अमेरिका में सिख पर जानलेवा हमला, 17 बार चाकू मारा, गर्दन-छाती छलनी, एक परिवार ने ऐसे बचाई जान
Sikh Man Attacked In US:
अमेरिका ने चीन को 64 सांस्कृतिक अवशेष और जीवाश्म वापस लौटाए
बीजिंग, 18 सितंबर . चीनी राष्ट्रीय सांस्कृतिक अवशेष ब्यूरो ने 16 और 18 सितंबर को अलग-अलग तौर पर वाशिंगटन और न्यूयॉर्क में अमेरिकी भूमि सुरक्षा जांच ब्यूरो और मैनहट्टन जिले के अभियोजक कार्यालय द्वारा वापस दिए गए 64 सांस्कृतिक अवशेष और जीवाश्म स्वीकार किए. बताया गया है कि इन सांस्कृतिक अवशेषों और जीवाश्म में थ्येनमनशान ... Read more
अमेरिका-ईरान जंग के बीच न्यूयॉर्क जाएंगे राष्ट्रपति पेजेशकियान
वॉशिंगटन डीसी/तेहरान, 18 सितंबर 2026। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और तनाव के बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अगले सप्ताह न्यूयॉर्क जाएंगे। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के शीर्ष अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए वीजा देने की मंजूरी दे दी है। इस प्रतिनिधिमंडल […] The post अमेरिका-ईरान जंग के बीच न्यूयॉर्क जाएंगे राष्ट्रपति पेजेशकियान appeared first on Rashtriya Ujala .
अमेरिका का रणनीति में बदलाव, इराक से सैन्य उपकरणों को कर रहा शिफ्ट
युद्ध के मैदान से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है. हाल ही में जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए लगातार हमलों के बाद अमेरिका ने यह कदम उठाया है. ताज़ा खबरों के मुताबिक, अमेरिका अब इराक से अपने कई महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों और हथियारों को जॉर्डन में शिफ्ट कर रहा है. पिछले कुछ समय से इराक में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा था.
म्यांमार में आतंकी ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक को डिफॉल्ट बेल
New Delhi, 18 सितंबर . म्यांमार में आतंकी संगठनों को हथियार और ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग देने के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों में से एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने डिफॉल्ट बेल दे दी है. राऊज एवेन्यू कोर्ट की विशेष एनआईए अदालत ने मैथ्यू ... Read more
ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से पहले ताइवान में बढ़ी चिंता, वीडियो में जाने चीन से डील के लिए अमेरिकी रुख नरम पड़ने का डर
USA से iPhone Duo मंगवाने की सोच रहे हैं, तो ज़रा रुक जाइए, एयरपोर्ट पर आपको कस्टम ड्यूटी का भारी झटका लग सकता है।
अमेरिकी नागरिक को मिली बेल, आतंकियों को ट्रेनिंग देने का है आरोप
म्यांमार में आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को राऊज एवेन्यू कोर्ट की NIA अदालत ने डिफॉल्ट जमानत दे दी है. जमानत के बाद आऱोपी को दिल्ली में रहना होगा और NIA के बुलाने पर जांच में शामिल होना होगा.
अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ ऐतिहासिक न्यायिक मिसाल कायम करते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका की एक संघीय अदालत ने सीरियाई सेना के पूर्व उच्च अधिकारी समीर ओसमान अलशेख को छह दशक (60 साल) की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के क्रूर शासनकाल के दौरान कुख्यात डिटेंशन सेंटरों में बंद असहाय राजनीतिक बंदियों, असंतुष्टों और आम नागरिकों को अमानवीय शारीरिक व मानसिक यातनाएं देने के संगीन मामलों में अलशेख को यह ऐतिहासिक दंड दिया गया है। कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स स्थित फेडरल कोर्ट में सुनाया गया यह निर्णय उन अनगिनत पीड़ितों के लिए इंसाफ की एक बड़ी किरण बनकर उभरा है, जिन्होंने असद शासन की गुप्त कालकोठरियों में असहनीय क्रूरता झेली थी।अदरा सेंट्रल प्रिजन का खौफनाक अतीत: यातनाओं की साजिश और बर्बरता के तीन संगीन मामलों में दोष साबितलॉस एंजिल्स की संघीय अदालत में चली लंबी और गहन सुनवाई के बाद न्यायपीठ ने पूर्व सीरियाई सैन्य अधिकारी समीर ओसमान अलशेख को वर्ष 2005 से 2008 के बीच राजधानी दमिश्क के पास स्थित कुख्यात 'अदरा सेंट्रल प्रिजन' (Adra Prison) के मुख्य प्रभारी के रूप में काम करते हुए किए गए अमानवीय अपराधों का मुख्य जिम्मेदार ठहराया। मार्च के महीने में ही अदालत की निष्पक्ष जूरी ने अलशेख को कैदियों के खिलाफ संगठित यातनाएं रचने की आपराधिक साजिश के एक प्रमुख मामले और सीधे तौर पर प्रताड़ना देने के तीन अलग-अलग संगीन मामलों में पूरी तरह दोषी करार दिया था। अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्यों, फॉरेंसिक मेडिकल रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों के जरिए यह अकाट्य रूप से साबित कर दिया कि अलशेख की सीधी देखरेख में सरकारी हिरासत में बंद कैदियों पर ऐसे रूह कंपा देने वाले तरीके आजमाए जाते थे जो अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत गंभीर युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं।'अकल्पनीय रूप से क्रूर और बर्बर': अमेरिकी संघीय जज ने सजा सुनाते हुए की तल्ख टिप्पणीअलशेख को उसके जीवन के अंतिम पड़ाव तक जेल की सलाखों के पीछे भेजने का आदेश देते हुए अमेरिकी फेडरल जज ने बेहद सख्त और भावुक टिप्पणियां दर्ज कीं। अदालत के पीठासीन न्यायाधीश ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि अभियुक्त द्वारा अंजाम दिया गया व्यवहार घिनौना, अकल्पनीय रूप से क्रूर और लगभग शब्दों से परे हिंसक एवं बर्बर था। अदालत ने रेखांकित किया कि किसी भी संप्रभु राज्य की आड़ में सत्ता का ऐसा घिनौना दुरुपयोग मानवीय सभ्यता और सार्वभौमिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। न्यायिक पीठ ने स्पष्ट किया कि 60 वर्ष की यह कठोर सजा न केवल दोषी के क्रूर कृत्यों का न्यायोचित हिसाब है, बल्कि यह दुनिया भर के उन तमाम सैन्य कमांडरों और हुक्मरानों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है जो अपनी जनता पर जुल्म ढाकर विदेशी सरजमीं पर छिपने का मुगालता पालते हैं।गुप्त कालकोठरियों में गायब होते लाखों नागरिक: संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट में असद सरकार बेनकाबसमीर ओसमान अलशेख को दी गई यह कठोर सजा सीरियाई सरकार के उस व्यापक और संगठित दमन तंत्र की पुष्टि करती है, जिसे लेकर वैश्विक संस्थाएं वर्षों से आवाज उठाती रही हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी प्रतिष्ठित मानवाधिकार संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष जांच आयोगों ने अपनी विस्तृत रिपोर्टों में बार-बार रेखांकित किया है कि बशर अल-असद के शासन में सरकारी सुरक्षा एजेंसियां बड़े पैमाने पर मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लेती रही हैं। सीरिया की विभिन्न जेलों में हजारों राजनीतिक कैदियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या आधिकारिक आरोप के वर्षों तक गुप्त रूप से बंद रखा गया और उन पर भयानक थर्ड डिग्री टार्चर किया गया। इन पीड़ितों में से एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जिनके परिवारों को आज तक यह जानकारी नहीं दी गई कि उनके अपने जीवित भी हैं या यातनाओं के चलते जेल की अंधेरी कोठरियों में हमेशा के लिए दफन हो चुके हैं।अंतरराष्ट्रीय न्याय का दायरा: विदेशी सीमाओं से परे युद्ध अपराधियों पर कानूनी शिकंजाअलशेख का यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायशास्त्र (Universal Jurisdiction) और अमेरिकी मानवाधिकार कानून के बढ़ते प्रभाव का एक बड़ा उदाहरण है। दशकों तक सीरियाई सत्ता की शक्ति का आनंद लेने के बाद जब पूर्व सैन्य अधिकारी अमेरिका पहुंचे, तो उन्हें लगा था कि उनका अतीत फाइलों में दब चुका है। हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के मानवाधिकार और विशेष अभियोजन अनुभाग ने सीरियाई नागरिक समाज और प्रताड़ना से बचे जीवित गवाहों के सहयोग से मजबूत कानूनी केस तैयार किया। इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों की कोई भौगोलिक सीमा या समय सीमा नहीं होती। विदेशी अदालतों में युद्ध अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की इस न्यायिक प्रक्रिया ने वैश्विक स्तर पर यह मजबूत संदेश दिया है कि सत्ता के संरक्षण में बेगुनाहों का खून बहाने वाले जल्लाद दुनिया के किसी भी कोने में न्याय के लंबे हाथों से बच नहीं सकते।
सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की तैयारी, वीडियो में देंखे चीन तक तकनीक पहुंचने का अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर
NIA terror conspiracy case में अमेरिकी Matthew VanDyke को Delhi Court से मिली जमानत
दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से जांच किए जा रहे आतंकी साजिश के एक मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक को शुक्रवार को जमानत दे दी। अदालत के सूत्रों के अनुसार, विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने वैन डाइक को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर राहत दी। अदालत ने निर्देश दिया कि वह दिल्ली से बाहर नहीं जाएगा। अदालत ने वैन डाइक की जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को एनआईए को नोटिस जारी किया था। इस महीने की शुरुआत में एजेंसी ने वैन डाइक और यूक्रेन के छह नागरिकों के खिलाफ भारत में कथित अवैध प्रवेश, ठहरने और आवाजाही को लेकर आरोपपत्र दाखिल किया था, लेकिन आतंकवाद रोधी कानून गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधान नहीं लगाए थे। एनआईए के आरोपपत्र में सातों आरोपियों पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 (वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में प्रवेश करने की सजा का प्रावधान) और धारा 23 के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है, ‘‘यूएपीए के तहत अपराध किए जाने के संबंध में सही और पूरी जानकारी जुटाने तथा उसका सत्यापन करने के लिए और समय की आवश्यकता है।’’एनआईए ने अदालत को बताया था कि आरोपियों के खिलाफ भारत और म्यांमा में जातीय सशस्त्र समूहों को सहायता देने और उन्हें ड्रोन प्रशिक्षण देने सहित व्यापक आतंकवादी साजिश के मामले में जांच की जा रही है।
अमेरिकी सीनेटर की भारत पर 'भाषा' और बिल पास होते ही मोदी सरकार के जवाब पर बहस - BBC
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अमेरिका-इरान जंग के बीच UNGA दौरा: पजेशकियान को मिलेगा डिप्लोमैटिक इम्युनिटी का कवच, US नहीं कर सकता अरेस्ट
अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव के मतदान शुरू, नवंबर में तय होगा ट्रंप का भविष्य
अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव की शुरुआती वोटिंग शुरू हो गई है. वर्जीनिया के बाद कई राज्यों में लोग अब्सेंटी बैलेट डाल रहे हैं. 3 नवंबर के चुनाव में कांग्रेस के साथ गवर्नर और स्टेट लेजिस्लेचर के लिए भी वोटिंग होगी. महंगाई, ईरान, इमिग्रेशन और एआई जैसे मुद्दे अहम रहेंगे.
रूस के लिए अमेरिका से भिड़ेगा भारत? MEA की दो टूक- रिश्तों पर पड़ सकता है असर
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' को पास कर दिया है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अधिकार देता है कि वे उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं जो रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखेंगे।
भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल, इकलौते भारतीय-अमेरिकी सांसद ने किया समर्थन; राजा कृष्णमूर्ति कौन?
कौन हैं राजा कृष्णमूर्ति? भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद ने रूस प्रतिबंध बिल के समर्थन में वोट दिया है। इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। जानिए भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
अमेरिका के नए टैरिफ कानून का चीन ने किया विरोध, कहा- दूसरे देशों पर अधिकार जताना बंद करे वाशिंगटन
रूस से तेल-गैस खरीद पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने वाले अमेरिकी कानून 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को लेकर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की।
पहले अमेरिका, फिर जापान, अब भारत में महंगा होगा बैंक लोन; RBI कितनी बढ़ा सकता है ब्याज दरें?
दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के बाद, भारत में भी बैंक लोन और ईएमआई महंगी होने की आशंका है।
सोल, 18 सितंबर . दक्षिण कोरिया के President ली जे म्युंग ने Friday को एक बार फिर कहा कि वह 1950-53 के कोरियाई युद्ध को रोकने वाले युद्धविराम समझौते की जगह एक स्थायी शांति व्यवस्था बनाना चाहते हैं. यह बात उन्होंने नेशनल असेंबली में आयोजित समारोह में कही. यह समारोह प्योंगयांग संयुक्त घोषणा की याद ... Read more
अमेरिका: ट्रंप प्रशासन की 'मिस्टर सिंह' वाली पोस्ट का असर? सिख ट्रक ड्राइवर पर जानलेवा हमला, 17 बार चाकू मारा
अमेरिकी सीनेटर की भारत पर 'भाषा' और बिल पास होते ही मोदी सरकार के जवाब पर बहस
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल की भारत के बारे में इस्तेमाल की गई आक्रामक भाषा की चर्चा है. लेकिन उससे भी ज़्यादा चर्चा भारत के कड़े जवाब की हो रही है.
अमेरिकी मछुआरों के लिए ट्रंप ने खोल दी सरकारी जमीनें
अमेरिका में अब शिकार और मछली पकड़ने के शौकीनों के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अहम आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं. इनमें लाखों एकड़ सरकारी जमीन को हंटिंग-फिशिंग के लिए खोलने और मरीन एक्टिविटी से जुड़े कई नियमों में ढील देने की बात कही गई है.
हूती की अमेरिका से 'सीक्रेट' डील, सऊदी अरब की कैसे बढ़ी मुश्किल
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक अत्याधुनिक एफ-15 लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया है और इसका वीडियो भी जारी किया है. तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों ने इस संघर्ष से दूरी बना ली है, जिससे सऊदी अरब खुद को अकेला महसूस कर रहा है. सबसे बड़ा झटका अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगा है, जिन्होंने ओमान में हूतियों के साथ एक गुप्त समझौता कर लिया है.
अमेरिका के 100% टैरिफ पर भारत का करारा जवाब, विदेश मंत्रालय ने कही ये बात
अमेरिका द्वारा 100 फीसदी टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और उसकी उपलब्धता के आधार पर अपने फैसले लेता रहेगा.
ईरान मुद्दे पर रूस-चीन ने अमेरिका को UN में दिया झटका
रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका के उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसमें ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी के लिए UN विशेषज्ञों का कार्य एक साल बढ़ाने की बात थी। प्रस्ताव 11-2 से खारिज हुआ, लेकिन ईरान पर मौजूदा प्रतिबंध अभी भी लागू हैं।
अमेरिका से तनातनी के बीच EU ने कनाडा को दिया 'सहयोगी सदस्य' बनने का प्रस्ताव। जानें इसके मायने, चुनौतियां और ट्रंप द्वारा भारी टैरिफ की धमकी की इनसाइड स्टोरी।
अमेरिका के व्योमिंग राज्य में एक सिख ट्रक चालक पर कथित तौर पर 17 बार चाकू से हमला किए जाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया है. यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब कुछ दिन पहले अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की एक पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया था.
सिख ट्रक ड्राइवर पर हमले से भड़के अमेरिकी सांसद, रेस्ट स्टॉप पर घोंप दिया गया था चाकू
अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने व्योमिंग में सिख ट्रक ड्राइवर पर हुए हमले की निंदा करते हुए नफरत और हिंसा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने DHS की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल उठाया है।
अमेरिका में पंजाबी सिख ट्रक चालक पर हमला: बाथरूम में चाकू से किए वार, कैलिफोर्निया निवासी गिरफ्तार
अमेरिका के वायोमिंग राज्य में कैलिफोर्निया के पंजाबी सिख ट्रक चालक पर चाकू से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है।
India-US Tech Partnership: सिएटल में भारतीय मूल के 40 से ज्यादा टेक सीईओ और सीटीओ एक मंच पर जुटे। माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला ने भारत-सिएटल तकनीकी रिश्तों की सराहना की। चर्चा में एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, डेटा सेंटर
वॉशिंगटन, 18 सितंबर . अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और उनका प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका का दौरा करने वाले हैं. इसके लिए अमेरिका की ओर से भी इजाजत दे दी गई है. दरअसल, न्यूयॉर्क में अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा की हाई-लेवल ... Read more
अमेरिका: रूस से तेल खरीद पर भारत पर प्रतिबंध के पक्ष में भारतवंशी सांसद, अपनी पार्टी के खिलाफ दिया वोट US: Indian-origin lawmaker favors sanctions on India over oil purchases from Russia; votes against own party.
अमेरिका और ईरान के बीच बीते लंबे समय से जंग को लेकर गतिरोध लगातार जारी है। ऐसे समय में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ईरान जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि वे ऐसे समय में अमेरिका क्यों जा रहे हैं।
F-35 Saudi Deal: सऊदी को 48 फाइटर जेट देने की तैयारी, चीन से जुड़ी खुफिया चिंता के बीच आगे बढ़ा अमेरिका
शुरुआती कारोबार में 16 पैसे सुधरा Rupee, अमेरिकी Dollar के मुकाबले 95.73 पर पहुंचा
रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 16 पैसे मजबूत होकर 95.73 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। घरेलू शेयर बाजारों में खरीदारी और विदेशी बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में तेज बढ़ोतरी के बाद कच्चे तेल की कीमतों के 104 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से भारतीय मुद्रा पर दबाव कम हुआ। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल भी रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.75 प्रति डॉलर पर खुला। शुरुआती कारोबार में थोड़ा मजबूत होकर 95.73 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 16 पैसे की बढ़त है। रुपया बृहस्पतिवार को दो पैसे मजबूत होकर 95.89 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इससे पहले चार सितंबर को 94.43 प्रति डॉलर के बंद भाव के बाद लगातार आठ सत्र में इसमें 150 पैसे यानी करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत टूटकर 99.97 पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चे तेल का भाव वायदा कारोबार में 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 103.85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 122.18 अंक चढ़कर 74,436.77 अंक पर और निफ्टी 23.55 अंक की बढ़त के साथ 23,294.15 अंक पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 3,208.76 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
ईरान समर्थित हूती से अमेरिकी ने कर ली डील, दलदल में फंसा सऊदी
ओमान में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों की मुलाकात के बीच यमन के लाल सागर तट पर हूतियों की बढ़त ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है. अगर यह खामोश समझ बनी रहती है, तो रियाद को बाब अल मंदेब और अपनी शिपिंग सुरक्षा के मोर्चे पर ज्यादा दबाव अकेले झेलना पड़ सकता है.
अमेरिका में OPT फीस में प्रस्तावित वृद्धि: विदेशी छात्रों पर संभावित प्रभाव
अमेरिका में अध्ययन कर रहे विदेशी छात्रों के लिए OPT फीस में प्रस्तावित वृद्धि चिंता का विषय बन गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फीस 1 लाख डॉलर तक हो सकती है, जो अभी केवल एक प्रस्ताव है। OPT छात्रों को डिग्री पूरी करने के बाद अपने क्षेत्र में काम करने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रस्ताव का असर भारतीय छात्रों सहित कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर पड़ सकता है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की वजहें और छात्रों को क्या करना चाहिए।
US OPT Fee: अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करना हो सकता है महंगा, 1 लाख डॉलर फीस के प्रस्ताव से भारतीय छात्रों की बढ़ी चिंता
अमेरिका ने रोका फलस्तीनी राष्ट्रपति का वीजा: यूएनजीए में भारत समेत152 देशों का मिल समर्थन; आगे क्या होगा?
वाशिंगटन, 18 सितंबर . अगले हफ्ते चीनी President शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक से पहले अमेरिकी लॉ मेकर्स ने President डोनाल्ड ट्रंप से दो बड़ी मांगें की हैं. लॉ मेकर्स चाहते हैं कि ट्रंप चीन में हिरासत में लिए गए अमेरिकियों की रिहाई सुनिश्चित करें और चीन को एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चिप्स ... Read more
Trump on Iran War: ईरान पर फिर बड़े हमले करेंगे ट्रंप? अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- लेना है बड़ा फैसला
Trump on Iran War: ईरान पर फिर बड़े हमले करेंगे ट्रंप? अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- लेना है बड़ा फैसला
उत्तर कोरिया का फिर ऐलान- परमाणु हथियार नहीं छोड़ेंगे, किम यो-जोंग ने कहा- सुरक्षा के लिए जरूरी; अमेरिका से बातचीत की कोशिशों के बीच बयान
अमेरिका-हूती के बीच गुप्त बातचीत, लाल सागर में जहाजों को लेकर बनी सहमति; सऊदी अरब को लेकर बदली रणनीति
अमेरिका का नया नियम: 30 पार कर चुके सैनिकों की टेस्टोस्टेरोन जांच अब जरूरी, पेंटागन ने जारी की गाइडलाइन New US rule: Testosterone testing now mandatory for soldiers over 30; Pentagon issues guidelines.
अमेरिका के सऊदी अरब को एफ़-35 फ़ाइटर प्लेन बेचने पर क्यों हो रहा है विवाद?
सऊदी अरब सालों से एफ़-35 ख़रीदने के लिए अमेरिका में लॉबी कर रहा था. इसे दुनिया का अब तक का सबसे एडवांस फ़ाइटर जेट माना जाता है.
रियाद को 48 एफ-35 देगा अमेरिका?: हूती-सऊदी तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम; चीन पर भी नजर
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि म्यांमार की राजधानी नेप्यीडॉ में अधिकारियों के साथ हुई बैठकों के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिक एडम कैस्टिलो की रिहाई सुनिश्चित कराई।
भारत से इतनी नफरत? अमेरिकी कंपनी ने 5 मिनट की कॉल में 80 भारतीयों को नौकरी से निकाला
जानकारी के मुताबिक कर्मचारियों को अचानक एक मीटिंग का इनविटेशन मिला। इसके बाद कुछ ही मिनटों की कॉल में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। रेडिट पर एक यूजर ने अपनी आपबीती शेयर की है।
यूएन में ईरान को लेकर भिड़ गए अमेरिका-रूस-चीन, सिर्फ 2 वोटों ने बदल दिया पूरा खेल
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका, रूस और चीन आमने-सामने आ गए। अमेरिका के प्रस्ताव पर 11 देशों ने समर्थन किया, लेकिन रूस और चीन के वीटो से प्रस्ताव गिर गया।
10 हजार फीट की ऊंचाई पर भारत-अमेरिका की सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास, आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में ड्रोन और रोबोटिक डॉग भी शामिल
रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ की धमकी, लेकिन यूरेनियम पर अमेरिका ने क्यों रखी छूट? बिल में सामने आया बड़ा प्रावधान
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री जाएंगे अमेरिका, ट्रंप ने दे दिया वीजा! - ABP News
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अमेरिका का दोगलापन देखिए! भारत को 100% टैरिफ की धमकी, लेकिन खुद रूस से करेगा खरीददारी
अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ किया है। भारत और चीन पर भी असर पड़ सकता है। लेकिन बिल में रूस से परमाणु सहयोग के लिए अहम अपवाद क्यों रखा गया है?
अमेरिका का नया प्रतिबंध कानून : भारत और चीन पर टैरिफ का खतरा, यूरेनियम आयात को मिली छूट
अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित कर दिया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है
विदेश के समाचार: नाइजीरिया में हिरासत में मौत से मचा हड़कंप; युद्ध अपराध पर घिरे अमेरिका-ईरान
विदेश के समाचार: नाइजीरिया में हिरासत में मौत से मचा हड़कंप; युद्ध अपराध पर घिरे अमेरिका-ईरान
अमेरिका में ट्रेनिंग के दौरान F-16 फाइटर जेट क्रैश, VIDEO आया सामने; खाली कराया गया इलाका
टेक्सास एयर नेशनल गार्ड का एक F-16 फाइटर जेट मिशिगन की ग्रैंड ट्रैवर्स काउंटी में रेगुलर ट्रेनिंग उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। CBS न्यूज़ के अनुसार, पायलट सुरक्षित रूप से जेट से बाहर निकल गया, लेकिन उसे चोटें आईं और बाद में उसकी हालत स्थिर बताई गई।
पक्षी से टकराकर अमेरिकी F-16 क्रैश... पायलट ने पैराशूट से बचाई जान
अमेरिका के मिशिगन में ट्रेनिंग के दौरान F-16 फाइटर जेट क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते विमान से बाहर निकलकर पैराशूट की मदद से अपनी जान बचा ली. हादसे के बाद जहरीले केमिकल के रिसाव की वजह से आसपास के लोगों को इलाका खाली करने का आदेश दिया गया.
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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पेजेश्कियान और अराघची को मिलेगा US वीज़ा
ट्रंप प्रशासन अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के शीर्ष अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल को शामिल होने की अनुमति देने वाला है. यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के बीच आया है.
ईरान पर प्रतिबंधों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में टकराव: रूस और चीन का अमेरिकी प्रस्ताव पर वीटो, ट्रंप को झटका russia-china-veto-us-proposal-un-experts-monitor-iran-sanctions
Kangra News: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, कच्चा माल महंगा, स्टेशनरी कारोबारी बेहाल
अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल की सीधी मार अब स्टेशनरी कारोबार पर पड़ने लगी है।
होमवर्क, लंच और बस: हर काम का अलग ऐप; अमेरिकी स्कूलों में डिजिटल जाल से माता-पिता बेहाल
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अमेरिका में ब्याज बढ़ा, अब भारत की बारी: रुपया, शेयर बाजार और सोने पर असर; आपकी जेब पर भी पड़ेगी मार?
पांच मिनट की गूगल मीट कॉल में 80 नौकरियां खत्म: अमेरिकी कंपनी ने पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम हटाई, वजह क्या? bluevine-lays-off-80-indian-customer-service-employees-in-five-minute-google-meet-call
खाड़ी में जंग के बीच सऊदी को अमेरिका का तोहफा, F-35 सौदे को मंजूरी
अमेरिका ने सऊदी अरब को 24.3 अरब डॉलर की कीमत वाले F-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री की मंजूरी दी है. यह डील ऐसे समय में हुई है जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बढ़ रहा है.
भारत-अमेरिका संबंध: उतार-चढ़ाव के बीच साझेदारी कायम; अंतरिक्ष, तकनीक से समुद्र तक रिश्तों का विस्तार
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Sonipat News: अमेरिका भेने के नाम पर युवक से 45 लाख रुपये ठगे
Youth defrauded of 45 lakh on the pretext of being sent to America.
Ambala News: वैध वीजा से अमेरिका भेजने का दिया झांसा, 44.80 लाख लेकर डंकी रूट से भेजा पनामा
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दुश्मनी अपनी जगह, कूटनीति अपनी जगह: युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरानी नेताओं को दिया वीजा, आखिर क्यों?
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अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
पाकिस्तान ने अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी के साथ किया समझौता, ट्रंप के बेटों से कनेक्शन
पाकिस्तान ने अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी के साथ समझौता किया है। इस कंपनी के साथ जल्दी की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटों की हिस्सेदारी वाली एक कंपनी समझौता करने वाली है।
Job loss News: पिछले कुछ समय से अचानक होने वाली छंटनी (Layoffs) के मामले लगातार कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। इसी बीच Reddit पर एक कर्मचारी की पोस्ट चर्चा में है। इसमें कर्मचारी ने दावा किया है कि अमेरिका की एक फाइनेंशियल कंपनी ने महज 5 मिनट की Google Meet कॉल के दौरान अपनी पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से निकाल दिया। उन्होंने बताया कि 80 कर्मचारियों के लिए एक आम शिफ्ट की तरह शुरू हुआ दिन एक पांच मिनट की कॉल के साथ खत्म हुआ, जिसने सब कुछ बदल दिया।आरोप है कि फाइनेंशियल कंपनी के लिए काम करने वाली भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को उनकी शिफ्ट के दौरान बताया गया कि उनकी नौकरी खत्म की जा रही है। इससे कर्मचारी हैरान और परेशान हो गए कि अब आगे क्या होगा। यह घटना ओरेकल और एडिडास जैसी जानी-मानी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी के बीच हुई है।कर्मचारी ने Reddit के r/IndianWorkplace फोरम पर अपना अनुभव शेयर किया है। पोस्ट का शीर्षक 'Laid off over a Google Meet' था। पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि एक दिन पहले तक वह अमेरिकी बैंक की कस्टमर सपोर्ट टीम का हिस्सा था, लेकिन अचानक पूरी टीम को नौकरी से निकाल दिया गया।शाम की शिफ्ट के दौरान आया Google Meet का बुलावाReddit पोस्ट के मुताबिक, कंपनी ने ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए कर्मचारियों को उस दिन घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा था। कर्मचारी शाम 6:30 बजे की शिफ्ट में काम कर रहा था। उसके मुताबिक, रात करीब 9:30 बजे अचानक सभी कर्मचारियों को Google Meet पर बुलाया गया। कर्मचारी का दावा है कि मीटिंग में बताया गया कि 'पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम' को नौकरी से हटा दिया गया है।'80 कर्मचारी, सभी चले गए... 80 परिवार प्रभावित'कर्मचारी ने छंटनी के पैमाने को बताते हुए लिखा कि टीम में कुल 80 कर्मचारी थे। सभी की नौकरी एक झटके में चली गई। उसने पोस्ट में कहा कि महज पांच मिनट की कॉल से 80 परिवार प्रभावित हुए हैं। कर्मचारी ने नौकरी जाने के बाद नई नौकरी मिलने को लेकर भी चिंता जताई। उसने कहा कि इस घटना ने उसे कॉरपोरेट नौकरियों की अस्थिरता का एहसास कराया है।कंपनी ने क्या वजह बताई?पोस्ट पर एक Reddit यूजर ने पूछा कि कंपनी ने इतने बड़े फैसले के पीछे क्या कारण बताया? इसके जवाब में कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी का कहना था कि भारतीय टीम से अपेक्षित आउटपुट नहीं मिल रहा था। हालांकि, कर्मचारी ने इस कारण पर असहमति जताई। उसका आरोप था कि अमेरिकी टीम में भी एट्रिशन और अन्य समस्याएं थीं। जबकि भारतीय कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त मेहनत करते थे। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसपोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कर्मचारी के प्रति सहानुभूति जताई। एक यूजर ने लिखा, यह बेहद दुखद है और दिल तोड़ने वाला है। वहीं, कुछ लोगों ने कंपनी की छंटनी प्रक्रिया, कर्मचारियों को मिलने वाले सेवरेंस और अचानक नौकरी जाने की स्थिति में सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कॉरपोरेट सेक्टर में अचानक होने वाली छंटनी को लेकर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।ये भी पढ़ें- Viral Video: ट्रेन से बेडशीट चुराते पकड़े गया ये कपल, TTE के टोकने पर महिला देने लगी अजीब दलील(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol हिंदी ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इन दावों का समर्थन किया है।)
अमेरिकी कंपनी पाकिस्तान में बनाएगी ड्रोन, सेना के साथ हुई डील
पाकिस्तान और एक अमेरिकी कंपनी के बीच ड्रोन निर्माण को लेकर एक बड़ी डील हुई है. इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनी पावरस पाकिस्तान में ड्रोन का निर्माण करेगी. इसके लिए कंपनी ने पाकिस्तान आर्मी यानी पाकिस्तानी सेना के साथ एक समझौता किया है. कंपनी के सह-संस्थापक ब्रेट वेलकोविच ने इस बात की पुष्टि करते हुए बयान जारी किया है. उनके अनुसार, इस समझौते में ड्रोन से जुड़े शुरुआती ऑर्डर भी शामिल किए गए हैं.
