चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग का अमेरिका दौरा, ट्रंप के स्टेट डिनर में शी के लिए मेन्यू में बहुत कुछ खास
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका के दौरे पर हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप गुरुवार शाम (भारतीय समयानुसार शुक्रवार सुबह) को व्हाइट...
शी चिनफिंग ने वाशिंगटन पहुंचकर अमेरिका की राजकीय यात्रा शुरू की
बीजिंग, 24 सितंबर . स्थानीय समयानुसार 23 सितंबर की दोपहर के बाद चीनी President शी चिनफिंग ने विशेष विमान से वाशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका की राजकीय यात्रा शुरू की. जब शी चिनफिंग अपनी पत्नी फंग लीयुएं के साथ हवाई अड्डे पर पहुंचे, तो अमेरिकी President ट्रंप और उनकी पत्नी ... Read more
अमेरिका पहुंचे शी चिनफिंग, दुनिया की नजर चीन-अमेरिका वार्ता पर
बीजिंग, 24 सितंबर . चीनी President शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा शुरू हो गई है. President शी 23 से 25 सितंबर तक अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं. चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, President शी और ट्रंप चीन-अमेरिका संबंधों तथा विश्व शांति और विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों ... Read more
चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता के आठवें दौर में कई मुद्दों पर सहमति बनी
बीजिंग, 24 सितंबर . चीनी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, प्रवक्ता हे याडोंग ने न्यूयॉर्क में आयोजित चीन और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के आठवें दौर से संबंधित सवालों के जवाब दिए. इस मौके पर हे याडोंग ने कहा कि हाल ही में चीन और अमेरिका की आर्थिक और व्यापारिक ... Read more
कौन बनेगा करोड़पति 18 के लेटेस्ट एपिसोड में आईवी लीग से ग्रेजुएट एक कंटेस्टेंट रामायण से जुड़े सवाल का जवाब नहीं दे पाया। क्या आपको पता है इस सवाल का जवाब?
'अमेरिकी-चीन के बीच रेस हो, रेसलिंग नहीं...', व्हाइट हाउस में ट्रंप से बोले जिनपिंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस में मुलाकात की. दोनों नेताओं ने अमेरिका-चीन के बीच टकराव से बचने और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. शी ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए, यह ऐसी कुश्ती नहीं होनी चाहिए जिसमें एक की जीत दूसरे की हार हो.
अमेरिका और चीन ने 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाया व्यापारिक संघर्षविराम, व्यापक समझौते पर जारी रहेगी बातचीत
वॉशिंगटन, 24 सितंबर . अमेरिका और चीन ने अपने बीच चल रहे व्यापारिक संघर्षविराम (ट्रेड ट्रूस) को 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाने पर सहमति जताई है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इस फैसले से नवंबर में समाप्त होने वाली मौजूदा समयसीमा दो महीने के लिए आगे बढ़ गई ... Read more
...तो अमेरिकी में होगा चीनी कंपनियों का दबदबा, इतनी होगी बिक्री
चीनी कारें दुनियाभर में पॉपुलर हो रही हैं. ऐसे में क्या हो अगर किसी ऐसे मार्केट में इन कारों को उतारा जाए, जहां इनकी एंट्री पर कई सारी पाबंदियां हों. इस स्थिति को लेकर एक मार्केट रिसर्च सामने आई है. मोबिलिटी ग्लोबल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अगर चीनी कार कंपनियों को अमेरिकी बाजार में एंट्री मिलने लगे, तो जल्द ही ये बड़े मार्केट पर कब्जा कर लेंगी.
'अमेरिका-जापान में भी होता है', समस्तीपुर छेड़छाड़ के सवाल पर भड़के मंत्री
बिहार के समस्तीपुर में छात्रा के साथ छेड़छाड़ के मामले पर सवाल करने पर मंत्री अशोक चौधरी भड़क गए. उन्होंने कहा कि बिहार में अनपढ़ और देहाती लोग हैं जो राज्य को बदनाम करने की साजिश करते हैं.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने देखा पिनाका-धनुष की ताकत
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और लेफ्टिनेंट जनरल विक्रांत सुरेश देशपांडे ने महाजन में युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान संयुक्त फायर पावर देखा. पिनाका, एम777, धनुष, अपाचे और हिमार्स शामिल रहे.
दिल्ली में अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार
New Delhi, 24 सितंबर . दिल्ली Police की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट ने पीतमपुरा में किराए की जगह से चल रहे एक अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. यह कॉल सेंटर टेक-सपोर्ट के नाम पर अमेरिका में लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था. Police ने इस मामले में ... Read more
दुनिया के चर्चित यूट्यूबर्स में शामिल अमेरिकी यूट्यूबर मिस्टर बीस्ट यानी जिमी डोनाल्डसन ने गुरुवार दोपहर 3 बजे ताजमहल का दीदार किया। उनके पहुंचने की खबर मिलते ही पर्यटकों और प्रशंसकों में उत्साह नजर आया। लोगों ने उनके साथ फोटो लेने की कोशिश की। इस दौरान उनके फैन एक बच्चे युवान गौरव ने मिस्टर बीस्ट को अपनी स्केच बुक गिफ्ट की, जिसे देखकर वे काफी खुश नजर आए। ताजमहल परिसर में मिस्टर बीस्ट और उनकी पत्नी थिया बूयसेन ने स्मारक की खूबसूरती को करीब से देखा। उन्होंने ताजमहल की बारीक पच्चीकारी के बारे में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से जानकारी ली। सफेद संगमरमर पर की गई नक्काशी और पच्चीकारी को देखकर दोनों काफी प्रभावित नजर आए और ताज की खूबसूरती में खोए दिखे। ताजमहल की खूबसूरती में खोए नजर आएताजमहल दुनिया के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है और इसकी संगमरमर की वास्तुकला के साथ बारीक पच्चीकारी खास आकर्षण है। आगरा जिला प्रशासन के अनुसार ताजमहल को शाहजहां ने मुमताज महल की याद में बनवाया था और इसके निर्माण में करीब 22 हजार कारीगरों ने काम किया था। मिस्टर बीस्ट के ताजमहल पहुंचने के दौरान उनके प्रशंसकों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवान गौरव की स्केच बुक से लेकर पच्चीकारी की जानकारी लेने तक, उनकी ताजमहल यात्रा के कई पल लोगों के बीच चर्चा का विषय बने। कौन हैं मिस्टर बीस्टअमेरिकी यूट्यूबर मिस्टर बीस्ट का असली नाम जिमी डोनाल्डसन है। वे YouTuber, बिजनेसमैन और परोपकारी के तौर पर दुनिया भर में मशहूर हैं। वे खासतौर पर बड़े-बड़े चैलेंज, प्रतियोगिताओं, भारी-भरकम इनाम और लोगों की मदद करने वाले वीडियो के लिए जाने जाते हैं। उनका मुख्य YouTube चैनल 2026 में 48.4 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर के साथ प्लेटफॉर्म का सबसे ज्यादा सब्सक्राइब किया जाने वाला चैनल है। मिस्टर बीस्ट Beast Industries, Feastables और MrBeast Burger जैसे कारोबार से भी जुड़े हैं और Team Trees व Team Seas जैसे बड़े फंडरेजिंग अभियानों में भी काम कर चुके हैं। उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब 2.6 अरब डॉलर बताई जाती है। कौन हैं थिया बूयसेनमिस्टर बीस्ट की पत्नी थिया बूयसेन दक्षिण अफ्रीका की कंटेंट क्रिएटर, स्ट्रीमर और लेखिका हैं। वे ऑनलाइन TheaBeasty नाम से भी जानी जाती हैं और गेमिंग कंटेंट के साथ मनोविज्ञान, विज्ञान और मानव व्यवहार से जुड़े विषयों पर भी कंटेंट बनाती हैं। उनकी किताब The Marked Children 2022 में प्रकाशित हुई थी। जुलाई 2026 में मिस्टर बीस्ट और थिया ने शादी की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक अधिवेशन में इस बार एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली। अमेरिकी धरती न्यूयॉर्क पर खड़े होकर कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जिस तरह अमेरिका की नीतियों को ही आड़े हाथ लिया, उससे वैश्विक राजनीति में बढ़ती बेचैनी साफ दिखाई दी। ईरान ने सीधे अमेरिका को चुनौती दी, फ्रांस ने महाशक्तियों के तकनीकी और सामरिक वर्चस्व पर सवाल उठाए, सीरिया ने गोलान पहाड़ियों पर अमेरिकी नीति को खारिज किया, जबकि ब्राजील और तुर्किये जैसे देशों ने संप्रभुता, विदेशी हस्तक्षेप और मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। संदेश साफ है कि दुनिया की अनेक सरकारें मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकटों के लिए अमेरिकी नीतियों और व्यापक शक्ति आधारित राजनीति को जिम्मेदार ठहराते हुए अब ज्यादा मुखर दिखाई दे रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भाषण बेहद महत्वपूर्ण रहा। 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में मैक्रों ने चेतावनी दी कि दुनिया कहीं फिर से “जंगल के कानून” की ओर न लौट जाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था उस समय कमजोर होती है जब ताकतवर देश नियमों और संस्थाओं से ऊपर खुद को समझने लगते हैं। मैक्रों ने सबसे तीखा सवाल कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को लेकर उठाया। उनका कहना था कि दुनिया का भविष्य केवल अमेरिका, चीन या कुछ बड़ी निजी कंपनियों के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने तकनीकी संप्रभुता, ओपन सोर्स अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों और रक्षा, साइबर सुरक्षा तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत को डराया नहीं जा सकता, यह नया भारत है गाजा के मुद्दे पर भी मैक्रों ने पश्चिमी देशों की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने गाजा की मानवीय स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए मौजूदा शांति प्रयासों पर सवाल उठाया। पश्चिमी तट में बस्तियों से जुड़ी हिंसा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों की संप्रभुता का उल्लंघन इजराइल के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकता। यूक्रेन युद्ध को लेकर उन्होंने नागरिक और ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने तथा काला सागर से अनाज परिवहन की सुरक्षा के लिए दोहरी अस्थायी युद्धविराम व्यवस्था का प्रस्ताव भी रखा। लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका को सबसे सीधी चुनौती ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की ओर से मिली। 23 सितंबर को पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दिन पहले दिए गए कड़े बयान का जवाब देते हुए कहा कि ईरान दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आरोप लगाते हुए ईरान को आतंकवाद का दोषी नहीं, बल्कि आतंकवाद का पीड़ित बताया। पेजेशकियन ने ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि उनका देश “घुटने नहीं टेकेगा।” उन्होंने परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा से इंकार किया, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक, विशेषकर चिकित्सा और कृषि के लिए, इन पर किसी तरह की पाबंदी स्वीकार करने से भी साफ इंकार कर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी उन्होंने ईरान के नौवहन अधिकारों पर जोर दिया और अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त करने की मांग रखी। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति ने युद्ध के बीच कूटनीति का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत संभव है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को धमकी, बल प्रयोग और प्रतिबंधों की भाषा छोड़नी होगी। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच कतर की मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष बातचीत भी हुई, लेकिन तत्काल कोई बड़ी सफलता सामने नहीं आई। ईरानी पक्ष आर्थिक और समुद्री प्रतिबंध हटाने तथा फ्रीज हुए धन से जुड़े मुद्दों पर अपनी शर्तों पर कायम रहा। इस टकराव का सबसे नाटकीय दृश्य तब देखने को मिला जब पेजेशकियन के भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र महासभा कक्ष से बाहर चला गया। एक ओर मंच पर ईरान अमेरिका को चुनौती दे रहा था, दूसरी ओर पर्दे के पीछे दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी चल रही थी। यानी युद्ध और कूटनीति एक साथ आगे बढ़ते दिखाई दिए। वहीं सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने भी अमेरिकी नीति पर खुला प्रहार किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट कहा कि गोलान पहाड़ियां सीरिया की भूमि हैं और किसी भी बाहरी शक्ति को सीरियाई क्षेत्र किसी दूसरे देश को सौंपने का अधिकार नहीं है। उनका यह बयान अमेरिका द्वारा गोलान पहाड़ियों पर इजराइली संप्रभुता को मान्यता देने वाली नीति के सीधे विरोध में था। साथ ही अल-शरा ने इजराइली सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए सैकड़ों हवाई हमलों, बड़ी संख्या में घुसपैठ और गिरफ्तारियों का आरोप लगाया तथा इजराइली सेना की वापसी और 1974 के अलगाव समझौते के पालन की मांग की। साथ ही उन्होंने युद्ध के बाद सीरिया के पुनर्निर्माण की तस्वीर भी पेश की। उन्होंने सरकारी संस्थाओं को स्थिर करने, हथियारों को केंद्रीय सरकार के नियंत्रण में लाने, संक्रमणकालीन न्याय लागू करने और मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई की बात भी कही। उधर, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने भी विदेशी हस्तक्षेप और राष्ट्रीय संप्रभुता के सवाल को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि ब्राजील किसी बाहरी शक्ति का पिछलग्गू नहीं है और विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान ने भी संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था और सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर सवाल उठाए तथा गाजा के मुद्दे पर इजराइल को मिल रहे समर्थन की आलोचना की। देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम को केवल अमेरिका-विरोधी भाषणों की श्रृंखला नहीं माना जा सकता। असली मुद्दा तेजी से बदलती विश्व व्यवस्था का है। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अलग-अलग देशों की आवाजें यह सवाल उठा रही हैं कि क्या सैन्य ताकत, आर्थिक प्रतिबंध, तकनीकी वर्चस्व और कूटनीतिक दबाव के दम पर विश्व व्यवस्था चलाई जा सकती है। न्यूयॉर्क में इस बार अमेरिका के सामने सवाल केवल ईरान का नहीं था। सवाल यह था कि क्या दुनिया कुछ शक्तिशाली देशों और बड़ी तकनीकी कंपनियों के निर्णयों से चलेगी या फिर संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका दोबारा मजबूत होगी। संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह अधिवेशन इसी टकराव को बेहद तीखे ढंग से दुनिया के सामने रख रहा है। -नीरज कुमार दुबे
F-35 फाइटर जेट के कुछ पार्ट्स चीन पहुंचे, ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजी गई खेप हांगकांग पहुंची; पेंटागन ने शुरू की जांच
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका-ईरान विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के यूएन महासभा में हिस्सा लेने अमेरिका पहुंचने के बाद ईरान ने एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दे डाली है। अब ईरान ने बोल दिया कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। खबरों के अनुसार, ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के सलाहकार याह्या रहीम सफावी ने अब ये बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जंग पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंच चुकी है। दोबारा हमला हुआ तो इसका दायरा और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस जंग का प्रभाव भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। आपको बात दें कि हिंद महासागर पश्चिम एशिया को एशिया से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने पर तेल लेकर आने वाले जहाजों पर हमले का खतरा बढ़ जाएगा। PC:abplive अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
अहमदाबाद: अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 7 गिरफ्तार
अहमदाबाद में साइबर ठगी के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये अमेरिकी नागरिकों को बैंक वकील बनकर लोन सेटलमेंट का लालच देते थे. अहमदाबाद में नरोडा पुलिस ने इस मामले में एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया.
दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा इलाके में चल रहे एक अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर लगभग 100 करोड़ रुपये का चूना लगाने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। आरोपियों ने संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) तथा अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों द्वारा जारी किए गए फर्जी पत्र भेजकर पीड़ितों को डराया-धमकाया भी। अधिकारियों ने बताया कि इंटेलीजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने 21 सितंबर को पीतमपुरा गांव में एक किराये के परिसर की तीसरी और चौथी मंजिल पर चल रहे कॉल सेंटर पर छापा मारा और 11 लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने परिसर से 41 लाख रुपये नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, आठ राउटर और एक कार जब्त की। इसके बाद विशेष प्रकोष्ठ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत 22 सितंबर को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर अमेरिका में पीड़ितों को निशाना बनाता था। इसके सदस्य पीड़ितों के कंप्यूटरों में ‘मैलवेयर इंस्टॉल’ कर देते थे, जिससे कंप्यूटर की स्क्रीन पर ‘पॉप-अप’ दिखाई देने लगता था। इसमें तकनीकी सहायता के लिए एक टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने का निर्देश दिया जाता था। अधिकारियों ने बताया कि जब पीड़ित इस नंबर पर फोन करते थे, तो उनकी कॉल एक ऐप के जरिए पीतमपुरा कॉल सेंटर में स्थानांतरित हो जाती थी तथा कॉल सेंटर के एजेंट तकनीकी सहायता कर्मचारी बनकर यह दावा करते थे कि पीड़ित के कंप्यूटर में वायरस आ गया है या हैक हो गया है। पुलिस ने बताया कि इसके बाद पीड़ितों को एक ‘सॉफ्टवेयर इंस्टॉल’ करने के लिए फुसलाया जाता था, जिससे जालसाज उनके कंप्यूटर को हैक कर लिया करते थे। इसके बाद उन्हें बताया जाता था कि उनके बैंक खाते भी खतरे में हैं और उनकी कॉल अन्य आरोपियों को स्थानांतरित कर दी जाती जो बैंक अधिाकरी बनकर पीड़ितों से बात करते। पुलिस ने बताया कि फर्जी बैंक अधिकारी ‘वॉयस एप्लिकेशन’ के जरिए अमेरिकी नंबरों का इस्तेमाल करके पीड़ितों से संपर्क करते थे और तकनीकी या बैंकिंग समस्या को हल करने के बहाने उन्हें गिफ्ट कार्ड खरीदने या क्रिप्टोकरेंसी स्थानांतरित करने के लिए उकसाते थे। पुलिस ने बताया कि कुछ मामलों में, आरोपियों ने पीड़ितों को उनकी मांगों को मानने के लिए मजबूर करने के वास्ते एफबीआई और अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों के फर्जी संदेश भेजकर उन्हें डराया-धमकाया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कंवल प्रीत सिंह उर्फ सनी सिंह (43), प्रशांत नंदा (29), अक्षत सिंह उर्फ शिवम (25), चित्रा नरह (27), रोहन जयरथ (31), गौरव सकलानी (24), सचिन घिल्डियाल उर्फ सचिन शर्मा (26), इरशाद रहमान (22), नवनीत उर्फ नवीन (28), निग्थौजम (25) और फेबो वांगशू (27) के रूप में हुई है। अधिकारियों ने बताया कि आईएफएसओ टीम को अवैध कॉल सेंटर के बारे में जानकारी मिली थी और निगरानी तथा खुफिया जानकारी जुटाने के बाद छापेमारी की गई।
मंत्री अशोक चौधरी ने जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं पर सरकार का बचाव करते हुए कहा कि अपराध हर जगह होते हैं, महत्वपूर्ण है कि सरकार कितनी तेजी से कार्रवाई करती है। उन्होंने बिहार में कानून का राज कायम रहने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, जबकि सांसद शांभवी चौधरी ने भी सख्त सजा की मांग की।
अमेरिका के लड़ाकू विमान के पार्ट्स चीन कैसे पहुंचे, क्या लीक हो गई F-35 की तकनीक?
F-35 दुनिया के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स में से एक है और दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया समेत करीब 20 देशों ने इसे खरीदा है. इसने ईरान के खिलाफ कई मिशन पूरे किए हैं.
ऐसी घटनाएं तो अमेरिका, जापान में भी होती है; श्रेयसी, जायसवाल के बाद अशोक चौधरी उवाच
अशोक चौधरी जमुई और समस्तीपुर में नाबालिग छात्रा से हैवानियत पर ने कहा है कि घटनाओं को कोई मुख्यमंत्री या किसी देश के राष्ट्रपति भी नहीं रोक सकता है। अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों में ऐसी घटनाएं होती हैं। घटना के बाद सरकार क्या कदम उठाती है यह महत्वपूर्ण है।
भारतीय-अमेरिका सैनिकों के युद्धाभ्यास में पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुंचे हैं।
तेजस्वी बोले- बिहार में जंगल नहीं राक्षस राज; समस्तीपुर छेड़खानी कांड पर सरकार को घेरा, मंत्री ने कहा- अमेरिका-जापान में भी होती हैं घटनाएं
CBSE पोर्टल की सुरक्षा खामी उजागर करने वाले 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के हॉल ऑफ फेम में शामिल कर सम्मानित किया गया है।
जयशंकर ने रुबियो से की मुलाकात, रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी कानून को लेकर जताई चिंता
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। इस बैठक में अमेरिका के नए कानून को लेकर चर्चा हुई, जिसका असर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर पड़ सकता है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई […] यह लेख जयशंकर ने रुबियो से की मुलाकात, रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी कानून को लेकर जताई चिंता सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
हिंद महासागर से भी आगे बढ़ेगा अब युद्ध? अमेरिका को बड़ा झटका देने की तैयारी में ईरान
ईरान और अमेरिका युद्ध के और तेज होने की आशंका बढ़ गई है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि अगर अमेरिका की तरफ से नया हमला होता है। तो यह युद्ध होर्मुज से आगे बढ़कर हिंद महासागर या उससे आगे भी फैल सकता है।
अमेरिका की कनेक्टिविटी रणनीति में आईएमईसी, ट्रंप के समर्थन के बाद विदेश विभाग ने फिर किया जिक्र
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) को लेकर अमेरिका का समर्थन एक दिन के भीतर दूसरी बार सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गलियारे का समर्थन करने के बाद अब अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इसे उन रणनीतिक आर्थिक गलियारों में शामिल किया है, जिन्हें वाशिंगटन वैश्विक स्तर पर समर्थन दे रहा है।
शी जिनपिंग का अमेरिका में भव्य स्वागत, ट्रंप खुद पहुंचे एयरपोर्ट; ट्रेड से लेकर AI तक कई मुद्दों पर होगी बात
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अमेरिका में हुआ लेट-लेट कर स्वागत! देखें वीडियो
चीन के राष्ट्रपति के स्वागत के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप खुद रनवे पर मौजूद रहे और प्लेन के सीढ़ियों के पास जाकर चीनी राष्ट्रपति की अगवानी की।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े हालिया कानून के बीच अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदार देशों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी दी।
रूसी तेल पर 100 प्रतिशत टैरिफ के बीच साझेदारों की ऊर्जा सुरक्षा में मदद को अमेरिका तैयार: रुबियो
न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (आईएएनस). अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े हालिया कानून के बीच अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदार देशों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है. अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी दी. ... Read more
चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आज पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया ने ED की कार्रवाई और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के उन आरोपों पर पलटवार किया, जिसमें बिट्टू ने दावा किया था कि मुंडिया विदेश चले गए हैं। मुंडिया ने कहा कि वह चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित पार्टी ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, अमेरिका में नहीं। बता दें कि ED ने मंत्री के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह उर्फ प्रिंस के साहनेवाल स्थित घर पर तलाशी ली थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई GMADA से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। 'लगता है बिट्टू ने मेरे घर के पास ट्रैवल एजेंसी खोल ली' मुंडिया ने बिट्टू पर तंज कसते हुए कहा, बिट्टू से मैं कहना चाहूंगा कि लगता है उनकी टिकट कटने के बाद अब उन्होंने चंडीगढ़ रोड पर मेरे घर के पास ट्रैवल एजेंसी खोल ली है। वहां उन्होंने मेरी और मेरे भतीजे की टिकट बुक कर हमें अमेरिका भेज दिया। मुंडिया ने कहा कि बिट्टू ने उनके भतीजे को भांजा बताया, जबकि प्रिंस उनका भतीजा है। उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने भी इस मामले को लेकर गलत जानकारी दी गई। 'परिवार के लोगों को घंटों परेशान किया' ED की कार्रवाई पर मुंडिया ने आरोप लगाया कि प्रिंस के घर पर परिवार के सदस्यों को परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि प्रिंस की मां, पत्नी, सालेहार और तीन साल की बेटी घर में मौजूद थे। उनके मुताबिक, करीब 11 बजे से रात 3 बजे तक तलाशी चली। मुंडिया का आरोप है कि परिवार के लोगों से पूछा गया कि वे मंत्री के साथ कब से हैं और उन्हें कितने पैसे मिलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रिंस की सैलरी तक पूछी गई और यह भी पूछा गया कि इतनी सैलरी में परिवार का गुजारा कैसे होता है। 'मंत्री का साथ छोड़ने या पार्टी बदलने को कहा' मुंडिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने प्रिंस की मां से कहा कि वह अपने बेटे को समझाएं कि वह मंत्री का साथ छोड़ दे या मंत्री पार्टी छोड़ दें। उन्होंने दावा किया कि प्रिंस की पत्नी गर्भवती हैं और उन्हें करीब साढ़े चार घंटे तक खड़ा रखा गया। मुंडिया ने यह भी आरोप लगाया कि एक बच्चे की मां को बच्चे को फीड तक नहीं करने दिया गया और परिवार की विधवा सदस्य को भी परेशान किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं है। ED की ओर से तलाशी के दौरान इन कथित व्यवहार संबंधी आरोपों पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। 'हम डरकर पार्टी नहीं छोड़ेंगे' मुंडिया ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एजेंसियों के जरिए पंजाब में कार्रवाई की जा रही है और हम पंजाबी हैं, हम डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह ED की कार्रवाई से डरकर पार्टी नहीं छोड़ेंगे। मुंडिया ने पंजाब में आगामी चुनावों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग भी भाजपा के खिलाफ सड़कों पर आ गए हैं और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। ED ने 26 ठिकानों पर की थी कार्रवाई उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने GMADA से जुड़ी जांच में दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और लुधियाना समेत कई स्थानों पर सर्च और सर्वे किए हैं। जांच का संबंध तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स और उससे जुड़ी कंपनियों से बताया गया है। ED की कार्रवाई के दौरान प्रिंस के घर से एक लैपटॉप अपने कब्जे में लिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
वैश्विक राजनीति के मंच पर जब भी वॉशिंगटन और बीजिंग के शीर्ष नेतृत्व की बैठक होती है, दुनिया की नजरें महाशक्तियों के रुख पर टिक जाती हैं। डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत में व्यापार शुल्क, तकनीकी वर्चस्व, ताइवान संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला हमेशा केंद्र में रहते हैं। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, खिलौने और औद्योगिक कलपुर्जों के मामले में अमेरिका का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार होने के बावजूद एक ऐसा क्षेत्र है जहां बीजिंग के लिए पेंटागन के दरवाजे पूरी तरह सील हैं—हथियारों का कारोबार।वॉशिंगटन और बीजिंग: व्यापार में अरबों डॉलर, लेकिन रक्षा क्षेत्र में शून्य डीलआंकड़ों पर गौर करें तो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच हर साल सैकड़ों अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। अमेरिकी सुपरमार्केट्स से लेकर सिलिकॉन वैली तक चीनी उत्पादों की भरमार दिखती है। इसके ठीक उलट जब बात सामरिक सुरक्षा और मिलिट्री हार्डवेयर की आती है, तो अमेरिका अपनी सेना के लिए चीन से एक बुलेट या ड्रोन तक नहीं खरीदता। यह कोई संयोग नहीं बल्कि कई दशकों से चली आ रही कठोर विदेश नीति, रणनीतिक अविश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सुविचारित फैसला है।1989 का तियानमेन स्क्वायर नरसंहार और स्थायी अमेरिकी हथियार प्रतिबंधअमेरिका द्वारा चीनी हथियारों के आयात और निर्यात पर पूर्ण पाबंदी की नींव जून 1989 की तियानमेन स्क्वायर घटना के बाद पड़ी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के प्रशासन ने बीजिंग द्वारा मानवाधिकारों के घोर हनन के विरोध में चीन पर कड़े रक्षा प्रतिबंध थोप दिए। इस कानून के तहत अमेरिका ने चीन को किसी भी प्रकार की रक्षा सामग्री, संवेदनशील सैन्य उपकरण और दोहरे उपयोग वाली तकनीकों की बिक्री पर पूर्ण रोक लगाई। साथ ही चीन से अमेरिकी रक्षा बलों के लिए किसी भी सैन्य साजो-सामान के आयात को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। यह प्रतिबंध आज भी पूरी ताकत से लागू है।बैकडोर जासूसी और आधुनिक साइबर वारफेयर का जानलेवा जोखिमइक्कीसवीं सदी का युद्ध केवल तोप और बारूद का नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर, माइक्रोचिप्स, एआई एल्गोरिदम और सैटेलाइट कनेक्टिविटी का खेल बन चुका है। पेंटागन के रणनीतिकारों को स्पष्ट डर है कि यदि चीन से कोई रक्षा उपकरण या सैन्य चिप्स खरीदी जाती हैं, तो उनमें 'हार्डवेयर ट्रोजन' या गुप्त बैकडोर प्रोग्राम मौजूद हो सकते हैं। युद्ध की स्थिति में बीजिंग महज एक साइबर कमांड से अमेरिकी मिसाइल डिफेंस, रडार नेटवर्क या फाइटर जेट्स के एवियोनिक्स को पंगु बना सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी कांग्रेस ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के तहत चीनी टेलीकॉम और टेक कंपनियों को अमेरिकी डिफेंस सप्लाई चेन से बाहर निकाल फेंका है।रिवर्स इंजीनियरिंग और बौद्धिक संपदा चोरी की कड़वी हकीकतअमेरिकी रक्षा उद्योग की रीढ़ उसकी बेजोड़ तकनीक और नवाचार है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के कई आधुनिक लड़ाकू विमान, जैसे जे-20 स्टील्थ फाइटर और जे-31, अमेरिकी एफ-22 और एफ-35 के डिज़ाइनों से हैरान करने वाली समानता रखते हैं। अमेरिका का लंबे समय से आरोप रहा है कि चीन ने औद्योगिक जासूसी और साइबर हैकिंग के जरिए पेटेंट तकनीकें चुराई हैं। ऐसे माहौल में अगर अमेरिका चीन के साथ किसी रक्षा व्यापार या संयुक्त निर्माण में शामिल होता है, तो उसकी शेष अत्याधुनिक मिलिट्री तकनीकों के लीक होने का शत-प्रतिशत खतरा बना रहता है।इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भू-राजनीतिक टकराव और ताइवान का सवालचीन केवल अमेरिका का व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि अमेरिकी नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी में दर्ज उसका सबसे बड़ा रणनीतिक व सैन्य प्रतिस्पर्धी है। साउथ चाइना सी में चीन की कृत्रिम सैन्य चौकियों का निर्माण, पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ सीमा विवाद, और ताइवान पर जबरन कब्जे की बीजिंग की धमकियां सीधे अमेरिकी हितों को चुनौती देती हैं। अमेरिका ताइवान को अरबों डॉलर के अत्याधुनिक हथियार बेचता है ताकि वह चीनी हमले को रोक सके। ऐसे प्रतिद्वंद्वी से हथियार खरीदना, जो किसी भी समय सीधे युद्ध में सामने आ सकता है, रणनीतिक आत्मघात के समान होगा।नाटो इंटरऑपरेबिलिटी और अमेरिकी सैन्य-औद्योगिक परिसर की आत्मनिर्भरताअमेरिकी रक्षा प्रणाली पूरी तरह से नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के मानकों के अनुरूप काम करती है। पश्चिमी हथियारों की प्रोग्रामिंग, संचार आवृत्ति और युद्ध प्रणालियां चीनी मानक के बिल्कुल अनुकूल नहीं हैं। दूसरी अहम बात यह है कि अमेरिका खुद दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन, रेथियॉन और जनरल डायनेमिक्स जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियां दुनिया के सबसे घातक हथियार बनाती हैं। पेंटागन 'बाय अमेरिकन' नीति के तहत अपनी घरेलू कंपनियों और नाटो सहयोगियों को प्राथमिकता देता है, जिससे उसकी सैन्य आत्मनिर्भरता अटूट बनी रहे।डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाले उच्चस्तरीय राजनयिक संवाद भले ही टैरिफ, मुद्रा विनिमय या कृषि व्यापार में तात्कालिक राहत ला दें, लेकिन दोनों देशों के सैन्य संबंध कभी सामान्य नहीं हो सकते। हथियारों की खरीद-फरोख्त विश्वास की सर्वोच्च बुनियाद पर टिकी होती है, और जब तक बीजिंग व वॉशिंगटन वैश्विक प्रभुत्व की जंग में आमने-सामने हैं, पेंटागन के शस्त्रागार में 'मेड इन चाइना' का कोई स्थान नहीं होगा।
जमुई के बाद समस्तीपुर में कुछ लड़कों ने बीच सड़क एक लड़की से छेड़खानी की। उसका वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस मामले को लेकर बिहार की सियासत गरम है। बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोला है। तेजस्वी ने कहा है, ‘लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। अगर सीएम जुबान के पक्के हैं तो इस्तीफा दें। कुछ दिनों पहले इनका बयान आया था कि रील बनाओगे तो मारे जाओगे। नहीं बनाओगे तो बच जाओगे। इन पर तो खुद 7 हत्या का केस है। दूसरों को बचने का आइडिया दे रहे हैं।’ पीएम चुनाव के वक्त बिहार आए थे तो कहते थे कि रील बनाओ। ये लोग हल्की बात करते हैं। वहीं जदयू कोटे से बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा है कि घटनाएं तो अमेरिका और जापान में भी होती हैं।' तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार के मंत्रियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘इनके निर्लज्ज मंत्री ऐसी घटनाओं को ‘छिटपुट घटना’ बताते हैं।’ उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या समस्तीपुर की घटना को भी छिटपुट घटना ही बताया जाएगा? क्या बिहार में जाति देखकर कार्रवाई होगी और दूसरों को बचाया जाएगा? तेजस्वी ने कहा कि बिहार में लड़कियों के साथ लगातार घटनाएं हो रही हैं, अगर सीएम जुबान के पक्के हैं तो इस्तीफा दें। मंत्री बोले- घटनाएं तो अमेरिका-जापान में भी मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि घटनाएं अमेरिका और जापान में भी हो रही हैं, लेकिन सरकार कार्रवाई कितनी जल्दी कर रही वो भी तो देखिए। कोई भी देश में घटना बंद नहीं हो सकती है। ऐसा नहीं कह सकते कि कल से कुछ घटना नहीं होगी। वहीं जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा कि निश्चित तौर पर चिंता करने वाली बात है। इस मामले में पुलिस एक्शन ले रही है। समस्तीपुर सांसद को नेता प्रतिपक्ष ने घेरा तेजस्वी यादव ने समस्तीपुर से लोजपा सांसद शांभवी चौधरी के फेसबुक पोस्ट को शेयर करते हुए सवाल उठाए हैं। तेजस्वी ने X पर लिखा- 'ये हैं लोजपा से समस्तीपुर की महिला और कथित युवा सांसद शांभवी चौधरी, जिसने अपने लोकसभा क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की से हुए यौन शोषण में शातिरपन और चालाकी का शर्मनाक प्रदर्शन करते हुए अपने फेसबुक पेज पर बिहार पुलिस द्वारा अभियुक्तों के नाम सहित जारी प्रेस रिलीज में से अपनी सहूलियत व सुविधानुसार आरोपियों के नाम काट कर (Crop कर) पोस्ट किया है। महिला सांसद ने ऐसा जानबुझकर किया है ताकि आरोपियों के नाम और जाति का दूसरों को पता ना लग सके। अभियुक्तों की जाति इनके और इनकी पार्टी प्रमुख चिराग पासवान के राजनीतिक हित साधने में कोई बाधा उत्पन्न ना करे इसलिए सांसद ने दरिंदे गुंडों से सहानुभूति एवं अपमानपन जताते हुए नाम काट दिए। जाहिर है एक महिला सांसद पीड़ित नाबालिग लड़की का पक्ष ना लेकर अप्रत्यक्ष रूप से बदमाशों को बचा रही है। अब ऐसे में आप क्या कहेंगे? ये सरकार और उसके कर्ता-धर्ता ऐसे ब्लात्कार और अपराध रोकेंगे??' मंत्री बोले- घटना की रील बनाने के पीछे साजिश मंत्री दिलीप जायसवाल ने इन घटनाओं के वीडियो और रील बनने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराधी घटना को अंजाम देता है और फिर उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर रील डालता है, तो यह सोचने वाली बात है। कोई अपराधी इतना बेवकूफ तो नहीं होगा कि उसे यह पता न हो कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस उस तक पहुंच सकती है और कानून उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है, इस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।' अब जानिए समस्तीपुर घटना के बारे में समस्तीपुर में भी जमुई जैसी छेड़खानी की घटना हुई है। सड़क पर कुछ लड़कों ने एक नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी की, जिसका वीडियो 21 सितंबर से वायरल है। लड़की उन लोगों से बार-बार छोड़ने के लिए कहती है, लेकिन लड़कों ने कभी उसका हाथ पकड़कर खींचा, बाल खींचे तो कभी उसे जबरन खींचकर दूसरी ओर ले गए। घटना कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में बूढ़ी गंडक नदी के बाइपास बांध के पास की बताई जा रही है। समस्तीपुर पुलिस को इसकी जानकारी 23 सितंबर की रात करीब साढ़े 10 बजे मिली। इसके बाद पुलिस ने कर्पूरी ग्राम थाना क्षेत्र में कई जगहों पर छापेमारी की। 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पांच दिन पहले 19 सितंबर को बिहार के ही जमुई में भी नाबालिग लड़की से छेड़खानी का मामला सामने आया था। इस मामले में 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखिए 56 सेकेंड के वीडियो में क्या है वो जानिए 56 सेकेंड के वीडियो में दिख रहा है कि एक लड़की सड़क पर खड़ी है। उसे कुछ लड़के परेशान कर रहे हैं। लड़की उनसे बचने की कोशिश करती है। बनियान पहने एक लड़का बार-बार उसका हाथ पकड़ता दिख रहा है। लड़की के विरोध करने पर एक लड़का उसे मारने की कोशिश करता है। ये सब बीच सड़क पर हो रहा है, लेकिन कोई बीच-बचाव के लिए नहीं आया। लड़की बार-बार कहती है कि मुझे छोड़ दो, लेकिन लड़के उसे जाने नहीं देते। लड़की कहती है- रुको, मैं अपने भाई को बुलाती हूं। इस पर लड़के कहते हैं कि ठीक है बुलाओ। वीडियो के अंत में दिख रहा है कि एक लड़का बाइक के सहारे खड़ा है।
दोनों देश किसी समझौते पर पहुंचते हैं तो व्यापार में स्थिरता बढ़ सकती है और सप्लाई चेन में रुकावट कम हो सकती है। इससे भारत को फायदा हो सकता है। लेकिन इसमें भारत के लिए एक नुकसान भी है।
दुनिया के 120 से ज्यादा देशों में घूम चुके हरियाणा के ट्रैवल व्लॉगर परमवीर बेनीवाल को अमेरिका में नस्लीय टिप्पणी का सामना करना पड़ा। लास वेगास में दो अमेरिकन युवकों ने बेनीवाल को रोककर कमेंट किए और इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की। अमेरिकन युवकों ने मजाक उड़ाते हुए कहा- क्या 7-इलेवन में कैशियर बनोगे असल में 7-इलेवन कन्वीनियंस स्टोर चेन है, जिसमें काफी संख्या में भारतीय कैशियर-क्लर्क जैसे जॉब करते हैं, जिन्हें अमूमन अमेरिकन यूथ जॉब के तौर पर पसंद नहीं करते। इसे कम दर्जे वाली जॉब मानते हैं। अचानक हुई इस तरह की टिप्पणी पर परमवीर घबराए नहीं बल्कि करार जवाब दिया। परमवीर ने कहा- तुम मुझे अफॉर्ड नहीं कर पाओगे ये सुनकर अमेरिकन युवक सन्न रह गए और कोई जवाब नहीं दे पाए। फिर वो डोंट-डोंट करते रहे। परमवीर ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने यूटयूब चैनल पैसेंजर परमवीर पर अपलोड किया है, जो काफी वायरल हो रहा है। पहले जानिये…लास वेगास का पूरा घटनाक्रम वीडियो वायरल होते ही दबाव में आया वेब स्ट्रीमर परमवीर का वीडियो वायरल होने के बाद कमेंट करने वाले अमेरिकन वेब स्ट्रीमर की ओर से भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया सामने आई है। इंस्टा अकाउंट @fore1gnxprime पर डाली वीडियो क्लिप्स के मुताबिक, उसने कहा कि हम पर भारतीयों का हमला हो गया है। उसने माना कि उसने “गलत इन्फ्लुएंसर से पंगा ले लिया”। यह भी कहा कि उसे लगता है कि वह भारत में बड़ा इन्फ्लुएंसर है, इसलिए अब भारतीय यूजर्स उसके अकाउंट्स पर स्पैम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय यूजर्स स्ट्रीमर के इंस्टाग्राम अकाउंट पर पहुंचकर उसके डायरेक्ट मैसेज (डीएम) में उसकी हरकत की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। एक क्लिप में स्ट्रीमर ने अपने फॉलोअर्स से कहा कि आगे की कुछ वीडियोज़ में वह 7-इलेवन रेज बेटिंग (यानी लोगों को भड़काने वाला कंटेंट) वापस लाएगा। उसने यह भी कहा कि तुम लोगों ने गलत इंसान से पंगा लिया है। यानी माफी मांगने या अपने व्यवहार पर खेद जताने के बजाय उसने उसी तरह का कंटेंट दोबारा बनाने की बात कही। क्या है 7-इलेवन वाला ताना परमवीर ने बताया कि अमेरिका में भारतीयों और अन्य दक्षिण एशियाई लोगों को अक्सर कन्वीनियंस स्टोर के कैशियर या कैब ड्राइवर के स्टीरियोटाइप में बांधकर मजाक बनाया जाता है। उनके मुताबिक, भारतीयों के लिए 7-इलेवन और अरब मूल के लोगों के लिए 9/11 जैसे तंज कसे जाते हैं। असल में 9/11 अमेरिका पर हुए आतंकी हमले का दिन रहा है। 7-इलेवन दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल-कन्वीनियंस स्टोर चेन में से एक है। सॉफ्ट रेसिज्म रोज झेलना पड़ता है परमवीर ने वीडियो में कहा कि उन पर इस घटना का ज्यादा असर नहीं पड़ा, क्योंकि विदेशों में सॉफ्ट रेसिज्म का सामना वे रोज करते हैं। उनका कहना था कि भारतीय मेहनत और कानूनी तरीके से कमाकर उन देशों की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं रुकनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से लोग ऐसे तंज समझ ही नहीं पाते और नस्लभेद का शिकार होकर चुप रह जाते हैं। वीडियो को मिले 32 लाख से ज्यादा व्यूज परमवीर ने यह पूरा वाकया 22 सितंबर को अपने चैनल पर साझा किया। वीडियो लास एंजिल्स के वेनिस बीच से लास वेगास तक के सफर पर आधारित है। खबर लिखे जाने तक इसे 32 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका था और 54 हजार से ज्यादा लाइक मिल चुके थे। परमवीर के यूट्यूब पर करीब 28.4 लाख सब्सक्राइबर हैं।
भारत का प्राकृतिक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर 'एक देश, एक गैस ग्रिड' लक्ष्य के साथ तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें 2,805 किमी लंबी कांडला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन दुनिया की सबसे लंबी पाइपलाइन बनने जा रही है। यह परियोजना ₹9,000-10,000 करोड़ की लागत से बन रही है और देश की 25% एलपीजी मांग को पूरा करते हुए सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करेगी।
अमेरिका ने बनाया ड्रोन फाइटर जेट MQ-20, बिना पायलट मचाएगा तबाही
अमेरिकी नौसेना ने MQ-20 एवेंजर से ऑटोनॉमस मिशन परीक्षण किया. यह बिना पायलट वाला ड्रोन फाइटर जेट है, जो दुश्मन इलाके में घुसकर भयानक तबाही मचाएगा.
