Panchkula News: रिश्वत मामले में पूर्व एसडीओ और पत्नी को अमेरिका जाने की अनुमति नहीं
रिश्वत मामले में पूर्व एसडीओ और पत्नी को अमेरिका जाने की अनुमति नहीं
'न्यू मैक्सिको' अब 'न्यू अमेरिका'... ट्रंप ने नाम बदलकर फिर चौंकाया
यह राज्य अमेरिका और मैक्सिको की सीमा से लगा है. इस दक्षिण-पश्चिमी राज्य का नाम बदलने का संकेत ट्रंप के पुराने आदेश की याद दिलाता है.
फिर हमला हुआ तो मिलेगा दर्दनाक जवाब, ईरान ने अमेरिका को दी खुलेआम चेतावनी
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने अमेरिका को चेतावनी दी है। इसमें उन्होंने कहाकि उनके देश पर भविष्य में होने वाले किसी भी हमले का तेज, ताकतवर और ज्यादा दर्दनाक जवाब दिया जायेगा।
अब समुद्र के पानी से घातक हथियार बनाएगा चीन, अमेरिका को छोड़ दिया पीछे
चीन ने एक नई तकनीक इजाद की है, जिससे वह समुद्र के पानी से परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम हासिल कर सकता है। चीनी शोधकर्ताओं ने इस बारे में बड़ी सफलता हासिल की है।
Bengaluru, 6 सितंबर . India में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने Sunday को कर्नाटक के Chief Minister डीके शिवकुमार से Bengaluru में मुलाकात की. इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच पैक्स सिलिका और ट्रस्ट जैसे पहलों को लेकर चर्चा हुई, जिसका मकसद स्पेस तकनीक, एआई और व्यापार के जरिए India और अमेरिका के ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध: फिर तेज़ हुए हमले, नागरिकों के लिए बढ़ता जोखिम
अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने की अपेक्षाकृत शान्ति के बाद एक बार फिर हिंसक टकराव तेज़ हो गया है.दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं,जिससे आम नागरिकों के हताहत होने का ख़तरा बढ़ गया है.
बस्तर की बगिया में मध्य अमेरिका का रस: ट्रीमैन संपत झा का सफल प्रयोग, उगाया लेमन ड्रॉप मैंगोस्टीन
बस्तर के प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी संपत झा ने अपने उद्यान में मध्य अमेरिका के दुर्लभ फल लेमन ड्रॉप मैंगोस्टीन को सफलतापूर्वक उगाया है। गार्सिनिया इंटरमीडिया नामक इस विदेशी फल के उत्पादन से बस्तर में कृषि विविधता की नई संभावनाएं जगी हैं। इससे पहले वे मियाज़ाकी आम भी उगा चुके हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और फल विविधता बढ़ाना है।
'होर्मुज में अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया', ईरान का दावा, US ने बताया झूठ
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका के एक बिना चालक वाले जहाज पर हमला करने का दावा किया है. हालांकि अमेरिका ने इस दावे को झूठा बताते हुए खारिज किया है.
Moscow में Putin से मिलने के बाद Kyiv पहुंचे अमेरिकी दूत, शांति वार्ता पर चर्चा
कीव, छह सितंबर (एपी) अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने रूस -यूक्रेन युद्ध खत्म करने के प्रयासों के तहत रविवार को कीव में “उत्साहजनक” बातचीत की। दोनों की यह यात्रा शनिवार को मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठक के बाद हुई है। इस बीच दोनों पक्षों ने हवाई हमले तेज कर दिए हैं ऐसे में चार साल से भी ज्यादा समय से जारी जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रयासों की गति धीमी पड़ती दिख रही है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन पिछले छह महीने से ईरान युद्ध पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। रूस हाल में तेज गति से उड़ने में सक्षम जेट इंजन वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है और हवाई हमलों की चेतावनी देने वाले सायरन की आवाज कीव में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है। सैनिकों को 1,250 किलोमीटर लंबी अग्रिम पंक्ति पर ज्यादा बढ़त हासिल करने में मुश्किल हो रही है। अमेरिकी अधिकारियों के साथ दो दौर की बातचीत के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि लक्ष्य “न्यायपूर्ण व उचित शांति” कायम करना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि “यूक्रेन के खिलाफ दोबारा हमला करने का कभी मौका न बने”। उन्होंने ट्रेन से कीव पहुंचे अमेरिकी वार्ताकारों का यूक्रेन आने के लिए धन्यवाद किया। विटकॉफ और कुशनर की यह पहली यूक्रेन यात्रा है। जेलेंस्की ने कहा कि रविवार को बाद में होने वाली अगली बातचीत में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी शामिल होंगे। विटकॉफ ने कहा, “हमने बहुत सार्थक, महत्वपूर्ण और विस्तृत चर्चा की है और हम बहुत उत्साहित हैं।”कुशनर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि केवल मौजूदा युद्ध को खत्म करने का रास्ता ही न निकाला जाए, बल्कि ऐसी व्यवस्था भी बनाई जाए जिससे लंबे समय तक शांति बनी रहे। शनिवार को मास्को में तीन घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में बैठक हुई और यह बिना किसी बड़ी सफलता की घोषणा के खत्म हो गई। पुतिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने बैठक के बाद इसे रचनात्मक, स्पष्ट व उपयोगी बताया, लेकिन किसी विशेष नतीजे के बारे में जानकारी नहीं दी। पुतिन और जेलेंस्की ने बातचीत के दौरान एक-दूसरे की राजधानियों पर हमले रोकने पर सहमति जताई थी। हालांकि अधिकारियों के अनुसार, रविवार तड़के तक दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए। यूक्रेन की राज्य आपात सेवा ने बताया कि रविवार तड़के तक यूक्रेन के कई क्षेत्रों में रूस के हमलों में एक व्यक्ति की मौत हुई और कम से कम 10 लोग घायल हुए। जापोरिज्जिया में ड्रोन हमलों में 74-वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन लोग घायल हुए। यूक्रेन की वायुसेना ने रविवार को कहा कि रूस ने रात में 108 ड्रोन और छह मिसाइल दागीं, जिनमें से उसने 82 ड्रोन को रोक दिया। रूस में बेलगोरोद सीमा क्षेत्र के स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि यूक्रेन के ड्रोन हमले में एक वाहन को निशाना बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में रूस के 14 क्षेत्रों, कब्जे वाले क्रीमिया और काला सागर तथा आजोव सागर के इलाकों में 258 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।
‘ईरान युद्ध छह महीने और खिंच सकता है’, पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री ने जताई आशंका
वॉशिंगटन, 6 सितंबर . अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री लियोन पेनेटा ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अगले छह महीने तक और चल सकता है तथा यह मध्य पूर्व का एक लंबा युद्ध बन सकता है. पेनेटा ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच फिलहाल गतिरोध की ... Read more
'ईरान युद्ध छह महीने और खिंच सकता है', पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री ने जताई आशंका
'ईरान युद्ध छह महीने और खिंच सकता है', पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री ने जताई आशंका
ईरान: अमेरिका के हमले का जवाब सख्त और दर्दनाक होगा
तेहरान, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने रविवार को संसद के खुले सत्र में कहा कि ईरान के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी हमले का जवाब त्वरित, ज्यादा सख्त और दर्दनाक होगा।
अमेरिकी बैंकों के जरिए ईरान से जुड़े अरबों डॉलर का लेनदेन, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अमेरिकी बैंकों के जरिए ईरान से जुड़े अरबों डॉलर का लेनदेन, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
ईरान युद्ध में 'फंस' गए हैं ट्रंप, पूर्व रक्षा सचिव ने बताया- अब अमेरिका के पास सिर्फ 3 विकल्प
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका के पूर्व रक्षा सचिव लियोन पैनेटा ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अगले छह महीने तक जारी रह सकता है।
युद्ध के नियम बदल चुके हैं, देर होने से पहले समझ जाओ; ईरान की अमेरिका को सीधी चेतावनी
ईरान ने रविवार को अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन को यह समझ लेना चाहिए कि तेहरान के खिलाफ युद्ध के नियम अब बदल चुके हैं, और यह समझ बहुत देर होने से पहले आ जानी चाहिए।
अमेरिका के किसी भी हमले का जवाब सख्त और दर्दनाक होगा : ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ
तेहरान, 6 सितंबर . ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने Sunday को संसद के खुले सत्र में कहा कि ईरान के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी हमले का जवाब त्वरित, ज्यादा सख्त और दर्दनाक होगा. मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, खुले सत्र में उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को यह पता ... Read more
अमेरिका से लौटी महिला की पोस्ट वायरल, भारत की सैलरी पर उठाए सवाल
अमेरिका से लौटी महिला की पोस्ट वायरल, भारत की सैलरी पर उठाए सवाल
आईआरजीसी का दावा, ‘नाकेबंदी से ईरान नहीं अमेरिका को ज्यादा नुकसान’
तेहरान, 6 सितंबर . इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का दावा है कि होर्मुज में नाकेबंदी बढ़ाने से ईरान को नहीं बल्कि अमेरिका को ही ज्यादा नुकसान पहुंचेगा. आईआरजीसी प्रवक्ता ब्रिगेडियर-जनरल हुसैन मोहिबी का ये बयान स्थानीय न्यूज एजेंसी ने प्रकाशित किया. जिनका मत है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक और समुद्री नाकेबंदी ... Read more
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में डूबा ईरानी तेल टैंकर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने एक वीडियो जारी कर ओमान की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकर ‘एम/टी काइलो’ के जलकर डूबने का दावा किया है। वीडियो में ईरानी तेल टैंकर आग की लपटों में घिरने के बाद डूबता हुआ दिखाई दे रहा है। सेंटकॉम के अनुसार,यह कार्रवाई …
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
वीएचपी की गाइडलाइन और अमेरिका में मोहन भागवत के बयान में विरोधाभास पर विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी नेताओं ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर तंज कसते हुए कहा कि लगता है उन्होंने अपना कुछ सामान अमेरिका में ही छोड़ दिया...
अमेरिका में मेहंदी लगाना इतना महंगा? भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताई अपनी प्रति घंटे की फीस
भारत में मेहंदी का नाम आते ही शादी, त्योहार और शुभ अवसर याद आ जाते हैं। लेकिन अमेरिका में रहने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रियंका जैन ने मेहंदी को सिर्फ उत्सव की परंपरा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे अपने लिए एक साइड बिजनेस और जुनून में बदल दिया है।प्रियंका के मुताबिक, मेहंदी लगाकर वह एक घंटे में करीब 100 डॉलर, यानी लगभग 9,000 से 10,000 रुपये तक कमा लेती हैं। इतना ही नहीं, कई ग्राहक उन्हें बिल के ऊपर 20 फीसदी तक टिप भी दे देते हैं।1 घंटे की मेहंदी से 10 हजार तक कमाईप्रियंका ने सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में अपनी कमाई और मेहंदी बिजनेस के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में वह करीब 100 डॉलर प्रति घंटे चार्ज करती हैं। हालांकि, असली कमाई ब्राइडल मेहंदी में और बढ़ जाती है। शादी के लिए बनाए जाने वाले डिजाइन ज्यादा बारीक और लंबे होते हैं, इसलिए इसमें कई घंटे लग सकते हैं।प्रियंका के अनुसार, अगर कोई 10 घंटे की ब्राइडल या वेडिंग मेहंदी बुकिंग होती है, तो उससे करीब 1 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। इसमें ग्राहक की ओर से मिलने वाली टिप अलग है। View this post on Instagram A post shared by Priyancka Jaiin (Creating Wings Co.) (@priyancka.jaiin) अमेरिका में ज्यादा कमाईभारतीय रुपये में 100 डॉलर प्रति घंटे की कमाई सुनकर यह रकम काफी बड़ी लगती है। हालांकि, प्रियंका का कहना है कि अमेरिका में कमाई के साथ रोजमर्रा के खर्च भी काफी ज्यादा हैं।यानी भारत और अमेरिका में मेहंदी की कमाई की सीधी तुलना करना पूरी तस्वीर नहीं बताता। वहां कलाकारों को अपनी सेवाओं के लिए ज्यादा फीस मिल सकती है, लेकिन जीवन-यापन की लागत भी उसी हिसाब से अधिक है।सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग नहीं छोड़ना चाहतींमेहंदी से अच्छी कमाई होने के बावजूद प्रियंका का अपनी मुख्य नौकरी छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वह अभी भी फुल-टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रही हैं।उनके मुताबिक, उनकी मुख्य आमदनी सैलरी से आती है, जबकि मेहंदी उनके लिए शौक और पैशन बिजनेस है। इसलिए मेहंदी से होने वाली कमाई उनके लिए अतिरिक्त आय का जरिया है।पैसे से ज्यादा ‘सम्मान’ करती है खुशप्रियंका की कहानी में सबसे खास बात सिर्फ उनकी कमाई नहीं है। उन्होंने अमेरिका में कलाकारों को मिलने वाले सम्मान को भी अपनी खुशी की बड़ी वजह बताया।उनका कहना है कि भारत में कई बार मेहंदी आर्टिस्ट के काम को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता। वहीं अमेरिका में उन्हें एक कलाकार के तौर पर पहचान और सम्मान मिलता है।प्रियंका के मुताबिक, उनके लिए पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण यह बात है कि वह जो काम कर रही हैं, उसकी इज्जत की जाती है। उनका मानना है कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता।सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?प्रियंका की कमाई का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा छिड़ गई। कुछ लोग अमेरिका में मेहंदी से मिलने वाली फीस देखकर हैरान हुए, तो कुछ ने भारत में कलाकारों को मिलने वाली कम फीस का जिक्र किया।एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब उसे अमेरिका चले जाना चाहिए। वहीं भारत की एक मेहंदी आर्टिस्ट ने बताया कि उसे एक मेहंदी के लिए सिर्फ 300 से 500 रुपये तक मिलते हैं।एक अन्य यूजर ने कहा कि भारत में लोग पूरी ब्राइडल मेहंदी के लिए 1,000 रुपये देने में भी आनाकानी करते हैं।क्या अमेरिका में मेहंदी आर्टिस्ट बनने के लिए लाइसेंस चाहिए?प्रियंका के वीडियो के बाद लोगों ने अमेरिका में मेहंदी का काम शुरू करने से जुड़ी जानकारी भी पूछी। एक यूजर ने उनसे पूछा कि क्या फ्रीलांस मेहंदी आर्टिस्ट बनने के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत होती है।जवाब में प्रियंका ने कहा कि उनके अनुसार इसके लिए अलग लाइसेंस की जरूरत नहीं है, लेकिन व्यक्ति का कानूनी रूप से अमेरिका में रहना या वैध वर्क वीजा होना जरूरी है।इस तरह प्रियंका की कहानी सिर्फ डॉलर में होने वाली कमाई की वजह से नहीं, बल्कि यह दिखाने के लिए भी चर्चा में है कि किसी पारंपरिक कला को हुनर और बिजनेस के तौर पर आगे बढ़ाया जाए तो वह अतिरिक्त कमाई के साथ पहचान और सम्मान भी दिला सकती है।21 साल के बिट्टू तबाही की CM मोहन यादव से मुलाकात पर मचा बवाल! ध्रुव राठी ने कही ये बात
अमेरिका: कैलिफोर्निया में 4 सीटर प्लेन क्रैश, 2 की मौत और दो घायल
कैलिफोर्निया, 6 सितंबर . अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के फ्रेस्नो शहर में एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में विमान सवार दो बच्चों की मौत हो गई जबकि दो व्यस्क घायलावस्था में अस्पताल पहुंचाए गए. मृतकों और घायलों की पहचान की स्थानीय प्रशासन ने जाहिर नहीं की है. समाचार एजेंसी सिंहुआ ने Sunday ... Read more
जालंधर। अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी FBI ने भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक मंजीत सिंह बेदी को कथित तौर पर 6 लाख डॉलर से अधिक के SNAP बेनिफिट फ्रॉड मामले में अपनी 'मोस्ट वॉन्टेड फ्रॉडस्टर्स' सूची में शामिल किया है। इस बीच, पंजाब पुलिस ने बेदी को जालंधर से गिरफ्तार कर लिया है।
भरोसे का संकट: यूरोप के देशों ने सोना समेटना शुरू किया, अमेरिका-कनाडा से 313 टन लंदन पहुंचा
नीदरलैंड ने अमेरिका और कनाडा से मार्च से अगस्त के बीच वापस लाए गए सोने को लंदन स्थित बैंक ऑफ इंग्लैंड की तिजोरी में रखने का फैसला किया है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंदन दुनिया के सबसे बड़े सोना व्यापार केंद्रों में शामिल है।
यूरोप से मॉस्को तक 'मेड इन इंडिया' डीजल का जलवा, आखिर कैसे हुआ ये कमाल? अमेरिका-रूस हुए आउट
रूस से डीजल आपूर्ति में गिरावट और अमेरिका से खेप कम होने के कारण भारत यूरोप के लिए डीजल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। भारत की रिफाइनरी क्षमता घरेलू मांग से अधिक है, लेकिन कच्चे तेल की उपलब्धता निर्यात को प्रभावित कर सकती है।
खार्ग आइलैंड के पास बड़ा हमला! अमेरिका ने ईरानी ऑयल टैंकर को बनाया निशाना, धमाकों से मचा हड़कंप
तेहरान/दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। खार्ग आइलैंड के पास एक ईरानी ऑयल टैंकर को अमेरिकी हमले में निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में इलाके में कई धमाकों की आवाज सुनाई देने की बात कही गई थी। बाद […] The post खार्ग आइलैंड के पास बड़ा हमला! अमेरिका ने ईरानी ऑयल टैंकर को बनाया निशाना, धमाकों से मचा हड़कंप first appeared on Sanjeevni Today .
Mumbai , 6 सितंबर . भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह वैश्विक घटनाक्रमों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़े और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं, जिसके चलते बाजार ... Read more
अमेरिकी हमले के बीच ईरान में फ्यूल टैंकर ब्लास्ट, 11 लोगों की मौत, कई घायल
ईरान में एक फ्यूल टैंकर ब्लास्ट होने की वजह से 11 लोगों की मौत हो गई है। युद्ध में घिरे ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 400 किमी दूर यह हादसा हुआ है। इसमें 7 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को बनाया निशाना
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी पुष्टि की. इनमें एक टैंकर खार्ग द्वीप के पास था. यह द्वीप ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात ...
संयुक्त राष्ट्र, 6 सितंबर . दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों और देशों के वास्तविक आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसे विश्व मानचित्र का समर्थन किया है, जो देशों और महाद्वीपों के असली आकार को बेहतर ढंग से दर्शाता है. India के ... Read more
ग्वालियर में पिटबुल, पाकिस्तानी बुली, रॉटविलर और जर्मन शेफर्ड जैसी आक्रामक नस्ल के कुत्तों को लेकर नगर निगम ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. ऐसे कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया है. बिना अनुमति या नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के साथ कुत्तों को जब्त कर शेल्टर होम भेजा जा सकता है.
अमेरिका की नर्स बनी सोशल मीडिया स्टार, नौकरी के साथ रील्स से भी बना रही पहचान
अमेरिका की नर्स बनी सोशल मीडिया स्टार, नौकरी के साथ रील्स से भी बना रही पहचान
अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्लेन क्रैश, 2 लोगों की हुई मौत, कैसे हुआ हादसा?
