ब्रिटेन में अमेरिकी एयरबेस पर हमले की साजिश! ईरान की मदद के शक में 2 गिरफ्तार
ब्रिटेन में ईरान की खुफिया सेवा की मदद करने के शक में दो लोगों को दोबारा गिरफ्तार किया गया है. दोनों पर RAF Fairford स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाने की कथित साजिश में मदद करने का शक है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति संकट के बीच भारत, अमेरिका और यूएई के विदेश मंत्रियों ने मुंबई में त्रिपक्षीय बैठक की। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध रखने और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।
भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से एक ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) को अंतिम रूप देने के 'बेहद करीब' पहुंच चुके हैं। रुबियो के अनुसार, दोनों देशों के वार्ताकारों ने ज्यादातर विवादित और जटिल मुद्दों को सुलझा लिया है और अब केवल कुछ सीमित तकनीकी पहलुओं को ही अंतिम रूप दिया जाना शेष है। इस बयान के बाद दोनों देशों के कारोबारी गलियारों और वैश्विक बाजारों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि यह डील एशिया-प्रशांत और वैश्विक सप्लाई चेन के समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने आधिकारिक भारत दौरे के दौरान मुंबई में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों से गहन चर्चा की है। उन्होंने कहा कि हालांकि व्यापार समझौतों की तकनीकी वार्ता सीधे तौर पर विदेश विभाग के दायरे में नहीं आती, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वे खुद इस रणनीतिक डील की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। रुबियो ने दो टूक शब्दों में कहा कि दोनों पक्ष उतने करीब पहुंच चुके हैं जितना किसी समझौते पर हस्ताक्षर होने से ठीक पहले हो सकते हैं, और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही दोनों देश दुनिया के सामने इस बड़ी खुशखबरी की घोषणा कर इसे औपचारिक रूप से साइन करेंगे।ट्रेड डील के इतने करीब पहुंचे दोनों देश: सिर्फ कुछ चुनिंदा मुद्दे बाकीमार्को रुबियो ने व्यापार समझौते की वर्तमान स्थिति का ब्योरा देते हुए बताया कि दोनों देशों की टीमें पिछले कई महीनों से कानूनी ड्राफ्टिंग और क्लॉज-बाय-क्लॉज समीक्षा पर काम कर रही हैं। दोनों पक्षों का मुख्य उद्देश्य टैरिफ (आयात शुल्क) में पारस्परिक कटौती करना, रणनीतिक सामानों और सेवाओं के लिए बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना और गैर-टैरिफ बाधाओं को समाप्त करना है।व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, समझौते का पहला चरण (First Tranche) लगभग तैयार हो चुका है। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि, डेयरी और चुनिंदा औद्योगिक उत्पादों पर दोनों देशों के घरेलू हितों को संतुलित करने के लिए अंतिम बातचीत चल रही है। रुबियो ने भरोसा जताया कि इन बचे हुए मुद्दों पर भी सहमति बन जाएगी, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिलेगी।'भूगोल एक हकीकत है': रूसी तेल और वैश्विक ऊर्जा संकट पर रुबियो का रुखभारत के साथ ट्रेड डील की बात करते हुए मार्को रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर अमेरिकी प्रशासन का नजरिया भी साफ किया। उन्होंने कहा कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा छूट (National Security Waivers) या प्रतिबंधों से जुड़े नीतिगत फैसले लेते हैं, तो कई जटिल वैश्विक कारकों को ध्यान में रखा जाता है। रुबियो ने यथार्थवादी टिप्पणी करते हुए कहा कि 'भूगोल एक सच्चाई है' और दुनिया के कुछ देशों के लिए रातों-रात ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना संभव नहीं होता।उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति, कीमतों में स्थिरता और पश्चिम एशिया (हॉर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर) में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा प्रवाह को सुरक्षित रखना पहली प्राथमिकता है। अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में रूसी तेल खरीद पर प्रस्तावित भारी टैरिफ से जुड़े कदमों की समीक्षा के लिए समय लिया है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और साझेदार देशों पर नकारात्मक असर न पड़े। रुबियो ने भारत को अमेरिका का अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी बताते हुए कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने का प्रयास किया है और अमेरिका नई दिल्ली की चिंताओं को पूरी तरह समझता है।भारत को बताया 'रिफाइनिंग सुपरपावर', जामनगर दौरे पर नजरेंअमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत की रिफाइनिंग क्षमता की खुलकर सराहना करते हुए इसे 'रिफाइनिंग सुपरपावर' (Refining Superpower) करार दिया। भारत दौरे के तहत उनका गुजरात के जामनगर जाने का भी कार्यक्रम है, जहां दुनिया का सबसे बड़ा तेल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स स्थित है। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल (Heavy Crude) और अन्य स्रोतों के प्रसंस्करण में भारतीय रिफाइनरियां एक अहम संतुलनकारी भूमिका निभा सकती हैं।जामनगर में ऊर्जा बुनियादी ढांचे के अवलोकन और भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गजों के साथ होने वाली बैठकों से भारत और अमेरिका के बीच केवल पारंपरिक व्यापार ही नहीं, बल्कि पेट्रोकेमिकल्स, एलएनजी (LNG) और ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी बड़े दीर्घकालिक समझौतों की जमीन तैयार होगी।द्विपक्षीय व्यापार में नया उछाल और भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलने वाले फायदेयदि भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता जल्द औपचारिक रूप ले लेता है, तो इसके भारतीय निर्यातकों, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सेवा क्षेत्र के लिए व्यापक सकारात्मक परिणाम होंगे। वर्तमान में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। डील के जरिए भारतीय कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, जेम्स एंड ज्वैलरी और आईटी सेवाओं को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी लाभ मिलने की उम्मीद है।दूसरी ओर, अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत के तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और ऊर्जा उपकरणों के निर्यात की राह और अधिक सुगम होगी। साथ ही, चीन पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अत्यधिक निर्भरता को कम करने (De-risking/China+1 Strategy) की दिशा में यह ट्रेड पैक्ट दोनों लोकतांत्रिक देशों को एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा घेरा प्रदान करेगा।जल्द हो सकता है आधिकारिक हस्ताक्षर समारोहराजनयिक सूत्रों के अनुसार, मार्को रुबियो और भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच द्विपक्षीय बातचीत के दौरान रक्षा सहयोग, हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) की सुरक्षा स्थिति और व्यापार समझौते के अंतिम प्रारूप पर विस्तार से सहमति बन चुकी है। दोनों देशों के व्यापार मंत्रालयों द्वारा अंतिम कानूनी ड्राफ्ट को मंजूरी दिए जाने के बाद शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर इसकी औपचारिक घोषणा और हस्ताक्षर का कार्यक्रम तय किया जाएगा। रुबियो का यह आशावादी बयान स्पष्ट संकेत देता है कि दशकों से लंबित भारत-अमेरिका व्यापक व्यापार समझौता अब अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच चुका है।
Marco Rubio Jamnagar Refinery: गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के दौरे से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कंपनी की रिफाइनिंग क्षमताओं की जमकर तारीफ की है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि रिलायंस ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में एक बेहद महत्वपूर्ण प्लेयर है और उनका दौरा वेनेजुएला तथा पश्चिमी गोलार्ध से कच्चे तेल के आयात और प्रसंस्करण को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।'रिलायंस के पास रिफाइनिंग की असाधारण क्षमता'बुधवार को जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी का दौरा करने जा रहे अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, 'रिलायंस एक बेहद महत्वपूर्ण कंपनी है। उसके पास कच्चे तेल को रिफाइन करने की असाधारण क्षमता है।' रुबियो ने ये भी कहा कि रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमताएं भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने में बड़ी मदद कर सकती हैं।वेनेजुएला के कच्चे तेल पर रिलायंस के साथ सहयोग का बड़ा प्लानरुबियो ने कहा कि वेनेजुएला में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ रहा है और भारत का इतिहास रहा है कि वह वेनेजुएला के भारी और उच्च-सल्फर तेल को आसानी से रिफाइन कर लेता है।उन्होंने स्पष्ट किया, 'पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले तेल को जब भारत में रिफाइन किया जाता है, तो यह भारत के लिए भी फायदेमंद है और हमारे लिए भी।' अमेरिकी विदेश मंत्री ने अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र में रिलायंस के मौजूदा निवेश और रिफाइनिंग क्षमताओं की भी सराहना की।जामनगर में है दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्सरिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है, जिसकी कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रति दिन है।इस कॉम्प्लेक्स में दो बड़ी रिफाइनरी शामिल हैं, जो वेनेजुएला द्वारा उत्पादित भारी और उच्च-सल्फर ग्रेड जैसे जटिल कच्चे तेल को भी आसानी से प्रोसेस करने में सक्षम हैं।'बस कुछ हफ्तों की बात...', भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेतDisclaimer: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।
Marco Rubio Interview: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ ट्रेड डील, रूस से तेल खरीदने, पाकिस्तान, ईरान और क्वाड जैसे अहम मुद्दों पर बात की। नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग तैयार है। इसे पूरा होने में महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लगने की उम्मीद है।रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास आपसी संबंध मजबूत करने के असाधारण अवसर हैं।रुबियो ने रूस से तेल खरीद, पाकिस्तान में आतंकवाद और ईरान युद्ध के बारे में भी बात की।भारत-अमेरिका ट्रेड डीलरुबियो ने कहा कि ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है। कुछ तकनीकी मुद्दों को सुलझाना और समझौते की भाषा को अंतिम रूप देना बाकी है। उनके मुताबिक, घोषणा से पहले जरूरी है कि दोनों देश हर शर्त पर सहमत हों। उन्हें उम्मीद है कि डील कुछ हफ्तों में पूरी हो जाएगी।भारत को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ मिलने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि किसी भी ट्रेड डील का मकसद मौजूदा स्थिति से बेहतर शर्तें हासिल करना होता है। लेकिन इससे भी जरूरी है कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते लंबे समय तक टिकाऊ रहें।उन्होंने कहा कि हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं। भारत अपने हितों की रक्षा करेगा और अमेरिका भी ऐसा ही करेगा। लेकिन दोस्ती और सहयोग की वजह से दोनों देश मतभेदों को सुलझा सकते हैं। रुबियो के मुताबिक, समझौता ऐसा होना चाहिए, जो कुल मिलाकर दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।रूस से तेल खरीदने पर भारत की स्थिति समझते हैं रुबियोअमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की बात करता है, जबकि खुद भी रूस से डीजल खरीद रहा है। इस सवाल पर रुबियो ने कहा कि यूक्रेन युद्ध पांचवें साल में पहुंच चुका है और इसे खत्म करना जरूरी है। लेकिन रूस पर प्रतिबंधों का असर सिर्फ उसी देश पर नहीं पड़ता। रूस के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने दो चुनौतियां हैं। पहली, रूस पर दबाव बनाना, ताकि वह युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर आए। दूसरी, यह देखना कि इस दबाव का असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ रहा है।रुबियो के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका के हितों के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को भी देखना जरूरी है। उन्होंने माना कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच तनाव है। उम्मीद जताई कि ट्रेड डील और बातचीत से मतभेद कम हो सकते हैं।अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरतअमेरिका के इलिनॉय स्टेट में एक हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश और भारतीयों के खिलाफ नफरत के सवाल पर रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी घटनाओं से पूरी तरह अछूता नहीं है। हर समाज में कुछ लोग अज्ञानता और नफरत के कारण गलत काम करते हैं।हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत व्यापक स्तर पर फैली हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ आसपास के लोग भी पीड़ितों के समर्थन में खड़े होते हैं।रुबियो ने विस्कॉन्सिन में सिख समुदाय के साथ हुई एक भयावह घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका में यहूदी विरोधी घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनके मुताबिक, नेताओं को ऐसी नफरत को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, न ही उसका बचाव करना चाहिए या उसे नजरअंदाज करना चाहिए।पाकिस्तान पर अमेरिकी नीतिपाकिस्तान को लेकर अमेरिकी नीति पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ है। हालांकि, विदेश मंत्री के तौर पर उन्हें उन देशों के साथ भी संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।राहुल जोशी ने उन्हें याद दिलाया कि 2025 में अमेरिकी सीनेटर रहते हुए रुबियो ने पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता रोकने से जुड़ा विधेयक लाने की बात कही थी, अगर वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देता है। उनसे पूछा गया कि क्या अब उनकी नीति बदल गई है।रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से भी अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से की। उनके मुताबिक, भारत को भी ईरान के नेताओं से बातचीत करनी पड़ती है, भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने से अमेरिका को उन मुद्दों पर बातचीत करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता है। इससे आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद भी की जा सकती है।ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर तनावईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों को लेकर रुबियो ने कहा कि ईरान की सरकार के साथ समझौता करना मुश्किल है। उन्होंने ईरान की तुलना नाजी जर्मनी से की और आरोप लगाया कि ईरान व्यावसायिक जहाजों को निशाना बना रहा है। और ऐसे नाविकों की जान खतरे में डाल रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है।रुबियो ने कहा कि अमेरिका हर रात समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। उनके मुताबिक, ईरान की ओर से दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं। इससे जहाजों को नुकसान होता है और लोगों की जान भी जाती है।उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि समुद्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। इसी वजह से इन हमलों में कई भारतीयों की भी जान गई है। उन्होंने ईरान से ऐसे हमले रोकने की अपील की।क्वाड की बैठक साल के अंत से पहलेरुबियो ने उम्मीद जताई कि क्वाड देशों के नेताओं की बैठक इस साल के अंत से पहले होगी। उन्होंने बताया कि बैठक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान आयोजित करने पर सहमति बनी है। हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है।क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। रुबियो ने बताया कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक क्वाड से जुड़ी थी, जिसमें जयशंकर भी शामिल थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सात या आठ बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने अटलांटा में G20 के दौरान एक और बैठक होने की जानकारी भी दी।रुबियो के मुताबिक, क्वाड अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है। इसके तहत ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगली शिखर बैठक में भी ऐसे फैसलों और उनके नतीजों की घोषणा होनी चाहिए, जिनका वास्तविक असर दिखाई दे।जयशंकर के साथ रिश्तों की तारीफरुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक में जयशंकर शामिल थे। इसके बाद दोनों कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। जयशंकर चार बार अमेरिका भी गए हैं। दोनों की मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय बैठकों और सम्मेलनों में भी हुई हैं।रुबियो ने कहा कि जब भी दोनों किसी बैठक या कार्यक्रम के लिए एक ही शहर में होते हैं, तो मिलने का समय जरूर निकालते हैं। उनके मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में दोनों के बीच मजबूत कामकाजी रिश्ता बना है। इससे कई संवेदनशील और मुश्किल मुद्दों को संभालने में मदद मिली है।जामनगर में रिलायंस से मुलाकात क्यों?रुबियो ने अपनी जामनगर यात्रा को रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा सहयोग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि रिलायंस के पास कच्चे तेल को उपयोगी उत्पादों में बदलने की असाधारण क्षमता है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम बताया।रुबियो के मुताबिक, रिलायंस भारत को ऊर्जा आपूर्ति के अलग-अलग स्रोतों से जोड़ने में मदद कर सकती है। उन्होंने वेनेजुएला के तेल का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, वेनेजुएला अपना तेल उत्पादन बढ़ा रहा है और भारत लंबे समय से इस तरह के कच्चे तेल को रिफाइन करने में सक्षम रहा है।उन्होंने यह भी बताया कि रिलायंस ने अमेरिका में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश किया है। रुबियो ने कहा कि जामनगर में कंपनी के कामकाज को देखने और उसके अधिकारियों से बातचीत करने का मकसद ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।उन्होंने कहा कि खास तौर पर पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिलेंगे और अमेरिका को भी लाभ होगा।'बस कुछ हफ्तों की बात...', भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत
भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए साझा हितों का विस्तार जरूरी: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत और अमेरिका के संबंधों को और मजबूत करने के लिए साझा हितों का विस्तार करना जरूरी है...
भारत-अमेरिका साझेदारी तय करेगी 21वीं सदी की दिशा : मार्को रुबियो
भारत-अमेरिका साझेदारी तय करेगी 21वीं सदी की दिशा : मार्को रुबियो
16 साल से ‘मरा हुआ’ मान रही थी पुलिस, जिंदा निकला शातिर यौन अपराधी, अमेरिका में हैरान करने वाला खुलासा
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता द्विपक्षीय व्यापार को महत्वपूर्ण बढ़ावा दे सकता है: टीसीसी प्रमुख
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता द्विपक्षीय व्यापार को महत्वपूर्ण बढ़ावा दे सकता है: टीसीसी प्रमुख
अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने गई भारतीय छात्रा, बताया किस चीज से सबसे ज्यादा हैरान हुई
अमेरिका में पढ़ रही भारतीय छात्रा ने वहां की एग्जाम सिस्टम को लेकर अपना अनुभव साझा किया. साथ ही छात्रा ने भारत में IIT की तुलना हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की है.
New Delhi, 20 अक्टूबर . ट्रेड एंड इकोनॉमिक काउंसिल के अध्यक्ष जॉन कवुलिच ने Tuesday को कहा कि India और अमेरिका के बीच व्यापार का दायरा बहुत बड़ा…
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द लगेगी मुहर? मार्को रुबियो ने दिए बड़े संकेत
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। इस दौरे के दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। अमेरिका के विदेश मंत्री रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली बैठक से पहले दोनों देशों के बीच सहयोग और आगे की योजनाओं को लेकर अपनी बात रखी। उनके इस दौरे को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखी।उन्होंने यूक्रेन युद्ध, अमेरिका के हथियार नियंत्रण से जुड़े मामलों और रूस से तेल खरीदने को लेकर जारी चर्चाओं जैसे विषयों पर चर्चा की। इन मुद्दों को लेकर भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।पॉजिटिव नतीजे देखने को मिलेगालंबे समय से चर्चा में चल रहे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौते की स्थिति पर बात करते हुए मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिकी विदेश विभाग सीधे तौर पर व्यापार समझौते पर बातचीत नहीं करता है। उन्होंने कहा, ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत की जिम्मेदारी विदेश विभाग की नहीं है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में हमारी अहम भूमिका है। मैं और मेरे काउंटरपार्ट, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर इस समझौते को लेकर काफी गंभीर हैं। हम इसे पूरा करने के बेहद करीब हैं। मेरा मानना है कि समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अब केवल कुछ मुद्दों पर काम करना बाकी है, इसलिए इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है।उन्होंने आगे कहा कि, हम चाहते हैं कि जल्द ही इस बारे में अच्छी खबर सामने आए और इसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएं। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में इस दिशा में पॉजिटिव नतीजे देखने को मिलेंगे।रिलायंस के साथ होगी बैठकइसके अलावा, उन्होंने बताया कि अमेरिकी डेलीगेशन वेनेजुएला में तेल उत्पादन को लेकर रिलायंस के साथ बैठक करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी पेट्रोलियम खरीद के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में काफी प्रगति की है, जिसे उन्होंने एक समझदारी भरा कदम बताया।ग्लोबल एनर्जी जरूरतों को पूरा करने में भारत की भूमिका पर बात करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि, भारत तेल रिफाइनिंग के मामले में काफी मजबूत है। उन्होंने बताया कि भारत के पास भारी कच्चे तेल को साफ करने और उससे उपयोगी ईंधन बनाने की क्षमता है और वह पहले भी ऐसा कर चुका है। रुबियो के मुताबिक, वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बढ़ने पर भारत इसका इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि भारत के पास वेनेजुएला में पहले से ही तेल उत्पादन से जुड़े अधिकार हैं, जिनकी मदद से वह वहां अपना तेल उत्पादन बढ़ा सकता है।मार्को रुबियो ने तेल को लेकर क्या कहाउन्होंने आगे कहा, ये सभी सकारात्मक बातें हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि दुनिया भर में चल रही घटनाओं के कारण तेल की आपूर्ति में जो कमी आ सकती है, उसे केवल वेनेजुएला ही पूरा कर सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि लंबे समय में वेनेजुएला इसमें अहम योगदान दे सकता है और कम समय में भी कुछ राहत पहुंचा सकता है। यह उन मुद्दों में से एक है, जिन पर हम चर्चा करेंगे। भारत के साथ इस विषय पर पहले भी बातचीत हो चुकी है और वह इसके लिए तैयार नजर आ रहा है। भारत इस दिशा में आगे बढ़ने को इच्छुक है, हालांकि पाबंदियों से जुड़ी कुछ बाधाएं सामने आ सकती हैं, जिनका हमें समाधान निकालना होगा।दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनानाअपने भारत दौरे के महत्व पर बात करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस साल चार बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश और सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए कहा कि, अमेरिका के लिए भारत एक अहम व्यापारिक और कारोबारी साझेदार है। रुबियो ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग और क्वाड में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत को अमेरिका का मजबूत रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों को भारत के अधिक दौरे करने चाहिए।यूक्रेन को लेकर क्या कहाइसके अलावा, मार्को रुबियो ने यूक्रेन युद्ध और अमेरिका के हथियार नियंत्रण से जुड़े अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिनमें कहा गया था कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी रक्षा प्रणाली इस्तेमाल करने वाले सहयोगी देशों को यूक्रेन के लिए पैट्रियट मिसाइलें भेजने की मंजूरी रोक दी थी, रुबियो ने कहा कि यूक्रेन को जानबूझकर किसी भी तरह की मदद से वंचित नहीं किया जा रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रंप उन आरोपों से नाराज थे, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके फैसलों से यूक्रेन की स्थिति कमजोर हो रही है।इसके अलावा, मार्को रुबियो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर चीन, रूस और अमेरिका के बीच हथियारों पर नियंत्रण को लेकर सहमति बनती है, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक सकारात्मक कदम होगा। उन्होंने संकेत दिया कि इन तीनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ने से वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
अमेरिकी और यूएई समकक्ष के साथ एस जयशंकर ने की त्रिपक्षीय बैठक
Mumbai , 20 अक्टूबर . यूएई के उप Prime Minister और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो और India के विदेश…
'अंतिम चरण में भारत-अमेरिका ट्रेड डील,' मुंबई में बोले रुबियो- जल्द होगी घोषणा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मुंबई में कहा कि भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं, जिसकी घोषणा जल्द होगी।
रणबीर कपूर की फिल्म रामायण ने रिलीज से पहले ही एडवांस बुकिंग में 7 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है। फिल्म को अमेरिका में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। आने वाले दिनों में कमाई बढ़ने वाली है।
मुंबई पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जयशंकर के साथ अहम द्विपक्षीय वार्ता पर नजर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मुंबई पहुंचे, जहां विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार समझौते, ऊर्जा, रक्षा और तकनीक पर चर्चा हुई। यात्रा के दौरान 26/11 पीड़ितों को श्रद्धांजलि और गुजरात के जामनगर दौरे का कार्यक्रम भी है।
भारत और अमेरिका का अहम साझेदारी
मुंबई, अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी मार्को रुबियो ने मंगलवार को भारत को यूएसए के लिए एक अहम आर्थिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील जल्द होगी।
भारत अमेरिका का अहम आर्थिक साझेदारी, जल्द होगी ट्रेड डील- मार्को रुबियो
अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी मार्को रुबियो ने मंगलवार को भारत को यूएसए के लिए एक अहम आर्थिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील जल्द होगी।
भारत अमेरिका का अहम आर्थिक साझेदारी, जल्द होगी ट्रेड डील: मार्को रुबियो
भारत अमेरिका का अहम आर्थिक साझेदारी, जल्द होगी ट्रेड डील: मार्को रुबियो
भारत को बताया ‘Refining Superpower’! अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान, वेनेजुएला के तेल पर रिलायंस से होगी चर्चा
अमेरिका और भारत के विदेश मंत्रियों की मुंबई में हुई मुलाकात, ट्रेड डील पर आया बड़ा अपडेट
इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद रहे। द्विपक्षीय बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मीडिया से भी बातचीत की।
'न्यू मैक्सिको का नाम न्यू अमेरिका...', ट्रंप ने कहा- इससे इनकम बढ़ेगी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यू मैक्सिको का नाम बदलकर न्यू अमेरिका करने की मांग फिर उठाई है. उनका दावा है कि इससे राज्य में घरों की कीमतें और लोगों की इनकम बढ़ेगी. हालांकि, राज्य की डेमोक्रेटिक गवर्नर ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.
