बहराइच में वारिस पंजाब दे संगठन का सदस्य गिरफ्तार:भारत-नेपाल सीमा पर अमेरिकी नागरिक समेत 5 पकड़े गए
बहराइच में गुरुवार शाम भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रूपईडीहा चेकपोस्ट पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी एक इनोवा वाहन में सवार होकर जा रहे थे। जांच के दौरान उनके पास वैध दस्तावेज नहीं मिले। सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में 'वारिस पंजाब दे' संगठन से जुड़ा विक्रमजीत सिंह भी शामिल है। हालांकि इस मामले पर जिले के किसी भी अधिकारी ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अब जानिए पूरा मामला… पंजाब के रूपनगर का निवासी विक्रमजीत सिंह वर्ष 2023 में अजनाला थाने पर हुए हमले के मामले में लंबे समय से वांछित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह नेपाल में फर्जी पहचान और दस्तावेजों का उपयोग कर छिपा हुआ था। गिरफ्तार किए गए लोगों में अमेरिकी नागरिक मनवीर सिंह ढिल्लों भी शामिल है, जो मोगा, पंजाब का मूल निवासी है। वह बिना वैध वीजा के नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा था। मनवीर की अमेरिकी नागरिक पत्नी और बच्ची भी उनके साथ थीं। चूंकि उनके पास वैध दस्तावेज थे, इसलिए उन्हें आव्रजन नियमों के तहत भारत में प्रवेश की अनुमति दी गई और वे लखनऊ के लिए रवाना हो गए। इनोवा वाहन में सवार दो अन्य लोग रूपईडीहा थाना क्षेत्र के निवासी थे और वे मनवीर सिंह ढिल्लों को भारत में प्रवेश कराने में मदद कर रहे थे। वाहन चालक को भी हिरासत में लिया गया है। इन तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि मामले को लेकर दैनिक भास्कर ने जब एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव के सीयूजी नंबर पर शाम 7:37 मिनट पर फोन किया तो पीआरओ ने कॉल रिसीव की। उन्होंने कहा- एसपी ही मामले की जानकारी दे पाएंगे। ------------------------ ये खबर भी पढ़ेंः- बॉयफ्रेंड को बंधक बनाकर NEET छात्रा से गैंगरेप, चित्रकूट घूमने आए थे; पहाड़ी पर तीन युवकों ने वनकर्मी बताकर धमकाया यूपी के चित्रकूट में बॉयफ्रेंड को बंधक बनाकर NEET छात्रा के साथ तीन युवकों ने गैंगरेप किया। पुलिस के मुताबिक, 20 साल की छात्रा बॉयफ्रेंड के साथ पहाड़ी पर बैठी थी, तभी आरोपी पहुंचे। खुद को वनकर्मी बताकर उन्हें धमकाया। बॉयफ्रेंड को बेल्ट से पीटा और उसके हाथ-पैर गमछे से बांध दिए। तीनों छात्रा को घसीटते हुए झाड़ियों में ले गए। दरिंदगी की। पढ़ें पूरी खबर…
ईडी भोपाल ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के प्रावधानों के अंतर्गत प्रदेश के जबलपुर से प्रियंक मेहता के खिलाफ कार्यवाही करते हुए 5,02,954 अमेरिकी डॉलर यानी 3.67 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति जब्त की है। मेहता ने अमेरिका के वीजा कार्यक्रम में निवेश के लिए करीब साढ़े पांच लाख डालर विदेश भेजे थे। इसके बाद पुर्तगाल में प्रॉपर्टी खरीदी गई और विदेशी बैंक में पैसा जमा किया गया। ईडी ने यह कार्रवाई आयकर विभाग से मिली सूचना और ईडी की जांच के आधार पर की है। ईडी की जांच में सामने आया है कि प्रियंक मेहता ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के अंतर्गत अमेरिका के EB-5 वीजा कार्यक्रम में निवेश के लिए 5,48,000 अमेरिकी डॉलर विदेश भेजे थे। ईडी के मुताबिक, जांच में यह पता चला कि भेजी गई राशि में से 5,02,954 अमेरिकी डॉलर, उस काम में उपयोग नहीं लाए गए, जिसके लिए भेजे गए थे। पुर्तगाल में खरीदी संपत्ति ईडी की जांच के अनुसार, अमेरिका से वापस हुई राशि को भारत वापस लाने के बजाय सीधे पुर्तगाल भेज दिया गया। बाद में भारत से भेजी गई अतिरिक्त धनराशि के साथ इसे मिलाकर पुर्तगाल में अचल संपत्ति खरीदी गई। शेष राशि भी पुर्तगाल के एक विदेशी बैंक खाते में रखी गई। ईडी का कहना है कि विदेश में इस प्रकार विदेशी मुद्रा और संपत्ति का अधिग्रहण एवं उपयोग FEMA, 1999 की धारा 4 तथा धारा 10(6) का उल्लंघन है। 3.67 करोड़ की संपत्ति जब्त ईडी ने FEMA की धारा 37A(1) में जबलपुर स्थित प्रियंक मेहता की लगभग 3.67 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्ति जब्त कर ली है। ईडी के अनुसार, यह राशि विदेश में अवैध रूप से रखे गए 5,02,954 अमेरिकी डॉलर के बराबर है। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने और समुद्री जहाजों पर हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर बेहद सख्त नजर आ रहे हैं, जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिका को खुली धमकी दे डाली है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उसके बुनियादी ढांचे और ठिकानों पर हमले बंद नहीं किए, तो अमेरिका में साल 2001 के 9/11 जैसी तबाही और राष्ट्रीय शोक की स्थिति पैदा हो जाएगी। इस तीखी बयानबाजी के बाद पश्चिम एशिया (Middle East) में एक बड़े और विनाशकारी युद्ध की आशंकाएं और अधिक गहरी हो गई हैं।डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी और होर्मुज स्ट्रेट का विवादअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। ट्रंप ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यावसायिक या अन्य जहाज पर मिसाइल, रॉकेट या ड्रोन से हमला किया, तो अमेरिकी सेना ईरान के सभी प्रमुख पुलों, पावर प्लांट्स और तेहरान के आसपास के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को बमबारी कर मलबे में बदल देगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में ईरान समर्थित गतिविधियों के तहत 30 से अधिक जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिसके कारण जून में हुआ युद्धविराम समझौता भी खतरे में पड़ गया है। अमेरिका की साफ शर्त है कि जब तक ईरान जहाजों पर हमले रोककर होर्मुज में नौवहन सामान्य नहीं करता, तब तक सैन्य दबाव बना रहेगा।IRGC की परमाणु और बुनियादी ढांचे के हमलों पर खौफनाक प्रतिक्रियाडोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान के परमाणु ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की लगातार मिल रही धमकियों के बाद IRGC ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के पुलों और अंडरग्राउंड परमाणु ठिकानों जैसे अति-सुरक्षित 'पिकैक्स माउंटेन' पर बमबारी करने का दुस्साहस किया, तो ईरान इसका ऐसा करारा जवाब देगा जिससे अमेरिका को भारी पछतावा होगा और वहां राष्ट्रीय शोक का माहौल बन जाएगा। पिछले 12 दिनों से अमेरिकी सेना द्वारा दक्षिणी ईरान के विभिन्न हिस्सों में लगातार की जा रही बमबारी के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की सारी उम्मीदें धुंधली होती नजर आ रही हैं।
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा तनाव अब एक भयानक जंग का रूप लेता जा रहा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) द्वारा सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों और महत्वपूर्ण ठिकानों पर हालिया मिसाइल व ड्रोन हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में खलबली मच गई है। लेकिन इस क्षेत्रीय जंग की तपिश सबसे ज्यादा पाकिस्तान को झुलसा रही है। इस हमले के बाद शहबाज शरीफ सरकार बेहद घबराई हुई है और उसकी नींद उड़ गई है। आइए एक फॉरेन अफेयर्स और जियोपॉलिटिकल रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि आखिर सऊदी पर हुए इस हमले से पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका क्यों लगा है।1. घोर आर्थिक तंगी और तेल संकट का मंडराता भूतपाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से दबकर आईसीयू में है।तेल पर निर्भरता: पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों और कच्चे तेल (Crude Oil) के लिए लगभग पूरी तरह से खाड़ी देशों—खासकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—पर निर्भर है।रिफाइनरी पर हमले का असर: हूती हमलों के चलते सऊदी के तेल उत्पादन में रुकावट आती है या लाल सागर (Red Sea) का समुद्री व्यापार मार्ग पूरी तरह बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकते हैं।कंगाल होने का डर: पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) इतना भी नहीं है कि वह महंगे दामों पर तेल खरीद सके। यदि तेल महंगा हुआ, तो पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और अभूतपूर्व महंगाई वहां की जनता को सड़कों पर ला देगी।2. सऊदी से मिलने वाली 'खैरात' और वित्तीय मदद का रुकनापाकिस्तान का अस्तित्व फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज और सऊदी अरब द्वारा दी जाने वाली अरबों डॉलर की 'फाइनेंशियल बेलआउट' (आर्थिक मदद) पर टिका है।सऊदी अरब ने पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में अरबों डॉलर डिपॉजिट करवा रखे हैं और वह शहबाज सरकार को उधार (Deferred Payment) पर तेल मुहैया कराता है। लेकिन अगर सऊदी अरब खुद युद्ध और सुरक्षा संकट में उलझ जाता है, तो वह पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर रोक लगा सकता है। पाकिस्तान के लिए रियाध से मिलने वाली इस खैरात का बंद होना किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं होगा।3. अमेरिका और ईरान के बीच धर्मसंकट और 'सैंडविच' बना पाकिस्तानपाकिस्तान की सबसे बड़ी कूटनीतिक (Diplomatic) मजबूरी यह है कि उसकी सीमा एक तरफ ईरान से लगती है और दूसरी तरफ वह अमेरिका व सऊदी अरब का पिछलग्गू बना रहता है।ईरान से सीधी सीमा: पाकिस्तान की ईरान के साथ 900 किलोमीटर लंबी सीमा (सिस्तान-बलूचिस्तान बॉर्डर) साझा होती है। यदि अमेरिका ईरान पर पूर्ण युद्ध थोपता है, तो ईरान में होने वाली अस्थिरता का सीधा असर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जारी अलगाववादी हिंसा पर पड़ेगा।दोनों तरफ कुआं, एक तरफ खाई: अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा कि वह उसके सैन्य गठजोड़ का साथ दे या अपने हवाई अड्डों/एयरस्पेस का इस्तेमाल करने दे। लेकिन अगर पाकिस्तान अमेरिका का साथ देता है, तो ईरान उस पर हमला करने से परहेज नहीं करेगा। वहीं अगर वह न्यूट्रल (तटस्थ) रहता है, तो अमेरिका और सऊदी अरब उसकी आर्थिक डोर काट देंगे।
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 98 डॉलर पार:कतर से LNG सप्लाई भी अटकने की आशंका; महंगाई बढ़ सकती है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड आज 23 जुलाई को 4% बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह पिछले 6 हफ्तों में सबसे ज्यादा है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। कच्चे तेल के महंगे होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फ्यूल मार्जिन पर दबाव बढ रहा है। अगर लंबे समय तक क्रूड महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला, हूतियों ने नाकेबंदी का ऐलान किया तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का बिगड़ता माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ अब यह विवाद फारसी खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है। यह हमला हुती ग्रुप की ओर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी की घोषणा करने के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। तेल कंपनियों के शेयर 2.5% तक टूटे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है… भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। अक्टूबर तक LNG सप्लाई अटकने के आसार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर एनर्जी मिड-अक्टूबर तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के शिपमेंट पर 'फोर्स मैज्योर' को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कतर ने जून में ही एशिया और यूरोप के कुछ ग्राहकों को सूचित किया था कि अगस्त और सितंबर के कार्गो रद्द रहेंगे। अगर यह पाबंदी अक्टूबर तक खिंचती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले गैस का ग्लोबल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि यूरोप और एशियाई देश सीमित LNG सप्लाई के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे। सेंसेक्स 364 और निफ्टी 127 अंक गिरी कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया है। 23 जुलाई को सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 76,391 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 127 अंक की गिरावट रही, ये 23,870 पर बंद हुआ। रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। आगे क्या? पश्चिम एशिया में अगर यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग, ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सोना ₹274 बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंचा: 4 दिन में ₹4,398 महंगा हो चुका, चांदी आज ₹360 चढ़कर ₹2.26 लाख पर पहुंची सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 23 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 360 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 274 रुपए चढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 4 दिन में सोना 4,398 रुपए और 10,346 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत पंजाबी गैंगस्टर और तस्कर को अरेस्ट किया गया। अरेस्ट आरोपी की पहचान हरमनवीर के तौर पर हुई है। उसे 3 दिन पहले ही एफवीआई ने मोस्ट वांटेड घोषित किया था। इसके बाद पंजाबी गैंगस्टर और तस्कर हरमनवीर सिंह को कैलिफोर्निया हाईवे गश्त के अधिकारियों ने 21 जुलाई को सुबह स्टॉकटन, कैलिफोर्निया से गिरफ्तार कर लिया।हरमनवीर सिंह वैंकूवर के रहने वाले और पंजाबी मूल के तस्कर रविंदर ढांडा के साथ मिलकर काम कर रहा था। ये लोग इंडिया की लॉरेंस और जग्गू भगवानपुरिया गैंग के लिए पैसा लेकर काम करते हैं। बता दें कि ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत गिरफ्तार किए गए बीसी (ब्रिटिश कोलंबिया) के रविंदर ढांडा, जसकरण बागड़ी और गुरतेज समाग की प्रत्यर्पण पर 22 जुलाई को बीसी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। हालांकि, अदालत ने इस मामले की अदालती कार्यवाही को पब्लिशल बैन कर दिया है। 20 जुलाई को मोस्ट वांटेड लिस्ट में डाला था नामगौरतलब है कि FBI की लॉस एंजिल्स इकाई ने 20 जुलाई को हरमनवीर सिंह की तस्वीर के साथ एक मोस्ट वांटेड पोस्टर जारी किया था। उसकी गिरफ्तारी की यह बड़ी कार्रवाई कैलिफोर्निया हाईवे गश्त अधिकारियों द्वारा की गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, हरमनवीर पर प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की तस्करी, उन्हें कब्जे में रखने और अमेरिका से नशीले पदार्थों के निर्यात की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए गए हैं। फर्जी पहचान से रह रहा है हरमनवीरएफबाआई के अनुसार हरमनवीर सिंह कनाडा में कई फर्जी नामों से रह रहे हैं। एफबीआई के अनुसार आरोपी हरी गौतम और हरमन संधू जैसे फर्जी नामों से भी जाना जाता है। 23 जून 2026 को लॉस एंजिल्स (कैलिफोर्निया) की फेडरल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था। जानें रविंदर ढांडा गिरोह का नेटवर्कट्रकों के जरिए नशे की बड़ी खेप को अमेरिका से कनाडा पहुंचाते हैं- एफबीआई के मुताबिक रविंदर ढांडा मूल रूप से पंजाब का है और लंबे समय से कनाडाई नागरिक है। इका नेटवर्क वैंकूवर (कनाडा) से आपरेट होता है। यह नेटवर्क अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में बड़े पैमाने पर कोकीन और मेथमफेटामाइन की तस्करी के लिए जिम्मेदार है। इस सिंडिकेट द्वारा हर हफ्ते 100 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स को लंबे ट्रकों के जरिए भारत-लिंक्ड नेटवर्क की मदद से सीमा पार भेजा जाता था। जानें क्या है ऑपरेशन हार्ड बॉल अमेरिकी न्याय विभाग और FBI की तरफ कनाडा और अन्य देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर तस्करों और अपराधियों को पकड़ने के लिए एक संयुक्त अभियान चलाया गया। इसको आपरेशन हार्ट बाल नाम दिया गया। इस आपरेशन में 37 अपराधियों/सस्पेक्ट्स को नामजद किया गया था। यह ऑपरेशन लॉरेंस, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर ढांडा जैसे भारत आधारित और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट्स के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए चलाया गया है। अमेरिका में कुल 24 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। इसके साथ ही गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को पकड़ने के लिए एक तलाशी अभियान भी शुरू किया गया था, जिसके तहत FBI ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर 50 हजार डालर के इनाम की घोषणा की थी। जानें हरमनवीर सिंह कौन है?FBI के अनुसार, हरमनवीर सिंह इंटरनेशनल आपराधिक संगठन में शामिल होने के लिए वांटेड है, जो प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के वितरण और उन्हें वितरण के इरादे से अपने पास रखने की साजिश में लिप्त था। 31 वर्षीय यह आरोपी हरी गौतम और हरमन संधू जैसे फर्जी नामों का भी इस्तेमाल करता है। FBI ने आगे बताया कि सिंह रविंदर ढांडा गैंग के लिए ड्रग तस्करी का काम करता है। ढांडा समूह कथित तौर पर पूरे अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में ड्रग तस्करी संगठनों के लिए कोकीन और मेथमफेटामाइन की तस्करी करता था।
मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर खुद अमेरिका के भीतर ही तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ ट्रंप प्रशासन पारंपरिक रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर नकेल कसने के लिए कड़े तेवर अपनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब के साथ किसी नई न्यूक्लियर डील या रक्षा समझौतों को लेकर दिखाए जा रहे दुलार ने अमेरिकी सियासत में हंगामा मचा दिया है। वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक इस दोहरे रवैये पर बहस छिड़ गई है कि आखिर ट्रंप की इस रणनीति के पीछे का असली मकसद क्या है और इससे वैश्विक सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।ईरान पर कड़ा रुख और अधिकतम दबाव की नीतिट्रंप प्रशासन का ईरान के प्रति रवैया हमेशा से आक्रामक रहा है। वाशिंगटन का मानना है कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों और उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों पर लगाम कसना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि ईरान पर लगातार आर्थिक प्रतिबंधों का चाबुक चलाया जा रहा है और किसी भी प्रकार की नरमी बरतने से साफ इनकार किया जा रहा है। अमेरिकी रणनीतिकारों का तर्क है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उस पर 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) बनाए रखना ही एकमात्र विकल्प है, ताकि मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों और उसके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।सऊदी अरब के साथ न्यूक्लियर डील पर क्यों मचा है बवाल?विवाद की असल जड़ सऊदी अरब के साथ होने वाले संभावित परमाणु और रणनीतिक समझौतों से जुड़ी है। आलोचकों और अमेरिकी सांसदों का सवाल है कि यदि ईरान पर परमाणु प्रसार को लेकर इतनी सख्ती बरती जा रही है, तो रियाद के साथ ऐसी किसी भी डील को हरी झंडी क्यों दी जा रही है जिससे भविष्य में पश्चिम एशिया में हथियारों की होड़ और तेज हो सकती है। अमेरिकी कांग्रेस और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के समझौते से क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है और न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन (परमाणु प्रसार रोकने) के अंतरराष्ट्रीय नियमों पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।अमेरिकी राजनीति में उठ रहे हैं तीखे सवालडोनाल्ड ट्रंप की इस दोहरी और व्यावहारिक कूटनीति ने डेमोक्रेट्स के साथ-साथ कई रिपब्लिकन नेताओं को भी असहज कर दिया है। घरेलू स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के नाम पर अमेरिका अपने ही सिद्धांतों से समझौता कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह डील आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि मध्य पूर्व के देशों के बीच शक्ति संतुलन को साधने की यह कोशिश अमेरिका को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भारी पड़ सकती है।
10 हाथियों जितना बारूद और तबाही का खौफ: अमेरिका ने ईरान में उतारा कोल्ड वॉर का खतरनाक B-1 बॉम्बर
मध्य पूर्व में सुलग रही जंग की आग अब अपने सबसे खतरनाक और विनाशकारी दौर में पहुंच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खुलकर खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने अपनी ताकत का ऐसा खौफनाक प्रदर्शन किया है जिसे देखकर पूरी दुनिया के होश उड़ गए हैं। अमेरिका ने ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए शीत युद्ध (Cold War) के दौर के अपने सबसे घातक और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट 'B-1 लांसब्रिर' यानी B-1 बॉम्बर को मैदान में उतार दिया है। इस सुपरसोनिक बॉम्बर की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अपने साथ करीब 10 हाथियों के वजन के बराबर यानी मीट्रिक टन बारूद और विस्फोटक लेकर उड़ने की क्षमता रखता है।क्या है B-1 बॉम्बर की खासियत और क्यों कांप रहे हैं दुश्मन?बी-1 लांसर (B-1 Lancer) अमेरिकी वायुसेना का एक ऐसा भारी-भरकम और सुपरसोनिक बॉम्बर है, जो अपनी भीषण मारक क्षमता और सटीक निशाना साधने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। शीत युद्ध के समय सोवियत संघ को टक्कर देने के लिए बनाए गए इस विमान को आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक एवियोनिक्स से लैस किया गया है। यह बॉम्बर बिना किसी रोक-टोक के दुश्मन के आसमान में कोहराम मचा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक हथियारों और गाइडेड मिसाइलों का एक ऐसा विशाल जखीरा अपने पेट में छिपाकर चलता है, जो कुछ ही पलों में किसी भी देश के सैन्य ठिकानों, बंकरों और एयरबेस को मलबे के ढेर में बदल सकता है।ईरान के IRGC अड्डों पर अमेरिका की भारी एयरस्ट्राइकअमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के बाद ईरान समर्थित मिलिशिया और IRGC के ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और बमबारी की गई है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए वाशिंगटन ने इस बार सीधे तौर पर रणनीतिक बमवर्षकों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, B-1 बॉम्बर ने अपनी भारी-भरकम मारक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए ईरान से जुड़े रणनीतिक कमांड सेंटर्स, हथियार डिपो और खुफिया ठिकानों को पूरी तरह स्वाहा कर दिया है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।मध्य पूर्व में तीसरे विश्व युद्ध जैसे मंडरा रहे हैं काले बादलअमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत ने ग्लोबल लेवल पर एक नए युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। जिस तरह से अमेरिका ने अपने सबसे बड़े और विध्वंसकारी बॉम्बर को इस संघर्ष में झोंक दिया है, उससे साफ जाहिर है कि आने वाले दिनों में यह जंग और अधिक भयानक रूप ले सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तनाव को कूटनीतिक स्तर पर जल्द नहीं रोका गया, तो यह मध्य पूर्व की सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट आ खड़ा हुआ है।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
व्यापार वार्ता में अमेरिकी सोडा ऐश पर भारत के प्रस्तावित प्रतिबंध का मुद्दा उठाएगा ट्रंप प्रशासन
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि वह भारत सरकार से अमेरिका से आने वाले 'सोडा ऐश' पर प्रस्तावित आयात प्रतिबंधों को लेकर अपनी चिंता जताएगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बुधवार को सांसदों से कहा कि यह मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापक व्यापार वार्ताओं का हिस्सा होगा।
जॉर्डन के अमेरिकी एयर बेस पर हमले में भारतीय मूल की अमेरिकी सार्जेंट लापता, मौत की आशंका
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के मुताबिक, भारतीय मूल की अमेरिकी सैनिक एंजेला रामप्रसाद के जॉर्डन में एक सैन्य अड्डे पर हुए ईरानी हमले में मारे जाने की आशंका है।
लुधियाना के जगराओं में जीटी रोड पर स्थित मशहूर 'बाबा चिकन' रेस्टोरेंट पर हथियारों के बल पर कब्जा करने, धमकियां देने और फिरौती मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अमेरिका में बैठे एक व्यक्ति ने मैनेजर के साथ मिलकर रेस्टोरेंट पर कब्जा करने की साजिश रची। पीड़ित मालिक की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए थाना सिटी पुलिस ने 2 नामजद आरोपियों और 3 अज्ञात समेत कुल 5 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया है। नामजद आरोपियों की पहचान लुधियाना के पंडोरी गांव निवासी वरिंदरपाल सिंह उर्फ हैप्पी और तेजिंदर सिंह उर्फ सन्नी के रूप में हुई है। गांव रसूलपुर (मल्ला) निवासी पीड़ित जसप्रीत सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वे मेन जीटी रोड पर बाबा चिकन रेस्टोरेंट चलाते हैं। उनके बड़े भाई राजविंदर सिंह उर्फ राजा की दोस्ती वरिंदरपाल सिंह उर्फ हैप्पी से थी, जो पंडोरी में मैरीविला पैलेस और एक रेस्टोरेंट चलाता है। जसप्रीत ने बताया कि शुरुआत में रेस्टोरेंट कारोबार का ज्यादा अनुभव न होने के कारण उन्होंने भाई के कहने पर हैप्पी से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने हैप्पी पर आंख मूंदकर भरोसा किया और उसे अपने कारोबार में शामिल कर लिया। आरोप है कि हैप्पी ने इसी भरोसे का फायदा उठाकर धीरे-धीरे अपने कर्मचारियों को बाबा चिकन रेस्टोरेंट में तैनात करवा दिया। हिसाब मांगा तो अमेरिका से भेजे हथियारबंद बदमाश जब रेस्टोरेंट बढ़िया चलने लगा, तो वरिंदरपाल सिंह उर्फ हैप्पी की नीयत खराब हो गई और उसने पूरे कारोबार पर कब्जा करने की साजिश रच डाली। जब जसप्रीत ने मैनेजर से रेस्टोरेंट का हिसाब-किताब मांगा, तो मैनेजर ने तुरंत इसकी जानकारी अमेरिका में मौजूद वरिंदरपाल सिंह उर्फ हैप्पी को दे दी। इसके बाद हैप्पी ने अमेरिका से ही अपने गुर्गों को रेस्टोरेंट पर कब्जा करने के लिए भेज दिया। आरोपी हथियार लेकर रेस्टोरेंट पहुंचे और जबरन ऑफिस में घुसकर स्टाफ को डराने-धमकाने लगे। कर्मचारियों के सामने कहा- 'अब सन्नी है रेस्टोरेंट का नया मालिक' पीड़ित के मुताबिक, हथियारबंद आरोपियों ने वहां मौजूद कर्मचारियों और लोगों के सामने सरेआम ऐलान कर दिया कि अब इस रेस्टोरेंट का मालिक जसप्रीत सिंह नहीं, बल्कि तेजिंदर सिंह उर्फ सन्नी है। आरोपियों ने धमकी दी कि अगर जसप्रीत दोबारा रेस्टोरेंट में आया या हिसाब-किताब मांगने की कोशिश की, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। परिवार दहशत में, कारोबार हुआ प्रभावित जसप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपी लगातार उन्हें और उनके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं और उनसे बड़ी रकम की फिरौती मांग रहे हैं। आरोपियों ने न तो रेस्टोरेंट का हिसाब दिया और उल्टा पूरा कारोबार हड़पने की नीयत से धोखाधड़ी की। इस गुंडागर्दी के कारण उनका चलता हुआ कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और पूरा परिवार खौफ के साए में है। पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच शुरू थाना सिटी पुलिस ने जसप्रीत सिंह की शिकायत के आधार पर मुख्य आरोपी वरिंदरपाल सिंह उर्फ हैप्पी, तेजिंदर सिंह उर्फ सन्नी और तीन अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329(3), 308(4), 318(4), 351(2), 62 और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
समस्तीपुर में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर विभिन्न किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन किया। किसानों ने शहर में विरोध मार्च निकाला और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के अंत में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया गया। किसानों का विरोध मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए स्टेशन चौक पहुंचा, जहां एक सभा आयोजित की गई। सभा में किसान नेताओं ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते को देश के किसानों, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया। उन्होंने इस समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ऐसे समझौतों से देश की कृषि व्यवस्था पर कॉरपोरेट कंपनियों का प्रभाव बढ़ेगा और छोटे-मध्यम किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। अधिग्रहण की योजनाओं को वापस लेने की भी मांग नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि किसान संगठन खेती और कृषि भूमि को कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपने की किसी भी नीति का पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने बिहार में प्रस्तावित 12 सैटेलाइट टाउनशिप और टोपो लैंड के नाम पर लैंड पूलिंग के माध्यम से कृषि भूमि के कथित अधिग्रहण की योजनाओं को वापस लेने की भी मांग की। उनका तर्क था कि किसानों की सहमति के बिना कृषि भूमि का उपयोग बदलना अस्वीकार्य होगा। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने शिक्षा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की। इसके अतिरिक्त, छात्रों के प्रदर्शन पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी इस्तीफे की मांग की गई।
केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही रणनीतिक नीतियों के खिलाफ पंजाब में एक बार फिर किसानों का उग्र रूप देखने को मिल रहा है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (व्यापार समझौते) के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के देशव्यापी आह्वान के बाद पंजाब के विभिन्न हिस्सों में किसानों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कई प्रमुख राजमार्गों पर स्थित टोल प्लाजा को पूरी तरह से फ्री करवा दिया, जिससे वाहन चालकों को टोल टैक्स नहीं देना पड़ा। किसानों के इस आक्रामक तेवर से स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों में भी हड़कंप मच गया है।संयुक्त किसान मोर्चा का बड़ा प्रदर्शन, टोल प्लाजा पर कब्जासंयुक्त किसान मोर्चा द्वारा दिए गए निर्देश के तहत पंजाब के अलग-अलग जिलों में सुबह से ही किसान संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इकट्ठा होने शुरू हो गए थे। किसानों का आरोप है कि इस ट्रेड डील से देश के छोटे किसानों, कृषि क्षेत्र और घरेलू उद्योगों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए किसानों ने टोल प्लाजा पर पहुंचकर बैरिकेडिंग हटा दी और कंपनियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान घंटों तक टोल प्लाजा पर वाहनों का आवागमन बिना किसी शुल्क के होता रहा, जिससे यातायात व्यवस्था भी काफी प्रभावित हुई।स्थानीय प्रशासन और पुलिस रही सतर्क, शांति बनाए रखने की अपीलकिसानों के इस अचानक और आक्रामक प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह से सतर्क नजर आया। कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए, इसके लिए टोल प्लाजा और संवेदनशील स्थानों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। हालांकि, किसानों का प्रदर्शन मुख्य रूप से शांतिपूर्ण ढंग से नारेबाजी और धरने के रूप में जारी रहा, लेकिन प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखा। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि आम जनता और यात्रियों को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।कृषि सेक्टर पर संकट का हवाला देकर सरकार पर बोला हमलाधरना प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने किसानों के हितों के खिलाफ जाकर इस ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। उनका मानना है कि विदेशी समझौतों के कारण देश का कृषि बाजार प्रभावित होगा और स्थानीय उत्पादों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पंजाब से उठी इस विरोध की चिंगारी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है, और आने वाले दिनों में किसान संगठनों की अगली रणनीतियों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
पटियाला में संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के न्यू मोती बाग पैलेस के बाहर धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ रोष जताया। प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पूर्व सांसद परनीत कौर का निवास भी प्रदर्शन स्थल के पास स्थित था। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। डील से व्यापारियों के हित प्रभावित होंगे किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील से देश के किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के हित प्रभावित होंगे। उन्होंने इस समझौते को किसानों के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। भाजपा नेताओं के घरों के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किए संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि बुधवार को पूरे पंजाब में भाजपा नेताओं के घरों के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किए गए। इसके अलावा, कई टोल प्लाजा को तीन घंटे के लिए टोल फ्री करवाया गया। किसान नेताओं ने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी कड़ी निंदा की। आवाज उठाने वालों को दबाना उचित नहीं उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वालों को दबाना उचित नहीं है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की चर्चित फिल्म ‘किंग’ अब अपने अंतिम शूटिंग चरण में पहुंच गई है। इंडस्ट्री से मिली जानकारी के अनुसार...‘फिल्म का आखिरी इंटरनेशनल शेड्यूल अगस्त में अमेरिका में शूट किया जाएगा। इसके लिए मेकर्स कई लोकेशनों पर तैयारी कर रहे हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो इस शेड्यूल के साथ निर्देशक सिद्धार्थ आनंद की इस एक्शन थ्रिलर की मुख्य शूटिंग पूरी हो जाएगी। इसके बाद पूरी टीम पोस्ट-प्रोडक्शन, वीएफएक्स और फिल्म को अंतिम रूप देने के काम में जुट जाएगी। इससे पहले फिल्म का एक अहम शेड्यूल जॉर्जिया में पूरा किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, फिल्म की ज्यादातर शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब केवल क्लाइमैक्स का बड़ा एक्शन सीक्वेंस फिल्माया जाना बाकी है। यही वजह है कि मेकर्स लोकेशन चुनने में पूरी सावधानी बरत रहे हैं।’ जॉर्जिया में पूरा हुआ अहम शूटिंग शेड्यूल इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार ‘फिल्म का बड़ा हिस्सा पहले ही जॉर्जिया में शूट किया जा चुका है। अप्रैल और मई के दौरान फिल्म की यूनिट ने वहां कई हफ्तों तक लगातार शूटिंग की, जिसमें बड़े एक्शन और ड्रामेटिक सीक्वेंस फिल्माए गए। इस विदेशी शेड्यूल को फिल्म की प्रिंसिपल फोटोग्राफी का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। जॉर्जिया जाने से पहले मुंबई के महबूब स्टूडियो में भी एक महत्वपूर्ण एक्शन ब्लॉक शूट किया गया था, जिसकी पुष्टि उस समय शाहरुख खान के करीबी सूत्रों ने की थी। सूत्रों का कहना है कि फिल्म की टीम पिछले साल जनवरी से इस प्रोजेक्ट पर लगातार काम कर रही है। अब शूटिंग अपने आखिरी चरण में है और अगस्त में प्रस्तावित अमेरिका शेड्यूल के पूरा होते ही फिल्म की मुख्य शूटिंग खत्म हो जाएगी।’ स्टूडियो में फिल्माए गए बड़े एक्शन सीन यूनिट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिल्म का एक अहम शेड्यूल मुंबई के यशराज स्टूडियो में पूरा किया गया। यह शूटिंग छह दिनों तक चली, जिसमें बड़े पैमाने पर हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस फिल्माए गए। शूटिंग का काम रोज देर रात शुरू होकर तड़के करीब साढ़े चार बजे तक चलता था। इस शेड्यूल में शाहरुख खान ने चार दिनों तक शूटिंग की, जबकि शुरुआती दो दिनों में स्टंट टीम और अन्य कलाकारों के हिस्से के दृश्य फिल्माए गए। पूरे एक्शन ब्लॉक के लिए अत्याधुनिक ग्रीन स्क्रीन तकनीक का इस्तेमाल किया गया, ताकि बाद में विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) की मदद से दृश्यों को और भव्य तथा बड़े पैमाने पर पेश किया जा सके। बता दें कि इस फिल्म में शाहरुख के साथ उनकी बेटी सुहाना खान लीड रोल में नजर आएंगी। पोस्ट-प्रोडक्शन पर रहेगा अगला बड़ा फोकस अंतिम इंटरनेशनल शेड्यूल पूरा होने के बाद फिल्म का सबसे अहम तकनीकी चरण शुरू होगा। इसके तहत एडिटिंग, विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स), डिजिटल इंटरमीडिएट (DI), साउंड डिजाइन, डॉल्बी मिक्सिंग और बैकग्राउंड स्कोर पर कई महीनों तक काम किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक्शन फिल्मों के विजुअल स्टैंडर्ड के अनुरूप तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यही वजह है कि शूटिंग पूरी होने के बाद भी पोस्ट-प्रोडक्शन पर विशेष समय और संसाधन लगाए जाएंगे।
अमेरिका-भारत मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान आज चंडीगढ़ पहुंच गए। सेक्टर-35 स्थित किसान भवन से भाजपा कार्यालय की ओर मार्च निकाल रहे किसानों को पुलिस ने बीच रास्ते में बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की व झड़प हुई। यह प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान शामिल होने पहुंचे। जैसे ही किसान विकास भवन से आगे बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद किसानों ने वहीं सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। देखिए प्रदर्शन की 2 PHOTOS:- 3 पॉइंट में जानिए किसान नेताओं ने क्या कहा: -
वैश्विक रक्षा और सामरिक गलियारों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने सुपरपावर अमेरिका की मिलिट्री स्ट्रैटेजी और हथियारों की क्षमता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर सेना होने का दावा करने वाले अमेरिका को अब मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान के आक्रामक रवैये और उसकी उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा खुफिया और सैन्य रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान की काउंटर-रणनीति के आगे अमेरिकी रक्षा प्रणालियां उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं जैसी उम्मीद की जा रही थी, जिसके चलते अब वाशिंगटन को यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले अनुभवों और इनपुट्स का सहारा लेना पड़ रहा है।ईरान की उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने अमेरिकी एयर डिफेंस पर उठे सवालबीते कुछ समय में ईरान ने अपनी स्वदेशी मिसाइल तकनीक और कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोन्स की क्षमता को बेहद घातक स्तर पर पहुंचा दिया है। खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर में अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों पर हुए हमलों ने यह साबित किया है कि ईरान के सस्ते लेकिन अत्यधिक प्रभावी ड्रोन्स को रोकने में अमेरिका के महंगे पैट्रियट (Patriot) और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम्स को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान की इस झुंड-हमला (Swarm Attack) रणनीति ने अमेरिकी मिलिट्री टेक की कमियों को उजागर कर दिया है, जिससे वैश्विक मंच पर वाशिंगटन की साख को बड़ा झटका लगा है।यूक्रेन से सैन्य इनपुट्स और हथियारों के अनुभवों को साझा करने की आई नौबतइस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह आया है कि अमेरिका अब यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले डेटा और सैन्य इनपुट्स पर निर्भर होने लगा है। यूक्रेन पिछले काफी समय से रूसी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईरानी ड्रोन्स (जैसे शाहेद-136) का सामना कर रहा है और उसने इन हवाई खतरों को मार गिराने की कुछ बेहद प्रभावी और कम खर्चीली तकनीकें विकसित की हैं। अमेरिकी सेना अब यूक्रेन के इसी अनुभव, काउंटर-ड्रोन डेटा और युद्ध रणनीति का बारीकी से अध्ययन कर रही है ताकि मिडिल ईस्ट में अपने हथियारों को ईरान के खिलाफ अपग्रेड कर सके। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सुपरपावर का इस तरह यूक्रेन के युद्ध डेटा पर निर्भर होना उसकी वर्तमान तैयारियों की पोल खोलता है।भारत और एशियाई देशों की सुरक्षा पर क्या होगा इसका सीधा असर?इस सैन्य गतिरोध का प्रभाव सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि नई दिल्ली, मुंबई और पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा रणनीतियों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। भारत हमेशा से ही अपनी रक्षा जरूरतों के लिए हथियारों के विविधीकरण (Diversification) पर जोर देता रहा है। अमेरिका के रक्षा उपकरणों में दिख रही इन कमियों के बाद, भारतीय सैन्य रणनीतिकार अब स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम (जैसे इंद्रजाल) और रूस-यूरोप के साथ रक्षा करारों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पश्चिमी देशों की सैन्य तकनीक के इस इम्तिहान ने वैश्विक बाजार में हथियारों की होड़ को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां अब महंगे से ज्यादा प्रभावी हथियारों की मांग बढ़ गई है।
महाशक्ति अमेरिका और सऊदी अरब में हुई ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील, मिडिल ईस्ट में बदला सत्ता का समीकरण
ग्लोबल पॉलिटिक्स और मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका और खाड़ी के दिग्गज सऊदी अरब के बीच एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील (परमाणु समझौता) पर सहमति बन गई है। इस समझौते के बाद अब खाड़ी देशों में शक्ति का संतुलन पूरी तरह बदलने वाला है। इस डील को न सिर्फ रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इसने इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।न्यूक्लियर डील के पीछे क्या है वॉशिंगटन और रियाद का बड़ा प्लान?इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते के तहत अमेरिका अब सऊदी अरब को असैन्य परमाणु तकनीक (Civil Nuclear Technology) ट्रांसफर करेगा। इसके साथ ही सऊदी अरब को अपने देश में ही यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की तकनीकी सहायता मिलने का रास्ता भी साफ हो सकता है। जानकारों का कहना है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर एक नई दिशा में ले जाना चाहते हैं। वहीं, जो बाइडन प्रशासन इस डील के जरिए मिडिल ईस्ट में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को पूरी तरह से काउंटर करना चाहता है, जिससे अमेरिकी वर्चस्व कायम रहे।पाकिस्तान के लिए क्यों लगा तगड़ा झटका और पत्ता साफ होने का डर?इस न्यूक्लियर डील का सबसे बड़ा और सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ता दिख रहा है। अब तक पाकिस्तान खुद को सऊदी अरब के सबसे करीबी सैन्य और परमाणु सुरक्षा कवच के रूप में पेश करता आया था। इतिहास गवाह है कि सऊदी अरब की वित्तीय मदद के दम पर ही पाकिस्तान ने अपना परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाया था, और बदले में वह सऊदी को सुरक्षा की गारंटी देता था। लेकिन अब अमेरिका के सीधे मैदान में आ जाने से सऊदी अरब की पाकिस्तान पर सैन्य और तकनीकी निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब से मिलने वाली मदद और उसकी कूटनीतिक अहमियत अब लगभग शून्य होने के कगार पर पहुंच गई है।भारत के लिए क्या हैं इस डील के मायने और लोकल इंपैक्ट?इस बड़ी ग्लोबल डील का असर दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत के रणनीतिक हितों पर भी देखने को मिलेगा। भारत और सऊदी अरब के रिश्ते हाल के दिनों में बेहद मजबूत हुए हैं, खासकर ऊर्जा और सुरक्षा के मोर्चे पर। अमेरिका-सऊदी की यह नजदीकी खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाएगी, जिससे वहां काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और भारत के कच्चे तेल के आयात को सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही, चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को कमजोर करने में यह डील भारत के लिए परोक्ष रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान और चीन इस अमेरिकी एंट्री का मुकाबला कैसे करते हैं।
