अमेरिका: भारतीय मूल के कारोबारी को पांच साल की जेल, 2.7 करोड़ डॉलर की आय छिपाने का आरोप; कैसे हुआ खुलासा?
नोएडा, 11 सितंबर . अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ सुरिंदर सिंह लाली ने कहा कि ईरान समझ गया है कि वह सीधे हमले की जगह तेल की कीमतों से अमेरिका को चोट पहुंचा सकता है. लाली ने चेतावनी दी कि तेल, उर्वरक और हीलियम की कीमतें बढ़ने से India के चालू खाते के घाटे, महंगाई और ... Read more
Bengaluru, 11 सितंबर . Bengaluru में चल रही ग्लोबल चेस लीग (जीसीएल) के सीजन 4 में दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जावोखिर सिंदारोव की लगातार तीन जीत का सिलसिला रोक दिया. दूसरी ओर, भारतीय ग्रैंडमास्टर विदित Gujaratी ने डैनिल डुबोव को एक रोमांचक मुकाबले में हराया. विदित ने ... Read more
UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का सपोर्ट करे चीन, अमेरिकी अर्थशास्त्री ने उठा दी बड़ी मांग
अमेरिकी अर्थशास्त्री ने कहा कि मैं चीन से गुजारिश करता हूं कि वह यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के छठे परमानेंट मेंबर के तौर पर भारत का सपोर्ट करे। मुझे लगता है कि यह चीन के फायदे में है।
45 साल पहले Lata Mangeshkar एक फ्लॉप गाने को अमेरिका ने कॉपी कर लिया था जिसके बाद 4000 करोड़ रुपये का मुकदमा चला था। इस गाने का कॉपी सुपरहिट रहा था।
सियोल, 11 सितंबर . दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री पद के उम्मीदवार कांग शिन-चुल ने Friday को कहा कि सियोल अमेरिका से युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल बिना किसी अतिरिक्त शर्त के वापस लेना चाहता है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत “नो एडेड कंडीशंस” यानी बिना किसी नई शर्त के सिद्धांत ... Read more
अमेरिकी राजनीतिक गलियारों और प्रवासी समुदायों के बीच इन दिनों एक ऐसा विज्ञापन भारी भूचाल लेकर आया है, जिसने सत्ताधारी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) की सुगबुगाहट के बीच होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट यानी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी किया गया एक विवादित विज्ञापन अमेरिकी राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस विज्ञापन में 'मिस्टर सिंह' नाम के एक सिख पात्र को आधार बनाकर बिना लाइसेंस वाले वाणिज्यिक चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा था और उसे स्वेच्छा से देश छोड़ने का संदेश दिया जा रहा था। एआई (AI) तकनीक की मदद से तैयार की गई इस तस्वीर और उसके साथ लिखे गए आपत्तिजनक कैप्शन को लेकर मानवाधिकार समूहों, सिख संगठनों और विभिन्न अमेरिकी-भारतीय समुदायों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। चौतरफा आलोचनाओं से घिरने और चुनावी मौसम में भारतीय मूल के मतदाताओं की नाराजगी का कड़ा जोखिम भांपते हुए आखिरकार ट्रंप प्रशासन को झुकना पड़ा और विवाद बढ़ने के बाद उस नस्लवादी विज्ञापन को सोशल मीडिया से तुरंत हटा लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में प्रवासियों की भूमिका और उनके चुनावी महत्व को उजागर कर दिया है।एआई से तैयार 'मिस्टर सिंह' विज्ञापन पर मचा बवाल और मानवाधिकार संगठनों का तीखा विरोधपूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अपने 'सीबीपी होम' कार्यक्रम के व्यापक प्रचार अभियान के तहत सोशल मीडिया पर एआई जनित तस्वीरों का एक विज्ञापन साझा किया। इस विज्ञापन में एक सिख समुदाय के व्यक्ति को ट्रक चलाते हुए दर्शाया गया था, जिसके साथ अपमानजनक लहजे में लिखा गया था कि 'हमारी सड़कों से दफा हो जाओ, मिस्टर सिंह, आपको वाहन चलाना नहीं आता।' इस विज्ञापन के सामने आते ही अमेरिकी समाज के उदारवादी तबके और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने इसे खुले तौर पर नस्लवादी, भेदभावपूर्ण और अमेरिका-विरोधी करार दिया। सिख संगठनों और नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूहों का कहना था कि अमेरिका में लाखों की संख्या में सिख नागरिक निवास करते हैं, जिनके उपनाम में 'सिंह' जुड़ा होता है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'शेर' होता है। संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सिख समुदाय अपनी अनूठी पहचान, पगड़ी और संस्कृति पर गर्व करता है, और यदि देश की अपनी संघीय एजेंसियां ही एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर उनका उपहास उड़ाएंगी, तो इससे समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि 'सिंह' केवल एक नाम नहीं है, बल्कि इस देश में रहने वाले हिंदू, सिख और तमाम अमेरिकी नागरिक गर्व से गाड़ी चलाते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं। फाउंडेशन ने इस मामले की उच्च स्तरीय संघीय जांच की मांग करते हुए प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की।मध्यावधि चुनावों के मुहाने पर खड़े ट्रंप प्रशासन को सता रहा भारतीय वोटर्स के खिसकने का डरअमेरिकी राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि इस विवादित विज्ञापन को आनन-फानन में हटाए जाने के पीछे विशुद्ध रूप से राजनीतिक दूरदर्शिता और आगामी मध्यावधि चुनावों का डर काम कर रहा है। अमेरिका में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, और वहां की राजनीतिक पार्टियों के लिए हर एक मतदाता समूह का समर्थन बेहद कीमती है। हालिया चुनावी सर्वेक्षणों और आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका में रहने वाले एशियाई-अमेरिकी और विशेष तौर पर भारतीय मूल के मतदाताओं का पारंपरिक झुकाव काफी हद तक डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। हाल ही में किए गए एक प्रतिष्ठित सर्वे के अनुसार, पंजीकृत एशियाई-अमेरिकी और एएपीआई (AAPI) मतदाताओं में से 90 प्रतिशत से अधिक लोगों ने इस बार मतदान प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की इच्छा जताई है। हालांकि सर्वे में यह बात भी सामने आई थी कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही दलों ने इन मतदाताओं तक पूरी तरह से पहुंच नहीं बनाई है, लेकिन जब बात वोटिंग पैटर्न की आती है, तो भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में से लगभग 66 प्रतिशत लोगों ने यह स्पष्ट किया है कि वे प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में अपना मतदान करेंगे। ऐसे संवेदनशील समय में जब भारतीय मूल का समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीक के क्षेत्र में एक शक्तिशाली स्तंभ बन चुका है, गृह सुरक्षा विभाग द्वारा इस प्रकार का नस्लीय विज्ञापन जारी किया जाना ट्रंप सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक आत्मघाती कदम साबित हो सकता था। इसी बड़े खतरे को भांपते हुए व्हाइट हाउस ने डैमेज कंट्रोल करते हुए उस विज्ञापन को फौरन डिलीट करवा दिया।सिख संगठनों और संघों का कड़ा रुख, फेडरल एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवालइस पूरे घटनाक्रम के दौरान अमेरिका के प्रभावशाली सिख संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और प्रशासनिक मशीनरी के नस्लीय रवैये को बेनकाब किया। 'सिख कोएलिशन' ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए याद दिलाया कि ऐतिहासिक 9/11 की घटना के 25 साल बीत जाने के बाद भी आज के आधुनिक अमेरिका में सिखों को उनके विशिष्ट पहनावे, दाढ़ी और रूप-रंग के आधार पर निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसके अलावा, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस भेदभावपूर्ण पोस्ट के खिलाफ देश भर के नागरिकों को एक साथ खड़े होने का आह्वान किया और इस मामले में देश की शीर्ष हस्तियों जैसे सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को टैग करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह केवल किसी साधारण कर्मचारी की गलती नहीं है, बल्कि एक संघीय एजेंसी की ओर से की गई सोची-समझी राजनीतिक संदेशबाजी और भेदभाव का गंभीर मामला है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। गृह सुरक्षा विभाग अपने जिस 'सीबीपी होम' कार्यक्रम का प्रचार कर रहा था, उसका उद्देश्य असल में उन प्रवासियों को स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना था जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, और इसके लिए स्वैच्छिक पंजीकरण कराने वालों को यात्रा सहायता के साथ-साथ 2,600 अमेरिकी डॉलर की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया गया था। लेकिन उस अभियान के प्रचार के लिए जिस भद्दे और नस्लीय तरीके का इस्तेमाल किया गया, उसने पूरी योजना की नीयत पर ही पानी फेर दिया और प्रशासनिक अधिकारियों की संकीर्ण मानसिकता को उजागर कर दिया।चुनावी समीकरणों पर पड़ता असर और अमेरिका की बहुसांस्कृतिक पहचान की रक्षाराजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक देश में जहां दुनिया भर के विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोग एक साथ मिलकर देश के निर्माण में अपना योगदान देते हैं, वहां इस तरह की नीतियां या विज्ञापन समाज में ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। ट्रंप प्रशासन के शुरुआती दौर से ही आव्रजन नीतियों को लेकर कड़ा रुख रहा है, और अवैध प्रवासियों पर लगाम कसना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, लेकिन उस नीति को लागू करने के लिए किसी एक धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान को निशाना बनाना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। जब सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हुए और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाना शुरू किया, तब जाकर रिपब्लिकन नेतृत्व को अपनी गलती का अहसास हुआ। अमेरिका में प्रवासी भारतीय और एशियाई समुदाय अब केवल एक छोटा समूह नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिकी राजनीति, वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी क्षेत्रों के सर्वोच्च पदों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे हर चुनाव में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि जब बात उनके सम्मान और पहचान पर आई, तो प्रशासन को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि वैचारिक और राजनीतिक लड़ाइयों के बीच अब अमेरिकी मतदाता अपनी गरिमा और अधिकारों को लेकर बेहद जागरूक हो चुके हैं, और कोई भी सरकार जनभावनाओं की कीमत पर अपनी मनमानी नहीं चला सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की दुनिया में अमेरिका अपने तकनीकी वर्चस्व और सुरक्षा मानकों का दम भरता आया है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने अमेरिकी खुफिया और तकनीकी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दुनिया की दिग्गज अमेरिकी एआई कंपनियों में शुमार 'एंथ्रोपिक' (Anthropic) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने इस बात का पर्दाफाश किया है कि यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोही अमेरिका में बने आधुनिक एआई मॉडल का इस्तेमाल खतरनाक हथियार और मिसाइलें बनाने के लिए कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों की एक गुप्त हथियार इंजीनियरिंग सेल ने एंथ्रोपिक के लोकप्रिय एआई मॉडल 'क्लाउड' (Claude) का उपयोग करके लंबी दूरी की मिसाइलों और गाइडेड रॉकेट के लिए उन्नत गाइडेंस सॉफ्टवेयर विकसित करने का काम किया है। अमेरिका के अपने ही अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल उसके कट्टर विरोधियों द्वारा हथियार निर्माण में किए जाने की इस घटना ने तकनीकी जगत में सुरक्षा और दुरुपयोग के खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे पूरी दुनिया में यह सवाल उठने लगा है कि क्या एआई तकनीक अब आतंकवादियों और विद्रोही संगठनों के हाथ का खिलौना बनती जा रही है।एंथ्रोपिक की रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: क्लाउड एआई से बना मिसाइल सॉफ्टवेयरप्रसिद्ध एआई कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा गुरुवार को जारी की गई अपनी एक विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि उसने चीन, रूस और यमन में चल रहे ऐसे छह बड़े ऑपरेशनों को समय रहते बाधित किया है, जहां उसके 'क्लाउड' मॉडल का गलत इस्तेमाल पारंपरिक हथियारों के विकास, खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य हार्डवेयर की खरीद के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के युद्धग्रस्त इलाके में सक्रिय हूतियों की एक तकनीकी सेल ने क्लाउड का इस्तेमाल मानव सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के विकल्प के रूप में किया। इस समूह ने उड़ने वाले सैन्य वाहनों और मिसाइलों के लिए गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सॉफ्टवेयर को डिजाइन करने में एआई की मदद ली। एआई का यह दुरुपयोग इस बात का प्रमाण है कि कैसे जटिल प्रोग्रामिंग और कोडिंग की जो क्षमता पहले केवल उच्च प्रशिक्षित इंजीनियरों के पास होती थी, उसे अब अत्याधुनिक एआई टूल्स की मदद से बेहद आसानी से हासिल किया जा रहा है। हूती विद्रोही, जिन्हें ईरान से हर प्रकार की सामरिक और कूटनीतिक सहायता मिलती रही है, इस तकनीक का उपयोग करके अपनी सैन्य मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने की फिराक में थे, ताकि वे लाल सागर और खाड़ी देशों में अपने रणनीतिक प्रभुत्व को और अधिक मजबूत कर सकें।2000 किलोमीटर से अधिक रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक तकनीक पर कामएंथ्रोपिक की इस चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि यमन में सक्रिय इस हूती हथियार सेल का दायरा कितना बड़ा और खतरनाक था। यह समूह केवल छोटे-मोटे हथियारों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह कई अत्यंत जटिल मिसाइल कार्यक्रमों पर एक साथ काम कर रहा था। इनमें एक मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल थी, जिसकी लक्षित मारक क्षमता या रेंज 2,000 किलोमीटर से अधिक आंकी गई थी। इसके अतिरिक्त, यह समूह एक अन्य उन्नत मिसाइल प्रणाली पर भी शोध कर रहा था, जिसे 'R2000' सेट के नाम से जाना जाता है, और इसमें अत्याधुनिक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का एक विशेष वेरिएंट भी शामिल था। हालांकि, एंथ्रोपिक ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि भले ही इस समूह ने एआई की मदद से डिजाइनिंग और कोडिंग का काम तेजी से किया हो, लेकिन कंपनी को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि इस सेल ने इन डिज़ाइनों के आधार पर सफलतापूर्वक कोई पूरी तरह से ऑपरेशनल और विनाशकारी हथियार मैदान में उतार लिया हो। इसके बावजूद, इतनी लंबी रेंज की मिसाइल प्रणालियों और हाइपरसोनिक तकनीक के विकास में एआई का यह उपयोग इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि पारंपरिक युद्धक तकनीक अब किस तेजी से गैर-राज्य अभिनेताओं (Non-state actors) के हाथों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।एआई की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने की शातिर तकनीक और कोडिंग का अनूठा तरीकाहूती विद्रोहियों की इस तकनीकी सेल ने अमेरिकी कंपनी के एआई मॉडल से काम निकलवाने के लिए बेहद शातिर और सुनियोजित तरीके अपनाए। रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह ने एंथ्रोपिक की सुरक्षा प्रणालियों (Safety Guardrails) और फिल्टर को बार-बार चकमा देने की कोशिश की। उन्होंने अपने खतरनाक इरादों और हथियारों के विकास के असली उद्देश्य को पूरी तरह से छिपाकर रखा। अपनी बातचीत और प्रॉम्प्ट्स को कई अलग-अलग छोटे सत्रों (Sessions) में बांटा ताकि किसी भी एक सिंगल चैट से उनके पूरे हथियार कार्यक्रम की मंशा स्पष्ट रूप से सामने न आ सके। हालांकि एंथ्रोपिक की सुरक्षा व्यवस्था ने इनमें से कई संदिग्ध अनुरोधों को बीच में ही ब्लॉक कर दिया, लेकिन इसके बावजूद वे कई सुरक्षा दीवारों को पार करने में सफल रहे। हैरानी की बात यह है कि यह समूह एक साथ 'क्लाउड' के कई अलग-अलग इंस्टेंस का इस्तेमाल कर रहा था, जिन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। उदाहरण के लिए, एक इंस्टेंस का उपयोग मुख्य कोडिंग लिखने के लिए किया जाता था, दूसरे का तकनीकी रिसर्च के लिए, और तीसरे का पहले इंस्टेंस द्वारा तैयार किए गए कोड की सटीकता की समीक्षा करने के लिए किया जाता था। इस तरह वे एआई को ही अपना वर्चुअल सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाकर अपनी कमियों को दूर कर रहे थे।गाइडेड रॉकेट का विफल परीक्षण और एंथ्रोपिक द्वारा की गई सख्त कार्रवाईजांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस हूती सेल ने एआई की मदद से तैयार किए गए साजो-सामान के आधार पर एक गाइडेड रॉकेट का प्रायोगिक परीक्षण (Test) भी किया था, हालांकि वह परीक्षण सफल होता हुआ दिखाई नहीं दिया और असफल हो गया। तकनीक और विज्ञान की दुनिया की विडंबना देखिए कि उस परीक्षण के विफल होने के कुछ ही घंटों बाद, वह समूह दोबारा एंथ्रोपिक के 'क्लाउड' मॉडल के पास पहुंचा और उससे यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर उनके द्वारा किए गए प्रयोग में तकनीकी रूप से क्या गलती रह गई थी, जिसके कारण रॉकेट फेल हो गया। जैसे ही एंथ्रोपिक को अपनी प्रणाली के इस तरह के खतरनाक और अनधिकृत इस्तेमाल की भनक लगी, कंपनी ने तुरंत त्वरित कार्रवाई करते हुए इस ऑपरेशन से जुड़े सभी यूजर अकाउंट्स को हमेशा के लिए प्रतिबंधित (Ban) कर दिया। इसके साथ ही, कंपनी ने इस पूरी घटना से जुड़ी संवेदनशील तकनीकी जानकारियां और डिजिटल सबूत तुरंत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अपने सुरक्षा साझेदारों के साथ साझा किए। कंपनी की आंतरिक जांच में यह भी पता चला कि इस समूह ने अपने पास पहले से ही एक ऐसा ऑफलाइन सिमुलेशन टूलकिट भी तैयार कर रखा था, जो क्लाउड या अन्य इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर जैसे कि एम MATLAB पर पूरी तरह निर्भर नहीं था, जिससे यह साबित होता है कि वे अपनी तकनीक को स्वतंत्र रूप से भी विकसित करने की क्षमता जुटा रहे थे।हथियारों के विकास से आगे जैविक अनुसंधान और भविष्य के गंभीर खतरेयह पूरा मामला केवल पारंपरिक मिसाइलों और हथियारों के विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एंथ्रोपिक ने अपनी इस व्यापक जांच के दौरान संभावित रूप से खतरनाक और संवेदनशील जैविक अनुसंधान (Biological Research) से जुड़े कई अन्य मामलों की भी गंभीर पहचान की है। कंपनी की सुरक्षा टीमों ने पाया कि इसी अवधि के दौरान बर्ड फ्लू, चिकनगुनिया, ऑर्थोपॉक्सवायरस और विभिन्न प्रकार के घातक टॉक्सिन से संबंधित गतिविधियों पर भी एआई के माध्यम से शोध करने के प्रयास किए गए थे। कंपनी ने महज 30 दिनों की एक छोटी अवधि में ऐसे करीब 35 अलग-अलग शोध प्रयासों की पहचान की, जो संभावित रूप से वैश्विक जैव-सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकते थे। हालांकि, एंथ्रोपिक ने यह स्पष्ट किया कि वह यह पूरी तरह से निश्चित नहीं कर सकी कि इन मामलों में शामिल लोगों का उद्देश्य स्पष्ट रूप से कोई जैविक नुकसान पहुंचाना था या वे किसी वैध चिकित्सा वैज्ञानिक शोध का हिस्सा थे। फिर भी, एक मामले में चिकनगुनिया वायरस की संक्रमण क्षमता और मानव इम्यून सिस्टम से बचने की उसकी ताकत पर 'गेन-ऑफ-फंक्शन' रिसर्च के लिए ग्रांट आवेदन तैयार करने में मदद ली जा रही थी, तो दूसरे मामले में यह अध्ययन किया जा रहा था कि बर्ड फ्लू वायरस स्तनधारियों के शरीर के अनुकूल कैसे ढलते हैं। इन तमाम घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अभूतपूर्व ताकत जहां एक तरफ मानवता के लिए वरदान साबित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ इसका गलत हाथों में पड़ना दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त और अचूक नियमों की बेहद सख्त जरूरत है।
जेडी वेंस की रैली में हंगामा, प्रदर्शनकारी को दिया मेक्सिको जाने का ऑफर
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीति में इन दिनों चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों को लेकर चल रही सियासी गहमागहमी के बीच एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक चुनावी रैली को संबोधित करने के दौरान उस वक्त गुस्से से भड़क उठे, जब भीड़ के बीच से एक प्रदर्शनकारी ने अचानक व्यवधान पैदा करना शुरू कर दिया। डलास शहर में रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली में बोलते हुए जेडी वेंस देश के भविष्य, अर्थव्यवस्था और नीतियों पर अपनी बात रख रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने मेक्सिको और फिलिस्तीन के झंडे हवा में लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित और तीखी परिस्थिति में अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने अपना आपा खोने के बजाय बेहद तंज भरे और कड़े अंदाज में उस प्रदर्शनकारी को लताड़ लगाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। इस घटना ने एक बार फिर अमेरिका में आव्रजन, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक असहिष्णुता के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा कर दिया है, जिस पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।डलास की रैली में फिलिस्तीनी और मेक्सिकन झंडों के साथ हुआ जमकर हंगामाअमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डलास में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल चुनावी सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) अभियान को धार देने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहुंचे थे। वह अमेरिका के आर्थिक भविष्य, मजबूत सीमाओं और राष्ट्रीय अस्मिता पर अपने विचार रख रहे थे, तभी दर्शक दीर्घा में मौजूद एक उपद्रवी प्रदर्शनकारी ने खलल डालना शुरू कर दिया। उस प्रदर्शनकारी ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते हुए चिल्लाना शुरू किया कि 'जोर से कहो, खुलकर कहो, डोनाल्ड ट्रंप का यहां स्वागत नहीं है।' इसके साथ ही उसने अपने हाथों में मेक्सिको और फिलिस्तीन के झंडे थाम रखे थे, जिन्हें वह लगातार लहरा रहा था। अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में इस तरह के प्रदर्शन अक्सर ध्रुवीकरण को बढ़ाते हैं, और इस बार भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, मौके की नजाकत को भांपते हुए सुरक्षा बलों और पुलिस ने तुरंत तत्परता दिखाई और उस प्रदर्शनकारी को धर दबोचा। पुलिस ने उसे आयोजन स्थल से घसीटते हुए बाहर का रास्ता दिखाया, लेकिन इस पूरी कार्रवाई के दौरान जो जुबानी जंग उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उस प्रदर्शनकारी के बीच हुई, उसने वहां मौजूद हजारों समर्थकों का पूरा ध्यान खींच लिया और रैली का माहौल पूरी तरह से गरमा गया।'मेक्सिको इतना ही पसंद है, तो वहीं चले जाओ, टिकट मैं खरीद दूंगा' - जेडी वेंसजब सुरक्षाकर्मी उस प्रदर्शनकारी को बाहर निकाल रहे थे, तो मंच से माइक पर बोल रहे जेडी वेंस ने तंज कसते हुए उसे सीधे तौर पर संबोधित किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बेहद आक्रामक और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, मेरे दोस्त, अगर तुम्हें मेक्सिको इतना ही पसंद है, तो तुम्हें वहीं चले जाना चाहिए। मैं व्यक्तिगत रूप से तुम्हारे लिए हवाई जहाज का टिकट खरीद दूंगा। वेंस के मुंह से यह तीखा और दो टूक बयान निकलते ही डलास की उस विशाल रैली में मौजूद हजारों समर्थकों ने तालियां बजाकर और शोर मचाकर उनका जोरदार समर्थन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस का यह अंदाज अमेरिकी मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को बहुत पसंद आता है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीयता के मुद्दों पर बेहद सख्त रुख रखते हैं। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले जेडी वेंस को भविष्य में ट्रंप का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है, और उनका यह आक्रामक तेवर पार्टी के कट्टर समर्थकों में एक नया जोश भर देता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में वैचारिक मतभेद अब किस हद तक तीखे होते जा रहे हैं, जहां चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की नाटकीय घटनाएं आम बात बन गई हैं।मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की जीत के लिए अमेरिकी जनता से जोरदार अपीलविवाद और हंगामे के इस वाकया के बाद जेडी वेंस ने अपने भाषण का रुख वापस देश के गंभीर मुद्दों और आगामी मिडटर्म चुनावों की ओर मोड़ा। उन्होंने वहां मौजूद अमेरिकी नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस साल नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में भारी संख्या में बाहर निकलें और रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में मतदान करें। वेंस ने देश की महान विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने उन्हें यह देश एक विरासत के रूप में सौंपा है, और इससे पहले उनके पुरखों ने इसे सहेज कर रखा था। हमें अपनी राष्ट्रीय नागरिकता का यह अधिकार विरासत में मिला है, जिसकी रक्षा के लिए हमें एकजुट होकर लड़ना होगा। इस वैचारिक लड़ाई को जीतने और अमेरिका को आर्थिक रूप से फिर से पटरी पर लाने के लिए रिपब्लिकन पार्टी को जिताना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पूरी पार्टी की शुरुआत से ही अमेरिका की 'बर्थराइट सिटीजनशिप' यानी जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने के नियमों के खिलाफ बेहद सख्त राय रही है। रिपब्लिकन नेताओं का यह दावा रहा है कि विदेशी लोग जानबूझकर अमेरिका में आकर अपने बच्चों को जन्म देते हैं, जिससे उनके बच्चों को स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, और इस नीति का देश की डेमोग्राफी तथा अर्थव्यवस्था पर गलत असर पड़ता है।डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव: रिपब्लिकन पार्टी की जीत पर हर वयस्क को मिलेंगे 5000 डॉलरडलास की इसी बहुचर्चित चुनावी रैली के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा आर्थिक ऐलान भी किया, जिसने अमेरिकी नागरिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ट्रंप ने वादा किया कि यदि आगामी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को पूर्ण बहुमत और जीत हासिल होती है, तो उनकी सरकार देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक को 5000 अमेरिकी डॉलर की नकद राशि प्रदान करेगी। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि उनके प्रशासन द्वारा हाल ही में लिए गए कड़े और साहसिक व्यापारिक फैसलों की बदौलत अमेरिकी खजाने और अर्थव्यवस्था को भारी मुनाफा हुआ है। इसी मुनाफे के एक हिस्से को सीधे तौर पर देश के आम नागरिकों के बीच साझा करने के लिए यह योजना बनाई गई है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह 5000 डॉलर वाला मास्टरस्ट्रोक मिडटर्म चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति और आर्थिक दबाव से जूझ रहे आम अमेरिकी मतदाताओं के लिए यह एक बहुत बड़ा प्रलोभन साबित हो सकता है। एक तरफ जहां जेडी वेंस रैलियों में राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा और आव्रजन नीतियों पर कड़े प्रहार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप का यह आर्थिक पैकेज रिपब्लिकन पार्टी की जीत की संभावनाओं को और अधिक मजबूत करता दिखाई दे रहा है, जिससे अमेरिका का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म है।
अमेरिका के जी-7 पर दिल्ली से व्लादिमीर पुतिन का तीखा तंज- ब्रिक्स के मुकाबले आधे से भी कम जीडीपी
पुतिन ने कहा किपिछले पांच सालों में दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा GDP BRICS देशों से आ चुकी है, जबकि तथाकथित G7 की हिस्सेदारी सिर्फ 29 फीसदी के करीब चल रही है. मुझे नहीं पता कि वे इसे ग्रुप ऑफ सेवन क्यों कहते हैं.
अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया एक विज्ञापन विवादों में घिर गया है। अमेरिकी सरकार की इस एजेंसी पर भारतीय-अमेरिकियों, सिखों और हिंदू समुदाय को निशाना बनाने तथा नस्लभेदी विचार फैलाने के आरोप लगे हैं। चौतरफा विरोध और नेताओं के कड़े एतराज के बाद आखिरकार विभाग को यह विवादित पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटानी पड़ी। वहीं, पोस्टर में पंजाबी और सिख समुदाय को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाने की अपील की है। क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विवाद? दरअसल, अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग सड़कों पर बिना लाइसेंस या बिना वैध दस्तावेजों के व्यवसायिक वाहन (जैसे ट्रक और बसें) चलाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ एक अभियान चला रहा था। इस अभियान के तहत विभाग ने सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार की गई कुछ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे। विवादित टैगलाइन: एक तस्वीर में भूरी दाढ़ी वाले एक व्यक्ति को दिखाया गया था, जिस पर लिखा था - हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता मिस्टर सिंह। 'ट्रांसफॉर्मर्स' के किरदारों का इस्तेमाल: अभियान को प्रचारित करने के लिए मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'ट्रांसफॉर्मर्स' के पात्रों का सहारा लिया गया। वीडियो में फिल्म के खलनायक 'मेगाट्रॉन' को दिखाया गया, जो सड़क हादसों और अपराधों में शामिल रहे कुछ ड्राइवरों (जिनमें हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार और जसवीर सिंह जैसे नाम शामिल थे) की रिहाई की मांग कर रहा था। एक अन्य तस्वीर में हीरो 'ऑप्टिमस प्राइम' को DHS का लोगो पहने दिखाया गया, जो दाढ़ी वाले व्यक्ति से कह रहा था- या तो खुद देश छोड़ दो (सेल्फ-डिपोर्ट), या अंजाम भुगतने को तैयार रहो। 'सेल्फ-डिपोर्टेशन' स्कीम से जुड़ा था अभियान यह पूरा विज्ञापन अमेरिकी सरकार के 'सीबीपी होम' नाम के एक विशेष कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। इस कार्यक्रम के तहत बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को अपनी मर्जी से अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सरकार ऐसे लोगों को देश छोड़ने के लिए यात्रा का खर्च और 2,600 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.15 लाख रुपए) का बोनस देने की पेशकश करती है। विवाद पर किसने क्या कहा? विज्ञापन में 'सिंह' सरनेम और दाढ़ी वाले व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने पर अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के संगठनों तथा राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी: गवर्नर गेविन न्यूसम (कैलिफोर्निया):उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक करार देते हुए कहा कि सरकार सिख समुदाय को निशाना बनाकर नस्लवादी दुष्प्रचार कर रही है। कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति (भारतीय-अमेरिकी सांसद): उन्होंने कहा कि अमेरिका में 1 लाख 60 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जिनका सरनेम 'सिंह' है। जब कोई सरकारी एजेंसी किसी खास सरनेम का मजाक उड़ाती है, तो इससे विदेशियों के प्रति नफरत बढ़ती है और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF): संगठन ने कहा कि 'सिंह' सरनेम वाले लोग हिंदू भी हैं, सिख भी हैं और सच्चे अमेरिकी भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सरकारी एजेंसी भारत-विरोधी और नस्लवादी सोच को बढ़ावा कैसे दे सकती है? संगठन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सिख कोएलिशन : सिख संगठन ने दुख जताते हुए कहा कि 9/11 की घटना के 25 साल बीत जाने के बाद भी सिखों को उनके पहनावे और पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा है और संदिग्ध नजरों से देखा जा रहा है। CoHNA (नॉर्थ अमेरिका के हिंदू संगठन): ने कहा कि कानून का पालन कराया जाना चाहिए, लेकिन किसी की पहचान या नाम का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले लोग किसी भी धर्म या जाति के हो सकते हैं। विज्ञापन हटने के बाद भी गुस्सा बरकरार चौतरफा दबाव और जनता के गुस्से को देखते हुए गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने विज्ञापन को सोशल मीडिया से डिलीट तो कर दिया है, लेकिन सिख और हिंदू संगठनों का कहना है कि केवल पोस्ट हटा देना काफी नहीं है। संगठनों की मांग है कि सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी समुदाय की पहचान को इस तरह गलत और नस्लवादी तरीके से पेश न किया जाए। धामी बोले-अमेरिका के विकास में पंजाबियों का अहम योगदान एडवोकेट धामी ने कहा कि अमेरिका के विकास और आर्थिक तरक्की में पंजाबियों ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और हुनर से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ट्रकिंग समेत कई क्षेत्रों में सिख और पंजाबी अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़े हैं और अमेरिकी समाज की सेवा कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के पोस्टर में विशेष रूप से ‘मिस्टर सिंह’ का उल्लेख कर पंजाबी और सिख समुदाय को निशाना बनाना नस्ली और सामुदायिक पक्षपात वाली सोच को दर्शाता है। विकसित देश के लिए इस तरह की सोच चिंताजनक है। धामी ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से अपील की कि सिख समाज के प्रति इस तरह के कथित भेदभावपूर्ण और आपत्तिजनक व्यवहार का मामला अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाया जाए।
लता मंगेशकर के इस गाने की हुई थी चोरी, अमेरिकी सिंगर को देना पड़ा था 4000 करोड़ का हर्जाना
क्या आप जानते हैं लता मंगेशकर का एक आईकॉनिक सॉन्ग अमेरिकी रैपर को इतना पसंद आया कि उसने इसको कॉपी कर गाना बना दिया और बिना इजाजत।
मिस्टर सिंह अमेरिका छोड़ दो नहीं तो अंजाम भुगतो। अमेरिका की यह धमकी क्या सिर्फ भारतीयों के लिए है? जिस अमेरिका को पीएम मोदी अपना दोस्त कहते हैं। क्या वो भारतीयों को निशाना बनाने में जुट गया है? क्या ट्रंप सभी भारतीयों को अमेरिका से बाहर निकालने का प्लान बना रहे हैं? ट्रंप सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कारवाई करते हुए सीधे भारतीयों को निशाना बनाया। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग यानी कि डीएचएस ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में एक भारतीय मूल के व्यक्ति को दिखाया गया और उसे मिस्टर सिंह कहकर अमेरिका छोड़ने की चेतावनी दी गई। पोस्ट में लिखा था सेल्फ डिपोर्ट और फाइंड आउट यानी खुद अमेरिका छोड़ दो वरना अंजाम भुगतो। लेकिन विवाद सिर्फ इस लाइन को लेकर नहीं हुआ। पोस्ट में आगे लिखा गया गेट ऑफ आवर रोड्स यू डोंट नो हाउ टू ड्राइव मिस्टर सिंह। यानी कि मिस्टर सिंह हमारी सड़कों से हट जाओ। तुम्हें गाड़ी चलानी नहीं आती। इसके बाद डीएचएस ने एक वीडियो भी पोस्ट किया। इसे भी पढ़ें: Paris में फ्रांस के पहले पारंपरिक BAPS मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न, श्रद्धालुओं के लिए खुला द्वार भारतीय मूल के दंपती ने 2 करोड़ डॉलर दिए भारतीय मूल के अनुराधा और विकास सिन्हा ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सस को 20 मिलियन डॉलर दान दिए है। उनके सम्मान में यूनिवर्सिटी नया 'अनुराधा एड विकास सिन्हा कॉलेज ऑफ आर्टिफिशल इंटेलिजेस एड अडवास्ड एनालिटिक्स' बनाएगी। दोनो भारत में सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे। विकास ब्रॉडकॉम में वरिष्ठ अधिकारी है। इसे भी पढ़ें: Bangladesh Politics: अल्पसंख्यक नहीं, हम सब बांग्लादेशी हैं, Janmashtami पर बोले PM Tarique Rahman हिंदू अमेरिकन संगठन ने बताया नस्लवादी हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन यानी एचएएफ ने डीएचएस पर आरोप लगाया कि सिंह सरनेम का इस्तेमाल करके भारतीयों और सिखों को निशा निशाना बनाया गया है। संगठन का कहना है कि सिख सिर्फ सिख ही नहीं लगाते सिंह बल्कि बड़ी संख्या में भारतीयों का सरनेम है यह और अमेरिका में सिख सरनेम वाले लोग अमेरिकी समाज का हिस्सा हैं। एचएफ ने इस पोस्ट को नस्ल भेदी और अमेरिका विरोधी बताया और कहा कि एक सरकारी एजेंसी की तरफ से इस तरह का पोस्ट किया जाना बहुत ही गंभीर मामला है। संगठन ने इसकी जांच की भी मांग की है। सिख कोलेशन ने भी इस पोस्ट की आलोचना की।
अमेरिका के बाहर UAE में बन रहा था सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर, ईरान हमलों के बाद प्लान में बदलाव: सूत्र
इस प्रोजेक्ट के पहले चरण - 'स्टारगेट UAE' नाम के 30 अरब डॉलर के 1-गीगावाट कंप्यूट क्लस्टर - का कंस्ट्रक्शन पिछले साल शुरू हुआ था और इसकी पहली 200 मेगावाट क्षमता इस साल चालू होने वाली है.
नीम करोली बाबा का 'दास' अमेरिकी सिंगर, 'हनुमान अंश' में गाए भजन
Hanuman Ansh में अमेरिकी सिंगर कृष्ण दास का खास कनेक्शन है. कभी रॉक म्यूजिक से जुड़े कृष्ण दास नीम करोली बाबा के भक्त बने और अब फिल्म में उनके भजन सुनाई दे रहे हैं.
'मेक्सिको चले जाओ, टिकट करा दे रहा', चुनावी रैली में भड़क गए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक चुनावी रैली के दौरान एक प्रदर्शनकारी को लताड़ लगाई है। मेक्सिको और फिलिस्तीन का झंडा फहरा रहे प्रदर्शनकारी से वेंस ने कहा कि अगर उसे मेक्सिको इतना ही पसंद है, तो वह वहां जा सकता है। उसे टिकट दे दिया जाएगा।
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अमेरिका हमेशा आतंकवाद के खिलाफ खड़ा रहेगा।
भारत क्या चीन के मामले में अमेरिका के लिए अब उपयोगी देश नहीं रहा? - BBC
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भारत क्या चीन के मामले में अमेरिका के लिए अब उपयोगी देश नहीं रहा?
अमेरिका के लिए भारत से संबंधों में सेलिंग पॉइंट मुख्य रूप से यही था कि 'चीन से मुक़ाबले के लिए भारत ज़रूरी है. लेकिन अब चीज़ें तेज़ी से बदल रही हैं. ट्रंप इस सोच से लगभग बाहर निकल चुके हैं.
अमेरिका में ₹1.9 लाख और भारत में सीधे ₹3 लाख! ये है iPhone के महंगा होने की असली वजह
अमेरिका में करीब 1.9 लाख रुपये वाला iPhone Duo भारत में 2,99,900 रुपये का क्यों है? इसके पीछे सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि इंपोर्ट ड्यूटी, मैन्युफैक्चरिंग, करेंसी और Apple की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी जैसी कई वजहें हैं। आइए उन्हें समझते हैं।
भारतीयों को बाहर निकालो, भारत की कंपनी बैन कर दो; अमेरिका में इतनी नफरत क्यों?
‘मिस्टर सिंह’ नाम के साथ पोस्टर जारी करना, भारत की कंपनियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और अब एच1 बी वीजा पर कड़े नियमों का प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से किया गया है। खास बात है कि इन सभी कदमों से भारतीय खासे प्रभावित हो रहे हैं।
ईरान के साथ अमेरिका की जंग 2029 तक जारी रह सकती है, ऐसी संभावना क्यों है? - BBC
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ईरान के साथ अमेरिका की जंग 2029 तक जारी रह सकती है, ऐसी संभावना क्यों है?
यह आकलन युद्ध के जल्दी खत्म होने के बारे में ट्रंप की ओर से बार-बार दिए गए सुझावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है.
सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘अमेरिका में संघ को विरोध से अधिक समर्थन मिला’
भुवनेश्वर में आयोजित ‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी से पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके संपादित अंश सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के अमेरिका प्रवास के दौरान कुछ लोगों और संगठनों ने संघ के विषय में विवाद […]
जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिकी एडल्ट्स को $5000 देने के वादे की तुलना तमिलनाडु की चुनावी राजनीति से कर दी है। वेम्बू ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति असल में भारत के तमिलनाडु की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की नकल कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने लिखा कि हमने इसका आविष्कार तमिलनाडु में किया और इसे पूरे भारत में फैलाया। राष्ट्रपति ट्रंप DMK की नकल कर रहे हैं।क्या है डोनाल्ड ट्रंप का $5000 ट्रम्प डिविडेंड वादा?श्रीधर वेम्बू का यह कमेंट डोनाल्ड ट्रंप के उस चुनावी वादे के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर अपना कंट्रोल बनाए रखती है, तो वह हर अमेरिकी एडल्ट को $5000 भेजेंगे। ट्रंप के वादे को ट्रंप डिविडेंड नाम दिया गया है।1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की लागत और भारी घाटाट्रंप के इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी और इससे 1 ट्रिलियन डॉलर (1 खरब डॉलर) से अधिक का खर्च आ सकता है। यह स्थिति तब है जब अमेरिका पहले से ही लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर के एनुअल बजट घाटे का सामना कर रहा है और उसका नेशनल कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है। ट्रंप ने सुझाव दिया है कि टैरिफ से मिलने वाले रेवेन्यू की मदद से अमेरिकी लोगों को ये पैसा दिया जाएगा। वैसे रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने जितने का वादा कर दिया है वो टैरिफ से आने वाले रेवेन्यू से भी ज्यादा बैठ रहा है।इस पर 'कमिटी फॉर ए रिस्पॉन्सिबल फेडरल बजट' के सीनियर पॉलिसी डायरेक्टर मार्क गोल्डवेन ने कहा कि ट्रंप कांग्रेस की मंजूरी के बिना यह भुगतान नहीं कर सकते। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब सरकार पहले से ही बड़े बजट घाटे में चल रही है तो ऐसे में डिविडेंड शब्द का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।आपको बता दें कि श्रीधर वेम्बू द्वारा DMK का जिक्र तमिलनाडु के दशकों पुराने राजनीतिक इतिहास को ध्यान में रखकर किया गया है। तमिलनाडु में वेलफेयर स्कीम्स को चुनावी राजनीति के साथ जोड़ने का इतिहास काफी पुराना है। यहां 1950 और 1960 के दशक में मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में के कामराज ने मुफ्त शिक्षा का विस्तार किया और स्कूली बच्चों के लिए मिड डे मील स्कीम शुरू की थी।1967 के विधानसभा चुनाव में DMK के संस्थापक सीएन अन्नादुरई ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए रियायती दरों पर चावल देने का वादा किया था। DMK ने यह चुनाव जीता और इस योजना को लागू किया। बाद में फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से इसे सीमित करना पड़ा। 2006 के चुनाव में एम करुणानिधि की अगुवाई वाली DMK ने मुफ्त कलर टीवी, रियायती चावल, गैस चूल्हे और अन्य लाभ देने का वादा किया। इसी तरह 2011 के चुनाव में ये कंपीटिशन और तेज हो गया। तब DMK और AIADMK दोनों ने मिक्सर, ग्राइंडर, पंखे और लैपटॉप जैसे घरेलू सामान देने के वादे किए।तमिलनाडु से निकलकर पूरे भारत में फैला यह मॉडलतमिलनाडु से शुरू हुआ यह मॉडल बाद में देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया। आम आदमी पार्टी ने 2015 में दिल्ली चुनाव प्रचार में मुख्य रूप से सब्सिडी वाली बिजली और मुफ्त पानी का वादा किया था। इसके बाद से भारत भर के राजनीतिक दलों ने मुफ्त बिजली, लोन माफी, मुफ्त सार्वजनिक परिवहन, कैश स्कीम, लैपटॉप और दूसरे डायरेक्ट फायदे देने शुरू कर दिए.ट्रंप के पुराने वादे: DOGE डिविडेंड और टैरिफ रिफंडऐसा नहीं है कि ट्रंप कोई पहली बार कुछ इस तरह का वादा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने एलन मस्क के डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) द्वारा की गई बचत को जनता में बांटने के लिए DOGE डिविडेंड का प्रचार किया था। इसके अलावा उन्होंने टैरिफ रिफंड का विचार भी पेश किया था। इसमें सुझाव दिया गया था कि इंपोर्ट फी से मिलने वाले रेवेन्यू को अंततः जनता को लौटाया जा सकता है।
Indian-American कपल ने University of Houston को 40 लाख डॉलर किए दान
(सीमा हाकू काचरू)ह्यूस्टन, 11 सितंबर भारतीय-अमेरिकी दंपति ने इंजीनियरिंग अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ह्यूस्टन विश्वविद्यालय को 40 लाख डॉलर का दान दिया है। विश्वविद्यालय ने बताया कि ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को दिए गए इस दान से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में दो स्थायी प्रोफेसर पद, शिक्षकों के शोध के लिए कोष, स्नातक छात्रों के लिए फेलोशिप और एक संगोष्ठी श्रृंखला स्थापित की जाएगी। भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर मनमोहन सिंह कलसी और उनकी पत्नी मैरी-लुइस शूबर्ट कालसी ने शोध और शिक्षा के विस्तार के उद्देश्य से यह राशि दान की है। कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रदीप शर्मा ने कहा, ‘‘ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के स्नातक छात्र से लेकर उद्योग जगत के नवोन्मेषक और उद्यमी तक मनमोहन कलसी की यात्रा कुलेन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है।’’यह योगदान इस दंपति के विश्वविद्यालय के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत करता है। मनमोहन कलसी ने ह्यूस्टन विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में परास्नातक और पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने दिवंगत प्रोफेसर गैब्रियल फाजेकास के मार्गदर्शन में अध्ययन किया था। वर्ष 1978 में उन्होंने हाइड्रोडायनेमिक रोटरी सीलिंग तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी कलसी इंजीनियरिंग की स्थापना की थी। इस दंपति ने इससे पहले 2014 में भी कॉलेज में एक स्थायी प्रोफेसर पद के लिए आर्थिक सहयोग दिया था, जिसे प्रोफेसर फाजेकास की स्मृति में स्थापित किया गया था।
‘मिस्टर सिंह, सड़कों से हट जाओ’—अमेरिका का विवादास्पद विज्ञापन वापस, क्यों भड़के हिंदू-सिख संगठन?
अमेरिका में हिन्दू व सिख संगठनों के विरोध के चलते वहां की सरकार को एक विज्ञापन वापिस लेना पड़ा है। इस विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ से अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया था। वहां के गृह सुरक्षा विभाग ने बिना लाइसेंस वाहन चलाने वाले लोगों के खिलाफ यह अभियान शुरू किया था। इसी अभियान के […]
US Strategic Petroleum Reserve: अमेरिका तेल को जमीन के नीचे क्यों रखता है? जानें नमक की गुफाओं का राज
कच्चे तेल में भयंकर आग: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच 116 डॉलर हुए इंडियन बास्केट पर दाम
अमेरिकी ईरान युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई। ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल पार हो गया तो WTI क्रूड भी 103 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल हुई।
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
अमेरिका का ड्रग तस्करी वाली नाव पर हमले का दावा, देखें US Top-10
अमेरिकी दक्षिणी कमांड ने कैरेबियन में ड्रग तस्करी से जुड़े एक तेज रफ्तार जहाज पर हमले का वीडियो जारी किया है. अमेरिकी सेना के मुताबिक इस कार्रवाई में 3 लोगों की मौत हो गई. वॉशिंगटन इन हमलों को नार्को टेररिस्ट के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि मानवाधिकार संगठन इसे न्यायेतर हत्याएं करार दे रहे हैं. देखें यूएस टॉप-10.
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल अमेरिका में 'जी20 ऊर्जा मंत्रियों' की बैठक में हिस्सा लेंगे
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल 14 से 16 सितम्बर 2026 तक जी20 ऊर्जा मंत्रियों की अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित बैठक में भाग लेंगे। अमेरिका की मेजबानी में आयोजित जी20 की अध्यक्षता वाली इस बैठक में जी20 सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि एकत्रित होकर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की वहनीयता, अवसंरचना विकास और सुदृढ़ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह जानकारी विद्युत मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई।
अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार ने 60 दिन की ग्रेस पीरियड खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 107 डॉलर के पार, भारत की बढ़ी चिंता; युद्ध लंबा खिंचने का भी खतरा
भारत के लिए महंगे क्रूड का असर आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। खासतौर पर अगर तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
Nepal flash flood many Americans unaccounted for after Nepal flash flood rescue operation us state department- अमेरिका: नेपाल में बाढ़ के बाद 70 अमेरिकी नागरिक अभी भी लापता, 18 बचाए गए; त्रासदी पर क्या बोला विदेश विभाग?
अमेरिकी पैरेंट्स से रिपब्लिकन को वोट देने की अपील, कैरोलिन लेविट बोली- ट्रंप अमेरिकी स्वतंत्रता के हैं रक्षक
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के परमाणु जखीरे का आकलन केवल उसके पास मौजूद प्लूटोनियम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए यह भी देखना जरूरी है कि देश के पास कितने परमाणु हथियार ले जाने वाले लांचर और अन्य वितरण तंत्र मौजूद हैं।
25 Years of 9/11 How the Attack Changed the World and the US US Saw No Major Terror Attack Again
Gold- silver price Today: 11 सितंबर को इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी और US फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता थी, जिसका असर कीमती धातुओं पर पड़ा।COMEX पर सोना $4,369.40 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले क्लोज़ से $37.90 या 0.86% कम था। कॉन्ट्रैक्ट ने $4,380.70 का हाई और $4,351.30 प्रति औंस का लो छुआ।चांदी पर ज़्यादा दबाव था।COMEX पर चांदी $63.91 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी, जो $1.017 या 1.57% कम थी। सेशन का हाई $64.32 प्रति औंस और लो $63.71 प्रति औंस रहा।सोने और चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?कीमती धातुओं पर दबाव डालने वाले मुख्य कारणों में से एक कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी है। शुक्रवार (10 सितंबर) को ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के ऊपर चला गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $103 प्रति बैरल के पार पहुंच गया; इससे पहले दोनों बेंचमार्क में पिछले सेशन में 6% से ज़्यादा की बढ़त हुई थी।तेल की ऊंची कीमतें महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं और इसके चलते US मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदें मुश्किल हो सकती हैं। ऊंची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों से सोने जैसी बिना रिटर्न वाली एसेट्स का आकर्षण कम हो जाता है।आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटीज़ और करेंसीज़ की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा, तेल की कीमतों में रिकवरी से सोने पर फिर से दबाव दिख रहा है।नार्वेकर ने कहा कि सोना ज़्यादातर $4,400 प्रति औंस के आस-पास एक सीमित दायरे में रहा क्योंकि मार्केट फेड के अगले कदम पर ज़्यादा स्पष्टता का इंतज़ार कर रहा था। उन्हें उम्मीद है कि इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें $4,340 से $4,450 प्रति औंस के बीच रहेंगी, जबकि MCX पर सोना ₹1.51 लाख-₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड कर सकता है।डॉलर और ETF फ्लो से कुछ सपोर्ट मिलाकीमती धातुओं की कीमतों में यह गिरावट कुछ सपोर्टिव फैक्टर्स के बावजूद आई है। कमज़ोर US डॉलर ने हाल के सेशन में सोने को सपोर्ट किया है, जबकि गोल्ड ETF में मज़बूत इनफ्लो ने निवेशकों की मांग को बढ़ाया है। नार्वेकर ने बताया कि अगस्त में ग्लोबल गोल्ड ETF में 18 अरब डॉलर का निवेश आया, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक निवेश है। इससे ग्लोबल होल्डिंग 121 टन बढ़कर रिकॉर्ड 4,189 टन हो गई।रिद्धि-सिद्धि बुलियंस लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के प्रेसिडेंट और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि डॉलर का कमजोर होना, अमेरिका में फिस्कल चिंताएं और जियोपॉलिटिकल रिस्क सोने की कीमतों को सहारा दे रहे हैं।हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि उम्मीद से ज़्यादा अमेरिकी महंगाई दर (इन्फ्लेशन) के आंकड़े ऊंची यील्ड के ज़रिए बुलियन पर और दबाव डाल सकते हैं। कोठारी को उम्मीद है कि सोने की कीमत मोटे तौर पर 4,300-4,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहेगी और उन्होंने कहा कि अगर चांदी 67 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो इसमें और बढ़त हो सकती है।भारतीय बुलियन कीमतों के लिए कच्चा तेल अहमक्यों हैतेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय बाजारों के लिए खास तौर पर अहम है क्योंकि यह महंगाई की उम्मीदों और रुपये, दोनों पर असर डाल सकती है।लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर रुपया भारतीय महंगाई और MCX कमोडिटीज के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि डॉलर के कमजोर होने से कीमती धातुओं को सहारा मिल रहा है।10 सितंबर के अपने बाजार विश्लेषण में, गर्ग ने सोने की कीमत लगभग 4,414 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 67.50 डॉलर प्रति औंस आंकी थी, साथ ही बुलियन बाजार पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों के असर पर भी प्रकाश डाला था।ताज़ा बाजार कमेंट्री में रुपया प्रति अमेरिकी डॉलर लगभग 95.10-95.25 रुपये के आसपास था। रुपया कमजोर होने से घरेलू सोने और चांदी की कीमतों को सहारा मिल सकता है क्योंकि रुपये के हिसाब से आयातित बुलियन महंगा हो जाता है।चांदी में ज़्यादा उतार-चढ़ावसोने की तुलना में चांदी में ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है; शुक्रवार (10 सितंबर) को सोने में 0.86% की गिरावट के मुकाबले चांदी में 1.57% की गिरावट आई।Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि हालिया MCX सेशन में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया, हालांकि ओपन इंटरेस्ट में भारी गिरावट से पता चलता है कि शॉर्ट कवरिंग ने इस रैली में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि हाल के MCX सेशन में सोना ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के लेवल को टेस्ट कर रहा था, जबकि चांदी की कीमत ₹2.44-₹2.45 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास थी।सुब्बुराज के अनुसार, चांदी में काफी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है, क्योंकि बाजार की मौजूदा स्थिति खबरों और US के महंगाई के आंकड़ों से तय हो रही है।सोने और चांदी के लिए आगे क्या?कीमती धातुओं (बुलियन) के बाजार के लिए अगला बड़ा ट्रिगर US की महंगाई और फेड की पॉलिसी पर इसका संभावित असर है।महंगाई के आंकड़े ऊंचे रहने पर US बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है और सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है। दूसरी ओर, आंकड़े कम रहने पर आसान मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदें फिर से बढ़ सकती हैं और कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल सकता है।इसलिए, भारतीय निवेशकों के लिए ग्लोबल बुलियन ट्रेंड, कच्चे तेल की कीमतें, US यील्ड और रुपया - ये सभी अहम फैक्टर होंगे जिन पर नज़र रखनी होगी।फिलहाल, आउटलुक एक दायरे में रहने वाला लेकिन उतार-चढ़ाव वाला है, जिसमें सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
ट्रंप हर अमेरिकी को बांटेंगे पांच हजार डॉलर
‘ट्रंप डिविडेंड’ नाम दिया और कहा कि यह अमेरिका की ‘आर्थिक ताकत और सफलता’ की वजह से दिया जाएगा।
Explainer: भारत, चीन और रूस; दिल्ली में तीन महाशक्तियों के जुटान पर क्यों अमेरिका को होगी टेंशन
चीन के खिलाफ अमेरिका ने भारत को संतुलन की नीति साधने के लिए इस्तेमाल किया है. उसका काउंटर करने के लिए भी भारत ने चीन के साथ तनाव कम करने की कोशिश की है.
नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा! H-1B वीजा वालों के लिए ट्रंप सरकार खत्म करेगी 60 दिनों की मोहलत
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने लोगों से 60 दिनों के अंदर इस नए नियम के प्रस्ताव पर अपनी राय देने को कहा है.अगर नियम लागू होता है, तो जिन विदेशी कर्मचारियों की नौकरी वीजा खत्म होने से पहले चली जाती है, उन्हें तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा.
जब अमेरिका पर हुआ आतंकी हमला, उड़ा दिया गया था वर्ल्ड ट्रेड टावर्स
आज का इतिहास में 9/11 अटैक के लिए जाना जाता है. जब अमेरिका में भीषण आतंकी हमला हुआ था और वर्ल्ड ट्रेड टावर्स को आतंकियों ने यात्री विमान हाईजैक कर उनसे टकरा दिया था.
9/11 Anniversary: ट्विन टावर से वॉर ऑन टेरर तक, अमेरिका को मिले जख्म और साजिशों की 25 साल पुरानी कहानी?
H-1B वीजा पर अमेरिका बना रहा तगड़ा प्लान, तुरंत छोड़ना पड़ सकता है देश!
ट्रंप प्रशासन अस्थायी कार्य वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्ताव लागू हुआ तो H-1B समेत कुछ अन्य वीजा धारकों को नौकरी जाने के बाद नई नौकरी या नया स्पॉन्सर तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिन की मोहलत खत्म हो सकती है।
Agra News: अमेरिका में नन्हे आरुष का स्वर्णिम प्रदर्शन
नन्हे वुशू खिलाड़ी आरुष श्रीवास्तव ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित विश्व वुशू ओपन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर आगरा का मान बढ़ाया।
Lucknow News: अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी के मामले की जांच करेगी ईडी
अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी के मामले की जांच करेगी ईडी
अमेरिका: अवैध प्रवासी को अदालत से बाहर जाने देने के आरोप में जज पर कार्रवाई; आठ साल पुराने मामले में क्या हुआ?
अमेरिका: ट्रंप के डाक मतदान के आदेश पर अदालत की रोक बरकरार, राज्यों में भेजे जा रहे मतपत्र; आगे क्या होगा?
अमेरिका में कार के चारों टायरों को निकालकर चोरों ने छोड़ा ऐसा, पढ़कर हैरान रह जाएंगे आप
अमेरिका में कार के चारों टायरों को निकालकर चोरों ने छोड़ा ऐसा, पढ़कर हैरान रह जाएंगे आप
दार्जिलिंग, 10 सितंबर . India में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर इन दिनों दार्जिलिंग दौरे पर हैं, जहां उनकी मेजबानी राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्ष वी. श्रृंगला ने की. दोनों नेताओं की मुलाकात पहाड़ों के बीच भारत-अमेरिका दोस्ती का एक खूबसूरत उदाहरण बन गई. राज्यसभा सांसद हर्ष वी. श्रृंगला ने social media ... Read more
'मिस्टर सिंह, सड़क से हटो...', अमेरिकी सरकार के विज्ञापन में 'नफरत'?
