अमेरिका को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं; कश्मीर पर गोर के बयान को लेकर बोलीं महबूबा मुफ्ती
जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने सर्जियो गोर के बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। जम्मू-कश्मीर की समस्या नई दिल्ली ही सुलझा सकता है।
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अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों (Gold Prices) में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। जून की शुरुआत के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4500 डॉलर प्रति औंस के पार बना हुआ है। COMEX गोल्ड 19 अगस्त को $4,571.80 प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि गुरुवार को इसमें मामूली 0.05 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह $4,542.90 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।घरेलू बाजार की बात करें तो शुक्रवार (14:58 IST) को घरेलू MCX पर सोने की हाजिर कीमत करीब 156571 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रही। वहीं 5 अक्टूबर के कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 158729 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले बुधवार (19 अगस्त) को पीएम फिक्सिंग (PM Fixing) में LBMA स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,460.70 प्रति औंस दर्ज की गई थी।अमेरिकी खजाने के एक फैसले से क्यों आई तेजी?सोने की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे यूएस ट्रेजरी का एक बड़ा फैसला है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि की प्रतिभूतियों की बायबैक बढ़ाने के कदम ने बॉन्ड यील्ड को नीचे धकेल दिया और अमेरिकी डॉलर को कमजोर कर दिया। इससे सोने की कीमतों को पुश मिल गया।अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम से 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड गिरकर क्रमशः 4.64 प्रतिशत और 5.18 प्रतिशत पर आ गई। इसके अलावा शुरुआती कारोबार में डॉलर में 0.76 फीसदी की गिरावट आई, जिससे सोने जैसे डॉलर डॉमिनेटेड असेट्स की डिमांड को मजबूत समर्थन मिला। बोनांजा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के मुताबिक जैसे ही यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ बिना ब्याज वाले एसेट यानी सोने के लिए माहौल अच्छा हो गया। बाजार ने इसे दीर्घकालिक ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी को रोकने और बॉन्ड मार्केट के लंबे सिरे पर लिक्विडिटी में सुधार के प्रयास के रूप में देखा। इसके बाद यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ, जिसने सोने के लिए एक बहुत ही अनुकूल स्थिति बनाई।सिर्फ ट्रेजरी का फैसला नहीं, ये फैक्टर भी दे रहे सहाराहालांकि, सोने में आई इस तेजी के पीछे सिर्फ अमेरिकी ट्रेजरी का ऐलान ही एकमात्र कारण नहीं है। वीटी मार्केट्स के मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, ट्रेजरी का ऐलान एक दिन की तेजी को एक्सप्लेन तो करता है, लेकिन सिर्फ यही एक फैक्टर नहीं है। रुचित ठाकुर के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी रुख और मौद्रिक नीति को लेकर जताई जा रही उम्मीदें, लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिरल अनिश्चितताएं और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही मांग जैसे फैक्टर भी इसे सपोर्ट कर रहे हैं।क्या निवेशकों को इस भाव पर खरीदना चाहिए सोना?सोने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद नए और पुराने निवेशकों के लिए विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। वीटी मार्केट्स के रुचित ठाकुर का सुझाव है कि ऊंचे स्तरों पर तेजी का पीछा करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। जो लोग पहले से सोने में निवेश कर चुके हैं, वो अपनी होल्डिंग को बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं।नए निवेशकों को एक बार में बड़ा दांव लगाने या तेज उछाल के तुरंत बाद अग्रेसिव इन्वेस्टमेंट करने की बजाय कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।आगे क्या ट्रैक करें?एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने की आगे की चाल तय करने के लिए निवेशकों को आने वाले दिनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व के संकेतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीक नजर रखनी होगी।डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
19 अगस्त 2026 को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर में सीएम उमर अब्दुल्ला से मिले। उन्होंने वहीं से बयान दिया- 'जम्मू-कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैं यहां पहली बार आया। ये बहुत खूबसूरत जगह है।' इस पर भड़के पाकिस्तान ने कहा कि ये गैर-जिम्मेदाराना बयान जम्मू-कश्मीर पर अमेरिका के पुराने रुख के खिलाफ है। तो क्या वाकई अमेरिका, जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर भारत के पाले में आ गया है, क्या बयान के पीछे ट्रम्प का कोई प्लान और इससे भारत को क्या फायदा; जानेंगे आज के एक्स्प्लेनर में... सवाल-1: जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका का रुख क्या रहा है? जवाब: जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 से ही विवाद चला आ रहा है। इसको लेकर अब तक अमेरिका का रुख तीन फेज में बदला है... 1. 1947-1965: पाकिस्तान का समर्थन, कश्मीर को विवादित इलाका कहा 2. 1965-1972: कम दखल, शिमला समझौते के बाद द्विपक्षीय मामला माना 3. 2019: ट्रम्प ने पहली बार मध्यस्थता की पेशकश की अब 2026 में पहली बार अमेरिकी राजदूत ने एक कदम आगे जाकर कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है। सवाल-2: तो क्या अब ट्रम्प और अमेरिका भारत के पाले में आ गए हैं? जवाब: सर्जियो ट्रंप के करीबी हैं और जनवरी 2026 में पद संभालने के बाद से ही एक खास अंदाज में एक्टिव हैं। ट्रम्प ने उन्हें भारत के राजदूत के अलावा साउथ और सेंट्रल एशिया के कुल 11 देशों का विशेष दूत भी बनाया है। इसलिए भी सर्जियो का बयान अहम है। हालांकि इसे लेकर एक्सपर्ट्स की राय मिली-जुली है… सवाल-3: सर्जियो के इन बयानों के पीछे अमेरिका का असली मकसद क्या है? जवाब: 2 बड़े मकसद हैं... 1. भारत-अमेरिका के रिश्ते बेहतर करना 2. अमेरिकी एजेंडे को मजबूत करके फायदा उठाना सवाल-4: क्या इससे भारत को भी कुछ फायदा होगा? जवाब: सर्जियो का बयान, जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका की ऑफिशियल पॉलिसी भले न हो, लेकिन जानकार मानते हैं, इससे जो मैसेज गया है, वो भारत के फायदे का है…रिटायर्ड कैप्टन अनिल गौर कहते हैं, 'सर्जियो के बयान ने इस असलियत पर मोहर लगा दी है कि आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अशांति फैली है। लोग पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते और भारत में शामिल होना चाहते हैं।स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट सुशांत सरीन कहते हैं, 'सर्जियों का बयान भारत के लिए अच्छी खबर है। अमेरिका और अन्य देश अब इस असलियत को मानने लगे हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है।हालांकि ब्रह्म चेलानी कहते हैं, ‘कथनी और करनी में अंतर होता है। ट्रम्प ने ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की असली वजह- सीमा पार आतंकवाद पर चुप्पी साध रखी है। जबकि वो बार-बार कश्मीर को विवाद के मुख्य मुद्दे की तरह देखते रहे हैं। पाकिस्तान इसी मुद्दे को अपने आतंकवादी अभियानों के लिए आड़ की तरह इस्तेमाल करता है।’ -------- ये खबर भी पढ़िए… CM विजय, गृहमंत्री शाह से मुलाकात, सैन्य कमांड का दौरा; ट्रम्प के दूत सर्जियो गोर आखिर भारत में कर क्या रहे हैं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर तमिलनाडु के सीएम विजय थलापति से मिलने चेन्नई पहुंच गए। 4 दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। 6 महीने में 6 मुख्यमंत्रियों से मिले। दिल्ली के उपराज्यपाल और राजस्थान की डिप्टी सीएम तक से मीटिंग की। भारतीय सेना के पश्चिमी कमान हेडक्वार्टर के दौरे पर तो हंगामा भी हुआ था। पूरी खबर पढ़िए…
भारत का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) सितंबर-अक्टूबर 2026 में Su-30MKI फाइटर एयरक्राफ्ट से स्वदेशी PGB-500 प्रिसिजन-गाइडेड बम का फ्लाइट टेस्ट करने वाले हैं। 500 किलोग्राम के वॉरहेड से लैस यह बम मजबूत बंकरों, कमांड सेंटरों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। ट्रायल के दौरान, एयरक्राफ्ट पर बम को ले जाने, एरोडायनामिक बैलेंस और सुरक्षित तरीके से बम गिराने जैसी बातों की जांच की जाएगी। इसके गाइडेंस सिस्टम में GPS/INS के साथ-साथ सटीक टारगेट पर निशाना लगाने की क्षमता भी शामिल होने की उम्मीद है। PGB-500 देश में बने सटीक निशाना लगाने वाले बमों की श्रेणी का हिस्सा है। यह भारी श्रेणी का हथियार है जो बहुत सटीकता के साथ मजबूत टारगेट को भेदने में सक्षम है। सफल ट्रायल के बाद, इसे सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा। इसे भी पढ़ें: 100% स्वदेशी...फाइटर जेट इंजन पर लाल किले से मोदी का बड़ा ऐलान पड़ोसी देशों में छिपे आतंकवादियों की रातों की नींद उड़ गई है पाकिस्तान, बांग्लादेश या म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में छिपे आतंकवादियों के बंकर या ज़मीन के नीचे बने ठिकानों को अब पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। Su-30MKI में पहले से ही ब्रह्मोस, अस्त्र और रुद्रम जैसे हथियार लगे हैं; इस बम के जुड़ने से विमान की हमला करने की क्षमता और बढ़ जाएगी। सफल परीक्षणों के बाद इसे सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा। एयरक्राफ्ट के पाइलन पर बम लगाए जाएंगे शुरुआत में एक कैरिज टेस्ट किया जाएगा जिसमें बम को एयरक्राफ्ट के पाइलन पर लगाया जाएगा; इससे एरोडायनामिक लोड, ड्रैग और हैंडलिंग की विशेषताओं का पता चलेगा। इसके बाद, एक रिलीज़ टेस्ट में सुरक्षित अलग होने, नेविगेशन बैलेंस और गाइडेंस की सटीकता की जांच की जाएगी। ये टेस्ट DRDO और IAF की संयुक्त कोशिशों से किए जाएंगे। सफल टेस्टिंग के बाद ऑपरेशनल मूल्यांकन किया जाएगा। Su-30MKI जैसे मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म पर, यह हथियार नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में बहुत असरदार साबित होगा। इसे भी पढ़ें: सालों बाद भारत ने निकाला बाहुबली, पाकिस्तान में मची खलबली स्वदेशीकरण और रणनीतिक फ़ायदा यह प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' पहल का हिस्सा है। DRDO, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और प्राइवेट इंडस्ट्रीज़ के साथ मिलकर काम कर रहा है। घरेलू उत्पादन से सप्लाई चेन मज़बूत होगी और लागत कम होगी। इससे भारत की सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे सीमा सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताएँ मज़बूत होंगी। अन्य स्वदेशी हथियारों के साथ-साथ, इससे वायु सेना और भी ज़्यादा सक्षम बनेगी। सफल परीक्षण के बाद सेना में शामिल करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया शुरू होगी। यह भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता की परिपक्वता को दर्शाता है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच स्वदेशी हथियारों का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड 4500 डॉलर के करीब, निवेशकों को क्या करना चाहिए?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी का असर गोल्ड पर दिखा है। 19 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड 4,571.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हालांकि, 20 अगस्त को इसमें थोड़ी नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सवाल है कि लंबे समय बाद गोल्ड में आई तेजी पर निवेशकों को क्या करना चाहिए?गोल्ड में तेजी की वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 4.64 पर आ गई है। 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.18 फीसदी पर आ गई है। इसका सीधा असर गोल्ड की कीमतों पर पड़ा है। डॉलर इंडेक्स में नरमी से भी गोल्ड को सपोर्ट मिला है।बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव ने कहा, बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी सोने के लिए फेवरेबल है। इससे लंबी अवधि के बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी। हालांकि, गोल्ड में तेजी की वजह सिर्फ बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं है। सुरक्षित निवेश के लिए सोने में इनवेस्टमेंट बढ़ा है। दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोने में खरीदारी कर रहे हैं।20 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में गोल्ड में जोरदार तेजी दिखी। यह 4,300 रुपये के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह घरेलू बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे हाई लेवल है। चांदी में भी अच्छी खरीदारी से तेजी देखने को मिली।वीटी मार्केट्स में मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी के गोल्ड के लिए सपोर्टिव रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निवेशकों के सोने में तेजी के पीछे भागने में रिस्क है। इनवेस्टर्स सोने में अपना निवेश जारी रख सकते हैं।उन्होंने कहा कि नए निवेशक सोने में गिरावट के मौके का इस्तेमाल निवेश के लिए कर सकते हैं। कीमतें हाई रहने पर उन्हें निवेश करने से बचने की सलाह है। आगे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ट्रेंड, फेडरल रिजर्व के संकेतों और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा ने चीनी-पाकिस्तानी चालों को किया दुरुस्त!
जरा गौर कीजिए, जब चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत को आंखें दिखा रहा हो, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर/लद्दाख पहुंचना और जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भारतीय कूटनीति की कितनी बड़ी सफलता है, क्योंकि यह परोक्ष रूप से चीन को संदेश है कि भारत का साथ मिलते ही अमेरिका अन्य एशियाई 'बदमाशों' को रौंद डालेगा। उधर, पाकिस्तान को संदेश है कि इस्लामिक नाटो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं बनेगा, यदि अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहेगा। जी हां, अमेरिकी राजदूत की 19–20 अगस्त 2026 की जम्मू-कश्मीर और लद्दाख यात्रा को केवल एक राजनयिक दौरा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Sergio Gor के बयान से तिलमिलाये Pakistan ने Trump Administration पर उतारी भड़ास, US Diplomat Natalie Baker को तलब कर थमाया Strong Demarche खासकर श्रीनगर में उनका यह कहना कि जम्मू-कश्मीर “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” है और अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत देना, वाशिंगटन के पुराने कश्मीर-संबंधी सार्वजनिक रुख की तुलना में महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामरिक संकेत देता है। इससे कई सवाल उपजते हैं, जिनके निहितार्थ को समझना भी जरूरी है:- पहला सवाल है कि क्या वास्तव में अमेरिकी स्टैंड बदल गया है? तो जवाब होगा कि अपेक्षित सावधानी जरूरी है। अभी इसे अमेरिका की औपचारिक कश्मीर-नीति में पूर्ण परिवर्तन कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन राजनयिक भाषा और व्यवहार में बदलाव का संकेत स्पष्ट है। पहले अमेरिकी नीति का सार्वजनिक ढांचा मुख्यतः यह रहा कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित विषय है और दोनों देशों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। 2019 के बाद भी अमेरिकी अधिकारियों ने इस मूल स्थिति को बनाए रखा था। इसके विपरीत, गोर ने भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर में जाकर उसे “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा। पाकिस्तान ने इसे अमेरिकी पारंपरिक रुख से विचलन मानते हुए अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इसलिए फिलहाल इसे “नीति परिवर्तन” से अधिक “नीति-संकेत में परिवर्तन” कहना उचित होगा। दूसरा सवाल है कि इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश क्या है? क्या कश्मीर को जमीन पर देखकर आकलन हुआ है? तो जवाब होगा कि गोर का दौरा छह साल से अधिक अंतराल के बाद किसी अमेरिकी राजदूत की कश्मीर यात्रा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और सुरक्षा व्यवस्था तथा बदलते माहौल का प्रत्यक्ष आकलन किया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अमेरिका की कश्मीर संबंधी धारणा अब केवल इस्लामाबाद, नई दिल्ली या अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रह सकती। राजदूत का स्वयं श्रीनगर जाना और फिर सुरक्षा स्थिति पर सकारात्मक टिप्पणी करना वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को एक अलग जमीनी इनपुट देता है। तीसरा सवाल यह है कि Travel Advisory में बदलाव—छोटा दिखने वाला बड़ा संकेत है? तो जवाब होगा कि गोर ने जम्मू-कश्मीर के लिए अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत दिए हैं। अगर आगे अमेरिका अपने मौजूदा “Do Not Travel” स्तर को नीचे करता है, तो इसका असर केवल अमेरिकी पर्यटकों पर नहीं पड़ेगा। यह संदेश जाएगा कि सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार हुआ है। सामान्य आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। पर्यटन के लिए क्षेत्र अधिक खुल रहा है। अंतरराष्ट्रीय जोखिम-धारणा बदल रही है। यानी कश्मीर के लिए यह सुरक्षा से पर्यटन और पर्यटन से निवेश की दिशा में सकारात्मक कूटनीतिक संकेत बन सकता है। चौथा सवाल यह है कि क्या यह परिदृश्य पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका है? तो कहना न होगा कि इस बयान की सबसे तीखी प्रतिक्रिया पाकिस्तान से आई है। इस्लामाबाद ने इसे अपनी दशकों पुरानी कश्मीर कूटनीति के प्रतिकूल माना और अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। पाकिस्तान के लिए समस्या सिर्फ गोर का बयान नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि यदि अमेरिका जैसा प्रभावशाली देश धीरे-धीरे कश्मीर को “भारत-पाकिस्तान के विवाद” की भाषा से हटाकर “भारत के महत्वपूर्ण हिस्से” की भाषा में संबोधित करने लगे, तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रणनीति कमजोर हो सकती है। पांचवां सवाल यह है कि क्या चीन का कोण भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता? तो जवाब होगा कि गोर का कार्यक्रम केवल श्रीनगर तक सीमित नहीं रहा; वह लद्दाख भी गए। यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि लद्दाख भारत-चीन सीमा-सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए यात्रा का एक व्यापक संदेश यह भी हो सकता है कि अमेरिका भारत के पश्चिमी और उत्तरी दोनों रणनीतिक मोर्चों को अपने Indo-Pacific और South/Central Asia दृष्टिकोण से देख रहा है। छठा सवाल यह है कि क्या भारत-अमेरिका संबंधों में कश्मीर की भूमिका बदल सकती है? तो कहना न होगा कि यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका संबंधों के उस व्यापक पुनर्संतुलन का हिस्सा हो सकता है जिसमेंआतंकवाद के विरुद्ध सहयोग, चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला, हिंद-प्रशांत रणनीति, रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा एवं व्यापार, और दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। गोर स्वयं भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ South and Central Asian Affairs के Special Envoy भी हैं। इसलिए उनकी टिप्पणी का महत्व सामान्य राजदूत की टिप्पणी से अधिक माना जा सकता है। सातवां सवाल यह है कि क्या भारत को अति-उत्साहित होने से भी बचना होगा? तो जवाब होगा कि यहां एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सावधानी बरतनी जरूरी है क्योंकि एक राजदूत का बयान अमेरिकी सरकार की पूरी औपचारिक विदेश नीति का विकल्प नहीं होता। जब तक अमेरिकी विदेश विभाग या व्हाइट हाउस अपनी आधिकारिक नीति में स्पष्ट बदलाव घोषित नहीं करता, तब तक यह कहना कि “अमेरिका ने कश्मीर पर पाकिस्तान को छोड़कर भारत का पक्ष ले लिया है” अतिशयोक्ति होगी। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि अमेरिकी सार्वजनिक कूटनीतिक भाषा में एक उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दे रहा है। आठवां सवाल यह है कि सबसे बड़ा रणनीतिक निहितार्थ क्या है? तो जवाब होगा कि मेरे आकलन में इस यात्रा का वास्तविक महत्व चार शब्दों में है: “Narrative → Ground Reality → Policy.” यदि अमेरिका को जमीनी स्तर पर कश्मीर में सुरक्षा, राजनीतिक प्रक्रिया, पर्यटन और आर्थिक सामान्यीकरण दिखाई देता है और उसके आधार पर उसकी यात्रा चेतावनी कम होती है, तो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव भी बदल सकता है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा। निष्कर्षतः, सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे अभी अमेरिकी कश्मीर नीति का अंतिम परिवर्तन घोषित करना जल्दबाजी होगी। असली परीक्षा अगले चरण में होगी—क्या Washington अपनी आधिकारिक भाषा बदलेगा, क्या travel advisory घटेगी और क्या भविष्य में अमेरिकी अधिकारी कश्मीर को भारत के आंतरिक प्रशासनिक-सुरक्षा संदर्भ में अधिक स्पष्टता से देखेंगे? अगर इन तीनों प्रश्नों का उत्तर “हाँ” होता है, तो गोर की यह यात्रा दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण turning point सिद्ध हो सकती है। # क्या ईरान में पिटी अमेरिकी भद्द और पाकिस्तान के दोगले रवैये से अचंभित अमेरिका ने ऐसा किया हाँ—इसे एक संभावित कारण के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन निर्णायक कारण कहना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध घटनाक्रम को जोड़ें तो अमेरिकी सोच में पाकिस्तान को लेकर विश्वसनीयता का प्रश्न जरूर उभरता है। सवाल है कि क्या ईरान प्रकरण ने अमेरिका को पाकिस्तान को नए नजरिये से देखने पर मजबूर किया? जवाब होगा कि ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान ने एक तरफ अमेरिका के साथ संवाद और मध्यस्थता की भूमिका निभाई, जबकि दूसरी तरफ ईरान के प्रति अपनी निकटता और क्षेत्रीय हितों को भी साधता रहा। विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं—विशेषकर ईरान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब से उसके एक साथ जुड़े हितों को देखते हुए। यानी Washington के लिए संदेश यह हो सकता है कि पाकिस्तान को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार की बजाय आवश्यकता पड़ने पर उपयोगी लेकिन स्वार्थ-आधारित साझेदार के रूप में देखना अधिक व्यावहारिक है। लेकिन कश्मीर पर गोर का बयान सिर्फ पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए? मेरे आकलन में नहीं। क्योंकि सर्जियो गोर ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए अमेरिकी Travel Advisory की समीक्षा की बात कही। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि यह अमेरिकी पारंपरिक कश्मीर-रुख के विपरीत है। इसलिए इसके पीछे कई परतें हो सकती हैं: 1. ईरान: पाकिस्तान की मध्यस्थता और दोहरे हितों से अमेरिकी रणनीतिक संदेह बढ़ा हो। 2. आतंकवाद: अमेरिका के लिए पाकिस्तान की उपयोगिता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन फिर से हो रहा हो। 3. भारत: चीन के मुकाबले भारत का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। 4. कश्मीर: जमीनी सुरक्षा परिस्थितियों को देखकर अमेरिकी धारणा में बदलाव की शुरुआत हुई हो। 5. पाकिस्तान: Washington अब Islamabad को South Asia का अनिवार्य रणनीतिक केंद्र मानने की बजाय भारत को अधिक महत्व दे रहा हो। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि यह बदलाव ईरान संकट के बाद पाकिस्तान की भूमिका बढ़ने के ठीक उसी दौर में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपनी कूटनीतिक उपयोगिता बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन यदि उसी समय अमेरिका का शीर्ष राजनयिक भारत में जाकर कहता है कि J&K भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, तो यह पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से बड़ा कूटनीतिक झटका है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अमेरिका का संदेश है: “Pakistan may be useful, but India is strategically indispensable.” हालांकि अभी इसे अमेरिकी नीति का औपचारिक परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। अगली निर्णायक परीक्षा यह होगी कि Washington अपनी आधिकारिक Kashmir language और Travel Advisory में वास्तव में क्या बदलाव करता है। और एक बड़ा प्रश्न इससे निकलता है—क्या ईरान संकट, पाकिस्तान की कथित दोहरी कूटनीति और चीन की बढ़ती चुनौती ने अमेरिका को अंततः यह समझा दिया है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान से अधिक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार भारत है? यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण यक्ष प्रश्न है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
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तुझ पे ही भरोसा, तू ही सहारा, भारत बिना नहीं चला अमेरिका का गुजारा? धमकी-टैरिफ सब टांय-टांय फिस्स
धमकी, टैरिफ और वॉशिंगटन का सारा जोर... मगर नतीजा वही-ढाक के तीन पात! डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर में टैरिफ का जितना भी डंडा चलाया हो, लेकिन जब बात भारत से खरीदारी की आई, तो अमरीकी बाजार का काम बिना हिंदुस्तानी सामान के नहीं चल पाया। आंकड़े गवाह हैं कि जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच एक्सपोर्ट में सिर्फ 2% के आसपास की मामूली खरोंच आई, जबकि भारत के कुल निर्यात में अमरीका की हिस्सेदारी आज भी करीब 20% पर सीना ताने खड़ी है। यानी ट्रंप की धमकियों का शोर चाहे जितना रहा हो, व्यापार के मैदान में भारत का जलवा आज भी बरकरार है। इसे भी पढ़ें: SIR मॉडल से अमरीकी चुनाव सुधारेंगे डोनाल्ड ट्रंप? क्या भारतीय चुनाव प्रणाली से प्रेरित है 'सेव अमेरिका एक्ट' अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बना हुआ 2025-26 में भी अमेरिका भारत के एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन में सबसे आगे रहा। इस दौरान $87.31 बिलियन का एक्सपोर्ट हुआ, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह आंकड़ा $86.51 बिलियन था। $37.37 बिलियन के साथ UAE दूसरा सबसे बड़ा डेस्टिनेशन रहा, और उसके बाद $19.48 बिलियन के साथ चीन का स्थान रहा। हालांकि, चीन को भारत के एक्सपोर्ट में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई और जुलाई तक के 12 महीनों में इसमें 42% की वृद्धि दर्ज की गई। अन्य प्रमुख बाज़ारों में नीदरलैंड ($17.50 बिलियन) और यूके ($13.44 बिलियन) शामिल थे। भारत ने अपने एक्सपोर्ट किए जाने वाले प्रोडक्ट्स का दायरा भी बढ़ाया है और लगभग 500 नई प्रोडक्ट लाइनें जोड़ी हैं, जिनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग के सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण और टेक्सटाइल के भारतीय एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका खास तौर पर अहम बना हुआ है। महीनों की बातचीत के बावजूद, भारत और अमेरिका अभी तक अपने व्यापक व्यापार समझौते को औपचारिक रूप से पूरा नहीं कर पाए हैं। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर का बयान, इतना बौखलाया पाकिस्तान, अमेरिकी राजनयिक को कर लिया तलब, ट्रंप का रिएक्शन देखने वाला होगा! इस बीच, तंजानिया, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और केन्या जैसे कई छोटे बाजारों में एक्सपोर्ट में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि कुल मिलाकर उनका योगदान अमेरिका की तुलना में काफी कम है। ट्रेड एनालिस्ट और सेंटर फॉर WTO स्टडीज़ के पूर्व प्रमुख प्रीतम बनर्जी ने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत को चीन से मैन्युफैक्चरिंग को अपनी ओर खींचने में मदद कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यह मौका सीमित हो सकता है। उन्होंने कहा कि G20 अर्थव्यवस्थाओं (जिनका ग्लोबल GDP में लगभग 85% हिस्सा है) के साथ-साथ लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाजारों के साथ गहरे जुड़ाव से भारत को इस बदलाव को तेज करने में मदद मिल सकती है। भारत ने व्यापार में विविधता लाने की कोशिशें तेज़ कीं अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण भारत ने दूसरे बड़े बाज़ारों के साथ बातचीत तेज़ कर दी है और निर्यात के लिए नई जगहें तलाश रहा है। भारत ने UK के साथ एक व्यापार समझौता किया जो जुलाई में लागू हुआ, जबकि यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ भी 2026 में समझौते हुए, लेकिन वे अभी लागू नहीं हुए हैं। भारत ने कई अन्य बाज़ारों के साथ भी व्यापार बातचीत फिर से शुरू की है या तेज़ की है, जिनमें गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, कनाडा, इज़राइल, पेरू, चिली और सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन शामिल हैं। फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइज़ेशन्स के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा कि इंडस्ट्री इस बात को लेकर बहुत सतर्क हो गई है कि जोखिम कम करने की रणनीति के तौर पर उन्हें विविधता लानी होगी। और इस नज़रिए से, मुझे लगता है कि अमेरिका के टैरिफ़ वॉर ने हमें एक बहुत अच्छा सबक सिखाया है। सहाय ने कहा कि बाज़ार में विविधता लाने के असर को सार्थक होने में दो से तीन साल लग सकते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय व्यवसायों के लिए अमेरिका सबसे आकर्षक निर्यात बाज़ार बना हुआ है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत उन अर्थव्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो मिलकर वैश्विक GDP का दो-तिहाई से ज़्यादा हिस्सा बनाती हैं।
बैंक ऑफ़ अमेरिका के सर्वे में इंडोनेशिया से पिछड़ा भारत, मार्केट में क्यों नहीं लौट पा रहा भरोसा?
इस सर्वे के मुताबिक़, भारतीय शेयरों को लेकर सबसे बड़ी चिंता आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अच्छी कंपनियों का अभाव है. इसके बाद कमज़ोर आर्थिक वृद्धि सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है.
अमेरिका में RSS प्रमुख मोहन भागवत विरोध के पीछे कौन? जानें 'एंटी-इंडिया' अभियान का पूरा कनेक्शन
अमेरिका में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे आखिर कौन है? ये प्रदर्शन महज भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक संगठित एंटी-इंडिया अभियान का हिस्सा हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से मांग की है कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाए और इसके नेताओं को किसी भी प्रकार का राजनयिक सम्मान या उच्चस्तरीय बैठकें न दी जाएं। आयोग का यह तीखा बयान संघ प्रमुख मोहन भागवत के संभावित अमेरिका दौरे से कुछ ही दिन पहले सामने आया है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।USCIRF के अध्यक्ष और कमिश्नर के बयानअमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने एक बयान में दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है। इसी आधार पर आयोग की कमिश्नर जीन मिल्स ने भी अमेरिकी प्रशासन से यह अपील की है कि धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।क्या है मोहन भागवत का विदेशी दौरा कार्यक्रम?संघ प्रमुख मोहन भागवत आगामी 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के महत्वपूर्ण दौरे पर जाने वाले हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके इस दौरे को लेकर विदेशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और विभिन्न संगठनों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है।कनाडा के 100 से अधिक संगठनों ने किया समर्थनदूसरी ओर, आरएसएस प्रमुख के इस दौरे का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है। कनाडा के 100 से अधिक प्रमुख संगठनों और समूहों ने खुलकर मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। इन संगठनों ने कनाडा के प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रियों को औपचारिक पत्र लिखकर उनके दौरे को रोकने की मांग करने वाले तत्वों को खारिज करने की अपील की है। समर्थन करने वाले समूहों का कहना है कि किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पुख्ता, स्वतंत्र और निष्पक्ष सबूत होने चाहिए तथा स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।
Rajat Sharma's Blog: कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत का संदेश दूर तलक जाएगा
सर्जियो गोर ने कहा कि मोदी सरकार ने कश्मीर को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बना दिया है, इसलिए अमेरिका जल्द ही अपने नागरिकों के लिए जारी की गई नेगेटिव ट्रेवल एडवाइज़री की समीक्षा करेगा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार कोई अमेरिकी राजदूत कश्मीर गया, इसलिए उनका एक-एक बयान महत्वपूर्ण है।
'भारत के पति ज्यादा अमीर...', अमेरिका से अनिरुद्धाचार्य का Video वायरल
आध्यात्मिक गुरु अनिरुद्धाचार्य जी का अमेरिका के एक किराना स्टोर पर ₹400 के पराठे को देखकर हैरान हो गए. उनका रिएक्शन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसने विदेश में रहने के दौरान आने वाली चुनौतियों, खाने की कीमतों, सुविधा और व्यस्त जीवनशैली पर बहस छेड़ दी है.
