बहस से बवाल और फिर गोलियों की बौछार: अमेरिका के डेट्रॉयट के स्ट्रिप क्लब में तीन की मौत; चार घायल
बहस से बवाल और फिर गोलियों की बौछार: अमेरिका के डेट्रॉयट के स्ट्रिप क्लब में तीन की मौत; चार घायल- Argument escalates into chaos followed hail of bullets Three dead four injured Detroit strip club in US
ईरान ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने के लिए 7 दिन का प्रस्ताव दिया है, जिसमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाने और संपत्ति जारी करने की शर्तें शामिल हैं।
ईरान की नौसेना ने होर्मुज में दूसरी अमेरिकी मानवरहित पनडुब्बी को कब्जे में लिया, आईआरजीसी का दावा
ईरान की नौसेना ने होर्मुज में दूसरी अमेरिकी मानवरहित पनडुब्बी को कब्जे में लिया, आईआरजीसी का दावा
भारत को लेकर अमेरिका का 'असली डर' आया सामने; रूसी राजदूत ने बताया 'फ्रॉयडियन स्लिप' का राज
रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने रविवार को दावा किया कि एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी की बिना सोचे कही गई बात से अमेरिका का असली डर सामने आ गया है। उनका कहना है कि वॉशिंगटन नहीं चाहता कि भारत चीन की तरह बड़ा प्रतिद्वंद्वी बने। अलीपोव ने इस टिप्पणी को फ्रॉयडियन स्लिप बताया है।
'भारत को दूसरा चीन नहीं बनने देगा अमेरिका', रूसी राजदूत का बड़ा दावा
रूसी राजदूत डेनिस अलिपोव ने दावा किया है कि एक अमेरिकी अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि वाशिंगटन भारत को प्रतिस्पर्धी के रूप में दूसरा चीन नहीं बनने देगा।
अमेरिकी नेताओं से मिले विदेश सचिव विक्रम मिस्री, एसआरआईए कानून पर हुई चर्चा
न्यूयॉर्क, 27 सितंबर . India के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने Sunday को अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट कर रहे थे. बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों, हाल ही में लागू रूस और ईरान प्रतिबंध कानून (एसआरआईए) और दोनों देशों के ... Read more
भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग सप्ताह की शुरुआत से पहले घरेलू और विदेशी मोर्चे पर कई ऐसे बड़े घटनाक्रम घट रहे हैं जो दलाल स्ट्रीट पर तेज उतार-चढ़ाव की वजह बन सकते हैं। 28 सितंबर से शुरू होने वाले नए कारोबारी हफ्ते में किसी भी शेयर में खरीदारी या बिकवाली करने से पहले खुदरा निवेशकों और ट्रेडर्स को उन 10 अहम ट्रिगर्स की बारीकी से पड़ताल करनी होगी जो निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स के रुख को तय करेंगे। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में गहराता भू-राजनीतिक संकट, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की अस्थिर कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े निवेशकों के सेंटिमेंट की कड़ी परीक्षा लेने जा रहे हैं।इसके अलावा घरेलू स्तर पर भारत के मैक्रोइकोनॉमिक डेटा, प्राथमिक पूंजी बाजार में आईपीओ की बहार और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली जैसे कई कारण हैं जो बाजार के तकनीकी ढांचे को प्रभावित करेंगे। जानकारों का मानना है कि इस हफ्ते बाजार सीमित दायरे में कंसोलिडेट करने के साथ-साथ तेज वोलेटिलिटी दिखा सकता है। ऐसे में बाजार में उतरने से पहले इन सभी दस कारकों का गहराई से विश्लेषण करना समझदारी भरा कदम होगा।भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की तपिश: अमेरिका-ईरान संकट से सहमा बाजारइस हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर अमेरिका और ईरान के बीच का गहराता संघर्ष बना हुआ है। ईरान ने अपने हालिया कूटनीतिक रुख में कहा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ उसका तनाव केवल कूटनीति के जरिए सुलझ सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित आवागमन के लिए खोलने और संघर्ष समाप्त करने के ईरानी प्रस्ताव को खारिज करने की बात कही है। रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस समुद्री मार्ग पर किसी भी प्रकार का सैन्य गतिरोध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बादलों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है, जो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए सबसे संवेदनशील विषय है।फरवरी के आखिर से ही जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई थी, तब से कच्चे तेल के दाम भारतीय बाजारों के लिए चिंता का मुख्य सबब बने हुए हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है तो इससे भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा, आयात बिल में भारी वृद्धि होगी और देश में महंगाई का दबाव गहरा सकता है। इसके चलते घरेलू बाजार में ऑटो, पेंट्स, टायर और एविएशन जैसे तेल-संवेदनशील सेक्टरों के शेयरों पर दबाव बना रह सकता है।एफआईआई की 25,682 करोड़ की निकासी और अमेरिकी डॉलर के सामने रुपये की लड़ाईविदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs/FIIs) की बिकवाली का सिलसिला भारतीय बाजारों के लिए लगातार सिरदर्द बना हुआ है। जुलाई और अगस्त के शुरुआती दौर में शुद्ध खरीदार रहने के बाद विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर भारतीय इक्विटी बाजार से अपने हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 25 अगस्त तक ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजारों से कुल 25,682 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली कर डाली है। विदेशी पूंजी का यह आउटफ्लो लार्जकैप शेयरों के वैल्यूएशन पर सीधा असर डाल रहा है और संस्थागत समर्थन कमजोर होने से ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली हावी हो रही है।वहीं दूसरी ओर विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की चाल पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहने वाली है। शुक्रवार के सत्र में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे मजबूत होकर 95.75 के स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.92 पर खुला था और दिन के कारोबार में फिसलकर 95.94 तक चला गया था। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल के आयातकों की ओर से डॉलर की निरंतर मांग और विदेशी फंडों की बाजार से निकासी रुपये पर लगातार दबाव बना रही है। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सक्रिय विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप ने रुपये की गिरावट को सीमित रखने में मदद की है, लेकिन डॉलर इंडेक्स की मजबूती किसी भी समय रुपये को दोबारा दबाव में ला सकती है।भारत और अमेरिका के अहम आर्थिक आंकड़े: पीएमआई, फैक्ट्री आउटपुट और बॉन्ड यील्डइस हफ्ते जारी होने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों और नीतिगत दिशा को लेकर बाजार को नई दिशा देंगे। भारत में अगस्त माह के औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़े और एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (HSBC Manufacturing PMI) के आंकड़े घोषित होने वाले हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, दलाल स्ट्रीट भारत के अगस्त इंडस्ट्रियल आउटपुट के साथ-साथ केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) की स्थिति पर पैनी नजर रखेगा। ये आंकड़े यह साफ करेंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित रफ्तार कितनी मजबूत है और क्या कॉरपोरेट अर्निंग्स में आने वाले समय में तेजी देखने को मिलेगी।इसके अलावा अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड की चाल वैश्विक वित्तीय हालात को कड़ा कर सकती है। यदि बॉन्ड यील्ड में उछाल आता है तो उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट्स) जैसे भारत से पूंजी निकलकर अमेरिकी सुरक्षित संपत्तियों में जाने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही अमेरिका से आने वाले कंज्यूमर कॉन्फिडेंस डेटा, जेओएलटीएस (JOLTS) जॉब ओपनिंग्स और यूरोप क्षेत्र के सितंबर मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) के आंकड़े फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी ब्याज दर नीतियों की रूपरेखा तय करेंगे, जो वैश्विक लिक्विडिटी के लिए निर्णायक होंगे।प्राइमरी मार्केट में बूम: 20 नए आईपीओ से 1,292 करोड़ जुटाने की तैयारीसेकेंडरी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारत का प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ बाजार इस हफ्ते भी जबरदस्त हलचल में रहेगा। इस हफ्ते कुल 20 नए आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने जा रहे हैं, जिनके जरिए कंपनियां बाजार से कुल 1,292 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की योजना बना रही हैं। खुदरा निवेशकों के लिए यह कमाई और नए लिस्टिंग गेंस के बेहतरीन मौके लेकर आ रहा है। इस हफ्ते मुख्य बोर्ड (मेनबोर्ड) पर 4 बड़े आईपीओ निवेशकों का ध्यान खींचने के लिए कतार में खड़े हैं।इन चार प्रमुख मेनबोर्ड आईपीओ में एसआरआईटी इंडिया, विशाल निर्मिति, नित्यास जेम्स एंड ज्वेलरी और शाह इन्वेस्टर होम शामिल हैं। ये चारों कंपनियां मिलकर 595 करोड़ रुपये का फंड जुटाएंगी। इसके अलावा एसएमई (SME) प्लेटफॉर्म पर भी दर्जन भर से ज्यादा छोटी कंपनियों के पब्लिक इश्यू दांव पर होंगे। निवेशकों को इन आईपीओ में पैसा लगाने से पहले कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन, ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) और उनके वैल्यूएशन की निष्पक्ष समीक्षा करनी होगी।2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर हॉलिडे: 4 कारोबारी दिनों का छोटा ट्रेडिंग हफ्ताट्रेडर्स को अपने साप्ताहिक पोजीशनिंग प्लान में इस बात का भी विशेष ध्यान रखना होगा कि आगामी कारोबारी हफ्ता छुट्टियों के चलते केवल चार दिनों का रहने वाला है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के वर्ष 2026 के आधिकारिक हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के राष्ट्रीय पर्व के उपलक्ष्य में भारतीय शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और कमोडिटी डेरिवेटिव्स के सभी सेगमेंट पूरी तरह बंद रहेंगे। शुक्रवार को ट्रेडिंग बंद रहने से साप्ताहिक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) एक्सपायरी और पोजीशन रोलओवर की प्रक्रिया पहले ही पूरी करनी होगी।संक्षेप में समझें तो 28 सितंबर से शुरू हो रहा यह हफ्ता निवेशकों के लिए अत्यधिक सतर्कता बरतने का है। एक तरफ जहां वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, क्रूड ऑयल और एफआईआई की बिकवाली बाजार पर दबाव बना सकती है, वहीं घरेलू आर्थिक आंकड़े और आईपीओ बाजार का उत्साह चुनिंदा सेक्टरों में तेजी के मौके बना सकता है। निवेशकों को जोखिम प्रबंधन (स्टॉप लॉस) के सख्त नियमों का पालन करते हुए ही इस वोलेटाइल बाजार में कदम बढ़ाना चाहिए।
राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ शुरू हो गया है। इस बार अभ्यास में अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का F-35A स्टील्थ फाइटर जेट खास आकर्षण है। F-35 पहली बार भारत की जमीन पर किसी सैन्य अभ्यास में भारतीय वायुसेना के साथ शामिल हो रहा है। अमेरिका के छह […] The post पहली बार भारतीय वायुसेना के साथ युद्धाभ्यास करेगा अमेरिकी F-35, 200 जवान भी पहुंचे; ‘तरंग शक्ति’ में 8 देशों की भागीदारी first appeared on Sanjeevni Today .
जिनके कंधों पर टिकी है आधी दुनिया की सुरक्षा, ताइवान संकट के बीच अमेरिकी कमांडर का बड़ा मास्टरप्लान
वैश्विक भू-राजनीति और सैन्य संतुलन के आधुनिक इतिहास में ऐसा दौर बहुत कम देखने को मिलता है जब किसी एक सैन्य कमांडर के फैसलों पर आधी दुनिया का भविष्य टिका हो। संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे विशाल, रणनीतिक और ताकतवर सैन्य शाखा 'यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड' (USINDOPACOM) के मुखिया एडमिरल सैमुअल पापारो इस समय दुनिया के उसी केंद्र बिंदु पर खड़े हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के मैदान में विजय पताका फहराने को ही सेना की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है, तब चार सितारों वाले इस शीर्ष अमेरिकी कमांडर का फलसफा एकदम अलग और व्यावहारिक है। एडमिरल पापारो का मानना है कि एक सच्चे और निष्ठावान फौजी की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत युद्ध लड़ने में नहीं, बल्कि अपनी अचूक शक्ति और तैयारी से युद्ध को होने से रोक देने में निहित है।आज जब प्रशांत महासागर से लेकर हिंद महासागर तक तनाव का दायरा लगातार फैल रहा है, पापारो के कंधों पर सबसे संवेदनशील जिम्मेदारी है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन की बढ़ती आक्रामकता को बांधकर रखना और ताइवान जलडमरूमध्य में मंडराते तीसरे विश्व युद्ध के काले बादलों को छांटना है। अपनी सख्त कार्यशैली, रणनीतिक अनुशासन और जमीनी यथार्थवाद के लिए मशहूर पापारो आज वाशिंगटन से लेकर टोक्यो, कैनबरा और नई दिल्ली तक रक्षा रणनीतिकारों के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं।'टॉप गन' के मावेरिक नहीं, अनुशासित 'आइसमैन' बने जीवन की प्रेरणासैमुअल पापारो के व्यक्तित्व और नेतृत्व शैली की जड़ें उनके छात्र जीवन से जुड़ी हुई हैं। यह बात साल 1986 की है, जब वे पेंसिल्वेनिया के एक कॉलेज में अपनी पढ़ाई कर रहे थे। एक शाम वे अपनी मंगेतर (अब पत्नी) मॉरीन के साथ सिनेमाघर में उस दौर की ब्लॉकबस्टर हॉलीवुड फिल्म 'टॉप गन' देखने पहुंचे। उस जमाने में टॉम क्रूज द्वारा निभाया गया 'मावेरिक' का बेपरवाह, आक्रामक और नियमों को ताक पर रखने वाला किरदार हर नौजवान का रोल मॉडल बन चुका था। मगर आश्चर्यजनक रूप से युवा पापारो को मावेरिक के बजाय उसका प्रतिद्वंद्वी किरदार 'आइसमैन' (टॉम काजेंस्की) सबसे ज्यादा प्रभावित कर गया।पापारो ने महसूस किया कि मावेरिक का अंदाज रोमांचक तो हो सकता है, लेकिन वास्तविक युद्ध में हवा-हवाई आत्मविश्वास और अनियंत्रित गुस्सा तबाही लाता है। इसके विपरीत आइसमैन अनुशासन, कड़ी मेहनत, योजनाबद्ध तैयारी और संकट के समय शांत रहकर सटीक फैसले लेने पर भरोसा करता था। यही 'आइसमैन फिलॉसफी' आगे चलकर पापारो के चार दशक लंबे सैन्य सफर की रीढ़ बन गई। वे आज भी मानते हैं कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और मिसाइल युद्ध में वही कमांडर जीतता है जिसका दिमाग दबाव में बर्फ की तरह ठंडा और स्थिर रहता है।सादगी भरी पृष्ठभूमि और नौसेना से पुश्तैनी जुड़ाव: पहली पीढ़ी के ग्रेजुएट का सफरएडमिरल पापारो को वर्दी और समंदर की लहरों का संस्कार विरासत में मिला था, हालांकि उनका पारिवारिक परिवेश बेहद सादगी और संघर्षों से भरा था। उनके दादा ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में अमेरिकी नौसेना के निर्माण दस्ते (सीबीज) में अपनी सेवाएं दी थीं। उनके पिता सैमुअल सीनियर ने अमेरिकी मरीन कोर में सेवा की और बाद में यूएसएस जॉन एफ. कैनेडी तथा किट्टी हॉक जैसे विशालकाय विमानवाहक पोतों (एयरक्राफ्ट कैरियर्स) की देखरेख और तकनीकी रख-रखाव में अहम भूमिका निभाई। घर की आर्थिक स्थिति को संवारने के लिए उनकी मां ने दक्षिण फिलाडेल्फिया के एक साधारण हेयर सैलून में बाल धोने और स्टोर में मेकअप काउंटर पर काम किया।पापारो अपने समूचे परिवार की पहली पीढ़ी के सदस्य थे जिन्होंने उच्च शिक्षा की दहलीज पार की। विलेनोवा कैथोलिक यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अमेरिकी नौसेना की प्रतिष्ठित 'टॉपगन' (नेवल फाइटर वेपन्स स्कूल) से फाइटर पायलट के रूप में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। एफ/ए-18 हॉर्नेट जैसे घातक लड़ाकू विमान उड़ाते हुए उन्होंने हजारों घंटे की उड़ान भरी और कैरियर्स पर सैकड़ों खतरनाक लैंडिंग कीं। अपनी असाधारण योग्यता के दम पर वे धीरे-धीरे अमेरिकी नौसेना की कमान श्रृंखला में शीर्ष पर पहुंचते गए।आधी दुनिया पर पैनी निगरानी: 4 लाख सैनिक, 5 कैरियर और 200 युद्धपोतएडमिरल पापारो आज जिस यूएस इंडो-पैसिफिक कमान का नेतृत्व कर रहे हैं, उसका भौगोलिक विस्तार अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी समुद्री सीमा तक फैला हुआ है। इस विशाल क्षेत्र में दुनिया की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्ग आते हैं। उनकी सीधी कमान में करीब 4 लाख सैन्य और असैन्य जवान, 5 विशालकाय परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स, लगभग 200 आधुनिक विध्वंसक व युद्धपोत और 1,000 से अधिक अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात हैं।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का नौसैनिक वर्चस्व निर्विवाद रहा है, लेकिन अब राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाला चीन इस प्रभुत्व को सीधी चुनौती दे रहा है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को 2027 तक ताइवान को सैन्य बल से नियंत्रित करने में सक्षम होने का स्पष्ट समयबद्ध लक्ष्य दे रखा है। ऐसे में पापारो का दायित्व केवल गश्त लगाना नहीं है, बल्कि बीजिंग के योजनाकारों के मन में यह मनोवैज्ञानिक डर बिठाना है कि ताइवान पर किसी भी सैन्य दुस्साहस की कीमत चीन की अर्थव्यवस्था और सेना के लिए पूरी तरह असहनीय होगी।विवादों और सुर्खियों से दूरी: 'युद्ध की तैयारी ताकि जंग कभी लड़नी ही न पड़े'सैन्य गलियारों में एडमिरल पापारो की पहचान एक ऐसे शांत और पेशेवर अधिकारी की है जो राजनीतिक बयानबाजी और टीवी की सुर्खियों से कोसों दूर रहते हैं। मध्य पूर्व और ईरान संकट के दौरान भी जब वाशिंगटन में सैन्य विकल्पों पर बहस चल रही थी, तब पापारो ने लाल सागर और फारस की खाड़ी में एयरक्राफ्ट कैरियर्स तथा गाइडेड मिसाइल विध्वंसकों की तैनाती को लेकर बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपनी स्वतंत्र, स्पष्ट और व्यावहारिक सैन्य राय रखी थी। उन्होंने शीर्ष नीति-निर्माताओं और नेतृत्व के समक्ष जमीनी हकीकत का निष्पक्ष आकलन प्रस्तुत किया।एडमिरल पापारो अपने अधिकारियों से अक्सर कहते हैं कि वे किसी जंग को जीतकर इतिहास की किताबों में महान नायक बनने की महत्वाकांक्षा नहीं रखते। उनका एकमात्र और सर्वोच्च लक्ष्य प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखना और शांति की रक्षा करना है। पापारो का मानना है कि सबसे बेहतरीन सेना वह है जिसकी मारक क्षमता देखकर दुश्मन कभी हमला करने की हिम्मत ही न जुटा सके। उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि वे और उनके सैनिक जिस भीषण महायुद्ध की तैयारी दिन-रात कर रहे हैं, मानवता को वह जंग कभी लड़नी ही न पड़े।
अमेरिका कमजोर, हम पहले से ज्यादा तैयार... फिर हमला हुआ तो होगी बड़ी जंग
ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि अमेरिका अच्छी स्थिति में नहीं है. ईरान पहले से ज्यादा तैयार है. अगर अमेरिका फिर हमला करता है तो क्षेत्र में और ज्यादा बड़ी जंग होगी.
लंदन, 27 सितंबर . ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर Sunday को Police ने ‘मेजर इन्सिडेंट’ की घोषणा की. इस एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी वायुसेना भी करती है. एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत अपराध के संदेह में कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद आसपास के कई घरों को खाली कराया गया और सेना ने ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध- अगले हफ्ते तय होगी शेयर बाजार की चाल
मुंबई, भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दौरान कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान युद्ध अपडेट और घरेलू आर्थिक आंकड़े जैसे ऑटो सेल्स, राजकोषीय घाटा, पीएमआई और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।
मार्केट आउटलुक: कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान युद्ध और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से अगले हफ्ते तय होगी शेयर बाजार की चाल
अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में खसरे का प्रकोप बढ़ा, इस साल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 890
वाशिंगटन/पेंसिल्वेनिया, 27 सितंबर . अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य में खसरे के प्रकोप बढ़ रहा है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 23 सितंबर के बाद दो दिनों में ही खसरे के 55 नए मामले रिकॉर्ड हुए. इन नए आंकड़ों के साथ ही 2026 में राज्य में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 890 हो गई है. पेंसिल्वेनिया ... Read more
वाशिंगटन समिट के बाद चीन की ‘पांडा डिप्लोमेसी’, अमेरिका भेजे गए ‘पिंग-पिंग’ और ‘फू शुआंग’
बीजिंग, 27 सितंबर . चीन के President शी जिनपिंग तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर अमेरिका पहुंचे थे. इस दौरान अमेरिकी President ने उनका रेड कार्पेट वेलकम किया ,उनके सम्मान में डिनर रखा, और दोनों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करने को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता भी हुई. चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक काफी ... Read more
Iran America War में IRGC ने Hormuz Strait में उड़ाया अमेरिकी सुरक्षा में तैनात जहाज | Trump
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चल रहे जहाजों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक तेल टैंकर के प्रभावित होने की भी प्रारंभिक सूचना है
चीन के साथ ईरान का ये दांव, क्या अमेरिका के शिकंजे से उसे आज़ाद करा देगा? - BBC
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चीन के साथ ईरान का ये दांव, क्या अमेरिका के शिकंजे से उसे आज़ाद करा देगा?
अमेरिकी नाकेबंदी के बाद ईरान के समुद्री व्यापार में बड़ी बाधाएं पैदा हो गई हैं. ऐसे में चीन और ईरान मिलकर इस समस्या का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं. ये कितनी कारगर साबित हो रही है?
सऊदी अरब बनाएगा परमाणु हथियार?: क्या ट्रंप भी कर रहे मदद, अमेरिका में क्यों बढ़ी चिंता, खुफिया आकलन में खुलासा
जोधपुर में एयरफोर्स का युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ चल रहा है। इसमें दुनिया के खतरनाक लड़ाकू विमान अपनी ताकत दिखा रहे हैं। इस मेगा एयर एक्सरसाइज में पहली बार अमेरिकी वायुसेना का 5वीं जनरेशन का स्टील्थ फाइटर जेट F-35 शामिल हुआ है। 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर चलने वाले युद्धाभ्यास में भारत समेत 8 देशों की वायुसेना के जवान हिस्सा ले रहे हैं। ये वायुसेना आसमान में अपनी ताकत और सामरिक तालमेल का प्रदर्शन कर रही हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी जोधपुर पहुंचे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट शेयर कर युद्धाभ्यास में अमेरिकी वायुसेना की भागीदारी को लेकर खुशी जाहिर की है। अमेरिकी राजदूत ने बताया कि अमेरिका के 6 अत्याधुनिक F-35 लाइटनिंग फाइटर जेट और 200 से ज्यादा अमेरिकी एयरसैनिक पहली बार इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए जोधपुर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि मैं अमेरिका के इन 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को भारतीय वायुसेना और अन्य सहभागी देशों के विमानों के साथ आसमान में उड़ान भरते देखने को लेकर उत्साहित हूं। देखिए, तरंग शक्ति-2026 के PHOTOS… हवाई युद्ध तकनीकों का अभ्यास इस युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI, राफेल, तेजस और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और यूएई सहित 8 देशों के लड़ाकू विमान, AWACS (एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) और रिफ्यूलर एयरक्राफ्ट भी युद्धाभ्यास में शामिल हैं। अलग-अलग देशों के लड़ाकू विमान एक साथ उड़ान भरकर रणनीतिक तालमेल और हवाई युद्ध की बारीकियों को साझा कर रहे हैं। भारतीय और विदेशी पायलट जटिल हवाई युद्ध तकनीक, नाइट-फ्लाइंग ऑपरेशन और संयुक्त युद्ध रणनीतियों का अभ्यास कर रहे हैं। इसके जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। … ये खबर भी पढ़ें… जोधपुर में तैनात दुनिया के शक्तिशाली लड़ाकू विमान:युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ शुरू; 8 देशों के 3 हजार से ज्यादा एयर वॉरियर्स हो रहे शामिल जोधपुर के आसमान में दुनिया के खतरनाक लड़ाकू विमान उड़ान भरेंगे। युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ शनिवार से शुरू हो गया। 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर चलने वाले युद्धाभ्यास में भारत समेत 8 देशों की वायु सेनाओं के जवान हिस्सा ले रहे हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए जमीन के नीचे मौजूद अपने खनिज संसाधनों का पूरा दोहन करना चाहिए, क्योंकि औद्योगिक परियोजनाओं का विरोध होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने ओडिशा में एक लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की, जिससे राज्य में दो लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे और यह विश्वस्तरीय एल्युमीनियम उत्पादन केंद्र बनेगा।
अमेरिका और ईयू ने खारिज किया भविष्य की महामारियों से निपटने वाला यूएन का घोषणापत्र
संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर . अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) ने संयुक्त राष्ट्र के उस घोषणापत्र को खारिज कर दिया है, जिसका मकसद भविष्य में आने वाली महामारियों से निपटने के लिए दुनिया के देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है. हालांकि, India और जर्मनी ने दस्तावेज के कुछ हिस्सों पर चिंता जताई, लेकिन ... Read more
अमेरिकी दबाव में आतंकवादी छोड़े!
एक जाने माने सामरिक विशेषज्ञ ने भारत को ‘पेरेनियल सॉफ्ट स्टेट’ यानी ‘चिरंतन नरम देश’ कहा है।
2028 में क्या अमेरिका में होगा भारतवंशी राष्ट्रपति?: भारतीय मूल के सांसद ने दिया बड़ा बयान, कहा- सक्रिय रहूंगा US-Congressman-ro-khanna-2028-usa-presidential-election-white-house-run-says-what
ग्रीस में बड़ा हादसा! एक्रोपोलिस के पास इमारत ढही, 4 अमेरिकी समेत 6 की मौत
ग्रीस की राजधानी एथेंस के प्लाका इलाके में एक दो मंजिला इमारत गैस रिसाव के कारण हुए जोरदार धमाके से ढह गई. इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई है, जिनमें चार अमेरिकी नागरिक शामिल हैं. धमाके के कारण आसपास की कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और रेस्क्यू ऑपरेशन में दमकल कर्मियों और डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई.
भारत को LPG देने वाला सबसे बड़ा देश बना अमेरिका, US ने जताई खुशी
भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक साल में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और कूटनीति के क्षेत्र में सहयोग में बढ़ोतरी हुई है. अमेरिका अब भारत को LPG सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है.
10वीं-12वीं में फेल: पिता ने मारा ताना तो आईआईटी पहुंचे, आईपीएस मोहिबुल्लाह को अमेरिका देगा एशियन हीरो सम्मान- America honor IPS officer Mohibullah with Asian Hero award once time he was Failed 10th and 12th grades
नॉरईस्टर ने अमेरिका में मचाई तबाही: समंदर उफना, सड़कें डूबीं और हजारों घरों की बिजली गुल, सड़कों पर चलीं नावें- Noreaster wreaks havoc in US seas surge roads submerge thousands of homes lose power boats navigate streets
विदेश के समाचार: थाईलैंड में बाढ़ का कहर, 84,000 लोग प्रभावित; अमेरिका में टिकटॉक ने 958 करोड़ का समझौता किया
एपल को महंगा पड़ा पेटेंट विवाद: अमेरिकी जूरी ने लगाया 5.7 अरब का जुर्माना, फैसले के खिलाफ अपील करेगी कंपनी- Apple Fined Record $5.7 अरब in Haptic Technology Patent Case
अमेरिका में नॉर ईस्टर तूफान का कहर, 400 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल
अमेरिका के ईस्ट कोस्ट में नॉर ईस्टर तूफान की वजह से हवाई सेवाएं प्रभावित हुई हैं. 400 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हुईं, जबकि कई राज्यों में हजारों घरों और कारोबारों की बिजली चली गई. खराब मौसम के बीच तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है.
