सोनीपत के गोहाना क्षेत्र में रविवार को किसान संगठनों ने अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील के विरोध और भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी ग्रुप) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। किसानों ने गांव रूखी चौक के पास रोहतक-पानीपत हाईवे पर जाम लगाकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। जाम के कारण हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। बाद में किसान नेताओं ने 21 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित महाप्रदर्शन की तैयारियों का हवाला देते हुए जाम समाप्त कर दिया और सभी किसानों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया। गांव रूखी चौक पर किसानों ने लगाया जाम भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी ग्रुप) और अन्य किसान संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान गांव रूखी चौक पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने रोहतक-पानीपत हाईवे पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया। हाईवे जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं। अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील का विरोध किसानों ने कहा कि अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील देश के किसानों के हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि इस तरह के समझौते से कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। इसी मुद्दे को लेकर देशभर के किसान 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। गुरनाम चढ़ूनी की गिरफ्तारी पर जताया रोष प्रदर्शन के दौरान किसानों ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चढ़ूनी की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। हाईवे पर भारी पुलिस बल रहा तैनात किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए गांव रूखी चौक और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने पूरे प्रदर्शन के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रखी और कानून-व्यवस्था कायम रखी। दिल्ली कूच की तैयारी के चलते खोला जाम कुछ समय तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद किसान नेताओं ने घोषणा की कि 21 जुलाई को दिल्ली में होने वाले बड़े आंदोलन की तैयारियों को देखते हुए फिलहाल हाईवे जाम खत्म किया जा रहा है। इसके बाद किसानों ने सड़क खाली कर दी और यातायात सामान्य दिखा। दिल्ली आंदोलन में शामिल होने का किया आह्वान किसान नेताओं ने प्रदेशभर के किसानों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचकर किसान घाट पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उनका कहना है कि फ्री ट्रेड डील और किसान नेताओं पर की जा रही कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाना जरूरी है। सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें गोहाना में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब किसानों की नजरें 21 जुलाई को दिल्ली में होने वाले आंदोलन और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज करने के संकेत भी किसान नेताओं ने दिए हैं।
अमेरिका-ईरान जंग में फंसा पाकिस्तान: 'मध्यस्थ' बनने चला था इस्लामाबाद, अब 'बलि का बकरा' बनने की नौबत
अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जंग छिड़ने के बाद पाकिस्तान की 'चीफ मीडिएटर' यानी मुख्य मध्यस्थ वाली छवि पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। हफ्तों की भारी कूटनीतिक दौड़-धूप और दिखावे के बाद भी नाजुक सीजफायर टूट चुका है, जिससे पाकिस्तान को गहरा धक्का लगा है। बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तेहरान के हमलों और वॉशिंगटन के खौफनाक पलटावर के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर का तंत्र असहाय नजर आ रहा है। इस्लामाबाद अब कूटनीति के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां वह मध्यस्थ बनने के बजाय दोनों तरफ से घिरकर 'फॉल गाई' यानी बलि का बकरा बनने की स्थिति में पहुंच गया है।कागजी शेर साबित हुआ इस्लामाबाद MoU: दोनों महाशक्तियों ने समझौतों को किया खारिजतनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा तैयार कराया गया तथाकथित 'इस्लामाबाद MoU' अब महज कागजी शेर साबित हो रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों की पाकिस्तान ने निंदा जरूर की, लेकिन वॉशिंगटन और तेहरान के आक्रामक रुख के आगे उसकी एक न चली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि वे अब ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते के मूड में नहीं हैं। इस कड़े रुख के बाद पाकिस्तान की शांति वार्ता आयोजित करने की सभी कोशिशें पूरी तरह बेअसर हो चुकी हैं।विशेषज्ञों की चेतावनी: शांति वार्ता विफल होने पर पाकिस्तान के सिर फूटेगा ठीकराअमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने आगाह किया है कि अगर अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पूरी तरह नाकाम होती है, तो इसका सारा दोष पाकिस्तान के सिर मढ़ दिया जाएगा। कुगेलमैन के अनुसार, पाकिस्तान पर अनुभवहीनता और बिना किसी ठोस आधार के विफल वार्ताओं को बढ़ावा देने का आरोप लग सकता है। सीजफायर टूटने के महज एक महीने के भीतर इस्लामाबाद की वैश्विक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है, जिससे उसे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर गंभीर कूटनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।रणनीतिक गफलत में फंसा इस्लामाबाद: होर्मुज स्ट्रेट पर टिका ईरान का कड़ा रुखतेहरान के सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के निदेशक जावेद हेरान-निया का मानना है कि 'इस्लामाबाद MoU' कभी भी मुख्य विवादों को सुलझाने के लिए नहीं बना था। यह केवल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अस्थायी रूप से खोलने और युद्ध टालने का एक तात्कालिक जरिया था। ईरान होर्मुज पर अपने रणनीतिक नियंत्रण को बेहद अहम मानता है और वह इसे किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहता। जब तक वाशिंगटन और तेहरान के बीच रणनीतिक शक्ति संतुलन खुद नहीं बदलता, तब तक पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश की भूमिका बिल्कुल सीमित रहेगी।शहबाज और असीम मुनीर के पास विकल्प खत्म: अमेरिका और ईरान दोनों पर निर्भरता बनी मजबूरीगल्फ इंटरनेशनल फोरम की कार्यकारी निदेशक दानिया थाफर के अनुसार, हालिया मिसाइल हमलों और आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के पास कूटनीतिक पैंतरेबाज़ी की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। पाकिस्तान अपनी आर्थिक और राजनीतिक जरूरतों के लिए अमेरिका और खाड़ी देशों दोनों पर अत्यधिक निर्भर है। लेकिन इस समय चूंकि ईरान और अमेरिका दोनों ही एक-दूसरे को नष्ट करने वाले दौर (Escalation Phase) में पहुंच चुके हैं, इसलिए तनाव कम करने या दोनों को बातचीत की टेबल पर लाने में पाकिस्तान पूरी तरह नाकाम और लाचार साबित हो रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब तक के सबसे खतरनाक और चरम स्तर पर पहुंच गया है। जॉर्डन में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए घातक हमले में एक और अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि के बाद वॉशिंगटन ने ईरान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार, 20 जुलाई की सुबह ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से ताबड़तोड़ बमबारी की। इस भीषण अमेरिकी हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 517 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।अमेरिकी एयरस्ट्राइक से दहला ईरान: परमाणु अड्डे और आईआरजीसी के सैन्य ठिकाने तबाहअमेरिकी सेना द्वारा जारी की गई फुटेज के अनुसार, यह हमला समुद्र और हवा दोनों ओर से बेहद सटीक रणनीति के तहत किया गया। सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर बताया कि हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल व ड्रोन भंडारण परिसरों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करना था। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने उसके एक निर्माणाधीन परमाणु प्रतिष्ठान को भी निशाना बनाया है, जिसके बाद तेहरान ने अमेरिका को इसके बेहद गंभीर अंजाम भुगतने की सीधी धमकी दी है।रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज फिर से ठप: वैश्विक ऊर्जा संकट का बड़ा खतरा मंडरायादोनों देशों के बीच पिछले महीने हुई अंतरिम शांति डील अब पूरी तरह से निष्प्रभावी हो चुकी है और दोनों ही पक्षों ने समझौतों को मानने से इनकार कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और आगजनी के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है। ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने जहाजों को बारूदी सुरंग वाले रास्ते पर धकेला। दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर भारी ऊर्जा संकट का खतरा गहरा गया है।खाड़ी देशों में रेड अलर्ट: कुवैत, बहरीन और इजरायल में एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवअमेरिका और ईरान की इस सीधी जंग की चपेट में खाड़ी देश भी आ गए हैं। ईरान की ओर से खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे जा रहे हैं। कुवैत के एक महत्वपूर्ण पावर जनरेशन और वॉटर डिजैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया है, जिसके बाद कुवैत, बहरीन और जॉर्डन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह एक्टिवेट कर दिया है। उधर इजरायल ने भी चेतावनी जारी की है कि जॉर्डन की दिशा से दागी गई ईरानी मिसाइलें उसके क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकती हैं।युद्ध में अब तक 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत, जंग और भीषण होने के आसारअमेरिकी रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जॉर्डन में हुए हालिया हमले के बाद अब तक इस संघर्ष में कुल 17 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जबकि 430 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह बड़ी सैन्य कार्रवाई जॉर्डन में मारे गए अपने जवानों का बदला लेने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की आक्रामक पकड़ को कमजोर करने के लिए की गई है। खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदलते इस घटनाक्रम से विश्व स्तर पर कूटनीतिक तनाव उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
अमेरिकी राजनीति और व्हाइट हाउस के गलियारों से एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और भारतीय मूल की सेकंड लेडी उषा वेंस के घर रविवार को एक बार फिर नन्हें मेहमान की किलकारियां गूंजी हैं। वेंस दंपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने चौथे बच्चे के जन्म की खुशखबरी साझा की है। इस नवजात शिशु के आगमन के साथ ही अमेरिकी इतिहास में 156 साल पुराना एक दुर्लभ और ऐतिहासिक कीर्तिमान भी दोहराया गया है।156 साल बाद पद पर रहते हुए पिता बने अमेरिकी उपराष्ट्रपति, बना अनोखा रिकॉर्डजेडी वेंस वर्तमान पद पर रहते हुए पिता बनने वाले पिछले 156 वर्षों में पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति बन गए हैं। अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में इससे पहले यह अद्भुत संयोग साल 1870 में देखने को मिला था, जब तत्कालीन उपराष्ट्रपति स्कायरलर कोलफैक्स और उनकी पत्नी एलेन वेड कोलफैक्स के घर बेटे का जन्म हुआ था। उससे भी पूर्व, वर्ष 1829 में उपराष्ट्रपति जॉन सी. कैलहून के कार्यकाल के दौरान उनके बेटे विलियम का जन्म हुआ था। इस तरह जेडी वेंस अमेरिकी इतिहास के ऐसे महज तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए हैं जिनके कार्यकाल के दौरान संतान का जन्म हुआ है।बेटे का नाम रखा 'ऐलेक नील वेंस', मेडिकल टीम का जताया आभारवेंस दंपति ने अपने नवजात बेटे का नाम ऐलेक नील वेंस (Alec Neal Vance) रखा है। सोशल मीडिया पर एक संयुक्त बयान जारी करते हुए जेडी वेंस और उषा वेंस ने अपनी खुशी व्यक्त की और लिखा कि वे अपने बेटे ऐलेक के आगमन से बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उषा और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनके तीनों बड़े बच्चे अपने छोटे भाई का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। दंपति ने वाशिंगटन स्थित वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों, चिकित्सा कर्मियों और व्हाइट हाउस की मेडिकल टीम का विशेष आभार व्यक्त किया।अमेरिका में बढ़ती जन्म दर के समर्थक रहे हैं जेडी वेंस41 वर्षीय जेडी वेंस लंबे समय से अमेरिका में घटती जन्म दर पर अपनी चिंता व्यक्त करते आए हैं और वे लगातार अमेरिकी नागरिकों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं। वाशिंगटन में आयोजित एक सार्वजनिक रैली के दौरान भी वेंस ने खुलकर कहा था कि वे अमेरिका में अधिक से अधिक बच्चों का जन्म देखना चाहते हैं। वेंस दंपति के इससे पहले तीन बच्चे हैं और अब परिवार में चौथे बच्चे ऐलेक नील वेंस के आने से उनका परिवार और भी समृद्ध हो गया है।भारतीय मूल से जुड़ाव: आंध्र प्रदेश से कैलिफोर्निया और फिर व्हाइट हाउस तक का सफरअमेरिका की सेकंड लेडी उषा वेंस का मूल नाता भारत के आंध्र प्रदेश राज्य से है। उषा के माता-पिता 1980 के दशक में भारत छोड़कर अमेरिका में बस गए थे, जिसके बाद वर्ष 1986 में कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में उषा का जन्म हुआ। उषा के पिता पेशे से एक मैकेनिकल इंजीनियर और मां जीवविज्ञानी हैं। जेडी वेंस और उषा की पहली मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान एक राइटिंग प्रोजेक्ट पर काम करते समय हुई थी, जो आगे चलकर गहरे प्रेम में बदल गई। वर्ष 2014 में केंटकी में परिणय सूत्र में बंधे इस जोड़े के लिए यह नया अध्याय बेहद खास है।
कल दिल्ली में होगी किसानों की हुंकार! भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ महापंचायत का ऐलान
देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर से किसानों के बड़े आंदोलन और राजनीतिक हलचल का गवाह बनने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में चर्चा में आए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) के खिलाफ देश भर के प्रमुख किसान संगठनों ने जोरदार मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में कल दिल्ली में किसानों की एक विशाल महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें देश भर से हजारों किसानों के जुटने की संभावना है। किसान नेताओं का कहना है कि यह समझौता देश के कृषि क्षेत्र, डेयरी सेक्टर और स्थानीय व्यापारियों के हितों के पूरी तरह खिलाफ है, जिससे घरेलू बाजार तबाह हो जाएगा। इस महापंचायत को लेकर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमाओं पर अपनी चौकसी बेहद कड़ी कर दी है।पंजाब और हरियाणा से रवाना हुए बसों के जत्थे: बॉर्डर इलाकों में पुलिस बल तैनात, ट्रैफिक व्यवस्था पर बड़ा असरइस महापंचायत को सफल बनाने के लिए पड़ोसी राज्यों—विशेष तौर पर पंजाब और हरियाणा—से किसानों के जत्थे बड़ी संख्या में बसों और ट्रैक्टरों के जरिए दिल्ली की तरफ कूच कर चुके हैं। पंजाब के विभिन्न जिलों से युवाओं और बुजुर्ग किसानों ने बसों में सवार होकर दिल्ली के लिए यात्रा शुरू कर दी है, जिससे रास्ते के तमाम टोल प्लाजा और राजमार्गों पर सरगर्मी बढ़ गई है। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली-नुकड़ सीमाओं, सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी पुलिस बल, पैरामिलिट्री फोर्सेज और बैरिकेड्स तैनात कर दिए गए हैं। प्रशासन इस बात की पूरी कोशिश कर रहा है कि पिछले आंदोलनों की तरह शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ठप न हो, लेकिन इसके बावजूद कई मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लगने की आशंका जताई जा रही है।आधुनिक Generative AI और सोशल मीडिया सर्विलांस: आंदोलन के डिजिटल ट्रेंड्स पर एजेंसियों की पैनी नजरआधुनिक Generative AI सोशल मीडिया एनालिटिक्स और डिजिटल सर्विलांस के इस दौर में किसानों के इस आंदोलन और महापंचायत को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई-टेक हो चुकी हैं। साइबर सेल की टीमें इस बात की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किस तरह के संदेश, वीडियो और भड़काऊ नारे शेयर किए जा रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से पहले ही उसे रोका जा सके। एआई-पावर्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट टूल्स के जरिए दिल्ली आने वाले रास्तों पर गाड़ियों की आवाजाही की पल-पल की अपडेट ली जा रही है, जिससे यात्रियों को समय रहते वैकल्पिक मार्गों की जानकारी मिल सके।लखनऊ और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी चर्चा: व्यापार समझौते के विरोध पर टिकी हैं सबकी निगाहेंदिल्ली में होने जा रही इस किसान महापंचायत और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध की गूंज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और अन्य कृषि प्रधान राज्यों तक साफ सुनाई दे रही है। लखनऊ के किसान संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का सीधा असर देश के छोटे किसानों और स्थानीय उद्योगों पर पड़ता है, यही वजह है कि इसे लेकर राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। इस बीच, दिल्ली आने वाले रास्तों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और कल होने वाली इस महापंचायत के दौरान किसी बड़े ऐलान की संभावना जताई जा रही है।
