इटली में सबसे बड़ी शराब चोरी: टस्कनी में कारखाने से 30,000 बोतलें चोरी, 58 लाख अमेरिकी डॉलर का नुकसान
पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान: रूस से अमेरिका पहुंचेगा 3 लाख टन डीजल, क्या है वजह?
पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान: रूस से अमेरिका पहुंचेगा 3 लाख टन डीजल, क्या है वजह?
अब रूस से डीजल खरीदेगा अमेरिका, ट्रंप और पुतिन की नई डील, यूक्रेन को दिखाया ठेंगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी समकक्ष पुतिन के साथ एक बड़ी डील का ऐलान किया है। इसके तहत रूस को अमेरिकी और वैश्विक बाजार में डीजल सप्लाई करने की मंजूरी दी गई है। बता दें, अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल खरीद करने वाले देशों पर कार्रवाई करने के लिए कानून बनाया था।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी निवास कार्यक्रम से बाहर करने और वीजा नियमों को सख्त करने को भारत विरोधी और अहंकारी बताया गया है
अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक टकराव का अन्त करने का आग्रह
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को ख़त्म करने के लिए एक अपील जारी करते हुए कहा है कि इस टकराव का वैश्विक व्यापार पर गहरा असर हुआ है.
यूएई फिर से भारत का सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर बना, अमेरिका को पीछे छोड़ा
New Delhi, 9 अक्टूबर . मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से अमेरिका India का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया था, लेकिन अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने फिर से वापसी करते हुए India के प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता का स्थान हासिल कर लिया है. यूएई ने अमेरिका को ... Read more
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भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी नियमों के अनुपालन और स्थानीय भर्ती बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। ट्रंप प्रशासन की नीतियों के बावजूद, वे अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए एच-1बी वीजा पर निर्भरता कम कर रही हैं और भारत से ऑफशोर डिलीवरी मजबूत कर रही हैं।
'अमेरिकी उपराष्ट्रपति की टिप्पणी अनुचित व अपमानजनक', ट्रंप सरकार के फैसले पर भारत ने दिखाया आईना
भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस द्वारा भारतीय आईटी पेशेवरों को 'बंधुआ' कहने और ग्रीन कार्ड से जुड़ी पर्म प्रक्रिया से कंपनियों को बाहर करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
अमेरिका में पहली बार मौत की सजा का लाइव प्रसारण! निदाल मलिक हसन पर दागी जाएंगी गोलियां
अमेरिका में 2009 के फोर्ट हूड गोलीबारी मामले में दोषी निदाल मलिक हसन को 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा देने की योजना है। इसके लाइव प्रसारण की खबर ने पारदर्शिता, नैतिकता और कानूनी प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है।
इस गाने की आवाज विरोध प्रदर्शन में भी सुनने की आवाज मिलती है. इस गाने का नाम 'हम होंगे कामयाब एक दिन' है. यूं तो यह गाना काफी साल पुराना है लेकिन इस फिल्म में 43 साल पहले लिया गया था.
...आपको शुभकामनाएं: अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस के 'बंधुआ मजदूर' तंज का भारतीय ने दिया तगड़ा जवाब
अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा धारकों पर कहा था 'हमारा संदेश माइक्रोसॉफ्ट और किसी भी अन्य विदेशी या फिर घरेलू कॉर्पोरेशन के लिए बिल्कुल सीधा है. हम चाहते हैं कि आप अपनी उन्नति अमेरिका में ही करिए.
अमेरिका में सस्ता, भारत में महंगा! iPhone-Pixel कीमत में इतना फर्क क्यों
अमेरिका के मुकाबले भारत में गूगल और ऐपल के स्मार्टफोन्स इतने महंगे क्यों होते हैं? जब भी पिक्सल या आईफोन लॉन्च होता है लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठता है. हाल ही में भारत में लॉन्च हुआ Google Fitbit Air इसका सबसे बड़ा उदाहरण. कैसे 50 डॉलर का फिटनेस बैंड भारत में 13 हजार रुपये का हो जाता है. आइए समझते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नवी पिल्लै की आलोचना करने वाली एक पोस्ट को रीपोस्ट किया। उन्होंने दक्षिण अफ़्रीकी कानून विशेषज्ञ पिल्लै पर अमेरिका और इज़राइल से नफ़रत करने का आरोप लगाया। इस पोस्ट में नोबेल समिति पर भी उन्हें पुरस्कार देने के लिए निशाना साधा गया और दावा किया गया कि उन्होंने शांति को बढ़ावा देने के लिए कभी कुछ नहीं किया। ट्रंप ने शोएनलॉ की पोस्ट को रीशेयर किया, जिसमें कहा गया था कि नोबेल कमिटी ने पिल्ले को चुनकर खुद को बुरी तरह शर्मिंदा किया है। पोस्ट में उन पर आतंकवादियों और हमास का समर्थन करने का आरोप भी लगाया गया और गाजा में नरसंहार के आरोपों की उनकी जांच की आलोचना की गई। पोस्ट में लिखा था पिल्ले अमेरिका और इज़राइल से बेझिझक नफ़रत करती हैं। इसमें आगे यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने आतंकवादियों का जश्न मनाया और हमास को पुरस्कृत किया।
TCS और Wipro समेत IT कंपनियों पर अमेरिकी Green Card रोक का भारत ने किया विरोध
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर भारत ने शुक्रवार को अमेरिका के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और विप्रो जैसी बड़ी वैश्विक एवं भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अहम ग्रीन-कार्ड प्रक्रिया कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा विदेशी पेशेवरों को ‘बंधुआ मज़दूर’ बताए जाने को पूरी तरह ‘‘निराधार और अत्यंत अपमानजनक’’ करार दिया। अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की संख्या कम करने की व्यापक कोशिशों के तहत, ट्रंप प्रशासन ने आठ बड़ी आईटी कंपनियों के लिए ‘स्थायी श्रम प्रमाणन’ (पीईआरएम) कार्यक्रम को निलंबित कर दिया और कई विश्वविद्यालयों में जांच शुरू कर दी। यह निर्णय भारत और अमेरिका के रिश्तों में जारी तनाव के बीच लिया गया। जिन कंपनियों पर कार्रवाई हो रही है, उनमें इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कैपजेमिनी और कॉग्निजेंट शामिल हैं। पीईआरएम को अमेरिका में स्थायी निवास और नागरिकता पाने का एक रास्ता माना जाता है। अमेरिका के इस कार्यक्रम को रोकने के फ़ैसले का असर हज़ारों भारतीय प्रौद्योगिकी पेशेवरों पर पड़ने की उम्मीद है, जो एच1बी वीज़ा पर अमेरिका आने के बाद वहाँ स्थायी रूप से रहने के लिए नियोक्ता प्रायोजित ग्रीन कार्ड पर निर्भर रहते हैं। अपनी प्रतिक्रिया में, माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसने जो 6,000 एच1-बी वीज़ा आवेदन जमा किए थे, उनमें से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों का स्तर बढ़ाने या बदलने के लिए थे, न कि नए लोगों को नौकरी पर रखने के लिए। इसने कहा, ‘‘हमें अमेरिकी कार्यबल की ताकत और प्रतिभा पर भरोसा है। इसीलिए अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट के अधिकतर कर्मचारी अमेरिकी ही हैं। हम प्रशासन को और जानकारी देने के लिए तैयार हैं।’’कंपनी ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए पिछले वित्त वर्ष में एच-1बी वीजा के लिए दाखिल किए गए लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत माइक्रोसॉफ्ट के मौजूदा कर्मचारियों की वीजा अवधि बढ़ाने या उनकी स्थिति में बदलाव के लिए थे। ये आवेदन नए लोगों को नौकरी पर रखने के लिए नहीं थे।’’नए कर्मचारियों के लिए किए गए शेष आवेदन उन लोगों के लिए थे जो पहले से ही कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे और जिन्होंने कंपनी के लिए काम करने का फैसला किया। ऐसे लोग अमेरिकी कार्यबल का केवल एक प्रतिशत हिस्सा ही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा, ‘‘वे हमारे देश में आने वाले नए लोग नहीं हैं।’’कंपनी ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट एच-1बी वीजा के लिए केवल उन्हीं लोगों के आवेदन दाखिल करती है, जो इस वीजा श्रेणी के कड़े मानकों पर खरे उतरते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह भी साफ़ होना चाहिए कि प्रतिभा गतिशीलता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फ़ायदेमंद है। इससे भारतीयों के लिए तो मौके बनते ही हैं, साथ ही यह अमेरिकी कंपनियों को बेहतरीन प्रतिभा, नवोन्मेष, अनुसंधान, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और नौकरी के मौके पैदा करने में भी मदद करता है, तथा इसके अलावा अमेरिका में शेयर धारकों की संपत्ति भी बढ़ाता है।’’इसने कहा, ‘‘इसलिए, यह दोनों देशों के लिए बहुत अधिक आपसी लाभ वाला क्षेत्र है और हमें उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्ष इस बात को समझेंगे। अमेरिका की ओर से घोषित किए गए कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते हैं।’’भारत ने दिल्ली ने अमेरिका में काम कर रहे विदेशी पेशेवरों के बारे में वेंस की टिप्पणियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘हमने इस संदर्भ में अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियां भी देखी हैं। हमारा मानना है कि ऐसी बातें बेबुनियाद हैं और इस तथ्य की अनदेखी करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था और नवोन्मेष तंत्र में उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं।’’इसने एक बयान में कहा, ‘‘सच तो यह है कि खुद अमेरिका का इतिहास उन पीढ़ियों के प्रवासियों से बना है, जिनकी मेहनत, उद्यम और नयी सोच ने इसके विकास और समृद्धि में योगदान दिया है।’’बयान में कहा गया, ‘‘ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल करना, जो दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाती हो, बेहद अपमानजनक है।’’विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस मामले से जुड़ी गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा। अमेरिका के श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने बृहस्पतिवार को नए उपायों की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘हम इन कंपनियों से जुड़े किसी भी नए स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदन को स्वीकार नहीं करेंगे और न ही किसी लंबित आवेदन पर कोई कार्रवाई करेंगे।’’वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को भर्ती करने वाली आईटी कंपनियों की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि यहाँ मौजूद हर कोई उस खेल को समझता है, जो खेला जा रहा है।’’उन्होंने कहा, ‘‘आप देश के बाहर से बंधुआ मज़दूरों को लाते हैं, अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालते हैं और अगर आप एक कॉर्पोरेशन हैं, तो अमेरिकी कर्मचारियों की मज़दूरी कम करके और उनकी जगह ऐसे लोगों को रखकर बहुत सारा पैसा कमाते हैं, जिन्हें शायद शुरू से ही अमेरिका में नहीं होना चाहिए था।
5 नवंबर 2009, दोपहर 1 बजे। अमेरिका के टेक्सस प्रांत का फोर्ट हूड मिलिट्री बेस। अमेरिकी मेजर निदाल हसन ने दो पिस्टल निकालीं और वहां मौजूद सैनिकों पर गोलियां बरसाने लगा। 13 लोग मारे गए और 32 घायल हुए। अब 17 साल बाद निदाल हसन को मौत दी जाएगी। ठीक उसी जगह, उसी वक्त। अमेरिकी सेना इसका लाइव टेलीकास्ट पूरी दुनिया को दिखाएगी। आखिर कौन है निदाल हसन, उसने अपने ही साथियों की हत्या क्यों की और अमेरिका लाइव टीवी पर उसकी सजा-ए-मौत क्यों दिखाना चाहता है; पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: कौन है निदाल हसन?जवाब: 56 साल के निदाल मलिक हसन की पैदाइश अमेरिका के वर्जीनिया राज्य की है। माता-पिता फिलिस्तीनी मूल के थे और येरुसलम के पास एक छोटे से कस्बे से अमेरिका आए थे। निदाल ने 1995 में ग्रेजुएशन के दौरान अमेरिका के रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स में ट्रेनिंग ली। इसके बाद घर वालों की मर्जी के खिलाफ अमेरिकी सेना जॉइन कर ली। 2003 में मनोचिकित्सा की डिग्री ली और 2005 में मेडिकल लाइसेंस मिल गया। निदाल वाशिंगटन के आर्मी मेडिकल सेंटर में तैनात था, जहां जंग से लौटे मानसिक बीमार सैनिकों का इलाज करने लगा। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के पूर्व डायरेक्टर विलियम वेब्स्टर की अगुवाई में हुई जांच के मुताबिक, 5 नवंबर 2009 को दोपहर करीब 1 बजे निदाल फोर्ट हूड बेस के मेडिकल फैसिलिटी सेंटर पहुंचा। एक डेस्क पर चढ़ा और धार्मिक नारा लगाने के बाद दोनों पिस्टलों से गोलियां चलाना शुरू कर दिया। उसने बाहर पार्किंग की तरफ भाग रहे सैनिकों की पीठ पर भी गोलियां चलाईं। 12 अमेरिकी सैनिक और अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट का एक कर्मचारी मारा गया और 32 अन्य लोग घायल हुए। एक पुलिस जवान की जवाबी फायरिंग में निदाल भी घायल हो गया था। पैरालिसिस के चलते निदाल तब से व्हीलचेयर पर है। जांच में पता चला कि निदाल ने हफ्तों हमले की तैयारी की। उसने पिस्तौल को तेजी से रिलोड करना सीखा था। कुछ जवानों ने बाद में बताया कि वो इतनी तेज मैगजीन रीलोड कर रहा था कि उसको रोकना लगभग नामुमकिन था। बिल्डिंग के अंदर से 146 खाली कारतूस मिले थे। इसके बावजूद निदाल के पास 177 जिंदा कारतूस बाकी थे। 28 अगस्त 2013 को अमेरिकी सैन्य कोर्ट ने निदाल को दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान निदाल ने न ही अपने पक्ष में कोई गवाह पेश किया और न आरोपों से बचने की कोशिश की। कोर्ट से उसे जो वकील मिले, उन्होंने बताया कि निदाल मौत की सजा चाहता था। 2 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी डिफेंस सेक्रेट्री पीट हेगसेथ की सिफारिश पर ट्रम्प ने निदाल की सजा को मंजूरी दी। 3 दिसंबर को अमेरिकी सेना का फायरिंग स्क्वाड उसे गोली मारकर मौत की सजा देगा। इसे लाइव दिखाया जाएगा। सवाल-2: आखिर निदाल ने 13 जवानों की हत्या क्यों की थी?जवाब: अमेरिका के मैरीलैंड के इमाम फैजुल खान के मुताबिक, निदाल धार्मिक प्रवृत्ति का था। वाशिंगटन में रहने के दौरान निदाल रोजाना मस्जिद में नमाज अदा करने जाता था। हमले से करीब एक साल पहले 17 दिसंबर 2008 को निदाल ने एक कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी से ईमेल के जरिए संपर्क किया। औलाकी अमेरिका के खिलाफ हिंसक जिहाद का समर्थन करता था। जब FBI को इसका पता चला, तो उसने निदाल की जांच शुरू की। फिर अमेरिका की जॉइंट टेररिज्म टास्क फोर्स, JTTF ने रिकॉर्ड किया कि 1 जनवरी 2009 से लेकर 16 जून तक 17 बार ईमेल के जरिए मौलवी से बात की। औलाकी ने भी 2 ईमेल किए। इसके बाद सेना की जांच एजेंसी ने निदाल से पूछताछ की, लेकिन इससे ये नहीं तय हो सका कि वो किसी आतंकी गतिविधि में शामिल था या किसी आतंकी संगठन के संपर्क में था। 15 जुलाई को हसन को फोर्ट हूड में तैनात कर दिया गया। अक्टूबर में तय हुआ कि हसन को अगले महीने अफगानिस्तान भेजा जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो नहीं चाहता था कि अमेरिकी सैनिकों को इराक और अफगानिस्तान में मुसलमानों से लड़ने भेजा जाए। उसके एक सहकर्मी के मुताबिक, 'निदाल कहता था कि मुसलमानों को हमलावरों के खिलाफ लड़ना चाहिए। हमें लगा कि वह चाहता है कि इराक, अफगानिस्तान के मुसलमान अमेरिकी सेना की मदद करें, लेकिन ऐसा नहीं था।' रिपोर्ट्स के मुताबिक, निदाल ओसामा बिन लादेन का बचाव करता था और कहता था कि आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की जंग, असल में इस्लाम के खिलाफ जंग है। हालांकि घटना के बाद निदाल के चचेरे भाई नादेर हसन ने कहा कि उसे अपनी मिडिल-ईस्ट की पहचान के चलते सेना में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और वह सेना छोड़ना चाहता था। नादेर के मुताबिक, 'निदाल ने सरकार को पैसा वापस करके सेना से बाहर निकलने के लिए एक सैन्य वकील रखा था। वो हर संभव कोशिश कर रहा था। मुझे नहीं लगता कि वो सेना में काम नहीं करना चाहता था। घटना उसके उत्पीड़न के चलते हुई थी।' सवाल-3: अमेरिका निदाल की सजा लाइव क्यों दिखाने वाला है?जवाब: US आर्मी के सेक्रेटरी एडम टेले ने निदाल की सजा की तारीख 3 दिसंबर और समय दोपहर का 1 बजे तय किया है। 8 अक्टूबर को पीट हेगसेथ ने कहा है, 'वर्दी में एक इस्लामी कट्टरपंथी ने सैनिकों पर हमला किया था। इसलिए उसे सैनिकों की ही फायरिंग स्क्वाड मार गिराएगी। ऐसा ही होना चाहिए और हम ये तय करेंगे कि लोग इसे देख सकें। इसे पब्लिक किया जाएगा। लोगों को ये समझने की जरूरत है कि ऐसी चीजों के परिणाम गंभीर होते हैं।' जब हेगसथ से पूछा गया कि क्या निदाल ने कोई और आखिरी याचिका दी है, तो उन्होंने कहा, 'मुझे इसकी परवाह नहीं है। हम उससे 3 दिसंबर को ही मिलेंगे।' 90 साल पहले अमेरिका में आखिरी बार 14 अगस्त 1936 को केंटकी प्रांत में 22 साल के अश्वेत युवक रैनी बेथिया को खुलेआम मौत की सजा दी गई थी। उस पर 70 साल की एक बुजुर्ग श्वेत महिला के बलात्कार का आरोप था। अमेरिकी सेना में किसी जवान को आखिरी बार 65 साल पहले 1961 में मौत की सजा दी गई थी। जॉन बेनेट नाम के जवान को फायरिंग स्क्वाड ने गोली मारी थी। ट्रम्प के दौर में अमेरिका में मौत की सजाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। ऑस्ट्रेलिया के सीनियर कॉलमिस्ट पॉल डेली कहते हैं, 'दुनिया ट्रम्प के भयानक अहंकार की इतनी आदी हो चुकी है कि कोई अचंभा नहीं होता। अब पहली बार एंटरटेनमेंट के बतौर मौत की सजा तय की गई है। दुनिया का कथित रूप से सबसे महान लोकतांत्रिक देश नैतिक रूप से डरावने स्तर तक गिर गया है।' थिंक टैंक ORF के सीनियर फेलो सुशांत सरीन कहते हैं, ‘अमेरिका ISIS के रास्ते पर चल रहा है। पहले वे तालिबान की सार्वजनिक फांसी की आलोचना करते थे और अब उससे भी आगे निकल गए हैं।’ सवाल-4: अमेरिका में मृत्युदंड के कितने तरीके, ट्रम्प के दौर में कितनी बढ़ोत्तरी हुई?जवाब: अमेरिका में ज्यादातर मामलों में मौत की सजा का तरीका राज्य तय करते हैं। 50 राज्यों में से 27 राज्य, अमेरिकी सेना और फेडरल गवर्नमेंट भी मौत की सजा देती है। हालांकि 2020 में ट्रम्प के कार्यकाल से पहले फेडरल गवर्नमेंट ने 20 साल से मौत की सजा पर बैन लगाया हुआ था। 2020 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रम्प ने बैन हटाया और शुरुआती 6 महीने में ही 13 लोगों को फांसी की सजा दी। ट्रम्प ने कहा था, 'अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ सबसे जघन्य अपराध और हिंसा को रोकने के लिए मौत की सजा सबसे जरूरी टूल है।' फिर बाइडेन के दौर में फेडरल गवर्नमेंट ने मौत की सजा पर दोबारा रोक लगा दी, लेकिन 2025 में ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन मौत की सजा को दोबारा बहाल कर दिया। फेडरल सरकार फांसी के अलावा गोली मारकर, बिजली का झटका देकर या फिर जहरीली गैस के जरिए मौत की सजा देती है। पहले जहरीले इंजेक्शन भी दिए जाते थे। फिलहाल अमेरिका में 5 राज्य- इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और यूटा में गोली मारकर मौत की सजा दी जाती है। 15 सालों में पहली बार पिछले साल साउथ कैरोलिना में एक दोषी को गोली मारी गई। हालांकि अब तक ट्रम्प के कार्यकाल में फेडरल गवर्नमेंट ने एक भी मौत की सजा नहीं दी है, लेकिन राज्यों में 2024 में 25 के मुकाबले 2025 में 47 दोषियों को मृत्युदंड दिया गया। 2026 में अब तक ये संख्या 19 है। सवाल-5: क्या दुनिया में और भी कहीं सरेआम मौत की सजा दी जाती है?जवाब: फिलहाल पूरी दुनिया में सिर्फ तीन देश- ईरान, अफगानिस्तान और नॉर्थ कोरिया में सरेआम लोगों को मौत की सजा दी जाती है... पहले सऊदी अरब में भी गंभीर अपराधों में सिर कलम करके मौत की सजा दी जाती थी, लेकिन अब ये तरीका बंद कर दिया गया है। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, अफगानिस्तान, चीन, नॉर्थ कोरिया, सऊदी अरब, सोमालिया, ताइवान, UAE और यमन में गोली मारकर भी मौत की सजा दी जाती है। वहीं भारत में आम अपराधियों को जेल के अंदर फांसी दी जा सकती है, लेकिन सैन्य दोषियों के मामले में सैन्य कोर्ट यह तय कर सकती है कि फांसी दी जाएगी या गोली मारी जाएगी। ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:शेख हसीना की फांसी लगभग तय, फिर भी बांग्लादेश क्यों जाना चाहती हैं; क्या भारत का रुख बदल गया बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद वो भागकर भारत आ गई थीं। उन्हें बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेशी नेता कह रहे- वापस आने पर इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स के नाम कटने का दावा, वीडियो में जाने ट्रम्प के ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर बढ़ी बहस
