जापान ने बताया अमेरिका को भरोसेमंद सहयोगी, भारत ने कहा- बढ़ रही है नौसेना की ताकत
New Delhi, 3 नवंबर . ‘इंडो पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2026’ में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और नौसैनिक सहयोग पर गहन चर्चा हुई. जापान के रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर पीस…
अमेरिका को ईरान का अल्टीमेटम, अब किसकी बारी?
अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने अब खुली चेतावनी दे दी है. ईरान का कहना है कि इस बार उसका जवाब पहले से ज्यादा ताकतवर होगा और संघर्ष का दायरा मिडिल ईस्ट से आगे भी फैल सकता है. ईरान ने अपनी टारगेट लिस्ट अपडेट करने का दावा किया है.
अमेरिका में वोटिंग जारी, तीन सर्वे में पिछड़ रही ट्रंप की पार्टी
मिडटर्म चुनाव के नतीजे सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहेंगे. अगर रिपब्लिकन पार्टी अपना बहुमत बरकरार रखती है तो ट्रंप को अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी. वहीं डेमोक्रेट्स के किसी सदन में बहुमत हासिल करने पर ट्रंप प्रशासन को विधायी फैसलों और सरकारी कामकाज में विपक्ष की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.
समुद्री सुरक्षा एवं आपदा राहत के लिए भारत का श्रीलंका, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ सहयोग
New Delhi, 3 नवंबर . भारतीय तटरक्षक बल और श्रीलंका तटरक्षक बल के बीच Tuesday को 9वीं उच्चस्तरीय बैठक हुई. इसके अलावा भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि…
बड़ी बढ़त...अब्दुल ने अमेरिका में कर दिया खेल! ट्रंप की कुर्सी पर संकट? क्या है इसका भारतीय कनेक्शन
अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से ठीक पहले एक तरफ ईरान में सिलसिलेवार धमाकों की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। चुनाव से पहले सामने आए एक सर्वे ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है। जिन सात राज्यों में लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा है, उनमें से छह राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रंप की पार्टी को अपने ही गढ़ में कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: 7 नवंबर को साइन होगी तबाही की फाइल! ट्रंप के प्लान ने उड़ाए होश मिशिगन: डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद को 53% समर्थन मिला, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को 42% वोट मिलते दिख रहे हैं। मेन: ट्रॉय जैक्सन 51% के साथ आगे हैं, जबकि रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कोलिन्स को 45% समर्थन मिला है। टेक्सास: डेमोक्रेटिक प्रत्याशी जेम्स तलारिको को 50% और रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को 43% समर्थन हासिल है। कैनसस: एडम हैमिल्टन 49% के साथ बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि रोजर मार्शल को 44% समर्थन मिला है। ओहायो: शेरोड ब्राउन 49% पर हैं और जॉन हस्टेड को 44% समर्थन मिला है। अलास्का: मैरी पेल्टोला 48% के साथ आगे हैं, जबकि डैन सुलिवन को 46% समर्थन प्राप्त है। आयोवा: यहां मुकाबला बेहद कड़ा है, जहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोश ट्यूरेक को 48% और रिपब्लिकन उम्मीदवार एशले हिंसन को 47% समर्थन मिलता दिख रहा है। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, ईरानी मिसाइल ठिकानों पर किए हमले इस सर्वे में महंगाई और रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता में गहरी नाराज़गी भी खुलकर सामने आई है। इस मुद्दे पर डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन्स के मुकाबले 9% की बढ़त हासिल हुई है। इसके अलावा, निर्दलीय (इंडिपेंडेंट) मतदाताओं के बीच भी सभी सातों राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को ही आगे बताया गया है। युद्ध से निपटने और आम अमेरिकियों के लिए बेहतर काम करने के सवाल पर भी डेमोक्रेट्स बढ़त बनाते दिखे हैं। हालांकि, इस अमेरिकी चुनाव में एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियां और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स अमेरिकी उम्मीदवारों के पक्ष में ऑनलाइन प्रचार कर रहे हैं। 'अल जज़ीरा' की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कंसल्टेंट्स पैसे लेकर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाते हैं और उनके जरिए उम्मीदवारों के समर्थन में पोस्ट व वीडियो फैलाते हैं। यह भी आरोप है कि विपक्षी नेताओं के भाषणों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है और मतदाताओं की राय बदलने के लिए उनके खिलाफ भ्रामक दावे फैलाए जाते हैं। यह गतिविधि सिर्फ अमेरिका तक ही सीमित नहीं बताई जा रही है; रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंसल्टेंट्स अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और पड़ोसी देशों के चुनावों में भी ऐसी ही सेवाएं दे रहे हैं। इसे भी पढ़ें: मोदी अगर नहीं जीते तो क्या होगा? चीन ने दिया बहुत अजीब सा जवाब अब सवाल उठता है कि यह ऑनलाइन प्रचार अभियान कैसे चलाया जाता है? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ भारतीय कंसल्टेंसी फर्में पुराने सोशल मीडिया पेज खरीदती हैं। वे नए अकाउंट्स तैयार करती हैं या पुराने पेजों का नाम बदल देती हैं। इसके बाद इन पेजों से ऐसे वीडियो और पोस्ट शेयर किए जाते हैं, जिन्हें किसी उम्मीदवार की आधिकारिक टीम अपने निजी अकाउंट्स से पोस्ट नहीं करना चाहती। सोशल मीडिया अकाउंट्स के अलावा इस कैंपेनिंग के बदले होने वाले वित्तीय लेन-देन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। कुछ कंसल्टेंट्स ने खुलासा किया कि कागजों पर किसी व्यक्ति को अन्य काम के लिए रखे जाने का दिखावा करने के लिए विदेशी कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि हकीकत में उन्हें चुनावी प्रचार के लिए पैसे दिए जाते हैं। कुछ कंपनियों पर हवाला के जरिए रकम ट्रांसफर करने के भी आरोप हैं—जहां बैंकिंग व्यवस्था की जगह अलग-अलग ठिकानों पर बैठे एजेंटों के नेटवर्क के जरिए पैसा भेजा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका के इस मध्यावधि चुनाव का मुकाबला अब सिर्फ डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ जहां ट्रंप की लोकप्रियता, महंगाई और चुनावी सर्वे उनकी पार्टी के लिए कड़ी चुनौती बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेशी सोशल मीडिया अभियानों और कथित फर्जी अकाउंट्स के मामले ने चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका में मतदान से पहले ईरान पर हमला, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए आज वोटिंग होने जा रही है...भारतीय समय के मुताबिक वोटिंग शाम 4.30 बजे से शुरु होगी...इस चुनाव में दोनों ही सदनों की सीटों के लिए मतदान होगा...निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और उच्च सदन सीनेट के 35 सीटों पर वोट डाले जाएंगे...लेकिन यहां वोटिंग से कुछ घंटे पहले ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला किया है.
US Midterm Election 2026:
क्या ट्रंप की कुर्सी पर होगा असर? अमेरिका में हो रहे मिडटर्म इलेक्शन का क्या है मतलब
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव हो रहे हैं. यह चुनाव होता क्या है? क्या इस चुनाव में हार- जीत से वहां के राष्ट्रपति भी चेंज हो सकते हैं? चलिए जानते हैं कि इस चुनाव में क्या होता है, किनके बीच चुनाव होता है, कौन- कौन इसमें हिस्सा लेते हैं? कौन- कौन इसके वोटर होते हैं और इस चुनाव का क्या असर होता है?
अमेरिका में आज मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग: संसद की 470 सीटों पर होगा मतदान, वीडियो में जाने ट्रम्प की प्रतिष्ठा दांव पर; बहुमत गंवाया तो मुश्किलें बढ़ेंगी
अमेरिका में छाई, भारत में कमजोर रामायण, धुरंधर 2 से भी पिछड़ी
फिल्म रामायण का एडवांस बुकिंग क्रेज के मुकाबले काफी धीमा नजर आया है. इंडिया में पहले दिन फिल्म 40 करोड़ भी नहीं जुटा पा रही है. लेकिन अमेरिका में इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.
ईरान ने दो अमेरिकी ड्रोन गिराए, धनतेरस से पहले सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट; टॉप-5
ईरान ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है, जबकि होर्मुज में तीन टैंकर माइंस से टकरा गए। इसी बीच सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट आई है। चांदी ऑल टाइम हाई से करीब 2.44 लाख रुपये सस्ती हो गई है।
ईरान के केश्म द्वीप पर 5 जोरदार धमाके, अमेरिका पर हमले का आरोप: वीडियो में जाने होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद द्वीप बना सैन्य ठिकाना; अंडरग्राउंड सुरंगों में छिपी हैं मिसाइलें
मिडटर्म चुनाव की वोटिंग से पहले अमेरिका ने किया ईरान पर हमला, केश्म द्वीप पर हुए 5 धमाके
इंटरनेट डेस्क। विवाद के बीच एक बार फिर से अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला कर दिया है। मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होने से पहलेअमेरिका ने सोमवार को ईरान के केश्म द्वीप पर कम से कम पांच जोरदार धमाके किए। कुछ दूर पर बंदर लेंगेह शहर में भी विस्फोट की खबर है। एक अमेरिकी अखबार ने अधिकारियों के हवाले से इस प्रकार का दावा किया है। यह हमला अमेरिका ने किया है। अमेरिका में आज मिडटर्म चुनाव होने हैं। हालांकि, ईरानी मीडिया की ओर से इसके पीछे अमेरिका या इजराइल का हाथ होने की पुष्टि नहीं की गई है। उसने अमेरिका के दो एमक्यूएम-170 जासूसी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। आपको बता दें कि केश्म द्वीप करीब 1,445 वर्ग किमी में फैला, ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है।इसकी पहलचान कभी फ्री-ट्रेड जोन और टूरिस्ट स्पॉट के लिए होती थी। अब ये एक बड़े सैन्य ठिकाने में बदल चुका है। अमेरिका-ईरान विवाद दुनिया के देशों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। PC:jagran.
अमेरिका का ईरान के क़ेश्म द्वीप पर हमला, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक क़ेश्म द्वीप पर सीमित सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक कदम बताया है। इस घटना के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है और क्षेत्र में संघर्ष तेज होने की आशंका जताई जा रही है। The post अमेरिका का ईरान के क़ेश्म द्वीप पर हमला, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव appeared first on Rashtriya Ujala .
ईरान पर अमेरिका ने फिर कर दिया हमला, पर इजरायल ने किया किनारा; बोला- हमारा हाथ नहीं
ईरान के केशम द्वीप पर कथित अमेरिकी हमलों की खबरों के बीच इजरायल ने साफ कहा है कि इन हमलों में उसकी कोई भूमिका नहीं थी. ईरान ने द्वीप पर कई धमाकों और आसमान में विमानों के देखे जाने की जानकारी दी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति की अग्निपरीक्षा की बारी है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है। कुछ राज्यों में स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे (11:00 GMT) मतदान शुरू हो गया, जबकि देश के अन्य हिस्सों में मतदान अलग-अलग समय पर शुरू होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति की अग्निपरीक्षा की बारी है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है। कुछ राज्यों में स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे (11:00 GMT) मतदान शुरू हो गया, जबकि देश के अन्य हिस्सों में मतदान अलग-अलग समय पर शुरू होगा।
US को बड़ा झटका: ईरान ने ढेर किए दो अमेरिकी ड्रोन, होर्मुज में 3 टैंकर माइंस से टकराए
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बताया कि उसने बंदर खमीर के तटीय इलाके के ऊपर दो अमेरिकी LUCAS ड्रोन मार गिराए हैं। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ये ड्रोन बंदर खमीर के पास गिराए गए।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, कांग्रेस की 470 सीटों पर फैसला करेंगे मतदाता
वॉशिंगटन,03 नवंबर 2026 | अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। इन चुनावों में अमेरिकी मतदाता कांग्रेस के दोनों सदनों के भविष्य का फैसला करेंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच हो रहे इन चुनावों को उनकी सरकार की नीतियों और कामकाज पर जनता की […] The post अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, कांग्रेस की 470 सीटों पर फैसला करेंगे मतदाता appeared first on Rashtriya Ujala .
Canada Study Visa: कनाडा में पढ़ाई का सपना छोड़ रहे भारतीय छात्र, सुरक्षा और नौकरी की चिंता से अब यूरोप-अमेरिका की ओर रुख
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अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका में मिडटर्मल चुनाव से पहले ईरान के केशम द्वीपर हमला किया गया है। ईरान ने अमेरिका को फिर से चेतावनी दी है। अब युद्ध में आगे क्या होगा?
US Midterm Elections: 62% भारतीय-अमेरिकी ट्रंप के खिलाफ, क्या पलट जाएगा पासा?
US Midterm Elections 2026: अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भूमिका लगातार निर्णायक होती जा रही है। मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले सामने आए 'इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड्स सर्वे' (IAAS) ने रिपब्लिकन पार्टी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ...
जंग रोकने की जिम्मेदारी हमारी नहीं, 'गेंद' अब अमेरिका के पाले में : ईरानी स्पीकर गालिबाफ
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने जंग रोकने की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका के हवाले कर दी है। मंगलवार को संसद (कंसल्टेटिव असेंबली) के एक खुले सत्र को संबोधित करते हुए गालिबाफ ने अपने विचार रखे। स्पष्ट किया कि वो अमेरिका की धमकियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
जंग रोकने की जिम्मेदारी हमारी नहीं, ‘गेंद’ अब अमेरिका के पाले में : ईरानी स्पीकर गालिबाफ
तेहरान, 3 नवंबर . ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने जंग रोकने की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका के हवाले कर दी है. Tuesday को संसद (कंसल्टेटिव…
जंग रोकने की जिम्मेदारी हमारी नहीं, 'गेंद' अब अमेरिका के पाले में : ईरानी स्पीकर गालिबाफ
जंग रोकने की जिम्मेदारी हमारी नहीं, 'गेंद' अब अमेरिका के पाले में : ईरानी स्पीकर गालिबाफ
अमेरिका में भारतीय कितने समय तक रह सकते हैं? मिडटर्म चुनाव पर टिकी नजर
अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने और अपने सुनहरे भविष्य का सपना संजोकर समंदर पार जाने वाले भारतीय छात्रों और पेशेवर प्रवासियों के लिए यह वक्त बेहद असमंजस और चिंता से भरा हुआ है। अमेरिका में छात्र और एक्सचेंज विजिटर वीजा पर रहने वाले भारतीय नागरिक अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि वे आखिर कानूनी तौर पर देश में कितने लंबे समय तक रुक सकेंगे। इस बीच, अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में चल रहे घटनाक्रम और आगामी मिडटर्म चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि अमेरिका के कड़े होते आव्रजन (इमिग्रेशन) ढांचे और बहुचर्चित 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) नियम का भविष्य क्या होगा। राजनीतिक बदलावों और अदालती फैसलों के बीच यह मुद्दा अब भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी बहस बन चुका है।#1. क्या है 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) नियम और क्यों मची है हलचल?पारंपरिक रूप से अमेरिका में F-1 (छात्र) और J-1 (एक्सचेंज विजिटर) वीजाधारकों को 'Duration of Status' (D/S) के तहत प्रवेश मिलता रहा है। इसका मतलब यह होता था कि जब तक छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा है या वैध प्रोग्राम में बना हुआ है, तब तक उसे अमेरिकी धरती पर रहने के लिए बार-बार वीजा अवधि बढ़वाने की चिंता नहीं करनी पड़ती थी। हालांकि, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा इस व्यवस्था को बदलकर एक निश्चित अवधि (Fixed Period of Admission) में तब्दील करने के प्रस्ताव और कानूनी दांवपेंचों ने छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस नियम के तहत छात्रों के ठहरने की अवधि को अधिकतम चार साल या कोर्स की अवधि तक सीमित करने की बात है, जिसके बाद उन्हें हर बार यूएसिस (USCIS) से एक्सटेंशन लेना पड़ेगा। हालांकि, अदालती आदेशों और प्रारंभिक रोक के कारण फिलहाल पुराना ढांचा ही बरकरार है, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता बरकरार है।#1. अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों पर टिकी भारतीय प्रवासियों और छात्रों की निगाहेंअमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा असर देश की इमिग्रेशन पॉलिसी और विदेशी छात्रों के जीवन पर पड़ता है। कांग्रेस (संसद) और प्रशासनिक पदों के समीकरण तय करेंगे कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के प्रति रुख नरम होगा या फिर नियमों को और अधिक कड़ा किया जाएगा। भारतीय समुदाय और छात्र संगठन अमेरिकी सांसदों की नीतियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि संसद के पास वीजा कैप, ग्रीन कार्ड बैकलॉग और छात्रों के अधिकारों से जुड़े कानूनों में बदलाव करने की पूरी शक्ति होती है। यदि चुनाव परिणामों के बाद संसद में सत्ता संतुलन बदलता है, तो आव्रजन सुधारों की दिशा भी पूरी तरह से बदल सकती है।#1. भारतीय छात्रों के भविष्य पर मंडराता अनिश्चितता का बादल और कानूनी चुनौतियांनए संभावित नियमों के विरोध में विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों और कानूनी संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसके चलते फिलहाल फिक्सड स्टे वाले नियमों के क्रियान्वयन पर कानूनी रोक लगी हुई है। इसके बावजूद छात्रों में डर का माहौल है कि यदि आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव के चलते ये नियम सख्ती से लागू होते हैं, तो उन्हें हर छोटे बदलाव के लिए भारी प्रशासनिक शुल्क और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना होगा। जानकारों का कहना है कि जो भारतीय छात्र अमेरिका में रहकर आगे की पढ़ाई, रिसर्च या ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) करने की सोच रहे हैं, उन्हें वहां के राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम से पूरी तरह अपडेट रहना चाहिए।#1. अमेरिका जाने वाले युवाओं के लिए कूटनीतिक और व्यावहारिक सलाहमौजूदा हालात को देखते हुए शिक्षा विशेषज्ञों और इमिग्रेशन वकीलों ने भारतीय छात्रों को सलाह दी है कि वे अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहें और अपने सभी दस्तावेज पूरी तरह दुरुस्त रखें। अमेरिका की घरेलू राजनीति और मिडटर्म चुनावों के बाद आने वाले विधायी परिणाम इस बात की तस्दीक करेंगे कि विदेशी नागरिकों और छात्रों के लिए अमेरिकी धरती पर टिके रहना कितना आसान या कठिन होने वाला है। फिलहाल हर किसी की नजरें चुनाव के नतीजों और अदालती फैसलों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि आने वाले समय में 'अमेरिकन ड्रीम' की राह कितनी सुगम होगी।
नेपाल जाने वाले विदेशी पर्यटकों में बड़ा बदलाव, पहली बार अमेरिका ने भारत को पछाड़ा; भारतीयों की संख्या 30% घटी
अमेरिका का ईरान पर हमला, पलटवार में 2 अमेरिकी ड्रोन बने निशाना
अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक केशम द्वीप पर मिसाइलों से बड़ा हमला किया है, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया है. अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि की है. वहीं पलटवार करते हुए ईरान की आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने होरमूज जलडमरूमध्य में अमेरिका के दो ड्रोनों को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के जरिए मार गिराया है. इस घटना से दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा और बढ़ गया है.
US Midterm Elections: अमेरिका में मंगलवार 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। इस चुनाव से तय होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना बहुमत बचा पाती है या डेमोक्रेटिक पार्टी उनमें से एक या दोनों सदनों पर कब्जा कर लेती है। इसका असर ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अगले दो सालों पर पड़ सकता है।भारत में चुनाव पर नजर रखने वाले लोगों के लिए नतीजों का सिलसिला बुधवार 4 नवंबर की सुबह से शुरू होगा। अमेरिका के इन चुनावों को ट्रंप सरकार के कामकाज पर जनता की राय के तौर पर भी देखा जा रहा है। ईरान के साथ लंबे समय से जारी युद्ध, महंगाई, व्यापार शुल्क यानी टैरिफ और देश के भीतर बढ़ते राजनीतिक मतभेद जैसे मुद्दे चुनाव में अहम हैं। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के किसी एक सदन या दोनों में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप के फैसलों पर संसद की निगरानी और जांच बढ़ सकती है।3 नवंबर को अमेरिका में वोटिंग, 435 हाउस सीटों पर चुनावअमेरिका में मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को हो रहे हैं। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके अलावा सीनेट की 100 सीटों में से 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। देश के 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी वोटिंग होगी। आपको बता दें कि अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन होते हैं- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट।हाउस के सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है, इसलिए इसकी सभी सीटों पर हर दो साल में चुनाव होता है। वहीं सीनेटर छह साल के लिए चुने जाते हैं। सीनेट की सीटों को तीन हिस्सों में बांटा गया है और हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होता है। इन चुनावों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बनाए रखेगी या डेमोक्रेट्स उसे चुनौती देकर बहुमत हासिल कर लेंगे।भारत में कब शुरू होगी वोटिंग और कब बंद होंगे पोलिंग स्टेशन?अमेरिका में अलग-अलग टाइम जोन होने की वजह से सभी राज्यों में मतदान एक साथ शुरू या खत्म नहीं होता। वहां 3 नवंबर को स्थानीय समय के अनुसार सुबह से वोटिंग शुरू होगी और पश्चिम की ओर बढ़ते हुए अलग-अलग समय पर पोलिंग स्टेशन बंद होंगे। भारत में पहली वोटिंग प्रक्रिया मंगलवार 3 नवंबर की शाम से शुरू हो जाएगी। मतदान पूरी रात चलेगा और आखिरी पोलिंग स्टेशन बुधवार 4 नवंबर की सुबह बंद होंगे।अमेरिका के पूर्वी हिस्से में कुछ राज्यों के पोलिंग स्टेशन शाम 7 बजे ईस्टर्न टाइम (ET) पर बंद होने शुरू होंगे। भारतीय समय के अनुसार यह बुधवार सुबह 5:30 बजे होगा। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में मतदान खत्म होने के साथ वोटों की गिनती और शुरुआती नतीजे सामने आने लगेंगे। अलास्का के कुछ पश्चिमी इलाकों में आखिरी पोलिंग स्टेशन 4 नवंबर को अमेरिकी समय के अनुसार देर रात तक खुले रह सकते हैं।भारत में कब से आने लगेंगे अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे?भारत में चुनाव के शुरुआती नतीजे बुधवार 4 नवंबर की सुबह करीब 5:30 बजे से आने शुरू हो सकते हैं। यह वह समय है जब अमेरिका के पूर्वी हिस्से के कई राज्यों में वोटिंग खत्म होने लगेगी। हालांकि अमेरिका में पूरे देश के लिए वोटों की गिनती का कोई एक तय समय नहीं है। हर राज्य अपने नियमों के हिसाब से वोटों की गिनती करता है।कुछ राज्यों में डाक से भेजे गए बैलेट यानी पोस्टल वोट की प्रक्रिया चुनाव के दिन से पहले शुरू हो जाती है, जबकि कुछ राज्यों में इनकी गिनती के नियम अलग हैं। इसलिए शुरुआती रुझान आने के बावजूद यह जरूरी नहीं है कि बुधवार सुबह ही यह साफ हो जाए कि हाउस और सीनेट में किस पार्टी को बहुमत मिलेगा। जिन सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी होगा, वहां पोस्टल वोट और दूसरे लंबित बैलेट की गिनती पूरी होने तक नतीजों का इंतजार करना पड़ सकता है।किन मुद्दों पर हो रहा है चुनाव?इस बार का चुनाव सिर्फ सांसदों और गवर्नरों को चुनने तक सीमित नहीं है। इसे ट्रंप की नीतियों पर जनता की राय के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान के साथ युद्ध, महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की कीमतें, दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ और इमिग्रेशन यानी दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले लोगों से जुड़े नियम चुनाव के बड़े मुद्दे हैं। रिपब्लिकन पार्टी ट्रंप की नीतियों और उनके फैसलों के आधार पर वोट मांग रही है। डेमोक्रेटिक पार्टी महंगाई, सरकार के कामकाज और ट्रंप प्रशासन के फैसलों को लेकर सवाल उठा रही है।रॉयटर्स/इप्सोस के 2 नवंबर को जारी सर्वे के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 32% थी। ये उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के सबसे निचले स्तर के करीब है। सर्वे में कांग्रेस चुनाव के लिए 46% रजिस्टर्ड वोटरों ने डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया जबकि 38% ने रिपब्लिकन पार्टी को चुना। हालांकि यह देशभर के वोटरों की पसंद का सर्वे है। इससे अलग-अलग राज्यों और सीटों पर जीत का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।डेमोक्रेट्स की नजर हाउस और सीनेट में बढ़त परचुनाव से पहले आए सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही थी। पार्टी की कोशिश है कि वह हाउस में बहुमत हासिल करे और सीनेट में भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए। सीनेट में डेमोक्रेट्स के लिए चुनौती ज्यादा बड़ी है।100 सदस्यों वाले इस सदन में बहुमत हासिल करने के लिए उन्हें मौजूदा स्थिति के मुकाबले कम से कम चार सीटों का नेट फायदा चाहिए। पार्टी की नजर मिशिगन, मेन, ओहायो, कंसास, टेक्सास, आयोवा और अलास्का जैसे राज्यों पर है। दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी के सामने दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है। अगर डेमोक्रेट्स हाउस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर संसद में सवाल उठाने और जांच कराने की उनकी ताकत बढ़ सकती है।ट्रंप ने 32 दिनों में 20 राज्यों का दौरा कियाचुनाव प्रचार के आखिरी दौर में ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए कई रैलियां कीं। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने बताया कि ट्रंप ने आखिरी 32 दिनों में 20 राज्यों का दौरा किया और 30 चुनावी रैलियों को संबोधित किया। इनमें ज्यादातर रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत माने जाने वाले राज्य थे।चुनाव प्रचार के आखिरी दिन ट्रंप ने वॉशिंगटन के लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल के पास कार्यक्रम किया। इस दौरान उन्होंने टैक्स में कटौती, टैरिफ और बॉर्डर सिक्योरिटी जैसे मुद्दों के बजाय राजधानी में हुए बदलावों और निर्माण कार्यों पर ज्यादा बात की। डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रचार को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी मजबूती दी। उन्होंने ओहायो, मिशिगन और जॉर्जिया में रैलियां कीं। जॉर्जिया में ओबामा ने कहा कि यह चुनाव ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर रोक लगाने का एक अहम मौका है।अगर डेमोक्रेट्स जीते तो ट्रंप के लिए क्या बदलेगा?अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस की शक्तियां अलग-अलग हैं। राष्ट्रपति सरकार चलाते हैं जबकि कांग्रेस कानून बनाने, बजट को मंजूरी देने और सरकार के कामकाज की निगरानी करने में अहम भूमिका निभाती है। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप प्रशासन के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।ऐसी स्थिति में कांग्रेस की समितियां सरकारी फैसलों, खर्च और प्रशासनिक कामकाज की जांच कर सकती हैं। ट्रंप की नीतियों पर सुनवाई और सवाल-जवाब बढ़ सकते हैं। कानून पास कराने के लिए उन्हें विपक्षी सांसदों का समर्थन भी जुटाना पड़ सकता है। हालांकि चुनाव में हार के बाद भी ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल जनवरी 2029 तक है। राष्ट्रपति के तौर पर उनके पास एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करने और कांग्रेस से पास हुए कानून पर वीटो लगाने जैसी शक्तियां बनी रहेंगी।ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी के दोनों सदनों में बहुमत खोने की आशंका पर कहा था कि ऐसी स्थिति में वह मिस्टर वीटो बन जाएंगे। उनका इशारा राष्ट्रपति के उस अधिकार की ओर था, जिसके तहत वह कांग्रेस से पास किसी बिल को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। हालांकि कांग्रेस दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है।चुनाव में भारतीय मूल के कई उम्मीदवार भी मैदान मेंइन चुनावों में भारतीय मूल के कई अमेरिकी नागरिक भी अलग-अलग पदों के लिए किस्मत आजमा रहे हैं। ओहायो में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की एमी एक्टन से है। इसके अलावा भारतीय मूल की नित्या रमन लॉस एंजिलिस के मेयर पद के लिए अपनी पूर्व बॉस करेन बास के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम फिर से चुनाव मैदान में हैं। वहीं पिया दांडिया और अमीश शाह जैसे भारतीय मूल के उम्मीदवार भी पहली बार अमेरिकी कांग्रेस में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन उम्मीदवारों की जीत पर भी भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नजर रहेगी।
जनवरी 2025 में सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप के सामने आ चुका है उनका सबसे बड़ा सियासी इम्तिहान—अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शंस! सवाल सिर्फ संसद में बहुमत का नहीं, बल्कि यह तय होने का है कि अगले दो साल ट्रंप वाइट हाउस से हुक्म चलाएंगे या फिर वॉशिंगटन में उनके हर फैसले पर ब्रेक लग जाएगा। राष्ट्रपति चार साल के लिए चुना जाता है, लेकिन अमेरिकी संसद हर दो साल में जनता की अदालत में खड़ी होती है। ट्रंप के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे रास्ते पर होने वाले इस चुनाव का असली गणित क्या है, और यह नतीजे कैसे तय करेंगे दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति की दिशा? ऐसे में नवंबर 2026 में होने वाले ये जो उनके चुनाव हो रहे हैं कार्यकाल के बीच में हो रहे हैं और इसलिए उसे हम मिड टर्म चुनाव कहा जा रहा है। इन चुनाव में क्या-क्या दांव पर है? अमेरिकी संसद के दो सदन होते हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव को प्रतिनिधि सभा और सीनेट को उच्च सदन कहा जाता है। मिड टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान होते हैं। वहीं सीनेट की कुल 100 सीटों में से इस बार 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर के भी चुनाव किए जा रहे हैं। प्रतिनिधि सभा के सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का ही होता है। इसलिए इनकी सभी सीटों पर हर 2 साल में चुनाव होता है। जबकि दूसरी तरफ जिन हम 100 सेनेटर्स की बात कर रहे थे वो सेनेटर्स का कार्यकाल छ साल का होता है। सीनेट की सभी सीटों पर एक साथ चुनाव भी नहीं होता बल्कि हर 2 साल में करीब 1/3 सीटों पर मतदान होता रहता है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में अमेरिकी कंपनियों का LNG प्रोजेक्ट पर 4.4 अरब डॉलर निवेश का प्लान क्या ट्रंप विदेश नीति सेना से जुड़े फैसले इस चुनाव के बाद ले पाएंगे सवाल का जवाब है हां। अमेरिकी राष्ट्रपति सेना के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। कमांडर इन चीफ मिड टर्म चुनाव में हार के बाद भी ट्रंप के पास सेना का नेतृत्व करने, विदेश विदेशी देशों के साथ बातचीत करने, कई विदेश नीति संबंधी फैसले लेने का उनके पास अधिकार होगा। हालांकि पेच भी है। युद्ध की घोषणा, सैन्य खर्च, रक्षा बजट जैसे महत्वपूर्ण मामलों में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए बड़े सैन्य अभियान और लंबे समय तक चलने वाली नीतियों में जो संसद है वो वहां से उनका विरोध हो सकता है जिससे वो उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के ठिकानों पर किए रक्षात्मक हमले, मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले गरमाई भू-राजनीति 2 साल में चुनाव क्यों हो जाता है? अमेरिका की जो चुनाव व्यवस्था है वह इस तरह बनाई गई है कि जनता को हर 2 साल में अपने प्रतिनिधियों के कामकाज पर राय देने का मौका मिल जाए। प्रतिनिधि सभा के सदस्य केवल 2 साल के लिए चुने जाते हैं ताकि वह लगातार अपने मतदाताओं के प्रति जवाबदेह बने रहे। सीनेट में स्थिरता बनाए रखने के लिए सदस्यों का कार्यकाल छ साल रखा गया और चुनाव अलग-अलग चरणों में होते हैं। इससे संसद में एक साथ बड़े बदलाव की संभावना जो है वो कम रहती है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका में वोटिंग डे, मिड टर्म चुनाव में बड़ा उलटफेर! ट्रंप का क्या होगा? ट्रंप के लिए अब क्यों खास है? अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत बरकरार रखती है तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान होगा। यानी कि जिस हौकने के अंदाज में ट्रंप अमेरिका में बातचीत करते हैं वो तेवर उनके जारी रह सकते हैं। लेकिन अगर यहां झटका लग गया तो ट्रंप के तेवर में नरमी आएगी। काम कराने के लिए कांग्रेस में डेमोक्रेट्स के आगे हाथपांव जोड़ने पड़ सकते हैं। लेकिन अगर डेमोक्रेटिक पार्टी जो है वो प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप के कई फैसले जैसे कि विधाई प्रस्ताव को रोकने उसमें बदलाव करने की उसकी ताकत बढ़ जाती है। संसद की समितियां सरकारी कामकाज की जांच कर सकती हैं और प्रशासन से जवाब मांग सकती हैं। हालांकि मिड टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार का मतलब यह नहीं होगा कि ट्रंप को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़े। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव अलग से होता है और राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। संसद में बहुमत गवाने से राष्ट्रपति अपने पद से नहीं हटते हैं। इसे भी पढ़ें: सींग को इस तरह उखाड़...क़ेशम द्वीप पर मिसाइल अटैक, ईरान से भी आ गया तगड़ा जवाब क्या चुनाव पर लागू हो सकता है राष्ट्रीय आपातकाल? अमेरिका में 2026 के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के बीच एक और बेहद संवेदनशील परिदृश्य की चर्चा हो रही है—देश में नेशनल इमरजेंसी (राष्ट्रीय आपातकाल) की घोषणा। डोनाल्ड ट्रंप के कुछ सहयोगियों ने कथित चुनावी धांधली या विदेशी दखल का हवाला देकर राष्ट्रीय आपातकाल लगाने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि इसके जरिए मतों की गिनती में संघीय सरकार की सीधी भागीदारी, जिसमें अनिवार्य रूप से हाथों से गिनती (Hand counts) कराना शामिल है, को सही ठहराया जा सकता है। खुद ट्रंप ने भी एक साक्षात्कार में इस विकल्प पर कहा था कि वे किसी भी चीज़ से न तो इनकार कर रहे हैं और न ही उसे स्वीकार कर रहे हैं। आशंका है कि चुनावों के दौरान या नतीजों के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर कथित गड़बड़ी का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी जाए, ताकि संघीय प्रशासन सीधे तौर पर वोटों की गिनती और प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में ले सके। भारत और अमेरिका के चुनाव की व्यवस्था में क्या अंतर है? भारत और अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में एक बड़ा अंतर है। भारत में लोकसभा चुनाव आमतौर पर 5 साल में होते हैं। प्रधानमंत्री और उनकी सरकार लोकसभा में बहुमत पर निर्भर करती है। अगर सरकार लोकसभा में बहुमत खो देती है तो उसे सत्ता छोड़नी पड़ती है। वहीं अमेरिका में जो राष्ट्रपति और संसद है उसके चुनाव अलग-अलग होते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव 4 साल में होता है। जबकि कांग्रेस के चुनाव हर 2 साल में होते हैं। इसलिए अगर राष्ट्रपति की पार्टी संसद में बहुमत खो देती है, तब भी राष्ट्रपति अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है। भारत की राज्यसभा की तरह अमेरिकी सीनेट भी एक स्थाई सदन है। इस इन जो सभी सदस्य का कार्यकाल जो है वो यहां एक साथ खत्म नहीं हो जाता। भारत में भी राज्यसभा के जो सदस्य हैं उनका कार्यकाल छ साल का होता है। अमेरिका में भी सेनेटरों का कार्यकाल भी जो है वो छ साल का होता है। दोनों जगह हर दो-दो साल में करीब 1/3 सदस्यों का कार्यकाल पूरा होता रहता है और रीइलेक्शंस वहां पे होते रहते हैं।
ट्रंप हारे तो क्या होगा? मिडटर्म चुनाव से तय होगी अमेरिकी राष्ट्रपति की ताकत
अमेरिका में आज होने वाले मिडटर्म चुनाव तय करेंगे कि सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में किस पार्टी का बहुमत रहेगा. नतीजे ट्रंप की घटती लोकप्रियता, रिपब्लिकन पार्टी की पकड़ और डेमोक्रेट्स की नीली लहर के दावों की परीक्षा के साथ अगले 2 साल की घरेलू राजनीति और कैपिटल हिल की निगरानी की दिशा भी तय करेंगे.