बिहार विधानसभा में आज सूखे के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। विधायक वेल में आ गए। मुख्यमंत्री के बयान के बाद विधायक अपनी सीट पर बैठे। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक ने ही राज्य में किसानों को हो रही बिजली आपूर्ति की समस्या का मुद्दा उठाया। विधायक ने कहा कि कई इलाकों में किसानों को समय पर बिजली नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। विधायक के सवालों के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद सदन में जवाब देने के लिए खड़े हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार राज्य के कई हिस्सों में बारिश कम हुई है, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में बताया कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक लगातार बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसान अपने खेतों में समय पर पानी पहुंचा सकें और फसल को नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि जिन-जिन इलाकों में बारिश की कमी के कारण सुखाड़ जैसी स्थिति बन रही है, वहां के जिलाधिकारियों को रिपोर्ट तैयार कर भेजने का निर्देश दिया गया है। जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार तत्काल कदम उठाएगी और प्रभावित किसानों को राहत देने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में सूखे की स्थिति सामने आती है तो वहां किसानों को डीजल अनुदान देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे किसान डीजल पंप के माध्यम से खेतों की सिंचाई कर सकेंगे और अपनी फसलों को बचाने में मदद मिलेगी। BJP विधायक ने तेजस्वी पर कसा तंज बीजेपी विधायक बैधनाथ प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष के सदन में नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सदन से गायब हैं। वो अपने पद का निर्वाहन नहीं कर पा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष बिहार के विकास में अपना योगदान छोड़कर अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता कर रहे हैं। या कहीं बैठकर चेन की बंसी बजा रहे हैं। मंगलवार को बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, 2026 हुआ था पास इलके पहले मंगलवार को बिहार विधानसभा बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन में इस विधेयक को पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बदलते समय और तकनीक के अनुरूप राज्य में जुए पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नए कानून की आवश्यकता थी। उन्होंने सभी सदस्यों से विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की। विधेयक पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा था, अब तक राज्य में 1867 के बंगाल जुआ अधिनियम के प्रावधान लागू थे। उस समय जुए का स्वरूप मुख्य रूप से ताश, पासा और पारंपरिक तरीकों तक सीमित था। समय के साथ सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने जुए के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। आज ऑनलाइन ऐप, वेबसाइट और अन्य डिजिटल माध्यमों से बड़े पैमाने पर जुआ खेला जा रहा है, जिसे पुराने कानून के तहत प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना संभव नहीं था। नया विधेयक केवल जुआ खेलने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों और संस्थाओं को भी इसके दायरे में लाया गया है जो जुआ संचालित करते हैं, जुआ खेलने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हैं या जुए से कमीशन प्राप्त करते हैं। ऐसे सभी व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। ऑनलाइन जुआ खेलने वालों के ट्रांजेक्शन की राशि सीज की जाएगी। इसके साथ ही दूसरी बार पकड़े जाने पर 2 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। बार-बार जुआ खेलते पकड़े जाने पर जुर्माने की राशि बढ़ती जाएगी। पंचायत टैक्स वसूली पर सदन में हंगामा मानसून सत्र के दूसरे दिन पंचायत में टैक्स वसूली का मसला विधानसभा में उठा। माले विधायक ने कहा- इससे गरीबों पर बोझ बढ़ेगा। विपक्ष ने पंचायती कर, आकस्मिकता निधि पर चर्चा कराने की मांग की और कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया। प्रस्ताव अमान्य होने पर विपक्षी विधायक हंगामा करने लगे। वेल में आए। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार सदस्यों को सीट पर जाने को कहा। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि विधेयक आएगा तो चर्चा होगी। कोई कर लग रहा है तो विपक्ष संशोधन प्रस्ताव सदन में लाए। तब विपक्षी सीट पर लौटे। इधर, विधान परिषद में सूखे नशे का मुद्दा उठा। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने कहा, ‘बिहार में गांजा,चरस तो एकदम सामान्य है। मंदिरों के पास गांजे का धुआं उड़ रहा है।’ मंदिर, मठ-आश्रमों के नाम लेने पर बीजेपी विधायकों ने सुनील सिंह का विरोध किया। इस पर सुनील सिंह ने कहा कि मंदिर का सब पैसा आप लोग खा गए। सुनील कुमार सिंह ने आगे कहा कि बिहार सरकार पेट्रोल में 11 रुपए और डीजल पर 5 रुपए ज्यादा ले रही है। बिहार सरकार 200 करोड़ रुपए जनता से अधिक वसूल रही है। लंच ब्रेक के बाद इसी मुद्दे पर बीजेपी एमएलसी अनामिका सिंह और राजद एमएलसी मुन्नी रजक के बीच नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के चेंबर के बाहर खूब तू-तू मैं-मैं हुई।
मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब पूर्ण युद्ध (Full-Scale War) का रूप ले चुकी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire Agreement) पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अमेरिकी सैनिकों की मौत और होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में तेल के टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी सेना को 'आर-पार' की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। ट्रम्प ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि हर अमेरिकी सैनिक के खून का बदला ईरान से कई गुना भारी कीमत वसूल कर लिया जाएगा।अमेरिकी CENTCOM का बड़ा हमला: ईरान के सैन्य ठिकाने और कमान सेंटर तबाहअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के नेतृत्व में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचों पर लगातार भीषण एयरस्ट्राइक (Airstrikes) की है।मिलिट्री ऑपरेशन्स सेंटर पर बमबारी: अमेरिकी बमवर्षक विमानों और मिसाइलों ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्य सैन्य कमान केंद्रों, संचार प्रणालियों (Communication Networks) और खुफिया अड्डों को सीधा निशाना बनाया है।ड्रोन व मिसाइल लॉन्च पैड्स नष्ट: तटीय इलाकों में स्थित ईरान की एंटी-शिप मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस रडार और ड्रोन स्टोरेज डिपो पर ताबड़तोड़ हमले कर उन्हें नष्ट कर दिया गया है।नौसैनिक बेड़ों पर प्रहार: होर्मुज के आसपास गश्त लगा रही ईरानी नौसेना की कई गश्ती नौकाओं और नौसैनिक ढांचों को तबाह कर दिया गया है।होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में ठप हुआ वैश्विक तेल व्यापारदुनिया भर के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' इस समय युद्ध का केंद्र बन गया है। ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी यातायात पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अमेरिकी सेना जहां जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए लगातार बमबारी कर रही है, वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण ढीला नहीं करेगा। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।कूटनीति की राह बंद, मध्य पूर्व में महायुद्ध का खतराईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने बयान जारी कर माना है कि देश इस समय अमेरिका के साथ 'पूर्ण पैमाने के युद्ध' का सामना कर रहा है। यद्यपि मध्यस्थ देश (जैसे कतर और पाकिस्तान) कूटनीतिक बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी और रोजाना हो रही भारी बमबारी ने शांति की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है। खाड़ी के अन्य देशों (कुवैत, बहरीन और जॉर्डन) में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ड्रग्स के काले कारोबार और संगठित अपराधों के खिलाफ अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई अब भारत और कनाडा से जुड़े एक बड़े ड्रग रैकेट में शामिल भारतीय नागरिक हार्मनवीर सिंह की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आरोप है कि हार्मनवीर सिंह कनाडा में सक्रिय कुख्यात रविंदर धांडा गैंग के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क को संचालित करने में अहम भूमिका निभा रहा था।'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत की जा रही है बड़ी कार्रवाईएफबीआई की ओर से यह ताजा और सख्त कदम 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' (Operation Hard Ball) के तहत उठाया गया है। यह अभियान लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर धांडा जैसे कुख्यात अपराधियों द्वारा चलाए जा रहे ट्रांसनेशनल क्रिमिनल सिंडिकेट्स के खिलाफ अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चलाई जा रही एक समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई है।कनाडा से लेकर अमेरिका और मेक्सिको तक फैला है जालएफबीआई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, वांछित आरोपी हार्मनवीर सिंह एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन का हिस्सा है, जो नियंत्रित पदार्थों (Controlled Substances) के अवैध व्यापार, कब्जे और उनके निर्यात की बड़ी साजिश में शामिल रहा है। जांच में सामने आया है कि रविंदर धांडा का संगठित अपराध समूह मुख्य रूप से कनाडा के वैंकूवर से संचालित होता है। यह गैंग कथित तौर पर अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के विभिन्न हिस्सों में कोकीन और मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) जैसी प्रतिबंधित और खतरनाक ड्रग्स की बड़ी मात्रा में तस्करी करता है।इस महीने की शुरुआत में हुई थी 24 आरोपियों की गिरफ्तारीगौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका, कनाडा और यूरोप की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक संयुक्त और खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान भारत से जुड़े तीन ट्रांसनेशनल संगठित अपराध समूहों के कुल 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 अकेले कैलिफोर्निया राज्य से दबोचे गए थे। अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) ने अपने इस मेगा ऑपरेशन के तहत कुल 37 लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए हैं, जिसके बाद से अंतरराष्ट्रीय अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया से एक बेहद दिल दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आई है। कैलिफोर्निया में हुए एक भीषण सड़क हादसे में भारत के हैदराबाद शहर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलने के बाद से हैदराबाद स्थित उनके पैतृक आवास और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई है।हादसे में मां और दो बच्चों की मौत, पिता और छोटी बेटी घायलप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक सड़क दुर्घटना सोमवार रात (भारतीय समयानुसार) कैलिफोर्निया में हुई, जब परिवार की कार एक अन्य वाहन से जोरदार तरीके से टकरा गई। इस भीषण टक्कर में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान नाजिया सलमा, उनकी बेटी और उनके बेटे के रूप में हुई है। वहीं, नाजिया के पति शेख नवेद और उनकी छोटी बेटी इस भयानक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।10 साल पहले अमेरिका गए थे शेख नवेदमृतक परिवार के स्थानीय संपर्कों और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, शेख नवेद करीब 10 साल पहले तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के सैदाबाद इलाके से बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। सोमवार को वे अपने पूरे परिवार के साथ किसी यात्रा पर निकले थे, तभी यह अनहोनी घटित हो गई। जब परिवार के बुजुर्गों ने अमेरिका में उनसे संपर्क साधने की कोशिश की, तो वहां की स्थानीय पुलिस ने फोन पर इस सड़क दुर्घटना की दुखद सूचना दी।विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इमरजेंसी वीजा की गुहारइस बड़ी त्रासदी के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शेख नवेद के पिता शेख अब्दुल सईद ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पुरजोर अपील की है कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को अमेरिका की यात्रा के लिए तत्काल आपातकालीन (Emergency Visa) जारी किया जाए, ताकि वे इस संकट की घड़ी में वहां पहुंचकर पीड़ित परिवार की मदद कर सकें। इसके अलावा, मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी है और विदेश मंत्रालय से तुरंत वीजा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का दावा, तेहरान बातचीत के लिए बेचैन
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है, हालांकि वॉशिंगटन ने उस पर सैन्य दबाव बनाना जारी रखे हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने या मजबूत करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उन ठिकानों पर हमला करेगा। व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इस बात को खारिज कर दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने कहा, ईरान बहुत बुरी तरह से हमसे मिलना चाहते हैं। जब तक वे गंभीर और सही तरीके से बातचीत के लिए तैयार नहीं होते, तब तक हमारी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है। अगर हम अभी वहां से हट जाएं, तो भी ईरान को दोबारा सब कुछ बनाने में 20 से 25 साल लग जाएंगे। लेकिन हमारा काम अभी पूरा नहीं हुआ है। परमाणु गतिविधियों को लेकर चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा, कोई भी साइट जहां वे न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में सोच भी रहे हैं, हम उस पर बहुत, बहुत ताकत से हमला करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने परमाणु सेंट्रीफ्यूज किसी दूसरी जगह पहुंचा दिया है। तो ट्रंप ने कहा कि हो सकता है उन्होंने ऐसा किया हो। लेकिन जब तक उनके पास जरूरी सामग्री नहीं होगी, तब तक इसका कोई मतलब नहीं है। हम उस सामग्री पर नजर रखते हैं। असली चीज वही है। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वे परमाणु हथियार नहीं बना सकते। उनके पास ऐसा करने का कोई मौका नहीं है। बैठक में मौजूद अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डालता है, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। ईरान को बातचीत के कई मौके दिए गए हैं। अगर वे व्यापारिक जहाजों पर हमला करेंगे, तो हम उन पर दस गुना ज्यादा ताकत से जवाब देंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी बनी हुई है। नाकाबंदी को कोई पार नहीं कर पा रहा है। यह लोहे की मजबूत दीवार जैसी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने लाल सागर में हूती विद्रोहियों के दोबारा हमले की आशंकाओं को भी कम करके बताया। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। अगर ऐसा कुछ होता है, तो हमें उससे निपटना पड़ेगा। ट्रंप के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है। पिछले कई महीनों से ईरान, इजरायल और ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के बीच सैन्य टकराव जारी है।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर आज प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते और किसानों की लंबित मांगों को लेकर पंजाब समेत देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी के तहत लुधियाना जिले के लाडोवाल, गुल्लाल और चौकीमान टोल प्लाजा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक टोल फ्री रहेंगे। इस दौरान इन टोल प्लाजा से गुजरने वाले सभी छोटे-बड़े वाहन बिना टोल शुल्क दिए आवागमन कर सकेंगे। किसान संगठनों के नेताओं ने बताया कि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देते हुए किसान, मजदूर और कर्मचारी विरोधी नीतियां लागू कर रही है। विभिन्न मांगें लंबे समय से लंबित हैं प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, इसलिए किसान संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी विभिन्न मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार उनकी ओर ध्यान नहीं दे रही। इसी कारण संयुक्त किसान मोर्चा ने आज राज्यभर के टोल प्लाजाओं पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और उन्हें निर्धारित समय के लिए टोल मुक्त रखने का फैसला लिया है। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए लुधियाना में सुबह से ही किसान संगठनों के कार्यकर्ता तीनों टोल प्लाजा पर पहुंचने लगे। दोपहर 12 बजे से प्रदर्शन तेज होने के साथ बड़ी संख्या में किसान वहां एकत्र होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करेंगे। प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता और किसान विरोधी नीतियां वापस नहीं ली जातीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