अमेरिका के होमलैंड डिपार्टमेंट की ओर से जारी इस पोस्ट पर भारतीयों ने आपत्ति जताई है. ‘Mr Singh’ वाले इस पोस्ट पर हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कहा कि सिंह सरनेम वाले लोग हिंदू भी हैं, सिख भी हैं और अमेरिकी नागरिक भी हैं. संगठन ने DHS पर “नस्लीय और भारत विरोधी प्रोफाइलिंग” का आरोप लगाया.
एुओ एप्पल का अब तक का सबसे महंगा आईफोन है. इसके बेस मॉडल की कीमत करीब 3 लाख रुपये है, जो टॉप मॉडल तक जाते-जाते 4 लाख 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है.
ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार, अमेरिका-ईरान संघर्ष बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति पर चिंता गहराई
New Delhi, 10 सितंबर . अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में Thursday को तेज उछाल देखने को मिला और ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं गहरा गई हैं. इसके साथ ही चीन की ... Read more
अमेरिका को चुभता BRICS, भारत के लिए कितना फायदेमंद?
12 तारीख से दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। जिसमें शामिल होने के लिए रूस, चीन समेत दुनिया के कई देशों के राष्ट्र प्रमुख यहां पर आ रहे हैं। लेकिन समिट शुरू होने से पहले ब्रिक्स समिट को लेकर पी चिदंबरम ने कहा कि हालिया बैठकों से कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला। बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जरा 1947 से लेकर के 2014 तक का हिसाब भी देख लीजिए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं और 7 साल के बाद यह शी जिनपिंग का भारत दौरा होगा। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit में दिखेगी India Story की झलक, Bihar के सत्तू से Odisha की कॉफी तक MEA की खास पहल 7 साल बाद जिनपिंग का भारत आना क्या पुराने विवादों को खत्म कर देगा, सुलझा देगा? शी जिनपिंग का यह दौरा भारत और चीन के रिश्तों में आई तल्खी के बाद काफी अहम माना जा रहा है। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में भी खिंचाव देखने को मिला। अगर 12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक होती है, तो गलवान की घटना के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत होगी। इसके अलावा शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आएंगे। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ब्रिक्स समिट में क्या कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा? भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भारत की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। इसमें डर की बात है कि दिल्ली में ईरान की एंट्री और क्या यही अमेरिका की बेचैनी बढ़ा रही है। दरअसल दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाली जो ब्रिक्स समिट है पूरी दुनिया की नजर जरूर है। लेकिन सबसे ज्यादा नजर अगर किसी की है तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की। वजह साफ है ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, डॉलर से दूरी की कोशिश और भारत की मेजबानी में रूस, चीन और ईरान जैसे देशों का एक मंच पर आना। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit के लिए छावनी बनी New Delhi, 15000 जवानों और Multi-layer Security के साथ अभेद्य सुरक्षा घेरा ईरान की मौजूदगी क्या अमेरिका की टेंशन को बढ़ा रही है? हालांकि उसमें करीब 11 देश हैं। लेकिन ये जो तीन चार नाम है भारत को छोड़कर रूस, चीन, ईरान यहीं पर तो फंसी है ट्रंप की जान। ट्रंप पहले ही ब्रिक्स को लेकर कई बार नाराजगी जता चुके हैं। 100% तक टेरिफ की धमकी दे चुके हैं। दिल्ली में इस बार मंच पर ग्लोबल साउथ की बड़ी उभरती इकॉनमीज़ एक साथ होंगी। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भी वो करेगा और यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। ब्रिक्स अब सिर्फ ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना और साउथ अफ्रीका तक सीमित नहीं है। ईरान समेत कई देश इसका एक हिस्सा बन चुके हैं। यानी एक ऐसा मंच जिसकी आर्थिक और राजनीतिक पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है, स्प्रेड हो रही है। विस्तार उसका हो रहा है। यही विस्तार अमेरिका के लिए चिंता का कारण है। खासकर इसलिए भी क्योंकि ब्रिक्स के भीतर कुछ देश दुनिया को मौजूदा आर्थिक व्यवस्था जो है तो कुछ देश ऐसे हैं जो उसमें व्यवस्था में बदलाव की बात करते हैं।
भारतीय सेना और अमेरिकी सेना अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करते हुए 'एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2026' का 22वां संस्करण शुरू करेंगी। जारी जानकारी के अनुसार, इस साल की ट्रेनिंग में अलास्का के फोर्ट वेनराइट में तैनात अमेरिकी सेना के 11वें एयरबोर्न डिवीजन के आर्कटिक-ट्रेन्ड सैनिकों को भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जाएगा। इस एक्सरसाइज में 3rd मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स (3MDTF) की भागीदारी से इसे और मजबूती मिलेगी, जो इस द्विपक्षीय ढांचे में एडवांस्ड लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर और इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को शामिल करेगी। यह संयुक्त एक्सरसाइज 28 सितंबर को समाप्त होगी। बताया गया है कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी सेना प्रशांत के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल जेबी वोवेल प्रमुख ट्रेनिंग कार्यक्रमों में शामिल होंगे, जो भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है। इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान में BLA का भीषण तांडव, 28 ऑपरेशनों में 52 Pakistani Soldiers के मारे जाने का दावा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा युद्ध अभ्यास दिखाता है कि अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी कितनी मजबूत हो गई है। हमारे सैनिक साथ मिलकर ट्रेनिंग कर रहे हैं, एक-दूसरे से सीख रहे हैं और ऐसा भरोसा और क्षमताएं बना रहे हैं जो हमारे दोनों देशों को और मजबूत और सुरक्षित बनाती हैं। जहां राजदूत ने रणनीतिक संबंधों पर जोर दिया, वहीं वोवेल ने उस ऑपरेशनल पहुंच और व्यावहारिक तैयारी पर जोर दिया जो यह सालाना द्विपक्षीय अभ्यास संयुक्त सेना को देता है। वोवेल ने कहा, युद्ध अभ्यास का मकसद भरोसा बनाना, जानकारी साझा करना और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति हमारी प्रतिबद्धता दिखाना है। हर साल भारतीय सेना के साथ हमारी साझेदारी मजबूत होती जा रही है और हम मिलकर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान में BLA का भीषण तांडव, 28 ऑपरेशनों में 52 Pakistani Soldiers के मारे जाने का दावा इस रिलीज़ में बताया गया है कि इस साल की एक्सरसाइज़ में 'कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़' और 'फ़ील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़' शामिल हैं, जो आखिर में एक जॉइंट 'लाइव-फ़ायर डेमोंस्ट्रेशन' के साथ खत्म होंगी। इस इवेंट में अमेरिका और भारत के कई लंबी दूरी और सटीक निशाना लगाने वाले फ़ायर और रॉकेट सिस्टम के डिजिटल इंटीग्रेशन को दिखाया जाएगा। 'ऑपरेशन पाथवेज़' के रणनीतिक फ़्रेमवर्क के तहत काम करते हुए, यह एक्सरसाइज़ एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि इसमें भारत में पहली बार एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं।
सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों से साइबर ठगी के मामले में एक दशक से अधिक समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी हरनेक सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। इंटरपोल रेड नोटिस और लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी होने के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने उसे डिपोर्ट किया। 9 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही सीबीआई की टीम ने उसे दबोच लिया। इसके बाद बुधवार को आरोपी को पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई मामले) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इमिग्रेशन अधिकारी बनकर करते थे ब्लैकमेल सीबीआई के मुताबिक, वर्ष 2013 में भारत से सक्रिय साइबर ठगों के एक गिरोह ने सिंगापुर में रह रहे भारतीयों को निशाना बनाया था। आरोपी खुद को सिंगापुर इमिग्रेशन विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को स्पूफ कॉल करते थे। वे धमकी देते थे कि एयरपोर्ट पर डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी भरने के कारण उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और देश से निर्वासन (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस डर का फायदा उठाकर ठग जुर्माने और सेटलमेंट फीस के नाम पर वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए भारत में मोटी रकम मंगवाते थे। जांच में खुलासा हुआ कि यह ठगी की पूरी रकम हरनेक सिंह द्वारा संचालित मनी ट्रांसफर आउटलेट के माध्यम से निकाली जाती थी। सह-आरोपी पहले ही हो चुके हैं दोषी करार इस सनसनीखेज मामले में हरनेक सिंह के अलावा आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन को भी आरोपी बनाया गया था। वारदात के बाद हरनेक सिंह मई 2013 में ही भारत से फरार हो गया था और बाद में अवैध तरीके से अमेरिका में जा छिपा। सीबीआई ने इस मामले में साल 2016 में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ पंचकूला की विशेष अदालत में ट्रायल पूरा हो चुका है और अदालत ने 26 मई 2025 को दोनों को दोषी करार दिया था। अमेरिका में नहीं माना समन, जारी हुआ था गैर-जमानती वारंट फरार चल रहे हरनेक सिंह को अमेरिका में रहते हुए भारतीय अदालत के समन और जमानती वारंट भी तामील कराए गए थे, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए। सीबीआई ने इसके बाद इंटरपोल के जरिए शिकंजा कसा। इंटरपोल के जरिए रेड नोटिस जारी कराया गया और उसके पासपोर्ट पर लुक आउट सर्कुलर भी खुलवाया गया, जिसके आधार पर अंततः उसे अमेरिका से भारत लाने में सफलता मिली।
वैश्विक वित्तीय तंत्र की रीढ़ माने जाने वाले अमेरिकी डेट बाजार से दुनिया भर के निवेशकों के लिए खतरे के सायरन बजने लगे हैं। अमेरिका के 30-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज यानी यील्ड अचानक उछलकर इंट्रा-डे कारोबार में 5.34 प्रतिशत के स्तर को छू चुकी है। यह आंकड़ा जून 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है, यानी लगभग 19 साल बाद निवेशकों को अमेरिकी हुकूमत को तीन दशकों के लिए कर्ज देने पर इतना भारी-भरकम मुनाफा मिल रहा है। पहली नजर में 5.34 प्रतिशत की यह संख्या साधारण लग सकती है, लेकिन जब दुनिया की सबसे सुरक्षित समझी जाने वाली सॉवरेन सिक्योरिटीज पर बिना किसी जोखिम के इतना तगड़ा रिटर्न मिलने लगे, तो इक्विटी मार्केट, कमोडिटीज और भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस रिकॉर्ड उछाल के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में भगदड़ मच गई, जहां नैस्डैक फ्यूचर्स 370 अंक से अधिक, डाउ फ्यूचर्स 160 अंक से ज्यादा और एसएंडपी फ्यूचर्स लगभग 45 अंक फिसल गए।जानिए क्या होती है बॉन्ड यील्ड और इसका शेयर बाजार से क्या है उलटा नाताआम जनता और रिटेल निवेशकों के लिए बॉन्ड यील्ड के गणित को समझना बेहद आवश्यक है। अमेरिकी सरकार अपनी विशाल कल्याणकारी योजनाओं, रक्षा बजट और बुनियादी ढांचे के खर्चों की पूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों से ऋण जुटाती है, जिसके बदले वह ट्रेजरी बॉन्ड जारी करती है। 30-ईयर बॉन्ड का सीधा अर्थ है कि एक निवेशक तीन दशकों की लंबी अवधि के लिए अमेरिकी सरकार को अपनी पूंजी सौंप रहा है। बॉन्ड की बाजार कीमत और उसकी यील्ड हमेशा एक तराजू के दो विपरीत सिरों की तरह काम करती हैं। जब वित्तीय बाजारों में घबराहट बढ़ती है और निवेशक पुराने बॉन्ड को बेचते हैं, तो उनकी कीमतें गिर जाती हैं और परिणामस्वरूप नए खरीदारों के लिए यील्ड यानी रिटर्न का प्रतिशत बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, यदि 100 डॉलर अंकित मूल्य वाले बॉन्ड पर 5 डॉलर का कूपन मिल रहा है और बिकवाली के चलते उसका भाव टूटकर 90 डॉलर रह जाए, तो नए खरीदार की प्रभावी यील्ड सीधे 5.5 प्रतिशत से ऊपर चली जाएगी। वर्तमान में अमेरिकी बॉन्ड बाजार में ठीक यही बिकवाली देखने को मिल रही है।आखिर 5.34 प्रतिशत तक क्यों उछली 30 साल की बॉन्ड यील्ड? ये हैं चार मुख्य वजहेंअमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के इस खतरनाक स्तर पर पहुंचने के पीछे चार बड़े वैश्विक और आर्थिक कारण काम कर रहे हैं। पहला और सबसे प्रमुख कारण अमेरिका का आसमान छूता कर्ज है। वाशिंगटन का कुल राष्ट्रीय ऋण 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक मुहाने पर पहुंच चुका है। जब सरकार का खर्च उसकी आमदनी से कहीं अधिक बढ़ जाता है, तो इस फिस्कल डेफिसिट को भरने के लिए अंधाधुंध नए बॉन्ड जारी किए जाते हैं। जब बाजार में बॉन्ड की आपूर्ति बेतहाशा बढ़ती है और खरीदारों की संख्या सीमित होती है, तो सरकार को निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ज्यादा रिटर्न ऑफर करना पड़ता है। दूसरा प्रमुख ट्रिगर कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के इर्द-गिर्द बने रहना है। मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में सुलगते भू-राजनीतिक तनावों ने क्रूड और एलएनजी की सप्लाई चेन को बाधित किया है, जिससे ईंधन, माल ढुलाई और मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ रही है। तीसरा कारक अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) की ब्याज दर नीतियां हैं। चिपचिपी महंगाई के कारण ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ गई है, जिससे निवेशक मान रहे हैं कि 'हायर फॉर लॉन्गर' की नीति बरकरार रहेगी। चौथा कारण टर्म प्रीमियम का बढ़ना है, जहां 30 साल जैसे लंबे समय के लिए अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े फंड मैनेजर्स अतिरिक्त रिटर्न की मांग कर रहे हैं।महंगे कर्ज के दलदल में फंसने का खतरा: अमेरिकी इकॉनमी पर मंडराते काले बादललॉन्ग-टर्म यील्ड के 5.34 प्रतिशत पर टिके रहने का सीधा असर यह है कि अमेरिका में समूची अर्थव्यवस्था के लिए पैसे की लागत महंगी हो चुकी है। अमेरिकी परिवारों के लिए होम लोन यानी मॉर्गेज रेट्स सीधे तौर पर 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड से तय होते हैं। जब मॉर्गेज रेट्स 7 से 8 प्रतिशत के पार बने रहेंगे, तो रियल एस्टेट सेक्टर में मकानों की मांग में भारी गिरावट आएगी। इसी तरह ऑटोमोबाइल लोन, क्रेडिट कार्ड उधारी और कॉरपोरेट वर्किंग कैपिटल पर ब्याज दरें बढ़ेंगी, जिससे कॉर्पोरेट कंपनियों के मुनाफे और नई नियुक्तियों पर ब्रेक लग जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बाजार में नकदी यानी लिक्विडिटी बढ़ाने के उद्देश्य से 6 अरब डॉलर मूल्य के पुराने लॉन्ग-टर्म बॉन्ड वापस खरीदने का कार्यक्रम भी चलाया, लेकिन 40 ट्रिलियन डॉलर के विशाल कर्ज के सामने यह उपाय ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां भी अमेरिका के अनियंत्रित कर्ज पर चिंता जता रही हैं।टेक शेयरों और हाई-ग्रोथ कंपनियों पर बिकवाली का साया: वैश्विक बाजारों में घबराहटशेयर बाजारों के लिए ऊंची बॉन्ड यील्ड हमेशा कड़वी दवा की तरह होती है। संस्थागत निवेशक यह सवाल उठाने लगते हैं कि जब बिना किसी क्रेडिट रिस्क के अमेरिकी ट्रेजरी पर 5.34 प्रतिशत का पक्का रिटर्न उपलब्ध है, तो फिर भारी उतार-चढ़ाव वाले शेयर बाजार में जोखिम क्यों उठाया जाए। इस परिस्थिति में सबसे ज्यादा गाज महंगे वैल्यूएशन वाले टेक स्टॉक्स, एआई आधारित स्टार्टअप्स और ग्रोथ कंपनियों पर गिरती है। इन कंपनियों का वर्तमान वैल्यूएशन उनकी भविष्य की अनुमानित आय पर निर्भर करता है, और डिस्काउंट रेट बढ़ने से उनकी प्रेजेंट वैल्यूएशन घट जाती है। इसके अतिरिक्त भारी कर्ज लेकर चलने वाली रियल एस्टेट, पावर, टेलीकॉम और यूटिलिटी कंपनियों की ब्याज लागत बढ़ने से उनके तिमाही मार्जिन सिकुड़ेंगे, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों में तेज गिरावट और अनिश्चितता का दौर जारी रहने की संभावना है।डॉलर की बादशाहत बनाम टूटती वैश्विक करेंसी: उभरते बाजारों की बढ़ेगी परेशानीबॉन्ड यील्ड के चरम पर जाने से डॉलर इंडेक्स को अतिरिक्त मजबूती मिलती है, क्योंकि दुनिया भर से पूंजी ऊंचा रिटर्न हासिल करने के लिए अमेरिकी डॉलर की ओर भागती है। इसके विपरीत, भारत, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दोहरा दबाव पड़ता है। पहला झटका डॉलर के मुकाबले स्थानीय करेंसी के कमजोर होने से लगता है, और दूसरा झटका महंगे कच्चे तेल के भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने के रूप में सामने आता है। हालांकि, यदि बॉन्ड यील्ड में यह तेजी अमेरिकी सरकार की राजकोषीय साख पर अविश्वास के कारण जारी रही, तो आगे चलकर डॉलर के प्रभुत्व पर भी प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है, मगर अल्पावधि में डॉलर की मजबूती अन्य मुद्राओं के लिए सिरदर्द बनी हुई है।गोल्ड-सिल्वर में मचेगी खींचतान: सेफ-हेवन डिमांड बनाम बॉन्ड का आकर्षणकीमती धातुओं के बाजार में बॉन्ड यील्ड का उछाल एक जटिल परिदृश्य तैयार कर रहा है। पारंपरिक रूप से सोना कोई नियमित ब्याज या डिविडेंड नहीं देता, इसलिए जब सॉवरेन बॉन्ड 5.34 प्रतिशत का कूपन देने लगें, तो निवेशक बुलियन मार्केट से पैसा निकालकर बॉन्ड में शिफ्ट करने लगते हैं। मजबूत होता डॉलर भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के भाव पर भारी दबाव डालता है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि 40 ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकी कर्ज, वैश्विक युद्ध और वित्तीय तनाव सोने की 'सेफ हेवन' मांग को हवा दे रहे हैं। चांदी के मामले में औद्योगिक उपयोग (सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर) के कारण अस्थिरता और ज्यादा रहेगी, जिससे कमोडिटी मार्केट में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।भारत, दलाल स्ट्रीट और घरेलू निवेशकों के लिए क्या हैं स्पष्ट मायनेभारतीय संदर्भ में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 19 साल के शिखर पर पहुंचना कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी करता है। सबसे पहला खतरा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के रूप में सामने आता है। भारतीय शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशक मुनाफावसूली कर अपना पैसा सुरक्षित अमेरिकी ट्रेजरी में पार्क कर सकते हैं, जिससे बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी पर बिकवाली का दबाव गहराएगा। दूसरा असर घरेलू मुद्रा रुपये पर पड़ेगा; डॉलर मजबूत होने और विदेशी पूंजी की निकासी से रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तरों की ओर खिसक सकता है। इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा और चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ सकता है। जिन भारतीय कंपनियों ने डॉलर डिनॉमिनेटेड विदेशी कर्ज (ECB) जुटाया है, उनकी ब्याज अदायगी का बोझ बढ़ेगा। हालांकि, आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स को कमजोर रुपये से थोड़ी राहत मिल सकती है, मगर व्यापक बाजार के लिए सतर्क रहने का समय है।
दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र होने का दावा करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीतिक और चुनावी संस्कृति में इन दिनों एक बहुत बड़ा वैचारिक और व्यावहारिक बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जिस प्रकार से अमेरिकी चुनाव प्रणाली को नया रूप देने की शुरुआत की है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में डलास में आयोजित रिपब्लिकन मिडटर्म कन्वेंशन के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी मतदाताओं के सामने एक ऐसा आकर्षक और सीधा प्रस्ताव रखा, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। ट्रंप ने देश की जनता से खुलकर यह वादा किया है कि यदि आगामी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस लाया जाता है, तो देश के प्रत्येक वयस्क अमेरिकी नागरिक को सरकार की तरफ से 5,000 डॉलर का भारी-भरकम डिविडेंड या नकद लाभ प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार की चुनावी घोषणाएं और नकद प्रोत्साहन देने की संस्कृति भले ही पश्चिमी देशों के लिए थोड़ी नई और अनोखी लग सकती है, लेकिन भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देशों के राजनीतिक इतिहास और चुनावी परिदृश्य से परिचित लोगों के लिए यह शैली अत्यंत जानी-पहचानी और पारंपरिक प्रतीत होती है।भारत की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना से प्रेरित लगती है ट्रंप की यह अनोखी रणनीतिराजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि डोनल्ड ट्रंप द्वारा पेश किया गया यह 5,000 डॉलर वाला प्रस्ताव बहुत हद तक भारत की सफल और लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाओं से प्रेरित नजर आता है। अगर पिछले एक दशक के भारतीय राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास पर नजर डालें, तो भारत के कल्याणकारी राज्य के स्वरूप में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' यानी डीबीटी (DBT) योजना ने सरकार और आम जनता के बीच के पारंपरिक वित्तीय संबंधों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत सरकारी सहायता का पैसा बिचौलियों के बिना सीधे पात्र नागरिकों और मतदाताओं के बैंक खातों में ट्रांसफर होने लगा है। आज स्थिति यह है कि जिस देश के किसी भी कोने में बैठे आम वोटर के बैंक खाते में सीधे सरकारी मदद या योजना का पैसा पहुंचता है, उसे सरकार की नीतियों या उपलब्धियों को समझाने के लिए किसी राजनीतिक नेता या भाषण की आवश्यकता नहीं होती। चुनावी नतीजों के लिहाज से भारत में यह तरीका एक अचूक और बेहद असरदार हथियार साबित हुआ है, जिसे देश के विभिन्न राज्यों की सरकारों ने और अधिक व्यापक रूप देते हुए महिलाओं और युवाओं के लिए नकद सहायता के रूप में आगे बढ़ाया है। ट्रंप की यह नीति भले ही अमेरिकी कांग्रेस की वैधानिक बाधाओं और जटिलताओं के कारण पूरी तरह से वैसी न हो, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक मनोवैज्ञानिक सोच वही है जिसे भारतीय राजनेताओं ने बहुत पहले से अपनी चुनावी सफलता का आधार बना रखा है।फेडरल चुनावों में सख्त फोटो वोटर ID लागू करने पर जोर और भारत-ब्राजील की व्यवस्था का जिक्रनकद प्रोत्साहन के अलावा, अमेरिकी चुनावी प्रणाली में एक और बहुत बड़ा बदलाव डोनल्ड ट्रंप के उस कड़े रुख में दिखाई दे रहा है जिसमें वे मतदान के लिए सख्त फोटो पहचान पत्र (वोटर ID) को अनिवार्य बनाने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं। मार्च 2025 में फेडरल चुनाव प्रक्रियाओं और चुनावी पारदर्शिता में सुधार के लिए जारी किए गए अपने एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) में डोनल्ड ट्रंप ने विशेष रूप से भारत और ब्राजील जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों का हवाला दिया था। ट्रंप ने अपने आदेश और भाषणों में इस बात की सराहना की थी कि कैसे भारत और ब्राजील जैसे देशों में मतदाताओं की पहचान को पुख्ता करने के लिए बायोमेट्रिक डेटाबेस और सख्त फोटो पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फर्जी मतदान की गुंजाइश लगभग समाप्त हो जाती है। इसी तर्ज पर अमेरिका में भी चुनावी शुद्धता लाने के लिए ट्रंप ने 'द सेव अमेरिका एक्ट' को तुरंत पारित करवाने की मांग की है। इस प्रस्तावित सख्त कानून के तहत अब फेडरल स्तर पर होने वाले सभी चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता का ठोस सबूत और सरकार द्वारा जारी आधिकारिक फोटो ID होना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया जाएगा, जो अमेरिकी चुनावी इतिहास में एक बड़ा और कड़ा कदम माना जा रहा है।अमेरिकी लोकतंत्र में पारंपरिक तरीकों से हटकर आक्रामक और लोकलुभावन नीतियों का दौरडोनल्ड ट्रंप के इन नए और आक्रामक राजनीतिक प्रस्तावों से यह साफ जाहिर होता है कि अमेरिका की दो-दलीय चुनावी राजनीति अब पारंपरिक और वैचारिक बहसों से आगे निकलकर सीधे तौर पर आर्थिक लाभ और मतदाता के व्यक्तिगत कल्याण से जुड़ने लगी है। हालांकि ट्रंप के इन प्रस्तावों को लेकर अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में तीखा विरोध देखने को मिल रहा है और विपक्षी डेमोक्रेट्स तथा कई रिपब्लिकन नेता भी इसे लेकर आशंकित हैं कि देश के राजकोष पर इसका कितना भारी असर पड़ेगा, फिर भी ट्रंप की यह शैली अमेरिकी जनता के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने में पूरी तरह कामयाब रही है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जब दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र एक-दूसरे की चुनावी रणनीतियों और कल्याणकारी मॉडलों से सीखने या उन्हें अपने अनुकूल ढालने लगते हैं, तो इससे वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र का एक नया ही स्वरूप उभरकर सामने आता है। आने वाले अमेरिकी चुनावों में ट्रंप के ये लोकलुभावन और कड़े प्रशासनिक वादे चुनावी परिणामों को किस हद तक प्रभावित करते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इसने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक राजनीति में जनता के सीधे सशक्तिकरण और पहचान की सुरक्षा के मुद्दे ही सबसे बड़े चुनावी हथियार बन चुके हैं।
सिंगापुर ठगी मामले का आरोपित अमेरिका से भारत लाया गया, पंचकूला कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा
सिंगापुर ठगी मामले में 2013 से फरार चल रहे आरोपित हरनेक सिंह को अमेरिका से भारत लाया गया है। सीबीआई ने उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर पंचकूला कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
Brent Crude 105 डॉलर के पार पहुंचा, अमेरिका-ईरान में बढ़ते टेंशन का असर
क्रूड ऑयल की कीमतों में 10 सितंबर को भी तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड का प्राइस 105 डॉलर पर पहुंच गया। इस साल 25 मई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ रहा है।चीन की क्रूड की खरीदारी का भी कीमतों पर असरक्रू्ड ऑयल की कीमतों में तेजी की कुछ दूसरी वजहें भी हैं। चीन ने फिर से क्रूड ऑयल की अच्छी खरीदारी शुरू कर दी है। उधर, सऊदी अरब ने कहा है कि उसके क्रूड के उत्पादन में तेज गिरावट आई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी युद्धपातों पर मिसाइल से हमले किए हैं। इससे हालात लगातार खराब होने की तरफ बढ़ रहे हैं।WTI क्रूड की कीमतें भी 100 डॉलर के पारभारतीय समय के मुताबिक, शाम 6:45 बजे ब्रेंट क्रूड का प्राइस 4 फीसदी उछलकर 105.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। WTI क्रूड भी 4.41 फीसदी उछाल के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ लड़ाई नवंबर में मिड टर्म इलेक्शंस के बाद खत्म होगी। इधर, ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका हमले जारी रखता है तो वह जवाबी हमले करेगा।अगस्त के लेवल से 30 फीसदी चढ़ चुका है क्रूडअगस्त की शुरुआत के मुकाबले ब्रेंट क्रूड की कीमत 30 फीसदी चढ़ चुकी है। बताया जाता है कि सऊदी अरब में क्रूड का उत्पादन गिरकर इस साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसकी वजह हूती विद्रोहियों की धमकी है, जिसमें कहा गया है कि वे सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों से गुजरने वाले ऑयल टैंकर्स को निशाना बनाएंगे।चीन की खरीदारी पर निर्भर करेगी कीमतेंएनालिस्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने की वजह से ब्रेंट फिर से 100 डॉलर के पार हो गया है, लेकिन इसका इस लेवल पर टिके रहना चीन के रुख पर निर्भर करेगा। चीन दुनिया में क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा इंपोर्टर है। उसने हाल के कुछ महीनों में क्रूड की खरीदारी बढ़ाई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है।यह भी पढ़ें:BRICS Summit 2026: भारत आ रहे हैं शी जिनपिंग और पुतिन! जानिए क्या है पीएम मोदी का मास्टरप्लानक्रूड में उछाल भारत के लिए चिंता की बातक्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता की बात है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। क्रूड महंगा होने का असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है। लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बने रहने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। साथ ही सीएनजी और पीएनजी के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।
iPhone 18 Pro Price Gap: Apple
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ट्रम्प का चुनावी दांव: रिपब्लिकन जीते तो हर अमेरिकी वयस्क को मिलेंगे 5000 डॉलर, वीडियो में जाने खर्च होगा 1.35 ट्रिलियन डॉलर
₹1910000000 का दान, कौन हैं सिन्हा दंपति, जिन्होंने अमेरिका में दान देकर दुनिया को किया हैरान
भारतीय मूल के अनुराधा और विकास सिन्हा दंपति ने अमेरिका के अपने पूर्व विश्वविद्यालय, उत्तरी टेक्सास विश्वविद्यालय (UNT) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत विश्लेषण कार्यक्रमों के लिए 191 करोड़ रुपये का दान दिया है।
ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अमेरिकी 'आर्थिक युद्ध' को ईरान ने 'आर्थिक आतंकवाद' बताया। ईरान की 27 एयरलाइंस और नागरिक विमानन से जुड़ी संस्थाओं पर लगाए गए नए अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष को पत्र लिखा।
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका-ईरान विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दोनों ही पक्षों की ओर से हमले हो रहे हैं। अमेरिका द्वारा बीते कुछ दिनों में ईरान के कई तेल टैंकर तबाह किए जाने के बाद अब ईरान ने भी करारा जवाब दिया है। खबरों क अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में आज तड़के अमेरिकी एयरबेस पर एक के बाद एक कई हमले किए, जिससे अमेरिका के कई मिलिट्री एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचा है। खबरों के अनुसार, मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर हुए ईरानी हमले में एक ए-10 थंडरबोल्ट का एक विंग (पंख) टूट गया। वहीं लगभग आठ एफ-15 विमानों को मामूली नुकसान हुआ है। ईरानी हमलों से बचाव के लिए अमेरिकी सेना की ओर से 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें दागीं। अमेरिका द्वारा ईरान के अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत को निशाना बनाए जाने के जवाब में ईरान द्वारा हमला किया गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने आठ टैंकरों और दो युद्धपोतों पर हमले किए, जिनमें जॉर्डन में मौजूद बेस भी शामिल था। PC: Ndtv अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
तेहरान, 10 सितंबर . ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अमेरिकी ‘आर्थिक युद्ध’ को ईरान ने ‘आर्थिक आतंकवाद’ बताया. ईरान की 27 एयरलाइंस और नागरिक ... Read more
अमेरिकी 'आर्थिक युद्ध' को ईरान ने बताया 'आर्थिक आतंकवाद', संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को लिखा पत्र
भारत के पास 190 परमाणु बम, और बढ़ेगा आंकड़ा; अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा - India TV Hindi
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ईरान से जारी जंग के बीच Trump ने किया बड़ा ऐलान, कहा- हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर…
इंटरनेट डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जारी जंग के बीच बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने अब ऐलान किया कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। डलास में रिपब्लिकन कन्वेंशन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये ऐलान किया है। इस दौरान ट्रंप ने बोल दिया कि अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों में जीतते हैं तो आपको 5000 डॉलर मिलेंगे। उन्होंने इसे ‘ट्रम्प डिविडेंड नाम दिया है। हालांकि इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की जानकारी नहीं दी कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा, भुगतान का दायरा क्या होगा और रकम किस तरह बांटी जाएगी। आपको बता दें कि अमेरिका में करीब 26.98 करोड़ वयस्क हैं। अगर सभी को 5,000 डॉलर प्रदान किए जाएंगे तो कुल खर्च करीब 1.35 ट्रिलियन डॉलर यानी 128.25 लाख करोड़ रुपए होगा। ये राशि विश्व के करीब 162 देशों की इकॉनॉमी से अधिक है। PC:newsonair अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
Petrol Prices today:अमेरिका से भी महंगा इन देशों में पेट्रोल, नेपाल-बांग्लादेश से लेकर चीन-पाकिस्तान तक जानें आज के रेट
iPhone 18 Pro Max: भारत, अमेरिका, दुबई, जापान और UK में कितनी है कीमत? जानें प्री-बुकिंग और सेल डेट
iPhone 18 Pro Max: Apple ने अपने Surprise and Shine इवेंट में नई पीढ़ी का iPhone 18 Pro Max भारत और दुनियाभर के बाजारों में आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह फोन iPhone 17 Pro Max का अगला वर्जन है। इसमें Apple का नया A20 Pro चिप, बेहतर कैमरे, बड़ी बैटरी और 2TB तक स्टोरेज दी गई है। कीमत की बात करें तो, iPhone 18 Pro Max की कीमत अलग-अलग मार्केट (देशों) में अलग-अलग है। हां हम आपको भारत, अमेरिका, दुबई, जापान और यूके में इसकी कीमत के साथ-साथ प्री-बुकिंग, सेल की तारीख और फोन के खास स्पेसिफिकेशन के बारे में बता रहे हैं।भारत में iPhone 18 Pro Max की कीमत भारत में iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत ₹1,79,900 है। यह कीमत 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की है। पिछले साल लॉन्च हुए iPhone 17 Pro Max की तुलना में इसकी कीमत करीब ₹30,000 ज्यादा है। वहीं, इसके 512GB मॉडल की कीमत ₹2,04,900 और 1TB मॉडल की कीमत ₹2,54,900 है। जबकि फोन का सबसे ज्यादा स्टोरेज वाला 2TB वेरिएंट ₹3,14,900 में लॉन्च किया गया है। US में, iPhone 18 Pro Max के 256GB मॉडल की शुरुआती कीमत $1,299 है। वहीं, 512GB वेरिएंट की कीमत $1,399 और 1TB और 2TB मॉडल की कीमत क्रमशः $1,799 और $2,499 है। दुबई में, iPhone 18 Pro Max के 256GB मॉडल की शुरुआती कीमत AED 5,099 है। Apple इस फोन को 256GB, 512GB, 1TB और 2TB स्टोरेज ऑप्शन में पेश कर रहा है। ज्यादा स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत भी ज्यादा है। जापान में, iPhone 18 Pro Max के 256GB मॉडल की शुरुआती कीमत 219,800 है। वहीं, 512GB वाले मॉडल की शुरुआती कीमत 254,800 है, जबकि 1TB और 2TB वर्जन की कीमत क्रमशः 324,800 और 429,800 तक जाती है। UK में, iPhone 18 Pro Max के 256GB मॉडल की शुरुआती कीमत 1,299 है। वहीं, 512GB वर्जन की कीमत 1,499 है। इसके अलावा, 1TB और 2TB मॉडल की कीमत क्रमशः 1,799 और 2,499 है। iPhone 18 Pro Max की प्री-बुकिंग और सेल डेटApple ने कन्फर्म किया है कि iPhone 18 Pro Max के लिए प्री-ऑर्डर 12 सितंबर से शुरू होंगे, जबकि यह फोन 18 सितंबर से उपलब्ध होगा। भारत में इसकी प्री-बुकिंग 12 सितंबर को शाम 5:30 बजे (IST) शुरू होगी।iPhone 18 Pro Max के पूरे स्पेसिफिकेशन्सiPhone 18 Pro Max में 6.9-इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले है, जिसमें ProMotion और Always-On डिस्प्ले का सपोर्ट मिलता है। यह नए A20 Pro चिप पर चलता है और इसमें 2TB तक का स्टोरेज मिलता है।कैमरे की बात करें तो, फोन में 48MP का Pro Fusion कैमरा सिस्टम है, जिसमें वेरिएबल अपर्चर वाला 48MP का मेन कैमरा, 48MP का अल्ट्रा-वाइड और 48MP का टेलीफोटो कैमरा शामिल है। इसके फ्रंट कैमरे को भी अपग्रेड किया गया है।यह फोन Burgundy, Glacier, Silver और Black कलर में उपलब्ध है। Apple ने इसमें नई एंटी-रिफ्लेक्टिव डिस्प्ले कोटिंग भी जोड़ी है और बैटरी लाइफ़ को बेहतर बनाया है।यह भी पढ़ें:Apple Watch Series 12 में भारत के लिए फिलहाल रोक दिया गया है यह खास फीचर, क्यों किया ऐसा कंपनी ने वजह भी बताई
यमन में हूती हमलों के पीछे ईरान का हाथ? तेहरान ने अमेरिकी दावे को बताया बेबुनियाद
तेहरान, 10 सितंबर . ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने हूती हमलों को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो पर तीखा हमला बोला. बाघेई ने रुबियो के उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा कि था कि हूती समूह कई मायनों में ईरान के एजेंट और प्रॉक्सी हैं. इसके पीछे ... Read more
ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव, रिपब्लिकन जीते तो हर अमेरिकी वयस्क को मिलेंगे करीब 5 लाख रुपये
वॉशिंगटन, 10 सितंबर2026 । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ा आर्थिक वादा कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव में कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण बरकरार रखती है, तो हर अमेरिकी वयस्क को 5,000 […] The post ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव, रिपब्लिकन जीते तो हर अमेरिकी वयस्क को मिलेंगे करीब 5 लाख रुपये appeared first on Rashtriya Ujala .
