मध्य अमेरिका में भयावह सूखा संकट, तीन देशों में इमरजेंसी घोषित; क्या है कारण
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सामान्य मौसमी कमी नहीं, बल्कि बेहद गंभीर मौसम संकट है। अल साल्वाडोर में मई के दौरान सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश हुई। अगस्त में लगातार 19 दिनों तक सूखा रहा।
भारतीय-अमेरिकी सैनिकों का 'युद्धाभ्यास' औली-महाजन में शुरू
भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 औली और महाजन में शुरू हो गया. दोनों देशों के 600-600 सैनिक भाग ले रहे हैं. यह पहाड़ी इलाकों में संयुक्त युद्ध क्षमता बढ़ाने पर है.
अमेरिका में ग्रीन कार्ड पर संग्राम: ट्रंप के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंचे 22 राज्य; छिड़ी कानूनी जंग
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और 22 अमेरिकी राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई ग्रीन कार्ड नीति के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह नीति 18 सितंबर से लागू होनी है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के फिलाडेल्फिया और पेंसिल्वेनिया उपनगरीय क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा प्रणाली के भीतर आधुनिक डिजिटल गैजेट्स और अत्यधिक स्क्रीन टाइम को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल रहा है। 'द फिलाडेल्फिया इन्क्वायरर' की विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख पब्लिक स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स ने कक्षाओं में छात्रों को बांटे जाने वाले व्यक्तिगत डिजिटल उपकरणों (1:1 डिवाइसेज) के अनियंत्रित वितरण पर ब्रेक लगाना शुरू कर दिया है। कोरोना काल के बाद से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में डिजिटल स्क्रीन पर बढ़ी निर्भरता के कारण बच्चों के संज्ञानात्मक विकास, सामाजिक मेलजोल, आंखों की सेहत और एकाग्रता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए शैक्षणिक प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए हैं। कई प्रतिष्ठित स्कूल बोर्ड्स ने किंडरगार्टन और प्राथमिक स्तर के नन्हे बच्चों को टैबलेट और लैपटॉप सौंपने की पुरानी योजनाओं को या तो पूरी तरह रद्द कर दिया है या फिर स्कूल अवधि के बाद इन उपकरणों को घर ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।#1 विभिन्न स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स के नए नियम: किंडरगार्टन से आईपैड गायब, क्रोमबुक पर शेयर्ड मॉडल लागूफिलाडेल्फिया क्षेत्र के विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों ने इस डिजिटल डिटॉक्स नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया है ताकि बच्चों का समय स्क्रीन पर नहीं बल्कि पारंपरिक किताबों और खेलकूद में बीते। कोलोनियल स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने नया नियम लागू करते हुए एलिमेंट्री स्तर के छात्रों के रात में लैपटॉप घर ले जाने पर रोक लगा दी है, जिससे बच्चे घर पर स्क्रीन के बजाय पारिवारिक संवाद और रचनात्मक गतिविधियों पर ध्यान दे सकें। वहीं ट्रेडीफ्रिन/ईस्टटाउन स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए किंडरगार्टन में दाखिला लेने वाले छोटे बच्चों को व्यक्तिगत आईपैड जारी करने पर पूर्ण रोक लगा दी है और एलिमेंट्री कक्षाओं के छात्रों के लिए भी छुट्टी के बाद गैजेट घर ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। मेथाक्टन स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने किंडरगार्टन और पहली कक्षा के छात्रों के लिए 'वन-टू-वन डिवाइस' व्यवस्था को समाप्त कर 'शेयर्ड डिवाइस मॉडल' लागू किया है, जहां क्रोमबुक केवल विशिष्ट समूह गतिविधियों के लिए कक्षा में ही उपलब्ध रहेंगे। इसी क्रम में फीनिक्सविले एरिया स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने किंडरगार्टन से लेकर तीसरी कक्षा तक के बच्चों के लिए व्यक्तिगत स्क्रीन बांटने का कार्यक्रम आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया है, जबकि वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर डिस्ट्रिक्ट में किंडरगार्टन से दूसरी कक्षा के लिए ऑनलाइन असेसमेंट सीमित कर दिए गए हैं और पांचवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों के लिए स्कूल नेटवर्क पर यूट्यूब ब्राउजिंग और सर्चिंग को पूर्ण रूप से ब्लॉक कर दिया गया है।#1 कक्षाओं में तकनीकी भटकाव पर अभिभावकों की दोहरी राय: राहत के साथ बड़ी कक्षाओं को लेकर चिंतास्कूल प्रशासनों द्वारा उठाए गए इन ऐतिहासिक कदमों का उन जागरूक अभिभावकों और बाल मनोवैज्ञानिकों ने खुलकर स्वागत किया है जो लंबे समय से क्लासरूम में अत्यधिक तकनीकी दखल का विरोध कर रहे थे। अभिभावकों का मानना है कि छोटे बच्चों के हाथों से स्क्रीन छिनने से शिक्षक एक बार फिर पारंपरिक ब्लैकबोर्ड, किताबों और प्रत्यक्ष संवाद के जरिए प्रभावी ढंग से पढ़ा सकेंगे, जिससे बच्चों का ध्यान भटकने की समस्या काफी हद तक नियंत्रित होगी। हालांकि, अभिभावकों का एक दूसरा वर्ग इस बात को लेकर चिंतित है कि प्राथमिक कक्षाओं में लगाए गए ये प्रतिबंध शायद सीमित प्रभाव ही छोड़ पाएंगे, क्योंकि मिडिल और हाई स्कूल की कक्षाओं में पहुंचते ही पाठ्यक्रम का बड़ा हिस्सा पूरी तरह डिजिटल असाइनमेंट्स पर निर्भर हो जाता है। यही कारण है कि 'स्क्रीन टाइम घटाओ' अभियान से जुड़े पैरेंट्स अब स्कूल प्रबंधन से यह मांग कर रहे हैं कि वे केवल छोटी कक्षाओं तक सीमित न रहें, बल्कि छठी से बारहवीं कक्षा तक के तकनीकी पाठ्यक्रम की भी समीक्षा करें ताकि किशोर छात्र साइबर लत और मानसिक तनाव से बच सकें।#1 नागरिक संगठनों की मुहिम और नई सलाहकार समितियों की भूमिका: पीए अनप्लग्ड का प्रभावशैक्षणिक संस्थानों में डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने के लिए पेंसिल्वेनिया में एक बड़ा नागरिक आंदोलन खड़ा हो चुका है, जिसका नेतृत्व 'पीए अनप्लग्ड' (PA Unplugged) नामक गैर-लाभकारी संगठन कर रहा है। लगभग 5,000 सक्रिय अभिभावकों और शिक्षकों के समर्थन वाले इस संगठन से जुड़े वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर के अभिभावक एलेक्स बर्ड बेकर का कहना है कि प्राथमिक स्कूलों में कंप्यूटर का उपयोग घटाना नीतिगत स्तर पर अपेक्षाकृत सरल कदम था, लेकिन असली चुनौती मिडिल और हाई स्कूल स्तर पर सामने आएगी, जहां शिक्षा का बुनियादी ढांचा ही सॉफ्टवेयर और डिजिटल पोर्टल पर केंद्रित हो चुका है। लगभग 3,700 विद्यार्थियों वाले वॉलिंगफोर्ड-स्वार्थमोर स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने भविष्य की तकनीकी नीतियों को दिशा देने के लिए एक विशेष 'प्रौद्योगिकी सलाहकार परिषद' का गठन किया है और इसमें शामिल होने के लिए अभिभावकों से आवेदन मांगे हैं। यह परिषद मिडिल और हाई स्कूल (कक्षा 6 से 12) में स्क्रीन उपयोग की व्यावहारिक सीमाओं की समीक्षा करेगी, जबकि लोअर मेरियन स्कूल डिस्ट्रिक्ट में भी अभिभावकों का समूह ऐसी स्वतंत्र तकनीकी निगरानी समितियों के गठन पर जोर दे रहा है ताकि बच्चों के समग्र मानसिक और शारीरिक विकास के बीच एक संतुलित शैक्षणिक वातावरण बहाल किया जा सके।
पहाड़ों से रेगिस्तान तक भारत-अमेरिका की सेनाओं का ‘युद्ध अभ्यास’
भारत और अमेरिका की सेनाएं एक बार फिर साथ मिलकर युद्ध कौशल और आधुनिक तकनीक की ताकत परख रही हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का 22वां संस्करण मंगलवार को शुरू हुआ। इस बार इसकी खास बात यह है कि अभ्यास उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाके औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक एक साथ चल रहा है।
चीन से ईरान को अमेरिकी बेस की सैटेलाइट तस्वीरें मिलने और उसके बाद चीनी टोही सैटेलाइट के टूटने की खबर ने इस कहानी को और रहस्यमयी बना दिया है। लेकिन क्या दोनों घटनाओं का कोई कनेक्शन है? अभी इसका कोई सबूत नहीं है।अंतरिक्ष को लंबे समय तक ऐसी जगह माना जाता रहा जहां से धरती […] यह लेख अंतरिक्ष में अब शुरू हो सकती है असली जंग? अमेरिका ने पहली बार माना- कक्षा में तैनात हैं ‘स्पेस हथियार’ सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
अमेरिकी अभिनेत्री के विज्ञापन पर विवाद, महिला खिलाड़ी बोलीं- 'खेलों में महिलाएं ऐसी दिखती हैं'
ब्रिटिश स्प्रिंटर एमी हंट उन कई महिला एथलीटों में शामिल हैं जो अभिनेत्री सिडनी स्वीनी के विवादास्पद सट्टेबाज़ी विज्ञापन की आलोचना कर रही हैं. इस विज्ञापन में ऐसा क्या है?
आर्थिक संकट की कगार पर अमेरिका का कैनेडी सेंटर, देखें US टॉप-10
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली आगामी बैठक में हर बड़े मुद्दे पर चर्चा होगी. ट्रंप ने खासकर अमेरिका में चीनी कारों की एंट्री और बोइंग से जुड़े समझौते का जिक्र किया. उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिका में चीनी कारों की एंट्री पर कोई फैसला नहीं हुआ है. यूएस टॉप 10 में देखें ऐसी ही टॉप 10 खबरें.
अमेरिका ने पहली बार अंतरिक्ष में तैनात किए हथियार
अमेरिकी वायु सेना के सचिव का कहना है कि दुश्मन की कार्रवाई से देश की रक्षा के लिए ये हथियार ज़रूरी हैं.
ईरान : हवाई क्षेत्र में मार गिराया अमेरिका का एमक्यू-1 ड्रोन को
तेहरान, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट के हवाई क्षेत्र में मंगलवार को एक और एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।
तेहरान, 15 सितंबर . ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट के हवाई क्षेत्र में Tuesday को एक और एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया. इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन को होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से के ... Read more
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के हवाई क्षेत्र में मार गिराया अमेरिका का MQ-1 ड्रोन, IRGC का दावा
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट के हवाई क्षेत्र में मंगलवार को एक और एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।
'स्पेस में हैं हमारे हथियार': अमेरिका के इस एक बयान से बढ़ी ग्लोबल वॉर की आहट, जानिए क्यों सीक्रेट रखा वेपन
होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा का खर्च दूसरे देशों से वसूलेंगे ट्रम्प, वीडियो में बोले- जिन्होंने मदद नहीं की उन्हें अमेरिका को देना होगा पैसा
रूस से दोस्ती की कीमत? भारत समेत 10 देशों पर 100% टैरिफ की तैयारी में अमेरिका
रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 100 परसेंट टैरिफ लगाने वाला विधेयक अमेरिकी संसद के एक सदन से पास हो चुका है और दूसरे में जाने वाला है. खास बात है कि इसमें देशों का नाम नहीं लिया गया है. अब अमेरिकी सांसद ने 10 देशों का नाम जोड़ने की मांग की है.
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्ट्रोरल असिस्टेंस की रिपोर्ट में दावा- अमेरिका में लोकतंत्र से जुड़े कई संकेतक 50 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. जो काम ट्रंप कर रहे हैं, उससे दुनिया के दूसरे कट्टर शासकों को अपने कदमों को सही ठहराने का मौका मिल है.
UPI लेनदेन पर शुल्क की तैयारी का आरोप, Rahul Gandhi बोले- अमेरिकी दबाव में झुकी सरकार
कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है और ‘‘कॉम्प्रोमाइज्ड’’ (समझौता कर चुके) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्यापार समझौते की तरह इस मामले में भी अमेरिका के सामने समर्पण कर दिया है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह दावा भी किया कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेनदेन की संख्या भले ही करीब पांच प्रतिशत हो, लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है तथा उसका बोझ अंततः कीमतों में बढ़ोतरी के जरिये ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा। सरकार ने बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क न लगाने का निर्देश दिया है। सरकार ने हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं। अभी तक किसी भी राशि के यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने इसको लेकर ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ सरकार का कहना है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। गांधी ने कहा, ‘‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की तरह ही, कॉम्प्रोमाइज्ड (समझौता कर चुके) प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने समर्पण कर रहे हैं।’’उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिए जाने के बावजूद व्यापारी पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी यूपीआई शुल्क को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि सरकार ने ‘‘यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं’’ की व्यवस्था को बदलकर दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खरगे ने दावा किया कि पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की जा सकती है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या यह वास्तव में प्रस्तावित है? कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि व्यापारियों पर एमडीआर (व्यापार रियायत दर) का अतिरिक्त बोझ डाला जाता है तो वह अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल होकर आम उपभोक्ता से ही वसूला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय सरकार उसकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी कर रही है। खरगे ने कहा, ‘‘10 वर्ष पहले नोटबंदी को डिजिटल भुगतान और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उपाय के तौर पर पेश किया गया था। ऐसे में अब यूपीआई पर शुल्क लगाने की संभावित व्यवस्था सरकार की उस नीति पर सवाल खड़े करती है।’’कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में सरकार से सवाल किया कि क्या यह कदम अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र का रास्ता खोलने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। रमेश ने आरोप लगाया कि ‘‘साफ तौर पर हम सभी से यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूलने की जमीन तैयार की जा रही है।
आखिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर जारी अमेरिकी-चीनी रस्साकसी के बीच क्या करे भारत? समझिए विस्तार से
वैश्विक पटल पर अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा देखते ही बनती है। इस बार मुद्दा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई बनी है, वो भी ब्रिक्स 2026 बैठक के तुरंत बाद जिसका अपना महत्व है। चूंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों को एआई ओपन सोर्स उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया स्वरूप कहा कि एआई की दौड़ में अमेरिका चीन से आगे है? तो सवाल उठना लाज़मी है कि कितना आगे? और क्या चीन अगले कुछ वर्षों में इस दूरी को पाट सकता है? सबसे बड़ा सवाल यह कि इस वैश्विक प्रतिद्वंद्विता में भारत को क्या करना चाहिए? इस सभी बिंदुओं को हम आगे एक एक करके स्पष्ट करेंगे। देखा जाए तो एआई सेक्टर में न केवल अमेरिका और चीन के बीच, बल्कि यूरोप और अन्य देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में भारत के सामने चुनौती केवल एआई मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि चिप, कंप्यूटिंग, डेटा, प्रतिभा, पूंजी और बाजार—पूरी एआई वैल्यू चैन में मजबूत होने की है। इसे भी पढ़ें: BRICS में Xi Jinping ने रखा 5-सूत्रीय सहयोग प्रस्ताव, Global South की मजबूती पर दिया जोर जहां तक भारत की “AI आत्मनिर्भरता” का सवाल है तो उसे विदेशी एआई यानी अमेरिका, चीन, यूरोप के एआई पटल को बंद करना नहीं चाहिए, बल्कि इन्हें इतना सक्षम बनना चाहिए कि भारत अपनी जरूरतों के लिए एआई बना सके और दुनिया को भी बेच सके। आपको पता होगा कि अमेरिका के नेतृत्व वाले एआई पैक्स सिलिका संगठन में 34 देश शामिल हैं, जिसमें भारत भी एक है। वहीं, चीनी नेतृत्व वाले वर्ल्ड एआई कोआपरेशन ऑर्गेनाइजेशन में 29 देश शामिल हैं। फिर भी ब्रिक्स देशों को चीन ने जो आकर्षक ऑफर दिया है उससे निकट भविष्य में पूरा खेल बदल सकता है। ऐसा इसलिए कि अमेरिकी एआई कंपनियों ने एआई की प्रगति को 'स्लोडाउन' करने का आह्वान किया है। चूंकि अब अमेरिका के भीतर ही एआई की प्रगति को लेकर विरोधाभास सामने आ रहा है और ट्रंप प्रशासन की तरफ से अमेरिकी कंपनियों को एआई प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में अमेरिकी हितों को प्राथमिकता की बात हो रही है, इसलिए पैक्स सिलिका संगठन के अन्य 33 देशों का दिग्भ्रमित होना स्वाभाविक है। ऐसे में यदि चीन, भारत और यूरोप आपसी समझदारी विकसित करके अमेरिका को मात दे दें तो किसी के लिए भी हैरत की बात नहीं होगी। क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स के मंच से कहा है कि चीन ब्रिक्स के लिए ओपन सोर्स एआई समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा, बड़े भाषा मॉडल के विकास व उपयोग में सहयोग देगा, विशेष प्रशिक्षण आयोजित करेगा, और खुला एआई पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करेगा। खास बात यह कि यह प्रस्ताव उस पृष्ठभूमि में आया है जब चीनी कंपनियां ओपन सोर्स मॉडल पर जोर दे रही हैं, जबकि अमेरिकी दिग्गज कंपनियां अधिक बंद, फ्रंटियर मॉडल पर काम कर रहे हैं। चूंकि भारत इस प्रतिद्वंद्विता को पहचान रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स बैठक में चेतावनी देते हुए साफ कहा था कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स का हथियार बनाना साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इससे भारत की नीति स्पष्ट है। देखा जाए तो दुनिया में एआई आधारित प्रौद्योगिकी को लेकर जो तगड़ी लामबंदी चल रही है, उसमें अमेरिका ने बेहद उच्च गुणवत्ता वाले चिप्स, सेमीकंडक्टर उपकरण, क्लाउड एक्सेस और कुछ फ्रंटियर मॉडल पर निर्यात नियंत्रण लागू करते हुए इन्हें सिर्फ 'भरोसेमंद साझेदारों' के साथ साझा करने की व्यवस्था करने का ऐलान किया है। कहने का तात्पर्य यह कि शेष देशों में एआई के मामले में अमेरिका या चीन में से किसी एक को ही चुनने का दबाव बनाया है और दोनों को चुनने का रास्ता अमेरिका ने लगभग बंद कर दिया है। चूंकि भारत भी पैक्स सिलिका का सदस्य है और ट्रंप ने खाड़ी देशों को भी चिप्स व निवेश के सौदे से जोड़ा है। उन्होंने अपने एआई स्टैक को निर्यात कूटनीति का हिस्सा बनाया है। इसलिए अमेरिका को रणनीतिक जवाब देते हुए चीन ने रेअर अर्थ मिनरल्स के निर्यात को नियंत्रित कर दुनिया को समझा दिया कि वह प्रौद्योगिकी की दुनिया में कितनी अफरातफरी मचा सकता है। आज चीनी गुट में रूस, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और पाकिस्तान समेत 29 देश शामिल हैं। आपको याद दिला दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि जो एआई जीतेगा, वही जीतेगा इस क्षेत्र में जारी वैश्विक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है। हालांकि, एआई अब एकतरफा अमेरिकी वर्चस्व की कहानी नहीं रही, बल्कि चीन जैसे दूसरे ध्रुव से मिल रही कड़ी तकनीकी प्रतिस्पर्धा की मिशाल बन चुकी है। यदि सितंबर 2026 की स्थिति को देखें, तो तकनीकी रूप से अमेरिका का पलड़ा अभी भी चीन से भारी है, लेकिन यह अंतर पहले की तुलना में काफी कम हुआ है और अगले कुछ वर्षों में चीन इस दूरी को पाटकर आगे भी निकल सकता है, बशर्ते कि भारत जैसे मजबूत पड़ोसी का साथ उसे मिल जाए। तकनीकी अध्ययन भी जाहिर करते हैं कि एआई अब एकतरफा अमेरिकी वर्चस्व की कहानी नहीं, बल्कि दो ध्रुवों की कड़ी तकनीकी प्रतिस्पर्धा बन चुकी है। इसलिए आइए जानते हैं कि किस क्षेत्र में कौन (अमेरिका या चीन) आगे? खासकर क्षेत्र, उसमें मिली बढ़त और अद्यतन स्थिति के नजरिए से:- एक, फ्रंटियर एआई मॉडल में अमेरिका बढ़त में है। उसका मॉडल अभी समग्र प्रदर्शन में आगे है। दो, एआई चिप्स/जीपीयू में अमेरिका को बढ़त है। Nvidia का बड़ा लाभ उसे मिला है। तीन, एआई कंप्यूट/आंकड़ा केंद्र में अमेरिका को बढ़त है। विशाल पूंजी, जीपीयू और हाइपरस्केल इंफ्रास्ट्रक्चर में वह आगे है। चार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध पारिस्थितिकी तंत्र में अमेरिका को बढ़त है। वह विश्वविद्यालय, बड़ी तकनीक और उद्यम पूंजी का संयोजन करने में आगे बढ़ा है। पांच, वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र में अमेरिका को बढ़त प्राप्त है। उसे सहयोगी देशों, कंपनियों और क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ मिला है। छह, सेमीकंडक्टर विनिर्माण या अर्धचालक निर्माण में चीन को कुछ क्षेत्रों में बढ़त प्राप्त है। उसने बड़े पैमाने का विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत किया है। सातवां, ओपन सोर्स/कम लागत वाले मॉडल में चीन मजबूत चुनौती बनकर उभरा है। उसके डीपसीक जैसे मॉडल ने लागत-प्रतिस्पर्धा बदली है। आठवां, एआई मॉडल की स्थापना/औद्योगिक उपयोग में चीन की बड़ी ताकत है। उसके पास विशाल विनिर्माण क्षमता और घरेलू बाजार है। यानी कि आठ क्षेत्रों में पांच में अमेरिका और तीन में चीन को बढ़त प्राप्त है। यदि आप ब्रुकिंग्स के अप्रैल 2026 के आकलन पर गौर करेंगे तो उसके अनुसार चीन के शीर्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल अभी अमेरिकी फ्रंटियर मॉडल से कुछ महीने या अधिक पीछे हैं और अमेरिकी मॉडल तार्किक क्षमता, गणित, कुटलेखन (coding) तथा लंबे समय वाले स्वायत्त कार्य या दीर्घकालिक एजेंट-आधारित कार्य में समग्र बढ़त रखते हैं। लेकिन चीन को भी कम आंकना बड़ी गलती होगी। चीन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह AI को पूरे औद्योगिक तंत्र से जोड़ रहा है—मोबाइल, ईवी, रोबोटिक्स, विनिर्माण, निगरानी या चौकसी, समान का प्रबंधन और सरकारी सेवाओं तक काफी मजबूत है। और चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अपने एआई चिप पारिस्थितिकी तंत्र को तेजी से विकसित किया है। हालांकि अभी अमेरिकी Huawei जैसे चीनी विकल्प या अमेरिकी Nvidia की बराबरी के पैमाने पर चीन नहीं हैं और अमेरिकी HBM जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों की कमी चीन के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। एक महत्वपूर्ण संकेत यह भी है कि अमेरिका और चीन मिलकर वैश्विक कंप्यूट, निवेश और एआई मॉडल के लगभग 90 प्रतिशत पर नियंत्रण रखते हैं। सवाल है कि असली अमेरिकी बढ़त कहाँ है? तो जवाब होगा कि अमेरिका के पास एक ऐसा एआई स्टैक (AI stack) है जिसे चीन के लिए पूरी तरह दोहराना कठिन है। उदाहरण स्वरूप Nvidia/एआई चिप्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन, क्लाउड, हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स, OpenAI/ Anthropic/Google आदि उद्यम पूंजी और ग्लोबल डेवलेपर्स के अमेरिकी विकल्प चीन के पास उस पैमाने पर उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि अमेरिका केवल अच्छे AI मॉडल नहीं बना रहा, बल्कि AI की पूरी वैश्विक आधारभूत संरचनात्मक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव रखता है। यह बात दीगर है कि आज अमेरिका स्पष्ट लेकिन घटती हुई बढ़त पर है और अगले 3–5 साल के दरम्यान ही अमेरिका व चीन का मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है। जबकि दीर्घकाल में चीन की विशाल विनिर्माण क्षमता और राज्य-समर्थित निवेश के कारण अमेरिकी बढ़त को स्थायी मानना सुरक्षित नहीं है। इसलिए इसे “अमेरिका बनाम चीन” से ज्यादा अमेरिकी नवोन्मेष, चिप्स और पूंजी बनाम चीनी स्केल, विनिर्माण और राज्य लामबंदी की प्रतिस्पर्धा कहना अधिक सही होगा। जहां तक भारत की बात है तो उसको किसी एक AI ब्लॉक पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय अमेरिका, चीन, यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य साझेदारों के साथ तकनीकी साझेदारी बढ़ानी चाहिए, साथ ही अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए। वहीं, AI को रोजगार-विरोधी नहीं, उत्पादकता क्रांति की मिशाल के तौर पर विकसित करना चाहिए। यह ठीक है कि AI से कुछ नौकरियाँ खत्म होंगी, लेकिन नई नौकरियाँ भी बनेंगी। इसलिए स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय और कार्यबल समूह तक एआई साक्षरता और पुनः कौशल विकास या नया कौशल सीखना को बड़े स्तर पर लागू करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह किन भारत को केवल “AI का उपभोक्ता” बनने के बजाय “AI का निर्माता और निर्यातक” बनना होगा। इसे एक रणनीतिक सूत्र में ऐसे समझिए: भारत चिप, कंप्यूट, डेटा, प्रतिभा, स्वदेशी मॉडल, स्टार्टअप, सुरक्षित रेगुलेशन और वैश्विक सहयोग को बढ़ाकर AI महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। ऐसा इसलिए कि भारत की विशेष ताकत उसके पास विशाल डिजिटल बाजार, यूपीआई जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, युवा तकनीकी प्रतिभा और दुनिया का बड़ा बहुभाषी उपभोक्ता आधार है। यदि इन ताकतों को कंप्यूट और गहन तकनीकी अनुसंधान के साथ जोड़ा जाए, तो भारत अमेरिका-चीन की सीधी नकल किए बिना अपना अलग AI मॉडल खड़ा कर सकता है। इस प्रकार भारत तीसरा AI शक्ति-केंद्र बन सकता है बशर्ते कि वह केवल AI का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि AI की पूरी वैल्यू चैन का महत्वपूर्ण निर्माता बन जाए। इसके लिए भारत को अमेरिका और चीन से अलग रास्ता अपनाना होगा, क्योंकि भारत की ताकत कम लागत, विशाल बहुभाषी बाजार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और इंजीनियरिंग प्रतिभा है। जहां तक भारत की सबसे बड़ी संभावित ताकत की बात है तो अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि।अमेरिका के पास नवोन्मेष और पूंजी है, चीन के पास स्केल और विनिर्माण है, जानकी भारत अपनी प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बहुभाषी आंकड़ा, न्यूनतम लागत वाला नवोन्मेष और बृहत बाजार को जोड़कर अपना मॉडल बना सकता है। इसलिए भारत, अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक संतुलन साधते हुए खुद को किसी एक कैंप का तकनीकी उपग्रह नहीं बनना चाहिए, बल्कि अमेरिका से एडवांस चिप्स/अनुसंधान, जापान-कॉरिया से सेमी कंडक्टर सहयोग, यूरोप से जिम्मेदार एआई मानक और अन्य देशों से डेटासेट्स/मार्केट्स के मद्देनजर सबके साथ साझेदारी करनी चाहिए। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