हापुड़ में भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों और किसान नेताओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। मंगलवार दोपहर 12 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन तीन घंटे तक चला, जिसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया। गन्ना बकाया भुगतान की मांग संगठन के जिलाध्यक्ष जीते चौहान के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में किसानों की समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की गई। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी के लिए कानून बनाने पर जोर दिया गया। किसानों ने अमेरिका के साथ किसी भी ऐसी व्यापारिक डील का विरोध किया, जिससे भारतीय किसानों के हितों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका हो। ज्ञापन में खेती की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए किसानों और मजदूरों के लिए संपूर्ण कर्जमाफी और मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल थी। इसके अतिरिक्त, भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों की सहमति को अनिवार्य बनाने, बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने और जनपद में सर्किल रेट बढ़ाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। सिंभावली और बृजनाथपुर चीनी मिलों पर किसानों के बकाया गन्ना भुगतान को ब्याज सहित जल्द कराने की मांग की गई। किसानों ने आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान, बिजली विभाग की मनमानी, स्मार्ट मीटर के नाम पर बढ़ाए गए कनेक्शन शुल्क, तथा खाद एवं यूरिया की किल्लत और कालाबाजारी जैसे मुद्दों को भी उठाया। ज्ञापन में अवैध खनन, प्रतिबंधित पेड़ों के कटान और डग्गामार वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई। गंगा एक्सप्रेस-वे से संबंधित खामियों को दूर करने की मांग भी की गई। इसमें सर्विस रोड पर स्ट्रीट लाइट और स्पीड ब्रेकर लगाने, अंडरपास में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने और अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा कराने की मांग शामिल थी। जिलाध्यक्ष जीते चौहान ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो संगठन भविष्य में बड़े आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए बाध्य होगा। इस दौरान दिनेश त्यागी, कुशलपाल आर्य, धनवीर शास्त्री, बबली त्यागी, रिजवान, अनिल मिश्रा समेत अन्य लोग शामिल रहे।
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किसान प्रदर्शन में शामिल होने के लिए हरियाणा के विभिन्न जिलों से किसान मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट की ओर रवाना हुए। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर पुलिस प्रशासन ने किसानों को रास्ते में रोककर हिरासत में लिया, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान दिल्ली पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने वाले सभी किसानों का धन्यवाद भी किया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में सोनीपत और दिल्ली प्रशासन किसान घाट पर प्रस्तावित किसान प्रदर्शन को लेकर मंगलवार को पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में दिखाई दी। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली से लगने वाले हरियाणा के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। ट्रेड डील को लेकर अफवाहें फैलाने का लगाया आरोप सत्यवान नरवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक सरकार और किसान संगठनों के बीच किसी भी प्रकार की सहमति नहीं बनी है और न ही किसानों की कोई मांग मानी गई है। उन्होंने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास नहीं करने की अपील की। शाम तक वाहनों की संख्या हुई कम सोनीपत के कुंडली और सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर किसानों की राजधानी में एंट्री रोकी गई। शाम होते-होते नेशनल हाईवे-44 पर लंबा जाम लग गया। लेकिन कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर वाहनों की संख्या कम हो गई। वहीं सोनीपत के गोहाना क्षेत्र से दिल्ली जा रहे किसानों को भी रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की सख्ती का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई दिया। करीबन 3 बजे तक कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर लंबी वाहनों की कतारें लगी रही। नेशनल हाईवे पर करीब चार से पांच किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई। सामान्य दिनों में पांच मिनट में तय होने वाला सफर लोगों को 30 से 35 मिनट में पूरा करना पड़ा। कई वाहनों के चालान काटे गए इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई वाहनों की जांच की और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान भी किए। वहीं, किसान संगठनों के नेताओं को बॉर्डर पर ही रोककर हिरासत में लिया गया और पुलिस वाहनों के माध्यम से विभिन्न थानों में भेज दिया गया और सहमति बनने के बाद शाम को किसानों को छोड़ दिया गया। कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर कड़ी बैरिकेडिंग, दिल्ली में एंट्री पर रोक दिल्ली के सिंघु और कुंडली बॉर्डर पर सुबह से ही दिल्ली पुलिस की अतिरिक्त टीमें तैनात रहीं। दोनों सीमाओं पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया। किसानों के दिल्ली पहुंचने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने हर वाहन की गहन जांच की। किसानों के वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई और कई किसान नेताओं को बॉर्डर पर ही रोक लिया गया। सुरक्षा व्यवस्था के कारण सिंघु बॉर्डर पूरी तरह सील रहा, जिससे सर्विस रोड और मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं वाहनों की लंबी लाइनों, लोगों को हुई परेशानी पुलिस की नाकेबंदी का सबसे अधिक असर नेशनल हाईवे पर देखने को मिला। सुबह से ही ट्रकों, बसों और निजी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। करीब चार से पांच किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही। आम दिनों में पांच मिनट में पार होने वाला कुंडली-सिंघु बॉर्डर का रास्ता लोगों को 30 से 35 मिनट में तय करना पड़ा। भारी वाहनों के साथ-साथ कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई किसानों को बॉर्डर पर किया डिटेन दिल्ली पुलिस ने हरियाणा से दिल्ली की ओर जा रहे 10 से अधिक किसानों को बॉर्डर पर हिरासत में लिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष की गाड़ी को भी रोककर उन्हें डिटेन किया गया। हिरासत में लिए गए किसानों को पुलिस कैब और अन्य वाहनों के जरिए संबंधित थानों में भेज दिया गया। पुलिस ने पूरे इलाके में लगातार निगरानी रखी और किसी भी समूह को दिल्ली की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी। गोहाना में 40 से 50 किसान हिरासत में लिए उधर, गोहाना क्षेत्र से किसान संगठनों के सदस्य दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हुए थे। गांव बड़ोता के पास पहले से तैनात हरियाणा पुलिस ने किसानों के वाहनों को रोक लिया। इस दौरान किसानों और पुलिस अधिकारियों के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई, लेकिन किसानों को आगे जाने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद करीब 40 से 50 किसानों को हिरासत में लेकर पुलिस वाहनों के माध्यम से गोहाना सदर थाना ले जाया गया। किसानों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप गोहाना सदर थाना में हिरासत में रखे गए किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जा रहे थे, लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। किसानों का कहना है कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार को भी सीमित कर रही है। उनका आरोप था कि पहले छात्रों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई और अब किसानों को भी आंदोलन करने से रोका जा रहा है। एसीपी बोले- पूरी निगरानी की जा रही है एसीपी मलकीत सिंह ने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद घेराव के मद्देनजर कुंडली बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कड़ी है। पूरी निगरानी रखी जा रही है कि कोई असमाजिक तत्व दिल्ली में एंट्री न कर पाएं। वाहनों को चैक किया जा रहा है। गुरनाम सिंह चढ़ूनी और अन्य किसान नेताओं को किया गया रिहा उन्होंने बताया कि किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी सहित अन्य नेताओं को पुलिस द्वारा रिहा कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े अगले कदमों को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। देश बचाओ मोर्चा के बयान के बाद होगा अगला फैसला किसान नेता सत्यवान नरवाल ने कहा कि देश बचाओ मोर्चा पूरे देश के किसान संगठनों का साझा मंच है और अभी तक इस मंच की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही मोर्चे की ओर से कोई आधिकारिक स्टेटमेंट आएगी, उसके बाद ही आंदोलन की आगामी रणनीति और निर्णय की घोषणा की जाएगी। सरकार से अब तक कोई समझौता नहीं भाकियू (चढ़ूनी) के प्रदेश उपाध्यक्ष ने दोहराया कि फिलहाल सरकार और किसान संगठनों के बीच किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक किसी भी समझौते की बात करना पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
गाजियाबाद में पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे किसान दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। किसान आगे बढ़ने की जिद पर अड़ गए और बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश करने लगे। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। 20 मिनट तक मौके पर गहमा-गहमी का माहौल रहा। बाद में अधिकारियों ने किसानों को शांत कराया। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में देशभर के किसानों ने मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट तक कूच का ऐलान किया था। इसी प्रदर्शन में शामिल होने यूपी के किसान भी दिल्ली जा रहे थे। इसे देखते हुए दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस किसानों को आगे बढ़ने नहीं दे रही है। पहले प्रदर्शन की 3 तस्वीरें एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर/ट्रैफिक राज करन नैयर ने बताया- दिल्ली से सटे यूपी गेट और लोनी समेत 6 बॉर्डर हैं। सभी पॉइंट पर अलग-अलग पुलिस फोर्स तैनात की गई है। यातायात व्यवस्था बाधित न हो, इसलिए यातायात को सुचारू तरह से चलाया जा रहा है। जो किसान आए थे, उन्हें भी समझा-बुझाकर कुछ देर बाद वापस गाड़ियों से भेज दिया गया। यूपी गेट और अलग-अलग स्थानों पर पुलिस के 700 जवान तैनात किए गए हैं। ट्रैफिक व्यवस्था के लिए एक एसीपी, 3 इंस्पेक्टर और एक एडिशनल डीसीपी को अलग से जिम्मेदारी दी गई है। ----------------------- यह खबर भी पढ़ें- मां-पिता ने डांटा तो 2 बेटों ने पीट-पीटकर मार डाला:गाजियाबाद में पिता को गिराकर पीटा, बचाने आई मां पर लात घूसे बरसाए यूपी के गाजियाबाद में 2 बेटों ने मां और पिता की पीट-पीटकर हत्या कर दी। सोमवार रात 11 बजे दोनों बेटे झगड़ा कर रहे थे। माता-पिता ने उन्हें डांट लगाई तो भड़क गए। गुस्से में माता-पिता को लात-घूसों से पीटा, फिर डंडे से ताबड़तोड़ वार करके अधमरा कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पीलीभीत में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में किसानों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। किसानों ने समझौते को कृषि और डेयरी क्षेत्र के लिए नुकसानदायक बताते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और मांगें पूरी नहीं होने पर दोबारा दिल्ली कूच की चेतावनी दी। किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित व्यापार समझौता देश के कृषि, डेयरी क्षेत्र और छोटे किसानों को तबाह कर देगा। प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी मुक्त व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध क्षेत्र को विदेशी कॉरपोरेट कंपनियों के लिए खोलना देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है। उनका तर्क है कि अत्यधिक सब्सिडी प्राप्त विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों के आयात से देशी किसान बर्बाद हो जाएंगे। किसानों ने मांग की है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित ऐसे सभी समझौतों को तत्काल रद्द किया जाए, जो देश की खाद्य सुरक्षा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बीकेयू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष गुरदीप सिंह (गोगी) ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, यह प्रदर्शन ट्रेड डील और किसानों की अनदेखी के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर है। यदि सरकार ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और संगठन का आदेश मिला, तो किसान एक बार फिर दिल्ली का रुख करेंगे और उसे घेरेंगे। इसके लिए हमारे वाहन, घोड़े और ट्रैक्टर पूरी तरह से तैयार हैं।ज्ञापन में ट्रेड डील को रद्द करने के अलावा कई अन्य मांगें भी शामिल थीं। इनमें सभी फसलों पर स्वामीनाथन आयोग (C2+50) के तहत एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल करना, बिजली बिल 2025 और स्मार्ट मीटर वापस लेना, उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाना और पीलीभीत की स्थानीय समस्याओं का समाधान करना शामिल है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब के किसान दिल्ली कूच के लिए रवाना हुए। शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें रोका। किसान समझौता रद्द करने और महापंचायत की मांग पर अड़े हैं।
