अमेरिका की नई टैरिफ नीति, आखिर क्यों ट्रंप के निशाने पर आए दुनिया के 10 प्रमुख देश?
ट्रंप की व्यापार नीति अब सिर्फ व्यापार घाटे तक सीमित नहीं रही। टैरिफ और प्रतिबंधों का इस्तेमाल अब युद्ध, रूसी तेल, प्रवासन, नशीली दवाओं की तस्करी, परमाणु कार्यक्रम और यहां तक कि सहयोगी देशों की घरेलू नीतियों से जोड़कर किया जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े दिग्गज और बैंकिंग सेक्टर के हैवीवेट HDFC Bank की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की एक अदालत में बैंक और उसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सिक्योरिटीज फ्रॉड का क्लास-एक्शन मुकदमा दर्ज होने की खबर से गुरुवार को घरेलू बाजार में बैंक के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखी गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर भारी बिकवाली के चलते HDFC Bank का शेयर टूटकर 710 रुपये के अपने 52-सप्ताह (एक साल) के नए निचले स्तर पर पहुंच गया।इस भारी गिरावट के कारण अकेले एक ही कारोबारी सत्र में बैंक के मार्केट कैपिटलाइजेशन (एम-कैप) से करीब 25,000 करोड़ रुपये का सफाया हो गया, जिसके चलते बैंक का कुल बाजार मूल्यांकन 11 लाख करोड़ रुपये के स्तर से नीचे फिसल गया।न्यूयॉर्क कोर्ट में सिक्योरिटीज फ्रॉड का मुकदमा: जानिए क्या हैं बैंक और अधिकारियों पर आरोपअमेरिका के न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की जिला अदालत (U.S. District Court for the Southern District of New York) में एक अमेरिकी निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी द्वारा यह क्लास-एक्शन लॉसूट दायर किया गया है। इस कानूनी शिकायत में बैंक के साथ-साथ उसके प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) शशिधर जगदीशन और मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी सीधे तौर पर पक्षकार बनाया गया है।यह मुकदमा 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच HDFC Bank के अमेरिकी डिपॉजिटरी शेयर्स (ADS) खरीदने वाले सभी वैश्विक निवेशकों की ओर से लाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक प्रबंधन ने निवेशकों और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के समक्ष भ्रामक बयान दिए और अहम वित्तीय व विनियामक जोखिमों को छुपाया। याचिकाकर्ता ने मामले की जूरी ट्रायल कराने और निवेशकों को हुए भारी वित्तीय नुकसान के हर्जाने की मांग की है।45 करोड़ का MSRDC मामला: मार्केटिंग खर्च के नाम पर कथित अतिरिक्त ब्याज का खेलअमेरिकी मुकदमे की जड़ में महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) से जुड़ा एक पुराना मामला है। आरोपों के अनुसार, बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट्स को आकर्षित करने के लिए मानक 3.5 प्रतिशत बचत दर के मुकाबले 6.01 प्रतिशत का अत्यधिक ब्याज दर देने का वादा किया था।बैंकिंग नियमों के तहत किसी एक संस्थागत ग्राहक को तय सीमा से अधिक ब्याज देने पर पाबंदी होने के कारण, कथित रूप से 45 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ब्याज राशि को तीसरे पक्ष के वेंडरों के जरिए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियानों के मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया।इस साल मई में इस आंतरिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद बैंक के अमेरिकी शेयर्स में भारी गिरावट आई थी। हालांकि HDFC Bank के निदेशक मंडल ने जुलाई में एक विशेष अनुशासनात्मक समिति की जांच के आधार पर इसे किसी दुर्भावना या व्यक्तिगत लाभ के बजाय 'कारोबारी अति-उत्साह' (Business Overreach) माना था और शीर्ष अधिकारियों पर सांकेतिक जुर्माना लगाया था।बैंक ने आरोपों को बताया बेबुनियाद: मजबूती से बचाव करने का ऐलानअमेरिकी मुकदमे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए HDFC Bank ने कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह से आधारहीन और मेरिट-विहीन है। बैंक के प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका में जब भी किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर मूल्य में गिरावट आती है, तो इस तरह के शेयरधारक मुकदमे दर्ज होना बेहद आम बात है और कई वैश्विक कंपनियां नियमित रूप से ऐसे मामलों का कानूनी बचाव करती हैं।बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी अदालत में अपनी वित्तीय सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता का मजबूती से बचाव करेगा। बैंक के जानकारों का कहना है कि इस मुकदमे से बैंक के दैनिक वित्तीय संचालन और कोर रेवेन्यू पर कोई सीधा भौतिक प्रभाव पड़ने की संभावना बेहद सीमित है।दुबई ऑपरेशंस और चेयरमैन के इस्तीफे से पहले से बना था दबावHDFC Bank के शेयरों पर पिछले कुछ महीनों से कई तरफा दबाव बना हुआ है। इसी साल मार्च में बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अप्रत्याशित रूप से इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने बैंक के कुछ तौर-तरीकों को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुकूल नहीं बताया था। उनके इस्तीफे के बाद भी बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई थी।इसके अतिरिक्त, बैंक के दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) ऑपरेशंस के जरिए कार्लाइल के लाइफ सेटलमेंट फंड में निवेश करने वाले 75 से अधिक एनआरआई निवेशकों ने भी मिस-सेलिंग और रिडेम्पशन रुकने के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और विदेशी नियामकों से गुहार लगाई है। इन लगातार विवादों के कारण संस्थागत निवेशकों के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा है।तकनीकी चार्ट्स और ब्रोकरेज की राय: क्या आगे संभलेगा शेयर?टेक्निकल एनालिस्ट्स के मुताबिक, HDFC Bank का शेयर अपने अहम वीकली सपोर्ट जोन 725-720 रुपये के नीचे फिसल चुका है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 30 के स्तर के करीब पहुंच रहा है, जो बियर्स (बिकवाली) के मजबूत दबाव का संकेत दे रहा है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेयर में रिकवरी नहीं आती है, तो अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट 685-680 रुपये के दायरे में हो सकता है।दूसरी ओर, वैश्विक और घरेलू ब्रोकरेज हाउस जैसे गोल्डमैन सैक्स, नोमुरा और मोतीलाल ओसवाल ने आकर्षक वैल्यूएशन को देखते हुए शेयर पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। विश्लेषकों का मानना है कि कानूनी स्पष्टता और आगामी तिमाहियों में मार्जिन सुधार के बाद ही स्टॉक में टिकाऊ तेजी देखने को मिलेगी।
वांग यी की अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू से मुलाकात
बीजिंग, 27 अगस्त . चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के Political ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी ने पेइचिंग में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू से मुलाकात की. वांग यी ने कहा कि चीन अमेरिका संबंधों के सामने अभी भी कई जोखिम और चुनौतियां मौजूद हैं. दोनों पक्षों को दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ... Read more
वीजा को लेकर भारतीयों को झटका देने की तैयारी में अमेरिका, कहा- यह सुविधा, अधिकार नहीं
अमेरिका का ट्रंप प्रशासन पिछले सालों में जारी किए गए वीजा की जांच कर रहा है। वाइट हाउस का कहना है कि सरकार यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं इन लोगों ने अपने टेम्पररी वीजा के आवेदन में गलत जानकारी तो नहीं दी थी।
CM के गृह जिले की सड़कें बनीं मजाक, वीडियो देखकर लोग बोले- अमेरिका-चीन भी जलेंगे!
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अमेरिका में बच्चों-टीनेजर्स के लिए Facebook और Instagram पर रात में रोक, रोजाना इस्तेमाल की भी होगी लिमिट
अमेरिका-ईरान जंग के बीच Doha की बड़ी पहल, कतर PM Al-Thani तेहरान में करेंगे हाई लेवल मीटिंग
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने कहा कि कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल-थानी गुरुवार को तेहरान पहुंचेंगे। वे वहां ईरानी अधिकारियों से मिलेंगे और तनाव कम करने और बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। अल-अंसारी ने एक्स पोस्ट में कहा, कि म शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल-थानी कल तेहरान पहुंचेंगे, जहां वे कई ईरानी अधिकारियों से मिलकर तनाव कम करने और बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। अल-अंसारी ने कहा कि यह दौरा कतर के इस दृढ़ रुख के अनुरूप है कि मतभेदों को सुलझाने और क्षेत्र में सुरक्षा व स्थिरता को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका कूटनीतिक रास्ता है। इसे भी पढ़ें: ईरान के डर से अपना एयरफोर्स-1 विमान छोड़-छाड़ झट से ली सीक्रेट फ्लाइट, Turkey से गुप्त तरीके से भागे ट्रंप? उन्होंने कहा कि बातचीत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही की आज़ादी और 28 फरवरी से पहले वाली स्थिति को बहाल करने की ज़रूरत पर भी चर्चा होगी। यह दौरा कतर और पाकिस्तान की उन नई कूटनीतिक कोशिशों के बीच हो रहा है जिनका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करना है। यह घटनाक्रम वाशिंगटन द्वारा 28 फरवरी को तेहरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के लगभग छह महीने बाद हो रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें लगता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई सैन्य अभियानों के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अभी भी जीवित हैं। ट्रंप ने अमेरिकी कमेंटेटर ग्लेन बेक से कहा, मुझे नहीं लगता कि उनकी मौत हुई है, और साथ ही यह भी कहा कि खामेनेई बहुत गंभीर रूप से घायल हुए थे।
अब ईरान पर अटैक नहीं करेगा अमेरिका, मार्को रूबियो ने बता दिया आगे का प्लान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कई सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों को बताया है कि वॉशिंगटन का अभी ईरान पर नए सिरे से सैन्य हमले करने का कोई इरादा नहीं है। शांतिपूर्ण समाधानों के अटके रहने के बीच, यह कदम आर्थिक और समुद्री दबाव बनाने की दिशा में एक बदलाव को दर्शाता है। एक्सियोस के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि रुबियो ने तेहरान के खिलाफ फिलहाल नए सैन्य हमले शुरू न करने की अमेरिका की योजना के बारे में जानकारी दी। इसके बजाय, प्रशासन का लक्ष्य नौसैनिक नाकेबंदी, आर्थिक उपायों और अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से पेट्रोलियम की आवाजाही बनाए रखकर अपना दबदबा बढ़ाना है। यह रणनीतिक बदलाव ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई से बचते हुए ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसे भी पढ़ें: 15 दिनों के भीतर दो बार एक मंच पर आएंगे मोदी-पुतिन और शी, ट्रंप की बेचैनी बढ़ी हालांकि रुबियो ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन की अभी कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई करने की योजना नहीं है, लेकिन अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अगर तेहरान पहले हमला करता है, तो अमेरिकी सेना ने सैन्य विकल्प को पूरी तरह से खत्म नहीं किया है। वॉशिंगटन का मानना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास की कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों में हेरफेर करने के तेहरान के मुख्य साधनों में से एक को काफी कमज़ोर कर दिया है। अमेरिकी सेना इस रास्ते से बारूदी सुरंगें हटाने में लगी हुई है, जिसके कारण इसके दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल करने वाले टैंकरों की संख्या बढ़ गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस बदलाव को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि जलडमरूमध्य से समुद्री ऊर्जा प्रवाह को रोकने की तेहरान की क्षमता काफी कम हो गई है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान के तेल निर्यात को काफी कम कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में तेहरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल, खार्ग द्वीप पर बहुत कम टैंकर देखे गए हैं। इसे भी पढ़ें: USCIRF ने Mohan Bhagwat का वीजा रद्द करने की मांग की, भारत ने किया खारिज स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि प्रशासन ईरानी सरकार के बचे-खुचे वित्तीय सहारे खत्म कर रहा है। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस रुख को दोहराया कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। इसी दौरान, वॉशिंगटन ने तेहरान के खिलाफ अपनी आर्थिक कार्रवाई और तेज़ कर दी। अमेरिका ने और प्रतिबंध लागू किए और ईरान के साथ व्यापार करने वाले विदेशी देशों को साफ चेतावनी दी कि उन्हें आगे चलकर भारी सज़ा का सामना करना पड़ सकता है।
9/11 का मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद कौन है, जिसकी ट्रायल डेट अमेरिका में तय हुई
शेख मोहम्मद ग्वांतानामो डिटेंशन सेंटर में सबसे चर्चित कैदी बना हुआ है, जिसे 2002 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद विदेशी संदिग्ध उग्रवादियों को रखने के लिए बनाया था.
एचडीएफसी बैंक पर न्यूयॉर्क में एक क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप है कि बैंक ने एक राज्य एजेंसी को अवैध रूप से अधिक ब्याज का भुगतान किया और उसे मार्केटिंग खर्च के रूप में छिपाया।
अमेरिका में म्यूज़िकल प्रोग्राम से कुछ घंटे पहले चल बसे थे मशहूर गायक मुकेश, आज 50वीं पुण्यतिथि
मुकेश की मौत 27 अगस्त, 1976 को डेट्रॉइट, मिशिगन में हुई थी, जब वह लता मंगेशकर और अपने बेटे नितिन मुकेश के साथ एक कॉन्सर्ट टूर के लिए US में थे। जो संगीत की एक और शाम होनी थी, वह हिंदी फिल्म इतिहास के सबसे दिल दहला देने वाले दिनों में से एक बन गई।
एचडीएफसी बैंक पर अमेरिका में क्लास-एक्शन मुकदमा, शेयर फिसले
एचडीएफसी बैंक पर अमेरिका में क्लास-एक्शन मुकदमा, शेयर फिसले
लखनऊ में रक्षाबंधन से पहले राखी बाजार सजे हुए हैं। अमेरिकन डायमंड और कैप्टन अमेरिका वाली राखियां खूब पसंद की जा रही हैं। रुद्राक्ष और भगवान शिव के त्रिनेत्र वाली राखियां भी डिमांड में हैं। बच्चों के लिए ‘भाई’ और ‘वीरा’ के साथ कैप्टन अमेरिका जैसे एनिमेशन हीरोज वाली राखियां बाजार में बिक रही हैं। बड़े भाइयों के लिए ढाई हजार रुपए तक की अमेरिकन डायमंड लगी राखी भी उपलब्ध है। शहर के अलग-अलग बाजारों में 10 रुपए से लेकर 3000 रुपए तक की राखियां मिल रही हैं। अमेरिकन डायमंड राखी बनी पहली पसंद पत्रकारपुरम, गोमतीनगर, आशियाना, निरालानगर, हजरतगंज, चौक समेत लखनऊ के कई बाजारों में अमेरिकन डायमंड राखी की डिमांड सबसे ज्यादा है। करीब 400 रुपए से शुरू होने वाली अमेरिकन डायमंड राखी को कलाई पर बांधने के बाद यह डायमंड ज्वेलरी या ब्रेसलेट जैसी दिखाई देती है। प्रीमियम डिजाइन में इसकी कीमत 2500 रुपए तक पहुंच रही है। अलग-अलग स्टोन और डिजाइन वाली राखियों में ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक खरीदारी कर रहे हैं। सावन में रुद्राक्ष और त्रिनेत्र वाली राखी का ट्रेंड सावन के महीने का असर राखी के डिजाइन पर भी दिखाई दे रहा है। बाजार में रुद्राक्ष वाली राखी और भगवान शिव के त्रिनेत्र की आकृति वाली राखी की मांग बढ़ी है। दुकानदारों के मुताबिक बहनें ऐसी राखियां पसंद कर रही हैं, जिनमें भाई के लिए शुभकामना के साथ धार्मिक भाव भी जुड़ा हो। रुद्राक्ष वाली राखियों को खास तौर पर सावन के कारण पसंद किया जा रहा है। कैप्टन अमेरिका राखी युवाओं और बच्चों को पसंद दुकानदार आरिफ बताते हैं कि अमेरिकन डायमंड के साथ कैप्टन अमेरिका राखी भी इस बार बाजार में ट्रेंड में है। इसके फैंसी डिजाइन और चमकदार लुक के कारण युवा और बच्चे इसे पसंद कर रहे हैं। कुछ डिजाइन में स्टोन और मेटल का इस्तेमाल किया गया है, जिससे राखी कलाई पर ब्रेसलेट जैसी नजर आती है। बच्चों की राखी पर लिखा ‘भाई’ और ‘वीरा’ दुकानदार सानू बताते हैं कि बच्चों के लिए बाजार में ‘भाई’ और ‘वीरा’ लिखी राखियां सबसे अलग आकर्षण बनी हुई हैं। रंगीन स्टोन, फैंसी डिजाइन और चमकदार सजावट वाली इन राखियों को बच्चे खुद चुन रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक, बच्चों के लिए राखी खरीदने वाले परिवारों में इन डिजाइन की मांग लगातार बनी हुई है। 10 रुपए से 3000 रुपए तक की राखियां उपलब्ध लखनऊ में राखियों की कीमत डिजाइन और क्वालिटी के हिसाब से तय हो रही है। सामान्य राखियां 10 रुपए से शुरू हैं, जबकि स्पेशल डिजाइन कई सौ रुपए तक पहुंच रहे हैं। प्रीमियम अमेरिकन डायमंड राखी 2500 रुपए तक उपलब्ध है। दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन राखियों की खरीदारी बढ़ने से सामान्य राखियों की बिक्री पर बड़ा असर है, लेकिन खास डिजाइन वाली राखियों के लिए ग्राहक बाजार पहुंच रहे हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच सुलह कराने की कोशिशें फिर तेज, देखें US टॉप-10
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिशें फिर तेज हो गई हैं. मध्यस्थता कर रहे कतर ने कहा है कि उसके अधिकारी दोनों देशों के संपर्क में हैं. और रोजाना बातचीत के जरिये रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा बयान दिया है. यूएस टॉप 10 में देखें ऐसी ही टॉप 10 खबरें.
नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने 25 देशों के कुल 605 नागरिकों को लापता कर दिया है, जिनमें सर्वाधिक 333 भारतीय शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन समेत कई देशों के नागरिक भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।
उत्तर कोरिया का पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण हमारा लक्ष्य: अमेरिका
अमेरिका ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने लक्ष्य को दोहराया है। दावा किया है
HDFC Bank पर अमेरिका में केस, भारत में शेयर धड़ाम, टूटकर आया एक साल के निचले स्तर पर
HDFC Bank Shares:देश में प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज बिकवाली का तेज दबाव दिखा। इसकी वजह ये है कि अमेरिका में बैंक और इसके कुछ सीनियर अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर हुआ है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक बैंक पर भ्रामक डिस्क्लोजर्स और गवर्नेंस से जुड़ी खामियों के जरिए अमेरिकी सिक्योरिटीज मार्केट के कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इसकी आंच में बैंक के शेयर झुलस गए। फिलहाल बीएसई पर यह 1.49% की गिरावट के साथ ₹716.30 पर है। इंट्रा-डे में यह 2.35% उछलकर ₹710.00 तक आ गया था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।किस मामले में फंसा HDFC Bankमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक निवेश ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी ने 13 अगस्त को न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट के यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बैंक और इसके दो सीनियर अधिकारियों के खिलाफ सिक्योरिटीज फ्रॉड का क्लास-एक्शन केस दर्ज कराया है। यह केस उन निवेशकों की तरफ से किया गया है जिन्होंने 17 जुलाई, 2023 और 26 मई, 2026 के बीच एचडीएफसी बैंक की सिक्योरिटीज खरीदे थे। इसमें आरोप लगाया है कि बैंक ने महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को जो पेमेंट किया, उसे मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया। आरोपों के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया ताकि बाकी डिपॉजिटर्स की तुलना में अधिक ब्याज दिया जा सके।क्या कहना है एचडीएफसी बैंक काएचडीएफसी बैंक के एक प्रवक्ता का कहना है कि शेयर प्राइस गिरने के बाद अमेरिका में शेयरहोल्डर्स के ऐसे केस आम बात हैं और अमेरिका में लिस्टेड कई कंपनियों को हर साल ऐसे मुकदमों का सामना करना पड़ता है। प्रवक्ता का कहना है कि जो आरोप लगाए हैं, उनमें कोई दम नहीं है और बैंक मजबूती से अपना बचाव करेगा।एक साल में कैसी रही शेयरों की चालएचडीएफसी बैंक के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 23 अक्टूबर 2025 को बीएसई पर यह ₹1,020.35 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 10 महीने में यह 30.42% फिसलकर आज 27 अगस्त 2026 को ₹710.00 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।Tata Power धड़ाम, ₹4700 करोड़ के झटके पर टूटा शेयर, प्वाइंटवाइज समझें पूरा मामलाNvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलबडिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ को लेकर कहा कि ये अवधारणाएं अमेरिका और यूरोप से आई हैं और भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था से इनका सीधा संबंध नहीं है।
‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा
सोमनाथ, 27 अगस्त . असम के Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ को लेकर कहा कि ये अवधारणाएं अमेरिका और यूरोप से आई हैं और भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था से इनका सीधा संबंध नहीं है. सोमनाथ में मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम हिमंता सरमा ने कहा कि हमारे ... Read more
'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा
'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा
अमेरिका ऐसे प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा है जो पहले से ही लागू हैं: इस्माइल बघाई
ईरान के विदेश मंत्रालय ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अमेरिकी योजना का मज़ाक उड़ाते हुए इसे ‘मज़ाक’ करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बयान में कहा कि वाशिंगटन की नीति का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि अमेरिका ऐसे प्रतिबंधों […] The post अमेरिका ऐसे प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा है जो पहले से ही लागू हैं: इस्माइल बघाई appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
जुलाई में अमेरिका में महंगाई दर में नरमी, मुख्य मुद्रास्फीति बढ़ी; उपभोक्ता खर्च में ठहराव
वॉशिंगटन, 27 अगस्त . अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति जुलाई में उल्लेखनीय रूप से कम हुई, लेकिन घरेलू खर्च लगभग स्थिर रहा और दूसरी तिमाही के दौरान आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ गई. यह जानकारी अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में दी गई है. अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति जुलाई में काफी धीमी पड़ी, लेकिन घरेलू खर्च ... Read more
देशभर में 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। उज्जैन में इस पर्व पर एक अनूठी परंपरा देखने को मिलती है। महाकाल मंदिर के पीछे स्थित बड़ा गणेश मंदिर में भगवान गणेश को भाई मानने वाली बहनें देश ही नहीं, विदेशों से भी राखियां भेजती हैं। मुंबई, जयपुर, बेंगलुरु, भोपाल, इंदौर के साथ अमेरिका, लंदन और हांगकांग से भी बहनों ने भगवान गणेश के लिए राखियां भेजी हैं। इस बार भगवान गणेश को 51 फीट की विशेष राखी भी अर्पित की जाएगी। महिलाएं भगवान गणेश को भाई मानकर उनके लिए राखी भेजने के साथ उनकी पत्नियों रिद्धि-सिद्धि को भाभी का दर्जा देती हैं। उनके लिए साड़ी और भगवान गणेश के वाहन मूषक के लिए आसन भी भेजे जाते हैं। रक्षाबंधन पर मंदिर में पहुंचने वाली इन राखियों को विधि-विधान से भगवान गणेश को अर्पित किया जाएगा। देश-विदेश से पहुंची राखियां महाकाल मंदिर के ठीक पीछे स्थित करीब 15 फीट ऊंची भगवान गणेश की प्रतिमा के कारण यह मंदिर बड़े गणेश मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। यहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में वर्षों से आने वाली कई महिला श्रद्धालु भगवान गणेश को अपना भाई मानकर उनकी पूजा करती हैं और रक्षाबंधन पर उनके लिए राखी भेजती हैं। पंडित अक्षत व्यास ने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती को जगत माता-पिता माना जाता है। इसी भाव के चलते कई महिलाएं भगवान गणेश को अपना भाई मानती हैं। हर साल देश के अलग-अलग शहरों के साथ विदेशों से भी भगवान गणेश के लिए राखियां भेजी जाती हैं। इस बार मुंबई की राजकुमारी जैन ने सोने की गिन्नी वाली राखी भेजी है। इसके अलावा बेंगलुरु, राजस्थान, कोलकाता, भोपाल और इंदौर से भी राखियां मंदिर पहुंची हैं। अमेरिका और हांगकांग से भी बहनों ने राखियां भेजी हैं। इस बार भगवान गणेश को 51 फीट लंबी विशेष राखी अर्पित की जाएगी। रिद्धि-सिद्धि के लिए साड़ी, मूषक के लिए आसन भगवान गणेश को भाई मानने वाली महिलाएं रक्षाबंधन पर सिर्फ उनके लिए राखी ही नहीं भेजतीं, बल्कि रिद्धि और सिद्धि को अपनी भाभी मानकर उनके लिए साड़ी भी भेजती हैं। वहीं भगवान गणेश के वाहन मूषक के लिए आसन भेजने की परंपरा भी है। 28 अगस्त को नहीं रहेगा भद्रा का साया श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। पंचांग गणना के अनुसार 27 अगस्त को सुबह 9:09 बजे से रात 9:25 बजे तक भद्रा रहेगी। इसके बाद 28 अगस्त की सुबह से पूरे दिन और प्रदोष काल में रक्षाबंधन पर्व मनाया जा सकेगा।
नेपाल में आखिर कैसे आई विनाशकारी बाढ़? ISRO ने भूकंप को माना जिम्मेदार, अमेरिका ने नाकारा
Nepal Flash Flood: भारतीय विशेषज्ञों के अनुसार, इस तबाही का केंद्र भले ही भारतीय सीमा से लगभग 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित था, लेकिन यह घटना पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने वाले गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को आतंकी प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बदला लेने की धमकी दी है। इस संबंध में पन्नू ने एक वीडियो जारी किया है। पन्नू ने कहा कि लॉरेंस और गोल्डी बराड़ ने खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि कनाडा या अमेरिका की अदालतों में केस बंद होने के बावजूद वे खालसाई इंसाफ और सजा से नहीं बच पाएंगे। खालसाई इंसाफ की गोली उनके माथे पर लगेगी। वीडियो उस समय सामने आया है, जब दो दिन पहले गोल्डी बराड़ और अर्श डल्ला की इस मामले को लेकर कथित ऑडियो वायरल हुई थी। वीडियो में उसने लॉरेंस, गोल्डी बराड़, करण बराड़, अमनदीप सिंह, कमलप्रीत और करणप्रीत सिंह की तस्वीरें दिखाईं और उन पर निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया है। FBI ने पन्नू को जान का खतरा बताया पन्नू ने दावा किया कि उसे अपनी जान का खतरा है। उसके मुताबिक, आज FBI अधिकारियों ने उसे चेतावनी दी कि खतरा टलने तक वह यात्रा न करें। अगर यात्रा करना जरूरी हो तो पहले एजेंसी को इसकी जानकारी देने के लिए कहा गया है। पन्नू ने बताया कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने भी मंगलवार को फोन कर उसे चेतावनी दी थी। हालांकि, दोनों कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सामने आए कथित खतरे की साजिश को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की। इस संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन तत्काल कोई जवाब नहीं मिला। अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता रखने वाले पन्नू ने कहा कि उसे अमेरिका के ‘ड्यूटी टू वार्न’ कानून के तहत चेतावनी दी गई है। इस कानून के तहत अमेरिकी खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियां हत्या, गंभीर शारीरिक नुकसान या अपहरण के विश्वसनीय और विशेष खतरे का पता चलने पर संबंधित व्यक्ति को सूचित करती हैं। अर्श डल्ला ने भी दी थी बदला लेने की धमकी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ द्वारा कथित तौर पर सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करवाने का दावा किए जाने के कुछ घंटे बाद कनाडा में रह रहे अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला ने भी बदला लेने की धमकी दी थी। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में बराड़ ने निज्जर पर डल्ला को पनाह देने, हथियार और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने तथा युवाओं में नशे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में डल्ला ने पंजाबी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब 15 मिनट का वीडियो जारी कर बराड़ के आरोपों को खारिज किया। डल्ला ने दावा किया कि हत्या से करीब एक साल पहले तक उसकी निज्जर से मुलाकात नहीं हुई थी। उसने निज्जर द्वारा उसे पैसे, पनाह या हथियार उपलब्ध कराने के आरोपों को भी नकार दिया। डल्ला और बराड़ दोनों ने एक-दूसरे पर खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने का आरोप लगाया है।
नेपाल त्रासदी: अमेरिका ने बढ़ाया मदद का हाथ, पांच लाख डॉलर की आपात सहायता और डिजास्टर एडवाइजर भेजा
नेपाल त्रासदी: अमेरिका ने बढ़ाया मदद का हाथ, पांच लाख डॉलर की आपात सहायता और डिजास्टर एडवाइजर भेजा
समझौते के तहत Meta अमेरिका में Facebook और Instagram इस्तेमाल करने वाले किशोरों के लिए कुछ नए प्रतिबंध और सुरक्षा उपाय लागू करेगा। इनमें दैनिक उपयोग की सीमाएं और रात के समय प्लेटफॉर्म तक पहुंच पर रोक जैसे कदम शामिल हैं।
आरएसएस: संघ प्रमुख के अमेरिका में कार्यक्रम को लेकर अलर्ट, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने चेतावनी क्यों जारी की?
