ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! कुवैत में अमेरिकी ठिकाने को बनाया निशाना, ट्रंप बोले - 'समझौते का आखिरी मौका'
Narinder Singh समेत 25 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त अमेरिका में पहचान संबंधी जानकारी में कथित फर्जीवाड़े से लेकर हत्या के प्रयास और बाल यौन शोषण जैसे आरोपों वाले मामलों में भारतीय मूल के एक व्यक्ति सहित 25 लोगों की नागरिकता रद्द की जा रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने 65 वर्षीय नरिंदर सिंह के खिलाफ डेलावेयर जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। उन पर अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए फर्जी पहचान का सहारा लेने का आरोप है। न्याय मंत्रालय के मुताबिक सिंह ने 1996 में अमेरिका में प्रवेश के लिए गलत पहचान का इस्तेमाल किया और एक मई, 2008 को अमेरिका के नागरिक बन गए। शिकायत में उनके कई गलत बयानों और गैर-कानूनी कामों का जिक्र करते हुए सात आरोप लगाए गए हैं। जिन 25 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कार्यवाही शुरू की गई है उनमें पाकिस्तानी मूल के दो लोग – जिया मुराद भट्टी और मोहम्मद वासिफ भी शामिल हैं। उन पर पहचान से जुड़ी गलत जानकारी देने के आरोप हैं। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिका की नागरिकता हमारे देश के सर्वोच्च विशेषाधिकारों में से एक है और इसे वैध तरीके एवं ईमानदारी से ही हासिल किया जाना चाहिए।’’ब्लांश ने कहा, ‘‘आज दर्ज की गई शिकायतों में आरोप है कि इन लोगों ने धोखाधड़ी से, तथ्यों को छिपाकर या गैर-कानूनी तरीके से नागरिकता हासिल की। इसमें हिंसक अपराध, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, फर्जी पहचान और नागरिकता के लिए अयोग्य ठहराने वाली अन्य बातें छिपाना शामिल है।’’ये शिकायतें 20 जुलाई से तीन अगस्त के बीच दर्ज की गई हैं। नागरिकता पाने वाले इन लोगों में 17 देशों जैसे कि पाकिस्तान, मोल्दोवा, भारत, मेक्सिको, कोलंबिया, नाइजीरिया, लाइबेरिया, घाना, जमैका, ताइवान, होंडुरास, कैमरून, जॉर्डन, क्यूबा, अल साल्वाडोर, हैती और स्वीडन के लोग शामिल हैं। ब्लांश ने कहा, ‘‘आज की ये कार्रवाई मंत्रालय के इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी समन्वित कोशिश है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है। न्याय मंत्रालय नागरिकता प्रक्रिया की शुचिता और अमेरिकी लोगों की रक्षा के लिए हर उपलब्ध तरीके का इस्तेमाल करना जारी रखेगा।
ईरान का कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमला, ओमान तट पर जहाज निशाने पर
मंगलवार सुबह कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को कम से कम तीन ड्रोन से निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह हमला ईरान की आईआरजीसी से जुड़ा था।
US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।जेम्स ने एक बयान में कहा, सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नरन्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।इसके बाद 'ट्रेड एक्ट 1974' के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव कियाट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।उन्होंने आगे कहा, किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।ये भी पढ़ें- Bankipur By-Election Results: बांकीपुर में BJP का किला ढहा! प्रशांत किशोर की जीत से बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और अधिक तेज करते हुए तेहरान को 'डील या टोटल सरेंडर' का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। सोमवार को एक तीखे बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पर्दे के पीछे निजी तौर पर बातचीत के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इसका खंडन कर रहे हैं। ट्रंप के इस ताजा और आक्रामक बयान से मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।ईरानी नेतृत्व का दोहरा चरित्र और गुप्त बातचीत का दावाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि ईरानी नेता बेहद दोहरा चरित्र अपना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ जहां गुप्त माध्यमों से बातचीत की गुहार लगाई जाती है और बैठकें तय होती हैं, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक रूप से यह ढिंढोरा पीटा जाता है कि वे अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं और केवल ओमान के जरिए ही संवाद हो रहा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि ईरान को दुनिया के किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले पर वाशिंगटन का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और अडिग है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का पूर्ण दबदबाईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण किए जाने के दावों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह महज खोखली बयानबाजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नौसेना और सख्त नाकेबंदी का पूरी तरह से नियंत्रण है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी अनुमति के बिना ईरान के अंदर कोई भी माल न तो आ सकेगा और न ही बाहर जा सकेगा। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक ईरान पूरी तरह से समर्पण नहीं करता या कोई मजबूत कूटनीतिक डील नहीं होती, तब तक अमेरिका का आर्थिक और सैन्य शिकंजा यूं ही कसा रहेगा।कूटनीति के बीच तीखे बयानों से गरमाया मध्य पूर्व का राजनीतिक माहौलविशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनलों को खुला रखने की कोशिशें चल रही थीं। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर लगातार आ रहे तीखे और आक्रामक बयानों ने शांति वार्ताओं की उम्मीदों को झटका दिया है। ट्रंप के इस रुख ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपनी अधिकतम दबाव की नीति को और अधिक कड़ाई से लागू करने के मूड में है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत दुनिया के कई देशों पर नए टैरिफ थोपा जाना अब खुद उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है। अमेरिका के 25 राज्यों के एक मजबूत गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के इस विवादास्पद फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज करा दिया है। राज्यों का आरोप है कि व्हाइट हाउस कानून का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी नागरिकों, परिवारों और व्यवसायों पर गैर-कानूनी तरीके से कर का बोझ डाल रहा है। इस कानूनी शिकंजे के बाद ट्रंप प्रशासन देश के भीतर ही चौतरफा घिरता नजर आ रहा है।60 से अधिक व्यापारिक साझेदारों पर लगाया गया है अतिरिक्त करबता दें कि इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत अपने करीब 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 से 12.5 फीसदी तक का अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का बड़ा ऐलान किया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के निर्यात को रोकने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव के तहत शुरुआती चर्चा में भारत पर 12.5% टैक्स लगाने की बात थी, जिसे बाद में घटाकर 10% कर दिया गया था। साथ ही, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं को इस दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद घरेलू स्तर पर भारी विरोध शुरू हो गया है।'1974 के ट्रेड एक्ट के नाम पर कानूनी नियमों की हो रही अनदेखी'मुकदमा दायर करने वाले अमेरिकी राज्यों ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लागू किए गए इन नए शुल्कों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स और ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि धारा 301 का इस्तेमाल किसी विशिष्ट देश या कंपनी की व्यापारिक नीतियों की जांच के लिए किया जाता है, न कि सभी अमेरिकी आयातों पर एकमुश्त भारी टैरिफ थोपने के लिए। राज्यों का यह भी कहना है कि सामान्य तौर पर एक साल में पूरी होने वाली जटिल जांच प्रक्रिया को महज़ ढाई महीने में ही जल्दबाजी में पूरा दिखा दिया गया, जो पूरी तरह से संदिग्ध और बहानेबाजी है।सुप्रीम कोर्ट से पहले भी कई कानूनी लड़ाइयां हार चुके हैं ट्रंपयह पहला मौका नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी टैक्स नीतियों को लेकर अदालती लड़ाई का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए ट्रंप के शुल्कों को असंवैधानिक करार दिया था। सर्वोच्च अदालत से करारा झटका मिलने के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत वैश्विक टैरिफ लगाने की कोशिश की, जिसे भी अदालतों ने गैर-कानूनी ठहरा दिया। अब धारा 301 का सहारा लेने के बाद 25 राज्यों के इस बड़े कानूनी दांव ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर ही बड़ा कानूनी और राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों के एक समूह ने सोमवार को अदालत का रुख किया है। इन राज्यों ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) समेत 60 व्यापारिक साझेदार देशों (Trading Partner Countries) से होने वाले आयात पर लगाए गए नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद एक बार फिर अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में 10% से 12.5% तक के उन टैरिफ को निशाना बनाया गया है, जो पिछले महीने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये ड्यूटी उन देशों के खिलाफ हैं जो जबरन मजदूरी से बने सामान के एक्सपोर्ट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। यह मामला ट्रंप की टैरिफ स्ट्रैटेजी की नई परीक्षा है, जो US कोर्ट में बार-बार झटके लगने के बावजूद कायम रही है। US राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसलों को नहीं मान रहे हैं यह मुकदमा ओरेगन और न्यूयॉर्क समेत 25 राज्यों ने दायर किया है, जिनके गवर्नर या अटॉर्नी जनरल डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप एक अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करके उन बड़े इम्पोर्ट टैक्स को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें कोर्ट पहले ही गैर-कानूनी करार दे चुका है। शिकायत के अनुसार, धारा 301 का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोपी खास देशों या उद्योगों को निशाना बनाने के लिए किया गया है - न कि लगभग सभी US इम्पोर्ट पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए। शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि प्रशासन जबरन मजदूरी का बहाना बनाकर उन टैरिफ को फिर से लागू कर रहा है जिन्हें कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने एक बयान में कहा, हर कदम पर हारने के बावजूद, ट्रंप एक बार फिर कामकाजी परिवारों और ओरेगन के स्थानीय व्यवसायों के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नए टैरिफ 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों पर लागू विवादित टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को की गई थी और ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से होने वाले इम्पोर्ट पर लागू होते हैं। कुछ देशों को कड़े नियम लागू करने के बाद कम टैरिफ दरें मिलीं। उदाहरण के लिए, प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भारत के लिए टैरिफ दर 12.5% से घटाकर 10% कर दी गई। कुछ खास प्रोडक्ट्स, जैसे तेल, नैचुरल गैस, फर्टिलाइज़र और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा पाने वाले सामानों को नए टैरिफ से छूट दी गई। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने इस कदम का बचाव किया। अमेरिका में लगभग एक सदी से ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है; अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा ही करने का समय आ गया है। ट्रंप ने एक नई कानूनी रणनीति अपनाई ये टैरिफ ट्रंप के आर्थिक एजेंडा के मुख्य स्तंभों में से एक को बचाने की उनकी नई कोशिश है, क्योंकि इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में, US सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है, जिससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई। इसके जवाब में, ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दुनिया भर में अस्थायी टैरिफ लगाए। बाद में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड ने उन लेवी को भी गैर-कानूनी करार दिया, हालांकि प्रशासन की अपील के दौरान वे लागू रहे। इसे भी पढ़ें: Ramayana की रिलीज से पहले स्पेशल स्क्रीन की मांग, श्री रामलीला महासंघ ने निर्माताओं को लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शन की दी चेतावनी कानूनी चुनौतियों के कारण उन विकल्पों के बाद, प्रशासन ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का रुख किया है, एक ऐसा कानून जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से विदेशी सरकारों की अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए किया जाता है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर टैरिफ लगाने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया था, और वे उपाय कानूनी चुनौतियों में टिके रहे क्योंकि वे किसी खास देश को टारगेट करके लगाए गए थे। कोर्ट से बार-बार झटके मिलने के बावजूद ट्रंप US मैन्युफैक्चरिंग को फिर से शुरू करने और ग्लोबल ट्रेड को नया रूप देने के लिए टैरिफ को एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले साल, उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का लंबे समय से चला आ रहा ट्रेड डेफिसिट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगभग हर देश से होने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ लगाए, हालांकि बाद में कोर्ट ने उन उपायों पर रोक लगा दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास किसी समझौते पर पहुँचने का यह आखिरी मौका है। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दावों को खारिज किया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान को सबक सिखाने और उस पर दबाव बनाने के लिए गैर-पारंपरिक और अपरंपरागत रणनीतियों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के अनुरोध पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन के साथ बातचीत के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चर्चा चल रही है। ट्रंप ने कहा, हम अभी बात कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, यह उनके लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। मैं उन्हें कड़ी कार्रवाई से पहले हर संभव आखिरी मौका देना चाहता हूँ। CENTCOM ने ईरान पर कार्रवाई के लिए 'नए और अनोखे' विचारों की मांग की इस बीच, खबर है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर दबाव बनाने के नए तरीकों के लिए सैन्य विश्लेषकों से नए विचारों की मांग की है। इसे भी पढ़ें: FSSAI का Dabur India पर बड़ा एक्शन! '100% शुद्ध' और 'ऑर्गेनिक' के गुमराह करने वाले दावों पर लगी रोक, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, CENTCOM की खुफिया शाखा के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते एक ईमेल भेजा था जिसमें कर्मचारियों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे दंडित करने के नए, अनोखे और अपरंपरागत तरीकों का प्रस्ताव देने को कहा गया था। क्राउडसोर्सिंग-शैली के इस अनुरोध को अमेरिकी सेना के लिए एक असामान्य कदम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अपने विकल्पों पर फिर से विचार कर रहा है क्योंकि वह ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है। मामले से परिचित एक दूसरे सूत्र ने CNN को बताया कि CENTCOM सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर रहा है और उसने अपनी मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने CNN को दिए एक बयान में कहा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का नए और अनोखे तरीकों से सोचने और काम करने का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने आगे कहा, खासकर एडमिरल कूपर, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के उच्चतम स्तर को हासिल करने के लिए रैंक की परवाह किए बिना हमारी बेहतरीन टीम के सदस्यों से संपर्क करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फोकस ट्रंप के अनुसार, चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से निपटने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक जलमार्ग सचमुच कल तक फिर से खुल सकता है, जबकि ईरान के परमाणु-मुक्त होने की प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। अमेरिका और ईरान 28 फरवरी से ही संघर्ष में उलझे हुए हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अचानक हमले किए थे। हालांकि बीच-बीच में हुई कूटनीतिक कोशिशों से कुछ समय के लिए शांति रही है, लेकिन टकराव जारी है। ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार है और वह इस इलाके में अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता रखता है। होर्मुज में कार्गो जहाज पर हमला एक नई घटना में, ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी, UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने मंगलवार सुबह बताया कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय एक अज्ञात कार्गो जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल (किसी अज्ञात चीज़) से हमला हुआ। एजेंसी ने कहा कि अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जहाज की पहचान या संभावित नुकसान या हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
ईरान और अमेरिका में बढ़ा तनाव, मुश्किल में फंसे ट्रंप, तेहरान ओमान की हुई दोस्ती, युद्ध लेगा U-turn?
अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी फिर बढ़ गई है। ईरान ने अमेरिका से बात करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, ट्रंप अपने ही देश में मुश्किलों में फंस गए हैं। ईरान और ओमान की दोस्ती बढ़ी, क्या युद्ध लेगा यू-टर्न?
भारत समेत 60 देशों पर लगाए टैरिफ को कोर्ट में चुनौती, 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप पर किया मुकद्दमा
भारत समेत 60 देशों पर लगाए टैरिफ को कोर्ट में चुनौती, 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप पर किया मुकद्दमा
Donald Trump के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने खटखटाई अदालत
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे। ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के वैश्विक आयात शुल्क के स्थान पर लागू किए गए हैं। इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है। जेम्स ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।’’भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली। बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
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अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका
वाशिंगटन, तीन अगस्त (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ प्रस्तावित नयी वार्ता तेहरान के लिए समझौता करने और अमेरिका के हमलों से बचने का आखिरी मौका है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में बातचीत शुरू होगी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान निकालने का रास्ता तैयार होगा। राष्ट्रपति ने कहा, “पहला चरण जलडमरूमध्य को खोलने का है। दूसरा चरण परमाणु निरस्त्रीकरण का है।”ट्रंप ने कहा कि “इसमें थोड़ा समय लगेगा।”ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगी खाड़ी देशों के आग्रह पर ईरान पर नए और बड़े हमले का आदेश देने का फैसला फिलहाल टाल दिया।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों पर स्टील निभाएंगी अहम भूमिका : विदेश मंत्री चो ह्यून
सोल। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोल में नई अमेरिकी राजदूत मिशेल स्टील, वॉशिंगटन तक अपनी 'सीधी पहुंच' का उपयोग करते हुए दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाएंगी। योनहाप न्यूज टीवी को दिए इंटरव्यू में चो ने कहा, मुझे उम्मीद है कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत होगी। कहा जाता है कि राजदूत की वॉशिंगटन तक सीधी पहुंच है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि हम इसका इस्तेमाल दोनों देशों के रिश्तों में मौजूद कठिन मुद्दों को सुलझाने के लिए कर सकेंगे। योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, मिशेल स्टील गुरुवार को दक्षिण कोरिया पहुंचीं और उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया। यह पद पिछले साल जनवरी से खाली पड़ा हुआ था। चो ह्यून मंगलवार को स्टील से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने वाले हैं, जब वह विदेश मंत्रालय को अपने नियुक्ति पत्रों की प्रति सौंपेंगी। स्टील का आगमन ऐसे समय में हुआ है, जब सोल और वॉशिंगटन के बीच सुरक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं। इनमें अमेरिका में दक्षिण कोरिया के निवेश संबंधी वादे और अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी कूपांग इंक के खिलाफ सोल की नियामक कार्रवाई को लेकर पैदा हुआ तनाव भी शामिल है। यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर डेटा लीक के बाद की गई थी। इसके अलावा, चो ने कहा कि उन्हें पता है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी 'जल्द ही' साउथ कोरिया जाएंगे। उनकी अप्रैल में हुई उत्तर कोरिया की यात्रा पर चर्चा होने की उम्मीद है। कोरिया नेशनल डिप्लोमैटिक अकादमी में हाल ही में हुए डेटा लीक के बारे में, जिसमें दक्षिण कोरिया के लगभग सभी राजनयिकों की निजी जानकारी उजागर होने की आशंका है, चो ने कहा कि विदेश मंत्रालय कड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है। इनमें भविष्य में हैकिंग रोकने के लिए मजबूत फायरवॉल तैयार करना भी शामिल है। पिछले महीने दक्षिण कोरिया की अमेरिका में राजदूत कांग क्यूंग-वा ने मिशेल स्टील से मुलाकात के दौरान उनसे दोनों देशों के गठबंधन को एक 'नई ऊंचाई' तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया था। कांग और स्टील की मुलाकात 21 जुलाई को हुई थी, जब स्टील सोल के लिए रवाना होने वाली थीं। स्टील 30 जुलाई (कोरिया समयानुसार) को सोल पहुंचीं। उस समय दोनों देशों के सामने कई साझा जिम्मेदारियां थीं, जिनमें पिछले वर्ष हुए सुरक्षा, व्यापार और निवेश संबंधी द्विपक्षीय समझौतों को लागू करना भी शामिल है।
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस, 'अवैध टैक्स' का आरोप - AajTak
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस, 'अवैध टैक्स' का आरोप AajTak ट्रंप के नए झटके से क्या भारत की मुश्किलें और बढ़ेंगी BBC अमेरिकी शुल्क की चेतावनी: क्या भारत की फार्मा ताकत अब नई परीक्षा के दौर में है? Jansatta Noida News: अमेरिका के टैरिफ वार से बेअसर नोएडा का निर्यात, उद्यमियों ने ढूंढे नए बाजार Amar Ujala अमेरिका अपने टैरिफ की दीवार का पुनर्निर्माण कर रहा है: Vietnam.vn
Auraiya News: सावन में फिरोजाबादी और अमेरिकन डायमंड की चूड़ियों की मांग
सावन में फिरोजाबादी और अमेरिकन डायमंड की चूड़ियों की मांग
तेल कंपनियों पर बिफरे ट्रंप: शवोन के CEO को अमेरिकी राष्ट्रपति की खरी-खरी, क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?--Trump Slams Chevron CEO, Demands Immediate Fuel Price Cuts Amid Rising Oil Costs
पानीपत में स्टडी वीजा पर अमेरिका भेजने के नाम पर 34.50 लाख रुपये की ठगी और मानव तस्करी का मामला सामने आया है। पुलिस ने चार आरोपितों सोनू, बिल्लू, रोबिन और आशीष के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व इमिग्रेशन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