ईरान के लिए 'सीक्रेट हथियार' बना रहा चीन! रिपोर्ट में हुए खुलासे से अमेरिका में हड़कंप
China Secret Support to Iran: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन एक तरफ तो खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से ईरान की आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। एक खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, ईरान के लिए एक खास 'सीक्रेट हथियार' भी बना रहा है।अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान के रक्षा मंत्रालय को भेजे जाने वाले 'डुअल-यूज' पार्ट्स यानी दोहरे इस्तेमाल वाले घटकों की डिलीवरी में इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। ईरानी सीमा शुल्क डेटा, अमेरिकी अधिकारियों और इस गुप्त व्यापार से जुड़े लोगों के हवाले से आई इस रिपोर्ट से कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। चीन और अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के बीच इस खुलासे ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।चीन से क्या-क्या मिल रहा है ईरान को?'डुअल-यूज' पार्ट्स वे सामान होते हैं जिनका उपयोग आम नागरिक उपकरणों के साथ-साथ खतरनाक हथियारों में भी किया जा सकता है। WSJ रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान भेजे गए सामान में ये प्रमुख चीजें शामिल हैं:इलेक्ट्रॉनिक्स और जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण: जो मिसाइलों की सटीक निशाना लगाने की क्षमता बढ़ाते हैं।इलेक्ट्रिक मोटर और एयरक्राफ्ट इंजन पार्ट्स: जिनका सीधा इस्तेमाल सैन्य ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम में होता है।रासायनिक सामग्री: जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल के फ्यूल बनाने में किया जा सकता है।उपग्रह तस्वीरें: अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि 17 जुलाई के उस हमले से पहले और बाद में ईरान ने चीनी सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।कार्गो फ्लाइट्स में अचानक उछाल: 'महान एयर' का संदिग्ध रोलफ्लाइट ट्रैकिंग साइट 'FlightRadar24' के डेटा के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन महान एयर ने मार्च के महीने में चीन के बीजिंग, शंघाई और गुआंगझू से तेहरान के लिए हर हफ्ते सिर्फ 4 उड़ानें भरी थीं।लेकिन अप्रैल के अंत तक यह संख्या बढ़कर 27 उड़ानें प्रति सप्ताह हो गई। सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में महान एयर की फ्लाइट्स की संख्या 39 तक पहुंच गई। इन अधिकांश उड़ानों का इस्तेमाल यात्रियों को ले जाने के बजाय गुप्त सैन्य और तकनीकी कार्गो (हथियारों के पुर्जों) की डिलीवरी के लिए किया जा रहा था।अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार कर खेल कर रहा तेल का 'मास्टरमाइंड'अमेरिकी पाबंदियों से पंगु हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को चीन संजीवनी दे रहा है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, चीन ईरान के क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा खुद खरीद रहा है। अमेरिकी वित्तीय पाबंदियों को चकमा देने के लिए चीनी बैंकों और छद्म कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे तेहरान तक पैसा आसानी से पहुंच रहा है।16 सितंबर को बीजिंग में हुई बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साफ शब्दों में कहा था कि चीन और ईरान 'व्यापक रणनीतिक भागीदार' हैं और चीन ईरान के 'वैध अधिकारों और हितों' की रक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने को तैयार है।ट्रंप-जिनपिंग की मीटिंग के बीच अमेरिकी सियासत में भूचालवाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, एआई सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन अमेरिकी संसद में ईरान का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है।सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन समेत कई डेमोक्रेट नेताओं ने व्हाइट हाउस को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रपति ट्रंप, शी जिनपिंग के सामने चीन की इस 'सैन्य मदद' का मुद्दा सख्ती से उठाएं। सीनेटरों ने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अमेरिकी सैनिकों की हत्या और ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को जिंदा रखने में मदद कर रही हैं।हालांकि, ट्रंप प्रशासन चीन से सीधे टकराने में थोड़ा हिचकिचा रहा है। ट्रंप पहले कह चुके हैं कि शी जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे ईरान को सीधे हथियार नहीं देंगे और वे शी पर भरोसा करते हैं।चीन की सफाई: 'हमारी छवि खराब करने की कोशिश'इन गंभीर आरोपों पर चीन के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह 'चीन को बदनाम करने की साजिश' है। चीन का तर्क है कि वह दोहरे उपयोग वाले सामानों के निर्यात पर सख्त नियम लागू करता है और अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।
यूएनजीए के बीच अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो का बड़ा बयान, जानिए क्यों कही यह बात
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठकों के दौरान दुनिया भर का ध्यान खींचने वाला एक बेहद स्पष्ट और दो टूक बयान सामने आया है। अमेरिकी राजनीति और कूटनीतिक गलियारों में एक प्रभावशाली पहचान रखने वाले सीनेटर मार्को रुबियो ने यूएनजीए केサイドलाइन पर एक बड़ा बयान देते हुए यह स्वीकार किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने द्विपक्षीय झगड़ों या विवादों को सुलझाने के लिए कोई भी प्रभावी या काम करने वाला अंतरराष्ट्रीय सिस्टम या तंत्र मौजूद नहीं है। वैश्विक मंचों पर अक्सर कश्मीर और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने की कोशिश करने वाले तत्वों के बीच अमेरिका के इस वरिष्ठ नेता का यह बयान एक बहुत बड़ा और यथार्थवादी संदेश माना जा रहा है। आइए इस हाई-प्रोफाइल बयान, इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों और दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ने वाले इसके असर की पूरी और गहरी समीक्षा करते हैं।मार्को रुबियो का यह बड़ा बयान और इसके भू-राजनीतिक मायनेजब भी संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और पाकिस्तान का जिक्र होता है, तो पारंपरिक रूप से मध्यस्थता या बाहरी दखल की बातें सामने आती रही हैं। हालांकि, अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने बहुत ही साफगोई के साथ यह बात कही है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच के जटिल मामलों को हल करने का काम किसी बाहरी वैश्विक संगठन या अंतरराष्ट्रीय सिस्टम के बस का नहीं है। वाशिंगटन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार, इस बयान का सीधा मतलब यह है कि अमेरिका और पश्चिमी देश अब इस सच्चाई को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार की मध्यस्थता सफल नहीं हो सकती। जब तक दोनों देश खुद आमने-सामने बैठकर आपसी संवाद के जरिए अपने मुद्दों को नहीं सुलझाते, तब तक कोई भी तीसरा पक्ष इसमें कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल सकता है।भारत का हमेशा से रहा है स्पष्ट रुख: तीसरे पक्ष की मध्यस्थता मंजूर नहींभारत सरकार ने अपनी विदेश नीति के इतिहास में हमेशा से इस बात पर दृढ़ता बनाए रखी है कि भारत और पाकिस्तान के तमाम द्विपक्षीय मुद्दे केवल शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत आपसी बातचीत से ही हल किए जा सकते हैं। नई दिल्ली ने कभी भी किसी भी बाहरी देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन को कश्मीर या अन्य मामलों में मध्यस्थता करने की अनुमति नहीं दी है। मार्को रुबियो का यह बयान भारत के उसी पारंपरिक और कूटनीतिक रुख की एक तरह से वैश्विक पुष्टि करता है, जिसमें यह माना गया है कि इस क्षेत्र की शांति और स्थिरता केवल दोनों देशों के सीधे राजनीतिक संवाद पर निर्भर करती है। जब अमेरिका जैसे देश का कोई प्रमुख नेता इस वास्तविकता को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है, तो यह पाकिस्तान के उन तमाम प्रोपेगेंडा प्रयासों को करारा झटका देता है जो वह हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीसरे पक्ष को खींचने के लिए करता रहता है।संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं की सीमाओं का यथार्थमार्को रुबियो के इस बयान ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक सुरक्षा संगठनों की सीमाओं और कार्यप्रणाली पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित किए गए ये अंतरराष्ट्रीय निकाय आज के दौर के क्षेत्रीय संघर्षों, आतंकवाद और द्विपक्षीय दुश्मनों को पूरी तरह से शांत करने में अक्सर असमर्थ साबित होते रहे हैं। जब दो परमाणु-सशस्त्र देश आपस में उलझे हों, तो केवल प्रस्ताव पारित करने या बयानबाजी करने से जमीन पर कोई बदलाव नहीं आ सकता। रुबियो ने इसी जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए यह संकेत दिया है कि दुनिया को अब यह मान लेना चाहिए कि भारत और पाकिस्तान के मामलों में कोई जादुई अंतरराष्ट्रीय समाधान उपलब्ध नहीं है, और इसका एकमात्र रास्ता कूटनीतिक परिपक्वता और द्विपक्षीय बातचीत ही है।दक्षिण एशिया की शांति और भविष्य का राजनीतिक परिदृश्यइस बड़े बयान के बाद दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों पर इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। एक तरफ जहां भारत अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति के दम पर वैश्विक मंचों पर लगातार आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि उसे अपनी आंतरिक और बाहरी असफलताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहानुभूति मिलने वाली नहीं है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियां अब भारत के साथ अपने सामरिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को सबसे ऊपर रख रही हैं, और वे क्षेत्रीय स्थिरता के नाम पर किसी भी ऐसे झंझट में नहीं पड़ना चाहतीं जिसका कोई व्यावहारिक अंत न हो। यूएनजीए के मंच से आया यह बयान दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत के बढ़ते कूटनीतिक कद और पश्चिमी देशों की बदलती सोच का एक सबसे स्पष्ट प्रमाण बनकर उभरा है।
व्यापार समझौता दो महीने आगे बढ़ाने पर अमेरिका और चीन के बीच सहमति
वॉशिंगटन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान अमेरिका ने घोषणा की कि दोनों देशों ने अपने मौजूदा व्यापार समझौते को दो महीने और बढ़ाने पर सहमति जताई है।
डोनाल्ड ट्रंप को झटका: व्हाइट हाउस से मीडिया बैन पर कोर्ट ने लगाई रोक, अमेरिकी प्रशासन को क्या आदेश दिया?
Trump Vs CNN: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को मीडिया को लेकर एक कानूनी मामले में बड़ा झटका लगा है। एक अमेरिकी फेडरल अदालत ने CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को 'व्हाइट हाउस' में दोबाराएंट्री देने का आदेश दिया है। अमेरिकी जिला जज टिमोथी केली ने कहा कि इन तीनों मीडिया संस्थानों पर लगाया गया प्रतिबंध संभवतः अमेरिकी संविधान के तहत असंवैधानिक है।अदालत का यह आदेश उन तीनों मीडिया संस्थानों की ओर से दायर मुकदमे पर आया है, जिसमें उन्होंने व्हाइट हाउस से अपने पत्रकारों को बाहर किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट के आदेश के बाद इन संस्थानों के पत्रकारों की प्रेस क्रेडेंशियल्स बहाल करने का निर्देश दिया गया है।18 सितंबर को ट्रंप ने लगाया था बैनराष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को CNN, MS NOW और Politico को 'व्हाइट हाउस' से प्रतिबंधित करने का ऐलान किया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इन मीडिया संस्थानों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि उन्हें लगातार 'फिक्शन और झूठ' लिखने या रिपोर्ट करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।इसके बाद 19 सितंबर को तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में एंट्री नहीं दिया गया। उनके प्रेस पास निष्क्रिय या जब्त कर लिए गए। CNN की रिपोर्टर बेट्सी क्लेन, MS NOW की रिपोर्टर अकायला गार्डनर और Politico की व्हाइट हाउस रिपोर्टर चेयेन हैसलेट उन पत्रकारों में शामिल थीं, जिन्हें प्रवेश से रोका गया था।मीडिया संस्थानों ने कोर्ट में क्या कहा?CNN, MS NOW और Politico ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए कहा कि उनके कवरेज के आधार पर उन्हें चुनिंदा तरीके से 'व्हाइट हाउस' से बाहर करना अमेरिकी संविधान के First Amendment यानी प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन है।तीनों संस्थानों ने यह भी तर्क दिया कि सरकार पत्रकारों को उनकी रिपोर्टिंग या प्रकाशित सामग्री के आधार पर सरकारी परिसर में प्रवेश से वंचित नहीं कर सकती। उन्होंनेकोर्ट से अपने पत्रकारों का व्हाइट हाउस एक्सेस बहाल करने की मांग की थी।व्हाइट हाउस का क्या तर्क था?ट्रंप प्रशासन ने प्रतिबंध का बचाव करते हुए कहा कि 'व्हाइट हाउस' में प्रवेश कोई स्वतः प्राप्त अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा/विशेषाधिकार है। प्रशासन का कहना था कि First Amendment मीडिया संस्थानों को अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करने का अधिकार देता है। लेकिन इससे उन्हें व्हाइट हाउस का विशेष प्रेस पास, ब्रीफिंग रूम की सीट या प्रेस पूल में जगह पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिलता। अमेरिकी न्याय विभाग ने भी अदालत में प्रशासन की कार्रवाई का बचाव किया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तर्क पेश किए।जज ने किस बात पर जताई आपत्ति?मामले की सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या पत्रकारों का एक्सेस रद्द करने से पहले उन्हें उचित प्रक्रिया का मौका दिया गया था। कोर्ट ने पूर्व के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि व्हाइट हाउस द्वारा किसी पत्रकार का हार्ड पास निलंबित या रद्द करने से पहले संबंधित पत्रकार को पहले से सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद अदालत ने तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों का व्हाइट हाउस एक्सेस बहाल करने का आदेश दिया। यह अस्थायी राहत फिलहाल 14 दिनों के लिए लागू रहेगी।CNN बैन के बाद टीवी प्रेस पूल ने क्या किया?इस विवाद का असर व्हाइट हाउस के साझा टीवी प्रेस पूल पर भी पड़ा। CNN को राष्ट्रपति की कवरेज करने वाले टेलीविजन पूल से हटाए जाने के बाद अन्य प्रमुख नेटवर्कों ने भी साझा पूल कवरेज को अस्थायी रूप से रोक दिया था। यह पूल राष्ट्रपति के सार्वजनिक कार्यक्रमों और यात्राओं की साझा वीडियो कवरेज उपलब्ध कराता है। CNN के निर्धारित कवरेज कर्तव्यों को लेकर व्हाइट हाउस के फैसले के बाद नेटवर्कों ने पूल कवरेज को आगे जारी न रखने का फैसला किया था।ये भी पढे़ं- Donald Trump vs US Media: 'व्हाइट हाउस' ने लॉन्च किया 'Trump TV', CNN समेत अमेरिका के प्रमुख चैनलों ने डोनाल्ड ट्रंप का किया 'बायकॉट'
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमति
वॉशिंगटन, 24 सितंबर . चीनी President शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान अमेरिका ने घोषणा की कि दोनों देशों ने अपने मौजूदा व्यापार समझौते को दो महीने और बढ़ाने पर सहमति जताई है. Wednesday शाम स्थानीय समय के मुताबिक ट्रंप और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर शी ... Read more
अमेरिका: जज ने ट्रंप के व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर लगाई रोक, एक्सेस बहाल करने का दिया आदेश
वाशिंगटन, 24 सितंबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में तीन मीडिया ग्रुप्स की व्हाइट हाउस में एंट्री पर बैन लगा दिया था. Thursday को एक फेडरल जज ने अमेरिकी President के आदेश को पलट दिया और सीएनएन, एमएस नॉउ और पोलिटिको के पत्रकारों का प्रवेश बहाल करने का आदेश दिया. जज ने ... Read more
अमेरिकी दौरे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ट्रंप ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने तीन दिवसीय ऐतिहासिक दौरे पर अमेरिका पहुंच गए हैं. इस खास यात्रा के दौरान एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप शी जिनपिंग और चीन की फर्स्ट लेडी पेंग लुआन का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे. साल 1962 के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने एयरपोर्ट जाकर किसी अन्य देश के नेता की अगवानी की हो.
राजस्थान: जयपुर के सरकारी अस्पताल की चर्चा अमेरिका तक! विदेशी महिला ने कराया 209 डॉलर में ऑपरेशन
अमेरिका की 28 वर्षीय नागरिक अमेथिस्ट मैकएडोरी पित्त की थैली में पथरी के इलाज के लिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचीं, जहां सर्जिकल यूनिट-5 में डॉ. राजेंद्र बागड़ी के नेतृत्व में दूरबीन विधि से उनकी सफल सर्जरी हुई।
चीन कैसे पहुंचे F35 स्टील्थ जेट के हिस्से...जांच करेगा पेंटागन, अमेरिका टेंशन में
पेंटागन F35 फाइटर जेट के पुर्जों के हांग कांग पहुंचने की जांच कर रहा है. ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जाते शिपमेंट के भटकने से कॉकपिट कैनोपी और वेपन्स-बे डोर चीन के पास पहुंचने की खबर है.
चीन के पास ऐसा 'हथियार' जो बिना गोली चलाए अमेरिका को कर सकता है परेशान, ट्रंप के सामने बढ़ी बड़ी चुनौती
अपनी पत्नी के साथ अमेरिका पहुंचे Xi Jinping, डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकाल तोड़कर किया ऐसा
इंटरनेट डेस्क। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 11 साल में पहली बार अमेरिका की यात्रा की है। अमेरिका पहुंचने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकाल तोड़ते हुए उनका ज्वाइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर खुद स्वागत किया। इस दौरान उन्हें रेड कार्पेट बिछाकर औपचारिक सम्मान दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी पत्नी और अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप भी मौजूद थीं। दूसरी और शी जिनपिंग के साथ भी उनकी पत्नी पेंग लियुआन मौजूद रहीं। डोनाल्ड ट्रंप चौंकाने वाला कदम उठाते हुए एयरपोर्ट पर खुद शी जिनपिंग का स्वागत करने पहुंचे। किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का सीधे एयरपोर्ट जाना आम नहीं है। आज रात व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के सम्मान में स्टेट डिनर का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद दुनिया के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच द्वपक्षीय बातचीत होगी। इस बैठक में ट्रंप और जिनिपंग के बीच व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ताइवान और रूस से जुड़े मुद्दों पर बात हो सकती है। PC:abplive अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
संगम पर अमेरिका से पितरों के लिए ऑनलाइन पिंडदान,पितृपक्ष में पहने पीले कपड़े
प्रयागराज में पितृ पक्ष को लेकर तैयारियां तेज हैं. 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृ पक्ष में देश-विदेश से श्रद्धालु संगम पहुंचकर अपने पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करेंगे. खास बात यह है कि अमेरिका में रहने वाला एक श्रद्धालु 28 सितंबर को ऑनलाइन माध्यम से प्रयागराज में पिंडदान करेगा.
रुबियो ने कहा, यह बहुत बेहतर होता अगर हमारे पास ऐसी प्रभावी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था होती जो उदाहरण के तौर पर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हुए युद्ध या फिर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी संभावित संघर्ष से प्रभावी ढंग से निपट सकती। लेकिन फिलहाल ऐसा लगता है कि हमारे पास ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था मौजूद ही नहीं है जो इसका समाधान निकाल सके।
अमेरिका में शी जिनपिंग की यात्रा पर विरोध, तिब्बती-उइगर समेत कई समुदायों का संयुक्त प्रदर्शन
अमेरिका में शी जिनपिंग की यात्रा पर विरोध, तिब्बती-उइगर समेत कई समुदायों का संयुक्त प्रदर्शन
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने रनवे पर बिछाए गए रेड कार्पेट पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का गर्मजोशी से स्वागत किया। विमान से नीचे उतरते ही दोनों शीर्ष नेताओं ने हाथ मिलाया।
लगातार बढ़ते विवाद और नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य पर उठ रहे सवालों के बीच, 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' अब मध्य पूर्व का मिशन पूरा कर उस इलाके से निकल चुका है। पोत फिलहाल कैलिफोर्निया स्थित अपने गृह अड्डे सैन डिएगो (San Diego) की ओर लौट रहा है।
मई में चीन में शी नहीं आए थे स्वागत करने, अब अमेरिका में ट्रंप ने खुद बिछाए पलक-पावड़े
अमरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसी साल मई में चीन के दौरे पर गए थे, लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत नहीं किया था। लेकिन, इसके उलट अब जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ अमेरिका तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। हैरानी की बात ये है कि अमेरिका जिनपिंग के स्वागत […]
बर्थ टूरिज्म पर अमेरिका का एक्शन, वीजा पाबंदी और फ्रॉड रिपोर्ट करने के लिए नया पोर्टल लॉन्च
वाशिंगटन, 24 सितंबर . अमेरिका ने बर्थ टूरिज्म में शामिल लोगों और इसे बढ़ावा देने वाले नेटवर्क पर वीजा पाबंदी लगाने का ऐलान किया है. साथ ही वीजा फ्रॉड की जानकारी देने के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जिसमें फर्जी नौकरी के ऑफर और फर्जी शादियों जैसे मामलों की रिपोर्ट की ... Read more
भारत और पाकिस्तान का युद्ध… अमेरिका ने मान ली नाकामी? खुद के बनाए सिस्टम पर ही उठाए सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दर्जनों बार कह चुके हैं उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाया। इससे पहले वह 8 वैश्विक युद्धों को रुकवाने का दावा भी कर चुके हैं। अब अमेरिका के बनाए सिस्टम पर उनके ही मंत्री को भरोसा नहीं।
ट्रंप ने जिनपिंग का किया स्वागत: रात्रिभोज में कौन होगा शामिल, अमेरिका-चीन व्यापार समझौता क्यों दो महीने बढ़ा?
अमेरिका ने जी20 के लिए पुतिन को भेजा न्योता, ट्रंप से मुलाकात की अटकलें तेज
संयुक्त राष्ट्र, 24 सितंबर . सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने रूसी President व्लादिमीर पुतिन को दिसंबर में होने वाले जी20 सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है. इससे President डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात की संभावना बढ़ गई है, हालांकि रुबियो ने यह भी साफ किया कि दोनों नेताओं के ... Read more
जॉइंट बेस एंड्रयूज पर दिखी अमेरिका-चीन कूटनीति की झलक, ट्रंप ने शी जिनपिंग का किया भव्य स्वागत
वॉशिंगटन, 24 सितंबर . चीन के President शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन Wednesday शाम स्थानीय समय के मुताबिक 6:01 बजे अपने तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे अमेरिका पहुंचे. अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने जॉइंट बेस एंड्रयूज पर रेड कार्पेट, तोपों की सलामी और बॉम्बर विमानों के फ्लाईपास्ट के ... Read more
जिनपिंग ने ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' पर कह दी बड़ी बात
वॉशिंगटन पहुंचते ही शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात से पहले कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार की तरह आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने सहयोग, सीमित प्रतिस्पर्धा और संभाले जा सकने वाले मतभेदों पर आधारित स्थिर रिश्ते की बात करते हुए संकेत दिया कि बीजिंग द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत बातचीत चाहता है.
अमेरिकी एफ-35 के पुर्जे हांगकांग कैसे पहुंचे?: पेंटागन ने शुरू की जांच, चीन के हाथ लगने की खबर से बढ़ी चिंता
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को ट्रंप के सपोर्ट करने के बाद अमेरिका के पूर्व NSA बोल्टन ने उनके प्रशासन को ही कोसना शुरू कर दिया। बोल्टन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास कोई ठोस क्षेत्रीय रणनीति नहीं है।
अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अभूतपूर्व स्वागत, ट्रंप खुद पहुंचे एयरपोर्ट - BBC
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अमेरिका का दोहरा रवैया: रूसी तेल पर 100% टैरिफ और अब पुतिन को G20 निमंत्रण
यूक्रेन युद्ध के चलते लंबे वक्त से रूस से कन्नी काटकर चल रहे अमेरिका ने एक बार फिर से उससे नजदीकी बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है। लेकिन, उसके दोहरे रवैये का पता इसी बात से चल जाता है कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल आयात करने वाले […]
ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत में व्यापार और टैरिफ प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकते हैं। पिछले कुछ समय से अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बना हुआ है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं, जिसका असर द्विपक्षीय व्यापार के साथ वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ा है।
अमेरिका: ट्रंप ने टेक और एआई कंपनियों में किए करोड़ों डॉलर के शेयर सौदे, माइक्रोसॉफ्ट से स्पेसएक्स तक निवेश- Trump executed multi million dollar stock deals in tech and AI companies investments ranged Microsoft SpaceX
यह एक दशक में चीनी राष्ट्रपति का पहला अमेरिकी दौरा है। इस दौरान मतभेदों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सार्थक चर्चा की उम्मीद है। जिनपिंग का दौरा शुक्रवार को ट्रंप और मेलानिया ट्रंप के साथ निजी चाय के साथ खत्म होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरबेस पर ऐतिहासिक स्वागत किया. रेड कार्पेट, F-22 और F-16 फाइटर जेट्स, बी-1 बॉम्बर फ्लाईपास्ट और सैन्य सम्मान के बीच शुरू हुआ यह तीन दिवसीय राजकीय दौरा दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है.
तनय बना रहे अमेरिकी कंपनियों के लिए एआई तकनीक
उदयपुर में जन्मे तनय अग्रवाल अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए एआई आधारित तकनीक विकसित कर रहे हैं। उन्होंने चंद्रिका माहेश्वरी के साथ मिलकर क्विवली की स्थापना की है। चंद्रिका कंपनी की सीईओ व तनय को-फाउंडर एवं चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं। कंपनी ऐसी तकनीक बना रही है, जो ग्राहक के रिकॉर्ड, पूर्व बातचीत, सॉफ्टवेयर उपयोग व कारोबारी बदलावों को एक जगह जोड़कर टीमों को अगली बैठक की बेहतर तैयारी में मदद करेगी।
ट्रंप-शी से मुलाकात के बीच अमेरिकी ऑटो उद्योग की चिंता: चीनी कारों की एंट्री रोकने की मांग, फैसले पर टिकी नजर- Amid Trump-Xi meeting US auto industry is concerned demanding ban entry of Chinese cars all eyes on decision
चीन का मिशन एआई: रोबोटिक्स-टेक्नोलॉजी के दम पर दुनिया में बढ़त बनाने की तैयारी, अमेरिका को चुनौती देने में लगा- China AI Mission Preparing to gain global edge through robotics and technology aiming to challenge US
अंतहीन युद्धों का रंगमंच:तीन महाद्वीपों के दिलचस्प त्रिकोण! अमेरिका आर्थिक दबाव का हथियार चला रहा है
जिनपिंग का अमेरिका दौरा: ट्रंप और मेलानिया ने एयरपोर्ट जाकर चीनी राष्ट्रपति का स्वागत किया, पत्नी पेंग भी साथ
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में इस बार अमेरिकी खरीदार भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
'बर्थ टूरिज्म' के जरिए नागरिकता का रास्ता बंद करने की तैयारी, अमेरिका का बड़ा एक्शन
अमेरिका ने बर्थ टूरिज्म के जरिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की रवायत पर सख्त कदम उठाए हैं. अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि जो लोग इस अवैध गतिविधि में शामिल होंगे या इसे बढ़ावा देंगे, उनके वीजा पर बैन लगाया जाएगा. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे धोखाधड़ी को रोकने के लिए संदेश बताया है.
रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी विदेश मंत्री से हुई बात?
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Jaunpur News: अमेरिका से आए उद्योगपतियों के साथ सीएम से मिले विधायक
MLA meets CM along with industrialists who came from America
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
जयशंकर-रुबियो की मुलाकात: भारत ने प्रतिबंधों का उठाया मुद्दा, अमेरिका ने दोस्ती का बढ़ाया हाथ
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात कर रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध कानून (SRAI) का मुद्दा उठाया।
सीजीटीएन सर्वे : रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता चीन-अमेरिका संबंधों को संभालने का सबसे व्यावहारिक तरीका
बीजिंग, 23 सितंबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर चीनी President शी चिनफिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर रहेंगे. तीन साल बाद शी चिनफिंग की यह अमेरिका वापसी है और इसके साथ ही छह महीने के भीतर चीनी और अमेरिकी राष्ट्राध्यक्षों की पारस्परिक यात्राएं भी पूरी होंगी. यह ... Read more
शी चिनफिंग अमेरिका की राजकीय यात्रा के लिए पेइचिंग से रवाना
बीजिंग, 23 सितंबर . चीनी President शी चिनफिंग अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका की राजकीय यात्रा के लिए विशेष विमान से पेइचिंग से रवाना हुए. उनके साथ उनकी पत्नी फंग लियुआन, सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और सीपीसी केंद्रीय समिति के सामान्य कार्यालय के निदेशक छाई ... Read more
एक ही अमेरिकी कंपनी भारत और पाकिस्तान दोनों को बेचेगी घातक ड्रोन, डील पर मचा वैश्विक बवाल
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और रक्षा व्यापार के गलियारों में एक चौंकाने वाला और संवेदनशील घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सामरिक विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से वित्तीय रूप से जुड़ी एक नवोदित डिफेंस टेक कंपनी 'पावरस' (Powerus) ने भारत और पाकिस्तान—दोनों पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी देशों—के साथ एक साथ आधुनिक सैन्य ड्रोन का व्यापार शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी फर्म पावरस के साथ अत्याधुनिक मानव रहित हवाई प्रणाली यानी अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) और संबंधित तकनीकी सहायता खरीदने के लिए एक औपचारिक खरीद आदेश जारी किया है तथा इस संबंध में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।इस सौदे की सबसे विवादास्पद और पेचीदा बात यह है कि पाकिस्तान के साथ इस रक्षा सौदे पर मुहर लगाने से महज तीन महीने पहले, इसी अमेरिकी कंपनी पावरस ने भारत की प्रतिष्ठित रक्षा निर्माता कंपनी पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज (Paras Defence) के साथ एक बड़ा रणनीतिक करार किया था। उस करार के तहत पावरस ने अपने बहुचर्चित 'गार्डियन-1' (Guardian-1) इंटरसेप्टर ड्रोन को भारत में ही स्वदेशी रूप से निर्मित करने और भारतीय सशस्त्र बलों को बेचने का विशेष एक्सक्लूसिव लाइसेंस प्रदान किया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि जो कंपनी भारत में काउंटर-ड्रोन और इंटरसेप्टर तकनीक दे रही है, वही कंपनी सीमा पार पाकिस्तान की सेना को निगरानी और हमलावर ड्रोन तकनीक कैसे मुहैया करा सकती है।ट्रंप के बेटों का निवेश और फ्लोरिडा हेडक्वार्टर: विवादों के घेरे में आई पावरस कंपनीपावरस एक बेहद नई रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी है, जिसे वर्ष 2025 में स्थापित किया गया था और इसका मुख्य कॉर्पोरेट मुख्यालय अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित है। इस कंपनी के मालिकाना हक और वित्तीय ढांचे को लेकर सबसे ज्यादा सुर्खियां इसलिए बन रही हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोनों प्रमुख बेटे—डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप—इसमें प्रमुख वित्तीय निवेशक (Investors) के रूप में जुड़े हुए हैं। हालांकि, रक्षा सौदे पर अंतरराष्ट्रीय विवाद गहराने के बाद कंपनी प्रबंधन ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि ट्रंप बंधु केवल निष्क्रिय वित्तीय निवेशक हैं और वे कंपनी के दैनिक संचालन, बोर्ड के तकनीकी निर्णयों या रणनीतिक सौदों के क्रियान्वयन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं।इसके बावजूद, कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या व्हाइट हाउस के राजनीतिक प्रभाव का उपयोग दक्षिण एशिया में हथियारों का समानांतर बाजार खड़ा करने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ अपनी उच्चस्तरीय बैठक की आधिकारिक तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि पावरस को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से ड्रोन सिस्टम और तकनीकी सहायता का पहला सीमित खरीद आदेश प्राप्त हुआ है। कंपनी का दावा है कि यह ऑर्डर अंतरराष्ट्रीय रक्षा व्यापार के विस्तार की दिशा में एक सामान्य व्यावसायिक कदम है, लेकिन नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक इसे संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।इजरायली कनेक्शन और पाकिस्तान का विरोधाभास: जिसे देश नहीं मानता, उसके पूर्व सैनिक से खरीद रहा हथियारइस पूरे रक्षा सौदे का एक और बेहद हैरान करने वाला और विरोधाभासी पहलू इसका इजरायली कनेक्शन है। पावरस कंपनी के सह-संस्थापक जिव मारोम (Ziv Marom) इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व सैनिक और रक्षा तकनीक विशेषज्ञ रहे हैं। यह सर्वविदित तथ्य है कि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इजरायल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार के राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में इजरायल विरोध हमेशा एक बड़ा भावनात्मक और धार्मिक मुद्दा रहा है। ऐसे में एक पूर्व इजरायली सैन्य अधिकारी द्वारा सह-स्थापित कंपनी से पाकिस्तानी सेना द्वारा ड्रोन तकनीक खरीदना इस्लामाबाद के कूटनीतिक दोहरेपन को पूरी तरह उजागर करता है।सैन्य विश्लेषक इस बात पर भी हैरानी जता रहे हैं कि पाकिस्तान के पास पहले से ही स्वदेशी स्तर पर विकसित किए जा रहे 'शाहपर-2' (Shahpar-II) जैसे हथियारबंद ड्रोन मौजूद हैं। इसके अलावा पाकिस्तान लंबे समय से अपने सदाबहार दोस्त चीन से विंग लूम (Wing Loong) और तुर्की से बायरकतार टीबी-2 (Bayraktar TB2) और अकिंसी जैसे उन्नत लड़ाकू ड्रोन खरीदता रहा है। इन तमाम विकल्पों के मौजूद होने के बावजूद, एक अमेरिकी-इजरायली पृष्ठभूमि वाली नई नवेली फर्म से हथियार खरीदने का निर्णय यह साबित करता है कि इसके पीछे विशुद्ध सैन्य जरूरतों से कहीं अधिक कोई गुप्त भू-राजनीतिक समीकरण काम कर रहा है।रक्षा जरूरत या राजनीतिक साधने का खेल? आसिम मुनीर और ट्रंप प्रशासन के रिश्तों पर एक्सपर्ट्स की रायअंतरराष्ट्रीय मामलों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पावरस के ड्रोन तकनीक के बुनियादी स्तर पर पाकिस्तान के पास पहले से ही चीनी और तुर्की प्लेटफॉर्म्स के जरिए पर्याप्त क्षमता मौजूद है। कुछ जानकारों का विश्लेषण है कि पाकिस्तानी सेना को हार्डवेयर से ज्यादा उन्नत अमेरिकी चिपसेट, सुरक्षित डेटा-लिंक, सिस्टम-लेवल इंटीग्रेशन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से निपटने वाली इलेक्ट्रॉनिक क्षमताओं की सख्त दरकार है, जिसमें पश्चिमी कंपनियां दुनिया में सबसे आगे मानी जाती हैं। पावरस के जरिए पाकिस्तानी सेना अमेरिकी तकनीक के इकोसिस्टम में फिर से घुसपैठ करने की कोशिश कर रही है।वहीं दूसरी ओर, एक बड़ा कूटनीतिक वर्ग इसे रक्षा खरीद से ज्यादा एक सोची-समझी 'राजनीतिक लॉबिंग' और कूटनीतिक संकेत मान रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और ट्रंप परिवार के करीबी कारोबारी तंत्र के बीच संबंध सुधारने की यह एक परोक्ष कोशिश हो सकती है। ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही इस्लामाबाद यह प्रयास कर रहा है कि वह वाशिंगटन के साथ अपने पुराने सुरक्षा संबंधों को दोबारा पटरी पर लाए। हालांकि, एक ही अमेरिकी कंपनी द्वारा भारत में एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाना और पाकिस्तान को ड्रोन बेचना सीधे तौर पर दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला खेल साबित हो सकता है, जिस पर आने वाले दिनों में भारत सरकार द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
आर्कटिक में बनेंगे नए अमेरिकी सैन्य बेस, ड्रैगन और रूस की घेराबंदी तेज
दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र में चल रहे लंबे भू-राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक अत्यंत युगांतरकारी घटनाक्रम सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के इतर न्यूयॉर्क में आयोजित एक औपचारिक समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क और उसके स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के साथ एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य आर्कटिक वृत्त में तेजी से बढ़ते सैन्यीकरण, चीनी जहाजों की आवाजाही और रूसी रणनीतिक दबाव को निष्प्रभावी करना है। न्यूज एजेंसी एएफपी (AFP) के अनुसार, इस समझौते पर मुहर लगाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा कि यह अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच दशकों तक चलने वाली एक अत्यंत मजबूत, ऐतिहासिक और शानदार सुरक्षा साझेदारी की शुरुआत है।इस समझौते का सीधा अर्थ यह है कि अमेरिका को अब रणनीतिक रूप से बेहद अहम और प्राकृतिक रूप से बेहद संवेदनशील ग्रीनलैंड द्वीप की सुरक्षा और रक्षा मामलों में निर्णायक और प्रत्यक्ष भूमिका प्राप्त हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप पूर्व में भी सार्वजनिक मंचों से यह रेखांकित करते रहे हैं कि पश्चिमी गोलार्ध की संपूर्ण सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का रणनीतिक नियंत्रण होना बेहद आवश्यक है। इस त्रिपक्षीय समझौते के जरिए अमेरिका ने बिना किसी औपचारिक संप्रभुता विवाद के उस स्थायी रक्षा उपस्थिति को सुनिश्चित कर लिया है, जिसकी रूपरेखा को लेकर पिछले कई वर्षों से नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच मतभेद सुलग रहे थे।'विरोधियों को करीब नहीं आने देंगे': डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने दिया ट्रंप की नीति को खुला समर्थनन्यूयॉर्क में हस्ताक्षर समारोह से ठीक पहले डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने बेहद स्पष्ट और मुखर शब्दों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सामरिक प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने पूरी पारदर्शिता से रखा है कि वे किसी भी सूरत में पश्चिमी विरोधियों को अपनी सुरक्षा परिधि के करीब फटकने नहीं देना चाहते। डेनिश प्रधानमंत्री ने कहा कि वे ट्रंप की इस चिंता से पूरी तरह सहमत हैं और यह नया त्रिपक्षीय समझौता ठीक वही काम करेगा जिसकी इस नाजुक वक्त में जरूरत थी।फ्रेडरिकसेन ने वैश्विक मंच से चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह समझौता इस बात की पक्की गारंटी देता है कि किसी भी प्रतिकूल शक्ति या प्रतिद्वंद्वी देश को आर्कटिक के विशाल खनिज संपदा वाले भूभाग पर नियंत्रण करने या अपना रणनीतिक प्रभुत्व स्थापित करने की कतई अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान सीधे तौर पर रूस की आर्कटिक में बढ़ती सबमरीन गश्त और चीन द्वारा शुरू किए गए 'पोलर सिल्क रोड' के मंसूबों पर करारा राजनयिक प्रहार माना जा रहा है। डेनमार्क के इस कड़े रुख से यह साबित हो गया है कि लंबे मतभेदों के बाद अब कोपेनहेगन और वाशिंगटन डीसी की सुरक्षा प्राथमिकताओं में पूर्ण सामंजस्य स्थापित हो चुका है।नारसारसुआक और मेस्टर्सविग में बनेंगे नए अमेरिकी सैन्य बेस: 10 पन्नों के समझौते में खुले बड़े राजसमाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा हासिल किए गए 10 पन्नों के विस्तृत गोपनीय समझौते के आधिकारिक दस्तावेजों से कई चौंकाने वाले रणनीतिक खुलासे हुए हैं। इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते के तहत ग्रीनलैंड सरकार और डेनमार्क ने अमेरिकी सेना को द्वीप के दो सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील भौगोलिक बिंदुओं पर नए अत्याधुनिक मिलिट्री बेस स्थापित करने की औपचारिक अनुमति दे दी है। इसके तहत दक्षिण में रणनीतिक एयरफील्ड वाले नारसारसुआक (Narsarsuaq) और आर्कटिक द्वीप के सुदूर पूर्वी तट पर स्थित मेस्टर्सविग (Mestersvig) में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना अपने उन्नत निगरानी केंद्र, रडार सिस्टम और फॉरवर्ड मिलिट्री बेस विकसित करेंगी।ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने समझौते के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड केवल एक बर्फ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की सुरक्षा और ट्रांस-अटलांटिक रक्षा संरचना का केंद्रीय स्तंभ है। उन्होंने कहा कि यह समझौता यह साबित करता है कि ग्रीनलैंड अपनी भू-राजनीतिक जिम्मेदारियों को पूरी परिपक्वता के साथ समझता है और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वैश्विक स्थिरता के लिए काम कर रहा है। इन नए सैन्य अड्डों के सक्रिय होने से अमेरिका न केवल नॉर्थ अटलांटिक और जीआईयूके (GIUK) गैप पर पूरी तरह हावी हो सकेगा, बल्कि उत्तर ध्रुवीय मार्ग से गुजरने वाले हर विदेशी जलपोत और परमाणु पनडुब्बी की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे रियल-टाइम नजर रखने में सक्षम हो जाएगा।नाटो के भीतर पैदा हुए तनाव और ग्रीनलैंड के 56 हजार नागरिकों की चिंताओं का हुआ समाधानउल्लेखनीय है कि इस समझौते तक पहुंचने का सफर कूटनीतिक रूप से बेहद कांटेदार और तनावपूर्ण रहा है। अपने पिछले कार्यकालों और बयानों में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की अप्रत्याशित इच्छा जाहिर किए जाने के बाद नाटो गठबंधन के भीतर भीषण भूचाल आ गया था। उस समय डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दो टूक शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका किसी संप्रभु क्षेत्र पर कब्जा करने की मानसिकता से आगे बढ़ता है, तो इससे ट्रांस-अटलांटिक सैन्य गठबंधन हमेशा के लिए बिखर सकता है। इस कूटनीतिक तल्खी के कारण ग्रीनलैंड में रहने वाले करीब 56,000 स्थानीय निवासियों में भी अपनी सांस्कृतिक पहचान, संप्रभुता और पर्यावरण को लेकर गहरी बेचैनी और असंतोष फैल गया था।अमेरिका, डेनमार्क और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती इस दरार का फायदा उठाने के लिए विरोधी ताकतों ने उस क्षेत्र में आर्थिक निवेश बढ़ाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं, जिसके जवाब में यूरोपीय सहयोगियों ने द्वीप पर संयुक्त सुरक्षा अभ्यास और वित्तीय अनुदान तेज कर दिए थे। महीनों तक चली उच्चस्तरीय राजनयिक वार्ताओं के बाद आखिरकार तीनों पक्षों ने एक ऐसा संतुलित रास्ता खोज निकाला जिसमें ग्रीनलैंड की स्वायत्तता, डेनमार्क की संप्रभुता और अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं—तीनों का सम्मान सुरक्षित रखा गया है। नए समझौते के साथ अब न केवल नाटो के उत्तरी मोर्चे पर छाई अनिश्चितता पूरी तरह छंट गई है, बल्कि यह भी तय हो गया है कि भविष्य के आर्कटिक संसाधन युद्ध में पश्चिमी गठबंधन पूरी तरह एकजुट होकर अपनी जमीन पर डटा रहेगा।
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर और मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर की चर्चा
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार सुबह न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो से मुलाकात की और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा...
