सोल, 13 अक्टूबर . दक्षिण कोरिया के President ली जे म्युंग ने Tuesday को अमेरिका के साथ अपने देश के गठबंधन को बेहद अहम बताते हुए कहा कि कूटनीति में किसी भी तरह के दब्बूपन या दूसरे देश के सामने झुकने की नीति से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की विदेश नीति का ... Read more
मशहूर अमेरिकी टीवी सीरीज ब्रेकिंग बैड में वॉल्टर व्हाइट के बेटे का किरदार निभाने वाले अभिनेता आरजे मिटे की 34 साल की उम्र में मौत हो गई। अमेरिकी एंटरटेनमेंट वेबसाइट TMZ ने आरजे मिटे के रिप्रेजेंटेटिव के हवाले से बताया कि एक्टर ने सोमवार को टेक्सास में आत्महत्या की। जन्म के समय हुई थी दिमाग को चोट आरजे मिटे का पूरा नाम रॉय फ्रैंक मिटे तृतीय था। उनका जन्म 21 अगस्त 1992 को अमेरिका के मिसिसिपी राज्य के जैक्सन शहर में हुआ था। जन्म के समय उनकी हालत गंभीर थी। उन्हें इमरजेंसी सिजेरियन ऑपरेशन से पैदा किया गया था। जन्म के समय वह सांस नहीं ले रहे थे। इसके कारण उनके दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा था। जन्म के कुछ हफ्तों बाद उन्हें रॉय फ्रैंक मिटे जूनियर और डायना मिटे ने गोद लिया था। जब वह सिर्फ दो महीने के थे, तब उनके माता-पिता अलग हो गए। इसके बाद उनकी मां ने उनकी परवरिश की। उनका बचपन लुइसियाना के लाफायेट और टेक्सास के ऑस्टिन शहरों में बीता। बचपन में पैरों पर लगाए गए थे प्लास्टर मिटे को तीन साल की उम्र में सेरेब्रल पाल्सी होने का पता चला। सेरेब्रल पाल्सी का मतलब है कि उन्हें बचपन से चलने-फिरने और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में परेशानी होती थी। उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल हॉलीवुड में दिव्यांग कलाकारों के अधिकारों की आवाज उठाने के लिए किया था। डॉक्टरों ने उनके पैरों को सीधा करने के लिए छह महीने तक प्लास्टर लगाया था। बचपन में वह पैरों में सपोर्ट लगाने वाले उपकरणों और बैसाखियों की मदद से चलते थे। हालांकि, खेल और एक्सरसाइज की मदद से धीरे-धीरे उनका शरीर मजबूत हुआ। किशोरावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें चलने के लिए इन उपकरणों की जरूरत नहीं रही। जब मिटे 13 साल के थे, तब उनकी मां लकवाग्रस्त हो गईं। इसके बाद उन्होंने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालनी शुरू कर दी। उस समय उनकी छोटी बहन भी परिवार का हिस्सा थीं। इतनी कम उम्र में उन्होंने परिवार की मदद के लिए काम करना शुरू किया। ‘ब्रेकिंग बैड’ से मिली दुनिया भर में पहचान मिटे ने अपने करियर की शुरुआत छोटे रोल से की थी। वह डिज्नी के शो ‘हाना मोंटाना’ में भी नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। जल्द ही उन्हें अमेरिकी टीवी सीरीज ‘ब्रेकिंग बैड’ में वॉल्टर व्हाइट जूनियर का किरदार मिला। इस सीरीज में उनके किरदार को भी सेरेब्रल पाल्सी था और वह बैसाखियों की मदद से चलता था। हालांकि, असल जिंदगी में उस समय मिटे को बैसाखियों की जरूरत नहीं थी। सीरीज में उन्होंने ब्रायन क्रैंस्टन और अन्ना गन के साथ काम किया। दोनों ने उनके ऑन-स्क्रीन माता-पिता का किरदार निभाया था। इस शो में उनके अभिनय को दिव्यांग लोगों की बेहतर पहचान और प्रतिनिधित्व के लिए भी सराहा गया। फिल्मों और टीवी में भी किया काम ‘ब्रेकिंग बैड’ के अलावा मिटे ने ‘द ओक रूम’, ‘ट्रायम्फ’, ‘द गार्डियंस ऑफ जस्टिस’ और ‘द अनसीन’ जैसी फिल्मों और सीरीज में काम किया। 2019 में आई फिल्म ‘स्टैंडिंग अप फॉर सनी’ में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। ब्रायन क्रैंस्टन ने जताया दुख 'ब्रेकिंग बैड' के लीड एक्टर ब्रायन क्रैंस्टन ने मिटे के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि कुछ हफ्ते पहले ही दोनों लंच पर मिलने की योजना बना रहे थे। क्रैंस्टन ने लिखा, “आज रात यह लिखते हुए मैं गहरे दुख में हूं। ब्रेकिंग बैड में मेरे प्यारे बेटे आरजे मिटे का निधन हो गया।” उन्होंने लिखा, “जब वह सिर्फ 14 साल के थे, तब मैं उनसे मिला था। उन्हें वॉल्टर व्हाइट जूनियर के किरदार के लिए चुना गया था। उन्होंने यह भूमिका खुशी और उत्साह के साथ निभाई।” क्रैंस्टन ने कहा, “सेरेब्रल पाल्सी के साथ जन्म लेने के बावजूद, आरजे ने कभी इस चुनौती को किसी काम के लिए बहाना नहीं बनने दिया।” उन्होंने आगे लिखा, “उन्होंने शूटिंग के कठिन शेड्यूल का पूरी दृढ़ता से सामना किया। वह अपनी टीवी मां अन्ना गन और मुझसे मिली सलाह हमेशा सुनते थे, लेकिन किशोर होने के नाते, वह कभी-कभी शरारत से हमारी सलाह नजरअंदाज भी कर देते थे। वह मुश्किल तरीके से सीखना चाहते थे। वह एक हिट टीवी शो के सितारों में से एक थे, लेकिन फिर भी एक बच्चे थे।” क्रैंस्टन ने कहा कि जब मिटे टीम से जुड़े थे, तब वह अभिनय में कच्चे थे। बाद में वह एक बेहतरीन अभिनेता बने। उन्होंने कहा कि मिटे ने शो में अपने अनुभव का इस्तेमाल दिव्यांग कलाकारों के लिए खुलकर आवाज उठाने में किया। क्रैंस्टन ने लिखा, “उनकी सारी उम्मीद और क्षमता अब खो गई है। यह जानना बेहद दुखद है कि उन्होंने अपनी जान ले ली। क्यों?”
अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन से रिपब्लिकन पर मेहरबान हुए मस्क
दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क ने साल 2026 के अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बनाए रखने के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है। चुनाव अभियान से जुड़े वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, मस्क अब तक लगभग 366 मिलियन डॉलर खर्च कर चुके हैं। इसमें से 276 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम राशि …
बांग्लादेश के पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट पर बांग्लादेशी प्रवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. एक व्यक्ति ने उन्हें आतंकवादी तक कहा और बांग्लादेश के राजनीतिक संकट में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए.
सऊदी अरब पर हूतियों के हमले रोकने में अमेरिका मदद क्यों नहीं कर रहा, ये हैं चार कारण
सऊदी अरब इतने हमले झेल रहा है, ऐसे में ज़्यादातर लोगों के मन में यही सवाल है कि अमेरिका उसकी मदद क्यों नहीं कर रहा है?
भारत विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान उमर के घर एफबीआई की छापेमारी, ट्रंप ने भी साधा निशाना
अमेरिकी सांसद इल्हान उमर के घर FBI की तलाशी से सियासी विवाद बढ़ा। ट्रंप ने आरोपों पर प्रतिक्रिया दी, जबकि डेमोक्रेट नेताओं ने चुनाव से पहले कार्रवाई पर सवाल उठाए।
अमेरिका में भारतीय टेक वर्कर्स को बड़ा झटका, 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड और वीजा बैन
अमेरिका में बसने और स्थायी निवासी (Permanent Resident) बनने का सपना देख रहे भारतीय आईटी पेशेवरों और कुशल टेक वर्कर्स के लिए अमेरिकी आव्रजन और श्रम विभाग से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार और लेबर डिपार्टमेंट (US Department of Labor) ने आव्रजन नियमों, वेतन मानकों और रोजगार शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में कुल 8 प्रमुख टेक कंपनियों और आईटी कंसल्टिंग फर्मों पर बड़ा शिकंजा कस दिया है।प्रशासन ने इन 8 चिह्नित कंपनियों के माध्यम से प्रोसेस होने वाले 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM Certification) और ग्रीन कार्ड (Green Card) के आवेदनों को रोक दिया है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और लेबर विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई के बाद इन कंपनियों में कार्यरत हजारों भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, सिस्टम एनालिस्ट्स और डेटा साइंटिस्ट्स के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।किन 8 कंपनियों पर गिरी अमेरिकी प्रशासन की गाज, जानिए क्या हैं उन पर लगे गंभीर आरोपअमेरिकी अधिकारियों द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिन 8 कंपनियों पर यह प्रतिबंध लगाया गया है उनमें कई प्रमुख आईटी परामर्श, आउटसोर्सिंग और स्टाफिंग फर्में शामिल हैं जो मुख्य रूप से भारत और एशियाई देशों से कुशल श्रमिकों को अमेरिका बुलाती रही हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे अमेरिकी आव्रजन कानूनों की कमियों का फायदा उठाकर स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों की अनदेखी कर रही थीं और विदेशी श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन (Prevailing Wage) से कम का भुगतान कर रही थीं।इसके अलावा, लेबर डिपार्टमेंट ने अपनी जांच में पाया कि इनमें से कुछ कंपनियों ने PERM प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेज पेश किए और स्पॉन्सर्ड ग्रीन कार्ड पदों के लिए योग्य अमेरिकी नागरिकों के आवेदनों को जानबूझकर खारिज किया। इस प्रकार के गैर-कानूनी आचरण पर लगाम लगाने के लिए ही अमेरिकी श्रम विभाग ने इन कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाए हैं।भारतीय आईटी पेशेवरों पर क्या पड़ेगा सीधा प्रभाव, जानिए क्या बदलेगा अबअमेरिका में कार्य कर रहे भारतीय कर्मचारियों के लिए यह फैसला एक बड़े दोहरे झटके की तरह सामने आया है। भारत से आने वाले आईटी प्रोफेशनल अमूमन H-1B वीजा पर अमेरिका जाते हैं और इसके बाद वे वहां ग्रीन कार्ड (PERM प्रोसेस) के लिए अपनी नियोक्ता कंपनी के माध्यम से आवेदन दाखिल करते हैं।इस नई प्रशासनिक रोक का मतलब यह है कि जो भारतीय कर्मचारी इन 8 ब्लैकलिस्टेड कंपनियों में काम कर रहे हैं, उनका ग्रीन कार्ड का इंतजार अब अनिश्चितकाल के लिए लटक गया है। इतना ही नहीं, यदि इन कर्मचारियों का H-1B वीजा अपनी अधिकतम 6 साल की सीमा पूरी करने वाला है और उनका PERM सर्टिफिकेशन अटका रहता है, तो उन्हें अमेरिका छोड़कर भारत वापस लौटना पड़ सकता है या फिर तुरंत किसी दूसरी मान्यता प्राप्त अमेरिकी कंपनी में अपनी नौकरी ट्रांसफर करानी होगी।क्या हैं प्रभावित भारतीय टेक वर्कर्स के पास कानूनी विकल्प, एक्सपर्ट्स की क्या है राय?अमेरिकी इमिग्रेशन वकीलों और लीगल एक्सपर्ट्स ने प्रभावित कर्मचारियों को घबराने के बजाय त्वरित और रणनीतिक कदम उठाने की सलाह दी है। यदि कोई कर्मचारी इन प्रतिबंधित कंपनियों में से किसी एक में कार्यरत है, तो उसके पास सबसे पहला और सुरक्षित रास्ता यह है कि वह जल्द से जल्द किसी ऐसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी का रुख करे जिसका PERM रिकॉर्ड बेदाग हो।दूसरा विकल्प यह है कि कर्मचारी यदि संभव हो तो O-1 वीजा या EB-1B/EB-2 NIW (National Interest Waiver) जैसी उच्च श्रेणी की वीजा कैटेगरी में शिफ्ट होने का प्रयास करें, जिनमें कंपनी के स्पॉन्सरशिप की आवश्यकता कम या अलग होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद आव्रजन नियमों में आ रही यह सख्ती यह साफ संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में अमेरिका में विदेशी टेक वर्कर्स के लिए कानूनी मानक और अधिक कड़े होने वाले हैं।
'फ्रांस प्रोटेस्ट के पीछे वामपंथी, भारत अगला टारगेट!', अमेरिकी पत्रकार ने चेताया
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट ने फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की है, जिनमें लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट संगठनों के शामिल होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं कि ये प्रदर्शन विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए बढ़ाए जा रहे हैं.
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव:जनता ट्रंप से नाराज...सुरक्षित सीटों पर भी कड़ा मुकाबला;बहाए जा रहे करोड़ों डॉलर
Kroger Layoffs: अमेरिकी ग्रॉसरी चेन में फिर छंटनी की तैयारी, 3000 जॉब हो सकती हैं कट
ग्रॉसरी यानि कि किराना सामान बेचने वाली अमेरिकी कंपनी क्रोगर अपने काम के तरीकों में AI को शामिल कर रही है। इसके चलते कंपनी अगले 3 सालों में लगभग 3,000 कॉरपोरेट रोल कम करने की योजना बना रही है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह बात क्रोगर के CEO ग्रेग फोरन ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में कही है। कंपनी के इस कदम के बारे में सबसे पहले ब्लूमबर्ग न्यूज ने खबर दी थी। फोरन ने मेमो में लिखा कि क्रोगर को एक जैसा काम दोबारा करने से बचना चाहिए और टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल बिठाना चाहिए। नौकरियों में कटौती से कंपनी को कीमतें कम करने और स्टोर में काम करने वाले कर्मचारियों पर निवेश करने में मदद मिलेगी।फोरन ने फरवरी में क्रोगर के CEO का पद संभाला था। फोरन ने मेमो में कहा कि नौकरियों में कटौती के बारे में डिटेल आने वाले महीनों में शेयर की जाएगी। इस कदम से कंपनी के 8,200 कॉरपोरेट कर्मचारियों में से लगभग 37 प्रतिशत प्रभावित होंगे। पिछले साल जून में, कंपनी ने लगभग 1,000 कॉरपोरेट रोल कम किए थे।पिछले महीने AI रणनीति पर डाली थी रोशनीपिछले महीने क्रोगर ने अपनी AI रणनीति के बारे में बताया था। इसमें काम के तरीकों को मैनेज करने के लिए मॉडल्स का इस्तेमाल और AI शॉपिंग असिस्टेंट जैसे टूल को बेहतर बनाने के लिए कस्टमर डेटा का इस्तेमाल शामिल है। कंपनी अपनी सालाना 'आइडेंटिकल सेल्स' का टारगेट भी कम कर चुकी है। क्रोगर, वॉलमार्ट और एल्डी जैसे प्रतिस्पर्धियों से बेहतर मुकाबला करने के लिए कीमतें कम करना चाहती है। पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के दबाव में ग्राहक अब ज्यादा सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं।
आ गई भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी, चीन-अमेरिका-ब्रिटेन सब छूट जाएंगे पीछे
IMF On India GDP Growth: चीन हो, अमेरिका हो या फिर रूस और ब्रिटेन, भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार के आगे कोई टिकने वाला नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने एक बार फिर इंडियन इकोनॉमी की तेज रफ्तार पर अपनी मोहर लगाई है.
Elon Musk: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ₹3,500 करोड़ झोंकने की तैयारी, ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के लिए चला रहे बड़ा अभियान
इल्हान उमर के घर एफबीआई की छापेमारी: भारत विरोधी हैं अमेरिकी सांसद, ट्रंप लगा चुके हैं भाई से शादी का आरोप- FBI raids Ilhan Omar home US lawmaker is anti-India Trump has alleged she married her brother
किम जोंग से मिलने के लिए ट्रंप उत्साहित: कब हो सकती है दोनों की मुलाकात? हूतियों पर भी बोले अमेरिकी राष्ट्रपति- Kim Jong Un and Donald Trump may meet in November indications given of military action against Houthis
अमेरिका में बदलाव की मांग: कटघरे में न्यूयॉर्क पुलिस की बलप्रयोग नीति, ममदानी ने क्यों दिए समीक्षा के निर्देश?- Mayor Mamdani tightens screws on NYPD Use-of-force policies to be investigated what prompted this decision
36.6 करोड़ डॉलर का चुनावी चंदा! अमेरिका में सवालों के घेरे में एलन मस्क
टेक्नोलॉजी दिग्गज एलन मस्क अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा 'स्टारलिंक' को भारत के बाजार में उतारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं अमेरिका में, सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने रिपब्लिकन पार्टी को जिताने के लिए मस्क द्वारा 36.6 करोड़ डॉलर खर्च किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है.
Maharajganj News: अमेरिकी नागरिक ट्रेविस फेलेन को जेल में बिताई अवधि व पांच हजार जुर्माने की सजा
135 दिन में सीजेएम कोर्ट का फाइनल जजमेंट, फरेंदा के छतरी चौराहे से 30 मई को हुई थी गिरफ्तारी
'कुछ लोगों की हरकतों से विश्वसनीयता को पहुंच सकता है नुकसान', विदेश सचिव ने अमेरिका को लिया आड़े हाथ
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने टैलेंट मोबिलिटी इकोसिस्टम की विश्वसनीयता पर चिंता जताई, खासकर अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा कुछ कंपनियों को निलंबित करने के बाद।
पश्चिम बंगाल: 'भारत पर अमेरिका का भरोसा, हर क्षेत्र में बढ़ा रहे सहयोग'; राजदूत सर्जियो गोर ने क्या-क्या कहा?
अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर अमेरिकी प्रतिबन्ध, ‘न्याय व्यवस्था पर आघात’
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा एक संस्थान के तौर पर अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर प्रतिबन्ध थोपे जाने की कठोर निन्दा की है और चिन्ता जताई है कि इस स्थिति में कोर्ट के लिए अपने दायित्वों को निभाने की क्षमता पर असर होगा.