Ramayana Advance Bookings: रणबीर कपूर और यश की फिल्म Ramayana: Rise of a Legend रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर चर्चा बटोर रही है। भगवान राम और रावण की कहानी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए दर्शकों में उत्सुकता है, जिसका असर विदेशों में एडवांस बुकिंग पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में टिकटों की बिक्री से लाखों डॉलर जुटा लिए हैं। खास बात यह है कि कुल विदेशी एडवांस बुकिंग में अमेरिका और कनाडा की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बताई जा रही है। अब भारतीय बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की शुरुआत को लेकर भी कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।ट्रेड जगत में पहले दिन 100 करोड़ रुपये तक की कमाई की चर्चा है, हालांकि इसकी असली तस्वीर रिलीज के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल सभी की नजर भारत में एडवांस बुकिंग और फिल्म को मिलने वाले शुरुआती रिस्पॉन्स पर टिकी है।विदेशों में एडवांस बुकिंग से जुटाए $7.71 लाखट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में एडवांस टिकट बिक्री से करीब 7.71 लाख डॉलर जुटाए हैं। Films Discourse के आंकड़ों और The Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी उत्तरी अमेरिका की है। कुल विदेशी प्री-सेल्स में अमेरिका और कनाडा का योगदान लगभग 72 फीसदी बताया गया है।अमेरिका और कनाडा में सबसे ज्यादा डिमांडफिल्म की एडवांस बुकिंग में उत्तरी अमेरिका सबसे आगे है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और कनाडा में करीब 5.58 लाख डॉलर के टिकट बिक चुके हैं। वहीं, ब्रिटेन में लगभग 1.41 लाख डॉलर और ऑस्ट्रेलिया में करीब 72 हजार डॉलर की एडवांस बुकिंग हुई है।ये आंकड़े बताते हैं कि रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर विदेशी बाजारों में दिलचस्पी बनी हुई है।प्रीमियर शो के लिए भी बिके हजारों टिकटअमेरिका में फिल्म के प्रीमियर शो 4 नवंबर को होंगे, जबकि इसकी आधिकारिक रिलीज 5 नवंबर को निर्धारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रीमियर के लिए करीब 10,800 टिकट बिक चुके हैं, जिनसे लगभग 2.10 लाख डॉलर की कमाई हुई है। कनाडा को मिलाकर प्रीमियर की एडवांस बुकिंग 2.50 लाख डॉलर से ज्यादा बताई गई है।भारत में एडवांस बुकिंग पर नजररिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में फिल्म की एडवांस बुकिंग 20 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। ट्रेड जगत में चर्चा है कि फिल्म पहले दिन 100 करोड़ रुपये तक कमा सकती है। हालांकि, यह महज अनुमान है और वास्तविक कमाई रिलीज के बाद ही सामने आएगी।IMAX स्क्रीन पर ‘Godzilla’ से मुकाबलाविदेशों में फिल्म को IMAX फॉर्मेट में रिलीज करने की भी उम्मीद है। हालांकि, अमेरिका में 6 नवंबर को रिलीज होने वाली Godzilla: Minus Zero से इसे प्रीमियम स्क्रीन के लिए मुकाबला करना पड़ सकता है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। अब देखना होगा कि विदेशी बाजारों में मिल रही शुरुआती दिलचस्पी भारतीय बॉक्स ऑफिस पर कितनी बड़ी ओपनिंग में बदलती है।पहले भी अंडरवर्ल्ड के निशाने में पर रहे हैं बॉलीवुड सितारे, टाइगर श्रॉफ ही नहीं सलमान खान समेत इन स्टार्स ने भी झेले हैं हमले
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान सख्त, आईआरजीसी ने 54वां अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन मार गिराने का किया दावा
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। वह आज मुंबई पहुंचे हैं। रुबियो, एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह जामनगर भी जाएंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत पहुंचे, जयशंकर से करेंगे अहम बातचीत
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी जेनेट रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद रहे। मुंबई हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और एआई मंत्री आशीष शेलार ने उनका स्वागत किया।
अमेरिकी नागरिकों से जयपुर में बैठकर करोड़ों रुपए का ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले गिरोह का मंगलवार को पुलिस ने खुलासा किया है। भांकरोटा इलाके में साइबर फ्रॉड गैंग के खोले फेक टेक्निकल सपोर्ट कॉल सेंटर पर पुलिस ने रेड डाली। आरोपी आईफोन की तकनीकी समस्या दूर करने के नाम पर ठगी करते थे। पुलिस ने मामले में 2 युवतियों सहित 10 जनों को अरेस्ट किया है। पुलिस ने आरोपियों से 19 मोबाइल और 12 लैपटॉप बरामद किए हैं। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने बताया- अमेरिकी नागरिकों से ठगी मामले में आरोपी हर्ष चौहान (27) निवासी झज्जर हरियाणा, कृष्ण (28) गांव बक्सा असम, आकाशी लाबा (30) निवासी दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल, खोजा (27) निवासी मेलयूरी नागालैंड, केवी (24) निवासी मेलयूरी नागालैंड, निशांत (24) निवासी गुरुग्राम हरियाणा, रविंद्र कुमार (31) महेंद्रगढ़ हरियाणा, अंकित (24) निवासी झज्जर हरियाणा और दिया गुरुजी (25) निवासी दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल व लिशीनी (25) निवासी सेनापति मणिपुर को अरेस्ट किया है। संचालित हो रहा था ठगी का नेटवर्क पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी आईफोन की तकनीकी समस्या दूर करने के नाम पर अमेरिकी नागरिकों के बैंक अकाउंट्स की गोपनीय जानकारी हासिल करते थे। इसके लिए भांकरोटा इलाके में फेक टेक्निकल सपोर्ट कॉल सेंटर बनाकर गिरोह काम कर रहा था। कॉल सेंटर में कार्यरत व्यक्ति X-Lite सॉफ्टवेयर और TFN नंबरों के माध्यम से अमेरिकी लोगों से संपर्क करते थे। आईफोन में तकनीकी समस्या आने पर उसका समाधान करने के नाम पर ग्राहकों को बातचीत में उलझाया जाता था। उनसे सहायता के नाम पर शुल्क वसूला जाता था। बैंक खातों की ले लेते थे जानकारी गिरोह में शामिल एक युवती बैंक अधिकारी बनकर ग्राहकों से बातचीत करती थी। उन्हें विश्वास में लेकर उनके बैंक खातों से संबंधित गोपनीय जानकारी हासिल करती थी। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी टेलीग्राम ग्रुप में शेयर की जाती थी। गिरोह के संचालक इन जानकारियों का दुरुपयोग कर खातों से रकम निकाल लेते थे। अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपए की ऑनलाइन ठगी की जा रही थी। मामले में गिरोह के संचालकों, नेटवर्क तथा ठगी की रकम के संबंध में जांच की जा रही है।
अमेरिकी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करने वाले साइबर गिरोह का पर्दाफाश, 10 व्यक्तियों को किया डिटे
जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल एवं स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश के निर्देशन में जयपुर पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
मार्को रुबियो मुंबई पहुंचे, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर होगी चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो दो दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं. उनके साथ पत्नी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत के अलावा रुबियो 26/11 हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देंगे.
संकट बड़ा है... अब क्या करेंगे ट्रंप? 1982 के बाद अमेरिका में हुआ कुछ ऐसा
Donald Trump New Tension: ईरान युद्ध लगातार अमेरिका पर भारी पड़ता जा रहा है और डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाली एक और खबर आ गई है. US के रणनीतिक भंडार में कच्चे तेल का रिजर्व 1982 के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गया है.
अमेरिकी रक्षा सचिव हेगसेथ ने नेतन्याहू से इजरायल में की सीक्रेट मुलाकात
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Elon Musk का बड़ा ऐलान! अमेरिका के हर बच्चे को देंगे SpaceX का शेयर, ट्रम्प ने कहा- धन्यवाद दोस्त
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Daily Voice : IT शेयरों में हालिया तेजी भले ही अभी किसी टिकाऊ रिकवरी का संकेत न हो,लेकिन हर उछाल पर आईटी शेयरों में बिकवाली की एकतरफा रणनीति अपनाना भी जल्दबाजी हो सकती है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे बाजारों के लिए एक ट्रिगर का काम कर सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि केवल इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी। ये बातें अल्फएक्यूरेट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक राजेश कोठारी ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं।उन्होंने आगे कहा कि आईटी शेयरों में आई हालिया तेजी पॉजिटिव संकेत है लेकिन निवेशकों को अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस सेक्टर में टिकाऊ तेजी की शुरुआत हो गई है। पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने से पहले तेल सप्लाई की स्थिति,डॉलर,बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर रखने की जरूरत है।आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरतराजेश कोठारी के मुताबिक IT शेयरों में हालिया तेजी उत्साहजनक है,लेकिन इसे एक टिकाऊ तेजी मान लेने में सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी इंडस्ट्री की अर्निंग आउटलुक से मेल खाती है या यह सिर्फ 'ओवरसोल्ड'लेवल्स से आई खरीदारी है? हमें आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत है:मांग की स्थिति: विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में टाले जा सकने वाला टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending)अहम बना हुआ है। बेहतर सौदे हासिल करने का नतीजा रेवेन्यू ग्रोथ के रूप में दिखना चाहिए।AI से बदलाव और अवसर: AI कमाई के नए स्रोत पैदा कर सकता है, लेकिन यह पारंपरिक बिलिंग मॉडल को भी बदल सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।वैल्यूएशन और अर्निंग आउटलुक: भारी तेजी के बाद, जिन शेयरों की कीमत उनकी कमाई की संभावनाओं से आगे निकल गई है, उनमें मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखने को मिल सकती है।राजेश कोठारी का मानना है कि आईटी सेक्टर में तेजी आने पर हर शेयर बेच देने की रणनीति जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन इस तेजी के पीछे भागना भी कोई समझदारी नहीं है। आईटी में उन कंपनियों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, जिनके ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं और जिनके पास AI से कमाई करने के ठोस मौके हैं। ऐसी कंपनियों से दूर रहने की जरूरत है जो अभी भी कमजोर मांग से जूझ रही हैं।क्या आप कंजम्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क हैं? कंजम्पशन डिमांड और इससे जुड़े शेयरों पर आपकी क्या राय है?राजेश कोठारी ने कहा कि कंजम्पशन सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने के बजाय,चुनिंदा रुख अपनाना पसंद करेंगे। जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च और गैर-जरूरी (वैकल्पिक) चीजों पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर समझना जरूरी है। कई 'फास्ट फ्रीक्वेंसी' डेटा इंडिकेटर कंजम्पशन ट्रेंड में सुधार दिखा रहे हैं (जैसे रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी, आदि)।इस सेक्टर में ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास मजबूत ब्रांड, अच्छा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, कीमतों को तय करने की ताकत, अच्छी बैलेंस शीट और सही वैल्यूएशन हों। वैकल्पिक उपभोग (discretionary consumption) के सेक्टर में केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर निर्भर रहने के बजाय, बिक्री की मात्रा (volume) में बढ़त के संकेतों पर भी नजर रखने की जरूरत है।क्या आप आने वाले समय में 'अल नीनो' (El Nio) को बड़ा जोखिम मानते हैं? इसका महंगाई, ग्रामीण मांग और भारत के विकास पर क्या असर पड़ सकता है?इसके जवाब उन्होंने कहा कि 'अल नीनो' एक जोखिम तो है,लेकिन इसे देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत के विकास का पूरा आउटलुक ही खराब हो जाएगा। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले फसल उत्पादन, जलाशयों के जल-स्तर, खाने-पीने की चीजों की कीमतों के रुझान और ग्रामीण मांग के इंडीकेटरों पर नजर रखने की जरूरत है।Q2FY27 में बैंकों के नतीजे कैसे रह सकते है? क्या इनके मौजूदा वैल्यूएशन अच्छे लग रहे है या इन स्तरों से आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है?इसके जवाब में राजेश कोठारी ने कहा कि बैंक शेयरों का प्रदर्शन उत्साहजनक है। ज़्यादातर बैंकों ने लोन वितरण (डिस्बर्समेंट) में अच्छी बढ़ोतरी और मज़बूत एसेट क्वालिटी की जानकारी दी है। अच्छे बैंकों में मध्यम अवधि के नजरिए निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं लेकिन वैल्यूएशन के नजरिए से चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।ऐसे बैंकों पर फोकस करने की सलाह होगी जिनकी अर्निंग ग्रोथ को टिकाऊ कोर इनकम,अच्छी एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग फ्रेंचाइजी का सपोर्ट हासिल हो। अगले दो से तीन तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने एक्सप्रो इंडिया में लगभग 1% हिस्सेदारी बेची, ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिंग में बढ़ाई हिस्सेदारडिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
अमेरिका: 2 भारतीय नागरिकों पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप
अमेरिका के कैलिफोर्निया में चुनाव में धोखाधड़ी करने के आरोप में 28 ग्रीन कार्ड धारकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, इन 28 विदेशी नागरिकों में दो भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। जिन दो भारतीयों पर आरोप लगे हैं, उनकी पहचान 30 वर्षीय अमनदीप कौर और 67 वर्षीय कमलेश …
जेडी वेंस : अमेरिका की नौकरियां अमेरिकी नागरिकों को मिलनी चाहिए
वाशिंगटन, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हों, ट्रंप प्रशासन ऐसी किसी भी व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कंपनियों से कहा कि वीजा कार्यक्रमों का इस्तेमाल करके स्थानीय कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों को न रखें।
अमेरिका : होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी तेल निर्यात लगभग रोक दिया
वाशिंगटन, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ईरान के तेल निर्यात को प्रभावी रूप से रोक दिया है, जबकि दूसरे देशों का करोड़ों बैरल कच्चा तेल अब भी वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहा है।
'हम मैक्सिको नहीं, अमेरिका हैं': ट्रंप ने दोहराई न्यू मैक्सिको का नाम बदलने की मांग, कहा- बढ़ेगी प्रतिष्ठा us-president-donald-trump-new-mexico-name-change-new-america-gulf-of-america
2024 में उनकी शेख हसीना की सरकार को गिराने वाले विरोध-प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका: साजीब वाजेद जॉय
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'मैं सिर्फ अमेरिकी...', नेतन्याहू को समर्थन देने से जेडी वेंस का इनकार
जेडी वेंस ने बेंजामिन नेतन्याहू की चुनावी दावेदारी का समर्थन करने से इनकार करते हुए अमेरिकी उम्मीदवारों पर ध्यान देने की बात कही. डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन के बाद आया यह बयान इजरायली चुनाव पर दोनों नेताओं के सार्वजनिक रुख का अंतर दिखाता है.
मार्को रूबियो : अमेरिकी विदेश मंत्री आज पहुचेंगे भारत; ऊर्जा, व्यापार और रक्षा समेत इन मुद्दों पर होगी चर्चा us secretary of state marco rubio three day india visit S Jaishankar mumbai
मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलीबारी की घटना ने संगठित अपराध पर सवाल उठाए हैं। इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से संबंधों की जांच चल रही है।
जमशेदपुर के सोनारी थाना क्षेत्र स्थित आशियाना गार्डन में मंगलवार सुबह हादसे में 77 वर्षीय रमेश प्रसाद श्रीवास्तव की मौत हो गई। वह अपने फ्लैट की छत पर मॉर्निंग वॉक कर रहे थे। इसी दौरान अचानक नीचे गिर गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। इसके बाद उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हलचल मच गई। सूचना मिलने पर सोनारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और जांच शुरू की। हालांकि, बुजुर्ग किन परिस्थितियों में छत से नीचे गिरे, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी है। पत्नी के साथ रहते थे बुजुर्ग रमेश प्रसाद श्रीवास्तव आशियाना गार्डन स्थित फ्लैट में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। उनका बेटा अमेरिका में रहता है, जबकि बेटी बेंगलुरु में रहती है। हादसे की खबर से परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। घटना के बाद परिवार के लोगों का बुरा हाल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि बुजुर्ग का संतुलन बिगड़ने से हादसा हुआ या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह सोनारी थाना के एएसआई दिवाकर कुमार ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बुजुर्ग किन हालात में छत से नीचे गिरे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की जानकारी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
ईरान ने होर्मुज के ऊपर अमेरिकी ड्रोन MQ-9 रीपर का मार गिराया
ईरान के IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मिसाइल से मार गिराने का दावा किया है. वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार फरवरी से अब तक 45 रीपर खोए, नुकसान 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा का है. ईरान ने अपनी एयर डिफेंस को मजबूत बताया.
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी तेल निर्यात लगभग रोक दिया : मार्को रुबियो
रुबियो ने कहा कि लगातार ईरानी हमलों के बावजूद अमेरिकी बल समुद्री व्यापार को सामान्य बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना इन जहाजों को सुरक्षा देने और हमलों से बचाने का काम कर रही है।
अमेरिका: सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने बढ़ते ध्रुवीकरण पर जताई चिंता, अल्पसंख्यकों पर हुए हमले को लेकर क्या कहा? Congressman raja krishnamoorthi expresses concern over us polarization
Global Market: सोमवार को नैस्डैक (Nasdaq) में 1% से ज्यादा की तेजी आई। AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ी कंपनियों की कमाई के नतीजों वाले अहम हफ्ते से पहले टेक शेयरों में रिकवरी देखने को मिली। वहीं, फ्रांस में चल रही अशांति के कारण वहां के वित्तीय हालात को लेकर चिंताएं बढ़ गई, जिससे यूरोपीय शेयरों और यूरो में गिरावट आई।फ्रांस में हो रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों ने सरकार के सामने अपने बड़े घाटे (deficit) को कम करने की चुनौतियों को उजागर कर दिया है, जिसके चलते फ्रांस के बॉन्ड और पेरिस में लिस्टेड शेयरों में गिरावट आई।विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई लूटपाट और सुरक्षा व्यवस्था में चूक को लेकर दबाव झेल रही फ्रांस की केंद्र सरकार ने कुछ स्थानीय प्रशासन को कर्फ्यू लगाने के निर्देश दिए हैं।वॉल स्ट्रीट पर टेक शेयरों ने एक मुश्किल हफ्ते के बाद कुछ हद तक वापसी की है, जिसमें सेमीकंडक्टर इंडेक्स 1.6% ऊपर रहा। शुक्रवार को यह इंडेक्स लगातार आठवें दिन गिरा था, जो 2008 के बाद की सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला था। इस हफ्ते मेटा (Meta), टेस्ला (Tesla) और चिप बनाने वाली कंपनियों - लैम रिसर्च (Lam Research) और टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स (Texas Instruments) के नतीजे आने वाले हैं। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या AI पर किया गया भारी-भरकम खर्च आखिरकार फायदेमंद साबित होता है या नहीं।न्यूयॉर्क में स्पार्टन कैपिटल सिक्योरिटीज के चीफ मार्केट इकोनॉमिस्ट पीटर कार्डिलो ने कहा, निवेशक बाजार में आई इस गिरावट (correction dip) का फायदा उठाकर खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, अगले दो हफ्तों में बाजार एक बहुत ही अहम परीक्षा से गुजरने वाला है, क्योंकि कई बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में, यह देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा कि AI पर किया गया खर्च उम्मीद के मुताबिक संतोषजनक नतीजे देता है या नहीं।डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) 36.38 अंक या 0.07% गिरकर 51,966.03 पर आ गया। S&P 500 में 31.29 अंक या 0.41% की तेजी आई और यह 7,690.73 पर पहुंच गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite) 290.85 अंक या 1.11% बढ़कर 26,430.89 पर बंद हुआ। दुनिया भर के शेयरों को दर्शाने वाला MSCI इंडेक्स 0.88 अंक या 0.08% बढ़कर 1,129.98 पर पहुंच गया। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, मेटा उन पांच AI हाइपरस्केलर कंपनियों में से एक है, जिनके अगले साल अपने कुल पूंजीगत व्यय (capital expenditure) को बढ़ाकर लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की उम्मीद है।मंगलवार को स्पेसएक्स (SpaceX) के नतीजे भी आने वाले हैं। कुल मिलाकर, अमेरिकी कंपनियों की कमाई में लगभग 30% की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण टेक्नोलॉजी सेक्टर में होने वाली ग्रोथ है।सोमवार को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury yields) में बढ़ोतरी हुई। बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड, जो पिछले 7 महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट के बाद संभली है, क्योंकि AI शेयरों पर ऊंची ब्याज दरों के असर को लेकर चिंताएं कम हो गई हैं। बेंचमार्क अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट की यील्ड 4.2 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.14% हो गई।हाल ही में बॉन्ड की भारी बिकवाली के कारण AI सेक्टर की बड़ी फंडिंग जरूरतों पर भी बारीकी से ध्यान दिया जाने लगा है।आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो, सोमवार को 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ होम बिल्डर्स/वेल्स फार्गो हाउसिंग मार्केट इंडेक्स' में तीन अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह इस महीने 29 के स्तर पर आ गया। यह जून 2012 के बाद का सबसे निचला स्तर है और रॉयटर्स द्वारा सर्वे किए गए अर्थशास्त्रियों के 31 के अनुमान से भी कम है।फेडरल रिजर्व के अधिकारियों (जिनमें केविन वॉर्श भी शामिल हैं) की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि नीति-निर्माता ब्याज दरों को फिर से बढ़ाने की कोई जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। शुक्रवार को, वॉर्श ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन इस बारे में कोई संकेत नहीं दिया कि क्या या कब और ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी।यूरोपीय शेयरों और यूरो में गिरावटपैन-यूरोपीय STOXX 600 इंडेक्स में 0.8% की गिरावट आई, जबकि फ्रांस का ब्लू-चिप CAC 40 इंडेक्स 1.1% गिर गया।फ्रांस की 10-वर्षीय यील्ड 13 बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.9% हो गई, जबकि यूरो ज़ोन के लिए बेंचमार्क मानी जाने वाली जर्मनी की 10-वर्षीय यील्ड में भी बढ़ोतरी देखी गई। फ्रांसीसी OATs और सुरक्षित माने जाने वाले जर्मन बंड्स (German Bunds) के बीच का अंतर (spread) बढ़कर 147 बेसिस पॉइंट हो गया है। सितंबर के अंत में यह अंतर लगभग 110 बेसिस पॉइंट था। यह स्तर 2011-2012 के यूरोपीय ऋण संकट (European debt crisis) के दौरान देखा गया था। यूरो जोन की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सप्ताहांत पर हुए व्यापक हंगामे ने फ्रांसीसी सरकार के सामने मौजूद चुनौती को उजागर कर दिया है। सरकार अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से पहले अपने बड़े बजट घाटे को कम करने की कोशिश कर रही है।यूरो 0.24% गिरकर 1.1212 डॉलर पर आ गया।टेक शेयरों में आई तेजी से अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली। डॉलर इंडेक्स, जो येन और यूरो सहित कई मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति मापता है, 0.17% बढ़कर 101.97 पर पहुंच गया।इस बीच, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.49% मज़बूत हुआ। ऐसा तब हुआ जब डेटा से पता चला कि चीन की आर्थिक विकास दर तीन साल के निचले स्तर से उबर गई है और तीसरी तिमाही में 4.5% की वार्षिक दर से बढ़ी है।तेल की कीमतों में मिला-जुला रुखतेल की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। निवेशक यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा एक सैन्य प्रशिक्षण शिविर पर किए गए हमलों और सऊदी अरब की ऊर्जा, हवाई अड्डे और सैन्य सुविधाओं पर फिर से हुए हमलों के असर का आकलन कर रहे थे।ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 31 सेंट गिरकर 109.55 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। सत्र के दौरान ब्रेंट में 3 डॉलर से ज़्यादा की गिरावट आई थी। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 2.25 डॉलर बढ़कर 103.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 15 सितंबर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.61% गिरकर 4,139.67 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी तेल निर्यात लगभग रोक दिया: मार्को रुबियो
वाशिंगटन, 20 अक्टूबर . अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ईरान के तेल निर्यात को प्रभावी रूप से रोक…
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: पानीपत के अनिल पंडित का परिवार साधारण, वीडियो में जाने पिता पुजारी; अमेरिका पहुंचकर लॉरेंस गैंग से जुड़ने का दावा
मस्क का बड़ा तोहफा: अमेरिकी बच्चों को देंगे स्पेसएक्स के शेयर, ट्रंप ने जताया आभार; क्या है ट्रंप अकाउंट्स? elon musk spacex shares us children trump accounts
जेडी वेंस की कंपनियों को चेतावनी: अमेरिका की नौकरियां अमेरिकी नागरिकों को मिलनी चाहिए
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कभी गल्फ, कभी पहाड़, अब इस अमेरिकी राज्य का नाम बदलना चाहते हैं ट्रंप
ट्रंप ने न्यू मैक्सिको राज्य का नाम बदलकर 'न्यू अमेरिका' करने की मांग दोहराई है. उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोगों की कमाई और घरों की कीमतों में इजाफा होगा. ट्रंप ने राज्य के चुनावों पर भी सवाल उठाए हैं.