UNGA में पेजेश्कियन का अमेरिका-इजरायल पर हमला, बोले- ईरान आतंकवादी नहीं, आतंकवाद का पीड़ित
पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान की आलोचना करने वालों को आतंकवादी कहकर खारिज करने की कोशिश की जाती है।
'एटमी एनर्जी ईरान का हक...', UNGA में बोले पेजेश्कियान, अमेरिकी डेलिगेशन ने किया बायकॉट
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि ईरान को आतंकवादी बताना गलत है. उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु ऊर्जा ईरान का हक है.
बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका की सेना संयुक्त युद्धाभ्यास कर रही है। 'युद्ध अभ्यास-2026' में AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, भारत और अमेरिकी सेना के जवानों के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं। रेगिस्तानी इलाके में दोनों देशों के जवान आर्टिलरी, रॉकेट सिस्टम, एयर डिफेंस, काउंटर ड्रोन तकनीक और एविएशन क्षमताओं का इस्तेमाल कर अभ्यास कर रहे हैं। इसमें M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, स्वदेशी धनुष 155MM तोप और पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर के साथ फायरिंग ड्रिल शामिल है। इस युद्धाभ्यास के वीडियो सामने आए हैं, जिसमें AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर से जमीन पर दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों पर पिन पॉइंट अटैक होता नजर आ रहा है। जबकि दूसरे वीडियो में दो हेलिकॉप्टर तेजी से टारगेट पर अटैक करते हैं। संयुक्त युद्धाभ्यास की खासियत केवल अलग-अलग हथियारों की फायरिंग नहीं, बल्कि उन्हें एक संयुक्त ऑपरेशन में इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग है। टारगेट की पहचान, सूचना का आदान-प्रदान, फायर कमांड, आर्टिलरी और रॉकेट फायर, ड्रोन खतरे की पहचान और काउंटर ड्रोन जैसी प्रक्रियाओं को भी शामिल किया जा रहा है। पहले देखिए- संयुक्त युद्धाभ्यास की तस्वीरें M777 की खासियत ‘शूट एंड स्कूट’अभ्यास में M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर प्रमुख हथियार प्रणालियों में शामिल है। हल्की होने के कारण इसे तेजी से तैनात कर फायरिंग करने और फिर फायरिंग पोजीशन बदलने की क्षमता का अभ्यास किया जा रहा है। आधुनिक युद्ध में तेजी से पोजीशन बदलने की इस प्रक्रिया को ‘शूट एंड स्कूट’ कहा जाता है। पिनाका से लंबी दूरी तक रॉकेट फायरभारतीय सेना का पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर भी अभ्यास में शामिल है। इसके जरिए एक साथ बड़ी संख्या में रॉकेट दागकर निर्धारित क्षेत्र में फायर पावर पहुंचाने की क्षमता का प्रदर्शन किया जा रहा है। धनुष तोप और पिनाका के साथ अभ्यास से दोनों सेनाओं को अलग-अलग आर्टिलरी और रॉकेट प्रणालियों के बीच तालमेल का प्रशिक्षण मिल रहा है। ड्रोन दिखे तो M-LIDS और एयर डिफेंस ने साधा निशानादुनिया में तेजी से बढ़ रहे ड्रोन अटैक जैसी गंभीर खतरों से निपटने के लिए भी प्रभावी तैयारी की जा रही है। अमेरिकी सेना का M-LIDS (Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System) काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी युद्धाभ्यास में शामिल है। इसके साथ L/70 एयर डिफेंस गन जैसी प्रणाली का इस्तेमाल छोटे और धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोन खतरों के खिलाफ किया जा रहा है। अपाचे हेलिकॉप्टर से एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशनमहाजन फील्ड फायरिंग रेंज में AH-64E Apache अटैक हेलिकॉप्टर भी अभ्यास का हिस्सा है। हेलिकॉप्टर और जमीन पर मौजूद सैनिकों के बीच एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशन, लक्ष्य की पहचान और संयुक्त कार्रवाई से जुड़ी ट्रेनिंग की जा रही है। अपाचे भारतीय सेना की प्रमुख अटैक हेलिकॉप्टर प्रणालियों में शामिल है। हिमार्स और स्टिंगर भी अभ्यास का हिस्साअमेरिकी सेना की ओर से हिमार्स (High Mobility Artillery Rocket System- HIMARS) और स्टिंगर एयर डिफेंस सिस्टम भी अभ्यास में शामिल है। हिमार्स मोबाइल प्रिसीजन रॉकेट फायर के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि स्टिंगर कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है। इनके साथ अमेरिकी और भारतीय सैनिक संयुक्त रूप से फायरिंग और ऑपरेशनल तालमेल का अभ्यास कर रहे हैं। औली में पर्वतीय युद्ध का अभ्यास15 से 28 सितंबर तक संयुक्त अभ्यास होगा, जिसमें पहले चरण में महाजन फील्ड फायरिंग में अभ्यास चल रहा है, जबकि दूसरे फेज उत्तराखंड के औली में युद्धाभ्यास हो रहा है। वहां दोनों देशों की सेनाएं ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाके में पैदल सेना आधारित अभियानों, पर्वतीय युद्ध कौशल और अलग भौगोलिक परिस्थितियों में संयुक्त संचालन का अभ्यास कर रही हैं। औली, LAC से करीब 95 किलोमीटर की दूरी पर है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के जेल नेटवर्क को लेकर केंद्र और असम सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। रंधावा ने आरोप लगाया है कि साल 2015 से पुलिस हिरासत में होने और असम की जेल में बंद होने के बावजूद जग्गू भगवानपुरिया बेखौफ होकर अंदर से ही अपना आपराधिक नेटवर्क चला रहा है। रंधावा का तर्क है कि भगवानपुरिया का नाम अमेरिका का हार्ड बॉल लिस्ट में शामिल है। सुखजिंदर रंधावा ने गृहमंत्री से मांग की है कि जग्गू भगवानपुरिया को अमेरिका को सौंप दिया जाए ताकि भगवानपुरिया पर अमेरिका में ही ट्रायल चलाया जा सके। असम जेल से कैसे चल रहा है नेटवर्क? रंधावा के गृह मंत्री से तीखे सवाल अमित शाह को भेजे पत्र में सांसद सुखजिंदर रंधावा ने केंद्र सरकार और असम की भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए कई अहम सवाल पूछे हैं: असम जेल प्रशासन पर सवाल: रंधावा ने पूछा कि जब असम में भाजपा की ही सरकार है, तो जेल की सलाखों के पीछे बंद होने के बावजूद जग्गू भगवानपुरिया अंदर से अपना नेटवर्क कैसे संचालित कर रहा है? 11 वर्षों में एक भी केस में सजा नहीं: पत्र में जिक्र किया गया है कि जग्गू पर कुल 128 आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह 2015 से पुलिस हिरासत में है। इसके बावजूद पिछले 11 वर्षों में उसे एक भी मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सका है, जो हमारी कानूनी और जांच प्रणाली पर बड़ा सवाल है। अमेरिका की हार्ड बॉल लिस्ट में नाम: रंधावा ने की यूएसए को सौंपने की मांग सुखजिंदर रंधावा ने पत्र में अमेरिकी जांच एजेंसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि जग्गू भगवानपुरिया का नाम अमेरिका की 'हार्ड बॉल लिस्ट' में शामिल है। अमेरिका में चलाया जाए ट्रायल: रंधावा ने मांग की है कि भारत सरकार जग्गू भगवानपुरिया को तुरंत अमेरिका को सौंपे ताकि उस पर अमेरिका में कानूनी ट्रायल चलाया जा सके। भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' पर साधा निशाना भाजपा द्वारा निकाली जा रही 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' पर तंज कसते हुए सांसद रंधावा ने कहा कि ऐसी यात्राएं सिर्फ एक दिखावा हैं। जब तक दो-दो महाद्वीपों में अपराध फैलाने वाला गैंगस्टर पुलिस हिरासत में रहकर जेल के अंदर से ही अपना गैंग चला रहा हो, तब तक पंजाब को नशा या अपराध मुक्त बनाना बिल्कुल असंभव है। रंधावा ने अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा पर गैंगस्टरों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से तीखी बहस, जापान की पीएम को नीचा दिखाना, भारत के पीएम को टैरिफ की चेतावनी… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ज्यादातर विदेशी नेताओं के साथ अपमानजनक तरीके से पेश आते रहे। लेकिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे से पहले ट्रम्प के तेवर बदले-बदले से हैं। जिनपिंग के लिए रेड कार्पेट कैसे बिछा रहे ट्रम्प, चीन को खुश करने के पीछे क्या कोई खास मकसद और इस दौरे का दुनिया पर असर क्या पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिका की जमीन पर जिनपिंग के स्वागत में क्या-क्या होगा? जवाब: शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका पहुंच रहे हैं। भारतीय समय के मुताबिक 23-24 सितंबर की रात 1 बजे के बाद उनका विमान वॉशिंगटन डीसी के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर लैंड करेगा। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक… सवाल-2: आखिर जिनपिंग को इतनी तवज्जो क्यों दे रहे ट्रम्प, बदले में क्या चाहिए? जवाब: अमेरिका में दशकों पुरानी परंपरा रही है कि विदेशी नेता राष्ट्रपति से मिलने व्हाइट हाउस आते हैं, व्हाइट हाउस उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट नहीं जाता। ट्रम्प का प्रोटोकॉल तोड़ना सिर्फ शिष्टाचार नहीं, चीन की अहमियत का कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। इसकी वजह मोटे-तौर पर 4 मांगों में छिपी है… 1. चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई बनाए रखे 2. चाकू, बेलन, नोटबुक का कारोबार टैरिफ-फ्री हो 3. बड़ी डील की घोषणा, जिससे मिड-टर्म चुनावों में माहौल बने 4. चीन के साथ ‘AI हॉटलाइन’ बने, ताकि ये बेलगाम न हो अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में चीनी कारोबार के एक्सपर्ट स्कॉट कैनेडी के मुताबिक, ‘ट्रम्प प्रशासन को उम्मीद थी कि टैरिफ के एकतरफा भारी दबाव से चीन झुक जाएगा। ऐसा नहीं हुआ। चीन का निर्यात इस साल 28% बढ़ा है। इसलिए मोलभाव में शी की स्थिति ट्रम्प से मजबूत दिख रही है।’ सवाल-3: जिनपिंग अमेरिका से क्या हासिल करने की कोशिश करेंगे? जवाब: अमेरिकी टैरिफ के बावजूद लगातार दूसरे साल चीन का ट्रेड सरप्लस 1 ट्रिलियन डॉलर पार कर सकता है। यानी चीन ने जितना सामान दूसरे देशों से खरीदा उससे कहीं ज्यादा उन्हें बेचा है। साफ है कि चीन व्यापार के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं है। ऐसे में अमेरिकी दौरे से जिनपिंग 3 चीजें साधना चाहते हैं… 1. अमेरिका ताइवान की आजादी का विरोध करे 2. रेयर अर्थ मिनरल्स के एवज में ज्यादा टैरिफ छूट मिले 3. जिनपिंग का भव्य स्वागत, जिससे चीन में छवि मजबूत हो सवाल-4: क्या इस दौरे से भारत और दुनिया पर कोई बड़ा असर पड़ेगा? जवाब: एशियाई और यूरोपीय देशों को डर है कि अगर अमेरिका और चीन साथ आ गए तो ये वर्ल्ड ऑर्डर, यानी दुनिया के नियम खुद तय करेंगे। AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन ही सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की मीटिंग के बाद पूरी दुनिया में AI को नियंत्रित करने का सिस्टम तैयार हो सकता है। ईरान जंग शुरू होने के बाद से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। अगर चीन की मध्यस्थता से अमेरिका ईरान जंग से बाहर निकल पाए और होर्मुज स्ट्रेट के कंट्रोल पर सहमति बन जाए, तो ग्लोबल ऑइल सप्लाई फिर पटरी पर आ सकती है। अमेरिका और चीन में ट्रेड वॉर की वजह से विदेशी कंपनियों के फैक्ट्री लगाने के लिए भारत विकल्प बनकर उभरा था। अमेरिका-चीन की सुलह से भारत के हाथ से यह मौका निकल सकता है। ब्रिगेडियर अनिल रमन (रि.) के मुताबिक, 'एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में चीन को मैनेज करने के लिए अमेरिका भारत से अच्छे रिश्ते बनाकर रखता था। अगर अब अमेरिका-चीन आपस में ही अपने रिश्ते संभालने लगेंगे, तो अमेरिका को भारत की जरूरत कम होगी। लेकिन अगर चीन-अमेरिका में सहमति नहीं बन पाती है, तो अमेरिका के लिए भारत की जरूरत बढ़ जाएगी।' अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास हो गया है। अगर रेयर अर्थ मिनरल्स के बदले अमेरिका चीन को रूसी तेल खरीदने की ढील देता है, तो भारत पर अमेरिका को ऐसा कोई ऑफर देने का दबाव बढ़ेगा, जिससे उसे भी रियायत मिले। ---------- ये खबर भी पढ़िए… खामेनेई को घर में मारा, अब ईरानी राष्ट्रपति को वीजा:अमेरिका के दुश्मनों को भी न्यूयॉर्क आकर खिलाफ बोलने की छूट क्यों; 5 किस्से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। वे हर साल होने वाले यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में आज भाषण देंगे। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी होंगे। इन नेताओं को अपना दुश्मन मानने वाले अमेरिका ने ही इन्हें वीजा दिया है। पूरी खबर पढ़िए..
व्हर्लपूल ऑफ इंडिया की प्रमोटर व्हर्लपूल मॉरीशस अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है, जिससे कंपनी के शेयरों में 20% की जबरदस्त तेजी आई। यह वही कंपनी है जिसे मुकेश अंबानी ने 2025 में खरीदने की कोशिश की थी।
मंडी जिले के सरकाघाट के शौर्यन शर्मा ने गूगल इंडिया में तकनीकी समाधान सलाहकार का पद संभाला है। उनका वार्षिक पैकेज करीब 50 लाख रुपये है और इससे पहले उन्होंने बैंक ऑफ अमेरिका में सेवाएं दी हैं।
‘अमेरिका में अब मन ऊब गया...’ भारतीय महिला ने बताई इसकी वजह
अमेरिका में 2 साल बिताने के बाद भारतीय माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर ने बताया कि कैसे नई जिंदगी का रोमांच धीरे-धीरे सामान्य लगने लगा. मनोविज्ञान में इसे 'हेडोनिक अडैप्टेशन' से जोड़कर समझा जाता है.
भारत सहित दुनिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। जिसे देखते हुए कई निर्माता दूसरे देशों में भी अपना विस्तार कर रही हैं। अब Ultraviolette भी अमेरिका सहित कई देशों में विस्तार की तैयारी कर रही है।
ट्रंप Vs IRGC: अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर ईरान का पलटवार, कहा— ‘अपनी सुरक्षा के लिए हर हद पार करेंगे’
अमेरिका-ईरान के बीच 3 घंटे चली बातचीत, वीडियो में ट्रम्प बोले- अच्छी रही बैठक; होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर भी चर्चा
अगर अमेरिका ने सौ प्रतिशत का टैरिफ थोपा तो !
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से ‘सैंक्शनिंग रशा एंड ईरान एक्ट’ के पारित होने को लेकर देश में आशंकाओं के बादलों का उठना स्वाभाविक है। आज जिस आर्थिकी और विश्व व्यवस्था को तकरीबन पूरी दुनिया ने अपना रखा है, उसकी वजह से पूरी दुनिया को लगता है कि अमेरिका के सहयोग के बिना वह एक कदम आगे नहीं रख सकती। वैश्विक आर्थिकी में डालर के वर्चस्व के चलते ज्यादातर देशों को लगता है कि अगर अमेरिका की आंखें टेढ़ी हुईं तो उस पर महाविपत्ति आ जाएगी। इसी सोच का ही असर है कि इस अधिनियम के पारित होने के बाद भारत के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की नजर में भारतीय विदेश नीति नाकाम नजर आने लगी है। सैद्धांतिक रूप से भारतीय वामपंथी इकोसिस्टम अमेरिका का हर पल खुला विरोध करता है, लेकिन उसे भी अमेरिकी टैरिफ कानून भारतीय हित के खिलाफ नजर आ रहा है। इन सबके बीच भारत सरकार की प्रतिक्रिया संतुलित और सधी हुई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपनी 140 करोड़ की आबादी की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दृढ़ है। जाहिर है, भारत को झुकाने की सोच रखने वाले ट्रंप प्रशासन को ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं रही होगी। ऐसे में अमेरिका के अगले कदम पर निगाह रखना ज्यादा जरूरी हो जाता है। रूस और ईरान से अगर भारत द्वारा तेल खरीदने का बुनियादी लक्ष्य रूस- यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देना या ईरान-इजरायल युद्ध में अमेरिका और इजरायल का विरोध नहीं है। दरअसल भारत मौजूदा माहौल में अपनी भारी-भरकम जनसंख्या के लिए किफायती ऊर्जा सुरक्षा को संरक्षित कर रहा है। इसलिए भारत का न झुकना देश के विपक्षी दलों और अमेरिकी सरकार के लिए हैरतअंगेज भले ही हो, भारतीय हितों के अनुकूल नहीं है। वैसे जब से ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभाला है, अपने ऊल-जलूल फैसलों के लिए ही वे जाने गए हैं। यह पहला मौका नहीं है कि उन्होंने इस कानून के जरिए भारत को दबाने की कोशिश की है। बीते साल एक अगस्त 2025 से उन्होंने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था। जिससे उनके ही बाजार में भारतीय वस्तुएं और सामान महंगे होने लगे थे। तब चालाकी दिखाते हुए ट्रंप प्रशासन ने फार्मास्युटिकल्स को इस टैरिफ से अलग रखा था। इसकी वजह यह है कि भारत से अमेरिका आने वाली दवाएं सस्ती पड़ती हैं। भारतीय रत्न और आभूषणों पर टैरिफ लगाने का बहुत असर नहीं पड़ा था। क्योंकि रत्न और आभूषण स्वभाव से ही महंगे होते हैं और उन्हें खरीदने वाले लोगों के लिए इनकी महंगाई मायने नहीं रखती। ठीक वैसे ही, जैसे भारत में महंगा होने के बावजूद सोने की खरीद-बिक्री पर असर नहीं पड़ा है। भारतीय सामान जब बढ़े टैरिफ के चलते अमेरिकी बाजार में महंगे होने लगे तो अमेरिका में भी ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ सवाल उठने लगे। तब तक अमेरिकी प्रशासन को भी समझ आने लगा था कि उसने कैसा कदम उठाया है। इसका असर यह हुआ कि फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन को टैरिफ में कटौती करनी पड़ी। इसे भी पढ़ें: इस बार भी मोदी नहीं जाएंगे UNGA, Jaishankar ही संभालेंगे मोर्चा, क्या Trump से आमना-सामना नहीं चाहते PM? पश्चिमी एशिया का हालिया संकट अमेरिका की ही देन है। जब से यह संकट बढ़ा है, भारत ने रूस से तेल की खरीददारी बढ़ा दी है। यह भारत की मजबूरी भी है। बीती जुलाई में भारत ने अपने कुल तेल आयात का 51.4 प्रतिशत तेल अकेले रूस से खरीदा था। रूस से तेल खरीद का भारतीय मकसद मौजूदा हालात में अपने लिए किफायती दरों पर तेल हासिल करना है। भारत का यह अधिकार है और मौजूदा हालात में अगर भारत झुकता है तो इसे भारतीय नागरिक शायद ही पसंद करेगा। भारत की तुलना में चीन ना सिर्फ रूस, बल्कि ईरान से भी भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है। रूस से तेल खरीदना उसके लिए ज्यादा आसान और सस्ता है। चूंकि दोनों देशों की सीमाएं मिलती हैं और तेल की आपूर्ति पाइपलाइन के जरिए आसानी से होती है, इसलिए चीन भी टैरिफ युद्ध के निशाने पर होने के बावजूद तेल खरीद से पीछे नहीं हट रहा तो फिर हमें ही क्यों पीछे रहना चाहिए। इसमें दो राय नहीं कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति इस कानून के तहत भारत पर सौ प्रतिशत टैरिफ थोपते हैं तो भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है। जानने की बात है कि भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों में टेक्सटाइल्स, रत्न और आभूषण, आटोमोबाइल और इंजीनियरिंग उत्पाद ज्यादा है। टैरिफ अगर बढ़ेगा तो अमेरिकी बाजार में इनकी कीमतें महंगी होंगी, जिससे उनकी मांग घट सकतकी है। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है। कुछ जानकारों को लगता है कि इससे रूस से जारी तेल खरीद से मिल रही अरबों रूपए की राहत खटाई में पड़ सकती है। यहां ध्यान देने की बात यह भी है कि भारत, अमेरिका से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी रखे हुए है। अगर सौ प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाता है तो इस प्रस्तावित व्यापार समझौते में अड़चन आ सकती है। हो सकता है कि यह बातचीत ही खटाई में पड़ जाए। बेशक अमेरिका भारत का बड़ा कारोबारी साझीदार है। लेकिन मोदी के 2024 में सत्ता में आने के बाद से अब तक करीब चालीस देशों से मुक्त व्यापार समझौता किए जा चुके हैं। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ से भी ऐसा समझौता किया है। भारत का मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड आदि से मुक्त व्यापार समझौते या व्यापक आर्थिक साझेदारी का समझौता कर चुका है। भारत सरकार के ही आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने कारोबारी नेटवर्क का विस्तार करते हुए नौ बड़े मुक्त व्यापार समझौते भी किए हैं। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। इसी तरह भारत ने आसियान देशों, जापान, दक्षिण कोरिया और साफ्टा के सदस्य देशों के साथ पारंपरिक कारोबारी समझौता कर चुका है। अगर अमेरिका भारत पर टैरिफ थोपता है तो देश को चाहिए कि इन देशों के जरिए कारोबार को बढ़ावा दे। वैसे भी टैरिफ थोपने की दशा में भारतीय कारोबारी दूसरे देशों के जरिए अमेरिका में अपना माल भेज सकते हैं। उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार भी ऐसी राह तलाशने की कोशिश में जुटी होगी। फिर भारतीय अर्थव्यवस्था भी पहले जैसी नहीं रही, इसलिए हताश और चिंतित होने की जरूरत नहीं है, भारत को अमेरिकी बाजार में घुसने के लिए वैकल्पिक राहों की तलाश तेज करनी होगी। - उमेश चतुर्वेदी लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं..
अमेरिका का Ego हर्ट, ईरान ने 47 MQ-9 रीपर ड्रोन तबाह किए, जेट भी
अमेरिका-ईरान संघर्ष में अमेरिकी विमानों के नुकसान का खुलासा हुआ. MQ-9 रीपर ड्रोन सबसे नष्ट हुए हैं. KC-135 और F-15E समेत क्रूड विमान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. कुल लागत अरबों में है.
15 करोड़ के घर और सुनसान सड़कें, NRI महिला ने दिखाया अमेरिका का सन्नाटा
आलीशान मकान, साफ़-सुथरे बगीचे और करोड़ों की प्रॉपर्टी. पहली नज़र में अमेरिका के उपनगरीय इलाके किसी सपने जैसे लगते हैं, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक गहरा सन्नाटा और अकेलापन भी छिपा है.
अमेरिका की माइनर लीग क्रिकेट में मुंबई में जन्मे 20 वर्षीय मितांश नित्यानंदम ने इतिहास रच दिया है। मितांश इस टी20 लीग के इतिहास में शतक जड़ने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने शिकागो किंग्समेन के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ महज 68 गेंदों पर 114 रनों की तूफानी पारी खेली। उनकी इस ऐतिहासिक पारी में सात छक्के और आठ चौके शामिल रहे। यह शतक इसलिए भी खास है क्योंकि ठीक एक दिन पहले वह मैच की पहली ही गेंद पर एक आसान फुल टॉस पर शून्य पर आउट हो गए थे। लेकिन अगले ही दिन अपनी गलती से सीखते हुए उन्होंने यह कीर्तिमान स्थापित कर दिया। मितांश की इस सफलता के पीछे मुंबई में बिताए उनके कड़े संघर्ष का बड़ा हाथ है। उनका जन्म मुंबई में हुआ था, लेकिन महज छह महीने की उम्र में ही उनका परिवार अमेरिका शिफ्ट हो गया था। अमेरिका में साल भर क्रिकेट ट्रेनिंग का ढांचा न होने के कारण मितांश ने हाई स्कूल के बाद कॉलेज जाने के बजाय एक बड़ा जोखिम लिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई एक साल के लिए टाली और क्रिकेट की बारीकियां सीखने के लिए अकेले मुंबई के चेंबूर आकर आठ महीने बिताए। मुंबई में अचीवर्स क्रिकेट अकादमी और कोच सुबू की मदद से उन्होंने खुद को निखारा। 15 मैचों तक बेंच पर बैठने के बाद उन्हें डीवाई पाटिल क्लब की तरफ से खेलने का मौका मिला। क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के खिलाफ उन्होंने 30 गेंदों पर चार छक्कों की मदद से 41 रन बनाकर अपनी जगह पक्की की। इसके बाद उन्होंने टाइम्स शील्ड ए डिवीजन और प्रतिष्ठित डीवाई पाटिल टी-20 कप (जिसे आईपीएल का ऑडिशन माना जाता है) में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भुवनेश्वर कुमार, प्रसिद्ध कृष्णा, यश ढुल और प्रियम गर्ग जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया और उनसे दबाव में खेलना सीखा। मुंबई की लाल मिट्टी वाली पिचों पर खेलते हुए मितांश ने स्पिन के खिलाफ अपनी तकनीक मजबूत की। उन्होंने यहीं स्वीप और रिवर्स-स्वीप जैसे शॉट खेलने सीखे, जो अमेरिका में उनके गेम का हिस्सा नहीं थे। शिकागो के खिलाफ अपने ऐतिहासिक शतक के दौरान उन्होंने करीब 40 रन इन्हीं स्वीप शॉट्स की मदद से बनाए। मितांश के पिता भारतीय टीम के कट्टर समर्थक हैं और बचपन में मितांश उनके साथ सुबह 4 बजे उठकर भारत के मैच देखते थे। मितांश का टैलेंट देखकर लीग ने नजरअंदाज कर दिए उम्र के नियम 2021 में शिकागो में एक अभ्यास मैच के दौरान शिकागो ब्लास्टर्स के तत्कालीन कप्तान अशर मेहदी ने 15 वर्षीय मितांश को पहली दो गेंदों पर छक्के जड़ते देखा था। तब उम्र कम होने के कारण उन्हें खेलने के लिए विशेष अनुमति दिलवाई गई क्योंकि लीग नियमों के अनुसार खिलाड़ी का 16 साल का होना जरूरी था। इससे मितांश लीग के सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। इसके बाद 17 साल की उम्र में वह लीग के सबसे युवा अर्धशतकवीर बने और अब 20 साल की उम्र में सबसे युवा शतकवीर बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम हो गया है।
Stock in News: लगातार तीन दिन अमेरिकी कंपनी ने की बिकवाली, आज शेयर अपर सर्किट पर
Mazda Share Price: इंजीनियरिंग गुड्स बनाने वाली मज्दा के शेयर आज उछलकर 5% के अपर सर्किट पर पहुंच गए। इसके शेयरों ने ऐसे समय में रिकवरी की है, जब लगातार तीन दिनों तक अमेरिकी कंपनी रेमंड्स इंटरनेशनल ने इसमें अपनी हिस्सेदारी हल्की की है। अमेरिकी कंपनी ने लगातार तीन दिनों में इसके 5 लाख से अधिक शेयर बेच दिए और इस वजह से लगातार दो दिनों में यह करीब 9% टूट गया था। हालांकि अब आज की बात करें तो इसने तेजी से रिकवरी की और फिलहाल बीएसई पर यह 5% के अपर सर्किट ₹259.60 पर बना हुआ है।कब, कितने और किस भाव पर बेचे Mazda के शेयरअमेरिकी कंपनी क्रॉल रेमंड्स इंटरनेशनल ने लगातार तीन दिनों में मजदा के 5,05,811 शेयर बेच दिए। इसमें से 1.50 लाख शेयर क्रॉल रेमंड्स ने 18 सितंबर को प्रति शेयर ₹261.07 के भाव पर ₹3.91 करोड़ में बेचे। अमेरिकी कंपनी ने इसके बाद फिर 21 सितंबर को ₹256.58 के भाव पर 1,12,884 शेयर ₹2.90 करोड़ और फिर 22 सितंबर को ₹243.51 के भाव पर 2,42,927 शेयर ₹5.92 करोड़ में बेचे। इस प्रकार लगातार तीन दिनों में क्रॉल रेमंड्स ने ₹12.73 करोड़ में मजदा में अपनी 2.52% हिस्सेदारी हल्की की। इससे पहले जून 2026 तिमाही के आखिरी में क्रॉल रेमंड्स की मजदा में 7.23% हिस्सेदारी (14,47,500 इक्विटी शेयर) थी।कैसी है सेहतमजदा के कारोबारी सेहत की बात करें तो इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 61.87% उछलकर ₹80.34 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 49.23% चढ़कर ₹7.33 करोड़ हो गया।अब एक साल में मजदा के शेयरों की चाल की बात करें तो इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 1 अक्टूबर 2025 को बीएसई पर यह एक साल के हाई लेवल ₹302.00 पर था। हालांकि शेयरों की तेजी यहीं थम गई और इस हाई लेवल से छह ही महीने में यह 47.35% टूटकर 30 मार्च 2026 को एक साल के निचले स्तर ₹159.00 पर आ गया।IRB Infra Share Price: थमी 7 दिनों की गिरावट, एक ऐलान पर शेयर बने रॉकेटडिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
25 लाख रुपये, अमेरिकी डॉलर... ऐसे सजे गणपति बप्पा, देखने उमड़ी भीड़
गुजरात के अमरेली में गणपति महोत्सव का एक अनोखा नजारा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां गणपति बप्पा का ऐसा श्रृंगार किया गया है, जिसे देखकर लोग एक पल के लिए ठहर जा रहे हैं. बप्पा को भारतीय करेंसी के साथ अमेरिकी डॉलर से सजाया गया है. यानी गणपति बप्पा यहां 'लखपति' ही नहीं, बल्कि 'डॉलरपति' भी नजर आ रहे हैं.
वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से खबर आई कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के आवागमन के लिए खोल सकता है।
ट्रंप-ताकाइची :जापान-अमेरिका गठबंधन की तारीफ की
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई एक बैठक में अपने देशों के गठबंधन की मजबूती और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर जोर दिया।
अमेरिका संग युद्धाभ्यास में अपाचे हेलीकॉप्टर की एंट्री, हवा से किए सटीक वार
भारत और अमेरिकी सेना के युद्धाभ्यास में एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी शामिल हो गए हैं।
उम्मीद, भ्रम और रणनीतिक गलतियां: क्या इतिहास से सबक लेगा अमेरिका?जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक पर नजरें
जर्मनी में अमेरिकी सेना का F-16 फाइटर जेट क्रैश, पायलट जख्मी
जर्मनी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. पश्चिमी जर्मनी में स्थित एक अमेरिकी सैन्य हवाई अड्डे पर अमेरिकी वायुसेना का एफ-16 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. अमेरिकी सेना द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलवार को हुआ जब विमान नियमित उड़ान पर था. गनीमत यह रही कि दुर्घटना के वक्त पायलट समय रहते विमान से सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहा. हालांकि, इस हादसे में पायलट को गंभीर चोटें आई हैं.