'अमेरिका से सशर्त होगी परमाणु वार्ता', ईरान बोला- पुरानी स्थिति में नहीं लौटेंगे
ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के दरवाजे खुले रखे हैं, लेकिन साफ किया है कि बातचीत पुरानी परिस्थितियों में नहीं होगी और वह बीते अनुभवों को ध्यान में रखेगा।
कोलकाता, 12 अक्टूबर . India में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर कोलकाता के दौरे पर हैं. पश्चिम बंगाल में बड़े ही धूमधाम के साथ दुर्गापूजा का त्योहार मनाया जाता है. इस मौके पर अमेरिकी राजदूत ने कोलकाता में दुर्गापूजा पंडाल का भी दौरा किया और तस्वीरें साझा कर सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दी. सर्जियो ... Read more
विश्व राजनय में विडंबना या विरोधाभास की पराकाष्ठा बेहद दुखद और शर्मनाक है। अमेरिका ने रूस के साथ डीजल आयात के लिए समझौता किया है। वह रूस से पहले ही यूरेनियम और उर्वरक आयात करता रहा है। स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने…
Woman Comes Alive: अमेरिका में अंतिम संस्कार से ठीक पहले जिंदा हुई महिला, लोगों ने दोबारा से पहुंचाया हॉस्पिटल
इन दो 2 अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को मिला Economics का नोबेल पुरस्कार
इंटरनेट डेस्क। इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के विजेताओं के नाम का भी ऐलान हो गया है। इस बार का ये पुरस्कार अमेरिकी अर्थशास्त्रियों रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड को दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने आज विजेताओं के नाम का ऐलान किया है। दोनों को इस पुरस्कार के तहत कुल 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी 11.5 करोड़ रुपए प्रदान की जाएगी। ये राशि दोनों को आपस में बराबर बांटनी होगी। खबरों के अनुसार, 2026 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दोनों को ऐसे आर्थिक मॉडल विकसित करने के लिए दिया गया है, जिनसे मंदी और महंगाई जैसी समस्याओं से निपटने के लिए बेहतर नीतियां बनाने में सहायता मिलेगी। अर्थशास्त्रियों की उनकी रिसर्च बताती है कि लोगों के खर्च और कंपनियों के फैसले अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं। इससे सरकारों और केंद्रीय बैंकों को यह समझने में सहायता मिलेगी कि आर्थिक संकट के समय कौन-से कदम उठाए जाने चाहिए। PC:livehindustan अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
अमेरिका के एडमिरल पापारो ने वाइस एडमिरल विनीट मैककार्टी से की मुलाकात
New Delhi, 12 अक्टूबर India और अमेरिका ने अपने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अमेरिका की पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो ने अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी से मुलाकात की है. इस ... Read more
अमेरिका: टूटे एंकल के इलाज के लिए अस्पताल गई 21 वर्षीय छात्रा की मौत
अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य में पैर का टखना टूटने पर इलाज कराने गई 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा की पेनकिलर्स के ओवरडोज़ के कारण मौत हो गई। मृतका डेल एलिस मार्टिन टेक्सास की ट्रिनिटी यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी और इतिहास की पढ़ाई कर रही थीं। उनके परिवार ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अदालत …
IIT कानपुर से पढ़े भारतीय मूल के देव गौतम अमेरिका में 2 साल से फुल टाइम जॉब के लिए भटक रहे हैं।
इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दो अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को मिला है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने सोमवार को इसकी घोषणा की। रॉबर्ट ई हॉल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और माइकल वुडफोर्ड कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
अमेरिकी सरकार के नए आदेश के बाद यूनिवर्सिटी ने बंद की लॉ एक्सटर्नशिप
अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे और भविष्य में वहां जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और निराश करने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वर्क परमिट और ऑफ-कैंपस ट्रेनिंग से जुड़े नियमों में हाल ही में किए गए कड़े बदलावों और नए दिशानिर्देशों के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल (HLS) ने बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय जेडी (J.D.) छात्रों के लिए अपनी सभी 13 लॉ एक्सटर्नशिप क्लिनिक प्रोग्राम्स में काम करने की मंजूरी (वर्क ऑथराइजेशन) को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इस फैसले का सीधा असर अमेरिका में पढ़ रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों पर पड़ा है, जिनमें भारतीय छात्रों की संख्या भी अच्छी-खासी है। अमेरिकी सरकार द्वारा करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (CPT) के नियमों को सख्त किए जाने के बाद यूनिवर्सिटी को कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी लॉ फर्मों, सरकारी एजेंसियों और गैर-लाभकारी संगठनों में प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करने के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं।अमेरिकी सरकार के कड़े नियम और CPT वर्क ऑथराइजेशन पर लगा ब्रेकअमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए फेडरल गाइडलाइन के अनुसार, विदेशी छात्रों को ऑफ-कैंपस वर्क परमिट यानी सीपीटी (Curricular Practical Training) देने के मानकों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को केवल उन्हीं वर्क प्रोग्राम्स में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है जो उनके डिग्री पाठ्यक्रम के लिए पूरी तरह से अनिवार्य हों। हार्वर्ड लॉ स्कूल में एक्सटर्नशिप क्लिनिक एक वैकल्पिक यानी इलेक्टिव कोर्स का हिस्सा थे, जिसके कारण नए नियमों के तहत विदेशी छात्रों को इन क्लिनिक्स में काम करने के लिए ऑथराइजेशन देना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता था। इस कड़े रुख के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 13 प्रमुख एक्सटर्नशिप प्रोग्राम्स से बाहर रखने का फैसला लिया है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने यह स्पष्ट किया है कि एलएलएम (LL.M.) प्रोग्राम के छात्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जेडी (J.D.) डिग्री ले रहे भारतीय व अंतरराष्ट्रीय छात्र इससे सीधे प्रभावित हुए हैं।भारतीय छात्रों के करियर पर बड़ा असर और प्रैक्टिकल एक्सपीरिएंस का संकटअमेरिका में कानून की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक्सटर्नशिप केवल क्रेडिट हासिल करने का जरिया नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वे अमेरिकी कानूनी प्रणाली, शीर्ष अदालतों, बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनियों और मानवाधिकार संगठनों में काम करने का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते थे। हार्वर्ड के इस फैसले के बाद भारतीय छात्रों को अब केवल यूनिवर्सिटी के इन-हाउस (ऑन-कैंपस) क्लिनिकल प्रोग्राम्स तक ही सीमित रहना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रैक्टिकल अनुभव के बिना अमेरिकी जॉब मार्केट में प्रवेश करना और पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां वर्क वीजा (H-1B) हासिल करना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जो छात्र प्रैक्टिकल अनुभव के लिए ऑप्टेशनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) का इस्तेमाल करेंगे, उनका पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क टाइम कोटा समय से पहले ही खत्म हो जाएगा, जिससे उनका करियर प्लान पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।अमेरिकी नीतियों में बदलाव और वैश्विक उच्च शिक्षा का बदलता परिदृश्यपिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन द्वारा छात्र वीजा (F-1 वीजा) और उससे जुड़ी रोजगार नीतियों में लगातार सख्ती बरती जा रही है। केवल हार्वर्ड ही नहीं, बल्कि अमेरिका की कई अन्य प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ भी इन नए फेडरल नियमों की वजह से अपने इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम्स और वर्क परमिट पॉलिसी में बदलाव करने पर मजबूर हो रही हैं। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के मन में असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। लाखों रुपये की फीस और भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर अमेरिका पढ़ने जाने वाले छात्रों के सामने अब पढ़ाई के साथ-साथ वर्क एक्सपीरियंस हासिल करने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी नीतियां इसी तरह सख्त होती रहीं, तो भारतीय छात्र अमेरिका के बजाय ब्रिटेन, कनाडा या यूरोप के अन्य देशों का रुख कर सकते हैं।
वीजा नीतियों का असर: सपने छोड़ अमेरिका से स्वदेश लौट रहे भारतीय टेक पेशेवर, पिछले साल की तुलना में कितना अधिक?
रूस से तेल खरीदेगा अमेरिका, झुके ट्रंप, भारत को होगा तगड़ा फायदा?
अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला किया है।
भारत पर क्यों आ रहे अमेरिका के सात शहरों के मेयर?: दिल्ली समेत तीन शहरों का करेंगे दौरा, जानिए पूरा कार्यक्रम
दोहरे तर्क: कटघरे में अमेरिकी नीतियों की विश्वसनीयता, खुद जरूरत पड़ी तो रूस से डीजल आयात करने को राजी हुए ट्रंप
अमेरिका में वीजा का एक पहलू यह भी: जेडी वेंस की बात अपमानजनक, लेकिनजिस निर्भरता की ओर इशारा किया, वह असली
दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक गलियारे 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर जारी भू-राजनीतिक टकराव अब एक खतरनाक मुहाने पर पहुंच गया है। वाशिंगटन की ओर से तनाव घटाने और जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के लिए भेजे गए कूटनीतिक जवाब को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को पूरी तरह 'अस्पष्ट और नाकाफी' बताते हुए स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि वह अब इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ किसी भी औपचारिक या अनौपचारिक बातचीत के मूड में नहीं है। ईरान के इस आक्रामक और कड़े रुख के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। पिछले कई हफ्तों से बंद पड़े या भारी सैन्य निगरानी में चल रहे इस समुद्री मार्ग को लेकर उम्मीद की जा रही थी कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत से कोई मध्यमार्ग निकल आएगा, लेकिन ईरान के ताजा ऐलान ने शांति की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।दुनिया की 'ऑयल लाइफलाइन': क्यों इतना अहम है होर्मुज का संकरा जलमार्गहोर्मुज जलडमरूमध्य केवल पानी का एक संकरा रास्ता नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की मुख्य जीवनरेखा (Choke Point) माना जाता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।वैश्विक तेल आपूर्ति का केंद्र: दुनिया भर में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20 से 21 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख तेल व प्राकृतिक गैस निर्यातक देश अपने जहाजों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजने के लिए पूरी तरह इसी रूट पर निर्भर हैं।रणनीतिक बढ़त: इस जलमार्ग के उत्तरी हिस्से पर ईरान का सीधा भौगोलिक और सैन्य नियंत्रण है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना स्पीड बोट्स, सबमरीन, एंटी-शिप मिसाइलों और सी-माइंस के जरिए इस पूरे इलाके पर नजर रखती है।व्यापारिक गतिरोध का असर: इस जलमार्ग पर जरा सा भी तनाव आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें आसमान छूने लगती हैं और वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई (Freight Rates) व जहाजों का बीमा खर्च कई गुना बढ़ जाता है।अमेरिका का प्रस्ताव और ईरान की नाराजगी: आखिर कहां फंसा है असली पेंच?कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने तीसरे पक्ष के माध्यम से तेहरान को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें जलमार्ग से सैन्य तनाव घटाने, व्यापारिक टैंकरों की सुरक्षा की गारंटी देने और बदले में कुछ गैर-महत्वपूर्ण प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही गई थी। लेकिन ईरान का रुख शुरुआत से ही बिल्कुल स्पष्ट रहा है:प्रतिबंधों पर ठोस गारंटी की मांग: ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके ऊर्जा क्षेत्र, बैंकिंग नेटवर्क और तेल निर्यात पर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को औपचारिक रूप से नहीं हटाता, तब तक समुद्री सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं हो सकता। तेहरान ने अमेरिका के 'सशर्त ढील' वाले प्रस्ताव को एक कूटनीतिक छलावा करार दिया है।सैन्य उपस्थिति पर ऐतराज: फारस की खाड़ी और अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) और पश्चिमी युद्धपोतों के भारी जमावड़े को ईरान अपनी संप्रभुता के लिए सीधा खतरा मानता है। ईरान का तर्क है कि इस इलाके की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय खाड़ी देशों की जिम्मेदारी है और पश्चिमी शक्तियों को तुरंत यह क्षेत्र खाली करना होगा।विश्वास की भारी कमी: ईरान के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका कूटनीतिक वार्ताओं का इस्तेमाल केवल समय बिताने और अपनी सैन्य तैनाती को मजबूत करने के लिए कर रहा है। इसी कारण ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि खाली वादों के आधार पर टेबल पर बैठने का दौर अब खत्म हो चुका है।वैश्विक बाजारों में खलबली: भारत सहित दुनिया की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?ईरान द्वारा बातचीत के रास्ते बंद करने की घोषणा का तुरंत असर वैश्विक वित्तीय और कमोडिटी बाजारों पर दिखने लगा है:क्रूड ऑयल में तेज उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुख बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा या फारस की खाड़ी में किसी टैंकर पर हमला हुआ, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं।एलएनजी (LNG) सप्लाई पर खतरा: कतर से एशियाई और यूरोपीय देशों को होने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस की बड़ी खेप इसी रास्ते से जाती है। सर्दियों के मौसम या बढ़ती बिजली मांग के बीच एलएनजी का संकट बिजली संकट को जन्म दे सकता है।भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा दबाव: भारत अपनी घरेलू कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यदि होर्मुज मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध होता है, तो भारत के लिए तेल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ जाएंगे, जिसका सीधा असर देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।सैन्य टकराव या कूटनीतिक दबाव: आगे किस दिशा में जा सकता है संकट?ईरान के इस सख्त रुख के बाद गेंद अब अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के पाले में है। वाशिंगटन पर अपने खाड़ी सहयोगी देशों की ओर से दबाव है कि वह व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक एस्कॉर्ट मिशन को और तेज करे। हालांकि, विशेषज्ञों की राय है कि इस संकरे जलमार्ग में कोई भी छोटी सी सैन्य चूक या गलतफहमी पूर्ण युद्ध का रूप ले सकती है, जिसे झेलने की स्थिति में इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था बिल्कुल नहीं है। दूसरी ओर, चीन और अन्य प्रमुख आयातक देश जो ईरान और खाड़ी देशों दोनों से जुड़े हुए हैं, वे पर्दे के पीछे से तनाव को काबू में करने की कोशिशों में जुट गए हैं। फिलहाल, तेहरान के अड़ियल रुख ने यह साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका प्रतिबंधों और अपनी सैन्य नीतियों पर कोई बड़ा व ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य का यह रणनीतिक ताला खुलना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने यमन में सैन्य कार्रवाई का किया विरोध
वॉशिंगटन, 12 अक्टूबर . हूती समूह के रियाद एयरपोर्ट पर हमले से एक दिन पहले अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी भी उसी एयरपोर्ट पर थे. उन्होंने यमन में किसी भी तरह की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया. कनेक्टिकट से डेमोक्रेट लॉमेकर मर्फी ने सीबीएस के कार्यक्रम ‘फेस द नेशन’ में कहा कि वह सऊदी अरब ... Read more
भारत की फर्स्ट एसी ट्रेन में अमेरिकी-कोरियन यूट्यूबर कपल ने किया सफर, बोले- ये सफर जिंदगी भर याद रहेगा
अमेरिका: सरकारी खजाने से ट्रंप का प्रचार पड़ा भारी, जनता के पैसों से चल रहे विज्ञापनों पर कोर्ट ने लगाई रोक- US President Trump campaign public expense proves costly court halts advertisements funded by taxpayer money
न्यूयॉर्क की अदालत ने ‘कॉमन कॉज’ समेत अन्य समूहों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक लगाई। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रशासन राजनीतिक संदेशों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी धन का गैर-कानूनी इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिका के PERM प्रोग्राम के तहत आवेदनों पर रोक से कितना होगा असर, इन्फोसिस ने बताया
इन्फोसिस को उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रम के तहत नए आवेदनों पर रोक से उसके कामकाज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
ईरान का बड़ा आरोप, अमेरिकी-इजरायली हमलों से पैदा हुआ गंभीर पर्यावरणीय संकट
ईरान का बड़ा आरोप, अमेरिकी-इजरायली हमलों से पैदा हुआ गंभीर पर्यावरणीय संकट
अमेरिका से लौटी महिला की पोस्ट वायरल, भारत की सैलरी पर उठाए सवाल
अमेरिका से लौटी महिला की पोस्ट वायरल, भारत की सैलरी पर उठाए सवाल
पाकिस्तान में दो मानवाधिकार वकीलों की गिरफ्तारी पर अमेरिका-ब्रिटेन के शिक्षाविदों ने जताई चिंता
New Delhi, 11 अक्टूबर . Pakistan के दो वकील पिछले कुछ महीनों से दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहे हैं. इन मानवाधिकार वकीलों का नाम इमान जैनब मजारी-हाजिर और हादी अली चट्ठा है. फिलहाल हिरासत में हैं और इसे लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में कार्यरत Pakistanी मूल के कई शिक्षाविदों और विद्वानों ने ... Read more
अरे बाप रे! हरियाणा के खेतों में बैठकर अमेरिका को ऐसे लगा रहे थे चूना, अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार
रोहतक पुलिस ने विदेशी नागरिकों को फर्जी उड़ान टिकट बुक कराने के नाम पर ठगने वाले गिरोह के दो और सदस्यों, रवित और अंकित, को गिरफ्तार किया है।
ताजमहल में बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है, रविवार को अमेरिकी और आंध्र प्रदेश के पर्यटकों को बंदरों ने काट लिया। प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
अमेरिका-ब्रिटेन-जर्मनी समेत अंतरराष्ट्रीय तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजेगी यूपी की ‘टीम 12’
Lucknow, 11 अक्टूबर . आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी अब अपनी तकनीकी प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) के 150 विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी समाधान प्रस्तुत कर ... Read more
अमेरिका-ब्रिटेन-जर्मनी समेत अंतरराष्ट्रीय तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजेगी यूपी की 'टीम 12'
अमेरिका-ब्रिटेन-जर्मनी समेत अंतरराष्ट्रीय तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजेगी यूपी की 'टीम 12'
बैतूल शहर की साक्षी अवस्थी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए केटलबेल लिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 4 से 9 अक्टूबर तक आयोजित इंटरनेशनल यूनियन ऑफ केटलबेल लिफ्टिंग (IUKL) चैंपियनशिप में साक्षी ने महिला वेटरन वर्ग (35 से 39 वर्ष) की डबल जर्क स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने दोनों हाथों में 16-16 किलोग्राम की केटलबेल उठाकर यह उपलब्धि हासिल की। साक्षी अवस्थी बैतूल के कमानी गेट क्षेत्र में रहती हैं। वह व्यवसायी बृजेश अवस्थी की बेटी हैं। खेल के साथ साक्षी फिटनेस कोच के रूप में भी सक्रिय हैं। वह ऑनलाइन लोगों को ट्रेनिंग देती हैं और वजन कम करने (वेट लॉस) के साथ मसल गेन यानी मांसपेशियां मजबूत बनाने के लिए व्यायाम और डाइट से जुड़ी सलाह देती हैं। 9 देशों के खिलाड़ियों ने लिया हिस्सानई दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत सहित 9 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसमें ऑस्ट्रेलिया, रूस, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल करना साक्षी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिटनेस कोच के रूप में भी सक्रियसाक्षी लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। ऑनलाइन ट्रेनिंग के जरिए वह लोगों को उनकी फिटनेस संबंधी जरूरतों के अनुसार मार्गदर्शन देती हैं। वेट लॉस और मसल गेन के लिए व्यायाम के साथ डाइट पर भी उनका फोकस रहता है। निरंतर अभ्यास, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण के दम पर साक्षी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से बैतूल का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहुंचा है।
तेहरान, 11 अक्टूबर . ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने Sunday को तेहरान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘इकोसाइड: द साइलेंट वॉर क्राइम’ को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि ईरान में तेल रिफाइनरी और ऊर्जा सुविधाओं पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हुआ है. अराघची ने कहा कि पर्यावरण ... Read more
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने जोधपुर में बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' के समापन समारोह में अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को लेकर तंज कसा और कहा कि अमेरिका भारतीय अधिकारियों को विमान के पास भी नहीं जाने देता.
