अमेरिकी कार्रवाई उस हमले के बाद तेज हुई, जिसमें जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया गया था। इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की ओर से की गई सीधी कार्रवाई में अमेरिकी सैनिकों की मौत का एक बड़ा मामला है।
पहली तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगा शेयर बाजार का रुझान
मुंबई, भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला कारोबारी हफ्ता काफी अहम होने वाला है। घरेलू आर्थिक आंकड़े जैसे पीएमआई, अमेरिका-ईरान तनाव और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजे बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवण सिंह पंधेर ने 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर होने वाली महा रैली को लेकर पंजाब के किसानों और मजदूरों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब से सैकड़ों बसें किसानों को लेकर दिल्ली के लिए रवाना होंगी। किसान मजदूर मोर्चा, ए.के.एम., बी.के.यू. एकता संघर्ष समेत कई किसान संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे। अमृतसर और गुरदासपुर जिले के किसान ब्यास में कल सुबह 11 बजे तक एकत्र होंगे, जबकि तरनतारन जिले के किसान गोइंदवाल साहिब में जुटेंगे। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी किसानों के लिए अलग-अलग स्थान तय किए गए हैं। पंधेर ने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का कृषि और डेयरी क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समझौते में मक्का, सोयाबीन, कपास, ड्राई फ्रूट, सेब, नाशपाती और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं। उनके मुताबिक, इसे व्यापक व्यापार समझौता बताया जा रहा है, लेकिन व्यापकता के नाम पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई वस्तुएं इसमें शामिल हो सकती हैं। उन्होंने पंजाब के युवाओं, किसानों और मजदूरों से अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की। पंधेर ने कहा कि पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और अन्य राज्यों से भी किसान दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को होने वाला यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन शाम 4 बजे समाप्त होगा। साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों को दिल्ली जाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से न रोका जाए।
ईरान के हमले में पहली बार दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। इसके बाद अमेरिकी सेना ने शनिवार को कहा कि उसने सैनिकों के मारे जाने के जवाब में ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
जयपुर में सॉफ्टेवयर इंजीनियर की पत्नी शादी के 8 साल बाद अचानक पीहर चली गई। उसके कुछ समय बाद रिश्तेदार की शादी में जाने के बहाने ससुराल से गहने भी मंगवा लिए। इसके बाद पत्नी (सॉफ्टवेयर इंजीनियर) जॉब के लिए अमेरिका चली गई। करीब 2 साल बाद इंडिया लौटी, लेकिन ससुराल नहीं आई। पति से बात करना भी बंद कर दिया। फिर 8 साल की बेटी की कस्टडी के लिए केस कर ससुराल पक्ष को नोटिस भिजवा दिया। यही नहीं, जिन गहनों को उसके मायके वाले हड़प चुके थे, उनको मांगने का भी नोटिस में जिक्र कर दिया। नोटिस मिलने के बाद 17 जुलाई को ससुर (पति के पिता) ने बिंदायका पुलिस थाने में बहू के पिता और उसके चाचा के खिलाफ गहने हड़पने की FIR दर्ज करवाई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा मामला… सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की 2014 में कराई थी शादी बिंदायका थाने के ASI बाबूलाल ने बताया- 65 वर्षीय बुजुर्ग ने थाने में FIR दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनके सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की शादी बेंगलुरु (कर्नाटक) निवासी युवती से साल 2014 में हुई थी। वह भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। शादी के करीब 8 साल बाद उनकी बहू अचानक पीहर चली गई। 8 दिसंबर 2023 को बहू के पिता और चाचा जयपुर आए। विद्याधर नगर में एक शादी में शामिल होने की कहकर उनके घर पर ही रुक गए। उस दौरान उनकी बहू बेंगलुरु में पीहर में ही थी। बहू के गहने लेने जयपुर आए थे पिता और चाचा ससुर ने रिपोर्ट में बताया कि जयपुर स्थित उनके घर पर बातचीत के दौरान बहू के पिता और चाचा ने 21 जनवरी 2024 को सिकंदराबाद (तेलंगाना) में परिवार में शादी होना बताया। शादी में बहू के भी जाने की बात बताई। दोनों ने अलमारी में रखी बहू की ज्वेलरी के साथ-साथ हमारे पैतृक गहने भी शादी में पहनने के लिए मांगे। उन्होंने बहू के अच्छे व्यवहार और संबंधों के चलते रिश्तेदार की शादी में पहनने के लिए गहने निकालकर उन्हें दे दिए। बाद में पता चला कि सिकंदराबाद में हुई शादी में बहू की मम्मी ने उन गहनों को पहना था। अमेरिका से लौटने पर भेजा नोटिस इसके बाद जॉब के सिलसिले में बहू मासूम बेटी के साथ अमेरिका चली गई। करीब 2 साल अमेरिका में रहने के बाद मार्च 2026 में बहू के इंडिया लौटने का पता चला। रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि 25 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु कोर्ट से उन्हें एक नोटिस मिला। नोटिस से पता चला कि बहू ने बेटी की कस्टडी के लिए बेंगलुरु कोर्ट में केस फाइल कर रखा है। मायके वाले ने जो गहने लिए थे, उसका भी झूठा हवाला दिया है कि वह अभी भी उनके (ससुराल वालों के) पास है। गहने मांगे तो लौटाने से किया इनकार इसका पता चलने पर पीड़ित परिवार ने बहू के मायके वालों से कॉन्टैक्ट कर गहने मांगे, तो उन्होंने गहने लौटाने से मना कर दिया। इन गहनों में सोने का रानीहार, मंगलसूत्र, कमरबंद, बाजूबंद, हथफूल, सात अंगूठी, दो कड़े, दो चूड़ी, चेन-पेंडेंट सेट, कान की जोड़ियां, टीका और अन्य सोने के गहने शामिल हैं। इसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
वाशिंगटन/तेहरान/लखनऊ। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी अमेरिका और ईरान का युद्ध अब अपने सबसे खौफनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान द्वारा किए गए सीधे ड्रोन और मिसाइल हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है। युद्ध के शुरुआती दिनों के बाद यह पहला मौका है जब ईरान की सीधी गोलीबारी में अमेरिकी जवानों की जान गई है। इस घटना से बौखलाए अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को कई गुना तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसने ईरान के कुख्यात 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) को सजा देने के लिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास सिरिक के निकट तड़के 1:30 बजे भीषण हवाई हमले किए हैं। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे बड़े मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह ध्वस्त करना है।कुवैत में तबाही: डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला, पीने के पानी का संकटअमेरिका के इन हमलों के जवाब में ईरान और उसके सहयोगी विद्रोही गुटों (Axis of Resistance) ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को ईरान ने रेगिस्तानी देश कुवैत पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिससे वहां के एक प्रमुख ऑयल फैसिलिटी सेंटर और 'वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट' (खारे पानी को मीठा बनाने वाला संयंत्र) को भारी नुकसान पहुंचा है। दो दिनों के भीतर कुवैत के पानी के प्लांट पर यह दूसरा बड़ा हमला है। कुवैत अपनी जरूरत का 90% पीने का पानी इसी तकनीक से हासिल करता है। इस हमले के बाद प्लांट में भीषण आग लग गई और कई बिजली उत्पादन इकाइयां ठप हो गईं, जिससे पूरे कुवैत में पीने के पानी और बिजली का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए कुवैत ने आपातकाल लागू कर कुछ समय के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) पूरी तरह बंद कर दिया था।इराक और जॉर्डन में भी मिसाइल और ड्रोन युद्ध, बहरीन-सऊदी में बजे सायरनइस युद्ध की लपटें अब पूरे मध्य पूर्व में फैल चुकी हैं। इराक के अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र की राजधानी इरबिल में रविवार तड़के आसमान धमाकों से गूंज उठा। यहां कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के बेस पर हुए ड्रोन हमले में 8 सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद इराकी एयर डिफेंस ने कई हमलावर ड्रोनों को मार गिराया। वहीं पड़ोसी देश जॉर्डन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए अपनी सीमा में घुस रही कई ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सऊदी अरब और बहरीन में दिन भर हवाई हमलों के सायरन बजते रहे, जिससे वहां के नागरिकों में दहशत का माहौल है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने ईरान की इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उसे आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए 'युद्ध अपराध' (War Crimes) का दोषी ठहराया है।खामेनेई की 'कभी न भूलने वाले सबक' की चेतावनी, अंतरिम डील टूटीअमेरिकी सेना द्वारा अपने जवानों की मौत की पुष्टि करने से ठीक पहले ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला खामेनेई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस्लामिक रिपब्लिक पर हमले नहीं रोके गए, तो वाशिंगटन को 'कभी न भूलने वाले सबक' सिखाए जाएंगे। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टीवी पर घोषणा की है कि अमेरिका द्वारा प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन के बाद तेहरान ने एक महीने पहले हुई उस 'अंतरिम डील' को पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है, जिसका मकसद युद्ध को स्थायी रूप से रोकना था। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 16 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 430 से अधिक घायल हुए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए ग्लोबल ट्रैवल अलर्ट जारी कर दिया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर मंदी के बादल मंडराने लगे हैं।
अमेरिका का ईरान पर नया हमला, IRGC की गोलीबारी में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शनिवार को जॉर्डन में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से की गई गोलीबारी में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। अमेरिका ने अभी तक मारे गए और ...
जॉर्डन में ईरानी हमला: दो अमेरिकी सैनिक ढेर, खाड़ी में दहशत
पश्चिम एशिया में चार महीने से जारी संघर्ष और भीषण होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को पुष्टि की कि जॉर्डन में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला करते हुए उनके दो सैनिक मारे गए हैं
फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला देर रात स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। टूर्नामेंट के 96 साल के इतिहास में यह 23वां फाइनल होगा। 12वीं बार फाइनल मुकाबला यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीम के बीच होने जा रहा है। इससे पहले इन दोनों महाद्वीपों की टीमों के बीच हुए 11 फाइनल में 8 बार लैटिन अमेरिकी टीमों ने खिताब जीता। यूरोप की टीम 3 बार ही टाइटल जीत पाई। इतिहास का एक और पहलू अर्जेंटीना के फेवर में है। इससे पहले यूरोप के बाहर 11 वर्ल्ड कप हुए। इनमें से 9 बार लैटिन अमेरिकी टीम चैंपियन बनी। यूरोप की टीमें सिर्फ दो बार ही खिताब जीत पाई।हालांकि, इससे स्पेन का दावा कमजोर नहीं होता। यूरोप की जिन दो टीमों ने यूरोप से बाहर वर्ल्ड कप जीता उसमें एक स्पेन भी है। स्पेन ने 2010 में साउथ अफ्रीका में हुए वर्ल्ड कप में खिताब जीता था। वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़े 5 रोचक फैक्ट्स 1. वर्ल्ड कप की ट्रॉफी सिर्फ दो महाद्वीपों में बंटी 1930 से 2022 तक खेले गए 22 वर्ल्ड कप में सिर्फ यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें ही चैंपियन बनी हैं। यूरोप ने पांच देशों के दम पर 12 और लैटिन अमेरिका ने तीन देशों के दम पर 10 खिताब जीते हैं। यानी 96 साल में कोई एशियाई, अफ्रीकी या उत्तरी अमेरिकी टीम वर्ल्ड चैंपियन नहीं बन सकी। 2. यूरोप के बाहर वर्ल्ड कप... तो लैटिन अमेरिका का दबदबा यूरोप के बाहर अब तक 11 वर्ल्ड कप हुए हैं। इनमें 9 बार लैटिन अमेरिकी और सिर्फ 2 बार यूरोपीय टीम चैंपियन बनी है। स्पेन (2010) और जर्मनी (2014) ही यूरोप की ऐसी टीमें हैं जिन्होंने यूरोप के बाहर हुए वर्ल्ड कप में खिताब जीता है। 3. अर्जेंटीना के पास 64 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराने का मौका अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है। टीम ने 2022 में कतर में तीसरा वर्ल्ड कप जीता था। अगर वह न्यू जर्सी में स्पेन को हराकर खिताब बचाने में सफल रहती है, तो 1962 के बाद लगातार दो वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन जाएगी। अब तक सिर्फ दो देशों ने अपने विश्व कप खिताब का सफल बचाव किया है। इटली ने 1934 और 1938, जबकि ब्राजील ने 1958 और 1962 में लगातार दो बार ट्रॉफी जीती थी। 4. स्पेन ने पहला वर्ल्ड कप यूरोप के बाहर ही जीता था स्पेन ने अपना इकलौता वर्ल्ड कप 2010 में साउथ अफ्रीका में जीता था। अब उसके सामने दूसरी ट्रॉफी जीतने के साथ-साथ गैर-यूरोपीय धरती पर लैटिन अमेरिका के लंबे वर्चस्व को चुनौती देने का मौका है। स्पेन का वर्ल्ड कप सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2010 के खिताब के बाद टीम 2014, 2018 और 2022 में नॉकआउट से आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं अर्जेंटीना पिछले चार वर्ल्ड कप में तीन बार सेमीफाइनल और दो बार फाइनल खेल चुका है। 5. फाइनल के आंकड़े किसके पक्ष में? वर्ल्ड कप इतिहास में यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें 11 बार फाइनल में आमने-सामने आई हैं। इनमें लैटिन अमेरिका ने 8 और यूरोप ने 3 बार जीत दर्ज की है। जर्मनी सबसे ज्यादा 8 फाइनल खेलने वाली टीम है, लेकिन सबसे सफल टीम ब्राजील है, जिसने सात फाइनल में पांच बार ट्रॉफी जीती। अर्जेंटीना 2026 का फाइनल खेलते ही सातवीं बार खिताबी मुकाबले में उतरेगा।
Share Market Weekly Review : अमेरिका ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपए में भारी गिरावट की वजह से भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। इस हफ्ते सेंसेक्स में 582 अंकों की बढ़त रही तो निफ्टी भी 126 अंक ऊपर बंद हुआ। ...
