युद्धकालीन सैन्य कमान हस्तांतरण पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने की बात
युद्धकालीन सैन्य कमान हस्तांतरण पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने की बात
क्या अमेरिका से खत्म हो जाएगा AI का नामोनिशान? जानिए क्या है 'सुपर इंटेलिजेंस' का पूरा सच!
अब तक पूरी दुनिया की जुबान पर एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नाम का शब्द चढ़ चुका है। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एआई का नाम बदलकर एसआई यानी सुपर इंटेलिजेंस कर दिया है। यानी अब वो चाहते हैं कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ना कहा जाए क्योंकि ये आर्टिफिशियल नहीं है। इसका नाम होना चाहिए सुपर इंटेलिजेंस। वो कहते हैं कि आर्टिफिशियल नहीं बल्कि सुपर इंटेलिजेंस चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी संबंधित संघीय सरकारी दस्तावेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AI शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान किया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने मीडिया आउटलेट द वॉल स्ट्रीट जर्नल पर सवाल उठाए और तर्क दिया कि इस उन्नत तकनीक की क्षमताओं को दर्शाने के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द अधिक सटीक है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा द वॉल स्ट्रीट जर्नल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)—जो कि एक बेहद खराब और गलत नाम है। उसको SI (सुपर इंटेलिजेंस) कहना कब शुरू करेगा? यह वही नाम है जिसे लगभग हर कोई इस्तेमाल कर रहा है या जल्द ही करने वाला है। उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में लिखा हम बहुत जल्द इसके गलत और भ्रामक होने की वजह से सभी प्रासंगिक दस्तावेजों और अन्य सभी जगहों पर ‘AI/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से प्रतिबंधित (BAN) करने जा रहे हैं। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद। कार्यकारी आदेश में शब्दावली बदलने का निर्देश दिया गया है ट्रम्प की यह घोषणा, 30 सितंबर को उनके द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश के बाद आई है, जिसका शीर्षक है सुपर इंटेलिजेंस के युग की शुरुआत। इस आदेश में संघीय विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे आधिकारिक संचार और कामकाज में, जहाँ कानूनी रूप से अनुमति हो, =आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जगह सुपर इंटेलिजेंस (SI) शब्द का इस्तेमाल करें। इन नए शब्दों का उपयोग सरकारी पत्राचार, सार्वजनिक संचार, आधिकारिक वेबसाइटों, रिपोर्टों और प्रशासनिक नीति दस्तावेजों में किया जाना है। पहले से जारी नियमों, सरकारी अनुबंधों, अनुदानों और ऐतिहासिक अभिलेखीय दस्तावेजों में पीछे की तारीख से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ट्रम्प 'AI' शब्द को क्यों बदलना चाहते हैं? इस कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि तकनीक में हुई प्रगति अब उस मूल ढांचे से कहीं आगे निकल गई है, जिसका इस्तेमाल 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) को परिभाषित करने के लिए किया जाता था। इसमें तर्क दिया गया है कि आज के उन्नत सिस्टम केवल मानवीय बुद्धिमत्ता के कुछ पहलुओं की नकल करने या उन्हें स्वचालित (ऑटोमेट) करने से कहीं अधिक काम करते हैं। आदेश के अनुसार, ये सिस्टम विज्ञान और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में मानवीय रचनात्मकता और क्षमताओं का लगातार विस्तार कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इन विकासों को बेहतर ढंग से दर्शाता है। एक नई कानूनी परिभाषा का भी प्रस्ताव रखा गया है। इस आदेश के तहत, राष्ट्रपति के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहायक को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस के सामने प्रस्तावित कानूनी भाषा पेश करने के लिए कहा गया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य 'सुपर इंटेलिजेंस' की एक आधिकारिक कानूनी परिभाषा तय करना और मौजूदा कानूनों में बदलाव की सिफारिश करना है। ट्रंप ने प्रमुख टेक लीडर्स से मुलाकात की यह कदम तब उठाया गया जब ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख टेक्नोलॉजी अधिकारियों के साथ तकनीकी विकास और एडवांस्ड सिस्टम के सुरक्षित विकास पर चर्चा की। इस चर्चा में शामिल टेक लीडर्स में एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई और जेन्सेन हुआंग शामिल थे। ट्रंप ने इस सेक्टर की ग्रोथ को अभूतपूर्व बताया, जबकि इंडस्ट्री लीडर्स ने सहयोग और सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। शब्दावली में प्रस्तावित यह बदलाव, अमेरिकी सरकार द्वारा अपने संघीय कार्यों में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को परिभाषित करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा। क्या इस रिब्रांडिंग के बाद इसके वास्तविक खतरे टल जाएंगे क्या गारंटी है कि यह जो सुपर इंटेलिजेंस है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है यह बनाए गए हमारे जो नियम हैं उन्हें नहीं तोड़ेगा? यह कंपनियों का डाटा चोरी नहीं करेगा? क्या गारंटी है कि इसका गलत इस्तेमाल नहीं होगा? क्या गारंटी है कि यह सुपर इंटेलिजेंस या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपके और हमारे जो पासवर्ड्स हैं उन्हें नहीं चुरा लेगा? यह कुछ भी कर सकता है। किसी की भी हैकिंग कर सकता है। कहीं भी जाकर चोरी कर सकता है। कोई भी डाटा निकाल सकता है। अब इस पर नजर कौन रखेगा? और हमारे ऊपर और आपके ऊपर तो एक कानून है जिसके तहत हम काम करते हैं। अगर हम उस कानून को तोड़ते हैं तो अदालत में हम पर मुकदमा चल सकता है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगर कुछ करता है तो किस पर मुकदमा चलेगा? अगर एक सेल्फ ड्राइविंग कार किसी की दुर्घटना कर देती है किसी के साथ तो फिर जब ड्राइवर ही नहीं है तो आप मुकदमा किस पर चलाएंगे?
यूएन में अमेरिका और क्यूबा के राजनयिक में तीखी बहस
संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस समय भारी हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के संबोधन के दौरान क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पोडियम की ओर बढ़ने लगे। इस पर वॉल्ट्ज ने सख्त लहजे में क्यूबाई राजनयिक को रोकते हुए कहा, ‘पीछे हटिए!’ यह विवाद क्यूबा पर दशकों पुराने …
ब्राजील चुनाव हारने के बाद अमेरिका भागे बोल्सोनारो, लूला दा सिल्वा ने साधा निशाना
ब्राजील में चुनाव हारने के बाद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो अमेरिका चले गए हैं. उन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप है. राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वे निर्दोष हैं तो उन्हें देश में रहकर यह साबित करना चाहिए था. अमेरिका द्वारा उनके परिवार को वीजा दिए जाने की भी चर्चा है.
100 देशों में 50 हजार स्क्रीन्स पर रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और सनी देओल की फिल्म रामायण रिलीज होगी. आइए जानते हैं कैसा रहा इसका अमेरिकी प्रीमियर और नमित मल्होत्रा ने क्या कहा?
राजनाथ सिंह और अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ की अहम बैठक, रक्षा सहयोग की समीक्षा
New Delhi, 28 अक्टूबर . भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई गति देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से एक अहम वार्ता की…
फिलीपींस: आसियान रक्षा बैठक इतर मिले राजनाथ सिंह और पीट हेगसेथ, अमेरिकी रक्षा मंत्री से हुई क्या चर्चा? rajnath-singh-meets-pete-hegseth-india-us-defence-cooperation-asean-meeting
ईरान: परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद क्या हुआ? संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी बोली- नहीं मिले मरम्मत के सबूत- What happened after US strike on Iran nuclear sites UN agency says no evidence of repairs found
‘अगला यूएन महासचिव लैटिन अमेरिका से हो’, पनामा ने मांगा अमेरिका का साथ
वाशिंगटन, 28 अक्टूबर . पनामा ने संयुक्त राज्य अमेरिका से आग्रह किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन में ‘क्षेत्रीय रोटेशन’ (बारी-बारी से अलग-अलग क्षेत्रों से…
3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 और उच्च सदन (सीनेट) की 35 सीटों पर वोट पड़ेंगे। जानिए इस चुनाव से कैसे तय होगा ट्रंप का राजनीतिक भविष्य।
'अगला यूएन महासचिव लैटिन अमेरिका से हो', पनामा ने मांगा अमेरिका का साथ
'अगला यूएन महासचिव लैटिन अमेरिका से हो', पनामा ने मांगा अमेरिका का साथ
Brazil Election: हार के बाद अमेरिका रवाना हुए फ्लावियो बोल्सोनारो! पासपोर्ट रद्द, राजनीतिक शरण लेने की अटकलें
यूएन महासभा को क्यूबा के विदेश मंत्री ने किया बाधित, अमेरिकी प्रतिनिधि से हुई तीखी बहस
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नॉन-अलाइन्ड मूवमेंट) की ओर से बोलते हुए, युगांडा के स्थायी प्रतिनिधि एडोनिया अयेबारे ने कहा कि उनका समूह इस साल अमेरिकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर गहरी चिंता जताता है, जिन्होंने (प्रतिबंधों) को अत्यधिक कठोर स्तर तक बढ़ा दिया है।
ट्रंप ने चुनावी रैली में वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही
वाशिंगटन, 28 अक्टूबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही है. उनका मानना है कि इससे वह एक समृद्ध…
अमेरिकी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर साइबर हमला: बंद करने पड़े सिस्टम, क्या मध्यावधि चुनाव पर मंडराया खतरा? US-Federal-Election-Commission-website-hacked-midterm-elections-campaign-finance-disclosures-disrupted
फ्लावियो बोल्सोनारो को मिलेगा अमेरिकी वीजा: ट्रंप सरकार का एलान, चुनाव हारने के बाद क्या छोड़ा ब्राजील? flavio-bolsonaro-and-family-us-visa-brazil-election-loss-investigation-corruption-surrender-passport
मुझे अमेरिका में नहीं धमका सकते, पीछे हट जाओ; UN के अंदर बवाल हो गया, US-क्यूबा क्यों भिड़े?
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला के बीच तीखी झड़प हुई। दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। फिदेल कास्त्रो की रोलेक्स घड़ी का जिक्र करते हुए वॉल्ट्ज ने क्यूबा सरकार को घेरा।
'पीछे हटिए, यह हवाना नहीं...', संयुक्त राष्ट्र में भिड़े अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधि
संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा सरकार पर भ्रष्टाचार और आलीशान जीवनशैली के आरोप लगाए.
एआई की होड़ में चीन को बड़ा झटका: शेयर बाजार से 228 लाख करोड़ रुपये साफ; अमेरिकी पाबंदियों ने बढ़ाई मुश्किलें---China AI Ambitions Face Setback as $2.4 Trillion Wiped Off Stock Markets
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद अमेरिका भागे फ्लावियो बोल्सोनारो
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो अमेरिका चले गए हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पासपोर्ट जमा करने के आदेश का पालन नहीं किया, जिसके कारण उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है.