डील या टोटल सरेंडर… ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम; होर्मुज पर अमेरिकी कंट्रोल का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए डील या टोटल सरेंडर का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी तौर पर बातचीत चाहते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से इनकार करते हैं।
ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका? ट्रंप के फैसले के पीछे क्या थे रणनीतिक और राजनीतिक कारण
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अमेरिकी क्रिकेटर अखिलेश रेड्डी पर लगा 8 साल का बैन, जानिए क्या है का मामला
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (यूएसए) के क्रिकेटर बोडुगम अखिलेश रेड्डी पर सभी तरह के क्रिकेट से आठ साल का बैन लगा दिया गया है, जिन्हें एंटी-करप्शन ट्रिब्यूनल ने एंटी-करप्शन कोड के तीन नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है। 26 वर्षीय रेड्डी पर ये कार्रवाई संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में होने वाले अबू धाबी टी10 टूर्नामेंट के 2025 एडिशन से जुड़ी भ्रष्ट गतिविधियों के कारण की गई है। आईसीसी को एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने इस लीग के लिए 'डेजिग्नेटेड एंटी-करप्शन ऑफिशियल' (डीएसीओ) के तौर पर नियुक्त किया था। आईसीसी के मुताबिक, रेड्डी का आठ साल का सस्पेंशन 21 नवंबर 2025 से लागू माना जाएगा, जब उन्हें पहली बार अस्थायी रूप से सस्पेंड किया गया था। ट्रिब्यूनल की औपचारिक कार्रवाई के बाद, रेड्डी को एंटी-करप्शन कोड के तहत तीन मुख्य नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है। आईसीसी ने सोमवार को अपने बयान में कहा, आर्टिकल 2.1.1: एडीटी10 2025 में मुकाबलों के नतीजे, प्रगति, आचरण या किसी अन्य पहलू को फिक्स करने, उसकी साजिश रचने या गलत तरीके से प्रभावित करने की कोशिश करना, या किसी भी तरह से फिक्सिंग या साजिश या गलत तरीके से प्रभावित करने के समझौते या प्रयास में शामिल होना। आर्टिकल 2.1.4: किसी दूसरे खिलाड़ी को एडीटी10 2025 के एक या ज्यादा मैचों में कोड के आर्टिकल 2.1.1 का उल्लंघन करने के लिए उकसाना, बहकाना, लालच देना, निर्देश देना, मनाना, बढ़ावा देना या जानबूझकर मदद करना (या ऐसा करने की कोशिश करना)। आर्टिकल 2.4.7: मोबाइल डिवाइस से डेटा और मैसेज डिलीट करके डीएसीओ की जांच में बाधा डालना, जो डीएसीओ की जांच के लिए अहम हो सकते थे। ये आरोप 19 नवंबर 2025 की सुबह एस्पिन स्टैलियंस के शुरुआती मैच से ठीक पहले एक होटल के कमरे में हुई एक घटना से जुड़े हैं। ट्रिब्यूनल ने पाया कि रेड्डी ने टीम के एक साथी खिलाड़ी ('प्लेयर ए' के तौर पर पहचाने गए) से संपर्क किया और टीम मैनेजमेंट के कहने पर बॉलिंग करते समय अतिरिक्त रन देने के लिए कहा। जब 'प्लेयर ए' ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और मामले की जानकारी आईसीसी एंटी-करप्शन यूनिट (एसीयू) को दी, तो उन्हें मैच से ठीक पहले शुरुआती प्लेइंग इलेवन से हटा दिया गया। तीसरे आरोप के संबंध में, रेड्डी ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 19 नवंबर की सुबह 'प्लेयर ए' के साथ हुए व्हाट्सएप टेक्स्ट मैसेज और कॉल लॉग को खुद डिलीट किया था। ये आरोप 19 नवंबर 2025 की सुबह एस्पिन स्टैलियंस के शुरुआती मैच से ठीक पहले एक होटल के कमरे में हुई एक घटना से जुड़े हैं। ट्रिब्यूनल ने पाया कि रेड्डी ने टीम के एक साथी खिलाड़ी ('प्लेयर ए' के तौर पर पहचाने गए) से संपर्क किया और टीम मैनेजमेंट के कहने पर बॉलिंग करते समय अतिरिक्त रन देने के लिए कहा। Also Read: LIVE Cricket Score ये सजा माइकल जे. बेलॉफ केसी (चेयर), जस्टिस केट ओ'रीगन और लॉयड म्हीशी वाली तीन-सदस्यीय ट्रिब्यूनल की लंबी सुनवाई के बाद सुनाई गईं। रेड्डी ने नॉर्थ अमेरिका टी20 कप में केमैन आइलैंड्स के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था, उन्होंने यूएसए के लिए चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में एक विकेट हासिल किया है। Article Source: IANS
अमेरिकी क्रिकेटर अखिलेश रेड्डी पर लगा 8 साल का बैन
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (यूएसए) के क्रिकेटर बोडुगम अखिलेश रेड्डी पर सभी तरह के क्रिकेट से आठ साल का बैन लगा दिया गया है, जिन्हें एंटी-करप्शन ट्रिब्यूनल ने एंटी-करप्शन कोड के तीन नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है।
ICC ने अमेरिकी क्रिकेटर पर ठोका 8 साल का बैन, लगे हैं मैच फिक्सिंग से जुड़े 3 बड़े आरोप
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने अमेरिका के क्रिकेटर बोडुगुम अखिलेश रेड्डी पर 8 साल का बैन लगाया है। यह बैन 21 नवंबर 2025 से माना जाएगा, जब खिलाड़ी को पहली बार अस्थायी रूप से सस्पेंड किया गया था।
ट्रम्प का दावा- अमेरिका और ईरान के बीच आज से शुरू होगी वार्ता, वीडियो में जाने बड़े हमले को टालने की कही बात
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के एंटी-करप्शन ट्रिब्यूनल ने अमेरिका के क्रिकेटर बोदुगुम अखिलेश रेड्डी पर क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से 8 साल का प्रतिबंध लगाया है। ट्रिब्यूनल ने उन्हें आबू धाबी T10 लीग 2025 के दौरान मैच फिक्सिंग की कोशिश, दूसरे खिलाड़ी को फिक्सिंग के लिए उकसाने और जांच के दौरान मोबाइल से सबूत मिटाने का दोषी पाया। यह प्रतिबंध 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा, जब उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। ICC के मुताबिक, मामले की जांच एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) की ओर से नियुक्त ICC के एंटी-करप्शन अधिकारियों (DACO) ने की थी। अमेरिका के लिए खेल चुके हैं 4 टी-20 मैच 26 साल के बोदुगुम अखिलेश रेड्डी ने अमेरिका की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 4 टी20 मैच खेले हैं। उन्होंने नॉर्थ अमेरिका टी20 कप में केमैन आइलैंड्स के खिलाफ अमेरिका के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था। एक बल्लेबाज और पार्ट-टाइम गेंदबाज के रूप में खेलने वाले अखिलेश के नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 1 विकेट दर्ज है। आबू धाबी T10 लीग में ICC की क्या भूमिका है? आबू धाबी T10 लीग का आयोजन एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) करता है। टूर्नामेंट में भ्रष्टाचार रोधी नियमों को लागू करने और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी आईसीसी के एंटी-करप्शन अधिकारियों (DACO) को सौंपी गई है। इसी अधिकार के तहत इस मामले की जांच और सुनवाई की गई। ------------------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम का भारत दौरा:भारतीय मूल के नील पटेल को 16 सदस्यीय टीम में मिली जगह क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अगले महीने होने वाले भारत दौरे के लिए 16 सदस्यीय अंडर-19 पुरुष टीम का ऐलान कर दिया है। इस टीम में भारतीय मूल के न्यू साउथ वेल्स के खिलाड़ी नील पटेल को भी शामिल किया गया है। यह टीम भारत के खिलाफ राजकोट और अहमदाबाद में पांच मैचों की मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। पूरी खबर
पानीपत में अमेरिका के स्टडी वीजा के नाम पर 35 लाख की ठगी, युवक को डंकी रूट से भेजा
पानीपत में एक युवक को स्टडी वीजा पर अमेरिका भेजने का झांसा देकर 35 लाख रुपये की ठगी की गई और उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजा गया।
'गले लगाया और छुरा घोंप दिया'... PAK मंत्री का ट्रंप पर बड़ा हमला, अमेरिका को लेकर किया चौंकाने वाला दावा
US-Iran West Asia Diplomacy: मिडिल ईस्ट में गहराते भीषण सैन्य संकट के बीच कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशें अचानक तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ बैक-टू-बैक हाई-लेवल टेलीफोनिक बातचीत की है।इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाले अपने 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े हमले' को फिलहाल रोक दिया है और दोनों देश बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार हो गए हैं।24 घंटे में सऊदी से दूसरी बातचीत, पाक आर्मी चीफ से भी संपर्कक्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए ईरान ने अपने पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक तालमेल बढ़ाया है। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से 24 घंटे के भीतर दूसरी बार फोन पर लंबी चर्चा की। अराघची ने पाकिस्तान सेना के फील्ड मार्शल असीम मुनीर से भी बात की।ईरान, सऊदी अरब और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर सहमति जताई कि सैन्य टकराव को रोकने के लिए क्षेत्रीय सहयोग और राजनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता है।ट्रंप ने क्यों टाला ईरान पर 'सबसे बड़ा हमला'?एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिका ईरान पर एक बहुत बड़ा सैन्य हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन गल्फ सहयोगियों के अनुरोध के बाद इसे टाल दिया गया। ट्रंप ने बताया कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर ने अमेरिका से हमला रोकने और कूटनीति को एक और मौका देने की अपील की थी।ट्रंप ने कहा, 'हम जाने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन हमारे सहयोगियों को लगता है कि एक डील हो सकती है। मैं लोगों को मारना नहीं चाहता, अगर बातचीत से रास्ता निकलता है तो वह बेहतर है।'आज से शुरू होगी अमेरिका-ईरान की ऐतिहासिक वार्ताट्रंप ने स्पष्ट किया है कि सोमवार दोपहर से अमेरिका और ईरान के बीच सीधे मोर्चे पर बातचीत शुरू हो रही है। इस वार्ता के मुख्य एजेंडे में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का निशस्त्रीकरण शामिल है। ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय की है, तो उन्होंने कहा कि कोई डेडलाइन नहीं है और वे देखेंगे कि वार्ता किस दिशा में जाती है।पहले की चेतावनी और पाकिस्तान में हुई गुप्त वार्ताइससे पहले 7 अप्रैल को ट्रम्प ने ईरान को शांति वार्ता में शामिल न होने पर 'पूरी सभ्यता तबाह करने' की चेतावनी दी थी। इसके बाद पाकिस्तान में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में दुर्लभ आमने-सामने की बैठकें भी हुई थीं, हालांकि वे बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थीं।लेकिन अब, होर्मुज में तेल टैंकरों पर हुए हालिया हमलों और वैश्विक ऊर्जा संकट के बढ़ते खतरे के बीच, दोनों देशों का फिर से बातचीत की मेज पर आना अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक शांति के लिए एक बेहद बड़ी राहत की खबर माना जा रहा है।
अभिजीत दीपके अमेरिका में पढ़ाई के लिए कहां से लाए पैसे? बता दिया सच, सबूत भी दिखाए
इससे पहले सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की थी। उन्होंने CJP की फंडिंग पर भी सवाल उठाए थे।
जुलाई में लगभग 23% की तेज बढ़त के बाद, सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 5% से ज्यादा गिरकर $80 प्रति बैरल के नीचे आ गया।
'पीएम केयर्स की ओर भी देखें..': अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई पर सवाल, भड़की CJP, बोली- मोदीजी माफ कर देंगे Navbharat Times सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 होगी, लोकसभा में बगैर बहस के बिल पारित BBC मोदी जी माफ कर देंगे, CJP का PM केयर्स फंड को लेकर RTI एक्टिविस्ट पर तंज ABP News अभिजीत दीपके अमेरिका में पढ़ाई के लिए कहां से लाए पैसे? बता दिया सच, National Hindi News Hindustan कॉकरोच जनता पार्टी दो दिन की रणनीतिक बैठक करेगी: कहा- राजनीतिक दल नहीं बनाएंगे; दीपके बोले- स्कॉलरशिप के पै... Dainik Bhaskar
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में कैसे हुई पढ़ाई? अभिजीत दिपके ने दिया जवाब
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने अमेरिका में हुई अपनी पढ़ाई को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है. उनका कहना है कि उनकी पढ़ाई का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरा हुआ था.