अमेरिकी सरकार द्वारा पीईआरएम निलंबन से कारोबार पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर: इंफोसिस
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंफोसिस ने कहा है कि अमेरिकी सरकार द्वारा परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) कार्यक्रम के तहत कुछ नई और लंबित आवेदन प्रक्रियाओं पर लगाए गए निलंबन का उसके कारोबार पर कोई महत्वपूर्ण असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
Houthis Attack on Riyadh Airport: Saudi पर बड़ा हमला, अमेरिकी सहित 12 की मौत, 300 घायल | Yemen War
Saudi Arabia Riyadh Airport Attack ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। रियाद के King Khalid International Airport पर हुए हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की खबर है
ईरान की नाकेबंदी के बीच अमेरिका का बड़ा एक्शन, ओमान की खाड़ी में कार्गो शिप पर फाइटर जेट से हमला
गल्फ के समंदर में वर्चस्व की कोशिशों जारी है। इस बीच अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में एक कार्गो शिप को निशाना बनाया है। पनामा झंडे वाले शिप पर अमेरिका के फाइटर जेट ने हमला कर उसे निष्क्रिय कर दिया है।
राहुल गांधी अमेरिका के एजेंट के रूप में यहां काम कर रहे : प्रतीक भूषण सिंह
गोंडा, 11 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश के गोंडा से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने Lok Sabha के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को यूएसए का एजेंट बताते हुए बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, चुनाव केवल वोटों से ही जीते जा सकते हैं भाजपा विधायक प्रतीक ... Read more
एलन मस्क की बौखलाहट: भारत में स्टारलिंक को लेकर अनर्गल टिप्पणी कर रहे अमेरिकी धनकुबेर, अंबानी पर भी बयानबाजी---Elon Musk vs India: Starlink Entry Sparks Debate Questions Billionaire Influence
अमेरिका : पेंसिल्वेनिया में गोलीबारी में नौ लोगों की मौत
न्यूयॉर्क, अमेरिका के पेंसिल्वेनिया के एरी में हुई गोलीबारी में दो बच्चों समेत नौ लोगों की मौत हो गई। शनिवार (स्थानीय समय) की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार शाम को पेरी स्ट्रीट पर पुलिस को बुलाया गया था। चश्मदीदों ने बताया था कि एक व्यक्ति ने घर में घुसने से पहले बंदूक से गोली चलाई थी।
अमेरिका के टेनेसी राज्य से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने दुनिया भर के मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मौत की सजा पाने के बाद जानलेवा इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद चमत्कारिक रूप से जीवित बचने वाली 50 वर्षीय कैदी क्रिस्टा पाइक (Christa Pike) को अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और उन्हें वापस जेल भेज दिया गया है। इस दुर्लभ घटना के सामने आने के बाद अमेरिका में एक बार फिर मृत्युदंड (Death Penalty) की नैतिकता, सुरक्षा और उसके तौर-तरीकों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।जानलेवा इंजेक्शन के बाद भी कैसे जिंदा बचीं क्रिस्टा पाइकयह पूरा मामला पिछले हफ्ते 30 सितंबर का है, जब क्रिस्टा पाइक को मौत की सजा देने के लिए 'पेंटोबार्बिटल' नामक घातक जहरीली दवा के दो डोज दिए गए थे। यह खुराक आमतौर पर किसी भी इंसान की जान लेने के लिए पर्याप्त मानी जाती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इससे उनकी मौत नहीं हुई। इसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां वे होश में आ गईं। हालांकि, उनके वकीलों का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी मानसिक स्थिति अभी थोड़ी भ्रमित है।'डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर' (DPIC) के आंकड़ों के मुताबिक, क्रिस्टा पाइक अमेरिकी इतिहास की इकलौती ऐसी कैदी हैं जो जानलेवा इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी जिंदा बच निकली हैं। उनके वकीलों ने बताया कि स्थानीय अस्पताल से डिस्चार्ज मिलने के बाद उन्हें वापस 'डेबोरा के. जॉनसन रिहैबिलिटेशन सेंटर' भेज दिया गया है, जहां वे पिछले 30 सालों से बंद हैं। अब जेल के अंदर ही उनकी मेडिकल देखरेख जारी रहेगी।कौन हैं क्रिस्टा पाइक और उन्हें क्यों मिली थी मौत की सजाक्रिस्टा पाइक को महज 18 साल की उम्र में टेनेसी में हत्या के एक मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर एक जॉब ट्रेनिंग कैंप में 19 साल की कॉलीन स्लेमर की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद अदालत ने उन्हें मृत्युदंड का फैसला सुनाया था।अमेरिका में मृत्युदंड को लेकर गरमाई राजनीति और नैतिकता की बहसइस असफल फांसी के बाद अमेरिका में एक बार फिर मौत की सजा को समाप्त किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। पाइक के वकीलों ने टेनेसी के गवर्नर बिल ली से अपील की है कि उनकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाए। गवर्नर ने फिलहाल राज्य में सभी तरह की फांसी की सजाओं पर रोक लगा दी है, ताकि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जा सके। इस बीच, वेटिकन और मानवाधिकार संगठन भी इस तरह की सजाओं के विरोध में खुलकर सामने आ रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
भारतीय IT कंपनियों पर अमेरिकी कार्रवाई का कोई खास असर नहीं, ग्रीन कार्ड के आवेदनों में भारी गिरावट
अमेरिका ने गुरुवार को टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक समेत 8 आईटी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड आवेदन करने वाले प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया था।
अमेरिका के PERM कार्यक्रम निलंबन का Infosys के कामकाज पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा
अमेरिकी प्रशासन द्वारा स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) कार्यक्रम के तहत नए और लंबित आवेदनों पर रोक लगाए जाने के फैसले से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी इन्फोसिस के कामकाज पर कोई बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है। कंपनी ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह बात कही है। बेंगलुरु मुख्यालय वाली इन्फोसिस ने कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग और संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर उनके सवालों और चिंताओं का समाधान करने के लिए तैयार है। कंपनी के मुताबिक, उसने अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती के साथ-साथ प्रौद्योगिकी और नवोन्मेषण केंद्रों के विकास में निवेश किया है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों, ग्राहकों और अमेरिकी समुदायों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी लागू कानून और नियम का पालन करने की बात कही। यह बयान अमेरिकी प्रशासन द्वारा बृहस्पतिवार को आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के बाद आया है। इनमें भारत की प्रमुख आईटी कंपनियां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। इसके अलावा कैपजेमिनी, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब का नाम भी इस निर्देश में शामिल है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया घरेलू श्रमिकों के अवसरों को प्रभावित कर सकती है। पीईआरएम अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी किया जाता है और यह विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार-आधारित ‘ग्रीन कार्ड’ प्राप्त करने की प्रक्रिया का शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण है। हालांकि, उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय आईटी कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में पीईआरएम आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय कमी की है। इससे अमेरिकी फैसले का संभावित परिचालन प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। आंकड़ों के अनुसार, टीसीएस ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 में केवल दो पीईआरएम आवेदन दाखिल किए, जबकि 2025 में यह संख्या 513 और 2024 में 1,804 थी। एचसीएल ने 2026 में 59 आवेदन दाखिल किए, जबकि 2025 में यह संख्या 323 थी। इन्फोसिस ने 2024 में 87 पीईआरएम आवेदन किए थे। विप्रो ने 2024 में 257 और 2025 में 523 आवेदन दाखिल किए। वर्ष 2024 में दाखिल 257 आवेदन में से 169 अस्वीकार कर दिए गए, जबकि कंपनी ने 88 आवेदन वापस ले लिए। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनीत नायर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि पिछले वर्ष कुल 1,17,849 पीईआरएम में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1,400 से कम थी, जो दो प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि इसलिए इस फैसले का प्रत्यक्ष प्रभाव शुरुआती अनुमान से कम हो सकता है। टीसीएस ने भी इस फैसले के प्रभाव को सीमित बताते हुए कहा कि पिछले दो साल में उसके पीईआरएम आवेदन घटकर एकल अंक में रह गए हैं। टीसीएस ने कहा कि अमेरिका में उसकी कार्यबल रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती पर आधारित है, जिसे मजबूत ‘कैंपस’ भर्ती व्यवस्था का समर्थन प्राप्त है। कंपनी ने अमेरिका में अपने 31 कार्यालयों और डिलिवरी केंद्रों के माध्यम से स्थानीय कार्यबल तैयार किया है। कंपनी ने यह भी दोहराया कि वह अगले पांच साल में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना पर कायम है।
पश्चिम एशिया में युद्ध की आग एक बार फिर भड़क उठी है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (King Khalid International Airport) को निशाना बनाकर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया है। सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार दोपहर हुए इस भीषण हमले में कम से कम 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 309 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह इस सप्ताह के भीतर रियाद एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किया गया तीसरा हमला था, लेकिन हताहतों की संख्या के लिहाज से यह अब तक का सबसे भयावह हमला साबित हुआ है। धमाके के तुरंत बाद हवाई अड्डे के टर्मिनल परिसर में धूल, धुएं का गुबार और मलबे का ढेर लग गया, जिसके बाद चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और यात्री जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।टर्मिनल 3 और 4 के पास गिरी मिसाइल: मारे गए लोगों में अमेरिकी नागरिक भी शामिलक्षेत्रीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, हूतियों द्वारा दागी गई मिसाइल सीधे एयरपोर्ट परिसर के उस हिस्से में जाकर गिरी जहां घरेलू उड़ानों के टर्मिनल 3 और 4 स्थित हैं। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि टर्मिनल की खिड़कियों और छतों के शीशे टूटकर चारों तरफ बिखर गए, जिसकी चपेट में आकर दर्जनों लोग लहूलुहान हो गए। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मारे गए 12 लोगों में चार सऊदी नागरिक, एक अमेरिकी नागरिक, दो बांग्लादेशी, एक फ़िलिस्तीनी, एक मिस्र, एक जॉर्डन, एक सीरियाई और एक सूडानी नागरिक शामिल हैं। घायलों को तुरंत रियाद के अलग-अलग सरकारी और सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई लोगों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने नागरिक की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इस हमले को अत्यंत निंदनीय और निर्दोष नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ करार दिया है।उड़ानों का संचालन पूरी तरह ठप: दर्जनों अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स डायवर्ट और रद्दहमले के तुरंत बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सऊदी उड्डयन प्राधिकरण ने किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के सभी ऑपरेशन्स को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। एयरपोर्ट की ओर जाने वाले सभी मुख्य मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और प्रवेश द्वारों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, रियाद आने वाले कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू विमानों को जेद्दा, दम्माम और अन्य पड़ोसी देशों के एयरपोर्ट्स की ओर डायवर्ट कर दिया गया। एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और कुवैत एयरवेज जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर रियाद के लिए अपनी सभी उड़ानें आगामी दिनों के लिए रद्द कर दी हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और भारत समेत कई देशों के दूतावासों ने सऊदी अरब में मौजूद अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए एयरपोर्ट की यात्रा न करने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सख्त सलाह दी है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: क्या हूतियों के खिलाफ जंग में उतरेगा अमेरिका?इस खूनी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी भू-राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन इस बात का मूल्यांकन कर रहा है कि क्या अमेरिका को यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य हमलों में सीधे शामिल होना चाहिए। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि सऊदी अरब में जो कुछ हुआ है वह किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर सीधे बातचीत करने की बात कही और स्पष्ट किया कि अमेरिका बहुत जल्द इस पर अंतिम फैसला लेगा और तेजी से कदम उठाएगा। उधर, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस हमले को 'पूर्ण युद्ध अपराध' करार देते हुए हूती विद्रोहियों के खिलाफ निर्णायक और बेहद आक्रामक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।मिडिल ईस्ट में गहराता संकट: वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की सप्लाई पर मंडराया खतरासऊदी अरब की राजधानी पर हुआ यह सीधा हमला वैश्विक तेल बाजार के लिए खतरे की घंटी बन गया है। सऊदी अरब दुनिया का प्रमुख कच्चा तेल निर्यातक है, और उसकी राजधानी के नागरिक और रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर लगातार हो रहे हमलों से होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के व्यापारिक गलियारों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सऊदी अरब और अमेरिका मिलकर यमन में हूतियों और उनके पीछे खड़े ईरान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हैं, तो यह संघर्ष पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का रूट प्रभावित होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की पूरी आशंका है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
'वे हमें F-35 जेट्स के पास तक जाने नहीं देते', एयर फोर्स चीफ के मजाक पर अमेरिकी कमांडर ने दी सफाई
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कन्फर्म किया कि रूस ने अपने Su-57 फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर जेट्स का ऑफर दिया है. हालांकि इस लड़ाकू विमानों के प्रस्ताव पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
पुतिन से तेल का सौदा कर फंसे ट्रंप: अपने ही पार्टी में घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति, रूस पर रोक के लिए आएगा बिल- Trump in bind over oil deal with Putin US President faces heat his own party bill to curb Russia expected
रूसी ईंधन पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील से भड़के पूर्व UK पीएम बोरिस जॉनसन
पूर्व UK पीएम बोरिस जॉनसन ने रूसी ईंधन पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील देने के फैसले की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिल सकती है. जॉनसन ने ईंधन की कीमतें बढ़ने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने को जिम्मेदार बताया.
होर्मुज के बाद महासागर? ट्रंप बोले- 'ट्रम्प ओशन' या 'ओशन ऑफ द अमेरिकाज'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटलांटिक और प्रशांत महासागर का नाम बदलने का मजाकिया सुझाव दिया है. उन्होंने कहा कि महासागर का नाम 'ट्रंप ओशन' या 'ओशन ऑफ द अमेरिकाज' रखा जाना चाहिए.
अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां: नेपाल में भीषण बाढ़ की चेतावनी, ऊंची जगहों पर जाने की अपील; अमेरिका में तूफान का कहर
ईरान को ट्रंप की धमकी: अब तक बहुत नरमी बरती; क्या अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले कुछ बड़ा कर सकता है तेहरान?--Trump Warns Iran May Escalate Tensions Before US Midterm Elections, Says Conflict Could End Quickly
ईंधन महंगाई से बैकफुट पर अमेरिका: भारत को राहत...तेल कीमतों में आएगी स्थिरता; रूस के आगे झुककर बदली नीति?
जोधपुर में 'तरंग शक्ति-2026' के समापन समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार से निर्णय मिलने के बाद ही Su-57 की क्षमताओं का भारतीय वायुसेना की जरूरतों के अनुरूप आकलन किया जाएगा। भारत फिलहाल भविष्य की हवाई युद्ध जरूरतों और स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर ध्यान दे रहा है।
रियाद हवाई अड्डे पर एक और हमला: 12 लोगों की मौत, 300 घायल; क्या अमेरिका करेगा हस्तक्षेप?
रियाद हवाई अड्डे पर एक और हमला: 12 लोगों की मौत, 300 घायल; क्या अमेरिका करेगा हस्तक्षेप?
सोने की खदान के मलबे से अमेरिका को मिला सुपर खजाना: फाइटर जेट निर्माण में मचेगी क्रांति
वैश्विक महाशक्तियों के बीच संसाधनों की जंग अब अंतरिक्ष से लेकर धरती की गहराइयों तक पहुंच चुकी है। इसी कड़ी में अमेरिका के हाथ एक ऐसा अभूतपूर्व और अनमोल खजाना लगा है, जिसकी गूंज सीधे बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक सुनाई दे रही है। अमेरिका की एक पुरानी और बंद पड़ी सोने की खदान के मलबे और बेकार समझे जाने वाले अवशेषों की जब वैज्ञानिक जांच की गई, तो वहां से दुर्लभ खनिजों और क्रिटिकल मेटल्स का ऐसा विशाल भंडार मिला, जिसे आधुनिक रक्षा तकनीक का सबसे बड़ा ईंधन माना जा रहा है। सोने की खोज के दौरान निकलने वाले इन विशेष तत्वों को आम तौर पर उपेक्षित मानकर फेंक दिया जाता था, लेकिन आधुनिक अमेरिकी वैज्ञानिकों और भू-विदों की एक टीम ने जब इस मलबे का गहराई से विश्लेषण किया, तो उनके होश उड़ गए। यह खोज न केवल अमेरिका की खनिज आत्मनिर्भरता को एक नया आयाम देगी, बल्कि वैश्विक रक्षा क्षेत्र के समीकरणों को भी पूरी तरह से बदलकर रख देगी।अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में कैसे होगा इस खजाने का इस्तेमालरक्षा तकनीक और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की दुनिया में इस नए खजाने को गेम-चेंजर माना जा रहा है। आधुनिक पांचवीं और छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स, स्टील्थ एयरक्राफ्ट, गाइडेड मिसाइल सिस्टम और रडार तकनीक को बनाने के लिए बेहद दुर्लभ और उच्च गुणवत्ता वाले सुपर-अलॉय्स की आवश्यकता होती है। अब तक इन सामरिक सामग्रियों के लिए अमेरिका और पश्चिमी देश काफी हद तक विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहे हैं। सोने की खदान के मलबे से मिले इन दुर्लभ तत्वों का उपयोग अब सुपरसोनिक इंजन के निर्माण, हीट-रेसिस्टेंट कोटिंग और अत्याधुनिक एवियोनिक्स में बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इन खनिजों की मदद से बनने वाले फाइटर जेट्स न केवल वजन में हल्के होंगे, बल्कि उनकी मारक क्षमता, गति और रडार से बचने की क्षमता (स्टील्थ फीचर्स) कई गुना बढ़ जाएगी। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन और प्रमुख एयरोस्पेस कंपनियों ने इस दिशा में युद्धस्तर पर काम करना शुरू कर दिया है, ताकि देश की डिफेंस सप्लाई चेन को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।ड्रैगन यानी चीन को लगा करारा झटका, रेयर अर्थ मिनरल्स की जंग हुई तेजअमेरिका की इस सनसनीखेज खोज से सबसे ज्यादा परेशानी और झटका चीन को लगा है। वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ मिनरल्स, क्रिटिकल मेटल्स और आधुनिक तकनीक में इस्तेमाल होने वाले खनिजों के बाजार पर लंबे समय से चीन का एकाधिकार रहा है। बीजिंग अक्सर अपनी नीतियों के जरिए इन खनिजों के निर्यात पर पाबंदियां लगाकर पश्चिमी देशों को दबाव में लाने की कोशिश करता रहा है। लेकिन सोने की खदान के मलबे से इस नए खजाने के मिलने के बाद अमेरिका की चीन पर यह निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना है कि अब चीन अपनी खनिज कूटनीति के जरिए अमेरिका या उसके सहयोगियों को ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा। ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रक्षा उत्पादन के मोर्चे पर अमेरिका की यह आत्मनिर्भरता चीन के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका साबित हो रही है।भू-आर्थिक बदलाव और घरेलू खनन उद्योग को मिल रहा है भारी प्रोत्साहनइस अभूतपूर्व सफलता के बाद अमेरिका के भीतर और बाहर भू-आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अमेरिकी सरकार अब अपनी पुरानी खदानों, औद्योगिक कचरे और मलबे के ढेरों की नए सिरे से वैज्ञानिक स्कैनिंग करवा रही है ताकि देश के भीतर छिपे अन्य छिपे हुए संसाधनों का पता लगाया जा सके। इस खोज से न केवल रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिल रही है, बल्कि घरेलू माइनिंग और रिफाइनिंग सेक्टर में भी अरबों डॉलर के नए निवेश की राह खुल गई है। पर्यावरण के अनुकूल अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके मलबे से इन कीमती धातुओं को बाहर निकालने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है, जिससे कम लागत में उच्च शुद्धता वाले खनिज प्राप्त हो रहे हैं। आर्थिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इस तरह के खनिज भंडारों की खोज से भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों और अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों को भी भारी गति मिलेगी, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दीर्घावधि में जबरदस्त लाभ पहुंचेगा।भविष्य की रक्षा तकनीक और वैश्विक महाशक्तियों की दौड़ के नए मायनेयह पूरी घटना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि आने वाले समय में जो देश अपने आंतरिक तकनीकी और प्राकृतिक संसाधनों का सबसे बेहतर उपयोग करेगा, वही वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित रहेगा। अमेरिका ने जिस तरह से बेकार मलबे से एक नया रक्षा खजाना तलाश लिया है, उसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि अमेरिका इस खजाने के दम पर अपने फाइटर जेट्स के बेड़े को कितनी तेजी से अपग्रेड करता है और इसका मुकाबला करने के लिए चीन या अन्य प्रतिद्वंद्वी देश क्या नई रणनीतियां अपनाते हैं। स्पष्ट है कि हथियारों की तकनीक और संसाधनों की यह जंग अब एक नए और अधिक उन्नत दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां विज्ञान और कूटनीति साथ-साथ चल रहे हैं।
शहबाज शरीफ के ट्वीट अमेरिका से आते हैं: ईरानी अधिकारी ने खोली पाकिस्तान की पोल
इस्लामिक जगत और मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक नया और बड़ा धमाका हुआ है, जिसने इस्लामाबाद से लेकर वाशिंगटन तक खलबली मचा दी है। ईरान के एक अत्यंत वरिष्ठ कूटनीतिक अधिकारी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर बेहद सीधा और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि शहबाज शरीफ के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से होने वाले सभी प्रमुख ट्वीट असल में पाकिस्तान से नहीं, बल्कि सीधे अमेरिका से संचालित और नियंत्रित होते हैं। ईरानी अधिकारी के इस विस्फोटक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की निष्पक्षता और उसकी स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य पूर्व में तनाव कम करने और मुस्लिम देशों के बीच शांति बहाली के लिए मध्यस्थता करने का दावा करने वाले पाकिस्तान के लिए यह बयान एक तगड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। ईरानी कूटनीतिज्ञ ने साफ शब्दों में कहा कि जो देश अपनी विदेश नीति और बयानबाजी के लिए भी पश्चिमी ताकतों पर निर्भर रहता है, वह दो देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका कैसे निभा सकता है।अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख और अमेरिकी प्रभाव का बड़ा सचईरानी अधिकारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर खुद को एक जिम्मेदार और शांतिप्रिय मुस्लिम राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, ईरान के इस तीखे प्रहार ने इस्लामाबाद की कूटनीतिक रणनीति की हवा निकाल दी है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि पाकिस्तान की विदेश नीति और उसके बड़े नेताओं के सार्वजनिक बयान स्वतंत्र नहीं हैं, बल्कि वे अमेरिका की भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं के हिसाब से लिखे और तैयार किए जाते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर लगे इन संगीन आरोपों से यह बात एक बार फिर सामने आई है कि इस्लामाबाद अपनी आर्थिक और राजनीतिक मजबूरियों के कारण वाशिंगटन के इशारों पर चलने के लिए मजबूर है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी ऐसे देश को मध्यस्थ स्वीकार नहीं करेगा जिसकी डोर अमेरिका जैसी महाशक्ति के हाथों में हो।तालिबान सरकार की तारीफ और अफगानिस्तान के क्षेत्रीय प्रभाव की सराहनाइस तीखे हमले के बीच ईरान ने पड़ोसी देश अफगानिस्तान पर शासन कर रहे तालिबान की अप्रत्याशित रूप से जमकर तारीफ की है। ईरानी अधिकारी ने तालिबान सरकार के रुख की सराहना करते हुए कहा कि पश्चिमी दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद तालिबान अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर मजबूती से टिका हुआ है। ईरान ने माना कि तालिबान ने किसी बाहरी महाशक्ति के आगे घुटने नहीं टेके हैं और अपने फैसले खुद लेने का साहस दिखाया है। पाकिस्तान के विपरीत, तालिबान ने क्षेत्रीय स्थिरता और संप्रभुता के मामले में अधिक परिपक्वता का परिचय दिया है। ईरान का यह तालिबान प्रेम और पाकिस्तान पर तीखा हमला इस बात का साफ संकेत है कि दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के कूटनीतिक समीकरणों में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है, जहाँ अमेरिका विरोधी धड़ा एक-दूसरे के करीब आ रहा है।दक्षिण और मध्य एशिया की भू-राजनीति पर इस बयान के गहरे कूटनीतिक प्रभावईरान और पाकिस्तान के बीच का यह ताजा विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और संबंधों पर पड़ने वाले हैं। पाकिस्तान हमेशा से अफगानिस्तान और मध्य पूर्व के मामलों में खुद को मुख्य खिलाड़ी साबित करना चाहता रहा है, लेकिन ईरान के इस खुलकर सामने आने से उसकी छवि को गहरा धक्का लगा है। दूसरी ओर, ईरान द्वारा तालिबान की तारीफ करने से इस्लामाबाद और काबुल के बीच पहले से बने तनावपूर्ण संबंधों में और आग लगने की संभावना है। तालिबान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद और डूरंड लाइन को लेकर लगातार झड़पें होती रही हैं। ऐसे में ईरान का तालिबान का समर्थन करना और शहबाज शरीफ की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अपने ही पड़ोसियों के बीच अलग-थलग पड़ता जा रहा है।भविष्य के समीकरण और इस्लामाबाद के सामने खड़ी नई कूटनीतिक चुनौतियांइस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें इस्लामाबाद के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय पर टिकी हैं कि वे ईरान के इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देते हैं। अमेरिका के साथ अपने बिगड़ते-संभलते रिश्तों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाली मदद के बीच पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद असहज करने वाली है। ईरान ने यह साफ कर दिया है कि वह क्षेत्रीय मामलों में किसी भी तीसरे देश की कठपुतली मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बना पाता है या फिर उसकी स्वतंत्र कूटनीति का ढोंग दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा।
Iran attack on US Base का वीडियो देखिए, इधर-उधर भागते दिखे अमेरिकी सैनिक | Iran America war
Iran attack on US Base का वीडियो देखिए, इधर-उधर भागते दिखे अमेरिकी सैनिक | Iran America war
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग से दहला पेंसिल्वेनिया, 2 बच्चों समेत 8 की मौत; हमलावर भी मारा गया
अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के एरी शहर में अंधाधुंध गोलीबारी में 2 बच्चों और हमलावर समेत 9 लोगों की मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है और फिलहाल आम लोगों को कोई खतरा नहीं है।
अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में मास शूटिंग... फायरिंग में 9 लोगों की मौत
अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में गोलीबारी की घटना में 9 लोगों की जान चली गई. घटना के बाद संदिग्ध हमलावर की मौत की भी पुष्टि हुई है.