New Delhi, 26 सितंबर . भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की मेजबानी में बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ का दूसरा संस्करण 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक Rajasthan के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जा रहा है. इसी क्रम में अमेरिकी वायु शक्ति जोधपुर पहुंच चुकी है. यह जानकारी India में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ... Read more
राजस्थान के जोधपुर में 'तरंग शक्ति 2026' युद्धाभ्यास शुरू, अमेरिकी वायु शक्ति पहुंची जोधपुर: सर्जियो गोर
चीन-अमेरिका संबंधों के विकास के लिए नई उम्मीद तय करें
बीजिंग, 26 सितंबर . चीनी President शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा संपन्न हो गई है. यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने चीन-अमेरिका संबंधों के विषय को और अधिक समृद्ध कर सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता पर आधारित रणनीतिक स्थिर व रचनात्मक संबंध स्थापित करने पर सहमति बनाई. इस बारे में चीनी रनमिन विश्वविद्यालय के ... Read more
भारतीय महिला ने अमेरिका में हर महीने खर्च का बताया हिसाब-किताब, बोली- हमारा 4 लोगों का परिवार है
भारतीय महिला ने अमेरिका में हर महीने खर्च का बताया हिसाब-किताब, बोली- हमारा 4 लोगों का परिवार है
वांग यी ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अमेरिका की राजकीय यात्रा पर चर्चा की
बीजिंग, 26 सितंबर . 23 से 25 सितंबर तक चीनी President शी चिनफिंग ने अमेरिका की राजकीय यात्रा की. यात्रा के समापन पर, सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पत्रकारों को इस यात्रा के बारे में जानकारी दी. इस मौके पर वांग यी ने कहा ... Read more
वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण बदलती सप्लाई चेन से प्रभावित हो रही है, जिससे महंगाई और खपत में कमी का खतरा बढ़ रहा है।
कौन हैं अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक जिनको अपने देश जाने देने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल - BBC
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अमेरिका जाकर भी शी जिनपिंग यूएन महासभा नहीं गए, क्या है इसके पीछे की रणनीति? - BBC
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Donald Trump ने Truth Social पर शेयर किया नक्शा, Strait of Hormuz को बताया नया अमेरिकी इलाका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक नक्शा शेयर किया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ट्रंप स्ट्रेट (Trump Strait) का नाम दिया गया है। यह कदम ईरान के उस सात-दिवसीय फ्रेमवर्क प्रस्ताव को खारिज करने के बाद उठाया गया है, जिसका मकसद इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलना और परमाणु बातचीत को दोबारा शुरू करना था। 'द वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, ट्रंप का कहना था कि ईरान कभी परमाणु बम हासिल नहीं कर पाएगा; उन्होंने तेहरान के उनकी शर्तों को मानने पर संदेह जताया और चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा फिर से बमबारी अभियान शुरू करने की प्रबल संभावना बनी हुई है। इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा था कि अगर वाशिंगटन तेहरान की शर्तों को मान ले, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य समुद्री आवाजाही सात दिनों के भीतर बहाल की जा सकती है। प्रस्तावित शर्तों के तहत अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटानी थी, ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने थे और लेबनान में युद्धविराम का सम्मान करना था। इसे भी पढ़ें: 8 महीने की मेहनत से स्वर्ण तक, Sunil Kumar ने बताया कैसे तैयार हुई भारत की चैंपियन टीम अरागची ने कहा अगर ज़रूरी शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है और सात दिनों के भीतर सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है। अब फैसला अमेरिका को करना है। उन्होंने आगे कहा सात दिन की समय-सीमा तभी शुरू होगी जब अमेरिका इस योजना को स्वीकार कर लेगा। यह घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य पर संभावित अमेरिकी नियंत्रण के बारे में ट्रम्प के पहले के बयानों के बाद हुआ है। अगस्त में, उन्होंने एक नक्शा जारी किया था जिसमें संकेत दिया गया था कि यह जलमार्ग अमेरिका का नया इलाका बन सकता है। ट्रम्प ने पहले होर्मुज को अमेरिकी इलाका घोषित करने के विचार को बेहतरीन विचार बताया था और कहा था कि वाशिंगटन अपनी जारी नाकेबंदी के ज़रिए इस जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है। ट्रम्प ने कहा मुझे लगता है कि यह एक बेहतरीन विचार है। मेरा मतलब है, हम नाकेबंदी के ज़रिए इसे नियंत्रित करते हैं। मुझे इसे अपना इलाका घोषित करने का विचार पसंद है। हमारा इस जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है। इसे भी पढ़ें: सब पर दादागिरी झाड़ते रहे ट्रंप, मगर कोई झुक नहीं रहा था! अब तो खुद US President ने ही अपनी 'सीमित शक्तियों' का खुलासा कर दिया यह मानते हुए कि तेहरान के पास माइन्स (बारूदी सुरंगों) का इस्तेमाल करके समुद्री यातायात में बाधा डालने की क्षमता है, उन्होंने कहा कि अमेरिका की नाकेबंदी सफल रही है। वॉशिंगटन के साथ चल रहे तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। 'द वॉशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, युद्ध से पहले दुनिया भर में व्यापार होने वाले तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुजरता था। शिपिंग में लगातार आ रही रुकावटों ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर असर डाला है और अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है।
अमेरिकी प्रतिबंध से मुश्किलें बढ़ीं, इराक ने मानवीय आधार पर मांगी रियायत
बगदाद, 26 सितंबर . इराक Government ने Saturday को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों से कुछ हवाईअड्डों को छूट दिलाने के लिए वाशिंगटन से सीधी बातचीत कर रही है, ताकि ईरान के साथ फ्लाइट्स फिर से शुरू हो सकें. इराक के Prime Minister अली अल-जैदी के मीडिया कार्यालय ने कहा कि ... Read more
कौन हैं अमेरिकी नागरिक वैनडाइक जिनको अपने देश जाने देने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कथित म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में गिरफ़्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एनआईए की विशेष अदालत ने पहले ही डिफ़ॉल्ट बेल दी थी और अब उन्हें अपने देश लौटने की इजाज़त दे दी गई है.
अंतरिक्ष में शुरू हो रही नई जंग? अमेरिका के पास पहुंची नई Space Warfare तकनीक, चीन और भारत भी तैयार
अंतरिक्ष में शुरू हो रही नई जंग? अमेरिका के पास पहुंची नई Space Warfare तकनीक, चीन और भारत भी तैयार
24 सितंबर को तिहाड़ जेल से निकला मैथ्यू वैनडाइक अमेरिका की उड़ान भर चुका है। वही भाड़े का सैनिक मैथ्यू, जिसे 6 महीने पहले भारत की सबसे सख्त आतंकवाद-रोधी एजेंसी NIA ने पकड़ा था और UAPA जैसा कड़ा कानून लगाया था। आखिर कौन है मैथ्यू, UAPA लगने के बावजूद भारत से जाने क्यों दिया गया और क्या वापस लौटेगा; 3 चैप्टर्स में पूरी कहानी… मैथ्यू वैनडाइक 1981 में अमेरिका के बाल्टीमोर में पैदा हुआ। वो खुद को मर्सिनरी बताता है, यानी भाड़े का सैनिक, जो पैसों के बदले किसी भी देश या संगठन के लिए लड़ सकता है। मैथ्यू की वेबसाइट के मुताबिक, वो 'Sons of Liberty International' (SOLI) नाम की प्राइवेट मिलिट्री का फाउंडर, जंग कवर करने वाला पत्रकार, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर है। वह सीरिया और इराक जैसे देशों में युद्धबंदी भी रहा है। पिछले दो दशकों में उसने दुनियाभर में कई ऑपरेशन किए… तो मैथ्यू भारत में क्या कर रहा था? गिरफ्तारी के वक्त NIA ने आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, यानी UAPA की धारा 18 लगाई, जो आतंकी साजिश, कोशिश, समर्थन, उकसाने या मदद करने से जुड़ी है। UAPA के तहत जांच पूरी करके 180 दिनों में चार्जशीट दायर करनी होती है, जो मैथ्यू के मामले में 8 सितंबर 2026 को खत्म हो रही थी। NIA ने 8 सितंबर को चार्जशीट दाखिल तो कर दी, लेकिन UAPA की धाराओं के बजाय इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 लगाईं। धारा 21 वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में दाखिल होने से जुड़ी है, जबकि धारा 23 वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रुकने या वीजा नियमों को तोड़ने से जुड़ी है। NIA का तर्क था कि जांच अब भी जारी है और UAPA के तहत अपराध की पुष्टि करने के लिए अभी और वक्त चाहिए। यहीं से कानूनी छूट का एक मौका बना… कोर्ट छूट के साथ कुछ शर्तें भी लगाईं… इसके बाद 24 सितंबर की रात मैथ्यू और बाकी 6 आरोपी तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। इस पर कई विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 23-26 मई को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने मैथ्यू का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव ने यह नतीजा तय किया, लेकिन भारत को बदले में क्या मिला? इससे भी अहम है कि इन विदेशी संदिग्धों को वीजा कैसे मिला और इन्हें भारत के रास्ते म्यांमार जाने की इजाजत कैसे मिली? AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘UAPA के तहत किसके खिलाफ चार्जशीट दायर की जानी चाहिए, यह सर्जियो गोर तय करते हैं। भारतीय नागरिक UAPA के तहत 9 से 10 साल तक जेल में सड़ सकते हैं, क्योंकि उनके पास सर्जियो गोर नहीं हैं।’ स्ट्रैटजिक अफेयर्स एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि भारत ने बार-बार कूटनीतिक या रणनीतिक दबाव के तहत विदेशी नागरिकों या संस्थाओं के खिलाफ हाई-प्रोफाइल आपराधिक कार्यवाहियों को कमजोर कर दिया गया, छोड़ दिया गया या बेअसर कर दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक महीने बाद मैथ्यू और बाकी 6 आरोपियों को भारत लौटना होगा और लौटने के 72 घंटों के भीतर कोर्ट को बताना होगा। सीनियर एडवोकेट सुमित नेमा बताते हैं कि अगर खुद जांच एजेंसी यह मान रही है कि जांच में काफी समय लगेगा और इस दौरान आरोपी की शारीरिक मौजूदगी जरूरी नहीं है, तो किसी विदेशी आरोपी के वापस न आने की आशंका के आधार पर उसे लंबे समय तक भारत में रहने के लिए मजबूर करना उचित नहीं माना जा सकता। सुमित कहते हैं कि कोर्ट के पास आरोपी के पासपोर्ट समेत सारी डिटेल्स हैं। अगर जरूरत पड़ी तो आरोपी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया जा सकता है। वो आदेश नहीं मानेगा कि आशंका पर उसे अपने देश जाने से रोका नहीं जा सकता है। फिलहाल NIA की UAPA को लेकर जांच जारी है। अगर एजेंसी को सबूत मिले और अपराधों की पुष्टि हुई, तो वह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है। ऐसा हुआ तो मैथ्यू पर फिर से UAPA के तहत आतंकी गतिविधियों के आरोप फिर से लग सकते हैं और केस चल सकता है। लेकिन ऐसा पहले भी हो चुका है कि जब विदेशी आरोपी एक बार छूटने के बाद वापस लौटे ही नहीं। 3 चर्चित मामले… ऐसे में अगर मैथ्यू तय समय पर नहीं लौटता, तो भारत के पास 2 विकल्प हैं- जमानत रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी करना या भारत-अमेरिका की प्रत्यर्पण संधि (1997) के तहत औपचारिक प्रत्यर्पण की मांग करना। --------------- ये भी खबर पढ़िए…. मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम रख पाकिस्तान कैसे करोड़ों जुटाएगा; ये मोस्ट वॉन्टेड आतंकी आखिर छिपा कहां है जैश-ए-मोहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर के सिर पर पाकिस्तान ने 70 लाख रुपए का इनाम रखा है। पाकिस्तान 2021 से दावा करता आ रहा है कि मसूद अफगानिस्तान भाग चुका है, जबकि भारतीय एजेंसियों का मानना है कि वो पाकिस्तान में ही छिपा है। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत तो हुई लेकिन बैठक बेनतीजा!
अमेरिका-ईरान वार्ता के प्रमुख कूटनीतिक मायने The post अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत तो हुई लेकिन बैठक बेनतीजा! appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
होर्मुज नहीं, ‘ट्रंप स्ट्रेट’...अमेरिकी राष्ट्रपति ने शेयर किया नक्शा; फिर भड़केगी आग?
अमेरिका और ईरान के बीच जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। ईरान के सात दिनों के सीजफायर को ठुकराने के बाद डोनाल्ड ट्रंप फिर से भड़क उठे हैं। अब ट्रंप ने जो किया है, उससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में अमेरिका का रुख और ज्यादा आक्रामक रहेगा।
भारतीय सेना के प्रशिक्षित फौजी श्वान 'युद्ध अभ्यास-2026' में अमेरिकी सैनिकों के साथ अपनी विशेष क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। औली में आयोजित इस संयुक्त अभ्यास में राइस, विक्टर, जैक और राउडी जैसे श्वान ट्रैकिंग, विस्फोटक पहचान और भवन तलाशी में विशेषज्ञता साझा कर रहे हैं।
शी चिनफिंग और फंग लियुआन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी के साथ ‘चाय पर चर्चा’ की
बीजिंग, 26 सितंबर . चीनी President शी चिनफिंग और उनकी पत्नी फंग लियुआन ने अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया के साथ व्हाइट हाउस में चाय-परिचर्चा की. दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने चीन-अमेरिका संबंधों की स्थिति की परिभाषा को और समृद्ध करने तथा संयुक्त रूप से ‘सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता पर आधारित रचनात्मक ... Read more
शी चिनफिंग और फंग लियुआन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी के साथ 'चाय पर चर्चा' की
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी फंग लियुआन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया के साथ व्हाइट हाउस में चाय-परिचर्चा की। दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने चीन-अमेरिका संबंधों की स्थिति की परिभाषा को और समृद्ध करने तथा संयुक्त रूप से 'सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता पर आधारित रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता संबंध' स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।
शी चिनफिंग और फंग लियुआन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी के साथ 'चाय पर चर्चा' की
शी चिनफिंग और फंग लियुआन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी के साथ 'चाय पर चर्चा' की
चीन-अमेरिका संबंधों की नई स्थिति को लागू करने के लिए राष्ट्रपति शी ने दिशा की निर्धारित
बीजिंग, 26 सितंबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर, चीनी President शी चिनफिंग ने 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की राजकीय यात्रा की. दोनों देशों के नेताओं ने छह महीने से भी कम समय में फिर से मुलाकात की और कई नई सहमतियां बनीं, जिसने चीन-अमेरिका रचनात्मक सामरिक स्थिरता संबंधों के आंतरिक ... Read more
सऊदी अरब ने परमाणु बम का विकल्प खुला रखा? वीडियो में जाने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट से बढ़ी हलचल
सऊदी अरब ने परमाणु बम का विकल्प खुला रखा? वीडियो में जाने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट से बढ़ी हलचल
ईरान पर फिर बरसेंगे अमेरिकी बम? ट्रंप ने 7 दिन के सीजफायर प्लान को ठुकराया, वीडियो में जाने मिडटर्म चुनाव के बाद हमले की रिपोर्ट
जिनपिंग के अमेरिका दौरे पर ट्रंप ने की मेजबानी, बाहर पेलोसी ने किया विरोध प्रदर्शन
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन दिनों अमेरिका के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं. व्हाइट हाउस के भीतर जहां उनका भव्य और कूटनीतिक स्वागत किया गया, वहीं वाशिंगटन की सड़कों पर उनके खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के सम्मान में व्हाइट हाउस में सैन्य रिव्यू और एक भव्य स्टेट डिनर का आयोजन किया.
ईरान ने अमेरिका को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम, हॉर्मुज पर कही ये बात
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख ने अमेरिका के समक्ष शांति समझौते के लिए 7 दिनों की समय सीमा तय की है. ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उसकी सात शर्तें नहीं मानीं, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक महायुद्ध छिड़ना तय है. इस अल्टीमेटम के बीच मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति बहुत नाजुक हो गई है.
BREAKING :अमेरिकी सरकारी वेबसाइट्स से AI एजेंट की छेड़छाड़: संवेदनशील डेटा एक्सेस कर ऑनलाइन डाला, टेक जगत में मची खलबली
अमेरिका-सऊदी डील पर बड़ा खुलासा! क्या सिविल न्यूक्लियर की आड़ में परमाणु बम बनाएगा सऊदी?
अमेरिका-सऊदी डील पर बड़ा खुलासा! क्या सिविल न्यूक्लियर की आड़ में परमाणु बम बनाएगा सऊदी?
चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के AI एजेंट्स ने अमेरिकी सरकार की वेबसाइट में छेड़छाड़ की। इसमें अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC और कॉमर्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट शामिल है। ओपनएआई ने इसकी जानकारी दी। हालांकि इस छेड़छाड़ से किसी तरह का कोई नकुसान नहीं हुआ। एआई एजेंट्स ने किसी भी नॉन-पब्लिक या गोपनीय डेटा को एक्सेस नहीं किया। कंपनी ने कहा कि AI एजेंट का मकसद सरकारी वेबसाइट से सटीक जानकारी जुटाना था। AI एजेंट ने डेटा की कॉपी बनाई, इंटरनेट पर पोस्ट की AI एजेंट्स ने अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC के डेटा की कॉपी बनाई और उसे इंटरनेट पर पोस्ट कर दिया, जबकि उन्हें ऐसा न करने के साफ निर्देश दिए गए थे। कॉमर्स डिपार्टमेंट के मामले में एआई एजेंट ने यूएस सेन्सस डेटा की वेबसाइट को ऐसे प्रोग्रामिंग इंटरफेस से एक्सेस किया, जो उस काम के लिए नहीं बनाया गया था। AI एजेंट ने शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट में भी घुसने का प्रयास किया। हालांकि, वो इसमें कामयाब नहीं हो सका। एजेंसियां बोलीं- कोई संवेदनशील डेटा लीक नहीं मामला सामने आने के बाद शेयर बाजार नियामक SEC के प्रवक्ता ने कहा कि एआई एजेंट्स ने किसी भी नॉन-पब्लिक या गोपनीय डेटा को एक्सेस नहीं किया। एजुकेशन डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने बताया कि डेटाबेस को कोई नुकसान नहीं हुआ हैं। वहीं, कॉमर्स डिपार्टमेंट की ओर से इस पर तुरंत कोई बयान नहीं आया है। कंपनी बोली- भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी साइट्स पर गए थे एजेंट ओपनएआई ने बताया कि यह गड़बड़ी तब हुई जब उनके एआई सिस्टम की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग के दौरान एआई से कई सवाल पूछे गए थे। एआई मॉडल भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी वेबसाइटों पर ही जाते हैं, इसलिए वह खुद-ब-खुद उन साइट्स पर गए। कंपनी का कहना है कि एआई का मकसद कोई गड़बड़ करना नहीं, बल्कि सरकारी साइट्स से आम जानकारी जुटाना ही था। ये एक सामान्य रिसर्च का काम है। AI एजेंट ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट में भी घुस गए थे दो दिन दिन पहले खुलासा हुआ था इन ओपन एआई के AI एजेंट्स ने ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट का भी एक्सेस हासिल कर लिया था। यह घटना जून में हुई थी, लेकिन सरकार को इसकी जानकारी सितंबर में मिली। एआई को बेकाबू होने से रोकने के लिए 'किल स्विच' की बात हो रही कई देश और एक्सपर्ट चाहते हैं कि एआई कंपनियों के लिए एक इमरजेंसी 'किल स्विच' बनाया जाए, जिससे खतरा दिखने पर पूरे एआई को एक झटके में बंद किया जा सके। ओपनएआई ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स तैयार करने में जुटी है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर के नेटवर्क से जुड़े AI को किसी एक स्विच से बंद करना लगभग नामुमकिन है। भविष्य के खतरों पर एआई विशेषज्ञों का क्या कहना है? यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के डॉ. हैमंड पिएर्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामले आगे चलकर और खतरनाक हो सकते हैं। ये सरकारों के लिए खतरे की बड़ी घंटी है। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के डॉ. राफेल सिरिएलो ने कहा कि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन एआई लगातार ताकतवर होता जा रहा है। इसकी 24 घंटे निगरानी जरूरी है। किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग को अनिवार्य करना होगा। ----------------------------------- AI से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गेट्स बोले-AI के गलत इस्तेमाल से 100 करोड़ मौतें संभव:अमेरिकी सरकार इस पर कानून बनाए; ऑस्ट्रेलिया में AI सरकारी पोर्टल हैक कर चुका माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने चेतावनी दी है कि गलत हाथों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इतना ताकतवर हो सकता है कि इससे 100 करोड़ लोगों की मौत तक हो सकती है। एक इंटरव्यू में गेट्स ने कहा कि बुरे इरादे वाले लोगों के साथ AI टूल्स का मेल अब तक के किसी भी हथियार से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। उन्होंने खतरे को गंभीरता से लेने को कहा है। पूरी खबर पढ़ें…
चैट जीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपन एआई के AI एजेंट्स ने अमेरिकी सरकार की वेबसाइट में एक्सेस बना लिया। इसमें अमेरिकी शेयर बाजार नियामक, व्यापार विभाग की वेबसाइट शामिल है। ये खुलासा हाल ही में आई एक रिपोर्ट में हुआ है। दो दिन दिन पहले खुलासा हुआ था इन AI एजेंट्स ने ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट का भी एक्सेस हासिल कर लिया था। AI रिसर्च नॉन-प्रॉफिट 'ट्रांसल्यूस' के अनुसार… एआई एजेंट्स ने अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC के डेटा की कॉपी बनाई और उसे इंटरनेट पर पोस्ट कर दिया, जबकि उन्हें ऐसा न करने के साफ निर्देश दिए गए थे। कॉमर्स डिपार्टमेंट के मामले में एआई एजेंट ने यूएस सेन्सस डेटा वेबसाइट को ऐसे प्रोग्रामिंग इंटरफेस से एक्सेस किया, जो उस काम के लिए नहीं बनाया गया था। AI एजेंट ने शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट में भी घुसने का प्रयास किया। हालांकि वो इसमें कामयाब नहीं हो सके। सरकारी एजेंसियां बोलीं- कोई संवेदनशील डेटा लीक नहीं मामला सामने आने के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने सफाई दी है। SEC के प्रवक्ता ने कहा कि एआई एजेंट्स ने किसी भी नॉन-पब्लिक या गोपनीय डेटा को एक्सेस नहीं किया। एजुकेशन डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने बताया कि डेटाबेस को कोई नुकसान नहीं हुआ हैं। वहीं कॉमर्स डिपार्टमेंट की ओर से इस पर तुरंत कोई बयान नहीं आया है। कंपनी बोली- भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी साइट्स पर गए थे ओपनएआई ने बताया कि यह गड़बड़ी तब हुई जब उनके एआई सिस्टम की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग के दौरान एआई से कई सवाल पूछे गए थे। एआई मॉडल भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी वेबसाइटों पर ही जाते हैं, इसलिए वह खुद-ब-खुद उन साइट्स पर गए। कंपनी का कहना है कि एआई का मकसद कोई गड़बड़ करना नहीं, बल्कि सरकारी साइट्स से आम जानकारी जुटाना ही था। ये एक सामान्य रिसर्च का काम है। एआई को बेकाबू होने से रोकने के लिए 'किल स्विच' की बात हो रही कई देश और एक्सपर्ट चाहते हैं कि एआई कंपनियों के लिए एक इमरजेंसी 'किल स्विच' बनाया जाए, जिससे खतरा दिखने पर पूरे एआई को एक झटके में बंद किया जा सके। ओपनएआई ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स तैयार करने में जुटी है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर के नेटवर्क से जुड़े AI को किसी एक स्विच से बंद करना लगभग नामुमकिन है। भविष्य के खतरों पर एआई विशेषज्ञों का क्या कहना है? यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के डॉ. हैमंड पिएर्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामले आगे चलकर और खतरनाक हो सकते हैं। ये सरकारों के लिए खतरे की बड़ी घंटी है। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के डॉ. राफेल सिरिएलो ने कहा कि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन एआई लगातार ताकतवर होता जा रहा है। इसकी 24 घंटे निगरानी जरूरी है। किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग को अनिवार्य करना होगा।
ईरान की मिसाइल का खौफ... समंदर में 1200 KM पीछे हटी अमेरिकी नौसेना
अमेरिकी नौसेना ने ईरान के पास से जहाज हटाए. सैटेलाइट तस्वीरों में कोई कैरियर या डेस्ट्रॉयर नहीं दिखे. कारण कासिम बसीर मिसाइल बताया जा रहा है. 1200 किमी रेंज वाली इस मिसाइल ने अमेरिकी जहाजों को पीछे धकेला.
अमेरिका जाकर भी शी जिनपिंग यूएन महासभा नहीं गए, क्या है इसके पीछे की रणनीति?
शी ने 2012 के अंत में चीन के शीर्ष नेता बनने के बाद से केवल एक बार संयुक्त राष्ट्र महासभा में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लिया है. शी के शामिल नहीं होने के कई कारण बताए जा रहे हैं.
जब वियतनाम की अगस्त क्रांति में मारा गया पहला अमेरिकी
आज के दिन ही वियतनाम की धरती पर पहली बार कोई अमेरिकी की हत्या हुआ थी. तब वियतनाम युद्ध शुरू भी नहीं हुआ था.
ग्रेटर नोएडा: इंटरनेशनल ट्रेड शो में छाई अलीगढ़ की कचौड़ी-चमचम, चार दिन में अमेरिका तक मिठाई डिलीवरी
ग्रेटर नोएडा इंटरनेशनल ट्रेड शो में अलीगढ़ की कचौड़ी, चमचम, सोन-पापड़ी, केसर पेड़ा, दालमोठ छाए। 80 देशों के उद्यमी आए, देसी-विदेशी मेहमानों ने स्वाद चखा।
'भारत-अमेरिका संबंधों में अड़चन रहा है व्यापार': ट्रंप प्रशासन बोला- ट्रेड डील का 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरा us-india-trade-deal-90-percent-complete-bilateral-relations-state-department-official
China Nuclear Test: क्या लोप नूर की नमक की गुफाओं में परमाणु परीक्षण कर रहा है चीन? समझें अमेरिका के दावे और डीकपलिंग तकनीक
आजाद पंक्षी की तरह भारत से उड़ गया अमेरिकी नागरिक वैनडाइक, NIA ने रोकने पर नहीं दिया जोर
NIA की UAPA जांच के बीच अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक समेत 6 यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए भारत छोड़ने की अनुमति मिली है। मामले में ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग और म्यांमार के सशस्त्र समूहों से जुड़े आरोपों की जांच जारी है।
अमेरिका के 22 राज्यों ने 1,00,000 डॉलर की एच-1बी फीस का विरोध किया
वॉशिंगटन, 26 सितंबर . अमेरिका के 22 अटॉर्नी जनरल के एक समूह ने ट्रंप प्रशासन के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें कुछ एच-1बी वीजा याचिकाओं पर 100,000 डॉलर से ज्यादा की फीस लगाने की बात कही गई है. उनका तर्क है कि यह कदम गैर-कानूनी है और इससे शिक्षकों, डॉक्टरों और नर्सों की ... Read more
ईरान ने अमेरिका को दिया ऑफर, रखीं ये 3 शर्तें!
ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का सात दिन का प्रस्ताव रखा है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, अमेरिका को नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में राहत देने और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम की दिशा में कदम उठाने होंगे. इसके बाद सातवें दिन होर्मुज खोलने और अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई है.
अमेरिका : एरिजोना में इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में 379 लोगों पर आरोप
वॉशिंगटन, 26 सितंबर . अमेरिका के एरिजोना में एक हफ्ते तक चले एनफोर्समेंट ऑपरेशन ने 379 लोगों पर इमिग्रेशन से जुड़े अपराधों के आरोप लगाए हैं. इनमें गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने, देश से निकाले जाने के बाद दोबारा अवैध रूप से आने और प्रवासियों की कथित तस्करी से जुड़े मामले शामिल हैं. ... Read more
ईरान को बर्बाद करने की तैयारी कर रहे ट्रंप? अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में किया गया बड़ा दावा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और नवंबर के अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की संभावना जताई है।
ईरान पर फिर बरसेगा अमेरिकी कहर?: ट्रंप ने ठुकराया तेहरान का प्रस्ताव, नवंबर चुनाव के बाद दोबारा हमले के संकेत Will US strike Iran again Trump rejects Tehran proposal hints at renewed attacks after the November election.
शी का 11 साल बाद अमेरिका जाना: ट्रंप से मुलाकात में दिखा भव्यता का असर; ठोस समझौतों की कमी, स्पष्ट सहमति नहीं
ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस समझौते का औपचारिक प्रस्ताव खाड़ी देश क़तर के माध्यम से अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचा दिया गया है और अब गेंद अमेरिका के पाले में है।
ईरान का अमेरिका को 7 दिन में जंग रोकने का प्लान, वीडियो में देंखे पहले संघर्ष विराम और तेल प्रतिबंधों में राहत की मांग
ट्रंप-शी की दोस्ती नई ऊंचाई पर, अमेरिका-चीन संबंधों में बड़ा बदलाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शी जिनपिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा का समापन सकारात्मक माहौल में किया
ओपनएआई की फिर से मनमानी: अमेरिकी सरकारी वेबसाइटों को बनाया निशाना, पारदर्शिता को लेकर क्या बोले सैम ऑल्टमैन?