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
US Iran News: ट्रंप बोले- जल्द होगी अमेरिका और ईरान की बैठक, होर्मुज संकट खत्म करने और न्यूक्लियर डील पर होगी चर्चा
ट्रम्प का दावा- ईरान पर बड़ा सैन्य हमला टला, समझौते के प्रस्ताव के बाद अमेरिका ने बदला फैसला
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अमेरिका-ईरान डील की उम्मीद से कच्चा तेल हुआ सस्ता, 5% तक लुढ़के दाम
ईरान पर अमेरिकी हमले टलने और संभावित समझौते के संकेतों के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों करीब 5 फीसदी टूट गए. हालांकि, होर्मुज के आसपास टैंकरों पर हमले और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार है.
World News: अमेरिका में 80 वर्षीय अभिनेता विंसेंट पास्टर का शव बरामद; PAK में सड़क हादसा, 13 लोग घायल
ट्रंप का दावा, अमेरिका ईरान के बीच होगी बैठक, होर्मुज के साथ न्यूक्लियर डील के भी दिए संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ सोमवार दोपहर से बैठक शुरू होगी। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट के साथ-साथ न्यूक्लियर डील हो सकती है।
ट्रंप का दावा, अमेरिका ईरान के बीच होगी बैठक, होर्मुज के साथ न्यूक्लियर डील के भी दिए संकेत India TV Hindi क्या ईरान के इस 'ख़तरनाक' प्लान ने ट्रंप को हमला करने से रोक दिया है? BBC ट्रम्प बोले- ईरान पर फिर हमला कर सकता हूं: लेकिन लोगों को मारना नहीं चाहता, आज से फिर होगी बातचीत Dainik Bhaskar 'तो निकल गई हवा...', हमले रोकने के बाद ईरानी मीडिया ने ट्रंप का उड़ाया मजाक Jagran विश्व युद्ध जैसे अटैक का था प्लान- ट्रंप की वॉर्निंग, ईरान बोला- US ने हिमाकत की तो... ABP News
Top News: CWG का ग्लास्गो में समापन; ईरान और अमेरिका के बीच फिर बढ़ा तनाव; पाकिस्तान में धमाके में कई मौतें---Top Headline Today Important And Big News Stories Of 03 August 2026 Updates on amar ujala
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
भारत और अमेरिका की सैलरी और खर्च को लेकर सोशल मीडिया पर किया गया एक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में कहा गया कि, भारत में सालाना 40 लाख रुपये कमाने वाले व्यक्ति की लाइफस्टाइल अमेरिका में 1.90 लाख डॉलर सालाना कमाने वाले व्यक्ति जैसी होती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोग इस पोस्ट पर कई लोग कमेंट कर रहे हैं। लोगों ने घर, कार, हेल्थकेयर और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर अपने-अपने तर्क दिए।व्यक्ति ने किया पोस्टसूरज कुमार तलरेजा नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर आप भारत में सालाना 40 लाख रुपये (40 LPA) कमा रहे हैं, तो आपकी लाइफस्टाइल लगभग वैसी ही है जैसी अमेरिका में सालाना 1,92,000 डॉलर कमाने वाले व्यक्ति की होती है।” उन्होंने आगे लोगों से ये भी कहा कि वे टैक्स को लेकर सोशल मीडिया पर बेवजह शिकायत करना बंद करें।यूजर ने किया कमेंटइस दावे पर नवीन नेगी नाम के एक अन्य यूजर ने आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, इस तरह की तुलना करते समय भारत और अमेरिका की परचेजिंग पावर और घर-कार जैसी बड़ी संपत्तियों की कीमतों में मौजूद बड़े अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने X पर लिखा, “अगर आप कभी अमेरिका में नहीं रहे हैं, तो इस तरह की बेवकूफी भरी बातें नहीं करनी चाहिए।” इसके बाद उन्होंने दोनों देशों में घरों और कारों की कीमतों का भी उदाहरण दिया।3 लाख डॉलर में घर खरीद सकते हैंनवीन नेगी ने लिखा, “सिर्फ जानकारी के लिए बता दूं कि अगर अमेरिका में आपकी सालाना आय 1.90 लाख डॉलर है, तो आज भी ऑस्टिन जैसे शहर में करीब 3 लाख डॉलर में 3BHK कॉन्डोमिनियम खरीदा जा सकता है। वहीं लगभग 50 हजार डॉलर में BMW 3 सीरीज का बेस मॉडल मिल जाता है, जो 1.90 लाख डॉलर की सालाना कमाई का करीब एक-चौथाई हिस्सा है।”भारत में घर खरीदना मुश्किलनवीन नेगी ने आगे कहा कि अगर भारत में किसी व्यक्ति की सालाना आय 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 80 लाख रुपये भी कर दी जाए, तब भी कई टियर-1 शहरों में आराम से दो बेडरूम का फ्लैट खरीदना आसान नहीं होगा। उन्होंने लिखा, “मान लीजिए भारत में किसी की सालाना कमाई 40 लाख रुपये की जगह 80 लाख रुपये हो जाए, तब भी देश के किसी बड़े टियर-1 शहर में आसानी से 2BHK फ्लैट खरीदना मुश्किल है। वहीं भारत में BMW 3 सीरीज की कीमत करीब 80 लाख रुपये या उससे अधिक है, जो एक साल की आय से लगभग दोगुनी बैठती है।” If you are earning 40 LPA every year in India, you are literally living a same lifestyle of someone who is in USA earning 192,000 USD every year.Stop doing nonsense on twitter about taxes you are paying.— Suraj Kumar Talreja (@suritalreja) July 31, 2026 नेगी ने कहा कि उनकी तुलना सिर्फ घरों और कारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने लिखा, “मैंने अभी कम ब्याज दरों, सस्ती लीज की सुविधाओं, क्रेडिट कार्ड का बकाया दूसरे कार्ड में ट्रांसफर करने जैसी सुविधाओं और कई अन्य बातों का जिक्र भी नहीं किया है, जो अमेरिका में लोगों की खरीदने की क्षमता को और मजबूत बनाती हैं। इसके अलावा, अमेरिका में सरकारी स्कूलों की शिक्षा भी अच्छी गुणवत्ता की होती है और लगभग मुफ्त होती है।”लोगों ने दिया मजेदारा रिएक्शनइस बहस ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और बड़ी संख्या में यूजर्स ने अपनी-अपनी राय रखी। एक यूजर ने लिखा, “बेंगलुरु में किसी अच्छी सोसाइटी में 3BHK फ्लैट की कीमत 2 करोड़ रुपये से कम नहीं है। अगर आप साल में 10 लाख रुपये भी बचाते हैं, तो बिना ब्याज जोड़े सिर्फ घर खरीदने में ही 20 साल लग जाएंगे।” एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “आप सिर्फ चीजों की कीमतों की तुलना कर रहे हैं। क्या अमेरिका में 1.90 लाख डॉलर सालाना कमाने वाला व्यक्ति फुल-टाइम घरेलू मदद रख सकता है? वहां सेवाएं काफी महंगी हैं।”
अमेरिका में 13 अगस्त को चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की फिर नीलामी हो रही है, जिसमें पियरे जेनरेट के 8 आइटम शामिल हैं। अधिवक्ता अजय जग्गा ने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर नीलामी रोकने और वस्तुओं को वापस लाने के लिए कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
अमेरिका भेजने के नाम पर 87 लाख की ठगी, पति-पत्नी के लिए सपनों का सफर बना धोखे का जाल; मोहाली में FIR
दंपती को अमेरिका भेजने के नाम पर दो ट्रैवल एजेंटों ने 87 लाख रुपये की ठगी की। मोहाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर अंबाला के एजेंटों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भारत अमेरिका को पछाड़ दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला सोलर एनर्जी मार्केट बना
नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 2014 में सिर्फ 3 गीगावाट से बढ़कर 30 जून, 2026 तक 162.15 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है, जो देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई।
अमेरिका से हमले न करने को गिड़गिड़ाया था ईरान? ट्रंप के दावे पर आया तेहरान का जवाब
ईरान ने साफ किया है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ऐसा नहीं कहा था कि अमेरिका उस पर हमले न करे। साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका के हमले रोकने का किया एलान, क्या है वजह? - BBC
ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका के हमले रोकने का किया एलान, क्या है वजह? BBC क्या ईरान के इस 'ख़तरनाक' प्लान ने ट्रंप को हमला करने से रोक दिया है? BBC ट्रम्प बोले- ईरान पर हमला फिलहाल टाला: होर्मुज खोलने और परमाणु खतरा खत्म करने पर सहमति बनी; सऊदी ने कार्रवा... bhaskar.com Aaj Ki Taza Khabar: पढ़ें 2 अगस्त 2026 की सुबह की बड़ी खबरें और अन्य समाचार AajTak होर्मुज जलमार्ग खोलने पर अमेरिका-ईरान में बनी सहमति, पश्चिम एशियाई देशों ने ट्रंप से कहा- अब हमले रोक दें Jansatta
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
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अमेरिका में बर्गर पार्टी के दौरान अंधाधुंध फायरिंग, दिल दहला देने वाली घटना में 3 लोगों की मौत
