अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से अच्छी बातचीत का दावा किया है, जिसके बाद IRGC से जुड़ी तीन कंपनियों से प्रतिबंध हटाए गए हैं।
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
ट्रंप के टैरिफ पर चीन का पलटवार 6 अमेरिकी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट, ड्रोन एक्सपोर्ट पर भी कसी लगाम
चीन ने ट्रंप की तरफ से लगाए गए हाल के टैरिफ का जवाब दिया है और अमेरिका की 6 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही, ड्रोन एक्सपोर्ट के नियम भी कड़े कर दिए हैं।
आंखें बंद कर क्यों बैठे ट्रंप? भारत के खिलाफ अमेरिका में चल रही क्या प्लानिंग
कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ऑफिस में आंखें बंद करके बैठे थे और ईसाई धर्मुगुरु उन्हें आशीर्वाद दे रहे थे। खुद को सेक्युलर बोलने वाले अमेरिका ने पहली बार दुनिया को दिखा दिया कि देश ईसाई राष्ट्रवादी चला रहे हैं। लेकिन अब अमेरिका यही ईसाई राष्ट्रवाद भारत पर थोपना चाहता है। अमेरिका भारत पर बहुत अजीब हमले की तैयारी कर रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका भारत को ईसाई बहुल देश बनाना चाहता है? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि डॉनल्ड ट्रंप की पार्टी के एक नेता रायली मूर ने खुलकर भारत को धमकी दी है। रायली मूर ने भारत में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी एफसीआरए कानून में संशोधनों की आलोचना कर दी है। हैरानी की बात देखिए कि यह तो भारत का कानून है लेकिन इसका विरोध अमेरिका की संसद में शुरू हो गया है। इसे भी पढ़ें: Chai Par Sameeksha: PM ने गाली देने वालों को किया माफ, क्या Gen Z भी अब मोदी मोदी के नारे लगाएंगे? भारत तो एफसीआरए कानून में संशोधन इसलिए ला रहा है ताकि एनजीओ और ईसाई मिशनरी विदेशी पैसे का इस्तेमाल भारत में धर्मांतरण रैकेट चलाने के लिए ना कर पाएं। भारत की विकास परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रोकने के लिए ना कर पाएं। विदेशी पैसे का इस्तेमाल एनजीओ और ईसाई मिशनरी भारत में इमीग्रेशन, अबॉर्शन और होमोसेक्सुअलिटी जैसे मुद्दों को सही ठहराने के लिए करते हैं। भारतीय लोगों की आस्थाओं और संस्कृति पर प्रहार करने के लिए करते हैं। यह सभी वो मुद्दे हैं जो भारत के विकास और भारत की हिंदू पहचान को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाते हैं। लेकिन अब भारत ऐसा नहीं होने देगा। शायद इसीलिए अमेरिका डर गया है। शायद इसीलिए रैली मूर झूठी खबरें फैलाते हुए एफसीआरए संशोधनों को ईसाई समुदाय पर हमला बता रहे हैं। चेतावनी दे रहे हैं कि भारत अमेरिका के संबंधों पर इसका बुरा असर पड़ेगा। यह संशोधन तो धर्मांतरण को रोकने के लिए है। हिंदुओं को बचाने के लिए है। ईसाइयों का तो इससे कुछ लेना देना नहीं है। यह ठीक वैसा ही नैरेटिव है जो सीएए कानून के दौरान फैलाया गया था। इसे भी पढ़ें: FCRA Bill पर US MP Riley Moore ने जताई चिंता, द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की कही बात सीएए कानून को भी मुस्लिम विरोधी बता दिया गया था। जबकि मुसलमानों का उस कानून से कुछ लेना देना नहीं था। वो कानून भी हिंदुओं की रक्षा के लिए लाया गया था। क्या आप जानते हैं कि अमेरिका और यूरोप से आने वाले पैसे का इस्तेमाल एनजीओ और ईसाई मिशनरी किस तरह से करते हैं? उसका एक उदाहरण देख लीजिए। आदिवासी रीति-रिवाजों को मानने वाले नागालैंड, मिजोरम और मेघालय जैसे राज्य आज ईसाई बहुसंख्यक हो गए हैं। पिछले 2 सालों में पंजाब में 3.5 लाख से ज्यादा लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi से मिले Kiren Rijiju; संसद गतिरोध खत्म करने में मांगा सहयोग पंजाब के तरन-तारन में ईसाइयों की आबादी 102% की रफ्तार से बढ़ी है। झारखंड और छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदायों में जमकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। कुछ समय पहले एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें दावा किया गया कि भारत सरकार के बाद कैथोलिक चर्च भारत में जमीन का दूसरा सबसे बड़ा मालिक है जिसके पास पूरे देश में लगभग 70 मिलियन हेक्टेयर यानी 172 मिलियन एकड़ जमीन है। आपको क्या लगता है यह सब कुछ किस पैसे से किया गया है? यह पैसा अमेरिकी डीप स्टेट का है। भारत को तेजी से ईसाई बहुसंख्यक देश बनाने की तैयारी की जा रही है। हैरानी की बात देखिए कि अमेरिका में खुद फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट नाम का एक कानून है जो दूसरे देशों से आने वाले विदेशी प्रभाव, धर्म परिवर्तन और प्रोपोगेंडा के लिए मिलने वाले पैसे पर रोक लगाता है। यानी अमेरिका अपने देश में तो धर्मांतरण पर रोक लगा रहा है लेकिन भारत के हिंदुओं को ईसाई बना रहा है। शायद इसीलिए रायली मूर एफसीआरए कानून का विरोध कर रहे हैं। शायद इसीलिए पहली बार अमेरिका की डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां इतिहास में पहली बार एक साथ आई हैं और एफसीआरए संशोधनों का विरोध कर रही हैं। रायली मूर ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि अमेरिका हमेशा एक ईसाई देश रहेगा।
5 महीने की लड़ाई ने बदला समीकरण! ईरान युद्ध में अमेरिका के मिसाइल स्टॉक खाली, लम्बा चला युद्ध तो क्या करेंगे ट्रंप
THAAD से पैट्रियोट तक भारी तबाही: ईरान युद्ध के बीच क्या सचमुच खत्म हो गया अमेरिका का डिफेंस स्टॉक
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य संघर्ष ने मध्य पूर्व (Middle East) में एक ऐसा महायुद्ध छेड़ दिया है, जिसकी भीषणता ने खुद अमेरिकी रक्षा तंत्र को सकते में डाल दिया है। इस जंग को लंबा खिंचते देख अब अमेरिका की सैन्य ताकत और उसकी आधुनिक रक्षा प्रणालियों के स्टॉक पर बहुत बड़े संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला करने में अमेरिकी सेना के तरकश के कई अहम तीर खाली हो चुके हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या आधुनिक युद्धक हथियारों की यह कमी अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व पर भारी पड़ने वाली है।THAAD के 80 और पैट्रियोट के 50 प्रतिशत इंटरसेप्टर खत्म, हथियारों का भंडार हुआ खालीसीएनएन की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के हवाले से यह खुलासा हुआ है कि ईरान के साथ जारी इस लंबे युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने अपने बेहद मारक और आधुनिक 'थाड' (THAAD) एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लगभग 80 प्रतिशत इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल कर डाला है। इसके साथ ही, देश की सुरक्षा का मुख्य आधार माने जाने वाले 'पैट्रियोट' (Patriot) इंटरसेप्टर का भी करीब 50 प्रतिशत स्टॉक पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। इससे पहले शुरुआती दौर के हमलों में ही अमेरिकी सेना अपनी लगभग 30 प्रतिशत टोमाहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलों को भी झोंक चुकी है। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि हथियारों के इस भारी क्षरण ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है।व्हाइट हाउस ने खारिज किए दावे, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस की सुरक्षा पर बढ़ी चिंताविशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे पूरी तरह से इन्हीं एयर डिफेंस सिस्टम्स की सुरक्षा पर निर्भर हैं, और ऐसे में स्टॉक का खतरनाक स्तर तक कम होना अमेरिकी सैनिकों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुमान के अनुसार, युद्ध से पहले अमेरिका के पास लगभग 2,200 पैट्रियोट और 452 थाड मिसाइलें मौजूद थीं, जो अब काफी हद तक घट चुकी हैं। हालांकि, इन गंभीर चेतावनियों के सामने आने के बावजूद व्हाइट हाउस ने गोला-बारूद की कमी की इन तमाम रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यकता से अधिक और पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद का सुरक्षित भंडार मौजूद है।
ट्रंप प्रशासन अमेरिका में H-1B और L-1 वर्क वीजा की अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया को अधिक खर्चीला बनाने की तैयारी में है। अगर यह होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही पड़ने वाला है।
थाड और पैट्रियट मिसाइलें चट कर गया ईरान, ट्रंप का गोदाम खाली; अमेरिका में हथियारों की भारी कंगाली
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव और ईरान के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका की सैन्य साजो-सामान से जुड़ी पोल खुलती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ रक्षा करने और उसके हमलों को नाकाम करने में अमेरिकी सेना ने अपने आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम 'थाड' (THAAD) और 'पैट्रियट' (Patriot) मिसाइलों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया है, जिसके चलते अमेरिकी रक्षा भंडारों में इन खतरनाक मिसाइलों का भारी अकाल पड़ गया है और ट्रंप प्रशासन के सामने हथियारों की जबरदस्त कंगाली खड़ी हो गई है।जानकारों का कहना है कि ईरान और उसके समर्थित मिलिशिया गुटों द्वारा दागे गए ड्रोनों और बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को अपने सबसे महंगे और अत्याधुनिक डिफेंस इंटरसेप्टर्स का लगातार इस्तेमाल करना पड़ा है। एक के बाद एक लगातार होने वाले इन हमलों से निपटने की प्रक्रिया में अमेरिकी रक्षा गोदामों में रखी करोड़ों डॉलर की ये मिसाइलें तेजी से खत्म हो गई हैं। स्थिति यह हो गई है कि रक्षा उत्पादन की धीमी रफ्तार के मुकाबले खपत कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है, जिससे पेंटागन की नींद उड़ी हुई है।इस हथियारों की किल्लत का सबसे बड़ा असर अमेरिकी वैश्विक सैन्य रणनीति पर पड़ता दिख रहा है। पेंटागन के रणनीतिकारों के सामने अब यह गंभीर संकट खड़ा हो गया है कि यदि आने वाले दिनों में दुनिया के किसी अन्य हिस्से में कोई नया भू-राजनीतिक विवाद या युद्ध छिड़ जाता है, तो अमेरिकी सेना अपनी रक्षा कैसे करेगी। अमेरिका के रक्षा कारखाने और हथियार निर्माता कंपनियां दिन-रात प्रोडक्शन बढ़ाने में जुटी हैं, लेकिन जिस तेजी से युद्ध के मैदान में मिसाइलें खर्च हो रही हैं, उस हिसाब से नए हथियारों की आपूर्ति करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।पश्चिम एशिया के इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सैनिकों और बंदूकों का खेल नहीं, बल्कि अत्यधिक खर्चीले और तकनीकी एयर डिफेंस सिस्टम्स की जंग बन चुका है। ईरान के रणनीतिक दबाव ने अमेरिका के अजेय माने जाने वाले रक्षा भंडारों को खाली करने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन के लिए अपने डिफेंस रिजर्व को दोबारा भरना और हथियारों की इस बड़ी कंगाली से निपटना सबसे बड़ी प्राथमिकता रहने वाली है, जिसका असर अमेरिकी रक्षा बजट और विदेश नीतियों पर भी साफ दिखाई देगा।