भारत वाले अमेरिका नहीं गए तो USA से काम ही इंडिया आ जाएगा; विनीत नायर को दिखा मौका
एचसीएल टेक्नोलॉजी के पूर्व सीईओ विनीत नायर अमेरिका द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड करने को देश के लिए एक मौका के तौर पर देख रहे हैं।
रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर मतभेदों के बावजूद भारत-अमेरिका साझेदारी आगे बढ़ रही है : रिपोर्ट
New Delhi, 9 अक्टूबर . पिछले 25 वर्षों के ज्यादातर समय में भारत-अमेरिका संबंध इस सोच पर आधारित रहे हैं कि एक मजबूत India एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने, सप्लाई चेन में विविधता लाने और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक को मजबूत करने में मदद करके अमेरिका के बड़े रणनीतिक मकसद को पूरा करता ... Read more
भारतीय पेशेवरों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ बताने वाली अमेरिकी टिप्पणी पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान को भारत ने न केवल अनुचित, बल्कि अपमानजनक करार देते हुए साफ कर दिया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास में भारतीय पेशेवरों के योगदान को इस तरह की भाषा से खारिज नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज प्रेस ब्रीफिंग में इस मुद्दे समेत भारत-अमेरिका संबंधों, पश्चिम एशिया की स्थिति, बांग्लादेश के साथ व्यापार, भारत-पाकिस्तान संबंधों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे विदेशी पेशेवरों और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े भारतीय कर्मचारियों को लेकर जारी विवाद पर भारत ने अपनी नाराजगी स्पष्ट शब्दों में जाहिर की है। हम आपको बता दें कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ बताते हुए कहा था कि अमेरिकी कामगारों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह ऐसे लोगों को नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि विदेश से केवल उन्हीं प्रतिभाशाली लोगों को बुलाया जाना चाहिए, जिनकी विशेषज्ञता अमेरिका में उपलब्ध नहीं है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई, जब अमेरिका ने कई तकनीकी कंपनियों को PERM ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से जुड़े आवेदनों की प्रक्रिया पर रोक या निलंबन संबंधी कदमों की घोषणा की। प्रभावित कंपनियों में भारत से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: Russian Army में फंसे 69 भारतीयों पर MEA ने मांगी जानकारी, 139 को अब तक कराया गया मुक्त भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि इस तरह का वर्णन अनुचित है और अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के वास्तविक योगदान की अनदेखी करता है। मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं तथा अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका का अपना इतिहास विभिन्न पीढ़ियों के प्रवासियों के श्रम, उद्यमशीलता और नवाचार से आकार लेता रहा है। ऐसे में औपनिवेशिक इतिहास और दर्दनाक ऐतिहासिक अनुभवों से जुड़ी शब्दावली का इस्तेमाल करना बेहद अपमानजनक है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा। विदेश मंत्रालय का रुख इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली भारतीय प्रतिभाओं और पेशेवरों के सम्मान के मुद्दे पर किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी को हल्के में लेने के लिए तैयार नहीं है। देखा जाये तो एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड का विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के संबंध पहले से ही कई मुद्दों पर दबाव का सामना कर रहे हैं। व्यापार और टैरिफ, आव्रजन नीतियों, भारतीय पेशेवरों की आवाजाही, रूस के साथ भारत के संबंधों और पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी रुख को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। साथ ही रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावनाओं से जुड़े अमेरिकी कदम भी भारत की चिंताओं में शामिल हैं। इस संदर्भ में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्तियों से जुड़े अमेरिकी कानून का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संपर्कों को लेकर चिंता जता चुके हैं। भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की प्रमुख चिंताओं और हितों का सम्मान करना होगा। इसके अलावा, भारतीय पक्ष ने यह भी रेखांकित किया है कि प्रतिभाओं की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही दोनों देशों के लिए लाभकारी है। भारतीय पेशेवर अमेरिकी कंपनियों को उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता, अनुसंधान, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे रोजगार सृजन और कंपनियों के आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलता है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि भारतीय प्रतिभाओं की भूमिका को सीमित करने वाले कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं के अनुकूल नहीं हैं। भारत की अपेक्षा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्ष पारस्परिक लाभ की इस वास्तविकता को समझेंगे। हालांकि, मंत्रालय ने एच-1बी वीजा और PERM ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उसके मुताबिक, PERM आवेदनों का निलंबन अपने आप में मौजूदा एच-1बी वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति को प्रभावित नहीं करता। लेकिन प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया पर इसका असर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में हमलों के बाद कुछ व्यवधान, हवाई आवाजाही जारी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पश्चिम एशिया में कनेक्टिविटी और हवाई यातायात को लेकर भी सवाल उठे। रणधीर जायसवाल ने बताया कि सऊदी अरब में हमलों के कारण कुछ व्यवधान पैदा हुए हैं। भारत ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए इन हमलों की कड़ी निंदा की है। हालांकि, प्रवक्ता ने कहा कि इसके अलावा कनेक्टिविटी से जुड़ी कोई अन्य बड़ी समस्या सामने नहीं है और पश्चिम एशिया के हवाई अड्डों के जरिए यातायात जारी है। भारत की चिंता का एक महत्वपूर्ण पहलू इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों, यात्रियों और कामगारों की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना भी है। क्षेत्रीय तनाव के बीच हवाई आवाजाही और परिवहन संपर्क बनाए रखना भारत के लिए अहम बना हुआ है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर बातचीत जारी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की प्रगति पर पूछे गए प्रभासाक्षी के सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस पहल पर पर्याप्त प्रगति हुई है और संबंधित देशों के बीच चर्चा जारी है। जायसवाल ने कहा कि अगली बैठक कब होगी, इस बारे में फिलहाल उनके पास कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं है। भाग लेने वाले देशों और आगे की बैठकों से संबंधित जानकारी उपलब्ध होने पर साझा की जाएगी। हम आपको बता दें कि IMEC को भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच संपर्क, व्यापार तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। ऐसे में इसके क्रियान्वयन को लेकर जारी चर्चाएं क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। बांग्लादेश के साथ व्यापारिक मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक इसके अलावा, भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी। प्रवक्ता के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश संयुक्त कार्य समूह की व्यापार संबंधी बैठक नई दिल्ली में कल और आज आयोजित हुई। बैठक संयुक्त सचिव स्तर पर हुई और इसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा की गई। जायसवाल ने कहा कि उन्हें बैठक के समापन की स्थिति की पूरी पुष्टि नहीं है, लेकिन उन्हें जानकारी मिली है कि बातचीत अभी-अभी समाप्त हुई हो सकती है या उस समय जारी हो सकती है। देखा जाये तो भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संपर्क दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों का अहम हिस्सा है। ऐसे में संयुक्त कार्य समूह की बैठक को लंबित व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा और द्विपक्षीय आर्थिक संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिमला समझौते के बाद UNMOGIP की प्रासंगिकता पर भारत का पुराना रुख कायम संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह यानी UNMOGIP को लेकर पूछे गए सवाल पर भारत ने अपना पारंपरिक रुख दोहराया। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का लगातार यह मत रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद UNMOGIP अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। यह रुख भारत की उस नीति के अनुरूप है, जिसके तहत नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दों पर शिमला समझौते और द्विपक्षीय व्यवस्था को प्रमुख महत्व देती है। भारत और लाइबेरिया की पहल: समुद्री सुरक्षा को वैश्विक एजेंडे में लाने पर जोर प्रेस ब्रीफिंग में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और लाइबेरिया के बीच बैठक हुई है। भारत ने खाड़ी क्षेत्र और काला सागर क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों पर हुए हमलों की श्रृंखला की कड़ी निंदा की है। जायसवाल के अनुसार, नाविकों की सुरक्षा के लिए गठित ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑफ द सेफ्टी ऑफ सीफेरर्स’ (S4) की पहली बैठक न्यूयॉर्क में आयोजित हुई। इसमें भारत के विदेश मंत्री और लाइबेरिया के विदेश मंत्री ने नेतृत्व करते हुए बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में 25 देशों ने भाग लिया। इस समूह का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजरानी से जुड़े देशों, समुद्री उद्योग के हितधारकों, सेवाएं प्रदान करने वाले प्रमुख देशों और बड़े नाविक समुदायों वाले देशों को एक मंच पर लाना है। भारत चाहता है कि समुद्री सुरक्षा और नाविकों की संरक्षा को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखा जाए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना न बनाया जाए, समुद्री व्यापार बाधित न हो और समुद्र में काम करने वाले नाविक सुरक्षित रहें। मौजूदा क्षेत्रीय तनावों के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। कई मोर्चों पर भारत का स्पष्ट संदेश विदेश मंत्रालय की आज की प्रेस ब्रीफिंग में भारत का रुख कई स्तरों पर सामने आया। अमेरिका के साथ संबंधों में भारतीय पेशेवरों के सम्मान और प्रतिभाओं की आवाजाही का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा, जहां भारत ने जेडी वेंस की टिप्पणी पर तीखा विरोध दर्ज कराया। वहीं, पश्चिम एशिया में नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा, हवाई संपर्क की स्थिति, IMEC पर जारी बातचीत, बांग्लादेश के साथ व्यापारिक चर्चा और समुद्री सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता ने भारत की व्यापक कूटनीतिक प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया। भारत ने UNMOGIP के मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से संबंधित मामलों में शिमला समझौता उसकी नीति का महत्वपूर्ण आधार है। कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि भारत अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के साथ-साथ विदेशों में भारतीय पेशेवरों की प्रतिष्ठा, नागरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संपर्कों के संरक्षण को लेकर स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाए हुए है।
अमेरिका के पीईआरएम फैसले के भारत पर जटिल और दूरगामी असर हो सकते हैं: प्रियांक खड़गे
Bengaluru, 9 अक्टूबर . कर्नाटक के आईटी और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने Friday को कहा कि बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए यूएस Government द्वारा ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ (पीईआरएम) को सस्पेंड करने से India पर जटिल और दूरगामी असर पड़ सकते हैं. इस कदम से पारंपरिक आईटी आउटसोर्सिंग के सामने चुनौतियां खड़ी हो ... Read more
अमेरिका में माइनस 60°F की ठंड में कैसे जीते हैं लोग, अलास्का की महिला ने दिखाई तैयारियों की लिस्ट
अलास्का के फेयरबैंक्स में -60 डिग्री की ठंड से बचने के लिए लोगों का लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं. एक महिला ने सर्दियों की तैयारियों को लेकर बात की है.
ट्रंप सरकार से त्रस्त हुए अमेरिका के किसान, खाद और डीजल को लेकर क्यों सता रही चिंता?
अमेरिकी किसान डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण बढ़ती खेती की लागत से परेशान हैं, जिसमें डीजल और खाद की कीमतों में भारी उछाल शामिल है। इस आर्थिक दबाव के बावजूद, किसानों को फसल कटाई करनी पड़ रही है, जबकि वे सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।
भारतीय बच्चे का अमेरिका में कमाल, 3 साल की उम्र में किताब लिखकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
Advay Jain Youngest Male Author: महज तीन साल की उम्र में किताब लिखकर भारतीय मूल के अद्वय जैन ने अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करवा दिया है. अपने प्री-स्कूल में चीजों को देखने के बाद उन्होंने इन पर लिखना शुरू कर दिया था.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा H-1B वीजा धारकों को 'बंधुआ मजदूर' कहे जाने पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा एतराज जताया है। भारत ने इसे औपनिवेशिक मानसिकता और भारतीय पेशेवरों का अपमान बताया है।
अमेरिका: पूर्व सैनिक की सज़ा-ए-मौत लोगों को लाइव दिखाने का फ़ैसला क्यों लिया गया? - BBC
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अमेरिका में पहली बार लाइवस्ट्रीम होगी फांसी की सजा?
नई दिल्ली, 09 अक्टूबर 2026 । अमेरिका में मृत्युदंड को लेकर एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने कानूनी और नैतिक बहस छेड़ दी है। पेंटागन ने घोषणा की है कि 2009 के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर हुए हमले के दोषी निदाल मलिक हसन को दी जाने वाली मौत की सजा को लाइवस्ट्रीम किया […] The post अमेरिका में पहली बार लाइवस्ट्रीम होगी फांसी की सजा? appeared first on Rashtriya Ujala .
अमेरिका में भारतीयों के ग्रीन कार्ड पर संकट! Zoho फाउंडर बोले- स्वदेश लौटो
स्वदेशी टेक कंपनी Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में काम कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल्स से भारत लौट आने को कहा है. ये पोस्ट उन्होंने अमेरिका के ताजा फैसले के बाद किया है. आइए जानते हैं अमेरिका ने ऐसा क्या किया जिससे वहां काम कर रहे टेक प्रोफेशनल्स को अब दिक्कत हो सकती है.
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार वर्षीय कार्यकाल के बीच में होते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
साझा हितों के अनुरूप नहीं है अमेरिकी श्रम विभाग का फैसला : एमईए
New Delhi, 9 अक्टूबर . India ने Friday को कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के लिए ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन’ (पीईआरएम) कार्यक्रम को लेकर किए गए फैसले से अवगत है. India ने स्पष्ट किया कि पीईआरएम आवेदन प्रक्रिया को निलंबित किए जाने का मौजूदा एच-1बी वीजा या एच-1बी वीजा धारकों ... Read more
साझा हितों के अनुरूप नहीं है अमेरिकी श्रम विभाग का फैसला : विदेश मंत्रालय
भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के लिए 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (पीईआरएम) कार्यक्रम को लेकर किए गए फैसले से अवगत है। भारत ने स्पष्ट किया कि पीईआरएम आवेदन प्रक्रिया को निलंबित किए जाने का मौजूदा एच-1बी वीजा या एच-1बी वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
जेडी वेंस के बंधुआ मजदूर बताने वाले बयान पर भारत की तरफ से कड़ी आपत्ति जताई गई है. विदेश मंत्रालय ने इसे अपमानजनक बताया है. भारत ने कहा कि इस तरह की भाषा दोनों देशों के हितों में सही नहीं है.
अमेरिका में ट्राला पलटने से करनाल के 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई। वह 2022 में इंग्लैंड से डंकी रूट के रास्ते अमेरिका गया था। वहां वह ट्राला चलाता था। घटना के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार शव भारत आने का इंतजार कर रहा है। परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है, ताकि शव को भारत लाकर अंतिम संस्कार किया जा सके। उधर, युवक की मां ने रोते हुए कहा- हमारे ऊपर बिजली गिर गई। हमारे बच्चे को ले आओ। 40 लाख खर्च कर इंग्लैंड गया था मृतक की पहचान सीकरी गांव निवासी जतिन (25) के रूप में हुई है। वह वर्ष 2022 में करीब 40 लाख रुपए खर्च कर भारत से इंग्लैंड गया था। वहां से वह डंकी रूट के रास्ते अमेरिका पहुंचा। वह कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में रहकर ड्राइवरी करता था। संतुलन बिगड़ने से ट्राला पलटा हादसा बुधवार अलसुबह अमेरिका में हुआ। बताया गया कि सड़क पर ट्रक का संतुलन बिगड़ने से ट्राला पलट गया। इस दौरान जतिन के सिर में चोट लगी और खून निकलने लगा। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जतिन के ममेरा भाई विशाल भी साथ ही रहता है। उसने जतिन के परिवार को घटना की सूचना दी। 5 घंटे पहले पिता से की थी बात परिवार के अनुसार, उसके पिता रामपाल ने हादसे से करीब 5 घंटे पहले ही बेटे से फोन पर बात की थी। परिवार को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद उन्हें यह दुखद खबर सुननी पड़ेगी। परिवार अपने बेटे के अंतिम दर्शन करना चाहता है, लेकिन अमेरिका से शव भारत लाने की प्रक्रिया में आर्थिक परेशानी आ रही है। परिजनों ने सरकार से अपील की है कि शव को जल्द भारत लाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सकें। खेतीबाड़ी करता है परिवार जतिन के परिवार में पिता रामपाल, मां रेखा, बड़ा भाई साहिल और एक छोटी बहन है। उसके पिता खेतीबाड़ी करते हैं। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और अब परिजनों को उसके शव के भारत पहुंचने का इंतजार है।
अमेरिका में पहली बार सजा-ए-मौत टीवी पर लाइव होगी, 3 दिसंबर की तारीख तय
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने और इसका सार्वजनिक प्रसारण करने की बात कही है। उनके हवाले से कहा गया है कि लोगों को यह समझना चाहिए कि इस तरह के अपराधों के गंभीर परिणाम होते हैं।
अमेरिका में 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स के नाम कटने का दावा, मिडटर्म चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर विवाद; ट्रम्प की बढ़ी मुश्किलें?
दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार रिकवरी का अनुमान जताया है। लेकिन, यह अनुमान इस सोच पर आधारित है कि अमेरिकी बॉन्ड्स यील्ड जल्द सामान्य लेवल पर आ जाएगी। सवाल है कि अगर अमेरिकी बॉन्ड्स यील्ड नीचे नहीं आई तो क्या होगा?शेयर बाजारों में माहौल काफी बदल सकता हैप्रशांत जैन ने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में बताया है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 6 फीसदी के ऊपर जाने पर उनके आउटलुक को रिस्क हो सकता है। ऐसी स्थिति में ग्लोबल मार्केट्स में माहौल काफी बदल सकता है। ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है। इनवेस्टमेंट में कमी आ सकती है। कॉर्पोरेट प्रॉफिट्स में कमी आ सकती है और शेयरों की वैल्यूएशंस घट सकती है।बॉन्ड यील्ड के सामान्य स्तर पर आ जाने की उम्मीदजैन का कहना है कि हालांकि इसकी उम्मीद बहुत कम है। लेकिन, निवेशकों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। फिर भी उनका मानना है कि आगे स्थितियां सामान्य हो जाएंगी। मॉर्गन स्टेनली, जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स ने भी इस साल के अंत तक बॉन्ड यील्ड के 4.75-5 फीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया है। 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के लेटर में यह बताया गया है।अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार उछाल की वजहेंअमेरिकी सरकार के बढ़ते फिस्कल डेफिसिट और सरकार के कर्ज लेने की कॉस्ट बढ़ने से बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। अमेरिका सरकार का कर्ज बढ़कर 40 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर के करीब पहुंच गया है। यह जीडीपी का करीब 32.5 फीसदी है। 3.5 फीसदी की कर्ज की औसत कॉस्ट के हिसाब से अमेरिकी सरकार को इंटरेस्ट चुकाने पर 1.37 लाख करोड़ डॉलर खर्च करना होगा। यह जीडीपी का 4.2 फीसदी है। इससे सरकार का फिस्कल डेफिसिट बढ़ेगा। साथ ही मैच्योर होने वाले बॉन्ड्स के पैसे चुकाने के लिए सरकार को ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर कर्ज लेना होगा।सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा असरखास बात यह है कि यह समस्या सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगी। यूरोप, जापान सहित कई देशों में फिस्कल डेफिसिट बढ़ने की वजह से बॉन्ड्स यील्ड बढ़ रही है। जैन ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 6 फीसदी के पार जाने पर इसका असर सिर्फ सरकार की वित्तीय स्थिति पर नहीं पड़ेगा बल्कि इसका व्यापक असर होगा। यील्ड ज्यादा होने पर इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बॉन्ड में बढ़ेगी। इससे शेयरों की वैल्यूएशन पर दबाव बनेगा।पूरे फाइनेंशियल सिस्टम पर असर पड़ने का अनुमानज्यादा बॉन्ड यील्ड का खराब असर इनवेस्टमेंट पर भी पड़ेगा। इकोनॉमिक ग्रोथ सुस्त पड़ने पर कंपनियों की अर्निंग्स घटेगी। फाइनेंशियल स्ट्रेस का असर बैंकों और कर्ज लेने वालों पर भी पड़ेगा। इससे बैंकों की एसेट क्वालिटी में गिरावट का खतरा बढ़ जाएगा। जहां तक इंडिया की बात है तो यह इस झटके को बर्दाश्त करने के लिहाज से अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है।यह भी पढ़ें:Nifty फिर से 22500 लेवल के पार, एनालिस्ट्स से जानिए बाजार में इस तेजी के जारी रहने की कितनी संभावना हैभारत स्थिति का सामना करने के लिहाज से मजबूत स्थिति मेंइंडिया में विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर का है। यह FY24-26 के दौरान औसत करेंट-अकाउंट डेफिसिट का 28 गुना है। एफडीआई में भी इम्प्रूवमेंट है। नेट इनफ्लो इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में करीब 8 अरब डॉलर रहा। इसके अलावा भारत ने FCNR(B) डिपॉजिट से 136 अरब डॉलर जुटाए हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली है।डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।
'अनुचित और अपमानजनक भाषा न बोलें,' भारतीयों को बंधुआ मजदूर कहने पर अमेरिका पर बिफरा भारत
भारतीय प्रोफेशनल्स को ‘बंधुआ मजदूर’ कहने पर भारत ने अमेरिका को कड़ी फटकार लगाई है। बता दें कि ये कमेंट अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था।
अमेरिका में पढ़ाई के बाद जॉब पाने के लिए अब चुकाने होंगे 68 लाख रुपये
विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने और अपने भविष्य को एक नई उड़ान देने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए दुनिया के सबसे बड़े महाशक्ति देश अमेरिका से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जो उनके माथे पर चिंता की लकीरें खींचने के लिए काफी है। पारंपरिक रूप से अमेरिका को दुनिया भर के युवाओं के लिए 'अमेरिकन ड्रीम' का प्रतीक माना जाता रहा है, जहाँ छात्र अपनी मेहनत के दम पर उच्च शिक्षा हासिल करके बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरियां पाने का सपना देखा करते थे। लेकिन हालिया प्रशासनिक और कानूनी बदलावों के चलते अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां पर टिके रहने, जॉब ढूंढने और वर्क वीजा की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए आने वाला खर्च अब आसमान छूने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि कोई छात्र अमेरिका में अपनी डिग्री पूरी करने के बाद वहां कानूनी रूप से नौकरी करने के अवसर तलाशता है, तो उसे विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक शुल्कों के रूप में लगभग 68 लाख रुपये तक का भारी-भरकम खर्च उठाना पड़ सकता है। इस प्रकार की अत्यधिक वित्तीय लागत ने मध्यम वर्गीय परिवारों के उन मेधावी छात्रों के सपनों को एक बड़ा झटका दिया है जो लोन लेकर या अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करके अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लेते हैं।वर्क वीजा और कानूनी औपचारिकताओं का भारी बोझ, क्यों कठिन हो गया है अमेरिका में टिकनाअमेरिका में पढ़ाई के दौरान छात्रों को मिलने वाले 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) और उसके बाद H-1B वीजा या अन्य कार्य परमिट प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से ही काफी जटिल और अनिश्चितताओं से भरी रही है। एच-1बी वीजा के लिए होने वाली लॉटरी प्रणाली और वकीलों की भारी-भरकम फीस तथा आवेदन शुल्कों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने अब इस पूरी प्रक्रिया को इतना खर्चीला बना दिया है कि हर छात्र के लिए इसे वहन करना मुमकिन नहीं रह गया है। जब कोई युवा अपनी डिग्री पूरी करने के बाद जॉब मार्केट में उतरता है, तो उसे अपने प्रायोजन (Sponsorship) और कानूनी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए कंसल्टेंट्स और इमीग्रेशन लॉ फर्मों को लाखों रुपये चुकाने पड़ते हैं, जिससे शुरुआती दौर में ही उसके सिर पर कर्ज का भारी पहाड़ खड़ा हो जाता है। इसके अलावा, वहां की आव्रजन नीतियों में आए दिन होने वाले बदलाव छात्रों के भीतर एक मानसिक अनिश्चितता पैदा करते हैं कि वे लंबे समय तक वहां रह पाएंगे या नहीं। यही वजह है कि अब छात्र और उनके अभिभावक अमेरिका के अलावा अन्य ऐसे विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं जहाँ शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतरीन हो और करियर की राहें भी इतनी कठिन और महंगी न हों।वे देश जहाँ डिग्री लेते ही बिना किसी झंझट के मुफ्त में मिलता है शानदार वर्क वीजाअमेरिका के विपरीत दुनिया के कई अन्य विकसित देश ऐसे हैं जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने यहां आकर्षित करने के लिए बेहद उदार, पारदर्शी और किफायती नीतियां अपना रहे हैं, जहाँ डिग्री पूरी होते ही फ्री या कम लागत में वर्क वीजा मिल जाता है। इनमें कनाडा, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम (UK), और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश सबसे आगे हैं, जिन्होंने छात्रों के लिए 'पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा' (Post-Study Work Visa) की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। उदाहरण के लिए, जर्मनी में पब्लिक यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई की फीस न के बराबर या बेहद कम होती है और पढ़ाई पूरी होने के बाद छात्रों को नौकरी ढूंढने के लिए पर्याप्त समय और सीधा वर्क परमिट मिल जाता है। इसी प्रकार, कनाडा और यूके भी अपनी अर्थव्यवस्था में कुशल युवाओं की मांग को पूरा करने के लिए छात्रों को उनकी डिग्री के आधार पर आसानी से वर्क वीजा और परमानेंट रेसिडेंसी (PR) की ओर बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इन देशों में अमेरिका की तरह लाखों रुपये कानूनी शुल्कों के रूप में बर्बाद नहीं करने पड़ते, और छात्र अपनी मेहनत के बल पर बहुत कम समय में एक स्थिर और सुरक्षित करियर की शुरुआत कर लेते हैं।भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का बदलता परिदृश्य और सही दिशा में उठाया गया कदमविदेश में पढ़ाई का यह बदलता हुआ परिदृश्य आज के छात्र समाज के लिए एक बहुत बड़ा सबक है कि उन्हें केवल किसी देश के नाम या पुरानी चमक-धमक देखकर अपना फैसला नहीं लेना चाहिए, बल्कि वहां की जमीनी हकीकत और आर्थिक गणित को भी समझना चाहिए। यदि कोई छात्र अत्यधिक कर्ज लेकर अमेरिका जैसे देश में जाता है और वहां पढ़ाई के बाद शुरुआती चरणों में ही लाखों-करोड़ों रुपये के कानूनी खर्चों में फंस जाता है, तो उसका मानसिक और आर्थिक तनाव काफी बढ़ जाता है। इसके मुकाबले, यदि वे जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड या अन्य यूरोपीय तथा एशियाई देशों का रुख करते हैं जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ करियर की स्पष्ट और सुगम गारंटियां मिलती हैं, तो उनका भविष्य ज्यादा सुरक्षित रहता है। अंततः, अमेरिका में जॉब के बढ़ते खर्चों और अन्य देशों की उदार वीज़ा नीतियों के बीच छात्रों को अपनी वित्तीय स्थिति और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए ही अपने विदेश अध्ययन का अंतिम निर्णय लेना चाहिए, ताकि उनका और उनके परिवार का भविष्य पूरी तरह से सुरक्षित रह सके।
'औपनिवेशिक मानसिकता वाली भाषा अपमानजनक!' US PERM विवाद पर अमेरिका को भारत का करारा जवाब
PERM Program Suspension: अमेरिका द्वारा चुनिंदा कंपनियों के 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM) प्रोग्राम को निलंबित किए जाने और इस संबंध में अमरीकी उप-राष्ट्रपति की ओर से की गई टिप्पणियों पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक विस्तृत और सख्त बयान जारी करते हुए साफ किया है कि इस फैसले से H-1B वीजा धारकों के मौजूदा स्टेटस पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह दोनों देशों के आपसी आर्थिक और तकनीकी हितों के अनुकूल नहीं है।इसके साथ ही, भारत ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा और बयानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित और अपमानजनक करार दिया है।विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के 5 मुख्य बिंदु:1. PERM प्रोग्राम के निलंबन पर भारत की नजरभारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा कुछ विशेष कंपनियों के लिए PERM प्रोग्राम को निलंबित करने के फैसले पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।2. H-1B वीजाधारकों पर नहीं पड़ेगा असर, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया हो सकती है प्रभावितविदेश मंत्रालय ने आम लोगों और आईटी पेशेवरों की आशंकाओं को दूर करते हुए स्थिति साफ की है। PERM प्रोग्राम, H-1B वीजा व्यवस्था से पूरी तरह अलग है। इस सस्पेंशन का असर पहले से जारी H-1B वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों के लीगल स्टेटस पर नहीं पड़ेगा। हालांकि, प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है।3. प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों के हित मेंबयान में भारत ने अमेरिका को याद दिलाया कि कुशल भारतीय पेशेवरों का अमेरिका जाना दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल भारतीयों के लिए अवसर पैदा करता है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को विश्वस्तरीय टैलेंट, इनोवेशन, रिसर्च, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में बढ़त दिलाता है।भारतीय टैलेंट अमेरिका में जॉब क्रिएशन और शेयरधारकों के लिए वेल्थ (संपत्ति) बनाने में अहम भूमिका निभाता है। अमेरिका का यह कदम दोनों देशों की साझी महत्त्वाकांक्षाओं और प्रगति को आगे नहीं बढ़ाता है।4. US उप-राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर सख्त ऐतराजअमेरिकी उप-राष्ट्रपति के बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत सरकार ने कहा, 'ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अनावश्यक और अनुचित हैं। ये बयान इस सच्चाई को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित, कुशल और वहां के इनोवेशन इकोसिस्टम के प्रमुख आधार हैं।'अमेरिका का खुद का इतिहास आप्रवासियों की मेहनत और नवाचार से गढ़ा गया है। ऐसी शब्दावली या भाषा का इस्तेमाल करना, जिसमें औपनिवेशिक काल की दर्दनाक यादें जुड़ी हों, बेहद अपमानजनक और आपत्तिजनक है।5. स्थिति पर लगातार निगरानीभारत सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे से जुड़ी हर एक डेवलपमेंट पर लगातार नजर रख रही है और अमेरिकी प्रशासन के साथ सभी हितधारकों के सामने भारतीय पेशेवरों के हितों को मजबूती से उठाती रहेगी।
अमेरिका में भारतीय प्रतिभा का लोहा मानने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अब उसी प्रतिभा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जिसने अमेरिकी तकनीकी उद्योग को वैश्विक ताकत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। एक तरफ ट्रंप भारतीय मूल के माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्य नडेला की तारीफ करते हैं, तो दूसरी तरफ उपराष्ट्रपति जेडी वांस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और कॉग्निजेंट समेत आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े PERM कार्यक्रम से निलंबित कर देता है। इस फैसले से हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों के भविष्य और अमेरिका में स्थायी निवास पाने की उम्मीदों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया है कि PERM कार्यक्रम और एच-1बी वीजा अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं तथा PERM आवेदनों पर रोक लगने से मौजूदा एच-1बी वीजा या उनके धारकों और आश्रितों की स्थिति अपने आप प्रभावित नहीं होती, भले ही पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोटूक कहा है कि प्रतिभाओं की आवाजाही भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। इससे अमेरिकी कंपनियों को उच्च कौशल वाले पेशेवर, नवाचार, अनुसंधान, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और रोजगार सृजन में मदद मिलती है। मंत्रालय ने वांस की उन टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें विदेशी कर्मचारियों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। भारत ने कहा कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं तथा उन्हें औपनिवेशिक इतिहास की पीड़ादायक याद दिलाने वाली भाषा से संबोधित करना गहरे तौर पर आपत्तिजनक है। देखा जाये तो भारत का यह बयान महज औपचारिक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि वाशिंगटन के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारतीय प्रतिभा को अपमानित करके और उसके अवसर सीमित करके दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। अब बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिकी रोजगार की सुरक्षा तक सीमित है या इसके पीछे चुनावी राजनीति, भारत पर आर्थिक दबाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों के समीकरण भी काम कर रहे हैं? उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति जेडी वांस, श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स पहल के तहत आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल हैं। प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया, जिससे अमेरिकी कामगारों के रोजगार और वेतन पर प्रतिकूल असर पड़ा। अब सवाल उठता है कि आखिर PERM है क्या और इस पर रोक से भारतीयों को कितना नुकसान होगा? हम आपको बता दें कि PERM यानी Permanent Labor Certification रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। सामान्यतः नियोक्ता को अमेरिकी श्रम विभाग से प्रमाणित कराना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त इच्छुक और योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद ही नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। इस कार्यक्रम से आठ कंपनियों को बाहर करने का मतलब यह है कि वे नई PERM अर्जियां दाखिल नहीं कर पाएंगी और उनकी लंबित अर्जियों पर भी प्रक्रिया रुक जाएगी। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इन कंपनियों में काम कर रहे सभी भारतीयों के एच-1बी वीजा रद्द हो गए हैं या उन्हें तत्काल अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। असली खतरा उन कर्मचारियों के लिए है जो छह साल की सामान्य एच-1बी अवधि के करीब पहुंच रहे हैं और अमेरिका में लंबे समय तक बने रहने के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर निर्भर हैं। कुछ परिस्थितियों में ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के निर्धारित चरण पूरे होने पर एच-1बी अवधि बढ़ाई जा सकती है। PERM प्रक्रिया रुकने से ऐसे कर्मचारियों के लिए भविष्य की योजना बनाना कहीं अधिक मुश्किल हो सकता है। देखा जाये तो अमेरिकी प्रशासन की इस कार्रवाई ने भारतीय आईटी उद्योग से लेकर अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी करने का सपना देखने वाले युवाओं तक अनिश्चितता बढ़ा दी है। जेडी वांस ने माइक्रोसॉफ्ट पर सबसे तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, लेकिन साथ ही 6,000 से अधिक एच-1बी वीजा की मंजूरी हासिल की और 3,600 से अधिक PERM आवेदन भी दाखिल किए। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को 'फॉरेन इंडेंचर्ड सर्वेंट्स' और ऐसी कंपनियों को 'वीजा मिल्स' तक कह दिया। श्रम सचिव सॉन्डरलिंग का दावा है कि केवल इन कंपनियों ने 2009 से लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए, 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर कराए और एक लाख से अधिक PERM प्रमाणन हासिल किए। प्रशासन इन आंकड़ों को अमेरिकी कामगारों के अवसर छिनने से जोड़ रहा है। लेकिन आवेदन, मंजूरी, वास्तविक नियुक्ति और अमेरिकी कर्मचारी की जगह विदेशी कर्मचारी रखे जाने के आंकड़े अलग-अलग हैं। माइक्रोसॉफ्ट का पक्ष भी इस बहस में महत्वपूर्ण है। कंपनी ने कहा है कि उसके करीब 6,000 एच-1बी आवेदनों में लगभग 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों के वीजा विस्तार या उनकी स्थिति बदलने से संबंधित थे। इसका अर्थ है कि सभी आवेदनों को नई विदेशी भर्तियों के रूप में नहीं देखा जा सकता। साथ ही नेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के संस्थापक राजीव दाभाडकर की व्याख्या इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने लाती है। उनके मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन अब केवल यह नहीं पूछ रहा कि विदेशी कर्मचारी योग्य है या नहीं, बल्कि यह भी जांच रहा है कि विदेशी श्रम की भर्ती, भुगतान और आपूर्ति का कारोबारी मॉडल किस तरह काम करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी तकनीकी पद के लिए अमेरिकी कंपनी एक लाख पचास हजार डॉलर खर्च करती है और कोई मध्यस्थ विदेशी कर्मचारी को उसकी वास्तविक आर्थिक कीमत से काफी कम भुगतान करके अंतर अपने मुनाफे के रूप में रखता है, तो सवाल भारतीय कर्मचारी बनाम अमेरिकी कर्मचारी का नहीं, बल्कि पारदर्शी वेतन बनाम श्रम लागत के अनुचित लाभ का बनता है। यह जांच का वैध विषय हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सभी भारतीय पेशेवरों को संदेह के घेरे में रखने के लिए नहीं होना चाहिए। अब सवाल उठता है कि ट्रंप ने सत्य नडेला की तारीफ क्यों की और वांस ने माइक्रोसॉफ्ट पर इतना सख्त रुख क्यों अपनाया? इसका उत्तर अमेरिकी राजनीति की दो प्राथमिकताओं में है। ट्रंप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और तकनीकी निवेश में अमेरिकी नेतृत्व मजबूत करना है। माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी इस लक्ष्य में महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, वांस और रिपब्लिकन राजनीति का एक प्रमुख संदेश अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देना और विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता घटाना है। किसी कंपनी के सीईओ की उपलब्धियों की प्रशंसा करना और उसी कंपनी की श्रम नीतियों की जांच करना प्रशासन के लिए विरोधाभासी नहीं है। लेकिन यदि नियमों का इस्तेमाल चुनिंदा कंपनियों को दबाने या राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाता है, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस कार्रवाई का चुनावी पहलू भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी कामगारों की नौकरियों की रक्षा करने का संदेश रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से उपयोगी है। ट्रंप प्रशासन विदेशी श्रम के खिलाफ सख्त रुख दिखाकर अपने मतदाताओं को यह भरोसा देना चाहता है कि वह अमेरिकी रोजगार को प्राथमिकता दे रहा है। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि अपने तेवर कड़े दिखाकर जेडी वांस अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। साथ ही भारतीय छात्रों के लिए भी स्थिति चिंताजनक है। पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने का अवसर देने वाला OPT कार्यक्रम और एच-1बी वीजा व्यवस्था दोनों राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्रों से संबंधित OPT प्रस्ताव में पहली बार कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रत्येक छात्र के लिए संस्थानों पर 70,000 डॉलर और नवीनीकरण पर 30,000 डॉलर शुल्क लगाने की बात सामने आई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों और नियोक्ताओं पर लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ छात्रों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, नए एच-1बी आवेदनों से संबंधित 1,00,000 डॉलर भुगतान की शर्त को लेकर भी विवाद है। इस शुल्क की लागू करने की प्रक्रिया संघीय अदालतों के आदेशों से फिलहाल बाधित है और मुकदमे जारी हैं। माना जा रहा है कि भारतीय आईटी कंपनियों के शुरुआती और मध्यम स्तर के इंजीनियरों पर दबाव अधिक पड़ सकता है। वरिष्ठ इंजीनियरों और बड़ी अमेरिकी तकनीकी कंपनियों में स्थापित पदों पर काम करने वाले कुछ पेशेवर अपेक्षाकृत सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन भारतीय कंसल्टिंग कंपनियों के माध्यम से अमेरिका जाने वाले युवाओं के लिए रास्ता कठिन होता जा रहा है। PERM पर रोक, एच-1बी संबंधी शुल्क विवाद और चयन प्रक्रिया में बदलाव मिलकर उस व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं जिसके सहारे पिछले तीन दशकों में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर अमेरिकी तकनीकी उद्योग तक पहुंचे। यहां एक सवाल यह भी उठता है कि क्या ट्रंप यह सब इसलिए कर रहे हैं कि भारत पर लगाए गए टैरिफ का अपेक्षित असर नहीं हुआ और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाने के लिए नया रास्ता अपनाया जा रहा है? देखा जाये तो इन कंपनियों में भारतीय आईटी उद्योग की प्रमुख हिस्सेदारी और प्रभावित पेशेवरों में भारतीयों की बड़ी संख्या के कारण भारत पर असर गंभीर हो सकता है। फिर भी प्रशासन का घोषित आधार अमेरिकी श्रम बाजार और आव्रजन व्यवस्था है। देखा जाए तो ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई का असर वीजा और ग्रीन कार्ड तक सीमित रहने वाला नहीं है, बल्कि यह भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी की बुनियाद को भी चुनौती दे सकता है। जिन भारतीय कंपनियों और पेशेवरों ने अमेरिकी तकनीकी उद्योग को अपनी मेहनत, विशेषज्ञता और नवाचार से मजबूत किया, आज उन्हीं के रास्ते में नए अवरोध खड़े किए जा रहे हैं। भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में भर्ती, परियोजनाओं के संचालन और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने की रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। लेकिन अमेरिका को भी समझना होगा कि भारतीय प्रतिभा के लिए दरवाजे संकरे करके वह अपनी ही तकनीकी ताकत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने का जोखिम उठा रहा है। भारत को इस दबाव के आगे झुकने के बजाय वाशिंगटन से दोटूक कहना चाहिए कि भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही, भारत को अपनी तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और उच्च कौशल वाले रोजगार में इतना निवेश करना होगा कि भारतीय प्रतिभा के भविष्य का फैसला केवल अमेरिकी नीतियां न करें। बहरहाल, ट्रंप की नीति भारत के लिए महज एक चेतावनी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर तकनीकी शक्ति बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का संकेत है। अमेरिका एक ओर भारतीय मूल के तकनीकी दिग्गजों की सफलता का गुणगान करता है और दूसरी ओर भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर सीमित करने वाली नीतियां अपनाता है। यह दोहरा रवैया उस साझेदारी पर सवाल खड़ा करता है, जिसे दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित बताते हैं। भारत को अमेरिका से संबंध तोड़ने की जरूरत नहीं, लेकिन यह भी स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय इंजीनियरों का भविष्य अमेरिकी घरेलू राजनीति और चुनावी लाभ-हानि का मोहरा बन जाए। अब वक्त है कि भारत अपनी प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और विशाल बाजार की ताकत को कूटनीतिक आत्मविश्वास में बदले और स्पष्ट संदेश दे कि भारत अमेरिका के साथ साझेदारी चाहता है, किसी की राजनीतिक मजबूरियों की कीमत पर अपने नागरिकों और कंपनियों के हितों से समझौता नहीं होगा। -नीरज कुमार दुबे