अमेरिका में निदाल मलिक हसन को इसी साल दिसंबर में मौत की सजा दी जाएगी और उसकी LIVE स्ट्रीमिंग भी की जाएगी। निदाल मलिक हसन ने 13 लोगों को गोलियां बरसाकर मार डाला।
अमेरिका में आठ कंपनियों का ग्रीन कार्ड रास्ता रुका: क्या मौजूदा H-1B वीजा भी खत्म होगा?
नमस्कार, आज की सबसे बड़ी खबर जयपुर से है। सीजेपी के प्रदर्शन में जाने वालों को रोका। चलिए सिलसिलेवार पढ़ते हैं, राजस्थान दिनभर में क्या कुछ खास रहा... पहले टॉप 5 खबरें 1. राजस्थान से CJP-प्रदर्शन में जाने वाले लोगों को रोकाकॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दिल्ली में आज के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले ही जयपुर में शुक्रवार रात 24 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पाबंद कर दिया। सीकर के रींगस में वकील सुरेंद्र उर्फ संजू वर्मा को डिटेन किया। रेलवे ने दिल्ली की ओर जाने वाली राजस्थान से जुड़ी 12 ट्रेनों को रद्द किया गया है। पूरी खबर पढ़ें 2. डबल डेकर ट्रेन के आगे कूदी प्रिंसिपल की प्रेग्नेंट पत्नीअलवर में शुक्रवार देर रात अरावली थाना क्षेत्र में 7 महीने की गर्भवती ने डबल डेकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान जनता कॉलोनी निवासी अंतिमा (28) पुत्री रामनरेश के रूप में हुई है। अंतिमा का पति, सौम्य राजपूत (35) राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सकरपुर (भरतपुर) में प्रिंसिपल है। पूरी खबर पढ़ें 3. गहलोत बोले-BJP-अध्यक्ष को चुनाव आयोग का वकील बनना पड़ रहापूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने के आरोप पर पलटवार किया। गहलोत ने एक्स पर लिखा- सवालों से डरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अब चुनाव आयोग का वकील बनना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें 4. RPSC में अधिकारी के सामने बैठकर समस्या बता सकेंगे कैंडिडेट्सराजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में कैंडिडेट्स को भर्ती से संबंधित कोई समस्या होने पर वह अधिकारी के सामने बैठकर बता सकेंगे। हर महीने में 2 बार आयोग अध्यक्ष, मेंबर और अफसर कैंडिडेट्स की समस्याएं सुनेंगे। ऑनलाइन आवेदन करने पर हर 15 दिन में करीब 30 कैंडिडेट्स का सिलेक्शन होगा। पूरी खबर पढ़ें 5. वायुसेना प्रमुख बोले- F-35 पर अमेरिका का कोई ऑफर नहींजोधपुर में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि अमेरिका ने भारत को F-35 लड़ाकू विमान बेचने की कोई आधिकारिक पेशकश नहीं की है। गौरतलब है कि यह अटकलें थी कि अमेरिका ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 बेचने की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने इसे ठुकरा दिया। पूरी खबर पढ़ें अब 3 अहम खबरें6. मिड-डे मील में छिपकली आई, 60 बच्चों की तबीयत बिगड़ीचूरू के सुजानगढ़ क्षेत्र के सुरवास सरकारी स्कूल में मिड-डे मील में छिपकली आ गई। खाना खाने के बाद करीब 60 बच्चों को की तबीयत बिगड़ गई। सभी को राजकीय बगड़िया अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। पूरी खबर पढ़ें 7. बारां में झाड़ियों में मिली नवजातबारां शहर के नटराज गार्डन के पास झाड़ियों में एक नवजात मिली। देर रात रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। गौसेवक अमित भार्गव ने मासूम को हॉस्पिटल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। पूरी खबर पढ़ें 8. कोटा-बारां डोल मेले से लौट रहे दो युवकों की मौतकोटा बारां फोरलेन पर देर रात सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई। दोनों युवक अपने तीन मौसेरे भाइयों के साथ दो बाइकों पर सवार होकर बारां से कोटा लौट रहे थे। फोरलेन पर डायरा के पास दोनों बाइकों का एक्सीडेंट हो गया। पूरी खबर पढ़ें खबर जो हटकर है 9. पितृपक्ष की अमावस्या पर कौवों की खूब मनुहारपितृपक्ष के अंतिम श्राद्ध दिवस सर्वपितृ अमावस्या पर शनिवार को सूरतगढ़ में कौवों की खूब मनुहार हुई। अपने पूर्वजों के निमित्त अन्न ग्रास अर्पित करने के लिए लोगों ने एसडीएम ऑफिस की चारदीवारी पर थालियां रखी। पूरी खबर पढ़ें कल क्या है खास 10. शारदीय नवरात्रा कल से, नौ स्वरूपों की होगी पूजामां दुर्गा की उपासना का सबसे पवित्र पर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगा। घटस्थापना के लिए मुख्य मुहूर्त सुबह 06 बजकर 19 मिलट से सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक है।
तरंग शक्ति-2026 में भारत, अमेरिका, फ्रांस और रूस के फाइटर जेट्स ने भरी उड़ान, वीडियो में राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक युद्ध का दायरा बढ़ा
अमेरिका में पहली बार लाइवस्ट्रीम होगी मौत की सजा, फुटेज में देंखे निदाल हसन को 3 दिसंबर को गोली मारने की तैयारी
बंधुआ मजदूर नहीं, इनोवेशन इंजन हैं भारतीय-अमेरिकी पेशेवर; नवाचार में देते हैं बड़ा योगदान
समझना होगा कि भारतीय-अमेरिकी पेशेवर केवल सस्ते कर्मचारी नहीं, बल्कि अमेरिका के विकास के इंजन हैं, जिनके बिना अमेरिकी नेतृत्व को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिका में कुदरत का कहर! तट से टकराया इसायस तूफान, 9 लाख घरों की बत्ती गुल और हाई अलर्ट जारी
अमेरिका में कुदरत का कहर! तट से टकराया इसायस तूफान, 9 लाख घरों की बत्ती गुल और हाई अलर्ट जारी
अमेरिका में तूफान इसायस का कहर, फ्लोरिडा और अलबामा के 7 लाख घरों की बिजली गुल
अमेरिका में तूफान इसायस का कहर, फ्लोरिडा और अलबामा के 7 लाख घरों की बिजली गुल
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका और रूस के बीच डीजल को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने यू टर्न लेते हुए रूस के साथ डीजल को लेकर बड़ी डील की है। ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद इस डील का ऐलान किया। अमेरिका ने रूस से डीजल की आपूर्ति के लिए प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी है। मीडिया रिपोटर्स की माने तो अब ट्रंप के इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हो गए हैं। उन्होंने इस फैसले को अनुचित कदम बताया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल ईंधन अमेरिकी और वैश्विक बाजार में उपलब्ध कराएगा। उन्होंने नवंबर में 5 लाख टन और उसके बाद 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति का भी जिक्र किया। रूस के क्रेमलिन ने भी अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने की अपनी तत्परता दोहराई। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया, जिससे अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल की वैश्विक बाजारों में आपूर्ति का रास्ता खुल सकेगा। pc- BBC
Ramleela in North America By Team Dhishum of Lucknow:भारत में पारंपरिक रूप से नौ दिनों तक चलने वाली इस रामलीला के छोटे रूप ने टोरंटो, एटोबिओक, ब्रैम्पटन, ओकविले, लंदन और ओटावा जैसे कनाडा के कई शहरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
अमेरिका को जाएं भूल: इन 5 देशों में जॉब के बाद आसानी से मिल जाता है PR
विदेशों में जाकर नौकरी करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका (USA) अब इकलौता विकल्प नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के कड़े वीजा नियमों, ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार और अनिश्चितताओं के चलते भारतीय प्रोफेशनल्स अब दुनिया के दूसरे देशों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर आपका भी सपना विदेश में जाकर काम करने और वहां की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) हासिल करने का है, तो आपको अमेरिका के बजाय दुनिया के उन पांच प्रमुख देशों पर नजर डालनी चाहिए जहां नौकरी मिलने के बाद बेहद आसानी से और पारदर्शी नियमों के तहत पीआर मिल जाती है। आज के इस विशेष आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही 5 शानदार देशों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जो भारतीय युवाओं और स्किल्ड वर्कर्स के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।कनाडा: भारतीय युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय और आसान पीआर प्रक्रिया वाला देशविदेशों में बसने की चाह रखने वाले भारतीयों की सूची में कनाडा (Canada) हमेशा से शीर्ष पर रहा है। एक्सप्रेस एंट्री (Express Entry) सिस्टम और प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) जैसी बेहतरीन नीतियों के चलते कनाडा में स्किल्ड वर्कर्स के लिए पीआर हासिल करना काफी सुगम माना जाता है। यदि आपके पास अच्छा वर्क एक्सपीरियंस, अंग्रेजी या फ्रेंच भाषा में अच्छी पकड़ और उच्च शिक्षा है, तो आप कम समय में कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी हासिल कर सकते हैं। हालांकि हाल के दिनों में वहां कुछ नियमों में बदलाव जरूर किए गए हैं, लेकिन आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए कनाडा आज भी दुनिया का सबसे पसंदीदा और भारतीय-अनुकूल देश बना हुआ है।जर्मनी: यूरोप का पावरहाउस जहां टैलेंटेड प्रोफेशनल्स के लिए तेजी से खुल रहे हैं पीआर के द्वारयूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था और औद्योगिक केंद्र जर्मनी (Germany) ने हाल के वर्षों में विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे बहुत ज्यादा खोल दिए हैं। भारत जैसे देशों से कुशल इंजीनियरों, आईटी एक्सपर्ट्स, डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी मांग को देखते हुए जर्मनी ने 'ऑपर्चुनिटी कार्ड' (Chancenkarte) और 'यूूरोपीय ब्लू कार्ड' (EU Blue Card) जैसी कई क्रांतिकारी योजनाएं शुरू की हैं। जर्मनी के नए आप्रवासन कानूनों के अनुसार, यदि आप वहां नौकरी पा लेते हैं और जर्मन भाषा का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, तो आप बहुत ही कम वर्षों में स्थाई निवास (Permanent Residency) के लिए पात्र बन जाते हैं। उच्च जीवन स्तर और मजबूत सामाजिक सुरक्षा के कारण भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच जर्मनी तेजी से पसंदीदा विकल्प बनता जा रहा है।ऑस्ट्रेलिया: प्वॉइंट-बेस्ड सिस्टम के जरिए पीआर पाने का बेहतरीन और सुनहरा मौकाअपनी खूबसूरत जीवनशैली, बेहतरीन जलवायु और उच्च वेतनमान के लिए पहचाना जाने वाला ऑस्ट्रेलिया (Australia) भी भारतीय युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। ऑस्ट्रेलिया का इमीग्रेशन सिस्टम पूरी तरह से प्वॉइंट-बेस्ड (Points-Based System) है, जहां आपकी उम्र, शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेजी दक्षता (PTE/IELTS) और कार्य अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते हैं। यदि आपकी स्किल्स ऑस्ट्रेलिया की 'स्किल ऑक्यूपेशन लिस्ट' (Skilled Occupation List) में शामिल हैं, तो आप स्वतंत्र स्किल्ड वीजा के माध्यम से सीधे पीआर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय इलाकों (Regional Areas) में पढ़ाई या नौकरी करने वाले युवाओं को पीआर हासिल करने में अतिरिक्त लाभ और प्राथमिकता मिलती है।न्यूजीलैंड: वर्क-टू-रेसिडेंसी पाथवे के साथ शांतिपूर्ण और स्थिर भविष्य की गारंटीप्रकृति की गोद में बसे शांत और विकसित देश न्यूजीलैंड (New Zealand) ने स्किल्ड माइग्रेंट्स के लिए अपनी नीतियों को काफी सरल और आकर्षक बना दिया है। न्यूजीलैंड सरकार की 'ग्रीन लिस्ट' (Green List) और 'वर्क-टू-रेसिडेंसी' (Work to Residence) पाथवे के तहत यदि आप निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईटी या कृषि क्षेत्र में कुशल नौकरी प्राप्त कर लेते हैं, तो आपको बिना किसी जटिल प्रक्रिया के सीधे रेजिडेंसी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। न्यूजीलैंड में काम करने वाले भारतीयों को न केवल बेहतरीन वर्क-लाइफ बैलेंस मिलता है, बल्कि वहां का सुरक्षित और प्रगतिशील माहौल परिवार के साथ बसने के लिए आदर्श माना जाता है।यूनाइटेड किंगडम (UK): स्किल्ड वर्कर वीजा के जरिए ब्रिटिश पीआर पाने का आसान रास्तापारंपरिक रूप से भारतीयों के पसंदीदा देशों में शामिल यूके ने ब्रेक्जिट के बाद से अपनी वीजा प्रणाली में बड़े और सकारात्मक बदलाव किए हैं। यूके का 'स्किल्ड वर्कर वीजा' (Skilled Worker Visa) उन सभी भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है जो ब्रिटेन में करियर बनाना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवा (NHS), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, फाइनेंस और अकादमिक क्षेत्रों में कुशल कामगारों की भारी मांग है। यूके के नियमों के अनुसार, यदि आप लगातार 5 वर्षों तक वैध वर्क वीजा पर वहां नौकरी करते हैं और न्यूनतम आय के मानदंडों को पूरा करते हैं, तो आप ब्रिटेन में सेटेलमेंट (Indefinite Leave to Remain) यानी पीआर के लिए आवेदन करने के योग्य हो जाते हैं। अमेरिका के मुकाबले यूके में पीआर की राह काफी स्पष्ट और व्यवस्थित है।
अमेरिकी मानव तस्करी रिपोर्ट पर भड़का उत्तर कोरिया, बोला- 'झूठ, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे दस्तावेज'
उत्तर कोरिया ने अमेरिका की मानव तस्करी संबंधी रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित गंभीर उकसावे’ की कार्रवाई करार दिया है। प्योंगयांग का आरोप है कि वाशिंगटन मानवाधिकारों के मुद्दे के जरिए उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी शत्रुतापूर्ण नीति को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है।
अमेरिकी मानव तस्करी रिपोर्ट पर भड़का उत्तर कोरिया, बोला- ‘झूठ, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे दस्तावेज’
सोल, 10 अक्टूबर . उत्तर कोरिया ने अमेरिका की मानव तस्करी संबंधी रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित गंभीर उकसावे’ की कार्रवाई करार दिया है. प्योंगयांग का आरोप है कि वाशिंगटन मानवाधिकारों के मुद्दे के जरिए उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी शत्रुतापूर्ण नीति को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है. ... Read more
अमेरिकी मानव तस्करी रिपोर्ट पर भड़का उत्तर कोरिया, बोला- 'झूठ, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे दस्तावेज'
अमेरिकी मानव तस्करी रिपोर्ट पर भड़का उत्तर कोरिया, बोला- 'झूठ, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे दस्तावेज'
दुनियाभर में दोहरेपन और खोखलेपन की सबसे बड़ी मिसाल हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला कर लिंडसे ग्राहम को मानो श्रद्धांजलि दे दी है! यह कटाक्ष इसलिए है, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदे तो उस पर सौ फीसदी टैरिफ लगा दिया जाता है, लेकिन अमेरिका वही काम करे तो उसे शानदार फैसला बताया जाता है। यही नहीं, नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, तो ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय पर ही प्रतिबंध लगा दिए। आखिर यह कैसी नीति है? दूसरों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले ट्रंप जब अपने देश के हितों की बात आती है, तो उन्हीं नियमों को भूल जाते हैं। भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने का दबाव बनाने वाले ट्रंप अब खुद रूस से डीजल खरीद रहे हैं, इस फैसले ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है इसलिए सवाल उठ रहा है कि रूस से तेल खरीदना गलत है, या गलत सिर्फ तब है जब भारत खरीदे? यही है ट्रंप की नीति का दोहरापन और खोखलापन! देखा जाये तो रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाने वाले ट्रंप का ताजा फैसला उनकी कथनी और करनी के बीच की खाई को उजागर करता है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने रूस से तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति के साथ नवंबर में पांच लाख टन, उसके बाद दस लाख टन और फिर कुछ ही समय में तीस लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए अस्थायी सामान्य अनुमति भी जारी की है, जिसके अंतर्गत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले कुछ माल पर अप्रैल 2027 तक प्रतिबंधों में छूट का प्रावधान किया गया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर Norway पर साधा निशाना, 8 युद्ध रुकवाने का किया दावा गौरतलब है कि यह वही प्रशासन है जिसने रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिबंधों को सख्त करने की नीति अपनाई थी। लेकिन जब अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ीं और किसानों, ट्रक चालकों तथा कारोबारियों पर दबाव बढ़ा, तो रूस से ऊर्जा खरीद अचानक स्वीकार्य हो गई। दरअसल अमेरिका में नवंबर की शुरुआत में मध्यावधि चुनाव होने हैं और ट्रंप की नीतियों के चलते वहां महंगाई अप्रत्याशित रूप से बढ़ गयी है जिसके चलते जनता नाराज है। रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर में अमेरिकी डीजल की कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गयी थी और शुक्रवार को लगभग 6.28 डॉलर प्रति गैलन रही। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई का सवाल ट्रंप के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है। सर्वेक्षणों के मुताबिक, 78 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने बढ़ती जीवन-यापन लागत के लिए ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार माना है। इसलिए जब अमेरिकी मतदाताओं की जेब का सवाल आया, तो रूस से डीजल खरीदना ट्रंप के लिए राष्ट्रीय हित बन गया। लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों के अनुसार रूसी तेल खरीदे, तो उसे टैरिफ का सामना करना पड़ता है। इसलिए सवाल उठता है कि यह कैसी निष्पक्षता है? यह कैसी नियम-आधारित व्यवस्था है, जिसमें नियम दूसरों के लिए हैं और छूट अपने लिए? दूसरी ओर, ट्रंप के इस फैसले ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की नाराजगी भी बढ़ा दी है। उन्होंने इसे अनुचित और बेईमानी भरा कदम बताते हुए कहा कि इससे पुतिन को जन्मदिन का उपहार मिलने जैसा संदेश जाता है। जेलेंस्की की आपत्ति इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि यह घोषणा ऐसे समय हुई, जब ट्रंप के प्रतिनिधि यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ युद्ध समाप्त करने के प्रस्तावों पर बातचीत कर रहे थे। जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यदि ऊर्जा प्रतिबंधों में ढील दोनों देशों की ओर से सर्दियों में ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने जैसे पारस्परिक समझौते का हिस्सा होती, तो उसका समर्थन किया जा सकता था। लेकिन बिना ऐसी शर्तों के रियायत देना रूस की युद्ध क्षमता को आर्थिक सहारा देने जैसा दिखाई देता है। वहीं अमेरिकी रिपब्लिकन नेता डॉन बेकन ने भी इस फैसले की आलोचना की। उनका तर्क था कि अमेरिकी किसानों और उपभोक्ताओं के लिए डीजल सस्ता करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए रूस से ईंधन खरीदना गलत रास्ता है। उन्होंने पूछा कि जब अमेरिकी संसद ने रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए कानून पारित किया और ट्रंप ने स्वयं उस पर हस्ताक्षर किए, तो अब उसी दबाव को कमजोर करने का औचित्य क्या है? इसके अलावा, ट्रंप की राजनीति का दूसरा चिंताजनक पहलू अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति उनका रवैया है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप प्रशासन ने न्यायालय के विरुद्ध प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। नवी पिल्लै को सम्मान ऐसे समय मिला, जब अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ने को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं। नोबेल समिति ने युद्ध अपराधियों को जवाबदेह ठहराने और पीड़ितों को न्याय दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को शांतिपूर्ण विश्व की अनिवार्य शर्त बताया। नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलते ही ट्रंप जैसे बौखला गये और कुछ घंटों बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी नागरिकों पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय का अभियोजन स्वीकार नहीं करेंगे। अमेरिकी प्रशासन ने न्यायालय के साथ लेन-देन पर रोक लगाने और उसके संसाधनों को बाधित करने की मंशा जाहिर की। वहीं अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने इसे कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की बुनियाद पर हमला बताया। देखा जाये तो यहां भी वही पुराना सवाल सामने आता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय कानून केवल कमजोर देशों और विरोधियों पर लागू होना चाहिए? क्या अमेरिका को अपने नागरिकों और अधिकारियों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से ऊपर रखने का अधिकार मिल जाना चाहिए? ऐसा लगता है कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही की सीमाएं अपने हिसाब से तय करना चाहता है। ट्रंप की राजनीति में सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि वे राष्ट्रीय हित का इस्तेमाल कभी प्रतिबंधों को उचित ठहराने के लिए करते हैं, तो कभी उन्हीं प्रतिबंधों को कमजोर करने के लिए। भारत के लिए रूसी तेल आर्थिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतों का प्रश्न है, लेकिन अमेरिका के लिए वही रूसी ऊर्जा घरेलू महंगाई घटाने और चुनावी नुकसान रोकने का साधन बन जाती है। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय न्याय की बात तब तक स्वीकार्य दिखाई देती है, जब तक वह अमेरिकी सत्ता और उसके सहयोगियों के हितों से न टकराए। जैसे ही जवाबदेही का सवाल उठता है, स्वतंत्र न्यायिक संस्था को ही निशाना बनाया जाने लगता है। यह केवल नीतिगत असंगति नहीं, बल्कि उस नैतिक दावे की कमजोरी है जिसके आधार पर अमेरिका दुनिया को नियमों, लोकतंत्र और न्याय का उपदेश देता रहा है। ट्रंप ने अपने फैसलों से यह धारणा मजबूत की है कि उनके लिए सिद्धांत स्थायी नहीं, बल्कि परिस्थितियों और राजनीतिक लाभ के अनुसार बदलने वाली चीज हैं। बहरहाल, ट्रंप चाहे अपने कदमों को अमेरिकी हितों की रक्षा बताएं, लेकिन जब वही कदम दूसरों पर थोपे गए नैतिक मानदंडों को ध्वस्त करते हैं, तो उनकी राजनीति का खोखलापन उजागर होता है। अमेरिका को रूसी डीजल और भारत पर सौ फीसदी टैरिफ, इससे बड़ा दोहरा मापदंड क्या होगा? साथ ही अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पर प्रतिबंध लगाकर यदि कोई देश खुद को कानून से ऊपर समझने लगे, तो दुनिया उसे न्याय का संरक्षक नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ का प्रहरी ही मानेगी। -नीरज कुमार दुबे
अमेरिका से छत्तीसगढ़ के भिलाई लौटे एक वरिष्ठ आईटी विश्लेषक के साथ रायपुर में एटीएम कार्ड बदलकर एक लाख नवासी हजार रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। रिंग रोड स्थित एटीएम में मदद के बहाने अज्ञात व्यक्ति ने कार्ड बदल लिया। पीड़ित की शिकायत पर डीडी नगर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अमेरिका में तूफान 'इसायस' का कहर, 5.94 लाख घरों की बिजली गुल, फ्लोरिडा-अलबामा में बाढ़
अमेरिका में तूफान ‘इसायस’ ने दस्तक दे दी है। इस शक्तिशाली तूफान ने फ्लोरिडा के पैनहैंडल क्षेत्र और अलबामा के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गईं, पेड़ उखड़ गए और बिजली की लाइनें टूट गईं।
ब्रिटेन के अमेरिकी सैन्य एयरबेस में घुसे 2 संदिग्ध, आखिर क्या था मकसद?
ब्रिटेन स्थित अमेरिकी सेना के एयरबेस में दो लोगों के घुसने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने रहे हैं. दोनों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन अब सख्त शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया गया है. कुछ हफ्ते पहले भी अमेरिकी सेना के एक दूसरे ब्रिटिश एयरबेस को निशाना बनाने की साजिश की आशंका जताई गई थी.
आईसीसी पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर बवाल; यूएन महासचिव गुटेरेस ने जताई चिंता, आठ देशों ने किया विरोध
LPG Import: UAE बना भारत का सबसे बड़ा सप्लायर, अमेरिका से 58% घटी गैस की सप्लाई
LPG Import: UAE बना भारत का सबसे बड़ा सप्लायर, अमेरिका से 58% घटी गैस की सप्लाई
Trump-Russia Diesel Deal: रूस से डीजल खरीदेगा अमेरिका, ट्रम्प के दावे पर जेलेंस्की ने जताई चिंता; तेल बाजार पर क्या होगा असर?
अमेरिकी नौकरी विदेश भेजी तो लगेगा भारी टैरिफ, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की कंपनियों को चेतावनी
वॉशिंगटन, 10 अक्टूबर . अमेरिका के उपPresident जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि जो कंपनियां अमेरिकी नौकरियां विदेशों में ले जा रही हैं या अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कानूनी अप्रवासियों को रखेंगी, उन्हें भारी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करना और ... Read more
'रूस युद्ध को मिलेगा फायदा': मॉस्को से डीजल खरीदने की डील पर घिरे ट्रंप; अमेरिकी सीनेटर बोले- यह शर्मनाक--Russia Deal Embarrassing: US Senator Richard Blumenthal Slams Trump Diesel Agreement With Putin
वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक ऐसा ऐतिहासिक और अप्रत्याशित मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक लंबी और बेहद अहम टेलीफोनिक वार्ता के बाद घोषणा की है कि रूस तत्काल प्रभाव से अमेरिकी और वैश्विक बाजार में लाखों टन डीजल ईंधन की आपूर्ति करने पर सहमत हो गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति संकट और अमेरिका में आसमान छूती ईंधन कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते पर मुहर लगाई है। इस बड़े कूटनीतिक समझौते के तुरंत बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त विभाग) ने अपने नियमों में संशोधन करते हुए रूसी संघ से बने डीजल ईंधन के आयात, बिक्री और अनलोडिंग पर लगे सभी कड़े प्रतिबंधों को 7 अप्रैल 2027 तक के लिए अस्थायी रूप से हटा लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस ऐलान के साथ ही न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज और यूरोपीय कमोडिटी बाजारों में डीजल के वायदा भाव में तत्काल तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ईंधन की महंगाई से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।पुतिन से सफल बातचीत के बाद ट्रंप का ऐलान: 30 लाख टन से ज्यादा डीजल देगा रूसराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस समझौते की जानकारी साझा करते हुए इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक युगांतरकारी जीत करार दिया। ट्रंप ने लिखा कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अत्यधिक सफल और ठोस चर्चा पूरी की है, जिसके तहत रूस तुरंत 3,00,000 टन (3 लाख टन) से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले डीजल ईंधन की आपूर्ति अमेरिकी और वैश्विक बाजारों को करेगा। समझौते के अगले चरण के अनुसार, मॉस्को नवंबर के महीने में 5,00,000 टन (5 लाख टन) अतिरिक्त डीजल भेजेगा और उसके तुरंत बाद 10 लाख टन डीजल की एक और बड़ी खेप रवाना की जाएगी। इसके अलावा, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि रूस अपनी रिफाइनरियों की स्थिति और परिचालन क्षमता के आधार पर बहुत कम समय के भीतर 30 लाख टन (30,00,000 टन) डीजल ईंधन की भारी आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। ट्रंप का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी निगरानी और रूसी ईंधन के इस बड़े प्रवाह से अमेरिका और पूरी दुनिया में डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर और बेहद तेजी से नीचे आएंगे।अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का बड़ा यू-टर्न: 7 अप्रैल 2027 तक प्रतिबंधों में ढीलइस समझौते की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रंप के बयान के कुछ ही मिनटों के भीतर अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने एक विशेष सामान्य लाइसेंस जारी कर दिया। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर कड़े प्रतिबंध और प्राइस कैप लगा रखे थे। हालांकि, नए आदेश के अनुसार 'रूसी हानिकारक विदेशी गतिविधियों से जुड़े प्रतिबंध नियमों' (RuHSR) के तहत प्रतिबंधित सभी प्रकार के लेन-देन को 7 अप्रैल 2027 की रात 12:01 बजे तक के लिए छूट दे दी गई है। इसके तहत रूसी मूल के डीजल ईंधन की समुद्री खरीद, शिपिंग, इंश्योरेंस, पोर्ट अनलोडिंग और अमेरिकी घरेलू रिफाइनरी नेटवर्क में सीधे आयात को कानूनी मान्यता मिल गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विश्लेषक इसे वाशिंगटन की विदेश नीति में एक बड़ा यू-टर्न मान रहे हैं, जो यह साबित करता है कि घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और मुद्रास्फीति के दबाव के आगे भू-राजनीतिक प्रतिबंधों को भी किनारे कर दिया गया है।ईंधन की आग में क्यों झुलस रहा था अमेरिका और ट्रंप पर क्यों था भारी दबावअमेरिका में डीजल की कीमतों में आए इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव और यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए गए ड्रोन हमले प्रमुख वजह रहे हैं। सऊदी अरब और लाल सागर के जलमार्गों पर हूती विद्रोहियों के हमलों ने वैश्विक कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों के आवागमन को बाधित कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छू रही थीं, जिसने सीधे तौर पर रसद, माल ढुलाई और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को झकझोर कर रख दिया था। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के मद्देनजर ईंधन की यह महंगाई ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक सिरदर्द बन चुकी थी। अमेरिकी किसान, पशुपालक, ट्रांसपोर्टर्स और लंबी दूरी के ट्रक चालक बढ़ते डीजल बिलों के खिलाफ मुखर हो रहे थे। ऐसे में पुतिन के साथ यह सीधी डील कर ट्रंप ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं—घरेलू मतदाताओं को महंगाई से तुरंत राहत का भरोसा दिया है और वैश्विक ऊर्जा व्यापार की बागडोर को फिर से अपने नियंत्रण में खींच लिया है।वैश्विक बाजारों और भारत पर क्या पड़ेगा असर: क्या कच्चे तेल के दाम भी गिरेंगेवैश्विक स्तर पर डीजल को सभी औद्योगिक और कृषि गतिविधियों का प्रमुख 'वर्कहॉर्स' ईंधन माना जाता है। जब भी डीजल महंगा होता है, तो खेतों में ट्रैक्टर चलाने से लेकर मंडियों तक अनाज पहुंचाने की पूरी लागत बढ़ जाती है, जिससे खुदरा खाद्य महंगाई अनियंत्रित हो जाती है। रूस द्वारा लाखों टन डीजल अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारे जाने से सिंगापुर, रॉटरडैम और गल्फ रिफाइनिंग मार्जिन्स में नरमी आना तय है। भारत के नजरिए से देखें, तो भारत पहले से ही रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल (Crude Oil) का बड़ा खरीदार रहा है। यदि वैश्विक बाजार में तैयार डीजल की उपलब्धता बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड व गैसऑयल की कीमतें ठंडी पड़ती हैं, तो इसका सीधा फायदा भारतीय तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को मिलेगा। नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगरों में माल ढुलाई सस्ती होने से आवश्यक वस्तुओं के थोक भावों पर सकारात्मक असर दिखेगा और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती की संभावनाएं मजबूत होंगी।
अमेरिका में मृत्युदंड पहली बार टीवी पर देखेंगे लोग?: जहां 13 सैनिकों की हत्या की थी, वहीं मारी जाएगी गोली
Donald Trump का ऐलान, अमेरिका को तुरंत 3 लाख टन Diesel देगा रूस
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, नौ अक्टूबर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद घोषणा की कि रूस अमेरिका को तुरंत डीजल की आपूर्ति करेगा। यह अप्रत्याशित घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका में एक कानून के तहत रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान करने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैंने अभी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बेहद सफल बातचीत की। इस दौरान इस बात पर सहमति बनी कि रूस तुरंत अमेरिकी और वैश्विक बाजार में 3,00,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा।’’उन्होंने कहा कि रूस नवंबर में पांच लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके तुरंत बाद 10 लाख टन डीजल की और आपूर्ति की जाएगी। ट्रंप ने कहा, ‘‘इसके अतिरिक्त, रूस की डीजल रिफाइनरियों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, वह इसके बाद कम समय के भीतर 30 लाख टन डीजल ईंधन की आपूर्ति करेगा।’’यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका ईंधन की ऊंची कीमतों से जूझ रहा है। यह मामला तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। इस बीच अमेरिका के वित्त विभाग ने कहा कि रूसी डीजल की बिक्री पर लगा प्रतिबंध अप्रैल 2027 तक के लिए हटा लिया गया है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में ट्राला पलटने से करनाल जिले के गांव सिकरी के 25 वर्षीय युवक जतिन की मौत हो गई। हादसे का करीब 10 सेकेंड का वीडियो सामने आया है, जिसमें ट्राला सड़क किनारे हरी घास पर दौड़ता दिखाई देता है। इसके बाद वह घास से सड़क की तरफ आता है, डिवाइडर पार करता है और पलट जाता है। हादसे में जतिन के सिर में चोट लगी और खून बहने लगा। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत से परिवार सदमे में है। परिजनों ने सरकार से शव भारत लाने और आर्थिक सहायता देने की अपील की है। 2022 में 40 लाख रुपए खर्च कर गया था इंग्लैंडगांव सिकरी का जतिन वर्ष 2022 में करीब 40 लाख रुपए खर्च करके भारत से इंग्लैंड गया था। इसके बाद वह डंकी रूट के रास्ते अमेरिका पहुंचा। वह कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में रहकर ड्राइवरी करता था। परिजनों के मुताबिक, बुधवार अलसुबह अमेरिका में ट्राला पलटने से उसकी जान चली गई। हादसे की सूचना जतिन के साथ रहने वाले उसके ममेरे भाई विशाल ने परिवार को दी। वीडियो में घास से सड़क पर आकर पलटता दिखा ट्रालासामने आए वीडियो में ट्राला पहले सड़क के किनारे हरी घास पर चलता नजर आता है। कुछ ही देर बाद वह घास से सड़क की तरफ आता है और डिवाइडर पार करके पलट जाता है। वीडियो देखकर आशंका जताई जा रही है कि चालक को नींद आने या ट्राले का संतुलन बिगड़ने से हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि, दुर्घटना की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है और इसकी जांच की जरूरत है। ट्राला पलटने के दौरान जतिन का सिर केबिन में टकराया, जिससे उसे गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा। मौके पर पहुंचे लोग, पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजाहादसे के बाद आसपास के लोग मौके पर एकत्रित हो गए और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद कैलिफोर्निया पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जतिन को मृत घोषित कर दिया। परिवार को उसके ममेरे भाई विशाल के जरिए हादसे की जानकारी मिली। पिता ने पांच घंटे पहले की थी बेटे से बातजतिन के पिता रामपाल ने हादसे से करीब पांच घंटे पहले ही बेटे से फोन पर बात की थी। परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ समय बाद उन्हें उसकी मौत की खबर मिलेगी। जतिन के परिवार में पिता रामपाल, मां रेखा, बड़ा भाई साहिल और छोटी बहन हैं। रामपाल खेतीबाड़ी करते हैं। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अंतिम दर्शन के लिए शव भारत लाने की गुहारपरिजन जतिन के अंतिम दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका से शव भारत लाने की प्रक्रिया में आर्थिक परेशानी आ रही है। परिवार ने सरकार से अपील की है कि शव को जल्द भारत लाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सकें। परिवार को अब शव के भारत पहुंचने का इंतजार है।
अमेरिकी संरक्षणवाद: भारतीय आईटी उद्योग के लिए चिंता का विषय, समाधान टकराव बढ़ाने में नहीं
अमेरिकी संरक्षणवाद:भारतीय आईटी उद्योग के लिए चिंता का विषय,समाधान टकराव बढ़ाने में नहीं
अमेरिका: ट्रंप ने केटी जकारिया को चुना व्हाइट हाउस का अगला प्रेस सचिव, कैरोलिन लेविट की लेंगी जगह
अमेरिका: ट्रंप ने केटी जकारिया को चुना व्हाइट हाउस का अगला प्रेस सचिव, कैरोलिन लेविट की लेंगी जगह
विदेश के समाचार: फ्रांस में भारतीय को 20 साल की जेल; अमेरिका में इसाईस तूफान से भारी तबाही की आशंका
विदेश के समाचार: फ्रांस में भारतीय को 20 साल की जेल; अमेरिका मेंइसाईस तूफान से भारी तबाही की आशंका
इटली में सबसे बड़ी शराब चोरी: टस्कनी में कारखाने से 30,000 बोतलें चोरी, 58 लाख अमेरिकी डॉलर का नुकसान
पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान: रूस से अमेरिका पहुंचेगा 3 लाख टन डीजल, क्या है वजह?
पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान: रूस से अमेरिका पहुंचेगा 3 लाख टन डीजल, क्या है वजह?
अब रूस से डीजल खरीदेगा अमेरिका, ट्रंप और पुतिन की नई डील, यूक्रेन को दिखाया ठेंगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी समकक्ष पुतिन के साथ एक बड़ी डील का ऐलान किया है। इसके तहत रूस को अमेरिकी और वैश्विक बाजार में डीजल सप्लाई करने की मंजूरी दी गई है। बता दें, अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल खरीद करने वाले देशों पर कार्रवाई करने के लिए कानून बनाया था।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी निवास कार्यक्रम से बाहर करने और वीजा नियमों को सख्त करने को भारत विरोधी और अहंकारी बताया गया है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नवी पिल्लै की आलोचना करने वाली एक पोस्ट को रीपोस्ट किया। उन्होंने दक्षिण अफ़्रीकी कानून विशेषज्ञ पिल्लै पर अमेरिका और इज़राइल से नफ़रत करने का आरोप लगाया। इस पोस्ट में नोबेल समिति पर भी उन्हें पुरस्कार देने के लिए निशाना साधा गया और दावा किया गया कि उन्होंने शांति को बढ़ावा देने के लिए कभी कुछ नहीं किया। ट्रंप ने शोएनलॉ की पोस्ट को रीशेयर किया, जिसमें कहा गया था कि नोबेल कमिटी ने पिल्ले को चुनकर खुद को बुरी तरह शर्मिंदा किया है। पोस्ट में उन पर आतंकवादियों और हमास का समर्थन करने का आरोप भी लगाया गया और गाजा में नरसंहार के आरोपों की उनकी जांच की आलोचना की गई। पोस्ट में लिखा था पिल्ले अमेरिका और इज़राइल से बेझिझक नफ़रत करती हैं। इसमें आगे यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने आतंकवादियों का जश्न मनाया और हमास को पुरस्कृत किया।
भारत के कंपाउंड तीरंदाजी टीम के मुख्या कोच डेव कजिन्स पिछले 3 महीने से सैलरी नहीं मिलने से नाराज है। मई में कंपाउंड आर्चरी प्रोग्राम की जिम्मेदारी संभालने वाले अमेरिकी कोच ने बकाया भुगतान नहीं होने पर देश छोड़कर जाने की चेतावनी दी है। आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAI) और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने भुगतान में देरी स्वीकार की है। दोनों संस्थाओं ने इसे तकनीकी समस्या बताया। साथ ही भरोसा दिलाया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने जापान में खेले गए एशियन गेम्स के तीनों टीम इवेंट मेंस, विमेंस और मिक्स्ड में गोल्ड जीते। वहीं इंडिविजुअल इवेंट में एक ब्रॉन्ज भी मिला। इसके साथ ही उन्होंने लॉस एंजिलिस ओलिंपिक-2028 के लिए इवेंट का पहला कोटा हासिल किया। साउथ कोरिया को हराकर भारत ने हासिल किया ओलिंपिक कोटा भारत के कंपाउंड तीरंदाजों की एशियन गेम्स में सबसे बड़ी सफलता मिक्स्ड टीम इवेंट रहा। इस मुकाबले में साहिल जाधव और चिकिता तनीपार्थी की भारतीय जोड़ी ने साउथ कोरिया को शूट-ऑफ में हराकर गोल्ड मेडल जीता। निर्धारित चार एंड के बाद दोनों टीमों का स्कोर 157-157 से बराबर था। इसके बाद शूट-ऑफ में भारतीय जोड़ी ने बाजी मार ली। कजिन्स की कोचिंग में भारत ने एशियन गेम्स के कंपाउंड इवेंट में तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता। रिकर्व और कंपाउंड को मिलाकर भारत का कुल प्रदर्शन पांच गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल का रहा। कजिन्स ने कहा था- ओलिंपिक का पहला कोटा हासिल करना उपलब्धि डेव कजिन्स ने भारतीय कंपाउंड टीम की जिम्मेदारी संभालने के बाद खिलाड़ियों की तैयारी और प्रक्रिया पर जोर दिया। एशियन गेम्स में सफलता के बाद उन्होंने कहा था- ‘टीम का लक्ष्य खिलाड़ियों को पूरी तैयारी के साथ मैदान पर उतारना था।’ कौन हैं डेव कजिन्स? 49 साल के अमेरिकी कोच डेव कजिन्स खुद भी कंपाउंड आर्चरी के बड़े नाम रहे हैं। वह पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 तीरंदाज हैं और 1999 तथा 2003 में वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप के खिताब जीत चुके हैं। उन्हें मई में भारत का मुख्य कंपाउंड आर्चरी कोच नियुक्त किया गया था। कजिन्स की नियुक्ति सर्जियो पग्नी के जाने के बाद हुई थी। पग्नी की कोचिंग में भारत ने 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में तीरंदाजी के सभी पांच गोल्ड मेडल जीते थे। रिकर्व टीम के लिए साउथ कोरियाई कोच से बातचीत इसी बीच, आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया लॉस एंजिलिस ओलिंपिक की तैयारी के लिए रिकर्व टीम के साथ साउथ कोरियाई कोच पार्क चे-सून को जोड़ने की बातचीत भी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्क दिसंबर तक भारत से जुड़ सकते हैं। पार्क का अंतरराष्ट्रीय कोचिंग में अच्छा अनुभव रहा है। उन्होंने 2012 के लंदन ओलिंपिक में साउथ कोरिया की महिला टीम और 2016 के रियो ओलिंपिक में पुरुष टीम को कोचिंग दी थी। ----------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… दावा- BCCI ने रोहित शर्मा के रिहैब की जानकारी छिपाई:पिछले एक साल में 32 क्रिकेटर चोटिल, मैनचेस्टर टेस्ट में पंत की हड्डी टूटी थी पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने IPL 2026 के बाद हैमस्ट्रिंग की चोट से उबरने के लिए बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रिहैब किया था, लेकिन BCCI ने इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। पूरी खबर पढ़ें…
5 नवंबर 2009, दोपहर 1 बजे। अमेरिका के टेक्सस प्रांत का फोर्ट हूड मिलिट्री बेस। अमेरिकी मेजर निदाल हसन ने दो पिस्टल निकालीं और वहां मौजूद सैनिकों पर गोलियां बरसाने लगा। 13 लोग मारे गए और 32 घायल हुए। अब 17 साल बाद निदाल हसन को मौत दी जाएगी। ठीक उसी जगह, उसी वक्त। अमेरिकी सेना इसका लाइव टेलीकास्ट पूरी दुनिया को दिखाएगी। आखिर कौन है निदाल हसन, उसने अपने ही साथियों की हत्या क्यों की और अमेरिका लाइव टीवी पर उसकी सजा-ए-मौत क्यों दिखाना चाहता है; पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: कौन है निदाल हसन?जवाब: 56 साल के निदाल मलिक हसन की पैदाइश अमेरिका के वर्जीनिया राज्य की है। माता-पिता फिलिस्तीनी मूल के थे और येरुसलम के पास एक छोटे से कस्बे से अमेरिका आए थे। निदाल ने 1995 में ग्रेजुएशन के दौरान अमेरिका के रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स में ट्रेनिंग ली। इसके बाद घर वालों की मर्जी के खिलाफ अमेरिकी सेना जॉइन कर ली। 2003 में मनोचिकित्सा की डिग्री ली और 2005 में मेडिकल लाइसेंस मिल गया। निदाल वाशिंगटन के आर्मी मेडिकल सेंटर में तैनात था, जहां जंग से लौटे मानसिक बीमार सैनिकों का इलाज करने लगा। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के पूर्व डायरेक्टर विलियम वेब्स्टर की अगुवाई में हुई जांच के मुताबिक, 5 नवंबर 2009 को दोपहर करीब 1 बजे निदाल फोर्ट हूड बेस के मेडिकल फैसिलिटी सेंटर पहुंचा। एक डेस्क पर चढ़ा और धार्मिक नारा लगाने के बाद दोनों पिस्टलों से गोलियां चलाना शुरू कर दिया। उसने बाहर पार्किंग की तरफ भाग रहे सैनिकों की पीठ पर भी गोलियां चलाईं। 12 अमेरिकी सैनिक और अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट का एक कर्मचारी मारा गया और 32 अन्य लोग घायल हुए। एक पुलिस जवान की जवाबी फायरिंग में निदाल भी घायल हो गया था। पैरालिसिस के चलते निदाल तब से व्हीलचेयर पर है। जांच में पता चला कि निदाल ने हफ्तों हमले की तैयारी की। उसने पिस्तौल को तेजी से रिलोड करना सीखा था। कुछ जवानों ने बाद में बताया कि वो इतनी तेज मैगजीन रीलोड कर रहा था कि उसको रोकना लगभग नामुमकिन था। बिल्डिंग के अंदर से 146 खाली कारतूस मिले थे। इसके बावजूद निदाल के पास 177 जिंदा कारतूस बाकी थे। 28 अगस्त 2013 को अमेरिकी सैन्य कोर्ट ने निदाल को दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान निदाल ने न ही अपने पक्ष में कोई गवाह पेश किया और न आरोपों से बचने की कोशिश की। कोर्ट से उसे जो वकील मिले, उन्होंने बताया कि निदाल मौत की सजा चाहता था। 2 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी डिफेंस सेक्रेट्री पीट हेगसेथ की सिफारिश पर ट्रम्प ने निदाल की सजा को मंजूरी दी। 3 दिसंबर को अमेरिकी सेना का फायरिंग स्क्वाड उसे गोली मारकर मौत की सजा देगा। इसे लाइव दिखाया जाएगा। सवाल-2: आखिर निदाल ने 13 जवानों की हत्या क्यों की थी?जवाब: अमेरिका के मैरीलैंड के इमाम फैजुल खान के मुताबिक, निदाल धार्मिक प्रवृत्ति का था। वाशिंगटन में रहने के दौरान निदाल रोजाना मस्जिद में नमाज अदा करने जाता था। हमले से करीब एक साल पहले 17 दिसंबर 2008 को निदाल ने एक कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी से ईमेल के जरिए संपर्क किया। औलाकी अमेरिका के खिलाफ हिंसक जिहाद का समर्थन करता था। जब FBI को इसका पता चला, तो उसने निदाल की जांच शुरू की। फिर अमेरिका की जॉइंट टेररिज्म टास्क फोर्स, JTTF ने रिकॉर्ड किया कि 1 जनवरी 2009 से लेकर 16 जून तक 17 बार ईमेल के जरिए मौलवी से बात की। औलाकी ने भी 2 ईमेल किए। इसके बाद सेना की जांच एजेंसी ने निदाल से पूछताछ की, लेकिन इससे ये नहीं तय हो सका कि वो किसी आतंकी गतिविधि में शामिल था या किसी आतंकी संगठन के संपर्क में था। 15 जुलाई को हसन को फोर्ट हूड में तैनात कर दिया गया। अक्टूबर में तय हुआ कि हसन को अगले महीने अफगानिस्तान भेजा जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो नहीं चाहता था कि अमेरिकी सैनिकों को इराक और अफगानिस्तान में मुसलमानों से लड़ने भेजा जाए। उसके एक सहकर्मी के मुताबिक, 'निदाल कहता था कि मुसलमानों को हमलावरों के खिलाफ लड़ना चाहिए। हमें लगा कि वह चाहता है कि इराक, अफगानिस्तान के मुसलमान अमेरिकी सेना की मदद करें, लेकिन ऐसा नहीं था।' रिपोर्ट्स के मुताबिक, निदाल ओसामा बिन लादेन का बचाव करता था और कहता था कि आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की जंग, असल में इस्लाम के खिलाफ जंग है। हालांकि घटना के बाद निदाल के चचेरे भाई नादेर हसन ने कहा कि उसे अपनी मिडिल-ईस्ट की पहचान के चलते सेना में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और वह सेना छोड़ना चाहता था। नादेर के मुताबिक, 'निदाल ने सरकार को पैसा वापस करके सेना से बाहर निकलने के लिए एक सैन्य वकील रखा था। वो हर संभव कोशिश कर रहा था। मुझे नहीं लगता कि वो सेना में काम नहीं करना चाहता था। घटना उसके उत्पीड़न के चलते हुई थी।' सवाल-3: अमेरिका निदाल की सजा लाइव क्यों दिखाने वाला है?जवाब: US आर्मी के सेक्रेटरी एडम टेले ने निदाल की सजा की तारीख 3 दिसंबर और समय दोपहर का 1 बजे तय किया है। 8 अक्टूबर को पीट हेगसेथ ने कहा है, 'वर्दी में एक इस्लामी कट्टरपंथी ने सैनिकों पर हमला किया था। इसलिए उसे सैनिकों की ही फायरिंग स्क्वाड मार गिराएगी। ऐसा ही होना चाहिए और हम ये तय करेंगे कि लोग इसे देख सकें। इसे पब्लिक किया जाएगा। लोगों को ये समझने की जरूरत है कि ऐसी चीजों के परिणाम गंभीर होते हैं।' जब हेगसथ से पूछा गया कि क्या निदाल ने कोई और आखिरी याचिका दी है, तो उन्होंने कहा, 'मुझे इसकी परवाह नहीं है। हम उससे 3 दिसंबर को ही मिलेंगे।' 90 साल पहले अमेरिका में आखिरी बार 14 अगस्त 1936 को केंटकी प्रांत में 22 साल के अश्वेत युवक रैनी बेथिया को खुलेआम मौत की सजा दी गई थी। उस पर 70 साल की एक बुजुर्ग श्वेत महिला के बलात्कार का आरोप था। अमेरिकी सेना में किसी जवान को आखिरी बार 65 साल पहले 1961 में मौत की सजा दी गई थी। जॉन बेनेट नाम के जवान को फायरिंग स्क्वाड ने गोली मारी थी। ट्रम्प के दौर में अमेरिका में मौत की सजाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। ऑस्ट्रेलिया के सीनियर कॉलमिस्ट पॉल डेली कहते हैं, 'दुनिया ट्रम्प के भयानक अहंकार की इतनी आदी हो चुकी है कि कोई अचंभा नहीं होता। अब पहली बार एंटरटेनमेंट के बतौर मौत की सजा तय की गई है। दुनिया का कथित रूप से सबसे महान लोकतांत्रिक देश नैतिक रूप से डरावने स्तर तक गिर गया है।' थिंक टैंक ORF के सीनियर फेलो सुशांत सरीन कहते हैं, ‘अमेरिका ISIS के रास्ते पर चल रहा है। पहले वे तालिबान की सार्वजनिक फांसी की आलोचना करते थे और अब उससे भी आगे निकल गए हैं।’ सवाल-4: अमेरिका में मृत्युदंड के कितने तरीके, ट्रम्प के दौर में कितनी बढ़ोत्तरी हुई?जवाब: अमेरिका में ज्यादातर मामलों में मौत की सजा का तरीका राज्य तय करते हैं। 50 राज्यों में से 27 राज्य, अमेरिकी सेना और फेडरल गवर्नमेंट भी मौत की सजा देती है। हालांकि 2020 में ट्रम्प के कार्यकाल से पहले फेडरल गवर्नमेंट ने 20 साल से मौत की सजा पर बैन लगाया हुआ था। 2020 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रम्प ने बैन हटाया और शुरुआती 6 महीने में ही 13 लोगों को फांसी की सजा दी। ट्रम्प ने कहा था, 'अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ सबसे जघन्य अपराध और हिंसा को रोकने के लिए मौत की सजा सबसे जरूरी टूल है।' फिर बाइडेन के दौर में फेडरल गवर्नमेंट ने मौत की सजा पर दोबारा रोक लगा दी, लेकिन 2025 में ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन मौत की सजा को दोबारा बहाल कर दिया। फेडरल सरकार फांसी के अलावा गोली मारकर, बिजली का झटका देकर या फिर जहरीली गैस के जरिए मौत की सजा देती है। पहले जहरीले इंजेक्शन भी दिए जाते थे। फिलहाल अमेरिका में 5 राज्य- इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और यूटा में गोली मारकर मौत की सजा दी जाती है। 15 सालों में पहली बार पिछले साल साउथ कैरोलिना में एक दोषी को गोली मारी गई। हालांकि अब तक ट्रम्प के कार्यकाल में फेडरल गवर्नमेंट ने एक भी मौत की सजा नहीं दी है, लेकिन राज्यों में 2024 में 25 के मुकाबले 2025 में 47 दोषियों को मृत्युदंड दिया गया। 2026 में अब तक ये संख्या 19 है। सवाल-5: क्या दुनिया में और भी कहीं सरेआम मौत की सजा दी जाती है?जवाब: फिलहाल पूरी दुनिया में सिर्फ तीन देश- ईरान, अफगानिस्तान और नॉर्थ कोरिया में सरेआम लोगों को मौत की सजा दी जाती है... पहले सऊदी अरब में भी गंभीर अपराधों में सिर कलम करके मौत की सजा दी जाती थी, लेकिन अब ये तरीका बंद कर दिया गया है। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, अफगानिस्तान, चीन, नॉर्थ कोरिया, सऊदी अरब, सोमालिया, ताइवान, UAE और यमन में गोली मारकर भी मौत की सजा दी जाती है। वहीं भारत में आम अपराधियों को जेल के अंदर फांसी दी जा सकती है, लेकिन सैन्य दोषियों के मामले में सैन्य कोर्ट यह तय कर सकती है कि फांसी दी जाएगी या गोली मारी जाएगी। ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:शेख हसीना की फांसी लगभग तय, फिर भी बांग्लादेश क्यों जाना चाहती हैं; क्या भारत का रुख बदल गया बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद वो भागकर भारत आ गई थीं। उन्हें बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेशी नेता कह रहे- वापस आने पर इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स के नाम कटने का दावा, वीडियो में जाने ट्रम्प के ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर बढ़ी बहस
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार वर्षीय कार्यकाल के बीच में होते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर मिली निराशा
दक्षिण अफ़्रीकी न्यायविद नावी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे लेकिन उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिलेगा।
अमेरिका में ट्राला पलटने से करनाल के 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई। वह 2022 में इंग्लैंड से डंकी रूट के रास्ते अमेरिका गया था। वहां वह ट्राला चलाता था। घटना के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार शव भारत आने का इंतजार कर रहा है। परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है, ताकि शव को भारत लाकर अंतिम संस्कार किया जा सके। उधर, युवक की मां ने रोते हुए कहा- हमारे ऊपर बिजली गिर गई। हमारे बच्चे को ले आओ। 40 लाख खर्च कर इंग्लैंड गया था मृतक की पहचान सीकरी गांव निवासी जतिन (25) के रूप में हुई है। वह वर्ष 2022 में करीब 40 लाख रुपए खर्च कर भारत से इंग्लैंड गया था। वहां से वह डंकी रूट के रास्ते अमेरिका पहुंचा। वह कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में रहकर ड्राइवरी करता था। संतुलन बिगड़ने से ट्राला पलटा हादसा बुधवार अलसुबह अमेरिका में हुआ। बताया गया कि सड़क पर ट्रक का संतुलन बिगड़ने से ट्राला पलट गया। इस दौरान जतिन के सिर में चोट लगी और खून निकलने लगा। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जतिन के ममेरा भाई विशाल भी साथ ही रहता है। उसने जतिन के परिवार को घटना की सूचना दी। 5 घंटे पहले पिता से की थी बात परिवार के अनुसार, उसके पिता रामपाल ने हादसे से करीब 5 घंटे पहले ही बेटे से फोन पर बात की थी। परिवार को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद उन्हें यह दुखद खबर सुननी पड़ेगी। परिवार अपने बेटे के अंतिम दर्शन करना चाहता है, लेकिन अमेरिका से शव भारत लाने की प्रक्रिया में आर्थिक परेशानी आ रही है। परिजनों ने सरकार से अपील की है कि शव को जल्द भारत लाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सकें। खेतीबाड़ी करता है परिवार जतिन के परिवार में पिता रामपाल, मां रेखा, बड़ा भाई साहिल और एक छोटी बहन है। उसके पिता खेतीबाड़ी करते हैं। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और अब परिजनों को उसके शव के भारत पहुंचने का इंतजार है।
अमेरिका में पहली बार सजा-ए-मौत टीवी पर लाइव होगी, 3 दिसंबर की तारीख तय
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने और इसका सार्वजनिक प्रसारण करने की बात कही है। उनके हवाले से कहा गया है कि लोगों को यह समझना चाहिए कि इस तरह के अपराधों के गंभीर परिणाम होते हैं।
अमेरिका में 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स के नाम कटने का दावा, मिडटर्म चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर विवाद; ट्रम्प की बढ़ी मुश्किलें?