अमेरिका में गन कल्चर और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, और एक बार फिर देश में हुई गोलीबारी की एक खौफनाक वारदात ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका में एक मामूली सी बर्गर पार्टी के दौरान अचानक उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब कुछ अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुए खूनी संघर्ष और अंधाधुंध गोलीबारी में तीन बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस सनसनीखेज घटना के बाद से स्थानीय इलाकों में भारी दहशत का माहौल है और पुलिस-प्रशासन हरकत में आ गया है।पार्टी की खुशियां पलभर में मातम में बदलींमिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना उस समय घटी जब लोग एक जगह इकट्ठा होकर बर्गर पार्टी का आनंद ले रहे थे और आपसी माहौल पूरी तरह खुशनुमा था। अचानक हुई इस हिंसक वारदात ने पलभर में सारी खुशियों को मातम में बदल दिया और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। चश्मदीदों के मुताबिक हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिससे वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।सुरक्षा व्यवस्था और गन वायलेंस पर उठे गंभीर सवालइस दर्दनाक गोलीबारी की घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर अमेरिका में खुलेआम मिलने वाले हथियारों और बढ़ते गन कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन और सरकार की नीतियों की आलोचना हो रही है क्योंकि इस तरह की मास शूटिंग की घटनाएं देश में आम होती जा रही हैं। पुलिस फिलहाल इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि इस खौफनाक वारदात के पीछे की असली वजह का खुलासा हो सके।
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने ग्लोबल डिफेंस एक्सपर्ट्स के भी होश उड़ा दिए हैं। ईरान के साथ कथित तौर पर चली पांच महीने लंबी लंबी और भीषण जंग ने अमेरिकी सेना की पोल खोलकर रख दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि लंबे संघर्षों से निपटने की उसकी ताकत और सैन्य क्षमता अंदर से कितनी खोखली हो चुकी है। इस जंग के बाद अमेरिकी रक्षा तंत्र की कमियां दुनिया के सामने खुलकर आ गई हैं, जिसे आठ मुख्य बिंदुओं के जरिए बेहद आसानी से समझा जा सकता है।मिलिट्री पावर और साजो-सामान का भारी संकटइस पूरे घटनाक्रम और जंग के दौरान सबसे बड़ा पहलू यह सामने आया है कि लगातार चलने वाले युद्धों के कारण अमेरिका के आधुनिक हथियारों और मिसाइलों के भंडार में भारी कमी आ गई है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान के उत्पादन की रफ्तार उस गति से नहीं हो पा रही है जितनी तेजी से जंग में उनका इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा, युद्ध के लंबे खिंचने से अमेरिकी रक्षा बजट पर भी अत्यधिक दबाव पड़ा है, जिससे देश के भीतर आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।महाशक्ति की रणनीतिक विफलताओं का सचईरान के साथ हुए इस लंबे गतिरोध ने अमेरिकी रणनीति की कमजोरियों को भी जगजाहिर कर दिया है, जहां लंबे समय तक चलने वाले पारंपरिक या क्षेत्रीय संघर्षों से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार नहीं दिखती। इस जंग ने यह साबित कर दिया है कि केवल अत्याधुनिक तकनीक के भरोसे किसी लंबी और जटिल लड़ाई को आसानी से नहीं जीता जा सकता, बल्कि इसके लिए मजबूत जमीनी समर्थन और अटूट सप्लाई चेन की भी जरूरत होती है। इस पूरी रिपोर्ट ने वैश्विक पटल पर अमेरिका के अजेय होने के उस पुराने दावे को तगड़ा झटका दिया है जिस पर अब दुनियाभर में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
उत्तर-पश्चिमी अमेरिकी राज्य इडाहो के ट्विन फॉल्स में एक इन-एन-आउट रेस्टोरेंट के इलाके में शनिवार को गोलीबारी की घटना सामने आई। इस गोलीबारी में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और कम से कम दो अन्य घायल हो गए।
अमेरिकी रेस्तरां के भीतर गोलीबारी: तीन की मौत, दो हताहत; हमलावर ढेर
अमेरिका के आइडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स शहर में शनिवार दोपहर एक इन-एन-आउट बर्गर रेस्तरांके अंदर हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई।वहीं दो अन्य घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
अमेरिका के रेस्टोरेंट में अंधाधुंध फायरिंग, 3 लोगों की मौत, 7 घायल, हमलावर भी ढेर
अमेरिका के इडाहो स्थित एक रेस्टोरेंट में फायरिंग की घटना में तीन लोगों की मौत और सात लोगों के घायल होने की खबर है। जानकारी के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में हमलावर भी मारा गया।
अमेरिका ने अपने नागरिकों को किया अलर्ट, मध्य पूर्व से किसी भी वक़्त निकलने के लिए रहें तैयार - BBC
अमेरिका ने अपने नागरिकों को किया अलर्ट, मध्य पूर्व से किसी भी वक़्त निकलने के लिए रहें तैयार BBC ट्रम्प बोले- ईरान पर हमला फिलहाल टाला: होर्मुज खोलने और परमाणु खतरा खत्म करने पर सहमति बनी; सऊदी ने कार्रवा... Dainik Bhaskar पश्चिम एशिया में कुछ नहीं बचेगा, US के हमले के बाद कहां निशाना लगाएगा ईरान; जारी की लिस्ट, International Hindi News Hindustan ईरान पर भीषण अटैक की तैयारी... ट्रंप के प्लान से चौकन्ना हुए सऊदी प्रिंस, अचानक लगाया फोन AajTak वर्ल्ड वॉर-2 जैसी तैयारी की धमकी देकर ट्रंप ने रद किया ईरान पर हमले का प्लान, कहा- दुनिया की भलाई के लिए उठाया कदम Jagran
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्टअमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शलआसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।ये भी पढ़ें- Abhijeet Dipke: रिटायर्ड पिता ने विदेश में अभिजीत दिपके की पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने CJP के फंड पर उठाए सवाल, जांच की मांगहालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।
ईरान ने नरमी को कमजोरी समझा, पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना अमेरिका की रणनीतिक भूल
इतिहास बार-बार सिद्ध करता है कि किसी भी युद्ध का परिणाम केवल सैन्य शक्ति से तय नहीं होता। निर्णायक भूमिका निभाती है राजनीतिक इच्छाशक्ति, रणनीतिक स्पष्टता और यह विश्वास दिलाने की क्षमता कि घोषित राष्ट्रीय लक्ष्य किसी भी परिस्थिति में नहीं बदलेंगे। जब कोई महाशक्ति एक दिन कठोर संदेश देती है और दूसरे दिन समझौते […]
'पाकिस्तान बिकता नहीं, किराए पर चलता है': रिपोर्ट में बड़ा दावा, क्या अमेरिका को उल्लू बना रहा PAK?
'पाकिस्तान बिकता नहीं, किराए पर चलता है': रिपोर्ट में बड़ा दावा, क्या अमेरिका को उल्लू बना रहा पाकिस्तान? pakistan us report terrorism strategy national interest imf world bank china cpec
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह खुलेगा, डोनाल्ड ट्रंप ने दी जानकारी
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि अमेरिका के साथ समझौते में इजरायल भी शामिल है। उन्होंने लिखा कि जल्द ही मिडिल ईस्ट में शांति होगी। ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलेगा और न्यूक्लियर बम नहीं बनाएगा।
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
युद्धपोत कम, मिसाइलें घटीं: शीर्ष जनरल की पेंटागन को चेतावनी, इस्राइल को ईरानी हमले से बचा पाएगा अमेरिका?
West Asia Tension LIVE: क्या आज रात हमले करेगी अमेरिकी सेना? US के नागरिकों को पश्चिम एशिया छोड़ने का फरमान
ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका, अपने नागरिकों से कहा- 'मिडिल ईस्ट छोड़ने के लिए तैयार रहें'
अमेरिका ने एडवाइजरी में कहा है कि मिडिल ईस्ट में कई एयरलाइंस अपनी फ्लाइट्स कैंसिल कर सकती हैं। ऐसे में अमेरिकी नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने के बारे में विचार करना चाहिए या इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिकी रेस्तरां के भीतर गोलीबारी: इडाहो में बंदूकधारी ने चलाईं गोलियां, कई हताहत; हमलावर ढेर
अमेरिकी रेस्तरां के भीतर गोलीबारी: इडाहो में बंदूकधारी ने चलाईं गोलियां, कई हताहत; हमलावर ढेर
Peru Aircraft Crash: दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में विमान हादसा, 13 लोगों की मौत; दुर्घटना का कारण क्या?