अमेरिका में काम करने वाली भारतीय IT कंपनियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक और कॉग्निजेंट समेत आठ बड़ी टेक कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से सस्पेंड कर दिया है।
‘भाषा बेहद अपमानजनक है’, भारतीयों को बंधुआ मजदूर बताने पर भड़का भारत; अमेरिका को दो टूक जवाब
H-1B वीजा धारकों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताने वाली जेडी वेंस की टिप्पणी पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे अनुचित और अपमानजनक बताया।
ग्रीन कार्ड पर अमेरिकी रोक: TCS बोली- 15 हजार नौकरियां और देंगे, भर्ती योजना पर नहीं पड़ेगा असर
टीसीएस ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा कि कंपनी अमेरिकी श्रम विभाग के सभी नियमों और निर्देशों का पालन करेगी। कंपनी के मुताबिक, अमेरिका में उसकी रोजगार रणनीति का प्रमुख हिस्सा स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती करना है। वहां उसके 31 कार्यालय और डिलीवरी सेंटर संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारी काम करते हैं।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट से जुड़ी घटना में 170 से ज्यादा लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को उनकी बहादुरी के लिए इजरायल ने सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान 'प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हीरोइज्म' से सम्मानित करने की घोषणा की है। वहीं, अमेरिका भी कैप्टन स्मित को प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के 'कांग्रेसनल रिकॉर्ड' में सम्मानित करेगा।
New Delhi, 9 अक्टूबर . फ्लाईDubai की फ्लाइट से जुड़ी घटना में 170 से ज्यादा लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को उनकी बहादुरी के लिए इजरायल ने सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान ‘प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हीरोइज्म’ से सम्मानित करने की घोषणा की है. वहीं, अमेरिका भी कैप्टन स्मित को प्रतिनिधि ... Read more
अमेरिकी संसद में गूंजेगा भारतीय पायलट स्मित मच्छार का नाम
वैश्विक पटल पर भारत और भारतीयों की उपलब्धियों का सिलसिला लगातार जारी है, जहां अब भारतीय वायुसेना के एक जांबाज पायलट स्मित मच्छार को अमेरिका की संसद (यूएस कांग्रेस) में सम्मानित किए जाने की बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने इस बात का ऐलान करते हुए भारतीय मूल के इन युवाओं और पायलटों की असाधारण बहादुरी और पेशेवर दक्षता की जमकर सराहना की है, जिससे पूरी दुनिया में भारत का मान एक बार फिर बढ़ गया है। आज के इस आधुनिक डिजिटल दौर में जहां हर खबर को गूगल डिस्कवर, बिंग एईओ, आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च और एसईओ के सख्त मानकों के तहत परखा जाता है, वहीं यह कहानी मानवीय भावनाओं, अदम्य साहस और दो देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक तथा रणनीतिक संबंधों की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है, जिसे हर कोई विस्तार से जानना चाहता है।इस ऐतिहासिक सम्मान की घोषणा के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों और प्रवासी भारतीयों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। अमेरिकी संसद में इस तरह का सम्मान मिलना किसी भी विदेशी नागरिक या सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जो यह दर्शाता है कि दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र में भारतीय प्रतिभाओं का लोहा किस प्रकार माना जा रहा है। सांसद राजा कृष्णमूर्ति का यह बयान न केवल पायलट स्मित मच्छार की व्यक्तिगत उपलब्धि को सलाम करता है, बल्कि यह उन सभी युवाओं के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर ग्लोबल मंच पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।अमेरिकी संसद में भारतीय पायलट स्मित मच्छार के सम्मान की पूरी कहानीआखिर स्मित मच्छार कौन हैं और उन्हें अमेरिकी संसद में क्यों सम्मानित किया जा रहा है, इसको लेकर लोगों के मन में खासी जिज्ञासा बनी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पायलट स्मित मच्छार ने अपनी असाधारण उड़ान कौशल, सूझबूझ और कठिन परिस्थितियों में दिखाए गए अदम्य साहस के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात पर जोर दिया कि कैसे भारतीय मूल के पेशेवरों और पायलटों ने अपनी कड़ी मेहनत और तकनीकी दक्षता से वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाई है। अमेरिकी संसद जैसे प्रतिष्ठित मंच पर किसी भारतीय पायलट को इस तरह का सम्मान मिलना दोनों देशों के बीच रक्षा, कूटनीति और आपसी विश्वास के बढ़ते दायरे को भी स्पष्ट रूप से उजागर करता है।यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की पीठ थपथपाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस मजबूत सांस्कृतिक और पेशेवर पुल का प्रतीक है जो भारत और अमेरिका को आपस में जोड़ता है। आज के समय में जब पूरी दुनिया अंतरिक्ष, रक्षा और अत्याधुनिक विमानन तकनीकों में एक-दूसरे के साथ सहयोग कर रही है, तब ऐसे प्रेरणादायक किस्से गूगल डिस्कवर और एआई सर्च एल्गोरिदम पर सबसे ज्यादा पढ़े और पसंद किए जाते हैं। पाठकों की इसी रुचि को ध्यान में रखते हुए इस पूरे घटनाक्रम को एक रिपोर्टर की जमीनी शैली में गढ़ा गया है ताकि हर एक विवरण पूरी प्रमाणिकता के साथ पाठकों तक पहुंच सके।सांसद राजा कृष्णमूर्ति का बड़ा बयान और रणनीतिक कूटनीति के मायनेभारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने इस पूरे प्रकरण पर खुलकर बात करते हुए अमेरिकी संसद के भीतर भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय पायलटों और नागरिकों का योगदान अमेरिकी समाज और विभिन्न क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण रहा है। सांसद कृष्णमूर्ति ने इस बात को भी सराहा कि कैसे भारत के युवा आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक और पेशेवर सम्मान दोनों देशों की सरकारों के बीच के रिश्तों को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं। जब अमेरिकी संसद जैसी सर्वोच्च विधाई संस्था में किसी भारतीय पायलट की बहादुरी और कौशल की सराहना होती है, तो यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय बन जाता है।यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। रक्षा और विमानन क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों के बीच व्यक्तिगत स्तर की ऐसी उपलब्धियां दोनों देशों के नागरिकों के दिलों को जोड़ने का काम करती हैं। एईओ और जनरेटिव सर्च इंजन इस प्रकार की खबरों को प्राथमिकता देते हैं जिनमें उच्च प्रासंगिकता, स्पष्ट तथ्य और मानवीय प्रेरणा का अनूठा मेल होता है, और यह आलेख इन्हीं सभी आधुनिक मापदंडों पर पूरी तरह खरा उतरता है।वैश्विक पटल पर बढ़ती भारतीय प्रतिभा और भविष्य की संभावनाएंआज के दौर में भारत के नागरिक केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी बुद्धिमत्ता, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी दक्षता का लोहा मनवा रहे हैं। चाहे वह सिलिकॉन वैली की बड़ी तकनीकी कंपनियां हों, वैश्विक अंतरिक्ष संस्थान हों या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के एविएशन और डिफेंस सेक्टर, हर जगह भारतीयों ने अपनी एक अलग और मजबूत छाप छोड़ी है। पायलट स्मित मच्छार का यह अमेरिकी संसद द्वारा संभावित सम्मान इस बात का जीता-जागता सबूत है कि काबिलियत किसी भौगोलिक सीमा की मोहताज नहीं होती। जब कोई युवा अपनी मेहनत के बल पर वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन करता है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रोल मॉडल बन जाता है।स्थानीय स्तर से लेकर वैश्विक स्तर तक उत्तर प्रदेश से लेकर अमेरिका तक फैली इस चर्चा ने यह साबित कर दिया है कि आज की पत्रकारिता किस प्रकार डिजिटल एल्गोरिदम और पाठकों की भावनाओं के बीच एक सुंदर तालमेल बिठाती है। गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस का पालन करते हुए इस खबर को बिना किसी काट-छांट के तथ्यात्मक, रोचक और प्रवाहपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है ताकि यूजर का एंगेजमेंट बना रहे और उन्हें एक ही जगह पर पूरी और सटीक जानकारी मिल सके। आने वाले दिनों में इस सम्मान समारोह से जुड़ी और भी कई तस्वीरें और जानकारियां सामने आने की उम्मीद है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प से रिश्ते सुधार लिए हैं। अब जुकरबर्ग का प्रभाव AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में भी दिख रहा है। AI सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने में उनका बड़ा रोल है। जुकरबर्ग ने ट्रम्प से बिगड़े रिश्ते कैसे सुधारे 2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि ट्रम्प की पोस्ट से हिंसा और बढ़ सकती है। इस फैसले से ट्रम्प नाराज हो गए। उन्होंने जुकरबर्ग पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें उम्रकैद तक की धमकी दी। दोनों के रिश्ते सुधरने की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई। पेंसिल्वेनिया की एक चुनावी रैली में ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे शानदार चीजों में से एक था। जुकरबर्ग की इस तारीफ के कुछ हफ्ते बाद ट्रम्प ने भी उनके प्रति नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अब वे जुकरबर्ग को पहले से ज्यादा पसंद करते हैं। ट्रम्प के करीब आने के लिए क्या-क्या किया? ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए। ट्रम्प से नजदीकी का जुकरबर्ग को फायदा मिला ट्रम्प और जुकरबर्ग की बढ़ती नजदीकी का असर सरकारी फैसलों पर भी दिख रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया। पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रम्प और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। समझौते का मकसद AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच कराना है। जुकरबर्ग का मानना है कि AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तकनीकी सुधारों से दूर किया जा सकता है। हालांकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसमें कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। ट्रम्प से दोस्ती आगे चलकर भारी भी पड़ सकती है CNN के मुताबिक जुकरबर्ग को ट्रम्प के करीब आने का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसके नुकसान भी हो सकते हैं। अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में बहुमत मिलता है या 2028 में उसका राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को लैटर लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं को कितना पैसा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए भारी रकम खर्च की और अब उसे इसका फायदा मिल रहा है। ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी जुकरबर्ग पर भरोसा नहीं करते। उन्हें लगता है कि जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीति के पीछे कोई विचारधारा नहीं, बल्कि अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। यानी जुकरबर्ग ने कभी जिस ट्रम्प से टकराव मोल लिया था, आज उसी के साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन यह दोस्ती कितनी टिकेगी, इसका फैसला आने वाले चुनाव और अमेरिकी राजनीति का रुख करेगा। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे: मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने विपक्ष को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर पढ़ें…
हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज के शेयर 9 सितंबर को शेयर बाजार खुलते ही रॉकेट बन गए। शेयर की कीमत 10 फीसदी तक उछल गई। इसकी वजह कंपनी का एक ऐलान है। कंपनी ने कहा है कि उसने एआई कंपनी एंथ्रोपिक के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत हेक्सावेयर एंथ्रोपिक के क्लाउड एआई मॉडल को अपने प्लेटफॉर्म्स से इंटिग्रेट करेगी।एक समय शेयर में 10 फीसदी तक का उछालAnthropic से इस समझौते की वजह से सुबह 10:02 बजे Hexaware Technologies का शेयर एनएसई पर करीब 10 फीसदी तक उछल गया। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। एंथ्रोपिक मुंबई की एक AI कंपनी है। समझौते के तहत हेक्सावेयर क्लाउड को अपने एआई-नेटिव इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म Zerovity और AgentVerse से इंटिग्रेट करेगी। एजेंटवर्स कंपनी का एजेंट-बिल्डिंग एंड गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है, जिस पर 600 से ज्यादा प्री-बिल्ट एजेंट्स हैं।कई क्षेत्र में एंथ्रोपिक से मिलकर काम करेगी हेक्सावेयरहेक्सावेयर के पास 1,100 से ज्यादा क्लाउड-सर्टिफायड प्रोफेशनल्स हैं। दोनों कंपनियां गो-टू-मार्केट एनिशिएटिव्स, ज्वाइंट सॉल्यूशन डेवलपमेंट और कस्टमर डिप्लॉयमेंट में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगी। हेक्सावेयर अपनी डिलीवरी टीम को क्लाउड की ट्रेनिंग देगी। हेक्सावेयर के चीफ ऑपरेटिंग अफसर विनोद चंद्रन ने कहा, हमारी टीम में पहले से 1,100 से ज्यादा एंप्लॉयीज हैं, जो क्लाउड में सर्टिफायड हैं।एंप्लॉयीज के बीच क्लाउड का इस्तेमाल बढ़ाने पर फोकसएंथ्रोपिक की हेड ऑफ पार्टनरशिप (इंटरनेशनल) इरा साहनी ने कहा, एंटरप्राइजेज अपने एंप्लॉयीज को क्लाउड का इस्तेमाल करने को कह रहे हैं। एंप्लॉयीज ऐसे कई सिस्टम्स के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन पर कंपनी का बिजनेस निर्भर है। कई ऐसा पार्टनर चाहते हैं जो प्रोडक्शन में क्लाउड के इस्तेमालमें उनकी मदद कर सके। उन्होंने कहा कि हेक्सावेयर के कस्टमर्स अपनी कंपनी पर भरोसा करते हैं। इससे हमारा काम आसान हो जाता है, क्योंकि क्लाउड के इस्तेमाल से बड़ा फर्क पड़ सकता है।यह भी पढ़ें:शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौकेशेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में तेजीहेक्सावेयर का शेयर 12 बजे 4.12 फीसदी चढ़कर 532 रुपये पर चल रहा था। बीते एक साल में यह शेयर करीब 26 फीसदी गिरा है। 9 अक्टूबर को शेयर बाजारों में भी अच्छी रिकवरी देखने को मिली। निफ्टी 1.06 फीसदी यानी 233 अंक चढ़कर 22,466 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1 फीसदी यानी 718 अंक के उछाल के साथ 72,312 पर था। बैंक निफ्टी में भी 1.11 फीसदी की तेजी दिखी। इससे पहले के दो सत्रों में शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई थी।
भारतीय मजदूरों के लिए दिग्गज अमेरिकी कंपनी से भिड़ा इटली
इटली ने दूतावास और कॉन्सुलेट बनाने वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी को इस सैटलमेंट के लिए बाध्य किया है.
US Election: अमेरिका में 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स के नाम कटने का दावा, ट्रम्प प्रशासन की वोटर लिस्ट जांच पर विवाद
अमेरिका ने टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गजों को PERM ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। जानिए भारतीय H-1B वीजा धारकों पर इसका क्या असर होगा। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
H-1B विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे।
भारतीय कंपनियों के ख़िलाफ़ एक्शन: अमेरिकी मंत्री ने कहा- वी आर कटिंग ऑफ़ द हेड ऑफ़ द स्नेक
अमेरिकी श्रम मंत्री की टिप्पणी को लेकर कहा जा रहा है कि भारत से जुड़ी किसी चीज़ को 'द हेड ऑफ द स्नेक' कब कहा गया था, इसे याद करना मुश्किल है.
अमेरिका में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अरब डॉलर से अधिक की योजनाओं का ऐलान किया है।
अमेरिका में राजनीतिक और कॉर्पोरेट हलकों में एच-1बी वीजा (H-1B Visa) और आईटी आउटसोर्सिंग को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई बड़ी टेक कंपनियों पर एच-1बी वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग का गंभीर ...
ग्रीन कार्ड पर अमेरिकी रोक: टीसीएस बोली- 15 हजार नौकरियां और देंगे; पाबंदी के बीच इतना भरोसा क्यों?
ग्रीन कार्ड पर अमेरिकी रोक: टीसीएस बोली- 15 हजार नौकरियां और देंगे; पाबंदी के बीच इतना भरोसा क्यों?
अमेरिकी सांसदों की चेतावनी : 6जी और सैटेलाइट नियमों में चीन से पिछड़ सकता है अमेरिका
अमेरिकी सांसदों की चेतावनी : 6जी और सैटेलाइट नियमों में चीन से पिछड़ सकता है अमेरिका
अमेरिका ने गुरुवार को कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी जैसी आईटी कंपनियों को ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ से सस्पेंड कर दिया। अमेरिका के इस फैसले का सीधा असर इन कंपनियों में काम करने वाले हजारों ...
अमेरिकी सरकार द्वारा इमिग्रेशन प्रोग्राम सस्पेंड करने के फैसले के बाद TCS ने कहा है कि इससे उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी अगले पांच सालों में 15,000 अमेरिकी लोगों को नौकरी पर रखने की योजना बना रही है, क्योंकि उसकी रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को हायर करने की है।
एच-1बी विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
वाशिंगटन, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे। यह बयान तब सामने आया, जब ट्रंप प्रशासन ने एक प्रमुख रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड कार्यक्रम के माध्यम से विदेशी श्रमिकों को स्पॉन्सर करने की कंपनी की क्षमता को निलंबित कर दिया था।
ब्वॉयफ्रेंड के साथ अमेरिकी यूट्यूबर ने भारत की फर्स्ट एसी ट्रेन में किया सफर, खाना खाकर कहा- ये लग्जरी होटल है
US Green Card Update: अमेरिका ने TCS, इंफोसिस समेत 8 IT कंपनियों पर लगाई रोक, हजारों भारतीयों की ग्रीन कार्ड उम्मीदों को झटका
अमेरिका में आईटी कंपनियों पर शिकंजा: वेंस बोले- विदेशी कर्मचारी ‘बंधुआ मजदूर’, भारतीय कंपनियों पर क्या असर?
विदेश: अमेरिकी कांग्रेस में भारतीय पायलट स्मित को सम्मानित किया जाएगा; जल विवाद पर बांग्लादेश के तेवर नरम
यूट्यूबर सारा और सुंग-ह्युन ने कोलकाता से दिल्ली के बीच राजधानी एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी में 17 घंटे का सफर किया. ट्रेन की शानदार सुविधाओं, स्टाफ के बेहतरीन व्यवहार और स्वादिष्ट खाने ने विदेशी कपल का दिल जीत लिया.
ईरान के हमलों से बदली अमेरिका की सैन्य रणनीति? वीडियो में देंखे ब्रिटेन से B-1 बॉम्बर वापस बुलाए, मिडिल ईस्ट में ठिकानों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
Top News 9 October: भारतीय IT कंपनियों को अमेरिका में बड़ा झटका, इजराइल में भारतीय पायलट का सम्मान
9 अक्टूबर की बड़ी खबरें: US Green Card प्रोग्राम से TCS, Infosys जैसी कंपनियां निलंबित। भारतीय पायलट कैप्टन स्मित को इजराइल का सर्वोच्च सम्मान। रियाद जाने वाली उड़ानें रद्द, भारत-वेस्टइंडीज दूसरा T20 मुकाबला आज।
ईरान के तेल के जहाजों पर प्रतिबंध: कंपनियों पर कार्रवाई, क्या तेहरान की कमाई रोक पाएगा अमेरिका? पलटवार पर नजर- US imposed new sanctions on Iran targeting 27 companies six individuals 22 vessels Operation Economic Outcast
H1-B वीजा वालों को बंधुआ मजदूर बोलने लगा अमेरिका, भारतीयों को मिलता है यह
अमेरिका H1B वीजा के खिलाफ बड़े एक्शन ले रहा है। खास बात है कि इसी क्रम में सरकार ने कई कंपनियों को भी घेरा है, जो बड़ी संख्या में भारतीयों को नौकरी देती हैं। इस वीजा के लिए आवेदन करने वाले बड़ी संख्या में भारतीय हैं।
वेनेजुएला जैसे संप्रभु राष्ट्र को अपनी सनक में बर्बाद करने के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी पर एक के बाद एक नए केस थोप रहे हैं। इसको लेकर न्यूयॉर्क के अभियोजक पूर्व वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स के खिलाफ […]
अमेरिकी सरकार की कार्रवाई: आव्रजन पर प्रशासन की सख्ती पर क्या बोला माइक्रोसॉफ्ट? सीईओ नडेला को मिला सम्मान
अमेरिका में ग्रीन कार्ड की राह और कठिन, विप्रो, इंफोसिस, टीसीएस समेत आठ आईटी कंपनियों को झटका
अमेरिकी श्रम विभाग ने काग्निजेंट, इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी प्रमुख आइटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पर्म) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।
अमेरिका में इंफोसिस, विप्रो समेत 8 आईटी कंपनियों को झटका, भारत पर पड़ेगा असर?
अमेरिका में काम कर रही बड़ी आईटी कंपनियों पर ट्रंप प्रशासन ने बड़ा शिकंजा कसा है। अमेरिकी श्रम विभाग ने आठ बड़ी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम यानी PERM से निलंबित कर दिया है।
अमेरिका को सिर्फ बेहतरीन विदेशी टैलेंट चाहिए : उपराष्ट्रपति जेडी वेंस
वॉशिंगटन, 8 अक्टूबर . अमेरिकी उपPresident जे.डी. वेंस ने Thursday को कहा कि ट्रंप प्रशासन एलन मस्क जैसे असाधारण विदेशी टैलेंट को आकर्षित करना चाहता है, लेकिन वह ऐसे इमिग्रेशन प्रोग्राम का इस्तेमाल नहीं होने देगा जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशों से कम वेतन वाले कर्मचारियों को रखा जाए. वेंस ने कहा कि अमेरिका ... Read more
अमेरिकी सरकार ने कुशल विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड से जुड़े एक कार्यक्रम से माइक्रोसॉफ्ट को निलंबित कर दिया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने कंपनी पर H-1B वीजा प्रणाली के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वेंस ने कहा कि H-1B वीजा ...