वैश्विक महासागरों में अपना निर्विवाद प्रभुत्व स्थापित करने की होड़ में चीनी जनमुक्ति सेना नौसेना (PLAN) ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पश्चिमी रक्षा विशेषज्ञों और पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है। अंतरिक्ष में तैनात हाई-रिजॉल्यूशन जासूसी उपग्रहों से प्राप्त नई तस्वीरों ने चीन के एक अति-गोपनीय नौसैनिक हथियार प्रणाली की पोल खोल दी है। शंघाई स्थित हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में चीनी इंजीनियर दुनिया के पहले ऐसे अनूठे और विशालकाय 'मदरशिप' (विशाल वाहक युद्धपोत) का निर्माण कर रहे हैं, जो पानी के भीतर चलने वाली चालक दल रहित रोबोटिक सबमरीन्स (ड्रोन पनडुब्बियों) का एक पूरा बेड़ा अपने साथ ले जाने और गहरे समंदर में उन्हें चुपके से तैनात करने में सक्षम है। यह युद्धपोत पारंपरिक नौसैनिक युद्ध की पूरी परिभाषा बदलने की क्षमता रखता है, जिससे अमेरिका और उसके प्रशांत सहयोगियों के रणनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा: शंघाई शिपयार्ड में आकार ले रहा दुनिया का पहला ड्रोन सबमरीन मदरशिपअमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस और सैटेलाइट इमेजरी फर्म 'वैंटोर' द्वारा जारी किए गए ताजा हवाई विश्लेषण के अनुसार, शंघाई के प्रसिद्ध हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में बन रहा यह विशेष प्लेटफॉर्म पारंपरिक फ्रिगेट, विध्वंसक या विमानवाहक पोतों से पूरी तरह भिन्न है। ब्रिटिश दैनिक 'द टेलीग्राफ' में प्रकाशित रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, इस नए चीनी युद्धपोत के निचले और मध्य ढांचे में एक विशाल आंतरिक हैंगर बनाया गया है, जो पानी के अंदर संचालित होने वाले स्वचालित वाहनों के रखरखाव और लॉन्चिंग के लिए समर्पित है। इसके साथ ही, सैटेलाइट इमेजरी में डेक के पास 12 भारी-भरकम वर्टिकल लिफ्टिंग आर्म्स और क्रेननुमा मैकेनिज्म साफ नजर आ रहे हैं। यह मैकेनिज्म समुद्र की अशांत लहरों के बीच भी भारी पानी के भीतर के ड्रोन्स को सीधे गहरे पानी में उतारने और ऑपरेशन पूरा होने के बाद वापस जहाज के पेट में खींचने के लिए डिजाइन किया गया है, जो साबित करता है कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह से आक्रामक नौसैनिक अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है।148 फीट लंबी दानवाकार XXLUUV पनडुब्बियां: अमेरिकी ओर्का और ब्रिटिश एक्सकैलिबर से कई गुना बड़ीइस मदरशिप की सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि यह एक साथ चार विशालकाय एक्स्ट्रा-लार्ज अनक्रूड अंडरवाटर व्हीकल्स (XXLUUV) को गुप्त रूप से ढोने की क्षमता रखता है। इन सबमरीन ड्रोन्स का पैमाना और इंजीनियरिंग दुनिया के बाकी देशों को पीछे छोड़ती नजर आ रही है। चीनी नौसेना द्वारा तैयार की जा रही मुख्य स्वचालित ड्रोन सबमरीन की लंबाई लगभग 148 फीट आंकी गई है। रक्षा जानकारों के मुताबिक, यह अमेरिकी नौसेना के सबसे उन्नत 'ओर्का' रोबोटिक सबमरीन कार्यक्रम से आकार में करीब तीन गुना और यूनाइटेड किंगडम के रॉयल नेवी 'एक्सकैलिबर' ड्रोन प्रोजेक्ट से लगभग चार गुना अधिक विशाल है। बिना किसी मानव दल के संचालित होने वाले ये रोबोटिक दैत्य गहरे समंदर में हजारों समुद्री मील तक पूरी तरह खामोशी से सफर तय करने में सक्षम हैं, जिससे दुश्मन के पारंपरिक सोनार नेटवर्क इन्हें आसानी से पकड़ नहीं पाते।भारी टॉरपीडो और सी-माइंस से लैस: गहरे पाताल से हजारों मील दूर सटीक प्रहार की घातक क्षमताये विशालकाय ड्रोन सबमरीन्स केवल जासूसी या निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये घातक पेलोड बे से लैस हैं जिनमें भारी वजन वाले आधुनिक एंटी-शिप और एंटी-सबमरीन टॉरपीडो, स्मार्ट समुद्री बारूदी सुरंगें (सी-माइंस) और क्रूज मिसाइलें लोड की जा सकती हैं। चालक दल की जैविक सीमाओं से मुक्त होने के कारण ये बिना थके महीनों तक समुद्र की तलहटी में घात लगाकर बैठ सकती हैं। आवश्यकता पड़ने पर यह मदरशिप अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खड़े होकर इन चारों सबमरीन्स को लॉन्च कर सकता है, जो शत्रु के रडार और पी-8आई पोसाइडन जैसे पनडुब्बी-रोधी टोही विमानों की पकड़ से बचते हुए हजारों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स, महत्वपूर्ण बंदरगाहों और रणनीतिक अंडरसी इंटरनेट केबल्स को तबाह करने की क्षमता रखती हैं।शिपबिल्डिंग में अमेरिका से आगे निकला चीन: 400 से अधिक युद्धपोतों का विशाल नौसैनिक जत्थाइस मदरशिप का निर्माण पश्चिमी रक्षा योजनाकारों की उस पुरानी चिंता को और गहरा करता है, जिसमें पेंटागन बार-बार चीन की अभूतपूर्व युद्धपोत निर्माण क्षमता (शिपबिल्डिंग कैपेसिटी) को रेखांकित करता रहा है। मौजूदा नौसैनिक आंकड़ों के अनुसार, जहां अमेरिकी नौसेना के पास सक्रिय युद्धपोतों की संख्या लगभग 295 के आसपास सिमटी हुई है, वहीं चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के पास एक्टिव वॉरशिप्स का बेड़ा 400 का आंकड़ा पार कर चुका है। चीन के वाणिज्यिक और सैन्य शिपयार्ड्स की उत्पादन गति पश्चिमी देशों की तुलना में कई गुना तेज है। यदि यह ड्रोन सबमरीन मदरशिप सफलतापूर्वक समुद्र में ट्रायल पूरा कर लेता है, तो चीन कम लागत और बिना किसी मानव जीवन के जोखिम के अमेरिकी नौसेना की पारंपरिक सुपरकैरियर श्रेष्ठता को सीधे चुनौती देने में सफल हो जाएगा।ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर पर फोकस: डोंग जून की पश्चिमी देशों को सख्त चेतावनीअंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों का मानना है कि बीजिंग इस नए हथियार का प्राथमिक इस्तेमाल ताइवान जलडमरूमध्य और विवादित दक्षिण चीन सागर (SCS) में एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीति को अभेद्य बनाने के लिए करेगा। चीन संपूर्ण दक्षिण चीन सागर पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोकता है और ताइवान के एकीकरण को अपना मुख्य लक्ष्य मानता है। किसी भी संभावित ताइवान संघर्ष की स्थिति में ये ड्रोन मदरशिप्स अमेरिकी युद्धपोतों को फर्स्ट आइलैंड चेन के भीतर प्रवेश करने से रोकने में अचूक ढाल साबित हो सकते हैं। इसी बीच, बीजिंग में संपन्न हुए शियांगशान सुरक्षा फोरम में चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून ने अपने कड़े संबोधन में पश्चिमी शक्तियों को चेतावनी देते हुए सैन्यवाद, गुटबाजी और वर्चस्ववादी नीतियों से दूर रहने को कहा। विश्लेषकों का मानना है कि चीनी रक्षा मंत्री का यह स्पष्ट संदेश अमेरिका और जापान जैसे सहयोगियों के लिए था, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री ताकत को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।
भोजपुर के कृष्णागढ़ थाने पहुंचा अमेरिकी नागरिक, पुलिस ने बातचीत कर रास्ता बताया
17 सितंबर, गुरुवार: भोजपुर के कृष्णागढ़ थाना क्षेत्र में रास्ता भटकने के बाद एक अमेरिकी नागरिक थाने पहुंचा। पुलिस ने विदेशी नागरिक से बातचीत कर उसकी मदद की और आगे जाने का रास्ता बताया। घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
Pakistan News: अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए एक नए रक्षा समझौते ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सैन्य खरीद रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर इस बात पर चर्चा शुरु हो गई है कि भविष्य में इन बिना पायलट वाले सिस्टम (Unmanned Systems) का इस्तेमाल पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर किस तरह किया जा सकता है। बुधवार 16 सितंबर को POWERUS के सह-संस्थापक रॉबर्ट ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की।पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बैठक में उभरती रक्षा तकनीक, सैन्य खरीद, उत्पादन और लंबी अवधि में क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, इसी बीच न्यूज एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट ने इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, POWERUS ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) से जुड़ा एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है। हालांकि, इस ऑर्डर की कीमत और सिस्टम की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।क्या है POWERUS कीसीक्रेट डील?Reuters के मुताबिक, POWERUS के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने पाकिस्तान आर्मी असीम मुनीर के साथ MoU और शुरुआती ऑर्डर की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने ऑर्डर की कीमत या इसमें शामिल ड्रोन सिस्टम के बारे में जानकारी देने से इनकार किया। इसकी वजह सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता और गोपनीयता बताई गई।दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान सेना की ओर से GHQ बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में इस MoU या शुरुआती ऑर्डर का उल्लेख नहीं किया गया। सेना ने केवल इतना कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण पर चर्चा की। असीम मुनीर ने बैठक मेंटेक्नोलॉजी इनोवेशनऔर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिएएडवांस टेक्नोलॉजी के महत्व पर जोर दिया।क्या ईरान सीमा पर हो सकता है इस्तेमाल?इसडील के बाद पाकिस्तान की ईरान से लगी सीमा को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 909 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गुजरता है। यह इलाका सीमा पार आतंकवाद, तस्करी नेटवर्क और सुरक्षा चुनौतियों के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे मेंहाइटेकड्रोन या काउंटर-ड्रोन सिस्टम पाकिस्तान को निगरानी और सीमा पर स्थिति की जानकारी जुटाने में मदद कर सकते हैं।CNN-News18 के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने संभावना जताई है कि POWERUS कीटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में ईरान सीमा के आसपास गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी यह सिर्फ दावा किया जा रहा है। पाकिस्तान सेना या POWERUS ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि इस समझौते के तहत मिलने वाली तकनीक को ईरान सीमा या बलूचिस्तान में तैनात किया जाएगा। GHQ की आधिकारिक बैठक के विवरण में भी ईरान, बलूचिस्तान या पश्चिमी सीमा की निगरानी का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए POWERUS समझौते को सीधे ईरान की निगरानी की रणनीति से जोड़ना फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों से आगे की बात होगी।POWERUS की $22.3 मिलियन वाली मिडिल ईस्ट डील क्या है? पाकिस्तान के साथ समझौते से पहले POWERUS ने करीब 22.3 मिलियन डॉलर के एक अन्यडिफेंस डील की घोषणा की थी। इसके तहत कंपनी को मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चरके लिए नेटवर्क आधारित काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) क्षमता उपलब्ध करानी है।यह सिस्टम ड्रोन खतरों को डिटेक्ट, ट्रैक और क्लासिफाई करने के साथ-साथ कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए शुरुआती चेतावनी देने के लिए बनाया गया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इसमें इंटरसेप्टर तकनीक को जोड़ा जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस 22.3 मिलियन डॉलर के मध्य-पूर्वी अनुबंध की तकनीक पाकिस्तान को दी जाएगी या नहीं।अमेरिका-पाकिस्तान डिफेंस डील और चीन फैक्टर POWERUS के साथयह डील अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा तकनीकी सहयोग के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है। Reuters के अनुसार, कंपनी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संयुक्त ड्रोन तकनीक विकसित करने और पाकिस्तान में संभावित निर्माण की संभावनाएं भी तलाश रही है।POWERUS के संस्थापक और CEO एंड्रयू फॉक्स ने पाकिस्तान के निजी रक्षा क्षेत्र को उभरता हुआ बताया है, हालांकि उनके मुताबिक यह क्षेत्र अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है। वेलिकोविच ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसा संयुक्त तकनीकी संबंध विकसित करना है जिसमें अमेरिकी और पाकिस्तानी क्षमताओं को साथ लाया जा सके।यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति में चीन की बड़ी भूमिका है। अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ बढ़ता सहयोग पाकिस्तान को तकनीक के एक अतिरिक्त स्रोत तक पहुंच दे सकता है। साथ ही, संवेदनशील रक्षा तकनीक की खरीद में पारदर्शिता, संचालन संबंधी नियंत्रण और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।ट्रंपपरिवार से जुड़ा नया कनेक्शन?POWERUS के कॉरपोरेट ढांचे में भी जल्द बदलाव होने की उम्मीद है। कंपनी का Aureus Greenway Holdings के साथ विलय प्रस्तावित है। यह एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है, जिसे एक ऐसे निवेश फंड का समर्थन प्राप्त है। इसका संबंध डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़ा बताया गया है। Reuters के अनुसार, दोनों कंपनियों को उम्मीद है कि यह विलय अक्टूबर की शुरुआत में पूरा हो जाएगा।अब तक क्या पता है और क्या छिपा है? POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए समझौते से फिलहाल तीन बातें सामने आती हैं। पहली, दोनों पक्षों ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरी, पाकिस्तान आर्मी ने अनमॅन्ड एरियल सिस्टिम्स से जुड़ा एक शुरुआती लेकिन अघोषित मूल्य वाला ऑर्डर दिया है। और तीसरी, दोनों पक्ष रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण में व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।समझौते का उद्देश्य क्या है?ईरान सीमा और बलूचिस्तान में संभावित इस्तेमाल की चर्चा इसलिए सामने आई है क्योंकि POWERUS काउंटर-ड्रोन तकनीक विकसित करती है। पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि POWERUS समझौते का उद्देश्य ईरान सीमा की निगरानी है।ये भी पढ़ें- Asian Games 2026: 14 घंटे इंतजार, न कमरे मिले और न ही खाना...; एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के साथ ये कैसा व्यवहार?फिलहाल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तान आर्मी और POWERUS के बीच सहयोग का वास्तविक दायरा सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी तक ही सामने आया है। शुरुआती ड्रोन ऑर्डर की कीमत, सिस्टम की प्रकृति और संभावित ऑपरेशनल इस्तेमाल को लेकर जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है।
ईरान के हमलों से अमेरिकी अड्डे हुए तबाह, सामने आईं तस्वीरों से और क्या पता चला - BBC
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UPI चार्ज के पीछे अमेरिकी दबाव? पार्टी प्रवक्ताओं में तीखी बहस
यूपीआई (UPI) पेमेंट पर चार्ज लगाने की खबरों के बीच देश में एक बड़ी बहस शुरू हो गई है. इस चर्चा में यह अहम सवाल उठाया जा रहा है कि क्या डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को हमेशा के लिए मुफ्त रखा जा सकता है. विशेषज्ञों और नीति निर्धारकों का मानना है कि तकनीकी विकास, सुरक्षा और निरंतर इनोवेशन को बनाए रखने के लिए न्यूनतम शुल्क यानी मिनिमल चार्ज लगाना आवश्यक है.
अमेरिका में शादी के 17 दिन बाद हैदराबाद के इंजीनियर की संदिग्ध मौत
अमेरिका के मैसाचुसेट्स में हैदराबाद के 28 वर्षीय सिविल इंजीनियर मोहम्मद जाबेर हुसैन की शादी के 17 दिन बाद मौत हो गई. परिवार ने पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए विदेश मंत्रालय से मदद मांगी है. पढ़ें पूरी कहानी.
भारत पर 100% तक टैरिफ का रास्ता साफ, वीडियो में जाने अमेरिकी हाउस ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बिल किया पास
अमेरिकी डेटा के झटके से सोना-चांदी धड़ाम, सराफा बाजार में हड़कंप
बुधवार देर रात यूएस डेटा जारी होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर एमसीएक्स तक सोना-चांदी के भाव में जोरदार गिरावट शुरू हो गई। रात 11:30 बजे तक भारतीय बाजार के खुले रहने के दौरान एमसीएक्स पर हरे निशान में चल रहा कारोबार अचानक लाल जोन में पहुंच गया।
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर नए प्रतिबंधों वाला बिल 262-159 वोटों से पास किया है। बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार डोनाल्ड ट्रंप को देने का प्रावधान है।
UN की रिपोर्ट में अमेरिका पर बड़ा आरोप: ईरान में युद्ध अपराध (War Crimes) करने के मिले ठोस आधार
UN की रिपोर्ट में अमेरिका पर बड़ा आरोप: ईरान में युद्ध अपराध (War Crimes) करने के मिले ठोस आधार
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में खुद को तंदुरुस्त और एनर्जेटिक बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के सप्लीमेंट्स, जिम वर्कआउट और हाई-प्रोटीन डाइट का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों और अमेरिका में यह माना जाता है कि यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल कर लिया जाए, तो शरीर की सारी कमजोरियां दूर हो जाती हैं और ऊर्जा का स्तर हमेशा उच्च बना रहता है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) द्वारा जारी की गई एक बेहद चौंकाने वाली और व्यापक रिपोर्ट ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। सीडीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 71.5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो भरपूर मात्रा में प्रोटीन या अन्य पोषक तत्व लेने के बाद भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहते हैं। यह आंकड़ा न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि आधुनिक चिकित्सा जगत और पोषण विशेषज्ञों (Nutritionists) के लिए भी एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस आलेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर भरपूर प्रोटीन लेने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर लोग क्रोनिक थकान और ऊर्जा की कमी का सामना क्यों कर रहे हैं, और इसके पीछे छिपे असली वैज्ञानिक व जीवनशैली से जुड़े कारण क्या हैं।प्रोटीन का सेवन बनाम शरीर की ऊर्जा: क्या सिर्फ प्रोटीन खाने से ही मिल जाती है एनर्जी?आम तौर पर लोगों के मन में यह भ्रम बैठा हुआ है कि यदि वे अपने रोजाना के खाने में चिकन, अंडे, प्रोटीन पाउडर, पनीर या अन्य हाई-प्रोटीन स्रोतों को शामिल कर लेते हैं, तो उनका शरीर स्वतः ही ऊर्जा से भर जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) और ऊर्जा उत्पादन का तंत्र केवल एक पोषक तत्व यानी प्रोटीन पर निर्भर नहीं करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी डाइट में अत्यधिक प्रोटीन तो जोड़ लेता है, लेकिन साथ ही जरूरी विटामिंस (जैसे विटामिन बी12, विटामिन डी), आयरन, सही प्रकार के कार्बोहाइड्रेट और पर्याप्त हाइड्रेशन की अनदेखी करता है, तो शरीर उस प्रोटीन को पूरी तरह पचाने और ऊर्जा में बदलने में असमर्थ हो जाता है। इसके अलावा, आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है। सीडीसी की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि सिर्फ मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (Protien, Fats, Carbs) की मात्रा पूरी कर लेने मात्र से ही कोई व्यक्ति अंदर से स्वस्थ या ऊर्जावान महसूस नहीं कर सकता, जब तक कि शरीर की कोशिकीय स्तर पर पोषण संबंधी जरूरतें पूरी न हो रही हों।नींद की कमी और मानसिक तनाव: थकान का सबसे बड़ा और अनदेखा कारणसीडीसी की इस व्यापक रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है कि शारीरिक थकान का सीधा संबंध केवल भोजन या डाइट से ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे आधुनिक युग की सबसे बड़ी बीमारियां—नींद की कमी (Sleep Deprivation) और मानसिक तनाव (Chronic Stress)—मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। आज के समय में कॉर्पोरेट कल्चर, नाइट शिफ्ट्स, और रातभर मोबाइल स्क्रीन या लैपटॉप के सामने समय बिताने के कारण लोगों की नींद का चक्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। जब शरीर को रात में गहरी और कम से कम 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं मिलती, तो शरीर के हारमोनल संतुलन में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है। कोर्टिसोल (Cortisol) यानी तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने से शरीर हमेशा 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड में रहता है, जिससे मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र लगातार थका हुआ महसूस करते हैं। आप चाहे दुनिया का सबसे महंगा प्रोटीन शेक पी लें या सबसे बेहतरीन डाइट फॉलो कर लें, लेकिन यदि आपकी नींद पूरी नहीं है और आप मानसिक रूप से तनावग्रस्त हैं, तो आपके शरीर की कोशिकाएं कभी भी तरोताजा महसूस नहीं कर सकतीं। यही कारण है कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी करोड़ों लोग अंदर से पूरी तरह खोखले और थके हुए महसूस कर रहे हैं।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) और खराब पाचन तंत्र की भूमिकाथकान और सुस्ती के इस महामारी जैसे फैलने के पीछे एक और बहुत बड़ा कारण हमारी आधुनिक शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) है। आजकल अधिकांश नौकरियां ऐसी हो गई हैं जिनमें लोगों को लगातार 8 से 10 घंटे अपनी कुर्सी या डेस्क पर बैठकर बिताना पड़ता है। शारीरिक रूप से कोई मेहनत न होने के कारण शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुस्त हो जाता है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और खाया हुआ भोजन सही ढंग से पच नहीं पाता। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात को मानते हैं कि जब तक आपका पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत और सक्रिय नहीं है, तब तक आप चाहे कितना भी पौष्टिक भोजन या प्रोटीन क्यों न खा लें, आपके शरीर को उसकी सही ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकती। अपच, कब्ज और आंतों (Gut Health) से जुड़ी समस्याएं शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा देती हैं, जिससे लगातार सुस्ती, सिरदर्द और भारीपन बना रहता है। सीडीसी की रिपोर्ट इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करती है कि जब तक लोग अपनी दिनचर्या में व्यायाम, वॉक और शारीरिक श्रम को शामिल नहीं करेंगे, तब तक केवल डाइट बदलने से थकान की इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता।निष्कर्ष: इस समस्या से बाहर निकलने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव जरूरी हैं?सीडीसी की यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी और आंखें खोलने वाला संदेश है। यह हमें यह सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल जिम जाने या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले किसी एक फिटनेस ट्रेंड को फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समग्र संतुलन (Holistic Balance) है जिसमें सही खानपान, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सक्रिय जीवनशैली का होना अनिवार्य है। यदि आप भी अक्सर खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो सिर्फ प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के बजाय अपनी नींद के पैटर्न को सुधारें, पानी की मात्रा बढ़ाएं, योग या मेडिटेशन को अपनाएं और डॉक्टर से सलाह लेकर अपने शरीर में विटामिंस व मिनरल्स की जांच करवाएं। आधुनिक दुनिया की इस अंधी दौड़ में अपने शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना और समय रहते आवश्यक बदलाव करना ही एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन की असली कुंजी है।
अमेरिका में 100% टैरिफ बिल हो गया पास, भारत पर पड़ेगा असर?
अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े बिल को प्रतिनिधि सभा ने मंजूरी दे दी है. इस बिल ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है.
ईरान के हमलों से अमेरिकी अड्डे हुए तबाह, सामने आईं तस्वीरों से और क्या पता चला
बीबीसी के सहयोगी सीबीएस न्यूज़ को मिलीं इन तस्वीरों में तबाह हुआ वायुसेना का एक विमान और नष्ट हुईं इमारतें शामिल हैं.
अमेरिकी 100% टैरिफ पर भारत का मैसेज, रूस-ईरान से रिश्ते पर ये रणनीति
अमरीका उन प्रमुख देशों पर 100% तक का एक्स्ट्रा टैरिफ लगा सकता है, जो रूस या ईरान से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात जारी रखते हैं. अमेरिका का ध्यान भारत-रूस के बीच बढ़ते व्यापार पर भी है.
अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा कर्ज, वीडियो में जाने निवेशक तलाश रहे नए ठिकाने; सोना और चीन में बढ़ा रुझान
अमेरिका के दबाव में लगाया UPI टैक्स! राहुल गांधी आरोपों में कितना दम?
मोदी सरकार 15 अक्टूबर से 2 हज़ार रुपए से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने जा रही है. लेकिन, सरकार के इस फैसले पर विपक्ष और राहुल गांधी ने सवाल खड़े कर दिये हैं.
अमेरिकी संसद में रूस-ईरान प्रतिबंध बिल पास, नॉनस्टॉप-100 में देखें बड़ी खबरें
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है. इस विधेयक के पक्ष में 262 और विपक्ष में 159 मत पड़े. इस कानून के लागू होने से भारत और चीन जैसे देशों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यह अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल और गैस आयात करने वाले देशों पर भारी कर लगाने की शक्ति देता है.
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ीं तो भड़क गए ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की कड़ी आलोचना की है। साथ ही बढ़ी हुई ब्याज दरों पर भी फटकार लगाई है। अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने बेंचमार्क ब्याज दर को 25 बेसिस प्वाइंट से बढ़ाकर 3.75% से 4% की टारगेट रेंज में कर दिया है। ब्याज दरों के बढ़ने पर ट्रंप ने फेड बोर्ड …
यूपीआई भुगतान पर चार्ज को अमेरिकी दबाव से क्यों जोड़ा जा रहा है? - BBC
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कीव पर रूसी मिसाइल हमले के बीच पास हुआ अमेरिकी कानून, यूक्रेन ने कहा-आतंक को रोकने का यही तरीका
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कहा कि अमेरिका ने रूस के खिलाफ 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पारित किया है। रूस के आतंक को रोकने का यही सही तरीका है क्योंकि रूस के हमले लगातार जारी हैं। गुरुवार को ही रूस ने कीव पर एक और भीषण बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया और ओडेसा पर भी नए हमले किए।
10000 फीट की ऊंचाई पर भारत-अमेरिका की ‘जंग’ वाली ट्रेनिंग, ड्रोन-रोबोटिक डॉग भी उतारे- VIDEO
10000 फीट की ऊंचाई पर भारत और अमेरिकी सेना संयुक्त युद्धाभ्यास कर रही है। आतंकवाद के खिलाफ यह संयुक्त ऑपरेशन 28 सितंबर तक चलेगा। इसमें ड्रोन-रोबोटिक डॉग भी शामिल किए गए हैं।
वित्त मंत्रालय ने UPI MDR पर अमेरिकी दबाव के आरोपों को नकारा... 'रुपे कार्ड को ही मिलेगी प्राथमिकता'
वित्त मंत्रालय ने बड़े यूपीआई लेनदेन पर 0.4% एमडीआर लगाने के फैसले को अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एनपीसीआई के दिशानिर्देश केवल रुपे क्रेडिट कार्ड को अनुमति देते हैं और विदेशी कार्डों को कोई लाभ नहीं होगा, जबकि छोटे व्यापारियों को शुल्क से छूट मिलेगी।
अमेरिकी सीनेट ने पास किया रूस प्रतिबंध बिल, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पास किया गया रूस प्रतिबंध विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की शक्ति देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं. इसका सीधा प्रभाव भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों पर पड़ सकता है.
Narendra Modi ने भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र बनाने पर दिया जोर, अमेरिकी विधेयक पर भारत सतर्क
नयी दिल्ली, 17 सितंबर की विभिन्न फाइल से बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार है: अर्थ20 : सेमीकॉन मोदीभारत को भरोसेमंद चिप विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए सरकार सभी कदम उठा रही : प्रधानमंत्री मोदीनयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को भारत को वैश्विक चिप विनिर्माण के लिए भरोसेमंद गंतव्य के रूप में पेश करते हुए कहा कि सरकार अनुकूल नीतियों और रूपरेखाओं के जरिये उद्योग की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठा रही है। वि2 : अमेरिका प्रतिबंध विधेयकरूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी, भारत-चीन समेत व्यापारिक साझेदारों पर भी निशानावाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने तथा भारत और चीन जैसे उसके तेल एवं गैस के व्यापारिक साझेदार देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देने के लिये अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया है। दि30 : मंत्रालय अमेरिका लीड ऊर्जा‘‘हम सभी जरूरी कदम उठाएंगे”: रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को लेकर विदेश मंत्रालयनयी दिल्ली: भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। दि23 : न्यायालय स्टेन्स याचिकाग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में दोषी दारा सिंह की सजा में छूट की याचिका खारिज कर दी गई: ओडिशा सरकारनयी दिल्ली: ओडिशा सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टीवर्ट स्टेन्स और उनके दो बच्चों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रविंद्र पाल उर्फ दारा सिंह की सजा में छूट के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी है। प्रादे5 : कश्मीर लीड मुठभेड़जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में जारी अभियान के दौरान दो आतंकवादी ढेरजम्मू: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के वन क्षेत्र में जारी आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) से जुड़े दो संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अर्थ1 : कर विंडफॉलसरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर’ घटायानयी दिल्ली: सरकार ने 16 सितंबर से शुरू हुए पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर’ (विंडफॉल) में कटौती की है। वि3 : संरा गुतारेस सुरक्षा परिषदअंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाली वैश्विक शक्तियां ही सुरक्षा परिषद में बैठी हैं: गुतारेससंयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने कड़े शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाली वैश्विक शक्तियां ही सुरक्षा परिषद में बैठी हैं। प्रादे46 : केरलम चैनल एमडी लीड गिरफ्तारकेरलम: आबकारी अधिनियम उल्लंघन मामले में समाचार चैनल के प्रबंध निदेशक गिरफ्तारकोच्चि: केरलम में एक मलयालम समाचार चैनल के प्रबंध निदेशक (एमडी) को, वायनाड स्थित उनके पैतृक घर पर तलाशी के दौरान अनुमेय सीमा से अधिक शराब बरामद होने के बाद आबकारी अधिकारियों ने बृहस्पतिवार तड़के कोच्चि के कलामस्सेरी से गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रादे53 : राजस्थान लीड आगजयपुर के त्रिपोलिया बाजार में वाणिज्यिक परिसर में लगी आग, कई दुकानों को नुकसानजयपुर: जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित एक वाणिज्यिक परिसर में बृहस्पतिवार सुबह आग लग गई और कई दुकानों को नुकसान पहुंचने की सूचना है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। खेल1 : खेल एशियाड हॉकी हरबिंदरएक गीत, एक चोटिल खिलाड़ी और गोल्डन गोल : हरबिंदर ने ताजा की 1966 एशियाड हॉकी स्वर्ण की यादेंनयी दिल्ली: एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीम को पहला स्वर्ण पदक जीते छह दशक बीत गए लेकिन टीम के धुरंधर सेंटर फॉरवर्ड हरबिंदर सिंह के जेहन में आज भी उसकी यादें ताजा है और वह गाना आज तक नहीं भूले जो टीम की बस में हमेशा बजता था।
औली में भारत-अमेरिका सेना का 'युद्ध अभ्यास 2026', आतंकवाद विरोधी ड्रिल की
अभ्यास के दौरान ड्रोन, रोबोटिक डॉग और स्नाइपर टीम की मदद से बिल्डिंग-क्लियरेंस और रूम-इंटरवेन्शन ड्रिल का प्रदर्शन किया गया।
चीन बना रहा अंडरवाटर ड्रोन मदरशिप, अमेरिका की स्पेस में जंग की तैयारी
दुनियाभर में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की होड़ मची हुई है. इस बीच चीन और अमेरिका की नई सैन्य तैयारियों ने सबको हैरान कर दिया है. एक तरफ चीन समंदर की गहराइयों में तहलका मचाने के लिए दुनिया का पहला अंडरवाटर ड्रोन मदरशिप तैयार कर रहा है. दूसरी तरफ, अमेरिका अब अंतरिक्ष में युद्ध की बड़ी तैयारी कर रहा है.
अमेरिकी संसद में रूसी तेल पर प्रतिबंध वाला बिल पास, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा
अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक अहम बिल को मंजूरी दे दी है. इस बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर करते ही यह बिल कानून का रूप ले लेगा. इस नए कानून का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है. दरअसल, इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार मिल जाएगा जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं.
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ! अमेरिकी संसद में बिल पास
अमेरिकी संसद ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा अहम बिल पारित कर दिया है. इसके तहत अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा जो रूस से भारी मात्रा में तेल और गैस खरीद रहे हैं.
अमेरिका में रिकॉर्ड $40 ट्रिलियन का कर्ज: ईरान युद्ध ने बिगाड़ी अर्थव्यवस्था, महंगे पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन
अमेरिकी दूतावास द्वारा पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई देने पर सोशल मीडिया पर यूजर्स भड़क गए, क्योंकि अमेरिका ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने का कानून मंजूर किया है।
अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत विभिन्न देशों ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं
New Delhi, 17 सितंबर . राष्ट्रीय राजधानी स्थित कई विदेशी राजनयिकों और मिशनों ने Prime Minister Narendra Modi को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई दी. साथ ही, उन्होंने उनके नेतृत्व में दुनिया भर के देशों के साथ India के करीबी रिश्तों और मजबूत साझेदारी को भी रेखांकित किया. India में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी President ... Read more
ट्रंप की चेतावनी, कनाडा और ईयू के बीच अमेरिकी हितों के खिलाफ समझौते की कीमत भारी टैरिफ होगी
ट्रंप की चेतावनी, कनाडा और ईयू के बीच अमेरिकी हितों के खिलाफ समझौते की कीमत भारी टैरिफ होगी
अमेरिका ने अंतरिक्ष में तैनात किए हथियार, रूस और चीन ने जताई कड़ी आपत्ति
दुनियाभर में युद्ध के तरीके और तकनीक लगातार बदल रहे हैं. अब युद्ध का मैदान केवल धरती और समुद्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अंतरिक्ष तक फैल चुका है. सुपरपावर अमेरिका ने अंतरिक्ष में अपने हथियार तैनात करने की घोषणा कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, इन हथियारों का उपयोग सुरक्षा और हमले दोनों स्थितियों में किया जा सकता है.
रूस से तेल खरीदने पर 100% अमेरिकी टैरिफ का भारत और चीन पर क्यों पड़ेगा सबसे बड़ा असर?