PM Modi US Visit: दिसंबर में अमेरिका जा सकते हैं पीएम मोदी, G20 में ट्रंप से मुलाकात की भी संभावना
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90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आया कच्चे तेल का भाव, अमेरिका-ईरान के बीच जारी बातचीत के बीच गिरी कीमतें
एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि अगर वॉशिंगटन ईरानी तेल एक्सपोर्ट को रोकने वाली नाकेबंदी हटाने की दिशा में कदम उठाता है, तो तेहरान 7 दिनों के अंदर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल सकता है।
ईरान-अमेरिका तनाव से लगातार बढ़ रहे कच्चे माल के दाम, पीएनजी, सभी तरह के केमिकल हुए महंगे
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च-स्तरीय सत्र में दुनिया की दो सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी ताकतों—अमेरिका और ईरान—के बीच का टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संयुक्त राष्ट्र के ऐतिहासिक मंच से ईरान को सीधी और खुली सैन्य धमकियां दिए जाने के बाद अब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं।वैश्विक कूटनीति के गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि क्या मसूद पेजेशकियान संयुक्त राष्ट्र के पोडियम से डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक भाषा का करारा पलटवार करेंगे? मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, समुद्री मार्गों की नाकेबंदी और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनातनी के बीच पेजेशकियान का यह संबोधन अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।Trump's 'Deal or Annihilate' Ultimatum: ट्रंप ने दिया था तबाही का अल्टीमेटमईरानी राष्ट्रपति के संबोधन से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से अपने भाषण में बेहद सख्त और धमकी भरा रुख अपनाया था। ट्रंप ने विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि उनके सामने ईरान को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लेने की घड़ी आ गई है:ट्रंप ने कहा, या तो ईरान के साथ ऐसा समझौता (Deal) हो जो उसे फिर से संभलने का मौका दे, या फिर मैं इस्लामिक गणराज्य को पूरी तरह 'नेस्तनाबूद' (Annihilate) कर दूं और ऐसा तेजी से करूं ताकि उन्हें कभी दोबारा उठने का मौका न मिले।उन्होंने दुनिया के देशों से ईरान का पूर्ण आर्थिक बहिष्कार करने और उसके नागरिक विमानों की लैंडिंग तक रोकने की अपील की।ट्रंप के भाषण के दौरान हॉल में मौजूद ईरानी राजनयिकों के दल ने कड़ा विरोध जताते हुए महज 10 मिनट के भीतर सदन से वॉकआउट कर दिया था।ट्रंप के इस कड़े भाषण के बाद से ही वैश्विक मीडिया और कूटनीतिक विश्लेषकों की निगाहें ईरानी राष्ट्रपति के पलटवार पर जम गई हैं।Pezeshkian's Agenda at UNGA: तेहरान से क्या संदेश लेकर आए हैं पेजेशकियान?ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान विदेश मंत्री अब्बास अराघची और शीर्ष राजनयिकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे से रवाना होने से ठीक पहले पेजेशकियान ने अपने इरादे साफ कर दिए थे।पेजेशकियान ने कहा था, ईरानी जनता सिर उठाकर जीती है। तमाम प्रतिबंधों, युद्ध और गैर-बराबरी के बावजूद हमारे लोगों ने अपनी जमीन पर डटकर मुकाबला किया है। हम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने देश के हितों और संप्रभुता का दृढ़ता से बचाव करेंगे और दुनिया के सामने पश्चिमी पाखंड का पर्दाफाश करेंगे।माना जा रहा है कि पेजेशकियान अपने भाषण में निम्नलिखित 4 प्रमुख मुद्दों पर तीखा हमला बोलेंगे:अमेरिकी आक्रामकता और धमकियों का विरोध: ट्रंप की 'तबाही' वाली भाषा को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए वैश्विक समुदाय से अमेरिका की दादागीरी का संज्ञान लेने की मांग।गाजा और पश्चिम एशिया में मानवीय संकट: इजरायल के सैन्य अभियानों और पश्चिमी देशों द्वारा दी जा रही सैन्य सहायता को अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध करार देना।आर्थिक प्रतिबंधों को वित्तीय आतंकवाद बताना: अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर और दवाओं-खाद्य पदार्थों की किल्लत को मानवाधिकार उल्लंघन के तौर पर पेश करना।परमाणु और रक्षा संप्रभुता: यह स्पष्ट करना कि ईरान किसी भी सैन्य हमले या दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपनी रक्षा तकनीक को विकसित करने का उसका संप्रभु अधिकार है।Diplomatic Drama: क्या पर्दे के पीछे बातचीत की भी कोई गुंजाइश है?संयुक्त राष्ट्र में एक तरफ जहां मंच से तीखी बयानबाजी और धमकियों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ बैकचैनल कूटनीति के संकेत भी मिल रहे हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं खुलासा किया था कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने न्यूयॉर्क में ईरानी अधिकारियों के साथ लगभग तीन घंटे की लंबी बातचीत की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत ने भी संकेत दिए हैं कि यदि माहौल अनुकूल रहता है, तो वाशिंगटन कूटनीतिक समाधान और प्रत्यक्ष वार्ताओं के लिए हमेशा तैयार है। हालांकि, ईरान के भीतर सर्वोच्च नेता के अंतिम रुख और आंतरिक खींचतान के चलते यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मंच का टकराव द्विपक्षीय वार्ताओं का रास्ता खोलेगा या खाई को और गहरा कर देगा।Global Implications: तेल बाजार और वैश्विक सुरक्षा पर सबकी निगाहेंईरान और अमेरिका के बीच संयुक्त राष्ट्र में होने वाला यह वाकयुद्ध केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के शिपिंग रूट पर पड़ता है।यदि पेजेशकियान अपने संबोधन में टकराव का रुख जारी रखते हैं और दोनों पक्षों में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं दिखती, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नया उछाल देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि आज जब पेजेशकियान संयुक्त राष्ट्र के मंच पर खड़े होंगे, तो दुनिया की नजरें उनके हर एक शब्द और बॉडी लैंग्वेज पर टिकी रहेंगी।
यूएन: अमेरिका की प्राथमिकताएं क्या? ईरान में परमाणु से भारत के साथ ट्रेड डील तक, फारुकी ने बताई ट्रंप की सोच
PM Modi US Visit: दिसंबर में अमेरिका जा सकते हैं मोदी, G20 में ट्रंप से मुलाकात की संभावना|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका का दौरा कर सकते हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर . अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने बच्चों के लिए 57 देशों तक अपने वैश्विक प्रौद्योगिकी और शिक्षा गठबंधन का दायरा बढ़ाया है. उन्होंने छह बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ साझेदारी की घोषणा की है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के साथ आयोजित एक सभा के दौरान ... Read more
US-Iran Talks: न्यूयॉर्क में 3 घंटे चली अमेरिका-ईरान बातचीत, होर्मुज खोलने पर सामने आई शर्तें
US-Iran Talks: न्यूयॉर्क में 3 घंटे चली अमेरिका-ईरान बातचीत, होर्मुज खोलने पर सामने आई शर्तें
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे का किया समर्थन
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे का किया समर्थन
ट्रंप और ताकाइची ने मजबूत जापान-अमेरिका गठबंधन की तारीफ की
संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप और जापानी Prime Minister सनाए ताकाइची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई एक बैठक में अपने देशों के गठबंधन की मजबूती और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर जोर दिया. ट्रंप ने द्विपक्षीय बैठक की शुरुआत ताकाइची की जमकर तारीफ करते हुए ... Read more
हार्वर्ड-स्टैनफर्ड नहीं... MIT है अमेरिकी नंबर वन कॉलेज, जानिए आइवी लीग कॉलेजों की रैंक
यूएस न्यूज बेस्ट कॉलेज 2027 रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने प्रिंसटन के 15 साल के वर्चस्व को खत्म कर पहला स्थान हासिल कर लिया है। सभी 8 आइवी लीग कॉलेज लिस्ट में शामिल हैं।
जोधपुर में गरजेगा अमेरिका का F-35, फुटेज इ देंखे 26 सितंबर से शुरू होगा तरंग शक्ति-2026; 40 देश होंगे शामिल
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भारत से पंगा लेना चाहता है छोटा सा देश? अमेरिका को क्यों कहने लगा थैंक्यू
डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी बिल पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। इस कानून में रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले चीन और भारत जैसे देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान है।
नेपाल: विनाशकारी बाढ़ के बाद अमेरिका की बड़ी मदद, राहत और पुनर्निर्माण के लिए 31 मिलियन डॉलर की फंडिंग का एलान Nepal: US aid following devastating floods $31 million in funding announced for relief and reconstruction.
अमेरिका की ईरान को बड़ी चेतावनी, एयरलाइंस को मदद करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी होगी कार्रवाई; वीडियो में जाने डॉलर सिस्टम से बाहर करने की धमकी
भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ का दूसरा संस्करण 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित होगा।
जोधपुर में 20 सितंबर को पकड़े गए पंजाब के मोस्ट वांटेड व लॉरेंस गैंग के शूटर अमेरिका में बैठे गैंगस्टर आरजू के इशारे पर पहुंचे थे। टारगेट पर पॉलिटिकल कनेक्शन वाले 2 बिजनेसमैन थे। इनसे पहले एक टीम और आई थी। उन्होंने हथियार छुपाए थे और वारदात यह शार्प शूटर करने वाले थे। राजस्थान की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की जानकारी पर जोधपुर पुलिस ने दोनों शार्प शूटर राजेन्द्र उर्फ बिल्ला और जसकरण उर्फ सन्नी को रातानाड़ा के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया था। दोनों शार्प शूटर 30 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कई खुलासे किए हैं। आरजू से वे लगातार कॉन्टैक्ट में थे। दो गुर्गो की एक टीम पहले पहुंची और हथियार छुपाए शूटर जसकरण और राजिंदर राजस्थान पहुंचें उससे पहले एक टीम यहां आकर रेकी कर के गई थी। शूटरों ने खुलासा किया कि टीम जोधपुर आकर हथियार छुपा कर गई थी। पुलिस ने जब दोनों शूटर को गिरफ्तार किया था, तब भी इनके पास से ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद की गई थी। हथियार कहां छिपाए, इसके बारे में पुलिस जांच कर रही है। पॉलिटिकल कनेक्शन वाला 2 बिजनेसमैन थे टारगेट दोनों शूटर जोधपुर पहुंचे तब इनको वॉट्सएप पर हथियार की लोकेशन और जहां हथियार छुपाए उसका वीडियो भेजा गया था। दोनों वारदात को अंजाम देने से पहले उस लोकेशन पर गए थे और वहां छिपाए हथियारों को भी देखा था। दोनों शूटर के टारगेट पर जोधपुर के दो बिजनेसमैन थे जिनके अच्छे पॉलिटिकल कनेक्शन हैं। हालांकि पुलिस इस बारे में अभी कुछ भी आधिकारिक तौर पर नहीं बता रही हैं। मामले की जांच एसीपी सेंट्रल आरपीएस संदीप कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी दोनों शूटर रिमांड पर हैं। इनवेस्टिगेशन पूरी होने के बाद ही जानकारी दी जाएगी। आरजू के इशारे पर पहुंचे थे जोधपुर लॉरेंस विश्नोई गैंग के यह शार्प शूटर गैंगस्टर आरजू के कॉन्टैक्ट में थे। जानकारी के अनुसार आरजू लॉरेंस का सबसे खास गैंगस्टर है और अमेरिका में है। इन दोनों से पहले रेकी करने के लिए जो टीम जोधपुर पहुंची थी। उस टीम ने सभी डिटेल आरजू को भेज दी थी। इसके बाद आरजू ने नेपाल से इन दोनों शूटर्स को जोधपुर भेजा था। शूटर नेपाल से एमपी होते हुए सिरोही और फिर जोधपुर पहुंचे। आरजू विश्नोई पंजाब का रंगदार नवीन कुमार उर्फ आरजू का है। उसने पंजाब में लॉरेंस गैंग के नाम पर व्यापारियों, कमीशन एजेंटों और संपन्न लोगों से धमकी देकर रंगदारी वसूलने के लिए संगठित सिंडिकेट बनाया था। यह लॉरेंस का करीबी सहयोगी और ऑपरेटर है। दिसंबर 2025 में श्रीगंगानगर रंगदारी नेटवर्क में भी मुख्य ऑपरेटर की भूमिका में था। 7 जुलाई 2025 को अबोहर में कपड़ा कारोबारी संजय वर्मा की गोली मारकर हत्या हुई थी। इसके बाद लॉरेंस गैंग के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरजू ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी। राजस्थान में रंगदारी का नेटवर्क श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर में दिसंबर 2025 में सामने आए रंगदारी नेटवर्क में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में करीब 91 लाख रुपए नकद बरामद किए गए थे। यह रकम राजस्थान से पंजाब तक पहुंचाई जा रही थी और आरजू को इस नेटवर्क का प्रमुख ऑपरेटर बताया गया। फरवरी में जोधपुर के दो बिजनेसमैन को मिली थी धमकी इस वर्ष फरवरी में जोधपुर के चौपासनी हाउसिंगबोर्ड और शास्त्री नगर निवासी दो बिजनेसमैन को लॉरेंस गैंग के आरजू ने रंगदारी के लिए कॉल किया और लॉरेंस के नाम की धमकी दी। वीपीएन के माध्यम से आई कॉल पर व्यापारियों से 48 घंटे में 2 करोड़ की रंगदारी मांगी थी। दोनों व्यापारियों ने चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में मामला दर्ज करवाया था। इन व्यापारियों को गनमैन भी मिले थे। व्यापारी की गोली मारकर हत्या : जोधपुर के प्रसिद्ध मोबाइल व्यवसायी वासुदेव इसरानी की सितंबर 2017 में लॉरेंस गैंग के शूटरों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसरानी से गैंग ने मोटी रंगदारी मांगी थी, और पैसे न देने पर उन पर पहले भी फायरिंग करवाई गई थी। और आखिर में रंगदारी के लिए उनकी हत्या कर दी गई, जो जोधपुर में लॉरेंस गैंग का सबसे बड़ा हत्याकांड माना जाता है। …. ये खबर भी पढ़िए… लॉरेंस की राजस्थान के 2 बिजनेसमैन की हत्या की प्लानिंग:सबसे खतरनाक शार्पशूटर्स को नेपाल से बुलाया, 5-5 लाख के इनामी, विदेश भागने वाले थे राजस्थान की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के हत्थे चढ़े लॉरेंस गैंग के 2 शार्प शूटरों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। दोनों जोधपुर के 2 व्यापारियों को मारने आए थे। पूरी खबर पढ़िए…
पानीपत में फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट और पार्सल क्लीयरेंस के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। अमेरिका से सामान का पार्सल आने का झांसा देकर साइबर ठगों ने एक युवक को डराया-धमकाया और उससे ₹1,27,000 ऐंठ लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पानीपत पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच शुरू कर दी है। अमेरिका से आना था पार्सल जौरासी रोड, करहंस निवासी अमित कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि अमेरिका से उनका एक कूरियर/पार्सल आना था, जिसमें मोबाइल, ज्वेलरी और जूते इत्यादि सामान था। पार्सल कूरियर होने के महज दो दिन बाद कूरियर भेजने वाले व्यक्ति से पीड़ित का संपर्क अचानक बंद हो गया। इसी दौरान पीड़ित के पास अनजान नंबरों से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को कस्टम अधिकारी बताया और पार्सल में कीमती/अवैध सामान होने का डर दिखाकर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। डरा-धमका कर हड़पे 1.27 लाख रुपए आरोपी ने पीड़ित को जेल भेजने और कानूनी झंझट में फंसाने का खौफ दिखाया। फर्जी कस्टम अधिकारी के झांसे और डर में आकर पीड़ित ने आरोपियों के बताए खातों में कुल ₹1,27,000 ट्रांसफर कर दिए। पैसे भेजने के बाद भी जब पार्सल नहीं मिला और ठगों की ओर से और रुपयों की मांग की जाने लगी, तब पीड़ित को अपने साथ हुई साइबर धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
ताजमहल घूमने आए एक अमेरिकी दंपती को बुरे अनुभव से गुजरना पड़ा। होटल से दवा लेने निकलने पर बच्चा गैंग ने घेर लिया। एक बच्चे ने पर्यटक के बैग से बटुआ पार कर लिया।
डेनमार्क-अमेरिका समझौता: रूस और चीन पर कितना असर पड़ेगा, यूएन में क्या बोले ट्रंप? जानिए समझौते का मकसद
'7 दिन में खुल जाएगा होर्मुज...', अमेरिका में मंथन के बीच ईरान का बड़ा बयान
ईरान ने कहा है कि अगर वॉशिंगटन सैन्य दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाए, तो होर्मुज जलडमरूमध्य 7 दिन में फिर खोला जा सकता है. न्यूयॉर्क में जारी कूटनीतिक कोशिशों के बीच तेहरान ने साफ कर दिया कि होर्मुज अब बातचीत का बड़ा दबाव बिंदु बन चुका है.
डीजल निर्यात पर रोक लगा सकता है अमेरिका: ट्रंप ने किया समर्थन, दुनिया भर में बढ़ सकती है ईंधन की कीमतें- US may ban diesel exports Trump backs move fuel prices worldwide could rise
अमेरिकी वैज्ञानिक को चीन से छुड़ाएंगे ट्रंप? पत्नी बोली- जिनपिंग से करेंगे बात
अमेरिका में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे से पहले वैज्ञानिक यूलीन चेन की रिहाई का मुद्दा चर्चा में है. चेन की पत्नी युफांग रोंग ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग से चेन की रिहाई की मांग करेंगे.
दिसंबर में अमेरिका जा सकते हैं PM मोदी, राष्ट्रपति ट्रंप से हो सकती है मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में अमेरिका के फ्लोरिडा जाने की चर्चा है. यहां डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में G20 समिट होगी. UNGA के 81वें सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं, जो 26 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
अमेरिकी दबाव घटे तो होर्मुज 7 दिन में खुल सकता है:रिपोर्ट आते ही तेल के दाम घटे; ईरानी अधिकारी बोले- दावा गलत
अमेरिका की सैंक्शन वॉर्निंग का असर! इराक ने सस्पेंड की ईरानी फ्लाइट्स
अमेरिका की सैंक्शन वॉर्निंग के बाद इराक ने बगदाद एयरपोर्ट पर सभी ईरानी उड़ानों को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है. इराकी सरकार अब ईरानी उड़ानों को नजफ एयरपोर्ट पर डायवर्ट करने के बारे में सोच रही है. वहीं, ओमान में भी ईरानी यात्रियों की एंट्री फिलहाल रोक दी गई है.
अमेरिका-यूरोप में बढ़ी आयुर्वेदिक दवाओं की मांग: आज दुनिया के 150 देशों में आयुर्वेद दिवस, क्या होगा खास?
अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद उसकी भव्यता दुनिया ने देखी, लेकिन इसके नक्शे से लेकर गर्भगृह में रामलला की स्थापना तक कई ऐसी कहानियां हैं, जो सामने नहीं आ सकीं। मंदिर का काम सोमपुरा परिवार को 1989-90 में मिला था। इसके बाद करीब 35 साल की इस यात्रा में कभी 3डी मॉडल ने तकनीकी चुनौती खड़ी की तो कभी गर्भगृह में रामलला की स्थापना के दौरान घंटों बारीकी से काम करना पड़ा। राम मंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा विज्ञान मेले में शामिल होने मंगलवार को भोपाल आए। उन्होंने भास्कर से खास बातचीत में इस पूरी यात्रा के अनुभव साझा किए। मालूम हो आशीष और उनके पिता पद्मश्री आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने मिलकर राम मंदिर का डिजाइन तैयार किया है। जब रामलला विराजे, हम वहीं बैठ गए... लगा, 35 साल की मेहनत को अर्थ मिल गया 1989-90 में जब राम मंदिर का काम हमारे परिवार को मिला, तब अंदाजा नहीं था कि यह इतने बड़े ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व का केंद्र बनेगा। हमारा परिवार लंबे समय से मंदिर बनाता आया है, इसलिए शुरुआत में यह भी दूसरे मंदिरों जैसा काम था। पर आंदोलन बढ़ा, लोगों की आस्था सामने आई तो जिम्मेदारी भी बढ़ती गई। मन में था कि मंदिर ऐसा बने, जहां लोगों को लगे कि वे वास्तव में रामलला के घर आए हैं। हमने राम मंदिर का 3डी मॉडल बनाया। इसके बाद ऐसा डिजिटल स्वरूप तैयार करना था, जिसमें मंदिर के भीतर घूमकर भी देखा जा सके। फाइल इतनी बड़ी थी कि हमारे सिस्टम पर यह काम मुश्किल हो गया। इसलिए इसे अमेरिका के लॉस एंजेलिस भेजकर वीडियो बनवाना पड़ा। इससे समझ आया कि नई टेक्नोलॉजी के साथ सिस्टम की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। पत्थर चुनते समय मजबूती, नक्काशी और लंबे समय तक टिकने की क्षमता देखी। हम गांधीनगर के अक्षरधाम में भी ऐसे बलुआ पत्थर पर काम कर चुके थे। इसके महीन दानों पर नक्काशी अच्छी उभरती है। दूसरे विकल्प भी देखे। संतों को नमूने दिखाए और उनकी सहमति के बाद पत्थर चुना। मेरे लिए सबसे भावुक क्षण रामलला की मूर्ति की स्थापना थी। गर्भगृह में उनकी दृष्टि, दिशा और ऊंचाई डिजाइन के मुताबिक तय करने में 3-4 घंटे लगे। जब सब कुछ वैसा हो गया, जैसा तय किया था, तो हम वहीं बैठ गए। उसी शाम एक महिला ने कहा- ‘भैया, आपने मेरे लल्ला को घर दे दिया।’ महसूस हुआ कि जिसे हम इतने वर्षों से आकार दे रहे थे, वह इमारत नहीं, रामलला का घर था।’ -आशीष सोमपुरा राम मंदिर से आगे क्या? ऑस्ट्रेलिया में 700, गुजरात में 425 फीट ऊंचा मंदिर बनेगा सोमपुरा के मुताबिक, परिवार अब दूसरे बड़े मंदिरों पर काम कर रहा है। अहमदाबाद में 425 फीट ऊंचे मंदिर का प्रोजेक्ट है। ऑस्ट्रेलिया में करीब 700 फीट ऊंचे मंदिर की योजना पर भी काम चल रहा है। उनके मुताबिक एआई से मंदिर डिजाइन करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, पर मंदिर वास्तुकला की गणनाएं इतनी जटिल हैं कि सभी बारीकियों को एआई में शामिल करना आसान नहीं है।
जर्मनी में अमेरिकी F-16 फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बची पायलट की जान
जर्मनी के स्पैंगडाहलम एयर बेस के पास अमेरिकी F-16 फाइटर जेट क्रैश हो गया. ये हादसा रूटीन ट्रेनिंग फ्लाइट के बाद हुआ. हालांकि प्लेन क्रैश होने के बावजूद पायलट की जान बच गई और वो सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा. फिलहाल इस हादसे की वजह का खुलासा नहीं हो पाया है.
एशियन गेम्स में एक बार फिर भारत के पास अपने लिए मेडल पक्के करने का मौका होगा।
अमेरिका ने ईरान के साथ जंग छेड़ने के पहले ही दिन ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के घर पर हमला किया। इसमें खामेनेई और उनके 4 करीबी परिवारवालों की मौत हो गई। अब तक इस जंग में आधे से ज्यादा ईरानी लीडरशिप और 8 हजार से ज्यादा ईरानी मारे जा चुके हैं। अमेरिका के डर से ही नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अब तक सामने नहीं आए हैं। लेकिन 7 महीने बाद अब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान न्यूयॉर्क पहुंचने वाले हैं। वे हर साल होने वाले यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में आज भाषण देंगे। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी होंगे। इन नेताओं को अपना दुश्मन मानने वाले अमेरिका ने ही इन्हें वीजा दिया है। ऐसा पहली बार नहीं है कि अमेरिका ने अपने विरोधी नेताओं को UNGA में शामिल होने के लिए वीजा दिया हो और उन नेताओं ने न्यूयॉर्क आकर अमेरिका को कोसा हो। भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे, ऐसे ही 5 चर्चित किस्से… क्यूबा क्रांति के बाद जनवरी 1959 में फिदेल कास्त्रो ने सत्ता संभाली। अमेरिका इससे नाराज था। इतना कि मार्च 1960 में अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने अपनी खुफिया एजेंसी CIA से कास्त्रो सरकार को उखाड़ फेंकने को कहा। हालांकि, सितंबर 1960 में हो रही UNGA के लिए फिदेल कास्त्रो और उनके डेलिगेशन को वीजा देना पड़ा। 19 सितंबर को कास्त्रो न्यूयॉर्क पहुंचे। मैनहटन के शेल्बर्न होटल में उन्होंने बुकिंग कराई थी, लेकिन होटल ने उन्हें ठहराने से मना कर दिया। वे हार्लम के थेरेसा होटल में शिफ्ट हो गए। थेरेसा होटल में कास्त्रो की मुलाकात सोवियत लीडर निकिता ख्रुश्चेव, मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर और भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से हुई। सिविल राइट्स एक्टिविस्ट मैल्कम एक्स और कई अफ्रीकी-अमेरिकी नेता भी उनसे मिलने पहुंचे। 26 सितंबर 1960 को कास्त्रो ने UNGA में भाषण शुरू करते हुए कहा, ‘कहा जाता है कि मैं लंबे भाषण देता हूं, लेकिन आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं छोटा भाषण ही दूंगा।’ हालांकि कास्त्रो ने इसके उलट किया और UNGA के इतिहास का सबसे लंबा भाषण दे डाला। 269 मिनट यानी 4 घंटे 29 मिनट तक वो बोलते रहे। कास्त्रो ने अमेरिका पर लैटिन अमेरिका में दखल देने और तानाशाही को शह देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्यूबा क्रांति केवल एक तानाशाह (बतिस्ता) के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ थी, जिसने क्यूबा को अमेरिका का गुलाम बना रखा था। कास्त्रो ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन एफ. कैनेडी और रिचर्ड निक्सन पर जमकर निशाना साधा। कैनेडी को ‘अनपढ़ और अज्ञानी करोड़पति’ तक कह डाला, जबकि निक्सन को राजनीतिक बुद्धि से कमजोर बताया। 1974 में फिलिस्तीन देश की मांग के लिए बने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) को अमेरिका और इजराइल आतंकी संगठन मानते थे। लेकिन 14 अक्टूबर 1974 को UNGA ने PLO को फिलिस्तीनी जनता का आधिकारिक प्रतिनिधि मान लिया और उन्हें भाषण देने के लिए बुलाया। इजराइल और अमेरिका ने इसका विरोध किया, लेकिन अमेरिका को वीजा देना पड़ा। महीने भर बाद 13 नवंबर 1974 को PLO के मुखिया यासिर अराफात UNGA पहुंचे। ऐसा पहली बार हुआ कि UN के किसी गैर-सदस्य संगठन के नुमाइंदे को UNGA में भाषण देने मिला। 80 मिनट के भाषण में उन्होंने फिलिस्तीनियों के लिए आजाद देश की मांग की। अराफात ने कहा, ‘मैं एक विद्रोही हूं और आजादी ही मेरा मकसद है। क्रांतिकारी और आतंकवादी में फर्क सिर्फ इतना है कि कौन किस वजह से लड़ रहा है? जो कब्जा और शोषण करने वाले हैं वही असली आतंकी हैं, न कि वे जो आजादी के लिए लड़ते हैं।’ आखिर में उन्होंने कहा, ‘आज मैं एक हाथ में जैतून की डाली और दूसरे हाथ में एक स्वतंत्रता सेनानी की बंदूक लेकर आया हूं। जैतून की डाली को मेरे हाथ से गिरने मत दीजिए।’ अराफात की ये लाइनें आज भी मशहूर हैं। उनकी एक तस्वीर भी काफी चर्चित है, जिसमें उनकी जैकेट से एक होल्स्टर झांकता दिखता है। यह विवाद भी रहा कि मंच पर जाने से पहले उन्होंने पिस्तौल उतारी थी या नहीं। अराफात के भाषण के 9 दिन बाद 22 नवंबर 1974 को UNGA ने PLO को ऑब्जर्वर का दर्जा दे दिया। इसे फिलिस्तीनी मुद्दे को पहली बार दुनिया में मान्यता मिलने की शुरुआत माना जाता है। 19 सितंबर 2006 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने UNGA में भाषण दिया। उन्होंने इराक और अफगानिस्तान में जारी अमेरिकी जंगों को ‘आजादी और लोकतंत्र’ की लड़ाई बताया, जबकि दोनों देश अमेरिकी सेना के कब्जे में थे। अगले ही दिन 20 सितंबर को वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज उसी पोडियम पर पहुंचे। भाषण की शुरुआत में उन्होंने कैथोलिक क्रॉस बनाते हुए कहा, ‘कल यहां शैतान आया था। ठीक यहीं। आज भी यहां गंधक की बदबू आ रही है। कल अमेरिका के राष्ट्रपति, जिन्हें मैं शैतान कहता हूं, यहां आकर ऐसे बोले जैसे पूरी दुनिया के मालिक हों।’ शावेज ने बुश की पॉलिसी को ‘बमों और गोलियों से थोपा गया लोकतंत्र’ बताया। उन्होंने UN सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार और वीटो पावर खत्म करने की मांग रखी। दिलचस्प बात है कि उस दिन UNGA में कोई सीनियर अमेरिकी एम्बेस्डर नहीं था, सिर्फ एक जूनियर नोट-टेकर मौजूद था। बाद में अमेरिका के तत्कालीन UN एम्बेस्डर जॉन बोल्टन ने शावेज के भाषण को अपमानजनक और अंतरराष्ट्रीय मामलों को देखने का ‘कॉमिक-स्ट्रिप’ नजरिया करार दिया, यानी बचकाना और कार्टूनिश बताया। सितंबर 1969 में लीबियाई सेना के कैप्टन मुअम्मर गद्दाफी ने राजा इदरीस प्रथम का तख्तापलट कर दिया। गद्दाफी ने अमेरिका विरोधी नीतियां अपनाईं और परमाणु प्रोग्राम शुरू किया। इससे नाराज अमेरिका ने लीबिया को ‘आतंकवाद प्रायोजक देश’ घोषित कर दिया। सत्ता संभालने के 40 साल बाद पहली बार गद्दाफी अमेरिका पहुंचे और 23 सितंबर 2009 को उन्होंने UNGA में पहला भाषण दिया। भूरे बेडुइन चोगे, काली टोपी, काला चश्मा, सीने पर अफ्रीका महाद्वीप जैसा ब्रोच पहने और लाल रूमाल लिए गद्दाफी ने खुद को ‘अफ्रीकी राजाओं का राजा’ बताया। गद्दाफी ने आरोप लगाया कि UN अपनी स्थापना के बाद से दुनिया में हुई 65 जंगें रोकने में नाकाम रहा। इसे सुरक्षा परिषद नहीं, बल्कि आतंक परिषद कहा जाना चाहिए। गद्दाफी को बोलने के लिए 15 मिनट मिले थे, लेकिन वे नोटबुक से फाड़े गए पीले-बिखरे पन्नों से 96 मिनट तक भाषण देते रहे। लंबे भाषण की वजह से साभागार आधा खाली हो गया। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और UN में अमेरिकी एम्बेस्डर सुजैन राइस तक बाहर चली गईं। पीछे सिर्फ जूनियर नोट-टेकर बैठे रहें। गद्दाफी का खुद का ट्रांसलेटर भी थक गया और उसने बीच में भाषण छोड़ दिया। UN स्टाफ को उसकी जगह लेनी पड़ी। भाषण के आखिर-आखिर में गद्दाफी ने UN चार्टर की एक कॉपी हाथ में उठाई, उसके कुछ हिस्से जोर से पढ़े और उसे हल्का-सा फाड़कर पीछे उछाल दिया। कहा कि सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों को मिला वीटो चार्टर की भावना के खिलाफ है। इसे खत्म होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को ‘हमारा बेटा’ कहकर सराहा- ‘हम अफ्रीकी खुश और गर्वित हैं कि अफ्रीका का एक बेटा अमेरिका पर राज कर रहा है।’ उसी दिन बाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने UNGA में जवाब दिया कि वे UN चार्टर को दोबारा स्वीकार करने आए हैं, उसे फाड़ने नहीं। UN की प्रवक्ता मिशेल मोंटास ने चार्टर के अपमान को अस्वीकार्य बताया। 23 सितंबर 2010 की सुबह ओबामा ने UNGA में ईरान से बातचीत की पेशकश करते हुए नरम लहजे में भाषण दिया। हालांकि कुछ ही घंटों बाद ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद मंच पर पहुंचे, तो माहौल पलट गया। अहमदीनेजाद ने 9/11 हमलों को लेकर 3 थ्योरी गिनाईं। पहली- एक ताकतवर आतंकी गुट ने अमेरिकी खुफिया तंत्र को चकमा देकर इसे अंजाम दिया; दूसरी- खुद अमेरिकी सरकार के कुछ लोगों ने डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने, मिडिल-ईस्ट में पकड़ मजबूत करने और जायोनी शासन (इजराइल) को बचाने के लिए यह हमला रचा और तीसरी- यह किसी आतंकी गुट का काम था, जिसका अमेरिकी सरकार ने फायदा उठाया। अहमदीनेजाद ने 9/11 के लिए अमेरिकी सरकार को ही घेरते हुए दावा किया कि बहुसंख्यक अमेरिकी, दुनिया के ज्यादातर देश और नेता इससे (दूसरी थ्योरी) से सहमत हैं। उन्होंने इसकी जांच के लिए एक अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-फाइंडिंग टीम बनाने की मांग भी रखी। दूसरी थ्योरी सुनते ही अमेरिका समेत 33 डेलिगेशन सागाभाग से बाहर निकल गए। इनमें कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कोस्टा रिका और यूरोपीय संघ के सभी 27 देश शामिल थे। अमेरिकी मिशन के प्रवक्ता मार्क कॉर्नब्लाऊ ने कहा कि अहमदीनेजाद ‘घटिया साजिश का दावा और यहूदी-विरोधी बकवास’ कर रहे हैं। वाइट हाउस ने भी बयान जारी किया कि राष्ट्रपति ओबामा को यह टिप्पणियां ‘बेहद आक्रामक और आपत्तिजनक’ लगीं, खासकर इसलिए क्योंकि यह उसी न्यूयॉर्क शहर में की गईं, जहां वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की इमारतें गिरी थीं। आखिर अमेरिका अपने सबसे बड़े दुश्मन को अपनी ही जमीन पर क्यों आने देता है? इसका जवाब 79 साल पुराने एक समझौते में है… यही वजह है कि जंग के बीच अमेरिका कानूनी तौर पर ईरानी डेलिगेशन को रोक नहीं सकता। हालांकि अमेरिका डेलिगेशन की आवाजाही सीमित कर सकता है। ऐसा हो भी रहा है। इस बार के UNGA के लिए पहुंचने वाला ईरानी डेलिगेशन सिर्फ UN मुख्यालय, ईरान के स्थायी UN मिशन, ईरानी राजदूत के आवास और जॉन एफ. कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच आ-जा सकेंगे। कहीं और जाने के लिए उन्हें अमेरिकी सरकार से इजाजत लेनी होगी। अमेरिका ने ईरान से अपना डेलिगेशन छोटा रखने को कहा है। साथ ही उनके क्लब और बाजार जाने पर रोक लगा दी। लग्जरी शॉपिंग भी बैन कर दी। तो क्या अमेरिका विरोधी नेता को UNGA के लिए न्यूयॉर्क आने से रोक ही नहीं सकता? ‘हेडक्वार्टर एग्रीमेंट’ में अमेरिकी सरकार को एक अधिकार मिला है कि जिस व्यक्ति से ‘अमेरिका की सुरक्षा को खतरा’ हो, वे उसे रोक सकते हैं। इसी को आधार बनाकर अमेरिका ने 1988 में यासिर अराफात को वीजा नहीं दिया था। अमेरिकी विदेश विभाग ने तब कहा था कि PLO के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के पुख्ता सबूत हैं। नतीजतन UNGA को उस साल अपना पूरा सत्र जिनेवा शिफ्ट करना पड़ा और अमेरिका को इसके लिए भारी आलोचना झेलनी पड़ी। अमेरिका ने 2025 और 2026 में भी फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अध्यक्ष महमूद अब्बास को वीजा नहीं दिया। अमेरिका का कहना है कि PLO और फिलिस्तीनी अथॉरिटी अपने वादों पर खरे नहीं उतरे। वे इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जरिए इजराइल-फिलिस्तीन विवाद को अंतरराष्ट्रीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पिछली बार अब्बास ने UNGA में वर्चुअली भाषण दिया था। ऐसा इस बार भी होगा। हालांकि, अमेरिका को मिली इस छूट में बारीक फर्क है। दरअसल, अब्बास और PLO के अधिकारी UN के किसी पूर्ण सदस्य देश के प्रमुख नहीं, बल्कि एक गैर-सदस्य इकाई के नुमाइंदे हैं। इसलिए उन पर पाबंदी लगाना अमेरिका के लिए राजनीतिक और कानूनी तौर पर थोड़ा आसान है। ईरान जैसे किसी पूर्ण सदस्य देश के चुने हुए राष्ट्रपति को रोकना कहीं ज्यादा बड़ा कूटनीतिक कदम होगा और इससे अमेरिका पर ‘हेडक्वार्टर एग्रीमेंट’ तोड़ने का आरोप लगेगा। -------------- ये खबर भी पढ़िए… चप्पल-लुंगी वाले हूती लड़ाके कौन, जिन्होंने सऊदी का F-15 जेट गिरा दिया; पाक-अमेरिका तक इनसे दूर क्यों भाग रहे पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका में पहली बार शराब की खपत घटी, युवाओं ने बदला ट्रेंड; 50–64 उम्र में भारी शराबखोरी 36% बढ़ी
अमेरिका में पहली बार शराब की खपत घटी, युवाओं ने बदला ट्रेंड; 50–64 उम्र में भारी शराबखोरी 36% बढ़ी- Alcohol consumption US declined first time young people shift trends heavy drinking among 50 to 64 age group
विदेश के समाचार: 73% अमेरिकियों को एआई से बड़े नुकसान का डर; भारतीय मूल के पूर्व ब्रिटिशपुलिस अधिकारी को जेल
अमेरिका-डेनमार्क-ग्रीनलैंड की नई डिफेंस डील, आर्कटिक सुरक्षा पर फोकस
अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक नया समझौता हुआ है. ये समझौता 1951 के पुराने समझौते का विस्तार है जिसमें अमेरिकी सेना की भूमिका, ग्रीनलैंड की संप्रभुता, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय अखंडता को प्राथमिकता दी गई है. इस समझौते का मकसद आर्कटिक में शांति, सुरक्षा और स्थिरता लाना है.
Ballia News: अमेरिका और ईरान के संघर्ष से बदल रहे वैश्विक समीकरण, ऊर्जा सुरक्षा पर मंथन
Global equations shifting due to the US-Iran conflict
आगरा ताजनगरी में अमेरिकी पर्यटक दंपती के साथ शातिर ठगी का मामला सामने आया है। दो बच्चों ने उनका डॉलरों से भरा पर्स पार कर दिया। पर्स में 2,750 डॉलर के साथ जरूरी कागजात और पासपोर्ट भी रखे थे। भारतीय मुद्रा में यह रकम ढाई लाख रुपये से अधिक है। घटना के बाद पर्यटक दंपती ने पर्यटन थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में अहम सुराग मिले हैं। जानकारी के अनुसार, अमेरिकी पर्यटक दंपती अपने मित्र गुयेन फुओन के साथ आगरा घूमने आए थे। सभी फतेहाबाद रोड स्थित होटल ट्राइडेंट में ठहरे हुए थे। 19 सितंबर की शाम करीब पांच बजे दंपती दवा लेने के लिए ताजगंज क्षेत्र स्थित एक मेडिकल स्टोर पर गए। दवा खरीदने के बाद उन्होंने भुगतान किया और पर्स को कंधे पर टंगे बैग में रख लिया। इसी दौरान दुकान पर मौजूद 9 और 12 साल के दो लड़कों ने उन्हें पर्स में रुपये रखते देख लिया। बताया गया कि दोनों लड़के दुकान से ही उनके पीछे लग गए और रुपये मांगने लगे। दंपती ने उन्हें अनदेखा कर दिया और आगे बढ़ गए। कंधे पर लटका बैग की चेन खुली रह गई थी। होटल लौटते समय रास्ते में दोनों लड़कों ने फिर उन्हें घेर लिया। बातों में उलझाकर एक लड़के ने बैग से पर्स निकाल लिया और दोनों मौके से भाग निकले। पीड़ित दंपती ने पुलिस को बताया कि पर्स में 2,750 डॉलर, दो हजार भारतीय रुपये और पासपोर्ट रखा था। सूचना मिलते ही पर्यटन पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। फुटेज में दो लड़के पर्स लेकर भागते हुए दिखाई दिए। एसीपी ताज सुरक्षा यतेंद्र नागर ने बताया कि सीसीटीवी की मदद से पुलिस मथुरा रेलवे स्टेशन तक पहुंची है। जांच में सामने आया है कि दोनों लड़के ताजनगरी मेट्रो स्टेशन के पास फुटपाथ पर रहते थे। पुलिस टीम उन्हें पकड़ने और डॉलर बरामद करने का प्रयास कर रही है।
UNGA81: अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान, वेनेज़ुएला के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई का किया बचाव
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने यूएन महासभा के81वें सत्र में अपने सम्बोधन के दौरान ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए, देशों से तेहरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने का आग्रह किया है. साथ ही, उन्होंने कहा कि उन्हें अब चयन यह करना है कि ईरान के साथ एक समझौता हो या फिर उसके विरुद्ध और अधिक सख़्त क़दम उठाए जाएं.
ग्रीनलैंड पर ट्रंप-डेनमार्क में समझौता, आर्कटिक सुरक्षा के लिए बढ़ेगी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
आखिरकार डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर समझौता कर लिया। अक्सर वे ग्रीनलैंड को अमेरिका के कब्जे में लेने की बात करते थे। समझौते के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में दो सैन्य अड्डे बनाएगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में दो बड़े सैन्य अड्डे बनाएगा। इस समझौते के तहत अमेरिका को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक...
सेबी ने अदाणी समूह की पांच कंपनियों के खिलाफ हिंडनबर्ग मामले को ₹1.51 करोड़ के जुर्माने के साथ सुलझा लिया है। आरोप लगाने वाली अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च आधिकारिक तौर पर बंद हो चुकी है।
भारत-अमेरिका की संयुक्त फायरिंग, महाजन रेंज में गूंजी तोपों की गर्जना
भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच चल रहे ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में मंगलवार का दिन बेहद अहम रहा...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दे रहे हैं। ट्रंप के भाषण में अमेरिका की ताकत और दुनिया में बदलाव लाने के लिए उसके इस्तेमाल पर फोकस है।
ईरानी एयरलाइंस पर अमेरिका की सख्त आर्थिक चोट, देखें दुनिया आजतक
ईरान के रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर अमेरिका ने टकराव को और बढा़या तो वो युद्ध का भूगोल बदल देंगे. रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान ने लंबे वक्त तक चलने वाले युद्ध की तैयारी कर ली है. और वे किसी भी हाल में झुकने वाले नहीं हैं. वहीं, ईरान को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए अमेरिका एक बड़ा फैसला कर रहा है. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
शरजील इमाम को जमानत, अमेरिका-रूस में अब नया पंगा; पढ़ें शाम की बड़ी खबरें
दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम को चचेरे भाई की शादी के लिए 7 दिन की अंतरिम जमानत मिल गई है। दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र की बैठक से पहले अमेरिका ने रूसी अधिकारी का वीजा रोक दिया, जिस कारण रूस भड़क गया है...