California Plane Crash:
'अमेरिकी सेना बच्चों की हत्यारी, उनका झूठा गौरव तोड़ा': हमले के बाद ईरान ने यूएस को लताड़ा, दे डाली धमकी
फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा नौसैनिक टकराव अब उस विस्फोटक मुहाने पर पहुंच गया है, जहां से किसी भी क्षण एक अनियंत्रित महायुद्ध भड़क सकता है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गश्त कर रहे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों के बाद वॉशिंगटन का रुख अभूतपूर्व रूप से आक्रामक हो चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्री (पेंटागन चीफ) पीट हेगसेथ ने तेहरान के शीर्ष नेतृत्व और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को सीधी और खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने किसी भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज, नाविक या रणनीतिक संपत्ति को छूने या नुकसान पहुंचाने की हिमाकत की, तो पेंटागन ईरान के समूचे वाणिज्यिक और सैन्य तेल बेड़े को समुद्र की तलहटी में डुबोने में एक सेकंड की भी देरी नहीं करेगा। हेगसेथ ने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि अमेरिकी सेना केवल रक्षात्मक रवैया नहीं अपनाएगी, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल तंत्र को पूरी तरह तार-तार कर देगी। पेंटागन से जारी इस तीखे बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब छद्म युद्ध के बजाए सीधे प्रहार की रणनीति पर उतर आया है।'एक जहाज पर हमला तो पूरा फ्लीट समुद्र की तलहटी में': पेंटागन ने तय किए जवाबी कार्रवाई के कड़े नियमअमेरिकी रक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के साथ एक आपातकालीन समीक्षा बैठक के बाद पीट हेगसेथ ने मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अमेरिका के 'रूल्स ऑफ एंगेजमेंट' (Rules of Engagement) को सार्वजनिक किया। हेगसेथ ने कहा कि वाशिंगटन दशकों से खाड़ी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही के लिए संयम बरतता रहा है, लेकिन तेहरान ने इस संयम को अमेरिका की कमजोरी समझने की भारी ऐतिहासिक भूल कर दी है। हेगसेथ ने तीखे लहजे में कहा, हम ईरान को बहुत स्पष्ट शब्दों में आगाह करना चाहते हैं—अगर आपने हमारे एक भी जहाज को निशाना बनाया या हमारे सैनिकों की जान जोखिम में डाली, तो हमारी प्रतिक्रिया आनुपातिक नहीं बल्कि विनाशकारी होगी। हम केवल आपकी मिसाइल बैटरियों को ही नष्ट नहीं करेंगे, बल्कि आपके उन सभी जहाजों, क्रूड ऑयल टैंकरों और रिफाइनरी हब्स को आग के गोलों में बदल देंगे जिनके दम पर आपका शासन चलता है। हमारे पास वह मारक क्षमता है कि हम कुछ ही घंटों में ईरान के पूरे 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) को समुद्र की गहराइयों में दफन कर सकते हैं। पेंटागन प्रमुख का यह बयान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा पहले ही नष्ट किए गए तीन ईरानी तेल टैंकरों (M/T Downy, M/T Stark 1 और M/T Kylo) की कार्रवाई के तुरंत बाद आया है, जिसने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका अब धमकियों से आगे बढ़कर सीधे एक्शन के मूड में है।ईरान की दुखती रग पर सीधा वार: 90% तेल निर्यात और शैडो नेटवर्क को खाक करने का अमेरिकी ब्लूप्रिंटपीट हेगसेथ द्वारा ईरानी तेल बेड़े को सीधे तौर पर निशाना बनाने की चेतावनी कोई सामान्य धमकी नहीं है, बल्कि यह ईरान के सबसे संवेदनशील आर्थिक केंद्र पर प्रहार करने की सुनियोजित रणनीति है। ईरान की अर्थव्यवस्था 90 प्रतिशत से अधिक अपने कच्चे तेल के निर्यात पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद ईरान अपने दर्जनों विशाल जहाजों और विदेशी झंडों तले चलने वाले 'घोस्ट या शैडो फ्लीट' के जरिए चीन और अन्य एशियाई देशों को प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल बेचता है। इसी तेल की काली कमाई से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट, परमाणु संवर्धन कार्यक्रम और हिजबुल्लाह, हूती व इराकी मिलिशिया जैसे छद्म संगठनों को आर्थिक व सैन्य मदद मुहैया कराते हैं।यदि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने खर्ग द्वीप (Kharg Island) के तटीय टर्मिनलों और गहरे समुद्र में मौजूद ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट करना शुरू कर दिया, तो ईरान का विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय ढांचा कुछ ही हफ्तों में ढह जाएगा। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर में सक्रिय ईरान से जुड़े सभी ज्ञात और गुप्त तेल टैंकरों की सटीक लोकेशन और सैटेलाइट कोऑर्डिनेट्स पहले ही चिन्हित कर लिए हैं। हेगसेथ के अल्टीमेटम का मतलब है कि अगला ईरानी मिसाइल परीक्षण सीधे तौर पर तेहरान के पूरे समुद्री व्यापार के खात्मे का कारण बन सकता है।हॉर्मुज में बारूदी तनाव: सेंटकॉम का एक्शन और आईआरजीसी के पलटवार की धमकियों से दहला खाड़ी क्षेत्रपीट हेगसेथ के इस बयान के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सैन्य हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के नेतृत्व में अमेरिकी 5वें नौसैनिक बेड़े ने फारस की खाड़ी के मुहाने पर अपनी गश्त कई गुना बढ़ा दी है। अमेरिकी गाइडेड-मिसाइल क्रूजर और परमाणु ऊर्जा से संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने अपने एयर डिफेंस राडार और इंटरसेप्टर मिसाइलों को हाई-अलर्ट पर तैनात कर रखा है। हवा में एफ-35 और एफ/ए-18 हॉर्नेट लड़ाकू विमान लगातार आसमान की निगरानी कर रहे हैं।दूसरी ओर, हेगसेथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसैनिक विंग ने भी अपने बयानों में आग उगलना शुरू कर दिया है। आईआरजीसी के कमांडरों ने दावा किया है कि यदि अमेरिका ने उनके तेल जहाजों पर हाथ डाला, तो वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को हमेशा के लिए बंद कर देंगे और इस क्षेत्र से किसी भी पश्चिमी देश या उनके सहयोगी अरब देशों का एक बैरल तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। ईरानी सेना ने तटीय इलाकों में अपनी भूमिगत 'मिसाइल सिटीज' (Underground Missile Cities) के दरवाजे खोल दिए हैं और सतह से समुद्र में मार करने वाली 'नूर' और 'कादिर' क्रूज मिसाइलों के लॉन्चरों को पोजिशन कर दिया है। दोनों पक्षों की इस बारूदी तनातनी ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया है जो किसी भी छोटी सी चिंगारी से फट सकता है।अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भूचाल: क्या वैश्विक युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुका है संघर्ष?पेंटागन की इस खुली चेतावनी और समुद्र में टैंकरों के जलाए जाने की खबरों ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों और ऊर्जा क्षेत्र में जबरदस्त हड़कंप मचा दिया है। वैश्विक स्तर पर कुल खपत होने वाले समुद्री कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा जिस हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, वहां युद्धपोतों और टैंकरों पर मिसाइल हमलों के खतरे ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के होश उड़ा दिए हैं। प्रमुख लॉजिस्टिक्स और टैंकर फर्मों ने फारस की खाड़ी में जाने वाले अपने जहाजों का वॉर-रिस्क इंश्योरेंस (War-Risk Insurance) कई गुना बढ़ा दिया है, जबकि कई जहाजों ने अपने रूट पूरी तरह डायवर्ट कर दिए हैं।कमोडिटी एक्सचेंजों पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें अनियंत्रित उछाल की ओर अग्रसर हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि अमेरिका ने हेगसेथ की चेतावनी के अनुसार ईरान के संपूर्ण तेल बेड़े पर निर्णायक हमला बोला और ईरान ने जवाबी कार्रवाई में हॉर्मुज में बारूदी सुरंगें (Naval Mines) बिछा दीं, तो तेल के दाम 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू सकते हैं। यह स्थिति न केवल मध्य पूर्व बल्कि यूरोप, अमेरिका और एशिया की तमाम बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भयानक मंदी और ऊर्जा संकट की आग में झोंक देगी। संयुक्त राष्ट्र और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देश पर्दे के पीछे से तनाव घटाने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन पीट हेगसेथ के इस ताजा अल्टीमेटम ने साफ कर दिया है कि वॉशिंगटन अब बातचीत की टेबल पर नहीं, बल्कि समंदर की लहरों पर अपनी शक्ति का अंतिम फैसला सुनाने के लिए तैयार खड़ा है।
पुतिन और अमेरिकी प्रतिनिधियों की अहम बैठक, संघर्ष के मूल कारणों को खत्म करने पर हुई चर्चा
पुतिन और अमेरिकी प्रतिनिधियों की अहम बैठक, संघर्ष के मूल कारणों को खत्म करने पर हुई चर्चा
अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरानी तेल टैंकर एमटी काइलो पर हमले का किया दावा, ओमान की खाड़ी में डूबा जहाज
अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरानी तेल टैंकर एमटी काइलो पर हमले का किया दावा, ओमान की खाड़ी में डूबा जहाज
मध्य पूर्व में महीनों से सुलग रही बारूद की चिंगारी आखिरकार एक विनाशकारी प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में तब्दील हो गई है। ईरान की एलीट सैन्य शाखा 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के एयरोस्पेस फोर्स ने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गश्त कर रहे अमेरिकी नौसेना के एक विशाल विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) और गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (Guided-Missile Destroyer) को सीधे तौर पर निशाना बनाते हुए कई शक्तिशाली एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों से भीषण हमला बोल दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया और स्टेट ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी (IRIB) द्वारा जारी एक आधिकारिक सैन्य बयान में दावा किया गया कि अमेरिकी युद्धपोत ईरानी व्यापारिक जहाजों को परेशान कर रहे थे और इस्लामी गणराज्य की नौसैनिक नाकेबंदी में सक्रिय रूप से शामिल थे। तेहरान ने दावा किया कि उसके मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी युद्धपोत भारी नुकसान के डर से संघर्ष क्षेत्र छोड़कर पीछे हटने को मजबूर हो गए। ईरान के इस अप्रत्याशित और सीधे हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि यह दशकों बाद ऐसा मौका है जब ईरानी सेना ने खुले तौर पर अमेरिकी नौसेना के शीर्ष जंगी जहाजों पर अपनी सबसे घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।अमेरिकी नौसेना का दावा: मिसाइलों को हवा में ही चकमा देकर बचे जंगी जहाज, कोई सैनिक हताहत नहींईरान के इस दुस्साहसिक हमले के तुरंत बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (Pentagon) और यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर ईरानी दावों को खारिज किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि क्षेत्रीय जलक्षेत्र में नियमित गश्त पर तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक को निशाना बनाकर ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। हालांकि, अमेरिकी युद्धपोतों पर तैनात अत्याधुनिक एजिस मिसाइल डिफेंस शील्ड (Aegis Missile Defense System) और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर्स की मदद से अमेरिकी जहाजों ने ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक चकमा दे दिया। पेंटागन ने स्पष्ट किया कि इस हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक को खरोंच तक नहीं आई है और न ही जहाजों को कोई संरचनात्मक नुकसान पहुंचा है। वाशिंगटन ने इस हमले को 'बिना किसी उकसावे के किया गया कायराना कृत्य' करार देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की कीमत तेहरान को बहुत भारी चुकानी पड़ेगी।अमेरिका का भीषण पलटवार: CENTCOM ने ईरान के 3 बड़े तेल टैंकर किए नष्ट, एडमिरल कूपर की सख्त चेतावनीईरानी हमले के चंद घंटों के भीतर ही अमेरिकी सेना ने ऐसा विध्वंसक पलटवार किया जिसने ईरानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के सीधे निर्देश पर अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने समन्वित हवाई हमले करते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े तीन विशाल कच्चे तेल के टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने सैटेलाइट और सटीक मिसाइल हमलों के जरिए खर्ग द्वीप (Kharg Island) के तटीय जलक्षेत्र में मौजूद कच्चे तेल के टैंकर 'एम/टी डाउनी' (M/T Downy) और जास्क (Jask) के पास 'एम/टी स्टार्क 1' (M/T Stark 1) को स्थायी रूप से पंगु (Permanently Disabled) बना दिया। इसके अलावा ओमान की खाड़ी में मौजूद तीसरे तेल वाहक पोत 'एम/टी काइलो' (M/T Kylo, जिसे नॉक्सन भी कहा जाता है) पर सटीक प्रहार कर उसे समुद्र की गहराइयों में डुबो दिया गया।अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस भीषण हमले का वीडियो फुटेज जारी करते हुए दुनिया को अपनी कार्रवाई के सबूत भी पेश किए। एडमिरल ब्रैड कूपर ने आईआरजीसी को सीधी और खुली चेतावनी देते हुए कहा, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को हमारा संदेश बिल्कुल साफ होना चाहिए—यदि आप हमारे दो जहाजों पर गोली चलाएंगे, तो हम आपके तीन जहाजों को नष्ट करके आपसे कहीं बड़ा आर्थिक हर्जाना वसूल करेंगे। हम अमेरिकी सेना की रक्षा करने में एक सेकंड की भी हिचकिचाहट नहीं दिखाएंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो हम ईरान के सीमित और असुरक्षित तेल बेड़े को पूरी तरह से खाक कर देंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ये तीनों टैंकर ईरान के उस बहु-अरब डॉलर के 'शैडो नेटवर्क' का हिस्सा थे, जिसकी कमाई से आईआरजीसी अपने छद्म गुटों और सैन्य अभियानों को फंड करता है।'हॉर्मुज स्ट्रेट' बना बारूदी अखाड़ा: जहाजों की आवाजाही ठप, कच्चे तेल के दामों में भूचालअमेरिका और ईरान के बीच समुद्र में छिड़े इस खूनी संघर्ष का केंद्र बिंदु रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) बन चुका है। दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस ताजा मिसाइल हमले और टैंकरों के विनाश के बाद हॉर्मुज से होकर गुजरने वाला वाणिज्यिक समुद्री यातायात ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक शिपिंग कंपनियों ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी से अपने विशाल तेल टैंकरों के मार्ग को पूरी तरह रोक दिया है या उन्हें अफ्रीका के लंबे चक्कर वाले रास्ते पर मोड़ दिया है। इस अभूतपूर्व नौसैनिक गतिरोध के चलते अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। ऊर्जा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि यह जलडमरूमध्य आगामी कुछ दिनों तक पूरी तरह बाधित रहा, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का नया तूफान आ जाएगा।तेहरान और वॉशिंगटन के बीच 'आंख के बदले आंख': ट्रंप के कड़े तेवर और IRGC की नई धमकियांइस सैन्य संकट ने दोनों देशों के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के बीच की तल्खी को चरम पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में स्पष्ट संकेत दिए थे कि ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को बख्शा नहीं जाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया बयानों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी सैन्य नियंत्रण का दावा करते हुए इसे बेहद सख्त चेतावनी के साथ रेखांकित किया है। दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खाड़ी के देशों और अंतरराष्ट्रीय पोतों को खुली धमकी जारी की है कि यदि कोई भी जहाज तथाकथित 'अनधिकृत जलमार्गों' से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों से निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने सऊदी अरब की 'बहरी' और यूएई की 'एडनॉक' से जुड़े 50 से अधिक तेल टैंकरों की सूची भी जारी की है, जिन्हें जब्त करने या नष्ट करने की चेतावनी दी गई है। तेहरान का स्पष्ट रुख है कि यदि अमेरिका उसके तेल निर्यात पर प्रतिबंध या नौसैनिक घेराबंदी लगाएगा, तो वह इस क्षेत्र से किसी भी देश का एक बूंद तेल बाहर नहीं जाने देगा।क्या तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा है मध्य पूर्व? अंतरराष्ट्रीय समुदाय में खलबलीसैन्य विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच शुरू हुआ यह 'टिट-फॉर-टैट' (जैसे को तैसा) का खेल अब अनियंत्रित चरण में प्रवेश कर चुका है। अब तक यह लड़ाई सीरिया, इराक या यमन के हूती विद्रोहियों जैसे छद्म गुटों (Proxies) के जरिए लड़ी जा रही थी, लेकिन अब दोनों देशों की नियमित सेनाएं सीधे तौर पर एक-दूसरे की रणनीतिक संपत्तियों पर भारी हथियारों से प्रहार कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और प्रमुख यूरोपीय शक्तियों ने तत्काल युद्धविराम और संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जिस तरह से अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी तेल संपत्तियों को निशाना बनाया है और ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल ब्रिगेड को हाई-अलर्ट पर रखा है, उससे बड़े पैमाने पर पूर्ण युद्ध की आशंका गहरा गई है। यदि ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों या क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों पर दोबारा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, तो पेंटागन ईरान की मुख्य भूमि पर स्थित मिसाइल साइटों, वायु रक्षा प्रणालियों और परमाणु प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर हवाई बमबारी शुरू कर सकता है। खाड़ी की जलराशि में तैरते बारूद के धुएं ने साफ कर दिया है कि दुनिया इस समय एक नए और अत्यंत विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी है।
ब्राजील-अमेरिका टैरिफ विवाद, राष्ट्रपति लूला ने कहा- यूएन में ट्रंप से मिलकर ‘पिक्स’ का बचाव करूंगा
साओ पाउलो, 6 सितंबर . ब्राजील के President लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने Saturday (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि वह अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली बातचीत में ब्राजील की डिजिटल भुगतान प्रणाली ‘पिक्स’ का बचाव करेंगे. अमेरिका ने ब्राजील के साथ चल रहे टैरिफ विवाद में इस प्लेटफॉर्म का भी जिक्र ... Read more
ब्राजील-अमेरिका टैरिफ विवाद, राष्ट्रपति लूला ने कहा- यूएन में ट्रंप से मिलकर 'पिक्स' का बचाव करूंगा
ब्राजील-अमेरिका टैरिफ विवाद, राष्ट्रपति लूला ने कहा- यूएन में ट्रंप से मिलकर 'पिक्स' का बचाव करूंगा
ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिकी हमला: धू-धू कर जलता रहा जहाज, CENTCOM ने जारी किया वीडियो; हेगसेथ ने दी खुली धमकी---Iranian Oil Tanker Hit by US: CENTCOM Releases Video as Pete Hegseth Warns Iran
40 डॉलर पर आ जाएंगी तेल की कीमतें, अमेरिकी मंत्री का बड़ा दावा
अमेरिका ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आने वाली है. ईरान के साथ जंग खत्म होते ही ये कीमतें 40 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाएंगी.
ईरान ने US वॉरशिप पर दागी मिसाइलें तो भड़का अमेरिका, बोला- डुबो देंगे सारे जहाज
IRGC ने दावा किया है कि उनकी मिसाइल स्ट्राइक में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद डरकर दोनों युद्धपोत उस इलाके से भागने पर मजबूर हो गए।
सर्वे में बड़ा खुलासा: अमेरिका में मुस्लिम आबादी और मस्जिदें बढ़ीं, फिर भी 9/11 की छाया क्यों नहीं हुई खत्म?---Perception of Muslims in America Remained Unchanged 25 Years After 9/11
होर्मुज में फिर छिड़ेगी जंग?: ईरान ने अमेरिकी विमानवाहक पोत पर मिसाइल हमले का किया दावा, यूएस ने क्या कहा?
मनजीत बेदी: भारत में पकड़ा गया अमेरिका का मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर, FBI कर रही वापसी की तैयारी; क्या है मामला?---FBI Working to Bring Most Wanted Fraudster Manjit Singh Bedi Back to US
Iran-America War Update: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध एक बार फिर बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और अमेरिकी नौसेना के डिस्ट्रॉयर पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी है। इस खतरनाख हमले से ईरान के आसपास के समुद्री इलाकों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव और बढ़ गया है। 'अल जजीरा' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने कहा कि दो अमेरिकी युद्धपोतों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे। ईरानी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल थे।ईरानी सेना ने दावा किया कि मिसाइल हमले से जहाजों को नुकसान पहुंचा और उसके बाद दोनों युद्धपोत उस इलाके से चले गए। अल जजीरा के हवाले से तस्नीमन्यूज एजेंसी ने IRGC के दावे की रिपोर्ट दी कि दोनों जहाज नुकसान पहुंचने और आगे के हमलों के डर से संघर्ष वाले इलाके से भागने को मजबूर हुए। ईरान का यह दावा उस समय आया है जब इस इलाके में सैन्य और कमर्शियल जहाजों के बीच हमलों का दौर चल रहा है, जो ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के बाद शुरू हुआ।IRGC ने और कड़े हमले की चेतावनी दीIRGC ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की पहले की चेतावनी का भी जिक्र किया, जिन्होंने कहा था, अगर आप हमारे दो जहाजों पर गोली चलाते हैं, तो हम और भी भारी आर्थिक कीमत वसूलेंगे। आपके तीन जहाजों को नष्ट कर देंगे। IRGC ने इस बयान का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि अगर ईरानी शिपिंग के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका और भी जोरदार जवाब दिया जा सकता है।अल जजीरा की रिपोर्ट मुताबिक, IRGC ने कहा, अगर अमेरिका अपनी दुश्मनी भरी और आक्रामक कार्रवाई जारी रखता है, तो अमेरिकी सरकार को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाओं से कड़े जवाब की उम्मीद करनी चाहिए। हम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं।अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जहाजों को निशाना बनायाईरान के ये ताजा दावे तीन ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के बाद आए हैं। अमेरिकी सेना ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमले के बाद उसकी सेना ने उन जहाजों पर हमला किया। न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बाद में कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तीन टैंकरों को निशाना बनाया, जिन्हें उसने अनधिकृत रास्तों पर चलने वाला बताया था।साथ ही तीन अन्य जहाजों को भी निशाना बनाया जिनके बारे में उसने आरोप लगाया कि वे अमेरिका से जुड़े थे। ईरानी सेना ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन ईरानी शिपिंग में दखल देना जारी रखता है, तो अमेरिकी सैन्य जहाजों पर हमले और भी गंभीर हो जाएंगे।अमेरिका का कहना है कि जहाज ईरानी हमलों से बच निकलेवहीं, अमेरिकी सेना नेदावा किया है कि इलाके में काम करते समय एक अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर ईरान के कई हमलों से बच निकले। 'एसोसिएटेड प्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस झड़प में कोई भी अमेरिकी कर्मी घायल नहीं हुआ। इसके बाद अमेरिका ने कहा कि ईरान के तीन तेल टैंकरों को बेकार या नष्ट कर दिया गया है। एडमिरल कूपर ने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन अमेरिकी सेना की रक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर ईरान के खुले में मौजूद तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा।पीएम मोदी ने की युद्ध खत्म करने की अपीलइस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से कहा कि भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से इतर पेजेश्कियान के साथ बैठक की। फरवरी में ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली द्विपक्षीय वार्ता थी।बैठक में PM मोदी ने ईरानी नेता से यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ व्यापार के दायरे को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहता है। पेजेश्कियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करके उन्हें युद्ध और खून-खराबे के रास्ते से हटाकर बातचीत और समझौते के रास्ते पर लौटने में मदद करें।विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चर्चा की और उभरती स्थिति पर अपने विचार साझा किए। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिये सुलझाया जाना चाहिए।प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कोशिशें जारी रखने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया। एक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ जैसे बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ मिलकर काम करने के भारत के इरादे को दोहराते हुए कहा कि उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान का भारत में स्वागत करने का इंतजार है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्लेन क्रैश में दो लोगों की मौत, दो लोग घायल
कैलिफोर्निया के उत्तर-पश्चिम फ्रेस्नो में एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
ईरान में शादी समारोह पर अमेरिका का ड्रोन हमला, देखें US TOP-10
ईरान में शादी समारोह पर अमेरिकी हमले के बाद तबाही की तस्वीरें सामने आई है. चश्मदीदों के मुताबिक मंगलवार को दो ड्रोन हमले हुए. इस हमले में तीन महिलाओं और दो बच्चों की मौत की खबर है. हालांकि अमेरिकी सेना ने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है. वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मामले में जांच की बात कही है.
ईरान ने अमेरिका के हमले का दिया जवाब, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर पर दागी मिसाइलें
अमेरिकी सेना द्वारा तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद अब IRGC ने जवाबी कार्रवाई की है। ईरान ने एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ईरान ने कहा कि हमले के डर से दोनों युद्धपोतों को संघर्ष वाले इलाके से भागने पर मजबूर होना पड़ा।
'नेवी पर हमला हुआ तो ईरानी तेल टैंकरों को डुबो देंगे', अमेरिका की धमकी
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान अमेरिकी जहाजों पर गोली चलाता है, तो हम उनके तेल टैंकरों को नष्ट कर देंगे और डुबो देंगे.