Trump rejects Sharia law in the US Supports ban on the law says he relies common sense rather than ideology.
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने कहा-मेयर ममदानी ‘कट्टरपंथी’ और ‘गलत रास्ते’ पर (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)
वॉशिंगटन, 27 अगस्त . लोकप्रिय अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी को “कट्टरपंथी” बताते हुए कहा है कि वह “गलत रास्ते” पर हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ममदानी एक ऐसे समाजवादी आंदोलन को अपना रहे हैं, जो अमेरिकी लोकतांत्रिक आदर्शों का प्रतिनिधित्व नहीं करता. लोकप्रिय अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने यह ... Read more
अमेरिका और कनाडा के सफल दौरे के बाद गुजरात लौटे सीएम भूपेंद्र पटेल, हर्ष संघवी ने किया स्वागत
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विवादों से आगे बढ़कर अमेरिकी लोगों तक संगठन का संदेश पहुंचाएगा मोहन भागवत का संबोधन: गायिका मैरी मिलबेन
अमेरिका के दबाव के बीच ईरान को मिला चीन का साथ, तेहरान बोला- रिश्ते के लिए किसी की मंजूरी जरूरी नहीं
अमेरिका के दबाव के बीच ईरान को मिला चीन का साथ, तेहरान बोला- रिश्ते के लिए किसी की मंजूरी जरूरी नहीं
मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर बवाल, US संसदीय आयोग ने उठाए सवाल, RSS को बैन करने की मांग
RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर जमकर बवाल मचा हुआ है। न्यूयॉर्क के मशहूर मैडिसन स्क्वायर गार्डन (MSG) में शनिवार, 29 अगस्त को उनका कार्यक्रम है, जिसको लेकर सरगर्मी बढ़ी हुई है। इस कार्यक्रम से पहले अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े ...
अमेरिका से बढ़ी LPG खरीद, फिर भी नए गैस कनेक्शन पर रोक क्यों? जानिए कब तक करना पड़ सकता है इंतजार
अमेरिका से बढ़ी LPG खरीद, फिर भी नए गैस कनेक्शन पर रोक क्यों? जानिए कब तक करना पड़ सकता है इंतजार
नेपाल बाढ़ में 162 मौतों पर अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने जताया दुख, मदद का दिया भरोसा
वॉशिंगटन, 27 अगस्त . नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एकजुटता जताते हुए मानवीय सहायता देने की बात कही. इस तबाही में 162 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सुरक्षाकर्मियों और पर्यटकों समेत सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए एक ... Read more
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक लॉजिस्टिक्स की रुकावटों और महंगे समुद्री मालभाड़े के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग ने वैश्विक बाजार में अपना लोहा मनवाया है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (EEPC India) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में देश का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाकर 12.24 अरब डॉलर (लगभग ₹1.02 लाख करोड़) के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष समान अवधि (जुलाई 2025) में यह आंकड़ा 10.40 अरब डॉलर था। यह लगातार चौथा महीना है जब देश का इंजीनियरिंग शिपमेंट 10 अरब डॉलर के बेंचमार्क से ऊपर बना हुआ है, जो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।चार महीने में $46.38 अरब का आंकड़ा पार: देश के कुल निर्यात में 27.7% की हिस्सेदारीवाणिज्य मंत्रालय के त्वरित अनुमानों के मुताबिक, जुलाई में देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। भारत के कुल 44.24 अरब डॉलर के वस्तु निर्यात में से 27.7 प्रतिशत हिस्सा अकेले इंजीनियरिंग उत्पादों का रहा है।चालू वित्त वर्ष (FY27) के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई की संचयी (Cumulative) अवधि की बात करें तो कुल इंजीनियरिंग निर्यात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 46.38 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 39.24 अरब डॉलर था। इस तरह भारतीय निर्यातकों ने चार महीनों के भीतर पिछले साल के मुकाबले 7.14 अरब डॉलर का अतिरिक्त कारोबार वैश्विक बाजारों से हासिल किया है।अमेरिका और चीन बने सबसे बड़े ग्रोथ ड्राइवरभारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका (US) सबसे बड़ा और पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। जुलाई में अमेरिका को होने वाले इंजीनियरिंग निर्यात में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2.18 अरब डॉलर पर पहुंच गया। अप्रैल-जुलाई के दौरान अमेरिका को कुल 7.78 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो 11.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।वहीं, चीन के बाजार से भी भारतीय इंजीनियरिंग सामानों के लिए जबरदस्त मांग देखने को मिली। जुलाई में चीन को किया जाने वाला इंजीनियरिंग निर्यात 32 प्रतिशत उछलकर 34.9 करोड़ डॉलर (349 मिलियन डॉलर) पर पहुंच गया। इसके अलावा जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम (UK), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सिंगापुर जैसे विकसित व रणनीतिक बाजारों में भी भारतीय औद्योगिक मशीनरी, ऑटो कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स की मजबूत खपत दर्ज की गई।34 में से 27 प्रमुख प्रोडक्ट कैटेगरीज में दर्ज हुई शानदार तेजीईईपीसी इंडिया के विश्लेषण के अनुसार, जुलाई में यह बढ़त किसी एक खास उत्पाद तक सीमित नहीं थी बल्कि इसका दायरा बेहद व्यापक रहा। इंजीनियरिंग काउंसिल के कुल 34 प्रमुख उत्पाद पैनलों में से 27 पैनलों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें इंडस्ट्रियल मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, नॉन-फेरस मेटल्स, कॉपर व एल्युमिनियम उत्पाद और मेडिकल डिवाइसेज के शिपमेंट में तेज उछाल देखा गया।हालांकि, 7 प्रमुख श्रेणियों में वैश्विक आर्थिक मंदी और स्थानीय मांग में नरमी के कारण गिरावट देखी गई। इनमें लोहा एवं इस्पात उत्पाद (Iron & Steel), सीसा व संबंधित उत्पाद, मशीन टूल्स, एयरक्राफ्ट व स्पेसक्राफ्ट के पुर्जे, भारी क्रेन, लिफ्ट और कार्यालय उपकरण शामिल रहे। इसके अलावा, मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के लॉजिस्टिक्स संकट के चलते सऊदी अरब को होने वाले प्रोजेक्ट-आधारित इंजीनियरिंग निर्यात में कुछ दबाव दर्ज किया गया।वैश्विक चुनौतियां और एक्सपोर्टर्स के सामने मौजूद बाधाएंईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने इस मजबूत प्रदर्शन की सराहना करते हुए वैश्विक स्तर पर उभरती चुनौतियों के प्रति सतर्क भी किया। उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती ऊर्जा लागत, ऊंचे कंटेनर भाड़े, विकसित देशों की संरक्षणवादी व्यापार नीतियां (Protectionist Measures) और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए जा रहे कड़े तकनीकी व कार्बन अनुपालन मानक (जैसे CBAM) भारतीय निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ा रहे हैं।संगठन का मानना है कि इस मजबूत निर्यात गति को पूरे वित्त वर्ष में बनाए रखने के लिए भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को उत्पादन के पैमाने (Scale) का विस्तार करना होगा, आधुनिक R&D और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर निवेश बढ़ाना होगा और अफ्रीकी व लैटिन अमेरिकी जैसे गैर-पारंपरिक बाजारों में अपने निर्यात बास्केट का विविधीकरण करना होगा। सरकार द्वारा निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं (जैसे RoDTEP) और नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का समय पर क्रियान्वयन इस रफ्तार को टिकाऊ बनाए रखने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
यूएस: अमेरिका लौटते समय थाईलैंड में क्यों रुकेगा युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन? पश्चिम एशिया में तनाव के बीच रिकॉर्ड समय रहा तैनात
अमेरिकी सेना का प्लान: पांच ठिकानों पर लगेंगे परमाणु माइक्रोरिएक्टर, खर्च होंगे 2.2 अरब डॉलर; क्या है मकसद?
अगले महीने अमेरिकी दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल: जी20 बैठक में होंगे शामिल, यात्रा पर क्यों टिकी नजरें?
अगले महीने अमेरिकी दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल: जी20 बैठक में होंगे शामिल, यात्रा पर क्यों टिकी नजरें? piyush-goyal-us-visit-g20-trade-ministers-meeting-india-us-trade-deal
मोजतबा खामेनेई की मौत को लेकर अटकलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया जवाब!
मोजतबा खामेनेई की मौत को लेकर अटकलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया जवाब!
आगरा के एकता थाना क्षेत्र कहरई में शंकर ग्रीन अपार्टमेंट में लिया था किराये पर फ्लैट।
दुनिया की खबरें: बांग्लादेश में हिंदू परिवार के 4 सदस्य लापता; चीनी हैकरों का अमेरिकी संस्थानों पर साइबर हमला world-news-updates-hindi-bangladesh-gaza-war-israel-pakistan-us-syria-Afghanistan TTP
'आपसी सम्मान की भावना से हो रहा कार्यक्रम': भागवत की अमेरिका यात्रा के बीच आरएसएस ने क्या कहा; किसे न्योता?
अमेरिका में बच्चों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मेटा और 48 अमेरिकी राज्यों के बीच 1.72 लाख करोड़ रुपये के समझौते के बाद, अब बच्चे रात में फेसबुक-इंस्टाग्राम का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
Varanasi News: पांच दिनों में अमेरिका, दुबई और इंग्लैंड भेजी गईं 150 राखियां
150 Rakhis sent to America, Dubai, and England in five days.
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत RSS के शताब्दी वर्ष समारोह से जुड़े वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत अमेरिका पहुंचे हैं। वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में लगभग 5,000 लोगों की सभा को संबोधित करने वाले हैं। हालांकि, उनकी इस सभा का विरोध शुरू हो गया है।
जोहरान ममदानी ने किया RSS प्रमुख मोहन भागवत की सभा का विरोध, अमेरिकी सिंगर ने ही लगा दी लताड़
संघ प्रमुख मोहन भागवत RSS के शताब्दी वर्ष समारोह से जुड़े वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत अमेरिका पहुंचे हैं। वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में लगभग 5,000 लोगों की सभा को संबोधित करने वाले हैं। हालांकि, उनकी इस सभा का विरोध शुरू हो गया है।
New Delhi, 26 अगस्त . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जा सकते हैं. प्रस्तावित दौरे का मुख्य उद्देश्य जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भाग लेना है, लेकिन यह यात्रा India और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में भी काफी ... Read more
सितंबर में अमेरिका दौरे पर जा सकते हैं पीयूष गोयल, जी-20 बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से हो सकती है अहम वार्ता
अमेरिका में पूर्व प्रेमिका निकिता गोदिशाला की हत्या के आरोपित अर्जुन शर्मा को गैर-जमानती वारंट पर गिरफ्तार कर लिया गया है। अदालत ने उसे हिरासत में लेने का आदेश दिया है, क्योंकि अमेरिका ने उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है।
मेटा को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वॉच टाइम कम करने के लिए डेली लिमिट और नाइट टाइम ब्लॉक जैसे फीचर लाने होंगे। अमेरिका के कैलिफोर्निया के फेडरल कोर्ट में 29 राज्यों की ओर से दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान यह निर्देश टेक कंपनी को दिए गए। कंपनी पर बच्चों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की लत लगाने, उनकी सुरक्षा पर गुमराह करने और बिना सहमति डेटा जुटाने के आरोप थे। मेटा बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ के मामले को खत्म करने के लिए करीब 1.59 लाख करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा। बच्चों का डेटा चुराकर AI को ट्रेन करने का आरोप मेटा पर अमेरिका के राज्यों, स्कूलों और माता-पिता ने युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाते हुए मुकदमे दर्ज कराए हैं। कंपनी ने माता-पिता को बिना बताए या उनकी मंजूरी लिए बिना बच्चों का पर्सनल डेटा जुटाया और उसका इस्तेमाल अपने मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई (AI) मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए किया। मेटा बोला- सोशल मीडिया की लत कोई बीमारी नहीं मेटा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया था। कंपनी का कहना था कि उसने बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। मेटा ने कोर्ट में तर्क दिया कि वो यूजर्स को गुमराह नहीं कर रही है, क्योंकि 'सोशल मीडिया की लत' कोई मान्यता प्राप्त मानसिक बीमारी नहीं है। इस मामले में अमेरिका के राज्य मेटा से भारी-भरकम जुर्माने की मांग कर रहे थे। कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक, कैलिफोर्निया और कोलोराडो जैसे राज्य मेटा पर करीब 133.48 लाख करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाने की मांग कर रहे थे। हालांकि, राज्यों ने बाद में इस राशि को 19.07 लाख करोड़ रुपए के करीब बताया था। जुर्माने के अलावा राज्यों ने मुआवजे और बच्चों के नए अकाउंट बनाने पर पूरी तरह रोक लगाने की भी मांग की थी। एल्गोरिदम कैसे बनाता है लत? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का एल्गोरिदम इस तरह बनाया जाता है कि यूजर ज्यादा से ज्यादा समय तक एप पर बना रहे और यही धीरे-धीरे लत में बदल जाता है। इसे कई रिसर्च और रिपोर्ट्स ने भी साबित किया है। इन टेक कंपनियों पर भी चल रहे हैं मुकदमे मेटा के अलावा स्नैपचैट, यूट्यूब (अल्फाबेट) और टिकटॉक (बाइटडांस) भी कई अदालतों में हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने एप्स में ऐसे फीचर्स जोड़े जो बच्चों और युवाओं को लत लगा रहे हैं। न्यू मेक्सिको और अन्य मामलों में मेटा की हार यह 1.59 लाख करोड़ रुपए का समझौता ऐसे समय में आया है, जब मेटा हाल ही में न्यू मेक्सिको राज्य में दायर एक लैंडमार्क मुकदमे के दोनों फेज में हार चुका है… इसके अलावा, मार्च में ही किसी व्यक्ति की याचिका पर आया पहला फैसला भी मेटा और गूगल के खिलाफ रहा। लॉस एंजिल्स की जूरी ने वादी कैली जीएम को डिप्रेशन और एंग्जाइटी के लिए इन कंपनियों को जिम्मेदार माना और संयुक्त रूप से 6 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया। मेटा और गूगल ने इन फैसलों के खिलाफ अपील करने की बात कही है। फेडरल कोर्ट में सुनवाई के लिए तय पहले मामले में मेटा, स्नैप, अल्फाबेट और बाइटडांस- इन चारों कंपनियों ने समझौता कर लिया था। केंटकी के ब्रेथिट काउंटी स्कूल डिस्ट्रिक्ट द्वारा दायर इस केस में आरोप था कि ये एप्स छात्रों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके तहत स्कूल जिले को संयुक्त रूप से 27 मिलियन डॉलर मिलने तय हुए थे।
अमेरिका के फ्लोरिडा में भीषण सड़क हादसा, तेलंगाना के तीन छात्रों की मौत
तेलंगाना के तीन छात्रों की फ्लोरिडा के ब्रेवार्ड काउंटी में हुए एक सड़क हादसे में मौत हो गई. हादसा इंटरस्टेट 95 हाईवे पर हुआ, जहां छात्रों की कार अचानक हाईवे से बाहर निकलकर पेड़ से टकरा गई और आग लग गई. परिवार ने भारत में पार्थिव शरीर लाने के लिए सरकार से मदद मांगी है.
ट्रम्प का दावा, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज से हटाये सभी बारूदी सुरंगे
अमेरिका ने घोषणा की है कि उसकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के मुख्य नौवहन मार्ग से सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ कर दिया है।
वीडियो! ट्रंप का नया बयान- लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने पर विचार
वीडियो! ट्रंप का नया बयान- लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने पर विचार
ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: दुनियाभर में अमेरिकी वीजा अपॉइंटमेंट पर अस्थाई रोक, जानिए क्या है वजह
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन और आप्रवासन नीतियों को लेकर बढ़ती सख्ती के बीच अमेरिका ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। अमेरिका ने दुनिया भर के वीजा आवेदकों के अपॉइंटमेंट पर अस्थाई रूप से रोक लगा दी है। अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में अधिकारियों के लिए एक नई ग्लोबल ट्रेनिंग पहल शुरू की गई है, जिसके चलते वीजा सेवाओं के शेड्यूल में बदलाव किए जा रहे हैं।ग्लोबल ट्रेनिंग के चलते वीजा सेवाओं में बदलावअमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि करते हुए मंगलवार को जानकारी दी कि दुनिया भर के सभी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में एक व्यापक ग्लोबल ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के कारण ही वीजा सेवाओं के अपॉइंटमेंट में अस्थायी फेरबदल और रोक लगाई गई है।ट्रंप प्रशासन देश से अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने (डिपोर्टेशन) और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा करने के लिए लगातार आक्रामक अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत वीजा और ग्रीन कार्ड रद्द करने के साथ-साथ कई तकनीकी व राजनीतिक कारणों से आवेदनों को खारिज किए जाने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें गाजा संघर्ष के दौरान हुए फिलिस्तीन-समर्थक प्रदर्शनों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।कानूनी अड़चनों और अदालती झटकों के बीच प्रशासन की सख्तीट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि इन कड़े कदमों का मुख्य उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा और व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, प्रशासन की इन नीतियों को कई स्तरों पर कानूनी अड़चनों और अदालती झटकों का भी सामना करना पड़ रहा है।हाल ही में एक अमेरिकी संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया था, जिसके तहत 75 देशों के आवेदकों के अप्रवासी वीजा जारी करने पर रोक लगाई गई थी। अदालत का कहना था कि यह नीति सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। इन कानूनी चुनौतियों के बावजूद प्रशासन अपनी नीतियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
Mohan Bhagwat के अमेरिकी दौरे पर राजनीति करने चले Zohran Mamdani, Mary Millben ने सिखाया करारा सबक
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने राजनीति करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सबक सिखाने के लिए अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन ही सामने आ गईं। हम आपको बता दें कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन में मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम का विरोध करने वाले ममदानी और उनके समर्थकों को मिलबेन ने करारा जवाब देते हुए साफ कहा कि निजी आयोजनों को समाजवादी नारों और राजनीतिक विरोध से नहीं रोका जा सकता। उनका सीधा संदेश था कि अगर विरोधियों को अपना मंच चाहिए तो वे संसाधन जुटाएं, आयोजन स्थल किराए पर लें और अपनी अलग सभा करें। देखा जाये तो यह प्रकरण केवल एक अमेरिकी गायिका और न्यूयॉर्क के मेयर के बीच वैचारिक तकरार नहीं है। यह उस व्यापक अंतरराष्ट्रीय विमर्श की तस्वीर भी है, जिसमें भारत, हिंदुत्व, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों तथा विरोधियों के बीच वैचारिक संघर्ष अब भारत की सीमाओं से बहुत आगे निकल चुका है। इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat के न्यूयॉर्क दौरे का मेयर ने किया विरोध, Madison Square Garden में है सभा हम आपको बता दें कि मोहन भागवत इन दिनों संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका पहुंचे हैं। उनके दौरे में न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को आयोजित होने वाला ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ विशेष आकर्षण का केंद्र है। करीब 5,000 लोगों की भागीदारी वाले इस आयोजन में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के साथ साझा विरासत, आपसी सम्मान, धार्मिक संवाद और वैश्विक एकता का संदेश देने की योजना है। आयोजन से जुड़े एएचईएडी फोरम और अन्य हिंदू-अमेरिकी संगठनों का कहना है कि इसका मूल संदेश है ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, अर्थात दुनिया एक परिवार है। यही बात मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे को महत्वपूर्ण बनाती है। संघ के शताब्दी वर्ष में उनका अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा मात्र प्रवासी भारतीयों से औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन और सांस्कृतिक दृष्टि को वैश्विक मंच पर रखने का प्रयास है। ऐसे समय में जब भारत की छवि को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बहस चलती रहती है, तब मोहन भागवत का सीधे भारतीय मूल के लोगों और अन्य समुदायों से संवाद करना एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन इस कार्यक्रम के विरोध में भी आवाजें उठी हैं। हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क जैसे संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम रद्द करने की मांग की। ममदानी ने भी कहा कि वह इस रैली का समर्थन नहीं करते, हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार संभवतः शहर प्रशासन के पास नहीं है। ममदानी ने अपने पारिवारिक अनुभवों का हवाला देते हुए भारत को एक बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में देखने की बात कही तथा संघ से जुड़े विचारों को लेकर अपनी गहरी असहमति जताई। लेकिन सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र और बहुलतावाद का अर्थ केवल उन्हीं विचारों के लिए मंच उपलब्ध कराना है जिनसे हम सहमत हों? किसी विचारधारा से असहमति लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन असहमति के नाम पर संवाद के मंच को बंद कराने की मांग स्वयं उस बहुलतावाद की कसौटी पर सवाल खड़े करती है, जिसकी दुहाई दी जा रही है। यहीं मैरी मिलबेन की टिप्पणी सबसे अधिक प्रासंगिक हो जाती है। भारत में ‘जन गण मन’ और ‘ओम जय जगदीश हरे’ गाकर लोकप्रियता हासिल करने वाली अफ्रीकी-अमेरिकी कलाकार ने ममदानी और अन्य विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा कि यदि वे प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की आलोचना के लिए अपना मंच चाहते हैं, तो वे धन जुटाएं और स्वयं मैडिसन स्क्वायर गार्डन किराए पर लेकर आयोजन करें। साथ ही उन्होंने संघ के कार्यक्रम के ‘वननेस’ शीर्षक की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि धार्मिक स्वतंत्रता सहित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक संवाद होगा। यह प्रकरण एक बार फिर दर्शाता है कि भारतीय विचार और भारतीय समाज अब वैश्विक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। विरोध होगा, सवाल होंगे और वैचारिक टकराव भी होगा। लेकिन ऐसे समय में भागवत का संवाद और ‘एक परिवार’ का संदेश भारतीय दृष्टि की उस शक्ति को रेखांकित करता है, जो मतभेद के बावजूद संवाद का रास्ता तलाशती है। ममदानी जैसे नेताओं को भी शायद यही सबक समझना चाहिए कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन दूसरे की आवाज बंद कराने का अधिकार किसी को नहीं है। बहरहाल, लगभग एक शताब्दी की यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अनुशासन, संगठन, सेवा और सामाजिक सहभागिता के जरिए देश के सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है। आपदा हो, सामाजिक संकट हो या समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने की चुनौती, संघ के स्वयंसेवकों की सक्रियता उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है। व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर काम करने वाला संघ आज केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि प्रवासी भारतीयों के बीच भी संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। मोहन भागवत का यह वैश्विक दौरा भी उसी विस्तार और आत्मविश्वास का प्रतीक है, जो बताता है कि संघ अब अपने विचारों और भारत की सांस्कृतिक दृष्टि को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मजबूती से रखने के लिए तैयार है।
किराना हिल्स पर बेइरादा हमले से घबरा गया था पाकिस्तान, अमेरिका की सक्रियता बढ़ी : रक्षा विशेषज्ञ
New Delhi, 26 अगस्त . ऑपरेशन सिंदूर के दौरान Pakistan के किराना हिल्स इलाके में हुए प्रहार को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान की टिप्पणी कि “India का वहां हमले का कोई पूर्व निर्धारित इरादा नहीं था” चर्चा में है. रक्षा विशेषज्ञ और रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने से बातचीत ... Read more
अमेरिका ने दुनियाभर में वीजा अपॉइंटमेंट पर लगाई रोक
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन पर अपनी सख्त कार्रवाई के तहत कॉन्सुलर अधिकारियों के लिए एक ग्लोबल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रहा है। इस बीच यूएस में दुनिया भर में वीजा अपॉइंटमेंट रोक दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि विभाग ने दुनिया भर में सभी अमेरिकी दूतावासों और …
अमेरिका का वीजा चाहिए तो जान लें ये बदलाव, देखें नया अपडेट
अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए जरूरी खबर है. ट्रंप प्रशासन ने दुनियाभर में अमेरिकी वीजा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट प्रक्रिया में अस्थायी बदलाव किया है. वैश्विक ट्रेनिंग प्रोग्राम के चलते कई आवेदकों की पहले से तय अपॉइंटमेंट दोबारा शेड्यूल की जा रही हैं.
टॉप जनरलों की छुट्टी! अमेरिकी सेना में क्यों छाया लीडरशिप का संकट?