महायुद्ध की दहलीज पर अमेरिका और ईरान, मिडिल ईस्ट में घातक हमलों से दहला इलाका
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा अमेरिका और ईरान का तनाव अब पूरी तरह से एक विनाशकारी युद्ध के रूप में तब्दील हो चुका है। दोनों ही महाशक्तियों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपने सबसे घातक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ईरानी समर्थित गुटों के रणनीतिक केंद्रों पर लगातार रॉकेट, मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं। युद्ध का यह नया चरण इतना आक्रामक है कि इसने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आहट तेज हो गई है।निर्दोष और बेकसूर देश बन रहे निशाना: वैश्विक सप्लाई चेन तबाहइस युद्ध की सबसे भयावह बात यह है कि इसका शिकार अब वे देश और क्षेत्र भी बन रहे हैं, जिनका इस भू-राजनीतिक दुश्मनी से कोई वास्ता नहीं है। ईरान और अमेरिका की इस जंग के कारण लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। वाणिज्यिक जहाजों और कार्गो शिप्स पर हो रहे लगातार घातक हमलों की वजह से कई एशियाई और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। आवश्यक वस्तुओं, दवाओं और खाद्यान्न की सप्लाई रुकने से उन देशों में भी महंगाई और भुखमरी का खतरा मंडराने लगा है जो इस युद्ध में पूरी तरह तटस्थ थे।घातक हवाई हमलों से टूटी कमर: सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर भारी नुकसानपेंटागन और ईरानी सैन्य कमांडरों की ओर से जारी बयानों के मुताबिक, दोनों पक्षों को इस टकराव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जहां एक तरफ अमेरिका ने ईरान के तेल डिपो, अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर्स और कमांड पोस्टों को निशाना बनाकर उसकी आर्थिक और सैन्य कमर तोड़ने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ ईरानी ड्रोन हमलों ने अमेरिकी गठबंधन सेना के कई महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस भीषण गोलाबारी और बमबारी के कारण स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है और बड़े पैमाने पर मानवीय संकट खड़ा हो गया है।भारत सहित पूरी दुनिया पर क्या होगा इसका सीधा असर?इस युद्ध के खतरनाक दौर में पहुंचने का सीधा असर भारत सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई अनियंत्रित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनकी आजीविका पर भी इस संकट के काले बादल मंडरा रहे हैं, जिसने नई दिल्ली की चिंताएं बेहद बढ़ा दी हैं।
Share Market 20 July : अमेरिका ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी की वजह से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में खुले।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक और चिंताजनक मोड़ ले लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की आग में अब क्षेत्र के अन्य शांतिप्रिय देश भी झुलसने लगे हैं। सोमवार को ईरान ने कुवैत के एक प्रमुख 'बिजली और जल अलवणीकरण संयंत्र' (Water Desalination & Power Plant) को निशाना बनाकर एक भीषण आत्मघाती हमला किया। इस सुनियोजित हमले के कारण कुवैत के इस बेहद महत्वपूर्ण एनर्जी हब में भयंकर आग लग गई और कई बिजली उत्पादन इकाइयां पूरी तरह तबाह हो गईं। दुखद बात यह है कि इस हमले में प्लांट में काम करने वाले एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले इस हमले ने पूरे रेगिस्तानी देश में पीने के पानी और बिजली का एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।कुवैत का 90% पानी सप्लाई ठप होने की कगार परकुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, ईरान की ओर से किए गए इस ड्रोन और मिसाइल हमले ने उनके सबसे संवेदनशील बुनियादी ढांचे को चोट पहुंचाई है। रेगिस्तानी देश होने के कारण कुवैत अपनी पीने के पानी की लगभग 90 प्रतिशत जरूरतों के लिए समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले इसी 'डिसैलिनेशन प्रोसेस' पर निर्भर रहता है। हमले के बाद प्लांट में लगी भीषण आग पर काबू तो पा लिया गया है, लेकिन बिजली और पानी की कई मुख्य यूनिट्स के क्षतिग्रस्त होने से देश में हाहाकार मच गया है। कुवैती अधिकारी फिलहाल नुकसान का आकलन करने और प्लांट को आंशिक रूप से फिर से चालू करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी के बाद तेहरान पर भीषण एयरस्ट्राइकईरान की इस आक्रामक हरकत के बाद अमेरिकी सेना भी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार सुबह अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और उसके रणनीतिक ठिकानों पर अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के कई अहम पुलों, सैन्य साइटों और एक प्रमुख बंदरगाह पर बने 'पोर्ट कंट्रोल टावर' को हवाई हमलों में पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।यह भीषण कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा तेहरान को दी गई उस कड़ी चेतावनी का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि यदि ईरान वैश्विक तेल मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) और क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ने की कोशिश करेगा, तो उसके पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।हॉर्मुज संकट से दुनिया भर में बढ़े कच्चे तेल के दामईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस आमने-सामने के युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आंशिक रूप से बंद होने के खतरे ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया का एक बड़ा तेल निर्यात इसी समुद्री रास्ते से होता है, जिस पर ईरान ने नए सेवा शुल्क और सख्त नियम लगाकर खलबली मचा दी है। इस सुरक्षा संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों ने तुरंत संयम नहीं बरता, तो यह संघर्ष एक पूर्ण वैश्विक युद्ध में बदल सकता है।
भारत में जब भी हम किसी सब्जी मंडी या ठेले वाले से आलू, प्याज या अन्य सब्जियां खरीदते हैं, तो आखिर में झोले में थोड़ी सी हरी मिर्च और धनिया मुफ्त में डलवाना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार जैसा होता है। सब्जीवाले भी हंसकर चार-पांच मिर्च मुफ्त में डाल देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसी हरी मिर्च के लिए विदेशों में आपको कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है? इन दिनों सोशल मीडिया पर एक भारतीय महिला का वीडियो इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है, जो अमेरिका के एक सुपरमार्केट में सिर्फ चंद हरी मिर्च की कीमत देखकर पूरी तरह हैरान रह गई। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह वायरल वीडियो भारत और अमेरिका के बीच न सिर्फ रहन-सहन बल्कि रोजमर्रा के खर्चों के बड़े अंतर को बयां करता है।114 ग्राम मिर्च का पैकेट देखकर थमी महिला की नजरेंवायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक भारतीय महिला अमेरिका के एक बड़े सुपरमार्केट में सब्जियां खरीदने पहुंचती है। वहां जब वह घूमते हुए हरी मिर्च के सेक्शन में जाती है, तो उसकी नजर एक छोटे से प्लास्टिक डिब्बे (पैकेट) पर पड़ती है। पैकेट पर लिखी कीमत को देखते ही महिला हैरान रह जाती है और तुरंत अपना कैमरा निकालकर इस वाकये को रिकॉर्ड करने लगती है। महिला वीडियो में बताती है कि अमेरिका में हरी मिर्च खरीदना किसी सोना या चांदी खरीदने जैसा महंगा काम है। उसने पैकेट का वजन दिखाते हुए बताया कि महज 114 ग्राम के इस छोटे से डिब्बे में मुश्किल से 12 से 13 मिर्च ही मौजूद हैं, लेकिन इसका दाम सुनकर किसी भी भारतीय के होश उड़ जाएंगे।भारतीय रुपए में करीब 3500 रुपए किलो बिक रही है मिर्चमहिला ने वीडियो में आगे कैलकुलेशन करके दिखाया कि इस 114 ग्राम के छोटे से पैकेट की कीमत करीब 400 रुपए (भारतीय मुद्रा के अनुसार) बैठती है। अगर इस हिसाब से 1 किलो हरी मिर्च की कीमत का अंदाजा लगाया जाए, तो अमेरिका में यह लगभग 3500 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच जाती है। महिला कहती है कि भारत में इतनी मिर्च तो सब्जी वाले थैले में ऐसे ही बिना पैसे लिए डाल देते हैं, जबकि यहां इसके लिए ₹400 का नोट ढीला करना पड़ रहा है। यही वजह है कि यह वीडियो अपलोड होते ही कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच गया और इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।सोशल मीडिया पर छिड़ी महंगाई बनाम कमाई की बहसइस वीडियो के वायरल होने के बाद कमेंट सेक्शन में भारतीय यूजर्स की तरफ से बेहद मजेदार और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक यूजर ने गर्व से कमेंट करते हुए लिखा, इसीलिए तो कहते हैं- मेरा भारत महान! हमारे यहां ₹20 में पाव भर (250 ग्राम) मिर्च मिल जाती है। वहीं, एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, इस भाव को देखकर तो लगता है कि अब अमेरिका जाकर मिर्च की खेती ही शुरू कर देनी चाहिए।हालांकि, कुछ यूजर्स ने इस तुलना को पूरी तरह सही नहीं माना और व्यावहारिक पक्ष रखते हुए लिखा कि अमेरिका में लोगों की इनकम और सैलरी भी उसी हिसाब से डॉलर में काफी ज्यादा होती है, इसलिए भारतीय रुपए में सीधे करेंसी कन्वर्ट करके कीमतों की तुलना करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। इसके अलावा विदेशों में पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन, लेबर कॉस्ट और कोल्ड स्टोरेज का खर्च ज्यादा होने के कारण भी भारत की तुलना में सब्जियां काफी महंगी बिकती हैं।
वाशिंगटन/लखनऊ। अमेरिकी राजनीति के शीर्ष गलियारों और व्हाइट हाउस से एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और उनकी भारतवंशी पत्नी व सेकंड लेडी उषा वेंस (Usha Vance) के घर चौथी बार बच्चे की किलकारी गूंजी है। उषा वेंस ने रविवार, 19 जुलाई 2026 की सुबह वाशिंगटन के पास मैरीलैंड स्थित वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया है। वेंस दंपत्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है।यह जन्म केवल वेंस परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे अमेरिकी राजनीतिक इतिहास के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया है。 अमेरिका के 156 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब कार्यकाल के दौरान पद पर बने रहते हुए (Sitting Vice President) किसी उपराष्ट्रपति के घर बच्चे का जन्म हुआ हो।'एलेक नील वेंस' रखा गया नाम, वेंस ने कहा- 'बच्चे और मां दोनों स्वस्थ हैं'उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने आधिकारिक पोस्ट में नवजात शिशु के नाम का खुलासा करते हुए लिखा:हम यह साझा करते हुए बेहद रोमांचित हैं कि आज सुबह हमारे बेटे एलेक नील वेंस (Alec Neel Vance) का जन्म हुआ है। उषा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ और खुश हैं। हमारे बाकी तीन बच्चे अपने नन्हे छोटे भाई से मिलने के लिए बेहद उत्साहित और आनंदित हैं।इसके साथ ही उन्होंने वाल्टर रीड मेडिकल सेंटर के सैन्य डॉक्टरों और व्हाइट हाउस मेडिकल यूनिट की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उषा और बच्चे की बेहतरीन देखभाल की।156 साल पुराना इतिहास: 1870 में आखिरी बार हुआ था ऐसा दुर्लभ संयोगव्हाइट हाउस हिस्टोरिकल एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, यह अमेरिकी राजनीति में बेहद दुर्लभ घटना है:शायलर कोलफैक्स का रिकॉर्ड: इससे पहले साल 1870 में तत्कालीन राष्ट्रपति यूलिसिस एस. ग्रांट के कार्यकाल के दौरान उपराष्ट्रपति शायलर कोलफैक्स जूनियर (Schuyler Colfax Jr.) की दूसरी पत्नी एलेन वेड ने बेटे शायलर कोलफैक्स III को जन्म दिया था।1.5 सदी का इंतजार: उसके बाद से आज तक (156 वर्षों में) किसी भी उपराष्ट्रपति को पद पर रहते हुए संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ था, जिसे अब 2026 में जेडी और उषा वेंस की जोड़ी ने एक नए इतिहास में बदल दिया है।चार बच्चों का पूरा परिवार, प्राइवेसी के लिए वाशिंगटन से दूर रहने का फैसलाआपको बता दें कि 41 वर्षीय जेडी वेंस वर्तमान अमेरिकी प्रशासन के सबसे युवा और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। येल लॉ स्कूल के दौरान अपनी सहपाठी रहीं 40 वर्षीय उषा वेंस (भारतीय प्रवासियों की बेटी) से उन्होंने साल 2014 में शादी की थी। इस नए मेहमान 'एलेक नील' के आने के बाद अब उनके परिवार में चार बच्चे हो गए हैं—जिनमें दो बड़े बेटे इवान (9 वर्ष), विवेक (6 वर्ष) और एक बेटी मिराबेल रोज (4 वर्ष) शामिल हैं।सूत्रों के मुताबिक, वाशिंगटन डीसी की राजनीतिक चकाचौंध और सुरक्षा घेरे के बीच अपने बच्चों को एक सामान्य और शांत जीवन (Normalcy) देने के लिए वेंस परिवार ने ग्रामीण उत्तरी वर्जीनिया के मिडिलबर्ग इलाके में एक घर लीज पर लिया है। हालांकि उपराष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान 'नेवल ऑब्जर्वेटरी' ही रहेगा, लेकिन बच्चों की परवरिश के लिए वे इस नए आशियाने का उपयोग करेंगे। इस बीच, रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों के ही शीर्ष नेताओं ने वेंस परिवार को इस नए आगमन और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए बधाई संदेश भेजे हैं।
अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात किया ईरान पर हमला : सेंट्रल कमांड
ईरान के खिलाफ अमेरिकी की सैन्य कार्रवाई लगातार 9वें दिन जारी रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक नया दौर शुरू हुआ है
कतर में इराकी पीएम से मिले अमीर, अमेरिका-ईरान समझौते को आगे बढ़ाने पर जोर
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की अपील की
फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल न्यूयॉर्क के न्यूजर्सी स्टेडियम में स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेला जा रहा है। टूर्नामेंट में दोनों टीमें 60 साल बाद आमने-सामने हो रही हैं। स्पेन के लामिन यमाल 5वें मिनट में गोल करने से चूक गए। इसके बाद अर्जेंटीना के मेसी ने अटैक किया। हालांकि वे गोल नहीं कर सके। स्पेन 2010 के बाद दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनने उतरेगा। दूसरी ओर डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना के पास चौथी बार ट्रॉफी जीतने और लगातार दूसरा वर्ल्ड कप अपने नाम करने का मौका होगा। जीत दर्ज करने पर अर्जेंटीना की टीम इटली (1938) और ब्राजील (1962) के बाद लगातार दो वर्ल्ड कप जीतने वाली तीसरी टीम बन जाएगी। दोनों टीमों के बीच अब तक 14 मुकाबले खेले गए हैं। दोनों ने 6-6 मैच जीते हैं और 2 मुकाबले ड्रॉ रहे। वर्ल्ड कप में दोनों की अब तक सिर्फ एक भिड़ंत हुई है। 1966 में अर्जेंटीना ने स्पेन को 2-1 से हराया था। वहीं पिछली भिड़ंत 2018 के दोस्ताना मैच में हुई थी, जिसमें स्पेन ने अर्जेंटीना को 6-1 से मात दी थी। क्लोजिंग सेरेमनी की 5 फोटोज… दोनों टीमों की स्टार्टिंग-11 स्पेन: उनाई सिमोन (गोलकीपर), पेड्रो पोरो, एमेरिक लापोर्टे, पाउ क्यूबार्सी, मार्क कुकुरेला, फाबियान रुइज, एलेक्स बाएना, रोड्री (कप्तान), दानी ओल्मो, लामिन यामाल, मिकेल ओयारजाबाल। अर्जेंटीना: एमिलियानो मार्टिनेज (गोलकीपर), निकोलस टैग्लियाफिको, गोंजालो मोंटिएल, लिसांद्रो मार्टिनेज, क्रिस्टियन रोमेरो, रोड्रिगो डी पॉल, निको गोंजालेज, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडेज, जूलियन अल्वारेज, लियोनेल मेसी (कप्तान)।
लगातार आठवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले, हाई अलर्ट पर 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि मध्य पूर्व में तैनात 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों का एक और दौर पूरा कर लिया है।
पहली तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगा शेयर बाजार का रुझान
मुंबई, भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला कारोबारी हफ्ता काफी अहम होने वाला है। घरेलू आर्थिक आंकड़े जैसे पीएमआई, अमेरिका-ईरान तनाव और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजे बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवण सिंह पंधेर ने 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर होने वाली महा रैली को लेकर पंजाब के किसानों और मजदूरों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब से सैकड़ों बसें किसानों को लेकर दिल्ली के लिए रवाना होंगी। किसान मजदूर मोर्चा, ए.के.एम., बी.के.यू. एकता संघर्ष समेत कई किसान संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे। अमृतसर और गुरदासपुर जिले के किसान ब्यास में कल सुबह 11 बजे तक एकत्र होंगे, जबकि तरनतारन जिले के किसान गोइंदवाल साहिब में जुटेंगे। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी किसानों के लिए अलग-अलग स्थान तय किए गए हैं। पंधेर ने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का कृषि और डेयरी क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समझौते में मक्का, सोयाबीन, कपास, ड्राई फ्रूट, सेब, नाशपाती और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं। उनके मुताबिक, इसे व्यापक व्यापार समझौता बताया जा रहा है, लेकिन व्यापकता के नाम पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई वस्तुएं इसमें शामिल हो सकती हैं। उन्होंने पंजाब के युवाओं, किसानों और मजदूरों से अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की। पंधेर ने कहा कि पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और अन्य राज्यों से भी किसान दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को होने वाला यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन शाम 4 बजे समाप्त होगा। साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों को दिल्ली जाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से न रोका जाए।
ईरान के हमले में पहली बार दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। इसके बाद अमेरिकी सेना ने शनिवार को कहा कि उसने सैनिकों के मारे जाने के जवाब में ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
जयपुर में सॉफ्टेवयर इंजीनियर की पत्नी शादी के 8 साल बाद अचानक पीहर चली गई। उसके कुछ समय बाद रिश्तेदार की शादी में जाने के बहाने ससुराल से गहने भी मंगवा लिए। इसके बाद पत्नी (सॉफ्टवेयर इंजीनियर) जॉब के लिए अमेरिका चली गई। करीब 2 साल बाद इंडिया लौटी, लेकिन ससुराल नहीं आई। पति से बात करना भी बंद कर दिया। फिर 8 साल की बेटी की कस्टडी के लिए केस कर ससुराल पक्ष को नोटिस भिजवा दिया। यही नहीं, जिन गहनों को उसके मायके वाले हड़प चुके थे, उनको मांगने का भी नोटिस में जिक्र कर दिया। नोटिस मिलने के बाद 17 जुलाई को ससुर (पति के पिता) ने बिंदायका पुलिस थाने में बहू के पिता और उसके चाचा के खिलाफ गहने हड़पने की FIR दर्ज करवाई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा मामला… सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की 2014 में कराई थी शादी बिंदायका थाने के ASI बाबूलाल ने बताया- 65 वर्षीय बुजुर्ग ने थाने में FIR दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनके सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की शादी बेंगलुरु (कर्नाटक) निवासी युवती से साल 2014 में हुई थी। वह भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। शादी के करीब 8 साल बाद उनकी बहू अचानक पीहर चली गई। 8 दिसंबर 2023 को बहू के पिता और चाचा जयपुर आए। विद्याधर नगर में एक शादी में शामिल होने की कहकर उनके घर पर ही रुक गए। उस दौरान उनकी बहू बेंगलुरु में पीहर में ही थी। बहू के गहने लेने जयपुर आए थे पिता और चाचा ससुर ने रिपोर्ट में बताया कि जयपुर स्थित उनके घर पर बातचीत के दौरान बहू के पिता और चाचा ने 21 जनवरी 2024 को सिकंदराबाद (तेलंगाना) में परिवार में शादी होना बताया। शादी में बहू के भी जाने की बात बताई। दोनों ने अलमारी में रखी बहू की ज्वेलरी के साथ-साथ हमारे पैतृक गहने भी शादी में पहनने के लिए मांगे। उन्होंने बहू के अच्छे व्यवहार और संबंधों के चलते रिश्तेदार की शादी में पहनने के लिए गहने निकालकर उन्हें दे दिए। बाद में पता चला कि सिकंदराबाद में हुई शादी में बहू की मम्मी ने उन गहनों को पहना था। अमेरिका से लौटने पर भेजा नोटिस इसके बाद जॉब के सिलसिले में बहू मासूम बेटी के साथ अमेरिका चली गई। करीब 2 साल अमेरिका में रहने के बाद मार्च 2026 में बहू के इंडिया लौटने का पता चला। रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि 25 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु कोर्ट से उन्हें एक नोटिस मिला। नोटिस से पता चला कि बहू ने बेटी की कस्टडी के लिए बेंगलुरु कोर्ट में केस फाइल कर रखा है। मायके वाले ने जो गहने लिए थे, उसका भी झूठा हवाला दिया है कि वह अभी भी उनके (ससुराल वालों के) पास है। गहने मांगे तो लौटाने से किया इनकार इसका पता चलने पर पीड़ित परिवार ने बहू के मायके वालों से कॉन्टैक्ट कर गहने मांगे, तो उन्होंने गहने लौटाने से मना कर दिया। इन गहनों में सोने का रानीहार, मंगलसूत्र, कमरबंद, बाजूबंद, हथफूल, सात अंगूठी, दो कड़े, दो चूड़ी, चेन-पेंडेंट सेट, कान की जोड़ियां, टीका और अन्य सोने के गहने शामिल हैं। इसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
वाशिंगटन/तेहरान/लखनऊ। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी अमेरिका और ईरान का युद्ध अब अपने सबसे खौफनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान द्वारा किए गए सीधे ड्रोन और मिसाइल हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है। युद्ध के शुरुआती दिनों के बाद यह पहला मौका है जब ईरान की सीधी गोलीबारी में अमेरिकी जवानों की जान गई है। इस घटना से बौखलाए अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को कई गुना तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसने ईरान के कुख्यात 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) को सजा देने के लिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास सिरिक के निकट तड़के 1:30 बजे भीषण हवाई हमले किए हैं। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे बड़े मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह ध्वस्त करना है।कुवैत में तबाही: डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला, पीने के पानी का संकटअमेरिका के इन हमलों के जवाब में ईरान और उसके सहयोगी विद्रोही गुटों (Axis of Resistance) ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को ईरान ने रेगिस्तानी देश कुवैत पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिससे वहां के एक प्रमुख ऑयल फैसिलिटी सेंटर और 'वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट' (खारे पानी को मीठा बनाने वाला संयंत्र) को भारी नुकसान पहुंचा है। दो दिनों के भीतर कुवैत के पानी के प्लांट पर यह दूसरा बड़ा हमला है। कुवैत अपनी जरूरत का 90% पीने का पानी इसी तकनीक से हासिल करता है। इस हमले के बाद प्लांट में भीषण आग लग गई और कई बिजली उत्पादन इकाइयां ठप हो गईं, जिससे पूरे कुवैत में पीने के पानी और बिजली का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए कुवैत ने आपातकाल लागू कर कुछ समय के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) पूरी तरह बंद कर दिया था।इराक और जॉर्डन में भी मिसाइल और ड्रोन युद्ध, बहरीन-सऊदी में बजे सायरनइस युद्ध की लपटें अब पूरे मध्य पूर्व में फैल चुकी हैं। इराक के अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र की राजधानी इरबिल में रविवार तड़के आसमान धमाकों से गूंज उठा। यहां कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के बेस पर हुए ड्रोन हमले में 8 सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद इराकी एयर डिफेंस ने कई हमलावर ड्रोनों को मार गिराया। वहीं पड़ोसी देश जॉर्डन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए अपनी सीमा में घुस रही कई ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सऊदी अरब और बहरीन में दिन भर हवाई हमलों के सायरन बजते रहे, जिससे वहां के नागरिकों में दहशत का माहौल है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने ईरान की इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उसे आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए 'युद्ध अपराध' (War Crimes) का दोषी ठहराया है।खामेनेई की 'कभी न भूलने वाले सबक' की चेतावनी, अंतरिम डील टूटीअमेरिकी सेना द्वारा अपने जवानों की मौत की पुष्टि करने से ठीक पहले ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला खामेनेई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस्लामिक रिपब्लिक पर हमले नहीं रोके गए, तो वाशिंगटन को 'कभी न भूलने वाले सबक' सिखाए जाएंगे। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टीवी पर घोषणा की है कि अमेरिका द्वारा प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन के बाद तेहरान ने एक महीने पहले हुई उस 'अंतरिम डील' को पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है, जिसका मकसद युद्ध को स्थायी रूप से रोकना था। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 16 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 430 से अधिक घायल हुए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए ग्लोबल ट्रैवल अलर्ट जारी कर दिया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर मंदी के बादल मंडराने लगे हैं।
तेहरान/लखनऊ। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अब ईरान के भीतर एक बहुत बड़ा आंतरिक राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। वैश्विक मीडिया संस्थान सीएनएन (CNN) की एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के भीतर सत्ता पर कब्जे को लेकर गृहयुद्ध और तख्तापलट (Coup) जैसी स्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं। ईरान के शक्तिशाली कट्टरपंथी गुटों ने अपनी ही सरकार पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत और समझौता करने वाले उदारवादी नेता इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ एक 'सॉफ्ट तख्तापलट' (Soft Coup) की साजिश रच रहे हैं। कट्टरपंथियों का दावा है कि नए सुप्रीम लीडर को पूरी तरह दरकिनार कर देश की कमान कुछ चुनिंदा नेताओं ने अपने हाथों में ले ली है।खामेनेई के अंतिम संस्कार में बवाल: विदेश मंत्री पर पथराव, लगे गद्दार के नारेईरान के भीतर सुलग रहा यह आंतरिक असंतोष उस समय सार्वजनिक रूप से हिंसक रूप में सामने आ गया, जब पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी। गौरतलब है कि खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए शुरुआती हवाई हमलों में हो गई थी। अंतिम संस्कार के दौरान जब ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब कट्टरपंथी समर्थकों ने 'समझौता करने वालों की मौत हो' के उग्र नारे लगाए। हद तो तब हो गई जब भीड़ ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थरों से हमला कर दिया और उन्हें 'देश बेचने वाला गद्दार' करार दिया। यही नहीं, ईरानी शासन से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पजशकियान को सीधे तौर पर धमकी देते हुए कहा, राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।कट्टरपंथी गुटों के गंभीर आरोप: मुज्तबा खामेनेई के नाम पर खेल?ईरान के इन कट्टरपंथी गुटों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सरकार को अमेरिका से बदला लेना चाहिए था, लेकिन उसने देश के स्वाभिमान को ताक पर रखकर वाशिंगटन से गुप्त समझौता कर लिया। उनका आरोप है कि यह समझौता नए संभावित सुप्रीम लीडर और दिवंगत खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की इच्छा के बिल्कुल खिलाफ जाकर किया गया है। रहस्यमयी बात यह है कि मुज्तबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से जनता के सामने नहीं आए हैं, न ही उन्होंने देश को संबोधित किया है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति और उनकी टीम उनके नाम का इस्तेमाल कर बड़े फैसले ले रही है। कट्टरपंथियों ने सरकार पर संसद को जबरन निलंबित करने, सुप्रीम लीडर के पुराने निर्देशों की धज्जियां उड़ाने और रात में होने वाली सरकार विरोधी रैलियों को बलपूर्वक रोकने का भी आरोप मढ़ा है। ईरान के सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ लिखा है, ईरान की जनता सावधान रहे, क्या देश में तख्तापलट होने वाला है? हम खामेनेई के खून का बदला लेने और तख्तापलट के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं।क्यों पैदा हुआ यह नेतृत्व का संकट? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्सईरान मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और प्रसिद्ध पुस्तक ‘What Iranians Want’ के लेखक अराश अजीजी ने सीएनएन से बातचीत में इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी समझाई है। उनके मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई के पूरी तरह से पर्दे के पीछे रहने के कारण ईरान में एक पावर वैक्यूम (नेतृत्व शून्यता) पैदा हो गया है। इसके चलते संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति पेजेशकियन और विदेश मंत्री अराघची ही इस समय ईरानी सरकार के मुख्य चेहरे बन चुके हैं। चूंकि कट्टरपंथी तत्वों की पहुंच मुज्तबा तक सीधे नहीं हो पा रही है, इसलिए वे इन तीन शीर्ष नेताओं को विलेन मान रहे हैं और उन पर अवैध तरीके से सत्ता हथियाने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं। इस भयंकर अंदरूनी राजनीतिक खींचतान के बीच सीमा पर अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले भी बदस्तूर जारी हैं, जिससे ईरान दोहरे संकट में फंस गया है।
अमेरिका का ईरान पर नया हमला, IRGC की गोलीबारी में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शनिवार को जॉर्डन में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से की गई गोलीबारी में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। अमेरिका ने अभी तक मारे गए और ...