वॉशिंगटन में ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात से अमेरिका-चीन को क्या हुआ हासिल? देखें कूटनीति
डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का शाही अंदाज में स्वागत किया. रेड कार्पेट बिछाया गया, लड़ाकू विमानों की गूंज हुई और अमेरिका के बड़े टेक दिग्गज एक छत के नीचे जुटे. ट्रंप खुद जिनपिंग की अगवानी के लिए एयरबेस पहुंचे. लेकिन इस सब के बाद असली सवाल यही है कि इस मुलाकात से हासिल क्या हुआ? देखें कूटनीति.
अमेरिका में भी शुरू होगा SIR, ट्रंप के फैसले को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को राहत देते हुए राज्यों को मतदाता सूची में नागरिकता सत्यापन के लिए SAVE सिस्टम के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले पर भी रोक लगा दी, जिसने संशोधित SAVE सिस्टम के इस्तेमाल को अवैध बताया था.
ईरान का अमेरिका को ऑफ़र- ये शर्तें पूरी कीं तो सात दिन में खोल देंगे होर्मुज़ स्ट्रेट - BBC
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अमेरिका में ग्रीन कार्ड का संकट गहराया, रोजगार आधारित बैकलॉग 12 लाख पार; भारतीयों को 179 साल तक इंतजार- Green Card crisis deepens in US employment based backlog exceeds 1.2 million Indians face wait up to 179 years
अमेरिका से भेजा था घरेलू सामान के पार्सल में 2 किलो गांजा, जब्त
जयपुर के विदेशी डाकघर में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने अमेरिका से आए पार्सल से 4 पैकेटों में 1.900 किलो हाईब्रिड गांजा बरामद किया है। नशे को एयर सर्कुलेटर के बॉक्स में चार पैकेटों में बेजा गया था। नारकोटिक्स अधिकारियों ने एफपीओ कस्टम्स के सहयोग से अमेरिका से आए पार्सल की तलाशी ली थी। इससे पहले भी जुलाई में स्पेन से आए पार्सल में 370 ग्राम हाइड्रोपोनिक वीड मिली थी। दिसंबर 2025 में थाईलैंड से आए पार्सल में 650 ग्राम हाइड्रोपोनिक वीड मिली थी। पैटर्न देखें तो डाक पार्सल नशे की सप्लाई के लिए नया रास्ता बन रहे हैं। यह मामला इसलिए अहम हो गया है, क्योंकि तीसरी बार विदेशी पार्सलों से हाइड्रोपोनिक वीड पकड़ी जा चुकी है। जांच में अब तक यह पता नहीं लग पाया है कि विदेश से इसे भेजने वाला कौन है और जयपुर या राजस्थान में इसे रिसीव कौन करने वाला था।
सुर्खियां: कई राज्यों में मौसम के अलर्ट जारी; आज से पितृपक्ष की शुरुआत; अमेरिका में जयशंकर पत्रकार पर बरसे-top headlines weather IMD cyclone rain alert jaishankar pak journo pitrupaksha gaya ji national global news
बदलती भू-राजनीति: अमेरिका-चीन शायद टकराव से नियंत्रित प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रहे, इस गर्मजोशी के पीछे क्या?
'फैसला अब अमेरिका करे...', 3 शर्तों के साथ 7 दिन में होर्मुज खोलने को तैयार ईरान
ईरान ने अमेरिका के सामने 7 दिन का प्लान रखा है. तीन शर्तें मानने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की बात कही है. इसके बाद परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू हो सकती है.
अमेरिका से वापस लौटे शी जिनपिंग, ट्रंप से फिर हो सकती है मुलाकात
अमेरिका दौरा खत्म करने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि इस साल उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो और मुलाकातें हो सकती हैं. शी ने ट्रंप और मेलानिया को नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले एपेक सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया है. इसके बाद दिसंबर में अमेरिका में होने वाले जी-20 सम्मेलन में भी दोनों नेता मिल सकते हैं.
राष्ट्रपति शी की ऐतिहासिक अमेरिका यात्रा का अर्थ : चीन-अमेरिका रणनीतिक स्थिरता की मजबूत नींव
राष्ट्रपति शी की ऐतिहासिक अमेरिका यात्रा का अर्थ : चीन-अमेरिका रणनीतिक स्थिरता की मजबूत नींव
भारत-अमेरिका Trade Pact साल के अंत तक हो पूरा, USIBC ने दोनों सरकारों से की मांग
प्रमुख अमेरिकी उद्योग संगठन ने भारत और अमेरिका से इस साल के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और दोनों देशों के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों में अधिक स्पष्टता लाने की अपील की है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा से पहले उद्योग संगठन ने यह बात कही। भारत- अमेरिका व्यावसायिक परिषद (यूएसआईबीसी) के अध्यक्ष अतुल केशप ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और साल के अंत तक पारस्परिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना दोनों देशों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होगा। उन्होंने दोनों सरकारों से ऐसा समझौता करने का आह्वान किया, जिससे व्यापार बाधाएं कम हों और शुल्कों में कमी आए। केशप के अनुसार, ऐसा समझौता इस साल हुई प्रगति को आगे बढ़ाएगा और दोनों देशों के महत्वपूर्ण आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों में अधिक स्पष्टता लाएगाभारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका की शुल्क व्यवस्था में बदलाव के बाद समझौते को लेकर आगे बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि यूएसआईबीसी के सदस्य दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के पक्षधर हैं और दोनों सरकारों के साथ काम करने की उम्मीद करते हैं। गोयल अमेरिका के विस्कॉन्सिन स्थित मिलवॉकी में 30 सितंबर से एक अक्टूबर तक होने वाली जी20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए यहां आएंगे।
चीन और अमेरिका की दोस्ती बनेगी बेमिसाल? जिनपिंग ने दिया न्योता, तो बोले ट्रंप-हम जल्द आएंगे
शी जिनपिंग ने अमेरिका से लौटते वक्त डोनाल्ड ट्रंप को चीन आने का न्योता दिया। इसपर, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा-हां, हम जरूर आएंगे और बहुत सारी बातें करेंगे। दोनों नेताओं के बीच मजबूत बॉन्डिंग दिखी।
'अमेरिकी सैन्य हमले की आशंका पर विचार': कनाडाई PM मार्क कार्नी के बयान से मची खलबली
उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप और पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों के पारंपरिक रक्षा गठबंधनों के इतिहास में एक ऐसा अप्रत्याशित बयान सामने आया है जिसने वाशिंगटन से लेकर ओटावा तक के कूटनीतिक गलियारों में गहरा सन्नाटा और बेचैनी पैदा कर दी है। कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर सभी को हैरान कर दिया है कि उनकी सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा कनाडा के खिलाफ की जाने वाली संभावित सैन्य कार्रवाई के जोखिम और परिदृश्यों पर औपचारिक रूप से विचार किया है। दशकों से दुनिया की सबसे लंबी, शांतिपूर्ण और खुली सीमा साझा करने वाले दो घनिष्ठ सहयोगी देशों के बीच इस प्रकार की सैन्य आशंका की चर्चा होना अपने आप में अभूतपूर्व है। इस बयान के सामने आते ही दोनों देशों की मीडिया, रक्षा थिंक टैंकों और राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। कार्नी ने इस संभावना को स्पष्ट करते हुए कहा कि हालांकि यह घटना बेहद कम संभावना वाली (लो प्रॉबेबिलिटी) है, लेकिन राष्ट्रीय संप्रभुता के नजरिए से यह अत्यंत गंभीर और विनाशकारी जोखिम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने नागरिकों और सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी काल्पनिक खतरे का विश्लेषण करना और रणनीतिक तैयारी रखना किसी भी संप्रभु सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है, भले ही यह उनकी सरकार का प्राथमिक पूर्वानुमान न हो।वाशिंगटन और ओटावा के बीच खटास: व्यापार विवाद और 51वें राज्य का तंजयह असाधारण बयान अचानक शून्य से नहीं उपजा है, बल्कि इसके पीछे पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार बढ़ रही कड़वाहट और भू-राजनीतिक अविश्वास की पृष्ठभूमि है। दोनों देशों के बीच लगभग 8,900 किलोमीटर लंबी साझी सीमा है, जो दुनिया की सबसे बड़ी गैर-सैन्यीकृत सीमा मानी जाती है। बावजूद इसके, पिछले कुछ समय से व्यापार नीतियों, आयात शुल्कों (टैरिफ), ऊर्जा आपूर्ति और सीमा सुरक्षा को लेकर दोनों राजधानियों के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा था। इस विवाद में घी डालने का काम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन विवादास्पद टिप्पणियों ने किया, जिसमें उन्होंने बार-बार व्यंग्यात्मक या आक्रामक लहजे में कनाडा को अमेरिका का '51वां राज्य' बनाने की बात कही थी। कनाडा के राजनीतिक हलकों में इन बयानों को केवल चुनावी बयानबाजी नहीं, बल्कि कनाडाई संप्रभुता और राष्ट्रीय पहचान के लिए एक प्रत्यक्ष अपमान और संप्रभुता पर मंडराते परोक्ष खतरे के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री कार्नी की हालिया टिप्पणी उसी संचित कनाडाई रोष और रक्षात्मक मानसिकता की मुखर अभिव्यक्ति मानी जा रही है।रक्षा बजट का विशाल अंतर: 1 ट्रिलियन डॉलर बनाम 37 बिलियन डॉलरयदि दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं और आर्थिक खर्च की तुलना की जाए, तो संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के बीच का फासला किसी भी पैमाने पर अतुलनीय दिखाई देता है। अमेरिका का सैन्य बजट वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर है, जो दुनिया के अगले कई देशों के कुल रक्षा बजट से भी अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025 में वाशिंगटन का रक्षा खर्च लगभग 895 बिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था, जबकि वर्ष 2026 में यह आंकड़ा ऐतिहासिक स्तर को पार करते हुए लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने लगभग 1.45 ट्रिलियन डॉलर के भारी-भरकम बजट की मांग प्रस्तुत की है। इसके विपरीत, कनाडा की अर्थव्यवस्था और रक्षा प्राथमिकताएं हमेशा से सीमित रही हैं। कनाडा का कुल रक्षा खर्च वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 25 बिलियन डॉलर था, जिसके 2026-27 के दौरान मामूली बढ़ोतरी के साथ 37 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। बजट का यह भारी अंतर साफ दर्शाता है कि अमेरिका अनुसंधान, तकनीकी विकास, हथियार खरीद और वैश्विक सैन्य अभियानों में कनाडा से लगभग 25 से 30 गुना अधिक धन खर्च करता है।थल सेना और बख्तरबंद ताकत: 13.4 लाख सैनिकों के सामने 68 हजार का कार्यबलरक्षा बजट की तरह ही दोनों देशों की सैन्य जनशक्ति (मैनपावर) और पारंपरिक थल सेना में भी भारी असमानता मौजूद है। अमेरिकी सेना की वित्तीय वर्ष 2027 योजना के अनुसार, उसके पास लगभग 1.34 मिलियन (13.4 लाख) सक्रिय-ड्यूटी नियमित सैन्य कर्मी हैं, जिनके साथ लाखों की संख्या में प्रशिक्षित नेशनल गार्ड और रिजर्व फोर्स का बैकअप जुड़ा हुआ है। इसके ठीक उलट, कनाडा की नियमित सशस्त्र सेना में महज 68,473 सक्रिय कर्मी तैनात हैं। हालांकि ओटावा वर्तमान में अपनी सैन्य भर्ती प्रक्रियाओं को गति देकर और कार्यबल का विस्तार करके इस संख्या को बढ़ाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, लेकिन दोनों देशों की पैदल सेना की संख्या में जमीन-आसमान का अंतर बना हुआ है। बख्तरबंद वाहनों और युद्धक टैंकों की बात करें तो अमेरिकी सेना मुख्य रूप से युद्ध-परीक्षित M1 अब्राम्स मेन बैटल टैंक (M1 Abrams MBT) और ब्रैडली फाइटिंग व्हीकल्स के विशाल बेड़े पर निर्भर है, जिन्होंने खाड़ी युद्ध से लेकर हालिया अभ्यासों तक अपनी मारक क्षमता साबित की है। दूसरी ओर, कनाडा की सेना जर्मन-निर्मित लेपर्ड 2 (Leopard 2) मेन बैटल टैंकों और हल्के बख्तरबंद वाहनों (LAVs) का उपयोग करती है, जो गुणवत्ता में उत्कृष्ट होने के बावजूद संख्यात्मक दृष्टि से बेहद सीमित हैं।आसमान पर वर्चस्व: अमेरिकी फिफ्थ जेनरेशन फ्लीट बनाम कनाडा का अपग्रेडहवाई ताकत और हवाई संप्रभुता के मामले में भी अमेरिकी वायुसेना (USAF) और कनाडाई रॉयल एयर फोर्स (RCAF) के बीच का संतुलन पूरी तरह एकतरफा है। अमेरिका के पास पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स का दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली जत्था है, जिसमें F-35A लाइटनिंग II और हवाई वर्चस्व का बेताज बादशाह F-22 रैप्टर शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका F-15EX और F-16 जैसे हजारों आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ-साथ B-1B लांसर, B-2 स्पिरिट स्टील्थ और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस जैसे अंतरमहाद्वीपीय स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमानों का संचालन करता है, जो दुनिया के किसी भी कोने में घंटों के भीतर भारी बमबारी करने में सक्षम हैं। दूसरी तरफ, कनाडा की हवाई सुरक्षा काफी हद तक अपने पुराने पड़ चुके चार दशक पुराने CF-18 हॉर्नेट विमानों के भरोसे चल रही थी। हालांकि कनाडा ने पुराने बेड़े को बदलने के लिए 88 अत्याधुनिक F-35A स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने का ऐतिहासिक रक्षा सौदा किया है, लेकिन यह कार्यक्रम अभी आपूर्ति और प्रशिक्षण के चरण में है। समझौते के तहत पहले आठ F-35 विमान कनाडाई पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए अमेरिका स्थित ठिकानों पर भेजे जाएंगे और पहला ऑपरेशनल विमान वर्ष 2028 तक ही कनाडा की धरती पर तैनात हो सकेगा।समुद्र में एकतरफा दबदबा: ग्लोबल ब्लू-वाटर नेवी बनाम कोस्टल गश्ती बेड़ानौसैनिक शक्ति के मोर्चे पर संयुक्त राज्य अमेरिका एक निर्विवाद वैश्विक सुपरपावर है। अमेरिकी नौसेना (US Navy) के पास 11 परमाणु-संचालित सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर, वर्जीनिया और लॉस एंजिल्स क्लास की दर्जनों न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN), ओहायो-क्लास की बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) और अर्ले बर्क-क्लास गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स का विशाल जत्था मौजूद है। यह क्षमता अमेरिका को अपने घरेलू तटों से हजारों किलोमीटर दूर किसी भी महासागर में महीनों तक निरंतर युद्ध लड़ने और एयर स्ट्राइक करने की असीमित ताकत प्रदान करती है। इसके विपरीत, रॉयल कैनेडियन नेवी (RCN) मूल रूप से एक तटीय रक्षा और सहयोगी भूमिका वाली नौसेना है। कनाडा का नौसैनिक बेड़ा मुख्य रूप से उम्रदराज हो चुके हैलिफैक्स-क्लास फ्रिगेट्स, चार पुरानी विक्टोरिया-क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों, किंग्स्टन-क्लास कोस्टल डिफेंस वेसल्स और हाल ही में शामिल किए गए हैरी डीवोल्फ-क्लास आर्कटिक और अपतटीय गश्ती जहाजों (AOPS) पर आधारित है। कनाडा के पास न तो कोई विमानवाहक पोत है और न ही कोई परमाणु पनडुब्बी, जिससे उसकी समुद्री पहुंच मुख्य रूप से अपनी तीन समुद्री सीमाओं तक ही सीमित रह जाती है।परमाणु क्षमता और आर्कटिक की सामरिक ढालदोनों देशों के बीच सबसे बड़ा और मौलिक भू-सामरिक अंतर परमाणु हथियारों की मौजूदगी का है। संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया की सबसे शक्तिशाली परमाणु शक्तियों में से एक है, जिसके पास जमीन से दागी जाने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs), समुद्र के भीतर छिपी बैलिस्टिक-मिसाइल पनडुब्बियां और परमाणु बमवर्षक विमानों से लैस एक पूर्ण और अचूक न्यूक्लियर ट्रायड मौजूद है। दूसरी तरफ, कनाडा एक गैर-परमाणु राष्ट्र है जिसके पास अपना कोई स्वतंत्र परमाणु हथियार भंडार नहीं है। हालांकि, कनाडा की असली रणनीतिक ताकत उसकी भौगोलिक अवस्थिति और विशाल बर्फीला आर्कटिक क्षेत्र है। उत्तरी ध्रुव के करीब स्थित कनाडा का विस्तृत भूभाग उत्तरी अमेरिका की रक्षा के लिए पहली चेतावनी रेखा (अर्ली वॉर्निंग लाइन) का काम करता है। यही कारण है कि ओटावा वर्तमान में अपने आर्कटिक निगरानी रडार, डीप-वाटर पोर्ट्स और तटीय क्षमताओं के आधुनिकीकरण में भारी निवेश कर रहा है। अमेरिका भी अपने अलास्का राज्य के जरिए आर्कटिक क्षेत्र में मजबूत मौजूदगी रखता है, जिससे दोनों देश एक-दूसरे की भौगोलिक सुरक्षा पर अनिवार्य रूप से निर्भर हैं।नोराड (NORAD) का सुरक्षा जाल और भविष्य की कूटनीतिक दिशासैन्य क्षमताओं, बजट और हथियारों के मामले में इतना विशाल और एकतरफा अंतर होने के बावजूद, वास्तविकता यह है कि अमेरिका और कनाडा की रक्षा प्रणालियां तकनीकी और सामरिक रूप से एक-दूसरे के भीतर बहुत गहराई से गुंथी हुई हैं। शीत युद्ध के दौर में स्थापित नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) दोनों देशों की संयुक्त कमान है, जो पूरे उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के हवाई क्षेत्र, उपग्रह निगरानी और समुद्री रास्तों की साझी निगरानी करती है। किसी भी संभावित बाहरी मिसाइल या हवाई हमले की स्थिति में दोनों देशों के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम एक एकीकृत नेटवर्क के रूप में प्रतिक्रिया देते हैं। यद्यपि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बयान ने दोनों मित्र देशों के बीच एक अत्यंत संवेदनशील, दुर्लभ और अप्रत्याशित कूटनीतिक तनाव को उजागर किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि साझा इतिहास, आर्थिक निर्भरता और एकीकृत सुरक्षा ढांचे को देखते हुए दोनों देश आने वाले समय में भी एक-दूसरे के सबसे अपरिहार्य और घनिष्ठ सहयोगी बने रहेंगे।
जिनपिंग के स्वागत में ट्रम्प भले ही रेड कार्पेट बिछा रहे हों, लेकिन पर्दे के पीछे रस्साकशी भी जारी है। ट्रम्प प्रशासन ने पूछा है कि क्या नमक की गुफाओं में चीन परमाणु बमों की टेस्टिंग कर रहा है? अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, अमेरिका और चीन के अधिकारी पिछले कुछ हफ्तों में 3 गोपनीय बैठकें कर चुके हैं। जिनपिंग की विजिट में भी इस मुद्दे पर बातचीत संभव है। आखिर अमेरिका ऐसे दावे क्यों कर रहा, क्या वाकई चीन कोई अनोखी टेस्टिंग कर रहा है और ये खतरनाक कैसे है; डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिका ने चीन पर क्या आरोप लगाए हैं? जवाब: अमेरिका के आरोपों की कहानी 7 साल पहले शुरू होती है… सवाल-2: आखिर गुफाओं में परमाणु टेस्ट की डीकपलिंग टेक्नोलॉजी है क्या? जवाब: आम तौर पर परमाणु परीक्षण जमीन के नीचे होते थे। इससे इतनी जोरदार भूकंपीय लहरें पैदा होतीं कि दुनियाभर में लगे मॉनिटरिंग स्टेशन उसे आसानी से पकड़ लेते। लेकिन 'डीकपलिंग' तकनीक से धमाके की असली ताकत और उससे पैदा होने वाली भूकंपीय लहरों को छिपाया जा सकता है… 1996 से पहले अमेरिका और सोवियत रूस ने भी कई बार ये तरीके आजमाए थे। मसलन, 3 दिसंबर, 1966 को अमेरिका ने मिसिसिपी के टाटम साल्ट डोम में इसी डीकपलिंग तकनीक से 'स्टर्लिंग' नाम का टेस्ट किया था। सवाल-3: क्या वाकई चीन चोरी-छिपे ऐसा कोई टेस्ट कर रहा है?जवाब: अमेरिका का दावा 22 जून 2020 को कजाकिस्तान के मॉनिटरिंग स्टेशन पर मिले सिग्नल पर टिका है। ये सिग्नल प्राकृतिक भूकंप के सिग्नल जैसे नहीं थे, बल्कि किसी नियंत्रित धमाके जैसे थे। 17 फरवरी 2026 को अमेरिकी थिंकटैंक हडसन इंस्टीट्यूट के एक इवेंट में अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर ने बताया, ‘मैंने इसका एडिशनल डेटा भी देखा है। यह एक अकेला विस्फोट के जैसा लगता है। यह डेटा माइनिंग ब्लास्ट या भूकंप से मेल नहीं खाता।’ हालांकि CTBTO ने कहा कि रिकॉर्ड किए गए झटकों से पुख्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि ये न्यूक्लियर टेस्ट थे। फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में न्यूक्लियर स्ट्रैटजी एक्सपर्ट जेफ्री लुइस के मुताबिक, पिछले 5 साल की सैटेलाइट तस्वीरों में लोप नूर में पहाड़ों के नीचे नई टनल, नई सड़कें और स्टोरेज फैसिलिटीज दिखती हैं। 2022 और 2023 की तस्वीरों की तुलना से पता चलता है कि टनल खोदने से निकली मिट्टी के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं। यानी टनल बड़ी की जा रही है। इससे लग रहा है कि चीन ने न्यूक्लियर टेस्ट किए हैं। लेकिन चीन अमेरिकी दावों से इनकार कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। ये उनका न्यूक्लियर टेस्ट्स दोबारा शुरू करने का बहाना है। सवाल-4: कम ताकत वाले न्यूक्लियर बमों की टेस्टिंग ज्यादा खतरनाक क्यों? जवाब: इस्तेमाल के हिसाब से मोटे तौर पर परमाणु हथियारों की 2 कैटेगरी हैं… अमेरिका को अंदेशा है कि चीन टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन बना रहा है। ये हिरोशिमा पर गिराए गए करीब 15 हजार टन TNT की ताकत वाले बम से कहीं छोटे बम होंगे। ताकि एक ही मिसाइल पर ज्यादा बम लगाए जा सकें। सवाल-5: तो क्या एक बार फिर से न्यूक्लियर रेस शुरू हो जाएगी? जवाब: दुनियाभर के परमाणु हथियारों पर निगाह रखने वाले स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा, 'दशकों से न्यूक्लियर हथियारों को नियंत्रित करने की कोशिशें हो रही हैं। फिर भी ऐसे हथियार बढ़ रहे हैं। दुनिया में नई न्यूक्लियर आर्म्स रेस उभर रही है। जबकि देशों के बीच में तनाव और गलतफहमियां तेजी से बढ़ रही हैं।' दुनियाभर में करीब 12,187 न्यूक्लियर हथियार हैं। इनमें से 83% हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं। एक साल में रूस के न्यूक्लियर हथियार 4309 से बढ़कर 4400, चीन के 600 से 620, भारत के 180 से 190 और नॉर्थ कोरिया के 50 से 60 पहुंच गए। अमेरिकी थिंकटैंक आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डैरिल किम्बल ने चेतावनी दी है कि अगर ट्रम्प के ऐलान बाद अमेरिका ने नए टेस्ट किए, तो एक चेन-रिएक्शन शुरू हो सकती है। इससे पूरी नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी टूट सकती है। यानी वो समझौता खत्म हो सकता है, जिसने परमाणु हथियारों को बढ़ने से रोका है। ------------------ ये खबर भी पढ़िए… जिनपिंग को लेने प्रोटोकॉल तोड़ एयरपोर्ट पहुंचे ट्रम्प, 3 दिन का स्पेशल कार्यक्रम; जानिए चीन को खुश करने में क्यों जुटा है अमेरिका यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से तीखी बहस, जापानी पीएम को नीचा दिखाना, भारतीय पीएम को टैरिफ की चेतावनी… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ज्यादातर विदेशी नेताओं के साथ अपमानजनक तरीके से पेश आते रहे। लेकिन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे से पहले ट्रम्प के तेवर बदले-बदले से हैं। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका ने भारत के ख़िलाफ़ 100 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा दिया तो क्या होगा? - BBC
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शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा और ट्रंप से मुलाकात, BRICS के बाद बदला कूटनीतिक माहौल?
शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा और ट्रंप से मुलाकात, BRICS के बाद बदला कूटनीतिक माहौल?