अमेरिका ने बनाए 113 AI मॉडल, चीन ने 91... भारत ने कितने बनाए?
दुनिया में आज 257 AI मॉडल ऐसे हैं जिन्हें डेवलपर्स खरीदकर इस्तेमाल कर सकते हैं. इनमें सिर्फ दो मॉडल भारत में बने हैं. भारत में होने वाले AI के ज्यादातर काम के लिए अमेरिकी और चीनी कंपनियों के मॉडल इस्तेमाल हो रहे हैं.
धमकी, टैरिफ फुस्स... नहीं चला अमेरिका का गुजारा? भारत ही सहारा
India US Trade: तमाम अमेरिकी दबाव के बावजूद कुल भारतीय एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 20% बनी हुई है. क्योंकि अमेरिकी बाजार से भारतीय सामान की मांग में अब तक बड़ी गिरावट नहीं आई है.
मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले वहां के संगठन ने जताई नाराज़गी, क्या है मामला
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का अमेरिका दौरा 25 अगस्त से प्रस्तावित है. लेकिन उनकी इस यात्रा को लेकर अमेरिका के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं.
चार पैरों वाले 'रोबोट डॉग्स' (Quadruped Robots) अब केवल टेक शो की शोभा नहीं बढ़ा रहे, बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के सैन्य अभियानों और अत्याधुनिक हथियारों की नई होड़ का केंद्र बन चुके हैं।
अमेरिका के घरेलू मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश:ईरान विदेश मंत्री अब्बास अरागची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रतिबंधों के अभियान को अमेरिका के घरेलू मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि तथाकथित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ से वाशिंगटन को और हार ही मिलेगी। यह कदम तब उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच कोई समझौता […] The post अमेरिका के घरेलू मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश:ईरान विदेश मंत्री अब्बास अरागची appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
ईरान के कब्जे में है होर्मुज़, फिर चोरी-चोरी कैसे तेल निकाल रहा अमेरिका? जानें ट्रंप का सीक्रेट मिशन
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। ईरान होर्मुज पर अपना पूरा नियंत्रण रखने का दावा कर रहा है, लेकिन अमेरिका चोरी चोरी होर्मुज से तेल निकाल ले जा रहा है। जानें ट्रंप का सीक्रेट मिशन कैसे कर रहा काम?
अमेरिका के साथ बातचीत करने का मतलब आत्मसमर्पण नहीं: ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत करने का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है।
भारत-अमेरिका के मुकाबले हमारे लोगों से यूएई में सुलूक अच्छा नहीं हुआ: पाकिस्तानी सांसद का छलका दर्द
इस्लामाबाद, 20 अगस्त . Pakistan के सांसद और नेशनल असेंबली के पूर्व अध्यक्ष असद कैसर ने संसद में अपने नागरिकों की विदेशी जमीं पर अनदेखी का मुद्दा उठाया. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर आरोप लगाया कि उन्होंने Pakistanियों के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया. पूर्व स्पीकर ने संसद सत्र के दौरान दिए गए अपने ... Read more
अमेरिकी राजदूत ने किए 'परी महल' के दीदार, खूबसूरती के हुए कायल
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के श्रीनगर दौरे के बाद परी महल सुर्खियों में आ गया है. डल झील के पास जबरवान पहाड़ी पर स्थित 17वीं शताब्दी का यह मुगलकालीन स्मारक काफी फेमस है. आइए आपको परी महल के बारे में बताते हैं कि इसे किसने बनवाया था और इसकी क्या खासियत है. इसे आप अपनी कश्मीर ट्रिप के लिए बकेट लिस्ट में शामिल कर सकते हैं.
मध्य पूर्व और दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में इस समय तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है, और इसका सबसे बड़ा कारण ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता हुआ वाकयुद्ध है। एक तरफ जहां वैश्विक महाशक्तियों के बीच परमाणु हथियारों और सुरक्षा को लेकर खींचतान जारी है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान के तेवर और भी अधिक आक्रामक हो गए हैं। ईरानी सरकार के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों की तरफ से एक बार फिर अमेरिका को खुली चेतावनी जारी की गई है। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका या उसके किसी भी सहयोगी देश ने उसकी धरती पर कोई भी परमाणु या सैन्य हमला करने की हिमाकत की, तो उसका बेहद करारा और तबाही मचाने वाला जवाब दिया जाएगा। इस तीखी बयानबाजी के बीच ईरानी रणनीतिकारों की नजरें अब यूरोपीय देशों की चाल और उनकी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है।तेहरान और वॉशिंगटन के बीच क्यों बढ़ रहा है तनाव?पिछले कुछ महीनों के दौरान अमेरिका और ईरान के आपसी संबंध किसी भी समय एक बड़े सैन्य टकराव में बदलने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रमों, उसके यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के बढ़ते स्तर और मध्य पूर्व में उसके प्रॉक्सी समूहों की गतिविधियों को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार तेहरान पर दबाव बना रहे हैं। अमेरिका और इजराइल जैसे देश यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते कि ईरान परमाणु हथियारों की दहलीज तक पहुंचे, जबकि ईरान का हमेशा से यह तर्क रहा है कि उसका पूरा परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों और ऊर्जा जरूरतों के लिए है। इसी बुनियादी वैचारिक और सामरिक मतभेद के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगभग ठप हो चुका है और सैन्य मोर्चे पर दोनों तरफ से लगातार धमकियों का दौर जारी है।ईरान की सैन्य चेतावनी और देश की रक्षा तैयारियांईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और सरकारी प्रवक्ताओं ने हाल ही में अपने एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल अपनी संप्रभुता और देश की भौगोलिक अखंडता की रक्षा करने के लिए पूरी क्षमता रखते हैं। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि वॉशिंगटन सरकार ने कोई भी दुस्साहसपूर्ण कदम उठाया, तो मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और उनके हितों को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। ईरान की इस आक्रामक रणनीति का उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगियों को किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई करने से रोकना है, ताकि वे कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी शर्तों पर बात करने के लिए मजबूर हों।यूरोपीय देशों की संदिग्ध भूमिका और तेहरान की पैनी नजरइस पूरे भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच ईरान की कूटनीति का एक बहुत बड़ा फोकस यूरोप और यूरोपीय संघ (EU) के रुख पर है। तेहरान अच्छी तरह जानता है कि अमेरिका के साथ सीधे टकराव को टालने या नियंत्रित करने में यूरोपीय देश एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे प्रमुख यूरोपीय देश अभी तक अमेरिकी नीतियों के ही समर्थन में खड़े नजर आए हैं और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को बनाए रखने की वकालत करते रहे हैं। इसके बावजूद, ईरान लगातार यूरोपीय राजधानियों के साथ अपने राजनयिक चैनलों को खुला रखने की कोशिश कर रहा है ताकि यदि वॉशिंगटन के साथ कोई गंभीर संकट पैदा हो, तो यूरोपीय देशों के जरिए कुछ कूटनीतिक गुंजाइश बनाई जा सके। तेहरान की यह पैनी नजर इस बात का संकेत है कि वह केवल सैन्य ताकत के भरोसे नहीं, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी पूरी चालें चल रहा है।वैश्विक शांति के लिए मंडराते खतरे और आगे की राहईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह शीत युद्ध और इस तरह की परमाणु धमकियां पूरी दुनिया के लिए गहरी चिंता का विषय बन चुकी हैं। यदि इन दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष छिड़ जाता है, तो इसके परिणाम न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं। कच्चे तेल की आपूर्ति से लेकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार तक सब कुछ भारी संकट में पड़ सकता है। दुनिया भर के शांतिप्रिय देश और संयुक्त राष्ट्र (UN) लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर जिस प्रकार की आक्रामक बयानबाजी और सैन्य तैयारियां चल रही हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद उथल-पुथल भरे और संवेदनशील रहने वाले हैं।
मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बहुत बड़ा और हैरान कर देने वाला भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रक्षा गलियारों से मिल रही खुफिया जानकारियों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने ईरान की नाक के नीचे से एक बेहद गुप्त और सुरक्षित सीक्रेट शिपिंग रूट का निर्माण कर लिया है। इस नए और वैकल्पिक मार्ग के जरिए दुनिया के सबसे व्यस्त तेल गलियारे से रोजाना लाखों बैरल कच्चे तेल और आवश्यक रसद के जहाजों को सुरक्षित रूप से निकाला जा रहा है, और सबसे बड़ी बात यह है कि इस बात की भनक ईरानी सेना या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को लगी तक नहीं है। अमेरिकी नौसेना की इस सामरिक और तकनीकी चाल ने ईरान के तमाम दावों और पहरेदारी को पूरी तरह से धता बता दिया है।होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व और तनावहोर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर के कच्चे तेल के व्यापार की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि खाड़ी देशों से निकलने वाले ऑयल टैंकरों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी तंग समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका और ईरान के बीच इस क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। ईरानी सेना अक्सर इस रास्ते को बंद करने या यहां से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को धमकाने की साजिशें रचती रहती है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले इस मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ईरान लगातार एंटी-शिप मिसाइलें और नौसैनिक अभ्यास करता रहा है। ऐसे में, अमेरिकी सेना द्वारा इस इलाके में एक ऐसा खुफिया और सुरक्षित रास्ता ढूंढ निकालना या तैयार करना, जहां ईरान की रडार और सर्विलांस प्रणालियां पूरी तरह से फेल हो चुकी हैं, अमेरिकी सैन्य क्षमता का एक अद्भुत और अकल्पनीय उदाहरण माना जा रहा है।कैसे तैयार हुआ यह सीक्रेट रूट और क्या है इसकी खासियत?अमेरिकी नौसेना के रणनीतिकारों और आधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोतों ने मिलकर इस जटिल अभियान को अंजाम दिया है। इस सीक्रेट शिपिंग रूट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट नेविगेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ईरानी सेना की कोस्टल रडार प्रणालियां और ड्रोन पूरी तरह से 'अंधे' हो चुके हैं। वे यह भांप ही नहीं पा रहे हैं कि कब अमेरिकी सुरक्षा घेरे में तेल टैंकर चुपचाप इस क्षेत्र से पार निकल जाते हैं। इस गुप्त मार्ग के जरिए रोजाना लाखों बैरल तेल सुरक्षित रूप से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Global Energy Supply Chain) में किसी भी प्रकार का बड़ा व्यवधान आने से बच गया है। वाशिंगटन की इस मास्टरस्ट्रोक रणनीति से तेहरान के रणनीतिकार गहरे सदमे में हैं।ईरानी सेना और नेतृत्व की खुली नाकामी और खीझजब से ईरान को इस बात का अहसास हुआ है कि उसकी नौसैनिक नाकेबंदी और धमकियों के बावजूद अमेरिकी जहाज उसकी नजरों से बचकर लगातार तेल और हथियार निकाल रहे हैं, तब से ईरानी सैन्य मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और रिवोल्यूशनरी गार्ड के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक मानी जा रही है, क्योंकि वे अपनी सीमाओं के ठीक पास चल रही इस बड़ी अमेरिकी गतिविधि को रोकने में पूरी तरह असमर्थ साबित हुए हैं। ईरानी मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसको लेकर काफी खलबली मची हुई है, और वे इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ एक बड़ा खतरा बता रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) की तरफ से इस सीक्रेट रूट के बारे में आधिकारिक तौर पर बहुत ज्यादा खुलासे नहीं किए गए हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कदम खाड़ी देशों में अमेरिका के दबदबे को और अधिक मजबूत करेगा।वैश्विक ऊर्जा बाजारों और भारत जैसे देशों पर इसका क्या असर होगा?इस पूरे घटनाक्रम का सीधा और सकारात्मक असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिल रहा है। चूंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य टकराव या रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। अमेरिका द्वारा इस सुरक्षित और गुप्त मार्ग को संचालित करने से तेल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, जिससे भारत सहित कई अन्य प्रमुख विकासशील देशों को बड़ी राहत मिली है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र के आयात पर निर्भर हैं। बहरहाल, मध्य पूर्व के इस उबलते हुए समंदर में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह नया शीत युद्ध आने वाले दिनों में और अधिक रंग दिखा सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
अमेरिका का कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, जानिए हर नागरिक पर कितना है भारी भरकम बोझ
दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवर अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले अमेरिका (United States) के सिर पर एक ऐसा वित्तीय संकट मंडराने लगा है, जिसने पूरी ग्लोबल इकोनॉमी के होश उड़ा दिए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय से आए हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश का कुल राष्ट्रीय कर्ज (National Debt) इतिहास में पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक और चौंकाने वाले आंकड़े को पार कर गया है। इस बेकाबू होती वित्तीय स्थिति ने न केवल अमेरिकी नीति निर्माताओं और सांसदों को चिंता में डाल दिया है, बल्कि दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों के बीच भी इस बात की बहस छेड़ दी है कि क्या ग्लोबल सुपरपावर आने वाले समय में एक बड़े आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रहा है। अमेरिका पर चढ़ा यह कर्ज इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि इसके आंकड़े देखकर हर कोई हैरान है।कैसे और क्यों बेकाबू हुआ अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज?विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के बजट घाटे (Budget Deficit) में लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर उधार लेना पड़ा है। अमेरिकी सरकार के खर्च उसकी टैक्स से होने वाली कुल आमदनी से कहीं ज्यादा हो चुके हैं। रक्षा बजट, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (Social Security), स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च और पिछले दशकों में दिए गए कई बड़े आर्थिक पैकेजों व राहत पैकेजों के कारण सरकार पर देनदारियों का बोझ तेजी से बढ़ता चला गया। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में लंबे समय तक उतार-चढ़ाव बनाए रखने के कारण सरकार को अपने पुराने कर्जों पर भारी-भरकम ब्याज भी चुकाना पड़ रहा है, जिससे यह लोन का पहाड़ और अधिक विकराल रूप लेता जा रहा है।देश के हर नागरिक और परिवार पर कितना है कर्ज का बोझ?जब 40 ट्रिलियन डॉलर के इस विशालकाय आंकड़े को अमेरिका की कुल आबादी के बीच बांटा जाता है, तो स्थिति और भी डरावनी नजर आती है। वर्तमान जनसांख्यिकीय आंकड़ों के हिसाब से अमेरिका के प्रत्येक नागरिक के सिर पर औसतन एक लाख डॉलर से भी ज्यादा का सरकारी कर्ज आ चुका है। अगर बात एक आम अमेरिकी परिवार की करें, तो उनके हिस्से आने वाला यह कर्ज कई लाख डॉलर बैठता है। देश के नवजात शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर व्यक्ति पर यह अदृश्य आर्थिक बोझ लटक रहा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह स्थिति दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है और यदि इस पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई, तो अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर भविष्य में टैक्स का बोझ और ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे उनकी क्रय शक्ति पर गहरा असर पड़ेगा।वैश्विक अर्थव्यवस्था और डॉलर पर क्या होगा इसका असर?अमेरिका के इस बढ़ते कर्ज का असर केवल अमेरिकी सीमाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अमेरिकी डॉलर दुनिया की मुख्य रिजर्व करेंसी होने के कारण, अमेरिका की वित्तीय सेहत में आने वाले किसी भी उतार-चढ़ाव से ग्लोबल मार्केट हिल जाता है। इस भारी-भरकम कर्ज के चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई और मंदी (Stagflation) का जोखिम काफी बढ़ गया है। इसके अलावा, वैश्विक निवेशक अब अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाने लगे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि अमेरिकी सरकार ने फिस्कल डेफिसिट को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में अस्थिरता और अधिक गहरी हो सकती है।क्या है इस संकट का आगे का रास्ता और समाधान?इस विकट परिस्थिति से निपटने के लिए अमेरिकी कांग्रेस (Congress) और बाइडन प्रशासन के सामने आने वाले दिनों में कड़े और अलोकप्रिय वित्तीय फैसले लेने की बड़ी चुनौती होगी। सरकार के पास दो ही मुख्य विकल्प बचते हैं या तो अपने भारी-भरकम खर्चों में ऐतिहासिक कटौती की जाए या फिर देश में टैक्स की दरों को बढ़ाया जाए, हालांकि राजनीतिक रूप से ये दोनों ही रास्ते बेहद कठिन माने जाते हैं। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही दल इस बात पर बहस कर रहे हैं कि देश के राजकोषीय अनुशासन को कैसे वापस लाया जाए, लेकिन राजनीतिक सहमति न बन पाने के कारण कर्ज का यह ग्राफ लगातार ऊपर की ओर ही भाग रहा है। आने वाले समय में दुनिया भर की निगाहें अमेरिकी नीतियों और उसकी आर्थिक चाल पर टिकी रहेंगी, क्योंकि इस संकट का असर हर देश के व्यापार और बाजारों पर पड़ना तय है।
सिर्फ इंडियन, अमेरिकन की एंट्री... UAE में पाकिस्तानियों को नहीं मिला होटल, दर-दर भटके
पाकिस्तान के पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर और PTI नेता असद कैसर ने UAE में पाकिस्तानी यात्रियों के साथ कथित भेदभाव का आरोप लगाया है. उनका दावा है कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद होटल में सिर्फ भारतीय और अमेरिकी पासपोर्ट धारकों को ठहरने की अनुमति दी गई. कैसर ने पाकिस्तान सरकार से UAE के सामने यह मुद्दा उठाने की मांग की है.
अमेरिका का साथ लेकर क्या इराक़ अपना पाला बदल रहा है?
इराक़ के नए प्रधानमंत्री अली ज़ैदी ने अमेरिका और तुर्की का दौरा करके संबंधों को गरमाहट देने की कोशिश की है. इसे ईरान के प्रति इराक़ की बदलती रणनीति के तौर पर क्यों देखा जा रहा है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
कोरियाई प्रायद्वीप पर अमेरिका-चीन की नजर, किम को लेकर ट्रंप के बयान से बढ़ी कूटनीतिक हलचल
कोरियाई प्रायद्वीप 'टॉक ऑफ द टाउन' है यानी सुर्खियों में है। ये एक बार फिर बड़ी शक्तियों की कूटनीति का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मुलाकात करने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोल में कहा है कि बीजिंग कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता के लिए अपनी “रचनात्मक भूमिका” जारी रखेगा।
सर्जियो गोर के बयान पर पाकिस्तान का पलटवार! अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर दर्ज कराया विरोध
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए बयान पर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस मामले में इस्लामाबाद ने अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर को विदेश मंत्रालय में तलब किया और गोर की टिप्पणी के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर ‘स्ट्रॉन्ग डिमार्श’ […] The post सर्जियो गोर के बयान पर पाकिस्तान का पलटवार! अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर दर्ज कराया विरोध first appeared on Sanjeevni Today .
अमेरिका में ईंट-सीमेंट नहीं, लकड़ी से क्यों बनते हैं ज्यादातर घर?
अमेरिका में बड़ी संख्या में घर लकड़ी के फ्रेम पर बनाए जाते हैं. इसके पीछे सिर्फ परंपरा नहीं,कम समय में निर्माण, लागत, मौसम और घर के अंदर टेंपरेचर कंट्रोल रखने जैसे कई कारण हैं. चलिए जानते हैं.
USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध की मांग की, मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से पहले बढ़ा विवाद
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने की अपील की है। महमूद का यह बयान RSS प्रमुख ...
अमेरिका में आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग, मोहन भागवत के दौरे से पहले यूएससीआईआरएफ ने उठाए सवाल
मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले यूएससीआईआरएफ अधिकारियों ने आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान और हाई-लेवल मीटिंग से दूर रखने की मांग की है। भारत यूएससीआईआरएफ की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण बता चुका है।
सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से USCIRF क्यों है परेशान?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के विदेश दौरे पर उन शक्तियों की भी नजर है, जो भारत को बढ़ते हुए नहीं देख सकती। अमेरिका की संस्था यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (USCIRF) ने एक बार फिर भारत के प्रति अपनी कुटिल सोच का परिचय दिया है। इस संस्था ने सरसंघचालक […]
अमेरिका ने बिजली संकट टालने के लिए आपातकालीन अधिकार का किया इस्तेमाल, 65 मिलियन लोगों को मिलेगी राहत
वाशिंगटन, 20 अगस्त . ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका के मिड-अटलांटिक क्षेत्र में बिजली कटौती का खतरा कम करने के लिए आपातकालीन संघीय अधिकार का इस्तेमाल किया है. यह इलाका 13 राज्यों और वाशिंगटन डीसी में करीब 6.5 करोड़ लोगों को बिजली सप्लाई करता है. ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने Wednesday को स्थानीय समय के अनुसार ... Read more
कर्ज के बोझ तले दबा अमेरिका, टूटा नया रिकॉर्ड
अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है. वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुल सार्वजनिक कर्ज 40.047 ट्रिलियन डॉलर दर्ज किया गया. पिछले करीब 10 महीनों में कर्ज में 2 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. रक्षा, सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर और बढ़ते ब्याज खर्च से सरकार पर दबाव बढ़ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर भविष्य के बजट और आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है.
बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को लेकर अमेरिकी सीनेटर ने मेटा पर उठाए सवाल
वॉशिंगटन, 20 अगस्त . अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग से उन पेड विज्ञापनों को लेकर जवाब मांगा है, जिनमें कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल) शामिल थी. वॉर्नर ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए उस पूर्व जांच का भी हवाला दिया, ... Read more
अमेरिकी नागरिक पर आईसीई एजेंट के बंदूक तानने की घटना के बाद अमेरिकी सांसद ने एफबीआई जांच की मांग की
वॉशिंगटन, 20 अगस्त . भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम और पांच अन्य अमेरिकी सांसदों ने उत्तरी वर्जीनिया में हुई एक घटना की एफबीआई जांच और न्याय विभाग द्वारा नागरिक अधिकारों की समीक्षा कराने की मांग की है. आरोप है कि इस घटना के दौरान एक आव्रजन (इमिग्रेशन) एजेंट ने एक अमेरिकी नागरिक पर ... Read more
अमेरिकी अर्थव्यवस्था एक बार फिर बड़े वित्तीय संकट के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी, सोशल सिक्योरिटी व मेडिकेयर जैसे सामाजिक कार्यक्रमों के विस्तार और बढ़ते ब्याज भुगतानों के कारण अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्तर को पार कर गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह चौथी बार है जब अमेरिकी कर्ज ने कोई नया रिकॉर्ड बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी लंबे समय के तनाव, नौसैनिक नाकेबंदी और भारी सैन्य अभियानों के वित्तीय बोझ ने इस आंकड़े को तेजी से बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। मार्च में 39 ट्रिलियन डॉलर और अक्टूबर में 38 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार करने के बाद, कर्ज का स्तर सिर्फ़ पांच महीनों में 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। कर्ज में यह तेज़ी US सरकार पर अलग-अलग प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने का दबाव दिखाती है, जिसमें रक्षा खर्च बढ़ाना और ईंधन व किराने के सामान जैसी ज़रूरी चीज़ों की लागत कम करने की कोशिशें शामिल हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि ट्रंप प्रशासन संघीय खर्च में बर्बादी, धोखाधड़ी और दुरुपयोग को कम करने के साथ-साथ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और देश के कर्ज-से-GDP अनुपात को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ट्रंप के कार्यकाल में चौथी बार रिकॉर्ड ऊंचाई जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद से, US का राष्ट्रीय कर्ज लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया है और चार बार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा है। उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में यह लगभग 36.2 ट्रिलियन डॉलर था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा हो गया। इस दौरान, कर्ज अगस्त 2025 में 37 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया, अक्टूबर में 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा, मार्च 2026 में 39 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर चला गया और फिर अगस्त 2026 में 40 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया। कर्ज लेने की रफ़्तार खास तौर पर उल्लेखनीय रही है; अगस्त और अक्टूबर 2025 के बीच सिर्फ़ 71 दिनों में कर्ज 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया, और उसके बाद अगले 10 महीनों में इसमें 2 ट्रिलियन डॉलर और जुड़ गए। अमेरिकियों के लिए ज़्यादा लागत हालांकि, अर्थशास्त्री और वित्तीय विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बढ़ता हुआ कर्ज पहले से ही अमेरिकियों को प्रभावित कर रहा है, क्योंकि उन्हें मॉर्गेज और कारों के लिए ज़्यादा ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि व्यापार में निवेश घटने से वेतन पर असर पड़ सकता है, जबकि कर्ज से जुड़ी ज़्यादा लागत के कारण सामान और सेवाएं महंगी हो सकती हैं। बाइपार्टिसन पॉलिसी सेंटर की प्रेसिडेंट और CEO, मार्गरेट स्पेलिंग्स ने कहा कि फ़ेडरल कर्ज़ की वजह से पहले से ही रहने का खर्च बढ़ रहा है और खर्च व निवेश सीमित हो रहे हैं, जिससे लंबे समय की आर्थिक समृद्धि के लिए खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वित्तीय रास्ता टिकाऊ नहीं है और मंदी, वैश्विक संघर्ष या किसी बड़े झटके से यह चुनौती तेज़ी से एक गंभीर संकट में बदल सकती है। अमेरिका में कर्ज़ की एक कानूनी सीमा तय है, जिसे कांग्रेस बढ़ा सकती है, रोक सकती है या खत्म कर सकती है। बाइपार्टिसन पॉलिसी सेंटर का अनुमान है कि देश 2027 में सर्दियों के आखिर और गर्मियों के बीच कभी भी 41.1 ट्रिलियन डॉलर की मौजूदा कर्ज़ सीमा तक पहुँच सकता है, जिससे कांग्रेस को उधार लेने की सीमा पर फिर से कोई कदम उठाना पड़ सकता है। ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के हालिया आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका की वित्तीय स्थिति सबसे कमज़ोर है। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर रोक की मांग, ट्रंप के आयोग ने कहा- RSS पर प्रतिबंध लगाओ
USCIRF ने कुछ महीने पहले भी भारत को लेकर कई विवादित सिफारिशें की थीं। आयोग ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। हालांकि भारत ने तब करारा जवाब दिया था।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से भारतीय शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 558 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के ऊपर
इंटरनेट डेस्क। आरएसएस को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई हैं और वो भी अमेरिका की और से, जी हां अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आयोग के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है। क्या कहा गया हैं मीडिया रिपोटर्स की माने तो आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि पीएम मोदी आरएसएस के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। महमूद का यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ हफ्ते पहले आया है। भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। आयोग कमिश्नर ने क्या कहा आयोग के कमिश्नर बोले- भारत सरकार से जुड़े आरएसएस नेताओं को सम्मान न मिलेकमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेता अगर भारतीय सरकार से जुड़े भी हों, तब भी उन्हें उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक सम्मान का हकदार नहीं माना जाना चाहिए। मिल्स ने कहा कि इसके बजाय अमेरिकी सरकार को धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए। pc- thehindustangazette.com
अमेरिका के 6800 किलो के 'डेजी कटर' बम से क्यों डरते थे दुश्मन?
वियतनाम के घने जंगलों में हेलिकॉप्टर उतारने की जगह बनाने के लिए बना 6800 किलो का यह अमेरिकी बम बाद में इराक और अफगानिस्तान तक पहुंचा. इसके धमाके का खौफ इतना था कि ब्रिटिश सैनिकों को परमाणु हमले का भ्रम हो गया.