US Vs China Tech War: क्या घर साफ करने वाला रोबोट या Wi-Fi राउटर से भी आपकी निजी जानकारी को खतरा हो सकता है? अमेरिका का दावा है कि कई स्मार्ट गैजेट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
Kanpur News: टैरिफ... अब सौ प्रतिशत पर असमंजस, बड़े आर्डर नहीं दे रहे अमेरिकी खरीदार
अमेरिका ने ट्रेड डील की बातचीत के बीच एक बार फिर रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
अमेरिका में नशा तस्करी में हरियाणा का युवक गिरफ्तार, वीडियो वायरल होते ही पिता ने तोड़ा दम
पानीपत के तामशाबाद गांव के वीरेंद्र को अमेरिका में नशा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। वायरल वीडियो से पिता रणबीर को हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया।
इजरायल की ढाल बनने में हांफने लगा अमेरिका! नेवी पर बढ़ा दबाव; टॉप जनरल ने पेंटागन को दी चेतावनी
जनरल ग्रिनकेविच ने स्पष्ट किया है कि अगर नए युद्धपोत नहीं मिलते हैं, तो उन्हें इजरायल की सुरक्षा के बजाय खुद अमेरिका की मुख्य भूमि की रक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खबरों के बीच तेहरान ने बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि अमेरिका ने उसके ऊर्जा संयंत्रों पर किसी भी प्रकार का बड़ा हमला किया, तो वह चुप नहीं बैठेगा। इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के कई खाड़ी देशों में स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस ठिकानों की एक व्यापक लिस्ट जारी कर दी है, जिन्हें अमेरिकी हमले की स्थिति में नेस्तनाबूद किया जा सकता है।ईरानी मीडिया का दावा, सऊदी अरब से लेकर यूएई तक के प्रमुख तेल क्षेत्र निशाने परईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने अमेरिकी आक्रामकता का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी रणनीति तैयार कर ली है। ईरान द्वारा जारी संभावित लक्ष्यों की इस सूची में सऊदी अरब के बेहद महत्वपूर्ण घरावार तेल क्षेत्र के साथ-साथ अबकाइक और खुरैस जैसे बड़े ठिकाने शामिल हैं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विशाल जकुम तेल क्षेत्र और रुवाइस रिफाइनरी को भी इस सूची में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग एक मिलियन बैरल तेल का उत्पादन होता है और यहाँ से वैश्विक बाजारों को बड़े पैमाने पर ऊर्जा का निर्यात किया जाता है।कतर, कुवैत और इजरायल के गैस संयंत्र भी ईरान के रडार परसऊदी अरब और यूएई के अलावा ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और इजरायल के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी अपनी चेतावनी के दायरे में लिया है। दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक कतर के उत्तरी गैस फील्ड और रस लफ्फान को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है, जो वैश्विक एलएनजी (LNG) व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। इसके साथ ही कुवैत के बर्गन तेल क्षेत्र, बहरीन की सित्राह और अल मिहाज रिफाइनरी तथा इजरायल के लेविथान और तमार गैस क्षेत्रों को भी संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की किसी भी लापरवाही या दुस्साहस का कड़ा और बराबरी का जवाब दिया जाएगा।डोनाल्ड ट्रंप की नई रणनीति और ईरान का पलटवारयह पूरा तनाव तब और बढ़ गया जब मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को आर्थिक और सामरिक रूप से कमजोर करने के लिए उसके ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक इस तरह के किसी अंतिम हमले के आदेश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन अमेरिका द्वारा इस विकल्प पर विचार करने से ही खाड़ी देशों की नींद उड़ गई है। इससे पहले भी अमेरिका और इजरायल के संभावित सैन्य दबाव के खिलाफ ईरान ने अपने हल्के ड्रोन्स और मिसाइल क्षमताओं के जरिए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगियों को कड़ा संदेश दिया है। अब इस नई टारगेट लिस्ट के सामने आने के बाद पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा और अधिक गहरा गया है।
आज और कल ईरान पर भारी?अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत निकलने की दी सलाह, क्या ट्रंप फिर ढाएँगे कहर
ईरान का बड़ी चेतावनी, अमेरिका या इजरायल ने हमला किया तो मचेगी तबाही, शेयर किया टारगेट लिस्ट
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इन खबरों के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी योजना तैयार कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अमेरिका या इजरायल ईरान पर नया हमला करते हैं, तो ईरान मध्य पूर्व में मौजूद महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है।ईरान की बड़ी चेतावनीयह बयान ऐसे समय आया है, जब एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस (Axios) को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की पूरी तैयारीईरान ने कथित तौर पर ऐसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों की सूची तैयार की है, जिन्हें अमेरिका या इजरायल के नए हमले की स्थिति में निशाना बनाया जा सकता है। तस्नीम न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य मध्य पूर्व में तेल और गैस से जुड़े अहम ढांचे को प्रभावित करना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संभावित लक्ष्यों में सऊदी अरब का घावर तेल क्षेत्र भी शामिल है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में गिना जाता है। इसके अलावा, अबकैक और खुरैस की तेल सुविधाओं का भी नाम लिया गया है, जहां हर दिन 70 लाख बैरल से ज्यादा तेल का उत्पादन होता है।UAE ने इन ठिकानों का किया जिक्रसंयुक्त अरब अमीरात में भी कुछ प्रमुख ऊर्जा ठिकानों का जिक्र किया गया है। इनमें ज़कुम तेल क्षेत्र और रुवाइस रिफाइनरी शामिल हैं। बताया गया है कि रुवाइस रिफाइनरी में रोजाना 10 लाख बैरल से अधिक तेल का प्रसंस्करण किया जाता है। तस्नीम न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की तैयार की गई सूची में कतर के नॉर्थ फील्ड और रास लाफान भी शामिल हैं। ये दोनों मिलकर दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) कारोबार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संभावित लक्ष्यों में कुवैत का बुरगन तेल क्षेत्र भी शामिल है, जहां हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता है। इसके अलावा, बहरीन की सिट्रा रिफाइनरी और अल-मिहाज क्षेत्र का भी जिक्र किया गया है। वहीं, इजरायल के लेविआथन और तामार गैस क्षेत्रों को भी संभावित निशानों की सूची में शामिल बताया गया है।ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए उसने पूरी तैयारी कर ली है। तस्नीम न्यूज के मुताबिक, ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, अमेरिका की किसी भी कार्रवाई का जवाब देने के लिए हमारे पास व्यापक योजना तैयार है। अधिकारी ने 40 दिन तक चले संघर्ष का भी जिक्र किया। उनका दावा था कि उस दौरान ईरान ने कतर की एक प्रमुख गैस रिफाइनरी को निशाना बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस मामले को लेकर टिप्पणी की थी। ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
पुलिस ने पानीपत में एक शिक्षण संस्थान के चेयरमैन से 7 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले का पर्दाफाश कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
Explainer: ट्रंप की नई नीति से भारतीय छात्रों के ‘अमेरिकन ड्रीम’पर कैसे खतरा मंडरा रहा है?
अमेरिका में पढ़ने और वहाँ नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक नई चुनौती आ खड़ी हुई है। ट्रंप प्रशासन ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम पर $100,000 (करीब ₹95 लाख) की फीस लगाने पर विचार कर रहा है। यह F-1 स्टूडेंट वीजा का एक्सटेंशन है, जो ग्रेजुएशन के बाद काम करने […]
ट्रंप की भीषण धमकी के बाद भड़का ईरान, कहा- 'अमेरिकी सैन्य अड्डों की जलेंगी चिताएं
वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी तनातनी अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है जहां से पीछे हटना नामुमकिन लग रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई सीधी और विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की धमकी के बाद मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध बेहद तेज हो गई है। ट्रंप के इस बयान पर पलटवार करते हुए ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने अमेरिका को खुली चुनौती दे दी है। ईरान ने साफ लफ्जों में कहा है कि अगर अमेरिका ने एक भी मिसाइल दागी, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को श्मशान में तब्दील कर दिया जाएगा। इस बीच ईरान के एक बेहद शक्तिशाली 'महाबली' दोस्त ने भी जंग में कूदने के संकेत देकर पेंटागन की नींद उड़ा दी है।ट्रंप की उस एक धमकी से कैसे थर्राया पूरा मिडिल ईस्टदरअसल, वाशिंगटन में एक हाई-लेवल सिक्योरिटी मीटिंग के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों और तेल डिपो को निशाना बनाने की खुली चेतावनी दी थी। ट्रंप का मानना है कि ईरान वैश्विक शांति और अमेरिकी हितों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। इस धमकी के बाद से ही कतर, बहरीन और इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। दूसरी तरफ, ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज के शटर खोल दिए हैं और सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों का रुख अमेरिकी ठिकानों की तरफ मोड़ दिया है, जिससे किसी भी वक्त युद्ध भड़कने की आशंका है।ईरान का वो रहस्यमयी 'महाबली' दोस्त कौन है जो अमेरिका से भिड़ने को तैयार हैइस पूरे विवाद में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब वैश्विक महाशक्ति माने जाने वाले ईरान के रणनीतिक साझेदार (रूस/चीन गुट) ने इस तनाव में सीधे दखल देने की बात कही। ईरान के इस महाबली दोस्त ने अमेरिकी विस्तारवाद को रोकने के लिए अपनी नौसेना और हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम को अलर्ट पर रख दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर तलवारें खिंचती हैं, तो यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रहेगी। यह महाबली दोस्त ईरान के पीछे ढाल बनकर खड़ा हो गया है, जो इस जंग को पलक झपकते ही वर्ल्ड वॉर में बदल सकता है।खाड़ी देशों और भारत पर इस संभावित महायुद्ध का क्या होगा असरअगर अमेरिकी सेना ईरान पर हमला करती है, तो इसका सबसे पहला और घातक असर ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर पड़ेगा। होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। लोकल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा भी दांव पर लग गई है। नई दिल्ली में भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखी जा रही है और विदेश मंत्रालय ने अपनी इमरजेंसी यूनिट को एक्टिव कर दिया है।
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अमेरिका-इजराइल इस हफ्ते ईरान पर कर सकते बड़ी स्ट्राइक, बिजली प्लांट और रिफाइनरी रडार पर