अमेरिका में भारतीय प्रतिभा का लोहा मानने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अब उसी प्रतिभा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जिसने अमेरिकी तकनीकी उद्योग को वैश्विक ताकत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। एक तरफ ट्रंप भारतीय मूल के माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्य नडेला की तारीफ करते हैं, तो दूसरी तरफ उपराष्ट्रपति जेडी वांस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और कॉग्निजेंट समेत आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े PERM कार्यक्रम से निलंबित कर देता है। इस फैसले से हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों के भविष्य और अमेरिका में स्थायी निवास पाने की उम्मीदों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया है कि PERM कार्यक्रम और एच-1बी वीजा अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं तथा PERM आवेदनों पर रोक लगने से मौजूदा एच-1बी वीजा या उनके धारकों और आश्रितों की स्थिति अपने आप प्रभावित नहीं होती, भले ही पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोटूक कहा है कि प्रतिभाओं की आवाजाही भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। इससे अमेरिकी कंपनियों को उच्च कौशल वाले पेशेवर, नवाचार, अनुसंधान, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और रोजगार सृजन में मदद मिलती है। मंत्रालय ने वांस की उन टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें विदेशी कर्मचारियों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। भारत ने कहा कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं तथा उन्हें औपनिवेशिक इतिहास की पीड़ादायक याद दिलाने वाली भाषा से संबोधित करना गहरे तौर पर आपत्तिजनक है। देखा जाये तो भारत का यह बयान महज औपचारिक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि वाशिंगटन के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारतीय प्रतिभा को अपमानित करके और उसके अवसर सीमित करके दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। अब बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिकी रोजगार की सुरक्षा तक सीमित है या इसके पीछे चुनावी राजनीति, भारत पर आर्थिक दबाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों के समीकरण भी काम कर रहे हैं? उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति जेडी वांस, श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स पहल के तहत आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल हैं। प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया, जिससे अमेरिकी कामगारों के रोजगार और वेतन पर प्रतिकूल असर पड़ा। अब सवाल उठता है कि आखिर PERM है क्या और इस पर रोक से भारतीयों को कितना नुकसान होगा? हम आपको बता दें कि PERM यानी Permanent Labor Certification रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। सामान्यतः नियोक्ता को अमेरिकी श्रम विभाग से प्रमाणित कराना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त इच्छुक और योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद ही नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। इस कार्यक्रम से आठ कंपनियों को बाहर करने का मतलब यह है कि वे नई PERM अर्जियां दाखिल नहीं कर पाएंगी और उनकी लंबित अर्जियों पर भी प्रक्रिया रुक जाएगी। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इन कंपनियों में काम कर रहे सभी भारतीयों के एच-1बी वीजा रद्द हो गए हैं या उन्हें तत्काल अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। असली खतरा उन कर्मचारियों के लिए है जो छह साल की सामान्य एच-1बी अवधि के करीब पहुंच रहे हैं और अमेरिका में लंबे समय तक बने रहने के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर निर्भर हैं। कुछ परिस्थितियों में ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के निर्धारित चरण पूरे होने पर एच-1बी अवधि बढ़ाई जा सकती है। PERM प्रक्रिया रुकने से ऐसे कर्मचारियों के लिए भविष्य की योजना बनाना कहीं अधिक मुश्किल हो सकता है। देखा जाये तो अमेरिकी प्रशासन की इस कार्रवाई ने भारतीय आईटी उद्योग से लेकर अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी करने का सपना देखने वाले युवाओं तक अनिश्चितता बढ़ा दी है। जेडी वांस ने माइक्रोसॉफ्ट पर सबसे तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, लेकिन साथ ही 6,000 से अधिक एच-1बी वीजा की मंजूरी हासिल की और 3,600 से अधिक PERM आवेदन भी दाखिल किए। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को 'फॉरेन इंडेंचर्ड सर्वेंट्स' और ऐसी कंपनियों को 'वीजा मिल्स' तक कह दिया। श्रम सचिव सॉन्डरलिंग का दावा है कि केवल इन कंपनियों ने 2009 से लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए, 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर कराए और एक लाख से अधिक PERM प्रमाणन हासिल किए। प्रशासन इन आंकड़ों को अमेरिकी कामगारों के अवसर छिनने से जोड़ रहा है। लेकिन आवेदन, मंजूरी, वास्तविक नियुक्ति और अमेरिकी कर्मचारी की जगह विदेशी कर्मचारी रखे जाने के आंकड़े अलग-अलग हैं। माइक्रोसॉफ्ट का पक्ष भी इस बहस में महत्वपूर्ण है। कंपनी ने कहा है कि उसके करीब 6,000 एच-1बी आवेदनों में लगभग 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों के वीजा विस्तार या उनकी स्थिति बदलने से संबंधित थे। इसका अर्थ है कि सभी आवेदनों को नई विदेशी भर्तियों के रूप में नहीं देखा जा सकता। साथ ही नेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के संस्थापक राजीव दाभाडकर की व्याख्या इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने लाती है। उनके मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन अब केवल यह नहीं पूछ रहा कि विदेशी कर्मचारी योग्य है या नहीं, बल्कि यह भी जांच रहा है कि विदेशी श्रम की भर्ती, भुगतान और आपूर्ति का कारोबारी मॉडल किस तरह काम करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी तकनीकी पद के लिए अमेरिकी कंपनी एक लाख पचास हजार डॉलर खर्च करती है और कोई मध्यस्थ विदेशी कर्मचारी को उसकी वास्तविक आर्थिक कीमत से काफी कम भुगतान करके अंतर अपने मुनाफे के रूप में रखता है, तो सवाल भारतीय कर्मचारी बनाम अमेरिकी कर्मचारी का नहीं, बल्कि पारदर्शी वेतन बनाम श्रम लागत के अनुचित लाभ का बनता है। यह जांच का वैध विषय हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सभी भारतीय पेशेवरों को संदेह के घेरे में रखने के लिए नहीं होना चाहिए। अब सवाल उठता है कि ट्रंप ने सत्य नडेला की तारीफ क्यों की और वांस ने माइक्रोसॉफ्ट पर इतना सख्त रुख क्यों अपनाया? इसका उत्तर अमेरिकी राजनीति की दो प्राथमिकताओं में है। ट्रंप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और तकनीकी निवेश में अमेरिकी नेतृत्व मजबूत करना है। माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी इस लक्ष्य में महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, वांस और रिपब्लिकन राजनीति का एक प्रमुख संदेश अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देना और विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता घटाना है। किसी कंपनी के सीईओ की उपलब्धियों की प्रशंसा करना और उसी कंपनी की श्रम नीतियों की जांच करना प्रशासन के लिए विरोधाभासी नहीं है। लेकिन यदि नियमों का इस्तेमाल चुनिंदा कंपनियों को दबाने या राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाता है, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस कार्रवाई का चुनावी पहलू भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी कामगारों की नौकरियों की रक्षा करने का संदेश रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से उपयोगी है। ट्रंप प्रशासन विदेशी श्रम के खिलाफ सख्त रुख दिखाकर अपने मतदाताओं को यह भरोसा देना चाहता है कि वह अमेरिकी रोजगार को प्राथमिकता दे रहा है। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि अपने तेवर कड़े दिखाकर जेडी वांस अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। साथ ही भारतीय छात्रों के लिए भी स्थिति चिंताजनक है। पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने का अवसर देने वाला OPT कार्यक्रम और एच-1बी वीजा व्यवस्था दोनों राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्रों से संबंधित OPT प्रस्ताव में पहली बार कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रत्येक छात्र के लिए संस्थानों पर 70,000 डॉलर और नवीनीकरण पर 30,000 डॉलर शुल्क लगाने की बात सामने आई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों और नियोक्ताओं पर लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ छात्रों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, नए एच-1बी आवेदनों से संबंधित 1,00,000 डॉलर भुगतान की शर्त को लेकर भी विवाद है। इस शुल्क की लागू करने की प्रक्रिया संघीय अदालतों के आदेशों से फिलहाल बाधित है और मुकदमे जारी हैं। माना जा रहा है कि भारतीय आईटी कंपनियों के शुरुआती और मध्यम स्तर के इंजीनियरों पर दबाव अधिक पड़ सकता है। वरिष्ठ इंजीनियरों और बड़ी अमेरिकी तकनीकी कंपनियों में स्थापित पदों पर काम करने वाले कुछ पेशेवर अपेक्षाकृत सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन भारतीय कंसल्टिंग कंपनियों के माध्यम से अमेरिका जाने वाले युवाओं के लिए रास्ता कठिन होता जा रहा है। PERM पर रोक, एच-1बी संबंधी शुल्क विवाद और चयन प्रक्रिया में बदलाव मिलकर उस व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं जिसके सहारे पिछले तीन दशकों में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर अमेरिकी तकनीकी उद्योग तक पहुंचे। यहां एक सवाल यह भी उठता है कि क्या ट्रंप यह सब इसलिए कर रहे हैं कि भारत पर लगाए गए टैरिफ का अपेक्षित असर नहीं हुआ और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाने के लिए नया रास्ता अपनाया जा रहा है? देखा जाये तो इन कंपनियों में भारतीय आईटी उद्योग की प्रमुख हिस्सेदारी और प्रभावित पेशेवरों में भारतीयों की बड़ी संख्या के कारण भारत पर असर गंभीर हो सकता है। फिर भी प्रशासन का घोषित आधार अमेरिकी श्रम बाजार और आव्रजन व्यवस्था है। देखा जाए तो ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई का असर वीजा और ग्रीन कार्ड तक सीमित रहने वाला नहीं है, बल्कि यह भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी की बुनियाद को भी चुनौती दे सकता है। जिन भारतीय कंपनियों और पेशेवरों ने अमेरिकी तकनीकी उद्योग को अपनी मेहनत, विशेषज्ञता और नवाचार से मजबूत किया, आज उन्हीं के रास्ते में नए अवरोध खड़े किए जा रहे हैं। भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में भर्ती, परियोजनाओं के संचालन और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने की रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। लेकिन अमेरिका को भी समझना होगा कि भारतीय प्रतिभा के लिए दरवाजे संकरे करके वह अपनी ही तकनीकी ताकत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने का जोखिम उठा रहा है। भारत को इस दबाव के आगे झुकने के बजाय वाशिंगटन से दोटूक कहना चाहिए कि भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही, भारत को अपनी तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और उच्च कौशल वाले रोजगार में इतना निवेश करना होगा कि भारतीय प्रतिभा के भविष्य का फैसला केवल अमेरिकी नीतियां न करें। बहरहाल, ट्रंप की नीति भारत के लिए महज एक चेतावनी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर तकनीकी शक्ति बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का संकेत है। अमेरिका एक ओर भारतीय मूल के तकनीकी दिग्गजों की सफलता का गुणगान करता है और दूसरी ओर भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर सीमित करने वाली नीतियां अपनाता है। यह दोहरा रवैया उस साझेदारी पर सवाल खड़ा करता है, जिसे दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित बताते हैं। भारत को अमेरिका से संबंध तोड़ने की जरूरत नहीं, लेकिन यह भी स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय इंजीनियरों का भविष्य अमेरिकी घरेलू राजनीति और चुनावी लाभ-हानि का मोहरा बन जाए। अब वक्त है कि भारत अपनी प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और विशाल बाजार की ताकत को कूटनीतिक आत्मविश्वास में बदले और स्पष्ट संदेश दे कि भारत अमेरिका के साथ साझेदारी चाहता है, किसी की राजनीतिक मजबूरियों की कीमत पर अपने नागरिकों और कंपनियों के हितों से समझौता नहीं होगा। -नीरज कुमार दुबे
मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प से रिश्ते सुधार लिए हैं। अब जुकरबर्ग का प्रभाव AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में भी दिख रहा है। AI सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने में उनका बड़ा रोल है। जुकरबर्ग ने ट्रम्प से बिगड़े रिश्ते कैसे सुधारे 2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि ट्रम्प की पोस्ट से हिंसा और बढ़ सकती है। इस फैसले से ट्रम्प नाराज हो गए। उन्होंने जुकरबर्ग पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें उम्रकैद तक की धमकी दी। दोनों के रिश्ते सुधरने की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई। पेंसिल्वेनिया की एक चुनावी रैली में ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे शानदार चीजों में से एक था। जुकरबर्ग की इस तारीफ के कुछ हफ्ते बाद ट्रम्प ने भी उनके प्रति नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अब वे जुकरबर्ग को पहले से ज्यादा पसंद करते हैं। ट्रम्प के करीब आने के लिए क्या-क्या किया? ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए। ट्रम्प से नजदीकी का जुकरबर्ग को फायदा मिला ट्रम्प और जुकरबर्ग की बढ़ती नजदीकी का असर सरकारी फैसलों पर भी दिख रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया। पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रम्प और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। समझौते का मकसद AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच कराना है। जुकरबर्ग का मानना है कि AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तकनीकी सुधारों से दूर किया जा सकता है। हालांकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसमें कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। ट्रम्प से दोस्ती आगे चलकर भारी भी पड़ सकती है CNN के मुताबिक जुकरबर्ग को ट्रम्प के करीब आने का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसके नुकसान भी हो सकते हैं। अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में बहुमत मिलता है या 2028 में उसका राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को लैटर लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं को कितना पैसा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए भारी रकम खर्च की और अब उसे इसका फायदा मिल रहा है। ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी जुकरबर्ग पर भरोसा नहीं करते। उन्हें लगता है कि जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीति के पीछे कोई विचारधारा नहीं, बल्कि अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। यानी जुकरबर्ग ने कभी जिस ट्रम्प से टकराव मोल लिया था, आज उसी के साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन यह दोस्ती कितनी टिकेगी, इसका फैसला आने वाले चुनाव और अमेरिकी राजनीति का रुख करेगा। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे: मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने विपक्ष को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर पढ़ें…
भारतीय मजदूरों के लिए दिग्गज अमेरिकी कंपनी से भिड़ा इटली
इटली ने दूतावास और कॉन्सुलेट बनाने वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी को इस सैटलमेंट के लिए बाध्य किया है.