अमेरिका की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित गोल्फ कोर्स के बेहद करीब एक संदिग्ध व्यक्ति को सुरक्षा एजेंसियों ने दबोच लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि संदिग्ध की कार से एक घातक गन और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस हाई-प्रोफाइल घटना ने एक बार फिर देश के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।घटना की जानकारी मिलते ही सीक्रेट सर्विस (Secret Service) और स्थानीय पुलिस के अमले ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया। आरोपी की गाड़ी की तलाशी के दौरान सुरक्षाकर्मियों को हथियार और कुछ अन्य संदिग्ध वस्तुएं मिलीं, जिसके आधार पर उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। शुरुआती पूछताछ के दौरान फेडरल एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस शख्स की मंशा क्या थी और क्या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश या सुनियोजित हमले का प्लान तो नहीं था।गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर सुरक्षा खतरे लगातार बढ़ते रहे हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और रैलियों के दौरान पहले भी उन पर कई बार जानलेवा हमले की कोशिशें हो चुकी हैं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा 'रेड अलर्ट' पर रखा जाता है। ताजा घटना के बाद से व्हाइट हाउस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गहरी समीक्षा शुरू हो गई है ताकि राष्ट्रपति की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश न बचे।इस सनसनीखेज गिरफ्तारी के बाद से अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि संदिग्ध व्यक्ति उस संवेदनशील इलाके तक कैसे पहुंचा और क्या उसके तार किसी स्थानीय या अंतरराष्ट्रीय संगठन से जुड़े हुए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) और सीक्रेट सर्विस मिलकर संयुक्त रूप से आगे की जांच को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं ताकि इस संभावित बड़े खतरे के हर पहलू का पर्दाफाश किया जा सके।
BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन
वाशिंगटन के गलियारों में इस समय जो सन्नाटा है, वह किसी बड़े तूफान के आने की आहट है। कल तक जो अमेरिका दुनिया को टैरिफ की धमकियां देता था, आज वह खुद अपने ही बुने हुए जाल में फंस गया है। चीन ने 90 अरब डॉलर का ऐसा आर्थिक बम फोड़ा है कि अमेरिका की कृषि से लेकर एनर्जी सेक्टर तक की नीव हिल गई है। लेकिन यह तो सिर्फ झांकी है। असली खबर उस 23 जुलाई 2026 के फैसले में छिपी है जिसने रातों-रात बीजिंग और वाशिंगटन के रिश्तों को उस नए मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी नामुमकिन है। दरअसल पीटरसन इंस्टट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमी की रिपोर्ट कोई सामान्य चेतावनी नहीं है। यह अमेरिका के लिए एक डेथ वारंट की तरह है। अगर 2017 में ट्रंप ने वो ट्रेड वॉर शुरू ना किया होता तो आज अमेरिकी कंपनियां हर साल $90 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रही होती। यह पैसा कहां से आता? यह पैसा आता अमेरिका के सोयाबीन किसानों की जेब से, टेक्सास के तेल कुओं से और मिड वेस्ट की फैक्ट्रियों से। लेकिन आज हालत क्या है? इसे भी पढ़ें: BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बांग्लादेश को निमंत्रण चीन जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आयात करने वाली अर्थव्यवस्था है उसने अमेरिका की तरफ पीट कर लिया है। निर्यात 2008 की वैश्विक मंदी के स्तर पर गिर चुका है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका की ग्रोथ अब रिवर्स गियर में है। दोस्तों, अब बात करते हैं उस सेक्टर की जिसने अमेरिका की कमर तोड़ दी है और उस सेक्टर का नाम है ऊर्जा यानी कि एनर्जी। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी एक्सपोर्टर बनने का सपना देखता रहता था। लेकिन चीन ने एक ही झटके में सपने को चगनाचूर कर दिया। 2026 की शुरुआत में चीन ने अमेरिकी गैस खरीदना लगभग शून्य कर दिया। क्यों? क्योंकि टेरिफ की वजह से अमेरिकी गैस इतनी महंगी हो गई कि चीन को क़तर और रूस से गैस मंगाना सस्ता पड़ने लगा। हैरानी की बात यह है कि चीन की चालाकी यहां खत्म नहीं हुई। चीन की कंपनियों ने अमेरिका से जो गैस पहले से बुक कर रखी थी, उसे अपने देश लाने के बजाय रास्ते में ही यूरोप को महंगे दाम पर बेच दिया। यानी अमेरिका की गैस, चीन का मुनाफा और अमेरिका का बाजार खत्म। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं एक्सपर्टों का मानना है कि अब चीन कभी भी अमेरिका के साथ नए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट नहीं करेगा। आखिर 23 जुलाई 2026 को ऐसा क्या हुआ? दरअसल अमेरिका का पुराना टेरिफ सिस्टम कानूनी लड़ाई में हार गया था। अपनी ईगो बचाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने सेक्शन 301 [संगीत] का इस्तेमाल किया और चीनी सामानों पर 12.5% का नया टैक्स थोप दिया। बहाना बनाया गया कि जबरन शंका। लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई कुछ और ही थी। अमेरिका को पता था कि अगर उसने यह टेरिफ नहीं लगाया तो चीन का सस्ता सामान अमेरिकी मार्केट को पूरी तरह निकल जाएगा। लेकिन चीन ने इसका ऐसा जवाब दिया जिसकी उम्मीद पेंटागन को भी नहीं थी। 27 जुलाई 2026 को ब्लूमबर्ग ने एक ऐसी रिपोर्ट छापी जिसने वाशिंगटन की साख को मिट्टी मिला दिया। इसे भी पढ़ें: सेंट्रल एशिया के खजाने तक पहुंचा भारत, Rare Earth Minerals पर मोदी के जय ने क्या बड़ा गेम कर दिया? चीन ने दावा किया कि अमेरिका ने बंद कमरों में उनसे भीख मांगी थी कि हम टेरिफ तो लगा रहे हैं लेकिन वादा करते हैं यह 20% से ऊपर नहीं जाएगा। चीन ने इस प्राइवेट बातचीत को पब्लिक कर दिया। यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी थी। इससे दुनिया को क्या मैसेज गया? यह गया कि महाशक्ति कहलाने वाला अमेरिका अब चीन के साथ डील करने के लिए मजबूर है। साल 2022 में जब रूस के डॉलर फ्रीज किए गए तब हमने कहा था कि अमेरिका अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है।
जालंधर स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जोनल कार्यालय ने अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत ईडी ने आरोपियों की 187.13 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां कुर्क (अटैच) की हैं। इनमें हरियाणा, दिल्ली और गोवा में स्थित कई लग्जरी फार्महाउस और आलीशान विला शामिल हैं। इस मामले की जांच अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) से मिले इनपुट के आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद शुरू हुई थी। FBI के इनपुट पर शुरू हुई थी कार्रवाई यह मामला तब सामने आया, जब अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने भारतीय एजेंसियों के साथ अहम इनपुट साझा किए। इसके आधार पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। जांच में सामने आया कि भारत से संचालित एक कथित अवैध कॉल सेंटर के जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर उनसे करोड़ों डॉलर की साइबर ठगी की जा रही थी। 36 कर्मचारियों के साथ चल रहा था 'अवैध' खेल ईडी जांच में सामने आया कि Digikaps – The Future of Digital नाम से एक कथित अवैध कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इस सेंटर में करीब 36 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें जिगर अहमद, यश खुराना, इंद्रजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा शामिल थे। पूरे नेटवर्क का संचालन और निगरानी जॉनी, दक्षे सेठी और गौरव वर्मा कर रहे थे। ऐसे बनाते थे अमेरिकी नागरिकों को शिकार गिरोह कथित तौर पर बेहद सुनियोजित तरीके से अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था। कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को टेक्निकल सपोर्ट से जुड़ा प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेते और उनकी निजी व गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे। इसके बाद वे अमेरिकी कर विभाग (IRS) की ओर से कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ितों पर दबाव बनाते थे। आरोप है कि इस डर का फायदा उठाकर उनसे रकम क्रिप्टो खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। काली कमाई से खरीदीं संपत्तियां और विला जांच के अनुसार, कथित ठगी से हासिल रकम को पहले क्रिप्टो वॉलेट के जरिए 'Bliss Infraproperties LLP' समेत अन्य कथित शेल (फर्जी) कंपनियों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इस धन को वैध दिखाने के लिए रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश किया जाता था। ईडी के मुताबिक, गिरोह के मुख्य आरोपी जॉनी उर्फ जॉनी त्यागी, दक्षे सेठी, राघव सतिहा, निखिल वर्मा, गौरव वर्मा और गौतम ढींगरा ने कथित तौर पर इसी रकम से हरियाणा, दिल्ली और गोवा में महंगी अचल संपत्तियां, फार्महाउस और आलीशान विला खरीदे। छापेमारी में मिली थी भारी नकदी और दस्तावेज इससे पहले जनवरी व फरवरी 2026 में ईडी ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई डिजिटल उपकरण, 34 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए थे। मामले में आगे की कार्रवाई जारी जांच में मिले दस्तावेजों से आरोपियों की भारत और विदेश में बड़ी संपत्तियों का पता चला। फिलहाल ईडी ने 187.13 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।
West Asia: कब खत्म होगा ईरान-US टकराव, होर्मुज में शुल्क; शांति बहाली के समझौते पर कतर और अमेरिका क्या बोले?
ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान ने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति की उस कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक मुश्किल मानी जाती थी। अमेरिकी सेना के लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले अत्याधुनिक मिसाइल भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, पेंटागन के कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के पास मौजूद कई अहम मिसाइल प्रणालियों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक घट चुका है। यह स्थिति केवल ईरान युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक में चीन जैसे महाशक्ति प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अमेरिका की भविष्य की सैन्य तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने अपने आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) और नई पीढ़ी की प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) का लगभग पूरा परिचालन भंडार इस्तेमाल कर लिया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इन लंबी दूरी की सटीक मारक मिसाइलों का वर्चुअली ऑल यानी लगभग पूरा स्टॉक खर्च हो चुका है। हालांकि पेंटागन ने शेष संख्या सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन यह स्वीकार किया गया है कि सेंट्रल कमांड को अपने अभियान जारी रखने के लिए दुनिया के अन्य अमेरिकी सैन्य भंडारों से मिसाइलें मंगानी पड़ीं। इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन ने US में Brazil की राजदूत मारिया लुइजा का वीजा रद्द किया युद्ध के दौरान केवल आक्रामक हथियार ही नहीं, बल्कि रक्षात्मक मिसाइलों का भंडार भी तेजी से घटा है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका अपने THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) इंटरसेप्टरों का लगभग 80 प्रतिशत और पैट्रियट इंटरसेप्टरों का लगभग आधा इस्तेमाल कर चुका है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) के अनुमान के अनुसार युद्ध से पहले अमेरिका के पास लगभग 452 THAAD और 2,200 Patriot इंटरसेप्टर थे। इसी अवधि में अमेरिकी नौसेना और अन्य बलों ने अपने वैश्विक टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल भंडार का भी लगभग आधा हिस्सा खर्च कर दिया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये वही हथियार हैं जिन पर अमेरिका चीन जैसे तकनीकी रूप से सक्षम प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ युद्ध की स्थिति में सबसे अधिक निर्भर करता है। चीन की बहुस्तरीय और अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली के कारण पारंपरिक लड़ाकू विमानों के जरिए गहरे हमले करना बेहद जोखिम भरा माना जाता है। ऐसे में ATACMS और PrSM जैसी लंबी दूरी की सटीक मिसाइलें अमेरिकी युद्धनीति की रीढ़ हैं। यदि इनका भंडार सीमित हो जाता है, तो इंडो-पैसिफिक में अमेरिका की प्रतिरोधक क्षमता और त्वरित जवाबी कार्रवाई की शक्ति दोनों कमजोर पड़ सकती हैं। यही वजह है कि पेंटागन के भीतर इस बात पर गंभीर बहस छिड़ी हुई है कि ईरान के खिलाफ अभियान को कितने समय तक जारी रखा जाए। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगाह किया है कि यदि मौजूदा गति से मिसाइलों का इस्तेमाल जारी रहा, तो अमेरिका किसी दूसरे बड़े सैन्य संकट के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं रहेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरानी ठिकानों पर मानव चालित लड़ाकू विमानों को भेजने की बजाय लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले को प्राथमिकता दी, ताकि पायलटों को जोखिम से बचाया जा सके। लेकिन इसी रणनीति ने अत्याधुनिक मिसाइल भंडार पर भारी दबाव डाल दिया। इस बीच, अमेरिका का रक्षा उद्योग उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। लॉकहीड मार्टिन ATACMS के स्थान पर नई PrSM मिसाइलों का उत्पादन बढ़ा रही है। हालांकि PrSM अपेक्षाकृत नई प्रणाली है, इसलिए उसका उत्पादन अभी सीमित है। अमेरिकी सेना ने भविष्य के लिए बड़े ऑर्डर जरूर दिए हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड उत्पादन भी लंबे और उच्च तीव्रता वाले युद्ध में खर्च हुए हथियारों की भरपाई इतनी तेजी से नहीं कर सकता। राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस लगातार इन चिंताओं को खारिज कर रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी देश से कहीं अधिक हथियार हैं और जरूरत से ज्यादा गोला बारूद मौजूद है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल और व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने भी कहा है कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के सभी रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता और गहरा हथियार भंडार मौजूद है। इसके बावजूद घटनाक्रम अलग तस्वीर पेश करता है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह ट्रंप ने ईरान पर बड़े पैमाने पर प्रस्तावित हमले को अंतिम क्षणों में रोक दिया। आधिकारिक तौर पर इसका कारण खाड़ी देशों की चिंता और ऊर्जा ढांचे पर संभावित ईरानी जवाबी हमला बताया गया, लेकिन अमेरिकी मीडिया के अनुसार हथियारों के घटते भंडार और लंबा युद्ध झेलने की क्षमता भी इस फैसले के पीछे एक अहम कारक थी। इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी हलचल तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बेहद अच्छी बातचीत चल रही है, जबकि ईरान सार्वजनिक रूप से इससे इंकार करता रहा है। दूसरी ओर, एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए अंतरिम समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। देखा जाये तो ईरान युद्ध ने एक बड़ा सबक दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल तकनीक या सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि सतत हथियार उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक क्षमता का भी संघर्ष है। यदि दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति को एक क्षेत्रीय युद्ध के दौरान अपने वैश्विक मिसाइल भंडार से हथियार खींचने पड़ रहे हैं, तो यह भविष्य के बहु-मोर्चीय संघर्षों के लिए गंभीर चेतावनी है। बहरहाल, ऐसा लग रहा है कि चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों के साथ संभावित समानांतर संकट की स्थिति में अमेरिका को अपने संसाधनों का विभाजन करना पड़ सकता है। इससे उसकी वैश्विक सैन्य विश्वसनीयता, सहयोगी देशों का भरोसा और प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, बीजिंग जैसे प्रतिद्वंद्वी इस घटनाक्रम का बारीकी से अध्ययन करेंगे और इसे अमेरिकी सैन्य क्षमता की सीमाओं के संकेत के रूप में देख सकते हैं। ऐसे में यह संकट केवल मिसाइलों की कमी का नहीं, बल्कि अमेरिकी वैश्विक सैन्य रणनीति, रक्षा उत्पादन मॉडल और दीर्घकालिक युद्ध क्षमता की वास्तविक परीक्षा बन चुका है।
FCRA पर अमेरिकी सांसद ने उठाए सवाल तो VHP ने दिया करारा जवाब
एफसीआरए में प्रस्तावित बदलावों पर अमेरिकी सांसद राइली मूर ने दावा किया कि इससे चर्च, धार्मिक चैरिटी, स्कूल और हेल्थकेयर संस्थानों पर सरकार की पकड़ बढ़ सकती है, जिसके बाद विश्व हिंदू परिषद के विनोद बंसल ने एक्स पर उनसे पूछा कि नियमों की किस धारा में ऐसा प्रावधान है.
FCRA: भारत में एफसीआरए संशोधन पर अमेरिकी सांसद को क्यों लगा मिर्ची? बोले- संबंधों पर असर पड़ने की आशंका why-us-congressman-riley-moore-concern-over-fcra-amendment-bill-india
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तेहरान: मध्य पूर्व में जारी भारी उथल-पुथल और अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे भीषण संघर्ष के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) मुज्तबा खामेनेई के भावी रुख को लेकर पूरी दुनिया में गहरा सस्पेंस बना हुआ है। अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बाद सत्ता की कमान संभालने वाले 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने आने के बजाय पर्दे के पीछे से देश और सेना का मार्गदर्शन कर रहे हैं। हमले में घायल होने की खबरों के बीच वे रणनीतिक संदेशों के जरिए तेहरान की नीतियों को आकार दे रहे हैं। ऐसे समय में जब देश में अंदरूनी राजनीतिक खींचतान और आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां चरम पर हैं, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या मुज्तबा अमेरिका के साथ युद्ध को आगे बढ़ाएंगे या फिर पर्दे के पीछे कोई सुलह का रास्ता तलाशेंगे।अली खामेनेई के बाद मुज्तबा की ताजपोशी और तेहरान में आंतरिक चुनौतियांईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के समर्थन से मुज्तबा खामेनेई को देश का तीसरा सुप्रीम लीडर चुना गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के समय से ही तेहरान के सत्ता के गलियारों में कुछ हद तक अंतर्कलह और बहस की स्थिति रही है। पारंपरिक धर्मगुरुओं और सुधारवादी धड़ों के बीच सर्वोच्च पद के वंशानुगत जैसे लगने वाले हस्तांतरण को लेकर सवाल उठे थे। इसके अलावा, अमेरिकी व इजरायली हमलों में बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान के कारण आंतरिक प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना नए नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।सार्वजनिक रूप से नजर न आने के बावजूद मुज्तबा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे देश में राजनीतिक स्थिरता और जनसमर्थन बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे सरकारी संस्थानों और जनता के बीच एकता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं ताकि युद्ध के इस नाजुक दौर में आंतरिक मतभेद देश की सुरक्षा को नुकसान न पहुंचाएं।'सैन्य प्रतिरोध और हॉर्मुज की नाकाबंदी': मुज्तबा का आक्रामक रुखसुप्रीम लीडर बनने के बाद जारी अपने शुरुआती लिखित बयानों में मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ सख्त और बेबाक रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान अपनी सैन्य ताकत के दम पर प्रतिरोध जारी रखेगा और किसी भी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा।मुज्तबा के प्लान का एक प्रमुख हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्गों में से एक हॉर्मुज को प्रभावित कर तेहरान वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, उन्होंने यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्लाह और इराक के सशस्त्र समूहों जैसे 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध के मोर्चे) के सहयोगियों को एकजुट रखकर नए युद्ध मोर्चे खोलने का भी संकेत दिया है।अमेरिका से सीधा टकराव या बैकचैनल डिप्लोमेसी? अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावाअमेरिकी खुफिया एजेंसियों (US Intelligence) के ताजा आकलनों के मुताबिक, घायल होने के बावजूद मुज्तबा खामेनेई तेहरान की युद्ध नीति और वाशिंगटन के साथ होने वाले गोपनीय कूटनीतिक संवादों को खुद नियंत्रित कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मुज्तबा अपने भरोसेमंद संदेशवाहकों और आमने-सामने की वार्ताओं के जरिए आईआरजीसी कमांडरों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को दिशानिर्देश भेज रहे हैं।एक तरफ जहां सार्वजनिक मंचों पर उनका संदेश अमेरिका को सबक सिखाने का है, वहीं दूसरी तरफ वाशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के साथ बैकचैनल कूटनीति के दरवाजे भी पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। अमरीकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नुकसान जरूर पहुंचा है, लेकिन वे पूरी तरह नष्ट नहीं हुई हैं। ऐसे में मुज्तबा का दोहरा प्लान दिख रहा है—एक तरफ सैन्य ताकत से हमले रोकना और दूसरी तरफ सौदेबाजी की मेज पर अपनी शर्तों को मजबूत बनाए रखना।आईआरजीसी का दबदबा और शासन की भावी दिशावर्तमान परिदृश्य में ईरान की दैनिक शासन व्यवस्था और रक्षा नीतियों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ की भूमिका बेहद अहम हो गई है। मुज्तबा खामेनेई के आईआरजीसी के साथ दशकों पुराने घनिष्ठ संबंध रहे हैं, जिसके चलते सेना का तेहरान की राजनीति पर नियंत्रण और मजबूत हुआ है।विश्लेषकों का मानना है कि मुज्तबा खामेनेई का अंतिम प्लान न तो पूरी तरह अमेरिका के सामने सरेंडर करने का है और न ही बिना किसी रणनीतिक सोच के अनियंत्रित युद्ध में कूदने का। वे ईरान के आंतरिक मतभेदों को दबाने, आईआरजीसी के जरिए नियंत्रण कायम रखने और हॉर्मुज व क्षेत्रीय सहयोगियों के माध्यम से अमेरिका पर कूटनीतिक व सैन्य दबाव बनाए रखने की बहुकोणीय रणनीति पर काम कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि मुज्तबा का यह गुप्त दांव मध्य पूर्व में शांति का रास्ता खोलेगा या संघर्ष को एक नए और भीषण मोड़ पर ले जाएगा।
कानपुर शहर के पॉश इलाकों में अमेरिकन, मलयेशियाई गांजा-चरस की होम डिलीवरी हो रही है। तस्कर डार्क वेब के जरिये खेप मंगवा कर तिलकनगर, स्वरूपनगर, आर्यनगर, सिविल लाइंस जैसे पाॅश इलाकों में खपा रहे हैं।
FCRA बिल 2026: कानून भारत में बन रहा, पर दिक्कत अमेरिका को क्यों?
भारत सरकार FCRA बिल ला रही है, लेकिन दिक्कत अमेरिका को हो रही है। इसी क्रम में अमेरिका के एक सांसद रिले मूर ने भारत के विदेशी योगदान नियम यानी FCRA में प्रस्तावित बदलावों की आलोचना की। उनका आरोप है कि ये बदलाव सरकार को चर्च और धार्मिक चैरिटी के प्रबंधन पर कब्जा करने का […]
अमेरिका के पास घातक मिसाइलें खत्म! क्या Strait of Hormuz फिर खुलेगा? जानें ईरान-अमेरिका तनाव की लेटेस्ट अपडेट
अमेरिका: डेमोक्रेटिक पार्टी से शैनन टेलर, रिपब्लिकन से जॉन मैकगायर उम्मीदवार; आम चुनाव में किससे होगी टक्कर?
अमेरिका के पास घातक मिसाइलें खत्म! Strait of Hormuz खोलेगा ईरान? जानें लेटेस्ट अपडेट India TV Hindi होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने के लिए ईरान किससे कर रहा है बात? BBC होर्मुज पर ईरान से आज समझौता संभव: अमेरिकी वित्त मंत्री, International Hindi News Hindustan हॉर्मुज जलडमरूमध्य से 1,000 से ज्यादा जहाजों को सुरक्षित पार कराया: अमेरिकी सेना DD News हॉर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा दावा. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जल्द ही पूरी तरह खुल सकता है. उन्होंने दावा किया कि इस जलमार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और ईरान की बाते facebook.com
अमेरिका के पास घातक मिसाइलें खत्म! Strait of Hormuz खोलेगा ईरान? जानें लेटेस्ट अपडेट
अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी जारी है। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खोलने के लिए तैयार नहीं हो रहा। वहींं, पता चला है कि अमेरिका के पास लंबी दूरी की मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं। अब आगे क्या होगा?