अमेरिका: ट्रंप बोले- 1979 से ईरान से संघर्ष जारी, वेनेजुएला बन सकता है 51वां राज्य; तेल का जिक्र कर क्या कहा?--America: Donald Trump Says Iran Has Waged War Against US Since 1979, Floats Venezuela as 51st State
Kanpur News: युवक ने हाथ की कलाई काटी, अमेरिका से मेटा ने पुलिस को भेजा अलर्ट
A young man slit his wrist; Meta (from the US) sent an alert to the police.
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई: ड्रग्स तस्करी के शक में नाव पर हमला, पांच लोगों की मौत; अब तक 240 से ज्यादा मारे गए-US Military Strike on Suspected Drug Boat Kills Five in Eastern Pacific
ईरान से दूर होगा अमेरिका का संकट? ट्रंप ने पुतिन से मांगी मदद, रूस जाएंगे ईरानी विदेश मंत्री
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अमेरिका-ईरान टकराव के अन्त के लिए, सम्वाद व कूटनीति पर बल
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव की पृष्ठभूमि में आगाह किया है कि जिस तरह की आक्रामक बयानबाज़ी और धमकियाँ देखी जा रही हैं, यदि वे फिर वास्तविक टकराव में तब्दील हुईं तो क्षेत्र में हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं. इसके मद्देनज़र, उन्होंने अधिकतम संयम बरतने और युद्ध के अन्त के लिए कूटनीतिक समाधान का सहारा लेने पर बल दिया है.
AI से आगे निकलने की तैयारी में ट्रंप, अमेरिका में 'सुपर इंटेलिजेंस' पर जोर देने का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार सरकारी कागजात और आधिकारिक बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AI शब्दों का इस्तेमाल बंद कर देगी। उनकी जगह सुपर इंटेलिजेंस और SI का इस्तेमाल किया जाएगा।
विचार: अमेरिकी जनता के समक्ष बड़े निर्णय की घड़ी
मध्यावधि चुनावों में बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका के लोग डोनल्ड ट्रंप के दौर में जारी पतन से अपने देश को बचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो के भारत दौरे के बाद जी-20 बैठक के लिए अमेरिका जा रहे हैं। यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और व्यापार व ऊर्जा सहयोग पर चर्चा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया (सैक्रामेंटो) में एनआरआई द्वारा पत्नी को जलाकर मारने के मामले में नया मोड़ आया है। मोगा निवासी महिला के परिजनों ने अमेरिकी सरकार से अपनी नातिन की कस्टडी मांगी है। उन्होंने सरकार से जल्द वीजा आदि की व्यवस्था करने की अपील की है, जिससे वह अपनी बेटी का अंतिम दर्शन कर सकें। पंजाब के मोगा जिले के डाला गांव निवासी गुरविंदर सिंह गिल पर अपनी पत्नी जैस्मीन गिल की हत्या कर शव को आग लगाने का गंभीर आरोप लगा है। दंपति के बीच पिछले कुछ समय से तलाक का विवाद चल रहा था। दोनों की ढाई साल पहले ही शादी हुई थी। उनकी सात माह की बेटी भी है। जिसकी कस्टडी जैस्मिन की मां और परिजन मांग रहे हैं। पुलिस जांच के बाद आरोपी पति गिरफ्तार जैस्मीन के अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने पर उसके चचेरे भाई ने स्थानीय अमेरिकी पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। अमेरिकी पुलिस ने जब मामले की गहनता से जांच की तो हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ, जिसके बाद आरोपी पति गुरविंदर सिंह गिल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आरोपी पर पत्नी की हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को जलाने का आरोप है। भावुक मां की सरकारों से गुहार: नाती की कस्टडी और अंतिम दर्शन की मिले इजाजत मृतका की मां सुखविंदर कौर रानी ने अत्यंत भावुक होकर केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और अमेरिकी प्रशासन से न्याय की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की शादी ढाई साल पहले हुई थी और उनका सात महीने का एक मासूम बच्चा है। मां ने इच्छा जताई कि वह अपने बेटे-बहू के साथ मिलकर नाती का पालन-पोषण करना चाहती हैं। उन्होंने सरकारों से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द अमेरिका जाने के लिए वीजा और यात्रा में प्रशासनिक सहायता दी जाए, ताकि वे अपनी बेटी के अंतिम दर्शन कर सकें और मासूम बच्चे की कस्टडी हासिल कर सकें। सामाजिक व साहित्यिक परिवार से था संबंध मृतका जैस्मीन गिल पंजाब के एक प्रतिष्ठित सामाजिक एवं साहित्यिक घराने से ताल्लुक रखती थीं। वह 'पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन' के प्रमुख नेता रहे जगतार सिंह जलाजण और डीएमसी अस्पताल लुधियाना से सेवानिवृत्त कर्मचारी सुखविंदर कौर रानी की पुत्री थीं। साथ ही, वह प्रसिद्ध पंजाबी कवि पास आजाद की बहन थीं। परिवार ने अब विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस कठिन समय में उन्हें कागजी और कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग दिया जाए ताकि वे जल्द अमेरिका पहुंच सकें।
पूर्व मिस स्विट्जरलैंड, बीट्रिस कोल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर 1993 में उनके साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीट्रिस कोल ने पहले भी राष्ट्रपति ट्रम्प पर अनुचित शारीरिक संपर्क का आरोप लगाया था; हालांकि, अब मॉडल का दावा है कि उस घटना में […] The post पूर्व मिस स्विट्जरलैंड ने ट्रम्प पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया; अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोपों को नकारा appeared first on Shahernama | Latest News, Articles, Analysis, Local, National, World .
33 साल पुराना सनसनीखेज मामला: स्विस मॉडल ने डोनाल्ड ट्रम्प पर लगाया बलात्कार का आरोप, अमेरिकी राजनीति में मचा हड़कंप
Stock Market Update: सेंसेक्स-निफ्टी में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता; निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर
पूर्व मिस स्विट्जरलैंड बीट्रिस केउल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर 1993 में न्यूयॉर्क के प्लाजा होटल में उनके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस घटना को बेहद क्रूर बताया है।
Cipla Q2 Results: मुनाफा 35% लुढ़का, नॉर्थ अमेरिका में बिक्री 19% घटी, मार्जिन पर बड़ी चोट!
Cipla Q2 Results: दवा बनाने वाली दिग्गज कंपनी सिप्ला के लिए सितंबर तिमाही अच्छी नहीं रही। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 35 फीसदी घटकर 877.54 करोड़ रुपये रह गया।एक साल पहले की इसी तिमाही में कंपनी ने 1,351 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। नॉर्थ अमेरिका में कमजोर बिक्री और ऑपरेटिंग मुनाफे में तेज गिरावट इसकी बड़ी वजह बनी। नतीजों के बाद मंगलवार दोपहर के कारोबार में सिप्ला का शेयर 0.6 फीसदी गिरकर 1,347 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।मुनाफे के साथ रेवेन्यू भी फिसलातिमाही में कंपनी के मुनाफे से 473.46 करोड़ रुपये कम हो गए। कमाई के मोर्चे पर भी कंपनी पिछले साल का आंकड़ा नहीं छू पाई। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 2.4 फीसदी घटकर 7,403.93 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 7,589 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू में गिरावट छोटी है, लेकिन मुनाफे पर इसका असर कहीं ज्यादा बड़ा दिखा। इसकी वजह कंपनी के ऑपरेटिंग मुनाफे में आई कमजोरी है।मार्जिन पर पड़ी सबसे बड़ी चोटतिमाही में कंपनी का EBITDA 26.8 फीसदी घटकर 1,388 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले यह 1,895 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन 25 फीसदी से फिसलकर 18.7 फीसदी पर आ गया, यानी 630 बेसिस पॉइंट की सीधी गिरावट। पिछले साल कंपनी हर 100 रुपये की बिक्री पर 25 रुपये का ऑपरेटिंग मुनाफा कमा रही थी, जो अब घटकर 18.7 रुपये रह गया है। रेवेन्यू में मामूली कमी के मुकाबले ऑपरेटिंग मुनाफे में इतनी बड़ी गिरावट ने ही नेट प्रॉफिट को 35 फीसदी नीचे खींच दिया।भारत के कारोबार ने संभाला मोर्चाइस मुश्किल तिमाही में भारत का कारोबार कंपनी के लिए सबसे बड़ा सहारा बना। सितंबर तिमाही में भारत से रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़कर 3,516 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल 3,146 करोड़ रुपये था। एक साल में इस कारोबार की कमाई 370 करोड़ रुपये बढ़ी। कंपनी ने बताया कि उसके वन-इंडिया कारोबार ने अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही बिक्री दर्ज की है। बाकी बाजारों में आई सुस्ती के बीच घरेलू बाजार की यह रफ्तार कंपनी के लिए राहत की खबर है।नॉर्थ अमेरिका से लगा सबसे बड़ा झटकाकंपनी के लिए असली परेशानी नॉर्थ अमेरिका से आई। इस बाजार से रेवेन्यू 19 फीसदी गिरकर 1,643 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले यह 2,039 करोड़ रुपये था। यानी इस एक बाजार में ही कंपनी की कमाई 396 करोड़ रुपये घट गई। डॉलर में देखें तो नॉर्थ अमेरिका कारोबार ने तिमाही में 172 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू कमाया। भारत में बढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा नॉर्थ अमेरिका की इसी गिरावट में बराबर हो गया।अफ्रीका, उभरते बाजार और यूरोप का हालवन अफ्रीका कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 1 फीसदी घटकर 1,171 करोड़ रुपये रहा। इसके अंदर दक्षिण अफ्रीका का रेवेन्यू 3 फीसदी कम होकर 872 करोड़ रुपये पर आ गया। सिप्ला ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में उसका प्राइवेट कारोबार बाजार के मुकाबले 1.3 गुना तेजी से बढ़ा है। उभरते बाजारों और यूरोप से रेवेन्यू 967 करोड़ रुपये पर सपाट रहा। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद इन बाजारों में कमाई टिकी रही।API कारोबार आधे से भी नीचेतिमाही में सबसे तेज गिरावट एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स यानी API और दूसरे कारोबारों में दिखी। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 59 फीसदी टूटकर 107 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 259 करोड़ रुपये था। एक साल में इस कारोबार की कमाई 152 करोड़ रुपये घट गई।R&D पर खर्च और कैश की स्थितिकमजोर नतीजों के बीच कंपनी ने रिसर्च पर खर्च में कटौती नहीं की। तिमाही में सिप्ला ने रिसर्च और डेवलपमेंट पर 423 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कुल बिक्री का 5.7 फीसदी है। यह खर्च मुख्य तौर पर प्रोडक्ट फाइलिंग और अहम डेवलपमेंट प्रोग्राम्स पर किया गया। कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है। सिप्ला के पास 9,823 करोड़ रुपये का नेट कैश है। कंपनी के कर्ज में मुख्य तौर पर लीज देनदारियां और वर्किंग कैपिटल की जरूरतें शामिल हैं।डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।
जब रूस-अमेरिका के बीच टला परमाणु युद्ध, क्यूबा की वजह से बने थे हालात
आज के दिन ही रूस और अमेरिका के बीच एक परमाणु युद्ध टल गया था. क्यूबा मिसाइल संकट की वजह से दोनों देश आमने सामने आ गए थे.