केन्या में दुर्घटनाग्रस्त हुआ हेलीकॉप्टर, 5 अमेरिकी नागरिकों सहित 7 लोगों की मौत, हादसे की जांच जारी
हेलीकॉप्टर पहाड़ी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। हेलीकॉप्टर में 5 अमेरिकी नागरिक सवार थे। इन सभी अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई। बचाव अभियान के लिए मौके पर दो हेलीकॉप्टर भेजे गए।
Trump को क्यों चाहिए भारत जैसा SIR? अमेरिका के मिड-टर्म से पहले वोटर वेरिफिकेशन पर बड़ा दांव
Trump को क्यों चाहिए भारत जैसा SIR? अमेरिका के मिड-टर्म से पहले वोटर वेरिफिकेशन पर बड़ा दांव
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे से पहले विवाद: अमेरिकी आयोग USCIRF ने RSS नेताओं पर बैन की मांग उठाई
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के आगामी अमेरिका दौरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित वैश्विक संपर्क अभियान के तहत मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करने वाले हैं। हालांकि, इस ऐतिहासिक कार्यक्रम से ठीक पहले अमेरिका की एक संस्था द्वारा संघ के नेताओं पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की मांग सामने आने के बाद बहस छिड़ गई है।USCIRF की विवादित मांग और आरोपअमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF)) से जुड़े सदस्यों ने अमेरिकी प्रशासन से अपील की है कि वे संघ से जुड़े उन पदाधिकारियों पर वीजा व यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाएं, जिन पर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन के आरोप लगाए जाते रहे हैं। आयोग की ओर से जारी बयानों में भारतीय अल्पसंख्यकों की स्थिति का हवाला देते हुए अमेरिकी विदेश विभाग से सख्त कदम उठाने की सिफारिश की गई है। भारत सरकार पहले भी USCIRF की ऐसी रिपोर्टों और बयानों को पक्षपातपूर्ण और दुर्भावना से प्रेरित बताकर पूरी तरह खारिज करती रही है।न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भव्य कार्यक्रम की तैयारीतमाम राजनीतिक विरोधों और आपत्तियों के बावजूद न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के स्वागत की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ जारी हैं। इस विशाल सभा का आयोजन 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) नामक संस्था द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इस सम्मेलन में लगभग 5,000 से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों के जुटने की उम्मीद है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक सद्भाव, सनातन मूल्यों और भारतीय संस्कृति की सर्वसमावेशी सोच का संदेश देना है।कनाडा और ब्रिटेन के दौरों पर भी टिकीं निगाहेंमोहन भागवत का यह विदेश दौरा केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसके बाद कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर भी जाने वाले हैं। कनाडा के टोरंटो में भी प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ उनके कई संवाद सत्र और सार्वजनिक बैठकें तय की गई हैं। हालांकि, कनाडा के कुछ विपक्षी सांसदों ने भी हाल ही में उनकी यात्रा का विरोध करते हुए सरकार को ज्ञापन सौंपा था। वैश्विक स्तर पर बढ़ते विरोध के बावजूद प्रवासी भारतीय समुदाय मोहन भागवत के इस शताब्दी वर्ष दौरे को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहा है।
Biz Updates: जेपी मॉर्गन की इकाई पर सेबी का शिकंजा; ट्रंप टैरिफ के बावजूद भारत का अमेरिकी निर्यात बढ़ा
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर द्वारा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के अपने दौरे के दौरान दिये गए बयानों को लेकर पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिकी दूतावास प्रभारी नताली बेकर को तलब किया। गोर ने बुधवार को श्रीनगर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अहम हिस्सा और बेहद खूबसूरत जगह है। श्रीनगर की मशहूर डल झील में ‘शिकारा’ की सवारी करने वाले गोर ने यह भी कहा कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर की यात्रा से जुड़े परामर्श पर पुनर्विचार करेगा, क्योंकि केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे सुरक्षित जगह बनाने के लिए कदम उठाए हैं। गोर के बयान के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास की प्रभारी को तलब किया और गोर की टिप्पणियों पर ‘कड़ी आपत्ति’ दर्ज कराई। गोर ट्रंप प्रशासन में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत भी हैं। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा,‘‘पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को ‘भारत का हिस्सा’ बताए जाने की कड़ी निंदा की और वह इसे पूरी तरह से खारिज करता है।’’ बयान में कहा गया कि ‘‘जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक विवादित क्षेत्र है, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों तथा कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार इसके अंतिम समाधान का इंतजार है।’’पाकिस्तान ने कहा कि अमेरिकी राजदूत के ‘‘गैर-जिम्मेदाराना बयान ने जम्मू-कश्मीर विवाद पर अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे और अच्छी तरह से दर्ज रुख को नकार दिया, और यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता के भी खिलाफ है। सर्जियो गोर ने क्या कहा? अमेरिकी राजदूत गोर ने जम्मू-कश्मीर को 'भारत का अहम हिस्सा' बताया और जम्मू-कश्मीर को और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और केंद्र सरकार द्वारा की गई सुरक्षा कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वाशिंगटन जम्मू-कश्मीर के लिए अपनी यात्रा सलाह (travel advisory) को कम करने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा यह भारत का एक अहम हिस्सा है और इसलिए मैं पहली बार यहाँ आया हूँ। यह बहुत ही खूबसूरत जगह है, और यहाँ आकर और इस जगह को देखकर मैं बहुत उत्साहित हूँ। हमारी मीटिंग बहुत अच्छी रही, और कुछ बातें हैं जिन पर आगे काम करना है; हम उन्हें वॉशिंगटन और दिल्ली ले जाएँगे। लेकिन, बातचीत बहुत गर्मजोशी भरी और दोस्ताना रही, और हम इस रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। इसे भी पढ़ें: Yogi Adityanath ने Lucknow में Taj Palace होटल का उद्घाटन कर उत्तर प्रदेश को बताया पर्यटन केंद्र जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो दिन के दौरे पर श्रीनगर पहुँचे गोर ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाक़ात के बाद ये बातें कहीं। 2019 में आर्टिकल 370 हटाए जाने और 2025 में पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के बाद, किसी अमेरिकी दूत का इस केंद्र शासित प्रदेश का यह पहला अलग दौरा है। अमेरिकी दूत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को और सुरक्षित रखने के लिए कुछ अहम कदम उठाए गए हैं और अमेरिका अपनी ट्रैवल एडवाइज़री की समीक्षा करेगा। गौरतलब है कि अभी अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए लेवल 4 की यात्रा न करें (do not travel) वाली एडवाइज़री जारी कर रखी है। इसे भी पढ़ें: Gaza में Israel के हमलों से 10 की मौत हुई, Jared Kushner की अपील निष्फल यात्रा एडवाइज़री की समीक्षा करेगा। गौरतलब है कि अभी अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए लेवल 4 की यात्रा न करें (do not travel) वाली एडवाइज़री जारी कर रखी है। गोर ने कहा अमेरिका यात्रा से जुड़ी चेतावनियाँ जारी करता है और समय-समय पर हम उन चेतावनियों की समीक्षा भी करते हैं। मैं आज यहाँ कोई बड़ी घोषणा तो नहीं कर सकता, लेकिन यह एक ऐसी चीज़ है जिस पर हम विचार करेंगे। हमारा मानना है कि नई दिल्ली, यहाँ के मुख्यमंत्री और यहाँ की सरकार ने इस इलाके को सुरक्षित रखने और इसे और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कुछ बेहतरीन कदम उठाए हैं।
अमेरिका में RSS पर बैन लगाने की मांग: भागवत के US दौरे पर USCIRF सख्त; बोला- संघ नेताओं को न मिले सम्मान- US religious freedom body USCIRF seeks sanctions against RSS no high-level meetings with its leaders
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर बोले- जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा, वीडियो में देंखे उमर अब्दुल्ला से की मुलाकात
ट्रम्प का फिर दावा- 2020 चुनाव में हुई धांधली, फुटेज में देंखे 24 हजार से ज्यादा गैर-अमेरिकी नागरिकों के वोट का आरोप
Mohan Bhagwat New York Visit: मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली एक अमेरिकी सलाहकार संस्था ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।संस्था ने अमरिकी सरकारसे कहा है कि वह इसके नेताओं को राजनयिक शिष्टाचार न दिखाए और न ही उनके साथ उच्च-स्तरीय बैठकें करे। US कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के अधिकारियों की ये टिप्पणियां RSS प्रमुख मोहन भागवत की 29 अगस्त को न्यूयॉर्क यात्रा से पहले आई हैं।उच्च-स्तरीय बैठकों को रद्द करने की अपीलभागवत की यह यात्रा 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स' के लिए हो रही है। US कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ने एक बयान में कहा, RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार का सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। अमेरिकी सरकार को RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए।USCIRF ने X पर एक पोस्ट में कमिश्नर जीन मिल्स की बात शेयर की है। मिल्स ने बताया कि USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को RSS का सदस्य बताया था। RSS एक मुख्य संगठन है, जिसके सहयोगी समूहों पर ईसाइयों और मुसलमानों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगे हैं।RSS को लेकर क्या कहा?USCIRF की तरफ से X पोस्ट में लिखा गया है, भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य हैं। यह भारत का एक ऐसा संगठन है जिसके कई सहयोगी समूहों ने ईसाइयों और मुसलमानों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका का दौरा करने वाले हैं।मिल्स ने अपनी बात में यह भी कहा कि RSS नेताओं को न तो हाई-लेवल मीटिंग्स में शामिल किया जाना चाहिए और न ही उन्हें डिप्लोमैटिक शिष्टाचार (डिप्लोमैटिक कर्टसी) मिलना चाहिए, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों।मिल्स ने कहा, भले ही RSS नेता भारत सरकार से जुड़े हों, फिर भी उन्हें हाई-लेवल मीटिंग्स या डिप्लोमैटिक शिष्टाचार का सम्मान नहीं मिलना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार को उन RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए जो FoRB (धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता) के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार पाए गए हैं।एक और संस्था ने की आलोचनान्यूज 18 के मुताबिक, इसके अलावा 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' नाम के एडवोकेसी ग्रुप ने भी भागवत के दौरे की आलोचना की है। ग्रुप का कहना है कि इस दौरे को RSS नेटवर्क से जुड़े मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा के आरोपों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इस एडवोकेसी ग्रुप ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'एकता का जश्न धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को छिपा नहीं सकता। ये ताजा बयान मार्च में जारी USCIRF की सालाना रिपोर्ट के बाद आई हैं। Chair @DrMahmood40: “India’s PM Modi is a member of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS), an Indian umbrella organization whose sub-groups have perpetrated attacks on religious minorities, incl. Christians & Muslims. Now the RSS leader, Mohan Bhagwat, plans to visit the U.S.— USCIRF (@USCIRF) August 19, 2026 इस रिपोर्ट में कमीशन ने धार्मिक आजादी के कथित उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की थी। साथ ही RSS तथा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत कुछ लोगों और संस्थाओं पर 'टारगेटेड प्रतिबंध' लगाने का समर्थन किया था। भारत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने USCIRF पर आरोप लगाया कि उसने संदिग्ध स्रोतों और विचारधारा पर आधारित नैरेटिव के आधार पर देश की तोड़-मरोड़कर और चुनिंदा तस्वीर पेश की है।ये भी पढ़ें- BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया
पड़ोसियों के भारत वापस लौटने पर फूट-फूटकर रो पड़ी अमेरिकी महिला, दिल छू लेने वाला Video हो रहा वायरल
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ग्रामीण अस्पताल में मुफ्त इलाज पाकर हैरान हुआ अमेरिकी शख्स, बोला- भारत की स्वास्थ्य सेवा ने दिल जीत लिया
कश्मीर के दौरे पर पहुंचे अमेरिकी राजदूत
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर बुधवार को जम्मू कश्मीर पहुंचे।
केन्या में सफारी पर जा रहा हेलिकॉप्टर क्रैश, 5 अमेरिकी टूरिस्ट सहित सभी 7 की मौत
केन्या सिविल एविएशन अथॉरिटी के मुताबिक, यह हादसा स्थानीय समयानुसार सुबह 09:13 बजे हुआ, जब विमान लोइसाबा वाइल्डलाइफ रिजर्व से रवाना हुआ था.
जम्मू-कश्मीर पर अमेरिका के बयान के क्या मायने? बौखलाए पाकिस्तान ने US राजदूत को किया तलब
पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की उस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार कोई अमेरिकी राजदूत कश्मीर के दौरे पर है इसलिए भी पाकिस्तान बैचेन है।
जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका की वर्षों पुरानी सुरक्षा धारणा में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का श्रीनगर दौरा पाकिस्तान और अलगाववादियों को स्पष्ट संदेश है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जो कश्मीर पर भारत के रुख पर अमेरिकी मुहर है।
नमस्कार, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। उन्होंने सीएम उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात की। नीदरलैंड्स और बेल्जियम की मेजबानी में जारी हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारत ने पाकिस्तान को हराया। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में आगे बताएंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता अपने संतानों को अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... कल की बड़ी खबरें... 1. अमेरिकी राजदूत बोले- जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा: आर्टिकल 370 हटने के बाद अमेरिकी राजदूत का पहला दौरा, CM उमर से मिले भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है। मैं पहली बार इस जगह का दौरा कर रहा हूं। यह खूबसूरत जगह है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला से मुलाकात भी की। इधर, पाकिस्तान ने गोर के जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा कहे जाने पर आपत्ति जताई और इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा- जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र है और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत ही होना चाहिए। धारा 370 हटने के बाद यह पहला अमेरिकी दौरा: राज्य में 5 अगस्त 2019 को धारा-370 हटने के बाद किसी भी अमेरिकी राजदूत का यह पहला आधिकारिक दौरा है। हालांकि, इससे पहले 9 जनवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर 15 देशों के सरकारी डेलिगेशन के साथ कश्मीर गए थे। पूरी खबर पढ़ें... 2. हॉकी वर्ल्डकप- भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से हराया: टीम टॉप-8 में पहुंची; कप्तान हरमनप्रीत और अभिषेक ने 2-2 गोल दागे भारत ने मेंस हॉकी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को 5-3 से हराया। इसी के साथ टीम टूर्नामेंट के टॉप-8 में पहुंच गई। पाकिस्तान टूर्नामेंट से बाहर हुआ। नीदरलैंड्स के वेगनर हॉकी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में भारत की ओर से कप्तान हरमनप्रीत सिंह, अभिषेक ने 2-2 गोल किए। जबकि, हार्दिक सिंह ने एक गोल दागा। पाकिस्तान की ओर से हन्नान शाहीद ने 2 और सुफियान खान ने एक गोल किया। मैच के 8 गोल पूरी खबर पढ़ें... 3. आजम की जौहर यूनिवर्सिटी पर 14 घंटे चली ED रेड, सहारनपुर से दिल्ली तक 10 ठिकानों पर पहुंची टीम सपा नेता आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े 10 ठिकानों पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की। रामपुर में यूनिवर्सिटी परिसर में ED की टीम करीब 14 घंटे तक रही। सुबह 7 बजे शुरू हुई कार्रवाई रात करीब 9 बजे तक चली। इसके बाद करीब 15 अफसरों की टीम 6 गाड़ियों से यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर निकली। अखिलेश बोले- भ्रष्टाचारियों पर छापा क्यों नहीं? सपा प्रमुख ने ED छापेमारी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, एक्सप्रेसवे, पुल, सड़क, टंकी और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दे गिनाए। अखिलेश ने सवाल उठाया कि इन मामलों में ED की कार्रवाई क्यों नहीं होती। पढ़ें पूरी खबर… 4. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बच्चों को प्रॉपर्टी से बेदखल कर सकते हैं माता-पिता, बढ़ती उम्र का मतलब अपमान-असुरक्षा नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता को अपने घर में सम्मान और सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार है। अगर बेटे या बहू का घर में रहना बुजुर्ग के भरण-पोषण या सुरक्षा में बाधा बन रहा है, तो वह उन्हें अपने बच्चों को घर से बेदखल कर सकते हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब अपमान या असुरक्षा के साथ रहना नहीं हैं। सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कितना सम्मान और सुरक्षा का व्यवहार करता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश लखनऊ के रवि कांत गुप्ता से जुड़े मामले में सुनाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमे अपने बेटे और बहू को घर से निकालने के SDM और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया था। पूरी खबर पढ़ें... 5. यूपी राज्यपाल पहली बार 10 दिन की छुट्टी पर, पद से हटने की अटकलें, ACS बोले- दमन दीव के दौरे पर हैं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल अचानक छुट्टी पर चली गई हैं। वह 17 से 26 अगस्त तक छुट्टी पर हैं। राज्यपाल अपने गृह राज्य गुजरात गई हैं। अवकाश के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुमति ली है। यूपी की राज्यपाल बनने के बाद से आनंदीबेन पटेल ने पहली बार इतनी लंबी छुट्टी ली है। अचानक ली गई इस छुट्टी के बाद सियासी और प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चा चलने लगी है। कहा जा रहा है कि यूपी को जल्द ही नया राज्यपाल मिल सकता है। हालांकि, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव (ACS) सुधीर बोवड़े ने पदभार मुक्त करने या बदले जाने की अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है, राज्यपाल सिलवासा और दमन दीव के भ्रमण पर हैं। इस दौरान उनकी वहां के राज्यपाल से मीटिंग है। पढ़ें पूरी खबर… 6. कम उम्र में हार्टअटैक के लिए सिर्फ घी-तेल जिम्मेदार नहीं: अपोलो हॉस्पिटल के चेयरमैन बोले- 300 साल पहले आए अकाल से जीन्स में बदलाव हुआ अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने कहा कि दक्षिण एशियाई लोगों में कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। 300 साल पहले एक अकाल पड़ा था, जिसने जीन्स को बदल दिया था। अकाल का असर लोगों की आने वाली पीढ़ियों के शरीर पर पड़ा। उन्होंने 1991 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि ड्यूटी रूम में 3 भारतीय डॉक्टरों की मौत के बाद इस मुद्दे पर काफी चर्चा हुई थी। उस समय युवाओं में हार्ट अटैक के लिए शारीरिक गतिविधियां कम होना, घी और नारियल तेल जैसी चीजों को जिम्मेदार माना गया। लेकिन रिसर्च में हार्ट अटैक का खतरा जीन और आनुवंशिक बनावट से भी जुड़ा हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें... 7. पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान से बहन और पत्नी ने मुलाकात की, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं थीं पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने रावलपिंडी की अडियाला जेल में मुलाकात की। पुलिस ने तीन बहनों में से केवल एक बहन को ही मिलने दिया। इमरान की नोरीन से 15 मिनट और पत्नी से करीब 35 मिनट इमरान की मुलाकात चली। इस दौरान परिवार ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की जानकारी भी दी, जिसमें इमरान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने को कहा गया है। दरअसल, 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। पूरी खबर पढ़ें... 8. वंदे मातरम के दो ही पैरा गाएगी कांग्रेस: CWC बैठक में फैसला, कहा- वंदे मातरम और राष्ट्रगान बीजेपी के लिए राजनीतिक मुद्दे नई दिल्ली के इंदिरा भवन में बुधवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई। पार्टी ने वंदे मातरम को लेकर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि पार्टी 1937 में हुई (CWC) की बैठक में लिए गए फैसले का पालन करेगी। इसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाए जाएंगे। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम और राष्ट्रगान कांग्रेस के लिए भावनात्मक मुद्दे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के लिए ये राजनीतिक मुद्दे हैं। बैठक में देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के साथ-साथ छात्रों से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी की घटना पर चर्चा हुई। पूरी खबर पढ़ें... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: मोदी सरकार रोज एक यूनिवर्सिटी भेजेगी एक केंद्रीय मंत्री:दावा- छात्रों से संवाद और योजनाओं की जानकारी देंगे; जेन-जी प्रदर्शन के बाद फैसला (पूरी खबर पढ़ें) 2. इंटरनेशनल: ट्रम्प बोले- 2020 चुनाव में 24,000 गैर-नागरिकों ने वोट डाले: चुनाव में मेरी जीत हुई थी, धांधली रोकने के लिए कानून बनाऊंगा (पूरी खबर पढ़ें) 3. तमिलनाडु: विधायकों को नई कार, ₹75 हजार भत्ता मिलेगा: महिला विधायक ने सदन में गाना गाकर धन्यवाद दिया; छात्रों के प्रदर्शन पर रोक वाला निर्देश वापस (पूरी खबर पढ़ें) 4. नेशनल: सुप्रीम कोर्ट में सरकार बोली- NEET का सिस्टम फूलप्रूफ, तोड़ना मुश्किल: SC ने कहा- टेक्नोलॉजी समझने वाले अफसर भर्ती करें, उन्हें बार-बार ट्रांसफर न करें (पूरी खबर पढ़ें) 5. इंटरनेशनल: पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं; 15 अगस्त को रिलीज हुई थी (पूरी खबर पढ़ें) 6. नेशनल: रुपए को गिरने से बचाने की जरूरत नहीं: PM सलाहकार बोले- मार्केट को तय करने दें करेंसी का स्तर, महंगाई-कंट्रोल करने पर ध्यान दे भारत (पूरी खबर पढ़ें) 7. नेशनल: भारत 600वें टेस्ट में जीता, श्रीलंका 165 रन से हारा: मानव सुथार ने मैच में 10 विकेट लिए; देवदत्त पडिक्कल प्लेयर ऑफ द मैच बने (पूरी खबर पढ़ें) 8. नेशनल: हैरी ब्रूक नंबर-1 टेस्ट बैटर बने, हेड चौथे पर फिसले: बुमराह 21 महीने से लगातार नंबर-1 बॉलर, गिल वनडे के टॉप बल्लेबाज (पूरी खबर पढ़ें) 9. इंटरनेशनल: बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा (पूरी खबर पढ़ें) 10. नेशनल: कोलकाता की पांच मंजिला बिल्डिंग में आग, 9 मौतें: इनमें कुछ बांग्लादेशी नागरिक; इमारत में कई होटल, अब तक 80 का रेस्क्यू, 6 घायल (पूरी खबर पढ़ें) 11. उत्तर प्रदेश: कूनो नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के ट्वीट पर विवाद: उत्तम शर्मा ने लिखा- हर जगह दिमागी नक्सल, मदद का दावा करने वाला जरूरी नहीं सही हो (पूरी खबर पढ़ें) 12. मध्य प्रदेश: राहुल गांधी बोले- मैं लड़ाई में आदिवासी भाई-बहनों के साथ: केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के प्रभावितों से मिले; संसद में मुद्दा उठाने का वादा किया (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... एक पहिए की साइकल से 11 हजार किमी का सफर केरलम के साइक्लिस्ट सनीद एक पहिए की साइकिल से 11 हजार किमी का सफर कर रहे हैं। वे अब तक 7 हजार किमी से ज्यादा दूरी तय कर चुके हैं। उनका सफर नेपाल के एवरेस्ट बेस कैंप तक जाएगा। यह राइड ‘Say No to Drugs’ कैंपेन का हिस्सा है। पूरी खबर पढ़ें... फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर:16% तक महंगा हुआ मोबाइल रिचार्ज, क्या अगले 3 महीने में और बढ़ेंगे दाम; लगातार कीमतें क्यों बढ़ा रहीं कंपनियां 2. रिलेशनशिप एडवाइज: पति साइलेंट ट्रीटमेंट देते हैं:झगड़ा हो तो बात नहीं करते, जब तक मैं माफी न मांगूं, क्या ये इमोशनल एब्यूज है 3. जरूरत की खबर: चीनियों की सेहत का राज ‘ताई-ची’:योग, मेडिटेशन और मार्शल आर्ट भी, जानें इसके 10 हेल्थ बेनिफिट्स, करने का सही तरीका 4. भास्कर इंटरव्यू:'अखिलेश कभी यूपी के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे':केशव बोले- विधायकों के टिकट कटेंगे, लेकिन ये प्रदेश भाजपा तय नहीं करेगी 5. यूपी एक्सप्लेनर: क्या पुलिसवाले रील नहीं बना सकते:अश्लील VIDEO वाली दरोगा का क्या होगा; क्या नौकरी जाएगी 6. ग्राउंड रिपोर्ट: प्रयागराज में 6 हजार परिवार छतों पर रहने को मजबूर:बारिश में गृहस्थी बर्बाद; लोग बोले- 3 दिन से चूल्हा नहीं जला, लाई-चना खा रहे 7. क्राइम फाइल्स: कराटे प्लेयर के साथ कोच ने अश्लील वीडियो बनाया:टूर्नामेंट के बहाने मलेशिया ले जाकर कराया गंदा काम, 3 साल बाद चंगुल से छूटी 8. भास्कर एक्सक्लूसिव:7 बुजुर्गों की आंखों में मिले थे खतरनाक बैक्टीरिया:सूजन और मवाद से आंख खराब होने का भी था खतरा; इन्फेक्शन कैसे हुआ, बनी पहेली 9. भास्कर एक्सक्लूसिव: सम्राट सरकार में सबसे ताकतवर IAS हुए संजय कुमार:59 हजार करोड़ कमाकर देंगे, 4 महीने में मिले 4 विभाग, CM के भरोसेमंद अफसर को जानिए 10. ग्राउंड रिपोर्ट: अमृतसर- वह 2 फोटो, जिनकी वजह से दफनाई लाश निकाली:पानी में औंधे मुंह पड़ी मिली, सिर पर चोट; बहन को शक हुआ 11. भास्कर एक्सक्लूसिव: उत्तराखंड की जमीन का बदलता ‘न्यूट्रिएंट मैप’:गढ़वाल की 90 सेमी गहराई तक मिट्टी की जांच, गहराई बढ़ी तो बदले पोषक तत्व करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज सिंह राशि वालों के बिजनेस में मुनाफे की स्थिति बनेगी। वृश्चिक राशि वालों को मनचाही जगह ट्रांसफर की खबर मिलने सकता है। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
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अमेरिका पर कर्ज का नया रिकॉर्ड, पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, हर 5 महीने में बढ़ रहा 1 ट्रिलियन
अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है. करीब पांच महीने में कर्ज 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा है, जिससे ब्याज खर्च और आम लोगों की आर्थिक चिंता बढ़ी है.
अमेरिका में भी होगा SIR? भारत के चुनावी सिस्टम की तारीफ कर ट्रंप ऐसा क्या करने वाले हैं
अमेरिका में कड़े चुनावी कानूनों की पैरवी करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनावी सिस्टम की तारीफ की है. इसके साथ ही उन्होंने 'सेव अमेरिका एक्ट' पास कराने की मांग की है.
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे पर डल झील में शिकारा का आनंद लिया और स्थानीय कारीगरों से मिले।
Sergio Gor Kashmir: अमेरिका के राजदूत ने दिया बयान,बौखलाए गए शहबाज-मुनीर
अमेरिका के राजदूत ने दिया बयान,बौखलाए गए शहबाज-मुनीर
US: कौन हैं अमेरिका की FDA प्रमुख बनने जा रहीं हेइडी ओवरटन? ट्रंप ने किया नामित, विवादों से भी रहा है नाता
Maharajganj News: अमेरिकी नागरिक ट्रेविस फेलेन को मिली जमानत, नेपाल जाने के दौरान हुआ था गिरफ्तार
US citizen Travis Phelan granted bail; he was arrested while traveling to Nepal.
Kenya Helicopter Crash: सफारी के दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश, पांच अमेरिकी समेत सात लोगों की मौत
Kenya Helicopter Crash: सफारी के दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश, पांच अमेरिकी समेत सात लोगों की मौत
अमेरिकी राजदूत का बयान भारतीय कूटनीति की बड़ी सफलता : विदेशी मामलों के जानकार
New Delhi, 19 अगस्त . India में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे और Chief Minister उमर अब्दुल्ला से मुलाकात को लेकर विदेश नीति विशेषज्ञों और स्थानीय नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है. राजदूत गोर के ‘जम्मू-कश्मीर India का अभिन्न अंग है’ वाले बयान को कई लोगों ने India की कूटनीति की बड़ी सफलता बताया ... Read more
काम नहीं आ रहा अमेरिका का दांव? कुशनर की यात्रा के बाद गाजा में इजरायली हमले तेज
गाजा में बुधवार को घातक हवाई हमलों ने फिलिस्तीन में कमजोर पड़ रहे संघर्षविराम को आगे बढ़ाने के अमेरिकी प्रयासों पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान का जिक्र तक नहीं... कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान के क्या हैं मायने?
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया, जहां उन्होंने इसे भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और विवादित क्षेत्र या पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं किया.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान दिए गए बयान को लेकर पाकिस्तान ने बुधवार को कड़ा विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मामले में इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी प्रभारी राजदूत (Charge d’Affaires) को तलब किया और सर्जियो ...
कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत के बयान से क्यों तिलमिलाया पाकिस्तान? गोर के दौरे का क्या है मतलब
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू–कश्मीर दौरा और उनका बयान पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। 19 अगस्त 2026 को श्रीनगर में जम्मू–कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने साफ कहा कि यह भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस एक वाक्य ने इस्लामाबाद को तिलमिला दिया। पाकिस्तान ने तुरंत अमेरिकी […] यह लेख कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत के बयान से क्यों तिलमिलाया पाकिस्तान? गोर के दौरे का क्या है मतलब सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने डल झील में ‘शिकारा’ की सवारी का उठाया आनंद, देखें VIDEO
सर्जियो गोर नेहरू पार्क के पास से 'शिकारा' में सवार हुए और उन्होंने लगभग एक घंटे तक डल झील की सैर की। इससे पहले, उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से उनके गुपकार स्थित निवास पर मुलाकात की।
कश्मीर पर सर्जियो गोर के बयान सुन जल-भून गया पाकिस्तान, अमेरिकी राजनयिक को किया तलब
पाकिस्तान ने बुधवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की उस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था।
अमेरिका से भारत आई बच्ची को हिंदी बोलने में दिक्कत, 'र' का उच्चारण सुन मां को आई हंसी, वीडियो हुआ वायरल
सेना के चीता हेलीकॉप्टर ने बचाई अमेरिकी नागरिक की जान, 15 हजार फीट की ऊंचाई पर दिखाया दमखम
भारतीय वायु सेना के चीता हेलीकॉप्टर ने 15,000 फीट की ऊंचाई पर फेयांग वैली से एक अमेरिकी नागरिक की जान बचाई है। दुर्गम पहाड़ियों के बीच हेलीकॉप्टर को लैंड करने के बाद सेना ने OIC कार्ड धारक को लेह के अस्पताल में भर्ती करवाया।
कश्मीर पर सर्जियो गोर के बयान के बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलब, क्या कहा? - BBC
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कश्मीर पर सर्जियो गोर के बयान से चिढ़ा पाकिस्तान, अमेरिकी राजनयिक को किया तलब
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर बुधवार को कश्मीर दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताया था.
अमेरिका में ‘ग्रीन कार्ड’ की राह होगी मुश्किल, भारतीय प्रवासियों पर कितना असर?
अमेरिका में ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास की इच्छा रखने वाले प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस फैसले का असर ग्रीन कार्ड पाने की उम्मीद लगाए भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ेगा।
ईरान-अमेरिका के बीच फिर बढ़ा तनाव! 60 दिनों का शांति समझौता खत्म, इन मुद्दों पर दोबारा हो सकती है जंग
श्रीनगर की वादियों में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, डल झील में शिकारा राइड करते VIDEO वायरल
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अपनी पहली जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान श्रीनगर की डल झील में शिकारा की सवारी का आनंद लिया, जिसका वीडियो सामने आया है।
कैलिफोर्निया में आयोजित Silicon Valley International Festival (SVIIF) में ताइवानी इन्वेंटर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया भर का ध्यान खींचा है।
Yash की ‘टॉक्सिक’ ने एडवांस बुकिंग में मचाई तबाही! अमेरिका में टिकट बिक्री से कमा डाले इतने करोड़
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मेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपने काम को लेकर 'पैशनेट नेता' बताया था। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र आज दुनिया के नक्शे पर दो वजहों से है, एक मुंबई और दूसरा उसके असाधारण मुख्यमंत्री। इस तारीफ को लेकर जब फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस से सवाल किया गया, तो उन्होंने अमेरिकी राजदूत को धन्यवाद दिया और मुख्यमंत्री के काम की तारीफ का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को भी दिया।
ईरान का अमेरिका पर वार का प्लान, इधर महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट; पढ़ें शाम की बड़ी खबरें
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की तैयारी तेज कर दी है, वहीं घरेलू मोर्चे पर तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है...