इराक और अफगानिस्तान युद्ध के बाद से अमेरिकी सेना वर्तमान समय में सबसे जटिल और व्यस्त अभियानों में शामिल है, लेकिन नेतृत्व में खाली पड़े पद रक्षा विशेषज्ञों और अमेरिकी सांसदों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
भाजपा नेता ने आरक्षण पर सुनाई सवर्णों को खरीखोटी! खुद के बच्चों को दिलाई अमेरिका की नागरिकता
आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर चल रही बहस के बीच BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक के एक बयान ने नई चर्चा श
अमेरिका के मोंटाना में 8 रिश्तेदारों को गोलियों से भूना, मृतकों में चार बच्चे
यूनाइटेड स्टेट्स के मोंटाना राज्य के बिलिंग्स शहर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो इंसानियत को लेकर सवाल खड़े करती है। यहां एक शख्स ने अपने 8 रिश्तेदारों को जान से मार कर दिया और फिर खुद भी सुसाइड कर ली। मोंटाना के बिलिंग्स शहर में हुई इस घटना में शख्स ने जिन …
एंटी मोदी हैं सनकी ममदानी, अमेरिकी सिंगर ने मोहन भागवत के विरोध से जोड़े तार
अमेरिका के प्रमुख शहरों में से एक न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम होना है, जिसपर मेयर जोहरान ममदानी ने सवाल उठाए हैं। अब सिंगर मैरी मिलबेन ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।
चीन को बड़ा धोखा देकर अमेरिका की शरण में पहुंचा पाकिस्तान! डोनाल्ड ट्रंप से मांगी 10 अरब डॉलर की भीख
वैश्विक कूटनीति के गलियारों में इस समय भूचाल आया हुआ है और एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दशकों तक 'चीन को अपना सबसे पक्का यार' बताने वाला पाकिस्तान अब ड्रैगन की पीठ में छुरा घोंपकर अमेरिका के दरवाजे पर जा पहुंचा है। ताजा अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों और कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान की माली हालत इतनी ज्यादा खस्ता हो चुकी है कि उसे बचाने के लिए अब बीजिंग का कर्ज भी कम पड़ रहा है। इसी हताशा के चलते पाकिस्तानी हुक्मरानों और सैन्य नेतृत्व ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने गिड़गिड़ाते हुए सीधे तौर पर 10 अरब डॉलर के भारी-भरकम पैकेज या वित्तीय सहायता की मांग रख दी है। पाकिस्तान की इस यू-टर्न वाली नीति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसका एकमात्र एजेंडा केवल और केवल विदेशी मदद और कर्ज के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था को किसी तरह खींचना है, चाहे इसके लिए उसे अपने सबसे बड़े रणनीतिक साझीदार चीन को ही क्यों न धोखा देना पड़े।ड्रैगन की पीठ पीछे अमेरिका से क्यों गलबहियां कर रहा है पाकिस्तानपिछले कुछ वर्षों में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और अन्य परियोजनाओं के नाम पर पाकिस्तान ने चीन से अरबों डॉलर का कर्ज लिया था। इस कर्ज के बोझ तले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस कदर दब चुकी है कि उसे हर साल केवल ब्याज चुकाने के लिए भी नए कर्जों की जरूरत पड़ती है। बीजिंग की तरफ से अब और अधिक खुला पैसा मिलने की उम्मीद लगभग खत्म होती देख पाकिस्तानी रणनीतिकारों ने एक बार फिर वाशिंगटन की ओर रुख किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापारिक और राजनीतिक नीतियों को साधने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा के नाम पर उसका सबसे वफादार प्यादा बन सकता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि अमेरिका इस बात अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान की नीयत क्या है और वह केवल अपने सामरिक स्वार्थों के लिए एक बार फिर वाशिंगटन का इस्तेमाल करना चाहता है।10 अरब डॉलर की इस सनसनीखेज मांग के पीछे छिपी है बड़ी आर्थिक मजबूरीपाकिस्तान द्वारा अमेरिका से 10 अरब डॉलर की इस भारी वित्तीय सहायता की मांग के पीछे उसकी डूबती हुई अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी किल्लत है। देश में महंगाई चरम पर है, ऊर्जा संकट गहराया हुआ है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों के कारण सरकार जनता को कोई राहत देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। ऐसे में, पाकिस्तान के हुक्मरानों को लगता है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के वित्तीय संस्थानों पर दबाव बनाकर या उनके सामने सुरक्षा का रोना रोकर वे भारी-भरकम राहत पैकेज हासिल कर सकते हैं। हालांकि, वाशिंगटन के गलियारों में अब पाकिस्तान की इन चालबाजियों को बहुत अधिक तवज्जो नहीं दी जा रही है, क्योंकि अमेरिकी नीति निर्माताओं की प्राथमिकताएं अब पूरी तरह बदल चुकी हैं और वे भारत के साथ अपने सामरिक संबंधों को सबसे ज्यादा मजबूती दे रहे हैं।चीन-पाकिस्तान संबंधों पर इस धोखे का क्या होगा दूरगामी असरपाकिस्तान की इस गुप्त और अवसरवादी कूटनीति का सबसे बड़ा असर बीजिंग और इस्लामाबाद के रिश्तों पर पड़ना तय माना जा रहा है। चीन कभी भी अपने सामरिक निवेश और क्षेत्रीय प्रभाव के साथ इस तरह के विश्वासघात को आसानी से बर्दाश्त नहीं करता है। बीजिंग के रणनीतिकारों की पैनी नजर इस बात पर है कि कैसे पाकिस्तान एक तरफ उनसे अरबों डॉलर की मदद लेता है और दूसरी तरफ पश्चिमी देशों के सामने जाकर गिड़गिड़ाता है। यदि अमेरिका ने इस मांग को ठुकरा दिया और चीन को इस दोहरे खेल की पूरी सच्चाई का अहसास हो गया, तो पाकिस्तान दोनों तरफ से घिर जाएगा। भारत के सामरिक विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि पाकिस्तान की यह चालबाजी उसकी अंतहीन कूटनीतिक विफलताओं और दिवालिएपन की एक और बानगी मात्र है, जिसका भारत की सुरक्षा पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ने वाला है, बल्कि इससे पड़ोसी देश की विश्व मंच पर किरकिरी ही होनी तय है।
भारत की सामरिक ताकत, सैन्य पराक्रम और कूटनीतिक रणनीतियों का लोहा आज पूरी दुनिया मानती है। जब भी देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई आंच आती है, भारतीय सशस्त्र बल दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। हाल ही में सेना से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और बड़े खुलासे ने देश की राजनीति और सामरिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) या शीर्ष सैन्य अधिकारियों द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर किए गए एक सनसनीखेज खुलासे ने पड़ोसी मुल्क की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भारत सरकार या सैन्य मुख्यालय की तरफ से युद्धविराम (सीजफायर) या किसी बड़े सैन्य अभियान को रोकने का आधिकारिक ऐलान होने से पहले ही उसकी गुप्त सूचना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक कैसे पहुंच गई? इस खुलासे ने भारत की खुफिया सुरक्षा व्यवस्था और पड़ोसी देश की कूटनीतिक चालबाजियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ऑपरेशन सिंदूर और सामरिक गोपनीयता की अनकही कहानीसैन्य अभियानों में गोपनीयता (Secrecy) सबसे बड़ा हथियार मानी जाती है। 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे रणनीतिक अभियानों की हर एक हरकत पर देश की सर्वोच्च कमान की सीधी नजर होती है। लेकिन जब ऐसे किसी अति-संवेदनशील मिशन के दौरान होने वाले फैसलों की जानकारी भारत के आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा से पहले ही वाशिंगटन या अमेरिकी नेतृत्व तक पहुंच जाती है, तो यह सुरक्षा चूक (Security Breach) या हाई-लेवल लीकेज की ओर इशारा करता है। पूर्व सीडीएस के बयानों और रक्षा मामलों के विशेषज्ञों के विश्लेषण के मुताबिक, पड़ोसी मुल्क ने अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने और अपनी रणनीतिक विफलता को छुपाने के लिए किस प्रकार से गुप्त चैनलों का इस्तेमाल किया, यह अब किसी से छुपा नहीं है। भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह घटना इस बात का सबक है कि सामरिक मामलों में डिजिटल और कूटनीतिक स्तर पर सूचनाओं की सुरक्षा कितनी अधिक जरूरी है।पड़ोसी देश की दोहरी चाल और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबावयुद्ध के मैदान में मुंह की खाने के बाद पड़ोसी देश अक्सर वैश्विक मंचों और पश्चिमी देशों के सामने गिड़गिड़ाने की पुरानी आदत से बाज नहीं आता है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जब भारतीय सेना ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करना शुरू किया, तो पड़ोसी मुल्क की नींद उड़ गई। अपनी हार को सामने देख उसने तुरंत अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के राजनयिक चैनलों का दरवाजा खटखटाया। पूर्व सीडीएस द्वारा खोले गए इन राज़ों से यह साफ हो गया है कि कैसे पड़ोसी देश ने परोक्ष रूप से दबाव बनाने की कोशिश की ताकि भारत को अपने सैन्य कदमों को रोकने के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, भारत ने हमेशा अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को सर्वोपरि रखा है और किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने से साफ इंकार किया है।रक्षा विशेषज्ञों की राय और भविष्य के लिए कड़े सामरिक सबकइस पूरे घटनाक्रम पर देश के जाने-माने रक्षा विश्लेषकों और रणनीतिकारों का मानना है कि भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा वास्तुकला (National Security Architecture) को और अधिक चाक-चौबंद बनाने की जरूरत है। आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सूचना युद्ध (Information Warfare), साइबर सुरक्षा और कूटनीतिक खुफिया तंत्र का भी एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। पूर्व सीडीएस द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' के रहस्यों से पर्दा उठाने के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में इस बात की समीक्षा तेज हो गई है कि संवेदनशील कूटनीतिक और सैन्य सूचनाएं लीक होने के रास्तों को कैसे पूरी तरह से बंद किया जाए। भारत अब एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जो अपनी सुरक्षा के फैसले खुद लेने में पूरी तरह सक्षम है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को कतई बर्दाश्त नहीं करता है।
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे पर छिड़ी सियासी जंग, विरोध करने वालों पर बरसीं अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन
New Delhi, 26 अगस्त . अमेरिकी दिग्गज गायिका और Actress डॉली पार्टन का 80 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन की खबर सामने आने के बाद संगीत की दुनिया से लेकर अमेरिकी राजनीति तक शोक की लहर है. हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है. इसी कड़ी में अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ... Read more
एच-1बी वीजा में बड़े बदलाव की तैयारी: अमेरिका ने दुनियाभर में सभी वीजा अपॉइंटमेंट रोके, क्या कर रहा ट्रंप प्रशासन?
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी दिग्गज गायिका और अभिनेत्री डॉली पार्टन का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद संगीत की दुनिया से लेकर अमेरिकी राजनीति तक शोक की लहर है। हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी डॉली पार्टन को श्रद्धांजलि दी और उन्हें महान कलाकार बताया। ट्रंप ने उनके सम्मान में पूरे अमेरिका में एक हफ्ते तक अमेरिकी झंडे को आधा झुकाए रखने का आदेश दिया है।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया है। जानिए ईरान के शीर्ष आयातक-निर्यातक देश, अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंध और चाबहार बंदरगाह से लेकर भारतीय व्यापार पर इसके गंभीर असर का पूरा विश्लेषण।
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज के ड्राइवर के परिवार से 50 लाख रुपए का फ्रॉड हो गया। आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को अमेरिका भेजने के नाम पर ट्रैवल एजेंट को अलग-अलग समय में किस्तों में यह रकम दी। एजेंट ने बेटे को लीगल तरीके से अमेरिका भेजने का भरोसा दिया था, लेकिन उसने डंकी रूट के जरिए मेक्सिको पहुंचाया और वहां से अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल करा दिया। अमेरिका पहुंचते ही बॉर्डर पुलिस ने नवीन को पकड़ लिया और उसे करीब 14 महीने तक डिटेंशन सेंटर में रहना पड़ा। दिसंबर 2025 में अमेरिकी सरकार ने उसे डिपोर्ट कर भारत भेज दिया। इसके बाद परिवार को ठगी का पता चला। पंचायत में एजेंट ने एक महीने के भीतर 50 लाख रुपए लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन आरोप है कि समय सीमा पूरी होने के बाद उसने पैसे लौटाने के बजाय फोन उठाना बंद कर दिया। पानीपत के ओल्ड इंडस्ट्रियल थाने में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सिलसिलेवार ढंग से जानिए शिकायत में क्या आरोप लगाए… सरकारी विभाग में ड्राइवर हैं राकेश गोहाना निवासी राकेश कुमार ने शिकायत में कहा कि वह हरियाणा सरकार के मिनिस्ट्री कार सेक्शन में बतौर ड्राइवर तैनात हैं। इस समय वह अंबाला कैंट स्थित शास्त्री कॉलोनी में मंत्री अनिल विज के आवास पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका छोटा बेटा नवीन वर्मा सीनियर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और वह उच्च शिक्षा व रोजगार के लिए अमेरिका जाना चाहता था। साले के दोस्त ने पानीपत के ट्रैवल एजेंट से मिलवाया राकेश ने बताया कि उनके साले के दोस्त, जींद के पिल्लूखेड़ा निवासी मनोज कुमार ने उनकी मुलाकात पानीपत की गोपाल कॉलोनी निवासी ट्रैवल एजेंट कुलदीप से करवाई थी। पानीपत में हुई पहली मीटिंग में एजेंट कुलदीप ने नवीन को वैध तरीके से (बाय-एयर) कानूनी प्रक्रिया के जरिए अमेरिका पहुंचाने का भरोसा दिलाया। इस सौदे के लिए कुल 40 लाख रुपए तय हुए। पहली मुलाकात में 5 लाख एडवांस दिए राकेश ने बताया कि बड़े बेटे प्रवीण वर्मा ने अपने दोस्त अमित की मौजूदगी में पहली ही मुलाकात में एजेंट कुलदीप को 5 लाख रुपए एडवांस दे दिए। अक्टूबर 2024 में एजेंट गोहाना स्थित उनके घर पहुंचा, जहां से वह नवीन का पासपोर्ट ले गया। इसके कुछ ही दिनों बाद पानीपत के सनौली रोड पर एजेंट को 10 लाख रुपए नकद थमा दिए गए। वीजा के नाम पर 8 लाख रुपए और लिए राकेश के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2024 को वीजा लगवाने के नाम पर एजेंट कुलदीप और उसके साथी आशू ने 8 लाख रुपए की मांग की। बड़े बेटे प्रवीण और उसके दोस्त अमित पानीपत के होटल मिड टाउन पहुंचे, जहां प्रवीण की ID पर कमरा बुक हुआ था। वहां दोनों आरोपियों को 8 लाख रुपए कैश दिए गए। अलग-अलग खातों में ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करवाई राकेश ने बताया कि एजेंट के कहने पर दुबई में रह रहे लाडवा निवासी सिद्धार्थ गोयल के अकाउंट में 92,150 रुपए ऑनलाइन डलवाए गए। नवीन के खाते में 95,000 रुपए चार किस्तों में डलवाए गए। इसके अगले ही दिन सिद्धार्थ गोयल के खाते में 52,000 रुपए और 2,800 रुपए दोबारा ट्रांसफर करवाए गए। एजेंट कुलदीप अपने साथी सोनू रंधावा निवासी ब्यास, पंजाब के साथ गोहाना स्थित घर पहुंचा और 12 लाख रुपए कैश ले गया। पिहोवा में 10 लाख रुपए और दिलवाए राकेश के मुताबिक, 3 दिसंबर को एजेंट पीड़ित के बेटे प्रवीण को गाड़ी में बैठाकर कुरुक्षेत्र के पिहोवा ले गया और वहां किसी अनजान व्यक्ति को 10 लाख रुपए दिलवाए। 5 दिसंबर को गोहाना स्थित घर आकर 5 लाख रुपए और ले लिए गए। इसके बाद 5 नवंबर 2024 को नवीन को फ्रांस की फ्लाइट में बैठाया गया। दिल्ली एयरपोर्ट पर एजेंट कुलदीप ने उससे 95,000 रुपए और लिए। लीगल रास्ते के बजाय डंकी रूट से अमेरिका भेजने का आरोप राकेश ने कहा कि एजेंट ने परिजनों को यह कहकर गुमराह किया कि प्रोसीजर के तहत कुछ दिन बेटे से बात नहीं हो पाएगी। आरोप है कि एजेंट ने लीगल रास्ते के बजाय नवीन को अवैध तरीके से डंकी रूट से मेक्सिको पहुंचा दिया और वहां से बॉर्डर पार कराकर अमेरिका में अवैध घुसपैठ करवा दी। अमेरिका में दाखिल होते ही वहां की बॉर्डर पुलिस ने नवीन को पकड़ लिया। इसके बाद उसे 14 महीने तक अमेरिका के डिटेंशन सेंटर में जेल की सलाखों के पीछे अत्यंत कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ा। आखिरकार, दिसंबर 2025 में अमेरिकी सरकार ने उसे डिपोर्ट कर भारत वापस भेज दिया। डिपोर्ट होकर लौटने पर ठगी का पता चला राकेश ने बताया कि दिसंबर 2025 में जब बेटा बदहवास हालत में डिपोर्ट होकर घर लौटा तो ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद परिजनों ने एजेंट कुलदीप को दबोचा। बिरादरी की पंचायत बुलाई गई, जिसमें एजेंट ने 1 महीने के भीतर पूरे 50 लाख रुपए लौटाने का लिखित और मौखिक वादा किया। हालांकि, समय सीमा बीतते ही आरोपी अपनी बात से मुकर गया। उसने फोन उठाना बंद कर दिया और छिपने लगा। रुपए मांगने पर जान से मारने की धमकी का आरोप राकेश का आरोप है कि अब जब भी वे रुपए वापस मांगते हैं तो आरोपी कुलदीप, आशू, सोनू रंधावा और उनके साथी उन्हें जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। आरोपी अपनी ऊंची राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच का रौब दिखाते हुए पीड़ित परिवार को झूठे पुलिस केस में फंसाने की धमकियां भी दे रहा है।
अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया मिलकर करेंगे ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास
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अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों और 3 कारोबारियों पर क्यों लगाया प्रतिबंध? लिस्ट में कौन-कौन
US sanctions Indian Companies:
आरएसएस प्रमुख का दौरा अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर चर्चा करने का अवसर: सिख-अमेरिकी नेता
वॉशिंगटन, 26 अगस्त . आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर सिख-अमेरिकी समुदाय के नेता जसदीप सिंह जस्सी ने उनका स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह दौरा अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं पर चर्चा करने का अवसर है. जस्सी ने कहा कि भागवत का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण और चर्चा में रहने वाला है. ... Read more
नेशनल अवॉर्डी और गुलाबी मीनाकारी के मास्टर आर्टिजन कुंज बिहारी सिंह बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों से रक्षाबंधन के लिए कारीगर एक महीने पहले से इसकी तैयारी में जुट जाते हैं।
रूस में अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ की सीक्रेट लैंडिंग! अचानक उतरा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, मॉस्को हैरान
मॉस्को/वाशिंगटन: मॉस्को के अति-सुरक्षित एयरपोर्ट पर उस समय हड़कंप मच गया जब अमेरिकी वायुसेना का एक विशेष सीक्रेट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट अचनाक लैंड हुआ। सूत्रों के मुताबिक, इस सीक्रेट फ्लाइट में कोई साधारण प्रतिनिधिमंडल नहीं, बल्कि अमेरिका के सीआईए (CIA) चीफ खुद मॉस्को पहुंचे हैं। अचानक हुई इस सीक्रेट लैंडिंग ने न सिर्फ रूसी सुरक्षा एजेंसियों […] The post रूस में अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ की सीक्रेट लैंडिंग! अचानक उतरा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, मॉस्को हैरान first appeared on Sanjeevni Today .
ईरान के खिलाफ अमेरिका ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने ‘Operation Economic Outcast’ के तहत ईरान से जुड़े करीब 60 संस्थानों और नेटवर्क पर नई पाबंदियां लगाई हैं। इसी कार्रवाई में चार भारत-आधारित कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंधों की चपेट में आई हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान […] The post ‘इकोनॉमिक डी-डे’ के नाम पर अमेरिका का ईरान पर कड़ा वार, भारत तक पहुंची आंच; चार भारतीय कंपनियों पर बैन, निर्यात और तेल आयात दोनों प्रभावित होने के आसार first appeared on Sanjeevni Today .
कैरिबियाई सागर में अमेरिका ने एक और नाव को बनाया निशाना: चार की मौत, ट्रंप के ड्रग्स अभियान पर क्यों उठे सवाल? US targets another boat Caribbean Sea Four dead why are questions being raised about Trump anti-drug campaign
अमेरिका में वीजा अपॉइंटमेंट पर लगा ब्रेक, दुनिया भर के आवेदकों की बढ़ी चिंता; जानें क्या है पूरा मामला
अमेरिकी सैन्य विमान अचानक मॉस्को पहुंचा, वीडियो में जाने C-17 की लैंडिंग से मचा हड़कंप; आखिर कौन था सवार?
दुनियाभर में अमेरिकी वीजा अपॉइंटमेंट पर अस्थाई रोक, ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन को लेकर बढ़ती सख्ती के कारण अमेरिका ने दुनिया भर के आवेदकों के वीजा अपॉइंटमेंट पर रोक लगा दी है. अमेरिकी दूतावासों में एक ग्लोबल ट्रेनिंग पहल शुरू की गई है। अमेरिका ने दुनिया भर के आवेदकों के वीजा अपॉइंटमेंट पर रोक ...
खाने में थोड़ी दिक्कत, बाकी सब बढ़िया..' 1 महीना रहकर पिता को कैसा लगा अमेरिका, बेटी ने शेयर किया रिएक्शन; Video
कंपनियों को चीन-रूस की खुफिया एजेंसियों से दूर रखना जरूरी, अमेरिकी लॉमेकर्स ने उठाई आवाज
वॉशिंगटन, 26 अगस्त . अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों के लॉमेकर्स के एक समूह ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को चीन और रूस की सिविलियन खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने से रोका जाए. लॉमेकर्स का कहना है कि मौजूदा कमियों की वजह से विदेशी दुश्मन देश अमेरिका ... Read more
ईरान से तेल खरीदा... अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों और 3 बिजनेसमैन पर लगाए प्रतिबंध
अमेरिका ने साफ कहा है कि जो देश ईरान को पैसे की अवैध तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग करने की अनुमति देते रहेंगे, उन्हें अमेरिकी डॉलर वाली वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर दिया जाएगा.
अमेरिका में ड्रग कार्टेल के लिए 7.5 लाख डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग, मैक्सिकन नागरिक गिरफ्तार
वॉशिंगटन, 26 अगस्त . अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट ने कहा है कि मिनेसोटा में एक मनी ट्रांसफर कंपनी में काम करने वाले मेक्सिको के एक नागरिक पर आरोप है कि उसने मेक्सिको के सबसे शक्तिशाली ड्रग कार्टेलों में से एक के लिए 750,000 डॉलर की कथित ड्रग कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग करने में मदद की. मिनियापोलिस ... Read more
LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर के दाम फिर स्थिर, दिल्ली में ₹942, अमेरिका से बढ़ा LPG आयात
LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर के दाम फिर स्थिर, दिल्ली में ₹942, अमेरिका से बढ़ा LPG आयात
विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी कंट्री सिंगर, गीतकार, अभिनेत्री और समाजसेविका डॉली पार्टन (Dolly Parton) का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. उनके परिवार और टीम की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रही थीं. उन्होंने वेंडरबिल्ट-इंग्राम कैंसर सेंटर में अपने परिजनों के बीच अंतिम सांस ली.
अमेरिका के बिना कनाडा आर्थिक रूप से नहीं टिक सकता : ट्रंप
अमेरिका के बिना कनाडा आर्थिक रूप से नहीं टिक सकता : ट्रंप
World: ईरान पर US के प्रतिबंध से भड़के चीन ने दी चेतावनी; अमेरिका में 35 साल बाद खसरे से दो लोगों की मौत
अमेरिका से भारत लौटे शख्स ने पार्किंग और भीड़भाड़ पर कही ऐसी बात, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
अमेरिका से भारत लौटे शख्स ने पार्किंग और भीड़भाड़ पर कही ऐसी बात, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का विस्तार, भारत की चार कंपनियां भी निशाने पर
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। इस बार भारत भी इसकी चपेट में आ गया है। ट्रंप प्रशासन ने चार भारतीय कंपनियों और तीन नागरिकों पर कार्रवाई की है
अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरान ने दी चेतावनी, देखें US TOP-10
ईरान ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर कड़ा पलटवार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रुभता का गंभीर उल्लंघन है. उन्होनें चेतावनी दी की ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा. बघाई ने यह भी कहा कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई के स्रोत को निशाना बनाना ईरान का अधिकार है.
ईरान पर अमेरिका का यू-टर्न? रुबियो बोले- नए हमले की तैयारी नहीं
मार्को रुबियो ने सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों से कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर नए हमले की तैयारी नहीं कर रहा है. इससे संकेत मिला है कि वॉशिंगटन अभी सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय प्रतिबंध, नौसैनिक दबाव और होर्मुज में तेल आवाजाही पर फोकस रखेगा.