MP दिनभर: MP दिनभर में आज दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। दिनभर की 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, एमपी में आज, क्या रहा खास… 1. गडकरी बोले- 40% एयर पॉल्यूशन के लिए मैं जिम्मेदार, MP को 351 बसें मिलीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 40% एयर पॉल्यूशन के लिए वे जिम्मेदार हैं। उन्होंने बसों का स्टैंडर्ड सुधारने की बात कही और कहा- नहीं तो कॉन्ट्रैक्टर्स को रगड़ूंगा। भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत मध्यप्रदेश को 351 सरकारी बसें मिलीं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। गडकरी ने सार्वजनिक परिवहन में बसों की गुणवत्ता और मानकों पर जोर दिया। पढ़ें पूरी खबर 2. गणेश विसर्जन में सीहोर में नाबालिग की डूबने से मौत, MP में सुरक्षा कड़ी गणेश विसर्जन के दौरान सीहोर में डूबने से नाबालिग की मौत हो गई। भोपाल में विसर्जन के लिए 6 घाट बनाए गए हैं। उज्जैन और जबलपुर में जुलूस और विसर्जन को देखते हुए ट्रैफिक डायवर्जन किया गया है। सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात है। अनंत चतुर्दशी पर शहरों में झांकियों और अखाड़ों के जुलूस निकल रहे हैं। प्रशासन ने विसर्जन स्थलों और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। पढ़ें पूरी खबर 3. भारत-वेस्टइंडीज T20 के सारे टिकट 2 घंटे 20 मिनट में बिके इंदौर में भारत-वेस्टइंडीज T20 मैच के सारे टिकट 2 घंटे 20 मिनट में बिक गए। ईस्ट पवेलियन के बाद वेस्ट पवेलियन भी फुल हो गया। टिकटों की कीमत 1 हजार से 12,500 रुपए तक थी। मैच को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। टिकट बिक्री शुरू होने के बाद तेजी से बुकिंग हुई और दोनों पवेलियन के टिकट बिक गए। भारत-वेस्टइंडीज के बीच होने वाले मुकाबले को लेकर इंदौर में तैयारियां जारी हैं। पढ़ें पूरी खबर 4. MP के 13 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट, 16 जिलों में तेज बारिश मध्यप्रदेश के 13 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सागर समेत 16 जिलों में तेज बारिश होने का अनुमान है। सतना में लगातार बारिश के चलते कल भी स्कूलों की छुट्टी रहेगी। मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। बारिश के चलते स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। पढ़ें पूरी खबर 5. हॉस्टल में 3 जूनियर्स को बेल्ट से पीटा, अंगारे हाथों में रखवाए मंडला के हॉस्टल में चोरी के शक में सीनियर्स ने 3 बच्चों के साथ मारपीट की। आरोप है कि जूनियर्स के हाथों में अंगारे रखवाए गए और बेल्ट से पीटा गया। उन्हें छत से फेंकने की धमकी भी दी गई। हॉस्टल में हुई इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। बच्चों के साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना को लेकर जांच की जा रही है। घटना से हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। पढ़ें पूरी खबर 6. 25 हजार स्थानों पर एक साथ गूंजा ‘वंदे मातरम्’, 1.52 लाख लोग शामिल मालवा के 522 सरस्वती स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन हुआ। 25 हजार स्थानों पर एक साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 1.52 लाख लोग शामिल हुए। अलग-अलग स्थानों पर स्कूलों और संस्थानों में कार्यक्रम हुए। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन करना था। पढ़ें पूरी खबर 7. होटल में घुसी कार, वकील की मौत; 4 घायल, बैक सीट पर मिली शराब जबलपुर में एक कार होटल में जा घुसी। हादसे में वकील की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हुए हैं। सभी दोस्त से मिलने जा रहे थे। हादसे के बाद कार होटल में घुस गई। पुलिस को कार की बैक सीट पर शराब की बोतल मिली। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। घटना में कार की रफ्तार और हादसे की परिस्थितियों को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। पढ़ें पूरी खबर पॉजिटिव खबर 8. MP में 48 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी, 30 हजार शिक्षकों को मिलेगा प्रमोशन मध्यप्रदेश में 48 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी है। 30 हजार शिक्षकों को पात्रता परीक्षा देने के बाद पदोन्नति मिलेगी। TET के बाद पहली सूची जारी होगी। भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया में पात्रता परीक्षा को अहम चरण माना गया है। परीक्षा के बाद पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रदेश में शिक्षकों के पदों को लेकर यह प्रक्रिया प्रस्तावित है। पढ़ें पूरी खबर खबर जरा हटके 9. अमेरिकी जियोलॉजिस्ट ने गाया ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’, VIDEO वायरल अमेरिकी जियोलॉजिस्ट एलेक सोडरबर्ग का हनुमान भजन गाते हुए VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन गाया और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया। VIDEO को 15 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। BJP विधायक ने भी इसे शेयर किया है। सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पढ़ें पूरी खबर कल का बिग इवेंट 10. UGC कानून के विरोध में सवर्ण समाज का भोपाल में मार्च UGC कानून को वापस लेने की मांग को लेकर सवर्ण समाज भोपाल में प्रदर्शन करेगा। समाज की ओर से माता मंदिर से राजभवन तक मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रदर्शन के जरिए UGC कानून को वापस लेने की मांग रखी जाएगी। मार्च में सवर्ण समाज के लोग शामिल होंगे।
प्री-बोर्ड में हुए थे फेल, अब अमेरिका में बजेगा बिहार के इस IPS का डंका; क्या है वजह
बिहार के मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी को अमेरिका में 'द एशियन हीरो अवार्ड' से नवाजा जाएगा। एक वक्त ऐसा भी था जब वह प्री-बोर्ड में फेल हो गए थे लेकर आईपीएस बनकर उन्होंने मिसाल कायम की है।
शी चिनफिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ वार्ता की
बीजिंग, 26 सितंबर . चीनी President शी चिनफिंग ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता की. चीनी President शी चिनफिंग ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने आधे साल से भी कम समय में एक-दूसरे के देशों की यात्रा की, जो चीन-अमेरिका संबंधों के इतिहास में अभूतपूर्व है. उन्होंने President ... Read more
शी चिनफिंग ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के स्वागत समारोह में हिस्सा लिया
बीजिंग, 26 सितंबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में भव्य समारोह आयोजित कर चीनी President शी चिनफिंग का स्वागत किया, जो अमेरिका की राजकीय यात्रा पर आए हैं. सितंबर का वाशिंगटन शरद ऋतु की खूबसूरती से सराबोर है. चीन और अमेरिका के राष्ट्रीय झंडे हवा में लहरा रहे हैं. जब शी चिनफिंग ... Read more
बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत-अमेरिकी सेना के संयुक्त ‘युद्ध अभ्यास-2026’ चल रहा है। इसे देखने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर भी पहुंचे। इस दौरान उनके सामने दोनों देशों के हाइटेक सिस्टम से रेगिस्तानी इलाकों में बनाए दुश्मन के ठिकानों को पलभर में उड़ा दिया गया। भारत के पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्च सिस्टम और अमेरिका के M-LIDS काउंटर-ड्रोन सिस्टम के जॉइंट ऑपरेशनल मूवमेंट और अटैकिंग मोड भी दिखाई दिए। युद्धाभ्यास के दौरान गोर ने दोनों सेनाओं के जवानों से बातचीत कीं। उन्होंने दोनों देशों की आधुनिक हथियार प्रणालियों के संयुक्त संचालन को प्रभावशाली बताया। साथ ही कहा कि यह सैन्य अभ्यास भारत और अमेरिका की मजबूत रक्षा साझेदारी और आपसी भरोसे के साथ हाइटेक तैयारी को बताता है। बता दें कि महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 15 से 28 सितंबर तक चलने वाले इस संयुक्त फायरपावर प्रदर्शन में दोनों देशों की ओर से अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें भारतीय सेना की ओर से स्वदेशी पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्च सिस्टम, एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, धनुष आर्टिलरी सिस्टम, L/70 एयर डिफेंस गन, स्वाथी वेपन-लोकेटिंग रडार और AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की क्षमता का प्रदर्शन प्रमुख है। वहीं अमेरिकी सेना की ओर से HIMARS (हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम) और M-LIDS काउंटर-ड्रोन सिस्टम की क्षमताओं का भी आकलन किया जा रहा है। ड्रोन और स्वॉर्म हमलों से निपटने का विशेष अभ्यासआधुनिक युद्ध तकनीकों को ध्यान में रखते हुए इस अभ्यास के दौरान लक्ष्य पहचान, त्वरित फायर कमांड प्रक्रिया और आर्टिलरी फायर की जांच की गई। साथ ही युद्धक्षेत्र में उभरते नए खतरों के बारे में एडवांस्ड अटैक मॉड्यूल अपनाए गए। इनमें ड्रोन और 'ड्रोन स्वॉर्म' (ड्रोन के समूह) के अटैक को बेअसर करने के लिए उन्नत काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) तकनीक का विशेष अभ्यास किया गया। रेगिस्तान से पहाड़ तक 1200 जवान एक साथ कर रहे अभ्यास‘युद्ध अभ्यास’ के 22वें संस्करण में दोनों देशों के लगभग 600-600 सैनिक (कुल 1,200 सैन्यकर्मी) भाग ले रहे हैं। इस बार अभ्यास को दो अलग-अलग जगहों पर किया जा रहा है। इनमें राजस्थान के बीकानेर में रेगिस्तानी इलाका शामिल है, वहीं उत्तराखंड (औली) पर अत्यधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में भी ऑपरेशनल तैयारी की गई। युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिकी सेना के बीच रणनीतिक तालमेल, सूचनाओं के आदान-प्रदान और जटिल बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) सैन्य अभियानों को एक साथ अंजाम देने की क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) को और मजबूत करना रखा गया है। ये खबर भी पढ़िए… अपाचे हेलिकॉप्टर से रेगिस्तान में उड़ाए टारगेट:स्वदेशी धनुष तोप और पिनाका से भी फायरिंग; भारत-अमेरिका के सैनिकों ने मिलकर किया युद्धाभ्यास बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका की सेना संयुक्त युद्धाभ्यास कर रही है। 'युद्ध अभ्यास-2026' में AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, भारत और अमेरिकी सेना के जवानों के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए
अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी: CBI ने अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी रैकेट के मुख्य आरोपी को दबोचा
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अवैध कॉल सेंटरों के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका को दिया 7 दिन वाला प्रस्ताव, क्या दोनों देशों में बन पाएगी बात?
दोनों देश अब इस स्थिति को समझ रहे हैं इस मसले का हल युद्ध से तो नहीं निकलने वाला. मगर बात सिर्फ इस पर अटकी हुई है कि कौन सा पक्ष युद्ध को समाप्त करने के लिए अपने मुद्दे पर कितना समझौता करना चाहता है.
अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी: सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी रैकेट के मुख्य आरोपी को दबोचा
New Delhi, 25 सितंबर . केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अवैध कॉल सेंटरों के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. सीबीआई ने उक्त आरोपी और अज्ञात अन्य लोगों के खिलाफ 8 सितंबर 2026 को मामला दर्ज किया था. यह मामला एक ... Read more
अमेरिका में पाकिस्तान की बोलती बंद, हाफिज पर पूछा ऐसा सवाल कि शाहबाज शरीफ भाग गए
UNGA के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा पर पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया. वहीं भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आतंकवाद और आर्थिक संकट के मुद्दे पर कड़ी फटकार लगाई.
ट्रंप ने शी जिनपिंग के सम्मान में दिया स्टेट डिनर, परोसे खास व्यंजन; वीडियो में बोले- अमेरिका-चीन के रिश्ते पहले से बेहतर
फंग लियुआन और अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी मेलानिया ने नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट का दौरा किया
स्थानीय समयानुसार 24 सितंबर को दोपहर में, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की पत्नी फंग लियुआन ने वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट का दौरा किया।
अमेरिकी जियोलॉजिस्ट और वैदिक मेडिटेशन शिक्षक एलेक सोडरबर्ग ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ का भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ अपनी आवाज में गाया है। उन्होंने खुद इकतारा तैयार किया और उसी की धुन पर भजन गाया। एलेक ने इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया, जिसे अब तक 15 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। खुद बनाया इकतारा, फिर गाया भजन वीडियो में एलेक तानपुरे/एकतारे जैसे पारंपरिक तार वाले वाद्य के साथ भजन गाते नजर आते हैं। उन्होंने खुद इकतारा तैयार किया और इसके बाद सुनील लोधी के गाए भजन को अपनी आवाज में प्रस्तुत किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यूजर्स उनके गायन और भक्ति भाव की तारीफ कर रहे हैं। BJP विधायक ने शेयर किया वीडियो भोपाल की हुजूर सीट से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने एलेक का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा- मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान भजन की गूंज आज भारत ही नहीं, विदेशों में भी सुनाई दे रही है। यह सनातन भक्ति की उस शक्ति का प्रमाण है, जो भाषा और सीमाओं से परे हर हृदय को जोड़ती है। सुनील लोधी ने गाया और कंपोज किया ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ का मूल वर्जन भजन गायक सुनील लोधी ने गाया और कंपोज किया है। यह भजन फिल्म ‘हनुमान अंश’ में शामिल है और नीम करौली बाबा तथा हनुमान भक्ति की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। भजन की पंक्तियां हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण को व्यक्त करती हैं- ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई।’ इसमें राम नाम को नाव, भक्ति को पतवार और ज्ञान को जंजीर के रूपक के जरिए भक्ति का भाव बताया गया है। कौन हैं एलेक सोडरबर्ग? एलेक सोडरबर्ग अमेरिका के जियोलॉजिस्ट, वैदिक मेडिटेशन टीचर और कीर्तन लीडर हैं। वे भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, मंत्र, ध्यान और कीर्तन से जुड़े हुए हैं। अर्थ टूर की वेबसाइट पर भी उन्हें इन्हीं पहचान के तौर पर परिचित कराया गया है। वे अमेरिकी दक्षिण-पश्चिम के प्राकृतिक और भूगर्भीय स्थलों से जुड़े टूर में भी काम करते हैं। उनके काम का केंद्र वैदिक ध्यान, नाद योग और कीर्तन है। एक आध्यात्मिक रिट्रीट प्रोफाइल में उन्हें नाद योग से जुड़े साधक और कीर्तन लीडर बताया गया है, जहां वे ध्वनि और मंत्र के जरिए ध्यान की साधना पर काम करते हैं। विज्ञान से आध्यात्म तक का सफर एलेक का जीवन एक तरफ जियोलॉजी और प्राकृतिक विज्ञान से जुड़ा है, तो दूसरी तरफ भारतीय आध्यात्मिक संगीत और ध्यान से। वे कीर्तन को सिर्फ संगीत की प्रस्तुति नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में देखते हैं। उनके सोशल मीडिया पर भारतीय मंत्र, कीर्तन और आध्यात्मिक संगीत से जुड़े कई वीडियो हैं। हनुमान भजन वाला वीडियो भी इसी श्रृंखला का हिस्सा है। वीडियो को मिले 15 लाख से ज्यादा व्यूज एलेक के भजन वाले वीडियो को इंस्टाग्राम पर 15 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। वीडियो पर लोगों ने कमेंट कर उनकी आवाज, उच्चारण और भक्ति भाव की तारीफ की। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर यह चर्चा भी हो रही है कि हनुमान भक्ति और भारतीय संगीत की पहुंच देश की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दे रही है। भक्ति संगीत में इस्तेमाल होता है इकतारा इकतारा भारतीय लोक और भक्ति संगीत में इस्तेमाल होने वाला तार वाला वाद्य है। संस्कृति मंत्रालय के एक प्रकाशन में भी इकतारा, दोतारा और चौतारा को भक्ति संगीत में इस्तेमाल होने वाले वाद्यों के रूप में बताया गया है।
अमेरिकी नागरिकों से 72 लाख डॉलर की ठगी: अहमदाबाद से चल रहे अवैध कॉल सेंटर सिंडिकेट का भंडाफोड़
सीबीआई ने अहमदाबाद से संचालित अवैध कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों से 72.1 लाख डॉलर (60 करोड़ रुपये से अधिक) की साइबर ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को यूएस अटॉर्नी और एफटीसी जैसे अमेरिकी संघीय अधिकारी बताकर पीड़ितों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी केस में फंसाने का डर दिखाते थे और बैंक खातों से रकम निकालकर सोना खरीदने व कूरियर को सौंपने के लिए मजबूर करते थे। डिजिटल साक्ष्य जब्त कर एजेंसी पूरे सिंडिकेट की जांच कर रही है।
NIA केस में 7 विदेशी नागरिकों को विदेश जाने की इजाजत, परिवार से मिलने अमेरिका-यूक्रेन जा सकेंगे
NIA ने मार्च 2026 में सातों विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े लोगों को हथियारों और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने में शामिल थे।
ताजमहल को दुनिया का सबसे पसंदीदा अजूबा बताने वाली एक विदेशी महिला वीडियो पर कमेंट्स पढ़कर हैरान रह गई है. उसने सवाल किया कि लोग भारत से इतनी नफरत क्यों करते हैं.
'बदले में क्या मिला?' अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई मामले में कांग्रेस का PM मोदी पर हमला
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई के मामले में कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी पर सवाल उठाया है। कांग्रेस आरोप लगाया कि यह पूरा फैसला अमेरिका के दबाव में लिया गया है। उन्होंने पूछा कि आखिर इसके बदले में भारत को क्या मिला।
शी जिनपिंग के सामने अमेरिकी शोऑफ! ट्रंप ने दिखाई अपनी ताकत!
व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीनी राष्ट्रपति को नया हेलीपैड दिखाया. करीब 50 करोड़ रुपये की लागत वाला यह हेलीपैड काले ग्रेनाइट से तैयार किया गया है. दोनों नेताओं ने मरीन वन का भी दौरा किया. इसी दौरान बी2 बॉम्बर और एफ22 लड़ाकू विमानों का फ्लाईओवर हुआ. ट्रंप का यह अंदाज अमेरिका की सैन्य क्षमता और भव्यता दिखाने वाला नजर आया.
इंटरेनट डेस्क । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अभी अमेरिका के दौरे पर है। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-चीन समिट के दौरान एक ऐसा वाकया देखने को मिला जिसको लेकर डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की जा रही है। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का मजाक उड़ाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को वाइट हाउस घुमा रहे थे तब उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वाइट हाउस में राष्ट्रपतियों के पोर्ट्रेट गैलरी के पास पहुंचते ही ट्रंप ने अपनी तस्वीरों की तरफ इशारा करते हुए कहा ट्रंप, फिर ट्रंप और फिर यह ऑटोपेन! यह सुनते ही शी जिनपिंग और उनका प्रतिनिधिमंडल ठहाके लगाकर हंस पड़ा। न्यूज वीक ने बताया है कि गुरुवार को हुई समिट के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को वाइट हाउस में लगी एक नई प्रदर्शनी दिखाई थी। इस प्रदर्शनी में अमेरिकी राष्ट्रपतियों की तस्वीरें और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन का मजाक उड़ाती हुई एक तस्वीर शामिल थी। इसी दौरान पूर्व राष्ट्रपति का ट्रंप ने मजाक उड़ाया है। pc- magzter.com
कपूरथला के नडाला-बेगोवाल रोड पर बीती शाम को एक सड़क हादसे में 26 साल के बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा बाइक और चावल की बोरियों से भरे ट्रक के बीच हुई टक्कर से हुआ। मृतक की पहचान तलवंडी कूका निवासी मनप्रीत सिंह पुत्र चंचल सिंह के रूप में हुई है। मनप्रीत दो महीने पहले ही अमेरिका से लौटा था। नडाला चौकी इंचार्ज बलजिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि नडाला-बेगोवाल रोड पर ट्रक और बाइक की टक्कर हुई है। पुलिस के मुताबिक, ट्रक शेलर से चावल की बोरियां लेकर जा रहा था, जबकि मनप्रीत सिंह नडाला से अपने गांव तलवंडी कूका जा रहा था। ज्यादा खून बहने से मौके पर तोड़ा दम टक्कर इतनी तेज थी कि मनप्रीत सिंह को गंभीर चोटें आईं। ज्यादा खून बहने से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रक व मृतक के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज कर रही है। बयानों और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गांव तलवंडी कूका के सरपंच हरजिंदर सिंह ने बताया कि मनप्रीत सिंह करीब दो महीने पहले ही अमेरिका से गांव लौटा था। युवक की अचानक मौत की खबर से पूरे गांव में शोक फैल गया। गांववालों ने पुलिस प्रशासन से हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच करने और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो नियमों के हिसाब से कार्रवाई करने की मांग की है।
विक्रम मिस्री ने की अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात
न्यूयॉर्क, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (पॉलिटिकल अफेयर्स) एलिसन हुकर से मुलाकात की। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे सहयोग और हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा हुई।
विक्रम मिस्री की अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात, ऊर्जा सुरक्षा और एसआरआईए समेत कई मुद्दों पर चर्चा
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (पॉलिटिकल अफेयर्स) एलिसन हुकर से मुलाकात की। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे सहयोग और हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा हुई।
फतेहाबाद की गलियों से शुरू हुआ एक सपना जब जुनून बन जाए, तो उसकी गूंज सात समुंद्र पार तक सुनाई देती है। हरियाणा के फतेहाबाद जिले से ताल्लुक रखने वाले अंतरराष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी राहुल कुमार यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 1999 में एक स्थानीय अंतर-स्कूली चैंपियनशिप में पहली बार कराटे मैट (ततामी) पर कदम रखने वाले राहुल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दो दशकों से अधिक समय तक बतौर एथलीट भारत और हरियाणा का नाम रोशन करने के बाद, अब वे अमेरिका के खेल गलियारों में अंतरराष्ट्रीय रेफरी बनने की राह पर अग्रसर हैं। वैश्विक मंच पर जमाई धाक राहुल यादव का प्रतिस्पर्धी करियर शानदार उपलब्धियों और जुझारूपन से भरा रहा है। विश्व कराटे महासंघ (WKF) द्वारा जारी वैश्विक रैंकिंग में उन्होंने 206 देशों के 10,000 से अधिक विश्वस्तरीय खिलाड़ियों के बीच शीर्ष 100 खिलाड़ियों (98वां स्थान) में जगह बनाकर इतिहास रचा था। वे हरियाणा के इकलौते ऐसे खिलाड़ी रहे, जिन्होंने सीनियर काटा और कुमिते वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया। फाइटर से कोच और रेफरी की भूमिकाराहुल यादव सिर्फ मैट के अंदर ही नहीं चमके, बल्कि उन्होंने जिला कराटे संघ फतेहाबाद के महासचिव और 'कराटे प्लैनेट डोजो' के मुख्य कोच के रूप में सैकड़ों युवाओं को तराशा। नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप में उन्हें 'बेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर' के साथ-साथ 'बेस्ट ऑफिशियल रेफरी' के पुरस्कार से भी नवाजा गया था। इसके अलावा काठमांडू (नेपाल) में हुई इंडो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय कराटे श्रृंखला में भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए उन्हें 'बेस्ट रेफरी' के सम्मान से सम्मानित किया गया था। ततामी के दूसरी तरफ निर्णय लेने की कला वर्तमान में अमेरिका में रह रहे राहुल यादव ने अपने करियर के एक नए और चुनौतीपूर्ण अध्याय की शुरुआत की है। वर्ष 2026 में उन्होंने स्पोकेन में आयोजित 2026 USA Karate National Championship में एक ऑफिशियल के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा उन्होंने सैक्रामेंटो कराटे चैंपियनशिप में अपनी सेवाएं दीं और कैलिफोर्निया में आयोजित 'USA Karate Region 1' रेफरी सेमिनार में भाग लिया। खिलाड़ी से रेफरी तक का सफर एक खिलाड़ी से रेफरी बनने के इस सफर को लेकर राहुल का मानना है कि: एक खिलाड़ी को बस एक सेकेंड के छोटे हिस्से में मौका देखकर दांव लगाना होता है, लेकिन एक रेफरी/जज को दोनों एथलीटों की तकनीक, टाइमिंग, नियंत्रण, नियम और सुरक्षा को एक साथ देखना होता है और वो भी बिना किसी पूर्वाग्रह के बिल्कुल सटीक निर्णय देना होता है। महासंघ में जगह बनाना लक्ष्य राहुल यादव का अगला लक्ष्य पैन अमेरिकन-स्तरीय रेफरी बनना और अंततः विश्व कराटे महासंघ (WKF) के आधिकारिक रेफरी पैनल में जगह बनाना है। अपनी इस उपलब्धि और प्रेरणादायक यात्रा का श्रेय वे अपने माता-पिता (शिव राम और उमा देवी), अपने कोच सेंसेई रजनीश चौधरी, एशियन रेफरी शिहान भारत शर्मा और खेल प्रेमियों को देते हैं। फतेहाबाद जैसे छोटे से शहर से निकलकर सात समंदर पार अमेरिका के नेशनल एरिना तक पहुंचने का उनका यह सफर देश के लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल है।
अमेरिका के नए बॉम्बर B-21 रेडर की पहली उड़ान, Video
बी-21 रेडर स्टील्थ बॉम्बर की साफ तस्वीरें टेस्ट फ्लाइट के दौरान सामने आईं. नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन का यह नया विमान पामडेल में विकसित हो रहा है.
टेक सपोर्ट के नाम पर अमेरिका में 100 करोड़ की ठगी का आरोप
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026 । दिल्ली के पीतमपुरा में चल रहे एक कथित अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटर का दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, यहां से अमेरिका में रहने वाले लोगों को टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर कथित तौर पर ठगी का शिकार बनाया जाता था। इस मामले […] The post टेक सपोर्ट के नाम पर अमेरिका में 100 करोड़ की ठगी का आरोप appeared first on Rashtriya Ujala .
अमेरिका-चीन बैठक: जिनपिंग ने ट्रंप के सामने उठाया ताइवान का मुद्दा, एआई सहयोग पर क्या सहमति बनी?
अमेरिका-चीन बैठक: जिनपिंग ने ट्रंप के सामने उठाया ताइवान का मुद्दा, एआई सहयोग पर क्या सहमति बनी?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की अपनी महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच रिश्तों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का आह्वान किया है। चीनी राष्ट्रपति ने एक भावुक और कूटनीतिक संबोधन में कहा, आइए, हम सब मिलकर चीन-अमेरिका दोस्ती के खूबसूरत फूलों को संवारें और अपने दोस्ताना संबंधों का एक नया अध्याय लिखें। शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप द्वारा वाशिंगटन में की गई शानदार मेहमाननवाज़ी के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत से कई महत्वपूर्ण वैश्विक और रणनीतिक मुद्दों पर सहमति बनी है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देगी। उस नदी की तरह जो कभी बहना नहीं छोड़ती... शी जिनपिंग उस नदी की तरह जो कभी बहना नहीं छोड़ती, इतिहास भी कभी नहीं रुकता। दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती एक नेक काम है जिसमें बड़ी संभावनाएँ हैं। आइए, हम हाथ मिलाएँ और साथ-साथ आगे बढ़ें। आइए, हम सब मिलकर चीन-अमेरिका दोस्ती के खूबसूरत फूलों को संवारें। आइए, हम सब मिलकर अपने दोस्ताना रिश्तों का एक नया अध्याय लिखें, चीन के राष्ट्रपति ने कहा। ट्रंप द्वारा आयोजित राजकीय भोज (स्टेट डिनर) को संबोधित करते हुए, शी ने अपनी यात्रा के लिए की गई व्यवस्थाओं के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि इन प्रयासों में हर छोटी-बड़ी बात का बहुत बारीकी और ध्यान से ख्याल रखा गया है। इसे भी पढ़ें: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के कूटनीतिक मायने मिस्टर प्रेसिडेंट और मिसेज ट्रंप, मुझे और मेरी पत्नी को इतनी शानदार मेहमाननवाज़ी और सोच-समझकर की गई व्यवस्थाएँ देने के लिए आपका धन्यवाद। आपने और मिसेज ट्रंप ने हमारी यात्रा के लिए कई खास इंतज़ाम किए हैं, और हर चीज़ बहुत बारीकी और ध्यान से तैयार की गई है। आपने हमें सचमुच घर जैसा महसूस कराया। मैं समाज के उन सभी वर्गों के अमेरिकियों को भी अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देना चाहता हूँ जो चीन-अमेरिका संबंधों की परवाह करते हैं और हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाने का समर्थन करते हैं, शी जिनपिंग ने कहा। जिनपिंग ने इस साल मई में ट्रंप की चीन यात्रा को याद किया जिनपिंग ने इस साल मई में ट्रंप की चीन यात्रा को भी याद किया और कहा कि दोनों नेता रणनीतिक स्थिरता पर आधारित एक रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंध बनाने पर सहमत हुए थे। उन्होंने आगे कहा कि उनकी अमेरिका यात्रा ट्रंप के निमंत्रण पर हुई और यह द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण है। इस साल मई में, राष्ट्रपति ट्रंप ने मेरे निमंत्रण पर चीन की सफल यात्रा की थी। हम रणनीतिक स्थिरता वाले एक रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंध बनाने पर सहमत हुए थे। दौरे के दौरान, राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझे अमेरिका आने का गर्मजोशी से न्योता दिया था, और मैं अपने वादे के मुताबिक यहाँ आया हूँ। छह महीने से भी कम समय में, चीन और अमेरिका के राष्ट्रपतियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया है, जिससे हमारे आपसी संबंधों में इतिहास रचा गया है। आज, राष्ट्रपति ट्रंप और मैंने खुलकर और गहराई से बातचीत की और कई मुद्दों पर आम सहमति बनाई। इससे रणनीतिक स्थिरता वाले चीन-अमेरिका के रचनात्मक संबंधों को नई मजबूती मिली है और चीन-अमेरिका संबंधों को नई रणनीतिक दिशा मिली है, उन्होंने कहा। इसे भी पढ़ें: वे हम पर नज़र रखते हैं, हम उन पर, शी जिनपिंग के अमेरिकी दौरे से पहले बोले ट्रंप जिनपिंग ने अमेरिका और चीन के बीच दोस्ती को मजबूत करने का आह्वान किया सभा को संबोधित करते हुए, जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के लोगों के बीच दोस्ती को मजबूत करने का आह्वान किया और कहा कि दोनों देशों को मिलकर अपने संबंधों में एक नया अध्याय लिखना चाहिए। आइए, हम सब मिलकर अपने दोस्ताना संबंधों में एक नया अध्याय लिखें, उन्होंने कहा। दूसरी ओर, ट्रंप ने व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और फर्स्ट लेडी पेंग लियुआन का स्वागत किया और डिनर के दौरान शी जिनपिंग को 'बाल्ड ईगल' (एक तरह का बाज) की मूर्ति भेंट की। डिनर के दौरान राष्ट्रपति के संबोधन के अनुसार, लगभग तीन फुट ऊंची यह मूर्ति एक पोडियम पर रखी गई थी और इसे ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के साथ मिलकर एक अमेरिकी कलाकार ने डिजाइन किया था। इसे भी पढ़ें: मेलोडी, ठेकुआ, मखाना-सत्तू— भारत की 'फूड डिप्लोमेसी' का नया दौर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, मैं राष्ट्रपति शी को एक असाधारण अमेरिकी कलाकार द्वारा बनाई गई एक भेंट दे रहा हूँ, जो दुनिया के महानतम कलाकारों में से एक हैं और जिसे मेलानिया और मैंने व्यक्तिगत रूप से उनके साथ मिलकर डिजाइन किया है। 'बाल्ड ईगल' अमेरिका का राष्ट्रीय प्रतीक है और अमेरिका की स्वतंत्र और ऊंची उड़ान भरने वाली भावना का प्रतीक है। हमें उम्मीद है कि इसे बीजिंग में एक अच्छी, एक शानदार जगह मिलेगी... ट्रंप ने आगे कहा, अपने-अपने देशों के नेताओं के तौर पर, राष्ट्रपति शी और मैं दोनों समझते हैं कि हम अलग-अलग प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन हमारे लोगों के बीच संबंध कायम हैं, और हमारे संबंध पहले से कहीं बेहतर हैं... हम मिलकर एक ऐसा रिश्ता बनाना जारी रख सकते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि और सुरक्षा को बढ़ावा दे। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
'फ्री तिब्बत, फ्री हॉन्ग-कॉन्ग...', अमेरिका में जिनपिंग के विरोध में आंदोलन
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच व्हाइट हाउस के बाहर तिब्बत, हॉन्ग-कॉन्ग और उइगर समर्थकों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने 'फ्री तिब्बत' और 'फ्री हॉन्ग-कॉन्ग' के नारे लगाए और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की.