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि अगर अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करे और नाकेबंदी हटा ले, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए तैयार है। इस प्रस्ताव के ज़रिए ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की है। खबरों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के ज़रिए वॉशिंगटन तक पहुँचाया गया है। तेहरान की योजना है कि वह न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली के दौरान मध्यस्थ देशों के साथ इस पहल पर चर्चा करे। क्योडो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाक़ात की संभावना को खारिज कर दिया, लेकिन कहा कि किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है, बशर्ते वॉशिंगटन गंभीरता और प्रतिबद्धता दिखाए। इसे भी पढ़ें: Houthi हमलों पर सख्त हुआ G7, Red Sea में जहाजों पर हमले और Iran के समर्थन पर दी चेतावनी ईरान चाहता है कि अमेरिका सैन्य अभियान रोके अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का असर एनर्जी मार्केट और ग्लोबल शिपिंग पर पड़ा है, खासकर उस समुद्री रास्ते पर जो रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। ईरान यह भी चाहता है कि अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते से जुड़ी अपनी सैन्य गतिविधियां रोक दे। इसके बदले में तेहरान का कहना है कि वह जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को फिर से खोल देगा और बातचीत शुरू करेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों की वजह से कच्चे तेल के एक्सपोर्ट और होर्मुज से होने वाले समुद्री ट्रैफिक पर असर पड़ा है। तेहरान ने बातचीत फिर से शुरू करने के लिए पहले सात शर्तें रखी थीं, जिनमें बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को बहाल करना शामिल था। इसे भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र संघ पर प्रासंगिकता पर उठते सवाल तेल की कीमतों में गिरावट इसके अलावा, तेल की कीमतें $99 प्रति बैरल से नीचे आ गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऐसी खबरें आईं कि ईरान जल्द ही उस समुद्री रास्ते को फिर से खोल सकता है, जिससे ग्लोबल क्रूड सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं। ब्रेंट क्रूड की कीमत सेशन के उच्चतम स्तर से 3.5% से ज़्यादा गिर गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में 2.25% की गिरावट आई। ईरान का यह प्रस्ताव कि वह उस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोल सकता है, इस शर्त पर है कि अमेरिका अपना मिलिट्री दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने के लिए कदम उठाए। यह नई पहल ऐसे समय में हुई है जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) के टूटने के बाद से मिलिट्री तनाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में युद्ध तब शुरू हुआ जब फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर मिलकर हमले किए।
7 दिन में खोल देंगे होर्मुज... ईरान का अमेरिका से वादा, लेकिन ये एक शर्त
Hormuz Strait को लेकर ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वो महज सात दिनों में फिर से दुनिया की तेल जरूरत को पूरा करने में अहम रोल निभाने वाले इस रास्ते को खोल सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को सिर्फ एक शर्त पूरी करनी होगी.
19-20 सितंबर 2026 की दरम्यानी रात। ईरान की राजधानी तेहरान के ऊपर रंग-बिरंगी लाइट वाली एक बड़ी पतंग जैसी चीज उड़ती दिखी। कुछ लोग इसे एलियंस का UFO, यानी अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट बता रहे हैं। ठीक 50 साल पहले भी तेहरान में ऐसा ही उड़ती चीज दिखी थी, जिसके पीछे ईरानी एयर फोर्स ने अपने 2 लड़ाकू जेट्स भेजे। नजदीक पहुंचते ही जेट्स के रडार और सेंसर ने काम करना बंद कर दिया था। तो क्या वाकई ईरान में एलियंस आए या ईरान-अमेरिका जंग के बीच UFO के धोखे किसी सीक्रेट वेपन की टेस्टिंग की जा रही, एलियंस की थ्योरी कितनी सही, पूरी कहानी समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: तेहरान में दिखी रंगीन पतंग आखिर क्या चीज है?जवाब: 19 सितंबर 2026 की रात को तेहरान से आए 2 वीडियो वायरल हैं, जिनमें पतंग जैसी चीज दिख रही है। 23 सेकेंड और 15 सेकेंड के ये दोनों वीडियो तेहरान के आजादेगन एक्सप्रेसवे के पास फोन से रिकॉर्ड किए लग रहे हैं। इनमें लाल, हरे और नीले रंग की रोशनी वाली एक घुमावदार चीज आसमान में कम ऊंचाई पर उड़ती दिख रही है। ईरान सरकार ने इसके बारे में कोई बयान नहीं दिया है। हालांकि इसे लेकर 3 थ्योरी चल रही हैं… 1. ड्रोन या कई रंगों वाले ड्रोन का झुंड 2. LED लगी हुई पतंग 3. AI से बना फेक वीडियो सवाल-2: 50 साल पहले ईरान में जो दिखा, वो क्या था?जवाब: 19 सितंबर 1976 की रात तेहरान में हुई घटना, दुनिया में UFO के कुछ ऐसे मामलों में से एक है, जिन पर सबसे ज्यादा स्टडी की गई। अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की रिपोर्ट के मुताबिक, तब अमेरिका और ईरान के बीच अच्छे रिश्ते थे। घटना की रिपोर्ट अमेरिकी एयर फोर्स को दी गई। अमेरिका, यूरोप के कई संस्थानों ने घटना की जांच की, लेकिन आज तक यह साबित नहीं हो पाया कि ये एलियंस का UFO था या नहीं। या फिर ये कोई उल्कापिंड, टूटता तारा या कोई विदेशी विमान था। सवाल-3: क्या एलियन की आड़ में नए हथियारों की टेस्टिंग भी होती है? जवाब: एलियंस के धोखे नए हथियारों की टेस्टिंग नहीं होती, लेकिन ऐसा कई बार हुआ है, जब किसी नए सैन्य जहाज को लोगों ने एलियंस का UFO समझ लिया। सरकारों ने भी इसके पीछे की सच्चाई नहीं बताई। अमेरिका के नेवादा राज्य में एक रेतीला इलाका है- एरिया-51, ये बेहद सुरक्षित मिलिट्री टेस्टिंग साइट है। यहां कई नए विमानों का गुप्त परीक्षण हुआ। 2013 में जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी को मिले अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के एक सीक्रेट दस्तावेज के मुताबिक, 1955 में एरिया-51 को खासतौर पर U-2 जासूसी विमान की सीक्रेट टेस्टिंग के लिए चुना गया था। ये उस समय के कई दूसरे विमानों से कहीं ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकता था। तब कमर्शियल विमान करीब 20 हजार और सैन्य विमान करीब 40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते थे, लेकिन U-2 60 हजार फीट या उससे भी ऊपर उड़ान भर सकता था। इतनी ऊंचाई पर सूरज की रोशनी उसके पंखों पर पड़ती थी, जबकि नीचे अंधेरा हो चुका होता था। इससे वह चमकता हुआ और अजीब आकार का दिखता। 1950 और 1960 के दशक में दर्ज आधे से ज्यादा UFO रिपोर्ट्स के पीछे असल में इन्हीं U-2 विमानों की गोपनीय उड़ानें थीं। प्रोग्राम टॉप सीक्रेट होते थे, इसलिए एयरफोर्स जनता को सच नहीं बता सकती थी। लोग इन्हें UFOs मानने लगे थे। एरिया-51 में U-2 के अलावा A-12 जासूसी विमान की भी टेस्ट फ्लाइट हुईं। इसकी चमकदार टाइटेनियम बॉडी और बीच का उभरा हुआ हिस्सा ‘फ्लाइंग सॉसर’, यानी उड़न तश्तरी जैसा लगा और लोग इसे UFO समझते रहे। 1981 में F-117 नाइटहॉक स्टील्थ फाइटर जेट भी पहली बार यहीं उड़ा। इसका अजीब, तिकोना डिजाइन लोगों को एलियन एयरक्राफ्ट जैसा लगता था। जब कोई देश नई सैन्य तकनीक को पूरी गोपनीयता में टेस्ट करता है, तो उसकी नई शक्ल, रोशनी या अप्रत्याशित उड़ान आम लोगों को एलियन स्पेसक्राफ्ट जैसी लग सकती है। तेहरान का वीडियो ज्यादा चर्चा में इसलिए भी आया, क्योंकि ईरान-अमेरिका के बीच जंग जारी है और 19 सितंबर को ही ईरानी सेना, IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने कहा है, 'अगर अमेरिका के साथ तनाव बढ़ा, तो ईरान नए हथियारों का इस्तेमाल करेगा। इनमें ऐसी ताकत होगी, जिसे देखकर दुनिया हैरान रह जाएगी। ईरान लंबी जंग के लिए तैयार है।' हालांकि ये साफ नहीं है कि क्या ये ईरान का कोई नया ड्रोन है या अमेरिका का, या फिर कुछ और। सवाल-4: तो क्या एलियंस और उनके स्पेसशिप जैसा कुछ भी नहीं है?जवाब: अब तक किसी भी सरकार, अंतरिक्ष एजेंसी या वैज्ञानिकों के पास एलियंस के अस्तित्व का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। एलियंस की थ्योरी पर काम करने वाली अमेरिकी संस्था AARO और अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA एक ही बात कहती हैं- ‘सैकड़ों मामलों की जांच के बावजूद, न किसी एलियन के अवशेष मिले हैं और न किसी पृथ्वी के बाहर की किसी टेक्नोलॉजी के सबूत।’ AARO की नवंबर 2024 में जारी एक रिपोर्ट में 3 खास बातें कही गईं… AARO के निदेशक जॉन कोस्लोस्की ने कहा था, ‘इन दिलचस्प मामले को मैं अपनी फिजिक्स, इंजीनियरिंग की पढ़ाई और जासूसी अनुभवों के बावजूद आज तक समझ नहीं पाया। मैं ऐसे किसी इंसान को भी नहीं जानता, जो इन्हें समझ पाए।’ इन 21 'दिलचस्प' मामलों की पूरी डिटेल्स सार्वजनिक नहीं हैं। हालांकि जॉन कोस्लोस्की के मुताबिक, ये सभी घटनाएं अमेरिका के मिलिट्री बेसेज या दूसरी नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी जगहों के आसपास की हैं, इसलिए इन्हें चश्मदीदों के अलावा दूसरे सेंसर या रडार ने भी कैप्चर किया था। ज्यादातर मामलों में कोई गोल, सिलेंडर या फिर ट्रायंगल के आकार की चीजें देखी गईं… सितंबर 2023 में NASA ने भी एलियंस की थ्योरी को नकारा था। हालांकि ये भी कहा कि कुछ मामले ऐसे हैं, जिनके पीछे कोई प्राकृतिक वजह नहीं समझ आती और न ही इन्हें इंसानों की किसी गतिविधि से जोड़ा जा सकता है। ---------- ये खबर भी पढ़िए… ‘2030 तक AI हम सबको मार सकता है’, रिसर्चर के इस्तीफे में चेतावनी; AI की दुनिया में अंदरखाने ऐसा क्या चल रहा ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI का दावा है कि उनके AI सिस्टम ने गणित की उस समस्या को 88 घंटे में सुलझा लिया, जिसने करीब 90 साल से इंसानों को उलझा रखा था। Claude बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक के एक रिसर्चर ने इस्तीफा देते हुए कहा है कि इस दशक के अंत तक AI हम सबको मार सकता है। फिलहाल AI की दुनिया में अंदरखाने क्या चल रहा है, पूरी खबर पढ़िए…
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के कूटनीतिक मायने
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। शी जिनपिंग 23 सितंबर को वाशिंगटन पहुंचेंगे। उनका यह दौरा 25 सितंबर को समाप्त होगा, जिसके बाद उनकी वापसी होगी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शिखर वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, टैरिफ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) और दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शी जिनपिंग का स्वागत करने और स्टेट डिनर देने के फैसले से साफ है कि दोनों महाशक्तियां तनाव को कम कर नए तालमेल की ओर बढ़ना चाहती हैं। लिहाजा इस यात्रा पर पूरी दुनिया के कूटनीतिज्ञों की नजर होगी। इस पर रूस और भारत की खास नजर बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिका चाहेगा कि रूस और भारत से प्रगाढ़ हो रहे चीन के रिश्तों में कुछ खलल पैदा किया जाए। चूंकि अमेरिका ने सोवियत संघ और भारत के खिलाफ चीन को रणनीतिक मजबूती दी थी, लेकिन बाद में भी उसकी भूल साबित हुई। चीन को काबू में रखने के लिए अमेरिका ने भारत को शह दिया, लेकिन यहां भी उसका दांव उल्टा पड़ गया। इसलिए अमेरिका अब रूस और चीन से वन टू वन, और फिर जी-3 के माध्यम से बातचीत करने को उतावला है ताकि भारत, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और ईरान जैसे महत्वाकांक्षी देशों को काबू में रखा जा सके। लेकिन यदि चीन व्यवहारिक कूटनीति को छोड़कर अमेरिकी मायाजाल में फंसता है तो फिर कहीं का नहीं रहेगा, क्योंकि भारत और रूस की समझदारी इतनी परिपक्व व मजबूत है कि उन्हें आंख दिखाने वाले उसी अंतर्राष्ट्रीय फजीहत को प्राप्त करेंगे, जैसा कि अभी अमेरिका भुगत रहा है। # इस यात्रा के प्रमुख कूटनीतिक मायने: एक, व्यापार युद्ध और टैरिफ में संतुलन: अमेरिका द्वारा चीनी सामानों पर अत्यधिक टैरिफ और निर्यात प्रतिबंध लगाने के बावजूद चीन ने रेयर अर्थ खनिजों और महत्वपूर्ण तकनीकों की सप्लाई रोककर कड़ा रुख अपनाया। इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य नए व्यापारिक समझौते की रूपरेखा तैयार करना और दोनों देशों के बीच जारी आर्थिक/व्यापारिक तनाव को कम करना है। दो, रेयर अर्थ और AI की होड़: स्मार्टफोन, रक्षा सामग्री, इलेक्ट्रिक वाहनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए आवश्यक रेयर अर्थ खनिजों की वैश्विक आपूर्ति पर चीन का नियंत्रण है। अमेरिका अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना चाहता है, जबकि चीन अमेरिका द्वारा सेमीकंडक्टर/चिप तकनीक पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील चाहता है। तीन, वैश्विक स्थिरता और मध्य-पूर्व संकट: दुनिया के दो बड़े नेताओं का मिलना वैश्विक बाजारों और अर्थव्यवस्था में स्थिरता का संदेश देता है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और रणनीतिक समुद्री रास्तों को सुचारू रखने जैसे मुद्दों पर दोनों देश कूटनीतिक सहयोग की गुंजाइश तलाश रहे हैं। चार, ताइवान और क्षेत्रीय सुरक्षा: चीन हमेशा से ताइवान पर अपने संप्रभु अधिकारों का दावा करता आया है। इस बैठक में अमेरिकी हथियारों की ताइवान को बिक्री पर चर्चा हो सकती है। बीजिंग इस मंच का इस्तेमाल अमेरिका को ताइवान के मामले में हस्तक्षेप कम करने का कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए करेगा। # कूटनीतिक संदर्भ के क्षेत्र, अमेरिकी हित और चीनी हित व्यापार में अमेरिकी सोयाबीन व कृषि उत्पादों की बिक्री व बाजार पहुंच पर डील करेगा, जबकि चीन टैरिफ दरों में कमी और आर्थिक स्थिरता पर जोर देगा। - तकनीक में अमेरिका AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाए रखना चाहेगा, जबकि चीन अमेरिकी टेक एक्सपोर्ट बैन और प्रतिबंधों से राहत चाहेगा। - सप्लाई चेन में अमेरिका रेयर अर्थ मिनरल्स की बिना बाधा आपूर्ति चाहेगा, जबकि चीन वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में केंद्रीय भूमिका बनाए रखना चाहेगा। # अमेरिका और चीन की डील से भारत और रूस पर क्या- क्या असर पड़ सकते हैं? अमेरिका और चीन की यह द्विपक्षीय बातचीत और 'प्रबंधित प्रतिस्पर्धा' की दिशा में कदम भारत और रूस के रणनीतिक और आर्थिक हितों पर गहरा प्रभाव डालते हैं, क्योंकि अमेरिका और चीन पुराने अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी रहे हैं? # अमेरिका और चीन की डील से भारत पर असर एक, सामरिक दबाव : भारत के लिए अमेरिका-चीन का संबंध एक दोधारी तलवार है। यदि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक या रणनीतिक सहमति बनती है, तो भारत को डर रहता है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाएगा, जितनी भारत अपनी सुरक्षा (जैसे LAC विवाद) के लिए चाहता है। दो, क्वाड (QUAD) का भविष्य: यदि ट्रंप-शी वार्ता से दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है, तो 'क्वाड' (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) का जो सैन्य और रणनीतिक जोर चीन को घेरने पर था, वह थोड़ा सुस्त पड़ सकता है। तीन, सप्लाई चेन और व्यापार: चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक गतिरोध कम होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जो विकल्प भारत (Make in India) के रूप में उभर रहा था, उस गति पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिका-चीन की तकनीकी प्रतिस्पर्धा बनी रहने के कारण भारत को टेक/सेमीकंडक्टर निर्माण में फायदा मिलता रहेगा। चार, भारत को वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों में स्थिरता का लाभ मिलता है जबकि चीन के खिलाफ अमेरिका का कड़ा समर्थन कम होने और ट्रेड में दबाव का जोखिम बना रहेगा। # अमेरिका और चीन की डील से रूस पर असर एक, चीन पर बढ़ती निर्भरता: रूस और चीन वर्तमान में असीमित साझेदारी में हैं। लेकिन यदि चीन और अमेरिका अपने आर्थिक रिश्तों को सुधार लेते हैं, तो रूस को डर रहेगा कि चीन अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में आकर रूस को मिलने वाली आर्थिक और तकनीकी मदद को सीमित कर सकता है। दो, रूस-यूक्रेन युद्ध और कूटनीति: अमेरिका-चीन शिखर वार्ता में यदि रूस-यूक्रेन संघर्ष या वैश्विक प्रतिबंधों पर कोई गुप्त सहमति बनती है, तो मॉस्को के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के रास्ते (जैसे चीन के जरिए व्यापार) कठिन हो सकते हैं। तीन, मॉस्को की रणनीतिक स्थिति: रूस नहीं चाहता कि अमेरिका और चीन इतने करीब आ जाएं कि दुनिया में फिर से अमेरिका-चीन की G2 (दो महाशक्तियों का प्रभुत्व) वाली व्यवस्था स्थापित हो जाए, क्योंकि इससे रूस का वैश्विक वजन कम होता है। चार, रूस को चीन से आर्थिक व्यापार जारी रहने की उम्मीद रहेगी। जबकि चीन द्वारा अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से रूस को दी जाने वाली मदद सीमित करने का जोखिम बना रहेगा। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
चोर आया, चोर आया; पाक PM पहुंचे अमेरिका तो पोस्टर से पट गईं सड़कें, शरीफ की ऐसी बेइज्जती क्यों?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने अमेरिका पहुंचे तो हवाई अड्डे पर न रेड कार्पेट मिला, न कोई बड़ा अमेरिकी अधिकारी स्वागत को आया। दूसरी ओर शहर में उनके खिलाफ चोर लिखे पोस्टर भी लगाए गए थे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और कच्चे तेल के सबसे बड़े जीवन रेखा माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर पश्चिमी एशिया से एक बहुत बड़ी और राहत भरी कूटनीतिक खबर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्चस्तरीय सत्र में हिस्सा लेने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर पहुंचे ईरान के उच्चस्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी प्रशासन को एक स्पष्ट और ठोस शांति प्रस्ताव भेजा है। ईरान के एक बेहद वरिष्ठ और शीर्ष राजनयिक अधिकारी ने वैश्विक समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए बयान में खुलासा किया है कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य दबाव को तत्काल कम करता है और ईरानी वाणिज्यिक बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने का लिखित आश्वासन देता है, तो तेहरान प्रशासन महज 7 दिनों के भीतर पूरे होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की निर्बाध आवाजाही के लिए पूरी तरह फिर से खोल देगा। तेहरान के इस अप्रत्याशित और सकारात्मक रुख ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के संकेत दिए हैं, साथ ही पूरी दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की औपचारिक प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं।संयुक्त राष्ट्र महासभा के बीच ईरान का दांव: रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने का मिला पूरा अधिकारन्यूयॉर्क में मौजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के नेतृत्व में आए राजनयिकों को सर्वोच्च नेता और तेहरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से वाशिंगटन के साथ ठप पड़ी कूटनीतिक वार्ता को दोबारा शुरू करने के लिए पूर्ण कार्यकारी अधिकार (Full Mandate) दिए गए हैं। ईरानी राजनयिकों ने स्पष्ट किया है कि वे दशकों पुरानी दुश्मनी को पीछे छोड़कर एक व्यावहारिक समझौते के लिए पूरी तरह मेज पर बैठने को तैयार हैं। ईरानी पक्ष का साफ कहना है कि उनका मकसद दुनिया को ऊर्जा संकट में डालना कभी नहीं था, बल्कि पश्चिमी नौसैनिक बेड़े द्वारा उनके देश की आर्थिक घेराबंदी और बंदरगाहों के अवरोध के जवाब में ही उन्हें यह कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ा था। यदि अमेरिका अपनी आक्रामक सैन्य उपस्थिति को कम करता है और ईरान के वैध तेल निर्यात व व्यापारिक जहाजों को बिना किसी प्रतिबंध के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जाने की अनुमति देता है, तो ईरान भी सद्भावना के तहत फारस की खाड़ी के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री द्वार को दुनिया के लिए खोल देगा।वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की लाइफलाइन: क्यों इतना संवेदनशील है होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ताहोर्मुज जलडमरूमध्य को भूगोल और भू-राजनीति की दृष्टि से दुनिया का सबसे संकरा लेकिन सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा माना जाता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सामान्य दिनों में दुनिया भर में समुद्री रास्ते से निर्यात होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत हिस्सा और वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक-तिहाई व्यापार इसी बेहद संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर और इराक जैसे बड़े तेल निर्यातक देशों की संपूर्ण अर्थव्यवस्था इसी जलमार्ग पर निर्भर है। इस समुद्री रास्ते के बंद हो जाने से दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके चलते यूरोप, एशिया और विकासशील देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में आग लगी हुई है। ऐसे में ईरान की ओर से 7 दिनों के भीतर इसे खोलने का प्रस्ताव वैश्विक मुद्रास्फीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक जीवनरक्षक दवा के समान देखा जा रहा है।2 मार्च 2026 से ठप्प पड़ा है समुद्री मार्ग: जहाजों पर हमलों के बाद पैदा हुआ था युद्ध का महा-संकटहोर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह रणनीतिक जलमार्ग व्यावसायिक और वाणिज्यिक जहाजों के लिए मुख्य रूप से 2 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद पड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल परीक्षणों और मध्य पूर्व में सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के बाद तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था, जिसके बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने इस रास्ते से किसी भी तेल टैंकर के गुजरने पर पूर्ण पाबंदी लगाने का ऐलान कर दिया था। हालांकि, बीच में जून और जुलाई के महीनों के दौरान कुछ तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के प्रयासों से इसे बेहद सीमित समय के लिए खोलने की कोशिश की गई थी, लेकिन उस दौरान अज्ञात मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण कई विदेशी व्यापारिक जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा और यह समुद्री गलियारा एक बार फिर पूरी तरह ठप्प हो गया। तब से लेकर अब तक दुनिया भर के बड़े शिपिंग कंसोर्टियम अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा, जोखिम भरा और अत्यधिक खर्चीला चक्कर लगाने को मजबूर हैं।क्या डोनाल्ड ट्रंप मानेंगे ईरान की शर्त: सैन्य दबाव घटाने और नाकेबंदी हटाने पर फंसा पेंचईरान की इस 7 दिवसीय समय सीमा वाली पेशकश के बाद अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका रक्षा विभाग पेंटागन ईरान की इस शर्त को स्वीकार करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं और उनका स्पष्ट संकल्प रहा है कि ईरान पर अधिकतम दबाव (Maximum Pressure) की नीति जारी रखी जाए ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दे। हालांकि, दूसरी तरफ अमेरिका के भीतर आगामी चुनावों और घरेलू स्तर पर बढ़ती ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी उद्योगपतियों का भारी दबाव है। ट्रंप ने हाल ही में ईरानी नेतृत्व से सीधी बातचीत की इच्छा भी जताई थी, लेकिन अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है तो इसे घरेलू राजनीति में ट्रंप के पीछे हटने के रूप में देखा जा सकता है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं, क्योंकि यदि दोनों देश किसी न्यूनतम समझौते पर सहमत होते हैं तो दुनिया को एक बड़े वैश्विक युद्ध और आर्थिक महामंदी के खतरे से बचाया जा सकेगा।
यूएनजीए के दौरान ईरान से मुलाकात को अमेरिका तैयार: विदेश मंत्री रूबियो
वाशिंगटन, 22 सितंबर . मार्को रूबियो ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के साथ सार्थक मुलाकात करने को अमेरिका तैयार है. अमेरिकी विदेश मंत्री ने एक टीवी साक्षात्कार में अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने एनबीसी न्यूज को बताया कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र में ईरान के साथ बैठक करने के लिए तैयार ... Read more
वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के वार्षिक उच्चस्तरीय सत्र के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच दशकों पुराना कड़वा भू-राजनीतिक गतिरोध एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने आ गया है। पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव, परमाणु हथियारों की होड़ और रणनीतिक जलमार्गों की नाकाबंदी के बीच ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस वैश्विक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। लेकिन उनके अमेरिकी धरती पर कदम रखते ही जो बाइडेन प्रशासन के विदेश विभाग (US State Department) ने उन पर और उनके साथ आए राजनयिक प्रतिनिधिमंडल पर बेहद कड़े, असाधारण और अभूतपूर्व यात्रा प्रतिबंध (Movement Restrictions) लागू कर दिए हैं। अमेरिका के इन सख्त सुरक्षा नियमों के कारण ईरानी राष्ट्रपति न्यूयॉर्क शहर के भीतर एक सामान्य राष्ट्राध्यक्ष की तरह स्वतंत्र आवाजाही नहीं कर सकेंगे, जिससे संयुक्त राष्ट्र के गलियारों में कूटनीतिक हलचल और गरमा गई है।होटल और यूएन मुख्यालय के बीच कैद ईरानी राष्ट्रपति: खरीदारी और सैर पर लगा कड़ा अमेरिकी पहराअंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' द्वारा प्रकाशित विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात महीनों से तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रहे सैन्य टकराव के मद्देनजर राष्ट्रपति पेजेश्कियान को न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान सख्त प्रशासनिक पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के नए प्रोटोकॉल के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति केवल मैनहट्टन स्थित अपने आधिकारिक होटल और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (UN Headquarters) परिसर के बीच ही आ-जा सकेंगे। इसके अलावा उन्हें न्यूयॉर्क के किसी भी अन्य सार्वजनिक स्थान पर जाने, दर्शनीय स्थलों को देखने, बाजार में खरीदारी करने या निजी यात्राओं की पूर्णतः मनाही की गई है। यदि ईरानी प्रतिनिधिमंडल या राष्ट्रपति को निर्धारित सीमित क्षेत्र से बाहर किसी भी स्थान पर जाना हो, तो उन्हें पहले अमेरिकी सरकार से विशेष कूटनीतिक अनुमति (Special Clearance) लेनी होगी। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अपने घरेलू कानूनों और वैश्विक प्रतिबंधों का इस्तेमाल ईरान पर मनोवैज्ञानिक और राजनयिक दबाव बनाने के लिए किस हद तक कर रहा है।यूएन के मंच से आत्मरक्षा का तर्क देगा ईरान: अमेरिकी और इजरायली आक्रामकता पर पलटवार की तैयारीवैश्विक थिंक-टैंक 'इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप' (ICG) के वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ रिचर्ड गोवन के विश्लेषण के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान महासभा के अपने संबोधन का उपयोग अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान का पक्ष मजबूती से रखने के लिए करेंगे। पेजेश्कियान दुनिया के सामने यह दलील पेश करेंगे कि ईरान कभी भी आक्रामक देश नहीं रहा है, बल्कि वह लंबे समय से अमेरिका और इजरायल की साम्राज्यवादी और सैन्य आक्रामकता का सीधा शिकार होता आया है। ईरानी पक्ष का मुख्य तर्क यह रहेगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक सुरक्षा हो या क्षेत्रीय स्तर पर उनके द्वारा उठाए गए कदम, वे सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत वैध आत्मरक्षा (Right to Self-Defense) के दायरे में आते हैं। इसके साथ ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में कई प्रमुख अमेरिकी और यूरोपीय थिंक-टैंकों के शीर्ष नीति विश्लेषकों और रणनीतिकारों से बंद कमरों में बैक-चैनल बातचीत करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े कानूनी प्रावधानों के चलते पश्चिमी विश्लेषक ईरानी अधिकारियों के साथ खुलकर बैठकें करने से हिचकिचा रहे हैं ताकि वे किसी कानूनी विवाद में न फंसें।परमाणु ठिकानों पर 12 दिवसीय बमबारी के एक साल बाद दौरा: होर्मुज जलडमरूमध्य में चरम पर तनावराष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का यह न्यूयॉर्क दौरा पिछले एक वर्ष में हुए भीषण तनाव और सीधे युद्ध के मुहाने पर खड़े हालातों के बाद हो रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल ईरान के भूमिगत यूरेनियम संवर्धन और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर अमेरिका और इजरायल द्वारा लगातार 12 दिनों तक विनाशकारी बमबारी और सटीक हवाई हमले किए गए थे। उस भीषण सैन्य टकराव के कुछ ही महीनों बाद ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। वर्तमान समय में भी परिस्थितियां बेहद नाजुक हैं; एक तरफ जहां ईरान के तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम और उन्नत सेंट्रीफ्यूज को लेकर पश्चिमी देश सशंकित हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) में वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की स्वतंत्र आवाजाही में पैदा की जा रही बाधाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के बीच बारूद का ढेर कभी भी सुलगने को तैयार है।ट्रंप का कड़ा रुख और वार्ता की अनिश्चितता: परमाणु हथियार पर रोक की दो-टूक चेतावनीदूसरी ओर, अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किसी भी पूर्व या भावी सैन्य कार्रवाई का पुरजोर बचाव करते हुए तेहरान पर बेहद आक्रामक आरोप मढ़े हैं। ट्रंप ने अपने बयानों में दो-टूक कहा है कि उनके रहते या अमेरिका के मौजूदा सुरक्षा ढांचे के तहत ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम (Nuclear Weapon) विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि विरोधाभासी बयानों के बीच ट्रंप ने यह संकेत भी दिया है कि वे परिस्थितियों के अनुरूप पेजेश्कियान से आमने-सामने बातचीत करने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और वैश्विक सुरक्षा परिषद के कई अनुभवी राजनयिकों का स्पष्ट मानना है कि इस वार्षिक सम्मेलन के दौरान वाशिंगटन और तेहरान के बीच किसी बड़े कूटनीतिक समझौते या शांति समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी इतनी गहरी हो चुकी है कि किसी भी औपचारिक और गंभीर वार्ता की शुरुआत केवल भविष्य में ही संभव हो सकेगी, जबकि वर्तमान में केवल आरोप-प्रत्यारोप और शक्ति प्रदर्शन का दौर ही देखने को मिलेगा।
UNGA के दौरान ईरान से मुलाकात को अमेरिका तैयार: विदेश मंत्री रूबियो
मार्को रूबियो ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के साथ सार्थक मुलाकात करने को अमेरिका तैयार है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने एक टीवी साक्षात्कार में अपने विचार व्यक्त किए।
जोधपुर में जुटेंगी 7 देशों की एयरफोर्स; अमेरिकी F-35 समेत गरजेंगे ये विमान
जोधपुर में युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति' के दूसरे संस्करण में अमेरिका समेत 7 देशों की वायुसेनाएं हिस्सा लेने जा रही हैं। पहली बार इस युद्धाभ्यास में अमेरिका का एफ-35 शामिल होने जा रहा है।
भारत बना 'ग्लोबल इकोनॉमिक सुपरपावर': अमेरिका, जापान और यूरोप को पछाड़ 6.7% की स्पीड से दौड़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था
UN की बैठक से ऐन पहले अमेरिका की खुराफात, बुरी तरह खिसिया गया रूस; माजरा क्या
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से पहले अमेरिका और रूस का पंगा होता नजर आ रहा है। असल में अमेरिका ने रूस के उप विदेश मंत्री एलेक्जेंडर एलिमोव को वीजा देने से इनकार कर दिया है। इस बात से रूस बुरी तरह से भड़क उठा है।
New Delhi, 22 सितंबर . भारतीय वायुसेना के साल के सबसे बड़े मल्टीनेशनल अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0’ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. तरंग शक्ति के दूसरे एडिशन में इस बार सबकी नजरें होंगी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर टिकी हैं. अमेरिका अपने एफ-35 के साथ अभ्यास में शिरकत कर रहा है. यह पहली ... Read more
WEF की सितंबर 2026 रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP Growth 6.7% रह सकती है. 74% अर्थशास्त्रियों को मजबूत आर्थिक ग्रोथ की उम्मीद है.
हम होर्मुज खोलने को तैयार हैं, अगर.... ईरान ने अमेरिका को भेजा प्रस्ताव, क्या अब थम जाएगा युद्ध?
ईरान ने अमेरिका को प्रस्ताव भेजा है कि अगर सैन्य कार्रवाई रोक दो तो हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को तैयार हैं। हालांकि तेहरान ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और ट्रंप के बीच किसी भी बैठक की संभावना से इनकार किया है।
जोधपुर का आसमान एक बार फिर दुनिया के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट से गूंजने वाला है। भारतीय वायुसेना की मेजबानी में बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ का आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर होने जा रहा है। इस मेगा एयर एक्सरसाइज की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इतिहास में पहली बार अमेरिकी वायुसेना का 5वें जनरेशन का स्टील्थ फाइटर जेट F-35 भारत में किसी युद्धाभ्यास का हिस्सा बनने जा रहा है। युद्धाभ्यास में भारत और अमेरिका के अलावा फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और श्रीलंका की वायु सेनाएं सीधे अपने लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा ले रही हैं। वहीं करीब 30 देश ऑब्जर्वर के तौर पर मौजूद रहेंगे। इन विमानों का दिखेगा दम अमेरिका का F-35, F-16 और F-18, फ्रांस का राफेल, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट A-400M जैसे अत्याधुनिक प्लेन जोधपुर के आसमान में अपने करतब और मारक क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। वहीं भारतीय वायुसेना अपने फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स-सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, स्वदेशी तेजस (LCA), रीफ्यूलर टैंकर और AWACS (हवा में रडार निगरानी प्रणाली) को इस अभ्यास में उतार रही है। भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि तरंग शक्ति का यह संस्करण हाई-ऑक्टेन जॉइंट टैक्टिकल मैन्युवर्स पर केंद्रित रहेगा। जोधपुर का रणनीतिक एयरबेस और विशाल हवाई क्षेत्र जटिल हवाई रणनीतियों, बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) कॉम्बैट और नाइट ऑपरेशन्स के अभ्यास के लिए बेहद मुफ़ीद माना जाता है। वीर गार्डियन युद्धाभ्यास के ठीक बाद आयोजित हो रही इस एक्सरसाइज के कारण पश्चिमी राजस्थान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद पुख्ता कर दी गई है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता तेजी से और सही दिशा में बढ़ रही आगे : पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को भारत और अमेरिका के बीच दोनों देशों के हित में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर चल रही वार्ता में प्रगति पर संतोष जताया।
भारत आएंगे अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान, फ्रांस के राफेल भी आएंगे नजर
New Delhi, 22 सितंबर . अमेरिका के एफ-35 और फ्रांस के राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान भारतीय लड़ाकू विमानों के साथ हवाई अभियानों में हिस्सा लेंगे. ये लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ का हिस्सा बनेंगे. अभ्यास में करीब 40 देशों के शामिल होने की जानकारी है. इनमें कुछ देश अपने ... Read more
Iran-US War: ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी, तेहरान की शर्तें मानोगे तो ही खुलेगा होर्मुज
इंटरनेट डेस्क। ईरान अमेरिका युद्ध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई हैं, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने और रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने से साफ इनकार कर दिया है। एएआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि जब तक अमेरिका तेहरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक पुराने वार्ता ढांचे में लौटने की कोई उम्मीद नहीं है। मीडिया रिपोटर्स की माने तो गालिबाफ के मुताबिक, ईरान ने अपनी मांगें मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक स्पष्ट रूप से पहुंचा दी हैं। उनका कहना है कि जब तक ईरानी जनता के अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक होर्मुज को दोबारा खोलने का सवाल नहीं उठता। होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका-ईरान टकराव का सबसे अहम केंद्र बन गया है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां समुद्री यातायात में किसी भी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। pc- rnamedia.in
अमेरिका से आ रहे हैं छह F35 फाइटर जेट, PAK बॉर्डर पर दिखाएंगे दम
युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2026 जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक होगा. अमेरिका के F35 फाइटर जेट पहली बार शामिल होंगे. करीब 40 देशों की भागीदारी से मल्टीनेशनल वायु अभ्यास मजबूत होगा.