H-1B विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे।
एच-1बी विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
वाशिंगटन, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे। यह बयान तब सामने आया, जब ट्रंप प्रशासन ने एक प्रमुख रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड कार्यक्रम के माध्यम से विदेशी श्रमिकों को स्पॉन्सर करने की कंपनी की क्षमता को निलंबित कर दिया था।
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
जयपुर के डॉक्टर के बेटे चेतन्य सिंह ने अमेरिका में अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए शहर का मान बढ़ाया है। चेतन्य ने अमेरिका में चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए होने वाली प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज प्रवेश परीक्षा (एमकैट) में पहली ही कोशिश में 100 पर्सेंटाइल हासिल किया है। इस उपलब्धि की खास बात यह है कि चेतन्य ने यह परीक्षा अपने पूर्व-चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रम के पांचवें सेमेस्टर की शुरुआत से पहले ही दी थी। शुरुआती चरण में ही परीक्षा देकर पहली कोशिश में सर्वोच्च पर्सेंटाइल हासिल करना उनकी असाधारण शैक्षणिक क्षमता और तैयारी को दर्शाता है। अमेरिका में चिकित्सा प्रवेश की अहम परीक्षा अमेरिकी चिकित्सा महाविद्यालय संघ (एएएमसी) अमेरिका में चिकित्सा महाविद्यालय प्रवेश परीक्षा का संचालन करता है। अमेरिका के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए यह परीक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है। चेतन्य ने परीक्षा में पहली बार शामिल होकर ही 100 पर्सेंटाइल हासिल किया, जो उनकी उपलब्धि को और खास बनाता है। पिता रेडियोलॉजिस्ट, मां वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ चेतन्य के पिता डॉ. राजीव सिंह जयपुर में वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट हैं। वे भारतीय रेडियोलॉजिकल एवं इमेजिंग संघ (आईआरआईए) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं। उनकी मां डॉ. शालिनी राठौड़ जयपुर के महिला चिकित्सालय में वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। चिकित्सकीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले चेतन्य ने अब अमेरिका में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ जयपुर के चिकित्सा जगत में भी खुशी का माहौल है। पढ़ाई के बीच हासिल की बड़ी उपलब्धि चेतन्य ने अपने पूर्व-चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रम की पढ़ाई जारी रखते हुए पांचवें सेमेस्टर की शुरुआत से पहले ही यह प्रतिष्ठित परीक्षा दी। पहली कोशिश में 100 पर्सेंटाइल हासिल करना उनके लिए ही नहीं, बल्कि जयपुर के लिए भी गौरव का विषय है।
कैथल जिले के पूंडरी क्षेत्र के गांव टयोंठा के रहने वाले करीब 26 वर्षीय युवक अजय चौधरी की अमेरिका में ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई। युवक करीब 3 साल पहले अमेरिका गया था। अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। पास में रहने वाले उसके साथियों ने उसे अस्पताल में पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने अजय को ये सोचकर विदेश भेजा था कि वहां जाकर दो पैसे कमाएगा और परिवार की गरीबी दूर करेगा, लेकिन अब अजय की मौत के बाद परिवार में मातम पसर गया है और उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। सामाजिक संस्थाएं और परिवार के लोग सरकार से गुहार लग रहे हैं कि अजय के मृत शरीर को उसके गांव लाने में सहायता की जाए। दोस्तों और रिश्तेदारों से लिए थे रुपए अजय के चाचा विनोद कुमार ने बताया कि अजय 3 साल पहले करीब 42 लाख रुपए लगाकर अमेरिका गया था। इस समय वह शिकागो में रह रहा था और एक राशन के स्टोर पर काम कर रहा था। परिवार ने कुछ पैसे अपनी तरफ से जमा किए, तो कुछ पैसे दोस्तों व रिश्तेदारों से उधार लिए थे। उसके बाद उसे अमेरिका भेजा था। अब करीब इतनी ही राशि उसके शव को भारत लाने पर खर्च करनी पड़ेगी। परिवार में माता पिता और एक बहन चाचा विनोद ने बताया कि अजय के परिवार में उसके पिता धर्म सिंह, माता रेखा रानी व एक छोटी बहन है। परिवार करीब पौना एकड़ जमीन पर खेती करता है और वे गांव में ही रहते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि अजय के शव को भारत लाने में सहयोग किया जाए। वहीं दूसरी ओर सामाजिक संस्थाएं और विदेश में रहने वाले लोगों के संगठन भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से अपील कर रहे हैं कि अजय के शव को भारत वापस लाने में सहयोग करें ताकि परिवार उसके अंतिम दर्शन कर सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति का इंटरव्यू लेने वाले पहले हिंदी पत्रकार पंकज को श्रद्धांजलि
भास्कर न्यूज | खरोरा रायपुर से निकलकर दिल्ली और अमेरिका तक पहचान बनाने वाले स्व. पंकज शर्मा का निधन 33 साल की उम्र में हुआ था। 28 अप्रैल 1970 को तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी. गिरि की भूटान-सिक्किम यात्रा के आधिकारिक कवरेज के दौरान भूस्खलन हादसे में उनकी मौत हुई थी। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने उनके योगदान को याद कर श्रद्धांजलि दी। समकालीनों के मुताबिक पंकज शर्मा ऊर्जा और जीवंतता से भरे थे। तेज चलते थे। तेज बोलते थे। लेखन भी प्रखर था। वे खबर की सतह पर नहीं रुकते थे। गहराई में जाकर सच सामने लाते थे। वे प्रदेश के अब तक एकमात्र पत्रकार रहे, जो तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति के इंटरव्यू पैनल में शामिल हुए। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, पंकज शर्मा का जीवन भारतीय पत्रकारिता का स्वर्णिम अध्याय है। महानता उम्र की मोहताज नहीं होती। उत्कृष्ट, ध्येयनिष्ठ कर्म से मिलती है। उन्होंने शोधपरक, निर्भीक, निष्पक्ष पत्रकारिता के उच्च मानदंड बनाए। ये आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति का साक्षात्कार लेने वाले पहले हिंदी पत्रकार से लेकर भूटान-सिक्किम यात्रा के दौरान देश सेवा में प्राण न्योछावर करने तक, उनका साहसी जीवन आने वाली पीढ़ियों को सत्य और निष्पक्षता की राह दिखाएगा। वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, पंकज शर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वैचारिक रूप से अपने युग के अग्रणी विचारकों में थे। उन्होंने पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं माना। समाज को दिशा देने का माध्यम माना। भूटान यात्रा के दौरान उनका जाना परिवार के साथ पत्रकारिता और बौद्धिक जगत के लिए भी बड़ा शून्य रहा। निष्पक्ष लेखन, सार्वजनिक संवाद, गहन तार्किक सोच में उनका योगदान इतिहास में दर्ज रहेगा। धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा, पंकज शर्मा छत्तीसगढ़ के तेजस्वी सपूत थे। असाधारण योग्यता, कर्तव्यनिष्ठा से रायपुर का नाम राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पटल पर रोशन किया। छत्तीसगढ़ कॉलेज के दिनों से उनकी भाषण कला, तार्किक शैली, नेतृत्व क्षमता दिखती थी। उन्होंने दिल्ली से अमेरिका तक हिंदी का परचम फहराया। भाषा और संस्कृति को गौरव दिलाया। कार्यक्रम में अनुज शर्मा ने रायपुर के पत्रकारों और ब्राह्मण समाज की मांगें डिप्टी सीएम विजय शर्मा और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सामने रखीं।
Kaithal News: आरकेएसडी कॉलेज में अमेरिकी विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति को करीब से जाना
American students experienced Indian culture up close at RKSD College.
आलू भुजिया के मसालों से ठीक हुआ अस्थमा? अमेरिकी शख्स का दावा, भारतीय खाने को बताया फायदेमंद
भारतीय मसालों और खाने के कई फायदे आपने सुने होंगे लेकिन क्या कभी पैकेट वाली आलू भुजिया को अस्थमा के इलाज के लिए खाया है। अमेरिकन शख्स सैम ने वीडियो में आलू भुजिया के पैकेट की फोटो दिखाई और उसमें लिखे मसालों को अस्थमा-एलर्जी का इलाज बताया। चलिए पूरी स्टोरी जानते हैं।
अमेरिका में एच-1बी वीजा संकट से पंजाब के इंजीनियर प्रभावित हो रहे हैं, जिस पर पूर्व स्पेशल चीफ सेक्रेटरी केबीएस सिद्धू ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
'तब आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति बुलाएंगे', बिहार के छात्र ने छोड़ा अमेरिका, फिर सच कर दिखाया सपना
“मेरे अंदर के बिहारी ने कहा, ‘मैं तब वापस आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति मुझे बुलाएंगे’”: जब शरद सागर ने भारत में काम करने के लिए अमेरिका छोड़ा, तो लोग हंसे, लेकिन उन्होंने भविष्य को सच कर दिखाया।
Iran US War: ईरान ने दागी Sayyad-3 मिसाइल, क्या अमेरिकी एयरक्राफ्ट था निशाने पर? | Trump | Mojtaba
ईरान ने अचानक ऐसी मिसाइल दागी कि अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है...क्योंकि जिस जगह से यह मिसाइल चली, वहां कुछ मिनट पहले अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान देखे गए थे.
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran America war में ईरान ने अमेरिका को Middle East से ही खदेड़ दिया? Prof Peter Kuznik का बड़ा दावा
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रही उथल-पुथल अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। वैश्विक मामलों के जानकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में दशकों से चला आ रहा अमेरिकी दबदबा अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है
अमेरिका में भारतवंशी छात्रों का कमाल, बनाया ऐसा कॉफी पॉड कि कचरा ही नहीं बचेगा
अमेरिका के छात्रों आदित्य हेरेकर और करण वर्मा ने बायोडिग्रेडेबल कॉफी पॉड Naturista बनाया है। करीब 200 प्रोटोटाइप के बाद तैयार इस इनोवेशन ने एक चैलेंज में 25 हजार डॉलर का पुरस्कार जीता। जानिए कैसे बना यह अनोखा कॉफी कैप्सूल।
पीसीएस 2025 के साक्षात्कार के तीसरे दिन एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति का स्वागत करने ट्रंप क्यों गए और उनका स्वागत क्यों हुआ।
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा!
बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा! असली मुद्दा ये है कि इराक में मुकीम सबसे बड़ी फोर्स हशदुशशाबी के लिए ये नाजुक और इम्तेहान की घड़ी है...वो इसलिए क्यों कि अमेरिका और इजरायल किसी भी सूरत में इराक में ईरान हिमायती इन फोर्सेस का खात्मा चाहते हैं..
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट क्यों भागी अमेरिकी सेना! Trump। Iran। Middle East
Iran America War के बीच Iraq से क्यों निकल रही US की फोर्सेस,अब कौन हावी?| Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक की। बैठक में AI की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, ओपनएआई, X-AI और एनवीडिया के CEO ने एक समझौते पर साइन किए। इस दौरान ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस (SI) करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। उन्होंने कहा कि AI को आर्टिफिशियल यानी बनावटी कहना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक, यह इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है। ट्रम्प ने कहा कि AI की दौड़ अब अमेरिका और चीन के बीच है और फिलहाल अमेरिका इस मुकाबले में आगे चल रहा है। उन्होंने पिछले हफ्ते UN महासभा में पहली बार AI को सुपर इंटेलिजेंस (SI) कहा था। समझौते में कंपनियों ने 4 बातें मानने पर सहमति दी 1. अपने AI सिस्टम की खुद जांच करेंगी: कंपनियां खुद जांचेंगी कि उनके AI मॉडल सुरक्षा के तय नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। 2. अलग टीम निगरानी करेगी: कंपनियां एक टीम बनाएंगी, जो AI सिस्टम की निगरानी करेगी और यह देखेगी कि कहीं कोई खतरा या गड़बड़ी तो नहीं है। 3. बाहर के विशेषज्ञ भी जांच करेंगे: कंपनियां अपने AI मॉडल की जांच बाहरी विशेषज्ञों या किसी स्वतंत्र संस्था से भी कराएंगी। 4. कंपनी का बोर्ड भी नजर रखेगा: कंपनियों के बोर्ड की एक स्वतंत्र समिति इन जांच रिपोर्टों को देखेगी। अगर कोई समस्या सामने आती है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी भी होगी। ट्रम्प ने टेक कंपनियों से कहा- डेटा सेंटर बनाने में स्थानीय लोगों को साथ लें बैठक में AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी चर्चा हुई। ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, टेक कंपनियों को वहां की स्थानीय कम्युनिटी के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियों को इन इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करनी चाहिए। इसमें स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना भी शामिल हो सकता है। ट्रम्प के मुताबिक, डेटा सेंटर बनाने से पहले कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि इन प्रोजेक्ट्स का फायदा वहां रहने वाले लोगों को भी मिल सके। AI के लिए डेटा सेंटर इतने जरूरी क्यों हैं? हम जिस AI से सवाल पूछते हैं, उसके पीछे हजारों-लाखों शक्तिशाली कंप्यूटर काम करते हैं। ये बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। इसलिए AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ेगी। जुकरबर्ग बोले- लोगों को AI पर भरोसा होना जरूरी मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का मकसद लोगों का भरोसा बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोगों और ग्राहकों को भरोसा होना चाहिए कि AI तकनीक उसी तरह काम करेगी, जिस तरह इसे बनाया गया है। एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि सभी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि इस तकनीक का विकास सुरक्षित तरीके से हो। अमेरिका-चीन की AI रेस में 4 मोर्चे पर मुकाबला 1. चिप्स: AI का दिमागAI को चलाने के लिए बहुत ताकतवर चिप्स चाहिए। जिसके पास बेहतर और ज्यादा चिप्स होंगे, वह बड़े और तेज AI सिस्टम बना सकेगा। 2. डेटा सेंटर: जहां AI चलता हैAI को चलाने वाले हजारों कंप्यूटर बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ऐसे डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ रही है। 3. बिजली: AI को चलाने के लिए ईंधनडेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली खाते हैं। इसलिए AI की रेस में सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, पर्याप्त और लगातार बिजली मिलना भी जरूरी है। 4. AI मॉडल: किसका AI ज्यादा काम का?आखिर में मुकाबला इस बात का भी है कि कौन ज्यादा तेज, समझदार और मुश्किल काम करने वाला AI मॉडल बना सकता है। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन ने जंग में विस्फोटकों से लैस रोबोट सैनिक उतारे: रूस के 3000 सैनिकों को मारने का दावा रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
विचार: अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजे भारत
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
<
अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन : राष्ट्रपति शी का दबदबा, और ट्रंप के पत्ते
एआई के मुद्दे पर, राष्ट्रपति शी ने एआई विकास पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण का विरोध किया और ओपन-सोर्स एआई का समर्थन किया।
Iran America War में IRGC ने Hormuz Strait में उड़ाया अमेरिकी सुरक्षा में तैनात जहाज | Trump
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चल रहे जहाजों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक तेल टैंकर के प्रभावित होने की भी प्रारंभिक सूचना है
अमेरिकी नागरिकों से 72 लाख डॉलर की ठगी: अहमदाबाद से चल रहे अवैध कॉल सेंटर सिंडिकेट का भंडाफोड़
सीबीआई ने अहमदाबाद से संचालित अवैध कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों से 72.1 लाख डॉलर (60 करोड़ रुपये से अधिक) की साइबर ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को यूएस अटॉर्नी और एफटीसी जैसे अमेरिकी संघीय अधिकारी बताकर पीड़ितों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी केस में फंसाने का डर दिखाते थे और बैंक खातों से रकम निकालकर सोना खरीदने व कूरियर को सौंपने के लिए मजबूर करते थे। डिजिटल साक्ष्य जब्त कर एजेंसी पूरे सिंडिकेट की जांच कर रही है।
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
नेताओं के हेल्दी खानपान के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डाइट जानते हैं। जिन चीजों को अनहेल्दी समझकर खाने से इनकार किया जाता है, उसी डाइट कोक, बर्गर, पिज्जा को खाकर राष्ट्रपति करते हैं बड़े-बड़े फैसलें।
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
CBSE पोर्टल की सुरक्षा खामी उजागर करने वाले 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के हॉल ऑफ फेम में शामिल कर सम्मानित किया गया है।
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
हार्वर्ड-स्टैनफर्ड नहीं... MIT है अमेरिकी नंबर वन कॉलेज, जानिए आइवी लीग कॉलेजों की रैंक
यूएस न्यूज बेस्ट कॉलेज 2027 रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने प्रिंसटन के 15 साल के वर्चस्व को खत्म कर पहला स्थान हासिल कर लिया है। सभी 8 आइवी लीग कॉलेज लिस्ट में शामिल हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
बिहार के नीरज को अमेरिका में मिली 2.6 करोड़ की स्कॉलरशिप, पिता चलाते हैं पान की दुकान
सारण जिले के नीरज को अमेरिका में करीब 2.6 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप पर PhD कर रहे हैं। बिहार के छोटे से गांव से अमेरिका तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष की अच्छी मिसाल है।
पिता के संघर्ष को सम्मान: कभी अमेरिका ने किया वीजा खारिज, आज नासा कर रहा स्वागत; कैसे लिखी सफलता की कहानी?
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री जाएंगे अमेरिका, ट्रंप ने दे दिया वीजा! - ABP News
<
अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में खुद को तंदुरुस्त और एनर्जेटिक बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के सप्लीमेंट्स, जिम वर्कआउट और हाई-प्रोटीन डाइट का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों और अमेरिका में यह माना जाता है कि यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल कर लिया जाए, तो शरीर की सारी कमजोरियां दूर हो जाती हैं और ऊर्जा का स्तर हमेशा उच्च बना रहता है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) द्वारा जारी की गई एक बेहद चौंकाने वाली और व्यापक रिपोर्ट ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। सीडीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 71.5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो भरपूर मात्रा में प्रोटीन या अन्य पोषक तत्व लेने के बाद भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहते हैं। यह आंकड़ा न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि आधुनिक चिकित्सा जगत और पोषण विशेषज्ञों (Nutritionists) के लिए भी एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस आलेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर भरपूर प्रोटीन लेने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर लोग क्रोनिक थकान और ऊर्जा की कमी का सामना क्यों कर रहे हैं, और इसके पीछे छिपे असली वैज्ञानिक व जीवनशैली से जुड़े कारण क्या हैं।प्रोटीन का सेवन बनाम शरीर की ऊर्जा: क्या सिर्फ प्रोटीन खाने से ही मिल जाती है एनर्जी?आम तौर पर लोगों के मन में यह भ्रम बैठा हुआ है कि यदि वे अपने रोजाना के खाने में चिकन, अंडे, प्रोटीन पाउडर, पनीर या अन्य हाई-प्रोटीन स्रोतों को शामिल कर लेते हैं, तो उनका शरीर स्वतः ही ऊर्जा से भर जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) और ऊर्जा उत्पादन का तंत्र केवल एक पोषक तत्व यानी प्रोटीन पर निर्भर नहीं करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी डाइट में अत्यधिक प्रोटीन तो जोड़ लेता है, लेकिन साथ ही जरूरी विटामिंस (जैसे विटामिन बी12, विटामिन डी), आयरन, सही प्रकार के कार्बोहाइड्रेट और पर्याप्त हाइड्रेशन की अनदेखी करता है, तो शरीर उस प्रोटीन को पूरी तरह पचाने और ऊर्जा में बदलने में असमर्थ हो जाता है। इसके अलावा, आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है। सीडीसी की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि सिर्फ मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (Protien, Fats, Carbs) की मात्रा पूरी कर लेने मात्र से ही कोई व्यक्ति अंदर से स्वस्थ या ऊर्जावान महसूस नहीं कर सकता, जब तक कि शरीर की कोशिकीय स्तर पर पोषण संबंधी जरूरतें पूरी न हो रही हों।नींद की कमी और मानसिक तनाव: थकान का सबसे बड़ा और अनदेखा कारणसीडीसी की इस व्यापक रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है कि शारीरिक थकान का सीधा संबंध केवल भोजन या डाइट से ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे आधुनिक युग की सबसे बड़ी बीमारियां—नींद की कमी (Sleep Deprivation) और मानसिक तनाव (Chronic Stress)—मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। आज के समय में कॉर्पोरेट कल्चर, नाइट शिफ्ट्स, और रातभर मोबाइल स्क्रीन या लैपटॉप के सामने समय बिताने के कारण लोगों की नींद का चक्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। जब शरीर को रात में गहरी और कम से कम 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं मिलती, तो शरीर के हारमोनल संतुलन में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है। कोर्टिसोल (Cortisol) यानी तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने से शरीर हमेशा 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड में रहता है, जिससे मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र लगातार थका हुआ महसूस करते हैं। आप चाहे दुनिया का सबसे महंगा प्रोटीन शेक पी लें या सबसे बेहतरीन डाइट फॉलो कर लें, लेकिन यदि आपकी नींद पूरी नहीं है और आप मानसिक रूप से तनावग्रस्त हैं, तो आपके शरीर की कोशिकाएं कभी भी तरोताजा महसूस नहीं कर सकतीं। यही कारण है कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी करोड़ों लोग अंदर से पूरी तरह खोखले और थके हुए महसूस कर रहे हैं।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) और खराब पाचन तंत्र की भूमिकाथकान और सुस्ती के इस महामारी जैसे फैलने के पीछे एक और बहुत बड़ा कारण हमारी आधुनिक शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) है। आजकल अधिकांश नौकरियां ऐसी हो गई हैं जिनमें लोगों को लगातार 8 से 10 घंटे अपनी कुर्सी या डेस्क पर बैठकर बिताना पड़ता है। शारीरिक रूप से कोई मेहनत न होने के कारण शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुस्त हो जाता है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और खाया हुआ भोजन सही ढंग से पच नहीं पाता। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात को मानते हैं कि जब तक आपका पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत और सक्रिय नहीं है, तब तक आप चाहे कितना भी पौष्टिक भोजन या प्रोटीन क्यों न खा लें, आपके शरीर को उसकी सही ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकती। अपच, कब्ज और आंतों (Gut Health) से जुड़ी समस्याएं शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा देती हैं, जिससे लगातार सुस्ती, सिरदर्द और भारीपन बना रहता है। सीडीसी की रिपोर्ट इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करती है कि जब तक लोग अपनी दिनचर्या में व्यायाम, वॉक और शारीरिक श्रम को शामिल नहीं करेंगे, तब तक केवल डाइट बदलने से थकान की इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता।निष्कर्ष: इस समस्या से बाहर निकलने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव जरूरी हैं?सीडीसी की यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी और आंखें खोलने वाला संदेश है। यह हमें यह सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल जिम जाने या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले किसी एक फिटनेस ट्रेंड को फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समग्र संतुलन (Holistic Balance) है जिसमें सही खानपान, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सक्रिय जीवनशैली का होना अनिवार्य है। यदि आप भी अक्सर खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो सिर्फ प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के बजाय अपनी नींद के पैटर्न को सुधारें, पानी की मात्रा बढ़ाएं, योग या मेडिटेशन को अपनाएं और डॉक्टर से सलाह लेकर अपने शरीर में विटामिंस व मिनरल्स की जांच करवाएं। आधुनिक दुनिया की इस अंधी दौड़ में अपने शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना और समय रहते आवश्यक बदलाव करना ही एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन की असली कुंजी है।
रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब - AajTak
<
अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