'यह भारत का अहम हिस्सा': अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर दौरा, शब्दों के चयन की चर्चा
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाक़ात की है.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा सुधारों की सराहना की और यात्रा सलाह की समीक्षा के संकेत दिए। उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच संपर्क और सहयोग और अधिक व्यापक तथा गहरा होगा।
FBI Most Wanted: अमेरिका में बढ़ा पंजाब के गैंग का नेटवर्क, जग्गू भगवानपुरिया गैंग का मेजर सिंह हुआ वांटेड
जम्मू-कश्मीर भारत का ‘महत्वपूर्ण हिस्सा’, ट्रैवल एडवाइजरी पर फिर विचार करेगा अमेरिका: अमेरिकी राजदूत
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे के दौरान कहा कि अमेरिका केंद्र शासित प्रदेश के लिए जारी यात्रा संबंधी एडवाइजरी पर फिर से विचार करेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
देवेंद्र फडणवीस की तारीफ पर पत्नी अमृता ने अमेरिकी राजदूत का किया धन्यवाद
देवेंद्र फडणवीस की तारीफ पर पत्नी अमृता ने अमेरिकी राजदूत का किया धन्यवाद
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कश्मीर की यात्रा की है। उन्होंने कहा कि यहां हर कोई जानता है कि मैं भारत में अमेरिकी राजदूत हूंं और कश्मीर भारत का एक अहम हिस्सा है। आइए जानते हैं कि उन्होंने इस बारे में और क्या कुछ कहा है।
मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर, वीडियो में जाने प्रवासी भारतीयों से करेंगे संवाद
अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर अपने पहले कश्मीर दौरे पर श्रीनगर पहुंचे और वहां के बदलते सुरक्षा माहौल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कश्मीर को भारत का एक अहम हिस्सा माना और कहा कि मोदी सरकार ने इसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बना दिया है। उनके इस ...
जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान से तिलमिला उठेगा PAK
Sergio Gor visits Jammu Kashmir: अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर हैं। उन्होंने सीएम उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद कहा कि नई दिल्ली और स्थानीय सरकार ने यहां सुरक्षा को लेकर बेहतर काम किया है। उन्होंने कहा कि यह भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर बुधवार को जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं. यह उनका कश्मीर का पहला दौरा है. इस दौरान उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है.
अमेरिका में भारतवंशी पिया डांडिया ने रचा इतिहास... फ्लोरिडा से जीता डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव
भारतीय मूल की पिया डांडिया ने अमेरिका की राजनीति में अपनी मजबूत छाप छोड़ते हुए फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राइमरी चुनाव जीत लिया है।
'जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा', सीएम उमर से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी राजदूत
अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को कश्मीर का दौरा किया. उन्होंने इस दौरान जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताया. उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर आर्थिक सहयोग और विकास के मुद्दों पर चर्चा की. यह दौरा पिछले कई सालों में किसी अमेरिकी राजदूत का पहला स्वतंत्र कश्मीर दौरा है.
ईरान को चुनौती, होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावा, क्या अमेरिका सच में कर चुका है कंट्रोल?
ट्रंप ने एक बार फिर होर्मुज पर अपना बड़ा दावा ठोक दिया है। उन्होंने एक नक्शा जारी कर इस समुद्री मार्ग को नए अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाया है और कहा है कि ईरान का नियंत्रण अब खत्म हो चुका है। समुद्री आंकड़े भी बता रहे हैं कि इस मार्ग पर तेहरान की पकड़ वाकई कमजोर पड़ रही है...
Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा और सनसनीखेज दावा सामने आया है। ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्ध को और बढ़ाए जाने की स्थिति में यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने पर विचार कर रहा है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के शासन के करीबी दो लोगों ने यह जानकारी दी है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरानी सैन्य बलों ने दक्षिण-पूर्वी यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर संभावित हमलों का आकलन किया है। इनमें बुल्गारिया स्थित सैन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। बताया गया है कि पिछले महीने बुल्गारिया ने अमेरिका को अपने बेजमर एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमानों के लिए करने की अनुमति दी थी।यूरोप के दूसरे ठिकाने भी निशाने परईरान की संभावित कार्रवाई सिर्फ बुल्गारिया तक सीमित नहीं बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, साइप्रस को भी संभावित टारगेट के तौर पर देखा जा रहा है। ईरानी पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि साइप्रस में मौजूद ब्रिटिश सैन्य ठिकाना भी संभावित निशानों में शामिल हो सकता है। मार्च में साइप्रस में एक ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला भी हुआ था।ईरान से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई यूरोपीय देशों के लिए संदेश भी हो सकती है कि अगर वे अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराते हैं, तो युद्ध का असर उनके क्षेत्र तक भी पहुंच सकता है।एक ईरानी सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि यूरोप को यह समझना चाहिए कि वह भी मिसाइल हमलों की जद में आ सकता है। सूत्रों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे पर बड़ा हमला करता है, तो युद्ध सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि यह यूरोप तक फैल सकता है।समुद्री इंटरनेट केबल भी निशाने पर?रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सैन्य बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्र के भीतर बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों पर हमले की संभावना का भी आकलन किया है। इन केबलों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय संचार और इंटरनेट डेटा के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि ऐसी किसी कार्रवाई को अंजाम दिया जाता है, तो इसका असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि वैश्विक संचार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।अमेरिका के साथ खड़े देशों को ईरान की खुली चेतावनीईरान लंबे समय से उन देशों को चेतावनी देता रहा है जो अपनी जमीन से अमेरिकी सेनाओं को सैन्य अभियान चलाने की अनुमति देते हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले महीने ब्रिटेन को भी चेतावनी दी थी। IRGC ने कहा था कि यदि किसी ब्रिटिश सैन्य अड्डे का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जाता है, तो वह अड्डा ईरान के लिए वैध सैन्य टारगेट माना जाएगा।ईरान से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यदि अमेरिका ने बड़ा हमला किया तो तेहरान की प्रतिक्रिया की कोई सीमा नहीं होगी। उसके मुताबिक, अगर अमेरिका बहुत आगे बढ़ता है तो ईरान किसी भी कीमत पर अपनी रक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र से बाहर जाकर यूरोप में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है। ईरान पहले भी दूर स्थित ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश कर चुका है।ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर यह चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि वह पहले भी अपने क्षेत्र से हजारों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों तक मिसाइल पहुंचाने की कोशिश कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी में युद्ध शुरू किए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की दिशा में कई मिसाइलें दागने का आरोप लगाया था।ईरानी मिसाइल की कितनी है क्षमता?डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में स्थित है। हालांकि, ईरान से दागी गई कोई भी मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। बाद में तुर्किये ने भी कहा था कि उसकी NATO एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया था।यूरोप के लिए खतरा कितना बड़ा?रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) के एक्सपर्ट सिद्धार्थ कौशल के मुताबिक, यूरोप के लिए ईरान की मिसाइल क्षमता से पैदा होने वाला खतरा वास्तविक है। हालांकि इसकी क्षमता अभी सीमित है। यानी इसका मतलब यह है कि ईरान के पास यूरोप तक खतरा पहुंचाने की कुछ क्षमता जरूर है। लेकिन बड़े पैमाने पर यूरोपीय लक्ष्यों पर हमला करने की उसकी क्षमता को लेकर अभी भी सीमाएं हैं। ईरान की ताजा धमकियां ऐसे समय सामने आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ समझौता पिछले महीने टूट गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।ये भी पढ़ें- BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बावजूद, भारत के निर्यात में अमेरिका अभी भी सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जिसका हिस्सा लगभग 20% है। भारत अपने व्यापारिक संबंधों को अन्य देशों जैसे चीन, यूएई और यूरोपीय संघ के साथ भी मजबूत कर रहा है, जिससे निर्यात में वृद्धि हुई है।
अमेरिका को ईरान का व्यंग्यात्मक जवाब: कैलिफ़ोर्निया को ईरानी इलाका बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के जवाब में, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अमेरिकी इलाका बताया था, ईरान ने कैलिफ़ोर्निया को ईरानी इलाका घोषित कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी इलाका बताते हुए एक नक्शा जारी किया था। इसके जवाब में, […] The post अमेरिका को ईरान का व्यंग्यात्मक जवाब: कैलिफ़ोर्निया को ईरानी इलाका बताया appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
बलोच नेताओं की ट्रंप से अपील,'बलूचिस्तान पर बम बरसाने वाले पाकिस्तान से अमेरिका मांगे जवाब'
बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से गुजारिश की है कि वो बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के हालिया हवाई हमले का संज्ञान लें और तुरंत दखल दें। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 30 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए थे।
बलोच नेताओं की ट्रंप से अपील,’बलूचिस्तान पर बम बरसाने वाले पाकिस्तान से अमेरिका मांगे जवाब’
वाशिंगटन, 19 अगस्त . बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप से गुजारिश की है कि वो बलूचिस्तान में Pakistanी सेना के हालिया हवाई हमले का संज्ञान लें और तुरंत दखल दें. इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 30 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए थे. ट्रंप को लिखे ... Read more
बलोच नेताओं की ट्रंप से अपील,'बलूचिस्तान पर बम बरसाने वाले पाकिस्तान से अमेरिका मांगे जवाब'
बलोच नेताओं की ट्रंप से अपील,'बलूचिस्तान पर बम बरसाने वाले पाकिस्तान से अमेरिका मांगे जवाब'
अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास छह दिन पहले खत्म, ट्रंप ने दिया था आदेश
सोल, 19 अगस्त . कोरियाई महाद्वीप को लेकर अमेरिका के रवैए में जबरदस्त बदलाव आया है. नॉर्थ कोरिया से बातचीत की कोशिशों के बीच अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ इस बार निर्धारित समय से छह दिन पहले समाप्त होगा. दक्षिण कोरिया ने Wednesday को कहा कि अमेरिका के ... Read more
FBI का दावा, अमेरिका में हिंसक अपराधों में आई रिकॉर्ड गिरावट
व्हाइट हाउस द्वारा जारी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अमेरिका में हिंसक अपराध दर में पिछले लगभग नौ दशकों में साल-दर-साल सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें हत्याओं और डकैतियों की घटनाओं में भारी कमी आई।
एफबीआई का दावा, अमेरिका में हिंसक अपराधों में आई रिकॉर्ड गिरावट
एफबीआई का दावा, अमेरिका में हिंसक अपराधों में आई रिकॉर्ड गिरावट
श्रीनगर, 19 अगस्त . जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की Wednesday को प्रस्तावित कश्मीर यात्रा पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत कभी नहीं रही. हमारे मुद्दों का समाधान वाशिंगटन नहीं करेगा, बल्कि हमारी केंद्र Government को करना है. ... Read more
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बुधवार को प्रस्तावित कश्मीर यात्रा पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत कभी नहीं रही। हमारे मुद्दों का समाधान वाशिंगटन नहीं करेगा, बल्कि हमारी केंद्र सरकार को करना है।
अमेरिका राजदूत के कश्मीर दौरे पर उमर अब्दुल्ला बोले- 'किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत नहीं'
अमेरिका में पिछले साल 189 सिख विरोधी और 32 हिंदू विरोधी हेट क्राइम के मामले दर्ज
वाशिंगटन, 19 अगस्त . अमेरिका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने 2025 में सिखों विरोधी हेट क्राइम के 189 और हिंदू विरोधी हेट क्राइम के 32 मामले दर्ज किए. अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. बताया गया कि ये आंकड़े एफबीआई के ‘देश में दर्ज अपराध’ संबंधी आंकड़ों से निकाले ... Read more
US-South Korea: तय समय से पहले खत्म होगा अमेरिका-दक्षिण कोरिया का सैन्य अभ्यास; क्या है ट्रंप के फैसले की वजह?
Q&T Foods IPO Listing: बेकरी प्रोडक्ट्स बनाने वाली क्यूएंडटी फूड्स के शेयरों की आज BSE SME पर फ्लैट एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और खुदरा निवेशकों के दम पर ओवरऑल 1.41 गुना बोली मिली थी। इसके आईपीओ के तहत ₹115 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹115.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को फ्लैट लिस्टिंग के बाद और झटका तब लगा, जब शेयरों में कोई मूवमेंट ही नहीं दिखा। फिलहाल यह ₹115.00 (Q&T Foods Share Price) पर बना हुआ है यानी कि आईपीओ निवेशक अभी न फायदे में हैं, न घाटे में।Q&T Foods IPO के पैसे कैसे होंगे खर्चक्यूएंडटी फूड्स का ₹26 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 12-14 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 1.42 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 0.20 गुना और खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित आधा हिस्सा 2.64 ृगुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 22,82,400 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹4.42 करोड़ इक्विपमेंट्स की खरीदारी, ₹7.50 करोड़ वर्किंग कैपिटल की फाइनेंसिंग, ₹6.75 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।Q&T Foods के बारे मेंक्यूएंडटी फू्ड्स बेकरी प्रोडक्ट्स बनाती है। यह अपने फ्लैगशिप ब्रांड अमेरिकन बेकर्स (American Bakers) के जरिए ब्रेड, बन, पिज्जा बेस, कुल्चा, पाव और बेकरी के अन्य प्रोडक्ट्स तैयार कर बिक्री करती है। इसका कारोबार मुख्य रूप से यूपी और इसके आस-पास के जगहों में फैला हुआ है। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 63% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹5.20 करोड़ और टोटल इनकम करीब 17% के सीएजीआर से ₹54.78 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹11.05 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹7.44 करोड़ पड़े थे।Behari Lal IPO Listing: 118 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 63% लिस्टिंग गेन, ₹285 के शेयरों का बड़ा धमालShiprocket लगातार घाटे में, लेकिन ₹97 का शेयर ₹131 पर लिस्ट, IPO को मिली थी 102 गुना बोलीPramodini IPO Listing: ₹118 के शेयर ₹120 पर लिस्ट, लगातार मजबूत हो रही प्रमोदिनी की सेहतडिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
अमेरिका ने ICC प्रमुख पर लगाए प्रतिबंध लगाए, व्यापक अभियान चलाने का लिया संकल्प
अमेरिका ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) के प्रेसिडेंट और एक सीनियर ट्रायल लॉयर पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे ट्रम्प प्रशासन का इस कोर्ट के खिलाफ अभियान और बढ़ गया है। कोर्ट के कामकाज को रोकने के लिए और कदम उठाने की धमकी भी दी गई है।
फ्लोरिडा : भारतीय-अमेरिकी पिया दांडिया ने जीता डेमोक्रेटिक प्राइमरी, नवंबर में रिपब्लिकन से होगी टक्कर
अमेरिका ने आईसीसी प्रमुख पर लगाए प्रतिबंध लगाए, व्यापक अभियान चलाने का लिया संकल्प
वॉशिंगटन, 19 अगस्त अमेरिका ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) के प्रेसिडेंट और एक सीनियर ट्रायल लॉयर पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. इससे ट्रम्प प्रशासन का इस कोर्ट के खिलाफ अभियान और बढ़ गया है. कोर्ट के कामकाज को रोकने के लिए और कदम उठाने की धमकी भी दी गई है. सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ... Read more
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज डील पर अमेरिका-ओमान में तनाव!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जारी तनाव के बीच ओमान को भी कड़ी चेतावनी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बन रही संभावित डील से नाराज हैं. इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप है, जबकि ओमान तेहरान के साथ सुरक्षित जहाजरानी को लेकर बातचीत आगे बढ़ा रहा है. इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है.
अपूर्वा मुखीजा, जिन्हें रेबेल किड के नाम से भी जाना जाता है, ने हाल ही में बताया है कि वह अब भारत में नहीं रहती हैं।
कनाडा में रह रहे भारतीय मूल के परिवारों को बढ़ती महंगाई और अमेरिकी शुल्क से गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रंप ने बताया होर्मुज बना अमेरिका का नया इलाका, देखें दुनिया आजतक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया है. सोशल मीडिया पर मैप दिखाकरउन्होनें ये दावा किया है. ट्रंप ने ये भी कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब अमेरिका का पूरा नियंत्रण है...ट्रंप के इस बयान से तनाव काफी बढ़ गया है.
ट्रेड वॉर की कगार पर अमेरिका-कनाडा: ट्रंप की डेडलाइन से बढ़ी हलचल; क्या आखिरी वक्त में झुकेंगे कार्नी? US-Canada on brink of a trade war Trump deadline sparks stir will Carney yield at last minute
ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को बताया ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’, वीडियो में ईरान बोला- जल्द समझ आएगा यहां अमेरिका का कोई अधिकार नहीं
राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज पर कब्जे की जिद पर अड़े, एमओयू फेल होने के बाद बताया नया अमेरिकी क्षेत्र
ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन के खत्म होने के एक दिन बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह नक्शा पोस्ट किया और कहा, होर्मुज स्ट्रेट खुला है और काम कर रहा है। सभी माइंस को हटा दिया गया या नष्ट कर दिया गया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और यूएई के सुरक्षा प्रमुख की फोन पर बातचीत, ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर चर्चा
भारत के वोटर आईडी की तारीफ - ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव सुधार के लिए दिया उदाहरण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनावी व्यवस्था की सराहना किए जाने पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा कि अमेरिका और भारत की वोटिंग प्रणाली में काफी फर्क है
अमेरिका में भी SIR, ट्रंप ने शुरू किया भारत की तरह वोटर लिस्ट साफ करने का अभियान
अमेरिका में मतदाता सूची की जांच के दौरान 24 हजार से अधिक गैर-नागरिक मतदाताओं का दावा सामने आया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली की सराहना करते हुए नागरिकता प्रमाण और फोटो पहचान पत्र को अनिवार्य बनाने वाले SAVE America Act को जल्द पारित करने की मांग की है.
'7000 मील दूर से देख रहे ख्वाब', अमेरिका ने होर्मुज पर ठोका दावा, ईरान ने ट्रंप का उड़ाया मजाक
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई ने होर्मुज़ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का मज़ाक उड़ाया और कहा कि इस जलमार्ग को फिर से खोलने के अमेरिका के सपने को सच करने के बीच की दूरी 7,000 मील की दूरी से भी ज़्यादा है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर बुधवार को श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात करेंगे, जो 15 वर्षों में किसी कार्यरत अमेरिकी राजदूत की जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री से पहली भेंट होगी।
ट्रंप ने होर्मुज को अमेरिका का हिस्सा बताया
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक पोस्ट कर खाड़ी क्षेत्र के 'नया अमेरिकी क्षेत्र' लिखा।
जब ईरान में हुआ तख्तापलट, अमेरिकी सरकार ने की थी मदद
आज के दिन ही ईरान में तख्तापलट कर अमेरिका ने शाह को सत्ता पर बैठाया था. इसके बाद ईरान पर दो दशक से भी ज्यादा समय तक अमेरिका का प्रभाव रहा.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर 19 अगस्त से जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जो अनुच्छेद 370 निरस्तीकरण के बाद पहला आधिकारिक दौरा है।
US: अमेरिका से लड़ाई के बीच ईरान ने ओमान से क्या समझौता किया? ट्रंप ने दी बमबारी की धमकी; यूएस क्यों परेशान?
World News: अमेरिका ने ICC अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील पर लगाई पाबंदियां; यूक्रेन के परमाणु संयंत्र में विस्फोट
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर पदभार संभालने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अपने पहले दौरे पर बुधवार को कश्मीर पहुंचेंगे।
Election Commission ने जारी किए 100 करोड़ Voter ID कार्ड, अमेरिकी राष्ट्रपति ने की प्रशंसा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ किए जाने के बाद निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि भारत में करीब 100 करोड़ मतदाताओं को ‘विशेष’ निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने कहा कि भारत में मतदान फोटो पहचान पत्र के आधार पर कराया जाता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने करीब एक अरब मतदाताओं सहित सभी मतदाताओं को विशेष ईपीआईसी जारी किए हैं। मतदाता एक विशिष्ट वेबसाइट के जरिए अपना ई-ईपीआईसी भी डाउनलोड कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि भारत में करीब 12 लाख मतदान केंद्रों के लिए मतदाता सूचियां तैयार की जाती हैं। इन सूचियों को राज्य सरकार के कर्मचारी बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा तैयार किया जाता है और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) इनका समानांतर रूप से ऑडिट करते हैं। उनके अनुसार, मतदान केंद्रों पर उम्मीदवारों द्वारा नियुक्त मतदान एजेंट भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। इसी तरह, मतगणना के दौरान उम्मीदवारों द्वारा नियुक्त मतगणना एजेंट भी पूरी प्रक्रिया का समानांतर रूप से ऑडिट करते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में बिना वैध फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने चुनावी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिका में प्रत्येक मतदाता के लिए अनिवार्य फोटो पहचान पत्र की वकालत की। ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में हाल के आम चुनाव में एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं ने डाक मतपत्र के जरिए मतदान किया और प्रत्येक मतदाता के पास वैध फोटो पहचान दस्तावेज था।
New Delhi, 18 अगस्त . Maharashtra साइबर एडीजी यशस्वी यादव ने भारत-अमेरिका साइबर सहयोग को लेकर मीडिया से बात की. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने आईएसीसी और अमेरिकी कंपनियों के साथ उत्तर प्रदेश Government के टाई-अप से महिलाओं को होने वाले फायदों का जिक्र किया. दोनों ने ... Read more
राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज पर कब्जे की जिद पर अड़े, एमओयू फेल होने के बाद बताया ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’
न्यूयॉर्क, 18 अगस्त . अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने Tuesday को होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे की अपनी योजना बताई. उन्होंने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की इस लाइफलाइन का एक नक्शा पोस्ट करके ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ बताया. ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन के खत्म होने के एक दिन बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह ... Read more
ट्रंप ने सराहा भारत का वोटर आईडी सिस्टम, वाइल अव्वाद बोले- अमेरिका में सुधार के लिए दिया उदाहरण
New Delhi, 18 अगस्त . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनावी व्यवस्था की सराहना किए जाने पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा कि अमेरिका और India की वोटिंग प्रणाली में काफी फर्क है. उन्होंने कहा कि ट्रंप का मकसद अमेरिकी चुनाव प्रणाली को बेहतर बनाना है. अव्वाद के मुताबिक India में ... Read more
राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज पर कब्जे की जिद पर अड़े, एमओयू फेल होने के बाद बताया 'नया अमेरिकी क्षेत्र'
राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज पर कब्जे की जिद पर अड़े, एमओयू फेल होने के बाद बताया 'नया अमेरिकी क्षेत्र'
'साइबर सुरक्षित माहौल के बिना बिजनेस संभव नहीं', महाराष्ट्र साइबर एडीजी ने कहा- अमेरिका के साथ सहयोग जारी
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
अबू अल-दुहुर एयरबेस पर हमले के बाद इजरायल पर बरसा अमेरिका, बोला- इसकी कोई जरूरत ही नहीं थी
इजरायली सेना ने हमलों पर कोई बयान नहीं दिया है. जबकि सीरिया के रक्षा मंत्रालय ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया.
अमेरिका से दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लेगा भारत, बढ़ेगी समुद्री निगरानी क्षमता
रिटायर्ड कैप्टन डीके शर्मा ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक डील साइन हुई है, जिसके तहत अमेरिका से दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लिए जाएंगे। इससे समुद्र में हो रही किसी भी हरकत पर निगरानी रख सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में ईरान के साथ बातचीत की कोई योजना नहीं है। तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ट्रंप ने कहा बातचीत का प्लान नहीं, ईरान बोला-गिड़गिड़ा रहा अमेरिका; होर्मुज पर तनाव कायम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहाकि ईरान के साथ बातचीत की कोई योजना नहीं है। इसके उलट ईरान का कहना है कि अमेरिका बातचीत के लिए गिड़गिड़ा रहा है।
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को अमेरिका में सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के 100 से ज्यादा लीडर्स के साथ कई राउंड-टेबल और वन-टू-वन मीटिंग की...
गांधीनगर, 18 अगस्त . Gujarat के Chief Minister भूपेंद्र पटेल ने Tuesday को अमेरिका में सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के 100 से ज्यादा लीडर्स के साथ कई राउंड-टेबल और वन-टू-वन मीटिंग की. उन्होंने राज्य को सिर्फ निवेश की जगह के तौर पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सप्लाई-चेन डेवलपमेंट के लिए एक लंबे समय के ... Read more
अमेरिका में सौ से ज्यादा इंडस्ट्री लीडर्स से गुजरात सीएम की मुलाकात, राज्य को 'बेहतरीन ट्रेड पार्टनर' बताया
होर्मुज़ पर अमेरिका का कब्ज़ा? ट्रंप ने शेयर किया मैप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मैप शेयर कर इसे ‘NEW U.S. Territory’ बताया. ईरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी बयान जमीनी हकीकत नहीं बदल सकते. ईरान का कहना है कि होर्मुज अभी भी बंद है और उसकी शर्तें स्वीकार किए जाने तक इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा.
होर्मुज पर अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने, बिहार के युवाओं के लिए गुड न्यूज; पढ़ें शाम की बड़ी खबरें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए नक्शे में अमेरिका का नया इलाका बताकर ईरान के साथ तनाव बढ़ा दिया है, दूसरी ओर बिहार लोक सेवा आयोग ने शिक्षक भर्ती के चौथे चरण का नोटिफिकेशन जारी कर 32388 पदों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं।
ट्रंप ने शेयर किया विवादित मैप, Strait of Hormuz को बताया अमेरिकी क्षेत्र; दुबई और केशम को लेकर भी दावा
होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावा: नक्शा पोस्ट कर बोले- यह अमेरिका का नया इलाका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान के साथ तनाव और बढ़ा दिया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक नक्शा पोस्ट कर इस रणनीतिक जलमार्ग को अमेरिका का नया इलाका घोषित किया है…
जमीन में 1000 साल का प्रेशर... बड़े अमेरिकी शहर में है 'भूकंप का गेट'
1000 साल के भूकंप इतिहास को खंगालने के बाद वैज्ञानिकों को कैलिफोर्निया की धरती के नीचे कुछ असामान्य मिला है. दो बड़े फॉल्ट पर प्रेशर रिकॉर्ड स्तर पर है. लॉस एंजेलिस के पास एक जगह है जो अगले बड़े भूकंप का रास्ता तय कर सकती है.
ये है अमेरिका का नया टेर्रेटिरी, ट्रूथ सोशल पर ट्रंप की नई पोस्ट ने मचाई हलचल
दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांज़िट रूट, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर अपना कंट्रोल होने का दावा करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (वहां के समय के अनुसार) इस जलमार्ग की एक AI-जनरेटेड तस्वीर शेयर की, जिस पर नया अमेरिकी इलाका लिखा था। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर जो तस्वीर शेयर की, उसमें ईरान और अरब प्रायद्वीप के बीच के जलमार्ग का नीला नक्शा दिखाया गया है। इस नक्शे में 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को एक फ्रेम के अंदर घेरा गया है, जिस पर मोटे अक्षरों में NEW U.S. Territory लिखा है। इस पोस्ट से ईरान के साथ जारी तनाव के बीच रणनीतिक ऊर्जा अवरोध बिंदु पर नियंत्रण के उनके प्रशासन के दावों को और बल मिलता है। इसे भी पढ़ें: ट्रंप से मुलाकात, UNGA से दूरी, 11 साल बाद जिनपिंग के लिए व्हाइट हाउस में बिछेगा रेड कार्पेट ट्रम्प ने सोमवार (स्थानीय समय) को भी इसी तरह की टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वाशिंगटन डीसी का इस क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण है। पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रम्प ने ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की प्रभावशीलता पर जोर दिया और कहा कि तेल की कीमतें गिर रही हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान बड़ी मुसीबत में है, वहाँ 300 प्रतिशत मुद्रास्फीति है, देश की हालत खराब है, और उनकी सेना पूरी तरह से पराजित है। मुझे लगता है यह एक बेहतरीन विचार है। मेरा मतलब है, हम नाकाबंदी से इसे नियंत्रित करते हैं। इसे एक क्षेत्र घोषित करने का विचार मुझे पसंद है। जलडमरूमध्य पर हमारा पूर्ण नियंत्रण है। अब, वे परेशानी खड़ी कर सकते हैं; वे पानी में बारूदी सुरंग बिछा सकते हैं, और लोग नहीं चाहते कि उनके अरबों डॉलर के जहाजों पर बारूदी सुरंगें गिरें। लेकिन नाकाबंदी बहुत प्रभावी रही है। अब, हो सकता है यह बंद हो जाए, या हो सकता है यह और भी खुल जाए, लेकिन अगर आप हमारे द्वारा किए जा रहे काम के आंकड़ों को देखें तो हम प्रति सप्ताह लाखों बैरल तेल निकाल रहे हैं। इसे भी पढ़ें: भारत ने करोड़ों...कुछ सीखो, चुनाव को लेकर ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन को दिखाया आईना घालिबाफ़ ने कहा कि जब तक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (समझौता ज्ञापन) में अमेरिका के वादे - जिनमें नाकेबंदी हटाना, फ्रीज़ की गई संपत्ति जारी करना, तेल पर लगी पाबंदियां हटाना, सभी मोर्चों पर धमकियां और सैन्य कार्रवाई बंद करना और अन्य शर्तें शामिल हैं - पूरे नहीं किए जाते, तब तक 'स्ट्रेट' (जलडमरूमध्य) नहीं खोला जाएगा। दुश्मनों को तनाव और न बढ़ाने की चेतावनी देते हुए, स्पीकर ने ज़ोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक दुश्मन की हरकतों और आक्रामकता के हिसाब से उसे और भी करारी हार देने के लिए तैयार है। इसके अलावा, घालिबाफ़ ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान की सेना और कूटनीतिक पक्ष मिलकर काम करें और अमेरिका द्वारा किए गए समझौते के उल्लंघन का जवाब दें। घालिबाफ़ ने कहा जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, दुश्मन - जिसने मजबूरी में युद्धविराम समझौते को स्वीकार किया था । इसलिए, अब समय आ गया है कि सैन्य क्षेत्र एक बार फिर कूटनीतिक क्षेत्र के साथ खड़ा हो और दुश्मन द्वारा समझौते के उल्लंघन का व्यावहारिक जवाब दे।
अमेरिकी से पढ़कर लौटी तो दादा ने 3 महीने नहीं की बात, 8000 करोड़ की तीन कंपनियां चला रही ये लड़की
Naiyya Saggi Success story: हार्वर्ड की पढ़ाई और अमेरिका की शानदार जिंदगी छोड़कर जब ये लड़की भारत लौटी. बिना किसी खानदानी दौलत के आज इस लड़की ने 8000 करोड़ की तीन कंपनियां खड़ी करके सबको हैरान कर दिया है.
'होर्मुज अब अमेरिका का नया इलाका...', ट्रंप ने मैप दिखाकर किया दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को Truth Social पर Strait of Hormuz का एक नक्शा पोस्ट किया, जिसमें इसे 'NEW U.S. Territory' बताया गया है.
ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट! सिर्फ 33% अमेरिकी खुश, 64% ने किया कामकाज को नापसंद
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अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर 19 अगस्त को कश्मीर घाटी पहुंचेंगे और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिलेंगे। यह दौरा भारत-अमेरिका के बीच राजनयिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित होगा, जिसमें सुरक्षा अहम है।
भारत की चुनाव प्रक्रिया सराहनीय, अमेरिका भी कर सकता है अनुसरण: योगेंद्र चंदोलिया
भारत की चुनाव प्रक्रिया सराहनीय, अमेरिका भी कर सकता है अनुसरण: योगेंद्र चंदोलिया
Strait of Hormuz Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दावे ने 'होर्मुज की खाड़ी' में तनाव को और भड़का दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज का एक नक्शा शेयर करते हुए उसे 'New U.S. Territory' यानी उन्होंने अपने पोस्ट में होर्मुज को अमेरिका का नया क्षेत्र करार दिया है।ट्रंप का यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की इजाजत नहीं देगा।ट्रंप का नक्शा और 'US Territory' का दावाट्रंप ने सोशल मीडिया पर होर्मुज की खाड़ी का नक्शा जारी कर उस पर 'New U.S. Territory' लिखा। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका का इस जलमार्ग पर 'पूरा नियंत्रण' है और उन्होंने ईरान से 'आत्मसमर्पण का सफेद झंडा' उठाने की मांग की थी।इतना ही नहीं, ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान ओमान को भी सीधी चेतावनी दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते के रास्ते में ओमान रुकावट बनता है, तो अमेरिका 'ओमान पर भारी बमबारी करने से पीछे नहीं हटेगा।'जब तक शर्तें पूरी नहीं होंगी, बंद रहेगी खाड़ीईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने ईरानी सरकारी टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि जब तक अमेरिका जून में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोला नहीं जाएगा।ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं है ये मुख्य शर्तें नौसैनिक नाकाबंदी का अंत: अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी तुरंत हटाई जाए। तेल प्रतिबंध हटाए जाएं: ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को खत्म किया जाए। जब्त संपत्तियों को अनफ्रीज करना: विदेशों में फंसे ईरान के वित्तीय एसेट्स (जब्त संपत्तियों) को वापस दिया जाए। गालीबाफ ने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य दुस्साहस का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।ओमान के साथ बैकचैनल वार्ता और ट्रंप की बौखलाहटएक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ ईरान और ओमान मिलकर एक वैकल्पिक नौवहन समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश होर्मुज की खाड़ी में एक निर्दिष्ट सुरक्षित मार्ग के भौगोलिक निर्देशांकों पर सहमत हो गए हैं। दोनों पक्ष एक 'संयुक्त बयान' का प्रारूप तैयार कर रहे हैं ताकि वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन फिर से शुरू हो सके।हालांकि, अमेरिका को दरकिनार कर ओमान और ईरान के बीच हो रही इस शांति वार्ता से राष्ट्रपति ट्रम्प खासे नाराज हैं, जिसके चलते उन्होंने ओमान को सैन्य हमले की धमकी दी है।आखिर क्यों इतना अहम है स्ट्रैट ऑफ होर्मुज?स्ट्रैट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के लगभग 20% हिस्से का परिवहन इसी रास्ते से होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद से इस इलाके में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। ईरान वर्तमान में इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से अनुमति मांगने और ट्रांजिट फीस देने की मांग कर रहा है, जिसका अमेरिका कड़ा विरोध कर रहा है।
खाड़ी देशों और वैश्विक राजनीति में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) की 60 दिनों की अवधि सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन शांति के बजाय तनाव और गहरा गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर उपजे विवाद और ओमान के बीच में आने से डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी है।समझौता क्यों हुआ विफलइस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य कार्रवाई को स्थायी रूप से रोकना, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। समझौते के तहत अमेरिका को 300 अरब डॉलर का पैकेज तैयार करना था, जबकि ईरान को परमाणु हथियारों की होड़ से हटना था। लेकिन विवाद की जड़ बना 'होर्मुज का समुद्री मार्ग'। ओमान द्वारा अमेरिका के समर्थन से एक नया समुद्री रूट तैयार करने पर ईरान ने आपत्ति जताई, जिसके बाद क्षेत्र में फिर से हमलों का दौर शुरू हो गया।ट्रंप की ओमान को खुली चेतावनीतनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ईरान ने ओमान के साथ होर्मुज मार्ग के नक्शे को लेकर बातचीत के संकेत दिए। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि यदि ओमान ईरान के साथ किसी भी ऐसी व्यवस्था में बाधा डालता है जो अमेरिका के हितों के खिलाफ है, तो वह उस पर बमबारी करने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्रीय समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।लेबनान और आर्थिक पैकेज का पेंचसमझौते में लेबनान की संप्रभुता का मुद्दा भी शामिल था, लेकिन इसमें इजरायल का स्पष्ट उल्लेख न होने के कारण स्थिति अस्पष्ट बनी रही। ईरान लगातार इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में हमलों को रोकने की मांग कर रहा था, जिसे इजरायल ने मानने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, 300 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज कौन देगा और इसे कैसे खर्च किया जाएगा, इस पर भी कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई, जिससे यह ऐतिहासिक समझौता पूरी तरह विफल हो गया है।
ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था का दिया हवाला, वीडियो में देंखे ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास कराने की अपील
दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र कहे जाने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका और सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनावी प्रणालियों को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में मतदाता पहचान (Voter Identification) और नागरिकता सत्यापन के ढीले नियमों पर गहरा असंतोष जताते हुए भारतीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की जमकर तारीफ की है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक आधिकारिक पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी संसद (Congress) से अपील की है कि देश में निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) को तत्काल प्रभाव से पारित किया जाना चाहिए। ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव प्रणाली में मौजूद खामियों को उजागर करने के लिए भारत के पिछले लोकसभा चुनावों में 64.6 करोड़ मतदाताओं द्वारा अनिवार्य वैध फोटो पहचान पत्र के साथ मतदान करने का ठोस उदाहरण दुनिया के सामने रखा है।The Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के साथ हुई एक हालिया चर्चा का उल्लेख करते हुए लिखा कि उन्होंने हमारे प्रशासन से सीधे तौर पर पूछा था कि आखिर अमेरिका में बिना किसी अनिवार्य और वैध फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे संपन्न कराए जा सकते हैं? ट्रंप ने भारत की विशाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सराहना करते हुए जोर दिया कि भारत जैसे विशाल देश में 64.6 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जहां 1 प्रतिशत से भी कम लोगों ने मेल-इन बैलट (डाक मतपत्र) का सहारा लिया और मतदान केंद्र पर पहुंचने वाले प्रत्येक नागरिक के पास सरकार द्वारा जारी वैध फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य था।भारत के 64.6 करोड़ वोटर्स और वैध फोटो आईडी का दिया उदाहरणFinancial Express के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करती है, जहां बायोमेट्रिक और फोटो आधारित मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के बिना कोई भी फर्जी मतदान नहीं कर सकता। इसके विपरीत, अमेरिका के कई राज्यों में आज भी संघीय चुनावों के दौरान मतदाताओं से किसी ठोस फोटो पहचान पत्र की मांग नहीं की जाती और केवल स्व-सत्यापन (Self-Attestation) के आधार पर वोट डालने की अनुमति दे दी जाती है।व्हाइट हाउस की ओर से जारी आधिकारिक ब्रीफिंग में भी इस बात को रेखांकित किया गया है कि भारत और ब्राजील जैसे देश अपने मतदाता पहचान तंत्र को एक मजबूत बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ते हैं, जबकि अमेरिका अब तक बुनियादी और अनिवार्य चुनावी सुरक्षा उपायों को लागू करने में कई विकासशील देशों से भी पीछे छूट रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि पारदर्शी लोकतंत्र की पहली शर्त यह है कि केवल और केवल उस देश के वैध नागरिक ही मतदान की प्रक्रिया में भाग लें, ताकि चुनावी परिणामों की शुचिता पर किसी प्रकार का संशय न रहे।क्या है 'SAVE America Act' और क्यों मचा है अमेरिका में सियासी घमासान?The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, 'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट' यानी 'SAVE America Act' एक प्रस्तावित संघीय कानून है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी संघीय चुनावों में मतदान के नियमों को कड़ा और पारदर्शी बनाना है। इस विधेयक के तहत मतदाताओं को वोटर लिस्ट में रजिस्ट्रेशन कराने से पहले अपनी अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण (जैसे पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र) और मतदान के समय वैध सरकारी फोटो आईडी दिखाना अनिवार्य होगा।इसके अलावा, यह कानून सभी राज्यों को निर्देश देता है कि वे अपनी मतदाता सूचियों की गहन जांच करके सभी गैर-नागरिकों (Non-citizens) के नाम वोटर लिस्ट से बाहर करें। इस बिल में डाक द्वारा मतदान (Mail-in Voting) को भी केवल गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, सैन्य सेवा या विदेश यात्रा जैसी असाधारण परिस्थितियों तक ही सीमित करने का प्रावधान किया गया है। रिपब्लिकन पार्टी और कंजर्वेटिव थिंक-टैंक इस बिल को चुनाव सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का तर्क है कि ऐसे कड़े नियमों से उन लाखों गरीब और अल्पसंख्यक नागरिकों के लिए मतदान करना कठिन हो जाएगा जिनके पास तत्काल आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते।अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और मुख्य चुनाव आयुक्त की मुलाकातट्रंप का यह बयान उस समय सामने आया है जब भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने नई दिल्ली स्थित भारतीय निर्वाचन आयोग के मुख्यालय 'निर्वाचन सदन' में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से औपचारिक मुलाकात की। इस बैठक के दौरान भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को भारत के चुनावी प्रबंधन, ईवीएम और वीवीपैट की सुरक्षा तथा मतदाता फोटो पहचान पत्र की तकनीक से अवगत कराया था।मुलाकात के बाद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप की बात बिल्कुल सटीक है कि भारत के 64.6 करोड़ मतदाताओं ने अनिवार्य पहचान पत्र के साथ मतदान किया और अमेरिकी कांग्रेस को बिना किसी देरी के 'SAVE America Act' पारित करना चाहिए। Navbharat Times की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के निर्वाचन अधिकारियों ने चुनावी प्रबंधन और तकनीकी सहयोग को लेकर भी सकारात्मक बातचीत की है।भारतीय चुनाव प्रणाली की वैश्विक साख और चुनावी सुधारों की दिशाभारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा विकसित मतदाता पहचान प्रणाली आज दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों के लिए एक वैश्विक मानक बन चुकी है। 1990 के दशक में शुरू हुआ मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) का सफर आज डिजिटल ई-एपिक और आधार लिंकेज के साथ अत्यंत आधुनिक हो चुका है। भारत में मतदान केंद्रों पर स्याही लगाने, फोटो युक्त मतदाता पर्ची और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए फर्जी मतदान की संभावनाओं को लगभग समाप्त कर दिया गया है।अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत के इस मॉडल की खुलकर तारीफ करना यह दर्शाता है कि चुनावी तकनीक और प्रबंधन के मामले में भारत न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि पश्चिमी देशों को भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पारदर्शी संचालन का मार्ग दिखा रहा है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा कि आप बिना वैध फोटो आईडी के अमेरिका में चुनाव कैसे करवा सकते हैं ?
ईरान का अमेरिकी सैनिकों को मारने-पकड़ने पर इनाम का ऐलान, भड़के ट्रंप
ईरानी आर्मी ने अमेरिकी सैनिकों को मारने और पकड़ने पर इनाम का ऐलान किया है. ये एलान किया है ईरान के कमांडर-इन चीफ अमिर हातमी ने. उन्होंने कहा है कि जो भी अमेरिकी सैनिक को मारेगा या पकड़कर हमारी सेना के हवाले करेगा, उसे 30,000 डॉलर के बराबर का तोहफा दिया जाएगा. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक आर्मी कमांडर ने कहा है कि अमेरिकी सैनिकों पर इनाम घोषित करने की ये योजना वित्तीय सहायता के लिए आए ढेर सारे अनुरोधों के बाद तैयार की गई है.
सैमसंग के बाद गूगल भी छोड़ेगी चीन! मुश्किल में ड्रेगन की साख; क्या भारत आएगी अमेरिकी दिग्गज?
गूगल 2027 तक अपने पिक्सल स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और ईयरबड्स का उत्पादन चीन से बाहर स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है। भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन के कारण कंपनी वियतनाम और भारत में विनिर्माण क्षमता बढ़ा रही है।
अमेरिका में विश्व चैंपियन बनीं 14 वर्षीय इनाया, जयपुर में जिला स्तरीय सम्मान से नवाजी गईं
अमेरिका में रोबोफेस्ट विश्व चैंपियनशिप 2026 की विजेता 14 वर्षीय इनाया ख़ान को जयपुर के चौगान स्टेडियम में जिला स्तरीय समारोह में सम्मानित किया गया। जानिए उनकी उपलब्धि और सामाजिक योगदान की पूरी कहानी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय चुनाव प्रणाली की प्रशंसा के बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा।
अमेरिका में 15 साल से ज्यादा समय बाद एक ही दिन तीन लोगों को फांसी दी गई. तीन अलग-अलग राज्यों की ये फांसियां संयोग थीं, लेकिन बढ़ती फांसी ने अमेरिका की मौत की सजा की नीति पर बहस छेड़ दी है.
भारत ने करोड़ों...कुछ सीखो, चुनाव को लेकर ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन को दिखाया आईना
ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एक सवाल का हवाला देते हुए अमेरिका को सीखने को बोला है और वजह है बिना आईडी कार्ड के चुनाव। ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन को आईना दिखाते हुए भारत का उदाहरण दिया। ट्रंप का कहना है कि अगर भारत करोड़ों लोगों से बिना किसी धांधली के वोटिंग करवा सकता है तो अमेरिका ऐसा क्यों नहीं करवा पा रहा है? भारत के लोकतंत्र की गूंज आज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इस बार यह तारीफ जो है वह किसी और से नहीं बल्कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आई है। ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रक्रिया और हमारे वोटर आईडी कार्ड सिस्टम की जमकर तारीफ की और इसकी मिसाल देते हुए अमेरिका को बड़ी नसीहत दी है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अमेरिका को चुनावी सूचिता के मामले में भारत से सीखना चाहिए। यानी कि दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र होने का दावा करने वाला अमेरिका अब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी कि भारत से सीखना चाहता है। इसे भी पढ़ें: Iran पर परमाणु बम गिराएगा अमेरिका? ये महिला कौन, जिसने मचा दी सनसनी यह मामला शुरू होता है ट्रंप के सोशल मीडिया ट्रू सोशल पर दिए गए बयान से। जहां पर उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि हाल ही में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से एक चुभता हुआ सवाल पूछा। उन्होंने पूछा आखिर अमेरिका में बिना किसी वैध फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे हो सकते हैं? ट्रंप ने इसी सवाल को आधार बनाकर अमेरिका में सेव अमेरिका एक्ट को तुरंत पास करने की मांग की है। ट्रंप का कहना है कि अगर भारत जैसे विशाल देश में हर नागरिक फोटो आईडी कार्ड दिखाकर वोट डालता है तो अमेरिका में ऐसा क्यों नहीं होता? ट्रंप ने अपनी पोस्ट में भारत के हालिया आम चुनावों के आंकड़ों का भी जिक्र करते हुए दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने लिखा कि पिछले साल चुनाव में 64 करोड़ 60 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। हर एक वोटर के पास एक वैध फोटो पहचान पत्र था। सिर्फ 1% से भी कम लोगों ने डाक के जरिए यानी कि पोस्टल बैलेट के जरिए वोट डाला। इसे भी पढ़ें: Russia में सेना-हथियार उतारते ही किम जोंग के आगे गिड़गिड़ाए ट्रंप, NATO देशों के बीच खलबली मची ट्रंप ने तर्क दिया कि जब इतनी बड़ी आबादी वाला देश पूरी पारदर्शिता के साथ फोटो आईडी कार्ड के जरिए मतदान करवा सकता है तो अमेरिका में बिना आईडी कार्ड के वोटिंग एक चुनावी धोखाधड़ी को बढ़ावा देना है। सिर्फ ट्रंप ही नहीं इसके बाद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गौर ने भी ट्रंप की बात का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने एक्स पर ट्रंप के पोस्ट को साझा करते हुए लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप बिल्कुल सही कह रहे हैं। भारत ने दिखा दिया कि कैसे तकनीक और पहचान पत्र के जरिए दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव सुरक्षित तरीके से करवाया जा सकता है। कानून में वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का सबूत अनिवार्य हो जाएगा। यानी कि जो कोई भी व्यक्ति अमेरिका में वोट डालना चाहता है उसके पास सिटीजनशिप जरूरी होगी। पूरे देश में मतदान के लिए फोटो आईडी कार्ड जरूरी हो जाएगा। यानी कि अमेरिका में वोट डालने के लिए भारत की ही तरह एक फोटो आईडी कार्ड होना पड़ेगा और मेल इन बैलेट यानी कि डाक द्वारा वोटिंग पर पाबंदी लगाई जाएगी।
भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाइए, वहीं रखिए... ट्रंप ने की तारीफ तो भड़की कांग्रेस
ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली और वोटर ID व्यवस्था की तारीफ की। इस पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने CEC ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाने और EVM भेजने का तंज कसा। जानिए ट्रंप ने क्या कहा और क्या है मामला?
Iran पर परमाणु बम गिराएगा अमेरिका? ये महिला कौन, जिसने मचा दी सनसनी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिका की पूर्व कांग्रेस वुमेन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने आरोप लगाया है कि वाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ईरान के खिलाफ संभावित परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं। ग्रीन ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्ट्स पर दावा किया कि ऐसी उच्च स्तरीय बातचीत वास्तव में हुई है। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने कथित बैठकों में शामिल अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए हैं। ग्रीन का दावा है कि ट्रंप प्रशासन परमाणु कारवाई की सीमा को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन अपने ही खुफिया आकलनों को नजरअंदाज कर रहा है। इसे भी पढ़ें: ईरान ने पलटा पूरा गेम, BRICS बैंक में एंट्री से उड़ाए अमेरिका के होश! ग्रीन के मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस आकलनों से यह संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है। बावजूद इसके उनके आरोप के मुताबिक वाशिंगटन ईरान को लेकर इजराइल की ओर से मिल रही चेतावनियों को ज्यादा महत्व दे रहा है। हालांकि यह दावा स्वतंत्र रूप से सच साबित नहीं हुआ है और अमेरिकी सरकार की ओर से ऐसी किसी परमाणु हमले की तैयारी की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं की गई है। मारजोरी टेलर ग्रीन ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की परमाणु कारवाई को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उनका कहना है कि ऐसा कदम अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव को एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है। बड़े पैमाने पर जान माल के नुकसान के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर Donald Trump का बड़ा दावा, बोले- जल्द ही इसे US Territory घोषित करेंगे ग्रीन ने इस संदर्भ में ट्रंप के उस राजनीतिक वादे का हवाला दिया है जिसमें उन्होंने अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखने की बात कही थी। ग्रीन के इन आरोपों पर वाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। अमेरिकी सरकार या रक्षा अधिकारियों ने यह भी सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है जिससे साबित हो कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी परमाणु नीति में कोई बदलाव किया है। यानी फिलहाल ईरान पर अमेरिकी परमाणु हमले की तैयारी का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। लेकिन यह सच है। ग्रीन का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों में भी लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका की ओर से तेहरान पर दबाव बनाए रखने के साथ-साथ क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसे भी पढ़ें: Hormuz Strait में ADNOC Tankers पर हमला: UAE ने Iran को घेरा, कहा- यह Maritime Piracy है खासकर होर्मुज स्टेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों को लेकर क्षेत्रीय तनाव लगातार चर्चा में है। मोर्चुरी टेलर ग्रीन इससे पहले भी ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के कुछ फैसलों का विरोध कर चुकी हैं। हालांकि वे खुद को ट्रंप का समर्थक बताती रही हैं। जून 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद भी ग्रीन ने प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि विदेशों में सैन्य कारवाई और शासन परिवर्तन से जुड़े अभियानों से दूरी बनाने के चुनावी वादों से प्रशासन पीछे हट रहा है। ग्रीन के ताजा आरोप एक बार फिर उन्हें ट्रंप प्रशासन की आधिकारिक विदेश नीति से अलग खड़ा करते दिखाई देते हैं।
अमरीकी राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक बेहद अहम और तीखी बहस छिड़ी हुई है, जो सीधे तौर पर वहां की मतदान प्रणाली और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ी हुई है। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर देश की इलेक्टोरल प्रक्रिया पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हुए मांग की है कि अमेरिका में भी भारत की तरह अनिवार्य रूप से वोटर आईडी (Voter ID) लागू किया जाना चाहिए। अमेरिका जैसी दुनिया की सबसे पुरानी और ताकतवर महाशक्ति में आज तक मतदान के लिए भारत की तरह कोई एक समान और पुख्ता सरकारी पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य नहीं रहा है, जबकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में दशकों से बिना वोटर आईडी के मतदान की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। ट्रंप के इस नए बयान ने अमेरिकी राजनीति में भूचाल ला दिया है और इसके साथ ही दोनों देशों की चुनाव प्रणालियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।अमेरिका और भारत की चुनाव प्रणालियों की बुनियादी और गहरी बनावटजब हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों यानी अमेरिका और भारत के चुनावी सिस्टम की तुलना करते हैं, तो जमीन-आसमान का अंतर साफ तौर पर दिखाई देता है। भारत में चुनाव संचालन के लिए एक संवैधानिक और पूरी तरह से स्वतंत्र स्वायत्त संस्था यानी भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) मौजूद है, जो पूरे देश में एक समान नियमों और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराती है। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका में संघीय स्तर पर कोई एक केंद्रीय चुनाव आयोग नहीं है। वहां के चुनाव राज्यों और स्थानीय काउंटियों के अपने अलग-अलग कानूनों और नियमों के तहत आयोजित किए जाते हैं, जिससे पूरे देश में एकरूपता का अभाव रहता है और यही बात अमेरिकी राजनेताओं के बीच हमेशा से बहस का बड़ा मुद्दा रही है।वोटर आईडी को लेकर अमेरिका में क्यों छिड़ी है लंबी और तीखी बहसभारत में वोटर आईडी कार्ड, जिसे आम तौर पर 'एपिक' (EPIC) कहा जाता है, मतदान केंद्र पर अपनी पहचान साबित करने का सबसे प्रमुख और आधिकारिक दस्तावेज है। इसके बिना कोई भी नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता है। वहीं, अमेरिका के कई राज्यों में मतदान के लिए वोटर आईडी की अनिवार्यता नहीं है, और इसके बजाय ड्राइविंग लाइसेंस, यूटिलिटी बिल या अन्य स्थानीय दस्तावेजों के आधार पर वोट डालने की अनुमति मिल जाती है। डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थक लंबे समय से यह तर्क देते आए हैं कि इस लचर व्यवस्था के कारण फर्जी मतदान और चुनावी धांधली की गुंजाइश बनी रहती है। उनका साफ कहना है कि देश में निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित करने के लिए हर मतदाता के पास एक पुख्ता फोटो पहचान पत्र होना चाहिए।डोनाल्ड ट्रंप की मांग और चुनावों में पारदर्शिता का कड़ा सवालडोनाल्ड ट्रंप का यह बार-बार कहना है कि अमेरिका को चुनावी सुरक्षा के मामले में भारत जैसे देशों से सीख लेनी चाहिए, जहां तकनीक और दस्तावेजों की सख्ती के साथ चुनावों को पूरी तरह से अचूक बनाया जाता है। ट्रंप का मानना है कि जब तक अमेरिका में मतदान के लिए सख्त पहचान नियमों को अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक चुनावी परिणामों पर जनता का पूरा भरोसा कायम रखना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी और उनके आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के कड़े नियम लागू करने से गरीबों, minorities और उन लोगों के लिए मतदान करना कठिन हो जाता है जिनके पास आसानी से आधुनिक पहचान पत्र उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। इस वैचारिक मतभेद ने इस मुद्दे को अमेरिका का सबसे संवेदनशील राजनीतिक विषय बना दिया है।दोनों देशों के मतदाता पंजीकरण और डेटाबेस में अंतरभारत में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को चुनाव आयोग द्वारा बेहद सुव्यवस्थित और डिजिटल बनाया गया है, जहां लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए हर पात्र नागरिक का नाम केंद्रीय और स्थानीय मतदाता सूचियों में स्पष्ट रूप से दर्ज होता है। इसके उलट, अमेरिका में नागरिक को खुद आगे बढ़कर वोटर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है और कई राज्यों में चुनाव के दिन भी ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिल जाती है। दस्तावेजों की इस भिन्नता के कारण अमेरिकी चुनावी व्यवस्था हमेशा से आलोचकों के निशाने पर रही है, क्योंकि वहां मतदाता सूचियों की सटीकता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, जो भारत की चुस्त-दुरुस्त प्रणाली में देखने को नहीं मिलते।भारतीय लोकतंत्र की मजबूत चुनाव प्रणाली से दुनिया क्यों ले रही है प्रेरणाआज के समय में भारत का निर्वाचन आयोग जिस विशाल पैमाने पर, यानी सौ करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराता है, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। भारत ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी मतदान प्रक्रिया को दुनिया के लिए एक मिसाल बना दिया है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी व्यवस्था में भारतीय तर्ज पर वोटर आईडी की मांग करना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि भारत की चुनावी प्रबंधन प्रणाली अब वैश्विक स्तर पर एक मानक और आदर्श के रूप में देखी जाने लगी है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सामरिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से एक बार फिर सनसनीखेज और दहला देने वाली खबरें सामने आ रही हैं। इस व्यस्त जलमार्ग पर जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों ने ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी सप्लाई चेन की सांसे अटका दी हैं। इन सबके बीच अमेरिकी प्रशासन और ओमान के बीच तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब अमेरिका की ओर से कथित तौर पर ओमान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया गया और बम गिराने तक की धमकियां सामने आने लगीं। पश्चिम एशिया के इस सुलगते रणक्षेत्र में तेल के कुओं और समुद्री जहाजों पर मंडराते खतरे के बीच दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष एक बड़े विश्व युद्ध की आग को हवा देने वाला है।होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर लगातार हमले और ग्लोबल ट्रेड का संकटदुनिया का कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा बनाता है। पिछले कुछ समय से इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों, ऑयल टैंकरों और कार्गो शिप्स पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। इन हमलों के पीछे सक्रिय मिलिशिया समूहों और क्षेत्रीय ताकतों का हाथ बताया जा रहा है, जिससे इस रास्ते से गुजरने वाले नाविकों और शिपिंग कंपनियों में भारी खौफ पैदा हो गया है। जहाजों पर बढ़ते इन खतरों के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।अमेरिका और ओमान के बीच बढ़ता तनाव और धमकी का पूरा सचइस संवेदनशील माहौल के बीच ओमान की रणनीतिक स्थिति और उसकी तटस्थ विदेश नीति पर अमेरिकी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ओमान हमेशा से खाड़ी देशों के बीच एक शांतिप्रिय और मध्यस्थ देश की भूमिका निभाता आया है, लेकिन अमेरिकी रक्षा रणनीतिकारों और शीर्ष अधिकारियों के साथ उसके रिश्तों में खटास की खबरें आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंधों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ओमान के बीच तीखी तनातनी हुई है, जिसके चलते अमेरिका की तरफ से आक्रामक तेवर अपनाए गए हैं।तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता हुआ बड़ा खतराहोर्मुज जलडमरूमध्य में जारी इस घमासान का सीधा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ रहा है। यदि यह जलमार्ग लंबे समय के लिए बंद होता है या यहां जहाजों का आवागमन असुरक्षित हो जाता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो सकती है। भारत समेत कई एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी खाड़ी मार्ग पर निर्भर हैं। तेल के दामों में होने वाली जरा सी भी वृद्धि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई का पहाड़ लेकर आती है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ता है।खाड़ी देशों की कूटनीति और पश्चिम एशिया का बदलता हुआ खतरनाक समीकरणपश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक समीकरण इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका अपनी नौसैनिक ताकत के दम पर इस क्षेत्र में दबदबा बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय देश अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति से समझौता करने को तैयार नहीं हैं। ओमान जैसे देशों पर बनने वाला दबाव इस बात का संकेत है कि महाशक्तियां अपने सामरिक हितों के लिए छोटे और मध्यस्थ देशों को भी अपने पाले में लाने या उन पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए किस हद तक जा सकती हैं।आने वाले समय में युद्ध के बादल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताविशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी यह तनाव जल्द ही कूटनीतिक बातचीत के जरिए नहीं सुलझाया गया, तो यह संघर्ष पश्चिम एशिया की सीमाओं को पार कर वैश्विक तबाही का रूप ले सकता है। यूनाइटेड नेशंस और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने और समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। दुनिया भर के देश इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं एक छोटी सी चिंगारी पूरे समंदर को आग के गोले में न बदल दे, जिससे मानवता को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
China को छोड़ पुतिन ने भारत को चुना पहला पार्टनर देश, हिला अमेरिका!