बिगड़ जाएंगे US संग रिश्ते… FCRA संशोधन को लेकर अमेरिकी सांसद ने भारत को दी चेतावनी
विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसाइटी समूहों का कहना है कि यह विधेयक सरकार को विदेशी फंडिंग पर निर्भर संस्थाओं पर अत्यधिक कंट्रोल देता है। अब इस बिल पर अमेरिकी सांसद का बयान सामने आया है।
कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का ड्रोन हमला
मध्य पूर्व में हालात फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। मंगलवार को ईरान ने कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने तीन ड्रोन से हमला किया
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच तेल कंपनियों ने कमाया 93 अरब डॉलर का मुनाफा, जलवायु संकट भी चरम पर
हमेशा एक बात कही जाती है कि ‘वॉर इज अ ब्लडी बिजनेस’। रूस यूक्रेन युद्ध के बाद अब ईरान अमेरिका युद्ध में भी साबित हो चुकी है। ऐसा इसलिए कि ईरान संघर्ष के दौरान तेल कीमतें बढ़ने और जलवायु संकट से जुड़ी गर्मी की लहरों के बीच दुनिया की आठ बड़ी तेल कंपनियों ने अप्रैल […]
अमेरिका-भारत मुक्त व्यापार समझौता रद्द करने की मांग
भास्कर न्यूज | जालंधर जमहूरी किसान सभा पंजाब की राज्य बैठक डॉ. सतनाम सिंह अजनाला की अध्यक्षता में शहीद सरवण सिंह चीमा भवन, गढ़ा में हुई। इसमें पंजाब किसान यूनियन के साथ एकता और आगामी गतिविधियों को गति देने का निर्णय लिया गया। बैठक में तय हुआ कि 20-21 सितंबर को जालंधर में होने वाले देश-स्तरीय डेलिगेट इजलास की तैयारी के लिए 9 अगस्त को देश भगत यादगार हाल, जालंधर में संयुक्त जनरल बॉडी बैठक होगी। राज्य महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने बताया कि 10 अगस्त को कॉर्पोरेट घरानों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान 'कॉर्पोरेट भारत छोड़ो' का पुरजोर नारा बुलंद किया जाएगा और अमेरिका-भारत मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग उठाई जाएगी। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 1 सितंबर से चंडीगढ़ में अनिश्चितकालीन पक्का मोर्चा (लगातार धरना) शुरू करने का फैसला लिया गया है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। प्रेस सचिव हरनेक सिंह गुज्जरवाल ने कहा कि किसान-मजदूर संगठनों की इस ऐतिहासिक एकता से केंद्र की भाजपा और पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की वादाखिलाफी व जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष को एक नई मजबूती और दिशा मिलेगी। बैठक में कुलवंत सिंह संधू, हरनेक सिंह गुज्जरवाल, रघवीर सिंह बैनीपाल, परगट सिंह जामाराय, हरप्रीत सिंह बुटारी, रेशम सिंह फैलोके, मनजीत सिंह बग्गू, दर्शन सिंह बेलूमाजरा, ऊधम सिंह संगरूर, सुखमिंदर सिंह धालीवाल, अमरीक सिंह फफड़े भाईके और मेजर सिंह खुरलापुर मौजूद रहे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका एक अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं और कुछ मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
Faridabad News: ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय माल भाड़ा
International freight rates rise due to Iran-US tensions.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
ईरान से पंगा ले फंस गए ट्रंप? अमेरिका का हथियार स्टॉक ही खत्म; मिसाइलों का भारी टोटा
अमेरिका और ईरान के बीच लगभग पांच महीने से युद्ध जारी है। इस बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने इस दौरान अपनी लगभग सभी सबसे सटीक और महत्वपूर्ण लंबी दूरी की मिसाइलें खर्च कर दी हैं।
ईरान से जंग अमेरिका पर पड़ रही भारी! मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घटा, अब क्या करेंगे ट्रंप
ईरान से जंग अमेरिका पर पड़ रही भारी! मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घटा, अब क्या करेंगे ट्रंप
पाकिस्तान ने ईरान के साथ अपने राजनयिक संपर्क बढ़ा दिए हैं। विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची को बातचीत के लिए जल्द से जल्द इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संपर्क को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील के बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ तय सैन्य हमले रद्द कर दिए थे। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से ईरान और अमेरिका के बीच एक अहम राजनयिक कड़ी बने रहने की इस्लामाबाद की कोशिश झलकती है, भले ही पाकिस्तान ने – जैसा कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया – काफी हद तक कम प्रोफ़ाइल बनाए रखी है। इस न्योते पर ईरान की प्रतिक्रिया के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं मिल पाई। इसे भी पढ़ें: Pakistan की स्थिति West Indies के खिलाफ टेस्ट में मजबूत सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री सीनेटर मोहम्मद इशाक डार (@MIshaqDar50) ने आज ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से बात की। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में बिगड़ते हालात भी शामिल हैं। इसमें आगे कहा गया उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री (डार) ने विदेश मंत्री अरागची को अपनी सुविधानुसार जल्द से जल्द पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया। इसके अलावा, खबर है कि नेशनल असsembly के स्पीकर अयाज सादिक ने अपने ईरानी समकक्ष मोहम्मद बागेर घालीबाफ को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया है। अरागची और घालीबाफ, दोनों ने हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी। इसे भी पढ़ें: आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेना पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया हालिया कोशिशों के ज़रिए पाकिस्तान एक भरोसेमंद मध्यस्थ के तौर पर अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कूटनीतिक कोशिशें कमज़ोर हैं और खाड़ी क्षेत्र में एक और सैन्य टकराव का खतरा बना हुआ है। अधिकारी ने कहा कि तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान अभी काफी हद तक खामोश है। उन्होंने आगे कहा मैं आपको बता दूं... पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत जारी है।
पाकिस्तान ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका! ईरान-अमेरिका वार्ता की मध्यस्थता से हुआ बाहर, अब कौन कराएगा डील?
ईरान को हराने के लिए नई रणनीति बनाने में जुटा अमेरिका, दुनियाभर के विशेषज्ञों से मांगे जा रहे सुझाव
ईरान को हराने के लिए नई रणनीति बनाने में जुटा अमेरिका, दुनियाभर के विशेषज्ञों से मांगे जा रहे सुझाव
मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले अमेरिका के एक रिटायर्ड जनरल और डिफेंस एनालिस्ट ने पाकिस्तान और कतर पर आरोप लगाया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर उनकी भूमिका प्रभावित रही है। उनका आरोप है कि दोनों देश अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान और कतर को चुनने से ईरान के साथ अमेरिका की कूटनीति पर असर पड़ा है और इससे तेहरान के इरादों को समझने में गलतफहमी पैदा हुई है। कीन की ये टिप्पणियां तब आई हैं जब ट्रंप ने तेहरान के साथ कूटनीतिक कोशिशों को फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर बड़े सैन्य हमले की योजना को रोकने का फैसला किया है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री, भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान कीन 'इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर' के चेयरमैन हैं, 'सेक्रेटरी ऑफ़ डिफेंस पॉलिसी बोर्ड' के सदस्य हैं, चार अमेरिकी रक्षा मंत्रियों को सलाह दे चुके हैं और 'नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी' पर 2018 और 2022 के कांग्रेसनल कमीशन में भी काम कर चुके हैं। कीन ने कहा मिडिल ईस्ट में हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियों और सभी संबंधित पक्षों को यह अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान और कतर की स्थिति संदिग्ध है, क्योंकि वे अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। यह बात पुरानी है, कोई नई नहीं। फिर भी, वे ही मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि ईरान के असली इरादों के बारे में अमेरिका को गुमराह करने में उनके प्रभाव की भी भूमिका रही है। रिटायर्ड जनरल ने सऊदी अरब के रवैये की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि रियाद ने बार-बार वॉशिंगटन को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दी थी। कीन के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि ऐसा ऑपरेशन सफल नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump के हाथ से निकल गई ये जंग? ईरान ने फिर ठोका अमेरिका का MQ-9 उन्होंने आगे दावा किया कि सऊदी अरब ने लगातार अमेरिका को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। कीन ने कहा सऊदी अरब मध्य पूर्व क्षेत्र को ईरान की आक्रामकता से मुक्त कराने के लिए कोई कुर्बानी देने को तैयार नहीं है। यही वह सच्चाई है जो हम यहां होते हुए देख रहे हैं। कीन ने यह भी आरोप लगाया कि सऊदी अरब ईरान का सामना करने का बोझ अमेरिका और इज़राइल पर डालना चाहता था, जबकि वह खुद अपने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान या जान-माल के नुकसान का जोखिम नहीं उठाना चाहता था।
Avengers: Endgame का रिकॉर्ड तोड़कर Spider-Man ने उत्तरी अमेरिका में रची इतिहास
लॉस एंजिलिस, चार अगस्त (एपी) फिल्म स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे ने उत्तरी अमेरिका में शुरुआती सप्ताहांत की टिकट बिक्री के मामले में एवेंजर्स: एंडगेम का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सोनी पिक्चर्स ने बताया कि अमेरिका और कनाडा के सिनेमाघरों में पहले सप्ताहांत में फिल्म की 36 करोड़ अमेरिकी डॉलर की टिकट बिकी हैं, जो उत्तरी अमेरिका में किसी भी फिल्म की अब तक की सबसे बड़ी शुरुआती सप्ताहांत की कमाई है। सोनी ने रविवार को अनुमान लगाया था कि 4,487 सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई यह फिल्म पहले सप्ताहांत में लगभग 35.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कमाई करेगी, जो वर्ष 2019 में एवेंजर्स: एंडगेम द्वारा बनाए गए 35.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड से थोड़ा पीछे होती। लेकिन, अभिनेता टॉम हॉलैंड अभिनीत स्पाइडर-मैन शृंखला की चौथी फिल्म ने रविवार को उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और अंततः एवेंजर्स: एंडगेम का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। सोनी पिक्चर्स मोशन पिक्चर ग्रुप के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉम रोथमैन ने सोमवार को जारी बयान में कहा, ‘‘रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं, लेकिन जब तक यह रिकॉर्ड हमारे नाम रहेगा, हमें इस पर गर्व रहेगा।’’ एवेंजर्स: एंडगेम से पहले किसी भी फिल्म ने उत्तरी अमेरिका में शुरुआती सप्ताहांत में 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की कमाई नहीं की थी। इससे पहले एवेंजर्स: इन्फिनिटी वॉर ने वर्ष 2018 में 25.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर और स्टार वार्स: द फोर्स अवेकेन्स ने वर्ष 2015 में 24.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर की शुरुआती कमाई की थी। कोविड-19 महामारी के दौरान दिसंबर 2021 में रिलीज हुई टॉम हॉलैंड की तीसरी स्पाइडर-मैन फिल्म नो वे होम ने शुरुआती सप्ताहांत में 26 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कमाई की थी और बाद में दुनिया भर में 190 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कारोबार किया था। स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे और द ओडिसी की शानदार कमाई ने अमेरिका और कनाडा के सिनेमाघरों के लिए भी रिकॉर्ड सप्ताहांत दर्ज कराया। इन दोनों फिल्मों में टॉम हॉलैंड, ज़ेंडाया और जॉन बर्नथल ने अभिनय किया है। बॉक्स ऑफिस विश्लेषण संस्था रेनट्रैक के अनुसार, इस वर्ष अब तक अमेरिका और कनाडा के घरेलू बॉक्स ऑफिस पर टिकट बिक्री 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है और कुल टिकट बिक्री 6.2 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंच गई है।
Donald Trump के हाथ से निकल गई ये जंग? ईरान ने फिर ठोका अमेरिका का MQ-9