'होर्मुज में तनाव के लिए अमेरिका जिम्मेदार', अराघची ने कूटनीति पर दिया जोर
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान कूटनीति से करने और साझा सुरक्षा व्यवस्था बनाने की अपील की. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में असुरक्षा के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया.
अमेरिका मध्यावधि चुनाव: चंदे में डेमोक्रेट आगे, ट्रंप की पार्टी को मस्क का सहारा; क्या है पैसों का पूरा खेल?
किशनगंज शहर में मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। अनुमान के मुताबिक, शहर के पूजा पंडालों में मां का आशीर्वाद लेने के लिए एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सुबह से देर रात तक पंडालों में लोगों के आने-जाने का सिलसिला जारी है। मां के जयकारों और आकर्षक सजावट के बीच पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है। फ्लोरिडा के स्वामीनारायण मंदिर की प्रतिकृति देखने पहुंच रहे लोग शहर के ऐतिहासिक रूईधासा मैदान के पास स्थित रूईधासा टाउन क्लब की दुर्गा पूजा इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की भव्य प्रतिकृति तैयार की गई है। मंदिर जैसी बनावट और आकर्षक सजावट को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। लोग मां दुर्गा के दर्शन के साथ पंडाल की खूबसूरती निहार रहे हैं और तस्वीरें भी ले रहे हैं। मनोरंजन क्लब से बड़ी कोठी तक पूजा की धूम रूईधासा टाउन क्लब के अलावा मनोरंजन क्लब, रोलबाग, डुमरिया, धर्मगंज, गांधी घाट, माधव नगर और बड़ी कोठी सहित शहर के विभिन्न इलाकों में भी दुर्गा पूजा की रौनक है। इन स्थानों पर बने आकर्षक पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। गांधी चौक पर भी लोगों की अच्छी-खासी आवाजाही देखने को मिल रही है। शाम होते ही रोशनी से जगमगा उठते हैं पंडाल शहर के प्रमुख पूजा स्थलों पर लोग परिवार और बच्चों के साथ मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। शाम होते ही पंडालों की आकर्षक रोशनी और सजावट शहर की खूबसूरती बढ़ा देती है। पूजा स्थलों के आसपास चहल-पहल बढ़ने से दुर्गा पूजा का उत्साह चरम पर है। आस्था के साथ मेल-मिलाप का भी पर्व किशनगंज में दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक उत्सव का भी प्रतीक है। शहर के अलग-अलग इलाकों में बने भव्य पंडाल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। शहरवासियों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पूजा पंडालों का भ्रमण करने और मां का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। लगातार बढ़ती भीड़ और मां के जयकारों से पूरे शहर का माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र: आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और क्यूबा आमने-सामने, वोट से पहले समर्थन जुटाने की कोशिश
अमेरिकी विदेश मंत्री आज तीन दिवसीय भारत दौरा: समझौते और जयशंकर से बातचीत पर रहेगी नजर; क्या है पूरा कार्यक्रम?
अपनी अप्रत्याशित घोषणाओं, सोशल मीडिया पोस्ट्स और लीक से हटकर सोचने के अंदाज के लिए मशहूर दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है। मस्क ने एक सार्वजनिक चर्चा के दौरान यह कहकर सबको चौंका दिया कि वे भविष्य में अमेरिका के प्रत्येक बच्चे को अपनी निजी अंतरिक्ष अनुसंधान कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) का एक शेयर देना चाहते हैं। जैसे ही यह बयान सामने आया, अमेरिकी वित्तीय गलियारों, सिलिकॉन वैली और वैश्विक मीडिया में इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया। कई लोग इसे भविष्य की पीढ़ियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने और वेल्थ इनइक्वलिटी (संपत्ति असमानता) को पाटने वाला क्रांतिकारी विचार बता रहे हैं, तो वहीं वित्तीय और कानूनी विश्लेषक इसे मस्क का एक और चतुर पीआर (पब्लिक रिलेशंस) स्टंट या व्यावहारिक रूप से असंभव घोषणा करार दे रहे हैं।स्पेसएक्स आज दुनिया की सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों (Private Unlisted Companies) में शीर्ष पर है, जिसका मूल्यांकन 200 अरब डॉलर के पार आंका जाता है। स्टारलिंक की वैश्विक सफलता, नासा के साथ गहरे सहयोग और मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने के महत्वाकांक्षी 'स्टारशिप' प्रोजेक्ट के चलते स्पेसएक्स के शेयरों की मांग वैश्विक स्तर पर बेहद अधिक है। ऐसे में किसी गैर-सूचीबद्ध (अनलिस्टेड) कंपनी के शेयर देश के करोड़ों बच्चों में बांटने के विचार के पीछे क्या कानूनी, आर्थिक और कूटनीतिक गणित छिपा है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।अमेरिकी बच्चों की आबादी और स्पेसएक्स की वैल्यू: गणित क्या कहता है?यदि इस बयान को शाब्दिक अर्थ में लागू करने की बात की जाए, तो सबसे पहले इसके बुनियादी आंकड़ों को देखना होगा। अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल संख्या लगभग 7.2 करोड़ से 7.3 करोड़ के बीच है।स्पेसएक्स एक गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी है, इसलिए इसके शेयर आम जनता के लिए किसी स्टॉक एक्सचेंज (जैसे NYSE या Nasdaq) पर खुले तौर पर उपलब्ध नहीं हैं। वर्तमान में कंपनी के आंतरिक सेकेंडरी मार्केट (Tender Offers) के आधार पर स्पेसएक्स के एक शेयर की सांकेतिक कीमत लगभग $100 से $115 के आसपास आंकी जाती है।यदि 7.3 करोड़ बच्चों को 1-1 शेयर दिया जाता है, तो इसके सीधे मायने यह होंगे:वित्तीय मूल्य: $100 प्रति शेयर के हिसाब से यह लगभग 7.3 अरब डॉलर (लगभग ₹60,000 करोड़ से अधिक) की वेल्थ का सीधा ट्रांसफर होगा।इक्विटी डाइल्यूशन: स्पेसएक्स की कुल इक्विटी का एक उल्लेखनीय हिस्सा मस्क को या तो अपनी निजी होल्डिंग से छोड़ना पड़ेगा या फिर कंपनी को करोड़ों नए शेयर जारी (Dilute) करने होंगे। हालांकि वित्तीय दृष्टि से 7.3 अरब डॉलर एलन मस्क की कुल 250+ अरब डॉलर से अधिक की निजी संपत्ति के मुकाबले कोई असंभव आंकड़ा नहीं है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की कानूनी प्रक्रियाएं इसे लगभग नामुमकिन बना देती हैं।कानूनी और नियामक अड़चनें: SEC के नियम और प्राइवेट कंपनी का ढांचाअमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (US Securities and Exchange Commission - SEC) के कड़े वित्तीय नियम किसी भी निजी कंपनी को इस तरह लाखों नागरिकों में शेयर बांटने की अनुमति नहीं देते।प्राइवेट कंपनी में शेयरधारकों की सीमा: अमेरिकी कानून (Securities Exchange Act) के तहत, यदि किसी निजी गैर-सूचीबद्ध कंपनी के पास 2,000 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त शेयरधारक (Non-accredited Investors) या 500 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त खुदरा निवेशक हो जाते हैं, तो उसे कानूनी रूप से एक पब्लिक कंपनी (Public Company) में तब्दील होना पड़ता है और अपने तिमाही वित्तीय नतीजे, घाटा-मुनाफा और आंतरिक गोपनीय आंकड़े सार्वजनिक करने होते हैं। स्पेसएक्स अपने रॉकेट और सैन्य प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा व रणनीतिक कारणों से खुद को पब्लिक कंपनी बनाने से बचती रही है। 7 करोड़ बच्चों को शेयरधारक बनाना सीधे तौर पर इन नियमों को तोड़ देगा।नाबालिगों को शेयर ट्रांसफर के नियम: अमेरिका में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सीधे तौर पर स्टॉक या सिक्योरिटीज के मालिक नहीं बन सकते। इसके लिए उनके माता-पिता या अभिभावकों को 'यूनिफॉर्म ट्रांसफर्स टू माइनर्स एक्ट' (UTMA) या 'कस्टोडियल अकाउंट्स' खोलने होंगे। करोड़ों कस्टोडियल खाते बनाना और उनका ऑडिट करना एक प्रशासनिक दुस्वप्न साबित होगा।गिफ्ट टैक्स (Gift Tax) का पेच: अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) के नियमों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में बिना किसी प्रतिफल (Consideration) के शेयर बांटने पर भारी टैक्स देनदारी (Gift Tax) बन सकती है, जिसे या तो मस्क को चुकाना होगा या बच्चों के माता-पिता पर इसका अप्रत्याशित वित्तीय बोझ पड़ेगा।इस बयान के पीछे छिपे 3 बड़े रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक मायनेवित्तीय जानकारों का मानना है कि मस्क के इस बयान का मकसद कल सुबह शेयर बांटना नहीं, बल्कि एक गहरा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक संदेश देना है:1. भावी पीढ़ी को अंतरिक्ष मिशन और स्पेसएक्स के विजन से बांधनामस्क हमेशा से पूंजीवाद को एक जन-आंदोलन की तरह पेश करने में माहिर रहे हैं। यदि अमेरिका के हर बच्चे के पास यह अहसास हो कि अंतरिक्ष में उड़ने वाले रॉकेट और चांद-मंगल पर जाने वाले 'स्टारशिप' में उनका भी 1 शेयर का मालिकाना हक है, तो पूरी अमेरिकी जनता और भावी पीढ़ी स्पेसएक्स के अभियानों के प्रति भावनात्मक रूप से जुड़ जाएगी। यह भविष्य में कंपनी को भारी सार्वजनिक समर्थन और नासा के बजट आवंटन में राजनीतिक मजबूती प्रदान करेगा।2. वामपंथी आलोचना और 'अमीरों पर टैक्स' की बहस का काटअमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील नेता अक्सर एलन मस्क जैसे खरबपतियों पर भारी वेल्थ टैक्स लगाने की मांग करते रहे हैं। उनका आरोप रहता है कि मस्क और बेजोस जैसे उद्योगपति देश के संसाधनों पर कब्जा किए बैठे हैं। हर बच्चे को अपनी कंपनी में हिस्सेदारी देने की बात कहकर मस्क खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करते हैं जो सरकार द्वारा टैक्स काटकर पैसा बर्बाद करने के बजाय सीधे जनता और बच्चों के हाथों में भविष्य की संपत्तियां बांटना चाहता है।3. संभावित IPO या 'डायरेक्ट लिस्टिंग' के लिए जमीन तैयार करनाअंतरराष्ट्रीय बाजार में यह कयास लंबे समय से लगाए जा रहे हैं कि मस्क अपनी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी 'स्टारलिंक' (Starlink) को स्पेसएक्स से अलग करके शेयर बाजार में लिस्ट करा सकते हैं। इस प्रकार की चर्चाएं छेड़कर मस्क बाजार में अपनी कंपनियों के प्रति जबरदस्त हाइप और वैश्विक खुदरा निवेशकों की मांग को चरम पर बनाए रखते हैं।क्या डिजिटल टोकन या ट्रस्ट के जरिए संभव है यह वादा?यदि मस्क कानूनी अड़चनों के बावजूद अपने इस विचार को लागू करने पर अड़ते हैं, तो इसके लिए वॉल स्ट्रीट के विश्लेषक दो वैकल्पिक मॉडल देखते हैं:सॉवरेन या नेशनल यूथ ट्रस्ट (Youth Trust Model): मस्क स्पेसएक्स के 7-8 करोड़ शेयर किसी स्वतंत्र चैरिटेबल ट्रस्ट या नेशनल फंड को दान कर दें। यह ट्रस्ट बच्चों के नाम पर शेयरों को होल्ड करे और जब बच्चा 18 या 21 वर्ष का बालिग हो जाए, तो उसे उस शेयर का लिक्विड कैश या वास्तविक शेयर ट्रांसफर कर दिया जाए।ब्लॉकचेन और डिजिटल ओनरशिप: मस्क चूंकि क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन के बड़े समर्थक रहे हैं, इसलिए यह भी संभव है कि वे किसी डिजिटल टोकन या फ्रैक्शनल ओनरशिप के जरिए एक प्रतीकात्मक हिस्सेदारी का ढांचा तैयार करें।बयान से हकीकत तक: उम्मीद कम, लेकिन चर्चा पूरीएलन मस्क का यह बयान सुनने में जितना लोकलुभावन और रोमांचक लगता है, अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के मौजूदा ढांचे में इसे हूबहू लागू करना उतना ही जटिल और पेचीदा है। पूर्व में भी मस्क ने टेस्ला को $420 पर प्राइवेट करने (Taking Tesla Private) जैसे कई साहसिक और विवादास्पद बयान दिए थे, जिसके चलते उन्हें एसईसी की जांच और भारी जुर्मानों का सामना करना पड़ा था।बहरहाल, शेयर भले ही कल बच्चों के खातों में न पहुंचे, लेकिन इस एक बयान ने दुनिया भर में यह चर्चा जरूर छेड़ दी है कि कैसे आधुनिक पूंजीवाद और तकनीकी क्रांति की वेल्थ को समाज के अंतिम व्यक्ति और आने वाली पीढ़ियों के साथ साझा किया जा सकता है। स्पेसएक्स के रॉकेटों की तरह मस्क की सोच भी हमेशा पारंपरिक सीमाओं को पार करने की कोशिश करती है, और यह बयान उसी मस्क-शैली का एक और नायाब नमूना है।
अमेरिका के हर बच्चे को SpaceX का 1 शेयर देंगे इलॉन मस्क, आगे और भी बड़े ऐलान होने की संभावनाएं
आधिकारिक जनगणना आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई 2025 तक अमेरिका में 18 साल तक के बच्चों की अनुमानित संख्या 72 मिलियन यानी 7.20 करोड़ है।
रूस के आगे यूक्रेन क्यों हुआ बेबस? पुतिन ने चीन और अमेरिका पर डाली युद्ध खत्म करने की जिम्मेदारी
रूस के आगे यूक्रेन बेबस दिखाई दे रहा है। रूस ने यूक्रेन पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं जिन्हें रोकने में यूक्रेन नाकाम हो रहा है। दूसरी ओर पुतिन ने चीन और अमेरिका पर युद्ध खत्म करने की जिम्मेदारी डाल दी है।
अमेरिका ने ईरान को जिस 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स' की धमकी दी, वो कितना ख़तरनाक है? - BBC
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अमेरिका ने ईरान को जिस 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स' की धमकी दी, वो कितना ख़तरनाक है?
अमेरिका ने ये बम इस्तेमाल किया तो ईरान को कितना नुक़सान होगा? ट्रंप की धमकी पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
भारत को घेरने चला अमेरिका खुद फंस गए ट्रंप?
रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका भारत और चीन पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, यूरोपीय सहयोगियों ने इस मांग को ठुकरा दिया। अब ट्रंप प्रशासन ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ के आर्थिक असर का आकलन करने के लिए 60 दिनों का समय लिया है।आखिर यूरोप ने अमेरिका का साथ क्यों नहीं दिया? रूस से ऊर्जा खरीदने पर भारत की क्या मजबूरी है? और ट्रंप प्रशासन ने 60 दिनों का वक्त क्यों लिया? जानिए इस पूरे घटनाक्रम की कहानी।
वेस्ट बैंक में सेटलर हिंसा पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, अमेरिका और यूरोप ने जताई चिंता
अमेरिकी पत्रकार और यूरोपीय राजनयिकों पर हमले के बाद इजरायल पर हिंसा रोकने और जवाबदेही तय करने की मांग तेज हुई।
Travelers Q3 Results: अंतरराष्ट्रीय बिजनेस में 12% उछाल, अमेरिका में सुस्ती
कंपनी ने Q3 में 1.947 अरब डॉलर की मुख्य आय दर्ज की, लेकिन अमेरिका में वाणिज्यिक बीमा दरों की रफ्तार धीमी पड़ी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 20 अक्टूबर को पहुंचेंगे मुंबई, छह महीने में दूसरी बार आ रहे भारत
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 20 अक्टूबर को पहुंचेंगे मुंबई, छह महीने में दूसरी बार आ रहे भारत
अमेरिका के हर बच्चे को SpaceX का शेयर देंगे एलन मस्क, किया बड़ा ऐलान
इलोन मस्क ने अमेरिका के हर बच्चे को स्पेसएक्स का एक शेयर देने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिका में 18 साल से कम उम्र के लगभग 7.2 करोड़ बच्चे हैं. इस योजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 10.5 अरब डॉलर यानी करीब 9,587 करोड़ भारतीय रुपये है. यह शेयर बच्चों को सीधे मिलेंगे या निवेश खातों में रखे जाएंगे, यह अभी साफ नहीं है. इसके अलावा, इसे ट्रंप अकाउंट से जोड़ने की भी चर्चा है, लेकिन मस्क ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
नाले में गिरी नशेड़ी अमेरिकी महिला, बचाने आए युवकों पर ही भड़की, VIDEO
Delhi Mahipalpur News: दिल्ली के महिपालपुर में NH-48 के खुले नाले में गिरी नशे में धुत अमेरिकी महिला. बचाने आए लोगों से की बदतमीजी, पुलिस ने एंबेसी को सौंपा.
मार्को रूबियो ने बताया क्यों अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रतिबंधों को 60 दिनों के लिए टाला: उज्बेकिस्तान
ताशकंद, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के मुताबिक, उनका देश दुनिया के हर हिस्से में अपने कारोबार और कंपनियों के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर चाहता है।
VIDEO: अमेरिका में 170 फीट की ऊंचाई से गिरकर एयरफोर्स जवान की मौत, स्टेडियम में मौजूद थे 23 हजार लोग
अमेरिका के सैन एंटोनियो स्थित अलामोडोम स्टेडियम में फुटबॉल मैच से पहले फास्ट-रोपिंग प्रदर्शन के दौरान अमेरिकी वायुसेना के एक जवान करीब 170 फीट की ऊंचाई से गिर गए और उनकी मौत हो गई।
अमेरिका में मस्क का बड़ा दांव: स्पेसएक्स के शेयरों से मालामाल होंगे देश के सभी बच्चे, कुल वैल्यू जानकर चौंक जाएंगे आप
अमेरिका के वॉलमार्ट से Winchester .308 राइफल चोरी, फर्जी दस्तावेज दिखाए
बेन्सलेम पुलिस ने संदिग्ध की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज जारी की है, आरोपी ने फर्जी क्लीयरेंस दस्तावेज दिखाकर हथियार चुराया।
Dollar Vs Rupee : सोमवार, 19 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपनी शुरुआती बढ़त गंवाते हुए 3 पैसे की गिरावट के साथ 94.92 के स्तर पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव पड़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के लगातार बने दबाव के बीच, रुपये की लगातार 6 सेशन की तेजी का सिलसिला टूट गया और यह गिरावट के साथ बंद हुआ।इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.90 पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान, यह 94.75 के हाई और 94.97 के निचले स्तर तक गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज 94.92 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 3 पैसे कम है।शुक्रवार को, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की हाजिर मांग को नियंत्रित करने के उपायों के चलते, रुपया लगातार छठे सत्र में मजबूत हुआ था और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ 94.89 पर बंद हुआ।16 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते के दौरान, डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए RBI द्वारा उठाए गए कदमों की मदद से भारतीय रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की मजबूती आई थी।लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड, गौरव गर्ग ने कहा कि RBI के कदम शॉर्ट टर्म में करेंसी के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इसमें कोई टिकाऊ सुधार तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी पूंजी की निकासी रुकने और बाहरी दबावों में कमी पर आने पर निर्भर करेगा।गर्ग ने आगे कहा कि हालांकि रुपये में सुधार उत्साहजनक है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या RBI के सपोर्ट के साथ-साथ ग्लोबल और घरेलू बुनियादी हालात (फंडामेंटल्स) भी बेहतर होते हैं।इस बीच छह बड़ी मुद्राओं के एक बॉस्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.93 पर कारोबार कर रहा है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार (फ्यूचर्स ट्रेड) में 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 108.58 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के चलते उम्मीद है कि रुपया पॉजिटिव रुख के साथ कारोबार करेगा। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और FII की निकासी इसमें बड़ी तेजी को सीमित कर सकती हैं।HDFC सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट, दिलीप परमार का कहना है कि भारतीय रुपया लगातार सातवें सत्र में भी मजबूत हुआ। हालांकि, दिन के दौरान हुई अधिकांश बढ़त गंवाने के बाद, यह मामूली तेजी के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में सुधार और मंगलवार को बाजार में छुट्टी होने से पहले घरेलू शेयरों में मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण, रुपये की तेजी सीमित रही। वहीं, RBI के दखल और अमेरिकी डॉलर के स्थिर रहने से रुपये को सहारा मिला। तकनीकी रूप से देखें तो स्पॉट USDINR के लिए 94.70 के स्तर पर सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि 95.50 के स्तर पर रेजिस्टेंस है।घरेलू इक्विटी बाजार में, सेंसेक्स 876.37 अंक गिरकर 73,852.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 257.20 अंक गिरकर 22,888.95 पर आ गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) खरीदार बन गए और उन्होंने कुल 1,165.92 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस बीच, शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों के अनुसार, 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.578 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया।ब्रिकवर्क रेटिंग्स के हेड ऑफ रिसर्च, राजीव शरण का कहना है कि सोमवार को रुपया लगातार सातवें सत्र में मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 94.8 के स्तर को छू गया और डॉलर के मुकाबले 94.95 के आसपास बना रहा। इस तरह, महीने की शुरुआत में 97 के स्तर से आई इसकी जोरदार रिकवरी कायम रही। शुक्रवार को जारी RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी है। 9 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 8.6 अरब डॉलर घटकर 7.26 अरब डॉलर रह गया। इस तरह, सितंबर की शुरुआत से अब तक कुल 60 अरब डॉलर की कमी आई है। यह एक अहम आंकड़ा है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने केवल करेंसी सट्टेबाजों को चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि अपने नियमों को सख्त करने से पहले एक 'कृत्रिम आधार' (artificial floor) बनाने के लिए भारी रकम भी खर्च की।हालांकि शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 1,166 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन ब्रेंट क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ना यह बताता है कि RBI हमेशा के लिए बाजार में शांति नहीं बनाए रख सकता। अब बाजार के बुनियादी कारकों (market fundamentals) को ही स्थिति संभालनी होगी।Market Outlook : बाजार की तेजी को लगा ब्रेक, जानिए 21 अक्टूबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चालडिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
पाकिस्तान के सबसे महंगे होटल में अमेरिकी यूट्यूबर ने गुजारी रात, बोला- 'ऐसा दिन किसी का न आए'
मशहूर अमेरिकी यूट्यूबर क्रिस मिक्स ल्यूइस ने पाकिस्तान के सबसे महंगे 'सेरीना होटल' की अव्यवस्था और गंदगी को उजागर किया है. 300 डॉलर प्रति रात वाले इस फाइव स्टार होटल का यह बुरा हाल देखकर स्थानीय पाकिस्तानी नागरिक भी बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं.