दैनिक भास्कर की सीरीज 'स्पाई फाइल्स' में आप पढ़ रहे हैं- 'ऑपरेशन हैट'। पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 1965 में भारत और अमेरिका ने चीन की जासूसी के लिए एक परमाणु उपकरण तैयार किया था। योजना थी इसे 25 हजार फीट ऊंचे नंदा देवी पर्वत पर लगाने की। जैसे ही टीम 23 हजार फीट पर पहुंची, भयंकर तूफान आ गया। आगे जाना मुमकिन नहीं था। वे परमाणु उपकरण को वहीं एक चट्टान से बांधकर नीचे आ गए। तय हुआ कि गर्मियों में दोबारा आकर इसे इंस्टॉल करेंगे। जब वे दोबारा पहुंचे, तो कुछ ऐसा हुआ, जिससे दुनिया में खलबली मच गई। आज भी लाखों लोगों के लिए उपकरण खतरा बना हुआ है। पूरी कहानी पार्ट-2 में... बात है 1 मई 1966 की। दिल्ली में भारत की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो का एक सेफ हाउस। बाहर एक बस आकर रुकी। उसमें राशन भरा हुआ था। जल्दी से 11 लोग सवार हुए और बस चल पड़ी। सुबह सूरज निकलने से पहले बस ऋषिकेश पहुंच चुकी थी। आगे का रास्ता पहाड़ी, संकरा और खतरों से भरा था। बस में बैठे लोग परेशान थे। तभी एक मिलिट्री ट्रक आकर रुका। चार-पांच जवान उतरे और फुर्ती से बस का सामान ट्रक पर लाद दिया। अब बस और ट्रक, दोनों ने रफ्तार पकड़ ली। 2 मई की शाम तक काफिला श्रीनगर पहुंच गया। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद, आगे का सफर शुरू हुआ। 3 मई की सुबह होते-होते टीम जोशीमठ पहुंच गई। ये वही टीम थी, जो नंदा देवी की चोटी पर फिर से जासूसी उपकरण लगाने जा रही थी। अगला पड़ाव था- 14 हजार फीट ऊंचा नंदा देवी बेस कैंप। जोशीमठ से 90 किलोमीटर का सफर। यहां से पैदल ही पहाड़ चढ़कर जाना था। बर्फीली हवाओं को चीरते हुए टीम धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगी। सांसें उखड़ रही थीं, दम घुटने लगा था। ठंड इतनी कि बर्फ में हाथ-पैर सुन्न पड़ने लगे। थककर बैठना, फिर हिम्मत जुटाकर उठना और आगे बढ़ना…यही सिलसिला चलता रहा। इसी दौरान, चीन ने फिर से झटका दिया। 14 मई को उसने दूसरा परमाणु परीक्षण कर डाला। खबर मिलते ही प्रधानमंत्री दफ्तर से लेकर खुफिया विंग तक हलचल मच गई। अफसरों के चेहरों पर झुंझलाहट साफ झलक रही थी। जैसे-तैसे 15 मई को टीम नंदा देवी बेस कैंप पहुंच गई। अगले 10 दिन मीटिंग और रणनीतियां बनाने में गुजर गए। फैसला हुआ- कैंप-4 पर सिर्फ 4 भारतीय पर्वतारोही जाएंगे, साथ में कुछ शेरपा और कुली होंगे। कोई अमेरिकी ऊपर नहीं जाएगा। कैंप-4 पर ही पिछले साल टीम उपकरण छोड़ आई थी। बेस कैंप से वह जगह करीब 10 हजार फीट ऊंची थी। 25 मई की सुबह टीम कैंप-4 के लिए चल पड़ी। बर्फीली हवाएं टीम का रास्ता रोक रही थीं। हर दिन टीम कुछ ऊपर चढ़ती, आराम करती और फिर आगे बढ़ती। इस तरह 6 दिन गुजर गए। 1 जून को टीम जैसे ही कैंप-4 पहुंची, बर्फीला तूफान आ गया। जबरदस्त धुंध छा गई। कुछ भी दिखना बंद हो गया। एक गलत कदम और सीधे 2 हजार फीट नीचे गहरी खाई। सब कुछ ठप पड़ गया। कुछ घंटे बाद तूफान हल्का पड़ा। टीम आगे बढ़ी। मलबे के बीच ढहा हुआ तंबू मिला। पास में ही गैस स्टोव, कुछ बर्तन और सूखा राशन बिखरा पड़ा था। एक अफसर मुड़ा और उस चट्टान की तरफ देखा, जहां उन्होंने जासूसी उपकरण छुपाया था। अफसर की सांसें गले में ही अटक गईं, वह उपकरण गायब था। ऐसा लग रहा था जैसे, किसी ने बर्फ की चट्टान को कुल्हाड़ी से काटकर उपकरण को निकाल लिया हो। तभी दूसरा अफसर वहां पहुंच गया। उसे रिसीवर वाला गत्ते का एक टूटा-फूटा डिब्बा मिला। बाकी बक्से और जनरेटर गायब थे। अफसरों ने किनारे से नीचे झांका। सौ फीट नीचे, मुड़े हुए तारों का एक गुच्छा दिखा। एक अफसर बोला- ‘लगता है परमाणु उपकरण नीचे चट्टान की तरफ फिसल गया है, चलो चलकर देखते हैं।’ अफसर ने एक चोटी से रस्सी बांधी और ढलान के किनारे से नीचे उतरने लगा। आधे रास्ते पहुंचते ही वह ठिठक गया। उसका पैर अंदर धंसने लगा। साथी अफसर चिल्लाया- ‘जल्दी निकलो वहां से, वर्ना हिमस्खलन शुरू हो जाएगा। हम सब बह जाएंगे।’ अफसर ने तेजी से अपना पैर खींचा। फिर रास्ता बदलकर नीचे पहुंचा। मलबे पर धीरे से कुल्हाड़ी मारी। परत के बीच से प्लास्टिक और धातु के टुकड़े बाहर निकले। ‘लगता है इसी में उपकरण दबा है…’ अफसर ने बड़ी उम्मीद से केबल पकड़ा और उसे झटका दिया। वह तुरंत अलग खींच आया। उसका सिरा कट चुका था। तार के तीन टुकड़े और मिले, लेकिन कोई भी 4 फीट से लंबा नहीं था। हताश अफसर फिर से ऊपर चढ़कर कैंप-4 तक पहुंचा। उसने दोबारा मलबे को कुल्हाड़ी से कुरेदा। उसे एक रेडियो सेट मिला। उस पर एक भी खरोंच नहीं थी। अफसरों के माथे की नसें तन गईं। सिर पर हाथ रखकर बैठ गए। ‘आखिर उपकरण गायब कहां हुआ… कहीं वह नीचे बहकर ग्लेशियर की तरफ तो नहीं चला गया…बेस कैंप में मौजूद अफसरों को इसकी जानकारी कैसे दें, अमेरिका वाले क्या सोचेंगे…’ ये सारी बातें उनके दिमाग में घूम रही थीं। भारी मन से उन्होंने बेस कैंप तक यह खबर पहुंचाई। वहां से यह खबर दिल्ली पहुंची। खुफिया अफसर आरएन काव और आईबी चीफ बीएन मलिक का चेहरा उतर गया। फौरन इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई। अमेरिकी दूतावास में दोनों देशों के खुफिया अफसर जुटे। तमाम सवालों, जवाबों और अटकलों के बीच तय हुआ कि एक बार फिर से टीम कैंप-4 की तरफ जाएगी। 3 जून को टीम फिर से उपकरण की खोज में ऊपर चढ़ने लगी। आखिरकार तीन पर्वतारोही कैंप-4 तक पहुंचे। फिर से खोजबीन शुरू हुई। हर दर्रे और मलबे को छान मारा, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। उन्होंने कैमरे निकाले और दर्जनों तस्वीरें खींच लीं। नीचे लौटकर सारा हाल बेस कैंप में मौजूद अफसरों से बयां कर दिया। तब तक अमेरिका से दो खास वैज्ञानिक आ चुके थे। शक की सुइयां भारत की तरफ भी घूम रही थीं। वे एक बार ऊपर जाकर अपनी आंखों से देखना चाहते थे। कुछ दिन बाद दोनों अफसर बड़ी मुश्किल से ऊपर पहुंच ही गए। हर जगह छान मारा, लेकिन हताशा के सिवा हाथ कुछ नहीं लगा। तभी अमेरिकी अफसरों को पांच हजार फीट नीचे बर्फीला और समतल मैदान दिखा। उन्होंने कहा- ‘उपकरण उसी तरफ गया होगा। चलो चलकर देखते हैं।’ भारतीय अफसर मुस्कुराया- ‘चलो तुम्हारा दिल रखने के लिए ये भी कर ही लेते हैं।’ अमेरिकी वैज्ञानिक नीचे पहुंचकर एक खास डिवाइस से चट्टान के टुकड़ों की जांच करने लगा। यह देखकर भारतीय अफसर बोल पड़ा- ‘ये क्या कर रहे हो?’ उसने जवाब दिया- ‘रेडियोएक्टिविटी जांच रहा हूं।’ ‘अगर रीडिंग नॉर्मल नहीं आई तो?’ भारतीय अफसर ने पूछा। अमेरिकी अफसर ने झुंझलाकर कहा- ‘कलकत्ता तक का पानी जहरीला हो चुका होगा। तुम्हारी पवित्र गंगा में डुबकी लगाने वाले बीमार पड़ जाएंगे।’ भारतीय अफसरों की सांसें अटक गईं… ‘जासूसी के चक्कर में हमने ये कौन सी मुसीबत ले ली। मिशन अमेरिका का और तबाही हमारी…’ लेकिन रीडिंग नॉर्मल आई… तब जाकर भारतीय अफसरों ने गहरी सांस ली। तब तक 11 जून आ चुका था। तय हुआ- अगले साल फिर से गर्मियों में आकर उपकरण की तलाश करेंगे। टीम नीचे तो लौट आई, लेकिन नया बखेड़ा खड़ा हो गया। चीन की जासूसी करने चले अमेरिका-भारत के अफसर अब एक दूसरे पर ही शक करने लगे। CIA के कुछ अफसर कहने लगे कि भारतीय टीम ने उपकरण गायब कर दिया है। वह जून में इसीलिए अकेले ऊपर गए थे। भारत अपने परमाणु कार्यक्रम में इसका इस्तेमाल करना चाहता है। ये बात भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दफ्तर से लेकर अमेरिकी हुकूमत तक पहुंची, पर राज की बात थी तो इसे राज ही रखने का फैसला लिया गया। आरोप-प्रत्यारोप लगते तो मिशन का भेद खुल जाता। भारत और अमेरिका के खुफिया अफसर फिर से मिले। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बात हुई। तय हुआ कि फिर से एक नया जासूसी उपकरण लगाया जाएगा। इस बार नंदा देवी की टॉप चोटी के बजाय अब नंदा देवी कोट पर। यह करीब 22 हजार 510 फीट ऊंचा था। 15 मार्च 1967 को इस मिशन की मंजूरी मिल गई। एक बार फिर, कोहली को टीम लीडर चुना गया। सारी तैयारियों के साथ चुपचाप 24 अप्रैल को टीम नंदा देवी कोट के लिए निकल पड़ी। तमाम मुश्किलों के बाद मई अंत तक जासूसी उपकरण को नंदा देवी कोट पर इंस्टॉल कर दिया गया। दोनों देशों के लिए यह बहुत बड़ी कामयाबी थी। कैप्टन कोहली को बधाइयां मिलने लगीं। जल्द ही उपकरण अपने मिशन को अंजाम भी देने लगा। भारत और अमेरिका के खुफिया विंग को चीन की हरकतों का पता चलने लगा। मालूम पड़ा कि वह बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च करने की योजना बना रहा था। चीन की उस हरकत से भी पर्दा उठा कि वह तिब्बत के पहाड़ों पर बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को तैनात कर रहा था। लेकिन 1968 की सर्दियों में उपकरण ने काम करना बंद कर दिया। एक बार फिर से CIA और IB टीम को धक्का लगा। फौरन अमेरिकी अफसरों ने भारत फोन घुमाया। गुहार लगाई कि नंदा देवी कोट पर एक टीम भेजी जाए। इंदिरा गांधी की सहमति मिल गई। 1968 की गर्मियों में एक छोटी टीम नंदा कोट भेजी गई। जब टीम चोटी पर पहुंची, तो पहले की तरह, उपकरण का कोई निशान नहीं था। उन्होंने कुछ फीट खुदाई की। फिर जो उन्होंने देखा वह हैरान करने वाला था- एक अर्ध-गोलाकार गुफा के बीच जनरेटर फंसा हुआ था। अब यह ठीक होने या दोबारा काम करने की हालत में नहीं था। बड़ी मुश्किल से नीचे उतारा गया और एक खास विमान से ओडिशा के चारबतिया एयरपोर्ट पर ले जाया गया। वहां उसे एक खास विमान में छुपा दिया गया। चारबतिया वहीं एयरबेस था, जिसे अमेरिका ने 1964 में चीन की जासूसी के लिए तैयार किया था, लेकिन 4 दिन बाद ही प्रधानमंत्री नेहरू का निधन हो गया और आगे चलकर अभियान ठंडा पड़ गया। साल बीते, दिन बीते। अमेरिका और भारत की सरकारें इस पर पर्दा डाले रखीं। फिर आई 12 अप्रैल 1978 की तारीख। अमेरिकी मैगजीन ‘आउटसाइड’ ने इसकी रिपोर्ट छाप दी। हंगामा होना ही था। अमेरिका से ज्यादा हंगामा भारत में हुआ। हंगामा इसलिए भी ज्यादा हुआ, क्योंकि तब देश में पहली बार गैर-कांग्रसी सरकार बनी थी। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे। सवाल उठने लगे कि नंदा देवी टॉप पर लगाने वाला उपकरण गायब कहां हुआ? सवाल के साथ चिंता भी थी। ऐसे समझिए कि नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम में जितना प्लूटोनियम इस्तेमाल हुआ था, उसका लगभग एक तिहाई हिस्सा उपकरण में मौजूद था। मोरारजी ने संसद में ना तो CIA का जिक्र किया ना ही अमेरिका का, लेकिन सारा दोष पिछली सरकार यानी कांग्रेस पर मढ़ दिया। 8 मई 1978 को अमेरिकी राष्ट्रपति कार्टर ने एक सीक्रेट लेटर भारत भेजा। उसमें पीएम मोरारजी देसाई के लिए लिखा था- ‘इस मुद्दे को आपने जिस तरह संभाला, उसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करना चाहता हूं। कुछ दिनों बाद मोरारजी देसाई वाइट हाउस अमेरिका पहुंचे। नीले रंग की शेरवानी जैकेट और सफेद टोपी पहने। ओवल ऑफिस में मुस्कुराते हुए राष्ट्रपति कार्टर के सामने बैठे हुए थे। उनकी ये तस्वीर काफी चर्चा में रही। आज उस घटना को दशकों बीत गए। नेता, पर्यावरण कार्यकर्ता और नंदा देवी के आसपास रहने वाले आज भी मांग कर रहे हैं कि उस डिवाइस को ढूंढकर बाहर निकाला जाए। क्योंकि, नंदा देवी की चोटी पर मौजूद ग्लेशियर से ऋषि गंगा और धौलीगंगा नदी तक पानी पहुंचता है। यह नदी आगे चलकर अलकनंदा और भागीरथी से मिलती है और फिर गंगा नदी बनती है, जो करोड़ों लोगों की लाइफ लाइन है। उत्तराखंड में जब भी कोई बड़ी बाढ़, एवलॉन्च या पहाड़ खिसकने जैसी घटना होती है, तो यह उपकरण खतरनाक साबित हो सकता है। ऑपरेशन हैट का पार्ट-1 भी पढ़िए : परमाणु उपकरण लगाकर चीन की जासूसी कर रहे थे भारत-अमेरिका:बर्फीले तूफान में दिखा हिम मानव, खतरनाक डिवाइस पहाड़ पर छोड़कर भाग आए; पार्ट-1 रफेरेंस : 1. Nanda Devi: A Journey to the Last Sanctuary : By Hugh Thomson. 2. Spies in the Himalayas: By M.S. Kohli and Kenneth J. Conboy. 3. Nuclear Bomb in Ganga : By RK Yadav
Ukraine War: शांति वार्ता के लिए Moscow में अमेरिकी दूतों से मिले पुतिन, कीव पर हमले 72 घंटे रोके
मॉस्को, पांच सितंबर (एपी) रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की रुकी हुई कोशिशों को फिर से शुरू करने के लिए, शनिवार को रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात की। इन दूतों की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों पक्षों की ओर से हवाई हमले तेज किए गए थे। पुतिन एवं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, दोनों ही बातचीत के दौरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हुए हैं। क्रेमलिन ने शनिवार को बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कीव पर हमले 72 घंटे रोकने का आदेश दिया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि शांति प्रक्रिया के तहत दोनों अमेरिकी दूत रविवार को पहली बार यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा भी करेंगे। मॉस्को में बैठक की शुरुआत में, पुतिन ने कुशनर और विटकॉफ से कहा कि वे ट्रंप तक उनकी शुभकामनाएं और आभार पहुंचाएं। पुतिन ने यूक्रेन की स्थिति को ‘‘आसान नहीं’’ बताया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर रूस पहुंचे हैं और रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण को समाप्त करने की रुकी हुई कोशिश को फिर से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास से कहा, ‘‘पुतिन ने आज आधी रात से शुरू होने वाले तीन दिनों तक कीव पर कोई हमला नहीं करने का आदेश दिया है।’’उन्होंने कहा कि यह फैसला विटकॉफ और कुशनर के यूक्रेन की राजधानी की प्रस्तावित यात्रा की तैयारियों से जुड़ा है। कीव ने कहा है कि दोनों अमेरिकी दूत रविवार को यूक्रेन की राजधानी का दौरा करेंगे। क्रेमलिन द्वारा पड़ोसी देश यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किए जाने के करीब साढ़े चार साल बाद भी संघर्ष जारी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिकी दूतों की यात्रा के दौरान यूक्रेन हवाई हमले रोक देगा और मॉस्को से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया था। अब पांचवें साल में चल रही लड़ाई खत्म करने की वॉशिंगटन की कोशिश धीमी पड़ गई है क्योंकि पिछले छह महीनों से अमेरिका का ध्यान ईरान के साथ जारी लड़ाई पर केंद्रित है। विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद कुशनर की मॉस्को की पिछली ज्ञात यात्रा जनवरी में हुई थी, जब उन्होंने क्रेमलिन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। दोनों ने उससे पहले कभी कीव की यात्रा नहीं की थी। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने बताया कि हवाई अड्डे पर रूसी दूत किरिल दिमित्रिएव ने इन दूतों से मुलाकात की। दिमित्रिएव ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के विमान से उतरने के दौरान उनसे मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों के साथ उन्होंने लिखा, ‘‘मॉस्को में शांति के दूतों का स्वागत है।’’शांति प्रयास रुकने के बीच रूस ने यूक्रेन के वायु रक्षा प्रणाली की कमी का फायदा उठाते हुए कीव और दूसरे शहरों पर हमले तेज कर दिए थे। शुक्रवार को, रूस के एक ड्रोन ने कीव में सरकार की सबसे अहम इमारतों में से एक पर हमला किया - यह यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (एसबीयू) का मुख्यालय था। एसबीयू उन एजेंसियों में से एक है जो रूस के अंदर घुसकर हमले करने का काम करती हैं। यूक्रेन ने लंबी दूरी तक मार करते हुए रूसी सैन्य ठिकानों, तेल रिफाइनरी और ई-कॉमर्स केंद्रों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों का उद्देश्य क्रेमलिन के युद्ध प्रयासों और अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के साथ-साथ आम नागरिकों को भी युद्ध के प्रभाव का एहसास कराना है। रूस और यूक्रेन के बीच हवाई युद्ध तेज हो गया है, क्योंकि दोनों देशों की सेनाएं 1,250 किलोमीटर लंबे मोर्चे पर आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रही हैं। रूस हाल में तेज़ी से उड़ने वाले, जेट-चालित ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है और कीव में हवाई हमले के सायरन की बार-बार बजने वाली आवाज अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है। शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने रात भर कीव और बोरिस्पिल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हमले किए, और इस हमले को अमेरिका की नियोजित यात्रा से जोड़ा। उन्होंने कहा, “साफ है कि हवाई अड्डों पर रूस के ये हमले, अमेरिका के यूक्रेन जाने के लिए एक विमान का इस्तेमाल करने की संभावना पर हो रही बातचीत और तैयारियों का जवाब हैं।”उन्होंने कहा, ‘‘हमने रूस के इस कदम का संज्ञान लिया है और अगले सप्ताह हम रूसी हवाई क्षेत्र के संबंध में उसी के अनुरूप अपनी कार्रवाई में बदलाव करेंगे, जो हमारे ड्रोन और आसमान में मौजूद मिसाइल के कारण खतरनाक हो गया है। बेशक, हमारी ओर से कूटनीति के लिए कोई खतरा नहीं है और न ही होगा।’’यूक्रेन के दक्षिणी निप्रॉपेट्रोव्स्क इलाके में एक औद्योगिकी केंद्र पर रूसी हमलों में पांच लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। स्थानीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेक्सांड्र हंझा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मारे गए लोग उसी जगह पर काम करने वाले कर्मचारी थे। रूस के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि उसकी सेना ने क्षेत्र में दो धातुकर्म संयंत्रों को निशाना बनाकर हमले किए। मंत्रालय ने इन संयंत्रों को ‘‘यूक्रेन के सैन्य उत्पादन के लिए धातु उत्पादों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता’’ बताया। इस बीच, यूक्रेन के कीव क्षेत्र में रातभर हुए रूसी हमले में दो और लोग घायल हो गए। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको ने यह जानकारी दी। बोरिस्पिल जिले में हमले के कारण लगी आग से नौ मंजिला एक आवासीय इमारत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। यूक्रेन की राज्य आपात सेवा के अनुसार, रूस की सेना ने दक्षिणी मायकोलाइव क्षेत्र में एक शॉपिंग सेंटर को रातभर ड्रोन से बार-बार निशाना बनाया। उसने कहा कि हमलों में दुकानों और अन्य व्यावसायिक परिसरों को नुकसान पहुंचा तथा आग लग गई। इस घटना में 72 वर्षीय एक व्यक्ति और 17 वर्षीय एक किशोरी घायल हो गई। आपात सेवा ने बताया कि घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे दलों को आगे के हमलों के खतरे के कारण कई बार सुरक्षित स्थानों पर पीछे हटना पड़ा। यूक्रेन की वायुसेना ने कहा कि रूस ने रोस्तोव और वोरोनेझ क्षेत्रों से बैलिस्टिक मिसाइल दागीं और रातभर में 167 हमलावर ड्रोन तैनात किए। इनमें शाहेद श्रेणी के ड्रोन शामिल थे, जिनमें से करीब आधे जेट इंजन से संचालित थे। यूक्रेन की वायु रक्षा ने 128 ड्रोन को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया। इस बीच, रूस के सीमावर्ती बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेन के हमलों में तीन लोग घायल हो गए, जिनमें 14 वर्षीय एक किशोरी भी शामिल है। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक अलग बयान में कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रात में यूक्रेन के 53 ड्रोन मार गिराए।
वेस्ट बैंक हिंसा: इस्राइल पर बरसे अमेरिकी राजदूत हकबी, सेटलर्स को आतंकवादी बताया; फलस्तीनी जनता पर रूख क्या?- US delivers blunt message to Israel over West Bank violence; Ambassador Huckabee calls settlers 'terrorists' and issues warning.
Panipat News: अमेरिका भेजने के नाम पर तीन लोगों से 1.52 करोड़ की ठगी
अमेरिका भेजने के नाम पर तीन लोगों से 1.52 करोड़ की ठगी
'भारत-अमेरिका संबंध इस वक्त ऐतिहासिक...', US राजदूत सर्जियो गोर का बयान
भारत और अमेरिका के रिश्ते मौजूदा समय में अपने सबसे मजबूत और ऐतिहासिक दौर से गुजर रहे हैं. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों पर खुलकर चर्चा की. उन्होंने कहा कि आज के समय में भारत और अमेरिका के बीच का भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है. राजदूत सर्जियो गौर ने बताया कि नई दिल्ली के अलावा उन्होंने मुंबई, बैंगलोर और हैदराबाद जैसे शहरों का दौरा किया है, जहां व्यापार, अंतरिक्ष, सैन्य अभ्यास और तकनीक के क्षेत्रों में असीमित संभावनाएं मौजूद हैं.
बेंगलुरु, 5 सितंबर (आईएएनएस)। ग्लोबल चेस लीग (जीसीएल) के चौथे सीजन की शुरुआत शनिवार से बेंगलुरु में हुई। पहले ही दिन मौजूदा चैंपियन अल्पाइन एपीएल पाइपर्स ने कड़े मुकाबले में चेक मुंबा मास्टर्स को 10-8 से हराकर जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की।
अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले के बाद US सेना का एक्शन, ईरान के 3 तेल टैंकरों पर अटैक
अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया है, जिसमें दो टैंकर पूरी तरह नष्ट हो गए और तीसरे को भी नुकसान पहुंचा का दावा किया है. अमेरिका सेना का कहा है कि ये हमला अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर मिसाइल हमलों के जवाब में किया गया.
भारत दो साल में मेट्रो नेटवर्क की लंबाई में अमेरिका को पीछे छोड़ देगा: मनोहर लाल
New Delhi, 5 सितंबर . केंद्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने Saturday को कहा कि India अगले दो वर्षों में मेट्रो रेल नेटवर्क की लंबाई के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है. इंदौर में विस्तारित मेट्रो रेल सेवा का उद्घाटन करने के बाद मंत्री ने ... Read more
अमेरिका में कार क्यों है इतनी जरूरी? भारतीय महिला ने Video में बताई असली वजह
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रूस-यूक्रेन जंग में 72 घंटे का ब्रेक, अमेरिकी दूतों के दौरे के बीच ऐलान
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के मॉस्को दौरे के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 72 घंटे के लिए कीव पर हमले रोकने का ऐलान किया है.
बदल जाएगा दुनिया का नक्शा! UN प्रस्ताव पर अकेला पड़ा अमेरिका, पूरी दुनिया एक तरफ
equal earth projection UNGA: दुनिया को देखने और भूगोल को समझने के तरीके में एक ऐतिहासिक बदलाव आने जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने शुक्रवार को एक नए विश्व मानचित्र 'इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन' को अपनाने के पक्ष में मतदान किया है। ...
ईरान पर अमेरिका का सबसे खतरनाक वार! टैंकर पर दागी मिसाइल, खार्ग आइलैंड में धमाका
Iran US War:
नेपाल में बाढ़ का कोहराम: अमेरिकी सांसदों ने Marco Rubio से DART Team और राहत पैकेज की मांग की
अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से आग्रह किया कि वे बाढ़ से प्रभावित नेपाल में अमेरिकी राहत और खोज-बचाव कार्यों को तेज़ करें। इसमें 'डिज़ास्टर असिस्टेंस रिस्पॉन्स टीम' (DART) को तैनात करना, अतिरिक्त मानवीय सहायता देना और बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण में मदद की योजना बनाना शामिल है, क्योंकि इस आपदा में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रुबियो को लिखे एक पत्र में, सांसदों ने अमेरिकी विदेश विभाग से आग्रह किया कि वे चल रहे खोज-बचाव कार्यों में मदद के लिए हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल करें और अमेरिकी नागरिकों तथा इस भयानक बाढ़ से प्रभावित अन्य लोगों की सुरक्षा और रिकवरी सुनिश्चित करें। सांसदों ने पत्र में कहा, हम विदेश विभाग से आग्रह करते हैं कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद चल रहे खोज-बचाव कार्यों में मदद के लिए हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल किया जाए और अमेरिकी नागरिकों तथा इस आपदा से प्रभावित अन्य लोगों की सुरक्षा और रिकवरी सुनिश्चित की जाए। यह अपील ऐसे समय में की गई है जब नेपाल बाढ़ से हुई भारी तबाही से जूझ रहा है। 'नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' (NDRRMA) की ओर से जारी अपडेट के अनुसार, शुक्रवार शाम 6:30 बजे तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,294 हो गई थी और खोज टीमें कई प्रभावित ज़िलों से शव बरामद कर रही थीं। NDRRMA के अपडेट के अनुसार, सबसे ज़्यादा मौतें चितवन में (359) हुईं, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (221), नवलपरासी वेस्ट (212), नुवाकोट (184) और रसुवा (140) का नंबर आता है। अब तक 96 शव परिवारों को सौंपे जा चुके हैं। इसे भी पढ़ें: Nepal Flood Rescue: भोटेकोशी तबाही के 10 दिन बाद Upper Trishuli Tunnel से विदेशी नागरिक का चमत्कारिक रेस्क्यू NDRRMA ने बताया कि ज़मीन और हवा से चलाए गए जॉइंट ऑपरेशन के ज़रिए 13,000 से ज़्यादा लोगों को बचाया गया है। इस बचाव कार्य में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के 21,421 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। सांसदों ने खास तौर पर बाढ़ से प्रभावित इलाकों में 'डिज़ास्टर असिस्टेंस रिस्पॉन्स टीम' (DART) तैनात करने की मांग की, ताकि खोज, बचाव, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल ऑपरेशन में मदद मिल सके। उन्होंने कहा, DART तेज़ी से काम करने वाली यूनिट्स हैं जो आपदा प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल सेवाओं में मदद करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा का पैमाना इतना बड़ा है कि DART को जितनी जल्दी हो सके तैनात किया जाना चाहिए। उन्होंने वॉशिंगटन से यह भी अपील की कि लापता लोगों का पता लगाने और बचाव टीमों को रियल-टाइम जानकारी देने के लिए US की तकनीकी क्षमताओं का ज़्यादा इस्तेमाल किया जाए, जिसमें ज़्यादा ऊंचाई पर काम करने वाले साधन, थर्मल और इन्फ्रारेड ड्रोन, सैटेलाइट इमेजिंग और हवाई निगरानी के दूसरे उपकरण शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: Nepal PM Balendra Shah संयुक्त राष्ट्र में उठाएंगे बाढ़ नुकसान और जलवायु परिवर्तन का मुद्दा कानून बनाने वालों ने कहा कि स्टेट डिपार्टमेंट को नेशनल जियोस्पेशियल-इंटेलिजेंस एजेंसी और अमेरिकी रक्षा विभाग की एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि जियोस्पेशियल और एरियल तस्वीरें सुरक्षित रूप से फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स, मानवीय संगठनों और स्थानीय अधिकारियों के साथ शेयर की जा सकें। उन्होंने कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियों के साथ तालमेल बिठाने और लापता लोगों का पता लगाने के लिए फ़ोन-लोकेशन डेटा का इस्तेमाल करने की कोशिशों पर भी ज़ोर दिया। पत्र में कहा गया है कि हज़ारों लोगों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है। NDRRMA के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, लापता लोगों की संख्या लगभग 5,053 है, जिनमें रसुवा में 2,130, नुवाकोट में 2,340 और 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि इस संख्या में ऐसी अज्ञात लाशें भी शामिल हो सकती हैं जिन्हें पहले ही बरामद किया जा चुका है।
रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स ने क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से बताया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित यात्रा से पहले, शनिवार से यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमले तीन दिन के लिए रोकने का आदेश दिया है। पेस्कोव ने TASS समाचार एजेंसी को बताया कि पुतिन की शनिवार को अमेरिका के विशेष प्रतिनिधियों स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात होनी थी। इसे भी पढ़ें: भारत तैयार है...यूक्रेन पहुंचकर जयशंकर ने किया ऐसा धमाका, रूस-अमेरिका दोनों हो जाएंगे हैरान ज़ेलेंस्की का कहना है कि रूस ने यूक्रेन के एयरपोर्ट्स पर हमला किया यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने पहले कहा था कि अमेरिकी दूतों के संभावित दौरे से ठीक पहले रूस ने कीव और उसके पास के शहर बोरिस्पिल के एयरपोर्ट्स पर हमला किया। उन्होंने टेलीग्राम ऐप पर कहा साफ़ है कि एयरपोर्ट्स पर रूस के ये हमले उस बातचीत और तैयारी का जवाब हैं, जिसमें अमेरिकी पक्ष यूक्रेन की यात्रा के लिए विमान का इस्तेमाल करके कीव एयरपोर्ट या बोरिस्पिल एयरपोर्ट पर उतरने पर विचार कर रहा था। अमेरिकी कूटनीति के जवाब में रूस-ईरान के शाहिद (ड्रोन) का इस्तेमाल किया गया। फरवरी 2022 में रूस के हमले के बाद से यूक्रेन ने अपना एयरस्पेस बंद रखा है। हालांकि, ज़ेलेंस्की ने कहा कि अधिकारियों ने रविवार को कीव के संभावित दौरे के लिए अमेरिकी शांति वार्ताकारों के विमान से यात्रा करने की संभावना पर चर्चा की थी। इसे भी पढ़ें: Ukraine के Drone Attacks से असुरक्षित हुआ Russian Airspace, Zelenskyy की चेतावनी यूक्रेन शांति योजना पर चर्चा के लिए अमेरिकी दूत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उनके विशेष दूत, स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर, रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराने की कोशिश में विदेश यात्रा कर रहे हैं। यह कदम वॉशिंगटन की ओर से यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध के बाद के सबसे घातक संघर्ष में आए राजनयिक गतिरोध को दूर करने की एक कोशिश है। ईरान के साथ वॉशिंगटन के तनाव के बीच शांति वार्ता रुकी हुई है, क्योंकि रूस और यूक्रेन ने भी लंबी दूरी के हमले तेज़ कर दिए हैं, जिससे संघर्ष शुरू होने के बाद से आम नागरिकों के हताहत होने की संख्या सबसे ज़्यादा हो गई है। यह नई राजनयिक पहल ऐसे समय में की जा रही है जब रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ख़िलाफ़ लंबी दूरी की मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए हैं।
AI से बनाई भारत की 'गंदी' तस्वीर? अमेरिकी महिला बोलीं- ये भारत नहीं
सोशल मीडिया पर भारत की ऐसी तस्वीरें और वीडियो अक्सर वायरल होते हैं, जिनमें देश को गंदगी, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार से जोड़कर दिखाया जाता है, लेकिन एक अमेरिकी महिला ने ऐसे वीडियो की पोल खोल दी है.
ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप के पास शनिवार को कई धमाकों की आवाज सुनाई देने के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरानी मीडिया में दावा किया गया कि द्वीप के पास मौजूद एक ईरानी तेल टैंकर को अमेरिकी मिसाइलों से निशाना बनाया गया। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों […] The post खाड़ी में फिर बढ़ा तनाव! खार्ग द्वीप के पास ईरानी ऑयल टैंकर पर अमेरिकी हमले की खबर, धमाकों से मचा हड़कंप first appeared on Sanjeevni Today .