US Tariff on Russian Oil: यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच अमेरिका ने रूस के ऊर्जा राजस्व (Energy Revenue) पर नकेल कसने के लिए एक बड़ा विधायी कदम उठाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बाधा पार कर आगे बढ़ गया है। 15 सितंबर को हुए इस मतदान में विधेयक के पक्ष में 214 और विरोध में 211 वोट पड़े। यदि यह विधेयक अंतिम रूप से पारित होकर कानून बनता है, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ (Tariff) लगाने का असीमित अधिकार दे देगा। ALSO READ: तेल संकट पर ट्रंप की दो टूक: यूक्रेन बंद करे रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले, जेलेंस्की ने दिया यह जवाब बिल में भारत और चीन निशाने पर क्यों? हालांकि अमेरिकी सीनेट द्वारा 7 अगस्त को 86-11 के भारी बहुमत से पारित इस बिल के ड्राफ्ट में भारत या चीन का नाम सीधे तौर पर दर्ज नहीं है, लेकिन इसमें 'रूस से तेल और प्राकृतिक गैस का आयात करने वाले दुनिया के 5 सबसे बड़े देशों' का स्पष्ट उल्लेख है। रूस के सबसे बड़े खरीदार : फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए और रूसी तेल का बहिष्कार किया। इसके बाद भारत और चीन रूसी कच्चे तेल (Discounted Russian Crude) के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे। यूक्रेन युद्ध का वित्तीय पोषण : अमेरिका का तर्क है कि भारत और चीन द्वारा की जा रही रूसी तेल की खरीद से मॉस्को को भारी विदेशी मुद्रा मिलती है, जिसका इस्तेमाल वह युद्ध को फंड करने के लिए कर रहा है। ALSO READ: अमेरिका में बड़ा चुनावी दांव: ट्रंप का ऐलान- हर वयस्क नागरिक को मिलेंगे 5000 डॉलर भारत के लिए यह दोहरा झटका क्यों साबित हो सकता है? यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस कानून के तहत भारत पर 100% टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक और गंभीर प्रभाव पड़ेंगे: अमेरिका को होने वाले निर्यात पर संकट : भारत अमेरिका को इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र (Textiles) और जेम्स एंड ज्वैलरी का भारी मात्रा में निर्यात करता है। 100% टैरिफ लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में दो गुने महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है। ऊर्जा सुरक्षा और महंगा तेल : भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। यदि भारत अमेरिकी दबाव में रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करता है, तो उसे मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है। बिल के प्रमुख प्रावधान : 'शैडो फ्लीट' पर भी शिकंजा यह विधेयक केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रूसी ऊर्जा तंत्र की रीढ़ पर हमला करता है: रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध : रूस के नेतृत्व और उसकी सरकारी तेल कंपनियों पर आर्थिक पाबंदियों को और सख्त किया जाएगा। 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) के खिलाफ कार्रवाई : रूस अमेरिकी और यूरोपीय प्राइस कैप (Price Cap) से बचने के लिए जिन अघोषित और बिना बीमा वाले तेल टैंकरों के बेड़े (Shadow Fleet) का इस्तेमाल कर रहा है, उन जहाजों और उनसे जुड़ी शिपिंग कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया जाएगा। अमेरिका में ट्रंप को मिलने वाले असीमित अधिकारों पर बहस इस बिल को लेकर अमरीकी संसद (कैपिटल हिल) के भीतर भी तीखी बहस छिड़ी हुई है: डेमोक्रेट्स की चिंता : विधेयक का विरोध करने वाले डेमोक्रेट सांसदों (जैसे विदेश मामलों की समिति के रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स) का कहना है कि यह बिल राष्ट्रपति को बिना किसी ठोस सुरक्षा उपाय या संसदीय निगरानी के टैरिफ लगाने की 'असीमित और तानाशाही शक्तियां' दे देता है। प्रतिनिधि सभा का शेड्यूल : अमेरिकी प्रतिनिधि सभा 17 सितंबर से अवकाश पर जा रही है और मध्यावधि चुनावों के बाद 9 नवंबर को ही दोबारा मिलेगी। ऐसे में 16 सितंबर का अंतिम मतदान इस विधेयक के भविष्य और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है। रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ का यह प्रस्ताव अमरीका द्वारा भारत और चीन जैसे वैश्विक खिलाड़ियों पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। भारत के लिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक व व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन साधना अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
देश में महंगाई पहले से ही बढ़ रही है, वहीं अब केंद्र सरकार ने UPI पेमेंट पर भी फीस लगाने का फैसला किया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के FAQ के मुताबिक, यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यानी UPI पेमेंट अब फ्री नहीं रहेंगे। ₹2,000 से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर फीस लगेगी। खास बात यह है कि अगर कोई आम आदमी UPI के ज़रिए ₹2,000 से ज़्यादा का पेट्रोल, बिजली या कोई भी बिल भरता है, तो अब उससे हर ट्रांज़ैक्शन पर ₹5 चार्ज लगेंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस MP राहुल गांधी ने UPI पेमेंट पर फीस को लेकर इंदिरा गांधी की एक फोटो शेयर कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। “ राहुल गांधी ने मांग की है कि सरकार UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR टैक्स वापस ले। सरकार ने US के सामने सरेंडर कर दिया है और US को भारी मुनाफ़ा कमाने का मौका दे दिया है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि वह 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% फ़ीस लगाएगी। हालांकि, यह फ़ीस कस्टमर को नहीं, बल्कि कंपनी या दुकान को देनी होगी। राहुल गांधी ने बुधवार (16 सितंबर, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो पोस्ट शेयर किया। इस वीडियो में उन्होंने UPI टैक्स को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “इंदिरा जी से एक बार पूछा गया था कि उनका झुकाव लेफ़्ट की तरफ़ ज़्यादा है या राइट की तरफ़। इस पर इंदिरा जी ने जवाब दिया कि उनका झुकाव किसी तरफ़ नहीं है; उनकी सोच पूरी तरह सीधी है।” राहुल गांधी ने कहा, “लेकिन मोदी जी का कॉन्सेप्ट अलग है। वह लेफ़्ट-विंग या राइट-विंग नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर कर दिया है। UPI टैक्स लगाकर और अमेरिका को भारी रकम देकर, उन्होंने भारत के हर नागरिक पर टैक्स लगा दिया है। राहुल गांधी ने भी अपील की है, “मोदीजी, अमेरिका के आगे झुकना बंद करें। हिम्मत दिखाएं, खड़े हों और UPI टैक्स खत्म करें।”
रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी कानून को लेकर भारत सतर्क, कहा-हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे कदम
नई दिल्ली, 17 सितंबर . रूस से तेल-गैस खरीद पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने वाले अमेरिकी कानून ‘सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ पर India ने कहा कि Government घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि Government 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. ... Read more
रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ.. भारत का अमेरिका को जवाब-समझौता नहीं करेंगे, अपने हिसाब से खरीदेंगे
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में भारत की ऊर्जा नीति की प्राथमिकता को स्पष्ट किया। सरकार के मुताबिक, देश की ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है और बड़ी आबादी की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आयात संबंधी फैसले लिए जाते हैं।
'100% टैरिफ के साथ अमेरिकी सांसद की भारत को खुली धमकी'- कांग्रेस का आरोप, 'मोदी चुप'
100% टैरिफ़ वाला बिल अमेरिकी संसद में पास होने के बाद US सीनेटर ब्लूमेंथल ने कहा, 'बेहतर होगा कि चीन और भारत अपने बर्ताव सुधारें। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें।' इसके बाद कांग्रेस ने इस धमकी के बावजूद पीएम मोदी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है।
अमेरिकी संसद द्वारा रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पास होने पर MEA ने कहा कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
भारत-अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ साझा युद्धाभ्यास
नई दिल्ली, भारत और अमेरिका की सेनाएं 'युद्ध अभ्यास 2026' के अंर्तगत अपनी आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को परख रही हैं। उत्तराखंड के औली में दोनों देशों के जवानों ने आतंकी ठिकानों में घुसने व वहां स्थित कमरों को प्रवेश करने का विशेष अभ्यास किया।
भारत और अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ साझा युद्धाभ्यास
New Delhi, 17 सितंबर . India और अमेरिका की सेनाएं ‘युद्ध अभ्यास 2026’ के अंर्तगत अपनी आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को परख रही हैं. उत्तराखंड के औली में दोनों देशों के जवानों ने आतंकी ठिकानों में घुसने व वहां स्थित कमरों को प्रवेश करने का विशेष अभ्यास किया. यह अभ्यास ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया ... Read more
रूस से व्यापार करने वाले देशों पर लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ, अमेरिकी संसद ने विधेयक को दी मंजूरी
अमेरिकी कांग्रेस ने एक ऐसा कानून पारित किया है, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा, जिनके इसके कानून बनने के लिए हस्ताक्षर करने की उम्मीद है।
US Fed ने क्यों महंगा किया लोन? तीन साल बाद बढ़ी अमेरिका में ब्याज दर
Why Rate Hike in US: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा दिया। जुलाई 2023 के बाद से यह पहली बार है, जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ऐसा फैसला किया। महंगाई के लगातार बने रहने, एनर्जी की बढ़ती कीमतें और मजबूत इकॉनमी की वजह तीन साल से अधिक समय के बाद पॉलिसीमेकर्स को एक फिर से मौद्रिक नीतियों को सख्त करना पड़ा। FOMC (फेडरल ओपन मार्केट कमेटी) ने सर्वसम्मति से फेडरल फंड्स रेट के टारगेट रेंज को बढ़ाकर 3.75-4% कर दिया। इससे भी अहम बात यह है कि फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया कि इस साल दरों में और बढ़ोतरी होगी।तीन साल बाद क्यों पड़ी ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत?अमेरिकी फेड की सबसे बड़ी चिंता फेडरल महंगाई की तेज रफ्तार है, जोकि लगातार बनी हुई है। जुलाई महीने में अमेरिकी में ओवरऑल महंगाई दर सालाना आधार पर 3.7% थी जबकि कोर इनफ्लेशन 3.3% थी और ये दोनों ही अमेरिकी फेड के 2% के टारगेट से ऊपर थी।अगस्त महीने में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी मासिक आधार पर 0.4% बढ़ गई और एनुनअल इनफ्लेशन 3.4% पर पहुंच गई।एनर्जी की बढ़ती कीमतों में महंगाई का अनुमान लगाना कठिन बना दिया है। पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई से कच्चे तेल में उबाल आया और ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क प्रति बैरल $100 के पार पहुंच गया। इसने इस बात की चिंता बढ़ा दी कि लंबे समय तक महंगाई का दबाव बना रह सकता है और इसका दायरा एनर्जी के बाहर भी फैल सकता है।फेड ने महंगाई के अपने एसेसमेंट में एक अहम बदलाव किया है। अमेरिकी फेड ने अपने लेटेस्ट बयान में पहले के रेफरेंस को हटा दिया है, जिसमें महंगाई के तेज रफ्तार की वजह सप्लाई शॉक को बताया, खासतौर से एनर्जी सेक्टर में। यह बदलाव इसलिए किया गया है कि पॉलिसीमेकर्स को चिंता हो रही है कि महंगाई का दबाव अब और व्यापक होता जा रहा है।महंगाई की तेज रफ्तार के बावजूद अमेरिकी इकॉनमी काफी मजबूत बनी हुई है, जिसके चलते फेड को मॉनेटरी पॉलिसी यानी मौद्रिक नीति को सख्त करने की गुंजाइश मिल रही है। पॉलिसीमेकर्स का अनुमान है कि साल 2026 में आर्थिक विकास दर 2.3% और 2027 में 2.4% रहेगी, जबकि बेरोजगारी दर 4.1% रहने की उम्मीद है।नए चेयरमैन केविन वार्श की पहली रेट हाइकअमेरिकी फेड ने तीन साल बाद ब्याद दरों को बढ़ाने का फैसला किया और मई में चेयरमैन बने केविन वार्श के कार्यकाल का पहला बदलाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कम ब्याज दरों की मांग करने के बाद फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श को चुना था। उस समय ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि उनके चुने गए लोग ब्याज दरें कम करेंगे।US Fed Rate Hike: अमेरिकी में महंगा हुआ लोन! जुलाई 2023 के बाद से पहली बार बढ़ी ब्याज दर
भारत सुधर जाओ, अमेरिक अब धमकियों पर उतरा; तुरंत तीखा जवाब भी मिला
100 फीसदी टैरिफ से संबंधित बिल को लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। अमेरिकी सांसद भारत को रूस के बजाए दूसरी जगहों से तेल खरीदने के लिए कह रहे हैं। हालांकि, भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और रिश्तों को लेकर चेतावनी भी दे दी है।
अमेरिकी फेड रिजर्व का बड़ा फैसला: 2023 के बाद पहली बार बढ़ाई गईं ब्याज दरें, भारत पर क्या होगा असर?
अमेरिका में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का बड़ा फैसला लिया है। फेड रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की है, जिससे अब ब्याज दरें बढ़कर 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत की नई लक्ष्य सीमा में पहुंच ...
मोदी को 'धमकाना' ट्रंप को पड़ा भारी! रूसी तेल पर अमेरिका के नए दांव का भारत ने दिया करारा जवाब
कहने को तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त कहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि शायद वह मोदी को अब तक अच्छे से जान ही नहीं पाए हैं। देखा जाये तो जो लोग नरेंद्र मोदी को जानते नहीं, वह अक्सर धमकियों, प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव के सहारे उन्हें झुकाने का सपना देखते हैं। लेकिन मोदी का संकल्प साफ है कि भारत के हितों से समझौता नहीं होगा और देश को किसी विदेशी दबाव के आगे झुकने नहीं देना है। उनके हर फैसले में यही दृढ़ता दिखाई देती है। दूसरी ओर, ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही भारत पर दबाव बनाने के लिए शुल्क, व्यापारिक दबाव और रूस से तेल खरीद बंद कराने जैसी तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नई दिल्ली ने हर बार अपने राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च रखा। अब अमेरिका एक बार फिर टैरिफ रूपी आर्थिक हथियार लेकर मैदान में उतरा है, लेकिन मोदी सरकार ने भी बिना देर किए वाशिंगटन को साफ संदेश दे दिया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित किसी विदेशी दबाव की कीमत पर तय नहीं होंगे। हम आपको बता दें कि जिस विधेयक को अमेरिकी कांग्रेस में पहली बार अप्रैल 2025 में पेश किया गया था, वह करीब डेढ़ साल तक अमेरिकी राजनीति और ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं के बीच अटका रहा। लेकिन इस महीने यानि सितंबर 2026 में तस्वीर अचानक बदल गई। भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी के कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों वाला विधेयक पारित कर दिया। घटनाक्रम का समय भले ही संयोग हो, लेकिन संदेश बेहद स्पष्ट है कि वाशिंगटन रूस से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अब शुल्क को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने को तैयार है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump के 'टैरिफ बम' पर भारत का करारा जवाब! MEA की दहाड़- एक अरब चालीस करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा से रत्ती भर समझौता नहीं! लेकिन भारत ने भी अमेरिका को उसी क्षण जवाब दे दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीदता रहेगा। इतना ही नहीं, नई दिल्ली ने अमेरिका को याद दिलाया कि इस कदम के भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ पूरे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में अमेरिकी पक्ष को पहले ही उच्च स्तर पर स्पष्ट रूप से बताया जा चुका है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। यानी अमेरिका शुल्क की धमकी दे सकता है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा की कीमत पर किसी विदेशी दबाव के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, जिस विधेयक को अब ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026’ कहा जा रहा है, उसकी कहानी डेढ़ साल पुरानी है। अप्रैल 2025 में लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने रूस के खिलाफ कड़े प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों की पहल की थी। इसके बाद लंबे समय तक इसे कांग्रेस और प्रशासन के बीच समर्थन जुटाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। जुलाई 2026 में व्हाइट हाउस से सहमति बनने के बाद इसकी राह खुली। अगस्त में सीनेट ने इसे 86 के मुकाबले 11 मतों से पारित किया और 16 सितंबर को प्रतिनिधि सभा ने 262 के मुकाबले 159 मतों से इसे मंजूरी दे दी। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों पर सौ प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है। भारत और चीन इसके निशाने पर हैं। इसके पीछे अमेरिकी रणनीति रूस की ऊर्जा आय को चोट पहुंचाने की है, ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए मास्को को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों पर दबाव बनाया जा सके। विधेयक में रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथ-साथ प्रतिबंधों से बचने वाले उसके जहाजी बेड़े पर भी शिकंजा कसने का प्रावधान है। लेकिन अमेरिका शायद यह भूल रहा है कि भारत रूस से तेल किसी राजनीतिक एहसान के लिए नहीं खरीद रहा। भारत की जरूरत है सस्ती, विश्वसनीय और लगातार उपलब्ध ऊर्जा। 2022 में रूस भारत के लिए कोई बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता नहीं था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप द्वारा रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाए जाने से रूस का कच्चा तेल भारी छूट पर उपलब्ध हुआ और भारत ने अपने आर्थिक हित में इसे खरीदना शुरू किया। इसके बाद रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी हिस्सेदारी 30.3 प्रतिशत रही और करीब 134.7 अरब डॉलर के कुल आयात में रूस से आने वाले तेल की कीमत 40.8 अरब डॉलर रही। जुलाई 2026 में तो भारत के आयातित तेल में रूसी हिस्सेदारी आधे से भी ज्यादा पहुंच गई। इसके अलावा, आज वैश्विक परिस्थितियों को देखें तो वह भी सामान्य नहीं हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध और आपूर्ति संकट ने तेल बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं हैं और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत भी दबाव में हैं। भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीदता है, लेकिन रूस और पश्चिम एशिया उसकी ऊर्जा सुरक्षा के मुख्य आधार बने हुए हैं। ऐसे समय में अचानक रूसी तेल बंद करना केवल रूस के खिलाफ फैसला नहीं होगा, बल्कि भारत की अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है। यही कारण है कि पिछले साल अमेरिकी दंडात्मक शुल्क भी भारत को रूसी तेल से पूरी तरह दूर नहीं कर सके। भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में बड़ी कटौती तब की जब रूस की प्रमुख तेल कंपनियों पर सीधे प्रतिबंध लगाए गए और व्यापार करना कठिन हो गया। लेकिन जैसे ही पश्चिम एशिया में आपूर्ति संकट गहराया, भारत ने फिर रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी। जुलाई में रूसी तेल की खरीद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इससे एक बात साफ होती है कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा कोई सौदेबाजी का विषय नहीं है। यहां इस पूरे घटनाक्रम का सामरिक महत्व सामने आता है। अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है। जबकि रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। चीन भी रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। साथ ही भारत एक साथ अमेरिका, रूस, चीन, ईरान तथा पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने हितों का संतुलन साध रहा है। ऐसे में नई दिल्ली के सामने चुनौती किसी एक खेमे में जाने की नहीं, बल्कि अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बचाए रखने की है। इसके अलावा, ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी की पुतिन और जिनपिंग के साथ बढ़ती कूटनीतिक निकटता ने जिस बदलती विश्व व्यवस्था की तस्वीर अमेरिका के सामने रखी, उसके कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी कांग्रेस का रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने वाला कदम कई सवाल खड़े करता है। सवाल उठता है कि क्या वाशिंगटन को यह स्वीकार करना मुश्किल हो रहा है कि दुनिया अब उसकी शर्तों पर नहीं चलती? देखा जाये तो भारत, रूस और चीन का एक मंच पर आना और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था तथा संप्रभु समानता की वकालत करना उस अमेरिकी वर्चस्ववादी सोच के लिए सीधी चुनौती है, जिसमें लंबे समय से आर्थिक ताकत को कूटनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन बदलती दुनिया का संदेश साफ है। भारत सहित उभरती शक्तियां अब अपने राष्ट्रीय हितों का फैसला किसी बाहरी राजधानी के इशारे पर नहीं करेंगी। खैर...अब गेंद ट्रंप के पाले में है। अमेरिकी कांग्रेस ने उन्हें सौ प्रतिशत तक शुल्क लगाने की शक्ति दे दी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सौ प्रतिशत शुल्क स्वतः लागू हो गया। अंतिम निर्णय ट्रंप को करना है। शुल्क कितना होगा, किन वस्तुओं पर लागू होगा और कब लागू होगा, इन सबका असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ेगा। भारत का रुख स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं होगा, विकल्पों का विस्तार जारी रहेगा, अमेरिका से बातचीत जारी रहेगी और राष्ट्रीय हितों पर कोई एकतरफा समझौता नहीं होगा। अमेरिकी शुल्क चाहे जितना बड़ा हो, भारत के लिए असली सवाल किसी एक देश को खुश करना नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता सुरक्षित रखना है। विदेश मंत्रालय पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। -नीरज कुमार दुबे
भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकते हैं Donald Trump, अमेरिकी राष्ट्रपति को मिल गया है ये अधिकार
इंटरनेट डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर एक्शन का अधिकार मिल गया है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस के खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों वाला विधेयक पारित कर डोनाल्ड ट्रंप को ये अधिकार दे दिया है। ऐसे में अब ट्रंप को रूस के तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर सौ प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।सौ प्रतिशत तक टैरिफ लगना भारत के लिए किस बड़े झटके से कम नहीं होगा। खबरों के अनुसार, ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नामक इस विधेयक को 262-159 के बहुमत से पास कर दिया है। अब ये विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा, जिनसे इस पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है। सीनेट की ओर से पहले ही 7 अगस्त को 86-11 के बहुमत से इसे पारित किया जा चुका है। अमेरिको इस विधेयक का लक्ष्य रूसी अधिकारियों, बैंकों और ऊर्जा व्यापार को निशाना बनाना है। ये विधेयक रूस के ‘शैडो फ्लीट’जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाता है। इसके माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल या गैस के पांच सबसे बड़े आयातक देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का निर्देश दिया गया है। भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल भारत के लिए ये कानून परेशानी का कारण बन सकता है। ये भारत द्वारा रूसी ऊर्जा की खरीद जारी रखने पर अमेरिकी आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का नया कानूनी रास्ता खोल देगा। आपको बता दें कि भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। हालांकि अमेरिकी संसद में पारित ये विधेयक में उन देशों के लिए छूट भी है जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम आयात करते हैं और खरीद कम करने के ठोस कदम उठा चुके हैं। PC:ddnews अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
US Fed Rate Hike: अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने से शेयर बाजारों में हलचल, महंगाई और तेल कीमतों पर फोकस
US Fed Rate Hike: अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने से शेयर बाजारों में हलचल, महंगाई और तेल कीमतों पर फोकस
कैसे और किसने बनाया भारत का UPI? एक झटके में खत्म कर दिया था अमेरिका का दबदबा
UPI कैसे बना और किसने इसे तैयार किया? जानिए 2016 में 21 बैंकों से शुरू हुई उस कहानी के बारे में, जिसने भारत के डिजिटल पेमेंट को बदल दिया और Visa-Mastercard के कार्ड मॉडल को बड़ी चुनौती दी।
मध्य पूर्व में जारी रणनीतिक टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक बड़ी समुद्री घटना सामने आई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सैन्य बलों ने एक US-अनुबंधित (US-contracted) वाणिज्यिक पोत को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। इस हमले में जहाज पर सवार कई कर्मी घायल हो गए हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में वाशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले रक्षा सूत्रों ने पुष्टि की है कि इस हमले में ईरान द्वारा चार ड्रोन और कम से कम एक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था चालक दल के सदस्य घायल फॉक्स न्यूज ने मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों का हवाला देते हुए बताया कि हमले में चार ईरानी ड्रोन और कम से कम एक मिसाइल शामिल थी। खबरों के मुताबिक, एक प्रोजेक्टाइल सीधे US-अनुबंधित जहाज से टकराया, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर रहा था। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि हमले के कारण मामूली चोटें आईं, जिसमें कर्मियों द्वारा धुआं अंदर जाने (smoke inhalation) की घटनाएं भी शामिल हैं; वे वर्तमान में खाड़ी के एक अज्ञात देश में चिकित्सा उपचार प्राप्त कर रहे हैं। घटना के समय जहाज पर कई अमेरिकी व्यक्ति भी सवार थे। यह समुद्री हमला महीनों से चल रहे सक्रिय सैन्य संघर्ष के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच लगातार उच्च तनाव के बीच हुआ है। शत्रुता 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुई थी, जिसमें खाड़ी और व्यापक क्षेत्रीय क्षेत्रों में लगातार झड़पें हो रही हैं, और अक्सर आपसी हमलों और जवाबी कार्रवाई के माध्यम से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वाणिज्यिक शिपिंग मार्गों में बाधा उत्पन्न हो रही है।इसे भी पढ़ें: फ्री यूपीआई के दावे के बीच ठगा रह गया आम आदमी अमेरिकी सेना ने दो ईरानी नौकाओं को नष्ट किया इससे पहले, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने गोलीबारी की और दो छोटी ईरानी नौकाओं को नष्ट कर दिया, जब उन्होंने कथित तौर पर ईरान के पास के जलक्षेत्र में एक मानवरहित सतह वाहन (unmanned surface vehicle) को 'चुराने' का प्रयास किया; यह वाहन रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त के दौरान अमेरिकी नौसेना द्वारा संचालित किया जा रहा था।इसे भी पढ़ें: PM Modi's 76th Birthday | काशी से वड़नगर तक शुरू होगी 'सेवा संकल्प' बाइक यात्रा, 10 राज्यों के 1150 से ज़्यादा गांवों से गुज़रेगी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के हवाले से कहा, ईरानी छोटी नौकाओं ने हाल ही में एक अमेरिकी मानवरहित सतह पोत पर कब्जा करने का प्रयास किया, लेकिन CENTCOM की जोरदार प्रतिक्रिया के बाद वे असफल रहे। हॉकिन्स ने मंगलवार को कहा कि इसमें शामिल ड्रोन एक 'सेलड्रोन' (Saildrone) था, जो लगभग 25 फीट (8 मीटर) का एक छोटा मानवरहित क्राफ्ट है और खुद से काम कर सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड समुद्री यातायात की निगरानी के लिए कई वर्षों से इस क्षेत्र में ऐसे ड्रोन का उपयोग कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि कमांड द्वारा संचालित सभी सतह ड्रोन 'पूरी तरह से सुरक्षित हैं' (उनका हिसाब-किताब सही है)। अमेरिकी सेना लंबे समय से यह दावा करती रही है कि सेलड्रोन पर मौजूद तकनीक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है और प्रकृति में संवेदनशील नहीं है। यह अहम शिपिंग कॉरिडोर दुनिया के लिए एक बहुत ज़रूरी 'चोक पॉइंट' (संकीर्ण मार्ग) का काम करता है, जो आम तौर पर दुनिया भर में होने वाले पेट्रोलियम और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi
India-US Relations: रूस-ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत सतर्क, ऊर्जा सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
India-US Relations: रूस-ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत सतर्क, ऊर्जा सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
भारत ने भी दे दी अमेरिका को वॉर्निंग, 100 फीसदी टैरिफ वाले बिल पर भयंकर नाराजगी
भारत ने साफतौर से अमेरिका को बता दिया है कि इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, बिल प्रतिनिधि सभा में पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगने ही लगेगा। यह अमेरिका के राष्ट्रपति को इसकी ताकत दे देगा।
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रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल अमेरिकी कांग्रेस में पास हो गया है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बिल पर साइन करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप भारत-चीन पर 100% टैरिफ लगा सकते हैं। अब भारत ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका को सीधा जवाब दे दिया है।
रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल अमेरिकी कांग्रेस में पास हो गया है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बिल पर साइन करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप भारत-चीन पर 100% टैरिफ लगा सकते हैं। अब भारत ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका को सीधा जवाब दे दिया है।
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर टैरिफ लगाने वाले कानून पर भारत ने पहली प्रतिक्रिया दी है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री के खिलाफ क्यों पेश हुआ महाभियोग प्रस्ताव? देखें US Top-10
ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका में विरोध की आवाज बुलंद होने लगी है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के खिलाफ रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने महाभियोग प्रस्ताव पेश किया. आरोप लगाया कि हेगसेथ ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश देकर अपने पद का गलत इस्तेमाल किया. देखें यूएस टॉप-10.
'ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं', अमेरिकी 100% टैरिफ बिल पर भारत का दो टूक जवाब
अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून पास होने के बाद भारत सरकार ने बयान जारी किया है. भारत ने कहा कि वह इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों के लिए विविध स्रोतों से तेल और गैस खरीदना जारी रखेगा.
वाह रे दोस्त! अमेरिका ने तो हूतियों संग ही कर ली सेटिंग, सऊदी को बीच मझधार छोड़ा
बता दें कि ट्रंप सरकार ने मार्च 2025 में हूतियों को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद लाल सागर में जबरदस्त युद्ध चला। हालांकि मई 2025 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था। इसकी कीमत सऊदी चुकाएगा?