वैश्विक महाशक्ति अमेरिका इस समय एक साथ कई मोर्चों पर गंभीर संकटों से घिरा हुआ है। एक तरफ जहां व्हाइट हाउस और पेंटागन में ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति और संभावित युद्ध को लेकर बड़े स्तर पर मंथन चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद अमेरिका के भीतर प्रकृति ने भयंकर तबाही मचा रखी है। देश के कई राज्य जहां एक ओर विनाशकारी बाढ़ और मूसलाधार बारिश में पूरी तरह डूब चुके हैं, तो वहीं दूसरी ओर सैकड़ों एकड़ में फैली जंगलों की आग (वाइल्डफायर) ने पूरे आसमान को काले और जहरीले धुएं से पाट दिया है। इस घरेलू आपातकाल और पर्यावरण संकट से बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अपनी भड़ास पड़ोसी देश कनाडा पर निकाली है और उसे सीधे तौर पर आर्थिक प्रतिबंध यानी एडिशनल टैरिफ लगाने की खुली चेतावनी दे दी है।जहरीले धुएं से घुट रहा है अमेरिकी शहरों का दम, जारी हुआ अलर्टदरअसल, इस समय कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग का खतरनाक और दूषित धुआं तेजी से सीमाओं को पार कर अमेरिका के आसमान पर छा गया है। न्यूयॉर्क, शिकागो, डेट्रॉइट और वाशिंगटन डीसी जैसे अमेरिका के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता (AQI) बेहद खतरनाक और जानलेवा स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसके कारण करोड़ों लोगों को घरों के अंदर ही रहने की सख्त हिदायत दी गई है। नासा (NASA) और मौसम विज्ञानियों की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा की तरफ से आ रहे इस 'प्रदूषण के आक्रमण' ने अमेरिका के 20 से अधिक राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है। न्यूयॉर्क में होने वाले आगामी बड़े आयोजनों और आम जनजीवन पर इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जिसने अमेरिकी प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है।'कनाडा की लापरवाही का हर्जाना भुगतेगा व्यापार' - ट्रंप का बड़ा बयानइस संकट पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कनाडाई सरकार को आड़े हाथों लिया। ट्रंप ने कहा कि कनाडा अपने जंगलों का सही तरीके से रखरखाव करने में पूरी तरह नाकाम रहा है और उसकी इस 'जानबूझकर की गई लापरवाही' के कारण अमेरिकी नागरिकों के फेफड़े इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस प्रदूषण के कारण अमेरिका को जो अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है, उसे कनाडा से वसूला जाएगा और इस खर्च को कनाडा से आने वाले सामानों पर लगने वाले मौजूदा टैरिफ में जोड़ दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक युद्ध (Trade War) छिड़ने के आसार और तेज हो गए हैं।भीषण बाढ़ और जलवायु परिवर्तन की दोहरी मार से बेहाल USकनाडा की ओर से आ रहे धुएं के अलावा अमेरिका खुद आंतरिक रूप से कुदरती कहर का सामना कर रहा है। अमेरिका के कई हिस्सों में अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Floods) और अत्यधिक बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, जिससे रिहायशी इलाके, सबवे और बेसमेंट पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। इस मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण पूरा उत्तरी अमेरिका इस समय भीषण सूखे, रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और अप्रत्याशित तूफानों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में जब राष्ट्रपति का पूरा ध्यान मिडिल ईस्ट और ईरान नीति पर होना चाहिए था, घरेलू मोर्चे पर पैदा हुए इस प्राकृतिक और आर्थिक संकट ने ट्रंप प्रशासन की राजनीतिक प्राथमिकताओं को बदलने पर मजबूर कर दिया है।
ईरान के समुद्री निगरानी नेटवर्क पर अमेरिकी अटैक, व्यावसायिक जहाजों की निगरानी में बड़ी बाधा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के चाबहार स्थित शहीद कलांतरी बंदरगाह के एक निगरानी टावर को नष्ट कर दिया है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साइबर हमलों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसी विदेशी ताकतें और कुछ गैर-सरकारी समूह साइबर हमलों के जरिए अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि देश की डिजिटल चुनाव प्रणाली में सेंध लगाकर नतीजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक पटल पर अमेरिका के चुनावी सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। हालांकि, 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) की विस्तृत रिपोर्ट और शीर्ष चुनाव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका की चुनाव व्यवस्था दुनिया की सबसे जटिल, विकेंद्रीकृत और अभेद्य प्रणालियों में से एक है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली काम कैसे करती है और इसमें सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं।क्यों हैक करना नामुमकिन है अमेरिका का चुनाव सिस्टम?एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया भारत या अन्य देशों की तरह किसी एक केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित नहीं की जाती। पूरे अमेरिका में चुनाव किसी एक संस्था के बजाय 10,000 से ज्यादा स्वतंत्र और अलग-अलग स्थानीय चुनाव क्षेत्रों (लोकल ज्यूरिसडिक्शन) में कराए जाते हैं।अमेरिकी संविधान के तहत राज्यों को अपने तरीके से चुनाव कराने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) कुछ बुनियादी नियम तय कर सकती है, लेकिन वोटिंग मशीनों के चयन से लेकर गिनती तक की पूरी जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के कंधों पर होती है। यही वजह है कि पूरे देश में कोई एक सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीय) डिजिटल सिस्टम नहीं है जिसे एक साथ हैक करके नतीजे बदले जा सकें। हर क्षेत्र का अपना अलग और ऑफलाइन ढांचा होता है।वोटर फ्रॉड रोकने के लिए थ्री-लेयर सिक्योरिटी सिस्टमअमेरिकी चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी या धोखाधड़ी (वोटर फ्रॉड) की आशंकाएं न के बराबर होती हैं, और यदि कोई ऐसा प्रयास करता भी है, तो वह तुरंत पकड़ में आ जाता है। अमेरिकी कानून के तहत चुनावी नियमों का उल्लंघन करना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी का अपराध माना जाता है।सुरक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:कठोर कानूनी कार्रवाई: एक से अधिक बार मतदान करना, किसी अन्य मृत या जीवित व्यक्ति के नाम पर फर्जी वोट डालना, बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करना या गलत दस्तावेज देना संघीय अपराध है, जिसके लिए भारी आर्थिक जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।पहचान का कड़ा सत्यापन: मतदान केंद्र पर वोट डालते समय अधिकांश राज्यों में वैध फोटो पहचान पत्र (Photo ID) मांगा जाता है।मेल-इन बैलेट सुरक्षा: डाक (Mail-in Ballot) के जरिए होने वाले मतदान में सुरक्षा को दोगुना करने के लिए मतदाता के हस्ताक्षरों का मिलान (Signature Verification), आधिकारिक गवाहों की गवाही या नोटरी जैसी बेहद जटिल और अतिरिक्त कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।2020 चुनाव चोरी के दावों पर क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े?डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह सार्वजनिक दावा करते रहे हैं कि साल 2020 का राष्ट्रपति चुनाव एक बड़ी धांधली के जरिए उनसे चुराया गया था। इस दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए एसोसिएटेड प्रेस ने साल 2021 में ट्रंप द्वारा विवादित ठहराए गए छह सबसे प्रमुख स्विंग स्टेट्स (राज्यों) में वोटर फ्रॉड के हर एक संभावित और संदिग्ध मामले की विस्तृत समीक्षा की थी।इस गहन पड़ताल में पाया गया कि इन राज्यों में कुल मिलाकर 475 से भी कम गड़बड़ी के मामले सामने आए थे, जो कि चुनाव के अंतिम परिणाम को बदलने के लिहाज से तिनके के बराबर भी नहीं थे। बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के ट्रंप के इन तमाम कानूनी आरोपों को अमेरिका की कई प्रांतीय व संघीय अदालतों, राज्य के चुनाव अधिकारियों और यहां तक कि ट्रंप सरकार के खुद के 'होमलैंड सिक्योरिटी विभाग' ने सिरे से खारिज कर दिया था। उस दौरान ट्रंप द्वारा ही नियुक्त किए गए तत्कालीन अमेरिकी अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि जांच में ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है जो 2020 के चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सके।ट्रंप के आरोपों पर भड़का चीन, कहा- बेबुनियाद और मनगढ़ंतडोनाल्ड ट्रंप द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में लगाए गए साइबर घुसपैठ के आरोपों पर चीन ने बेहद कड़ी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान साफ कहा कि चीन ने कभी भी अमेरिका के आंतरिक मामलों या उनके चुनावों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही भविष्य में उसकी ऐसी कोई मंशा है।प्रवक्ता लिन जियान ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत, राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने वाशिंगटन को नसीहत देते हुए अपील की कि अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति और चुनावी खींचतान में चीन का नाम घसीटना तुरंत बंद करे और इसके बजाय दोनों महाशक्तियों के द्विपक्षीय रिश्तों को रचनात्मक तरीके से बेहतर बनाने की दिशा में काम करे।
फतेहाबाद जिले के जाखल में मजदूर किसान मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को किसानों ने भारत- अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। गांव मुनदलिया के सरपंच निर्मल सिंह की अध्यक्षता में तलवाड़ा, साधनवास, चांदपुरा और मुनदलिया सहित कई गांवों में किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले फूंके और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरपंच निर्मल सिंह मुनदलिया ने कहा कि प्रस्तावित ट्रेड डील किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों के विपरीत है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी नीतियों से कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और छोटे व मध्यम वर्ग के किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करने की मांग मुनदलिया ने सरकार से किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और कृषि से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करने की अपील की। किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों की लगातार अनदेखी की गई और किसान हितों के खिलाफ निर्णय लिए गए, तो मजदूर किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने सरकार से किसान हितों की रक्षा करने और ट्रेड डील से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार करने की मांग की। इस मौके पर सरपंच निर्मल सिंह मुनदलिया के साथ तारा सिंह, गोरा सिंह, कुलदीप सिंह, देसराज सिंह, जगतार सिंह, सुखा सिंह सहित अनेक किसान और मजदूर साथी मौजूद रहे।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध:राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ की बैठक; 'देश बचाओ मोर्चा' का ऐलान
बड़वानी जनपद की ग्राम पंचायत रेहगून के गवलाबेड़ी गांव में गुरुवार देर रात राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने 'देश बचाओ मोर्चा' के तहत बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर किसानों और युवाओं को जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और युवा शामिल हुए। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता लागू होने पर कृषि, दुग्ध उत्पादन, सोयाबीन, मक्का, कपास और फल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका दावा था कि इससे छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका प्रभावित होगी तथा विदेशी कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी बढ़ेगी। समझौते को बताया किसान हितों के खिलाफ राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के प्रदेश संगठन महामंत्री गोपाल पाटीदार ने प्रस्तावित समझौते को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उन्होंने किसानों से इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने और जनसमर्थन जुटाने का आह्वान किया। आंदोलन तेज करने की चेतावनी मालवा-निमाड़ प्रांत अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि यदि सरकार ने किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया तो संगठन प्रदेशभर में आंदोलन तेज करेगा। प्रांत उपाध्यक्ष कैलाश पाटीदार और किशोर पाटीदार ने भी किसानों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की। युवाओं ने ली सदस्यता, आंदोलन से जुड़ने का संकल्प बैठक के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं ने राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ की सदस्यता ग्रहण की और 'देश बचाओ आंदोलन' से जुड़ने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को खरगौन जिला अध्यक्ष संतोष यादव, तहसील अध्यक्ष सुखदेव पाटीदार और जिला कोषाध्यक्ष माधव यादव ने भी संबोधित किया। अंत में उपस्थित लोगों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
मिडल ईस्ट की राजनीति में इन दिनों एक अजीब कूटनीतिक पहेली सुलझती नजर नहीं आ रही है। एक तरफ सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके साम्राज्य की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और किसी भी प्रकार का हमला उसके लिए 'रेड लाइन' है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान का ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का 'ठेकेदार' बनने का प्रयास गले की हड्डी बनता जा रहा है। इस्लामाबाद के इस कदम ने न केवल उसे अपने पुराने दोस्त सऊदी अरब की नजरों में संदिग्ध बना दिया है, बल्कि उसे एक ऐसे कूटनीतिक भंवर में धकेल दिया है जहां से निकलना अब मुश्किल होता जा रहा है।मध्यस्थता का दिखावा या कूटनीतिक मजबूरी?पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता आया है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक 'सेतु' (Bridge) का काम कर सकता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रुख उसकी अपनी आर्थिक बदहाली और सऊदी अरब से मिलने वाली वित्तीय मदद के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर रहा है। सऊदी अरब मिडल ईस्ट में अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क है और वह ईरान को अपना सबसे बड़ा क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानता है। ऐसे में, यदि पाकिस्तान ईरान के करीब जाकर अमेरिका से डील कराने का प्रयास करता है, तो रियाद इसे अपनी पीठ में छुरा घोंपने जैसा महसूस करता है। पाकिस्तान का यह दोहरा रुख अब उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर रहा है।सऊदी अरब की 'रेड लाइन' और पाक की मुश्किलेंरियाद ने साफ कर दिया है कि यमन या समुद्री रास्तों से उसकी सुरक्षा को खतरा पहुँचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सऊदी अरब की इस सख्त नीति के बीच पाकिस्तान का ईरान के साथ मिलकर अमेरिका से 'डील' की वकालत करना उसके कूटनीतिक समीकरणों को बिगाड़ रहा है। सऊदी अरब से पाकिस्तान को मिलने वाले निवेश और सस्ते तेल पर अब तलवार लटकी हुई है। यदि इस्लामाबाद अपनी मध्यस्थता की नीति को नहीं बदलता, तो उसे रियाद की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पाकिस्तान का यह कूटनीतिक प्रयोग अब उसके अपने ही पाले में 'सेल्फ गोल' साबित हो रहा है।क्यों फंसा है पाकिस्तान?पाकिस्तान की यह स्थिति 'धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का' जैसी हो गई है। एक ओर उसे चीन का दबाव झेलना पड़ रहा है, दूसरी ओर अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की मजबूरी है, और तीसरी ओर सऊदी अरब को नाराज न कर पाने की विवशता है। मध्यस्थता का 'ठेका' लेने के चक्कर में पाकिस्तान ने यह नहीं सोचा कि ईरान-अमेरिका के बीच दशकों से चली आ रही दुश्मनी इतनी आसानी से हल होने वाली नहीं है। अब इस्लामाबाद न तो ईरान को पूरी तरह संतुष्ट कर पा रहा है, न अमेरिका को और न ही सऊदी अरब का भरोसा जीत पा रहा है। अंततः, इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय मंच पर गिरती जा रही है, जो उसके भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है।
अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्राइम-टाइम संबोधन में चीन पर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी 'डेटा सेंधमारी' (Data Breach) का गंभीर आरोप लगाया है। ट्रंप का दावा है कि चीन ने करीब 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का निजी डेटा अवैध रूप से हासिल किया था। इस खुलासे के साथ ही ट्रंप ने अपनी ही खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों को 'डीप स्टेट' करार देते हुए उन पर इस जानकारी को सालों तक छिपाने का आरोप लगाया है।ट्रंप का दावा: 'चुनावी सुरक्षा में सबसे बड़ी सेंध'ट्रंप ने व्हाइट हाउस से देश को संबोधित करते हुए दावा किया कि चीन ने 2020 के चुनाव चक्र के दौरान बड़ी योजना के तहत अमेरिकी मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर और राजनीतिक पसंद जैसी संवेदनशील जानकारी चुराई। राष्ट्रपति का आरोप है कि चीन ने इस डेटा का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने और अमेरिकी जनता को गुमराह करने के लिए एक 'डेटा एक्सप्लॉयटेशन यूनिट' बनाई थी। उन्होंने इसे अमेरिकी चुनाव प्रणाली की 'चौंकाने वाली कमजोरियां' (Shocking Vulnerabilities) करार दिया और कहा कि अब वे इससे जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि चुनाव प्रणाली की खामियों को सुधारा जा सके।खुफिया एजेंसियों पर भड़के राष्ट्रपतिट्रंप के बयानों का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उनकी अपनी खुफिया एजेंसियों के प्रति अविश्वास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईए (CIA), एफबीआई (FBI) और अन्य इंटेलिजेंस विभागों के 'रॉग ब्यूरोक्रेट्स' (Rogue Bureaucrats) ने जानबूझकर चीन की इस दखलंदाजी को राष्ट्रपति और अमेरिकी जनता से छिपाए रखा। ट्रंप ने मांग की है कि इस 'कवर-अप' में शामिल अधिकारियों की जांच हो, उन्हें बर्खास्त किया जाए और उन पर आपराधिक मुकदमे चलाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें उन संस्थानों पर भरोसा नहीं है जिन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़ी इस बड़ी जानकारी को दबाया।क्या ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं?ट्रंप के इन दावों को अमेरिका में आगामी नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। आलोचकों और डेमोक्रेटिक नेताओं का आरोप है कि ट्रंप इन 'संदेह पैदा करने वाले' बयानों के जरिए अपनी हार के पुराने दावों को फिर से जिंदा कर रहे हैं और मतदाताओं के मन में चुनाव प्रक्रिया के प्रति अविश्वास पैदा करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2021 की खुफिया रिपोर्ट में ऐसी कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई थी कि किसी विदेशी शक्ति ने चुनाव नतीजों या वोटिंग मशीनों को प्रभावित किया हो। चीन ने भी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वह कभी भी अमेरिका के आंतरिक मामलों या चुनावों में दखल नहीं देता।नया चुनावी कानून: 'SAVE America Act' की वकालतअपने संबोधन में ट्रंप ने 'SAVE America Act' को तुरंत पास करने की अपील की। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को और अधिक कड़ा बनाना है, जिसमें फोटो आईडी और नागरिकता संबंधी सख्त नियम शामिल हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि ये कदम चुनावी अखंडता को बहाल करने के लिए अनिवार्य हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह सब चुनावी लाभ उठाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है ताकि आने वाले चुनावों में जनता का एक वर्ग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठाए
रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए ईरान की ओर बढ़ रहे तीन मालवाहक जहाजों को बीच रास्ते में ही रोक दिया है। इस चौंकाने वाली कार्रवाई के दौरान अमेरिकी मरीन कमांडो का एक दस्ता सीधे एक जहाज पर उतरा, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़े सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है।क्या है 'ऑपरेशन शिकंजा'?अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और ईरान द्वारा की जाने वाली संभावित गतिविधियों पर नजर रखने के लिए की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान की तरफ जा रहे तीन जहाजों को घेरा और उनकी तलाशी ली। इस दौरान एक जहाज पर अमेरिकी मरीन कमांडो के उतरने की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वे पूरी तरह से हथियारों से लैस नजर आ रहे हैं। अमेरिकी नौसेना का दावा है कि ये जहाज संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते थे, जिसके कारण यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है इतना अहम?स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में ईरान ने इस क्षेत्र में कई विदेशी तेल टैंकरों को जब्त करने या परेशान करने का प्रयास किया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने इस इलाके में अपनी तैनाती को कई गुना बढ़ा दिया है। अब अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सैन्य मौजूदगी के जरिए इस समुद्री गलियारे को किसी भी तरह की दखलअंदाजी से मुक्त रखने के लिए प्रतिबद्ध है।ईरान की प्रतिक्रिया और भविष्य के हालातइस घटना के बाद तेहरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक बड़े सैन्य टकराव की आहट के तौर पर देख रहे हैं। ईरान पहले ही अमेरिका के इस 'शक्ति प्रदर्शन' को अपने समुद्री क्षेत्र की संप्रभुता का उल्लंघन बता चुका है। उधर, अमेरिका के इस कदम से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ गई है। आने वाले दिनों में हॉर्मुज के जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच यह 'बिल्ली-चूहे' का खेल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिका और उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगी देश इजरायल के बीच अंदरूनी खींचतान अब खुलकर दुनिया के सामने आ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ पिछले महीने हुए शांति समझौते का विरोध करने वाले और इसे सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश करने वाले इजरायली तत्वों को सीधे और बेहद तल्ख शब्दों में 'भाड़ में जाओ' (Go to Hell) कहकर कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बेहद लोकप्रिय पोडकास्ट 'द जो रोगन एक्सपीरियंस' (The Joe Rogan Experience) पर एक विस्तृत तीन घंटे की बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति वेंस ने इजरायल के कड़े रुख पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए कि कुछ इजरायली ताकतें किसी स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य के बिना ईरान के साथ इस सैन्य संघर्ष को अनिश्चितकाल के लिए खींचना चाहती हैं।इजरायली सोशल मीडिया कैंपेन पर भड़के वेंस: अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने का लगाया आरोपपॉडकास्ट पर खुलकर बात करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि इजरायल के भीतर कुछ ऐसे प्रभावी लोग और समूह सक्रिय हैं जो अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने और उसे बदलने के लिए बड़े पैमाने पर गुप्त अभियान चला रहे हैं। वेंस ने आरोप लगाया कि इन अभियानों का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के साथ अमेरिका की जंग कभी खत्म न हो और यह अनिश्चितकाल तक चलती रहे। वेंस ने खुलासा किया कि इजरायली सरकार के करीबी सूत्रों और उनसे जुड़े व्यक्तियों ने खुद उनके खिलाफ एक बड़ा दुष्प्रचार अभियान चलाया क्योंकि वह ईरान के साथ एक ऐसा कूटनीतिक समझौता स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय और सुरक्षा लक्ष्यों के बिल्कुल अनुकूल था।लीक रिपोर्ट्स और ऑनलाइन हमलों का पर्दाफाश: वेंस बोले- 'मैं अमेरिकी हितों के लिए अडिग रहूंगा'उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रोपेगैंडा के काम करने के तरीके को बेनकाब करते हुए कहा कि इस अभियान के तहत अमेरिकी पत्रकारों को संवेदनशील और आधी-अधूरी जानकारियां जानबूझकर लीक की गईं ताकि अमेरिकी सरकार की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर किया जा सके। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन पर व्यक्तिगत हमले किए गए। इन साजिशों के पीछे काम करने वाले इजरायली सिंडिकेट का जिक्र करते हुए वेंस ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, भाड़ में जाओ। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विदेशी ताकतों के इस तरह के दबाव के आगे कभी नहीं झुकेंगे और वही करेंगे जो अमेरिकी नागरिकों और अमेरिका के व्यापक राष्ट्रीय हितों के लिए सबसे बेहतर और सही होगा।फंडिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा: पूर्व ट्रंप अधिकारी और इजरायली सरकार के बीच कनेक्शनबातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति वेंस ने उन खुफिया रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया जिनमें एक बड़े वित्तीय नेक्सस की बात सामने आई थी। इन खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले चुनावी अभियान से जुड़े रहे एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी को इजरायली सरकार के करीबियों से भारी-भरकम फंडिंग मिली थी। इस फंड का उपयोग कुछ विशेष सोशल मीडिया प्रभावितों और रणनीतिकारों को भुगतान करने के लिए किया गया था ताकि वे ईरान नीति को लेकर सीधे उपराष्ट्रपति वेंस पर तीखे हमले बोल सकें। वेंस ने साफ किया कि उन्हें वॉशिंगटन की नीतियों को प्रभावित करने वाली विदेशी सरकारों की कोशिशों या अमेरिकी सरकार के भीतर से होने वाली आलोचनाओं से कोई गुरेज नहीं है क्योंकि इजरायल और दुनिया के अन्य देश हमेशा अपने हितों के लिए ऐसा करते आए हैं। लेकिन उन्हें असल आपत्ति तब होती है जब अमेरिकी नीति निर्माता इन बाहरी प्रभावों के दबाव में आकर देश के फैसले बदलने लगते हैं।एकमात्र मजबूत सहयोगी पर निशाना: पिछले महीने के कूटनीतिक तनाव की यादें हुईं ताजाजेडी वेंस द्वारा की गई यह ताजा टिप्पणी ईरान युद्ध और कूटनीति के मुद्दे पर इजरायली अधिकारियों की अब तक की सबसे सीधी और सबसे तीखी अमेरिकी आलोचना मानी जा रही है। इससे पहले पिछले महीने भी तेहरान के साथ वॉशिंगटन के समझौते की सार्वजनिक रूप से निंदा करने वाले इजरायली कैबिनेट के मंत्रियों को वेंस ने कड़ा आड़े हाथों लिया था। तब उन्होंने बेहद गंभीर लहजे में इजरायली नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा था कि अगर वह खुद इजरायली सरकार के मंत्री होते, तो दुनिया में बचे अपने एकमात्र सबसे शक्तिशाली और मजबूत सहयोगी (अमेरिका) पर इस तरह के घटिया और सार्वजनिक हमले कभी नहीं करते।
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में उच्च शिक्षा प्राप्त करने और करियर बनाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद चिंताजनक और बड़ा झटका देने वाला फैसला सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक विनिमय आगंतुकों (Exchange Visitors) और विदेशी पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को बेहद कड़ा करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) द्वारा जारी किए गए इन नए नियमों के तहत अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रुकने की अधिकतम अवधि को सीमित कर दिया गया है। इस नए आदेश का सीधा और तगड़ा असर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे तीन लाख से भी अधिक भारतीय छात्र-छात्राओं पर पड़ने जा रहा है, जिससे उनका भविष्य अब अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है।F, J और I वीजा की 'असीमित अवधि' समाप्त: अब तय समय सीमा के भीतर ही रहना होगा अमेरिका मेंवर्तमान व्यवस्था के तहत, अमेरिका में F वीजा (इंटरनेशनल स्टूडेंट्स), J वीजा (सांस्कृतिक और शैक्षणिक एक्सचेंज प्रोग्राम विजिटर्स) और I वीजा (विदेशी मीडिया कर्मी) धारक अपने संबंधित स्टडी प्रोग्राम, रिसर्च वर्क या मीडिया जॉब की पूरी अवधि तक कानूनी रूप से अमेरिका में रहने के हकदार होते थे। इसे 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' कहा जाता था। लेकिन ट्रंप सरकार के नए नियम ने इस असीमित प्रावधान को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब इन सभी वीजा धारकों के लिए एक 'फिक्स्ड पीरियड' यानी तय समय सीमा निर्धारित कर दी गई है। नए नियम के अनुसार, स्टूडेंट और एक्सचेंज वीजा की अधिकतम अवधि चार साल से ज्यादा की नहीं होगी। यह नया नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के 60 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा, जो कि अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा के अधीन है।कोर्स बदलने और स्कूल ट्रांसफर पर भी लगी सख्त पाबंदी: देश छोड़ने का ग्रेस पीरियड भी हुआ आधाट्रंप प्रशासन का यह नया नियम केवल समय सीमा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों की शैक्षणिक स्वतंत्रता को भी काफी हद तक प्रभावित करता है। नए नियमों के मुताबिक, ग्रेजुएट स्तर के छात्र अब अपनी मर्जी से कभी भी अपना एजुकेशनल मकसद या विषय नहीं बदल सकेंगे। इसके साथ ही, बिना विशेष सरकारी अनुमति के एक स्कूल से दूसरे स्कूल या यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर लेने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सबसे बड़ा झटका कोर्स पूरा होने के बाद मिलने वाले 'ग्रेस पीरियड' पर लगा है। पहले अपनी डिग्री या प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी करने के बाद छात्रों को अमेरिका में रहने या नौकरी तलाशने के लिए 60 दिनों का समय मिलता था, जिसे अब घटाकर केवल 30 दिन कर दिया गया है।विदेशी पत्रकारों पर भी चला चाबुक: चीनी पत्रकारों के लिए केवल 90 दिनों की होगी सीमानए नियम का दायरा केवल छात्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने विदेशी मीडिया कर्मियों (I-Visa) को भी अपनी जद में ले लिया है। विदेशी पत्रकारों के लिए जारी होने वाला वीजा, जो पहले सालों तक वैध रहता था, अब अधिकतम 240 दिनों तक के लिए ही वैध होगा। विशेष रूप से चीनी मीडिया घरानों और चीनी नागरिकों के मामले में इसे और कड़ा करते हुए मात्र 90 दिनों तक सीमित कर दिया गया है। हालांकि, नियमों में यह प्रावधान रखा गया है कि विशेष परिस्थितियों में वीजा धारक समय सीमा बढ़ाने (Visa Extension) के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसकी मंजूरी पूरी तरह से कड़े प्रशासनिक मूल्यांकन पर निर्भर करेगी।इमिग्रेशन विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने उठाए सवाल: 'क्या इन्हें समझ नहीं कि जिंदगी कैसे चलती है?'ट्रंप प्रशासन के इस कड़े कदम की अमेरिका के भीतर ही तीखी आलोचना शुरू हो गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) के पूर्व अधिकारी डग रैंड ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा, ज्यादातर अमेरिकी इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों का स्वागत करना और अनावश्यक लालफीताशाही (Red Tape) को खत्म करना देश के विकास के लिए कितना जरूरी है। लेकिन यह नया नियम इसके ठीक उलट काम करेगा और अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचाएगा। वहीं कैटो इंस्टीट्यूट में इमिग्रेशन स्टडीज के डायरेक्टर डेविड जे. बियर ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, जो छात्र अपने जीवन के कई साल और लाखों डॉलर यहां खर्च कर चुके हैं, उनके पास अब नौकरी ढूंढने या स्पॉन्सरशिप हासिल करने के लिए केवल 30 दिन होंगे, वरना वे अवैध अप्रवासी घोषित हो जाएंगे। क्या नीति निर्माताओं को यह समझ नहीं है कि एक आम इंसान की जिंदगी कैसे काम करती है?