खार्ग द्वीप के पास ईरानी तेल टैंकर पर हमला: तेहरान का अमेरिका पर आरोप, बढ़ा तनाव
ईरान के प्रमुख तेल टर्मिनल खार्ग द्वीप के आसपास शनिवार को कई धमाकों की आवाज सुनी गई। ईरान की मीडिया ने इसकी जानकारी दी। हालांकि धमाकों के स्रोत की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।
खार्ग द्वीप के पास ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिकी मिसाइलों का दावा, खाड़ी में फिर बढ़ा तनाव
वॉशिंगटन डीसी/तेहरान, 05 सितंबर2026 । ईरान के रणनीतिक खार्ग द्वीप के पास एक ईरानी तेल टैंकर को अमेरिकी मिसाइलों से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, टैंकर पर चार अमेरिकी मिसाइलें दागी गईं। घटना को लेकर अभी अमेरिका की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं […] The post खार्ग द्वीप के पास ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिकी मिसाइलों का दावा, खाड़ी में फिर बढ़ा तनाव appeared first on Rashtriya Ujala .
ईरान के साथ तनाव के बीच, 5,000 अमेरिकी सैनिक USS अब्राहम लिंकन से थाईलैंड पहुँचे
थाईलैंड के पटाया शहर में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS अब्राहम लिंकन’ से लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिक पहुँचे हैं। समुद्र में 286 दिन बिताने के बाद, वे यहाँ अपने 5 दिन के प्रवास के दौरान मनोरंजन और खरीदारी में व्यस्त हैं। ब्रिटिश अखबार ‘द गार्डियन’ के अनुसार, थाईलैंड पहुँचने के बाद कई अमेरिकी सैनिक शहर में […] The post ईरान के साथ तनाव के बीच, 5,000 अमेरिकी सैनिक USS अब्राहम लिंकन से थाईलैंड पहुँचे appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
आरोपी यात्री यहीं नहीं रूका उसने क्रू मेंबर पर नस्लभेदी और समलैंगिक विरोधी टिप्पणियां कीं। जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
बॉक्स ब्रीदिंग क्या है जिसे अमेरिकी सील कमांडो भी स्ट्रेस कम करने के लिए आजमाते हैं
हमने एक्सपर्ट्स से बात कर यह जानने की कोशिश की है कि सांस लेने की जिस तकनीक को आर्मी और इन्फ्लुएंसर्स तक अपनाते हैं, वह कैसे काम करती है.
अमेरिका में 6 लाख डॉलर के कथित फ्रॉड का आरोपी पंजाब में गिरफ्तार
जालंधर, 05 सितंबर2026 । पंजाब के जालंधर में पुलिस ने अमेरिका में करीब 6 लाख डॉलर की कथित धोखाधड़ी के मामले में वांछित मंजीत सिंह बेदी को गिरफ्तार किया है। पंजाब पुलिस के मुताबिक, बेदी अमेरिकी जांच एजेंसी FBI की वांटेड फ्रॉडस्टर्स सूची में शामिल था। पुलिस ने विशेष सूचना के आधार पर उसकी गतिविधियों […] The post अमेरिका में 6 लाख डॉलर के कथित फ्रॉड का आरोपी पंजाब में गिरफ्तार appeared first on Rashtriya Ujala .
छोटे दिखेंगे अमेरिका और यूरोप, अफ्रीका दिखेगा विशाल! UN ने बदला वर्ल्ड मैप, भारत पर क्या होगा असर?
World New Map:
'भारत-US रिश्तों में स्थिरता की वजह मोदी' बोले अमेरिकी राजदूत सर्जियो
भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बड़ा बयान दिया है. गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध इस वक्त ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं- देखिए आजतक से अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर खास बातचीत.
ईरान के ऑयल टैंकर पर अमेरिकी सेना का मिसाइल अटैक! खार्ग द्वीप के पास जोरदार धमाका
ईरान के खार्ग द्वीप के पास शनिवार को धमाकों की आवाजें सुनी गईं. स्थानीय सूत्रों के हवाले से ईरानी टैंकर को अमेरिकी मिसाइल से निशाना बनाए जाने की अपुष्ट रिपोर्ट है. हालांकि, धमाकों की वजह की पुष्टि नहीं हुई है और ईरानी अधिकारियों ने तत्काल कोई बयान नहीं दिया.
US-Iran War: शादी के जश्न के बीच अमेरिकी हमला, प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई आपबीती
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अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर
यूएस ग्रीन कार्ड को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और बुरी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी पूरी तरह 'अनअवेलेबल' हो चुकी है।अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर?अमेरिका में सालों से परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और उच्च कुशल कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) और आव्रजन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित दूसरी श्रेणी यानी ईबी-2 (EB-2 - Employment-Based Second Preference) कैटेगरी को फिलहाल पूरी तरह से 'अनअवेलेबल' (Unavailable) यानी अनुपलब्ध घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति का मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए इस श्रेणी के तहत तय किए गए कोटे के सारे वीजा पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी दूतावास या आव्रजन कार्यालय इस कैटेगरी में अब अगले आदेश या नए वित्त वर्ष के शुरू होने तक किसी भी नए ग्रीन कार्ड या अप्रवासन वीजा को जारी या स्वीकृत नहीं कर सकते हैं। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वर्षों से लंबित पेंडिंग फाइलों और भारी-भरकम बैकलॉग के बीच इस प्रकार अचानक श्रेणी का बंद होना उनके सपनों पर एक बहुत बड़ा विराम लगाता हुआ नजर आ रहा है।ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी के पूरी तरह से अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह क्या सामने आई है?इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कैटेगरी के अचानक बंद होने और अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी कानूनों के तहत तय की गई वार्षिक सीमा और देश-वार कोटा प्रणाली (Per-Country Ceiling) है। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, हर साल रोजगार-आधारित जितने भी ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, उनमें से किसी एक देश के नागरिकों को कुल कोटे का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। भारत जैसे विशाल देश से एडवांस्ड डिग्री धारकों और विशेष योग्यताओं वाले प्रोफेशनल्स की संख्या और आवेदन इतने ज्यादा हैं कि यह तयशुदा कोटा निर्धारित समय से बहुत पहले ही पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इस वर्ष भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही भारत के कोटे के सारे ईबी-2 वीजा नंबर पूरी तरह से एग्जॉस्ट यानी समाप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, अन्य देशों द्वारा अप्रयुक्त रहने वाले वीजा नंबरों का लाभ भी इस बार समय पर नहीं मिल पाने के कारण अमेरिकी प्रशासन को मजबूरन इस कैटेगरी को पूरी तरह से बंद या अनअवेलेबल करना पड़ा है, जिससे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, एच-1बी (H-1B) धारकों और उनके परिवारों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय नागरिकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए यह स्थिति भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता लेकर आई है। जो प्रोफेशनल्स अपनी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में थे, उनकी फाइलें अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई हैं और तब तक आगे नहीं बढ़ सकतीं जब तक कि नया कोटा शुरू नहीं होता। हालांकि आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस स्थिति के बावजूद यूएसिसिस (USCIS) द्वारा फॉर्म आई-485 (Adjustment of Status) की कुछ श्रेणियों के आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर तकनीकी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन अंतिम अप्रूवल के लिए लंबा इंतजार करना ही होगा। इस लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता के कारण कई कुशल भारतीय कर्मचारी अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं, क्योंकि ग्रीन कार्ड मिलने में लगने वाला यह बेहिसाब समय कई दशकों तक लंबा खींचता जा रहा है।इस गंभीर बैकलॉग और समस्या से निपटने के लिए आगे क्या उम्मीदें बची हैं?इस बड़ी प्रशासनिक रोक के बीच भारतीय प्रवासियों और नीति विश्लेषकों की निगाहें अब पूरी तरह से नए वित्त वर्ष और अमेरिकी संसद में होने वाले विधायी सुधारों पर टिकी हुई हैं। चूंकि हर साल 1 अक्टूबर को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही वार्षिक वीजा सीमाओं और कोटे का नया आवंटन दोबारा रिसेट होता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि तब जाकर इस कैटेगरी में कुछ राहत मिल सकती है और कट-ऑफ डेट्स आगे बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, आव्रजन सुधारों की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक अमेरिका देश-वार लगने वाली इस 7 प्रतिशत की सीमा को समाप्त नहीं करता या ग्रीन कार्ड की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक भारतीय प्रोफेशनल्स को इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। अमेरिकी श्रम बाजार में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में बुनियादी बदलाव कितनी बड़ी और तत्काल आवश्यकता बन चुके हैं।
खर्ग द्वीप के पास बड़ा हमला, अमेरिका ने तबाह कर दिया ईरान का टैंकर - Hindustan
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर इन दिनों एक ऐसा हैरान करने वाला और खतरनाक भू-राजनीतिक भूचाल आया है जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया खुलासों के अनुसार, पश्चिमी देशों विशेषकर अमेरिका की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शह पर यूक्रेन अब यूरोपीय सीमाओं से निकलकर सीधे एशिया के म्यांमार में एक गुप्त प्रॉक्सी वॉर (परोक्ष युद्ध) को हवा दे रहा है। म्यांमार वर्तमान में एक बेहद गंभीर आंतरिक गृहयुद्ध और राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है, जहाँ देश की सैन्य सरकार (जुंटा) के खिलाफ कई विद्रोही संगठन armed struggle चला रहे हैं। विश्लेषकों का दावा है कि यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों और सैन्य सलाहकारों ने गुप्त रूप से म्यांमार के कुछ विद्रोही गुटों को आधुनिक ड्रोन तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण और सामरिक हथियार उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है ताकि वहां की सरकार को अस्थिर किया जा सके। इस परोक्ष युद्ध का मुख्य भू-राजनीतिक उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन और उसके करीबी सहयोगियों की रणनीतिक बढ़त को कमजोर करना है, क्योंकि म्यांमार इस क्षेत्र में बीजिंग के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील गलियारा माना जाता है। जब यूरोप में खुद रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहा यूक्रेन एशिया के इस संघर्ष में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करता है, तो यह पूरी दुनिया को एक तीसरे विश्व युद्ध या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की खतरनाक आग में झोंकने की पूरी क्षमता रखता है।म्यांमार के आंतरिक गृहयुद्ध में विदेशी ताकतों और यूक्रेन की इस खतरनाक दखलंदाजी के पीछे असली भू-राजनीतिक मकसद क्या है?म्यांमार लंबे समय से लोकतांत्रिक संकट, जातीय संघर्षों और सैन्य शासन के कुचक्र में फंसा हुआ है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसके रणनीतिक चरित्र को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। पश्चिमी महाशक्तियों और विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की यह सोची-समझी रणनीति रही है कि वे दुनिया के उन सभी अहम भू-भागों पर अपना दबाव बनाए रखें जहाँ उनके विरोधी यानी चीन और रूस का प्रभाव ज्यादा है। म्यांमार बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर स्थित एक ऐसा सामरिक देश है जहाँ से चीन अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और भारत-मियांमार-थैailand राजमार्ग जैसी परियोजनाओं को संचालित कर रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देश सीधे तौर पर चीन से टकराने से बचते हुए यूक्रेन जैसे मोहरों के जरिए ऐसे देशों में आंतरिक अशांति और प्रॉक्सी वॉर को हवा दे रहे हैं ताकि चीनी हितों को गहरी चोट पहुंचाई जा सके। यूक्रेन जो खुद हथियारों, पैसों और पश्चिमी मदद के लिए तरस रहा है, उसका म्यांमार के विद्रोहियों को सैन्य सहायता देना इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह खेल पर्दे के पीछे बैठे किसी बहुत बड़े वैश्विक खिलाड़ी के इशारे पर खेला जा रहा है। इस तरह के छद्म युद्धों से न केवल म्यांमार की संप्रभुता खतरे में पड़ रही है, बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया का पूरा सुरक्षा ढांचा भी भारी अस्थिरता और अराजकता की ओर धकेला जा रहा है।इस म्यांमार-यूक्रेन प्रॉक्सी संघर्ष की आंच से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्तर-पूर्व राज्यों पर क्या गंभीर असर पड़ सकता है?दिल्ली में बैठे हमारे देश के रक्षा रणनीतिकारों और नीति निर्माताओं के लिए म्यांमार के घटनाक्रम में यूक्रेन की यह घुसपैठ गहरी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि भारत की सीमाएं म्यांमार के साथ सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। भारत के पूर्वोत्तर राज्य—जैसे मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश—अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण म्यांमार के घटनाक्रम से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यदि म्यांमार में विदेशी ताकतों के इशारे पर प्रॉक्सी वॉर और गृहयुद्ध की आग और अधिक भड़कती है, तो वहाँ के उग्रवादी संगठन और विद्रोही गुट इस अराजकता का फायदा उठाकर भारतीय सीमा के भीतर हथियारों की तस्करी, ड्रग्स की अवैध सप्लाई और शरणार्थियों की घुसपैठ को बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, भारत की कई महत्वपूर्ण सामरिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं जैसे 'कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट' म्यांमार के ही रास्ते म्यांमार के सितवे बंदरगाह को भारत से जोड़ती हैं, जो हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) की रीढ़ हैं। यदि म्यांमार पूरी तरह से विदेशी शक्तियों का अखाड़ा बन जाता है, तो भारत के लिए अपनी सीमाओं की सुरक्षा और इन सामरिक परियोजनाओं को बचाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगा, जिसके चलते भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद पैनी नजर रखनी पड़ रही है।इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका-चीन के इस परोक्ष संघर्ष के बीच भारत को क्यों रहना होगा अत्यधिक सतर्क?वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दुनिया की महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, और म्यांमार इस महान खेल का एक प्रमुख प्यादा बनता जा रहा है। अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी हर हाल में यह चाहते हैं कि म्यांमार और बंगाल की खाड़ी के इलाके में चीन और रूस का प्रभाव कम हो, जबकि चीन इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। इस महाशक्तिशाली संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति हमेशा से 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की रही है, जिसके तहत भारत किसी भी गुट में शामिल हुए बिना अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है। हालांकि, जब यूक्रेन जैसे यूरोपीय देश प्रॉक्सी वॉर के जरिए हमारे पड़ोसी देश की जमीन पर अपनी चालें चलने लगते हैं, तो भारत के लिए तटस्थ रहना और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि भारत को अपनी खुफिया एजेंसियों (RAW और IB) को और अधिक सक्रिय करना होगा ताकि म्यांमार के भीतर चल रही इन गुप्त विदेशी साजिशों की हर गतिविधि की समय रहते सटीक जानकारी मिल सके। यदि भारत इस खतरनाक भू-राजनीतिक चाल से सतर्क नहीं रहता है, तो यह आग हमारे अपने घर की दहलीज तक पहुंच सकती है, जिससे हमारी आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभुत्व को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।
Sergio Gor: भारत-अमेरिका रिश्तों पर बोले सर्जियो गोर, ‘ट्रंप की प्राथमिकता में पीएम मोदी’
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों से कई अन्य देश असहज या ईर्ष्यालु हैं।
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दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में मर्केटर मैप के खिलाफ प्रस्ताव पास; अमेरिका ने किया विरोध
इस पहल का उद्देश्य ऐसे विश्व मानचित्र के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार धरती पर उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात के ज्यादा करीब दिखाई दे। प्रस्ताव अफ्रीकी देशों की ओर से आगे बढ़ाया गया।
अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और अदालत के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है।
दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी: संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के साथ खड़ा हुआ भारत; अमेरिका ने जताया विरोध--UNGA Resolution on World Map: India Votes in Favour of More Accurate Global Representation
ईरान अमेरिका युद्ध: परमाणु पहाड़ पर ट्रंप करेंगे हमला? जानें क्या है पिकैक्स माउंटेन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को एक बार फिर बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान के पिकैक्स माउंटेन पर बहुत जल्द हमला कर सकता है। तो आखिर क्यों ट्रंप के इस पहाड़ से है खतरा
IQVIA MAT जुलाई 2026 के डेटा से पता चलता है कि अमेरिका में मोडाफिनिल टैबलेट्स की अनुमानित सालाना बिक्री 70.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी।
यूएन में पास हुआ 'नक़्शा बदलने' वाला प्रस्ताव, केवल अमेरिका ने क्यों किया विरोध? - BBC
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अमेरिका के टकराव को पूर्ण युद्ध के बजाय रुक-रुक कर होने वाला सैन्य संघर्ष बताया है। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर वॉशिंगटन का नियंत्रण है और उसने तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका है।
निकाह वाले घर पर अमेरिका ने दागी मिसाइल, ईरान से आईं तबाही की दर्दनाक तस्वीरें
ईरान के शहर कुहस्तक में शादी समारोह के दौरान एक घर पर अमेरिकी मिसाइल गिरने की खबर है। हमले के बाद बर्बाद हो चुके घर, मलबे और मृतकों के सामूहिक अंतिम संस्कार की तस्वीरें सामने आई हैं।
अमेरिका : तूफान लोवेल फिर हुआ ताकतवर, हवाई में इमरजेंसी घोषित
लॉस एंजिल्स, 5 सितंबर . हवाई द्वीप के दक्षिण में कई सौ मील दूर स्थित तूफान लोवेल तेजी से मजबूत हो रहा है, जिसके बाद हवाई के गवर्नर जोश ग्रीन ने तूफान के संभावित असर से निपटने की तैयारी के लिए पूरे राज्य में इमरजेंसी घोषित कर दी है. अमेरिकी नेशनल हरिकेन सेंटर के Friday ... Read more
डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी: नतांज के पास स्थित पिकैक्स माउंटेन पर बड़े अमेरिकी हमले के संकेत
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव अब अपने सबसे निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए एक सनसनीखेज बयान दिया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका बहुत जल्द ईरान के बेहद सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) पर सटीक और भीषण हमला कर सकता है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका की अंतरिक्ष तकनीक और यूएस स्पेस फोर्स (US Space Force) इस पूरे इलाके पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है। उन्होंने दो टूक कहा कि वॉशिंगटन को पिकैक्स माउंटेन और पूरे ईरान में हो रही एक-एक गतिविधि और हर वाहन की आवाजाही की सटीक जानकारी है। ट्रंप ने साफ किया कि यदि हालात और बिगड़े तो अमेरिका वहां बेहद जोरदार प्रहार करेगा।यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में मिसाइल हमलों, ड्रोन टकरावों और फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही को लेकर तनाव चरम पर है। ट्रंप की इस सीधी धमकी ने वैश्विक कूटनीतिक गलियारों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में हड़कंप मचा दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ने सीधे तौर पर इस भूमिगत परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया, तो यह अब तक के छिटपुट हमलों से अलग सीधे तौर पर पूर्ण युद्ध की घोषणा साबित हो सकता है।क्या है पिकैक्स माउंटेन? ज़ाग्रोस की पहाड़ियों में 140 मीटर नीचे छुपा ईरान का अभेद्य परमाणु किलाअंतरराष्ट्रीय मीडिया और खुफिया एजेंसियों में 'पिकैक्स माउंटेन' के नाम से चर्चित यह ठिकाना वास्तव में ईरान के मध्य प्रांत इस्फ़हान (Isfahan) में स्थित है। फारसी भाषा में इस पर्वत को 'कूह-ए-कुलंग' (Kūh-e Kolang) या पूरा नाम 'कुलंग गज़ ला' (Kolang Gaz Lā) कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अनुवाद कुदाल या पिकैक्स पर्वत होता है। आधिकारिक तौर पर ईरान इसे 'शहीद अलीमोहम्मदी परिसर' के नाम से भी पुकारता है। भौगोलिक दृष्टि से यह विशालकाय पहाड़ ईरान के कुख्यात नतांज यूरेनियम संवर्धन संयंत्र से मात्र 1.5 से 2 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और राजधानी तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण की ओर पड़ता है।इस पर्वत की सबसे बड़ी खासियत इसकी भूगर्भीय संरचना है। आसपास की अधिकांश ज़ाग्रोस पर्वतमाला जहां अवसादी (Sedimentary) चट्टानों से बनी है, वहीं पिकैक्स माउंटेन अत्यधिक ठोस, कठोर और घने आग्नेय ग्रेनाइट (Dense Granite) पत्थरों से निर्मित है। यह पर्वत समुद्र तल से लगभग 1,608 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो कि ईरान के फोर्डो (Fordow) परमाणु संयंत्र वाले पहाड़ की तुलना में लगभग दोगुना ऊंचा है। सैटेलाइट विश्लेषणों और भूवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, ईरान ने इस कठोर ग्रेनाइट चट्टान को काटकर पहाड़ के शिखर से 100 से 140 मीटर की अत्यधिक गहराई में दो विशाल भूमिगत सुरंग परिसरों और हॉलों का निर्माण किया है। इस जटिल परिसर तक पहुंचने के लिए पूर्व और पश्चिम दिशाओं में मजबूत कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परतों से ढके भारी-भरकम टनल पोर्टल बनाए गए हैं।2020 के रहस्यमयी धमाके के बाद शुरू हुआ गुप्त निर्माण: नतांज से भी ज्यादा सुरक्षित क्यों है यह ठिकाना?पिकैक्स माउंटेन के निर्माण की कहानी जुलाई 2020 में नतांज में हुए एक बड़े गुप्त विस्फोट से जुड़ी है। 2 जुलाई 2020 को नतांज के मुख्य संवर्धन केंद्र के ठीक ऊपर जमीन पर बनी आधुनिक सेंट्रीफ्यूज असेंबली वर्कशॉप में एक रहस्यमयी तोड़फोड़ (Sabotage) की घटना हुई थी, जिसके पीछे इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ माना गया था। इस विस्फोट में ईरान की उन्नत सेंट्रीफ्यूज बनाने वाली वर्कशॉप पूरी तरह नष्ट हो गई थी।इस बड़ी नाकामी के तुरंत बाद, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) के तत्कालीन प्रमुख अली अकबर सालेही ने ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सामने सार्वजनिक ऐलान किया था कि तेहरान अब अपनी आधुनिक सेंट्रीफ्यूज असेंबली यूनिट को किसी भी हवाई हमले या तोड़फोड़ से बचाने के लिए 'पहाड़ों के सीने को चीरकर' उसके भीतर स्थापित करेगा। इसके बाद वर्ष 2020 के अंत में पिकैक्स माउंटेन में भारी ड्रिलिंग और खुदाई का काम शुरू किया गया।ईरान का आधिकारिक रुख हमेशा यही रहा है कि यह जगह केवल हजारों उन्नत सेंट्रीफ्यूज मशीनों (जैसे IR-4 और IR-6) के विनिर्माण और संयोजन (Assembly) के लिए बनाई जा रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को आज तक इस ठिकाने के अंदर जाने और स्वतंत्र रूप से जांच करने की अनुमति नहीं दी गई है। पश्चिमी और इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि नतांज पर लगातार हुए साइबर हमलों और हवाई हमलों के डर से ईरान ने अपने उच्च-संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के गुप्त भंडारों और क्रिटिकल सेंट्रीफ्यूज कैस्केड्स को इसी पर्वत की अतल गहराइयों में स्थानांतरित कर दिया है ताकि किसी भी युद्ध की स्थिति में उसका परमाणु हथियार कार्यक्रम जिंदा बच सके।बंकर बस्टर बम भी बेअसर? क्या अमेरिकी GBU-57 भेद पाएगा ग्रेनाइट की यह चट्टानी दीवार?पिकैक्स माउंटेन को लेकर सबसे बड़ा सैन्य और सामरिक सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायुसेना भी इसे पूरी तरह नष्ट कर सकती है? अमेरिकी शस्त्रागार में गैर-परमाणु श्रेणी का सबसे भारी और विनाशकारी बम GBU-57 मैसिव ऑर्डिनेंस पेनेट्रेटर (MOP) है। 30,000 पाउंड (लगभग 14,000 किलोग्राम) वजनी यह जीपीएस-निर्देशित बंकर बस्टर बम विशेष रूप से अमेरिका के बी-2 स्पिरिट (B-2 Spirit) स्टील्थ बॉम्बर्स द्वारा गिराया जाता है।अमेरिकी वायुसेना के परीक्षणों के मुताबिक, GBU-57 लगभग 60 मीटर सामान्य मिट्टी और चट्टान या लगभग 8 मीटर प्रबलित कंक्रीट (Reinforced Concrete) को भेदने में सक्षम है। लेकिन पिकैक्स माउंटेन की मुख्य प्रयोगशालाएं और संवर्धन हॉल 100 से 140 मीटर ठोस ग्रेनाइट के नीचे दबे हुए हैं। सैन्य हथियार विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया का कोई भी पारंपरिक बंकर बस्टर बम अकेले एक झटके में इतनी गहराई पर मौजूद प्राकृतिक ग्रेनाइट की परत को नहीं तोड़ सकता।अमेरिकी सेना के योजनाकारों के पास दूसरा विकल्प 'मल्टी-वेव स्ट्राइक' का हो सकता है, जहां एक ही सटीक निर्देशांक पर लगातार कई बंकर बस्टर गिराकर धीरे-धीरे चट्टान की ऊपरी परतों को हटाया जाए। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी हमले का मुख्य फोकस पर्वत के अंदर बने हॉलों को सीधे उड़ाने के बजाय उसकी जीवन रेखाओं को काटना हो सकता है। पिकैक्स माउंटेन के सुरंग द्वारों (Tunnel Entrances), बाहरी वेंटिलेशन शाफ्टों, बिजली आपूर्ति ग्रिड और नतांज से जोड़ने वाले सुरक्षा कॉरिडोर को भारी हवाई बमबारी से मलबे में तब्दील किया जा सकता है। ऐसा होने पर पहाड़ के अंदर मौजूद वैज्ञानिक और संवेदनशील मशीनें हफ्तों तक मलबे के नीचे दब जाएंगी और पूरा संयंत्र बिना पूरी तरह टूटे भी पूरी तरह निष्क्रिय (Inoperable) हो जाएगा।स्पेस फोर्स और सैटेलाइट की पैनी नजर: यूरेनियम संवर्धन और उन्नत सेंट्रीफ्यूज का खेलडोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में जिस अमेरिकी स्पेस फोर्स और सैटेलाइट सर्विलांस का उल्लेख किया है, वह बेहद महत्वपूर्ण है। अत्याधुनिक कॉमर्शियल और सैन्य जासूसी उपग्रहों जैसे प्लैनेट लैब्स, मैक्सार और पेंटागन के सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) उपग्रहों ने पिकैक्स माउंटेन की हर हलचल को दशकों तक कैमरे में कैद किया है। 2025 और 2026 की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने पहाड़ के चारों ओर कई किलोमीटर लंबी दोहरी सुरक्षा दीवारें, कंक्रीट के गश्ती मार्ग और अत्याधुनिक सतह से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियां (Air Defense Systems) तैनात की हैं।खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में भारी ट्रकों के जरिए सैकड़ों कंटेनर इस पर्वत की सुरंगों में ले जाए गए हैं। इजरायली खुफिया सूत्रों का दावा है कि ईरान के 60% तक संवर्धित किए गए लगभग 900 पाउंड यूरेनियम का एक बड़ा हिस्सा इसी पहाड़ के सुरक्षित बंकरों में छिपाया गया हो सकता है। यह यूरेनियम संवर्धन के उस स्तर पर है जहां से इसे कुछ ही हफ्तों में हथियार-ग्रेड (90% शुद्धता) में बदला जा सकता है।यही वजह है कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी (E3 समूह) संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) के जरिए ईरान को सुरक्षा परिषद में भेजने और उस पर नए कड़े वैश्विक प्रतिबंध लगाने का दबाव बना रहे हैं। उधर, ईरान के संसदीय अध्यक्ष के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी और तेहरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी है कि पिकैक्स माउंटेन दुनिया का सबसे सुरक्षित परमाणु ढांचा है, और यदि उस पर परिंदा भी पर मारने की कोशिश करेगा तो ईरान पूरे क्षेत्र को 'जहन्नुम' में तब्दील कर देगा।मध्य पूर्व में महायुद्ध का खतरा: होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असरयदि अमेरिका पिकैक्स माउंटेन पर हमला करता है, तो इसका असर केवल ईरान की सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समूची दुनिया को इसकी आर्थिक और सामरिक कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि किसी भी प्रत्यक्ष हमले की स्थिति में वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अवरुद्ध कर सकता है, जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। हालांकि ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री सुरंगों (Mines) को हटा दिया है और मध्य पूर्व में नई तेल पाइपलाइनों के निर्माण के बाद होर्मुज की निर्भरता कम हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि खाड़ी से तेल का प्रवाह बाधित होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।ऊर्जा संकट गहराने से दुनिया भर के देशों में मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ेगी और शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। इसके साथ ही इराक, सीरिया, यमन और लेबनान में सक्रिय ईरान समर्थित लड़ाके अमेरिकी सैन्य ठिकानों और वाणिज्यिक जहाजों पर आत्मघाती ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले तेज कर सकते हैं।पिकैक्स माउंटेन पर ट्रंप की ताजा चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीति की गुंजाइश अब लगभग खत्म हो चुकी है। ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे चल रही यह आणविक जंग दुनिया को एक नए और विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ी कर चुकी है।
वॉशिंगटन, 5 सितंबर . President डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अमेरिका के टकराव को पूर्ण युद्ध के बजाय रुक-रुक कर होने वाला “सैन्य संघर्ष” बताया है. उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर वॉशिंगटन का नियंत्रण है और उसने तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका है. ट्रंप ने यह बात तब कही, ... Read more
अफ्रीका के देशों ने बदलवा दिया दुनिया का नक्शा! अमेरिका का विरोध भी हुआ बेअसर; यूएन ने दी मंजूरी
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन वाले विश्व मानचित्र के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है। टोगो के प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि सिर्फ अमेरिका ने विरोध किया।
प्रीति जिंटा ने रोज 18 घंटे काम करने पर तोड़ी चुप्पी, वीडियो में बोलीं- ‘बच्चों के पास अमेरिका जल्दी लौटना था, इसलिए खुद चुना लंबा शेड्यूल’
ट्रंप ने दोहराया होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा, ईरान के साथ 'पूर्ण युद्ध' को खारिज किया
भारत-अमेरिका रिश्तों पर सर्जियो गोर का बड़ा बयान, बोले- PM मोदी से मिलना चाहते हैं ट्रंप
अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे व्यापार, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी को देखकर कई दूसरे देश ईर्ष्या कर सकते हैं। गोर ने प्रधानमंत्री ...