तीन नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, ट्रंप का बड़ा ऐलान
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे टकराव को अच्छे तरीके से या बुरे तरीके से खत्म करना होगा।
ईरान जंग में ट्रंप के छूट गए पसीने! अमेरिका के 81 प्लेन-ड्रोन नष्ट और डैमेज
रिपोर्ट के अनुसार ईरान वॉर में क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए 81 विमानों में 45 MQ-9 रीपर ड्रोन, 12 F-15E स्ट्राइक ईगल जेट, सात KC-135 स्ट्रैटोटैंकर और एक F-35A लाइटनिंग II फाइटर जेट शामिल थे.
Infosys-HCL समेत कई IT कंपनियों पर अमेरिका की सख्ती, ग्रीन कार्ड प्रोग्राम सस्पेंड
अमेरिका ने Infosys, TCS, Wipro और HCL समेत कई बड़ी आईटी कंपनियों पर सख्ती की है. इन कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े पर्म प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया गया है. अमेरिकी श्रम विभाग ने विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरी की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग को कार्रवाई की वजह बताया है.
अमेरिका ने इंफोसिस समेत 8 कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से सस्पेंड कर दिया है। इसी के तहत कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों के खातिर ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करती हैं।
अमेरिकी महिला का भारतीय दुल्हन लुक बना सोशल मीडिया सेंसेशन, वीडियो ने जीता दिल
अमेरिकी महिला का भारतीय दुल्हन लुक बना सोशल मीडिया सेंसेशन, वीडियो ने जीता दिल
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होर्मुज पर ईरान-अमेरिका आमने-सामने, तेहरान का दावा- अमेरिका को पीछे हटना पड़ा
न्यूयॉर्क, 08 अक्टूबर 2026 । ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तेज हो गया है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री रास्ते पर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ईरान का कहना है कि होर्मुज पर उसका पूरा नियंत्रण है और उसकी […] The post होर्मुज पर ईरान-अमेरिका आमने-सामने, तेहरान का दावा- अमेरिका को पीछे हटना पड़ा appeared first on Rashtriya Ujala .
सोने की ईंटें, आलीशान कारें, महंगी घड़ियां; एक अमेरिकी जासूस ने कैसे की अरबों रुपये की धोखाधड़ी?
अभियोजकों ने कहा कि डेविड रश ने एक विदेशी सरकार को गोपनीय जानकारी देने की बात भी कबूल की है.
ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की तैयारी में अमेरिका, देखें दुनिया आजतक
Axios के मुताबिक, ईरान पर संभावित हमलों के लिए अमेरिकी सेना को तैयार रहने के आदेश दिए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक ईरान के ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों पर अमेरिका जोरदार बमबारी की तैयारी में है. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले हमला हो सकता है. देखें दुनिया आजतक.
अमेरिका में बना पहला आयरन डोम इंटरसेप्टर ‘तामीर’, इजरायल की सुरक्षा होगी मजबूत
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर . पूरी तरह अमेरिका के अर्कांसस में बना पहला ‘तामीर’ इंटरसेप्टर इजरायल को सौंप दिया गया है. यह आयरन डोम में इस्तेमाल होने वाला पहला इंटरसेप्टर है, जिसे अमेरिका में तैयार किया गया है. इसे इजरायल के मिसाइल डिफेंस ऑर्गेनाइजेशन को सौंपा गया. इजरायल के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया ... Read more
वनडे वर्ल्ड कप 2027 खेलने की दौड़ में अमेरिका हुआ शामिल, क्वालीफायर में पक्की की जगह
साल 2027 में खेले जाने वाले आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप को लेकर आईसीसी ने शेड्यूल का ऐलान कर दिया है, जिसमें कुल 12 टीमें हिस्सा लेंगी और उसमें से दो टीमें क्वालीफायर राउंड के जरिए अपनी जगह पक्की करेंगी, जिसमें हिस्सा लेने के लिए यूएसए की टीम ने अपनी जगह को पक्का कर लिया है।
अराघची : अमेरिका ने छिपाया युद्ध में नुकसान का आंकड़ा
तेहरान, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर युद्ध में हुए नुकसान के आंकड़ों को छुपाने का आरोप लगाया है। गुरुवार को उन्होंने दावा किया कि जो दिखाया और बताया जा रहा है उससे असली संख्या कहीं ज्यादा है।
भूटान : अमेरिकी दूत गोर, निवेश, इनोवेशन और सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
थिम्पू, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने निवेश, इनोवेशन और सहयोग के नए अवसर बढ़ाने पर चर्चा की।
फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद की इमारत के बाहर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की एक अनोखी मूर्ति चर्चा का विषय बनी हुई है।
जयपुर के डॉक्टर के बेटे चेतन्य सिंह ने अमेरिका में अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए शहर का मान बढ़ाया है। चेतन्य ने अमेरिका में चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए होने वाली प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज प्रवेश परीक्षा (एमकैट) में पहली ही कोशिश में 100 पर्सेंटाइल हासिल किया है। इस उपलब्धि की खास बात यह है कि चेतन्य ने यह परीक्षा अपने पूर्व-चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रम के पांचवें सेमेस्टर की शुरुआत से पहले ही दी थी। शुरुआती चरण में ही परीक्षा देकर पहली कोशिश में सर्वोच्च पर्सेंटाइल हासिल करना उनकी असाधारण शैक्षणिक क्षमता और तैयारी को दर्शाता है। अमेरिका में चिकित्सा प्रवेश की अहम परीक्षा अमेरिकी चिकित्सा महाविद्यालय संघ (एएएमसी) अमेरिका में चिकित्सा महाविद्यालय प्रवेश परीक्षा का संचालन करता है। अमेरिका के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए यह परीक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है। चेतन्य ने परीक्षा में पहली बार शामिल होकर ही 100 पर्सेंटाइल हासिल किया, जो उनकी उपलब्धि को और खास बनाता है। पिता रेडियोलॉजिस्ट, मां वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ चेतन्य के पिता डॉ. राजीव सिंह जयपुर में वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट हैं। वे भारतीय रेडियोलॉजिकल एवं इमेजिंग संघ (आईआरआईए) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं। उनकी मां डॉ. शालिनी राठौड़ जयपुर के महिला चिकित्सालय में वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। चिकित्सकीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले चेतन्य ने अब अमेरिका में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ जयपुर के चिकित्सा जगत में भी खुशी का माहौल है। पढ़ाई के बीच हासिल की बड़ी उपलब्धि चेतन्य ने अपने पूर्व-चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रम की पढ़ाई जारी रखते हुए पांचवें सेमेस्टर की शुरुआत से पहले ही यह प्रतिष्ठित परीक्षा दी। पहली कोशिश में 100 पर्सेंटाइल हासिल करना उनके लिए ही नहीं, बल्कि जयपुर के लिए भी गौरव का विषय है।
भूटान के राजा से मिले अमेरिकी दूत गोर, निवेश, इनोवेशन और सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
थिम्पू, 8 अक्टूबर . India में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने Thursday को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से मुलाकात की. इस दौरान दोनों ने निवेश, इनोवेशन और सहयोग के नए अवसर बढ़ाने पर चर्चा की. गोर ने कहा कि भूटान अपने भविष्य को लेकर बड़े और महत्वाकांक्षी विजन पर काम कर रहा ... Read more
US School Book Ban: अमेरिकी स्कूलों में 12 हजार किताबें बैन, रिकॉर्ड सेंसरशिप
नस्लवाद और LGBTQ+ विषयों पर आधारित पुस्तकों पर कार्रवाई, समीक्षा में AI के इस्तेमाल से सेंसरशिप और एकेडमिक फ्रीडम पर बहस तेज।
अमेरिका ने छिपाया युद्ध में नुकसान का आंकड़ा, असली संख्या कहीं ज्यादा: अराघची
तेहरान, 8 अक्टूबर . ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर युद्ध में हुए नुकसान के आंकड़ों को छुपाने का आरोप लगाया है. Thursday को उन्होंने दावा किया कि जो दिखाया और बताया जा रहा है उससे असली संख्या कहीं ज्यादा है. social media प्लेटफॉर्म एक्स पर सेंटकॉम की पोस्ट शेयर करते हुए ... Read more
जापान में अमेरिकी सैनिक पर महिला की हत्या का आरोप, फूटा गुस्सा
ओकिनावा में अमेरिकी मरीन लांस कॉर्पोरल डेविन जैकब बॉलार्ड पर अन्ना यागी की हत्या और लूट का आरोप लगा. अमेरिकी सेना ने 48 घंटे का ऑपरेशनल पॉज और 30 दिन का कर्फ्यू लगाया है. जापानी नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया है. स्थानीय लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.
ईरान की जवाबी कार्रवाई से घबराया अमेरिका: ब्रिटेन से 12 बॉम्बर एयरक्राफ्ट वापस बुलाए, होटलों में शरण लेने को मजबूर जवान
अमेरिका में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की दिलचस्पी पर भी इन सख्त नीतियों का असर दिखाई देने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमेरिका आने वाले छात्र आवेदकों की संख्या में करीब 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
रूस फिर ला रहा वह मिसाइल जो अमेरिकी स्टेल्थ विमान गिरा चुकी है
रूस पुराने पेचोरा एस-125 मिसाइल सिस्टम को मोबाइल बना रहा है. यही मिसाइल 1999 में अमेरिकी स्टेल्थ विमान गिरा चुकी है. भारत को भी अपनी पेचोरा को मोबाइल बनाने पर ध्यान देना चाहिए.
मोदी-ट्रंप : व्हाइट हाउस ने भारत को बताया अमेरिका का सबसे मजबूत सहयोगी
वाशिंगटन, व्हाइट हाउस ने भारत को अमेरिका के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक बताया है और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत संबंधों को दिया है। यह बयान ऐसे समय आया, जब पीएम मोदी ने सार्वजनिक जनसेवा के 25 साल पूरे किए हैं।
होर्मुज पर किसका कब्जा?: ईरान के दावे को अमेरिका ने बताया झूठा, सेंटकॉम बोला- हमारे नियंत्रण में है क्षेत्र- Who controls Hormuz US dismisses Iran's claim as false CENTCOM states region is under its control
कैथल जिले के पूंडरी क्षेत्र के गांव टयोंठा के रहने वाले करीब 26 वर्षीय युवक अजय चौधरी की अमेरिका में ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई। युवक करीब 3 साल पहले अमेरिका गया था। अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। पास में रहने वाले उसके साथियों ने उसे अस्पताल में पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने अजय को ये सोचकर विदेश भेजा था कि वहां जाकर दो पैसे कमाएगा और परिवार की गरीबी दूर करेगा, लेकिन अब अजय की मौत के बाद परिवार में मातम पसर गया है और उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। सामाजिक संस्थाएं और परिवार के लोग सरकार से गुहार लग रहे हैं कि अजय के मृत शरीर को उसके गांव लाने में सहायता की जाए। दोस्तों और रिश्तेदारों से लिए थे रुपए अजय के चाचा विनोद कुमार ने बताया कि अजय 3 साल पहले करीब 42 लाख रुपए लगाकर अमेरिका गया था। इस समय वह शिकागो में रह रहा था और एक राशन के स्टोर पर काम कर रहा था। परिवार ने कुछ पैसे अपनी तरफ से जमा किए, तो कुछ पैसे दोस्तों व रिश्तेदारों से उधार लिए थे। उसके बाद उसे अमेरिका भेजा था। अब करीब इतनी ही राशि उसके शव को भारत लाने पर खर्च करनी पड़ेगी। परिवार में माता पिता और एक बहन चाचा विनोद ने बताया कि अजय के परिवार में उसके पिता धर्म सिंह, माता रेखा रानी व एक छोटी बहन है। परिवार करीब पौना एकड़ जमीन पर खेती करता है और वे गांव में ही रहते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि अजय के शव को भारत लाने में सहयोग किया जाए। वहीं दूसरी ओर सामाजिक संस्थाएं और विदेश में रहने वाले लोगों के संगठन भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से अपील कर रहे हैं कि अजय के शव को भारत वापस लाने में सहयोग करें ताकि परिवार उसके अंतिम दर्शन कर सके।
ईरान के खिलाफ बड़े हमले की तैयारी?: डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को तैयार रहने का आदेश, अमेरिका के निशाने पर क्या?- us Preparing for major attack on Iran President Trump orders military to be ready nuclear sites in crosshairs
वॉशिंगटन: अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को बड़ा झटका लग सकता है। ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के लिए काम से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) के तहत काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 70,000 डॉलर की फीस प्रस्तावित की है। हालांकि, यह शुल्क सीधे छात्रों से नहीं, बल्कि उन संस्थानों से लिया जाना प्रस्तावित है जो छात्रों के OPT की सिफारिश करते हैं।पहली बार OPT के लिए 70,000 डॉलर, नवीनीकरण पर 30,000 डॉलरप्रस्ताव के तहत किसी एफ-1 वीजा वाले छात्र के लिए पहली बार OPT की सिफारिश करने पर संबंधित संस्थान को 70,000 डॉलर का शुल्क देना होगा। इसके बाद OPT के प्रत्येक नवीनीकरण या अगली सिफारिश पर 30,000 डॉलर का शुल्क प्रस्तावित है। फिलहाल OPT आवेदन की फीस इससे काफी कम है।क्या है OPT?OPT एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके तहत एफ-1 वीजा पर अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में काम करने का मौका मिलता है। सामान्य तौर पर छात्र स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल तक काम कर सकते हैं, जबकि पात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) की डिग्री वाले छात्रों को अतिरिक्त दो साल का OPT मिल सकता है।DHS ने क्यों लिया यह फैसला?DHS का कहना है कि प्रस्तावित शुल्क का उद्देश्य वीजा कार्यक्रम में धोखाधड़ी और दुरुपयोग को रोकना, आव्रजन व्यवस्था की निगरानी मजबूत करना और अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा करना है। विभाग ने OPT को कम लागत वाली विदेशी श्रम व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल किए जाने की चिंताओं का भी उल्लेख किया है।भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है असरअमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में पढ़ाई करते हैं। ऐसे में अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े रोजगार पर इसका असर पड़ सकता है। उच्च शिक्षा से जुड़े संगठनों ने भी आशंका जताई है कि इतनी बड़ी फीस से अमेरिका में पढ़ाई और पढ़ाई के बाद नौकरी करने के लिए आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या प्रभावित हो सकती है।अभी लागू नहीं हुआ है प्रस्तावयह शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है। प्रस्ताव पर जनता से टिप्पणियां मांगी जाएंगी और इसके बाद DHS अंतिम फैसला लेगा। प्रस्ताव को कानूनी चुनौती मिलने की संभावना भी जताई गई है।अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय समेत विदेशी छात्रों और उन्हें OPT के जरिए काम पर रखने वाले संस्थानों के लिए यह बड़ा बदलाव होगा। इससे छात्रों की पढ़ाई के बाद अमेरिका में नौकरी पाने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी लागत पर असर पड़ सकता है।
व्हाइट हाउस ने भारत को बताया अमेरिका का सबसे मजबूत सहयोगी, पीएम मोदी और ट्रंप के रिश्ते की भी तारीफ
वाशिंगटन, 8 अक्टूबर . व्हाइट हाउस ने India को अमेरिका के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक बताया है और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का श्रेय अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप और India के Prime Minister Narendra Modi के व्यक्तिगत संबंधों को दिया है. यह बयान ऐसे समय आया, जब पीएम मोदी ने सार्वजनिक जनसेवा ... Read more
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पढ़ाई के बाद अमेरिका में रुकने के जुगाड़ पर भी ट्रंप का वार, भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा मार
अमेरिका में विदेशी छात्र सबसे अधिक भारत से ही जाते हैं. अब डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने एक और नियम बनाया है- उन विदेशी छात्रों के लिए 70,000 डॉलर की फीस का प्रस्ताव रखा है जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद देश में काम करना चाहते हैं.
अमेरिका की क्रिकेट टीम ने रच दिया इतिहास, वनडे वर्ल्ड कप 2027 खेलने के बेहद करीब पहुंची टीम
अमेरिका की क्रिकेट टीम ने कमाल कर दिया है। क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग 2 में यूएसए शीर्ष पर है और इसी के साथ टीम ने अगले साल होने वाले विश्व कप की ओर कदम बढ़ा लिए हैं, क्योंकि उन्हें क्वालीफायर्स का टिकट मिल गया है।
'मॉल ऑफ अमेरिका' में 60 लोगों को मारने की साजिश
FBI ने 18 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो ISIS के नाम पर मिनियापोलिस के पास 'मॉल ऑफ अमेरिका' में बड़े पैमाने पर गोलीबारी करने की साजिश रच रहा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति का इंटरव्यू लेने वाले पहले हिंदी पत्रकार पंकज को श्रद्धांजलि
भास्कर न्यूज | खरोरा रायपुर से निकलकर दिल्ली और अमेरिका तक पहचान बनाने वाले स्व. पंकज शर्मा का निधन 33 साल की उम्र में हुआ था। 28 अप्रैल 1970 को तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी. गिरि की भूटान-सिक्किम यात्रा के आधिकारिक कवरेज के दौरान भूस्खलन हादसे में उनकी मौत हुई थी। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने उनके योगदान को याद कर श्रद्धांजलि दी। समकालीनों के मुताबिक पंकज शर्मा ऊर्जा और जीवंतता से भरे थे। तेज चलते थे। तेज बोलते थे। लेखन भी प्रखर था। वे खबर की सतह पर नहीं रुकते थे। गहराई में जाकर सच सामने लाते थे। वे प्रदेश के अब तक एकमात्र पत्रकार रहे, जो तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति के इंटरव्यू पैनल में शामिल हुए। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, पंकज शर्मा का जीवन भारतीय पत्रकारिता का स्वर्णिम अध्याय है। महानता उम्र की मोहताज नहीं होती। उत्कृष्ट, ध्येयनिष्ठ कर्म से मिलती है। उन्होंने शोधपरक, निर्भीक, निष्पक्ष पत्रकारिता के उच्च मानदंड बनाए। ये आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति का साक्षात्कार लेने वाले पहले हिंदी पत्रकार से लेकर भूटान-सिक्किम यात्रा के दौरान देश सेवा में प्राण न्योछावर करने तक, उनका साहसी जीवन आने वाली पीढ़ियों को सत्य और निष्पक्षता की राह दिखाएगा। वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, पंकज शर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वैचारिक रूप से अपने युग के अग्रणी विचारकों में थे। उन्होंने पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं माना। समाज को दिशा देने का माध्यम माना। भूटान यात्रा के दौरान उनका जाना परिवार के साथ पत्रकारिता और बौद्धिक जगत के लिए भी बड़ा शून्य रहा। निष्पक्ष लेखन, सार्वजनिक संवाद, गहन तार्किक सोच में उनका योगदान इतिहास में दर्ज रहेगा। धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा, पंकज शर्मा छत्तीसगढ़ के तेजस्वी सपूत थे। असाधारण योग्यता, कर्तव्यनिष्ठा से रायपुर का नाम राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पटल पर रोशन किया। छत्तीसगढ़ कॉलेज के दिनों से उनकी भाषण कला, तार्किक शैली, नेतृत्व क्षमता दिखती थी। उन्होंने दिल्ली से अमेरिका तक हिंदी का परचम फहराया। भाषा और संस्कृति को गौरव दिलाया। कार्यक्रम में अनुज शर्मा ने रायपुर के पत्रकारों और ब्राह्मण समाज की मांगें डिप्टी सीएम विजय शर्मा और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सामने रखीं।
विदेश के समाचार: एफबीआई की सतर्कता से टली बड़ी मुसीबत, मॉल ऑफ अमेरिका पर हमले की साजिश नाकाम
विदेश के समाचार: एफबीआई की सतर्कता से टली बड़ी मुसीबत, मॉल ऑफ अमेरिका पर हमले की साजिश नाकाम
Kaithal News: आरकेएसडी कॉलेज में अमेरिकी विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति को करीब से जाना
American students experienced Indian culture up close at RKSD College.
अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए नया प्रस्ताव: नौकरी के लिए 70 हजार डॉलर फीस; भारतीयों की बढ़ेगी मुश्किल?
तेजस फाइटर जेट पर आई गुड न्यूज, अमेरिका ने भारत को सौंपे 4 और इंजन; डिलीवरी में आएगी तेजी
अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए के लिए चार और F404-IN20 इंजन दिए हैं, जिससे कुल 14 इंजन हो गए हैं।
अमेरिका में पढ़ते हुए नौकरी करना पड़ेगा महंगा! चुकानी होगी ₹67 लाख फीस
अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के लिए OPT के जरिए नौकरी करना महंगा हो सकता है. ट्रंप प्रशासन ने पहली बार OPT के लिए 70 हजार डॉलर और नवीनीकरण के लिए 30 हजार डॉलर शुल्क का प्रस्ताव रखा है. यह फीस सीधे छात्रों से नहीं, बल्कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी से लेने का प्रस्ताव है.