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से ट्रंप की समर्थकों से अपील
वाशिंगटन, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वोट अपील की। संदेश पहुंचाने के लिए उन्होंने टेलीफोन का इस्तेमाल किया। पांच राज्यों में चुनाव प्रचार कर रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान का आग्रह किया। उन्होंने जॉर्जिया, इंडियाना, दक्षिण कैरोलिना, अलास्का और न्यूयॉर्क के मतदाताओं को संबोधित करते हुए इन चुनावों को अपने राष्ट्रपति कार्यकाल और सरकार के एजेंडे के लिए महत्वपूर्ण बताया।
एक तरफ समझौते की बात, दूसरी ओर ईरान पर अमेरिकी हमले! केशम द्वीप पर धमाकों से बढ़ी हलचल
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई है। अमेरिकी सेना ने सोमवार, 2 नवंबर को ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर सीमित हमले किए। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ समझौते की संभावना […] The post एक तरफ समझौते की बात, दूसरी ओर ईरान पर अमेरिकी हमले! केशम द्वीप पर धमाकों से बढ़ी हलचल first appeared on Sanjeevni Today .
रणबीर कपूर की 'रामायण' ने एडवांस बुकिंग में मचाया धमाल, भारत से लेकर अमेरिका तक दिखा फिल्म का जलवा
रणबीर कपूर की 'रामायण: पार्ट वन' रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। भारत में फिल्म की एडवांस बुकिंग 73.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। हिंदी वर्जन के साथ 3D और प्रीमियम फॉर्मेट को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अमेरिका में ...
अमेरिकी चुनावों में रुझानों के शुरुआती संकेत बुधवार सुबह मिलने की उम्मीद
न्यूयॉर्क, 3 नवंबर . अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान Tuesday को संपन्न होगा. इसके बाद काउंटिंग शुरू होगी. शुरुआती रुझान आधी रात से पहले (India में Wednesday…
अमेरिका के कैलिफोर्निया में नगर कीर्तन के दौरान हिंसा की 2 घटनाएं हुईं। सटर काउंटी में आयोजित 47वें वार्षिक नगर कीर्तन में शनिवार को फायरिंग हुई। वहीं रविवार को चाकूबाजी में 2 लोग घायल हो गए। युवकों ने तलवारों और भालों से भीड़ पर हमला कर दिया। पुलिस ने चाकूबाजी करने के मामले में सैक्रामेंटो निवासी दविंदर सिंह को गिरफ्तार किया है। वहीं, फायरिंग मामले में एक संदिग्ध की पहचान की गई है। सटर काउंटी शेरिफ कार्यालय दोनों घटनाओं के आपस में जुड़े होने की जांच कर रहा है। कैलिफोर्निया में हिंसा की तस्वीरें, देखिए … दोनों मामलों में क्या हुआ, जानिए… दोनों घटनाओं के संबंध की जांच कर रही पुलिससटर काउंटी शेरिफ कार्यालय के अनुसार, दोनों मामलों की जांच जारी है। जांचकर्ता सिख गुरुद्वारे के प्रबंधन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि घटनाओं में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। --------- ये भी पढ़ें गुरबाणी पर AI की मनगढ़ंत पंक्तियों से अकाल तख्त चिंतित:जत्थेदार गड़गज बोले-प्रमाणित प्लेटफॉर्म बनाएंगे; सिख इतिहास की गलत जानकारी दे रहा चैटबॉट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए गुरबाणी की गलत जानकारी और मनगढ़ंत पंक्तियां प्रसारित होने पर श्री अकाल तख्त साहिब ने चिंता जताई है। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि एआई चैटबॉट्स गुरबाणी, सिख इतिहास और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी कई बार गलत जानकारी दे रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर
Iran America War Update: अमेरिका से Nuclear वाली धमकी पर China के Wang Yi ने क्या कहा?
Iran America War Update: अमेरिका से Nuclear वाली धमकी पर China के Wang Yi ने क्या कहा? मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
डेमोक्रेट पूजा सेठी ने पैक्सटन को दी चुनौती, ‘भारतीय-अमेरिकियों पर नस्लवादी टिप्पणी की निंदा करें’
वाशिंगटन, 3 नवंबर . टेक्सास हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव लड़ रहीं भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट पूजा सेठी ने रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन को चुनौती दी है कि…
डेमोक्रेट पूजा सेठी ने पैक्सटन को दी चुनौती, 'भारतीय-अमेरिकियों पर नस्लवादी टिप्पणी की निंदा करें'
डेमोक्रेट पूजा सेठी ने पैक्सटन को दी चुनौती, 'भारतीय-अमेरिकियों पर नस्लवादी टिप्पणी की निंदा करें'
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले भारतीय मूल के अमेरिकी उम्मीदवारों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए आखिरी चुनावी अपील की। रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने अपराध, महंगाई और कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाया, जबकि डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ पिछले आठ महीनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक बातचीत में प्रगति के संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थित ईरान के सबसे बड़े द्वीप केशम (Qeshm Island) पर एक 'गुप्त' और सीमित सैन्य हमला किया है। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन द्वारा तेहरान के खिलाफ हाल के हफ्तों में किए गए सीमित हमलों की श्रृंखला में यह सबसे ताज़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। केशम द्वीप पर धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'आईआरएनए' (IRNA) ने बताया कि केशम द्वीप पर लगातार कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। कुछ स्थानीय निवासियों ने द्वीप के ऊपर दो विमान उड़ते हुए भी देखे। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि वाशिंगटन ने इन हमलों को सीमित रखा और जानबूझकर इन्हें गुप्त रखा, ताकि ऐसा कोई संकेत न जाए कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपना व्यापक सैन्य अभियान फिर से शुरू करने जा रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी, जिसे सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने की अनुमति नहीं थी और जिसने नाम न छापने की शर्त पर बात की, ने बताया कि इन हमलों का निशाना वे ईरानी थे जो अमेरिकी संपत्तियों के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (surface-to-air missiles) का इस्तेमाल कर रहे थे। ये हमले सीमित दायरे के थे, न कि किसी बड़े सैन्य संघर्ष की शुरुआत। ये हमले अमेरिका में महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों (midterm elections) से ठीक पहले हुए हैं, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले कहा था कि चुनाव से पहले वाशिंगटन ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा। ईरान के साथ समझौता 'हो सकता है': ट्रंप ट्रंप ने ईरान के साथ एक संभावित समझौते की दिशा में प्रगति के संकेत दिए हैं, क्योंकि तेहरान अपने संघर्ष विराम (ceasefire) प्रस्ताव को तेज़ करने की कोशिश कर रहा है। सोमवार को वाशिंगटन डीसी में लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल के पास बोलते हुए ट्रंप ने कहा, ऐसा लगता है कि बात बहुत अच्छे से आगे बढ़ रही है। उन्होंने आगे कहा, शायद इसीलिए तेल की कीमतें गिर गई हैं। लोगों को इसके बारे में पता चल गया है। इससे पहले उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक पोस्ट में कहा था कि ईरान जल्द से जल्द एक समझौता करना चाहता है। उन्होंने आगे लिखा, ऐसा हो सकता है! उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ बातचीत के ज़रिए समझौता होने की संभावना पर सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन का मानना है कि राजनयिक प्रयासों से कुछ प्रगति हुई है। सप्ताहांत पर हुई बातचीत में नेतन्याहू ने ट्रम्प से हमले करने के लिए कहा समाचार एजेंसी एपी (AP) के अनुसार, दो क्षेत्रीय अधिकारियों और मामले की जानकारी रखने वाले एक तीसरे व्यक्ति ने बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रम्प से ईरान पर एक और दौर के हमले करने के लिए कहा है। ईरान के साथ पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ने से नेतन्याहू को एक आपातकालीन सरकार बनाने में मदद मिल सकती है, क्योंकि पिछले हफ्ते हुए चुनावों में वे और उनके दक्षिणपंथी सहयोगियों ने संसद में अपना बहुमत खो दिया है। ट्रम्प कभी ईरान पर बड़े हमले करने की धमकी देते हैं, तो कभी ईरान के साथ कोई समझौता करने की बात करते हैं। इन दो अधिकारियों ने बताया कि राजनयिक प्रयासों में कुछ प्रगति हुई है। कतरी मध्यस्थों ने पिछले हफ्ते ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत के दो दौर किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, मध्यस्थ एक ऐसा समझौता तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके तहत ईरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में अपने हमले बंद कर दे, और बदले में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा ले। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi
एक्सप्लेनर: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से क्या बदलेगा, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए क्या दांव पर?
'बेतुकी बकवास मत करो', अमेरिका पर भड़क उठीं किम जोंग उन की बहन
नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले साइबर क्राइम मामलों में सीधे नॉर्थ कोरिया का नाम घसीट रहा है. इस घटना से हमने एक बार फिर वाशिंगटन का हमारे प्रति दुश्मनी भरा रवैया देख लिया है.
अमेरिका: ट्रंप के दूसरे टर्म पर जनमत की परीक्षा आज, राष्ट्रपति के सुर में दिखी हताशा
अमेरिका: ट्रंप के दूसरे टर्म पर जनमत की परीक्षा आज, राष्ट्रपति के सुर में दिखी हताशा
US Midterm Elections: आज अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग, ट्रम्प की सत्ता पर रहेगी नजर; 435 हाउस और 35 सीनेट सीटों पर मुकाबला
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक गलियारों से इस वक्त दुनिया को हिला देने वाली एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। अमेरिका के जाने-माने और प्रभावशाली मीडिया पर्सनालिटी, फॉक्स न्यूज के पूर्व होस्ट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी रहे टकर कार्लसन (Tucker Carlson) ने एक बार फिर परमाणु युद्ध की आसन्न तबाही को लेकर बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए अपने एक लंबे और विमर्श पैदा करने वाले बयान में कार्लसन ने दावा किया है कि वॉशिंगटन डीसी में कहीं एक गुप्त 'न्यूक्लियर क्लॉक' टिक-टिक कर रही है। उनके अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के परमाणु ठिकानों पर परमाणु हमला करने का आदेश देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इस सनसनीखेज दावे के बाद से वैश्विक कूटनीति में खलबली मच गई है और तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि टकर कार्लसन के इन दावों के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और अमेरिकी राजनीति में इसे लेकर क्या प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।नेतन्याहू की हताशा और ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की आशंकाटकर कार्लसन ने अपने इस सनसनीखेज दावे में कहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समय राजनीतिक रूप से चारों तरफ से घिर चुके हैं और बेहद हताश स्थिति में हैं। कार्लसन के मुताबिक, जब तक अमेरिका उनकी मदद नहीं करता, तब तक इजरायल में उनके लिए राजनीतिक अस्तित्व बचाना मुश्किल हो रहा है।यही वजह है कि नेतन्याहू लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करके दबाव बना रहे हैं। कार्लसन का दावा है कि इस दबाव के चलते अमेरिका ईरान की बेहद सुरक्षित और भूमिगत मानी जाने वाली नतान्ज परमाणु सुविधा के पास स्थित 'पिकएक्स माउंटेन' जैसे ठिकानों पर हमला करने के विकल्प तलाश रहा है। कार्लसन ने यहां तक कह दिया कि मौजूदा हालात में युद्ध के मैदान में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए अमेरिकी परमाणु नीति में चुपचाप बदलाव किए गए हैं, हालांकि व्हाइट हाउस या पेंटागन की तरफ से इसकी कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।क्या मंडरा रहा है तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? भारत और पाकिस्तान का भी जिक्रअपनी इस चेतावनी को और अधिक भयावह बनाते हुए टकर कार्लसन ने दावा किया है कि यदि अमेरिका द्वारा ईरान पर पहला परमाणु हमला किया जाता है, तो इसके परिणाम पूरी मानवता के लिए विनाशकारी साबित होंगे। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैलने के साथ ही इस संघर्ष की आग बहुत दूर तक फैल सकती है।कार्लसन ने अपनी बात रखते हुए भारत, पाकिस्तान, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों का भी हवाला दिया और आशंका जताई कि यह टकराव अंततः एक भयानक तीसरे विश्व युद्ध (World War III) का रूप ले सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह संभावित युद्ध भले ही छोटा हो, लेकिन बेहद निर्णायक और सर्वनाश करने वाला होगा। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों और गंभीर नीति-निर्माताओं ने कार्लसन के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इन बड़े और डरावने दावों के समर्थन में उनके पास कोई पुख्ता दस्तावेज या ठोस सबूत नहीं है, और वे केवल गुमनाम सूत्रों के बयानों पर निर्भर हैं।दावों की सच्चाई पर सवाल और ट्रंप का पुराना रुखटकर कार्लसन द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों के बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि उनके इन दावों और वास्तविक जमीनी हकीकत के बीच बहुत बड़ा अंतर है। स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले एक मीडिया इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा था कि वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं हैं और अमेरिका को ऐसी किसी कार्रवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।इसके अलावा, आतंकवाद काउंटर और खुफिया एजेंसियों के पूर्व अधिकारियों का भी यह मानना रहा है कि ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित करने के मामले में खुफिया रिपोर्टें उतनी आसन्न नहीं हैं जितनी कि आशंका जताई जा रही है। सोशल मीडिया पर तो इस बहस को लेकर कई तरह के मीम्स भी वायरल हो रहे हैं, जिसमें यह तंज कसा जा रहा है कि वर्षों से यह दावा किया जा रहा है कि ईरान परमाणु बम बनाने से कुछ ही हफ्ते दूर है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है।MAGA आंदोलन के भीतर वैचारिक मतभेद और टकर कार्लसन की भूमिकायह पूरा घटनाक्रम इस बात को भी उजागर करता है कि किस प्रकार अमेरिका के 'MAGA' (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) आंदोलन के भीतर ही विदेश नीति को लेकर गंभीर वैचारिक मतभेद पैदा हो गए हैं। कभी डोनाल्ड ट्रंप के सबसे बड़े समर्थक माने जाने वाले टकर कार्लसन अब अमेरिका फर्स्ट की उस विचारधारा के समर्थक बन गए हैं जो यह मानती है कि अमेरिका को मध्य-पूर्व के अंतहीन युद्धों और विदेशी लड़واियों में खुद को नहीं झोंकना चाहिए।कार्लसन का तर्क है कि अमेरिकी विदेश नीति को पूरी तरह से इजरायली हितों के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। वॉशिंगटन में नेतन्याहू के बढ़ते प्रभाव और लॉबीइंग पर खुलकर सवाल उठाने वाले कार्लसन रूढ़िवादी राजनीति की उस स्थापित परंपरा को चुनौती दे रहे हैं जो इजरायल को बिना शर्त समर्थन देने की वकालत करती है। एक तरफ जहां आलोचकों का मानना है कि कार्लसन अनावश्यक रूप से साजिशी थ्योरी और तनाव को हवा दे रहे हैं, वहीं उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग उन्हें अमेरिका की स्थापित व्यवस्था के खिलाफ बोलने वाली एक साहसी और स्वतंत्र आवाज मानता है।
दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका की राजनीतिक दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित दिन आ चुका है। अमेरिका में आज यानी मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) के लिए मतदान किया जा रहा है। वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दूसरे कार्यकाल के ठीक बीच में हो रहे ये चुनाव उनकी प्रशासनिक नीतियों, लोकप्रियता और भविष्य के राजनीतिक एजेंडे के लिए एक बहुत बड़ी और निर्णायक परीक्षा माने जा रहे हैं। इन चुनावों के परिणामों से यह साफ हो जाएगा कि आगामी दो वर्षों तक अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा और सीनेट—पर रिपब्लिकन पार्टी का वर्चस्व कायम रहेगा या विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी बाजी मार लेगी। देश भर में मतदाताओं की भारी भीड़ पोलिंग बूथों पर उमड़ रही है, और चुनाव के तुरंत बाद मतगणना शुरू होने से अगले ही दिन तक स्थिति पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का पूरा गणित क्या है, कौन-से बड़े मुद्दे इस चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं और इसमें भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की क्या भूमिका है।अमेरिकी कांग्रेस का पूरा गणित: प्रतिनिधि सभा और सीनेट का नियंत्रण दांव परअमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में मध्यावधि चुनाव वे चुनाव होते हैं जो राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक दो साल बाद कराए जाते हैं। इसमें राष्ट्रपति पद सीधे तौर पर दांव पर नहीं होता, लेकिन संसद (कांग्रेस) की ताक़त का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।इस बार के चुनाव में प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की सभी 435 सीटों और सीनेट (Senate) की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हो रहा है। वर्तमान स्थिति के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 218 सीटों का है, जहां रिपब्लिकन के पास 219 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं, जबकि 2 सीटें खाली हैं। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों पर जीत की दरकार है। दूसरी ओर, सीनेट में 100 सीटों में से फिलहाल 53 पर रिपब्लिकन और 45 पर डेमोक्रेट्स का कब्जा है। यदि सीनेट में मुकाबला 50-50 की बराबरी पर पहुंचता है, तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) का निर्णायक वोट गेमचेंजर साबित हो सकता है।ट्रंप के एजेंडे पर सीधा असर और चुनावी मैदान में पानी की तरह बहाया गया पैसाराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इन चुनावों के परिणाम बेहद दूरगामी साबित होंगे। यदि डेमोक्रेट पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है, तो वे ट्रंप प्रशासन के विधायी एजेंडे, बजट प्रस्तावों और नीतिगत फैसलों को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। इसके अलावा, सीनेट के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियों पर मुहर लगती है, इसलिए सीनेट का नियंत्रण ट्रंप के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।चुनावी सरगर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार प्रचार और विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसा बहाया गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के संगठन 'मागा इंक' (MAGA Inc.) ने लगभग 28 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं, जबकि ट्रंप के प्रबल समर्थक और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने चुनाव प्रचार और राजनीतिक समर्थन में 36.6 करोड़ डॉलर झोंक दिए हैं। अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग (EAC) के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 23.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, जिनकी सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए न्याय विभाग ने देशभर में 1,000 से अधिक स्वतंत्र मॉनिटर तैनात किए हैं।मतदाताओं के सामने सबसे बड़े मुद्दे: महंगाई, आव्रजन और ईरान युद्धइस बार के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में आम नागरिकों के मन में कई गंभीर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे हावी हैं। चुनाव पूर्व आए न्यूयार्क टाइम्स-सिएना यूनिवर्सिटी के पोल के मुताबिक टेक्सास, कंसास, मेन, अलास्का, मिशिगन और ओहायो जैसे राज्यों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। मतदाताओं को प्रभावित करने वाले मुख्य मुद्दे निम्नलिखित हैं:महंगाई और जीवन-यापन का बढ़ता खर्च: रोजमर्रा की कमोडिटीज, ईंधन और बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर भारी असर डाला है, जिससे मतदाताओं में असंतोष है।आव्रजन और सीमा सुरक्षा: अमेरिका की सीमाओं की सुरक्षा और अवैध आव्रजन नीतियों को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच तीखा वैचारिक मतभेद जारी है।अंतरराष्ट्रीय नीतियां और ईरान युद्ध: वैश्विक मोर्चे पर ईरान युद्ध और उससे जुड़े आर्थिक तथा सामरिक परिणामों को लेकर भी सरकार की नीतियों की समीक्षा हो रही है।अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाएं: आम नागरिकों के लिए रोजगार के नए अवसर, मजबूत अर्थव्यवस्था और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं भी इस चुनाव के प्रमुख केंद्र बिंदु हैं।चुनाव में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों और मतदाताओं की अहम भूमिकाइस बार के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भारतीय मूल के नागरिकों और नेताओं के लिए भी बहुत खास हैं, क्योंकि कई दिग्गज भारतीय-अमेरिकी चेहरे मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गवर्नर और अन्य बड़े पदों के लिए विवेक रामास्वामी (ओहायो से गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार), न्यूयार्क से अटॉर्नी जनरल पद के लिए सरिथा कोमातिरेड्डी और लॉस एंजिलिस में मेयर पद के लिए नित्या रमन कड़ा मुकाबला कर रही हैं।इसके अलावा प्रतिनिधि सभा के लिए डेमोक्रेट पार्टी से रो खन्ना (कैलिफोर्निया), प्रमिला जयपाल (वाशिंगटन), सुहास सुब्रमण्यम (वर्जीनिया) और अमी बेरा (कैलिफोर्निया) जैसे अनुभवी सांसद एक बार फिर पुनर्निर्वाचन की कोशिश में हैं। रणनीतिक रूप से कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली और न्यू जर्सी जैसे इलाकों में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की अच्छी-खासी आबादी है, जो कई करीबी सीटों पर हार-जीत का फैसला करने में निर्णायक साबित हो सकती है। सर्वेक्षणों के अनुसार, अधिकांश भारतीय-अमेरिकी मतदाता घरेलू अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अमेरिकी हमले के बाद तेजी आई है, जिससे अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा है।
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान के कुछ चुनिंदा ठिकानों पर रक्षात्मक हमले (Defensive Strikes) किए हैं। वहीं, ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पुष्टि की है कि इन हमलों के दौरान देश के केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अनाम रहने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी कि ईरानी सेना अमेरिकी परिसंपत्तियों को निशाना बनाने के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (Surface-to-Air Missiles) का इस्तेमाल कर रही थी, जिसके जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई। हालांकि, ये हमले काफी सीमित दायरे में किए गए हैं एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर सोमवार को बताया, ‘‘ईरानी अमेरिकी संपत्ति के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे थे जिन्हें निशाना बनाया गया है।’’ ये हमले अमेरिका में महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले हुए हैं, जो काफी सीमित लग रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनालड ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमले नहीं करेगा। ईरान के खिलाफ युद्ध और इसके कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों तथा अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर पड़े असर को रिपब्लिकन पार्टी की कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है। रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में अपना नियंत्रण बरकरार रखने की कोशिश कर रही है। इसे भी पढ़ें: Iran की शर्तें US ने मानी तो 2 दिन में बहाल होगा Strait of Hormuz पर जहाजों का आवागमन उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि उन्होंने ईरान के साथ बातचीत के संबंध में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति और मुझे दोनों को लगता है कि बातचीत के जरिए किसी समझौते तक पहुंचने की अच्छी संभावना है।’’ वेंस ने पिछले हफ्ते ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा था, लेकिन ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) ने इस पत्र की सामग्री के बारे में बहुत कम जानकारी दी है। ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि यह पत्र ईरान को ‘‘चिकित्सा आपूर्ति और अन्य चीजों’’ में मदद करने के बारे में था, लेकिन सोमवार को वेंस ने संकेत दिया कि इस बात की उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Iran के एक-दो ठिकाने और बाकी! Mojtaba Khamenei ने तेवर पर Donald Trump की चेतावनी कूटनीतिक मोर्चे पर बातचीत और शांति की उम्मीदें सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक रास्ते भी खुले रखने के प्रयास जारी हैं: उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस का बयान: उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने ईरान के साथ संभावित वार्ताओं को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चर्चा की है। उन्होंने विश्वास जताया कि बातचीत के जरिए किसी ठोस समझौते पर पहुंचने की अच्छी संभावनाएं हैं। इसे भी पढ़ें: अमेरिका व उसके मित्र देशों की आंतरिक तैयारियां देख किसी बाहरी खतरे का हो रहा स्पष्ट आभास? गुप्त पत्र और राहत सामग्री: पिछले हफ्ते, जे.डी. वेंस ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई (Mohsen Rezaei) को एक पत्र भेजा था। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पत्र की पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह पत्र ईरान को मानवीय सहायता, जैसे चिकित्सा आपूर्ति और अन्य जरूरी चीजों में मदद करने के उद्देश्य से लिखा गया था। समझौते की आस: सोमवार को वेंस के बयानों से यह संकेत मिला कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक संवाद के जरिए इस गतिरोध को सुलझाने की गुंजाइश अभी भी बाकी है।
पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण केशम द्वीप (Qeshm Island) पर सीमित सैन्य हमला किया है। यह इलाका फारस की खाड़ी और दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के मुहाने पर स्थित है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से पुष्टि हुई है कि अमेरिकी बलों ने सामरिक ठिकानों को निशाना बनाकर रक्षात्मक हवाई स्ट्राइक की है। इस हमले के तुरंत बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर आ गई हैं और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।केशम द्वीप पर लगातार 5 जोरदार धमाके और आसमान में दिखे विमानईरानी सरकारी समाचार एजेंसी 'आईआरएनए' (IRNA) और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केशम द्वीप पर एक के बाद एक लगातार 5 भीषण धमाके सुने गए। धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई रिहायशी इलाकों में झटके महसूस किए गए। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि धमाकों से ठीक पहले और बाद में द्वीप के ऊपर आसमान में कम से कम दो लड़ाकू विमान तेजी से उड़ान भरते देखे गए। हालांकि स्थानीय प्रांतीय प्रशासन की ओर से नुकसान या हताहतों को लेकर आधिकारिक ब्योरा तैयार किया जा रहा है, लेकिन जमीन पर हुए विस्फोटों ने स्पष्ट कर दिया है कि ठिकानों पर सीधा असर हुआ है।ईरान के आईआरजीसी (IRGC) का दावा: मार गिराए 3 अमेरिकी ड्रोनहमले के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी सैन्य सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य और केशम द्वीप के दक्षिणी हिस्से में जासूसी कर रहे तीन अमेरिकी ड्रोनों को उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने निशाना बनाया। तसनीम न्यूज एजेंसी के जरिए जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूर्व में एक एमक्यू-9 (MQ-9) रीपर ड्रोन को नष्ट किया और केशम द्वीप के दक्षिण में दो एमक्यूएम-170 (MQM-170) टोही ड्रोनों को मार गिराकर उनके मलबे को कब्जे में ले लिया। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने ईरानी सेना के इन ड्रोन-मार गिराने के दावों की तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।मिडटर्म चुनावों से पहले कार्रवाई और कूटनीतिक हलचलयह हमला अमेरिका में मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से ठीक पहले हुआ है। एक तरफ जहां अमेरिकी सेना ने रणनीतिक ठिकानों पर यह सीमित स्ट्राइक की है, वहीं दूसरी तरफ वाशिंगटन में कूटनीतिक बयानबाजी भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत और सोशल मीडिया पोस्ट में संकेत दिया कि तेहरान के साथ तनाव कम करने और समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है। ट्रंप ने उल्लेख किया कि ईरान जल्द से जल्द विवाद का समाधान चाहता है। इसके विपरीत, इजरायल और वाशिंगटन के रक्षा गलियारों में रणनीतिक दबाव के चलते अमेरिकी सेना ने होर्मुज क्षेत्र में ईरानी सैन्य गतिविधियों को संतुलित करने के लिए यह पिनपॉइंट हमला अंजाम दिया है।वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर असरस्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए लाइफलाइन माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। केशम द्वीप पर हुए इन सिलसिलेवार हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) बाजारों में तत्काल अस्थिरता और उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। शिपिंग कंपनियों ने फारस की खाड़ी से गुजरने वाले अपने टैंकरों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर दी है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान ने इस हमले के जवाब में जलमार्ग को बाधित करने या अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की, तो यह संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की समर्थकों से अपील- ऐसे वोट दें जैसे मैं भी मैदान में हूं
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की समर्थकों से अपील- ऐसे वोट दें जैसे मैं भी मैदान में हूं
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग का बिगुल बज गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे की हवा निकल गई
अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) के मतदान से चंद घंटे पहले रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित ईरान के केश्म (Qeshm) द्वीप पर सोमवार को सिलसिलेवार पांच भीषण धमाके सुने गए।
केश्म द्वीप पर अमेरिका की 'सीक्रेट एयर स्ट्राइक', ईरान का दावा- 'यूएस ड्रोन कब्जे में लिए'
केश्म द्वीप पर अमेरिका की 'सीक्रेट एयर स्ट्राइक', ईरान का दावा- 'यूएस ड्रोन कब्जे में लिए'
अमेरिका ने ईरान पर शुरू किए हमले, केशम द्वीप को बनाया निशाना, कई धमाके हुए - India TV Hindi
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अमेरिका ने ईरान पर शुरू किए हमले, केशम द्वीप को बनाया निशाना, कई धमाके हुए
अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप को निशाना बनाया है जो कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में स्थित है।
अमेरिका में वोटिंग से ठीक पहले ट्रंप ने किया ईरान पर हमला, केशम द्वीप पर कई धमाके
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा कि हाल के हफ्तों में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर किए गए सीमित हमलों की श्रृंखला में यह सबसे ताजा हमला है. ईरान की सरकारी मीडिया ने भी केशम द्वीप पर कई विस्फोटों की पुष्टि की है.