सऊदी अरब को अमेरिका की सौगात: पांच अरब डॉलर के हथियार सौदे को मंजूरी; JDAM किट-बमों से खाड़ी में बढ़ेगी ताकत?---US Approves Potential $5 Billion Arms Sale to Saudi Arabia Including JDAM Kits and Bombs
होर्मुज तनाव के बीच ईरान का अमेरिका पर तंज, ‘हबीबी, ईरान आओ’ वीडियो में माइनस्वीपर गेम से दिया संदेश
होर्मुज तनाव के बीच ईरान का अमेरिका पर तंज, ‘हबीबी, ईरान आओ’ वीडियो में माइनस्वीपर गेम से दिया संदेश
भारत-अमेरिका रिश्तों पर बोले सर्जियो गोर, 'कई देश जलते हैं', वीडियो में जाने G20 में PM मोदी से मिलना चाहते हैं ट्रंप; भारत दौरे के संकेत
डीआर कांगो ने 180 दिन का इबोला रिस्पॉन्स प्लान लॉन्च किया, 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर फंड की मांग
डीआर कांगो ने 180 दिन का इबोला रिस्पॉन्स प्लान लॉन्च किया, 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर फंड की मांग
यूएन में पास हुआ 'नक़्शा बदलने' वाला प्रस्ताव, केवल अमेरिका ने क्यों किया विरोध?
16वीं सदी से इस्तेमाल हो रहे दुनिया के नक़्शे की आलोचना इसलिए की जा रही है कि ये अफ़्रीका का आकार ग्रीनलैंड के बराबर दिखता है, जबकि यह उससे 14 गुना ज़्यादा बड़ा है.
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष में तनाव फिर बढ़ते हुए नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को एक बार फिर बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान के पिकैक्स माउंटेन पर बहुत जल्द हमला कर सकता है। ट्रंप ने ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र के पास की इस बेहद मजबूत और सुरक्षा के लिहाज से पुख्ता भूमिगत ठिकाने पर हमला करने की अपनी धमकी को नए सिरे से दोहराया है।हम जानते हैं पिकैक्स पर कौन क्या कर रहा है - ओवल ऑफिस से ट्रंप की चेतावनीशुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि हम बहुत जल्द पिकैक्स पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि अगर पिकैक्स पर कुछ भी चल रहा होगा तो हम कार्रवाई करेंगे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस पूरे ठिकाने की हर एक गतिविधि पर नजर रख रही है। ट्रंप ने कहा कि हम जानते हैं कि पिकैक्स माउंटेन पर कौन हलचल कर रहा है, हम जानते हैं कि पूरे ईरान में कौन कहां आगे बढ़ रहा है। अगर कुछ भी गलत होता दिखा, तो हम उन पर हमला करेंगे और बहुत जोरदार हमला करेंगे। इससे पहले जुलाई में भी ट्रंप ने इस ठिकाने पर हमला करने की धमकी दी थी।क्यों अमेरिका के निशाने पर है Pickaxe Mountain?पिकैक्स माउंटेन ईरान के मुख्य यूरेनियम संवर्धन केंद्रों में से एक नतांज के पास है। इस ठिकाने में जमीन के काफी नीचे दो बेहद गहरी सुरंगों का कॉम्पलेक्स बना हुआ है। इस वजह से पारंपरिक हवाई हमलों से इसे नुकसान पहुंचाना बेहद मुश्किल माना जाता है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अपने हजारों सेंट्रीफ्यूज को इस भूमिगत ठिकाने के अंदर शिफ्ट कर दिया है।अन्य परमाणु ढांचों पर हुए हमलों के बाद, पिकैक्स माउंटेन अपनी गहराई और लोकेशन की वजह से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बचे हुए हिस्से को संरक्षित और पुनर्जीवित करने का मुख्य केंद्र बन गया है। यही कारण है कि यह अमेरिका की सैन्य रणनीति के केंद्र में आ गया है।'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने देंगे'डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य अभियान को अपने मुख्य उद्देश्य से सीधे जोड़ते हुए दोहराया कि उनका मकसद ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। ट्रंप ने कहा कि हमें अब पांच महीने हो चुके हैं। और आप जानते हैं कि हमने इन पांच महीनों में क्या किया? उनके पास अब परमाणु हथियार नहीं होगा; यही हमने किया है।इजरायल और पश्चिमी देशों को बड़े खतरे से बचायाडोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के इस सैन्य हस्तक्षेप का बचाव करते हुए दावा किया कि अगर अमेरिका ने कदम नहीं उठाया होता, तो इजरायल, मध्य पूर्व और पश्चिमी देशों पर बड़ा खतरा मंडरा सकता था। ट्रंप ने कहा कि अगर हम वहां नहीं जाते, तो आज इजरायल नहीं बचता, मध्य पूर्व नहीं बचता, और शायद वे (ईरान) इसके बाद यूरोपीय शहरों और हमारे शहरों को निशाना बनाते।ईरान का पलटवार: संप्रभुता का उल्लंघन, अमेरिकी ठिकानों पर 'विनाशकारी हमले'दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है और वाशिंगटन पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने व कई प्रांतों में नागरिक ठिकानों एवं बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनके सशस्त्र बलों ने पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों से जवाब दिया है।
बड़ा दिखेगा अफ्रीका, घटेगा अमेरिका-यूरोप का आकार... UN ने बदला दुनिया का नक्शा
UN महासभा ने दुनिया के नए नक्शे को मंजूरी दे दी है. इसमें अफ्रीका पहले से बड़ा दिखेगा, जबकि यूरोप-अमेरिका छोटे नजर आएंगे. जिसका अमेरिका ने विरोध किया.
Top News 5 September: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा कि भारत और अमेरिका की दोस्ती से दूसरे देशों को जलन होती है। यूरोप को महंगा पड़ा पीएम मोदी की बात नहीं मानना। स्वतंत्र भारद्वाज पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। राम मंदिर ट्रस्ट में ...
रूस यूक्रेन के बीच युद्ध के करीब 5 साल होने को है। इसी क्रम में शुक्रवार को कीव के बीचोंबीच यूक्रेन की सुरक्षा सेवा एसबीयू के मुख्यालय पर रूस का ड्रोन हमला हुआ। इमारत से काला धुआं निकलने लगा। यह जगह सेंट सोफिया कैथेड्रल के ठीक सामने है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर है। क्या […]
लुधियाना में अमेरिका भेजने के नाम पर एक युवक से 40 लाख रुपए की ठगी हो गई। जमालपुर के सुखदेव नगर निवासी गुरदीप सिंह ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसे अमेरिका भेजने का भरोसा देकर एजेंट ने लाखों रुपए ले लिए। इसके बाद उसे कंबोडिया समेत कई देशों में घुमाया गया। वह अमेरिका पहुंचने के बाद करीब 10 महीने तक टेक्सास के एक रिफ्यूजी कैंप में रहा। आखिरकार 25 जून 2025 को उसे डिपोर्ट कर भारत भेज दिया गया। मामले में पुलिस ने एजेंट के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। अब विस्तार से पढ़ें पूरा मामला… जांच में शामिल होने के लिए कई नोटिस, फिर भी नहीं पहुंचा पुलिस ने राकेश कुमार के मोबाइल नंबर पर कई बार नोटिस भेजकर उसे जांच में शामिल होने के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, उसे 23 अप्रैल, 13 मई, 22 मई, 9 जून और 22 जून 2026 को नोटिस भेजे गए। पुलिस ने फोन के जरिए भी उससे संपर्क किया, लेकिन आरोप है कि वह बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद जांच में शामिल नहीं हुआ। जांच अधिकारी ASI साहिब सिंह ने बताया कि आरोपी राकेश कुमार के खिलाफ थाना जमालपुर में IPC की धारा 420 के तहत FIR दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
अमेरिका-ईरान जंग: ट्रंप के तेवरों से हड़कंप, पिकैक्स माउंटेन पर जल्द हमले का जिक्र; होर्मुज में कैसे हालात?
लीगल वीजा का झांसा देकर ऐंठे 40 लाख, डंकी रूट से भेजा अमेरिका
लुधियाना| अमेरिका भेजने के नाम पर 40 लाख रुपए ठगने के आरोप में जमालपुर थाना पुलिस ने राकेश कुमार उर्फ गोर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उसने पीड़ित को कानूनी तरीके से अमेरिका भेजने का झांसा दिया, लेकिन अवैध रास्ते से वहां पहुंचा दिया। अमेरिका पहुंचने पर पीड़ित को सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में ले लिया और बाद में भारत डिपोर्ट कर दिया। सुखदेव नगर निवासी गुरदीप सिंह (45) ने पुलिस को बताया कि उसकी मुलाकात राकेश कुमार उर्फ गोर पुत्र धर्मवीर कालिया निवासी खसल, थाना भुलत्थ, जिला कपूरथला से हुई थी। आरोपी ने कानूनी तरीके से अमेरिका का वीजा लगवाकर भेजने का भरोसा देकर उससे करीब 40 लाख रुपए ले लिए। आरोप है कि 17 अगस्त 2023 को आरोपी ने गुरदीप को कानूनी वीजा के बजाय डंकी रूट से अमेरिका भेज दिया। वहां पहुंचने पर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया। हिरासत केंद्र में रखने के बाद उसे भारत वापस भेज दिया गया। शिकायत की जांच के बाद जमालपुर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही है।
जमीन से हजारों फीट ऊपर, बादलों के पार, भारत और अमेरिका मिलकर चीन की जासूसी कर रहे थे। वे 23 हजार फीट ऊंचे पहाड़ पर खतरनाक परमाणु उपकरण छोड़ आए। ऐसा उपकरण, जिसमें नागासाकी को तबाह करने वाले परमाणु बम में इस्तेमाल किए गए प्लूटोनियम का एक-तिहाई हिस्सा मौजूद था। आज कहानी उसी खुफिया मिशन की… 23 जून 1965 की शाम। दिल्ली का पालम हवाई अड्डा, जो अब इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता है। रनवे के पास भीड़ जुटी थी। ढोल-नगाड़े बज रहे थे। भीड़ में सबसे आगे खड़े थे देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा। साढ़े चार बजे हवा को चीरता हुआ वायुसेना का डकोटा विमान रनवे पर उतरा। दरवाजा खुला और बाहर निकले 21 जांबाज। यह वही दस्ता था, जो माउंट एवरेस्ट के माथे पर देश का झंडा गाड़कर लौटा था। दुनिया के नक्शे पर ब्रिटेन, अमेरिका और चीन के बाद भारत का नाम दर्ज हो गया था। टीम के अगुवा थे- कैप्टन एमएस कोहली। वह नौसेना में थे, लेकिन जुनून पहाड़ चढ़ने का था। बंटवारे के वक्त पाकिस्तान के हरिपुर से जान बचाकर आए थे। उनकी ट्रेन में सवार एक हजार यात्रियों को दंगाइयों ने मार डाला था। रनवे पर खड़े कोहली के दिमाग में वही पुरानी तस्वीरें घूम रही थीं, तभी गुलजारी लाल ने उन्हें गले लगा लिया। कुछ देर बधाइयों का सिलसिला चला। फिर टीम एग्जिट गेट की तरफ बढ़ने लगी। तभी भारत की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो के अफसर बलबीर सिंह ने कोहली के कान में धीरे से कहा- ‘विमान के पीछे कोई तुम्हारा इंतजार कर रहा है।’ कोहली पीछे पहुंचे। वहां आरएन काव खड़े थे। चेहरे पर हल्की मुस्कान और पैनी निगाहें। काव तब IB की हवाई खुफिया विंग 'एविएशन रिसर्च सेंटर', यानी ARC के डायरेक्टर थे। काव ने कोहली को गले लगाते हुए कहा- ‘Congratulations Captain.’ कोहली कुछ कहते उससे पहले ही काव बोले- 'एक सीक्रेट ऑपरेशन के लिए आपको अमेरिका जाना है।' अमेरिका! कब और क्यों? काव ने कोहली के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- ‘अभी दिल्ली मत छोड़ना। जल्द मिलते हैं।’ दो दिन बाद… 25 जून 1965, दिल्ली का एक सेफ हाउस। बंद कमरे में 5 लोग बैठे थे- कैप्टन कोहली, IB प्रमुख बीएन मलिक, ARC डायरेक्टर आरएन काव, अमेरिकी माउंटेनियर बैरी बिशप और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एक अफसर। बीएन मलिक ने कोहली से कहा, 'चीन परमाणु बम बना चुका है। वह भारत पर मिसाइल हमला कर सकता है। अमेरिका-भारत मिलकर उसकी निगरानी करेंगे।’ कैप्टन कोहली चुप रहे। तभी आरएन काव बोले- ‘हमें हिमालय की एक चोटी पर जासूसी उपकरण लगाना है। आप टीम के फील्ड कमांडर होंगे।' कैप्टन कोहली के मन में कई सवाल थे, लेकिन उन्होंने सहमति में सिर हिला दिया। वे जानते थे कि ना कहने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि दो देशों की सरकारें फैसला कर चुकी हैं। तारीख बदली और वो घड़ी आ गई, जिसका इंतजार कैप्टन कोहली 24 दिनों से कर रहे थे। 19 जुलाई को कोहली और उनके तीन साथियों को एक पैसेंजर विमान से चुपचाप अमेरिका भेज दिया गया। वहां 20 हजार फीट ऊंची मैकिनाले चोटी पर माइनस 30-40 डिग्री तापमान और खतरनाक बर्फीले तूफानों के बीच काम करने की ट्रेनिंग दी गई। फिर प्लूटोनियम से चलने वाले जासूसी डिवाइस को पीठ पर लादकर पहाड़ चढ़ने की प्रैक्टिस कराई जाने लगी। इधर, भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग छिड़ चुकी थी। अमेरिका इस जंग में तटस्थ था, लेकिन पाकिस्तान खुलकर अमेरिकी पैटन टैंकों और हथियारों का इस्तेमाल कर रहा था। तब वियतनाम जंग में फंसे अमेरिका ने भारत को युद्ध रोकने की धमकी दी और गेहूं की सप्लाई रोक दी, लेकिन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अड़ गए। हफ्ते में एक दिन के उपवास की घोषणा कर दी। यहीं से ‘जय जवान जय किसान’ का नारा गूंजने लगा। इस सब के बावजूद दोनों देशों का खुफिया मिशन जारी रहा। 28 अगस्त को भारतीय टीम लौट आई। एक सैनिक विमान से अमेरिकी खुफिया अफसर और जासूसी उपकरण भी भारत पहुंचा दिया गया। अमेरिकी टीम उपकरण को दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी 'कंचनजंगा' पर लगाना चाहती थी। कैप्टन कोहली इसके लिए राजी नहीं हुए। लंबी बहस के बाद 'नंदा देवी की टॉप चोटी' को चुना गया। ऊंचाई 25 हजार 645 फीट। यह भारत की सीमा के भीतर थी और चीन की सरहद पर सीधी नजर रखती थी। सीक्रेट मिशन का नाम रखा गया- ‘ऑपरेशन HAT’, यानी High Altitude Training. 18 लोगों की टीम बनी- कैप्टन कोहली समेत 4 भारतीय और 14 अमेरिकी। कोहली को ऑपरेशन का फील्ड कमांडर बनाया गया। 1 सितंबर 1965 की सुबह दिल्ली से काफिला निकला और 3 सितंबर को जोशीमठ पहुंच गया। आगे सड़कें नहीं थीं। करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर नंदा देवी बेस कैंप था। वहीं से पूरा ऑपरेशन चलने वाला था। वहां जाने का रास्ता संकरा, पथरीला और जानलेवा था। पैदल ही चलकर जाना था, वो भी 57 किलो भारी जासूसी उपकरण को लेकर। खुफिया अफसरों ने मोटी रकम देकर लद्दाख के कुछ शेरपाओं और कुलियों को हायर कर लिया। ये वो लोग थे, जिनका जीवन ही पर्वतों पर बीतता है। अब असल मुश्किल इस मिशन की सीक्रेसी थी। सब जानना चाहते थे कि इतनी भारी डिवाइस को नंदा देवी की चोटी पर क्यों ले जाया जा रहा। फिर एक कहानी गढ़ी गई। कहा गया कि अमेरिकी ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से होने वाले प्रभाव की स्टडी करने आए हैं। 200 कुलियों और 14 शेरपाओं को जुटाया गया। मशीन को 6 टुकड़ों में बांटा गया, ताकि किसी एक बंदे पर ज्यादा बोझ न पड़े। टीम चल पड़ी। आगे-आगे शेरपा, कुली और पर्वतारोही चल रहे थे, और ठीक पीछे CIA के अफसर और कैप्टन कोहली। 18 सितंबर को टीम नंदा देवी बेस कैंप पहुंच गई। बर्फानी हवाएं इतनी ठंडी थीं कि हर सांस फेफड़ों में सुइयों की तरह चुभती थी। यहां करीब 15 दिन गुजारने थे। भारतीय अफसरों के दिमाग में फिर से मिशन की सीक्रेसी का सवाल कौंधने लगा। इतने अमेरिकी यहां क्या कर रहे हैं? बेस कैंप में रहने वाले कर्मचारियों के बीच कानाफुसी होने लगी थी। अमेरिकी टीम से कहा गया- ‘कम से कम बात करें। हां या ना में जवाब दें।’ पर, इतने से काम चलने वाला था नहीं। खुफिया अफसरों को आइडिया आया- अमेरिकी अफसरों की बॉडी पेंट करने का, लेकिन वे इसके लिए राजी नहीं हुए। अमेरिकी अफसरों को ‘मैन टैन’ नाम से एक लोशन दिया गया। कहा गया कि यह सनबर्न से बचाएगा, लेकिन असल में उनकी गोरी रंगत को ढकने की यह चाल थी। अब तारीख आई 7 अक्टूबर 1965… अमेरिकी वैज्ञानिकों ने उस उपकरण के कंटेनरों का लॉक खोला। अंदर, एक जनरेटर और सात रेडियोएक्टिव प्लूटोनियम कैप्सूल अलग-अलग कांच के सांचों में रखे थे। जनरेटर तीन फीट लंबा और मशरूम के आकार का था। उसके साथ ट्रांसमिशन के लिए एक छाता-नुमा एंटीना और सिग्नल पकड़ने वाले खुफिया राडार जुड़े हुए थे। सातों कैप्सूल को निकालकर जनरेटर में भरा गया। इनमें 4.5 किलो प्लूटोनियम- 238 भरा हुआ था। इन कैप्सूलों का काम था- डिवाइस को सालों तक बिजली सप्लाई करना, यानी बैटरी का काम करना। इस उपकरण को नाम दिया गया- 'स्पेस न्यूक्लियर ऑक्सिलरी पावर' यानी SNAP-19. 8 अक्टूबर की सुबह, टीम चढ़ाई के लिए निकल पड़ी। उस रोज टीम का जोश देखते ही बन रहा था। टीम तेजी से ऊपर चढ़ रही थी, लेकिन तभी पर्वत ने अपना रंग दिखाया। बर्फीली हवाएं दीवार बनकर खड़ी हो गईं। लोग गिरने लगे। फिसलने लगे। कुछ बीमार भी पड़ गए। शाम ढली तो चढ़ाई रोक दी गई। रात 8 बजे का वक्त। एक अफसर तंबू का पर्दा उठाकर अंदर आया। उसके चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थीं। 'क्या हुआ वांग्याल?' कोहली ने पूछा। उसने अपना भारी-भरकम बैकपैक पटका और घुटनों के बल बैठ गया। हांफते हुए बोला- 'कैप्टन, मैंने ऋषि गंगा के उस पार एक जीव देखा। वह दो पैरों पर सीधा खड़ा था। कम से कम 15 फीट लंबा। काले-भूरे बालों से ढका हुआ।' 'तुमने कैमरा निकाला?' CIA के एक अफसर ने पूछा। उसने हांफते हुए कहा- ‘जैसे ही मैंने बैकपैक उतारना चाहा, वह लंबी छलांग मारकर गायब हो गया।' तंबू में खामोशी छा गई। कोने में बैठे लद्दाखी और तिब्बती शेरपा फुसफुसाने लगे- ‘ये तो पहाड़ी राक्षस है। अगर हमारे रास्ते में आ गया, तो किसी की हड्डी भी नीचे नहीं पहुंचेगी।’ 'क्या तुमने सच में ऐसा जानवर देखा?' कोहली ने पूछा। 'कैप्टन, मेरी आंखों में कोई धुंध नहीं थी। वह जो भी था, बेहद खौफनाक था।' अब कोहली ने CIA के अफसरों की तरफ देखा। वे थोड़ा डरे हुए थे। कोहली ने गहरी सांस ली और वांग्याल के कंधे पर हाथ रखा। 'सुनो सब, वांग्याल जो कह रहे हैं, उस पर शक नहीं है, लेकिन इतनी ऊंचाई पर दूर से किसी आकार का अंदाजा लगाना मुमकिन नहीं है। ये परछाइयों का खेल हो सकता है। पहाड़ी भालू होगा।’ ‘क्या भालू 15 फीट लंबा हो सकता है?' एक शेरपा ने डरते-डरते सवाल किया। ‘पहाड़ में हर साया बड़ा ही दिखता है। हमें अपने मिशन पर डटे रहना है। रात को पहरा बढ़ा दो।’ कोहली ने ये कहकर टीम को हौसला दिया, लेकिन उस रात बेस कैंप में कोई सो नहीं सका। 9 अक्टूबर को टीम और ऊपर बढ़ी। कैंप-3 पर पहुंचते-पहुंचते चट्टानें दिखना बंद हो गईं। सामने 23 हजार 750 फीट ऊंची सूखी बर्फ की दीवार खड़ी थी। खतरा हिमस्खलन का था। बर्फ की एक परत भी खिसकती, तो टीम हजारों फीट गहरी खाई में जा गिरती। शाम के 4 बज रहे थे। तापमान माइनस 30 डिग्री पहुंच चुका था। कोई शेरपा थूकता भी था, तो वह फर्श पर गिरने से पहले बर्फ बन जा रहा था। टीम बर्फ को कुल्हाड़ी से काटकर और चट्टानों में रस्सियां बांधते हुए ऊपर बढ़ रही थी। तभी बर्फीला तूफान आ गया। 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हवाएं तंबुओं को उखाड़ने लगीं। कुछ अफसर नीचे की तरफ भाग गए, तो कुछ वहीं डटे रहे। तूफान जारी रहा। दिन-रात गुजरने लगे। भूख खत्म हो चुकी थी, गले सूख गए थे। ऑक्सीजन की कमी से हर सांस के साथ छाती दर्द से फटी जा रही थी। पांचवें दिन 14 अक्टूबर की सुबह तूफान धीमा पड़ा। टीम ने फिर से जोर लगाया और दोपहर होने से पहले कैंप-4 तक पहुंच गई। यहां से नंदा देवी की टॉप चोटी 1895 फीट ऊंचाई पर थी। तभी 16 अक्टूबर को फिर से भयानक तूफान आ गया। बर्फ अफसरों के जांघों तक जमा हो गई। तूफान इतना तेज था कि पास खड़ा आदमी तक दिखाई नहीं दे रहा था। हिमस्खलन का खतरा था। तभी बेस कैंप से कोहली की आवाज गूंजी- ‘उपकरण को वहीं सुरक्षित बांध दो और तुरंत नीचे आ जाओ।’ अफसरों ने उपकरण को बर्फ की एक चट्टान से बांधा और नीचे उतर आए। तय हुआ कि अगले साल गर्मियों में आकर इसे फिर से इंस्टॉल करेंगे। वे एक ऐसा उपकरण छोड़ आए थे, जिसमें 4.5 किलो प्लूटोनियम- 238 भरा था। जो नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम में इस्तेमाल किए गए प्लूटोनियम का एक-तिहाई हिस्से के बराबर था। आगे जो हुआ, वो एक खतरनाक रहस्य बन गया। पूरी कहानी कल यानी रविवार को पार्ट-2 में पढ़िए… रफेरेंस : 1. Nanda Devi: A Journey to the Last Sanctuary : By Hugh Thomson. 2. Spies in the Himalayas: By M.S. Kohli and Kenneth J. Conboy. 3. Nuclear Bomb in Ganga : By RK Yadav
Kanpur News: अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी से एलेनहाउस इंस्टीट्यूट का करार
एलेन हाउस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर के प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम उठाया है।
अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट: मजबूत रोजगार आंकड़ों से ब्याज दर बढ़ने की आशंका; महंगाई पर क्या होगा असर?