जॉर्डन में ईरानी हमला: दो अमेरिकी सैनिक ढेर, खाड़ी में दहशत
पश्चिम एशिया में चार महीने से जारी संघर्ष और भीषण होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को पुष्टि की कि जॉर्डन में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला करते हुए उनके दो सैनिक मारे गए हैं
Share Market Weekly Review : अमेरिका ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपए में भारी गिरावट की वजह से भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। इस हफ्ते सेंसेक्स में 582 अंकों की बढ़त रही तो निफ्टी भी 126 अंक ऊपर बंद हुआ। ...
वैश्विक महाशक्ति अमेरिका इस समय एक साथ कई मोर्चों पर गंभीर संकटों से घिरा हुआ है। एक तरफ जहां व्हाइट हाउस और पेंटागन में ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति और संभावित युद्ध को लेकर बड़े स्तर पर मंथन चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद अमेरिका के भीतर प्रकृति ने भयंकर तबाही मचा रखी है। देश के कई राज्य जहां एक ओर विनाशकारी बाढ़ और मूसलाधार बारिश में पूरी तरह डूब चुके हैं, तो वहीं दूसरी ओर सैकड़ों एकड़ में फैली जंगलों की आग (वाइल्डफायर) ने पूरे आसमान को काले और जहरीले धुएं से पाट दिया है। इस घरेलू आपातकाल और पर्यावरण संकट से बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अपनी भड़ास पड़ोसी देश कनाडा पर निकाली है और उसे सीधे तौर पर आर्थिक प्रतिबंध यानी एडिशनल टैरिफ लगाने की खुली चेतावनी दे दी है।जहरीले धुएं से घुट रहा है अमेरिकी शहरों का दम, जारी हुआ अलर्टदरअसल, इस समय कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग का खतरनाक और दूषित धुआं तेजी से सीमाओं को पार कर अमेरिका के आसमान पर छा गया है। न्यूयॉर्क, शिकागो, डेट्रॉइट और वाशिंगटन डीसी जैसे अमेरिका के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता (AQI) बेहद खतरनाक और जानलेवा स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसके कारण करोड़ों लोगों को घरों के अंदर ही रहने की सख्त हिदायत दी गई है। नासा (NASA) और मौसम विज्ञानियों की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा की तरफ से आ रहे इस 'प्रदूषण के आक्रमण' ने अमेरिका के 20 से अधिक राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है। न्यूयॉर्क में होने वाले आगामी बड़े आयोजनों और आम जनजीवन पर इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जिसने अमेरिकी प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है।'कनाडा की लापरवाही का हर्जाना भुगतेगा व्यापार' - ट्रंप का बड़ा बयानइस संकट पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कनाडाई सरकार को आड़े हाथों लिया। ट्रंप ने कहा कि कनाडा अपने जंगलों का सही तरीके से रखरखाव करने में पूरी तरह नाकाम रहा है और उसकी इस 'जानबूझकर की गई लापरवाही' के कारण अमेरिकी नागरिकों के फेफड़े इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस प्रदूषण के कारण अमेरिका को जो अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है, उसे कनाडा से वसूला जाएगा और इस खर्च को कनाडा से आने वाले सामानों पर लगने वाले मौजूदा टैरिफ में जोड़ दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक युद्ध (Trade War) छिड़ने के आसार और तेज हो गए हैं।भीषण बाढ़ और जलवायु परिवर्तन की दोहरी मार से बेहाल USकनाडा की ओर से आ रहे धुएं के अलावा अमेरिका खुद आंतरिक रूप से कुदरती कहर का सामना कर रहा है। अमेरिका के कई हिस्सों में अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Floods) और अत्यधिक बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, जिससे रिहायशी इलाके, सबवे और बेसमेंट पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। इस मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण पूरा उत्तरी अमेरिका इस समय भीषण सूखे, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और अप्रत्याशित तूफानों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में जब राष्ट्रपति का पूरा ध्यान मिडिल ईस्ट और ईरान नीति पर होना चाहिए था, घरेलू मोर्चे पर पैदा हुए इस प्राकृतिक और आर्थिक संकट ने ट्रंप प्रशासन की राजनीतिक प्राथमिकताओं को बदलने पर मजबूर कर दिया है।
ईरान के समुद्री निगरानी नेटवर्क पर अमेरिकी अटैक, व्यावसायिक जहाजों की निगरानी में बड़ी बाधा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के चाबहार स्थित शहीद कलांतरी बंदरगाह के एक निगरानी टावर को नष्ट कर दिया है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साइबर हमलों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसी विदेशी ताकतें और कुछ गैर-सरकारी समूह साइबर हमलों के जरिए अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि देश की डिजिटल चुनाव प्रणाली में सेंध लगाकर नतीजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक पटल पर अमेरिका के चुनावी सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। हालांकि, 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) की विस्तृत रिपोर्ट और शीर्ष चुनाव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका की चुनाव व्यवस्था दुनिया की सबसे जटिल, विकेंद्रीकृत और अभेद्य प्रणालियों में से एक है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली काम कैसे करती है और इसमें सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं।क्यों हैक करना नामुमकिन है अमेरिका का चुनाव सिस्टम?एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया भारत या अन्य देशों की तरह किसी एक केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित नहीं की जाती। पूरे अमेरिका में चुनाव किसी एक संस्था के बजाय 10,000 से ज्यादा स्वतंत्र और अलग-अलग स्थानीय चुनाव क्षेत्रों (लोकल ज्यूरिसडिक्शन) में कराए जाते हैं।अमेरिकी संविधान के तहत राज्यों को अपने तरीके से चुनाव कराने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) कुछ बुनियादी नियम तय कर सकती है, लेकिन वोटिंग मशीनों के चयन से लेकर गिनती तक की पूरी जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के कंधों पर होती है। यही वजह है कि पूरे देश में कोई एक सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीय) डिजिटल सिस्टम नहीं है जिसे एक साथ हैक करके नतीजे बदले जा सकें। हर क्षेत्र का अपना अलग और ऑफलाइन ढांचा होता है।वोटर फ्रॉड रोकने के लिए थ्री-लेयर सिक्योरिटी सिस्टमअमेरिकी चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी या धोखाधड़ी (वोटर फ्रॉड) की आशंकाएं न के बराबर होती हैं, और यदि कोई ऐसा प्रयास करता भी है, तो वह तुरंत पकड़ में आ जाता है। अमेरिकी कानून के तहत चुनावी नियमों का उल्लंघन करना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी का अपराध माना जाता है।सुरक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:कठोर कानूनी कार्रवाई: एक से अधिक बार मतदान करना, किसी अन्य मृत या जीवित व्यक्ति के नाम पर फर्जी वोट डालना, बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करना या गलत दस्तावेज देना संघीय अपराध है, जिसके लिए भारी आर्थिक जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।पहचान का कड़ा सत्यापन: मतदान केंद्र पर वोट डालते समय अधिकांश राज्यों में वैध फोटो पहचान पत्र (Photo ID) मांगा जाता है।मेल-इन बैलेट सुरक्षा: डाक (Mail-in Ballot) के जरिए होने वाले मतदान में सुरक्षा को दोगुना करने के लिए मतदाता के हस्ताक्षरों का मिलान (Signature Verification), आधिकारिक गवाहों की गवाही या नोटरी जैसी बेहद जटिल और अतिरिक्त कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।2020 चुनाव चोरी के दावों पर क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े?डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह सार्वजनिक दावा करते रहे हैं कि साल 2020 का राष्ट्रपति चुनाव एक बड़ी धांधली के जरिए उनसे चुराया गया था। इस दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए एसोसिएटेड प्रेस ने साल 2021 में ट्रंप द्वारा विवादित ठहराए गए छह सबसे प्रमुख स्विंग स्टेट्स (राज्यों) में वोटर फ्रॉड के हर एक संभावित और संदिग्ध मामले की विस्तृत समीक्षा की थी।इस गहन पड़ताल में पाया गया कि इन राज्यों में कुल मिलाकर 475 से भी कम गड़बड़ी के मामले सामने आए थे, जो कि चुनाव के अंतिम परिणाम को बदलने के लिहाज से तिनके के बराबर भी नहीं थे। बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के ट्रंप के इन तमाम कानूनी आरोपों को अमेरिका की कई प्रांतीय व संघीय अदालतों, राज्य के चुनाव अधिकारियों और यहां तक कि ट्रंप सरकार के खुद के 'होमलैंड सिक्योरिटी विभाग' ने सिरे से खारिज कर दिया था। उस दौरान ट्रंप द्वारा ही नियुक्त किए गए तत्कालीन अमेरिकी अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि जांच में ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है जो 2020 के चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सके।ट्रंप के आरोपों पर भड़का चीन, कहा- बेबुनियाद और मनगढ़ंतडोनाल्ड ट्रंप द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में लगाए गए साइबर घुसपैठ के आरोपों पर चीन ने बेहद कड़ी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान साफ कहा कि चीन ने कभी भी अमेरिका के आंतरिक मामलों या उनके चुनावों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही भविष्य में उसकी ऐसी कोई मंशा है।प्रवक्ता लिन जियान ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत, राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने वाशिंगटन को नसीहत देते हुए अपील की कि अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति और चुनावी खींचतान में चीन का नाम घसीटना तुरंत बंद करे और इसके बजाय दोनों महाशक्तियों के द्विपक्षीय रिश्तों को रचनात्मक तरीके से बेहतर बनाने की दिशा में काम करे।
फतेहाबाद जिले के जाखल में मजदूर किसान मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को किसानों ने भारत- अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। गांव मुनदलिया के सरपंच निर्मल सिंह की अध्यक्षता में तलवाड़ा, साधनवास, चांदपुरा और मुनदलिया सहित कई गांवों में किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले फूंके और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरपंच निर्मल सिंह मुनदलिया ने कहा कि प्रस्तावित ट्रेड डील किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों के विपरीत है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी नीतियों से कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और छोटे व मध्यम वर्ग के किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करने की मांग मुनदलिया ने सरकार से किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और कृषि से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करने की अपील की। किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों की लगातार अनदेखी की गई और किसान हितों के खिलाफ निर्णय लिए गए, तो मजदूर किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने सरकार से किसान हितों की रक्षा करने और ट्रेड डील से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार करने की मांग की। इस मौके पर सरपंच निर्मल सिंह मुनदलिया के साथ तारा सिंह, गोरा सिंह, कुलदीप सिंह, देसराज सिंह, जगतार सिंह, सुखा सिंह सहित अनेक किसान और मजदूर साथी मौजूद रहे।
चीनी कंपनी मूनशॉट AI ने अपना नया AI मॉडल किमी K3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स वाला दुनिया का पहला ओपन मॉडल है। इसमें 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है। पिछले मॉडल किमी K2 की तुलना में इसकी स्केलिंग दक्षता करीब 2.5 गुना बेहतर है। इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए एआई मॉडल एक इंसानी दिमाग की तरह है, जिसे एक बहुत बड़ी परीक्षा की तैयारी करनी है। 1. पैरामीटर्स क्या हैं? पैरामीटर्स को आप एआई का 'अनुभव' मान सकते हैं। एक बच्चा जब बड़ा होता है, तो वह जितनी ज्यादा बातें सीखता है, उसका दिमाग उतना ही तेज चलता है। एआई की दुनिया में जिस मॉडल के पास जितने ज्यादा पैरामीटर्स होते हैं, वह उतना ही समझदार माना जाता है। 28 लाख करोड़ पैरामीटर्स होने का मतलब है कि इस मॉडल का दिमाग बेहद विशाल है और यह बहुत ही पेचीदा और मुश्किल सवालों को इंसानों की तरह समझकर हल कर सकता है। 2. 3T क्लास क्या है? यहां 'T' का मतलब है ट्रिलियन। चूंकि इस मॉडल में 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स हैं, जो कि 3 ट्रिलियन (3.0T) के बेहद करीब है, इसलिए इसे '3T क्लास' का मॉडल कहा गया है। एआई की दुनिया में 3T क्लास में पहुंचना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इतने बड़े मॉडल अब तक सिर्फ अमेरिका की ओपन एआई जैसी चुनिंदा कंपनियों के पास ही थे। 3. 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो क्या है? कॉन्टेक्स्ट विंडो का मतलब है एआई की 'याददाश्त' या एक बार में पढ़ने की क्षमता। जब आप एआई से चैट करते हैं, तो वह एक बार में कितना लंबा पैराग्राफ या दस्तावेज याद रख सकता है, यही उसकी कॉन्टेक्स्ट विंडो है। उदाहरण: एक आम एआई मॉडल को अगर आप 5-10 पन्ने देंगे, तो वह उसे पढ़ लेगा, लेकिन पूरी किताब देने पर उसके हाथ-पैर फूल जाएंगे। किमी K3 की 10 लाख टोकन की क्षमता का मतलब है कि आप इसे पूरी की पूरी मोटी किताब, हजारों लाइनों का कंप्यूटर कोड या साल भर की बैंक स्टेटमेंट एक साथ दे दीजिए; यह एक सेकंड में उस पूरी जानकारी को दिमाग में रखकर आपको उसका सटीक विश्लेषण करके दे देगा। 4. स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर होने का क्या मतलब है? 'स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर' होने का मतलब है कि मूनशॉट कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर को इतना कुशल बना दिया है कि यह अपने पिछले मॉडल के मुकाबले ढाई गुना कम कंप्यूटर पावर और खर्चे में, उससे कहीं ज्यादा तेजी से और बड़ा काम कर सकता है। 