US Space Force Weapons in Orbit: अंतरिक्ष में युद्ध कीआशंका लगातार बढ़ती जा रही हैं।यह वजह है कि अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक खोज और संचार का क्षेत्र नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। इसी बीच, अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसके हथियार अंतरिक्ष की कक्षा (Orbit) में तैनात हैं। अमेरिकी स्पेस फोर्स की इस पुष्टि को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका ने इससे पहले कक्षा में तैनात अपनी सैन्य क्षमताओं के बारे में इतनी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी थी।अमेरिकी स्पेस फोर्स के एक प्रवक्ता ने बताया कि ये सिस्टम अंतरिक्ष में अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ होने वाली संभावित दुश्मन गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए बनाए गए हैं। हालांकि, प्रवक्ता ने इन हथियारों की कैपसिटी, संख्या या उनकी तैनाती से जुड़ीडिटेल्स जानकारी देने से इनकार कर दिया।अमेरिकी स्पेस फोर्स ने क्या कहा?अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका के पास 'ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स' मौजूद हैं, जो अमेरिकी संयुक्त सैन्य बलों (Joint Force) को किसी दुश्मन की कार्रवाई से बचाने में सक्षम हैं। स्पेस फोर्स के मुताबिक, स्पेस कंट्रोल का मतलब अंतरिक्ष क्षेत्र में विरोधी की क्षमताओं को प्रभावित करने के लिए ऐसे अभियानों को संचालित करना है। इनके जरिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में नियंत्रण और रणनीतिक बढ़त हासिल की जा सके।इसके लिए काइनेटिक (Kinetic) और नॉन-काइनेटिक (Non-Kinetic) दोनों तरह के साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। स्पेस फोर्स ने यह भी कहा कि इन क्षमताओं का इस्तेमाल रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।अंतरिक्ष में वर्चस्व की होड़, चीन और रूस बड़ी चुनौती अंतरिक्ष में सैन्य वर्चस्व की होड़ अब तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका के सामने इस क्षेत्र में उसके दो प्रमुख भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन और रूस हैं।अमेरिकी स्पेस फोर्स चीन और रूस की अंतरिक्ष संबंधी सैन्य क्षमताओं को अमेरिकी हितों के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखती है। अमेरिकी आकलन के मुताबिक, चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति के तहत अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताओं को विकसित और संचालित कर रहा है। वहीं, रूस अंतरिक्ष को युद्ध के क्षेत्र के तौर पर देखता है और उसका मानना है कि भविष्य के संघर्षों में अंतरिक्ष पर सर्वोच्चता निर्णायक भूमिका निभा सकती है। यही वजह है कि अमेरिका भी अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रहा है। स्पेस रेस के साथ ही शुरू हो गया था अंतरिक्ष का सैन्यीकरण अंतरिक्ष का सैन्यीकरण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। इसकी शुरुआत अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शुरू हुई स्पेस रेस के शुरुआती दौर में ही हो गई थी।ॉ 1957 में सोवियत संघ द्वारा स्पुतनिक लॉन्च किए जाने के बाद अमेरिका और मॉस्को ने इस बात पर विचार करना शुरू किया कि उपग्रहों को हथियारों से लैस कैसे किया जा सकता है और दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने की क्षमता कैसे विकसित की जाए। उस समय सबसे बड़ी चिंता अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती को लेकर थी। इस खतरे को नियंत्रित करने के लिए 1967 में Outer Space Treaty (बाह्य अंतरिक्ष संधि) अस्तित्व में आई। इस संधि पर अमेरिका, सोवियत संघ समेत कई देशों ने हस्ताक्षर किए थे। संधि के तहत अंतरिक्ष की कक्षा में सामूहिक विनाश के हथियार (Weapons of Mass Destruction) तैनात करने पर रोक लगाई गई है। फिर भी अंतरिक्ष में सैन्य क्षमताएं बढ़ती रहीं Outer Space Treaty के बाद भी अमेरिका, रूस, चीन और भारत सहित कई देशों ने ऐसी सैन्य क्षमताएं विकसित की हैं। इनके जरिए अंतरिक्ष में सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं, जो संधि में प्रतिबंधित गतिविधियों के दायरे से बाहर हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक दुश्मन के उपग्रहों को निशाना बनाने की क्षमता है। आधुनिक युद्ध में उपग्रहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। सैन्य संचार, निगरानी और नेविगेशन जैसी कई अहम सेवाएं उपग्रहों पर निर्भर करती हैं। ऐसे में किसी देश के उपग्रहों को नुकसान पहुंचाना उसकी सैन्य क्षमता और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका की पुष्टि क्यों अहम है? अमेरिका द्वारा पहली बार यह स्वीकार करना कि उसके पास कक्षा में तैनात स्पेस कंट्रोल हथियार मौजूद हैं। एक तरह से अंतरिक्ष में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, अमेरिकी स्पेस फोर्स ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कक्षा में किस तरह के हथियार तैनात हैं, उनकी संख्या कितनी है या वे किन स्थानों पर मौजूद हैं। लेकिन यह पुष्टि ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अंतरिक्ष को भविष्य के संघर्षों का महत्वपूर्ण क्षेत्र मानते हुए अपनी स्पेस और काउंटर-स्पेस क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही हैं। आपको बता दें कि यह खबर ऐसे समय आई है जब अभी भी रूस और यूक्रेन एवं अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है।ये भी पढ़ें- Vande Bharat News: 'वंदे भारत' एक्सप्रेस पर 10 बड़े अपडेट! काशी को मिलेगी स्लीपर ट्रेन, सूरत-उदयपुर रूट को भी मंजूरी; माल ढुलाई का भी हुआ ट्रायल
'अमेरिका के प्रेशर में सरकार ने सरेंडर किया', UPI चार्ज को लेकर बोले राहुल
UPI के जरिए होने वाले डिजिटल लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के दबाव में सरकार ने zero-MDR नीति को बदल दिया है, जिससे आम ग्राहक की जेब पर असर पड़ेगा.
अमेरिका से लौटते ही बच्चों के साथ गणपति पूजा में शामिल हुए Govinda, दिखाई नहीं दी पत्नी सुनीता आहूजा
अमेरिका से लौटने के बाद गोविंदा ने परिवार के साथ गणेश चतुर्थी मनाई। बेटे और बेटी के साथ वह पूजा करते नजर आए।
अमेरिका में इतने का आता एक बेलपत्र, कीमत जानकर चौंक जाएंगे
पूजा की छोटी-छोटी चीजों की कीमत भी अमेरिका में डॉलर में चुकानी पड़ती है. एक भारतीय स्टोर पर हल्दी करीब 0.99 डॉलर, कुमकुम करीब 0.99 डॉलर, कपूर करीब 1.79 डॉलर और चंदन पाउडर करीब 5.99 डॉलर में लिस्टेड है.
जमुई की लक्ष्मी भार्गव ने मॉडलिंग की दुनिया में एक और उपलब्धि हासिल की है। जिला मुख्यालय के हरनाहा निवासी उमाकांत सिंह और विभा देवी की बेटी लक्ष्मी ने बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए मिस रीना हिस्पानोअमेरिकाना इंडिया 2026 का खिताब अपने नाम किया है। उनकी इस जीत पर बिहार सरकार की उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने पत्र भेजकर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। यह प्रतियोगिता गुजरात के अहमदाबाद स्थित ईकेए एरिना में हुई थी। ग्रैंड फिनाले में देश के कई राज्यों से आई प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लक्ष्मी ने अपने आत्मविश्वास और प्रतिभा से निर्णायकों को प्रभावित किया और विजेता बनीं। खिताब जीतने के साथ ही अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। लक्ष्मी साल 2027 में बोलीविया जाएंगी, जहां वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। मेहनत के बल पर बनाई पहचान मंत्री श्रेयसी सिंह ने अपने बधाई संदेश में कहा कि लक्ष्मी ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी सफलता जमुई जिले के साथ-साथ पूरे बिहार और देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि और महिला के तौर पर उन्हें लक्ष्मी की सफलता पर बहुत खुशी और गर्व है। उनकी यह उपलब्धि बेटियों की प्रतिभा और आत्मविश्वास को दिखाती है। श्रेयसी सिंह ने लक्ष्मी के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि वह आने वाले समय में सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल करेंगी और देश, समाज तथा अपने क्षेत्र का नाम रोशन करती रहेंगी। खिताब जीतने के बाद लक्ष्मी ने कहा कि यह जीत उनके लिए बहुत खास है। इस सफर में उन्हें परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों का लगातार साथ मिला। उन्होंने बताया कि अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की संस्कृति, आत्मविश्वास और मजबूती को दुनिया के सामने लाना है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीता था बेस्ट स्माइल अवार्ड लक्ष्मी का मॉडलिंग का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। सामाजिक सोच और आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी। उन्होंने साल 2021 में पटना की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बेस्ट स्माइल अवार्ड जीता था। इसके बाद फरवरी 2022 में उन्होंने मिस बेतिया का खिताब भी अपने नाम किया। इसी वर्ष वह मिस टीन इंडिया सुपरमॉडल बनीं। वर्ष 2025 में मिस फेस ऑफ इंडिया का खिताब हासिल किया और मिस साउथ एशिया यूनिवर्स में सेकंड रनर अप रहीं।अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी है। उनकी सफलता से जमुई में खुशी का माहौल है।
अमेरिकी टैरिफ को लेकर ब्राजील और यूएस के बीच होगी बातचीत की तैयारी
रियो डी जेनेरो, अमेरिकी टैरिफ को लेकर ब्राजील और अमेरिका के बीच जल्द ही बातचीत होने की संभावना है। ब्राजील के अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक सितंबर के आखिर में हो सकती है।
मोहसिन रेजाई : अमेरिका के साथ बातचीत संभव नहीं
तेहरान, ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत तब तक संभव नहीं है जब तक कि ईरान की शर्तें पूरी नहीं हो जाती।
अमेरिका में पंजाब के एक ट्रक ड्राइवर पर कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणी के बाद चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है।
जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होती, अमेरिका के साथ बातचीत संभव नहीं: मोहसिन रेजाई
तेहरान, 15 सितंबर . ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत तब तक संभव नहीं है जब तक कि ईरान की शर्तें पूरी नहीं हो जाती. ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर यह बात कही. उनका ... Read more
अमेरिकी टैरिफ को लेकर ब्राजील और यूएस के बीच सितंबर के आखिर में बातचीत की तैयारी
अमेरिकी टैरिफ को लेकर ब्राजील और अमेरिका के बीच जल्द ही बातचीत होने की संभावना है। ब्राजील के अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक सितंबर के आखिर में हो सकती है।
पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने आज गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी करमवीर सिंह को दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया है। करमवीर सिंह को कनाडा से डिपोर्ट किए जाने के बाद भारत लाया गया था। करमवीर लॉरेंस से जुड़े नेटवर्क के लिए काम करता था। पंजाब पुलिस के अनुसार, करमवीर सिंह ने अमेरिका में लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था। यानी उसके रहने, छिपने और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं में मदद की थी। इसी वजह से पंजाब पुलिस की जांच में उसका नाम सामने आया और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। करमवीर सिंह के खिलाफ SAS नगर के स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज है। इस मामले में IPC, आर्म्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। करमवीर सिंह पर पहले से दर्ज हैं ये मामले… गैंगस्टर नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी पंजाब पुलिस ने कहा है कि ट्रांसनेशनल यानी विदेशों से संचालित हो रहे गैंगस्टर नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। विदेश में छिपे या वहां से आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने वाले वांछित आरोपियों को कानून के दायरे में लाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई की जा रही है।
अमेरिका के रूस प्रतिबंध बिल में भारत को लेकर बड़ा संशोधन
अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों को लेकर सांसदों ने बिल में संशोधन पेश किए हैं। एक संशोधन में भारत जैसे रूस के बड़े व्यापारिक साझेदारों को सीधे बिल में शामिल करने की मांग है, जबकि दूसरे में टैरिफ प्रावधान हटाने का प्रस्ताव है।
iPhone 18 Pro Max: भारत और अमेरिका वाले मॉडल में बड़ा अंतर, खरीदने से पहले जान लें ये बात
iPhone 18 Pro Max: भारत और अमेरिका वाले मॉडल में बड़ा अंतर, खरीदने से पहले जान लें ये बात
अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
एआई पर अमेरिका-चीन आमने-सामने, ब्रिक्स में शी का ओपन सोर्स दांव; भारत ने दी संतुलित नीति की झलक
13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शी चिनफिंग ने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों के लिए ओपन-सोर्स एआई समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। उन्होंने बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) के विकास और इस्तेमाल में सहयोग, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और व्यापक एआई इकोसिस्टम तैयार करने की पेशकश की।
केंद्र सरकार की सख्ती के आगे झुका Meta! अब अमेरिका नहीं, सीधे भारतीय पुलिस को देगा ये जानकारी
Meta अब बाल यौन शोषण (CSAM) से जुड़े मामलों की रिपोर्ट अमेरिकी संस्था NCMEC के बजाय सीधे भारतीय जांच एजेंसियों को सौंपेगा.
क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने के अमेरिकी प्रस्ताव पर रूस राजी हुआ तो यूक्रेन भी करेगा समर्थन : जेलेंस्की
घटना दो अप्रैल की बताई गई है। अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को इसाफहान के आसपास ईरानी मिसाइल से निशाना बनाए जाने के बाद विमान में मौजूद पायलट ‘अल्फा’ और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर ‘ब्रावो’ को विमान छोड़ना पड़ा।
शादी के बाद नौकरी छोड़कर गईं अमेरिका, अब ट्रंप के लिए ट्रांसलेटर का काम करती हैं गुरदीप चावला
Gurdeep Kaur Chawla Interpreter: गुरदीप चावला की पूरी कहानी शानदार रही है. उन्होंने पहले भारत में नौकरी की, लेकिन शादी के बाद अमेरिका जाना पड़ा, जहां उन्होंने अपने करियर को नया मोड़ दिया और आज दुनिया के बड़े नेताओं के साथ काम करती हैं.
अमेरिकी Supreme Court ने खारिज की ट्रंप की अपील, मेल-बैलेट में बदलाव की मंजूरी नहीं
वॉशिंगटन, 15 सितंबर . अमेरिका के Supreme Court ने Monday (स्थानीय समय के अनुसार) ट्रंप प्रशासन को नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के लिए मेल बैलेट पर नए और व्यापक नियम लागू करने से रोक दिया. कोर्ट ने उस आपातकालीन अपील को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत की ओर से लगाए गए प्रतिबंध ... Read more
अंतरिक्ष में जंग की तैयारी?: अमेरिका ने माना- ऑर्बिट में हैं हथियार, दुश्मन के सैटेलाइट को बना सकते हैं निशाना- Preparing for war in space US admits weapons are deployed in orbit capable of targeting enemy satellites
हमने अंतरिक्ष में तैनात किए हैं हथियार... अमेरिका का बड़ा दावा
अमेरिकी स्पेस फोर्स ने पहली बार खुलेआम पुष्टि की है कि ऑर्बिट में हथियार तैनात हैं. वायुसेना सचिव ट्रोय मेंक ने कहा कि ये दुश्मन के हमलों से बचाव के लिए हैं. दो नए ड्रोन विमानों के नाम बताए गए.
भारत-चीन पर 100% टैरिफ की तैयारी, अमेरिकी संसद में संशोधन पेश
अमेरिका में रूस प्रतिबंध बिल को लेकर सांसदों ने कई संशोधन पेश किए हैं. एक संशोधन में भारत, चीन जैसे रूस के व्यापारिक साझेदार देशों के नाम बिल में जोड़ने की मांग की गई है, ताकि उन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सके. वहीं सांसद ग्रेगरी मीक्स ने टैरिफ प्रावधान वाले सेक्शन को ही हटाने का प्रस्ताव दिया है.
संघर्ष की दास्तां: जब ईरान में गिरा अमेरिकी वायुसेना अफसर काविमान;टूटी हड्डियां, 7000 फीट चढ़ाई; 50 घंटे...
Trump Iran Deal: ब्रिक्स समिट के बाद ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख, बोले- अमेरिका बातचीत के लिए तैयार लेकिन फैसला मेरा
रूस से तेल खरीदना पड़ेगा महंगा? भारत समेत 10 देशों पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, संशोधन बिल पेश- Will buying oil from Russia become costlier US prepares impose 100% tariffs on 10 countries including India
ट्रंप को चुनौती देगा कनाडा?: अमेरिका से निवेश खींचने की तैयारी में कार्नी, समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ Will Canada Challenge Trump Carney Prepares Attract Investment from the US; 300 Top CEOs to Gather at Summit.
'मेरा बचना एक चमत्कार है': एफ़-15 मार गिराए जाने के बाद अमेरिकी पायलट ने ईरान में कैसे बिताए 48 घंटे
विमान क्षतिग्रस्त होने के बाद उसमें सवार दोनों अमेरिकी वायुसैनिकों ने छलांग लगा दी थी. इसके बाद दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए. अमेरिकी स्पेशल फ़ोर्स के बचाव के लिए पहुंचने तक उन्हें ईरानी सैनिकों से बचते हुए छिपना पड़ा.
होर्मुज में टैंकर पर हमला: अमेरिकी सेना ने ईरान का बारूदी सुरंग से टकराने का दावा किया खारिज; क्या कहा?
ट्रंप का बड़ा झटका: मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति का बैन निरस्त, डाक मतपत्र मामले में क्या निर्णय?
अमेरिका में पक्षियों का पलायन: क्या शहरों की रोशनी बन रही जानलेवा; कैसे बचेंगे करोड़ों प्रवासी परिंदे?
पंजाब के ड्राइवर पर अमेरिका में नस्लीय हमला हुआ है। हमलवार ने आराम कर रहे ड्राइवर पर सोमवार सुबह पहले नस्लीय टिप्पणी की। उसके बाद चाकू से हमला कर दिया। पंजाबी कम्युटी के व्यक्ति पवित्र सिंह ने बताया कि ड्राइवर की पहचान गुरविंदर सिंह के रूप में हुई है। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सूचना दे दी है। पवित्र सिंह ने कहा कि ड्राइवर पंजाब में कहां का रहने वाला है, यह जानकारी नहीं है। अभी उसकी हालत गंभीर है और बोलने में असमर्थ है। वह डब्ल्यूजे ट्रांसपोर्ट में काम करता था। सुबह रेस्ट लेन पर खड़े अपने ट्रक से करीब 100 मीटर की दूरी पर वह खून से लथपथ मिला। इसके बाद हाईवे पेट्रोलिंग पुलिस ने उसे इलाज के लिए भर्ती करवाया। हमले के बाद से पंजाबी समुदाय के लोगों को में गुस्सा है। लोगों ने कहा कि पंजाबियों पर लगातार हेट स्पीच और हमले बढ़ रहे हैं। बावजूद इसके यहां का स्थानीय मीडिया तक इसे कवरेज नहीं देता। उनकी आवाज को दबाया जाता है, ताकि दुनिया को पता न चल सके। जानें हमले के बाद सामने आए वीडियो में क्या दिखा अमेरिकी मीडिया में खामोशी, समुदाय ने उठाया मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि इस गंभीर घटना को अभी तक किसी प्रमुख अमेरिकी न्यूज चैनल या अखबार ने कवर नहीं किया है। स्थानीय पंजाबी समुदाय ने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना को उजागर करने और दुनिया भर में साझा करने की अपील की है। उनका कहना है कि अमेरिका में उनकी कम्युनिटी के साथ हो रहे भेदभाव और नफरत की घटनाओं को मीडिया में जगह नहीं मिल रही है। डेढ़ लाख सिख ड्राइवर, बढ़ रहा हेट क्राइम यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में सिख और पंजाबी ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ नफरत की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने एक विवादास्पद पोस्ट में मिस्टर सिंह का जिक्र करते हुए सिख ड्राइवरों को निशाना बनाया था, जिसकी कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यू समेत कई नेताओं ने कड़ी निंदा की थी। उत्तरी अमेरिकी पंजाबी ट्रकिंग एसोसिएशन के अनुसार, अमेरिका में करीब डेढ़ लाख सिख ट्रक ड्राइवर हैं, जो लगातार नस्लीय प्रोफाइलिंग का शिकार हो रहे हैं। FBI की हेट क्राइम वेबसाइट पर दर्ज कराएं शिकायत विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट स्थानीय पुलिस और FBI की हेट क्राइम वेबसाइट पर दर्ज करानी चाहिए। सिख कोएलिशन जैसी संस्थाएं भी पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रही हैं। समुदाय के लोग अधिकारियों से इस मामले की गंभीरता से जांच करने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
Mumbai , 14 सितंबर . गणेश चतुर्थी के अवसर पर भाजपा नेता कृपाशंकर सिंह ने देश की प्रगति, Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व, ब्रिक्स सम्मेलन, राहुल गांधी के डिनर मेन्यू पर किए गए तंज, आर्टिकल 370, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और क्रिकेट से जुड़े विवादों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने गणपति उत्सव को सामाजिक एकता ... Read more
AI पर अमेरिका और चीन आमने-सामने, ट्रंप बोले - नहीं रुकेगा AI
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि AI पर किसी तरह का कोई स्लोडाउन नहीं होगा. जो जीतेगा, वही जीतेगा. ऐसे कह कर उन्होंने चीन पर निशाना साधा है. माना जा रहा है कि चीनी AI मॉडल्स इतने पावरफुल हो रहे हैं कि अमेरिकी कंपनियां डर रही हैं.