अमेरिका में बसे PhD बेटे के लिए मां ने LinkedIn पर तलाशनी शुरू की दुल्हन, मैसेज हुआ वायरल
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा LinkedIn मैसेज चर्चा में है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर रिश्ते तलाशने की सही जगह कौन-सी है। दरअसल, एक मां ने अपने अमेरिका में बसे PhD बेटे के लिए दुल्हन की तलाश करते हुए LinkedIn पर एक महिला को मैसेज भेज दिया। मैसेज सामने आते ही कुछ लोगों ने इसे प्यारा बताया, तो कुछ ने इसे प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म की मर्यादा के खिलाफ करार दिया।बताई मैसेज की वजहइस पूरे मामले को X यूजर मुद्रिका कवड़िया ने शेयर किया। उन्होंने LinkedIn पर मिले मैसेज का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए हैरानी जताई कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि LinkedIn पर कोई मां अपने बेटे के लिए रिश्ता तलाशते हुए उनसे संपर्क करेगी। मैसेज की शुरुआत काफी अपनापन भरा था। महिला ने लिखा कि वह उम्र में मुद्रिका की मां के बराबर हैं, इसलिए उन्हें 'बेटा' कहकर संबोधित कर रही हैं। इसके बाद उन्होंने उनकी उपलब्धियों की तारीफ की और फिर सीधे अपने मैसेज की वजह बता दी।अमेरिका में बसे PhD बेटे के लिए तलाश रही थीं जीवनसाथीमहिला ने बताया कि उनका बेटा 1997 में जन्मा है, Biomedical Sciences में PhD कर चुका है और अमेरिका में सेटल है। अब वह उसके लिए 24 से 29 साल की उम्र की उपयुक्त लड़की तलाश रही हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि परिवार को कोई जल्दबाजी नहीं है और वह खुद ही अपने बेटे के लिए रिश्ता तलाशने की कोशिश कर रही हैं। इसके बाद उन्होंने मुद्रिका से पूछा कि क्या वह सिंगल हैं और अगर दोनों तरफ से रुचि हो, तो परिवार आपस में जानकारी साझा कर सकते हैं। मैसेज के अंत में महिला ने आशीर्वाद देते हुए बेहद विनम्र अंदाज में अपनी बात खत्म की।LinkedIn पर रिश्तामैसेज सोशल मीडिया पर आते ही बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों को लगा कि LinkedIn करियर और प्रोफेशनल नेटवर्किंग के लिए बना है, इसलिए वहां शादी के लिए संपर्क करना उचित नहीं है। कुछ यूजर्स ने इसे 'अनप्रोफेशनल' बताते हुए चिंता जताई कि अगर ऐसे मामलों को सामान्य मान लिया गया, तो आने वाले समय में LinkedIn पर नौकरी और बिजनेस के बजाय रिश्तों के मैसेज ज्यादा दिखाई देने लगेंगे। एक यूजर ने तो इसे बेहद 'क्रिंज' बताया और मजाक में कहा कि ऐसी चीजों को बढ़ावा मिला तो LinkedIn पर 'रिश्ता लेकर आंटी' की भरमार हो सकती है।कहीं एक ही मैसेज कई लड़कियों को तो नहीं भेजा?बहस के बीच कुछ लोगों ने मैसेज के तरीके पर भी सवाल उठाए। यूजर्स ने अंदाजा लगाया कि हो सकता है महिला ने इसी तरह का मैसेज कई LinkedIn प्रोफाइल पर भेजा हो, ताकि बेटे के लिए ज्यादा से ज्यादा संभावित रिश्ते मिल सकें। हालांकि, यह सिर्फ सोशल मीडिया यूजर्स का अनुमान था। शेयर किए गए स्क्रीनशॉट से यह साबित नहीं होता कि ऐसा वास्तव में हुआ था। लेकिन मुद्रिका ने कहा- 'इतना मत सोचिए, ये क्यूट है'जहां कई लोग इस घटना को लेकर नाराज दिखे, वहीं खुद मुद्रिका ने मामले को काफी हल्के और सकारात्मक अंदाज में लिया। उन्होंने कहा कि महिला का इरादा गलत नहीं था। उनके मुताबिक, वह एक मां हैं जो LinkedIn को समझने और इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने महिला के विनम्र व्यवहार को देखते हुए लोगों से ज्यादा विश्लेषण न करने की अपील की और इस पूरे प्रयास को 'काफी क्यूट' बताया। मुद्रिका ने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि जिंदगी का एक सबक है अगर कोशिश ही नहीं करेंगे, तो सफलता मिलने का सवाल ही नहीं उठता।कुछ लोगों को मां का अंदाज आया पसंदसोशल मीडिया पर हर कोई इस मैसेज के खिलाफ नहीं था। कई यूजर्स ने कहा कि जब इरादा साफ हो और सामने वाले से सम्मानपूर्वक बात की जाए, तो इसमें इतनी बड़ी समस्या नहीं है। कुछ लोगों ने तो LinkedIn को इस काम के लिए एक दिलचस्प विकल्प भी बताया। उनका तर्क था कि किसी व्यक्ति की शिक्षा, नौकरी, करियर और उपलब्धियों की जानकारी LinkedIn प्रोफाइल पर आसानी से मिल जाती है। ऐसे में मां को अपने बेटे के लिए संभावित रिश्ता तलाशने के दौरान यह प्लेटफॉर्म उपयोगी लगा हो, तो इसे पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता।राजस्थान की सांभर झील से गुजरने वाली इस ऑरेंज वंदे भारत से दिखते हैं अद्भुत नजारे! इसका रूट, फेयर और स्टॉपेज जानिए
अमेरिका ने चीन जाने वाले नागरिकों को जारी की चेतावनी, मनमानी गिरफ्तारी और एग्जिट बैन का खतरा
वॉशिंगटन, 10 सितंबर . अमेरिका ने चीन के लिए अपनी यात्रा सलाह (ट्रैवल एडवाइजरी) को अपडेट किया है. इसमें अमेरिकी नागरिकों को मनमानी कानूनी कार्रवाई, निगरानी, देश छोड़ने पर रोक और बिना उचित कारण गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने के जोखिम को लेकर चेतावनी दी गई है. अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन के लिए ... Read more
सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार, अमेरिका के महंगाई डेटा का इंतजार
सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार, अमेरिका के महंगाई डेटा का इंतजार
ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी समझ सकता है अमेरिका: अजय बिसारिया
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका की नजर इस समूह की बढ़ती भूमिका पर है. पूर्व राजनयिक अजय बिसारिया ने आशंका जताई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स के मौजूदा स्वरूप को पश्चिम-विरोधी मंच के तौर पर देख सकते हैं.
तेल के बदले एयर डिफेंस और हथियार... ईरान ने चीन के साथ सीक्रेट डील कर ऐसे अमेरिका को दिया धोखा
ईरान पर लगे प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए चीन के साथ एक खास बार्टर जैसे सिस्टम के इस्तेमाल की खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने चीन को तेल बेचने के बदले अरबों डॉलर का सामान खरीदा.
ट्रंप का बड़ा चुनावी वादा, रिपब्लिकन सत्ता में लौटे तो हर वयस्क अमेरिकी को मिलेंगे 5,000 डॉलर
वाशिंगटन, 10 सितंबर . अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने आगामी मध्यावधि चुनाव से पहले अपने देशवासियों से बड़ा चुनावी वादा किया है. उन्होंने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर अपना नियंत्रण बरकरार रखती है, तो हर वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर का भुगतान किया जाएगा. ट्रंप ने ... Read more
अमेरिका में बर्थराइट सिटिजनशिप पर बहस, रिपब्लिकन ने की सीमाएं लगाने की मांग
वॉशिंगटन, 10 सितंबर . अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों के यहां पैदा हुए बच्चों की नागरिकता के अधिकार एक बार फिर बहस का विषय बन गए हैं. रिपब्लिकन सांसद इन अधिकारों पर कुछ सीमाएं लगाने की वकालत कर रहे हैं जबकि डेमोक्रेट्स का कहना है कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के ... Read more
अमेरिका के लोग तूफान के वक्त फ्रिज में स्पॉन्ज क्यों रख देते हैं?
क्या आप जानते हैं अमेरिका के क्लीनिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब भी तूफान आता है तो इस दौरान फ्रिज में स्पॉन्ज रख देना चाहिए.
ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर फिर दागीं मिसाइलें, देखें US Top-10
अमेरिका और ईरान के बीच नए दौर की जंग शुरू हो गई है. ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर फिर से मिसाइलें दागीं. इससे पहले ईरान ने होर्मुज में एक अमेरिकी पनडुब्बी को कब्जे में लिया. अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के 5 तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया. देखें यूएस टॉप-10.
CBI को मिली बड़ी सफलता, 13 साल से फरार आरोपी हरनेक सिंह का अमेरिका से कराया प्रत्यर्पण
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लंबे समय से फरार आरोपी हरनेक सिंह को अमेरिका से सफलतापूर्वक भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। वह 2013 से जांच और मुकदमे से बच रहा था।
सीबीआई को मिली बड़ी सफलता, 13 साल से फरार आरोपी हरनेक सिंह का अमेरिका से कराया प्रत्यर्पण
New Delhi, 10 सितंबर . केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लंबे समय से फरार आरोपी हरनेक सिंह को अमेरिका से सफलतापूर्वक India वापस लाने में कामयाबी हासिल की है. वह 2013 से जांच और मुकदमे से बच रहा था. सीबीआई ने Thursday को जानकारी दी कि आरोपी हरनेक सिंह के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस और ... Read more
UFC में इतिहास रचने वाली पूजा तोमर की मुरीद हुईं दुनिया, अमेरिकी राजदूत ने की तारीफ|
भारत की पहली यूएफसी फाइटर पूजा तोमर से मिलकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उनके संघर्ष और प्रेरणादायक सफर की जमकर तारीफ की है।
भारतीय संस्कृति से बेहद इंप्रेस हुई अमेरिकी टैटू आर्टिस्ट, ब्रिटिश शासन पर जमकर बरसी; कहा- 'भारत को गरीब बना दिया'
अमेरिका में भारतीय टेक्नीशियन ने पार्ट-टाइम मेहंदी आर्टिस्ट बनकर शुरू किया काम, Video में कमाई का किया खुलासा
भारत की रसोई गैस सप्लाई में पिछले छह महीनों में बड़ा बदलाव आया है। पश्चिम एशिया में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच अमेरिका भारत के लिए LPG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका […] The post अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, 6 महीने में आयात 281% बढ़ा, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी क्यों घटी? appeared first on https://rajsattaexpress.com .
अमेरिकी सेना ने कैरेबियाई सागर में ड्रग तस्करों के जहाज को उड़ाया, तीन की मौत
अमेरिकी सेना ने कैरेबियाई सागर में ड्रग तस्करों के जहाज को उड़ाया, तीन की मौत
US midterm elections: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल नवंबर में होने वाले मिड टर्म चुनाव से पहले बड़ा आर्थिक वादा किया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट दोनों में अपना कंट्रोल बरकरार रखती है, तो अमेरिका के हर वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर (करीब 4.4 लाख रुपये) का डिविडेंड दिया जाएगा।ट्रंप ने बुधवार (9 सितंबर) को डलास में आयोजित एक रिपब्लिकन सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की आर्थिक ताकत और उनकी सरकार की आर्थिक सफलता के चलते वह देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर का भुगतान जारी करेंगे।'दोनों सदनों में जीत जरूरी'ट्रंप ने कहा, अगर रिपब्लिकन प्रतिनिधि सभा और अमेरिकी सीनेट, दोनों में जीत हासिल करते हैं... हमारी जबरदस्त ताकत और आर्थिक सफलता के कारण मैं अमेरिका के हर वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर का डिविडेंड जारी करूंगा। हालांकि, ट्रंप ने इस प्रस्ताव के साथ एक शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि यह पैसा अमेरिका के भीतर ही खर्च किया जाना चाहिए।प्रस्ताव को लेकर अभी ज्यादा जानकारी नहींट्रंप की घोषणा के बाद इस प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी तत्काल सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि 5,000 डॉलर का भुगतान किस फंड से किया जाएगा। साथ ही यह खुलासा होना बाकी है कि इसके लिए पात्र लाभर्थियों के लिए क्या शर्तें होंगी। वहीं, अमेरिकी सरकार इसे किस तरीके से लागू करेगी इसका भी डिटेल्स आना बाकी है।ट्रंप का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब नवंबर के चुनाव में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक वयस्क अमेरिकी नागरिक को सीधे आर्थिक लाभ देने का वादा चुनावी राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।US मिडटर्म चुनाव का मतलब क्या है?अमेरिकी मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर 2026 (मंगलवार) को होंगे। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव नहीं होते। बल्कि राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होने वाले कांग्रेस के चुनाव हैं। अमेरिका की संसद को Congress कहा जाता है। भारत की तरह इसके दो सदन हैं:- House of Representatives (प्रतिनिधि सभा): सभी 435 सीटों पर चुनाव होगा। Senate (सीनेट): 100 में से 35 सीटों पर चुनाव होगा। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर और राज्य विधानसभाओं के चुनाव भी होंगे। ट्रंप के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों?डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति हैं। लेकिन उनके कानून और नीतियों को लागू करने के लिए कांग्रेस का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में बहुमत है। सितंबर 2026 की स्थिति में हाउस में रिपब्लिकन 219-214 और सीनेट में 53-47 से आगे हैं। अगर रिपब्लिकन दोनों सदनों में बहुमत बचा लेते हैं, तो ट्रंप को अपने एजेंडे टैक्स, बजट, इमिग्रेशन, आर्थिक नीतियां आदि को आगे बढ़ाने में काफी आसानी होगी।ये भी पढ़ें- Iran-US War Update: ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद तुरंत खत्म हो जाएगी जंगअगर डेमोक्रेट्स हाउस या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप के लिए कानून पास कराना मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस उनकी सरकार की नीतियों की जांच-पड़ताल/निगरानी भी ज्यादा आक्रामक तरीके से कर सकती है। यही वजह है कि ट्रंप ने $5,000 'डिविडेंड' का वादा मिडटर्म चुनाव से जोड़कर किया है। Trump promises $5,000 to every American adult if Republicans retain control of Congress in Novemberhttps://t.co/SUZfUimpdu pic.twitter.com/1ZIGzc3vKA— AFP News Agency (@AFP) September 10, 2026
Who is Anuradha and Vikas Sinha: अमेरिका में भारतीय मूल के एक इंजीनियर कपल ने एजुकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी मिसाल पेश की है। अनुराधा और विकास सिन्हा ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सास (UNT) को 2 करोड़ डॉलर यानी करीब 190 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा दान दिया है। इस रकम से यूनिवर्सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड एनालिटिक्स को समर्पित एक नया कॉलेज स्थापित किया जाएगा।विकास और अनुराधा का University of North Texas से रिश्ता केवल दान देने तक सीमित नहीं है। विकास खुद इसी यूनिवर्सिटी से PhD कर चुके हैं। इसी वजह से उनका नया $20 मिलियन (करीब ₹190 करोड़) का योगदान उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी खास माना जा रहा है।कपल के नाम पर होगा कॉलेजहमारे सहयोगी 'फर्स्ट पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने बताया कि नए संस्थान का नाम 'अनुराधा और विकास सिन्हा कॉलेज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड एडवांस्ड एनालिटिक्स (Anuradha and Vikas Sinha College of Artificial Intelligence and Advanced Analytics)' रखा जाएगा। यह कॉलेज छात्रों और फैकल्टी के लिए नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ AI, इंटेलिजेंट सिस्टम्स और डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में एजुकेशन एवं रिसर्च का प्रमुख केंद्र बनेगा।दो प्रमुख डिवीजनों में काम करेगा कॉलेजनया कॉलेज मुख्य रूप से दो डिवीजनों के तहत काम करेगा। 'डिवीजन ऑफ एप्लाइड इंटेलिजेंस एंड इंफॉर्मेटिक्स (Division of Applied Intelligence and Informatics)' का फोकस इंटेलिजेंट सिस्टम्स को विकसित करने और उन्हें वास्तविक दुनिया में लागू करने पर होगा। वहीं, 'डिवीजन ऑफ इंफॉर्मेशन एंड लर्निंग एप्लीकेशन्स (Division of Information and Learning Applications)' यह अध्ययन करेगा कि इंसानों और संस्थानों के बीच सूचनाएवं इंटेलिजेंट सिस्टम किस तरह काम करते हैं। इससे AI को केवल तकनीकी नजरिए से नहीं। बल्कि मानव समाज, संस्थानों और विभिन्न क्षेत्रों में उसके इस्तेमाल के व्यापक संदर्भ में समझने पर भी जोर दिया जाएगा।दान से बनाए जाएंगे छह स्थायी फंडUNT के मुताबिक, सिन्हा कपल की $20 मिलियन की इस मदद से छह स्थायी एंडोमेंट स्थापित किए जाएंगे। इनका इस्तेमाल कॉलेज के नेतृत्व, छात्रों की स्कॉलरशिप, प्रोफेसरशिप और इनक्यूबेशन, एडवांस्ड रिसर्च तथा उभरती तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। विकास सिन्हा ने कहा कि एजुकेशन ने उनके जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते खोले और अब वे चाहते हैं कि दूसरे लोगों के लिए भी ये दरवाजे खुले रहें।उन्होंने कहा कि यह दान उनके लिए अवसर को आगे बढ़ाने और यह पहचानने का माध्यम है कि प्रवासी केवल अमेरिकी सपने में हिस्सा नहीं लेते। बल्कि उसे बनाने में भी योगदान देते हैं। ब्रॉडकॉम (Broadcom) के वाइस प्रेसिडेंट विकास सिन्हा ने कहा, हमारे लिए, यह उपहार उस अवसर को आगे बढ़ाने और यह पहचानने के बारे में है कि अप्रवासी केवल 'अमेरिकन ड्रीम' में भाग ही नहीं लेते बल्कि वे इसे बनाने में मदद भी करते हैं।भारत से US एकेडेमिया और टेक्नोलॉजी तकविकास और अनुराधा सिन्हा ने 'श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी' से सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए भारत से अमेरिका का रुख किया था। इसके बाद दोनों ने फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट डिग्री हासिल की। विकास ने बाद में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। फिर 2023 में 'यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सास' से अपनी PhD पूरी की।विकास ने कहा, यही एक बड़ी वजह है कि अनु (अनुराधा) और मुझे UNT पर इतना भरोसा है कि वह छात्रों के लिए क्या कुछ मुमकिन बना सकता है। इसमें वे छात्र भी शामिल हैं जो दूसरे देशों से वही महत्वाकांक्षा और शिक्षा में वही विश्वास लेकर यहां आ सकते हैं, जो कभी हमारे पास हुआ करता था।यह कॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटेलिजेंट सिस्टम और डेटा एनालिटिक्स पर केंद्रित एक एकेडमिक और रिसर्च हब के तौर पर काम करेगा। यह AI, साइबरसिक्योरिटी, डेटा साइंस, एडवांस्ड एनालिटिक्स, हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स, इंफॉर्मेशन साइंस, लाइब्रेरी साइंस और लर्निंग टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता को एक साथ लाएगा। विकास सिन्हा ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी पीढ़ी की अहम टेक्नोलॉजी में से एक होगी।उन लोगों को तैयार करने में यूनिवर्सिटी की अहम भूमिका होगी जो इसके भविष्य को आकार देंगे।उन्होंने कहा, UNT के विजन के बारे में जो बात हमें उत्साहित करती है। वह यह है कि यह कॉलेज छात्रों को सिर्फ AI का इस्तेमाल करना ही नहीं सिखाएगा। बल्कि यह उन्हें इसे बनाने, समझने, इस पर सवाल उठाने, इसे नियंत्रित करने और जिम्मेदारी से इसका इस्तेमाल करने के लिए तैयार करेगा। इससे इंटेलिजेंट सिस्टम को बनाने वाले और उनकी देखभाल करने वाले दोनों तरह के लोग तैयार होंगे।इस कॉलेज में 'अप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस इंस्टीट्यूट' भी होगा, जो UNT में AI और एनालिटिक्स रिसर्च और शिक्षा को जोड़ेगा। साथ ही इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च, साझा इंफ्रास्ट्रक्चर, बाहरी रिसर्च फंडिंग और इंडस्ट्री के साथ साझेदारी को बढ़ावा देगा। विकास वर्तमान में Broadcom के मेनफ्रेम सॉफ्टवेयर डिवीजन में वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे 2023 से UNT के 'कॉलेज ऑफ इंफॉर्मेशन लीडरशिप बोर्ड' के सदस्य भी हैं।पहले भी दे चुके हैं दानयह हालिया दान इस कपल की ओर से दिए गए दो पहले के बड़े तोहफों के बाद आया है। 2024 में उन्होंने 'अनुराधा और विकास सिन्हा डिपार्टमेंट ऑफ डेटा साइंस' की स्थापना की थी। साथ ही स्कॉलरशिप, फैकल्टी, रिसर्च और खास पहलों के लिए एंडोमेंट भी दिए। फिर 2025 में उन्होंने 'सिन्हा इनोवेशन लैब फ़ॉर डेटा साइंस' की स्थापना के लिए एक और बड़ा योगदान दिया।ये भी पढ़ें- US-Iran War: ईरान ने होर्मुज में दर्जनों कमर्शियल जहाजों को बनाया निशाना! 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, 'नो-गो जोन' का दायरा भी बढ़ायाUNT ने कहा कि यह हालिया तोहफा छात्रों की सफलता, रिसर्च और इनोवेशन से जुड़े उसके लक्ष्यों को और आगे बढ़ाएगा। साथ ही ग्रेजुएट को ऐसे वर्कफोर्स के लिए तैयार करने में मदद करेगा जो तेजी से AI और डेटा से प्रभावित हो रहा है।
चुनाव हार रहे डोनाल्ड ट्रंप? कर दिया 'रेवड़ी' बांटने का ऐलान, हर अमेरिकी को देंगे 5000 डॉलर
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन कांग्रेस पर नियंत्रण बनाए रखते हैं तो हर अमेरिकी वयस्क को 5 हजार डॉलर का ‘Trump Dividend’ दिया जाएगा। इस योजना पर करीब 1.35 ट्रिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है।
क्रूड ऑयल फिर 100 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता; पेट्रोल-डीजल और LPG महंगे होने का खतरा
अमेरिका में भारतीय दंपती की दरियादिली: एआई को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज को दिए ₹191 करोड़, आंध्र से है कनेक्शन- Indian couple Anuradha Vikas Sinha donated 20 million dollar for AI research in US college named after him
हर अमेरिकी नागरिक को ट्रंप ने ₹4.2 लाख देने का क्यों कर दिया ऐलान?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी हाउस और सीनेट दोनों जीत जाती है, तो अमेरिका की आर्थिक सफलता के चलते हर वयस्क नागरिक को 5000 डॉलर का डिविडेंड दिया जाएगा. उन्होंने पिछले साल सेना को दिए गए 1776 डॉलर के बोनस का भी जिक्र किया.