100% अमेरिकी टैरिफ का रास्ता साफ! ट्रंप के एक फैसले से खड़ी हो सकती है बड़ी मुश्किलें
US Russia Sanctions Bill: अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को 262-159 के भारी बहुमत से पारित कर दिया है। यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष देशों जिसमें भारत और चीन शामिल हैं उन पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।सीनेट से पहले ही पास हो चुका यह बिल अब राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। भारत अपनी जरूरत का 88% से अधिक कच्चा तेल इंपोर्ट करता है और कुल जरूरत का करीब एक-तिहाई से आधा हिस्सा रियायती रूसी कच्चे तेल से पूरा करता है।इस घटनाक्रम के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या भारत पर 100% टैरिफ लगने जा रहा है? और अगर ऐसा होता है तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा?क्या भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लग जाएगा?इसका जवाब हैं नहीं, यह कोई ऑटोमैटिक या तुरंत लागू होने वाला शुल्क नहीं है। यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल/गैस खरीदने वाले दुनिया के 5 सबसे बड़े खरीदारों पर टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। यह फैसला ट्रंप को करना है कि वह टैरिफ लगाते हैं या नहीं, और अगर लगाते हैं तो उसकी दर (0% से 100% के बीच) क्या होगी।बिल में अमेरिकी प्रशासन को छूट देने का भी अधिकार दिया गया है। यानी यह कानून भारत पर एक 'संभावित खतरे' का दबाव बनाता है, न कि कोई सीधी पेनल्टी लागू करता है।भारत पर क्या हो सकता है इसका असर?अगर राष्ट्रपति ट्रंप इस कानून के तहत भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो इसका असर सीधे रूसी तेल की कीमत पर नहीं, बल्कि अमेरिकी बाजार में बिकने वाले भारतीय सामानों पर पड़ेगा:भारतीय निर्यात होंगे महंगे: अमेरिकी बाजार में भारत के कपड़े, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग गुड्स पर अगर अतिरिक्त ड्यूटी लगती है, तो वे अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। इससे भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हो सकता है।फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साया: भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में है। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक समझौता लगभग फाइनल है। लेकिन इस नए अमेरिकी कानून से ट्रेड डील की शर्तों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा सकते हैं।भारत रूस से तेल खरीदना बंद क्यों नहीं कर सकता?फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिमी देशों के बैन के बीच भारत की सरकारी और निजी रिफाइनरियों ने सस्ता रूसी क्रूड आयात बढ़ाया। वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने $40.8 अरब डॉलर का रूसी कच्चा तेल खरीदा (कुल आयात का एक-तिहाई)। जुलाई 2026 में भारत के कुल आयातित तेल में रूस की हिस्सेदारी 51% और अगस्त में 45% (2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन) रही।आगे क्या होगा?अब पूरी गेंद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाले में है। ट्रंप इस बिल पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बनाएंगे। इसके बाद वाशिंगटन यह तय करेगा कि भारत के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को देखते हुए क्या इस अधिकार का इस्तेमाल करना है या बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकालना है।फिलहाल भारत के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है। एक तरफ भारत अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक संबंध मजबूत कर रहा है, तो दूसरी तरफ देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें काबू में रखने के लिए सस्ता रूसी तेल आयात करना भारत की मजबूरी और जरूरत दोनों है। अब कुल मिलाकर भारत का कूटनीतिक रुख यही रहेगा कि वह अमेरिका को साधते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता न करे।
अमेरिकी संसद ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल को मंजूरी दे दी है, जिसे अब हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के पास भेजा जाएगा
भारत पर ट्रंप लगाएंगे 100% टैरिफ? अमेरिकी संसद में पास हुआ ये बिल
अमेरिकी संसद के निचले सदन में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास हो गया. अब बिल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दस्तखत करते ही ये कानून बन जाएगा. लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम वाले इस बिल का असर भारत पर भी पड़ सकता है क्योंकि बिल के पास होने के बाद ट्रंप को भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. देखें वीडियो.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय की जांच में पता चला है कि फर्जी कॉल सेंटरों की आड मे अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। ईडी की जांच में यह भी बात सामने आए चंडीगढ़ में बना कॉल सेंटर कंट्रोल रूम बना हुआ था। यहां से कुल 66 मोबाइल, 13 लैपटॉप समेत डिजिटल उपकरण जब्त किए गए है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई। अब जानिए अब तक की जांच में क्या मिला ईडी को :- 3 लाइव कॉल सेंटर मिले, 220 लोग काम करते मिलेED की तलाशी में 3 कॉल सेंटर चलते हुए मिले। इनमें 2 पटियाला और 1 पुणे में था। तलाशी के दौरान इन सेंटरों में करीब 220 लोग काम करते मिले। उनके काम, पहचान और किसे रिपोर्ट करते थे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। कॉल सेंटरों में बड़ी संख्या में कंप्यूटर, हेडसेट, मोबाइल फोन और नेटवर्किंग उपकरण लगे थे। ED के अनुसार, इन सेंटरों से अमेरिकी नागरिकों को फोन कर झूठे बहाने बनाए जाते थे और उनसे पैसे देने के लिए कहा जाता था। मोबाइल और लैपटॉप से ठगी का तरीका मिलापटियाला के कॉल सेंटरों से मिले मोबाइल फोन और एक लैपटॉप में सिंडिकेट के काम करने के तरीके और ठगी से मिले पैसों के बंटवारे से जुड़ा डेटा मिला है। पुणे के कॉल सेंटर में भी अमेरिकी नागरिकों को ठगने का इसी तरह का तरीका अपनाए जाने की बात सामने आई। चंडीगढ़ का मकान बना था कंट्रोल सेंटरED के मुताबिक, चंडीगढ़ में जिस आवासीय परिसर की तलाशी ली गई, उसका इस्तेमाल पटियाला में चल रहे फर्जी कॉल सेंटरों के संचालन और नियंत्रण के लिए किया जा रहा था। यहां से कॉल सेंटरों के कामकाज से जुड़ा डेटा रखने वाले कई डिजिटल उपकरण मिले। ED ने बताया कि यहां एक व्यक्ति अमेरिकी डॉलर को भारतीय रुपए में बदलने से जुड़े काम में कथित तौर पर शामिल मिला। उसकी भूमिका और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। 66 मोबाइल, 13 लैपटॉप समेत डिजिटल उपकरण जब्ततलाशी के दौरान ED ने 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, अन्य संचार उपकरण, नकदी और रिकॉर्ड जब्त किए हैं। अब ED कॉलिंग अभियानों, स्क्रिप्ट, डायलर, VoIP सिस्टम, पीड़ितों के डेटा, भुगतान के माध्यम, कॉल सेंटर चलाने वालों और ठगी से हासिल रकम के लेनदेन की जांच कर रही है। डिजिटल सबूतों के जरिए पूरे नेटवर्क, इसमें शामिल लोगों और ठगी की रकम का पता लगाया जा रहा है।
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक विधेयक पारित किया है जो राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है, जिससे भारत पर भी असर पड़ सकता है। यह कानून रूस, चीन और ईरान को निशाना बनाता है, जिसका उद्देश्य रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करना और मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वालों पर कार्रवाई करना है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार दिए गए बयानों और खुले दबाव को दरकिनार करते हुए मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव किया है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने अपनी ताजा दो दिवसीय बैठक में बेंचमार्क ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी कर दी है। वर्ष 2023 के बाद यानी पिछले 3 वर्षों के लंबे अंतराल में यह पहला मौका है जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दरों में कटौती करने के बजाय हाइक (वृद्धि) का रुख अपनाया है। इस बढ़ोतरी के साथ ही अमेरिका में नीतिगत ब्याज दरें बढ़कर 3.75% से 4.00% की सीमा में पहुंच गई हैं।इस अप्रत्याशित नीतिगत फैसले के सामने आते ही अमेरिकी शेयर बाजारों (Wall Street) में तेज बिकवाली देखी गई, जबकि 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड उछलकर 19 साल के उच्चतम स्तर (5% के पार) पर पहुंच गई। फेड के इस आक्रामक तेवर ने वैश्विक बाजारों में वित्तीय अस्थिरता और विकास की रफ्तार धीमी होने की आशंकाओं को गहरा कर दिया है।व्हाइट हाउस का दबाव बनाम महंगाई की आग: आखिर फेड ने क्यों उठाया यह कदम?राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ब्याज दरों को 1% या उससे नीचे लाने की पुरजोर वकालत कर रहे थे ताकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सस्ता कर्ज मिले और विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर दरों को तुरंत घटाने की सख्त मांग भी दोहराई थी। राजनीतिक दबावों के बावजूद फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श और नीति निर्धारकों ने बढ़ती मुद्रास्फीति को काबू में करने के अपने संवैधानिक दायित्व को प्राथमिकता दी।फेड के इस कड़े कदम के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारक जिम्मेदार रहे:जिद्दी महंगाई (Sticky Inflation): अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति दर फेड के 2% के दीर्घकालिक लक्ष्य के मुकाबले लगातार 3.4% से 3.7% के ऊंचे दायरे में बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों में उछाल और खाद्य उत्पादों की महंगाई घटने का नाम नहीं ले रही है।टैरिफ और व्यापार नीतियां: नए टैरिफ नियमों और संरक्षणवादी व्यापार नीतियों के चलते आयातित उत्पादों की लागत बढ़ी है, जिसने सीधे तौर पर खुदरा कीमतों को ऊपर खींचने का काम किया है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर बूम: एआई डेटा सेंटर्स, चिप्स और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी पूंजीगत खर्च के कारण उद्योगों में नकदी प्रवाह तेज बना हुआ है, जिससे अर्थव्यवस्था जरूरत से ज्यादा गर्म (Overheated) हो रही थी।फेड चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि जब तक मुद्रास्फीति स्पष्ट रूप से 2% के लक्ष्य की ओर नहीं लौटती, तब तक दरों को घटाना अमेरिकी नागरिकों की क्रय शक्ति के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।वॉल स्ट्रीट पर हड़कंप: टेक स्टॉक्स में भारी गिरावट, डॉलर इंडेक्स मजबूतब्याज दरें बढ़ने और साल के अंत तक एक और संभावित बढ़ोतरी के संकेत मिलने से अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का भरोसा डगमगा गया:नैस्डैक और एसएंडपी 500 में बिकवाली: तकनीकी (Tech) और ग्रोथ स्टॉक्स महंगे कर्ज के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। दरों में बढ़ोतरी के कारण एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और टेस्ला जैसे दिग्गज शेयरों में तेज मुनाफावसूली दर्ज की गई।बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल: यूएस 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 5.02% के पार निकल गई। जब जोखिम-मुक्त सरकारी बॉन्ड पर 5% से ज्यादा रिटर्न मिलने लगे, तो इक्विटी मार्केट से संस्थागत पूंजी निकलकर बॉन्ड मार्केट की ओर रुख करने लगती है।डॉलर की चमक बढ़ी: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में मजबूती आई है, जिसके चलते दुनिया भर की उभरती मुद्राओं (जैसे भारतीय रुपया, यूरो और येन) पर दबाव और गहरा गया है।होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड होंगे महंगे: अमेरिकी उपभोक्ताओं पर सीधा असरफेडरल फंड्स रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी का तात्कालिक असर आम अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना तय है:मॉर्गेज (होम लोन) दरें: 30-वर्षीय फिक्स्ड होम लोन दरें फिर से 7% से 7.5% के स्तर को छू सकती हैं, जिससे रियल एस्टेट बाजार में मकानों की बिक्री प्रभावित होगी।क्रेडिट कार्ड और ऑटो लोन: क्रेडिट कार्ड का औसत वार्षिक ब्याज (APR) 21% से ऊपर बना हुआ है, जो और महंगा होगा। इसके साथ ही ऑटो लोन की मासिक ईएमआई बढ़ जाएगी, जिससे कारों और टिकाऊ उपभोक्ता सामानों की मांग में कमी आ सकती है।भारत और उभरते बाजारों के लिए क्या हैं इस फैसले के मायने?अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इस फैसले का असर भारतीय वित्तीय बाजारों पर भी कई स्तरों पर देखने को मिलेगा:विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आकर्षक होने से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकालकर अमेरिकी बॉन्ड्स में शिफ्ट कर सकते हैं, जिससे घरेलू शेयर बाजारों (निफ्टी और सेंसेक्स) पर दबाव दिखेगा।रुपये पर दबाव और आयातित महंगाई: डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपये में गिरावट आ सकती है, जिससे भारत के लिए कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल का आयात महंगा होगा।आरबीआई (RBI) की ब्याज दरों पर रोक: भारतीय रिजर्व बैंक जो आने वाले महीनों में रेपो रेट में कटौती कर विकास को रफ्तार देने की योजना बना रहा था, उसे अब विदेशी पूंजी के पलायन और मुद्रा विनिमय दर को संभालने के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला टालना पड़ सकता है।फेडरल रिजर्व का यह फैसला साबित करता है कि केंद्रीय बैंकों के लिए राजनीतिक मांगों के मुकाबले महंगाई पर नियंत्रण और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता अधिक सर्वोपरि है। आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस और फेड के बीच यह टकराव और तेज होने के आसार हैं।
अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास, भारत के ख़िलाफ़ 100% तक टैरिफ़ का प्रावधान - BBC
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Russia Sanctions Bill: अमेरिका में रूस पर शिकंजा कसने वाला बिल पास, भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का रास्ता साफ
अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास, भारत के ख़िलाफ़ 100% तक टैरिफ़ का प्रावधान
इसमें अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों के लिए महत्वपूर्ण छूट का भी प्रावधान है. इसका आधार यह है कि इनमें से कई देशों ने रूस से ऊर्जा ख़रीद कम करने के प्रयास किए हैं.
US Fed Rate Hike: अमेरिकी में महंगा हुआ लोन! जुलाई 2023 के बाद से पहली बार बढ़ी ब्याज दर
US Fed Rate Hike: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी कर दी है। जुलाई 2023 के बाद से पहले पहली बार फेडरल रिजर्व ने यह फैसला लिया है और केविन वार्श की चेयरमैनशिप में पहली बार इसे बढ़ाया गया है। सिर्फ यही नहीं, अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने महंगाई के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज करते हुए यह भी संकेत दिया कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। FOMC (फेडरल ओपन मार्केट कमेटी) ने एकमत होकर फेडरल फंड रेट टारगेट रेंज 3.5-3.75% से बढ़ाकर 3.75-4% करने का फैसला किया है।फेड के फैसले के बाद अमेरिकी शेयरों में बढ़त बनी रही। S&P 500 में लगभग 0.4% और नैस्डैक कम्पोजिट में 0.8% की तेज़ी रही, जबकि डाऊ में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड लगभग 5 बेसिस पॉइंट गिरकर 4.947% के आसपास आ गई।कैसी है आर्थिक स्थिति?महंगाई के आंकड़ों से यह संभावना बन गई थी कि मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने वाली है और फाइनेंशियल मार्केट में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद पहले से ही थी। पश्चिमी एशिया में युद्ध के चलते कच्चा तेल प्रति बैरल $100 के पार चला गया, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि अमेरिकी आर्थिक गतिविधि और लेबर मार्केट मजबूत बने हुए हैं। फेड का कहना है कि आर्थिक गतिविधियां अच्छी रफ्तार से बढ़ रही है, घरेलू खर्च मजबूत बना हुआ है, प्रोडक्टिविटी में अच्छी बढ़ोतरी हो रही है और कैपिटल इन्वेस्टमेंट भी मजबूत है। इसके अलावा वर्कफोर्स में बढ़ोतरी के साथ-साथ नौकरियों में भी बढ़ोतरी हुई है, जबकि बेरोजगारी दर में हल्का बदलाव हुआ है।अभी और कितनी बढ़ेगी ब्याज दर?फेडरल रिजर्व के आर्थिक अनुमानों से संकेत मिल रहा है कि ब्याज दरों में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है। ब्याज दर के अनुमान देने वाले 18 पॉलिसीमेकर्स में से 16 का मानना है कि इस साल 2026 के आखिरी तक कम से कम एक बार और 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी होगी तो चार ने 50 बेसिस पॉइंट्स के बढ़ोतरी का अनुमान जाहिर किया है। फेड का मानना है कि साल 2029 तक महंगाई की रफ्तार फेड के 2% के टारगेट तक नहीं लौट पाएगा।दुनिया में सबसे कम ब्याज दर होनी चाहिए अमेरिका में, इस कारण ट्रंप ने किया दावाडिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
अमेरिकी कांग्रेस ने रूस प्रतिबंध विधेयक पारित किया, भारत और चीन पर 100% टैरिफ का खतरा
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस के खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों वाला विधेयक पारित कर दिया
भारत जल्द ही अमेरिका, यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने वाला है। न्यूजीलैंड के साथ अक्तूबर मध्य तक और यूरोपीय संघ के साथ इस साल के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
अमेरिका में बढ़ीं ब्याज दरें, शेयर मार्केट धड़ाम, भारत में क्या होगा आज असर?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने का असर अब भारत में भी देखने को मिल सकता है. अमेरिका में दरें बढ़ने से डॉलर मजबूत होने और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है. इसका असर विदेशी निवेश, शेयर बाजार, कच्चे तेल और भारत में कर्ज की लागत पर भी पड़ सकता है.
रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब - AajTak
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रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब
नए बिल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है. भारत का नाम भी उन 10 देशों में शामिल है, जिन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, अभी भारत पर कोई 100% टैरिफ नहीं लगा है.
फिलिस्तीन राज्य मुख्य रूप से दो भौगोलिक क्षेत्रों, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर अपना दावा करता है. इजरायल इसके अस्तित्व से इनकार करता है और कहता है कि वह कभी फिलिस्तीन को देश नहीं बनने देगा.
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के मादक पदार्थों से निपटने के प्रयास की सराहना की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मादक पदार्थों से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया...
अमेरिकी संसद से पास हुआ रूस प्रतिबंध बिल; भारत पर 100% टैरिफ का खतरा बढ़ा, ट्रंप के हस्ताक्षर बाकी
अमेरिका ने रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पास हुए नए प्रतिबंध बिल के बाद भारत पर भी नजरें टिक गई हैं, क्योंकि कानून बनने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है.
सुर्खियां: अमेरिकी बिल से भारत पर टैरिफ का खतरा; यूपीआई पर जीएसटी का फैसला कायम; सर क्रीक पर पाक की नापाक चाल
रूस पर प्रतिबंध का बिल अमेरिकी हाउस में पास, भारत-चीन पर टैरिफ की तलवार
यह कानून उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं. हाउस में हुई बहस में भारत और चीन को खास तौर पर उन बड़े खरीदारों के तौर पर चिह्नित गया है जिन पर इस प्रावधान का असर पड़ सकता है.
रूस पर शिकंजा कसने वाला बिल अमेरिकी संसद से पास: भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का खतरा; क्या है मामला?
रूस पर शिकंजा कसने वाला बिल अमेरिकी संसद से पास: भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का खतरा; क्या है मामला?
Yamuna Nagar News: किसान महापंचायत चार को, अमेरिका ट्रेड डील पर होगी चर्चा
किसान महापंचायत चार को, अमेरिका ट्रेड डील पर होगी चर्चा
विपक्षी दलों का दावा है कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के तहत 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने से अधिकांश चीजों की कीमतें बढ़ जाएंगी। कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को मोदी टैक्स करार दिया है।
हूतियों से बातचीत के बाद अमेरिका का यू-टर्न, सऊदी की मदद से बनाई दूरी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक वाशिंगटन ने यमन में सीधे हस्तक्षेप करने से दूरी बना ली है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हूतियों ने यमन के लाल सागर के तट के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है.
us fed raises interest rates first time since 2023 defying Donald Trump
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जाएंगे अमेरिका, ट्रेड डील पर होगी चर्चा; किस पर बनी अंडरस्टैंडिंग?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल G20 बैठक में शामिल होने के लिए अमेरिका जाएंगे. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी.
अमेरिका के ईसाई मिशनरी समूह टीटीआई पर सीबीआई का शिकंजा, FCRA उल्लंघन का मामला दर्ज
सीबीआई ने अमेरिका स्थित ईसाई मिशनरी समूह 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (टीटीआई) और उसके सदस्यों के खिलाफ विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम (FCRA) के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने UPI MDR पर राहुल गांधी की आलोचना का जवाब दिया, कहा ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और राहुल को हर जगह अमेरिका का 'भूत' दिखता है।
ईरान पर हमले की अमेरिका ने अब तक क्या 'क़ीमत' चुकाई है? इस रिपोर्ट से चला पता - BBC
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पश्चिम एशिया के सामरिक और तेल समृद्ध भू-भाग में सुरक्षा संकट गहराने के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने सऊदी अरब जाने वाले और वहां रह रहे अपने नागरिकों के लिए तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय और गंभीर सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर दी है। अमेरिकी विदेश विभाग (US Department of State) ने संपूर्ण सऊदी अरब के लिए लेवल-3 'रीकंसीडर ट्रैवल' यानी यात्रा पर पुनर्विचार करने की सख्त चेतावनी जारी की है। यह आधिकारिक चेतावनी उस समय आई है जब यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब की संप्रभु सीमाओं, रणनीतिक बुनियादी ढांचे और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर लगातार विस्फोटक ड्रोन, क्रूज मिसाइलें और बैलिस्टिक रॉकेट दाग रहे हैं। वाशिंगटन का मानना है कि लाल सागर और अरब प्रायद्वीप में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नागरिकों, वाणिज्यिक संपत्तियों और कूटनीतिक मिशनों पर हमलों का अप्रत्याशित जोखिम बहुत तेजी से बढ़ गया है।अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जारी इस नए दस्तावेज़ ने स्पष्ट किया है कि हाल के हफ्तों में हूती लड़ाकों की ओर से सीमा पार हवाई हमलों की आवृत्ति में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। कुछ ही दिन पहले सऊदी अरब के पवित्र मक्का शहर के ठीक दक्षिण में स्थित एक संवेदनशील इलाके की ओर बढ़ रहे एक खतरनाक आत्मघाती ड्रोन को सऊदी रॉयल एयर डिफेंस सिस्टम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया था। इस गंभीर घटना ने यह प्रमाणित कर दिया है कि विद्रोही समूह केवल सीमावर्ती चौकियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सऊदी अरब के पश्चिमी प्रांतों, घनी आबादी वाले महानगरीय केंद्रों और पवित्र स्थलों के करीब तक हमले करने का दुस्साहस कर रहे हैं। हालांकि सऊदी अरब के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर वाणिज्यिक विमानों का परिचालन अभी पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, किंतु हवाई रक्षा प्रणालियों के अचानक सक्रिय होने और मिसाइल अवरोधन अभियानों के चलते उड़ानों में बड़े पैमाने पर देरी, डायवर्जन और परिचालन संबंधी गंभीर व्यवधान सामने आ रहे हैं।यमन सीमा पर लेवल-4 का सबसे कड़ा प्रतिबंध: 20 मील के दायरे में अमेरिकी कर्मियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जितसऊदी अरब के अधिकांश हिस्सों के लिए जहां लेवल-3 एडवाइजरी लागू की गई है, वहीं यमन से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे समस्त संवेदनशील क्षेत्रों के लिए वाशिंगटन ने अपनी सर्वोच्च और सबसे सख्त लेवल-4 'डू नॉट ट्रैवल' (Do Not Travel - बिल्कुल यात्रा न करें) चेतावनी जारी की है। यमन की सीमा पर सक्रिय सशस्त्र विद्रोही गुट आए दिन सीमावर्ती चौकियों, असैन्य बस्तियों और राजमार्गों पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के रॉकेटों और कम दूरी की मिसाइलों से अंधाधुंध बमबारी करते रहते हैं, जिससे इन क्षेत्रों में मौजूद किसी भी नागरिक या विदेशी यात्री की जान को तत्काल जानलेवा खतरा पैदा हो जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी अमेरिकी नागरिक इन सीमांत प्रांतों में जाने का जोखिम न उठाए क्योंकि आपातकाल की स्थिति में वहां तत्काल कूटनीतिक या सुरक्षा सहायता पहुंचाना अमेरिकी दूतावास के लिए संभव नहीं होगा।सुरक्षा प्रोटोकॉल को अत्यधिक कड़ा करते हुए अमेरिकी सरकार ने अपने सभी आधिकारिक राजनयिकों, वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए यमन सीमा के 20 मील (लगभग 32 किलोमीटर) के संपूर्ण दायरे में जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा सऊदी अरब के संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांतों जैसे कतीफ, जिजान, असीर और नजरान की यात्रा करने के लिए भी अमेरिकी सरकारी कर्मियों को मिशन सुरक्षा प्रमुख से विशेष और पूर्व आधिकारिक अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इन क्षेत्रों में लंबे समय से सीमा पार से होने वाली तोपखाने की गोलाबारी और आत्मघाती ड्रोन के गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार की चूक या ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।ऊर्जा संयंत्र, एयरपोर्ट और भीड़भाड़ वाले इलाके निशाने पर: अमेरिकी नागरिकों के लिए आपातकालीन सुरक्षा गाइडलाइनअमेरिकी विदेश विभाग की नई सुरक्षा एडवाइजरी में नागरिकों को केवल मिसाइल हमलों से ही नहीं, बल्कि विभिन्न हिंसक गुटों और आतंकवादी संगठनों द्वारा किए जाने वाले संभावित हमलों को लेकर भी आगाह किया गया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, सऊदी अरब के भीतर स्थित अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डे, तेल शोधन कारखाने, विशाल ऊर्जा संयंत्र, पाइपलाइन टर्मिनल, सैन्य ठिकाने, पश्चिमी नागरिकों की आवाजाही वाले लक्जरी होटल, सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और घनी भीड़भाड़ वाले वाणिज्यिक बाजार आतंकी और विद्रोही तत्वों के प्राथमिक निशाने पर हो सकते हैं। इन रणनीतिक और नागरिक ठिकानों पर किसी भी अप्रत्याशित हमले की आशंका को देखते हुए अमेरिकी सरकार ने नागरिकों को निर्देश दिया है कि वे अनावश्यक रूप से ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर जाने से पूरी तरह बचें और अपनी गतिविधियों को न्यूनतम व सतर्क रखें।इसके अतिरिक्त, रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास और जेद्दाह तथा धाहरान स्थित वाणिज्य दूतावासों ने नागरिकों को लगातार स्थानीय समाचारों पर नजर रखने, आपातकालीन अलर्ट पर सक्रिय रहने और आपात स्थिति में तुरंत बंकर या सुरक्षित कंक्रीट संरचनाओं में शरण लेने की योजना तैयार रखने की सलाह दी है। अगर आसमान में कोई संदिग्ध रोशनी, धमाका या इंटरसेप्टर मिसाइल की आवाज सुनाई दे, तो तुरंत खिड़कियों से दूर रहने और जमीन पर लेट जाने के दिशा-निर्देश दोहराए गए हैं। पश्चिम एशिया में ईरान, यमन और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते इस सैन्य टकराव ने यह साफ कर दिया है कि सऊदी अरब में सुरक्षा समीकरण अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
अमेरिकी स्पेस वेपन और चीन-रूस के चक्रव्यूह के बीच भारत का 'मिशन शक्ति' कैसे बनेगा सबसे बड़ा गेमचेंजर
वैश्विक महाशक्तियों के बीच लंबे समय से चल रही सामरिक रस्साकशी अब धरती की सीमाओं को लांघकर अंतरिक्ष के निर्वात में पहुंच चुकी है। 21वीं सदी के आधुनिक युद्धक्षेत्र का सबसे खतरनाक और निर्णायक मोर्चा अब पृथ्वी की निचली कक्षा बन चुका है। हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किए जाने के बाद कि उसने पृथ्वी की कक्षा में परिचालन स्थिति में स्पेस कंट्रोल हथियार तैनात कर रखे हैं, समूचे अंतरराष्ट्रीय रक्षा जगत में सनसनी फैल गई है। शीतयुद्ध के दौर से लेकर अब तक उपग्रहों का उपयोग केवल निगरानी, जासूसी, संचार, मौसम विज्ञान और मार्गदर्शन प्रणालियों के लिए ही प्राथमिक रूप से किया जाता रहा था। वायुमंडल के बाहर सैन्य साजो-सामान की उपस्थिति कोई नई बात नहीं थी, किंतु किसी संप्रभु राष्ट्र द्वारा बाकायदा कक्षा में प्रत्यक्ष हमला करने वाले हथियारों की स्थायी तैनाती को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना इतिहास की पहली घटना है। वाशिंगटन की इस अभूतपूर्व स्वीकारोक्ति ने रूस और चीन के रक्षा प्रतिष्ठानों में खलबली मचा दी है, जिससे एक नए और विनाशकारी ‘स्टार वॉर्स’ यानी अंतरिक्षीय सैन्यीकरण की घातक होड़ औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। उपग्रहों को जाम करने, उन्हें लेजर किरणों से अंधा करने और उनकी कक्षा बदलने से लेकर उन्हें सीधे मार गिराने की तकनीकें अब केवल विज्ञान फंतासी का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि वास्तविक भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन का पैमाना बन चुकी हैं। इस अंतरराष्ट्रीय तनाव और महाशक्तियों के संभावित टकराव के बीच सबसे गंभीर और अहम सवाल यह उठता है कि भारत इस वैश्विक स्पेस वॉर में अपनी रणनीतिक स्थिति को किस प्रकार सुरक्षित रखता है और क्या हमारे पास दुश्मन के आक्रामक उपग्रहों को सेकंडों में निष्क्रिय करने की अचूक मारक क्षमता मौजूद है।अंतरिक्ष का नया रणक्षेत्र: अमेरिका की आक्रामक स्वीकारोक्ति और रूस-चीन का गुप्त स्पेस चक्रव्यूहशीतयुद्ध की समाप्ति के बाद ऐसा माना जा रहा था कि आउटर स्पेस ट्रीटी जैसी अंतरराष्ट्रीय संधियों के माध्यम से अंतरिक्ष को युद्ध और विनाशकारी हथियारों की होड़ से दूर रखा जा सकेगा, किंतु आधुनिक युद्धों में तकनीक की बढ़ती निर्भरता ने इस शांतिपूर्ण संतुलन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। आज के दौर में किसी भी देश की नौसेना, वायुसेना और थलसेना उपग्रह आधारित संचार और नेविगेशन प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भर हैं। अमेरिका की जीपीएस प्रणाली और भारत का स्वदेशी नाविक (NavIC) नेविगेशन तंत्र सैन्य अभियानों, सटीक मिसाइल हमलों, ड्रोन संचालन और सैनिकों की वास्तविक लोकेशन ट्रैकिंग की रीढ़ बन चुके हैं। ऐसे परिदृश्य में दुश्मन देश के उपग्रहों को निशाना बनाकर उसकी संपूर्ण सैन्य संचार व्यवस्था को पंगु बना देना किसी भी युद्ध की पहली और सबसे प्रभावी रणनीति बन जाती है। यही कारण है कि दुनिया की शीर्ष महाशक्तियां अब पारंपरिक युद्ध के बजाय ‘काउंटर-स्पेस क्षमताओं’ को विकसित करने में अपनी पूरी वैज्ञानिक और वित्तीय ताकत झोंक रही हैं। अमेरिका ने अपनी स्पेस फोर्स के जरिए कक्षा में ऐसे हथियारों को स्थापित किया है जो दुश्मन के निगरानी उपग्रहों के सेंसर को जला सकते हैं, उनके डेटा लिंक को अवरुद्ध कर सकते हैं या उनकी कक्षा को विचलित कर सकते हैं। यह घोषणा केवल एक तकनीकी उपलब्धि का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर बीजिंग और मॉस्को को यह संदेश देना है कि अंतरिक्ष में अमेरिकी आधिपत्य को चुनौती देना आसान नहीं होगा।इस अमेरिकी आक्रामकता के जवाब में चीन और रूस ने भले ही संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर अंतरिक्ष के हथियारीकरण का कड़ा विरोध करते हुए शांति की वकालत की हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों देश पर्दे के पीछे से अंतरिक्ष युद्ध की अति-उन्नत तकनीकें विकसित करने में किसी से पीछे नहीं हैं। वर्ष 2022 में चीन ने अपने शिजियान-21 उपग्रह के माध्यम से एक ऐसा परीक्षण किया था जिसने पेंटागन के कान खड़े कर दिए थे। बीजिंग ने अपने उपग्रह में लगी एक शक्तिशाली रोबोटिक आर्म यानी कृत्रिम यांत्रिक हाथ की मदद से अंतरिक्ष में तैर रहे एक निष्क्रिय उपग्रह को पकड़ा और उसे घसीटकर एक अन्य कक्षा में धकेल दिया। सैद्धांतिक रूप से इसे अंतरिक्ष के कचरे को साफ करने का परीक्षण बताया गया, किंतु सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक युद्ध के समय किसी भी दुश्मन देश के जासूसी या नेविगेशन उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा से खींचकर नष्ट करने का अचूक हथियार है। इसी प्रकार अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि रूस अंतरिक्ष में तैनात किए जाने वाले परमाणु-सक्षम या इलेक्ट्रॉनिक-पल्स एंटी-सैटेलाइट हथियारों पर काम कर रहा है, जो कम समय में व्यापक क्षेत्र में मौजूद उपग्रहों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को एक झटके में भूनकर नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। अंतरिक्ष की इस गुप्त जंग ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों का फैसला जमीन पर टैंकों की भिड़ंत से पहले अंतरिक्ष में उपग्रहों के अंधा होने के साथ ही तय हो जाएगा।भारत का अभेद्य ढाल बना 'मिशन शक्ति': हिट-टू-किल तकनीक से अंतरिक्ष में रचा था इतिहासजब दुनिया की महाशक्तियां अंतरिक्ष को युद्धक्षेत्र में बदलने की गुप्त योजनाएं बना रही थीं, तब भारत ने भी भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को पहले ही भांप लिया था। नई दिल्ली की स्पष्ट और घोषित नीति कभी भी अंतरिक्ष का आक्रामक हथियारीकरण करने या अंतरिक्ष में स्थायी आक्रामक हथियार तैनात करने की नहीं रही है, परंतु अपने राष्ट्रीय हितों, उपग्रह तंत्र और सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारत ने अपनी असाधारण निवारक (Deterrence) शक्ति को दुनिया के सामने अत्यंत दृढ़ता से प्रमाणित कर दिखाया है। 27 मार्च 2019 को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने संयुक्त रूप से एक अत्यंत गोपनीय और ऐतिहासिक अभियान को अंजाम दिया, जिसे ‘मिशन शक्ति’ का नाम दिया गया। इस साहसिक मिशन के तहत ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से भारत की स्वदेशी ‘पृथ्वी डिफेंस व्हीकल मार्क-II’ (PDV Mk-II) इंटरसेप्टर मिसाइल को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस मिसाइल ने पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चक्कर काट रहे भारत के ही जीवित लेकिन निष्क्रिय 'माइक्रोसैट-R' उपग्रह को सीधे प्रहार से नेस्तनाबूद कर दिया।मिशन शक्ति की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका ‘हिट-टू-किल’ (Hit-to-Kill) सिद्धांत था। अंतरिक्ष में किसी उपग्रह को मार गिराने के लिए किसी रासायनिक बारूद या पारंपरिक विस्फोटक की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि अत्यधिक गति के कारण होने वाली सीधी टक्कर में पैदा होने वाली गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) ही लक्ष्य को पूरी तरह राख करने के लिए पर्याप्त होती है। भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने बिना किसी विस्फोटक वारहेड के, केवल गणितीय सटीकता और स्वदेशी मार्गदर्शन प्रणाली के दम पर, अत्यधिक तीव्र गति से उड़ती मिसाइल की टिप को सीधे घूमते हुए उपग्रह से टकरा दिया। यह उपलब्धि तकनीकी रूप से किसी बंदूक से निकली गोली से उड़ती हुई दूसरी गोली को हवा में भेदने जैसी थी। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही भारत दुनिया का चौथा ऐसा संप्रभु राष्ट्र बन गया, जिसके पास एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल तकनीक का सफल और प्रमाणित रिकॉर्ड दर्ज हुआ। भारत से पहले यह सामरिक क्षमता केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के ही पास थी। इस परीक्षण ने वैश्विक पटल पर भारत को एक ऐसी स्पेस सुपरपॉवर के रूप में स्थापित कर दिया जिसे नजरअंदाज करना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए असंभव हो गया।क्या है ASAT हथियार प्रणाली? भविष्य के अंतरिक्ष युद्ध में भारत की रणनीतिक तैयारी और कूटनीतिएंटी-सैटेलाइट वेपन यानी ASAT तकनीक का मुख्य उद्देश्य युद्धकाल के दौरान दुश्मन देश के अंतरिक्षीय संपत्तियों, विशेषकर सैन्य संचार, जासूसी, टोही और मिसाइल ट्रैकिंग उपग्रहों को पूरी तरह नष्ट या निष्प्रभावी करना होता है। इसमें सबसे सीधा और अचूक तरीका ‘काइनेटिक डायरेक्ट-एसेंट ASAT’ मिसाइल का होता है, जिसे जमीन पर स्थापित गतिशील लॉन्चरों, उच्च ऊंचाई वाले लड़ाकू विमानों या नौसैनिक युद्धपोतों से दुश्मन के उपग्रह के रास्ते में सीधे दागा जाता है। जब यह इंटरसेप्टर मिसाइल वातावरण को पार करके अंतरिक्ष में प्रवेश करती है, तो इसके अत्याधुनिक ऑन-बोर्ड इन्फ्रारेड और ऑप्टिकल सीकर उपग्रह की सटीक स्थिति को ट्रैक करते हैं और कुछ ही माइक्रो-सेकंड के भीतर उससे सीधी टक्कर कर देते हैं। इस टक्कर के परिणामस्वरूप दुश्मन का उपग्रह तुरंत निष्क्रिय होकर बिखर जाता है, जिससे उसकी सेना के ग्राउंड रडार, गाइडेड मिसाइल सिस्टम और युद्धक टुकड़ियों के बीच का डिजिटल लिंक हमेशा के लिए टूट जाता है।मिशन शक्ति की शानदार सफलता के बाद भारत ने जानबूझकर कोई दूसरा प्रत्यक्ष विनाशकारी काइनेटिक परीक्षण नहीं किया है। इसका मुख्य कारण भारत का एक अत्यंत जिम्मेदार, परिपक्व और पर्यावरण-सचेत वैश्विक शक्ति होना है। अंतरिक्ष में होने वाले काइनेटिक मिसाइल हमलों से अंतरिक्षीय मलबे (Space Debris) का भारी संकट उत्पन्न होता है, जो कक्षा में तैर रहे अन्य नागरिक, वाणिज्यिक और वैज्ञानिक उपग्रहों के साथ-साथ मानवयुक्त अंतरिक्ष स्टेशनों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। भारत ने अपने 2019 के परीक्षण को जानबूझकर बहुत कम ऊंचाई वाले लो-अर्थ ऑर्बिट में अंजाम दिया था, जिससे उत्पन्न हुआ अधिकांश मलबा कुछ ही हफ्तों और महीनों के भीतर पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करके प्राकृतिक घर्षण से पूरी तरह जलकर भस्म हो गया। हालांकि, प्रत्यक्ष परीक्षणों पर संयम बरतने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि भारत की रक्षा तैयारियां शिथिल पड़ी हैं। भारत ने अपनी त्रि-सेवा अंतरिक्ष रक्षा क्षमताओं को संस्थागत रूप देते हुए 'डिफेंस स्पेस एजेंसी' (DSA) का गठन किया है, जो सेना के तीनों अंगों के अंतरिक्षीय संसाधनों के समन्वय और सुरक्षा का कार्य देखती है।भविष्य के अंतरिक्ष युद्धों में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि गैर-काइनेटिक तकनीकें जैसे डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (लेजर और माइक्रोवेव बीम), साइबर हमले और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भारत इस दिशा में भी अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं को निरंतर परिष्कृत कर रहा है ताकि दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों से अपने उपग्रहों को सुरक्षित (हार्डनिंग) रखा जा सके। अमेरिका द्वारा अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती की पुष्टि और रूस-चीन की गतिविधियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भविष्य में शांति केवल उसी देश की सुरक्षित रह सकती है जिसके पास प्रतिशोध लेने की निर्विवाद क्षमता हो। भारत के मिशन शक्ति ने समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संभावित शत्रुओं को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि किसी भी दुस्साहसी ताकत ने भारतीय उपग्रहों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया, तो भारत के पास दुश्मन के अंतरिक्षीय ढांचे को पलक झपकते ही ध्वस्त करने की अचूक तकनीक, अडिग राजनीतिक इच्छाशक्ति और अचूक मिसाइल क्षमताएं पूरी तरह मुस्तैद हैं।
अमेरिका से निवेशकों ने खींचा पैसा, महंगे तेल और महंगाई की चिंता से US शेयर फंडों में बड़ी बिकवाली
वॉशिंगटन, 16 सितंबर 2026। अमेरिकी शेयर बाजार से निवेशकों की निकासी ने हाल के दिनों में वैश्विक वित्तीय बाजारों का ध्यान खींचा है। सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में अमेरिका के इक्विटी फंडों से बड़ी मात्रा में पैसा बाहर गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 9 सितंबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी इक्विटी फंडों से 32.27 अरब […] The post अमेरिका से निवेशकों ने खींचा पैसा, महंगे तेल और महंगाई की चिंता से US शेयर फंडों में बड़ी बिकवाली appeared first on Rashtriya Ujala .
अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटरों पर ईडी की रेड: पटियाला-पुणे में 220 कर्मचारी मिले
नई दिल्ली — 16 सितंबर, 2026 — अमेरिका के नागरिकों को फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में एक ऐसा तंत्र सामने आया है, जिसमें ठगी के लिए अलग-अलग कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थी। कोई पीड़ित का भरोसा जीतता था, कोई सरकारी अधिकारी या प्रतिष्ठित कंपनी का कर्मचारी बनकर डर पैदा करता था, तो कोई भुगतान और खाते में रकम की पुष्टि का काम संभालता था। इसके बाद गिफ्ट कार्ड, नकदी और सोने के जरिए हासिल रकम को क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और दूसरे बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था। ईडी के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ स्थित चार ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी ली। कार्रवाई में तीन सक्रिय फर्जी कॉल सेंटर मिले, जहां करीब 220 लोग काम करते हुए पाए गए।
अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं। इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है। तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है। नेताओं से लेकर टेक दिग्गजों तक अलग-अलग राय AI को लेकर अमेरिका में छिड़ी यह बहस अब टेक कंपनियों से निकलकर राजनीति के केंद्र में पहुंच गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के कुछ नेता AI को लेकर चिंता जता रहे हैं। आम तौर पर एक-दूसरे से अलग रहने वाले इन दोनों खेमों में बहुत कम मुद्दों पर सहमति दिखती है। लेकिन AI की यह बहस सिर्फ राजनीति या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में इसके फैसले हमारी नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, यह भी तय होगा कि AI के इस्तेमाल को लेकर नियम कैसे बनाए जाएंगे। AI का विकास धीमा करने के पक्ष में… डारियो अमोडेई AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है। अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है। वे लंबे समय से AI पर सरकारी नियम बनाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का प्रस्ताव रखा है। रुख बदलने वाले… सैम ऑल्टमैन OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे की चेतावनी वाले बयान पर हस्ताक्षर किए थे। इसी साल उन्होंने अमेरिकी सीनेट में ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया। बाद में उनका रुख कुछ नरम पड़ा। 2025 के बीच तक ऑल्टमैन का कहना था कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव है। फिर जुलाई 2026 में OpenAI ने बताया कि उसके दो AI मॉडल टेस्टिंग के दौरान बिना इंसानी मदद के सिस्टम से बाहर निकल गए। उन्होंने चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर Hugging Face के सर्वर तक पहुंच बनाई। इस घटना के बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस मांग का भी समर्थन किया कि AI मॉडल का विकास कुछ धीमा किया जाना चाहिए। इलॉन मस्क लंबे समय से AI के खतरों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। उनका अनुमान है कि AI के इंसानों के लिए खतरनाक साबित होने की संभावना 10 से 20% तक है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते इसके लिए नियम बनाने की मांग की है। मस्क ने खुद AI कंपनी xAI शुरू की है और ट्रम्प के चुनाव अभियान में बड़ी रकम दी थी। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक सरकारी नियमों में बदलाव से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को उन्होंने अमोडेई की AI विकास धीमा करने की मांग का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर मस्क ने लिखा, “डारियो सही हैं।” AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं… सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। AI की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट OpenAI के साथ बड़ी साझेदारी कर चुका है और अब अपने AI टूल्स पर भी तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, नडेला AI को बिना रोक-टोक आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि इसका विकास सोच-समझकर और इंसानी निगरानी में होना चाहिए। उनका तर्क है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस का कोई फायदा नहीं, जो इंसानों के कंट्रोल से बाहर हो या लोगों के काम न आए। इसके साथ ही नडेला AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। सुंदर पिचाई अल्फाबेट और गूगल के CEO हैं। वह AI के खतरों को मानते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत कड़े नियमों के पक्ष में नहीं हैं। पिचाई का कहना है कि AI के इस्तेमाल के हिसाब से अलग-अलग नियम बनाए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, AI के जोखिम से निपटना जरूरी है, लेकिन इसके फायदों से पीछे रह जाना भी बड़ा खतरा हो सकता है। मार्क जुकरबर्ग मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI अगर कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहा तो यह ज्यादा बड़ा खतरा हो सकता है। इसके बजाय वह AI को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने को सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं। जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में AI मॉडल बनाने और जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को भी मानते हैं। इसी वजह से मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी न करने का फैसला कर सकती है। एलेक्जेंडर वेंग 2025 में मेटा से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के AI असिस्टेंट एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी जुड़े हैं। वेंग ने एक स्ट्रैटिजी पेपर में सुपरइंटेलिजेंस को परमाणु बम के बाद सबसे खतरनाक चीज बताया। उनका कहना है कि अमेरिका को AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरे देशों को रोकने की रणनीति के नजरिए से भी देखना चाहिए। AI का विकास तेजी से जारी रखने के पक्ष में जेनसन हुआंग एनवीडिया के को-फाउंडर और CEO हैं। एनवीडिया के चिप्स का इस्तेमाल AI बनाने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां करती हैं। हुआंग AI के तेज विकास के प्रमुख समर्थकों में हैं। उनका कहना है कि कंपनियों को सरकार से AI पर ज्यादा नियम बनाने की मांग नहीं करनी चाहिए। AI से नौकरियां जाने और अमेरिकी चिप्स दूसरे देशों को बेचने जैसे मुद्दों पर उनका एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई से सार्वजनिक मतभेद भी रहा है। डेविड सैक्स टेक निवेशक हैं। ट्रम्प प्रशासन में वह AI और क्रिप्टो से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह AI के डर के आधार पर सख्त नियम बनाने के खिलाफ हैं। सैक्स अमेरिकी राज्यों के अलग-अलग AI कानून बनाने का भी विरोध करते हैं। इसके बजाय वह कम सरकारी दखल वाली नीति चाहते हैं। उनका कहना है कि AI कंपनियां तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, इसलिए उनकी रफ्तार रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी राजनीति में भी AI को लेकर दो राय नियम बनाने के पक्ष में… बर्नी सैंडर्स निर्दलीय अमेरिकी सीनेटर हैं। AI के तेज विकास के आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि AI से बड़ी कंपनियों की ताकत बढ़ सकती है और इसका असर कामगारों पर पड़ सकता है। सैंडर्स ने नए AI डेटा सेंटर बनाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, बड़ी AI कंपनियों पर 50% टैक्स लगाने और उससे सार्वजनिक फंड बनाने की बात कही है। उन्होंने सुपरइंटेलिजेंस पर स्थायी रोक लगाने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, उनका प्रस्ताव है कि तब तक AI के एडवांस विकास पर रोक रहे, जब तक ऐसे सिस्टम को लेकर सुरक्षा इंतजाम तय नहीं हो जाते। नियमों के विरोध में… माइक जॉनसन अमेरिकी स्पीकर मानते हैं कि AI के खतरे बढ़ रहे हैं, लेकिन वह जल्दबाजी में नियम बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वे कहते हैं कि जल्दबाजी में ऐसे नियम नहीं बनाने चाहिए जिनसे चीन को फायदा मिल सकता है। जॉनसन ने AI के कारण इंसानों के खत्म हो जाने की आशंकाओं को खारिज किया है। डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि AI के मामले में अमेरिका चीन से आगे रहे। उन्होंने AI में अमेरिका की बढ़त बनाए रखना अपनी प्राथमिकता बनाई है। इसके लिए वह AI को तेजी से आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। इसमें AI डेटा सेंटर के लिए ज्यादा बिजली की व्यवस्था करना और ऐसे AI मॉडल को बढ़ावा देना शामिल है, जिनका इस्तेमाल ज्यादा लोग कर सकें। एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग के साथ एक कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने यह भी कहा था कि AI के विकास में सरकार को ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… ओपनएआई का 90 साल पुरानी गणित पहेली सुलझाने का दावा: यह दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में एक; 88 घंटे में जवाब ढूंढा ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया के सबसे मुश्किल सवालों में से एक को सॉल्व कर दिया है। AI को इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। पूरी खबर पढ़ें…
ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच जल्द बातचीत के दिए संकेत, देखें US टॉप-10
अमेरिका और ईरान में चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान बहुत जल्द और बुरी तरह से समझौता करना चाहता है. और अमेरिका फिर बातचीत करने के लिए तैयार हो सकता है. वहीं, ईरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत तभी शुरू होगी, जब उसकी शर्तें पूरी की जाएंगी. यूएस टॉप 10 में देखें ऐसी ही टॉप 10 खबरें.
Gold-Silver Rate Update: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सोना-चांदी स्थिर; जानिए बाजार का ताजा रुख
Bengaluru, 16 सितंबर अमेरिका की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग उपकरण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लैम रिसर्च कॉरपोरेशन ने Wednesday को घोषणा की कि वह अगले कई वर्षों में India में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बना रही है. कंपनी देश में अपनी पहली सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने के साथ-साथ अपने एडवांस ... Read more
बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस फैसले को अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। सांसद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि UPI ने वीजा और मास्टरकार्ड के आगे सरेंडर नहीं किया है। बल्कि, 56 इंच वाले मोदी जी ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र किया। सांसद ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग वीजा और मास्टरकार्ड जैसे कार्ड नेटवर्क के बजाय यूपीआई का इस्तेमाल करने लगे हैं। ''बड़े लेन-देन पर शुल्क की व्यवस्था की'' इससे अमेरिकी कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ना स्वाभाविक है। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने केंद्र सरकार के नए शुल्क प्रावधान पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव में लिया गया फैसला बताया। सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का रास्ता खोल दिया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस यूपीआई को भारत की डिजिटल ताकत और डिजिटल इंडिया की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया, अब उसी के बड़े लेन-देन पर शुल्क की व्यवस्था की जा रही है। तेल भी जनता डालेगी और कीमत भी जनता चुकाएगी - सांसद सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को लेकर भी इस मुद्दे पर व्यंग्य किया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों को ‘आशीर्वाद का दिया’ दिया है। यह दिया जन्मदिन पर एक दिन या एक घंटे के लिए नहीं जलाना है, बल्कि आजीवन जलाना होगा। सांसद ने कहा कि यूपीआई पर हर बड़े भुगतान के साथ यह ‘दिया’ याद आएगा। उन्होंने कहा, डिजिटल इंडिया का दिया है साहब, अब तेल भी जनता डालेगी और कीमत भी जनता चुकाएगी। हालांकि, प्रस्तावित एमडीआर की व्यवस्था सांसद के राजनीतिक आरोप से अलग तकनीकी रूप से देखी जा रही है। फीस अधिकतम 300 र प्रति लेन-देन तक सीमित एनपीसीआई के प्रावधान के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति लेन-देन तक सीमित रहेगा। इस व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि यूपीआई से भुगतान करने वाले हर ग्राहक से सीधे शुल्क वसूला जाएगा। सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक एमडीआर भुगतान व्यवस्था में व्यापारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा। वहीं ₹2,000 तक के पी2एम भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा। सांसद ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल सरकार के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत पी2एम यूपीआई लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन समेत कुछ आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 0.4 प्रतिशत की जगह ₹5 का फ्लैट एमडीआर निर्धारित किया गया है। वहीं सांसद सुधाकर सिंह ने इसी फैसले को अमेरिकी दबाव से जोड़कर केंद्र सरकार की नीतियों पर राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में यूपीआई पर एमडीआर का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का भी विषय बन सकता है।
15-15 करोड़ के मकान, लेकिन सड़कें सुनसान! NRI ने दिखाई अमेरिका की वो सच्चाई जिसे देखकर चौंक गए लोग
भारत में शाम होते ही मोहल्लों का माहौल बदल जाता है। बच्चे बाहर खेलते हैं, लोग टहलते हैं, पड़ोसी आपस में बातचीत करते हैं और गलियों में चहल-पहल बढ़ जाती है। लेकिन अमेरिका के एक रिहायशी इलाके का नजारा इससे बिल्कुल अलग दिखा। अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय ने शाम करीब 6 बजे अपने आसपास का वीडियो बनाया, जिसमें बड़े-बड़े घर तो नजर आए,लेकिन सड़क पर लोग लगभग गाय ब दिखे।अमेरिका में पिछले पांच साल से रह रहे नितिन मल्होत्रा ने इंस्टाग्राम पर यह वीडियो साझा किया है। वह अपने पड़ोस की गलियों में चलते हुए वहां बने आलीशान घरों को दिखाते हैं। उनके मुताबिक, इस इलाके में कई घरों की कीमत करीब 10 लाख डॉलर या उससे भी ज्यादा है। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह रकम कई करोड़ रुपये बैठती है।करोड़ों के घर, लेकिन बाहर कोई नजर नहीं आयावीडियो में चौड़ी सड़कें, बड़े मकान और उनके सामने बने ड्राइववे दिखाई देते हैं। देखने में पूरा इलाका बेहद व्यवस्थित और शांत नजर आता है। हालांकि , नितिन का ध्यान जिस बात ने सबसे ज्यादा खींचा, वह थी सड़कों पर लोगों की गैरमौजूदगी। वीडियो बनाते हुए वह कहते हैं कि शाम के वक्त भी सड़क पर एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा। उनका कहना है कि भारत में इसी समय आमतौर पर मोहल्लों में काफी हलचल देखने को मिलती है।नितिन के मुताबिक, इस इलाके में कुछ घरों की कीमत करीब 5 करोड़, कुछ की 10 करोड़ और कुछ की 15 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसके बावजूद शाम के समय आसपास का माहौल बेहद शांत रहता है।‘अमेरिका आकर करोग े क्या?’नितिन ने अपने अनुभव की तुलना भारत की रोजमर्रा की जिंदगी से भी की। उनका कहना है कि भारत में शाम के वक्त लोग अक्सर घरों से बाहर निकलते हैं। बच्चे खेलते हैं, लोग पड़ोसियों से मिलते हैं और आसपास की दुकानों पर भी भीड़ दिखाई देती है। इसके उलट अमेरिकी उपनगरों में लोगों का ज्यादातर समय घर के अंदर या अपनी निजी जिंदगी में गुजर सकता है। नितिन ने बताया कि उन्होंने टेक्सास, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क के कुछ इलाकों में भी इसी तरह का माहौल देखा है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि जहां भारतीय या दूसरे प्रवासी समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं, वहां माहौल कुछ अलग हो सकता है।आखिर अमेरिकी उपनगर इतने शांत क्यों रहते हैं?वीडियो में दिख रहा इलाका पूरे अमेरिका की तस्वीर नहीं है। यह मुख्य रूप से अमेरिकी उपनगरी य इलाकों की जीवनशैली की एक झलक है। ऐसे कई इलाकों में घर एक-दूसरे से काफी दूरी पर बने होते हैं और रोजमर्रा की जरूरतों की जगहें भी अक्सर पैदल दूरी पर नहीं होतीं। लोग काम,खरीदारी या दूसरी जगहों पर जाने के लिए कार का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़ कों पर पैदल चलते या बैठकर बातचीत करते लोग कम दिखाई दे सकते हैं। View this post on Instagram किसी को सुकून, किसी को लगा अकेलापननितिन के वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। कुछ यूजर्स को खाली और शांत सड़कें बेहद सुकून देने वाली लगीं, जबकि कुछ लोगों को इतना शांत माहौल देखकर अकेलापन महसूस हुआ।(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)Video: पूजा के सामने आसमान छू रहा पेड़ भी हो गया बौना, टॉप पर पहुंच कर किया सलाम
'UPI पर टैक्स से अमेरिका को फायदा': राहुल गांधी का केंद्र पर निशाना, फैसला वापस लेने की मांग
'UPI पर टैक्स से अमेरिका को फायदा': राहुल गांधी का केंद्र पर निशाना, फैसला वापस लेने की मांग
यूपीआई भुगतान पर चार्ज को अमेरिकी दबाव से क्यों जोड़ा जा रहा है?
इसी साल मार्च में यूनाइटेड स्टेट ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) ने अपनी रिपोर्ट में यूपीआई को बाधा के रूप में पेश किया था. मोदी सरकार के इस फ़ैसले को यूएसटीआर की रिपोर्ट से भी जोड़ा जा रहा है.
अमेरिकी नागरिकों को फोन कर ठगी करने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटरों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी की हैदराबाद जोनल ऑफिस की टीम ने 15 सितंबर 2026 को पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में चार अलग-अलग ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। शंकर आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में PMLA की धारा 17 के तहत की गई, जिसमें जांच एजेंसी को कई अहम सबूत हाथ लगे हैं।वहीं, जांच के दौरान मिले इनपुट और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर ED को ऐसे एक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली थी, जो अन्य लोगों के साथ मिलकर पटियाला और पुणे में कथित तौर पर फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था।सर्च के दौरान 3 लाइव कॉल सेंटर मिलेED की कार्रवाई के दौरान 3 फर्जी कॉल सेंटर ऑपरेशनल हालत में मिले। इनमें 2 कॉल सेंटर पटियाला में और 1 पुणे में चल रहा था।सर्च के दौरान इन तीनों कॉल सेंटरों में करीब 220 लोग काम करते हुए मिले। अब ED इन सभी लोगों की पहचान, उनकी भूमिका और कॉल सेंटर में उनके रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर की जांच कर रही है। वहीं, तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में वर्कस्टेशन और क्यूबिकल के अलावा कंप्यूटर, हेडसेट, मोबाइल फोन और नेटवर्किंग से जुड़े उपकरण भी मिले हैं।अमेरिकी नागरिकों को फोन कर ठगी का आरोपED के मुताबिक, इन कॉल सेंटरों से अमेरिकी नागरिकों को फोन किए जाते थे और झूठे बहाने बनाकर उनसे पैसे जमा कराने के लिए कथित तौर पर प्रेरित किया जाता था। पंजाब स्थित पटियाला के ठिकानों पर चल रहे कॉल सेंटरों में अमेरिकी नागरिकों के साथ ठगी और उन्हें कथित तौर पर एक्सटॉर्ट करने से जुड़े सबूत मिले हैं। सर्च के दौरान बरामद मोबाइल फोन और एक लैपटॉप में सिंडिकेट के काम करने के तरीके और ठगी के शिकार लोगों से हासिल रकम के वितरण से जुड़ा डेटा मिला है।पुणे के कॉल सेंटर में भी मिला समान तरीकाED की जांच में पुणे स्थित कथित फर्जी कॉल सेंटर से भी अमेरिकी नागरिकों के साथ ठगी करने का इसी तरह का तरीका (modus operandi) सामने आया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पटियाला और पुणे में चल रहे इन कॉल सेंटरों के बीच आपस में क्या कनेक्शन है और इनके पीछे किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था।चंडीगढ़ के ठिकाने से मास्टरमाइंड से जुड़े सुरागचंडीगढ़ में जिस आवासीय परिसर की तलाशी ली गई, वह कथित तौर पर पटियाला में चल रहे फर्जी कॉल सेंटरों के संचालन और नियंत्रण से जुड़े मास्टरमाइंड द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था। यहां से कॉल सेंटरों के संचालन से संबंधित डेटा वाले कई डिजिटल डिवाइस बरामद हुए हैं। इसी परिसर से अमेरिकी डॉलर से भारतीय रुपये में कथित तौर पर अवैध कमाई को बदलने और प्रोसेस करने में शामिल एक व्यक्ति के भी काम करने की जानकारी मिली है। उसकी भूमिका और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप समेत बड़ी बरामदगीसर्च और सीजर ऑपरेशन के दौरान ED ने बड़ी संख्या में डिजिटल डिवाइस और अन्य सामान जब्त किया है, बरामदगी में शामिल हैं --66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, अन्य कम्युनिकेशन उपकरण, नकदी, महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेज।कॉलिंग कैंपेन और फंड फ्लो की जांचED अब बरामद डिजिटल और अन्य सबूतों की विस्तृत जांच कर रही है। जांच के दायरे में—कॉलिंग कैंपेन, कॉल स्क्रिप्ट, डायलर और VoIP आधारित सिस्टम, पीड़ितों से जुड़ा डेटा, पेमेंट चैनल, कॉल सेंटर को मैनेज और कंट्रोल करने वाले लोग, कथित अपराध से पैदा हुई रकम का फ्लो शामिल हैं।ED का कहना है कि बरामद सामग्री और डिजिटल एविडेंस की जांच से पूरे modus operandi का पता लगाने, इसमें शामिल लोगों की पहचान करने, अलग-अलग ठिकानों के बीच लिंक स्थापित करने और अपराध से अर्जित रकम को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।यह भी पढ़ें:दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर बिग अपडेट, मंत्रालय को सौंपा गया DPR, सारी डिटेल जानिए
अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करना होगा महंगा, वीडियो में जाने विदेशी छात्रों से 1 लाख डॉलर फीस लेने की तैयारी
जॉर्डन में अमेरिकी विमानों को नुकसान? ट्रंप का आया दो टूक जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन के मुवाफ्फक सलती एयर बेस पर ईरानी हमले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की खबरों को खारिज किया है. ट्रंप ने कहा कि विमानों को कोई नुकसान नहीं हुआ.
भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप का प्रदर्शन
New Delhi, 16 सितंबर India और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्धाभ्यास’ चल रहा है. Wednesday को इस सैन्य अभ्यास में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप को लेकर विशेष गतिविधियां आयोजित की गई. दोनों सेनाओं का यह अभ्यास 16 सितंबर को Rajasthan की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ. यहां एम-777 अल्ट्रा ... Read more
अमेरिका से अभिषेक बनर्जी की 'स्कार' पोस्ट से सियासी हलचल, जानिए क्या लिखा इंस्टाग्राम स्टोरी पर
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अमेरिका में आंख के इलाज के दौरान इंस्टाग्राम पर शेयर की गई एक पोस्ट से पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
'मेरा काम अभी खत्म नहीं हुआ है', अमेरिका से पोस्ट कर अभिषेक बनर्जी ने क्या दिया संदेश?
तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने अमेरिका से एक रहस्यमयी संदेश और अपनी आंख की तस्वीर साझा की है।
कोलकाता, 16 सितंबर . तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अमेरिका में आंख के इलाज के दौरान इंस्टाग्राम पर शेयर की गई एक पोस्ट से पश्चिम बंगाल के Political गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी इन दिनों Supreme Court की अनुमति ... Read more
अभिषेक बनर्जी की 'स्कार' पोस्ट से सियासी हलचल, अमेरिका में इलाज के बीच इंस्टाग्राम स्टोरी बनी चर्चा का विषय
ईरान पर हमले की अमेरिका ने अब तक क्या 'क़ीमत' चुकाई है? इस रिपोर्ट से चला पता
इस रिपोर्ट से ईरान के साथ युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में अमेरिकी विमानों, सैन्य अड्डों, कूटनीतिक ठिकानों और हथियारों को हुए नुक़सान का आधिकारिक ब्यौरा पहली बार सार्वजनिक हुआ है.
इजरायल को एक-एक टन के 40 हजार बम देगा अमेरिका, जानिए क्यों?
ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को एक टन के 40 हजार के बम देने का पैकेज मंजूर किया है. इसमें MK-84, BLU-117 और I-2000 बंकर बस्टर बम शामिल हैं. ये ईरान के ठिकानों पर हमले के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं.
यमन सीमा से दूर रहें अमेरिकी नागरिक, सऊदी अरब यात्रा पर भी करें पुनर्विचार: यूएस एडवाइजरी
रियाद, 16 सितंबर . अमेरिका ने सऊदी अरब में रह रहे अपने नागरिकों को यमन की सीमा से दूर रहने की नसीहत दी है. अमेरिकी विदेश विभाग ने Wednesday को सऊदी अरब के लिए यात्रा संबंधी एडवाइजरी को लेवल-3 यानी ‘यात्रा पर पुनर्विचार’ की श्रेणी में रखा है और यमन से लगी सीमा वाले इलाकों ... Read more
petrol diesel price India: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इंडोनेशिया, फिलीपींस, ग्वाटेमाला जैसे कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से विरोध-प्रदर्शन और आपूर्ति संकट गहराया है। वहीं, भारत में घरेलू मूल्य निर्धारण प्रणाली, विविध खरीद स्रोतों और सरकारी तेल कंपनियों की भूमिका के कारण ईंधन की कीमतों पर इसका तत्काल और बड़ा असर नहीं दिखा है।
New Delhi, 16 सितंबर . यूपीआई भुगतान में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का विपक्षी नेताओं ने विरोध किया है. आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) सदस्य गुरुनाधम, कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत, आरजेडी सांसद मनोज झा और एनसीपी नेता क्लाइड क्रास्टो ने भाजपा Government पर अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया और इस ... Read more
US Visa Rules: अमेरिका में विदेशी छात्रों की नौकरी पर संकट, ₹40 हजार की जगह $100K चार्ज वसूलने की तैयारी
ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) अमेरिका में उच्च शिक्षा पूरी करने वाले विदेशी छात्रों के लिए नौकरी करने का अहम माध्यम है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने के साथ अमेरिका में काम कर सकते हैं।
प्रेमी से मिलने 13 हजार किलोमीटर दूर नेपाल पहुंची अमेरिकी लड़की, सात समंदर पार तय किया लंबा सफर
प्रेमी से मिलने 13 हजार किलोमीटर दूर नेपाल पहुंची अमेरिकी लड़की, सात समंदर पार तय किया लंबा सफर
अब जानवरों से भी संबंध बनाने वाला बन सकता है FBI एजेंट! अमेरिका में ट्रंप सरकार के फैसले ने चौंकाया
अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने इस साल की शुरुआत में चुपचाप नियम बदल दिए थे. इनमें जानवरों से संबंध बाने और प्रॉस्टिट्यूशन में पहले शामिल रहे उम्मीदवारों को नौकरी देने पर लगी पूरी तरह की रोक हटा दी गई थी. जानिए FBI के डायरेक्टर किस आधार पर इसे सही बता रहे हैं.
'अमेरिकी दबाव में झुकी मोदी सरकार': यूपीआई मुद्दे पर कांग्रेस का आरोप- प्रधानमंत्री ने नोटा का नया मतलब समझाया- Modi government bows to US pressure Congress alleges on UPI issue Prime Minister explains new meaning of NOTA
अमेरिका एक बार फिर भारत और चीन समेत कई देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा। इस फैसले से भारत और चीन जैसे बड़े देशों की मुश्किलें काफी ...
भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास के 22वें संस्करण का उद्घाटन समारोह मंगलवार को औली स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया गया।
युद्ध को लेकर अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के खिलाफ : ईरान
वॉशिंगटन, रिपब्लिकन प्रतिनिधि थॉमस मैसी ने अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने यह कदम ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध और अपने पद पर उनके कामकाज को लेकर उठाया।
अमेरिका में कौन से प्रोफेशन के लोग सबसे ज्यादा पैसा कमाते हैं?
अमेरिका में डॉक्टर और डेंटिस्ट सबसे ज्यादा कमाई करने वाले प्रोफेशनल्स में शामिल हैं. स्पेशलाइजेशन, अनुभव और प्राइवेट प्रैक्टिस के कारण कुछ डॉक्टरों की सालाना कमाई 5 लाख डॉलर या उससे ज्यादा तक पहुंच सकती है. हालांकि हर डॉक्टर या डेंटिस्ट की कमाई इतनी नहीं होती.
UPI पर अमेरिका का वार! क्या US कंपनियों के दबाव में Modi सरकार ने किया FREE UPI का अंत ?
होर्मुज में तेल टैंकर हादसे का शिकार, ईरान-अमेरिका के अलग-अलग दावे
होर्मुज में प्रतिबंधित क्षेत्र से गुजरते हुए तेल टैंकर 'एल गैया' हादसे का शिकार हो गया है. इस हादसे में दो नाविकों के लापता होने की भी खबर है. ईरान ने दावा किया है कि टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों का शिकार हो गया है. हालांकि अमेरिकी सेना ने बताया कि ये पुराना मामला है. अमेरिका के मुताबिक ये टैंकर पिछले महीने हुए मिसाइल हमले की चपेट में आया था.
अमेरिका-यूरोप में रूसी विरोधियों को मारने की साजिश: एफबीआई ने खुफिया नेटवर्क का कैसे किया भंडाफोड़?
Plot to kill Russian dissidents in the US and Europe: How did the FBI bust the intelligence network?