अमेरिका में आगामी नवंबर में होने वाले बेहद महत्वपूर्ण मिडटर्म इलेक्शंस (Midterm Elections) से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चीन के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। गुरुवार 16 जुलाई 2026 को व्हाइट हाउस से दिए गए अपने एक बेहद तीखे और सनसनीखेज 25 मिनट के विशेष संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कुछ ऐसी अत्यंत संवेदनशील और क्लासिफाइड खुफिया फाइलों को सार्वजनिक किया है, जो अमेरिकी चुनावी व्यवस्था में चीन की सीधी और अवैध दखलअंदाजी का पर्दाफाश करती हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप का यह नया और गंभीर दावा खुद अमेरिका की ही शीर्ष खुफिया एजेंसियों की उन पुरानी रिपोर्टों के बिल्कुल विपरीत है, जिनमें कहा गया था कि 2020 के चुनावों में चीनी हस्तक्षेप के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।चीनी हैकर्स के निशाने पर अमेरिकी वोटर: 22 करोड़ मतदाताओं के निजी डेटा में सेंधमारी का गंभीर आरोपराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए बेहद चौंकाने वाला आरोप लगाया कि उनके द्वारा डीक्लासिफाइड किए गए दस्तावेजों से साफ होता है कि चीनी खुफिया एजेंसियों और हैकर्स ने अवैध रूप से लगभग 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की गुप्त फाइलें हासिल कर ली थीं। ट्रंप के अनुसार, इस हैक किए गए डेटाबेस में अमेरिकी नागरिकों के नाम, उनके स्थायी पते, फोन नंबर और वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली बेहद संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं। ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने अमेरिकी खुफिया तंत्र (Intelligence Community) के ही कुछ अंदरूनी अधिकारियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन लोगों ने चीन की इस खतरनाक साइबर साजिश की गंभीरता को जानबूझकर छिपाया और दबाया था ताकि जनता को गुमराह किया जा सके।बीजिंग का पलटवार और ट्रेड वॉर की वापसी का खतरा: शी जिनपिंग से सुधरते रिश्ते फिर अधर मेंट्रंप के इस बेहद आक्रामक भाषण के तुरंत बाद चीन ने इन आरोपों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के आधिकारिक प्रवक्ता लियू चांग ने एक बयान जारी कर ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, चीन ने अमेरिका के आंतरिक और राष्ट्रपति चुनावों में कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही भविष्य में ऐसा करने की हमारी कोई मंशा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से दोनों महाशक्तियों के बीच हाल ही में पटरी पर लौट रहे व्यापारिक संबंध एक बार फिर पूरी तरह से पटरी से उतर सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल लंबे चले ट्रेड वॉर के बाद संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग जाकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बेहद सकारात्मक मुलाकात की थी, जिस पर अब पानी फिरता नजर आ रहा है।डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के दावों को नकारा: खुफिया जानकारियों को 'हथियार' बनाने की दी चेतावनीदूसरी ओर, अमेरिकी विपक्षी दल यानी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह चुनावी स्टंट और मनगढ़ंत करार दिया है। हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सांसदों ने कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बिल पुल्टे सहित देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों एफबीआई (FBI), सीआईए (CIA) और एनएसए (NSA) के प्रमुखों को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति ट्रंप को नवंबर के मिडटर्म चुनावों को प्रभावित करने के लिए चुनावी सुरक्षा से जुड़े झूठे दावों और संवेदनशील खुफिया जानकारियों को एक राजनीतिक हथियार (Weaponizing Intelligence) के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत बिल्कुल न दी जाए। सीनेट में मेजॉरिटी लीडर चक शूमर ने भी ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे इन भ्रामक दावों की आड़ में आगामी नवंबर के चुनावों में अपनी पार्टी के पक्ष में हेरफेर करने की जमीन तैयार कर रहे हैं।'सेव अमेरिका एक्ट' के जरिए चुनावी नियमों को बदलने की तैयारी: विपक्ष ने खड़े किए सवालजनवरी 2025 में व्हाइट हाउस में दोबारा ऐतिहासिक वापसी करने के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार देश की चुनावी प्रक्रिया पर संघीय सरकार का केंद्रीय नियंत्रण मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं। ट्रंप इन दिनों सीनेट और कांग्रेस के रिपब्लिकन सदस्यों पर बेहद कड़े प्रावधानों वाले 'सेव अमेरिका एक्ट' (Save America Act) को जल्द से जल्द पारित करने का भारी दबाव बना रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के तहत वोट डालने के लिए सरकार द्वारा जारी वैध फोटो आईडी और वोटर रजिस्ट्रेशन के समय केवल अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण (Proof of Citizenship) देना अनिवार्य कर दिया जाएगा। साथ ही, सभी राज्यों को अपने वोटरों का पूरा डेटा अनिवार्य रूप से संघीय सरकार के साथ साझा करना होगा। हालांकि, डेमोक्रेट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कानून का पुरजोर विरोध करते हुए कहा है कि अमेरिका में वोटर फ्रॉड जैसी घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं और इस कानून का असली मकसद गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं के वैध वोटों को दबाना है।
ट्रंप प्रशासन की चेतावनी, अमेरिका में चुनावी डेटा पर साइबर हमले का खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय खुफिया और साइबर सुरक्षा आकलनों में चेतावनी दी कि देश के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस अब भी विदेशी साइबर हमलों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। अगर यह डेटा चोरी होता है तो उसका दुरुपयोग कई वर्षों तक किया जा सकता है।
यदि आप आज यानी 17 जुलाई 2026 को घर की रसोई के लिए घरेलू गैस सिलेंडर बुक करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। आज भी सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। देशभर में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी हुई हैं।हालांकि, वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव ने आने वाले दिनों के लिए भारतीय उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए जानते हैं आज आपके शहर में गैस सिलेंडर के प्रमुख रेट क्या हैं और अंतरराष्ट्रीय हालात का आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है:आज के प्रमुख शहरों के रेट (LPG Cylinder Rates Today)देश की राजधानी और उससे सटे दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के इलाकों में आज एलपीजी गैस सिलेंडर पुराने दामों पर ही उपलब्ध हैं:दिल्ली (Delhi): राष्ट्रीय राजधानी में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹942 पर स्थिर है। वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,930 बनी हुई है।नोएडा (Noida): उत्तर प्रदेश के नोएडा में घरेलू गैस सिलेंडर ₹939.50 में मिल रहा है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर का रेट ₹2,930 है।गाजियाबाद (Ghaziabad): नोएडा की तरह गाजियाबाद में भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹939.50 और कमर्शियल सिलेंडर ₹2,930 की कीमत पर बिक रहा है।अमेरिका-ईरान तनाव: भारत की एलपीजी सप्लाई पर मंडराया खतरा?अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से गहराते राजनयिक और सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में खलबली मचा दी है। भारत के नजरिए से यह स्थिति बेहद संवेदनशील है:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट:भारत अपनी घरेलू एलपीजी (LPG) जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करता है। खाड़ी देशों से आने वाले इस गैस आयात का अधिकांश हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री मार्ग से होकर भारत पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा आती है, तो भारत में एलपीजी की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। सप्लाई रुकने या कम होने की स्थिति में घरेलू बाजार में कीमतों पर भारी दबाव बढ़ना तय है।क्या फिर महंगी हो सकती है रसोई गैस? (Expert Analysis)ऑटो और एनर्जी सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और एलपीजी की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार और तेल कंपनियों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा:कंपनियों का बढ़ता घाटा: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर लगभग ₹500 से ₹700 तक का भारी नुकसान (Under-recovery) उठाना पड़ रहा था।सरकार के पास दो विकल्प: इस बढ़ते घाटे को पाटने के लिए सरकार के पास या तो एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी (Subsidy) का बोझ बढ़ाने का विकल्प होगा, या फिर सीधे तौर पर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी करके इसका बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर डालना होगा। लंबे समय तक वैश्विक कीमतें ऊंची रहने की स्थिति में दूसरी संभावना ज्यादा प्रबल हो जाती है।उपभोक्ताओं के लिए सलाह: फिलहाल 17 जुलाई को कीमतें न बढ़ने से आम जनता को बड़ी राहत मिली है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए आने वाले हफ्तों में एलपीजी की कीमतों में संशोधन की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में बजट को संतुलित रखने के लिए उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में ईंधन की सप्लाई और कीमतों के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा चुराया, ट्रंप का नया दावा, चुनावी सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस
व्हाइट हाउस से संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि कथित साइबर गतिविधियों की शुरुआत वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हुई थी। उनके अनुसार, चीन ने अमेरिकी चुनाव प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर मतदाताओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल की।
पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन को फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट नीति की समीक्षा करने वाले कार्यबल में शामिल किया गया है। यह समूह केंद्रीय बैंक की परिसंपत्तियों और मौद्रिक नीति के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। राजन को वैश्विक स्तर पर वित्तीय स्थिरता, केंद्रीय बैंकिंग और मौद्रिक नीति के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 2020 के चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डाटा चुराने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। ट्रंप इन आरोपों से जुड़े खुफिया दस्तावेज जल्द सार्वजनिक करने वाले हैं। उन्होंने इसे इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी डाटा ...
ईरान का पलटवार: अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें
ईरान ने गुरुवार तड़के बहरीन, जॉर्डन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं
ईरान पर अमेरिकी हमले जारी, पांचवीं रात भी बमबारी; व्हाइट हाउस ने कहा- बातचीत के दरवाज़े खुले
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने लगातार पांचवीं रात ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए
भू-राजनीति और वैश्विक महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की जंग में एक ऐसा चौंकाने वाला मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया के नीति-नियंताओं को हैरान कर दिया है। प्रतिष्ठित वैश्विक सर्वे एजेंसी 'प्यू रिसर्च सेंटर' (Pew Research Center) द्वारा साल 2026 की शुरुआत में किए गए एक व्यापक वैश्विक सर्वेक्षण के परिणाम सामने आए हैं। इस वैश्विक सर्वे के रणनीतिक आंकड़े यह साफ गवाही दे रहे हैं कि दुनिया भर के कई प्रमुख देशों में अब अमेरिका के मुकाबले चीन की छवि कहीं अधिक सकारात्मक और मजबूत होकर उभरी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों में सबसे बड़ा उलटफेर तब देखा गया जब वैश्विक नेतृत्व और निर्णयों पर भरोसे की बात आई, जहां दुनिया के अधिकांश देशों के नागरिकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर अधिक विश्वास जताया।36 देशों में 42 हजार से ज्यादा लोगों से बातचीत: 25 देशों में चीन की छवि अमेरिका से बेहतरप्यू रिसर्च सेंटर ने इस व्यापक रिसर्च के लिए 8 फरवरी से 13 मई 2026 के बीच दुनिया के 36 महत्वपूर्ण देशों में रहने वाले 42,151 लोगों से सीधे बातचीत की। साल 2002 से लगातार ऐसे वैश्विक सर्वे कर रही इस संस्था के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब 36 में से 25 देशों के नागरिकों ने अमेरिका की तुलना में चीन के प्रति अपनी राय को कहीं अधिक सकारात्मक और बेहतर बताया है। डेटा विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक पटल पर चीन की सॉफ्ट पावर और रणनीतिक छवि में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है, जबकि इसके विपरीत अमेरिका की वैश्विक स्वीकार्यता के ग्राफ में भारी गिरावट आई है।बदलते वैश्विक समीकरण: अमेरिका के पड़ोसी देश भी चीन के पक्ष में, सिर्फ 6 देश बचे सुपरपावर के साथइस सर्वे में सबसे बड़ा झटका अमेरिका को उसके अपने पड़ोसी मुल्कों से लगा है। कनाडा, मेक्सिको, स्पेन, इंडोनेशिया, इटली और ग्रीस जैसे देशों में चीन के प्रति जनभावनाओं में सबसे बड़ा और सकारात्मक सुधार देखा गया है। अब स्थिति यह है कि कनाडा और मेक्सिको जैसे अमेरिकी सीमा से सटे देश भी अमेरिका से ज्यादा चीन को पसंद कर रहे हैं। पूरे सर्वे में केवल 6 देश ऐसे बचे हैं जो आज भी वैश्विक मंच पर चीन के मुकाबले अमेरिका को बेहतर और सर्वोच्च मानते हैं। इन देशों में भारत, पोलैंड, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, जापान और इजरायल शामिल हैं, जो लंबे समय से वाशिंगटन के रणनीतिक और सैन्य सहयोगी रहे हैं। इसके विपरीत, एशिया-पैसिफिक और विकासशील देशों में चीन की लोकप्रियता रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिसमें पाकिस्तान (83%), इंडोनेशिया, मलेशिया, नाइजीरिया और तुर्की सबसे आगे हैं।ट्रंप बनाम शी जिनपिंग: विश्व मामलों में फैसले लेने के मामले में कौन है आगे?जब सर्वे में वैश्विक नागरिकों से यह पूछा गया कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में सही कदम उठाने और बेहतर फैसले लेने के मोर्चे पर उन्हें डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग में से किस पर अधिक भरोसा है, तो दोनों ही नेताओं का व्यक्तिगत स्कोर 50 प्रतिशत से नीचे रहा, जो यह दिखाता है कि दुनिया दोनों ही सुपरपावर के प्रमुखों को लेकर संशय में है। इसके बावजूद, व्यक्तिगत तुलना में शी जिनपिंग ने बाजी मार ली। दुनिया के 22 देशों (जिनमें फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, कनाडा और मेक्सिको शामिल हैं) के लोगों ने ट्रंप के मुकाबले शी जिनपिंग की निर्णय क्षमता पर ज्यादा भरोसा जताया। ट्रंप को सबसे ज्यादा 68% समर्थन फिलीपींस में मिला, जबकि वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में उनका समर्थन गिरकर महज 4% रह गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया में ट्रंप को लेकर राय बेहद चरम पर है (या तो बहुत अच्छी या बहुत खराब), जबकि शी जिनपिंग को लेकर राय उतनी आक्रामक नहीं है।व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आंतरिक हस्तक्षेप का मुद्दा: 75% लोगों ने माना अमेरिका करता है जरूरत से ज्यादा दखलवैश्विक मंच पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Individual Liberty) और मानवाधिकारों का सम्मान करने के मामले में अमेरिका हमेशा से चीन से आगे रहा है और पिछले 10 सालों से प्यू के सर्वे में यह ट्रेंड कायम है। लेकिन 2021 के बाद से यह अंतर भी बहुत तेजी से कम हुआ है। स्वीडन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे विकसित देशों में अब 25 प्रतिशत से भी कम लोग यह मानते हैं कि अमेरिकी सरकार स्वतंत्रता का सम्मान करती है। इसके विपरीत, मेक्सिको जैसे देशों में 35% लोग मानते हैं कि चीन स्वतंत्रता का सम्मान करता है, जबकि अमेरिका के लिए यह आंकड़ा केवल 20% है। वहीं, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल देने (Foreign Interference) के मामले में आज भी दुनिया अमेरिका को सबसे बड़ा दोषी मानती है; 75% उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों में बहुत ज्यादा दखल देता है, जबकि चीन के लिए यह राय सिर्फ 45% लोगों की है। इसके अतिरिक्त, प्रसिद्ध 'गैलप सर्वे' (Gallup Survey) में भी इसी तरह के परिणाम सामने आए हैं, जिसके अनुसार वैश्विक नेतृत्व रेटिंग में चीन और अमेरिका के बीच का अंतर पिछले 20 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो वैश्विक महाशक्ति के रूप में बदलते समीकरणों का स्पष्ट संकेत है।