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका की साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया और नई दिल्ली व वाशिंगटन के बीच रक्षा, व्यापार और कूटनीतिक संबंधों और दोनों के बीच उच्च स्तरीय जुड़ाव का उल्लेख किया।
जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन में अमेरिकी भगोड़े मंजीत सिंह बेदी को गिरफ्तार किया है। बेदी अमेरिका में 'SNAP' (सरकारी सहायता कार्यक्रम) से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में मोस्ट वांटेड था और अप्रैल 2026 में कनाडा के रास्ते भारत भाग आया था। पंजाब पुलिस का यह कदम यह साफ संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार करके भी अपराधी भारत की धरती को अपना सुरक्षित ठिकाना नहीं बना सकते।
अमेरिका की मोस्ट वांटेड धोखाधड़ी सूची में शामिल मंजीत सिंह बेदी जालंधर से गिरफ्तार
जालंधर, 4 सितंबर . अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई की ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ सूची में शामिल भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक मंजीत सिंह बेदी को पंजाब Police ने जालंधर से गिरफ्तार कर लिया है. बेदी पर अमेरिकी Government की खाद्य सहायता योजना से जुड़े लाभों में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने ... Read more
सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी आंखों के इलाज के लिए अमेरिका रवाना हो गए हैं।
जालंधर पुलिस ने एफबीआई के वांटेड मनजीत बेदी को दबोचा, अमेरिका में 600,000 डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप
जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए धोखाधड़ी के एक अंतरराष्ट्रीय मामले में आरोपी मनजीत सिंह बेदी को गिरफ्तार किया है...
वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत का निर्यात अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों की मदद से बढ़ रहा है।
भारत-US की दोस्ती से जलते हैं दूसरे देश बोले: अमेरिकी राजदूत
भारत-अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों पर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी दूसरे देशों के लिए ‘ईर्ष्या’ का कारण बन रही है. गोर ने मोदी-ट्रंप के रिश्तों की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उन नेताओं में शीर्ष पर हैं, जिनसे ट्रंप मिलना चाहते हैं.
मोदी-ट्रंप के रिश्तों पर क्या बोले सर्जियो गोर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी कही ये बात
सर्जियो गोर ने कहा है कि दिसंबर में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में ट्रंप पीएम मोदी से सबसे पहले मिलना चाहेंगे. उन्होंने कहा कि जब भी उनकी ट्रंप से बातचीत होती है, वे अपनी शानदार भारत यात्रा और अपने 'प्रिय मित्र' प्रधानमंत्री को बहुत अच्छी तरह याद करते हैं.
ट्रंप की पहली पसंद PM मोदी! अमेरिकी राजदूत का बड़ा खुलासा!
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने आजतक से बातचीत में भारत अमेरिका रिश्तों पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दुनिया के 35 नेताओं में से किसी एक से मिलना हो तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी सूची में सबसे ऊपर होंगे. गोर ने व्यापार, रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष और क्वाड में बढ़ते सहयोग को रिश्तों की मजबूती का संकेत बताया. व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य है.
'लिंकन में लगी जंग, अमेरिकी दबंगई का भी यही हाल', US पर चीन का तीखा तंज
चीन ने USS अब्राहम लिंकन की खस्ता हालत पर तीखी टिप्पणी की है. अखबार लिखता है कि जंग को रगड़कर हटाया जा सकता है और दोबारा पेंट किया जा सकता है. लेकिन उस सिस्टम की संरचनात्मक थकान को नए पेंट से नहीं छिपाया जा सकता, जो दुनिया में अपने दबदबे को बनाए रखने के लिए सैनिक ताकत पर निर्भर है.
जिस सोने पर गुरूर, अब उसी से टूटेगा अमेरिका का तिल्सिम; धड़ाधड़ खाली हो रहा खजाना!
Gold Price Update: कई देश अमेरिका से अपने सोने के भंडार को वापस मंगा रहे हैं या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर रहे हैं, जिसका मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और भविष्य के संकटों के लिए त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है। नीदरलैंड, फ्रांस और भारत जैसे देशों ने अपने सोने को न्यूयॉर्क से लंदन या घरेलू वॉल्ट में ले जाया है, जिससे सोने के बाजार में बड़ी हलचल और कीमतों में वृद्धि की उम्मीद है।
अमेरिका का मोस्ट वांटेड जालंधर में गिरफ्तार, कौन है मंजीत सिंह बेदी? FBI को क्यों उसकी तलाश
भारतीय मूल के मंजीत सिंह बेदी ने वॉशिंगटन में अपने किराना स्टोर के जरिए अमेरिका की एक सरकारी कल्याणकारी योजना में करोड़ों का घोटाला किया है। वह FBI द्वारा भगोड़ा घोषित किया गया था।
पीएम मोदी से मिलना चाहते हैं ट्रंप; अमेरिकी राजदूत बोले-भारत-US रिश्तों से जलते हैं बाकी देश
अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिकी रिश्तों की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिनसे राष्ट्रपति ट्रंप मिलना चाहते हैं।
अमेरिकी नौसैनिकों के लिए पटाया की मशहूर 'सोई 6' गली क्यों है बैन? जानें बड़ी वजह
US Navy Pattaya Ban: थाईलैंड का खूबसूरत शहर पटाया अपनी रंगीन नाइटलाइफ और एडल्ट एंटरटेनमेंट के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन अमेरिका की नौसेना (US Navy) ने अपने अधिकारियों और सैनिकों के पटाया की सबसे प्रसिद्ध रेड-लाइट गली 'सोई 6' (Soi 6) में जाने ...
एक दांत की कीमत ₹2.37 लाख, अमेरिका के डेंटिस्ट का बिल देख हैरान हुआ NRI, बोला- भारत में तो...
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म्यांमार में विमान पर अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों ने किया ड्रोन अटैक, NIA का दावा
NIA इन साक्ष्यों और वीडियो डेटा के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन ड्रोनों की आपूर्ति कहां से हुई और म्यांमार के विद्रोही गुटों तक यह तकनीक कैसे पहुंची।
अमेरिका-ईरान में टेंशन जारी, डोनाल्ड ट्रंप ने दी ये चेतावनी
2 सितंबर को ड्रोन फुटेज में एक जगह पर नुकसान और मलबा दिखाई दिया; ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह शादी की एक जगह थी जिस पर अमेरिकी सेना ने हमला किया था. नुकसान का शिकार हुई इमारतों में वह जगह भी शामिल थी जिसे ईरानी मीडिया ने शादी का स्थल बताया है; इसकी छत में एक छेद था और आंगन में मलबा बिखरा हुआ था.
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पिता की मौत की खबर ने बेटी को तोड़ दिया, अमेरिका से 13 हजार किमी का सफर तय कर नूंह पहुंची
नूंह, 04 सितंबर2026 ।नूंह में एक परिवार के लिए पिता का निधन बेहद भावुक कर देने वाला पल बन गया। पिता की मौत की खबर मिलने के बाद अमेरिका में रह रही उनकी बेटी खुद को रोक नहीं पाई और अंतिम दर्शन के लिए करीब 13 हजार किलोमीटर का सफर तय कर नूंह पहुंची। हजारों […] The post पिता की मौत की खबर ने बेटी को तोड़ दिया, अमेरिका से 13 हजार किमी का सफर तय कर नूंह पहुंची appeared first on Rashtriya Ujala .
US Navy Sailors in Pattaya: समुद्र के बीच लगातार 286 दिनों की थका देने वाली तैनाती, जंग के तनाव वाले हालात और फिर अचानक थाइलैंड का सबसे मशहूर पार्टी डेस्टिनेशन 'पटाया'। अमरीकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के हजारों जवानों के लिए यह सफर किसी सपने जैसा साबित हो रहा है।लगातार महीनों तक समुद्र में रहने और ईरान युद्ध से जुड़े ऑपरेशन्स के बाद जब अमेरिकी सैनिक सूखी जमीन पर उतरे, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आइए जानते हैं कि पटाया के रंगीन माहौल में ये अमेरिकी जवान आखिर क्या-क्या कर रहे हैं।286 दिनों बाद जमीन पर पेडीक्योर और रिलैक्सेशनथकाऊ तैनाती का असर मिटाने के लिए अमेरिकी नौसेना के पुरुष और महिला सैनिक सबसे पहले पटाया के सैलून में नजर आए। 'कलर नेल सैलून' में नौसेना के जवान अपनी थकान दूर करने के लिए पेडीक्योर करवाते दिखे। गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, सैलून वर्कर अरिसा सुएक्कान्या ने बताया कि अमेरिकी सेना द्वारा इतने लंबे समय बाद थाइलैंड को पहली पोर्ट-ऑफ-कॉल चुनना उनके लिए बेहद उत्साहजनक है।नौसैनिकों ने माना कि जहाज पर कच्चा खाना खाने और कठिन हालातों में रहने के बाद जमीन पर पैर रखते ही कंधे से भारी बोझ उतर गया।खाने पर टूटे जवान: 'थाई फूड और बर्गर से दोस्ती'जहाज पर मिलने वाली अधपकी बीफ और कच्चे आलू की शिकायतों के बाद, थाइलैंड पहुंचते ही जवानों ने सबसे पहले भरपेट खाना खाया। एक सैनिक ने बर्गर किंग में दो बड़े बर्गर ऑर्डर किए, जबकि दूसरे जवान ने मुस्कुराते हुए कहा कि 'अब से मेरी और थाई फूड की पक्की दोस्ती हो चुकी है'। जवान न सिर्फ लोकल फूड एन्जॉय कर रहे हैं, बल्कि दर्जी की दुकानों पर कस्टम-मेड सूट सिलवाने के ऑर्डर दे रहे हैं।रेड लाइट एरिया और 'वॉक-इन स्ट्रीट' का जलवापटाया अपनी नाइटलाइफ और रेड लाइट एरिया के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन अमेरिकी कमांडरों ने जवानों के लिए कुछ सख्त नियम भी तय किए हैं।नौसैनिकों को पटाया की बदनाम बीयर बार वाली सड़क 'सोई 6' पर रात ढलने के बाद जाने से मना किया गया है।हालांकि, मशहूर 'वॉकिंग स्ट्रीट' जवानों के लिए खुली है। वहां के पब और बार्स ने अमेरिका का स्वागत करते हुए विशाल नियॉन बोर्ड लगाए हैं और 'सैनिक आईडी कार्ड' दिखाने पर 10% तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है।मोजे, खिलौने और ब्रांडेड कपड़े खरीद रहे जवानहजारों डॉलर जेब में होने के बावजूद कई जवान बहुत ही साधारण चीजें खरीदते दिखे। एक सैनिक मॉल में नाइकी और Vans के स्टोर से नए मोजे खरीद रहा था, तो दूसरा अपनी पत्नी के लिए H&M से 'हैलो किटी' का सॉफ्ट टॉय खरीदता नजर आया।पटाया के मेयर पोरमेट नगाम्पिचेट के अनुसार, अगर 5,000 अमेरिकी सैनिक रोजाना 100 से 150 डॉलर खर्च करते हैं, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को करीब 10 करोड़ थाई बात (लगभग 3 मिलियन डॉलर) का फायदा होगा।
अमेरिका में बसने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली अपडेट सामने आ रही है। अमरीकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएसएसीआईएस (USCIS) ने ग्रीन कार्ड और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने वाले व्यक्ति या परिवार के वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ उनके क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिरता की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस बदलाव का सीधा असर उन हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स पर पड़ने वाला है जो अपने किसी परिजन या एम्प्लॉयी के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस नए फॉर्म और नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अब स्पॉन्सरशिप की राह उतनी आसान नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी।क्या है USCIS का नया फॉर्म और कैसे काम करेगा स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर की जांच का नया नियमयूएसएसीआईएस द्वारा लागू किए गए इन नए नियमों के केंद्र में एफिडेविट ऑफ सपोर्ट (Affidavit of Support) से जुड़ा नया फॉर्म है, जिसके जरिए स्पॉन्सर को अपनी वित्तीय क्षमता का पूरा ब्योरा देना होता है। पारंपरिक तौर पर स्पॉन्सर को सिर्फ अपनी आय का टैक्स रिटर्न दिखाना होता था, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारी स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर, बैंक खातों की स्थिति, मौजूदा कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई स्पॉन्सर आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है या उसका क्रेडिट स्कोर खराब चल रहा है, तो वह किसी आवेदक के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं कर पाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अमेरिका आने वाला नया अप्रवासी कभी भी वहां की सरकारी सहायता या पब्लिक चार्ज (Public Charge) पर निर्भर न हो और अपनी आजीविका खुद चलाने में पूरी तरह से सक्षम हो।भारतीय आवेदकों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इस बदलाव के क्या हैं गहरे मायनेअमेरिका में वर्क वीजा यानी एच-1बी (H-1B) पर काम कर रहे लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता पहले से ही काफी लंबा और पेचीदा रहा है। ऐसे में फैमिली-बेस्ड या एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड स्पॉन्सरशिप के नियमों का कड़ा होना भारतीयों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार परिवार के सदस्य जब अपने माता-पिता या भाई-बहनों को अमेरिका बुलाने के लिए स्पॉन्सर करते हैं, तो उन्हें इस नए वित्तीय कड़े मानदंड से गुजरना होगा। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, और जरा सी भी वित्तीय चूक होने पर आवेदन को सीधे खारिज किया जा सकता है। इसलिए जो भारतीय परिवार या पेशेवर आने वाले दिनों में ग्रीन कार्ड के लिए फाइल करने की सोच रहे हैं, उन्हें अपने स्पॉन्सर के वित्तीय रिकॉर्ड और क्रेडिट हिस्ट्री को पहले से ही दुरुस्त और मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है।भविष्य की आव्रजन नीतियां और ग्रीन कार्ड चाहने वालों के लिए जरूरी सलाहअमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हो रहे ये लगातार बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले समय में ग्रीन कार्ड पाना और अधिक कठिन और अनुशासित होने जा रहा है। अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर साल नियमों में फेरबदल किए जाते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में भारतीय अप्रवासियों और छात्रों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कागजी कार्रवाई को शुरू करने से पहले इमीग्रेशन वकीलों या विशेषज्ञों से पूरी सलाह जरूर लें। नए फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पॉन्सर की आय संघीय गरीबी रेखा (Federal Poverty Guidelines) से काफी ऊपर हो और उनका क्रेडिट इतिहास बिल्कुल साफ-सुथरा हो। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर सही कदम उठाकर ही इस नई प्रशासनिक चुनौती से पार पाया जा सकता है और अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का सपना साकार किया जा सकता है।
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर उस छात्र की आंखों में पलता है जो अपनी मेहनत के दम पर करियर में ऊंची उड़ान भरना चाहता है। जब दुनिया भर के बेहतरीन विश्वविद्यालयों की बात आती है, तो अमेरिका का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और शानदार करियर ग्रोथ की वजह से अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, वहां की महंगी यूनिवर्सिटी फीस, ट्यूशन कॉस्ट और रहने-खाने का भारी खर्च कई बार मेधावी छात्रों के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। वित्तीय तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका जाने का विचार छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में ऐसी कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप प्रोग्राम्स मौजूद हैं, जो छात्रों के ट्यूशन फीस से लेकर उनके रहने, खाने और यहाँ तक कि हेल्थ इंश्योरेंस तक का पूरा खर्च खुद उठाती हैं? इन स्कॉलरशिप्स के जरिए आप बिना किसी आर्थिक तनाव के अमेरिकी धरती पर अपने सपनों की डिग्री हासिल कर सकते हैं।अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मिलने वाली फुल-ब्राइट और अन्य प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स के बारे में जानेंअमेरिका में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप (Fulbright-Nehru Fellowships) एक ऐसा नाम है जो भारत में बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित है। अमेरिकी सरकार और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो मास्टर या पीएचडी करने अमेरिका जाना चाहते हैं। इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ मासिक वजीफा, आने-जाने का हवाई किराया और स्वास्थ्य बीमा का पूरा खर्च कवर किया जाता है। इसके अलावा ह्यूबर्ट हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम (Hubert Humphrey Fellowship Program) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो अनुभवी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नॉन-डिग्री स्टडी और लीडरशिप ट्रेनिंग का मौका देते हैं। इन स्कॉलरशिप्स को हासिल करने के लिए छात्रों को एक निश्चित चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और अपने एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर खरा उतरना होता है, जिसके बाद उनके विदेश में पढ़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाता है।यूनिवर्सिटी-बेस्ड फाइनेंशियल असिस्टेंस और फुल-राइड स्कॉलरशिप्स का कैसे उठाएं लाभकेवल सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अधिकांश प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी अपने यहां आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को मेरिट और जरूरत के आधार पर फुल-राइड स्कॉलरशिप्स प्रदान करते हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और येल जैसी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज की वित्तीय सहायता नीतियां बहुत मजबूत हैं। अगर आपका एकेडमिक रिकॉर्ड शानदार है और आपके पास बेहतरीन एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का रिकॉर्ड है, तो ये यूनिवर्सिटीज आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 100 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति दे सकती हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही मिलने वाली ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंटशिप (GRA) या टीचिंग असिस्टेंटशिप (TA) के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं, जिससे उनका रहने-खाने का खर्च आसानी से निकल जाता है। इन अवसरों के बारे में सही समय पर जानकारी जुटाकर समय से आवेदन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अमेरिका में फ्री एजुकेशन पाने के लिए स्मार्ट टिप्सअमेरिका में बिना पैसे की टेंशन के पढ़ाई करने का यह सुनहरा अवसर पाने के लिए छात्रों को अपनी तैयारी बहुत पहले से शुरू करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आपको अपने एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, प्रोफेसरों से मिलने वाले रिकमेंडेशन लेटर्स और आईईएलटीएस (IELTS) या टॉफेल (TOEFL) जैसे इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट के स्कोर कार्ड तैयार रखने होते हैं। अधिकांश स्कॉलरशिप्स के लिए आवेदन की प्रक्रिया साल में एक निश्चित समय पर खुलती है, इसलिए यूनिवर्सिटीज की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर डेडलाइन पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाने के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन और नेतृत्व क्षमता से जुड़े अनुभवों को अपने आवेदन में जरूर शामिल करें। थोड़ी सी मेहनत, सही दिशा में की गई रिसर्च और समय पर किए गए आवेदन आपको बिना किसी वित्तीय बोझ के अमेरिका की बेहतरीन शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का बड़ा दावा, कहा-हम यूरोप को बचा रहे हैं...
इंटरनेट डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब यूरोप को लेकर बड़ा दावा किया है। खबरों के अनुसार, एक ब्रिटिश पत्रकार से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ब्रिटेन को कथित ईरानी परमाणु खतरे से बचा रहा है। उन्होंने इस दौरान ब्रिटिश पत्रकार से कहा कि मैं आपके देश को भी इस खतरे से बचा रहा हूं। अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो वे अमेरिका के मुकाबले यूरोप में इसका इस्तेमाल करने के लिए अधिक तत्पर होते, क्योंकि उनके पास यूरोप तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता मौजूद है। आपको बता दें कि इससे पहले गत वर्ष मार्च में अमेरिकी खुफिया समुदाय ने दावा किया था कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा है और उसके नेतृत्व ने 2003 में निलंबित किए गए परमाणु हथियार कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी है। गौतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच एक बार फिर से जंग छिड़ चुकी है। PC:deccanchronicle अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
टेस्ला के मुताबिक, 22-इंच की टचस्क्रीन पर थिएटर, म्यूजिक और गेमिंग ऐप्स के साथ, साइबरकैब आपको काम करने या आराम करने की जगह देता है. जल्द ही इसमें पूरी कनेक्टिविटी के लिए V5 स्टारलिंक हार्डवेयर भी लगाया जाएगा.
हिंदू-अमेरिकी नेता बोले- भागवत के वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे विज्ञापन से जागती है हिंदू गौरव की भावना
वॉशिंगटन, 4 सितंबर . हिंदू-अमेरिकी नेताओं ने Thursday को ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत वाले एक पूरे पेज के पेड विज्ञापन का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि एकता और विविधता के प्रति सम्मान का संदेश देने वाले इस विज्ञापन ने समुदाय को अपनी विरासत पर गर्व महसूस कराया. यह पेड ... Read more
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्वाड सहयोग की समीक्षा की
वॉशिंगटन, 4 सितंबर . भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण तकनीकों और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में चल रहे सहयोग की समीक्षा की. यह बैठक ऐसे समय हुई है जब चार देशों का समूह ‘क्वाड’ अपने अगले विदेश मंत्रियों की बैठक की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी विदेश विभाग ... Read more
ईरान के बाद अब क्यूबा पर आफत! अमेरिका ने लगा दिए नए प्रतिबंध, जानें क्या बताई वजह
अमेरिका की सरकार ने क्यूबा पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका मकसद क्यूबा के ऊर्जा संकट को और गंभीर बनाना बताया जा रहा है। इस पर मार्को रुबियो ने कहा कि कास्त्रो के भ्रष्ट वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कतर सरकार की ओर से आईटीयू (अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ) को सौंपे गए दस्तावेज का हवाला देते हुए ईरान की ओर कतर की जमीन पर किए हमलों का बचाव किया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली की एक अदालत को बताया है कि मार्च में गिरफ्तार किए गए सात विदेशी नागरिक म्यांमार में एक नागरिक विमान पर ड्रोन हमले से जुड़े हैं। इनमें छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी शामिल हैं। ये लोग भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार हुए थे। […]
कीव स्थित अमेरिकी कंपनी पर रूस का ड्रोन हमला अमेरिका को साफ संदेश : जेलेंस्की
कीव स्थित अमेरिकी कंपनी पर रूस का ड्रोन हमला अमेरिका को साफ संदेश : जेलेंस्की
India-US: ट्रेड डील पर भारत ने अमेरिका के सामने रखी शर्त, तब तक ऐलान नहीं होगा जब तक...
इंटरनेट डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते की अंतिम डिटेल्स फिलहाल सार्वजनिक नहीं होंगी। मीडिया रिपोटर्स की माने तो केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, समझौते का फाइनल टेक्स्ट तभी सामने आएगा, जब अमेरिका भारतीय उत्पादों को उसके प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले बेहतर प्रेफरेंशियल टैरिफ रेट देने पर सहमत होगा। उन्होंने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक वर्कशॉप में यह बात कही। क्या बोले गोयल मीडिया रिपोटर्स की माने तो पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते का टेक्स्ट अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, उनके मुताबिक, भारत को जब तक अमेरिका से बेहतर प्रेफरेंशियल रेट नहीं मिलता, तब तक बीटीए की अंतिम डिटेल्स सामने नहीं आएंगी. भारत और अमेरिका ने फरवरी में समझौते के पहले चरण के फ्रेमवर्क को फाइनल करने का ऐलान किया था। हालांकि, इसके बाद अमेरिका के टैरिफ ढांचे में बदलाव हुआ और दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू हुई। इन देशों से है भारतीय सामान को मुकाबला अमेरिकी बाजार में भारत को श्रीलंका, बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलती है। इंडोनेशिया और मलेशिया भी प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में शामिल हैं। सरकार की कोशिश है कि भारत को इन देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ दर मिले। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे और उनकी प्राइस कंपिटिटिवनेस बढ़ेगी। pc- newsonair.gov.in
New Delhi, 4 सितंबर . ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कतर Government की ओर से आईटीयू (अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ) को सौंपे गए दस्तावेज का हवाला देते हुए ईरान की ओर कतर की जमीन पर किए हमलों का बचाव किया. उन्होंने कहा कि दस्तावेज में यह पूरी तरह स्पष्ट है कि ईरान ... Read more
'ईरान के हमले में सिर्फ अमेरिकी ठिकाने, नागरिक क्षेत्र नहीं', इस्माइल बाघेई ने आईटीयू को सौंपे दस्तावेज का दिया हवाला
ईरान के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय संघ आए साथ: तेल और वित्तीय नेटवर्क पर कसा शिकंजा, क्या बढ़ेगा आर्थिक संकट?
पश्चिम एशिया तनाव: 'ईरान के मुकाबले चीन ज्यादा जिम्मेदार', अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने क्यों कही ये बात?usa vice president jd vance said china is more responsible then iran west asia tension
स्मृति शेष: स्टाइनम ने गांधी से प्रेरणा ले अमेरिका में छेड़ा था आंदोलन; कैसे भारत में पदयात्रा से बदली थी सोच?
भारतीयों पर दोहरी मार: अमेरिका में ग्रीन कार्ड की उम्मीदों को झटका, खाड़ी संकट ने भी बढ़ाई चिंता; आगे क्या?