NRI कोटे से किसी भी स्कोर पर MBBS सीट दिलवा देंगे। 30 हजार आप इंडिया में हमें दे दीजिएगा। बाकी का 1 करोड़ अमेरिका, दुबई से कैंडिडेट के अकाउंट में डलवाएंगे। कोई नहीं कह पाएगा कि NRI नहीं है। मैं बिहार से हूं। एमपी में 11 साल से रह रहा हूं। अब तक 3 हजार से ज्यादा डॉक्टर बना चुका हूं। अपना नेटवर्क तो पूरे देश में फैला है। जहां जिस कॉलेज में बोलिएगा MBBS की सीट लॉक करा दूंगा। कोई भी ऐसा राज्य नहीं जहां अपनी सेटिंग से कॉलेज की सीट फिक्स न हो जाए। हम लोगों ने ऐसी नेटवर्किंग बनाई है, एक कॉल पर एडमिशन होता है। पैसा खर्च कीजिए किसी भी कोटे से सेट करा दूंगा। हम लोग ऐसे काम नहीं करते हैं, पैसा देकर पहले ही कॉलेजों से सीट होल्ड करा लेते हैं..। ऐसे दावे देश के अलग-अलग राज्यों में बैठे एजेंट्स कर रहे हैं जो MBBS की सीट बेच रहे हैं। हर एजेंट का कनेक्शन बिहार से है। बिहार के एजेंट्स ने पूरे देश में नेटवर्क मार्केटिंग की तरह अपना जाल फैला दिया है। ऑपरेशन MBBS पार्ट 3 में पढ़िए और देखिए बिहार के एजेंट्स ने देश में कैसे खड़ा किया MBBS की सीट बेचने वाला नेटवर्क..। भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम ने इन्वेस्टिगेशन के दौरान देश के 6 से अधिक राज्यों में बात की है। हर राज्य में MBBS सीट की डील करने वाला एजेंट्स बिहार का निकला। रिपोर्टर्स के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि देश के अलग-अलग राज्यों में कैसे नेटवर्क मार्केटिंग की तरह एजेंट्स ने अपना जाल फैलाया और कैसे MBBS की सीट बेच रहे हैं। इन्वेस्टिगेशन में सबसे बड़ा नाम प्रिंस का सामने आया जो बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है, लेकिन पूरे देश में अपना नेटवर्क खड़ा कर रखा है। वो खुद मध्य प्रदेश के भोपाल में रहता है, वहीं से MBBS की पूरी डील करता है। इनपुट मिला कि फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर वह अब तक 3000 से अधिक डॉक्टर बना चुका है, इसी कमाई से भोपाल में खुद हॉस्पिटल चलाता है। प्रिंस से मिलने भास्कर रिपोर्टर अंडर कवर बनकर 1100 किमी दूर भोपाल के सलैया पहुंचे। बातचीत में खुद प्रिंस ने ही पूरा खुलासा कर दिया। रिपोर्टर - मैं बिहार से आया हूं, एडमिशन के संबंध में बात करनी है। प्रिंस - बढ़िया है, हो जाएगा। अपना तो काम ही यही है, देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में जाइए अपना आदमी मिलेगा। रिपोर्टर - आप बिहार से भोपाल कैसे पहुंच गए।प्रिंस - मैने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, नौकरी नहीं लगी तो यही काम शुरू कर दिया। अब तक तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राओं का डॉक्टरी में एडमिशन करा चुका हूं। रिपोर्टर - तब तो आपकी पूरी सेटिंग होगी?प्रिंस - एमपी और बिहार नहीं देश में कोई भी मेडिकल कॉलेज ऐसा नहीं है, जहां अपनी सेटिंग नहीं है। रिपोर्टर - आपके साथ तो बहुत लोग काम करने वाले होंगे?प्रिंस - पूरा नेटवर्क है, बिहार के लोग देश के हर राज्य में हैं, सब एक दूसरे से जुड़े हैं। MBBS एडमिशन के लिए हम लोगों की मार्केटिंग की पूरी चेन है। रिपोर्टर - स्टूडेंट्स का पता कैसे चलता है?प्रिंस - अलग-अलग शहरों में लोग हैं, स्टूडेंट्स की जानकारी जुटाते हैं, फिर नंबर और मार्क्स देखकर उन्हें आगे भेज देते हैं। हम लोग भी कैंडिडेट्स के इंटरेस्ट के हिसाब से उन्हें कॉलेज दिला देते हैं। रिपोर्टर - काउंसलिंग तो करानी ही पड़ती होगी?प्रिंस - प्रक्रिया तो सभी पूरी की जाती है, लेकिन कोटा तो अपना पहले से सेट करके रखा जाता है। कैंडिडेट्स के आधार पर डॉक्यूमेंट्स तैयार करा दिए जाते हैं। रिपोर्टर - इसमें तो बहुत लोगाें और बड़ी सेटिंग की जरूरत पड़ती होगी। प्रिंस - NRI डॉक्यूमेंट्स और कॉलेज तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अलग-अलग लोग जुड़ते हैं। प्रिंस बोला- छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ में ही एडमिशन करवा दूंगा प्रिंस ने अंडर कवर रिपोर्टर्स से डील के दौरान MBBS सीट बेचने में कमाई का पैकेज भी बताया। प्रिंस ने दावा किया कि 220 नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स के लिए NRI कोटे से MBBS में एडमिशन का पैकेज करीब 1 से 1.5 करोड़ तक का है। हॉस्टल का खर्च अलग से देना होगा। प्रिंस ने छत्तीसगढ़ की सेटिंग का दावा करते हुए बताया कि वहां 1 करोड़ में ही MBBS में एडमिशन करा देंगे। प्रिंस का दावा है कि हर कोटे के लिए उसकी सेटिंग है। पहले से ही कॉलेज से सीट को लेकर डील हो जाती है। इसके बाद काउंसलिंग शुरू होते ही सीट की डीलिंग भी शुरू हो जाती है। किसी कैंडिडेट्स के परिवार में कोई NRI हो या ना हो, प्रिंस डॉक्यूमेंट्स से उसे NRI बनवा देगा। इतना ही नहीं NRI स्पॉन्सर की व्यवस्था भी प्रिंस खुद करता है। दावा किया कि स्टूडेंट यादव है तो यादव सरनेम वाला NRI स्पॉन्सर भी ढूंढकर दिया जाएगा। प्रिंस ने बताया कि कागजों में NRI स्पॉन्सर छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाने वाला दिखेगा, जबकि असली पैसा छात्र का परिवार देगा। प्रिंस से डील करने के बाद हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम को प्रदीप का इनपुट मिला। प्रदीप बिहार के कटिहार का रहने वाला है, फिलहाल वो नोएडा में रहता है। प्रदीप के बारे में जानकारी मिली कि वो बिहार और यूपी के अधिकतर स्टूडेंट्स की कॉलेज में सेटिंग नोएडा में बैठकर करता है। प्रदीप का दावा- राजस्थान और बंगाल में सेटिंग भास्कर के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने प्रदीप से दो स्टूडेंट्स के एडमिशन के लिए अलग-अलग डील की। हमने बताया कि 215 और 220 स्कोर वाले स्टूडेंट्स का MBBS में एडमिशन कराना है। प्रदीप ने भी वही रास्ता बताया जो बाकी एजेंट्स ने बताया। प्रदीप ने दावा किया कि MBBS में जितनी भी NRI कोटे की सीट होती है, हम लोग ही उसकी सेटिंग करते हैं। अगर कॉलेज एजेंट्स से अलग हो जाए तो ये सीट भर ही नहीं पाएंगी। प्रदीप ने दावा किया कि 215-220 नंबर पर एडमिशन के लिए राजस्थान और बंगाल में सेटिंग है। प्रदीप ने ऑल इंडिया काउंसलिंग के अलावा राजस्थान और पश्चिम बंगाल में एडमिशन के विकल्प बताए। उसने दावा किया कि राजस्थान और बंगाल में NRI दस्तावेज नहीं होने के बावजूद एडमिशन का रास्ता निकाला जाता है। डेढ़ लाख रुपए में लिस्ट क्लियर करा देंगे, इसके बाद NRI डॉक्यूमेंट्स के लिए साढ़े 4 लाख रुपए लेंगे। इसके अलावा NRI के खाते से 10 लाख रुपए के बराबर अमेरिकी डॉलर ट्रांसफर कराने और विदेशी लेनदेन पर करीब 2 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज लगने की बात भी कही। एजेंट्स की विदेशों में सेटिंग प्रदीप से बातचीत में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदीप के मुताबिक NRI कोटे में एडमिशन के लिए विदेश से पैसे का ट्रांजेक्शन दिखाना पड़ता है। कॉलेज में एडमिशन के बाद वह विदेश में बैठे अपने आदमियों से ट्रांजेक्शन कराएगा। अमेरिका से फंड ट्रांजेक्शन कराने का एक नया ट्रेंड भी सामने आया। प्रदीप ने बताया कि जितने भी एडमिशन NRI कोटे से होते हैं, इसमें फंड बाहर से ही आता है। प्रदीप ने बताया कि जितने भी एजेंट्स हैं, उनकी विदेशों में सेटिंग होती है। वह वहां से ही पैसे ट्रांसफर कॉलेज के खातों में कराते हैं। प्रदीप ने बताया कि स्टूडेंट्स की सीट सेट करने के लिए नीट स्कोर में सेटिंग से लेकर काउंसलिंग, NRI डॉक्यूमेंट्स लिस्ट में नाम और पैसे के लेनदेन तक की अलग-अलग व्यवस्था बनानी पड़ती है। प्रदीप से डील के दौरान ही निखिल यादव का मोबाइल नंबर मिला। निखिल बिहार के रक्सौल का रहने वाला है, लेकिन उसका नेटवर्क देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों तक फैला है। वह दिल्ली में बैठकर MBBS की सीट बेच रहा है। प्रदीप और निखिल ने डील के दौरान बिहार के कई एजेंटस के नाम लिए जो देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकर MBBS सीट की डील कर रहे हैं। इस तरह से एक एजेंट से दूसरे एजेंट तक पहुंचने पर नेटवर्क की एक और कड़ी सामने आई। निखिल का दावा- कॉलेज पहले ही कोटे वाली सीट बेच देते हैं कॉलेज से पहले ही हम लोगों की डील हो जाती है। कॉलेज पहले ही कोटे वाली सीट का रेट बता देते हैं। हम लोग उसका सौदा कर एडवांस देकर सीट होल्ड करा लेते हैं। इसके बाद एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स को भेज देते हैं। कॉलेज से हिसाब किताब बाद में हो जाता है स्टूडेंट एडमिशन के लिए आए तो उसे आगे कॉलेज तक ले जाने की व्यवस्था करा दी जाती है। जरूरत पड़ने पर दिल्ली से फ्लाइट से बेंगलुरु ले जाकर एडमिशन कराते हैं। MCC के NRI नियमों से हम लोगों को मदद मिलती है, इससे हम कम स्कोर के बाद भी स्टूडेंट्स को कोटे वाली सीट दिला देते हैं। बिहार और बंगाल में NRI दाखिले से जुड़े कुछ नियम और डॉक्यूमेंट्स स्पष्ट नहीं होने के कारण कॉलेजों से बातचीत में दिक्कत आ रही है। जबकि दूसरे राज्यों में प्रक्रिया पूरी तरह आसान है। बड़ी ही आसानी से हम एडमिशन की पहले से ही डील करके रखते हैं। हम लोगों के नेटवर्क में हर व्यक्ति का अपना-अपना काम तय है। कोई छात्र और उसके परिवार से संपर्क करता है, कोई NRI डॉक्यूमेंट्स बनवाता है तो कोई स्पॉन्सर फिक्स कर विदेश से पैसे का ट्रांजेक्शन करने की सेटिंग करता है। इसी में से कुछ को कॉलेज तक पहुंचाने और वहां बातचीत कराने की जिम्मेदारी दी जाती है। हैदराबाद से लेकर बंगाल तक सेटिंग निखिल ने तेलंगाना के हैदराबाद और पश्चिम बंगाल में एडमिशन कराने का दावा किया। उसने कहा, देश का कोई भी राज्य हो और वहां का कोई भी मेडिकल कॉलेज हो, सब कोई जानता है। निखिल का दावा है कि राजस्थान में तीसरे राउंड की काउंसलिंग में बड़ा ऑप्शन निकलेगा। कॉलेजों से लगातार बातचीत हो रही है। डीम्ड कॉलेजों में NRI और मैनेजमेंट सीटों को लेकर पहले से ही सेटिंग हो गई है। निखिल ने कहा कि किसी कॉलेज से सीधे फोन पर एडमिशन की बात नहीं होती। पहले काउंसलिंग, रजिस्ट्रेशन और NRI डॉक्यूमेंट्स की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद कैंडिडेट्स को कॉलेज ले जाकर संबंधित लोगों से आमने-सामने बातचीत करा दी जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि कोई भी एजेंसी किसी को नहीं पकड़ पाए। ऐसा करने से कॉलेज और एजेंट्स दोनों सेफ होते हैं। निखिल का दावा है कि देश में फैले बिहार के एजेंट्स कोटे वाली सीट की पहले से ही डील कर लेते हैं। कोटे की जितनी भी सीट होती है वह सेटिंग से ही भरती है। अगर एजेंट्स हाथ नहीं डाले तो कॉलेज की सीटें खाली जाएंगी और कॉलेज एक्सपोज भी हो जाएंगे। सबसे अधिक डील NRI कोटे की होती है। इस कोटे से एडमिशन सबसे आसान होता है। एजेंट्स कॉलेज की फीस अलग से दिलवाते हैं, अपना कमीशन वह अलग से लेते हैं। हॉस्टल के करीब 2 लाख रुपए सालाना खर्च में भी एजेंट्स अपना कमीशन फिक्स कर लेते हैं। निखिल बोला- एडमिशन के पहले 35-40 लाख लगेंगे निखिल ने बताया कि कैंडिडेट्स के पैरेंट्स को पहले एडमिशन के बाद पहले साल कम से कम 35 से 40 लाख रुपए तैयार रखने पड़ते हैं। उसने कुछ कॉलेजों के लिए करीब 95 लाख रुपए के पैकेज का भी जिक्र किया। बातचीत में उसने हैदराबाद के महेश्वरा और राजा राजेश्वरी कॉलेज का नाम लिया। वहां हाल में उसने एक कैंडिडेट्स की बुकिंग और दूसरे की प्रक्रिया चलने का दावा किया। एक लड़की के लिए करीब 95 लाख रुपए के पैकेज में एडमिशन होने की बात भी कही। निखिल ने कहा कि वह केवल फोन पर कॉलेज का नंबर देकर कैंडिडेट्स को भेजने के बजाय खुद फ्लाइट से कॉलेज ले जाएगा और वहां संबंधित लोगों से आमने-सामने बातचीत कराएगा। एजेंट से एजेंट तक जुड़ती गई कड़ियां प्रिंस, प्रदीप और निखिल से बातचीत अलग-अलग जगहों पर हुई, लेकिन तीनों की बातचीत को जोड़ने पर एक जैसा तरीका सामने आया। पहले छात्र के नंबर और कैटेगरी की जानकारी ली जाती है। इसके बाद उसके लिए कॉलेज और कोटे का विकल्प बताया जाता है। NRI दस्तावेज नहीं होने पर स्पॉन्सर की व्यवस्था की बात होती है और फिर काउंसलिंग से लेकर कॉलेज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने का दावा किया जाता है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि यह काम सिर्फ एक एजेंट तक सीमित नहीं है। इसके लिए पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। नेटवर्क में शामिल अधिकतर लोग बिहार के हैं। बिहार से बच्चों की अधिक डिमांड होती है, इसलिए इस नेटवर्क में यूपी बिहार के एजेंट्स का सिक्का चलता है। कॉलेज भी उनके संपर्क में रहते हैं ताकि कोई सीट खाली नही जाए। इन्वेस्टिगेशन में यह भी साफ हो गया कि कहीं कोई एजेंट फंसे नहीं, इसका भी बहुत ख्याल रखा जाता है। इसलिए एक एजेंट दूसरे एजेंट का नंबर देता है और आगे की प्रक्रिया के लिए दूसरे एजेंट से बात कराई जाती है। यानी पूरा सिस्टम एक तरह से नेटवर्क मार्केटिंग चेन की तरह काम करता दिखाई देता है। एक तरफ ऐसे लोग हैं जो स्टूडेंट और उसके परिवार तक पहुंचते हैं। इसके बाद मार्क्स और बजट के हिसाब से एडमिशन का विकल्प बताया जाता है। फिर NRI डॉक्यूमेंट्स और स्पॉन्सर की व्यवस्था की बात करने वाला एजेंट सामने आता है। आगे काउंसलिंग और रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोग और आखिर में कॉलेज तक ले जाकर सीट और फीस पर बातचीत कराने का दावा करने वाले एजेंट जुड़ते हैं। कम नंबर वाले स्टूडेंटस को तलाशते हैं एजेंट हमारी इन्वेस्टिगेशन में एक और बात सामने आई वह कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स पर टारगेट करने वाली थी। एजेंट्स का पूरा जोर कम नंबर वाले स्टूडेंट्स पर अधिक होता है। 215, 220 और इसके आसपास के नंबर बताए जाने पर एजेंटों ने अलग-अलग राज्यों और NRI कोटे के विकल्प बताने शुरू किए। इसके बाद बातचीत सीधे पैकेज और अतिरिक्त खर्च तक पहुंची। ऐसा इनपुट भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को पहले ही मिला था, इसलिए रिपोटर्स अंडर कवर बनकर कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स पर ही बात की। एजेंट प्रिंस ने 220 नंबर पर 1.10 से 1.20 करोड़ रुपए के पैकेज की बात की और एजेंट प्रदीप ने 215-220 नंबर वाले छात्रों के लिए राजस्थान और बंगाल में सेटिंग बताई। निखिल ने डॉक्यूमेंटस, सर्विस, काउंसलिंग और कॉलेज तक पहुंचाने की कड़ी को जोड़ा और पैकेज की जानकारी दी। एजेंट्स और कॉलेज की कड़ी बिहार से जुड़ी भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार, मध्य प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, यूपी, दिल्ली में 50 से अधिक एजेंट्स से बात की है। इसमें 80 प्रतिशत बिहार के एजेंट्स निकले हैं। जो बिहार के रहने वाले नहीं हैं, वह बिहार के एजेंट्स के संपर्क में है। इन्वेस्टिगेशन में यह साफ हो गया कि देश में कहीं भी MBBS की सीट बिक रही है, इसमें बिहार के एजेंट्स शामिल हैं। इन्वेस्टिगेशन में यह भी पता चला कि जो एजेंट पहले बिहार में काम करते थे, वह अब देश के अलग-अलग राज्यों में सेट हो गए हैं। बिहार के रहने वाले 3 एजेंट प्रिंस, प्रदीप और निखिल ने राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में बड़ी सेटिंग होने का दावा किया है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आए एजेंट्स की बातचीत के आधार पर यह नेटवर्क एक ऐसे मार्केटिंग सिस्टम की तरह काम करता दिखाई देता है, जिसमें छात्र को पहले संभावित ग्राहक के तौर पर जोड़ा जाता है और फिर उसके नंबर, कैटेगरी और बजट के हिसाब से अलग-अलग विकल्प बताए जाते हैं। इसके बाद एजेंट से दूसरे एजेंट तक छात्र को पहुंचाने, NRI दस्तावेज और स्पॉन्सर की व्यवस्था करने तथा कॉलेज तक ले जाने की बात कही जाती है। एजेंट्स के दावों की पुष्टि अलग-अलग कॉलेजों या संबंधित संस्थानों से भी हुई है। हालांकि बातचीत में जिस तरह एक एजेंट से दूसरे एजेंट का नंबर मिलता गया और एडमिशन की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग लोगों के जरिए संभालने की बात सामने आई, उससे इस नेटवर्क की आपसी कनेक्टिविटी का भी खुलासा होता है। बिहार के एजेंट प्रिंस, प्रदीप और निखिल से बातचीत के दौरान ही बंगाल में MBBS सीट के लिए नेटवर्क चलाने वाली मौसम का इनपुट मिला। वह पश्चिम बंगाल से काम करती है, जबकि मौसम पूर्णिया की रहने वाली है। मौसम ने दावा किया कि वह लंबे समय से बंगाल में रह रही है। मौसम से रिपोटर्स ने फोन पर बात की। NEET में 545 नंबर के स्कोर कार्ड के साथ रिपोर्टर्स ने बातचीत शुरु की। मौसम का दावा- राजस्थान और बंगाल के कॉलेज का नेटवर्क है मौसम ने कहा, देखिए 545 नंबर पर सामान्य तरीके से सरकारी मेडिकल कॉलेज एडमिशन मिलना मुश्किल है, लेकिन मेरे पास सरकारी कॉलेज में एडमिशन कराने का रास्ता है। इसके लिए फीस ज्यादा देनी होगी। कई कोटे हैं अपने पास। हम किसी न किसी कोटे से स्टूडेंट्स की सीट सेट करा देंगे। राजस्थान और बंगाल के सरकारी कॉलेज के लिए मेरे पास नेटवर्क है। दोनों स्टेट में काम हो जाएगा। सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेने के कई फायदे हैं, एडमिशन तो पूरा जुगाड़ से होगा, लेकिन इसका फायदा स्टूडेंट्स को आगे मिलेगा। इसी वजह से लोग सरकारी कॉलेज के लिए इतना पैसा खर्च करने को तैयार होते हैं। सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल से सेटिंग का दावा बिहार की रहने वाली और बंगाल में नेटवर्क चलाने वाली मौसम ने दावा किया कि उसकी सेटिंग सरकारी कॉलेजों में तगड़ी है। वह सीधा प्रिंसपल से डील करा देगी। मौसम ने कहा, आप बंगाल आइए एक लाख रुपए जमा कर दीजिए और फिर मैं प्रिंसपल से आमने-सामने डील करा दूंगी। इसके लिए कोलकाता आना पड़ेगा। रिपोर्टर ने पूछा कि क्या कॉलेज में जाकर सीधे बात होगी? मौसम ने कहा कि हां, कॉलेज में बैठकर बात हो सकती है। रिपोर्टर ने सवाल किया कि किस कॉलेज में बात होगी तो मौसम ने दावा किया कि राजस्थान के साथ पश्चिम बंगाल के कई सरकारी कॉलेजों में वह आमने-सामने बैठाकर डील करा देगी। मौसम ने राजस्थान और बंगाल के कई कॉलेजों का नाम लिया। मौसम ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता), एसएसकेएम मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (कोलकाता), नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (कोलकाता) जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कराने का दावा किया। रिपोर्टर ने पूछा कि अगर हमें कॉलेज में जाकर देखना हो तो क्या करना होगा? मौसम ने कहा कि सरकारी कॉलेज में आम आदमी सीधे जाकर इस तरह बातचीत नहीं कर सकता। उसके मुताबिक पहले उनके ऑफिस आना होगा और वहां से कॉलेज में ले जाकर मुलाकात कराई जाएगी। पहले MCC रजिस्ट्रेशन, फिर कॉलेज ले जाने की बात मौसम ने बातचीत में एक बात पर खास जोर दिया कि पहले MCC में रजिस्ट्रेशन करना होगा। उसने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन के आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती। रिपोर्टर ने पूछा कि क्या पहले कॉलेज में जाकर बात नहीं हो सकती? मौसम ने कहा कि पहले रजिस्ट्रेशन जरूरी है। उसके बाद ही कॉलेज में बात कराने का दावा किया। उसने यह भी कहा कि अगर रजिस्ट्रेशन करने में कोई परेशानी होती है तो उसका नेटवर्क फोन पर स्टेप-बाय-स्टेप मदद करेगा। कैफे जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की बात भी कही। बिहार के एजेंटस के देश में नेटवर्क एक्टिव होने का दावा रुपेश ने भी किया है। रुपेश पटना के बोरिंग रोड से एडमिशन की कड़ी जोड़ता है। कैंडिडेट्स बनकर अलग-अलग डेट्स में पहुंचे भास्कर के अंडर कवर रिपोर्टर्स से रूपेश ने एडमिशन के बहाने देश के कई राज्यों में सेटिंग का खुलासा किया। रूपेश का दावा- ब्लैक मनी लाइए, एडमिशन में खप जाएगी मेरा नेटवर्क बिहार के बाहर के मेडिकल कॉलेजों तक भी है। बैंगलुरु में भी अपना ऑफिस है। देश के किसी भी राज्य में एडमिशन चाहिए, यहां से ही सेटिंग हो जाएगी। कर्नाटक के निजी मेडिकल कॉलेजों में 213 से 250 अंक वाले स्टूडेंट्स के लिए करीब 1 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपए तक के बजट में काम हो जाएगा। करीब 1.40 करोड़ रुपए के एडमिशन में 36 लाख रुपए कॉलेज फीस और करीब 40 लाख रुपए ब्लैक में देने होंगे। वहीं अगर 1.75 करोड़ रुपए के बजट में पहले साल करीब 84 लाख रुपए देने होंगे, जिसमें करीब 44 लाख रुपए कॉलेज फीस और करीब 40 लाख रुपए अलग से बलैक में देने होंगे। पश्चिम बंगाल, राजस्थान, चेन्नई और पुडुचेरी में भी एडमिशन हो जाएगा। पश्चिम बंगाल में करीब 1.05 से 1.10 करोड़ रुपए, राजस्थान में करीब 1.05 करोड़ रुपए और हिमालयन मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 1.15 करोड़ रुपए का बजट हो सकता है। बैंक गारंटी से बचने के लिए 2 साल की फीस पहले लेने का दावा पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए रूपेश ने बैंक गारंटी की व्यवस्था भी बताई। कुछ कॉलेजों में फीस की बड़ी पैसे की बैंक गारंटी मांगी जाती है। परिवार के पास इतनी बड़ी बैंक गारंटी नहीं होने पर कॉलेज पहले ही दो साल की फीस लेने का विकल्प अपनाता है। ऐसे मामलों में आधिकारिक फीस के साथ और पैसों डिमांड की जाती है। जब उससे पूछा गया कि अतिरिक्त पैसे कॉलेज के नाम पर लिए जाते हैं या नहीं, तो रूपेश ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज सीधे तौर पर ऐसा पैसे नहीं लेते। उसके अनुसार, पैसा देने का तरीका अलग होता है और एजेंट के जरिए इसे मैनेज कराया जाता है। रूपेश ने यह भी दावा किया कि बेंगलुरु में उसका अपना ऑफिस है और एडमिशन से जुड़ी सारी व्यवस्था वहीं से कराई जाती है। रूपेश के इस खुलासे से बिहार के एजेंट्स के देश में फैले नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। बिहार के एजेंट्स ने हर स्टेट में तैयार किए लोकल एजेंट्स इन्वेस्टिगेशन में यह सामने आया कि बिहार के एजेंट्स पूरे देश में फैले हैं। इन्वेंस्टिगेशन में यह भी खुलासा हुआ कि बिहार के रहने वाले एजेंट्स ने ही देश में कई लोकल एजेंट्स खडे किए हैं जो अलग-अलग राज्यों में MBBS की सीट बेच रहे हैं। लोकल एजेंट्स तैयार करने के पीछे बिहार के एजेंट्स की मंशा है कि उस स्टेट में उनका विरोध ना हो।
इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल : छात्र परिषद ने ली शपथ
उदयपुर | इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल में सत्र 2026- 27 के लिए विद्यालय छात्र परिषद का गठन एवं शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। शपथ ग्रहण समारोह के मुख्य अतिथि विद्यालय प्राचार्या डॉ.रीनिका राय, डॉ.अतुल रावत ( 17 जेकेएल आर्मी) एवं डॉ. राजश्री गांधी अध्यक्ष राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार संरक्षण मंच रहे।