आज जब पूरी दुनिया एक तरफ खड़ी है और रूस दूसरी तरफ खड़ा है तब भारत ने जो किया उसने पूरी दुनिया की कूटनीति के सिद्धांतों को हिला कर रख दिया। अमेरिका ने प्रतिबंधों का जाल बिछाया। यूरोप ने आंखें दिखाई और डॉलर को हथियार बनाया गया ताकि रुपए को दुनिया के नक्शे से आर्थिक रूप से मिटाया जा सके। लेकिन मॉस्को से जो खबर आई है वह केवल एक व्यापारिक खबर नहीं होने वाली है। वह भारत की संप्रभुता का विजय घोष है। रूस ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है साल 2026 के रशियन एनर्जी वीक यानी आरईडब्ल्यू में कि भारत पहला आधिकारिक भागीदार देश बन गया है उसका। यह दर्जा आज तक किसी को नहीं मिला। चीन को भी नहीं मिला है। दरअसल मॉस्को का मोनेज सेंट्रल एग्बिशन हॉल पूरी दुनिया के लिए शक्ति का केंद्र बन चुका है। 100 देशों के 7000 डेलीगेट्स वहां मौजूद थे। लेकिन सबकी निगाहें केवल एक तिरंगे पर होगी। रूसी सरकार के बयान के अनुसार भारत इस फोरम का स्टार पार्टनर है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री यानी कि एफआईपीआई की अगुवाई में भारत की आठ सबसे बड़ी महारत्न और नवरत्न कंपनियां वहां भारत का झंडा गाड़ रही हैं। इसे भी पढ़ें: Russia ने Ukraine की Naftogaz कंपनी पर 300 बार किए हमले, ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान यह प्रदर्शनी केवल तेल दिखाने के लिए नहीं था। यह दुनिया को यह बताने के लिए कि भारत अब रूस के ऊर्जा साम्राज्य का हिस्सेदार बन चुका है। और रूस का ऐलान भी सुनिए। उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक का यह कहना कि रूस भारत में अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बनाना चाहता है। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है। जुलाई 2026 के आंकड़े किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी है। भारत ने रूस से 2.8 मिलियन बैरल कच्चा तेल हर दिन खरीदा। यह भारत की कुल ऊर्जा जरूरत का 55.5% है। अब आप खुद कल्पना कीजिए यूक्रेन युद्ध से पहले यह हिस्सा 1% से भी कम था। यकीन मानिए रिपोर्ट्स देखिए। अमेरिका ने प्राइस कैप लगाया ताकि रूस को $60 से ज्यादा कीमत ना मिले। लेकिन भारत ने अपनी चतुराई दिखाई अपने दोस्त के लिए और कूटनीति से अमेरिका के उस कैप की धज्जियां उड़ा दिए। इसे भी पढ़ें: Russia में सेना-हथियार उतारते ही किम जोंग के आगे गिड़गिड़ाए ट्रंप, NATO देशों के बीच खलबली मची भारत ने ना केवल सस्ता तेल खरीदा बल्कि उसे रिफाइन करके यूरोप तक पहुंचा दिया। और आज हमारा दोस्त पेट्रोल जब मांगता है रूस तो भारत फटाक से दे देता है। यानी जिस रूस पर बैन लगे प्रतिबंध लगे थे उसी का तेल घूमकर यूरोप गया, रूस गया और इसमें भारत ने मिडिल मैन बनकर अरबों की कमाई भी की। यह कूटनीति का वो मास्टर स्ट्रोक था जिसे हावर्ड और ऑक्सफोर्ड में पढ़ाया जरूर जाएगा।
China Green Energy Global Expansion: कैरेबियाई देश क्यूबा इन दिनों गंभीर बिजली संकट और ब्लैकआउट से जूझ रहा है। इस बीच चीन ने क्यूबा को 5,000 सोलर फोटोवोल्टिक (PV) सिस्टम भेजे हैं, जिन्हें अस्पतालों, प्रमुख संस्थानों और ऑफ-ग्रिड इलाकों में लगाया जा रहा है। सतह पर यह एक मानवीय मदद दिखती है, लेकिन इसके पीछे चीन का एक बहुत बड़ा जियोपॉलिटिकल और इकोनॉमिक मास्टरप्लांन छिपा हुआ है।चीन सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा सोलर और विंड इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर ही नहीं रहा, बल्कि अब वह अपनी 'क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी' का इस्तेमाल ग्लोबल साउथ के देशों में अपना राजनीतिक और तकनीकी दबदबा बढ़ाने के लिए कर रहा है।क्यूबा का उदाहरण क्यों है सबसे खास?अमेरिकी प्रतिबंधों और ईंधन संकट के बीच पिस रहे क्यूबा के लिए चीनी सोलर पैनल किसी जीवनदान से कम नहीं हैं। पिछले 5 वर्षों में क्यूबा द्वारा चीनी सोलर पैनलों के आयात में 1,800% से अधिक की भारी वृद्धि हुई है।विशेषज्ञों का मानना है कि तेल के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहने वाला क्यूबा अब धीरे-धीरे इनवर्टर, पैनल, स्पेयर पार्ट्स और बैटरी के लिए चीन पर वित्तीय व तकनीकी रूप से निर्भर होता जा रहा है।अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के टैरिफ से परेशान चीन के पास विशाल ओवरकैपेसिटी है। अमेरिका के ठीक पड़ोस (कैरेबियाई क्षेत्र) में क्यूबा की मदद करके चीन अपने पुराने राजनीतिक साझेदार को टूटने से बचा रहा है और अमेरिका को कड़ा संदेश दे रहा है।चीन ने कैसे बनाई 'रिन्यूएबल एनर्जी' में अपनी बादशाहत?चीन की क्लीन एनर्जी इंडस्ट्री का आकार भारत, ब्राजील या कनाडा जैसे देशों की कुल जीडीपी के बराबर पहुंच चुका है। दुनिया भर के सोलर मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन के 80% से अधिक हिस्से पर अकेला चीन का कब्जा है। चीन के क्लीन एनर्जी सेक्टर ने वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 15.4 ट्रिलियन युआन ($2.2 ट्रिलियन) का बिजनेस जनरेट किया, जो उसकी कुल GDP का 11.4% हिस्सा है।2026 की पहली छमाही में चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत 56% निवेश अकेले सोलर, विंड और हाइड्रो जैसे ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में हुआ है।विकासशील देश क्यों खरीद रहे हैं चीनी तकनीक?अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों के लिए चीनी सोलर उपकरण बेहद सस्ते, टिकाऊ और तेजी से लगने वाले हैं। सोलर और विंड पावर अब दुनिया के 91% नए प्रोजेक्ट्स में पारंपरिक कोयले या डीजल से सस्ते पड़ रहे हैं। केन्या, नामीबिया, पाकिस्तान, श्रीलंका और कंबोडिया जैसे देशों ने अपनी राष्ट्रीय ग्रिड क्षमता से अधिक चीनी सोलर उपकरण आयात कर लिए हैं।क्या भारत बन सकता है चीन का विकल्प?चीन के इस बढ़ते वर्चस्व को टक्कर देने के लिए भारत भी अपने सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को तेजी से बढ़ा रहा है। भारत की PV मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी 2018 के 10 GW से बढ़कर 2026 में 172 GW तक पहुंच गई है। भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से चीनी सोलर पैनलों का भारत में आयात 2020 के 8.2 GW से घटकर 2025 में सिर्फ 2.1 GW रह गया है।हालांकि, भारत मॉड्यूल असेंबल तो कर रहा है, लेकिन अपस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग (कच्चे माल और सिलिकॉन वेफर) के लिए अभी भी चीन पर निर्भर है। ग्लोबल साउथ को तकनीक निर्यात करने के लिए भारत को इस सप्लाई चेन गैप को भरना होगा।कुल मिलाकर सच्चाई ये है कि चीन अपनी घरेलू 'ओवरकैपेसिटी' और पश्चिमी देशों के टैरिफ का मुकाबला करने के लिए क्लीन एनर्जी को एक शक्तिशाली 'जियोपॉलिटिकल टूल' बना चुका है। क्यूबा से लेकर अफ्रीका तक, चीन केवल सोलर पैनल नहीं बेच रहा, बल्कि आने वाले दशकों के लिए रणनीतिक और तकनीकी रिश्ते मजबूत कर रहा है।
चीन से कितने अलग हैं अमेरिका के घर? दोनों जगह नहीं करते ईंट का इस्तेमाल
अमेरिका और चीन में घर बनाने के तरीके एकदम अलग- अलग हैं. फिर भी दोनों में एक समानता है. दोनों ही जगह ईंट का इस्तेमाल घर बनाने में नहीं किया जाता है. अगर होता भी है तो कुछ- एक काम के लिए. चलिए जानते हैं अमेरिका और चीन में घर कैसे बनते हैं?
ट्रंप ने भारतीय अमेरिकी बच्चे को लहरों से बचाने वाले लाइफगार्ड को किया सम्मानित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक 16 वर्षीय लाइफगार्ड को सम्मानित किया, जिसने पिछले महीने कैलिफोर्निया के एक समुद्र तट पर 10 वर्षीय भारतीय मूल के लड़के को डूबने से बचाया। ट्रंप ने लाइफगार्ड, राइडर विलियम्स, और उनके परिवार के सदस्यों, साथ ही युवा लड़के नाथानियल राय, उसकी बहन लैला और उसके पिता …
भारत के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का अमेरिका हुआ मुरीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का हवाला देते हुए अमेरिका में हर मतदाता के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग की। ट्रंप ने भारत के चुनावों में फोटो पहचान दस्तावेज की अनिवार्यता और बेहद कम पोस्टल वोटिंग का जिक्र करते हुए SAVE अमेरिका एक्ट के समर्थन में तर्क दिया।
भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनावी सिस्टम की जमकर सराहना करते हुए अमेरिका में वोटिंग के नियम कड़े करने और 'सेव अमेरिका एक्ट' लागू करने की मांग की। उन्होंने इस दौरान भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र किया।
वेंकटा नरसमांबा वासमसेट्टी साल 2022 में कई महीनों तक भारत में रुक गई थीं. आखिर अमेरिका में कानूनी स्थायी निवासी होने के बावजूद उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया है?
एक रिस्ट बैंड से नावजात बच्चों की मौत को कैसे कम कर रहा अमेरिका?
अमेरिका में नई माताओं को दिया जा रहा 'I Gave Birth' Wristband चर्चा में है. जानिए यह छोटा सा बैंड डिलीवरी के बाद होने वाली जटिलताओं की पहचान कर महिलाओं की जान बचाने में कैसे मदद कर रहा है.
ट्रंप ने भारत के चुनाव सिस्टम की तारीफ की, बोले- जब भारत में Photo ID जरूरी तो अमेरिका में क्यों नहीं?
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बातचीत शुरू करने का किया आग्रह
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बातचीत शुरू करने का किया आग्रह
ईरान-अमेरिका वार्ता पर फिर संकट, ट्रंप ने 60 दिन की डेडलाइन बढ़ाने से किया इन्कार
अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का सबसे अहम मुद्दा तेहरान का परमाणु कार्यक्रम है। वॉशिंगटन की प्रमुख मांग है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करे। अमेरिका का तर्क है कि ईरान की परमाणु गतिविधियों से क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनावी व्यवस्था का हवाला देते हुए अमेरिका में वोटर ID को लेकर अपनी मांग फिर तेज कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया कि वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे […] The post ट्रम्प ने भारतीय चुनाव आयुक्त का हवाला दिया: ‘भारत में फोटो आईडी अनिवार्य, अमेरिका में बिना उसके चुनाव?’ first appeared on Sanjeevni Today .
एक मैप भी तैयार किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि तीन दिशा उत्तर, दक्षिण और पश्चिम की ओर से चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं आ रही हैं।
एक जींस की फिटिंग के ₹4000! अमेरिका में इतनी होती है टेलर की कमाई
अगर आपको सिलाई का काम आता है, तो अमेरिका में यह हुनर अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है. वहां एक टेलर करीब 25 डॉलर (करीब 2,300 रुपये) प्रति घंटे तक कमा सकता है, जबकि जींस की छोटी-सी फिटिंग के लिए भी 40 डॉलर (करीब 4,000 रुपये) तक लिए जा सकते हैं.
ओडिशा के गांव में बिगड़ी अमेरिकी टूरिस्ट की तबीयत, इलाज के बाद बिल देखकर रह गए दंग, देखें VIDEO
American tourist Odisha hospital: ओडिशा के एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल में फ्री इलाज मिलने के बाद अमेरिकी टूरिस्ट माइक ने भारत के हेल्थकेयर सिस्टम की जमकर तारीफ की है. सोशल मीडिया पर अब उनका वीडियो खूब वायरल हो रहा है.
अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट: सूचकांकरिकॉर्ड ऊंचाई से और नीचे, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के दबाव का असर
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनावी व्यवस्था का हवाला देते हुए अमेरिका में वोटर आईडी अनिवार्य करने की मांग की। उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार और सेव अमेरिका एक्ट का जिक्र किया।
ट्रंप ने अमेरिका में वोटर आईडी कानून को बढ़ावा देने के लिए भारत का दिया उदाहरण
वॉशिंगटन, 18 अगस्त . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने Monday को अमेरिका के लिए India की चुनावी व्यवस्था को एक मॉडल के तौर पर पेश किया. उन्होंने वोटर की पहचान से जुड़े कड़े नियमों की अपनी मांग को फिर से दोहराया और कांग्रेस से ‘सेवअमेरिका एक्ट’ पास करने की अपील की. ट्रंप ने बताया कि ... Read more
अमेरिकी लॉमेकर्स ने मेटा के चुनावी सुरक्षा इंतजामों पर उठाए सवाल, कहा- एआई और डीपफेक से खतरा बढ़ा
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ट्रंप ने भारत के चुनाव सिस्टम की तारीफ में पढ़े कसीदे, ज्ञानेश कुमार का जिक्र कर अमेरिका को दी ये बड़ी नसीहत
US: दक्षिण कोरिया को छोड़ उत्तर कोरिया के करीब क्यों जा रहे ट्रंप? अमेरिका के सहयोगियों की बढ़ी चिंता
ईरान युद्ध का नहीं दिख रहा अंत! अमेरिका के रुख से कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने की उम्मीद कमजोर पड़ने से मंगलवार को तेल की कीमतों में तेजी आई।
India elections: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था की जमकर तारीफ की है। ट्रंप का कहना है कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अमेरिका को चुनाव कराने का तरीका सिखाया। कुमार ने ट्रंप प्रशासन से पूछा, बिना वैध फोटो आईडी के अमेरिका में चुनाव कैसे हो सकते हैं? अमेरिका में चुनावी नियमों को और सख्त करने की मांग के बीच ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण दिया है।मंगलवार (18 अगस्त) तड़के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ कथित बातचीत का जिक्र करते हुए अमेरिकी चुनावों में अनिवार्य फोटो पहचान पत्र (Photo ID) की जरूरत पर जोर दिया।बिना वैध फोटो ID के चुनाव कैसे?'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने अपनी सरकार और कुमार के बीच इस महीने की शुरुआत में हुई बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि CEC ने सवाल किया था कि बिना अनिवार्य फोटो पहचान पत्र के अमेरिका में चुनाव कैसे हो सकते हैं। ट्रंप ने लिखा, इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारी सरकार से पूछा- आप बिना वैध फोटो ID के US में चुनाव कैसे करा सकते हैं?भारतीय चुनाव का जिक्रइसके बाद ट्रंप ने भारत के 2024 के लोकसभा चुनाव का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसमें 64.6 करोड़ (646 मिलियन) मतदाताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान 1% से भी कम लोगों ने डाक से वोट दिया। उन्होंने दावा किया कि हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र दिखाना जरूरी था।उन्होंने कहा, भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ (646,000,000) मतदाता थे! 1% से भी कम लोगों ने डाक से वोट दिया। हर मतदाता के पास वैध फोटो पहचान पत्र होना जरूरी था।ट्रंप ने इस तुलना का इस्तेमाल अपनी उस मांग को फिर से उठाने के लिए किया जिसमें वे चाहते हैं कि कानून बनाने वाले 'Save America Act' को पास करें।Save America Act पर जोरट्रंप ने कहा, हमें अभी 'SAVE अमेरिका एक्ट' पास करने की जरूरत है! ट्रंप का यह तर्क वॉशिंगटन में वोटर पहचान, नागरिकता के सबूत और डाक से वोट (मेल-इन बैलेट) की सुविधा को लेकर चल रहे लंबे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। राष्ट्रपति का तर्क है कि वोटर ID एक बुनियादी जरूरत होनी चाहिए। उन्होंने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स से इस कानून का समर्थन करने को कहा है।'SAVE एक्ट' 29 जनवरी को अमेरिकी संसद में पेश किया गया था। हालांकि, इसके पास होने की संभावना अनिश्चित बनी हुई है, क्योंकि डेमोक्रेट्स इस उपाय का विरोध कर रहे हैं। संसद में वोटिंग नियमों को लेकर मतभेद जारी हैं। सीनेट भी इस कानून को आगे बढ़ाए बिना इस महीने की शुरुआत में पांच हफ्तेकी छुट्टी पर चली गई थी। व्हाइट हाउस ने प्रस्तावित कानून को चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने वाला कदम बताया है।क्या है 'SAVE एक्ट'?यह कानून संघीय चुनावों के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन और चुनाव संबंधी जरूरतों को कड़ा करने के मकसद से लाया गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस कानून के तहत वोटरों को फेडरल चुनाव के लिए रजिस्टर करने से पहले वैध पहचान-पत्र और अमेरिकी नागरिकता का सबूत देना होगा। इसमें मेल-इन बैलेट (डाक से वोटिंग) पर पाबंदी लगाने का भी प्रस्ताव है। हालांकि बीमारी, विकलांगता, मिलिट्री सर्विस और यात्रा जैसी स्थितियों में छूट दी जाएगी। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कानून राज्यों को वोटर लिस्ट से गैर-नागरिकों के नाम हटाने का निर्देश भी देगा।इन देशों के चुनावी प्रक्रिया का जिक्रट्रंप प्रशासन ने भारत और ब्राजील समेत दूसरे देशों की चुनाव प्रक्रियाओं से अमेरिकी चुनाव प्रक्रियाओं की तुलना करके अपनी बात को मजबूत करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि ये दोनों देश वोटर की पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ते हैं। जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए ज्यादातर खुद के दावे (सेल्फ-अटेस्टेशन) पर निर्भर रहता है। प्रशासन ने जर्मनी और कनाडा का भी जिक्र किया है।उन्होंने कहा है कि उनके वोट-गिनती के सिस्टम में कागज-आधारित प्रक्रियाएं और 'चेन-ऑफ-कस्टडी' (सुरक्षा और जवाबदेही) के बेहतर उपाय हैं। उन्होंने डेनमार्क और स्वीडन का उदाहरण भी दिया है, जहां मेल वोटिंग पर ज्यादा पाबंदियां हैं। खास बात यह है कि व्हाइट हाउस की यह तुलना अमेरिकी चुनाव नियमों में बदलाव के लिए ट्रंप के बड़े कैंपेन का हिस्सा बन गई है। US President Donald Trump posts on his Truth Social, Earlier this month, India’s Chief Election Commissioner, Gyanesh Kumar, asked our Administration — How can you have Elections in the U.S. without a valid Photo ID? India’s last Election had 646,000,000 Voters! Less than 1%… pic.twitter.com/GDblVs4EHb— ANI (@ANI) August 18, 2026 उनके प्रशासन ने बार-बार कहा है कि वोटर की पहचान और नागरिकता के सबूत की ज़रूरतें बुनियादी सुरक्षा उपाय हैं जो पूरे देश में लागू होने चाहिए। यह कानून 29 जनवरी कोसंसद में पेश किया गया था। यह चुनाव के कड़े नियमों के लिए ट्रंप के बड़े कैंपेन का हिस्सा बन गया है। ट्रंप द्वारा भारत का ज़िक्र किए जाने से भारत का चुनाव सिस्टम वोटिंग प्रक्रियाओं को लेकर अमेरिका में चल रही तीखी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।भारतीय चुनाव सिस्टम क्या है?भारत का 2024 का लोकसभा चुनाव सात चरणों में हुआ था। इसमें देश भर से करोड़ों वोटरों ने हिस्सा लिया था। भारत का चुनाव आयोग वोटर लिस्ट-आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करता है। साथ ही पोलिंग स्टेशन पर आने वाले वोटरों के लिए तय पहचान-पत्रों की जरूरत होती है। 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) फेडरल चुनाव नियमों में बड़े बदलाव लाने की ट्रंप की कोशिश का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।ये भी पढ़ें- Business idea: 1 करोड़ की नौकरी छोड़ भारत लौटा इंजीनियर! सिर्फ ₹90,000 से शुरू किया बिजनेस, 6 साल में हासिल किया बड़ा मुकाम
भारत को मिले अमेरिकी ड्रोन - नौसेना की ताकत में होगा इज़ाफ़ा
अमेरिका ने भारत को दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने का फैसला किया है। अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को कहा कि वह रक्षा मंत्रालय के जनरल एटॉमिक्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने के अनुबंध का स्वागत करता है।
ट्रम्प ने की भारत के चुनाव सिस्टम की तारीफ, कहा- अमेरिका को भी सेव अमेरिका एक्ट पास करना चाहिए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को भारत के चुनाव सिस्टम की तारीफ की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में यह बात कही। ट्रम्प ने हाल ही में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से हुई बातचीत का जिक्र किया। ट्रम्प की पोस्ट में क्या था ट्रम्प ने लिखा […]
डोनाल्ड ट्रंप से अमेरिकी नाराज! अप्रूवल रेटिंग गिरकर 33% पर पहुंची
रॉयटर्स/इप्सोस के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है. उनकी अप्रूवल रेटिंग घटकर 33% हो गई है.
Donald Trump Save America Act:
Donald Trump: ट्रंप ने भारत के चुनाव का दिया उदाहरण, अमेरिका में वोटर ID अनिवार्य करने की मांग क्यों हुई तेज?
‘उम्मीद खो देता था’, अमेरिकी की जेल से रिहाई के बाद रो पड़ा भारतीय म्यूजिशियन
नई दिल्ली में जन्मे जैज संगीतकार प्रीतेश वालिया को 14 दिन तक अमेरिका में ICE हिरासत में रहने के बाद जमानत मिल गई है. उन्हें 2 अगस्त को लॉस एंजिलिस लौटने पर हिरासत में लिया गया था और कैलिफोर्निया के एडेलांटो सेंटर भेजा गया था. वालिया ने बताया कि हिरासत के दौरान वे खुद को टूटा हुआ महसूस करते थे, लेकिन परिवार, वकील और फैंस के सपोर्ट ने उन्हें हिम्मत दी.
हरियाणा के नारनौल जिले के एक छोटे से गांव की 10 वर्षीय छात्रा आयशा ने अपनी प्रतिभा के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरे क्षेत्र को गर्व है। गांव भाखंरी निवासी आयशा का चयन अमेरिका स्थित अंतरिक्ष एजेंसी नासा के शैक्षणिक भ्रमण के लिए हुआ है। अगले माह वह अमेरिका जाकर नासा का भ्रमण करेगी। इतनी कम उम्र में नासा का शैक्षणिक दौरा करने वाली वह क्षेत्र की पहली छात्रा मानी जा रही है। इस उपलब्धि से गांव, स्कूल और परिवार में खुशी का माहौल है। पांचवीं में भरा था फार्मआयशा गांव गोद स्थित कर्मभूमि विंग स्कूल में कक्षा छठी की छात्रा है। उसने बताया कि जब वह पांचवीं कक्षा में थी, तब उसने मिटस्योर मैथमैटिक्स ओलंपियाड में भाग लिया। सबसे पहले उसने स्कूल स्तर की परीक्षा दी, जिसमें प्रथम स्थान प्राप्त किया। जयपुर में हुआ इंटरव्यू इसके बाद जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल की। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद जयपुर में आयोजित इंटरव्यू के लिए उसे बुलाया गया।सभी सवाओं के दिए जवाबआयशा ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान तीन सदस्यीय ज्यूरी ने उससे विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे। उसने लगभग सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिए। इसी प्रदर्शन के आधार पर उसका चयन नासा के शैक्षणिक भ्रमण के लिए किया गया। उसका पासपोर्ट बनने की प्रक्रिया चल रही है और अगले माह वह अमेरिका के लिए रवाना होगी।पिता नौसेना से सेवानिवृत्तआयशा के पिता राजकुमार भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में परिवार ने इस प्रतियोगिता को सामान्य परीक्षा समझकर ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन जब आयशा ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल की तो उन्हें उसकी प्रतिभा का एहसास हुआ। उन्होंने कहा कि बेटी की इस उपलब्धि पर पूरे परिवार को गर्व है। मां बोली, बेटी बहुत मेहनतीमाता स्नेहलता ने बताया कि आयशा शुरू से ही पढ़ाई के प्रति बेहद मेहनती रही है। वह नियमित रूप से पढ़ाई करती है और स्कूल के बाद तीन से चार घंटे ट्यूशन भी जाती है। घर के छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटाने के बावजूद उसने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान रखा। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें आयशा सबसे बड़ी है। उसके बाद छोटी बहन वंशिका और सबसे छोटा भाई रेयांश है।गणित विषय में रुचिस्कूल प्रबंधन और ग्रामीणों ने आयशा की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि उसकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। शिक्षिका डा. रीना यादव व आशा यादव का कहना है कि आयशा शुरू से ही मेधावी छात्रा रही है और गणित विषय में उसकी विशेष रुचि है। नासा के शैक्षणिक भ्रमण से उसे विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान को करीब से समझने का अवसर मिलेगा, जिससे भविष्य में वह बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित होगी।
भारत को दो एमक्यू-9बी ड्रोन लीज पर देगा अमेरिका, रक्षा मंत्रालय ने फैसले का किया स्वागत
New Delhi, 17 अगस्त . अमेरिका ने India को दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने का फैसला किया है. अमेरिकी दूतावास ने Monday को कहा कि वह रक्षा मंत्रालय के जनरल एटॉमिक्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने के अनुबंध का स्वागत करता है. अमेरिकी ... Read more
भारत-अमेरिका के बीच ‘एक्सप्लोसिव ऑर्डिनेंस डिस्पोजल’ अभ्यास पूरा, ऑपरेशनल तालमेल हुआ मजबूत
New Delhi, 17 अगस्त . India और अमेरिकी नौसेना के बीच एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल (ईओडी) अभ्यास 2026 पूरा हुआ. इस अभ्यास का आयोजन पांच दिनों के लिए किया गया था. India के रक्षा मंत्रालय ने Monday को इसकी जानकारी दी. रक्षा मंत्रालय ने बताया, “भारत-अमेरिकी नौसेना विस्फोटक आयुध निपटान (ईओडी) अभ्यास 2026 का आठवां संस्करण ... Read more
भारत-अमेरिका के बीच 'एक्सप्लोसिव ऑर्डिनेंस डिस्पोजल' अभ्यास पूरा, ऑपरेशनल तालमेल हुआ मजबूत
भारत-अमेरिका के बीच 'एक्सप्लोसिव ऑर्डिनेंस डिस्पोजल' अभ्यास पूरा, ऑपरेशनल तालमेल हुआ मजबूत
अमेरिका और चीन के युवाओं ने शीत्सांग में बढ़ाई सांस्कृतिक दोस्ती
अमेरिका और चीन के युवाओं ने शीत्सांग में बढ़ाई सांस्कृतिक दोस्ती
यह लेख टमाटर के वैश्विक और भारतीय उत्पादन, शीर्ष उत्पादक देशों और भारत के प्रमुख राज्यों पर प्रकाश डालता है। इसमें आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले को एशिया की सबसे बड़ी टमाटर मंडी बताया गया है, जहां सालाना 12 लाख टन का व्यापार होता है।
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
भारत-अमेरिका की नई डील से ड्रैगन परेशान! खतरनाक ड्रोन से हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत
भारत-अमेरिका की नई डील से ड्रैगन परेशान! खतरनाक ड्रोन से हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत
अमेरिका-ईरान ज्ञापन समझौते की 60 दिनों की डेडलाइन खत्म, बाघेई बोले- हम दबाव में नहीं बनाते नीतियां
तेहरान, 17 अगस्त . अमेरिका और ईरान के बीच जो 60 दिनों का समझौता हुआ था, वो खत्म हो गया है. ऐसे में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि जिस हिसाब से अमेरिका ने बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया है, उसके बाद कोई भी चर्चा बेकार है. ईरानी मीडिया ने ... Read more
Meta पर California में मुकदमा शुरू, अमेरिकी राज्यों ने 1.4 लाख करोड़ डॉलर का हर्जाना मांगा
मेटा के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े हजारों मुकदमों में से कैलिफोर्निया में इस सप्ताह शुरू होने वाली सुनवाई को सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है। अमेरिका के कई राज्य मेटा से व्यापक वित्तीय हर्जाने की मांग कर रहे हैं जो सैद्धांतिक रूप से 1.4 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक हो सकता है। इसके अलावा राज्यों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के संचालन के तरीके में बदलाव की भी मांग की है। मुकदमे में सोशल मीडिया कंपनी पर युवा मानसिक स्वास्थ्य संकट को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। राज्यों का कहना है कि मेटा ने जानबूझकर ऐसे फीचर तैयार किए, जिनसे बच्चे उसके प्लेटफॉर्म के आदी हो जाएं। मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि मेटा नियमित रूप से 13 साल से कम उम्र के बच्चों का उनके माता-पिता की सहमति के बिना डेटा एकत्र करती है, जो संघीय कानून का उल्लंघन है। मुकदमे में कहा गया है, ‘‘मेटा ने युवाओं और किशोरों को आकर्षित करने, जोड़े रखने और अंततः अपने जाल में फंसाने के लिए शक्तिशाली और अभूतपूर्व तकनीकों का इस्तेमाल किया है। उसका मकसद मुनाफा कमाना है।’’दर्जनों राज्यों ने तीन साल पहले मुकदमा दायर किया था। मंगलवार से कैलिफोर्निया के ऑकलैंड की संघीय अदालत में शुरू होने वाले मुकदमे में चार राज्य—कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी—वादी हैं। अन्य 25 राज्यों में बाद में सुनवाई होने की उम्मीद है। मेटा ने आरोपों से इनकार किया है। कंपनी ने कहा कि सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्य युवाओं की मदद के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाएंगे। कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘हमने माता-पिता की बात सुनी है, विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम किया है तथा उन मुद्दों को समझने के लिए गहन शोध किया है, जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।’’मेटा के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। कंपनी इस साल बच्चों और किशोरों को होने वाले नुकसान से जुड़े दो अहम मामलों में पहले ही हार चुकी है। कंपनी ने पिछले महीने मुनाफे में असामान्य गिरावट दर्ज की थी, जिसमें 2.4 अरब डॉलर के कानूनी खर्च की भी भूमिका रही। मेटा ने एक कानूनी दस्तावेज में 1.4 लाख करोड़ डॉलर के संभावित हर्जाने का उल्लेख किया है। यह राशि कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क स्थित कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण के लगभग बराबर है। इतनी बड़ी राशि का भुगतान कंपनी को दिवालिया कर सकता है और संभवतः उसके स्वामित्व को राज्यों के हाथों में पहुंचा सकता है। मेटा ने हाल के वर्षों में नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कई नए फीचर पेश किए हैं। वर्ष 2024 में कंपनी ने इंस्टाग्राम पर ‘टीन अकाउंट’ शुरू किए, जो निजी होते हैं और इनमें संदेश तथा सामग्री पर प्रतिबंध के साथ माता-पिता के लिए नियंत्रण के विकल्प भी हैं। पिछले सप्ताह जूरी चयन के दौरान संभावित जूरी सदस्यों से पूछा गया कि क्या वे मानते हैं कि मेटा ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य संकट में योगदान दिया है और यदि हां, तो कितना। कई लोगों ने माना कि कंपनी की भूमिका है, लेकिन उन्होंने माता-पिता की जिम्मेदारी भी मानी। कुछ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और दुनिया की मौजूदा स्थिति जैसे कारक भी बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसानों के हित में हुआ तो स्वागत, राष्ट्रहित सर्वोपरि : बीकेएस
भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसानों के हित में हुआ तो स्वागत, राष्ट्रहित सर्वोपरि : बीकेएस
ईरान का बड़ा ऐलान: अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने पर 30 हजार डॉलर का इनाम, वीडियो में जाने महिलाओं को 60 हजार डॉलर
भारतीय और अमेरिकी नौसेना ने समंदर में 'बम फोड़ने' की प्रैक्टिस की
कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में भारतीय और अमेरिकी नौसेना का आठवां EOD अभ्यास 2026 सफलतापूर्वक खत्म हुआ. दोनों देशों की टीमें विस्फोटक निपटाने, गोताखोरी और मानवरहित सिस्टम पर प्रशिक्षण किया.