भारत-अमेरिका संबंध: पैक्स सिलिका से लेकर 100% टैरिफ वाले कानून तक, यूएस में विदेश सचिव ने किसके साथ की बैठकें? vikram-misri-us-talks-pax-silica-critical-minerals-energy-security-sria-russia-iran
न मिसाइल दागेगा, न ड्रोन, आसमानी 'आफत' बरसाएगा अमेरिका, HELIOS तैनात - ABP News
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जेल में पास्ता-चिकन मांगने वाला अमेरिकी कैदी रिहा, आतंकी ट्रेनिंग का था आरोप
राउज एवेन्यू की विशेष एनआईए अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को परिवार से मिलने एक महीने के लिए विदेश जाने की इजाजत दी. अदालत ने पासपोर्ट लौटाने, 24 घंटे में संपर्क विवरण देने, जांच में शामिल होने और तय समय पर भारत लौटकर 72 घंटे में सूचना देने की शर्त भी रखी.
चीन के सामने क्यों झुक रहा अमेरिका, ट्रंप की तरकीब कितनी कारगर, भविष्य किसके हक में?
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गुरुवार रात 10:20 बजे गाजियाबाद की लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर संभल में बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश सिंघल के घर पहुंचे। राजेश सिंघल ने उन्हें भगवान श्रीकल्कि का चित्र भेंट किया। इस दौरान विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि यह कांग्रेस की सरकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जब SIR हुआ था, तब दिल्ली के लगभग 32,000 मुस्लिम वोटर यहां और दिल्ली दोनों जगह थे। विधायक ने आगे कहा कि वोटर लिस्ट को शुद्ध करने और उसमें सुधार का काम चल रहा है। इस पर कांग्रेस या दूसरे दल के लोग बेवजह बातें करते रहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव निष्पक्ष होते हैं। अगर किसी को कोई आपत्ति है, तो उसके लिए चुनाव आयोग है। अगर कोई किसी मामले को लेकर कोर्ट गया है, तो कोर्ट निर्देश देता है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। नंदकिशोर गुर्जर ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बात को कोई नहीं मानता। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अमेरिका में बैठकर दंगे कराए और बांग्लादेश में हिंदुओं को कटवा दिया। विधायक ने कहा कि कांग्रेस ने 90 के दशक में कश्मीर खाली करा दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोआखली पर राहुल गांधी के पिता कुछ नहीं बोले और जिन्ना को बैठाकर भारत माता के तीन टुकड़े कर दिए गए। विधायक ने कहा कि इसलिए राहुल गांधी की बातों का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव में गड़बड़ी हुई है, तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की इतनी सीटें कैसे आ गईं? उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार कहीं बनती है, तो चुनाव आयोग अच्छा लगता है। हिमाचल प्रदेश में जब उनकी सरकार बनी, तब क्यों नहीं कहा गया कि चुनाव फर्जी है? उनके मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। नंदकिशोर गुर्जर ने राहुल गांधी को 'पप्पू' बताते हुए कहा कि वह दूसरे 'पप्पू' के साथ बैठकर भगवान राम और पूरे सनातन का अपमान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह सदी सनातन की सदी है। विधायक ने दावा किया कि आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी को 27 सीटें भी नहीं मिलेंगी। उन्होंने सपा पर आतंकवादियों को रिहा करने, बेटियों के साथ दुष्कर्म करने वालों का समर्थन करने और गर्व से यह कहने का आरोप लगाया कि उन्होंने कारसेवा में लोगों को मरवा दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि अब हिंदू जाग चुका है। हिंदू पहले भाईचारा मानता था, लेकिन आज सनातनी उसी को भाईचारा मान रहा है जो सनातनी है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर लोग काफी सक्रिय हैं।
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है। इसमें कहा गया है कि अगर कुछ शर्तें पूरी हुईं तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य छह-सात दिनों में खोल देगा और उसके अगले दिन अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू कर देगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि […]
नेताओं के हेल्दी खानपान के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डाइट जानते हैं। जिन चीजों को अनहेल्दी समझकर खाने से इनकार किया जाता है, उसी डाइट कोक, बर्गर, पिज्जा को खाकर राष्ट्रपति करते हैं बड़े-बड़े फैसलें।
दुश्मनी छोड़ नई पीढ़ी पर दांव?: शी ने एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाया, जानें क्या है ड्रैगन का नया प्लान- Xi Jinping invited 100000 American youths to visit China over next five years find out what Dragon plan
Prayagraj News: प्रयागराज से अमेरिका भेजे जाएंगे 600 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर
प्रयागराज से अमेरिका भेजे जाएंगे 600 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर
Sonipat News: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों ने की सभा
सभा में बिजली बिल 2025 रद्द करने, बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक, सीटू प्लस फिफ्टी फीसदी के आधार पर एमएसपी देने और किसान-मजदूरों को कर्जमुक्त करने की मांग उठाई गई।
दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा में चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर दो महिलाओं समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
'नवंबर में खत्म हो जाएगा ट्रंप का राज..'; अमेरिका के ताकतवर शख्स ने कर दी भविष्यवाणी
कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने बड़ा दावा किया है कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट हाउस जीत लेंगे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मौजूदा दबदबा खत्म हो जाएगा। न्यूयॉर्क में जलवायु सम्मेलन के बाद उन्होंने इसे जनता का हिसाब-किताब का दिन बताया।
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
दुनिया के चर्चित यूट्यूबर्स में शामिल अमेरिकी यूट्यूबर मिस्टर बीस्ट यानी जिमी डोनाल्डसन ने गुरुवार दोपहर 3 बजे ताजमहल का दीदार किया। उनके पहुंचने की खबर मिलते ही पर्यटकों और प्रशंसकों में उत्साह नजर आया। लोगों ने उनके साथ फोटो लेने की कोशिश की। इस दौरान उनके फैन एक बच्चे युवान गौरव ने मिस्टर बीस्ट को अपनी स्केच बुक गिफ्ट की, जिसे देखकर वे काफी खुश नजर आए। ताजमहल परिसर में मिस्टर बीस्ट और उनकी पत्नी थिया बूयसेन ने स्मारक की खूबसूरती को करीब से देखा। उन्होंने ताजमहल की बारीक पच्चीकारी के बारे में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से जानकारी ली। सफेद संगमरमर पर की गई नक्काशी और पच्चीकारी को देखकर दोनों काफी प्रभावित नजर आए और ताज की खूबसूरती में खोए दिखे। ताजमहल की खूबसूरती में खोए नजर आएताजमहल दुनिया के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है और इसकी संगमरमर की वास्तुकला के साथ बारीक पच्चीकारी खास आकर्षण है। आगरा जिला प्रशासन के अनुसार ताजमहल को शाहजहां ने मुमताज महल की याद में बनवाया था और इसके निर्माण में करीब 22 हजार कारीगरों ने काम किया था। मिस्टर बीस्ट के ताजमहल पहुंचने के दौरान उनके प्रशंसकों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवान गौरव की स्केच बुक से लेकर पच्चीकारी की जानकारी लेने तक, उनकी ताजमहल यात्रा के कई पल लोगों के बीच चर्चा का विषय बने। कौन हैं मिस्टर बीस्टअमेरिकी यूट्यूबर मिस्टर बीस्ट का असली नाम जिमी डोनाल्डसन है। वे YouTuber, बिजनेसमैन और परोपकारी के तौर पर दुनिया भर में मशहूर हैं। वे खासतौर पर बड़े-बड़े चैलेंज, प्रतियोगिताओं, भारी-भरकम इनाम और लोगों की मदद करने वाले वीडियो के लिए जाने जाते हैं। उनका मुख्य YouTube चैनल 2026 में 48.4 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर के साथ प्लेटफॉर्म का सबसे ज्यादा सब्सक्राइब किया जाने वाला चैनल है। मिस्टर बीस्ट Beast Industries, Feastables और MrBeast Burger जैसे कारोबार से भी जुड़े हैं और Team Trees व Team Seas जैसे बड़े फंडरेजिंग अभियानों में भी काम कर चुके हैं। उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब 2.6 अरब डॉलर बताई जाती है। कौन हैं थिया बूयसेनमिस्टर बीस्ट की पत्नी थिया बूयसेन दक्षिण अफ्रीका की कंटेंट क्रिएटर, स्ट्रीमर और लेखिका हैं। वे ऑनलाइन TheaBeasty नाम से भी जानी जाती हैं और गेमिंग कंटेंट के साथ मनोविज्ञान, विज्ञान और मानव व्यवहार से जुड़े विषयों पर भी कंटेंट बनाती हैं। उनकी किताब The Marked Children 2022 में प्रकाशित हुई थी। जुलाई 2026 में मिस्टर बीस्ट और थिया ने शादी की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक अधिवेशन में इस बार एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली। अमेरिकी धरती न्यूयॉर्क पर खड़े होकर कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जिस तरह अमेरिका की नीतियों को ही आड़े हाथ लिया, उससे वैश्विक राजनीति में बढ़ती बेचैनी साफ दिखाई दी। ईरान ने सीधे अमेरिका को चुनौती दी, फ्रांस ने महाशक्तियों के तकनीकी और सामरिक वर्चस्व पर सवाल उठाए, सीरिया ने गोलान पहाड़ियों पर अमेरिकी नीति को खारिज किया, जबकि ब्राजील और तुर्किये जैसे देशों ने संप्रभुता, विदेशी हस्तक्षेप और मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। संदेश साफ है कि दुनिया की अनेक सरकारें मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकटों के लिए अमेरिकी नीतियों और व्यापक शक्ति आधारित राजनीति को जिम्मेदार ठहराते हुए अब ज्यादा मुखर दिखाई दे रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भाषण बेहद महत्वपूर्ण रहा। 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में मैक्रों ने चेतावनी दी कि दुनिया कहीं फिर से “जंगल के कानून” की ओर न लौट जाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था उस समय कमजोर होती है जब ताकतवर देश नियमों और संस्थाओं से ऊपर खुद को समझने लगते हैं। मैक्रों ने सबसे तीखा सवाल कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को लेकर उठाया। उनका कहना था कि दुनिया का भविष्य केवल अमेरिका, चीन या कुछ बड़ी निजी कंपनियों के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने तकनीकी संप्रभुता, ओपन सोर्स अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों और रक्षा, साइबर सुरक्षा तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत को डराया नहीं जा सकता, यह नया भारत है गाजा के मुद्दे पर भी मैक्रों ने पश्चिमी देशों की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने गाजा की मानवीय स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए मौजूदा शांति प्रयासों पर सवाल उठाया। पश्चिमी तट में बस्तियों से जुड़ी हिंसा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों की संप्रभुता का उल्लंघन इजराइल के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकता। यूक्रेन युद्ध को लेकर उन्होंने नागरिक और ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने तथा काला सागर से अनाज परिवहन की सुरक्षा के लिए दोहरी अस्थायी युद्धविराम व्यवस्था का प्रस्ताव भी रखा। लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका को सबसे सीधी चुनौती ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की ओर से मिली। 23 सितंबर को पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दिन पहले दिए गए कड़े बयान का जवाब देते हुए कहा कि ईरान दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आरोप लगाते हुए ईरान को आतंकवाद का दोषी नहीं, बल्कि आतंकवाद का पीड़ित बताया। पेजेशकियन ने ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि उनका देश “घुटने नहीं टेकेगा।” उन्होंने परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा से इंकार किया, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक, विशेषकर चिकित्सा और कृषि के लिए, इन पर किसी तरह की पाबंदी स्वीकार करने से भी साफ इंकार कर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी उन्होंने ईरान के नौवहन अधिकारों पर जोर दिया और अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त करने की मांग रखी। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति ने युद्ध के बीच कूटनीति का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत संभव है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को धमकी, बल प्रयोग और प्रतिबंधों की भाषा छोड़नी होगी। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच कतर की मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष बातचीत भी हुई, लेकिन तत्काल कोई बड़ी सफलता सामने नहीं आई। ईरानी पक्ष आर्थिक और समुद्री प्रतिबंध हटाने तथा फ्रीज हुए धन से जुड़े मुद्दों पर अपनी शर्तों पर कायम रहा। इस टकराव का सबसे नाटकीय दृश्य तब देखने को मिला जब पेजेशकियन के भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र महासभा कक्ष से बाहर चला गया। एक ओर मंच पर ईरान अमेरिका को चुनौती दे रहा था, दूसरी ओर पर्दे के पीछे दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी चल रही थी। यानी युद्ध और कूटनीति एक साथ आगे बढ़ते दिखाई दिए। वहीं सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने भी अमेरिकी नीति पर खुला प्रहार किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट कहा कि गोलान पहाड़ियां सीरिया की भूमि हैं और किसी भी बाहरी शक्ति को सीरियाई क्षेत्र किसी दूसरे देश को सौंपने का अधिकार नहीं है। उनका यह बयान अमेरिका द्वारा गोलान पहाड़ियों पर इजराइली संप्रभुता को मान्यता देने वाली नीति के सीधे विरोध में था। साथ ही अल-शरा ने इजराइली सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए सैकड़ों हवाई हमलों, बड़ी संख्या में घुसपैठ और गिरफ्तारियों का आरोप लगाया तथा इजराइली सेना की वापसी और 1974 के अलगाव समझौते के पालन की मांग की। साथ ही उन्होंने युद्ध के बाद सीरिया के पुनर्निर्माण की तस्वीर भी पेश की। उन्होंने सरकारी संस्थाओं को स्थिर करने, हथियारों को केंद्रीय सरकार के नियंत्रण में लाने, संक्रमणकालीन न्याय लागू करने और मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई की बात भी कही। उधर, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने भी विदेशी हस्तक्षेप और राष्ट्रीय संप्रभुता के सवाल को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि ब्राजील किसी बाहरी शक्ति का पिछलग्गू नहीं है और विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान ने भी संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था और सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर सवाल उठाए तथा गाजा के मुद्दे पर इजराइल को मिल रहे समर्थन की आलोचना की। देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम को केवल अमेरिका-विरोधी भाषणों की श्रृंखला नहीं माना जा सकता। असली मुद्दा तेजी से बदलती विश्व व्यवस्था का है। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अलग-अलग देशों की आवाजें यह सवाल उठा रही हैं कि क्या सैन्य ताकत, आर्थिक प्रतिबंध, तकनीकी वर्चस्व और कूटनीतिक दबाव के दम पर विश्व व्यवस्था चलाई जा सकती है। न्यूयॉर्क में इस बार अमेरिका के सामने सवाल केवल ईरान का नहीं था। सवाल यह था कि क्या दुनिया कुछ शक्तिशाली देशों और बड़ी तकनीकी कंपनियों के निर्णयों से चलेगी या फिर संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका दोबारा मजबूत होगी। संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह अधिवेशन इसी टकराव को बेहद तीखे ढंग से दुनिया के सामने रख रहा है। -नीरज कुमार दुबे
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका-ईरान विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के यूएन महासभा में हिस्सा लेने अमेरिका पहुंचने के बाद ईरान ने एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दे डाली है। अब ईरान ने बोल दिया कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। खबरों के अनुसार, ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के सलाहकार याह्या रहीम सफावी ने अब ये बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जंग पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंच चुकी है। दोबारा हमला हुआ तो इसका दायरा और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस जंग का प्रभाव भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। आपको बात दें कि हिंद महासागर पश्चिम एशिया को एशिया से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने पर तेल लेकर आने वाले जहाजों पर हमले का खतरा बढ़ जाएगा। PC:abplive अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
मंत्री अशोक चौधरी ने जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं पर सरकार का बचाव करते हुए कहा कि अपराध हर जगह होते हैं, महत्वपूर्ण है कि सरकार कितनी तेजी से कार्रवाई करती है। उन्होंने बिहार में कानून का राज कायम रहने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, जबकि सांसद शांभवी चौधरी ने भी सख्त सजा की मांग की।
ऐसी घटनाएं तो अमेरिका, जापान में भी होती है; श्रेयसी, जायसवाल के बाद अशोक चौधरी उवाच
अशोक चौधरी जमुई और समस्तीपुर में नाबालिग छात्रा से हैवानियत पर ने कहा है कि घटनाओं को कोई मुख्यमंत्री या किसी देश के राष्ट्रपति भी नहीं रोक सकता है। अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों में ऐसी घटनाएं होती हैं। घटना के बाद सरकार क्या कदम उठाती है यह महत्वपूर्ण है।
CBSE पोर्टल की सुरक्षा खामी उजागर करने वाले 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के हॉल ऑफ फेम में शामिल कर सम्मानित किया गया है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अमेरिका में हुआ लेट-लेट कर स्वागत! देखें वीडियो
चीन के राष्ट्रपति के स्वागत के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप खुद रनवे पर मौजूद रहे और प्लेन के सीढ़ियों के पास जाकर चीनी राष्ट्रपति की अगवानी की।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े हालिया कानून के बीच अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदार देशों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी दी।
चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आज पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया ने ED की कार्रवाई और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के उन आरोपों पर पलटवार किया, जिसमें बिट्टू ने दावा किया था कि मुंडिया विदेश चले गए हैं। मुंडिया ने कहा कि वह चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित पार्टी ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, अमेरिका में नहीं। बता दें कि ED ने मंत्री के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह उर्फ प्रिंस के साहनेवाल स्थित घर पर तलाशी ली थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई GMADA से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। 'लगता है बिट्टू ने मेरे घर के पास ट्रैवल एजेंसी खोल ली' मुंडिया ने बिट्टू पर तंज कसते हुए कहा, बिट्टू से मैं कहना चाहूंगा कि लगता है उनकी टिकट कटने के बाद अब उन्होंने चंडीगढ़ रोड पर मेरे घर के पास ट्रैवल एजेंसी खोल ली है। वहां उन्होंने मेरी और मेरे भतीजे की टिकट बुक कर हमें अमेरिका भेज दिया। मुंडिया ने कहा कि बिट्टू ने उनके भतीजे को भांजा बताया, जबकि प्रिंस उनका भतीजा है। उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने भी इस मामले को लेकर गलत जानकारी दी गई। 'परिवार के लोगों को घंटों परेशान किया' ED की कार्रवाई पर मुंडिया ने आरोप लगाया कि प्रिंस के घर पर परिवार के सदस्यों को परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि प्रिंस की मां, पत्नी, सालेहार और तीन साल की बेटी घर में मौजूद थे। उनके मुताबिक, करीब 11 बजे से रात 3 बजे तक तलाशी चली। मुंडिया का आरोप है कि परिवार के लोगों से पूछा गया कि वे मंत्री के साथ कब से हैं और उन्हें कितने पैसे मिलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रिंस की सैलरी तक पूछी गई और यह भी पूछा गया कि इतनी सैलरी में परिवार का गुजारा कैसे होता है। 'मंत्री का साथ छोड़ने या पार्टी बदलने को कहा' मुंडिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने प्रिंस की मां से कहा कि वह अपने बेटे को समझाएं कि वह मंत्री का साथ छोड़ दे या मंत्री पार्टी छोड़ दें। उन्होंने दावा किया कि प्रिंस की पत्नी गर्भवती हैं और उन्हें करीब साढ़े चार घंटे तक खड़ा रखा गया। मुंडिया ने यह भी आरोप लगाया कि एक बच्चे की मां को बच्चे को फीड तक नहीं करने दिया गया और परिवार की विधवा सदस्य को भी परेशान किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं है। ED की ओर से तलाशी के दौरान इन कथित व्यवहार संबंधी आरोपों पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। 'हम डरकर पार्टी नहीं छोड़ेंगे' मुंडिया ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एजेंसियों के जरिए पंजाब में कार्रवाई की जा रही है और हम पंजाबी हैं, हम डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह ED की कार्रवाई से डरकर पार्टी नहीं छोड़ेंगे। मुंडिया ने पंजाब में आगामी चुनावों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग भी भाजपा के खिलाफ सड़कों पर आ गए हैं और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। ED ने 26 ठिकानों पर की थी कार्रवाई उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने GMADA से जुड़ी जांच में दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और लुधियाना समेत कई स्थानों पर सर्च और सर्वे किए हैं। जांच का संबंध तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स और उससे जुड़ी कंपनियों से बताया गया है। ED की कार्रवाई के दौरान प्रिंस के घर से एक लैपटॉप अपने कब्जे में लिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
वैश्विक राजनीति के मंच पर जब भी वॉशिंगटन और बीजिंग के शीर्ष नेतृत्व की बैठक होती है, दुनिया की नजरें महाशक्तियों के रुख पर टिक जाती हैं। डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत में व्यापार शुल्क, तकनीकी वर्चस्व, ताइवान संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला हमेशा केंद्र में रहते हैं। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, खिलौने और औद्योगिक कलपुर्जों के मामले में अमेरिका का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार होने के बावजूद एक ऐसा क्षेत्र है जहां बीजिंग के लिए पेंटागन के दरवाजे पूरी तरह सील हैं—हथियारों का कारोबार।वॉशिंगटन और बीजिंग: व्यापार में अरबों डॉलर, लेकिन रक्षा क्षेत्र में शून्य डीलआंकड़ों पर गौर करें तो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच हर साल सैकड़ों अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। अमेरिकी सुपरमार्केट्स से लेकर सिलिकॉन वैली तक चीनी उत्पादों की भरमार दिखती है। इसके ठीक उलट जब बात सामरिक सुरक्षा और मिलिट्री हार्डवेयर की आती है, तो अमेरिका अपनी सेना के लिए चीन से एक बुलेट या ड्रोन तक नहीं खरीदता। यह कोई संयोग नहीं बल्कि कई दशकों से चली आ रही कठोर विदेश नीति, रणनीतिक अविश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सुविचारित फैसला है।1989 का तियानमेन स्क्वायर नरसंहार और स्थायी अमेरिकी हथियार प्रतिबंधअमेरिका द्वारा चीनी हथियारों के आयात और निर्यात पर पूर्ण पाबंदी की नींव जून 1989 की तियानमेन स्क्वायर घटना के बाद पड़ी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के प्रशासन ने बीजिंग द्वारा मानवाधिकारों के घोर हनन के विरोध में चीन पर कड़े रक्षा प्रतिबंध थोप दिए। इस कानून के तहत अमेरिका ने चीन को किसी भी प्रकार की रक्षा सामग्री, संवेदनशील सैन्य उपकरण और दोहरे उपयोग वाली तकनीकों की बिक्री पर पूर्ण रोक लगाई। साथ ही चीन से अमेरिकी रक्षा बलों के लिए किसी भी सैन्य साजो-सामान के आयात को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। यह प्रतिबंध आज भी पूरी ताकत से लागू है।बैकडोर जासूसी और आधुनिक साइबर वारफेयर का जानलेवा जोखिमइक्कीसवीं सदी का युद्ध केवल तोप और बारूद का नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर, माइक्रोचिप्स, एआई एल्गोरिदम और सैटेलाइट कनेक्टिविटी का खेल बन चुका है। पेंटागन के रणनीतिकारों को स्पष्ट डर है कि यदि चीन से कोई रक्षा उपकरण या सैन्य चिप्स खरीदी जाती हैं, तो उनमें 'हार्डवेयर ट्रोजन' या गुप्त बैकडोर प्रोग्राम मौजूद हो सकते हैं। युद्ध की स्थिति में बीजिंग महज एक साइबर कमांड से अमेरिकी मिसाइल डिफेंस, रडार नेटवर्क या फाइटर जेट्स के एवियोनिक्स को पंगु बना सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी कांग्रेस ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के तहत चीनी टेलीकॉम और टेक कंपनियों को अमेरिकी डिफेंस सप्लाई चेन से बाहर निकाल फेंका है।रिवर्स इंजीनियरिंग और बौद्धिक संपदा चोरी की कड़वी हकीकतअमेरिकी रक्षा उद्योग की रीढ़ उसकी बेजोड़ तकनीक और नवाचार है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के कई आधुनिक लड़ाकू विमान, जैसे जे-20 स्टील्थ फाइटर और जे-31, अमेरिकी एफ-22 और एफ-35 के डिज़ाइनों से हैरान करने वाली समानता रखते हैं। अमेरिका का लंबे समय से आरोप रहा है कि चीन ने औद्योगिक जासूसी और साइबर हैकिंग के जरिए पेटेंट तकनीकें चुराई हैं। ऐसे माहौल में अगर अमेरिका चीन के साथ किसी रक्षा व्यापार या संयुक्त निर्माण में शामिल होता है, तो उसकी शेष अत्याधुनिक मिलिट्री तकनीकों के लीक होने का शत-प्रतिशत खतरा बना रहता है।इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भू-राजनीतिक टकराव और ताइवान का सवालचीन केवल अमेरिका का व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि अमेरिकी नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी में दर्ज उसका सबसे बड़ा रणनीतिक व सैन्य प्रतिस्पर्धी है। साउथ चाइना सी में चीन की कृत्रिम सैन्य चौकियों का निर्माण, पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ सीमा विवाद, और ताइवान पर जबरन कब्जे की बीजिंग की धमकियां सीधे अमेरिकी हितों को चुनौती देती हैं। अमेरिका ताइवान को अरबों डॉलर के अत्याधुनिक हथियार बेचता है ताकि वह चीनी हमले को रोक सके। ऐसे प्रतिद्वंद्वी से हथियार खरीदना, जो किसी भी समय सीधे युद्ध में सामने आ सकता है, रणनीतिक आत्मघात के समान होगा।नाटो इंटरऑपरेबिलिटी और अमेरिकी सैन्य-औद्योगिक परिसर की आत्मनिर्भरताअमेरिकी रक्षा प्रणाली पूरी तरह से नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के मानकों के अनुरूप काम करती है। पश्चिमी हथियारों की प्रोग्रामिंग, संचार आवृत्ति और युद्ध प्रणालियां चीनी मानक के बिल्कुल अनुकूल नहीं हैं। दूसरी अहम बात यह है कि अमेरिका खुद दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन, रेथियॉन और जनरल डायनेमिक्स जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियां दुनिया के सबसे घातक हथियार बनाती हैं। पेंटागन 'बाय अमेरिकन' नीति के तहत अपनी घरेलू कंपनियों और नाटो सहयोगियों को प्राथमिकता देता है, जिससे उसकी सैन्य आत्मनिर्भरता अटूट बनी रहे।डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाले उच्चस्तरीय राजनयिक संवाद भले ही टैरिफ, मुद्रा विनिमय या कृषि व्यापार में तात्कालिक राहत ला दें, लेकिन दोनों देशों के सैन्य संबंध कभी सामान्य नहीं हो सकते। हथियारों की खरीद-फरोख्त विश्वास की सर्वोच्च बुनियाद पर टिकी होती है, और जब तक बीजिंग व वॉशिंगटन वैश्विक प्रभुत्व की जंग में आमने-सामने हैं, पेंटागन के शस्त्रागार में 'मेड इन चाइना' का कोई स्थान नहीं होगा।
जमुई के बाद समस्तीपुर में कुछ लड़कों ने बीच सड़क एक लड़की से छेड़खानी की। उसका वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस मामले को लेकर बिहार की सियासत गरम है। बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोला है। तेजस्वी ने कहा है, ‘लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। अगर सीएम जुबान के पक्के हैं तो इस्तीफा दें। कुछ दिनों पहले इनका बयान आया था कि रील बनाओगे तो मारे जाओगे। नहीं बनाओगे तो बच जाओगे। इन पर तो खुद 7 हत्या का केस है। दूसरों को बचने का आइडिया दे रहे हैं।’ पीएम चुनाव के वक्त बिहार आए थे तो कहते थे कि रील बनाओ। ये लोग हल्की बात करते हैं। वहीं जदयू कोटे से बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा है कि घटनाएं तो अमेरिका और जापान में भी होती हैं।' तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार के मंत्रियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘इनके निर्लज्ज मंत्री ऐसी घटनाओं को ‘छिटपुट घटना’ बताते हैं।’ उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या समस्तीपुर की घटना को भी छिटपुट घटना ही बताया जाएगा? क्या बिहार में जाति देखकर कार्रवाई होगी और दूसरों को बचाया जाएगा? तेजस्वी ने कहा कि बिहार में लड़कियों के साथ लगातार घटनाएं हो रही हैं, अगर सीएम जुबान के पक्के हैं तो इस्तीफा दें। मंत्री बोले- घटनाएं तो अमेरिका-जापान में भी मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि घटनाएं अमेरिका और जापान में भी हो रही हैं, लेकिन सरकार कार्रवाई कितनी जल्दी कर रही वो भी तो देखिए। कोई भी देश में घटना बंद नहीं हो सकती है। ऐसा नहीं कह सकते कि कल से कुछ घटना नहीं होगी। वहीं जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा कि निश्चित तौर पर चिंता करने वाली बात है। इस मामले में पुलिस एक्शन ले रही है। समस्तीपुर सांसद को नेता प्रतिपक्ष ने घेरा तेजस्वी यादव ने समस्तीपुर से लोजपा सांसद शांभवी चौधरी के फेसबुक पोस्ट को शेयर करते हुए सवाल उठाए हैं। तेजस्वी ने X पर लिखा- 'ये हैं लोजपा से समस्तीपुर की महिला और कथित युवा सांसद शांभवी चौधरी, जिसने अपने लोकसभा क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की से हुए यौन शोषण में शातिरपन और चालाकी का शर्मनाक प्रदर्शन करते हुए अपने फेसबुक पेज पर बिहार पुलिस द्वारा अभियुक्तों के नाम सहित जारी प्रेस रिलीज में से अपनी सहूलियत व सुविधानुसार आरोपियों के नाम काट कर (Crop कर) पोस्ट किया है। महिला सांसद ने ऐसा जानबुझकर किया है ताकि आरोपियों के नाम और जाति का दूसरों को पता ना लग सके। अभियुक्तों की जाति इनके और इनकी पार्टी प्रमुख चिराग पासवान के राजनीतिक हित साधने में कोई बाधा उत्पन्न ना करे इसलिए सांसद ने दरिंदे गुंडों से सहानुभूति एवं अपमानपन जताते हुए नाम काट दिए। जाहिर है एक महिला सांसद पीड़ित नाबालिग लड़की का पक्ष ना लेकर अप्रत्यक्ष रूप से बदमाशों को बचा रही है। अब ऐसे में आप क्या कहेंगे? ये सरकार और उसके कर्ता-धर्ता ऐसे ब्लात्कार और अपराध रोकेंगे??' मंत्री बोले- घटना की रील बनाने के पीछे साजिश मंत्री दिलीप जायसवाल ने इन घटनाओं के वीडियो और रील बनने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराधी घटना को अंजाम देता है और फिर उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर रील डालता है, तो यह सोचने वाली बात है। कोई अपराधी इतना बेवकूफ तो नहीं होगा कि उसे यह पता न हो कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस उस तक पहुंच सकती है और कानून उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है, इस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।' अब जानिए समस्तीपुर घटना के बारे में समस्तीपुर में भी जमुई जैसी छेड़खानी की घटना हुई है। सड़क पर कुछ लड़कों ने एक नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी की, जिसका वीडियो 21 सितंबर से वायरल है। लड़की उन लोगों से बार-बार छोड़ने के लिए कहती है, लेकिन लड़कों ने कभी उसका हाथ पकड़कर खींचा, बाल खींचे तो कभी उसे जबरन खींचकर दूसरी ओर ले गए। घटना कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में बूढ़ी गंडक नदी के बाइपास बांध के पास की बताई जा रही है। समस्तीपुर पुलिस को इसकी जानकारी 23 सितंबर की रात करीब साढ़े 10 बजे मिली। इसके बाद पुलिस ने कर्पूरी ग्राम थाना क्षेत्र में कई जगहों पर छापेमारी की। 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पांच दिन पहले 19 सितंबर को बिहार के ही जमुई में भी नाबालिग लड़की से छेड़खानी का मामला सामने आया था। इस मामले में 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखिए 56 सेकेंड के वीडियो में क्या है वो जानिए 56 सेकेंड के वीडियो में दिख रहा है कि एक लड़की सड़क पर खड़ी है। उसे कुछ लड़के परेशान कर रहे हैं। लड़की उनसे बचने की कोशिश करती है। बनियान पहने एक लड़का बार-बार उसका हाथ पकड़ता दिख रहा है। लड़की के विरोध करने पर एक लड़का उसे मारने की कोशिश करता है। ये सब बीच सड़क पर हो रहा है, लेकिन कोई बीच-बचाव के लिए नहीं आया। लड़की बार-बार कहती है कि मुझे छोड़ दो, लेकिन लड़के उसे जाने नहीं देते। लड़की कहती है- रुको, मैं अपने भाई को बुलाती हूं। इस पर लड़के कहते हैं कि ठीक है बुलाओ। वीडियो के अंत में दिख रहा है कि एक लड़का बाइक के सहारे खड़ा है।
दुनिया के 120 से ज्यादा देशों में घूम चुके हरियाणा के ट्रैवल व्लॉगर परमवीर बेनीवाल को अमेरिका में नस्लीय टिप्पणी का सामना करना पड़ा। लास वेगास में दो अमेरिकन युवकों ने बेनीवाल को रोककर कमेंट किए और इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की। अमेरिकन युवकों ने मजाक उड़ाते हुए कहा- क्या 7-इलेवन में कैशियर बनोगे असल में 7-इलेवन कन्वीनियंस स्टोर चेन है, जिसमें काफी संख्या में भारतीय कैशियर-क्लर्क जैसे जॉब करते हैं, जिन्हें अमूमन अमेरिकन यूथ जॉब के तौर पर पसंद नहीं करते। इसे कम दर्जे वाली जॉब मानते हैं। अचानक हुई इस तरह की टिप्पणी पर परमवीर घबराए नहीं बल्कि करार जवाब दिया। परमवीर ने कहा- तुम मुझे अफॉर्ड नहीं कर पाओगे ये सुनकर अमेरिकन युवक सन्न रह गए और कोई जवाब नहीं दे पाए। फिर वो डोंट-डोंट करते रहे। परमवीर ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने यूटयूब चैनल पैसेंजर परमवीर पर अपलोड किया है, जो काफी वायरल हो रहा है। पहले जानिये…लास वेगास का पूरा घटनाक्रम वीडियो वायरल होते ही दबाव में आया वेब स्ट्रीमर परमवीर का वीडियो वायरल होने के बाद कमेंट करने वाले अमेरिकन वेब स्ट्रीमर की ओर से भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया सामने आई है। इंस्टा अकाउंट @fore1gnxprime पर डाली वीडियो क्लिप्स के मुताबिक, उसने कहा कि हम पर भारतीयों का हमला हो गया है। उसने माना कि उसने “गलत इन्फ्लुएंसर से पंगा ले लिया”। यह भी कहा कि उसे लगता है कि वह भारत में बड़ा इन्फ्लुएंसर है, इसलिए अब भारतीय यूजर्स उसके अकाउंट्स पर स्पैम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय यूजर्स स्ट्रीमर के इंस्टाग्राम अकाउंट पर पहुंचकर उसके डायरेक्ट मैसेज (डीएम) में उसकी हरकत की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। एक क्लिप में स्ट्रीमर ने अपने फॉलोअर्स से कहा कि आगे की कुछ वीडियोज़ में वह 7-इलेवन रेज बेटिंग (यानी लोगों को भड़काने वाला कंटेंट) वापस लाएगा। उसने यह भी कहा कि तुम लोगों ने गलत इंसान से पंगा लिया है। यानी माफी मांगने या अपने व्यवहार पर खेद जताने के बजाय उसने उसी तरह का कंटेंट दोबारा बनाने की बात कही। क्या है 7-इलेवन वाला ताना परमवीर ने बताया कि अमेरिका में भारतीयों और अन्य दक्षिण एशियाई लोगों को अक्सर कन्वीनियंस स्टोर के कैशियर या कैब ड्राइवर के स्टीरियोटाइप में बांधकर मजाक बनाया जाता है। उनके मुताबिक, भारतीयों के लिए 7-इलेवन और अरब मूल के लोगों के लिए 9/11 जैसे तंज कसे जाते हैं। असल में 9/11 अमेरिका पर हुए आतंकी हमले का दिन रहा है। 7-इलेवन दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल-कन्वीनियंस स्टोर चेन में से एक है। सॉफ्ट रेसिज्म रोज झेलना पड़ता है परमवीर ने वीडियो में कहा कि उन पर इस घटना का ज्यादा असर नहीं पड़ा, क्योंकि विदेशों में सॉफ्ट रेसिज्म का सामना वे रोज करते हैं। उनका कहना था कि भारतीय मेहनत और कानूनी तरीके से कमाकर उन देशों की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं रुकनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से लोग ऐसे तंज समझ ही नहीं पाते और नस्लभेद का शिकार होकर चुप रह जाते हैं। वीडियो को मिले 32 लाख से ज्यादा व्यूज परमवीर ने यह पूरा वाकया 22 सितंबर को अपने चैनल पर साझा किया। वीडियो लास एंजिल्स के वेनिस बीच से लास वेगास तक के सफर पर आधारित है। खबर लिखे जाने तक इसे 32 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका था और 54 हजार से ज्यादा लाइक मिल चुके थे। परमवीर के यूट्यूब पर करीब 28.4 लाख सब्सक्राइबर हैं।
व्यापार समझौता दो महीने आगे बढ़ाने पर अमेरिका और चीन के बीच सहमति
वॉशिंगटन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान अमेरिका ने घोषणा की कि दोनों देशों ने अपने मौजूदा व्यापार समझौते को दो महीने और बढ़ाने पर सहमति जताई है।
डोनाल्ड ट्रंप को झटका: व्हाइट हाउस से मीडिया बैन पर कोर्ट ने लगाई रोक, अमेरिकी प्रशासन को क्या आदेश दिया?