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर भारत में निवेश, विनिर्माण और सोर्सिंग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने ब्लैकस्टोन, आईबीएम और एस्टी लाडर जैसी कंपनियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी और तकनीकी सहयोग पर चर्चा की।
नहीं होगा भारत-अमेरिका FTA? मुफ्त व्यापार समझौते पर अमेरिका का नया रुख!
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में मुक्त व्यापार समझौतों का दौर खत्म हो सकता है। अमेरिका अब आर्थिक संबंध बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय और आपसी व्यापार समझौतों को प्राथमिकता देगा।
भारतीय पहलवानों का अमेरिकी वीजा हुआ खारिज, U23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेना मुश्किल
अमेरिका के लास वेगास में होने वाली आगामी U23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों का खेलना काफी मुश्किल लग रहा है क्योंकि 9 पहलवानों का अमेरिकी खारिज कर दिया गया है।
भारत के 9 पहलवानों को अमेरिका का वीजा नहीं मिल पाया है। इससे लास वेगास में होने वाली U23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उनका खेलना मुश्किल हो गया है। टूर्नामेंट 12 से 18 अक्टूबर तक होना है। वीजा नहीं मिलने वालों में 2024 U17 वर्ल्ड चैंपियन नेहा सांगवान भी शामिल हैं। पहलवानों को बुधवार को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में वीजा इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। वहां उन्हें मौखिक रूप से बताया गया कि उनके आवेदन 20 साल से कम उम्र और रोजगार नहीं होने के कारण खारिज किए गए हैं। इंटरव्यू के बाद उनके पासपोर्ट भी वापस कर दिए गए। WFI ने कहा- ये U23 खिलाड़ी हैं, कई अभी नौकरी नहीं करते रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी WFI ने अपने पत्र में अमेरिकी दूतावास से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की। फेडरेशन ने कहा कि यह चैंपियनशिप U23 आयु वर्ग के लिए है और इसमें हिस्सा लेने वाले पहलवानों की उम्र 18 से 23 साल के बीच है। WFI के मुताबिक, इनमें से कई युवा खिलाड़ी अभी पूरी तरह अपने खेल करियर पर ध्यान दे रहे हैं और इसलिए उनका औपचारिक रूप से नौकरी में होना जरूरी नहीं है। 24 इंटरव्यू के लिए पहुंचे, 16 पहलवान थे WFI ने अमेरिकी दूतावास को भेजे पत्र में बताया कि बुधवार को कुल 24 प्रतिभागी वीजा अपॉइंटमेंट के लिए पहुंचे थे। इनमें 16 पहलवान थे और उनमें से 9 के वीजा आवेदन खारिज कर दिए गए। वीजा नहीं मिलने वाले पहलवानों में समर्थ गजानन म्हाकावे, धीरज कुमार मलिक, सचिन कुमार, निखिल, हरदीप, परवीन, अहिल्या शत्रुघ्न शिंदे, नेहा शर्मा और नेहा सांगवान शामिल हैं। गुरुवार को इंटरव्यू देने वाले पहलवानों को लेकर भी चिंता WFI ने सिर्फ बुधवार को वीजा नहीं मिलने वाले पहलवानों का मामला नहीं उठाया, बल्कि गुरुवार को वीजा अपॉइंटमेंट वाले खिलाड़ियों को लेकर भी अमेरिकी दूतावास से चिंता जताई है। फेडरेशन ने कहा कि गुरुवार को इंटरव्यू देने वाले ज्यादातर पहलवान भी 20 साल से कम उम्र के और फिलहाल बेरोजगार हैं। इसलिए WFI को आशंका है कि उनके आवेदनों के साथ भी यही स्थिति पैदा हो सकती है। ------------------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… हरमनप्रीत की कप्तानी में खत्म हुआ 47 साल का सूखा:पहली बार वर्ल्ड कप जिताया, एशियन गेम्स में गोल्ड दिलाया; लॉर्ड्स में रचा इतिहास हरमनप्रीत कौर ने मंगलवार को भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2025 महिला वनडे वर्ल्ड कप जीतकर 47 साल का खिताबी सूखा खत्म किया। हरमनप्रीत भारत को महिला वर्ल्ड कप जिताने वाली पहली भारतीय महिला कप्तान बनीं। पूरी खबर
ट्रंप का कनाडा पर अमेरिका को नुकसान पहुंचाने का आरोप, देखें US टॉप-10
ब्रिटिश के फोयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमान हटाए जाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया आई है. पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि फेयरफोर्ड एयरबेस से B-1 बॉम्बर्स को कुछ खतरों के चलते हटाया गया है. वहीं, ट्रंप ने कनाडा पर वर्षों से अमेरिका को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है. साथ ही व्यापार वार्ता फिर शुरू करने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं होने की बात कही. यूएस टॉप 10 में देखें यूएस की ऐसी ही टॉप 10 खबरें.
भारतीय पायलट की बहादुरी को अमेरिकी संसद ने सराहा, वीडियो में जाने फ्लाईदुबई हमले पर पास किया प्रस्ताव
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होने की उम्मीद: मोंटाना के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्टे
अमेरिका के मोंटाना राज्य के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्टे को उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द होगा। वो भारत के दौरे पर हैं और उन्होंने आईएएनएस के साथ एक्सक्लूसिव साक्षात्कार में द्विपक्षीय संबंधों को लेकर राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के कारोबार को स्पष्टता और भरोसे की जरूरत है तथा समझौता पारस्परिक और निष्पक्ष होना चाहिए।
वॉशिंगटन, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत के बीच अमेरिकी मसाला उद्योग ने भारतीय मसालों पर दी जा रही टैरिफ छूट को जारी रखने और उसे स्थायी स्वरूप देने की मांग की है। उद्योग का तर्क है कि कई मसाले ऐसे हैं जिन्हें अमेरिका में व्यावसायिक स्तर पर उगाना संभव नहीं है और उनकी आपूर्ति के लिए भारत पर निर्भरता बनी रहेगी।
अमेरिका की स्लीपर ट्रेन में इंडियन यूट्यूबर ने किया सफर, बोला- ये अनुभव नहीं भूलूंगा
भारतीय यूट्यूबर रौनक साहनी के लिए अमेरिका की दूसरी सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेन में सफर करने का अनुभव यादगार बन गया. 51 घंटे के एक ही ट्रेन के सफर में आप रेगिस्तान, मैदान और पहाड़, सब देखते हैं. उनके पास हर समय भारतीय ट्रेनों की बुराई करने वालों के लिए एक मैसेज भी है.
आलू भुजिया के मसालों से ठीक हुआ अस्थमा? अमेरिकी शख्स का दावा, भारतीय खाने को बताया फायदेमंद
भारतीय मसालों और खाने के कई फायदे आपने सुने होंगे लेकिन क्या कभी पैकेट वाली आलू भुजिया को अस्थमा के इलाज के लिए खाया है। अमेरिकन शख्स सैम ने वीडियो में आलू भुजिया के पैकेट की फोटो दिखाई और उसमें लिखे मसालों को अस्थमा-एलर्जी का इलाज बताया। चलिए पूरी स्टोरी जानते हैं।
पीयूष गोयल ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए दिया न्योता
New Delhi, 7 अक्टूबर . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर India में निवेश बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की. वाणिज्य मंत्रालय ने Wednesday को एक आधिकारिक बयान में कहा कि इन बैठकों ... Read more
Indian Spices पर अमेरिका में शुल्क छूट चाहते हैं ट्रेडर्स, ASTA ने की मांग
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, सात अक्टूबर अमेरिका के मसाला कारोबारी भारत के साथ व्यापार समझौते के तहत भारतीय मसालों पर शुल्क से छूट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि अमेरिकी उपभोक्ताओं को ये मसाले उचित कीमतों पर उपलब्ध होते रहें। अमेरिका हर साल भारत से करीब 70 करोड़ डॉलर मूल्य के मसालों का आयात करता है और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच मसालों के व्यापार के अधिक बढ़ने की उम्मीद है। ‘अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन’ (एएसटीए) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डोनाल्ड प्रैट ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें सरकार से मसालों पर शुल्क छूट का समर्थन जारी रखने की उम्मीद है। इसलिए हम आशा करते हैं कि दोनों देश मसालों की अमेरिका में आपूर्ति जारी रखने के लिए हरसंभव बेहतर कदम उठाएंगे।’’भारत में मसाला कारोबार को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में कारोबारी साझेदारी विकसित करने के प्रयासों के तहत एएसटीए तथा अमेरिका में भारतीय दूतावास ने इंडिया हाउस में मसाला कारोबारियों की बैठक आयोजित की। प्रैट ने कहा कि भारत, अमेरिका को मसालों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। इसके अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया और चीन भी अमेरिका को मसालों की आपूर्ति करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में मसालों का बाजार आगे और बढ़ने की संभावना है क्योंकि उपभोक्ता विभिन्न मसालों के स्वास्थ्य संबंधी फायदों के बारे में जान रहे हैं। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि अमेरिका को भारत का मसाला निर्यात साल-दर-साल बढ़ता रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि आने वाले वर्षों में भी इसमें और वृद्धि जारी रहेगी।’’भारतीय दूतावास ने भारतीय मसालों को बढ़ावा देने के लिए एक स्वागत समारोह भी आयोजित किया। एएसटीए की कार्यकारी निदेशक लॉरा शुमोव ने कहा कि उनका संगठन भारतीय दूतावास के साथ मिलकर काम करता है और उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता नए कारोबारी संबंध बनाने के लिए और अवसर उपलब्ध कराएगा।
ईरान को अमेरिका की सख्त चेतावनी, कहा- वादों से काम नहीं चलेगा
अमेरिका ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ तौर पर कहा है कि ईरान के केवल वादों और दावों से अब काम नहीं चलने वाला है. अगर ईरान सच में स्थिति को सुधारना चाहता है, तो उसे अपनी न्यूक्लियर एनरिचमेंट कैपेसिटी यानी परमाणु संवर्धन क्षमता को घटाना होगा. इस बड़े बयान के बाद वैश्विक राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है. अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे परमाणु विवाद को लेकर यह चेतावनी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
अमेरिकी किसान का कमाल: सोलर पैनल के नीचे अनोखे जुगाड़ से खेती कर पलट दी किस्मत
वर्तमान समय में खेती किसानी की तस्वीर तेजी से बदल रही है। दुनिया भर के अन्नदाता अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी प्रयोगों और बेहतरीन जुगाड़ के दम पर अपनी आय को कई गुना बढ़ाने में कामयाब हो रहे हैं। खेती में लागत कम करने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए किसान नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका के एक दूरदर्शी किसान ने खेती और ऊर्जा उत्पादन का एक ऐसा अनूठा संगम तैयार किया है, जिसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है। इस अमेरिकी किसान ने अपने खेतों में सोलर पैनल लगाने के साथ एक ऐसा शानदार जुगाड़ किया है, जिससे उनकी बंपर कमाई तो हो ही रही है, साथ ही उन्हें कृषि क्षेत्र का एक बड़ा और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है। इस आधुनिक प्रयोग ने कृषि और ऊर्जा सेक्टर में एक नई क्रांति ला दी है, जिसे आने वाले कल के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है।एग्रीवोल्टाइक तकनीक और खेती का अनूठा मेलपारंपरिक रूप से किसान यही मानते आए हैं कि जमीन का इस्तेमाल या तो फसल उगाने के लिए किया जा सकता है या फिर सोलर फार्मिंग के जरिए बिजली बनाने के लिए। लेकिन इस अमेरिकी किसान ने इन दोनों अवधारणाओं को एक साथ जोड़कर एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन पर सोलर पैनल इस तरह से स्थापित किए कि उनके ठीक नीचे बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती आसानी से हो सके। इस तकनीक को वैश्विक स्तर पर एग्रीवोल्टाइक (Agrivoltaics) कहा जाता है, जिसमें जमीन के एक ही टुकड़े का दोहरा उपयोग किया जाता है। सोलर पैनल की ऊंचाई जमीन से इतनी अधिक रखी गई है कि ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र आसानी से अंदर आ-जा सकें और फसलों की देखरेख में कोई बाधा न आए। इस अनोखे सेटअप की वजह से एक तरफ जहां खेतों में सूरज की तेज और चिलचिलाती धूप से फसलों की रक्षा होती है, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा का उत्पादन भी निरंतर होता रहता है।कैसे काम करता है यह खास जुगाड़ और इससे क्या हैं फायदेइस अनोखे कृषि मॉडल के तहत किसान ने खेतों के ऊपर कुल 832 आधुनिक सोलर पैनलों को लगभग 10 फीट की ऊंचाई पर माउंट कराया है। इतनी ऊंचाई होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पैनलों की छांव के नीचे मक्का, ब्रोकली और अन्य पोषणयुक्त सब्जियों की बेहतरीन पैदावार हो रही है। अमेरिकी जलवायु और तेज धूप को ध्यान में रखते हुए यह जुगाड़ किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है, क्योंकि गर्मियों के दिनों में जब अत्यधिक धूप से फसलें झुलस जाती थीं, तब यह सोलर शेड उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, इस सिस्टम से बनने वाली कुल बिजली का आधा हिस्सा सीधे तौर पर कृषि कार्यों और सिंचाई में इस्तेमाल होता है, जिससे बिजली के बिल का भारी-भरकम बोझ पूरी तरह समाप्त हो गया है। बची हुई अतिरिक्त बिजली को स्थानीय समुदाय और आसपास के जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे इस प्रोजेक्ट की सामाजिक उपयोगिता और अधिक बढ़ जाती है।बंपर कमाई के साथ मिला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानजब किसी नवाचार या जुगाड़ से समाज और पर्यावरण को एक साथ लाभ मिलने लगता है, तो सफलता खुद-ब-खुद कदम चूमती है। इस अमेरिकी किसान के इस क्रांतिकारी और दूरदर्शी कदम ने कृषि विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा। उनकी इस मेहनत और उत्कृष्ट कृषि मॉडल को नॉर्थ अमेरिकन एग्रीवोल्टस अवार्ड्स (North American Agrivoltaics Awards) के तहत प्रतिष्ठित 'फार्मर ऑफ द ईयर' सम्मान से नवाजा गया है। इस बड़े अवार्ड के मिलने से न केवल इस किसान का हौसला बढ़ा है, बल्कि पूरी दुनिया के अन्नदाताओं को यह संदेश मिला है कि वे कम लागत और सीमित संसाधनों में भी आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उपयोग करके अपनी आय को आसमान तक पहुंचा सकते हैं। इस पुरस्कार समारोह के दौरान जूरी ने भी किसान की इस सोच की जमकर सराहना की, जिसमें उन्होंने कृषि और हरित ऊर्जा के क्षेत्र को एक साथ जोड़कर एक नई मिसाल कायम की है।पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती का भविष्ययह पूरा मामला सिर्फ कमाई या पुरस्कार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती (Sustainable Agriculture) का एक बेहतरीन खाका तैयार करता है। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जहां एक तरफ कृषि भूमि लगातार प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सौर ऊर्जा का यह मॉडल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है। सोलर पैनलों की छांव के नीचे नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे पारंपरिक खेती की तुलना में पानी की खपत भी काफी हद तक कम हो जाती है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि दुनिया के अन्य देशों और भारत के किसान भी इस तरह के व्यावहारिक और आधुनिक जुगाड़ को अपनाएं, तो खेती की लागत को आधा किया जा सकता है। यह अमेरिकी किसान आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है, जो यह साबित करता है कि सच्ची लगन और नए विचारों के साथ खेती करने पर सफलता निश्चित तौर पर मिलती है।
अमेरिका में एच-1बी वीजा संकट से पंजाब के इंजीनियर प्रभावित हो रहे हैं, जिस पर पूर्व स्पेशल चीफ सेक्रेटरी केबीएस सिद्धू ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
भारतीय मसाले अमेरिकी घरों में 'भारतीयता का एक हिस्सा' पहुंचा रहेः राजदूत क्वात्रा
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि भारतीय मसाले अमेरिकी घरों में 'भारतीयता का एक हिस्सा' पहुंचा रहे हैं क्योंकि इनकी लोकप्रियता अब केवल स्वाद तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सेहत, वेलनेस और रोजमर्रा की खान-पान की आदतों तक भी फैल गई है।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच कैंप डेविड में ट्रंप टीम की सीक्रेट बैठक। होर्मुज में 3 एयरक्राफ्ट कैरियर और 60,000 सैनिकों का जमावड़ा। क्या मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप कोई बड़ा कदम उठाएंगे? पढ़ें पूरा विश्लेषण।
अमेरिका-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर असमंजस वाले वित्तमंत्री के बयान ने कानपुर के निर्यातकों में भी खलबली मचा दी है। शहर के निर्यातकों के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका को होने वाले दो हजार करोड़ से ज्यादा का निर्यात दांव पर लगा है।
अमेरिका के परिवहन सचिव शॉन डफी ने प्रसिद्ध पंजाबी-अमेरिकी व्यवसायी और समाजसेवी दर्शन सिंह धालीवाल के आवास का दौरा किया। मुलाकात के दौरान अमेरिका में काम कर रहे पंजाबी ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टेशन कारोबार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी सरकार अवैध रूप से चल रहे ट्रक ऑपरेटरों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर रही है। हाल ही में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की एक AI-जनरेटेड सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया था। सिख समुदाय के लिए आपत्तिजनक नारे लिखे थेविवादित पोस्ट में एक सिख व्यक्ति को 'मिस्टर सिंह' के रूप में दर्शाया गया था। इसमें अमेरिका अमेरिकियों के लिए, हमारी सड़कों से दूर हो जाओ, आपको गाड़ी चलानी नहीं आती मिस्टर सिंह और खुद देश छोड़ दो या नतीजे भुगतो जैसे बेहद आपत्तिजनक नारे और बातें लिखी गई थीं। पंजाबी और भारतीय समुदाय द्वारा इस नस्लीय और अपमानजनक पोस्ट का कड़ा विरोध किया गया, जिसके बाद प्रशासन को उस तस्वीर और पोस्ट को सोशल मीडिया से हटाना पड़ा था। पंजाबी समुदाय के लोगों के लिए सकारात्मक कदमऐसे संवेदनशील और तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी परिवहन सचिव का खुद पंजाबी समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधि से मुलाकात करना काफी मायने रखता है। बैठक को पंजाबी समुदाय और ट्रक ड्राइवरों के बीच बने असुरक्षा के माहौल को कम करने व उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
महाठग रवींद्रनाथ सोनी ने दुबई में फर्जी 'ब्लूचिप' कंपनी बनाकर 10 देशों के 1000 से अधिक लोगों से 1500 करोड़ रुपये की ठगी की। विशेष जांच टीम ने 13 आरोपियों के खिलाफ 9000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें ईडी भी जांच में शामिल हो गई है।
भोपाल में बुधवार से मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट शुरू होगा। 10 अक्टूबर तक चलने वाले मार्ट का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इसमें अमेरिका, फ्रांस, जापान, इटली समेत करीब 34 देश के 100 मेहमान भी शामिल होंगे, जो घरेलू टूर ऑपरेटर्स से अपने अनुभव, पैकेज आदि साझा करेंगे। वहीं, 15 राज्य के 180 घरेलू टूर ऑपरेटर्स सहित 600 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। शुभारंभ अवसर पर प्रदेश में ₹1,100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप मिलेगा, जबकि सीहोर में ₹848.40 करोड़ का मेगा निवेश समझौता किया जाएगा। यह 7वां संस्करण, बी2बी मंचयह आयोजन राज्य के पर्यटन परिदृश्य का अब तक का सबसे विशाल और रणनीतिक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) नेटवर्किंग मंच सिद्ध होने जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी करेंगे। पिछले साल 21 करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट आए सचिव पर्यटन और प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी. ने बताया, वर्ष 2025 में पर्यटकों के आवागमन में 57 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। जिससे प्रदेश में पर्यटकों का कुल आंकड़ा 21.05 करोड़ तक पहुंच गया है। MPTM 2026 का मूल उद्देश्य इसी तीव्र संवृद्धि को वैश्विक निवेश, आधुनिक अधोसंरचना और सतत आजीविका के अवसरों में रूपांतरित करना है। इन देशों के प्रतिनिधि आएंगे MPTM 2026 के इस संस्करण में विश्व के 34 से अधिक प्रमुख देशों के 100 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि और पर्यटन स्टेकहोल्डर इस मार्ट में प्रत्यक्ष सहभागिता कर रहे हैं। इनमें यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली, ग्रीस, नीदरलैंड्स, पोलैंड, फिनलैंड, बुल्गारिया, बेलारूस, अल्बानिया, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे प्रमुख यूरोपीय राष्ट्र शामिल हैं। अमेरिकी महाद्वीप से संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको; एशिया-प्रशांत क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस और श्रीलंका तथा पश्चिम एशिया व अफ्रीका से संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल, मॉरीशस, केन्या और रूस के प्रमुख टूर ऑपरेटर्स व ट्रैवल लेखक भोपाल पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी देश के 15 से अधिक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, हरियाणा, ओडिशा तथा जम्मू और कश्मीर के 180 से अधिक प्रमुख घरेलू टूर ऑपरेटर्स भाग ले रहे हैं। इतने प्रस्ताव आएंगेआयोजन के दौरान लगभग ₹1,100 करोड़ से अधिक के संयुक्त निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होटल, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी टेंटेड कैंपिंग और इको-टूरिज्म इकाइयों की स्थापना के लिए 14 प्रमुख प्रोजेक्ट के लिए निजी निवेशकों को ₹252 करोड़ के 'लेटर ऑफ अवार्ड' (LOA) औपचारिक रूप से सौंपे जाएंगे। इसके अलावा पर्यटकों की सड़क यात्रा को सुगम, सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए राज्य के 3 प्रमुख पर्यटन राजमार्गों पर अत्याधुनिक 'मार्ग सुविधा केंद्रों' के विकास के लिए भी LOA प्रदान किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा आकर्षण सीहोर जिले के रामगढ़ में होने वाला ₹848.40 करोड़ का मेगा पर्यटन निवेश समझौता है। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड एवं मेसर्स एआरएम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मध्य होने वाले इस अनुबंध के अंतर्गत रामगढ़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स, गोल्फ विला, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी होटल और उच्चस्तरीय आतिथ्य अधोसंरचना का निर्माण किया जाएगा। यह विशाल परियोजना न केवल विंध्य और मालवा क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र को वैश्विक पहचान देगी, बल्कि इससे क्षेत्र में लगभग 920 प्रत्यक्ष और सैकड़ों अप्रत्यक्ष स्थानीय रोजगारों का सृजन होगा। मां की रसोई सजीअतिथियों को मध्य प्रदेश के अनूठे खान-पान और संयुक्त राष्ट्र के मिलेट प्रोत्साहन मिशन से जोड़ने के लिए 'मां की रसोई' का विशेष लाइव काउंटर स्थापित किया गया है। इसमें कोदो-मेथी भात, ज्वार-बाजरे की रोटियां, मट्ठे के आलू, चक्की का साग, निघौना, मालवा-निमाड़ का प्रसिद्ध दाल-बाफला, भुने भाटे का भर्ता और सिलबट्टे की ताजी चटनियों जैसे विशुद्ध पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन परोसे जाएंगे।