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का दावा: 10 डॉलर प्रति बैरल सस्ता हुआ तेल, ईरान से समझौते पर क्या कहा? donald-trump-oil-prices-drop-10-dollars-iran-settlement-us-midterm-elections
अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव, कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण की परीक्षा
वाशिंगटन, 3 नवंबर . अमेरिका में Tuesday को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान होगा. इस चुनाव में President डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने प्रतिनिधि सभा और…
सऊदी अरब में हूतियों के हमले का खतरा, अमेरिकी नागरिकों के लिए अलर्ट जारी
US ने सऊदी अरब में अपने नागरिकों को संभावित हमलों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. अमेरिकी चेतावनी के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती पहले सऊदी अरब के नागरिक एयरपोर्ट और अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बना चुके हैं. अमेरिका ने एयरपोर्ट पर हमले, एयरस्पेस बंद होने और उड़ानें रद्द होने की आशंका जताई है.
साल में सिर्फ दो इंजेक्शन: एचआईवी से बचाव का सस्ता विकल्प बनी भारतीय जेनेरिक दवा, अमेरिका ने दी मंजूरी- Just two injections year Indian generic drug emerges affordable option for HIV prevention approved by US
अमेरिका में ट्रंप के नेतृत्व की परीक्षा आज, 25 करोड़ वोटर तय करेंगे संसद पर किसका कंट्रोल
अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव होंगे। इसमें कांग्रेस और कई राज्यों की सरकारों पर नियंत्रण दांव पर है। मतदाता प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 गवर्नरों के पदों के लिए मतदान करेंगे।
होर्मुज के पास सीरियल धमाके: केश्म द्वीप पर पांच विस्फोट के साथ दो विमान दिखे, क्या बढ़ेगा ईरान-अमेरिका तनाव?- Explosions in Iran near Hormuz Five blasts heard on Qeshm Island two aircraft spotted will tensions rise again
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और एफआईआई (FII) की वापसी से मंगलवार को सेंसेक्स 1,225 अंक उछलकर 76,917 के स्तर पर बंद हुआ। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव की वोटिंग और उसके नतीजों का भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ता, आइए जानते हैं प्रमुख अपडेट।
इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल में मनाया गया दीपावली उत्सव, जरूरतमंदों को बांटे वस्त्र
उदयपुर | इंडो अमेरिकन पब्लिक स्कूल में दीपावली का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान जरूरतमंदों को वस्त्र, मिठाई और पटाखे वितरित किए गए। विद्यार्थियों ने सुंदर रंगोलियां बनाईं और पारंपरिक वेशभूषा में डांडिया रास किया। प्राचार्या डॉ. रीनिका राय ने कहा कि दीपावली जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां फैलाने का अवसर है। संस्थापक डॉ. गणेश हड़पावत, ट्रस्ट अध्यक्ष मोहित नागौरी और सचिव शुभम कोठारी ने सभी को शुभकामनाएं दीं।
सुर्खियां: आंध्र तट से टकराया चक्रवात मुरासु; अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव के मतदान; मैक्सवेल ने लिया संन्यास- Top News Cyclone Murasu hits Andhra coast midterm elections voting in US today Maxwell announces retirement
अमेरिका मध्यावधि चुनाव: आज होंगे मतदान, प्रतिनिधि सभा की 435 और सीनेट की 35 सीटों के लिए वोटिंग
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अमेरिका मध्यावधि चुनाव: प्रचार में ट्रंप का आखिरी दांव; एक और मौके का जिक्र क्यों? 127 वादों की सूची में क्या?- US Midterm Elections Trump final gambit campaign trail mention another chance And what his list 127 promises
एमसीएक्स: अमेरिकी चुनाव नतीजों से पहले चांदी 3% से अधिक गिरी, निवेशक सतर्क; जानिए पूरा मामला
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों और ब्याज दरों की चिंताओं के कारण चांदी की कीमतों में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट आई। जानें वैश्विक बाजार और औद्योगिक मांग का इस पर क्या असर पड़ा।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता ने सरकार को अमेरिका से बातचीत के लिए विशेष अधिकार दिए हैं। कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों के जरिए कूटनीतिक संपर्क जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है।
अमेरिका के खिलाफ बड़े युद्ध की तैयारी में ईरान! नागरिकों को दे रहा सैन्य ट्रेनिंग
अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं. तेहरान में आम नागरिकों को युद्ध के लिए तैयार करने के मकसद से नए सैन्य ट्रेनिंग सेंटर खोले गए हैं. यहां IRGC के जवान लोगों को हथियार चलाने और सैन्य अभ्यास की ट्रेनिंग दे रहे हैं.
राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (राना) के संरक्षक सदस्य, हीरा व्यवसायी और समाजसेवी अशोक कुमार संचेती को न्यूयॉर्क में प्रतिष्ठित कौटिल्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एसोसिएशन ऑफ इंडियंस इन अमेरिका (एआईए) नेशनल के बिजनेस काउंसिल अवॉर्ड्स समारोह में यह सम्मान दिया गया। एसोसिएशन ऑफ इंडियंस इन अमेरिका (एआईए) नेशनल के बिजनेस काउंसिल अवॉर्ड्स समारोह का आयोजन 1 नवंबर को लॉन्ग आइलैंड स्थित क्रेस्ट हॉलो कंट्री क्लब में हुआ। समारोह में राना के अन्य संरक्षक सदस्य और विश्वविख्यात इंटरवेंशनल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. समीन शर्मा इस आयोजन के गाला चेयर रहे। राना अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने संचेती को मिले सम्मान और डॉ. शर्मा की भूमिका को पूरे राना परिवार के लिए गर्व का विषय बताया। न्यूयॉर्क में आयोजित समारोह में 5 हस्तियों को मिला कौटिल्य पुरस्कार इस वर्ष कौटिल्य पुरस्कार से सम्मानित 5 हस्तियों में पायनियर जेम्स एलएलसी के अध्यक्ष अशोक कुमार संचेती, पीएंडजी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिलेट नॉर्थ अमेरिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज भल्ला, क्रिस्पर थेरेप्यूटिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. समर्थ कुलकर्णी, एक्वस के अध्यक्ष अरविंद मेलिगेरी और वेल्स फार्गो एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक याकूब मैथ्यू शामिल रहे। भारतीय विरासत और संस्कृति को बढ़ावा देने वाली संस्था है एआईए 20 अगस्त 1967 को स्थापित एसोसिएशन ऑफ इंडियंस इन अमेरिका (एआईए) अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों का सबसे पुराना राष्ट्रीय संगठन है। करीब छह दशकों से यह संस्था भारतीय विरासत, संस्कृति, शिक्षा और समाजसेवा को बढ़ावा देने के साथ भारतीय-अमेरिकी समुदाय को एकजुट करने में भूमिका निभा रही है। समारोह में राना के संरक्षक सदस्यों, पदाधिकारियों और निदेशक मंडल के सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। राना अध्यक्ष प्रेम भंडारी के साथ संरक्षक सदस्य के.के. मेहता, डॉ. नरिंदर कुकर और हरिदास कोटेवाला उपस्थित रहे। राना के प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष डॉ. शरद कोठारी, सचिव रवि जारगढ़, कोषाध्यक्ष नीलम मोदी, संयुक्त सचिव अमित सराफ और अमित शोरवाला तथा निदेशक मंडल के सदस्य दीप चोपड़ा और नितिन धारीवाल शामिल थे। नीलम मोदी एआईए नेशनल की राष्ट्रीय सचिव भी हैं। उन्होंने समारोह में बैंक्वेट चेयर की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा बृहद न्यूयॉर्क सीनियर्स के अध्यक्ष अजय पटेल, जयपुर फुट यूएसए के कोषाध्यक्ष एवं समारोह के आयोजन अध्यक्ष हरीश ठक्कर और जयपुर फुट यूएसए से निक गर्ग भी मौजूद रहे। अक्षय पात्र को न्यूयॉर्क लाने में निभाई थी अहम भूमिका अशोक संचेती जयपुर फुट यूएसए के सलाहकार भी हैं। वे लंबे समय से परोपकार और समाजसेवा से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2006 में राना की ओर से आयोजित दूसरे अंतरराष्ट्रीय राजस्थानी सम्मेलन के दौरान अक्षय पात्र को न्यूयॉर्क लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्हें मिले कौटिल्य पुरस्कार को राना परिवार ने विशेष गौरव का विषय बताया। प्रेम भंडारी बोले- पूरे राना परिवार के लिए गर्व का क्षण दैनिक भास्कर से बातचीत में राना अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने कहा कि अशोक संचेती को प्रतिष्ठित कौटिल्य पुरस्कार मिलना और डॉ. समीन शर्मा का आयोजन का गाला चेयर होना पूरे राना परिवार के लिए गर्व की बात है। उन्होंने सभी पांच पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी। साथ ही परोपकार, समाजसेवा और भारतीय प्रवासी संस्थाओं को सशक्त बनाने में राना सदस्यों के निरंतर योगदान की सराहना की। भंडारी ने डॉ. नरिंदर कुकर के एआईए के साथ लंबे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि “एआईए उनके डीएनए में है।” उन्होंने एआईए नेशनल की अध्यक्ष नीलिमा मदान को भी बधाई दी। आयोजन टीम में नीलम मोदी, हरीश ठक्कर, कल्पना पटेल और गोबिंद भतीजा सहित सभी सहयोगियों के प्रयासों की सराहना की।
चीन के रहस्यमयी स्पेस प्लेन शेनलोंग (Shenlong) की पहली हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीर अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में सामने आई है. तस्वीर में यह स्पेस प्लेन एक दूसरे सैटेलाइट से जुड़ा हुआ दिखाई देता है.
US Midterm Elections 2026: Donald Trump की अग्निपरीक्षा, अमेरिका में 2 साल में चुनाव क्यों होते हैं?
अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन होने जा रहे हैं... और इस चुनाव पर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है...
अमेरिका मांगें माने तो दो दिन में होर्मुज स्ट्रेट फिर खोला जा सकता है : बाघेई
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Viral Video: अमेरिकी इन्फ्लुएंसर Marvin Achi के लिए फूट-फूटकर रोईं शिवानी कुमारी, वीडियो में छलके आंसू
अमेरिका मिडटर्म चुनाव में अगर डेमोक्रेट्स जीते तो क्या होगा? ट्रंप ने खोली अपनी रणनीति
संयुक्त राज्य अमेरिका में आगामी तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) को लेकर सियासी तापमान अपने चरम पर पहुंच चुका है। मतदान से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को सीधी और बेहद आक्रामक चेतावनी देकर अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि यदि मंगलवार को होने वाले इस महा-मुकाबले में डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के किसी एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेती है, तो वह विधायी कामकाज को अपने हिसाब से चलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी स्थिति में वे बिना किसी हिचकिचाहट के 'मिस्टर वीटो' का रूप अख्तियार कर लेंगे और विपक्षी पार्टी के किसी भी एजेंडे को आगे नहीं बढ़ने देंगे।द न्यूयॉर्क पोस्ट के साथ एक विस्तृत बातचीत के दौरान जब राष्ट्रपति ट्रंप से यह सीधा सवाल किया गया कि यदि मध्यावधि चुनावों में जनमत उनके खिलाफ गया और संसद के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा हो गया तो वे इस राजनीतिक गतिरोध से कैसे निपटेंगे, तो ट्रंप ने अपने जाने-पहचाने बेबाक अंदाज में जवाब दिया। ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि उस स्थिति में मैं पूरी तरह 'मिस्टर वीटो' बन जाऊंगा। मैं उन्हें देश के बुनियादी ढांचे और नीतियों को बर्बाद करने की छूट किसी भी कीमत पर नहीं दे सकता। ट्रंप के इस बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि अगर चुनाव परिणाम बंटे हुए जनादेश की ओर जाते हैं, तो आने वाले महीनों में व्हाइट हाउस और कैपिटल हिल के बीच अभूतपूर्व विधायी टकराव देखने को मिल सकता है।'वे बिल भेजेंगे और मैं रद्द कर दूंगा', ट्रंप ने समझाया अपनी वीटो रणनीति का पूरा गणितराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ भविष्य में होने वाले विधायी संघर्ष का पूरा रोडमैप मीडिया के सामने उजागर किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि यदि विपक्षी सांसद अपने एजेंडे के तहत नए कानून या विधेयक पारित करके व्हाइट हाउस के पास हस्ताक्षर के लिए भेजेंगे, तो वे हर एक बिल पर अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उसे सीधे खारिज कर देंगे। ट्रंप ने कहा कि वे विधेयक पारित करके भेजते रहेंगे और मैं एक के बाद एक उन सभी पर वीटो लगाता रहूंगा। एक या दो महीने तक लगातार विधेयकों के खारिज होने के बाद जब डेमोक्रेट सांसदों को यह अहसास हो जाएगा कि वे केवल अपना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं, तब वे अपनी जिद छोड़कर बातचीत की मेज पर आने के लिए विवश होंगे।ट्रंप ने रेखांकित किया कि जब डेमोक्रेट्स को जमीनी हकीकत का भान होगा, तभी दोनों पक्षों के बीच वास्तविक समझौता संभव हो सकेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि विधायी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच किसी मुद्दे पर सहमति बनना कोई नई या अनोखी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी न किसी मोड़ पर हम शायद एक व्यावहारिक समझौते पर पहुंच ही जाएंगे क्योंकि अमेरिकी विधायी इतिहास में ऐसा पहले भी कई बार देखा गया है और यह कोई पहला मौका नहीं होगा जब दोनों दल आपसी बातचीत से रास्ता निकालेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे पूरी तरह आश्वस्त हैं कि अमेरिकी मतदाता रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों का समर्थन करेंगे और कांग्रेस के दोनों सदनों में उनकी पार्टी का नियंत्रण मजबूती से बरकरार रहेगा। इसके बावजूद उन्होंने दोहराया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनका वीटो का पेन लगातार चलता रहेगा।वीटो की संवैधानिक ताकत और पिछले कार्यकालों के आंकड़े, कैसे निष्प्रभावी हो सकता है राष्ट्रपति का वीटोअमेरिकी संवैधानिक ढांचे में राष्ट्रपति की वीटो शक्ति कार्यपालिका का सबसे बड़ा और निर्णायक हथियार मानी जाती है। अमेरिकी संविधान के अनुसार, संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किसी भी विधेयक को कानून की शक्ल लेने से पहले राष्ट्रपति की मेज पर भेजा जाता है। यदि राष्ट्रपति उस विधेयक से असहमत हैं, तो वे अपनी वीटो शक्ति का प्रयोग करके उसे नामंजूर कर सकते हैं। हालांकि संविधान निर्माताओं ने शक्ति के संतुलन (चेक्स एंड बैलेंसेज) की भी मजबूत व्यवस्था की है। यदि प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) दोनों सदनों के कम से कम दो-तिहाई (66 प्रतिशत से अधिक) सदस्य राष्ट्रपति की आपत्ति को दरकिनार करते हुए उस विधेयक के पक्ष में दोबारा मतदान कर दें, तो राष्ट्रपति का वीटो निष्प्रभावी हो जाता है और वह विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना भी स्वतः कानून बन जाता है। वर्तमान राजनीतिक ध्रुवीकरण के दौर में किसी भी दल के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई का भारी बहुमत जुटाना लगभग असंभव माना जाता है।आंकड़ों के नजरिए से देखें तो डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान अब तक बहुत संयम के साथ काम लिया है और महज दो बार ही अपनी वीटो शक्ति का उपयोग किया है। इसके विपरीत, अपने पहले कार्यकाल (2017 से 2021) के दौरान जब संसद में डेमोक्रेट्स का दबदबा बढ़ा था, तब ट्रंप ने कुल 10 विधेयकों को वीटो के जरिए रोक दिया था। यदि इस मध्यावधि चुनाव में संसद के समीकरण बदलते हैं, तो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वीटो के इस्तेमाल की संख्या अपने पुराने सभी रिकॉर्ड्स को तोड़ सकती है।क्या तीसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव लड़ेंगे डोनाल्ड ट्रंप? 22वें संशोधन का जिक्र कर दिया जवाबसाक्षात्कार के दौरान पत्रकारों ने डोनाल्ड ट्रंप से भविष्य की योजनाओं और तीसरे कार्यकाल के संभावित चुनाव को लेकर भी सवाल पूछा। ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे अपने दूसरे कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा व्हाइट हाउस की दौड़ में शामिल होने पर विचार करेंगे? इस पर ट्रंप ने मुस्कराते हुए कहा कि व्यक्तिगत रूप से मैं जरूर दोबारा चुनाव लड़ना चाहूंगा, लेकिन इस देश में इसको लेकर कानूनी नियम बेहद सख्त और स्पष्ट हैं। ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिकी संविधान के ऐतिहासिक 22वें संशोधन की ओर इशारा करता है।अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन स्पष्ट रूप से यह अनिवार्य करता है कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में दो बार से अधिक संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति निर्वाचित नहीं हो सकता। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के चार बार राष्ट्रपति बनने के बाद साल 1951 में इस संवैधानिक सीमा को कानूनी रूप से लागू किया गया था। ट्रंप पहले ही 2016 और 2024 के चुनाव जीतकर अपने दो कार्यकाल पूरे करने की दिशा में हैं, ऐसे में संवैधानिक सीमाओं के कारण उनके लिए 2028 में तीसरी बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होना कानूनी तौर पर संभव नहीं होगा। ट्रंप के इस स्पष्टीकरण ने उन सभी अटकलों पर भी विराम लगा दिया है जिनमें उनके तीसरे कार्यकाल की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं चल रही थीं।
US मिड-टर्म चुनाव में पड़े फर्जी वोट, 20000 गैर-अमेरिकियों ने कर दिए मतदान
ट्रंप के न्याय विभाग ने कैलिफोर्निया में करीब 20,000 मेल मतपत्र अलग रखने और अलास्का में नतीजों की पुष्टि रोकने के लिए अदालत का रुख किया. दोनों याचिकाएं खारिज होने के बावजूद इस कार्रवाई ने चुनाव से पहले विभाग के सीधे दखल और उसकी राजनीतिक निष्पक्षता पर उठे सवालों को सामने ला दिया है.
सांसद से गवर्नर पद तक... अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में कौन-कौन से भारतवंशी ठोक रहे ताल? - Jagran
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अमेरिका के फ्लोरिडा में प्राइवेट जेट क्रैश, हादसे में सभी 9 लोगों की मौत
अमेरिका के फ्लोरिडा में एक प्राइवेट जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस दर्दनाक विमान हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दुर्घटना के बाद के खौफनाक मंजर को देखा जा सकता है. मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान में कुल 9 लोग सवार थे और हादसे में विमान में सवार सभी 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है.
नए साल 2027 की सफारी के लिए रणथंभौर में पहले ही दिन रिकॉर्ड बुकिंग हुई। 1 नवंबर को एडवांस बुकिंग शुरू होते ही देश-विदेश के 46,500 पर्यटकों ने टिकट बुक करा लिए। इनमें 19,500 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। सबसे ज्यादा बुकिंग ब्रिटेन से हुई। बुकिंग रिपोर्ट के अनुसार, खबर लिखे जाने तक करीब 46,500 पर्यटकों ने सफारी टिकट बुक कराए। इनमें 27 हजार भारतीय और 19,500 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, पोलैंड, रोमानिया, आर्मेनिया और जॉर्जिया सहित कई देशों के पर्यटकों ने रणथंभौर के आधिकारिक बुकिंग पोर्टल से सीधे टिकट बुक कराए। खास बात यह है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता के बावजूद पर्यटकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। एक जनवरी की बुकिंग को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह बुकिंग के आंकड़ों में 1 जनवरी 2027 पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरा। पर्यटकों में करीब 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं, 41 से 60 वर्ष और इससे अधिक आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत रही। बाकी पर्यटकों में बच्चे और 25 वर्ष तक के युवा शामिल हैं। विदेशी पर्यटकों की बुकिंग में भी कई बदलाव देखने को मिले। फ्रांस से आने वाले पर्यटकों की हिस्सेदारी में 0.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, पर्यटकों की संख्या के मामले में इटली और स्विट्जरलैंड ने कनाडा को पीछे छोड़ दिया। विदेशी पर्यटकों की बुकिंग में यूनाइटेड किंगडम पहले, अमेरिका दूसरे और ऑस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहे। तकनीक और वन्यजीव संरक्षण का संगम रणथंभौर में आधुनिक तकनीक के जरिए पर्यटन प्रबंधन को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। रियल टाइम मॉनिटरिंग, GPS डेटा और पर्यटकों के फीडबैक के माध्यम से सफारी संचालन को प्रभावी बनाने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नए साल की एडवांस बुकिंग में मिले रिकॉर्ड रिस्पॉन्स ने एक बार फिर साबित किया है कि रणथंभौर की पहचान केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में अपनी खास जगह रखता है।
तो 2 दिन में खुलेगा होर्मुज? अमेरिका से समझौते के लिए ईरान का नया प्रस्ताव
अमेरिका के साथ जंग खत्म करने को लेकर कतर की मध्यस्थता में चल रही बातचीत से ईरानी वार्ताकार रविवार को लौट गए. एक अधिकारी के मुताबिक, बातचीत में किसी मुश्किल की वजह से उन्होंने वार्ता नहीं छोड़ी है. इस बीच समझौते का एक ड्राफ्ट प्रस्ताव साझा किया जा रहा है और आगे बैठक होने की संभावना है.
Pakistan में अमेरिकी कंपनियों का LNG प्रोजेक्ट पर 4.4 अरब डॉलर निवेश का प्लान
(सज्जाद हुसैन) इस्लामाबाद, दो नवंबर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के समर्थन वाली अमेरिकी कंपनियों के एक समूह ने पाकिस्तान में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की एकीकृत परियोजना के लिए 4.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक के निवेश की योजना बनाई है। सोमवार को एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।समाचारपत्र ‘डॉन’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना में एलएनजी आयात, भंडारण, पुनर्गैसीकरण, पाइपलाइन से आपूर्ति और बड़े उपभोक्ताओं को बिक्री की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पाकिस्तान में फिलहाल एलएनजी भंडारण की कोई इकाई नहीं है।कंपनियों के इस समूह में ग्लोबल विजन एनर्जी पार्टनर्स (जीवीईपी), खानजी होल्डिंग्स और लक्जमबर्ग की जनरल मेडिटेरेनियन होल्डिंग शामिल हैं। परियोजना के लिए पोर्ट कासिम प्राधिकरण से प्रस्तावित स्थल की सहमति मिल गई है और तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण (ओगरा) के पास अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना को अमेरिकी व्यापार एवं विकास एजेंसी के परियोजना तैयारी कार्यक्रम के तहत विचार के लिए मंजूरी मिली है। इसे अमेरिकी विकास वित्त निगम से आंशिक वित्तपोषण और अमेरिकी निर्यात-आयात बैंक से प्रौद्योगिकी, उपकरण और सेवाओं के लिए निर्यात ऋण गारंटी भी मिल सकती है।परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 1.7 अरब डॉलर की लागत से चार टैंक वाला एलएनजी टर्मिनल और भंडारण सुविधा बनाई जाएगी, जिसकी सालाना क्षमता 35 अरब घन फुट होगी। दूसरे चरण में 1,100 किलोमीटर लंबी और 42-48 इंच व्यास वाली गैस पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसकी क्षमता प्रतिदिन करीब 1.2 अरब घन फुट होगी। इसके साथ परियोजना की कुल लागत 4.4 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य घरेलू गैस बाजार के साथ अमेरिकी और पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्ताओं को जोड़ते हुए क्षेत्रीय भंडारण, गैस में परिवर्तन और कारोबार केंद्र विकसित करना है। इसके लिए परिसंपत्तियों, देनदारियों और वित्तीय जोखिमों के प्रबंधन को एक विशेष कंपनी भी बनाई गई है।समूह स्थानीय निवेशकों को परियोजना में 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी देने के लिए बातचीत कर रहा है। प्रत्येक निवेशक से न्यूनतम पांच करोड़ डॉलर के निवेश की उम्मीद है। संभावित निवेशकों में केकेआर, ब्लैकस्टोन, सऊदी अरब का सार्वजनिक निवेश कोष और कुवैत निवेश प्राधिकरण शामिल हैं। हालांकि, अभी किसी निवेशक की पक्की प्रतिबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है।
कैथल के युवक की अमेरिका में हार्ट अटैक से मौत:9 साल पहले ₹45 लाख खर्च कर गया; 2 बच्चों का पिता था
कैथल के गांव रसीना निवासी करीब 40 वर्षीय संजीव की अमेरिका में हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह करीब नौ साल पहले परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और कमाई करने के उद्देश्य से अमेरिका गया था। अब परिवार को उसकी मौत की सूचना मिली है। संजीव की मौत की खबर से गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। 9 साल पहले अमेरिका गया था संजीव परिजनों के अनुसार, संजीव करीब नौ-दस साल से अमेरिका में रह रहा था और डंकी के रास्ते गया था। वह कैलिफोर्निया में गाड़ी चलाने का काम करता था और वहां की नागरिकता भी प्राप्त कर चुका था। 28 अक्टूबर को अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। साथ रहने वाले लोग उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों और सामाजिक संस्थाओं ने सरकार तथा अन्य संस्थाओं से संजीव का शव भारत लाने में सहयोग करने की अपील की है। विदेश भेजने में खर्च किए थे 45 लाख रुपए संजीव के चचेरे भाई राजेश ने बताया कि उसे अमेरिका भेजने के लिए परिवार ने करीब 45 लाख रुपए खर्च किए थे। इस रकम का इंतजाम करने के लिए कुछ पैसे जानकारों से भी उधार लिए गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि संजीव वहां कमाई करके घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा। पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गया पीछे परिजनों के अनुसार, संजीव शादीशुदा था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उसकी मां, पत्नी और दो बच्चे हैं। पहले परिवार खेती करता था, लेकिन संजीव को विदेश भेजने के लिए जमीन बेच दी गई थी। परिजनों ने सरकार और सामाजिक संस्थाओं से संजीव का शव भारत लाने तथा परिवार की मदद करने की अपील की है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने बयान जारी कर कहा है कि यदि अमेरिका उनकी मांगों को स्वीकार कर लेता है, तो ईरान आगामी दो दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए तैयार है। तेहरान का कहना है कि इस विषय पर […] The post अमेरिका की शर्तों पर निर्भर है होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना, ईरान ने दो दिनों में मार्ग बहाल करने की पेशकश की first appeared on Sanjeevni Today .