अमेरिका में भारतीय शेफ ने कमाई दौलत-शोहरत, फिर भी है बहुत दुखी; बोला- 'झूठ है कि पैसा खुशी देता है'
अमेरिका में आलीशान घर और लग्जरी गाड़ी खरीदने के बाद भी एक भारतीय शेफ वहां अकेलेपन से जूझ रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल इस भावुक वीडियो में उन्होंने दिखाया है कि डॉलर्स कमाने के बाद भी अपनों के बिना त्योहार कितने सूने होते हैं.
US Elections: ट्रंप को चुनने वाले 25% दक्षिण एशियाई अमेरिकी अब Democrats के साथ, सर्वे में खुलासा
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, 27 अक्टूबर अमेरिका में 2024 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को वोट देने वाले कम से कम 25 प्रतिशत दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाता तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने की योजना बना रहे हैं। एक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में जीवनयापन की लागत (65 प्रतिशत), स्वास्थ्य सेवा (53 प्रतिशत), रोजगार और वेतन (33 प्रतिशत) तथा शिक्षा (28 प्रतिशत) को मध्यावधि चुनावों के प्रमुख मुद्दों के रूप में पहचाना गया है। सर्वेक्षण में शामिल 800 पंजीकृत दक्षिण एशियाई मतदाताओं में से 87 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी हैं जबकि शेष 13 प्रतिशत पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव, अफगानिस्तान और म्यांमा के अलावा कंबोडिया के खमेर समुदाय से संबंधित हैं। वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस को वोट देने वालों में से 96 प्रतिशत आगामी चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में अपना वोट डालने की योजना बना रहे हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि ट्रंप को वोट देने वाले 67 प्रतिशत दक्षिण एशियाई अमेरिकी अब भी रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करते हैं, लेकिन 25 प्रतिशत ने कहा कि वे डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। सर्वेक्षण के ये नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब टेक्सास सहित कई राज्यों में समय से पहले मतदान शुरू हो चुका है, जहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको का मुकाबला ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन केन पैक्सटन से है और दोनों के बीच कड़ी टक्कर है। रिपब्लिकन नेता सीनेटर टेड क्रूज के 2024 के चुनाव प्रचार अभियान में प्रशिक्षु के रूप में काम कर चुके 21 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी वसंत भट्ट ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने टालारिको को वोट दिया है। भट्ट ने लिखा, ‘‘मैंने अभी जेम्स टालारिको के लिए अपना वोट डाला है। दूसरी पीढ़ी का भारतीय-अमेरिकी होने के नाते, मैं विदेशी मूल के लोगों के प्रति नफरत, नस्ली द्वेष और अपनी पहचान पर लगातार बढ़ते खुले हमलों से बेहद दुखी हूं।’’सर्वेक्षण में भेदभाव को लेकर चिंताएं भी सामने आईं। इसमें 90 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने भेदभाव का सामना किया है या वे किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसे भेदभाव का सामना करना पड़ा है। इनमें 48 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने खुद भेदभाव का सामना किया है। ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने एक बयान में कहा, ‘‘इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि हमारे समुदाय के जिन लोगों ने 2024 में ट्रंप को वोट दिया था, उनमें से एक-चौथाई अब डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देने की योजना बना रहे हैं। यह समुदाय चुनाव में हार-जीत का अंतर तय कर सकता है और हम ऐसे हर मतदाता तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।’’
राजधानी रांची में काली पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां इस बार श्रद्धालु कई अनूठे पंडालों के दर्शन कर सकेंगे। कुसई में 15 लाख प्लास्टिक बोतलों से पंडाल बन रहा है, वहीं लोअर चुटिया में अमेरिका के स्वामी नारायण मंदिर की झलक दिखेगी।
नॉर्थ डकोटा के निवासी बोले-ट्रंप ने अमेरिका को अंदर से सुरक्षित बनाया, ग्लोबल स्तर पर खतरा बरकरार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश को अंदरूनी तौर पर ज्यादा सुरक्षित बनाया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति उतनी स्पष्ट नहीं है। यह बात मध्यावधि चुनावों से पहले व्हाइट हाउस के बाहर नॉर्थ डकोटा के चौथी पीढ़ी के एक किसान रेजिनाल्ड हरमन ने कही। उन्होंने ट्रंप से 'थोड़ा नरम' व्यवहार अपनाने और 'अधिक स्वतंत्र व्यापार' को बढ़ावा देने की भी अपील की।
ड्रग कार्टेल और साइबर ठगों के खिलाफ अमेरिका-प्रशांत देशों में बड़ी डील, यूएस देगा 44 मिलियन डॉलर
वाशिंगटन, 27 अक्टूबर . अमेरिका और प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल, ऑनलाइन धोखाधड़ी नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए की जाने वाली मनी लॉन्ड्रिंग के…
अमेरिका ने जताई चिंता, यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को मिले निवेश ऋण
वाशिंगटन, अमेरिका ने यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को दिए गए रिकॉर्ड स्तर के निवेश ऋण पर चिंता जताई है। अमेरिका का कहना है कि इस कदम से अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है और विमान सब्सिडी विवाद पर बने पुराने समझौते के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
रूसी डीजल : अमेरिकी लॉमेकर्स की चेतावनी
वाशिंगटन, अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) के लॉमेकर्स के एक समूह ने देश के बड़े बैंकों, बंदरगाह प्राधिकरणों और ईंधन वितरक कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे रूसी डीजल का आयात करते हैं, तो उन्हें आपराधिक और दीवानी (सिविल) कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ अपनी ऊर्जा नीति का बचाव किया है।
रूसी डीजल आयात पर अमेरिकी लॉमेकर्स की चेतावनी, बैंकों और कंपनियों को कानूनी कार्रवाई का डर
वाशिंगटन, 27 अक्टूबर . अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) के लॉमेकर्स के एक समूह ने देश के बड़े बैंकों, बंदरगाह प्राधिकरणों और ईंधन वितरक कंपनियों…
सूडान में अकाल का खतरा, अमेरिका और उसके सहयोगियों ने जताई चिंता
वाशिंगटन, 27 अक्टूबर . अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों ने सूडान में अकाल की चेतावनी जारी की है. देश के लगभग 2 करोड़ लोग पर्याप्त भोजन पाने के…
सऊदी अरब और अमेरिका से क़रीबी के बावजूद ईरान पाकिस्तान पर भरोसा क्यों करता है? - BBC
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सऊदी अरब और अमेरिका से क़रीबी के बावजूद ईरान पाकिस्तान पर भरोसा क्यों करता है?
पाकिस्तान बनने के बाद से ही अमेरिका और सऊदी का क़रीबी सहयोगी रहा है. इसके बावजूद ईरान पाकिस्तान की मध्यस्थता को स्वीकार कर रहा है और सार्वजनिक रूप से कोई अविश्वास भी नहीं है.
यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को मिले निवेश ऋण पर अमेरिका ने जताई चिंता
वाशिंगटन, 27 अक्टूबर . अमेरिका ने यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को दिए गए रिकॉर्ड स्तर के निवेश ऋण पर चिंता जताई है. अमेरिका का कहना है कि इस…
ट्रम्प नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने से नाराज, नॉर्वे को बताया ‘घटिया देश’; वीडियो में बोले- वहां से किसी को अमेरिका नहीं आने देना चाहता
नीदरलैंड से दो बड़े संकेतः अमेरिका से डील करीब, कार्बन कर पर अड़ा यूरोप;व्यापार समझौतों पर गोयल क्या बोले?
अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशियों को रखने वाली कंपनियों पर कार्रवाई करेंगे वेंस
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मध्यावधि चुनाव: क्या नरम पड़े ट्रंप? कनाडाई पीएम कार्नी का दावा- अमेरिका समझौते की शर्तों पर सहमत, आगे क्या?- Trump bows before midterm elections Hope for agreement with Canada increased Carney said US close to our terms
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: सर्वे में डेमोक्रेट को बढ़त, मैदान में भारतीय मूल के उम्मीदवार भी; भारतवंशी किसके साथ?--US Midterm Elections: Trump Targets Abdul El-Sayed, Indian-American Voters and Candidates in Focus
इधर अमेरिका, उधर चीन: महाशक्तियों की दुश्मनी भी उतनी ही खतरनाक है, जितनी कि उनकी दोस्ती
इधर अमेरिका, उधर चीन: महाशक्तियों की दुश्मनी भी उतनी ही खतरनाक है, जितनी कि उनकी दोस्ती
वाशिंगटन, 26 अक्टूबर . अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के Monday को भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने पेश एक प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव में जुलाई महीने…
Iran America War: ईरान के पास Father of all Bombs,अमेरिका को सीधी धमकी से उठे सवाल| Trump
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जयपुर में अंतरराष्ट्रीय फैशन और सौंदर्य प्रतियोगिता ‘मिस एंड मिसेज सुपरमॉडल वर्ल्ड वाइड-2026’ का ग्रैंड फिनाले आगरा रोड स्थित एस्थेरिया बेरीज रिसॉर्ट एंड स्पा में आयोजित हुआ। दुनिया के 40 देशों से आई प्रतिभागियों ने इस मंच पर अपनी खूबसूरती, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, प्रतिभा और मंच पर प्रस्तुति के दम पर अंतरराष्ट्रीय खिताबों के लिए मुकाबला किया। प्रतियोगिता के मिस वर्ग में जॉर्जिया की लिया गुगुशविली ने विजेता का ताज अपने नाम किया, जबकि मिसेज वर्ग में अमेरिका की ल्यूडमिला व्लादिमिरोवना वॉरेन वेट्रेल विजेता बनीं। भारत की नेहा सिंह ने मिस कैटेगरी में चौथा रनर-अप स्थान हासिल किया। ग्रैंड फिनाले में अलग-अलग देशों की प्रतिभागियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। मुख्य खिताबों के साथ विभिन्न विशेष श्रेणियों में भी विजेताओं की घोषणा की गई। आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा और सांस्कृतिक पहचान प्रदर्शित करने का मंच दिया। यहां देखिए इवेंट के फोटोज… मिस कैटेगरी में जॉर्जिया की लिया ने पहना ताज मिस सुपरमॉडल वर्ल्ड वाइड-2026 के खिताब पर जॉर्जिया की लिया गुगुशविली ने कब्जा जमाया। प्रतियोगिता में फिलीपींस की प्रतिभागी प्रथम रनर-अप, कजाकिस्तान की प्रतिभागी द्वितीय रनर-अप और इथियोपिया की प्रतिभागी तृतीय रनर-अप रहीं। भारत की नेहा सिंह ने चौथा रनर-अप स्थान हासिल कर भारतीय प्रतिनिधित्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का आकलन केवल उनके लुक्स के आधार पर नहीं, बल्कि मंच पर आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, प्रस्तुति और दर्शकों के सामने अपनी बात रखने की क्षमता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे आयोजनों में प्रतिभागियों को अलग-अलग राउंड के जरिए अपनी विशेषताओं और प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। वहीं, मिस टीन सुपरमॉडल वर्ल्ड वाइड-2026 का खिताब किर्गिस्तान की प्रतिभागी ने जीता। फिलीपींस की प्रतिभागी को मिस सुपरमॉडल वर्ल्ड वाइड-2026 का ब्रांड एंबेसडर भी घोषित किया गया। मिसेज कैटेगरी में अमेरिका की ल्यूडमिला रहीं विजेता मिसेज सुपरमॉडल वर्ल्ड वाइड-2026 के फिनाले में अमेरिका की ल्यूडमिला व्लादिमिरोवना वॉरेन वेट्रेल ने विजेता का ताज हासिल किया। मध्य एशिया की ओक्साना बोब्रिशेवा प्रथम रनर-अप रहीं। किर्गिस्तान की प्रतिभागी को द्वितीय रनर-अप, फिलीपींस की प्रतिभागी को तृतीय रनर-अप और कजाकिस्तान की प्रतिभागी को चतुर्थ रनर-अप घोषित किया गया। एस्टोनिया की लेइली गैनुत्दिनोवा पांचवीं रनर-अप रहीं। मिसेज कैटेगरी में विभिन्न देशों की प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति और व्यक्तित्व के जरिए निर्णायकों का ध्यान आकर्षित किया। इस वर्ग में मुख्य खिताब के अलावा पर्यटन, सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक योगदान और प्रेरणादायक व्यक्तित्व जैसे विषयों से जुड़े विशेष पुरस्कार भी दिए गए। बेलारूस की प्रतिभागी ने मिसेज टूरिज्म वर्ल्ड वाइड-2026 का खिताब जीता, जबकि फिनलैंड की प्रतिभागी को मिसेज सुपरमॉडल वर्ल्ड वाइड-2026 का ब्रांड एंबेसडर चुना गया। न्यूजीलैंड की प्रतिभागी को मिसेज इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर और लेबनान की प्रतिभागी को मिसेज कल्चरल एंबेसडर का खिताब प्रदान किया गया। कैस्पियन क्षेत्र की प्रतिभागी को वुमन ऑफ इंस्पिरेशन और मेक्सिको की प्रतिभागी को मिसेज सुपरमॉडल वर्ल्ड वाइड-अमेरिकाज का खिताब मिला। ग्रैंड फिनाले में मुख्य विजेताओं के अलावा विशेष श्रेणियों के पुरस्कारों की घोषणा भी की गई। मिस कैटेगरी में फिलीपींस की प्रतिभागी को पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड और मिस चैरिटी क्वीन का खिताब मिला। लेबनान की प्रतिभागी को मिस एंबेसडर ऑफ पीस चुना गया। मिसेज कैटेगरी में किर्गिस्तान की प्रतिभागी ने पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड और मिसेज चैरिटी क्वीन के खिताब अपने नाम किए। इन पुरस्कारों के जरिए प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की लोकप्रियता, सामाजिक भागीदारी और विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को भी पहचान देने का प्रयास किया गया। आयोजक प्रियंका और नितिन दूबे के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में 40 देशों की प्रतिभागियों की मौजूदगी ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया।
अमेरिका के ओशो के बसाए शहर रजनीशपुरम पहुंचे भारतीय YouTuber, पुराने विवाद की यादें आज भी मौजूद होने का दावा
हम आज जिस गाने के बारे में बात कर रहे हैं वो है 1981 में आई फिल्म ज्योति (Jyoti 1981) का गाना. यह हेमा मालिनी (Hema Malini) और जीतेंद्र (Jeetendra) की फिल्म का है. इसे अरुणा ईरानी (Aruna Irani) पर फिल्माया गया था.
अमेरिका-ईरान तनाव: ईरान की 7 शर्तें, ट्रंप की चेतावनी और कतर की मध्यस्थता
कतर की मध्यस्थता के बीच ईरान ने बातचीत के लिए 7 शर्तें रखी हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई या समझौते का फैसला जल्द लेने के संकेत दिए हैं।
वाशिंगटन डीसी (USA), [ANI]: पश्चिमी एशिया में एक बार फिर युद्ध का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका की सेना ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी में जुटी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिलते ही सेना 96 घंटे के भीतर हमला शुरू कर सकती है। ट्रंप ने अभी तक कोई अंतिम फैसला तो नहीं लिया है लेकिन अमेरिका ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और इजरायल के साथ भी आगे की कार्रवाई को लेकर बातचीत कर रहा है।अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के रडार और मिसाइल लॉन्चर के अलावा उसके सैन्य ठिकानों, ऊर्जा केंद्रों और परमाणु ठिकानों को भी निशाना बना सकता है। इसके लिए अमेरिकी सेना और पेंटागन हमले के संभावित ठिकानों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस साल के आखिर तक, खासकर अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद, इस पर फैसला हो सकता है। ईरान की सेना अब अमेरिका के लड़ने के तरीके को बेहतर समझती है। ऐसे में ईरान के सभी ठिकानों पर हमला करना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा।ईरान के जवाबी हमले का खतराअमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमला करते हैं, तो ईरान और यमन के हूती विद्रोही जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। वे पश्चिमी एशिया में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।इस खतरे को देखते हुए अमेरिका सुरक्षा बढ़ा रहा है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक:• सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास से कर्मचारियों को वापस बुलाने के आदेश दिए गए हैं।• अगले सैन्य बदलाव के दौरान कुछ गैर-जरूरी अमेरिकी सैनिकों को पश्चिमी एशिया नहीं भेजा जाएगा।• क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है।ईरान पर हमले को लेकर इजरायल की तैयारीइजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान पर फिर हमला करना चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए अमेरिका से मदद मांगी थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल रुकने को कहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने अभी हमले टाल दिए हैं और आगे अमेरिका के साथ मिलकर कार्रवाई कर सकता है।इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने नेतन्याहू और सेना प्रमुख इयाल ज़मीर के बीच मतभेद की खबरों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि इजरायल का चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने का इरादा नहीं था। लेकिन अगर ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो इजरायल भी पूरी ताकत से जवाब देगा।तनाव के बीच तेल की कीमतों ने मारी छलांगस्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ गई है, फिर भी तेल की कीमतें कम नहीं हो रही हैं। इसकी बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव और हमले का डर है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अगर बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकलता है, तो ट्रंप सैन्य कार्रवाई का फैसला ले सकते हैं। अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका इस तनाव को खत्म करने के लिए क्या योजना बना रहा है।फिलहाल अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार बताई जा रही है, लेकिन उसे ट्रंप के आदेश का इंतजार है। वहीं, इजरायल ने भी अभी ईरान पर नए हमले रोक रखे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमेरिका और इजरायल आगे क्या कदम उठाते हैं।