अमेरिका-चीन की सहमति से तय हो सकता है अगला नाम : यूएन महासचिव
न्यूयॉर्क, संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव कौन होंगे इसको लेकर चर्चा जोरों पर है। मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। नए महासचिव का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होना है।
अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है। इस बीच भारतीय-अमेरिकी समुदाय और उनकी धार्मिक आस्था बहस के केंद्र में आ गए हैं।
बद्रीनाथ मंदिर पहुंचे अमेरिकी सैनिक, देखा भारत का सांस्कृतिक वैभव
अमेरिकी सैन्य बलों के अधिकारी व जवान हिमालय की गोद में स्थित बद्रीनाथ मंदिर पहुंचे और यहां दर्शन किए। इसके साथ ही अमेरिकी जवान बीकानेर स्थित जूनागढ़ के किले में भी गए। दरअसल भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' आयोजित किया गया है।
Middle East Conflict Iranian Airlines Flights Shutdown:
Hanuman Statue In Texas Row: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बीच टेक्सास में स्थित भगवान हनुमान जी की 90 फुट ऊंची प्रतिमा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक कंजर्वेटिव YouTuber द्वारा प्रतिमा को हटाने की मांग किए जाने के बाद हिंदू संगठनों और उनसे मिलती-जुलती सोच रखने वाले लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया है। शुगर लैंड स्थित 'अष्टलक्ष्मी मंदिर' में स्थापित इस प्रतिमा की अगस्त 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। इसके बाद से ही यह विवाद के केंद्र में है। ईसाई रूढ़िवादी समुदाय के एक वर्ग ने इसे 'ईसाई विरोधी' बताया है।यूट्यूबर जेसी ह्यूज ने मूर्ति की एक तस्वीर शेयर करते हुए कहा, वैसे, जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे...। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने ह्यूज की टिप्पणी को 'हिंदू धर्म के खिलाफ धमकी' करार दिया। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मूर्ति को 'स्टैच्यू ऑफ यूनियन' कहा जाता है। अगस्त 2024 में इस मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह हुआ था। PTI के मुताबिक, कुछ ईसाई कंजर्वेटिव समूहों ने उस समय भी प्रतिमा को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे 'अनक्रिश्चियन' बताया था।YouTuber के बयान पर विवादजेसी ह्यूज ने हाल ही में हनुमान जी की प्रतिमा की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक और भारतीय-अमेरिकी रुचिर बख्शी ने ह्यूजेस की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे हिंदू धर्म के खिलाफ धमकी बताया। बख्शी ने कहा कि किसी धार्मिक समुदाय के पूजा स्थल को सिर्फ इसलिए निशाना बनाना कि वहां अलग धर्म की आस्था का पालन किया जाता है, गंभीर चिंता का विषय है। बख्शी ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका में जीतने का मतलब हिंदू मंदिरों को गिराना है, तो यह वह अमेरिका नहीं है जिसके लिए उन्होंने सेवा की थी।हिंदू संगठन ने किया समर्थनबख्शी के बयान को कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) और टेक्सास में रहने वाले अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक एवं राजनीतिक टिप्पणीकार कार्ल व्हील्स का समर्थन मिला। CoHNA ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह इस प्लेटफॉर्म पर धार्मिक कट्टरता को मुख्यधारा में आते देखकर चिंतित है। इसके खिलाफ वह बख्शी के साथ खड़ा है।टेक्सास की राजनीति से भी जुड़ा विवादहनुमान जी की प्रतिमा को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले टेक्सास में आव्रजन और नस्लीय पहचान जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है। टेक्सास में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। हाल के दिनों में भारतीय समुदाय को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी चर्चा में रही है।Bo French की पोस्ट पर भी विवादटेक्सास के रेलरोड कमिश्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने टेक्सास यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा फुटबॉल मैच की जीत का जश्न मनाने की एक तस्वीरशेयर की थी। इसके साथ उन्होंने लिखा कि उन्होंने सुना है कि इस साल UT का ग्रेजुएशन ऐसा दिखता था। साथ ही दावा किया कि समस्या अब पहले से कहीं ज्यादा गंभीर है। इस पोस्ट की काफी आलोचना हुई। हाउस डेमोक्रेटिक लीडर हकीम जेफ्रीज ने कहा कि दक्षिणपंथी रिपब्लिकन बार-बार अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने भी फ्रेंच की टिप्पणी की आलोचना करते हुए पूछा कि क्या अन्य रिपब्लिकन नेता ऐसी असहिष्णुता और नस्लवाद की निंदा करेंगे। टेक्सास के रिपब्लिकन विधायक लेसी हल और जारेड पैटरसन ने भी फ्रेंच की पोस्ट की आलोचना की। हालांकि, फ्रेंच ने बाद में अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि टेक्सास यूनिवर्सिटी की एडमिशन नीतियां राज्य के छात्रों को नुकसान पहुंचा रही हैं।चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मीये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब टेक्सास में नवंबर में होने वाले अमेरिकी सीनेट चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। टेक्सास में लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा है। जबकि डेमोक्रेट्स सीनेट सीट पर बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। हनुमान जी की प्रतिमा पर विवाद ने इस चुनावी माहौल में धर्म, धार्मिक स्वतंत्रता, आव्रजन और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।ये भी पढ़ें- Delhi Gang-rape: दिल्ली में कालकाजी मंदिर के पास नाबालिग के साथ गैंगरेप, आरोपियों ने खुद को बताया पुलिसकर्मी, आसिफ अरेस्ट
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) ने चिली में ड्यू डिलिजेंस के लिए चार कॉपर ब्लॉक चुने हैं और कोडेल्को के साथ जॉइंट वेंचर बना रहा है। यह पहल भारत की खनिज सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें उत्पादन शुरू होने में छह से आठ साल लग सकते हैं।
ट्रंप-सीएनएन का घमासान: व्हाइट हाउस ने लॉन्च किया 'ट्रंप टीवी', मामला पहुंचा कोर्ट
डोनाल्ड ट्रंप और सीएनएन के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब एक नए और बेहद नाटकीय मोड़ पर आ गई है, जहां अमेरिका के राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया जगत तक खलबली मची हुई है। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहा वैचारिक शीत युद्ध अब खुलकर सामने आ गया है, जिसने दुनिया भर के मीडिया विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब व्हाइट हाउस की तरफ से एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए आधिकारिक रूप से 'ट्रंप टीवी' को लॉन्च किए जाने का ऐलान किया गया। इस नए डिजिटल और ब्रॉडकास्ट प्लेटफॉर्म के सामने आने से पारंपरिक मीडिया घरानों के बीच हड़कंप मच गया है। बात सिर्फ जुबानी तीखे हमलों या बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह पूरा मामला अब अदालत की चौखट तक जा पहुंचा है, जहां दोनों पक्ष कानूनी दांव-पेच के जरिए एक-दूसरे को मात देने की तैयारी में जुटे हुए हैं।ट्रंप बनाम सीएनएन: क्यों भड़की है यह नई राजनीतिक और मीडिया की जंग?डोनाल्ड ट्रंप और सीएनएन के बीच का यह रिश्ता हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है, लेकिन हालिया हफ्तों में इस रिश्ते में कड़वाहट उस समय और ज्यादा घुल गई जब कवरेज और बयानों को लेकर दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। डोनाल्ड ट्रंप ने सीएनएन पर लगातार पक्षपातपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण रिपोर्टिंग करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका साफ तौर पर कहना है कि यह प्रतिष्ठित मीडिया चैनल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए एक सुनियोजित एजेंडा चला रहा है। दूसरी ओर, सीएनएन और अन्य प्रमुख मीडिया संस्थान ट्रंप के बयानों को प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार देते हैं। यह वैचारिक और पेशेवर टकराव अब केवल स्टूडियो बहसों या सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने जमीनी स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। अमेरिका के आम नागरिकों और मतदाताओं के बीच भी इस बात को लेकर गहरी बहस छिड़ गई है कि क्या स्वतंत्र मीडिया की आड़ में किसी राजनीतिक शख्सियत को निशाना बनाया जा रहा है, या फिर राजनेता अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए मीडिया पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। इस माहौल ने अमेरिकी समाज में सूचनाओं के प्रवाह और उसकी विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे हर कोई यह जानना चाहता है कि इस घमासान का अंत कहां जाकर होगा।व्हाइट हाउस का बड़ा दांव: 'ट्रंप टीवी' की लॉन्चिंग से बदला मीडिया का खेलइस पूरे घटनाक्रम का सबसे रोमांचक और चौंकाने वाला पहलू व्हाइट हाउस की ओर से 'ट्रंप टीवी' का लॉन्च किया जाना है। पारंपरिक मीडिया घरानों के वर्चस्व को सीधी चुनौती देते हुए इस नए डिजिटल और ब्रॉडकास्ट प्लेटफॉर्म को मैदान में उतारा गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 'ट्रंप टीवी' के जरिए अब सीधे जनता तक अपनी बात पहुंचाने का एक ऐसा अचूक हथियार तैयार कर लिया गया है जो किसी भी पारंपरिक न्यूज़ चैनल के फिल्टर या संपादकीय नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त है। इस लॉन्च के बाद से ही अमेरिकी मीडिया मार्केट में भूचाल आ गया है क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े न्यूज़ नेटवर्क्स की टीआरपी और उनके जनमानस पर प्रभाव को कड़ी चुनौती दे रहा है। ट्रंप समर्थकों में इस कदम को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, उनका मानना है कि यह मुख्यधारा के मीडिया के एकाधिकार को तोड़ने का सबसे बेहतरीन और प्रभावी तरीका है। वहीं, दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि इस तरह के प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के भरोसे को कमजोर कर सकते हैं और समाज में सूचनाओं का ध्रुवीकरण और ज्यादा बढ़ा सकते हैं। इस नए प्लेटफॉर्म के आने से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में पारंपरिक चैनल्स को नए और आक्रामक डिजिटल विकल्पों से जबर्दस्त टक्कर मिलने वाली है, जिससे मीडिया इंडस्ट्री की पूरी रूपरेखा ही बदल सकती है।मामला पहुंचा कोर्ट: कानूनी लड़ाई तय करेगी अमेरिकी मीडिया का भविष्यजब जुबानी जंग, राजनीतिक दांव-पेच और बयानों के तीर से बात नहीं बनी, तो यह पूरा मामला अब अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। मानहानि, बयानों की सत्यता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से अपने-अपने कानूनी विशेषज्ञों को मैदान में उतार दिया गया है। कोर्ट में चल रही इस हाई-वोल्टेज कानूनी लड़ाई पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका फैसला केवल ट्रंप या सीएनएन के पक्ष या विपक्ष में नहीं आएगा, बल्कि यह आने वाले समय में अमेरिकी पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और राजनीतिक हस्तियों के अधिकारों की एक नई और स्पष्ट परिभाषा तय करेगा। अदालती दस्तावेजों और वकीलों की तीखी दलीलों से यह बिल्कुल साफ हो गया है कि यह लड़ाई बेहद लंबी और रोमांचक होने वाली है। जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इसमें कई नए खुलासे होने की भी पूरी संभावना है, जो अमेरिकी राजनीतिक और मीडिया बाजार के पुराने समीकरणों को हमेशा के लिए उलट-पुलट कर रख सकते हैं।अमेरिकी राजनीति और डिजिटल मीडिया पर इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का क्या होगा असर?इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युग में राजनीति और मीडिया अब एक ही सिक्के के दो पहलू बन चुके हैं, जहां हर एक बयान और हर एक मंच का इस्तेमाल बेहद रणनीतिक रूप से किया जा रहा है। 'ट्रंप टीवी' के आने से और कोर्ट में मामला जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाला समय अमेरिकी राजनीति में उथल-पुथल से भरा रहने वाला है। अमेरिका के आम लोग इस पूरे तमाशे को एक रोमांचक राजनीतिक ड्रामे की तरह देख रहे हैं, जहां हर दिन एक नया नाटकीय मोड़ सामने आ रहा है। चाहे वह सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता हुआ वार-पलटवार हो, व्हाइट हाउस का यह ऐतिहासिक फैसला हो, या फिर कोर्टरूम में चल रही कानूनी बहस, यह विवाद आने वाले कई महीनों तक सुर्खियों में बना रहेगा। यह देखना वाकई बेहद दिलचस्प होगा कि क्या 'ट्रंप टीवी' मुख्यधारा के मीडिया को पछाड़ पाने में पूरी तरह कामयाब होता है या फिर सीएनएन इस कानूनी और वैचारिक लड़ाई में अपनी पुरानी बादशाहत बचाने में सफल रहता है।
यूएन महासचिव की कुर्सी पर पेच, अमेरिका-चीन की सहमति से तय हो सकता है अगला नाम
संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव कौन होंगे इसको लेकर चर्चा जोरों पर है। मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। नए महासचिव का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होना है।
अफगानिस्तान में PAK ने अमेरिकी GBU-12 लेजर गाइडेड बम गिराया!
अफगानिस्तान के कुनार हमले में अमेरिकी बम जीबीयू-12 पेववे II लेजर-गाइडेड बम के अवशेष मिले. यह एमके-82 आधारित 227 किलोग्राम का बम है. आइए जानते हैं इस बम का खासियत...
Donald Trump vs US Media: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 'व्हाइट हाउस' और मीडिया संस्थानों के बीच प्रेस एक्सेस को लेकर चल रहे विवाद के बीच 'ट्रंप टीवी' नाम से 24/7 स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म लॉन्चकर दिया है। इस प्लेटफॉर्म पर ट्रंप के पुराने भाषण, सार्वजनिक कार्यक्रमों के वीडियो, प्रशासन की घोषणाएं और ताजा अपडेट जारी किए जा रहे हैं। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने फर्जी खबरें चलाने का आरोप लगाकर CNN, MS NOW और पॉलिटिको के व्हाइट हाउस में एंट्री पर रोक लगा दी थी।इसके विरोध में अमेरिका के शीर्ष पांच मीडिया हाउसों ने एकजुट होकर व्हाइट हाउस कीवीडियो कवरेज रोक दी है। ABC, CBS, Fox News, CNN और NBC न्यूज ने मिलकर संयुक्त रूप से राष्ट्रपति ट्रंप का कवरेज न करने का ऐलान किया है।इसके बाद व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने 'Trump TV' प्लेटफॉर्म के लॉन्च की है। इसकी जानकारी देते हुए कहा कि 'ट्रंप टीवी' अब लाइव है। यहां राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण पुराने पलों, घोषणाओं और प्रशासन की ताजा गतिविधियों को एक जगह देखा जा सकता है।ट्रंप के पुराने भाषणों का प्रसारणलॉन्च के दौरान 'व्हाइट हाउस' ने ट्रंप के कई पुराने सार्वजनिक कार्यक्रमों और भाषणों के फुटेजजारी किए। इनमें जनवरी 2025 में अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में उनके शपथ ग्रहण समारोह केवीडियो भी शामिल थे।Trump TV की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब ट्रंप प्रशासन और कई प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों के बीच 'व्हाइट हाउस' में पत्रकारों की पहुंच को लेकर विवाद चल रहा है।CNN, Politico और MS NOW ने दायर किया मुकदमाCNN, Politico और MS NOW ने ट्रंप प्रशासन द्वारा अपने पत्रकारों की 'व्हाइट हाउस' तक पहुंच सीमित किए जाने के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। इन मीडिया संस्थानों का तर्क है कि सरकार को उनकी रिपोर्टिंग के आधार पर यह तय नहीं करना चाहिए कि कौन-से पत्रकार 'व्हाइट हाउस' में प्रवेश कर सकते हैं। वहीं, 'व्हाइट हाउस' का कहना है कि अमेरिकी संविधान मीडिया को प्रकाशित करने की स्वतंत्रता देता है। लेकिन किसी विशेष मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस परिसर, ब्रीफिंग रूम या राष्ट्रपति के प्रेस पूल तक पहुंच की गारंटी नहीं देता।ट्रंप ने मीडिया प्रतिबंधों का किया बचावन्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात के बाद ग्रेसी मेंशन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी निष्पक्ष रिपोर्टिंग करना है। उन्होंने कहा कि जिन आउटलेट्स को वह 'फेक न्यूज' मानते हैं, उन्हें व्हाइट हाउस में प्रवेश देने से इनकार करना उनका अधिकार है। ट्रंप ने मीडिया के संभावित बहिष्कार की बात को भी खारिज करते हुए कहा कि पहले भी बहिष्कार की बातें हुई हैं। लेकिन मीडिया ने ऐसा नहीं किया।कोर्ट में पहुंचा मामलाCNN, Politico और MS NOW की याचिका पर मामला अमेरिकी जिला जज टिमोथी केली के सामने पहुंचा है, जिन्हें ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान संघीय न्यायपालिका में नियुक्त किया गया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Truth Social' पर मुकदमे को लेकर इन मीडिया संस्थानों की आलोचना की। ट्रंप नेकहा कि अगर अदालत का फैसला प्रशासन के खिलाफ आता है तो उनकी सरकार अपील करेगी। उन्होंने इन संस्थानों पर उनके प्रशासन की नकारात्मक रिपोर्टिंग और कथित तौर पर गलत सूचनाएं प्रकाशित करने के आरोप भी लगाए।'व्हाइट हाउस टीवी' पूल पर भी असरयह विवाद 'व्हाइट हाउस' के टेलीविजन पूल तक भी पहुंच गया है। यह व्यवस्था राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा वीडियो फुटेज कईमीडिया संस्थानों को उपलब्ध कराती है। फिलहाल,ट्रंप न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए मौजूद हैं। वह महासभा की हाई-लेवल जनरल डिबेट में हिस्सा लेने के साथ कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करने वाले हैं।ये भी पढ़ें- राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: CCTV में कैद हुईं चोरी की 105 घटनाएं, चांदी की ईंटों और कीमती सामानों पर SIT ने SC को क्या बताया?
US Iran Sanctions: 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस पर बड़ा संकट, विदेशी कंपनियों को भी अमेरिकी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिका-इटली : अहम खनिजों पर सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता
वॉशिंगटन, अमेरिका और इटली ने क्रिटिकल मिनरल्स यानी बेहद अहम खनिजों को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें इन खनिजों की रीसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल के लिए उन्हें हासिल करने पर खास ध्यान दिया जाएगा।
म्यांमार ट्रेनिंग केस: यूएस नागरिक वैन डाइक ने भरा ₹5.5 लाख का जुर्माना, अमेरिका जाने की मांगी इजाजत
Matthew Van Dyke US National arrested with Ukraine Mercenaries NIA Chargesheet UAPA Case- म्यांमार ट्रेनिंग केस: अमेरिकी नागरिक वैन डाइक ने भरा ₹5.5 लाख का जुर्माना, जल्द दाखिल होगी डिस्चार्ज याचिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शंस बिल' (Lindsey Graham Sanctions Bill) पर हस्ताक्षर करने के बाद एक बार फिर भारत पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा मंडराने लगा है। यह विधेयक अमेरिकी प्रशासन को रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है। भारत अपनी जरूरत का आधा से अधिक कच्चा तेल रूस से आयात करता है, जिससे भारतीय निर्यात के लिए अमेरिका जैसे सबसे बड़े बाजार में कड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब भारत को वाशिंगटन के आर्थिक और तकनीकी दबाव का सामना करना पड़ रहा हो। ठीक 25 साल पहले (1998 में), भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को न केवल बेअसर किया, बल्कि वाशिंगटन को अपनी नीति बदलने पर भी मजबूर कर दिया था। यह कहानी 1990 के दशक के आखिर की है, जब भारत बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा था। देश अपनी लंबे समय से रुकी हुई अर्थव्यवस्था को तेज़ी से उदार बना रहा था और दुनिया के लिए अपने दरवाज़े खोल रहा था। मज़बूत विदेशी निवेश और IT व सर्विस सेक्टर की ग्रोथ की वजह से आर्थिक विकास तेज़ी से हो रहा था। ग्लोबल मंच पर, नई दिल्ली का कभी हर मौसम का साथी रहा USSR इतिहास बन चुका था, और भारत पश्चिम, खासकर अमेरिका के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा था। इसे भी पढ़ें: Ayodhya Ram Temple Donation Theft Case | SIT ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट, CCTV फुटेज में 105 बार चोरी की पुष्टि, 25 सितंबर तक चार्जशीट फिर 1998 में, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की सरकार ने नई दिल्ली पर प्रतिबंधों का एक पैकेज लागू किया। इसमें लगभग सभी तरह की विदेशी मदद, आर्थिक सहायता, सैन्य सहयोग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई, ताकि भारत के परमाणु शक्ति बनने के इरादों को रोका जा सके। लेकिन अगर इन प्रतिबंधों का मकसद नई दिल्ली को वॉशिंगटन की बात मानने पर मजबूर करना था, तो वे नाकाम रहे। 22 सितंबर 2001 को राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया। जब नई दिल्ली पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा मंडरा रहा है, तो 1998 की घटना एक ज़रूरी याद दिलाती है कि कैसे नई दिल्ली ने 25 साल पहले वॉशिंगटन के दबाव का सामना किया था। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह बना परमाणु परीक्षण 11 मई 1998 को दोपहर 3.45 बजे, राजस्थान के पोखरण में भारतीय सेना की फायरिंग रेंज में 'ऑपरेशन शक्ति' (जिसे 'ऑपरेशन पोखरण-II' भी कहा जाता है) के तहत ज़मीन के नीचे तीन परमाणु धमाके किए गए। इसके कुछ ही समय बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घोषणा की कि भारत अब पूरी तरह से परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया है। लेकिन जहाँ इन टेस्ट्स की खबर से बुद्ध के चेहरे पर मुस्कान आ सकती थी, वहीं वॉशिंगटन डीसी में हालात बिल्कुल अलग थे। भारत के न्यूक्लियर क्लब में शामिल होने की खबर से अमेरिका पूरी तरह हैरान रह गया और उसकी प्रतिक्रिया अविश्वास और गुस्से वाली थी। अमेरिकी विदेश विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, तत्कालीन राष्ट्रपति क्लिंटन ने कहा था कि वे न्यूक्लियर टेस्ट्स से बहुत परेशान थे और ये टेस्ट एक सुरक्षित 21वीं सदी बनाने के लक्ष्य के खिलाफ थे। इसे भी पढ़ें: क्या UNSC में भारत की दावेदारी को मिल रही है रफ्तार? Visegrd Group (V4) देशों ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट का किया समर्थन क्लिंटन ने आगे कहा, भारत का यह कदम न केवल इस इलाके की स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियारों के प्रसार को रोकने की मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहमति को भी सीधे तौर पर चुनौती देता है। इसलिए अमेरिका की प्रतिक्रिया तय थी, और यह 13 मई, 1998 को सामने आई। उस दिन, क्लिंटन ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि उन्होंने 'आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट' (जिसे 'ग्लेन अमेंडमेंट एक्ट' के नाम से भी जाना जाता है) की धारा 102 के तहत भारत पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। विदेश विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इन प्रतिबंधों का मकसद नई दिल्ली को अन्य बातों के अलावा, मिसाइलों या परमाणु हथियारों को तैनात या टेस्ट न करने और परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय सामग्री (fissile material) का उत्पादन बंद करने के लिए मजबूर करना था। प्रतिबंधों से विदेशी सहायता बंद हुई, भारत को मिलने वाली वर्ल्ड बैंक की फंडिंग रुकी 1998 के अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण मानवीय और खाद्य सहायता को छोड़कर अमेरिका की सभी विदेशी सहायता बंद हो गई। अमेरिकी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इससे आर्थिक विकास के लिए दी जाने वाली लगभग 21 मिलियन डॉलर की सहायता और ग्रीनहाउस गैस को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के कार्यक्रम के लिए तय 6 मिलियन डॉलर की सहायता बंद हो गई। अमेरिका ने वर्ल्ड बैंक और IMF जैसे वैश्विक संस्थानों से मिलने वाले लोन का भी विरोध किया, जिससे भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए 3-4 बिलियन डॉलर की फंडिंग रुक गई। वॉशिंगटन ने अमेरिकी बैंकों और सरकारी एजेंसियों को भी निर्देश दिया कि वे नई दिल्ली को कोई भी नया लोन और क्रेडिट लाइन न दें, सिवाय उन लोन के जिनका इस्तेमाल खाद्य और कृषि उत्पादों को खरीदने में किया जाना हो। इसके अलावा, प्रतिबंधों के तहत 'आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट' के अंतर्गत रक्षा उपकरणों, सेवाओं और विदेशी सैन्य वित्तपोषण की बिक्री को भी रोक दिया गया, जिसका सीधा असर संभावित हथियारों के सौदों और सहयोग पर पड़ा। प्रतिबंध भारत को कमजोर करने में नाकाम रहे — समय के साथ भारत और मजबूत हुआ 1998 में, भारत बड़े पैमाने पर आर्थिक उदारीकरण कार्यक्रम के दौर से गुजर रहा था, जिसमें सुधारों के जरिए अर्थव्यवस्था को अधिक विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोला जा रहा था। यह बदलाव 1991 के भुगतान संतुलन संकट के बाद शुरू हुआ, जब भारत ने बड़े पैमाने पर संरचनात्मक सुधार करते हुए IMF और विश्व बैंक जैसे संस्थानों से काफी वित्तीय मदद हासिल की। इस तरह, अमेरिकी प्रतिबंधों का कुछ असर तो हुआ। अगले साल कारगिल युद्ध के दौरान मिलिट्री इक्विपमेंट की बिक्री और फाइनेंसिंग रोकने का असर महसूस किया गया। और वर्ल्ड बैंक और IMF के ज़रिए फंडिंग रोकने से कई इंफ्रास्ट्रक्चर और मिलिट्री प्रोजेक्ट्स (जैसे HAL तेजस प्रोजेक्ट) में देरी हुई। उस साल अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में भी गिरावट आई। हालांकि, नई दिल्ली अपने रास्ते पर अडिग रही। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 27 मई, 1998 को संसद में इन टेस्ट्स का बचाव करते हुए इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया। उन्होंने लोकसभा में कहा, सही फ़ैसला लेने में राष्ट्रीय सुरक्षा ही हमारा मुख्य आधार रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के नए परमाणु हथियार आत्मरक्षा के हथियार हैं, जिनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश को परमाणु धमकियों या दबाव का सामना न करना पड़े। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी प्रतिबंधों का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, तो उन्होंने 'इंडिया टुडे' मैगज़ीन से कहा, प्रतिबंध हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकते और न ही पहुंचाएंगे। भारत ऐसी धमकियों और सज़ा वाले कदमों से डरेगा नहीं। भारत के पास अपनी पुरानी शान और भविष्य के विज़न का समर्थन है, जिससे वह हर तरह से मज़बूत बन सके। और कई मायनों में, प्रतिबंधों के बावजूद भारत मज़बूत हुआ। मार्केट रिफॉर्म्स की वजह से 1990 के दशक के बीच में GDP ग्रोथ औसतन 6.5% थी, और जब प्रतिबंध लगाए गए, तब अर्थव्यवस्था लगभग 5.8% पर स्थिर थी। 2003 तक, यानी अमेरिकी प्रतिबंधों के सिर्फ़ 5 साल बाद, भारत की GDP सालाना 7.8% की दर से बढ़ रही थी। दुनिया के साथ भारत के व्यापारिक संबंध मज़बूत बने रहे। इस दौरान नई दिल्ली ने अपने व्यापारिक साझेदारों में भी विविधता लाई। अमेरिका ने अरबों डॉलर के टेक्सटाइल और रत्न इम्पोर्ट करना जारी रखा, साथ ही मशीनरी एक्सपोर्ट की। यूरोपियन यूनियन ने इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट एक्सपोर्ट करने के बदले टेक्सटाइल, लेदर और केमिकल इम्पोर्ट किए। रूस ने डिफेंस हार्डवेयर सप्लाई किए और भारतीय फार्मास्यूटिकल्स और चाय खरीदी। UAE और सऊदी अरब ने तेल एक्सपोर्ट किया, जबकि रत्न और चावल इम्पोर्ट किए। जापान और चीन भी सक्रिय साझेदार बने रहे और इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और केमिकल का व्यापार किया। असल में, तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बाद में 2001 में समाचार एजेंसी PTI को बताया था, जहां तक भारतीय अर्थव्यवस्था की बात है, तो कुछ रक्षा आपूर्ति को छोड़कर, प्रतिबंधों का कोई मतलब नहीं था। भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखी, जिससे बुश ने प्रतिबंध हटा दिए इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिबंध लगने के बावजूद, भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखी, जिससे रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, जिन्होंने सबसे पहले प्रतिबंध लगाए थे, 2000 में द्विपक्षीय यात्रा पर आए; यह 1978 के बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत की पहली यात्रा थी। आखिरकार, 22 सितंबर 2001 को, ठीक 25 साल पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने प्रतिबंध हटा दिए, जिससे आर्थिक और सैन्य सहायता का रास्ता खुल गया। 9/11 के बाद आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत के समर्थन से नई दिल्ली और वाशिंगटन डीसी के संबंध समय के साथ और मजबूत होते गए। आखिरकार, 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति बुश के बीच भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर के साथ वाशिंगटन ने भारत को एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दी। एक चौथाई सदी बाद, भारत और अमेरिका पहले से कहीं अधिक गहराई से जुड़े हुए हैं। अमेरिका भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में सभी शिपमेंट का 19.78% है, जबकि 2025 में द्विपक्षीय व्यापार अनुमानित 239.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यह विशाल निर्यात बाजार अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे में है। 100% टैरिफ लगाने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में पूरी तरह से गैर-प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि नई दिल्ली अपने 1.4 अरब नागरिकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, भले ही इसके लिए रूसी कच्चा तेल खरीदना पड़े। 25 साल पहले का सबक यह है कि भारत को अमेरिकी दबाव में झुकने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता देना जारी रखना चाहिए। लेकिन उसे अमेरिका के साथ रचनात्मक रूप से बातचीत भी जारी रखनी चाहिए। 2001 का अनुभव बताता है कि गंभीर असहमति के दौर के बाद भी, लगातार बातचीत से रिश्तों को फिर से बनाने और टकराव से बाहर निकलने का रास्ता बनाने में मदद मिल सकती है। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
अमेरिकी सेना के एआई सिस्टम पर उठे सवाल, तीन सीनियर सीनेटरों ने की जांच की मांग
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अमेरिका: मीडिया संस्थानों से टकराव के बीच व्हाइट हाउस ने लॉन्च किया ‘ट्रंप टीवी’, क्या है पूरा मामला? USA: Amidst a standoff with media outlets, the White House has launched ‘Trump TV’—what is the full story?
Judge won block Trump admin from giving SpaceX acres of wildlife refuge in land swap- अमेरिका: स्पेसएक्स को मिलेगी वाइल्डलाइफ की जमीन, कोर्ट ने खारिज की अंतरिम रोक की मांग; भड़के पर्यावरण समूह
ईरान पर अमेरिका का बड़ा वार: 23 सितंबर से दुनियाभर में एयरलाइंस पर रोक, तेहरान ने दी हमले की चेतावनी
ईरान पर अमेरिका का बड़ा वार: 23 सितंबर से दुनियाभर में एयरलाइंस पर रोक, तेहरान ने दी हमले की चेतावनीUS announces global restrictions on Iranian airlines from September 23 amid rising Iran tensions
अमेरिका में हादसा: योसेमाइट नेशनल पार्क में आग बुझाते हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, दो पायलटों की मौत
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वाशिंगटन में चीन की चर्चा:जिनपिंग अमेरिका दौरे पर जा रहे हैं, क्या खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पर भी बात होगी?
अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल: न्यूयॉर्क के तीन बड़े एयरपोर्ट पर उड़ानें ठप; क्या है वजह?
अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल: न्यूयॉर्क के तीन बड़े एयरपोर्ट पर उड़ानें ठप; क्या है वजह?us flight disruption new york airports faa technical failure
Ambala News: दीप्ति ने अमेरिका में जीता सौंदर्य प्रतियोगिता का खिताब
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जियो और टी-मोबाइल ने 5G स्टैंडअलोन रोमिंग के लिए साझेदारी की है, जिससे भारत और अमेरिका के बीच यात्रा करने वाले यूजर्स को तेज और विश्वसनीय 5G कनेक्टिविटी मिलेगी।
आईआईटी कानपुर मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान को प्रयोगशाला से मरीज तक पहुंचाने के लिए अमेरिका में 'फेस 2026' कार्यक्रम में भाग ले रहा है।
अमेरिकी नागरिकों से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित ठगी करने वाले गिरोह के बारे में पुलिस की जांच में कई अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में जालसाजों की भर्ती Telegram के जरिए की जाती थी। इसके बाद ऑनलाइन इंटरव्यू लिया जाता और चयनित लोगों को लखनऊ बुलाकर करीब 15 […] The post लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, Telegram से भर्ती और 20 दिन की ट्रेनिंग; अमेरिकियों से 100 करोड़ की ठगी का आरोप appeared first on https://rajsattaexpress.com .
बिहार के नीरज को अमेरिका में मिली 2.6 करोड़ की स्कॉलरशिप, पिता चलाते हैं पान की दुकान
सारण जिले के नीरज को अमेरिका में करीब 2.6 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप पर PhD कर रहे हैं। बिहार के छोटे से गांव से अमेरिका तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष की अच्छी मिसाल है।
ट्रंप-शी रिश्तों में बदला अंदाज, टैरिफ से व्यापार तक चीन के सामने अमेरिका की नई रणनीति
शी की यह अमेरिका की एक दशक से अधिक समय बाद पहली राजकीय यात्रा होगी। ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप उनके सम्मान में व्हाइट हाउस में राजकीय भोज भी देंगे।
Tensions following Kim new missile test US, Japan, and South Korea alert; what did Foreign Ministry say?
अमेरिकी नागरिकों से 100 करोड़ से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह में टेलीग्राम के जरिए जालसाजों की भर्ती होती थी। ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद लखनऊ में 15-20 दिन की ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें ठगी की स्क्रिप्ट रटाई जाती थी। जालसाजों को 25-30 हजार रुपये वेतन मिलता था।
पिता के संघर्ष को सम्मान: कभी अमेरिका ने किया वीजा खारिज, आज नासा कर रहा स्वागत; कैसे लिखी सफलता की कहानी?