क्या है mid-term election, अमेरिका में क्या होगा डोनाल्ड ट्रंप सरकार का, मनमानी पर लगेगी लगाम?
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। इन मिडटर्म के नतीजे अमेरिकन नेशनल लेजिस्लेचर, स्टेट गवर्नरशिप और हजारों लोकल ऑफिस में पावर बैलेंस को तय करते हैं। मिडटर्म चुनाव यानी राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के ठीक बीच में होने वाले संसद के ...
अमेरिका में बिजनेस जेट क्रैश, सभी 9 लोगों की मौत: वीडियो में पायलट ने आखिरी समय में कहा- हम जमीन से टकराने वाले हैं, 10 हजार फीट प्रति मिनट की रफ्तार से गिर रहा विमान
क्या ईरान के पिकेक्स पहाड़ पर अमेरिका गिराएगा B61-11 न्यूक्लियर बम
अमेरिकी परमाणु बम B61-11 एक खास बंकर बस्टर बम है, जिसे अंडरग्राउंड सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है. ईरान केपिकेक्स माउंटेन को लेकर इसकी चर्चा तेज है, लेकिन ट्रंप प्रशासन के परमाणु हमले की तैयारी का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के घर से 11 किमी दूर क्रैश होकर आग का गोला बना जेट, 9 लोगों की मौत
इस दर्दनाक हादसे में विमान में मौजूद सभी नौ व्यक्तियों की जान चली गई। दुर्घटना स्थल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विख्यात 'मार-ए-लागो' एस्टेट से मात्र 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रूस से जुड़े तेल की खरीद पर अमेरिकी टैरिफ छूट से भारत-यूएस व्यापार को मिलेगा बढ़ावा : रिपोर्ट
अमेरिका के रूस से जुड़े टैरिफ और प्रतिबंधों से संबंधित उपायों में रूसी मूल के तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों को छूट देने के फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। इससे कारोबारी विश्वास बहाल होगा और द्विपक्षीय व्यापार को गति देने में मदद मिलेगी। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई है।
राष्ट्रपति की पार्टी के लिए क्यों है ये 'लिटमस टेस्ट': अमेरिकी मिडटर्म चुनाव
वाशिंगटन, अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म पोल यानि मध्यावधि चुनाव के लिए वोटिंग है। ऐसा चुनाव जिसमें राष्ट्रपति की कुर्सी तो नहीं खिसकती लेकिन उसके लिए खतरे की घंटी जरूर होता है।
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म पोल यानि मध्यावधि चुनाव के लिए वोटिंग है। ऐसा चुनाव जिसमें राष्ट्रपति की कुर्सी तो नहीं खिसकती लेकिन उसके लिए खतरे की घंटी जरूर होता है।
वाशिंगटन, 2 नवंबर . अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म पोल यानि मध्यावधि चुनाव के लिए वोटिंग है. ऐसा चुनाव जिसमें President की कुर्सी तो नहीं खिसकती लेकिन…
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: राष्ट्रपति की पार्टी के लिए क्यों है ये 'लिटमस टेस्ट', इतिहास में छुपा है जवाब
एच-1बी और एल-1 वीजा एक्सटेंशन नियम सख्त करेगा अमेरिका, भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है असर
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की एक प्रस्तावित इमिग्रेशन नीति भारतीय पेशेवरों की मुश्किलों में इजाफा कर सकती है।
ट्रंप की सख्त नीतियों से अमेरिका से मोहभंग? एक साल में 50 हजार भारतीय छात्रों ने घटाई दूरी
आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में अमेरिका में सक्रिय भारतीय छात्रों की संख्या घटकर 3,16,893 रह गई, जबकि अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 3,66,258 था। यानी एक साल के भीतर 49,365 भारतीय छात्र कम हुए हैं। प्रतिशत के लिहाज से यह गिरावट लगभग 13.5 फीसदी है।
अनंत सिंह के होने वाले दामाद अमेरिका में रहते हैं, बेटी शिवांगी की शादी के लिए यूपी से आया टेंट
अनंत सिंह की बेटी शिवांगी सिंह की शादी इसी साल 25 नवंबर को होने वाली है। कहा जा रहा है कि करीब 10 बीघे में शादी की तैयारियां चल रही हैं। शिवांगी सिंह की शादी में विशाल टेंट-पंडाल लगाने के लिए मऊ से लोग आए हैं तो वहीं अनंत सिंह के दामाद यानी दूल्हे राजा भी विदेश से आ रहे हैं।
अमेरिका के फ्लोरिडा में दर्दनाक विमान हादसा
अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य से एक बेहद डरावनी और झकझोर देने वाली विमान दुर्घटना की खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। फ्लोरिडा के आसमान में एक प्राइवेट बिजनेस जेट अचानक अनियंत्रित हो गया और चश्मदीदों के मुताबिक किसी खतरनाक मिसाइल की तरह सीधे तेज गति से नीचे जमीन पर आ गिरा। इस भीषण हादसे के बाद विमान में जोरदार धमाका हुआ और आसमान में आग का गोला तथा काले धुएं का गुबार छा गया। इस अत्यंत भयानक दुर्घटना में विमान में सवार सभी 9 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन राहत दल (Emergency Rescue Teams) तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।आसमान से मिसाइल की तरह नीचे गिरा विमान: चश्मदीदों ने बयां किया खौफनाक मंजरफ्लोरिडा के स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह हादसा इतनी तेजी से हुआ कि किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। चश्मदीदों ने बताया कि उन्होंने हवा में एक तेज आवाज सुनी और जब ऊपर देखा तो एक बिजनेस जेट किसी रॉकेट या मिसाइल की भांति सीधे वर्टिकल एंगल में नीचे की तरफ गोता लगाते हुए जमीन पर क्रैश हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि विमान के परखच्चे उड़ गए और आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया। आसमान से अचानक विमान के गिरने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान और सहमे हुए हैं।विमान में सवार सभी 9 लोगों की मौत, पहचान की प्रक्रिया जारीअमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) की शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस बिजनेस जेट में कुल 9 लोग सवार थे, जिनमें क्रू मेंबर और यात्री दोनों शामिल थे। टक्कर इतनी विनाशकारी थी कि विमान में सवार किसी भी व्यक्ति के बचने की कोई गुंजाइश नहीं बची। दुर्घटनास्थल से सभी 9 शवों के अवशेष बरामद कर लिए गए हैं, और स्थानीय फोरेंसिक टीम मृतकों की पहचान पुख्ता करने के लिए डीएनए टेस्ट व अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में जुटी हुई है। प्रारंभिक तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विमान ने कहां से उड़ान भरी थी और इसका गंतव्य स्थान कहां था।तकनीकी खराबी या पायलट की चूक: क्रैश के संभावित कारणों की जांच शुरूइस दुखद दुर्घटना के असल कारणों का अभी आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन NTSB और FAA के विशेष जांच दल ने मौके से ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपीट वॉयस रिकॉर्डर) को तलाशने का काम शुरू कर दिया है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी तेजी से विमान का नीचे गिरना या तो किसी गंभीर और अचानक पैदा हुई तकनीकी खराबी (Technical Malfunction) की ओर इशारा करता है, या फिर हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने और मौसम की अचानक खराबी का परिणाम हो सकता है। जांच एजेंसियां एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के साथ हुई आखिरी बातचीत के रिकॉर्ड्स को भी खंगाल रही हैं, ताकि हादसे से कुछ सेकंड पहले कॉकपिट के भीतर हुई हलचल का पता लगाया जा सके।अमेरिकी एविएशन सेक्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालपिछले कुछ समय में अमेरिका के भीतर छोटे निजी विमानों और बिजनेस जेट्स के साथ होने वाले हादसों में इजाफा देखने को मिला है, जिसके बाद देश की हवाई सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। अमेरिकी मीडिया और नागरिक सुरक्षा संगठनों ने विमानों के समय पर मेंटेनेंस और सख्त एयरवर्थनेस नियमों के पालन पर जोर दिया है। इस মর্মান্তिक दुर्घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि आसमान में जरा सी तकनीकी चूक या अनहोनी कितनी भारी पड़ सकती है। फ्लोरिडा प्रशासन और संघीय जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि इस हादसे की तह तक पहुंचकर सच्चाई का पता लगाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
अमेरिका में हैलोवीन पर कई जगह गोलीबारी, 11 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका में हैलोवीन वीकेंड के दौरान डलास और बर्मिंघम समेत कई शहरों में गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं. इन हिंसक वारदातों में 11 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. डलास के दीप एम इलाके और अलबामा के बर्मिंघम में फुटबॉल मैच के दौरान हुई फायरिंग से हड़कंप मच गया है. पुलिस मामलों की जांच कर रही है.
ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले की आशंका; खाड़ी देश सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार
ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले की आशंका को देखते हुए खाड़ी देश सबसे खराब स्थिति (worst-case scenario) के लिए तैयारी कर रहे हैं। चिंता इस बात की है कि ऐसी घटना से इस क्षेत्र में निवेशकों और पर्यटकों का भरोसा और कम हो सकता है, जबकि संघर्ष की एक नई लहर से भारी आर्थिक तबाही […] The post ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले की आशंका; खाड़ी देश सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
टकर कार्लसन ने सोमवार को एक्स पर एक बड़ा पोस्ट डालते हुए दावा किया कि अमेरिका अपने संभावित परमाणु हमले में ईरान में 'पिकएक्स माउंटेन' को निशाना बना सकता है. उनका दावा है कि नेतन्याहू इस बारे में हर दिन ट्रंप को फोन करते हैं.
अमेरिका के कई शहरों में हैलोवीन के दौरान गोलीबारी, 6 लोगों की मौत
अमेरिका में हैलोवीन जश्न के दौरान छह से अधिक शहरों में भीषण गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं. डलास, बर्मिंघम और नेवार्क समेत कई शहरों में हुई इस हिंसा में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. डलास में ही 4 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस वारदात के बाद अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था और गन कल्चर पर फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के उम्मीदवारों की बड़ी दस्तक, 57 चेहरे मंगलवार को आजमाएंगे किस्मत
अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के उम्मीदवारों की बड़ी दस्तक, 57 चेहरे मंगलवार को आजमाएंगे किस्मत
अमेरिका से आएगा अनंत सिंह का दामाद, 10 बीघा में होगी बेटी शिवांगी की शाही शादी; कौन हैं ऋषिकेश?
मोकामा विधायक अनंत सिंह की छोटी बेटी शिवांगी सिंह की शादी 25 नवंबर को उनके पैतृक गांव लदमा में होने जा रही है। अमेरिका में रहने वाले ऋषिकेश कुमार से तय हुई यह शादी 10 बीघा जमीन पर भव्य तरीके से आयोजित की जाएगी, जिसमें घुड़दौड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
अमेरिकी में मिडटर्म इलेक्शन: क्या ट्रंप की घटती लोकप्रियता का फ़ायदा उठा पाएंगे डेमोक्रेट्स
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट के बावजूद मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स की राह आसान नहीं दिख रही है. क्या है इसकी वजह?
अमेरिका में इंश्योरेंस के 10 करोड़ पाने रची फर्जी मौत, श्मशानघाट की रसीद भी लगाई; एक गलती ने पकड़ाया
देहरादून के एक शख्स ने अमेरिका में 10 करोड़ का इंश्योरेंस पाने के लिए फर्जी मौत रची। श्मशानघाट से फर्जी रसीद तक लगाई, लेकिन एक गलती से वह पकड़ा गया।
अमेरिका चीन और रूस की जासूसी और भी बेहतर तरीके से करता है : ट्रंप
सलीना की रैली में, ट्रंप ने फिर से अर्थव्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, पिछले तीन महीनों में आपकी महंगाई दर 1.7 प्रतिशत तक गिर गई है। मुझे 'स्लीपी' (सुस्त) जो बाइडेन से विरासत में ऊंची कीमतें मिली थीं; मैंने ये कीमतें नहीं बढ़ाईं।
दक्षिण कोरिया-अमेरिका के सैन्य अभ्यास से भड़का प्योंगयांग, परमाणु ताकत बढ़ाने की दी चेतावनी
दक्षिण कोरिया-अमेरिका के सैन्य अभ्यास से भड़का प्योंगयांग, परमाणु ताकत बढ़ाने की दी चेतावनी
अमेरिका चीन और रूस की जासूसी ‘और भी बेहतर’ तरीके से करता है : ट्रंप
वाशिंगटन, 2 नवंबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने Sunday (स्थानीय समयानुसार) को अपने मध्यावधि चुनाव प्रचार अभियान का समापन किया. ईरान पर अमेरिकी हमले का बचाव किया,…
अमेरिका के फ्लोरिडा में बिजनेस जेट क्रैश, 9 की मौत
अमेरिका के फ्लोरिडा में 1 नवंबर को लियरजेट 60 बिजनेस विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. टेक्सास के ऑस्टिन से बहामास जा रहे इस विमान में 9 लोग सवार थे और सभी की मौत हो गई.
अमेरिका चीन और रूस की जासूसी 'और भी बेहतर' तरीके से करता है : ट्रंप
अमेरिका चीन और रूस की जासूसी 'और भी बेहतर' तरीके से करता है : ट्रंप
Stock Market LIVE Updates : GIFT निफ्टी के संकेतों को देखते हुए लगता है कि 2 नवंबर को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्सों में गैप-अप शुरुआत हो सकती है। शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 217 अंक ऊपर 23,303 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, पिछले कारोबार सेशन की बात करें तो 30 अक्टूबर को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्सों ने पिछले सत्र की तेजी को जारी रखा। IT, फार्मा और कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी के चलते निफ्टी ने फिर से 23,000 का स्तर हासिल कर लिया। बंद होने पर, सेंसेक्स 308.49 अंक या 0.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,459.53 पर और निफ्टी 116.35 अंक या 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,053.10 पर बंद हुआ था।
BREAKING:Florida Plane Crash: अमेरिका में सड़क पर गिरा विमान, हादसे में 9 लोगों की मौत; आग के गोले में बदला जेट
अमेरिका: फ्लोरिडा के रिहायशी इलाके में गिरा नौ लोगों को ले जा रहा विमान
वेस्ट पाम बीच (फ्लोरिडा), 2 नवंबर . अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में Sunday दोपहर नौ लोगों को लेकर जा रहा एक लियरजेट-60 बिजनेस जेट रिहायशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त…
ट्रंप से नेतन्याहू की क्या हुई बात?: अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर हमले का बनाया दबाव, रिपोर्ट में बड़ा दावा--Netanyahu Urges Trump to Strike Iran After US Midterm Elections: Axios Report
अमेरिका के फ्लोरिडा में जेट विमान हादसे का शिकार, सभी 9 लोगों की मौत, VIDEO
फ्लोरिडा में नौ लोगों को ले जा रहा एक बिजनेस जेट रविवार को हादसे का शिकार हो गया. इस घटना में सभी नौ लोगों की मौत हो गई.
अमेरिका-कनाडा डील में कीस्टोन XL पाइपलाइन की एंट्री! ट्रंप ने बताया प्लान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ एक नए व्यापार समझौते का प्रस्ताव पेश किया है जो किसानों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस बातचीत को सकारात्मक बताया है और कहा है कि दोनों देशों की टीमें जल्द ही समझौते को अंतिम रूप देंगी.
आईआईटी की तैयारी के लिए देशभर में पहचान बना चुका कोटा अब दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों तक भी अपनी प्रतिभा पहुंचा रहा है। यहां कोचिंग करने वाले विद्यार्थी सिर्फ देश की शीर्ष इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में ही सफलता नहीं पा रहे, बल्कि अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) जैसे वैश्विक संस्थानों में भी जगह बना रहे हैं। पिछले 9 शैक्षणिक वर्षों (2017-18 से 2025-26) में कोटा कोचिंग से जुड़े 18 स्टूडेंट्स को एमआईटी में प्रवेश मिला है। 2025-26 में रुद्र पेठानी और कनिष्क जैन को प्रवेश मिला। जेईई एडवांस्ड टॉपर चित्रांग मुरदिया और सतवत जगवानी ने भी एमआईटी में प्रवेश लिया। एमआईटी में 286 भारतीय: वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार एमआईटी में भारत के 286 विद्यार्थी पढ़ रहे थे। इनमें 16 अंडरग्रेजुएट और 242 ग्रेजुएट विद्यार्थी थे। शेष रिसर्च कर रहे थे। चीन के बाद एमआईटी में सबसे अधिक विद्यार्थी भारत के हैं। सबसे अधिक विद्यार्थी अमेरिका और ब्रिटेन से आते हैं। अकादमिक के साथ रचनात्मकता व नेतृत्व क्षमता भी आंकते हैं: एमआईटी में प्रवेश के लिए गणित-विज्ञान की मजबूत समझ, कठिन समस्याएं सुलझाने की क्षमता और नई खोजों की जिज्ञासा परखी जाती है। रचनात्मकता, नेतृत्व, टीमवर्क और सामाजिक समस्याओं के समाधान में रुचि को महत्व मिलता है। एसएटी-एसीटी स्कोर और विद्यार्थी की प्रोफाइल भी चयन का आधार हैं। रिसर्च, आकर्षक सैलरी पैकेज एमआईटी में विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, एआई, स्पेस, बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में शोध व नई तकनीक विकसित करने के अवसर मिलते हैं। संस्थान स्कॉलरशिप देता है। अमेरिकी कंपनियों में आकर्षक सैलरी पैकेज मिलते हैं।
top headline today important and big news stories of 2 November updates on amar ujala news in hindi- सुर्खियां: दिल्ली-एनसीआर की हवा में घुल रहा जहर; अमेरिका में विमान हादसा; होर्मुज पर गतिरोध दूर होने के संकेत
Florida Plane Crash Private Business Jet Crashes Near Residential Area many people Dead US news- अमेरिका के फ्लोरिडा में बड़ा विमान हादसा: रिहायशी इलाके के पास निजी जेट क्रैश, सवार सभी 9 लोगों की मौत
पश्चिम एशिया संकट: सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीति से निकलेगा समाधान; अमेरिका-ईरान तनाव पर यूएई की अपील
uae says military solutions offer no quick off-ramps to crisis with Iran west asia us iran war- पश्चिम एशिया संकट: सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीति से निकलेगा समाधान; अमेरिका-ईरान तनाव पर यूएई की अपील
ट्रंप के साथ कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार के भविष्य पर हुई अच्छी बात: कार्नी
नई दिल्ली, 1 नवंबर . अमेरिका और कनाडा के बीच हालात कुछ बेहतर होते दिखाई दे रहे हैं. कनाडाई Prime Minister मार्क कार्नी ने Sunday को बताया कि…
क्यूबा पर थोपे गए अमेरिकी प्रतिबन्धों को हटाने के पक्ष में प्रस्ताव पारित
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने क्यूबा पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक व वित्तीय प्रतिबन्धों को हटाने के लिए लगातार 34वीं बार प्रस्ताव पारित किया है. हालांकि, इस प्रस्ताव को पिछले दो दशकों में सबसे कम समर्थन मिला है. यूएन महासभा ने चिन्ता व्यक्त की है कि इतने वर्षों से हो रही अपील और प्रस्ताव के लिए समर्थन के बावजूद ये पाबन्दियाँ अब भी जारी हैं.
अमेरिका में हैलोवीन वीकेंड पर कई शहरों में फायरिंग, 6 की मौत, दर्जनों घायल
अमेरिका के कई शहरों में हैलोवीन वीकेंड के दौरान नाइटलाइफ इलाकों में गोलीबारी की घटनाएं हुईं, जिनमें छह लोगों की मौत और 12 से अधिक घायल हुए. डलास के डीप एलम इलाके में सबसे ज्यादा हिंसा हुई, जहां चार लोगों की मौत हुई और 15 घायल हुए.
Iran Attack US Air Base: अमेरिका के तबाही का सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा! | Trump | Mojtaba
Iran Attack US Air Base: अमेरिका के तबाही का सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा! | Trump | Mojtaba
रणबीर कपूर इन दिनों अपनी फिल्म रामायणम् की प्रमोशन में जुटे हुए हैं. इस दौरान एक बातचीत में उन्होंने कुछ ऐसी बात कह दी कि सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें आड़े हाथों ले रहे हैं.
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को करीब से जानने के लिए अमेरिका से दो चिकित्सा विशेषज्ञ धमतरी के दुगली क्षेत्र पहुंचे हैं।
छत्तीसगढ़ आज अपना 26वां स्थापना दिवस मना रहा है। 1 नवंबर 2000 को अलग राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया, लेकिन इसके पीछे कई दशकों का संघर्ष छिपा है। अलग राज्य के लिए लड़ने वाले आंदोलनकारियों को भाजपा और कांग्रेस के लोग देशद्रोही और अमेरिका का एजेंट तक कहते थे। आंदोलनकारियों को सामाजिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ीं। वे जेल गए, सरकारों के सामने अपनी मांग रखी और गांवों से लेकर दिल्ली तक आंदोलन किया। आज राज्य स्थापना दिवस के मौके पर हम आपको उन आंदोलनकारियों के संघर्ष की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने अलग छत्तीसगढ़ का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा आंदोलन में लगा दिया। छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी के महासचिव दीनदयाल वर्मा बताते हैं कि अलग राज्य की मांग को संगठित रूप देने में छत्तीसगढ़ी समाज की अहम भूमिका रही। 16 मई 1965 को छत्तीसगढ़ी समाज की स्थापना हुई। इसी साल रायपुर के आरडी तिवारी स्कूल में पहला छत्तीसगढ़ी सम्मेलन हुआ। यहीं से अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को लेकर आंदोलन ने संगठित रूप लेना शुरू किया। इस रिपोर्ट में पढ़िए राज्य निर्माण आंदोलन का संघर्ष, 48 साल पहले दिल्ली के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हुई ऐतिहासिक बैठक, जिसने अलग राज्य की मांग को नई दिशा दी और संसद घेराव की कहानी… आंदोलनकारियों को कहते थे देशद्रोही और अमेरिका का एजेंट छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी के महासचिव दीनदयाल वर्मा बताते हैं कि छत्तीसगढ़ी समाज 1965 से शोषण के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। शुरुआत में आंदोलन सीमित स्तर पर था, लेकिन 1970 के बाद इसकी आवाज गांवों और शहरों तक पहुंचने लगी। 1979 तक आंदोलन ने प्रदेशव्यापी रूप ले लिया। गांव, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर रैलियां निकाली गईं। लोगों में अलग राज्य की मांग को लेकर जागरूकता बढ़ी। दीनदयाल वर्मा बताते हैं कि उस समय आंदोलनकारियों को कई तरह के विरोध का सामना करना पड़ता था। मध्यप्रदेश से अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग उठाने पर भाजपा और कांग्रेस के लोग उन्हें देशद्रोही और अमेरिका का एजेंट तक कहते थे। इसके बावजूद आंदोलनकारी अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटे। 1965 से की थी अलग राज्य बनाने की मांग छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष (संगठन) अनिल दुबे ने बताया कि 16 मई 1965 को छत्तीसगढ़ी समाज की स्थापना हुई थी। इसी साल रायपुर के आरडी तिवारी स्कूल में पहला छत्तीसगढ़ी सम्मेलन हुआ। यहीं से अलग छत्तीसगढ़ राज्य के लिए आंदोलन की शुरुआत हुई। इसके बाद 1967 में रायपुर के ईदगाह भाटा में बड़ा सम्मेलन हुआ। आचार्य नरेंद्र दुबे और रामानंद शुक्ला के नेतृत्व में अलग राज्य की मांग के समर्थन में 5 हजार हस्ताक्षर जुटाए गए। हर गांव और मुख्यालय में धरने और रैलियां होती रहीं। रायपुर से दिल्ली तक गए जेल, संसद और विधानसभा में प्रदर्शन अनिल दुबे बताते हैं कि छत्तीसगढ़ी समाज के लोगों ने शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। आंदोलन की प्रेरणा उन्हें अपने गुरु से मिली। वे छात्र जीवन से ही इस आंदोलन से जुड़ गए थे। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान उन्हें रायपुर, भोपाल और दिल्ली की जेल तक जाना पड़ा। संसद और विधानसभा के सामने भी प्रदर्शन किए गए। कई आंदोलनों में उन्हें पहली पंक्ति में शामिल होने का अवसर मिला। 1978 में रायपुर में निकाली गई थी बड़ी रैली छत्तीसगढ़ समाज पार्टी के अध्यक्ष जीपी चंद्राकर बताते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का आंदोलन जोर पकड़ रहा था। इसी दौरान 23 अक्टूबर 1978 को रायपुर में अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को लेकर ऐतिहासिक रैली निकाली गई। PMO से मिलने दिल्ली गए छत्तीसगढ़ी समाज के 15 सदस्य जीपी चंद्राकर बताते हैं कि पहले राज्य निर्माण की मांग को लेकर समाज की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया था। यह ज्ञापन आगे तत्कालीन गृह मंत्री विद्या चरण शुक्ल के पास पहुंचा, लेकिन उन्होंने अलग राज्य की मांग पर ध्यान नहीं दिया। इसके कारण मांग आगे नहीं बढ़ सकी। जीपी चंद्राकर के मुताबिक, 1978 में रैली के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम फिर ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से दिल्ली आने का बुलावा मिला। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी समाज के अध्यक्ष और 15 प्रतिनिधि 2 दिसंबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से अलग राज्य के मुद्दे पर बात करने दिल्ली गए थे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आचार्य नरेंद्र दुबे कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने उन्हें विशेष सम्मान दिया। आचार्य नरेंद्र दुबे स्वतंत्रता सेनानी थे और इमरजेंसी के दौरान MISA के तहत जेल में बंद रहे थे। प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए सिर्फ 15 मिनट का समय दिया गया था। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को एक विस्तृत मास्टर प्लान दिखाया। इसमें छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने और रोजगार पैदा करने की योजनाएं शामिल थीं। आंकड़ों और तर्कों ने PM को प्रभावित किया बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने आंकड़ों के साथ बताया कि मध्यप्रदेश के राजस्व में छत्तीसगढ़ क्षेत्र का बड़ा योगदान है, लेकिन विकास के लिए यहां अनुपात के हिसाब से हिस्सा नहीं मिलता। संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद छत्तीसगढ़ लगातार पिछड़ रहा है। इन बातों का प्रधानमंत्री पर असर पड़ा। पूरी चर्चा सुनने के बाद मोरारजी देसाई ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ राज्य की मांग के समर्थन में हैं। अगर मध्यप्रदेश सरकार अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का प्रस्ताव पारित कर देती है, तो केंद्र सरकार इसमें देरी नहीं करेगी। आंदोलनकारियों के मुताबिक यह पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री ने अलग राज्य की मांग पर सार्वजनिक रूप से सकारात्मक रुख दिखाया। यह आंदोलनकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि थी। इससे पूरे प्रदेश में आंदोलन को नई ऊर्जा और भरोसा मिला। 48 साल पहले ही बन जाता छत्तीसगढ़ राज्य जीपी चंद्राकर बताते हैं कि जब प्रतिनिधिमंडल ने इस बारे में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा को पत्र लिखा, तो उन्होंने अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाने से मना कर दिया। यह राज्य निर्माण की राह में बड़ी रुकावट बन गया। चंद्राकर के मुताबिक, छत्तीसगढ़ी समाज की दलीलों से प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई इतने प्रभावित हुए थे कि वे छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने के लिए हस्ताक्षर करने को तैयार थे, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के चलते ऐसा नहीं हो सका। बाद में मोरारजी देसाई की सरकार भी गिर गई। उनका कहना है कि अगर राजनीतिक अड़चनें नहीं आतीं, तो छत्तीसगढ़ आज से 48 साल पहले ही अलग राज्य बन गया होता। जुलाई 2000 में किया संसद का घेराव अनिल दुबे बताते हैं कि 1970 के बाद छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का आंदोलन जनक्रांति का रूप लेने लगा। हर गांव और मुख्यालय में धरने और रैलियों का सिलसिला चलता रहा। 1978 में रायपुर के जयस्तंभ चौक पर हुई रैली में 10 हजार से 15 हजार लोग शामिल हुए थे। 1979 में छत्तीसगढ़ी वाहिनी का गठन किया गया। इसके बाद भोपाल विधानसभा से लेकर दिल्ली में संसद तक घेराव और विरोध प्रदर्शन किए गए। छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी के नेतृत्व में 24 जुलाई 2000 को संसद का घेराव किया गया। इसमें सैकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे और संसद भवन के सामने प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री सचिवालय और लोकसभा सचिवालय तक ज्ञापन सौंपे। उस दिन उन्होंने 36 घंटे में छत्तीसगढ़ राज्य गठन की घोषणा करने की मांग रखी। इस आंदोलन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। आंदोलनकारियों के मुताबिक, सामूहिक संघर्ष और लगातार उठाई गई मांगों के बाद आखिरकार तीन महीने बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना। 10 तस्वीरों में देखिए छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ी समाज का आंदोलन और संघर्ष-
अमेरिकी चुनाव में भारतीय-अमेरिकियों पर उम्मीदवारों की नजर, कोई बना रहा डोसा तो कोई पहुंच रहा मंदिर
भारतीय-अमेरिकी समुदाय की मजबूत मौजूदगी कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन, इलिनोइस, पेंसिल्वेनिया और जॉर्जिया जैसे राज्यों में है। इन राज्यों में मतदाताओं की संख्या और राजनीतिक भागीदारी के कारण समुदाय चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
औरैया जिले के सहार कस्बे के निवासी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार बाजपेयी को गृह मंत्री पदक से सम्मानित जाएगा। उन्हें आपराधिक मामलों की जांच में सराहनीय काम के लिए यह पदक मिला। लाल किला विस्फोट मामले की जांच और अमेरिका से तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की कार्रवाई में उनकी भूमिका रही। बाजपेयी ने 2010 में एनआईए में काम शुरू किया था। इसके बाद वे देश में सामने आए कई हाई-प्रोफाइल आतंकवादी मामलों की जांच से जुड़े रहे। लाल किला विस्फोट और तहव्वुर राणा मामले में उन्होंने जांच अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। एनआईए में रहते हुए उन्होंने आतंकवाद से जुड़े संवेदनशील मामलों की जांच की। जांच क्षमता और मामलों की तह तक पहुंचने के प्रयासों के आधार पर उन्हें गृह मंत्री पदक के लिए चुना गया। फिलहाल प्रभात कुमार बाजपेयी अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (यूएनएमआईएस) में सेवाएं दे रहे हैं। सहार के लोगों ने उनके सम्मान पर खुशी जताई है।
बेंगलुरु के फाइव स्टार होटल के स्विमिंग पूल में करंट लगने से 2 विदेशी नागरिकों की मौत, वीडियो में जाने बचाने पहुंचे अमेरिकी और पूल अटेंडेंट घायल
अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या घटी, 13.5 फीसदी गिरावट दर्ज: डीएचएस डेटा
अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या घटी, 13.5 फीसदी गिरावट दर्ज: डीएचएस डेटा
अल अरबिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के मसौदे में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए तुर्किये के इस्तांबुल के बजाय कतर की राजधानी दोहा को चुने जाने की बात कही गई है। समझौते का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच जारी विवाद को कम करना और युद्धविराम की संभावनाओं को मजबूत करना है।
हरियाणा एसोसिएशन ऑफ अमेरिका-मिशिगन (HAA-MI) की ओर से अमेरिका के मिशिगन में हरियाणा दिवस और दिवाली मिलन का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हरियाणवी संस्कृति, परंपराओं, खानपान और आपसी भाईचारे की शानदार झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में अमेरिका में रहने वाले हरियाणवी परिवारों के अलावा भारतीय समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया। समारोह में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागी पारंपरिक भारतीय और हरियाणवी वेशभूषा में पहुंचे। कार्यक्रम में हरियाणा के पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक विरासत को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। आयोजन का उद्देश्य विदेश में रह रहे हरियाणवी परिवारों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखना तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराना रहा। हरियाणवी समुदाय एकजुट इस अवसर पर HAA-MI के अध्यक्ष एवं महेंद्रगढ़ के माजरा कलां गांव निवासी रवि यादव ने कहा कि अमेरिका में हरियाणवी समुदाय को एकजुट रखना, अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना और सामुदायिक सेवा करना संगठन की प्राथमिकता है। वहीं, बोर्ड अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर आयोजकों ने कहा कि HAA-MI लगातार मिशिगन में हरियाणवी परिवारों को एक मंच पर लाने और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। विभिन्न त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय के लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर दिया जाता है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार जताया। एसोसिएशन ने भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
दुनिया आजतक: अमेरिका-इजरायल को मोजतबा खामेनेई की सख्त चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता दिख रहा है... अमेरिका की तरफ से नए हमलों की तैयारी की खबरें हैं...तो ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा... हालांकि, बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं...