चीन-अमेरिका के बीच AI वॉर? ब्रिक्स के अगले दिन गरमाया मोर्चा
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद चीन और अमेरिका के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर वैश्विक शक्ति-संतुलन की नई दौड़ शुरू हो गई है, जिसमें चीन ब्रिक्स देशों के लिए ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम का प्रस्ताव कर रहा है।
Iran ने दबोच लिया ट्रंप का 'जासूस', अमेरिका में सन्नाटा, IRGC की हिम्मत से दुनिया हैरान
ईरान की IRNA समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि ईरान द्वारा ली गई अमेरिकी पनडुब्बी को युद्ध की लूट (spoils of war) के तौर पर कब्ज़े में लिया गया था और ऐसी लूट वैध होती है। ईरान द्वारा ली गई अमेरिकी पनडुब्बी के बारे में बात करते हुए बघाई ने कहा, इसे ज़ब्त नहीं किया गया था; इसे युद्ध की लूट के तौर पर कब्ज़े में लिया गया था, और ऐसी लूट वैध होती है। सऊदी अरब द्वारा क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन को टालने के अनुरोध पर, बघाई ने कहा कि इस अनुरोध को यमन की घटनाओं से जोड़ना संकट की मुख्य वजहों से ध्यान भटकाने जैसा है, जैसा कि ईरानी मीडिया ने बताया। उन्होंने कहा, सऊदी अरब का क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन को टालने का अनुरोध और इसे यमन की घटनाओं से जोड़ना संकट की मुख्य वजहों से ध्यान भटकाने जैसा है। ईरानी मीडिया के अनुसार, बघाई ने आगे कहा कि ईरान ने हमेशा यमनी पक्षों के बीच तय रोडमैप का समर्थन किया है और कहा कि इस्लामी देशों के बीच संघर्ष का जारी रहना ज़ायोनी शासन के असुरक्षा बनाए रखने के लक्ष्यों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, ईरान ने हमेशा यमनी पक्षों के बीच तय रोडमैप का समर्थन किया है और इस्लामी देशों के बीच संघर्ष के जारी रहने को ज़ायोनी शासन के असुरक्षा बनाए रखने के लक्ष्यों के अनुरूप मानता है। ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर से बढ़ रहा है; यमन में लड़ाई तेज़ हो गई है क्योंकि हूथी विद्रोही सऊदी-समर्थित सरकार के कब्ज़े वाले इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेल और गैस से समृद्ध प्रांत मारिब और ताइज़ शहर शामिल हैं, जबकि सऊदी अरब पर जवाबी कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है। इसे भी पढ़ें: इंतज़ार रहेगा...इधर ईरान का ऐलान, उधर नेतन्याहू ने मोदी को भेजा खास पैगाम अल जज़ीरा के अनुसार, हूथी विद्रोही मारिब और ताइज़ में सरकार के मज़बूत ठिकानों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे फिर से हमले की चिंता बढ़ गई है। 2015 में संघर्ष बढ़ने के बाद से मारिब यमन में सरकार के कब्ज़े वाले सबसे अहम इलाकों में से एक रहा है; यहाँ सेना के बड़े बेस, तेल और गैस के भंडार, एक मुख्य पावर स्टेशन और 20 लाख से ज़्यादा विस्थापित लोग हैं। ऐसी ख़बरों के बीच कि हूथी मारिब के आस-पास अपनी सेना इकट्ठा कर रहे हैं, यमन की सरकारी सेना ने कहा है कि वे किसी भी नए हमले से इस इलाके की रक्षा के लिए तैयार हैं। इस बीच, सितंबर की शुरुआत में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास बिना चालक वाली अमेरिकी पनडुब्बी को ज़ब्त करने की ज़िम्मेदारी ली। ईरान के सरकारी मीडिया ने ज़ब्त किए गए उपकरण की पहचान 'डाइव-एलडी' (Dive-LD) के तौर पर की है, जो कैलिफ़ोर्निया की रक्षा कंपनी 'एंडुरिल' (Anduril) द्वारा बनाया गया एक बड़ा ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) है। इसे भी पढ़ें: दोस्त इजरायल को झटका! क्या भारत ने बदल लिया अपना रुख, ईरान के लिए नेतन्याहू को छोड़ा? मैन्युफ़ैक्चरर की जानकारी के अनुसार, 19 फ़ीट लंबी यह सबमर्सिबल कई तरह के काम करने के लिए बनाई गई है, जैसे कि माइन काउंटरमेज़र (बारूदी सुरंगों का पता लगाना और उन्हें बेअसर करना), समुद्र की सतह की मैपिंग, खुफिया जानकारी जुटाना और पानी के नीचे मौजूद ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे केबल और पाइपलाइन) की जांच करना। सरकारी मीडिया के ज़रिए इस ज़ब्ती की घोषणा करते हुए, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी ने कहा, हमने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के मुहाने पर अमेरिकी सेना की सबसे आधुनिक, इंटेलिजेंट और बिना चालक वाली पनडुब्बियों में से एक को पकड़ लिया। यह सबमर्सिबल लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस है।
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
तरनतारन में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने रविवार को विभिन्न मांगों को लेकर डीसी कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता रद्द करने, लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस लेने और किसानों-मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग की। इसके साथ ही काश्तकार किसानों, मजदूरों, आबादकारों और मजारेदारों को जमीन का मालिकाना हक देने की मांग भी उठाई। धरने को जिला प्रधान गुरबाज सिंह सिद्धवां, भूपिंदर सिंह ठठियां, हरदीप सिंह जोड़ां, दलेर सिंह राजोके, सुखबीर सिंह गग्गू भूआं, जत्थेदार सुलखण सिंह मंडाला और जत्थेदार संतोष सिंह पट्टी समेत कई किसान नेताओं ने संबोधित किया। किसान नेताओं ने कहा कि अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते से पहले से संकट झेल रहे कृषि क्षेत्र पर और दबाव बढ़ेगा। किसान नेता बोले- पराली से जुड़े केस वापस ले सरकार किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि इससे उद्योग और खुदरा क्षेत्र भी प्रभावित होंगे, जिससे बेरोजगारी और महंगाई बढ़ सकती है। किसानों ने बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज क्षेत्र में कॉरपोरेट दखल का भी विरोध किया। किसानों ने बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने और इसके लिए अलग बजट का प्रावधान करने की मांग की। उन्होंने मनरेगा कानून दोबारा लागू कर 200 दिन के रोजगार की गारंटी देने, निजीकरण की नीतियां वापस लेने और सरकारी संस्थानों में स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग भी रखी। किसान नेताओं ने आत्महत्या कर चुके किसानों और मजदूरों के परिवारों को 10 लाख रुपए मुआवजा देने, मजदूर विरोधी श्रम कोड रद्द करने और किसान आंदोलन व पराली से जुड़े पुलिस केस वापस लेने की मांग की।
अहमदाबाद में आयोजित ‘साबरमती संवाद 2026’ में बदलती वैश्विक व्यवस्था, ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका और ग्लोबल साउथ में भारत के प्रभाव को लेकर पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर जी और वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा जी ने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रख्यात विचारक श्री राम माधव जी से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत […]
सेंटकॉम प्रमुख ने बताया कि 90 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों को ईरान में जमीन पर भेजा गया; यह 46 सालों में वहां अमेरिकी जमीनी सैनिकों की पहली तैनाती थी.
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) उगराहां के बैनर तले मानसा में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 16वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान किसान नेताओं ने सरकार को कड़े शब्दों में नसीहत दी कि वह पानी के संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना बंद करे और किसानों की जायज समस्याओं का तुरंत समाधान करे। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं इंद्रजीत सिंह झब्बर, राम सिंह भैणी बाघा, महिंदर सिंह रोमाणा और जगसीर सिंह जवाहरके ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि किसान पिछले काफी समय से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है और उनकी सुध नहीं ले रही है। किसान नेताओं ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी 13 सूत्रीय मांगों पर जल्द ही सकारात्मक ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रमुख मांगें और आपत्तियां: भारत-अमेरिका डील का विरोध: किसानों का कहना है कि इस डील से देश का किसान, मजदूर, व्यापारी और हर अन्य वर्ग गंभीर रूप से प्रभावित होगा, इसलिए केंद्र सरकार को इस पर तुरंत पुनर्विचार कर इसे रद्द करना चाहिए। ड्रोन सर्वे और लैंड पूलिंग: पंजाब में खेतों का ड्रोन के जरिए करवाया जा रहा सर्वे और लाई जाने वाली लैंड पूलिंग नीति को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। कर्ज माफी: पंजाब के तमाम किसानों और मजदूरों के पूर्ण कर्ज माफ किए जाएं। नहरी पानी की उपलब्धता: किसानों के खेतों तक पर्याप्त नहरी पानी पहुंचाने के लिए सरकार प्राथमिकता के आधार पर ठोस कदम उठाए। पराली के मुकदमे रद्द हों: धान की पराली जलाने के मामलों में किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी पुलिस केस वापस लिए जाएं।
अमेरिकी महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका तेज होने से सोने की कीमतों में आई गिरावट
New Delhi, 14 सितंबर . अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े आने के बाद वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है. निवेशकों को अब इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना अधिक नजर आ रही है, जिसके चलते सुरक्षित निवेश माने ... Read more
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को घूमने पहुंचे भारतीय YouTuber Anshu Bisht, जिन्हें ‘GamerFleet’ के नाम से जाना जाता है, के साथ ऐसा वाकया हुआ जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी। वह Burger King के एक आउटलेट में खाना लेने गए थे, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें पता चला कि उनका स्मार्टफोन चोरी हो चुका है।आनंद की जगह अचानक टेंशन में आए YouTuber ने जब CCTV फुटेज देखी तो मामला और भी हैरान करने वाला लगा। फुटेज में एक शख्स उनका फोन उठाकर रेस्टोरेंट से बाहर जाता दिखाई दिया।CCTV में दिखा चोर, फोन लेकर स्कूटर से भागाAnshu Bisht के मुताबिक, वह कुछ देर के लिए अपनी टेबल से खाना लेने गए थे। इसी दौरान एक व्यक्ति ने मौका देखकर उनका फोन उठा लिया और वहां से निकल गया। CCTV फुटेज में कथित तौर पर वह शख्स फोन को अपने अंडरवियर में छिपाता नजर आया और इसके बाद स्कूटर से वहां से चला गया। YouTuber ने दूसरे डिवाइस की मदद से अपने फोन की लोकेशन ट्रैक कर ली थी। लेकिन लोकेशन पता चलने के बावजूद उन्होंने खुद चोर का पीछा करने या उससे भिड़ने का फैसला नहीं किया।‘डर लग रहा था, इसलिए खुद नहीं गया’Anshu ने बताया कि उन्हें डर था कि अगर वह खुद फोन लेने पहुंचते हैं तो मामला खतरनाक हो सकता है। इसलिए उन्होंने अमेरिका के इमरजेंसी नंबर 911 पर कॉल कर पुलिस को पूरी जानकारी दी। उन्होंने पुलिस को फोन की लाइव लोकेशन के बारे में बताया। इसके बाद जो हुआ, उसने उन्हें भी हैरान कर दिया।कुछ ही सेकंड में पहुंची पुलिस, 3-4 गाड़ियों ने घेराYouTuber के अनुसार, पुलिस ने लोकेशन पर पहुंचकर कुछ ही समय में संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ लिया। मौके पर करीब 3-4 पुलिस गाड़ियां पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि वह खुद वहां जाने की सोच रहे थे और मन में यह भी था कि पुलिस से पहले पहुंचकर उन्हें बता देंगे कि उनका फोन इसी जगह की लोकेशन दिखा रहा है। लेकिन जब तक वह कुछ कर पाते, पुलिस आरोपी को हिरासत में ले चुकी थी। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि पुलिस इतनी तेजी से पहुंचकर कार्रवाई कर चुकी है।पुलिस की कार्रवाई से हुए बेहद प्रभावितफोन वापस मिलने के बाद Anshu ने पुलिस के प्रति जमकर सम्मान जताया। उन्होंने खास तौर पर Colma Police Department की तारीफ की और कहा कि इस पूरे अनुभव के बाद उनके मन में वहां की पुलिस के लिए सम्मान और बढ़ गया है। हालांकि, उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि फोन वापस मिलने के बाद उसे इस्तेमाल करना थोड़ा अजीब लग रहा है, क्योंकि चोर ने उसे अपने अंडरवियर में छिपाकर रखा था। View this post on Instagram A post shared by Anshu Bisht (@gamerfleetog) सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानीAnshu के वीडियो के सामने आने के बाद यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। कई यूजर्स ने पुलिस की तेज कार्रवाई की तारीफ की और राहत जताई कि फोन सुरक्षित वापस मिल गया। एक यूजर ने पुलिस की कार्रवाई को ‘सुपरफास्ट’ बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि पूरी घटना किसी रोलरकोस्टर राइड जैसी थी, लेकिन अंत अच्छा रहा। कुछ लोगों ने इस घटना पर मजाक भी किया। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि भारतीय पुलिस शायद इसे AI की कहानी बता देती। वहीं किसी ने मजाक किया कि फोन को अब ‘वॉशिंग मशीन’ की जरूरत पड़ सकती है।हालांकि, यह पूरी कहानी Anshu Bisht द्वारा साझा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है और इसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)Ganesh Chaturthi 2026: मेहंदी लेने रात से मंदिर के बाहर डटे रहे ‘कुंवारे’, 3500 किलो का स्टॉक चंद घंटों में खत्म... जानिए क्या है मान्यता
24 कैरेट गोल्ड और अमेरिकन हीरों से सजे गणपति... ठहर जाएंगी नजरें!
हैदराबाद के बेगम बाजार में 24 कैरेट गोल्ड प्लेटेड गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है. 48 किलो की इस मूर्ति पर 3.8 लाख से ज्यादा अमेरिकन डायमंड्स लगाए गए हैं.
ईरान को चीन से मिलीं अमेरिकी एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें? 3 US सैनिकों की मौत से जुड़ा लिंक
17 जुलाई को मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए गए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर बेस को तीन बार निशाना बनाया गया। हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई, जबकि चार अन्य घायल हुए।
खदीर खान मोहम्मद पर आरोप है कि उसने अपने लैब्स के जरिए मेडिकेयर को करीब 9.3 करोड़ डॉलर के कथित फर्जी क्लेम भेजे. मेडिकल इंश्योरेंस के रूप में पैसे उठाए और भाग गया.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
BRICS सम्मेलन के चलते आगरा में नहीं मिली जगह तो लखनऊ में उतरा अमेरिकी प्लेन, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
ब्रिक्स सम्मेलन के बीच आगरा में पार्किंग की अनुपलब्धता के कारण एक अमेरिकी चार्टर विमान को लखनऊ में आपात लैंडिंग करनी पड़ी। विमान में सवार 56 अमेरिकी यात्रियों को सड़क मार्ग से आगरा भेजा गया।
एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अमेरिका के शेल्टन को हराकर जीता US ओपन 2026 का खिताब
अमेरिकी टेनिस फैंस को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी। US ओपन के फाइनल में बेन शेल्टन से देश को 22 साल बाद पुरुष सिंगल्स का ग्रैंड स्लैम चैंपियन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने उनके सपने पर पानी फेर दिया।
Bond Market में कोहराम, अमेरिका में 5% के करीब पहुंची यील्ड, जापान में 28 साल का टूटा रिकॉर्ड
Bond Market: बॉन्ड मार्केट में अचानक बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि अमेरिका की 10-साल वाले ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5% के स्तर के करीब पहुंच गई। यह वह स्तर है जो इससे पहले अक्टूबर 2023 में सिर्फ थोड़े समय के लिए दिखा था और साल 2007 के बाद से यह लेवल इससे पहले कभी भी क्लोजिंग बेसिस पर नहीं दिखा था। सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के बॉन्ड मार्केट बढ़ते सरकारी कर्ज और एनर्जी की ऊंची कीमतों का दबाव झेल रहे हैं। यूके में 30-साल वाले बॉन्ड की यील्ड साल 1998 के बाद के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई तो जर्मनी और फ्रांस में भी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के हाई लेवल पर पहुंच गई।इस कारण बढ़ा दबाव और अब आगे क्या है रुझानअमेरिकी ट्रेजरी ने पिछले हफ्ते करीब $600 करोड़ के बॉन्ड वापस खरीदने यानी बायबैक की बात कही थी लेकिन उसने केवल $514 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। इससे मार्केट को झटका लगा और यील्ड उछल पड़ा। अभी आगे बॉन्ड बायबैक की जो योजना है, उसके तहत मिनिमम साइज को ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹400 किया गया है लेकिन मार्केट की नजर इस बात पर रहेगी कि वास्तव में खरीदारी होती कितनी है।बॉन्ड मार्केट पर दबाव और बढ़ सकता है क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी के कई बड़े होल्डर्स इसे बेचने की तैयारी कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की 12 सितंबर की Banco Santander SA के हवाले से रिपोर्ट के मुताबिक जापान का गवर्नमेंट पेंशन इंवेस्टमेंट फंड ₹6200 करोड़ तक के अमेरिकी ट्रेजरी बेच सकता है। इससे पहले पिछले महीने इंवेस्टमेंट फंड की बैठक में विदेशी बॉन्ड्स में अपने निवेश पर दोबारा विचार करने और उसकी जगह घरेलू कर्ज में निवेश बढ़ाने की बात हुई थी। सबसे अधिक $1 लाख करोड़ से अधिक के यूएस ट्रेजरी जापान के पास हैं और इसने जुलाई के आखिरी दिनों से अगस्त तक अपनी करेंसी येन को मजबूत बनाए रखने के लिए करीब $10 हजार करोड़ खर्च कर दिए। कई वर्षों तक ब्याज दरें सबसे निचले स्तर पर रखने के बाद बैंक ऑफ जापान ने इसे बढ़ाना शुरू कर दिया जिससे जापान की 10-साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 3% हो गई जो 1996 के बाद पहली बार हुआ है। बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें अनुमान से अधिक स्पीड से बढ़ाने के आसार और सरकारी खर्च से जुड़ी चिंताओं ने इसमें चाबी भरी है।दुनिया का सबसे बड़ा सोवरेन वेल्थ फंड भी इस रेस में आने वाला है और नॉर्वे के $2.3 लाख करोड़ के फंड की योजना अपनी $21.5 हजार करोड़ की होल्डिंग्स में से करीब $8 हजार करोड़ की यूएस ट्रेजरी बेचने की है। नॉर्गेस बैंक इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट का इरादा सरकारी बॉन्ड्स के अलावा अन्य प्रकार के डेट में अपना निवेश बढ़ाने का है।अमेरिकी फेड की बढ़ी मुश्किलेंबुधवार को अमेरिकी फेड के फैसले से पहले बढ़ती यील्ड के साथ-साथ महंगाई और एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी ने फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले शुक्रवार को आए महंगाई के आंकड़ों के बाद इस बात के आसार 90% हो गए हैं कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है।ब्रांडीवाइन ग्लोबल एसेट मैनेजमेंट की ट्रेसी चैन का मानना है कि मीडियम-टर्म में यील्ड और बढ़ेगी और यह 5% के निशान से ऊपर जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दरों के मामले में फेड पीछे चल रहा है। स्टॉक मार्केट पर इसके असर की बात करें तो तो यील्ड बढ़ने पर बॉन्ड मार्केट अधिक आकर्षक हो सकता है क्योंकि यहां फिक्स्ड इनकम रिटर्न मिल सकता है।दुनिया में सबसे कम ब्याज दर होनी चाहिए अमेरिका में, इस कारण ट्रंप ने किया दावाडिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
करोड़ों की सैलरी! अमेरिका में अमीरों के घर खाना बनाने के मिलते हैं इतने
क्या आपको पता है कि अमेरिका में अल्ट्रा-रिच परिवारों के घर काम करने वाले प्रोफेशनल्स की सैलरी कितनी होती है? प्राइवेट शेफ से लेकर पर्सनल असिस्टेंट और चीफ ऑफ स्टाफ तक, इनकी कमाई के आंकड़े हैरान कर सकते हैं. आइए जानते हैं, इन नौकरियों में सैलरी कहां तक पहुंचती है.
ईरान के तेल पर अमेरिका की नजर? ट्रंप बोले- जरूरत पड़ी तो लागू करेंगे वेनेजुएला मॉडल, तेहरान के जवाब का इंतजार- Is US eyeing Iran oil Trump says Venezuela model will be implemented if necessary awaiting Tehran response
दुनिया में सबसे कम ब्याज दर होनी चाहिए अमेरिका में, इस कारण ट्रंप ने किया दावा
अमेरिका में ब्याज दर दुनिया में सबसे कम होनी चाहिए। ये बातें अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की अगली नीतिगत बैठक से कुछ दिनों पहले रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कही। फेडरल बैंक के गवर्नर्स की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका में मिडटर्म के इलेक्शंस में कुछ ही हफ्ते बाकी हैं। इन चुनावों से यह तय होगा कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपने मामूली बहुमत को बनाए रख पाती है या नहीं। हाल ही में Reuters/Ipsos के पोल के मुताबिक ब्याज दरों में बढ़ोतरी से महंगाई और हर दिन इस्तेमाल वाली चीजों की कीमतों को लेकर वोटर्स की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।क्या कहना है Donald Trump का?आयरिश ओपन गोल्फ टूर्नामेंट में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि फेड के पॉलिसी बनाने वाले इस हफ्ते होने वाली बैठक में ब्याज दरें बढ़ाएंगे या नहीं। हालांकि उन्होंने आग्रह किया कि महंगाई और अर्थव्यवस्था के बारे में फेडरल रिजर्व का डेटा कुछ भी कहे, अमेरिका में दुनिया में सबसे कम ब्याज दर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह किसी भी और की तुलना में फॉर्मूलों के बारे में अधिक जानते हैं और दुनिया में सबसे अच्छी क्रेडिट स्थिति होने के बावजूद अमेरिका दूसरे देशों को अमीर बना रहा है। उनका दावा है कि फेड की ब्याज दरों ने अमेरिका की कीमत पर दूसरे देशों को फायदा पहुंचाया है।बता दें कि ब्याज दरों को लेकर ट्रंप ने फेड के पूर्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल की कई बार आलोचना की थी और अब जब उन्होंने फेड के चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श को चुना है तो शुरुआत में उनका सपोर्ट किया लेकिन अब उन्होंने अपनी मांग स्पष्ट कर दी है। दो हफ्ते पहले सोशल मीडिया पर ट्रंप ने लिखा था कि ब्याज दर कम करो, वरना जिन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है, उनके साथ व्यापार करना बंद कर दिया जाएगा।रविवार को ही फॉक्स न्यूज से नेशनल इकनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट (Kevin Hassett) ने कहा कि ब्याज दरों को लेकर कोई भी फैसला आए, ट्रंप फेड की स्वतंत्रता को सपोर्ट करते रहेंगे। हालांकि केविन ने यह भी कहा कि अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं तो ट्रंप को इससे खुशी नहीं होगी।क्या है अमेरिका में महंगाई की स्थितिअमेरिकी फेड की बैठक महंगाई के आंकड़े आने के कुछ ही दिनों बाद होने वाली है। अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट ने इसे शुक्रवार को जारी किया था जिसके मुताबिक अगस्त महीने में CPI (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) यानी खुदरा महंगाई की रफ्तार चार महीने में सबसे तेज रही। इससे इस बात के आसार बढ़े हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। बता दें कि महंगाई लगातार बने रहने के बीच ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट आई है। Market Outlook: इस हफ्ते बाजार में तेजी या गिरावट; फेड के फैसले, पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल समेत इन फैक्टर्स से होगा तय
WSJ की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में जॉर्डन में हुए एक हमले से पहले ईरान को चीन से वहां मौजूद एक सैन्य अड्डे की सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं. इस हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी.
जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने रविवार को न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में बेन शेल्टन को 6-3, 7-6(2), 5-7, 6-2 से हराकर पहली बार US ओपन का मेंस सिंगल्स खिताब जीत लिया। यह ज्वेरेव का इस साल का दूसरा और करियर का दूसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है। मैच खत्म होने का यकीन ही नहीं हुआ, ज्वेरेव की प्रतिक्रिया ने जीता दिल हालांकि, खिताब जीतने से ज्यादा चर्चा ज्वेरेव की प्रतिक्रिया की हुई। मैच प्वाइंट पर शेल्टन का फोरहैंड बाहर चला गया। ज्वेरेव ने तुरंत जश्न नहीं मनाया। वह कुछ कदम पीछे हटे, जैसे अगले पॉइंट की तैयारी कर रहे हों। कुछ सेकंड तक उन्हें समझ ही नहीं आया कि मुकाबला खत्म हो चुका है। फिर आर्थर ऐश स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के शोर से उन्हें जीत का एहसास हुआ। उन्होंने दोनों हाथ ऊपर उठाए और भीड़ की ओर देखा। इसके बाद उनकी खुशी सामने आई। पहले दो सेट में ज्वेरेव का दबदबा ज्वेरेव ने फाइनल की शुरुआत मजबूती से की। उन्होंने पहला सेट 6-3 से जीता। दूसरे सेट में शेल्टन ने कड़ी चुनौती दी, लेकिन टाईब्रेकर में ज्वेरेव ने 7-2 से बाजी मार ली। शेल्टन ने तीसरे सेट में वापसी की। उन्होंने सेट 7-5 से जीतकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया। चौथे सेट में ज्वेरेव ने फिर नियंत्रण हासिल किया। उन्होंने शुरुआत में ही बढ़त बनाई और सेट 6-2 से जीतकर खिताब पक्का कर लिया। ज्वेरेव की सर्विस पूरे मुकाबले में बड़ा हथियार रही। उन्होंने 69 प्रतिशत फर्स्ट सर्विस अंदर डाली और इनमें से 85 प्रतिशत पॉइंट जीते। फाइनल तीन घंटे 33 मिनट तक चला। दो पांच सेट के मुकाबलों से निकले थे ज्वेरेव ज्वेरेव का US ओपन अभियान आसान नहीं रहा। सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले वह 16 घंटे 40 मिनट कोर्ट पर बिता चुके थे। शुरुआती दो राउंड में उन्हें पांच सेट के मुकाबले खेलने पड़े। इसके बाद उन्होंने अपनी लय हासिल की। सेमीफाइनल में ज्वेरेव ने करेन खाचानोव को 6-3, 7-6(7), 7-6(6) से हराकर फाइनल में जगह बनाई। यह छह साल बाद US ओपन के फाइनल में उनकी वापसी थी। 2020 के फाइनल में ज्वेरेव दो सेट की बढ़त लेने के बावजूद डोमिनिक थीम से हार गए थे। इस बार उन्होंने उस हार की याद को पीछे छोड़ दिया। शेल्टन ने अल्काराज और टियाफो को हराया बेन शेल्टन पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचे थे। उनके अभियान की सबसे बड़ी जीत क्वार्टर फाइनल में कार्लोस अल्काराज के खिलाफ रही। शेल्टन ने अल्काराज को पांच सेट में हराया। यह मुकाबला सुबह 3:33 बजे खत्म हुआ था। इसके बाद उन्होंने सेमीफाइनल में अपने हमवतन फ्रांसिस टियाफो को हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया। शेल्टन 1972 में आर्थर ऐश के बाद US ओपन के मेंस सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाले पहले अश्वेत अमेरिकी खिलाड़ी बने। हालांकि, वह 2003 में एंडी रॉडिक के बाद ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब जीतने वाले पहले अमेरिकी पुरुष खिलाड़ी नहीं बन सके। अमेरिकी पुरुष टेनिस का यह इंतजार अब भी जारी है। ज्वेरेव ने शेल्टन की गर्लफ्रेंड को बताया ‘लकी चार्म’ शेल्टन की गर्लफ्रेंड और अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी ट्रिनिटी रोडमैन भी फाइनल देखने पहुंचीं। वह पहले अपने क्लब वॉशिंगटन स्पिरिट के मैच में व्यस्त थीं। इसके बाद वह न्यूयॉर्क पहुंचकर शेल्टन को सपोर्ट करने आईं। मैच के बाद ज्वेरेव ने रोडमैन को लेकर मजाक किया। उन्होंने कहा कि रोडमैन शेल्टन के लिए ‘लकी चार्म’ हैं। हालांकि, इस बार उनका लकी चार्म शेल्टन को खिताब नहीं दिला सका। फ्रेंच ओपन के बाद US ओपन भी जीता ज्वेरेव ने इस साल फ्रेंच ओपन जीतकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया था। अब US ओपन जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है। छह साल पहले US ओपन फाइनल में मिली हार के बाद इस बार ज्वेरेव के हिस्से में कोई टूटन नहीं आई। सिर्फ शेल्टन का बाहर जाता फोरहैंड, कुछ सेकंड की हैरानी और फिर यह अहसास कि US ओपन का खिताब आखिरकार उनका हो चुका है।
एक पिता ने बेटे को खिलाड़ी बनाने का सपना देखा। किसान परिवार से आने वाले मंजीत सिंह ने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए अपना कारोबार तक छोड़ दिया। सीमित संसाधनों के बीच बेटे के प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और यात्राओं का खर्च उठाया। मेहनत रंग लाई तो सिद्धार्थ चौधरी ने शॉटपुट में देश-प्रदेश का नाम रोशन किया। अब वही सिद्धार्थ हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में अपने खेल और पढ़ाई का नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। मगर इस कामयाबी के बीच एक टीस भी है, राजस्थान में चार साल से बकाया पुरस्कार राशि का इंतजार आज भी खत्म नहीं हुआ है। उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त : 2023 में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता। 2024 में साउथ एशियन जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण और एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में कांस्य पदक। 2022 में एशियन यूथ चैंपियनशिप में कांस्य। राष्ट्रीय स्तर पर वह जूनियर चैंपियनशिप, फेडरेशन कप और खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण जीत चुके हैं। यहां खिलाड़ी को पढ़ाई और खेल में संतुलन बनाना पड़ता है और विश्वविद्यालय ‘स्टूडेंट एथलीट’ तैयार करने पर जोर देता है। मेरा सपना अब भी साफ है, विदेश में मिली सुविधाओं का इस्तेमाल कर भारत के लिए बेहतर प्रदर्शन करना।’ -सिद्धार्थ चौधरी, अंतरराष्ट्रीय शॉटपुट खिलाड़ी जूनियर लेवल पर कई रिकॉर्ड हैं सिद्धार्थ के नाम राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय शॉटपुटर सिद्धार्थ चौधरी ने जूनियर स्तर पर एशिया में स्वर्ण सहित छह अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। उनके नाम अंडर-18 इंडिया रिकॉर्ड, जूनियर साउथ एशियन रिकॉर्ड और यूथ नेशनल रिकॉर्ड भी हैं। सिद्धार्थ के पिता एवं कोच मंजीत सिंह का दावा है कि राज्य की विभिन्न उपलब्धियों के लिए घोषित करीब 15-20 लाख रुपए की पुरस्कार राशि अभी बकाया है। परिवार के अनुसार, इस संबंध में कई बार खेल विभाग और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन पुरस्कार राशि नहीं मिल सकी। स्पोर्ट्स मीडिया कोर्स भी करेंगे : अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना स्थित हाई प्वाइंट यूनिवर्सिटी ने सिद्धार्थ की प्रतिभा को पहचान दी। विवि ने चार वर्ष की उच्च शिक्षा और खेल के लिए करीब 6 करोड़ रु. की स्कॉलरशिप दी है। सिद्धार्थ अंतरराष्ट्रीय लेवल के कोचों के साथ तैयारियां शुरू कर दी हैं।
दुनिया का 80% कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है। इससे अमेरिका बैठे-बिठाए अरबों कमाता है। दिल्ली समिट में तय हुआ है कि BRICS के देश आपस में स्थानीय करेंसी में पेमेंट पर फोकस बढ़ाएंगे। इसे डी-डॉलराइजेशन, यानी डॉलर का दबदबा घटाने की कोशिश माना जा रहा है।आखिर डॉलर कैसे बना ग्लोबल करेंसी, अमेरिका इससे अरबों कैसे कमाता है और क्या BRICS देश इस दबदबे को रौंद पाएंगे; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी … **** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और विपुल शर्मा ----------- BRICS से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… दुश्मन देशों को एक टेबल पर लाए, चीन से पहलगाम की निंदा कराई; BRICS समिट से भारत के 5 बड़े हासिल 18वां BRICS समिट रविवार को खत्म हो गया। पुतिन-जिनपिंग जैसे नेता दिल्ली से लौट चुके हैं। दो दिन, 12 देशों के शीर्ष नेता, हजारों डेलीगेट्स, दर्जनों इवेंट और सबकी सहमति से पारित हुआ एक डिक्लेरेशन। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका के कैलिफोर्निया में करनाल के युवक रोहित (22) ने भारतीय मूल की युवती शालिनी ठाकुर (38) की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को भी गोली मारकर सुसाइड कर लिया। शालिनी की मां का आरोप है कि रोहित उनकी बेटी से शादी करना चाहता था, लेकिन दोनों की उम्र में 16 साल का अंतर था। इसी वजह से परिवार ने शादी से इनकार कर दिया था। हालांकि, रोहित के परिवार ने शालिनी पर अलग आरोप लगाए हैं। रोहित के चाचा सत्यवान का कहना है कि दोनों को जिस बंदूक से गोली लगी, वह शालिनी ने ही करीब 6-7 महीने पहले रोहित को गिफ्ट की थी। शालिनी रोहित से अब तक 30 से 35 लाख रुपए ले चुकी थी और उसके पास रोहित का एक वीडियो था, जिसके जरिए वह उसे ब्लैकमेल कर रही थी। शालिनी ने ही रोहित को उकसाया था। अब जानिए रोहित के चाचा सत्यवान ने क्या आरोप लगाए… युवती के हिमाचल से होने का दावा सत्यवान ने बताया- शालिनी भारत में कहां की रहने वाली है, यह हमें नहीं पता। मेरा अंदाजा है कि वह हिमाचल से है। उसकी मां है, लेकिन पिता नहीं हैं। मां-बेटी अमेरिका में रहती थीं। शालिनी का काम लड़कों को अपने जाल में फंसाना और उनसे पैसे ऐंठना था। उसने मतलौडा (पानीपत) के रहने वाले एक युवक को भी फंसाया था। रोहित के साथ भी ऐसा ही हुआ। दिवाली पर आने की बात कही थी सत्यवान ने बताया कि अगर वह हमें घटना के बारे में बता देता तो हम उसका हल निकालते और उसे वापस भी बुला लेते। उसने कहा था कि वह दिवाली पर आएगा। यह युवती ब्लैकमेल करने वाली प्रवृत्ति की है। उसकी उम्र 38 साल है, जबकि रोहित 22 साल का था। उस शालिनी ने अब तक शादी नहीं की थी। रोहित सारे पैसे शालिनी को दे रहा था सत्यवान ने बताया कि रोहित की एक साल की कमाई वहीं रह गई थी। 35 से 40 लाख रुपए तो अपने आप बन गए। वह सारे पैसे उसे ही दे रहा था। इतना ही नहीं, रोहित ने चार बार गाड़ी बदली थी। एक बार गाड़ी के लिए हमने भी पांच लाख रुपए दिए थे। रोहित को तो वह शालिनी खा गई। शालिनी के कुत्तों को रोहित संभालता था सत्यवान ने यह भी आरोप लगाया कि अपार्टमेंट की दूसरी चाबी भी शालिनी ने ही हमारे रोहित को दी थी, ताकि वह किसी भी समय वहां आ-जा सके। इसके अलावा, उस शालिनी ने दो कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें खाना डालने के लिए भी वह रोहित से कहती थी। अब जानिए सुरक्षा एजेंसी ने घटना को लेकर क्या बताया… एक साल से शालिनी का पीछा करने का आरोप शालिनी की मां सुदेश कुमारी के अनुसार, शालिनी आर्डन आर्केड इलाके के एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थीं। उनके पति की दो साल पहले मौत हो गई थी। शालिनी उनकी इकलौती संतान थी। रोहित उसके काम की जगह पर डिलीवरी लेकर आता था। वह शालिनी से शादी करना चाहता था, लेकिन उम्र के अंतर के कारण उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद रोहित नाराज हो गया और पीछा करना नहीं छोड़ा। रोहित के पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती रोहित करनाल के जुंडला का रहने वाला था। उसके पिता राजेश जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती हैं। रोहित भी उनकी इकलौती संतान थी। रोहित 2023 में एरिजोना के रास्ते (डंकी रूट) अमेरिका गया था। अमेरिकी बॉर्डर पुलिस ने उसे पकड़ा था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया। वह डोरडैश डिलीवरी का काम करता था।
ज्वेरेव यूएस ओपन चैंपियन: जर्मन खिलाड़ी ने अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी बेन शेल्टन को दी मात, कड़े मुकाबले में जीते
Panchkula News: अमेरिका भेजने के नाम पर 20 लाख लेने का आरोप, वीजा कंसल्टेंट रेनू शर्मा को जमानत
अमेरिका भेजने के नाम पर 20 लाख लेने का आरोप, वीजा कंसल्टेंट रेनू शर्मा को जमानत
रेलवे स्टेशन पर क्लॉक रूम नहीं, अमेरिकी पर्यटक ने सिर पर बैग रख किया विरोध
Satara Railway Station News: सतारा रेलवे स्टेशन पर क्लॉक रूम न मिलने से नाराज अमेरिकी पर्यटक ने सिर पर बैग रखकर जताया विरोध. प्रशासन ने दिया यह जवाब...
करियर की रेस में दशकों से यह धारणा सबसे आगे रही है कि अगर आपके बायोडाटा पर हार्वर्ड, एमआईटी, स्टैनफोर्ड या प्रिंसटन जैसी दुनिया की सबसे मशहूर आइवी लीग यूनिवर्सिटीज का ठप्पा नहीं है, तो कॉरपोरेट जगत में करोड़ों के पैकेज का सपना देखना मुश्किल है। हालांकि, अमेरिका के उच्च शिक्षा जगत से सामने आए फोर्ब्स की ताजा टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग के आंकड़ों ने इस पारंपरिक सोच को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। रिपोर्ट के हैरान कर देने वाले आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि शानदार कमाई और सुरक्षित भविष्य के लिए किसी विश्वविख्यात संस्थान का नाम होना अब कोई अनिवार्य शर्त नहीं रह गया है। साधारण दिखने वाले क्षेत्रीय और छोटे अमेरिकी कॉलेजों से डिग्री लेने वाले छात्र भी अपने करियर के एक दशक पूरे होते-होते दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों के पूर्व छात्रों के लगभग बराबर कमाई कर रहे हैं।फोर्ब्स टॉप-500 रैंकिंग का बड़ा खुलासा: छोटे कॉलेजों के पास भी करोड़ों की कमाई का फॉर्मूलाफोर्ब्स की इस विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के टॉप-500 संस्थानों की सूची में जो कॉलेज सबसे निचले पायदान पर हैं, वहां से निकले ग्रेजुएट्स भी अपनी डिग्री पूरी करने के 10 साल बाद औसतन 95 लाख रुपये से अधिक का सालाना पैकेज उठा रहे हैं। अगर तुलनात्मक नजरिए से देखें तो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसे शीर्ष वैश्विक संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले पेशेवर अपने करियर के दसवें साल में औसतन 1.15 करोड़ रुपये सालाना कमाते हैं। इसके मुकाबले इस सूची में आखिरी पायदान यानी 500वें नंबर पर काबिज ओहायो के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में स्थित मेरिएटा कॉलेज (Marietta College) के पूर्व छात्र 10 साल के पेशेवर अनुभव के बाद सालाना लगभग 1 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। यह मामूली 15 से 20 लाख रुपये का अंतर यह साबित करने के लिए काफी है कि सामान्य स्तर के समझे जाने वाले कॉलेज भी छात्रों को एक मजबूत और टिकाऊ करियर देने में पूरी तरह सक्षम हैं।लिस्ट के सभी 500 संस्थानों का औसत वेतन ₹86 लाख पार: कौशल बनाम कॉलेज का टैगइस अध्ययन का सबसे मजबूत पहलू यह है कि फोर्ब्स की 500 कॉलेजों की पूरी सूची में शामिल किसी भी संस्थान के ग्रेजुएट की 10 साल बाद की औसत सालाना आय 86 लाख रुपये से कम नहीं पाई गई। इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि आज के आधुनिक जॉब मार्केट में नियोक्ताओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की प्राथमिकता डिग्री जारी करने वाले कॉलेज के नाम से ज्यादा उम्मीदवार के वास्तविक तकनीकी ज्ञान, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक कौशल पर टिक गई है। छोटे कॉलेजों में फैकल्टी का छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान, व्यावहारिक इंटर्नशिप के अवसर और स्थानीय उद्योग जगत से सीधे जुड़ाव ने छात्रों को इस काबिल बना दिया है कि वे आइवी लीग के स्नातकों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।सिर्फ शुरुआती पैकेज देखकर फैसला न लें: अल्मनाई नेटवर्क और ब्रांड वैल्यू की अपनी ताकतहालांकि यह रिपोर्ट कम मशहूर संस्थानों की बड़ी सफलता को रेखांकित करती है, लेकिन शिक्षा और करियर विशेषज्ञ छात्रों को सिर्फ सैलरी पैकेज देखकर ही कॉलेज चुनने से बचने की हिदायत देते हैं। हार्वर्ड, येल या एमआईटी जैसे बड़े संस्थानों में दाखिला लेने के कई ऐसे अदृश्य और दीर्घकालिक लाभ होते हैं जो किसी भी वेतन आंकड़े में तुरंत दर्ज नहीं होते। इन दिग्गज संस्थानों का वैश्विक स्तर पर फैला बेहद मजबूत पूर्व छात्र नेटवर्क (Alumni Network) जीवनभर छात्रों के लिए वेंचर कैपिटल फंडिंग, अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व के अवसर और कॉरपोरेट बोर्डरूम के दरवाजे खोलता है। एक प्रतिष्ठित ब्रांड का नाम उम्मीदवार को भीड़ से अलग पहचान दिलाता है, जो मंदी या वैश्विक संकट के दौर में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनता है।आसमान छूती फीस और 33 लाख का एजुकेशन लोन: डिग्री का बढ़ता वित्तीय जोखिमदूसरी तरफ, अमेरिका की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद परेशान करने वाला सच भी सामने आ रहा है। एजुकेशन डेटा इनिशिएटिव की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में उच्च शिक्षा की लागत दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ चुकी है। आज के समय में केवल एक बैचलर डिग्री पूरी करने के लिए एक सामान्य छात्र को औसतन 33 लाख रुपये से अधिक का एजुकेशन लोन अपने सिर पर लेना पड़ रहा है। जब युवा भारी-भरकम कर्ज के साथ अपने करियर की शुरुआत करते हैं, तो उन पर मानसिक और वित्तीय दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में करोड़ों रुपये की फीस देकर नामी कॉलेज जाने के बजाय किफायती फीस वाले छोटे कॉलेजों से पढ़ाई करके लगभग बराबर का पैकेज हासिल करना छात्रों के लिए वित्तीय रूप से ज्यादा समझदारी भरा सौदा साबित हो रहा है।मार्क जकरबर्ग का सवाल: क्या आज के कॉलेज भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हैं?उद्योग जगत के दिग्गज भी अब इस बहस में खुलकर अपनी राय रख रहे हैं कि सिर्फ एक महंगी डिग्री सफलता की पक्की गारंटी नहीं हो सकती। मेटा (फेसबुक) के संस्थापक मार्क जकरबर्ग का मानना है कि पारंपरिक कॉलेज जाने का सबसे बड़ा लाभ नए और प्रतिभाशाली लोगों से मिलना तथा एक मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाना है। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक शिक्षा प्रणाली पर गहरा सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या मौजूदा पाठ्यक्रम छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और तेजी से बदलती जॉब मार्केट की अगली पीढ़ी की चुनौतियों के लिए सच में तैयार कर पा रहे हैं? तकनीक के इस युग में सेल्फ-लर्निंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड एक्सपीरियंस और व्यावहारिक कौशल ने महंगी डिग्रियों के पुराने एकाधिकार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
अमेरिका ने कमर्शियल जहाजों की हवाई सुरक्षा का दायरा घटाया, अब मिलेंगे सिर्फ 2 तय स्लॉट
पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर संकट और गहरा गया है। ईरान की बढ़ती आक्रामकता और लगातार होते ड्रोन व मिसाइल हमलों के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने कमर्शियल तेल टैंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा में भारी कटौती कर दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने विशेष रूप से लड़ाकू विमानों और ड्रोनों द्वारा दी जाने वाली रातभर की निरंतर हवाई निगरानी को सीमित करने का फैसला किया है। अब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के इस लाइफलाइन रूट से गुजरने वाले जहाजों को चौबीसों घंटे सुरक्षा मिलने के बजाय केवल प्रतिदिन दो तय ट्रांजिट स्लॉट में ही अमेरिकी हवाई छत्रछाया उपलब्ध कराई जाएगी।होर्मुज जलडमरूमध्य में नया सुरक्षा प्रोटोकॉल: रातभर की हवाई निगरानी पर ब्रेकफाइनेंशियल टाइम्स की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना मई 2026 से ही जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में ओमान के तटवर्ती रास्तों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सघन हवाई सुरक्षा प्रदान कर रही थी। इस रणनीतिक कवच का उद्देश्य ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के हमलों के बावजूद दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखना था। पुरानी व्यवस्था के तहत जहाज ऑपरेटर अमेरिकी नौसेना के कोऑर्डिनेशन सेंटर से संपर्क साधकर विशेष कोऑर्डिनेट्स और समय हासिल करते थे, जिसके दौरान अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के विमान आसमान से उनकी निगरानी करते हुए सुरक्षित रास्ता निकालते थे। हालांकि, सितंबर 2026 की शुरुआत से इस पूरे सुरक्षा तंत्र को अचानक संकुचित कर दिया गया है।नौसेना समन्वय केंद्र की एडवाइजरी: अब जहाजों को तय समय पर ही निकालना होगा काफिलानेवल कोऑपरेशन एंड गाइडेंस फॉर शिपिंग (NCAGS) द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री सलाहकारों और शिपिंग कंपनियों को भेजे गए गोपनीय ईमेल से इस बड़े नीतिगत बदलाव की पुष्टि हुई है। इस नए आदेश में साफ कहा गया है कि पहले मिलने वाली रातभर की लंबी सुरक्षा विंडो अब समाप्त कर दी गई है। जहाजों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे हर दिन निर्धारित किए गए दो विशेष टाइम स्लॉट के मुताबिक ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। यदि कोई टैंकर इन तय स्लॉट्स से पहले या बाद में इस संकीर्ण जलमार्ग में प्रवेश करता है, तो उसे अमेरिकी सेना से किसी भी तरह का हवाई बैकअप नहीं मिल सकेगा। मध्य पूर्व में तैनात यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस मुद्दे पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि जारी की गई आधिकारिक नौसैनिक एडवाइजरी अपने आप में अंतिम और स्पष्ट निर्देश है।तेहरान और वाशिंगटन में सीधा टकराव: मिसाइलें, ड्रोन और टैंकरों पर जवाबी प्रहारसुरक्षा घेरे को सीमित करने का यह अप्रत्याशित कदम ऐसे नाजुक मोड़ पर उठाया गया है जब खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हमले खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। बीते बुधवार को ईरान ने आधिकारिक रूप से दावा किया कि उसने अपने पांच जहाजों पर हुए कथित अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में दो अमेरिकी नौसैनिक जहाजों और आठ विशाल तेल टैंकरों पर सटीक हमले किए हैं। इसके जवाब में अमेरिकी सैन्य सूत्रों ने पुष्टि की कि ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हाल ही में अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिसके चलते दोनों महाशक्तियों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है।यूकेएमटीओ की चेतावनी: दुबई और इराक के समुद्री तटों तक फैला युद्ध का दायराब्रिटेन की नौसैनिक निगरानी एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी इस पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया है। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी कमांडो और समुद्री ड्रोन अब केवल होर्मुज के मुहाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुबई के अपतटीय क्षेत्रों और इराक के निकटवर्ती समुद्री मार्गों में भी व्यापारिक जहाजों को लगातार निशाना बना रहे हैं। 28 फरवरी 2026 को क्षेत्रीय संघर्ष भड़कने के बाद से अब तक 70 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर घातक हमले दर्ज किए जा चुके हैं। इस अभूतपूर्व समुद्री असुरक्षा के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों का बीमा प्रीमियम आसमान छू रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक रेस्टोरेंट के बाहर भारतीय मूल की युवती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोप हरियाणा के करनाल के रहने वाले 22 साल के युवक पर लगा। घटना के बाद युवक अपनी गाड़ी से फरार हो गया। पुलिस पीछा करते हुए उस तक पहुंची तो युवक भी गाड़ी में मृत मिला। उसने खुद को गोली मारी हुई थी। युवती की पहचान शालिनी ठाकुर (38) के तौर पर हुई है। अभी यह नहीं पता चल पाया है कि वह कहां की रहने वाली है। करनाल का रोहित 2023 में एरिजोना के रास्ते (डंकी रूट) अमेरिका गया था। अमेरिकी बॉर्डर पुलिस ने उसे पकड़ा था, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया। मर्डर-सुसाइड की घटना 8 सितंबर की है। आरोप है कि रोहित शालिनी पर शादी करने का दबाव बना रहा था। हालांकि, शालिनी के परिवार ने उम्र में 16 साल का अंतर होने की वजह से इनकार कर दिया था। सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… एक साल से शालिनी का पीछा करने का आरोप शालिनी की मां सुदेश कुमारी के अनुसार, शालिनी आर्डन आर्केड इलाके के एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थीं। उनके पति की दो साल पहले मौत हो गई थी। शालिनी उनकी इकलौती संतान थी। रोहित उसके काम की जगह पर डिलीवरी लेकर आता था। वह शालिनी से शादी करना चाहता था, लेकिन उम्र के अंतर के कारण उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद रोहित नाराज हो गया और पीछा करना नहीं छोड़ा। रोहित के पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती रोहित करनाल के जुंडला का रहने वाला था। उसके पिता जुंडला अनाज मंडी में आढ़ती हैं। रोहित भी उनकी इकलौती संतान थी। वह 2023 में डंकी रूट से अमेरिका गया था। वह डोरडैश डिलीवरी का काम करता था।
शी चिनफिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' का रखा प्रस्ताव, अमेरिका और यूरोप पर बिना नाम लिए कसा तंज
चिनफिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' का प्रस्ताव रखा और अमेरिका व पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए, 'जिसकी लाठी, उसकी भैंस' के सिद्धांत को अमान्य बताया।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स देशों के बीच नया बीमा सिस्टम और अनाज का साझा बाज़ार बनाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने आर्थिक सहयोग मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया, साथ ही न्यू डेवलपमेंट बैंक के कार्यों की सराहना की।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका के सामने ईरान की शर्त!