अमेरिका को हमारी कल्पनाओं से भी बड़ा नुकसान, संभलना मुश्किल: पेंटागन रिपोर्ट
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भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास 2026 उत्तराखंड में शुरू
ज्योतिर्मठ ( चमोली )। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास के 22वें संस्करण का उद्घाटन समारोह उत्तराखंड के औली विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में हुआ। भारतीय सेना की 14वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन और अमेरिकन सेना के 11 वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल […]
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी संसद में घमासान: रक्षामंत्री के खिलाफ लाया गया महाभियोग: जानें क्यों घिरे हेगसेथ?- Uproar in US Congress over Iran war Impeachment motion moved against Defense Secretary Hegseth
अपने प्रेमी से मिलने के लिए एक लड़की सात समंदर पार से नेपाल पहुंची। अमेरिकी लड़की 13 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर नेपाल पहुंची है। नेपाल से वो अपने प्रेमी के साथ भारत के किशनगंज के दिघलबैंक में मार्केंटिंग करने पहुंची। नेपाल लौटने के दौरान दोनों पर SSB की नजर पड़ गई। SSB ने पूछताछ के बाद दोनों को हिरासत में ले लिया। लड़की ने बताया कि उसका बॉयफ्रेंड नेपाल का रहने वाला है। हमारी दोस्ती सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच की बातचीत गहरे प्रेम प्रसंग में बदल गई। इसके बाद अपने प्रेमी से मिलने की जिद में युवती पहले 12 हजार किमी दूर भूटान पहुंची और फिर वहां से बाय रोड लगभग 800 KM की दूरी तर करके वो नेपाल पहुंची। अमेरिका से भूटान फिर नेपाल पहुंची विदेशी लड़की जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की रहने वाली इस युवती की कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर नेपाल के एक युवक से दोस्ती हुई थी। धीरे-धीरे उनकी बातचीत बढ़ी और यह दोस्ती प्यार में बदल गई। युवक से मिलने के लिए युवती अमेरिका से पहले भूटान पहुंची। वहां से वह सड़क के रास्ते नेपाल में दाखिल हुई और अपने नेपाली प्रेमी के साथ रह रही थी। सोमवार को युवती अपने नेपाली प्रेमी के साथ खरीदारी के लिए किशनगंज जिले के दिघलबैंक बाजार आई थी। यह बाजार भारत-नेपाल सीमा से सटा हुआ है। बाजार से खरीदारी के बाद जब दोनों नेपाल लौट रहे थे, तभी सीमा स्तंभ संख्या 130 के पास तैनात एसएसबी की 12वीं वाहिनी के जवानों ने अमेरिकी युवती को देखा। सीमा क्षेत्र में विदेशी नागरिक की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर जवानों ने दोनों को रोका और पूछताछ शुरू की। युवती ने खुद को अमेरिकी नागरिक बताया। इसके बाद एसएसबी ने उसे हिरासत में ले लिया। अधिकारी उसके यात्रा से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां पता लगा रही हैं कि युवती के पास भारत में आने के लिए वैध वीजा और जरूरी परमिशन था या नहीं। फिलहाल लड़की को दिघलबैंक थाने की पुलिस को सौंपा गया है। सुरक्षा एजेंसियां लड़की की भारत, नेपाल और भूटान यात्रा की पूरी जानकारी जुटा रही हैं। उसके मोबाइल फोन, यात्रा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। हालांकि अब तक की जांच में किसी आपराधिक या राष्ट्रविरोधी गतिविधि का संकेत नहीं मिला है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में विदेशी नागरिक की उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं। ---------- इसे भी पढ़िए… जिंदा बेटी की घर वालों ने निकाली अर्थी:पुतला बनाकर पिता ने मुखाग्नि दी; बेटी ने बॉयफ्रेंड से भागकर की है शादी ‘मैंने बेटी को बढ़ाया-लिखाया, बड़ा किया और वो हमलोगों का सिर झुका कर चली गई। भगवान करे ऐसी बेटी किसी को नहीं मिले। किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे।’ ये बातें मनोज कुमार गोस्वामी ने कही है, जिनकी बेटी रिया (18) ने अपने पसंद के लड़के से भागकर कोर्ट में शादी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें।
Crackdown on H-1B visas: Vance says Americans' jobs won't be taken away; one crore rupees to be paid for work. एच-1बी वीजा पर सख्ती: वेंस बोले- अमेरिकियों की नौकरियां नहीं छिनेंगी; काम के लिए देने होंगे एक करोड़ रुपये
बाइडन ने रोकी थी खेप, ट्रंप ने की जारी: इस्राइल को 40 हजार खतरनाक बम देगा अमेरिका, जानें कितने में हुई डील?- US to supply Forty thousand bombs Israel President Donald Trump announces 2.8 billion deal Biden imposed ban
अमेरिकी हाउस में रूस प्रतिबंध विधेयक पेश
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर वोट करने जा रहा है। इसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। प्रस्तावित संशोधन में भारत का नाम भी शामिल किया गया है
रूस पर प्रतिबंध विधेयक: अमेरिका में आगे बढ़ा प्रस्ताव, भारत समेत कई देशों पर 100% टैरिफ लगाएंगे ट्रंप; वोट कब?
विदेश के समाचार: अमेरिका में छात्रों के प्रवास की सीमा वाले नियम पर रोक; रूस जाएंगे सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ
रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका ने ईरान से जंग में फूंके 38 अरब डॉलर; कितने विमान गंवाए, हर महीने कितना खर्च?
ट्रंप जूनियर की पार्टी का रूस कनेक्शन: पुतिन से करीबी का जिक्र क्यों, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कैसे किनारा किया?
अमेरिका से तनाव के बीच कार्नी का बड़ा संदेश: 'कनाडा और मजबूत और आत्मनिर्भर बनेगा'; क्या है आगे की राह?
सीतामढ़ी में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल से भारत लाई जा रही विदेशी पशु टीकों की एक बड़ी खेप पकड़ी गई है। इस दौरान एक युवक को गिरफ्तार किया गया। बरामद 1435 शीशियों की बाजार में कीमत 40 से 50 लाख रुपए बताई जा रही है। एसएसबी के मुताबिक, 14 सितंबर की आधी रात सीमा पिलर नंबर 322(27) से करीब 200 मीटर अंदर भारतीय इलाके में एक शख्स नेपाल की ओर से सिर पर सामान लेकर आता दिखाई दिया। शक होने पर नाका पार्टी ने उसे रोका और सामान की तलाशी ली। जांच में अलग-अलग कंपनियों के पशु टीकों की 1435 शीशियां बरामद हुईं। पकड़ी गई खेप की लागत करीब 10 लाख रुपए पकड़ी गई खेप में नीदरलैंड में बनी नोबिलिस राइनो सीवी की 245 शीशियां शामिल हैं। हर शीशी में 1000 खुराक बताई गई है। वहीं, अमेरिका में बनी फाउल लैरींगोट्रेकाइटिस वैक्सीन की 1190 शीशियां मिलीं। इसमें भी हर शीशी में 1000 खुराक बताई गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पप्पू महतो (35) के तौर पर हुई है, जो भदई महतो का बेटा और सोनबरसा थाना क्षेत्र के इंदरवा वार्ड नंबर-13 का रहने वाला है। वैक्सीन से संबंधित डॉक्यूमेंट नहीं दिखा सका आरोपी पूछताछ में उसने एसएसबी को बताया कि वह नेपाल के सेकुववा गांव से किसी अनजान शख्स से टीकों की खेप लेकर इंदरवा जा रहा था। टीकों को भारत लाने या खरीदने से जुड़े दस्तावेज मांगने पर वह कुछ भी नहीं दिखा सका। एसएसबी के मुताबिक, पकड़ी गई खेप की लागत करीब 10 लाख रुपए है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 40-50 लाख रुपए है। टीकों को कानूनी तरीके से जब्त कर आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए हिरासत में लिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मध्य अमेरिका में भयावह सूखा संकट, तीन देशों में इमरजेंसी घोषित; क्या है कारण
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सामान्य मौसमी कमी नहीं, बल्कि बेहद गंभीर मौसम संकट है। अल साल्वाडोर में मई के दौरान सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश हुई। अगस्त में लगातार 19 दिनों तक सूखा रहा।
अमेरिका में ग्रीन कार्ड पर संग्राम: ट्रंप के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंचे 22 राज्य; छिड़ी कानूनी जंग
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और 22 अमेरिकी राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई ग्रीन कार्ड नीति के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह नीति 18 सितंबर से लागू होनी है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के फिलाडेल्फिया और पेंसिल्वेनिया उपनगरीय क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा प्रणाली के भीतर आधुनिक डिजिटल गैजेट्स और अत्यधिक स्क्रीन टाइम को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल रहा है। 'द फिलाडेल्फिया इन्क्वायरर' की विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख पब्लिक स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स ने कक्षाओं में छात्रों को बांटे जाने वाले व्यक्तिगत डिजिटल उपकरणों (1:1 डिवाइसेज) के अनियंत्रित वितरण पर ब्रेक लगाना शुरू कर दिया है। कोरोना काल के बाद से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में डिजिटल स्क्रीन पर बढ़ी निर्भरता के कारण बच्चों के संज्ञानात्मक विकास, सामाजिक मेलजोल, आंखों की सेहत और एकाग्रता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए शैक्षणिक प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए हैं। कई प्रतिष्ठित स्कूल बोर्ड्स ने किंडरगार्टन और प्राथमिक स्तर के नन्हे बच्चों को टैबलेट और लैपटॉप सौंपने की पुरानी योजनाओं को या तो पूरी तरह रद्द कर दिया है या फिर स्कूल अवधि के बाद इन उपकरणों को घर ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।#1 विभिन्न स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स के नए नियम: किंडरगार्टन से आईपैड गायब, क्रोमबुक पर शेयर्ड मॉडल लागूफिलाडेल्फिया क्षेत्र के विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों ने इस डिजिटल डिटॉक्स नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया है ताकि बच्चों का समय स्क्रीन पर नहीं बल्कि पारंपरिक किताबों और खेलकूद में बीते। कोलोनियल स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने नया नियम लागू करते हुए एलिमेंट्री स्तर के छात्रों के रात में लैपटॉप घर ले जाने पर रोक लगा दी है, जिससे बच्चे घर पर स्क्रीन के बजाय पारिवारिक संवाद और रचनात्मक गतिविधियों पर ध्यान दे सकें। वहीं ट्रेडीफ्रिन/ईस्टटाउन स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए किंडरगार्टन में दाखिला लेने वाले छोटे बच्चों को व्यक्तिगत आईपैड जारी करने पर पूर्ण रोक लगा दी है और एलिमेंट्री कक्षाओं के छात्रों के लिए भी छुट्टी के बाद गैजेट घर ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। मेथाक्टन स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने किंडरगार्टन और पहली कक्षा के छात्रों के लिए 'वन-टू-वन डिवाइस' व्यवस्था को समाप्त कर 'शेयर्ड डिवाइस मॉडल' लागू किया है, जहां क्रोमबुक केवल विशिष्ट समूह गतिविधियों के लिए कक्षा में ही उपलब्ध रहेंगे। इसी क्रम में फीनिक्सविले एरिया स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने किंडरगार्टन से लेकर तीसरी कक्षा तक के बच्चों के लिए व्यक्तिगत स्क्रीन बांटने का कार्यक्रम आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया है, जबकि वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर डिस्ट्रिक्ट में किंडरगार्टन से दूसरी कक्षा के लिए ऑनलाइन असेसमेंट सीमित कर दिए गए हैं और पांचवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों के लिए स्कूल नेटवर्क पर यूट्यूब ब्राउजिंग और सर्चिंग को पूर्ण रूप से ब्लॉक कर दिया गया है।#1 कक्षाओं में तकनीकी भटकाव पर अभिभावकों की दोहरी राय: राहत के साथ बड़ी कक्षाओं को लेकर चिंतास्कूल प्रशासनों द्वारा उठाए गए इन ऐतिहासिक कदमों का उन जागरूक अभिभावकों और बाल मनोवैज्ञानिकों ने खुलकर स्वागत किया है जो लंबे समय से क्लासरूम में अत्यधिक तकनीकी दखल का विरोध कर रहे थे। अभिभावकों का मानना है कि छोटे बच्चों के हाथों से स्क्रीन छिनने से शिक्षक एक बार फिर पारंपरिक ब्लैकबोर्ड, किताबों और प्रत्यक्ष संवाद के जरिए प्रभावी ढंग से पढ़ा सकेंगे, जिससे बच्चों का ध्यान भटकने की समस्या काफी हद तक नियंत्रित होगी। हालांकि, अभिभावकों का एक दूसरा वर्ग इस बात को लेकर चिंतित है कि प्राथमिक कक्षाओं में लगाए गए ये प्रतिबंध शायद सीमित प्रभाव ही छोड़ पाएंगे, क्योंकि मिडिल और हाई स्कूल की कक्षाओं में पहुंचते ही पाठ्यक्रम का बड़ा हिस्सा पूरी तरह डिजिटल असाइनमेंट्स पर निर्भर हो जाता है। यही कारण है कि 'स्क्रीन टाइम घटाओ' अभियान से जुड़े पैरेंट्स अब स्कूल प्रबंधन से यह मांग कर रहे हैं कि वे केवल छोटी कक्षाओं तक सीमित न रहें, बल्कि छठी से बारहवीं कक्षा तक के तकनीकी पाठ्यक्रम की भी समीक्षा करें ताकि किशोर छात्र साइबर लत और मानसिक तनाव से बच सकें।#1 नागरिक संगठनों की मुहिम और नई सलाहकार समितियों की भूमिका: पीए अनप्लग्ड का प्रभावशैक्षणिक संस्थानों में डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने के लिए पेंसिल्वेनिया में एक बड़ा नागरिक आंदोलन खड़ा हो चुका है, जिसका नेतृत्व 'पीए अनप्लग्ड' (PA Unplugged) नामक गैर-लाभकारी संगठन कर रहा है। लगभग 5,000 सक्रिय अभिभावकों और शिक्षकों के समर्थन वाले इस संगठन से जुड़े वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर के अभिभावक एलेक्स बर्ड बेकर का कहना है कि प्राथमिक स्कूलों में कंप्यूटर का उपयोग घटाना नीतिगत स्तर पर अपेक्षाकृत सरल कदम था, लेकिन असली चुनौती मिडिल और हाई स्कूल स्तर पर सामने आएगी, जहां शिक्षा का बुनियादी ढांचा ही सॉफ्टवेयर और डिजिटल पोर्टल पर केंद्रित हो चुका है। लगभग 3,700 विद्यार्थियों वाले वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने भविष्य की तकनीकी नीतियों को दिशा देने के लिए एक विशेष 'प्रौद्योगिकी सलाहकार परिषद' का गठन किया है और इसमें शामिल होने के लिए अभिभावकों से आवेदन मांगे हैं। यह परिषद मिडिल और हाई स्कूल (कक्षा 6 से 12) में स्क्रीन उपयोग की व्यावहारिक सीमाओं की समीक्षा करेगी, जबकि लोअर मेरियन स्कूल डिस्ट्रिक्ट में भी अभिभावकों का समूह ऐसी स्वतंत्र तकनीकी निगरानी समितियों के गठन पर जोर दे रहा है ताकि बच्चों के समग्र मानसिक और शारीरिक विकास के बीच एक संतुलित शैक्षणिक वातावरण बहाल किया जा सके।
ईरान : हवाई क्षेत्र में मार गिराया अमेरिका का एमक्यू-1 ड्रोन को
तेहरान, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट के हवाई क्षेत्र में मंगलवार को एक और एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।
होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा का खर्च दूसरे देशों से वसूलेंगे ट्रम्प, वीडियो में बोले- जिन्होंने मदद नहीं की उन्हें अमेरिका को देना होगा पैसा
अमेरिका में बढ़ रही 'मिनी इंडिया' की संख्या, दो मिनट के वीडियो में जानें 5 साल में 75 इलाकों तक पहुंचने का अनुमान; भारतीय परिवारों की कमाई भी ज्यादा
आखिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर जारी अमेरिकी-चीनी रस्साकसी के बीच क्या करे भारत? समझिए विस्तार से
वैश्विक पटल पर अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा देखते ही बनती है। इस बार मुद्दा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई बनी है, वो भी ब्रिक्स 2026 बैठक के तुरंत बाद जिसका अपना महत्व है। चूंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों को एआई ओपन सोर्स उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया स्वरूप कहा कि एआई की दौड़ में अमेरिका चीन से आगे है? तो सवाल उठना लाज़मी है कि कितना आगे? और क्या चीन अगले कुछ वर्षों में इस दूरी को पाट सकता है? सबसे बड़ा सवाल यह कि इस वैश्विक प्रतिद्वंद्विता में भारत को क्या करना चाहिए? इस सभी बिंदुओं को हम आगे एक एक करके स्पष्ट करेंगे। देखा जाए तो एआई सेक्टर में न केवल अमेरिका और चीन के बीच, बल्कि यूरोप और अन्य देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में भारत के सामने चुनौती केवल एआई मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि चिप, कंप्यूटिंग, डेटा, प्रतिभा, पूंजी और बाजार—पूरी एआई वैल्यू चैन में मजबूत होने की है। इसे भी पढ़ें: BRICS में Xi Jinping ने रखा 5-सूत्रीय सहयोग प्रस्ताव, Global South की मजबूती पर दिया जोर जहां तक भारत की “AI आत्मनिर्भरता” का सवाल है तो उसे विदेशी एआई यानी अमेरिका, चीन, यूरोप के एआई पटल को बंद करना नहीं चाहिए, बल्कि इन्हें इतना सक्षम बनना चाहिए कि भारत अपनी जरूरतों के लिए एआई बना सके और दुनिया को भी बेच सके। आपको पता होगा कि अमेरिका के नेतृत्व वाले एआई पैक्स सिलिका संगठन में 34 देश शामिल हैं, जिसमें भारत भी एक है। वहीं, चीनी नेतृत्व वाले वर्ल्ड एआई कोआपरेशन ऑर्गेनाइजेशन में 29 देश शामिल हैं। फिर भी ब्रिक्स देशों को चीन ने जो आकर्षक ऑफर दिया है उससे निकट भविष्य में पूरा खेल बदल सकता है। ऐसा इसलिए कि अमेरिकी एआई कंपनियों ने एआई की प्रगति को 'स्लोडाउन' करने का आह्वान किया है। चूंकि अब अमेरिका के भीतर ही एआई की प्रगति को लेकर विरोधाभास सामने आ रहा है और ट्रंप प्रशासन की तरफ से अमेरिकी कंपनियों को एआई प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में अमेरिकी हितों को प्राथमिकता की बात हो रही है, इसलिए पैक्स सिलिका संगठन के अन्य 33 देशों का दिग्भ्रमित होना स्वाभाविक है। ऐसे में यदि चीन, भारत और यूरोप आपसी समझदारी विकसित करके अमेरिका को मात दे दें तो किसी के लिए भी हैरत की बात नहीं होगी। क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स के मंच से कहा है कि चीन ब्रिक्स के लिए ओपन सोर्स एआई समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा, बड़े भाषा मॉडल के विकास व उपयोग में सहयोग देगा, विशेष प्रशिक्षण आयोजित करेगा, और खुला एआई पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करेगा। खास बात यह कि यह प्रस्ताव उस पृष्ठभूमि में आया है जब चीनी कंपनियां ओपन सोर्स मॉडल पर जोर दे रही हैं, जबकि अमेरिकी दिग्गज कंपनियां अधिक बंद, फ्रंटियर मॉडल पर काम कर रहे हैं। चूंकि भारत इस प्रतिद्वंद्विता को पहचान रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स बैठक में चेतावनी देते हुए साफ कहा था कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स का हथियार बनाना साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इससे भारत की नीति स्पष्ट है। देखा जाए तो दुनिया में एआई आधारित प्रौद्योगिकी को लेकर जो तगड़ी लामबंदी चल रही है, उसमें अमेरिका ने बेहद उच्च गुणवत्ता वाले चिप्स, सेमीकंडक्टर उपकरण, क्लाउड एक्सेस और कुछ फ्रंटियर मॉडल पर निर्यात नियंत्रण लागू करते हुए इन्हें सिर्फ 'भरोसेमंद साझेदारों' के साथ साझा करने की व्यवस्था करने का ऐलान किया है। कहने का तात्पर्य यह कि शेष देशों में एआई के मामले में अमेरिका या चीन में से किसी एक को ही चुनने का दबाव बनाया है और दोनों को चुनने का रास्ता अमेरिका ने लगभग बंद कर दिया है। चूंकि भारत भी पैक्स सिलिका का सदस्य है और ट्रंप ने खाड़ी देशों को भी चिप्स व निवेश के सौदे से जोड़ा है। उन्होंने अपने एआई स्टैक को निर्यात कूटनीति का हिस्सा बनाया है। इसलिए अमेरिका को रणनीतिक जवाब देते हुए चीन ने रेअर अर्थ मिनरल्स के निर्यात को नियंत्रित कर दुनिया को समझा दिया कि वह प्रौद्योगिकी की दुनिया में कितनी अफरातफरी मचा सकता है। आज चीनी गुट में रूस, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और पाकिस्तान समेत 29 देश शामिल हैं। आपको याद दिला दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि जो एआई जीतेगा, वही जीतेगा इस क्षेत्र में जारी वैश्विक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है। हालांकि, एआई अब एकतरफा अमेरिकी वर्चस्व की कहानी नहीं रही, बल्कि चीन जैसे दूसरे ध्रुव से मिल रही कड़ी तकनीकी प्रतिस्पर्धा की मिशाल बन चुकी है। यदि सितंबर 2026 की स्थिति को देखें, तो तकनीकी रूप से अमेरिका का पलड़ा अभी भी चीन से भारी है, लेकिन यह अंतर पहले की तुलना में काफी कम हुआ है और अगले कुछ वर्षों में चीन इस दूरी को पाटकर आगे भी निकल सकता है, बशर्ते कि भारत जैसे मजबूत पड़ोसी का साथ उसे मिल जाए। तकनीकी अध्ययन भी जाहिर करते हैं कि एआई अब एकतरफा अमेरिकी वर्चस्व की कहानी नहीं, बल्कि दो ध्रुवों की कड़ी तकनीकी प्रतिस्पर्धा बन चुकी है। इसलिए आइए जानते हैं कि किस क्षेत्र में कौन (अमेरिका या चीन) आगे? खासकर क्षेत्र, उसमें मिली बढ़त और अद्यतन स्थिति के नजरिए से:- एक, फ्रंटियर एआई मॉडल में अमेरिका बढ़त में है। उसका मॉडल अभी समग्र प्रदर्शन में आगे है। दो, एआई चिप्स/जीपीयू में अमेरिका को बढ़त है। Nvidia का बड़ा लाभ उसे मिला है। तीन, एआई कंप्यूट/आंकड़ा केंद्र में अमेरिका को बढ़त है। विशाल पूंजी, जीपीयू और हाइपरस्केल इंफ्रास्ट्रक्चर में वह आगे है। चार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध पारिस्थितिकी तंत्र में अमेरिका को बढ़त है। वह विश्वविद्यालय, बड़ी तकनीक और उद्यम पूंजी का संयोजन करने में आगे बढ़ा है। पांच, वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र में अमेरिका को बढ़त प्राप्त है। उसे सहयोगी देशों, कंपनियों और क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ मिला है। छह, सेमीकंडक्टर विनिर्माण या अर्धचालक निर्माण में चीन को कुछ क्षेत्रों में बढ़त प्राप्त है। उसने बड़े पैमाने का विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत किया है। सातवां, ओपन सोर्स/कम लागत वाले मॉडल में चीन मजबूत चुनौती बनकर उभरा है। उसके डीपसीक जैसे मॉडल ने लागत-प्रतिस्पर्धा बदली है। आठवां, एआई मॉडल की स्थापना/औद्योगिक उपयोग में चीन की बड़ी ताकत है। उसके पास विशाल विनिर्माण क्षमता और घरेलू बाजार है। यानी कि आठ क्षेत्रों में पांच में अमेरिका और तीन में चीन को बढ़त प्राप्त है। यदि आप ब्रुकिंग्स के अप्रैल 2026 के आकलन पर गौर करेंगे तो उसके अनुसार चीन के शीर्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल अभी अमेरिकी फ्रंटियर मॉडल से कुछ महीने या अधिक पीछे हैं और अमेरिकी मॉडल तार्किक क्षमता, गणित, कुटलेखन (coding) तथा लंबे समय वाले स्वायत्त कार्य या दीर्घकालिक एजेंट-आधारित कार्य में समग्र बढ़त रखते हैं। लेकिन चीन को भी कम आंकना बड़ी गलती होगी। चीन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह AI को पूरे औद्योगिक तंत्र से जोड़ रहा है—मोबाइल, ईवी, रोबोटिक्स, विनिर्माण, निगरानी या चौकसी, समान का प्रबंधन और सरकारी सेवाओं तक काफी मजबूत है। और चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अपने एआई चिप पारिस्थितिकी तंत्र को तेजी से विकसित किया है। हालांकि अभी अमेरिकी Huawei जैसे चीनी विकल्प या अमेरिकी Nvidia की बराबरी के पैमाने पर चीन नहीं हैं और अमेरिकी HBM जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों की कमी चीन के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। एक महत्वपूर्ण संकेत यह भी है कि अमेरिका और चीन मिलकर वैश्विक कंप्यूट, निवेश और एआई मॉडल के लगभग 90 प्रतिशत पर नियंत्रण रखते हैं। सवाल है कि असली अमेरिकी बढ़त कहाँ है? तो जवाब होगा कि अमेरिका के पास एक ऐसा एआई स्टैक (AI stack) है जिसे चीन के लिए पूरी तरह दोहराना कठिन है। उदाहरण स्वरूप Nvidia/एआई चिप्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन, क्लाउड, हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स, OpenAI/ Anthropic/Google आदि उद्यम पूंजी और ग्लोबल डेवलेपर्स के अमेरिकी विकल्प चीन के पास उस पैमाने पर उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि अमेरिका केवल अच्छे AI मॉडल नहीं बना रहा, बल्कि AI की पूरी वैश्विक आधारभूत संरचनात्मक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव रखता है। यह बात दीगर है कि आज अमेरिका स्पष्ट लेकिन घटती हुई बढ़त पर है और अगले 3–5 साल के दरम्यान ही अमेरिका व चीन का मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है। जबकि दीर्घकाल में चीन की विशाल विनिर्माण क्षमता और राज्य-समर्थित निवेश के कारण अमेरिकी बढ़त को स्थायी मानना सुरक्षित नहीं है। इसलिए इसे “अमेरिका बनाम चीन” से ज्यादा अमेरिकी नवोन्मेष, चिप्स और पूंजी बनाम चीनी स्केल, विनिर्माण और राज्य लामबंदी की प्रतिस्पर्धा कहना अधिक सही होगा। जहां तक भारत की बात है तो उसको किसी एक AI ब्लॉक पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय अमेरिका, चीन, यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य साझेदारों के साथ तकनीकी साझेदारी बढ़ानी चाहिए, साथ ही अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए। वहीं, AI को रोजगार-विरोधी नहीं, उत्पादकता क्रांति की मिशाल के तौर पर विकसित करना चाहिए। यह ठीक है कि AI से कुछ नौकरियाँ खत्म होंगी, लेकिन नई नौकरियाँ भी बनेंगी। इसलिए स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय और कार्यबल समूह तक एआई साक्षरता और पुनः कौशल विकास या नया कौशल सीखना को बड़े स्तर पर लागू करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह किन भारत को केवल “AI का उपभोक्ता” बनने के बजाय “AI का निर्माता और निर्यातक” बनना होगा। इसे एक रणनीतिक सूत्र में ऐसे समझिए: भारत चिप, कंप्यूट, डेटा, प्रतिभा, स्वदेशी मॉडल, स्टार्टअप, सुरक्षित रेगुलेशन और वैश्विक सहयोग को बढ़ाकर AI महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। ऐसा इसलिए कि भारत की विशेष ताकत उसके पास विशाल डिजिटल बाजार, यूपीआई जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, युवा तकनीकी प्रतिभा और दुनिया का बड़ा बहुभाषी उपभोक्ता आधार है। यदि इन ताकतों को कंप्यूट और गहन तकनीकी अनुसंधान के साथ जोड़ा जाए, तो भारत अमेरिका-चीन की सीधी नकल किए बिना अपना अलग AI मॉडल खड़ा कर सकता है। इस प्रकार भारत तीसरा AI शक्ति-केंद्र बन सकता है बशर्ते कि वह केवल AI का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि AI की पूरी वैल्यू चैन का महत्वपूर्ण निर्माता बन जाए। इसके लिए भारत को अमेरिका और चीन से अलग रास्ता अपनाना होगा, क्योंकि भारत की ताकत कम लागत, विशाल बहुभाषी बाजार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और इंजीनियरिंग प्रतिभा है। जहां तक भारत की सबसे बड़ी संभावित ताकत की बात है तो अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि।अमेरिका के पास नवोन्मेष और पूंजी है, चीन के पास स्केल और विनिर्माण है, जानकी भारत अपनी प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बहुभाषी आंकड़ा, न्यूनतम लागत वाला नवोन्मेष और बृहत बाजार को जोड़कर अपना मॉडल बना सकता है। इसलिए भारत, अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक संतुलन साधते हुए खुद को किसी एक कैंप का तकनीकी उपग्रह नहीं बनना चाहिए, बल्कि अमेरिका से एडवांस चिप्स/अनुसंधान, जापान-कॉरिया से सेमी कंडक्टर सहयोग, यूरोप से जिम्मेदार एआई मानक और अन्य देशों से डेटासेट्स/मार्केट्स के मद्देनजर सबके साथ साझेदारी करनी चाहिए। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
जमुई की लक्ष्मी भार्गव ने मॉडलिंग की दुनिया में एक और उपलब्धि हासिल की है। जिला मुख्यालय के हरनाहा निवासी उमाकांत सिंह और विभा देवी की बेटी लक्ष्मी ने बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए मिस रीना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 का खिताब अपने नाम किया है। उनकी इस जीत पर बिहार सरकार की उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने पत्र भेजकर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। यह प्रतियोगिता गुजरात के अहमदाबाद स्थित ईकेए एरिना में हुई थी। ग्रैंड फिनाले में देश के कई राज्यों से आई प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लक्ष्मी ने अपने आत्मविश्वास और प्रतिभा से निर्णायकों को प्रभावित किया और विजेता बनीं। खिताब जीतने के साथ ही अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। लक्ष्मी साल 2027 में बोलीविया जाएंगी, जहां वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। मेहनत के बल पर बनाई पहचान मंत्री श्रेयसी सिंह ने अपने बधाई संदेश में कहा कि लक्ष्मी ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी सफलता जमुई जिले के साथ-साथ पूरे बिहार और देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि और महिला के तौर पर उन्हें लक्ष्मी की सफलता पर बहुत खुशी और गर्व है। उनकी यह उपलब्धि बेटियों की प्रतिभा और आत्मविश्वास को दिखाती है। श्रेयसी सिंह ने लक्ष्मी के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि वह आने वाले समय में सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल करेंगी और देश, समाज तथा अपने क्षेत्र का नाम रोशन करती रहेंगी। खिताब जीतने के बाद लक्ष्मी ने कहा कि यह जीत उनके लिए बहुत खास है। इस सफर में उन्हें परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों का लगातार साथ मिला। उन्होंने बताया कि अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की संस्कृति, आत्मविश्वास और मजबूती को दुनिया के सामने लाना है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीता था बेस्ट स्माइल अवार्ड लक्ष्मी का मॉडलिंग का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। सामाजिक सोच और आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी। उन्होंने साल 2021 में पटना की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता था। इसके बाद फरवरी 2022 में उन्होंने मिस बेतिया का खिताब भी अपने नाम किया। इसी वर्ष वह मिस टीन इंडिया सुपरमॉडल बनीं। वर्ष 2025 में मिस फेस ऑफ इंडिया का खिताब हासिल किया और मिस साउथ एशिया यूनिवर्स में सेकंड रनर अप रहीं।अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी है। उनकी सफलता से जमुई में खुशी का माहौल है।
अमेरिकी टैरिफ को लेकर ब्राजील और यूएस के बीच होगी बातचीत की तैयारी
रियो डी जेनेरो, अमेरिकी टैरिफ को लेकर ब्राजील और अमेरिका के बीच जल्द ही बातचीत होने की संभावना है। ब्राजील के अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक सितंबर के आखिर में हो सकती है।
मोहसिन रेजाई : अमेरिका के साथ बातचीत संभव नहीं
तेहरान, ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत तब तक संभव नहीं है जब तक कि ईरान की शर्तें पूरी नहीं हो जाती।
अमेरिका में पंजाब के एक ट्रक ड्राइवर पर कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणी के बाद चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है।
पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने आज गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी करमवीर सिंह को दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया है। करमवीर सिंह को कनाडा से डिपोर्ट किए जाने के बाद भारत लाया गया था। करमवीर लॉरेंस से जुड़े नेटवर्क के लिए काम करता था। पंजाब पुलिस के अनुसार, करमवीर सिंह ने अमेरिका में लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था। यानी उसके रहने, छिपने और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं में मदद की थी। इसी वजह से पंजाब पुलिस की जांच में उसका नाम सामने आया और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। करमवीर सिंह के खिलाफ SAS नगर के स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज है। इस मामले में IPC, आर्म्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। करमवीर सिंह पर पहले से दर्ज हैं ये मामले… गैंगस्टर नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी पंजाब पुलिस ने कहा है कि ट्रांसनेशनल यानी विदेशों से संचालित हो रहे गैंगस्टर नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। विदेश में छिपे या वहां से आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने वाले वांछित आरोपियों को कानून के दायरे में लाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई की जा रही है।
अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
एआई पर अमेरिका-चीन आमने-सामने, ब्रिक्स में शी का ओपन सोर्स दांव; भारत ने दी संतुलित नीति की झलक
13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शी चिनफिंग ने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों के लिए ओपन-सोर्स एआई समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। उन्होंने बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) के विकास और इस्तेमाल में सहयोग, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और व्यापक एआई इकोसिस्टम तैयार करने की पेशकश की।
घटना दो अप्रैल की बताई गई है। अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को इसाफहान के आसपास ईरानी मिसाइल से निशाना बनाए जाने के बाद विमान में मौजूद पायलट ‘अल्फा’ और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर ‘ब्रावो’ को विमान छोड़ना पड़ा।