हर अमेरिकी बच्चे को देंगे SpaceX का शेयर, एलन मस्क का बड़ा वादा
Elon Musk ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने इस प्रस्ताव के बारे में बताया है. अगर फिलहाल के आधार पर देखें, तो अमेरिका में 18 साल से कम उम्र के करीब 7.2 करोड़ बच्चे हैं, ऐसे में उनके शेयर वितरण प्रपोजल का दायरा बेहद बड़ा हो सकता है.
मोगा जिले के गांव डाला के मूल निवासी गुरिंदर सिंह गिल पर अमेरिका के कैलिफोर्निया (सैक्रामेंटो) में अपनी पत्नी जैस्मीन गिल की नृशंस हत्या करने और सबूत मिटाने की नियत से शव को जलाने का संगीन आरोप लगा है। अमेरिकी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी गुरिंदर गिल को गिरफ्तार कर लिया है। जैस्मीन और गुरिंदर की शादी करीब ढाई साल पहले हुई थी और दोनों का सात महीने का एक छोटा बच्चा भी है। तलाक को लेकर चल रहा था विवाद प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरिंदर और जैस्मीन कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में रह रहे थे। पिछले कुछ समय से दोनों के बीच तलाक को लेकर अनबन और विवाद चल रहा था। जैस्मीन के अचानक लापता होने पर उसके चचेरे भाई ने अमेरिकी पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। मामले की जांच के दौरान जब पुलिस ने पति गुरिंदर गिल से सख्ती से पूछताछ की, तो परतें खुलती चली गईं। पुलिस के अनुसार, गुरिंदर ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद अपराध को छिपाने के उद्देश्य से उसके शव को आग के हवाले कर दिया था। पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन नेता की बेटी थीं जैस्मीन मृतका जैस्मीन गिल 'पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन' के नेता जगतार सिंह जलाजण और लुधियाना के डीएमसी (DMC) अस्पताल की सेवानिवृत्त कर्मचारी सुखविंदर कौर रानी की बेटी थीं। परिवारजनों ने बताया कि जैस्मीन की अस्थियां अमेरिका से पंजाब लाने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, सात महीने के मासूम बच्चे को फिलहाल अमेरिकी सरकार के बाल कल्याण विभाग की देखरेख में रखा गया है। विदेश में पत्नी की हत्या की दूसरी दिल दहला देने वाली वारदात निहाल सिंह वाला हलके के निवासियों के अनुसार, विदेश में अपने ही क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा पत्नी की हत्या किए जाने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पूर्व, हलका निहाल सिंह वाला के गांव भागीके निवासी केवल सिंह ने बेल्जियम में अपनी पत्नी की हत्या कर शव के टुकड़े-टुकड़े करके नदी में बहा दिए थे। उस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करीब 10 साल बाद हुआ था, जिसमें अदालत ने आरोपी केवल सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब इस नई वारदात ने एक बार फिर पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
एलन मस्क का बड़ा ऐलान, 2027 में अमेरिका के हर बच्चे को देंगे SpaceX का एक शेयर
बिजनेस ,19 अक्टूबर 2026 | दुनिया के दिग्गज कारोबारी एलन मस्क ने बच्चों के भविष्य को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह साल 2027 में अमेरिका के हर बच्चे को अपनी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX का एक शेयर देंगे। मस्क ने 19 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह […] The post एलन मस्क का बड़ा ऐलान, 2027 में अमेरिका के हर बच्चे को देंगे SpaceX का एक शेयर appeared first on Rashtriya Ujala .
ईरान या हूती, किसका डर? अमेरिका ने 11 अरब मुल्कों में जारी किया अलर्ट
मिडिल ईस्ट में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच अमेरिका ने 11 देशों और इलाकों में अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी किया है. चेतावनी में संभावित हवाई क्षेत्र बंद होने, फ्लाइट रद्द होने और यात्रा में रुकावट आने की आशंका जताई गई है.
रूसी तेल पर भारत को राहत, अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान में क्या संकेत? - BBC
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रूसी तेल पर भारत को राहत, अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान में क्या संकेत?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान में दिखता है कि अमेरिका ने भारत पर तत्काल सख़्ती से फ़िलहाल परहेज़ किया है. अमेरिका के इस रुख़ के भारत के लिए क्या मायने हैं.
एलन मस्क ने अमेरिका के हर बच्चे को SpaceX का एक शेयर देने का ऐलान किया है। प्रस्तावित योजना अगले साल लागू हो सकती है, लेकिन शेयर बांटने की प्रक्रिया और पात्रता की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
फ्रांस में हिंसा के पीछे इमिग्रेशन या आर्थिक असमानता? अमेरिका में क्यों छिड़ी बहस
फ्रांस में हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने अमेरिका में इमिग्रेशन बनाम आर्थिक असमानता की बहस छेड़ दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसके लिए पश्चिमी देशों की उदारवादी इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने इसे बढ़ती आर्थिक असमानता, महंगे आवास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी समस्या बताया।
एलन मस्क का बड़ा ऐलान, अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को मिलेगा 'स्पेसएक्स' का एक शेयर
अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने सोमवार को कहा कि वह अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को स्पेसएक्स का एक शेयर देंगे।
एलन मस्क का बड़ा ऐलान, अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को मिलेगा ‘स्पेसएक्स’ का एक शेयर
New Delhi, 19 अक्टूबर . अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने Monday को कहा कि वह अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को स्पेसएक्स का एक शेयर देंगे. social…
वाशिंगटन, 19 अक्टूबर . अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों, खासकर India और चीन, पर अतिरिक्त टैरिफ…
एलन मस्क का बड़ा ऐलान, अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को मिलेगा 'स्पेसएक्स' का एक शेयर
एलन मस्क का बड़ा ऐलान, अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को मिलेगा 'स्पेसएक्स' का एक शेयर
दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि अगले साल वह अमेरिका के हर बच्चें को SpaceX का एक शेयर देने जा रहे हैं.
हजारों दर्शकों के बीच हुआ खौफनाक हादसा: स्टंट के दौरान 170 फीट से नीचे गिरा अमेरिकी सैनिक, मौके पर ही तोडा दम
दहेज प्रताड़ना मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट सख्त, अमेरिका में रह रहे पति की अंतरिम जमानत खत्म
रायपुर की महिला की शिकायत पर दर्ज दहेज प्रताड़ना मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अमेरिका में रह रहे पति सुनील कुमार अग्रवाल की गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत खत्म कर दी है।
जेडी वेंस ने ईरान के साथ युद्ध से निपटने में अमेरिका की विफलताओं को स्वीकार किया
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने माना कि अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के तरीके से सैन्य रणनीति की कुछ कमियां सामने आईं। उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि कुछ मामलों में—उदाहरण के लिए, सैनिकों की तैनाती की जगह को लेकर—हमें एहसास हुआ कि यह एक बड़ी गलती थी जिसे बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था; हमने अब […] The post जेडी वेंस ने ईरान के साथ युद्ध से निपटने में अमेरिका की विफलताओं को स्वीकार किया appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
भारत का नाम जप रहे बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिका से लगने लगा डर; कारण भी बताया
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत का जिक्र करते रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच रिश्ते को बहुत खास बताया था। दरअसल, वह आशंका जता रहे हैं कि अमेरिका का अगला राष्ट्रपति इजरायल के खिलाफ दुश्मनी रख सकता है।
अमेरिका में कंट्रोल, मुंबई में फायरिंग... टाइगर श्रॉफ गोली कांड में बिश्नोई गैंग का नाम
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार हुए और 17 साल के एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया. जांच में लारेंस बिश्नोई गैंग का नाम और अमेरिका से उसका कंट्रोल होने की बात सामने आने से बॉलीवुड को धमकाकर उगाही के आरोप फिर केंद्र में हैं.
मिडिल ईस्ट में ईरान-हूती का बढ़ा खतरा, अमेरिका ने अपने नागरिकों को किया अलर्ट
ईरान और हूती विद्रोहियों से खतरे का हवाला देते हुए मध्य पूर्व में मौजूद अपने नागरिकों के लिए अमेरिकी दूतावासों ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
'ट्रेड डील के बेहद करीब भारत-अमेरिका', मार्को रुबियो का बड़ा ऐलान
मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. उनकी भारत यात्रा में रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक हालात और ऊर्जा सहयोग के साथ रूस से ईंधन खरीद पर प्रस्तावित शुल्क की समीक्षा भी अहम रहेगी.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, जल्द हो सकता है ऐलान: मार्को रुबियो
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है। भारत की अपनी यात्रा से एक दिन पहले उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर अधिकांश काम पूरा हो चुका है।
मुंबई में एक्टर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की जिम्मेदारी लेने वाला गैंगस्टर अनिल पंडित हरियाणा के पानीपत जिले के रेरकलां गांव का रहने वाला है। साल 2022 में नौकरी करने के लिए दुबई गया था। 2024 में वह डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंच गया। भारत छोड़ने से पहले उसके खिलाफ देश में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं था, लेकिन अमेरिका पहुंचने के बाद वह लॉरेंस गैंग से जुड़ गया और हैरी बॉक्सर के संपर्क में आया। अब विदेश में बैठकर वह भारत में रंगदारी मांगने और फायरिंग जैसी वारदातों को अंजाम दिलवाने के नेटवर्क में सक्रिय है। हाल ही में अनिल पंडित ने हरियाणवी सिंगर दिलेर खरकिया की गाड़ी पर हुई फायरिंग की भी जिम्मेदारी ली थी। पानीपत में अनिल पर 10 केस दर्ज हैं। टाइगर पर फायरिंग मामले में पुलिस ने तीन युवकों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि इनमें से दो युवक हरियाणा और एक महाराष्ट्र का रहने वाला है। हैरी बॉक्सर के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा सूत्रों के मुताबिक, अनिल पंडित लॉरेंस के नाम पर धमकियां जरूर देता है, लेकिन उसे सीधे लॉरेंस से निर्देश नहीं मिलते। उसका मुख्य संचालक भारत का इनामी बदमाश हरी चंद जाट उर्फ हैरी बॉक्सर है। वह भी अमेरिका में बैठा है। हरियाणा पुलिस की स्पेशल टीमें इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के साथ अनिल पंडित के प्रत्यर्पण और उसके खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया में जुटी हैं। अनिल पंडित और उसका साथी रणदीप मलिक विदेश में बैठकर सोशल मीडिया और विशेष एन्क्रिप्टेड एप के जरिए रंगदारी का नेटवर्क चला रहे हैं। इस नेटवर्क का सबसे ज्यादा असर पानीपत में देखने को मिला है।
एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के बाद जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है वह है अनिल पंडित. जो लॉरेंस बिश्नोई गैंग का मेंबर है. जिसकी भारत से अमेरिका पहुंचने से लेकर लॉरेंस गैं से जुड़ने तक की कहानी दिलचस्प है.
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जल्द लग सकती है मुहर, मार्को रुबियो ने कहा- बातचीत अंतिम चरण के करीब
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
अमेरिका के लास वेगास एयरपोर्ट पर हादसा, रनवे से आगे निकल गया विमान, बाउंड्री से जा टकराया
लास वेगास एयरपोर्ट पर एक प्राइवेट जेट उड़ान भरने के दौरान फिसलकर रनवे से आगे निकल गया। इसके बाद विमान एयरपोर्ट की बाउंड्री से टकरा गया। हालांकि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है।
गैंगस्टर जगदीप सिंह उर्फ ‘जग्गू भगवानपुरिया’ की पत्नी अमनदीप कौर पंजाब के सीमावर्ती हलके डेरा बाबा नानक से चुनाव लड़ेंगी। अमेरिका से 3 दिन पहले लौटीं अमनदीप ने 18 अक्टूबर को हलके के गांव सर्फकोट में विधानसभा चुनाव में उतरने की घोषणा की। हालांकि उन्होंने पार्टी का नाम नहीं बताया। जग्गू भगवानपुरिया इस समय असम की सिलचर सेंट्रल जेल में बंद है। अमेरिका में डेंटल की पढ़ाई और वहां की जिंदगी छोड़कर लौटीं अमनदीप ने कहा कि वह डेरा बाबा नानक की ‘बेटी भी हैं और बहू भी’। इसलिए अपने हलके और घर की सेवा करना उनका नैतिक फर्ज है। उन्होंने कहा कि अब वह स्थायी रूप से यहीं रहकर जनता के बीच काम करेंगी। पति पर लगे गैंगस्टर के ठप्पे को लेकर उन्होंने भावुक होते हुए कहा- वे जग्गू नहीं, जगदीप सिंह अठवाल हैं। कोई भी मां के पेट से गैंगस्टर पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि उनके पति को एक आम इंसान के रूप में देखा जाना चाहिए और गैंगस्टर का टैग खत्म होना चाहिए। अमनदीप कौर ने ये बड़ी बातें कही…. जग्गू भगवानपुरिया पर 128 से अधिक केस गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया पर पंजाब और अन्य राज्यों में 128 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, फिरौती, जबरन वसूली, नशा तस्करी और अवैध हथियारों की सप्लाई से जुड़े मामले शामिल हैं। वह पंजाबी सिंहग सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत करीब 12 मामले दर्ज हैं। जग्गू साल 2015 से जेल में बंद है और वर्तमान में असम की सिलचर सेंट्रल जेल में है। *********** ये खबर भी पढ़ें: पंजाब की पॉलिटिक्स में गैंगस्टर्स की कहानी: AAP में सेखों की एंट्री पर विपक्ष मुद्दा बना रहा; जानिए किन गैंगस्टरों ने रखा राजनीति में कदम पंजाब की राजनीति में गैंगस्टरों का दबदबा लंबे समय से रहा है। गैंगस्टर्स को राजनीतिक दलों और नेताओं का सीधा संरक्षण मिलता रहा। जसविंदर सिंह भुल्लर जैसे कई गैंगस्टर राजनीति में आए, जबकि जग्गू भगवानपुरिया जैसों ने अपने परिवार को आगे किया। हालांकि, पंजाब की राजनीति में गैंगस्टर या उनके करीबी कोई बड़ा चुनाव नहीं जीते। (पढ़ें पूरी खबर)
अमेरिका-सऊदी के दबाव में PAK ने ईरान की पीठ पर छुरा घोंपा
पाकिस्तान ने सुरक्षा और तस्करी रोकने के लिए ईरान के साथ दो बॉर्डर क्रॉसिंग पर व्यापार स्थगित किया. सैकड़ों ट्रक फंसे, एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है.
आगरा देश के कुल जूता निर्यात में करीब 28 से 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है और यहां से सालाना लगभग 5,000 करोड़ रुपये के फुटवियर विदेश भेजे जाते हैं।
US-Russia Sanctions: रूस पर नए प्रतिबंधों से पहले 60 दिन रुकेगा अमेरिका, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा भी टला?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर दिल्ली के बजाय मुंबई और जामनगर जा रहे हैं। जानिए अमेरिका में डीजल संकट, जामनगर रिफाइनरी और भारत में छिड़े सियासी विवाद की पूरी वजह।
‘भारत में हो रहे आंदोलनों को अमेरिका कर रहा फंड ?’ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का विस्फोटक दावा
मार्कंडेय काटजू ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इन देशों के साथ नजदीकी बढ़ा रही है। उनका संकेत था कि इसी कारण वॉशिंगटन भारत के भीतर असंतोष को हवा दे सकता है।
यूक्रेन में क्यों अटकीं स्टारलिंक की सेवाएं?: अमेरिकी सांसदों में उठा मामला, कहा- जिम्मेदार का पता लगाना जरूरी
Tiger Shroff Firing Update: वायरल ऑडियो क्लिप में गैंगस्टर अनिल पंडित ने सलमान खान को बिश्नोई समाज से माफी मांगने की धमकी दी और कहा कि उनके साथ काम करने वालों को निशाना बनाया जाएगा।
अनिल अमेरिका में, गोल्डी कनाडा में... कहां हैं लॉरेंस गैंग के बड़े चेहरे?
मुंबई में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अनिल पंडित और हरमन संधू ने हमले की जिम्मेदारी ली है. गैंग का सरगना लॉरेंस बिश्नोई जेल में बंद हैं, लेकिन उसका गिरोह सक्रिय है.
Video: भारत के देसी अंदाज पर फिदा हुई अमेरिकी महिला? किराना स्टोर के वीडियो पर आए मजेदार सुझाव
भारत में मोहल्ले की किराना दुकान से दूध-दही खरीदना भले ही आम बात हो, लेकिन विदेश से आए लोगों के लिए ऐसे अनुभव खास बन सकते हैं। दिल्ली में रहने वाली एक अमेरिकी महिला का वीडियो इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है। घर से चंद कदमों की दूरी पर मौजूद दुकान से सामान खरीदने का उनका अंदाज लोगों का ध्यान खींच रहा है। खास बात यह है कि उन्होंने दुकानदार से हिंदी में बातचीत की और जरूरत का सामान लेकर वापस घर लौट गईं। उनकी इस छोटी-सी खरीदारी ने सोशल मीडिया पर ऑनलाइन डिलीवरी और स्थानीय दुकानों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।जहां कुछ लोग क्विक-कॉमर्स सेवाओं को सुविधाजनक मानते हैं, वहीं कई यूजर्स मोहल्ले के दुकानदारों से खरीदारी करने को बेहतर बता रहे हैं। क्रिस्टन फिशर का यह वीडियो भारतीय रोजमर्रा की जिंदगी की एक ऐसी झलक दिखाता है, जिसे स्थानीय लोग अक्सर सामान्य समझते हैं।घर से निकलीं और एक मिनट में पहुंच गईं किराना दुकानअमेरिकी महिला क्रिस्टन फिशर (Kristen Fischer) ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह अपने घर के पास स्थित किराना स्टोर पर जाती नजर आ रही हैं। क्रिस्टन के मुताबिक, यह दुकान उनके घर से एक मिनट से भी कम दूरी पर है।वीडियो में वह पैदल दुकान पहुंचती हैं और दुकानदार से हिंदी में बात करते हुए दो लीटर फुल क्रीम दूध और आधा किलो दही मांगती हैं। सामान मिलने के बाद वह नकद भुगतान करती हैं और वापस घर लौट जाती हैं। उनकी यह छोटी-सी खरीदारी दिखाती है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हमेशा बड़े स्टोर या लंबी शॉपिंग की जरूरत नहीं होती।हिंदी में बातचीत ने खींचा लोगों का ध्यानक्रिस्टन के वीडियो की खास बात सिर्फ किराना दुकान तक उनकी छोटी-सी यात्रा नहीं, बल्कि दुकानदार से हिंदी में बातचीत करना भी है। उनका यह अंदाज भारतीय बाजारों की रोजमर्रा की संस्कृति से जुड़ाव की झलक देता है। भारत में मोहल्ले की किराना दुकानें लंबे समय से लोगों की जरूरतें पूरी करती आई हैं। यहां ग्राहक कम मात्रा में सामान खरीद सकते हैं और जरूरी चीजों के लिए दूर जाने की परेशानी भी नहीं होती।Blinkit का सुझाव, छोटे दुकानदारों के समर्थन में भी आए लोगक्रिस्टन की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा, “आप Blinkit का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।” वहीं, दूसरे यूजर ने स्थानीय कारोबारियों का समर्थन करते हुए कहा, “अच्छा है कि आप छोटी किराना दुकानों को कारोबार दे रही हैं।” इन प्रतिक्रियाओं से ऑनलाइन डिलीवरी और स्थानीय दुकानों के बीच लोगों की पसंद को लेकर चर्चा भी देखने को मिली। View this post on Instagram A post shared by Instagram छोटी दुकान, बड़ी सुविधाआज के दौर में जब ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स सेवाएं तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं, तब भी मोहल्ले की किराना दुकानें अपनी अहमियत बनाए हुए हैं। दूध, दही जैसी जरूरी चीजें कुछ ही मिनटों में खरीद पाना कई लोगों के लिए बड़ी सुविधा है।क्रिस्टन फिशर का वीडियो इसी सामान्य अनुभव को एक नए नजरिए से सामने लाता है। दिल्ली के निवासियों के लिए जो रोजमर्रा की बात है, वही किसी दूसरे देश से आई महिला के लिए दिलचस्प अनुभव बन गई। शायद यही वजह है कि उनकी छोटी-सी खरीदारी इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रही है।Video: शादी के बाद इंटरव्यू में HR ने पूछा बेबी प्लानिंग पर सवाल, हैरान रह गई महिला, वीडियो वायरल
जब अमेरिकियों ने अंग्रेजों को हराया, लॉर्ड कॉर्नवालिस को करना पड़ा था सरेंडर
आज के दिन ही अमेरिका ने अपनी आजादी की आखिरी जंग जीत ली थी. इसके साथ ही बड़े और कुख्यात अंग्रेज जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस को सरेंडर करना पड़ा था. इस युद्ध के बाद अमेरिकी क्रांति खत्म हो गई थी और एक साल बाद अमेरिका ने आजादी की घोषणा की थी.
क्या यूक्रेन का साथ छोड़ रहा अमेरिका?: नहीं मिली रूसी हमलों की चेतावनी, स्टारलिंक पर क्या बोले जेलेंस्की? Is America abandoning Ukraine No warning received regarding Russian attacks what Zelenskyy say about Starlink
तीन दिनों तक अमेरिका ने नहीं दी रूस के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की खुफिया जानकारी: जेलेंस्की
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फ्यूचर अमेरिकी राष्ट्रपति से डरे नेतन्याहू? कहा- भारत से गठबंधन जरूरी
नेतन्याहू ने आशंका जताई है कि भविष्य में अमेरिका का कोई राष्ट्रपति इजरायल के प्रति विरोधी रुख अपना सकता है. उन्होंने भारत और लैटिन अमेरिका समेत दूसरे देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दिया है. नेतन्याहू ने संसदीय चुनाव से पहले अपनी सुरक्षा नीति पेश करते हुए यह बात कही.
दरियादिली: एलन मस्क अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को देंगे स्पेसएक्स के शेयर, जानिए उन्होंने क्या कहा
एलन मस्क ने अगले साल अमेरिका के हर बच्चे को एक स्पेसएक्स शेयर देने की घोषणा की है। जानें इस योजना के विवरण, मस्क की स्पेसएक्स में हिस्सेदारी और उनके रोडस्टर स्पोर्ट्स कार के नए प्रोटोटाइप के बारे में।
'अमेरिकी नीति बदली तो क्या करेगा इस्राइल?': चुनाव से पहले नेतन्याहू ने फिर किया भारत का जिक्र; क्या बोले?
अमेरिका की आतंकी सूची में शामिल मुहम्मद सरवर की मौत: लश्कर के लिए जुटाता था फंड; क्या थी भूमिका?
अमेरिका की आतंकी सूची में शामिल मुहम्मद सरवर की मौत: लश्कर के लिए जुटाता था फंड; क्या थी भूमिका?