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने हॉर्मोज जलडमरूमध्य के ऊपर ओढ़ रहे एक अमेरिकी एमकेाइन रिपड ड्रोन को मार गिराया है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी संकेत दिए हैं कि होमोस जलडम मध्य को लेकर उसकी रणनीति में बदलाव हो सकता है। लेकिन फिलहाल वह इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने के पक्ष में नहीं है। इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका आईआरजीसी के आधिकारिक मीडिया प्लेटफार्म सिपाह न्यूज़ के अनुसार अमेरिकी एम99 रिपेर ड्रोन को हॉर्मोज जलडमरूमध्य के ऊपर तैनात ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ड्रोन को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन ने किस स्थान से उड़ान भरी थी। एम9 रिपर ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिकी वायुसेना निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों के लिए करती है। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद से तेहरान लगातार अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को चुनौती देता रहा है। ईरानी मीडिया का दावा है कि अब तक 30 से ज्यादा एम क्यूाइन रिपोन गिराए गए हैं। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागची ने होमस जलडमरू मध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ओमान के साथ जलडम मध्य के प्रबंधन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच नए शिपिंग रूट को लेकर सहमति बनने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। इसे भी पढ़ें: UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांच ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी संकेत दिए हैं कि संबंध में जल्द ही कोई औपचारिक समझौता हो सकता है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी नए समुद्री मार्ग पर सहमति बनने का अर्थ यह नहीं होगा कि हुरम जलडम्र मध्य को पूरी तरह खोल दिया जाए। तेहरान का कहना है कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और मौजूदा हालात को देखते हुए जलडू मंदिर में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण बनाए रखा जाएगा। यानी नए शिपिंग रूट की व्यवस्था के बावजूद ईरान अपने रणनीतिक विकल्प अपने हाथ में रखना चाहता है। फिलहाल ईरान ने एक और एम9 रिपब ड्रोन को मार गिराया है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यमन के ईरान हिमायती अंसारुल्लाह या हूती ने जिस तरह सऊदी के सेंशंस के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए लाल सागर पर सऊदी के लिए कंप्लीट ब्लॉकेट लगा दिया है।
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! कुवैत में अमेरिकी ठिकाने को बनाया निशाना, ट्रंप बोले - 'समझौते का आखिरी मौका'
Narinder Singh समेत 25 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त अमेरिका में पहचान संबंधी जानकारी में कथित फर्जीवाड़े से लेकर हत्या के प्रयास और बाल यौन शोषण जैसे आरोपों वाले मामलों में भारतीय मूल के एक व्यक्ति सहित 25 लोगों की नागरिकता रद्द की जा रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने 65 वर्षीय नरिंदर सिंह के खिलाफ डेलावेयर जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। उन पर अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए फर्जी पहचान का सहारा लेने का आरोप है। न्याय मंत्रालय के मुताबिक सिंह ने 1996 में अमेरिका में प्रवेश के लिए गलत पहचान का इस्तेमाल किया और एक मई, 2008 को अमेरिका के नागरिक बन गए। शिकायत में उनके कई गलत बयानों और गैर-कानूनी कामों का जिक्र करते हुए सात आरोप लगाए गए हैं। जिन 25 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कार्यवाही शुरू की गई है उनमें पाकिस्तानी मूल के दो लोग – जिया मुराद भट्टी और मोहम्मद वासिफ भी शामिल हैं। उन पर पहचान से जुड़ी गलत जानकारी देने के आरोप हैं। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिका की नागरिकता हमारे देश के सर्वोच्च विशेषाधिकारों में से एक है और इसे वैध तरीके एवं ईमानदारी से ही हासिल किया जाना चाहिए।’’ब्लांश ने कहा, ‘‘आज दर्ज की गई शिकायतों में आरोप है कि इन लोगों ने धोखाधड़ी से, तथ्यों को छिपाकर या गैर-कानूनी तरीके से नागरिकता हासिल की। इसमें हिंसक अपराध, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, फर्जी पहचान और नागरिकता के लिए अयोग्य ठहराने वाली अन्य बातें छिपाना शामिल है।’’ये शिकायतें 20 जुलाई से तीन अगस्त के बीच दर्ज की गई हैं। नागरिकता पाने वाले इन लोगों में 17 देशों जैसे कि पाकिस्तान, मोल्दोवा, भारत, मेक्सिको, कोलंबिया, नाइजीरिया, लाइबेरिया, घाना, जमैका, ताइवान, होंडुरास, कैमरून, जॉर्डन, क्यूबा, अल साल्वाडोर, हैती और स्वीडन के लोग शामिल हैं। ब्लांश ने कहा, ‘‘आज की ये कार्रवाई मंत्रालय के इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी समन्वित कोशिश है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है। न्याय मंत्रालय नागरिकता प्रक्रिया की शुचिता और अमेरिकी लोगों की रक्षा के लिए हर उपलब्ध तरीके का इस्तेमाल करना जारी रखेगा।
US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।जेम्स ने एक बयान में कहा, सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नरन्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।इसके बाद 'ट्रेड एक्ट 1974' के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव कियाट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।उन्होंने आगे कहा, किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।ये भी पढ़ें- Bankipur By-Election Results: बांकीपुर में BJP का किला ढहा! प्रशांत किशोर की जीत से बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और अधिक तेज करते हुए तेहरान को 'डील या टोटल सरेंडर' का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। सोमवार को एक तीखे बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पर्दे के पीछे निजी तौर पर बातचीत के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इसका खंडन कर रहे हैं। ट्रंप के इस ताजा और आक्रामक बयान से मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।ईरानी नेतृत्व का दोहरा चरित्र और गुप्त बातचीत का दावाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि ईरानी नेता बेहद दोहरा चरित्र अपना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ जहां गुप्त माध्यमों से बातचीत की गुहार लगाई जाती है और बैठकें तय होती हैं, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक रूप से यह ढिंढोरा पीटा जाता है कि वे अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं और केवल ओमान के जरिए ही संवाद हो रहा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि ईरान को दुनिया के किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले पर वाशिंगटन का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और अडिग है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का पूर्ण दबदबाईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण किए जाने के दावों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह महज खोखली बयानबाजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नौसेना और सख्त नाकेबंदी का पूरी तरह से नियंत्रण है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी अनुमति के बिना ईरान के अंदर कोई भी माल न तो आ सकेगा और न ही बाहर जा सकेगा। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक ईरान पूरी तरह से समर्पण नहीं करता या कोई मजबूत कूटनीतिक डील नहीं होती, तब तक अमेरिका का आर्थिक और सैन्य शिकंजा यूं ही कसा रहेगा।कूटनीति के बीच तीखे बयानों से गरमाया मध्य पूर्व का राजनीतिक माहौलविशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनलों को खुला रखने की कोशिशें चल रही थीं। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर लगातार आ रहे तीखे और आक्रामक बयानों ने शांति वार्ताओं की उम्मीदों को झटका दिया है। ट्रंप के इस रुख ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपनी अधिकतम दबाव की नीति को और अधिक कड़ाई से लागू करने के मूड में है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत दुनिया के कई देशों पर नए टैरिफ थोपा जाना अब खुद उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है। अमेरिका के 25 राज्यों के एक मजबूत गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के इस विवादास्पद फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज करा दिया है। राज्यों का आरोप है कि व्हाइट हाउस कानून का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी नागरिकों, परिवारों और व्यवसायों पर गैर-कानूनी तरीके से कर का बोझ डाल रहा है। इस कानूनी शिकंजे के बाद ट्रंप प्रशासन देश के भीतर ही चौतरफा घिरता नजर आ रहा है।60 से अधिक व्यापारिक साझेदारों पर लगाया गया है अतिरिक्त करबता दें कि इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत अपने करीब 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 से 12.5 फीसदी तक का अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का बड़ा ऐलान किया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के निर्यात को रोकने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव के तहत शुरुआती चर्चा में भारत पर 12.5% टैक्स लगाने की बात थी, जिसे बाद में घटाकर 10% कर दिया गया था। साथ ही, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं को इस दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद घरेलू स्तर पर भारी विरोध शुरू हो गया है।'1974 के ट्रेड एक्ट के नाम पर कानूनी नियमों की हो रही अनदेखी'मुकदमा दायर करने वाले अमेरिकी राज्यों ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लागू किए गए इन नए शुल्कों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स और ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि धारा 301 का इस्तेमाल किसी विशिष्ट देश या कंपनी की व्यापारिक नीतियों की जांच के लिए किया जाता है, न कि सभी अमेरिकी आयातों पर एकमुश्त भारी टैरिफ थोपने के लिए। राज्यों का यह भी कहना है कि सामान्य तौर पर एक साल में पूरी होने वाली जटिल जांच प्रक्रिया को महज़ ढाई महीने में ही जल्दबाजी में पूरा दिखा दिया गया, जो पूरी तरह से संदिग्ध और बहानेबाजी है।सुप्रीम कोर्ट से पहले भी कई कानूनी लड़ाइयां हार चुके हैं ट्रंपयह पहला मौका नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी टैक्स नीतियों को लेकर अदालती लड़ाई का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए ट्रंप के शुल्कों को असंवैधानिक करार दिया था। सर्वोच्च अदालत से करारा झटका मिलने के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत वैश्विक टैरिफ लगाने की कोशिश की, जिसे भी अदालतों ने गैर-कानूनी ठहरा दिया। अब धारा 301 का सहारा लेने के बाद 25 राज्यों के इस बड़े कानूनी दांव ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं।
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर ही बड़ा कानूनी और राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों के एक समूह ने सोमवार को अदालत का रुख किया है। इन राज्यों ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) समेत 60 व्यापारिक साझेदार देशों (Trading Partner Countries) से होने वाले आयात पर लगाए गए नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद एक बार फिर अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में 10% से 12.5% तक के उन टैरिफ को निशाना बनाया गया है, जो पिछले महीने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये ड्यूटी उन देशों के खिलाफ हैं जो जबरन मजदूरी से बने सामान के एक्सपोर्ट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। यह मामला ट्रंप की टैरिफ स्ट्रैटेजी की नई परीक्षा है, जो US कोर्ट में बार-बार झटके लगने के बावजूद कायम रही है। US राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसलों को नहीं मान रहे हैं यह मुकदमा ओरेगन और न्यूयॉर्क समेत 25 राज्यों ने दायर किया है, जिनके गवर्नर या अटॉर्नी जनरल डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप एक अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करके उन बड़े इम्पोर्ट टैक्स को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें कोर्ट पहले ही गैर-कानूनी करार दे चुका है। शिकायत के अनुसार, धारा 301 का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोपी खास देशों या उद्योगों को निशाना बनाने के लिए किया गया है - न कि लगभग सभी US इम्पोर्ट पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए। शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि प्रशासन जबरन मजदूरी का बहाना बनाकर उन टैरिफ को फिर से लागू कर रहा है जिन्हें कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने एक बयान में कहा, हर कदम पर हारने के बावजूद, ट्रंप एक बार फिर कामकाजी परिवारों और ओरेगन के स्थानीय व्यवसायों के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नए टैरिफ 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों पर लागू विवादित टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को की गई थी और ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से होने वाले इम्पोर्ट पर लागू होते हैं। कुछ देशों को कड़े नियम लागू करने के बाद कम टैरिफ दरें मिलीं। उदाहरण के लिए, प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भारत के लिए टैरिफ दर 12.5% से घटाकर 10% कर दी गई। कुछ खास प्रोडक्ट्स, जैसे तेल, नैचुरल गैस, फर्टिलाइज़र और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा पाने वाले सामानों को नए टैरिफ से छूट दी गई। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने इस कदम का बचाव किया। अमेरिका में लगभग एक सदी से ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है; अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा ही करने का समय आ गया है। ट्रंप ने एक नई कानूनी रणनीति अपनाई ये टैरिफ ट्रंप के आर्थिक एजेंडा के मुख्य स्तंभों में से एक को बचाने की उनकी नई कोशिश है, क्योंकि इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में, US सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है, जिससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई। इसके जवाब में, ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दुनिया भर में अस्थायी टैरिफ लगाए। बाद में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड ने उन लेवी को भी गैर-कानूनी करार दिया, हालांकि प्रशासन की अपील के दौरान वे लागू रहे। इसे भी पढ़ें: Ramayana की रिलीज से पहले स्पेशल स्क्रीन की मांग, श्री रामलीला महासंघ ने निर्माताओं को लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शन की दी चेतावनी कानूनी चुनौतियों के कारण उन विकल्पों के बाद, प्रशासन ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का रुख किया है, एक ऐसा कानून जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से विदेशी सरकारों की अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए किया जाता है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर टैरिफ लगाने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया था, और वे उपाय कानूनी चुनौतियों में टिके रहे क्योंकि वे किसी खास देश को टारगेट करके लगाए गए थे। कोर्ट से बार-बार झटके मिलने के बावजूद ट्रंप US मैन्युफैक्चरिंग को फिर से शुरू करने और ग्लोबल ट्रेड को नया रूप देने के लिए टैरिफ को एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले साल, उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का लंबे समय से चला आ रहा ट्रेड डेफिसिट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगभग हर देश से होने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ लगाए, हालांकि बाद में कोर्ट ने उन उपायों पर रोक लगा दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास किसी समझौते पर पहुँचने का यह आखिरी मौका है। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दावों को खारिज किया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान को सबक सिखाने और उस पर दबाव बनाने के लिए गैर-पारंपरिक और अपरंपरागत रणनीतियों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के अनुरोध पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन के साथ बातचीत के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चर्चा चल रही है। ट्रंप ने कहा, हम अभी बात कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, यह उनके लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। मैं उन्हें कड़ी कार्रवाई से पहले हर संभव आखिरी मौका देना चाहता हूँ। CENTCOM ने ईरान पर कार्रवाई के लिए 'नए और अनोखे' विचारों की मांग की इस बीच, खबर है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर दबाव बनाने के नए तरीकों के लिए सैन्य विश्लेषकों से नए विचारों की मांग की है। इसे भी पढ़ें: FSSAI का Dabur India पर बड़ा एक्शन! '100% शुद्ध' और 'ऑर्गेनिक' के गुमराह करने वाले दावों पर लगी रोक, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, CENTCOM की खुफिया शाखा के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते एक ईमेल भेजा था जिसमें कर्मचारियों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे दंडित करने के नए, अनोखे और अपरंपरागत तरीकों का प्रस्ताव देने को कहा गया था। क्राउडसोर्सिंग-शैली के इस अनुरोध को अमेरिकी सेना के लिए एक असामान्य कदम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अपने विकल्पों पर फिर से विचार कर रहा है क्योंकि वह ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है। मामले से परिचित एक दूसरे सूत्र ने CNN को बताया कि CENTCOM सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर रहा है और उसने अपनी मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने CNN को दिए एक बयान में कहा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का नए और अनोखे तरीकों से सोचने और काम करने का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने आगे कहा, खासकर एडमिरल कूपर, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के उच्चतम स्तर को हासिल करने के लिए रैंक की परवाह किए बिना हमारी बेहतरीन टीम के सदस्यों से संपर्क करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फोकस ट्रंप के अनुसार, चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से निपटने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक जलमार्ग सचमुच कल तक फिर से खुल सकता है, जबकि ईरान के परमाणु-मुक्त होने की प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। अमेरिका और ईरान 28 फरवरी से ही संघर्ष में उलझे हुए हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अचानक हमले किए थे। हालांकि बीच-बीच में हुई कूटनीतिक कोशिशों से कुछ समय के लिए शांति रही है, लेकिन टकराव जारी है। ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार है और वह इस इलाके में अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता रखता है। होर्मुज में कार्गो जहाज पर हमला एक नई घटना में, ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी, UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने मंगलवार सुबह बताया कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय एक अज्ञात कार्गो जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल (किसी अज्ञात चीज़) से हमला हुआ। एजेंसी ने कहा कि अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जहाज की पहचान या संभावित नुकसान या हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
ईरान और अमेरिका में बढ़ा तनाव, मुश्किल में फंसे ट्रंप, तेहरान ओमान की हुई दोस्ती, युद्ध लेगा U-turn?
अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी फिर बढ़ गई है। ईरान ने अमेरिका से बात करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, ट्रंप अपने ही देश में मुश्किलों में फंस गए हैं। ईरान और ओमान की दोस्ती बढ़ी, क्या युद्ध लेगा यू-टर्न?
भारत समेत 60 देशों पर लगाए टैरिफ को कोर्ट में चुनौती, 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप पर किया मुकद्दमा
भारत समेत 60 देशों पर लगाए टैरिफ को कोर्ट में चुनौती, 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप पर किया मुकद्दमा
Donald Trump के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने खटखटाई अदालत
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे। ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के वैश्विक आयात शुल्क के स्थान पर लागू किए गए हैं। इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है। जेम्स ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।’’भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली। बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
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अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
भारत पर नए टैरिफ लगाकर बुरे फंसे ट्रंप, अमेरिका के 25 राज्यों ने ठोक दिया मुकदमा
ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि ये टैरिफ उन देशों पर लगाए गए हैं जो बंधुआ मजदूरी से बने सामान के निर्यात को रोकने के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि राज्यों का कहना है कि यह टैरिफ लगाने का एक बहाना है।
Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका
वाशिंगटन, तीन अगस्त (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ प्रस्तावित नयी वार्ता तेहरान के लिए समझौता करने और अमेरिका के हमलों से बचने का आखिरी मौका है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में बातचीत शुरू होगी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान निकालने का रास्ता तैयार होगा। राष्ट्रपति ने कहा, “पहला चरण जलडमरूमध्य को खोलने का है। दूसरा चरण परमाणु निरस्त्रीकरण का है।”ट्रंप ने कहा कि “इसमें थोड़ा समय लगेगा।”ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगी खाड़ी देशों के आग्रह पर ईरान पर नए और बड़े हमले का आदेश देने का फैसला फिलहाल टाल दिया।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों पर स्टील निभाएंगी अहम भूमिका : विदेश मंत्री चो ह्यून
सोल। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोल में नई अमेरिकी राजदूत मिशेल स्टील, वॉशिंगटन तक अपनी 'सीधी पहुंच' का उपयोग करते हुए दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाएंगी। योनहाप न्यूज टीवी को दिए इंटरव्यू में चो ने कहा, मुझे उम्मीद है कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत होगी। कहा जाता है कि राजदूत की वॉशिंगटन तक सीधी पहुंच है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि हम इसका इस्तेमाल दोनों देशों के रिश्तों में मौजूद कठिन मुद्दों को सुलझाने के लिए कर सकेंगे। योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, मिशेल स्टील गुरुवार को दक्षिण कोरिया पहुंचीं और उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया। यह पद पिछले साल जनवरी से खाली पड़ा हुआ था। चो ह्यून मंगलवार को स्टील से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने वाले हैं, जब वह विदेश मंत्रालय को अपने नियुक्ति पत्रों की प्रति सौंपेंगी। स्टील का आगमन ऐसे समय में हुआ है, जब सोल और वॉशिंगटन के बीच सुरक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं। इनमें अमेरिका में दक्षिण कोरिया के निवेश संबंधी वादे और अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी कूपांग इंक के खिलाफ सोल की नियामक कार्रवाई को लेकर पैदा हुआ तनाव भी शामिल है। यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर डेटा लीक के बाद की गई थी। इसके अलावा, चो ने कहा कि उन्हें पता है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी 'जल्द ही' साउथ कोरिया जाएंगे। उनकी अप्रैल में हुई उत्तर कोरिया की यात्रा पर चर्चा होने की उम्मीद है। कोरिया नेशनल डिप्लोमैटिक अकादमी में हाल ही में हुए डेटा लीक के बारे में, जिसमें दक्षिण कोरिया के लगभग सभी राजनयिकों की निजी जानकारी उजागर होने की आशंका है, चो ने कहा कि विदेश मंत्रालय कड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है। इनमें भविष्य में हैकिंग रोकने के लिए मजबूत फायरवॉल तैयार करना भी शामिल है। पिछले महीने दक्षिण कोरिया की अमेरिका में राजदूत कांग क्यूंग-वा ने मिशेल स्टील से मुलाकात के दौरान उनसे दोनों देशों के गठबंधन को एक 'नई ऊंचाई' तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया था। कांग और स्टील की मुलाकात 21 जुलाई को हुई थी, जब स्टील सोल के लिए रवाना होने वाली थीं। स्टील 30 जुलाई (कोरिया समयानुसार) को सोल पहुंचीं। उस समय दोनों देशों के सामने कई साझा जिम्मेदारियां थीं, जिनमें पिछले वर्ष हुए सुरक्षा, व्यापार और निवेश संबंधी द्विपक्षीय समझौतों को लागू करना भी शामिल है।
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस, 'अवैध टैक्स' का आरोप - AajTak
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस, 'अवैध टैक्स' का आरोप AajTak ट्रंप के नए झटके से क्या भारत की मुश्किलें और बढ़ेंगी BBC अमेरिकी शुल्क की चेतावनी: क्या भारत की फार्मा ताकत अब नई परीक्षा के दौर में है? Jansatta Noida News: अमेरिका के टैरिफ वार से बेअसर नोएडा का निर्यात, उद्यमियों ने ढूंढे नए बाजार Amar Ujala अमेरिका अपने टैरिफ की दीवार का पुनर्निर्माण कर रहा है: Vietnam.vn
Auraiya News: सावन में फिरोजाबादी और अमेरिकन डायमंड की चूड़ियों की मांग
सावन में फिरोजाबादी और अमेरिकन डायमंड की चूड़ियों की मांग
तेल कंपनियों पर बिफरे ट्रंप: शवोन के CEO को अमेरिकी राष्ट्रपति की खरी-खरी, क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?--Trump Slams Chevron CEO, Demands Immediate Fuel Price Cuts Amid Rising Oil Costs
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
पानीपत में स्टडी वीजा पर अमेरिका भेजने के नाम पर 34.50 लाख रुपये की ठगी और मानव तस्करी का मामला सामने आया है। पुलिस ने चार आरोपितों सोनू, बिल्लू, रोबिन और आशीष के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व इमिग्रेशन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
डील या टोटल सरेंडर… ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम; होर्मुज पर अमेरिकी कंट्रोल का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए डील या टोटल सरेंडर का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी तौर पर बातचीत चाहते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से इनकार करते हैं।
ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका? ट्रंप के फैसले के पीछे क्या थे रणनीतिक और राजनीतिक कारण
ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका? ट्रंप के फैसले के पीछे क्या थे रणनीतिक और राजनीतिक कारण
अमेरिकी क्रिकेटर अखिलेश रेड्डी पर लगा 8 साल का बैन