पंजाब के ड्राइवर पर अमेरिका में नस्लीय हमला हुआ है। हमलवार ने आराम कर रहे ड्राइवर पर सोमवार सुबह पहले नस्लीय टिप्पणी की। उसके बाद चाकू से हमला कर दिया। पंजाबी कम्युटी के व्यक्ति पवित्र सिंह ने बताया कि ड्राइवर की पहचान गुरविंदर सिंह के रूप में हुई है। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सूचना दे दी है। पवित्र सिंह ने कहा कि ड्राइवर पंजाब में कहां का रहने वाला है, यह जानकारी नहीं है। अभी उसकी हालत गंभीर है और बोलने में असमर्थ है। वह डब्ल्यूजे ट्रांसपोर्ट में काम करता था। सुबह रेस्ट लेन पर खड़े अपने ट्रक से करीब 100 मीटर की दूरी पर वह खून से लथपथ मिला। इसके बाद हाईवे पेट्रोलिंग पुलिस ने उसे इलाज के लिए भर्ती करवाया। हमले के बाद से पंजाबी समुदाय के लोगों को में गुस्सा है। लोगों ने कहा कि पंजाबियों पर लगातार हेट स्पीच और हमले बढ़ रहे हैं। बावजूद इसके यहां का स्थानीय मीडिया तक इसे कवरेज नहीं देता। उनकी आवाज को दबाया जाता है, ताकि दुनिया को पता न चल सके। जानें हमले के बाद सामने आए वीडियो में क्या दिखा अमेरिकी मीडिया में खामोशी, समुदाय ने उठाया मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि इस गंभीर घटना को अभी तक किसी प्रमुख अमेरिकी न्यूज चैनल या अखबार ने कवर नहीं किया है। स्थानीय पंजाबी समुदाय ने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना को उजागर करने और दुनिया भर में साझा करने की अपील की है। उनका कहना है कि अमेरिका में उनकी कम्युनिटी के साथ हो रहे भेदभाव और नफरत की घटनाओं को मीडिया में जगह नहीं मिल रही है। डेढ़ लाख सिख ड्राइवर, बढ़ रहा हेट क्राइम यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में सिख और पंजाबी ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ नफरत की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने एक विवादास्पद पोस्ट में मिस्टर सिंह का जिक्र करते हुए सिख ड्राइवरों को निशाना बनाया था, जिसकी कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यू समेत कई नेताओं ने कड़ी निंदा की थी। उत्तरी अमेरिकी पंजाबी ट्रकिंग एसोसिएशन के अनुसार, अमेरिका में करीब डेढ़ लाख सिख ट्रक ड्राइवर हैं, जो लगातार नस्लीय प्रोफाइलिंग का शिकार हो रहे हैं। FBI की हेट क्राइम वेबसाइट पर दर्ज कराएं शिकायत विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट स्थानीय पुलिस और FBI की हेट क्राइम वेबसाइट पर दर्ज करानी चाहिए। सिख कोएलिशन जैसी संस्थाएं भी पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रही हैं। समुदाय के लोग अधिकारियों से इस मामले की गंभीरता से जांच करने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
तरनतारन में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने रविवार को विभिन्न मांगों को लेकर डीसी कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता रद्द करने, लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस लेने और किसानों-मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग की। इसके साथ ही काश्तकार किसानों, मजदूरों, आबादकारों और मजारेदारों को जमीन का मालिकाना हक देने की मांग भी उठाई। धरने को जिला प्रधान गुरबाज सिंह सिद्धवां, भूपिंदर सिंह ठठियां, हरदीप सिंह जोड़ां, दलेर सिंह राजोके, सुखबीर सिंह गग्गू भूआं, जत्थेदार सुलखण सिंह मंडाला और जत्थेदार संतोष सिंह पट्टी समेत कई किसान नेताओं ने संबोधित किया। किसान नेताओं ने कहा कि अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते से पहले से संकट झेल रहे कृषि क्षेत्र पर और दबाव बढ़ेगा। किसान नेता बोले- पराली से जुड़े केस वापस ले सरकार किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि इससे उद्योग और खुदरा क्षेत्र भी प्रभावित होंगे, जिससे बेरोजगारी और महंगाई बढ़ सकती है। किसानों ने बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज क्षेत्र में कॉरपोरेट दखल का भी विरोध किया। किसानों ने बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने और इसके लिए अलग बजट का प्रावधान करने की मांग की। उन्होंने मनरेगा कानून दोबारा लागू कर 200 दिन के रोजगार की गारंटी देने, निजीकरण की नीतियां वापस लेने और सरकारी संस्थानों में स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग भी रखी। किसान नेताओं ने आत्महत्या कर चुके किसानों और मजदूरों के परिवारों को 10 लाख रुपए मुआवजा देने, मजदूर विरोधी श्रम कोड रद्द करने और किसान आंदोलन व पराली से जुड़े पुलिस केस वापस लेने की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) उगराहां के बैनर तले मानसा में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 16वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान किसान नेताओं ने सरकार को कड़े शब्दों में नसीहत दी कि वह पानी के संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना बंद करे और किसानों की जायज समस्याओं का तुरंत समाधान करे। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं इंद्रजीत सिंह झब्बर, राम सिंह भैणी बाघा, महिंदर सिंह रोमाणा और जगसीर सिंह जवाहरके ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि किसान पिछले काफी समय से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है और उनकी सुध नहीं ले रही है। किसान नेताओं ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी 13 सूत्रीय मांगों पर जल्द ही सकारात्मक ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रमुख मांगें और आपत्तियां: भारत-अमेरिका डील का विरोध: किसानों का कहना है कि इस डील से देश का किसान, मजदूर, व्यापारी और हर अन्य वर्ग गंभीर रूप से प्रभावित होगा, इसलिए केंद्र सरकार को इस पर तुरंत पुनर्विचार कर इसे रद्द करना चाहिए। ड्रोन सर्वे और लैंड पूलिंग: पंजाब में खेतों का ड्रोन के जरिए करवाया जा रहा सर्वे और लाई जाने वाली लैंड पूलिंग नीति को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। कर्ज माफी: पंजाब के तमाम किसानों और मजदूरों के पूर्ण कर्ज माफ किए जाएं। नहरी पानी की उपलब्धता: किसानों के खेतों तक पर्याप्त नहरी पानी पहुंचाने के लिए सरकार प्राथमिकता के आधार पर ठोस कदम उठाए। पराली के मुकदमे रद्द हों: धान की पराली जलाने के मामलों में किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी पुलिस केस वापस लिए जाएं।
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
BRICS सम्मेलन के चलते आगरा में नहीं मिली जगह तो लखनऊ में उतरा अमेरिकी प्लेन, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
ब्रिक्स सम्मेलन के बीच आगरा में पार्किंग की अनुपलब्धता के कारण एक अमेरिकी चार्टर विमान को लखनऊ में आपात लैंडिंग करनी पड़ी। विमान में सवार 56 अमेरिकी यात्रियों को सड़क मार्ग से आगरा भेजा गया।
अमेरिका में छाएंगे यूपी के प्रोफेसर डॉ. कमलेश दुबे, पढ़ाएंगे AI और फॉरेंसिक तकनीक
उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फारेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार दुबे को 2026-27 के लिए अमेरिका के प्रतिष्ठित 'फुलब्राइट स्कालर-इन-रेजिडेंस' कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है।
एक पिता ने बेटे को खिलाड़ी बनाने का सपना देखा। किसान परिवार से आने वाले मंजीत सिंह ने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए अपना कारोबार तक छोड़ दिया। सीमित संसाधनों के बीच बेटे के प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और यात्राओं का खर्च उठाया। मेहनत रंग लाई तो सिद्धार्थ चौधरी ने शॉटपुट में देश-प्रदेश का नाम रोशन किया। अब वही सिद्धार्थ हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में अपने खेल और पढ़ाई का नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। मगर इस कामयाबी के बीच एक टीस भी है, राजस्थान में चार साल से बकाया पुरस्कार राशि का इंतजार आज भी खत्म नहीं हुआ है। उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त : 2023 में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता। 2024 में साउथ एशियन जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण और एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में कांस्य पदक। 2022 में एशियन यूथ चैंपियनशिप में कांस्य। राष्ट्रीय स्तर पर वह जूनियर चैंपियनशिप, फेडरेशन कप और खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण जीत चुके हैं। यहां खिलाड़ी को पढ़ाई और खेल में संतुलन बनाना पड़ता है और विश्वविद्यालय ‘स्टूडेंट एथलीट’ तैयार करने पर जोर देता है। मेरा सपना अब भी साफ है, विदेश में मिली सुविधाओं का इस्तेमाल कर भारत के लिए बेहतर प्रदर्शन करना।’ -सिद्धार्थ चौधरी, अंतरराष्ट्रीय शॉटपुट खिलाड़ी जूनियर लेवल पर कई रिकॉर्ड हैं सिद्धार्थ के नाम राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय शॉटपुटर सिद्धार्थ चौधरी ने जूनियर स्तर पर एशिया में स्वर्ण सहित छह अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। उनके नाम अंडर-18 इंडिया रिकॉर्ड, जूनियर साउथ एशियन रिकॉर्ड और यूथ नेशनल रिकॉर्ड भी हैं। सिद्धार्थ के पिता एवं कोच मंजीत सिंह का दावा है कि राज्य की विभिन्न उपलब्धियों के लिए घोषित करीब 15-20 लाख रुपए की पुरस्कार राशि अभी बकाया है। परिवार के अनुसार, इस संबंध में कई बार खेल विभाग और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन पुरस्कार राशि नहीं मिल सकी। स्पोर्ट्स मीडिया कोर्स भी करेंगे : अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना स्थित हाई प्वाइंट यूनिवर्सिटी ने सिद्धार्थ की प्रतिभा को पहचान दी। विवि ने चार वर्ष की उच्च शिक्षा और खेल के लिए करीब 6 करोड़ रु. की स्कॉलरशिप दी है। सिद्धार्थ अंतरराष्ट्रीय लेवल के कोचों के साथ तैयारियां शुरू कर दी हैं।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में करनाल के युवक रोहित (22) ने भारतीय मूल की युवती शालिनी ठाकुर (38) की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को भी गोली मारकर सुसाइड कर लिया। शालिनी की मां का आरोप है कि रोहित उनकी बेटी से शादी करना चाहता था, लेकिन दोनों की उम्र में 16 साल का अंतर था। इसी वजह से परिवार ने शादी से इनकार कर दिया था। हालांकि, रोहित के परिवार ने शालिनी पर अलग आरोप लगाए हैं। रोहित के चाचा सत्यवान का कहना है कि दोनों को जिस बंदूक से गोली लगी, वह शालिनी ने ही करीब 6-7 महीने पहले रोहित को गिफ्ट की थी। शालिनी रोहित से अब तक 30 से 35 लाख रुपए ले चुकी थी और उसके पास रोहित का एक वीडियो था, जिसके जरिए वह उसे ब्लैकमेल कर रही थी। शालिनी ने ही रोहित को उकसाया था। अब जानिए रोहित के चाचा सत्यवान ने क्या आरोप लगाए… युवती के हिमाचल से होने का दावा सत्यवान ने बताया- शालिनी भारत में कहां की रहने वाली है, यह हमें नहीं पता। मेरा अंदाजा है कि वह हिमाचल से है। उसकी मां है, लेकिन पिता नहीं हैं। मां-बेटी अमेरिका में रहती थीं। शालिनी का काम लड़कों को अपने जाल में फंसाना और उनसे पैसे ऐंठना था। उसने मतलौडा (पानीपत) के रहने वाले एक युवक को भी फंसाया था। रोहित के साथ भी ऐसा ही हुआ। दिवाली पर आने की बात कही थी सत्यवान ने बताया कि अगर वह हमें घटना के बारे में बता देता तो हम उसका हल निकालते और उसे वापस भी बुला लेते। उसने कहा था कि वह दिवाली पर आएगा। यह युवती ब्लैकमेल करने वाली प्रवृत्ति की है। उसकी उम्र 38 साल है, जबकि रोहित 22 साल का था। उस शालिनी ने अब तक शादी नहीं की थी। रोहित सारे पैसे शालिनी को दे रहा था सत्यवान ने बताया कि रोहित की एक साल की कमाई वहीं रह गई थी। 35 से 40 लाख रुपए तो अपने आप बन गए। वह सारे पैसे उसे ही दे रहा था। इतना ही नहीं, रोहित ने चार बार गाड़ी बदली थी। एक बार गाड़ी के लिए हमने भी पांच लाख रुपए दिए थे। रोहित को तो वह शालिनी खा गई। शालिनी के कुत्तों को रोहित संभालता था सत्यवान ने यह भी आरोप लगाया कि अपार्टमेंट की दूसरी चाबी भी शालिनी ने ही हमारे रोहित को दी थी, ताकि वह किसी भी समय वहां आ-जा सके। इसके अलावा, उस शालिनी ने दो कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें खाना डालने के लिए भी वह रोहित से कहती थी। अब जानिए सुरक्षा एजेंसी ने घटना को लेकर क्या बताया… एक साल से शालिनी का पीछा करने का आरोप शालिनी की मां सुदेश कुमारी के अनुसार, शालिनी आर्डन आर्केड इलाके के एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थीं। उनके पति की दो साल पहले मौत हो गई थी। शालिनी उनकी इकलौती संतान थी। रोहित उसके काम की जगह पर डिलीवरी लेकर आता था। वह शालिनी से शादी करना चाहता था, लेकिन उम्र के अंतर के कारण उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद रोहित नाराज हो गया और पीछा करना नहीं छोड़ा। रोहित के पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती रोहित करनाल के जुंडला का रहने वाला था। उसके पिता राजेश जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती हैं। रोहित भी उनकी इकलौती संतान थी। रोहित 2023 में एरिजोना के रास्ते (डंकी रूट) अमेरिका गया था। अमेरिकी बॉर्डर पुलिस ने उसे पकड़ा था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया। वह डोरडैश डिलीवरी का काम करता था।
Panchkula News: अमेरिका भेजने के नाम पर 20 लाख लेने का आरोप, वीजा कंसल्टेंट रेनू शर्मा को जमानत
अमेरिका भेजने के नाम पर 20 लाख लेने का आरोप, वीजा कंसल्टेंट रेनू शर्मा को जमानत
Karnal News: 40 लाख में इकलौते बेटे को भेजा था अमेरिका भेजा, जन्मदिन से पहले घर पहुंची मौत की खबर
40 लाख में इकलौते बेटे को भेजा था अमेरिका भेजा, जन्मदिन से पहले घर पहुंची मौत की खबर
अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक रेस्टोरेंट के बाहर भारतीय मूल की युवती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोप हरियाणा के करनाल के रहने वाले 22 साल के युवक पर लगा। घटना के बाद युवक अपनी गाड़ी से फरार हो गया। पुलिस पीछा करते हुए उस तक पहुंची तो युवक भी गाड़ी में मृत मिला। उसने खुद को गोली मारी हुई थी। युवती की पहचान शालिनी ठाकुर (38) के तौर पर हुई है। अभी यह नहीं पता चल पाया है कि वह कहां की रहने वाली है। करनाल का रोहित 2023 में एरिजोना के रास्ते (डंकी रूट) अमेरिका गया था। अमेरिकी बॉर्डर पुलिस ने उसे पकड़ा था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया। मर्डर-सुसाइड की घटना 8 सितंबर की है। आरोप है कि रोहित शालिनी पर शादी करने का दबाव बना रहा था। हालांकि, शालिनी के परिवार ने उम्र में 16 साल का अंतर होने की वजह से इनकार कर दिया था। सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… एक साल से शालिनी का पीछा करने का आरोप शालिनी की मां सुदेश कुमारी के अनुसार, शालिनी आर्डन आर्केड इलाके के एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थीं। उनके पति की दो साल पहले मौत हो गई थी। शालिनी उनकी इकलौती संतान थी। रोहित उसके काम की जगह पर डिलीवरी लेकर आता था। वह शालिनी से शादी करना चाहता था, लेकिन उम्र के अंतर के कारण उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद रोहित नाराज हो गया और पीछा करना नहीं छोड़ा। रोहित के पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती रोहित करनाल के जुंडला का रहने वाला था। उसके पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती हैं। रोहित भी उनकी इकलौती संतान थी। वह 2023 में डंकी रूट से अमेरिका गया था। वह डोरडैश डिलीवरी का काम करता था।
फरीदकोट के गुरु तेग बहादुर नगर निवासी लाल चंद को साइबर ठगों ने अपना शिकार बनाया। 6 सितंबर को लाल चंद के व्हाट्सऐप पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को अमेरिका में रहने वाला उनका भांजा पवन कुमार बताया और कहा कि 22 सितंबर को भारत आ रहा है। आरोपी ने कहा कि वह अपने माता-पिता को सरप्राइज देना चाहता है, इसलिए इस बात की जानकारी उन्हें न दी जाए। ठग ने लाल चंद को पैसे भेजने का झांसा देकर उनके एचडीएफसी बैंक खाते की डिटेल मांगी। बातों में आकर लाल चंद ने अपने बैंक चेक की फोटो व्हाट्सऐप पर भेज दी। इसके बाद आरोपी ने 18,00,550 रुपये खाते में ट्रांसफर करने की एक फर्जी रसीद लाल चंद को भेजी। पास्पोर्ट अटकने का बहाना बनाकर ऐंठे 14.10 लाख रुपये रसीद भेजने के बाद आरोपी ने फोन कर कहा कि उसका पासपोर्ट अटक गया है और उसे तुरंत पैसों की जरूरत है। उसने दावा किया कि उसके द्वारा भेजे गए पैसे जल्द ही खाते में आ जाएंगे। भांजे की परेशानी समझकर लाल चंद ने आरोपी के बताए खाते में 14,10,00,0 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपी ने जब दोबारा 1 लाख रुपये की मांग की, तो लाल चंद को शक हुआ। असली भांजे से बात करने पर खुली पोल संदेह होने पर लाल चंद ने अमेरिका में रह रहे अपने असली भांजे पवन कुमार के नंबर पर संपर्क किया। भांजे ने बताया कि उसने न तो कोई फोन किया है और न ही पैसे मांगे हैं। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने दर्ज किया केस, खाते खंगाले जा रहे थाना साइबर क्राइम के एसएचओ इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह ने बताया कि लाल चंद की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट (IT Act) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उन बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी की पहचान के प्रयास जारी हैं और जल्द ही पीड़ित के पैसे रिकवर कराने की कोशिश की जाएगी।
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे औद्योगिक गलियारे के पहले चरण में यूपीडा द्वारा 24 बड़े भूखंड आवंटित किए जाएंगे, जिनमें से 5 का आवंटन हो चुका है। अमेरिकी कंपनी बॉल कॉर्पोरेशन 20 हेक्टेयर भूमि पर 2913 करोड़ रुपये का निवेश कर एल्युमीनियम केन बनाएगी, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है।
एपल के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की बुकिंग भारत सहित दुनियाभर में शुरू हो गई है। भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1.65 लाख रुपए और आईफोन 18 प्रो मैक्स की कीमत 1.80 लाख रुपए रखी गई है। कंपनी ने इस बार अपने प्रो मॉडल लाइनअप में नया A20 Pro चिपसेट, एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम और मेन कैमरे में पहली बार DSLR कैमरे वाली वेरिएबल अपर्चर टेक्नोलॉजी दी है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारत में इन दोनों मॉडल्स की कीमतें काफी ज्यादा हैं। आईफोन्स 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स के स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स ग्राफिक्स में देखें… एपल Siri AI में 6 बड़े अपडेट्स स्क्रीन देखकर काम करना: स्क्रीन पर क्या दिख रहा है, सिरी उसे समझकर सीधे वही टास्क पूरा कर देती है। निजी डेटा से सटीक जवाब: ईमेल, मैसेज या कैलेंडर से जानकारी निकालकर आपकी फ्लाइट, मीटिंग या प्लान बता देती है। एप्स के अंदर काम: सिर्फ एप खोलती ही नहीं, बल्कि फोटो एडिट करके किसी को भेजने जैसा अंदर का काम भी कर देती है। इंसानों जैसी बात: अटक-अटक कर बोलने या अधूरा वाक्य बोलने पर भी बात आसानी से समझ लेती है। बिना बोले टाइपिंग: स्क्रीन के नीचे डबल टैप करके अब सिरी को लिखकर भी कमांड दे सकते हैं। चैटजीपीटी सपोर्ट: मुश्किल सवालों के जवाब, टेक्स्ट या रेसिपी के लिए सीधे 'चैटजीपीटी' से मदद ले लेती है। एपल के नए वियरेबल डिवाइसेस
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दिल्ली के भारत मंडपम में हुए 18वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम दिखेंगे। मंत्री ने इसे बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका से जोड़ा और अमेरिका पर भी निशाना साधा। जयवीर सिंह ने कहा कि अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता। इससे भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी प्रभावित होती हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात में आर्थिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है और भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने दिल्ली में हुए इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत बताया। मंत्री ने सम्मेलन को लेकर एक तीखा बयान भी दिया। उन्होंने कहा, यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अमेरिका का मनोबल तोड़ने का काम है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और वैश्विक आर्थिक शक्ति-संतुलन पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। जनसुनवाई के दौरान मंत्री से उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों के बारे में भी पूछा गया। इस पर जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में चुनाव तय समय पर होंगे। महिलाओं को एक लाख रुपये देने की योजना पर विपक्ष के सवालों पर उन्होंने सरकार का पक्ष रखा। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी व्यवस्था पहले से कर रखी है। भाजपा जनता के लिए समर्पित सरकार है। विपक्ष द्वारा सरकार की योजनाओं को 'रेवड़ी' बताए जाने पर जयवीर सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले यह बताए कि अगर वह ऐसी घोषणाएं करेगा तो उनके लिए पैसे की व्यवस्था कहां से करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की योजनाओं के पीछे वित्तीय व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है। गोंडा में हुई घटना को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। चुनावी दौर में सभी राजनीतिक दल और नेता जनता के हितैषी होने का दावा करेंगे, लेकिन जनता के हित में कौन कितना खरा उतरता है, इसका फैसला आखिरकार जनता ही करेगी।
क्या अमेरिका, रूस और चीन के साथ मिलकर जी-3 बना सकता है? समझिए इसके पीछे की बदलती कूटनीति!
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीतिक स्वायत्तता वाली कूटनीति से जहां अमेरिका, चीन, रूस तीनों बड़े देश घबराए हुए हैं, वहीं फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश इसमें ही अपना कूटनीतिक भविष्य देख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का भी मानना है कि यदि भारत अपने मिशन में कामयाब हो जाता है तो इससे न केवल बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि अमेरिका, रूस और चीन के हथियारों के सौदागरों के हाथ-पांव भी ठिठक जाएंगे। चूंकि समसामयिक वैश्विक परिदृश्य में अरब-खाड़ी देशों में अमेरिका-यूरोप की इज्जत दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि रूस-चीन का शह ईरान को हासिल है। इससे पहले यूक्रेन में रूस-चीन-उत्तर कोरिया की सैन्य साख दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि अमेरिका-यूरोप मिलकर यूक्रेन को भड़काए हुए हैं। वैसे तो चीन को ताइवान में और भारत को पीओके में उलझाने की साजिश पश्चिमी-पूर्वी देशों के इशारे पर रचाई गई, लेकिन भारत और चीन के सूझबूझ वाले नेतृत्व ने समय रहते ही स्थिति को संभाल लिया। इससे हथियारों के वैश्विक सौदागरों और ड्रग्स सप्लायर्स का भारत-चीन से खफा होना स्वाभाविक है। इससे होने वाले घाटे की भरपाई के लिए ही तो अमेरिका ने दोनों देशों के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़ दिया। # मोदी डॉक्ट्रिन के चक्रव्यूह में हर ओर से घिरा महसूस करने लगा है अमेरिका और जब इसमें भी अमेरिका विफल हो गया और मोदी डॉक्ट्रिन के चक्रव्यूह में हर ओर से घिरा महसूस करने लगा तब उसने ग्रुप-तीन (G-3) का नया पैंतरा बदला। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के व्हाइट हाउस के जी तीन प्लान पर रूस के क्रेमलिन ने भी रजामंदी जताई है और बताया है कि पुतिन और जिनपिंग ने नवंबर में शेनजेन में होने वाले APEC सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ G3 बैठक करने पर चर्चा की है। अगर अमेरिका, रूस और चीन एक साथ बातचीत की मेज पर बैठ जाते हैं और किसी सहमति तक पहुंचते हैं, तो ये दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने उस ‘याल्टा सिस्टम’ का अंत होगा, जिसने यूएन सुरक्षा परिषद को बनाया था। इसे भी पढ़ें: ईरान, सऊदी अरब और UAE के मतभेदों के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, BRICS में साझा बयान पर बनी आम सहमति कहने का तात्पर्य यह कि अब अमेरिका, रूस और चीन परस्पर मिलकर दुनिया के अन्य मजबूत देशों भारत, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील आदि को अपने अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे पर चलाएंगे और इनसे मुनाफा कमाएंगे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की जो वैश्विक चाल चली है, उसमें भारत विरोधी महारथियों का उलझना और छटपटाना तय है। वहीं, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों को ये त्रिपक्षीय पहल नागवार गुजरी तो फिर दुनियावी कश्मकश और दिलचस्प हो जाएगी। # वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों और कूटनीतिक विरोध के हल की कुंजी है अमेरिका, रूस और चीन के ही पास यूं तो वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों और कूटनीतिक विरोध के कारण अमेरिका, रूस और चीन का मिलकर 'जी-3' (G-3) बनाना वर्तमान परिदृश्य में अत्यधिक असंभावित चिंतन है। लेकिन जब मुख्य षड्यंत्रकारी राष्ट्र अमेरिका और उसके मनमौजी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ ही रूस-चीन युगलबंदी के समक्ष घुटने टेकते हुए ऐसा आकर्षक प्रस्ताव दे रहे हैं तो रूस-चीन दोनों के लिए भी यह आकर्षक डील होगी। चूंकि अमेरिका ने ही भारत-रूस की दोस्ती के मुकाबले चीन की तरक्की में योगदान दिया है तो चीन के लिए भी तो यह और अधिक फायदे का सौदा होगा। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका-रूस में तनावपूर्ण संबंध हैं, और अमेरिका ने रूस पर कई प्रतिबंध भी लगा रखे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों के कारण अमेरिका और रूस के संबंध बहुत खराब हैं, ऐसे में बात कहां तक बढ़ेगी नवंबर 2006 तक इंतजार करना होगा। जहां तक अमेरिका और चीन की बात है तो दोनों देशों में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है। अमेरिका और चीन आर्थिक और सैन्य मामलों में दुनिया के मुख्य प्रतिद्वंद्वी देश हैं। खास बात यह कि अमेरिका, रूस और चीन में विचारधारा का अंतर है। अमेरिका एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन करता है, जबकि रूस और चीन की शासन प्रणालियां उससे अलग हैं। ऐसे में जी-तीन की छतरी के नीचे आने के लिए तीनों देशों को भारी कीमत चुकानी होंगी और किसी सर्वमान्य निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले कई तरह के कूटनीतिक पापड़ बेलने पड़ेंगे। # दुनिया के लगभग सभी प्रगतिशील देश समझ चुके हैं अमेरिकी चतुराई देखा जाए तो पहले अमेरिका और सोवियत संघ की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में, फिर अमेरिका और चीन की अंतर्राष्ट्रीय तनातनी में और रूस के साथ चीन के खड़े होने और भारत द्वारा भी रूस की इज्जत करने से अमेरिका बेचैन है। वहीं यूरोप भी अमेरिका की चतुराई समझ चुका है। इससे जी-7 (G-7) और नाटो जैसे उसके पुराने हथियार अब एशियाई- यूरोपीय मामलों में भोथरे साबित हो चुके है। फिर उसने जी-20 (G-20) की चाल चली लेकिन यहां भी भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद कर अमेरिकी अरमानों पर पानी फेर दिया। इधर, भारत की रूसी सहभागिता, चीन की मौजूदगी, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान आदि की मौजूदगी वाले एससीओ (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) में बढ़ती दिलचस्पी से अमेरिकी चौधराहट को एक नया खतरा उत्पन्न हो गया है। वैसे तो अमेरिकी डीप स्टेट ने भारत-चीन संबंधों को बिगाड़ने की पूरी चाल चली, लेकिन परिपक्व भारतीय कूटनीति के सामने अकसर वह लाचार दिखा। वहीं, भारत के पड़ोसी देशों को भड़काकर भी वह अपना उल्लू सीधा नहीं कर सका। यही वजह है कि भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता से पहले रूस-चीन के लिए उसने जी-तीन का नया चारा डाल दिया। # रूस के राष्ट्रपति पुतिन के पास भी अमेरिका से हाथ मिलाने की हैं कई बड़ी वजहें ऐसे में जहां रूस के राष्ट्रपति पुतिन के पास भी अमेरिका से हाथ मिलाने की अपनी बड़ी वजहें हैं। वास्तव में पुतिन की मजबूरी है कि करीब साढ़े चार साल से चल रहे यूक्रेन युद्ध में वो उलझे हुए हैं, जिसने रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और मोर्चे पर भी कोई साफ जीत नजर नहीं आ रही है। वहीं दूसरी तरफ, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग काफी मजबूत स्थिति में हैं। तभी तो वो बिश्केक, काहिरा और दिल्ली का दौरा खत्म करने के बाद सीधे व्हाइट हाउस, अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि शी जिनपिंग की स्थिति मजबूत है और वह हर मामले में सधी हुई चाल चलते हैं। इसलिए ट्रंप उनके मुरीद हैं। मुंह में राम, बगल में छुरी वाले अंदाज में। # भारत अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास दर की रफ्तार बढ़ाकर G-3 के वैश्विक कुचक्रों का कर सकता है मुकाबला हालांकि, भारत अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास दर की रफ्तार बढ़ाकर खुद को इतना मजबूत बना सकता है कि G-3 का कोई भी देश भारत को नजरअंदाज करने की स्थिति में न रहे। यानी भारत अपनी आर्थिक ताकत में इजाफा करके स्थिति को कभी भी अपने पक्ष में कर लेगा। वहीं, जिस तरह रूस और चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल करते हुए भी अमेरिका से सीधा फायदा निकालते आए हैं, ठीक वैसे ही भारत भी सभी बड़े देशों से अपने हितों के हिसाब से सीधे रिश्ते साधकर वैश्विक मेज पर अपनी जगह मजबूत रखेगा। इसके दृष्टिगत भारत स्मार्ट और व्यवहारिक कूटनीतिक का सहारा लेगा। इसके अलावा, भारत फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया मजबूत मोर्चा खड़ा कर सकता है और इस प्रकार जो मिडिल पावर्स का नया फ्रंट बनेगा, उससे भारत लाभांवित होगा। दरअसल, ये वो देश हैं जो दुनिया की कमान सिर्फ तीन देशों के हाथों में सिमटे, ऐसा नहीं होने देना चाहते, इसलिए परस्पर एकजूट हैं। # अमेरिका, रूस और चीन का जी-3 (G-3) महज एक परिकल्पना, जमीनी हकीकत से दूर है यह त्रिकोणीय तालमेल यह बात दीगर है कि भू-राजनीतिक स्तर पर अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक संभावित जी-3 (G-3) त्रिकोणीय तालमेल या महान शक्ति समझौते की जो चर्चाएँ सामने आ रही हैं, वह अभी कोई औपचारिक और स्थायी गठबंधन नहीं है। चूंकि तीनों देशों के शीर्ष नेताओं की सीधी बातचीत होगी, इसलिए अमेरिकी नेतृत्व बहुपक्षीय संगठनों के बजाय सीधे रूस और चीन के राष्ट्र प्रमुखों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क साधने की नीति को प्राथमिकता पर रखता है। विश्लेषकों का भी मानना है कि दुनिया की ये तीन सबसे बड़ी महाशक्तियाँ आपस में मिलकर वैश्विक व्यवस्था के नियमों को तय करने के लिए एक त्रिकोणीय ढांचा बना सकती हैं, ताकि वैश्विक सत्ता का संतुलन बरकरार रहे। चूंकि इन तीनों देशों के पास विशाल सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक ताकत है, जिसके बल पर वे बड़े भू-राजनीतिक सौदे कर सकते हैं। यह एक प्रकार की रणनीतिक सौदेबाजी होगी, उससे ज्यादा कुछ नहीं। # रूस और चीन के पारस्परिक सहयोग से अमेरिका को टेकने पड़ेंगे घुटने चूंकि रूस और चीन अपने पारंपरिक सहयोग या ब्रिक्स (BRICS) जैसे मंचों को छोड़कर अमेरिका के पाले में पूरी तरह नहीं आ रहे हैं; बल्कि वे इन मंचों के साथ-साथ वाशिंगटन से भी सीधे संवाद की गुंजाइश तलाश रहे हैं। ताकि ब्रिक्स का अंत नहीं हो और अमेरिका से रणनीतिक लाभ भी मिलता रहे। गौर करने वाली बात यह है कि तीनों देशों के बीच बुनियादी मतभेद हैं। खासकर व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और क्षेत्रीय आधिपत्य जैसे गंभीर मुद्दों पर तीनों देशों के हित एक-दूसरे के विपरीत हैं। इसलिए क्या जी-3 एक पक्का गठबंधन बनेगा, इसमें संदेह है। जब इसे लेकर कोई औपचारिक संधि होगी, या कोई लिखित समझौता होगा या फिर नाटो जैसा कोई नया सैन्य गुट बनेगा, तब यह समझा जाएगा कि अमेरिका, चीन और रूस अब एक दूसरे के करीब जा चुके हैं। चूंकि, यह नया राग अलापना अमेरिका की मजबूरी है, क्योंकि वह अरब-खाड़ी देशों में रूसी-चीनी चक्रव्यूह में घिर चुका है और निकलने का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में रूस और चीन बहुत अच्छे रणनीतिक और आर्थिक साझेदार हैं, जिन्हें अक्सर 'दोस्त' या 'जिगरी दोस्त' कहा जाता है। इस दोस्ती का मुख्य कारण भी अमेरिका विरोध है, क्योंकि दोनों देश अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना चाहते हैं। चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। रूस चीन को तेल और प्राकृतिक गैस बेचता है, जबकि चीन से उसे औद्योगिक वस्तुएं मिलती हैं। वहीं यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के दृष्टिगत रूस का चीन पर आर्थिक और राजनीतिक रूप से भरोसा और निर्भरता दोनों बढ़ी है। यद्यपि 1960 और 1970 के दशक में दोनों कम्युनिस्ट देशों के बीच वैचारिक मतभेद और सीमा विवाद भी रहे हैं, जिसे उन्होंने समझदारी पूर्वक दूर कर लिया है। इसे औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं कहा जाता है, बल्कि यह साझा हितों पर आधारित एक मजबूत रणनीतिक तालमेल यानी रणनीतिक साझेदारी है। # अमेरिका ने कस रखी है चीन की व्यापारिक नकेल वहीं, अमेरिका ने चीन पर विभिन्न व्यापारिक नीतियों और उत्पादों के तहत अलग-अलग दर से टैरिफ लगाए हैं, जिसमें अक्टूबर 2025 में घोषित 100% अतिरिक्त टैरिफ और पहले से चले आ रहे धारा 301 (Section 301) के शुल्क शामिल हैं। इसकी प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:- पहला, अतिरिक्त टैरिफ: अक्टूबर 2025 में अमेरिका ने चीन पर चीनी सामानों की डंपिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स के विवाद के कारण 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आदेश दिया था। दूसरा, पुराने शुल्क: साल 2018 से चले आ रहे धारा 301 (Section 301) के तहत लगाए गए बुनियादी शुल्क अभी भी कई चीनी उत्पादों पर लागू हैं। तीसरा, विशेष उत्पाद: कुछ खास उत्पादों (जैसे बैटरी सामग्री) पर यह दरें 205% तक भी पहुंच चुकी हैं। चौथा, कानूनी फेरबदल: साल 2026 की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ आपातकालीन टैरिफ को अमान्य भी करार दिया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत जारी है। # सैन्य और आर्थिक ताकत के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से है काफी आगे यह ठीक है कि सैन्य और आर्थिक ताकत के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से आगे और दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है। जहां तक सैन्य रैंकिंग (Military Ranking) की बात है तो यह इस प्रकार है:- पहला, ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग: रक्षा और सैन्य ताकत की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है और रूस दूसरे स्थान पर आता है। दूसरा, रक्षा बजट: अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 850 बिलियन डॉलर है, जो रूस के बजट (लगभग 135 बिलियन डॉलर) से काफी अधिक है। तीसरा, अमेरिका की ताकत वायुसेना: अमेरिका के पास लगभग 13,000 विमान और 1,790 से ज्यादा फाइटर प्लेन हैं, जो इसे दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेना बनाते हैं। चौथा, वैश्विक पहुंच: अमेरिका के पास उन्नत तकनीक, विशाल नौसेना और दुनिया भर में फैले सैन्य ठिकाने हैं। जहां तक रूस की ताकत की बात है तो वह निम्नलिखित है:- पहला, परमाणु हथियार: परमाणु हथियारों के मामले में रूस सबसे आगे है। उसके पास करीब 6,000 परमाणु बम और खतरनाक मिसाइलें मौजूद हैं। दूसरा, जमीनी ताकत: रूस के पास जमीन पर मुकाबला करने के लिए 10,000 से अधिक टैंक और एस-400 व एस-500 जैसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम हैं। निष्कर्ष यह है कि कुल मिलाकर अमेरिका अधिक शक्तिशाली और व्यापक रूप से सक्षम है, जबकि रूस के पास परमाणु और रणनीतिक रक्षा बल बहुत मजबूत हैं। इसलिए यदि तीनों देश एक साथ आएंगे तो वह मध्यम दर्जे वाले देशों के उभार में कितना बाधक बनेंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। # आखिर ब्रिक्स की बैठक शुरू होने से पहले ही अमेरिका ने क्यों अलापा नया राग? राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन के साथ मिलकर एक नया 'G-3' गुट बनाने की घोषणा करना, अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की एक जबरदस्त बिसात समझी जा सकती है। क्योंकि अमेरिका अब यह मान चुका है कि बिना चीन और रूस की मदद के वह भारत पर लगाम नहीं लगा सकता है और ऐसा किए बिना वह अपना मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय अस्तित्व भी नहीं बचा पाएगा। इसलिए अब ट्रंप सीधे पुतिन और शी जिनपिंग से हाथ मिलाकर वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा को बदलना चाहते हैं। चूंकि भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जैसे वैश्विक नेता एक छत के नीचे होंगे और एग्रीकल्चर, हेल्थ सेक्टर और डिजिटल दुनिया में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे, साथ ही बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत करेंगे। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन के साथ मिलकर G-3 गुट बनाने का जो ऐलान किया है, वह दुनिया के मध्यम दर्जे के उन देशों को खुली चुनौती है, जो इन तीनों देशों के अंतर्विरोध का फायदा उठाकर लाभ पीट रहे हैं। चूंकि वर्ष 2019 के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं, इसलिए पूरी दुनिया की नजरें पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी हुई हैं। चूंकि दोनों देश पिछले कुछ सालों से बॉर्डर टेंशन और ट्रेड खींचतान से जूझ रहे हैं, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली का ये मंच दोनों पड़ोसी देशों के बीच की कड़वाहट कम करेगा और व्यापारिक रिश्तों को फिर से पटरी पर लाएगा। इसके अलावा ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के आने से भी इस सम्मेलन की हलचल काफी बढ़ गई है। चूंकि ब्रिक्स हमेशा से खुद को अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबदबे के खिलाफ एक बड़े विकल्प के तौर पर दिखाता आया है. लेकिन जैसे-जैसे इस संगठन का विस्तार हुआ है, इसके अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी भी खुलकर सामने आने लगी है। इस वक्त ईरान और UAE के बीच तनातनी चल रही है। जहां ईरान चाहता है कि ब्रिक्स का ये मंच अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के खिलाफ खुलकर बोले और सख्त बयान दे, वहीं दूसरी तरफ यूएई इस विवाद में पड़ने के बजाय अपनी समुद्री सीमा और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को ज्यादा अहमियत दे रहा है। दोनों देशों की इसी खींचतान की वजह से मई में दिल्ली में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान तक जारी नहीं हो सका था। चूंकि एक तरफ ब्रिक्स अपने अंदरूनी झगड़ों में उलझा हुआ है तो दूसरी तरफ वाशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को के बीच एक नया समीकरण बन रहा है। वैसे भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ये मानते रहे हैं कि अगर वो पुतिन और शी जिनपिंग से सीधे बातचीत करें, तो दुनिया के बड़े-बड़े विवाद पलक झपकते ही सुलझ सकते हैं। लेकिन ट्रंप की इस पर्सनल कूटनीति से अमेरिका का अपना विदेश मंत्रालय, वहां की दूरदर्शी संसद और यूरोपीय सहयोगी देश काफी घबराए हुए हैं। वहीं, यूरोप को भय है कि ट्रंप यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा को दांव पर लगाकर रूस से हाथ मिला लेंगे। वहीं एशियाई देशों को चिंता है कि चीन के साथ कोई बड़ी डील करने के चक्कर में अमेरिका इस इलाके की सुरक्षा का अपना वादा कहीं तोड़ न दे। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