अमेरिका भेजने के नाम पर करोड़ों का खेल! नेपाल के पूर्व डिप्टी PM को मिली 4 साल की जेल
पड़ोसी देश नेपाल से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आ रही है। नेपाली नागरिकों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजने के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस बड़े घोटाले में काठमांडू जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री और ऊर्जा मंत्री टोप बहादुर रायमाझी को 4 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने साफ किया कि इस संगठित धोखाधड़ी ने नेपाल की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरी ठेस पहुंचाई है।नेपाली नागरिकों को फर्जी भूटानी शरणार्थी बनाकर रच रहे थे साजिशइस पूरे मामले की तफ्तीश में जो सच सामने आया है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। दरअसल, यह पूरा रैकेट नेपाली नागरिकों से मोटी रकम वसूल कर उन्हें अमेरिका भेजने का झांसा देता था। इसके लिए आरोपियों ने बकायदा सरकारी सांठगांठ से फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन जाली कागजातों के जरिए मूल नेपाली नागरिकों को कागजों पर 'भूटानी शरणार्थी' (Bhutanese Refugees) घोषित कर दिया जाता था, ताकि वे अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे तीसरे देश के पुनर्वास कार्यक्रम का फायदा उठाकर आसानी से वाशिंगटन पहुंच सकें।पूर्व गृहमंत्री समेत 15 से ज्यादा रसूखदार दोषी करारकाठमांडू जिला अदालत के न्यायाधीश तेज बहादुर खड़का की एकल पीठ ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया। पूर्व डिप्टी पीएम टोप बहादुर रायमाझी के अलावा देश के पूर्व गृहमंत्री और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाल कृष्ण खांड को भी इस साजिश में मददगार होने का दोषी पाया गया है और उन्हें 2 साल जेल की सजा दी गई है। अदालत ने इस पूरे नेटवर्क में शामिल पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडे और गृहमंत्री के सुरक्षा सलाहकार सहित कुल 15 से ज्यादा आरोपियों को धोखाधड़ी, राज्य के खिलाफ अपराध और संगठित अपराध की विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।कैसे हुआ नेपाल के इस सबसे बड़े 'मानव तस्करी' घोटाले का भंडाफोड़?इस महाघोटाले की शुरुआत साल 2023 में तब हुई, जब सैकड़ों पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि अमेरिका भेजने के नाम पर उनसे लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ लिए गए लेकिन उन्हें विदेश नहीं भेजा गया। पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सरकारी तंत्र में बैठे बड़े-बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के नाम सामने आते गए, जिसके बाद पूर्व डिप्टी पीएम रायमाझी कई दिनों तक फरार भी रहे थे। रक्षा और कानून विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में किसी पूर्व प्रधानमंत्री या उप प्रधानमंत्री स्तर के नेता को मानव तस्करी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले में जेल होना एक नजीर पेश करेगा और इससे नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूती मिलेगी
लुधियाना के डाबा थाना इलाके में रात के समय हुई एक्टिवा लूट की वारदात का CCTV फुटेज सामने आया है। घटना स्टार रोड स्थित वर्मा बर्तन स्टोर के सामने की है। यहां तीन बाइक सवार बदमाशों ने एक युवक को घेरकर उसके साथ मारपीट की और उसकी नई एक्टिवा लूटकर फरार हो गए। इस पूरी घटना का वीडियो CCTV में कैद हो गया है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CCTV फुटेज में दिख रहा है कि रात के समय एक युवक लाल शर्ट पहनकर अपनी एक्टिवा सड़क किनारे खड़ी किए हुए था। तभी सामने से एक बाइक पर सवार तीन युवक वहां पहुंचते हैं और उसकी एक्टिवा के पास बाइक रोक देते हैं। बाइक रुकते ही पीछे बैठे दोनों बदमाश तुरंत नीचे उतर जाते हैं और युवक पर हमला कर देते हैं। इसके बाद तीनों मिलकर उसके साथ मारपीट करते हैं। धक्का-मुक्की के दौरान युवक पीछे की ओर गिरता है और उसकी एक्टिवा भी जमीन पर गिर जाती है। वीडियो में बदमाशों की आवाज भी सुनाई दे रही है। वे गाली-गलौज करते हुए चिल्लाते हैं- भाग ले... ले जा यार। अमेरिका-कनाडा में 2 पंजाबी गैंगस्टरों पर कार्रवाई पंजाब के गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के कनाडा स्थित राइट हैंड नितिश कौशल के खिलाफ FBI ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरदासपुर निवासी नितिश कौशल को जग्गू गैंग को कनाडा में ऑपरेट करने के आरोपों के चलते मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया गया है। वहीं, 'ऑपरेशन हार्ड बाल' के तहत पंजाबी मूल के गैंगस्टर रविंदर सिंह ढांडा की करीब 6.4 मिलियन डॉलर (61.60 करोड़ रुपए ) की संपत्ति सीज करने के आदेश जारी किए गए हैं। दोनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश 15 जुलाई को दिए गए। FBI ने 'ऑपरेशन हार्ड बाल' के तहत भारत आधारित अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट्स पर कार्रवाई तेज कर दी है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सक्रिय रविंदर सिंह ढांडा पर ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गनाइजेशन चलाने का आरोप है। उस पर अमेरिका-कनाडा सीमा के जरिए सैकड़ों किलो कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी में शामिल होने के आरोप हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी फिर शुरू
ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई तेज हो गई है। सेंटकॉम ने दावा किया है कि नाकाबंदी के बाद दो वाणिज्यिक जहाजों को रोककर उनका रास्ता बदल दिया है
पंजाब: अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी मामले में ईडी ने जालंधर की अदालत में दाखिल की चार्जशीट
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब के जालंधर स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है
ट्रंप के आने से अमेरिका में ट्रक ड्राइवर नहीं, स्किल्ड युवाओं की ज्यादा डिमांड
भास्कर न्यूज | जालंधर करीब 15 साल बाद पंजाब पहुंचे अमेरिका के वरिष्ठ अटॉर्नी डॉ. जसप्रीत सिंह ने कहा कि अमेरिका में रोजगार और इमिग्रेशन का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। कानूनी सेवाओं में योगदान के लिए पिछले दिनों उन्हें गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की तरफ से मानद (ऑनरेरी) डॉक्ट्रेट से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपनी शिक्षा गुरु नानक देव विश्वविद्यालय और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से प्राप्त की है। डॉ. जसप्रीत ने कहा पहले पंजाब के युवा 10वीं-12वीं के बाद विदेश जाकर ट्रक ड्राइविंग को सबसे आसान करियर मानते थे। अब यह ट्रेंड तेजी से खत्म हो रहा है। अमेरिका में अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि प्रमाणित स्किल वाले युवाओं की जरूरत है। डॉ. जसप्रीत सिंह ने कहा कि अमेरिका और कनाडा में पिछले एक साल से रिवर्स माइग्रेशन देखने को मिल रही है। अमेरिका की नई नीतियों के कारण बॉर्डर पार करना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप शाशन साल 2028 तक है इसलिए तब तक वहां की नीतियों में सख्ती बनी रहने की संभावना है, इसलिए विदेश जाने की तैयारी करने वाले युवाओं को पुराने अनुभवों के बजाय वर्तमान हालात को समझकर निर्णय लेना चाहिए। डॉ. जसप्रीत सिंह पिछले 28 वर्षों से अमेरिका में कानूनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में 18 जूनियर वकीलों की टीम काम करती है और उनके 15 हजार से अधिक क्लाइंट हैं। उनका दावा है कि उन्होंने 10 हजार से अधिक लोगों को अमेरिका में स्थायी कानूनी दर्जा दिलाने में मदद की है। वह अमेरिका के 18 प्रमुख गुरुद्वारा साहिबों के कानूनी सलाहकार भी हैं। अमेरिका से आए जसप्रीत सिंह अटॉर्नी ऑफ लॉ। नियमों का सबसे कम उल्लंघन पंजाबी ट्रक ड्राइवरों ने किया, सख्त कार्रवाई से ड्राइवर भी हुए प्रभावित डॉ. जसप्रीत सिंह ने बताया कि अमेरिका में करीब 54 हजार ट्रक ड्राइवरों के लाइसेंस समाप्त किए गए हैं। उन्होंने 30 जून को 300 से अधिक ट्रक ड्राइवरों के साथ बैठक की थी। उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार पंजाबी ट्रक ड्राइवरों ने नियमों का सबसे कम उल्लंघन किया, लेकिन कार्रवाई का असर उन पर भी पड़ा। इसके चलते अब बड़ी संख्या में पंजाबी ट्रक ड्राइवर उबर, गैस स्टेशन, कंस्ट्रक्शन और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। पंजाब में बदलना होगा स्टडी पैटर्न उन्होंने कहा अब केवल सोशल मीडिया या यू ट्यूब देखकर कोई स्किल सीख लेना पर्याप्त नहीं है। अमेरिका में रोजगार के लिए मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पंजाब सरकार, विश्वविद्यालयों और स्कूलों को युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक स्किल्ड बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार रिपेयर वर्क, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, फैक्ट्री ऑपरेशन, कंस्ट्रक्शन, प्लंबिंग, कारपेंट्री, मशीन ऑपरेशन और अन्य तकनीकी ट्रेड आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। पंजाब के राज्यपाल तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के अधिकारियों के साथ बैठक में भी यही सुझाव रखा कि पंजाब के युवाओं को पारंपरिक सोच से बाहर निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरत के तहत प्रशिक्षित किया जाए।
पंजाब के गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के कनाडा बैठे राइट हैंड पर FBI ने एक और कार्रवाई की है। जग्गू गैंग को कनाडा में आपरेट कर रहे गुरदासपुर के नितिश कौशल को मोस्ट वांटेड की लिस्ट में डाल दिया है।इसी तरह से आपरेशन हार्ड बाल में नाम आने के बाद पंजाबी मूल के गैंगस्टर रविंदर सिंह ढांडा की करीब 6.4 मिलियन डालर (61.60 करोड़) की प्रापर्टी सीज करने का आदेश दिया है।दोनों के खिलाफ कार्रवाई के ये आदेश 15 जुलाई को दिए गए हैं। अमेरिकी एजेंसी FBI ने आपरेशन हार्ड बाल में भारत आधारित अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट्स पर कार्रवाई तेज कर दी है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सक्रिय रविंदर सिंह ढांडा ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गनाइजेशन का कथित सरगना है।यूनाइटेड स्टेट और कनाडा सीमा के जरिए सैकड़ों किलो कोकीन और मेथाम्फेटामाइन की तस्करी करने के आरोप में उसे 7 जुलाई 2026 को ब्रिटिश कोलंबिया में गिरफ्तार किया गया था। अब उसके खिलाफ प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी चल रही है। ब्रिटिश कोलंबिया सरकार उसकी करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टीज को सिविल फॉरफीचर के तहत जब्त करने की तैयारी कर रही है। भगवानपुरिया गैंग से जुड़े नितिश पर हत्या सहित कई केसबता दें कि इसी ऑपरेशन हार्ड बाल के तहत भगवानपुरिया गैंग से जुड़े नितिश कौशल को FBI ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर मोस्ट वांटेड लिस्ट में डाल दिया है। कौशल भारतीय जेल में बंद जग्गू के सिंडेगेट को कनाडा में संभालता है। उस पर हत्या, अपहरण, ड्रग तस्करी, रंगदारी, हथियारों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप हैं। FBI ने उसे खतरनाक बताते हुए जानकारी देने वाले को इनाम देने की भी घोषणा की है। आपरेशन हार्ड बाल में लारेंस, ढांडा और जग्गू की गैंग पर भी कार्रवाईएफबीआई ने आपरेशन हार्ड बाल चलाकर कुल 37 आरोपियों पर कार्रवाई की थी। इसमें गैंगस्टर लारेंस, जग्गू भगवानपुरिया और ढांडा का नेटवर्क भी शामिल हैं। 24 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 10 फरार हैं। यह कार्रवाई US, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से की गई थी। इसमें 1 हजार किलो से ज्यादा ड्रग्स, हथियार और नकदी जब्त हुई। अमेरिकी अटॉर्नी ने कहा कि जेल से ऑपरेट होने वाले ये गैंग भारतीयों को निशाना बना रहे थे।
पंचकूला जिले के कालका में देश बचाओ मोर्चा और किसान संगठनों ने बुधवार को भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के पदाधिकारियों और किसानों ने कालका तहसीलदार को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रधान कुलदीप सिंह ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और किसानों ने भाग लिया। मोटरसाइकिल मार्च सेक्टर 30 हुड्डा के समीप गांव सूरजपुर से शुरू हुआ। यह काफिला करनपुर, खेड़ावाली, जटा माजरी और चरनिया से होते हुए कालका तहसील पहुंचा। कालका तहसील कार्यालय पर की नारेबाजी कालका तहसील पहुंचकर किसानों ने ट्रेड डील के विरोध में जमकर नारेबाजी की। उन्होंने तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रस्तावित ट्रेड डील को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी ऐसी ट्रेड डील को स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे देश के किसानों, मजदूरों और कृषि व्यवस्था को नुकसान पहुंचे। कुलदीप सिंह ने आरोप लगाया कि यह समझौता भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है और इससे इन क्षेत्रों को भारी नुकसान होगा। कुलदीप सिंह ने यह भी बताया कि यदि सरकार ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया, तो 21 जुलाई को दिल्ली स्थित किसान घाट पर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे पर देश बचाओ मोर्चा से बातचीत करना चाहती है, तो संगठन इसके लिए तैयार है।