अमेरिका से डिपोर्ट हुए पानीपत के युवक राहुल मलिक मर्डर केस में पुलिस ने दो आरोपियों आर्यन और साहिल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूछताछ में दोनों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। थाना सेक्टर-29 के इंस्पेक्टर रॉबिन नैन के मुताबिक, हत्यारोपी आर्यन राहुल के बचपन का दोस्त है, जबकि साजिश में साहिल की भी अहम भूमिका सामने आई है। उसकी राहुल से कोई रंजिश नहीं थी, लेकिन वह उससे ईर्ष्या (जलन) रखता था। वह भी अमेरिका से डिपोर्ट हो चुका है और अब यूरोप जाना चाहता था। खास बात यह है कि वारदात के बाद खुद को बचाने की मंशा से उसने ऐसी परिस्थितियां बनाने की कोशिश की, जिससे वह सीधे तौर पर हत्या के आरोप से बच सके। उसने वारदात के बाद मौके का एक वीडियो बनाया, जिसमें राहुल करीब डेढ़ घंटे तक खून से लथपथ हालत में फर्श पर पड़ा दिखाई दे रहा है। उसी हालत में वह डेढ़ घंटे तक तड़पता रहा। दूसरा वीडियो थाने के बाहर का है, जिसमें साहिल दावा कर रहा है कि एक अन्य युवक को भी मारने की योजना बनाई जा चुकी है, जिसके लिए दो पिस्टल भी मंगवाई गई हैं। फिलहाल, पुलिस इन सभी कड़ियों को जोड़ने के लिए दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। इंस्पेक्टर के अनुसार, शुरुआती जांच में हत्या के पीछे कोई पुरानी रंजिश सामने नहीं आई है। वीडियो में हत्यारोपी साहिल ये बात कह रहा… इंस्पेक्टर रॉबिन नैन के अनुसार, साहिल ने वारदात के बाद मौके पर एक वीडियो बनाया। इसके बाद वह खुद थाने पहुंचा और वहां भी वीडियो बनवाया। पुलिस जांच में उसकी इस गतिविधि को हत्या के मामले से खुद को अलग दिखाने और सरकारी गवाह बनने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वह वीडियो के जरिये खुद को घटनास्थल पर मौजूद एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करना चाहता था, जिसका हत्या में कोई हाथ नहीं है। अब यह वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह कई चौंकाने वाली बातें कहता नजर आ रहा है। 'मैं साहिल पुत्र यशपाल, नांगल खेड़ी (गढ़ी) का निवासी हूं। राहुल मलिक की हत्या के बाद राकू और राकू का भाई मुझे और आर्यन को करनाल ले गए। वहां उन्होंने हमारे फोन बंद करवा दिए और बताया कि तुम्हारे फोन की लोकेशन ट्रेस हो सकती है। वहां शराब पीने के बाद उन्होंने चेयरमैन को फोन किया और बताया कि संदीप छूटकर वापस आ चुका है और कल सुबह आर्यन को पेश करना पड़ेगा। इसके बाद उन्हें पता चला कि आरोपियों का नाम गांव के ही 'गरड़े ' नाम के शख्स ने लिखवाया है। उन्होंने आर्यन से कहा कि अगर तुम जेल जाओ, तो यूपी के राजा भैया के राइट हैंड भोला के पास चले जाना और बोल देना कि तुम राकू के भतीजे हो; वह तुम्हें संभाल लेगा। अगले दिन सुबह वे मुझे यह समझाने लेने आए कि तुम्हें यही बयान देना है कि 'जब लड़ाई-झगड़े का वीडियो बनाया गया था, उस समय हम दुकान पर सामान लेने चले गए थे।' अब गांव के ही गरड़े को मारने की साजिश राकू और पूनिया नाम के शख्स कर रहे हैं, जिसके लिए दो पिस्तौलें मंगवाई गई हैं। वे कह रहे थे कि अगर हमारे भतीजे पर बात आई तो देख लेंगे और अब खुली बदमाशी होगी। आरोपी, पंपू नाम के एक शख्स का हवाला देते हुए कह रहा है कि उसे भी देख लेंगे कि वह क्या चीज है।' युवक राहुल के मर्डर की दो तस्वीरें… राहुल की मर्डर केस में पुलिस ने ये खुलासा किया… बचपन के दोस्त थे राहुल और आर्यन, साथ गए थे अमेरिका इस हत्याकांड में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राहुल और मुख्य आरोपी आर्यन बचपन के दोस्त थे। दोनों नांगल खेड़ी गांव के रहने वाले थे और लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों बेहतर भविष्य की उम्मीद में डंकी रूट के जरिये अमेरिका गए थे, लेकिन वहां से उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया था। साहिल भी अमेरिका से डिपोर्ट होकर भारत लौटा था। तीनों एक ही गांव के रहने वाले थे और आपस में दोस्त हैं। परिवार ने चार युवकों पर लगाए थे आरोप राहुल की हत्या के बाद उसके परिजनों ने गांव के ही युवकों पर वारदात में शामिल होने के आरोप लगाए थे। गिरफ्तारी में देरी से नाराज परिजनों ने नागरिक अस्पताल के बाहर जीटी रोड पर जाम भी लगाया था। पुलिस के आश्वासन के बाद उन्होंने जाम खोल दिया था। बाद में राहुल के पिता राकेश मलिक की शिकायत पर औद्योगिक सेक्टर-29 थाना पुलिस ने आर्यन, राकू और रिंकू समेत एक अन्य युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इनमें से आर्यन और साहिल को अरेस्ट कर लिया गया है। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका से डिपोर्ट युवक के मर्डर का VIDEO:शरीर पर चाकू के गहरे घाव, फर्श पर शराब की बोतलें-खून बिखरा दिखा; पानीपत में बेस्ट फ्रेंड पर FIR पानीपत में अमेरिका से डिपोर्ट हुए युवक राहुल मलिक (28) की हत्या के मामले में एक वीडियो सामने आया है। इसमें राहुल फर्श पर खून से लथपथ पड़ा दिखाई दे रहा है और पूरे कमरे में खून फैला हुआ है। वीडियो में शराब की बोतल और ऑफिस का टूटा हुआ सामान भी नजर आ रहा है। (पूरी खबर पढ़ें)
लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश ब्राजील में जहां राष्ट्रपति चुनाव के बेहद कांटे के मुकाबले में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली है। लेकिन इस जीत के साथ ही ब्राजील में एक सियासी बवंडर भी शुरू हो गया है। पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसुनारो के बेटे और विपक्षी उम्मीदवार फ्लेवियो बोलसुनारो ने नतीजों को मानने से साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव प्रक्रिया पर सीधे तौर पर धांधली और नियमों से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाते हुए चुनावों को रद्द करने की मांग कर दी है। पहले राउंड में पिछड़े फिर पलटीबाजी और अब ऐसी जीत की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिणपंथी राजनीति के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया। ब्राजील में 80 साल के लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने फ्लावियो बोलसनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया है। लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी बात सिर्फ इतनी नहीं कि लूला फिर सत्ता में लौटे हैं। असली कहानी है उनकी चुनावी वापसी। ब्राजील की संप्रभुता और अमेरिका के साथ रिश्तों का भविष्य। क्योंकि लूला खुले तौर पर ट्रंप की कई नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। वहीं उनके प्रतिद्वंदी फ्लावियो बालसुनारो दक्षिणपंथी नेता और पूर्व राष्ट्रपति जार बोलसुनारो के बेटे हैं। ऐसे में लूला की जीत को ट्रंप की राजनीति के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन क्या यह वाकई ट्रंप की हार है? क्या ब्राजील ने अमेरिका को साफ संदेश दे दिया है? कि वो किसी के दबाव में नहीं आएगा और पहले दौर में पीछे रहने के बाद लूला ने आखिर में जो है बाजी कैसे पलट दी। इसने ट्रंप के घमंड और दादागिरी को कैसे चूरचूर कर डाला और लूला का चौथी बार ब्राजील का राष्ट्रपति बनना लैटिन अमेरिका की राजनीति पर कैसा संभावित असर डालने वाला है। कैसे लूला ने सेंकेड राउंड में पलट दी बाजी ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव का पहला दौर लूला के लिए चुनौती लेकर आया था। दक्षिणपंथी सेनेटर फ्लावियो बोलसनारो पहले दौर में आगे रहे जबकि लूला दूसरे स्थान पर थे। ऐसा लग रहा था कि ब्राजील में सत्ता का समीकरण बदल सकता है। लेकिन दूसरे दौर में तस्वीर पलट गई। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट यानी टीएसई की तरफ से जारी आधिकारिक नतीजों के मुताबिक वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। अगर नतीजों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के नेता लूला डसिलवा को 51.78% वैध वोट मिले हैं। वहीं लिबरल पार्टी के उम्मीदवार फ्लेवियो को 48.23% वोट हासिल हुए हैं। यानी कि जीत और हार का अंतर महज 3.5% का है। यह अंतर दिखाता है कि ब्राजील की जनता वैचारिक रूप से दो फाड़ हो चुकी है और मुकाबला आखिरी वोट तक कितना करीबी था। इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पहले दौर में लूला दसिलवा पीछे चल रहे थे। 4 अक्टूबर को हुए पहले राउंड के मतदान में फ्लेवियो बोलसनारो 47.03% वोटों के साथ बढ़त बनाए हुए थे। जबकि लूला को 45% 16% वोट मिले थे। उस वक्त ऐसा लग रहा था कि दक्षिणपंथी लहर लूला की सत्ता को उखाड़ फेंकेगी। लेकिन इसके बाद लैटिन अमेरिका में तीन हफ्तों तक चला आक्रामक चुनाव प्रचार। लूला ने अपने मजदूर वर्ग के जनाधार पूर्वोत्तर के गढ़ और आम जनता के बीच जमीन नापी। दूसरे दौर यानी रन ऑफ में शानदार वापसी करते हुए लूला ने बाजी पलट दी। इसे भी पढ़ें: ट्रंप के मुखर आलोचक Lula Da Silva ब्राजील में फिर जीते; 44 लाख वोटों से Flavio Bolsonaro हारे, चुनाव नतीजे रद्द करने की मांग की नतीजों पर प्रतिद्वंद्वी बोलसनारो ने क्या कहा अब बात करते हैं उस विवाद की जिसने ब्राजील को एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। हार के बाद ब्राज़लिया से फ्लेवियो बोलसनारो ने तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि जिन परिस्थितियों में यह सब हुआ उसके बाद नतीजों को स्वीकार करना असंभव है। हम कानूनी कारवाई करेंगे और चुनाव को रद्द करने की मांग करेंगे। रविवार की दोपहर क्रिस्टियानो जानी ने मतदान केंद्रों को 2 घंटे अतिरिक्त खुला रखने का आदेश दे दिया। फ्लेवियो बल्सनारो का आरोप है कि जस्टिस जानिन को लूला ने ही सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया था और वह पहले लूला के निजी वकील रह चुके हैं। एंड वक्त पर वोटिंग का समय बढ़ाकर सुप्रीम कोर्ट ने खेल के नियम बदल दिए जिससे लूला को फायदा पहुंचाया गया है। हालांकि इस पूरे विवाद पर एक पेच यह भी है कि खुद बालसुनारो के कैंप ने भी खराब मौसम के चलते कुछ राज्यों में समय बढ़ाने की मांग की थी। इलेक्ट्रोरल कोर्ट के चीफ कांसियो नून्स मारकेस ने दोनों उम्मीदवारों से बात की और लूला की जीत की औपचारिक पुष्टि कर दी। दिलचस्प बात यह भी है कि मार्केस को पूर्व राष्ट्रपति जायर व्सेसारो के कार्यकाल में नियुक्त किया गया था। मार्केस ने साफ किया कि आखिरी पलों में समय बढ़ाने के फैसले से काउंटिंग पर असर जरूर पड़ा है। लेकिन अंतिम नतीजों में कोई बाहरी दखल नहीं था और चुनाव निष्पक्ष रहा है। लेकिन दुनिया की चिंताएं इसलिए बढ़ गई है क्योंकि यह पूरा घटनाक्रम साल 2022 के चुनाव की याद दिलाता है। उस समय जाहिर बोलसुनारो ने भी लूला से मिली करीबी हार को स्वीकार नहीं किया था। जिसके बाद उनके समर्थकों ने संसद और सरकारी इमारतों पर धावा बोल दिया था। इसे भी पढ़ें: ''White House ऐसा लगता है जैसे Saddam Hussein ने Cheesecake Factory खोल ली हो'', Obama के तंज पर बुरी तरह भड़के Trump लूला की वापसी और वाशिंगटन के लिए संदेश यह जीत 80 वर्षीय लूला की एक और राजनीतिक वापसी है। उन्हें 2018 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल हुई थी, लेकिन बाद में ये आरोप खारिज कर दिए गए। 