हरियाणा के महेंद्रगढ़ में अमेरिका की वाशिंगटन डिजिटल यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता रमेश राव पायलट का अभिनंदन किया गया। रविवार को यादव धर्मशाला में आयोजित समारोह में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें सम्मानित किया। रमेश राव पायलट पिछले 21 वर्षों से सामाजिक और धार्मिक कार्यों के माध्यम से लोगों की सेवा कर रहे हैं। वक्ताओं ने उनकी उपलब्धि को महेंद्रगढ़ क्षेत्र के लिए गर्व की बात बताया और कहा कि समाजसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान दूसरों के लिए प्रेरणादायक है। समारोह में महेंद्रगढ़ के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दे भी उठाए गए। इनमें महेंद्रगढ़ में जिला मुख्यालय स्थापित करने, औद्योगिक विकास के लिए आईएमटी बनाने और केंद्रीय विश्वविद्यालय में मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग प्रमुख रही। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र के विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों को मिलकर प्रयास करने चाहिए। समारोह की मुख्य अतिथि साध्वी पुष्पा शास्त्री रहीं, जबकि यादव सभा के कनवीनर प्राचार्य लालचंद यादव ने अध्यक्षता की। 21 साल से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रमेश राव पायलट यादव महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने के साथ पत्रकार और लेखक के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक कार्यों के जरिए लोगों की समस्याएं उठाना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। किसी व्यक्ति के सामाजिक योगदान को सम्मान मिलने से दूसरे लोगों को भी जनहित के कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। महेंद्रगढ़ के विकास के लिए एकजुट होने की अपील रमेश राव पायलट ने अभिनंदन समारोह में पहुंचे सभी प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने के लिए लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होना होगा। उन्होंने जिला मुख्यालय, आईएमटी और केंद्रीय विश्वविद्यालय में मेडिकल कॉलेज की मांग को प्रमुखता से उठाया। साथ ही कहा कि इन मुद्दों को पूरा कराने के लिए जनसहयोग से व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि महेंद्रगढ़ क्षेत्र का विकास हो और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
अमेरिका में कार के चारों टायरों को निकालकर चोरों ने छोड़ा ऐसा, पढ़कर हैरान रह जाएंगे आप
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मछुआरा कुछ सेकंड के लिए हम्पबैक व्हेल के मुंह में फंसा, अमेरिका में दावा चर्चा में
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ताजमहल को खूबसूरत बताने पर घिरी अमेरिकी महिला का दर्द छलका, बोली- इतने गंदे कमेंट्स आए, बता भी नहीं सकती
भारतीय महिला ने अमेरिका में हर महीने खर्च का बताया हिसाब-किताब, बोली- हमारा 4 लोगों का परिवार है
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अमेरिका-ईरान तनाव से लेकर फ्रांस में आगजनी तक, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच परिस्थितियां बेहद नाजुक हो चुकी हैं. सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों ने अमेरिका द्वारा दिए गए उन्नत अपाचे हेलीकॉप्टर को गिरा दिया है, जिससे क्षेत्र में हलचल मच गई है. इसके साथ ही लाल सागर और फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमले लगातार जारी हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है.
माधुरी दीक्षित : शादी के बाद अमेरिका में हाउसवाइफ बन गई थीं
मुंबई, बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित ने अपनी एक्टिंग और डांस से लाखों लोगों का दिल जीता। हालांकि, शादी के बाद एक्ट्रेस ने अपनी जिंदगी में बड़ा बदलाव किया और पति डॉ. श्रीराम नेने के साथ अमेरिका शिफ्ट हो गईं।
वेस्ट बैंक में फिर भड़की हिंसा: अमेरिकी पत्रकार और यूरोपीय राजनयिक पर हमला, इजरायलियों पर आरोप
इजरायली कब्जे वाले वेस्ट बैंक में तनाव लगातार बढ़ रहा है। खबर है कि इजरायली बसने वालों ने एक अमेरिकी फोटो जर्नलिस्ट और कई यूरोपीय राजनयिकों पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच होर्मुज में हुआ भीषण धमाका!
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों से समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि समुद्री बारूदी सुरंग से टकराने के बाद एक विशाल टैंकर में विस्फोट हुआ, जिसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा था. इससे पहले एक अन्य टैंकर में भी धमाके की खबर आई थी. वहीं, सऊदी अरब के अल जुबैल के पास दो जहाजों पर हमले की सूचना मिली.
Mumbai , 18 अक्टूबर . Bollywood की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित ने अपनी एक्टिंग और डांस से लाखों लोगों का दिल जीता. हालांकि, शादी के बाद एक्ट्रेस ने…
अमेरिका : ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग
वाशिंगटन, अमेरिका के कई शहरों में रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सरकार की नीतियों के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया। भारी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। जल्दी मतदान को प्रोत्साहन देने के लिए लुइसविले में 'नो किंग्स' रैलियां फिर से आयोजित की गईं।
दुनिया के कई देशों में आर्थिक दबाव, रोजगार की चिंता और सरकारी नीतियों को लेकर लोगों की नाराजगी चर्चा में है। फ्रांस से इटली और अमेरिका तक अलग-अलग मुद्दों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने सरकारों के सामने जनता की अपेक्षाओं और आर्थिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने का सवाल खड़ा किया है। कहीं महंगाई […] The post फ्रांस, इटली से अमेरिका तक 8 देशों में विरोध प्रदर्शन तेज, महंगाई-बेरोजगारी और सरकारी नीतियों से क्यों नाराज हैं लोग? first appeared on Sanjeevni Today .
मेरे सास-ससुर दक्षिण भारत से, उनकी बेटी आज अमेरिका की सेकंड लेडी: जेडी वेंस
वाशिंगटन, 18 अक्टूबर . अमेरिकी उपPresident जेडी वेंस ने इमिग्रेशन और अपनी भाषा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अपनी फैमिली का उदाहरण पेश किया. कहा कि…
अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग, सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन
वाशिंगटन, 18 अक्टूबर . अमेरिका के कई शहरों में Sunday को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी Government की नीतियों के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया. भारी संख्या में…
अमेरिका की सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी कम होने से यूक्रेन की रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। रूसी मिसाइलों और सैन्य गतिविधियों के बारे में समय रहते सूचना मिलना यूक्रेन की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
डीजल के बाद अब अमेरिका रूस से करेगा ये बड़ी डील, पुतिन के करीबी का ऐलान
रूस और अमेरिका के बीच हाल ही में डीजल को लेकर बड़ी डील हुई थी और अब एक डेटा सेंटर्स को बिजली पॉवर देने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है. पुतिन के करीबी का कहना है कि इस डील पर जल्द मोहर लग सकती है. हालांकि, अभी बाधाएं बहुत सी हैं.
रूसी कच्चे तेल की प्रोसेसिंग के बाद भारत और दो अन्य देशों से पश्चिमी देशों को तेल उत्पादों का निर्यात सितंबर में 43% बढ़कर 1 अरब यूरो हो गया। सीआरईए रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ ने रूसी तेल से बने ईंधन पर प्रतिबंध के बावजूद इन देशों से आयात बढ़ाया, जबकि भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटा।
इस सप्ताह भारत की कूटनीति के केंद्र में अमेरिका और यूएई, जयशंकर करेंगे अहम बातचीत
New Delhi, 18 अक्टूबर . कूटनीति के लिहाज से India के लिए ये सप्ताह भी संभावनाओं और उम्मीदों से भरा रहने वाला है. 19 और 20 अक्टूबर का…
दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र कहे जाने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में इस समय राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। आगामी 3 नवंबर 2026 को होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से ठीक पहले अमेरिकी राजनीति में एक नया और आक्रामक बवंडर खड़ा हो गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में 'नो किंग्स' (No Kings) नेटवर्क के बैनर तले शनिवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों और विशाल रैलियों का आयोजन किया गया। इन रैलियों का घोषित उद्देश्य भले ही अमेरिकी मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग जल्द से जल्द करने और शुरुआती मतदान (Early Voting) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करना था, लेकिन इसके अंतर्निहित राजनीतिक संदेश ने देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। इन प्रदर्शनों ने वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की नीतियों के खिलाफ जनता के एक बड़े वर्ग के गुस्से को फिर से उजागर कर दिया है।वाशिंगटन डीसी से अटलांटा तक गूंजे नारे, 'जल्दी वोट करें' का संदेशशनिवार को अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन डीसी में स्थित ऐतिहासिक लिंकन मेमोरियल (Lincoln Memorial) के परिसर में कड़ाके की ठंड और सर्द हवाओं की परवाह किए बिना सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक, एक्टिविस्ट और राजनीतिक कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। प्रदर्शन का माहौल किसी राजनीतिक सभा से अलग एक जन-उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था, जहां संगीत की धुनों के बीच लोगों ने नृत्य किया और लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में जोरदार नारे लगाए।प्रदर्शनकारियों के हाथों में विभिन्न प्रकार के आकर्षक और तीखे संदेश लिखे पोस्टर दिखाई दे रहे थे। इन पोस्टरों पर प्रमुख रूप से 'जल्दी मतदान करें' (Vote Early), 'मेरे वोट से दूर रहो' और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े नारे लिखे हुए थे। इसी तरह, जॉर्जिया की राजधानी अटलांटा में भी एक बड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए सिटी काउंसिल के सदस्य माइकल जूलियन बांड ने नागरिकों से अपील की कि वे आगामी 3 नवंबर को होने वाले आम चुनावों के दिन का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द अपना वोट डालें और अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को मतदान की जो असली ताकत दी है, मौजूदा समय में उसका सही इस्तेमाल करना सबसे बड़ी देशभक्ति है।क्या है 'नो किंग्स' आंदोलन और क्यों ट्रंप प्रशासन के खिलाफ उठ रहे हैं सवालभले ही इन रैलियों के आयोजकों और प्रबंधकों ने आधिकारिक तौर पर इसे पूरी तरह से 'गैर-दलीय' (Non-partisan) मंच बताने की कोशिश की हो, ताकि ज्यादा से ज्यादा आम जनता इससे जुड़ सके, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे अच्छी तरह समझ रहे हैं। 'नो किंग्स' नेटवर्क मूल रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन द्वारा लिए गए कई विवादास्पद फैसलों, कार्यकारी शक्तियों के कथित विस्तार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ मुखर होकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए जाना जाता रहा है।आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं का मानना है कि अमेरिकी लोकतंत्र में कोई भी शासक या राष्ट्रपति देश के संविधान और कानून से ऊपर नहीं हो सकता। इसी वैचारिक पृष्ठभूमि के तहत यह रैलियां आयोजित की जा रही हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश देना है कि यदि सत्ता के केंद्रीयकरण को रोकना है, तो मतपेटी ही सबसे बड़ा हथियार है। मिड टर्म इलेक्शन से ठीक पहले इस तरह का जन-आंदोलन खड़ा होना यह साबित करता है कि अमेरिकी मतदाता मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर बेहद गंभीर और संचेत हैं।मध्यावधि चुनावों पर टिकी पूरी दुनिया की नजरेंअमेरिका में होने वाले ये मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) देश की संसद यानी कांग्रेस (कांग्रेस के दोनों सदनों—सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के राजनीतिक समीकरणों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्तमान अमेरिकी प्रशासन की नीतियों, आर्थिक फैसलों और विदेश मामलों पर इन चुनावों के परिणामों का सीधा असर पड़ेगा। यही कारण है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों ही दलों की तरफ से मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 'नो किंग्स' जैसी रैलियों के माध्यम से युवा और तटस्थ मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक खींचने की जो रणनीति अपनाई जा रही है, वह अंतिम परिणाम को पूरी तरह बदल सकती है। अमेरिकी इतिहास में शुरुआती मतदान (Early Voting) के रुझान हमेशा से यह तय करते आए हैं कि चुनाव के दिन मुख्य लहर किस दिशा में बहेगी। अब देखना यह होगा कि 3 नवंबर के इन ऐतिहासिक चुनावों में अमेरिकी जनता परिवर्तन के पक्ष में मतदान करती है या वर्तमान प्रशासनिक नीतियों पर अपनी मुहर लगाती है, लेकिन इतना तय है कि इन रैलियों ने चुनावी माहौल को बेहद गर्म कर दिया है।
रूस पर नरमी दिखाकर घिरे ट्रंप: विरोध के बीच कहा- मेरा फैसला दुनिया के हित में; अमेरिकी सांसदों ने खोला मोर्चा--Trump Defends Russia Sanctions Waiver, Says Decision Is Good for the World
यूक्रेन की सैटेलाइट सेवा पर विवाद: रुबियो ने व्हाइट हाउस को बताया बेदाग, कहा- अमेरिका का कोई हाथ नहीं marco-rubio-denies-us-role-ukraine-drone-satellite-disruption-starlink-starshield
अमेरिका: कंसास में फुटबॉल मैच के दौरान मैदान में घुसी कार; बच्चे समेत दो की मौत, हिरासत में वाहन चालक kansas-wichita-soccer-field-vehicle-crash-two-dead-child-injured
Iran America War: अमेरिका बना रहा MOAB से हमले का प्लान,ईरान का पलटवार क्या होगा?|Trump
इस बार भी सुगबुगाहट बढ़ रही है कि अमेरिका ईरान पर बहुत तगड़ा अटैक करने जा रहा है...ये हमला न्यूक्लियर तो नहीं होगा..लेकिन उससे कम भी नहीं होगा...क्यों की अमेरिका मदर ऑफ ऑल बम्बस का इस्तेमाल करेगा और ईरान इसका जवाब देने की तैयारी कर रहा है…
London में Dhruv Rathee और Washington में 6 अमेरिकी सांसदों ने थामी भारत विरोधी अभियान की कमान
भारत के अंदरूनी मामलों में टांग अड़ाने और दुनिया भर में भारत को कटघरे में खड़ा करने का खेल एक बार फिर शुरू हो गया है। अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलाइब, एलेनॉर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि वे भारत दौरे पर छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कथित हिरासतों का मुद्दा उठाएं। यहां सवाल उठता है कि भारत को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने निकले इन सांसदों को आखिर किसने हक दिया कि वे हमारे देश के आंतरिक मामलों में दखल दें? भारत की समस्याओं पर इतनी चिंता दिखाने वाले इन नेताओं से यह भी पूछा जाना चाहिए कि उनकी यह चिंता चुनिंदा मुद्दों पर ही क्यों जागती है और भारत के मामले में वे हर बार उंगली उठाने के लिए सबसे आगे क्यों खड़े नजर आते हैं? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र पर उंगली उठाने वाले इन जनप्रतिनिधियों की अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय आचरण की पड़ताल कौन करेगा? वैसे यह कोई पहला अवसर नहीं है जब इन अमेरिकी नेताओं ने भारत की नीतियों पर सवाल उठाए हों। प्रमिला जयपाल ने 2019 में भी जम्मू-कश्मीर में संचार प्रतिबंधों और हिरासतों को लेकर भारत से जवाब मांगा था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उस समय उनके आकलन को अनुचित बताते हुए उनसे मुलाकात करने तक में रुचि नहीं दिखाई थी। अप्रैल 2022 में इल्हान उमर के पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के दौरे पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे देश की संप्रभुता से जुड़ा मामला बताया था। इल्हान उमर का तो अक्सर भारत विरोधी रवैया सामने आता ही रहता है। इसे भी पढ़ें: Dhruv Rathee ने 'वोट चोरी' के खिलाफ लंदन में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की; कहा- अब 'अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने' का समय आ गया है सवाल उठता है कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को ठीक से समझे बिना विदेशी दबाव बनाने की यह राजनीति आखिर क्यों चल रही है? क्या किसी राजनीतिक दल या किसी संगठन के आंदोलन के दौरान लगाये गये आरोपों को ही सच मानकर भारत को कटघरे में खड़ा कर देना इन सांसदों का नया शगल बन गया है? अगर इन्हें वाकई लोकतंत्र और नागरिकों की आजादी की इतनी चिंता है, तो यह चिंता हर देश के मामले में एक जैसी क्यों नहीं दिखती? आखिर भारत के मामले में ही इनका लोकतांत्रिक प्रेम क्यों उमड़ने लगता है? क्या भारत को नसीहत देना और उसके आंतरिक मामलों में दखल देना ही इनकी राजनीति का असली मकसद है? अब बात ध्रुव राठी की। जर्मनी में रहने वाले इस यूट्यूबर ने लंदन पहुंचकर पार्लियामेंट चौक में महात्मा गांधी की प्रतिमा के निकट 18 अक्टूबर को प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। उन्होंने भारत में कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है और विदेशों में लोगों से इस अभियान में शामिल होने का आग्रह किया है। यहां सवाल उठता है कि अगर ध्रुव राठी के पास वोट चोरी के सबूत थे तो वह उन्होंने अपने भारत दौरे के दौरान पुलिस या कोर्ट को क्यों नहीं दिये? क्यों वह वापस विदेश भाग गये? हर बात पर विदेशों में ढिंढोरा पीटना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की चुनावी व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश करना आखिर किस बात का संकेत है? चुनावी प्रक्रिया से शिकायत होना अलग बात है, लेकिन अपनी राजनीतिक खुन्नस निकालने के लिए पूरी चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठाना और दुनिया भर में भारत के लोकतंत्र की साख पर बट्टा लगाने की कोशिश करना अलग बात है। देखा जाये तो आरोप लगाना आसान है, लेकिन आरोपों को सबूतों के दम पर साबित करना ही असली कसौटी है! सवाल यह भी है कि ध्रुव राठी आखिर विदेशों में बैठकर भारत के खिलाफ इतना बड़ा अभियान किसके दम पर चला रहे हैं? लंदन में प्रदर्शन, विदेशी मंचों पर भारत को घेरने की कोशिश और देश की राजनीति को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की मुहिम, क्या यह सब महज संयोग है, या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? विदेशी फंडिंग के आरोपों को झुठलाने वाले ध्रुव राठी को बताना चाहिए कि इस पूरे अभियान का पैसा कहां से आ रहा है, इसे कौन चला रहा है और इसके पीछे किसके हित जुड़े हैं? आखिर कौन है जो भारत की छवि को विदेशों में नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे अभियानों को ताकत दे रहा है? साथ ही लंदन में भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में भारतीयों का मैदान में उतरना उन लोगों के लिए करारा जवाब है, जो विदेशों में बैठकर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। उन्हें समझ लेना चाहिए कि विदेशों में रहने वाले भारतीय कोई उनके इशारे पर चलने वाली भीड़ नहीं हैं। इस देश से प्यार करने वाले लाखों भारतीय दुनिया के किसी भी कोने में हों, तिरंगा उठाना और अपनी सरकार के समर्थन में आवाज बुलंद करना जानते हैं। भारत के खिलाफ नारे लगाने वाले ही लोकतंत्र के ठेकेदार नहीं हैं; भारत के समर्थन में खड़े होने वालों को भी अपनी बात कहने का पूरा हक है। करोड़ों भारतीयों के वोट से बनी सरकार का फैसला विदेशों में बैठे कुछ लोगों के शोर-शराबे से नहीं बदला जा सकता। भारत किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह फैसला भारत की जनता करेगी, कोई विदेशी ताकत नहीं! इसके अलावा, यह भी बड़ी हैरानी की बात है कि संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को भारत के मामलों में दखल देने की इतनी जल्दी रहती है कि वे किसी भी आरोप पर चिंता जताने से पहले पूरी सच्चाई जानने की जहमत तक नहीं उठातीं! 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान हिरासतों की खबरों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने चिंता जताई, तो भारत ने भी साफ-साफ जवाब दे दिया कि देश के आंतरिक मामलों में इस तरह की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भी भारत ने इन टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अपने संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस का हवाला दिया। सवाल यह है कि मानवाधिकारों की दुहाई देने वाली इन वैश्विक संस्थाओं को दुनिया के हर मामले में एक जैसी तत्परता क्यों नहीं दिखती? भारत के मामले में बिना पूरी तस्वीर समझे बयान देने की जल्दी और दूसरे मामलों में चुप्पी...आखिर यह दोहरा रवैया कब तक चलेगा? जब संस्थाएं चुनिंदा मुद्दों पर ही जागेंगी और अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग तराजू रखेंगी, तो उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे ही। यही रवैया उनकी विश्वसनीयता को कमजोर करता है और दुनिया भर में लोगों के मन में यह सवाल खड़ा करता है कि क्या ये संस्थाएं सचमुच मानवाधिकारों की रक्षा कर रही हैं या चुनिंदा राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का जरिया बनती जा रही हैं? उधर, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत के संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं पर बिना पूरी जानकारी के उंगली उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। भारत कोई ऐसा देश नहीं है कि कोई भी विदेशी संस्था या नेता उठे और बिना सोचे-समझे हमें लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने लगे! भारत के अपने कानून हैं, अपनी अदालतें हैं और अपना संवैधानिक ढांचा है। लिहाजा, भारत पर सवाल उठाने वालों को पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए, फिर बयानबाजी करनी चाहिए। भारत को बदनाम करने की कोशिश करने वालों को यह समझना होगा कि हर आरोप पर जवाब मिलेगा और तथ्यों के दम पर मिलेगा। बहरहाल, जो लोग सत्ता पलटने का ख्वाब देख रहे हैं उन्हें भी समझना होगा कि भारत की ताकत किसी एक सरकार में नहीं, बल्कि उस करोड़ों भारतीयों के जनादेश में है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव मजबूत की है। इस देश को न विदेशी मंचों पर बैठकर भाषण देने वाले कुछ नेता चला सकते हैं, न सोशल मीडिया पर शोर मचाकर खुद को लोकतंत्र का सबसे बड़ा रखवाला बताने वाले लोग! भारत की छवि को झूठे आरोपों, आधी-अधूरी जानकारी और राजनीतिक एजेंडे के सहारे चोट पहुंचाने का सपना देखने वालों को समझना होगा कि भारत कोई कमजोर देश नहीं, जिसकी साख चंद बयानों से मिटा दी जाए। भारत पर उंगली उठाने से पहले अपने तथ्यों की जांच करो, आरोप लगाने से पहले सबूत जुटाओ और लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने से पहले यह समझो कि भारत का भविष्य तय करने का अधिकार भारतीय जनता के पास है, किसी विदेशी नेता या सोशल मीडिया के स्वयंभू विशेषज्ञ के पास नहीं! सवाल पूछने हैं तो पूछिए, लेकिन सवालों की आड़ में देश की संस्थाओं को बदनाम करने का ठेका मत लीजिए। क्योंकि भारत की असली ताकत तिरंगे के नीचे खड़े करोड़ों लोगों का विश्वास, स्वाभिमान और अपने देश का फैसला खुद करने का अधिकार है। -नीरज कुमार दुबे