अब Iran ने अमेरिका को दे डाली है ये चेतावनी, कहा- उसने नौसैनिक टकराव की क्षमता विकसित…
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका-ईरान संघर्ष समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों का ये विवाद कब खत्म होगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा। इसी बीच ईरान ने अमेरिका को एक चेतावनी दे डाली है। खबरों के अनुसार, ईरान ने अब बोल दिया कि उसने नौसैनिक टकराव की क्षमता विकसित कर ली है। ईरान का दावा है कि अगर युद्ध फिर से शुरू होता है तो हिंद महासागर में मौजूद अमेरिकी जहाज उनके निशाने पर होंगे। खबरों के अनुसार, ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने इस संबंध में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अब बोल दिया कि अगर युद्ध फिर से शुरू होता है, तो हिंद महासागर में मौजूद अमेरिकी जहाजों पर वे जहां भी होंगे, हमला किया जाएगा, हमने ये क्षमताएं विकसित कर ली हैं। ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने इस संबंध में आगे कहा कि ईरान ने अपनी हाइपरसोनिक मिसाइलों की रफ्तार मैक 6 से बढ़ाकर मैक 10 कर दी है। उन्होंने बताया कि हमने अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी विकसित किए हैं और एयर डिफेंस को बेहतर बनाया है। मोहसिन रेजाई ने कहा कि हमारे पास दूसरे उपाय भी हैं जिनका इस्तेमाल हम सही समय पर करेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर मोहम्मद बाघेर ने दिया ये बयान इससे पहले ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया था। बाघेर गालिबाफ ने कहा कि जब तक ईरान के अधिकारों को मान्यता नहीं दी जाती और अमेरिका अपने वादे पूरे नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा। PC:zeebiz अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
अमेरिका के कैलिफोर्निया में 8 सितंबर को भारतीय मूल की युवती की गोली मारकर हत्या के बाद खुद को गोली मारने वाले युवक का पार्थिव शरीर रविवार को अमेरिका से भारत पहुंचा। दिल्ली एयरपोर्ट से शव करनाल में उनके पैतृक गांव पाढ़ा लाया गया। यहां परिवार ने अंतिम दर्शन किए और इसके बाद गांव की शिवपुरी में कल युवक का अंतिम संस्कार किया गया। युवक के चचेरे भाई व उसके पिता ने रोहित को मुखाग्नि दी। रोहित की अंतिम यात्रा में हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला समेत राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोग तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। अमेरिका से दिल्ली पहुंचा शव, गांव में दी अंतिम विदाईरोहित करनाल के पाढ़ा गांव का रहने वाला था। उसके पिता राजेश जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती हैं। रोहित उनकी इकलौती संतान था। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार और ग्रामीणों ने उसे श्रद्धांजलि दी। इस दौरान दुष्यंत चौटाला सहित कई लोगों ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और ढांढस बंधाया।रोहित वर्ष 2023 में एरिजोना के रास्ते अमेरिका गया था। यह रास्ता आमतौर पर अवैध तरीके से अमेरिका पहुंचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘डंकी रूट’ के तौर पर जाना जाता है। अमेरिका पहुंचने के बाद बॉर्डर पुलिस ने उसे पकड़ा था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया। इसके बाद वह अमेरिका में डोरडैश के जरिए सामान पहुंचाने का काम करता था। 8 सितंबर को शॉपिंग सेंटर में हुई थी गोलीबारीसैक्रामेंटो काउंटी शेरिफ ऑफिस के मुताबिक, 8 सितंबर को दोपहर करीब 3 बजे हाउ एवेन्यू स्थित एक शॉपिंग सेंटर में 38 वर्षीय शालिनी ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों से आरोपी की गाड़ी की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसका पीछा किया। कुछ ही देर बाद पुलिस को गाड़ी हाईवे-50 और हाउ एवेन्यू के पास मिली। पुलिस ने गाड़ी रुकवाने की कोशिश की। युवक ने ब्रेक लगा दिए। जब पुलिस अधिकारी कार के पास पहुंचे तो रोहित अंदर मृत मिला। पुलिस के अनुसार, उसने खुद को गोली मार ली थी। जनवरी 2025 से पीछा करने का आरोपसैक्रामेंटो काउंटी शेरिफ ऑफिस की जांच के अनुसार, रोहित जनवरी 2025 से शालिनी को परेशान कर उसका पीछा कर रहा था। एक घटना में शालिनी की गाड़ी के हुड के नीचे एयरटैग यानी ट्रैकर मिला था। पुलिस के मुताबिक, दूसरी घटना में रोहित ने शालिनी की गाड़ी के टायर की हवा निकाल दी और फिर उसका पीछा करते हुए उसके काम की जगह तक पहुंच गया। आरोप है कि वह मदद करने के बहाने शालिनी से संपर्क करना चाहता था। जांच में एक अन्य घटना का भी जिक्र सामने आया। पुलिस के अनुसार, रोहित ने शालिनी के अपार्टमेंट की दूसरी चाबी हासिल कर ली और उसके सोते समय घर में घुस गया था। मई के बाद कोर्ट से लिया था रोक आदेशएजेंसी के मुताबिक, मई 2026 के बाद शालिनी ने पीछा किए जाने की शिकायत को लेकर रोहित के खिलाफ अदालत से रोक आदेश ले लिया था। इसके बावजूद 29 जुलाई को शालिनी ने पुलिस को शिकायत दी कि रोहित ने इस आदेश का उल्लंघन किया। आरोप था कि उसने शालिनी के घर के दरवाजे पर कुछ किराने का सामान छोड़ दिया था। मां ने कहा- रोहित डिलीवरी लेकर काम की जगह आता थाशालिनी की मां सुदेश कुमारी के अनुसार, उनकी बेटी आर्डन आर्केड इलाके के एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थी। उनके पति की करीब दो साल पहले मौत हो गई थी और शालिनी उनकी इकलौती संतान थी। सुदेश कुमारी के अनुसार, रोहित शालिनी की काम की जगह पर डिलीवरी लेकर आता था।उनका कहना था कि रोहित शालिनी से शादी करना चाहता था, लेकिन उम्र के अंतर के कारण शालिनी ने इनकार कर दिया था। इसके बाद रोहित नाराज हो गया और उसका पीछा करना नहीं छोड़ा। रोहित के चाचा सत्यवान ने लगाए अलग आरोपरोहित के चाचा सत्यवान ने मामले को लेकर शालिनी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। सत्यवान के अनुसार, शालिनी अपनी मां के साथ अमेरिका में रहती थी और उसके पिता नहीं थे।सत्यवान ने आरोप लगाया था कि शालिनी लड़कों को अपने जाल में फंसाकर उनसे पैसे ऐंठती थी। उन्होंने दावा किया कि पानीपत के मतलौडा के रहने वाले एक युवक के साथ भी ऐसा हुआ था और रोहित भी इसी तरह उसके संपर्क में आया था। चाचा बोले- बताता तो वापस बुला लेतेसत्यवान ने कहा था कि अगर रोहित ने परिवार को पूरी घटना के बारे में बताया होता तो वे इसका कोई हल निकालते और उसे अमेरिका से वापस भी बुला लेते। उनके अनुसार, रोहित ने कहा था कि वह दिवाली पर भारत आएगा। सत्यवान ने आरोप लगाया कि रोहित की करीब एक साल की कमाई शालिनी को दे दी गई थी। उनके मुताबिक, यह रकम करीब 35 से 40 लाख रुपए थी। उन्होंने यह भी कहा कि रोहित ने चार बार गाड़ी बदली थी और एक गाड़ी खरीदने के लिए परिवार ने भी पांच लाख रुपए दिए थे।उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि अपार्टमेंट की दूसरी चाबी शालिनी ने ही रोहित को दी थी, जिससे वह वहां कभी भी आ-जा सके। सत्यवान के अनुसार, शालिनी ने दो कुत्ते पाल रखे थे और उन्हें खाना देने के लिए भी रोहित से कहा जाता था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
Lucknow News: जेवर लेने पीड़ितों के घर तक पहुंच जाते थे अमेरिकी हैंडलर
जेवर लेने पीड़ितों के घर तक पहुंच जाते थे अमेरिकी हैंडलर
भारतीय सेना के प्रशिक्षित श्वान 'युद्ध अभ्यास-2026' में अमेरिका सैनिकों के साथ अपनी जांबाजी दिखा रहे हैं। इनमें भारतीय नस्ल के रैम्पुर हाउंड समेत चार श्वान रूम इंटरवेंशन और रैपलिंग जैसे कठिन अभ्यासों में कौशल प्रदर्शित कर रहे हैं।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में पंजाबी मूल के 73 वर्षीय पाल सिंह पर चार महिलाओं से यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगा है। खुद को 'हीलर' बताने वाले पाल सिंह को 2 लाख डॉलर की जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
भारतीय और अमेरिकी सेना ने राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 'युद्ध अभ्यास 2026' के तहत M777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर से लाइव फायरिंग का प्रदर्शन किया।
पटना में बैठे-बैठे अमेरिकी और ब्रिटिश नागरिकों से ठगी, MBA पास युवकों का गिरोह यूं देता था झांसा
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य इंटरनेशनल कॉल के जरिए अमेरिका में बैठे लोगों को निशाना बनाते थे। वे कंप्यूटर और लैपटॉप में खराबी होने का झांसा देकर लोगों से संपर्क करते थे। वे उनके सिस्टम में मालवेयर इंस्टॉल करवाते थे।
अमेरिका में इलाज के बहाने पंजाबी मूल के पाल सिंह (73) ने 4 महिलाओं का यौन शोषण किया। खुद को हीलर बताने वाले पाल ने मसाज के बहाने 4 महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से छेड़छाड़ की। जिसके बाद पुलिस ने इसी महीने उसे गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि वह अपने घर में ही इलाज जैसी सेवाएं देता था। हालांकि गिरफ्तारी के बाद वह करीब 2 करोड़ की जमानत राशि भरकर छूट गया। उसके वकील ने आरोपों को गलत करार दिया है। पुलिस के मुताबिक छेड़छाड़ की घटनाएं जून 2023 से जुलाई 2025 के बीच हुई। जिसका खुलासा आरोपी से पीड़ित महिलाओं की शिकायत के बाद हुआ। बिना लाइसेंस घर में ही इलाज के लिए बुलातापुलिस के मुताबिक, पाल सिंह सेल्मा स्थित अपने घर से सेवाएं देता था । इसका उसके पास कोई लाइेंसस नहीं था। उसकी सिख समुदाय में ‘हीलर’ के रूप में पहचान थी। पुलिस के मुताबिक, उसके पास इलाज कराने के लिए कैलिफोर्निया के अलग-अलग इलाकों से लोग आते थे। सोशल मीडिया पर भी उसके इलाज से जुड़े वीडियो और तस्वीरें पोस्ट की जाती थीं। ऑनलाइन रिव्यू में भी दूर-दराज से उसके पास आने वाले लोगों का जिक्र मिला। एक रिव्यू में एक व्यक्ति ने कनाडा से इलाज के लिए आने की बात लिखी थी। महिलाओं ने कहा- इलाज के दौरान यौन उत्पीड़न कियाअमेरिकी पुलिस के मुताबिक, जांच की शुरुआत उन शिकायतों के बाद हुई, जिनमें क्लाइंट्स ने पाल सिंह पर इलाज के दौरान अनुचित तरीके से छूने के आरोप लगाए। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार चारों मामले अलग-अलग महिलाओं से जुड़े हैं। रिपोर्टों में आरोपों को बिना सहमति महिला के साथ जबरन यौन हरकत करने का बताया गया है। पुलिस ने अभी यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की है कि ये महिलाएं किस स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए पाल सिंह के पास गई थीं। 2 लाख डॉलर की जमानत पर रिहापाल सिंह को 8 सितंबर को गिरफ्तार किए जाने के बाद 10 सितंबर को 2 लाख डॉलर (1.92 करोड़ रुपए) की जमानत पर रिहा कर दिया गया। उसके वकील ने कोर्ट में कहा कि पाल सिंह काम जारी रखना और अपने परिवार की मदद करना चाहता है। पाल सिंह ने चारों आरोपों में दोषी नहीं होने की दलील दी है। उसके वकील के मुताबिक, उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को तय है। पुलिस को और पीड़ितों की आशंकासेल्मा पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले में और भी लोग सामने आ सकते हैं। पुलिस कमांडर टिम कैनन के मुताबिक, विभाग को पिछले कई वर्षों में पाल सिंह से जुड़ी शिकायतें और ऐसी सूचनाएं मिलती रही थीं। कुछ लोगों ने कथित घटनाओं की जानकारी दी, लेकिन वे औपचारिक शिकायत के लिए सामने नहीं आए। पुलिस का मानना है कि संभावित पीड़ित फ्रेस्नो काउंटी के बाहर भी हो सकते हैं, क्योंकि लोग दूसरे इलाकों से उसके पास इलाज कराने आते थे। पुलिस ने ऐसे लोगों से सामने आने की अपील की है, जिन्हें पाल सिंह से इलाज के दौरान कोई आपत्तिजनक अनुभव हुआ हो। पहले ग्रंथी रह चुका पाल सिंहकोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, पाल सिंह ने भारत में रहते हुए करीब 20 साल की उम्र में ग्रंथी के रूप में धार्मिक सेवा शुरू की थी। बाद में वह अमेरिका चला गया। उसके वकील एडी रुइज के मुताबिक, बाद में पाल सिंह ने एक्यूप्रेशर का काम शुरू किया। उसने भारत में इसकी ट्रेनिंग ली और अमेरिका आने के बाद ऑनलाइन ट्रेनिंग भी की। कोर्ट में जमा एक चरित्र-पत्र के मुताबिक, पाल सिंह ने 2010 से 2016 तक सेल्मा के सिख सेंटर ऑफ द पेसिफिक कोस्ट नाम के गुरुद्वारे में ग्रंथी के तौर पर सेवा दी थी।
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
लखनऊ के अलीगंज में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। गिरोह के सदस्य खुद को अमेरिकी जांच एजेंसी FBI का एजेंट, FDI का अफसर और माइक्रोसॉफ्ट-अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों के मेंबर और प्रतिनिधि बताते थे। इसके बाद वे विदेशी नागरिकों को खासकर अमेरिकियों को फोनकर अपने जाल में फंसा लेते थे। उन्हें ड्रग्स और पोर्नोग्राफी स्कैंडल में शामिल होने की बात बताकर डर दिखाते थे। ठगी का फंड सोना, क्रिप्टो और डॉलर में ट्रांसफर करवाते थे। अलीगंज पुलिस ने मामले में 16 आरोपियों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया। शनिवार को पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके घटना का खुलासा किया। पुलिस ने गिरोह के सरगना शिवा उर्फ प्रियांशु कुशवाहा समेत 17 लोगों के खिलाफ IT एक्ट और BNS की 11 धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने अब तक करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की है। मुख्य आरोपी शिवा उर्फ प्रियांशु कुशवाहा फरार है। वह गुजरात का रहने वाला है। कॉल सेंटर के भंडाफोड़ के बाद की तस्वीरें देखिए… फर्जी FBI, FDI अफसर बन बनाते थे निशाना गिरोह NEXOLANE SOLUTION नाम से सेंटर चला रहा था। यहां विदेशी नागरिकों के ऑनलाइन डेटा को ट्रैक किया जाता था। ठगी के लिए उनके कंप्यूटर या मोबाइल पर फर्जी पॉप-अप और हैकिंग का अलर्ट भेजा जाता था। पॉप-अप पर दिए गए नंबर या विकल्प के जरिये पीड़ित की कॉल कॉल सेंटर तक पहुंचती थी। इसके बाद आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट का एजेंट या ग्लोबल टेक्निकल सपोर्ट बताकर बात करते थे। वे कंप्यूटर की समस्या ठीक करने का झांसा देकर UltraViewer जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर से कंप्यूटर का एक्सेस ले लेते थे। इसके बाद फर्जी सिक्योरिटी स्कैन किया जाता था। पीड़ित को बताया जाता था कि उसके कंप्यूटर से पोर्नोग्राफी वेबसाइट खोली गई हैं या चाइल्ड पोर्नोग्राफी, ड्रग स्मगलिंग जैसी गैरकानूनी गतिविधियों के सबूत मिले हैं। इससे पीड़ित डर जाता था। एजेंट के बाद वेरिफायर और क्लोजर टीम संभालती थी मोर्चा गिरोह तीन स्तर पर काम करता था। सबसे पहले एजेंट पीड़ित से बात करते थे। उसकी जानकारी वेरिफायर टीम को दी जाती थी। वेरिफायर दोबारा पीड़ित से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करता था। इसके बाद मामला क्लोजर टीम को दिया जाता था। क्लोजर टीम के सदस्य खुद को FBI, अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट या दूसरे सरकारी विभागों का अधिकारी बताते थे। वे गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित से पैसे ऐंठते थे। डॉलर, सोना और क्रिप्टो में लेते थे रकम मामले को खत्म करने और सुरक्षा देने के नाम पर गिरोह पीड़ितों से ईमेल के जरिये गिफ्ट कार्ड मांगता था, जिन्हें बाद में क्रिप्टो करेंसी में बदलकर सरगना शिवा कुशवाहा क्यूआर कोड के माध्यम से अपने खातों में ट्रांसफर कर लेता था। जिन लोगों से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन नहीं हो पाता था, उनसे अमेरिका में मौजूद अपने एजेंट्स को पार्सल/कूरियर के जरिये डॉलर या सोना भिजवाया जाता था। आरोपी गुजरात, बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और यूपी के रहने वाले पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर का संचालन मुख्य आरोपी शिवा उर्फ प्रियांशु कुशवाहा कर रहा था। वह अहमदाबाद, गुजरात का रहने वाला है और फिलहाल फरार है। नेहाल और आशीष कॉल सेंटर के संचालन और मैनेजमेंट में प्रमुख भूमिका निभाते थे। दोनों कर्मचारियों की हायरिंग, ट्रेनिंग और उपस्थिति की व्यवस्था देखते थे। गिरफ्तार आरोपी गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इनमें मैनेजर आशीष और वेरिफायर/टीम इंचार्ज मयंक चौहान अहमदाबाद के रहने वाले हैं। इनके अलावा विवेक सिंह, आदित्य कुमार सिंह, शिल्पा चक्रवर्ती, रॉकी राना, आयुष्मान, हसनैन, विशाल, तसीना गाजी, विश्वजीत मंडल, रिहान उर्फ फरान, जेनिफर लामा, जोइता दास, सुहेब और नेहाल कुमार के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को 18 से 30 हजार रुपए महीने वेतन दिया जाता था। उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी मुफ्त थी। 36 लैपटॉप और 20 मोबाइल बरामद 36 लैपटॉप जिनमें डायलर, रिमोट एक्सेस ऐप जैसे अल्ट्रा व्यूअर, सुप्रीमो और फर्जी FBI/FTC फाइल्स थीं। 20 मोबाइल फोन जो ऑफिस में घुसते ही मैनेजर केबिन में जमा करा लेता था, 05 वाई-फाई राउटर, 22 हैडफोन, 20 माउस और 32 लैपटॉप चार्जर बरामद हुए हैं। पुलिस ने सभी 17 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही मुख्य सरगना शिवा उर्फ प्रियांशु कुशवाहा और अन्य सहयोगियों की तलाश व वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम को पुलिस उपायुक्त उत्तरी ने 25 हजार रुपए का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। वहीं, कांस्टेबल विपिन कुमार वर्मा को बेहतर और सराहनीय कार्य के लिए अलग से 5 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया। ----------------------------- संबंधित खबर भी पढ़िए- लखनऊ में अमेरिकियों को ठगने वाले 16 लोग पकड़े गए : पुलिस चौकी के बगल में चलाते थे कॉल सेंटर, मास्टरमाइंड गुजरात का लखनऊ में अमेरिकी नागरिकों को ऑनलाइन ठगने वाले 16 लोग पकड़े गए हैं। इन लोगों ने पुलिस चौकी के बगल की बिल्डिंग में ही ऑफिस खोल रखा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस ऑफिस (कॉल सेंटर) का संचालक गुजरात का रहने वाला है। इन लोगों के टारगेट अमेरिकी नागरिक थे, जिन्हें ये कॉल पर तकनीकी मदद देने के बहाने झांसे में लेते थे। शुक्रवार सुबह पुलिस को अलीगंज इलाके में मॉर्निंग गश्त के दौरान कॉल सेंटर चलने की जानकारी मिली। यह कपूरथला पुलिस चौकी से चौथी बिल्डिंग पर रिध्या प्लाजा में खुला था। पढ़िए पूरी खबर…
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा की सिकंदरा कॉलोनी के रहने वाले 34 साल के विक्की अरोड़ा की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई। विक्की अमेरिका के इंडियाना में रह रहा था और ट्राला चलाता था। 17 सितंबर की रात करीब ढाई बजे वह ट्राले में सामान लेकर हाईवे से जा रहा था। इसी दौरान सामने से गलत साइड में दूसरा ट्राला आ गया। उसे बचाने के चक्कर में विक्की का ट्राला बेकाबू होकर हाईवे के किनारे बनी कंक्रीट के बैरियर से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि विक्की ट्राले की खिड़की से करीब 20 फीट नीचे रेलवे लाइन पर जा गिरा। सिर के बल गिरने से उसे गंभीर चोट लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। रात साढ़े 11 बजे मिली सूचना विक्की इंडियाना में पिहोवा के ही युवक हैप्पी के साथ रूममेट था। हादसे के बाद वहां की पुलिस ने हैप्पी से विक्की की पहचान करवाई। इसके बाद हैप्पी ने शुक्रवार रात करीब साढ़े 11 बजे पिहोवा में विक्की के परिवार को फोन कर हादसे और उसकी मौत की जानकारी दी। 17-18 सितंबर की रात को हुआ हादसा विक्की के चाचा राजकुमार उर्फ राजू ने बताया कि अमेरिका के समय के मुताबिक 17-18 सितंबर की रात करीब ढाई बजे विक्की ट्राले में सामान लेकर जा रहा था। ओहायो शहर के पास हाईवे पर सामने से गलत साइड में अचानक दूसरा ट्राला आ गया। उसे बचाने के दौरान विक्की का ट्राला बेकाबू होकर कंक्रीट के बैरियर से जा टकराया। टकराते ही विक्की ट्राले की खिड़की से करीब 20 फीट नीचे रेलवे लाइन पर गिर गया। नीचे गिरते ही विक्की ने दम तोड़ दिया। सुबह पुलिस ने एक्सीडेंट की सूचना ट्रांसपोर्ट संचालक तक पहुंचाई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अस्पताल भेज दिया। यहां सोमवार को विक्की के शव का पोस्टमॉर्टम होगा। 12 साल बाद पहली बार घर लौटने वाला था विक्की के परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी बड़ा झटका है, क्योंकि वह करीब 12 साल से अमेरिका में था और अब पहली बार स्थायी तौर पर घर आने की तैयारी कर रहा था। 16 सितंबर को ही विक्की ने अपने पिता कश्मीरी लाल से फोन पर बातचीत की थी। उसके पिता समेत परिवार विक्की के वापस लौटने से खुश था। घर में चल रही थी शादी की प्लानिंग कश्मीरी लाल के मुताबिक, विक्की नवंबर-दिसंबर में घर वापस आने वाला था। विक्की ने यह भी बताया था कि वापस आकर वह अपना कोई काम शुरू करेगा। बेटे के घर लौटने की बात से परिवार काफी खुश था। घर में उसकी शादी को लेकर भी तैयारी और बातचीत चल रही थी। लेकिन घर लौटने से पहले ही अमेरिका से उसकी मौत की खबर आ गई। 2014 में 45-50 लाख रुपए खर्च कर गया था अमेरिका राजकुमार ने बताया कि विक्की साल 2014 में अमेरिका गया था। उसे अमेरिका भेजने में परिवार ने करीब 45 से 50 लाख रुपए खर्च किए थे। एजेंट ने उसे डंकी के रास्ते अमेरिका पहुंचाया था। इसमें करीब दो साल का समय लगा था। इसके बाद वह अमेरिका में ही रहकर ट्राला चलाने का काम कर रहा था। भाई की बाजार में जूस की दुकान विक्की का बड़ा भाई सोनू अरोड़ा है, उसकी पिहोवा के मेन बाजार में जूस की दुकान है। विक्की की मां राजरानी की करीब तीन साल पहले मौत हो चुकी है। अब परिवार में पिता और भाई समेत अन्य परिजन हैं। चाचा राजकुमार ने बताया कि विक्की का शव फिलहाल आहयो के अस्पताल की मॉर्चरी में रखा हुआ है। सोमवार को उसका पोस्टमॉर्टम होगा। इसके बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इंडियाना तक लाने का खर्च 8 हजार डॉलर राजकुमार ने बताया कि आहयो से इंडियाना तक शव को ले जाने और अन्य प्रक्रिया में करीब 8 हजार डॉलर का खर्च बताया गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। परिजनों ने मांग की है कि सरकार विक्की का शव जल्द भारत लाने में मदद करे, ताकि परिवार अंतिम संस्कार कर सके।
सोनीपत की सिक्का कॉलोनी में 6 महीने के बच्चे पर डॉग के हमले के मामले में अब डॉग मालिक राजेश कुमार मीडिया के सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि बच्चे पर हमला करने वाले डॉग पिटबुल नहीं, बल्कि अमेरिकन बुली नस्ल के हैं। राजेश के मुताबिक दोनों फीमेल डॉग अल्फा और बीटा करीब 7 साल से उनके पास थीं और इस दौरान उन्होंने कभी किसी पर हमला नहीं किया। सोमवार शाम अचानक दोनों डॉग नीचे आ गईं और पड़ोस की महिला की गोद में बच्चे को देखकर अल्फा ने उस पर हमला कर दिया। दोनों कुत्तों को घर से निकाला घटना के बाद राजेश ने दोनों डॉग को अपने घर से निकालकर पंजाब में किसी अन्य व्यक्ति को निशुल्क दे दिया। अब दोनों की नई वीडियो भी सामने आई है, जिसमें अल्फा और बीटा एक बच्चे और उसकी मां के साथ खेलती नजर आ रही हैं। वहीं, डॉग मालिक ने बच्चे के इलाज पर मैक्स अस्पताल में चार दिन में करीब 4 लाख रुपए खर्च होने की बात कही है। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बच्चे को आगे के इलाज के लिए पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया गया। राजेश ने घटना को लेकर अपनी गलती भी मानी है। अब पढ़िए डॉग मालिक ने क्या कहा… पिटबुल नहीं, अमेरिकन बुली नस्ल के हैं डॉग:सिक्का कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि उसके घर में रहने वाले दोनों डॉग पिटबुल नहीं, बल्कि अमेरिकन बुली नस्ल के हैं। दोनों फीमेल डॉग के नाम अल्फा और बीटा हैं और उनकी उम्र करीब 7 साल है। राजेश के मुताबिक उसने दोनों डॉग करीब 7 साल पहले खरीदे थे। उसे डॉग पालने का शौक था और साथ ही वह इनके प्रजनन के बाद होने वाले बच्चों को बेचकर बिजनेस करने की योजना बना रहा था। दोनों डॉग को उसी ने खरीदकर घर में रखा था। बेटे ने ट्यूशन जाने के लिए खोला था गेट: राजेश ने बताया कि सोमवार शाम वह घर के नीचे बैठा हुआ था, जबकि दोनों डॉग ऊपर रहते थे। उसका बेटा ट्यूशन जाने के लिए घर का गेट खोलकर बाहर चला गया। इसी दौरान दोनों डॉग अचानक नीचे कैसे आ गए, इसकी जानकारी उसे नहीं है। गोद में बच्चे को खिलौना समझकर झपटी अल्फा: राजेश का कहना है कि पड़ोस की लड़की की गोद में 6 महीने का बच्चा था। उसे आशंका है कि अल्फा ने गोद में मौजूद बच्चे को किसी खेलने वाले खिलौने के रूप में समझ लिया और अचानक उसकी तरफ झपट गई। इसी दौरान बच्चे पर हमला हो गया। राजेश ने दावा किया कि अल्फा और बीटा दोनों शांत स्वभाव की थीं। करीब 7 साल तक उनके पास रहने के दौरान दोनों ने कभी किसी व्यक्ति पर हमला नहीं किया। उसने कहा कि सोमवार को हुई घटना अचानक हुई और इससे पहले इस तरह की कोई शिकायत या घटना सामने नहीं आई थी। हमले के बाद पंजाब भेजे दोनों डॉग: बच्चे पर हमला होने के बाद राजेश ने दोनों डॉग को अपने घर से निकाल दिया। उसने बताया कि अल्फा और बीटा को पंजाब में किसी अन्य व्यक्ति को निशुल्क दे दिया गया है। दोनों डॉग अब वहीं रह रही हैं। बच्चों के साथ खेलती दिखीं मां:दोनों डॉग की नई वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में अल्फा और बीटा एक बच्चे और उसकी मां के साथ खेलती नजर आ रही हैं। डॉग मालिक का दावा है कि पंजाब भेजे जाने के बाद भी दोनों का व्यवहार शांत है। डॉग्स मालिक ने कैसे उठाया खर्च मैक्स में 4 दिन में करीब 4 लाख खर्च होने का दावा: राजेश ने बताया कि हमले में घायल बच्चे का इलाज मैक्स अस्पताल में कराया गया। उसके अनुसार वहां करीब चार दिन के इलाज में लगभग 4 लाख रुपए खर्च हुए। बाद में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह आगे का महंगा इलाज कराने में असमर्थ था। डॉक्टरों ने बच्चे को खतरे से बाहर बताया, जिसके बाद आगे के इलाज के लिए उसे पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया गया। डॉग मालिक खुद डायलिसिस पर: राजेश ने बताया कि उसकी खुद की किडनी खराब है और वह डायलिसिस पर है। परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है। उसने बताया कि वह अपने भाई की मदद से परिवार का खर्च चला रहा है। परिवार में उसकी पत्नी और बेटा हैं। किराए के मकान में रह रहा परिवार: राजेश के मुताबिक वह पिछले करीब साढ़े तीन साल से सिक्का कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहा है। इससे पहले वह जनता कॉलोनी में किराए के मकान में रहता था। उसने बताया कि उसका खुद का मकान भी था, लेकिन बीमारी और आर्थिक परेशानी के चलते उसे बेचना पड़ा। राजेश ने बताया कि पहले उसका एक्सीडेंट हुआ था। इसके बाद कई अन्य बीमारियां होने के कारण उसकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई। बीमारी के इलाज और खर्चों के चलते उसे अपना मकान तक बेचना पड़ा। डॉग पालना अपनी गलती मानी: घटना के बाद राजेश ने अपनी गलती भी मानी। उसने कहा कि उसके घर में अल्फा और बीटा को पालना और इस तरह की घटना होना उसकी गलती है। उसका कहना है कि उसने डॉग शौक और बिजनेस के उद्देश्य से पाले थे, लेकिन बच्चे पर हमले के बाद उसे अपनी गलती का एहसास हुआ है। बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर राजेश ने बताया कि अब उसकी तबीयत ठीक है और धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उसने कहा कि बच्चे का इलाज जारी है और उसकी हालत पहले से बेहतर है।
सोनीपत की सिक्का कॉलोनी में 6 महीने के बच्चे पर डॉग के हमले के मामले में अब डॉग मालिक राजेश कुमार मीडिया के सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि बच्चे पर हमला करने वाले डॉग पिटबुल नहीं, बल्कि अमेरिकन बुली नस्ल के हैं। राजेश के मुताबिक दोनों फीमेल डॉग अल्फा और बीटा करीब 7 साल से उनके पास थीं और इस दौरान उन्होंने कभी किसी पर हमला नहीं किया। सोमवार शाम अचानक दोनों डॉग नीचे आ गईं और पड़ोस की महिला की गोद में बच्चे को देखकर अल्फा ने उस पर हमला कर दिया। घटना के बाद राजेश ने दोनों डॉग को अपने घर से निकालकर पंजाब में किसी अन्य व्यक्ति को निशुल्क दे दिया। अब दोनों की नई वीडियो भी सामने आई है, जिसमें अल्फा और बीटा एक बच्चे और उसकी मां के साथ खेलती नजर आ रही हैं। वहीं, डॉग मालिक ने बच्चे के इलाज पर मैक्स अस्पताल में चार दिन में करीब 4 लाख रुपए खर्च होने की बात कही है। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बच्चे को आगे के इलाज के लिए पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया गया। राजेश ने घटना को लेकर अपनी गलती भी मानी है। अब पढ़िए डॉग मालिक राजेश कुमार ने क्या कहा… पिटबुल नहीं, अमेरिकन बुली नस्ल के हैं डॉग:सिक्का कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि उसके घर में रहने वाले दोनों डॉग पिटबुल नहीं, बल्कि अमेरिकन बुली नस्ल के हैं। दोनों फीमेल डॉग के नाम अल्फा और बीटा हैं और उनकी उम्र करीब 7 साल है।राजेश के मुताबिक उसने दोनों डॉग करीब 7 साल पहले खरीदे थे। उसे डॉग पालने का शौक था और साथ ही वह इनके प्रजनन के बाद होने वाले बच्चों को बेचकर बिजनेस करने की योजना बना रहा था। दोनों डॉग को उसी ने खरीदकर घर में रखा था। बेटे ने ट्यूशन जाने के लिए खोला था गेट: राजेश ने बताया कि सोमवार शाम वह घर के नीचे बैठा हुआ था, जबकि दोनों डॉग ऊपर रहते थे। उसका बेटा ट्यूशन जाने के लिए घर का गेट खोलकर बाहर चला गया। इसी दौरान दोनों डॉग अचानक नीचे कैसे आ गए, इसकी जानकारी उसे नहीं है।गोद में बच्चे को खिलौना समझकर झपटी अल्फा: राजेश का कहना है कि पड़ोस की लड़की की गोद में 6 महीने का बच्चा था। उसे आशंका है कि अल्फा ने गोद में मौजूद बच्चे को किसी खेलने वाले खिलौने के रूप में समझ लिया और अचानक उसकी तरफ झपट गई। इसी दौरान बच्चे पर हमला हो गया। राजेश ने दावा किया कि अल्फा और बीटा दोनों शांत स्वभाव की थीं। करीब 7 साल तक उनके पास रहने के दौरान दोनों ने कभी किसी व्यक्ति पर हमला नहीं किया। उसने कहा कि सोमवार को हुई घटना अचानक हुई और इससे पहले इस तरह की कोई शिकायत या घटना सामने नहीं आई थी।हमले के बाद पंजाब भेजे दोनों डॉग: बच्चे पर हमला होने के बाद राजेश ने दोनों डॉग को अपने घर से निकाल दिया। उसने बताया कि अल्फा और बीटा को पंजाब में किसी अन्य व्यक्ति को निशुल्क दे दिया गया है। दोनों डॉग अब वहीं रह रही हैं। नई वीडियो में बच्चे और मां के साथ खेलती दिखीं:दोनों डॉग की नई वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में अल्फा और बीटा एक बच्चे और उसकी मां के साथ खेलती नजर आ रही हैं। डॉग मालिक का दावा है कि पंजाब भेजे जाने के बाद भी दोनों का व्यवहार शांत है। डॉग्स मालिक ने कैसे उठाया खर्च मैक्स में 4 दिन में करीब 4 लाख खर्च होने का दावा: राजेश ने बताया कि हमले में घायल बच्चे का इलाज मैक्स अस्पताल में कराया गया। उसके अनुसार वहां करीब चार दिन के इलाज में लगभग 4 लाख रुपए खर्च हुए। बाद में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह आगे का महंगा इलाज कराने में असमर्थ था। डॉक्टरों ने बच्चे को खतरे से बाहर बताया, जिसके बाद आगे के इलाज के लिए उसे पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया गया। डॉग मालिक खुद डायलिसिस पर:राजेश ने बताया कि उसकी खुद की किडनी खराब है और वह डायलिसिस पर है। परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है। उसने बताया कि वह अपने भाई की मदद से परिवार का खर्च चला रहा है। परिवार में उसकी पत्नी और बेटा हैं। किराए के मकान में रह रहा परिवार: राजेश के मुताबिक वह पिछले करीब साढ़े तीन साल से सिक्का कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहा है। इससे पहले वह जनता कॉलोनी में किराए के मकान में रहता था। उसने बताया कि उसका खुद का मकान भी था, लेकिन बीमारी और आर्थिक परेशानी के चलते उसे बेचना पड़ा।राजेश ने बताया कि पहले उसका एक्सीडेंट हुआ था। इसके बाद कई अन्य बीमारियां होने के कारण उसकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई। बीमारी के इलाज और खर्चों के चलते उसे अपना मकान तक बेचना पड़ा। डॉग पालना अपनी गलती मानी: घटना के बाद राजेश ने अपनी गलती भी मानी। उसने कहा कि उसके घर में अल्फा और बीटा को पालना और इस तरह की घटना होना उसकी गलती है। उसका कहना है कि उसने डॉग शौक और बिजनेस के उद्देश्य से पाले थे, लेकिन बच्चे पर हमले के बाद उसे अपनी गलती का एहसास हुआ है। बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर राजेश ने बताया कि अब उसकी तबीयत ठीक है और धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उसने कहा कि बच्चे का इलाज जारी है और उसकी हालत पहले से बेहतर है।
अमेरिका की अदालत में बेहद गोपनीय तरीके से चली सुनवाई के बाद ओंटारियो के एक ट्रक ड्राइवर को 9 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह मामला कोई सामान्य ड्रग तस्करी का नहीं, बल्कि 2002 शीतकालीन ओलंपिक में कनाडा का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व खिलाड़ी रियान वेडिंग के अंतर्राष्ट्रीय नारको कार्टेल से जुड़ा हुआ है। एफबीआई ने रियान वेडिंग को 'आज के दौर का पाब्लो एस्कोबार' करार दिया है, जो कोलंबिया, मैक्सिको और अमेरिका के रास्ते कनाडा में कोकीन की सप्लाई लाइन चला रहा था। सीक्रेट चैंबर से 124 किलो कोकीन बरामदब्रैम्टन के 58 वर्षीय इकबाल सिंह विर्क ने लॉस एंजिल्स की अदालत में स्वीकार किया कि वह ओंटारियो से कैलिफोर्निया तक अपने ट्रक के जरिए कोकीन की खेप अमेरिका समेत कई जगह पहुंचाता था। 28 अगस्त 2024 को जब विर्क और उसका साथी रणजीत सिंह रोवाल मिशिगन को जोड़ने वाले ब्लू वॉटर ब्रिज के पास अमेरिकी कस्टम पोस्ट पहुंचे, तो एफबीआई के अधिकारियों ने उन्हें दबोच लिया। एफबीआई ने इस गिरोह में पहले से ही अपने गुप्त एजेंट शामिल किए हुए थे। जांच के दौरान ट्रक के एक सीक्रेट चैंबर से 124 किलो कोकीन बरामद हुई, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 4 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 33 करोड़ रुपये) बताई जा रही है। अमेरिका का सहयोग कर रहे मुख्य गवाह की हत्या मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी जज शेरिलिन पीस गार्नेट ने अदालती दस्तावेजों पर कड़ा प्राइवेसी ऑर्डर लागू कर दिया। इसका मुख्य कारण यह था कि अमेरिकी सरकार का सहयोग कर रहे एक मुख्य गवाह की पहले ही हत्या की जा चुकी थी। गवाहों और गुप्त मुखबिरों की जान बचाने के लिए कोर्ट ने ‘अटॉर्नीज आइज ओनली’ का आदेश जारी किया, जिसका मतलब है कि वकील कुछ संवेदनशील सबूत अपने क्लाइंट को भी नहीं दिखा सकते। सजा पूरी होते ही भारत डिपोर्ट होगा विर्कमुख्य सरगना रियान वेडिंग को जनवरी में मैक्सिको से गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह अमेरिकी जेल में बंद है। विर्क को इस मामले में उम्रकैद की सजा हो सकती थी, लेकिन अदालत में अपना अपराध कबूल करने के बाद उसे 9 साल की सजा सुनाई गई। वहीं, उसके साथी रोवाल को 37 महीने की कैद मिली है। दोनों आरोपी भारतीय नागरिक हैं और कनाडा के पीआर (परमानेंट रेसीडेंट) हैं। अमेरिकी कानून के तहत सजा पूरी होते ही विर्क को अमेरिका से सीधे भारत डिपोर्ट कर दिया जाएगा।
नमस्कार, पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी उठापटक जारी है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इधर पाकिस्तान में आत्मघाती हमले मे 16 लोगों की मौत हो गई। सभी नमाज के लिए जुटे थे। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ आगे जानिए की मराठी मूवी 'गोंधल' को ऑस्कर में भारत की तरफ से ऑफिशियल एंट्री मिली है। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... 1. पीएम मोदी दिल्ली में रोजगार मेले में वर्चुअली जॉब लेटर बांटेंगे। 2. दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के रिजल्ट आएंगे। कल की बड़ी खबरें... 1. ममता की कैंडिडेट हटीं, कांग्रेस प्रत्याशी गिरफ्तार, बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में 2 घंटे में बदली तस्वीर पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से 18 दिन पहले ममता गुट की महिला कैंडिडेट संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम सीट से नामांकन वापस ले लिया। संचिता ने इससे पहले बंगाल सीएम शुभेंदु से मुलाकात की थी। इसके बाद ममता ने नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की बात कही। इसके 2 घंटे बाद बंगाल पुलिस ने मिलन को एक पुराने केस में अरेस्ट कर लिया। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खाली की थी। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को चुनाव होगा, रिजल्ट 9 अक्टूबर को आएगा। चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जीशुक्रवार को चुनाव आयोग ने TMC के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न मिला है, जबकि ऋतब्रत वाले बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है। इससे एक दिन पहले आयोग ने दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाला मूल चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था। यह अंतरिम व्यवस्था है। मूल नाम और चिह्न पर अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। देर रात ममता ने सुप्रीम कोर्ट में EC के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की। पूरी खबर पढ़ें... 2. निठारी कांड- आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शव फंदे पर मिला, 13 मामलों में मौत की सजा, फिर बरी निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार के भूपतवाला में चाय की दुकान में फांसी पर लटका मिला। वह पिछले कुछ महीनों से नाम बदलकर हरिद्वार में रह रहा था। करीब 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया था। नोएडा के निठारी में 2005-06 में बच्चों और महिलाओं के गायब होने के बाद उसका नाम सामने आया था। कोली को 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी किया गया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी बरी किया था। पूरी खबर पढ़ें... 3. UGC के विरोध में 1200 युवक सड़क पर उतरे, आगरा में 100 ट्रैक्टर से पहुंचे, हाईवे पर हनुमान चालीसा पढ़ी आगरा में सवर्ण समाज के करीब 1200 युवक UGC के विरोध में शुक्रवार को सड़क पर उतर आए। 100 ट्रैक्टरों पर सवार ये युवक कलेक्ट्रेट का घेराव करने जा रहे थे। लेकिन, एत्मादपुर के संवई गांव से करीब 200 मीटर आगे पुलिस और PAC ने 4 क्रेन और 7 बुलडोजर से बैरियर लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद ये युवक कलेक्ट्रेट जाने की मांग पर अड़ गए। इसको लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात संभालने के लिए मौके पर तैनात 2 कंपनी PAC और करीब 300 पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को गांव की तरफ खदेड़ दिया। लेकिन, प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए। दोपहर करीब 3 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरियर तोड़ते हुए आगरा-फिरोजाबाद हाईवे की तरफ दौड़ लगा दी। उन्हें रोकने के लिए पुलिसवाले भी पीछे-पीछे दौड़ने लगे। इसके बाद प्रदर्शनकारी हाईवे पर धरने पर ही बैठ गए। हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। पूरी खबर पढ़ें… 4. पेपर लीक रोकने के क्या इंतजाम हुए, सुप्रीम कोर्ट जांचेगा, जज NTA दफ्तर जाएंगे, एजेंसी ने कहा था- एग्जाम सिस्टम फूलप्रूफ बनाया सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जरूरत पड़ने पर NEET परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, FAIMA और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें NTA को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है। इधर, केंद्र ने कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। इससे पहले सरकार ने 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि NEET परीक्षा सिस्टम फूलप्रूफ है। इसमें सेंध लगाना मुश्किल है। पूरी खबर पढ़ें... 5. पाकिस्तान में नमाज के दौरान आत्मघाती हमला, 21 मौतें, आतंकी विस्फोटक से भरी गाड़ी लेकर टकराया पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में शुक्रवार की नमाज के दौरान मस्जिद के पास धमाका हुआ। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 80 लोग घायल हुए हैं। धमाका इतना जोरदार था कि मस्जिद के बाहर का हिस्सा पूरी तरह टूट गया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि पुराने पुलिस लाइंस के गेट पर विस्फोटक से भरी एक गाड़ी टकराई थी। घटना के बाद पुलिस और हमलावरों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। 7 में से 6 हमलावरों को मार गिराया। वहीं, हमले की जिम्मेदारी इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान नाम के आतंकी गठबंधन ने ली है। यह संगठन पिछले साल बना था और इसमें पाकिस्तान के कई उग्रवादी गुट शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें... 6. अमेरिका से जंग के बावजूद न्यूयॉर्क जाएंगे ईरानी राष्ट्रपति: US वीजा मिला, संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करेंगे; उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकती अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं को वीजा दे दिया गया है। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार होगा, जब ईरान के शीर्ष नेता अमेरिका पहुंचेंगे। पजशकियान के पास खास कानूनी सुरक्षा, गिरफ्तारी नहीं होगी 1. राष्ट्रपति को खास कानूनी सुरक्षा मिलती है किसी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को दूसरे देश में जाकर सीधे गिरफ्तार करना आसान नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत मौजूदा राष्ट्राध्यक्षों को खास कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसका मकसद यह है कि कोई देश अपनी मर्जी से दूसरे देश के मौजूदा राष्ट्रपति को गिरफ्तार न कर सके। 2. UNGA के लिए अमेरिका की अलग जिम्मेदारी है यह मामला सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच का नहीं है। UN का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और अमेरिका इसकी मेजबानी करता है। इसलिए UN की बैठकों में हिस्सा लेने वाले दूसरे देशों के प्रतिनिधियों को अमेरिका आने की अनुमति देना उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। पूरी खबर पढ़ें... 7. मराठी मूवी 'गोंधल' ऑस्कर में भारत की ऑफिशियल एंट्री; धुरंधर, बॉर्डर 2, हनुमान अंश को पीछे छोड़ा मराठी फिल्म 'गोंधल' को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2027) के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री चुना गया है। मराठी लोक परम्परा पर बनी इस थ्रिलर फिल्म को ऑस्कर समारोह में 'बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म' कैटेगरी में भेजा जाएगा। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के मुताबिक इस साल ऑस्कर की दावेदारी के लिए देश भर की अलग-अलग भाषाओं से कुल 33 फिल्में FFI के पास भेजी गई थीं। इसमें सबसे ज्यादा 14 फिल्में हिंदी भाषा की थीं। जिनमें भारत की तरफ से धुरंधर, बॉर्डर-2, हनुमान अंश जैसी फिल्में शामिल थीं। पूरी खबर पढ़ें... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: एअर इंडिया एक्सप्रेस के 8 क्रू सस्पेंड, इनमें 4 पायलट:तय समय में एल्कोहल टेस्ट नहीं कराया; दुबई-अमृतसर फ्लाइट का मामला (पूरी खबर पढ़ें) 2. नेशनल: मुनाफे के लिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी नहीं चला सकते: सुप्रीम कोर्ट ने 6 हफ्ते में अकाउंट की ऑडिट रिपोर्ट, फीस और सैलरी की जानकारी मांगी (पूरी खबर पढ़ें) 3. स्पोर्ट्स: भारतीय विमेंस टीम एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में पहुंची: जापान को 8 विकेट से हराया, शेफाली ने नाबाद 40 रन बनाए, चरणी को 4 विकेट (पूरी खबर पढ़ें) 4. पंजाब: पूर्व केंद्रीय मंत्री के काफिले पर हमला,कार के शीशे तोड़े: अंडे-टमाटर फेंके; बिट्टू का AAP समर्थकों पर आरोप; नशामुक्त यात्रा में जा रहे थे (पूरी खबर पढ़ें) 5. बिजनेस: टाटा संस में टाटा परिवार की ही नहीं चली: नोएल का वीटो खारिज; चंद्रशेखरन अपने ही वोट से फिर चेयरमैन बने (पूरी खबर पढ़ें) 6. इंटरनेशनल: सऊदी को F-35 फाइटर जेट देगा अमेरिका, अमेरिकी एजेंसियों को टेक्नोलॉजी चीन के हाथ लगने का डर (पूरी खबर पढ़ें) 7. एंटरटेंमेंट: रणवीर सिंह ने लिया 1000 बेटियों की पढ़ाई का संकल्प: लालबागचा राजा पहुंचे थे; बोले- आशा है, इससे बप्पा प्रसन्न होंगे (पूरी खबर पढ़ें) 8. इंटरनेशनल: यूरोप से 40 हजार सैनिक घटा सकता है अमेरिका: ट्रम्प बोले थे- यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए हम पर निर्भरता घटाए (पूरी खबर पढ़ें) 9. राजस्थान: रेगिस्तान में पहली बार 'ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम' का लाइव-टेस्ट: 'वायु उत्तम' ने सैन्य-नागरिक ड्रोनों को किया ट्रैक (पूरी खबर पढ़ें) 10. कर्नाटक: बेंगलुरु में शादी का प्रपोजल ठुकराने पर लड़की पर हमला:बीच सड़क पर चाकू मारा, घटना CCTV में रिकॉर्ड, दोनों आरोपी गिरफ्तार (पूरी खबर पढ़ें) 11. नेशनल: सुप्रीम कोर्ट की सलाह- युवा वकील सीनियर्स से ट्रेनिंग लें:उनके बिना पेशे की बारीकियां नहीं जान सकते, कोर्ट में क्या नहीं बोलना यह भी सीखेंगे (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... शार्क के सामने गर्लफ्रेंड को प्रपोज इंग्लैंड में एक शख्स ने शार्क टैंक में डाइविंग के दौरान अपनी गर्लफ्रेंड को शादी के लिए प्रपोज किया। उन्होंने पहले ही एक्वेरियम को ईमेल कर योजना बताई थी। दोनों को बाकी लोगों से अलग किया गया और कर्मचारी प्रपोजल का साइन लेकर पहुंचा। पेज ने पानी के अंदर ‘ओके’ इशारा कर हां कर दी। पूरी खबर पढ़ें... फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर: दोस्त से मिलने गई लड़की, उसने 3 और दोस्तों को बुलाकर रेप-मर्डर किया; POCSO के 97% रेप मामलों में आरोपी जानने वाले ही क्यों 2. मेंटल हेल्थ- छोटी बातों पर गुस्सा आने लगा है: गुस्से में चीजें पटक देता हूं, पत्नी-बच्चे मुझसे डरने लगे हैं, खुद को कैसे ठीक करूं 3. जरूरत की खबर- मेनोपॉज के बाद जल्दी आता बुढ़ापा: मसल्स–हड्डियां होतीं कमजोर, शुरू करें वेट ट्रेनिंग, डॉक्टर से जानें इसके फायदे 4. पावर प्ले: भारत के इतिहास में सिर्फ एक बार हुआ: चूहों ने भड़काई बगावत, हथियार उठाकर युवा पाकिस्तान-चीन से मिले; इंदिरा ने अपने ही शहर पर बरसाए बम 5. राजस्थान एक्सप्लेनर: बाड़ेबंदी के पीछे की असली वजह क्या?: पार्षदों के क्रॉस वोटिंग-पाला बदलने का डर, 7 सवालों में जानिए- क्या है रिसॉर्ट पॉलिटिक्स 6. ग्राउंड रिपोर्ट 25 घर बाढ़ में बहे, मस्जिद नदी में लटकी: बाराबंकी में 18 साल बाद सरयू ने बदला रास्ता; लोग बोले- उम्मीद टूटती जा रही 7. 'जज के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए': यूपी में फांसी की 23 सजा सुनाने वाले जज का दर्द, पहले कहा था- मरना पसंद, डरना नहीं 8. गोरे बच्चे के लिए नेपाली लड़कियों का सौदा:1 करोड़ में बिना शादी प्रेग्नेंसी से डिलीवरी तक साथ रहेगी, यूपी बॉर्डर पर तस्करी का नया ट्रेंड 9. ग्राउंड रिपोर्ट ‘सपने बहुत थे... अब कुछ भी संभव नहीं दिख रहा’: आंखों के सामने गंगा में समा रहे घर, भोजपुर में गंगा के कटाव पीड़ितों की आपबीती करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज तुला राशि के प्राइवेट सेक्टर के लोगों को प्रमोशन मिलने के योग हैं। कुंभ राशि के लोगों को निवेश में सावधानी रखनी होगी। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Lucknow News: अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले एक और फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़
कपूरथला पुलिस चौकी के पास स्थित रिध्या प्लाजा में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का अलीगंज पुलिस ने शुक्रवार को भंडाफोड़ किया।
Firozabad News: अमेरिकी संसद में 100 फीसदी टैरिफ बिल पास होने से सहमे कांच निर्यातक
फिरोजाबादसमाचार