2022 में जायर बोल्सोनारो को हराकर वे फिर से सत्ता में लौटे। लूला की यह जीत ऐसे समय में हुई है, जब लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों में दक्षिणपंथी सरकारों की ओर झुकाव बढ़ रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने बोल्सोनारो के खेमे पर ब्राजील की संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने ऐसी नीतियों के खिलाफ चेतावनी दी जो सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को कमजोर कर सकती हैं, और गरीबी कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में हुई प्रगति को उलट सकती हैं। यह नतीजा ट्रम्प के लिए एक झटका है, जिनके प्रशासन ने बोल्सोनारो परिवार को फिर से सत्ता में लाने की कोशिशों का समर्थन किया था। लूला का लगातार नेतृत्व इस क्षेत्र में वाशिंगटन के प्रभाव को संतुलित करने का काम कर सकता है। लूला के कार्यकाल में विदेश मंत्री रहे सेल्सो अमोरिम ने रॉयटर्स को बताया कि लैटिन अमेरिका में संतुलन बनाए रखने में ब्राज़ील के राष्ट्रपति की भूमिका अहम होगी। इसे भी पढ़ें: Iran ने कहा America के साथ कूटनीति के रास्ते खुले, मध्यस्थों से भेजे जा रहे संदेश इस जीत ने कैसे ट्रंप को हरा दिया? लूला डसिलवा वही शख्सियत हैं जिन्होंने ना सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप को उंगलियां दिखाई, तेवर दिखाया और यह भी जता दिया कि ब्राजील जो है अमेरिका का कोई गुलाम बनने वाला देश नहीं है। उसके प्रभाव से जो है मुक्त रहने वाला देश है। उसने साफ-साफ कह दिया था कि अगर हमारे ऊपर किसी भी तरह से व्यापारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की जाती है तो हमारे पास और भी बहुत सारे रास्ते खुले हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप को यह बातें जो है अपने ईगो से ज्यादा बड़ी दिखाई दी। उनका ईगो कहीं ना कहीं इससे हर्ट होता हुआ दिखाई दिया था। ऐसी अपेक्षाएं रही होंगी उनको कि लूरा डसिलवा जो है सत्ता से अब बेदखल हो जाए। लेकिन इस चुनाव ने कहीं ना कहीं उनकी उम्मीदों पर पानी फेर कर रख दिया है। कंजेर्वेटिव कांग्रेस लूला के लिए पेश कर रही है चुनौती अपनी जीत के बावजूद, लूला को अपने चौथे कार्यकाल के दौरान बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्राज़ील ने 1980 के दशक में लोकतंत्र की बहाली के बाद से अपनी सबसे रूढ़िवादी कांग्रेस चुनी है, जहाँ बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी और उसके सहयोगियों का दोनों सदनों में गहरा प्रभाव रहने की उम्मीद है। यह राजनीतिक संतुलन लूला के लिए नए कानून पारित कराने और बजट संबंधी निर्णयों पर नियंत्रण बनाए रखने में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। आर्थिक दबाव भी एक और बड़ी चिंता का विषय है। सरकार ने अगले वर्ष 2.3% की आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया है, जबकि सार्वजनिक ऋण बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 82% से अधिक हो गया है। ऊँची ब्याज दरें, घरेलू कर्ज़ और सरकारी खर्च को नियंत्रित करने का दबाव प्रशासन पर भारी पड़ने के आसार हैं। इसलिए लूला को सामाजिक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के अपने वादे को पूरा करने के साथ-साथ एक रूढ़िवादी विधायिका के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होगा। उनकी इस जीत ने एक और कार्यकाल तो सुरक्षित कर लिया है, लेकिन बोल्सोनारो खेमे द्वारा चुनावी नतीजों को स्वीकार करने से इनकार करने के कारण आने वाले हफ्तों में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
ब्राजील में Lula Da Silva की चौथी जीत, अमेरिकी महाद्वीप के वामपंथी नेताओं ने दी बधाई
अमेरिका महाद्वीप के नेताओं ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को विपक्षी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हरा कर अभूतपूर्व चौथी बार राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर सोशल मीडिया पर बधाई दी। क्षेत्र के अन्य वामपंथी रुझान वाले नेताओं ने नतीजों पर विशेष रूप से तेजी से प्रतिक्रिया दी। लूला को लातिन अमेरिका के वामपंथी खेमे में एक सम्मानित नेता माना जाता है। उन्होंने 2003 से 2010 तक ब्राजील का शासन संभाला था। उस समय क्षेत्र के कई देशों में वामपंथी नेता सत्ता में थे। वर्ष 2023 में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद से लूला, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। लूला की जीत पर मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा, ‘‘लोकतंत्र जिंदाबाद, ब्राजील की जनता की जीत हुई है। राष्ट्रपति लूला को बधाई।’’क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा, ‘‘प्रिय भाई लूला, क्यूबा की सरकार और जनता की ओर से मैं आपको इस ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई देता हूं। यह जीत आपके नेतृत्व में ब्राजील की जनता द्वारा अपनाए गए शांति, संप्रभुता और सामाजिक न्याय के मार्ग को जारी रखना सुनिश्चित करती है।’’वहीं, अर्जेंटीना की पूर्व राष्ट्रपति क्रिस्टीना किर्चनर ने कहा, ‘‘कॉमरेड राष्ट्रपति लूला, आपको बधाई। आपने अपने सातवें राष्ट्रपति चुनाव में अपने हमवतन लोगों के जोश और विवेक को जगाया और उन्हें इस लड़ाई में जीत दिलाई।’’चिली के राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्त ने कहा, ‘‘चिली और ब्राजील के सामने साझा भविष्य की व्यापक संभावनाएं हैं। हम अपने देशों के बीच आर्थिक एकीकरण और क्षेत्र में संगठित अपराध से मुकाबले के लिए संबंध मजबूत करने वाले एजेंडे पर काम जारी रखेंगे।’’इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने कहा, ‘‘इस जीत के लिए लूला को बधाई। हमारे क्षेत्र के दुश्मन साझा हैं, चुनौतियां समान हैं और मिलकर काम करने पर हमें बहुत कुछ हासिल हो सकता है।’’इस बीच, पेरू के राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी और बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने भी लूला को बधाई दी। अमेरिका के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा, ‘‘लूला ने ब्राजील के श्रमिकों और लोकतंत्र के पक्ष में आवाज उठाई है तथा अगले चार वर्षों में भी ऐसा करते रहेंगे।’’
अमेरिका के लास वेगास से गैंगस्टर हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके हवाला नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।
लिमिटेड की नई इकाई का उद्घाटन रविवार को राजातालाब के खोचवां में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस यूनिट की स्थापना पर करीब 150 करोड़ रूपये का निवेश किया गया है।
दिल्ली के पहाड़गंज में 72 वर्षीय महिला चोर गिरफ्तार, 1.85 लाख रुपये और 2,600 अमेरिकी डॉलर बरामद
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होर्मुज से 1.5 अरब बैरल तेल के निर्यात में मदद का अमेरिकी दावा, सेंटकॉम प्रमुख ने किया दौरा
वाशिंगटन, 26 अक्टूबर . अमेरिका की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने पिछले छह महीनों में खाड़ी देशों को…
अमेरिका-चीन एआई प्रतिस्पर्धा के बीच फंसे कई देश
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण दुनिया के कई देश दोनों पक्षों के साथ संबंध बनाए रखने की रणनीति अपना रहे हैं।
1200 किमी रेंज और अमेरिकी-चीनी पुर्जे! रूस की नई क्रूज मिसाइल 'फिलिन' ने बढ़ाई यूक्रेन की आफत
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को ने अपने हथियारों के शस्त्रागार में एक बेहद खतरनाक और सस्ते लंबी दूरी के स्ट्राइक हथियार को शामिल किया है, जिसका नाम 'फिलिन' है। इस नई क्रूज मिसाइल को विशेष रूप से यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके सुदूर पश्चिमी क्षेत्रों में तैनात बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम को थकाने और भेदने के मकसद से तैयार किया गया है। यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी (HUR) द्वारा जारी किए गए ताजा तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, रूसी सेना ने 2026 की गर्मियों के अंतिम हफ्तों से इस हथियार का सक्रिय युद्धक उपयोग शुरू कर दिया है। यह मिसाइल न केवल यूक्रेन के अग्रिम मोर्चे के ठिकानों बल्कि देश के सुदूर पश्चिमी और भीतरी सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में रणनीतिक बुनियादी ढांचे को सीधा निशाना बनाने में पूरी तरह सक्षम है।इस नए हथियार के सामने आने से यूक्रेन की रक्षा प्रणाली के सामने अभूतपूर्व जटिलताएं खड़ी हो गई हैं। मॉस्को की रणनीति अब केवल महंगी और अत्यधिक उन्नत मिसाइलों पर निर्भर रहने की नहीं है, बल्कि वह ऐसे सस्ते स्ट्राइक सिस्टम विकसित कर रहा है जिन्हें बड़ी तादाद में बनाकर दागा जा सके। जब सैकड़ों की संख्या में झुंड बनाकर चलने वाले ड्रोनों के साथ इस तरह की तेज रफ्तार क्रूज मिसाइलें आसमान से बरसती हैं, तो कीव के लिए पश्चिमी देशों से मिले महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों के जरिए प्रत्येक खतरे को बेअसर करना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।अमेरिकी पुर्जे और चीनी नेविगेशन: एचयूआर ने खोला मिसाइल के भीतर का राजयूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी (HUR) ने 22 अक्टूबर को अपने आधिकारिक 'वार एंड सैंक्शन्स' पोर्टल पर फिलिन मिसाइल का पूरा कच्चा-चिट्ठा सार्वजनिक करते हुए एक इंटरैक्टिव 3D मॉडल, उसके विस्तृत तकनीकी विनिर्देश और घटकों का डेटाबेस जारी किया है। यूक्रेनी और अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषक तब हैरान रह गए जब जांच में यह सामने आया कि कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद इस मिसाइल के निर्माण में विदेशी घटकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया एजेंसी ने मिसाइल के सर्किट में अमेरिकी निर्माताओं से जुड़े 35 इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित 22 इलेक्ट्रॉनिक घटकों की स्पष्ट पहचान की है।एचयूआर के विशेषज्ञों का कहना है कि फिलिन में इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स काफी हद तक अन्य रूसी मिसाइलों और गैरपिया जैसे घातक स्ट्राइक ड्रोनों में पाए जाने वाले सर्किट बोर्ड से मिलते-जुलते हैं। इन मानकीकृत ऑनबोर्ड यूनिट्स और सर्किट बोर्डों के मानकीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि रूस कम लागत और बहुत कम समय में फैक्ट्रियों के भीतर इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर पा रहा है। मिसाइल के इस अंतरराष्ट्रीय कलपुर्जों के नेटवर्क ने एक बार फिर पश्चिमी निर्यात नियंत्रण और वैश्विक प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।