कैलिफोर्निया में पंजाब मूल की भारतीय महिला जैस्मीन औजला गिल की हत्या का मामला सामने आया है। उसके जले हुए अवशेष मिलने के बाद पति गुरिंदर गिल को गिरफ्तार किया गया है।
ईरान पर फिर बड़े हमले की ट्रंप की चेतावनी, पिकएक्स माउंटेन पर अमेरिका की नजर
ट्रंप ने गुरुवार रात न्यूजमैक्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उनके मुताबिक, ईरान का परमाणु कार्यक्रम पहाड़ों के नीचे गहराई में स्थित सुरक्षित ठिकानों में छिपा हो सकता है।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा पाकिस्तान पर दिए बयान को लेकर आज सीकर में कांग्रेस पार्टी द्वारा विरोध जताया गया। कांग्रेसियों ने करीब 1 घंटे तक मदन राठौड़ के पुतले को कलेक्ट्रेट के बाहर पेड़ पर रस्सी से लटकाए रखा। इसके बाद पुतला दहन किया। कांग्रेस ने बीजेपी से मदन राठौड़ का इस्तीफा लेकर उन्हें फांसी देने की मांग की है। दरअसल बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने जयपुर में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर आयोजित सेमिनार में पाकिस्तान को लेकर विवादित बयान दिया था। मदन राठौड़ ने कहा था- अगर भारत और पाकिस्तान का क्रिकेट का मैच हो और दुर्भाग्य से भारत हार जाए। उस समय जो पटाखे फोड़े, वह देशभक्त नहीं है। हां, मैं यह कहता हूं कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मैच हो तो हम पाकिस्तान के साथ हैं, क्योंकि वह हमारा पड़ोसी है। जिलाध्यक्ष सुनीता गिठाला ने कहा कि एक तरफ तो भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकार पाकिस्तान के लोगों को आंख दिखाने की बात करते हैं। लेकिन मदन राठौड़ के बयान ने बता दिया है कि बीजेपी की कथनी और करनी में अंतर है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि मदन राठौड़ का जो बयान है उसके लिए पार्टी उनसे इस्तीफा ले और उन्हें फांसी की सजा दे। क्योंकि मदन राठौड़ का यह बयान भारत देश और भारत के शहीदों का भी अपमान है।
अमेरिकी कंजर्वेटिव ग्रुप : एच-1बी वीजा पर रोक लगाने की मांग की
वाशिंगटन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर सख्त नियमों की वकालत करने वाले एक कंजर्वेटिव संगठन ने एच-1बी वीजा पर रोक लगाने की मांग की है। ह्यूमन्स फर्स्ट नाम के इस ग्रुप ने इसे अपनी 'अमेरिका फर्स्ट एआई पॉलिसी' का हिस्सा बताया है।
पत्र में भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की चिंताओं का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं की चुनावी भागीदारी पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए।
करनाल जिले के असंध क्षेत्र के गांव बल्लाह निवासी 21 वर्षीय अनिल कुमार मान का शव 15 दिन बाद अमेरिका से उसके पैतृक गांव पहुंचा। बेटे का शव घर पहुंचते ही परिजन बिलख-बिलखकर रोने लगे। परिवार को बेटे के अंतिम दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। आर्थिक तंगी के कारण शव भारत लाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में अमेरिका में रह रहे गांव के युवकों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने लाखों रुपए जुटाए और शव भारत लाने की प्रक्रिया पूरी करवाई। शनिवार को गांव की शिवपुरी में अनिल का अंतिम संस्कार किया गया। पिता ऋषिपाल ने बेटे को मुखाग्नि दी। 4 अक्टूबर को अमेरिका में बिगड़ी थी तबीयत जानकारी के अनुसार, अनिल की 4 अक्टूबर को अमेरिका में अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार की सबसे बड़ी चिंता बेटे के शव को भारत लाने की थी, ताकि वे उसका अंतिम दर्शन कर सकें। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजनों ने सरकार से भी मदद की गुहार लगाई थी। बेटे के भविष्य के लिए बेच दी थी जमीन अनिल कुमार मान ने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और अपने सपने पूरे करने के लिए उसने अमेरिका जाने का फैसला किया था। पिता ऋषिपाल ने बेटे के बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपनी जमीन बेच दी और कर्ज भी लिया। करीब 45 लाख रुपए खर्च कर अनिल को डंकी रूट से अमेरिका भेजा गया था। कई महीने का सफर तय करने के बाद वह अमेरिका पहुंचा और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर वहां रहने लगा था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा विदेश में मेहनत कर घर की आर्थिक स्थिति सुधारेगा, लेकिन उसकी अचानक मौत से सभी सपने अधूरे रह गए। दो परिवारों का इकलौता चिराग था अनिल अनिल अपने पिता ऋषिपाल का इकलौता बेटा था। वहीं, ऋषिपाल के भाई रामपाल की भी एक ही बेटी है। ऐसे में अनिल दोनों परिवारों के लिए इकलौता चिराग था। उसकी मौत से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में शव पहुंचने पर परिवार के लोगों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद ग्रामीणों की मौजूदगी में शिवपुरी में अंतिम संस्कार किया गया। इस दुख की घड़ी में गांव के लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे। अमेरिका में रहने वाले युवकों ने की मदद परिवार के पास शव भारत लाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे में अमेरिका में काम करने वाले गांव के युवकों ने आर्थिक सहयोग किया। उन्होंने लाखों रुपए एकत्रित कर शव को भारत लाने के प्रयास किए, जिसके बाद अनिल का शव गांव पहुंच सका। परिवार ने बेटे का अंतिम संस्कार कर उसे अंतिम विदाई दी।
रूसी डीजल : अमेरिकी सांसदों ने पेश किया नया बिल
वाशिंगटन, अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों के कुछ सांसदों ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस व्यवस्था को रोकना है, जिसके तहत रूस से डीजल खरीदने और अमेरिका में लाने की अनुमति दी गई है। आलोचकों का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन में चल रहे युद्ध के लिए अतिरिक्त पैसा मिल सकता है।
Marco Rubio भारत दौरे में उठाएं छात्र प्रदर्शनों पर बल प्रयोग का मुद्दा: अमेरिकी सांसद
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, 17 अक्टूबर प्रमिला जयपाल और इल्हान उमर सहित छह अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से आग्रह किया है कि वह भारत यात्रा के दौरान अपने भारतीय समकक्षों के सामने दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग के कथित आरोपों का मुद्दा उठाएं। अमेरिकी सांसदों जयपाल, उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलाइब, एलेनॉर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया ने वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और अन्य अमेरिकी शहरों के वाणिज्य दूतावासों पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों की निगरानी के लिए फोटोग्राफर को तैनात करने का आरोप लगाया है। रुबियो अगले सप्ताह भारत यात्रा पर जा रहे हैं और मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। सांसदों ने शुक्रवार को रुबियो को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘हम दिल्ली और भारत के अन्य क्षेत्रों में छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें गलत तरीके से हिरासत में लेने तथा अत्यधिक बल प्रयोग करने के मुद्दे को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं।’’सांसदों ने अपने पत्र में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कॉजपा के प्रदर्शनों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने का हवाला दिया। जयपाल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का संदर्भ देते हुए भारत में ‘‘मसौदा मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने’’ पर चिंता जताई और कॉकरोच जनता पार्टी को अपना समर्थन दिया। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने जयपाल की टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारत के आंतरिक मामलों में ‘‘अस्वीकार्य हस्तक्षेप’’ करार दिया। सांसदों ने पत्र में लिखा, ‘‘मौलिक स्वतंत्रताओं का निष्पक्ष इस्तेमाल और मतदान का अधिकार अमेरिका एवं भारत दोनों की लोकतांत्रिक पहचान का अभिन्न अंग है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप अपनी यात्रा के दौरान दोनों देशों के लोगों से जुड़ीं इन साझा चिंताओं को उठाएं।’’दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक नेता एवं ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति का आवास एवं आधिकारिक कार्यालय) के पूर्व सलाहकार अजय जैन भुटोरिया ने रुबियो को पत्र लिखने के लिए जयपाल की तीखी आलोचना की। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के सलाहकार रहे भुटोरिया ने कहा, ‘‘भारत अपनी अदालतों, स्वतंत्र मीडिया और 90 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। नयी दिल्ली के आंतरिक मामलों पर अमेरिकी कांग्रेस को उसे उपदेश देने का कोई हक नहीं है। यह भारत-अमेरिका साझेदारी को कमजोर करता है। अमेरिका को अपनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।’’
भारत-अमेरिका : टैरिफ घटाने के बदले अमेरिकी फल-सोयाबीन-वाइन को भारतीय बाजार में एंट्री
वाशिंगटन, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। हालांकि, अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच देने का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर आ रहे हैं।
जमशेदपुर में दुर्गा पूजा के दौरान ढाक की थाप और धुनुची नृत्य भक्तिमय माहौल बनाते हैं। कलाकार बापी मनोज सिंह जैसे ढाकी अपनी कला से उत्सव की रौनक बढ़ाते हुए देश-विदेश में भी प्रस्तुति दे चुके हैं।
अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैक्रामेंटो में पंजाबी मूल के युवक ने पत्नी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए दावा किया कि अमेरिकी आव्रजन एजेंसी ICE के एजेंट उसकी पत्नी को हिरासत में लेकर चले गए हैं। इसी बीच पुलिस एल्डोराडो काउंटी में महिला की जली हुई लाश मिली। फॉरेंसिक जांच और DNA रिपोर्ट से उसकी पहचान जैसमीन गिल के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने 16 अक्टूबर को पति गुरिंदर को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो पूरा मामला सामने आया। पुलिस अब हत्या के कारणों का पता लगा रही है। 30 सितंबर को आखिरी बार घर पर देखी गई जैसमीन जैसमीन गिल को आखिरी बार 30 सितंबर को सैक्रामेंटो स्थित उनके घर पर देखा गया था। इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। 4 अक्टूबर को उनके चचेरे भाई ने पुलिस में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। पति ने कहा- डाक चेक करते समय ICE एजेंट ले गए शुरुआती पूछताछ में गुरिंदर गिल ने पुलिस को बताया कि जैसमीन घर के बाहर लगे मेलबॉक्स में डाक चेक कर रही थीं। इसी दौरान ICE के एजेंट आए और उन्हें हिरासत में लेकर चले गए। पुलिस को गुरिंदर की बात पर शक हुआ। अधिकारियों ने जब ICE एजेंसी से संपर्क किया, तो एजेंसी ने ऐसी किसी कार्रवाई से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। जली हुई लाश मिली, DNA जांच से हुई पहचान जैसमीन के लापता होने के बीच 1 अक्टूबर को एल्डोराडो काउंटी में पुलिस को एक जली हुई लाश मिली। फॉरेंसिक जांच और DNA रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि लाश जैसमीन गिल की थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में गुरिंदर की भूमिका की जांच तेज कर दी। जांच के दौरान उसके बयानों में कई विरोधाभास भी सामने आए। तलाक और बच्चों की कस्टडी को लेकर विवाद जांच में सामने आया कि गुरिंदर और जैसमीन के बीच रिश्ते ठीक नहीं थे। दोनों के बीच तलाक और बच्चों की कस्टडी को लेकर अदालत में कानूनी विवाद चल रहा था। पुलिस इस विवाद को हत्या की संभावित वजह मानकर जांच कर रही है। आरोपी गिरफ्तार, दो ठिकानों पर छापेमारी पुलिस ने गुरिंदर गिल को गिरफ्तार कर सैक्रामेंटो काउंटी की मुख्य जेल भेज दिया है। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी से जुड़े दो ठिकानों पर छापेमारी कर सबूत जुटाए। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। *********** ये खबर भी पढ़ें: झोटा-हत्याकांड, केमिस्ट 2 साल से कत्ल की फिराक में था: चौबीसों घंटे पिस्टल अपने पास रखता; अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता कह गोलियां मारी इसने मुझे बहुत तंग कर रखा, अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता, आज इसे जान से मार दूंगा…पत्नी नीलम गर्ग को फोन पर ये कहकर मानसा में केमिस्ट अश्विनी कुमार ने नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या कर दी। आर्म्स लाइसेंस मिलते ही पिस्टल खरीदने के बाद पिछले 2 साल से ही अश्विनी ने झोटा की हत्या का प्लान बना लिया था। वह चौबीसों घंटे पिस्टल अपने पास रखता था। यहां तक कि रात को भी उसे सिराहने पास रखकर सोता था। (पढ़ें पूरी खबर)
विचार: भारतीय आकांक्षाओं को समझे अमेरिका
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब व्यापार वार्ता और रूसी तेल खरीद को लेकर भारत-अमेरिका संबंध निर्णायक मोड़ पर हैं
कैथल में पंजाब के तीन आरोपियों ने एक युवक को अमेरिका भेजने के नाम पर 37 लाख रुपए हड़प लिए। रुपए लेने के बाद आरोपियों ने उसे विदेश नहीं भेजा। जब उसने आरोपियों से मिलकर रुपए वापस मांगे तो मुख्यारोपी ने पिस्तौल दिखाते हुए कहा कि हमारे तो बहुत बड़े बड़े गैंगस्टरों के साथ रिश्ते हैं और अगर पैसे मांगने दोबारा घर पर आए तो तुम्हें और तुम्हारे परिवार को जिंदा नहीं छोड़ेंगे। इस संबंध में पीड़ित युवक ने पुलिस को शिकायत दी है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। 55 लाख रुपए में विदेश भेजने की बात कही गांव कोलेखां निवासी नरेश कुमार ने कलायत थाना में दी शिकायत में बताया कि वह विदेश जाना चाहता था। इस संबंध में उसने कलायत में गांव सानेवाल जिला लुधियाना पंजाब निवासी कुलविंदर सिंह से बातचीत की। कुलविंदर ने उसे 55 लाख रुपए में अमेरिका भेजने की बात कही। आरोपी ने 35 लाख रुपए पहले मांगे और 20 लाख रुपए अमेरिका पहुंचने के बाद देने के लिए कहा। दिसंबर 2023 में आरोपी ने उसे 16 लाख 50 हजार रुपए देने के लिए कहा और उसे शुगर मिल के पास अपने कार्यालय में बुला लिया। वहां पर कुलविंदर व उसकी पत्नी जसप्रीत कौर आए और 6 लाख 50 हजार रुपए ले कर चले गए। उसे भरोसा दिलाया कि बस जल्दी ही अमेरिका भेज देंगे। रुपए लेकर बोले- आपका काम नहीं बन सकता कुछ समय बाद आरोपियों ने उससे 10 लाख 50 हजार रुपए नरवाना बिजली बोर्ड के पास ले लिए। अगले दिन कुलविंदर व उसके पिता हरबंस सिंह उसके पास आए और 8 लाख रुपए लेकर चले गए। उसने आरोपियों को अलग अलग समय के 35 लाख रुपए दे दिए। एक जनवरी 2024 को आरोपी ने उससे 2 लाख रुपए डॉलर में बदलने के लिए मांगे। उसने वह रकम भी आरोपियों को दे दी। काफी समय बीतने के बाद उसने आरोपियों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि काम नहीं बन रहा, इसलिए उसके पैसे वापस कर देंगे। रुपए मांगने पर दी जान से मारने की धमकी आरोपियों ने उसे ढाई-ढाई लाख रुपए के दो चैक दिए, जो बाउंस हो गए। इसके बाद आरोपियों ने उसकी कॉल उठानी बंद कर दी। बाद में रुपए मांगने पर उसे जान से मारने की धमकी दी। ऐसा करके आरोपियों ने उसके साथ 37 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है। शिकायतकर्ता ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अमेरिकी बॉक्स ऑफिस पर रामायण का धमाका, टूटेगा धुरंधर 2 का रिकॉर्ड?
रामायण फिल्म के एक ट्रेलर ने अमेरिकी ऑडियंस में कैसा भौकाल मचाया है, इसकी एक झलक अब देखने मिल गई है. बीते दिन फिल्म की प्री-सेल एडवांस बुकिंग की शुरुआत हुई, और इसने खुलते ही धमाका कर दिया है.
एफबीआई का मोस्ट वांटेड ठग मनजीत सिंह बेदी, जिसे सितंबर में पंजाब में गिरफ्तार किया गया था, अब अमेरिका लौट गया है। उस पर अमेरिकी खाद्य सहायता योजना में 6 लाख डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप है।
Rajasthan: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का बयान, अमेरिका-पाक में युद्ध होता हैं तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे
इंटरनेट डेस्क। राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ का एक बड़ा बयान सामने आया हैं, उन्होंने इस बयान में कुछ ऐसा बोला हैं की अब उनकी चर्चा चारों और है। उन्होंने अमेरिका-पाकिस्तान को लेकर ऐसा बयान दिया है कि नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। उन्होंने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंति पर सभा को संबोधित करते हुए कहा- “अगर आज अमेरिका और पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं। क्योंकि वो हमारा पड़ोसी है। ठीक है। यह बात हमें समझनी होगी।” सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो रहा है। दे रहे थे भाषण खबरों के अनुसार राठौड़ 15 अक्टूबर को पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर जयपुर के प्रदेश कार्यालय में हुए कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पड़ोसियों के साथ खड़े होने की बात कही। पूर्व राष्ट्रपति के विचारों और उनके बताए रास्तों को लेकर सीख देते हुए कहा- अब्दुल कलाम ने हमेशा सादगी के साथ-साथ रहने के अलावा पड़ोसियों की मदद करने की भी सीख दी थी। अमेरिका-पाक के उदाहण से छिड़ गई नई बहस इसके बाद मदन राठौड़ ने जो उदाहरण दिया, वो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने अमेरिका-पाकिस्तान युद्ध का ऐसा उदाहरण दिया कि सोशल मीडिया समेत हर जगह नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। उन्होंने कहा- अगर आज अमेरिका और पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं। क्योंकि वो हमारा पड़ोसी है। वीडियो सामने आने के बाद एक्स पर यूजरों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। एक अकाउंट ने लिखा- ‘देख रहे विनोद राष्ट्रवादी पार्टी के लोगों को।’ योगेश मिश्रा नामक यूजर ने लिखा- ‘वाह! पड़ोसी धर्म का ऐसा पालन? यह तो बिल्कुल आउट ऑफ सिलेबस बयान आ गया।’ जसराज आजाद नामक यूजर ने लिखा- यदि कोई विपक्ष का नेता ऐसा बोल देता, तो पूरा देशद्रोही घोषित कर देते। pc- ndtv raj
अमेरिका के $6,00,000 (लगभग ₹5.6 करोड़) के सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (SNAP) घोटाले में वांछित और FBI की 'मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स' सूची में शामिल 64 वर्षीय मनजीत सिंह बेदी को पंजाब पुलिस और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से गिरफ्तार कर अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया है। मूल रूप से जालंधर का रहने वाला मनजीत सिंह बेदी वाशिंगटन के टकोमा में एक ग्रोसरी स्टोर चलाता था, जहां उस पर गरीबों के लिए तय खाद्य सहायता फंड में धोखाधड़ी करने का संगीन आरोप है। अप्रैल 2026 में अमेरिकी अदालत में वायर फ्रॉड के मामले में खुद को निर्दोष बताने के बाद वह जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कनाडा के रास्ते भागकर भारत (जालंधर) आ छिपा था। FBI ने 3 सितंबर, 2026 को उसे अपने 'मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स' की नई सूची में शामिल किया और उसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा की। सूचना मिलते ही जालंधर पुलिस और भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए बेदी को हिरासत में ले लिया और अमेरिकी एजेंटों के हवाले कर दिया। बेदी अब वाशिंगटन के वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट पहुंच चुका है। जहां टकोमा स्थित U.S. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में उस पर मुकदमा चलाया जाएगा। FBI डायरेक्टर काश पटेल और U.S. अटॉर्नी कार्यालय ने इस सफल प्रत्यर्पण की पुष्टि करते हुए पंजाब पुलिस व भारतीय एजेंसियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने मनजीत बेदी के यूएस पहुंचने के बाद प्रेस रिलीज जारी की है। मनजीत बेदी के भारत से अमेरिका को प्रत्यर्पण की पूरी कहानी जानिए... मनजीत बेदी पर क्या आरोप हैं जानिए... अमेरिका से भारत और फिर जालंधर अरेस्ट होने की पूरी कहानी जानिए...