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (यूएसए) के क्रिकेटर बोडुगम अखिलेश रेड्डी पर सभी तरह के क्रिकेट से आठ साल का बैन लगा दिया गया है, जिन्हें एंटी-करप्शन ट्रिब्यूनल ने एंटी-करप्शन कोड के तीन नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है।
ICC ने अमेरिकी क्रिकेटर पर ठोका 8 साल का बैन, लगे हैं मैच फिक्सिंग से जुड़े 3 बड़े आरोप
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने अमेरिका के क्रिकेटर बोडुगुम अखिलेश रेड्डी पर 8 साल का बैन लगाया है। यह बैन 21 नवंबर 2025 से माना जाएगा, जब खिलाड़ी को पहली बार अस्थायी रूप से सस्पेंड किया गया था।
ट्रम्प का दावा- अमेरिका और ईरान के बीच आज से शुरू होगी वार्ता, वीडियो में जाने बड़े हमले को टालने की कही बात
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के एंटी-करप्शन ट्रिब्यूनल ने अमेरिका के क्रिकेटर बोदुगुम अखिलेश रेड्डी पर क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से 8 साल का प्रतिबंध लगाया है। ट्रिब्यूनल ने उन्हें आबू धाबी T10 लीग 2025 के दौरान मैच फिक्सिंग की कोशिश, दूसरे खिलाड़ी को फिक्सिंग के लिए उकसाने और जांच के दौरान मोबाइल से सबूत मिटाने का दोषी पाया। यह प्रतिबंध 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा, जब उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। ICC के मुताबिक, मामले की जांच एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) की ओर से नियुक्त ICC के एंटी-करप्शन अधिकारियों (DACO) ने की थी। अमेरिका के लिए खेल चुके हैं 4 टी-20 मैच 26 साल के बोदुगुम अखिलेश रेड्डी ने अमेरिका की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 4 टी20 मैच खेले हैं। उन्होंने नॉर्थ अमेरिका टी20 कप में केमैन आइलैंड्स के खिलाफ अमेरिका के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था। एक बल्लेबाज और पार्ट-टाइम गेंदबाज के रूप में खेलने वाले अखिलेश के नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 1 विकेट दर्ज है। आबू धाबी T10 लीग में ICC की क्या भूमिका है? आबू धाबी T10 लीग का आयोजन एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) करता है। टूर्नामेंट में भ्रष्टाचार रोधी नियमों को लागू करने और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी आईसीसी के एंटी-करप्शन अधिकारियों (DACO) को सौंपी गई है। इसी अधिकार के तहत इस मामले की जांच और सुनवाई की गई। ------------------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम का भारत दौरा:भारतीय मूल के नील पटेल को 16 सदस्यीय टीम में मिली जगह क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अगले महीने होने वाले भारत दौरे के लिए 16 सदस्यीय अंडर-19 पुरुष टीम का ऐलान कर दिया है। इस टीम में भारतीय मूल के न्यू साउथ वेल्स के खिलाड़ी नील पटेल को भी शामिल किया गया है। यह टीम भारत के खिलाफ राजकोट और अहमदाबाद में पांच मैचों की मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। पूरी खबर
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
पानीपत में अमेरिका के स्टडी वीजा के नाम पर 35 लाख की ठगी, युवक को डंकी रूट से भेजा
पानीपत में एक युवक को स्टडी वीजा पर अमेरिका भेजने का झांसा देकर 35 लाख रुपये की ठगी की गई और उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजा गया।
'गले लगाया और छुरा घोंप दिया'... PAK मंत्री का ट्रंप पर बड़ा हमला, अमेरिका को लेकर किया चौंकाने वाला दावा
US-Iran West Asia Diplomacy: मिडिल ईस्ट में गहराते भीषण सैन्य संकट के बीच कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशें अचानक तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ बैक-टू-बैक हाई-लेवल टेलीफोनिक बातचीत की है।इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाले अपने 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े हमले' को फिलहाल रोक दिया है और दोनों देश बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार हो गए हैं।24 घंटे में सऊदी से दूसरी बातचीत, पाक आर्मी चीफ से भी संपर्कक्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए ईरान ने अपने पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक तालमेल बढ़ाया है। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से 24 घंटे के भीतर दूसरी बार फोन पर लंबी चर्चा की। अराघची ने पाकिस्तान सेना के फील्ड मार्शल असीम मुनीर से भी बात की।ईरान, सऊदी अरब और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर सहमति जताई कि सैन्य टकराव को रोकने के लिए क्षेत्रीय सहयोग और राजनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता है।ट्रंप ने क्यों टाला ईरान पर 'सबसे बड़ा हमला'?एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिका ईरान पर एक बहुत बड़ा सैन्य हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन गल्फ सहयोगियों के अनुरोध के बाद इसे टाल दिया गया। ट्रंप ने बताया कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर ने अमेरिका से हमला रोकने और कूटनीति को एक और मौका देने की अपील की थी।ट्रंप ने कहा, 'हम जाने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन हमारे सहयोगियों को लगता है कि एक डील हो सकती है। मैं लोगों को मारना नहीं चाहता, अगर बातचीत से रास्ता निकलता है तो वह बेहतर है।'आज से शुरू होगी अमेरिका-ईरान की ऐतिहासिक वार्ताट्रंप ने स्पष्ट किया है कि सोमवार दोपहर से अमेरिका और ईरान के बीच सीधे मोर्चे पर बातचीत शुरू हो रही है। इस वार्ता के मुख्य एजेंडे में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का निशस्त्रीकरण शामिल है। ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय की है, तो उन्होंने कहा कि कोई डेडलाइन नहीं है और वे देखेंगे कि वार्ता किस दिशा में जाती है।पहले की चेतावनी और पाकिस्तान में हुई गुप्त वार्ताइससे पहले 7 अप्रैल को ट्रम्प ने ईरान को शांति वार्ता में शामिल न होने पर 'पूरी सभ्यता तबाह करने' की चेतावनी दी थी। इसके बाद पाकिस्तान में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में दुर्लभ आमने-सामने की बैठकें भी हुई थीं, हालांकि वे बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थीं।लेकिन अब, होर्मुज में तेल टैंकरों पर हुए हालिया हमलों और वैश्विक ऊर्जा संकट के बढ़ते खतरे के बीच, दोनों देशों का फिर से बातचीत की मेज पर आना अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक शांति के लिए एक बेहद बड़ी राहत की खबर माना जा रहा है।
जुलाई में लगभग 23% की तेज बढ़त के बाद, सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 5% से ज्यादा गिरकर $80 प्रति बैरल के नीचे आ गया।
'पीएम केयर्स की ओर भी देखें..': अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई पर सवाल, भड़की CJP, बोली- मोदीजी माफ कर देंगे Navbharat Times सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 होगी, लोकसभा में बगैर बहस के बिल पारित BBC मोदी जी माफ कर देंगे, CJP का PM केयर्स फंड को लेकर RTI एक्टिविस्ट पर तंज ABP News अभिजीत दीपके अमेरिका में पढ़ाई के लिए कहां से लाए पैसे? बता दिया सच, National Hindi News Hindustan कॉकरोच जनता पार्टी दो दिन की रणनीतिक बैठक करेगी: कहा- राजनीतिक दल नहीं बनाएंगे; दीपके बोले- स्कॉलरशिप के पै... Dainik Bhaskar
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
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अमेरिका में कैसे हुई पढ़ाई? अभिजीत दिपके ने दिया जवाब
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने अमेरिका में हुई अपनी पढ़ाई को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है. उनका कहना है कि उनकी पढ़ाई का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरा हुआ था.
रूस के भीषण हमलों के बाद जेलेंस्की की अमेरिका-यूरोप से गुहार, बोले- पैट्रियट मिसाइलें गोदामों में नहीं, यूक्रेन भेजिए
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
US Iran News: ट्रंप बोले- जल्द होगी अमेरिका और ईरान की बैठक, होर्मुज संकट खत्म करने और न्यूक्लियर डील पर होगी चर्चा
ट्रम्प का दावा- ईरान पर बड़ा सैन्य हमला टला, समझौते के प्रस्ताव के बाद अमेरिका ने बदला फैसला
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अमेरिका-ईरान डील की उम्मीद से कच्चा तेल हुआ सस्ता, 5% तक लुढ़के दाम
ईरान पर अमेरिकी हमले टलने और संभावित समझौते के संकेतों के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों करीब 5 फीसदी टूट गए. हालांकि, होर्मुज के आसपास टैंकरों पर हमले और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार है.
World News: अमेरिका में 80 वर्षीय अभिनेता विंसेंट पास्टर का शव बरामद; PAK में सड़क हादसा, 13 लोग घायल
ट्रंप का दावा, अमेरिका ईरान के बीच होगी बैठक, होर्मुज के साथ न्यूक्लियर डील के भी दिए संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ सोमवार दोपहर से बैठक शुरू होगी। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट के साथ-साथ न्यूक्लियर डील हो सकती है।
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
अमेरिका में 13 अगस्त को चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की फिर नीलामी हो रही है, जिसमें पियरे जेनरेट के 8 आइटम शामिल हैं। अधिवक्ता अजय जग्गा ने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर नीलामी रोकने और वस्तुओं को वापस लाने के लिए कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
अमेरिका भेजने के नाम पर 87 लाख की ठगी, पति-पत्नी के लिए सपनों का सफर बना धोखे का जाल; मोहाली में FIR
दंपती को अमेरिका भेजने के नाम पर दो ट्रैवल एजेंटों ने 87 लाख रुपये की ठगी की। मोहाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर अंबाला के एजेंटों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भारत अमेरिका को पछाड़ दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला सोलर एनर्जी मार्केट बना
नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 2014 में सिर्फ 3 गीगावाट से बढ़कर 30 जून, 2026 तक 162.15 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है, जो देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई।
अमेरिका से हमले न करने को गिड़गिड़ाया था ईरान? ट्रंप के दावे पर आया तेहरान का जवाब
ईरान ने साफ किया है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ऐसा नहीं कहा था कि अमेरिका उस पर हमले न करे। साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
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अमेरिका में बर्गर पार्टी के दौरान अंधाधुंध फायरिंग, दिल दहला देने वाली घटना में 3 लोगों की मौत
अमेरिका में गन कल्चर और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, और एक बार फिर देश में हुई गोलीबारी की एक खौफनाक वारदात ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका में एक मामूली सी बर्गर पार्टी के दौरान अचानक उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब कुछ अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुए खूनी संघर्ष और अंधाधुंध गोलीबारी में तीन बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस सनसनीखेज घटना के बाद से स्थानीय इलाकों में भारी दहशत का माहौल है और पुलिस-प्रशासन हरकत में आ गया है।पार्टी की खुशियां पलभर में मातम में बदलींमिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना उस समय घटी जब लोग एक जगह इकट्ठा होकर बर्गर पार्टी का आनंद ले रहे थे और आपसी माहौल पूरी तरह खुशनुमा था। अचानक हुई इस हिंसक वारदात ने पलभर में सारी खुशियों को मातम में बदल दिया और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। चश्मदीदों के मुताबिक हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिससे वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।सुरक्षा व्यवस्था और गन वायलेंस पर उठे गंभीर सवालइस दर्दनाक गोलीबारी की घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर अमेरिका में खुलेआम मिलने वाले हथियारों और बढ़ते गन कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन और सरकार की नीतियों की आलोचना हो रही है क्योंकि इस तरह की मास शूटिंग की घटनाएं देश में आम होती जा रही हैं। पुलिस फिलहाल इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि इस खौफनाक वारदात के पीछे की असली वजह का खुलासा हो सके।