अमेरिका में बैठे IAS शिखर अग्रवाल पर कैसे तय हुआ ACB एक्शन प्लान
राजस्थान कैडर के सीनियर आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल (IAS Shikhar Agarwal) और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर (IPS Prashakha Mathur) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) की ओर से की गई बड़ी कार्रवाई ने देश के प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। राजस्थान सरकार ने निजी होटल कंपनी 'अनंत ग्रुप/गोयल फैशन' को आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाने और उदयपुर व अलवर (अजबगढ़) में बाजार मूल्य से बेहद कम दरों पर करीब 40 रिसॉर्ट विला खरीदने के आरोपों के बाद एसीबी जांच की औपचारिक मंजूरी दी है।विभागीय अनुमतियों के बाद सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल को उनके सभी पदों से मुक्त करते हुए एपीओ (APO - Awaiting Posting Orders) कर दिया गया था। इसके तुरंत बाद राजस्थान सरकार ने एक्शन बढ़ाते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के पद पर तैनात उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर को भी पदों से हटाकर एपीओ कर दिया है। फिलहाल आईएएस अफसर शिखर अग्रवाल विदेश (अमेरिका) दौरे पर हैं, जिसके चलते यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि उनके भारत लौटते ही एसीबी का अगला कानूनी कदम क्या होगा और क्या उनकी आईपीएस पत्नी भी जांच के सीधे घेरे में आएंगी? आइए इस पूरे मामले का ब्योरा और एसीबी का एक्शन प्लान विस्तार से समझते हैं।क्या है 40 विला डील और वित्तीय अनियमितता का पूरा मामला?एसीबी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिक जांच (Preliminary Inquiry) की रिपोर्ट के अनुसार, 1990 कैडर के आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल ने अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक निजी रिसॉर्ट समूह (अनंत ग्रुप/गोयल फैशन) को नियमों में भारी छूट दी। आरोप है कि निर्माण शर्तों में छूट, बिना वेरिफिकेशन एनओसी और एक विशेष वित्तीय पैकेज स्वीकृत कराने के बदले अफसर व उनके परिवार को उदयपुर के भुजड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित प्रीमियम रिसॉर्ट्स में 40 विला बेहद कम दामों में दिए गए।एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्त के मुताबिक, जहां बाजार में एक-एक विला की कीमत 1.6 करोड़ रुपये के आसपास थी, वहीं इन्हें महज 15 लाख से 16.5 लाख रुपये प्रति विला के हिसाब से कागजों पर दर्शाकर खरीदा गया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 27 मार्च को जिस दिन वित्त विभाग ने उस कंपनी को विशेष वित्तीय पैकेज की राहत दी, ठीक उसी दिन अफसरों और उनके परिजनों के नाम 20 विला की सेल डीड और लीज डीड एक साथ रजिस्टर कराई गई थी। इन विला से हर साल 1.80 करोड़ रुपये का रेंटल इनकम भी हासिल किया जा रहा था।अमेरिका में बैठे IAS शिखर अग्रवाल पर कैसे तय हुआ ACB का कानूनी एक्शन प्लान?मामला उजागर होने से ठीक पहले आईएएस शिखर अग्रवाल पहले से स्वीकृत छुट्टी पर अमेरिका चले गए थे। हालांकि, उनकी गैर-मजूदगी में भी जांच एजेंसी ने अपना कानूनी खाका पूरी तरह तैयार कर लिया है:प्राथमिक जांच का पंजीकरण: राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद एसीबी ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ प्रिलिमिनरी जांच (PI) दर्ज कर ली है।दस्तावेजों व रजिस्ट्री की जब्ती: उदयपुर और अलवर के उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालयों से खरीद-बिक्री, लीज डीड, बैंक ट्रांजैक्शन और स्टाम्प ड्यूटी से जुड़े सभी मूल दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं।वापसी पर लुकआउट और पूछताछ की तैयारी: जांच एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, जैसे ही शिखर अग्रवाल अमेरिका से भारत लौटेंगे, एसीबी उन्हें समन जारी कर व्यक्तिगत पूछताछ के लिए तलब करेगी। यदि शुरुआती जांच में साक्ष्य और पुख्ता होते हैं, तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के तहत विधिवत एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है।क्या IPS पत्नी प्रशाखा माथुर भी आएंगी ACB जांच के सीधे घेरे में?इस प्रकरण का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि 1995 बैच की सीनियर आईपीएस अफसर प्रशाखा माथुर (ADG प्लानिंग, मॉडर्नाइजेशन एवं वेलफेयर) भी अब जांच के दायरे से बाहर नहीं हैं।कार्मिक विभाग द्वारा शनिवार को जारी आदेश के तहत प्रशाखा माथुर को भी एपीओ (APO) कर दिया गया है। एसीबी की एफआईआर और प्राथमिक जांच दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि खरीदे गए 40 विला में से कई विला सीधे आईपीएस प्रशाखा माथुर के नाम पर, उनके दो बेटों के नाम पर और उनके माता-पिता (ससुराल पक्ष) के नाम पर रजिस्टर्ड कराए गए हैं।यद्यपि एसीबी ने अभी तक आईपीएस माथुर के खिलाफ सीधी औपचारिक एफआईआर का ऐलान नहीं किया है, लेकिन विला में बेनामी मालिकाना हक और वित्तीय लेनदेन में नाम शामिल होने के कारण एजेंसी उन्हें भी पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। यदि विला की खरीद में उनके वेतन/खातों के ट्रांजैक्शन पाए जाते हैं, तो वह भी सह-आरोपी के रूप में कानूनी घेरे में आ सकती हैं।राजस्थान की राजनीति में भूचाल, ईडी और सीबीआई जांच की उठने लगी मांगराजस्थान कैडर के इतने बड़े आईएएस-आईपीएस दंपत्ति पर एक साथ कार्रवाई से राज्य की नौकरशाही और राजनीति में भारी हड़कंप मच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए केवल एपीओ या विभागीय जांच को नाकाफी करार दिया है।विपक्ष ने मांग की है कि चूंकि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये की सरकारी राजस्व हानि से जुड़ा है, इसलिए इस 40-विला घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जानी चाहिए। फिलहाल, एसीबी की यह तेजी इस बात का साफ संकेत है कि राजस्थान में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत प्रशासनिक पदों पर बैठे बड़े से बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा कसना तय हो चुका है।
क्या G-20 में अमेरिकी विदेश मंत्री के दावे से मचेगा हड़कंप
G-20 बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बहुत बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि ईरान उन जहाजों को निशाना बना रहा है जिन पर भारतीय नाविक हैं। रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास इस बात के सबूत हैं। यह दावा बहुत ही गंभीर है और अगर यह सच है तो इससे बहुत से जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की जान खतरे में है।यह पहला मौका नहीं है जब ईरान पर ऐसे आरोप लगे हों। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने पहले भी ईरान पर जहाजों पर हमले करने का आरोप लगाया है। हालांकि, ईरान ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है।इस दावे के बाद बहुत से जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका ने कहा है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करेगा ताकि ऐसे हमलों को रोका जा सके।अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया देता है। क्या वह इन आरोपों को खारिज करेगा या वह इस मामले में सहयोग करेगा? यह भी देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले में क्या कदम उठाता है।यह एक बहुत ही गंभीर मामला है और इस पर नजर रखना बहुत जरूरी है। यह भारत के लिए भी एक चिंता का विषय है क्योंकि बहुत से भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर काम करते हैं। भारत सरकार को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए और अपने नाविकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए।
H-1B Visa धारकों पर पाबंदियों से US Economy को होगा भारी नुकसान, Indiaspora की चेतावनी
ह्यूस्टन, एक नवंबर अमेरिका में चुनाव से पहले भारतीयों के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी और आव्रजन संबंधी प्रस्तावित पाबंदियों पर चिंता जताते हुए गैर-लाभकारी संगठन इंडियास्पोरा ने आगाह किया है कि एच-1बी वीजा धारकों को निशाना बनाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है। संगठन ने 30 अक्टूबर को जारी एक बयान में भारतीय मूल के पेशेवरों को निशाना बनाने के राजनीतिक प्रयासों पर चिंता व्यक्त की। संगठन ने कहा कि भारतीय मूल के पेशेवर स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी एवं शिक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा, भारत के एच-1बी कर्मचारी अमेरिका को दुनिया में नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मददगार रहे हैं और उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान दिया है। उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसका असर बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक के समुदायों पर पड़ेगा। प्रवासी भारतीयों के इस संगठन ने प्रस्तावित नियामकीय उपायों पर भी चिंता जताई। इनमें उच्च प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के नियोक्ताओं के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक का याचिका शुल्क लगाने, एच-1बी वीजा के लिए मौजूदा बिना क्रम के लॉटरी प्रणाली की जगह वेतन आधारित चयन व्यवस्था लागू करने और नौकरी गंवाने वाले विदेशी कर्मचारियों को मिलने वाली 60 दिन की रियायत अवधि समाप्त करने के प्रस्ताव शामिल हैं। इसने एच-4 वीजाधारक कर्मचारियों के जीवनसाथियों को जारी किए जाने वाले रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज (ईएडी) पर रोक लगाने के प्रस्तावों के साथ-साथ वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (एसटीईएम) से संबंधित कार्य अनुमति की अवधि बढ़ाने पर 70,000 अमेरिकी डॉलर तक शुल्क लगाने के प्रस्तावों पर भी चिंता जताई। इंडियास्पोरा ने कहा कि विदेशी पेशेवर, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सक और शिक्षक, अमेरिका के उन इलाकों में कार्यबल की कमी दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जहां घरेलू स्तर पर तत्काल पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। इनमें मिसिसिपी डेल्टा जैसे संसाधनों की कमी वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। संगठन ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से भारतीयों के खिलाफ बयानबाजी का विरोध करने की अपील की। उसने आगाह किया कि अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए विदेशी प्रतिभाओं को बलि का बकरा बनाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है और भारत-अमेरिका के रणनीतिक द्विपक्षीय संबंध कमजोर भी हो सकते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। कूटनीतिक बातचीत के प्रयासों के बावजूद ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के संभावित सैन्य हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान अमेरिका के ...
Does America want stop war Iran claims Vance sent letter expressing readiness talks Rezaei says we have won. क्या अमेरिका रोकना चाहता है जंग?: ईरान का दावा- वेंस ने भेजा पत्र, बातचीत को तैयार; रेजाई बोले- हमारी जीत हुई
ब्राजील से भागने में किसने की मदद?: फ्लावियो बोल्सोनारो अमेरिका पहुंचे, मार्को रूबियो ने दिया ये जवाब marco-rubio-says-us-did-not-facilitate-flavio-bolsonaro-flight-to-america
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने जुटाए हथियार: वीडियो में जाने 5 हजार से ज्यादा एजेंसियों का गुप्त नेटवर्क बनाया, चीन-रूस से मंगाए मिसाइलों के पुर्जे
अमेरिका में चुनाव, मंदिर-मंदिर दौड़ लगा रहे उम्मीदवार; डोसा बनाकर भी खिलाया
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी-भारतीयों को लुभाने में प्रत्याशी किसी तरह की कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कोई रेस्तरां में डोसा बनाकर लोगों को खिला रहा है तो वहीं कई उम्मीदवार हिंदू मंदिरों की दौड़ लगा रहे हैं।
अमेरिकी दोस्त मार्विन आची के आरोपों पर बिग बॉस फेम औरैया की शिवानी कुमारी ने जवाब दिया है। शिवानी का कहना है कि टेसू की शादी कराने का कार्यक्रम पहले से फिक्स था। मार्विन को इसके बारे में पता था। उनकी सहमति से ही उन्हें तैयार किया गया था। मार्विन आची ने यूट्यूब पर वीडियो पोस्ट किया था। उन्होंने शिवानी पर दोस्ती और भरोसे की आड़ में मजाक उड़ाने और लाइक्स-व्यूज के लिए अपमानित करने का आरोप लगाया था। शिवानी से दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने फोन पर बात की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले मामला समझिए… मार्विन आची 24 सितंबर को अपनी दोस्त फर्नांडा के साथ लखनऊ पहुंचे। शिवानी ने एयरपोर्ट पर दोनों का स्वागत किया। मार्विन ऋषिकेश, राजस्थान समेत कई जगह शिवानी और दोस्तों के साथ घूमे। दो दिन पहले मार्विन ने 28 अक्टूबर को यूट्यूब पर 10 मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। मार्विन ने आरोप लगाया- मैं भारत की संस्कृति को महसूस करने आया था। कोई आपका स्वागत करता है, आपके साथ वक्त बिताता है, आपको सहज महसूस कराता है। मैं उस इंसान पर भरोसा करने लगा और भारतीय संस्कृति के बारे में जो भी वह बताती, उस पर यकीन करने लगा। गांव पहुंचे तो उसने कहा कि तुम्हें एक कैरेक्टर प्ले करना है। मैं जब तक समझ पाता कि किरदार कौन सा है या किस बारे में है, उसने मेरे चेहरे पर पेंट करना शुरू कर दिया। मुझे लगा ये नॉर्मल है तो उसके साथ इंजॉय करता रहा। कमेंट देखकर पता चला कि मेरा मजाक बनाया गया है। अब मैं सोच रहा हूं, क्या उसने यह सब कंटेंट, व्यूज या अटेंशन के लिए किया। अब पढ़िए शिवानी ने क्या बताया… शिवानी ने बताया कि जब हम लोग ऋषिकेश में थे। उसी समय मैंने मार्विन को टेसू-झेंझी कार्यक्रम के बारे में बता दिया था। मैंने बताया था कि हमारे यहां टेसू की शादी का कार्यक्रम होगा। 3 दिन तक वो हमारे साथ रहे। हमारे गांव अरियारी में टेसू-झेंझी की शादी का कार्यक्रम हुआ। इसमें मार्विन को टेसू की तरह से तैयार किया गया था। उनके चेहरे पर काला रंग लगाया गया, नकली मूंछें बनाई गईं। माथे पर टीका लगाया गया। मार्विन को उनकी सहमति से तैयार किया गया था। वीडियो बनने के बाद बोले- बहुत अच्छा लगा वीडियो अपलोड होने के अगले दिन भी मैंने मार्विन से पूछा था कि आपको कार्यक्रम कैसा लगा। इस पर मार्विन ने कहा था कि उन्हें बहुत अच्छा लगा और वह दोबारा भी ऐसा करना चाहेंगे। शिवानी का कहना है कि गांव के कार्यक्रम में जैसे अबीर-गुलाल उड़ाई जाती है, वैसे ही हम लोगों ने थोड़ी मिट्टी उड़ा दी थी। यह मिट्टी थोड़ी सी फर्नांडा की आंख में लग गई थी। तब मैंने खुद अपने दुपट्टे से उनका चेहरा साफ किया था। उन्हें सिर पर बांधने के लिए अपना दुपट्टा भी दिया था, जिससे उन्हें दिक्कत न हो। अगर मुझे अपमान करना होता तो मैं मदद क्यों करती। बोलीं- टेसू-झेंझी हमारा क्षेत्र का पारंपरिक त्योहार शिवानी ने बताया- टेसू-झेंझी का त्योहार ब्रज-बुंदेलखंड और आसपास के क्षेत्रों की पारंपरिक लोक संस्कृति का हिस्सा है। इसका संबंध खाटू श्याम जी यानी बर्बरीक की मान्यता से भी जोड़ा जाता है। हमने तो उन्हें भगवान वाला भेष रखवाया और वो अपमान की बात कह रहे हैं। रात 11:43 बजे आया था मैसेज, टीम ने दिया जवाब शिवानी के मुताबिक, 27 अक्टूबर की रात 11 बजकर 43 मिनट पर मार्विन ने मुझे मैसेज किया था। मेरी तबीयत सही नहीं थी और मैं सो रही थी। लेकिन, मेरी टीम ने 10 मिनट के अंदर उन्हें जवाब दे दिया था। टीम ने मार्विन को बताया था कि शिवानी के हेटर्स कमेंट कर रहे हैं। आप इसे दिल पर मत लीजिए। अगले ही दिन 28 अक्टूबर को मार्विन ने यूट्यूब पर वीडियो अपलोड कर दिया। अभी अरुणाचल प्रदेश में हैं मार्विन शिवानी ने बताया कि मार्विन फिलहाल भारत में ही हैं। वह इंडिया टूर पर आए हैं। अभी अरुणाचल प्रदेश में हैं। मेरी टीम ने कई बार कॉल और मैसेज के जरिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन न तो उनकी ओर से कोई जवाब मिला और न ही कॉल रिसीव किया गया। मार्विन मेरे घर पर करीब 15 दिन तक मेहमान बनकर रहे थे। मैंने हमेशा उनका सम्मान किया। अगर किसी बात से उन्हें ठेस पहुंची थी तो सोशल मीडिया पर आरोप लगाने के बजाय सीधे बातचीत करनी चाहिए थी। बातचीत से गलतफहमी दूर की जा सकती थी। ये है टेसू-झेंझी के विवाह की परंपरा उत्तर भारत में शरद पूर्णिमा के आसपास टेसू-झेंझी के विवाह की परंपरा निभाई जाती है। दशहरे के बाद लड़के टेसू को दूल्हे और लड़कियां झेंझी को दुल्हन की तरह सजाती हैं। शरद पूर्णिमा की रात दोनों का विवाह कराया जाता है। लोकमान्यता के अनुसार, टेसू का संबंध महाभारत के बर्बरीक से है। भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे शीश दान में मांगा था। युद्ध देखने की उनकी इच्छा पूरी करने के लिए उनका सिर तीन डंडों के सहारे पहाड़ी पर रखा गया था। इसी वजह से टेसू का सिर तिपाई पर बनाया जाता है। टेसू-झेंझी के विवाह को बर्बरीक की विवाह इच्छा से जोड़कर देखा जाता है। ------------------------ यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकन इन्फ्लुएंसर और यूपी की यूट्यूबर की दोस्ती में दरार:मार्विन बोले- मेरा मजाक उड़ाया, शिवानी फूट-फूटकर रोईं, VIDEO औरैया की इन्फ्लुएंसर शिवानी कुमारी और उनके अमेरिकी दोस्त मार्विन आची के बीच दरार पड़ गई है। मार्विन ने शिवानी पर अपमानित करने का आरोप लगाया। शिवानी ने रोते हुए कहा- भैया कोई परेशानी थी तो मुझसे पूछते, वीडियो बनाने की क्या जरूरत थी? VIDEO में पूरा मामला देखिए…
अमेरिका के कैलिफोर्निया में पंजाबी मूल के व्यक्ति को 24 साल की सजा सुनाई गई। 41 वर्षीय रिकी सिंह लशर पर 27 साल की एमिरी स्वीनी के मर्डर और दूसरी महिला के यौन उत्पीड़न का आरोप था। जांच के दौरान सामने आया कि रिकी पहले रेस्टोरेंट की पार्किंग में खड़ी अमेरिकी लड़की को नशे का लालच देकर पास में ही गार्डन में ले गया था। वहीं जाकर उसने लड़की से रेप की कोशिश की। लेकिन, लड़की भाग निकली। तभी रिकी ने अपने ट्रक से लड़की को बुरी तरह कुचल दिया। यही नहीं, इस केस में रिकी का नाम सामने आते ही कुछ दूसरी महिलाएं भी सामने आईं और रिकी द्वारा किए गए उनके यौन शोषण की जानकारी अदालत को दी। इसके बाद मामले में पुलिस के हाथ कुछ सीसीटीवी फुटेज लगे, जिससे रिकी फंस गया। आखिरकार रिकी ने अप्रैल 2026 में अपना गुनाह कबूल कर लिया। जिसके बाद कैलिफोर्निया राज्य की युबा काउंटी अदालत ने रिकी को दोषी करार देते हुए 24 साल की सजा सुनाई। अदालत में इस मामले की सुनवाई 2 साल चली थी। सिलसिलेवार जानिए कैसे रिकी पकड़ा गया… 2023 में गार्डन में मिला था युवती का शव मामला 27 अप्रैल 2023 का है। मैरिसविले में सिंपसन लेन के पास एक गार्डन में राहगीर को 27 वर्षीय एमिरी स्वीनी का शव मिला था। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि उसकी मौत किसी भारी वाहन से कुचले जाने के कारण हुई थी। शुरुआती जांच में पुलिस को आरोपी तक पहुंचने का कोई ठोस सुराग नहीं मिला। अखबार की खबर से मिला सुराग, CCTV में दिखा ट्रक जांच में नया मोड़ तब आया, जब एक प्रत्यक्षदर्शी ने स्थानीय अखबार में एमिरी की मौत की खबर पढ़कर पुलिस से संपर्क किया। उसने बताया कि 26 अप्रैल 2023 की रात वह एमिरी के साथ 'जैक इन द बॉक्स' रेस्तरां तक गया था। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एमिरी के आसपास घूमता दिखा रिकी फुटेज में एमिरी रेस्तरां की पार्किंग में अपना सामान लेकर खड़ी दिखाई दी। इसी दौरान सफेद शेवरले 1500 ट्रक में रिकी सिंह लशर वहां पहुंचा। वह बार-बार ट्रक घुमाकर एमिरी के पास आता और उससे बातचीत करने की कोशिश करता दिखा। उससे बचने के लिए एमिरी पास के 'एमपीएम' स्टोर में चली गई। इस दौरान रिकी उसका सामान ट्रक में रखकर वहां से चला गया। स्टोर से बाहर आने के बाद एमिरी करीब 50 मिनट तक उसी इलाके में रही। फिर वह गली से होते हुए 8वीं स्ट्रीट की तरफ पैदल चली गई। CCTV में यही उसकी जिंदा दिखाई देने की आखिरी फुटेज थी। गार्डन में ले जाकर की जबरदस्ती की, भागी तो ट्रक से कुचला जांच अधिकारियों और अभियोजकों के मुताबिक, रिकी पहले भी महिलाओं को ड्रग्स का लालच देकर सिंपसन लेन के पास स्थित गार्डन में ले जाता था। वहां उनके साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश करता था। 26 अप्रैल की देर रात उसने एमिरी को भी इसी तरह अपने झांसे में लिया और ट्रक में बैठाकर गार्डन तक ले गया। वहां रिकी ने एमिरी के साथ जबरदस्ती और रेप की कोशिश की। एमिरी ने विरोध किया और आरोपी से हाथापाई कर जान बचाने के लिए भागने लगी। आरोप है कि रिकी ने अपने ट्रक से उसका पीछा किया और उसे कुचल दिया। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया। पुलिस को घटनास्थल से जूतों और वाहन के टायरों के निशान मिले। एमिरी के शरीर पर भी टायर के निशान थे। इन सबूतों की जांच से पुलिस को वारदात में रिकी के ट्रक की भूमिका का पता लगाने में मदद मिली। 2024 में गिरफ्तारी, दूसरी महिलाओं ने भी दी गवाही लंबी जांच के बाद पुलिस ने 2024 में रिकी सिंह लशर को गिरफ्तार किया। मामले में उसका नाम सामने आने के बाद कई अन्य महिलाएं भी आगे आईं। उन्होंने रिकी पर उनके साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगाए और अदालत में गवाही दी। इस मामले की जांच में युबा काउंटी शेरिफ टीम, कैलिफोर्निया हाईवे पेट्रोल की मल्टीडिसिप्लिनरी एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन टीम (MAIT), न्याय विभाग के विश्लेषकों और डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ब्रांड्ट लोवे व जेम्स पेरिन की टीम शामिल रही। जांच में हजारों घंटे लगे। 24 साल की सजा, जीवनभर सेक्स ऑफेंडर से जाना जाएगा 10 अप्रैल 2026 को युबा काउंटी जिला अटॉर्नी कार्यालय के साथ हुए समझौते के तहत रिकी ने गैर-इरादतन हत्या और 2024 में किए गए यौन उत्पीड़न के अपराध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद गुरुवार को अदालत ने उसे 24 साल जेल की सजा सुनाई। अदालत ने रिकी को जीवनभर सेक्स ऑफेंडर के रूप में रजिस्टर्ड रखने और कैलिफोर्निया में उसका ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने का भी आदेश दिया। फैसले के बाद एमिरी की बहन एरियाना स्वीनी ने युबा काउंटी शेरिफ और जिला अटॉर्नी कार्यालय का आभार जताया। उन्होंने उन महिलाओं की भी सराहना की, जो सामने आईं और अदालत में गवाही देकर रिकी के व्यवहार के बारे में बताया। एरियाना ने कहा कि एमिरी स्वाभिमानी और बहादुर महिला थी। उसने आखिरी सांस तक अपने हक के लिए लड़ाई लड़ी। वह हमेशा उनके परिवार की हीरो रहेगी।
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की मदद कर रहा अमेरिका, हमले को लेकर किया अलर्ट
यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने रूस में बड़े आतंकी हमले की खुफिया जानकारी साझा की है। इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों ने साथ काम करते हुए इसकी और जानकारी निकालने की कोशिश शुरू कर दी है। एहतियात के तौर पर मॉस्को के एक म्यूज्यिम को बंद कर दिया गया है।
अटलांटा, 31 अक्टूबर . India और उसके क्वाड सहयोगियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तक पहुंच बढ़ाने के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की…
रूस के मशहूर म्यूजियम पर आतंकी हमले का खतरा, अमेरिका ने जारी किया अलर्ट
मॉस्को में संभावित आतंकी हमले के खतरे को लेकर रूस की FSB को अमेरिका से जानकारी मिली है. वहीं, अमेरिकी दूतावास ने 31 अक्टूबर को त्सारित्सिनो म्यूजियम रिजर्व में बड़े पैमाने पर लोगों के हताहत होने की आशंका को लेकर सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लंबे समय से अंतिम चरण में, जल्द पूरा होने की उम्मीद: सर्जियो गोर
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अमेरिका अब कुछ नहीं कह सकता, बंदे का ये जुगाड़ देख हिल जाएगा दिमाग, लोगों ने भी किए कमेंट्स
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अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की पार्टी के प्रदर्शन का भारत पर क्या असर होगा - BBC
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'हमला हुआ तो जवाब देने की जगह हम तय करेंगे', अमेरिका से आर-पार के मूड में ईरान!