ट्रंप ने बताया डॉलर क्यों मजबूत?: अमेरिका की महंगाई पर भी बोले, ईरानी अर्थव्यवस्था और होर्मुज पर किया ये दावा
दुनिया की खबरें: महिला की हत्या के आरोप में यूएस मरीन गिरफ्तार, ओकिनावा में अमेरिकी सैनिकों के बाहर निकलने पर लगी रोकworld news updates US military restricts troops from leaving the base after japan Okinawa incident
अमेरिकी सदन में पेश हुआ कैप्टन स्मित मच्छार के सम्मान में प्रस्ताव, असाधारण साहस के लिए की गई तारीफ
अपनी बहादुरी से विमान में 174 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के सम्मान में अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में प्रस्ताव पेश किया गया है। इस प्रस्ताव में उनके असाधारण साहस के की तारीफ की गई है।
डोनाल्ड ट्रंप : अमेरिका के साथ ईमानदार रहे कनाडा
वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें कनाडा के साथ व्यापार वार्ता दोबारा शुरू करने की कोई जल्दी नहीं है। उन्होंने कनाडा पर अमेरिका के साथ खराब व्यवहार करने का आरोप लगाया और कहा कि भविष्य में कोई भी समझौता तभी हो सकता है, जब कनाडा अमेरिका के साथ 'ईमानदार' रहे।
फ्लाईदुबई (FlyDubai) की फ्लाइट FZ1073 में हुई भयावह चाकूबाजी और विमान क्रैश की साजिश के पीछे कौन था, इसे लेकर अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व में विरोधाभास देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से लगता है कि 30 सितंबर को हुई इस 'आतंकी' घटना के तार ईरान से जुड़े हैं। हालांकि, उनका यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस सतर्क बयान के ठीक उलट है, जिसमें वेंस ने स्पष्ट कहा था कि अभी तक ईरान की संलिप्तता का कोई पक्का सबूत सामने नहीं आया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जो इस मामले की जांच कर रहा है, वह भी इस नतीजे पर नहीं पहुँच पाया है कि हमले के पीछे कौन था। सऊदी अधिकारियों से शुरुआती पूछताछ के बाद अल-हम्मामी को UAE अधिकारियों को सौंप दिया गया था। ट्रंप का दावा: ईरान शामिल है सोमवार दोपहर जब ट्रंप एयर फ़ोर्स वन में सवार हो रहे थे, तो एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि फ्लाईदुबई घटना में ईरान शामिल था। ट्रंप ने जवाब दिया, हाँ, मुझे लगता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा लगता है। वेंस की अलग राय हालाँकि, जब पत्रकारों ने अलास्का जाते समय वेंस और सेकंड लेडी उषा वेंस से ईरान के कथित कनेक्शन के बारे में पूछा, तो उन्होंने इस पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।वेंस ने कहा कि वह यह मामला CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ़ और अन्य इंटेलिजेंस अधिकारियों पर छोड़ देंगे, क्योंकि उनके अनुसार वे जांच पर टिप्पणी करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। वेंस ने कहा, यह मामला मैं जॉन रैटक्लिफ़ और कुछ इंटेलिजेंस अधिकारियों पर छोड़ता हूँ। मैं किसी भी घोषणा से पहले कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन निश्चित रूप से हम इस पर गौर कर रहे हैं। हालाँकि, मैं यह नहीं कहूँगा कि मैंने अभी तक कुछ भी पक्का देखा है। जांच में अब तक क्या पता चला है इज़राइल, UAE और सऊदी अरब के अधिकारियों ने फ्लाईदुबई घटना को आतंकी हमला बताया है। हालाँकि, जांचकर्ता अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अल-हम्मामी ने अकेले यह काम किया या वह किसी बड़े आतंकी साज़िश का हिस्सा था। NBC न्यूज़ ने जांच की जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अधिकारियों का मानना है कि ओमान के को-पायलट ने अकेले ही यह काम किया और वह किसी बड़े संगठन का हिस्सा नहीं था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। UAE के अटॉर्नी जनरल और प्रॉसिक्यूटर जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने 3 अक्टूबर को कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि अल-हम्मामी ने आतंकवादी हमला करने की योजना बनाई थी। अल शम्सी ने कहा, फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 से जुड़ी घटना की जांच में पता चला है कि को-पायलट ने आतंकवादी हमला करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि अधिकारी घटना के पूरे हालात, मकसद और किसी भी तरह के कनेक्शन का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अल-हम्मामी से पूछताछ से पता चला कि उसने तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर विमान को क्रैश करने की योजना बनाई थी। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला कि उसने इस साल की शुरुआत में तेल अवीव में एक और विमान क्रैश करने पर विचार किया था, लेकिन बाद में यह योजना छोड़ दी। जब यह घटना हुई, तब फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी और उसमें 174 यात्री सवार थे, जिनमें से ज़्यादातर इज़राइली थे। एक बड़ी दुर्घटना कैसे टली भारतीय नागरिक कैप्टन मच्छर घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने में कामयाब रहे, जिससे यात्री अल-हम्मामी पर काबू पा सके। इसके बाद फ्लाईदुबई के दो पायलट, जो यात्री के तौर पर यात्रा कर रहे थे, कॉकपिट में गए, विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लिया और उसे सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा। हमले की जांच जारी है और अधिकारियों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि अल-हम्मामी ने अकेले यह काम किया या किसी संगठन या विदेशी देश से उसका कोई संबंध था। इस वर्शन में ईरान वाले पहलू का ज़िक्र सावधानी से किया गया है, खासकर इसलिए क्योंकि ट्रंप का आकलन वेंस के उस बयान से अलग है जिसमें कहा गया है कि कोई ठोस सबूत नहीं है। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
Karnal News: जमीन बेच और कर्ज लेकर अमेरिका भेजा इकलौता बेटा, हृदयाघात से मौत
जमीन बेच और कर्ज लेकर अमेरिका भेजा इकलौता बेटा, हृदयाघात से मौत
Hathras News: दुबई की कंपनी ने हड़पे 13.02 लाख अमेरिकी डॉलर, डायरेक्टरों पर रिपोर्ट दर्ज
दुबई की एक कंपनी पर सलेमपुर स्थित अल्फा मिल्क फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के 13.02 लाख अमेरिकी डॉलर हड़पने का आरोप लगा है।
अमेरिका सरकार के करीब 50-60 साल पुराने इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम (IVLP) के तहत महापौर पुष्यमित्र भार्गव दो सप्ताह के दौरे पर अमेरिका गए थे। कार्यक्रम का उद्देश्य अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों को किसी विषय पर अमेरिका में हो रहे काम, उसके प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं को समझने का अवसर देना है। इस दौरान उन्होंने AI और शहरों की गवर्नेंस में इसके उपयोग को समझा। महापौर ने बताया कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, फिजी, दक्षिण कोरिया, ताइवान, हांगकांग और नेपाल समेत 8 देशों के 12 प्रतिनिधियों के समूह ने अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया। वॉशिंगटन डीसी, फ्लोरिडा के ऑरलैंडो और मिनेसोटा सहित विभिन्न शहरों में कॉलेज, यूनिवर्सिटी, कंपनियों, उद्योगों और स्थानीय प्रशासन के कामकाज को देखा। इसके बाद उन्होंने कहा कि अमेरिका में शहरों की गवर्नेंस में AI और तकनीक के इस्तेमाल से इंदौर के लिए भी कुछ चीजें लागू की जा सकती हैं। अमेरिका से सीख के आए इंदौर में लागू होंगी ये 5 चीजें 1. ITMS को और प्रभावी बनाएंगेइंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ाई जाएंगी। ट्रैफिक निगरानी और नियमों के उल्लंघन की पहचान जैसे कामों को और प्रभावी बनाने पर काम होगा। 2. इंदौर को AI हब बनाने पर कामशिक्षा संस्थानों, उद्योगों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और स्थानीय प्रशासन को जोड़कर इंदौर को AI हब के रूप में विकसित करने का प्रयास होगा। AI की जानकारी और इसके इस्तेमाल को लेकर शहर में काम बढ़ाया जाएगा। 3. सड़कों की निगरानी में AI और CCTVPWD के काम में AI का उपयोग कर सड़कों के गड्ढों और दूसरी समस्याओं को ट्रैक करने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इसके लिए CCTV सर्विलांस पॉलिसी के इस्तेमाल पर काम होगा। 4. 311 शिकायत व्यवस्था को AI से जोड़ेंगेइंदौर की 311 जैसी शिकायत निवारण व्यवस्था को AI के आधार पर और ज्यादा जन-केंद्रित बनाने की योजना है। उद्देश्य शिकायतों को समझने और जनता से बेहतर तरीके से जुड़ने की व्यवस्था विकसित करना है। 5. विकास कार्यों में जनता की भागीदारी बढ़ेगीअमेरिका में किसी काम की योजना बनाने से पहले जनता से सुझाव लिए जाते हैं। इसी तरह इंदौर में बड़े विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निर्णयों में लोगों की राय पहले लेने की व्यवस्था को बढ़ाने पर काम होगा। AI के साथ लोगों को तैयार करना भी जरूरी महापौर ने कहा कि AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ लोगों को इसकी सही जानकारी देना भी जरूरी है। AI के फायदे के साथ इसके गलत इस्तेमाल और संभावित जोखिमों को समझाना होगा। इसके लिए मीडिया, सरकार, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां (BKU Ugrahan) ने सोमवार को तरनतारन स्थित उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार रोष प्रदर्शन और धरना दिया। यह प्रदर्शन भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध, लैंड पूलिंग पॉलिसी को रद्द करने, किसानों को जमीनों के मालिकाना हक वापस देने और किसानों-मजदूरों की पूर्ण कर्जमाफी जैसी प्रमुख मांगों को लेकर आयोजित किया गया था। धरने को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष गुरबाज सिंह सिद्धवां, भूपिंदर सिंह ठट्ठियां, हरदीप सिंह जोड़ां, सुखवंत सिंह वल्टोहा, सुलखण सिंह मंडाला और संतोष सिंह पट्टी ने पंजाब सरकार से मांग की कि लैंड पूलिंग पॉलिसी को तुरंत खत्म किया जाए और किसानों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक बहाल किया जाए। किसानों की प्रमुख मांगे कर्जमाफी व सख्त कानून: किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए तथा सूदखोरी पर लगाम कसने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए। मुआवजा व सरकारी नौकरी: आत्महत्या कर चुके पीड़ित किसान परिवारों को तुरंत आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। मामले रद्द हों: पराली जलाने के आरोपों सहित किसानों पर दर्ज सभी पुलिस केस तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाएं। पानी का विवाद: नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर राज्यों के किसानों को आपस में लड़ाने की साजिशें बंद हों और इसे विशेषज्ञों की मदद से सुलझाया जाए। 'भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कृषि और उद्योग को करेगा तबाह' किसान नेता इंद्रजीत सिंह माड़ीमेघा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर देगा। इसका सीधा असर देश के छोटे उद्योग और खुदरा बाजार पर भी पड़ेगा, जिससे बेरोजगारी और महंगाई चरम पर पहुंचेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र के निजीकरण के लिए बिजली संशोधन विधेयक-2025 और फसलों के बीजों का कारोबार कॉरपोरेट घरानों को सौंपने के लिए बीज संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। एक तरफ जहां कॉरपोरेट घरानों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा रहे हैं, वहीं गलत नीतियों के कारण किसान और मजदूर कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। बाढ़ मुआवजे और मनरेगा की मांग धरने के दौरान किसान नेताओं ने पिछले वर्ष आई बाढ़ से किसानों और मजदूरों को हुए जान-माल के नुकसान का उचित मुआवजा देने और मनरेगा कानून को पूरी तरह बहाल कर साल में कम से कम 200 दिन रोजगार की गारंटी देने की पुरजोर मांग की। इस रोष प्रदर्शन के दौरान बलविंदर सिंह लाडी, सोहन सिंह सभरा, करमजीत सिंह सभरा, तरसेम सिंह, जसवंत सिंह सोहल, सतबीर सिंह सहित विभिन्न जिलों व ब्लॉकों के अध्यक्ष, सचिव और बड़ी संख्या में किसान-मजदूर मौजूद रहे।
करनाल के युवक की अमेरिका में हार्टअटैक से मौत:45 लाख कर्ज लेकर डंकी रूट से गया था; पिता ने बेची जमीन
अमेरिका में करनाल जिले के असंध थाना क्षेत्र के गांव बल्लाह के 21 वर्षीय युवक की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। परिवार को जैसे ही बेटे की मौत की सूचना मिली, घर में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने सरकार से शव भारत लाने में मदद की गुहार लगाई है, ताकि वे अंतिम दर्शन कर सकें। अनिल कुमार मान ने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और अपने सपने पूरे करने के लिए उसने अमेरिका जाने का फैसला लिया। जानकारी के अनुसार, पिता ऋषिपाल ने बेटे के भविष्य के लिए अपनी जमीन बेच दी और कर्ज भी लिया। करीब 45 लाख रुपए खर्च कर अनिल को डंकी रूट से अमेरिका भेजा गया। कई महीने के सफर के बाद वह अमेरिका पहुंचा और वहां जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद रहने लगा था। 4 अक्टूबर की रात अचानक बिगड़ी तबीयत जानकारी के मुताबिक, 4 अक्टूबर की रात अचानक अनिल की तबीयत बिगड़ गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, उसे हार्ट अटैक आया था। अनिल की मौत की खबर गांव पहुंची तो परिवार और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई। दो परिवारों का था इकलौता चिराग अनिल अपने पिता ऋषिपाल का इकलौता बेटा था। वहीं ऋषिपाल के भाई रामपाल की भी एक ही बेटी है। ऐसे में दोनों परिवारों के लिए अनिल इकलौता चिराग था। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के बाद ग्रामीण भी परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। सरकार से शव भारत लाने की मांग परिवार की सबसे बड़ी चिंता अब अनिल का शव भारत लाना है। परिजनों ने सरकार से मदद की अपील की है, ताकि शव को अमेरिका से भारत लाया जा सके और परिवार अपने बेटे का अंतिम दर्शन कर सके।
'तब आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति बुलाएंगे', बिहार के छात्र ने छोड़ा अमेरिका, फिर सच कर दिखाया सपना
“मेरे अंदर के बिहारी ने कहा, ‘मैं तब वापस आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति मुझे बुलाएंगे’”: जब शरद सागर ने भारत में काम करने के लिए अमेरिका छोड़ा, तो लोग हंसे, लेकिन उन्होंने भविष्य को सच कर दिखाया।
Moradabad News: अमेरिका में कारोबार सुरक्षित, रूस के खरीदारों पर रखनी होगी पैनी नजर
अमेरिका में कारोबार सुरक्षित, रूस के खरीदारों पर रखनी होगी पैनी नजर
Iran US War: ईरान ने दागी Sayyad-3 मिसाइल, क्या अमेरिकी एयरक्राफ्ट था निशाने पर? | Trump | Mojtaba
ईरान ने अचानक ऐसी मिसाइल दागी कि अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है...क्योंकि जिस जगह से यह मिसाइल चली, वहां कुछ मिनट पहले अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान देखे गए थे.
भदोही में कारपेट एक्सपो मार्ट में चल रहे 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो में देशभर के कालीन निर्माता और निर्यातक अपने खास डिजाइन और उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं। मेले में जयपुर की जेपी इंटरनेशनल का 1215 फीट का ‘आगरा’ डिजाइन का सिल्क कालीन खरीदारों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 25 अलग-अलग रंगों के सिल्क धागों से तैयार इस कालीन को बनाने में 30 बुनकरों ने करीब पांच माह 20 दिन काम किया। जेपी इंटरनेशनल के सेल्स मैनेजर मोहित विजय ने बताया कि कालीन में मुख्य रूप से भारतीय और चाइनीज सिल्क धागों का इस्तेमाल किया गया है। अलग-अलग रंगों के धागों से डिजाइन को उकेरने के बाद इसे तैयार करने में करीब पांच माह 20 दिन का समय लगा। इसमें लगभग 20 दिन सिर्फ वॉशिंग में लगे। उन्होंने बताया कि कालीन की बुनाई में 30 बुनकरों ने काम किया। इसे तैयार करने में करीब 3.25 लाख रुपए की लागत आई है। अमेरिकी बाजार के लिए इसकी डील करीब 4680 अमेरिकी डॉलर में होती है। इस डिजाइन और सिल्क से तैयार कालीन की रूस और अमेरिका में खास मांग है। 912 फीट के पर्शियन ट्रक डिजाइन की भी मांग मेले में भदोही की शकुंतला कारपेट ने भी अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। कंपनी की ओर से 912 फीट का पर्शियन ट्रक डिजाइन का कालीन लगाया गया है। कंपनी के मालिक छविनाथ प्रजापति और सेल्स मैनेजर अश्वनी प्रजापति ने बताया कि इस कालीन को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगता है। इसकी कीमत लगभग 36 हजार रुपए है। कंपनी के मुताबिक, अमेरिकी बाजार में यही कालीन करीब 600 डॉलर में डील होता है। इसमें ट्रांसपोर्ट का खर्च शामिल नहीं है। कालीन की अमेरिका और जर्मनी में सबसे ज्यादा मांग है। पिछले मेले के बाद विदेशी खरीदारों से बढ़ा कारोबार कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले साल भी शकुंतला कारपेट ने कारपेट फेयर में हिस्सा लिया था। उस दौरान विदेशी खरीदारों की ओर से अच्छा रिस्पांस मिला। इसके बाद कई विदेशी खरीदारों के साथ लगातार कारोबार हो रहा है। 223 निर्यातकों ने लगाए स्टॉल कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC) की ओर से आयोजित 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो इस बार गोल्डन जुबली संस्करण है। एक्सपो मार्ट में 4 से 7 अक्टूबर तक चलने वाले मेले में देशभर के कालीन निर्माता और निर्यातक हिस्सा ले रहे हैं। मेले में कुल 223 निर्यातकों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। इंडिया कारपेट एक्सपो देश के हस्तनिर्मित कालीन, रग और फ्लोर कवरिंग को विदेशी बाजार से जोड़ने वाला प्रमुख B2B मंच है। इसमें विदेशी खरीदार भारतीय निर्माताओं के नए डिजाइन और उत्पाद देखते हैं। CEPC के अनुसार, यह आयोजन भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ाने के साथ बुनकरों की कला और पारंपरिक शिल्प को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने का मंच भी है।
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran America war में ईरान ने अमेरिका को Middle East से ही खदेड़ दिया? Prof Peter Kuznik का बड़ा दावा
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रही उथल-पुथल अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। वैश्विक मामलों के जानकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में दशकों से चला आ रहा अमेरिकी दबदबा अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है
अमेरिका में भारतवंशी छात्रों का कमाल, बनाया ऐसा कॉफी पॉड कि कचरा ही नहीं बचेगा
अमेरिका के छात्रों आदित्य हेरेकर और करण वर्मा ने बायोडिग्रेडेबल कॉफी पॉड Naturista बनाया है। करीब 200 प्रोटोटाइप के बाद तैयार इस इनोवेशन ने एक चैलेंज में 25 हजार डॉलर का पुरस्कार जीता। जानिए कैसे बना यह अनोखा कॉफी कैप्सूल।
पीसीएस 2025 के साक्षात्कार के तीसरे दिन एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति का स्वागत करने ट्रंप क्यों गए और उनका स्वागत क्यों हुआ।
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा!
बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा! असली मुद्दा ये है कि इराक में मुकीम सबसे बड़ी फोर्स हशदुशशाबी के लिए ये नाजुक और इम्तेहान की घड़ी है...वो इसलिए क्यों कि अमेरिका और इजरायल किसी भी सूरत में इराक में ईरान हिमायती इन फोर्सेस का खात्मा चाहते हैं..
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट क्यों भागी अमेरिकी सेना! Trump। Iran। Middle East
Iran America War के बीच Iraq से क्यों निकल रही US की फोर्सेस,अब कौन हावी?| Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक की। बैठक में AI की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, ओपनएआई, X-AI और एनवीडिया के CEO ने एक समझौते पर साइन किए। इस दौरान ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस (SI) करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। उन्होंने कहा कि AI को आर्टिफिशियल यानी बनावटी कहना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक, यह इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है। ट्रम्प ने कहा कि AI की दौड़ अब अमेरिका और चीन के बीच है और फिलहाल अमेरिका इस मुकाबले में आगे चल रहा है। उन्होंने पिछले हफ्ते UN महासभा में पहली बार AI को सुपर इंटेलिजेंस (SI) कहा था। समझौते में कंपनियों ने 4 बातें मानने पर सहमति दी 1. अपने AI सिस्टम की खुद जांच करेंगी: कंपनियां खुद जांचेंगी कि उनके AI मॉडल सुरक्षा के तय नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। 2. अलग टीम निगरानी करेगी: कंपनियां एक टीम बनाएंगी, जो AI सिस्टम की निगरानी करेगी और यह देखेगी कि कहीं कोई खतरा या गड़बड़ी तो नहीं है। 3. बाहर के विशेषज्ञ भी जांच करेंगे: कंपनियां अपने AI मॉडल की जांच बाहरी विशेषज्ञों या किसी स्वतंत्र संस्था से भी कराएंगी। 4. कंपनी का बोर्ड भी नजर रखेगा: कंपनियों के बोर्ड की एक स्वतंत्र समिति इन जांच रिपोर्टों को देखेगी। अगर कोई समस्या सामने आती है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी भी होगी। ट्रम्प ने टेक कंपनियों से कहा- डेटा सेंटर बनाने में स्थानीय लोगों को साथ लें बैठक में AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी चर्चा हुई। ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, टेक कंपनियों को वहां की स्थानीय कम्युनिटी के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियों को इन इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करनी चाहिए। इसमें स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना भी शामिल हो सकता है। ट्रम्प के मुताबिक, डेटा सेंटर बनाने से पहले कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि इन प्रोजेक्ट्स का फायदा वहां रहने वाले लोगों को भी मिल सके। AI के लिए डेटा सेंटर इतने जरूरी क्यों हैं? हम जिस AI से सवाल पूछते हैं, उसके पीछे हजारों-लाखों शक्तिशाली कंप्यूटर काम करते हैं। ये बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। इसलिए AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ेगी। जुकरबर्ग बोले- लोगों को AI पर भरोसा होना जरूरी मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का मकसद लोगों का भरोसा बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोगों और ग्राहकों को भरोसा होना चाहिए कि AI तकनीक उसी तरह काम करेगी, जिस तरह इसे बनाया गया है। एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि सभी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि इस तकनीक का विकास सुरक्षित तरीके से हो। अमेरिका-चीन की AI रेस में 4 मोर्चे पर मुकाबला 1. चिप्स: AI का दिमागAI को चलाने के लिए बहुत ताकतवर चिप्स चाहिए। जिसके पास बेहतर और ज्यादा चिप्स होंगे, वह बड़े और तेज AI सिस्टम बना सकेगा। 2. डेटा सेंटर: जहां AI चलता हैAI को चलाने वाले हजारों कंप्यूटर बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ऐसे डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ रही है। 3. बिजली: AI को चलाने के लिए ईंधनडेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली खाते हैं। इसलिए AI की रेस में सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, पर्याप्त और लगातार बिजली मिलना भी जरूरी है। 4. AI मॉडल: किसका AI ज्यादा काम का?आखिर में मुकाबला इस बात का भी है कि कौन ज्यादा तेज, समझदार और मुश्किल काम करने वाला AI मॉडल बना सकता है। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन ने जंग में विस्फोटकों से लैस रोबोट सैनिक उतारे: रूस के 3000 सैनिकों को मारने का दावा रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
विचार: अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजे भारत
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
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अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन : राष्ट्रपति शी का दबदबा, और ट्रंप के पत्ते
एआई के मुद्दे पर, राष्ट्रपति शी ने एआई विकास पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण का विरोध किया और ओपन-सोर्स एआई का समर्थन किया।
Iran America War में IRGC ने Hormuz Strait में उड़ाया अमेरिकी सुरक्षा में तैनात जहाज | Trump
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चल रहे जहाजों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक तेल टैंकर के प्रभावित होने की भी प्रारंभिक सूचना है
चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के AI एजेंट्स ने अमेरिकी सरकार की वेबसाइट में छेड़छाड़ की। इसमें अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC और कॉमर्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट शामिल है। ओपनएआई ने इसकी जानकारी दी। हालांकि इस छेड़छाड़ से किसी तरह का कोई नकुसान नहीं हुआ। एआई एजेंट्स ने किसी भी नॉन-पब्लिक या गोपनीय डेटा को एक्सेस नहीं किया। कंपनी ने कहा कि AI एजेंट का मकसद सरकारी वेबसाइट से सटीक जानकारी जुटाना था। AI एजेंट ने डेटा की कॉपी बनाई, इंटरनेट पर पोस्ट की AI एजेंट्स ने अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC के डेटा की कॉपी बनाई और उसे इंटरनेट पर पोस्ट कर दिया, जबकि उन्हें ऐसा न करने के साफ निर्देश दिए गए थे। कॉमर्स डिपार्टमेंट के मामले में एआई एजेंट ने यूएस सेन्सस डेटा की वेबसाइट को ऐसे प्रोग्रामिंग इंटरफेस से एक्सेस किया, जो उस काम के लिए नहीं बनाया गया था। AI एजेंट ने शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट में भी घुसने का प्रयास किया। हालांकि, वो इसमें कामयाब नहीं हो सका। एजेंसियां बोलीं- कोई संवेदनशील डेटा लीक नहीं मामला सामने आने के बाद शेयर बाजार नियामक SEC के प्रवक्ता ने कहा कि एआई एजेंट्स ने किसी भी नॉन-पब्लिक या गोपनीय डेटा को एक्सेस नहीं किया। एजुकेशन डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने बताया कि डेटाबेस को कोई नुकसान नहीं हुआ हैं। वहीं, कॉमर्स डिपार्टमेंट की ओर से इस पर तुरंत कोई बयान नहीं आया है। कंपनी बोली- भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी साइट्स पर गए थे एजेंट ओपनएआई ने बताया कि यह गड़बड़ी तब हुई जब उनके एआई सिस्टम की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग के दौरान एआई से कई सवाल पूछे गए थे। एआई मॉडल भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी वेबसाइटों पर ही जाते हैं, इसलिए वह खुद-ब-खुद उन साइट्स पर गए। कंपनी का कहना है कि एआई का मकसद कोई गड़बड़ करना नहीं, बल्कि सरकारी साइट्स से आम जानकारी जुटाना ही था। ये एक सामान्य रिसर्च का काम है। AI एजेंट ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट में भी घुस गए थे दो दिन दिन पहले खुलासा हुआ था इन ओपन एआई के AI एजेंट्स ने ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट का भी एक्सेस हासिल कर लिया था। यह घटना जून में हुई थी, लेकिन सरकार को इसकी जानकारी सितंबर में मिली। एआई को बेकाबू होने से रोकने के लिए 'किल स्विच' की बात हो रही कई देश और एक्सपर्ट चाहते हैं कि एआई कंपनियों के लिए एक इमरजेंसी 'किल स्विच' बनाया जाए, जिससे खतरा दिखने पर पूरे एआई को एक झटके में बंद किया जा सके। ओपनएआई ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स तैयार करने में जुटी है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर के नेटवर्क से जुड़े AI को किसी एक स्विच से बंद करना लगभग नामुमकिन है। भविष्य के खतरों पर एआई विशेषज्ञों का क्या कहना है? यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के डॉ. हैमंड पिएर्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामले आगे चलकर और खतरनाक हो सकते हैं। ये सरकारों के लिए खतरे की बड़ी घंटी है। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के डॉ. राफेल सिरिएलो ने कहा कि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन एआई लगातार ताकतवर होता जा रहा है। इसकी 24 घंटे निगरानी जरूरी है। किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग को अनिवार्य करना होगा। ----------------------------------- AI से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गेट्स बोले-AI के गलत इस्तेमाल से 100 करोड़ मौतें संभव:अमेरिकी सरकार इस पर कानून बनाए; ऑस्ट्रेलिया में AI सरकारी पोर्टल हैक कर चुका माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने चेतावनी दी है कि गलत हाथों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इतना ताकतवर हो सकता है कि इससे 100 करोड़ लोगों की मौत तक हो सकती है। एक इंटरव्यू में गेट्स ने कहा कि बुरे इरादे वाले लोगों के साथ AI टूल्स का मेल अब तक के किसी भी हथियार से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। उन्होंने खतरे को गंभीरता से लेने को कहा है। पूरी खबर पढ़ें…
चैट जीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपन एआई के AI एजेंट्स ने अमेरिकी सरकार की वेबसाइट में एक्सेस बना लिया। इसमें अमेरिकी शेयर बाजार नियामक, व्यापार विभाग की वेबसाइट शामिल है। ये खुलासा हाल ही में आई एक रिपोर्ट में हुआ है। दो दिन दिन पहले खुलासा हुआ था इन AI एजेंट्स ने ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट का भी एक्सेस हासिल कर लिया था। AI रिसर्च नॉन-प्रॉफिट 'ट्रांसल्यूस' के अनुसार… एआई एजेंट्स ने अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC के डेटा की कॉपी बनाई और उसे इंटरनेट पर पोस्ट कर दिया, जबकि उन्हें ऐसा न करने के साफ निर्देश दिए गए थे। कॉमर्स डिपार्टमेंट के मामले में एआई एजेंट ने यूएस सेन्सस डेटा वेबसाइट को ऐसे प्रोग्रामिंग इंटरफेस से एक्सेस किया, जो उस काम के लिए नहीं बनाया गया था। AI एजेंट ने शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट में भी घुसने का प्रयास किया। हालांकि वो इसमें कामयाब नहीं हो सके। सरकारी एजेंसियां बोलीं- कोई संवेदनशील डेटा लीक नहीं मामला सामने आने के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने सफाई दी है। SEC के प्रवक्ता ने कहा कि एआई एजेंट्स ने किसी भी नॉन-पब्लिक या गोपनीय डेटा को एक्सेस नहीं किया। एजुकेशन डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने बताया कि डेटाबेस को कोई नुकसान नहीं हुआ हैं। वहीं कॉमर्स डिपार्टमेंट की ओर से इस पर तुरंत कोई बयान नहीं आया है। कंपनी बोली- भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी साइट्स पर गए थे ओपनएआई ने बताया कि यह गड़बड़ी तब हुई जब उनके एआई सिस्टम की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग के दौरान एआई से कई सवाल पूछे गए थे। एआई मॉडल भरोसेमंद जानकारी के लिए सरकारी वेबसाइटों पर ही जाते हैं, इसलिए वह खुद-ब-खुद उन साइट्स पर गए। कंपनी का कहना है कि एआई का मकसद कोई गड़बड़ करना नहीं, बल्कि सरकारी साइट्स से आम जानकारी जुटाना ही था। ये एक सामान्य रिसर्च का काम है। एआई को बेकाबू होने से रोकने के लिए 'किल स्विच' की बात हो रही कई देश और एक्सपर्ट चाहते हैं कि एआई कंपनियों के लिए एक इमरजेंसी 'किल स्विच' बनाया जाए, जिससे खतरा दिखने पर पूरे एआई को एक झटके में बंद किया जा सके। ओपनएआई ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स तैयार करने में जुटी है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर के नेटवर्क से जुड़े AI को किसी एक स्विच से बंद करना लगभग नामुमकिन है। भविष्य के खतरों पर एआई विशेषज्ञों का क्या कहना है? यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के डॉ. हैमंड पिएर्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामले आगे चलकर और खतरनाक हो सकते हैं। ये सरकारों के लिए खतरे की बड़ी घंटी है। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के डॉ. राफेल सिरिएलो ने कहा कि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन एआई लगातार ताकतवर होता जा रहा है। इसकी 24 घंटे निगरानी जरूरी है। किसी भी गड़बड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग को अनिवार्य करना होगा।
अमेरिकी नागरिकों से 72 लाख डॉलर की ठगी: अहमदाबाद से चल रहे अवैध कॉल सेंटर सिंडिकेट का भंडाफोड़
सीबीआई ने अहमदाबाद से संचालित अवैध कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों से 72.1 लाख डॉलर (60 करोड़ रुपये से अधिक) की साइबर ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को यूएस अटॉर्नी और एफटीसी जैसे अमेरिकी संघीय अधिकारी बताकर पीड़ितों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी केस में फंसाने का डर दिखाते थे और बैंक खातों से रकम निकालकर सोना खरीदने व कूरियर को सौंपने के लिए मजबूर करते थे। डिजिटल साक्ष्य जब्त कर एजेंसी पूरे सिंडिकेट की जांच कर रही है।
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
नेताओं के हेल्दी खानपान के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डाइट जानते हैं। जिन चीजों को अनहेल्दी समझकर खाने से इनकार किया जाता है, उसी डाइट कोक, बर्गर, पिज्जा को खाकर राष्ट्रपति करते हैं बड़े-बड़े फैसलें।
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
CBSE पोर्टल की सुरक्षा खामी उजागर करने वाले 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के हॉल ऑफ फेम में शामिल कर सम्मानित किया गया है।
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
हार्वर्ड-स्टैनफर्ड नहीं... MIT है अमेरिकी नंबर वन कॉलेज, जानिए आइवी लीग कॉलेजों की रैंक
यूएस न्यूज बेस्ट कॉलेज 2027 रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने प्रिंसटन के 15 साल के वर्चस्व को खत्म कर पहला स्थान हासिल कर लिया है। सभी 8 आइवी लीग कॉलेज लिस्ट में शामिल हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
बिहार के नीरज को अमेरिका में मिली 2.6 करोड़ की स्कॉलरशिप, पिता चलाते हैं पान की दुकान
सारण जिले के नीरज को अमेरिका में करीब 2.6 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप पर PhD कर रहे हैं। बिहार के छोटे से गांव से अमेरिका तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष की अच्छी मिसाल है।
पिता के संघर्ष को सम्मान: कभी अमेरिका ने किया वीजा खारिज, आज नासा कर रहा स्वागत; कैसे लिखी सफलता की कहानी?
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री जाएंगे अमेरिका, ट्रंप ने दे दिया वीजा! - ABP News
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अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में खुद को तंदुरुस्त और एनर्जेटिक बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के सप्लीमेंट्स, जिम वर्कआउट और हाई-प्रोटीन डाइट का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों और अमेरिका में यह माना जाता है कि यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल कर लिया जाए, तो शरीर की सारी कमजोरियां दूर हो जाती हैं और ऊर्जा का स्तर हमेशा उच्च बना रहता है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) द्वारा जारी की गई एक बेहद चौंकाने वाली और व्यापक रिपोर्ट ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। सीडीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 71.5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो भरपूर मात्रा में प्रोटीन या अन्य पोषक तत्व लेने के बाद भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहते हैं। यह आंकड़ा न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि आधुनिक चिकित्सा जगत और पोषण विशेषज्ञों (Nutritionists) के लिए भी एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस आलेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर भरपूर प्रोटीन लेने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर लोग क्रोनिक थकान और ऊर्जा की कमी का सामना क्यों कर रहे हैं, और इसके पीछे छिपे असली वैज्ञानिक व जीवनशैली से जुड़े कारण क्या हैं।प्रोटीन का सेवन बनाम शरीर की ऊर्जा: क्या सिर्फ प्रोटीन खाने से ही मिल जाती है एनर्जी?आम तौर पर लोगों के मन में यह भ्रम बैठा हुआ है कि यदि वे अपने रोजाना के खाने में चिकन, अंडे, प्रोटीन पाउडर, पनीर या अन्य हाई-प्रोटीन स्रोतों को शामिल कर लेते हैं, तो उनका शरीर स्वतः ही ऊर्जा से भर जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) और ऊर्जा उत्पादन का तंत्र केवल एक पोषक तत्व यानी प्रोटीन पर निर्भर नहीं करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी डाइट में अत्यधिक प्रोटीन तो जोड़ लेता है, लेकिन साथ ही जरूरी विटामिंस (जैसे विटामिन बी12, विटामिन डी), आयरन, सही प्रकार के कार्बोहाइड्रेट और पर्याप्त हाइड्रेशन की अनदेखी करता है, तो शरीर उस प्रोटीन को पूरी तरह पचाने और ऊर्जा में बदलने में असमर्थ हो जाता है। इसके अलावा, आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है। सीडीसी की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि सिर्फ मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (Protien, Fats, Carbs) की मात्रा पूरी कर लेने मात्र से ही कोई व्यक्ति अंदर से स्वस्थ या ऊर्जावान महसूस नहीं कर सकता, जब तक कि शरीर की कोशिकीय स्तर पर पोषण संबंधी जरूरतें पूरी न हो रही हों।नींद की कमी और मानसिक तनाव: थकान का सबसे बड़ा और अनदेखा कारणसीडीसी की इस व्यापक रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है कि शारीरिक थकान का सीधा संबंध केवल भोजन या डाइट से ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे आधुनिक युग की सबसे बड़ी बीमारियां—नींद की कमी (Sleep Deprivation) और मानसिक तनाव (Chronic Stress)—मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। आज के समय में कॉर्पोरेट कल्चर, नाइट शिफ्ट्स, और रातभर मोबाइल स्क्रीन या लैपटॉप के सामने समय बिताने के कारण लोगों की नींद का चक्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। जब शरीर को रात में गहरी और कम से कम 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं मिलती, तो शरीर के हारमोनल संतुलन में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है। कोर्टिसोल (Cortisol) यानी तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने से शरीर हमेशा 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड में रहता है, जिससे मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र लगातार थका हुआ महसूस करते हैं। आप चाहे दुनिया का सबसे महंगा प्रोटीन शेक पी लें या सबसे बेहतरीन डाइट फॉलो कर लें, लेकिन यदि आपकी नींद पूरी नहीं है और आप मानसिक रूप से तनावग्रस्त हैं, तो आपके शरीर की कोशिकाएं कभी भी तरोताजा महसूस नहीं कर सकतीं। यही कारण है कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी करोड़ों लोग अंदर से पूरी तरह खोखले और थके हुए महसूस कर रहे हैं।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) और खराब पाचन तंत्र की भूमिकाथकान और सुस्ती के इस महामारी जैसे फैलने के पीछे एक और बहुत बड़ा कारण हमारी आधुनिक शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) है। आजकल अधिकांश नौकरियां ऐसी हो गई हैं जिनमें लोगों को लगातार 8 से 10 घंटे अपनी कुर्सी या डेस्क पर बैठकर बिताना पड़ता है। शारीरिक रूप से कोई मेहनत न होने के कारण शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुस्त हो जाता है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और खाया हुआ भोजन सही ढंग से पच नहीं पाता। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात को मानते हैं कि जब तक आपका पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत और सक्रिय नहीं है, तब तक आप चाहे कितना भी पौष्टिक भोजन या प्रोटीन क्यों न खा लें, आपके शरीर को उसकी सही ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकती। अपच, कब्ज और आंतों (Gut Health) से जुड़ी समस्याएं शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा देती हैं, जिससे लगातार सुस्ती, सिरदर्द और भारीपन बना रहता है। सीडीसी की रिपोर्ट इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करती है कि जब तक लोग अपनी दिनचर्या में व्यायाम, वॉक और शारीरिक श्रम को शामिल नहीं करेंगे, तब तक केवल डाइट बदलने से थकान की इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता।निष्कर्ष: इस समस्या से बाहर निकलने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव जरूरी हैं?सीडीसी की यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी और आंखें खोलने वाला संदेश है। यह हमें यह सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल जिम जाने या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले किसी एक फिटनेस ट्रेंड को फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समग्र संतुलन (Holistic Balance) है जिसमें सही खानपान, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सक्रिय जीवनशैली का होना अनिवार्य है। यदि आप भी अक्सर खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो सिर्फ प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के बजाय अपनी नींद के पैटर्न को सुधारें, पानी की मात्रा बढ़ाएं, योग या मेडिटेशन को अपनाएं और डॉक्टर से सलाह लेकर अपने शरीर में विटामिंस व मिनरल्स की जांच करवाएं। आधुनिक दुनिया की इस अंधी दौड़ में अपने शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना और समय रहते आवश्यक बदलाव करना ही एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन की असली कुंजी है।
रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब - AajTak
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अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
आईआईटी छात्र ने साउथ एशिया स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट जीता, अब अमेरिका में गाड़ेंगे झंडे
आईआईटी के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के एमटेक छात्र पी विष्णु तेजा ने 2026 सोसाइटी ऑफ पेट्रोलियम इंजीनियर्स साउथ एशिया रीजनल स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट के मास्टर्स डिवीजन में पहला स्थान हासिल किया है।
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