विदेश के समाचार: अटलांटिक में प्रवासियों की नाव डूबी, पांच की मौत; ईबी-1 वीजा पर अमेरिका में सख्ती जारी
मस्क की 'साइबरकैब' में नहीं होगा स्टीयरिंग: फिर कैसे रुकेगी गाड़ी? अमेरिका में शुरू हुई नई सेवा
मस्क की 'साइबरकैब' में नहीं होगा स्टीयरिंग: फिर कैसे रुकेगी गाड़ी? अमेरिका में शुरू हुई नई सेवा
Kangra News: अमेरिका से गठोता पहुंची अनूप कुमार की पार्थिव देह
उलेहड़ियां पंचायत के गठोता गांव निवासी एवं पब्लिक मॉडल स्कूल परिवार से जुड़े अनूप कुमार (40) पुत्र कैप्टन तारा सिंह का अमेरिका में बीमारी के चलते निधन हो गया था।
Shamli News: यूरोप, अमेरिका, कनाडा और स्विट्जरलैंड में मिल रही गोगी गिरोह के गुर्गाें की लोकेशन
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में गोगी गिरोह के विदेश में बैठे गुर्गे लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं।
हबीबी, ईरान आओ ना, तेहरान ने अमेरिका की धमकी का मज़ाक उड़ाया, ट्रंप को कहा-अंकल सैम
ईरान और अमेरिका में फिर से जंग छिड़ गई है। होर्मुज को लेकर की गई टिप्पणी के बाद ईरान ने अमेरिका का मजाक उड़ाया है, ट्रंप को अंकल सैम कहा है और एक गेम के साथ पोस्ट लिखा है-हबीबी ईरान आओ ना
समुद्र में 250 दिन बिताने के बाद थाईलैंड के पटाया क्यों पहुँचे अमेरिका के 5,000 सैनिक - BBC
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रूसी तेल खरीदने या न खरीदने से यूक्रेन युद्ध नहीं रुकेगा; कीव में बैठकर जयशंकर अमेरिका को रगड़ दिया
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत का रुख दोहराते हुए साफ कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान इस बात से नहीं होगा कि कोई देश तेल खरीद रहा है या नहीं खरीद रहा है।
90 अमेरिकी नेताओं का ऐलान, RSS और जुड़े संगठनों से नहीं लेंगे चंदा; मोहन भागवत के दौरे का रिएक्शन?
संघ प्रमुख ने न्यूयॉर्क में 'वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी फेथ लीडर्स समिट' को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाता।
'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ चल रहे तनाव के सात महीने बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निजी तौर पर यह घोषणा करने पर विचार कर रहे हैं कि युद्ध खत्म हो गया है। हालांकि, पेंटागन पश्चिम एशिया में सैनिकों की तैनाती बढ़ा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि तनाव अगले साल तक जारी रह सकता है। यह रिपोर्ट तब आई जब मंगलवार को अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का एक नया दौर शुरू हुआ। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार को कहा कि उसने ईरान के अंदर कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी सुविधाओं पर हमले किए। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका के हालिया हमलों में 18 लोगों की मौत हुई और 142 अन्य घायल हो गए। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान से यारी पड़ी इतनी भारी, पुराना कर्ज चुकाने के लिए सऊदी ले रहा 8 अरब डॉलर का लोन WSJ के अनुसार, ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों से इस बारे में बात की है कि क्या ईरान युद्ध के खत्म होने की घोषणा की जाए। वे निजी तौर पर इस कदम का समर्थन करते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं और युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं। राष्ट्रपति का मानना है कि भारी आर्थिक दबाव के कारण ईरान समय के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म कर देगा। यह घटनाक्रम पिछले हफ्ते अमेरिका द्वारा 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किए जाने के बाद हुआ है, जिसका मकसद तेहरान के मुख्य आर्थिक आधारों - जैसे तेल, शिपिंग, एविएशन और डिजिटल एसेट्स - पर चोट करना है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, भले ही ट्रंप ईरान युद्ध को खत्म करने पर ज़ोर दे रहे हैं, लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ चुपचाप पश्चिम एशिया में सैनिकों की तैनाती बढ़ा रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि यह संघर्ष अगले साल तक खिंच सकता है। इसे भी पढ़ें: भारत तैयार है...यूक्रेन पहुंचकर जयशंकर ने किया ऐसा धमाका, रूस-अमेरिका दोनों हो जाएंगे हैरान मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का हवाला देते हुए अखबार ने बताया कि इस फ़ैसले का मकसद राष्ट्रपति के पास युद्ध में विकल्प बनाए रखना है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने CNN को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव के दौरान, मंगलवार को वाशिंगटन ने 40 कमर्शियल जहाजों को एक अहम समुद्री रास्ते से सुरक्षित निकाला। उन्होंने कहा कि एक ही ऑपरेशन में सुरक्षित निकाले गए जहाजों की यह संख्या जारी युद्ध में अब तक की सबसे ज़्यादा है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर छिड़ा भीषण युद्ध, तेहरान में शादी समारोह में गिरी मिसाइल, मची तबाही
ईरान और अमेरिका के बीच फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिका के मिसाइल हमले का ईरान भी करारा जवाब दे रहा है। वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक शादी समारोह में मिसाइल गिरा और सब तबाह हो गया।
मॉस्को से शांति की ओर बढ़ते कदमों का संकेत मिला है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की संभावना मौजूद है।
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
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अमेरिका: क्या वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ खारिज होगा मामला? इस आधार पर मिल सकती है राहत
अमेरिका: क्या वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ खारिज होगा मामला? इस आधार पर मिल सकती है राहत
अमेरिका में 1984 के दंगों और पंजाब के आतंकवाद के दौर में उत्पीड़न की कथित कहानियां गढ़कर राजनीतिक शरण लेने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अमेरिका की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क की संघीय अदालत ने भारतीय मूल के नागरिक गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने का आदेश दिया है।
अमेरिका, चीन और इजरायल आगे, लेकिन भारत भी बन सकता है वैश्विक एआई पावर: एलेक्स कार्प
चैपल हिल (नॉर्थ कैरोलिना), 3 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी सॉफ्टवेयर और डेटा एनालिटिक्स कंपनी पैलेंटिर टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलेक्स कार्प ने कहा है कि भारत एक प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शक्ति के रूप में उभर सकता है। उन्होंने इसके लिए देश की तकनीकी प्रतिभा, ऊर्जा क्षेत्र में की गई पहल और उन्नत एआई मॉडल विकसित करने की क्षमता को प्रमुख कारण बताया।
Bhadohi News: अमेरिका निर्यात होने वाले कालीनों के साथ देना होगा ज्वलनशीलता का प्रमाण पत्र
A flammability certificate must be provided with carpets exported to the US.
Shamli News: कनाडा-अमेरिका में बैठे गोगी गैंग के सदस्यों के लिए रेड कॉर्नर नोटिस होगा जारी
Red Corner Notice to be issued against Gogi gang members based in Canada and America
मानसा में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी है। किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि सरकारें किसान विरोधी कानून ला रही हैं, जिनका वे विरोध कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) ने पंजाब भर के जिला मुख्यालयों पर किसानों की मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने शुरू किए हैं। मानसा में जिला प्रधान राम सिंह भैणी बागा, महिंदर सिंह रोमाणा, कुलदीप सिंह कोर वाला, जगसीत सिंह जवाहरके और मेजर सिंह गोबिंदपुरा जैसे किसान नेता प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। वे केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की भारत-अमेरिका डील का भी विरोध किया। उनका कहना है कि इस डील से देश के किसानों, व्यापारियों और मजदूरों को नुकसान होगा। पंजाब सरकार द्वारा किसानों की जमीनों की मैपिंग और लैंड पूलिंग नीति लाने का भी लगातार विरोध किया जा रहा है। 13 मांगों को लेकर चल रहा प्रदर्शन किसान नेताओं ने बताया कि देश के किसान और मजदूर कर्ज के बोझ तले दबे हैं। उनका पूरा कर्ज माफ किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकारें बड़े घरानों के कर्ज माफ कर रही हैं, जबकि छोटे किसानों और मजदूरों के घरों पर ताले लगाए जा रहे हैं। किसान नेताओं ने साफ किया कि पंजाब भर में चल रहे इन धरनों में किसानों की 13 मुख्य मांगें केंद्र और पंजाब सरकार से जुड़ी हैं। जब तक सरकार इन मांगों पर ध्यान नहीं देती, तब तक ये धरने जारी रहेंगे।
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। कान्हा के 5253वें जन्मोत्सव को खास बनाने के लिए मथुरा-वृंदावन के बाजार सजकर तैयार हैं। जन्माष्टमी से पहले लड्डू गोपाल की पोशाक, मुकुट और अन्य श्रृंगार सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। ब्रज में तैयार होने वाले कान्हा के श्रृंगार की मांग सिर्फ देश तक सीमित नहीं है। अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जापान, जर्मनी, रूस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भी यहां तैयार होने वाली पोशाक और श्रृंगार सामग्री भेजी जाती है। इस बार जन्माष्टमी के आसपास इससे करीब 1,500 करोड़ रुपए के कारोबार का अनुमान है। कान्हा के श्रृंगार को तैयार करने में ब्रज के करीब 3 हजार हिंदू-मुस्लिम कारीगर दिन-रात जुटे हैं। कारीगर लड्डू गोपाल की अलग-अलग डिजाइन और आकार की पोशाक, मुकुट और अन्य श्रृंगार सामग्री तैयार कर रहे हैं। इनकी कीमत 10 रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक है। 3 तस्वीरें देखिए- छोटी जरी की पोशाक बनाने में 8 घंटे तक लग रहे पोशाक व्यापारी शुभम गुप्ता ने बताया कि मथुरा-वृंदावन की गलियों में पोशाक, मुकुट और ठाकुरजी के श्रृंगार का कारोबार लंबे समय से चल रहा है। यहां छोटे-बड़े करीब 300 कारखाने हैं। इनमें 3 हजार से ज्यादा कारीगर दिन-रात पोशाक और श्रृंगार का सामान तैयार कर रहे हैं। कारीगरों के मुताबिक, छोटी जरी की पोशाक तैयार करने में भी करीब 8 घंटे लग जाते हैं। इसमें ज्यादातर बारीक काम हाथ से किया जाता है। जन्माष्टमी नजदीक आते ही पोशाक और श्रृंगार के सामान की मांग बढ़ जाती है। कारोबारियों को करीब दो महीने पहले से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। पोशाक के साथ ठाकुरजी के मुकुट, गले के हार, पायजेब, बगलबंदी, चूड़ियां और कानों के कुंडल भी तैयार किए जा रहे हैं। अलग-अलग साइज और डिजाइन में उपलब्ध इन सामानों की भक्त जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इंग्लैंड, जापान और जर्मनी से भी पोशाक के ऑर्डर आए ब्रज की खासियत यह भी है कि ठाकुरजी की पोशाक तैयार करने में हिंदू और मुस्लिम कारीगर साथ मिलकर काम करते हैं। दोनों समुदायों के कारीगर महीन कढ़ाई और जरी का काम करते हैं। जन्माष्टमी से पहले यह काम आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। कारीगर कान्हा के लिए अलग-अलग डिजाइन और रंगों में आकर्षक पोशाक तैयार कर रहे हैं। इस बार अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जापान, जर्मनी, रूस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से पोशाक के ऑर्डर मिले हैं। 'राधा' नाम वाली पोशाक सबसे ज्यादा पसंद बाजार में लड्डू गोपाल के लिए कई डिजाइन और रंगों की पोशाक हैं। इस बार 'राधा' नाम लिखी पोशाक की सबसे ज्यादा डिमांड है। अलग-अलग साइज में इन पोशाकों पर राधा नाम के साथ राधा-कृष्ण के छोटे-छोटे चित्र भी लगाए गए हैं। इसके अलावा श्रीनाथजी की छवि वाली पोशाक भी भक्तों को पसंद आ रही है। जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को आमतौर पर पीले रंग की पोशाक पहनाने की परंपरा है, जबकि राधारानी के लिए मोरपंखी रंग की पोशाक पसंद की जा रही है। 10 रुपए से शुरू, 20 हजार तक कीमत पहुंची पोशाक व्यापारी शुभम गुप्ता ने बताया- इस बार पोशाक की मांग पिछले वर्षों की तुलना में अच्छी है। बाजार में 10 रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक की पोशाक हैं। पोशाक का साइज, डिजाइन और उस पर किए गए काम के हिसाब से कीमत तय होती है। मशीन से तैयार पोशाक कुछ सस्ती हैं, जबकि हाथ से जरी और कढ़ाई वाली पोशाक की कीमत ज्यादा है। भक्त अपनी पसंद और बजट के हिसाब से लड्डू गोपाल के लिए पोशाक खरीद रहे हैं। पालने में झूलेंगे लाला, 100 से 5 हजार तक कीमत जन्माष्टमी पर कान्हा के जन्म के बाद उन्हें पालने में झुलाने की परंपरा है। यही वजह है कि बाजार में इस बार अलग-अलग डिजाइन के पालने भी खूब बिक रहे हैं। खस, कपड़े और फूलों से तैयार पालनों के साथ गोल और चौकोर डिजाइन के पालने भी हैं। इनकी कीमत 100 रुपए से लेकर 5 हजार रुपए तक है। इसके अलावा लकड़ी के खिलौने और भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाने के लिए खास तरह की हांडियां भी बाजार में हैं। इससे जन्माष्टमी से पहले मथुरा के बाजारों में कान्हा के श्रृंगार और जन्मोत्सव की तैयारियों को लेकर रौनक बढ़ गई है। --------------------------- ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ में तेज बारिश, सड़कें डूबीं: चित्रकूट में मंदाकिनी फिर उफनाई, SP अनाउंस कर रहे- घर-दुकान बंद करके जाइए यूपी में मानसूनी बारिश का सिलसिला जारी है। मंगलवार सुबह से लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर समेत 35 जिलों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। लखनऊ में दोपहर 2 बजे अचानक अंधेरा छा गया। फिर तेज बारिश शुरू हो गई। कई जगह सड़कों पर पानी भर गया। पढ़ें पूरी खबर…
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
गुरुग्राम पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने फर्जी Apple कस्टमर सर्विस के नाम पर अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी गुरुग्राम के पालम विहार स्थित एक मकान में फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। पुलिस ने आरोपियों से 9 लैपटॉप, 20 मोबाइल फोन, 2 हेडफोन/माइक, 2 कार, 1 बाइक और 1 स्कूटी बरामद की है। पुलिस थाना साइबर अपराध पश्चिम की टीम को जानकारी मिली थी कि प्लॉट नंबर 1208, जे ब्लॉक, पालम विहार में बिना इजाजत फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया इस जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर छापा मारा। इस दौरान आरोपी लैपटॉप, मोबाइल फोन और हेडफोन/माइक के जरिए X-Lite Dialler और Apple FaceTime पर अंग्रेजी भाषा में विदेशी नागरिकों से बात करते हुए मिले। पुलिस ने मौके से सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम प्रितपाल सिंह, मोहम्मद रिजान अंसारी, चैतन्य गोयल, मनीष, शाहरुख अंसारी, संजीव पाण्डे, शिवम, आदित्य, दीपक त्रिवेदी, वरुण गौतम और नीरज हैं। पुलिस के अनुसार, प्रितपाल सिंह कॉल सेंटर में टीम लीडर के तौर पर काम करता था। वायरस या तकनीकी समस्या का झांसा देते आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने करीब 2 से 3 महीने पहले मकान किराए पर लेकर यह कॉल सेंटर शुरू किया था। कॉल करने वालों को कमीशन के आधार पर रखा गया था, जबकि सेंटर का संचालन कोई और व्यक्ति कर रहा था। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों को Apple कस्टमर सर्विस का कर्मचारी बनकर कॉल करते थे। वे मोबाइल में वायरस या तकनीकी समस्या होने का झांसा देकर उन्हें फर्जी वर्चुअल टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने को कहते थे। 10 हजार से 20 हजार अमेरिकी डॉलर तक ठगते थे इसके बाद फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) के फर्जी पत्र का डर दिखाकर समस्या के समाधान के नाम पर उनसे 10 हजार से 20 हजार अमेरिकी डॉलर तक की रकम ठगते थे। ठगी की रकम विदेशी बैंक खातों में ट्रांसफर कराने के साथ-साथ गिफ्ट वाउचर और कार्ड के नंबर भी हासिल किए जाते थे। मामले में साइबर अपराध पश्चिम थाने में BNS की धारा 318(4), 319, 61(2) तथा IT Act की धारा 43, 66D, 72 और 75 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब कॉल सेंटर के संचालन से जुड़े अन्य लोगों और ठगी से जुड़े बैंक खातों की भी जांच कर रही है।
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
गुरुग्राम साइबर पुलिस ने पालम विहार में एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो अमेरिकी नागरिकों को एपल कस्टमर सर्विस के नाम पर ठग रहा था। पुलिस ने 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा: भारतीय चिंतन की सार्थक प्रस्तुति
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की अगस्त 2026 की अमेरिका यात्रा को केवल प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम तक सीमित करके देखना उसके व्यापक अर्थ को छोटा करना होगा। न्यूयार्क में 29 अगस्त को आयोजित ‘एक विश्व, एक मानवता’ कार्यक्रम में उनका संबोधन ऐसे समय हुआ, जब संघ को लेकर भारत ही नहीं, विदेशों में भी अनेक धारणाएं, आरोप और पूर्वाग्रह सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे वातावरण में भागवत ने जिस प्रकार विविधता, संवाद, सेवा, सह-अस्तित्व और मानवीय एकात्मता को केंद्र में रखा, उसने संघ की विचारधारा को उसके समर्थकों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक समाज के सामने भी एक अलग दृष्टि से प्रस्तुत किया। यह यात्रा इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है और उसके विचार अब भारत की सीमाओं से बाहर भी व्यापक चर्चा का विषय बन रहे हैं। भागवत का अमेरिका जाना वस्तुतः संघ के विचार को प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से समझाने का अवसर बना। संघ के बारे में भारत में लंबे समय से दो विपरीत धारणाएं दिखाई देती रही हैं। एक पक्ष उसे भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभावना, सेवा और सामाजिक संगठन की विराट शक्ति मानता है, जबकि दूसरा पक्ष उसके विचारों को संकीर्ण धार्मिक राजनीति से जोड़कर देखता है। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने समय-समय पर संघ और उसके विचारों पर गंभीर राजनीतिक प्रश्न उठाए हैं। अमेरिका में भी कार्यक्रम से पहले कुछ संगठनों और राजनीतिक व्यक्तियों ने भागवत की यात्रा और संघ की विचारधारा पर आपत्तियां व्यक्त कीं। ऐसे माहौल में किसी संस्था की वास्तविक छवि केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बनती, वह संवाद से बनती है। यही इस यात्रा का सबसे बड़ा महत्व है। भागवत ने अपने विचार विरोधियों पर आक्रमण करके नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन की व्याख्या करके सामने रखे। इससे संघ को लेकर बनी धारणाओं पर बहस का एक नया आधार तैयार हुआ। न्यूयार्क में भागवत के वक्तव्य का सबसे अधिक चर्चित पक्ष उनका हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर स्पष्ट कथन रहा। उन्होंने कहा कि यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमानों के लिए स्थान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। यह कथन राजनीतिक नारे से अधिक महत्वपूर्ण इसलिए है कि इसमें हिंदुत्व की उनकी व्याख्या को सामाजिक समावेश के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सत्य एक है और उसे समझने तथा व्यक्त करने के मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं। भारतीय परंपरा की यही विशेषता है कि वह मतभिन्नता को अस्तित्व के संकट के रूप में नहीं, बल्कि सत्य की विविध अभिव्यक्तियों के रूप में देखने की क्षमता रखती है। यहां एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है-यदि हिंदुत्व का अर्थ भारत की सांस्कृतिक चेतना है, तो क्या वह किसी समुदाय को भारत से बाहर कर सकता है? भागवत का उत्तर स्पष्ट रूप से नकारात्मक दिखाई देता है। उनका कथन हिंदुत्व की उस व्याख्या को सामने रखता है, जिसमें भारतीयता किसी एक पूजा-पद्धति की बपौती नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत है। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Muslims पर Bhagwat के बयान के बाद BJP ने Rajasthan में 8 मुसलमानों को थमाए टिकट, UP में भी दिखेगा बदलाव! भागवत ने अमेरिका में भारत की विविधता को उसकी कमजोरी नहीं, शक्ति बताया। उनके अनुसार विविधता और एकता भारत के स्वभाव में ही अंतर्निहित हैं। भारत में भाषा, जाति, पंथ, पूजा-पद्धति और परंपराओं की असंख्य धाराएं हैं, फिर भी इन्हें एक साझा सभ्यतागत चेतना जोड़ती रही है। यह संदेश आज के विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। अनेक देशों में धार्मिक पहचान, नस्लीय भेद, सांस्कृतिक असहमति और राजनीतिक ध्रुवीकरण सामाजिक तनाव बढ़ा रहे हैं। ऐसे समय भारत का अनुभव यह बताता है कि भिन्नताओं को मिटाना आवश्यक नहीं, उन्हें सम्मान देकर भी एकता स्थापित की जा सकती है। यही विचार भागवत के संबोधन को सामान्य राजनीतिक भाषण से ऊपर उठाता है। उनका आग्रह था कि विविधता को स्वीकार ही नहीं, सम्मान और संरक्षण भी मिलना चाहिए। संघ की सार्वजनिक छवि का एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक विमर्श से निर्मित हुआ है, जबकि संघ स्वयं को सामाजिक संगठन और सेवा-आधारित सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। भागवत ने अमेरिका में भी सेवा, सामाजिक समरसता और संवाद को परिवर्तन का आधार बताया। यही वह बिंदु है जहां संघ की छवि को केवल चुनावी राजनीति के चश्मे से देखने की सीमा सामने आती है। किसी संगठन को समझने के लिए उसके राजनीतिक प्रभाव के साथ उसकी सामाजिक गतिविधियों, सेवा-कार्य, संगठनात्मक संस्कृति और वैचारिक आधार को भी देखना आवश्यक है। भागवत की यात्रा ने कम से कम इतना अवसर अवश्य दिया कि संघ को उसके अपने शब्दों और उसके सरसंघचालक की प्रत्यक्ष व्याख्या के आधार पर सुना जाए। अमेरिका में बसे भारतीयों से भागवत ने एक संतुलित संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस देश में वे रह रहे हैं, वह उनकी कर्मभूमि है और वहां के प्रति उनकी निष्ठा तथा दायित्व सर्वोपरि हैं। साथ ही भारत उनकी जन्मभूमि है, जिससे उन्हें मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक संस्कारों की विरासत मिली है। यह दृष्टि प्रवासी भारतीयों के सामने पहचान के संघर्ष के बजाय पहचान के समन्वय का मार्ग रखती है। अपनी जड़ों से जुड़े रहना और जिस समाज में रह रहे हैं उसके प्रति पूर्ण निष्ठा रखना-दोनों एक साथ संभव हैं। यही भारतीय संस्कृति की उदारता है। यह भी तथ्य है कि भागवत के कार्यक्रम का अमेरिका में विरोध हुआ और संघ की विचारधारा को लेकर तीखी आलोचनाएं सामने आईं। लेकिन लोकतांत्रिक समाज में किसी विचार का उत्तर उसे दबाकर नहीं, उसके साथ संवाद करके दिया जाता है। इस दृष्टि से यह यात्रा संघ के लिए भी एक परीक्षा थी। भागवत ने विरोध का उत्तर आक्रामक भाषा में देने के बजाय एकात्मता, मानवता और सह-अस्तित्व की बात की। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। आलोचक उनके शब्दों और संघ के व्यवहार के बीच अंतर का प्रश्न उठा रहे हैं, समर्थक इसे संघ के मूल विचारों की स्पष्ट अभिव्यक्ति मान रहे हैं। इस बहस का अंतिम निर्णय समय और व्यवहार करेगा, लेकिन इतना निश्चित है कि बहस अब अधिक प्रत्यक्ष और वैश्विक हो गई है। मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा को संघ की छवि पर वर्षों से चले आ रहे विवाद का अंतिम उत्तर मानना अतिशयोक्ति होगी। किंतु इसे एक महत्वपूर्ण मोड़ अवश्य कहा जा सकता है। जिन लोगों ने संघ को केवल राजनीतिक आरोपों और विरोधी व्याख्याओं के माध्यम से जाना है, उन्हें पहली बार इतने बड़े वैश्विक मंच पर उसके शीर्ष नेतृत्व की विचार-दृष्टि को सीधे सुनने का अवसर मिला। यह यात्रा संघ के लिए एक उजाला इसलिए बनी है कि इसमें प्रतिरक्षा की भाषा कम और आत्मविश्वास की भाषा अधिक दिखाई दी। इसमें यह कहने का प्रयास था कि भारतीयता किसी के निषेध से नहीं, सबके सम्मान से मजबूत होती है, हिंदुत्व किसी समुदाय के बहिष्कार से नहीं, मानवता की एकात्म दृष्टि से सार्थक होता है और भारत की शक्ति उसकी समानता में नहीं, उसकी विविधताओं के बीच बनी रहने वाली सांस्कृतिक एकता में है। आज विश्व को केवल आर्थिक शक्ति, सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रगति की आवश्यकता नहीं है। उसे ऐसा जीवन-दर्शन भी चाहिए जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ सके। भागवत के अमेरिकी संबोधन में भारत की इसी भूमिका की कल्पना दिखाई दी-एक ऐसा भारत जो अपनी परंपरा के बल पर विश्व को सह-अस्तित्व, संवाद और एकात्मता का रास्ता दिखा सके। मोहन भागवत की यह यात्रा इसलिए स्मरणीय रहेगी कि उसने संघ के बारे में चल रही बहस को भारत की सीमाओं से निकालकर विश्व के सार्वजनिक विमर्श में पहुंचा दिया। अब संघ की पहचान केवल उसके विरोधियों के आरोपों या समर्थकों के दावों से नहीं, बल्कि उसके विचार, उसके व्यवहार और समाज के साथ उसके संवाद से तय होगी। अंततः किसी विचारधारा की सबसे बड़ी शक्ति उसका प्रचार नहीं, उसका आचरण होता है। अमेरिका की धरती से भागवत ने जो संदेश दिया है, उसकी वास्तविक कसौटी भारत की धरती पर सामाजिक समरसता, सेवा, संवाद और सह-अस्तित्व के रूप में दिखाई देगी। यदि यह संदेश व्यवहार में उतरता है, तो यह केवल संघ की छवि को नहीं, भारत की वैश्विक सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाई दे सकता है। - ललित गर्ग लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
क्या भारत की तरह अमेरिका में भी है ट्यूशन कल्चर?
भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया.
भारतीय डेटा साइंटिस्ट दिशा लांबा ने अमेरिका में लाखों का पैकेज और एच-1बी वीजा छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया है। उन्होंने अकेलेपन और एच-1बी वीजा की कड़ी बंदिशों को इस निर्णय का मुख्य कारण बताया है। अब वह गुरुग्राम में परिवार के साथ हैं।
पठानकोट के युवक की कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। युवक 3 महीने पहले ही रोजगार की तलाश में अमेरिका गया था। वहां एक स्टोर में काम करता था। वह किसी काम के लिए कनाडा के कैलगरी गया था। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति ने उस पर गोली चला दी। मामला कनाडा के कैलगरी स्थित कॉर्नस्टोन बुलेवर्ड के 1100 ब्लॉक का है। मृतक की पहचान हरजस सिंह (24) के रूप में हुई है। पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने के लिए अपीलजैसे ही इसकी सूचना पठानकोट के सुंदर नगर स्थित उसके घर पहुंची, परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने सरकार से मांग की है कि मृतक के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने के लिए प्रशासनिक मदद मुहैया कराई जाए। फायरिंग की सूचना के बाद पहुंची पुलिसकैलगरी पुलिस की होमिसाइड यूनिट मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, 30 अगस्त को तड़के करीब 12:55 बजे कॉर्नस्टोन बुलेवर्ड एन.ई. के 1100 ब्लॉक में गोलीबारी की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। यहां अधिकारियों को युवक मृत अवस्था में मिला। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस ने लोगों से मांगी मददपुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी के पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी है तो वे 403-266-1234 पर संपर्क करें। इसके अलावा क्राइम स्टॉपर्स के जरिए गुमनाम रूप से भी जानकारी दी जा सकती है। हम खबर को अपडेट कर रहे हैं…
हिमाचल प्रदेश: ईरान-अमेरिका तनाव से Gen Z के मुद्दों तक, कसौली लिट फेस्ट में होगी बेबाक बहस
कसौली क्लब में 23 से 25 अक्तूबर तक 15वां खुशवंत सिंह लिट फेस्ट होगा। ईरान-अमेरिका तनाव, मध्य पूर्व संघर्ष और जेन जी के मुद्दों पर चर्चा होगी।
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
जर्मन मानते हैं, देश पर अमेरिकी प्रभाव बढ़ा
जर्मनी में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 67 प्रतिशत नागरिकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाद अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रमों का जर्मनी पर प्रभाव बढ़ गया है
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
संभल में भारतीय किसान यूनियन (असली अराजनैतिक) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता सदर तहसील पहुंचे और उपजिलाधिकारी विकास चंद्र को ज्ञापन सौंपकर किसानों और ग्रामीणों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि 5 सितंबर तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 6 सितंबर से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। अमेरिकी कृषि उत्पादों को टैरिफ-फ्री करने का विरोध भाकियू ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित अमेरिकी ट्रेड डील का विरोध किया। पदाधिकारियों का कहना है कि भारी वित्तीय सहायता से उत्पादित अमेरिकी कृषि उत्पाद यदि बिना शुल्क भारत में आते हैं तो भारतीय किसानों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा। इससे पहले से आर्थिक संकट झेल रहे किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। संगठन ने व्यापारिक समझौते को रद्द करने के साथ किसानों को खाद, बीज और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की मांग की। यूरिया की लंबी कतार और कालाबाजारी का मुद्दा उठाया किसानों ने यूरिया वितरण व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि खाद वितरण के लिए लगातार नए नियम लागू होने से किसान असमंजस में हैं और उन्हें घंटों कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। यूनियन ने यूरिया की कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की। ज्ञापन में कृषि उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और लागत में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर किसानों को उचित मूल्य देने की मांग भी शामिल रही। सर्किल रेट और जल जीवन मिशन पर भी सवाल किसानों ने जल जीवन मिशन के तहत गांवों में खोदी गई सड़कों की मरम्मत नहीं होने का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि कई गांवों में योजना के बावजूद स्वच्छ पेयजल की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा वर्ष 2013 से संभल जिले में कृषि भूमि के सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जाने पर भी सवाल उठाए गए। किसानों का आरोप है कि पुराने सर्किल रेट के आधार पर बहुफसली और उपजाऊ जमीन का औद्योगिक गलियारे के लिए अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे किसानों में असंतोष है। प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, चौधरी संजीव गांधी, जयवीर सिंह यादव, मुशाहिद, मोहम्मद उस्मान, आशिक रजा, अजर सिंह, नवाब सिंह, मोहम्मद वारिस, मोहम्मद जीशान, चौधरी सत्यवीर सिंह और जावेद अख्तर समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ''अमेरिकी सम्बोधन' के अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक कूटनीतिक मायने
आधुनिक भारत का सामाजिक चाणक्य समझे जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत एक असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी हैं, क्योंकि उन्होंने भाजपा के 'गाबाज' नेतृत्व को बदलवाकर कांग्रेसियों/समाजवादियों को उनके ही राजनीतिक पीच पर 2014 में जो सियासी शिकस्त दिलवाई, उससे आम भारतीयों की राजनीतिक सोच ही बदल गई। फलसफा यह निकला कि आज भारत के जर्रे-जर्रे में भगवा ध्वज शान से लहरा रहा है और आरएसएस-भाजपा खुद SC-ST-OBC-EWS का हिमायती बन चुकी है, ताकि देशद्रोही सियासत के लिए कोई सामाजिक स्पेस ही न छोड़ी जाए। इससे सवर्ण बुद्धिजीवियों में हलचल जरूर है, लेकिन जो व्यक्ति भगवान परशुराम को 'लकड़हारा यानी 'बढ़ई जाति' से जोड़कर एक नया 'ओबीसी ब्राह्मण दर्शन' पैदा कर चुका हो, उसकी 'चाणक्य नीति' और 'श्रीरामजी आदर्श नीति' का आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: 'हमने किसी देश पर कब्ज़ा नहीं किया, न ही धर्म बदला', टोरंटो में मोहन भागवत ने भारत के 'यूनिवर्सल DNA' पर की बात | Mohan Bhagwat Toronto Speech पूरी दुनिया ने देखा कि एक मुस्लिम अमेरिकी महापौर (न्यूयॉर्क) ममदानी के विरोध के बावजूद मोहन भागवत सात समंदर पार अमेरिका पहुंचे और 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में जो संबोधन दिया, वह केवल प्रवासी भारतीयों को संबोधित भाषण नहीं था, बल्कि इसे RSS के शताब्दी-वर्ष में हिंदुत्व की वैश्विक प्रस्तुति और भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (वसुधैव कुटुम्बकम) के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में पढ़ा जा सकता है। जिस प्रकार से मोहन भागवत ने वहां “एक विश्व–एक मानवता”, विविधता में एकता, मानवता और प्रवासी भारतीयों की जिम्मेदारी पर जो जोर दिया, वह यदि अगले 100 सालों में विश्व का सांस्कृतिक नक्शा बदल दे तो आपको हैरत में नहीं पड़ना चाहिए। क्योंकि कहा ही गया है कि अग्रसोचि सदा सुखी। इससे 100 साल पहले के आरएसएस और 100 बाद के आरएसएस की जो झलक उनकी इस यात्रा गत सम्बोधन में मिलती है, वह इस प्रकार है:- पहला, सबसे बड़ा संदेश है हिंदुत्व की वैश्विक री-ब्रांडिंग: भागवत ने अमेरिका में यह रेखांकित किया कि हिंदुत्व मुस्लिम-विरोधी विचार नहीं है और यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए तो वह वास्तविक अर्थ में हिंदू नहीं है। अंतरराष्ट्रीय श्रोता के लिए इसका महत्व बहुत बड़ा है। RSS की पश्चिमी छवि लंबे समय से Hindu nationalism, majoritarianism और minority rights की बहस से जुड़ी रही है। ऐसे में भागवत ने उसी विचारधारा को pluralism, diversity और universal humanity की भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। इसे एक तरह की वैचारिक कूटनीति (ideological diplomacy) कहा जा सकता है। दूसरा, अमेरिका को दिया गया दूसरा संदेश है “भारतीय बनो, लेकिन अमेरिकी भी रहो”: भागवत ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय से अपनी karmabhoomi यानी अमेरिका के प्रति निष्ठा और योगदान की बात कही। इसका अर्थ है कि RSS की वैश्विक परियोजना केवल भारत के बाहर बसे हिंदुओं को संगठित करना नहीं, बल्कि उन्हें स्थानीय समाज में प्रभावशाली और जिम्मेदार नागरिक रहते हुए भारतीय सभ्यतागत पहचान से जोड़ना भी है। यह मॉडल भविष्य में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य पश्चिमी देशों में भारतीय diaspora की राजनीतिक-सामाजिक शक्ति को बढ़ा सकता है। तीसरा, “भारत की विविधता” को अमेरिका में प्रस्तुत करना—बहुत सोचा-समझा संदेश: अमेरिका स्वयं को pluralistic society मानता है। भागवत ने इसी अमेरिकी संवेदनशीलता से संवाद करते हुए कहा कि America = pluralism and, Bharat = unity in diversity. उन्होंने कहा कि विविधता भारत के DNA में है और उसे स्वीकारना व सम्मानित करना चाहिए। यह महज सांस्कृतिक कथन नहीं है। यह भारत की soft power narrative को अमेरिका के राजनीतिक-सांस्कृतिक विमर्श के अनुरूप ढालने का प्रयास भी है। चौथा, लेकिन अमेरिका ने इसे एकतरफा स्वीकार नहीं किया: यहीं इस यात्रा का दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहलू सामने आता है। भागवत के कार्यक्रम से पहले ही New York Mayor Zohran Mamdani ने RSS की विचारधारा को लेकर आपत्ति जताई थी। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF ने तो RSS से जुड़े लोगों पर targeted sanctions और भागवत का visa revoke करने जैसी सिफारिशें तक की थीं। भारत ने इन आरोपों को पक्षपातपूर्ण बताया है। यानी भागवत अमेरिका में जिस “inclusive Hinduism” को प्रस्तुत कर रहे थे, अमेरिकी आलोचकों का एक वर्ग RSS के भारतीय रिकॉर्ड और minority rights को उसके ठीक विपरीत देखता है। इससे उनकी अमेरिकी यात्रा का एक अनपेक्षित परिणाम भी हुआ: वह यह कि RSS अब केवल भारतीय राजनीति का विषय नहीं रहा; वह अमेरिकी public discourse में भी India, religion, democracy और minority rights की बहस का हिस्सा बन गया है। पांचवां, भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्या अर्थ?: सरकार-से-सरकार कूटनीति से अलग एक नया people-to-people / diaspora-to-politics channel मजबूत होता दिख रहा है। अमेरिका में भारतीय मूल की आबादी आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है। यदि RSS इस समुदाय में अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक स्वीकार्यता बढ़ाता है तो उसका असर भविष्य मेंअमेरिकी राजनीति में India-related lobbying, भारत की image-building, Hindu-American organisations, भारत-अमेरिका strategic relationship, धार्मिक स्वतंत्रता और minority-rights debates पर पड़ सकता है। छठा, सबसे दिलचस्प बदलाव: “हिंदू राष्ट्र” से “विश्व मानवता” तक: आपके पिछले सवाल से इसे जोड़ें तो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है। भागवत की वैचारिक भाषा में एक trajectory दिखाई देती है: हिंदू संगठन → हिंदू राष्ट्र → सामाजिक समरसता → विश्वगुरु → “One World, One Humanity” न्यूयॉर्क में उन्होंने कहा कि RSS की दृष्टि दुनिया को एक परिवार/एक मानवता के रूप में देखने की है। इसलिए इसे “विश्व विजय” कहना शायद अतिशयोक्ति होगा; लेकिन भारतीय सभ्यतागत विचार को वैश्विक वैचारिक प्रभाव में बदलने की कोशिश कहना अधिक सटीक है। सातवां, और यही सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है: भागवत के अमेरिकी भाषण ने RSS के सामने एक नई कसौटी खड़ी कर दी है: यदि हिंदुत्व वास्तव में विविधता, मानव-एकता और मुसलमानों सहित सभी समुदायों की बराबर जगह को स्वीकार करता है, तो क्या यही सिद्धांत भारत के घरेलू सामाजिक-राजनीतिक व्यवहार में भी उसी स्पष्टता से दिखाई देगा? इसी प्रश्न को लेकर भारत में विपक्ष ने उनके अमेरिकी वक्तव्य पर सवाल उठाए हैं—आलोचकों ने इसे “doublespeak” तक कहा है। मेरे आकलन में अमेरिकी भाषण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मायना यही है: RSS पहली बार इतने बड़े वैश्विक मंच पर अपने को केवल Hindu organisation के रूप में नहीं, बल्कि मानवता, विविधता और वैश्विक सामाजिक व्यवस्था के बारे में एक वैकल्पिक सभ्यतागत विचार देने वाली संस्था के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। और यदि यह रणनीति आगे ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों में भी जारी रहती है, तो RSS की शताब्दी के बाद का दशक भारत के भीतर वैचारिक प्रभाव से आगे बढ़कर वैश्विक वैचारिक प्रभाव की प्रतिस्पर्धा का दशक बन सकता है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग द्वारा CPT (Curricular Practical Training) को लेकर एक नया नीतिगत मेमो जारी किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। CPT वह माध्यम है जिसके जरिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी डिग्री कोर्स के दौरान ही इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन ICE के इस नए मेमो ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और पेचीदा बना दिया है, जिससे भारतीय छात्रों के करियर और उनकी कानूनी स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है। गूगल डिस्कवर और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय इस विषय को लेकर लाखों छात्र सर्च कर रहे हैं कि आखिर इस नए बदलाव का उनकी पढ़ाई और जॉब करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए अमेरिका में CPT के पूरे गणित को समझते हैं और जानते हैं कि ICE के इस नए मेमो में क्या-क्या खास बातें कही गई हैं।अमेरिका में CPT (कर्रिकलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) असल में क्या है?सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CPT क्या है और यह विदेशी छात्रों के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जब कोई भारतीय छात्र अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन (मास्टर्स या बैचलर्स) के लिए एडमिशन लेता है, तो उसे अपने कोर्स के करिकुलम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाती है, जिसे CPT कहा जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और साथ ही कुछ पैसे भी कमाते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए जीवनरेखा की तरह होता है जो अपने खर्चों का एक हिस्सा खुद उठाने और अमेरिकी कॉर्पोरेट कल्चर को नजदीक से समझने की कोशिश करते हैं। पारंपरिक रूप से CPT को F-1 वीजा धारक छात्रों के लिए एक बेहद लचीली और मददगार व्यवस्था माना जाता रहा है, जिसके जरिए वे आगे चलकर OPT (Optional Practical Training) और H-1B वीजा की ओर कदम बढ़ाते हैं।ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने क्यों जारी किया नया मेमो?हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ICE द्वारा जारी किए गए नए मेमो ने विदेशी छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस मेमो का मुख्य उद्देश्य CPT के नियमों का कथित तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि कुछ छात्र और विश्वविद्यालय CPT नियमों का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई की आड़ में लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से काम करने के रास्ते तलाश रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विश्वविद्यालयों को CPT के अनुमोदन (Approval) के मामले में और अधिक कठोर नियमों का पालन करना होगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि CPT सीधे तौर पर छात्र के अकादमिक पाठ्यक्रम और डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल अंशकालिक नौकरी पाने का एक आसान जरिया। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से छात्रों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि क्या उनकी यूनिवर्सिटीज अब आसानी से CPT अप्रूव कर पाएंगी या नहीं।भारतीय छात्रों पर इस नए मेमो का क्या होगा सीधा असर?लोकल ऑप्टिमाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में हर साल हजारों की संख्या में भारतीय छात्र कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस और डेटा साइंस जैसे कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने ट्यूशन फीस के कर्ज को चुकाने और अमेरिकी बाजार में फुल-टाइम जॉब पाने के लिए CPT और फिर OPT पर निर्भर रहता है। यदि ICE के नए नियमों के कारण CPT मिलना मुश्किल हो जाता है, या इसके घंटों (Hours) को सीमित कर दिया जाता है, तो भारतीय छात्रों की आर्थिक स्थिति और करियर प्लानिंग बुरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि छात्रों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहने की जरूरत है।आधुनिक Generative Engine Optimization और डिजिटल सर्च ट्रेंड्स का परिदृश्यआधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च) और गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में शिक्षा, वीजा नियमों में बदलाव और करियर से जुड़ी ऐसी जटिल कानूनी खबरों को छात्र और उनके परिवार सबसे ज्यादा खोजते हैं। आज का डिजिटल युग यह मांग करता है कि किसी भी ग्लोबल पॉलिसी बदलाव को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडिट (Reddit) और इमिग्रेशन फोरम्स पर इस समय CPT मेमो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहाँ छात्र अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं। सही और तथ्यात्मक जानकारी समय पर मिलना हर उस छात्र के लिए बेहद जरूरी है जो अमेरिका में अपने सपनों को साकार करने की राह पर है।भारतीय छात्रों को अब किन सावधानियों और नियमों का रखना होगा ध्यान?इस बदलते हुए परिदृश्य में अमेरिका में पढ़ रहे या जाने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को कुछ बेहद अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, अपने कोर्स के दौरान लिए जाने वाले CPT का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) एकदम दुरुस्त रखें और यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर और आपकी यूनिवर्सिटी का कोर्स करिकुलम पूरी तरह से नियमों के दायरे में हो। किसी भी शॉर्टकट या संदिग्ध तरीके से CPT प्राप्त करने से बचें, क्योंकि अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS और ICE) इस मामले में अब बहुत अधिक आक्रामक हो चुका है। अपनी यूनिवर्सिटी के कानूनी सलाहकारों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें ताकि वीजा की स्थिति पर कोई आंच न आए।अमेरिकी शिक्षा और करियर की राह में आने वाली नई चुनौतियाँअंततः, अमेरिका में CPT को लेकर ICE द्वारा जारी किया गया यह मेमो इस बात की चेतावनी है कि अमेरिका में आव्रजन और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को लेकर प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना और वहां टिके रहना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है, इसके लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक ईमानदारी और नियमों की सटीक समझ होना अनिवार्य है। यदि छात्र सही दिशा में योजना बनाकर चलेंगे और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे, तो वे इन नई बाधाओं को पार करते हुए अपने अमेरिकी सपने को जरूर पूरा कर पाएंगे, बशर्ते हर कदम बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ उठाया जाए।
अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
मेटा को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वॉच टाइम कम करने के लिए डेली लिमिट और नाइट टाइम ब्लॉक जैसे फीचर लाने होंगे। अमेरिका के कैलिफोर्निया के फेडरल कोर्ट में 29 राज्यों की ओर से दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान यह निर्देश टेक कंपनी को दिए गए। कंपनी पर बच्चों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की लत लगाने, उनकी सुरक्षा पर गुमराह करने और बिना सहमति डेटा जुटाने के आरोप थे। मेटा बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ के मामले को खत्म करने के लिए करीब 1.59 लाख करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा। बच्चों का डेटा चुराकर AI को ट्रेन करने का आरोप मेटा पर अमेरिका के राज्यों, स्कूलों और माता-पिता ने युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाते हुए मुकदमे दर्ज कराए हैं। कंपनी ने माता-पिता को बिना बताए या उनकी मंजूरी लिए बिना बच्चों का पर्सनल डेटा जुटाया और उसका इस्तेमाल अपने मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई (AI) मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए किया। मेटा बोला- सोशल मीडिया की लत कोई बीमारी नहीं मेटा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया था। कंपनी का कहना था कि उसने बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। मेटा ने कोर्ट में तर्क दिया कि वो यूजर्स को गुमराह नहीं कर रही है, क्योंकि 'सोशल मीडिया की लत' कोई मान्यता प्राप्त मानसिक बीमारी नहीं है। इस मामले में अमेरिका के राज्य मेटा से भारी-भरकम जुर्माने की मांग कर रहे थे। कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक, कैलिफोर्निया और कोलोराडो जैसे राज्य मेटा पर करीब 133.48 लाख करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाने की मांग कर रहे थे। हालांकि, राज्यों ने बाद में इस राशि को 19.07 लाख करोड़ रुपए के करीब बताया था। जुर्माने के अलावा राज्यों ने मुआवजे और बच्चों के नए अकाउंट बनाने पर पूरी तरह रोक लगाने की भी मांग की थी। एल्गोरिदम कैसे बनाता है लत? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का एल्गोरिदम इस तरह बनाया जाता है कि यूजर ज्यादा से ज्यादा समय तक एप पर बना रहे और यही धीरे-धीरे लत में बदल जाता है। इसे कई रिसर्च और रिपोर्ट्स ने भी साबित किया है। इन टेक कंपनियों पर भी चल रहे हैं मुकदमे मेटा के अलावा स्नैपचैट, यूट्यूब (अल्फाबेट) और टिकटॉक (बाइटडांस) भी कई अदालतों में हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने एप्स में ऐसे फीचर्स जोड़े जो बच्चों और युवाओं को लत लगा रहे हैं। न्यू मेक्सिको और अन्य मामलों में मेटा की हार यह 1.59 लाख करोड़ रुपए का समझौता ऐसे समय में आया है, जब मेटा हाल ही में न्यू मेक्सिको राज्य में दायर एक लैंडमार्क मुकदमे के दोनों फेज में हार चुका है… इसके अलावा, मार्च में ही किसी व्यक्ति की याचिका पर आया पहला फैसला भी मेटा और गूगल के खिलाफ रहा। लॉस एंजिल्स की जूरी ने वादी कैली जीएम को डिप्रेशन और एंग्जाइटी के लिए इन कंपनियों को जिम्मेदार माना और संयुक्त रूप से 6 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया। मेटा और गूगल ने इन फैसलों के खिलाफ अपील करने की बात कही है। फेडरल कोर्ट में सुनवाई के लिए तय पहले मामले में मेटा, स्नैप, अल्फाबेट और बाइटडांस- इन चारों कंपनियों ने समझौता कर लिया था। केंटकी के ब्रेथिट काउंटी स्कूल डिस्ट्रिक्ट द्वारा दायर इस केस में आरोप था कि ये एप्स छात्रों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके तहत स्कूल जिले को संयुक्त रूप से 27 मिलियन डॉलर मिलने तय हुए थे।
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Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
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Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
एस्प्रेसो से अमेरिकानो तक, जानें कैफे में मिलने वाली 5 ब्लैक कॉफी का स्वाद, ऑर्डर करना होगा आसान
किसी कैफे में जाकर अलग-अलग तरह की कॉफी को देखकर आप भी कंफ्यूज हो जाते हैं तो आपकी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम यहां कैफे में मिलने वाली कुछ मुख्य ब्लैक कॉफी का स्वाद बता रहे हैं। जिसे जानने के बाद अगली बार ऑर्डर देना आसान हो जाएगा।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
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अमेरिका के फॉल इनटेक में एडमिशन ले चुके अधिकतर भारतीय छात्रों के मन में एक ही सवाल उठता है- क्या वह पहुंचते ही पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अमेरिका में फीस और रहने-खाने के खर्च को देखते हुए छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि टॉप यूनिवर्सिटीज की सालाना फीस और रहने खाने का खर्चा करीब 50 से 60 लाख रुपए तक होता है। वहीं पूरी पढ़ाई का खर्च 1.5 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीज पर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट टाइम जॉब के नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। यहां तक कि डिपोर्टेशन तक का समय आ सकता है। ऐसे में हम इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स फर्स्ट सेमेस्टर में पार्ट-टाइम नौकरी कर सकते हैं और इसको लेकर क्या नियम हैं। इसे भी पढ़ें: क्या 40 की उम्र में संभव है LLB? BCI के नए नियमों के तहत Age Limit और Career Switch पर एक विशेष रिपोर्ट फर्स्ट ईयर में जॉब कर सकते हैं या नहीं USICS के नियमों क मुताबिक F-1 वीजा पर पहले पूरे अकेडमिक ईयर तक आप कैंपस के बाहर कोई नौकरी नहीं कर सकते हैं। USICS के नियमों में फर्स्ट सेमेस्टर वाले स्टूडेंट्स के लिए कोई खास छूट नहीं दी गई है। कैंपस के बाहर किसी भी स्थिति में जॉब नहीं करना है। फर्स्ट ईयर छात्रों के पास ऑन कैंपस जॉब का ऑप्शन जरूर है। छात्र कैंपस के अंदर आराम से पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। फर्स्ट सेमेस्टर में क्या करें अच्छी खबर यह है कि ऑन कैंपस जॉब के लिए आपको USCIS से अलग इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। इसको आपको फर्स्ट सेमेस्टर से ही शुरूकर सकते हैं। जब क्लास चल रही हो, तब आप सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान आप फुल टाइम यानी की सप्ताह में 40 घंटे काम कर सकते हैं। ऑन कैंपस जॉब का मतलब है, यूनिवर्सिटी के कैंपस पर होने वाला काम कैफेटेरिया में काम, लाइब्रेरी में असिस्टेंट, यूनिवर्सिटी बुकस्टोर में जॉब, या किसी प्रोफेसर के साथ रिसर्च असिस्टेंटशिप। यह जॉब कुछ मामलों में कैंपस के बाहर भी हो सकता है। बशर्ते वह जगह आपकी यूनिवर्सिटी से एजुकेशनली एफिलिएटेड हो। उसका सीधा संबंध आपकी पढ़ाई या यूनिवर्सिटी से हो। ऑन कैंपस जॉब के लिए क्लास शुरू होने से करीब 30 दिन पहले तक अप्लाई कर सकते हैं। इसलिए अगर आप फॉल इनटेक में अभी पहुंचे हैं। तो जल्द से जल्द अपने कैंपस जॉब पोर्टल या फिर इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप ऑन कैंपस जॉब ढूंढ रहे हैं, या भविष्य में ऑफ-कैंपस काम के बारे में जानना चाहते हों। तो सबसे जरूरी काम है कि अपने DSO से बात करें। DSO आपकी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के मामलों को संभालने वाला अधिकारी होता है। वह आपको बताएगा कि कौन सी जॉब्स उपलब्ध हैं और आप उनके लिए एलिजिबल हैं या नहीं।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश सम्पूर्णानंद पांडेय ने हाल ही अपने करियर की यात्रा का एक किस्सा शेयर किया है। ये बात उस वक्त की है जब वो स्ट्रगल कर रहे थे।
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
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सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
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पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
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कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
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अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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