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिकी हमले की स्थिति में सेना को तुरंत और बिना भौगोलिक सीमा के जवाब देने का आदेश दिया है। वहीं, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को युद्ध खत्म करने की कोई जल्दबाजी नहीं है।
8 अक्टूबर को ट्रम्प ने कहा था कि मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेंगे। अब खबरें हैं कि चुनाव के फौरन बाद, 4 नवंबर से हमले शुरू हो सकते हैं। अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ सबसे बड़े ऑपरेशन के लिए तैयार है। खुद ट्रम्प कह रहे हैं, ‘ये सब जल्दी खत्म होने वाला है।’ तो क्या वाकई चुनाव खत्म होते ही ईरान पर टूट पड़ेगा अमेरिका, ईरान कितना तैयार है और ट्रम्प आखिर चाहते क्या हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या अमेरिका 4 नवंबर से ईरान पर हमला करने वाला है? जवाब: 3 बड़े संकेत मिल रहे हैं… 1. हफ्तेभर में ट्रम्प की 4 बार धमकी हालांकि अमेरिका ने अभी कोई मिलिट्री प्लान नहीं बताया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, ‘हम उन सेंसिटिव मिलिट्री प्लान पर कमेंट नहीं करते, जो हो भी सकते हैं और नहीं भी। प्रेसिडेंट ट्रम्प ये पक्का करना चाहते हैं कि ईरान के पास कभी न्यूक्लियर वेपन न हो, इसलिए उन्होंने सारे ऑप्शन खोल रखे हैं।’ 2. मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सैन्य जमावड़ा अमेरिका खाड़ी देशों के सैन्य अड्डों पर सैनिक, हथियार, पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट्स तैनात कर रहा है। साथ ही खाड़ी में एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और 20 युद्धपोत भी भेजे जा रहे हैं। अमेरिकी न्यूज चैनल CNN के मुताबिक, 2 अमेरिकी ऑफिसर्स ने बताया कि ट्रम्प का आदेश मिलने के बाद सेना 96 घंटे के अंदर ईरान के खिलाफ सबसे बड़ा ‘मिलिट्री ऑपरेशन’ शुरू करने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने कहा, 'हमले महज ईरानी रडार, लॉन्चर वगैरह को निशाना बनाने से कहीं ज्यादा बड़े और घातक होंगे। इलेक्शन के फौरन बाद 4 नवंबर से हमले शुरू होने की ज्यादा संभावना है।' US सेंट्रल कमांड और पेंटागन के ऑफिसर्स एक लंबी टारगेट लिस्ट बना रहे हैं, जिसमें ईरानी एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिलिट्री साइट्स और न्यूक्लियर फैसिलिटी शामिल हैं। 3. गल्फ देशों को अमेरिका की चेतावनी अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, अमेरिका ने डिप्लोमैटिक और मिलिट्री चैनलों के जरिए खाड़ी देशों से कहा है कि वे ईरान के खिलाफ ‘छोटे, लेकिन तेज मिलिट्री कैंपेन’ के लिए तैयार रहें। ट्रम्प प्रशासन ने सऊदी अरब में तैनात गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को लौटने का आदेश दिया है। राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास के सारे कर्मचारियों को अमेरिका बुला लिया गया है। दूसरे खाड़ी देशों में भी इसी तरह के निर्देश दिए गए हैं। कुछ जगहों पर अमेरिकी कर्मचारियों की संख्या कम करने को कहा गया है। CNN ने दो अमेरिकी ऑफिसर्स और एक इजराइली सोर्स के हवाले से बताया है कि पीएम नेतन्याहू 27 अक्टूबर को इजराइल के चुनावों से पहले ही ईरान पर हमला करना चाहते थे। हालांकि तब ट्रम्प ने हरी झंडी नहीं दी। सवाल-2: अगर हमला हुआ, तो ईरान जंग के लिए कितना तैयार है? जवाब: ईरानी सेना, यानी IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेबी ने कहा है कि ईरान ने पिछली बार 40 दिन की जंग में अपनी पूरी ताकत इस्तेमाल नहीं की थी। वे जंग के अगले फेज के लिए तैयार हैं। इस बार नए और चौंकाने वाले हथियार भी इस्तेमाल किए जाएंगे। ईरान का दावा- मिसाइल भंडार 1.5 गुना बढ़ाया अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 30 सितंबर को कहा था कि अमेरिका ने ईरान की 'मिलिट्री इंडस्ट्रियल कैपेसिटी' तबाह कर दी है। हालांकि 22 अक्टूबर को IRGC प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने दावा किया कि ईरान के पास जून 2025 के मुकाबले 1.5 गुना मिसाइल भंडार हो गया है। ईरान अपना खास हथियार- ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब’ भी लॉन्च करने वाला है। ये कैसा बम है, कोई नहीं जानता। फरवरी में अमेरिकी हमले से पहले ईरान के पास 420 मिसाइल लॉन्चर थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी भी 400 लॉन्चर चालू हालत में हैं। अमेरिकी मीडिया ग्रुप ब्लूमबर्ग का दावा है कि ईरान में मिसाइल और ड्रोन्स का प्रोडक्शन जारी है। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता अब भी 75% है। 11 अक्टूबर को IRGC ने करीब 30 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण किए हैं। ईरान ने रूस और चीन से हथियार इकट्ठा किए ब्लूमबर्ग, वॉल स्ट्रीट जर्नल, CNN जैसे अमेरिकी मीडिया चैनलों ने ईरान को विदेशी मदद मिलने की रिपोर्ट दी हैं। इनके मुताबिक... रूस ईरान को मिसाइलें दे रहा है और अमेरिकी सैन्य ठिकानों व जहाजों की लोकेशन ट्रेस करने में भी मदद कर रहा है। ईरान के सहयोगी यमन के हूती विद्रोही सऊदी पर हमले के लिए रूसी सैटेलाइट नेविगेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। चीन ने जून 2026 तक ईरान को ड्रोन और मिसाइल बनाने के सामानों के 1300 शिपमेंट भेजे थे। इनमें GPS सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोटर, एयरक्राफ्ट इंजन शामिल है। ईरान जंग के कई मोर्चे खोलने को तैयार ईरानी सेना ने 'ऑफेंसिव एंड एसिमेट्रिक डॉक्ट्रिन की बात कही है। यानी हमले का इंतजार करने और फिर जवाबी कार्रवाई करने के बजाय दुश्मन पर पहले ही हमला करना। साथ ही एक ही मोर्चे के बजाय कई मोर्चों से हमला करना। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी लगाई है, तो हूती विद्रोहियों ने यमन के पास लाल सागर के अहम समुद्री रूट बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर शिकंजा कसा है। सऊदी अरब के ऑयल प्लांट और दूसरे ठिकानों पर लगभग रोज हूतियों के हमले हो रहे हैं। हूती एक साथ ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर सऊदी के एयर डिफेंस को चकमा दे रहे हैं। 10 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले में 10 लोग मारे गए। हालांकि ईरान लगभग 10 साल से लागू आर्थिक बैन और पिछली जंग के चलते आर्थिक मोर्चे पर कमजोर है… ईरान के सरकारी बजट का एक-तिहाई हिस्सा तेल की कमाई से आता है। अमेरिका ने जुलाई 2025 से ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगा दी है। सितंबर के दूसरे हफ्ते तक ईरान का ऑयल एक्सपोर्ट में लगभग शून्य हो गया है। इसके चलते ईरान को करीब 25 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान में महंगाई दर 88.7% पहुंच गई है। सरकार को एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और सिक्योरिटी सेक्टर के वर्कर्स की सैलरी और पेंशन वगैरह रोकनी पड़ी हैं। सवाल-3: आखिर एक और जंग से अमेरिका-इजराइल को हासिल क्या होगा? जवाब: ईरान 20 हजार से ज्यादा हमले झेल चुका है। उसके बावजूद उसने भीषण जवाबी हमले किए और न्यूक्लियर डील पर सख्त शर्तें रखी हैं। विश्लेषक मानते हैं कि ईरान पर हमलों के एक और दौर के बावजूद वह आसानी से नहीं झुकेगा… पूर्व इजराइली खुफिया अधिकारी डैनी सिट्रिनोविच के मुताबिक, ‘इजराइल और अमेरिका की सबसे बड़ी गलती ये है कि उन्हें लगता है कि ईरान पर एक और बार हमला करके वो किसी तरह वहां की सरकार गिरा देंगे। जबकि बमबारी से उनका शासन और ज्यादा सख्त हो सकता है। उनकी मिसाइल और न्यूक्लियर प्रोग्राम की जिद और मजबूत होगी।’ सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज, CSIS के एनालिस्ट सेठ जोन्स कहते हैं कि ट्रम्प नए हमलों से अपनी जीत घोषित कर सकते हैं। वो कहेंगे कि हमले ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को दोबारा कई साल पीछे धकेल दिया है। हालांकि ऐसा होना मुश्किल है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान प्रोग्राम के डायरेक्टर बेहनम बेन तालेब्लू कहते हैं, 'अगर अमेरिका को ईरान के मिसाइल प्रोग्राम से दिक्कत है, तो उन्हें खुले तौर पर ये बात विस्तार से कहनी चाहिए। फिलहाल अमेरिका के पास ईरान पर बैन लगाने और नाकेबंदी जारी रखने के ऑप्शन हैं, उन्हें वही करना चाहिए।’ सवाल-4: क्या ये जंग बड़े पैमाने पर फैल भी सकती है? जवाब: पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी जोनेथन पैनिकॉफ के मुताबिक, ईरान जंग में एस्केलेशन की संभावना 55%, कूटनीतिक तरीके से रास्ता निकलने की संभावना 25% है और जो स्थिति है, वही बने रहने की संभावना 10% है। बाकी 10% में अन्य संभावनाएं हैं। ईरान-अमेरिका के बीच टकराव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ता है। फ्यूल की सप्लाई भी प्रभावित होती है। फरवरी में अमेरिकी हमले के बाद कच्चे तेल की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी। इससे दुनियाभर में तेल की किल्लत और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का अनुमान है कि तेल की किल्लत 2027 तक जारी रहेगी। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन ने देशवासियों से इमरजेंसी के लिए 3 दिन का खाना-पानी जमा करने के लिए कहा है। अमेरिका खुद अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों को 90 दिन तक बिना बाहरी मदद के संचालन के लिए तैयार कर रहा है। यूरोपीय देश तो रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से ही इमरजेंसी से निपटने की तैयारी में है। ये खबर भी पढ़ें… भास्कर एक्सप्लेनर: अमेरिका ने ईरान जंग में हर मिनट ₹6 करोड़ लुटाए:क्या 28 लाख करोड़ हर्जाना और देना पड़ेगा; आखिर ट्रम्प को कितनी महंगी पड़ी ये जंग अमेरिका को ईरान जंग का हर सेकेंड 10 लाख रुपए का पड़ा। रोजाना करीब 9,400 करोड़ रुपए। 107 दिन बाद जंग खत्म करके भी मुसीबत नहीं टली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को हर्जाने के तौर पर 28 लाख करोड़ रुपए और देने पड़ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका पर कनाडा जरूरत से ज्यादा निर्भर हैः कनाडा पीएम
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने डीडब्ल्यू से कहा कि उनका देश यूरोपीय संघ के साथ और नजदीकी संबंध चाहता है.
'दुनिया में कहीं भी करेंगे हमला,' ईरान की अमेरिका को खुली चुनौती
ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका ने क़ेश्म द्वीप के पास दो मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर हमला किया, जिसमें दो मछुआरे लापता और एक घायल है. इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने किसी भी दुश्मन के हमले की स्थिति में तत्काल और प्रभावी जवाब देने का आदेश दिया है.
अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की पार्टी के प्रदर्शन का भारत पर क्या असर होगा
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता का ही इम्तिहान नहीं, बल्कि संसद में उनके नियंत्रण की परीक्षा भी है. अगर इन चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदन में बहुमत गंवा देती है, तो उनके लिए फ़ैसले पास कराना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा.
जींद की बेटी मनीषा भनवाला ने कजाकिस्तान में चल रही सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। 59 किलोग्राम भार वर्ग के मुकाबले में मनीषा ने अमेरिकी पहलवान एलिबेग एजिलाबेथ नेट्ट को 8-6 से हराकर विश्व चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। मुकाबले के दौरान एक समय मनीषा पीछे चल रही थीं, लेकिन आखिरी समय में उन्होंने ऐसा दांव लगाया कि अमेरिकी पहलवान को शिकस्त देकर जीत हासिल कर ली। मां बोलीं- पहले डर लग रहा था, बेटे मनीषा की जीत के बाद परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। गांव सिवाह में उनकी उपलब्धि पर दिवाली से पहले ही जश्न मनाया जा रहा है। मां मीना भनवाला ने बेटी का मुकाबला देखने के दौरान हुए अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि डर के कारण वह पहले मैच नहीं देखना चाहती थीं, लेकिन बेटे के हौसला देने पर उन्होंने मुकाबला देखा। बोलीं- बेटी की जीत पर आंखों में आंसू आ गए मनीषा की मां मीना भनवाला ने बताया कि मैच से पहले उन्हें काफी घबराहट हो रही थी। उन्होंने बेटे से पूछा कि क्या मनीषा का मैच हो गया है। बेटे ने बताया कि मुकाबला अभी होना है। जब बेटे ने उन्हें मैच देखने के लिए कहा तो उन्होंने डर के कारण मना कर दिया। बाद में बेटे के समझाने पर वह मुकाबला देखने बैठीं। मीना ने कहा कि शुरुआत में अमेरिकी पहलवान बढ़त बनाए हुए थी, जिससे उन्हें चिंता होने लगी। बेटे ने पहले ही कहा था कि बेबे, अपनी टांग बचाकर रखना, यह टांगों में घुसेगी। हालांकि, आखिरी मौके पर मनीषा ने दांव लगाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। बेटी की जीत देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि यह केवल मनीषा की नहीं, बल्कि पूरे परिवार, गांव, जिले, प्रदेश और देश की जीत है। उनकी इच्छा है कि बेटी ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीते। उन्हें उम्मीद है कि ओलंपिक की तैयारी में सरकार की ओर से भी पूरा सहयोग मिलेगा। भाई रिंकू से प्रेरित होकर शुरू की कुश्ती मनीषा ने अपने भाई रिंकू भनवाला से प्रेरित होकर खेलों में कदम रखा था। रिंकू कबड्डी खिलाड़ी हैं। मनीषा ने वर्ष 2015 में खेल स्कूल निडानी से कुश्ती का अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर से ही उन्होंने मेहनत और लगन के साथ प्रशिक्षण लिया। लगातार अभ्यास के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। मनीषा फिलहाल रोहतक में जूनियर कोच के पद पर कार्यरत हैं और छोटू राम अखाड़े में अभ्यास करती हैं। वह सेफ गेम्स में पदक जीत चुकी हैं और विश्व रैंकिंग की खिलाड़ी हैं। उनके भाई रिंकू ने कहा कि मनीषा ने कठिन परिस्थितियों में भी विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। उनकी जीत बताती है कि मजबूत इरादों और हौसले के साथ मंजिल हासिल की जा सकती है। चार बार एशियन चैंपियन भी रह चुकी मनीषा मनीषा वर्ष 2022 से 2025 तक लगातार चार बार सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं। अब विश्व चैंपियनशिप में अमेरिकी पहलवान को हराकर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी सफलता जोड़ ली है। मनीषा ने अपनी जीत का श्रेय परिवार, कोच और समर्थकों को दिया। उन्होंने कहा कि पिता का एक सपना उन्होंने पूरा कर दिया है। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतकर पिता के दूसरे सपने को पूरा करना है। 4 साल पहले हुई थी पिता की मौत मनीषा के पिता सुरेश भनवाला का वर्ष 2022 में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। उस समय मनीषा एक कार्यक्रम में शामिल होने गई हुई थीं। वहीं उन्हें पिता के निधन की सूचना मिली। इस मुश्किल दौर के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कुश्ती जारी रखी। परिवार के लिए उनकी यह उपलब्धि पिता के सपने से भी जुड़ी है। उनकी भाभी को भी खेल कोटे से आयकर विभाग में नौकरी मिली है। घर आने पर पसंद का खाना बनाता है परिवार परिजनों के अनुसार, मनीषा को खाने में कढ़ी-चावल, टिंडी घी यानी मक्खन और दही-लस्सी पसंद हैं। भाभी के हाथ की बनी चटनी उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। जब भी वह घर आती हैं तो परिवार उनकी पसंद का खाना बनाने की कोशिश करता है। विश्व चैंपियन बनने के बाद अब परिवार के लिए उनकी यह जीत खुशियों का खास मौका बन गई है।
G20 बैठक में रूस पर घमासान! लावरोव के साथ फोटो खिंचवाने से कई देशों का इनकार, अमेरिका ने रद्द किया ग्रुप फोटो सेशन
चीन को AI चिप्स की स्मगलिंग... अमेरिका की रडार पर Nvidia सीईओ
चीन से जुड़े चिप-स्मगलिंग के एक संदिग्ध नेटवर्क ने Nvidia के CEO जेन्सन हुआंग को चर्चा में ला दिया है. इस मामले के केंद्र में ऐलिस हुआंग हैं, जो सिंगापुर की डेटा सेंटर कंपनी मेगास्पीड से जुड़ी एक चीनी बिजनेसवुमन हैं.
फूट गया AI बबल? अमेरिकी बाजार में मची भारी तबाही, 1.8 ट्रिलियन डॉलर साफ!
अमेरिकी बाजार में भारी तबाही मची हुई है. शुक्रवार को इंटेल के शेयरों में 28 फीसदी की गिरावट आई, जिस कारण नैस्डैक 2.86 फीसदी तक गिर गया और झटके में 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक साफ हो गया.
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अमेरिका व उसके मित्र देशों की आंतरिक तैयारियां देख किसी बाहरी खतरे का हो रहा स्पष्ट आभास?
अमेरिका अपनी वैश्विक बादशाहत बनाए रखने के लिए पूरी दुनिया को तृतीय विश्व युद्ध की आग में झोंकने वाला है! चाहे तेल का खेल हो या फिर मज़बूत सरकारों को अस्थिर करने का षड्यंत्र- अमेरिकी रणनीति हर मोर्चे पर पिटती हुई प्रतीत हुई। इसी की खीझ में अब वह खाड़ी और मध्य-पूर्व देशों, यूरोप और भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ नया गुल खिलाने वाला है क्योंकि उसके 'पालतू कुत्तों' के पांव भी अब जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का कहना है कि रूस, चीन, भारत, ईरान, ब्राजील, अफगानिस्तान के खिलाफ वह ऐसा युद्ध छेड़ना चाहता है, ताकि इनकी आर्थिक कमर टूट जाए और जी-7 देशों की बादशाहत पूरी दुनिया पर बनी रहे। शायद इसलिए वह कुछ बड़ा करने वाला है और 90 दिन के लक्ष्य निर्धारित करते हुए अपनी तैयारियां पुख्ता कर रहा है। इसे भी पढ़ें: China को लगे 40 साल, Modi ने 12 साल में कर दिखाया! बचपन में गरीबी को झेलने वाले PM ने 49.6 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया इस बात की चुगली पूरी दुनिया की वह गिनी चुनी सरकारें कर रही हैं, जो ऐसी चेतावनियाँ दे रही हैं, जैसी शायद आखिरी बार दूसरे विश्व युद्ध से पहले देखने को मिली थीं। जहां एक तरफ अमेरिका का पेंटागन अपने सभी मिलिट्री बेस को 'ऑपरेशन फोर्ट्रेस' के तहत तैयार कर रहा है, जिसके तहत अमेरिकी सैन्य ठिकानों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वे बाहर से खाना, पानी या किसी भी तरह की सप्लाई मिले बिना पूरे 90 दिनों तक अपना काम चला सकें। वहीं दूसरी तरफ, यूरोपीय देशों ब्रिटेन, नीदरलैंड और फ्रांस एवं एशियाई देश जापान ने अपने नागरिकों से कह दिया है कि वे कम से कम 72 घंटे तक काम आने वाला इमरजेंसी सामान अपने घर में जमा करके रखें। इसमें खाने-पीने की चीजें, पानी, दवाइयाँ और यहाँ तक कि नकद पैसे भी शामिल हैं, ताकि अगर बिजली, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएँ बंद हो जाएँ, तो लोग बिना किसी बाहरी मदद के कम से कम 72 घंटे तक अपना काम चला सकें। भले ही सरकारें इसकी आधिकारिक वजह खराब मौसम, एल नीनो, बिजली गुल होने और साइबर अटैक जैसी स्थितियों को बता रही हैं, लेकिन सर्वाधिक ध्यान देने वाली बात ये है कि कोई भी खुलकर 'युद्ध' शब्द का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। अब सवाल ये है कि आखिर अचानक दुनिया भर में ऐसी तैयारियाँ क्यों हो रही हैं? और अमेरिकी-यूरोपीय टारगेट पर आने वाले देश क्या तैयारियां कर रहे हैं? इसके पीछे सिर्फ दो संभावनाएँ हैं। पहली, ये सारी तैयारियाँ सिर्फ सुरक्षा के लिए की जा रही हैं और इनका किसी असली खतरे से कोई लेना-देना नहीं है। दूसरी, दुनिया की ये सारी सरकारें कुछ ऐसा जानती हैं, जिसके बारे में वे अभी हमें बता नहीं सकतीं या जानबूझकर बता नहीं रही हैं। और अगर दूसरी बात सही है, तो आखिर वो क्या है? सबसे बड़ी आशंका ये है कि अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर से युद्ध शुरू हो सकता है। साथ ही, यूरोप में रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध भी और ज्यादा भड़क सकता है। इधर, भारत के खिलाफ पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश आग उगल सकते हैं। इसलिए पहले मैं ईरान की बात करता हूँ। अगर इस बार दोबारा युद्ध शुरू होता है, तो इसकी शुरुआत सबसे ज्यादा संभावना के साथ बाब अल-मंदेब के पास हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच टकराव से हो सकती है। इसका मतलब ये है कि तेल की सप्लाई पर खतरा सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाब अल-मंदेब के रास्ते पर भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। और धीरे-धीरे ये संकट स्वेज नहर तक फैल सकता है। आपको बता दूँ कि स्वेज नहर दुनिया के व्यापार का एक बेहद अहम रास्ता है। दावा है कि दुनिया का लगभग 25% व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है। अगर ये रास्ता बंद हो गया, तो यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के बीच व्यापार के रास्ते लगभग कटकर रह जाएँगे। दुनिया भर में सामान पहुँचाने में भारी रुकावट आएगी और तेल की सप्लाई पर भी बहुत बड़ा असर पड़ सकता है। और ये सब उस समय हो रहा है, जब अमेरिका का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर 'थियोडोर रूजवेल्ट' मिडिल ईस्ट पहुँचने वाला है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने अपने दूतावासों और सैन्य ठिकानों से गैर-जरूरी कर्मचारियों को भी मिडिल ईस्ट से निकलने के लिए कहा है। यानी अमेरिका वही तैयारियाँ दोबारा करता हुआ दिखाई दे रहा है, जैसी उसने इस साल 28 फरवरी को हुए हमले से पहले की थीं। और अब यूरोप की तरफ आइए। ऐसी रिपोर्टें आ रही हैं कि अमेरिका यूरोप में तैनात अपने नाटो सैनिकों में से लगभग एक-तिहाई सैनिकों को वापस बुला सकता है। इससे पहले अमेरिका दक्षिण कोरिया से अपना थाड (THAAD) एयर डिफेंस सिस्टम भी हटा चुका है। अब इस बात को समझिए कि दक्षिण कोरिया से थाड हटने के बाद उत्तर कोरिया से आने वाले संभावित मिसाइल हमलों से बचाव की उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। ठीक उसी तरह, अगर अमेरिका यूरोप से अपने सैनिकों को वापस बुला लेता है, तो रूस के सामने यूरोप की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। और रूस के राष्ट्रपति पुतिन इसी स्थिति का फायदा उठाना चाहते हैं। यही वजह है कि यूरोप के देश अपनी सेना और रक्षा पर खर्च लगातार बढ़ा रहे हैं। दूसरी तरफ, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आम लोगों के लिए जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं पर खर्च कम किया जा रहा है। यानी आम जनता की सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन सेना और हथियारों पर खर्च बढ़ाने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। यूरोप के देशों में इसी बात को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं कि सरकारें आम लोगों की जरूरतों पर खर्च कम कर रही हैं, जबकि सेना और रक्षा पर लगातार ज्यादा पैसा लगा रही हैं। इसके बावजूद कोई भी देश अपनी रक्षा तैयारियों को धीमा करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। यूरोपीय देश सेना और रक्षा पर अब उतना पैसा खर्च कर रहे हैं, जितना दूसरे विश्व युद्ध के बाद से किसी भी समय नहीं किया गया था। खासकर जर्मनी ने तो यहाँ तक कह दिया है कि उसके अस्पतालों को तैयार रहना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वे एक ही रात में कम से कम 1,000 मरीजों का इलाज कर सकें। अब इन सारी बातों को एक साथ जोड़कर देखिए तो आभास होता है कि दुनिया की सरकारें अपने नागरिकों से इमरजेंसी सामान जमा करने को कह रही हैं। अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों को 90 दिनों तक बिना बाहरी सप्लाई के चलने के लिए तैयार कर रहा है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, दूतावासों और सैन्य ठिकानों से गैर-जरूरी कर्मचारियों को हटाया जा रहा है और दुनिया के सबसे अहम तेल और व्यापारिक रास्तों पर खतरा मंडरा रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका के यूरोप से सैनिक वापस बुलाने की खबरों के बीच यूरोपीय देश अपनी सेना और हथियारों पर रिकॉर्ड स्तर पर पैसा खर्च कर रहे हैं। जर्मनी के अस्पतालों को एक ही रात में 1,000 मरीजों को संभालने के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है। यानी दुनिया की तमाम बड़ी ताकतें एक ही समय पर ऐसी तैयारियाँ कर रही हैं, जो युद्ध जैसी किसी बड़ी स्थिति में काम आ सकती हैं, लेकिन कोई भी खुलकर 'युद्ध' शब्द का इस्तेमाल नहीं कर रहा है! अब आप खुद सोचिए कि जब अलग-अलग देशों की सरकारें एक साथ इस तरह की तैयारियाँ कर रही हैं, तो आखिर उन्हें किस चीज का डर है? क्या ये सब सिर्फ सामान्य सुरक्षा तैयारियाँ हैं, या फिर सरकारें किसी ऐसी स्थिति के लिए तैयारी कर रही हैं, जिसके बारे में आम लोगों को अभी बताया नहीं जा रहा है? ब्रिक्स देशों को भी अब सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि देर सबेर ये गाज उन्हीं पर गिरने वाली है। शुरुआत भले ही ईरान व रूस से हो, लेकिन देर सबेर भारत और चीन दोनों को लपेटा जाना तय है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जी-2 और जी-3 की आड़ में खुद के वर्चस्व को कायम रखना चाहा, लेकिन जब बात नहीं बन पाई तो दुष्परिणाम कभी भी दिखाई पड़ सकता है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
अमेरिका के मिड-टर्म चुनावों में ट्रंप को लग सकता है झटका
कंसास और आयोवा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की चुनावी रैलियों के रद होने पर जब पत्रकार ने उनसे सवाल किया तो ट्रंप झुंझला गए। उन्होंने पत्रकार को ही भला-बुरा कह दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने रैली में ना जाने की वजह के बारे में बताया कि वहां उनकी रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बढ़िया प्रदर्शन कर …
म्यांमार: क्या यूरोपीय संघ की कूटनीतिक घेराबंदी को कमजोर कर रहा है अमेरिका?
यूरोपीय संघ पर सवाल उठ रहे हैं कि वह अब भी म्यांमार के सैन्य शासन से दूरी क्यों बनाए हुए है.
बिग बॉस फेम शिवानी कुमारी पर भड़के अमेरिकी इन्फ्लुएंसर मार्विन, बोले- मेरा भरोसा तोड़ा
बिग बॉस से पहचान बनाने वाली यूट्यूबर शिवानी कुमारी और अमेरिकी इन्फ्लुएंसर मार्विन आची के बीच विवाद सामने आया है। टेसू-झेंझी कार्यक्रम के दौरान चेहरे पर काला रंग लगाने से आहत मार्विन ने वीडियो जारी कर शिवानी पर भरोसा तोड़ने और मजाक करने का आरोप लगाया है।
Intel का शेयर क्रैश, Nvidia, AMD, डेल भी फिसले, क्या अमेरिका में AI बुलबुला फूटने लगा है?