LinkedIn पर नौकरी की जगह मिला शादी का ऑफर, अमेरिका में सेटल बेटे के लिए मां ने भेजा मैसेज
हाल ही में एक लड़की को लिंक्डइन पर जॉब ऑफर की जगह अमेरिका में सेटल PhD लड़के के लिए शादी का रिश्ता आया. एक मां ने ये मैसेज भेजा था, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
अब अमेरिका में भी रेवड़ी पॉलिटिक्स, ट्रंप ने चुनाव जीतने पर हर युवा को कैश देने का किया वादा
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान जंग में उलझी हुई है, अमेरिका में तेल महंगा हुआ पड़ा है. ऐसे में मिडटर्म चुनावों में ट्रंप की पार्टी डेमोक्रेट्स के मुकाबले संघर्ष कर रही है. ट्रंप अब वोटरों को रिझाने का नया तरीका लेकर आए हैं.
पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा राजनीतिक व रणनीतिक बयान दिया है। टेक्सास के डलास में आयोजित रिपब्लिकन मिडटर्म सम्मेलन में भाग लेने के लिए जॉइंट बेस एंड्रयूज से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने भविष्यवाणी की कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के तुरंत बाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि चुनाव के तुरंत बाद यह युद्ध खत्म हो जाएगा क्योंकि वे (ईरान) अब ज्यादा देर तक टिक नहीं सकते।'ईरान अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश में जुटा': ट्रंप का आरोपट्रंप ने आरोप लगाया कि तेहरान जानबूझकर इस टकराव को लंबा खींच रहा है ताकि अमेरिकी मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके। उनके अनुसार, ईरान यह उम्मीद कर रहा है कि नवंबर चुनावों के जरिए वाशिंगटन की सत्ता में ऐसे 'कमजोर' लोग आ जाएं जो उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दें और उसे परमाणु हथियार विकसित करने का मौका मिल जाए। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान की पूरी रणनीति केवल परमाणु क्षमता हासिल करने के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अमेरिका किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका तुरंत कूटनीतिक बातचीत शुरू करेगा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन किसी जल्दबाजी में नहीं है क्योंकि हालिया सैन्य और आर्थिक प्रहारों से ईरान की स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है।तेल की कीमतों और रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी चिंताईरान संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलने और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में उछाल के सवाल पर भी ट्रंप ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होते ही ईंधन की कीमतें तेजी से नीचे आ जाएंगी। उल्लेखनीय है कि सातवें महीने में प्रवेश कर चुके इस सैन्य संघर्ष और बढ़ती महंगाई को लेकर अमेरिकी मतदाताओं में असंतोष देखा जा रहा है, जिससे 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। हालांकि, ट्रंप ने भरोसा जताया कि यह स्थिति जल्द सामान्य होगी।
'हर जगह वर्कलोड का प्रेशर है...' अमेरिका से भारत लौटी महिला को याद आया वहां का वर्क कल्चर; Video Viral
दुनिया एक नए तकनीकी शीत युद्ध की ओर बढ़ रही है, जहां अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला अब सिर्फ एआई मॉडल का नहीं बल्कि चिप, कंप्यूटिंग क्षमता, डाटा और वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण का है।
भारतीय कंपनियों ने डेटा चुराया?: अमेरिकी सीनेटरों ने की ब्लैक लिस्ट में डालने की मांग, क्या है पूरा मामला- Did Indian companies steal data US senators demand they be blacklisted here’s full story
iPhone 18 Pro Max के लिए देने होंगे 1.70 लाख? अमेरिका में बढ़ी कीमत ने बढ़ाई टेंशन
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Iran-US War Update: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने बुधवार (9 सितंबर) रात कहा कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद ईरान के साथ युद्ध खत्म हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब ज्यादा समय तक इस युद्ध को झेलने की स्थिति में नहीं है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन में शामिल होने के लिए डलास रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म हो जाएगा। उन्होंने इसके पीछे वजह बताते हुए कहा कि ईरान अब ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता।ईरान पर चुनाव को प्रभावित करने का आरोपट्रंप ने ईरान पर अमेरिका के नवंबर में होने वाले चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि तेहरान ऐसे लोगों को चुनाव जिताना चाहता है, जिन्हें उन्होंने अच्छे और कमजोर लोगों का समूह बताया। ट्रंप के मुताबिक, ईरान चाहता है कि ऐसे लोग सत्ता में आएं जो उसे अकेला छोड़ दें। उसे परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति दे दें। हालांकि, ईरान की ओर से ट्रंप के इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।होर्मुज में ईरान ने बढ़ाया सैन्य दबावट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। यह जलमार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बुधवार को दो अमेरिकी जहाजों, आठ तेल टैंकरों और 10 अन्य जहाजों पर हमला किया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। ब्रिटेन के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी कहा कि खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कई जहाजों को जारी सैन्य गतिविधियों के बीच “डिसेबलिंग फायर” का सामना करना पड़ा।100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेलईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ा है। युद्ध के फिर तेज होने और होर्मुज जलमार्ग पर ईरान की पकड़ मजबूत होने के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड ने 100 डॉलर का स्तर पार किया है। इससे दुनियाभर में महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ सकती है।अमेरिकी मिडटर्म चुनाव बने ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव ट्रंप प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। लंबे समय से चल रहे युद्ध और बढ़ती महंगाई एवं जीवन-यापन की लागत को लेकर अमेरिकी मतदाताओं में नाराजगी बढ़ने की बात कही जा रही है। ट्रंप ने तेल की कीमतों को भी चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि युद्ध खत्म होने के तुरंत बाद तेल की कीमतें भी नीचे आ जाएंगी। इस तरह उन्होंने ईरान युद्ध और अमेरिकी जनता पर बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच सीधा संबंध बताया।बातचीत की संभावना से भी इनकार नहींहालांकि, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिलहाल सक्रिय रूप से बातचीत की कोशिश नहीं कर रहा है। लेकिन उन्होंने कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद भी नहीं किया। ट्रंप ने कहा कि बातचीत संभव हो सकती है। लेकिन फिलहाल अमेरिका इसे लेकर प्रयास नहीं कर रहा है। ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती गतिविधियों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।ये भी पढ़ें- 10 सितंबर को ओडिशा में रेड कलर वॉर्निंग, बिहार-झारखंड संग 12 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट! 50kmph स्पीड से आएगी आंधी
नेपाल जलप्रलय: मदद से पीछे हटे अमेरिका जैसे देश, ट्रंप के फैसले से राहत कार्यों को लगा बड़ा झटका
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सिरिक से लेकर केशम तक कई धमाके... ईरान-अमेरिका की जंग में क्या चल रहा है?
ईरान के सिरिक, मिनाब काउंटी और केशम आइलैंड में धमाकों और प्रोजेक्टाइल गिरने की खबरों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इसी बीच ट्रंप ने जंग के नवंबर चुनाव बाद खत्म होने का दावा किया, जबकि तेहरान ने बातचीत और समुद्री सुरक्षा पर अपना रुख दोहराया.
अमेरिकी हमलों में ईरान के पांच तेल टैंकर तबाह, देखें दुनिया आजतक
अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकर को तबाह कर दिया. सेंट्रल कमांड ने अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर मिसाइल हमले की कोशिश के बाद हमले का दावा किया. पिछले दो दिन में अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत पर ईरान की ओर से मिसाइल हमले के आरोप लगाए गए हैं. देखें दुनिया आजतक.
अमेरिका: सोशल मीडिया पर खूब बिक रहा जादू-टोना, कोई श्राप खरीद रहा तो कोई प्यार के टोटके...; क्यों बढ़ा क्रेज?
एक नए शोध के अनुसार, 2024 तक वैश्विक तापमान वृद्धि में भारत का योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस से भी कम है, जो प्रमुख उत्सर्जकों से कम है लेकिन ब्राजील और ब्रिटेन जैसे देशों से अधिक है।
अमेरिका-चीन गैर-संवेदनशील वस्तुओं में संतुलित व्यापार की नई सूची तैयार कर रहे हैं: जैमिसन ग्रीर
New Delhi, 9 सितंबर . अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार संतुलित करने के उद्देश्य से ऐसी गैर-संवेदनशील वस्तुओं की पहचान कर रहे हैं, जिनका आयात-निर्यात दोनों देशों के बीच अधिक संतुलित तरीके से किया जा सके. यह जानकारी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर ने दी. ग्रीर ने ... Read more
गल्फ में ईरान-अमेरिका की भीषण लड़ाई, 15 जहाज डूबे, लाखों बैरल तेल जला
ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका के दो जहाजों को डूबोया है और 8 तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया है. ईरान का ये एक्शन उस अमेरिकी हमले के जवाब में हुआ है जहां अमेरिकी सेना ने 5 ईरानी टैंकरों पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया था. इस घटना में लाखों लीटर कच्चा तेल जल गया है.
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
जागतिक कुस्ती स्पर्धेसाठी अमेरिकेला जाणाऱ्या अमृता पुजारीला सतेज पाटील यांची ५० हजारांची मदत
मुरगूडच्या कुस्तीपटू अमृता पुजारीची २३ वर्षांखालील जागतिक अजिंक्यपद कुस्ती स्पर्धेसाठी निवड झाली आहे. अमेरिकेच्या आंतरराष्ट्रीय मोहिमेसाठी आमदार सतेज उर्फ बंटी पाटील यांनी जाहीर केलेली ५० हजारांची मदत सुपूर्द केली.
'US खुद खत्म कर रहा अमेरिकी डॉलर पर भरोसा', आजतक के सवाल पर बोले क्रेमलिन प्रवक्ता
दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स समिट का आयोजन किया जाना है. इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी और क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस की. और बड़ी खबर ये है कि आजतक संवाददाता अंजना ओम कश्यप के सवाल के जवाब में पेसकोव ने कहा कि ब्रिक्स का मकसद डॉलर को खत्म करना नहीं है. अमेरिका खुद अपने डॉलर की साख गिरा रहा है. पेसकोव ने कहा कि अमेरिका ने रूस से डॉलर और यूरो के इस्तेमाल का हक छीना है.
Hormuz Strait में अमेरिकी पनडुब्बी पकड़ने का ईरान का दावा, ट्रंप के सामने बढ़ी चुनौती
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास एक अमेरिकी बिना क्रू वाले अंडरवाटर व्हीकल को पकड़ लिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ...
कभी सीज़फ़ायर (युद्धविराम) में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए अपनी पीठ थपथपाने वाला पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण एक मुश्किल कूटनीतिक चुनौती का सामना कर रहा है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस्लामाबाद की स्थिति को रस्सी पर चलने जैसा बताया है, क्योंकि ईरान और इस संघर्ष में शामिल खाड़ी देशों—दोनों के साथ ही पाकिस्तान के करीबी संबंध हैं। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच भविष्य की बातचीत में पाकिस्तान की संभावित भूमिका के बारे में बात करते हुए, आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद के ईरान के साथ-साथ सभी खाड़ी देशों के साथ भाई जैसे संबंध हैं और ये संबंध पाकिस्तान के लिए बहुत अहम हैं। इसे भी पढ़ें: Pakistan के Karachi और Lahore पर Climate Change का बड़ा संकट, दुनिया के सबसे असुरक्षित शहरों में शामिल उन्होंने कहा कि हालात ने इस्लामाबाद को यह सावधानी से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वह इस टकराव में किस हद तक शामिल हो सकता है, कहाँ उसे संयम बरतना चाहिए और क्या वह इससे दूर रह सकता है। पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया में टकराव को खत्म करने की कोशिश में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की है, लेकिन अब तक की बातचीत से कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान में BLA का भीषण तांडव, 28 ऑपरेशनों में 52 Pakistani Soldiers के मारे जाने का दावा पाकिस्तान के लिए एक और मुश्किल: हूथी-सऊदी अरब तनाव और मक्का समझौता इस बीच, आसिफ ने यह भी चेतावनी दी कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए 'मक्का डिफेंस अलायंस' (मक्का रक्षा गठबंधन) के तहत सामूहिक रक्षा के नियम तब लागू हो सकते हैं, जब किसी सदस्य देश पर हमला हो। उनके ये बयान यमन में ईरान-समर्थित हूथी बलों द्वारा सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला शुरू करने के कुछ घंटों बाद आए। इन हमलों में शहरों के साथ-साथ आर्थिक, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया। खबरों के अनुसार, कम से कम 73 नागरिक घायल हुए। जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि गठबंधन की संयुक्त रक्षा प्रतिबद्धताओं को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान समझौते के तहत सऊदी अरब के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है और तीनों देशों को अपनी पहल पर किसी अन्य देश के खिलाफ हमले शुरू करने की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई तभी होगी जब सदस्य देशों में से किसी एक पर हमला किया जाएगा।
अमेरिका को बड़ा झटका, ईरान ने होर्मुज में अमेरिकी पनडुब्बी को पकड़ा; अब क्या करेंगे ट्रंप?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी ने कहा कि हमने आतंकवादी अमेरिकी सेना की सबसे मॉडर्न, इंटेलिजेंट और बिना पायलट वाली सबमरीन में से एक को होर्मुज स्ट्रेट के एंट्री गेट पर फंसा लिया है।
ईरान ने खार्ग द्वीप और जास्क बंदरगाह के पास ईरानी तेल टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई मिसाइलें दागी हैं। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने अरब मीडिया का हवाला देते हुए पुष्टि की कि ईरानी मिसाइलों का एक जत्था दुश्मन के ठिकानों की ओर बढ़ा और जॉर्डन में चल रहे अमेरिकी बेस पर सफलतापूर्वक हमला किया। यह मिसाइल हमला क्षेत्रीय जलक्षेत्र में ईरानी समुद्री संपत्तियों पर अमेरिकी हमलों की एक श्रृंखला के बाद हुआ है। IRIB ने बताया कि शुरुआती हमले में खार्ग द्वीप एंकरेज के पास एक ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया गया, जहाँ से चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। कुछ ही देर बाद, अमेरिकी सेना ने जास्क काउंटी के तटीय जलक्षेत्र में एक कमर्शियल जहाज पर हमला किया, साथ ही उस इलाके में अज्ञात मूल का एक और विस्फोट भी हुआ। इसे भी पढ़ें: Iran vs US Tension: जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर Iran का Missile Attack, बढ़ सकता है युद्ध का खतरा IRIB के अनुसार, इन हमलों के जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने तत्काल निकासी की चेतावनी जारी की। पड़ोसी बंदरगाहों पर समुद्री जहाजों के चालक दल को संबोधित करते हुए, IRGC ने बहरीन और कुवैत के बंदरगाहों के पास तेल टैंकरों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प लिया। IRGC नौसेना ने IRIB के अनुसार घोषणा की, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के कई टैंकरों को निशाना बनाने में अमेरिकी आतंकवादी सेना के अत्याचारों को देखते हुए, हम कुवैती और बहरीनी बंदरगाहों पर मौजूद सभी टैंकर चालक दलों को चेतावनी देते हैं - जो इन आतंकवादियों को जगह देते हैं और उनके अत्याचारों में भागीदार हैं - कि वे तुरंत अपने जहाजों को छोड़ दें, चाहे वे लंगर डाले हुए हों या बंदरगाह पर हों, क्योंकि उन्हें निशाना बनाया जाएगा। रणनीतिक जलमार्गों और क्षेत्रीय मेजबान देशों में तनाव गंभीर स्तर पर बना हुआ है क्योंकि दोनों सैन्य बल एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को, ईरान की IRGC नौसेना ने दावा किया था कि उसके बलों ने एक जटिल खुफिया और ऑपरेशनल अभियान के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर एक अमेरिकी मानवरहित सबमर्सिबल (पानी के नीचे चलने वाला वाहन) को कब्जे में ले लिया था। इसे भी पढ़ें: US अटैक के बाद ईरान ने मचा दिया गदर, होर्मुज में कितने जहाज ठोके? IRIB के अनुसार, IRGC नेवी के लड़ाकों ने तड़के अमेरिकी सेना की सबसे आधुनिक, इंटेलिजेंट और बिना चालक वाली पनडुब्बियों में से एक को पकड़ लिया। IRGC नेवी ने बताया कि यह पनडुब्बी पानी के नीचे इस्तेमाल होने वाली लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस है और इसे 2025 में अमेरिकी बेड़े को सौंपा गया था। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, यह पनडुब्बी दुनिया की सबसे एडवांस्ड अंडरवाटर टेक्नोलॉजी से लैस है और इसे युद्ध की ट्रॉफी के तौर पर ज़ब्त किया गया है। IRNA ने आगे बताया कि पकड़ी गई पनडुब्बी की तस्वीरें आने वाले कुछ घंटों में जारी होने की उम्मीद है।
Iran vs US Tension: जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर Iran का Missile Attack, बढ़ सकता है युद्ध का खतरा
ईरान ने बुधवार, 9 सितंबर को जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मुवाफ़्फ़क साल्टी एयर बेस को निशाना बनाया गया। यह हमला ईरानी जहाजों पर अमेरिकी सेना के हमले के जवाब में किया गया था। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने घोषणा की कि उन्होंने एक सज़ा देने वाले ऑपरेशन के तहत जॉर्डन में अमेरिकी अल-अज़राक बेस पर भारी मिसाइल हमले किए। इसे भी पढ़ें: US सेना ने Iran के तेल टैंकरों को बनाया निशाना, Revolutionary Guard ने दी चेतावनी हमलों के कुछ ही समय बाद, जॉर्डन की सेना ने घोषणा की कि उसके एयर डिफेंस नेटवर्क ने आने वाली मिसाइलों को रोककर बेअसर कर दिया। सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, जॉर्डन के डिफेंस सिस्टम ने 20 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया और उनमें से 18 को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें सुनसान इलाकों में गिरीं। यह तनाव अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की कार्रवाई के बाद बढ़ा है, जिसने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार, 8 सितंबर को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े पांच ईरानी टैंकरों को निशाना बनाया था। यह कार्रवाई पिछले 48 घंटों में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर बार-बार किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में की गई थी। इसे भी पढ़ें: Trump के नहले पर ईरान का दहला, अमेरिका ने 5 तेल टैंकरों को उड़ाया, तेहरान ने युद्धपोतों को निशाना बनाया CENTCOM ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में मौजूद चार कच्चे तेल के टैंकरों और फारस की खाड़ी में खार्ग द्वीप के पास एक पांचवें जहाज पर हमला किया। अधिकारियों ने कहा कि जिस अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाया गया था, उसने हमलों से खुद को सफलतापूर्वक बचाया और अपने इलाके में गश्त जारी रखी। इसमें किसी भी अमेरिकी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, जबकि हमलों से पहले टैंकरों पर मौजूद कर्मचारियों को वहां से निकलने का निर्देश दिया गया था। कोलंबिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तेहरान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरानी सेना अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाती है, तो वाशिंगटन लगातार जवाबी कार्रवाई करेगा।
अवैध रूप से भारत में घुसे एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों पर बरकरार है UAPA, NIA ने साफ की स्थिति
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ी एक बेहद अहम और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की संप्रभुता से जुड़े एक बड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। भारत में गैरकानूनी और संदिग्ध तरीके से घुसपैठ करने वाले एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ लगाए गए सख्त आतंकवाद विरोधी कानून यानी 'UAPA' के आरोप हटाए नहीं गए हैं, बल्कि वे पूरी तरह से बरकरार हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में भले ही एनआईए ने अभी शुरुआती तौर पर अप्रवासन और विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के तहत अपनी पहली चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी हो, लेकिन जांच एजेंसी ने यह साफ कर दिया है कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए आगे की जांच अभी भी जोरों पर जारी है और आने वाले दिनों में पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट के जरिए UAPA की धाराओं को और अधिक पुख्ता किया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय घुसपैठ मामले के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और एनआईए की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ रही है।NIA ने विशेष अदालत में दाखिल की पहली चार्जशीट, 180 दिन की समयसीमा का था मामलाराष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में इन सातों विदेशी आरोपियों के खिलाफ अप्रवासन और विदेशी अधिनियम (IFA) की धाराओं 21 और 23 के तहत अपनी पहली आधिकारिक चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन सभी विदेशी नागरिकों की न्यायिक हिरासत के 180 दिन बीते 8 सितंबर को पूरे होने वाले थे। यदि कानूनी समयसीमा के भीतर एजेंसी द्वारा अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, तो वैधानिक प्रावधानों के तहत इन आरोपियों को 'डिफॉल्ट बेल' (Default Bail) यानी स्वतः जमानत मिलने का खतरा पैदा हो जाता। चूंकि विदेशी अधिनियम के तहत इनके अवैध प्रवेश और अपराध के पुख्ता सबूत पहले ही सामने आ चुके थे, इसलिए एनआईए ने कानूनी पेचीदगियों से बचने और आरोपियों को जमानत का लाभ न मिलने देने के लिए तय समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले यह पहली चार्जशीट दाखिल करने का रणनीतिक कदम उठाया है।क्या UAPA के आरोप हटा दिए गए हैं? सरकार और एजेंसी के सूत्रों ने दूर किया भ्रमइस मामले में जब शुरुआती चार्जशीट में यूएपीए (UAPA) की धाराओं का प्रत्यक्ष जिक्र नहीं दिखा, तो मीडिया और कानूनी गलियारों में यह भ्रम फैल गया था कि शायद इन विदेशी नागरिकों पर से आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप हटा लिए गए हैं। हालांकि, इस भ्रम की स्थिति को पूरी तरह से दूर करते हुए सरकारी और एजेंसी के वरिष्ठ सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट के शुरुआती दस्तावेज में UAPA की धाराएं न होने का यह कतई मतलब नहीं है कि आतंकवाद के गंभीर आरोप समाप्त हो गए हैं या इस एंगल पर जांच बंद कर दी गई है। भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली के नियमों के अनुसार, पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी किसी भी मामले में आगे की विस्तृत जांच जारी रखी जा सकती है। जैसे-जैसे जांच के दौरान नए डिजिटल सबूत, विदेशी फंडिंग के ट्रेल और अन्य कड़ियां सामने आएंगी, एनआईए अदालत में पूरक (Supplementary) चार्जशीट दाखिल करके UAPA के तहत कठोर आरोप औपचारिक रूप से जोड़ देगी।म्यांमार के रास्ते भारत में हुई थी घुसपैठ, क्या ये किराए के सैनिक थेयह पूरा गंभीर मामला इसी साल 13 मार्च का है, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वान डिक (Matthew Aaron Van Dyke) और छह यूक्रेनी नागरिकों—कामियांस्की विक्टर, हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोवस्की, स्टेफनकीव मारियान और गोंचारुक मैक्सिम—को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अब तक के खुलासे के अनुसार, ये सभी सातों विदेशी नागरिक म्यांमार के रास्ते बेहद गोपनीय और अवैध तरीके से भारतीय सीमा के भीतर दाखिल हुए थे। इसके बाद ये लोग देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा करते हुए घरेलू हवाई अड्डों पर पकड़े गए। भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इस बात का गहरा अंदेशा है कि यह पूरा अंतरराष्ट्रीय गिरोह भारत या पड़ोसी देशों में 'किराये के सैनिकों' (Mercenaries) या गुप्त सैन्य गतिविधियों के रूप में सक्रिय हो सकता है। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए शुरुआत में एनआईए ने इनके खिलाफ UAPA और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।अमेरिकी राजनयिकों के हस्तक्षेप और कांसुलर एक्सेस पर एनआईए का स्पष्ट रुखइस हाई-प्रोफाइल मामले में जब एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी हुई, तो अमेरिका के राजनयिकों और दूतावास द्वारा इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी गई और कानूनी सहायता की मांग उठाई गई। इस कूटनीतिक हस्तक्षेप पर बात करते हुए एनआईए के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया एक सामान्य और स्थापित अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जिस तरह दुनिया के किसी भी देश में यदि कोई भारतीय नागरिक पकड़ा जाता है, तो भारत का दूतावास वहां कांसुलर एक्सेस और कानूनी सहायता की मांग करता है, ठीक उसी तरह वियना कन्वेंशन (Vienna Convention) के नियमों के तहत विदेशी नागरिकों को भी अपने देश के राजनयिकों से मिलने का अधिकार होता है। इस कूटनीतिक औपचारिकता का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मामले की आपराधिक गंभीरता या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर किसी भी प्रकार का समझौता किया जाएगा। एनआईए इस मामले में पूरी मुस्तैदी से अपनी तफ्तीश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन विदेशी नागरिकों के भारत में घुसने के असली और खतरनाक इरादे क्या थे।
पाकिस्तान के लिए दोधारी तलवार बना अमेरिका-ईरान तनाव, ख्वाजा आसिफ बोले- रस्सी पर चलने जैसी है स्थिति
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान की कूटनीति को नाजुक मोड़ पर ला खड़ा कर दिया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ईरान से ऐतिहासिक नजदीकी और खाड़ी देशों से भाईचारे के रिश्तों के बीच इस्लामाबाद की स्थिति रस्सी पर चलने जैसी है। मध्यस्थता के प्रयास अब तक सफल नहीं हुए हैं।
दक्षिण कोरिया-अमेरिका के शीर्ष कमांडरों ने किया डीएमजेड इलाकों का दौरा , संयुक्त तैयारी पर जोर
सोल, 9 सितंबर . हाल के हफ्तों में उत्तर कोरिया की सीमा पर अनचाही गतिविधियां बढ़ गई है. Wednesday को दक्षिण कोरिया और यूएस फोर्सेज कोरिया (यूएसएफके) के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने पूर्वी सीमावर्ती इकाइयों का दौरा किया और संयुक्त तैयारी व अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने (डिटरेंस) पर जोर दिया. जेसीएस ने एक ... Read more
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावों को किया खारिज, दो जहाजों पर हमले का बताया 'सच'
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के दो अमेरिकी जहाजों पर हमले के दावे को सिरे से खारिज किया है। बुधवार को एक बयान जारी कर 'सच' बताया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावों को किया खारिज, दो जहाजों पर हमले का बताया ‘सच’
वाशिंगटन, 9 सितंबर . अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के दो अमेरिकी जहाजों पर हमले के दावे को सिरे से खारिज किया है. Wednesday को एक बयान जारी कर ‘सच’ बताया है. सेंटकॉम ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर फैक्ट बताया. उनके मुताबिक ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) फोर्स ने दावा किया ... Read more
महंगाई का नया झटका! अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल $100 पार, फिर जेब खाली करेंगे पेट्रोल के दाम
महंगाई का नया झटका! अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल $100 पार, फिर जेब खाली करेंगे पेट्रोल के दाम
अमेरिका से इंग्लैंड तक RSS की चर्चा, संपादक हितेश शंकर का प्रदीप जोशी से विशेष संवाद
भुवनेश्वर के Vivanta Bhubaneswar DN Square में आयोजित ‘पाञ्चजन्य सुशासन संवाद – ओडिशा की उड़ान 2.0’ कार्यक्रम में संपादक श्री हितेश शंकर जी के सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्री प्रदीप जोशी ने संघ, हिंदुत्व और भारत को लेकर दुनिया में बढ़ती जिज्ञासा पर विस्तार से […]
NIA ने अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों पर UAPA के तहत जांच जारी रखी
नयी दिल्ली, नौ सितंबर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने सात विदेशी नागरिकों पर गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत लगाए गए आतंकवाद के आरोप नहीं हटाए हैं और आतंकवाद रोधी कानून के तहत जांच जारी है। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को यह बात कही। इन विदेशी लोगों में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, एनआईए ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम (आईएफए) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है, क्योंकि अब तक की जांच में इस कानून के तहत अपराध ‘‘पूरी तरह से साबित’’ हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि एजेंसी ने अपने पहले आरोपपत्र में यह भी कहा है कि यूएपीए के तहत जांच जारी है। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘कानून आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भी आगे जांच करने और पूरक आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति देता है, जब अतिरिक्त सबूतों से अन्य अपराधों का पता चलता है।’’सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों की न्यायिक हिरासत के 180 दिन 8 सितंबर को पूरे होने वाले थे और अगर आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जाता, तो वे अपने आप जमानत के पात्र हो जाते। उन्होंने कहा कि चूंकि आईएफए के तहत अपराध साबित हो चुके थे, इसलिए एनआईए ने कानूनी ज़मानत की अवधि खत्म होने का इंतज़ार करने के बजाय पहला आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, “...आईएफए आरोपपत्र में यूएपीए के प्रावधान शामिल न होने का मतलब यह नहीं है कि यूएपीए जांच वापस ले ली गई है, छोड़ दी गई है या बंद कर दी गई है।”सूत्रों ने कहा कि हिरासत में लिए गए अपने एक नागरिक का मामला उठाना अमेरिकी राजनयिकों के लिए ‘‘सामान्य राजनयिक प्रक्रिया’’ भी है। उन्होंने कहा कि जब भी किसी भारतीय को विदेश में गिरफ़्तार किया जाता है, तो भारतीय मिशन राजनयिक पहुंच, कानूनी मदद और निष्पक्ष व्यवहार के लिए स्थानीय विदेश कार्यालय तथा अधिकारियों से संपर्क करते हैं; साथ ही, जहां उचित हो, वहां जल्द सुनवाई और सज़ा में छूट की भी मांग करते हैं। सूत्रों ने कहा कि वियना संधि के तहत हिरासत में लिए गए नागरिकों तक राजनयिक पहुंच को भी विशेष रूप से मान्यता दी गई है। एनआईए ने विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें सात लोगों पर आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत गैर-कानूनी तरीके से घुसने, रहने और घूमने-फिरने के आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने 13 मार्च को वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों-कामिन्स्की विक्टर, हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन और होंचारुक मक्सिम को गिरफ़्तार किया था। इन लोगों पर आरोप है कि वे म्यांमा से मिज़ोरम सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुए थे और बाद में देश भर के अलग-अलग घरेलू हवाई अड्डों पर उन्हें पकड़ा गया। आरोप है कि यह समूह भाड़े के लड़ाकों के तौर पर काम कर रहा था। एनआईए ने पूर्व में उनके खिलाफ यूएपीए के प्रावधानों और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
खेल के मैदान में हार और जीत एक सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन असली सीख इस बात में छिपी होती है कि हार के बाद हम खुद को कैसे संभालते हैं। अमेरिका की एक लिटिल लीग बेसबॉल टीम के कोच कोरी एडवर्ड्स का 17 सेकंड का भाषण इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है। 2026 लिटिल लीग वर्ल्ड सीरीज के फाइनल में हार की कगार पर खड़ी अपनी टीम के 12 साल के खिलाड़ियों को उन्होंने ऐसी सीख दी, जो खेल से कहीं आगे जिंदगी में भी काम आती है। एडवर्ड्स ने बच्चों से कहा कि नतीजा चाहे जो हो, उन्हें सिर ऊंचा रखना है, एक-दूसरे पर गुस्सा नहीं करना है और अपनी बॉडी लैंग्वेज सकारात्मक रखनी है। नेवादा के हेंडरसन की पासेओ वर्डे टीम के कोच एडवर्ड्स की टीम फाइनल में कुराकाओ के खिलाफ खेल रही थी। मैच हाथ से निकलता देख टीम के खिलाड़ी बुरी तरह निराश होने लगे थे। कुछ बच्चे आंसू रोकने की कोशिश कर रहे थे, कुछ मायूस होकर बैठे थे और कुछ एक-दूसरे को दोष दे रहे थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज से साफ दिख रहा था कि उन्होंने मानसिक रूप से हार स्वीकार कर ली है। यह देखकर एडवर्ड्स ने टीम को अपने पास बुलाया और उन्हें समझाया कि मुश्किल समय में मानसिक रूप से मजबूत रहना सबसे जरूरी है। ब्रॉडकास्टर के कैमरों में कैद उनकी यह छोटी-सी स्पीच सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कोच की बात का असर भी तुरंत दिखाई दिया। मायूस बैठे बच्चे फिर मुस्कुराने लगे और मैदान में खेल रहे अपने साथियों का उत्साह बढ़ाने लगे। मैच खत्म होने के बाद खिलाड़ियों की आंखों में आंसू जरूर थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। इसके बाद पूरी टीम ने साथ बैठकर पिज्जा खाया और बास्केटबॉल खेला। दिन में स्टारबक्स के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर के रूप में काम करने वाले एडवर्ड्स ने बाद में बताया कि सही तरीके से हारना नहीं सीखेंगे तो हार की कड़वाहट पिछली जीतों और अच्छी यादों पर भी भारी पड़ सकती है। उनका कहना था कि परेशानी आने पर टूटने के बजाय उसका डटकर सामना करना चाहिए और बेस्ट देना चाहिए। उन्होंने बच्चों को यह भाषण मैच में किसी चमत्कारी वापसी के लिए नहीं दिया था, बल्कि एक सबक देने के लिए दिया था। उनके मुताबिक, चुनौती के समय हम किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, यही हमारे चरित्र को दिखाता है। 12 साल की उम्र में यह बच्चों के लिए मुश्किल पल था, लेकिन आगे जिंदगी में उन्हें इससे भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा। ऐसे में असली जीत सिर्फ मुकाबला जीतने में नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में खुद को सकारात्मक रखने में है। क्योंकि जीत हमें खुशी देती है, लेकिन हार को गरिमा के साथ स्वीकार करना हमें बेहतर इंसान बनाता है।
अमेरिका का ईरान पर बड़ा वार, 27 एयरलाइंस प्रतिबंधित; तुर्की, मलेशिया और UAE की कंपनियों पर भी शिकंजा
अमेरिका के वित्त विभाग ने ईरान की 27 एयरलाइंस को अपनी 'स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स' (एसडीएन) सूची में शामिल कर लिया है। इस कदम के साथ अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश करते हुए उसकी बची हुई सभी एयरलाइंस को निशाने पर ले लिया है।
टेनिस जगत के मौजूदा सुपरस्टार खिलाड़ी कार्लोस अल्कारेज साल 2026 के आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उलटफेर का शिकार हो गए हैं, जिसमें उनको अमेरिकी खिलाड़ी बेन शेल्टन के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से क्यों नाराज हैं भारतीय-अमेरिकी? मिडटर्म इलेक्शन पर दिखेगा असर
Donald Trump Approval Rating: अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections 2026) को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। इस बीच, एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता बढ़ा दी है। एशियाई-अमेरिकी और प्रशांत ...