कृषि कानूनों के विरोध के बाद एक बार फिर देश भर के किसान संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। इस बार किसानों के गुस्से की मुख्य वजह भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (India-US Trade Deal) है। भारतीय किसान यूनियन (BKU), किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) समेत विभिन्न किसान संगठनों ने इस समझौते के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी, सरवन सिंह पंधेर और अन्य किसान प्रतिनिधियों ने इस डील को भारतीय कृषि और पशुपालकों के लिए 'डेथ वारंट' करार दिया है। इसके विरोध में दिल्ली के किसान घाट (Kisan Ghat) पर विशाल 'किसान महापंचायत' का आह्वान किया गया है, जिसके चलते दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह विरोध केवल राजनीति नहीं, बल्कि देश के 80 करोड़ कृषि-निर्भर नागरिकों की रोजी-रोटी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।आखिर क्यों भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध कर रहे हैं किसान?किसान नेताओं और कृषि विशेषज्ञों का तर्क है कि अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) या कृषि-डेयरी रियायतें देने से भारतीय बाजार को भारी नुकसान पहुंचेगा:डेयरी सेक्टर पर बड़ा खतरा: अमेरिका अपने डेयरी उद्योग (दूध, पनीर, मक्खन) को भारी सरकारी सब्सिडी देता है। यदि अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट्स को भारतीय बाजार में बिना/कम ड्यूटी (Import Duty) के आने की अनुमति मिली, तो भारत के छोटे और मध्यम दूध उत्पादक किसान (अमूल जैसे को-ऑपरेटिव्स से जुड़े पशुपालक) तबाह हो जाएंगे।जीएम फसलों (GM Crops) और पॉल्ट्री का आयात: अमेरिकी मक्का, सोयाबीन और पॉल्ट्री प्रोडक्ट्स (चिकन) का भारतीय बाजार में कम दामों पर पहुंचना स्थानीय किसानों की फसलों के भाव गिरा देगा।एमएसपी (MSP) और सरकारी सब्सिडी पर असर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अमेरिका लगातार भारत द्वारा दी जाने वाली एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और खाद-बिजली सब्सिडी का विरोध करते रहे हैं। किसानों को डर है कि ट्रेड डील के दबाव में सरकार सब्सिडी में कटौती कर सकती है।किसान घाट पर महापंचायत और आंदोलन की चेतावनीपंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से हजारों किसानों का जत्था दिल्ली की ओर कूच कर रहा है:किसान नेताओं की हुंकार: किसान नेताओं का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर देश के कृषि क्षेत्र को विदेशी कॉर्पोरेट कंपनियों के हाथों नीलाम नहीं होने देंगे।व्यापक आंदोलन की चेतावनी: यदि केंद्र सरकार ने इस ट्रेड डील पर अपने कदम पीछे नहीं खींचे, तो दिल्ली के चारों तरफ 2020-21 जैसा ऐतिहासिक किसान आंदोलन (Kisan Andolan) फिर से शुरू किया जाएगा।
अंतरिक्ष (Space) की असीम गहराइयों में सुपरपावर्स के बीच वर्चस्व की नई जंग छिड़ चुकी है। चीन के एक नए और बेहद गोपनीय स्पेस मिशन— सीक्रेट रीयूजेबल स्पेस प्लेन (Shenlong ) और उसकी ऑर्बिटल गतिविधियों ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) और अमेरिकी स्पेस फोर्स (US Space Force) की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अमेरिका को डर सताने लगा है कि यदि चीन की यह रफ्तार जारी रही, तो वह बहुत जल्द अंतरिक्ष में अमेरिका के दशकों पुराने एकछत्र दबदबे को खत्म कर देगा। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो उपग्रहों को ट्रैक करने वाले विशेषज्ञों और यूएस स्पेस कमांड ने चीन द्वारा पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में बिना किसी पूर्व सूचना के रहस्यमयी ऑब्जेक्ट्स (Mysterious Objects) छोड़ने और सिग्नल ट्रांसफर करने पर गहरी चिंता जताई है।चीन के सीक्रेट स्पेस प्लेन ने क्यों बढ़ाई अमेरिका की टेंशन?चीन का यह स्पेस प्लेन देखने में अमेरिका के मशहूर एक्स-37बी (US Space Force X-37B) जैसा ही एक मानव रहित रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट है:अंतरिक्ष में रहस्यमयी गतिविधियां: हालिया मिशन के दौरान चीन के इस स्पेस प्लेन ने कक्षा में लंबे समय तक चक्कर लगाते हुए कुछ अज्ञात पेलोड और स्मॉल सैटेलाइट्स छोड़े हैं, जो अमेरिकी सैन्य उपग्रहों के करीब मंडराते देखे गए हैं।एंटी-सैटेलाइट और सर्विलांस क्षमता: पेंटागन के जनरलों का मानना है कि चीन इस गुप्त मिशन के जरिए 'काउंटर-स्पेस' तकनीकों का परीक्षण कर रहा है—जैसे कि युद्ध की स्थिति में दुश्मन के सैटेलाइट्स को जाम करना, सिग्नल इंटरसेप्ट करना या उन्हें नष्ट करना।उत्तर अमेरिका के ऊपर सिग्नल बीमिंग: सैटेलाइट ट्रैकर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जब यह चीनी यान उत्तरी अमेरिका के ऊपर से गुजरता है, तो यह जमीन पर मजबूत सिग्नल भेजता है, जिससे खुफिया जासूसी की आशंका गहरा गई है।अमेरिका खो सकता है अपना दबदबा - US स्पेस फोर्स की चेतावनीअमेरिकी स्पेस कमांड के शीर्ष अधिकारियों ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम (Chinese Space Program) केवल वैज्ञानिक खोजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य बढ़त हासिल करना है:स्पेस रेस में चीन की छलांग: चीन ने अपना खुद का 'तिआंगोंग' (Tiangong) स्पेस स्टेशन स्थापित कर लिया है और वह 2030 तक चंद्रमा पर इंसानों को भेजने और लूनर बेस बनाने के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है।सस्ते और फास्ट-टैप लॉन्च: चीन हर साल दर्जनों वाणिज्यिक व सैन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर रहा है, जिससे अंतरिक्षीय निगरानी क्षमता में अमेरिका और चीन का अंतर बहुत तेजी से घट गया है।क्या शुरू हो चुकी है 'स्पेस वॉर' की नई होड़?विशेषज्ञों का कहना है कि जहां अमेरिका स्पेसएक्स (SpaceX Starshield) और नासा के जरिए अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं चीन अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में झोंक रहा है। अंतरिक्ष का यह ध्रुवीकरण भविष्य में भू-राजनीतिक (Geopolitical) संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।
अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील के विरोध और भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी के खिलाफ आज दिल्ली के किसान घाट पर प्रस्तावित देशव्यापी महापंचायत में शामिल होने के लिए यमुनानगर से किसानों का जत्था सुबह दिल्ली के लिए रवाना हो गया। रवाना होने से पहले किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर पुलिस की सख्ती बढ़ा दी गई है और किसानों को रास्ते में रोका जा रहा है। इसके बावजूद किसान बैरिकेडिंग तोड़कर किसी भी कीमत पर किसान घाट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। आंदोलन शांतिपूर्ण रहने का दावा भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुदियाना ने बताया कि यमुनानगर के विभिन्न गांवों से किसान दिल्ली के लिए कूच कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि देशभर से हजारों किसान किसान घाट पर पहुंचकर अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील के विरोध और गिरफ्तार किसान नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई जाएगी। संजू गुदियाना ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास कर रही है। कुछ किसान रात को ही दिल्ली हुए रवाना संजू के अनुसार हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर पुलिस द्वारा वाहनों की जांच की जा रही है और किसानों को भी रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई किसान नेताओं को हिरासत में लेने की कोशिश की गई, जिसके चलते कई नेता सोमवार-मंगलवार की रात ही अपने घरों से निकलकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन बैरिकेडिंग कर किसानों का रास्ता रोकता है, तब भी किसान पीछे नहीं हटेंगे। सभी किसान एकजुट होकर किसी भी स्थिति में किसान घाट पहुंचेंगे और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करेंगे। किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह अहिंसक है और वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रखेंगे।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील के विरोध में पंजाब के किसानों ने आज दिल्ली कूच का ऐलान किया है। इसके लिए शंभू बॉर्डर पर भारी संख्या में पंजाब के किसान इकट्ठे हुए हैं। इसे देखते हुए हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर बंद कर दिया है। बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बैरिकेड्स लगाने के साथ जेसीबी मशीनें भी तैनात की गई हैं, ताकि किसानों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। प्रदर्शन की अगुआई किसान नेता सरवण पंधेर कर रहे हैं। किसान नेता तेजबीर सिंह ने बताया कि शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा वाले किसान जैसे कि पिहोवा, अंबाला, कुरुक्षेत्र वाले दिल्ली की तरफ कूच करेंगे। पंजाब वाले शंभू बॉर्डर पर आएंगे। उन्होंने कहा कि खनौरी वाला रास्ता भी बंद कर दिया गया है। आज हमारा दिल्ली में प्रोग्राम 12 से चार बजे तक है। ऐसे में जो स्टेज से आदेश आए। उसका पालन करना है। किसान नेताओं ने कहा कि हरियाणा के सीएम रोज पंजाब में आकर रैलियां करते हैं। किसानों को दिल्ली से जाने रोकने का ये तरीका ठीक नहीं है। उधर, अंबाला पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करते हुए यात्रियों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें। शंभू बॉर्डर पर पहुंचे किसानों और बैरिकेडिंग की PHOTOS… किसानों के दिल्ली कूच के पल-पल अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिकी सैनिक को नुकसान पहुंचाया तो ईरान को भुगतना होगा कई गुना अंजाम: ट्रंप
'ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व' में तैनात अमेरिकी सेना के दो सक्रिय सैनिकों की जॉर्डन में मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी जारी की है
अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील के विरोध और किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी के खिलाफ आज मंगलवार को दिल्ली में किसानों का बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है। देशभर से किसान दिल्ली के किसान घाट पहुंच रहे हैं। वहीं सोनीपत जिले में भी आंदोलन को लेकर सोमवार रात से ही हलचल तेज हो गई। कई किसान नेता देर रात अपने घरों से निकलकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए। किसान संगठनों का आरोप है कि पुलिस कई नेताओं को हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी, जिसके चलते कई नेता पहले ही घर छोड़कर निकल गए। वहीं हरियाणा में दिल्ली बॉर्डर पर भी पुलिस ने सख्ती की है और बॉर्डर पर वाहन चालकों से पूछताछ के बाद ही जाने दिया जा रहा है। किसानों को भी रोका जा रहा है। दिल्ली कूच के लिए रात से ही तैयारियां शुरू किसान संगठनों के अनुसार, दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सोनीपत समेत हरियाणा के विभिन्न जिलों से किसान देर रात और मंगलवार तड़के ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए। किसान नेताओं का कहना है कि किसी भी स्थिति में वे किसान घाट पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होंगे। इन मुद्दों को लेकर हो रहा है आंदोलन किसानों का कहना है कि अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील से देश के किसानों के हित प्रभावित होंगे। उनका आरोप है कि इस समझौते से कृषि क्षेत्र में विदेशी कंपनियों का प्रभाव बढ़ेगा और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने में मुश्किलें आएगी। साथ ही किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी का भी किसान संगठन विरोध कर रहे हैं और उनकी तत्काल रिहाई की मांग कर रहे हैं। हिरासत की कोशिश का आरोप दिल्ली कूच से पहले सोनीपत में पुलिस पूरी तरह अलर्ट रही। किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि कई किसान नेताओं को हिरासत में लेने की कोशिश की गई। इसी आशंका के चलते कई नेता रविवार रात से ही अपने घरों से निकल गए और सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो गए। गोहाना में भी हुआ था हाईवे जाम दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सोमवार को गोहाना के गांव रूखी चौक पर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) और अन्य किसान संगठनों ने रोहतक-पानीपत हाईवे जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। किसानों ने अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील और गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी के विरोध में नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। बाद में किसानों ने दिल्ली कूच की तैयारियों को देखते हुए जाम समाप्त कर दिया। दिल्ली के प्रदर्शन पर सभी की नजरें आज दिल्ली में होने वाले किसान प्रदर्शन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। किसान संगठनों ने बड़ी संख्या में किसानों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। वहीं सरकार और पुलिस की रणनीति पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सोनीपत के गोहाना क्षेत्र में रविवार को किसान संगठनों ने अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील के विरोध और भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी ग्रुप) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। किसानों ने गांव रूखी चौक के पास रोहतक-पानीपत हाईवे पर जाम लगाकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। जाम के कारण हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। बाद में किसान नेताओं ने 21 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित महाप्रदर्शन की तैयारियों का हवाला देते हुए जाम समाप्त कर दिया और सभी किसानों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया। गांव रूखी चौक पर किसानों ने लगाया जाम भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी ग्रुप) और अन्य किसान संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान गांव रूखी चौक पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने रोहतक-पानीपत हाईवे पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया। हाईवे जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं। अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील का विरोध किसानों ने कहा कि अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील देश के किसानों के हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि इस तरह के समझौते से कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। इसी मुद्दे को लेकर देशभर के किसान 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। गुरनाम चढ़ूनी की गिरफ्तारी पर जताया रोष प्रदर्शन के दौरान किसानों ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की गिरफ्तारी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चढ़ूनी की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। हाईवे पर भारी पुलिस बल रहा तैनात किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए गांव रूखी चौक और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने पूरे प्रदर्शन के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रखी और कानून-व्यवस्था कायम रखी। दिल्ली कूच की तैयारी के चलते खोला जाम कुछ समय तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद किसान नेताओं ने घोषणा की कि 21 जुलाई को दिल्ली में होने वाले बड़े आंदोलन की तैयारियों को देखते हुए फिलहाल हाईवे जाम खत्म किया जा रहा है। इसके बाद किसानों ने सड़क खाली कर दी और यातायात सामान्य दिखा। दिल्ली आंदोलन में शामिल होने का किया आह्वान किसान नेताओं ने प्रदेशभर के किसानों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचकर किसान घाट पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उनका कहना है कि फ्री ट्रेड डील और किसान नेताओं पर की जा रही कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाना जरूरी है। सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें गोहाना में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब किसानों की नजरें 21 जुलाई को दिल्ली में होने वाले आंदोलन और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज करने के संकेत भी किसान नेताओं ने दिए हैं।