जयपुर में तीज माता की शाही सवारी, अमेरिका तक पहुंचा तीज का रंग, 175 लोक कलाकारों ने सजाया उत्सव
जयपुर में तीज माता की शाही सवारी ने लोककला और राजसी परंपरा का रंग बिखेरा, 175 कलाकारों की प्रस्तुतियां और अमेरिका तक लाइव प्रसारण हुआ।
ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को लेकर किया बड़ा ऐलान, ₹28 लाख इनाम और हथियार को म्यूजियम में रखने की बात
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी पक्ष की ओर से अमेरिकी सैनिकों को लेकर एक बड़ा और विवादित ऐलान सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी सेना से जुड़े एक बयान में अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर इनाम देने की बात कही गई है। इस ऐलान में कथित तौर […] The post ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को लेकर किया बड़ा ऐलान, ₹28 लाख इनाम और हथियार को म्यूजियम में रखने की बात first appeared on Sanjeevni Today .
मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य [Hormuz Strait] पर इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक तलवार लटक रही है। वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसके तहत ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही एक अहम समझौता डील आज आधिकारिक तौर पर समाप्त होने जा रही है। जानकारों का यह मानना है कि यह डील क्षेत्र में बढ़ते तनाव और युद्ध के बादलों को टालने के लिए की गई थी, लेकिन यह समझौता अपनी इस बुनियादी शर्त में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। दुनिया भर की निगाहें इस वक्त फारस की खाड़ी [Persian Gulf] पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस समझौते के खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और अधिक गहराने की आशंका पैदा हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की सप्लाई पर भी बड़ा संकट आ सकता है।शांति समझौते की विफलता और युद्ध रोकने के प्रयास फेलकुछ समय पहले जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के बाद इस विशेष डील को अमली जामा पहनाया गया था, तो यह उम्मीद जताई जा रही थी कि हॉर्मोझ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और दोनों देशों के बीच किसी भी संभावित महायुद्ध को टाला जा सकेगा। लेकिन पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि यह डील केवल कागजी साबित हुई है। ज़मीनी स्तर पर ईरान के सैन्य अभियानों, प्रॉक्सी संगठनों की गतिविधियों और अमेरिकी नौसेना की तैनाती के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता ही चला गया। कूटनीतिक मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज यह डील बिना किसी ठोस और स्थायी शांति परिणाम के अपने दम तोड़ते हुए आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है।वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर मंडराता सायाहॉर्मोझ संकट का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। दुनिया का कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी हॉर्मोझ स्ट्रेट के रास्ते से समुद्री जहाजों के जरिए दुनिया भर के बाजारों में सप्लाई किया जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच आज डील खत्म होने और तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल टैंकरों की आवाजाही पर गंभीर पाबंदियां लग सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल [Crude Oil Prices] की कीमतों में भारी उछाल आने की पूरी संभावना है। यदि हालात युद्ध जैसे बनते हैं, तो वैश्विक स्तर पर महंगाई एक बार फिर विकराल रूप धारण कर सकती है, जिसका सीधा असर भारत समेत विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर देखने को मिलेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक ट्रेड चेन के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है।दोनों देशों की सैन्य तैयारियां और कूटनीतिक गतिरोधइस समझौते के खत्म होने के मुहाने पर खड़े होकर दोनों ही देश अपनी-अपनी सैन्य ताकतों को और अधिक मजबूत करने में जुटे हुए हैं। पेंटगन [Pentagon] और अमेरिकी रक्षा मुख्यालय की ओर से फारस की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोतों और अत्याधुनिक सैन्य विमानों की तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अपनी नौसेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रख दिया है, जिससे इस क्षेत्र में सैन्य टकराव की संभावना अपने चरम पर पहुंच गई है। कूटनीतिक चैनल इस वक्त लगभग बंद होने की कगार पर हैं और दोनों पक्षों की तरफ से बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र [United Nations] के सामने यह एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है कि वे कैसे इस क्षेत्र को एक और भयानक युद्ध की विभीषिका से बचाएं।आने वाला समय और भू-राजनीतिक भविष्य की अनिश्चितताआज जब ईरान और अमेरिका के बीच की यह डील आधिकारिक रूप से समाप्त हो रही है, तो मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से अनिश्चितताओं के भंवर में फंस गया है। दुनिया भर के देश और कूटनीतिक विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता, तो यह छोटा क्षेत्रीय विवाद एक बड़े वैश्विक युद्ध में भी बदल सकता है। कूटनीति के मोर्चे पर असफल साबित हुई यह डील इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब तक दोनों देश आपसी अविश्वास और भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर किसी वास्तविक और न्यायसंगत समाधान की तरफ नहीं बढ़ते, तब तक हॉर्मोझ जलडमरूमध्य और खाड़ी देशों की शांति केवल एक सपना ही बनकर रह जाएगी।
लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS वाशिंगटन खुद हुआ बीमार
दुनिया की सबसे ताकतवर और अत्याधुनिक सैन्य ताकत होने का दावा करने वाली अमेरिकी नौसेना (United States Navy) के भीतर से एक ऐसी शर्मनाक और हैरान करने वाली हकीकत सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां अमेरिकी युद्धपोत [USS Washington] को समंदर में किसी बड़े मिशन पर तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) को राहत और सहायता पहुंचाने के लिए रवाना किया गया था, वहीं खुद यह युद्धपोत तकनीकी और प्रशासनिक बदहाली के कारण गंभीर संकट में घिर गया है। इस युद्धपोत के अंदर की जो तस्वीरें और रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उन्होंने नौसेना के भीतर मचे आंतरिक हाहाकार को उजागर कर दिया है। पोत पर तैनात सैनिकों, विशेषकर महिला नौसैनिकों को जिन अमानवीय और दयनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, उसने अमेरिकी सैन्य प्रबंधन [Military Management] की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।टॉयलेट और स्वच्छता के बदतर हालात से सैनिक परेशानUSS वाशिंगटन जैसे विशाल और आधुनिक युद्धपोत पर बुनियादी सुविधाओं का इस हद तक लावारिस हाल होना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। पोत पर तैनात क्रू मेंबर्स और अधिकारियों के अनुसार, जहाज के अंदर बने अधिकांश टॉयलेट और सैनिटेशन सिस्टम पिछले काफी समय से पूरी तरह से खराब या जाम पड़े हैं। सीवर लाइन और प्लंबिंग फेल होने के कारण पोत के भीतर असहनीय बदबू और अस्वच्छ माहौल बन चुका है, जिससे सैनिकों के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। समंदर की बीच लहरों के बीच लंबे अभियानों पर रहने वाले नौसैनिकों के लिए साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता सबसे पहली जरूरत होती है, लेकिन जब युद्धपोत के टॉयलेट ही काम करना बंद कर दें, तो सैनिकों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों चरमराने लगता है। प्रशासनिक लापरवाही की यह पराकाष्ठा है कि महासागर की गहराइयों में गश्त लगाने वाले इन जांबाज सैनिकों को बुनियादी मानवीय जरूरतों के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।महिला सैनिकों के सामने विकराल संकट और सैनिटरी पैड तक की कमीइस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू यह है कि युद्धपोत पर तैनात महिला सैनिकों (Female Sailors) को अपनी बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता जरूरतों के लिए भी भारी अपमान और संकट का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्धपोत पर एमरजेंसी मेडिकल सप्लीमेंट्स और आवश्यक सैनिटरी प्रोडक्ट्स [Sanitary Pads] का भारी अकाल पड़ चुका है, जिसके चलते महिला सैनिकों को पीरियड्स के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिस देश की सेना दुनिया भर में मानवाधिकारों और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े उपदेश देती है, उसी देश के युद्धपोत पर सेवारत महिला नौसैनिकों को बुनियादी सैनिटरी पैड जैसी सामान्य वस्तुएं तक उपलब्ध न करा पाना रक्षा मंत्रालय और नौसेना कमान की बड़ी विफलता को दर्शाता है। महिला सैनिकों ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि एक तरफ उन्हें पुरुषों के बराबर युद्धक मोर्चों पर तैनात किया जाता है, लेकिन जब मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की बात आती है, तो उन्हें पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।तकनीकी खराबी और लॉजिस्टिक्स की भयंकर विफलताअमेरिकी नौसेना के इन युद्धपोतों के संचालन के पीछे अरबों-खरबों डॉलर का बजट होता है, इसके बावजूद इस तरह की रसद और तकनीकी विफलताएं [Logistics Failures] यह साबित करती हैं कि जमीनी स्तर पर प्रबंधन कितना खोखला हो चुका है। USS वाशिंगटन जब लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला था, तो उम्मीद यह की जा रही थी कि यह पोत युद्ध के मोर्चों पर एक मजबूत बैकअप साबित होगा, लेकिन खुद अपने ही आंतरिक रख-रखाव के मोर्चे पर यह पोत चित्कार उठा। जहाजों के इंजनों की तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ समय पर स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति न होना इस बात का प्रमाण है कि रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Defense Supply Chain) में गंभीर खामियां आ चुकी हैं। नौसेना अधिकारियों द्वारा इस मामले को दबाने और छिपाने के तमाम प्रयास किए गए, लेकिन जब पीड़ित सैनिकों ने अपनी आपबीती मीडिया और मानवाधिकार मंचों तक पहुंचाई, तो पोल खुल गई।अमेरिकी सेना की साख को बट्टा और जवाबदेही की मांगइस सनसनीखेज खुलासे के बाद अमेरिका के रक्षा विभाग [Pentagon] और नौसेना मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों और सांसदों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने की मांग की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर किस स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई जिसके कारण देश की रक्षा करने वाले सैनिक खुद नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हुए। युद्धपोत पर तैनात सैनिकों के परिवारों में भी भारी रोष व्याप्त है, जो यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सरकार सैनिकों की जान और उनकी गरिमा के साथ इसी तरह खिलवाड़ करती रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी बहस होने की पूरी संभावना है, क्योंकि इस घटना ने दुनिया के सबसे बड़े सुपरपॉवर की सैन्य तैयारियों के खोखलेपन को सबके सामने बेनकाब कर दिया है।
Iran अमेरिकी सैनिकों को मारने पकड़ने पर 28 लाख मिलेगा इनाम, महिला ने किया ये काम तो दोगुनी होगी कीमत
इंटरनेट डेस्क । ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को मारने को लेकर नया फरमान जारी किया है। मीडिया रिपोटर्स की माने तो ईरान ने रविवार को घोषणा की है कि अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने के लिए 30 हजार डॉलर के बराबर का इनाम दिया जाएगा। साथ ही कहा है कि अगर यह कोई महिला करती है, तो इनाम दोगुना मिलेगा। मीडिया रिपोटर्स की माने तो तेहरान ने यह घोषणा तब की है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध का अंतिम छोर फिलहाल नजर आ नहीं रहा है, हॉर्मुज पर दोनों देशों में तनातनी बनी हुई है। ईरान की सरकारी एजेंसी आईआरएनए ने बताया कि देश के सेना चीफ अमीर हातमी ने कहा है कि यह योजना फाइनेंशियल हेल्प में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में अनुरोधों को बाद बनाई गई थी। हातमी ने कहा है कि जो कोई भी हमलावर अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारता है, पकड़कर सौंपता है, उसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना 30 हजार डॉलर या 5 बिलियन टोमन के बराबर इनाम मिलेगा। टोमन ईरान की 10 हजार रियाल के बराबर एक अनौपचारिक इकाई है। इसके अलावा अगर यह काम कोई महिला करती है, तो उसे इनाम दोगुना दिया जाएगा। pc- www.cbsnews.com
ट्रंप सरकार ने भारत के जश्नदीप सिंह को अमेरिका से निकाला, यौन अपराध से लेकर चोरी तक के आरोप
अमेरिका ने जश्नदीप सिंह के साथ चार और लोगों को देश से बाहर किया. जश्नदीप उसे किस देश भेजा गया, यह भी नहीं बताया गया है.
इजरायल-अमेरिका से खतरा? जानें होर्मुज में फिर क्यों अटकी ईरान-ओमान की डील
ईरान ने कहा है कि ओमान के साथ होर्मुज के रास्ते अस्थायी समुद्री ट्रांजिट रूट बनाने की कोशिश फिलहाल सुरक्षा चिंताओं की वजह से अटक गई है. दोनों देश साझा बयान और आपसी हितों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित व्यवस्था पर तेजी से बातचीत कर रहे हैं.
न्यूयॉर्क में फिर लहराया तिरंगे का गौरव! Empire State Building पर दिखा भारत का रंग, FIA ने मनाया भारत-अमेरिका रिश्तों का जश्न
US-Iran Nuclear War Allegation: रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में जारी भारी तनातनी के बीच अमेरिका के राजनीतिक गलियारों से आई एक खबर ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। पूर्व अमेरिकी कांग्रेसवुमन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन के उच्च अधिकारी ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की रणनीति पर सीक्रेट बैठकें कर रहे हैं।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रविवार (16 अगस्त 2026) को किए गए इस दावे के बाद कूटनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। आइए जानते हैं कि पूर्व महिला सांसद ने क्या-क्या आरोप लगाए हैं और इस पूरे विवाद की सच्चाई क्या है।'यह कोई अटकलबाजी नहीं, सच में चल रही है मीटिंग'पूर्व अमेरिकी सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि व्हाइट हाउस में वरिष्ठ अधिकारी ईरान पर परमाणु हमला करने की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।ग्रीन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'वे रणनीति बैठकों में ईरान पर परमाणु हथियारों का उपयोग करने पर चर्चा कर रहे हैं। हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। यह सच है। मैं कोई अटकलबाजी नहीं लगा रही, मुझे पता है। और यह विशुद्ध पाप है।'उन्होंने दुनिया को चेताते हुए याद दिलाया कि आखिरी बार 6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था। अगर ऐसा कदम उठाया गया, तो यह भीषण वैश्विक तबाही लेकर आएगा।इंटेलिजेंस रिपोर्ट की अनदेखी और इजराइल का दबाव?मार्जोरी टेलर ग्रीन ने ट्रंप प्रशासन पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, अमेरिकी खुफिया आकलन से संकेत मिलता है कि ईरान तुरंत परमाणु हथियार बनाने की कगार पर नहीं है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन इस रिपोर्ट को खारिज कर रहा है।ग्रीन का दावा है कि वाशिंगटन अपनी खुफिया एजेंसियों के बजाय इजराइल से मिलने वाली चेतावनियों के प्रभाव में आकर रणनीतिक फैसले ले रहा है। उन्होंने ट्रंप के चुनावी वादों का जिक्र करते हुए लिखा कि ट्रंप ने विदेशों में कोई नया युद्ध न शुरू करने का वादा किया था, लेकिन यह कदम दुनिया को एक बड़े वैश्विक युद्ध में झोंक सकता है।दावों में कितनी सच्चाई? व्हाइट हाउस और डिफेंस का रुखपूर्व सांसद के इन सनसनीखेज दावों के बाद कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं:कोई सबूत नहीं: मार्जोरी टेलर ग्रीन ने अपने इस दावे के समर्थन में न तो कोई दस्तावेज पेश किए हैं और न ही उन अधिकारियों के नामों का खुलासा किया है जो इन बैठकों में शामिल हैं।व्हाइट हाउस की चुप्पी: अमेरिकी प्रशासन या रक्षा विभाग की ओर से इन दावों पर तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।नीति में बदलाव का प्रमाण नहीं: अमेरिकी सरकार या सैन्य अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक संकेत नहीं मिला है कि वाशिंगटन ने अपनी परमाणु नीति बदली है या वह ईरान के खिलाफ परमाणु हमले की तैयारी कर रहा है।अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव?मार्जोरी टेलर ग्रीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य तनातनी चरम पर है। अमेरिका फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर दबाव बनाए हुए है, जिसका ईरान लगातार विरोध कर रहा है।ईरानी सेना प्रमुख अमीर हतामी ने अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने या मारने वाले के लिए इनाम की घोषणा की है, जिससे दोनों देशों की बयानबाजी और तीखी हो गई है। जून 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों के बाद से ही ग्रीन ट्रंप की विदेश नीति का विरोध करती रही हैं। वहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत बेनतीजा साबित हुई है।वैसे मार्जोरी टेलर ग्रीन के इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और ये दावे असत्यापित हैं। हालांकि, एक पूर्व वरिष्ठ राजनेता द्वारा ऐसा बयान आना यह स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी किस बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
अमेरिका ने लगातार तीसरी बार अंडर-19 महिला टी20 विश्व कप में जगह पक्की की
अमेरिका ने केमैन आइलैंड्स में हुए अमेरिका क्वालीफायर 2026 में शानदार जीत हासिल करके आईसीसी अंडर-19 महिला टी20 वर्ल्ड कप में लगातार तीसरी बार अपनी जगह पक्की कर ली है। सीनियर इंटरनेशनल खिलाड़ी और अंडर-19 टी20 वर्ल्ड कप 2025 टीम की सदस्य चेतना पगिड्याला की कप्तानी में अमेरिका ने अपने सभी छह मैच जीतकर बेहतरीन प्रदर्शन किया अमेरिका की टीम दूसरे स्थान पर रही और उन्होंने कनाडा से छह अंक ज्यादा आर्जित किए। अंडर-19 महिला टी20 विश्व कप 2027 का आयोजन बांग्लादेश और नेपाल की संयुक्त मेजबानी में होना है। भारत इस प्रतियोगिता के दोनों पिछले संस्करण जीतकर डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर इसमें उतरेगा। अमेरिका ने वेस्ट बे के जिमी पॉवेल ओवल में पहले ही दिन कनाडा पर 8 विकेट से जीत के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर ली। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर अमेरिका ने कनाडा को सिर्फ 65 रनों के स्कोर पर रोका। टीम की तरफ से महक देसाई और सान्वी इम्मादी ने तीन-तीन विकेट चटकाए। इसके बाद अमेरिका ने 11 ओवर में ही लक्ष्य को हासिल कर लिया। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाए रखा। उन्होंने कनाडा के खिलाफ दूसरी जीत के साथ क्लीन स्वीप किया और साथ ही अर्जेंटीना और 'नेक्स्टजेन इलेवन' (एक क्षेत्रीय मिली-जुली टीम) के खिलाफ भी जीत हासिल की। ऑलराउंडर महक देसाई इस प्रतियोगिता की सबसे बेहतरीन खिलाड़ी बनकर उभरीं। उन्होंने सबसे ज्यादा 16 विकेट लिए और 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का पुरस्कार जीता। अमेरिका ने वेस्ट बे के जिमी पॉवेल ओवल में पहले ही दिन कनाडा पर 8 विकेट से जीत के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर ली। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर अमेरिका ने कनाडा को सिर्फ 65 रनों के स्कोर पर रोका। टीम की तरफ से महक देसाई और सान्वी इम्मादी ने तीन-तीन विकेट चटकाए। इसके बाद अमेरिका ने 11 ओवर में ही लक्ष्य को हासिल कर लिया। Also Read: LIVE Cricket Score चेतना पगिड्याला की कप्तानी में अमेरिका की टीम साल 2025 में किए गए शानदार प्रदर्शन को आगे बढ़ाना चाहेगी। पिछली बार अमेरिका ने सुपर सिक्स चरण तक जगह बनाई थी और मजबूत न्यूजीलैंड टीम को भी कड़ी चुनौती दी थी। हालांकि, न्यूज़ीलैंड को सिर्फ 97 रन पर रोकने के बावजूद अमेरिका को 18 रन से हार का सामना करना पड़ा था। Article Source: IANS
अमेरिका के पुराने दोस्तों के बीच क्यों आई दरार?
राष्ट्रपति ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का असर अब अमेरिका के पुराने सहयोगी देशों के साथ रिश्तों पर भी दिखने लगा है. दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास, कनाडा के साथ टैरिफ, फ्रांस से विदेश नीति और इजरायल-ब्रिटेन के साथ ईरान व यूक्रेन जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं. आखिर क्यों अपने ही साझेदारों से उलझ रहे हैं ट्रंप?
भूपेंद्र पटेल का अमेरिका-कनाडा दौरा आज से, 25 साल बाद गुजरात CM की US यात्रा; जानिए क्या है मकसद
गुजरात में नो रिपीट थ्योरी के तहत जिम्मेदारी संभालने के बाद सितंबर में अपने सफल 5 साल पूरे कर रहे मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहे हैं। वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इसके ...
सुलह के लिए ईरान के सबसे ताकतवर गुट से अमेरिका ने की थी चुपके से बात! लेकिन ट्रंप का प्लान B भी फेल
US Iran War: आखिर अमेरिका ने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी को चुना को इस सीक्रेट बैकचैनल बातचीत के लिए मीडिएटर के तौर पर क्यों चुना?
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ट्रंप ने खोला राज! सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान की दोस्ती से अमेरिका क्यों खुश?
ट्रंप के बयान से यह संकेत मिला कि वॉशिंगटन फिलहाल इस उभरते सुरक्षा ढांचे को अपने खिलाफ नहीं मान रहा. समझौते में सामूहिक रक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया सहयोग और आगे दूसरे देशों, खासकर मिस्र, के जुड़ने की संभावना ने क्षेत्रीय राजनीति की बहस को और तेज कर दिया है.
अमेरिका के साथ शांति समझौता 'सम्मान और ताकत' के साथ आगे बढ़ा : ईरानी राष्ट्रपति
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा बताए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ हालिया शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) 'सम्मान' और 'ताकत' के साथ किया है।
अमेरिकी सैनिक को मारने वाले को मिलेगा ₹28 लाख महिला ने किया तो रकम दोगुनी, ईरान ने किया विवादित एलान
अमेरिकी सैनिक को मारने वाले को मिलेगा ₹28 लाख महिला ने किया तो रकम दोगुनी, ईरान ने किया विवादित एलान
इंडियंस के मुकाबले अमेरिकन कॉन्फिडेंट क्यों? भारतीय ने बताई वजह
इंडियंस के मुकाबले अमेरिकन इतने कॉन्फिडेंट क्यों होते हैं? भारतीय महिला ने बताई वजह. ऑफिस मीटिंग में जहां भारतीय अपनी बात रखने से झिझकते हैं, वहीं अमेरिकन बिना पूरी तरह आश्वस्त हुए भी अपनी राय खुलकर रखते हैं.
अमेरिका के साथ शांति समझौता ‘सम्मान और ताकत’ के साथ आगे बढ़ा : ईरानी राष्ट्रपति
तेहरान, 17 अगस्त . ईरान के President मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा बताए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ हालिया शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) ‘सम्मान’ और ‘ताकत’ के साथ किया है. मसूद पेजेश्कियन ने Sunday को शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी की मौजूदगी में ... Read more
धरती पर मौसम का चक्र पूरी तरह से बेपटरी हो चुका है और दुनिया के कई शक्तिशाली मुल्क प्रकृति के रौद्र रूप के आगे घुटने टेकने को मजबूर हैं। चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, फिलीपींस, भारत, ब्राजील और चिली समेत दुनिया के 10 से अधिक देशों में मूसलाधार बारिश, चक्रवाती तूफानों और बादल फटने की घटनाओं ने ऐतिहासिक तबाही मचा रखी है। आधुनिक बुनियादी ढांचे वाले बड़े-बड़े महानगर कंक्रीट के समंदर में तब्दील हो चुके हैं। सड़कों पर सैलाब का बहाव इतना तेज है कि बहुमंजिला इमारतों के बाहर खड़ी गाड़ियां, बसें और भारी कंटेनर तिनके की तरह बहते नजर आ रहे हैं। करोड़ों लोग जलभराव, बिजली गुल और बुनियादी सुविधाओं के ठप होने से घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं।चीन में 'डॉलफिन' तूफान से हाहाकार, 10 लाख से अधिक लोग विस्थापितएशिया के सबसे बड़े देश चीन में शक्तिशाली समुद्री तूफान 'डॉलफिन' (Typhoon Dolphin) और लगातार हो रही बारिश ने दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पूर्वी झेजियांग, हुबेई, हेनान और राजधानी बीजिंग के बाहरी इलाकों में सैलाब की ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि सरकार को रेड अलर्ट जारी कर 10 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाना पड़ा। शंघाई और हांगझोउ जैसे वैश्विक व्यापारिक केंद्रों में सबवे, रेलवे और 1300 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। नदियां खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रही हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र और विशाल रिहायशी इलाके कई फीट पानी में डूबे हुए हैं।अमेरिका और जापान में आसमान से बरसी 'जल-प्रलय'दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के पूर्वी राज्यों और तटीय इलाकों में अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Floods) ने भारी तबाही मचाई है। भारी वर्षा के कारण हाईवे नदियों में बदल गए और दर्जनों अंडरपास पानी से लबालब भर गए, जिससे सैकड़ों वाहन जलमग्न हो गए। वहीं जापान के तोक्यो और चिबा प्रान्त में बादल फटने जैसी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। चिबा में मात्र एक घंटे के भीतर 11.5 सेंटीमीटर से अधिक रिकॉर्डतोड़ बारिश दर्ज की गई, जिससे रेलवे ट्रैक और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक पानी में डूब गए और हजारों लोग स्टेशनों पर फंस गए।दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका में भी प्रकृति का विकराल रूपभारत के उत्तरी राज्यों में सक्रिय मानसून के चलते गंगा, यमुना और घाघरा जैसी नदियां उफान पर हैं, जिससे यूपी, बिहार और उत्तराखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। पड़ोसी देश फिलीपींस में तूफानी बारिश के चलते हुए भूस्खलन में कई घर जमींदोज हो गए। उधर लैटिन अमेरिकी देशों—ब्राजील और चिली में भी भारी बारिश और नदियों के टूटे तटबंधों ने भारी जन-धन की हानि पहुंचाई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, वैश्विक तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) में अभूतपूर्व बढ़ोतरी के कारण वायुमंडल में नमी धारण करने की क्षमता बढ़ गई है, जिससे एक ही समय में कई महाद्वीपों पर चरम मौसम घटनाएं (Extreme Weather Events) घट रही हैं। इंसान की तमाम तकनीकी तरक्की के बावजूद प्रकृति का यह उग्र रूप यह साबित कर रहा है कि जलवायु संकट अब भविष्य का खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान की भयावह हकीकत बन चुका है।
अमेरिका के साथ शांति समझौता 'सम्मान और ताकत' के साथ आगे बढ़ा : ईरानी राष्ट्रपति
अमेरिका के साथ शांति समझौता 'सम्मान और ताकत' के साथ आगे बढ़ा : ईरानी राष्ट्रपति
दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास काफी हद तक सीमित करेगा अमेरिका, ट्रंप ने दिया पेंटागन को निर्देश
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ये बातें तब कहीं जब सियोल और वाशिंगटन इस सप्ताह अपना सालाना उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास शुरू करने वाले हैं, प्योंगयांग लंबे समय से इसे युद्ध की तैयारी बताता रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य-पश्चिमी (Midwest) राज्यों में चक्रवाती तूफान, बवंडर (Tornadoes) और लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे गंभीर और चिंताजनक हालात इंडियाना (Indiana) राज्य में बने हुए हैं, जहां कई दिनों से जारी तूफानी सिस्टम ने ऐतिहासिक बाढ़ का रूप ले लिया है। अधिकारियों और आपातकालीन प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, राज्य के विभिन्न काउंटीज में आई बाढ़, तेज हवाओं और पेड़ गिरने की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिनमें एक 4 वर्षीय मासूम बच्चा भी शामिल है।बाढ़ और तेज आंधी के कारण इंडियाना राज्य भर में बिजली के खंभे और ट्रांसमिशन लाइनें धराशायी हो गई हैं, जिससे लगभग 1,30,000 घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की बिजली गुल हो गई है। इससे पहले तूफान के चरम पर रहने के दौरान मिडवेस्ट के चार राज्यों में करीब 10 लाख से अधिक उपभोक्ता बिना बिजली के अंधेरे में रहने को मजबूर हुए थे। Courthouse News की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इंडियानापोलिस के मेयर जो हॉगसेट ने इसे पिछले 30 से अधिक वर्षों में शहर की सबसे भयावह बाढ़ त्रासदी करार दिया है।व्हाइट रिवर में 113 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा: जलमग्न हुए सैकड़ों रिहायशी इलाकेराष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) के आंकड़ों के मुताबिक, इंडियाना के कई मध्यवर्ती क्षेत्रों में महज 48 घंटों के भीतर 11 इंच (लगभग 28 सेंटीमीटर) से अधिक की असामान्य बारिश दर्ज की गई है। अत्यधिक जलप्रवाह के कारण इंडियाना की प्रमुख जीवनरेखा कही जाने वाली व्हाइट रिवर (White River) अपने खतरे के निशान को पार कर उफान पर आ गई है।नदी का जलस्तर एंडरसन और नोबल्सविले जैसे रिहायशी इलाकों में 24 फीट (7.32 मीटर) से ऊपर पहुंच गया, जिसने वर्ष 1913 में बने 113 साल पुराने ऐतिहासिक बाढ़ रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। राजधानी इंडियानापोलिस के निचले इलाकों, विशेषकर रेवेनवुड और रिवरफ्रंट कॉलोनियों में सड़कों पर कई फीट पानी भर गया है। रिहायशी बस्तियों में पानी भरने के बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए कयाक, रबर की नावों और छतों का सहारा लेने को विवश हो गए हैं। मैरियन काउंटी इमरजेंसी मैनेजमेंट के अधिकारियों ने इसे जीवन में एक बार देखी जाने वाली अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा बताया है।4 साल के बच्चे समेत 6 लोगों ने गंवाई जान: जानिए मौतों का दुखद ब्योराइंडियाना स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी और आपातकालीन राहत केंद्र ने पुष्टि की है कि मौतों का आंकड़ा बढ़कर छह तक पहुंच गया है। मृतकों में तीन महिलाएं, दो पुरुष और एक चार वर्षीय बालक शामिल हैं:जेनिंग्स काउंटी: दक्षिणी इंडियाना के जेनिंग्स काउंटी में तेज आंधी के दौरान एक विशालकाय पेड़ सीधे एक घर की छत को चीरते हुए बेडरूम पर गिर गया, जिससे बिस्तर पर सो रहे 4 साल के मासूम बच्चे की मौके पर ही दबकर मौत हो गई।डेलावेयर काउंटी: डेलावेयर काउंटी में मिसिसिनेवा नदी के तेज बहाव में एक 19 वर्षीय युवक मैथ्यू मोरे की डूबने से मौत हो गई। इसी काउंटी में एक अन्य दुखद घटना में 58 वर्षीय महिला स्टेफनी सैली और उनके पालतू कुत्ते का शव मक्के के खेत में पानी के बीच मिला; माना जा रहा है कि उनकी कार बाढ़ के तेज पानी में बह गई थी।लेक, पोर्टर और लापोर्टे काउंटी: उत्तरी इंडियाना के लेक, पोर्टर और लापोर्टे काउंटीज में भी तूफानी पानी में फंसने और मलबे की चपेट में आने से तीन अन्य लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है।रेस्क्यू बोट्स से सुरक्षित निकाले गए सैकड़ों लोग: राहत और पुनर्वास कार्य जारीजलस्तर के चरम पर पहुंचने के बाद इंडियानापोलिस अग्निशमन विभाग (IFD), राष्ट्रीय गार्ड और स्थानीय बचाव दलों ने रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिए हैं। The Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, आपातकालीन दलों ने बोट्स और हेलीकॉप्टर्स की मदद से 95 से अधिक फंसे हुए नागरिकों और 45 पालतू जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।डेलावेयर काउंटी में 350 से ज्यादा परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है, जबकि टिप्टन काउंटी में वरिष्ठ नागरिकों के एक मोबाइल होम कम्युनिटी को पूरी तरह खाली कराया गया है। विस्थापित लोगों के ठहरने और भोजन के लिए शहर भर में दर्जनों इमरजेंसी शेल्टर्स सक्रिय कर दिए गए हैं।गवर्नर माइक ब्रॉन की अपील पर राष्ट्रपति ने दी संघीय आपातकाल को मंजूरीप्राकृतिक आपदा के पैमाने को देखते हुए इंडियाना के गवर्नर माइक ब्रॉन ने संघीय सरकार से आपातकालीन घोषणा का औपचारिक अनुरोध किया था। गवर्नर ब्रॉन ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा राज्य के अनुरोध को तुरंत स्वीकार कर लिया गया है, जिससे फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (FEMA) के राहत फंड और संघीय संसाधनों की मदद का रास्ता साफ हो गया है। फेमा की टीमें राज्य के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, पुलों के निरीक्षण और पीड़ितों को वित्तीय सहायता पहुंचाने के काम में जुट गई हैं।इलिनोइस, ओहायो और केंटकी में भी मौसम का तांडव: कई राज्यों में हाई अलर्टइंडियाना के अलावा इस चक्रवाती मौसमी तंत्र का प्रभाव मिडवेस्ट के अन्य राज्यों—इलिनोइस, ओहायो और केंटकी—में भी बड़े पैमाने पर महसूस किया गया है। ओहायो के रोजविले में भी बाढ़ के पानी में फंसने से एक व्यक्ति की मौत की खबर सामने आई है। भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण पूरे क्षेत्र में सैकड़ों सड़कें बह गई हैं और कई महत्वपूर्ण पुलों को सुरक्षा के लिहाज से बंद कर दिया गया है।मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भले ही प्रमुख नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे स्थिर होने लगा है, लेकिन दलदली मिट्टी और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण अगले कुछ दिनों तक भूस्खलन और अचानक जलभराव का खतरा बना रहेगा, इसलिए नागरिकों को उफनते जलस्रोतों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।ग्राउंड पर बाढ़ की विभीषिका, रेस्क्यू ऑपरेशंस और आधिकारिक पुष्टि से जुड़े ताजा विजुअल्स देखने के लिए The Daily Jagran Indiana flood report का यह वीडियो बुलेटिन अत्यंत प्रासंगिक है, जो इंडियाना में आई इस ऐतिहासिक बाढ़ के दृश्यों और राहत कार्यों की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है।
अमेरिका-साउथ कोरिया रिश्तों में खटास? ट्रंप ने सैन्य अभ्यास घटाने का दिया आदेश, जाने क्या है पूरा मामला
अमेरिका में बाढ़-तूफान से 6 लोगों की मौत, देखें US TOP-10
अमेरिका के इंडियाना में आए तेज तूफान-बाढ़ से कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई है. मृतकों में एक चार साल का बच्चा भी शामिल है. राज्य के गवर्नर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की. ट्रंप ने इंडियाना की ओर से मांगी गई राष्ट्रपति आपातकाली घोषणा को मंजूरी देने की बात कही है जिससे राज्य को संघीय मदद मिल सकेगी.
दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास ‘काफी हद तक सीमित’ करेगा अमेरिका, ट्रंप ने दिया पेंटागन को निर्देश
वॉशिंगटन, 17 अगस्त . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने Sunday (स्थानीय समय) को कहा कि उन्होंने पेंटागन प्रमुख को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को “काफी हद तक” कम करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि ये अभ्यास न केवल “खर्चीले” हैं, बल्कि उत्तर कोरिया को पूरी तरह से अनुचित और ... Read more
Iran-US War News Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपने वाले व्यक्ति को 30 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 25 लाख रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि अगर यह कार्रवाई किसी ईरानी महिला द्वारा की जाती है, तो उसे इनाम की रकम दोगुनी दी जाएगी।ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना के प्रमुख अमीर हातमी ने इस इनाम की घोषणा की है। हातमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस तरह की कार्रवाई में शामिल होने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई कहां और कब की जानी है।अमेरिकी सैनिक को पकड़ने पर भी मिलेगा इनामहातमी ने कहा कि जो भी व्यक्ति किसी आक्रमणकारी अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारता है या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपता है, उसे 30 हजार डॉलर या 5 अरब तोमान का इनाम दिया जाएगा। ईरान में तोमान एक अनौपचारिक करेंसी है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर रियाल के साथ किया जाता है। ईरानी सेना प्रमुख ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए अलग घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई बहादुर ईरानी महिला ऐसी कार्रवाई करती है, तो उसे दोगुना इनाम दिया जाएगा।अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनीइनाम की घोषणा के साथ ही हातमी ने अमेरिका को क्षेत्र से अपनी सेना हटाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेनाओं को अब फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंट्री करने की अनुमति नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य एवं राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, संघर्ष के दौरान ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी सामने नहीं आई है।ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती नहींरिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक बड़े बचाव अभियान के दौरान करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी और 170 से अधिक विमान शामिल हुए थे। इस अभियान का उद्देश्य हादसे का शिकार हुए F-15 के वेपन सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित निकालना था। इसके अलावा ईरान के अंदर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी नहीं है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इनाम की घोषणा का ऐलान खास तौर पर तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।कैसे शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष?अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के खिलाफ हमले किए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई जारी रही। बाद में अप्रैल में संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक संभावित ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई। लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और प्रयास विफल हो गया।इसके बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच छिटपुट सैन्य हमले जारी रहे हैं। खासकर दक्षिणी ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव देखने को मिला है। हालांकि मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क जारी रहने की बात कही गई है, लेकिन अब तक कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आया है।संघर्ष में 17 अमेरिकी जवानों की मौतUS मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे जा चुके हैं। इनमें सबसे हालिया मौतों की जानकारी जुलाई में सामने आई थी।बड़ी बात यह है कि इन सभी अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत ईरान के बाहर हुई। इनमें जॉर्डन और इराक में मारे गए अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं।ये भी पढ़ें- Vande Mataram Row: वंदे मातरम विवाद पर सोनिया गांधी की बढ़ी मुश्किलें! BJP ने दर्ज कराई शिकायत, राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोपईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर इनाम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ राजनयिक स्तर पर भी गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में इस ऐलान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, ईरान के इस घोषणा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पलटवार का इंतजार है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी, उनके 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत और निस्वार्थ राजनीति को याद किया। उन्होंने कारगिल युद्ध, अनुच्छेद 370 और आपातकाल में अटल जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने के उदाहरणों पर प्रकाश डाला।
बिहार ने अमेरिका,इंग्लैंड, फ्रांस, स्पेन को पीछे छोड़ दिया; CEC ज्ञानेश कुमार ने क्यों जताया आभार?
ज्ञानेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे बिहार के मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करने आये हैं। मतदाता सूची के शुद्धिकरण का देश भर में सबसे सफल आयोजन बिहार से ही शुरू हुआ था।
Satyanand Stokes Jayanti: जानिए सत्यानंद स्टोक्स कौन थे और कैसे अमेरिका से हिमाचल आकर उन्होंने 1916 में सेब की खेती को बढ़ावा दिया।
मोहाली स्थित सनी एन्क्लेव में अमेरिका में रह रहे एनआआई के करोड़ो के प्लॉट हड़पने के लिए 4 साल पहले मर चुके व्यक्ति को कागजों में ‘जिंदा’ खड़ा कर दिया। फर्जी GPA बनाकर एनआरआई का प्लॉट अपने नाम करवा लिया। लेकिन इसी बीच एनआरआई की मां अपने प्लॉट को देखने गई तो उसकी भनक उसे लग गई। उसने तुरंत अपने बेटे को बताया। बेटे ने इस मामले पंजाब पुलिस के एनआरआई थाने को शिकायत दी। पुलिस ने मामले की पड़ताल करते हुए अमनदीप कौर, दलबीर सिंह, विनोद कुमार व निर्मल चंद पर एफआईआर दर्ज की। अमनदीप कौर अदालत में जमानत के लिए पहुंची थी, लेकिन जमानत देने से मना कर दिया। अदालत ने कहा किमृतक को जिंदा दिखाकर साजिश है। हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अब सारी कहानी को प्वाइंट वाइज जानिए18 साल पहले खरीदा था प्लॉट अमित नागपाल ने बताया कि मैं मैनचेस्टर, कनेक्टिकट, अमेरिका में रहता हूं। मैंने सनी एन्क्लेव, देसू माजरा, तहसील खरड़, मोहाली में बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड से गांव फतहउल्लापुर में 192 वर्ग गज का एक प्लॉट खरीदा था। इसकी सेल डीड मैसर्स बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जरनैल सिंह बाजवा के माध्यम से 05.06.2008 को मेरे नाम पर करवाई हुई थी। इसके बाद तहसील खरड़ के राजस्व रिकॉर्ड में इंतकाल नंबर के जरिए मेरा नाम दर्ज हुआ। मैं इस संपत्ति का वैध व एकमात्र मालिक हूं और इस प्लॉट का कब्जा हमेशा मेरे पास ही रहा है। प्लॉट खाली, बाउंड्री वॉल् करवाई मेरा एक खाली प्लॉट था, जिसकी बाउंड्री वॉल बनवाकर और पिलर लगाकर मैंने चारों तरफ बाड़ (फेंसिंग) कर दी थी और अपना साइनबोर्ड भी लगा दिया था। मैं 2008 में अमेरिका शिफ्ट हो गया था और समय-समय पर ही भारत आता हूं। चूंकि अमनदीप कौर और उनके पति दलबीर सिंह मेरे पड़ोसी हैं, इसलिए वे अच्छी तरह जानते थे कि मैं एक एनआरआई हूं और भारत में स्थायी रूप से नहीं रहता। मां देखने आई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ हाल ही में, जब मेरी मां प्लॉट का निरीक्षण करने गईं, तब इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ और उन्होंने मुझे इसकी जानकारी दी। उक्त लोगों ने आपस में मिलीभगत करके मेरी संपत्ति को अवैध रूप से हड़पने और गलत लाभ कमाने की नीयत से फर्जी और जाली दस्तावेज तैयार किए। देसू माजरा निवासी करम सिंह, जो मेरी संपत्ति से कोई संबंध नहीं रखता और जिसे मैं जानता तक नहीं, उसने खुद को झूठा मालिक बताकर 29.08.2025 को एक पावर ऑफ अटॉर्नी निर्मल चंद के नाम करवा दी। फर्जी तरीके मेरे प्लॉट का नंबर जोड़ दिया इस पावर ऑफ अटॉर्नी में मेरे प्लॉट नंबर का कोई उल्लेख तक नहीं था, फिर भी इसे जानबूझकर अवैध रूप से शामिल किया गया। इसके बाद निर्मल चंद ने 01 दिसंबर 2025 को वसीका के तहत अमनदीप कौर के पक्ष में मेरे प्लॉट की एक फर्जी और जाली सेल डीड करवा दी। इस जाली रजिस्ट्री के समय अमनदीप कौर का पति दलबीर सिंह सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद था और नंबरदार व दो गवाहों ने भी हस्ताक्षर किए। इसके बाद एनआरआई की शिकायत पर केस दर्ज हुआ। अदालत में कमजोर पड़ आरोपी की कहानी केस दर्ज होने के बाद महिला अदालत पहुंची । वहां पता चला कि 1 दिसंबर 2025 की फर्जी सेल डीड में प्लॉट की रकम चेक से देने की बात लिखी गई थी, लेकिन पुलिस पूछताछ में अमनदीप कौर ने कहा कि भुगतान नकद किया गया था। जांच में सामने आया कि वास्तव में प्लॉट की खरीद के लिए कोई भुगतान हुआ ही नहीं था और पूरा लेन-देन सिर्फ कागजों पर दिखाया गया था। अदालत ने भी चेक और नकद के अलग-अलग दावों और वास्तविक भुगतान नहीं होने को गंभीर माना, जिससे अमनदीप कौर की भूमिका संदिग्ध नजर आती है।
जालंधर के रहने वाले ओंकार सिंह ने अमेरिका में पहला सिंह टावर बनाकर दुनिया में सिखों को नई पहचान दी है। गांव दौलतपुर से 1990 में अमेरिका के न्यू जर्सी गए ओंकार सिंह ने नए टावर का 3 अगस्त को इनोग्रेशन किया तो नाम से ये चर्चा में आ गया। ओंकार सिंह ने टावर बनाने के बाद कहा कि इसमें 30 मंजिल हैं। इसमें किराए और खरीदने के लिए 1 बीएचके से 3 बीएचके के फ्लैट हैं। इनकी कीमत लगभग 3.44 करोड़ रुपए से लेकर 15 करोड़ रुपए तक है। सिंह टावर बनाने की कहानी शेयर करते हुए ओंकार सिंह ने बताया कि उसका वाहेगुरु में बहुत विश्वास है। उनकी कृपा से ही ये बन पाया है। गुरुद्वारा के रेनोवेशन का काम करते-करते वे इस धंधे में आ गए। सिख कम्युनिटी के लिए वह कुछ करना चाहते थे इसलिए इसका नाम सिंह टावर रखा। ओंकार सिंह आगे बोले- सिंह टावर हमेशा सिंहों की पहचान बना रहेगा, मेरे जाने के बाद भी ये याद दिलाता रहेगा। पढ़ें ओंकार सिंह की सक्सेस स्टोरी... घर के बचे लंगर से शुरू हुई सेवा 2010 में ओंकार सिंह ने घर पर आसा दी वार का कीर्तन करवाया था। इसके बाद काफी लंगर बच गया। उन्होंने जरूरतमंदों की तलाश कर उन्हें खाना खिलाया। यहीं से उन्हें पता चला कि बड़ी संख्या में लोग भोजन के लिए संघर्ष करते हैं। शुरुआत में बिना नाम बताए खाना बांटा, बाद में लेट्स शेयर मील संस्था शुरू की। आज संस्था दिल्ली में 350 लोगों को भोजन दे रही है। 100 से ज्यादा आश्रयों में 20 हजार भोजन पैकेट लेट्स शेयर मील अब 100 से अधिक बेघर आश्रयों में 20 हजार से ज्यादा भोजन पैकेट वितरित कर रही है। संस्था ने अमेरिका के सभी 50 राज्यों में स्थानीय समुदायों तक भोजन पहुंचाया है। सीरिया और यूक्रेन संकट के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत सामग्री भेजी गई। ट्रकिंग के बाद रियल एस्टेट में उतरे ओंकार सिंह ने जीएन मैनेजमेंट और ईस्ट वेस्ट हॉलिंग की शुरुआत की। 25-30 साल ट्रकिंग कारोबार में काम करने के बाद अब बेटी हरलीन कौर के साथ कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट डेवलपमेंट में काम कर रहे हैं। दोनों 38.18 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोई भी फैसला लेने के बाद मेहनत से उसे सही साबित करना चाहिए।
आगरा में स्वतंत्रता दिवस पर सपा के पूर्व प्रत्याशी विनय अग्रवाल ने न्यू राजा मंडी कॉलोनी रोड की बदहाल सड़क को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने करीब 20 फीट गहरे और 10 फीट लंबे गड्ढे के पास तिरंगा फहराकर विरोध जताया। विनय अग्रवाल ने कहा कि देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, लेकिन आगरा शहर की सड़कों की स्थिति देखकर सवाल उठता है कि क्या हमने ऐसे शहर की कल्पना की थी? 'ताजमहल से दुनिया में पहचान, सड़कों के गड्ढों से बदनामी' सपा नेता ने कहा कि ताजमहल की वजह से आगरा की पहचान दुनियाभर में है। इसके बावजूद पिछले 15-20 दिनों से शहर में जगह-जगह बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ने की बात करती है, लेकिन शहर की सड़कों के गड्ढे तक नहीं भरे जा रहे हैं। उन्होंने सड़क की स्थिति तत्काल सुधारने और गड्ढों को भरने की मांग की। कहा कि आगरा को बेहतर सड़कें और बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि शहर की पहचान खराब सड़कों से नहीं, बल्कि विकास और पर्यटन से हो। इस दौरान हिमांशु यादव और भानु प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस पर सड़क की बदहाली को लेकर विनय अग्रवाल का वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा।
कैथल जिले में राजौंद खंड के गांव खेड़ी संदल स्थित राजकीय उच्च विद्यालय की दसवीं कक्षा की तीन छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें बोर्ड परीक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने के लिए मिला। गांव खेड़ी संदल से संयुक्त राज्य अमेरिका गए युवकों ने अपनी तरफ से इन छात्राओं को स्कूटी प्रदान की। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य कुलदीप शर्मा और सरपंच रामेश्वर दास सहित स्कूल स्टाफ व ग्रामीण मौजूद रहे। उन्होंने छात्राओं को भविष्य में भी कड़ी मेहनत कर सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। प्रधानाचार्य कुलदीप शर्मा ने बताया कि विद्यालय में कुछ कमियों के बावजूद भी यह उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम बच्चों की कड़ी मेहनत, स्टाफ की निष्ठा और अभिभावकों के सहयोग के बिना संभव नहीं था। विदेश में बसे गांव के युवकों की पहल उन्होंने कहा कि जहां निजी स्कूल पढ़ाई को लेकर विभिन्न दावे करते हैं, वहीं खेड़ी संदल का सरकारी विद्यालय शिक्षा और सौंदर्य दोनों में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। विद्यालय ने दो बार जिला स्तर पर सौंदर्य के लिए प्रथम स्थान भी प्राप्त किया है। कुलदीप शर्मा ने यह भी बताया कि विदेशों में बसे गांव के युवकों की यह पहल बच्चों के लिए बहुत सार्थक साबित होगी। इन युवकों की मदद से समय-समय पर स्कूली बच्चों को जूते, जुराबें और जर्सियां भी वितरित की जाती रही हैं। छात्राओं को स्कूटी देकर सम्मानित करना अन्य बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने में सहायक होगा।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ थाना परिसर में हुए आईईडी ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
पंजाब के बठिंडा, संगरूर और अमृतसर जिलों में भारतीय किसान यूनियन उगराहां (बीकेयू उगराहां) द्वारा 20 अगस्त को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में धरने दिए जाएंगे। इन धरनों को सफल बनाने के लिए किसानों द्वारा बैठकों का सिलसिला जारी है। मानसा में बीकेयू उगराहां के जिला प्रधान राम सिंह भैणी बाघा ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करवाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह तीन कृषि कानूनों को किसानों ने रद्द करवाया था, उसी तरह इस समझौते को भी रद्द करवाने के लिए देश की संघर्षशील जत्थेबंदियां एकजुट हो चुकी हैं। लैंड पूलिंग नीति को लेकर किसानों में रोष इन धरनों की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता वार्ता रद्द करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, दोबारा लाई जा रही लैंड पूलिंग नीति की योजना को रद्द करने की भी मांग की गई है। किसानों की अन्य मांगों में आबादकारों, पूर्व मुजारों सहित दशकों से खेती करते आ रहे किसानों और खेत मजदूरों को जमीनों के मालिकाना हक देना और इन जमीनों से उनका उजाड़ा तुरंत बंद करना शामिल है। वे किसानों, खेत मजदूरों और अन्य दिहाड़ीदार श्रमिकों के सभी कर्ज माफ करने की भी मांग कर रहे हैं। आत्महत्या पीड़ित परिवारों को नौकरी और मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है। किसानों और खेत मजदूरों के हितों की रक्षा और विकास के लिए पर्यावरण हितैषी तथा कॉरपोरेटों और जागीरदारों के विरोध वाली पंजाब की कृषि नीति बनाने और लागू करने की भी मांग की गई है। कार्यकर्ताओं पर दर्ज झूठे मामले रद्द करने की मांग संघर्षों के दौरान किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी झूठे मामले रद्द करने तथा गिरफ्तारी के सभी वारंट तुरंत रद्द करने की मांग की गई है। पराली जलाने के सभी मामले तत्काल वापस लेने की भी मांग शामिल है। राम सिंह भैणी बाघा ने कहा कि राज्य में संघर्ष कर रहे लोगों पर अत्याचार करना बंद किया जाए और संघर्ष करने के लोकतांत्रिक अधिकार की गारंटी दी जाए। उन्होंने कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों के जरिए लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों का दमन बंद करने की भी मांग की।
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद बदमाशों की विदेशों में बैठे आकाओं से बात करवाने वाले जेल प्रहरी धारा सिंह के खुलासे चौंकाने वाले हैं। आरोपी ने 15 से ज्यादा बार लॉरेंस, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा जैसी गैंग के कई बदमाशों की विदेश में बात करवाई थी। इस मदद के बदले जेल प्रहरी को फैमिली सहित विदेश (अमेरिका-दुबई) में सैटल करने का लालच दिया था। भरोसा दिलाया था कि पकड़े जाने पर गैंग का वकील सुप्रीम कोर्ट में उसका केस लड़ेगा। हर मदद के बदले पैसे भी मिलते रहेंगे। इसी लालच में आकर जेल प्रहरी धारा सिंह बदमाशों की मदद में जुट गया। उसने 3 बार में 50 हजार, 30 हजार और 20 हजार रुपए कैश में लिए। वहीं एक दूसरे की दुश्मन गैंग को भी कई अहम जानकारियां लीक कर दी। जयपुर में नाकाबंदी के दौरान हथियारों सहित पकड़े गए बदमाश की निशानदेही पर धारा सिंह को 7 अगस्त को गिरफ्तार किया था। इस स्टोरी में पढ़िए- जेल प्रहरी कैसे हाई सिक्योरिटी को मात देता था? कैसे बदमाशों की बात करवाता था? फैमिली सहित विदेश में सैटल करने का लालच जेल प्रहरी धारा सिंह चौहान ने दौलतपुरा थाना पुलिस को बताया कि अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की कुछ बैरकों की जिम्मेदारी उसके पास थी। उनमें लॉरेंस, रोहित गोदारा, शिवराज सिंह जैसी गैंग के कई बदमाश बंद हैं। मार्च 2026 में गैंग के कुछ बदमाशों ने उससे संपर्क किया। मोबाइल नंबर देते हुए कहा- इन नंबरों पर कॉल करके बस इतना मैसेज कर देना कि हम लोग यहां सब ठीक हैं। इस पर धारा सिंह ने उन नंबरों पर फोन लगाए और मैसेज पहुंचाया। लेकिन कुछ दिनों बाद ही विदेशी नंबरों से फोन आने लगे। विदेश में बैठे गैंगस्टरों ने धारा सिंह को लालच दिया- तुम तो हमारे जाति भाई हो, कोई परेशानी नहीं आने देंगे। मैं खुद इस जेल में काफी समय बिता कर निकला हूं। आप मेरे साथियों का ध्यान रखना, जो भी जरूरत हो, वह समय-समय पर उपलब्ध करवा देना। समय-समय पर पैसा आ जाएगा। विदेश में बैठे गैंग के सरगना ने लालच दिया कि आपको भविष्य में कोई परेशानी आई तो उसकी पूरी जिम्मेदारी हम लेंगे। नौकरी नहीं रही तो फैमिली सहित विदेश बुलवा लेंगे। परिवार को भी पूरी सिक्योरिटी देंगे। जरूरत पड़ी तो केस लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील भी खड़े कर देंगे। इसी लालच में फंस कर धारा सिंह बदमाशों की मदद करने जुट गया। 15 बार से ज्यादा गैंगस्टरों की बात करवाई चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेश की सबसे हाई सिक्योरिटी जेल जैमर से लैस है। जेल के भीतर किसी भी रेंज का मोबाइल काम नहीं करता। लेकिन धारा सिंह जेल प्रहरी होने के कारण सारे लूपहोल जानता था। उसने 15 से ज्यादा बार गैंग के बदमाशों की अपने मोबाइल से बात करवाई। नियमानुसार जेल में कोई भी व्यक्ति मोबाइल लेकर प्रवेश नहीं कर सकता। जेल में एंटर होने से पहले स्टाफ के हर सदस्य की भी जांच होती है। नियमानुसार जेलकर्मी को भी ड्यूटी के दौरान मोबाइल जमा करवाना पड़ता है। फिर धारा सिंह कैसे 15 बार फोन लेकर अंदर घुसा। पुलिस को इस खेल में कई जेलकर्मियों की मिलीभगत की आशंका है। गैंगस्टरों से बात के लिए खरीदा की-पैड वाला फोन, पेमेंट कैश में धारा सिंह चौहान ने बदमाशों की आपस में बात कराने के लिए अलग से की-पैड फोन खरीदा था, जो 2जी टेक्नोलॉजी का है। सिक्योरिटी को चकमा देकर वह दूसरा फोन जेल की बैरकों तक ले जाता था। बात करवाने के बदले कैश में पैसा लेता था। धारा सिंह ने 3 बार पैसों का लेनदेन कबूला है। पुलिस के अनुसार उसने तीन बार में 50 हजार, 30 हजार और 20 हजार रुपए लिए थे। ये सारा लेनदेन कैश में हुआ ताकि कभी जांच हो तो पकड़ में नहीं आए। दुश्मन गैंग को लीक की एक दूसरे की जानकारियां पूछताछ में सामने आया है कि वह जेल में बंद कैदियों की पूरी जानकारी रखता था। परिवारों से बात कराने के अलावा एक दूसरे के दुश्मन को भी अहम जानकारियां लीक करता था। जैसे- गैंगस्टर को कब पैरोल मिलेगी, जेल शिफ्टिंग कब होगी, कौन कैदी जेल में नया आया है, उसे किस वार्ड में रखा गया है, उससे कौन-कौन मिलने आ रहे हैं। इस तरह की गोपनीय जानकारी भी शेयर करता था। नाकाबंदी में पकड़े गए बदमाश से हुआ खुलासा दरअसल, 6 अगस्त को जयपुर के दौलतपुरा थाने के पास पुलिस ने नाकाबंदी में एक कार को पकड़ा था। तलाशी के दौरान कार में दो कारतूस और एक चाकू मिला था। पुलिस ने कार सवार संदीप सिंह निर्वाण (30) निवासी बबाई (झुंझुनूं) को अरेस्ट किया। संदीप जयपुर में कालवाड़ रोड पर करधनी में रहता था। उसके कब्जे से अवैध हथियार और कार को जब्त कर आगे की कार्रवाई की गई। आरोपी संदीप ने पूछताछ में बताया कि वह अवैध वसूली गैंग से जुड़ा हुआ है। दो-तीन दिन पहले ही उसे अवैध वसूली के 1.50 लाख रुपए मिले थे। इनमें से उसने 20 हजार रुपए का पेमेंट सोहन सिंह को किया था। पुलिस ने सोहन सिंह को राउंडअप कर पूछताछ की। उसने बताया कि गांव के साथी और अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में प्रहरी धारा सिंह के कहने पर उसने संदीप से 20 हजार रुपए कैश लिए थे। इन पैसों को बाद में उसने धारा सिंह के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किया था। इसके बाद 7 अगस्त को एक टीम अजमेर गई और धारा सिंह को जेल में ड्यूटी के दौरान गिरफ्तार किया। कई जिलों में छापेमारी डीसीपी पश्चिम प्रशांत किरण ने बताया- जेल प्रहरी धारा सिंह की निशानदेही पर पुलिस टीम ने अलग-अलग जिलों में दबिश देकर कई बदमाशों को डिटेन किया है। धारा सिंह का कनेक्शन कई गैंगस्टरों और उनके गुर्गों से सामने आया है। हालांकि अभी तक ये पुष्टि नहीं हुई है कि वह कौन-कौन सी गैंग के टच में था। धारा सिंह ने कबूल किया है कि वह बदमाशों के लालच में आकर जेल में बंद गैंग के बदमाशों की मदद करता था। उसका मोबाइल जब्त कर FSL जांच के लिए भिजवाया गया है। इसके बाद कई और राज खुलने की संभावना है। धारा सिंह की 7 साल पहले हुई थी नियुक्ति धारा सिंह मूल रूप से दौसा जिले का रहने वाला है। वह साल 2018 बैच का जेल प्रहरी है। साल 2019 में उसको पोस्टिंग मिली थी। वर्ष 2022 से अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में तैनात हुआ। मार्च महीने से पैसों के लालच में गैंग से जुड़कर काम कर रहा था। पैसे लेने के एवज में गैंग के जेल में बंद गुर्गों को सुविधाएं पहुंचाता था। …. अजमेर जेल से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 100 रेप के मास्टरमाइंड को जेलर ने किया वीडियो कॉल:अजमेर सेंट्रल जेल के कैदियों से कराई बात, खुद भी बोला- ओके चाचा; सस्पेंड अजमेर सेंट्रल जेल से जेलर सद्दाम हुसैन ने वीडियो कॉल करके 100 रेप के मास्टरमाइंड नफीस चिश्ती से कैदियों की बात करवाई। यह सब सद्दाम हुसैन के ऑफिस में और उनके फोन से हुआ। पूरी खबर पढ़िए…
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश सम्पूर्णानंद पांडेय ने हाल ही अपने करियर की यात्रा का एक किस्सा शेयर किया है। ये बात उस वक्त की है जब वो स्ट्रगल कर रहे थे।
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
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सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
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Meta और भारत सरकार के बीच बढ़ी तकरार! 'भारत में नहीं चलेगा अमेरिकी कानून', एल्गोरिदम को लेकर बड़ा विवाद
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
अमेरिका में भारत से ₹30 हजार सस्ता होगा iPhone 18 Pro Max, कहां से खरीदने में फायदा
अगर आप iPhone 18 Pro Max खरीदने की सोच रहे हैं, तो अमेरिका से खरीदना आपकी जेब के लिए फायदेमंद हो सकता है। जानिए खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