नमस्कार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जाति जनगणना के सवालों को लेकर पीएम मोदी को लेटर लिखा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग छात्रा की हिजाब में स्कूल आने और क्लास लेने की याचिका खारिज कर दी। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में आगे अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर की रूस में सीक्रेट लैंडिंग के बारे में बताएंगे। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... कल की बड़ी खबरें... 1. राहुल-खड़गे की मोदी को चिट्ठी, लिखा- जाति जनगणना के सवाल बदलें, इसमें पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लेटर लिखा। इसमें जाति जनगणना में जातियों के नाम दर्ज करने और डेटा जुटाने के तरीके का विरोध किया और जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। दोनों ने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए। साथ ही जनगणना के सवालों में पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं होने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे देश में ओबीसी आबादी का सही आंकड़ा सामने आने में परेशानी हो सकती है। तेलंगाना और बिहार जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग की है। लेटर की 4 प्रमुख बातें… पूरी खबर पढ़ें... 2. इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत नहीं, सेक्युलरिज्म के लिए यूनिफॉर्म जरूरी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इनकार किया। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने कहा कि स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम का पालन करना जरूरी है। बेंच ने नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यूनिफॉर्म की बदौलत बिना किसी धार्मिक भेदभाव वाला माहौल बना रहता है और बच्चों में भी बराबरी की भावना रहती है। स्कूल की अपनी पहचान भी बनती है। हिजाब की अनुमित यूनिफॉर्म के विचार के खिलाफ बेंच ने कहा कि स्कूल में व्यक्तिगत आधार पर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह यूनिफॉर्म के विचार के खिलाफ होगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के बजाय अलग-अलग छात्रों के हाथ में चला जाएगा। इसलिए कोई भी छात्र या छात्रा स्कूल के तय किए गए ड्रेस कोड को बदलने की जिद नहीं कर सकती। पूरी खबर पढ़ें... 3. यूपी में बुजुर्ग महिलाओं को रोडवेज बसों में यात्रा फ्री, योगी कैबिनेट में 24 प्रस्ताव पास रक्षाबंधन से पहले योगी सरकार ने प्रदेश की करीब एक करोड़ बुजुर्ग महिलाओं को बड़ा तोहफा दिया। अब 60 साल के ऊपर की महिलाएं रोडवेज बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। इसके लिए उन्हें स्पेशल स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे। मंगलवार शाम करीब 6 बजे सीएम योगी की कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। हर महीने 22.50 करोड़ रुपए खर्च करेगी यूपी सरकार: महिलाओं के लिए लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना के तहत यूपी सरकार हर महीने 22.50 करोड़ रुपए खर्च करेगी। अनुमान है कि हर दिन 88,438 बुजुर्ग महिलाएं रोडवेज बसों से सफर करेंगी। यात्रा के दौरान स्मार्ट कार्ड, आधार कार्ड या वोटर आईडी दिखाना होगा। 26 अगस्त से योजना की शुरुआत: सीएम योगी आज बुधवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से खुद इस योजना की शुरुआत करेंगे। जिलों में इसके लिए प्रभारी मंत्री रहेंगे। वहीं, रक्षाबंधन के मौके पर रोडवेज बसों में महिलाओं को निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा 27 अगस्त सुबह 6 बजे से 29 अगस्त रात 12 बजे तक लागू रहेगी। पूरी खबर पढ़ें 4. चंपत राय के खिलाफ संतों की बैठक पुलिस ने रोकी, गुस्साए संतों ने चंदा चोर के नारे लगाए अयोध्या में कारसेवकपुरम के पास मंगलवार को ओम आश्रम में राम मंदिर चढ़ावा चोरी और चंपत राय के खिलाफ चल रही संतों की बैठक को पुलिस ने रोक दिया। संतों का आरोप है कि बैठक के बीच पुलिस पहुंची और हम सभी को बाहर निकालकर आश्रम में ताला लगा दिया। इससे गुस्साए संतों ने ‘चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो’ के नारे लगाए। हालांकि, पुलिस का कहना है कि रोकने से पहले ही संत खुद आश्रम से बाहर निकल गए और नारेबाजी करने लगे। संतों का कहना है- चंदा चोरी के छोटे आरोपियों पर कार्रवाई की गई, जबकि बड़े आरोपियों को बचाया जा रहा है। जिला प्रशासन आरोपियों का साथ दे रहा है। वह नहीं चाहता कि आरोपी पकड़े जाएं। इसलिए संतों की बैठक नहीं होने दी जा रही है। पूरी खबर पढ़ें 5. पूर्व CDS बोले- पाकिस्तान की किराना हिल्स से टकराया था ड्रोन, वह टारगेट नहीं था, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उठे थे सवाल देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बताया कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की न्यूक्लियर ठिकाने किराना हिल्स पर लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन गिरा था। पूर्व CDS ने कहा कि कभी-कभी सवाल उठता है कि क्या किराना हिल्स पर हमला हुआ था। दरसअल, हमने सरगोधा में कई 'लोइटरिंग मिशन' भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10km नॉर्थ में है। इस ड्रोन का काम सरगोधा और उसके आस-पास मौजूद राडार को खोजना था। ड्रोन करीब 2 घंटे तक हवा में घूमता है पूर्व CDS ने कहा कि यह ड्रोन लगभग 2 घंटे तक हवा में घूमता है। अगर टारगेट नहीं मिलता, तो यह नीचे आकर टकरा जाता है। हो सकता है कि ऐसा ही कोई ड्रोन जाकर पहाड़ियों से टकराया हो। पाकिस्तानी मीडिया ने भी कुछ ऐसी तस्वीरें दिखाई थीं जिनमें किराना हिल्स से धुआं निकलता दिख रहा था। पूरी खबर पढ़ें 6. अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी के चीफ की रूस में सीक्रेट लैंडिंग, रूस बोला- हमें इसकी जानकारी नहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मॉस्को पहुंचे। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, वह अमेरिकी वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर से मॉस्को गए और वहां अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। CIA चीफ बनने के बाद रैटक्लिफ की रूस की पहली यात्रा है। रैटक्लिफ के रूस दौरे की पहले कोई घोषणा नहीं की गई थी। अमेरिकी सैन्य विमान के मॉस्को पहुंचने के बाद उनकी यात्रा की खबर सामने आई। इससे पहले रूसी अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें C-17 ग्लोबमास्टर की मॉस्को यात्रा की जानकारी नहीं है। अमेरिकी सरकार ने भी अभी इस दौरे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अमेरिका से लातविया और फिर मॉस्को पहुंचा C-17 फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना का C-17 पहले अमेरिका से लातविया की राजधानी रीगा पहुंचा। इसके बाद विमान मंगलवार सुबह करीब 9 बजे मॉस्को के लिए रवाना हुआ और व्नुकोवो एयरपोर्ट पर उतरा। यह विमान RCH4555 कॉल साइन से उड़ रहा था। इसकी उड़ान की एक खास बात यह थी कि विमान रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इस विमान की मॉस्को यात्रा की जानकारी नहीं थी। पूरी खबर पढ़ें... 7. गूगल ने प्ले स्टोर से हटाए 3 फर्जी लोन एप, डेटा चोरी और भारी ब्याज वसूलने की शिकायत पर एक्शन गृह मंत्रालय की शिकायत पर गूगल ने 3 और फर्जी लोन एप होराइजन कैश सर्विस, मनी स्कोर मॉनिटर और जेलीक्रेडिट को प्ले स्टोर से हटा दिया। इस महीने में अब तक 9 ऐसे ठग एप्स बंद कराए जा चुके हैं। गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा टीम (I4C) ने 19 अगस्त को गूगल को नोटिस भेजकर इन एप को हटाने का कहा था। आरोप है कि ये एप कम ब्याज पर 5 मिनट में लोन देने का लालच देकर लोगों को फंसाते थे। बाद में उनसे ज्यादा ब्याज और पेनाल्टी वसूलते थे। साथ ही यूजर-कंज्यूमर की निजी जानकारी भी चुराते थे। I4C और सरकारी नियम क्या हैं? I4C (साइबरक्राइम सेंटर): यह गृह मंत्रालय की एक खास टीम है, जिसका काम देश में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों को रोकना है। सरकारी नियम (IT Act 79): इसका मतलब है कि अगर सरकार किसी कंपनी को किसी गलत या खतरनाक एप के बारे में बताएगी, तो कंपनी को उसे तुरंत हटाना पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: सुप्रीम कोर्ट बोला-बांके बिहारी में चढ़ावा चोरी नहीं होने देंगे: एक-एक पैसा दानपेटी में डालें; श्रद्धालुओं का दिया दान भगवान के लिए (पूरी खबर पढ़ें) 2. इंटरनेशनल: पूर्व वर्ल्ड स्नूकर चैंपियन बच्चों के यौन शोषण में दोषी:1993 से 2010 के बीच लड़की और लड़के से दुर्व्यवहार; स्नूकर संस्था ने सदस्यता खत्म की (पूरी खबर पढ़ें) 3. उत्तर प्रदेश: चंपत राय के खिलाफ संतों की बैठक पुलिस ने रोकी: आश्रम से निकालकर ताला लगाने का आरोप; गुस्साए संतों ने चंदा चोर के नारे लगाए (पूरी खबर पढ़ें) 4. महाराष्ट्र: 'आईफोन के लिए खुदकुशी की बात अफवाह': खाई हादसा का पीड़ित परिवार बोला- वो चाहता था परिवार साथ रहे, 3 की मौत हुई थी (पूरी खबर पढ़ें) 5. हरियाणा: दो महीने बाद फिर जेल से बाहर आया राम रहीम:लैंड क्रूजर-फॉर्च्यूनर के काफिले में सिरसा डेरे पहुंचा; 17वीं बार पैरोल-फरलो मिली (पूरी खबर पढ़ें) 6. क्रिकेट: सरफराज श्रीलंकाई कप्तान से बोले- यहां टाइमपास करने नहीं आया: चोटिल पंत की जगह जुरेल ने विकेटकीपिंग की, बारिश से दो बार खेल रुका; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स (पूरी खबर पढ़ें) 7. जम्मू-कश्मीर: शोपियां में 6 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार: हैंड ग्रेनेड और हिजबुल मुजाहिदीन के पोस्टर बरामद; पुलवामा में भी 2 सहयोगी पकड़ाए (पूरी खबर पढ़ें) 8. पटना: छात्रों पर लाठीचार्ज, दौड़ाकर पीटा: पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल, वाटर कैनन चली, CRPF से झड़प; TRE-4 एग्जाम में बदलाव की मांग (पूरी खबर पढ़ें) 9. महाराष्ट्र: क्या खिलाड़ियों को पता था उन्होंने कॉकरोच वाली चाय पी: हाईकोर्ट का मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से सवाल, रेस्टोरेंट में गंदगी का आरोप (पूरी खबर पढ़ें) 10. एंटरटेंमेंट: राहुल गांधी ने एक्ट्रेस कृति सेनन का सपोर्ट किया:बोले- महिलाओं की ऑनलाइन पुलिसिंग गलत, राखी एड में रिवीलिंग ड्रेस पहनने पर कंगना ने ट्रोल किया (पूरी खबर पढ़ें) 11. नेशनल: संसद मार्च में पुलिस ज्यादती-जांच समिति दोबारा बनाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल बोले- किसी ने शरारत की, यह कोर्ट राजनीतिक मंच नहीं (पूरी खबर पढ़ें) 12. नेशनल: TMC सांसदों की अयोग्यता पर समयसीमा में फैसला लें स्पीकर:सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया (पूरी खबर पढ़ें) 13. राजस्थान: 5-स्टार होटल का 5.74-लाख का बिल चुकाए बिना भागा टूरिस्ट: उदयपुर के उदय विलास में परिवार समेत ठहरा था दिल्ली का युवक (पूरी खबर पढ़ें) 14. क्रिकेट: वैभव सूर्यवंशी ने 4 गेंद में 2 विकेट लिए:दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की तरफ से गेंदबाजी की; बैटिंग में 8 रन ही बना सके (पूरी खबर पढ़ें) 15. मध्य प्रदेश: मंत्री शाह पर केस की परमिशन नहीं देगी MP सरकार: अफसरों को बाहर निकालकर कैबिनेट का फैसला; कर्नल सोफिया पर विवादित बयान दिया था (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... कूड़े के ढेर से चॉकलेट की लूट यूपी के कानपुर में लोग कूड़े के ढेर से एक्सपायरी चॉकलेट और टॉफियां लूटते नजर आए। बाइक सवार हो या कार सवार, लोगों ने वाहन रोड पर खड़े करके जितना हो सका, उतना सामान लूटा। घटना का वीडियो वायरल है। पूरी खबर पढ़ें... फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर: क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा 2. भास्कर इंटरव्यू: हाथ में तिरंगा था, तभी पैलेट गन चली:साहिल बोला- होश आया तो अस्पताल में था; शरीर में अब भी छर्रे, आंख से दिख नहीं रहा 3. भास्कर इन्वेस्टिगेशन: ‘NEET-2027 की डील, 180 दिन कैंडिडेट दुबई रहेगा’:एजेंट बोला- Gen-Z आंदोलन के बाद सख्ती, एंबेसी से NRI डॉक्यूमेंट्स बनेंगे, कोई पकड़ेगा नहीं 4. भास्कर इंटरव्यू: हाथ में तिरंगा था, तभी पैलेट गन चली:साहिल बोला- होश आया तो अस्पताल में था; शरीर में अब भी छर्रे, आंख से दिख नहीं रहा 5. भास्कर इन्वेस्टिगेशन: ‘NEET-2027 की डील, 180 दिन कैंडिडेट दुबई रहेगा’:एजेंट बोला- Gen-Z आंदोलन के बाद सख्ती, एंबेसी से NRI डॉक्यूमेंट्स बनेंगे, कोई पकड़ेगा नहीं 6. क्राइम फाइल्स: शादी का गिफ्ट बना मौत का पैकेट:होम थिएटर का स्विच दबाते ही दूल्हे और भाई की मौत, फिर…अचानक गायब हुआ संदिग्ध 7. भास्कर एक्सक्लूसिव: गैंगस्टर-लॉरेंस से मिलने के लिए 20-दिन भूखे रहे थे कैदी: हाई सिक्योरिटी जेल में ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं खूंखार क्रिमिनल, गर्लफ्रेंड से भी बात करते हैं 8. ग्राउंड रिपोर्ट: 'चारों तरफ समंदर, रेत... तेज धूप स्किन जलाती थी':काम, वेतन सब बदला था; 20 दिनों बाद दुबई से लौटे सीमांचल के लड़कों की आपबीती 9. ग्राउंड रिपोर्ट: गुरुग्राम में 300 परिवार घरों में कैद:सीवर के लिए गली खोदी, बरसात में दलदल बनी; लोग बोले-महिला-बच्चे फिसल रहे करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज मिथुन राशि वाले नया बिजनेस शुरू करने से करने का बचें। मीन राशि वाले जोखिम वाले निवेश से बचें। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
ईरान के साथ तेल डील... भारत आधारित 4 कंपनियों पर लगा अमेरिकी प्रतिबंध
ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार से जुड़ी इंडिया-बेस्ड कंपनियों पर अमेरिका मे प्रतिबंध लगा दिया है. वहीं, तीन भारतीय नागरिकों को भी निशाने बनाया गया है.
आरएसएस प्रमुख का अमेरिका दौरा: न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय को संबोधित करके भागवत; मेयर भड़के, क्या-क्या कहा?
Panipat News: अमेरिका भेजने के नाम पर 25 लाख की ठगी में एक साल कैद
अमेरिका भेजने के नाम पर 25 लाख की ठगी में एक साल कैद
अमेरिका पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम को करेंगे संबोधित
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका पहुंच गए हैं. वह न्यूयॉर्क शहर में 29 अगस्त को आयोजित होने वाले एक बड़े हिंदू समुदाय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसका उद्देश्य एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देना है. कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार, भागवत का स्वागत ‘यूनिवर्सल ... Read more
अचानक मॉस्को पहुंचे CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ, रूस में अमेरिकी प्लेन पहुंचने से मची थी हलचल
CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मंगलवार को मॉस्को पहुंचे, जो CIA प्रमुख बनने के बाद उनकी पहली ज्ञात रूस यात्रा बताई जा रही है। उनके दौरे का मकसद सामने नहीं आया है। बता दें कि अमेरिकी C-17 सैन्य विमान के मॉस्को पहुंचने की खबर सामने आई थी, तभी से पूरी दुनिया की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी थीं।
तीसरा चीन-अमेरिका ट्रैक 1.5 संवाद आयोजित
बीजिंग, 25 अगस्त . तीसरा चीन-अमेरिका ट्रैक 1.5 संवाद 25 अगस्त को चीन की राजधानी पेइचिंग में आयोजित हुआ. चीन के संबंधित विभागों, क्षेत्रीय Governmentों, थिंक टैंक और एशिया सोसाइटी से आए चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने आपसी Political विश्वास मजबूत करने, आर्थिक व व्यापारिक सहयोग का विस्तार करने और एआई व तकनीक के ... Read more
क्या अपने मकसद में कामयाब होगा अमेरिका? ईरान में पेट्रोल पंपों पर लगीं लंबी लाइनें
अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकाबंदी के दबाव के बीच ईरान में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और महंगाई बढ़ रही है। अमेरिका आर्थिक दबाव से ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ऊर्जा आपूर्ति के जरिए जवाब दे रहा है। फिलहाल ईरानी नेतृत्व पीछे हटता नहीं दिख रहा।
5 हजार डॉलर से 50 हजार पेड़ तक: चीन-अमेरिका मैत्री की आशा जनता में मौजूद
5 हजार डॉलर से 50 हजार पेड़ तक: चीन-अमेरिका मैत्री की आशा जनता में मौजूद
अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर फिर तेज हो गया है। कनाडा ने अमेरिकी सामान पर नए जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। साथ ही कनाडा सरकार ने प्रभावित कर्मचारियों और कारोबारियों के लिए C$5.4 अरब का राहत पैकेज भी घोषित किया है।कनाडा की सरकार अमेरिकी सामान पर 15% से 50% तक के जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है। ये टैरिफ 8 सितंबर से लागू होंगे। सरकार का कहना है कि इससे अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित कंपनियों और कर्मचारियों को राहत देने में मदद मिलेगी।अमेरिका ने कनाडा के सामान पर 50% तक टैरिफ लगायाअमेरिका ने शनिवार से कनाडा के कई सामान पर 50% तक के नए टैरिफ लागू कर दिए हैं। इससे करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई एक्सपोर्ट पर असर पड़ने का अनुमान है। यह अमेरिका को कनाडा के कुल एक्सपोर्ट का करीब 5.5% है।अमेरिका के इस कदम के बाद कनाडा ने जवाबी कार्रवाई का फैसला किया है। Oxford Economics के मुताबिक, नए अमेरिकी टैरिफ से कनाडा के अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर प्रभावी टैरिफ रेट 5.1% से बढ़कर 6.9% हो सकता है।किन सेक्टर पर ज्यादा असर?इस ट्रेड विवाद का असर कई इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। प्लास्टिक, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लकड़ी और पेपर प्रोडक्ट्स पर इसका बड़ा असर होने की उम्मीद है। Quebec, New Brunswick और Ontario के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी दबाव बढ़ सकता है। कंपनियों के लिए लागत और सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।ऑटो सेक्टर भी निशाने परट्रेड विवाद अब ऑटो सेक्टर तक भी पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगले साल कनाडा से आने वाली कारों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% किया जा सकता है। फिलहाल गैर-अमेरिकी कंटेंट पर 25% टैरिफ है। इस प्रस्ताव के बाद कनाडाई ऑटो इंडस्ट्री पर दबाव और बढ़ सकता है।अमेरिका पर कनाडा की बड़ी निर्भरताकनाडा के लिए यह ट्रेड वॉर इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ कारोबार पर काफी निर्भर है। कनाडा के कुल एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 70% है। वहीं कनाडा इस साल अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा गुड्स ट्रेडिंग पार्टनर है।विवाद अब सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहींदोनों देशों के बीच तनाव अब ट्रेड से आगे राजनीतिक मुद्दों तक पहुंच गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी वार्ताकारों ने कनाडा के दूसरे देशों के साथ ट्रेड समझौतों और फ्रेंच भाषा व Quebec की संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर भी दबाव बनाया।ट्रंप ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह कनाडाई लोगों के फ्रेंच बोलने के मामले में कभी दखल नहीं देंगे।USMCA पर भी नजरअब दोनों देशों के बीच USMCA यानी US-Mexico-Canada Agreement का भविष्य भी अहम हो गया है। ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह मौजूदा समझौते को उसी रूप में आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।ESDS Software IPO: 28 अगस्त से खुलेगा ₹720 करोड़ का आईपीओ, GMP 58% के पार; आशीष कचोलिया का भी है निवेश
चीन ने ईरान का साथ दिया तो क्या बेअसर होंगे अमेरिका के प्रतिबंध? - BBC
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ट्रंप को कनाडा का करारा जवाब, अमेरिकी सामानों पर 20 अरब डॉलर का टैरिफ
कनाडा ने अमेरिका के खिलाफ करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगा दिए हैं. इसमें स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण और रोजमर्रा की चीजें शामिल हैं, जिनमें कुछ पर 50% तक शुल्क लगाया गया है.
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को हटाने का व्यापक अभियान पूरा कर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिछाए गए सभी माइंस को पूरी तरह निष्क्रिय या विस्फोटित (Removed and Detonated) कर रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई भी ईरानी नाव या जहाज दोबारा माइंस बिछाने की कोशिश करेगा, तो उसे तुरंत और व्यवस्थित तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा।'जीरो टॉलरेंस नीति लागू': ईरान को दी गई अंतिम सैन्य चेतावनीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी प्रकार की नौसैनिक रुकावट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:तत्काल तबाही का आदेश: ट्रंप ने कहा, ईरान को स्पष्ट रूप से सूचित कर दिया गया है कि यदि कोई भी जहाज या नाव नए माइंस बिछाते हुए पाई गई, तो उसे बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।माइन प्लेसमेंट पर जीरो टॉलरेंस: जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance Policy) नीति पूरी तरह प्रभावी हो चुकी है।स्पेस फोर्स की 24x7 निगरानी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि यूएस स्पेस फोर्स (Space Force) के उन्नत उपग्रहों और निगरानी प्रणालियों के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी संदिग्ध हलचल को रडार पर तुरंत पकड़ा जा सके।वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज का रणनीतिक महत्वफारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत संवेदनशील 'चोकपॉइंट' है:20% कच्चे तेल की आवाजाही: दुनिया में समुद्री मार्ग से होने वाले कुल कच्चे तेल (Crude Oil) और एलएनजी (LNG) निर्यात का लगभग 20% हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।सप्लाई चेन पर असर: हाल के तनाव और माइंस बिछाए जाने की आशंकाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों ने अपने कार्गो रूट बदल दिए थे और समुद्री बीमा प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।बाजार को राहत: अमेरिकी नौसेना द्वारा जलमार्ग से माइंस हटाने की पुष्टि के बाद तेल आयातक देशों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों ने राहत की सांस ली है।
कर्ज में डूबा अमेरिका दुनिया पर फोड़ रहा है टैरिफ बम
डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के देशों को धमका रहे हैं... या फिर अमेरिका की बिगड़ती आर्थिक हालत उन्हें और आक्रामक बना रही है? क्योंकि जिस अमेरिका को दुनिया सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था मानती है... उसी पर अब 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है.
अमेरिका के खिलाफ कनाडा ने उठा लिया बड़ा कदम, US के 700 से ज्यादा सामानों पर टैरिफ का ऐलान
अमेरिका और उसके पड़ोसी देश कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव काफी बढ़ गया है। अब कनाडा ने अमेरिका के खिलाफ बड़े स्तर पर जवाबी टैरिफ का ऐलान किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अटपटा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह अमेरिका-कनाडा की सीमा से लगने वाले लेक ओंटारियो का नाम बदलकर लेक अमेरिका कर देने पर विचार कर रहे हैं।
LPG को लेकर भारत का बड़ा दांव, अमेरिका से रिकॉर्ड मात्रा में खरीदी गैस; क्या है वजह?