अमेरिका में टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को आई गिरावट ने निवेशकों को डरा दिया है। इंटेल के शेयर में 28 फीसदी गिरावट आई। एनवीडिया, एएमडी, डेल और एचपी के शेयरों में भी बड़ी गिरावट आई। इससे नैस्डेक कंपोजिट इंडेक्स 2.86 फीसदी गिरकर बंद हुआ। इससे इनवेस्टर्स में डर का माहौल है। क्या अमेरिका में एआई बुलबुला फूटने लगा है?Nasdaq Composite में 5 जून के बाद सबसे बड़ी गिरावटNasdaq Composite में शुक्रवार को 5 जून के बाद फीसदी में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह इंटेल और एमेजन के खराब तिमाही नतीजे हैं। इससे आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में टेक्नोलॉजी कंपनियों के लगातार भारी निवेश को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इनवेस्टर्स यह पूछ रहे हैं कि AI में निवेश का रिटर्न कितने समय में मिलेगा?सोमवार 3 नवंबर को दुनियाभर के बाजारों पर दिखेगा असरनैस्डेक कंपोजिट 30 अक्तूबर को 747 अंक गिरकर 25,437 पर बंद हुआ। S&P 500 भी 1.82 फीसदी गिरकर 7,580 पर बंद हुआ। डाओ जेंस इंडस्ट्रियल एवरेज 1.09 फीसदी यानी 572 अंक गिरकर 51,770 पर बंद हुआ। इस गिरावट का असर सोमवार यानी 3 नवंबर को दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दिखेगा। खासकर दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आ सकती है, क्योंकि इन बाजारों में तेजी की वजह टेक्नोलॉजी स्टॉक्स रहे हैं।इंटेल का शेयर 28 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गयानैस्डेक 6 अक्तूबर को अपनी रिकॉर्ड क्लोजिंग लेवल से 7.8 फीसदी गिर चुका है। इससे अमेरिकी शेयर बाजारों में AI की बदौलत आई तेजी के जारी रहने को लेकर संदेह पैदा होने लगा है। एसएंडपी 500 और नैस्डेक का रिटर्न अक्तूबर में निगेटिव रहा है, जबकि डाओ में हल्की बढ़त है। शुक्रवार को आई गिरावट में Intel और Amazon के खराब तिमाही नतीजों का बड़ा हाथ रहा। Intel का शेयर 28.6 फीसदी क्रैश कर गया।सेमीकंडक्टर और सर्वर कंपनियों के शेयर भी फिसलेसेमीकंडक्टर और सर्वर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भी बड़ी बिकवाली देखने को मिली। Nvidia का शेयर 4.2 फीसदी फिसला, जबकि AMD में करीब 11 फीसदी की गिरावट आई। सर्वर बनाने वाली Dell और HP के शेयरों में भी बड़ी गिरावट आई। Dell 10.8 फीसदी फिसला, जबकि एचपी में 9.6 फीसदी गिरावट आई। रायटर्स के मुताबिक, अक्तूबर में नैस्डेक 100 की मार्केट वैल्यू में 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की गिरावट दिख रही है।टेक्नोलॉजी कंपनियों ने कर्ज से काफी पैसे जुटाए हैंअमेरिका में टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने बीते कुछ सालों में कर्ज से काफी पैसे जुटाए हैं। मेटा ने 97.5 अरब डॉलर फंड जुटाने का प्लान बनाया है। माइक्रोसॉफ्ट बॉन्ड्स के जरिछए करीब 25 अरब डॉलर जुटाने के बारे में सोच रही है।यह भी पढ़ें:Reliance Industries एनसीडी से15,000 करोड़ रुपये तक जुटाएगी , जानिए कंपनी का पूरा प्लानअगल साल AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश 1 ट्रिलियन पार करने की उम्मीदमेटा, एमेजान और अल्फाबेट ने मिलकर बीते चार सालों में अरबों डॉलर के बॉन्ड्स इश्यू किए हैं। इससे टेक्नोलॉजी कंपनियों पर बढ़ते कर्ज के बोझ को लेकर चिंता जताई जा रही है। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि अगले साल AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश के 1 ट्रिलियन डॉलर पार कर जाने की उम्मीद है।
एलन मस्क की चेतावनी: 2028 में डेमोक्रेट्स जीते तो खत्म हो जाएगा अमेरिका का खेल!
मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित चुनावी जीत को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने दावा किया कि अगर डेमोक्रेट्स को संघीय सरकार के तीनों प्रमुख राजनीतिक केंद्रों पर नियंत्रण मिल गया, तो वे अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठा सकते हैं।
बिग बॉस ओटीटी सीजन 3 की कंटेस्टेंट रह चुकीं सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर शिवानी कुमार एक बार फिर विवादों में आ गई हैं. दरअसल, हाल ही में अमेरिकी इन्फ्लूएंसर मारविन आची ने उनपर भारतीय संस्कृति को बिगाड़ने का आरोप लगाया
सऊदी अरब में मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच अमेरिकी मिशन ने जारी की एक और एडवाइजरी
सऊदी अरब में अहम ठिकानों पर हो रहे हमलों के मद्देनजर रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने मिशनों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। दूतावास ने सभी गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और कर्मचारियों के परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है।
कारगिल में अमेरिका ने दिया था धोखा, इसरो ने कैसे पलट दी बाजी? अजूबा है NVS-03 सैटेलाइट
ISRO ने GSLV-F18 रॉकेट से NVS-03 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया। स्वदेशी परमाणु घड़ी से लैस यह सैटेलाइट भारत के NavIC नेविगेशन सिस्टम को मजबूत करेगा। जानिए कैसे भारत ने कारगिल में अमेरिकी धोखे से लिया सबक।
औरैया की इन्फ्लुएंसर शिवानी कुमारी और उनके अमेरिकी दोस्त मार्विन आची के बीच दरार पड़ गई है। मार्विन ने शिवानी पर अपमानित करने का आरोप लगाया। मार्विन के आरोप के बाद शिवानी ने रोते हुए कहा- भैया आप मेरे साथ 15 दिन रहे। कोई परेशानी थी तो मुझसे पूछते, वीडियो बनाने की क्या जरूरत थी? VIDEO में पूरा मामला देखिए…
Kaithal News: अमेरिका में नौकरी लगवाने का झांसा देकर 80 लाख रुपये ठगे
अमेरिका में नौकरी लगवाने का झांसा देकर 80 लाख रुपये ठगे
American YouTuber Marvin Achi ने Indian YouTuber Shivani Kumari पर लगाए गंभीर आरोप
American YouTuber Marvin Achi ने Indian YouTuber Shivani Kumari पर लगाए गंभीर आरोप
AI Impact On Jobs: एआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर अब अमेरिका में छात्रों के करियर चुनाव पर भी दिख रहा है। कंप्यूटर साइंस के अंडरग्रेजुएट कोर्स में दो साल के भीतर छात्रों की संख्या 18.4% और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में 27.1% घट गई है।
बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा (Preity Zinta) करवा चौथ के मौके पर एक ऐसी परेशानी में फंस गईं, जिसने उनका इंतजार बढ़ा दिया। भारत में जहां महिलाएं चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार करती हैं, वहीं अमेरिका में मौजूद प्रीति जिंटा को बादलों की वजह से चांद के दीदार नहीं हो पा रहे थे। चांद देखने […]
करवा चौथ पर चांद को तरसीं प्रीति जिंटा, अमेरिका में बादलों ने बढ़ाई मुश्किल
करवा चौथ पर अमेरिका में प्रीति जिंटा ने पति जीन गुडइनफ के लिए व्रत रखा, लेकिन बादलों के कारण उन्हें चांद नहीं दिखा. जानिए, सोशल मीडिया पर उन्होंने क्या पूछा और फैंस ने कैसे मजेदार जवाब दिए.
गुरुग्राम में शराब ठेकेदार से विदेश में बैठे गैंगस्टर के नाम पर रंगदारी मांगने के आरोप में एक नाबालिग सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने इंटरनेट से वर्चुअल विदेशी नंबर का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया था।
Mecca Pact In Iran के बीच ईरान ने अमेरिका के दोस्त Saudi को क्यों घेरा? Khalid bin Salman | MBS
मीटिंग में ईरान ने पूछा है कि अमेरिका के साथ उसके जो डायलॉग चले हैं..जिसके विरोध में रहा है सऊदी अरब...उस पर सवाल अब ईरान ने उठाए हैं...गौरतलब है कि जब 40 दिनों की जंग के बाद इस्लामाबाद में जब एमओयू साइन हुआ था तो उस समय सऊदी अरब,यूएई,बहरीन जैसे मुल्कों ने इसका विरोध किया था
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ओहियो रैली में की भारतीय मूल के रामास्वामी को जिताने की अपील
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ओहियो रैली में की भारतीय मूल के रामास्वामी को जिताने की अपील
बिहार में मिट्टी के बर्तनों पर उकेरी कला, कुम्हारों के हुनर को अमेरिका-यूरोप तक मिला बाजार
Indian Handmade Terracotta Products : मुजफ्फरपुर में उद्यमी डॉ. ऋतुराज की पहल से पारंपरिक कुम्हारी कला को आधुनिक रूप दिया जा रहा है, जिससे मिट्टी के बर्तनों पर मिथिला सहित विभिन्न कला शैलियों का समावेश हो रहा है।
भागलपुर के कलाकार छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाले सूपों पर मंजूषा कला उकेरेंगे। इस काम के लिए उन्हें अमेरिका से ऑर्डर मिला है। मंजूषा गुरु मनोज पंडित और उनकी टीम सूपों को सजाने में जुटी है। इन पर बनी कला अंग क्षेत्र की पहचान को अमेरिका तक पहुंचाएगी। छठ पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पारंपरिक सूप का इस्तेमाल किया जाता है। अब इन सूपों पर भागलपुर की मंजूषा कला भी नजर आएगी। छठ में सूप का विशेष महत्व है छठ में सूप का अपना विशेष महत्व है। व्रती इसी सूप में पूजन सामग्री, फल और अन्य प्रसाद सजाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा बिहार की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। अब इसी परंपरा में भागलपुर की मंजूषा कला के रंग भरने की कोशिश की जा रही है। सूप पर जब मंजूषा के पारंपरिक चित्र और आकर्षक आकृतियां उभरेंगी, तो उसमें छठ की आस्था के साथ अंग प्रदेश की लोक संस्कृति भी दिखाई देगी। यह पहल परंपरा को नया रूप देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है।सबसे खास बात यह है कि इस बार इन सूपों की कहानी भागलपुर तक सीमित नहीं रहेगी। अमेरिका में रहने वाले छठ श्रद्धालुओं तक पहुंचने वाले ये सूप अपने साथ उस धरती की पहचान भी लेकर जाएंगे, जहां मंजूषा कला की परंपरा सदियों से जीवित है।नोज पंडित बोले—ऑर्डर बहुत हैं, लेकिन हर सूप को मंजिल तक पहुंचाना भी जरूरीमंजूषा गुरु मनोज पंडित के मुताबिक, मंजूषा कला से सजे सूपों की मांग लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं। अमेरिका के अलावा बजाना संस्था और इनपावर टू अर्न जैसी संस्थाओं के माध्यम से भी मांग सामने आ रही है।मनोज पंडित बताते हैं कि फिलहाल करीब 100 से 200 सूपों के ऑर्डर मिले हैं। मांग बढ़ने से कलाकारों में उत्साह है, लेकिन उनके सामने उत्पादन और समय पर आपूर्ति की चुनौती भी है। कलाकार अपनी क्षमता के अनुसार काम कर रहे मनोज का कहना है कि ऑर्डर मिलना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि जितने ऑर्डर लिए जाएं, उन्हें तैयार करके सही समय पर संबंधित लोगों तक पहुंचाया जा सके। कलाकार अपनी क्षमता के अनुसार काम कर रहे हैं, ताकि गुणवत्ता से समझौता किए बिना मंजूषा कला को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके। उनके लिए अमेरिका से ऑर्डर मिलना गर्व का विषय है। यह इस बात का संकेत है कि भागलपुर की पारंपरिक कला अब अपने परिचित दायरे से बाहर निकल रही है और दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। छठ से जुड़ेगी मंजूषा, फिर दुनिया तक पहुंचेगी अंग की पहचानमंजूषा कलाकार गौतम कुमार इस पहल को केवल सूप सजाने का काम नहीं मानते। उनके अनुसार, सबसे पहले मंजूषा कला को लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जोड़ने की जरूरत है।गौतम कुमार बताते हैं कि जिस तरह छठ पूजा बिहार की सांस्कृतिक पहचान है, उसी तरह मंजूषा कला का संबंध अंग क्षेत्र की ऐतिहासिक लोक परंपराओं से है। बिहुला-विषहरी की लोकगाथा और उससे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराएं मंजूषा कला की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनका प्रयास है कि मंजूषा कला को बिहार के हर हिस्से तक पहुंचाया जाए और फिर वहां से पूरी दुनिया में इसकी पहचान बने। जिस तरह आज बिहार से बाहर रहने वाले लोग विदेशों में भी छठ महापर्व मनाते हैं, उसी तरह मंजूषा कला भी उन आयोजनों और घरों तक पहुंचे, जहां बिहार की संस्कृति के प्रति प्रेम और सम्मान मौजूद है।गौतम कुमार कहते हैं कि अमेरिका से ऑर्डर मिलने से उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। इच्छा है कि आगे भी दूसरे देशों से ऑर्डर मिलें। चित्र शैली और लोकगाथाओं से जुड़ाव मंजूषा कला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशिष्ट चित्र शैली और लोकगाथाओं से जुड़ाव है। इसमें प्रयुक्त पारंपरिक आकृतियां, रेखाएं और रंग अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों को सामने लाते हैं। बिहुला-विषहरी की कथा से जुड़ी यह कला भागलपुर की पहचान मानी जाती है।जब इसी कला को छठ के सूप पर उकेरा जाएगा, तो दो महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ेंगी। एक ओर भगवान सूर्य और छठी मैया के प्रति श्रद्धा होगी, तो दूसरी ओर अंग प्रदेश की लोककला का सौंदर्य।
रोशनी के महापर्व दिवाली के खास अवसर पर मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) के भारतीय प्रशंसकों को हॉलीवुड से एक बहुत बड़ा और अद्भुत सरप्राइज मिला है। मार्वल के दो सबसे पसंदीदा सुपरस्टार्स- रॉबर्ट डाउनी जूनियर और क्रिस इवांस ने भारतीय दर्शकों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। इसके साथ ही, एक विशेष वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने यह घोषणा भी की है कि उनकी बहुप्रतीक्षित ब्लॉकबस्टर फिल्म 'एवेंजर्स: डूम्सडे' (Avengers: Doomsday) अमेरिका से पूरे एक दिन पहले भारत के सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 17 दिसंबर 2026 को अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अमेरिका में यह फिल्म 18 दिसंबर को रिलीज होगी, जिसका मतलब है कि भारतीय दर्शकों को इस शानदार सुपरहीरो फिल्म को देखने का मौका पहले मिल जाएगा। एक खास वीडियो संदेश में, डाउनी जूनियर और इवांस ने भारतीय फैंस को शुभकामनाएं दीं और रोशनी के इस त्योहार की तुलना फिल्म की कहानी से की। अभिनेताओं ने कहा, नमस्ते भारत! दिवाली के बारे में हमें जो बात सबसे अच्छी लगती है, वह यह है कि यह एक अध्याय के खत्म होने और दूसरे की शुरुआत का प्रतीक है। हम इस बारे में काफी कुछ जानते हैं, बस फर्क इतना है कि यहां अंधेरे से रोशनी की ओर जाने के बजाय, शायद मामला कुछ उल्टा है! आप सभी को दिवाली की शुभकामनाएं! 'एवेंजर्स: डूम्सडे' में मिलते हैं! यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब मार्वल की इस आने वाली फिल्म को लेकर काफी उत्साह है। इस फिल्म में मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के कई ऐसे किरदार एक साथ नजर आएंगे, जिन्हें फैंस बहुत पसंद करते हैं। भारत में फिल्म की जल्दी रिलीज होने से इसे लेकर लोगों का उत्साह और भी बढ़ेगा, क्योंकि यह इस साल की सबसे बहुप्रतीक्षित हॉलीवुड फिल्मों में से एक है। 'एवेंजर्स: डूम्सडे' के बारे में सब कुछ 'एवेंजर्स: डूम्सडे' में तीन अलग-अलग यूनिवर्स के हीरो एक साथ आएंगे। उन्हें एक ऐसे बड़े खतरे का सामना करना होगा, जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। रॉबर्ट डाउनी जूनियर, जो पहले मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स में टोनी स्टार्क (आयरन मैन) का किरदार निभा चुके हैं, अब इस फ्रेंचाइजी में एक खतरनाक विलेन 'डॉक्टर डूम' के रूप में वापसी करेंगे। वहीं, क्रिस इवांस एक बार फिर स्टीव रोजर्स (पूर्व कैप्टन अमेरिका) की भूमिका में नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन एंथनी और जो रूसो ने किया है, जो इससे पहले 'एवेंजर्स: इन्फिनिटी वॉर' और 'एवेंजर्स: एंडगेम' जैसी मार्वल की ब्लॉकबस्टर फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म को केविन फीगी, लुई डी'एस्पोसिटो और जोनाथन श्वार्ट्ज ने प्रोड्यूस किया है। इस फिल्म की स्टार कास्ट में क्रिस हेम्सवर्थ, पेड्रो पास्कल, पॉल रड, एंथनी मैकी, फ्लोरेंस प्यू, वैनेसा किर्बी, एबॉन मॉस-बैचराच, वायट रसेल, चैनिंग टेटम, सिमु लियू, इयान मैककेलेन, हेली एटवेल, टॉम हिडलेस्टन, जेम्स मार्सडेन, पैट्रिक स्टीवर्ट, जोसेफ क्विन, सेबेस्टियन स्टेन, डेविड हार्बर, लेटिशिया राइट, लुईस पुलमैन, केल्सी ग्रामर, कैथरीन न्यूटन, डैनी रामिरेज़, विंस्टन ड्यूक, एलन कमिंग, हन्ना जॉन-कामेन, रेबेका रोमिजन, एलेक्स लिविनाली, मेबेल कैडेना और टेनोच ह्यूर्टा मेजिया शामिल हैं। 'एवेंजर्स: डूम्सडे' 17 दिसंबर 2026 को भारतीय सिनेमाघरों में अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज होगी। यह फिल्म मार्वल स्टूडियोज के 'इनफिनिटी विजन' सहित कई प्रीमियम फॉर्मेट्स में भी उपलब्ध होगी। Entertainment News Hindi Today only at Prabhasakshi
अमृतसर में स्थित श्री गुरु रामदास स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और अमेरिका की चैरिटेबल संस्था 'ऑपरेशन वॉक' ने मिलकर पंजाब के गरीब मरीजों के घुटने बदले हैं। इस अभियान का मकसद उन जरूरतमंदों की मदद करना है, जो गंभीर घुटनों की समस्या से जूझ रहे हैं और महंगा इलाज नहीं करा सकते। डॉक्टर हरपाल सिंह खनूजा और यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि एपी सिंह ने बताया कि इस बार 70 मरीजों की स्क्रीनिंग हुई थी। इनमें से 53 सबसे जरूरतमंद मरीजों को सर्जरी के लिए चुना गया। पिछले साल 39 सर्जरी हुई थीं, इस बार यह आंकड़ा 53 तक पहुंचा। अमेरिका से लाए गए इम्प्लांट्स इलाज में अमेरिका से लाए गए उच्च गुणवत्ता वाले इम्प्लांट्स का इस्तेमाल किया गया। डॉ. खनूजा के अनुसार, इन इम्प्लांट्स से घुटने का मूवमेंट और फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होती है। सर्जरी के तुरंत बाद मरीजों को खड़ा करके वॉक भी करवाई जाती है, जिससे रिकवरी तेजी से होती है। इस तरह के अभियानों का एक अन्य सकारात्मक पहलू यह है कि यह देश के युवा मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट्स के लिए एक बेहतरीन 'लर्निंग फेज' साबित होता है। ऑर्थोपेडिक्स विभाग में वर्तमान में पोस्ट-ग्रेजुएशन कर रहे रेजिडेंट्स को अमेरिकी सर्जनों के साथ काम करने, उनकी नई सर्जिकल तकनीकों को सीखने और मरीजों की देखरेख करने का अनमोल व्यावहारिक अनुभव मिलता है। यूनिवर्सिटी में ऑर्थोपेडिक पीजी एडमिशंस और फैकल्टी का यह एक्सपोजर संस्थान के शैक्षणिक स्तर को और अधिक मजबूत करता है। बढ़े हुए वजन को नियंत्रित रखें मरीज ऑपरेशन के बाद की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी उतनी ही जरूरी है जितनी कि सर्जरी खुद। अमेरिका से आए फिजियोथेरेपिस्ट्स ने स्थानीय टीम के साथ मिलकर हर मरीज की व्यक्तिगत रूप से देखभाल की है। इसके साथ ही, मरीजों को यह सलाह दी गई है कि वे अपने बढ़े हुए वजन को नियंत्रित रखें, क्योंकि घुटने के जोड़ वजन-वियरिंग जोड़ होते हैं और अधिक वजन इन प्रत्यारोपणों पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है। गरीब मरीजों का मुफ्त या बेहद कम खर्च में मिलेगा इलाज यह सहयोगात्मक पहल पंजाब के स्वास्थ्य ढांचे में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। आयोजकों और डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इस प्रकार के कैंप हर साल आयोजित किए जाते रहेंगे। जिससे न केवल गरीब मरीजों का मुफ्त या बेहद कम खर्च में इलाज संभव हो सकेगा, बल्कि हमारे देश के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को वैश्विक स्तर की चिकित्सा पद्धतियों से सीखने का निरंतर अवसर मिलता रहेगा।
क्या अमेरिका से खत्म हो जाएगा AI का नामोनिशान? जानिए क्या है 'सुपर इंटेलिजेंस' का पूरा सच!
अब तक पूरी दुनिया की जुबान पर एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नाम का शब्द चढ़ चुका है। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एआई का नाम बदलकर एसआई यानी सुपर इंटेलिजेंस कर दिया है। यानी अब वो चाहते हैं कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ना कहा जाए क्योंकि ये आर्टिफिशियल नहीं है। इसका नाम होना चाहिए सुपर इंटेलिजेंस। वो कहते हैं कि आर्टिफिशियल नहीं बल्कि सुपर इंटेलिजेंस चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी संबंधित संघीय सरकारी दस्तावेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AI शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान किया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने मीडिया आउटलेट द वॉल स्ट्रीट जर्नल पर सवाल उठाए और तर्क दिया कि इस उन्नत तकनीक की क्षमताओं को दर्शाने के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द अधिक सटीक है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा द वॉल स्ट्रीट जर्नल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)—जो कि एक बेहद खराब और गलत नाम है। उसको SI (सुपर इंटेलिजेंस) कहना कब शुरू करेगा? यह वही नाम है जिसे लगभग हर कोई इस्तेमाल कर रहा है या जल्द ही करने वाला है। उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में लिखा हम बहुत जल्द इसके गलत और भ्रामक होने की वजह से सभी प्रासंगिक दस्तावेजों और अन्य सभी जगहों पर ‘AI/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से प्रतिबंधित (BAN) करने जा रहे हैं। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद। कार्यकारी आदेश में शब्दावली बदलने का निर्देश दिया गया है ट्रम्प की यह घोषणा, 30 सितंबर को उनके द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश के बाद आई है, जिसका शीर्षक है सुपर इंटेलिजेंस के युग की शुरुआत। इस आदेश में संघीय विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे आधिकारिक संचार और कामकाज में, जहाँ कानूनी रूप से अनुमति हो, =आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जगह सुपर इंटेलिजेंस (SI) शब्द का इस्तेमाल करें। इन नए शब्दों का उपयोग सरकारी पत्राचार, सार्वजनिक संचार, आधिकारिक वेबसाइटों, रिपोर्टों और प्रशासनिक नीति दस्तावेजों में किया जाना है। पहले से जारी नियमों, सरकारी अनुबंधों, अनुदानों और ऐतिहासिक अभिलेखीय दस्तावेजों में पीछे की तारीख से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ट्रम्प 'AI' शब्द को क्यों बदलना चाहते हैं? इस कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि तकनीक में हुई प्रगति अब उस मूल ढांचे से कहीं आगे निकल गई है, जिसका इस्तेमाल 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) को परिभाषित करने के लिए किया जाता था। इसमें तर्क दिया गया है कि आज के उन्नत सिस्टम केवल मानवीय बुद्धिमत्ता के कुछ पहलुओं की नकल करने या उन्हें स्वचालित (ऑटोमेट) करने से कहीं अधिक काम करते हैं। आदेश के अनुसार, ये सिस्टम विज्ञान और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में मानवीय रचनात्मकता और क्षमताओं का लगातार विस्तार कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इन विकासों को बेहतर ढंग से दर्शाता है। एक नई कानूनी परिभाषा का भी प्रस्ताव रखा गया है। इस आदेश के तहत, राष्ट्रपति के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहायक को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस के सामने प्रस्तावित कानूनी भाषा पेश करने के लिए कहा गया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य 'सुपर इंटेलिजेंस' की एक आधिकारिक कानूनी परिभाषा तय करना और मौजूदा कानूनों में बदलाव की सिफारिश करना है। ट्रंप ने प्रमुख टेक लीडर्स से मुलाकात की यह कदम तब उठाया गया जब ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख टेक्नोलॉजी अधिकारियों के साथ तकनीकी विकास और एडवांस्ड सिस्टम के सुरक्षित विकास पर चर्चा की। इस चर्चा में शामिल टेक लीडर्स में एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई और जेन्सेन हुआंग शामिल थे। ट्रंप ने इस सेक्टर की ग्रोथ को अभूतपूर्व बताया, जबकि इंडस्ट्री लीडर्स ने सहयोग और सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। शब्दावली में प्रस्तावित यह बदलाव, अमेरिकी सरकार द्वारा अपने संघीय कार्यों में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को परिभाषित करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा। क्या इस रिब्रांडिंग के बाद इसके वास्तविक खतरे टल जाएंगे क्या गारंटी है कि यह जो सुपर इंटेलिजेंस है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है यह बनाए गए हमारे जो नियम हैं उन्हें नहीं तोड़ेगा? यह कंपनियों का डाटा चोरी नहीं करेगा? क्या गारंटी है कि इसका गलत इस्तेमाल नहीं होगा? क्या गारंटी है कि यह सुपर इंटेलिजेंस या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपके और हमारे जो पासवर्ड्स हैं उन्हें नहीं चुरा लेगा? यह कुछ भी कर सकता है। किसी की भी हैकिंग कर सकता है। कहीं भी जाकर चोरी कर सकता है। कोई भी डाटा निकाल सकता है। अब इस पर नजर कौन रखेगा? और हमारे ऊपर और आपके ऊपर तो एक कानून है जिसके तहत हम काम करते हैं। अगर हम उस कानून को तोड़ते हैं तो अदालत में हम पर मुकदमा चल सकता है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगर कुछ करता है तो किस पर मुकदमा चलेगा? अगर एक सेल्फ ड्राइविंग कार किसी की दुर्घटना कर देती है किसी के साथ तो फिर जब ड्राइवर ही नहीं है तो आप मुकदमा किस पर चलाएंगे?