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि ओमान के साथ नए समुद्री रास्ते का समझौता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का संकेत नहीं है. उन्होंने बताया कि ओमान में होने वाली बैठक में नए रास्ते के नक्शे और समझौते की जानकारी साझा की जाएगी. अराघची के मुताबिक होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौटना होगा. क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी भी स्थानीय देशों को देने की बात कही गई है.
नामी यूनिवर्सिटी को टक्कर दे रहे अमेरिका के आम कॉलेज
अक्सर युवाओं और उनके माता-पिता को लगता है कि एक शानदार करियर और भारी-भरकम सैलरी के लिए हार्वर्ड, प्रिंसटन या एमआईटी जैसे किसी बड़े और नामी कॉलेज से पढ़ाई करना बेहद जरूरी है। अमेरिका की फोर्ब्स टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग की हालिया रिपोर्ट ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। इस रिपोर्ट के …
दिल्ली से 6000 KM दूर समंदर में एक्सरसाइज, भारत-अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया आए साथ
क्वाड के चार देशों ने 3 और 4 सितंबर 2026 को टोक्यो में टेबलटॉप एक्सरसाइज किया, जिसमें प्राकृतिक आपदा के वक्त साझा रसद क्षमता और राहत समन्वय पर फोकस रहा. इस अभ्यास से आईपीएलएन के एसओपी बनाने की दिशा में अहम प्रगति हुई और क्षेत्रीय संकट में मानवीय मदद को तेज करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई.
अमेरिका ने होर्मुज में टैंकरों की हवाई सुरक्षा का समय घटाया
अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल टौंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा, खासकर हवाई सुरक्षा के समय को सीमित कर दिया है। यह कदम इस अहम समुद्री रास्ते पर चलने वाले जहाजों पर ईरान के हमलों में बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका मई से …
अंबानी की कंपनी ले रही अमेरिकी बैंक से ₹18268 करोड़, क्यों आई ये नौबत? इसलिए होगा फंड का इस्तेमाल
गैर-बैंकिंग ऋणदाता जियो क्रेडिट को दिसंबर तक बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) से 18,268 करोड़ रुपये की पूंजी मिलने की उम्मीद है, जिससे उसकी एयूएम में पांच गुना वृद्धि हो सकती है। इस निवेश से कंपनी अपनी व्यावसायिक रणनीति की समीक्षा करेगी और प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (एयूएम) को 1.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य रखेगी।
'ताकतवर होने से कोई सही नहीं हो जाता', जिनपिंग ने PM मोदी को कहा थैंक्यू, अमेरिका को मैसेज
BRICS समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ, अंतरराष्ट्रीय नियमों, UN, AI और आर्थिक सहयोग को लेकर चीन का विजन सामने रखा. उन्होंने BRICS देशों से एकजुट होकर दुनिया में स्थिरता और विकास के लिए काम करने की अपील की.
फरीदकोट के गुरु तेग बहादुर नगर निवासी लाल चंद को साइबर ठगों ने अपना शिकार बनाया। 6 सितंबर को लाल चंद के व्हाट्सऐप पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को अमेरिका में रहने वाला उनका भांजा पवन कुमार बताया और कहा कि 22 सितंबर को भारत आ रहा है। आरोपी ने कहा कि वह अपने माता-पिता को सरप्राइज देना चाहता है, इसलिए इस बात की जानकारी उन्हें न दी जाए। ठग ने लाल चंद को पैसे भेजने का झांसा देकर उनके एचडीएफसी बैंक खाते की डिटेल मांगी। बातों में आकर लाल चंद ने अपने बैंक चेक की फोटो व्हाट्सऐप पर भेज दी। इसके बाद आरोपी ने 18,00,550 रुपये खाते में ट्रांसफर करने की एक फर्जी रसीद लाल चंद को भेजी। पास्पोर्ट अटकने का बहाना बनाकर ऐंठे 14.10 लाख रुपये रसीद भेजने के बाद आरोपी ने फोन कर कहा कि उसका पासपोर्ट अटक गया है और उसे तुरंत पैसों की जरूरत है। उसने दावा किया कि उसके द्वारा भेजे गए पैसे जल्द ही खाते में आ जाएंगे। भांजे की परेशानी समझकर लाल चंद ने आरोपी के बताए खाते में 14,10,00,0 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपी ने जब दोबारा 1 लाख रुपये की मांग की, तो लाल चंद को शक हुआ। असली भांजे से बात करने पर खुली पोल संदेह होने पर लाल चंद ने अमेरिका में रह रहे अपने असली भांजे पवन कुमार के नंबर पर संपर्क किया। भांजे ने बताया कि उसने न तो कोई फोन किया है और न ही पैसे मांगे हैं। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने दर्ज किया केस, खाते खंगाले जा रहे थाना साइबर क्राइम के एसएचओ इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह ने बताया कि लाल चंद की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट (IT Act) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उन बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी की पहचान के प्रयास जारी हैं और जल्द ही पीड़ित के पैसे रिकवर कराने की कोशिश की जाएगी।
पश्चिम एशिया: होर्मुज के पास ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हमला, एक की मौत-तीन घायल; US की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस
अमेरिका ने नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 10 लाख डॉलर की दी मंजूरी
वॉशिंगटन, अमेरिका ने नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की पहचान करने में मदद के लिए अतिरिक्त 1 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी है। इसके साथ ही, आपदा से निपटने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से दी जाने वाली कुल मदद 5 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई है। अमेरिकी फोरेंसिक विशेषज्ञ नेपाली पुलिस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
11 सितंबर 2001 (9/11) को अमेरिका के ट्विन टावर्स और पेंटागन पर हुए भीषण आतंकी हमले ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया था। इस हमले के मास्टरमाइंड और कुख्यात आतंकी संगठन अलकायदा (Al-Qaeda) के सरगना ओसामा बिन लादेन को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और FBI) के डीक्लासिफाइड दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिका की धरती पर हवाई जहाजों से तबाही मचाने से काफी पहले ही भारत लादेन और उसके आतंकी नेटवर्क की 'प्राइम हिट लिस्ट' में शामिल था। लादेन केवल पश्चिमी देशों से ही नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक प्रगति को भी गहरे आघात पहुंचाने की साजिश रच रहा था।1990 के दशक से ही रची जा रही थी भारत विरोधी साजिशअमेरिकी आतंकवाद रोधी विशेषज्ञों और खुफिया दस्तावेजों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि 1996 में अफगानिस्तान लौटने के बाद ओसामा बिन लादेन ने भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया था:पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुटों से गठजोड़: लादेन ने हरकत-उल-अंसार (बाद में हरकत-उल-मुजाहिदीन), लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत विरोधी आतंकी संगठनों को धन, हथियार और ट्रेनिंग मुहैया कराई थी।कंधार विमान अपहरण (IC-814) का कनेक्शन: 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के अपहरण के पीछे अलकायदा और तालिबान का सीधा साजो-सामान सहयोग था। इस घटना के बाद मसूद अजहर की रिहाई ने भारत के खिलाफ अलकायदा के मंसूबों को और हवा दी थी।भारतीय दूतावासों की रेकी: खुफिया फाइलों से यह खुलासा भी हुआ कि 1998 में केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर किए गए बम धमाकों के दौर में ही अलकायदा ने दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों में भारतीय मिशनों की भी निगरानी करवाई थी।लादेन की 'हिट लिस्ट' में कौन से भारतीय ठिकाने थे?खुफिया विश्लेषकों के अनुसार, अलकायदा का मकसद भारत में किसी बड़े प्रतीकात्मक और आर्थिक केंद्र पर हमला कर व्यापक अस्थिरता पैदा करना था:परमाणु और रक्षा प्रतिष्ठान: लादेन भारत की परमाणु क्षमताओं को लेकर हमेशा चिंतित रहता था और उसके लड़ाके भारतीय सैन्य और अनुसंधान ठिकानों की जानकारियां जुटाने की फिराक में थे।आर्थिक राजधानी मुंबई और दिल्ली के प्रशासनिक केंद्र: 9/11 हमले से पहले ही लादेन के नेटवर्क ने भारत के प्रमुख वित्तीय संस्थानों, संसद भवन और वाणिज्यिक केंद्रों को निशाना बनाने की योजना पर काम शुरू किया था, जिसे बाद में उसके सहयोगी संगठनों ने अंजाम देने की कोशिश की।धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल: भारत के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने के लिए प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आत्मघाती हमलों का खाका तैयार किया गया था।9/11 के बाद भारत ने दुनिया को दी थी चेतावनी9/11 हमले के तुरंत बाद भारत के तत्कालीन नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट किया था कि आतंकवाद को 'क्षेत्रीय' या 'वैश्विक' के रूप में बांटना एक भारी भूल है। भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का दंश झेल रहा था, जिसे पश्चिमी देश लंबे समय तक स्थानीय कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानते रहे। सीआईए के दस्तावेजों से यह प्रमाणित हुआ कि लादेन का नेटवर्क एक एकीकृत वैश्विक जिहादी एजेंडे पर काम कर रहा था, जिसमें अमेरिका और भारत दोनों उसके प्राथमिक दुश्मन थे।एबटाबाद रेड से बरामद फाइलों में भी मिले थे भारत से जुड़े दस्तावेजमई 2011 में जब अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में स्थित लादेन के गुप्त ठिकाने पर हमला कर उसे ढेर किया था, तब वहां से हजारों कंप्यूटर हार्ड ड्राइव और कागजात बरामद हुए थे। इन दस्तावेजों में भी भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों, कश्मीर मुद्दे और भारत में जिहादी नेटवर्क के विस्तार की रणनीतियों से जुड़ी कई गुप्त डायरियां और पत्र मिले थे। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि अपनी मौत के समय तक लादेन भारत के खिलाफ साजिशें रचने में लगातार लगा हुआ था।भारतीय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता ने टाले बड़े खतरेभारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (R&AW) और आईबी (IB) ने 1990 और 2000 के शुरुआती दशकों में पश्चिमी खुफिया तंत्र के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग कर अलकायदा के कई खतरनाक मंसूबों को समय रहते नाकाम किया। आज भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और सुरक्षा एजेंसियां अलकायदा के भारतीय उपमहाद्वीप विंग (AQIS) के स्लीपर सेल्स पर लगातार शिकंजा कस रही हैं।
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
ग्लोबल चेस लीग के चौथे सीजन में मैग्नस कार्लसन को पहली हार मिली। बेंगलुरु में शनिवार को खेले गए मुकाबले में त्रिवेणी कॉन्टिनेंटल किंग्स के अलीरेजा फिरोजा ने उन्हें हराया। इसके बावजूद कार्लसन की अल्पाइन पाइपर्स 18 मैच पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंच गई। रविवार को खिताबी मुकाबले में पाइपर्स का सामना गंगेज ग्रैंडमास्टर्स से होगा। कार्लसन की चेतावनी के बाद अलीरेजा ने दी मात टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले मैग्नस कार्लसन ने मजाकिया अंदाज में अलीरेजा फिरोजा को कम समय में हराने की चेतावनी दी थी। दोनों के बीच पहली बाजी ड्रॉ रही थी। शनिवार को अलीरेजा ने कार्लसन को हराकर टूर्नामेंट में उनकी जीत का सिलसिला तोड़ दिया। जीत के बाद अलीरेजा ने कहा, ‘यह टूर्नामेंट हमारे लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। हमारी टीम में फाइनल जीतने का दम था, लेकिन कुछ करीबी मुकाबलों ने खेल बिगाड़ दिया। दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी के खिलाफ यह जीत बेहद खास है।’ आनंद की टीम पहले ही हो चुकी थी बाहर टूर्नामेंट के 10वें दिन विश्वनाथन आनंद की PBG अलास्कन नाइट्स और त्रिवेणी कॉन्टिनेंटल किंग्स फाइनल की दौड़ से बाहर हो गई थीं। हालांकि, अलास्कन नाइट्स ने अपने आखिरी मैच में टेबल-टॉपर गंगेज ग्रैंडमास्टर्स को हराकर बड़ा उलटफेर किया। अमेरिकन गैंबिट्स का फाइनल में पहुंचने का सपना टूटा बेंगलुरु में खेल रही होम फेवरिट टीम अमेरिकन गैंबिट्स के पास फाइनल में जगह बनाने का मौका था। उसे मुंबा मास्टर्स के खिलाफ कम से कम 8 अंकों के अंतर से जीत की जरूरत थी। टीम के जावोखिर सिंदारोव ने मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव को हराकर 3 अंक जुटाए। दानिल डुबोव और बिबिसारा असाउबाएवा की बाजियां ड्रॉ रहीं। लेकिन सारा खादेम, मार्क एंड्रिया मौरीज़ी और भारत के निहाल सरीन अपने-अपने मैच हार गए। निहाल अच्छी बढ़त पर थे, लेकिन समय समाप्त होने के कारण प्रानेश एम से हार गए। इस नतीजे के बाद गैंबिट्स तीसरे स्थान के मैच में मुंबा मास्टर्स से भिड़ेगी। ------------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… 94 साल में पहली बार ऐसी क्रिकेट सीरीज:दिल्ली में मैच फिर भी विदेशी होगी टीम इंडिया, पिच भी अफगान टीम तय करेगी भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन टी-20 मैचों की सीरीज आज से शुरू हो रही है। तीनों मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होंगे। मुकाबले भले ही भारत में हो रहे हैं लेकिन इस सीरीज में होम टीम अफगानिस्तान की होगी और भारतीय टीम विजिटर्स होगी। पूरी खबर
9/11 से पहले ही ओसामा बिन लादेन की 'हिट लिस्ट' में था भारत! अमेरिकी खुफिया एजेंसी का सनसनीखेज दावा
Osama Bin Laden News: 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले से पहले ही भारत आतंकवादी संगठन अल-कायदा के सरगना और खूंखार पाकिस्तानी आतंकी ओसामा बिन लादेन के निशाने पर था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) द्वारा सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों से यह बड़ा खुलासा हुआ है। दस्तावेजों के मुताबिक, बिन लादेन कई देशों में आतंकी हमले कराने की योजना पर विचार कर रहा था, जिसमें भारत भी शामिल था। CIA ने 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर बिन लादेन से जुड़े 70 से ज्यादा प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफ जारी किए हैं।इनमें 100 से अधिक पन्नों की खुफिया जानकारीशामिल है। ये दस्तावेज 1998 से लेकर 2001 तक की अवधि से जुड़े हैं। ये बताते हैं कि अमेरिका को उस दौर में बिन लादेन और अल-कायदा के संभावित हमलों को लेकर लगातार चेतावनियां मिल रही थीं। 1998 के प्रेसिडेंशियल ब्रीफ में बताया गया है कि बिन लादेन भारत समेत कई देशों पर हमले करना चाहता था।1998 के दस्तावेज में भारत का जिक्रCIA द्वारा जारी दस्तावेजों में 28 अगस्त 1998 की एक प्रेसिडेंशियल ब्रीफ बेहद महत्वपूर्ण है। इसका शीर्षक Bin Ladin Terrorist Network Still a Threat (बिन लादेन का आतंकवादी नेटवर्क अभी भी एक खतरा है) था। इस खुफिया रिपोर्ट में बताया गया था कि ओसामा बिन लादेन कई देशों में हमले करवाना चाहता था।भारत के साथ ये नाम भी थे शामिललिस्ट में भारत, पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा का नाम शामिल था। रिपोर्ट में संभावित रूप से नाइजीरिया का भी जिक्र किया गया था। हालांकि, दस्तावेज के कुछ हिस्से अभी भी ब्लैकआउट यानी रेडैक्ट किए गए हैं। इसमें भारत के किसी खास शहर, संस्थान या व्यक्ति को संभावित निशाना बताए जाने की जानकारी नहीं है। साथ ही किसी संभावित हमले की निश्चित तारीख या विस्तृत ऑपरेशनल प्लान का भी जिक्र नहीं किया गया है।60 देशों में नेटवर्क का इस्तेमाल करने की तैयारीरिपोर्ट के मुताबिक, बिन लादेन अफगानिस्तान में बैठे अपने सहयोगियों और आतंकी नेटवर्क के जरिए दुनिया के कई हिस्सों में हमले कराने की क्षमता रखता था। CIA के आकलन में कहा गया था कि अल-कायदा प्रमुख कम से कम 60 देशों में मौजूद लोगों और सहयोगी संगठनों के नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकी हमलों के लिए कर सकता है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में बिन लादेन का पहले से मौजूद नेटवर्क इस बात को विश्वसनीय बनाता था कि वह इन क्षेत्रों में अमेरिकी हितों को भी निशाना बना सकता है।अमेरिकी हमलों के बाद भी कायम था अल-कायदा नेटवर्कदस्तावेज के अनुसार, अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में अल-कायदा के ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जाने के बावजूद बिन लादेन और उसके साथ मौजूद अन्य आतंकी नेता बच गए थे। CIA का आकलन था कि उनका कम्युनिकेशन नेटवर्क अभी भीएक्टिव था। कुछ आतंकीट्रेनिंग शिविरों में गतिविधियां दोबारा शुरू हो गई थीं। जबकि कुछ अन्य कैंपों को दूसरी जगहों पर ले जाया जा रहा था। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई थी कि बिन लादेन अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन के खिलाफ भी नए हमले कराने की कोशिश कर सकता है।9/11 से पहले अमेरिका को मिल रही थीं लगातार चेतावनियांCIA द्वारा जारी इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों को 1998 से 2001 के बीच बिन लादेन और अल-कायदा के खतरे को लेकर कई बार खुफिया जानकारी दी गई थी। इन प्रेसिडेंशियल ब्रीफ का सिलसिला बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति कार्यकाल से शुरू होकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल तक पहुंचता है।CIA ने दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि यह रिलीज अमेरिका के इतिहास के सबसे संवेदनशील खुफिया दस्तावेजों में से एक को लेकर अभूतपूर्व पारदर्शिता प्रदान करती है। खासकर उस दौर को लेकर जो अमेरिका के इतिहास के सबसे भयावह दिनों में से एक से पहले और उसके तुरंत बाद का था।क्या हुआ था 11 सितंबर 2001 को?11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकियों ने अमेरिका में चार यात्री विमानों का अपहरण कर लिया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराए। हमले के बाद दोनों विशाल इमारतें पूरी तरह ढह गईं और हजारों लोगों की जान चली गई। 9/11 हमले ने पूरी दुनिया की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीति को बदल दिया। अब सार्वजनिक किए गए CIA दस्तावेज यह भी सामने लाते हैं कि इस हमले से वर्षों पहले ही ओसामा बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क कई देशों को संभावित निशाने के तौर पर देख रहा था।ये भी पढ़ें- VIDEO: 'ख्वाब हो तुम या...'; BRICS में दिखा बॉलीवुड का रंग! किशोर कुमार के जबरा फैन निकले मलेशियाई PM अनवर इब्राहिम, हिंदी गायकी का वीडियो वायरल
अमेरिका ने बाढ़ पीड़ितों की पहचान करने में नेपाल की मदद के लिए अतिरिक्त 10 लाख डॉलर की दी मंजूरी
वॉशिंगटन, 13 सितंबर . अमेरिका ने नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की पहचान करने में मदद के लिए अतिरिक्त 1 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी है. इसके साथ ही, आपदा से निपटने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से दी जाने वाली कुल मदद 5 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई है. अमेरिकी फोरेंसिक विशेषज्ञ ... Read more
अमेरिका-ईरान जंग पर क्या बोले मसूद पेजेशकियान? देखें US TOP-10
आजतक से बात करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर बगैर उकसावे के हमला किया. अमेरिका को लगा था कि वो वेनेजुएला की तरह 24 घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा कर लेगा. अपनी कटपुतली की सरकार बना लेगा लेकिन अमेरिका के हमले ने ईरान को एकजुट कर दिया. और अमेरिका के उम्मीद के विपरीट ईरान की सेना ने जान की बाजी लगाकर अम्रिका का मुकाबला किया.
BRICS में अमेरिका की मनमानी रोकने की तैयारी!
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने BRICS को अमेरिकी एकतरफा नीतियों और प्रतिबंधों के खिलाफ महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने डॉलर पर निर्भरता कम करने, सदस्य देशों के बीच निवेश और सहयोग बढ़ाने तथा दुनिया को एकध्रुवीय व्यवस्था से दूर ले जाने पर जोर दिया।
मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे औद्योगिक गलियारे के पहले चरण में यूपीडा द्वारा 24 बड़े भूखंड आवंटित किए जाएंगे, जिनमें से 5 का आवंटन हो चुका है। अमेरिकी कंपनी बॉल कॉर्पोरेशन 20 हेक्टेयर भूमि पर 2913 करोड़ रुपये का निवेश कर एल्युमीनियम केन बनाएगी, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है।
ना अमेरिका से डर और ना दबाव में रिश्ते, ब्रिक्स से भारत ने दुनिया को दे दिया बड़ा संदेश
भारत ने ब्रिक्स के जरिए बता दिया है कि ना तो हम किसी के डर से और ना ही दबाव में किसी के साथ रिश्ते बना या खराब कर सकते हैं। भारत ने अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता का सीधा संदेश दिया है।
ब्रिक्स पर दुनिया की नजर: अमेरिका से पाकिस्तान तक मीडिया ने माना-पश्चिम को चुनौती का मंच; मतभेद भी बड़ी चुनौतीbrics summit india global media western dominance diplomacy
अमेरिका में भारतीय महिला की हत्या: आरोपी ने महीनों पीछा कर बरसाईं गोलियां; फिर खुद को भी मार डाला, क्या मामला?indian origin woman shalini thakur killed california stalker
क्या BRICS से खत्म होगा अमेरिका का दबदबा, ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान के दावे में कितना दम?
भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट में यूं तो दुनिया के कई देश शामिल हुए हैं, लेकिन जिन देशों की चर्चा है, वो हैं चीन, रूस, ईरान और भारत। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ब्रिक्स को लेकर बड़ा दावा किया है।
New Delhi, 12 सितंबर . India की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति को विदेश मामलों के विशेषज्ञ केपी फैबियन ने बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है. उन्होंने कहा कि ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे तनाव के बीच घिरे देशों के बावजूद साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना ... Read more
भारत-ईरान रिश्तों से अमेरिका तक, ईरानी राष्ट्रपति का Exclusive इंटरव्यू
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक के साथ खास बातचीत की. इस खास बातचीत में उन्होंने अमेरिका, ईरान और दोनों देशों के बीच के तनाव को लेकर तमाम सवालों पर खुलकर बात की.
BRICS डिक्लेरेशन भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, अमेरिकी विश्लेषक कुगैलमैन का बड़ा बयान
अमेरिका के दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में जारी न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमैटिक उपलब्धि है।
'ताइवान को हथियार दिए तो रद्द होगी मुलाकात', चीन का अमेरिका को अल्टीमेटम
सूत्रों के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की तैयारियों के बीच चीन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक रेड लाइन है.
'UAE या क्षेत्रीय देशों से समस्या नहीं, अमेरिकी ठिकाने असली मुद्दा हैं', ईरान के राष्ट्रपति ने कहा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि हमें यूएई से कोई समस्या नहीं है. हमें क्षेत्र के किसी भी देश से कोई समस्या नहीं है. हमें समस्या अमेरिकी अड्डों से है जो इन देशों में स्थित हैं.
अमेरिका में कार के चारों पहिए चुरा ले गए चोर, जाते-जाते छोड़ दिया ऐसा नोट, पढ़ भारतीय महिला भी रह गई हैरान!
ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की क्या स्थिति है? राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने बताया
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका के साथ टकराव के बीच बातचीत जारी रखने और शांति स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है. उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी आक्रामक भूमिका नहीं निभाई.
BRICS से डॉलर को चुनौती? ईरान ने बताया अमेरिका के खिलाफ अपना पूरा प्लान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक के साथ खास इंटरव्यू में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने पर बात की. उन्होंने कहा कि BRICS के सदस्य देश बहुत सारे मुद्दों पर एक-दूसरे का सहयोग कर सकते हैं.
अमेरिका को लेकर क्या बोले राष्ट्रपति पेजेश्कियान? देखें दुनिया आजतक
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के सामने झुकेगा नहीं, बल्कि डट कर मुकाबला करेगा....ब्रिक्स समिट में शामिल होने दिल्ली आए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि हम आज़ाद रहें और वो अपने बुरे इरादे तेहरान पर थोपना चाहता है. देखें...
एपल के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की बुकिंग भारत सहित दुनियाभर में शुरू हो गई है। भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1.65 लाख रुपए और आईफोन 18 प्रो मैक्स की कीमत 1.80 लाख रुपए रखी गई है। कंपनी ने इस बार अपने प्रो मॉडल लाइनअप में नया A20 Pro चिपसेट, एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम और मेन कैमरे में पहली बार DSLR कैमरे वाली वेरिएबल अपर्चर टेक्नोलॉजी दी है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारत में इन दोनों मॉडल्स की कीमतें काफी ज्यादा हैं। आईफोन्स 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स के स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स ग्राफिक्स में देखें… एपल Siri AI में 6 बड़े अपडेट्स स्क्रीन देखकर काम करना: स्क्रीन पर क्या दिख रहा है, सिरी उसे समझकर सीधे वही टास्क पूरा कर देती है। निजी डेटा से सटीक जवाब: ईमेल, मैसेज या कैलेंडर से जानकारी निकालकर आपकी फ्लाइट, मीटिंग या प्लान बता देती है। एप्स के अंदर काम: सिर्फ एप खोलती ही नहीं, बल्कि फोटो एडिट करके किसी को भेजने जैसा अंदर का काम भी कर देती है। इंसानों जैसी बात: अटक-अटक कर बोलने या अधूरा वाक्य बोलने पर भी बात आसानी से समझ लेती है। बिना बोले टाइपिंग: स्क्रीन के नीचे डबल टैप करके अब सिरी को लिखकर भी कमांड दे सकते हैं। चैटजीपीटी सपोर्ट: मुश्किल सवालों के जवाब, टेक्स्ट या रेसिपी के लिए सीधे 'चैटजीपीटी' से मदद ले लेती है। एपल के नए वियरेबल डिवाइसेस
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दिल्ली के भारत मंडपम में हुए 18वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम दिखेंगे। मंत्री ने इसे बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका से जोड़ा और अमेरिका पर भी निशाना साधा। जयवीर सिंह ने कहा कि अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता। इससे भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी प्रभावित होती हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात में आर्थिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है और भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने दिल्ली में हुए इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत बताया। मंत्री ने सम्मेलन को लेकर एक तीखा बयान भी दिया। उन्होंने कहा, यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अमेरिका का मनोबल तोड़ने का काम है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और वैश्विक आर्थिक शक्ति-संतुलन पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। जनसुनवाई के दौरान मंत्री से उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों के बारे में भी पूछा गया। इस पर जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में चुनाव तय समय पर होंगे। महिलाओं को एक लाख रुपये देने की योजना पर विपक्ष के सवालों पर उन्होंने सरकार का पक्ष रखा। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी व्यवस्था पहले से कर रखी है। भाजपा जनता के लिए समर्पित सरकार है। विपक्ष द्वारा सरकार की योजनाओं को 'रेवड़ी' बताए जाने पर जयवीर सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले यह बताए कि अगर वह ऐसी घोषणाएं करेगा तो उनके लिए पैसे की व्यवस्था कहां से करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की योजनाओं के पीछे वित्तीय व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है। गोंडा में हुई घटना को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। चुनावी दौर में सभी राजनीतिक दल और नेता जनता के हितैषी होने का दावा करेंगे, लेकिन जनता के हित में कौन कितना खरा उतरता है, इसका फैसला आखिरकार जनता ही करेगी।
क्या अमेरिका में आमने-सामने होंगे पुतिन-जेलेंस्की? G20 समिट में हो सकती है मुलाकात
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मियामी में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान आमने-सामने मुलाकात की संभावना बन रही है.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मणिपुर की लोकटक झील में नौका विहार किया
इंफाल, 12 सितंबर . India में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने अपने दो दिवसीय मणिपुर दौरे के दौरान Saturday को बिष्णुपुर जिले स्थित पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील लोकटक में नौका विहार किया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, कोलकाता की काउंसल जनरल कैथी गाइल्स-डियाज और अन्य अधिकारियों के ... Read more
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पास बैठे थे जिनपिंग, ब्रिक्स समिट से पीएम मोदी ने दे दिया संदेश; अमेरिका को भी दो टूक
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में फैसले लेने की मौजूदा व्यवस्था ऐसी है, जिसमें ताकत और फैसले कुछ देशों के हाथ में ज्यादा है, जबकि कई देश उन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का मौका कम मिलता है।
क्या अमेरिका, रूस और चीन के साथ मिलकर जी-3 बना सकता है? समझिए इसके पीछे की बदलती कूटनीति!
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीतिक स्वायत्तता वाली कूटनीति से जहां अमेरिका, चीन, रूस तीनों बड़े देश घबराए हुए हैं, वहीं फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश इसमें ही अपना कूटनीतिक भविष्य देख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का भी मानना है कि यदि भारत अपने मिशन में कामयाब हो जाता है तो इससे न केवल बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि अमेरिका, रूस और चीन के हथियारों के सौदागरों के हाथ-पांव भी ठिठक जाएंगे। चूंकि समसामयिक वैश्विक परिदृश्य में अरब-खाड़ी देशों में अमेरिका-यूरोप की इज्जत दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि रूस-चीन का शह ईरान को हासिल है। इससे पहले यूक्रेन में रूस-चीन-उत्तर कोरिया की सैन्य साख दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि अमेरिका-यूरोप मिलकर यूक्रेन को भड़काए हुए हैं। वैसे तो चीन को ताइवान में और भारत को पीओके में उलझाने की साजिश पश्चिमी-पूर्वी देशों के इशारे पर रचाई गई, लेकिन भारत और चीन के सूझबूझ वाले नेतृत्व ने समय रहते ही स्थिति को संभाल लिया। इससे हथियारों के वैश्विक सौदागरों और ड्रग्स सप्लायर्स का भारत-चीन से खफा होना स्वाभाविक है। इससे होने वाले घाटे की भरपाई के लिए ही तो अमेरिका ने दोनों देशों के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़ दिया। # मोदी डॉक्ट्रिन के चक्रव्यूह में हर ओर से घिरा महसूस करने लगा है अमेरिका और जब इसमें भी अमेरिका विफल हो गया और मोदी डॉक्ट्रिन के चक्रव्यूह में हर ओर से घिरा महसूस करने लगा तब उसने ग्रुप-तीन (G-3) का नया पैंतरा बदला। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के व्हाइट हाउस के जी तीन प्लान पर रूस के क्रेमलिन ने भी रजामंदी जताई है और बताया है कि पुतिन और जिनपिंग ने नवंबर में शेनजेन में होने वाले APEC सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ G3 बैठक करने पर चर्चा की है। अगर अमेरिका, रूस और चीन एक साथ बातचीत की मेज पर बैठ जाते हैं और किसी सहमति तक पहुंचते हैं, तो ये दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने उस ‘याल्टा सिस्टम’ का अंत होगा, जिसने यूएन सुरक्षा परिषद को बनाया था। इसे भी पढ़ें: ईरान, सऊदी अरब और UAE के मतभेदों के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, BRICS में साझा बयान पर बनी आम सहमति कहने का तात्पर्य यह कि अब अमेरिका, रूस और चीन परस्पर मिलकर दुनिया के अन्य मजबूत देशों भारत, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील आदि को अपने अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे पर चलाएंगे और इनसे मुनाफा कमाएंगे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की जो वैश्विक चाल चली है, उसमें भारत विरोधी महारथियों का उलझना और छटपटाना तय है। वहीं, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों को ये त्रिपक्षीय पहल नागवार गुजरी तो फिर दुनियावी कश्मकश और दिलचस्प हो जाएगी। # वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों और कूटनीतिक विरोध के हल की कुंजी है अमेरिका, रूस और चीन के ही पास यूं तो वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों और कूटनीतिक विरोध के कारण अमेरिका, रूस और चीन का मिलकर 'जी-3' (G-3) बनाना वर्तमान परिदृश्य में अत्यधिक असंभावित चिंतन है। लेकिन जब मुख्य षड्यंत्रकारी राष्ट्र अमेरिका और उसके मनमौजी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ ही रूस-चीन युगलबंदी के समक्ष घुटने टेकते हुए ऐसा आकर्षक प्रस्ताव दे रहे हैं तो रूस-चीन दोनों के लिए भी यह आकर्षक डील होगी। चूंकि अमेरिका ने ही भारत-रूस की दोस्ती के मुकाबले चीन की तरक्की में योगदान दिया है तो चीन के लिए भी तो यह और अधिक फायदे का सौदा होगा। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका-रूस में तनावपूर्ण संबंध हैं, और अमेरिका ने रूस पर कई प्रतिबंध भी लगा रखे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों के कारण अमेरिका और रूस के संबंध बहुत खराब हैं, ऐसे में बात कहां तक बढ़ेगी नवंबर 2006 तक इंतजार करना होगा। जहां तक अमेरिका और चीन की बात है तो दोनों देशों में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है। अमेरिका और चीन आर्थिक और सैन्य मामलों में दुनिया के मुख्य प्रतिद्वंद्वी देश हैं। खास बात यह कि अमेरिका, रूस और चीन में विचारधारा का अंतर है। अमेरिका एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन करता है, जबकि रूस और चीन की शासन प्रणालियां उससे अलग हैं। ऐसे में जी-तीन की छतरी के नीचे आने के लिए तीनों देशों को भारी कीमत चुकानी होंगी और किसी सर्वमान्य निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले कई तरह के कूटनीतिक पापड़ बेलने पड़ेंगे। # दुनिया के लगभग सभी प्रगतिशील देश समझ चुके हैं अमेरिकी चतुराई देखा जाए तो पहले अमेरिका और सोवियत संघ की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में, फिर अमेरिका और चीन की अंतर्राष्ट्रीय तनातनी में और रूस के साथ चीन के खड़े होने और भारत द्वारा भी रूस की इज्जत करने से अमेरिका बेचैन है। वहीं यूरोप भी अमेरिका की चतुराई समझ चुका है। इससे जी-7 (G-7) और नाटो जैसे उसके पुराने हथियार अब एशियाई- यूरोपीय मामलों में भोथरे साबित हो चुके है। फिर उसने जी-20 (G-20) की चाल चली लेकिन यहां भी भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद कर अमेरिकी अरमानों पर पानी फेर दिया। इधर, भारत की रूसी सहभागिता, चीन की मौजूदगी, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान आदि की मौजूदगी वाले एससीओ (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) में बढ़ती दिलचस्पी से अमेरिकी चौधराहट को एक नया खतरा उत्पन्न हो गया है। वैसे तो अमेरिकी डीप स्टेट ने भारत-चीन संबंधों को बिगाड़ने की पूरी चाल चली, लेकिन परिपक्व भारतीय कूटनीति के सामने अकसर वह लाचार दिखा। वहीं, भारत के पड़ोसी देशों को भड़काकर भी वह अपना उल्लू सीधा नहीं कर सका। यही वजह है कि भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता से पहले रूस-चीन के लिए उसने जी-तीन का नया चारा डाल दिया। # रूस के राष्ट्रपति पुतिन के पास भी अमेरिका से हाथ मिलाने की हैं कई बड़ी वजहें ऐसे में जहां रूस के राष्ट्रपति पुतिन के पास भी अमेरिका से हाथ मिलाने की अपनी बड़ी वजहें हैं। वास्तव में पुतिन की मजबूरी है कि करीब साढ़े चार साल से चल रहे यूक्रेन युद्ध में वो उलझे हुए हैं, जिसने रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और मोर्चे पर भी कोई साफ जीत नजर नहीं आ रही है। वहीं दूसरी तरफ, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग काफी मजबूत स्थिति में हैं। तभी तो वो बिश्केक, काहिरा और दिल्ली का दौरा खत्म करने के बाद सीधे व्हाइट हाउस, अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि शी जिनपिंग की स्थिति मजबूत है और वह हर मामले में सधी हुई चाल चलते हैं। इसलिए ट्रंप उनके मुरीद हैं। मुंह में राम, बगल में छुरी वाले अंदाज में। # भारत अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास दर की रफ्तार बढ़ाकर G-3 के वैश्विक कुचक्रों का कर सकता है मुकाबला हालांकि, भारत अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास दर की रफ्तार बढ़ाकर खुद को इतना मजबूत बना सकता है कि G-3 का कोई भी देश भारत को नजरअंदाज करने की स्थिति में न रहे। यानी भारत अपनी आर्थिक ताकत में इजाफा करके स्थिति को कभी भी अपने पक्ष में कर लेगा। वहीं, जिस तरह रूस और चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल करते हुए भी अमेरिका से सीधा फायदा निकालते आए हैं, ठीक वैसे ही भारत भी सभी बड़े देशों से अपने हितों के हिसाब से सीधे रिश्ते साधकर वैश्विक मेज पर अपनी जगह मजबूत रखेगा। इसके दृष्टिगत भारत स्मार्ट और व्यवहारिक कूटनीतिक का सहारा लेगा। इसके अलावा, भारत फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया मजबूत मोर्चा खड़ा कर सकता है और इस प्रकार जो मिडिल पावर्स का नया फ्रंट बनेगा, उससे भारत लाभांवित होगा। दरअसल, ये वो देश हैं जो दुनिया की कमान सिर्फ तीन देशों के हाथों में सिमटे, ऐसा नहीं होने देना चाहते, इसलिए परस्पर एकजूट हैं। # अमेरिका, रूस और चीन का जी-3 (G-3) महज एक परिकल्पना, जमीनी हकीकत से दूर है यह त्रिकोणीय तालमेल यह बात दीगर है कि भू-राजनीतिक स्तर पर अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक संभावित जी-3 (G-3) त्रिकोणीय तालमेल या महान शक्ति समझौते की जो चर्चाएँ सामने आ रही हैं, वह अभी कोई औपचारिक और स्थायी गठबंधन नहीं है। चूंकि तीनों देशों के शीर्ष नेताओं की सीधी बातचीत होगी, इसलिए अमेरिकी नेतृत्व बहुपक्षीय संगठनों के बजाय सीधे रूस और चीन के राष्ट्र प्रमुखों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क साधने की नीति को प्राथमिकता पर रखता है। विश्लेषकों का भी मानना है कि दुनिया की ये तीन सबसे बड़ी महाशक्तियाँ आपस में मिलकर वैश्विक व्यवस्था के नियमों को तय करने के लिए एक त्रिकोणीय ढांचा बना सकती हैं, ताकि वैश्विक सत्ता का संतुलन बरकरार रहे। चूंकि इन तीनों देशों के पास विशाल सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक ताकत है, जिसके बल पर वे बड़े भू-राजनीतिक सौदे कर सकते हैं। यह एक प्रकार की रणनीतिक सौदेबाजी होगी, उससे ज्यादा कुछ नहीं। # रूस और चीन के पारस्परिक सहयोग से अमेरिका को टेकने पड़ेंगे घुटने चूंकि रूस और चीन अपने पारंपरिक सहयोग या ब्रिक्स (BRICS) जैसे मंचों को छोड़कर अमेरिका के पाले में पूरी तरह नहीं आ रहे हैं; बल्कि वे इन मंचों के साथ-साथ वाशिंगटन से भी सीधे संवाद की गुंजाइश तलाश रहे हैं। ताकि ब्रिक्स का अंत नहीं हो और अमेरिका से रणनीतिक लाभ भी मिलता रहे। गौर करने वाली बात यह है कि तीनों देशों के बीच बुनियादी मतभेद हैं। खासकर व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और क्षेत्रीय आधिपत्य जैसे गंभीर मुद्दों पर तीनों देशों के हित एक-दूसरे के विपरीत हैं। इसलिए क्या जी-3 एक पक्का गठबंधन बनेगा, इसमें संदेह है। जब इसे लेकर कोई औपचारिक संधि होगी, या कोई लिखित समझौता होगा या फिर नाटो जैसा कोई नया सैन्य गुट बनेगा, तब यह समझा जाएगा कि अमेरिका, चीन और रूस अब एक दूसरे के करीब जा चुके हैं। चूंकि, यह नया राग अलापना अमेरिका की मजबूरी है, क्योंकि वह अरब-खाड़ी देशों में रूसी-चीनी चक्रव्यूह में घिर चुका है और निकलने का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में रूस और चीन बहुत अच्छे रणनीतिक और आर्थिक साझेदार हैं, जिन्हें अक्सर 'दोस्त' या 'जिगरी दोस्त' कहा जाता है। इस दोस्ती का मुख्य कारण भी अमेरिका विरोध है, क्योंकि दोनों देश अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना चाहते हैं। चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। रूस चीन को तेल और प्राकृतिक गैस बेचता है, जबकि चीन से उसे औद्योगिक वस्तुएं मिलती हैं। वहीं यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के दृष्टिगत रूस का चीन पर आर्थिक और राजनीतिक रूप से भरोसा और निर्भरता दोनों बढ़ी है। यद्यपि 1960 और 1970 के दशक में दोनों कम्युनिस्ट देशों के बीच वैचारिक मतभेद और सीमा विवाद भी रहे हैं, जिसे उन्होंने समझदारी पूर्वक दूर कर लिया है। इसे औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं कहा जाता है, बल्कि यह साझा हितों पर आधारित एक मजबूत रणनीतिक तालमेल यानी रणनीतिक साझेदारी है। # अमेरिका ने कस रखी है चीन की व्यापारिक नकेल वहीं, अमेरिका ने चीन पर विभिन्न व्यापारिक नीतियों और उत्पादों के तहत अलग-अलग दर से टैरिफ लगाए हैं, जिसमें अक्टूबर 2025 में घोषित 100% अतिरिक्त टैरिफ और पहले से चले आ रहे धारा 301 (Section 301) के शुल्क शामिल हैं। इसकी प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:- पहला, अतिरिक्त टैरिफ: अक्टूबर 2025 में अमेरिका ने चीन पर चीनी सामानों की डंपिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स के विवाद के कारण 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आदेश दिया था। दूसरा, पुराने शुल्क: साल 2018 से चले आ रहे धारा 301 (Section 301) के तहत लगाए गए बुनियादी शुल्क अभी भी कई चीनी उत्पादों पर लागू हैं। तीसरा, विशेष उत्पाद: कुछ खास उत्पादों (जैसे बैटरी सामग्री) पर यह दरें 205% तक भी पहुंच चुकी हैं। चौथा, कानूनी फेरबदल: साल 2026 की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ आपातकालीन टैरिफ को अमान्य भी करार दिया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत जारी है। # सैन्य और आर्थिक ताकत के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से है काफी आगे यह ठीक है कि सैन्य और आर्थिक ताकत के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से आगे और दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है। जहां तक सैन्य रैंकिंग (Military Ranking) की बात है तो यह इस प्रकार है:- पहला, ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग: रक्षा और सैन्य ताकत की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है और रूस दूसरे स्थान पर आता है। दूसरा, रक्षा बजट: अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 850 बिलियन डॉलर है, जो रूस के बजट (लगभग 135 बिलियन डॉलर) से काफी अधिक है। तीसरा, अमेरिका की ताकत वायुसेना: अमेरिका के पास लगभग 13,000 विमान और 1,790 से ज्यादा फाइटर प्लेन हैं, जो इसे दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेना बनाते हैं। चौथा, वैश्विक पहुंच: अमेरिका के पास उन्नत तकनीक, विशाल नौसेना और दुनिया भर में फैले सैन्य ठिकाने हैं। जहां तक रूस की ताकत की बात है तो वह निम्नलिखित है:- पहला, परमाणु हथियार: परमाणु हथियारों के मामले में रूस सबसे आगे है। उसके पास करीब 6,000 परमाणु बम और खतरनाक मिसाइलें मौजूद हैं। दूसरा, जमीनी ताकत: रूस के पास जमीन पर मुकाबला करने के लिए 10,000 से अधिक टैंक और एस-400 व एस-500 जैसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम हैं। निष्कर्ष यह है कि कुल मिलाकर अमेरिका अधिक शक्तिशाली और व्यापक रूप से सक्षम है, जबकि रूस के पास परमाणु और रणनीतिक रक्षा बल बहुत मजबूत हैं। इसलिए यदि तीनों देश एक साथ आएंगे तो वह मध्यम दर्जे वाले देशों के उभार में कितना बाधक बनेंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। # आखिर ब्रिक्स की बैठक शुरू होने से पहले ही अमेरिका ने क्यों अलापा नया राग? राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन के साथ मिलकर एक नया 'G-3' गुट बनाने की घोषणा करना, अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की एक जबरदस्त बिसात समझी जा सकती है। क्योंकि अमेरिका अब यह मान चुका है कि बिना चीन और रूस की मदद के वह भारत पर लगाम नहीं लगा सकता है और ऐसा किए बिना वह अपना मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय अस्तित्व भी नहीं बचा पाएगा। इसलिए अब ट्रंप सीधे पुतिन और शी जिनपिंग से हाथ मिलाकर वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा को बदलना चाहते हैं। चूंकि भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जैसे वैश्विक नेता एक छत के नीचे होंगे और एग्रीकल्चर, हेल्थ सेक्टर और डिजिटल दुनिया में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे, साथ ही बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत करेंगे। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन के साथ मिलकर G-3 गुट बनाने का जो ऐलान किया है, वह दुनिया के मध्यम दर्जे के उन देशों को खुली चुनौती है, जो इन तीनों देशों के अंतर्विरोध का फायदा उठाकर लाभ पीट रहे हैं। चूंकि वर्ष 2019 के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं, इसलिए पूरी दुनिया की नजरें पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी हुई हैं। चूंकि दोनों देश पिछले कुछ सालों से बॉर्डर टेंशन और ट्रेड खींचतान से जूझ रहे हैं, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली का ये मंच दोनों पड़ोसी देशों के बीच की कड़वाहट कम करेगा और व्यापारिक रिश्तों को फिर से पटरी पर लाएगा। इसके अलावा ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के आने से भी इस सम्मेलन की हलचल काफी बढ़ गई है। चूंकि ब्रिक्स हमेशा से खुद को अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबदबे के खिलाफ एक बड़े विकल्प के तौर पर दिखाता आया है. लेकिन जैसे-जैसे इस संगठन का विस्तार हुआ है, इसके अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी भी खुलकर सामने आने लगी है। इस वक्त ईरान और UAE के बीच तनातनी चल रही है। जहां ईरान चाहता है कि ब्रिक्स का ये मंच अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के खिलाफ खुलकर बोले और सख्त बयान दे, वहीं दूसरी तरफ यूएई इस विवाद में पड़ने के बजाय अपनी समुद्री सीमा और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को ज्यादा अहमियत दे रहा है। दोनों देशों की इसी खींचतान की वजह से मई में दिल्ली में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान तक जारी नहीं हो सका था। चूंकि एक तरफ ब्रिक्स अपने अंदरूनी झगड़ों में उलझा हुआ है तो दूसरी तरफ वाशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को के बीच एक नया समीकरण बन रहा है। वैसे भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ये मानते रहे हैं कि अगर वो पुतिन और शी जिनपिंग से सीधे बातचीत करें, तो दुनिया के बड़े-बड़े विवाद पलक झपकते ही सुलझ सकते हैं। लेकिन ट्रंप की इस पर्सनल कूटनीति से अमेरिका का अपना विदेश मंत्रालय, वहां की दूरदर्शी संसद और यूरोपीय सहयोगी देश काफी घबराए हुए हैं। वहीं, यूरोप को भय है कि ट्रंप यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा को दांव पर लगाकर रूस से हाथ मिला लेंगे। वहीं एशियाई देशों को चिंता है कि चीन के साथ कोई बड़ी डील करने के चक्कर में अमेरिका इस इलाके की सुरक्षा का अपना वादा कहीं तोड़ न दे। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किलटेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।45 मिनट में दो Hard सवाल? Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए। ‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)Grok से भारत के नियम पूछ रहा था आयरिश शख्स, वायरल हुई बातचीत तो Elon Musk ने भी दे दिया जवाब
अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद कर रहा चीन? US को क्यों संदेह
अमेरिका यह भी देख रहा है कि कहीं चीन से मिली सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से ईरान अमेरिकी युद्धपोतों की निगरानी तो नहीं कर रहा। हाल के हमलों में ईरान ने अमेरिकी विमानवाहक पोत और दूसरे युद्धपोतों पर मिसाइलें दागी हैं।
क्यों एक नहीं हो सकते भारत, रूस और चीन? 'अमेरिका विरोधी' एजेंडे पर फंसा पेच
भारत ने मजबूती से रुख अपनाया कि BRICS पश्चिम-विरोधी नहीं, बल्कि गैर-पश्चिमी मंच होना चाहिए. भारत के इस रुख का समर्थन ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे सदस्यों ने भी किया.