5. 'ओपन मॉडल' होने का क्या फायदा है? अब तक अमेरिका की कंपनियां अपने इतने बड़े मॉडल्स को छुपाकर रखती हैं। इसे क्लोज्ड मॉडल कहते हैं। वे सिर्फ आपको इस्तेमाल करने देती हैं, लेकिन यह नहीं बतातीं कि इसे अंदर से कैसे बनाया गया है। चीन की कंपनी ने इसे 'ओपन मॉडल' रखा है। इसका मतलब है कि वह इस शक्तिशाली दिमाग की 'ब्लूप्रिंट' दुनिया भर के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और वैज्ञानिकों के लिए मुफ्त या खुले तौर पर जारी कर देगी। इससे दुनिया का कोई भी आम इंजीनियर इस एआई को लेकर अपने हिसाब से बदल सकता है, नया ऐप बना सकता है या अपने काम में इस्तेमाल कर सकता है। मूनशॉट 27 जुलाई को ओपन करेगा अपना सीक्रेट फॉर्मूला मूनशॉट AI ने ब्लॉग में बताया कि Kimi K3 को 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' पर बनाया गया है। इसमें नेटिव विजन क्षमताएं भी हैं। यह मॉडल कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग जैसे जटिल कामों के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसके फुल मॉडल वेट्स 27 जुलाई तक जारी कर दिए जाएंगे। 1. 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' क्या है? उदाहरण से समझिए: जब आप कोई बहुत मोटी किताब पढ़ते हैं, तो क्या आप हर एक शब्द पर बराबर ध्यान देते हैं? नहीं। आपका दिमाग केवल मुख्य शब्दों और जरूरी लाइनों पर 'अटेंशन' देता है और फालतू शब्दों को छोड़ देता है। फायदा: मूनशॉट AI ने 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' नाम का जो नया फॉर्मूला बनाया है, वह इस एआई को यही सुपर पावर देता है। जब आप इसे बहुत बड़ा काम या लाखों शब्दों की फाइल देते हैं, तो यह तकनीक एआई के दिमाग को भटकने नहीं देती। यह केवल सबसे जरूरी पॉइंट पर फोकस करती है और पुरानी पढ़ी हुई बातों का 'असर' (रेजिड्यूल्स) दिमाग में बनाए रखती है। इससे एआई बिना थके और बिना गलती किए बहुत तेजी से काम कर लेता है। 2. ‘नेटिव विजन क्षमताएं’ क्या हैं? उदाहरण से समझिए: पहले के एआई सिर्फ टेक्स्ट समझ सकते थे। अगर आप उन्हें फोटो दिखाते, तो उन्हें पहले उस फोटो को शब्दों में बदलना पड़ता था, तब वो समझ पाते थे। लेकिन 'नेटिव विजन' का मतलब है कि Kimi K3 के पास देखने की क्षमता है। फायदा: आप इसे कोई फोटो, कोई पेचीदा ग्राफ, मेडिकल स्कैन (जैसे एक्स-रे या एमआरआई) या कोई वीडियो दिखाएंगे, तो यह उसे इंसानी आंखों की तरह देखकर तुरंत समझ जाएगा और उस पर आपके सवालों के जवाब दे देगा। 3. कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग का क्या मतलब है? कंपनी का कहना है कि यह मॉडल तीन बड़े काम करेगा: लॉन्ग-होराइजन कोडिंग : इसका मतलब सिर्फ छोटा-मोटा कोड लिखना नहीं है। यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की तरह एक साथ हजारों लाइनों का पूरा का पूरा बड़ा कंप्यूटर प्रोग्राम या ऐप खुद लिख सकता है और उसमें कमियां ढूंढकर ठीक कर सकता है। नॉलेज वर्क: यह रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और बड़े वकीलों की तरह काम कर सकता है। सालों पुरानी फाइलों को खंगालना, बड़े कानूनी मामलों का विश्लेषण करना या किसी विषय पर पूरी रिसर्च रिपोर्ट तैयार करना इसके लिए चुटकियों का काम है। रीजनिंग: इसका मतलब है 'सोचने-समझने और तर्क करने की क्षमता'। यह सिर्फ रटी-रटाई बातें नहीं बताएगा, बल्कि इंसानों की तरह गणित के मुश्किल सवालों या बिजनेस की उलझनों में 'अगर-मगर' लगाकर सही फैसला लेने में मदद करेगा। अमेरिका के लेटेस्ट AI मॉडल्स से पीछे है Kimi K3 कंपनी ने माना कि Kimi K3 का प्रदर्शन अमेरिका के क्लॉड फेबल 5 और GPT 5.6 Sol जैसे मॉडल्स से पीछे है। हालांकि, कई बेंचमार्क टेस्ट में इसने अमेरिका के पुराने मॉडल्स को पीछे छोड़ दिया है। मूनशॉट AI को चीनी कंपनी अलीबाबा और टेनसेंट का समर्थन हासिल है। चीनी फर्मों ने 24 हजार फर्जी अकाउंट बनाकर चुराया डेटा इसी बीच, अमेरिकी कंपनियों ने चीनी फर्मों के सस्ते में मॉडल जारी करने पर चिंता जताई है। एंथ्रोपिक ने आरोप लगाया है कि डीपसीक, मूनशॉट और मिनीमैक्स ने उनके मॉडल की क्षमताओं को अवैध रूप से निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए। एंथ्रोपिक के मुताबिक, करीब 24,000 फर्जी खातों से 1.6 करोड़ बार क्लॉड का इस्तेमाल किया गया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध:राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ की बैठक; 'देश बचाओ मोर्चा' का ऐलान
बड़वानी जनपद की ग्राम पंचायत रेहगून के गवलाबेड़ी गांव में गुरुवार देर रात राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने 'देश बचाओ मोर्चा' के तहत बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर किसानों और युवाओं को जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और युवा शामिल हुए। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता लागू होने पर कृषि, दुग्ध उत्पादन, सोयाबीन, मक्का, कपास और फल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका दावा था कि इससे छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका प्रभावित होगी तथा विदेशी कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी बढ़ेगी। समझौते को बताया किसान हितों के खिलाफ राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के प्रदेश संगठन महामंत्री गोपाल पाटीदार ने प्रस्तावित समझौते को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उन्होंने किसानों से इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने और जनसमर्थन जुटाने का आह्वान किया। आंदोलन तेज करने की चेतावनी मालवा-निमाड़ प्रांत अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि यदि सरकार ने किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया तो संगठन प्रदेशभर में आंदोलन तेज करेगा। प्रांत उपाध्यक्ष कैलाश पाटीदार और किशोर पाटीदार ने भी किसानों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की। युवाओं ने ली सदस्यता, आंदोलन से जुड़ने का संकल्प बैठक के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं ने राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ की सदस्यता ग्रहण की और 'देश बचाओ आंदोलन' से जुड़ने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को खरगौन जिला अध्यक्ष संतोष यादव, तहसील अध्यक्ष सुखदेव पाटीदार और जिला कोषाध्यक्ष माधव यादव ने भी संबोधित किया। अंत में उपस्थित लोगों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
मिडल ईस्ट की राजनीति में इन दिनों एक अजीब कूटनीतिक पहेली सुलझती नजर नहीं आ रही है। एक तरफ सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके साम्राज्य की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और किसी भी प्रकार का हमला उसके लिए 'रेड लाइन' है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान का ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का 'ठेकेदार' बनने का प्रयास गले की हड्डी बनता जा रहा है। इस्लामाबाद के इस कदम ने न केवल उसे अपने पुराने दोस्त सऊदी अरब की नजरों में संदिग्ध बना दिया है, बल्कि उसे एक ऐसे कूटनीतिक भंवर में धकेल दिया है जहां से निकलना अब मुश्किल होता जा रहा है।मध्यस्थता का दिखावा या कूटनीतिक मजबूरी?पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता आया है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक 'सेतु' (Bridge) का काम कर सकता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रुख उसकी अपनी आर्थिक बदहाली और सऊदी अरब से मिलने वाली वित्तीय मदद के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर रहा है। सऊदी अरब मिडल ईस्ट में अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क है और वह ईरान को अपना सबसे बड़ा क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानता है। ऐसे में, यदि पाकिस्तान ईरान के करीब जाकर अमेरिका से डील कराने का प्रयास करता है, तो रियाद इसे अपनी पीठ में छुरा घोंपने जैसा महसूस करता है। पाकिस्तान का यह दोहरा रुख अब उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर रहा है।सऊदी अरब की 'रेड लाइन' और पाक की मुश्किलेंरियाद ने साफ कर दिया है कि यमन या समुद्री रास्तों से उसकी सुरक्षा को खतरा पहुँचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सऊदी अरब की इस सख्त नीति के बीच पाकिस्तान का ईरान के साथ मिलकर अमेरिका से 'डील' की वकालत करना उसके कूटनीतिक समीकरणों को बिगाड़ रहा है। सऊदी अरब से पाकिस्तान को मिलने वाले निवेश और सस्ते तेल पर अब तलवार लटकी हुई है। यदि इस्लामाबाद अपनी मध्यस्थता की नीति को नहीं बदलता, तो उसे रियाद की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पाकिस्तान का यह कूटनीतिक प्रयोग अब उसके अपने ही पाले में 'सेल्फ गोल' साबित हो रहा है।क्यों फंसा है पाकिस्तान?पाकिस्तान की यह स्थिति 'धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का' जैसी हो गई है। एक ओर उसे चीन का दबाव झेलना पड़ रहा है, दूसरी ओर अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की मजबूरी है, और तीसरी ओर सऊदी अरब को नाराज न कर पाने की विवशता है। मध्यस्थता का 'ठेका' लेने के चक्कर में पाकिस्तान ने यह नहीं सोचा कि ईरान-अमेरिका के बीच दशकों से चली आ रही दुश्मनी इतनी आसानी से हल होने वाली नहीं है। अब इस्लामाबाद न तो ईरान को पूरी तरह संतुष्ट कर पा रहा है, न अमेरिका को और न ही सऊदी अरब का भरोसा जीत पा रहा है। अंततः, इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय मंच पर गिरती जा रही है, जो उसके भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है।
रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए ईरान की ओर बढ़ रहे तीन मालवाहक जहाजों को बीच रास्ते में ही रोक दिया है। इस चौंकाने वाली कार्रवाई के दौरान अमेरिकी मरीन कमांडो का एक दस्ता सीधे एक जहाज पर उतरा, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़े सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है।क्या है 'ऑपरेशन शिकंजा'?अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और ईरान द्वारा की जाने वाली संभावित गतिविधियों पर नजर रखने के लिए की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान की तरफ जा रहे तीन जहाजों को घेरा और उनकी तलाशी ली। इस दौरान एक जहाज पर अमेरिकी मरीन कमांडो के उतरने की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वे पूरी तरह से हथियारों से लैस नजर आ रहे हैं। अमेरिकी नौसेना का दावा है कि ये जहाज संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते थे, जिसके कारण यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है इतना अहम?स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में ईरान ने इस क्षेत्र में कई विदेशी तेल टैंकरों को जब्त करने या परेशान करने का प्रयास किया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने इस इलाके में अपनी तैनाती को कई गुना बढ़ा दिया है। अब अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सैन्य मौजूदगी के जरिए इस समुद्री गलियारे को किसी भी तरह की दखलअंदाजी से मुक्त रखने के लिए प्रतिबद्ध है।ईरान की प्रतिक्रिया और भविष्य के हालातइस घटना के बाद तेहरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक बड़े सैन्य टकराव की आहट के तौर पर देख रहे हैं। ईरान पहले ही अमेरिका के इस 'शक्ति प्रदर्शन' को अपने समुद्री क्षेत्र की संप्रभुता का उल्लंघन बता चुका है। उधर, अमेरिका के इस कदम से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है। आने वाले दिनों में हॉर्मुज के जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच यह 'बिल्ली-चूहे' का खेल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिका और उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगी देश इजरायल के बीच अंदरूनी खींचतान अब खुलकर दुनिया के सामने आ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ पिछले महीने हुए शांति समझौते का विरोध करने वाले और इसे सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश करने वाले इजरायली तत्वों को सीधे और बेहद तल्ख शब्दों में 'भाड़ में जाओ' (Go to Hell) कहकर कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बेहद लोकप्रिय पोडकास्ट 'द जो रोगन एक्सपीरियंस' (The Joe Rogan Experience) पर एक विस्तृत तीन घंटे की बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति वेंस ने इजरायल के कड़े रुख पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए कि कुछ इजरायली ताकतें किसी स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य के बिना ईरान के साथ इस सैन्य संघर्ष को अनिश्चितकाल के लिए खींचना चाहती हैं।इजरायली सोशल मीडिया कैंपेन पर भड़के वेंस: अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने का लगाया आरोपपॉडकास्ट पर खुलकर बात करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि इजरायल के भीतर कुछ ऐसे प्रभावी लोग और समूह सक्रिय हैं जो अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने और उसे बदलने के लिए बड़े पैमाने पर गुप्त अभियान चला रहे हैं। वेंस ने आरोप लगाया कि इन अभियानों का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के साथ अमेरिका की जंग कभी खत्म न हो और यह अनिश्चितकाल तक चलती रहे। वेंस ने खुलासा किया कि इजरायली सरकार के करीबी सूत्रों और उनसे जुड़े व्यक्तियों ने खुद उनके खिलाफ एक बड़ा दुष्प्रचार अभियान चलाया क्योंकि वह ईरान के साथ एक ऐसा कूटनीतिक समझौता स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय और सुरक्षा लक्ष्यों के बिल्कुल अनुकूल था।लीक रिपोर्ट्स और ऑनलाइन हमलों का पर्दाफाश: वेंस बोले- 'मैं अमेरिकी हितों के लिए अडिग रहूंगा'उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रोपेगैंडा के काम करने के तरीके को बेनकाब करते हुए कहा कि इस अभियान के तहत अमेरिकी पत्रकारों को संवेदनशील और आधी-अधूरी जानकारियां जानबूझकर लीक की गईं ताकि अमेरिकी सरकार की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर किया जा सके। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन पर व्यक्तिगत हमले किए गए। इन साजिशों के पीछे काम करने वाले इजरायली सिंडिकेट का जिक्र करते हुए वेंस ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, भाड़ में जाओ। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विदेशी ताकतों के इस तरह के दबाव के आगे कभी नहीं झुकेंगे और वही करेंगे जो अमेरिकी नागरिकों और अमेरिका के व्यापक राष्ट्रीय हितों के लिए सबसे बेहतर और सही होगा।फंडिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा: पूर्व ट्रंप अधिकारी और इजरायली सरकार के बीच कनेक्शनबातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति वेंस ने उन खुफिया रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया जिनमें एक बड़े वित्तीय नेक्सस की बात सामने आई थी। इन खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले चुनावी अभियान से जुड़े रहे एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी को इजरायली सरकार के करीबियों से भारी-भरकम फंडिंग मिली थी। इस फंड का उपयोग कुछ विशेष सोशल मीडिया प्रभावितों और रणनीतिकारों को भुगतान करने के लिए किया गया था ताकि वे ईरान नीति को लेकर सीधे उपराष्ट्रपति वेंस पर तीखे हमले बोल सकें। वेंस ने साफ किया कि उन्हें वॉशिंगटन की नीतियों को प्रभावित करने वाली विदेशी सरकारों की कोशिशों या अमेरिकी सरकार के भीतर से होने वाली आलोचनाओं से कोई गुरेज नहीं है क्योंकि इजरायल और दुनिया के अन्य देश हमेशा अपने हितों के लिए ऐसा करते आए हैं। लेकिन उन्हें असल आपत्ति तब होती है जब अमेरिकी नीति निर्माता इन बाहरी प्रभावों के दबाव में आकर देश के फैसले बदलने लगते हैं।एकमात्र मजबूत सहयोगी पर निशाना: पिछले महीने के कूटनीतिक तनाव की यादें हुईं ताजाजेडी वेंस द्वारा की गई यह ताजा टिप्पणी ईरान युद्ध और कूटनीति के मुद्दे पर इजरायली अधिकारियों की अब तक की सबसे सीधी और सबसे तीखी अमेरिकी आलोचना मानी जा रही है। इससे पहले पिछले महीने भी तेहरान के साथ वॉशिंगटन के समझौते की सार्वजनिक रूप से निंदा करने वाले इजरायली कैबिनेट के मंत्रियों को वेंस ने कड़ा आड़े हाथों लिया था। तब उन्होंने बेहद गंभीर लहजे में इजरायली नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा था कि अगर वह खुद इजरायली सरकार के मंत्री होते, तो दुनिया में बचे अपने एकमात्र सबसे शक्तिशाली और मजबूत सहयोगी (अमेरिका) पर इस तरह के घटिया और सार्वजनिक हमले कभी नहीं करते।
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में उच्च शिक्षा प्राप्त करने और करियर बनाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद चिंताजनक और बड़ा झटका देने वाला फैसला सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक विनिमय आगंतुकों (Exchange Visitors) और विदेशी पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को बेहद कड़ा करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) द्वारा जारी किए गए इन नए नियमों के तहत अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रुकने की अधिकतम अवधि को सीमित कर दिया गया है। इस नए आदेश का सीधा और तगड़ा असर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे तीन लाख से भी अधिक भारतीय छात्र-छात्राओं पर पड़ने जा रहा है, जिससे उनका भविष्य अब अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है।F, J और I वीजा की 'असीमित अवधि' समाप्त: अब तय समय सीमा के भीतर ही रहना होगा अमेरिका मेंवर्तमान व्यवस्था के तहत, अमेरिका में F वीजा (इंटरनेशनल स्टूडेंट्स), J वीजा (सांस्कृतिक और शैक्षणिक एक्सचेंज प्रोग्राम विजिटर्स) और I वीजा (विदेशी मीडिया कर्मी) धारक अपने संबंधित स्टडी प्रोग्राम, रिसर्च वर्क या मीडिया जॉब की पूरी अवधि तक कानूनी रूप से अमेरिका में रहने के हकदार होते थे। इसे 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' कहा जाता था। लेकिन ट्रंप सरकार के नए नियम ने इस असीमित प्रावधान को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब इन सभी वीजा धारकों के लिए एक 'फिक्स्ड पीरियड' यानी तय समय सीमा निर्धारित कर दी गई है। नए नियम के अनुसार, स्टूडेंट और एक्सचेंज वीजा की अधिकतम अवधि चार साल से ज्यादा की नहीं होगी। यह नया नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के 60 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा, जो कि अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा के अधीन है।कोर्स बदलने और स्कूल ट्रांसफर पर भी लगी सख्त पाबंदी: देश छोड़ने का ग्रेस पीरियड भी हुआ आधाट्रंप प्रशासन का यह नया नियम केवल समय सीमा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों की शैक्षणिक स्वतंत्रता को भी काफी हद तक प्रभावित करता है। नए नियमों के मुताबिक, ग्रेजुएट स्तर के छात्र अब अपनी मर्जी से कभी भी अपना एजुकेशनल मकसद या विषय नहीं बदल सकेंगे। इसके साथ ही, बिना विशेष सरकारी अनुमति के एक स्कूल से दूसरे स्कूल या यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर लेने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सबसे बड़ा झटका कोर्स पूरा होने के बाद मिलने वाले 'ग्रेस पीरियड' पर लगा है। पहले अपनी डिग्री या प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी करने के बाद छात्रों को अमेरिका में रहने या नौकरी तलाशने के लिए 60 दिनों का समय मिलता था, जिसे अब घटाकर केवल 30 दिन कर दिया गया है।विदेशी पत्रकारों पर भी चला चाबुक: चीनी पत्रकारों के लिए केवल 90 दिनों की होगी सीमानए नियम का दायरा केवल छात्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने विदेशी मीडिया कर्मियों (I-Visa) को भी अपनी जद में ले लिया है। विदेशी पत्रकारों के लिए जारी होने वाला वीजा, जो पहले सालों तक वैध रहता था, अब अधिकतम 240 दिनों तक के लिए ही वैध होगा। विशेष रूप से चीनी मीडिया घरानों और चीनी नागरिकों के मामले में इसे और कड़ा करते हुए मात्र 90 दिनों तक सीमित कर दिया गया है। हालांकि, नियमों में यह प्रावधान रखा गया है कि विशेष परिस्थितियों में वीजा धारक समय सीमा बढ़ाने (Visa Extension) के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसकी मंजूरी पूरी तरह से कड़े प्रशासनिक मूल्यांकन पर निर्भर करेगी।इमिग्रेशन विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने उठाए सवाल: 'क्या इन्हें समझ नहीं कि जिंदगी कैसे चलती है?'ट्रंप प्रशासन के इस कड़े कदम की अमेरिका के भीतर ही तीखी आलोचना शुरू हो गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) के पूर्व अधिकारी डग रैंड ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा, ज्यादातर अमेरिकी इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों का स्वागत करना और अनावश्यक लालफीताशाही (Red Tape) को खत्म करना देश के विकास के लिए कितना जरूरी है। लेकिन यह नया नियम इसके ठीक उलट काम करेगा और अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचाएगा। वहीं कैटो इंस्टीट्यूट में इमिग्रेशन स्टडीज के डायरेक्टर डेविड जे. बियर ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, जो छात्र अपने जीवन के कई साल और लाखों डॉलर यहां खर्च कर चुके हैं, उनके पास अब नौकरी ढूंढने या स्पॉन्सरशिप हासिल करने के लिए केवल 30 दिन होंगे, वरना वे अवैध अप्रवासी घोषित हो जाएंगे। क्या नीति निर्माताओं को यह समझ नहीं है कि एक आम इंसान की जिंदगी कैसे काम करती है?
अमेरिका में आगामी नवंबर में होने वाले बेहद महत्वपूर्ण मिडटर्म इलेक्शंस (Midterm Elections) से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चीन के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। गुरुवार 16 जुलाई 2026 को व्हाइट हाउस से दिए गए अपने एक बेहद तीखे और सनसनीखेज 25 मिनट के विशेष संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कुछ ऐसी अत्यंत संवेदनशील और क्लासिफाइड खुफिया फाइलों को सार्वजनिक किया है, जो अमेरिकी चुनावी व्यवस्था में चीन की सीधी और अवैध दखलअंदाजी का पर्दाफाश करती हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप का यह नया और गंभीर दावा खुद अमेरिका की ही शीर्ष खुफिया एजेंसियों की उन पुरानी रिपोर्टों के बिल्कुल विपरीत है, जिनमें कहा गया था कि 2020 के चुनावों में चीनी हस्तक्षेप के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।चीनी हैकर्स के निशाने पर अमेरिकी वोटर: 22 करोड़ मतदाताओं के निजी डेटा में सेंधमारी का गंभीर आरोपराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए बेहद चौंकाने वाला आरोप लगाया कि उनके द्वारा डीक्लासिफाइड किए गए दस्तावेजों से साफ होता है कि चीनी खुफिया एजेंसियों और हैकर्स ने अवैध रूप से लगभग 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की गुप्त फाइलें हासिल कर ली थीं। ट्रंप के अनुसार, इस हैक किए गए डेटाबेस में अमेरिकी नागरिकों के नाम, उनके स्थायी पते, फोन नंबर और वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली बेहद संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं। ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने अमेरिकी खुफिया तंत्र (Intelligence Community) के ही कुछ अंदरूनी अधिकारियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन लोगों ने चीन की इस खतरनाक साइबर साजिश की गंभीरता को जानबूझकर छिपाया और दबाया था ताकि जनता को गुमराह किया जा सके।बीजिंग का पलटवार और ट्रेड वॉर की वापसी का खतरा: शी जिनपिंग से सुधरते रिश्ते फिर अधर मेंट्रंप के इस बेहद आक्रामक भाषण के तुरंत बाद चीन ने इन आरोपों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के आधिकारिक प्रवक्ता लियू चांग ने एक बयान जारी कर ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, चीन ने अमेरिका के आंतरिक और राष्ट्रपति चुनावों में कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही भविष्य में ऐसा करने की हमारी कोई मंशा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से दोनों महाशक्तियों के बीच हाल ही में पटरी पर लौट रहे व्यापारिक संबंध एक बार फिर पूरी तरह से पटरी से उतर सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल लंबे चले ट्रेड वॉर के बाद संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग जाकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बेहद सकारात्मक मुलाकात की थी, जिस पर अब पानी फिरता नजर आ रहा है।डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के दावों को नकारा: खुफिया जानकारियों को 'हथियार' बनाने की दी चेतावनीदूसरी ओर, अमेरिकी विपक्षी दल यानी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह चुनावी स्टंट और मनगढ़ंत करार दिया है। हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सांसदों ने कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बिल पुल्टे सहित देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) और एनएसए (NSA) के प्रमुखों को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति ट्रंप को नवंबर के मिडटर्म चुनावों को प्रभावित करने के लिए चुनावी सुरक्षा से जुड़े झूठे दावों और संवेदनशील खुफिया जानकारियों को एक राजनीतिक हथियार (Weaponizing Intelligence) के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत बिल्कुल न दी जाए। सीनेट में मेजॉरिटी लीडर चक शूमर ने भी ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे इन भ्रामक दावों की आड़ में आगामी नवंबर के चुनावों में अपनी पार्टी के पक्ष में हेरफेर करने की जमीन तैयार कर रहे हैं।'सेव अमेरिका एक्ट' के जरिए चुनावी नियमों को बदलने की तैयारी: विपक्ष ने खड़े किए सवालजनवरी 2025 में व्हाइट हाउस में दोबारा ऐतिहासिक वापसी करने के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार देश की चुनावी प्रक्रिया पर संघीय सरकार का केंद्रीय नियंत्रण मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं। ट्रंप इन दिनों सीनेट और कांग्रेस के रिपब्लिकन सदस्यों पर बेहद कड़े प्रावधानों वाले 'सेव अमेरिका एक्ट' (Save America Act) को जल्द से जल्द पारित करने का भारी दबाव बना रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के तहत वोट डालने के लिए सरकार द्वारा जारी वैध फोटो आईडी और वोटर रजिस्ट्रेशन के समय केवल अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण (Proof of Citizenship) देना अनिवार्य कर दिया जाएगा। साथ ही, सभी राज्यों को अपने वोटरों का पूरा डेटा अनिवार्य रूप से संघीय सरकार के साथ साझा करना होगा। हालांकि, डेमोक्रेट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कानून का पुरजोर विरोध करते हुए कहा है कि अमेरिका में वोटर फ्रॉड जैसी घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं और इस कानून का असली मकसद गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं के वैध वोटों को दबाना है।
ट्रंप प्रशासन की चेतावनी, अमेरिका में चुनावी डेटा पर साइबर हमले का खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय खुफिया और साइबर सुरक्षा आकलनों में चेतावनी दी कि देश के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस अब भी विदेशी साइबर हमलों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। अगर यह डेटा चोरी होता है तो उसका दुरुपयोग कई वर्षों तक किया जा सकता है।
नई दिल्ली । यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे तीन कमर्शियल जहाजों को रोक लिया।
पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन को फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट नीति की समीक्षा करने वाले कार्यबल में शामिल किया गया है। यह समूह केंद्रीय बैंक की परिसंपत्तियों और मौद्रिक नीति के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। राजन को वैश्विक स्तर पर वित्तीय स्थिरता, केंद्रीय बैंकिंग और मौद्रिक नीति के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें
ईरान ने गुरुवार तड़के बहरीन, जॉर्डन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं
लुधियाना के डाबा थाना इलाके में रात के समय हुई एक्टिवा लूट की वारदात का CCTV फुटेज सामने आया है। घटना स्टार रोड स्थित वर्मा बर्तन स्टोर के सामने की है। यहां तीन बाइक सवार बदमाशों ने एक युवक को घेरकर उसके साथ मारपीट की और उसकी नई एक्टिवा लूटकर फरार हो गए। इस पूरी घटना का वीडियो CCTV में कैद हो गया है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CCTV फुटेज में दिख रहा है कि रात के समय एक युवक लाल शर्ट पहनकर अपनी एक्टिवा सड़क किनारे खड़ी किए हुए था। तभी सामने से एक बाइक पर सवार तीन युवक वहां पहुंचते हैं और उसकी एक्टिवा के पास बाइक रोक देते हैं। बाइक रुकते ही पीछे बैठे दोनों बदमाश तुरंत नीचे उतर जाते हैं और युवक पर हमला कर देते हैं। इसके बाद तीनों मिलकर उसके साथ मारपीट करते हैं। धक्का-मुक्की के दौरान युवक पीछे की ओर गिरता है और उसकी एक्टिवा भी जमीन पर गिर जाती है। वीडियो में बदमाशों की आवाज भी सुनाई दे रही है। वे गाली-गलौज करते हुए चिल्लाते हैं- भाग ले... ले जा यार। अमेरिका-कनाडा में 2 पंजाबी गैंगस्टरों पर कार्रवाई पंजाब के गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के कनाडा स्थित राइट हैंड नितिश कौशल के खिलाफ FBI ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरदासपुर निवासी नितिश कौशल को जग्गू गैंग को कनाडा में ऑपरेट करने के आरोपों के चलते मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया गया है। वहीं, 'ऑपरेशन हार्ड बाल' के तहत पंजाबी मूल के गैंगस्टर रविंदर सिंह ढांडा की करीब 6.4 मिलियन डॉलर (61.60 करोड़ रुपए ) की संपत्ति सीज करने के आदेश जारी किए गए हैं। दोनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश 15 जुलाई को दिए गए। FBI ने 'ऑपरेशन हार्ड बाल' के तहत भारत आधारित अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट्स पर कार्रवाई तेज कर दी है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सक्रिय रविंदर सिंह ढांडा पर ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गनाइजेशन चलाने का आरोप है। उस पर अमेरिका-कनाडा सीमा के जरिए सैकड़ों किलो कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी में शामिल होने के आरोप हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
पंजाब: अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी मामले में ईडी ने जालंधर की अदालत में दाखिल की चार्जशीट
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब के जालंधर स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है
ट्रंप के आने से अमेरिका में ट्रक ड्राइवर नहीं, स्किल्ड युवाओं की ज्यादा डिमांड
भास्कर न्यूज | जालंधर करीब 15 साल बाद पंजाब पहुंचे अमेरिका के वरिष्ठ अटॉर्नी डॉ. जसप्रीत सिंह ने कहा कि अमेरिका में रोजगार और इमिग्रेशन का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। कानूनी सेवाओं में योगदान के लिए पिछले दिनों उन्हें गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की तरफ से मानद (ऑनरेरी) डॉक्ट्रेट से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपनी शिक्षा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से प्राप्त की है। डॉ. जसप्रीत ने कहा पहले पंजाब के युवा 10वीं-12वीं के बाद विदेश जाकर ट्रक ड्राइविंग को सबसे आसान करियर मानते थे। अब यह ट्रेंड तेजी से खत्म हो रहा है। अमेरिका में अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि प्रमाणित स्किल वाले युवाओं की जरूरत है। डॉ. जसप्रीत सिंह ने कहा कि अमेरिका और कनाडा में पिछले एक साल से रिवर्स माइग्रेशन देखने को मिल रही है। अमेरिका की नई नीतियों के कारण बॉर्डर पार करना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप शाशन साल 2028 तक है इसलिए तब तक वहां की नीतियों में सख्ती बनी रहने की संभावना है, इसलिए विदेश जाने की तैयारी करने वाले युवाओं को पुराने अनुभवों के बजाय वर्तमान हालात को समझकर निर्णय लेना चाहिए। डॉ. जसप्रीत सिंह पिछले 28 वर्षों से अमेरिका में कानूनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में 18 जूनियर वकीलों की टीम काम करती है और उनके 15 हजार से अधिक क्लाइंट हैं। उनका दावा है कि उन्होंने 10 हजार से अधिक लोगों को अमेरिका में स्थायी कानूनी दर्जा दिलाने में मदद की है। वह अमेरिका के 18 प्रमुख गुरुद्वारा साहिबों के कानूनी सलाहकार भी हैं। अमेरिका से आए जसप्रीत सिंह अटॉर्नी ऑफ लॉ। नियमों का सबसे कम उल्लंघन पंजाबी ट्रक ड्राइवरों ने किया, सख्त कार्रवाई से ड्राइवर भी हुए प्रभावित डॉ. जसप्रीत सिंह ने बताया कि अमेरिका में करीब 54 हजार ट्रक ड्राइवरों के लाइसेंस समाप्त किए गए हैं। उन्होंने 30 जून को 300 से अधिक ट्रक ड्राइवरों के साथ बैठक की थी। उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार पंजाबी ट्रक ड्राइवरों ने नियमों का सबसे कम उल्लंघन किया, लेकिन कार्रवाई का असर उन पर भी पड़ा। इसके चलते अब बड़ी संख्या में पंजाबी ट्रक ड्राइवर उबर, गैस स्टेशन, कंस्ट्रक्शन और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। पंजाब में बदलना होगा स्टडी पैटर्न उन्होंने कहा अब केवल सोशल मीडिया या यू ट्यूब देखकर कोई स्किल सीख लेना पर्याप्त नहीं है। अमेरिका में रोजगार के लिए मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पंजाब सरकार, विश्वविद्यालयों और स्कूलों को युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक स्किल्ड बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार रिपेयर वर्क, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, फैक्ट्री ऑपरेशन, कंस्ट्रक्शन, प्लंबिंग, कारपेंट्री, मशीन ऑपरेशन और अन्य तकनीकी ट्रेड आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। पंजाब के राज्यपाल तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के अधिकारियों के साथ बैठक में भी यही सुझाव रखा कि पंजाब के युवाओं को पारंपरिक सोच से बाहर निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरत के तहत प्रशिक्षित किया जाए।
पंजाब के गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के कनाडा बैठे राइट हैंड पर FBI ने एक और कार्रवाई की है। जग्गू गैंग को कनाडा में आपरेट कर रहे गुरदासपुर के नितिश कौशल को मोस्ट वांटेड की लिस्ट में डाल दिया है।इसी तरह से आपरेशन हार्ड बाल में नाम आने के बाद पंजाबी मूल के गैंगस्टर रविंदर सिंह ढांडा की करीब 6.4 मिलियन डालर (61.60 करोड़) की प्रापर्टी सीज करने का आदेश दिया है।दोनों के खिलाफ कार्रवाई के ये आदेश 15 जुलाई को दिए गए हैं। अमेरिकी एजेंसी FBI ने आपरेशन हार्ड बाल में भारत आधारित अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट्स पर कार्रवाई तेज कर दी है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सक्रिय रविंदर सिंह ढांडा ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गनाइजेशन का कथित सरगना है।यूनाइटेड स्टेट और कनाडा सीमा के जरिए सैकड़ों किलो कोकीन और मेथाम्फेटामाइन की तस्करी करने के आरोप में उसे 7 जुलाई 2026 को ब्रिटिश कोलंबिया में गिरफ्तार किया गया था। अब उसके खिलाफ प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी चल रही है। ब्रिटिश कोलंबिया सरकार उसकी करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टीज को सिविल फॉरफीचर के तहत जब्त करने की तैयारी कर रही है। भगवानपुरिया गैंग से जुड़े नितिश पर हत्या सहित कई केसबता दें कि इसी ऑपरेशन हार्ड बाल के तहत भगवानपुरिया गैंग से जुड़े नितिश कौशल को FBI ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर मोस्ट वांटेड लिस्ट में डाल दिया है। कौशल भारतीय जेल में बंद जग्गू के सिंडेगेट को कनाडा में संभालता है। उस पर हत्या, अपहरण, ड्रग तस्करी, रंगदारी, हथियारों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप हैं। FBI ने उसे खतरनाक बताते हुए जानकारी देने वाले को इनाम देने की भी घोषणा की है। आपरेशन हार्ड बाल में लारेंस, ढांडा और जग्गू की गैंग पर भी कार्रवाईएफबीआई ने आपरेशन हार्ड बाल चलाकर कुल 37 आरोपियों पर कार्रवाई की थी। इसमें गैंगस्टर लारेंस, जग्गू भगवानपुरिया और ढांडा का नेटवर्क भी शामिल हैं। 24 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 10 फरार हैं। यह कार्रवाई US, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से की गई थी। इसमें 1 हजार किलो से ज्यादा ड्रग्स, हथियार और नकदी जब्त हुई। अमेरिकी अटॉर्नी ने कहा कि जेल से ऑपरेट होने वाले ये गैंग भारतीयों को निशाना बना रहे थे।
पंचकूला जिले के कालका में देश बचाओ मोर्चा और किसान संगठनों ने बुधवार को भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के पदाधिकारियों और किसानों ने कालका तहसीलदार को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रधान कुलदीप सिंह ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और किसानों ने भाग लिया। मोटरसाइकिल मार्च सेक्टर 30 हुड्डा के समीप गांव सूरजपुर से शुरू हुआ। यह काफिला करनपुर, खेड़ावाली, जटा माजरी और चरनिया से होते हुए कालका तहसील पहुंचा। कालका तहसील कार्यालय पर की नारेबाजी कालका तहसील पहुंचकर किसानों ने ट्रेड डील के विरोध में जमकर नारेबाजी की। उन्होंने तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रस्तावित ट्रेड डील को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी ऐसी ट्रेड डील को स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे देश के किसानों, मजदूरों और कृषि व्यवस्था को नुकसान पहुंचे। कुलदीप सिंह ने आरोप लगाया कि यह समझौता भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है और इससे इन क्षेत्रों को भारी नुकसान होगा। कुलदीप सिंह ने यह भी बताया कि यदि सरकार ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया, तो 21 जुलाई को दिल्ली स्थित किसान घाट पर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे पर देश बचाओ मोर्चा से बातचीत करना चाहती है, तो संगठन इसके लिए तैयार है।
सिरसा जिले के डबवाली तहसील परिसर में बुधवार को देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले विभिन्न किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने मोटरसाइकिल रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को मांगपत्र सौंपकर प्रस्तावित डील को तत्काल रद्द करने की मांग की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए तहसील परिसर पहुंची। किसानों ने एकजुट होकर कहा कि यदि यह ट्रेड डील लागू होती है, तो इसका सबसे अधिक नुकसान देश के किसानों, पशुपालकों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को होगा। किसानों का तर्क था कि विदेशी कंपनियों और अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में बढ़ावा मिलने से देश के किसानों की उपज को उचित मूल्य नहीं मिलेगा। इससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। अमेरिका के साथ डील से प्रभावित होगी खेतीबाड़ी- व्यवसाय : भाटी राष्ट्रीय किसान संगठन के नेता जसवीर सिंह भाटी ने रोष प्रदर्शन की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां करोड़ों परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। यदि अमेरिका से बड़े पैमाने पर कृषि उत्पाद, डेयरी उत्पाद और अन्य खाद्य सामग्री भारतीय बाजार में आने लगी, तो देश के किसानों का दूध, गेहूं, धान, मक्का, दालें, फल-सब्जियां और मछली पालन जैसे व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होंगे। भाटी ने बताया कि किसान पहले से ही बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और फसलों के कम दाम से परेशान हैं। ऐसे में यह ट्रेड डील किसानों के लिए आर्थिक संकट को और गहरा कर देगी। कृषि विशेषज्ञों, किसान संगठनों से चर्चा किए जाने की मांग उन्होंने मांग की कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की चिंताओं की अनदेखी की, तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के नेता मिट्ठू कंबोज ने कहा कि सरकार को ऐसी किसी भी डील को स्वीकार नहीं करना चाहिए जिससे भारतीय किसानों के हित प्रभावित हों। उन्होंने मांग की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए और ऐसी नीति बनाई जाए जिससे देश के किसानों, पशुपालकों और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिले। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। प्रदर्शन में यह किसान नेता रहे शामिल प्रदर्शन में राष्ट्रीय किसान संगठन से जसवीर सिंह भाटी, परमजीत सिंह, प्रितपाल सिंह और राजेश, हरियाणा किसान एकता डबवाली से संगठन के उपाध्यक्ष गुरपाल सिंह मांगियाना, संतोख सिंह खालसा, जगदीप सिंह, बालकरण सिंह और खुशदीप सिंह हैबूआना शामिल रहे। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) से गुरमेल सिंह, गुरतेज सिंह, वकील सिंह सहित अनेक किसान नेताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। वहीं पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति से मिट्ठू कंबोज, देवेंद्र सिंह सहित कई किसान मौजूद रहे। किसान नेताओं ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन प्रदर्शन के अंत में किसानों ने तहसीलदार के माध्यम से मांगपत्र सौंपते हुए सरकार से अपील की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लागू करने से पहले किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। किसान नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसानों के हितों के विपरीत कोई फैसला लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने एकजुट होकर कृषि और किसान हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी लिया।