3D प्रिंटेड बॉडी से लेकर जेट इंजन तक: क्या है फिलिन की तकनीकी मारक क्षमतामिलिटार्नी और डिफेंस जर्नल्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिन मिसाइल का डिजाइन और विकास मॉस्को स्थित प्रसिद्ध रक्षा संस्थान 'एनपीओ मोल्निया' द्वारा किया गया है, जो रूस के प्रमुख 'टैक्टिकल मिसाइल्स कॉर्पोरेशन' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिसाइल की शारीरिक बनावट काफी आधुनिक है। इसका 3.5 मीटर लंबा मुख्य धड़ और 3 मीटर चौड़ा पंख बेहद हल्के कार्बन फाइबर और फाइबरग्लास कंपोजिट मटेरियल से तैयार किया गया है। इसके अलावा इसके कुछ जटिल आंतरिक और संरचनात्मक हिस्सों को 3D प्रिंटिंग तकनीक की मदद से ढाला गया है, जिससे इसका वजन कम रहता है और रडार क्रॉस-सेक्शन भी सीमित हो जाता है।मिसाइल को गति देने के लिए इसमें रेनॉल्ड्स एलएलसी द्वारा असेंबल किया गया स्वदेशी रूसी R500 टर्बोजेट इंजन लगाया गया है। इसके ऑनबोर्ड एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सेंट पीटर्सबर्ग की पीएलएजेड (PLAZ) एलएलसी द्वारा तैयार किया गया है, जो पहले से ही रूसी सेना के गैरपिया अटैक ड्रोन के लिए महत्वपूर्ण पुर्जे बनाती है। नेविगेशन और सटीकता के लिए इसमें चीन में निर्मित आधुनिक इनर्टियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के खिलाफ अत्यधिक प्रतिरोधी 16-चैनल वाला 'कोमेटा' सैटेलाइट एंटीना लगाया गया है, जिससे यूक्रेनी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम इसे आसानी से भटका नहीं पाते। जमीन पर लगे मोबाइल लॉन्चर से सॉलिड-प्रोपेलेंट रॉकेट बूस्टर के सहारे दागी जाने वाली यह मिसाइल 50 से 100 किलोग्राम तक का घातक विस्फोटक वारहेड ले जा सकती है। 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ने वाली यह मिसाइल जमीन से मात्र कुछ मीटर की बेहद नीची ऊंचाई से लेकर 6 किलोमीटर के आसमान तक उड़ने की क्षमता रखती है और इसकी कुल मारक रेंज 1,200 किलोमीटर आंकी गई है।सस्ते हथियारों की रणनीति और यूक्रेन के एयर डिफेंस का बढ़ता संकटफिलिन मिसाइल का उद्भव रूस के उस व्यापक रक्षा सिद्धांत का हिस्सा है जिसके तहत वह 'Kh-101' और 'कैलिबर' जैसी अत्यधिक महंगी क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ भारी संख्या में सस्ते विकल्पों को मैदान में उतार रहा है। प्रसिद्ध सैन्य विश्लेषक रॉब ली के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, मॉस्को का रक्षा मंत्रालय साल के अंत तक एक हजार से ज्यादा फिलिन मिसाइलों की खेप अपनी सेना में शामिल करने की तैयारी में था। हालांकि अभी तक युद्ध के मैदान में इसका सीमित और परीक्षण के तौर पर ही इस्तेमाल देखा गया है, लेकिन यदि इसका औद्योगिक उत्पादन तेज होता है, तो यह यूक्रेन के बिजली संयंत्रों और रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाएगा।यह संकट ऐसे समय में गहराया है जब यूक्रेन लगातार रूस के भीषण हवाई हमलों की मार झेल रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हाल ही में सार्वजनिक मंच से चेतावनी दी थी कि रूसी सेना ने महज एक सप्ताह के भीतर करीब 2,300 स्ट्राइक ड्रोन, 48 मिसाइलें और 1,600 गाइडेड ग्लाइड बम दागे हैं, जिससे देश के नौ प्रमुख क्षेत्रों में भारी तबाही मची है। कीव लगातार वाशिंगटन और यूरोपीय सहयोगियों से अतिरिक्त पैट्रियट और नासाम्स (NASAMS) एयर डिफेंस मिसाइलें भेजने की गुहार लगा रहा है। इस भारी सैन्य तनाव के बीच राजनयिक हलचल भी जारी है, जहां राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार नवंबर के शुरुआती पखवाड़े में अबू धाबी के मंच पर यूक्रेन, रूस और अमेरिका के वार्ताकारों के बीच तकनीकी स्तर की त्रिपक्षीय गोपनीय बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।
लातिन अमेरिकी राजनीति के केंद्र वेनेजुएला में उस वक्त एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिला, जब देश की सबसे प्रभावशाली विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने रविवार को अपनी मातृभूमि पर ऐतिहासिक वापसी दर्ज की। करीब बारह महीनों तक देश से बाहर रहने के बाद उनकी इस गोपनीय व अप्रत्याशित वापसी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी गठबंधन और उनके समर्थकों के बीच इस कदम को देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली और स्वतंत्र राजनीतिक प्रक्रिया की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या मौजूदा परिस्थितियों के बीच मचाडो सुरक्षित रूप से अपनी सरजमीं पर कदम रख पाएंगी। उनके मुख्य प्रवक्ता डेविड स्मोलांस्की ने इस घटनाक्रम की औपचारिक रूप से पुष्टि करते हुए इसे देश में शांतिपूर्ण, पारदर्शी और वास्तविक सत्ता परिवर्तन का आधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मचाडो की मौजूदगी से निकट भविष्य में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनाव कराने के जनांदोलन को अभूतपूर्व ऊर्जा मिलेगी।भूमिगत संघर्ष से निर्वासन तक का सफर और दमनकारी सत्ता का सामनामारिया कोरिना मचाडो का हालिया राजनीतिक सफर चुनौतियों, खतरों और व्यक्तिगत जोखिमों से भरा रहा है। पिछले तीन वर्षों से वेनेजुएला के समूचे विपक्ष को एक मजबूत धागे में पिरोने वाली मचाडो को पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासनकाल में भीषण दमन का सामना करना पड़ा था। सरकारी एजेंसियों की धरपकड़ और मनमाने कानूनी मुकदमों से बचते हुए उन्होंने अपने ही देश के भीतर महीनों तक अज्ञात ठिकानों पर छिपकर गुजारे थे। भूमिगत रहते हुए भी उन्होंने लगातार जनता के बीच अपनी आवाज पहुंचाई और चुनावी धांधलियों के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार किया।पिछले वर्ष जब उन्हें मानवाधिकारों, नागरिक स्वतंत्रता और शांति के लिए उनके अद्वितीय योगदान हेतु प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला हुआ, तब उन्हें यह वैश्विक सम्मान ग्रहण करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाना पड़ा। उसी दौरान उन्हें औपचारिक रूप से देश की सीमाओं से बाहर रहने के लिए विवश होना पड़ा। निर्वासन में रहने के बावजूद वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काराकास की जमीनी हकीकत को प्रमुखता से उठाती रहीं और लातिन अमेरिकी देशों से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक अपनी बात मजबूती से रखी।काराकास में सत्ता का उलटफेर और वाशिंगटन के साथ असहज रिश्तेवेनेजुएला का भू-राजनीतिक परिदृश्य तब तेजी से बदला जब इस वर्ष जनवरी में काराकास में एक बड़ा रणनीतिक घटनाक्रम सामने आया। अमेरिकी एजेंसियों द्वारा निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी उथल-पुथल मच गई। हालांकि, लोकतंत्र समर्थकों की अपेक्षाओं के विपरीत, अमेरिकी प्रशासन के समर्थन से सत्ता की बागडोर मादुरो प्रशासन से ही जुड़ी डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर सौंप दी गई।इस निर्णय के बाद से ही मचाडो और अमेरिकी कूटनीतिज्ञों के बीच एक स्पष्ट असहजता और नीतिगत तनाव देखने को मिला। मचाडो का सदैव यह मानना रहा है कि केवल चेहरों के बदलने से व्यवस्था नहीं बदलेगी, बल्कि संप्रभु सत्ता का फैसला वेनेजुएला की आम जनता को अपने मताधिकार के जरिए ही करना होगा। इस कूटनीतिक खिंचाव के दौर में भी उन्होंने बार-बार यह दोहराया कि वे अपने वतन वापस लौटेंगी और स्वतंत्र जनमत संग्रह व लोकतांत्रिक चुनावों के लिए जमीन पर रहकर संघर्ष करेंगी।न्यूयॉर्क टाइम्स का साक्षात्कार और लारा राज्य से सामने आया संदेशहाल ही में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में मचाडो ने अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए थे। जब उनसे पूछा गया था कि वे कब तक वेनेजुएला लौटेंगी, तो उन्होंने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा था कि उनकी घर वापसी किसी की भी उम्मीद से बहुत पहले हो जाएगी। रविवार को उनका यह बयान सच साबित हुआ जब उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संक्षिप्त मगर बेहद भावुक संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि वे वापस आ चुकी हैं और अपने लोगों के बीच खड़ी हैं।इस संदेश के तुरंत बाद उनकी राजनीतिक पार्टी ने वेनेजुएला के लारा राज्य स्थित एक स्थानीय चर्च से उनकी ताजा तस्वीरें सार्वजनिक कीं। इन तस्वीरों में मचाडो को स्थानीय नागरिकों के साथ प्रार्थना करते और शांति का संदेश देते देखा जा सकता है। इन प्रामाणिक दृश्यों ने उनके सुरक्षित आगमन की पुष्टि की और पूरे देश में फैले उनके समर्थकों के भीतर एक नया उत्साह भर दिया।लातिन अमेरिका में स्वतंत्र चुनावों की नई उम्मीद और भविष्य की राहमचाडो की वापसी ऐसे समय में हुई है जब पूरे लातिन अमेरिका की निगाहें काराकास में होने वाले अगले राजनीतिक कदमों पर टिकी हैं। राजधानी काराकास से लेकर बोगोटा और वाशिंगटन तक के राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि मचाडो की शारीरिक उपस्थिति से विपक्ष का बिखराव रुकेगा और सत्ता पक्ष पर निष्पक्ष चुनाव कराने का दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। आम नागरिक जो वर्षों से आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति और मानवीय त्रासदियों से जूझ रहे हैं, वे इस वापसी को एक नई लोकतांत्रिक सुबह की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं।हालाँकि, आगे की राह आसान नहीं होगी। सुरक्षा के खतरे, सत्ता प्रतिष्ठान के कड़े नियम और आगामी चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करना मचाडो के लिए एक जटिल चुनौती साबित होगा। इसके बावजूद, अपनी धरती पर लौटकर उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वेनेजुएला के भविष्य का फैसला अब बंद कमरों में नहीं, बल्कि जनता की खुली भागीदारी के साथ ही तय होगा।
हरियाणा का कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ अमेरिका में फर्जी पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथ नीरज फरीदपुरिया भी पकड़ा गया।
India-US Trade: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, जानिए क्या बोले वाणिज्य मंत्री
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर अधिकांश चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं।
ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए खोले पत्ते: जेडी वेंस और मार्को रुबियो के गिनाए नाम, कहा- हमारे पास मजबूत टीम---Trump Names JD Vance and Marco Rubio as Potential 2028 Presidential Contenders
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव: दूसरे दौर केमतदान के बाद आज आएंगे नतीजे; क्या बढ़ेगा अमेरिका का प्रभाव?