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने ग्लोबल डिफेंस एक्सपर्ट्स के भी होश उड़ा दिए हैं। ईरान के साथ कथित तौर पर चली पांच महीने लंबी लंबी और भीषण जंग ने अमेरिकी सेना की पोल खोलकर रख दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि लंबे संघर्षों से निपटने की उसकी ताकत और सैन्य क्षमता अंदर से कितनी खोखली हो चुकी है। इस जंग के बाद अमेरिकी रक्षा तंत्र की कमियां दुनिया के सामने खुलकर आ गई हैं, जिसे आठ मुख्य बिंदुओं के जरिए बेहद आसानी से समझा जा सकता है।मिलिट्री पावर और साजो-सामान का भारी संकटइस पूरे घटनाक्रम और जंग के दौरान सबसे बड़ा पहलू यह सामने आया है कि लगातार चलने वाले युद्धों के कारण अमेरिका के आधुनिक हथियारों और मिसाइलों के भंडार में भारी कमी आ गई है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान के उत्पादन की रफ्तार उस गति से नहीं हो पा रही है जितनी तेजी से जंग में उनका इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा, युद्ध के लंबे खिंचने से अमेरिकी रक्षा बजट पर भी अत्यधिक दबाव पड़ा है, जिससे देश के भीतर आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।महाशक्ति की रणनीतिक विफलताओं का सचईरान के साथ हुए इस लंबे गतिरोध ने अमेरिकी रणनीति की कमजोरियों को भी जगजाहिर कर दिया है, जहां लंबे समय तक चलने वाले पारंपरिक या क्षेत्रीय संघर्षों से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार नहीं दिखती। इस जंग ने यह साबित कर दिया है कि केवल अत्याधुनिक तकनीक के भरोसे किसी लंबी और जटिल लड़ाई को आसानी से नहीं जीता जा सकता, बल्कि इसके लिए मजबूत जमीनी समर्थन और अटूट सप्लाई चेन की भी जरूरत होती है। इस पूरी रिपोर्ट ने वैश्विक पटल पर अमेरिका के अजेय होने के उस पुराने दावे को तगड़ा झटका दिया है जिस पर अब दुनियाभर में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
उत्तर-पश्चिमी अमेरिकी राज्य इडाहो के ट्विन फॉल्स में एक इन-एन-आउट रेस्टोरेंट के इलाके में शनिवार को गोलीबारी की घटना सामने आई। इस गोलीबारी में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और कम से कम दो अन्य घायल हो गए।
अमेरिका के रेस्टोरेंट में अंधाधुंध फायरिंग, 3 लोगों की मौत, 7 घायल, हमलावर भी ढेर
अमेरिका के इडाहो स्थित एक रेस्टोरेंट में फायरिंग की घटना में तीन लोगों की मौत और सात लोगों के घायल होने की खबर है। जानकारी के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में हमलावर भी मारा गया।
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
US Mass Shooting: अमेरिका के इडाहो में ‘इन-एन-आउट’ बर्गर रेस्टोरेंट में अंधाधुंध गोलीबारी
संयुक्त राज्य अमेरिका में गन कल्चर का खौफनाक चेहरा एक बार फिर सामने आया है। इस बार दक्षिणी इडाहो (Idaho) राज्य का शांत रहने वाला शहर 'ट्विन फॉल्स' (Twin Falls) गोलियों की गूंज से कांप उठा। शनिवार शाम लगभग 4 बजे, जब लोग एक व्यस्त शॉपिंग इलाके के पास स्थित मशहूर 'इन-एन-आउट बर्गर' (In-N-Out Burger) रेस्टोरेंट में अपने परिवार और दोस्तों के साथ मौजूद थे, तभी अचानक एक सिरफिरे बंदूकधारी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बर्गर का स्वाद ले रहे मासूम लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही रेस्टोरेंट के भीतर और बाहर गोलियों की तड़तड़ाहट से चीख-पुकार मच गई। वारदात के समय इलाका काफी व्यस्त था, जिसके चलते वहां अफरातफरी और भगदड़ जैसा माहौल बन गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए टेबल और कुर्सियों के पीछे छिपने लगे।पुलिस चीफ का बड़ा बयान: हमलावर मारा गया, फिलहाल लोगों के लिए टला खतराघटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। ट्विन फॉल्स के पुलिस चीफ मैथ्यू हिक्स (Matthew Hicks) ने एक त्वरित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्थिति की जानकारी दी। पुलिस चीफ हिक्स ने बताया कि घटना के समय मौके पर बेहद खौफनाक और अफरातफरी का माहौल था। हालांकि, सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से स्थिति पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने पुष्टि की कि हमलावर भी मरने वाले लोगों में शामिल है। हिक्स ने शहरवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा, हमें पूरा विश्वास है कि अब आम लोगों के लिए तत्काल कोई खतरा नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि हताहतों की सटीक संख्या और पहचान की पुष्टि की जा रही है तथा पुलिस अधिकारी संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों के परिवारों को सूचित करने की प्रक्रिया में जुटे हैं।सड़कों की नाकेबंदी और आपातकालीन अलर्ट: सेंट ल्यूक मैजिक वैली अस्पताल में हड़कंपगोलीबारी के तुरंत बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया। ट्विन फॉल्स काउंटी के कमिश्नर ब्रेंट रेनके (Brent Reinke), जो इडाहो डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शंस के पूर्व प्रमुख भी रह चुके हैं, ने बताया कि उन्हें शाम 4 बजे से ठीक पहले इस एक्टिव शूटर घटना की जानकारी मिली थी। शुरुआती दौर में ही कम से कम पांच लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर आई थी। सुरक्षा के मद्देनजर ट्विन फॉल्स पुलिस ने रेस्टोरेंट की ओर जाने वाली सभी प्रमुख सड़कों को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया और आम जनता से इस व्यस्त वाणिज्यिक क्षेत्र से दूर रहने की अपील की। वहीं, पास स्थित 'सेंट ल्यूक मैजिक वैली' (St. Luke's Magic Valley) मेडिकल सेंटर के प्रवक्ता टेलर मार्शनर ने बताया कि अस्पताल का इमरजेंसी स्टाफ घायलों के त्वरित इलाज के लिए पुलिस और रिस्पॉन्स टीमों के साथ मिलकर चौबीसों घंटे काम कर रहा है।एफ़बीआई (FBI) संभालेगी जांच की कमान: हमलावर की पहचान और मकसद तलाश रहे अधिकारीइस बड़े हमले के पीछे की साजिश और हमलावर के इरादों को खंगालने के लिए अब अमेरिकी जांच एजेंसी एफ़बीआई (FBI) मैदान में उतर चुकी है। पुलिस चीफ मैथ्यू हिक्स ने जानकारी दी कि स्थानीय पुलिस की मदद के लिए एफ़बीआई की स्पेशल यूनिट्स पहुंच गई हैं। फॉरेंसिक टीमें और बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स रेस्टोरेंट परिसर से साक्ष्य जुटा रहे हैं। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावर अकेले इस वारदात को अंजाम देने आया था या उसका कोई मददगार भी था। इसके अलावा, हमलावर के पास से मिले हथियारों के लाइसेंस, उसके सोशल मीडिया बैकग्राउंड और हमले के पीछे के मुख्य कारण की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि यह कोई नफरती अपराध (Hate Crime) था या फिर किसी व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा।नेवादा बॉर्डर के पास बसा शांत शहर ट्विन फॉल्स: सीनेटर माइक क्रैपो ने जताया दुख और की यह अपीललगभग 56,000 की आबादी वाला ट्विन फॉल्स शहर इडाहो की राजधानी बोइस (Boise) से दक्षिण-पूर्व में लगभग 205 किलोमीटर और नेवादा (Nevada) राज्य की सीमा से उत्तर में करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित है। आमतौर पर शांत माने जाने वाले इस शहर में हुई इस हिंसक घटना से पूरा अमेरिका स्तब्ध है। इडाहो के रिपब्लिकन सीनेटर माइक क्रैपो (Mike Crapo) ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, मैं ट्विन फॉल्स से आ रही एक्टिव शूटर से जुड़ी हर पल की जानकारी पर सीधी नजर रख रहा हूं। सीनेटर ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और प्रभावित क्षेत्र की तरफ जाने से बचें। इस वारदात ने एक बार फिर अमेरिका में गन वायलेंस और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
ईरान ने नरमी को कमजोरी समझा, पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना अमेरिका की रणनीतिक भूल
इतिहास बार-बार सिद्ध करता है कि किसी भी युद्ध का परिणाम केवल सैन्य शक्ति से तय नहीं होता। निर्णायक भूमिका निभाती है राजनीतिक इच्छाशक्ति, रणनीतिक स्पष्टता और यह विश्वास दिलाने की क्षमता कि घोषित राष्ट्रीय लक्ष्य किसी भी परिस्थिति में नहीं बदलेंगे। जब कोई महाशक्ति एक दिन कठोर संदेश देती है और दूसरे दिन समझौते […]
'पाकिस्तान बिकता नहीं, किराए पर चलता है': रिपोर्ट में बड़ा दावा, क्या अमेरिका को उल्लू बना रहा PAK?
'पाकिस्तान बिकता नहीं, किराए पर चलता है': रिपोर्ट में बड़ा दावा, क्या अमेरिका को उल्लू बना रहा पाकिस्तान? pakistan us report terrorism strategy national interest imf world bank china cpec
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह खुलेगा, डोनाल्ड ट्रंप ने दी जानकारी
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि अमेरिका के साथ समझौते में इजरायल भी शामिल है। उन्होंने लिखा कि जल्द ही मिडिल ईस्ट में शांति होगी। ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलेगा और न्यूक्लियर बम नहीं बनाएगा।
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
युद्धपोत कम, मिसाइलें घटीं: शीर्ष जनरल की पेंटागन को चेतावनी, इस्राइल को ईरानी हमले से बचा पाएगा अमेरिका?
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
Kanpur News: टैरिफ... अब सौ प्रतिशत पर असमंजस, बड़े आर्डर नहीं दे रहे अमेरिकी खरीदार
अमेरिका ने ट्रेड डील की बातचीत के बीच एक बार फिर रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
अमेरिका में नशा तस्करी में हरियाणा का युवक गिरफ्तार, वीडियो वायरल होते ही पिता ने तोड़ा दम
पानीपत के तामशाबाद गांव के वीरेंद्र को अमेरिका में नशा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। वायरल वीडियो से पिता रणबीर को हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया।
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
पुलिस ने पानीपत में एक शिक्षण संस्थान के चेयरमैन से 7 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले का पर्दाफाश कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
बाल यौन शोषण सामग्री अपलोड की, अमेरिका की एजेंसी ने किया अलर्ट; पंजाब पुलिस ने दर्ज की FIR
अमेरिका स्थित एनसीएमईसी के अलर्ट के बाद पंजाब साइबर क्राइम पुलिस ने बाल यौन शोषण सामग्री अपलोड करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली रिपोर्टों के आधार पर दो जीमेल खातों के अज्ञात संचालकों के खिलाफ जांच शुरू की है।
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिकी फेड के फैसले का असर, भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला
मुंबई, भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को गिरावट के साथ हुई। सुबह 9:15 पर सेंसेक्स 151 अंक या 0.20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,502 और निफ्टी 37 अंक या 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,213 पर खुला।
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 98 डॉलर पार:कतर से LNG सप्लाई भी अटकने की आशंका; महंगाई बढ़ सकती है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड आज 23 जुलाई को 4% बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह पिछले 6 हफ्तों में सबसे ज्यादा है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। कच्चे तेल के महंगे होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फ्यूल मार्जिन पर दबाव बढ रहा है। अगर लंबे समय तक क्रूड महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला, हूतियों ने नाकेबंदी का ऐलान किया तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का बिगड़ता माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ अब यह विवाद फारसी खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है। यह हमला हुती ग्रुप की ओर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी की घोषणा करने के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। तेल कंपनियों के शेयर 2.5% तक टूटे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है… भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। अक्टूबर तक LNG सप्लाई अटकने के आसार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर एनर्जी मिड-अक्टूबर तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के शिपमेंट पर 'फोर्स मैज्योर' को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कतर ने जून में ही एशिया और यूरोप के कुछ ग्राहकों को सूचित किया था कि अगस्त और सितंबर के कार्गो रद्द रहेंगे। अगर यह पाबंदी अक्टूबर तक खिंचती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले गैस का ग्लोबल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि यूरोप और एशियाई देश सीमित LNG सप्लाई के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे। सेंसेक्स 364 और निफ्टी 127 अंक गिरी कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया है। 23 जुलाई को सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 76,391 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 127 अंक की गिरावट रही, ये 23,870 पर बंद हुआ। रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। आगे क्या? पश्चिम एशिया में अगर यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग, ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सोना ₹274 बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंचा: 4 दिन में ₹4,398 महंगा हो चुका, चांदी आज ₹360 चढ़कर ₹2.26 लाख पर पहुंची सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 23 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 360 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 274 रुपए चढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 4 दिन में सोना 4,398 रुपए और 10,346 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की मांग तेज
यह केवल विचारधारा की बात भी नहीं है। यह इस बारे में नहीं है कि कोई प्रशासन की व्यापक नीतियों का समर्थन करता है या विरोध।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