राजस्थान: जयपुर के सरकारी अस्पताल की चर्चा अमेरिका तक! विदेशी महिला ने कराया 209 डॉलर में ऑपरेशन
अमेरिका की 28 वर्षीय नागरिक अमेथिस्ट मैकएडोरी पित्त की थैली में पथरी के इलाज के लिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचीं, जहां सर्जिकल यूनिट-5 में डॉ. राजेंद्र बागड़ी के नेतृत्व में दूरबीन विधि से उनकी सफल सर्जरी हुई।
अपनी पत्नी के साथ अमेरिका पहुंचे Xi Jinping, डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकाल तोड़कर किया ऐसा
इंटरनेट डेस्क। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 11 साल में पहली बार अमेरिका की यात्रा की है। अमेरिका पहुंचने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकाल तोड़ते हुए उनका ज्वाइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर खुद स्वागत किया। इस दौरान उन्हें रेड कार्पेट बिछाकर औपचारिक सम्मान दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी पत्नी और अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप भी मौजूद थीं। दूसरी और शी जिनपिंग के साथ भी उनकी पत्नी पेंग लियुआन मौजूद रहीं। डोनाल्ड ट्रंप चौंकाने वाला कदम उठाते हुए एयरपोर्ट पर खुद शी जिनपिंग का स्वागत करने पहुंचे। किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का सीधे एयरपोर्ट जाना आम नहीं है। आज रात व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के सम्मान में स्टेट डिनर का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद दुनिया के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच द्वपक्षीय बातचीत होगी। इस बैठक में ट्रंप और जिनिपंग के बीच व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ताइवान और रूस से जुड़े मुद्दों पर बात हो सकती है। PC:abplive अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
तनय बना रहे अमेरिकी कंपनियों के लिए एआई तकनीक
उदयपुर में जन्मे तनय अग्रवाल अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए एआई आधारित तकनीक विकसित कर रहे हैं। उन्होंने चंद्रिका माहेश्वरी के साथ मिलकर क्विवली की स्थापना की है। चंद्रिका कंपनी की सीईओ व तनय को-फाउंडर एवं चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं। कंपनी ऐसी तकनीक बना रही है, जो ग्राहक के रिकॉर्ड, पूर्व बातचीत, सॉफ्टवेयर उपयोग व कारोबारी बदलावों को एक जगह जोड़कर टीमों को अगली बैठक की बेहतर तैयारी में मदद करेगी।
प्रदेश की हैल्थ पॉलिसीज और ऑनलाइन रिव्यू देखकर अमेरिका की 28 वर्षीय महिला पित्त की थैली की पथरी का इलाज कराने एसएमएस पहुंची। जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. राजेंद्र बागड़ी व टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से महिला का ऑपरेशन किया। अमेरिका में इस सर्जरी पर करीब 14,35,895 रुपए (15 हजार अमेरिकी डॉलर) तक खर्च आता, जबकि एसएमएस में ऑपरेशन महज 20 हजार (209 डॉलर) में हुआ। एसएमएस में राजस्थान के मरीजों के अलावा अन्य राज्यों से हर साल करीब 15 हजार और विदेशों से करीब 100 मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। जयपुर आने-जाने के खर्च से भी कम में इलाज महिला के अनुसार, एसएमएस अस्पताल में ऑपरेशन का खर्च 209 डॉलर यानी करीब 20 हजार रुपए आया। इलाज का खर्च यहां आने-जाने के खर्च से भी कम रहा। भारत आने-जाने, ठहरने और इलाज सहित कुल खर्च भी अमेरिका में केवल सर्जरी पर आने वाले करीब 15 हजार डॉलर के अनुमानित खर्च से कम रहा। पूरी जानकारी जुटाई, फिर पहुंची अस्पताल महिला ने बताया कि भारत आने से पहले उसने एसएमएस अस्पताल और यहां के डॉक्टर्स के बारे में ऑनलाइन रिव्यू और पॉलिसीज की जानकारी ली। सरकारी नियमों के तहत निर्धारित न्यूनतम शुल्क में उसका ऑपरेशन किया गया। जनरल वार्ड में ही कराया इलाज डॉ. राजेन्द्र बागड़ी ने बताया कि महिला कॉटेज के बजाय जनरल वार्ड में रहीं। ऑपरेशन में एनेस्थिसिया प्रो. सुशील भाटी, डॉ. इन्दु, डॉ. कंचन, डॉ. सुनील व अन्य भी शामिल रहे।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में इस बार अमेरिकी खरीदार भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
Jaunpur News: अमेरिका से आए उद्योगपतियों के साथ सीएम से मिले विधायक
MLA meets CM along with industrialists who came from America
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका की सेना संयुक्त युद्धाभ्यास कर रही है। 'युद्ध अभ्यास-2026' में AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, भारत और अमेरिकी सेना के जवानों के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं। रेगिस्तानी इलाके में दोनों देशों के जवान आर्टिलरी, रॉकेट सिस्टम, एयर डिफेंस, काउंटर ड्रोन तकनीक और एविएशन क्षमताओं का इस्तेमाल कर अभ्यास कर रहे हैं। इसमें M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, स्वदेशी धनुष 155MM तोप और पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर के साथ फायरिंग ड्रिल शामिल है। इस युद्धाभ्यास के वीडियो सामने आए हैं, जिसमें AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर से जमीन पर दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों पर पिन पॉइंट अटैक होता नजर आ रहा है। जबकि दूसरे वीडियो में दो हेलिकॉप्टर तेजी से टारगेट पर अटैक करते हैं। संयुक्त युद्धाभ्यास की खासियत केवल अलग-अलग हथियारों की फायरिंग नहीं, बल्कि उन्हें एक संयुक्त ऑपरेशन में इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग है। टारगेट की पहचान, सूचना का आदान-प्रदान, फायर कमांड, आर्टिलरी और रॉकेट फायर, ड्रोन खतरे की पहचान और काउंटर ड्रोन जैसी प्रक्रियाओं को भी शामिल किया जा रहा है। पहले देखिए- संयुक्त युद्धाभ्यास की तस्वीरें M777 की खासियत ‘शूट एंड स्कूट’अभ्यास में M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर प्रमुख हथियार प्रणालियों में शामिल है। हल्की होने के कारण इसे तेजी से तैनात कर फायरिंग करने और फिर फायरिंग पोजीशन बदलने की क्षमता का अभ्यास किया जा रहा है। आधुनिक युद्ध में तेजी से पोजीशन बदलने की इस प्रक्रिया को ‘शूट एंड स्कूट’ कहा जाता है। पिनाका से लंबी दूरी तक रॉकेट फायरभारतीय सेना का पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर भी अभ्यास में शामिल है। इसके जरिए एक साथ बड़ी संख्या में रॉकेट दागकर निर्धारित क्षेत्र में फायर पावर पहुंचाने की क्षमता का प्रदर्शन किया जा रहा है। धनुष तोप और पिनाका के साथ अभ्यास से दोनों सेनाओं को अलग-अलग आर्टिलरी और रॉकेट प्रणालियों के बीच तालमेल का प्रशिक्षण मिल रहा है। ड्रोन दिखे तो M-LIDS और एयर डिफेंस ने साधा निशानादुनिया में तेजी से बढ़ रहे ड्रोन अटैक जैसी गंभीर खतरों से निपटने के लिए भी प्रभावी तैयारी की जा रही है। अमेरिकी सेना का M-LIDS (Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System) काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी युद्धाभ्यास में शामिल है। इसके साथ L/70 एयर डिफेंस गन जैसी प्रणाली का इस्तेमाल छोटे और धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोन खतरों के खिलाफ किया जा रहा है। अपाचे हेलिकॉप्टर से एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशनमहाजन फील्ड फायरिंग रेंज में AH-64E Apache अटैक हेलिकॉप्टर भी अभ्यास का हिस्सा है। हेलिकॉप्टर और जमीन पर मौजूद सैनिकों के बीच एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशन, लक्ष्य की पहचान और संयुक्त कार्रवाई से जुड़ी ट्रेनिंग की जा रही है। अपाचे भारतीय सेना की प्रमुख अटैक हेलिकॉप्टर प्रणालियों में शामिल है। हिमार्स और स्टिंगर भी अभ्यास का हिस्साअमेरिकी सेना की ओर से हिमार्स (High Mobility Artillery Rocket System- HIMARS) और स्टिंगर एयर डिफेंस सिस्टम भी अभ्यास में शामिल है। हिमार्स मोबाइल प्रिसीजन रॉकेट फायर के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि स्टिंगर कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है। इनके साथ अमेरिकी और भारतीय सैनिक संयुक्त रूप से फायरिंग और ऑपरेशनल तालमेल का अभ्यास कर रहे हैं। औली में पर्वतीय युद्ध का अभ्यास15 से 28 सितंबर तक संयुक्त अभ्यास होगा, जिसमें पहले चरण में महाजन फील्ड फायरिंग में अभ्यास चल रहा है, जबकि दूसरे फेज उत्तराखंड के औली में युद्धाभ्यास हो रहा है। वहां दोनों देशों की सेनाएं ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाके में पैदल सेना आधारित अभियानों, पर्वतीय युद्ध कौशल और अलग भौगोलिक परिस्थितियों में संयुक्त संचालन का अभ्यास कर रही हैं। औली, LAC से करीब 95 किलोमीटर की दूरी पर है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के जेल नेटवर्क को लेकर केंद्र और असम सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। रंधावा ने आरोप लगाया है कि साल 2015 से पुलिस हिरासत में होने और असम की जेल में बंद होने के बावजूद जग्गू भगवानपुरिया बेखौफ होकर अंदर से ही अपना आपराधिक नेटवर्क चला रहा है। रंधावा का तर्क है कि भगवानपुरिया का नाम अमेरिका का हार्ड बॉल लिस्ट में शामिल है। सुखजिंदर रंधावा ने गृहमंत्री से मांग की है कि जग्गू भगवानपुरिया को अमेरिका को सौंप दिया जाए ताकि भगवानपुरिया पर अमेरिका में ही ट्रायल चलाया जा सके। असम जेल से कैसे चल रहा है नेटवर्क? रंधावा के गृह मंत्री से तीखे सवाल अमित शाह को भेजे पत्र में सांसद सुखजिंदर रंधावा ने केंद्र सरकार और असम की भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए कई अहम सवाल पूछे हैं: असम जेल प्रशासन पर सवाल: रंधावा ने पूछा कि जब असम में भाजपा की ही सरकार है, तो जेल की सलाखों के पीछे बंद होने के बावजूद जग्गू भगवानपुरिया अंदर से अपना नेटवर्क कैसे संचालित कर रहा है? 11 वर्षों में एक भी केस में सजा नहीं: पत्र में जिक्र किया गया है कि जग्गू पर कुल 128 आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह 2015 से पुलिस हिरासत में है। इसके बावजूद पिछले 11 वर्षों में उसे एक भी मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सका है, जो हमारी कानूनी और जांच प्रणाली पर बड़ा सवाल है। अमेरिका की हार्ड बॉल लिस्ट में नाम: रंधावा ने की यूएसए को सौंपने की मांग सुखजिंदर रंधावा ने पत्र में अमेरिकी जांच एजेंसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि जग्गू भगवानपुरिया का नाम अमेरिका की 'हार्ड बॉल लिस्ट' में शामिल है। अमेरिका में चलाया जाए ट्रायल: रंधावा ने मांग की है कि भारत सरकार जग्गू भगवानपुरिया को तुरंत अमेरिका को सौंपे ताकि उस पर अमेरिका में कानूनी ट्रायल चलाया जा सके। भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' पर साधा निशाना भाजपा द्वारा निकाली जा रही 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' पर तंज कसते हुए सांसद रंधावा ने कहा कि ऐसी यात्राएं सिर्फ एक दिखावा हैं। जब तक दो-दो महाद्वीपों में अपराध फैलाने वाला गैंगस्टर पुलिस हिरासत में रहकर जेल के अंदर से ही अपना गैंग चला रहा हो, तब तक पंजाब को नशा या अपराध मुक्त बनाना बिल्कुल असंभव है। रंधावा ने अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा पर गैंगस्टरों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया है।
मंडी जिले के सरकाघाट के शौर्यन शर्मा ने गूगल इंडिया में तकनीकी समाधान सलाहकार का पद संभाला है। उनका वार्षिक पैकेज करीब 50 लाख रुपये है और इससे पहले उन्होंने बैंक ऑफ अमेरिका में सेवाएं दी हैं।
अगर अमेरिका ने सौ प्रतिशत का टैरिफ थोपा तो !
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से ‘सैंक्शनिंग रशा एंड ईरान एक्ट’ के पारित होने को लेकर देश में आशंकाओं के बादलों का उठना स्वाभाविक है। आज जिस आर्थिकी और विश्व व्यवस्था को तकरीबन पूरी दुनिया ने अपना रखा है, उसकी वजह से पूरी दुनिया को लगता है कि अमेरिका के सहयोग के बिना वह एक कदम आगे नहीं रख सकती। वैश्विक आर्थिकी में डालर के वर्चस्व के चलते ज्यादातर देशों को लगता है कि अगर अमेरिका की आंखें टेढ़ी हुईं तो उस पर महाविपत्ति आ जाएगी। इसी सोच का ही असर है कि इस अधिनियम के पारित होने के बाद भारत के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की नजर में भारतीय विदेश नीति नाकाम नजर आने लगी है। सैद्धांतिक रूप से भारतीय वामपंथी इकोसिस्टम अमेरिका का हर पल खुला विरोध करता है, लेकिन उसे भी अमेरिकी टैरिफ कानून भारतीय हित के खिलाफ नजर आ रहा है। इन सबके बीच भारत सरकार की प्रतिक्रिया संतुलित और सधी हुई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपनी 140 करोड़ की आबादी की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दृढ़ है। जाहिर है, भारत को झुकाने की सोच रखने वाले ट्रंप प्रशासन को ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं रही होगी। ऐसे में अमेरिका के अगले कदम पर निगाह रखना ज्यादा जरूरी हो जाता है। रूस और ईरान से अगर भारत द्वारा तेल खरीदने का बुनियादी लक्ष्य रूस- यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देना या ईरान-इजरायल युद्ध में अमेरिका और इजरायल का विरोध नहीं है। दरअसल भारत मौजूदा माहौल में अपनी भारी-भरकम जनसंख्या के लिए किफायती ऊर्जा सुरक्षा को संरक्षित कर रहा है। इसलिए भारत का न झुकना देश के विपक्षी दलों और अमेरिकी सरकार के लिए हैरतअंगेज भले ही हो, भारतीय हितों के अनुकूल नहीं है। वैसे जब से ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभाला है, अपने ऊल-जलूल फैसलों के लिए ही वे जाने गए हैं। यह पहला मौका नहीं है कि उन्होंने इस कानून के जरिए भारत को दबाने की कोशिश की है। बीते साल एक अगस्त 2025 से उन्होंने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था। जिससे उनके ही बाजार में भारतीय वस्तुएं और सामान महंगे होने लगे थे। तब चालाकी दिखाते हुए ट्रंप प्रशासन ने फार्मास्युटिकल्स को इस टैरिफ से अलग रखा था। इसकी वजह यह है कि भारत से अमेरिका आने वाली दवाएं सस्ती पड़ती हैं। भारतीय रत्न और आभूषणों पर टैरिफ लगाने का बहुत असर नहीं पड़ा था। क्योंकि रत्न और आभूषण स्वभाव से ही महंगे होते हैं और उन्हें खरीदने वाले लोगों के लिए इनकी महंगाई मायने नहीं रखती। ठीक वैसे ही, जैसे भारत में महंगा होने के बावजूद सोने की खरीद-बिक्री पर असर नहीं पड़ा है। भारतीय सामान जब बढ़े टैरिफ के चलते अमेरिकी बाजार में महंगे होने लगे तो अमेरिका में भी ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ सवाल उठने लगे। तब तक अमेरिकी प्रशासन को भी समझ आने लगा था कि उसने कैसा कदम उठाया है। इसका असर यह हुआ कि फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन को टैरिफ में कटौती करनी पड़ी। इसे भी पढ़ें: इस बार भी मोदी नहीं जाएंगे UNGA, Jaishankar ही संभालेंगे मोर्चा, क्या Trump से आमना-सामना नहीं चाहते PM? पश्चिमी एशिया का हालिया संकट अमेरिका की ही देन है। जब से यह संकट बढ़ा है, भारत ने रूस से तेल की खरीददारी बढ़ा दी है। यह भारत की मजबूरी भी है। बीती जुलाई में भारत ने अपने कुल तेल आयात का 51.4 प्रतिशत तेल अकेले रूस से खरीदा था। रूस से तेल खरीद का भारतीय मकसद मौजूदा हालात में अपने लिए किफायती दरों पर तेल हासिल करना है। भारत का यह अधिकार है और मौजूदा हालात में अगर भारत झुकता है तो इसे भारतीय नागरिक शायद ही पसंद करेगा। भारत की तुलना में चीन ना सिर्फ रूस, बल्कि ईरान से भी भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है। रूस से तेल खरीदना उसके लिए ज्यादा आसान और सस्ता है। चूंकि दोनों देशों की सीमाएं मिलती हैं और तेल की आपूर्ति पाइपलाइन के जरिए आसानी से होती है, इसलिए चीन भी टैरिफ युद्ध के निशाने पर होने के बावजूद तेल खरीद से पीछे नहीं हट रहा तो फिर हमें ही क्यों पीछे रहना चाहिए। इसमें दो राय नहीं कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति इस कानून के तहत भारत पर सौ प्रतिशत टैरिफ थोपते हैं तो भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है। जानने की बात है कि भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों में टेक्सटाइल्स, रत्न और आभूषण, आटोमोबाइल और इंजीनियरिंग उत्पाद ज्यादा है। टैरिफ अगर बढ़ेगा तो अमेरिकी बाजार में इनकी कीमतें महंगी होंगी, जिससे उनकी मांग घट सकतकी है। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है। कुछ जानकारों को लगता है कि इससे रूस से जारी तेल खरीद से मिल रही अरबों रूपए की राहत खटाई में पड़ सकती है। यहां ध्यान देने की बात यह भी है कि भारत, अमेरिका से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी रखे हुए है। अगर सौ प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाता है तो इस प्रस्तावित व्यापार समझौते में अड़चन आ सकती है। हो सकता है कि यह बातचीत ही खटाई में पड़ जाए। बेशक अमेरिका भारत का बड़ा कारोबारी साझीदार है। लेकिन मोदी के 2024 में सत्ता में आने के बाद से अब तक करीब चालीस देशों से मुक्त व्यापार समझौता किए जा चुके हैं। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ से भी ऐसा समझौता किया है। भारत का मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड आदि से मुक्त व्यापार समझौते या व्यापक आर्थिक साझेदारी का समझौता कर चुका है। भारत सरकार के ही आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने कारोबारी नेटवर्क का विस्तार करते हुए नौ बड़े मुक्त व्यापार समझौते भी किए हैं। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। इसी तरह भारत ने आसियान देशों, जापान, दक्षिण कोरिया और साफ्टा के सदस्य देशों के साथ पारंपरिक कारोबारी समझौता कर चुका है। अगर अमेरिका भारत पर टैरिफ थोपता है तो देश को चाहिए कि इन देशों के जरिए कारोबार को बढ़ावा दे। वैसे भी टैरिफ थोपने की दशा में भारतीय कारोबारी दूसरे देशों के जरिए अमेरिका में अपना माल भेज सकते हैं। उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार भी ऐसी राह तलाशने की कोशिश में जुटी होगी। फिर भारतीय अर्थव्यवस्था भी पहले जैसी नहीं रही, इसलिए हताश और चिंतित होने की जरूरत नहीं है, भारत को अमेरिकी बाजार में घुसने के लिए वैकल्पिक राहों की तलाश तेज करनी होगी। - उमेश चतुर्वेदी लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं..
25 लाख रुपये, अमेरिकी डॉलर... ऐसे सजे गणपति बप्पा, देखने उमड़ी भीड़
गुजरात के अमरेली में गणपति महोत्सव का एक अनोखा नजारा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां गणपति बप्पा का ऐसा श्रृंगार किया गया है, जिसे देखकर लोग एक पल के लिए ठहर जा रहे हैं. बप्पा को भारतीय करेंसी के साथ अमेरिकी डॉलर से सजाया गया है. यानी गणपति बप्पा यहां 'लखपति' ही नहीं, बल्कि 'डॉलरपति' भी नजर आ रहे हैं.