मध्यप्रदेश में निवेश लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया-2026 में देश-विदेश की सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की समीक्षा की गई। सीएम ने बताया कि 23-24 अक्टूबर को इंदौर में बड़ा इन्वेस्टर समिट होगा, जिसमें सेमीकंडक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों के निवेशकों को प्रदेश की नीतियों और संभावनाओं से अवगत कराया जाएगा। जापान, कोरिया, अमेरिका की कंपनियों से मुलाकात मुख्यमंत्री ने यशोभूमि में आयोजित सेमीकॉन इंडिया-2026 में मध्यप्रदेश पवेलियन का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने पारस सेमीकंडक्टर्स, थॉमसन सेमीकंडक्टर्स, स्प्रिन्टोनिक्स एआई, एनएक्सपी इंडिया, मार्वल सेमीकंडक्टर्स, एलएंडटी सेमीकंडक्टर्स और स्वदेश आईसी सेमीकंडक्टर्स सहित कई कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री ग्रुप के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात हुई। इनमें जापान की एक्रेटेक, केनन और कैइजो, कोरिया की हनवा और जेनसेम इंक तथा अमेरिका की मेकडरमिड अल्फा के प्रतिनिधि शामिल थे। जापान की आक्साईड कॉर्पोरेशन, स्केल फोटोनिक्स और इम्प्यूट इंक के प्रतिनिधियों से भी निवेश और तकनीकी सहयोग पर चर्चा की गई। चिप डिजाइनिंग कंपनियों को भी न्योता सीएम ने किष्किंधा इंटरनेशनल, डिजिकॉम, सिग्निटयूट, स्टेम्बो टेक्नोलॉजी, ट्रू-चिप सॉल्यूशन, बनाश्री सेमीकंडक्टर्स, वीएलएसआई एक्सपर्ट और न्यूजिमो सेमीकंडक्टर्स जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने मोहाली चिप डिजाइनिंग पवेलियन और स्वीडिश पवेलियन का अवलोकन किया। सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइनिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियां, पर्याप्त लैंड बैंक और स्किल डेवलपमेंट की संभावनाएं मौजूद हैं। भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को भी इस क्षेत्र के लिए संभावनाशील बताया। 23-24 अक्टूबर को इंदौर में बड़ा निवेश सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 और 24 अक्टूबर को इंदौर में बड़ा निवेशक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़े निवेशकों को मध्यप्रदेश की नीतियों और निवेश अवसरों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जीआईएस-2025 के दौरान भी सेमीकंडक्टर क्षेत्र के निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया था और कुछ निवेशकों ने इस दिशा में कदम भी उठाए हैं। सीएम ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर बनेंगे। विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी से नए उद्योग और कारोबार का इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है। नड्डा से स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति पर चर्चा इसी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। बैठक में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे, चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा हुई। नड्डा ने प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के प्रयासों की सराहना की। खासतौर पर मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में पीपीपी मॉडल के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया। एक साल में 520 एमबीबीएस सीट बढ़ीं बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में 2026 में एमबीबीएस सीटों की संख्या 5,600 से बढ़कर 6,120 हो गई है। यानी एक साल में 520 सीट बढ़ी हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सीटें 63 से बढ़कर 73 और निजी मेडिकल कॉलेजों में 29 से बढ़कर 53 हो गई हैं। धार, पन्ना, कटनी और बैतूल में पीपीपी मॉडल से मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। इन्हें दिसंबर 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है। 52 जिलों में 70 डायलिसिस यूनिट प्रदेश के 52 जिलों में 70 हीमोडायलिसिस यूनिट संचालित हैं, जबकि 52 कैंसर डे-केयर सेंटरों में इलाज की सुविधा दी जा रही है। इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में CAR-T सेल थेरेपी जैसी उन्नत कैंसर उपचार सुविधा भी शुरू की गई है। छतरपुर, दमोह और बुधनी में मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। उज्जैन मेडिकल कॉलेज के 2027 में पूरा होने की उम्मीद है। केंद्र की फेज-III योजना में राजगढ़ और मंडला में मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित हैं।
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
अमेरिका में पंजाबी सिख ट्रक चालक पर हमला: बाथरूम में चाकू से किए वार, कैलिफोर्निया निवासी गिरफ्तार
अमेरिका के वायोमिंग राज्य में कैलिफोर्निया के पंजाबी सिख ट्रक चालक पर चाकू से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री जाएंगे अमेरिका, ट्रंप ने दे दिया वीजा! - ABP News
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अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में खुद को तंदुरुस्त और एनर्जेटिक बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के सप्लीमेंट्स, जिम वर्कआउट और हाई-प्रोटीन डाइट का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों और अमेरिका में यह माना जाता है कि यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल कर लिया जाए, तो शरीर की सारी कमजोरियां दूर हो जाती हैं और ऊर्जा का स्तर हमेशा उच्च बना रहता है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) द्वारा जारी की गई एक बेहद चौंकाने वाली और व्यापक रिपोर्ट ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। सीडीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 71.5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो भरपूर मात्रा में प्रोटीन या अन्य पोषक तत्व लेने के बाद भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहते हैं। यह आंकड़ा न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि आधुनिक चिकित्सा जगत और पोषण विशेषज्ञों (Nutritionists) के लिए भी एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस आलेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर भरपूर प्रोटीन लेने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर लोग क्रोनिक थकान और ऊर्जा की कमी का सामना क्यों कर रहे हैं, और इसके पीछे छिपे असली वैज्ञानिक व जीवनशैली से जुड़े कारण क्या हैं।प्रोटीन का सेवन बनाम शरीर की ऊर्जा: क्या सिर्फ प्रोटीन खाने से ही मिल जाती है एनर्जी?आम तौर पर लोगों के मन में यह भ्रम बैठा हुआ है कि यदि वे अपने रोजाना के खाने में चिकन, अंडे, प्रोटीन पाउडर, पनीर या अन्य हाई-प्रोटीन स्रोतों को शामिल कर लेते हैं, तो उनका शरीर स्वतः ही ऊर्जा से भर जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) और ऊर्जा उत्पादन का तंत्र केवल एक पोषक तत्व यानी प्रोटीन पर निर्भर नहीं करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी डाइट में अत्यधिक प्रोटीन तो जोड़ लेता है, लेकिन साथ ही जरूरी विटामिंस (जैसे विटामिन बी12, विटामिन डी), आयरन, सही प्रकार के कार्बोहाइड्रेट और पर्याप्त हाइड्रेशन की अनदेखी करता है, तो शरीर उस प्रोटीन को पूरी तरह पचाने और ऊर्जा में बदलने में असमर्थ हो जाता है। इसके अलावा, आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है। सीडीसी की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि सिर्फ मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (Protien, Fats, Carbs) की मात्रा पूरी कर लेने मात्र से ही कोई व्यक्ति अंदर से स्वस्थ या ऊर्जावान महसूस नहीं कर सकता, जब तक कि शरीर की कोशिकीय स्तर पर पोषण संबंधी जरूरतें पूरी न हो रही हों।नींद की कमी और मानसिक तनाव: थकान का सबसे बड़ा और अनदेखा कारणसीडीसी की इस व्यापक रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है कि शारीरिक थकान का सीधा संबंध केवल भोजन या डाइट से ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे आधुनिक युग की सबसे बड़ी बीमारियां—नींद की कमी (Sleep Deprivation) और मानसिक तनाव (Chronic Stress)—मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। आज के समय में कॉर्पोरेट कल्चर, नाइट शिफ्ट्स, और रातभर मोबाइल स्क्रीन या लैपटॉप के सामने समय बिताने के कारण लोगों की नींद का चक्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। जब शरीर को रात में गहरी और कम से कम 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं मिलती, तो शरीर के हारमोनल संतुलन में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है। कोर्टिसोल (Cortisol) यानी तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने से शरीर हमेशा 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड में रहता है, जिससे मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र लगातार थका हुआ महसूस करते हैं। आप चाहे दुनिया का सबसे महंगा प्रोटीन शेक पी लें या सबसे बेहतरीन डाइट फॉलो कर लें, लेकिन यदि आपकी नींद पूरी नहीं है और आप मानसिक रूप से तनावग्रस्त हैं, तो आपके शरीर की कोशिकाएं कभी भी तरोताजा महसूस नहीं कर सकतीं। यही कारण है कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी करोड़ों लोग अंदर से पूरी तरह खोखले और थके हुए महसूस कर रहे हैं।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) और खराब पाचन तंत्र की भूमिकाथकान और सुस्ती के इस महामारी जैसे फैलने के पीछे एक और बहुत बड़ा कारण हमारी आधुनिक शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) है। आजकल अधिकांश नौकरियां ऐसी हो गई हैं जिनमें लोगों को लगातार 8 से 10 घंटे अपनी कुर्सी या डेस्क पर बैठकर बिताना पड़ता है। शारीरिक रूप से कोई मेहनत न होने के कारण शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुस्त हो जाता है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और खाया हुआ भोजन सही ढंग से पच नहीं पाता। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात को मानते हैं कि जब तक आपका पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत और सक्रिय नहीं है, तब तक आप चाहे कितना भी पौष्टिक भोजन या प्रोटीन क्यों न खा लें, आपके शरीर को उसकी सही ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकती। अपच, कब्ज और आंतों (Gut Health) से जुड़ी समस्याएं शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा देती हैं, जिससे लगातार सुस्ती, सिरदर्द और भारीपन बना रहता है। सीडीसी की रिपोर्ट इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करती है कि जब तक लोग अपनी दिनचर्या में व्यायाम, वॉक और शारीरिक श्रम को शामिल नहीं करेंगे, तब तक केवल डाइट बदलने से थकान की इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता।निष्कर्ष: इस समस्या से बाहर निकलने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव जरूरी हैं?सीडीसी की यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी और आंखें खोलने वाला संदेश है। यह हमें यह सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल जिम जाने या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले किसी एक फिटनेस ट्रेंड को फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समग्र संतुलन (Holistic Balance) है जिसमें सही खानपान, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सक्रिय जीवनशैली का होना अनिवार्य है। यदि आप भी अक्सर खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो सिर्फ प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के बजाय अपनी नींद के पैटर्न को सुधारें, पानी की मात्रा बढ़ाएं, योग या मेडिटेशन को अपनाएं और डॉक्टर से सलाह लेकर अपने शरीर में विटामिंस व मिनरल्स की जांच करवाएं। आधुनिक दुनिया की इस अंधी दौड़ में अपने शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना और समय रहते आवश्यक बदलाव करना ही एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन की असली कुंजी है।
रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब - AajTak
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अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं। इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है। तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है। नेताओं से लेकर टेक दिग्गजों तक अलग-अलग राय AI को लेकर अमेरिका में छिड़ी यह बहस अब टेक कंपनियों से निकलकर राजनीति के केंद्र में पहुंच गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के कुछ नेता AI को लेकर चिंता जता रहे हैं। आम तौर पर एक-दूसरे से अलग रहने वाले इन दोनों खेमों में बहुत कम मुद्दों पर सहमति दिखती है। लेकिन AI की यह बहस सिर्फ राजनीति या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में इसके फैसले हमारी नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, यह भी तय होगा कि AI के इस्तेमाल को लेकर नियम कैसे बनाए जाएंगे। AI का विकास धीमा करने के पक्ष में… डारियो अमोडेई AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है। अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है। वे लंबे समय से AI पर सरकारी नियम बनाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का प्रस्ताव रखा है। रुख बदलने वाले… सैम ऑल्टमैन OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे की चेतावनी वाले बयान पर हस्ताक्षर किए थे। इसी साल उन्होंने अमेरिकी सीनेट में ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया। बाद में उनका रुख कुछ नरम पड़ा। 2025 के बीच तक ऑल्टमैन का कहना था कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव है। फिर जुलाई 2026 में OpenAI ने बताया कि उसके दो AI मॉडल टेस्टिंग के दौरान बिना इंसानी मदद के सिस्टम से बाहर निकल गए। उन्होंने चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर Hugging Face के सर्वर तक पहुंच बनाई। इस घटना के बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस मांग का भी समर्थन किया कि AI मॉडल का विकास कुछ धीमा किया जाना चाहिए। इलॉन मस्क लंबे समय से AI के खतरों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। उनका अनुमान है कि AI के इंसानों के लिए खतरनाक साबित होने की संभावना 10 से 20% तक है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते इसके लिए नियम बनाने की मांग की है। मस्क ने खुद AI कंपनी xAI शुरू की है और ट्रम्प के चुनाव अभियान में बड़ी रकम दी थी। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक सरकारी नियमों में बदलाव से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को उन्होंने अमोडेई की AI विकास धीमा करने की मांग का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर मस्क ने लिखा, “डारियो सही हैं।” AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं… सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। AI की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट OpenAI के साथ बड़ी साझेदारी कर चुका है और अब अपने AI टूल्स पर भी तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, नडेला AI को बिना रोक-टोक आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि इसका विकास सोच-समझकर और इंसानी निगरानी में होना चाहिए। उनका तर्क है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस का कोई फायदा नहीं, जो इंसानों के कंट्रोल से बाहर हो या लोगों के काम न आए। इसके साथ ही नडेला AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। सुंदर पिचाई अल्फाबेट और गूगल के CEO हैं। वह AI के खतरों को मानते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत कड़े नियमों के पक्ष में नहीं हैं। पिचाई का कहना है कि AI के इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग नियम बनाए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, AI के जोखिम से निपटना जरूरी है, लेकिन इसके फायदों से पीछे रह जाना भी बड़ा खतरा हो सकता है। मार्क जुकरबर्ग मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI अगर कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहा तो यह ज्यादा बड़ा खतरा हो सकता है। इसके बजाय वह AI को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने को सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं। जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में AI मॉडल बनाने और जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को भी मानते हैं। इसी वजह से मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी न करने का फैसला कर सकती है। एलेक्जेंडर वेंग 2025 में मेटा से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के AI असिस्टेंट एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी जुड़े हैं। वेंग ने एक स्ट्रैटिजी पेपर में सुपरइंटेलिजेंस को परमाणु बम के बाद सबसे खतरनाक चीज बताया। उनका कहना है कि अमेरिका को AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरे देशों को रोकने की रणनीति के नजरिए से भी देखना चाहिए। AI का विकास तेजी से जारी रखने के पक्ष में जेनसन हुआंग एनवीडिया के को-फाउंडर और CEO हैं। एनवीडिया के चिप्स का इस्तेमाल AI बनाने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां करती हैं। हुआंग AI के तेज विकास के प्रमुख समर्थकों में हैं। उनका कहना है कि कंपनियों को सरकार से AI पर ज्यादा नियम बनाने की मांग नहीं करनी चाहिए। AI से नौकरियां जाने और अमेरिकी चिप्स दूसरे देशों को बेचने जैसे मुद्दों पर उनका एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई से सार्वजनिक मतभेद भी रहा है। डेविड सैक्स टेक निवेशक हैं। ट्रम्प प्रशासन में वह AI और क्रिप्टो से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह AI के डर के आधार पर सख्त नियम बनाने के खिलाफ हैं। सैक्स अमेरिकी राज्यों के अलग-अलग AI कानून बनाने का भी विरोध करते हैं। इसके बजाय वह कम सरकारी दखल वाली नीति चाहते हैं। उनका कहना है कि AI कंपनियां तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, इसलिए उनकी रफ्तार रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी राजनीति में भी AI को लेकर दो राय नियम बनाने के पक्ष में… बर्नी सैंडर्स निर्दलीय अमेरिकी सीनेटर हैं। AI के तेज विकास के आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि AI से बड़ी कंपनियों की ताकत बढ़ सकती है और इसका असर कामगारों पर पड़ सकता है। सैंडर्स ने नए AI डेटा सेंटर बनाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, बड़ी AI कंपनियों पर 50% टैक्स लगाने और उससे सार्वजनिक फंड बनाने की बात कही है। उन्होंने सुपरइंटेलिजेंस पर स्थायी रोक लगाने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, उनका प्रस्ताव है कि तब तक AI के एडवांस विकास पर रोक रहे, जब तक ऐसे सिस्टम को लेकर सुरक्षा इंतजाम तय नहीं हो जाते। नियमों के विरोध में… माइक जॉनसन अमेरिकी स्पीकर मानते हैं कि AI के खतरे बढ़ रहे हैं, लेकिन वह जल्दबाजी में नियम बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वे कहते हैं कि जल्दबाजी में ऐसे नियम नहीं बनाने चाहिए जिनसे चीन को फायदा मिल सकता है। जॉनसन ने AI के कारण इंसानों के खत्म हो जाने की आशंकाओं को खारिज किया है। डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि AI के मामले में अमेरिका चीन से आगे रहे। उन्होंने AI में अमेरिका की बढ़त बनाए रखना अपनी प्राथमिकता बनाई है। इसके लिए वह AI को तेजी से आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसमें AI डेटा सेंटर के लिए ज्यादा बिजली की व्यवस्था करना और ऐसे AI मॉडल को बढ़ावा देना शामिल है, जिनका इस्तेमाल ज्यादा लोग कर सकें। एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग के साथ एक कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने यह भी कहा था कि AI के विकास में सरकार को ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… ओपनएआई का 90 साल पुरानी गणित पहेली सुलझाने का दावा: यह दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में एक; 88 घंटे में जवाब ढूंढा ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया के सबसे मुश्किल सवालों में से एक को सॉल्व कर दिया है। AI को इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
एपल के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की बुकिंग भारत सहित दुनियाभर में शुरू हो गई है। भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1.65 लाख रुपए और आईफोन 18 प्रो मैक्स की कीमत 1.80 लाख रुपए रखी गई है। कंपनी ने इस बार अपने प्रो मॉडल लाइनअप में नया A20 Pro चिपसेट, एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम और मेन कैमरे में पहली बार DSLR कैमरे वाली वेरिएबल अपर्चर टेक्नोलॉजी दी है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारत में इन दोनों मॉडल्स की कीमतें काफी ज्यादा हैं। आईफोन्स 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स के स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स ग्राफिक्स में देखें… एपल Siri AI में 6 बड़े अपडेट्स स्क्रीन देखकर काम करना: स्क्रीन पर क्या दिख रहा है, सिरी उसे समझकर सीधे वही टास्क पूरा कर देती है। निजी डेटा से सटीक जवाब: ईमेल, मैसेज या कैलेंडर से जानकारी निकालकर आपकी फ्लाइट, मीटिंग या प्लान बता देती है। एप्स के अंदर काम: सिर्फ एप खोलती ही नहीं, बल्कि फोटो एडिट करके किसी को भेजने जैसा अंदर का काम भी कर देती है। इंसानों जैसी बात: अटक-अटक कर बोलने या अधूरा वाक्य बोलने पर भी बात आसानी से समझ लेती है। बिना बोले टाइपिंग: स्क्रीन के नीचे डबल टैप करके अब सिरी को लिखकर भी कमांड दे सकते हैं। चैटजीपीटी सपोर्ट: मुश्किल सवालों के जवाब, टेक्स्ट या रेसिपी के लिए सीधे 'चैटजीपीटी' से मदद ले लेती है। एपल के नए वियरेबल डिवाइसेस
आईआईटी छात्र ने साउथ एशिया स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट जीता, अब अमेरिका में गाड़ेंगे झंडे
आईआईटी के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के एमटेक छात्र पी विष्णु तेजा ने 2026 सोसाइटी ऑफ पेट्रोलियम इंजीनियर्स साउथ एशिया रीजनल स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट के मास्टर्स डिवीजन में पहला स्थान हासिल किया है।
अमेरिका में ₹1.9 लाख और भारत में सीधे ₹3 लाख! ये है iPhone के महंगा होने की असली वजह
अमेरिका में करीब 1.9 लाख रुपये वाला iPhone Duo भारत में 2,99,900 रुपये का क्यों है? इसके पीछे सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि इंपोर्ट ड्यूटी, मैन्युफैक्चरिंग, करेंसी और Apple की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी जैसी कई वजहें हैं। आइए उन्हें समझते हैं।
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
अमेरिका और ब्रिटेन के नए आंकड़े बताते हैं कि नॉन-ग्रेजुएट्स के मुकाबले कॉलेज डिग्री वालों को मिलने वाला सैलरी का फायदा घट रहा है। अर्थशास्त्रियों होजे अजार, मिरेया गिने और जेवियर एस्पिन की रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में कॉलेज ग्रेजुएट्स का वेतन प्रीमियम 4 वर्षों में लगातार गिरा है। कुल गिरावट करीब 10% है। यह 1970 के दशक के बाद पहली बड़ी गिरावट मानी जा रही है। 100 साल से भी ज्यादा समय में पहली बार ग्रेजुएट्स की मांग घट रही है। ब्रिटेन में भी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की डिग्री वालों का फायदा कम हो रहा है। एआई खासतौर पर उन व्हाइट-कॉलर और नॉलेज-वर्क जॉब्स को बदल रहा है, जिन पर लंबे समय से ग्रेजुएट्स का दबदबा था। भारत में डिग्रीधारी बढ़े लेकिन नौकरियां नहीं अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2023 के बीच युवाओं में ग्रेजुएट्स की संख्या 10% से बढ़कर 28% हो गई। लेकिन हर साल बढ़ने वाले ग्रेजुएट्स के अनुपात में नौकरियां नहीं बन रहीं। करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट्स जॉब मार्केट में आते हैं, जबकि करीब 28 लाख जॉब पैदा होती हैं। बेरोजगार युवाओं में अब करीब दो-तिहाई ग्रेजुएट हैं। सर्वे - 70-90% एम्पलॉयर्स स्किल बेस्ड भर्ती कर रहे अमेरिका के नेशनल एसोसिएशन ऑफ कॉलेजेस एंड एम्पलाइज की रिपोर्ट में करीब 70% नियोक्ता अब स्किल्स-बेस्ड हायरिंग कर रहे हैं। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब 90% कंपनियां डिग्री के बजाय कौशल के आधार पर भर्तियां करती हैं। 94% एम्पलॉयर्स का मानना है कि स्किल बेस्ड हायरिंग डिग्री, सर्टिफिकेट या अनुभव के आधार पर हायरिंग से बेहतर है। बदलाव - कई देशों में डिग्री की जरूरत में कमी आ रही देश - कमीयूएस - 3.9%यूके - 1.8%ऑस्ट्रेलिया - 1.6% (स्रोत- बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप)
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
IIT : आईआईटी के PhD स्कॉलर को 40 लाख का पैकेज, दूसरे छात्र ने अमेरिका में बजाया डंका
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी डॉ शत्रुघ्न ठाकुर को इटली की हंसा टीएमपी में डिजाइन इंजीनियर के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव मिला है। वे 40.65 लाख सालाना पे-पैकेज पर कार्य करेंगे।
अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर
यूएस ग्रीन कार्ड को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और बुरी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी पूरी तरह 'अनअवेलेबल' हो चुकी है।अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर?अमेरिका में सालों से परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और उच्च कुशल कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) और आव्रजन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित दूसरी श्रेणी यानी ईबी-2 (EB-2 - Employment-Based Second Preference) कैटेगरी को फिलहाल पूरी तरह से 'अनअवेलेबल' (Unavailable) यानी अनुपलब्ध घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति का मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए इस श्रेणी के तहत तय किए गए कोटे के सारे वीजा पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी दूतावास या आव्रजन कार्यालय इस कैटेगरी में अब अगले आदेश या नए वित्त वर्ष के शुरू होने तक किसी भी नए ग्रीन कार्ड या अप्रवासन वीजा को जारी या स्वीकृत नहीं कर सकते हैं। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वर्षों से लंबित पेंडिंग फाइलों और भारी-भरकम बैकलॉग के बीच इस प्रकार अचानक श्रेणी का बंद होना उनके सपनों पर एक बहुत बड़ा विराम लगाता हुआ नजर आ रहा है।ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी के पूरी तरह से अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह क्या सामने आई है?इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कैटेगरी के अचानक बंद होने और अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी कानूनों के तहत तय की गई वार्षिक सीमा और देश-वार कोटा प्रणाली (Per-Country Ceiling) है। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, हर साल रोजगार-आधारित जितने भी ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, उनमें से किसी एक देश के नागरिकों को कुल कोटे का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। भारत जैसे विशाल देश से एडवांस्ड डिग्री धारकों और विशेष योग्यताओं वाले प्रोफेशनल्स की संख्या और आवेदन इतने ज्यादा हैं कि यह तयशुदा कोटा निर्धारित समय से बहुत पहले ही पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इस वर्ष भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही भारत के कोटे के सारे ईबी-2 वीजा नंबर पूरी तरह से एग्जॉस्ट यानी समाप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, अन्य देशों द्वारा अप्रयुक्त रहने वाले वीजा नंबरों का लाभ भी इस बार समय पर नहीं मिल पाने के कारण अमेरिकी प्रशासन को मजबूरन इस कैटेगरी को पूरी तरह से बंद या अनअवेलेबल करना पड़ा है, जिससे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, एच-1बी (H-1B) धारकों और उनके परिवारों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय नागरिकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए यह स्थिति भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता लेकर आई है। जो प्रोफेशनल्स अपनी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में थे, उनकी फाइलें अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई हैं और तब तक आगे नहीं बढ़ सकतीं जब तक कि नया कोटा शुरू नहीं होता। हालांकि आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस स्थिति के बावजूद यूएसिसिस (USCIS) द्वारा फॉर्म आई-485 (Adjustment of Status) की कुछ श्रेणियों के आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर तकनीकी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन अंतिम अप्रूवल के लिए लंबा इंतजार करना ही होगा। इस लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता के कारण कई कुशल भारतीय कर्मचारी अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं, क्योंकि ग्रीन कार्ड मिलने में लगने वाला यह बेहिसाब समय कई दशकों तक लंबा खींचता जा रहा है।इस गंभीर बैकलॉग और समस्या से निपटने के लिए आगे क्या उम्मीदें बची हैं?इस बड़ी प्रशासनिक रोक के बीच भारतीय प्रवासियों और नीति विश्लेषकों की निगाहें अब पूरी तरह से नए वित्त वर्ष और अमेरिकी संसद में होने वाले विधायी सुधारों पर टिकी हुई हैं। चूंकि हर साल 1 अक्टूबर को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही वार्षिक वीजा सीमाओं और कोटे का नया आवंटन दोबारा रिसेट होता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि तब जाकर इस कैटेगरी में कुछ राहत मिल सकती है और कट-ऑफ डेट्स आगे बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, आव्रजन सुधारों की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक अमेरिका देश-वार लगने वाली इस 7 प्रतिशत की सीमा को समाप्त नहीं करता या ग्रीन कार्ड की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक भारतीय प्रोफेशनल्स को इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। अमेरिकी श्रम बाजार में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में बुनियादी बदलाव कितनी बड़ी और तत्काल आवश्यकता बन चुके हैं।
खर्ग द्वीप के पास बड़ा हमला, अमेरिका ने तबाह कर दिया ईरान का टैंकर - Hindustan
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अमेरिका में बसने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली अपडेट सामने आ रही है। अमरीकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएसएसीआईएस (USCIS) ने ग्रीन कार्ड और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने वाले व्यक्ति या परिवार के वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ उनके क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिरता की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस बदलाव का सीधा असर उन हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स पर पड़ने वाला है जो अपने किसी परिजन या एम्प्लॉयी के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस नए फॉर्म और नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अब स्पॉन्सरशिप की राह उतनी आसान नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी।क्या है USCIS का नया फॉर्म और कैसे काम करेगा स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर की जांच का नया नियमयूएसएसीआईएस द्वारा लागू किए गए इन नए नियमों के केंद्र में एफिडेविट ऑफ सपोर्ट (Affidavit of Support) से जुड़ा नया फॉर्म है, जिसके जरिए स्पॉन्सर को अपनी वित्तीय क्षमता का पूरा ब्योरा देना होता है। पारंपरिक तौर पर स्पॉन्सर को सिर्फ अपनी आय का टैक्स रिटर्न दिखाना होता था, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारी स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर, बैंक खातों की स्थिति, मौजूदा कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई स्पॉन्सर आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है या उसका क्रेडिट स्कोर खराब चल रहा है, तो वह किसी आवेदक के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं कर पाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अमेरिका आने वाला नया अप्रवासी कभी भी वहां की सरकारी सहायता या पब्लिक चार्ज (Public Charge) पर निर्भर न हो और अपनी आजीविका खुद चलाने में पूरी तरह से सक्षम हो।भारतीय आवेदकों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इस बदलाव के क्या हैं गहरे मायनेअमेरिका में वर्क वीजा यानी एच-1बी (H-1B) पर काम कर रहे लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता पहले से ही काफी लंबा और पेचीदा रहा है। ऐसे में फैमिली-बेस्ड या एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड स्पॉन्सरशिप के नियमों का कड़ा होना भारतीयों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार परिवार के सदस्य जब अपने माता-पिता या भाई-बहनों को अमेरिका बुलाने के लिए स्पॉन्सर करते हैं, तो उन्हें इस नए वित्तीय कड़े मानदंड से गुजरना होगा। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, और जरा सी भी वित्तीय चूक होने पर आवेदन को सीधे खारिज किया जा सकता है। इसलिए जो भारतीय परिवार या पेशेवर आने वाले दिनों में ग्रीन कार्ड के लिए फाइल करने की सोच रहे हैं, उन्हें अपने स्पॉन्सर के वित्तीय रिकॉर्ड और क्रेडिट हिस्ट्री को पहले से ही दुरुस्त और मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है।भविष्य की आव्रजन नीतियां और ग्रीन कार्ड चाहने वालों के लिए जरूरी सलाहअमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हो रहे ये लगातार बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले समय में ग्रीन कार्ड पाना और अधिक कठिन और अनुशासित होने जा रहा है। अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर साल नियमों में फेरबदल किए जाते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में भारतीय अप्रवासियों और छात्रों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कागजी कार्रवाई को शुरू करने से पहले इमीग्रेशन वकीलों या विशेषज्ञों से पूरी सलाह जरूर लें। नए फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पॉन्सर की आय संघीय गरीबी रेखा (Federal Poverty Guidelines) से काफी ऊपर हो और उनका क्रेडिट इतिहास बिल्कुल साफ-सुथरा हो। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर सही कदम उठाकर ही इस नई प्रशासनिक चुनौती से पार पाया जा सकता है और अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का सपना साकार किया जा सकता है।
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर उस छात्र की आंखों में पलता है जो अपनी मेहनत के दम पर करियर में ऊंची उड़ान भरना चाहता है। जब दुनिया भर के बेहतरीन विश्वविद्यालयों की बात आती है, तो अमेरिका का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और शानदार करियर ग्रोथ की वजह से अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, वहां की महंगी यूनिवर्सिटी फीस, ट्यूशन कॉस्ट और रहने-खाने का भारी खर्च कई बार मेधावी छात्रों के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। वित्तीय तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका जाने का विचार छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में ऐसी कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप प्रोग्राम्स मौजूद हैं, जो छात्रों के ट्यूशन फीस से लेकर उनके रहने, खाने और यहाँ तक कि हेल्थ इंश्योरेंस तक का पूरा खर्च खुद उठाती हैं? इन स्कॉलरशिप्स के जरिए आप बिना किसी आर्थिक तनाव के अमेरिकी धरती पर अपने सपनों की डिग्री हासिल कर सकते हैं।अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मिलने वाली फुल-ब्राइट और अन्य प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स के बारे में जानेंअमेरिका में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप (Fulbright-Nehru Fellowships) एक ऐसा नाम है जो भारत में बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित है। अमेरिकी सरकार और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो मास्टर या पीएचडी करने अमेरिका जाना चाहते हैं। इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ मासिक वजीफा, आने-जाने का हवाई किराया और स्वास्थ्य बीमा का पूरा खर्च कवर किया जाता है। इसके अलावा ह्यूबर्ट हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम (Hubert Humphrey Fellowship Program) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो अनुभवी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नॉन-डिग्री स्टडी और लीडरशिप ट्रेनिंग का मौका देते हैं। इन स्कॉलरशिप्स को हासिल करने के लिए छात्रों को एक निश्चित चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और अपने एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर खरा उतरना होता है, जिसके बाद उनके विदेश में पढ़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाता है।यूनिवर्सिटी-बेस्ड फाइनेंशियल असिस्टेंस और फुल-राइड स्कॉलरशिप्स का कैसे उठाएं लाभकेवल सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अधिकांश प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी अपने यहां आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को मेरिट और जरूरत के आधार पर फुल-राइड स्कॉलरशिप्स प्रदान करते हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और येल जैसी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज की वित्तीय सहायता नीतियां बहुत मजबूत हैं। अगर आपका एकेडमिक रिकॉर्ड शानदार है और आपके पास बेहतरीन एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का रिकॉर्ड है, तो ये यूनिवर्सिटीज आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 100 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति दे सकती हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही मिलने वाली ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंटशिप (GRA) या टीचिंग असिस्टेंटशिप (TA) के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं, जिससे उनका रहने-खाने का खर्च आसानी से निकल जाता है। इन अवसरों के बारे में सही समय पर जानकारी जुटाकर समय से आवेदन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अमेरिका में फ्री एजुकेशन पाने के लिए स्मार्ट टिप्सअमेरिका में बिना पैसे की टेंशन के पढ़ाई करने का यह सुनहरा अवसर पाने के लिए छात्रों को अपनी तैयारी बहुत पहले से शुरू करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आपको अपने एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, प्रोफेसरों से मिलने वाले रिकमेंडेशन लेटर्स और आईईएलटीएस (IELTS) या टॉफेल (TOEFL) जैसे इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट के स्कोर कार्ड तैयार रखने होते हैं। अधिकांश स्कॉलरशिप्स के लिए आवेदन की प्रक्रिया साल में एक निश्चित समय पर खुलती है, इसलिए यूनिवर्सिटीज की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर डेडलाइन पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाने के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन और नेतृत्व क्षमता से जुड़े अनुभवों को अपने आवेदन में जरूर शामिल करें। थोड़ी सी मेहनत, सही दिशा में की गई रिसर्च और समय पर किए गए आवेदन आपको बिना किसी वित्तीय बोझ के अमेरिका की बेहतरीन शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना सकते हैं।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
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Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
क्या भारत की तरह अमेरिका में भी है ट्यूशन कल्चर?
भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया.
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
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संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग द्वारा CPT (Curricular Practical Training) को लेकर एक नया नीतिगत मेमो जारी किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। CPT वह माध्यम है जिसके जरिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी डिग्री कोर्स के दौरान ही इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन ICE के इस नए मेमो ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और पेचीदा बना दिया है, जिससे भारतीय छात्रों के करियर और उनकी कानूनी स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है। गूगल डिस्कवर और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय इस विषय को लेकर लाखों छात्र सर्च कर रहे हैं कि आखिर इस नए बदलाव का उनकी पढ़ाई और जॉब करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए अमेरिका में CPT के पूरे गणित को समझते हैं और जानते हैं कि ICE के इस नए मेमो में क्या-क्या खास बातें कही गई हैं।अमेरिका में CPT (कर्रिकलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) असल में क्या है?सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CPT क्या है और यह विदेशी छात्रों के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जब कोई भारतीय छात्र अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन (मास्टर्स या बैचलर्स) के लिए एडमिशन लेता है, तो उसे अपने कोर्स के करिकुलम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाती है, जिसे CPT कहा जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और साथ ही कुछ पैसे भी कमाते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए जीवनरेखा की तरह होता है जो अपने खर्चों का एक हिस्सा खुद उठाने और अमेरिकी कॉर्पोरेट कल्चर को नजदीक से समझने की कोशिश करते हैं। पारंपरिक रूप से CPT को F-1 वीजा धारक छात्रों के लिए एक बेहद लचीली और मददगार व्यवस्था माना जाता रहा है, जिसके जरिए वे आगे चलकर OPT (Optional Practical Training) और H-1B वीजा की ओर कदम बढ़ाते हैं।ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने क्यों जारी किया नया मेमो?हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ICE द्वारा जारी किए गए नए मेमो ने विदेशी छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस मेमो का मुख्य उद्देश्य CPT के नियमों का कथित तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि कुछ छात्र और विश्वविद्यालय CPT नियमों का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई की आड़ में लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से काम करने के रास्ते तलाश रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विश्वविद्यालयों को CPT के अनुमोदन (Approval) के मामले में और अधिक कठोर नियमों का पालन करना होगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि CPT सीधे तौर पर छात्र के अकादमिक पाठ्यक्रम और डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल अंशकालिक नौकरी पाने का एक आसान जरिया। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से छात्रों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि क्या उनकी यूनिवर्सिटीज अब आसानी से CPT अप्रूव कर पाएंगी या नहीं।भारतीय छात्रों पर इस नए मेमो का क्या होगा सीधा असर?लोकल ऑप्टिमाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में हर साल हजारों की संख्या में भारतीय छात्र कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस और डेटा साइंस जैसे कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने ट्यूशन फीस के कर्ज को चुकाने और अमेरिकी बाजार में फुल-टाइम जॉब पाने के लिए CPT और फिर OPT पर निर्भर रहता है। यदि ICE के नए नियमों के कारण CPT मिलना मुश्किल हो जाता है, या इसके घंटों (Hours) को सीमित कर दिया जाता है, तो भारतीय छात्रों की आर्थिक स्थिति और करियर प्लानिंग बुरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि छात्रों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहने की जरूरत है।आधुनिक Generative Engine Optimization और डिजिटल सर्च ट्रेंड्स का परिदृश्यआधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च) और गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में शिक्षा, वीजा नियमों में बदलाव और करियर से जुड़ी ऐसी जटिल कानूनी खबरों को छात्र और उनके परिवार सबसे ज्यादा खोजते हैं। आज का डिजिटल युग यह मांग करता है कि किसी भी ग्लोबल पॉलिसी बदलाव को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडिट (Reddit) और इमिग्रेशन फोरम्स पर इस समय CPT मेमो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहाँ छात्र अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं। सही और तथ्यात्मक जानकारी समय पर मिलना हर उस छात्र के लिए बेहद जरूरी है जो अमेरिका में अपने सपनों को साकार करने की राह पर है।भारतीय छात्रों को अब किन सावधानियों और नियमों का रखना होगा ध्यान?इस बदलते हुए परिदृश्य में अमेरिका में पढ़ रहे या जाने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को कुछ बेहद अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, अपने कोर्स के दौरान लिए जाने वाले CPT का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) एकदम दुरुस्त रखें और यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर और आपकी यूनिवर्सिटी का कोर्स करिकुलम पूरी तरह से नियमों के दायरे में हो। किसी भी शॉर्टकट या संदिग्ध तरीके से CPT प्राप्त करने से बचें, क्योंकि अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS और ICE) इस मामले में अब बहुत अधिक आक्रामक हो चुका है। अपनी यूनिवर्सिटी के कानूनी सलाहकारों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें ताकि वीजा की स्थिति पर कोई आंच न आए।अमेरिकी शिक्षा और करियर की राह में आने वाली नई चुनौतियाँअंततः, अमेरिका में CPT को लेकर ICE द्वारा जारी किया गया यह मेमो इस बात की चेतावनी है कि अमेरिका में आव्रजन और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को लेकर प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना और वहां टिके रहना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है, इसके लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक ईमानदारी और नियमों की सटीक समझ होना अनिवार्य है। यदि छात्र सही दिशा में योजना बनाकर चलेंगे और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे, तो वे इन नई बाधाओं को पार करते हुए अपने अमेरिकी सपने को जरूर पूरा कर पाएंगे, बशर्ते हर कदम बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ उठाया जाए।
अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
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Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
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Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
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अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