अमेरिका से पढ़ाई, पिता के बाद मिला पद, कौन हैं प्रिंस रहीम आगा खान?
प्रिंस रहीम आगा खान पंचम इन दिनों अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन उनकी पहचान केवल धार्मिक नेतृत्व तक सीमित नहीं है. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी खास है. उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित फिलिप्स एकेडमी एंडोवर से पढ़ाई करने के बाद ब्राउन यूनिवर्सिटी से तुलनात्मक साहित्य में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की.
'अमेरिका के हमले से ईरान एकजुट', आजतक से इंटरव्यू में बोले पेजेशकियान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. ये इंटरव्यू ऐसे वक्त में आया है जब जंग जारी है, ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करने दिल्ली आए पेजेश्कियान से आजतक ने एक्सक्लूसिव बात की. आजतक से बात करते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर बगैर उकसावे के हमला किया अमेरिका को लेकर लगा था कि वो वेनेजुएला की तरह चौबीस घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा कर लेगा, अपनी कठपुतली सरकार बना लेगा, लेकिन अमेरिका के हमले ने ईरान को एकजुट कर दिया और अमेरिका की उम्मीद के विपरीत ईरान की सेना ने जान की बाजी लगाकर अमेरिका का मुकाबला किया. पेजेश्कियान ने कहा कि हम परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहते. फिर भी यह आरोप क्यों लगाया जा रहा है कि हम परमाणु हथियार बनाना चाहते हैं?
लादेन से बगदादी तक... UN में अमेरिका ने गिनाया आतंकियों का हिसाब
9/11 की 25वीं बरसी पर UNSC में अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया. खास बात यह रही कि जब अमेरिकी प्रतिनिधि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का हिसाब बता रहे थे, उस वक्त पाकिस्तान भी वहीं मौजूद था.
जीतू यादव को भाजपा के एक अन्य पार्षद कमलेश कालरा के नाबालिग बेटे के साथ घर में घुसकर मारपीट और अभद्रता के मामले में नाम सामने आने के बाद पार्टी से बाहर कर दिया गया था।
आईआईटी छात्र ने साउथ एशिया स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट जीता, अब अमेरिका में गाड़ेंगे झंडे
आईआईटी के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के एमटेक छात्र पी विष्णु तेजा ने 2026 सोसाइटी ऑफ पेट्रोलियम इंजीनियर्स साउथ एशिया रीजनल स्टूडेंट पेपर कॉन्टेस्ट के मास्टर्स डिवीजन में पहला स्थान हासिल किया है।
BRICS समिट में अमेरिका पर भड़के रूस और ईरान, मेजबान भारत के लिए क्या होंगी चुनौतियां
रूस और ईरान ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की और समूह से ऐसी रणनीतियां बनाने का आग्रह किया जो चुनौतियों का सामना कर सकें।
India vs US job: भारत में नौकरी पाना अमेरिका से भी मुश्किल?
एक टेकी ने भारत और अमेरिका में नौकरी के इंटरव्यू की तुलना करते हुए दावा किया है कि भारत में कम सैलरी वाली नौकरी के लिए भी उम्मीदवारों को कई मुश्किल इंटरव्यू राउंड से गुजरना पड़ता है.
पेजेश्कियान का अमेरिका-इजराइल को दो टूक संदेश, बोले- दबाव और दादागीरी के आगे नहीं झुकेगा ईरान
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उनका देश अत्याचार के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल को निशाने पर लेते हुए कहा कि ईरान डराने-धमकाने की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा।
अमेरिकी अभिनेत्री रेटा शॉ: सख्त मिजाज किरदारों से दर्शकों का दिल जीता, हॉलीवुड में बनाई अलग पहचान
New Delhi, 12 सितंबर . अमेरिकी Actress रेटा शॉ को 1960 व 1970 के दशक के सबसे लोकप्रिय टेलीविजन शो में मजबूत, सख्त मिजाज और कामकाजी महिलाओं का किरदार निभाने के लिए जाना जाता है. टेलीविजन सीरीज ‘द घोस्ट एंड मिसेज मुइर’ में हाउसकीपर मार्था ग्रांट और 1964 की फिल्म ‘मैरी पॉपिंस’ में कुक मिसेज ... Read more
भारत-चीन संबंधों को लेकर घबराया यूएसए, ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर अमेरिकी अखबारों में क्या छपा?
भारत-चीन संबंधों को लेकर घबराया यूएसए, ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर अमेरिकी अखबारों में क्या छपा?US world media on brics summit 2026 india china relations are hot topic
US Midterm Elections 2026: ट्रंप की लोकप्रियता से लेकर महंगाई तक, क्यों अहम है अमेरिका का मिड-टर्म चुनाव?
Russia पर प्रतिबंध और भारत पर Tariff से जुड़े विधेयक पर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अगले सप्ताह मतदान
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) अगले सप्ताह रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक बेहद कड़े और चर्चित विधेयक पर मतदान करने जा रही है। ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ नामक यह विधेयक यदि पारित हो जाता है, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के साथ-साथ रूसी तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर भारी टैरिफ (शुल्क) लगाने के व्यापक अधिकार प्रदान करेगा। यह विधेयक पिछले महीने अमेरिकी सीनेट द्वारा भारी बहुमत से पारित किया जा चुका है। अब प्रतिनिधि सभा की नियम समिति (Rules Committee) सोमवार को इस पर विचार करेगी और इसके बाद इसे सदन के पटल पर मतदान के लिए रखा जाएगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। यदि प्रतिनिधि सभा भी इसे पारित कर देती है तो यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस एवं रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर और कड़े प्रतिबंध लगाने का अधिकार देगा। इसके अलावा ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी बढ़ाया जा सकेगा। प्रतिनिधि सभा में अल्पमत के नेता हकीम जेफ्रीज समेत कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस विधेयक का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे ट्रंप को शुल्क लगाने के व्यापक और जोखिम भरे नए अधिकार मिल जाएंगे। डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स, डॉन बेयर और रिचर्ड नील ने शुक्रवार को एक संयुक्त बयान में कहा, ‘‘प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सदस्य यूक्रेन के समर्थन में पूरी मजबूती से खड़े हैं लेकिन ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ से फायदा होने के बजाय नुकसान अधिक होगा।’’ इसे भी पढ़ें: Explained Story | दोस्त, दुश्मन और ट्रंप फैक्टर... भारत के लिए BRICS में संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती | BRICS Summit 2026 उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक शुल्क लगाने के राष्ट्रपति के अधिकारों का बहुत अधिक विस्तार करेगा लेकिन रूस पर प्रतिबंध लगाना अनिवार्य नहीं बनाएगा। ये दोनों ही बातें अस्वीकार्य हैं। इन खामियों के कारण अमेरिकियों के लिए वस्तुएं महंगी होंगी और दीर्घकाल के लिहाज से यूक्रेन के लिए समर्थन कमजोर होगा।’’ प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन नेतृत्व ने पहले इस विधेयक को कार्यसूची से हटा दिया था लेकिन अब इसे आपात कदम के तौर पर नियम समिति के विचार के लिए फिर से लाया गया है। सीनेट की विदेश संबंध समिति की ‘रैंकिंग’ सदस्य जीन शाहीन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘यह बहुत अच्छी खबर है कि प्रतिनिधि सभा रूस पर बेहद जरूरी प्रतिबंध संबंधी विधेयक पर मतदान करेगी।’’ इसे भी पढ़ें: 25th Anniversary of 9/11 Attacks | 'आतंकवाद के पूरी तरह खात्मे तक साथ लड़ेंगे भारत-अमेरिका', पेंटागन स्मारक पर भारतीय राजदूत ने दी श्रद्धांजलि उन्होंने कहा, ‘‘पुतिन की युद्ध मशीन के कारण यूक्रेन के आम नागरिक लगातार मारे जा रहे हैं और यह विधेयक क्रेमलिन के खजाने पर बड़ी चोट करेगा। अब इसे पारित करने और पुतिन को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर करने का समय है।
2001 में अमेरिका में हुए वीभत्स 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पेंटागन स्थित राष्ट्रीय 9/11 स्मारक पहुँचकर पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका की ओर से आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया।इसे भी पढ़ें: Novak Djokovic बोले, सिनसिनाटी में जल्दी हारने से US Open की तैयारी के लिए मिला अतिरिक्त समय क्वात्रा ने एक संदेश में कहा कि जब तक आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक भारत और अमेरिका एकजुट होकर प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “आज से 25 साल पहले इसी दिन आतंकवादियों ने अमेरिका पर हमला किया था। आज हम उन हमलों के पीड़ितों को याद करते हैं और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने दुनियाभर में अनगिनत निर्दोष लोगों की जान ली है तथा इसे अंजाम देने वाले, इसका समर्थन करने वाले और इसे प्रायोजित करने वाले लोग साझा मानवता में निहित हर अच्छी और सभ्य भावना के खिलाफ खड़े हैं। क्वात्रा ने कहा, ‘‘ऐसे लोग करुणा, गरिमा और स्वयं सभ्यता के खिलाफ हैं।’’ इसे भी पढ़ें: Asha Bhosle के 93वें जन्मदिन पर रिलीज़ हुआ उनका आखिरी फ़िल्मी गाना Ae Meri Zindagi, म्यूज़िक वीडियो में दिखीं बिहाइंड-द-सीन्स झलकियाँ उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना करता आया है और इसके खिलाफ लड़ाई में हमेशा अग्रिम मोर्चे पर रहा है। क्वात्रा ने कहा, “हमारी नीति आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत और अमेरिका इस खतरे के खिलाफ एक साथ खड़े रहे हैं। जब तक आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक भारत और अमेरिका एकजुट होकर प्रयास जारी रखेंगे।
अमेरिका का वर्क वीजा लगवाने के नाम पर 9 लाख रुपए की धोखाधड़ी
नग्गल क्षेत्र के घाघरु गांव निवासी अजैब सिंह के बेटे हसन को अमेरिका का वर्क वीजा दिलाने के नाम पर 9 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने खन्ना स्थित एनएआई इमिग्रेशन सेंटर के 3 संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पीड़ित के अनुसार, मई 2025 में सोशल मीडिया विज्ञापन देखकर उन्होंने सेंटर संचालक बलप्रीत सिंह, सुखविंद्र सिंह और परमप्रीत कौर से संपर्क किया था। 35 लाख में सौदा तय हुआ, जिसमें 10 लाख एडवांस देने थे। पीड़ित ने मई 2025 में 5 लाख बैंक से और 4 लाख नकद (एग्रीमेंट के दौरान) कुल 9 लाख रुपए दे दिए। करीब 10-11 महीने बीतने पर भी वीजा नहीं लगा। जब रुपए वापस मांगे तो आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकियां दी।
Ambala News: अमेरिका भेजने के नाम पर 9 लाख रुपये हड़पे
अमेरिका भेजने के नाम पर 9 लाख रुपये हड़पे
अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने अमेरिकी सरकार के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी किए गए एक पोस्टर पर कड़ा एतराज जताया है। धामी ने आरोप लगाया है कि इस पोस्टर में पंजाबी और सिख समुदाय को कथित तौर पर निशाना बनाया गया है और इसके खिलाफ दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को विरोध पत्र भेजा गया है। साथ ही एसजीपीसी अध्यक्ष ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को भी पत्र लिखकर इस संवेदनशील मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाने की अपील की है। एसजीपीसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल चिंता-भाई चारे की खतरा एडवोकेट धामी ने चेतावनी दी कि इस तरह का व्यवहार विभिन्न प्रवासियों और समुदायों के बीच आपसी भाईचारे के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह सिख समाज के स्वाभिमान की रक्षा के लिए इस आपत्तिजनक व्यवहार का मुद्दा अमेरिकी प्रशासन के सामने मजबूती से रखे।
अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया एक विज्ञापन विवादों में घिर गया है। अमेरिकी सरकार की इस एजेंसी पर भारतीय-अमेरिकियों, सिखों और हिंदू समुदाय को निशाना बनाने तथा नस्लभेदी विचार फैलाने के आरोप लगे हैं। चौतरफा विरोध और नेताओं के कड़े एतराज के बाद आखिरकार विभाग को यह विवादित पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटानी पड़ी। वहीं, पोस्टर में पंजाबी और सिख समुदाय को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाने की अपील की है। क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विवाद? दरअसल, अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग सड़कों पर बिना लाइसेंस या बिना वैध दस्तावेजों के व्यवसायिक वाहन (जैसे ट्रक और बसें) चलाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ एक अभियान चला रहा था। इस अभियान के तहत विभाग ने सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार की गई कुछ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे। विवादित टैगलाइन: एक तस्वीर में भूरी दाढ़ी वाले एक व्यक्ति को दिखाया गया था, जिस पर लिखा था - हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता मिस्टर सिंह। 'ट्रांसफॉर्मर्स' के किरदारों का इस्तेमाल: अभियान को प्रचारित करने के लिए मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'ट्रांसफॉर्मर्स' के पात्रों का सहारा लिया गया। वीडियो में फिल्म के खलनायक 'मेगाट्रॉन' को दिखाया गया, जो सड़क हादसों और अपराधों में शामिल रहे कुछ ड्राइवरों (जिनमें हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार और जसवीर सिंह जैसे नाम शामिल थे) की रिहाई की मांग कर रहा था। एक अन्य तस्वीर में हीरो 'ऑप्टिमस प्राइम' को DHS का लोगो पहने दिखाया गया, जो दाढ़ी वाले व्यक्ति से कह रहा था- या तो खुद देश छोड़ दो (सेल्फ-डिपोर्ट), या अंजाम भुगतने को तैयार रहो। 'सेल्फ-डिपोर्टेशन' स्कीम से जुड़ा था अभियान यह पूरा विज्ञापन अमेरिकी सरकार के 'सीबीपी होम' नाम के एक विशेष कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। इस कार्यक्रम के तहत बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को अपनी मर्जी से अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सरकार ऐसे लोगों को देश छोड़ने के लिए यात्रा का खर्च और 2,600 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.15 लाख रुपए) का बोनस देने की पेशकश करती है। विवाद पर किसने क्या कहा? विज्ञापन में 'सिंह' सरनेम और दाढ़ी वाले व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने पर अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के संगठनों तथा राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी: गवर्नर गेविन न्यूसम (कैलिफोर्निया):उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक करार देते हुए कहा कि सरकार सिख समुदाय को निशाना बनाकर नस्लवादी दुष्प्रचार कर रही है। कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति (भारतीय-अमेरिकी सांसद): उन्होंने कहा कि अमेरिका में 1 लाख 60 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जिनका सरनेम 'सिंह' है। जब कोई सरकारी एजेंसी किसी खास सरनेम का मजाक उड़ाती है, तो इससे विदेशियों के प्रति नफरत बढ़ती है और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF): संगठन ने कहा कि 'सिंह' सरनेम वाले लोग हिंदू भी हैं, सिख भी हैं और सच्चे अमेरिकी भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सरकारी एजेंसी भारत-विरोधी और नस्लवादी सोच को बढ़ावा कैसे दे सकती है? संगठन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सिख कोएलिशन : सिख संगठन ने दुख जताते हुए कहा कि 9/11 की घटना के 25 साल बीत जाने के बाद भी सिखों को उनके पहनावे और पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा है और संदिग्ध नजरों से देखा जा रहा है। CoHNA (नॉर्थ अमेरिका के हिंदू संगठन): ने कहा कि कानून का पालन कराया जाना चाहिए, लेकिन किसी की पहचान या नाम का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले लोग किसी भी धर्म या जाति के हो सकते हैं। विज्ञापन हटने के बाद भी गुस्सा बरकरार चौतरफा दबाव और जनता के गुस्से को देखते हुए गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने विज्ञापन को सोशल मीडिया से डिलीट तो कर दिया है, लेकिन सिख और हिंदू संगठनों का कहना है कि केवल पोस्ट हटा देना काफी नहीं है। संगठनों की मांग है कि सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी समुदाय की पहचान को इस तरह गलत और नस्लवादी तरीके से पेश न किया जाए। धामी बोले-अमेरिका के विकास में पंजाबियों का अहम योगदान एडवोकेट धामी ने कहा कि अमेरिका के विकास और आर्थिक तरक्की में पंजाबियों ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और हुनर से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ट्रकिंग समेत कई क्षेत्रों में सिख और पंजाबी अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़े हैं और अमेरिकी समाज की सेवा कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के पोस्टर में विशेष रूप से ‘मिस्टर सिंह’ का उल्लेख कर पंजाबी और सिख समुदाय को निशाना बनाना नस्ली और सामुदायिक पक्षपात वाली सोच को दर्शाता है। विकसित देश के लिए इस तरह की सोच चिंताजनक है। धामी ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से अपील की कि सिख समाज के प्रति इस तरह के कथित भेदभावपूर्ण और आपत्तिजनक व्यवहार का मामला अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाया जाए।
अमेरिका में ₹1.9 लाख और भारत में सीधे ₹3 लाख! ये है iPhone के महंगा होने की असली वजह
अमेरिका में करीब 1.9 लाख रुपये वाला iPhone Duo भारत में 2,99,900 रुपये का क्यों है? इसके पीछे सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि इंपोर्ट ड्यूटी, मैन्युफैक्चरिंग, करेंसी और Apple की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी जैसी कई वजहें हैं। आइए उन्हें समझते हैं।
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
Agra News: अमेरिका में नन्हे आरुष का स्वर्णिम प्रदर्शन
नन्हे वुशू खिलाड़ी आरुष श्रीवास्तव ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित विश्व वुशू ओपन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर आगरा का मान बढ़ाया।
Lucknow News: अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी के मामले की जांच करेगी ईडी
अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी के मामले की जांच करेगी ईडी
सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों से साइबर ठगी के मामले में एक दशक से अधिक समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी हरनेक सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। इंटरपोल रेड नोटिस और लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी होने के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने उसे डिपोर्ट किया। 9 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही सीबीआई की टीम ने उसे दबोच लिया। इसके बाद बुधवार को आरोपी को पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई मामले) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इमिग्रेशन अधिकारी बनकर करते थे ब्लैकमेल सीबीआई के मुताबिक, वर्ष 2013 में भारत से सक्रिय साइबर ठगों के एक गिरोह ने सिंगापुर में रह रहे भारतीयों को निशाना बनाया था। आरोपी खुद को सिंगापुर इमिग्रेशन विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को स्पूफ कॉल करते थे। वे धमकी देते थे कि एयरपोर्ट पर डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी भरने के कारण उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और देश से निर्वासन (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस डर का फायदा उठाकर ठग जुर्माने और सेटलमेंट फीस के नाम पर वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए भारत में मोटी रकम मंगवाते थे। जांच में खुलासा हुआ कि यह ठगी की पूरी रकम हरनेक सिंह द्वारा संचालित मनी ट्रांसफर आउटलेट के माध्यम से निकाली जाती थी। सह-आरोपी पहले ही हो चुके हैं दोषी करार इस सनसनीखेज मामले में हरनेक सिंह के अलावा आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन को भी आरोपी बनाया गया था। वारदात के बाद हरनेक सिंह मई 2013 में ही भारत से फरार हो गया था और बाद में अवैध तरीके से अमेरिका में जा छिपा। सीबीआई ने इस मामले में साल 2016 में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ पंचकूला की विशेष अदालत में ट्रायल पूरा हो चुका है और अदालत ने 26 मई 2025 को दोनों को दोषी करार दिया था। अमेरिका में नहीं माना समन, जारी हुआ था गैर-जमानती वारंट फरार चल रहे हरनेक सिंह को अमेरिका में रहते हुए भारतीय अदालत के समन और जमानती वारंट भी तामील कराए गए थे, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए। सीबीआई ने इसके बाद इंटरपोल के जरिए शिकंजा कसा। इंटरपोल के जरिए रेड नोटिस जारी कराया गया और उसके पासपोर्ट पर लुक आउट सर्कुलर भी खुलवाया गया, जिसके आधार पर अंततः उसे अमेरिका से भारत लाने में सफलता मिली।
सिंगापुर ठगी मामले का आरोपित अमेरिका से भारत लाया गया, पंचकूला कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा
सिंगापुर ठगी मामले में 2013 से फरार चल रहे आरोपित हरनेक सिंह को अमेरिका से भारत लाया गया है। सीबीआई ने उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर पंचकूला कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
भारत की रसोई गैस सप्लाई में पिछले छह महीनों में बड़ा बदलाव आया है। पश्चिम एशिया में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच अमेरिका भारत के लिए LPG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका […] The post अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, 6 महीने में आयात 281% बढ़ा, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी क्यों घटी? appeared first on https://rajsattaexpress.com .