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से आपूर्ति में कमी के चलते भारत ने अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खरीद बढ़ा दी है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है। ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो ने अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के कार्यकाल में अमेरिका के खिलाफ तल्खी लगातार बढ़ती जा रही है। ईरानी सरकारी टीवी चैनल 3 और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित इस भड़काऊ वीडियो में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 वर्षीय बेटे बैरन ट्रंप को निशाना बनाने की बात कही गई है। इस वीडियो में बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीकों का सनसनीखेज खुलासा करते हुए लगभग 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 96 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की गई है, जिसने वैश्विक स्तर पर सनसनी फैला दी है।वीडियो में बैरन ट्रंप की गतिविधियों और गेमिंग अकाउंट्स का जिक्रमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 'बैरन ट्रंप को कहां मारें' शीर्षक से जारी किए गए इस वीडियो क्लिप में बैरन की दैनिक गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर दावे किए गए हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि उन पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि सुरक्षा घेरे को भेदकर एक महिला निजी बैठक में उनके करीब तक पहुंच गई थी। इसके अलावा, वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि बैरन अपनी सुरक्षा के दायरे से दूर किस तरह ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसे एक्सबॉक्स, फीफा वीडियो गेम और डिस्कॉर्ड अकाउंट्स के जरिए वॉयस और टेक्स्ट चैट पर बातचीत करते हैं। इस तरह की संवेदनशील जानकारियों के सार्वजनिक होने से अमेरिकी खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।पहले मेलानिया ट्रंप को भी बनाया जा चुका है निशानायह पहली बार नहीं है जब ईरानी मीडिया ने ट्रंप परिवार के किसी सदस्य को सीधे तौर पर इस तरह की धमकियां दी हों। इससे पहले पिछले महीने भी ईरान के सरकारी टेलीविजन पर एक अन्य वीडियो जारी किया गया था, जिसका शीर्षक 'मेलानिया को कहां मारें' था। उस वीडियो में अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के काफिले, न्यूयॉर्क शहर में उनके आवागमन के रास्तों और उनके पसंदीदा लग्जरी डिजाइनर स्टोरों को चिह्नित किया गया था, जहां वे अक्सर खरीदारी के लिए जाती हैं। उस वीडियो के अंत में बैरन ट्रंप का जिक्र करते हुए सीधी चेतावनी दी गई थी कि यह महज एक शुरुआत है। हालांकि, इन तमाम धमकियों के बीच सीक्रेट सर्विस द्वारा मेलानिया और बैरन दोनों को चौबीसों घंटे कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है और व्हाइट हाउस से लेकर मार-ए-लागो तक तमाम संपत्तियां अत्यधिक सुरक्षित हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति हलकों में हलचल मचा दी है। रूस की राजधानी मास्को के नुकोवो एयरपोर्ट पर अचानक एक अमेरिकी सैन्य विमान के उतरने से दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के कान खड़े हो गए हैं। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना का सी-17ए ग्लोबमास्टर III विमान लातविया की राजधानी रीगा से उड़ान भरकर मास्को पहुंचा। इस विमान के इस तरह अचानक रूस की धरती पर लैंड करने के पीछे के असली मकसद और इरादे को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जिससे इस पूरी घटना पर एक बड़ा रहस्य गहरा गया है।क्रेमलिन की प्रतिक्रिया और वाशिंगटन से कनेक्शनअमेरिकी सैन्य विमान की इस गतिविधि ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि यह विमान सीधे तौर पर अमेरिका के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ठिकानों से जुड़ा हुआ है। यह विमान 23 अगस्त को मैरीलैंड स्थित कैंप स्प्रिंग्स से रीगा पहुंचा था, जो कि ज्वायंट बेस एंड्रयूज का हिस्सा है और यहीं अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारियों तथा प्रेसिडेंशियल फ्लीट के विमान रखे जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि रूस के शीर्ष नेतृत्व को इस लैंडिंग की कोई आधिकारिक भनक नहीं थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कॉव ने स्पष्ट किया है कि मास्को के पास इस अमेरिकी सैन्य विमान के आने को लेकर कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। इसके अलावा, रूसी सरकारी मीडिया का भी कहना है कि इस सप्ताह मास्को में किसी भी अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी के साथ कोई बैठक निर्धारित नहीं थी।एक तरफ खतरनाक होती जंग, दूसरी तरफ रहस्ययह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब रूस और यूक्रेन के बीच का युद्ध बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। हाल ही में रूस के तीव्र मिसाइल हमलों में यूक्रेन की राजधानी कीव में भारी तबाही मची है और कई बेकसूर नागरिकों की जान गई है। यूक्रेन इस समय गंभीर वायु रक्षा मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर की कमी से जूझ रहा है। यूक्रेनी नेतृत्व लगातार पश्चिमी देशों से अतिरिक्त सैन्य सहायता की गुहार लगा रहा है। ऐसे नाज़ुक वक्त में अमेरिकी सैन्य विमान का अचानक रूस की राजधानी पहुंचना और दोनों महाशक्तियों का इस पर साधी गई चुप्पी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी बड़े कूटनीतिक फेरबदल या गुप्त संवाद की ओर इशारा कर रही है।
अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए राहें अब कठिन होती जा रही हैं। कड़े आव्रजन नियमों और वीजा नीतियों के चलते शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में अमेरिकी कॉलेजों में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 15 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। 'कॉमन ऐप' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 1,100 से अधिक अमेरिकी संस्थानों के इस मंच पर अंतरराष्ट्रीय आवेदनकर्ताओं की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी आई है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। भारत वर्तमान में अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत है, लेकिन अब अमेरिका की बदलती नीतियों के कारण छात्रों का रुझान अन्य देशों की ओर बढ़ रहा है।'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नियम की समाप्ति और भारी फीस का दबावइस गिरावट के पीछे अमेरिकी सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदम मुख्य वजह माने जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने पारंपरिक 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नियम को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत अब छात्रों के वहां रहने की अवधि को अधिकतम चार साल तक सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के अवसरों से जुड़े 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) कार्यक्रम का लाभ उठाने वाले विदेशी छात्रों पर एक लाख डॉलर तक का भारी शुल्क लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ फॉरेन स्टूडेंट एडवाइजर्स' और शोध फर्म 'जेबी इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, इन अनिश्चितताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय छात्र पंजीकरण में लाखों की कमी आने की आशंका है।अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी उठाना पड़ रहा है बड़ा आर्थिक नुकसानभारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के इस तरह मोहभंग होने का असर केवल विद्यार्थियों के करियर पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने स्थानीय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगभग 41.77 अरब डॉलर का योगदान दिया था, जो आने वाले समय में घटकर 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वीजा नीतियां और अनुपालन नियम ऐसे ही सख्त बने रहे, तो अमेरिका वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में अपनी साख खो सकता है, क्योंकि अब भारतीय छात्र ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय देशों के विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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मॉस्को में उतरा अमेरिकी एयरफोर्स का विमान? रूस ने कहा- हमें इस बारे में कुछ नहीं पता
अमेरिका के एक C-17A सैन्य परिवहन विमान के मॉस्को पहुंचने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान एंड्रयूज एयरफोर्स बेस से रवाना हुआ, रीगा के रास्ते रूस पहुंचा, लेकिन क्रेमलिन ने कहा कि उसे विमान के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
चीन ने ईरान का साथ दिया तो क्या बेअसर होंगे अमेरिका के प्रतिबंध?
अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए अपने ताज़ा प्रतिबंधों को आर्थिक डी-डे बताया है, लेकिन ईरान का कहना है कि उसके पास इनसे निपटने की योजना है.
यूक्रेन जंग के बीच मॉस्को में क्यों उतरा अमेरिकी मिलिट्री C-17 विमान? गहराया राज
एक तरफ रूस और यूक्रेन के बीच जंग और इन सबके बीच मॉस्को पहुंच गया अमेरिकी जंगी विमान। आखिर क्या है इसके पीछे मकसद और क्या है इरादा? इसको लेकर राज गहरा गया है…
जमुई की लक्ष्मी भार्गव ने मॉडलिंग की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नक्सल प्रभावित जमुई जिले के हरनाहा निवासी उमाकांत सिंह और विभा देवी की बेटी लक्ष्मी ने मिस रीना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 का खिताब जीता है। उन्होंने बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के विभिन्न राज्यों से आई प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह सफलता प्राप्त की। यह भव्य ग्रैंड फिनाले गुजरात के अहमदाबाद स्थित ईकेए एरिना में आयोजित किया गया था। ग्रैंड फिनाले से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. लगातार सपोर्ट के लिए आभार व्यक्त किया इस जीत के साथ ही लक्ष्मी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। वह वर्ष 2027 में बोलीविया में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। खिताब जीतने के बाद लक्ष्मी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने इस सफर में परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। साल 2021 में बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता लक्ष्मी ने कहा कि अब उनकी कोशिश अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की संस्कृति, आत्मविश्वास, खूबसूरती और मजबूती को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की होगी। लक्ष्मी का मॉडलिंग का सफर चुनौतियों भरा रहा है। करियर की शुरुआत में उन्हें सामाजिक सोच और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी उपलब्धियों की शुरुआत वर्ष 2021 में पटना में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से हुई, जहां उन्होंने बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी लक्ष्मी फरवरी 2022 में उन्होंने मिस बेतिया का खिताब अपने नाम किया और उसी वर्ष मिस टीन इंडिया सुपरमॉडल भी बनीं। वर्ष 2025 में लक्ष्मी ने मिस फेस ऑफ इंडिया का खिताब जीता और मिस साउथ एशिया यूनिवर्स प्रतियोगिता में सेकंड रनर अप रहीं। मिस रीना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 का खिताब जीतने के बाद अब उनकी निगाहें अंतरराष्ट्रीय मंच पर टिकी हैं। जमुई की इस बेटी की उपलब्धि से उनके परिवार, जिले और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है।
अमेरिका ने ईरान पर क्या नए प्रतिबंध लगाए? देखें दुनिया आजतक
अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर पर नए प्रतिबंध लग दिए हैं...वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान को अलग-थलग करने और तेहरान के साथ व्यापार करने वाले दूसरे देशों को सजा देने के मकसद से ये प्रतिबंध लगाए गए हैं. देखें...
US Canada Trade War:
दक्षिण कोरिया-अमेरिका अब भी कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण लक्ष्य पर कायम
सोल, 25 अगस्त . दक्षिण कोरिया और अमेरिका कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने Tuesday को यह स्पष्ट किया. यह बयान दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच हालिया फोन वार्ता के आधिकारिक विवरण में ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ शब्द के स्पष्ट रूप ... Read more
अमेरिका का ईरान पर बड़ा आर्थिक प्रहार, वीडियो में जाने क्रिप्टो से लेकर शिपिंग तक 5 सेक्टरों पर लगाए नए प्रतिबंध
अमेरिका में बड़ा वीजा एक्शन, 2 लाख विदेशी नागरिकों के B1-B2 वीजा रद्द करने की तैयारी; वीडियो में जाने शरण मांगने वालों पर नजर
अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या घटी, अंडरग्रेजुएट दाखिलों में 15% गिरावट; वीडियो में जाने वीजा नीतियों की अनिश्चितता का असर
US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक' करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' करार दिया है।वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।सीधे नहीं, 'चीन फैक्टर' से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दीएनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।क्या रूस से मिलेगा सहारा?भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटकामिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का 'वॉर-रिस्क इंश्योरेंस' 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभावभारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह 'सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट' के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।
Crude oil prices fall: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। क्रूड ऑयल 3 फीसदी से ज्यादा टूटा। ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 के स्तर से नीचे गिरकर $89.25 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 3% से ज़्यादा गिरकर $82.20 पर आ गया।कच्चे तेल में यह गिरावट पिछले सत्र में शुरू हुई गिरावट का ही सिलसिला है, क्योंकि बाज़ार ने ईरान पर अमेरिका की बढ़ी हुई पाबंदियों के तुरंत असर को नजरअंदाज़ किया और मध्य पूर्व से कच्चे तेल की सप्लाई में बड़ी रुकावट की आशंकाओं के कम होने पर ध्यान केंद्रित किया।सोमवार को दोनों बेंचमार्क 2% से ज़्यादा नीचे बंद हुए थे, जिसमें WTI एक हफ़्ते के निचले स्तर पर आ गया था, क्योंकि निवेशकों ने दो हफ़्ते की तेज़ी के बाद मुनाफ़ा वसूली की थी। यह ताज़ा गिरावट तब आई जब बाज़ार ने ईरान पर तुरंत सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के अमेरिकी प्रशासन के फैसले का आकलन किया।सैक्सो बैंक में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के प्रमुख ओले हैनसेन ने रॉयटर्स को बताया, ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल संघर्ष में सैन्य टकराव से आर्थिक दबाव की ओर बढ़ने से तेल बाज़ार की कुछ चिंताएं कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि पाबंदियों की घोषणा उतनी सख़्त नहीं थी जितनी बाज़ार को आशंका थी।अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान की आर्थिक जीवनरेखा को काटने के उद्देश्य से पाबंदियों के विस्तार की घोषणा की और देशों से तेहरान के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने या डॉलर-आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने के जोखिम का सामना करने का आह्वान किया।हालांकि, बेसेंट ने उन देशों की पहचान नहीं की जिन्हें दंड का सामना करना पड़ सकता है या उनके कार्यान्वयन के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा कि इसके बजाय देशों को नियमों का पालन करने के लिए समय दिया जाएगा।ईरान ने बढ़ी हुई पाबंदियों का जवाब देने का संकल्प लिया है, साथ ही भरोसा जताया है कि प्रमुख व्यापारिक साझेदार वाशिंगटन के दबाव अभियान का विरोध करेंगे।अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि वाशिंगटन ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं करेगा। हालांकि, आर्थिक दबाव पर ज़्यादा ज़ोर देने से क्षेत्र में तेल की सप्लाई के लिए और खतरों के बारे में तत्काल चिंताएं कम हो गई हैं।सप्लाई में रुकावट का जोखिम बना हुआ हैतत्काल जोखिम प्रीमियम में कमी का मतलब यह नहीं है कि तेल बाज़ार सप्लाई को लेकर निश्चिंत हो गया है।KCM के मुख्य बाज़ार विश्लेषक टिम वॉटरर ने रॉयटर्स को बताया, ईरान के पास अभी भी शिपिंग में रुकावट डालकर जवाब देने की क्षमता है, जिससे तेल की कीमत में कुछ प्रीमियम बना हुआ है।होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग एक विशेष चिंता का विषय बनी हुई है। शिपिंग डेटा के अनुसार, सोमवार को इस अहम समुद्री रास्ते से सामान ले जाने वाले सिर्फ़ दो टैंकर गुज़रे; मई की शुरुआत के बाद से यह एक दिन में गुज़रने वाले टैंकरों की सबसे कम संख्या है।आमतौर पर दुनिया में इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुज़रता है, इसलिए वहां लंबे समय तक रुकावट आने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने बताया कि मंगलवार को एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात चीज़ से हमला हुआ, जिससे वह ओमान के 'अश शिशाह' से लगभग नौ नॉटिकल मील (16.7 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में खराब होकर रुक गया।इस टकराव की वजह से कई देशों ने अपने कमर्शियल और रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, क्योंकि सरकारें सप्लाई में संभावित रुकावटों के लिए तैयारी कर रही हैं।इसके अलावा, क्षेत्रीय गवर्नर ने बताया कि रात में रूस के दक्षिणी रोस्तोव इलाके में यूक्रेनी ड्रोन हमले से नोवोशाख्तिंस्क तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा, जिसके कारण वहां कामकाज रोकना पड़ा।हालांकि, फिलहाल तेल बाज़ार का ध्यान इस बात पर ज़्यादा है कि सप्लाई से जुड़े जोखिमों में अभी कोई अचानक बढ़ोतरी नहीं हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पता चलता है कि ट्रेडर हालिया प्रतिबंधों को नज़रअंदाज़ करने को तैयार हैं — कम से कम तब तक, जब तक कि इस बात के साफ़ सबूत न मिल जाएं कि टकराव की वजह से तेल की असल सप्लाई में रुकावट आ रही है।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
अमेरिका का $950 अरब का मास्टरप्लान: शेयर, बॉन्ड और डॉलर के निवेशकों और भारतीय बाजार पर असर
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कनाडा कैसे पलटवार करके ट्रंप और अमेरिका को नुक़सान पहुंचा सकता है? - BBC
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ऑल टाइम फेवरिट हैं कैप्टन अमेरिका के ये 5 एक्शन सीन, इनमें से कौन सा है आपका पसंदीदा?
Top 5 Most Powerful Action Scenes: कैप्टन अमेरिका को मार्वल के सबसे पसंदीदा सुपरहीरोज में इसलिए भी गिना जाता है, क्योंकि उसके बिना फैंसी सुपरपावर्स के उसके एक्शन सीन काफी रियलिस्टिक लगते हैं।
'ट्रंप को बिना तेल के कारें चलाते देखना चाहूंगा': कनाडा किस तरह अमेरिका को नुक़सान पहुंचा सकता है?
कनाडा अपना लगभग 70 फ़ीसदी सामान अमेरिका में बेचता है. लेकिन अब बढ़ते ट्रेड वॉर के कारण हालात तेज़ी से बदल रहे हैं. कनाडा के पास क्या विकल्प हैं?
चीनी लंबे समय से हमारे खानपान का हिस्सा रही है. खासकर 17वीं सदी से 19वीं सदी तक विश्व में चीनी के व्यापार और उत्पादक देशों पर वर्चस्व को लेकर कई युद्ध लड़े गए.
ईरान की तरफ से पहले डोनाल्ड ट्रंप की पत्नि मेलानिया ट्रंप को धमकियां मिल चुकी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि यह पहली बार है जब उनके छोटे बेटे बैरन को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया गया है.
अमेरिका ने ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर कसा शिकंजा, आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी
वाशिंगटन, 25 अगस्त 2026 । अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी प्रशासन की नई प्रतिबंध रणनीति का उद्देश्य ईरान की कमाई के प्रमुख स्रोतों और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को प्रभावित करना है। वॉशिंगटन ने यह भी चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों […] The post अमेरिका ने ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर कसा शिकंजा, आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी appeared first on Rashtriya Ujala .
ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाएगा कनाडा, आज हो सकता है ऐलान
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है। दोनों ओर से जुबानी जंग छिड़ी हुई है।
अमेरिका की हरकत से भारत के 1.63 अरब डॉलर के कारोबार पर चोट, ईरान के बाजार तक पहुंच हुई मुश्किल!
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों से भारत-ईरान का 1.63 अरब डॉलर का व्यापार प्रभावित होगा, खासकर चावल, चाय और दवाइयों का निर्यात। UAE के माध्यम से होने वाले भुगतान में बाधा आने और तुर्की को वैकल्पिक मार्ग बनाने से माल ढुलाई लागत व समय में भारी वृद्धि होगी।
अमेरिकी आयोग USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है, जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। जानिए क्या है यूएससीआईआरएफ, इसका इतिहास और पिछले 20 वर्षों के बड़े विवाद।
हवा चली, आग बेकाबू... अमेरिकी शहर में जंगल राख, 24 हजार लोग बेघर
अमेरिका के नेवादा में रेनो शहर के पास लगी भीषण जंगल की आग तेजी से फैल रही है. 15 हजार एकड़ से ज्यादा इलाका जल चुका है, जबकि 24 हजार लोग बेघर हो गए हैं.
दुश्मनों को जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए: ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी
ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिज़ादेह ने अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों को और बढ़ाने के फैसले को खारिज कर दिया है और कहा है कि तेहरान अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। एक बयान में, अली मदानिज़ादेह ने कहा कि दुश्मन ईरान के खिलाफ आर्थिक हमला करना चाहते हैं, लेकिन ईरान […] The post दुश्मनों को जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए: ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
पाकिस्तान बॉर्डर के पास अभ्यास करेगा अमेरिकी F35 फाइटर जेट!
अमेरिकी वायुसेना के पांचवीं पीढ़ी के F35 फाइटर जेट संभवतः पहली बार भारत के तरंग शक्ति 2026 अभ्यास में शामिल होंगे. जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक होने वाले बहुराष्ट्रीय अभ्यास में 30 से अधिक देश भाग लेंगे.
Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
अमेरिकी सांसद ने जेल में बंद पाक के पूर्व पीएम इमरान के साथ ‘अमानवीय’ व्यवहार का मुद्दा उठाया
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने जेल में बंद Pakistan के पूर्व Prime Minister इमरान खान के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के घटनाक्रम Pakistan में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर चिंताजनक संकेत देते हैं. सुब्रमण्यम ने ... Read more
‘रवैया बदले अमेरिका, तभी होगी बात’, अमेरिका की टैरिफ धमकी पर कार्नी सख्त; जवाबी टैक्स की तैयारी
ओटावा, 25 अगस्त . अमेरिका की ओर से नए टैरिफ लगाने की धमकियों के बाद कनाडा के Political नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया और सख्त कर दी है. क्यूबेक में बोलते हुए कनाडा के Prime Minister मार्क कार्नी ने कहा कि अगर अमेरिका अपना रवैया बदलता है, तो कनाडा बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने कहा ... Read more
डोनाल्ड ट्रंप पिछले दिनों चीन की यात्रा कर चुके हैं और अब उन्होंने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो सप्ताह के भीतर अमेरिका आने वाले हैं। सामने से दिख रहा है कि दोनों देशों के नेता बातचीत कर रहे हैं, उच्चस्तरीय संपर्क बनाए हुए हैं और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तनाव को नियंत्रित करने का संदेश दे रही हैं। लेकिन इस कूटनीतिक मुस्कान के पीछे हकीकत बिल्कुल अलग है। वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच एक नया शीत युद्ध पूरी रफ्तार से चल रहा है और उससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि दोनों पक्ष भविष्य के संभावित युद्ध की तैयारी अभी से कर रहे हैं। हम आपको बता दें कि व्यापार, तकनीक, ताइवान, दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक में प्रभाव की लड़ाई अब कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गयी है। चीन अपनी मिसाइल और हाइपरसोनिक ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, जबकि अमेरिका प्रशांत महासागर के द्वीपों, सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के नेटवर्क के जरिए बीजिंग को घेरने की रणनीति तैयार कर रहा है। यानी सामने बातचीत है, लेकिन पर्दे के पीछे युद्ध की शतरंज बिछ चुकी है। इसे भी पढ़ें: Russia में Jaishankar, China में Doval, Japan में Piyush Goyal ने संभाला मोर्चा, आखिर क्या है Modi का मिशन? चीन का नया हाइपरसोनिक दांव, अमेरिका की युद्ध मशीन पर सीधा निशाना इस उभरते टकराव में चीन का सबसे नया और सबसे खतरनाक कदम उसकी हाइपरसोनिक क्षमता से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक चीनी सेना ने ऐसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल विकसित किए हैं, जो हवा से हवा में मार करने वाले हथियार लॉन्च कर सकते हैं। यह क्षमता अमेरिका के उन महंगे और अत्यंत महत्वपूर्ण विमानों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, जो अब तक युद्धक्षेत्र से हजारों किलोमीटर दूर रहकर अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे। चीन का निशाना केवल किसी लड़ाकू विमान को गिराना नहीं है। उसकी रणनीति अमेरिका की पूरी एयर ऑपरेशन आर्किटेक्चर को चोट पहुंचाने की है। अमेरिकी टैंकर विमान, एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम और E-4B Nightwatch जैसे उड़ते कमांड पोस्ट अमेरिका की सैन्य ताकत की रीढ़ हैं। टैंकर लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी तक पहुंच देते हैं, AWACS दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखता है और एयरबोर्न कमांड प्लेटफॉर्म युद्ध संचालन को नियंत्रित करते हैं। अगर चीन इन “दूर लेकिन निर्णायक” लक्ष्यों तक पहुंचने की क्षमता हासिल कर लेता है, तो अमेरिका की पूरी हवाई युद्ध प्रणाली दबाव में आ सकती है। चीन की मिसाइल ताकत का पैमाना भी इस खतरे को और गंभीर बनाता है। अमेरिकी आकलन के अनुसार चीन के पास 2024 तक कम से कम 3,150 बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 300 ग्राउंड लॉन्च्ड क्रूज मिसाइलें थीं। DF-17 से लॉन्च किया गया हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल लगभग 1,500 मील तक जा सकता है, जबकि DF-27 की अनुमानित रेंज लगभग 5,000 मील है। यानी चीन अब केवल अपने तटीय क्षेत्र की रक्षा की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूरस्थ ऑपरेशनल नेटवर्क को भी खतरे में लाने की क्षमता बढ़ा रहा है। हालांकि इस हथियार के इस्तेमाल की अपनी जटिलताएं भी हैं। हजारों किलोमीटर दूर उड़ते विमान को निशाना बनाने के लिए बेहद सटीक और लगातार अपडेट होने वाली टारगेटिंग जानकारी चाहिए। मिसाइल की लंबी “किल चेन” को बाधित किया जा सकता है और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च को परमाणु हमले के रूप में गलत समझे जाने का खतरा भी मौजूद है। लेकिन अगर चीन इन तकनीकी चुनौतियों को प्रभावी ढंग से पार कर लेता है, तो अमेरिका के लिए यह रणनीतिक सिरदर्द बन सकता है। अमेरिका की घेराबंदी, चीन का जवाब अमेरिका की रणनीति भी कम आक्रामक नहीं है। वॉशिंगटन प्रशांत क्षेत्र में जापान, ताइवान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों के सहारे चीन को पहली द्वीप श्रृंखला के भीतर सीमित रखने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर गुआम, कैरोलाइन द्वीप और टिनियन जैसे ठिकाने अमेरिकी सैन्य अभियानों के महत्वपूर्ण लॉन्चपैड हैं। अमेरिका की योजना है कि छोटे-छोटे द्वीपों और ठिकानों पर अपनी सैन्य क्षमता को फैलाया जाए ताकि चीन के सामने एक ही बड़ा लक्ष्य न रहे, बल्कि उसे असंख्य ठिकानों और लॉन्च पोजीशन से जूझना पड़े। इन द्वीपों को समुद्र में किलों की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी है। NMESIS जैसे लगभग 300 किलोमीटर रेंज वाले हथियारों के जरिए चीन की नौसेना के लिए समुद्री इलाकों को खतरनाक बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। इसके पीछे अंतरिक्ष, हवा, जमीन और समुद्र के नीचे तक फैला निगरानी नेटवर्क काम करेगा। लेकिन चीन भी इस अमेरिकी घेराबंदी को समझ चुका है। बीजिंग की रॉकेट फोर्स अब उन्हीं अमेरिकी एयरबेस और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी कर रही है, जिनके सहारे वॉशिंगटन भविष्य के किसी संघर्ष में चीन पर दबाव बनाना चाहता है। यही इस नए हथियारों के मुकाबले की असली तस्वीर है। यानि अमेरिका चीन को द्वीपों से घेरना चाहता है, जबकि चीन मिसाइलों से उन द्वीपों और अमेरिकी ठिकानों को निशाने पर लेना चाहता है। ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात, लेकिन तनाव जस का तस इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि शी जिनपिंग दो सप्ताह में अमेरिका आ सकते हैं। ट्रंप ने अपने चीन दौरे और बीजिंग के ग्रेट हॉल का उल्लेख करते हुए व्हाइट हाउस परिसर में नए निर्माण, बॉलरूम और एक सैन्य परिसर की योजना का भी जिक्र किया। हालांकि जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा को लेकर चीन की ओर से उपलब्ध सामग्री में कोई अलग आधिकारिक घोषणा नहीं थी। यह संभावित मुलाकात दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने का संकेत जरूर है, लेकिन इससे रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिलते। ताइवान, व्यापार, तकनीक, दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक पर दोनों देशों के हित सीधे टकराते हैं। इसलिए कूटनीतिक बातचीत का एक उद्देश्य तनाव को नियंत्रित करना भी है, ताकि यह प्रतिस्पर्धा अनियंत्रित सैन्य टकराव में न बदल जाए। अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी है खाली होते हथियार भंडार उधर, शिंगटन के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि जिस समय वह चीन के साथ संभावित लंबे संघर्ष की तैयारी कर रहा है, उसके हथियार भंडार पहले ही भारी दबाव में हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका और उसके सहयोगियों ने बड़े पैमाने पर हथियार उपलब्ध कराए। इसके बाद ईरान के साथ संघर्ष ने प्रिसिजन हथियारों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की मांग और बढ़ा दी। स्थिति इतनी गंभीर है कि अमेरिका के सामने अब केवल महंगे और अत्याधुनिक हथियारों का उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं माना जा रहा। कई सिस्टमों की उत्पादन अवधि तीन से चार साल तक हो सकती है। इसलिए अब “प्रिसाइज मास” की सोच पर जोर दिया जा रहा है। यानी बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन, सेंसर और ऐसे हथियार तैयार करना जिन्हें तेजी से बनाया जा सके और युद्ध में बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सके। बहरहाल, ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकातें दुनिया को तनाव कम होने का संदेश दे सकती हैं, लेकिन जमीन पर अमेरिका और चीन दोनों भविष्य के संघर्ष के लिए अपनी-अपनी सैन्य मशीन को तैयार कर रहे हैं। चीन हाइपरसोनिक हथियारों और विशाल मिसाइल शक्ति से अमेरिकी सैन्य नेटवर्क की नसों पर वार करने की क्षमता विकसित कर रहा है। वहीं अमेरिका द्वीपों, गठबंधनों, पनडुब्बियों और फैले हुए सैन्य ठिकानों के जरिए चीन को घेरने की कोशिश कर रहा है। अब सवाल यह उठता है कि बातचीत की मेज के पीछे दोनों महाशक्तियां जिस युद्ध की तैयारी कर रही हैं, अगर वह कभी वास्तविक संघर्ष में बदल गया तो प्रशांत महासागर में पहला वार कौन करेगा और कौन उसे सहने के लिए ज्यादा तैयार होगा? -नीरज कुमार दुबे
अमेरिका में विदेशी छात्रों की कमी: आवेदन 10% घटे, नए दाखिले में भी गिरावट; वीजा नियम में सख्ती से बदला रुझान?