सिरसा जिले के डबवाली तहसील परिसर में बुधवार को देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले विभिन्न किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने मोटरसाइकिल रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को मांगपत्र सौंपकर प्रस्तावित डील को तत्काल रद्द करने की मांग की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए तहसील परिसर पहुंची। किसानों ने एकजुट होकर कहा कि यदि यह ट्रेड डील लागू होती है, तो इसका सबसे अधिक नुकसान देश के किसानों, पशुपालकों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को होगा। किसानों का तर्क था कि विदेशी कंपनियों और अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में बढ़ावा मिलने से देश के किसानों की उपज को उचित मूल्य नहीं मिलेगा। इससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। अमेरिका के साथ डील से प्रभावित होगी खेतीबाड़ी- व्यवसाय : भाटी राष्ट्रीय किसान संगठन के नेता जसवीर सिंह भाटी ने रोष प्रदर्शन की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां करोड़ों परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। यदि अमेरिका से बड़े पैमाने पर कृषि उत्पाद, डेयरी उत्पाद और अन्य खाद्य सामग्री भारतीय बाजार में आने लगी, तो देश के किसानों का दूध, गेहूं, धान, मक्का, दालें, फल-सब्जियां और मछली पालन जैसे व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होंगे। भाटी ने बताया कि किसान पहले से ही बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और फसलों के कम दाम से परेशान हैं। ऐसे में यह ट्रेड डील किसानों के लिए आर्थिक संकट को और गहरा कर देगी। कृषि विशेषज्ञों, किसान संगठनों से चर्चा किए जाने की मांग उन्होंने मांग की कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की चिंताओं की अनदेखी की, तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के नेता मिट्ठू कंबोज ने कहा कि सरकार को ऐसी किसी भी डील को स्वीकार नहीं करना चाहिए जिससे भारतीय किसानों के हित प्रभावित हों। उन्होंने मांग की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए और ऐसी नीति बनाई जाए जिससे देश के किसानों, पशुपालकों और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिले। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। प्रदर्शन में यह किसान नेता रहे शामिल प्रदर्शन में राष्ट्रीय किसान संगठन से जसवीर सिंह भाटी, परमजीत सिंह, प्रितपाल सिंह और राजेश, हरियाणा किसान एकता डबवाली से संगठन के उपाध्यक्ष गुरपाल सिंह मांगियाना, संतोख सिंह खालसा, जगदीप सिंह, बालकरण सिंह और खुशदीप सिंह हैबूआना शामिल रहे। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) से गुरमेल सिंह, गुरतेज सिंह, वकील सिंह सहित अनेक किसान नेताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। वहीं पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति से मिट्ठू कंबोज, देवेंद्र सिंह सहित कई किसान मौजूद रहे। किसान नेताओं ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन प्रदर्शन के अंत में किसानों ने तहसीलदार के माध्यम से मांगपत्र सौंपते हुए सरकार से अपील की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लागू करने से पहले किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। किसान नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसानों के हितों के विपरीत कोई फैसला लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने एकजुट होकर कृषि और किसान हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी लिया।
पानीपत जिले में मालपुर किसान मजदूर यूनियन के सदस्यों ने डाहर टोल प्लाजा पर इकट्ठा होकर भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया। किसानों ने पानीपत के जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्र सरकार से इस व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की गई। इस अवसर पर मालपुर किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सोनू मालपुरिया ने कहा कि भारत सरकार अमेरिका के साथ जिस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली है, वह छोटे किसानों, व्यापारियों, पशुपालन और पोल्ट्री उद्योगों सहित अन्य छोटे कामगारों को खत्म कर देगा। देश के छोटे किसानों-मजदूरों को खत्म कर देगी ड्रेड डील- सोनू मालपुरिया ने तर्क दिया कि जिस तरह जियो कंपनी ने शुरुआत में मुफ्त सेवाएं देकर अन्य कंपनियों को बाजार से बाहर कर दिया और बाद में कीमतें बढ़ा दीं, उसी तरह यह ट्रेड डील भी देश के छोटे किसानों, मजदूरों, पोल्ट्री और पशुपालन उद्योगों को खत्म कर देगी। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इसके बाद अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में महंगे दामों पर बेचे जाएंगे, जिससे आम गरीब और मध्यम वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यूनियन ने सरकार से इस डील को तत्काल रद्द करने की मांग की है, चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
बागपत में भारतीय किसान यूनियन (स्वतंत्रता संग्राम) के भारत बचाओ मोर्चा ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का विरोध किया है। संगठन ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें समझौते को रद्द करने की मांग की गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी कादिर प्रधान के नेतृत्व में किसानों ने कहा कि यह समझौता देश के किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और कुटीर उद्योगों के हितों के प्रतिकूल है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यदि एफटीए को वर्तमान स्वरूप में लागू किया जाता है, तो विदेशी कंपनियों के सस्ते कृषि और औद्योगिक उत्पाद भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर प्रवेश करेंगे। इससे भारतीय किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा और छोटे उद्योगों के अस्तित्व पर संकट आ जाएगा। किसानों के अनुसार, इसका सीधा असर रोजगार, आजीविका, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत बचाओ मोर्चा ने सरकार से प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसान संगठनों, व्यापारी संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। संगठन ने भारतीय कृषि, दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, एमएसएमई और लघु उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रखने के लिए ठोस नीतियां बनाने की भी मांग की। किसानों ने स्पष्ट किया कि देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भारत बचाओ मोर्चा लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करने की मांग:जौनपुर में किसान संगठन ने PM के नाम सौंपा ज्ञापन
जौनपुर में भारतीय किसान मजदूर जनसेवा यूनियन ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की है। यूनियन के जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 'देश बचाओ मोर्चा' ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। संगठन ने इस समझौते को किसानों, खेत मजदूरों और देश की आर्थिक संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा बताया है। जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील देश के पशुपालकों, छोटे व्यापारियों, लघु उद्योगों तथा खाद्य एवं आर्थिक संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। संगठन ने इस समझौते को किसानों के लिए 'डेथ वारंट' करार दिया है और स्पष्ट किया है कि इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। 'देश बचाओ मोर्चा' ने भारत सरकार से इस मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है, ताकि देश के किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा हो सके। मोर्चे ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस मांग की अनदेखी करती है, तो देशभर में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
डूंगरपुर के आर्थोपेडिक डॉक्टर अनिल बनवीर की मंगलवार को अमेरिका से मेक्सिको के बीच क्रूज पर मौत हो गई। वे अपनी डॉक्टर पत्नी के साथ घूमने के लिए गए थे। क्रूज से दोनों अमेरिका से मेक्सिको जा रहे थे। अचानक हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने कईं सालों तक डूंगरपुर और सागवाड़ा के सरकारी अस्पताल में मरीजों की सेवाएं दी। रिटायरमेंट के बाद भी वे एक निजी अस्पताल में मरीजों को देखते थे। डॉ. बनवीर की मौत के बाद डूंगरपुर में शोक की लहर है। समुद्र के बीच क्रूज पर हुई मौतडूंगरपुर के जाने माने आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल बनवीर (75) और उनकी पत्नी डॉ. निशा बनवीर दोनों ही 9 जुलाई से घूमने के लिए विदेश गए थे। मंगलवार को वे और उनकी पत्नी दोनों ही क्रूज से अमेरिका से मेक्सिको जा रहे थे। समुद्र के बीच में ही उनकी हृदय गति रुक गई। क्रूज पर डॉक्टरों ने जांच भी की, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थीं। रिटायरमेंट के बाद भी निजी अस्पताल में दे रहे थे सेवाएंये खबर डूंगरपुर आई तो चिकित्सा महकमे के साथ ही उनसे इलाज ले रहे मरीजों और लोगों में शोक की लहर छा गई। उन्होंने कई सालों तक डूंगरपुर जिला अस्पताल और फिर सागवाड़ा अस्पताल में मरीजों का इलाज किया। वे प्रमुख चिकित्सा अधिकारी भी रहे। 13 साल पहले रिटायरमेंट के बाद भी वे निजी अस्पताल में मरीजों को देख रहे थे। बेटा-बहू भी लंदन में है डॉक्टरउनका बेटा डॉ. सौमित्र बनवीर और बहू डॉ. उपासना बनवीर भी लंदन में डॉक्टर है। जबकि बेटी शौकिता ठाकुर अपने पति कुणाल ठाकुर के साथ कनाडा में रहती है। बेटा और बेटी दोनों के ही विदेशों में होने से उनका अंतिम संस्कार कहा होगा ये अभी जानकारी नहीं मिल सकी है। डूंगरपुर जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. कांतिलाल मेघवाल ने बताया कि उनकी मौत से चिकित्सा से जुड़े तमाम लोगों में शोक की लहर है। भारत विकास परिषद तिलक शाखा के अध्यक्ष मुकेश श्रीमाल ने भी डॉ. बनवीर के निधन पर शोक जताया है 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन किए थेडॉ. बनवीर ने पोलियो करेक्शन के 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन किए थे। इस कारण कई दिव्यांग फिर चलने फिरने लगे थे। वे आर्थोपेडिक डॉक्टर होने के साथ ही समाजसेवा के कामों में भी जुड़े रहे। वे नारायण सेवा संस्थान, महावीर इंटरनेशनल जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं से भी जुड़े थे। उन्होंने डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सागवाड़ा और कई जगहों पर पोलियो करेक्शन के करीब 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन भी किए। इससे जन्मजात चलने फिरने की परेशानी से जूझ रहे लोग फिर से चलने लगे।
भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में बुधवार को देशभर में बड़े स्तर पर मोटरसाइकिल मार्च निकाला जाएगा। किसान संगठनों ने इस मार्च के जरिए केंद्र सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। किसान संगठनों का कहना है कि यह समझौता किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम लोगों के हितों के खिलाफ है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के राज्य नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर पूरे देश में मोटरसाइकिल मार्च आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य केंद्र सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि देश का किसान और मजदूर वर्ग भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध करता है। पंजाब के 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे पंधेर ने बताया कि पंजाब के सभी 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे, जिनमें किसान मजदूर मोर्चा, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), आजाद किसान मोर्चा सहित कई किसान संगठन हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन, मोटरसाइकिल मार्च और साइकिल रैलियां आयोजित की जाएंगी। कृषि उत्पादों के आयात की कोई आवश्यकता नहीं सरवन सिंह पंधेर ने दावा किया कि भारत कृषि उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर देश है। उन्होंने कहा कि देश में अनाज, दालें, फल, सब्जियां, फूल और तिलहन समेत अधिकांश आवश्यक कृषि उत्पादों का पर्याप्त उत्पादन होता है। ऐसे में विदेशों से कृषि उत्पादों के आयात की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत के अधिकांश किसान छोटी जोतों पर खेती करते हैं उन्होंने आशंका जताई कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लागू होता है तो अमेरिकी कृषि उत्पाद कम या शून्य आयात शुल्क पर भारतीय बाजार में आ सकते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका में किसानों और कृषि कंपनियों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत के अधिकांश किसान छोटी जोतों पर खेती करते हैं। पंधेर के अनुसार, ऐसी स्थिति में भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन हो जाएगा, जिससे छोटे और मध्यम किसानों के साथ-साथ छोटे उद्योगों और व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। समझौता वापस न होने पर बड़े किसान आंदोलन की चेतावनी पंधेर ने देशवासियों से अपील की कि वे आज होने वाले मोटरसाइकिल मार्च में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपना समर्थन दें। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर पुनर्विचार नहीं किया, तो किसान संगठन व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेंगे।
अमेरिका के अटॉर्नी लॉ डॉ. जसप्रीत सम्मानित किए
भास्कर न्यूज | जालंधर मंगलवार को अमेरिका में लॉ फर्म चलाने वाले डॉ. जसप्रीत सिंह अटॉर्नी जालंधर पहुंचे। आदमपुर से आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज पवन टीनू की तरफ से कार्यक्रम का आयोजन किया। पवन टीनू ने बताया कि अमेरिका में लॉ फर्म के माध्यम से किस तरह डॉ. जसप्रीत सिंह भारतीय खास कर पंजाबियों को मदद पहुंचा रहे है। पंजाबियों को कानूनी तरीके से वहां पर सैटल करने में डॉ. जसप्रीत का बड़ा योगदान है। उनकी तरफ से मंगलवार को गुरुद्वारा तल्हण साहिब में मरीजों के लिए नई तकनीक की एमआरआई मशीन व अन्य उपकरणों को लेकर भी मदद की है। पवन टीनू ने बताया कि अमेरिका में पॉलिटिशियनों के कानूनी सलाहकार से लेकर यूएसए के 18 बड़े गुरुद्वारा साहिब में भी वह कानूनी सलाहकार है। वह साल 1993 से अमेरिका में रह रहे है और करीब 15 साल बाद पंजाब पहुंचे है। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की तरफ से उन्हें कानूनी सेवाओं को लेकर ऑनरेरी डाक्टरेट की उपाधी देकर भी सम्मानित किया गया है। डॉ. जसप्रीत ने बताया कि वह जीएनडीयू, पीयू पटियाला और जगत गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी सहित पंजाब के गवर्नर को मिलकर पंजाब में एजुकेशन सिस्टम में बदलाव लाना चाहते है ताकि हमारे युवा स्किल्ड हो सकें। इस मौके पर मेयर विनीत धीर, सीनियर आप नेता गुरचरण सिंह चन्नी, सीनियर डिप्टी मेयर बलबीर सिंह, पूर्व मेयर जगदीश राजा, नितिन कोहली, चरणजीत सिंह, दलजीत सिंह मिन्हास चेयरमैन, जस दयाल सिंह जिला परिषद, अमरीक सिंह, सर्बजीत सिंह हैप्पी, लखबीर सिंह, हरकिरत सिंह निज्जर, विक्की तुलसी पार्षद, राकेश बग्गा, गैरी टुट, बलजीत कुमार, जावेद मौजूद रहे।