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मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव के बीच एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान की तेल रिफाइनरियों और बिजली संयंत्रों पर अब तक का सबसे भीषण और बड़ा हमला बोल सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को झुकाने और अपने घुटने टेकने के लिए सैन्य तैयारियां तेज करने के कड़े निर्देश दे दिए हैं। अमेरिका का मुख्य मकसद तेहरान पर अधिकतम दबाव बनाना है ताकि उसे अपनी युद्धविराम शर्तों को मानने के लिए मजबूर किया जा सके।कैंप डेविड से राष्ट्रपति ट्रंप का सख्त संदेशमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कैंप डेविड से एक बेहद कड़ा संदेश देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इन हमलों की शुरुआत इसी हफ्ते हो सकती है। यदि यह हमला होता है, तो यह कई महीनों में पहला ऐसा मौका होगा जब इजरायल सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में खुलकर शामिल होगा। बीते जुलाई में युद्धविराम टूटने के बाद से अमेरिका लगातार ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य गतिविधियां चला रहा था, लेकिन इजरायल ने इन ऑपरेशनों से दूरी बनाए रखी थी।कैंप डेविड में दिए अपने बयान में ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा, 'हम उन पर बहुत भारी प्रहार करने जा रहे हैं। एक समय ऐसा आएगा, जब वे कहेंगे कि अब हम इसे और सहन नहीं कर सकते।' हालांकि, सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस सैन्य अभियान के लिए अंतिम कागजी मंजूरी नहीं दी है, और व्हाइट हाउस की कैबिनेट बैठक के दौरान कुछ सलाहकारों ने इस कार्रवाई पर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं।होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले भी दी थी चेतावनीडोनाल्ड ट्रंप पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि यदि फारस की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद नहीं हुए, तो वह ईरान के पुलों, बंदरगाहों और पावर प्लांटों को पूरी तरह मलबे में बदल देंगे। यह ताजा राजनीतिक और सैन्य हलचल इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच वॉशिंगटन में हुई उच्च-स्तरीय बैठकों के ठीक बाद सामने आई है।5 महीने से जारी है भीषण संघर्षपश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले पांच महीनों से भी अधिक समय से लगातार सैन्य तनातनी और जवाबी हमलों का खूनी खेल जारी है। क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हालिया हमलों के बाद वॉशिंगटन का यह आकलन है कि ईरान का रुख दिन-प्रतिदिन और अधिक आक्रामक होता जा रहा है। तेहरान की इसी बढ़ती जिद और आक्रामकता पर लगाम कसने के लिए अब अमेरिका और इजरायल एक बड़े और निर्णायक एक्शन की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं, जिससे आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
मध्य पूर्व (Middle East) में भू-राजनीतिक तनाव अब तक के सबसे खतरनाक और विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल की ओर से संभावित सैन्य हमलों के कयासों के बीच ईरान ने अपनी आक्रामक रणनीति का खुलासा कर दिया है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उस पर कोई नया हमला किया गया, तो वह इजरायल के साथ-साथ पूरे अरब क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ऊर्जा संपत्तियों और दुनिया के सबसे संवेदनशील एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी सटीक मिसाइलों से नेस्तनाबूद कर देगा। इस चेतावनी के बाद से वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है।ईरान की हिट लिस्ट में शामिल हैं अरब देशों के 7 बड़े एनर्जी हबसैन्य और खुफिया सूत्रों के अनुसार, अरब देशों और इजरायल में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस रिफाइनरियां सीधे तौर पर ईरानी गाइडेड मिसाइलों की रेंज में हैं। ईरान द्वारा जिन 7 प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की चेतावनी दी गई है, वे इस प्रकार हैं:1. घावर ऑयल फील्ड (सऊदी अरब): यह सऊदी अरब के तेल उत्पादन की रीढ़ माना जाता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट आने का मतलब है कि दुनिया की 5 प्रतिशत से अधिक तेल आपूर्ति एक झटके में ठप हो जाएगी।2. अबकैक और खुरैस (सऊदी अरब): लगभग 70 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक थ्रूपुट क्षमता वाला यह दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल स्टेबिलाइजेशन प्लांट है।3. रूवेज रिफाइनरी और जकुम ऑयल फील्ड (UAE): संयुक्त अरब अमीरात का यह दूसरा सबसे बड़ा ऑफशोर तेल क्षेत्र है, जहां रोजाना 10 लाख बैरल से अधिक तेल का उत्पादन होता है।4. नॉर्थ गदीर गैस फील्ड और रास लफान LNG (कतर): यह दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र है, जिसके पास वैश्विक एलपीजी/एलएनजी व्यापार का 20 प्रतिशत हिस्सा और 25 प्रतिशत प्रमाणित गैस भंडार मौजूद है।5. बर्गन ऑयल फील्ड (कुवैत): 67 अरब बैरल के विशाल भंडार और 20 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाला यह एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है।6. सितराह रिफाइनरी और अल-मिहाज (बहरीन): बहरीन की प्रमुख और रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील रिफाइनरी।7. लेविथान और तमार गैस फील्ड्स (इजरायल): इजरायल के सबसे बड़े और अहम प्राकृतिक गैस क्षेत्र, जो देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करते हैं।एक हमले से चरमरा जाएगी वैश्विक अर्थव्यवस्थासैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान इन प्रमुख ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने में कामयाब हो जाता है, तो इसका विनाशकारी असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया में कच्चे तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी आधुनिक मिसाइलें इन सभी ठिकानों को भेदने में पूरी तरह सक्षम हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले 40 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान जब ईरान के साउथ पारस ठिकानों को निशाना बनाया गया था, तब जवाब में कतर की सबसे महत्वपूर्ण गैस रिफाइनरी पर बमबारी की गई थी। उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रुथ सोशल पर बयान जारी कर यह वादा किया था कि ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराई जाएगी। बहरहाल, ईरान की इस ताजा और आक्रामक चेतावनी के बाद वाशिंगटन, तेल अवीव और खाड़ी देशों के बीच आपातकालीन बैठकों का दौर तेज हो गया है और पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
क्या ईरान पर फिर बरसेंगे अमेरिकी बम ट्रंप ने बना लिया तबाही का प्लान, सेना को दिए सख्त आदेश
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West Asia: क्या ईरान पर नहीं रुकेंगे अमेरिकी हमले? व्हाइट हाउस ने दिया जवाब; ट्रंप बोले- अब भरोसा खत्म हो रहा Donald-trump-signals-fresh-military-action-against-iran-hormuz-strait-tensions
ईरान पर नए हमले की तैयारी कर रहा है अमेरिका? WSJ की रिपोर्ट में किया गया बड़ा दावा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर इस वीकेंड नए सैन्य हमले की तैयारी कर सकता है ताकि तेहरान को अपनी शर्तों पर वार्ता के लिए मजबूर किया जा सके। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से तेल कीमतों में उछाल आया है और क्षेत्रीय संघर्ष गहराने की आशंका बढ़ गई है।
West Asia Tension LIVE: ईरान से जंग में ट्रंप के तेवर और उग्र, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर नई रिपोर्ट में क्या?
ईरान पर हमला रोकना अब मुश्किल?: अमेरिकी सीनेट में एक वोट से गिरा अहम प्रस्ताव, ट्रंप के पक्ष में गया फैसला---US Senate Rejects Bill to Limit Trump Military Action Against Iran by One Vote
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
गाजा में अमेरिका की 15 सूत्रीय योजना: ट्रंप का दावा- हथियार डालेगा हमास, क्या इस्राइल अब छोड़ देगा गाजा पट्टी?---Trump 15-Point Gaza Peace Plan: Hamas Agrees to Disarm, Will Israel Withdraw from Gaza Strip?
2026 में अमेरिका से अब तक 2,273 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया: विदेश मंत्रालय
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग स्पष्ट करते हुए कहा कि साल 2026 में अब तक अमेरिका से 2,273 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा गया है।
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
US Immigration Fraud: भारतीय वकील Suraj Raj Singh पर 4 करोड़ का जुर्माना, फर्जी Asylum आवेदन का आरोप
अमेरिका में इमिग्रेसन मामलों से जुड़े एक भारतीय मूल के वकील पर गंभीर आरोप लगने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने अपने कई मुवक्किलों की ओर से कथित रूप से गलत और भ्रामक शरण आवेदन दाखिल किए। इस मामले में अब उनके खिलाफ करोड़ों रुपये के बराबर का नागरिक जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि मामले की कानूनी सुनवाई अभी जारी है और अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों द्वारा लिया जाना बाकी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय मूल के आव्रजन वकील सूरज राज सिंह अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में इमिग्रेसन से जुड़े मामलों की पैरवी करते हैं। बताया गया है कि उन्होंने मुख्य रूप से भारतीय मूल के लोगों के लिए शरण से संबंधित आवेदन तैयार किए और उन्हें अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया। अब अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग और आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने उनके खिलाफ नागरिक दंड की कार्रवाई शुरू की है। अधिकारियों का आरोप है कि सूरज राज सिंह ने 54 अलग-अलग इमिग्रेसन मामलों में कुल 118 कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर दाखिल किए। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कई आवेदनों में इस्तेमाल की गई भाषा, घटनाओं का विवरण और तथ्यों का उल्लेख लगभग एक जैसा था। यहां तक कि अलग-अलग आवेदकों द्वारा कथित उत्पीड़न की कहानी भी काफी हद तक समान पाई गई, जिससे अधिकारियों को दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह हुआ है। बता दें कि इन्हीं आरोपों के आधार पर इमिग्रेसन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने सूरज राज सिंह पर अधिकतम 4 लाख 70 हजार 584 अमेरिकी डॉलर का नागरिक जुर्माना लगाने की मांग की है। भारतीय मुद्रा में इसकी अनुमानित राशि लगभग 4 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। हालांकि यह प्रस्तावित दंड है और अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। गृह सुरक्षा विभाग के महाधिवक्ता जेम्स पर्सिवल ने कहा कि कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन केवल आव्रजन व्यवस्था को कमजोर नहीं करते, बल्कि इससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों के मामलों में भी देरी होती है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों के कारण गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान आव्रजन नियमों के दुरुपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है और इस तरह के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि गृह सुरक्षा विभाग ने बताया है कि यह कार्रवाई मई 2026 में जारी उस निर्देश के तहत की जा रही है, जिसमें कथित फर्जी शरण दावों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। विभाग का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य आव्रजन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और नियमों के दुरुपयोग को रोकना है। यह भी उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में यह दूसरा बड़ा मामला है, जिसमें किसी आव्रजन वकील के खिलाफ दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी को लेकर नागरिक दंड की कार्रवाई की गई है। इससे पहले जून 2026 में भारतीय मूल के एक अन्य आव्रजन वकील विनोद दोड्डमणि को भी कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन दाखिल करने के आरोप में 2 लाख 55 हजार अमेरिकी डॉलर से अधिक के प्रस्तावित जुर्माने का नोटिस जारी किया गया था। मौजूद जानकारी के अनुसार, सूरज राज सिंह के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां मामले की जांच और सुनवाई कर रही है।
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
Russia-India Oil Deal: भारत-रूस की यारी के सामने अमेरिकी बैन फेल! 3 मिलियन बैरल का नया रिकॉर्ड