कनाडा के जवाबी टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के सामानों को अमेरिका की बड़ी और लॉन्ग टर्म सरकारी खरीद से बाहर करने की दिशा में मंगलवार को कदम उठाया।
होर्मुज़ में अमेरिका-ईरान फिर भिड़े, सऊदी पर हूती हमले: क्यों बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें - BBC
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होर्मुज़ में अमेरिका-ईरान फिर भिड़े, सऊदी पर हूती हमले: क्यों बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें
भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 90 प्रतिशत तेल आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल की क़ीमत बढ़ने का मतलब है कि समान मात्रा में तेल ख़रीदने के लिए भारत को पहले से ज्यादा डॉलर ख़र्च करने पड़ेंगे.
अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने यूएफसी स्टार पूजा तोमर से मुलाकात की
New Delhi, 9 सितंबर . India में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट पूजा तोमर से मुलाकात की और अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (यूएफसी) में उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों की तारीफ की. गोर ने पूजा के सफर को प्रेरणादायी उदाहरण बताया. पूजा तोमर के साथ मुलाकात की तस्वीर एक्स पर साझा करते हुए ... Read more
अमेरिका और ब्रिटेन के नए आंकड़े बताते हैं कि नॉन-ग्रेजुएट्स के मुकाबले कॉलेज डिग्री वालों को मिलने वाला सैलरी का फायदा घट रहा है। अर्थशास्त्रियों होजे अजार, मिरेया गिने और जेवियर एस्पिन की रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में कॉलेज ग्रेजुएट्स का वेतन प्रीमियम 4 वर्षों में लगातार गिरा है। कुल गिरावट करीब 10% है। यह 1970 के दशक के बाद पहली बड़ी गिरावट मानी जा रही है। 100 साल से भी ज्यादा समय में पहली बार ग्रेजुएट्स की मांग घट रही है। ब्रिटेन में भी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की डिग्री वालों का फायदा कम हो रहा है। एआई खासतौर पर उन व्हाइट-कॉलर और नॉलेज-वर्क जॉब्स को बदल रहा है, जिन पर लंबे समय से ग्रेजुएट्स का दबदबा था। भारत में डिग्रीधारी बढ़े लेकिन नौकरियां नहीं अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2023 के बीच युवाओं में ग्रेजुएट्स की संख्या 10% से बढ़कर 28% हो गई। लेकिन हर साल बढ़ने वाले ग्रेजुएट्स के अनुपात में नौकरियां नहीं बन रहीं। करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट्स जॉब मार्केट में आते हैं, जबकि करीब 28 लाख जॉब पैदा होती हैं। बेरोजगार युवाओं में अब करीब दो-तिहाई ग्रेजुएट हैं। सर्वे - 70-90% एम्पलॉयर्स स्किल बेस्ड भर्ती कर रहे अमेरिका के नेशनल एसोसिएशन ऑफ कॉलेजेस एंड एम्पलाइज की रिपोर्ट में करीब 70% नियोक्ता अब स्किल्स-बेस्ड हायरिंग कर रहे हैं। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब 90% कंपनियां डिग्री के बजाय कौशल के आधार पर भर्तियां करती हैं। 94% एम्पलॉयर्स का मानना है कि स्किल बेस्ड हायरिंग डिग्री, सर्टिफिकेट या अनुभव के आधार पर हायरिंग से बेहतर है। बदलाव - कई देशों में डिग्री की जरूरत में कमी आ रही देश - कमीयूएस - 3.9%यूके - 1.8%ऑस्ट्रेलिया - 1.6% (स्रोत- बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप)
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने खाड़ी में अमेरिका के दो जहाजों और आठ तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया।
आईआरजीसी का दावा: अमेरिका के आठ तेल टैंकरों और दो जहाजों पर की कार्रवाई, दस अन्य जहाजों को भी बनाया निशाना
अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर किया हमला, ईरान ने भी 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका-ईरान तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बाद फिर से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने अब ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया। ईरान ने भी इसका करार जवाब देते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं हैं। वहीं जॉर्डन की सेना की ओर से उसके एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा 18 मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है। वहीं दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से इस संबंध में बयान आया है। कमांड ने कहा कि ईरान ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने का प्रयास किया था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया गया। अमेरिका की ओर से जिन पांच टैंकरों पर हमला किए जाने का दावा किया गया है, वे अरबों डॉलर के एक शैडो नेटवर्क का हिस्सा थे। यह नेटवर्क ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके सहयोगियों के लिए फंड जुटाता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को खुले तौर पर दी ये चेतावनी वहीं सेंटकॉम ने जानकारी दी कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने का प्रयास किया था। हालांकि अमेरिकी युद्धपोत ने मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया। इस घटना में किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ। खबरों के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को खुले तौर पर चेतावनी देते हुए बोल दिया कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमले की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। PC:jagran
अमेरिका-ईरान युद्ध: ट्रंप ने तेल टैंकर पर बरसाईं मिसाइलें, तेहरान का भी जवाबी हमला
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
कनाडा ने अमेरिकी सामान पर लगाया 15 से 50% तक टैरिफ; कार्नी बोले- चुप बैठने की कीमत ज्यादा
कनाडा का ताजा फैसला अमेरिका द्वारा पिछले महीने कनाडाई सामान के करीब 20 अरब डॉलर के आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद आया है। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुंचा जा सका।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार तड़के घोषणा की कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी एयर बेस पर हमला किया है। आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिका के 'आक्रामक' हमलों के जवाब में की गई।
ईरान ने दावा किया है कि उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी 'पनडुब्बी' को पकड़ा है और जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। वहीं, जॉर्डन ने अधिकांश मिसाइलें नष्ट करने की बात कही है।
कांग्रेस: अमेरिकी नागरिक पर से हटा यूएपीए; जयराम रमेश केंद्र पर हमलावर, पूछा- किसके दबाव में झुकी मोदी सरकार?- UAPA charges dropped against US citizen VanDyke congress attacks asks whose pressure did Modi government
सेंसेक्स 600 अंक से अधिक गिरकर लाल निशान में बंद हुआ, जबकि पश्चिम एशिया तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मुख्य वजह रही।
अमेरिका ने ईरान पर दो दिनों में दो बार अमेरिकी युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाने के बाद, ओमान की खाड़ी और खार्ग द्वीप के पास ईरान के पांच तेल टैंकरों पर हमला किया है। ईरान ने मंगलवार को हुए हमलों का जवाब जॉर्डन में अल-अज़राक बेस पर तैनात अमेरिकी सेना पर मिसाइलें दागकर दिया। उसने इलाके में कम से कम दो अमेरिकी जहाजों और आठ टैंकरों पर और हमले करने का भी दावा किया और कहा कि इन हमलों से भारी नुकसान हुआ है। ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इज़राइल की जंग के छह महीने बाद खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच गोलीबारी हुई है। इस दौरान तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है और वाशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। इस तनाव के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतें $99.49 प्रति बैरल तक पहुँच गईं। इसे भी पढ़ें: मुस्लिम NATO की पहली मीटिंग में ऐसा ऐलान, बुरे फंसे नेतन्याहू! मंगलवार देर रात जारी एक बयान में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले दो दिनों में दो बार अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन वह जहाज़ ईरान के हमलों की कोशिशों से सफलतापूर्वक बच निकला। इसमें कहा गया, किसी भी अमेरिकी कर्मी को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। CENTCOM ने बताया कि उसने ओमान की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकरों - M/T Kaviz, M/T Charminar, M/T Horizon 1 और M/T Riesco - के साथ-साथ खार्ग द्वीप के पास M/T Derya पर हमला करके उन्हें नष्ट कर दिया। इसे भी पढ़ें: Iran War खत्म होते ही Trump चलेंगे बड़ी चाल! इजरायल से लेकर सऊदी अरब तक बदलेंगे समीकरण CENTCOM ने आगे कहा, अमेरिकी सेना ने जहाजों पर हमला करने और उन्हें बेकार करने से पहले उनके क्रू को जहाज छोड़ने का निर्देश दिया। बाद में उसने एक वीडियो जारी किया, जिसमें ओमान की खाड़ी में M/T Riesco को डूबते हुए दिखाया गया था।
अमेरिका के मित्र देशों की हालत ईरान के इन हथियारों से खराब
ईरान अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर शाहेद ड्रोन तथा फतेह समेत बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर रहा है. सस्ते ड्रोन और मिसाइलों की बौछार से एयर डिफेंस सिस्टम को थकाया जा रहा है.
तेहरान, 9 सितंबर . ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने Wednesday तड़के घोषणा की कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी एयर बेस पर हमला किया है. आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिका के ‘आक्रामक’ हमलों के जवाब में की गई. आईआरजीसी ने एक ... Read more
ट्रेड वॉर में ट्रंप की नई चाल: कनाडा के डेयरी-शराब और बाइक अमेरिका में बैन, अब क्या पलटवार करेंगे कार्नी?- Donald Trump new move in trade war Canadian dairy, alcohol, and bikes banned in US how PM Carney retaliate now
अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकर उड़ाए: जवाब में तेहरान ने जॉर्डन पर दागीं मिसाइलें; क्या फिर बढ़ेगा तनाव?us iran war oil tankers jordan missile attack hormuz crisis
ईरान की अमेरिका को चेतावनी, जवाबी कार्रवाई का ऐलान, देखें US TOP-10
ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने कहा है कि अगर अमेरिका ने ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर हमला किया तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी. ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाने पर लेने की बात कही है. वहीं ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि संघर्ष का दायरा पूरे क्षेत्र तक फैल सकता है.
पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से बड़े युद्ध की आशंका और गहरा गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा खाड़ी क्षेत्र में ईरान के पांच बड़े कच्चे तेल वाहक टैंकरों को सटीक हमलों में नष्ट किए जाने के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भारी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान की सेना ने जॉर्डन के अल-अजराक में स्थित अमेरिका संचालित मुवफ्फक साल्ती एयरबेस (Muwaffaq Salti Air Base) को निशाना बनाते हुए 20 शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। ईरानी सैन्य कमान का दावा है कि इस बेस का इस्तेमाल अमेरिकी लड़ाकू विमानों की तैनाती, हथियार लोडिंग और मेंटेनेंस शेल्टर के रूप में किया जा रहा था, जिस पर सीधे और भारी प्रहार किए गए हैं।जॉर्डन की एयर डिफेंस का एक्शन: 18 मिसाइलें हवा में ढेर, 2 बंजर इलाकों में गिरींईरान द्वारा दागी गई इस मिसाइल श्रृंखला के बाद जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में तेज सायरन बज उठे। जॉर्डन की सेना (Jordanian Armed Forces) ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि उनके आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही ट्रैक कर नष्ट कर दिया। बाकी बची दो मिसाइलें आबादी से दूर खुले और गैर-रिहायशी इलाकों में गिरीं। जॉर्डन के रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में किसी भी आम नागरिक या सैन्य कर्मी के हताहत होने की खबर नहीं है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि हमले के बाद जॉर्डन में तैनात सभी अमेरिकी सैनिकों का सुरक्षित मिलान कर लिया गया है।होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका का हाई-टेक अंडरवॉटर ड्रोन 'कैप्चर' करने का दावाइस भीषण मिसाइल हमले के बीच ईरानी नौसेना ने एक और सनसनीखेज दावा करके वाशिंगटन को झटका दिया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन और आईआरजीसी ने एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि उसने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मुहाने पर एक जटिल खुफिया ऑपरेशन चलाकर अमेरिकी नौसेना के एक उन्नत स्वायत्त मानवरहित अंडरवॉटर व्हीकल (AUV/Drone) को पकड़ लिया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, जब्त किया गया सबमर्सिबल ड्रोन कैलिफोर्निया की प्रमुख रक्षा फर्म एंडुरिल इंडस्ट्रीज (Anduril Industries) द्वारा निर्मित 'डाइव-एलडी' (Dive-LD) ऑटोनॉमस व्हीकल है, जिसे आधुनिक रडार और निगरानी तकनीक से लैस बताया गया।पेंटागन की सफाई और दो अमेरिकी युद्धपोतों पर हमलों का दावाईरान के इस दावे पर अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन और अमेरिकी अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। रॉयटर्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि मध्य पूर्व के जलक्षेत्र में अमेरिकी सेना का एक अंडरवॉटर ड्रोन तकनीकी खराबी (Malfunction) के कारण भटक गया था। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के खुफिया तकनीक हासिल करने के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वह एक पुराना मॉडल था, जिसमें कोई क्लासिफाइड या संवेदनशील सोनार व रडार उपकरण मौजूद नहीं थे। दूसरी ओर, आईआरजीसी ने यह भी दावा किया है कि उसने खाड़ी में गश्त कर रहे दो अमेरिकी गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाजों (DDG-119 और DDG-53) पर भी बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी कमान का कहना है कि युद्धपोत हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रहे।कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और खाड़ी में आपात स्थितिमिसाइल हमलों, ड्रोन विवाद और तेल टैंकरों पर जारी हमलों की इस श्रृंखला ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में आग लगा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम तेजी से चढ़ते हुए $99 से $100 प्रति बैरल के स्तर को छूने लगे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक वाशिंगटन उसके जहाजों और हितों पर हमले नहीं रोकता, तब तक उसके सैन्य अभियान जारी रहेंगे। खाड़ी क्षेत्र में दोनों ताकतों के बीच जारी यह सीधी जवाबी कार्रवाई पूरे क्षेत्र को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट की ओर धकेल रही है।
Crude Oil Price Market Update: अमेरिका-ईरान तनाव से फिर बढ़ी तेल की कीमत, 100 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट; भारत पर क्या असर?
अमेरिका ने 27 ईरानी एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाए, तीसरे देश की कंपनियों को भी निशाना बनाया
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सबसे ज्यादा कमाई करने वाले प्रधानमंत्री बने वोंग: मिलेगी ₹27 करोड़ सैलरी, अमेरिका-भारत के नेता भी छूटे पीछे- Singapore PM receives salary hike with earnings exceeding 27 crore become highest-paid Prime Minister in world
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युद्ध का फायदा उठा रहा अमेरिका: भारत का एलपीजी आयात छह माह में 281% बढ़ा; क्या खाड़ी देशों की पकड़ कमजोर हुई?
अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकरों पर हमला, ईरान ने दी धमकी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। सोमवार देर रात अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े कई तेल टैंकरों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब ईरान ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर मिसाइल हमले की कोशिश की थी
अमेरिका-कनाडा व्यापार युद्ध: ट्रंप के टैरिफ का कनाडा ने दिया जवाब; स्टील समेत क्या सामान महंगे होंगे?