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
अमेरिका और ब्रिटेन के नए आंकड़े बताते हैं कि नॉन-ग्रेजुएट्स के मुकाबले कॉलेज डिग्री वालों को मिलने वाला सैलरी का फायदा घट रहा है। अर्थशास्त्रियों होजे अजार, मिरेया गिने और जेवियर एस्पिन की रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में कॉलेज ग्रेजुएट्स का वेतन प्रीमियम 4 वर्षों में लगातार गिरा है। कुल गिरावट करीब 10% है। यह 1970 के दशक के बाद पहली बड़ी गिरावट मानी जा रही है। 100 साल से भी ज्यादा समय में पहली बार ग्रेजुएट्स की मांग घट रही है। ब्रिटेन में भी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की डिग्री वालों का फायदा कम हो रहा है। एआई खासतौर पर उन व्हाइट-कॉलर और नॉलेज-वर्क जॉब्स को बदल रहा है, जिन पर लंबे समय से ग्रेजुएट्स का दबदबा था। भारत में डिग्रीधारी बढ़े लेकिन नौकरियां नहीं अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2023 के बीच युवाओं में ग्रेजुएट्स की संख्या 10% से बढ़कर 28% हो गई। लेकिन हर साल बढ़ने वाले ग्रेजुएट्स के अनुपात में नौकरियां नहीं बन रहीं। करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट्स जॉब मार्केट में आते हैं, जबकि करीब 28 लाख जॉब पैदा होती हैं। बेरोजगार युवाओं में अब करीब दो-तिहाई ग्रेजुएट हैं। सर्वे - 70-90% एम्पलॉयर्स स्किल बेस्ड भर्ती कर रहे अमेरिका के नेशनल एसोसिएशन ऑफ कॉलेजेस एंड एम्पलाइज की रिपोर्ट में करीब 70% नियोक्ता अब स्किल्स-बेस्ड हायरिंग कर रहे हैं। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब 90% कंपनियां डिग्री के बजाय कौशल के आधार पर भर्तियां करती हैं। 94% एम्पलॉयर्स का मानना है कि स्किल बेस्ड हायरिंग डिग्री, सर्टिफिकेट या अनुभव के आधार पर हायरिंग से बेहतर है। बदलाव - कई देशों में डिग्री की जरूरत में कमी आ रही देश - कमीयूएस - 3.9%यूके - 1.8%ऑस्ट्रेलिया - 1.6% (स्रोत- बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप)
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
IIT : आईआईटी के PhD स्कॉलर को 40 लाख का पैकेज, दूसरे छात्र ने अमेरिका में बजाया डंका
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी डॉ शत्रुघ्न ठाकुर को इटली की हंसा टीएमपी में डिजाइन इंजीनियर के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव मिला है। वे 40.65 लाख सालाना पे-पैकेज पर कार्य करेंगे।
अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर
यूएस ग्रीन कार्ड को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी और बुरी खबर सामने आई है, जहां अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी पूरी तरह 'अनअवेलेबल' हो चुकी है।अमेरिकी ग्रीन कार्ड के नियमों में क्या हुआ है बड़ा बदलाव और क्यों आई है यह बुरी खबर?अमेरिका में सालों से परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और उच्च कुशल कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) और आव्रजन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित दूसरी श्रेणी यानी ईबी-2 (EB-2 - Employment-Based Second Preference) कैटेगरी को फिलहाल पूरी तरह से 'अनअवेलेबल' (Unavailable) यानी अनुपलब्ध घोषित कर दिया गया है। इस स्थिति का मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए इस श्रेणी के तहत तय किए गए कोटे के सारे वीजा पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी दूतावास या आव्रजन कार्यालय इस कैटेगरी में अब अगले आदेश या नए वित्त वर्ष के शुरू होने तक किसी भी नए ग्रीन कार्ड या अप्रवासन वीजा को जारी या स्वीकृत नहीं कर सकते हैं। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय वर्कफोर्स के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वर्षों से लंबित पेंडिंग फाइलों और भारी-भरकम बैकलॉग के बीच इस प्रकार अचानक श्रेणी का बंद होना उनके सपनों पर एक बहुत बड़ा विराम लगाता हुआ नजर आ रहा है।ईबी-2 (EB-2) कैटेगरी के पूरी तरह से अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह क्या सामने आई है?इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कैटेगरी के अचानक बंद होने और अनअवेलेबल होने के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी कानूनों के तहत तय की गई वार्षिक सीमा और देश-वार कोटा प्रणाली (Per-Country Ceiling) है। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, हर साल रोजगार-आधारित जितने भी ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, उनमें से किसी एक देश के नागरिकों को कुल कोटे का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकता है। भारत जैसे विशाल देश से एडवांस्ड डिग्री धारकों और विशेष योग्यताओं वाले प्रोफेशनल्स की संख्या और आवेदन इतने ज्यादा हैं कि यह तयशुदा कोटा निर्धारित समय से बहुत पहले ही पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इस वर्ष भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही भारत के कोटे के सारे ईबी-2 वीजा नंबर पूरी तरह से एग्जॉस्ट यानी समाप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, अन्य देशों द्वारा अप्रयुक्त रहने वाले वीजा नंबरों का लाभ भी इस बार समय पर नहीं मिल पाने के कारण अमेरिकी प्रशासन को मजबूरन इस कैटेगरी को पूरी तरह से बंद या अनअवेलेबल करना पड़ा है, जिससे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, एच-1बी (H-1B) धारकों और उनके परिवारों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय नागरिकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए यह स्थिति भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता लेकर आई है। जो प्रोफेशनल्स अपनी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के अंतिम चरणों में थे, उनकी फाइलें अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई हैं और तब तक आगे नहीं बढ़ सकतीं जब तक कि नया कोटा शुरू नहीं होता। हालांकि आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस स्थिति के बावजूद यूएसिसिस (USCIS) द्वारा फॉर्म आई-485 (Adjustment of Status) की कुछ श्रेणियों के आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया पर तकनीकी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन अंतिम अप्रूवल के लिए लंबा इंतजार करना ही होगा। इस लंबी प्रतीक्षा और अनिश्चितता के कारण कई कुशल भारतीय कर्मचारी अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं, क्योंकि ग्रीन कार्ड मिलने में लगने वाला यह बेहिसाब समय कई दशकों तक लंबा खींचता जा रहा है।इस गंभीर बैकलॉग और समस्या से निपटने के लिए आगे क्या उम्मीदें बची हैं?इस बड़ी प्रशासनिक रोक के बीच भारतीय प्रवासियों और नीति विश्लेषकों की निगाहें अब पूरी तरह से नए वित्त वर्ष और अमेरिकी संसद में होने वाले विधायी सुधारों पर टिकी हुई हैं। चूंकि हर साल 1 अक्टूबर को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही वार्षिक वीजा सीमाओं और कोटे का नया आवंटन दोबारा रिसेट होता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि तब जाकर इस कैटेगरी में कुछ राहत मिल सकती है और कट-ऑफ डेट्स आगे बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही, आव्रजन सुधारों की मांग उठाने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक अमेरिका देश-वार लगने वाली इस 7 प्रतिशत की सीमा को समाप्त नहीं करता या ग्रीन कार्ड की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक भारतीय प्रोफेशनल्स को इसी तरह की गंभीर समस्याओं का सामना बार-बार करना पड़ेगा। अमेरिकी श्रम बाजार में अपनी योग्यता का लोहा मनवाने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति एक बार फिर से इस बात की गवाही देती है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में बुनियादी बदलाव कितनी बड़ी और तत्काल आवश्यकता बन चुके हैं।
खर्ग द्वीप के पास बड़ा हमला, अमेरिका ने तबाह कर दिया ईरान का टैंकर - Hindustan
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अमेरिका में बसने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली अपडेट सामने आ रही है। अमरीकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूएसएसीआईएस (USCIS) ने ग्रीन कार्ड और परमानेंट रेजिडेंसी से जुड़े नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने वाले व्यक्ति या परिवार के वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ उनके क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिरता की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस बदलाव का सीधा असर उन हजारों भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स पर पड़ने वाला है जो अपने किसी परिजन या एम्प्लॉयी के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस नए फॉर्म और नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अब स्पॉन्सरशिप की राह उतनी आसान नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी।क्या है USCIS का नया फॉर्म और कैसे काम करेगा स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर की जांच का नया नियमयूएसएसीआईएस द्वारा लागू किए गए इन नए नियमों के केंद्र में एफिडेविट ऑफ सपोर्ट (Affidavit of Support) से जुड़ा नया फॉर्म है, जिसके जरिए स्पॉन्सर को अपनी वित्तीय क्षमता का पूरा ब्योरा देना होता है। पारंपरिक तौर पर स्पॉन्सर को सिर्फ अपनी आय का टैक्स रिटर्न दिखाना होता था, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत आव्रजन अधिकारी स्पॉन्सर के क्रेडिट स्कोर, बैंक खातों की स्थिति, मौजूदा कर्ज और अन्य वित्तीय दायित्वों का गहराई से आकलन करेंगे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई स्पॉन्सर आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है या उसका क्रेडिट स्कोर खराब चल रहा है, तो वह किसी आवेदक के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं कर पाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अमेरिका आने वाला नया अप्रवासी कभी भी वहां की सरकारी सहायता या पब्लिक चार्ज (Public Charge) पर निर्भर न हो और अपनी आजीविका खुद चलाने में पूरी तरह से सक्षम हो।भारतीय आवेदकों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए इस बदलाव के क्या हैं गहरे मायनेअमेरिका में वर्क वीजा यानी एच-1बी (H-1B) पर काम कर रहे लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता पहले से ही काफी लंबा और पेचीदा रहा है। ऐसे में फैमिली-बेस्ड या एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड स्पॉन्सरशिप के नियमों का कड़ा होना भारतीयों के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार परिवार के सदस्य जब अपने माता-पिता या भाई-बहनों को अमेरिका बुलाने के लिए स्पॉन्सर करते हैं, तो उन्हें इस नए वित्तीय कड़े मानदंड से गुजरना होगा। जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के बाद अब कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है, और जरा सी भी वित्तीय चूक होने पर आवेदन को सीधे खारिज किया जा सकता है। इसलिए जो भारतीय परिवार या पेशेवर आने वाले दिनों में ग्रीन कार्ड के लिए फाइल करने की सोच रहे हैं, उन्हें अपने स्पॉन्सर के वित्तीय रिकॉर्ड और क्रेडिट हिस्ट्री को पहले से ही दुरुस्त और मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है।भविष्य की आव्रजन नीतियां और ग्रीन कार्ड चाहने वालों के लिए जरूरी सलाहअमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हो रहे ये लगातार बदलाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले समय में ग्रीन कार्ड पाना और अधिक कठिन और अनुशासित होने जा रहा है। अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर साल नियमों में फेरबदल किए जाते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में भारतीय अप्रवासियों और छात्रों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कागजी कार्रवाई को शुरू करने से पहले इमीग्रेशन वकीलों या विशेषज्ञों से पूरी सलाह जरूर लें। नए फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पॉन्सर की आय संघीय गरीबी रेखा (Federal Poverty Guidelines) से काफी ऊपर हो और उनका क्रेडिट इतिहास बिल्कुल साफ-सुथरा हो। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर सही कदम उठाकर ही इस नई प्रशासनिक चुनौती से पार पाया जा सकता है और अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का सपना साकार किया जा सकता है।
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना हर उस छात्र की आंखों में पलता है जो अपनी मेहनत के दम पर करियर में ऊंची उड़ान भरना चाहता है। जब दुनिया भर के बेहतरीन विश्वविद्यालयों की बात आती है, तो अमेरिका का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और शानदार करियर ग्रोथ की वजह से अमेरिका भारतीय छात्रों के बीच हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, वहां की महंगी यूनिवर्सिटी फीस, ट्यूशन कॉस्ट और रहने-खाने का भारी खर्च कई बार मेधावी छात्रों के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाता है। वित्तीय तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका जाने का विचार छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में ऐसी कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप प्रोग्राम्स मौजूद हैं, जो छात्रों के ट्यूशन फीस से लेकर उनके रहने, खाने और यहाँ तक कि हेल्थ इंश्योरेंस तक का पूरा खर्च खुद उठाती हैं? इन स्कॉलरशिप्स के जरिए आप बिना किसी आर्थिक तनाव के अमेरिकी धरती पर अपने सपनों की डिग्री हासिल कर सकते हैं।अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मिलने वाली फुल-ब्राइट और अन्य प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स के बारे में जानेंअमेरिका में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप (Fulbright-Nehru Fellowships) एक ऐसा नाम है जो भारत में बेहद लोकप्रिय और प्रतिष्ठित है। अमेरिकी सरकार और भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो मास्टर या पीएचडी करने अमेरिका जाना चाहते हैं। इसके तहत छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस माफ होने के साथ-साथ मासिक वजीफा, आने-जाने का हवाई किराया और स्वास्थ्य बीमा का पूरा खर्च कवर किया जाता है। इसके अलावा ह्यूबर्ट हम्फ्री फेलोशिप प्रोग्राम (Hubert Humphrey Fellowship Program) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो अनुभवी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नॉन-डिग्री स्टडी और लीडरशिप ट्रेनिंग का मौका देते हैं। इन स्कॉलरशिप्स को हासिल करने के लिए छात्रों को एक निश्चित चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू और अपने एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर खरा उतरना होता है, जिसके बाद उनके विदेश में पढ़ने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाता है।यूनिवर्सिटी-बेस्ड फाइनेंशियल असिस्टेंस और फुल-राइड स्कॉलरशिप्स का कैसे उठाएं लाभकेवल सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अधिकांश प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी अपने यहां आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को मेरिट और जरूरत के आधार पर फुल-राइड स्कॉलरशिप्स प्रदान करते हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और येल जैसी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज की वित्तीय सहायता नीतियां बहुत मजबूत हैं। अगर आपका एकेडमिक रिकॉर्ड शानदार है और आपके पास बेहतरीन एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का रिकॉर्ड है, तो ये यूनिवर्सिटीज आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 100 प्रतिशत तक की छात्रवृत्ति दे सकती हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही मिलने वाली ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंटशिप (GRA) या टीचिंग असिस्टेंटशिप (TA) के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं, जिससे उनका रहने-खाने का खर्च आसानी से निकल जाता है। इन अवसरों के बारे में सही समय पर जानकारी जुटाकर समय से आवेदन करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और अमेरिका में फ्री एजुकेशन पाने के लिए स्मार्ट टिप्सअमेरिका में बिना पैसे की टेंशन के पढ़ाई करने का यह सुनहरा अवसर पाने के लिए छात्रों को अपनी तैयारी बहुत पहले से शुरू करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आपको अपने एकेडमिक ट्रांसक्रिप्ट्स, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, प्रोफेसरों से मिलने वाले रिकमेंडेशन लेटर्स और आईईएलटीएस (IELTS) या टॉफेल (TOEFL) जैसे इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट के स्कोर कार्ड तैयार रखने होते हैं। अधिकांश स्कॉलरशिप्स के लिए आवेदन की प्रक्रिया साल में एक निश्चित समय पर खुलती है, इसलिए यूनिवर्सिटीज की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर डेडलाइन पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाने के लिए इंटर्नशिप, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन और नेतृत्व क्षमता से जुड़े अनुभवों को अपने आवेदन में जरूर शामिल करें। थोड़ी सी मेहनत, सही दिशा में की गई रिसर्च और समय पर किए गए आवेदन आपको बिना किसी वित्तीय बोझ के अमेरिका की बेहतरीन शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बना सकते हैं।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
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Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
क्या भारत की तरह अमेरिका में भी है ट्यूशन कल्चर?
भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया.
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
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संयुक्त राज्य अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग द्वारा CPT (Curricular Practical Training) को लेकर एक नया नीतिगत मेमो जारी किया गया है, जिसके बाद से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। CPT वह माध्यम है जिसके जरिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी डिग्री कोर्स के दौरान ही इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन ICE के इस नए मेमो ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और पेचीदा बना दिया है, जिससे भारतीय छात्रों के करियर और उनकी कानूनी स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है। गूगल डिस्कवर और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय इस विषय को लेकर लाखों छात्र सर्च कर रहे हैं कि आखिर इस नए बदलाव का उनकी पढ़ाई और जॉब करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए अमेरिका में CPT के पूरे गणित को समझते हैं और जानते हैं कि ICE के इस नए मेमो में क्या-क्या खास बातें कही गई हैं।अमेरिका में CPT (कर्रिकलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) असल में क्या है?सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि CPT क्या है और यह विदेशी छात्रों के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जब कोई भारतीय छात्र अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन (मास्टर्स या बैचलर्स) के लिए एडमिशन लेता है, तो उसे अपने कोर्स के करिकुलम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाती है, जिसे CPT कहा जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं और साथ ही कुछ पैसे भी कमाते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए जीवनरेखा की तरह होता है जो अपने खर्चों का एक हिस्सा खुद उठाने और अमेरिकी कॉर्पोरेट कल्चर को नजदीक से समझने की कोशिश करते हैं। पारंपरिक रूप से CPT को F-1 वीजा धारक छात्रों के लिए एक बेहद लचीली और मददगार व्यवस्था माना जाता रहा है, जिसके जरिए वे आगे चलकर OPT (Optional Practical Training) और H-1B वीजा की ओर कदम बढ़ाते हैं।ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने क्यों जारी किया नया मेमो?हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ICE द्वारा जारी किए गए नए मेमो ने विदेशी छात्रों की नींद उड़ा दी है। इस मेमो का मुख्य उद्देश्य CPT के नियमों का कथित तौर पर हो रहे दुरुपयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि कुछ छात्र और विश्वविद्यालय CPT नियमों का अनुचित लाभ उठाकर पढ़ाई की आड़ में लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से काम करने के रास्ते तलाश रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विश्वविद्यालयों को CPT के अनुमोदन (Approval) के मामले में और अधिक कठोर नियमों का पालन करना होगा। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि CPT सीधे तौर पर छात्र के अकादमिक पाठ्यक्रम और डिग्री की अनिवार्य आवश्यकता से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल अंशकालिक नौकरी पाने का एक आसान जरिया। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से छात्रों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि क्या उनकी यूनिवर्सिटीज अब आसानी से CPT अप्रूव कर पाएंगी या नहीं।भारतीय छात्रों पर इस नए मेमो का क्या होगा सीधा असर?लोकल ऑप्टिमाइजेशन और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में हर साल हजारों की संख्या में भारतीय छात्र कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस और डेटा साइंस जैसे कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने ट्यूशन फीस के कर्ज को चुकाने और अमेरिकी बाजार में फुल-टाइम जॉब पाने के लिए CPT और फिर OPT पर निर्भर रहता है। यदि ICE के नए नियमों के कारण CPT मिलना मुश्किल हो जाता है, या इसके घंटों (Hours) को सीमित कर दिया जाता है, तो भारतीय छात्रों की आर्थिक स्थिति और करियर प्लानिंग बुरी तरह चरमरा सकती है। जानकारों का मानना है कि छात्रों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने और अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISO) के संपर्क में रहने की जरूरत है।आधुनिक Generative Engine Optimization और डिजिटल सर्च ट्रेंड्स का परिदृश्यआधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च) और गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में शिक्षा, वीजा नियमों में बदलाव और करियर से जुड़ी ऐसी जटिल कानूनी खबरों को छात्र और उनके परिवार सबसे ज्यादा खोजते हैं। आज का डिजिटल युग यह मांग करता है कि किसी भी ग्लोबल पॉलिसी बदलाव को बेहद सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडिट (Reddit) और इमिग्रेशन फोरम्स पर इस समय CPT मेमो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहाँ छात्र अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं। सही और तथ्यात्मक जानकारी समय पर मिलना हर उस छात्र के लिए बेहद जरूरी है जो अमेरिका में अपने सपनों को साकार करने की राह पर है।भारतीय छात्रों को अब किन सावधानियों और नियमों का रखना होगा ध्यान?इस बदलते हुए परिदृश्य में अमेरिका में पढ़ रहे या जाने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को कुछ बेहद अहम बातों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, अपने कोर्स के दौरान लिए जाने वाले CPT का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) एकदम दुरुस्त रखें और यह सुनिश्चित करें कि आपका एम्प्लॉयर और आपकी यूनिवर्सिटी का कोर्स करिकुलम पूरी तरह से नियमों के दायरे में हो। किसी भी शॉर्टकट या संदिग्ध तरीके से CPT प्राप्त करने से बचें, क्योंकि अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS और ICE) इस मामले में अब बहुत अधिक आक्रामक हो चुका है। अपनी यूनिवर्सिटी के कानूनी सलाहकारों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें ताकि वीजा की स्थिति पर कोई आंच न आए।अमेरिकी शिक्षा और करियर की राह में आने वाली नई चुनौतियाँअंततः, अमेरिका में CPT को लेकर ICE द्वारा जारी किया गया यह मेमो इस बात की चेतावनी है कि अमेरिका में आव्रजन और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को लेकर प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना और वहां टिके रहना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है, इसके लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक ईमानदारी और नियमों की सटीक समझ होना अनिवार्य है। यदि छात्र सही दिशा में योजना बनाकर चलेंगे और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे, तो वे इन नई बाधाओं को पार करते हुए अपने अमेरिकी सपने को जरूर पूरा कर पाएंगे, बशर्ते हर कदम बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ उठाया जाए।
अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
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Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
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Indian Students in US: अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले दाखिलों में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
एस्प्रेसो से अमेरिकानो तक, जानें कैफे में मिलने वाली 5 ब्लैक कॉफी का स्वाद, ऑर्डर करना होगा आसान
किसी कैफे में जाकर अलग-अलग तरह की कॉफी को देखकर आप भी कंफ्यूज हो जाते हैं तो आपकी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हम यहां कैफे में मिलने वाली कुछ मुख्य ब्लैक कॉफी का स्वाद बता रहे हैं। जिसे जानने के बाद अगली बार ऑर्डर देना आसान हो जाएगा।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
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अमेरिका के फॉल इनटेक में एडमिशन ले चुके अधिकतर भारतीय छात्रों के मन में एक ही सवाल उठता है- क्या वह पहुंचते ही पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अमेरिका में फीस और रहने-खाने के खर्च को देखते हुए छात्रों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि टॉप यूनिवर्सिटीज की सालाना फीस और रहने खाने का खर्चा करीब 50 से 60 लाख रुपए तक होता है। वहीं पूरी पढ़ाई का खर्च 1.5 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अमेरिका के F-1 स्टूडेंट वीज पर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट टाइम जॉब के नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई इन नियमों को तोड़ता है, तो उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। यहां तक कि डिपोर्टेशन तक का समय आ सकता है। ऐसे में हम इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स फर्स्ट सेमेस्टर में पार्ट-टाइम नौकरी कर सकते हैं और इसको लेकर क्या नियम हैं। इसे भी पढ़ें: क्या 40 की उम्र में संभव है LLB? BCI के नए नियमों के तहत Age Limit और Career Switch पर एक विशेष रिपोर्ट फर्स्ट ईयर में जॉब कर सकते हैं या नहीं USICS के नियमों क मुताबिक F-1 वीजा पर पहले पूरे अकेडमिक ईयर तक आप कैंपस के बाहर कोई नौकरी नहीं कर सकते हैं। USICS के नियमों में फर्स्ट सेमेस्टर वाले स्टूडेंट्स के लिए कोई खास छूट नहीं दी गई है। कैंपस के बाहर किसी भी स्थिति में जॉब नहीं करना है। फर्स्ट ईयर छात्रों के पास ऑन कैंपस जॉब का ऑप्शन जरूर है। छात्र कैंपस के अंदर आराम से पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। फर्स्ट सेमेस्टर में क्या करें अच्छी खबर यह है कि ऑन कैंपस जॉब के लिए आपको USCIS से अलग इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। इसको आपको फर्स्ट सेमेस्टर से ही शुरूकर सकते हैं। जब क्लास चल रही हो, तब आप सप्ताह में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं। स्कूल की छुट्टियों के दौरान आप फुल टाइम यानी की सप्ताह में 40 घंटे काम कर सकते हैं। ऑन कैंपस जॉब का मतलब है, यूनिवर्सिटी के कैंपस पर होने वाला काम कैफेटेरिया में काम, लाइब्रेरी में असिस्टेंट, यूनिवर्सिटी बुकस्टोर में जॉब, या किसी प्रोफेसर के साथ रिसर्च असिस्टेंटशिप। यह जॉब कुछ मामलों में कैंपस के बाहर भी हो सकता है। बशर्ते वह जगह आपकी यूनिवर्सिटी से एजुकेशनली एफिलिएटेड हो। उसका सीधा संबंध आपकी पढ़ाई या यूनिवर्सिटी से हो। ऑन कैंपस जॉब के लिए क्लास शुरू होने से करीब 30 दिन पहले तक अप्लाई कर सकते हैं। इसलिए अगर आप फॉल इनटेक में अभी पहुंचे हैं। तो जल्द से जल्द अपने कैंपस जॉब पोर्टल या फिर इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं। अगर आप ऑन कैंपस जॉब ढूंढ रहे हैं, या भविष्य में ऑफ-कैंपस काम के बारे में जानना चाहते हों। तो सबसे जरूरी काम है कि अपने DSO से बात करें। DSO आपकी यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के मामलों को संभालने वाला अधिकारी होता है। वह आपको बताएगा कि कौन सी जॉब्स उपलब्ध हैं और आप उनके लिए एलिजिबल हैं या नहीं।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