अमेरिका-ईरान जंग में फंसा पाकिस्तान: 'मध्यस्थ' बनने चला था इस्लामाबाद, अब 'बलि का बकरा' बनने की नौबत
अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जंग छिड़ने के बाद पाकिस्तान की 'चीफ मीडिएटर' यानी मुख्य मध्यस्थ वाली छवि पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। हफ्तों की भारी कूटनीतिक दौड़-धूप और दिखावे के बाद भी नाजुक सीजफायर टूट चुका है, जिससे पाकिस्तान को गहरा धक्का लगा है। बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तेहरान के हमलों और वॉशिंगटन के खौफनाक पलटावर के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर का तंत्र असहाय नजर आ रहा है। इस्लामाबाद अब कूटनीति के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां वह मध्यस्थ बनने के बजाय दोनों तरफ से घिरकर 'फॉल गाई' यानी बलि का बकरा बनने की स्थिति में पहुंच गया है।कागजी शेर साबित हुआ इस्लामाबाद MoU: दोनों महाशक्तियों ने समझौतों को किया खारिजतनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा तैयार कराया गया तथाकथित 'इस्लामाबाद MoU' अब महज कागजी शेर साबित हो रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों की पाकिस्तान ने निंदा जरूर की, लेकिन वॉशिंगटन और तेहरान के आक्रामक रुख के आगे उसकी एक न चली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि वे अब ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते के मूड में नहीं हैं। इस कड़े रुख के बाद पाकिस्तान की शांति वार्ता आयोजित करने की सभी कोशिशें पूरी तरह बेअसर हो चुकी हैं।विशेषज्ञों की चेतावनी: शांति वार्ता विफल होने पर पाकिस्तान के सिर फूटेगा ठीकराअमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने आगाह किया है कि अगर अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पूरी तरह नाकाम होती है, तो इसका सारा दोष पाकिस्तान के सिर मढ़ दिया जाएगा। कुगेलमैन के अनुसार, पाकिस्तान पर अनुभवहीनता और बिना किसी ठोस आधार के विफल वार्ताओं को बढ़ावा देने का आरोप लग सकता है। सीजफायर टूटने के महज एक महीने के भीतर इस्लामाबाद की वैश्विक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है, जिससे उसे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर गंभीर कूटनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।रणनीतिक गफलत में फंसा इस्लामाबाद: होर्मुज स्ट्रेट पर टिका ईरान का कड़ा रुखतेहरान के सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के निदेशक जावेद हेरान-निया का मानना है कि 'इस्लामाबाद MoU' कभी भी मुख्य विवादों को सुलझाने के लिए नहीं बना था। यह केवल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अस्थायी रूप से खोलने और युद्ध टालने का एक तात्कालिक जरिया था। ईरान होर्मुज पर अपने रणनीतिक नियंत्रण को बेहद अहम मानता है और वह इसे किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहता। जब तक वाशिंगटन और तेहरान के बीच रणनीतिक शक्ति संतुलन खुद नहीं बदलता, तब तक पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश की भूमिका बिल्कुल सीमित रहेगी।शहबाज और असीम मुनीर के पास विकल्प खत्म: अमेरिका और ईरान दोनों पर निर्भरता बनी मजबूरीगल्फ इंटरनेशनल फोरम की कार्यकारी निदेशक दानिया थाफर के अनुसार, हालिया मिसाइल हमलों और आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के पास कूटनीतिक पैंतरेबाज़ी की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। पाकिस्तान अपनी आर्थिक और राजनीतिक जरूरतों के लिए अमेरिका और खाड़ी देशों दोनों पर अत्यधिक निर्भर है। लेकिन इस समय चूंकि ईरान और अमेरिका दोनों ही एक-दूसरे को नष्ट करने वाले दौर (Escalation Phase) में पहुंच चुके हैं, इसलिए तनाव कम करने या दोनों को बातचीत की टेबल पर लाने में पाकिस्तान पूरी तरह नाकाम और लाचार साबित हो रहा है।
अमेरिकी राजनीति और व्हाइट हाउस के गलियारों से एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और भारतीय मूल की सेकंड लेडी उषा वेंस के घर रविवार को एक बार फिर नन्हें मेहमान की किलकारियां गूंजी हैं। वेंस दंपति ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने चौथे बच्चे के जन्म की खुशखबरी साझा की है। इस नवजात शिशु के आगमन के साथ ही अमेरिकी इतिहास में 156 साल पुराना एक दुर्लभ और ऐतिहासिक कीर्तिमान भी दोहराया गया है।156 साल बाद पद पर रहते हुए पिता बने अमेरिकी उपराष्ट्रपति, बना अनोखा रिकॉर्डजेडी वेंस वर्तमान पद पर रहते हुए पिता बनने वाले पिछले 156 वर्षों में पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति बन गए हैं। अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में इससे पहले यह अद्भुत संयोग साल 1870 में देखने को मिला था, जब तत्कालीन उपराष्ट्रपति स्कायरलर कोलफैक्स और उनकी पत्नी एलेन वेड कोलफैक्स के घर बेटे का जन्म हुआ था। उससे भी पूर्व, वर्ष 1829 में उपराष्ट्रपति जॉन सी. कैलहून के कार्यकाल के दौरान उनके बेटे विलियम का जन्म हुआ था। इस तरह जेडी वेंस अमेरिकी इतिहास के ऐसे महज तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए हैं जिनके कार्यकाल के दौरान संतान का जन्म हुआ है।बेटे का नाम रखा 'ऐलेक नील वेंस', मेडिकल टीम का जताया आभारवेंस दंपति ने अपने नवजात बेटे का नाम ऐलेक नील वेंस (Alec Neal Vance) रखा है। सोशल मीडिया पर एक संयुक्त बयान जारी करते हुए जेडी वेंस और उषा वेंस ने अपनी खुशी व्यक्त की और लिखा कि वे अपने बेटे ऐलेक के आगमन से बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उषा और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनके तीनों बड़े बच्चे अपने छोटे भाई का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। दंपति ने वाशिंगटन स्थित वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों, चिकित्सा कर्मियों और व्हाइट हाउस की मेडिकल टीम का विशेष आभार व्यक्त किया।अमेरिका में बढ़ती जन्म दर के समर्थक रहे हैं जेडी वेंस41 वर्षीय जेडी वेंस लंबे समय से अमेरिका में घटती जन्म दर पर अपनी चिंता व्यक्त करते आए हैं और वे लगातार अमेरिकी नागरिकों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं। वाशिंगटन में आयोजित एक सार्वजनिक रैली के दौरान भी वेंस ने खुलकर कहा था कि वे अमेरिका में अधिक से अधिक बच्चों का जन्म देखना चाहते हैं। वेंस दंपति के इससे पहले तीन बच्चे हैं और अब परिवार में चौथे बच्चे ऐलेक नील वेंस के आने से उनका परिवार और भी समृद्ध हो गया है।भारतीय मूल से जुड़ाव: आंध्र प्रदेश से कैलिफोर्निया और फिर व्हाइट हाउस तक का सफरअमेरिका की सेकंड लेडी उषा वेंस का मूल नाता भारत के आंध्र प्रदेश राज्य से है। उषा के माता-पिता 1980 के दशक में भारत छोड़कर अमेरिका में बस गए थे, जिसके बाद वर्ष 1986 में कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में उषा का जन्म हुआ। उषा के पिता पेशे से एक मैकेनिकल इंजीनियर और मां जीवविज्ञानी हैं। जेडी वेंस और उषा की पहली मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान एक राइटिंग प्रोजेक्ट पर काम करते समय हुई थी, जो आगे चलकर गहरे प्रेम में बदल गई। वर्ष 2014 में केंटकी में परिणय सूत्र में बंधे इस जोड़े के लिए यह नया अध्याय बेहद खास है।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक और चिंताजनक मोड़ ले लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की आग में अब क्षेत्र के अन्य शांतिप्रिय देश भी झुलसने लगे हैं। सोमवार को ईरान ने कुवैत के एक प्रमुख 'बिजली और जल अलवणीकरण संयंत्र' (Water Desalination & Power Plant) को निशाना बनाकर एक भीषण आत्मघाती हमला किया। इस सुनियोजित हमले के कारण कुवैत के इस बेहद महत्वपूर्ण एनर्जी हब में भयंकर आग लग गई और कई बिजली उत्पादन इकाइयां पूरी तरह तबाह हो गईं। दुखद बात यह है कि इस हमले में प्लांट में काम करने वाले एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले इस हमले ने पूरे रेगिस्तानी देश में पीने के पानी और बिजली का एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।कुवैत का 90% पानी सप्लाई ठप होने की कगार परकुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, ईरान की ओर से किए गए इस ड्रोन और मिसाइल हमले ने उनके सबसे संवेदनशील बुनियादी ढांचे को चोट पहुंचाई है। रेगिस्तानी देश होने के कारण कुवैत अपनी पीने के पानी की लगभग 90 प्रतिशत जरूरतों के लिए समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले इसी 'डिसैलिनेशन प्रोसेस' पर निर्भर रहता है। हमले के बाद प्लांट में लगी भीषण आग पर काबू तो पा लिया गया है, लेकिन बिजली और पानी की कई मुख्य यूनिट्स के क्षतिग्रस्त होने से देश में हाहाकार मच गया है। कुवैती अधिकारी फिलहाल नुकसान का आकलन करने और प्लांट को आंशिक रूप से फिर से चालू करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी के बाद तेहरान पर भीषण एयरस्ट्राइकईरान की इस आक्रामक हरकत के बाद अमेरिकी सेना भी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार सुबह अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और उसके रणनीतिक ठिकानों पर अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के कई अहम पुलों, सैन्य साइटों और एक प्रमुख बंदरगाह पर बने 'पोर्ट कंट्रोल टावर' को हवाई हमलों में पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।यह भीषण कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा तेहरान को दी गई उस कड़ी चेतावनी का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि यदि ईरान वैश्विक तेल मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) और क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ने की कोशिश करेगा, तो उसके पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।हॉर्मुज संकट से दुनिया भर में बढ़े कच्चे तेल के दामईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस आमने-सामने के युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आंशिक रूप से बंद होने के खतरे ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया का एक बड़ा तेल निर्यात इसी समुद्री रास्ते से होता है, जिस पर ईरान ने नए सेवा शुल्क और सख्त नियम लगाकर खलबली मचा दी है। इस सुरक्षा संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों ने तुरंत संयम नहीं बरता, तो यह संघर्ष एक पूर्ण वैश्विक युद्ध में बदल सकता है।
अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात किया ईरान पर हमला : सेंट्रल कमांड
ईरान के खिलाफ अमेरिकी की सैन्य कार्रवाई लगातार 9वें दिन जारी रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक नया दौर शुरू हुआ है
पहली तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगा शेयर बाजार का रुझान
मुंबई, भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला कारोबारी हफ्ता काफी अहम होने वाला है। घरेलू आर्थिक आंकड़े जैसे पीएमआई, अमेरिका-ईरान तनाव और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजे बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवण सिंह पंधेर ने 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर होने वाली महा रैली को लेकर पंजाब के किसानों और मजदूरों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब से सैकड़ों बसें किसानों को लेकर दिल्ली के लिए रवाना होंगी। किसान मजदूर मोर्चा, ए.के.एम., बी.के.यू. एकता संघर्ष समेत कई किसान संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे। अमृतसर और गुरदासपुर जिले के किसान ब्यास में कल सुबह 11 बजे तक एकत्र होंगे, जबकि तरनतारन जिले के किसान गोइंदवाल साहिब में जुटेंगे। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी किसानों के लिए अलग-अलग स्थान तय किए गए हैं। पंधेर ने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का कृषि और डेयरी क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समझौते में मक्का, सोयाबीन, कपास, ड्राई फ्रूट, सेब, नाशपाती और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं। उनके मुताबिक, इसे व्यापक व्यापार समझौता बताया जा रहा है, लेकिन व्यापकता के नाम पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई वस्तुएं इसमें शामिल हो सकती हैं। उन्होंने पंजाब के युवाओं, किसानों और मजदूरों से अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की। पंधेर ने कहा कि पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और अन्य राज्यों से भी किसान दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को होने वाला यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन शाम 4 बजे समाप्त होगा। साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों को दिल्ली जाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से न रोका जाए।