17 जून को अमेरिका के सेंट्रल पार्क में घोड़ा-बग्गी दुर्घटना के दौरान अपनी मां की जान बचाते हुए अपनी जान गंवाने वाले 18 वर्षीय पठानकोट निवासी रोमांच महाजन को अमेरिका में मरणोपरांत बड़ा सम्मान मिला है। दुनिया की सबसे बड़ी पशु अधिकार संस्था पेटा (पीपुल फॉर द् एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) द्वारा ये विशेष सम्मान पाने वाले रोमांच पहले भारतीय हैं। PETA ने अपने मुख्यालय स्थित 'ट्री ऑफ लाइफ' मेमोरियल में रोमांच की स्मृति में एक विशेष पत्ती समर्पित करने का फैसला किया है। इस सम्मान के साथ-साथ इसी साल न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल 'रोमांच लॉ' नाम के विधेयक पर मुहर लगाने जा रही है। जिसका उद्देश्य सेंट्रल पार्क में घोड़ा-बग्गी उद्योग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना है। कई दशकों से घोड़ा-बग्गी बंद करने की मांग पूरी होते देख अमेरिका के लोग और दुनिया भर के पशु प्रेमी खुश हैं। भास्कर ने इस बाबत रोमांच के पिता दीपक महाजन से बातचीत की। जिन्होंने इस पूरे मामले में जानकारी दी। पशुओं का फरिश्ता: PETA मेमोरियल में उकेरा जाएगा संदेशदीपक महाजन ने बताया कि PETA का 'ट्री ऑफ लाइफ' मेमोरियल वर्जीनिया स्थित उसके मुख्यालय (सैम साइमन सेंटर) में स्थापित है, जो उन नायकों और दयालु आत्माओं को याद करता है जिन्होंने जानवरों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। पत्ती पर लिखा संदेश: रोमांच के नाम की पत्ती पर लिखा होगा रोमांच महाजन की प्यारी याद में—पशुओं का एक फरिश्ता। पारिवारिक स्मृति: पठानकोट स्थित रोमांच के घर में उनके माता-पिता उनके कमरे में इस स्मारक पट्टिका की एक प्रति लगाने जा रहे हैं। स्वभाव से दयालु और धार्मिक था रोमांच देश के लिए गर्व की बात दीपक महाजन ने कहा कि भले ही इस हादसे ने उन्हें कभी खत्म न होने वाला दर्द दिया है। लेकिन, इस हादसे के बाद सरकारों और संस्थाओं की ओर से बरती जा रही संजीदगी से कई लोगों की जान बच जाएगी। बताया कि रोमांच के हादसे के बाद इजिप्ट, बॉम्बे, बेल्जियम, स्पेन, इटली और पराग में घोड़ा गाड़ी पर प्रतिबंध लग गया है। उसके इलावा, पेटा के 'ट्री ऑफ लाइफ' में पहले भारतीय के नाम जुड़ने और पहले भारतीय के नाम पर अमेरिका में कानून ‘रोमांच लॉ’ बनना हर देशवासी के लिए गर्व की बात है। क्या है 'रोमांच लॉ'? यह विधेयक न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके तहत घोड़ा-बग्गी चालकों के लिए नए लाइसेंस जारी करने पर तुरंत रोक लगाई जाएगी। इस उद्योग को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। हाल ही में सिटी काउंसिल की स्वास्थ्य समिति की सुनवाई के दौरान रोमांच के परिवार और एमी पुरस्कार विजेता अभिनेत्री एडी फाल्को सहित कई समर्थकों ने हिस्सा लिया। काउंसिल की स्पीकर जूली मेनिन इस प्रतिबंध का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने वाली पहली सीटिंग स्पीकर बन गई हैं। 51 में से 32 काउंसिल सदस्यों ने इस विधेयक का सह-प्रायोजन किया है। 70% न्यूयॉर्क निवासी प्रतिबंध के पक्ष में; परिवार ने किया केस सर्वेक्षणों के अनुसार, न्यूयॉर्क के 70% नागरिक घोड़ा-बग्गी उद्योग को बंद करने के पक्ष में हैं। घोड़ों को भीषण गर्मी और ठंड में कंक्रीट की सड़कों पर दौड़ना पड़ता है, जिससे वे सांस और पैरों की गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। गाड़ियों के धुएं और हादसों के कारण कई घोड़ों और इंसानों की जान जा चुकी है। गौरतलब है कि रोमांच के माता-पिता ने 14 अगस्त को न्यूयॉर्क शहर के खिलाफ गलत तरीके से हुई मौत का मुकदमा दर्ज कराने के लिए दावा नोटिस दायर किया है। उनका कहना है कि यदि उन्हें इस उद्योग में शामिल क्रूरता और खतरों के बारे में पहले से पता होता, तो वे कभी बग्गी की सवारी न करते। क्यों खास है पेटा का 'ट्री ऑफ लाइफ' पेटा का 'ट्री ऑफ लाइफ' एक विशेष मेमोरियल (स्मारक) है जिसे पशु अधिकारों और उनके प्रति करुणा की भावना को अमर बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसकी मुख्य खासियतों और महत्व को इस तरह समझें श्रद्धांजलि और सम्मान: पेटा अपने इस 'ट्री ऑफ लाइफ' स्मारक पर एक विशेष 'पत्ती'जोड़कर उन असाधारण इंसानों और पशु प्रेमियों को सम्मानित करता है जिन्होंने पशु कल्याण के लिए अपनी जान जोखिम में डाली या अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसके अलावा, यह उन बेजुबान जानवरों की याद में भी समर्पित होता है जो मानवीय क्रूरता या हादसों का शिकार हुए हैं। सहानुभूति और एकता का प्रतीक: पेटा का यह मेमोरियल केवल पशुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर तरह के उत्पीड़न और हिंसा के खिलाफ प्यार और न्याय का संदेश देता है। उदाहरण के लिए, ऑरलैंडो में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों और उनके पीछे छूटे पालतू जानवरों के सम्मान में भी पेटा ने अपने 'ट्री ऑफ लाइफ' पर एक विशेष पत्ती समर्पित की थी। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा: इस पेड़ पर दर्ज नाम और कहानियां लोगों को हमेशा याद दिलाती हैं कि वे समाज में अहिंसा, शाकाहार और जीवों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा दें। यह पशु रक्षकों की विरासत को जीवित रखने का एक जरिया है। अब जानिए पूरा मामला… पठानकोट से अमेरिका घूमने गया था परिवारः न्यूयॉर्क में हादसे का शिकार हुए रोमांच महाजन (18) माता-पिता के साथ 14 जून को न्यूयॉर्क गया था। परिवार का 15 दिन का टूर था। इसमें परिवार ने 2-3 दिन और घूमने के बाद रोमांच की भुआ (अमेरिका) के घर जाना था। लेकिन, उसके पहले ही हादसा हो गया। परिवार पठानकोट के इंदिरा कॉलोनी में रहता है। अचानक बेकाबू हुआ घोड़ा, घोड़ा-गाड़ी पलटीः न्यूयॉर्क पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, रमन महाजन अपने पिता दीपक महाजन, मां प्रिया महाजन और छोटे भाई माणिक के साथ पारंपरिक घोड़ा-गाड़ी में बैठकर सेंट्रल पार्क की सैर कर रहा था। इसी दौरान 'चेरी हिल' इलाके के पास घोड़ा अचानक किसी बात से डर गया और बेकाबू होकर सरपट दौड़ने लगा। सड़क से टकराया सिरः बेकाबू घोड़ा बग्गी को घसीटते हुए 'वेस्ट ड्राइव' की तरफ भागा और मशहूर 'टैवर्न ऑन द ग्रीन' रेस्टोरेंट के पास दूसरी घोड़ा-गाड़ी से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बग्गी बीच सड़क पर ही पलट गई और रमन उछलकर कंक्रीट की सड़क पर जा गिरा, जिससे उसके सिर पर गहरी चोटें आईं। मां को बचाने के चक्कर में गई जानः रोमांच के दादा सुरेश महाजन ने बताया कि बग्गी में पूरा परिवार सवार था। घोड़ा जैसे ही बिदका उसके पीछे बग्गी चालक भी दौड़ा पर घोड़ा तेजी से बग्गी सहित निकल भागा। परिवार के मुताबिक रोमांच और मां प्रिया एक साइड बैठे थे। जैसे ही घोड़ा तेज दौड़ा तो बग्गी का संतुलन बिगड़ गया और प्रिया बग्गी से नीचे गिर गई। मां को बचाने के चक्कर में रोमांच ने भी छलांग लगा दी।इंटरनल ब्लीडिंग से मौतः हादसे में प्रिया महाजन के हलकी चोटें आईं। लेकिन, रोमांच सिर के बल नीचे गिरा। जिससे उसके हेड इंजरी हुई। अस्पताल में 2 दिन उसका इलाज चला लेकिन, इंटरनल ब्लीडिंग के कारण उसकी जान चली गई।
अमेरिका का पलटवार: ईरान के तीन तेल टैंकरों पर किया हमला; विमानन क्षेत्र की 36 संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाया
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
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टेलीग्राम हुआ डाउन: भारत, अमेरिका और सिंगापुर में ठप हुई सर्विस, यूजर्स ने की शिकायत
लोकप्रिय मैसेजिंग एप टेलीग्राम मंगलवार सुबह अचानक डाउन हो गया। भारत, अमेरिका और सिंगापुर समेत कई देशों में यूजर्स को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डाउनडिटेक्टर पर हजारों लोगों ने इस तकनीकी खामी की शिकायत दर्ज कराई है।
समुद्र में अमेरिका का कहर: इक्वाडोर का पांचवां जहाज डुबोया, 227 मौतों ने बढ़ाई चिंता; क्या है पूरा मामला?us sinks ecuador ship drug trafficking los choneros
अमेरिका के कैलिफोर्निया में एराउंड पिज्जा रेस्तरां की आड़ में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट चलाने वाले पंजाब निवासी कवंलप्रीत को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अवैध रूप से देश में दाखिल हुआ यह शख्स पिज्जा डिलीवरी के बहाने कोकीन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों का नेटवर्क चला रहा था। कैलिफोर्निया पुलिस और एफबीआई की संयुक्त कार्यवाही में उसके ठिकाने से 40 किलो कोकीन, कई पिस्तौलें और भारी मात्रा में डॉलर कैश बरामद हुआ है। आरोपी कवंलप्रीत को अब उम्रकैद तक की सजा और भारी-भरकम आर्थिक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। कोकीन के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाशजांच अधिकारियों के अनुसार, कवंलप्रीत (50) लंबे समय से गुप्त रूप से एक बड़ा ड्रग सिंडिकेट चला रहा था। वह अपने रेस्तरां नेटवर्क का फायदा उठाकर स्थानीय लोगों को मेथ और कोकीन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थ सप्लाई करता था। देखते ही देखते उसने एक विशाल सप्लाई चेन तैयार कर ली थी, जिससे वह भारी मुनाफा कमा रहा था। पुलिस की रेड में बरामद हुए हथियार, ड्रग्स और कैशपुलिस को जब इस अवैध कारोबार के बारे में गुप्त सूचना मिली तो अधिकारियों ने आरोपी के घर और ठिकानों पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। रेड के दौरान पुलिस को मौके से 40 किलो शुद्ध कोकीन, कई अवैध पिस्तौलें और भारी मात्रा में डॉलर कैश बरामद हुआ। हथियारों की बरामदगी से यह भी स्पष्ट हो गया कि वह सिर्फ ड्रग तस्करी ही नहीं, बल्कि एक हिंसक आपराधिक गिरोह भी संचालित कर रहा था। गैर-कानूनी तरीके से रह रहा थापुलिस जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि आरोपी बिना किसी वैध दस्तावेज के गैर-कानूनी तरीके से रह रहा था। वह पहचान बदलकर और अपने अवैध धंधे को पिज्जा बिजनेस के पीछे छुपाकर सालों से कानून की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था। उम्रकैद की सजा और भारी जुर्माना लग सकता हैनशीले पदार्थों की इतनी बड़ी खेप, अवैध हथियार और गैर-कानूनी तरीके से रहने के गंभीर आरोपों के तहत पुलिस ने उस पर कड़े कानून लागू किए हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इन संगीन अपराधों के लिए उसे उम्रकैद की सजा मिलना लगभग तय है। इसके साथ ही, अदालत उस पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगा सकती है।
Kanpur News: जाजमऊ से अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटर पर छापा
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Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
कैथल में पुलिस की स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट द्वारा 20 हजार रुपए के इनामी बदमाश को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी पर कैथल, नरवाना, जींद व सोनीपत में कातिलाना हमला, फिरौती, आर्म्स एक्ट व लूट के करीब 8 मामले दर्ज हैं। वह अमेरिका भाग गया था, जो पिछले दिनों अमेरिका से डिपोर्ट हुआ है। पकड़े गए आरोपी की पहचान गांव भागल निवासी राहुल उर्फ गोगी के रूप में हुई है। उसके कब्जे से 315 बोर के अवैध देसी कट्टा व 2 रौंद बरामद हुए हैं। डीएसपी ने दी जानकारी मामले को लेकर डीएसपी बीरभान ने अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता की। उन्होंने बताया कि स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील कुमार की अगुवाई में एचसी देवेंद्र सिंह की टीम गांव शिमला बस अड्डा पर मौजूद थी। इसी दौरान पुलिस टीम को गुप्तचर से सूचना प्राप्त हुई कि गांव भागल निवासी राहुल उर्फ गोगी, जिसके खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं तथा जो काफी समय से फरार चल रहा है, आईटीआई कलायत के सामने हिसार-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-152 पर अवैध देसी कट्टा लेकर किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में खड़ा है। देसी कट्टा व रौंद बरामद सूचना पर पुलिस टीम ने आईटीआई कलायत के सामने दबिश दी। जहां बताए हुलिए के अनुसार एक युवक पुलिस की गाड़ी को देखकर हाईवे से कलायत की तरफ भागने लगा, जिसे पुलिस टीम ने पीछा करके कुछ दूरी पर ही काबू कर लिया। आरोपी की पहचान गांव भागल निवासी राहुल उर्फ गोगी के रूप में हुई। तलाशी दौरान आरोपी के कब्जे से 315 बोर का देसी कट्टा तथा 2 रौंद बरामद हुए। पांच दिन रिमांड पर डीएसपी ने बताया कि इस बारे में आरोपी के खिलाफ थाना कलायत में मामला दर्ज कर कर लिया गया। आरोपी पर वर्ष 2024 दौरान जिला सोनीपत में फिरौती के एक मामले में 20 हजार रुपए का इनाम भी घोषित है जिसमें आरोपी वांछित था। आरोपी का व्यापक पूछताछ के लिए न्यायालय से 5 दिन पुलिस रिमांड हासिल किया गया है।
जमुई की लक्ष्मी भार्गव ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 21 साल की लक्ष्मी ने अहमदाबाद, गुजरात में हुई मिस राइना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 प्रतियोगिता का खिताब जीता है। अब वह अगले साल बोलिविया में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।उनकी इस जीत से जमुई में खुशी का माहौल है। लक्ष्मी भार्गव मूल रूप से जमुई जिला मुख्यालय के हरनाहा की रहने वाली हैं। वह उमाकांत सिंह और विभा देवी की बेटी हैं। जमुई पहुंचने पर उनके माता-पिता और बड़ी संख्या में लोगों ने स्टेशन पर फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया। फिलहाल लक्ष्मी दिल्ली में रहकर अमेजन कंपनी में काम कर रही हैं। नौकरी के साथ मॉडलिंग का जुनून रखा जारी लक्ष्मी बताती हैं कि नौकरी के साथ मॉडलिंग के अपने जुनून को जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था।इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। वह काम के बीच से समय निकालकर प्रतियोगिता की तैयारी करती रहीं। कई चरणों के बाद हासिल किया पहला स्थान इस प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।कई चरणों में हुई प्रतियोगिता के बाद फाइनल राउंड तक पहुंचना ही बड़ी चुनौती थी। लक्ष्मी ने यहां आत्मविश्वास और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। इसके साथ ही उन्हें मिस राइना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 का ताज मिला। आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद नहीं मानी हार लक्ष्मी का कहना है कि मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने के दौरान कई बार परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं रहीं। नौकरी और मॉडलिंग को साथ लेकर चलना मुश्किल था। मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण उन्हें आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। मॉडलिंग को करियर बनाने के फैसले पर सामाजिक स्तर पर भी कई तरह की रुकावटें सामने आईं, लेकिन उन्होंने लगातार खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। हालांकि लक्ष्मी ने इन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रहीं और हर अनुभव से खुद को निखारती गईं। कम उम्र में ही शुरू हुआ उपलब्धियों का सिलसिला उनकी उपलब्धियों की शुरुआत भी कम उम्र में ही हो गई थी। दिसंबर 2021 में पटना में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्होंने बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता था। इसके बाद फरवरी 2022 में बेतिया में बेस्ट पर्सनैलिटी अवार्ड अपने नाम किया। वर्ष 2022 में उन्होंने मिस टीन इंडिया सुपरमॉडल का खिताब जीता। हालांकि लक्ष्मी ने इन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रहीं और हर अनुभव से खुद को निखारती गईं। उनकी उपलब्धियों की शुरुआत भी कम उम्र में ही हो गई थी। दिसंबर 2021 में पटना में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्होंने बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता था। इसके बाद फरवरी 2022 में बेतिया में बेस्ट पर्सनैलिटी अवार्ड अपने नाम किया। वर्ष 2022 में उन्होंने मिस टीन इंडिया सुपरमॉडल का खिताब जीता। लक्ष्मी भार्गव की कुछ और तस्वीरें…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा- खड़गे (राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष), सोनिया गांधी और राहुल गांधी को सबक सिखाना जरूरी है। तभी राष्ट्रभक्त बनेंगे। अमेरिका और यूरोप ने राहुल गांधी पर इनवेस्टमेंट किया, लेकिन बेकार हो गया। अब तरीका बदलकर कॉकरोज जैसों पर इनवेस्टमेंट कर रहे है। राठौड़ ने बाड़मेर में रविवार रात 9 बजे नगर परिषद के प्रत्याशी और कार्यकर्ता के साथ मीटिंग में यह बात कही। प्रदेशाध्यक्ष ने टिकट से नाराज बागियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आपके पास अपील करने मौका है। मां (पार्टी) के पीठ में छुरा खोंपने वालों को पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। अभी खूब नियुक्तियां पड़ी है, योग्य कार्यकर्ताओं को सम्मान किया जाएगा। राठौड़ बोले- एक-एक वोट की वैल्यू बैठक में राठौड़ ने कहा कि नगर निकाय चुनाव में एक-एक वोट की वैल्यू है। एक वोट से सीपी जोशी हार गए और सांसद प्रत्याशी भी हारे हैं। उन्होंने प्रत्याशियों से पूछा कि टैक्सी बुक कर दी क्या? अगर नहीं की है तो आज ही पोलिंग के लिए टैक्सी बुक कर दो। उन्होंने कहा कि 100 रुपए एक्स्ट्रा दे दो और आज से ही टैक्सी पर भाजपा का झंडा लगाकर चलाओ। राठौड़ ने कहा - बाड़मेर में 55 वार्ड हैं। अगर प्रत्येक प्रत्याशी दो या तीन टैक्सियां लगाए तो शहर में कितनी टैक्सियां भाजपा का झंडा लगाकर घूमती नजर आएंगी। कल्पना करो कि 150 टैक्सियां भाजपा का झंडा लगाकर शहर में घूम रही हैं तो इससे एक माहौल बनेगा। यह व्यवस्था चुनाव संचालन समिति को करनी चाहिए। 10 फीसदी वोट हवा में होते हैं, माहौल से भी असर पड़ता है: राठौड़ राठौड़ ने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं से कहा कि करीब 10 फीसदी वोट हवा में होते हैं। कुछ वोट जातिगत होते हैं, जबकि कुछ दोस्ती और दुश्मनी के आधार पर पड़ते हैं। 10 फीसदी वोट ऐसे होते हैं जो हवा के साथ जाते हैं। हवा जिसके पक्ष में होती है, वही जीतता है। जब लोगों को लगता है कि इतनी टैक्सियां भाजपा की घूम रही हैं तो बाड़मेर में भाजपा ही जीत रही है, तो चुनाव का माहौल बनता है। बोले- बाड़मेर की 55 सीटें जीतकर भेजो, खड़गे-सोनिया-राहुल को सबक मिलेगा राठौड़ ने कार्यकर्ताओं से कहा कि अगर आपने बाड़मेर की 55 सीटें जीतकर भेज दीं तो उन लोगों को सबक सीखने को मिलेगा। तब वे भी राष्ट्रभक्ति करने लगेंगे और भारत माता की जय बोलने लगेंगे। जब वंदे मातरम् राष्ट्रगीत होते हुए खड़गे जी हिलते हैं तो आपको गुस्सा आता है या नहीं। जब सोनिया गांधी इधर-उधर हिलती-डुलती हैं तो आपको बुरा लगता है या नहीं। जब राहुल नाटक करते हैं तो आपको गुस्सा आता है। राठौड़ ने कार्यकर्ताओं से कहा - उस गुस्से को दबाकर मत रखो। उन लोगों को सबक सिखाना बेहद जरूरी है। तब उन्हें लगेगा कि बाड़मेर की जनता अराष्ट्रीय गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। तब जाकर उनकी अक्ल ठिकाने आएगी। मैं भी राष्ट्रभक्त हूं और मेरा विरोधी भी राष्ट्रभक्त बने, तभी लोकतंत्र सफल होगा। पूरे राजस्थान की 309 नगर निकाय जीतने का लक्ष्य बताया राठौड़ ने चुनाव संचालन समिति के सदस्यों से कहा कि वे फैल जाएं और जनता को बताएं कि यह समय अराष्ट्रीय गतिविधि करने वालों को सबक सिखाने का है। अगर पूरे राजस्थान की 309 नगर निकाय चुनाव जीत लेंगे तो उन्हें लगेगा कि जनता अराष्ट्रीय गतिविधि बर्दाश्त नहीं करती है। राठौड़ बोले- अमेरिका और यूरोप ने राहुल गांधी पर इनवेस्टमेंट किया, बेकार हो गया राठौड़ ने कहा कि जब कोई व्यक्ति प्रगति करता है तो बहुत लोग उससे जलते हैं। भारत प्रगति करता है तो दुनिया के कई देश जलते हैं और नाराज हैं। वे भारत की प्रगति रोकना चाहते हैं। इसलिए अमेरिका और यूरोप ने हमारे देश के विपक्षियों को पैसा देना शुरू किया। देश को अस्थिर करने की कोशिश की गई। जब उन देशों को लगा कि यह इनवेस्टमेंट तो बेकार हो गया, क्योंकि राहुल गांधी को जितना पैसा दो, वे कोई भी काम करें तो भाजपा को फायदा हो जाता है। इसलिए उन्होंने अपना तरीका बदल दिया। विरोधी देश 'कॉकरोज' जैसे लोगों पर इनवेस्टमेंट कर रहे: राठौड़ राठौड़ ने कहा - विरोधी देशों ने ऐसे लोगों को तैयार किया है। 'कॉकरोज' जैसे लोगों पर इनवेस्टमेंट करना शुरू किया गया है। ऐसे लोग कई जगह सुबबुगाहट उठाते हैं, कई नाटक करते हैं, कई आगजनी करते हैं और गंदी-गंदी भाषा बोल देते हैं। इसके बाद देश उन्हें शांत करने में लग जाता है और इससे विकास रुक जाता है। विरोधी देश इसी तरह सोचते हैं, लेकिन हम रुकने वाले नहीं हैं और कतई चिंता नहीं करने वाले। हम मजबूती के साथ भारत को विकसित भारत बनाना चाहते हैं। बागियों को चेतावनी- पार्टी के खिलाफ गए तो बर्दाश्त नहीं करेंगे टिकट से नाराज दावेदारों और बागियों को लेकर राठौड़ ने कहा कि पार्टी ने अलग-अलग स्तर पर सर्वे करवाकर चुनाव में उम्मीदवार उतारे हैं। प्रत्याशी सेवक बनकर काम करेंगे, लेकिन कई योग्य कार्यकर्ता टिकट से पीछे रह गए क्योंकि टिकट एक ही व्यक्ति को मिल सकता है। ऐसे सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल करने और उन्हें अवसर देने की कोशिश होगी। अभी तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं और अब नियुक्तियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए यह व्यवस्था है कि हर कार्यकर्ता को काम और हर काम के लिए कार्यकर्ता हो। यह पार्टी के संस्कार हैं। बोले- कल शाम तक पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में अपील कर दें राठौड़ ने कहा कि कुछ दावेदार गुस्से में आकर नामांकन कर चुके हैं। उनके पास कल शाम तक का समय है। वे पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में अपील निकाल दें। जो नाराज हैं, उन्हें भी सम्मानित किया जाएगा। --- ये खबर भी पढ़ें … जोधपुर में शेखावत-गहलोत फैक्टर से कांटे की टक्कर:उदयपुर में कांग्रेस को बागियों से खतरा; पाली में राठौड़ के गढ़ में निर्दलीयों से बदले समीकरण जोधपुर नगर निगम में 100, उदयपुर में 80 और पाली में 65 वार्ड हैं। अभी तक के समीकरणों में जोधपुर और पाली में कांग्रेस-बीजेपी में टक्कर है। पूरी खबर पढ़ें
बनारसी साड़ी के सभी प्रोडक्ट आगामी 10 सितंबर से महंगे हो जाएंगे। बुनकरों के प्रतिष्ठित संस्था बुनकर उद्योग मंडल ने इस बात का आह्वान किया है। इस फैसले पर बुनकर बिरादराना तंजीम, बुनकर उद्योग मंडल, हिंदू बुनकर कल्याण समिति तथा गिरस्ता एवं व्यापारी बंधुओं ने अपनी सहमति जताई है। बनारसी साड़ी का कच्चा माल अमेरिका- ईरान युद्ध के बाद से महंगा हुआ है। क्योंकि ये सभी पेट्रो प्रोडेक्टस हैं। कच्चे माल पर बढ़ा दाम बुनकर उद्योग मंडल के महासचिव मोहम्मद जुबेर ने बताया - 10 सितंबर 2026 से बनारसी साड़ी, दुपट्टा, थान, सूट फैब्रिक समेत तैयार कपड़ों की कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की तैयारी है। पिछले एक सप्ताह से हम लोगों ने बुनकर के सभी संगठनों एक कर एक सहमति बनाई है। कच्चे माल पर 20 से 25 प्रतिशत दाम बढ़ गया है। ऐसे हम लोगों ने यह फैसला लिया है कि अब आने वाली 10 सितंबर से हमारे प्रोडक्ट का दाम बढ़ाकर मार्केट में भेजेंगे। सभी गद्दीदार सहमत जुबेर ने बताया - इस बढ़ोत्तरी में कोई विरोधाभास नहीं है। क्योंकि हमारा जो कच्चा माल महंगा हुआ है। उसके लिए हमें अपना प्रोडक्ट महंगा करना पड़ रहा है। गद्दीदार जो हैं जहां से प्रोडक्ट लोग खरीद्ते हैं। वो भी इस बात से सहमत हैं। मार्किट दाम बढ़ाने के लिए सहमत है। अमेरिका-ईरान युद्ध का इफेक्ट सहकार भारती के प्रदेश प्रमुख और वाराणसी वस्त्र बुनकर संघ के उपाध्यक्ष शैलेश सिंह ने बताया - अमेरिका-ईरान युद्ध का सीधा असर पेट्रो प्रोडक्ट्स पर पड़ रहा है। बनारसी साड़ी में ज्यादातर पेट्रो प्रोडक्ट्स ही इस्तेमाल होता है। ऐसे में दाम बढ़ना लाजमी है क्योंकि पेट्रो प्रोडक्ट्स महंगे हो रहे हैं। ऐसे में सभी इस बढ़ोत्तरी से सहमत हैं। क्योंकि लागत के बराबर भी अगर पैसा नहीं मिलेगा तो कारोबार ठप हो जाएगा। और लोग पलायन करने लगेंगे।
हिमाचल प्रदेश विदेशी पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन गया है, जिसमें पिछले तीन वर्षों में 2.64 लाख से अधिक विदेशी सैलानी आए हैं। ब्रिटेन से सर्वाधिक पर्यटक पहुंचे हैं।
नमस्कार, दिल्ली के मोतीबाग इलाके में 5 मंजिला बॉयज हॉस्टल ढह गया। लोगों के मुताबिक बिल्डिंग के बेसमेंट में खुदाई चल रही थी। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कनाडा सरकार पर कमेंट किया। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में आगे बताएंगे कि दुनिया के नए नक्शे पर भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सीमाओं को लेकर आपत्ति जताई है। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... 1. बेंगलुरु में स्पेस एक्स्पो 2026 की शुरुआत। 9 सितंबर तक चलेगा।2. दलीप ट्रॉफी का फाइनल ईस्ट जोन Vs साउथ जोन के बीच जारी, आज मैच का दूसरा दिन। कल की बड़ी खबरें... 1. दिल्ली में 5 मंजिला इमारत गिरी, 3 छात्रों की मौत: दावा- हादसे के वक्त 50 से ज्यादा लोग अंदर मौजूद थे; बेसमेंट में खुदाई हो रही थी दिल्ली के मोतीबाग इलाके के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला बिल्डिंग ढह गई। यहां बॉयज हॉस्टल चलता था। घटना में 4 लोगों की मौत हुई, कई घायल हैं। इमारत 40-50 साल पुरानी थी। उसके बेसमेंट में काम चल रहा था, इसी दौरान वह ढह गई। लोगों के मुताबिक बिल्डिंग में 20-25 कमरे थे और हर कमरे में 2 स्टूडेंट्स रहते थे। हादसे के वक्त अंदर 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे। बिल्डिंग के मालिक का नाम आनंद बंसल है, जो गुरुग्राम में रहता है। उसके खिलाफ FIR की गई है। सत्य निकेतन प्रमुख छात्र इलाका सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास बसा प्रमुख छात्र इलाका है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इलाके में कई छात्र आवास हैं और आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे संस्थान हैं। 3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की 1133 घटनाएं पूरी खबर पढ़ें... 2.आकाश आनंद को मायावती फिर BSP से निकाल सकती हैं, नेताओं से बोलीं- उन्हें अनफॉलो करें बसपा प्रमुख मायावती कभी भी अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से फिर बाहर कर सकती हैं। रविवार को मायावती और आकाश आनंद ने इस बात के संकेत खुद दिए। आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना बायो (परिचय) बदल दिया। उन्होंने खुद को बसपा समर्थक लिखा। 4 दिन में यह दूसरा मौका है, जब आकाश ने अपना बायो बदला है। 3 सितंबर को लखनऊ बैठक में न बुलाए जाने पर उन्होंने बायो में बसपा कार्यकर्ता बताया था। उससे पहले वे बसपा के नेशनल कोआर्डिनेटर लिखा करते थे। तीन बड़े घटनाक्रम हुए- पढ़ें पूरी खबर… 3. अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को 'भौंकने वाला छोटा कुत्ता' बताया: बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में बातचीत नाकाम हुई थी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कनाडा को भौंकने वाला छोटा कुत्ता कहा। साथ ही कनाडाई पीएम मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा- मेरे पास एक जर्मन शेफर्ड कुत्ता था। पार्क में एक छोटा कुत्ता उस पर लगातार भौंकता रहता था। यह स्थिति मुझे उसी की यााद दिलाती है। काफी समय तक जर्मन शेफर्ड उसे नजरअंदाज करता है। फिर एक दिन उसका भी सब्र खत्म हो गया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच 19-21 अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका ने कहा कि उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 22 अगस्त से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू किया। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। पूरी खबर पढ़ें... 4. योगी ने चित्रकूट में मंच पर नेताओं को फटकारा, बाढ़ पीड़ितों को राहत चेक बांट रहे थे, नेता फोटो खिंचवाने की होड़ में लगे थे चित्रकूट में सीएम योगी ने रविवार को मंच पर नेताओं को जमकर फटकार लगाई। वह गरीबों को राहत चेक बांट रहे थे। इसी दौरान मंच पर मौजूद नेता उनके साथ फोटो खिंचवाने की होड़ में लग गए। यह देखकर सीएम नाराज हो गए। उन्होंने हाथ से इशारा कर नेताओं को पीछे जाने को कहा, जिससे गरीबों को आने-जाने में दिक्कत न हो। सीएम रामघाट का निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान लोग उन्हें अपनी समस्या बता रहे थे। तभी सिक्योरिटी में तैनात जवान लोगों को हटाने लगा। इस पर सीएम नाराज हो गए। कहा- बोलने दो, बीच में क्यों आते हो? चित्रकूट बाढ़ से 36 गांवों में 14 हजार लोग प्रभावित पढ़ें पूरी खबर… 5. मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से 2 दिन में 11 मौतें: जहर इतना कि 24 लोगों के शरीर नीले पड़े, 5 अधिकारी सस्पेंड, 25 पर FIR मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत हो गई। 25 लोगों का अभी भी इलाज जारी है। इनमें से 1 मरीज को एयरलिफ्ट करके भोपाल AIIMS लाया गया। ज्यादादर लोगों के शरीर नीले पड़ चुके है। मामले में 25 लोगों पर FIR दर्ज की गई है। लापरवाही पर आबकारी-पुलिस विभाग के 5 अधिकारी सस्पेंड किए गए। एहतियातन क्षेत्र की 7 शराब दुकानों को सील किया गया है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के मुताबिक, 2-3 शवों के पोस्टमॉर्टम में मिथाइल अल्कोहल के सेवन की आशंका सामने आई है। पूरी खबर पढ़ें... 6. दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति: कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, हमारी सीमाएं अटल, इनसे समझौता नहीं भारत ने दुनिया के नए नक्शे को लेकर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा इलाका भारत के आधिकारिक नक्शे के हिसाब से ही दिखना चाहिए। भारत के इलाके को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना हमें मंजूर नहीं है। भारत की सीमाएं अटल हैं, इससे समझौता नहीं हो सकता। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जिसमें दुनिया के नक्शे पर देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल के करीब दिखाने की बात कही गई है। हालांकि, भारत ने साफ किया कि इसका मतलब किसी एक खास नक्शे को मंजूरी देना नहीं है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर को दुनिया के नक्शे को नए तरीके से दिखाने का प्रस्ताव पास किया। इस बदलाव से किसी देश या महाद्वीप का असली क्षेत्रफल नहीं बदलेगा। सिर्फ नक्शे पर उनका आकार पहले से कुछ छोटा या बड़ा नजर आएगा। दुनिया में मर्केटर मैप का इस्तेमाल दुनिया में मर्केटर मैप काफी इस्तेमाल होता है। इसमें नक्शे पर ध्रुवों के पास के इलाके अपने असली आकार से बड़े दिखाई देते हैं। नए तरीके को इक्वल एरिया प्रोजेक्शन कहा गया है। इसमें अफ्रीका पहले से बड़ा, जबकि यूरोप-उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्से भी पहले की तुलना में छोटे दिखाई दे सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें... 7. कर्मचारियों का सवाल- क्या ISRO रॉकेट नहीं बनाएगा: 9 संगठनों ने प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी 6 सितंबर को सामने आई। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि सरकारी संस्थानों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO मजबूत संगठन बना रहना चाहिए। इसे केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (RD) संस्था तक सीमित न कर दिया जाए। अब जानिए ISRO के बारे में, 57 साल पहले बना था ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसका पूरा नाम इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है। ISRO का मुख्यालय बेंगलुरु में है। ISRO की स्थापना में डॉ. विक्रम साराभाई की सबसे अहम भूमिका थी। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। इससे पहले 1962 में INCOSPAR बनाया गया था जिसकी अगुआई भी विक्रम साराभाई ने की थी। पूरी खबर पढ़ें... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: शाह बोले- नक्सलवाद के बाद नशा भी खत्म करेंगे:रेड कॉरिडोर की सोच वालों ने हथियार डाले; नॉर्थईस्ट में 10 हजार युवाओं का आत्मसमर्पण (पूरी खबर पढ़ें) 2. इंटरनेशनल: नेपाल की थेरांग नदी में बाढ़, बूढ़ीगंडकी अलर्ट पर: गोरखा में 4 घर और सस्पेंशन ब्रिज बहा; अब तक 1344 शव मिले, 5 हजार लापता (पूरी खबर पढ़ें) 3. नेशनल: खड़गे बोले- युवा रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा,पीएम आउट ऑफ रीच:नाकामी छिपाने के लिए 'नाराज फूफा', 'दिमागी नक्सल' जैसे जुमले लेकर लाए (पूरी खबर पढ़ें) 4. उत्तर प्रदेश: यूपी-सहारनपुर कलेक्ट्रेट में ढहाई मस्जिद के नीचे कुआं मिला: कितना पुराना, जांचने के लिए ASI को बुलाया; राजभर ने अखिलेश से पूछा- वहां फातिहा पढ़ेंगे (पूरी खबर पढ़ें) 5. नेशनल: CJP कार्यकर्ता ने घर पर पत्थर फेंकने का आरोप लगाया: जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में पिता से मारपीट का दावा किया था, आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार (पूरी खबर पढ़ें) 6. महाराष्ट्र: शिवसेना नेता ने हॉस्पिटल कर्मचारी को थप्पड़ मारा,VIDEO:₹19 हजार के बिल पर विवाद हुआ था; विधायक के बेटे समेत 17 पर FIR (पूरी खबर पढ़ें) 7. दिल्ली: JNU में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप:11 छात्रों की शिकायत; दावा- वाइवा में सेक्सुअल कमेंट किए; छात्रसंघ बोला- प्रोफेसर लैब में रोकते हैं (पूरी खबर पढ़ें) 8. नेशनल: चुनाव प्रचार के लिए पार्टियां इंफ्लूएंसर्स का नेटवर्क बना रहीं: रील्स के जरिए प्रचार करेंगी, ₹30 लाख देने का तैयार; यूपी, उत्तराखंड, पंजाब में अगले साल इलेक्शन (पूरी खबर पढ़ें) 9. नेशनल: बाय-बाय, पापा कहकर चिनाब नदी में छलांग लगाई...VIDEO: बेटी ने फोन पर कहा- दिल कह रहा है मुझे इसी रास्ते जाना चाहिए, जम्मू की घटना (पूरी खबर पढ़ें) 9. इंटरनेशनल: अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा (पूरी खबर पढ़ें) 10. इंटरनेशनल: अमेरिका ने ईरानी टैंकर पर हमले का वीडियो जारी किया: ओमान की खाड़ी में डूबा जहाज; तीन टैंकरों को निशाना बनाया था (पूरी खबर पढ़ें) 11. मध्य प्रदेश: धीरेंद्र शास्त्री बोले- भैया को सैयां बनाने वाले क्या जानें:बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर पर भड़के; कहा- जौहर कायरता नहीं, वीरता है (पूरी खबर पढ़ें) 12. उत्तर प्रदेश: बृजभूषण की बेटी शालिनी बोलीं- टिकट मिला तो जरूर लड़ूंगी:परिवारवाद कमजोरी नहीं, मेरी ताकत है; 15 साल से नोएडा में एक्टिव (पूरी खबर पढ़ें) 13. उत्तर प्रदेश: BHU में 85-साल के पद्मश्री प्रोफेसर को डॉक्टर ने पीटा:चेहरे पर चोट, आंख लाल; PRO बोले- आरोप गलत, परिवार देखने तक नहीं आता (पूरी खबर पढ़ें) 14. स्पोर्ट्स: सूर्यवंशी की बैटिंग देखने उमड़ी हजारों की भीड़:93 मिनट तक वैभवमय हुआ चेपॉक, दलीप ट्रॉफी फाइनल में स्टेडियम के एक्स्ट्रा स्टैंड खोले गए (पूरी खबर पढ़ें) 15. एंटरटेंमेंट: शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था जवाब:बोले थे- ‘पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो’; फिल्म नहीं करूंगा; डायरेक्टर ने सुनाया किस्सा (पूरी खबर पढ़ें) 16. स्पोर्ट्स: 7 महीने प्रेगनेंट कराटे खिलाड़ी ने गोल्ड जीता:चेन्नई की वी अनिता ने रचा इतिहास; पिछले 10 सालों से अपने जिले की महिला चैंपियन (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... जन्मदिन पर दोस्त ने दिया लॉटरी टिकट, ₹8 करोड़ जीते अमेरिका के इलिनॉय में एक व्यक्ति ने जन्मदिन पर गिफ्ट में मिले लॉटरी टिकट से 1 मिलियन डॉलर (करीब 8.3 करोड़ रुपए) का जैकपॉट जीता। व्यक्ति ने बताया कि उसे ये टिकट उसके दोस्त ने दिया था। . फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर: ट्रम्प के दामाद, दोस्त से लेकर CIA डायरेक्टर तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है 2. साइबर लिटरेसी: सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो न डालें:गलत इस्तेमाल का रिस्क, पुलिस की एडवाइजरी और पेरेंट्स के लिए 10 सेफ्टी टिप्स 3. जरूरत की खबर: क्या आपके भोजन में विटामिन-P है:इससे खाना अच्छे से पचता और शरीर में लगता है, फूड में विटामिन-P बढ़ाने के 10 टिप्स 4. भास्कर इन्वेस्टिगेशन: यूपी में रिश्वत ले रहे विधायक, ऑन-कैमरा बेनकाब: भाजपा विधायक ने खुद कैश लिया, सपा विधायक 35% कमीशन पर अड़ी 5. स्पाई फाइल्स: नंदा देवी पर्वत से गायब हुआ परमाणु उपकरण: अमेरिका को शक-भारत ने चोरी कर ली, इसमें भरा प्लूटोनियम लीक हुआ तो लाखों जान खतरे में; पार्ट-2 6. ग्राउंड रिपोर्ट: मुस्लिम धर्मगुरु बोले-100 साल पुरानी मस्जिद के लिए हाईकोर्ट जाएंगे:क्या मस्जिद, मदरसे या मजार ही अवैध; सहारनपुर में 16 घंटे में ढहाई गई मस्जिद 7. भास्कर एनालिसिस: अखिलेश की सहारनपुर जनसभा क्या गुटबाजी से टली:2 सितंबर को क्यों पहुंचे सपा प्रमुख? किसी के साथ भोजन किया, किसी को साथ लाए 8. ग्राउंड रिपोर्ट: भीलवाड़ा में पूर्व मंत्री सहित 2 नेता चुनाव से गायब:अजमेर में वासुदेव देवनानी को चुनौती, कोटा में बिरला और धारीवाल-गुंजल की प्रतिष्ठा दांव पर 9. भास्कर एक्सप्लेनर: प्याज की पैदावार नहीं घटी, फिर 80% महंगी क्यों हुई: क्या आगे और बढ़ेंगे दाम; आखिर प्याज की इकोनॉमिक्स चलती कैसे है 10. पंजाब: सिख युवती को ग्रूम कर बनाया मुस्लिम:2 साल पहले गई लंदन, ड्राइविंग सीखते संपर्क में आई; 2 बीवियों के पति से की शादी 11. भास्कर एनालिसिस: 8 MLC सीटों पर चुनाव, JDU में सिर फुटव्वल:अनंत सिंह ने नीरज के खिलाफ खोला मोर्चा, क्या PK दिखा पाएंगे करिश्मा करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास ️ मौसम का मिजाज मेष राशि के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर परिणाम मिलेंगे। मकर राशि वालों को उधारी या लेनदेन चिंता में डाल सकता है। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Panchkula News: रिश्वत मामले में पूर्व एसडीओ और पत्नी को अमेरिका जाने की अनुमति नहीं
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Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
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Panipat News: अमेरिका भेजने के नाम पर तीन लोगों से 1.52 करोड़ की ठगी
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IIT : आईआईटी के PhD स्कॉलर को 40 लाख का पैकेज, दूसरे छात्र ने अमेरिका में बजाया डंका
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी डॉ शत्रुघ्न ठाकुर को इटली की हंसा टीएमपी में डिजाइन इंजीनियर के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव मिला है। वे 40.65 लाख सालाना पे-पैकेज पर कार्य करेंगे।
अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर
यूएस ग्रीन कार्ड को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और बुरी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी पूरी तरह 'अनअवेलेबल' हो चुकी है।अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर?अमेरिका में सालों से परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और उच्च कुशल कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) और आव्रजन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित दूसरी श्रेणी यानी ईबी-2 (EB-2 - Employment-Based Second Preference) कैटेगरी को फिलहाल पूरी तरह से 'अनअवेलेबल' (Unavailable) यानी अनुपलब्ध घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति का मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए इस श्रेणी के तहत तय किए गए कोटे के सारे वीजा पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी दूतावास या आव्रजन कार्यालय इस कैटेगरी में अब अगले आदेश या नए वित्त वर्ष के शुरू होने तक किसी भी नए ग्रीन कार्ड या अप्रवासन वीजा को जारी या स्वीकृत नहीं कर सकते हैं। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वर्षों से लंबित पेंडिंग फाइलों और भारी-भरकम बैकलॉग के बीच इस प्रकार अचानक श्रेणी का बंद होना उनके सपनों पर एक बहुत बड़ा विराम लगाता हुआ नजर आ रहा है।ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी के पूरी तरह से अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह क्या सामने आई है?इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कैटेगरी के अचानक बंद होने और अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी कानूनों के तहत तय की गई वार्षिक सीमा और देश-वार कोटा प्रणाली (Per-Country Ceiling) है। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, हर साल रोजगार-आधारित जितने भी ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, उनमें से किसी एक देश के नागरिकों को कुल कोटे का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। भारत जैसे विशाल देश से एडवांस्ड डिग्री धारकों और विशेष योग्यताओं वाले प्रोफेशनल्स की संख्या और आवेदन इतने ज्यादा हैं कि यह तयशुदा कोटा निर्धारित समय से बहुत पहले ही पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इस वर्ष भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही भारत के कोटे के सारे ईबी-2 वीजा नंबर पूरी तरह से एग्जॉस्ट यानी समाप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, अन्य देशों द्वारा अप्रयुक्त रहने वाले वीजा नंबरों का लाभ भी इस बार समय पर नहीं मिल पाने के कारण अमेरिकी प्रशासन को मजबूरन इस कैटेगरी को पूरी तरह से बंद या अनअवेलेबल करना पड़ा है, जिससे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, एच-1बी (H-1B) धारकों और उनके परिवारों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय नागरिकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए यह स्थिति भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता लेकर आई है। जो प्रोफेशनल्स अपनी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में थे, उनकी फाइलें अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई हैं और तब तक आगे नहीं बढ़ सकतीं जब तक कि नया कोटा शुरू नहीं होता। हालांकि आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस स्थिति के बावजूद यूएसिसिस (USCIS) द्वारा फॉर्म आई-485 (Adjustment of Status) की कुछ श्रेणियों के आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर तकनीकी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन अंतिम अप्रूवल के लिए लंबा इंतजार करना ही होगा। इस लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता के कारण कई कुशल भारतीय कर्मचारी अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं, क्योंकि ग्रीन कार्ड मिलने में लगने वाला यह बेहिसाब समय कई दशकों तक लंबा खींचता जा रहा है।इस गंभीर बैकलॉग और समस्या से निपटने के लिए आगे क्या उम्मीदें बची हैं?इस बड़ी प्रशासनिक रोक के बीच भारतीय प्रवासियों और नीति विश्लेषकों की निगाहें अब पूरी तरह से नए वित्त वर्ष और अमेरिकी संसद में होने वाले विधायी सुधारों पर टिकी हुई हैं। चूंकि हर साल 1 अक्टूबर को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही वार्षिक वीजा सीमाओं और कोटे का नया आवंटन दोबारा रिसेट होता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि तब जाकर इस कैटेगरी में कुछ राहत मिल सकती है और कट-ऑफ डेट्स आगे बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, आव्रजन सुधारों की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक अमेरिका देश-वार लगने वाली इस 7 प्रतिशत की सीमा को समाप्त नहीं करता या ग्रीन कार्ड की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक भारतीय प्रोफेशनल्स को इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। अमेरिकी श्रम बाजार में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में बुनियादी बदलाव कितनी बड़ी और तत्काल आवश्यकता बन चुके हैं।
खर्ग द्वीप के पास बड़ा हमला, अमेरिका ने तबाह कर दिया ईरान का टैंकर - Hindustan
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अमेरिका में बसने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली अपडेट सामने आ रही है। अमरीकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएसएसीआईएस (USCIS) ने ग्रीन कार्ड और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने वाले व्यक्ति या परिवार के वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ उनके क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिरता की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस बदलाव का सीधा असर उन हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स पर पड़ने वाला है जो अपने किसी परिजन या एम्प्लॉयी के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस नए फॉर्म और नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अब स्पॉन्सरशिप की राह उतनी आसान नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी।क्या है USCIS का नया फॉर्म और कैसे काम करेगा स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर की जांच का नया नियमयूएसएसीआईएस द्वारा लागू किए गए इन नए नियमों के केंद्र में एफिडेविट ऑफ सपोर्ट (Affidavit of Support) से जुड़ा नया फॉर्म है, जिसके जरिए स्पॉन्सर को अपनी वित्तीय क्षमता का पूरा ब्योरा देना होता है। पारंपरिक तौर पर स्पॉन्सर को सिर्फ अपनी आय का टैक्स रिटर्न दिखाना होता था, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारी स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर, बैंक खातों की स्थिति, मौजूदा कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई स्पॉन्सर आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है या उसका क्रेडिट स्कोर खराब चल रहा है, तो वह किसी आवेदक के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं कर पाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अमेरिका आने वाला नया अप्रवासी कभी भी वहां की सरकारी सहायता या पब्लिक चार्ज (Public Charge) पर निर्भर न हो और अपनी आजीविका खुद चलाने में पूरी तरह से सक्षम हो।भारतीय आवेदकों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इस बदलाव के क्या हैं गहरे मायनेअमेरिका में वर्क वीजा यानी एच-1बी (H-1B) पर काम कर रहे लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता पहले से ही काफी लंबा और पेचीदा रहा है। ऐसे में फैमिली-बेस्ड या एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड स्पॉन्सरशिप के नियमों का कड़ा होना भारतीयों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार परिवार के सदस्य जब अपने माता-पिता या भाई-बहनों को अमेरिका बुलाने के लिए स्पॉन्सर करते हैं, तो उन्हें इस नए वित्तीय कड़े मानदंड से गुजरना होगा। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, और जरा सी भी वित्तीय चूक होने पर आवेदन को सीधे खारिज किया जा सकता है। इसलिए जो भारतीय परिवार या पेशेवर आने वाले दिनों में ग्रीन कार्ड के लिए फाइल करने की सोच रहे हैं, उन्हें अपने स्पॉन्सर के वित्तीय रिकॉर्ड और क्रेडिट हिस्ट्री को पहले से ही दुरुस्त और मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है।भविष्य की आव्रजन नीतियां और ग्रीन कार्ड चाहने वालों के लिए जरूरी सलाहअमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हो रहे ये लगातार बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले समय में ग्रीन कार्ड पाना और अधिक कठिन और अनुशासित होने जा रहा है। अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर साल नियमों में फेरबदल किए जाते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में भारतीय अप्रवासियों और छात्रों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कागजी कार्रवाई को शुरू करने से पहले इमीग्रेशन वकीलों या विशेषज्ञों से पूरी सलाह जरूर लें। नए फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पॉन्सर की आय संघीय गरीबी रेखा (Federal Poverty Guidelines) से काफी ऊपर हो और उनका क्रेडिट इतिहास बिल्कुल साफ-सुथरा हो। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर सही कदम उठाकर ही इस नई प्रशासनिक चुनौती से पार पाया जा सकता है और अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का सपना साकार किया जा सकता है।
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर उस छात्र की आंखों में पलता है जो अपनी मेहनत के दम पर करियर में ऊंची उड़ान भरना चाहता है। जब दुनिया भर के बेहतरीन विश्वविद्यालयों की बात आती है, तो अमेरिका का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और शानदार करियर ग्रोथ की वजह से अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, वहां की महंगी यूनिवर्सिटी फीस, ट्यूशन कॉस्ट और रहने-खाने का भारी खर्च कई बार मेधावी छात्रों के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। वित्तीय तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका जाने का विचार छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में ऐसी कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप प्रोग्राम्स मौजूद हैं, जो छात्रों के ट्यूशन फीस से लेकर उनके रहने, खाने और यहाँ तक कि हेल्थ इंश्योरेंस तक का पूरा खर्च खुद उठाती हैं? इन स्कॉलरशिप्स के जरिए आप बिना किसी आर्थिक तनाव के अमेरिकी धरती पर अपने सपनों की डिग्री हासिल कर सकते हैं।अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मिलने वाली फुल-ब्राइट और अन्य प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स के बारे में जानेंअमेरिका में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप (Fulbright-Nehru Fellowships) एक ऐसा नाम है जो भारत में बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित है। अमेरिकी सरकार और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो मास्टर या पीएचडी करने अमेरिका जाना चाहते हैं। इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ मासिक वजीफा, आने-जाने का हवाई किराया और स्वास्थ्य बीमा का पूरा खर्च कवर किया जाता है। इसके अलावा ह्यूबर्ट हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम (Hubert Humphrey Fellowship Program) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो अनुभवी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नॉन-डिग्री स्टडी और लीडरशिप ट्रेनिंग का मौका देते हैं। इन स्कॉलरशिप्स को हासिल करने के लिए छात्रों को एक निश्चित चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और अपने एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर खरा उतरना होता है, जिसके बाद उनके विदेश में पढ़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाता है।यूनिवर्सिटी-बेस्ड फाइनेंशियल असिस्टेंस और फुल-राइड स्कॉलरशिप्स का कैसे उठाएं लाभकेवल सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अधिकांश प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी अपने यहां आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को मेरिट और जरूरत के आधार पर फुल-राइड स्कॉलरशिप्स प्रदान करते हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और येल जैसी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज की वित्तीय सहायता नीतियां बहुत मजबूत हैं। अगर आपका एकेडमिक रिकॉर्ड शानदार है और आपके पास बेहतरीन एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का रिकॉर्ड है, तो ये यूनिवर्सिटीज आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 100 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति दे सकती हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही मिलने वाली ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंटशिप (GRA) या टीचिंग असिस्टेंटशिप (TA) के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं, जिससे उनका रहने-खाने का खर्च आसानी से निकल जाता है। इन अवसरों के बारे में सही समय पर जानकारी जुटाकर समय से आवेदन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अमेरिका में फ्री एजुकेशन पाने के लिए स्मार्ट टिप्सअमेरिका में बिना पैसे की टेंशन के पढ़ाई करने का यह सुनहरा अवसर पाने के लिए छात्रों को अपनी तैयारी बहुत पहले से शुरू करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आपको अपने एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, प्रोफेसरों से मिलने वाले रिकमेंडेशन लेटर्स और आईईएलटीएस (IELTS) या टॉफेल (TOEFL) जैसे इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट के स्कोर कार्ड तैयार रखने होते हैं। अधिकांश स्कॉलरशिप्स के लिए आवेदन की प्रक्रिया साल में एक निश्चित समय पर खुलती है, इसलिए यूनिवर्सिटीज की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर डेडलाइन पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाने के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन और नेतृत्व क्षमता से जुड़े अनुभवों को अपने आवेदन में जरूर शामिल करें। थोड़ी सी मेहनत, सही दिशा में की गई रिसर्च और समय पर किए गए आवेदन आपको बिना किसी वित्तीय बोझ के अमेरिका की बेहतरीन शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना सकते हैं।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
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Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
क्या भारत की तरह अमेरिका में भी है ट्यूशन कल्चर?
भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया.
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग द्वारा CPT (Curricular Practical Training) को लेकर एक नया नीतिगत मेमो जारी किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। CPT वह माध्यम है जिसके जरिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी डिग्री कोर्स के दौरान ही इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन ICE के इस नए मेमो ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और पेचीदा बना दिया है, जिससे भारतीय छात्रों के करियर और उनकी कानूनी स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है। गूगल डिस्कवर और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय इस विषय को लेकर लाखों छात्र सर्च कर रहे हैं कि आखिर इस नए बदलाव का उनकी पढ़ाई और जॉब करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए अमेरिका में CPT के पूरे गणित को समझते हैं और जानते हैं कि ICE के इस नए मेमो में क्या-क्या खास बातें कही गई हैं।अमेरिका में CPT (कर्रिकलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) असल में क्या है?सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CPT क्या है और यह विदेशी छात्रों के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जब कोई भारतीय छात्र अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन (मास्टर्स या बैचलर्स) के लिए एडमिशन लेता है, तो उसे अपने कोर्स के करिकुलम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाती है, जिसे CPT कहा जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और साथ ही कुछ पैसे भी कमाते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए जीवनरेखा की तरह होता है जो अपने खर्चों का एक हिस्सा खुद उठाने और अमेरिकी कॉर्पोरेट कल्चर को नजदीक से समझने की कोशिश करते हैं। पारंपरिक रूप से CPT को F-1 वीजा धारक छात्रों के लिए एक बेहद लचीली और मददगार व्यवस्था माना जाता रहा है, जिसके जरिए वे आगे चलकर OPT (Optional Practical Training) और H-1B वीजा की ओर कदम बढ़ाते हैं।ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने क्यों जारी किया नया मेमो?हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ICE द्वारा जारी किए गए नए मेमो ने विदेशी छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस मेमो का मुख्य उद्देश्य CPT के नियमों का कथित तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि कुछ छात्र और विश्वविद्यालय CPT नियमों का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई की आड़ में लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से काम करने के रास्ते तलाश रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विश्वविद्यालयों को CPT के अनुमोदन (Approval) के मामले में और अधिक कठोर नियमों का पालन करना होगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि CPT सीधे तौर पर छात्र के अकादमिक पाठ्यक्रम और डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल अंशकालिक नौकरी पाने का एक आसान जरिया। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से छात्रों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि क्या उनकी यूनिवर्सिटीज अब आसानी से CPT अप्रूव कर पाएंगी या नहीं।भारतीय छात्रों पर इस नए मेमो का क्या होगा सीधा असर?लोकल ऑप्टिमाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में हर साल हजारों की संख्या में भारतीय छात्र कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस और डेटा साइंस जैसे कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने ट्यूशन फीस के कर्ज को चुकाने और अमेरिकी बाजार में फुल-टाइम जॉब पाने के लिए CPT और फिर OPT पर निर्भर रहता है। यदि ICE के नए नियमों के कारण CPT मिलना मुश्किल हो जाता है, या इसके घंटों (Hours) को सीमित कर दिया जाता है, तो भारतीय छात्रों की आर्थिक स्थिति और करियर प्लानिंग बुरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि छात्रों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहने की जरूरत है।आधुनिक Generative Engine Optimization और डिजिटल सर्च ट्रेंड्स का परिदृश्यआधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च) और गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में शिक्षा, वीजा नियमों में बदलाव और करियर से जुड़ी ऐसी जटिल कानूनी खबरों को छात्र और उनके परिवार सबसे ज्यादा खोजते हैं। आज का डिजिटल युग यह मांग करता है कि किसी भी ग्लोबल पॉलिसी बदलाव को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडिट (Reddit) और इमिग्रेशन फोरम्स पर इस समय CPT मेमो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहाँ छात्र अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं। सही और तथ्यात्मक जानकारी समय पर मिलना हर उस छात्र के लिए बेहद जरूरी है जो अमेरिका में अपने सपनों को साकार करने की राह पर है।भारतीय छात्रों को अब किन सावधानियों और नियमों का रखना होगा ध्यान?इस बदलते हुए परिदृश्य में अमेरिका में पढ़ रहे या जाने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को कुछ बेहद अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, अपने कोर्स के दौरान लिए जाने वाले CPT का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) एकदम दुरुस्त रखें और यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर और आपकी यूनिवर्सिटी का कोर्स करिकुलम पूरी तरह से नियमों के दायरे में हो। किसी भी शॉर्टकट या संदिग्ध तरीके से CPT प्राप्त करने से बचें, क्योंकि अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS और ICE) इस मामले में अब बहुत अधिक आक्रामक हो चुका है। अपनी यूनिवर्सिटी के कानूनी सलाहकारों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें ताकि वीजा की स्थिति पर कोई आंच न आए।अमेरिकी शिक्षा और करियर की राह में आने वाली नई चुनौतियाँअंततः, अमेरिका में CPT को लेकर ICE द्वारा जारी किया गया यह मेमो इस बात की चेतावनी है कि अमेरिका में आव्रजन और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को लेकर प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना और वहां टिके रहना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है, इसके लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक ईमानदारी और नियमों की सटीक समझ होना अनिवार्य है। यदि छात्र सही दिशा में योजना बनाकर चलेंगे और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे, तो वे इन नई बाधाओं को पार करते हुए अपने अमेरिकी सपने को जरूर पूरा कर पाएंगे, बशर्ते हर कदम बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ उठाया जाए।
अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
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Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
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Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
एस्प्रेसो से अमेरिकानो तक, जानें कैफे में मिलने वाली 5 ब्लैक कॉफी का स्वाद, ऑर्डर करना होगा आसान
किसी कैफे में जाकर अलग-अलग तरह की कॉफी को देखकर आप भी कंफ्यूज हो जाते हैं तो आपकी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम यहां कैफे में मिलने वाली कुछ मुख्य ब्लैक कॉफी का स्वाद बता रहे हैं। जिसे जानने के बाद अगली बार ऑर्डर देना आसान हो जाएगा।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
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अमेरिका के फॉल इनटेक में एडमिशन ले चुके अधिकतर भारतीय छात्रों के मन में एक ही सवाल उठता है- क्या वह पहुंचते ही पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अमेरिका में फीस और रहने-खाने के खर्च को देखते हुए छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि टॉप यूनिवर्सिटीज की सालाना फीस और रहने खाने का खर्चा करीब 50 से 60 लाख रुपए तक होता है। वहीं पूरी पढ़ाई का खर्च 1.5 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीज पर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट टाइम जॉब के नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। यहां तक कि डिपोर्टेशन तक का समय आ सकता है। ऐसे में हम इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स फर्स्ट सेमेस्टर में पार्ट-टाइम नौकरी कर सकते हैं और इसको लेकर क्या नियम हैं। इसे भी पढ़ें: क्या 40 की उम्र में संभव है LLB? BCI के नए नियमों के तहत Age Limit और Career Switch पर एक विशेष रिपोर्ट फर्स्ट ईयर में जॉब कर सकते हैं या नहीं USICS के नियमों क मुताबिक F-1 वीजा पर पहले पूरे अकेडमिक ईयर तक आप कैंपस के बाहर कोई नौकरी नहीं कर सकते हैं। USICS के नियमों में फर्स्ट सेमेस्टर वाले स्टूडेंट्स के लिए कोई खास छूट नहीं दी गई है। कैंपस के बाहर किसी भी स्थिति में जॉब नहीं करना है। फर्स्ट ईयर छात्रों के पास ऑन कैंपस जॉब का ऑप्शन जरूर है। छात्र कैंपस के अंदर आराम से पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। फर्स्ट सेमेस्टर में क्या करें अच्छी खबर यह है कि ऑन कैंपस जॉब के लिए आपको USCIS से अलग इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। इसको आपको फर्स्ट सेमेस्टर से ही शुरूकर सकते हैं। जब क्लास चल रही हो, तब आप सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान आप फुल टाइम यानी की सप्ताह में 40 घंटे काम कर सकते हैं। ऑन कैंपस जॉब का मतलब है, यूनिवर्सिटी के कैंपस पर होने वाला काम कैफेटेरिया में काम, लाइब्रेरी में असिस्टेंट, यूनिवर्सिटी बुकस्टोर में जॉब, या किसी प्रोफेसर के साथ रिसर्च असिस्टेंटशिप। यह जॉब कुछ मामलों में कैंपस के बाहर भी हो सकता है। बशर्ते वह जगह आपकी यूनिवर्सिटी से एजुकेशनली एफिलिएटेड हो। उसका सीधा संबंध आपकी पढ़ाई या यूनिवर्सिटी से हो। ऑन कैंपस जॉब के लिए क्लास शुरू होने से करीब 30 दिन पहले तक अप्लाई कर सकते हैं। इसलिए अगर आप फॉल इनटेक में अभी पहुंचे हैं। तो जल्द से जल्द अपने कैंपस जॉब पोर्टल या फिर इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप ऑन कैंपस जॉब ढूंढ रहे हैं, या भविष्य में ऑफ-कैंपस काम के बारे में जानना चाहते हों। तो सबसे जरूरी काम है कि अपने DSO से बात करें। DSO आपकी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के मामलों को संभालने वाला अधिकारी होता है। वह आपको बताएगा कि कौन सी जॉब्स उपलब्ध हैं और आप उनके लिए एलिजिबल हैं या नहीं।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश सम्पूर्णानंद पांडेय ने हाल ही अपने करियर की यात्रा का एक किस्सा शेयर किया है। ये बात उस वक्त की है जब वो स्ट्रगल कर रहे थे।
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
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पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
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अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
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अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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