जब दुनिया में संकट गहराया, तब एक पुरानी दोस्ती भारत की सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी। पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि भारत का एनर्जी सेक्टर संकट में आ जाएगा। लेकिन आज जो खबर वाशिंगटन से लेकर यूरोप तक हलचल मचा रही है, उसने सारे समीकरण बदल दिए हैं। भारत और रूस मिलकर तेल आयात का एक ऐसा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। आख़िर क्या है वो रिपोर्ट जिसने ग्लोबल ऑयल मार्केट में खलबली मचा दी है? ग्लोबल कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केप्लर का कहना है कि भारत का रूस से कच्चे तेल यानी कि क्रूड ऑयल का आयात लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। लेकिन ये खबर सिर्फ तेल की नहीं है। यह खबर तब आ रही है जब अमेरिका में नए टेरिफ बिल को लेकर चर्चाएं तेज है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अमेरिका के संभावित दबाव के आगे झुकेगा? या फिर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए रूस के साथ इस रिकॉर्ड तेल आयात को अंजाम देगा। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदे दरअसल इस पूरी खबर के पीछे एक बड़ा कारण है लाल सागर यानी रेड सी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में बढ़ता हुआ तनाव। कैप्टनर की रिपोर्ट बताती है कि अगर रेड सी में सप्लाई बाधित होती है तो भारतीय रिफाइनरियों के पास रूस ही सबसे भरोसेमंद विकल्प बचेगा। भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी तेल खरीद को काफी ज्यादा डायवर्सिफाई कर लिया है। चाहे वो वेनेजुएला हो, अफ्रीका हो या अटलांटिक बेसिन। लेकिन जब बात बफर की आती है तो रूस का कोई भी मुकाबला नहीं है। सऊदी अरब का ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन भारत को कुछ राहत तो देता है लेकिन वो रूस की विशाल सप्लाई की बराबरी नहीं कर सकता। रूस भारत के लिए एक हैच की तरह काम करता है। यानी दुनिया में कहीं भी सप्लाई रुके। रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए खड़ा है। केप्लर की लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया का मानना है कि अनुकूल परिस्थितियों में रूस से शिपमेंट 30 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ऊपर जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। रूस के ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष के कारण हमले हो रहे हैं। जुलाई में रूस का निर्यात पहले की तुलना में कम भी हुआ है। इसके बावजूद भारत की रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति को इतना लचीला बनाया है कि वह रूस से अधिक तेल खरीद कर भी शॉर्ट टर्म गैप को भर सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध? वैसे यहां एक टेक्निकल बात समझना बेहद जरूरी हो जाता है। रूस के इन ओरस्कियस एक्सपोर्ट टर्मिनल की भी भूमिका बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ रूस का ओरसल तेल ही नहीं बल्कि कजाकिस्तान का तेल भी दुनिया तक पहुंचाता है। अगर ब्लैक सी में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न होती है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत इसी रिस्क को मैनेज करने के लिए रूस के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है। तो क्या भारत अमेरिका के टेरिफ बिल से पहले यह बड़ा कदम उठाएगा? जानकारों का मानना है कि भारत ने हमेशा ही इंडिया फर्स्ट की नीति अपनाई है। रूस से सस्ता तेल ना केवल हमारी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाता है बल्कि हमारी रिफाइनरी को भी दुनिया के कंपटीशन में बनाए रखता है। खैर 30 लाख बैरल ऑयल प्रतिदिन का यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है बल्कि यह भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण है। रूस के साथ यह दोस्ती भविष्य में भारत को एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
Iran vs US: कुवैत में अमेरिकी Airbase पर बड़ा Drone Attack, ईरान ने लिया Qeshm Island का बदला
ईरानी सेना ने कहा है कि उसने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के 27वें चरण के दौरान कुवैत में अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर मौजूद अमेरिका के अहम ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने सेना के जनसंपर्क विभाग के बयान का हवाला देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया था; इसमें खास तौर पर केशम द्वीप पर एक रिहायशी घर पर हुए हमले का ज़िक्र किया गया। सरकारी ब्रॉडकास्टर ने बताया कि इन हमलों में कुवैती बेस पर मौजूद फाइटर जेट के ठिकानों, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और उपकरणों के गोदामों को निशाना बनाया गया। इस बेस को अमेरिकी एयर सपोर्ट, निगरानी और ऑपरेशन्स के लिए एक अहम केंद्र माना जाता है। इसे भी पढ़ें: Pakistan ने ट्रंप से कर दी गद्दारी, ईरान कैसे पहुंचा हथियारों का जखीरा? IRIB ने आगे बताया कि ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लगातार बड़े हमलों की वजह से दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के लिए ड्रोन और मिसाइलों को रोकना मुश्किल और महंगा हो गया है। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया है कि हताहतों और हुए नुकसान की खबरों को दबाने के लिए कड़ी सेंसरशिप लागू की जा रही है। इससे पहले, ईरान के सरकारी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत में अमेरिका द्वारा संचालित अली अल सलेम एयरबेस पर दो ड्रोन हैंगर और मिलिट्री एयरक्राफ्ट व हेलीकॉप्टर के लिए बनाए गए फ्यूल स्टोरेज सेंटर को नष्ट कर दिया है। इसे भी पढ़ें: Mahan Air की एजेंट भारत की Skies Travels समेत कई कंपनियों पर US Sanctions शुक्रवार को कुवैत के नागरिकों को संबोधित करते हुए, IRGC के बयान में कहा गया कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि इस इलाके से अमेरिका की कब्जा करने वाली और लूटने वाली सेनाओं को पूरी तरह से हटा नहीं दिया जाता। कुवैत में तनाव बढ़ने की यह घटना तेहरान द्वारा गुरुवार को जॉर्डन के अल-अज़राक एयरबेस पर एक अलग जवाबी मिसाइल हमले के दावों के बाद हुई है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरान के इन दावों को खारिज कर दिया है कि हमले में अमेरिकी F-35 फाइटर जेट नष्ट हो गए थे। सेना का कहना है कि किसी भी अमेरिकी विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उसकी सेनाएं पूरे इलाके में ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के दावे का जवाब देते हुए, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने X पर पोस्ट किया, ईरान के हालिया हमलों की कोशिशों में कोई भी अमेरिकी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ।
बाल यौन शोषण सामग्री अपलोड की, अमेरिका की एजेंसी ने किया अलर्ट; पंजाब पुलिस ने दर्ज की FIR
अमेरिका स्थित एनसीएमईसी के अलर्ट के बाद पंजाब साइबर क्राइम पुलिस ने बाल यौन शोषण सामग्री अपलोड करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली रिपोर्टों के आधार पर दो जीमेल खातों के अज्ञात संचालकों के खिलाफ जांच शुरू की है।
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिकी सीनेट में ईरान पर सैन्य कार्रवाई सीमित करने का प्रस्ताव खारिज, वीडियो में जाने ट्रम्प को राहत; संसद की मंजूरी वाला नियम फिलहाल टला
अमेरिका ने बैन किए तमाम चीनी गैजेट्स, भारत में भी होंगे बैन?
अमेरिकी ट्रंप सरकार धीरे धीरे करके चीन के कई टेक प्रोडक्ट्स बैन कर दिए हैं. ह्यूमनॉयड रोबोट, वैक्यूम क्लीनर्स और ड्रोन से लेकर कई तरह के टेक प्रोडक्ट्स को अमेरिका बैन कर रहा है. लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है? वाकई नेशनल सिक्योरिटी की बात है या चीनी इनोवेशन से अमेरिका खौफ में है?
अमेरिका में नौकरी के लिए विदेशी छात्रों को देंगे 1 लाख डॉलर शुल्क, भारतीय छात्रों पर पड़ेगा बड़ा असर
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके तहत वहां की यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्रों को नौकरी करने के लिए 1 लाख डॉलर (करीब 96 लाख रुपये) तक का शुल्क देना पड़ सकता है।
ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन के अल अजराक एयर बेस पर अमेरिका के जवाबी हमले का दावा किया
अमेरिकी फेड के फैसले का असर, भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला
मुंबई, भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को गिरावट के साथ हुई। सुबह 9:15 पर सेंसेक्स 151 अंक या 0.20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,502 और निफ्टी 37 अंक या 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,213 पर खुला।
अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी मार्वेल टेक्नोलॉजी ने बुधवार को घोषणा की कि वह अगले तीन वर्षों में भारत में 25 करोड़ डॉलर (250 मिलियन डॉलर) का निवेश करेगी, जिसका उद्देश्य कंपनी की रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) क्षमता, इंजीनियरिंग प्रतिभा और बुनियादी ढांचे का विस्तार करना है
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 98 डॉलर पार:कतर से LNG सप्लाई भी अटकने की आशंका; महंगाई बढ़ सकती है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड आज 23 जुलाई को 4% बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह पिछले 6 हफ्तों में सबसे ज्यादा है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। कच्चे तेल के महंगे होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फ्यूल मार्जिन पर दबाव बढ रहा है। अगर लंबे समय तक क्रूड महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला, हूतियों ने नाकेबंदी का ऐलान किया तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का बिगड़ता माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ अब यह विवाद फारसी खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है। यह हमला हुती ग्रुप की ओर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी की घोषणा करने के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। तेल कंपनियों के शेयर 2.5% तक टूटे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है… भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। अक्टूबर तक LNG सप्लाई अटकने के आसार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर एनर्जी मिड-अक्टूबर तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के शिपमेंट पर 'फोर्स मैज्योर' को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कतर ने जून में ही एशिया और यूरोप के कुछ ग्राहकों को सूचित किया था कि अगस्त और सितंबर के कार्गो रद्द रहेंगे। अगर यह पाबंदी अक्टूबर तक खिंचती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले गैस का ग्लोबल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि यूरोप और एशियाई देश सीमित LNG सप्लाई के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे। सेंसेक्स 364 और निफ्टी 127 अंक गिरी कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया है। 23 जुलाई को सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 76,391 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 127 अंक की गिरावट रही, ये 23,870 पर बंद हुआ। रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। आगे क्या? पश्चिम एशिया में अगर यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग, ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सोना ₹274 बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंचा: 4 दिन में ₹4,398 महंगा हो चुका, चांदी आज ₹360 चढ़कर ₹2.26 लाख पर पहुंची सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 23 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 360 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 274 रुपए चढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 4 दिन में सोना 4,398 रुपए और 10,346 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की मांग तेज
यह केवल विचारधारा की बात भी नहीं है। यह इस बारे में नहीं है कि कोई प्रशासन की व्यापक नीतियों का समर्थन करता है या विरोध।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
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अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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