जयपुर में सॉफ्टेवयर इंजीनियर की पत्नी शादी के 8 साल बाद अचानक पीहर चली गई। उसके कुछ समय बाद रिश्तेदार की शादी में जाने के बहाने ससुराल से गहने भी मंगवा लिए। इसके बाद पत्नी (सॉफ्टवेयर इंजीनियर) जॉब के लिए अमेरिका चली गई। करीब 2 साल बाद इंडिया लौटी, लेकिन ससुराल नहीं आई। पति से बात करना भी बंद कर दिया। फिर 8 साल की बेटी की कस्टडी के लिए केस कर ससुराल पक्ष को नोटिस भिजवा दिया। यही नहीं, जिन गहनों को उसके मायके वाले हड़प चुके थे, उनको मांगने का भी नोटिस में जिक्र कर दिया। नोटिस मिलने के बाद 17 जुलाई को ससुर (पति के पिता) ने बिंदायका पुलिस थाने में बहू के पिता और उसके चाचा के खिलाफ गहने हड़पने की FIR दर्ज करवाई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा मामला… सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की 2014 में कराई थी शादी बिंदायका थाने के ASI बाबूलाल ने बताया- 65 वर्षीय बुजुर्ग ने थाने में FIR दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनके सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की शादी बेंगलुरु (कर्नाटक) निवासी युवती से साल 2014 में हुई थी। वह भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। शादी के करीब 8 साल बाद उनकी बहू अचानक पीहर चली गई। 8 दिसंबर 2023 को बहू के पिता और चाचा जयपुर आए। विद्याधर नगर में एक शादी में शामिल होने की कहकर उनके घर पर ही रुक गए। उस दौरान उनकी बहू बेंगलुरु में पीहर में ही थी। बहू के गहने लेने जयपुर आए थे पिता और चाचा ससुर ने रिपोर्ट में बताया कि जयपुर स्थित उनके घर पर बातचीत के दौरान बहू के पिता और चाचा ने 21 जनवरी 2024 को सिकंदराबाद (तेलंगाना) में परिवार में शादी होना बताया। शादी में बहू के भी जाने की बात बताई। दोनों ने अलमारी में रखी बहू की ज्वेलरी के साथ-साथ हमारे पैतृक गहने भी शादी में पहनने के लिए मांगे। उन्होंने बहू के अच्छे व्यवहार और संबंधों के चलते रिश्तेदार की शादी में पहनने के लिए गहने निकालकर उन्हें दे दिए। बाद में पता चला कि सिकंदराबाद में हुई शादी में बहू की मम्मी ने उन गहनों को पहना था। अमेरिका से लौटने पर भेजा नोटिस इसके बाद जॉब के सिलसिले में बहू मासूम बेटी के साथ अमेरिका चली गई। करीब 2 साल अमेरिका में रहने के बाद मार्च 2026 में बहू के इंडिया लौटने का पता चला। रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि 25 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु कोर्ट से उन्हें एक नोटिस मिला। नोटिस से पता चला कि बहू ने बेटी की कस्टडी के लिए बेंगलुरु कोर्ट में केस फाइल कर रखा है। मायके वाले ने जो गहने लिए थे, उसका भी झूठा हवाला दिया है कि वह अभी भी उनके (ससुराल वालों के) पास है। गहने मांगे तो लौटाने से किया इनकार इसका पता चलने पर पीड़ित परिवार ने बहू के मायके वालों से कॉन्टैक्ट कर गहने मांगे, तो उन्होंने गहने लौटाने से मना कर दिया। इन गहनों में सोने का रानीहार, मंगलसूत्र, कमरबंद, बाजूबंद, हथफूल, सात अंगूठी, दो कड़े, दो चूड़ी, चेन-पेंडेंट सेट, कान की जोड़ियां, टीका और अन्य सोने के गहने शामिल हैं। इसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
फतेहाबाद जिले के जाखल में मजदूर किसान मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को किसानों ने भारत- अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। गांव मुनदलिया के सरपंच निर्मल सिंह की अध्यक्षता में तलवाड़ा, साधनवास, चांदपुरा और मुनदलिया सहित कई गांवों में किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले फूंके और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरपंच निर्मल सिंह मुनदलिया ने कहा कि प्रस्तावित ट्रेड डील किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों के विपरीत है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी नीतियों से कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और छोटे व मध्यम वर्ग के किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करने की मांग मुनदलिया ने सरकार से किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और कृषि से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा करने की अपील की। किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों की लगातार अनदेखी की गई और किसान हितों के खिलाफ निर्णय लिए गए, तो मजदूर किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने सरकार से किसान हितों की रक्षा करने और ट्रेड डील से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार करने की मांग की। इस मौके पर सरपंच निर्मल सिंह मुनदलिया के साथ तारा सिंह, गोरा सिंह, कुलदीप सिंह, देसराज सिंह, जगतार सिंह, सुखा सिंह सहित अनेक किसान और मजदूर साथी मौजूद रहे।
चीनी कंपनी मूनशॉट AI ने अपना नया AI मॉडल किमी K3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स वाला दुनिया का पहला ओपन मॉडल है। इसमें 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है। पिछले मॉडल किमी K2 की तुलना में इसकी स्केलिंग दक्षता करीब 2.5 गुना बेहतर है। इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए एआई मॉडल एक इंसानी दिमाग की तरह है, जिसे एक बहुत बड़ी परीक्षा की तैयारी करनी है। 1. पैरामीटर्स क्या हैं? पैरामीटर्स को आप एआई का 'अनुभव' मान सकते हैं। एक बच्चा जब बड़ा होता है, तो वह जितनी ज्यादा बातें सीखता है, उसका दिमाग उतना ही तेज चलता है। एआई की दुनिया में जिस मॉडल के पास जितने ज्यादा पैरामीटर्स होते हैं, वह उतना ही समझदार माना जाता है। 28 लाख करोड़ पैरामीटर्स होने का मतलब है कि इस मॉडल का दिमाग बेहद विशाल है और यह बहुत ही पेचीदा और मुश्किल सवालों को इंसानों की तरह समझकर हल कर सकता है। 2. 3T क्लास क्या है? यहां 'T' का मतलब है ट्रिलियन। चूंकि इस मॉडल में 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स हैं, जो कि 3 ट्रिलियन (3.0T) के बेहद करीब है, इसलिए इसे '3T क्लास' का मॉडल कहा गया है। एआई की दुनिया में 3T क्लास में पहुंचना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इतने बड़े मॉडल अब तक सिर्फ अमेरिका की ओपन एआई जैसी चुनिंदा कंपनियों के पास ही थे। 3. 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो क्या है? कॉन्टेक्स्ट विंडो का मतलब है एआई की 'याददाश्त' या एक बार में पढ़ने की क्षमता। जब आप एआई से चैट करते हैं, तो वह एक बार में कितना लंबा पैराग्राफ या दस्तावेज याद रख सकता है, यही उसकी कॉन्टेक्स्ट विंडो है। उदाहरण: एक आम एआई मॉडल को अगर आप 5-10 पन्ने देंगे, तो वह उसे पढ़ लेगा, लेकिन पूरी किताब देने पर उसके हाथ-पैर फूल जाएंगे। किमी K3 की 10 लाख टोकन की क्षमता का मतलब है कि आप इसे पूरी की पूरी मोटी किताब, हजारों लाइनों का कंप्यूटर कोड या साल भर की बैंक स्टेटमेंट एक साथ दे दीजिए; यह एक सेकंड में उस पूरी जानकारी को दिमाग में रखकर आपको उसका सटीक विश्लेषण करके दे देगा। 4. स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर होने का क्या मतलब है? 'स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर' होने का मतलब है कि मूनशॉट कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर को इतना कुशल बना दिया है कि यह अपने पिछले मॉडल के मुकाबले ढाई गुना कम कंप्यूटर पावर और खर्चे में, उससे कहीं ज्यादा तेजी से और बड़ा काम कर सकता है। 5. 'ओपन मॉडल' होने का क्या फायदा है? अब तक अमेरिका की कंपनियां अपने इतने बड़े मॉडल्स को छुपाकर रखती हैं। इसे क्लोज्ड मॉडल कहते हैं। वे सिर्फ आपको इस्तेमाल करने देती हैं, लेकिन यह नहीं बतातीं कि इसे अंदर से कैसे बनाया गया है। चीन की कंपनी ने इसे 'ओपन मॉडल' रखा है। इसका मतलब है कि वह इस शक्तिशाली दिमाग की 'ब्लूप्रिंट' दुनिया भर के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और वैज्ञानिकों के लिए मुफ्त या खुले तौर पर जारी कर देगी। इससे दुनिया का कोई भी आम इंजीनियर इस एआई को लेकर अपने हिसाब से बदल सकता है, नया ऐप बना सकता है या अपने काम में इस्तेमाल कर सकता है। मूनशॉट 27 जुलाई को ओपन करेगा अपना सीक्रेट फॉर्मूला मूनशॉट AI ने ब्लॉग में बताया कि Kimi K3 को 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' पर बनाया गया है। इसमें नेटिव विजन क्षमताएं भी हैं। यह मॉडल कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग जैसे जटिल कामों के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसके फुल मॉडल वेट्स 27 जुलाई तक जारी कर दिए जाएंगे। 1. 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' क्या है? उदाहरण से समझिए: जब आप कोई बहुत मोटी किताब पढ़ते हैं, तो क्या आप हर एक शब्द पर बराबर ध्यान देते हैं? नहीं। आपका दिमाग केवल मुख्य शब्दों और जरूरी लाइनों पर 'अटेंशन' देता है और फालतू शब्दों को छोड़ देता है। फायदा: मूनशॉट AI ने 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' नाम का जो नया फॉर्मूला बनाया है, वह इस एआई को यही सुपर पावर देता है। जब आप इसे बहुत बड़ा काम या लाखों शब्दों की फाइल देते हैं, तो यह तकनीक एआई के दिमाग को भटकने नहीं देती। यह केवल सबसे जरूरी पॉइंट पर फोकस करती है और पुरानी पढ़ी हुई बातों का 'असर' (रेजिड्यूल्स) दिमाग में बनाए रखती है। इससे एआई बिना थके और बिना गलती किए बहुत तेजी से काम कर लेता है। 2. ‘नेटिव विजन क्षमताएं’ क्या हैं? उदाहरण से समझिए: पहले के एआई सिर्फ टेक्स्ट समझ सकते थे। अगर आप उन्हें फोटो दिखाते, तो उन्हें पहले उस फोटो को शब्दों में बदलना पड़ता था, तब वो समझ पाते थे। लेकिन 'नेटिव विजन' का मतलब है कि Kimi K3 के पास देखने की क्षमता है। फायदा: आप इसे कोई फोटो, कोई पेचीदा ग्राफ, मेडिकल स्कैन (जैसे एक्स-रे या एमआरआई) या कोई वीडियो दिखाएंगे, तो यह उसे इंसानी आंखों की तरह देखकर तुरंत समझ जाएगा और उस पर आपके सवालों के जवाब दे देगा। 3. कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग का क्या मतलब है? कंपनी का कहना है कि यह मॉडल तीन बड़े काम करेगा: लॉन्ग-होराइजन कोडिंग : इसका मतलब सिर्फ छोटा-मोटा कोड लिखना नहीं है। यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की तरह एक साथ हजारों लाइनों का पूरा का पूरा बड़ा कंप्यूटर प्रोग्राम या ऐप खुद लिख सकता है और उसमें कमियां ढूंढकर ठीक कर सकता है। नॉलेज वर्क: यह रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और बड़े वकीलों की तरह काम कर सकता है। सालों पुरानी फाइलों को खंगालना, बड़े कानूनी मामलों का विश्लेषण करना या किसी विषय पर पूरी रिसर्च रिपोर्ट तैयार करना इसके लिए चुटकियों का काम है। रीजनिंग: इसका मतलब है 'सोचने-समझने और तर्क करने की क्षमता'। यह सिर्फ रटी-रटाई बातें नहीं बताएगा, बल्कि इंसानों की तरह गणित के मुश्किल सवालों या बिजनेस की उलझनों में 'अगर-मगर' लगाकर सही फैसला लेने में मदद करेगा। अमेरिका के लेटेस्ट AI मॉडल्स से पीछे है Kimi K3 कंपनी ने माना कि Kimi K3 का प्रदर्शन अमेरिका के क्लॉड फेबल 5 और GPT 5.6 Sol जैसे मॉडल्स से पीछे है। हालांकि, कई बेंचमार्क टेस्ट में इसने अमेरिका के पुराने मॉडल्स को पीछे छोड़ दिया है। मूनशॉट AI को चीनी कंपनी अलीबाबा और टेनसेंट का समर्थन हासिल है। चीनी फर्मों ने 24 हजार फर्जी अकाउंट बनाकर चुराया डेटा इसी बीच, अमेरिकी कंपनियों ने चीनी फर्मों के सस्ते में मॉडल जारी करने पर चिंता जताई है। एंथ्रोपिक ने आरोप लगाया है कि डीपसीक, मूनशॉट और मिनीमैक्स ने उनके मॉडल की क्षमताओं को अवैध रूप से निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए। एंथ्रोपिक के मुताबिक, करीब 24,000 फर्जी खातों से 1.6 करोड़ बार क्लॉड का इस्तेमाल किया गया।
नई दिल्ली । यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे तीन कमर्शियल जहाजों को रोक लिया।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
अगर आपके बच्चों की तस्वीरें, बैंक खातों के पासवर्ड और आपकी डिजिटल पहचान एक ही ‘की’ से सुरक्षित हो और वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए, तो सब खतरे में पड़ सकता है। कॉमर्शियल एयरलाइन पायलट रेयान पेटिट के साथ ऐसा ही हुआ। विमानन क्षेत्र में काम करने वाले पेटिट जानते हैं कि सुरक्षा के लिए हमेशा कई स्तरों पर बैकअप होता है, पर डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा एक कमजोर कड़ी पर टिक गई थी। एक साधारण-सा टेक्स्ट मैसेज आया और उनकी पूरी डिजिटल पहचान उनसे छिन गई। पढ़िए उनकी कहानी और एक्सपर्ट से जानिए किन गलतियों से बचना चाहिए... मुझे गोल्डमैन साक्स एपल कार्ड पर एक संदिग्ध लेन-देन का ‘फ्रॉड अलर्ट’ मैसेज मिला। मैसेज में सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देने को कहा गया था। सुरक्षा के लिए मैंने ‘ना’ लिखकर भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद कॉल आया। कॉलर आईडी पर एपल कार्ड सपोर्ट का नंबर दिख रहा था। मुझे शक नहीं हुआ, क्योंकि मैसेज भी उसी आधिकारिक i Message थ्रेड में एपल लोगो व ग्रे बबल के साथ आ रहे थे। कॉलर ने कहा कि मेरी पहचान सत्यापित करने के लिए कोड भेजा जा रहा है। जैसे ही कोड बताया, सब कुछ बदल गया। मैंने पहचान पूछी, तो उसने मेरा सोशल सिक्योरिटी नंबर व जन्मतिथि तक बता दी। तब लगा कि मैं ठगी का शिकार हो चुका हूं। आंखों के सामने मेरी पूरी डिजिटल दुनिया बिखरने लगी। मैं देख रहा था कि एपल वॉलेट से कैश एप, वीसा कार्ड और एपल कार्ड एक-एक करके गायब हो रहे थे। हैकर ने मेरे अकाउंट में अपना फोन नंबर जोड़ दिया और मेरा नंबर हटा दिया। कुछ ही देर बाद मैं अपने ही अकाउंट से बाहर हो गया। मेरा आईफोन रीसेट हो गया और बेकार डिवाइस बनकर रह गया। मैं बिना डिजिटल वॉलेट व पैसों के होनोलूलू पहुंचा। किसी तरह लैपटॉप पर वाई-फाई जोड़कर पत्नी को मैसेज किया। उन्होंने मेरे लिए उबर बुक की। एपल स्टोर पहुंचने पर पता चला कि हैकर ने फोन पर एक्टिवेशन लॉक लगा दिया है। पहचान व खरीद के सबूत दिखाने के बावजूद एपल कर्मचारी मदद नहीं कर सके। नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। हैकर के हाथ मेरी एक लाख से ज्यादा फैमिली फोटो, पासवर्ड और मैसेज हिस्ट्री लग चुकी थी। उसने मेरे निवेश बेचकर नकदी निकाल ली। पत्नी को मेरे नाम पर मैसेज भेजकर हजारों डॉलर ठग लिए। मेरे अकाउंट खाली हो गए। स्मार्टवॉच का डेटा हटा दिया, इससे वह मुझे नहीं पहचान सकी। पुलिस भी मदद नहीं कर सकी।’- रेयान ऑथेंटिकेटर एप रखें साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट केविन मिटनिक सुझाव देते हैं,‘अपने डिजिटल वर्ल्ड की एक ‘मास्टर की’ न रखें। लॉगिन हैक होते ही बैंक, फोटो व डेटा खतरे में पड़ सकते हैं; सभी खाते अलग रखें। हार्डवेयर सिक्योरिटी की या ऑथेंटिकेटर एप इस्तेमाल करें, जिससे पासवर्ड व नंबर लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। कॉलर आईडी पर दिखने वाले नाम या नंबर पर भरोसा न करें। बैंक या संस्थान को कॉल करके जांच कर लें।
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की मांग तेज
यह केवल विचारधारा की बात भी नहीं है। यह इस बारे में नहीं है कि कोई प्रशासन की व्यापक नीतियों का समर्थन करता है या विरोध।
ईरान जंग ने तोड़ा नाटो और अमेरिका का रिश्ता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह ईरान पर छिड़ी जंग को खत्म करने का ऐलान कर सकते हैं
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