अमेरिका ने ईरान पर लगाए 'अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध', भारत पर ये असर - BBC
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'रवैया बदले अमेरिका, तभी होगी बात', अमेरिका की टैरिफ धमकी पर कार्नी सख्त; जवाबी टैक्स की तैयारी
अमेरिका की ओर से नए टैरिफ लगाने की धमकियों के बाद कनाडा के राजनीतिक नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया और सख्त कर दी है। क्यूबेक में बोलते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अगर अमेरिका अपना रवैया बदलता है, तो कनाडा बातचीत के लिए तैयार है।
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अमेरिका से भारतीय छात्रों का मोहभंग! UG एडमिशन में 15% गिरावट, अब जर्मनी-कनाडा समेत इन देशों का रुख
अमेरिका से भारतीय छात्रों का मोहभंग! UG एडमिशन में 15% गिरावट, अब जर्मनी-कनाडा समेत इन देशों का रुख
भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में ढेरों छात्र अमेरिका स्थिति दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी या संस्थानों से पढ़ाई का सपना देखते हैं। लेकिन हाल फिलहाल में अमेरिकी संस्थानों से छात्रों का मोहभंग देखने को मिल रहा है। कम से कम भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की कमी देखने को मिल रही है। ये गिरावट इसलिए भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि शैक्षिक सत्र 2026-27 में अमेरिकी शैक्षिक संस्थाना में कुल अंडरग्रेजुएट आवेदन की संख्या बढ़ी है।अमेरिका में 1,100 से अधिक इंस्टीट्यूशन का प्रतिनिधित्व करने वाली गैर लाभकारी संस्था (NGO) कॉमन ऐप के डेटा के मुताबिक, इमिग्रेशन पॉलिसी सख्त होने और स्टूडेंट वीजा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की गिरावट आई है। इस बीच, कई अमेरिकी यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय छात्रों से 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौटने की अपील कर रही हैं। यहां पारंपरिक स्टेटस की ड्यूरेशन व्यवस्था की जगह निश्चित अवधि वीजा स्टे वाले नए नियम लागू होने वाले हैं।कॉमन ऐप की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए 1 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय अंडरग्रेजुएट आवेदन में 10% की गिरावट आई थी। इसने इस गिरावट को अपने डेटा में दर्ज सबसे बड़ी गिरावट बताया, जबकि कुल मिलाकर आवेदन में बढ़ोतरी बनी हुई है। भारत में 15% की गिरावट दर्ज की गई, जो इस बात को देखते हुए काफी है कि यह अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शैक्षिक सत्र 2024-25 के दौरान 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिकी संस्थानों में प्रवेश लिया।अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का एक नया नियम है, जो स्टूडेंट और एक्सचेंज वीजा के लिए ट्रेडिशनल स्टेटस की ड्यूरेशन सिस्टम को ऑथराइज्ड स्टे के फिक्स्ड पीरियड से बदल देता है। यह नियम 15 सितंबर से लागू होने वाला है। विश्वविद्यालय हर संभव तरीके से छात्रों और स्कॉलर्स को संपर्क कर सूचित कर रहे हैं कि उनके इमिग्रेशन के स्टेटस पर इसका क्या असर होगा।द हार्वर्ड क्रिमसन के मुताबिक, हार्वर्ड के अंतरराष्ट्रीय कार्यालय ने ऑन-कैंपस कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले F-1 और J-1 छात्रों के साथ-साथ J-1 स्कॉलर्स को सलाह दी है कि नए नियम लागू होने के बाद वे अमेरिका में रहने पर विचार करें। यह अंतर इसलिए जरूरी है क्योंकि जो लोग नियम लागू होने के समय पहले से अमेरिका में हैं, उनके साथ उन लोगों से अलग बर्ताव किया जाएगा जो बाद में देश में दाखिल होते हैं। पीटीआई ने एक यूनिवर्सिटी एडवाइजरी का जिक्र किया है जिसमें कहा गया है कि जो छात्र पहले से अमेरिका में हैं, उनके I-94 रिकॉर्ड पर मौजूदा “D/S” नोटेशन बना रहेगा, जबकि 15 सितंबर से आने वालों को एक फिक्स्ड “एडमिट टिल डेट” मिलेगी।जो स्टूडेंट्स अभी अमेरिका में हैं, वे अपने शैक्षिक कार्यक्रम के खत्म होने या काम पूरा होने के बाद काम करने की मंजूरी खत्म होने तक, अधिक से अधिक चार साल के समय तक बिना एक्सटेंशन मांगे रह सकते हैं। जो लोग विदेश यात्रा करके 15 सितंबर के बाद लौट रहे हैं, वे इसके बजाय नए फिक्स्ड-टर्म सिस्टम के तहत आ सकते हैं। इन बदलावों से इस बात पर भी असर पड़ सकता है कि स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका छोड़ने या अपना स्टेटस ठीक करवाने में कितना समय लगेगा।मौजूदा व्यवस्था के तहत, F-1 छात्रों को आम तौर पर 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है, जबकि J-1 भागीदारों को 30 दिन का। नए नियम में F-1 ग्रेस पीरियड को घटाकर 30 दिन किया जाएगा। पीटीआई के मुताबिक, शिकागो यूनिवर्सिटी, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसी यूनिवर्सिटीज ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों, स्कॉलर और लोगों को वैकल्पिक प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के बारे में जानकारी दी है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को 8 सितंबर को क्लास शुरू होने से पहले न्यूयॉर्क लौटने की सलाह दी है, और कहा है कि यह सलाह नए नियम को लागू करने की टाइमलाइन से जुड़ी है।पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की अनुमानित संख्या 2025-26 में लगभग 11.69 लाख से घटकर 2026-27 में 10.57 लाख होने का अनुमान है। इस गिरावट का बड़ा आर्थिक असर हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने फॉल 2025-26 के दौरान स्थानीय अमेरिकी इकॉनमी में लगभग $41.77 अरब का योगदान दिया, और 2026-27 में यह आंकड़ा घटकर $38.37 अरब होने का अनुमान है।भारतीय छात्रों के लिए एक और बड़ी चिंता ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम का भविष्य है, जो योग्य अंतरराष्ट्रीय स्नातकों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने की इजाजत देता है। ट्रंप प्रशासन ओपीटी का इस्तेमाल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए $100,000 फीस पर विचार कर रहा है। यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिससे उन छात्रों के लिए अमेरिकी डिग्री हासिल करने की लागत काफी बढ़ सकती है जो ग्रेजुएशन के बाद वहां काम का अनुभव हासिल करना चाहते हैं।School Holiday Tomorrow: क्या कल बंद रहेंगे स्कूल? जानें यूपी, बिहार, झारखंड और दिल्ली-एनसीआर पर क्या है ताजा अपडेट
US: अमेरिका ने कसा ईरान पर शिकंजा, भारत की चार कंपनियों पर भी प्रतिबंध; पेट्रोलियम कारोबार से जुड़ा है मामला---US Sanctions Four India-Based Companies Over Alleged Iran Petroleum Trade Links
अमेरिका का ईरान पर बड़ा आर्थिक वार, 5 सेक्टर पर प्रतिबंध से भारत पर भी पड़ सकता है असर
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ड्रोन युद्ध का नया दौर ! लेजर और माइक्रोवेव से दुश्मन के UAV गिराने निकला अमेरिका, भारत भी रेस में
रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद एंटी-ड्रोन तकनीक पर दुनिया का फोकस बढ़ा है. अमेरिकी सेना लेजर और माइक्रोवेव हथियारों का बड़ा परीक्षण करने जा रही है. जानिए यह तकनीक कैसे काम करती है और भारत D4 जैसे सिस्टम के साथ इस रेस में कहां खड़ा है.
अमेरिका को ईरान के प्रति अपना रवैया और भाषा बदलनी होगी: राष्ट्रपति पेजेश्कियन
तेहरान, 25 अगस्त . ईरान के President मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि अमेरिका को ईरान के प्रति अपनी भाषा और नजरिया में बदलाव करना चाहिए. President कार्यालय की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, पेजेशकियन ने Monday को तेहरान में Pakistan के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ बैठक के दौरान यह ... Read more
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव को और तेज करते हुए उसकी अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम सेक्टरों को निशाने पर लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त 2026 को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का ऐलान करते हुए कहा कि वॉशिंगटन का मकसद ईरान की उन आर्थिक लाइफलाइन को कमजोर करना है, […] The post ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर अमेरिका का बैन! सोना-टेक्नोलॉजी से शिपिंग तक निशाना, बिजनेस करने वालों को भी चेतावनी first appeared on Sanjeevni Today .
ईरान को अलग-थलग करने के लिए अमेरिका ने शुरू किया आर्थिक युद्ध, नेतन्याहू ने दी बधाई
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य तेहरान की आर्थिक जीवनरेखाओं को काटकर उसे पूरी तरह अलग-थलग करना है. साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि जो लोग खुद को तेहरान से जोड़कर रखेंगे उन्हें भी ... Read more
वॉशिंगटन, 25 अगस्त . अमेरिका के 30 सीनेटरों के एक समूह ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से छात्र और एक्सचेंज विजिटर वीजा की प्रक्रिया में हो रही देरी को दूर करने की अपील की है. उनका कहना है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो कई छात्र नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले अमेरिका नहीं ... Read more
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर किए जा रहे प्रयास आतंकियों को रास नहीं आ रहे।अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद कथित तौर से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र से टारगेट किया गया है।
आतंकवाद प्रायोजक देशों में शामिल नहीं सीरिया, अमेरिकी सूची से नाम हटाए जाने का किया स्वागत
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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार मेंगिरावट दिखी। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले।
अमेरिका की टेररिज्म लिस्ट से सीरिया आउट, ट्रंप ने अपने फेवरेट को दिया 'तोहफा'
ट्रंप प्रशासन ने सीरिया को अमेरिका की टेरर ब्लैकलिस्ट से हटाते हुए एचटीएस की अलग सूचीबद्धता भी खत्म कर दी. वॉशिंगटन का कहना है कि इससे निवेश, आर्थिक बहाली और वैश्विक तंत्र में सीरिया की वापसी का रास्ता खुलेगा.
अमेरिका में AI की वजह से नहीं जाएगी शिक्षकों की नौकरी: शिक्षा मंत्री बोलीं- मशीन नहीं ले सकता इंसान की जगह- Teachers will not lost job due to AI Linda McMahon US Secretary Education says machines cannot replace humans
रेवंत रेड्डी बोले- अमेरिका यात्रा की अनुमति न देना तेलंगाना का अपमान, वीडियो में जाने केंद्र से पूछा- पहले मंजूरी क्यों दी गई?
अमेरिका-ईरान तनाव फिर गहराया, नए प्रतिबंधों के बाद तेहरान ने दिखाया सख्त रुख
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अमेरिका ने ईरान पर लगाए 'अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध', भारत पर ये असर
अमेरिका के लगाए नए प्रतिबंधों का असर सिर्फ़ ईरान ही नहीं दूसरे देशों पर भी पड़ेगा. ईरान के आर्थिक हालात बेहद ख़राब हो चुके हैं. जानिए ये नई पाबंदियां पुराने प्रतिबंधों से कैसे अलग हैं.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो हफ्ते में अमेरिका आएंगे: ट्रंप
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो हफ्ते में अमेरिका आएंगे: ट्रंप
पश्चिम एशिया में जारी लंबे तनाव और भू-राजनीतिक टकराव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और आक्रामक आर्थिक घेराबंदी शुरू कर दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) का आधिकारिक ऐलान करते हुए इसे आर्थिक मोर्चे का 'डी-डे' (Economic D-Day) करार दिया है।इस नई नीति का सीधा उद्देश्य ईरान के वैश्विक व्यापारिक संपर्कों को पूरी तरह काटकर उसकी अर्थव्यवस्था को अलग-थलग (Isolate) करना और उसकी वित्तीय जीवन रेखा को समाप्त करना है। अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी देश, बैंक या कंपनियां ईरान के साथ व्यापार करेंगी, उन पर सख्त सेकेंडरी सैंक्शन्स (Secondary Sanctions) लगाए जाएंगे और उन्हें अमेरिकी डॉलर क्लियरिंग सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।क्या है 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और अमेरिका का 'जीरो-लीकेज' रुख?अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह केवल नियमित प्रतिबंधों की घोषणा नहीं है, बल्कि एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नाकेबंदी है। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी प्रशासन ने उन सभी माध्यमों और नेटवर्कों का नक्शा तैयार किया है जिनका इस्तेमाल ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने, मनी लॉन्ड्रिंग करने और गुप्त तरीके से धन जुटाने के लिए करता रहा है।ग्लोबल नेटवर्क्स पर एक्शन: अमेरिका के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने अवैध मिसाइल व न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी खरीद, साइबर हमलों और तेल तस्करी से जुड़ी करीब 60 वैश्विक संस्थाओं, जहाजों और व्यक्तियों को एक साथ प्रतिबंधित किया है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त चेतावनी: अमेरिका ने वैश्विक जहाजरानी कंपनियों को आगाह किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के लिए ईरान को किसी भी प्रकार का टैक्स या टोल (Toll) देना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन माना जाएगा।तीसरे देशों को अल्टीमेटम: अमेरिकी अधिकारियों की टीमें दुनिया भर के सहयोगी व साझीदार देशों से संपर्क कर रही हैं और उन्हें ईरान के साथ अपने सभी वित्तीय सौदे बंद करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा (Timeline) दे रही हैं।इन 6 अहम क्षेत्रों पर होगा अमेरिका का सीधा और निर्णायक वार'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले 6 प्रमुख स्तंभों को चिन्हित कर उन पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है:कच्चा तेल और शैडो फ्लीट (Crude Oil & Shadow Fleet): ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह शून्य करने के लिए उसके 'शैडो फ्लीट' (अवैध तेल ले जाने वाले गुप्त टैंकरों के नेटवर्क) पर शिकंजा कसा गया है। चीनी रिफाइनरियों और बिचौलियों को तेल पहुंचाने वाले जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया गया है।डिजिटल एसेट्स और क्रिप्टोकरेंसी (Digital Assets & Crypto): अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान द्वारा इस्तेमाल की जा रही वर्चुअल करेंसी और डिजिटल एसेट्स प्लेटफॉर्म्स को ट्रैक कर उन्हें ब्लॉक किया जा रहा है।सोना और कीमती धातुएं (Gold & Precious Metals): स्थानीय मुद्रा (रियाल) की भारी गिरावट को थामने और विदेशी संपत्तियों के बदले गोल्ड ट्रांसफर के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।एविएशन सेक्टर (Aviation): नागरिक और सैन्य विमानन कंपनियों, विमानों के पुर्जों की आपूर्ति और हवाई मार्गों के जरिए हथियारों या नकदी की ढुलाई से जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।शिपिंग और समुद्री परिवहन (Shipping): ईरान के सरकारी और निजी समुद्री शिपिंग नेटवर्क, कंटेनर लॉजिस्टिक्स और बंदरगाहों से संचालित होने वाले कार्गो मूवमेंट पर कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और साइबर नेटवर्क (Technology & Cyber): मिसाइल और ड्रोन तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-टेक पुर्जों की खरीद और महत्वपूर्ण अमेरिकी व वैश्विक बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले करने वाले ऑपरेटरों पर कानूनी कार्रवाई की गई है।वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर क्या होगा असर?अमेरिकी वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दुनिया भर के बैंकों को ईरान से अलग होने के लिए एक संक्षिप्त मोहलत (Cure Period) दी जा रही है, लेकिन यदि किसी बड़े वित्तीय संस्थान ने नियमों का उल्लंघन जारी रखा, तो उस पर इसी सप्ताह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।दूसरी ओर, इस आक्रामक आर्थिक वार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह इस 'आर्थिक युद्ध' का जवाब देने के लिए तैयार है, जिससे आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया का तनाव और अधिक गहराने के आसार हैं।
अमेरिका के चुनाव में ट्रंप का खेला या बदलाव? SC ने भी दी मंजूरी
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनके उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ कर दिया है, जिसमें मेल से वोट डालने की प्रक्रिया पर नए प्रतिबंध लगाने की बात है. हालांकि, कई राज्यों की आपत्ति और आगे की कानूनी चुनौती का रास्ता अभी खुला है.
अमेरिका में नौकरी चाहने वालों के लिए एक और बैड न्यूज, अब ट्रंप H-1B वीजा पर वसूलेंगे 1 करोड़ की फीस!
इससे पहले अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप सरकार की H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने की योजना को रद्द कर दिया था.
पश्चिम एशिया में जारी लंबे सैन्य टकराव और कूटनीतिक गतिरोध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच की जंग अब सबसे आक्रामक वित्तीय और आर्थिक मोर्चे पर पहुंच गई है। सैन्य अभियानों और बंदरगाहों की नाकेबंदी के बाद भी तेहरान को झुकाने में असफल रहने पर वाशिंगटन ने अब उसकी अंतिम आर्थिक जीवन रेखा को पूरी तरह काट देने का खुला ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक स्तर पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) शुरू करते हुए दुनिया भर के देशों को दो-टूक चेतावनी दी है कि वे ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और वित्तीय संबंध तुरंत तोड़ लें, अन्यथा उन्हें अमेरिकी डॉलर-आधारित बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह बेदखल कर दिया जाएगा।अमेरिकी घोषणा के तुरंत बाद तेहरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के इस आर्थिक आतंकवाद का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।अमेरिका का 'इकोनॉमिक डी-डे': 5 प्रमुख सेक्टरों और 60 संस्थाओं पर नए प्रतिबंधअमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक वित्तीय घेराबंदी शुरू की गई है:5 अहम सेक्टर निशाने पर: अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले 5 प्रमुख क्षेत्रों—डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टो), टेक्नोलॉजी, गोल्ड (सोना), एविएशन (विमानन) और शिपिंग (समुद्री परिवहन)—को सीधे तौर पर लक्षित किया है।60 संस्थाओं पर एक्शन: ईरान के मिसाइल, न्यूक्लियर, साइबर और शैडो-फ्लीट (अवैध तेल टैंकर नेटवर्क) से जुड़ी करीब 60 कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए गए हैं।वैश्विक देशों को अल्टीमेटम: स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सभी वित्तीय चैनलों का नक्शा तैयार कर लिया है और दुनिया के हर देश को एक निश्चित समय-सीमा (Defined Timeline) दी जा रही है ताकि वे ईरान से जुड़े सभी लेन-देन और तेल खरीद पूरी तरह बंद कर दें।अमेरिकी वित्त मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, हमारा स्पष्ट लक्ष्य तेहरान को सहारा देने वाली हर एक आर्थिक जीवन रेखा को काट देना है ताकि यह शासन पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाए। कोई भी बैंक या संस्था यदि ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग या तेल तस्करी में शामिल पाई गई, तो वह अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दी जाएगी। हमारे प्रतिबंधों के दायरे से कोई भी ऊपर नहीं है।'ईरान का तीखा पलटवार: 'हमारा रुख अब रक्षात्मक नहीं, दुश्मन हमले के लिए तैयार रहे'अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों का नया जाल बिछाए जाने पर ईरानी नेतृत्व ने कड़ा और बेबाक जवाब दिया है:ईरानी वित्त मंत्री का बयान: ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, हम अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। स्वाभाविक रूप से दुश्मन हम पर एक आर्थिक आतंकवादी हमला करना चाहता है, लेकिन हमारे पास भी अपने प्रभावी हथियार हैं और हम यह खेल खेलना अच्छी तरह जानते हैं। अब हमारा रुख केवल रक्षात्मक नहीं रहा है; दुश्मनों को हमारे जवाबी वार के लिए तैयार रहना चाहिए।आईआरजीसी की खुली चेतावनी: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचे या ऊर्जा नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो पश्चिम एशिया के सभी महत्वपूर्ण 'एनर्जी चोकपॉइंट्स' और अमेरिकी रणनीतिक ठिकानों पर भारी और विनाशकारी चोट की जाएगी।राष्ट्रपति पेजेशकियन का रुख: पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ तेहरान में हुई शांति वार्ता के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका को ईरान से बात करने का अपना लहजा और रवैया बदलना होगा। दादागीरी और आर्थिक दबाव से हालात केवल और अधिक जटिल होंगे, सुलझेंगे नहीं।वैश्विक ऊर्जा बाजार और प्रमुख साझेदारों की चुनौतीविशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भले ही प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा हो, लेकिन इसे पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा। ईरान पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच जीवित रहने और पैरेलल बैंकिंग व तीसरे देशों के जरिए व्यापार करने की कला में पारंगत हो चुका है।इसके साथ ही, यदि अमेरिका चीन, भारत या तुर्की जैसी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की संस्थाओं पर सीधे सेकेंडरी सैंक्शन्स लगाने का जोखिम उठाता है, तो इससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली और तेल आपूर्ति में भारी उथल-पुथल मच सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से बने तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच यह नया आर्थिक टकराव दुनिया को एक नए महासंकट की ओर धकेल रहा है।
Sudan War: सूडान में 59 हजार मौतों के बाद अमेरिका सख्त, UN से पूरे देश में हथियार बैन की मांग; बढ़ेगा दबाव?---US Seeks Tougher UN Sanctions to Push Sudan Rivals Toward Peace Talks
कनाडाई अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका ने वार्ता के अंतिम चरण में ऐसी अनुचित शर्तें और मांगें रखीं जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। इनमें एक शर्त यह भी शामिल थी जिसके तहत कनाडा किन देशों के साथ भविष्य में व्यापार समझौते कर सकता है, उस पर सीमाएं तय करने का दबाव बनाया जा रहा था।
ट्रंप का बड़ा खुलासा: दो हफ्ते में अमेरिका आएंगे शी जिनपिंग, व्हाइट हाउस में बन रहा ‘चीन जैसा’ ग्रेट हॉल- Trump major revelation Xi Jinping visit US in two weeks China-style Great Hall being built at White House
तेहरान में मुनीर से मिले गालिबाफ: ईरान ने अमेरिका पर लगाया समझौता तोड़ने का आरोप; चीन ने क्या कहा?
तेहरान में मुनीर से मिले गालिबाफ: ईरान ने अमेरिका पर लगाया समझौता तोड़ने का आरोप; चीन ने क्या कहा?