विचार: अमेरिकी जनता के समक्ष बड़े निर्णय की घड़ी
मध्यावधि चुनावों में बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका के लोग डोनल्ड ट्रंप के दौर में जारी पतन से अपने देश को बचाने का प्रयास करेंगे।
इधर अमेरिका, उधर चीन: महाशक्तियों की दुश्मनी भी उतनी ही खतरनाक है, जितनी कि उनकी दोस्ती
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Iran America War: ईरान के पास Father of all Bombs,अमेरिका को सीधी धमकी से उठे सवाल| Trump
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इलॉन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के लिए एक नए फीचर का ऐलान किया है। इसके तहत यूजर लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी भी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर टिप के तौर पर भेज सकेंगे। यह ट्रांजैक्शन X के पेमेंट प्लेटफॉर्म 'X मनी' के जरिए पूरा होगा। यह फीचर अभी सिर्फ अमेरिका के X यूजर्स के लिए ही होगा। मस्क ने X पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'हम X मनी के जरिए किसी को भी $1 भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस का ऑप्शन जोड़ रहे हैं।' कैसे काम करेगा $1 टिपिंग सिस्टम? इस नए सिस्टम में किसी पोस्ट के क्रिएटर को पैसे भेजने के लिए यूजर को सिर्फ लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए 1 डॉलर सीधे यूजर के अकाउंट से ट्रांसफर हो जाएगा। यह फीचर यूजर्स को बिना किसी अलग पेमेंट प्रोसेस में जाए सीधे क्रिएटर को सपोर्ट करने का आसान तरीका देता है। हालांकि, X ने अभी तक इसके रोलआउट की तारीख या एलिजिबिलिटी की शर्तों का खुलासा नहीं किया है। कंपनी ने यह भी साफ नहीं किया है कि डिफॉल्ट $1 की रकम को बदला जा सकेगा या नहीं, या भविष्य में एडिशनल पेमेंट ऑप्शन मिलेंगे या नहीं। क्या है X मनी और इसके फीचर्स? X मनी की शुरुआत अमेरिका में जुलाई 2026 में हुई थी। यह सर्विस यूजर्स को पीयर-टू-पीयर (P2P) यानी पर्सन-टू-पर्सन मनी ट्रांसफर, डिपॉजिट अकाउंट्स और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड की सुविधा देती है। यह सर्विस पूरी तरह से 'क्रॉस रिवर बैंक' के बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करती है। यानी X मनी खुद एक बैंक नहीं है, बल्कि एक फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए मिलने वाला डेबिट कार्ड एपल पे से भी कनेक्ट हो जाता है। साथ ही, एलिजिबल डिपॉजिट्स पर ब्याज और खरीदारी पर कैशबेक जैसे फायदे भी मिलते हैं। X को 'एवरीथिंग एप' बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ एक सोशल नेटवर्किंग साइट न रखकर एक 'एवरीथिंग एप' बनाना चाहते हैं, जहां मैसेजिंग, सोशल मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज एक साथ मिल सकें। X मनी का यह $1 टिपिंग फीचर उसी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। अगर यह बड़े पैमाने पर लागू होता है, तो इससे क्रिएटर्स को सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी लॉन्च करने या भारतीय यूजर्स के लिए $1 टिपिंग फीचर अवेलेबल कराने को लेकर अब तक कोई ऑफिशियल तारीख या ऐलान नहीं किया है। भारत के पास पहले से ही UPI बेस्ड एक मजबूत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम मौजूद है। ऐसे में अगर X मनी भारत में आता है, तो इसे देश के नियमों का पालन करना होगा। फिलहाल यह फीचर केवल अमेरिकी बाजार पर फोकस है। क्या होता है 'एवरीथिंग एप'? 'एवरीथिंग एप' या 'सुपर एप' उस डिजिटल प्लेटफॉर्म को कहते हैं, जहां एक ही एप्लिकेशन में सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल वॉलेट, शॉपिंग, कैब बुकिंग और बैंकिंग जैसी तमाम सर्विसेज एक साथ मिलती हैं। चीन का 'वीचैट'इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इलॉन मस्क X को इसी तर्ज पर दुनिया का सबसे बड़ा सुपर एप बनाना चाहते हैं। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी स्टार्टअप का पारे से सोना बनाने का दावा:क्या हीरे की तरह सस्ता होगा गोल्ड; पहले भी 2 बार लैब में कोशिश हो चुकी सैन फ्रांसिस्को का एक स्टार्ट-अप है मैराथन फ्यूजन। दावा है कि उसने पारे को सोने में बदल दिया है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसने प्रयोग में कुल कितना सोना बनाया है। यही वजह है कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या सच में बाजार में बेचने लायक सोना बन भी पाएगा? 'द अटलांटिक' के मुताबिक, यह कोई नया विचार नहीं है। इसके पहले भी 2 बार लैब में सोना बनाने की कोशिश हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
सैन फ्रांसिस्को का एक स्टार्ट-अप है मैराथन फ्यूजन। दावा है कि उसने पारे को सोने में बदल दिया है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसने प्रयोग में कुल कितना सोना बनाया है। यही वजह है कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या सच में बाजार में बेचने लायक सोना बन भी पाएगा? 'द अटलांटिक' के मुताबिक, यह कोई नया विचार नहीं है। इसके पहले भी 2 बार लैब में सोना बनाने की कोशिश हो चुकी है। 10 आसान सवाल-जवाब में समझते हैं मैराथन फ्यूजन के दावे का पूरा सच…. सवाल 1: मैराथन फ्यूजन ने क्या दावा किया है? जवाब: मैराथन फ्यूजन ने कहा कि उसने पारे को सोने में बदल दिया है। दावा है कि उसकी यह उपलब्धि CERN के पिछले रिकॉर्ड से 10 गुना बेहतर है। कंपनी ने कहा कि अब, हम रिकॉर्ड बिजली/ऊर्जा पैदा करने के लिए सैन फ्रांसिस्को में एक फ्यूजन रिएक्टर बना रहे हैं। CERN दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु प्रयोगशाला है, जहां ब्रह्मांड के मूलभूत कणों और नियमों पर रिसर्च की जाती है। CERN ने भी अपने 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' में लेड कणों की टक्कर के दौरान अनजाने में सोना बनाया था, लेकिन वह बेहद मामूली मात्रा में बना था। सवाल 2: मैराथन फ्यूजन असल में सोना क्यों बनाना चाहता है? जवाब: सोना बनाना मैराथन फ्यूजन का मुख्य बिजनेस नहीं है, बल्कि यह एक साइड बिजनेस जैसा है। न्यूक्लियर फ्यूजन ऊर्जा का एक बेहद साफ और असीमित स्रोत है जो भविष्य में कोयले-पेट्रोल की जगह ले सकता है, लेकिन यह तकनीक बहुत ज्यादा महंगी है। कंपनी के को-फाउंडर एडम रुतकोव्स्की के अनुसार, फ्यूजन के दौरान बनने वाले सोने से जो करोड़ों डॉलर मिलेंगे, उससे फ्यूजन के भारी-भरकम खर्चों की भरपाई की जा सकेगी। हर धातु या तत्व की अपनी एक पहचान होती है, जो उसके केंद्र में मौजूद प्रोटॉन की संख्या से तय होती है। पारे के केंद्र में 80 प्रोटॉन होते हैं। वहीं सोने के केंद्र में 79 प्रोटॉन होते हैं। यानी अगर पारे में से सिर्फ 1 प्रोटॉन कम कर दिया जाए, तो वह अपने आप सोना बन जाएगा। सवाल 3: पारे से सोना बनाने की प्रक्रिया क्या है? जवाब: स्टेप 1- कंपनी फ्यूजन रिएक्शन के दौरान बेहद तेज रफ्तार वाले न्यूट्रॉन्स की बौछार पारे के ऊपर करती है। तेज रफ्तार न्यूट्रॉन पारे के परमाणु से टकराता है और उसके अंदर से न्यूट्रॉन को बाहर निकाल देता है। इससे पारा बदलकर 'मरकरी-197' नाम के एक अस्थायी और रेडियोएक्टिव रूप में आ जाता है। स्टेप 2- मरकरी-197 का यह रूप ज्यादा देर ऐसे नहीं रह सकता। लगभग 64 घंटे के अंदर यह खुद को शांत करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन सोख लेता है। इलेक्ट्रॉन सोखते ही पारे के अंदर का एक प्रोटॉन बदलकर न्यूट्रॉन बन जाता है। इससे प्रोटॉन की संख्या 80 से घटकर 79 रह जाती है। सवाल 4: न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक क्या है और यह काम कैसे करती है? जवाब: न्यूक्लियर फ्यूजन बिल्कुल वही प्रक्रिया है जिससे सूरज लगातार ऊर्जा पैदा करता है। इसमें दो परमाणुओं जैसे हाइड्रोजन के आइसोटोप्स को बहुत तेज तापमान और दबाव में आपस में जोड़ा जाता है। इस जुड़ाव से बहुत भारी मात्रा में साफ-सुथरी ऊर्जा पैदा होती है। सवाल 5: क्या विज्ञान की मदद से पहले भी लैब में सोना बनाया गया है? जवाब: सवाल 6: तकनीक सफल होती है, तो एक प्लांट में कितना सोना बन सकता है? जवाब: मैराथन फ्यूजन के 2025 के रिसर्च पेपर के मुताबिक, 1 गीगावाट थर्मल पावर वाले कॉमर्शियल फ्यूजन प्लांट से सालाना करीब 2 टन सोना बनाया जा सकता है। सवाल 7: इस प्रोजेक्ट के सामने सबसे बड़ी तकनीकी रुकावटें क्या हैं? जवाब: इसके सामने 2 बड़ी रुकावटें हैं: सवाल 8: इतिहास में पारस पत्थर का क्या रहस्य रहा है? जवाब: 2,000 सालों से इंसान धातुओं को सोने में बदलने का सपना देखता आया है। ऐसा माना जाता रहा है कि एक ऐसा जादुई पत्थर है जो किसी भी धातु को छूते ही सोना बना सकता है। 1782 में ब्रिटिश केमिस्ट जेम्स प्राइस ने जादुई पाउडर से पारे को सोना बनाने का दावा किया। जब वैज्ञानिकों के सामने इसका डेमो मांगा गया, तो उन्होंने जहर पीकर जान दे दी। वहीं, 20वीं सदी में रुडोल्फ हंटर ने सूरज के नियमों से रोज हजारों डॉलर का सोना बनाने का दावा किया, पर साबित करने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। सवाल 9: अन्य वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मैराथन के इस दावे पर क्या कह रहे हैं? जवाब: सवाल 10: क्या लैब-मेड गोल्ड से बाजार में सोने की कीमतें गिर जाएंगी? जवाब: कृत्रिम हीरे की तरह सोना बनाना सस्ता नहीं है। 2025 में दुनिया की खदानों से 3,672 टन सोना निकाला गया था। दुनिया में कुल 2,22,600 टन माइन्ड सोना पहले से मौजूद है। मैराथन के अनुमानित 2 टन सालाना उत्पादन से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ये खबर भी पढ़ें… स्टारलिंक बोली-हम 5 सालों से भारत में काम कर रहे: हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार, मंजूरी मिलने का इंतजार इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने कहा है कि वह भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान शेयर करते हुए बताया कि वह पिछले 5 सालों से भारतीय रेगुलेटर्स, इंडस्ट्री और ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…
विचार: अमेरिका के समक्ष अडिग रहे भारत
यदि अमेरिका चाहता है कि भारत उसके ऊर्जा हितों की रक्षा में सहायक बने तो उसे भी भारतीय हितों की रक्षा के प्रति संवेदनशील होना होगा।
Hormuz Strait में Iran ने उड़ाए दो अमेरिकी सुपरटैंकर! | Iran US War | Trump | Mojtaba Khamenei
Hormuz Strait में Iran ने उड़ाए दो अमेरिकी सुपरटैंकर! | Iran US War | Trump | Mojtaba Khamenei Iran America War के बीच Strait of Hormuz से जुड़ा बड़ा दावा सामने आया है।
ईरान की अमेरिका को सीधी चेतावनी, नए हमले का देंगे कड़ा जवाब
ईरान की अंडरग्राउंड ड्रोन फैक्ट्री से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एक बड़ा संदेश जारी किया गया है. ईरान के आर्मी चीफ मेजर जनरल अमीर हाफ ने इस सीक्रेट ड्रोन फैक्ट्री का दौरा कर अमेरिकी राष्ट्रपति को सीधी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान पर कोई नया सैन्य हमला हुआ, तो अमेरिका और इजरायल को एक नहीं बल्कि कई सरप्राइज हमलों का सामना करना पड़ेगा.
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विचार: अमेरिका में बढ़ता हिंदूफोबिया
अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई है
हर आईआईटीएन का सपना होता है कि वह दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनी में काम करे। भारतीय मूल की प्रणीता पुजारी ने भी ऐसा ही किया। आईआईटी कानपुर से पढ़ाई करने के बाद अमेरिका में एमबीए किया। फिर उन्होंने फ्लिपकार्ट और अमेजॉन के साथ अपने करियर की शुरुआत की
भारतीय कंपनियों पर पाबंदी से अमेरिका को भी नुकसान
चुनाव नजदीक आते ही राजनेता लुभावनी घोषणाएं करते हैं। रियायतों का ढेर लगाते हैं। समर्थकों का भरोसा बनाए रखने के वास्ते उनकी पसंद के फैसले लेते हैं
आईआईटी के बाद अमेरिका से PhD, अब AI चिप्स की हीट कम करने की तैयारी, कंपनी को मिले 80 करोड़ रुपये
आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र आकाश रामदास ने अपनी रिसर्च को ही बिजनेस आइडिया बनाया है। उनके एआई स्टार्टअप को करीब 80 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है।
अमेरिका में कंट्रोल, मुंबई में फायरिंग... टाइगर श्रॉफ गोली कांड में बिश्नोई गैंग का नाम
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार हुए और 17 साल के एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया. जांच में लारेंस बिश्नोई गैंग का नाम और अमेरिका से उसका कंट्रोल होने की बात सामने आने से बॉलीवुड को धमकाकर उगाही के आरोप फिर केंद्र में हैं.
Iran America War: अमेरिका बना रहा MOAB से हमले का प्लान,ईरान का पलटवार क्या होगा?|Trump
इस बार भी सुगबुगाहट बढ़ रही है कि अमेरिका ईरान पर बहुत तगड़ा अटैक करने जा रहा है...ये हमला न्यूक्लियर तो नहीं होगा..लेकिन उससे कम भी नहीं होगा...क्यों की अमेरिका मदर ऑफ ऑल बम्बस का इस्तेमाल करेगा और ईरान इसका जवाब देने की तैयारी कर रहा है…
विचार: भारतीय आकांक्षाओं को समझे अमेरिका
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब व्यापार वार्ता और रूसी तेल खरीद को लेकर भारत-अमेरिका संबंध निर्णायक मोड़ पर हैं
अमेरिकी बॉक्स ऑफिस पर रामायण का धमाका, टूटेगा धुरंधर 2 का रिकॉर्ड?
रामायण फिल्म के एक ट्रेलर ने अमेरिकी ऑडियंस में कैसा भौकाल मचाया है, इसकी एक झलक अब देखने मिल गई है. बीते दिन फिल्म की प्री-सेल एडवांस बुकिंग की शुरुआत हुई, और इसने खुलते ही धमाका कर दिया है.
विचार: अमेरिका के लिए संकट की घड़ी
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका से हूतियों पर हमले की अपील की थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध और यूक्रेन में खुले मोर्चे के चलते हथियारों की किल्लत के कारण यमन में नया मोर्चा खोलने से मना कर दिया।
बॉलीवुड स्टार आमिर खान के भतीजे और अभिनेता इमरान खान कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। मुंबई पुलिस ने उन्हें एक आधिकारिक नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद मिली है। यह नोटिस उन्हें तब मिला, जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इमरान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित इस प्रदर्शन में भाग लिया था। इस प्रदर्शन के सिलसिले में मुंबई पुलिस ने अभिनेता को हिरासत में भी लिया था। CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस मिली जानकारी के अनुसार, इमरान के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट (प्रवासन अधिनियम) के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। उन पर आरोप है कि भारतीय नागरिक न होने के बावजूद उन्होंने भारत में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) कार्ड है, जो उन्हें भारत में रहने और काम करने की अनुमति देता है। हाल ही में हुए विवाद के बाद अक्टूबर 2026 में उनकी नागरिकता की स्थिति चर्चा में आ गई। 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने इमरान खान को हिरासत में लिया इससे पहले, 10 अक्टूबर को बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। इमरान को 10 अक्टूबर 2026 को शाम 5:20 बजे हिरासत में लिया गया था। इसके कुछ समय बाद, अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर पुलिस वैन के अंदर से एक तस्वीर साझा की और कैप्शन में लिखा, लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूँ। इमरान खान के अलावा, उनके चचेरे भाई और 'मेड इन हेवन' के अभिनेता ज़ैन खान को भी इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस घटना के बारे में एक मज़ेदार अंदाज़ में जानकारी साझा की। हिरासत में लिए जाने से पहले, 'दिल्ली बेली' के अभिनेता ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, मेरी कोई मांगें नहीं हैं। मैं यहां एक नागरिक के तौर पर आया हूं, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही पर रोक क्यों लगाई जा रही है—और लोगों की आवाज़ को क्यों दबाया जा रहा है। बस इसीलिए मैं यहां हूं। मैं ऐसी स्थिति में नहीं हूं कि किसी के सामने कोई मांग रख सकूं। और न ही मैं किसी संगठन से जुड़ा हूं। मैं यहां बस एक प्रतिनिधि के तौर पर आया हूं। यह विरोध प्रदर्शन 'हम भारत के लोग' (We, the People of India) के बैनर तले आयोजित किया गया था। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में दोपहर 3:30 बजे इसका कार्यक्रम तय था। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही, पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी, बैरिकेड्स लगा दिए और कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया। साथ ही, प्रदर्शन में हिस्सा लेने आ रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। View this post on Instagram A post shared by Imran Khan (@imrankhan)
ट्रेड डील पर बड़ी उम्मीद, इसी हफ्ते भारत आएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत दौरे पर रहेंगे. इस दौरान व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता किसी निष्कर्ष के करीब पहुंच रही है.
रूस के आगे फिर नरम पड़ा अमेरिका
रूस से ‘डीजल समझौता’ करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साथ कई समस्याओं से पार पाने का प्रयास किया है। इस समझौते के तहत मॉस्को तुरंत तीन लाख टन डीजल वाशिंगटन को देगा और फिर नवंबर में पांच लाख टन। अगली आपूर्ति में यह आंकड़ा बढ़कर 10 लाख टन तक हो जाएगा…
विश्व राजनय में विडंबना या विरोधाभास की पराकाष्ठा बेहद दुखद और शर्मनाक है। अमेरिका ने रूस के साथ डीजल आयात के लिए समझौता किया है। वह रूस से पहले ही यूरेनियम और उर्वरक आयात करता रहा है। स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने…
अमेरिकी सरकार के नए आदेश के बाद यूनिवर्सिटी ने बंद की लॉ एक्सटर्नशिप
अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे और भविष्य में वहां जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और निराश करने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वर्क परमिट और ऑफ-कैंपस ट्रेनिंग से जुड़े नियमों में हाल ही में किए गए कड़े बदलावों और नए दिशानिर्देशों के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल (HLS) ने बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय जेडी (J.D.) छात्रों के लिए अपनी सभी 13 लॉ एक्सटर्नशिप क्लिनिक प्रोग्राम्स में काम करने की मंजूरी (वर्क ऑथराइजेशन) को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इस फैसले का सीधा असर अमेरिका में पढ़ रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों पर पड़ा है, जिनमें भारतीय छात्रों की संख्या भी अच्छी-खासी है। अमेरिकी सरकार द्वारा करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (CPT) के नियमों को सख्त किए जाने के बाद यूनिवर्सिटी को कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी लॉ फर्मों, सरकारी एजेंसियों और गैर-लाभकारी संगठनों में प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करने के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं।अमेरिकी सरकार के कड़े नियम और CPT वर्क ऑथराइजेशन पर लगा ब्रेकअमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए फेडरल गाइडलाइन के अनुसार, विदेशी छात्रों को ऑफ-कैंपस वर्क परमिट यानी सीपीटी (Curricular Practical Training) देने के मानकों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को केवल उन्हीं वर्क प्रोग्राम्स में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है जो उनके डिग्री पाठ्यक्रम के लिए पूरी तरह से अनिवार्य हों। हार्वर्ड लॉ स्कूल में एक्सटर्नशिप क्लिनिक एक वैकल्पिक यानी इलेक्टिव कोर्स का हिस्सा थे, जिसके कारण नए नियमों के तहत विदेशी छात्रों को इन क्लिनिक्स में काम करने के लिए ऑथराइजेशन देना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता था। इस कड़े रुख के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 13 प्रमुख एक्सटर्नशिप प्रोग्राम्स से बाहर रखने का फैसला लिया है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने यह स्पष्ट किया है कि एलएलएम (LL.M.) प्रोग्राम के छात्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जेडी (J.D.) डिग्री ले रहे भारतीय व अंतरराष्ट्रीय छात्र इससे सीधे प्रभावित हुए हैं।भारतीय छात्रों के करियर पर बड़ा असर और प्रैक्टिकल एक्सपीरिएंस का संकटअमेरिका में कानून की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक्सटर्नशिप केवल क्रेडिट हासिल करने का जरिया नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वे अमेरिकी कानूनी प्रणाली, शीर्ष अदालतों, बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनियों और मानवाधिकार संगठनों में काम करने का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते थे। हार्वर्ड के इस फैसले के बाद भारतीय छात्रों को अब केवल यूनिवर्सिटी के इन-हाउस (ऑन-कैंपस) क्लिनिकल प्रोग्राम्स तक ही सीमित रहना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रैक्टिकल अनुभव के बिना अमेरिकी जॉब मार्केट में प्रवेश करना और पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां वर्क वीजा (H-1B) हासिल करना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जो छात्र प्रैक्टिकल अनुभव के लिए ऑप्टेशनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) का इस्तेमाल करेंगे, उनका पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क टाइम कोटा समय से पहले ही खत्म हो जाएगा, जिससे उनका करियर प्लान पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।अमेरिकी नीतियों में बदलाव और वैश्विक उच्च शिक्षा का बदलता परिदृश्यपिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन द्वारा छात्र वीजा (F-1 वीजा) और उससे जुड़ी रोजगार नीतियों में लगातार सख्ती बरती जा रही है। केवल हार्वर्ड ही नहीं, बल्कि अमेरिका की कई अन्य प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ भी इन नए फेडरल नियमों की वजह से अपने इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम्स और वर्क परमिट पॉलिसी में बदलाव करने पर मजबूर हो रही हैं। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के मन में असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। लाखों रुपये की फीस और भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर अमेरिका पढ़ने जाने वाले छात्रों के सामने अब पढ़ाई के साथ-साथ वर्क एक्सपीरियंस हासिल करने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी नीतियां इसी तरह सख्त होती रहीं, तो भारतीय छात्र अमेरिका के बजाय ब्रिटेन, कनाडा या यूरोप के अन्य देशों का रुख कर सकते हैं।
दोहरे तर्क: कटघरे में अमेरिकी नीतियों की विश्वसनीयता, खुद जरूरत पड़ी तो रूस से डीजल आयात करने को राजी हुए ट्रंप
अमेरिका में वीजा का एक पहलू यह भी: जेडी वेंस की बात अपमानजनक, लेकिनजिस निर्भरता की ओर इशारा किया, वह असली
Houthis Attack on Riyadh Airport: Saudi पर बड़ा हमला, अमेरिकी सहित 12 की मौत, 300 घायल | Yemen War
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Iran attack on US Base का वीडियो देखिए, इधर-उधर भागते दिखे अमेरिकी सैनिक | Iran America war
अमेरिका को जाएं भूल: इन 5 देशों में जॉब के बाद आसानी से मिल जाता है PR
विदेशों में जाकर नौकरी करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका (USA) अब इकलौता विकल्प नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के कड़े वीजा नियमों, ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार और अनिश्चितताओं के चलते भारतीय प्रोफेशनल्स अब दुनिया के दूसरे देशों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर आपका भी सपना विदेश में जाकर काम करने और वहां की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) हासिल करने का है, तो आपको अमेरिका के बजाय दुनिया के उन पांच प्रमुख देशों पर नजर डालनी चाहिए जहां नौकरी मिलने के बाद बेहद आसानी से और पारदर्शी नियमों के तहत पीआर मिल जाती है। आज के इस विशेष आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही 5 शानदार देशों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जो भारतीय युवाओं और स्किल्ड वर्कर्स के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।कनाडा: भारतीय युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय और आसान पीआर प्रक्रिया वाला देशविदेशों में बसने की चाह रखने वाले भारतीयों की सूची में कनाडा (Canada) हमेशा से शीर्ष पर रहा है। एक्सप्रेस एंट्री (Express Entry) सिस्टम और प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) जैसी बेहतरीन नीतियों के चलते कनाडा में स्किल्ड वर्कर्स के लिए पीआर हासिल करना काफी सुगम माना जाता है। यदि आपके पास अच्छा वर्क एक्सपीरियंस, अंग्रेजी या फ्रेंच भाषा में अच्छी पकड़ और उच्च शिक्षा है, तो आप कम समय में कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी हासिल कर सकते हैं। हालांकि हाल के दिनों में वहां कुछ नियमों में बदलाव जरूर किए गए हैं, लेकिन आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए कनाडा आज भी दुनिया का सबसे पसंदीदा और भारतीय-अनुकूल देश बना हुआ है।जर्मनी: यूरोप का पावरहाउस जहां टैलेंटेड प्रोफेशनल्स के लिए तेजी से खुल रहे हैं पीआर के द्वारयूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था और औद्योगिक केंद्र जर्मनी (Germany) ने हाल के वर्षों में विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे बहुत ज्यादा खोल दिए हैं। भारत जैसे देशों से कुशल इंजीनियरों, आईटी एक्सपर्ट्स, डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी मांग को देखते हुए जर्मनी ने 'ऑपर्चुनिटी कार्ड' (Chancenkarte) और 'यूूरोपीय ब्लू कार्ड' (EU Blue Card) जैसी कई क्रांतिकारी योजनाएं शुरू की हैं। जर्मनी के नए आप्रवासन कानूनों के अनुसार, यदि आप वहां नौकरी पा लेते हैं और जर्मन भाषा का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, तो आप बहुत ही कम वर्षों में स्थाई निवास (Permanent Residency) के लिए पात्र बन जाते हैं। उच्च जीवन स्तर और मजबूत सामाजिक सुरक्षा के कारण भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच जर्मनी तेजी से पसंदीदा विकल्प बनता जा रहा है।ऑस्ट्रेलिया: प्वॉइंट-बेस्ड सिस्टम के जरिए पीआर पाने का बेहतरीन और सुनहरा मौकाअपनी खूबसूरत जीवनशैली, बेहतरीन जलवायु और उच्च वेतनमान के लिए पहचाना जाने वाला ऑस्ट्रेलिया (Australia) भी भारतीय युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। ऑस्ट्रेलिया का इमीग्रेशन सिस्टम पूरी तरह से प्वॉइंट-बेस्ड (Points-Based System) है, जहां आपकी उम्र, शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेजी दक्षता (PTE/IELTS) और कार्य अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते हैं। यदि आपकी स्किल्स ऑस्ट्रेलिया की 'स्किल ऑक्यूपेशन लिस्ट' (Skilled Occupation List) में शामिल हैं, तो आप स्वतंत्र स्किल्ड वीजा के माध्यम से सीधे पीआर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय इलाकों (Regional Areas) में पढ़ाई या नौकरी करने वाले युवाओं को पीआर हासिल करने में अतिरिक्त लाभ और प्राथमिकता मिलती है।न्यूजीलैंड: वर्क-टू-रेसिडेंसी पाथवे के साथ शांतिपूर्ण और स्थिर भविष्य की गारंटीप्रकृति की गोद में बसे शांत और विकसित देश न्यूजीलैंड (New Zealand) ने स्किल्ड माइग्रेंट्स के लिए अपनी नीतियों को काफी सरल और आकर्षक बना दिया है। न्यूजीलैंड सरकार की 'ग्रीन लिस्ट' (Green List) और 'वर्क-टू-रेसिडेंसी' (Work to Residence) पाथवे के तहत यदि आप निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईटी या कृषि क्षेत्र में कुशल नौकरी प्राप्त कर लेते हैं, तो आपको बिना किसी जटिल प्रक्रिया के सीधे रेजिडेंसी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। न्यूजीलैंड में काम करने वाले भारतीयों को न केवल बेहतरीन वर्क-लाइफ बैलेंस मिलता है, बल्कि वहां का सुरक्षित और प्रगतिशील माहौल परिवार के साथ बसने के लिए आदर्श माना जाता है।यूनाइटेड किंगडम (UK): स्किल्ड वर्कर वीजा के जरिए ब्रिटिश पीआर पाने का आसान रास्तापारंपरिक रूप से भारतीयों के पसंदीदा देशों में शामिल यूके ने ब्रेक्जिट के बाद से अपनी वीजा प्रणाली में बड़े और सकारात्मक बदलाव किए हैं। यूके का 'स्किल्ड वर्कर वीजा' (Skilled Worker Visa) उन सभी भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है जो ब्रिटेन में करियर बनाना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवा (NHS), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, फाइनेंस और अकादमिक क्षेत्रों में कुशल कामगारों की भारी मांग है। यूके के नियमों के अनुसार, यदि आप लगातार 5 वर्षों तक वैध वर्क वीजा पर वहां नौकरी करते हैं और न्यूनतम आय के मानदंडों को पूरा करते हैं, तो आप ब्रिटेन में सेटेलमेंट (Indefinite Leave to Remain) यानी पीआर के लिए आवेदन करने के योग्य हो जाते हैं। अमेरिका के मुकाबले यूके में पीआर की राह काफी स्पष्ट और व्यवस्थित है।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी निवास कार्यक्रम से बाहर करने और वीजा नियमों को सख्त करने को भारत विरोधी और अहंकारी बताया गया है
आलू भुजिया के मसालों से ठीक हुआ अस्थमा? अमेरिकी शख्स का दावा, भारतीय खाने को बताया फायदेमंद
भारतीय मसालों और खाने के कई फायदे आपने सुने होंगे लेकिन क्या कभी पैकेट वाली आलू भुजिया को अस्थमा के इलाज के लिए खाया है। अमेरिकन शख्स सैम ने वीडियो में आलू भुजिया के पैकेट की फोटो दिखाई और उसमें लिखे मसालों को अस्थमा-एलर्जी का इलाज बताया। चलिए पूरी स्टोरी जानते हैं।
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
'तब आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति बुलाएंगे', बिहार के छात्र ने छोड़ा अमेरिका, फिर सच कर दिखाया सपना
“मेरे अंदर के बिहारी ने कहा, ‘मैं तब वापस आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति मुझे बुलाएंगे’”: जब शरद सागर ने भारत में काम करने के लिए अमेरिका छोड़ा, तो लोग हंसे, लेकिन उन्होंने भविष्य को सच कर दिखाया।
Iran US War: ईरान ने दागी Sayyad-3 मिसाइल, क्या अमेरिकी एयरक्राफ्ट था निशाने पर? | Trump | Mojtaba
ईरान ने अचानक ऐसी मिसाइल दागी कि अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है...क्योंकि जिस जगह से यह मिसाइल चली, वहां कुछ मिनट पहले अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान देखे गए थे.
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran America war में ईरान ने अमेरिका को Middle East से ही खदेड़ दिया? Prof Peter Kuznik का बड़ा दावा
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रही उथल-पुथल अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। वैश्विक मामलों के जानकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में दशकों से चला आ रहा अमेरिकी दबदबा अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा!
बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा! असली मुद्दा ये है कि इराक में मुकीम सबसे बड़ी फोर्स हशदुशशाबी के लिए ये नाजुक और इम्तेहान की घड़ी है...वो इसलिए क्यों कि अमेरिका और इजरायल किसी भी सूरत में इराक में ईरान हिमायती इन फोर्सेस का खात्मा चाहते हैं..
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट क्यों भागी अमेरिकी सेना! Trump। Iran। Middle East
Iran America War के बीच Iraq से क्यों निकल रही US की फोर्सेस,अब कौन हावी?| Trump
विचार: अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजे भारत
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन : राष्ट्रपति शी का दबदबा, और ट्रंप के पत्ते
एआई के मुद्दे पर, राष्ट्रपति शी ने एआई विकास पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण का विरोध किया और ओपन-सोर्स एआई का समर्थन किया।
Iran America War में IRGC ने Hormuz Strait में उड़ाया अमेरिकी सुरक्षा में तैनात जहाज | Trump
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चल रहे जहाजों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक तेल टैंकर के प्रभावित होने की भी प्रारंभिक सूचना है
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
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अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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