पानीपत जिले में मालपुर किसान मजदूर यूनियन के सदस्यों ने डाहर टोल प्लाजा पर इकट्ठा होकर भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया। किसानों ने पानीपत के जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्र सरकार से इस व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की गई। इस अवसर पर मालपुर किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सोनू मालपुरिया ने कहा कि भारत सरकार अमेरिका के साथ जिस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली है, वह छोटे किसानों, व्यापारियों, पशुपालन और पोल्ट्री उद्योगों सहित अन्य छोटे कामगारों को खत्म कर देगा। देश के छोटे किसानों-मजदूरों को खत्म कर देगी ड्रेड डील- सोनू मालपुरिया ने तर्क दिया कि जिस तरह जियो कंपनी ने शुरुआत में मुफ्त सेवाएं देकर अन्य कंपनियों को बाजार से बाहर कर दिया और बाद में कीमतें बढ़ा दीं, उसी तरह यह ट्रेड डील भी देश के छोटे किसानों, मजदूरों, पोल्ट्री और पशुपालन उद्योगों को खत्म कर देगी। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इसके बाद अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में महंगे दामों पर बेचे जाएंगे, जिससे आम गरीब और मध्यम वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यूनियन ने सरकार से इस डील को तत्काल रद्द करने की मांग की है, चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कैथल में भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ग्रुप से जुड़े किसानों ने शहर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के माध्यम से किसानों ने भारत अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया। किसान सैकड़ों की संख्या में हनुमान वाटिका में इकट्ठे हुए और केंद्र सरकार द्वारा की जा रही ट्रेड डील के विरोध में मोटरसाइकिल रैली निकाली। किसानों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि किसी भी ऐसी ट्रेड डील को स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे देश के किसानों, मजदूरों और कृषि व्यवस्था को नुकसान पहुंचे। हनुमान वाटिका से शुरू हुई रैली रैली का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रदेश उपाध्यक्ष महाबीर चहल नरड़ तथा युवा प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र मागो माजरी ने किया। यह मोटरसाइकिल रैली हनुमान वाटिका से शुरू होकर बस स्टैंड, सम्राट मीहिर भोज चौक, विश्वकर्मा चौक, छोटू राम चौक और पिहोवा चौक से होती हुई जिला सचिवालय पहुंची। वहां किसानों ने तहसीलदार के माध्यम से भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपकर ट्रेड डील को तुरंत वापस लेने की मांग की। भाकियू करेगी विरोध उपाध्यक्ष महाबीर चहल नरड़ ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों और मजदूरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां देश की खेती, मंडी व्यवस्था और किसानों की आय पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही महंगी खेती, बढ़ती लागत, फसलों के उचित दाम न मिलने और प्राकृतिक आपदाओं से परेशान हैं। ऐसे समय में सरकार यदि विदेशी कंपनियों के दबाव में आकर ट्रेड डील करती है तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के किसान को होगा। भारतीय किसान यूनियन किसी भी कीमत पर किसान विरोधी नीतियों को लागू नहीं होने देगी। जनआंदोलन करने की चेतावनी दी युवा प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र मागो माजरी ने कहा कि सरकार किसानों की आवाज सुनने के बजाय लगातार किसान विरोधी फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि आज देश का किसान जागरूक है और अपने अधिकारों की रक्षा करना जानता है। यदि सरकार ने समय रहते इस ट्रेड डील को वापस नहीं लिया तो पूरे देश में बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। 21 जुलाई को दिल्ली में आंदोलन उन्होंने सभी किसानों, मजदूरों से अपील करते हुए कहा कि 21 जुलाई को दिल्ली में होने वाले किसान-मजदूर आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसानों की नहीं बल्कि देश के हर उस व्यक्ति की है जो खेती, रोजगार और देश की आर्थिक स्वतंत्रता की चिंता करता है। सरकार को तुरंत किसानों के हितों की रक्षा करने वाले निर्णय लेने चाहिए। यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी जारी रखी तो भारतीय किसान यूनियन पूरे प्रदेश में आंदोलन को और तेज करेगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करने की मांग:जौनपुर में किसान संगठन ने PM के नाम सौंपा ज्ञापन
जौनपुर में भारतीय किसान मजदूर जनसेवा यूनियन ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की है। यूनियन के जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 'देश बचाओ मोर्चा' ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। संगठन ने इस समझौते को किसानों, खेत मजदूरों और देश की आर्थिक संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा बताया है। जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील देश के पशुपालकों, छोटे व्यापारियों, लघु उद्योगों तथा खाद्य एवं आर्थिक संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। संगठन ने इस समझौते को किसानों के लिए 'डेथ वारंट' करार दिया है और स्पष्ट किया है कि इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। 'देश बचाओ मोर्चा' ने भारत सरकार से इस मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है, ताकि देश के किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा हो सके। मोर्चे ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस मांग की अनदेखी करती है, तो देशभर में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
डूंगरपुर के आर्थोपेडिक डॉक्टर अनिल बनवीर की मंगलवार को अमेरिका से मेक्सिको के बीच क्रूज पर मौत हो गई। वे अपनी डॉक्टर पत्नी के साथ घूमने के लिए गए थे। क्रूज से दोनों अमेरिका से मेक्सिको जा रहे थे। अचानक हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने कईं सालों तक डूंगरपुर और सागवाड़ा के सरकारी अस्पताल में मरीजों की सेवाएं दी। रिटायरमेंट के बाद भी वे एक निजी अस्पताल में मरीजों को देखते थे। डॉ. बनवीर की मौत के बाद डूंगरपुर में शोक की लहर है। समुद्र के बीच क्रूज पर हुई मौतडूंगरपुर के जाने माने आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल बनवीर (75) और उनकी पत्नी डॉ. निशा बनवीर दोनों ही 9 जुलाई से घूमने के लिए विदेश गए थे। मंगलवार को वे और उनकी पत्नी दोनों ही क्रूज से अमेरिका से मेक्सिको जा रहे थे। समुद्र के बीच में ही उनकी हृदय गति रुक गई। क्रूज पर डॉक्टरों ने जांच भी की, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थीं। रिटायरमेंट के बाद भी निजी अस्पताल में दे रहे थे सेवाएंये खबर डूंगरपुर आई तो चिकित्सा महकमे के साथ ही उनसे इलाज ले रहे मरीजों और लोगों में शोक की लहर छा गई। उन्होंने कई सालों तक डूंगरपुर जिला अस्पताल और फिर सागवाड़ा अस्पताल में मरीजों का इलाज किया। वे प्रमुख चिकित्सा अधिकारी भी रहे। 13 साल पहले रिटायरमेंट के बाद भी वे निजी अस्पताल में मरीजों को देख रहे थे। बेटा-बहू भी लंदन में है डॉक्टरउनका बेटा डॉ. सौमित्र बनवीर और बहू डॉ. उपासना बनवीर भी लंदन में डॉक्टर है। जबकि बेटी शौकिता ठाकुर अपने पति कुणाल ठाकुर के साथ कनाडा में रहती है। बेटा और बेटी दोनों के ही विदेशों में होने से उनका अंतिम संस्कार कहा होगा ये अभी जानकारी नहीं मिल सकी है। डूंगरपुर जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. कांतिलाल मेघवाल ने बताया कि उनकी मौत से चिकित्सा से जुड़े तमाम लोगों में शोक की लहर है। भारत विकास परिषद तिलक शाखा के अध्यक्ष मुकेश श्रीमाल ने भी डॉ. बनवीर के निधन पर शोक जताया है 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन किए थेडॉ. बनवीर ने पोलियो करेक्शन के 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन किए थे। इस कारण कई दिव्यांग फिर चलने फिरने लगे थे। वे आर्थोपेडिक डॉक्टर होने के साथ ही समाजसेवा के कामों में भी जुड़े रहे। वे नारायण सेवा संस्थान, महावीर इंटरनेशनल जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं से भी जुड़े थे। उन्होंने डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सागवाड़ा और कई जगहों पर पोलियो करेक्शन के करीब 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन भी किए। इससे जन्मजात चलने फिरने की परेशानी से जूझ रहे लोग फिर से चलने लगे।
भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में बुधवार को देशभर में बड़े स्तर पर मोटरसाइकिल मार्च निकाला जाएगा। किसान संगठनों ने इस मार्च के जरिए केंद्र सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। किसान संगठनों का कहना है कि यह समझौता किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम लोगों के हितों के खिलाफ है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के राज्य नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर पूरे देश में मोटरसाइकिल मार्च आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य केंद्र सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि देश का किसान और मजदूर वर्ग भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध करता है। पंजाब के 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे पंधेर ने बताया कि पंजाब के सभी 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे, जिनमें किसान मजदूर मोर्चा, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), आजाद किसान मोर्चा सहित कई किसान संगठन हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन, मोटरसाइकिल मार्च और साइकिल रैलियां आयोजित की जाएंगी। कृषि उत्पादों के आयात की कोई आवश्यकता नहीं सरवन सिंह पंधेर ने दावा किया कि भारत कृषि उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर देश है। उन्होंने कहा कि देश में अनाज, दालें, फल, सब्जियां, फूल और तिलहन समेत अधिकांश आवश्यक कृषि उत्पादों का पर्याप्त उत्पादन होता है। ऐसे में विदेशों से कृषि उत्पादों के आयात की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत के अधिकांश किसान छोटी जोतों पर खेती करते हैं उन्होंने आशंका जताई कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लागू होता है तो अमेरिकी कृषि उत्पाद कम या शून्य आयात शुल्क पर भारतीय बाजार में आ सकते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका में किसानों और कृषि कंपनियों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत के अधिकांश किसान छोटी जोतों पर खेती करते हैं। पंधेर के अनुसार, ऐसी स्थिति में भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन हो जाएगा, जिससे छोटे और मध्यम किसानों के साथ-साथ छोटे उद्योगों और व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। समझौता वापस न होने पर बड़े किसान आंदोलन की चेतावनी पंधेर ने देशवासियों से अपील की कि वे आज होने वाले मोटरसाइकिल मार्च में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपना समर्थन दें। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर पुनर्विचार नहीं किया, तो किसान संगठन व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेंगे।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
अगर आपके बच्चों की तस्वीरें, बैंक खातों के पासवर्ड और आपकी डिजिटल पहचान एक ही ‘की’ से सुरक्षित हो और वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए, तो सब खतरे में पड़ सकता है। कॉमर्शियल एयरलाइन पायलट रेयान पेटिट के साथ ऐसा ही हुआ। विमानन क्षेत्र में काम करने वाले पेटिट जानते हैं कि सुरक्षा के लिए हमेशा कई स्तरों पर बैकअप होता है, पर डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा एक कमजोर कड़ी पर टिक गई थी। एक साधारण-सा टेक्स्ट मैसेज आया और उनकी पूरी डिजिटल पहचान उनसे छिन गई। पढ़िए उनकी कहानी और एक्सपर्ट से जानिए किन गलतियों से बचना चाहिए... मुझे गोल्डमैन साक्स एपल कार्ड पर एक संदिग्ध लेन-देन का ‘फ्रॉड अलर्ट’ मैसेज मिला। मैसेज में सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देने को कहा गया था। सुरक्षा के लिए मैंने ‘ना’ लिखकर भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद कॉल आया। कॉलर आईडी पर एपल कार्ड सपोर्ट का नंबर दिख रहा था। मुझे शक नहीं हुआ, क्योंकि मैसेज भी उसी आधिकारिक i Message थ्रेड में एपल लोगो व ग्रे बबल के साथ आ रहे थे। कॉलर ने कहा कि मेरी पहचान सत्यापित करने के लिए कोड भेजा जा रहा है। जैसे ही कोड बताया, सब कुछ बदल गया। मैंने पहचान पूछी, तो उसने मेरा सोशल सिक्योरिटी नंबर व जन्मतिथि तक बता दी। तब लगा कि मैं ठगी का शिकार हो चुका हूं। आंखों के सामने मेरी पूरी डिजिटल दुनिया बिखरने लगी। मैं देख रहा था कि एपल वॉलेट से कैश एप, वीसा कार्ड और एपल कार्ड एक-एक करके गायब हो रहे थे। हैकर ने मेरे अकाउंट में अपना फोन नंबर जोड़ दिया और मेरा नंबर हटा दिया। कुछ ही देर बाद मैं अपने ही अकाउंट से बाहर हो गया। मेरा आईफोन रीसेट हो गया और बेकार डिवाइस बनकर रह गया। मैं बिना डिजिटल वॉलेट व पैसों के होनोलूलू पहुंचा। किसी तरह लैपटॉप पर वाई-फाई जोड़कर पत्नी को मैसेज किया। उन्होंने मेरे लिए उबर बुक की। एपल स्टोर पहुंचने पर पता चला कि हैकर ने फोन पर एक्टिवेशन लॉक लगा दिया है। पहचान व खरीद के सबूत दिखाने के बावजूद एपल कर्मचारी मदद नहीं कर सके। नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। हैकर के हाथ मेरी एक लाख से ज्यादा फैमिली फोटो, पासवर्ड और मैसेज हिस्ट्री लग चुकी थी। उसने मेरे निवेश बेचकर नकदी निकाल ली। पत्नी को मेरे नाम पर मैसेज भेजकर हजारों डॉलर ठग लिए। मेरे अकाउंट खाली हो गए। स्मार्टवॉच का डेटा हटा दिया, इससे वह मुझे नहीं पहचान सकी। पुलिस भी मदद नहीं कर सकी।’- रेयान ऑथेंटिकेटर एप रखें साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट केविन मिटनिक सुझाव देते हैं,‘अपने डिजिटल वर्ल्ड की एक ‘मास्टर की’ न रखें। लॉगिन हैक होते ही बैंक, फोटो व डेटा खतरे में पड़ सकते हैं; सभी खाते अलग रखें। हार्डवेयर सिक्योरिटी की या ऑथेंटिकेटर एप इस्तेमाल करें, जिससे पासवर्ड व नंबर लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। कॉलर आईडी पर दिखने वाले नाम या नंबर पर भरोसा न करें। बैंक या संस्थान को कॉल करके जांच कर लें।
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की मांग तेज
यह केवल विचारधारा की बात भी नहीं है। यह इस बारे में नहीं है कि कोई प्रशासन की व्यापक नीतियों का समर्थन करता है या विरोध।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