Kurukshetra News: थानेसर के राकेश ने अमेरिका में रहकर कराई श्रीराम कथा
थानेसर के राकेश ने अमेरिका में रहकर कराई श्रीराम कथा
ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'ट्रंप कार्ड', ट्रेड रूट पर सीधा वार; चेतावनी के साथ निशाने पर ये देश
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को चेतावनी दी कि नए प्रतिबंधों से ईरान के सभी राजस्व स्रोत बंद किए जाएंगे। उन्होंने अन्य देशों से आर्थिक संबंध तोड़ने को कहा, वरना जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिका का नया H-1B प्लान, ₹98 लाख से ज्यादा फीस की तैयारी; भारतीयों पर सीधा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन नए एच-1बी वीजा पर 1,03, 265 डॉलर का भारी शुल्क लगाने की तैयारी में है। सोमवार को जारी प्रस्तावित नियम के तहत अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए यह शुल्क लागू किया जा सकता है…
भारत ने इस साल जून में फ्रांस के एवियान में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान ‘सावधानीपूर्ण रुख’ अपनाया था। शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि यह फैसला ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।
पंजाब में किसान संगठन 30 अगस्त से जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरने-प्रदर्शन करेंगे। भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने मानसा में आज जिले भर के किसानों की संयुक्त बैठक की, जिसमें धरने की रूपरेखा तैयार की गई। भारतीय किसान यूनियन उगराहां के जिला अध्यक्ष राम सिंह भैणी बाघा ने बताया कि इन प्रदर्शनों की मुख्य मांगों में भारत-अमेरिका डील को रद्द करना और जबरन भूमि अधिग्रहण से संबंधित 'लैंड पूलिंग' नीति को समाप्त करना शामिल है। किसान पंजाब सरकार की इस नीति का भी विरोध कर रहे हैं। कर्ज माफ करने की मांग भी की जाएगी किसानों द्वारा सभी किसानों के कर्ज माफ करने की मांग भी की जाएगी। किसानों ने अपनी 13 जायज मांगें रखी हैं। इन मांगों को लेकर जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकाल के लिए मोर्चे लगाए जाएंगे और पंजाब तथा केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। आने वाले समय में संघर्ष तेज किया जाएगा किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारें उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती हैं, तो आने वाले समय में इन संघर्षों को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
क्या अब जंग खत्म होगी क्योंकि ईरान को तोड़ने में अमेरिका भी आर्थिक रूप से टूटा
अमेरिका आर्थिक रूप से टूटा The post क्या अब जंग खत्म होगी क्योंकि ईरान को तोड़ने में अमेरिका भी आर्थिक रूप से टूटा appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
एस्प्रेसो से अमेरिकानो तक, जानें कैफे में मिलने वाली 5 ब्लैक कॉफी का स्वाद, ऑर्डर करना होगा आसान
किसी कैफे में जाकर अलग-अलग तरह की कॉफी को देखकर आप भी कंफ्यूज हो जाते हैं तो आपकी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम यहां कैफे में मिलने वाली कुछ मुख्य ब्लैक कॉफी का स्वाद बता रहे हैं। जिसे जानने के बाद अगली बार ऑर्डर देना आसान हो जाएगा।
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की गौरवगाथा अब अमेरिका की सिलिकॉन वैली में भी आकर्षण का केंद्र बनी। फ्रेमोंट शहर में आयोजित इंडिया डे परेड एंड फेयर-2026 में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और मध्य प्रदेश की थीम ‘एमपी-द इनोवेशन हब’ पर तैयार झांकी को ‘मोस्ट ब्यूटीफुल फ्लोट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। भारत की स्वतंत्रता के 80वें और अमेरिका की स्वतंत्रता के 250वें वर्ष के आयोजनों की श्रृंखला के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, विरासत और मध्यप्रदेश की उपलब्धियों को अमेरिकी धरती पर प्रदर्शित किया गया। झांकी में दिखाया अहिल्याबाई का योगदान झांकी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के राष्ट्रनिर्माण, सुशासन, जनकल्याण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान को प्रदर्शित किया गया। इसमें देशभर के मंदिरों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प में उनके योगदान को भी दर्शाया गया। परेड के दौरान झांकी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद निर्णायकों ने इसे ‘मोस्ट ब्यूटीफुल फ्लोट अवार्ड’ के लिए चुना। इंदौर-मध्यप्रदेश के लोगों ने लिया हिस्सा फेस्टिवल ऑफ ग्लोब के चेयरमैन डॉ. रमेश जापरा के आतिथ्य में हुए कार्यक्रम में इंदौर और मध्यप्रदेश से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। झांकी की ओर से यह पुरस्कार केपी माहेश्वरी, रितू माहेश्वरी और अमेरिकंस फॉर हिंदू के प्रेसिडेंट प्रमित माकोड़े ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में काउंसिल जनरल ऑफ इंडिया, सैन फ्रांसिस्को के डॉ. के. श्रीकर रेड्डी भी मौजूद रहे। टीम मध्यप्रदेश की दीपाली साकल्ले, शीतल गुप्ता, पूजा तिवारी, सोनाली शर्मा, पल्लवी विश्वकर्मा, रैना मराठे, राधिका ठाकुर, राखी चौहान, स्वाति निगम और वंदना गोहिल ने भी सहभागिता की। टीम के सदस्यों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर भारतीय और मध्यप्रदेश की संस्कृति को भी प्रस्तुत किया। अमेरिका में आयोजित इस परेड में मध्यप्रदेश की झांकी को मिला सम्मान प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के योगदान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञ का खुलासा: ईरान ने 40 साल पहले ही शुरू कर दी थी अमेरिका से युद्ध की तैयारी, बनाई थी रणनीति
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US Open: क्या यूएस ओपन में फिर दिखेगा फेडरर का जादू? इस अमेरिकी दिग्गज के खिलाफ खेलेंगे खास मुकाबला
20 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन रोजर फेडरर बुधवार को यूएस ओपन के एक खास प्रदर्शनी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। न्यूयॉर्क में पांच बार खिताब जीत चुके फेडरर का सामना 2003 के यूएस ओपन चैंपियन एंडी रॉडिक से होगा।
अमेरिकी जेन-जी ज्यादा आक्रामक: भाषण पसंद न आने पर वक्ता को जबरन रोकने के समर्थक, हिंसा से भी परहेजनहीं
ईरान-अमेरिका तनाव फिर चरम पर, नए प्रतिबंधों की धमकी पर तेहरान का पलटवार
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि प्रतिबंधों की धमकी अब कोई नई बात नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने पहले भी आर्थिक दबाव, नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’: तेहरान बोला- नहीं जाने देंगे तेल की एक भी बूंद
ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’: तेहरान बोला- नहीं जाने देंगे तेल की एक भी बूंद- US Economic D-Day against Iran Tehran says it won’t let a single drop of oil pass
US: अमेरिका में नेवाडा-कैलिफोर्निया बॉर्डर पर जंगल में लगी भीषण आग, हजारों एकड़ जंगल खाक; 42 हजार लोगों को इलाका छोड़ने का आदेशUS nevada california border wildfire thousand evacuate
Lucknow News: अमेरिकी लोगों से ठगी की आरोपी महिला को मिली जमानत
अमेरिकी लोगों से ठगी की आरोपी महिला को मिली जमानत
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोबोटिक्स प्रतियोगिता में विश्व विजेता बनने की उपलब्धि हासिल करने वाली इनाया खान (14) अजमेर पहुंचीं। उन्होंने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शरीफ में अकीदत के साथ जियारत कर चौखट पर मखमली चादर एवं अकीदत के फूल पेश किए। साथ ही देश-दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी। दरगाह शरीफ के खादिम सैयद आकिफ चिश्ती ने इनाया खान को जियारत कराई। इस दौरान उन्होंने दरगाह शरीफ की परंपरा के अनुसार ओढ़नी उड़ाकर उनका इस्तकबाल किया तथा तबर्रुक भेंट किया। बता दें कि इनाया खान ने महज 14 वर्ष की उम्र में अमेरिका में आयोजित रोबोफेस्ट वर्ल्ड चैम्पियनशिप-2026 में विश्व स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर भारत का नाम रोशन किया। इनाया खान केवल शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी हुई हैं। वे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, बालिका शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियानों में सक्रिय योगदान दे रही हैं। इस अवसर पर मोहम्मद जैद,बेनजीर खान, सलमा खान, नजमा खान,मोहम्मद जुनेद, मोहम्मद जाहिद, जफिरा आदि मौजूद थे। (इनपुट-नजीर कादरी, अजमेर) पढें ये खबर भी… जयपुर की इनाया खान बनीं वर्ल्ड चैंपियन:अमेरिका में हुए रोबोफेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में पहला स्थान हासिल किया जयपुर की इनाया खान ने अमेरिका में आयोजित रोबोफेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में पहला स्थान हासिल किया है। इनाया ने जूनियर बिल्डिंग ब्रिजेस श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया है। पूरी खबर पढें
गुरदीप सिंह करीब 13 साल पहले रोजी-रोटी कमाने और परिवार का बेहतर भविष्य बनाने की उम्मीद में कर्ज लेकर अमेरिका गया था।
कपूरथला जिले के बेगोवाल कस्बे के गांव जब्बोवाल के 28 वर्षीय युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। गुरदीप सिंह करीब 10 साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। जानकारी के अनुसार, गुरदीप सिंह न्यूयॉर्क शहर की रिचमंड स्ट्रीट पर पिज्जा डिलीवरी का काम करने जा रहे थे। यह वारदात 22 अगस्त को हुई। इसी दौरान कुछ हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार और गांव में शोक छा गया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अमेरिका पहुंचने के बाद गुरदीप को शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा था। पिता प्यारा लाल ने 30 लाख का कर्ज लेकर गुरदीप को विदेश भेजा था। गुरदीप ने भी हार नहीं मानी औरकड़ी मेहनत करते रहे। वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें बेहतर जीवन देने के लिए दिन-रात काम कर रहे थे। अविवाहित था गुरदीप सिंह परिजनों के मुताबिक, गुरदीप सिंह अविवाहित थे। उनका परिवार गांव में डीजे का काम करता है। परिवार को उम्मीद थी कि गुरदीप विदेश में मेहनत कर उनके सपनों को पूरा करेंगे, लेकिन उनकी हत्या की खबर से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। परिवार ने शव वापस लाने की लगाई गुहार गुरदीप सिंह के परिवार ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके बेटे का शव जल्द से जल्द भारत लाने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की जाए। परिवार ने अमेरिकी प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और हत्या के जिम्मेदार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाने की भी मांग की है। गांव के लोगों ने भी सरकार से परिवार की मदद करने और गुरदीप सिंह का शव भारत लाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आग्रह किया है।
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फरीदाबाद के सेक्टर-14 निवासी दो लोगों से फ्लाइट टिकट बुक कराने के नाम पर करीब 9.03 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी राकेश बिष्ट के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-14 निवासी दीप चौधरी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी के लिए नई दिल्ली से अमेरिका के सिएटल तक आने-जाने की तीन फ्लाइट टिकट बुक कराने के लिए राकेश बिष्ट से संपर्क किया था। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग माध्यमों से कुल 4.20 लाख रुपए का भुगतान किया। पहले लुफ्थांसा की टिकट देने का दावा शिकायत के अनुसार, राकेश बिष्ट ने पहले उन्हें लुफ्थांसा एयरलाइंस की टिकट और पीएनआर उपलब्ध कराया। उसने बताया कि यात्रा से 15 दिन पहले तक टिकट बिना किसी शुल्क के रद्द कराई जा सकती है। कम किराए का झांसा देकर कतर की टिकट बुक कराई कुछ दिन बाद राकेश ने कम किराए और ज्यादा सामान ले जाने की सुविधा बताते हुए कतर एयरवेज की टिकट बुक कराने की सलाह दी। उसने भरोसा दिया कि 15 दिन के अंदर टिकट रद्द कराने पर पूरी रकम वापस मिल जाएगी। दीप चौधरी के अनुसार 11 जून को कतर एयरवेज की टिकट रद्द करा दी गई। आरोपी ने दो दिन के अंदर पूरी रकम वापस करने का आश्वासन दिया, लेकिन पैसे वापस नहीं किए। बेटी के इंटरव्यू से पहले पीएनआर की जांच की जब दीप चौधरी की बेटी अपनी टिकट इंटरव्यू लेने वाले अधिकारी को भेजने वाली थी, उससे पहले टिकट में दिए गए लुफ्थांसा पीएनआर को ऑनलाइन जांचा गया। जांच में पता चला कि पीएनआर फर्जी था और टिकट बुक ही नहीं हुई थी। फर्जी टिकट के कारण महंगी टिकट खरीदनी पड़ी फर्जी टिकट की जानकारी मिलने के बाद दीप चौधरी ने आरोपी से रकम वापस करने को कहा। टिकट फर्जी होने के कारण बेटी को समय पर इंटरव्यू में पहुंचाने के लिए उन्हें दूसरी जगह से महंगी फ्लाइट टिकट खरीदनी पड़ी। इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हुआ। बार-बार पैसे लौटाने का देता रहा भरोसा दीप चौधरी का आरोप है कि 19 जून से वह लगातार आरोपी से पैसे वापस मांग रहे हैं। आरोपी हर बार थोड़ा और समय देने की बात कहता रहा, लेकिन आज तक रकम वापस नहीं की। दूसरे व्यक्ति से भी 4.82 लाख रुपए लेने का आरोप इसी मामले में सेक्टर-14 निवासी विशाल गुप्ता ने भी राकेश बिष्ट के खिलाफ शिकायत दी। पुलिस के अनुसार, विशाल गुप्ता से भी फ्लाइट टिकट के नाम पर 4.82 लाख रुपए लिए गए थे। जांच के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस दोनों शिकायतों की जांच के बाद पुलिस को धोखाधड़ी का मामला मिला। इसके बाद थाना सेंट्रल फरीदाबाद में मामला दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी एसआई देवेंद्र सिंह ने अनुसार पुलिस अब टिकट, पीएनआर, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में गुरु घर की सेवाओं के लिए संगत और श्रद्धालुओं का समर्पण लगातार जारी है। इसी कड़ी में अमेरिका निवासी श्रद्धालु सरदार बलवंत सिंह और उनके परिवार ने गुरु घर के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए ₹4 लाख की नकद राशि और एक वाहन (गाड़ी) भेंट किया है। यह दान संगत की सुविधा और मरीजों के लिए चलाई जा रही लंगर सेवा को और सुचारू बनाने के उद्देश्य से दिया गया है। पारिवारिक सदस्यों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार ₹4 लाख की राशि श्री हरमंदिर साहिब परिसर स्थित सरायों में आने वाली संगत के लिए चादरें, तकिए और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए दी गई है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा गुरु नानक देव अस्पताल, अमृतसर में उपचाराधीन मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए चलाई जा रही निरंतर लंगर सेवा के उपयोग हेतु एक विशेष वाहन भेंट किया गया है। SGPC अध्यक्ष ने जताया आभार वाहन की चाबियां प्राप्त करते हुए SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सेवक परिवार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरदार बलवंत सिंह और उनका परिवार लंबे समय से समय-समय पर गुरु घर की विभिन्न सेवाओं में अपना बहुमूल्य योगदान देता रहा है। यह समर्पण गुरु साहिब के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और निष्ठा का प्रतीक है। इस अवसर पर एडवोकेट धामी ने गुरु साहिब के चरणों में अरदास करते हुए सेवक परिवार की 'चढ़दी कला' (खुशहाली और प्रगति) की कामना की और उम्मीद जताई कि यह परिवार भविष्य में भी इसी तरह मानवता और गुरु घर की सेवा में तत्पर रहेगा इस मौके पर उपस्थित रहे प्रमुख व्यक्तित्व इस सेवा कार्य और चाबी सौंपने के कार्यक्रम के दौरान सरदार शेर सिंह मंडवाला (महासचिव, SGPC) सरदार रणजीत सिंह काहलों और सरदार नवतेज सिंह काउणी (सदस्य) सरदार सतबीर सिंह धामी (OSD) बलविंदर सिंह काहलवां (सचिव) और सरदार गुरिंदर सिंह मथरेवाल सरदार शाहबाज सिंह (निजी सचिव), विजय सिंह (अतिरिक्त सचिव) सरदार हरभजन सिंह वक्ता (उप सचिव) सरदार मेजर सिंह (मैनेजर, श्री दरबार साहिब) और सरदार गुरतिंदरपाल सिंह कादियां (अतिरिक्त मैनेजर) सहित सिख जगत और SGPC की कई प्रमुख शख्सियतें मौजूद रहीं।
पलवल में संयुक्त किसान मोर्चा और सीटू के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम और पृथला क्षेत्र के विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया को ज्ञापन सौंपे। प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द करने की प्रमुख मांग रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। यह ज्ञापन संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत सौंपे गए हैं। इस अभियान का उद्देश्य पूरे देश में जनप्रतिनिधियों को किसान-मजदूरों की मांगों से अवगत कराना है। इसी निर्णय के तहत पलवल के किसान-मजदूर प्रतिनिधियों ने भी अपने जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए। ज्ञापन देते समय ये रहे मौजूद ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, रूप राम तेवतिया, धर्मचंद घुघेरा, दरयाबसिंह सौरोत, डॉक्टर रघुवीर सिंह, करण सिंह आर्य, समय राम कुंडू, चरणजीत डागर, रमेश आर्य, सतीश बैंसला, राहुल कौशिक, तथा ट्रेड यूनियन नेता रमेश सौरोत और ताराचंद प्रधान शामिल थे। समझौता तत्काल रद्द करने की मांग की किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौता गैर-बराबरी पर आधारित है। उनका तर्क है कि इस समझौते के लागू होने से देश का किसान और कृषि बर्बाद हो जाएगी, क्योंकि भारतीय किसान अमेरिकी किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। इसलिए उन्होंने इस समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की। ये हैं प्रमुख मांगें अन्य प्रमुख मांगों में पूरे देश के किसान-मजदूरों को एक बार कर्ज मुक्त करना, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देना, बिजली संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेना, और मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को रद्द करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये लागू करने और अस्थाई कर्मचारियों को स्थायी करने की भी मांग की।
कश्मीर पर अमेरिकी सुर बदलेः भारत का कद बढ़ा, पाक बेचैन
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का 19 अगस्त 2026 को श्रीनगर में दिया गया यह बयान कि जम्मू-कश्मीर “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” है, सामान्य कूटनीतिक टिप्पणी मानकर नजरअंदाज करने योग्य नहीं है। यह ऐसे समय आया है जब कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान की धारणाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नए समीकरण बन रहे हैं। गोर ने जम्मू-कश्मीर की निरन्तर सुधर रही सुरक्षा स्थिति की बात कही और अमेरिकी यात्रा संबंधी परामर्श पर पुनर्विचार के संकेत भी दिए। पाकिस्तान ने इस बयान पर अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब कर तीखा विरोध दर्ज कराया। इस पूरे घटनाक्रम को केवल कश्मीर के संदर्भ में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसे भारत-अमेरिका संबंधों में आ रहे व्यापक परिवर्तन, दक्षिण एशिया की बदलती सामरिक संरचना और पाकिस्तान की घटती कूटनीतिक प्रभावशीलता के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा। अमेरिका की कश्मीर नीति में लंबे समय से एक प्रकार की सावधानी रही है। वाशिंगटन सामान्यतः भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद तथा शांतिपूर्ण समाधान की बात करता रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग की पूर्व घोषित नीति भी जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति और राजनीतिक-आर्थिक स्थिरता की वापसी का समर्थन करती रही है। इसलिए गोर का श्रीनगर में जाकर जम्मू-कश्मीर को भारत का “महत्वपूर्ण हिस्सा” कहना निश्चित रूप से भाषा के स्तर पर एक उल्लेखनीय परिवर्तन है। लेकिन इसे अमेरिका की पूरी कश्मीर नीति में तत्काल और औपचारिक परिवर्तन मानना भी जल्दबाजी होगी। किसी राजदूत का बयान और किसी सरकार की औपचारिक नीति में अंतर होता है। फिर भी कूटनीति में शब्दों का अपना महत्व होता है। विशेष रूप से तब, जब वही शब्द उस भूभाग में बोले जाएं जिसे पाकिस्तान दशकों से अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। इस दृष्टि से गोर का बयान भारत के लिए मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा ने चीनी-पाकिस्तानी चालों को किया दुरुस्त! इस बयान का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष जम्मू-कश्मीर की बदलती जमीन से जुड़ा है। गोर ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए यात्रा संबंधी अमेरिकी परामर्श में कमी लाने की संभावना जताई है। इसका अर्थ यह है कि वाशिंगटन अब कश्मीर को केवल सुरक्षा संकट या आतंकवाद की दृष्टि से देखने के बजाय पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और सामान्य जनजीवन की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में भी देख रहा है। यहीं से भारत-अमेरिका संबंधों की नई रोशनी दिखाई देती है। दोनों देशों के संबंध अब केवल व्यापार या रक्षा तक सीमित नहीं हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, आपूर्ति-शृंखला और वैश्विक शक्ति-संतुलन जैसे विषयों ने भारत को अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार और शुल्क जैसे मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं, फिर भी व्यापक सामरिक साझेदारी अपनी उपयोगिता बनाए हुए है। हाल में अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा का उद्देश्य भी तनावों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करना और व्यापार तथा ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाना था। इसलिए कश्मीर पर अमेरिकी भाषा को भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक पुनर्संतुलन का हिस्सा मानना अधिक तार्किक होगा। अमेरिका के लिए भारत अब केवल दक्षिण एशिया का एक बड़ा देश नहीं, बल्कि एशिया में शक्ति-संतुलन का प्रमुख आधार है। भारत के लिए भी अमेरिका महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत ने अपनी विदेश नीति को किसी एक शक्ति के साथ पूर्ण निर्भरता के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रखा है। यही कारण है कि भारत अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ाते हुए रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया और अन्य शक्तियों के साथ भी अपने संबंध बनाए रखता है। कश्मीर के संदर्भ में यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से असहज करने वाला है। इस्लामाबाद ने गोर के बयान को अस्वीकार करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और उसका अंतिम निर्धारण होना बाकी है। पाकिस्तान ने इसे अमेरिका की पूर्व स्थिति से विचलन बताते हुए औपचारिक विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान की समस्या यह है कि वह कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विदेश नीति का केंद्रीय विषय बनाए रखना चाहता है, जबकि विश्व राजनीति की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। आतंकवाद, आर्थिक स्थिरता, चीन का बढ़ता प्रभाव, पश्चिम एशिया का संकट, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति-शृंखलाएं आज बड़ी शक्तियों की चिंता के केंद्र में हैं। ऐसे वातावरण में केवल कश्मीर के प्रश्न को बार-बार अंतरराष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तानी कोशिशों की प्रभावशीलता सीमित होती जा रही है। भारत ने दूसरी ओर लगातार यह रेखांकित किया है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े विषय भारत की संप्रभुता और द्विपक्षीय संबंधों के दायरे में आते हैं। गोर का श्रीनगर दौरा स्वयं इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि एक प्रमुख अमेरिकी राजनयिक ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा की, वहां के निर्वाचित नेतृत्व से मुलाकात की और क्षेत्र की सुरक्षा तथा आर्थिक संभावनाओं पर सकारात्मक टिप्पणी की। यह पाकिस्तान की उस कोशिश के विपरीत है जिसमें वह कश्मीर को केवल विवाद और अस्थिरता के चश्मे से प्रस्तुत करना चाहता है। फिर भी भारत को इस बयान से अत्यधिक उत्साहित होकर यह मान लेने से बचना चाहिए कि अमेरिका ने कश्मीर पर अपनी संपूर्ण नीति बदल दी है। अमेरिका की विदेश नीति परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है और वह भारत तथा पाकिस्तान दोनों के साथ अपने हितों को संतुलित करने की कोशिश करता है। आज भी वाशिंगटन के लिए पाकिस्तान आतंकवाद-रोध, क्षेत्रीय सुरक्षा और अफगानिस्तान सहित कुछ विषयों में उपयोगी साझेदार है। अतः भारत के लिए इस बयान का वास्तविक महत्व किसी औपचारिक अमेरिकी नीति-परिवर्तन से अधिक उस कूटनीतिक वातावरण में है, जिसमें भारत की स्थिति को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है। यहां एक और महत्वपूर्ण बात है। कूटनीति में किसी देश का महत्व केवल इस बात से तय नहीं होता कि कितने देश उसके पक्ष में बयान दे रहे हैं, बल्कि इससे तय होता है कि वैश्विक शक्तियों के हित उसके साथ कितने गहरे जुड़े हैं। आज भारत की आर्थिक क्षमता, विशाल बाजार, तकनीकी सामर्थ्य, लोकतांत्रिक संस्थाएं, युवा शक्ति और सामरिक स्थिति उसे विश्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाती हैं। इसी बदलती वास्तविकता का प्रभाव कश्मीर पर भी दिखाई देना स्वाभाविक है। गोर का बयान इसलिए भारत के लिए एक उपलब्धि से अधिक एक संकेत है-संकेत इस बात का कि जम्मू-कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय विमर्श धीरे-धीरे बदल रहा है। पाकिस्तान के लिए यह चेतावनी है कि केवल पुराने नारों और कूटनीतिक दबाव से वह कश्मीर को विश्व राजनीति के केंद्र में नहीं रख सकता और अमेरिका के लिए यह उसके बदलते हितों के अनुरूप संतुलन साधने की कोशिश है। अंततः कश्मीर की स्थायी शांति केवल अंतरराष्ट्रीय बयानों से नहीं, बल्कि लोकतंत्र, विकास, सुरक्षा, जनभागीदारी और सीमा-पार आतंकवाद के अंत से सुनिश्चित होगी। भारत को इस नए कूटनीतिक वातावरण का उपयोग आक्रामक प्रचार के बजाय जिम्मेदार और आत्मविश्वासी राष्ट्र की तरह करना चाहिए। सर्जियो गोर का बयान इस बदलती तस्वीर की एक महत्वपूर्ण झलक है-जहां कश्मीर को लेकर भारत की स्थिति पहले की अपेक्षा अधिक स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता प्राप्त करती दिखाई दे रही है और पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती पहले से अधिक कठिन होती जा रही है। - ललित गर्ग लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा रद्द, जेडी वेंस और जोहरान ममदानी से होने वाली मुलाकातों पर उठे सवाल
केंद्र के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि प्रस्तावित अमेरिकी कार्यक्रम में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से संभावित मुलाकातों ने मामले को संवेदनशील बना दिया।
एफबीआई ने बिश्नोई गैंग के कथित सदस्य कमल को अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया है। उस पर अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रंगदारी और मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क चलाने का आरोप है।
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अमेरिका के फॉल इनटेक में एडमिशन ले चुके अधिकतर भारतीय छात्रों के मन में एक ही सवाल उठता है- क्या वह पहुंचते ही पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अमेरिका में फीस और रहने-खाने के खर्च को देखते हुए छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि टॉप यूनिवर्सिटीज की सालाना फीस और रहने खाने का खर्चा करीब 50 से 60 लाख रुपए तक होता है। वहीं पूरी पढ़ाई का खर्च 1.5 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीज पर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट टाइम जॉब के नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। यहां तक कि डिपोर्टेशन तक का समय आ सकता है। ऐसे में हम इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स फर्स्ट सेमेस्टर में पार्ट-टाइम नौकरी कर सकते हैं और इसको लेकर क्या नियम हैं। इसे भी पढ़ें: क्या 40 की उम्र में संभव है LLB? BCI के नए नियमों के तहत Age Limit और Career Switch पर एक विशेष रिपोर्ट फर्स्ट ईयर में जॉब कर सकते हैं या नहीं USICS के नियमों क मुताबिक F-1 वीजा पर पहले पूरे अकेडमिक ईयर तक आप कैंपस के बाहर कोई नौकरी नहीं कर सकते हैं। USICS के नियमों में फर्स्ट सेमेस्टर वाले स्टूडेंट्स के लिए कोई खास छूट नहीं दी गई है। कैंपस के बाहर किसी भी स्थिति में जॉब नहीं करना है। फर्स्ट ईयर छात्रों के पास ऑन कैंपस जॉब का ऑप्शन जरूर है। छात्र कैंपस के अंदर आराम से पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। फर्स्ट सेमेस्टर में क्या करें अच्छी खबर यह है कि ऑन कैंपस जॉब के लिए आपको USCIS से अलग इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। इसको आपको फर्स्ट सेमेस्टर से ही शुरूकर सकते हैं। जब क्लास चल रही हो, तब आप सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान आप फुल टाइम यानी की सप्ताह में 40 घंटे काम कर सकते हैं। ऑन कैंपस जॉब का मतलब है, यूनिवर्सिटी के कैंपस पर होने वाला काम कैफेटेरिया में काम, लाइब्रेरी में असिस्टेंट, यूनिवर्सिटी बुकस्टोर में जॉब, या किसी प्रोफेसर के साथ रिसर्च असिस्टेंटशिप। यह जॉब कुछ मामलों में कैंपस के बाहर भी हो सकता है। बशर्ते वह जगह आपकी यूनिवर्सिटी से एजुकेशनली एफिलिएटेड हो। उसका सीधा संबंध आपकी पढ़ाई या यूनिवर्सिटी से हो। ऑन कैंपस जॉब के लिए क्लास शुरू होने से करीब 30 दिन पहले तक अप्लाई कर सकते हैं। इसलिए अगर आप फॉल इनटेक में अभी पहुंचे हैं। तो जल्द से जल्द अपने कैंपस जॉब पोर्टल या फिर इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप ऑन कैंपस जॉब ढूंढ रहे हैं, या भविष्य में ऑफ-कैंपस काम के बारे में जानना चाहते हों। तो सबसे जरूरी काम है कि अपने DSO से बात करें। DSO आपकी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के मामलों को संभालने वाला अधिकारी होता है। वह आपको बताएगा कि कौन सी जॉब्स उपलब्ध हैं और आप उनके लिए एलिजिबल हैं या नहीं।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश सम्पूर्णानंद पांडेय ने हाल ही अपने करियर की यात्रा का एक किस्सा शेयर किया है। ये बात उस वक्त की है जब वो स्ट्रगल कर रहे थे।
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
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सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
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अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