ईरान-अमेरिका तनाव से लगातार बढ़ रहे कच्चे माल के दाम, पीएनजी, सभी तरह के केमिकल हुए महंगे
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हार्वर्ड-स्टैनफर्ड नहीं... MIT है अमेरिकी नंबर वन कॉलेज, जानिए आइवी लीग कॉलेजों की रैंक
यूएस न्यूज बेस्ट कॉलेज 2027 रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने प्रिंसटन के 15 साल के वर्चस्व को खत्म कर पहला स्थान हासिल कर लिया है। सभी 8 आइवी लीग कॉलेज लिस्ट में शामिल हैं।
भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ का दूसरा संस्करण 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित होगा।
जोधपुर में 20 सितंबर को पकड़े गए पंजाब के मोस्ट वांटेड व लॉरेंस गैंग के शूटर अमेरिका में बैठे गैंगस्टर आरजू के इशारे पर पहुंचे थे। टारगेट पर पॉलिटिकल कनेक्शन वाले 2 बिजनेसमैन थे। इनसे पहले एक टीम और आई थी। उन्होंने हथियार छुपाए थे और वारदात यह शार्प शूटर करने वाले थे। राजस्थान की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की जानकारी पर जोधपुर पुलिस ने दोनों शार्प शूटर राजेन्द्र उर्फ बिल्ला और जसकरण उर्फ सन्नी को रातानाड़ा के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया था। दोनों शार्प शूटर 30 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कई खुलासे किए हैं। आरजू से वे लगातार कॉन्टैक्ट में थे। दो गुर्गो की एक टीम पहले पहुंची और हथियार छुपाए शूटर जसकरण और राजिंदर राजस्थान पहुंचें उससे पहले एक टीम यहां आकर रेकी कर के गई थी। शूटरों ने खुलासा किया कि टीम जोधपुर आकर हथियार छुपा कर गई थी। पुलिस ने जब दोनों शूटर को गिरफ्तार किया था, तब भी इनके पास से ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद की गई थी। हथियार कहां छिपाए, इसके बारे में पुलिस जांच कर रही है। पॉलिटिकल कनेक्शन वाला 2 बिजनेसमैन थे टारगेट दोनों शूटर जोधपुर पहुंचे तब इनको वॉट्सएप पर हथियार की लोकेशन और जहां हथियार छुपाए उसका वीडियो भेजा गया था। दोनों वारदात को अंजाम देने से पहले उस लोकेशन पर गए थे और वहां छिपाए हथियारों को भी देखा था। दोनों शूटर के टारगेट पर जोधपुर के दो बिजनेसमैन थे जिनके अच्छे पॉलिटिकल कनेक्शन हैं। हालांकि पुलिस इस बारे में अभी कुछ भी आधिकारिक तौर पर नहीं बता रही हैं। मामले की जांच एसीपी सेंट्रल आरपीएस संदीप कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी दोनों शूटर रिमांड पर हैं। इनवेस्टिगेशन पूरी होने के बाद ही जानकारी दी जाएगी। आरजू के इशारे पर पहुंचे थे जोधपुर लॉरेंस विश्नोई गैंग के यह शार्प शूटर गैंगस्टर आरजू के कॉन्टैक्ट में थे। जानकारी के अनुसार आरजू लॉरेंस का सबसे खास गैंगस्टर है और अमेरिका में है। इन दोनों से पहले रेकी करने के लिए जो टीम जोधपुर पहुंची थी। उस टीम ने सभी डिटेल आरजू को भेज दी थी। इसके बाद आरजू ने नेपाल से इन दोनों शूटर्स को जोधपुर भेजा था। शूटर नेपाल से एमपी होते हुए सिरोही और फिर जोधपुर पहुंचे। आरजू विश्नोई पंजाब का रंगदार नवीन कुमार उर्फ आरजू का है। उसने पंजाब में लॉरेंस गैंग के नाम पर व्यापारियों, कमीशन एजेंटों और संपन्न लोगों से धमकी देकर रंगदारी वसूलने के लिए संगठित सिंडिकेट बनाया था। यह लॉरेंस का करीबी सहयोगी और ऑपरेटर है। दिसंबर 2025 में श्रीगंगानगर रंगदारी नेटवर्क में भी मुख्य ऑपरेटर की भूमिका में था। 7 जुलाई 2025 को अबोहर में कपड़ा कारोबारी संजय वर्मा की गोली मारकर हत्या हुई थी। इसके बाद लॉरेंस गैंग के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरजू ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी। राजस्थान में रंगदारी का नेटवर्क श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर में दिसंबर 2025 में सामने आए रंगदारी नेटवर्क में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में करीब 91 लाख रुपए नकद बरामद किए गए थे। यह रकम राजस्थान से पंजाब तक पहुंचाई जा रही थी और आरजू को इस नेटवर्क का प्रमुख ऑपरेटर बताया गया। फरवरी में जोधपुर के दो बिजनेसमैन को मिली थी धमकी इस वर्ष फरवरी में जोधपुर के चौपासनी हाउसिंगबोर्ड और शास्त्री नगर निवासी दो बिजनेसमैन को लॉरेंस गैंग के आरजू ने रंगदारी के लिए कॉल किया और लॉरेंस के नाम की धमकी दी। वीपीएन के माध्यम से आई कॉल पर व्यापारियों से 48 घंटे में 2 करोड़ की रंगदारी मांगी थी। दोनों व्यापारियों ने चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में मामला दर्ज करवाया था। इन व्यापारियों को गनमैन भी मिले थे। व्यापारी की गोली मारकर हत्या : जोधपुर के प्रसिद्ध मोबाइल व्यवसायी वासुदेव इसरानी की सितंबर 2017 में लॉरेंस गैंग के शूटरों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसरानी से गैंग ने मोटी रंगदारी मांगी थी, और पैसे न देने पर उन पर पहले भी फायरिंग करवाई गई थी। और आखिर में रंगदारी के लिए उनकी हत्या कर दी गई, जो जोधपुर में लॉरेंस गैंग का सबसे बड़ा हत्याकांड माना जाता है। …. ये खबर भी पढ़िए… लॉरेंस की राजस्थान के 2 बिजनेसमैन की हत्या की प्लानिंग:सबसे खतरनाक शार्पशूटर्स को नेपाल से बुलाया, 5-5 लाख के इनामी, विदेश भागने वाले थे राजस्थान की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के हत्थे चढ़े लॉरेंस गैंग के 2 शार्प शूटरों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। दोनों जोधपुर के 2 व्यापारियों को मारने आए थे। पूरी खबर पढ़िए…
पानीपत में फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट और पार्सल क्लीयरेंस के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। अमेरिका से सामान का पार्सल आने का झांसा देकर साइबर ठगों ने एक युवक को डराया-धमकाया और उससे ₹1,27,000 ऐंठ लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पानीपत पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच शुरू कर दी है। अमेरिका से आना था पार्सल जौरासी रोड, करहंस निवासी अमित कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि अमेरिका से उनका एक कूरियर/पार्सल आना था, जिसमें मोबाइल, ज्वेलरी और जूते इत्यादि सामान था। पार्सल कूरियर होने के महज दो दिन बाद कूरियर भेजने वाले व्यक्ति से पीड़ित का संपर्क अचानक बंद हो गया। इसी दौरान पीड़ित के पास अनजान नंबरों से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को कस्टम अधिकारी बताया और पार्सल में कीमती/अवैध सामान होने का डर दिखाकर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। डरा-धमका कर हड़पे 1.27 लाख रुपए आरोपी ने पीड़ित को जेल भेजने और कानूनी झंझट में फंसाने का खौफ दिखाया। फर्जी कस्टम अधिकारी के झांसे और डर में आकर पीड़ित ने आरोपियों के बताए खातों में कुल ₹1,27,000 ट्रांसफर कर दिए। पैसे भेजने के बाद भी जब पार्सल नहीं मिला और ठगों की ओर से और रुपयों की मांग की जाने लगी, तब पीड़ित को अपने साथ हुई साइबर धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
ताजमहल घूमने आए एक अमेरिकी दंपती को बुरे अनुभव से गुजरना पड़ा। होटल से दवा लेने निकलने पर बच्चा गैंग ने घेर लिया। एक बच्चे ने पर्यटक के बैग से बटुआ पार कर लिया।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद उसकी भव्यता दुनिया ने देखी, लेकिन इसके नक्शे से लेकर गर्भगृह में रामलला की स्थापना तक कई ऐसी कहानियां हैं, जो सामने नहीं आ सकीं। मंदिर का काम सोमपुरा परिवार को 1989-90 में मिला था। इसके बाद करीब 35 साल की इस यात्रा में कभी 3डी मॉडल ने तकनीकी चुनौती खड़ी की तो कभी गर्भगृह में रामलला की स्थापना के दौरान घंटों बारीकी से काम करना पड़ा। राम मंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा विज्ञान मेले में शामिल होने मंगलवार को भोपाल आए। उन्होंने भास्कर से खास बातचीत में इस पूरी यात्रा के अनुभव साझा किए। मालूम हो आशीष और उनके पिता पद्मश्री आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने मिलकर राम मंदिर का डिजाइन तैयार किया है। जब रामलला विराजे, हम वहीं बैठ गए... लगा, 35 साल की मेहनत को अर्थ मिल गया 1989-90 में जब राम मंदिर का काम हमारे परिवार को मिला, तब अंदाजा नहीं था कि यह इतने बड़े ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व का केंद्र बनेगा। हमारा परिवार लंबे समय से मंदिर बनाता आया है, इसलिए शुरुआत में यह भी दूसरे मंदिरों जैसा काम था। पर आंदोलन बढ़ा, लोगों की आस्था सामने आई तो जिम्मेदारी भी बढ़ती गई। मन में था कि मंदिर ऐसा बने, जहां लोगों को लगे कि वे वास्तव में रामलला के घर आए हैं। हमने राम मंदिर का 3डी मॉडल बनाया। इसके बाद ऐसा डिजिटल स्वरूप तैयार करना था, जिसमें मंदिर के भीतर घूमकर भी देखा जा सके। फाइल इतनी बड़ी थी कि हमारे सिस्टम पर यह काम मुश्किल हो गया। इसलिए इसे अमेरिका के लॉस एंजेलिस भेजकर वीडियो बनवाना पड़ा। इससे समझ आया कि नई टेक्नोलॉजी के साथ सिस्टम की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। पत्थर चुनते समय मजबूती, नक्काशी और लंबे समय तक टिकने की क्षमता देखी। हम गांधीनगर के अक्षरधाम में भी ऐसे बलुआ पत्थर पर काम कर चुके थे। इसके महीन दानों पर नक्काशी अच्छी उभरती है। दूसरे विकल्प भी देखे। संतों को नमूने दिखाए और उनकी सहमति के बाद पत्थर चुना। मेरे लिए सबसे भावुक क्षण रामलला की मूर्ति की स्थापना थी। गर्भगृह में उनकी दृष्टि, दिशा और ऊंचाई डिजाइन के मुताबिक तय करने में 3-4 घंटे लगे। जब सब कुछ वैसा हो गया, जैसा तय किया था, तो हम वहीं बैठ गए। उसी शाम एक महिला ने कहा- ‘भैया, आपने मेरे लल्ला को घर दे दिया।’ महसूस हुआ कि जिसे हम इतने वर्षों से आकार दे रहे थे, वह इमारत नहीं, रामलला का घर था।’ -आशीष सोमपुरा राम मंदिर से आगे क्या? ऑस्ट्रेलिया में 700, गुजरात में 425 फीट ऊंचा मंदिर बनेगा सोमपुरा के मुताबिक, परिवार अब दूसरे बड़े मंदिरों पर काम कर रहा है। अहमदाबाद में 425 फीट ऊंचे मंदिर का प्रोजेक्ट है। ऑस्ट्रेलिया में करीब 700 फीट ऊंचे मंदिर की योजना पर भी काम चल रहा है। उनके मुताबिक एआई से मंदिर डिजाइन करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, पर मंदिर वास्तुकला की गणनाएं इतनी जटिल हैं कि सभी बारीकियों को एआई में शामिल करना आसान नहीं है।
Ballia News: अमेरिका और ईरान के संघर्ष से बदल रहे वैश्विक समीकरण, ऊर्जा सुरक्षा पर मंथन
Global equations shifting due to the US-Iran conflict
आगरा ताजनगरी में अमेरिकी पर्यटक दंपती के साथ शातिर ठगी का मामला सामने आया है। दो बच्चों ने उनका डॉलरों से भरा पर्स पार कर दिया। पर्स में 2,750 डॉलर के साथ जरूरी कागजात और पासपोर्ट भी रखे थे। भारतीय मुद्रा में यह रकम ढाई लाख रुपये से अधिक है। घटना के बाद पर्यटक दंपती ने पर्यटन थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में अहम सुराग मिले हैं। जानकारी के अनुसार, अमेरिकी पर्यटक दंपती अपने मित्र गुयेन फुओन के साथ आगरा घूमने आए थे। सभी फतेहाबाद रोड स्थित होटल ट्राइडेंट में ठहरे हुए थे। 19 सितंबर की शाम करीब पांच बजे दंपती दवा लेने के लिए ताजगंज क्षेत्र स्थित एक मेडिकल स्टोर पर गए। दवा खरीदने के बाद उन्होंने भुगतान किया और पर्स को कंधे पर टंगे बैग में रख लिया। इसी दौरान दुकान पर मौजूद 9 और 12 साल के दो लड़कों ने उन्हें पर्स में रुपये रखते देख लिया। बताया गया कि दोनों लड़के दुकान से ही उनके पीछे लग गए और रुपये मांगने लगे। दंपती ने उन्हें अनदेखा कर दिया और आगे बढ़ गए। कंधे पर लटका बैग की चेन खुली रह गई थी। होटल लौटते समय रास्ते में दोनों लड़कों ने फिर उन्हें घेर लिया। बातों में उलझाकर एक लड़के ने बैग से पर्स निकाल लिया और दोनों मौके से भाग निकले। पीड़ित दंपती ने पुलिस को बताया कि पर्स में 2,750 डॉलर, दो हजार भारतीय रुपये और पासपोर्ट रखा था। सूचना मिलते ही पर्यटन पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। फुटेज में दो लड़के पर्स लेकर भागते हुए दिखाई दिए। एसीपी ताज सुरक्षा यतेंद्र नागर ने बताया कि सीसीटीवी की मदद से पुलिस मथुरा रेलवे स्टेशन तक पहुंची है। जांच में सामने आया है कि दोनों लड़के ताजनगरी मेट्रो स्टेशन के पास फुटपाथ पर रहते थे। पुलिस टीम उन्हें पकड़ने और डॉलर बरामद करने का प्रयास कर रही है।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के कूटनीतिक मायने
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। शी जिनपिंग 23 सितंबर को वाशिंगटन पहुंचेंगे। उनका यह दौरा 25 सितंबर को समाप्त होगा, जिसके बाद उनकी वापसी होगी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शिखर वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, टैरिफ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) और दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शी जिनपिंग का स्वागत करने और स्टेट डिनर देने के फैसले से साफ है कि दोनों महाशक्तियां तनाव को कम कर नए तालमेल की ओर बढ़ना चाहती हैं। लिहाजा इस यात्रा पर पूरी दुनिया के कूटनीतिज्ञों की नजर होगी। इस पर रूस और भारत की खास नजर बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिका चाहेगा कि रूस और भारत से प्रगाढ़ हो रहे चीन के रिश्तों में कुछ खलल पैदा किया जाए। चूंकि अमेरिका ने सोवियत संघ और भारत के खिलाफ चीन को रणनीतिक मजबूती दी थी, लेकिन बाद में भी उसकी भूल साबित हुई। चीन को काबू में रखने के लिए अमेरिका ने भारत को शह दिया, लेकिन यहां भी उसका दांव उल्टा पड़ गया। इसलिए अमेरिका अब रूस और चीन से वन टू वन, और फिर जी-3 के माध्यम से बातचीत करने को उतावला है ताकि भारत, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और ईरान जैसे महत्वाकांक्षी देशों को काबू में रखा जा सके। लेकिन यदि चीन व्यवहारिक कूटनीति को छोड़कर अमेरिकी मायाजाल में फंसता है तो फिर कहीं का नहीं रहेगा, क्योंकि भारत और रूस की समझदारी इतनी परिपक्व व मजबूत है कि उन्हें आंख दिखाने वाले उसी अंतर्राष्ट्रीय फजीहत को प्राप्त करेंगे, जैसा कि अभी अमेरिका भुगत रहा है। # इस यात्रा के प्रमुख कूटनीतिक मायने: एक, व्यापार युद्ध और टैरिफ में संतुलन: अमेरिका द्वारा चीनी सामानों पर अत्यधिक टैरिफ और निर्यात प्रतिबंध लगाने के बावजूद चीन ने रेयर अर्थ खनिजों और महत्वपूर्ण तकनीकों की सप्लाई रोककर कड़ा रुख अपनाया। इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य नए व्यापारिक समझौते की रूपरेखा तैयार करना और दोनों देशों के बीच जारी आर्थिक/व्यापारिक तनाव को कम करना है। दो, रेयर अर्थ और AI की होड़: स्मार्टफोन, रक्षा सामग्री, इलेक्ट्रिक वाहनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए आवश्यक रेयर अर्थ खनिजों की वैश्विक आपूर्ति पर चीन का नियंत्रण है। अमेरिका अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना चाहता है, जबकि चीन अमेरिका द्वारा सेमीकंडक्टर/चिप तकनीक पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील चाहता है। तीन, वैश्विक स्थिरता और मध्य-पूर्व संकट: दुनिया के दो बड़े नेताओं का मिलना वैश्विक बाजारों और अर्थव्यवस्था में स्थिरता का संदेश देता है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और रणनीतिक समुद्री रास्तों को सुचारू रखने जैसे मुद्दों पर दोनों देश कूटनीतिक सहयोग की गुंजाइश तलाश रहे हैं। चार, ताइवान और क्षेत्रीय सुरक्षा: चीन हमेशा से ताइवान पर अपने संप्रभु अधिकारों का दावा करता आया है। इस बैठक में अमेरिकी हथियारों की ताइवान को बिक्री पर चर्चा हो सकती है। बीजिंग इस मंच का इस्तेमाल अमेरिका को ताइवान के मामले में हस्तक्षेप कम करने का कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए करेगा। # कूटनीतिक संदर्भ के क्षेत्र, अमेरिकी हित और चीनी हित व्यापार में अमेरिकी सोयाबीन व कृषि उत्पादों की बिक्री व बाजार पहुंच पर डील करेगा, जबकि चीन टैरिफ दरों में कमी और आर्थिक स्थिरता पर जोर देगा। - तकनीक में अमेरिका AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाए रखना चाहेगा, जबकि चीन अमेरिकी टेक एक्सपोर्ट बैन और प्रतिबंधों से राहत चाहेगा। - सप्लाई चेन में अमेरिका रेयर अर्थ मिनरल्स की बिना बाधा आपूर्ति चाहेगा, जबकि चीन वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में केंद्रीय भूमिका बनाए रखना चाहेगा। # अमेरिका और चीन की डील से भारत और रूस पर क्या- क्या असर पड़ सकते हैं? अमेरिका और चीन की यह द्विपक्षीय बातचीत और 'प्रबंधित प्रतिस्पर्धा' की दिशा में कदम भारत और रूस के रणनीतिक और आर्थिक हितों पर गहरा प्रभाव डालते हैं, क्योंकि अमेरिका और चीन पुराने अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी रहे हैं? # अमेरिका और चीन की डील से भारत पर असर एक, सामरिक दबाव : भारत के लिए अमेरिका-चीन का संबंध एक दोधारी तलवार है। यदि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक या रणनीतिक सहमति बनती है, तो भारत को डर रहता है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाएगा, जितनी भारत अपनी सुरक्षा (जैसे LAC विवाद) के लिए चाहता है। दो, क्वाड (QUAD) का भविष्य: यदि ट्रंप-शी वार्ता से दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है, तो 'क्वाड' (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) का जो सैन्य और रणनीतिक जोर चीन को घेरने पर था, वह थोड़ा सुस्त पड़ सकता है। तीन, सप्लाई चेन और व्यापार: चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक गतिरोध कम होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जो विकल्प भारत (Make in India) के रूप में उभर रहा था, उस गति पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिका-चीन की तकनीकी प्रतिस्पर्धा बनी रहने के कारण भारत को टेक/सेमीकंडक्टर निर्माण में फायदा मिलता रहेगा। चार, भारत को वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों में स्थिरता का लाभ मिलता है जबकि चीन के खिलाफ अमेरिका का कड़ा समर्थन कम होने और ट्रेड में दबाव का जोखिम बना रहेगा। # अमेरिका और चीन की डील से रूस पर असर एक, चीन पर बढ़ती निर्भरता: रूस और चीन वर्तमान में असीमित साझेदारी में हैं। लेकिन यदि चीन और अमेरिका अपने आर्थिक रिश्तों को सुधार लेते हैं, तो रूस को डर रहेगा कि चीन अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में आकर रूस को मिलने वाली आर्थिक और तकनीकी मदद को सीमित कर सकता है। दो, रूस-यूक्रेन युद्ध और कूटनीति: अमेरिका-चीन शिखर वार्ता में यदि रूस-यूक्रेन संघर्ष या वैश्विक प्रतिबंधों पर कोई गुप्त सहमति बनती है, तो मॉस्को के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के रास्ते (जैसे चीन के जरिए व्यापार) कठिन हो सकते हैं। तीन, मॉस्को की रणनीतिक स्थिति: रूस नहीं चाहता कि अमेरिका और चीन इतने करीब आ जाएं कि दुनिया में फिर से अमेरिका-चीन की G2 (दो महाशक्तियों का प्रभुत्व) वाली व्यवस्था स्थापित हो जाए, क्योंकि इससे रूस का वैश्विक वजन कम होता है। चार, रूस को चीन से आर्थिक व्यापार जारी रहने की उम्मीद रहेगी। जबकि चीन द्वारा अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से रूस को दी जाने वाली मदद सीमित करने का जोखिम बना रहेगा। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
जोधपुर का आसमान एक बार फिर दुनिया के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट से गूंजने वाला है। भारतीय वायुसेना की मेजबानी में बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ का आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर होने जा रहा है। इस मेगा एयर एक्सरसाइज की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इतिहास में पहली बार अमेरिकी वायुसेना का 5वें जनरेशन का स्टील्थ फाइटर जेट F-35 भारत में किसी युद्धाभ्यास का हिस्सा बनने जा रहा है। युद्धाभ्यास में भारत और अमेरिका के अलावा फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और श्रीलंका की वायु सेनाएं सीधे अपने लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा ले रही हैं। वहीं करीब 30 देश ऑब्जर्वर के तौर पर मौजूद रहेंगे। इन विमानों का दिखेगा दम अमेरिका का F-35, F-16 और F-18, फ्रांस का राफेल, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट A-400M जैसे अत्याधुनिक प्लेन जोधपुर के आसमान में अपने करतब और मारक क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। वहीं भारतीय वायुसेना अपने फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स-सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, स्वदेशी तेजस (LCA), रीफ्यूलर टैंकर और AWACS (हवा में रडार निगरानी प्रणाली) को इस अभ्यास में उतार रही है। भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि तरंग शक्ति का यह संस्करण हाई-ऑक्टेन जॉइंट टैक्टिकल मैन्युवर्स पर केंद्रित रहेगा। जोधपुर का रणनीतिक एयरबेस और विशाल हवाई क्षेत्र जटिल हवाई रणनीतियों, बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) कॉम्बैट और नाइट ऑपरेशन्स के अभ्यास के लिए बेहद मुफ़ीद माना जाता है। वीर गार्डियन युद्धाभ्यास के ठीक बाद आयोजित हो रही इस एक्सरसाइज के कारण पश्चिमी राजस्थान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद पुख्ता कर दी गई है।
Ambala News: दीप्ति ने अमेरिका में जीता सौंदर्य प्रतियोगिता का खिताब
दीप्ति ने अमेरिका में जीता सौंदर्य प्रतियोगिता का खिताब
आईआईटी कानपुर मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान को प्रयोगशाला से मरीज तक पहुंचाने के लिए अमेरिका में 'फेस 2026' कार्यक्रम में भाग ले रहा है।
अमेरिकी नागरिकों से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित ठगी करने वाले गिरोह के बारे में पुलिस की जांच में कई अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में जालसाजों की भर्ती Telegram के जरिए की जाती थी। इसके बाद ऑनलाइन इंटरव्यू लिया जाता और चयनित लोगों को लखनऊ बुलाकर करीब 15 […] The post लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, Telegram से भर्ती और 20 दिन की ट्रेनिंग; अमेरिकियों से 100 करोड़ की ठगी का आरोप appeared first on https://rajsattaexpress.com .
बिहार के नीरज को अमेरिका में मिली 2.6 करोड़ की स्कॉलरशिप, पिता चलाते हैं पान की दुकान
सारण जिले के नीरज को अमेरिका में करीब 2.6 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप पर PhD कर रहे हैं। बिहार के छोटे से गांव से अमेरिका तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष की अच्छी मिसाल है।
अमेरिकी नागरिकों से 100 करोड़ से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह में टेलीग्राम के जरिए जालसाजों की भर्ती होती थी। ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद लखनऊ में 15-20 दिन की ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें ठगी की स्क्रिप्ट रटाई जाती थी। जालसाजों को 25-30 हजार रुपये वेतन मिलता था।
पिता के संघर्ष को सम्मान: कभी अमेरिका ने किया वीजा खारिज, आज नासा कर रहा स्वागत; कैसे लिखी सफलता की कहानी?