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि- अगर भारत और पाकिस्तान का क्रिकेट का मैच हो और दुर्भाग्य से भारत हार जाए। उस समय जो पटाखे फोड़े, वह देशभक्त नहीं है। हां, मैं यह कहता हूं कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मैच हो तो हम पाकिस्तान के साथ हैं, क्योंकि वह हमारा पड़ोसी है। राठौड़ गुरुवार को प्रदेश बीजेपी कार्यालय में पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। सबसे पहले देखिए- कार्यक्रम से जुड़ी PHOTOS डराते हैं आरएसएस वाले खा जाएंगे मदन राठौड़ ने कहा कि यह कांग्रेस वाले मुस्लिम भाइयों को डराते हैं कि आरएसएस वाले तुमको खा जाएंगे। मैं आपको आरएसएस प्रमुख की बात बताता हूं, डॉ मोहन भागवत कहते हैं की- कोई किसी भी पद्धति से अपने धर्म का पालन करें, कर सकता है। लेकिन हमें पहले देशभक्त होना है। वो कहते हैं हिंदुस्तान के प्रति निष्ठा रखने वाला प्रत्येक राष्ट्रभक्त नागरिक हमारा भाई है, हम सब मिलकर रहेंगे। जब आरएसएस के मुखिया ने यह बात कह दी तो कांग्रेस वाले क्यों डरा रहे हैं और आप लोग डर क्यों रहे हैं। खुद पर किसी की छाप मत लगने दो राठौड़ ने कहा- मैं मुस्लिम भाइयों को कहना चाहता हूं कि खुद पर किसी की छाप मत लगने दो। जो अच्छा काम करें, उसे शाबाशी दो। खातेदार मत बनो, रोकड़िया बनो। उन्हें लगता है कि आप लोग कहां जाओगे। वही हम भी सोचते हैं कि आप तो उनके हैं, हम आपकी चिंता क्यों करें। हमारे यहां तो मुस्लिम समाज के गिनती के लोग हैं। फिर भी हमने अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष हमीद खान मेवाती को स्टार प्रचारक बनाया। देश का हर नागरिक विकसित हो। यही हमारी प्राथमिकता है। राठौड़ के ये बयान भी चर्चा में रहे हैं… ‘चोर को सब चोर नजर आते हैं’ 10 दिन पहले मदन राठौड़ ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि- जो जैसा होता है, वह दूसरे के लिए वैसा ही सोचता है। एक कहावत है कि चोर को सब चोर नजर आते हैं। यह बात कांग्रेस पर लागू होती है। क्योंकि वह हमेशा ऐसा ही करते हैं। पूरी खबर पढ़िए… ‘सोनिया गांधी नागरिक बाद में, पहले मतदाता बन गईं’ मदन राठौड़ ने कुछ दिन पहले सोनिया गांधी के वोटर होने पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि सोनिया गांधी भारत की नागरिक बनने से पहले ही मतदाता बन गई थीं। उस समय SIR होता तो वह मतदाता नहीं होतीं। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। पूरी खबर पढ़िए…
विचार: अमेरिका के लिए संकट की घड़ी
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका से हूतियों पर हमले की अपील की थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध और यूक्रेन में खुले मोर्चे के चलते हथियारों की किल्लत के कारण यमन में नया मोर्चा खोलने से मना कर दिया।
खाड़ी देशों में ईरान पर जोरदार हमला करके अमेरिका-इजरायल ने जो आग भड़काई, उसकी भारी कीमत आज उसके समर्थक चुका रहे हैं। जब ईरान ने अपनी सधी हुई रणनीति से और रूस व चीन के बल पर अमेरिका-इजरायल को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, तो उन्होंने अपनी सैन्य कार्रवाई रोक ली। इधर ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने जब सऊदी को निशाने पर लिया और ताबड़तोड़ हमले शुरू किए, तो उनके विरुद्ध अमेरिका, सऊदी अरब और इस्लामिक नाटो की सैन्य क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। आधुनिक हथियारों, उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बावजूद हूती विद्रोही सऊदी अरब के लिए सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं। जिस तरह से अक्टूबर 2026 में रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले हुए और लाल सागर के समुद्री मार्गों को लेकर तनाव बढ़ा, उसने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। आइए हम आपको इसके पीछे के दस अहम सवाल समझाएंगे, जो आगे दिए हुए हैं। इससे पहले एक मीडिया की 12–13 अक्टूबर की रिपोर्टों में सऊदी हवाई सुरक्षा की कमजोरियों और हूतियों की बढ़ती क्षमताओं का उल्लेख किया गया है, उसकी चर्चा करते हैं। यही वजह है कि इस संकट को समझने के लिए तीन सवाल महत्त्वपूर्ण हैं:- इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Saudi Arabia पर Houthis के हमले और तेज होते ही Trump ने दी युद्ध की चेतावनी, जवाब में हूतियों ने अमेरिका को फटकारा एक, अमेरिका जैसी महाशक्ति हूतियों को निर्णायक रूप से नियंत्रित क्यों नहीं कर पा रही है? शायद इसलिए कि उनके ऊपर ईरान और ईरान के ऊपर रूस व चीन का हाथ है। सभी मिलकर खाड़ी देशों से अमेरिकी पांव उखाड़ना चाहते हैं। इसलिए अमेरिका बेबस है। दो, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने नए रक्षा समझौते की वास्तविक उपयोगिता क्या है? दरअसल, यह अमेरिकी इशारे पर भारत के विरुद्ध बनवाया गया संगठन है। लेकिन इनकी आर्थिक और सैन्य क्षमता ईरान से सीधा टकराने की नहीं है। अब जान चुके हैं कि जो देश अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर सकता है, वह देश इन अमेरिकी पिल्लों को पल भर में दबोच कर शिया शासन के अधीन मिला लेगा। किसी भी लड़ाई में सारे मोर्चे एक साथ नहीं खोले जाते, बल्कि एक एक कर दुर्लभ लक्ष्य साधा जाता है। ईरान और उसके प्रॉक्सी शिया संगठनों की रणनीति यही है। तीन, सऊदी अरब के पास सैन्य कार्रवाई के अलावा कौन-कौन से विकल्प हैं? चूंकि अमेरिका व इजरायल सऊदी अरब का साथ छोड़ चुके हैं, इसलिए अब वह रूस को माध्यम बनाकर ईरान के शरणागत हो जाए। साथ ही तमाम अमेरिका सैन्य अड्डों को खाली करवा ले। इससे ईरान खुद को सुरक्षित महसूस करेगा। यदि वह सुन्नी मुल्कों पाकिस्तान व तुर्कीये के भ्रमजाल में फंसेगा तो बर्बादी भी होगी और सत्ता पलट भी होगा। अब आइए दस मौलिक सवालों से इस वैश्विक समस्या के समाधान को ढूंढने की कोशिश करते हैं, जहां पर हर पक्ष के संतुलन को दर्शाने की कोशिश की गई है। पहला सवाल यह है कि हूतियों को नियंत्रित करना इतना कठिन क्यों है? तो जवाब होगा कि सैन्य शक्ति और युद्ध के परिणाम में अंतर होता है। अमेरिका और सऊदी अरब के पास आधुनिक सैन्य संसाधन हैं, लेकिन किसी सशस्त्र संगठन को पराजित करना केवल हथियारों की श्रेष्ठता का प्रश्न नहीं है, बल्कि सैनिकों में मजबूत राष्ट्रीय जज्बा भी होना चाहिए जो अबतक दिखा नहीं। हूती आंदोलन ने यमन के गृहयुद्ध के दौरान सैन्य अनुभव हासिल किया है। वह देश के बड़े हिस्से में अपना प्रभाव बनाए हुए है और उसके पास मिसाइल तथा ड्रोन जैसी क्षमताएँ हैं। एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, हूतियों की चुनौती के पीछे अपेक्षाकृत कम लागत वाली सैन्य तकनीक, ईरान से मिली तकनीकी सहायता, स्थानीय समर्थन और विरोधी पक्षों के बीच मतभेद जैसे कारक हैं। दरअसल किसी देश की सैन्य श्रेष्ठता अपने आप यह सुनिश्चित नहीं करती कि वह अपने राजनीतिक उद्देश्यों को भी प्राप्त कर लेगा। दूसरा सवाल है कि कम लागत वाले हमले और महँगी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भी सऊदी अरब पर हुती क्यों भारी पड़ रहा है? शायद इसलिए कि हूती संकट का एक महत्त्वपूर्ण पहलू आर्थिक है। ड्रोन और अन्य अपेक्षाकृत सस्ते साधनों से खतरा उत्पन्न किया जा सकता है। हमलों को रोकने के लिए अत्याधुनिक निगरानी और वायु रक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पड़ती है। लगातार हमलों की आशंका के कारण नागरिक विमानन, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सऊदी अरब की रक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई है, बल्कि हालिया घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि क्या उसकी मौजूदा व्यवस्था सभी प्रकार के हमलों से पर्याप्त सुरक्षा दे पा रही है। मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अधिकारी रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आई कमियों की जाँच कर रहे हैं। तीसरा सवाल यह है कि यमन का भूगोल और राजनीतिक परिस्थितियाँ हुतियों की मदद कर रही हैं। यमन की भौगोलिक परिस्थितियाँ और लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता इस समस्या को जटिल बनाती हैं। हूती आंदोलन को केवल बाहरी सैन्य शक्ति से नियंत्रित करने की कोशिश में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की अनदेखी नहीं की जा सकती। यमन में एक ओर हूतियों का प्रभाव है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और दूसरे स्थानीय राजनीतिक तथा सैन्य समूह हैं। इन सभी के हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। इसलिए हूतियों के विरुद्ध कार्रवाई और यमन में स्थायी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना दो अलग-अलग चुनौतियाँ हैं। चौथा सवाल है कि आखिर इसके पीछे ईरान की भूमिका क्या है? तो जवाब होगा कि हूती आंदोलन को ईरान से समर्थन और तकनीकी सहायता मिलने की बात लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में सामने आती रही है। लेकिन हूतियों को केवल ईरान का निर्देश मानकर चलना भी अधूरा विश्लेषण होगा। एक अध्ययन के अनुसार, ईरान और हूतियों के हित कई मामलों में एक-दूसरे से मेल खाते हैं, लेकिन हूतियों के अपने स्थानीय राजनीतिक उद्देश्य भी हैं। इसका कूटनीतिक अर्थ यह है कि ईरान के साथ बातचीत उपयोगी हो सकती है, लेकिन उससे हूतियों के सभी निर्णय स्वतः नियंत्रित हो जाएँगे, इसकी गारंटी नहीं है। पांचवां सवाल यह है कि आखिर अमेरिका हूतियों को निर्णायक रूप से नियंत्रित क्यों नहीं कर पा रहा? तो जवाब होगा कि अमेरिका की स्थिति में एक महत्त्वपूर्ण विरोधाभास है: वह सऊदी अरब की सुरक्षा में सहयोग करना चाहता है, लेकिन यमन में एक और व्यापक युद्ध में उलझने से भी बचना चाहता है। इसके पीछे कुछ कारण हैं:- एक, सैन्य कार्रवाई की सीमाएँ: हूती ठिकानों पर हवाई हमले उनकी क्षमताओं को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन हवाई कार्रवाई अपने आप किसी संगठन का राजनीतिक नियंत्रण समाप्त नहीं करती। अतीत के अनुभवों से भी स्पष्ट है कि लंबे सैन्य अभियान के बावजूद हूती आंदोलन को समाप्त नहीं किया जा सका। इसलिए अमेरिका के सामने केवल हमले करने का प्रश्न नहीं, बल्कि यह भी है कि सैन्य कार्रवाई के बाद स्थायी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए? दो, अमेरिका की प्राथमिकताएँ: एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने हूतियों के विरुद्ध प्रस्तावित अभियान में अमेरिकी हवाई हमलों का समर्थन माँगा था, लेकिन उस समय वाशिंगटन ने प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार किया। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका खुफिया जानकारी और अन्य सहायता देता रहा। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका की सहायता और उसकी प्रत्यक्ष युद्ध में भागीदारी अलग-अलग विषय हैं। वाशिंगटन के लिए व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का जोखिम, सैन्य संसाधनों पर दबाव और दूसरे मोर्चों पर उसकी प्राथमिकताएँ महत्त्वपूर्ण कारक हैं। तीन, लाल सागर का सामरिक महत्त्व: लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण मार्ग हैं। यदि इन मार्गों पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो उसका असर केवल सऊदी अरब पर नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, माल ढुलाई की लागत और ऊर्जा व्यापार पर भी पड़ता है। एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि लाल सागर की सुरक्षा को लेकर बढ़ता संकट अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को कमजोर कर सकता है। अमेरिका की दुविधा यह है कि उसे समुद्री व्यापार और अपने सहयोगियों की सुरक्षा करनी है, लेकिन ऐसी कार्रवाई से बचना भी है जो संघर्ष को और व्यापक बना दे। छठा सवाल है कि क्या ‘इस्लामिक नाटो’ हूतियों को रोक सकता है? तो यहाँ पर एक महत्त्वपूर्ण तथ्यात्मक अंतर समझना आवश्यक है। वह यह कि अगस्त 2026 में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौता किया, जिसे भारत विरोधी माना गया। इस समझौते में एक हस्ताक्षरकर्ता पर सशस्त्र हमला अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं पर हमले के रूप में देखने का प्रावधान है। मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में इस व्यवस्था को कभी-कभी ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है। लेकिन इसे नाटो के समान संस्थागत, सैन्य और परिचालन क्षमता वाला संगठन मान लेना अभी उचित नहीं होगा। क्योंकि इस गठबंधन की अपनी संभावनाएँ हैं:- एक, सामूहिक प्रतिरोध का संदेश: यदि सदस्य देशों की प्रतिबद्धता विश्वसनीय होती है, तो किसी एक सदस्य पर हमले की राजनीतिक कीमत बढ़ सकती है। दो, सुरक्षा सहयोग: सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी, प्रशिक्षण और सुरक्षा समन्वय में सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि इन क्षेत्रों में वास्तविक सहयोग कितना विकसित हुआ है, इसका आकलन उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर करना होगा। तीन, सऊदी अरब के लिए अतिरिक्त कूटनीतिक विकल्प: रियाद को अमेरिका पर अपनी सुरक्षा संबंधी निर्भरता कम करने की दिशा में नए साझेदार मिल सकते हैं। फिर भी तीन बड़ी चुनौतियाँ हैं:- एक, अलग-अलग राष्ट्रीय हित: प्रत्येक देश यह तय कर सकता है कि किसी संकट में उसकी भागीदारी कितनी और किस प्रकार की होगी। दो, समझौते का व्यावहारिक क्रियान्वयन: पारस्परिक रक्षा की घोषणा अपने आप संयुक्त सैन्य कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करती। तीन, क्षेत्रीय संघर्ष का जोखिमकिसी सैन्य कार्रवाई से ईरान और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के साथ तनाव बढ़ सकता है। एक मीडिया विश्लेषण ने भी इस गठबंधन की वास्तविक प्रभावशीलता और उसके सामने मौजूद चुनौतियों पर प्रश्न उठाए थे। वास्तव में यह समझौता सऊदी अरब की सुरक्षा कूटनीति में एक नया आयाम है, लेकिन इसे हूती समस्या का स्वतः समाधान नहीं माना जा सकता। सातवां सवाल है कि सऊदी अरब के सामने अब क्या विकल्प हैं? तो जवाब होगा कि सऊदी अरब के सामने मुख्य चुनौती यह है कि वह अपनी जनता, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करे, जबकि एक और लंबा युद्ध शुरू करने के जोखिम को भी ध्यान में रखे। लिहाजा उसके सामने पाँच प्रमुख विकल्प हैं:- एक, सैन्य दबाव बढ़ाना: सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के साथ मिलकर हूतियों पर सैन्य दबाव बढ़ा सकता है। इस विकल्प का उद्देश्य हूतियों की हमले करने की क्षमता को सीमित करना और विवादित क्षेत्रों पर नियंत्रण से संबंधित परिस्थितियों को बदलना होगा। इससे संभावित लाभ यह होगा कि हूतियों की सैन्य गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। जबकि जोखिम यह है कि संघर्ष लंबा खिंच सकता है, नागरिकों को नुकसान पहुँच सकता है और सऊदी अरब के भीतर हमलों का खतरा बढ़ सकता है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब नेतृत्व यमन की सरकारी सेनाओं के साथ अभियान की योजना बना रहा था। उस समय अमेरिकी सेना की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित नहीं थी। इसलिए केवल सैन्य अभियान की घोषणा को सफलता का प्रमाण नहीं माना जा सकता है। दो, अमेरिका पर निर्भरता के साथ-साथ अन्य साझेदारों से सहयोग: सऊदी अरब अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंध बनाए रखते हुए पाकिस्तान, तुर्किये और दूसरे सहयोगियों के साथ सहयोग बढ़ा सकता है। लेकिन नए रक्षा समझौतों की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश किस प्रकार की सहायता देने को तैयार हैं और उनके बीच व्यावहारिक समन्वय कितना है। यहाँ उद्देश्य केवल गठबंधन का विस्तार करना नहीं, बल्कि सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाना होगा। तीन, ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद बनाना: हूती संकट का एक महत्त्वपूर्ण आयाम ईरान-सऊदी अरब संबंध भी हैं। यदि दोनों देश क्षेत्रीय तनाव कम करने, यमन में राजनीतिक समाधान और हमलों को रोकने के लिए संवाद आगे बढ़ाते हैं, तो इससे संघर्ष के विस्तार का जोखिम घट सकता है। हालाँकि, ईरान से बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितना प्रभाव डाल सकता है और हूती नेतृत्व किन शर्तों को स्वीकार करता है। यहां पर कूटनीतिक चुनौती यह है कि ऐसा समझौता खोजना जो सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करे, लेकिन यमन के भीतर राजनीतिक समाधान की संभावना भी बनाए रखे। चार, समुद्री सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत करना: लाल सागर की सुरक्षा केवल सऊदी अरब की समस्या नहीं है। इसलिए वह अन्य देशों के साथ समुद्री निगरानी, वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, सूचना साझा करने और संकट के समय समन्वित प्रतिक्रिया पर काम कर सकता है। चैथम हाउस ने मौजूदा बहुराष्ट्रीय समुद्री अभियानों और सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं का उल्लेख किया है। इस विकल्प का महत्त्व इसलिए है क्योंकि समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए हूती आंदोलन के साथ पूरे संघर्ष का सैन्य समाधान निकालना अनिवार्य नहीं है। पांच, यमन में राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास: यह विकल्प तत्काल राजनीतिक रूप से कठिन हो सकता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र ने सितंबर 2026 में हूतियों के हमलों की निंदा करते हुए सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और यमन के नेतृत्व में समावेशी राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करने का आग्रह किया था। राजनीतिक समाधान में युद्धविराम, नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता, बंदियों के प्रश्न और यमन की भविष्य की शासन-व्यवस्था जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में कठिन बातचीत और आपसी समझौते की आवश्यकता होगी। आठवां सवाल है कि सऊदी अरब के विकल्पों की तुलना किससे और कैसे की जा सकती है? इस विकल्प के संभावित लाभ, प्रमुख जोखिम या सीमा स्पष्ट हैं। जहां तक सैन्य दबावकी बात है तो हूतियों की क्षमताओं पर दबाव लंबा युद्ध और नागरिक नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका के साथ सहयोग, मौजूदा सुरक्षा साझेदारी का लाभ, अमेरिकी प्रत्यक्ष भागीदारी की अनिश्चितता, पाकिस्तान-तुर्किये सहित नए साझेदार सुरक्षा सहयोग का विस्तार और समझौते की वास्तविक क्षमता अभी परखी जानी है। लिहाजा ईरान के साथ संवाद क्षेत्रीय तनाव कम करने की संभावना बढ़ा सकता है। ईरान का प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा में सहयोग व्यापक राजनीतिक संघर्ष का समाधान नहीं हो सकता। इसलिए यमन में राजनीतिक समझौता और स्थायी शांति की संभावना, कठिन वार्ता और परस्पर अविश्वास को दूर करके ही हासिल की जा सकती है। यह तुलना किसी एक विकल्प को सर्वश्रेष्ठ घोषित नहीं करती, बल्कि प्रत्येक विकल्प अलग समस्या का समाधान करने का प्रयास करता है और उसके परिणाम परिस्थितियों पर निर्भर होंगे। नौवां सवाल है कि भारत के लिए इस संकट के क्या मायने हैं? तो जवाब होगा कि भारत के लिए यह संकट तीन प्रमुख कारणों से महत्त्वपूर्ण है:- एक, ऊर्जा सुरक्षा: सऊदी अरब भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। क्षेत्रीय संघर्ष से तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। दो, समुद्री व्यापार: लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में अस्थिरता से भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक जहाजों के मार्ग, परिवहन लागत और माल पहुँचने के समय पर प्रभाव पड़ सकता है। तीन, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा: पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर उनकी सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर निकासी की तैयारी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए भारत के हित में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव में कमी और सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना है। दसवां सवाल है कि क्या सऊदी अरब को सैन्य रणनीति बदलनी होगी? तो जवाब होगा कि हूतियों के साथ जारी संघर्ष यह दिखाता है कि सैन्य संसाधनों की प्रचुरता और राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के बीच सीधा संबंध नहीं है। अमेरिका की प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी की सीमाएँ, हूतियों की अपनी राजनीतिक और सैन्य संरचना, ईरान का समर्थन तथा यमन की जटिल आंतरिक परिस्थितियाँ इस संकट को लगातार कठिन बना रही हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान और तुर्किये के साथ सऊदी अरब का नया रक्षा समझौता सुरक्षा सहयोग के नए अवसर प्रस्तुत करता है, लेकिन उसकी वास्तविक प्रभावशीलता समय और परिस्थितियों के साथ ही स्पष्ट होगी। सऊदी अरब के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न केवल यह नहीं है कि हूतियों पर सैन्य दबाव कैसे बढ़ाया जाए, बल्कि यह भी है कि अपने नागरिकों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा करते हुए यमन में ऐसा राजनीतिक समाधान कैसे खोजा जाए जो बार-बार युद्ध की स्थिति पैदा होने से रोके। वस्तुतः इस संकट का आकलन तीन कसौटियों पर करना उपयोगी होगा: सऊदी अरब की सुरक्षा, लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निर्बाध आवाजाही और यमन में स्थायी शांति की संभावनाएँ। इसको साधे बिना हर सैन्य कार्रवाई व वैश्विक कूटनीतिक अधूरी रहेगी। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
बॉलीवुड स्टार आमिर खान के भतीजे और अभिनेता इमरान खान कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। मुंबई पुलिस ने उन्हें एक आधिकारिक नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद मिली है। यह नोटिस उन्हें तब मिला, जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इमरान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित इस प्रदर्शन में भाग लिया था। इस प्रदर्शन के सिलसिले में मुंबई पुलिस ने अभिनेता को हिरासत में भी लिया था। CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस मिली जानकारी के अनुसार, इमरान के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट (प्रवासन अधिनियम) के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। उन पर आरोप है कि भारतीय नागरिक न होने के बावजूद उन्होंने भारत में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) कार्ड है, जो उन्हें भारत में रहने और काम करने की अनुमति देता है। हाल ही में हुए विवाद के बाद अक्टूबर 2026 में उनकी नागरिकता की स्थिति चर्चा में आ गई। 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने इमरान खान को हिरासत में लिया इससे पहले, 10 अक्टूबर को बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। इमरान को 10 अक्टूबर 2026 को शाम 5:20 बजे हिरासत में लिया गया था। इसके कुछ समय बाद, अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर पुलिस वैन के अंदर से एक तस्वीर साझा की और कैप्शन में लिखा, लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूँ। इमरान खान के अलावा, उनके चचेरे भाई और 'मेड इन हेवन' के अभिनेता ज़ैन खान को भी इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस घटना के बारे में एक मज़ेदार अंदाज़ में जानकारी साझा की। हिरासत में लिए जाने से पहले, 'दिल्ली बेली' के अभिनेता ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, मेरी कोई मांगें नहीं हैं। मैं यहां एक नागरिक के तौर पर आया हूं, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही पर रोक क्यों लगाई जा रही है—और लोगों की आवाज़ को क्यों दबाया जा रहा है। बस इसीलिए मैं यहां हूं। मैं ऐसी स्थिति में नहीं हूं कि किसी के सामने कोई मांग रख सकूं। और न ही मैं किसी संगठन से जुड़ा हूं। मैं यहां बस एक प्रतिनिधि के तौर पर आया हूं। यह विरोध प्रदर्शन 'हम भारत के लोग' (We, the People of India) के बैनर तले आयोजित किया गया था। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में दोपहर 3:30 बजे इसका कार्यक्रम तय था। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही, पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी, बैरिकेड्स लगा दिए और कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया। साथ ही, प्रदर्शन में हिस्सा लेने आ रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। View this post on Instagram A post shared by Imran Khan (@imrankhan)
Jind News: विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए अमेरिका रवाना हुए जुआं के अमित मुन्ना
गांव जुआं सोनीपत के पहलवान अमित उर्फ मुन्ना अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बुधवार को अमेरिका रवाना हो गए।
साल बाद पुरखों का पता लगाने दक्षिण अमेरिका से गाजीपुर पहुंचा परिवार, बीएचयू में दिया सैंपल
दैनिक जागरण द्वारा जमशेदपुर के साकची स्थित धालभूम क्लब में 'जागरण डांडिया' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका सुस्वाति मलिक अपनी संगीतमय प्रस्तुति से शहरवासियों को झूमने पर मजबूर करेंगी।
अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन (Mary Millben) ने भारत के राजनीतिक घटनाक्रम पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिका में बैठे कुछ डोनर्स भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व को निशाना बनाने के लिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) जैसे संगठनों को फंड मुहैया करा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने देश के युवा देशभक्तों से आगे आकर इस 'विनाशकारी सोच' के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करने की अपील की है। मिलबेन ने ये बातें बुधवार को कहीं, जब नई दिल्ली में विपक्षी पार्टियों और CJP समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेंद्र कुमार के इस्तीफे की मांग की। मैरी मिलबेन ने युवा भारतीयों से CJP के खिलाफ विरोध करने को कहा 41 साल की सिंगर ने दावा किया कि CJP नेता अभिजीत दिपके और उनकी पार्टी को अमेरिका के उन डोनर्स से आर्थिक मदद मिल रही है जो मोदी और उनके नेतृत्व का विरोध करते हैं। मिलबेन ने कहा, यह चुप रहने का समय नहीं है। उन्होंने युवा भारतीयों से उन ताकतों के खिलाफ खड़े होने की अपील की जिन्हें उन्होंने 'विनाशकारी ताकतें' बताया। अपनी पोस्ट में उन्होंने PM मोदी और उनके राजनीतिक नेतृत्व का बचाव भी किया। पोस्ट में लिखा था, डरो मत, मेरे युवा देशभक्तों। तुम्हारे प्रधानमंत्री, जिन्होंने 25 साल तक भारत की सेवा की है - 12 साल प्रधानमंत्री के तौर पर और लगातार तीन बार चुने गए - वे मेरे देश की विनाशकारी ताकतों के सामने झुकने वाले नहीं हैं। मिलबेन ने आगे आरोप लगाया कि कुछ अमेरिकी डोनर्स दुनिया भर में कंज़र्वेटिव (रूढ़िवादी) नेताओं को निशाना बनाने का तरीका अपनाते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे अमेरिका में पढ़े-लिखे लोगों की पहचान करते हैं, उन्हें कट्टरपंथी बनाते हैं और उनके देशों में राजनीतिक आंदोलनों को फंड देते हैं। उन्होंने कहा, और इन चुनिंदा डोनर्स का दुनिया भर में एक ही तरीका है - दुनिया के कंज़र्वेटिव नेताओं को निशाना बनाना, उस देश से अमेरिका में पढ़े-लिखे व्यक्ति को ढूंढना, उन्हें कट्टरपंथी बनाना, उन्हें वापस देश भेजना और उन्हें अराजकता और तबाही फैलाने के लिए फंड देना। इनमें से कोई भी सफल नहीं हुआ है, लेकिन उन्होंने देश के विकास और शासन पर असर डाला है। सिंगर ने लोकतंत्र और आज़ादी की रक्षा के लिए एक जवाबी आंदोलन की भी बात कही। उन्होंने भारतीयों से एकजुट होने और CJP की विनाशकारी सोच का शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने की अपील की। अब समय आ गया है कि #भारत की मिट्टी में जन्मी, पली-बढ़ी और शिक्षित एक नई आवाज़ आगे आए, संगठित हो और 'कॉकरोच पार्टी' की विघटनकारी सोच के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विरोध करे। जागो, युवा देशभक्तों! जागो! - उन्होंने अपनी बात इसी तरह खत्म की। मैरी मिलबेन कौन हैं? मैरी मिलबेन एक अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री हैं। उन्हें भारत में राष्ट्रगान 'जन गण मन' और भक्ति गीत 'ओम जय जगदीश हरे' को अपनी आवाज़ देने के लिए काफ़ी लोकप्रियता मिली है। साल 2023 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत का राष्ट्रगान गाया था। To all the beautiful young patriots in India: This is not the time to be silent. @abhijeet_dipke and the @Cockroachisback are being funded by donors in the U.S. who are against Prime Minister @NarendraModi and your future under his leadership. Do not fear, my young patriots. Your Prime Minister, who has served India for 25 years, 12 years as Prime Minister, elected three consecutive terms, is not going to bow to disruptive forces from my country. And these select donors have a pattern globally - target conservative global leaders, find an U.S. educated person from the country, radicalize them, send them back to the country, and fund them to start chaos and destruction. None of them have been successful but have impacted the development and governance of the country. It is time for a new voice in #India, born, raised, educated on the soil of India, to RISE UP, organize, and peacefully protest the disruptive spirit of the Cockroach Party. There should always be a counter movement to uphold democracy and freedom. Rise up, young patriots! Rise up! — Mary Millben (@MaryMillben) October 14, 2026
किशनगंज शहर के ऐतिहासिक रुईधासा मैदान के पास इस बार दुर्गापूजा में भव्यता और कलात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। टाउन क्लब दुर्गा पूजा समिति की ओर से अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर विशाल पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। गगनचुंबी स्वरूप और आकर्षक स्थापत्य शैली के कारण निर्माणाधीन पंडाल अभी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। सड़क से गुजरने वाले लोग भी इसकी भव्यता देखने के लिए ठहर जा रहे हैं। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। हर साल नई थीम से आकर्षित होते हैं श्रद्धालु रुईधासा टाउन क्लब की दुर्गापूजा शहर के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। समिति की ओर से हर साल पंडाल की थीम और सजावट में कुछ नया करने का प्रयास किया जाता है। इस बार मंदिर की स्थापत्य शैली को पंडाल के रूप में उतारा जा रहा है। इसके लिए समिति के सदस्य और स्थानीय युवा दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पंडाल की बाहरी बनावट से लेकर आंतरिक सजावट और रोशनी की व्यवस्था तक विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पंडाल में प्रवेश करते ही मंदिर जैसी भव्यता का एहसास कराना है। विश्वकर्मा पूजा के बाद से ही निर्माण और सजावट का काम जोर पकड़ लेता है। पंडाल निर्माण और सजावट पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहता है। पांच बैंककर्मियों ने 1982 में रखी थी नींव टाउन क्लब की दुर्गापूजा का इतिहास वर्ष 1982 से जुड़ा है। उस समय पांच बैंककर्मियों ने मिलकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की शुरुआत की थी। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ यह आयोजन धीरे-धीरे शहर के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल हो गया। स्थानीय निवासी और पूजा समिति के सदस्य राजेश दुबे के अनुसार, बैंक सेवा से जुड़े पांच साथियों संदीप घोष राय, स्व. बिमल दास, सुनील कुंडू, प्रदीप मजूमदार और गौतम दास ने मिलकर पहली बार यहां दुर्गापूजा का आयोजन किया था। शुरुआत में छोटे स्तर पर आयोजित होने वाली पूजा में समय के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ती गई। आज यह आयोजन सामूहिक सहयोग और आस्था की मिसाल बन चुका है। चार दशक से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा को नई पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है। हर साल नई थीम, आकर्षक सजावट और बेहतर व्यवस्थाओं के जरिए आयोजन को खास बनाने की कोशिश की जाती है। बंगाली विधि-विधान से होती है मां दुर्गा की पूजा भव्य पंडाल के साथ यहां की पारंपरिक पूजा पद्धति भी आयोजन की खास पहचान है। टाउन क्लब में शुरुआत से ही बंगाली विधि-विधान के अनुसार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती रही है। पूजा के दौरान मंत्रोच्चार, पुष्पांजलि और आरती का विशेष महत्व रहता है। मुख्य पुजारी पंडित संजय भट्टाचार्य बताते हैं कि पहले उनके पिता यहां मुख्य पुजारी के रूप में पूजा संपन्न कराते थे। उनके बाद वे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी पीढ़ी दर पीढ़ी निभाई जा रही है। यहां सुबह आठ बजे और शाम छह बजे आरती होती है। इस दौरान मंत्रोच्चार और ढाक की थाप से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा रहेगी अहम दुर्गापूजा के दौरान रुईधासा मैदान के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भीड़ प्रबंधन, सुचारु आवागमन और परिसर में व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। भव्य पंडाल को देखने के लिए शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। टाउन क्लब की दुर्गापूजा की खासियत यह है कि समय के साथ आयोजन का स्वरूप बदलता रहा है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और पारंपरिक पूजा पद्धति आज भी कायम है। अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर बन रहा इस वर्ष का पंडाल किशनगंज के दुर्गोत्सव का प्रमुख आकर्षण बनने की ओर अग्रसर है। भव्यता, परंपरा और सामुदायिक सहभागिता के साथ रुईधासा टाउन क्लब की दुर्गापूजा एक बार फिर शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई चमक देने के लिए तैयार है।
ट्रेड डील पर बड़ी उम्मीद, इसी हफ्ते भारत आएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत दौरे पर रहेंगे. इस दौरान व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता किसी निष्कर्ष के करीब पहुंच रही है.