लखनऊ में अमेरिका के नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले इंटरनेशनल कॉल सेंटर का साइबर क्राइम टीम ने भंडाफोड़ किया था। उसमें सरगना मुख्य सरगना 25 हजार रुपए के इनामी विनीत वशिष्ठ समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अमेरिकी स्कैमर्स तक पहुंचने के लिए अहम डिजिटल सबूत अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा करेगी। 1 जुलाई 2026 को पुलिस ने लखनऊ के विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए थे। मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। ऐसे फंसाए जाते थे अमेरिकी नागरिक जांच में सामने आया कि अमेरिका में बैठे स्कैमर्स पहले अमेरिकी टोल-फ्री नंबर खरीदते थे। इन नंबरों को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भारत में बैठे गिरोह के सदस्यों को उपलब्ध कराया जाता था। इसके बाद अमेरिकी नागरिकों को बड़ी संख्या में एसएमएस भेजकर शिकायत दर्ज कराने के नाम पर इन्हीं टोल-फ्री नंबरों पर कॉल करने के लिए प्रेरित किया जाता था। टोल-फ्री नंबर होने के कारण लोग बिना संदेह कॉल करते थे और फिर ठगी का शिकार बन जाते थे। जांच के दौरान पुलिस ने धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए कई अमेरिकी टोल-फ्री नंबरों की पहचान कर ली है। अमेरिकी एजेंसियों को भेजी जाएगी जानकारी लखनऊ पुलिस इन टोल-फ्री नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के जरिए से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को भेजेगी। इससे वहां की एजेंसियां संबंधित स्कैमर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकेंगी। पुलिस के मुताबिक, अमेरिका में Somos संस्था टोल-फ्री नंबरों के पंजीकरण और प्रबंधन का काम करती है, जबकि Traceback संस्था संदिग्ध और फर्जी कॉल के स्रोत की टेक्निकल जानकारी जुटाने में मदद करती है। भारतीय एजेंसियों से साझा होने वाले इनपुट के आधार पर अमेरिकी प्राधिकरण आगे की जांच करेंगे। किरायानामा भी जांच के घेरे में विवेचना में कॉल सेंटर का किरायानामा भी बरामद हुआ है। जांच में पता चला कि किरायानामा Solaris Solution के बजाय Xicom Technologies के नाम पर किया गया था। पुलिस के अनुसार, इस कंपनी का कानूनी स्वामित्व गिरफ्तार आरोपी नायकर जयराज से जुड़ा मिला है। पुलिस अब गिरोह के हवाला नेटवर्क और ठगी की रकम के लेन-देन (मनी ट्रेल) की गहन जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां तथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नमस्कार, आज की सबसे बड़ी खबर पटना से है। पटना की बांकीपुर सीट पर तेजप्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) की उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन रद्द हो गया है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट में योग गुरु बाबा रामदेव उर्फ रामकृष्ण यादव के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। चलिए सिलसिलेवार पढ़ते हैं, बिहार दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. तेजप्रताप की कैंडिडेट वीणा का नॉमिनेशन रद्द पटना की बांकीपुर सीट पर तेजप्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) की उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन रद्द हो गया है। सोमवार को नामांकन दाखिल करने के बाद पटना पुलिस ने उन्हें धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई। वीणा मानवी के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी प्रिय किन्नर समेत 10 उम्मीदवारों का नामांकन भी रद्द कर दिया गया है। जनशक्ति जनता दल की उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने की जानकारी मिलते ही तेजप्रताप यादव पटना कलेक्ट्रेट पहुंच गए। पूरी खबर पढ़ें 2. चारा घाटाला मामले में राजद सुप्रीमो को राहत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट की ओर से लालू यादव की सजा निलंबित किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल लालू यादव को मिली राहत बरकरार रहेगी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट का यह आदेश करीब 7 साल पुराना है। पूरी खबर पढ़ें 3. सरकार के दावे पर बाहुबली विधायक ने खड़े किए सवाल अपने अंदाज और बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अनंत सिंह ने बिहार सरकार के खजाने और नीतीश कुमार के खास कहे जाने वाले छोटू सिंह को जदयू से निकाले जाने पर प्रतिक्रिया दी है। बिहार सरकार के मुखिया सम्राट चौधरी एक तरफ दावा कर रहे हैं कि सरकार के पास फंड की कमी नहीं है। विपक्षी खजाने खाली होने का झूठ बोल रहे हैं। वहीं मोकामा से जदयू के विधायक और बाहुबली अनंत सिंह का कहना है कि नई सरकार बनने के बाद जनता का काम नहीं हो पा रहा है। पूरी खबर पढ़ें 4. 'भरत को गोली मारने वाले पुलिसवालों को फांसी हो' भोजपुर के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच जारी है। मंगलवार को ग्रामीण ललिता देवी और भरत तिवारी के भाई चंदन न्यायिक जांच आयोग कार्यालय पहुंचे। जहां आयोग के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा के सामने अपना पक्ष रखा। भाई चंदन ने कहा है कि मैंने जज को बताया है कि सरेंडर करने के बाद भी पुलिस ने मेरे भाई भरत को गोली मार दी। मैंने कहा है कि जल्द से पुलिस वालों को गिरफ्तार करके उन्हें फांसी दी जाए। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पूरी खबर पढ़ें 5. बाबा रामदेव के खिलाफ परिवाद दायर योग गुरु बाबा रामदेव उर्फ रामकृष्ण यादव के खिलाफ मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय में एक परिवाद दायर किया गया है। यह परिवाद हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तमन्ना हाशमी ने दायर किया है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि 13 जुलाई 2026 की रात बाबा रामदेव का एक बयान टीवी पर प्रसारित हुआ था। इस बयान में उन्होंने कहा था कि मुसलमानों का मूल भी हिंदुओं से है और सबका बाप एक है। परिवादी तमन्ना हाशमी का आरोप है कि इस बयान से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में धार्मिक उन्माद फैलने की आशंका है। पूरी खबर पढ़ें 6. अमेरिका-ईरान जंग में गोपालगंज के युवक की मौत गोपालगंज के युवक की अमेरिका-ईरान जंग के दौरान हुए हमले में मौत हो गई। मृतक की पहचान थावे बाजार के शू कारोबारी संजय गुप्ता के बेटे सोनू कुमार (30) के रूप में हुई है। सोनू गुप्ता मैकेनिकल इंजीनियर थे। वह पिछले 6 सालों से दुबई में एक कंपनी में काम कर रहे थे। उन्होंने कोलकाता से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 2020 में दुबई स्थित स्कॉर्पियो कंपनी में नौकरी शुरू की थी। बाद में वे अबू धाबी की प्रतिष्ठित ऊर्जा कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) जॉइन कर लिया। सोनू गुप्ता के साथ हुए हादसे की जानकारी कंपनी के CMD की ओर से उनके परिजनों को दी गई। पूरी खबर पढ़ें 7. ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से 3 महिलाओं की मौत, 24 घायल अररिया में मंगलवार सुबह ब्रेक फेल होने से मजदूरों से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली पानी भरे गड्ढे में पलट गई। हादसे में 3 महिलाओं की मौत हो गई जबकि 24 मजदूर घायल हो गए। ट्रैक्टर ट्रॉली में कुल 27 मजदूर सवार थे, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। सभी धान की रोपनी के लिए जा रहे थे। हादसा भरगामा प्रखंड के सिरसिया हनुमानगंज वार्ड संख्या-14 में हुआ। मृतक महिलाओं की पहचान मीरा देवी, नैना देवी और रंजू देवी के रूप में हुई है। सभी मृतकों की उम्र 35 से 40 साल के बीच थी। पूरी खबर पढ़ें 8. बंटी मर्डर केस में 2 आरोपी गिरफ्तार, सरगना फरार पटना में 6 जुलाई को हुए बंटी यादव अपहरण और हत्या मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रौशन कुमार और अजीत कुमार साहनी के रूप में हुई है। सेंट्रल SP ममता कल्याणी ने बताया कि रौशन और अजीत अन्य आरोपियों के साथ वारदात में शामिल थे। दोनों की गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से 3 मोबाइल फोन और 28 हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस अब तक रोहित, बजरंगी और ऑटो चालक रवि उर्फ चंदू को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मुख्य आरोपी रवीश रवीश कुमार उर्फ बीसी अब भी फरार है। पूरी खबर पढ़ें 9. थाने के सामने पत्नी ने पति चप्पल से कर दी पिटाई मुजफ्फरपुर के मोतीपुर थाना के बाहर पति-पत्नी और साले के बीच मारपीट हो गई। जिसका वीडियो भी सामने आया है। देखा जा सकता है कि महिला अपने पति को चप्पल से पीटती नजर आ रही है। दोनों पक्षों से धक्का-मुक्की हो रही। घूंसे भी चल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले से पारिवारिक विवाद चल रहा है और मामला फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है। इसी विवाद को लेकर सोमवार को मोतीपुर थाना के सामने दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद विवाद मारपीट में बदल गया। पूरी खबर पढ़ें 10. कल मौसम रहेगा सामान्य, उमस से राहत नहीं मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, मानसून कमजोर हो गया। इससे बारिश की ज्यादा संभावना नहीं है। कल पूरे बिहार में मौसम सामान्य बना रहेगा। लोगों को उमस भरी गर्मी महसूस होगी। हालांकि, मौसम विज्ञान केंद्र ने अररिया और किशनगंज में बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
अमेरिका द्वारा हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ पर आरोप लगाए जाने के बाद भारत सरकार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत हमेशा से ही अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, आतंकवाद और नशीली दवाओं की तस्करी जैसी वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आपराधिक नेटवर्क समाज के लिए एक बेहद गंभीर खतरा हैं और इनसे निपटने के लिए भारत-अमेरिका की एजेंसियां सालों से आपसी तालमेल के साथ बेहद मजबूत सहयोग कर रही हैं। लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर अमेरिकी कार्रवाई हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी घोषणाएं की हैं। इन घोषणाओं के तहत भारत के कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में छिपे उसके साथी गोल्डी बराड़ पर खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिका में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के इस बड़े कदम के बाद पूरी दुनिया का ध्यान इस हाई-प्रोफाइल मामले की ओर खिंचा है। भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होता सहयोग रणधीर जायसवाल ने अपने बयान में आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ भारत-अमेरिका की साझा जंग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों ही मोर्चों पर भारत और अमेरिका के बीच बेहद मजबूत और प्रभावी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों की सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस दिशा में काफी लंबे समय से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रही हैं। सालों पुराना और गहरा है सुरक्षा एजेंसियों का तालमेल विदेश मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए दोनों देशों की खुफिया और जांच एजेंसियों के बीच का यह नेटवर्क सिर्फ तात्कालिक नहीं है, बल्कि सालों पुराना है। यह सहयोग समय के साथ और अधिक मजबूत, पारदर्शी तथा गहरा होता जा रहा है।
गोपालगंज के युवक की अमेरिका-ईरान जंग के दौरान हुए हमले में मौत हो गई। मृतक की पहचान थावे बाजार के शू कारोबारी संजय गुप्ता के बेटे सोनू कुमार (30) के रूप में हुई है। सोनू गुप्ता मैकेनिकल इंजीनियर थे। वह पिछले 6 सालों से दुबई में एक कंपनी में काम कर रहे थे। उन्होंने कोलकाता से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 2020 में दुबई स्थित स्कॉर्पियो कंपनी में नौकरी शुरू की थी। बाद में वे अबू धाबी की प्रतिष्ठित ऊर्जा कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) जॉइन कर लिया। सोनू गुप्ता के साथ हुए हादसे की जानकारी कंपनी के CMD की ओर से उनके परिजनों को दी गई। शिप पर आग का गोला गिरा सोनू के साथियों ने परिवार को बताया कि ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया गया था। आग का गोला और मलबा शिप पर आ गिरा, जिसकी चपेट में आने से सोनू की मौत हो गई। सोनू के बड़े भाई आलोक ने बताया कि मंगलवार सुबह उन्हें सूचना मिली कि सऊदी अरब के होर्मुज समुद्री क्षेत्र में जहाज पर मिसाइल गिरी है। इसी शिप पर सोनू काम करता था। मिसाइल की चपेट में आने से वो गंभीर रूप से घायल हो गया। थोड़ी देरी बाद उसकी मौत हो गई। सोनू के साथी भी हमलों को लेकर परेशान हो रहे हैं। 20 दिन पहले ही छुट्टी बिताकर गए थे दुबई बड़े भाई आलोक ने बताया कि सोनू करीब 20 दिन पहले ही घर पर छुट्टी बिताकर दुबई लौटे थे। हमें यकीन ही नहीं हो रहा है कि वो हम लोगों के बीच में नहीं है। वो बहुत अच्छा भाई था, शांत स्वभाव का था। उसकी मौत के बाद घर में सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। अब देखिए उसकी बॉडी कब तक यहां पहुंचती है। वो कहकर गया था कि जल्द ही वापस आएगा। विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता होर्मुज स्ट्रेट में ईरान ने सोमवार देर रात UAE के दो तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया। हमले में एक भारतीय की मौत हो गई, जबकि 6 भारतीय नागरिकों समेत 8 लोग घायल हैं। भारत ने मंगलवार सुबह ईरान के उप राजदूत मोहम्मद जवाद हुसैनी समेत ईरानी डिप्लोमेट्स को तलब किया। विदेश मंत्रालय ने घटना पर गंभीर चिंता जताई और ईरानी मिशन से जवाब मांगा। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र कार्तिक लड्ढा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शोध प्रस्तुति से जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्हें अमेरिका में आयोजित वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिकल स्टूडेंट्स रिसर्च में 'बेस्ट रिसर्च' और 'पीपुल्स चॉइस' श्रेणियों में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। यह 2 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मेडिकल स्टूडेंट्स की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें दुनियाभर से 90 से ज्यादा शोधपत्रों का ऑनलाइन चयन किया गया था, जहां विभिन्न देशों के मेडिकल छात्रों और शोधकर्ताओं ने अपने शोध प्रस्तुत किए। ऑनलाइन माध्यम से पेश किये शोध के निष्कर्षकार्तिक लड्ढा ने फ्लोराइडयुक्त पानी से संबंधित अपने शोध के निष्कर्ष ऑनलाइन माध्यम से विशेषज्ञों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के समक्ष प्रस्तुत किए। उनके शोध की वैज्ञानिक गुणवत्ता, सामाजिक उपयोगिता और प्रभाव को देखते हुए इसे 2 अलग-अलग श्रेणियों में तीसरे स्थान से सम्मानित किया गया। यह शोध कार्य सामुदायिक चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शकीला मुल्ला के मार्गदर्शन में पूरा किया गया था। छात्र कार्ति लड्ढा को दी बधाईइस उपलब्धि की जानकारी मिलते ही डीन संजय पोरवाल ने छात्र कार्तिक लड्ढा को बधाई दी और उनके बेहतर कार्य की सराहना की। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताया है।इस उपलब्धि पर मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों, विद्यार्थियों और जिलेवासियों ने कार्तिक लड्ढा और उनकी शोध मार्गदर्शक डॉ. शकीला मुल्ला को बधाई दी, इसे युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणादायी बताया। फ्लोराइडयुक्त पानी पर किया था शोध11-12 जुलाई को हुए इस आयोजन में शोध का विषय झालावाड़ जिले के निकट स्थित मंडावर कस्बे में फ्लोराइड युक्त पेयजल के उपयोग और उसके आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़ा था। अध्ययन में फ्लोराइड युक्त पानी के ज्यादा समय तक उपयोग से होने वाले संभावित स्वास्थ्य दुष्प्रभावों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया गया।