आईआईटी छात्र ने साउथ एशिया स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट जीता, अब अमेरिका में गाड़ेंगे झंडे
आईआईटी के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के एमटेक छात्र पी विष्णु तेजा ने 2026 सोसाइटी ऑफ पेट्रोलियम इंजीनियर्स साउथ एशिया रीजनल स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट के मास्टर्स डिवीजन में पहला स्थान हासिल किया है।
पेजेश्कियान का अमेरिका-इजराइल को दो टूक संदेश, बोले- दबाव और दादागीरी के आगे नहीं झुकेगा ईरान
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उनका देश अत्याचार के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल को निशाने पर लेते हुए कहा कि ईरान डराने-धमकाने की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा।
अमेरिका में ₹1.9 लाख और भारत में सीधे ₹3 लाख! ये है iPhone के महंगा होने की असली वजह
अमेरिका में करीब 1.9 लाख रुपये वाला iPhone Duo भारत में 2,99,900 रुपये का क्यों है? इसके पीछे सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि इंपोर्ट ड्यूटी, मैन्युफैक्चरिंग, करेंसी और Apple की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी जैसी कई वजहें हैं। आइए उन्हें समझते हैं।
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
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अमेरिका और ब्रिटेन के नए आंकड़े बताते हैं कि नॉन-ग्रेजुएट्स के मुकाबले कॉलेज डिग्री वालों को मिलने वाला सैलरी का फायदा घट रहा है। अर्थशास्त्रियों होजे अजार, मिरेया गिने और जेवियर एस्पिन की रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में कॉलेज ग्रेजुएट्स का वेतन प्रीमियम 4 वर्षों में लगातार गिरा है। कुल गिरावट करीब 10% है। यह 1970 के दशक के बाद पहली बड़ी गिरावट मानी जा रही है। 100 साल से भी ज्यादा समय में पहली बार ग्रेजुएट्स की मांग घट रही है। ब्रिटेन में भी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की डिग्री वालों का फायदा कम हो रहा है। एआई खासतौर पर उन व्हाइट-कॉलर और नॉलेज-वर्क जॉब्स को बदल रहा है, जिन पर लंबे समय से ग्रेजुएट्स का दबदबा था। भारत में डिग्रीधारी बढ़े लेकिन नौकरियां नहीं अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2023 के बीच युवाओं में ग्रेजुएट्स की संख्या 10% से बढ़कर 28% हो गई। लेकिन हर साल बढ़ने वाले ग्रेजुएट्स के अनुपात में नौकरियां नहीं बन रहीं। करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट्स जॉब मार्केट में आते हैं, जबकि करीब 28 लाख जॉब पैदा होती हैं। बेरोजगार युवाओं में अब करीब दो-तिहाई ग्रेजुएट हैं। सर्वे - 70-90% एम्पलॉयर्स स्किल बेस्ड भर्ती कर रहे अमेरिका के नेशनल एसोसिएशन ऑफ कॉलेजेस एंड एम्पलाइज की रिपोर्ट में करीब 70% नियोक्ता अब स्किल्स-बेस्ड हायरिंग कर रहे हैं। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब 90% कंपनियां डिग्री के बजाय कौशल के आधार पर भर्तियां करती हैं। 94% एम्पलॉयर्स का मानना है कि स्किल बेस्ड हायरिंग डिग्री, सर्टिफिकेट या अनुभव के आधार पर हायरिंग से बेहतर है। बदलाव - कई देशों में डिग्री की जरूरत में कमी आ रही देश - कमीयूएस - 3.9%यूके - 1.8%ऑस्ट्रेलिया - 1.6% (स्रोत- बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप)
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
IIT : आईआईटी के PhD स्कॉलर को 40 लाख का पैकेज, दूसरे छात्र ने अमेरिका में बजाया डंका
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी डॉ शत्रुघ्न ठाकुर को इटली की हंसा टीएमपी में डिजाइन इंजीनियर के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव मिला है। वे 40.65 लाख सालाना पे-पैकेज पर कार्य करेंगे।
अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर
यूएस ग्रीन कार्ड को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और बुरी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी पूरी तरह 'अनअवेलेबल' हो चुकी है।अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर?अमेरिका में सालों से परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और उच्च कुशल कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) और आव्रजन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित दूसरी श्रेणी यानी ईबी-2 (EB-2 - Employment-Based Second Preference) कैटेगरी को फिलहाल पूरी तरह से 'अनअवेलेबल' (Unavailable) यानी अनुपलब्ध घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति का मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए इस श्रेणी के तहत तय किए गए कोटे के सारे वीजा पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी दूतावास या आव्रजन कार्यालय इस कैटेगरी में अब अगले आदेश या नए वित्त वर्ष के शुरू होने तक किसी भी नए ग्रीन कार्ड या अप्रवासन वीजा को जारी या स्वीकृत नहीं कर सकते हैं। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वर्षों से लंबित पेंडिंग फाइलों और भारी-भरकम बैकलॉग के बीच इस प्रकार अचानक श्रेणी का बंद होना उनके सपनों पर एक बहुत बड़ा विराम लगाता हुआ नजर आ रहा है।ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी के पूरी तरह से अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह क्या सामने आई है?इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कैटेगरी के अचानक बंद होने और अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी कानूनों के तहत तय की गई वार्षिक सीमा और देश-वार कोटा प्रणाली (Per-Country Ceiling) है। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, हर साल रोजगार-आधारित जितने भी ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, उनमें से किसी एक देश के नागरिकों को कुल कोटे का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। भारत जैसे विशाल देश से एडवांस्ड डिग्री धारकों और विशेष योग्यताओं वाले प्रोफेशनल्स की संख्या और आवेदन इतने ज्यादा हैं कि यह तयशुदा कोटा निर्धारित समय से बहुत पहले ही पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इस वर्ष भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही भारत के कोटे के सारे ईबी-2 वीजा नंबर पूरी तरह से एग्जॉस्ट यानी समाप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, अन्य देशों द्वारा अप्रयुक्त रहने वाले वीजा नंबरों का लाभ भी इस बार समय पर नहीं मिल पाने के कारण अमेरिकी प्रशासन को मजबूरन इस कैटेगरी को पूरी तरह से बंद या अनअवेलेबल करना पड़ा है, जिससे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, एच-1बी (H-1B) धारकों और उनके परिवारों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय नागरिकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए यह स्थिति भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता लेकर आई है। जो प्रोफेशनल्स अपनी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में थे, उनकी फाइलें अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई हैं और तब तक आगे नहीं बढ़ सकतीं जब तक कि नया कोटा शुरू नहीं होता। हालांकि आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस स्थिति के बावजूद यूएसिसिस (USCIS) द्वारा फॉर्म आई-485 (Adjustment of Status) की कुछ श्रेणियों के आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर तकनीकी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन अंतिम अप्रूवल के लिए लंबा इंतजार करना ही होगा। इस लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता के कारण कई कुशल भारतीय कर्मचारी अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं, क्योंकि ग्रीन कार्ड मिलने में लगने वाला यह बेहिसाब समय कई दशकों तक लंबा खींचता जा रहा है।इस गंभीर बैकलॉग और समस्या से निपटने के लिए आगे क्या उम्मीदें बची हैं?इस बड़ी प्रशासनिक रोक के बीच भारतीय प्रवासियों और नीति विश्लेषकों की निगाहें अब पूरी तरह से नए वित्त वर्ष और अमेरिकी संसद में होने वाले विधायी सुधारों पर टिकी हुई हैं। चूंकि हर साल 1 अक्टूबर को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही वार्षिक वीजा सीमाओं और कोटे का नया आवंटन दोबारा रिसेट होता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि तब जाकर इस कैटेगरी में कुछ राहत मिल सकती है और कट-ऑफ डेट्स आगे बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, आव्रजन सुधारों की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक अमेरिका देश-वार लगने वाली इस 7 प्रतिशत की सीमा को समाप्त नहीं करता या ग्रीन कार्ड की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक भारतीय प्रोफेशनल्स को इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। अमेरिकी श्रम बाजार में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में बुनियादी बदलाव कितनी बड़ी और तत्काल आवश्यकता बन चुके हैं।
खर्ग द्वीप के पास बड़ा हमला, अमेरिका ने तबाह कर दिया ईरान का टैंकर - Hindustan
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अमेरिका में बसने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली अपडेट सामने आ रही है। अमरीकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएसएसीआईएस (USCIS) ने ग्रीन कार्ड और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने वाले व्यक्ति या परिवार के वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ उनके क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिरता की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस बदलाव का सीधा असर उन हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स पर पड़ने वाला है जो अपने किसी परिजन या एम्प्लॉयी के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस नए फॉर्म और नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अब स्पॉन्सरशिप की राह उतनी आसान नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी।क्या है USCIS का नया फॉर्म और कैसे काम करेगा स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर की जांच का नया नियमयूएसएसीआईएस द्वारा लागू किए गए इन नए नियमों के केंद्र में एफिडेविट ऑफ सपोर्ट (Affidavit of Support) से जुड़ा नया फॉर्म है, जिसके जरिए स्पॉन्सर को अपनी वित्तीय क्षमता का पूरा ब्योरा देना होता है। पारंपरिक तौर पर स्पॉन्सर को सिर्फ अपनी आय का टैक्स रिटर्न दिखाना होता था, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारी स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर, बैंक खातों की स्थिति, मौजूदा कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई स्पॉन्सर आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है या उसका क्रेडिट स्कोर खराब चल रहा है, तो वह किसी आवेदक के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं कर पाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अमेरिका आने वाला नया अप्रवासी कभी भी वहां की सरकारी सहायता या पब्लिक चार्ज (Public Charge) पर निर्भर न हो और अपनी आजीविका खुद चलाने में पूरी तरह से सक्षम हो।भारतीय आवेदकों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इस बदलाव के क्या हैं गहरे मायनेअमेरिका में वर्क वीजा यानी एच-1बी (H-1B) पर काम कर रहे लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता पहले से ही काफी लंबा और पेचीदा रहा है। ऐसे में फैमिली-बेस्ड या एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड स्पॉन्सरशिप के नियमों का कड़ा होना भारतीयों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार परिवार के सदस्य जब अपने माता-पिता या भाई-बहनों को अमेरिका बुलाने के लिए स्पॉन्सर करते हैं, तो उन्हें इस नए वित्तीय कड़े मानदंड से गुजरना होगा। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, और जरा सी भी वित्तीय चूक होने पर आवेदन को सीधे खारिज किया जा सकता है। इसलिए जो भारतीय परिवार या पेशेवर आने वाले दिनों में ग्रीन कार्ड के लिए फाइल करने की सोच रहे हैं, उन्हें अपने स्पॉन्सर के वित्तीय रिकॉर्ड और क्रेडिट हिस्ट्री को पहले से ही दुरुस्त और मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है।भविष्य की आव्रजन नीतियां और ग्रीन कार्ड चाहने वालों के लिए जरूरी सलाहअमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हो रहे ये लगातार बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले समय में ग्रीन कार्ड पाना और अधिक कठिन और अनुशासित होने जा रहा है। अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर साल नियमों में फेरबदल किए जाते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में भारतीय अप्रवासियों और छात्रों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कागजी कार्रवाई को शुरू करने से पहले इमीग्रेशन वकीलों या विशेषज्ञों से पूरी सलाह जरूर लें। नए फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पॉन्सर की आय संघीय गरीबी रेखा (Federal Poverty Guidelines) से काफी ऊपर हो और उनका क्रेडिट इतिहास बिल्कुल साफ-सुथरा हो। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर सही कदम उठाकर ही इस नई प्रशासनिक चुनौती से पार पाया जा सकता है और अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का सपना साकार किया जा सकता है।
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर उस छात्र की आंखों में पलता है जो अपनी मेहनत के दम पर करियर में ऊंची उड़ान भरना चाहता है। जब दुनिया भर के बेहतरीन विश्वविद्यालयों की बात आती है, तो अमेरिका का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और शानदार करियर ग्रोथ की वजह से अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, वहां की महंगी यूनिवर्सिटी फीस, ट्यूशन कॉस्ट और रहने-खाने का भारी खर्च कई बार मेधावी छात्रों के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। वित्तीय तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका जाने का विचार छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में ऐसी कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप प्रोग्राम्स मौजूद हैं, जो छात्रों के ट्यूशन फीस से लेकर उनके रहने, खाने और यहाँ तक कि हेल्थ इंश्योरेंस तक का पूरा खर्च खुद उठाती हैं? इन स्कॉलरशिप्स के जरिए आप बिना किसी आर्थिक तनाव के अमेरिकी धरती पर अपने सपनों की डिग्री हासिल कर सकते हैं।अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मिलने वाली फुल-ब्राइट और अन्य प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स के बारे में जानेंअमेरिका में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप (Fulbright-Nehru Fellowships) एक ऐसा नाम है जो भारत में बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित है। अमेरिकी सरकार और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो मास्टर या पीएचडी करने अमेरिका जाना चाहते हैं। इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ मासिक वजीफा, आने-जाने का हवाई किराया और स्वास्थ्य बीमा का पूरा खर्च कवर किया जाता है। इसके अलावा ह्यूबर्ट हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम (Hubert Humphrey Fellowship Program) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो अनुभवी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नॉन-डिग्री स्टडी और लीडरशिप ट्रेनिंग का मौका देते हैं। इन स्कॉलरशिप्स को हासिल करने के लिए छात्रों को एक निश्चित चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और अपने एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर खरा उतरना होता है, जिसके बाद उनके विदेश में पढ़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाता है।यूनिवर्सिटी-बेस्ड फाइनेंशियल असिस्टेंस और फुल-राइड स्कॉलरशिप्स का कैसे उठाएं लाभकेवल सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अधिकांश प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी अपने यहां आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को मेरिट और जरूरत के आधार पर फुल-राइड स्कॉलरशिप्स प्रदान करते हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और येल जैसी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज की वित्तीय सहायता नीतियां बहुत मजबूत हैं। अगर आपका एकेडमिक रिकॉर्ड शानदार है और आपके पास बेहतरीन एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का रिकॉर्ड है, तो ये यूनिवर्सिटीज आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 100 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति दे सकती हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही मिलने वाली ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंटशिप (GRA) या टीचिंग असिस्टेंटशिप (TA) के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं, जिससे उनका रहने-खाने का खर्च आसानी से निकल जाता है। इन अवसरों के बारे में सही समय पर जानकारी जुटाकर समय से आवेदन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अमेरिका में फ्री एजुकेशन पाने के लिए स्मार्ट टिप्सअमेरिका में बिना पैसे की टेंशन के पढ़ाई करने का यह सुनहरा अवसर पाने के लिए छात्रों को अपनी तैयारी बहुत पहले से शुरू करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आपको अपने एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, प्रोफेसरों से मिलने वाले रिकमेंडेशन लेटर्स और आईईएलटीएस (IELTS) या टॉफेल (TOEFL) जैसे इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट के स्कोर कार्ड तैयार रखने होते हैं। अधिकांश स्कॉलरशिप्स के लिए आवेदन की प्रक्रिया साल में एक निश्चित समय पर खुलती है, इसलिए यूनिवर्सिटीज की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर डेडलाइन पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाने के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन और नेतृत्व क्षमता से जुड़े अनुभवों को अपने आवेदन में जरूर शामिल करें। थोड़ी सी मेहनत, सही दिशा में की गई रिसर्च और समय पर किए गए आवेदन आपको बिना किसी वित्तीय बोझ के अमेरिका की बेहतरीन शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना सकते हैं।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
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Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
क्या भारत की तरह अमेरिका में भी है ट्यूशन कल्चर?
भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया.
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग द्वारा CPT (Curricular Practical Training) को लेकर एक नया नीतिगत मेमो जारी किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। CPT वह माध्यम है जिसके जरिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी डिग्री कोर्स के दौरान ही इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन ICE के इस नए मेमो ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और पेचीदा बना दिया है, जिससे भारतीय छात्रों के करियर और उनकी कानूनी स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है। गूगल डिस्कवर और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय इस विषय को लेकर लाखों छात्र सर्च कर रहे हैं कि आखिर इस नए बदलाव का उनकी पढ़ाई और जॉब करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए अमेरिका में CPT के पूरे गणित को समझते हैं और जानते हैं कि ICE के इस नए मेमो में क्या-क्या खास बातें कही गई हैं।अमेरिका में CPT (कर्रिकलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) असल में क्या है?सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CPT क्या है और यह विदेशी छात्रों के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जब कोई भारतीय छात्र अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन (मास्टर्स या बैचलर्स) के लिए एडमिशन लेता है, तो उसे अपने कोर्स के करिकुलम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाती है, जिसे CPT कहा जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और साथ ही कुछ पैसे भी कमाते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए जीवनरेखा की तरह होता है जो अपने खर्चों का एक हिस्सा खुद उठाने और अमेरिकी कॉर्पोरेट कल्चर को नजदीक से समझने की कोशिश करते हैं। पारंपरिक रूप से CPT को F-1 वीजा धारक छात्रों के लिए एक बेहद लचीली और मददगार व्यवस्था माना जाता रहा है, जिसके जरिए वे आगे चलकर OPT (Optional Practical Training) और H-1B वीजा की ओर कदम बढ़ाते हैं।ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने क्यों जारी किया नया मेमो?हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ICE द्वारा जारी किए गए नए मेमो ने विदेशी छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस मेमो का मुख्य उद्देश्य CPT के नियमों का कथित तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि कुछ छात्र और विश्वविद्यालय CPT नियमों का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई की आड़ में लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से काम करने के रास्ते तलाश रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विश्वविद्यालयों को CPT के अनुमोदन (Approval) के मामले में और अधिक कठोर नियमों का पालन करना होगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि CPT सीधे तौर पर छात्र के अकादमिक पाठ्यक्रम और डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल अंशकालिक नौकरी पाने का एक आसान जरिया। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से छात्रों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि क्या उनकी यूनिवर्सिटीज अब आसानी से CPT अप्रूव कर पाएंगी या नहीं।भारतीय छात्रों पर इस नए मेमो का क्या होगा सीधा असर?लोकल ऑप्टिमाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में हर साल हजारों की संख्या में भारतीय छात्र कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस और डेटा साइंस जैसे कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने ट्यूशन फीस के कर्ज को चुकाने और अमेरिकी बाजार में फुल-टाइम जॉब पाने के लिए CPT और फिर OPT पर निर्भर रहता है। यदि ICE के नए नियमों के कारण CPT मिलना मुश्किल हो जाता है, या इसके घंटों (Hours) को सीमित कर दिया जाता है, तो भारतीय छात्रों की आर्थिक स्थिति और करियर प्लानिंग बुरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि छात्रों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहने की जरूरत है।आधुनिक Generative Engine Optimization और डिजिटल सर्च ट्रेंड्स का परिदृश्यआधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च) और गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में शिक्षा, वीजा नियमों में बदलाव और करियर से जुड़ी ऐसी जटिल कानूनी खबरों को छात्र और उनके परिवार सबसे ज्यादा खोजते हैं। आज का डिजिटल युग यह मांग करता है कि किसी भी ग्लोबल पॉलिसी बदलाव को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडिट (Reddit) और इमिग्रेशन फोरम्स पर इस समय CPT मेमो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहाँ छात्र अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं। सही और तथ्यात्मक जानकारी समय पर मिलना हर उस छात्र के लिए बेहद जरूरी है जो अमेरिका में अपने सपनों को साकार करने की राह पर है।भारतीय छात्रों को अब किन सावधानियों और नियमों का रखना होगा ध्यान?इस बदलते हुए परिदृश्य में अमेरिका में पढ़ रहे या जाने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को कुछ बेहद अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, अपने कोर्स के दौरान लिए जाने वाले CPT का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) एकदम दुरुस्त रखें और यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर और आपकी यूनिवर्सिटी का कोर्स करिकुलम पूरी तरह से नियमों के दायरे में हो। किसी भी शॉर्टकट या संदिग्ध तरीके से CPT प्राप्त करने से बचें, क्योंकि अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS और ICE) इस मामले में अब बहुत अधिक आक्रामक हो चुका है। अपनी यूनिवर्सिटी के कानूनी सलाहकारों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें ताकि वीजा की स्थिति पर कोई आंच न आए।अमेरिकी शिक्षा और करियर की राह में आने वाली नई चुनौतियाँअंततः, अमेरिका में CPT को लेकर ICE द्वारा जारी किया गया यह मेमो इस बात की चेतावनी है कि अमेरिका में आव्रजन और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को लेकर प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना और वहां टिके रहना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है, इसके लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक ईमानदारी और नियमों की सटीक समझ होना अनिवार्य है। यदि छात्र सही दिशा में योजना बनाकर चलेंगे और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे, तो वे इन नई बाधाओं को पार करते हुए अपने अमेरिकी सपने को जरूर पूरा कर पाएंगे, बशर्ते हर कदम बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ उठाया जाए।
अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
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Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
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Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
एस्प्रेसो से अमेरिकानो तक, जानें कैफे में मिलने वाली 5 ब्लैक कॉफी का स्वाद, ऑर्डर करना होगा आसान
किसी कैफे में जाकर अलग-अलग तरह की कॉफी को देखकर आप भी कंफ्यूज हो जाते हैं तो आपकी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम यहां कैफे में मिलने वाली कुछ मुख्य ब्लैक कॉफी का स्वाद बता रहे हैं। जिसे जानने के बाद अगली बार ऑर्डर देना आसान हो जाएगा।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
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अमेरिका के फॉल इनटेक में एडमिशन ले चुके अधिकतर भारतीय छात्रों के मन में एक ही सवाल उठता है- क्या वह पहुंचते ही पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अमेरिका में फीस और रहने-खाने के खर्च को देखते हुए छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि टॉप यूनिवर्सिटीज की सालाना फीस और रहने खाने का खर्चा करीब 50 से 60 लाख रुपए तक होता है। वहीं पूरी पढ़ाई का खर्च 1.5 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीज पर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट टाइम जॉब के नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। यहां तक कि डिपोर्टेशन तक का समय आ सकता है। ऐसे में हम इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स फर्स्ट सेमेस्टर में पार्ट-टाइम नौकरी कर सकते हैं और इसको लेकर क्या नियम हैं। इसे भी पढ़ें: क्या 40 की उम्र में संभव है LLB? BCI के नए नियमों के तहत Age Limit और Career Switch पर एक विशेष रिपोर्ट फर्स्ट ईयर में जॉब कर सकते हैं या नहीं USICS के नियमों क मुताबिक F-1 वीजा पर पहले पूरे अकेडमिक ईयर तक आप कैंपस के बाहर कोई नौकरी नहीं कर सकते हैं। USICS के नियमों में फर्स्ट सेमेस्टर वाले स्टूडेंट्स के लिए कोई खास छूट नहीं दी गई है। कैंपस के बाहर किसी भी स्थिति में जॉब नहीं करना है। फर्स्ट ईयर छात्रों के पास ऑन कैंपस जॉब का ऑप्शन जरूर है। छात्र कैंपस के अंदर आराम से पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। फर्स्ट सेमेस्टर में क्या करें अच्छी खबर यह है कि ऑन कैंपस जॉब के लिए आपको USCIS से अलग इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। इसको आपको फर्स्ट सेमेस्टर से ही शुरूकर सकते हैं। जब क्लास चल रही हो, तब आप सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान आप फुल टाइम यानी की सप्ताह में 40 घंटे काम कर सकते हैं। ऑन कैंपस जॉब का मतलब है, यूनिवर्सिटी के कैंपस पर होने वाला काम कैफेटेरिया में काम, लाइब्रेरी में असिस्टेंट, यूनिवर्सिटी बुकस्टोर में जॉब, या किसी प्रोफेसर के साथ रिसर्च असिस्टेंटशिप। यह जॉब कुछ मामलों में कैंपस के बाहर भी हो सकता है। बशर्ते वह जगह आपकी यूनिवर्सिटी से एजुकेशनली एफिलिएटेड हो। उसका सीधा संबंध आपकी पढ़ाई या यूनिवर्सिटी से हो। ऑन कैंपस जॉब के लिए क्लास शुरू होने से करीब 30 दिन पहले तक अप्लाई कर सकते हैं। इसलिए अगर आप फॉल इनटेक में अभी पहुंचे हैं। तो जल्द से जल्द अपने कैंपस जॉब पोर्टल या फिर इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप ऑन कैंपस जॉब ढूंढ रहे हैं, या भविष्य में ऑफ-कैंपस काम के बारे में जानना चाहते हों। तो सबसे जरूरी काम है कि अपने DSO से बात करें। DSO आपकी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के मामलों को संभालने वाला अधिकारी होता है। वह आपको बताएगा कि कौन सी जॉब्स उपलब्ध हैं और आप उनके लिए एलिजिबल हैं या नहीं।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
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पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
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अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
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अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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