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री जाएंगे अमेरिका, ट्रंप ने दे दिया वीजा! - ABP News
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अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में खुद को तंदुरुस्त और एनर्जेटिक बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के सप्लीमेंट्स, जिम वर्कआउट और हाई-प्रोटीन डाइट का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों और अमेरिका में यह माना जाता है कि यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल कर लिया जाए, तो शरीर की सारी कमजोरियां दूर हो जाती हैं और ऊर्जा का स्तर हमेशा उच्च बना रहता है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) द्वारा जारी की गई एक बेहद चौंकाने वाली और व्यापक रिपोर्ट ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। सीडीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 71.5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो भरपूर मात्रा में प्रोटीन या अन्य पोषक तत्व लेने के बाद भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहते हैं। यह आंकड़ा न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि आधुनिक चिकित्सा जगत और पोषण विशेषज्ञों (Nutritionists) के लिए भी एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस आलेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर भरपूर प्रोटीन लेने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर लोग क्रोनिक थकान और ऊर्जा की कमी का सामना क्यों कर रहे हैं, और इसके पीछे छिपे असली वैज्ञानिक व जीवनशैली से जुड़े कारण क्या हैं।प्रोटीन का सेवन बनाम शरीर की ऊर्जा: क्या सिर्फ प्रोटीन खाने से ही मिल जाती है एनर्जी?आम तौर पर लोगों के मन में यह भ्रम बैठा हुआ है कि यदि वे अपने रोजाना के खाने में चिकन, अंडे, प्रोटीन पाउडर, पनीर या अन्य हाई-प्रोटीन स्रोतों को शामिल कर लेते हैं, तो उनका शरीर स्वतः ही ऊर्जा से भर जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) और ऊर्जा उत्पादन का तंत्र केवल एक पोषक तत्व यानी प्रोटीन पर निर्भर नहीं करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी डाइट में अत्यधिक प्रोटीन तो जोड़ लेता है, लेकिन साथ ही जरूरी विटामिंस (जैसे विटामिन बी12, विटामिन डी), आयरन, सही प्रकार के कार्बोहाइड्रेट और पर्याप्त हाइड्रेशन की अनदेखी करता है, तो शरीर उस प्रोटीन को पूरी तरह पचाने और ऊर्जा में बदलने में असमर्थ हो जाता है। इसके अलावा, आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है। सीडीसी की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि सिर्फ मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (Protien, Fats, Carbs) की मात्रा पूरी कर लेने मात्र से ही कोई व्यक्ति अंदर से स्वस्थ या ऊर्जावान महसूस नहीं कर सकता, जब तक कि शरीर की कोशिकीय स्तर पर पोषण संबंधी जरूरतें पूरी न हो रही हों।नींद की कमी और मानसिक तनाव: थकान का सबसे बड़ा और अनदेखा कारणसीडीसी की इस व्यापक रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है कि शारीरिक थकान का सीधा संबंध केवल भोजन या डाइट से ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे आधुनिक युग की सबसे बड़ी बीमारियां—नींद की कमी (Sleep Deprivation) और मानसिक तनाव (Chronic Stress)—मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। आज के समय में कॉर्पोरेट कल्चर, नाइट शिफ्ट्स, और रातभर मोबाइल स्क्रीन या लैपटॉप के सामने समय बिताने के कारण लोगों की नींद का चक्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। जब शरीर को रात में गहरी और कम से कम 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं मिलती, तो शरीर के हारमोनल संतुलन में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है। कोर्टिसोल (Cortisol) यानी तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने से शरीर हमेशा 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड में रहता है, जिससे मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र लगातार थका हुआ महसूस करते हैं। आप चाहे दुनिया का सबसे महंगा प्रोटीन शेक पी लें या सबसे बेहतरीन डाइट फॉलो कर लें, लेकिन यदि आपकी नींद पूरी नहीं है और आप मानसिक रूप से तनावग्रस्त हैं, तो आपके शरीर की कोशिकाएं कभी भी तरोताजा महसूस नहीं कर सकतीं। यही कारण है कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी करोड़ों लोग अंदर से पूरी तरह खोखले और थके हुए महसूस कर रहे हैं।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) और खराब पाचन तंत्र की भूमिकाथकान और सुस्ती के इस महामारी जैसे फैलने के पीछे एक और बहुत बड़ा कारण हमारी आधुनिक शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) है। आजकल अधिकांश नौकरियां ऐसी हो गई हैं जिनमें लोगों को लगातार 8 से 10 घंटे अपनी कुर्सी या डेस्क पर बैठकर बिताना पड़ता है। शारीरिक रूप से कोई मेहनत न होने के कारण शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुस्त हो जाता है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और खाया हुआ भोजन सही ढंग से पच नहीं पाता। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात को मानते हैं कि जब तक आपका पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत और सक्रिय नहीं है, तब तक आप चाहे कितना भी पौष्टिक भोजन या प्रोटीन क्यों न खा लें, आपके शरीर को उसकी सही ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकती। अपच, कब्ज और आंतों (Gut Health) से जुड़ी समस्याएं शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा देती हैं, जिससे लगातार सुस्ती, सिरदर्द और भारीपन बना रहता है। सीडीसी की रिपोर्ट इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करती है कि जब तक लोग अपनी दिनचर्या में व्यायाम, वॉक और शारीरिक श्रम को शामिल नहीं करेंगे, तब तक केवल डाइट बदलने से थकान की इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता।निष्कर्ष: इस समस्या से बाहर निकलने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव जरूरी हैं?सीडीसी की यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी और आंखें खोलने वाला संदेश है। यह हमें यह सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल जिम जाने या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले किसी एक फिटनेस ट्रेंड को फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समग्र संतुलन (Holistic Balance) है जिसमें सही खानपान, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सक्रिय जीवनशैली का होना अनिवार्य है। यदि आप भी अक्सर खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो सिर्फ प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के बजाय अपनी नींद के पैटर्न को सुधारें, पानी की मात्रा बढ़ाएं, योग या मेडिटेशन को अपनाएं और डॉक्टर से सलाह लेकर अपने शरीर में विटामिंस व मिनरल्स की जांच करवाएं। आधुनिक दुनिया की इस अंधी दौड़ में अपने शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना और समय रहते आवश्यक बदलाव करना ही एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन की असली कुंजी है।
रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब - AajTak
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अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं। इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है। तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है। नेताओं से लेकर टेक दिग्गजों तक अलग-अलग राय AI को लेकर अमेरिका में छिड़ी यह बहस अब टेक कंपनियों से निकलकर राजनीति के केंद्र में पहुंच गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के कुछ नेता AI को लेकर चिंता जता रहे हैं। आम तौर पर एक-दूसरे से अलग रहने वाले इन दोनों खेमों में बहुत कम मुद्दों पर सहमति दिखती है। लेकिन AI की यह बहस सिर्फ राजनीति या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में इसके फैसले हमारी नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, यह भी तय होगा कि AI के इस्तेमाल को लेकर नियम कैसे बनाए जाएंगे। AI का विकास धीमा करने के पक्ष में… डारियो अमोडेई AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है। अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है। वे लंबे समय से AI पर सरकारी नियम बनाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का प्रस्ताव रखा है। रुख बदलने वाले… सैम ऑल्टमैन OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे की चेतावनी वाले बयान पर हस्ताक्षर किए थे। इसी साल उन्होंने अमेरिकी सीनेट में ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया। बाद में उनका रुख कुछ नरम पड़ा। 2025 के बीच तक ऑल्टमैन का कहना था कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव है। फिर जुलाई 2026 में OpenAI ने बताया कि उसके दो AI मॉडल टेस्टिंग के दौरान बिना इंसानी मदद के सिस्टम से बाहर निकल गए। उन्होंने चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर Hugging Face के सर्वर तक पहुंच बनाई। इस घटना के बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस मांग का भी समर्थन किया कि AI मॉडल का विकास कुछ धीमा किया जाना चाहिए। इलॉन मस्क लंबे समय से AI के खतरों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। उनका अनुमान है कि AI के इंसानों के लिए खतरनाक साबित होने की संभावना 10 से 20% तक है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते इसके लिए नियम बनाने की मांग की है। मस्क ने खुद AI कंपनी xAI शुरू की है और ट्रम्प के चुनाव अभियान में बड़ी रकम दी थी। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक सरकारी नियमों में बदलाव से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को उन्होंने अमोडेई की AI विकास धीमा करने की मांग का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर मस्क ने लिखा, “डारियो सही हैं।” AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं… सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। AI की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट OpenAI के साथ बड़ी साझेदारी कर चुका है और अब अपने AI टूल्स पर भी तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, नडेला AI को बिना रोक-टोक आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि इसका विकास सोच-समझकर और इंसानी निगरानी में होना चाहिए। उनका तर्क है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस का कोई फायदा नहीं, जो इंसानों के कंट्रोल से बाहर हो या लोगों के काम न आए। इसके साथ ही नडेला AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। सुंदर पिचाई अल्फाबेट और गूगल के CEO हैं। वह AI के खतरों को मानते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत कड़े नियमों के पक्ष में नहीं हैं। पिचाई का कहना है कि AI के इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग नियम बनाए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, AI के जोखिम से निपटना जरूरी है, लेकिन इसके फायदों से पीछे रह जाना भी बड़ा खतरा हो सकता है। मार्क जुकरबर्ग मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI अगर कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहा तो यह ज्यादा बड़ा खतरा हो सकता है। इसके बजाय वह AI को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने को सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं। जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में AI मॉडल बनाने और जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को भी मानते हैं। इसी वजह से मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी न करने का फैसला कर सकती है। एलेक्जेंडर वेंग 2025 में मेटा से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के AI असिस्टेंट एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी जुड़े हैं। वेंग ने एक स्ट्रैटिजी पेपर में सुपरइंटेलिजेंस को परमाणु बम के बाद सबसे खतरनाक चीज बताया। उनका कहना है कि अमेरिका को AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरे देशों को रोकने की रणनीति के नजरिए से भी देखना चाहिए। AI का विकास तेजी से जारी रखने के पक्ष में जेनसन हुआंग एनवीडिया के को-फाउंडर और CEO हैं। एनवीडिया के चिप्स का इस्तेमाल AI बनाने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां करती हैं। हुआंग AI के तेज विकास के प्रमुख समर्थकों में हैं। उनका कहना है कि कंपनियों को सरकार से AI पर ज्यादा नियम बनाने की मांग नहीं करनी चाहिए। AI से नौकरियां जाने और अमेरिकी चिप्स दूसरे देशों को बेचने जैसे मुद्दों पर उनका एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई से सार्वजनिक मतभेद भी रहा है। डेविड सैक्स टेक निवेशक हैं। ट्रम्प प्रशासन में वह AI और क्रिप्टो से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह AI के डर के आधार पर सख्त नियम बनाने के खिलाफ हैं। सैक्स अमेरिकी राज्यों के अलग-अलग AI कानून बनाने का भी विरोध करते हैं। इसके बजाय वह कम सरकारी दखल वाली नीति चाहते हैं। उनका कहना है कि AI कंपनियां तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, इसलिए उनकी रफ्तार रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी राजनीति में भी AI को लेकर दो राय नियम बनाने के पक्ष में… बर्नी सैंडर्स निर्दलीय अमेरिकी सीनेटर हैं। AI के तेज विकास के आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि AI से बड़ी कंपनियों की ताकत बढ़ सकती है और इसका असर कामगारों पर पड़ सकता है। सैंडर्स ने नए AI डेटा सेंटर बनाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, बड़ी AI कंपनियों पर 50% टैक्स लगाने और उससे सार्वजनिक फंड बनाने की बात कही है। उन्होंने सुपरइंटेलिजेंस पर स्थायी रोक लगाने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, उनका प्रस्ताव है कि तब तक AI के एडवांस विकास पर रोक रहे, जब तक ऐसे सिस्टम को लेकर सुरक्षा इंतजाम तय नहीं हो जाते। नियमों के विरोध में… माइक जॉनसन अमेरिकी स्पीकर मानते हैं कि AI के खतरे बढ़ रहे हैं, लेकिन वह जल्दबाजी में नियम बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वे कहते हैं कि जल्दबाजी में ऐसे नियम नहीं बनाने चाहिए जिनसे चीन को फायदा मिल सकता है। जॉनसन ने AI के कारण इंसानों के खत्म हो जाने की आशंकाओं को खारिज किया है। डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि AI के मामले में अमेरिका चीन से आगे रहे। उन्होंने AI में अमेरिका की बढ़त बनाए रखना अपनी प्राथमिकता बनाई है। इसके लिए वह AI को तेजी से आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसमें AI डेटा सेंटर के लिए ज्यादा बिजली की व्यवस्था करना और ऐसे AI मॉडल को बढ़ावा देना शामिल है, जिनका इस्तेमाल ज्यादा लोग कर सकें। एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग के साथ एक कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने यह भी कहा था कि AI के विकास में सरकार को ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… ओपनएआई का 90 साल पुरानी गणित पहेली सुलझाने का दावा: यह दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में एक; 88 घंटे में जवाब ढूंढा ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया के सबसे मुश्किल सवालों में से एक को सॉल्व कर दिया है। AI को इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
एपल के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की बुकिंग भारत सहित दुनियाभर में शुरू हो गई है। भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1.65 लाख रुपए और आईफोन 18 प्रो मैक्स की कीमत 1.80 लाख रुपए रखी गई है। कंपनी ने इस बार अपने प्रो मॉडल लाइनअप में नया A20 Pro चिपसेट, एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम और मेन कैमरे में पहली बार DSLR कैमरे वाली वेरिएबल अपर्चर टेक्नोलॉजी दी है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारत में इन दोनों मॉडल्स की कीमतें काफी ज्यादा हैं। आईफोन्स 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स के स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स ग्राफिक्स में देखें… एपल Siri AI में 6 बड़े अपडेट्स स्क्रीन देखकर काम करना: स्क्रीन पर क्या दिख रहा है, सिरी उसे समझकर सीधे वही टास्क पूरा कर देती है। निजी डेटा से सटीक जवाब: ईमेल, मैसेज या कैलेंडर से जानकारी निकालकर आपकी फ्लाइट, मीटिंग या प्लान बता देती है। एप्स के अंदर काम: सिर्फ एप खोलती ही नहीं, बल्कि फोटो एडिट करके किसी को भेजने जैसा अंदर का काम भी कर देती है। इंसानों जैसी बात: अटक-अटक कर बोलने या अधूरा वाक्य बोलने पर भी बात आसानी से समझ लेती है। बिना बोले टाइपिंग: स्क्रीन के नीचे डबल टैप करके अब सिरी को लिखकर भी कमांड दे सकते हैं। चैटजीपीटी सपोर्ट: मुश्किल सवालों के जवाब, टेक्स्ट या रेसिपी के लिए सीधे 'चैटजीपीटी' से मदद ले लेती है। एपल के नए वियरेबल डिवाइसेस
आईआईटी छात्र ने साउथ एशिया स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट जीता, अब अमेरिका में गाड़ेंगे झंडे
आईआईटी के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के एमटेक छात्र पी विष्णु तेजा ने 2026 सोसाइटी ऑफ पेट्रोलियम इंजीनियर्स साउथ एशिया रीजनल स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट के मास्टर्स डिवीजन में पहला स्थान हासिल किया है।
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
IIT : आईआईटी के PhD स्कॉलर को 40 लाख का पैकेज, दूसरे छात्र ने अमेरिका में बजाया डंका
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी डॉ शत्रुघ्न ठाकुर को इटली की हंसा टीएमपी में डिजाइन इंजीनियर के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव मिला है। वे 40.65 लाख सालाना पे-पैकेज पर कार्य करेंगे।
अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर
यूएस ग्रीन कार्ड को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और बुरी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी पूरी तरह 'अनअवेलेबल' हो चुकी है।अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर?अमेरिका में सालों से परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और उच्च कुशल कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) और आव्रजन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित दूसरी श्रेणी यानी ईबी-2 (EB-2 - Employment-Based Second Preference) कैटेगरी को फिलहाल पूरी तरह से 'अनअवेलेबल' (Unavailable) यानी अनुपलब्ध घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति का मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए इस श्रेणी के तहत तय किए गए कोटे के सारे वीजा पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी दूतावास या आव्रजन कार्यालय इस कैटेगरी में अब अगले आदेश या नए वित्त वर्ष के शुरू होने तक किसी भी नए ग्रीन कार्ड या अप्रवासन वीजा को जारी या स्वीकृत नहीं कर सकते हैं। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वर्षों से लंबित पेंडिंग फाइलों और भारी-भरकम बैकलॉग के बीच इस प्रकार अचानक श्रेणी का बंद होना उनके सपनों पर एक बहुत बड़ा विराम लगाता हुआ नजर आ रहा है।ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी के पूरी तरह से अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह क्या सामने आई है?इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कैटेगरी के अचानक बंद होने और अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी कानूनों के तहत तय की गई वार्षिक सीमा और देश-वार कोटा प्रणाली (Per-Country Ceiling) है। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, हर साल रोजगार-आधारित जितने भी ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, उनमें से किसी एक देश के नागरिकों को कुल कोटे का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। भारत जैसे विशाल देश से एडवांस्ड डिग्री धारकों और विशेष योग्यताओं वाले प्रोफेशनल्स की संख्या और आवेदन इतने ज्यादा हैं कि यह तयशुदा कोटा निर्धारित समय से बहुत पहले ही पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इस वर्ष भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही भारत के कोटे के सारे ईबी-2 वीजा नंबर पूरी तरह से एग्जॉस्ट यानी समाप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, अन्य देशों द्वारा अप्रयुक्त रहने वाले वीजा नंबरों का लाभ भी इस बार समय पर नहीं मिल पाने के कारण अमेरिकी प्रशासन को मजबूरन इस कैटेगरी को पूरी तरह से बंद या अनअवेलेबल करना पड़ा है, जिससे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, एच-1बी (H-1B) धारकों और उनके परिवारों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय नागरिकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए यह स्थिति भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता लेकर आई है। जो प्रोफेशनल्स अपनी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में थे, उनकी फाइलें अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई हैं और तब तक आगे नहीं बढ़ सकतीं जब तक कि नया कोटा शुरू नहीं होता। हालांकि आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस स्थिति के बावजूद यूएसिसिस (USCIS) द्वारा फॉर्म आई-485 (Adjustment of Status) की कुछ श्रेणियों के आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर तकनीकी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन अंतिम अप्रूवल के लिए लंबा इंतजार करना ही होगा। इस लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता के कारण कई कुशल भारतीय कर्मचारी अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं, क्योंकि ग्रीन कार्ड मिलने में लगने वाला यह बेहिसाब समय कई दशकों तक लंबा खींचता जा रहा है।इस गंभीर बैकलॉग और समस्या से निपटने के लिए आगे क्या उम्मीदें बची हैं?इस बड़ी प्रशासनिक रोक के बीच भारतीय प्रवासियों और नीति विश्लेषकों की निगाहें अब पूरी तरह से नए वित्त वर्ष और अमेरिकी संसद में होने वाले विधायी सुधारों पर टिकी हुई हैं। चूंकि हर साल 1 अक्टूबर को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही वार्षिक वीजा सीमाओं और कोटे का नया आवंटन दोबारा रिसेट होता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि तब जाकर इस कैटेगरी में कुछ राहत मिल सकती है और कट-ऑफ डेट्स आगे बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, आव्रजन सुधारों की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक अमेरिका देश-वार लगने वाली इस 7 प्रतिशत की सीमा को समाप्त नहीं करता या ग्रीन कार्ड की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक भारतीय प्रोफेशनल्स को इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। अमेरिकी श्रम बाजार में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में बुनियादी बदलाव कितनी बड़ी और तत्काल आवश्यकता बन चुके हैं।
खर्ग द्वीप के पास बड़ा हमला, अमेरिका ने तबाह कर दिया ईरान का टैंकर - Hindustan
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अमेरिका में बसने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली अपडेट सामने आ रही है। अमरीकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएसएसीआईएस (USCIS) ने ग्रीन कार्ड और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने वाले व्यक्ति या परिवार के वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ उनके क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिरता की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस बदलाव का सीधा असर उन हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स पर पड़ने वाला है जो अपने किसी परिजन या एम्प्लॉयी के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस नए फॉर्म और नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अब स्पॉन्सरशिप की राह उतनी आसान नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी।क्या है USCIS का नया फॉर्म और कैसे काम करेगा स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर की जांच का नया नियमयूएसएसीआईएस द्वारा लागू किए गए इन नए नियमों के केंद्र में एफिडेविट ऑफ सपोर्ट (Affidavit of Support) से जुड़ा नया फॉर्म है, जिसके जरिए स्पॉन्सर को अपनी वित्तीय क्षमता का पूरा ब्योरा देना होता है। पारंपरिक तौर पर स्पॉन्सर को सिर्फ अपनी आय का टैक्स रिटर्न दिखाना होता था, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारी स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर, बैंक खातों की स्थिति, मौजूदा कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई स्पॉन्सर आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है या उसका क्रेडिट स्कोर खराब चल रहा है, तो वह किसी आवेदक के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं कर पाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अमेरिका आने वाला नया अप्रवासी कभी भी वहां की सरकारी सहायता या पब्लिक चार्ज (Public Charge) पर निर्भर न हो और अपनी आजीविका खुद चलाने में पूरी तरह से सक्षम हो।भारतीय आवेदकों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इस बदलाव के क्या हैं गहरे मायनेअमेरिका में वर्क वीजा यानी एच-1बी (H-1B) पर काम कर रहे लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता पहले से ही काफी लंबा और पेचीदा रहा है। ऐसे में फैमिली-बेस्ड या एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड स्पॉन्सरशिप के नियमों का कड़ा होना भारतीयों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार परिवार के सदस्य जब अपने माता-पिता या भाई-बहनों को अमेरिका बुलाने के लिए स्पॉन्सर करते हैं, तो उन्हें इस नए वित्तीय कड़े मानदंड से गुजरना होगा। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, और जरा सी भी वित्तीय चूक होने पर आवेदन को सीधे खारिज किया जा सकता है। इसलिए जो भारतीय परिवार या पेशेवर आने वाले दिनों में ग्रीन कार्ड के लिए फाइल करने की सोच रहे हैं, उन्हें अपने स्पॉन्सर के वित्तीय रिकॉर्ड और क्रेडिट हिस्ट्री को पहले से ही दुरुस्त और मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है।भविष्य की आव्रजन नीतियां और ग्रीन कार्ड चाहने वालों के लिए जरूरी सलाहअमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हो रहे ये लगातार बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले समय में ग्रीन कार्ड पाना और अधिक कठिन और अनुशासित होने जा रहा है। अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर साल नियमों में फेरबदल किए जाते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में भारतीय अप्रवासियों और छात्रों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कागजी कार्रवाई को शुरू करने से पहले इमीग्रेशन वकीलों या विशेषज्ञों से पूरी सलाह जरूर लें। नए फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पॉन्सर की आय संघीय गरीबी रेखा (Federal Poverty Guidelines) से काफी ऊपर हो और उनका क्रेडिट इतिहास बिल्कुल साफ-सुथरा हो। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर सही कदम उठाकर ही इस नई प्रशासनिक चुनौती से पार पाया जा सकता है और अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का सपना साकार किया जा सकता है।
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर उस छात्र की आंखों में पलता है जो अपनी मेहनत के दम पर करियर में ऊंची उड़ान भरना चाहता है। जब दुनिया भर के बेहतरीन विश्वविद्यालयों की बात आती है, तो अमेरिका का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और शानदार करियर ग्रोथ की वजह से अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, वहां की महंगी यूनिवर्सिटी फीस, ट्यूशन कॉस्ट और रहने-खाने का भारी खर्च कई बार मेधावी छात्रों के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। वित्तीय तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका जाने का विचार छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में ऐसी कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप प्रोग्राम्स मौजूद हैं, जो छात्रों के ट्यूशन फीस से लेकर उनके रहने, खाने और यहाँ तक कि हेल्थ इंश्योरेंस तक का पूरा खर्च खुद उठाती हैं? इन स्कॉलरशिप्स के जरिए आप बिना किसी आर्थिक तनाव के अमेरिकी धरती पर अपने सपनों की डिग्री हासिल कर सकते हैं।अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मिलने वाली फुल-ब्राइट और अन्य प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स के बारे में जानेंअमेरिका में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप (Fulbright-Nehru Fellowships) एक ऐसा नाम है जो भारत में बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित है। अमेरिकी सरकार और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो मास्टर या पीएचडी करने अमेरिका जाना चाहते हैं। इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ मासिक वजीफा, आने-जाने का हवाई किराया और स्वास्थ्य बीमा का पूरा खर्च कवर किया जाता है। इसके अलावा ह्यूबर्ट हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम (Hubert Humphrey Fellowship Program) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो अनुभवी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नॉन-डिग्री स्टडी और लीडरशिप ट्रेनिंग का मौका देते हैं। इन स्कॉलरशिप्स को हासिल करने के लिए छात्रों को एक निश्चित चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और अपने एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर खरा उतरना होता है, जिसके बाद उनके विदेश में पढ़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाता है।यूनिवर्सिटी-बेस्ड फाइनेंशियल असिस्टेंस और फुल-राइड स्कॉलरशिप्स का कैसे उठाएं लाभकेवल सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अधिकांश प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी अपने यहां आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को मेरिट और जरूरत के आधार पर फुल-राइड स्कॉलरशिप्स प्रदान करते हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और येल जैसी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज की वित्तीय सहायता नीतियां बहुत मजबूत हैं। अगर आपका एकेडमिक रिकॉर्ड शानदार है और आपके पास बेहतरीन एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का रिकॉर्ड है, तो ये यूनिवर्सिटीज आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 100 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति दे सकती हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही मिलने वाली ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंटशिप (GRA) या टीचिंग असिस्टेंटशिप (TA) के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं, जिससे उनका रहने-खाने का खर्च आसानी से निकल जाता है। इन अवसरों के बारे में सही समय पर जानकारी जुटाकर समय से आवेदन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अमेरिका में फ्री एजुकेशन पाने के लिए स्मार्ट टिप्सअमेरिका में बिना पैसे की टेंशन के पढ़ाई करने का यह सुनहरा अवसर पाने के लिए छात्रों को अपनी तैयारी बहुत पहले से शुरू करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आपको अपने एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, प्रोफेसरों से मिलने वाले रिकमेंडेशन लेटर्स और आईईएलटीएस (IELTS) या टॉफेल (TOEFL) जैसे इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट के स्कोर कार्ड तैयार रखने होते हैं। अधिकांश स्कॉलरशिप्स के लिए आवेदन की प्रक्रिया साल में एक निश्चित समय पर खुलती है, इसलिए यूनिवर्सिटीज की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर डेडलाइन पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाने के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन और नेतृत्व क्षमता से जुड़े अनुभवों को अपने आवेदन में जरूर शामिल करें। थोड़ी सी मेहनत, सही दिशा में की गई रिसर्च और समय पर किए गए आवेदन आपको बिना किसी वित्तीय बोझ के अमेरिका की बेहतरीन शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना सकते हैं।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
क्या भारत की तरह अमेरिका में भी है ट्यूशन कल्चर?
भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया.
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग द्वारा CPT (Curricular Practical Training) को लेकर एक नया नीतिगत मेमो जारी किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। CPT वह माध्यम है जिसके जरिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी डिग्री कोर्स के दौरान ही इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन ICE के इस नए मेमो ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और पेचीदा बना दिया है, जिससे भारतीय छात्रों के करियर और उनकी कानूनी स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है। गूगल डिस्कवर और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय इस विषय को लेकर लाखों छात्र सर्च कर रहे हैं कि आखिर इस नए बदलाव का उनकी पढ़ाई और जॉब करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए अमेरिका में CPT के पूरे गणित को समझते हैं और जानते हैं कि ICE के इस नए मेमो में क्या-क्या खास बातें कही गई हैं।अमेरिका में CPT (कर्रिकलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) असल में क्या है?सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CPT क्या है और यह विदेशी छात्रों के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जब कोई भारतीय छात्र अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन (मास्टर्स या बैचलर्स) के लिए एडमिशन लेता है, तो उसे अपने कोर्स के करिकुलम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाती है, जिसे CPT कहा जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और साथ ही कुछ पैसे भी कमाते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए जीवनरेखा की तरह होता है जो अपने खर्चों का एक हिस्सा खुद उठाने और अमेरिकी कॉर्पोरेट कल्चर को नजदीक से समझने की कोशिश करते हैं। पारंपरिक रूप से CPT को F-1 वीजा धारक छात्रों के लिए एक बेहद लचीली और मददगार व्यवस्था माना जाता रहा है, जिसके जरिए वे आगे चलकर OPT (Optional Practical Training) और H-1B वीजा की ओर कदम बढ़ाते हैं।ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने क्यों जारी किया नया मेमो?हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ICE द्वारा जारी किए गए नए मेमो ने विदेशी छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस मेमो का मुख्य उद्देश्य CPT के नियमों का कथित तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि कुछ छात्र और विश्वविद्यालय CPT नियमों का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई की आड़ में लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से काम करने के रास्ते तलाश रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विश्वविद्यालयों को CPT के अनुमोदन (Approval) के मामले में और अधिक कठोर नियमों का पालन करना होगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि CPT सीधे तौर पर छात्र के अकादमिक पाठ्यक्रम और डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल अंशकालिक नौकरी पाने का एक आसान जरिया। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से छात्रों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि क्या उनकी यूनिवर्सिटीज अब आसानी से CPT अप्रूव कर पाएंगी या नहीं।भारतीय छात्रों पर इस नए मेमो का क्या होगा सीधा असर?लोकल ऑप्टिमाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में हर साल हजारों की संख्या में भारतीय छात्र कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस और डेटा साइंस जैसे कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने ट्यूशन फीस के कर्ज को चुकाने और अमेरिकी बाजार में फुल-टाइम जॉब पाने के लिए CPT और फिर OPT पर निर्भर रहता है। यदि ICE के नए नियमों के कारण CPT मिलना मुश्किल हो जाता है, या इसके घंटों (Hours) को सीमित कर दिया जाता है, तो भारतीय छात्रों की आर्थिक स्थिति और करियर प्लानिंग बुरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि छात्रों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहने की जरूरत है।आधुनिक Generative Engine Optimization और डिजिटल सर्च ट्रेंड्स का परिदृश्यआधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च) और गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में शिक्षा, वीजा नियमों में बदलाव और करियर से जुड़ी ऐसी जटिल कानूनी खबरों को छात्र और उनके परिवार सबसे ज्यादा खोजते हैं। आज का डिजिटल युग यह मांग करता है कि किसी भी ग्लोबल पॉलिसी बदलाव को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडिट (Reddit) और इमिग्रेशन फोरम्स पर इस समय CPT मेमो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहाँ छात्र अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं। सही और तथ्यात्मक जानकारी समय पर मिलना हर उस छात्र के लिए बेहद जरूरी है जो अमेरिका में अपने सपनों को साकार करने की राह पर है।भारतीय छात्रों को अब किन सावधानियों और नियमों का रखना होगा ध्यान?इस बदलते हुए परिदृश्य में अमेरिका में पढ़ रहे या जाने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को कुछ बेहद अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, अपने कोर्स के दौरान लिए जाने वाले CPT का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) एकदम दुरुस्त रखें और यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर और आपकी यूनिवर्सिटी का कोर्स करिकुलम पूरी तरह से नियमों के दायरे में हो। किसी भी शॉर्टकट या संदिग्ध तरीके से CPT प्राप्त करने से बचें, क्योंकि अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS और ICE) इस मामले में अब बहुत अधिक आक्रामक हो चुका है। अपनी यूनिवर्सिटी के कानूनी सलाहकारों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें ताकि वीजा की स्थिति पर कोई आंच न आए।अमेरिकी शिक्षा और करियर की राह में आने वाली नई चुनौतियाँअंततः, अमेरिका में CPT को लेकर ICE द्वारा जारी किया गया यह मेमो इस बात की चेतावनी है कि अमेरिका में आव्रजन और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को लेकर प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना और वहां टिके रहना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है, इसके लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक ईमानदारी और नियमों की सटीक समझ होना अनिवार्य है। यदि छात्र सही दिशा में योजना बनाकर चलेंगे और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे, तो वे इन नई बाधाओं को पार करते हुए अपने अमेरिकी सपने को जरूर पूरा कर पाएंगे, बशर्ते हर कदम बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ उठाया जाए।
अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