रूस के आगे फिर नरम पड़ा अमेरिका
रूस से ‘डीजल समझौता’ करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साथ कई समस्याओं से पार पाने का प्रयास किया है। इस समझौते के तहत मॉस्को तुरंत तीन लाख टन डीजल वाशिंगटन को देगा और फिर नवंबर में पांच लाख टन। अगली आपूर्ति में यह आंकड़ा बढ़कर 10 लाख टन तक हो जाएगा…
विश्व राजनय में विडंबना या विरोधाभास की पराकाष्ठा बेहद दुखद और शर्मनाक है। अमेरिका ने रूस के साथ डीजल आयात के लिए समझौता किया है। वह रूस से पहले ही यूरेनियम और उर्वरक आयात करता रहा है। स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने…
अमेरिकी सरकार के नए आदेश के बाद यूनिवर्सिटी ने बंद की लॉ एक्सटर्नशिप
अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे और भविष्य में वहां जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और निराश करने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वर्क परमिट और ऑफ-कैंपस ट्रेनिंग से जुड़े नियमों में हाल ही में किए गए कड़े बदलावों और नए दिशानिर्देशों के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल (HLS) ने बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय जेडी (J.D.) छात्रों के लिए अपनी सभी 13 लॉ एक्सटर्नशिप क्लिनिक प्रोग्राम्स में काम करने की मंजूरी (वर्क ऑथराइजेशन) को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इस फैसले का सीधा असर अमेरिका में पढ़ रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों पर पड़ा है, जिनमें भारतीय छात्रों की संख्या भी अच्छी-खासी है। अमेरिकी सरकार द्वारा करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (CPT) के नियमों को सख्त किए जाने के बाद यूनिवर्सिटी को कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी लॉ फर्मों, सरकारी एजेंसियों और गैर-लाभकारी संगठनों में प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करने के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं।अमेरिकी सरकार के कड़े नियम और CPT वर्क ऑथराइजेशन पर लगा ब्रेकअमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए फेडरल गाइडलाइन के अनुसार, विदेशी छात्रों को ऑफ-कैंपस वर्क परमिट यानी सीपीटी (Curricular Practical Training) देने के मानकों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को केवल उन्हीं वर्क प्रोग्राम्स में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है जो उनके डिग्री पाठ्यक्रम के लिए पूरी तरह से अनिवार्य हों। हार्वर्ड लॉ स्कूल में एक्सटर्नशिप क्लिनिक एक वैकल्पिक यानी इलेक्टिव कोर्स का हिस्सा थे, जिसके कारण नए नियमों के तहत विदेशी छात्रों को इन क्लिनिक्स में काम करने के लिए ऑथराइजेशन देना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता था। इस कड़े रुख के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 13 प्रमुख एक्सटर्नशिप प्रोग्राम्स से बाहर रखने का फैसला लिया है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने यह स्पष्ट किया है कि एलएलएम (LL.M.) प्रोग्राम के छात्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जेडी (J.D.) डिग्री ले रहे भारतीय व अंतरराष्ट्रीय छात्र इससे सीधे प्रभावित हुए हैं।भारतीय छात्रों के करियर पर बड़ा असर और प्रैक्टिकल एक्सपीरिएंस का संकटअमेरिका में कानून की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक्सटर्नशिप केवल क्रेडिट हासिल करने का जरिया नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वे अमेरिकी कानूनी प्रणाली, शीर्ष अदालतों, बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनियों और मानवाधिकार संगठनों में काम करने का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते थे। हार्वर्ड के इस फैसले के बाद भारतीय छात्रों को अब केवल यूनिवर्सिटी के इन-हाउस (ऑन-कैंपस) क्लिनिकल प्रोग्राम्स तक ही सीमित रहना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रैक्टिकल अनुभव के बिना अमेरिकी जॉब मार्केट में प्रवेश करना और पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां वर्क वीजा (H-1B) हासिल करना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जो छात्र प्रैक्टिकल अनुभव के लिए ऑप्टेशनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) का इस्तेमाल करेंगे, उनका पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क टाइम कोटा समय से पहले ही खत्म हो जाएगा, जिससे उनका करियर प्लान पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।अमेरिकी नीतियों में बदलाव और वैश्विक उच्च शिक्षा का बदलता परिदृश्यपिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन द्वारा छात्र वीजा (F-1 वीजा) और उससे जुड़ी रोजगार नीतियों में लगातार सख्ती बरती जा रही है। केवल हार्वर्ड ही नहीं, बल्कि अमेरिका की कई अन्य प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ भी इन नए फेडरल नियमों की वजह से अपने इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम्स और वर्क परमिट पॉलिसी में बदलाव करने पर मजबूर हो रही हैं। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के मन में असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। लाखों रुपये की फीस और भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर अमेरिका पढ़ने जाने वाले छात्रों के सामने अब पढ़ाई के साथ-साथ वर्क एक्सपीरियंस हासिल करने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी नीतियां इसी तरह सख्त होती रहीं, तो भारतीय छात्र अमेरिका के बजाय ब्रिटेन, कनाडा या यूरोप के अन्य देशों का रुख कर सकते हैं।
दोहरे तर्क: कटघरे में अमेरिकी नीतियों की विश्वसनीयता, खुद जरूरत पड़ी तो रूस से डीजल आयात करने को राजी हुए ट्रंप
अमेरिका में वीजा का एक पहलू यह भी: जेडी वेंस की बात अपमानजनक, लेकिनजिस निर्भरता की ओर इशारा किया, वह असली
Houthis Attack on Riyadh Airport: Saudi पर बड़ा हमला, अमेरिकी सहित 12 की मौत, 300 घायल | Yemen War
Saudi Arabia Riyadh Airport Attack ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। रियाद के King Khalid International Airport पर हुए हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की खबर है
Iran attack on US Base का वीडियो देखिए, इधर-उधर भागते दिखे अमेरिकी सैनिक | Iran America war
Iran attack on US Base का वीडियो देखिए, इधर-उधर भागते दिखे अमेरिकी सैनिक | Iran America war
अमेरिका को जाएं भूल: इन 5 देशों में जॉब के बाद आसानी से मिल जाता है PR
विदेशों में जाकर नौकरी करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका (USA) अब इकलौता विकल्प नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के कड़े वीजा नियमों, ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार और अनिश्चितताओं के चलते भारतीय प्रोफेशनल्स अब दुनिया के दूसरे देशों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर आपका भी सपना विदेश में जाकर काम करने और वहां की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) हासिल करने का है, तो आपको अमेरिका के बजाय दुनिया के उन पांच प्रमुख देशों पर नजर डालनी चाहिए जहां नौकरी मिलने के बाद बेहद आसानी से और पारदर्शी नियमों के तहत पीआर मिल जाती है। आज के इस विशेष आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही 5 शानदार देशों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जो भारतीय युवाओं और स्किल्ड वर्कर्स के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।कनाडा: भारतीय युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय और आसान पीआर प्रक्रिया वाला देशविदेशों में बसने की चाह रखने वाले भारतीयों की सूची में कनाडा (Canada) हमेशा से शीर्ष पर रहा है। एक्सप्रेस एंट्री (Express Entry) सिस्टम और प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) जैसी बेहतरीन नीतियों के चलते कनाडा में स्किल्ड वर्कर्स के लिए पीआर हासिल करना काफी सुगम माना जाता है। यदि आपके पास अच्छा वर्क एक्सपीरियंस, अंग्रेजी या फ्रेंच भाषा में अच्छी पकड़ और उच्च शिक्षा है, तो आप कम समय में कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी हासिल कर सकते हैं। हालांकि हाल के दिनों में वहां कुछ नियमों में बदलाव जरूर किए गए हैं, लेकिन आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए कनाडा आज भी दुनिया का सबसे पसंदीदा और भारतीय-अनुकूल देश बना हुआ है।जर्मनी: यूरोप का पावरहाउस जहां टैलेंटेड प्रोफेशनल्स के लिए तेजी से खुल रहे हैं पीआर के द्वारयूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था और औद्योगिक केंद्र जर्मनी (Germany) ने हाल के वर्षों में विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे बहुत ज्यादा खोल दिए हैं। भारत जैसे देशों से कुशल इंजीनियरों, आईटी एक्सपर्ट्स, डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी मांग को देखते हुए जर्मनी ने 'ऑपर्चुनिटी कार्ड' (Chancenkarte) और 'यूूरोपीय ब्लू कार्ड' (EU Blue Card) जैसी कई क्रांतिकारी योजनाएं शुरू की हैं। जर्मनी के नए आप्रवासन कानूनों के अनुसार, यदि आप वहां नौकरी पा लेते हैं और जर्मन भाषा का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, तो आप बहुत ही कम वर्षों में स्थाई निवास (Permanent Residency) के लिए पात्र बन जाते हैं। उच्च जीवन स्तर और मजबूत सामाजिक सुरक्षा के कारण भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच जर्मनी तेजी से पसंदीदा विकल्प बनता जा रहा है।ऑस्ट्रेलिया: प्वॉइंट-बेस्ड सिस्टम के जरिए पीआर पाने का बेहतरीन और सुनहरा मौकाअपनी खूबसूरत जीवनशैली, बेहतरीन जलवायु और उच्च वेतनमान के लिए पहचाना जाने वाला ऑस्ट्रेलिया (Australia) भी भारतीय युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। ऑस्ट्रेलिया का इमीग्रेशन सिस्टम पूरी तरह से प्वॉइंट-बेस्ड (Points-Based System) है, जहां आपकी उम्र, शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेजी दक्षता (PTE/IELTS) और कार्य अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते हैं। यदि आपकी स्किल्स ऑस्ट्रेलिया की 'स्किल ऑक्यूपेशन लिस्ट' (Skilled Occupation List) में शामिल हैं, तो आप स्वतंत्र स्किल्ड वीजा के माध्यम से सीधे पीआर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय इलाकों (Regional Areas) में पढ़ाई या नौकरी करने वाले युवाओं को पीआर हासिल करने में अतिरिक्त लाभ और प्राथमिकता मिलती है।न्यूजीलैंड: वर्क-टू-रेसिडेंसी पाथवे के साथ शांतिपूर्ण और स्थिर भविष्य की गारंटीप्रकृति की गोद में बसे शांत और विकसित देश न्यूजीलैंड (New Zealand) ने स्किल्ड माइग्रेंट्स के लिए अपनी नीतियों को काफी सरल और आकर्षक बना दिया है। न्यूजीलैंड सरकार की 'ग्रीन लिस्ट' (Green List) और 'वर्क-टू-रेसिडेंसी' (Work to Residence) पाथवे के तहत यदि आप निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईटी या कृषि क्षेत्र में कुशल नौकरी प्राप्त कर लेते हैं, तो आपको बिना किसी जटिल प्रक्रिया के सीधे रेजिडेंसी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। न्यूजीलैंड में काम करने वाले भारतीयों को न केवल बेहतरीन वर्क-लाइफ बैलेंस मिलता है, बल्कि वहां का सुरक्षित और प्रगतिशील माहौल परिवार के साथ बसने के लिए आदर्श माना जाता है।यूनाइटेड किंगडम (UK): स्किल्ड वर्कर वीजा के जरिए ब्रिटिश पीआर पाने का आसान रास्तापारंपरिक रूप से भारतीयों के पसंदीदा देशों में शामिल यूके ने ब्रेक्जिट के बाद से अपनी वीजा प्रणाली में बड़े और सकारात्मक बदलाव किए हैं। यूके का 'स्किल्ड वर्कर वीजा' (Skilled Worker Visa) उन सभी भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है जो ब्रिटेन में करियर बनाना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवा (NHS), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, फाइनेंस और अकादमिक क्षेत्रों में कुशल कामगारों की भारी मांग है। यूके के नियमों के अनुसार, यदि आप लगातार 5 वर्षों तक वैध वर्क वीजा पर वहां नौकरी करते हैं और न्यूनतम आय के मानदंडों को पूरा करते हैं, तो आप ब्रिटेन में सेटेलमेंट (Indefinite Leave to Remain) यानी पीआर के लिए आवेदन करने के योग्य हो जाते हैं। अमेरिका के मुकाबले यूके में पीआर की राह काफी स्पष्ट और व्यवस्थित है।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी निवास कार्यक्रम से बाहर करने और वीजा नियमों को सख्त करने को भारत विरोधी और अहंकारी बताया गया है
मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प से रिश्ते सुधार लिए हैं। अब जुकरबर्ग का प्रभाव AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में भी दिख रहा है। AI सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने में उनका बड़ा रोल है। जुकरबर्ग ने ट्रम्प से बिगड़े रिश्ते कैसे सुधारे 2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि ट्रम्प की पोस्ट से हिंसा और बढ़ सकती है। इस फैसले से ट्रम्प नाराज हो गए। उन्होंने जुकरबर्ग पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें उम्रकैद तक की धमकी दी। दोनों के रिश्ते सुधरने की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई। पेंसिल्वेनिया की एक चुनावी रैली में ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे शानदार चीजों में से एक था। जुकरबर्ग की इस तारीफ के कुछ हफ्ते बाद ट्रम्प ने भी उनके प्रति नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अब वे जुकरबर्ग को पहले से ज्यादा पसंद करते हैं। ट्रम्प के करीब आने के लिए क्या-क्या किया? ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए। ट्रम्प से नजदीकी का जुकरबर्ग को फायदा मिला ट्रम्प और जुकरबर्ग की बढ़ती नजदीकी का असर सरकारी फैसलों पर भी दिख रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया। पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रम्प और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। समझौते का मकसद AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच कराना है। जुकरबर्ग का मानना है कि AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तकनीकी सुधारों से दूर किया जा सकता है। हालांकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसमें कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। ट्रम्प से दोस्ती आगे चलकर भारी भी पड़ सकती है CNN के मुताबिक जुकरबर्ग को ट्रम्प के करीब आने का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसके नुकसान भी हो सकते हैं। अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में बहुमत मिलता है या 2028 में उसका राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को लैटर लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं को कितना पैसा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए भारी रकम खर्च की और अब उसे इसका फायदा मिल रहा है। ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी जुकरबर्ग पर भरोसा नहीं करते। उन्हें लगता है कि जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीति के पीछे कोई विचारधारा नहीं, बल्कि अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। यानी जुकरबर्ग ने कभी जिस ट्रम्प से टकराव मोल लिया था, आज उसी के साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन यह दोस्ती कितनी टिकेगी, इसका फैसला आने वाले चुनाव और अमेरिकी राजनीति का रुख करेगा। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे: मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने विपक्ष को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर पढ़ें…
H-1B विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे।
एच-1बी विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
वाशिंगटन, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे। यह बयान तब सामने आया, जब ट्रंप प्रशासन ने एक प्रमुख रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड कार्यक्रम के माध्यम से विदेशी श्रमिकों को स्पॉन्सर करने की कंपनी की क्षमता को निलंबित कर दिया था।
आलू भुजिया के मसालों से ठीक हुआ अस्थमा? अमेरिकी शख्स का दावा, भारतीय खाने को बताया फायदेमंद
भारतीय मसालों और खाने के कई फायदे आपने सुने होंगे लेकिन क्या कभी पैकेट वाली आलू भुजिया को अस्थमा के इलाज के लिए खाया है। अमेरिकन शख्स सैम ने वीडियो में आलू भुजिया के पैकेट की फोटो दिखाई और उसमें लिखे मसालों को अस्थमा-एलर्जी का इलाज बताया। चलिए पूरी स्टोरी जानते हैं।
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
'तब आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति बुलाएंगे', बिहार के छात्र ने छोड़ा अमेरिका, फिर सच कर दिखाया सपना
“मेरे अंदर के बिहारी ने कहा, ‘मैं तब वापस आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति मुझे बुलाएंगे’”: जब शरद सागर ने भारत में काम करने के लिए अमेरिका छोड़ा, तो लोग हंसे, लेकिन उन्होंने भविष्य को सच कर दिखाया।
Iran US War: ईरान ने दागी Sayyad-3 मिसाइल, क्या अमेरिकी एयरक्राफ्ट था निशाने पर? | Trump | Mojtaba
ईरान ने अचानक ऐसी मिसाइल दागी कि अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है...क्योंकि जिस जगह से यह मिसाइल चली, वहां कुछ मिनट पहले अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान देखे गए थे.
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran America war में ईरान ने अमेरिका को Middle East से ही खदेड़ दिया? Prof Peter Kuznik का बड़ा दावा
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रही उथल-पुथल अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। वैश्विक मामलों के जानकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में दशकों से चला आ रहा अमेरिकी दबदबा अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है
अमेरिका में भारतवंशी छात्रों का कमाल, बनाया ऐसा कॉफी पॉड कि कचरा ही नहीं बचेगा
अमेरिका के छात्रों आदित्य हेरेकर और करण वर्मा ने बायोडिग्रेडेबल कॉफी पॉड Naturista बनाया है। करीब 200 प्रोटोटाइप के बाद तैयार इस इनोवेशन ने एक चैलेंज में 25 हजार डॉलर का पुरस्कार जीता। जानिए कैसे बना यह अनोखा कॉफी कैप्सूल।
पीसीएस 2025 के साक्षात्कार के तीसरे दिन एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति का स्वागत करने ट्रंप क्यों गए और उनका स्वागत क्यों हुआ।
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा!
बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा! असली मुद्दा ये है कि इराक में मुकीम सबसे बड़ी फोर्स हशदुशशाबी के लिए ये नाजुक और इम्तेहान की घड़ी है...वो इसलिए क्यों कि अमेरिका और इजरायल किसी भी सूरत में इराक में ईरान हिमायती इन फोर्सेस का खात्मा चाहते हैं..
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट क्यों भागी अमेरिकी सेना! Trump। Iran। Middle East
Iran America War के बीच Iraq से क्यों निकल रही US की फोर्सेस,अब कौन हावी?| Trump
विचार: अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजे भारत
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
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अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन : राष्ट्रपति शी का दबदबा, और ट्रंप के पत्ते
एआई के मुद्दे पर, राष्ट्रपति शी ने एआई विकास पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण का विरोध किया और ओपन-सोर्स एआई का समर्थन किया।
Iran America War में IRGC ने Hormuz Strait में उड़ाया अमेरिकी सुरक्षा में तैनात जहाज | Trump
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चल रहे जहाजों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक तेल टैंकर के प्रभावित होने की भी प्रारंभिक सूचना है
अमेरिकी नागरिकों से 72 लाख डॉलर की ठगी: अहमदाबाद से चल रहे अवैध कॉल सेंटर सिंडिकेट का भंडाफोड़
सीबीआई ने अहमदाबाद से संचालित अवैध कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों से 72.1 लाख डॉलर (60 करोड़ रुपये से अधिक) की साइबर ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को यूएस अटॉर्नी और एफटीसी जैसे अमेरिकी संघीय अधिकारी बताकर पीड़ितों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी केस में फंसाने का डर दिखाते थे और बैंक खातों से रकम निकालकर सोना खरीदने व कूरियर को सौंपने के लिए मजबूर करते थे। डिजिटल साक्ष्य जब्त कर एजेंसी पूरे सिंडिकेट की जांच कर रही है।
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
नेताओं के हेल्दी खानपान के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डाइट जानते हैं। जिन चीजों को अनहेल्दी समझकर खाने से इनकार किया जाता है, उसी डाइट कोक, बर्गर, पिज्जा को खाकर राष्ट्रपति करते हैं बड़े-बड़े फैसलें।
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
CBSE पोर्टल की सुरक्षा खामी उजागर करने वाले 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के हॉल ऑफ फेम में शामिल कर सम्मानित किया गया है।
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
हार्वर्ड-स्टैनफर्ड नहीं... MIT है अमेरिकी नंबर वन कॉलेज, जानिए आइवी लीग कॉलेजों की रैंक
यूएस न्यूज बेस्ट कॉलेज 2027 रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने प्रिंसटन के 15 साल के वर्चस्व को खत्म कर पहला स्थान हासिल कर लिया है। सभी 8 आइवी लीग कॉलेज लिस्ट में शामिल हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
बिहार के नीरज को अमेरिका में मिली 2.6 करोड़ की स्कॉलरशिप, पिता चलाते हैं पान की दुकान
सारण जिले के नीरज को अमेरिका में करीब 2.6 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप पर PhD कर रहे हैं। बिहार के छोटे से गांव से अमेरिका तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष की अच्छी मिसाल है।
पिता के संघर्ष को सम्मान: कभी अमेरिका ने किया वीजा खारिज, आज नासा कर रहा स्वागत; कैसे लिखी सफलता की कहानी?
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