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर कानपुर के एक्सपोर्ट कारोबार पर भी दिखने लगा है। शहर के करीब ₹250 करोड़ के एक्सपोर्ट ऑर्डर समुद्र में फंस गए हैं। करीब 15 दिन पहले खाड़ी देशों के लिए भेजे गए कंसाइनमेंट मौजूदा हालात के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। बीच समुद्र में ही कंटेनर रोक दिए गए हैं, कंपनियां अभी नहीं बता पा रहीं है कि कंटेनर का माल कब पहुंच सकेगा। मंगलवार रीजनल चेयरमैन कांउन्सिल आफ लेदर एक्सपोर्ट असद कमाल ईराकी ने 11.15 बजे बताया कि माल फंसने से क्रिसमस में तैयार किए जाने वाले उत्पाद पर भी असर पड़ेगा। इससे पहले माल फंसा था तो एक कंटेनर को मंगाने और भेजने की कीमतों पर इजाफा हुआ था। फिर से जिस एक कंटेनर के लिए हम 1500 डालर भुगतान करते थे, अब वहीं 4500 डालर तक का भुगतान करना पड़ रहा है। निर्यातकों के मुताबिक, फंसे कंसाइनमेंट में चमड़े के उत्पाद, टेक्सटाइल और खाद्य सामग्री शामिल हैं। सबसे ज्यादा चिंता खाद्य सामग्री को लेकर है। यदि जहाज लंबे समय तक समुद्र में रुके रहे तो माल समय पर नहीं पहुंचेगा और खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। इससे भुगतान अटक सकता है और निर्यातकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। होर्मुज के हालत के कारण चिंता बढ़ीनिर्यातकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए हालात और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात प्रभावित हो रहा है। इसका असर साल के सबसे बड़े कारोबारी सीजन क्रिसमस मार्केट की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। यदि तनाव लंबा चला तो कोरोना काल जैसी सप्लाई चेन की दिक्कतें फिर सामने आ सकती हैं। जहाजों को फिलहाल रोकने के निर्देशनिर्यातकों के अनुसार, जीसीसी (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) देशों के लिए आवश्यक वस्तुओं समेत अन्य उत्पादों के कंसाइनमेंट पहले ही रवाना किए जा चुके थे। मौजूदा हालात को देखते हुए कई जहाजों को फिलहाल जहां हैं, वहीं रुकने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार हमलों की आशंका और व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता के कारण नए एक्सपोर्ट ऑर्डरों पर भी फैसला लेना मुश्किल हो रहा है। इन देशों को होता है निर्यातकानपुर से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुवैत, कतर, बहरीन समेत जीसीसी देशों के अलावा इजराइल और ईरान को भी विभिन्न उत्पादों का निर्यात किया जाता है। निर्यातकों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा तो आने वाले दिनों में कारोबार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में बुधवार को देशभर में बड़े स्तर पर मोटरसाइकिल मार्च निकाला जाएगा। किसान संगठनों ने इस मार्च के जरिए केंद्र सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि यह समझौता किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम लोगों के हितों के खिलाफ है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के राज्य नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर पूरे देश में मोटरसाइकिल मार्च आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य केंद्र सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि देश का किसान और मजदूर वर्ग भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध करता है। पंजाब के 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे पंधेर ने बताया कि पंजाब के सभी 23 जिलों में मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे, जिनमें किसान मजदूर मोर्चा, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), आजाद किसान मोर्चा सहित कई किसान संगठन हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन, मोटरसाइकिल मार्च और साइकिल रैलियां आयोजित की जाएंगी। कृषि उत्पादों के आयात की कोई आवश्यकता नहीं सरवन सिंह पंधेर ने दावा किया कि भारत कृषि उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर देश है। उन्होंने कहा कि देश में अनाज, दालें, फल, सब्जियां, फूल और तिलहन समेत अधिकांश आवश्यक कृषि उत्पादों का पर्याप्त उत्पादन होता है। ऐसे में विदेशों से कृषि उत्पादों के आयात की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत के अधिकांश किसान छोटी जोतों पर खेती करते हैं उन्होंने आशंका जताई कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लागू होता है तो अमेरिकी कृषि उत्पाद कम या शून्य आयात शुल्क पर भारतीय बाजार में आ सकते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका में किसानों और कृषि कंपनियों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत के अधिकांश किसान छोटी जोतों पर खेती करते हैं। पंधेर के अनुसार, ऐसी स्थिति में भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन हो जाएगा, जिससे छोटे और मध्यम किसानों के साथ-साथ छोटे उद्योगों और व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। समझौता वापस न होने पर बड़े किसान आंदोलन की चेतावनी पंधेर ने देशवासियों से अपील की कि वे बुधवार को होने वाले मोटरसाइकिल मार्च में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपना समर्थन दें। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर पुनर्विचार नहीं किया, तो किसान संगठन व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेंगे।
नेपाल सीमा पर सोनौली बॉर्डर से एक अमेरिकी नागरिक को बिना वैध यात्रा दस्तावेज के गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने समुद्री रास्ते से भारत आने का दावा किया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।
पंचकूला सेक्टर-26 स्थित एक बंद मकान को निशाना बनाते हुए अज्ञात चोर नकदी और कीमती सामान चोरी कर ले गए। परिवार अमेरिका में अपनी बेटी से मिलने गया हुआ था। घर की देखरेख की जिम्मेदारी रिश्तेदार को सौंपी गई थी। रिश्तेदार ने घर का टूटा ताला देखकर परिवार को चोरी की सूचना दी। पुलिस को दी शिकायत में सेक्टर-26 के कुलदीप सिंह ने बताया कि वह BEL कंपनी से सेवानिवृत्त हैं। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी पिछले 8 वर्षों से अमेरिका में नौकरी कर रही है। 11 मई 2026 को वह पत्नी और बेटे के साथ अमेरिका बेटी से मिलने चले गए थे। दूसरी बेटी 6 जून को भी अमेरिका पहुंच गई। घर की सुरक्षा और देखरेख के लिए मकान की चाबियां अपने बड़े साले उदयवीर सिंह को सौंप दी थीं। मुख्य गेट का टूटा मिला ताला उनके रिश्तेदार उदयवीर सिंह ने फोन कर बताया कि मकान का मुख्य ताला टूटा हुआ है। घर के दोनों कमरों की अलमारियां खुली पड़ी हैं और उनमें रखा सामान बिखरा हुआ है। स्टोर में रखी अलमारी भी खुली मिली। परिवार अमेरिका में होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि क्या-क्या सामान चोरी हुआ है। जब पूरे घर की जांच की गई, तो नकदी और अन्य कीमती सामान गायब मिला। चोर घर से करीब 1 लाख रुपए नकद, 5 साड़ियां, 2 सूट, एक लाख रुपए की कीमत वाले ब्नांडेड शूज 5 जोड़ी चोर ले गए। वहीं चोरी के समय महिला भी साथ थी, क्योंकि एक जोड़ी महिला की चप्पल घर में मिली हैं। केस दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस पंचकूला के चंडीमंदिर थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मौके का निरीक्षण किया। जांच में चोरी की पुष्टि होने पर चंडीमंदिर थाना में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305 और 331(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सैमायरा मेहता ने अमेरिका के नेशनल स्पीच एंड डिबेट टूर्नामेंट में हासिल किया दूसरा स्थान
सैमायरा मेहता ने अमेरिका के प्रतिष्ठित नेशनल स्पीच एंड डिबेट टूर्नामेंट की ‘ओरिजिनल ऑरेटरी’ श्रेणी में पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। भारतीय मूल की सैमायरा के दादा उदयपुर में रहते हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी सैमायरा बचपन से ही कोडिंग, एआई (AI) शोध और वक्तृत्व में सक्रिय रही हैं। उन्होंने बच्चों के लिए ‘कोडरबनीज’ कोडिंग गेम बनाया है और वे ‘थ्री एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज’ की फाइनलिस्ट भी रही हैं। एआई हेल्थकेयर शोध में योगदान देने वाली सैमायरा अब जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस और कंप्यूटेशनल मेडिसिन की उच्च शिक्षा लेंगी। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से मेवाड़ सहित पूरा देश गौरवान्वित है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
पानीपत जिले में अमेरिका भेजने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी और युवक की जान जोखिम में डालने का एक मामला सामने आया है। आरोपी ट्रैवल एजेंट ने सीधे हवाई जहाज से अमेरिका भेजने का झांसा देकर पीड़ित परिवार से कुल 20 लाख 75 हजार रुपए ऐंठ लिए, लेकिन युवक को अवैध डंकी रूट से जंगलों और पहाड़ों के रास्ते पैदल चलने पर मजबूर किया। पीड़ित को 11 महीने अमेरिका की जेल में काटना पड़ा, जिसके बाद उसे भारत डिपोर्ट कर दिया गया। पानीपत SP के आदेश पर आरोपी एजेंट के खिलाफ धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। 10 दिन में अमेरिका भेजने का दिया था झांसा पुलिस को दी गई शिकायत में समालखा के गांव मनाना निवासी निशांत ने बताया कि एक रिश्तेदार के माध्यम से उसकी मुलाकात पानीपत के सेक्टर-18 निवासी कथित एजेंट नरेश कुमार से हुई थी। नरेश ने निशांत को ऊंचे सपने दिखाए और दावा किया कि वह कोई ऐरा-गैरा एजेंट नहीं है और जंगलों के रास्ते नहीं, बल्कि सीधे 10 दिन के भीतर हवाई जहाज से उसे अमेरिका भेजकर वहां नौकरी, पीआर और लाखों की सैलरी दिलवाएगा। झांसे में आकर पीड़ित परिवार ने कागजी कार्रवाई के नाम पर अलग-अलग तारीखों में बैंक खातों से निकालकर कुल ₹20.75 लाख नकद आरोपी को दे दिए। कई सौ किलोमीटर पैदल सफर, रास्ते में मारपीट आरोपी ने 12 जून 2024 को निशांत को थाईलैंड की फ्लाइट में यह कहकर बिठाया कि वहां से कनेक्टिंग फ्लाइट है, लेकिन थाईलैंड पहुंचने पर पता चला कि उसके पास चाइना और गुयाना का वीजा है। आरोपी के आदमियों ने निशांत को गुयाना से अमेरिका के लिए कई सौ किलोमीटर तक हफ्तों-महीनों पैदल चलने पर मजबूर किया। रास्ते में उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, पैसे छीन लिए गए और विरोध करने पर जंगलों में भूखा मारकर फेंकने की धमकी दी गई। मेक्सिको बॉर्डर से दीवार कुदवाई, 11 महीने जेल में रहा 25 अगस्त 2024 को आरोपी के गुर्गों ने सबूत मिटाने के लिए निशांत का फोन छीन लिया और मेक्सिको-अमेरिका बॉर्डर पर दीवार कुदाकर उसे जबरन अमेरिका में घुसा दिया। वहां घुसते ही अमेरिकी पुलिस ने उसे अवैध घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। टॉर्चर करने के बाद उसे 11 महीने जेल में रखा गया। इस दौरान भी आरोपी एजेंट ने युवक को जेल से छुड़ाने के नाम पर परिजनों से ₹1.15 लाख और ऐंठ लिए। 5 जुलाई 2025 को अमेरिकी सरकार ने निशांत को डिपोर्ट कर भारत वापस भेज दिया। पैसे वापस मांगने पर दी जान से मारने की धमकी भारत लौटने के बाद जब पीड़ित परिवार ने आरोपी नरेश कुमार से अपने पैसे वापस मांगे, तो उसने टालमटोल शुरू कर दी। अब आरोपी पीड़ित और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा है। आरोपी का कहना है कि वह कई लोगों को रास्ते में ही मरवा चुका है और उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक है। आरोपी ने पीड़ित के घर बदमाश किस्म के युवकों को भेजकर उल्टा 12 लाख रुपए और देने का दबाव बनाया। पीड़ित ने पुलिस को शिकायत के साथ बैंक ट्रांजैक्शन के विवरण और एक पेन ड्राइव (पेन ड्राइव में मौजूद रिकॉर्डिंग्स) सौंपी है। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
चंडीगढ़ में सोमवार (13 जुलाई) को किसानों की बाइक रैली और प्रदर्शन के चलते यातायात व्यवस्था प्रभावित रहने की संभावना है। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के नेतृत्व में पंजाब के किसान मोहाली से बाइक रैली निकालकर सेक्टर-34 स्थित प्रदर्शनी मैदान पहुंचेंगे। यहां मुख्यमंत्री और राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम दो ज्ञापन सौंपे जाएंगे। भारत-अमेरिकी व्यापार समझौते, पानी और भूमि नीति समेत कई मांगों को लेकर हो रहे इस प्रदर्शन के मद्देनजर चंडीगढ़ पुलिस अलर्ट पर है। आम लोगों की सुविधा के लिए सुबह 10:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा और कुछ जगहों पर आवाजाही भी सीमित रहेगी। ऐसे में घर से निकलने से पहले ट्रैफिक रूट जरूर जांच लें। सभी जिलों के किसान शामिल होंगे बीकेयू (राजेवाल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि 13 जुलाई को होने वाली मोटरसाइकिल रैली में पंजाब के सभी जिलों से किसान शामिल होंगे। उन्होंने इसे राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में किसान चंडीगढ़ पहुंचकर अमेरिकी व्यापार समझौते, पंजाब के पानी और भूमि नीति समेत अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाएंगे। हालांकि, रैली में शामिल होने वाले किसानों की संख्या को लेकर उन्होंने कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। 13 जुलाई को लोग हुए थे परेशान 11 जुलाई 2026 को विभिन्न किसान संगठनों ने सेक्टर-34 प्रदर्शनी मैदान में अमेरिकी व्यापार समझौते और भूमि नीति के विरोध में प्रदर्शन किया था। इस दौरान किसान बसों के जरिए सेक्टर-34 पहुंचे थे और कार्यक्रम के बाद वापस लौट गए थे। हालांकि, प्रदर्शन के चलते लोगों को यातायात संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसी को देखते हुए पुलिस इस बार पहले से तैयारी कर रही है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
अगर आपके बच्चों की तस्वीरें, बैंक खातों के पासवर्ड और आपकी डिजिटल पहचान एक ही ‘की’ से सुरक्षित हो और वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए, तो सब खतरे में पड़ सकता है। कॉमर्शियल एयरलाइन पायलट रेयान पेटिट के साथ ऐसा ही हुआ। विमानन क्षेत्र में काम करने वाले पेटिट जानते हैं कि सुरक्षा के लिए हमेशा कई स्तरों पर बैकअप होता है, पर डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा एक कमजोर कड़ी पर टिक गई थी। एक साधारण-सा टेक्स्ट मैसेज आया और उनकी पूरी डिजिटल पहचान उनसे छिन गई। पढ़िए उनकी कहानी और एक्सपर्ट से जानिए किन गलतियों से बचना चाहिए... मुझे गोल्डमैन साक्स एपल कार्ड पर एक संदिग्ध लेन-देन का ‘फ्रॉड अलर्ट’ मैसेज मिला। मैसेज में सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देने को कहा गया था। सुरक्षा के लिए मैंने ‘ना’ लिखकर भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद कॉल आया। कॉलर आईडी पर एपल कार्ड सपोर्ट का नंबर दिख रहा था। मुझे शक नहीं हुआ, क्योंकि मैसेज भी उसी आधिकारिक i Message थ्रेड में एपल लोगो व ग्रे बबल के साथ आ रहे थे। कॉलर ने कहा कि मेरी पहचान सत्यापित करने के लिए कोड भेजा जा रहा है। जैसे ही कोड बताया, सब कुछ बदल गया। मैंने पहचान पूछी, तो उसने मेरा सोशल सिक्योरिटी नंबर व जन्मतिथि तक बता दी। तब लगा कि मैं ठगी का शिकार हो चुका हूं। आंखों के सामने मेरी पूरी डिजिटल दुनिया बिखरने लगी। मैं देख रहा था कि एपल वॉलेट से कैश एप, वीसा कार्ड और एपल कार्ड एक-एक करके गायब हो रहे थे। हैकर ने मेरे अकाउंट में अपना फोन नंबर जोड़ दिया और मेरा नंबर हटा दिया। कुछ ही देर बाद मैं अपने ही अकाउंट से बाहर हो गया। मेरा आईफोन रीसेट हो गया और बेकार डिवाइस बनकर रह गया। मैं बिना डिजिटल वॉलेट व पैसों के होनोलूलू पहुंचा। किसी तरह लैपटॉप पर वाई-फाई जोड़कर पत्नी को मैसेज किया। उन्होंने मेरे लिए उबर बुक की। एपल स्टोर पहुंचने पर पता चला कि हैकर ने फोन पर एक्टिवेशन लॉक लगा दिया है। पहचान व खरीद के सबूत दिखाने के बावजूद एपल कर्मचारी मदद नहीं कर सके। नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। हैकर के हाथ मेरी एक लाख से ज्यादा फैमिली फोटो, पासवर्ड और मैसेज हिस्ट्री लग चुकी थी। उसने मेरे निवेश बेचकर नकदी निकाल ली। पत्नी को मेरे नाम पर मैसेज भेजकर हजारों डॉलर ठग लिए। मेरे अकाउंट खाली हो गए। स्मार्टवॉच का डेटा हटा दिया, इससे वह मुझे नहीं पहचान सकी। पुलिस भी मदद नहीं कर सकी।’- रेयान ऑथेंटिकेटर एप रखें साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट केविन मिटनिक सुझाव देते हैं,‘अपने डिजिटल वर्ल्ड की एक ‘मास्टर की’ न रखें। लॉगिन हैक होते ही बैंक, फोटो व डेटा खतरे में पड़ सकते हैं; सभी खाते अलग रखें। हार्डवेयर सिक्योरिटी की या ऑथेंटिकेटर एप इस्तेमाल करें, जिससे पासवर्ड व नंबर लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। कॉलर आईडी पर दिखने वाले नाम या नंबर पर भरोसा न करें। बैंक या संस्थान को कॉल करके जांच कर लें।
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की मांग तेज
यह केवल विचारधारा की बात भी नहीं है। यह इस बारे में नहीं है कि कोई प्रशासन की व्यापक नीतियों का समर्थन करता है या विरोध।
ईरान जंग ने तोड़ा नाटो और अमेरिका का रिश्ता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह ईरान पर छिड़ी जंग को खत्म करने का ऐलान कर सकते हैं
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