'सऊदी अरब छोड़ दें...', अमेरिका ने अपने कर्मियों को दिया देश छोड़ने का आदेश
सऊदी अरब में बढ़ते सुरक्षा खतरों के कारण अमेरिका ने अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है.
गैंगस्टर Himanshu Bhau अमेरिका में हिरासत में, प्रत्यर्पण की तैयारी में जुटी Haryana Police
हरियाणा के रोहतक का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर 23 वर्षीय हिमांशु ‘भाऊ’ हत्या और रंगदारी समेत कई आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का सरगना है। हिंमाशु के खिलाफ कुल 64 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हिमांशु के खिलाफ अधिकतर मामले उसके गृह राज्य हरियाणा में दर्ज हैं। भारत और विदेश की विभिन्न जांच एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भी उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद विदेश से गिरोह चलाने वाले हिमांशु को उसके गिरोह के सदस्यों ने ‘भाऊ’ (बड़ा भाई) उपनाम दिया। दुनियाभर में फैले आपराधिक नेटवर्क के कथित सरगना हिमांशु को उसके गिरोह में फैसले लेने वाले प्रमुख व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। उसे हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों ने हिरासत में लिया था और वह फिलहाल अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) की हिरासत में है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि अमेरिका में फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर प्रवेश करने और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के आरोप में हिमांशु को हिरासत में लिया गया था। हरियाणा पुलिस ने उसके बारे में अमेरिकी अधिकारियों को जानकारी दी थी। पुलिस अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के साथ समन्वय कर हिमांशु को भारत प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी है। रोहतक जिले के रिटौली गांव के मूल निवासी 23 वर्षीय गैंगस्टर का असली नाम हिमांशु रिटौलिया है। अधिकारियों के अनुसार, उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और आपराधिक धमकी देने से संबंधित धाराओं के तहत 64 मामले दर्ज हैं। इनमें से ज्यादातर हरियाणा में दर्ज किए गए हैं। हिमांशु के आपराधिक गिरोह के गुर्गे मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में सक्रिय हैं। वे हिमांशु के निर्देश पर हत्याओं और रंगदारी की वारदात को अंजाम देते हैं, जबकि वह विदेश से इस नेटवर्क का संचालन करता था। हिमांशु के अपराध की दुनिया में कदम रखने की शुरुआत महज 17 साल की उम्र में हुई थी। वर्ष 2019 में पढ़ाई के दौरान हिमांशु ने कथित तौर पर रंगदारी वसूलने के लिए रोहतक की एक सब्जी मंडी में गोलीबारी की थी, जिसके बाद उसे पकड़ा गया था। नाबालिग होने के कारण हिमांशु को हिसार स्थित किशोर सुधार गृह भेजा गया था, जहां से वह दीवार तोड़कर 17 अन्य बंदियों के साथ फरार हो गया। इसके बाद पुलिस उसे दोबारा नहीं पकड़ सकी। बाद में हिमांशु की अपने गांव के बचपन के दोस्त अंकित उर्फ ‘बाबा’ के साथ दुश्मनी हो गई। गांव में अपना दबदबा कायम करने की कोशिश में बाबा गिरोह ने कथित तौर पर हिमांशु के चचेरे भाई रोहित उर्फ बजरंग की हत्या कर दी। इसका बदला लेने के लिए हिमांशु ने कथित तौर पर पांच दिन बाद बाबा गिरोह के सदस्य हंसराज की हत्या कर दी। दुश्मनी बढ़ने के साथ ही हिमांशु पहले झज्जर और फिर दिल्ली चला गया। दिल्ली में हिमांशु की मुलाकात गैंगस्टर नीरज बवाना से हुई, जिसने उसे अपने गिरोह में शामिल कर लिया। इसके बाद हिमांशु ने कई कारोबारियों को धमकाकर रंगदारी वसूलने की कोशिश की और धीरे-धीरे इतना प्रभाव बढ़ा लिया कि अपना गिरोह बना सके। वर्ष 2022 में हिमांशु कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर भारत से फरार हो गया। वह पहले पुर्तगाल गया और फिर अमेरिका पहुंचा। अमेरिका से हिमांशु ने कथित तौर पर अपने गिरोह में शूटर को शामिल करना शुरू किया और दिल्ली-एनसीआर, पंजाब तथा हरियाणा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचने लगा।
लुकास ड्रोन को मुख्य रूप से ईरान के चर्चित 'शाहेद' ड्रोन की तर्ज पर कम लागत में प्रभावी हमलों के लिए विकसित किया गया है। इसके एक यूनिट की अनुमानित कीमत लगभग 35 हजार डॉलर (क़रीब 29-30 लाख रुपये) है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद को राज्य-नीति के रूप में इस्तेमाल करने को अस्वीकार्य बताया और कहा कि इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता।
इलॉन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के लिए एक नए फीचर का ऐलान किया है। इसके तहत यूजर लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी भी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर टिप के तौर पर भेज सकेंगे। यह ट्रांजैक्शन X के पेमेंट प्लेटफॉर्म 'X मनी' के जरिए पूरा होगा। यह फीचर अभी सिर्फ अमेरिका के X यूजर्स के लिए ही होगा। मस्क ने X पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'हम X मनी के जरिए किसी को भी $1 भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस का ऑप्शन जोड़ रहे हैं।' कैसे काम करेगा $1 टिपिंग सिस्टम? इस नए सिस्टम में किसी पोस्ट के क्रिएटर को पैसे भेजने के लिए यूजर को सिर्फ लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए 1 डॉलर सीधे यूजर के अकाउंट से ट्रांसफर हो जाएगा। यह फीचर यूजर्स को बिना किसी अलग पेमेंट प्रोसेस में जाए सीधे क्रिएटर को सपोर्ट करने का आसान तरीका देता है। हालांकि, X ने अभी तक इसके रोलआउट की तारीख या एलिजिबिलिटी की शर्तों का खुलासा नहीं किया है। कंपनी ने यह भी साफ नहीं किया है कि डिफॉल्ट $1 की रकम को बदला जा सकेगा या नहीं, या भविष्य में एडिशनल पेमेंट ऑप्शन मिलेंगे या नहीं। क्या है X मनी और इसके फीचर्स? X मनी की शुरुआत अमेरिका में जुलाई 2026 में हुई थी। यह सर्विस यूजर्स को पीयर-टू-पीयर (P2P) यानी पर्सन-टू-पर्सन मनी ट्रांसफर, डिपॉजिट अकाउंट्स और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड की सुविधा देती है। यह सर्विस पूरी तरह से 'क्रॉस रिवर बैंक' के बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करती है। यानी X मनी खुद एक बैंक नहीं है, बल्कि एक फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए मिलने वाला डेबिट कार्ड एपल पे से भी कनेक्ट हो जाता है। साथ ही, एलिजिबल डिपॉजिट्स पर ब्याज और खरीदारी पर कैशबेक जैसे फायदे भी मिलते हैं। X को 'एवरीथिंग एप' बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ एक सोशल नेटवर्किंग साइट न रखकर एक 'एवरीथिंग एप' बनाना चाहते हैं, जहां मैसेजिंग, सोशल मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज एक साथ मिल सकें। X मनी का यह $1 टिपिंग फीचर उसी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। अगर यह बड़े पैमाने पर लागू होता है, तो इससे क्रिएटर्स को सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी लॉन्च करने या भारतीय यूजर्स के लिए $1 टिपिंग फीचर अवेलेबल कराने को लेकर अब तक कोई ऑफिशियल तारीख या ऐलान नहीं किया है। भारत के पास पहले से ही UPI बेस्ड एक मजबूत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम मौजूद है। ऐसे में अगर X मनी भारत में आता है, तो इसे देश के नियमों का पालन करना होगा। फिलहाल यह फीचर केवल अमेरिकी बाजार पर फोकस है। क्या होता है 'एवरीथिंग एप'? 'एवरीथिंग एप' या 'सुपर एप' उस डिजिटल प्लेटफॉर्म को कहते हैं, जहां एक ही एप्लिकेशन में सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल वॉलेट, शॉपिंग, कैब बुकिंग और बैंकिंग जैसी तमाम सर्विसेज एक साथ मिलती हैं। चीन का 'वीचैट'इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इलॉन मस्क X को इसी तर्ज पर दुनिया का सबसे बड़ा सुपर एप बनाना चाहते हैं। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी स्टार्टअप का पारे से सोना बनाने का दावा:क्या हीरे की तरह सस्ता होगा गोल्ड; पहले भी 2 बार लैब में कोशिश हो चुकी सैन फ्रांसिस्को का एक स्टार्ट-अप है मैराथन फ्यूजन। दावा है कि उसने पारे को सोने में बदल दिया है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसने प्रयोग में कुल कितना सोना बनाया है। यही वजह है कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या सच में बाजार में बेचने लायक सोना बन भी पाएगा? 'द अटलांटिक' के मुताबिक, यह कोई नया विचार नहीं है। इसके पहले भी 2 बार लैब में सोना बनाने की कोशिश हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
ईरान पर हमला बोलने वाला अमेरिका? डोनाल्ड ट्रंप के इस जवाब ने बढ़ा दिया सस्पेंस
क्या अमेरिका, ईरान पर कभी भी हमला बोल सकता है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ताजा बयान से यह कयास फिर से उठने शुरू हो गए हैं। ट्रंप ने एक दिन पहले ही ईरान को धमकी दी है।
मिथिला के मखाने की विदेशों में बढ़ रही डिमांड, दुबई-अमेरिका तक हो रहा निर्यात
आधुनिक प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के कारण दरभंगा से मखाने का निर्यात अब दुबई, कनाडा सहित कई देशों में हो रहा हैं।
Iran ने अमेरिका और इजरायल को दी खुली चेतावनी!
मध्य पूर्व में तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर दोबारा हमला हुआ तो ईरान जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने यह भी कहा कि 40 दिनों के युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही और उसके प्रबंधन की व्यवस्था पहले जैसी नहीं रहेगी. इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत जारी है.
Avengers Doomsday New Teaser: अवेंजर्स डूम्सडे के नए टीजर को रिलीज कर दिया गया है. डॉक्टर डूम के खतरे से निबटने के लिए पुराने वाले कैप्टन अमेरिका की वापसी हो गई है.
अमेरिका में भारतीय मूल के 2 उम्मीदवारों की चुनावी जंग सबसे महंगी, अब तक 2.26 अरब रुपये खर्च
संघीय चुनाव आयोग (एफईसी) के आंकड़े एरिजोना के चुनाव में हुए सभी खर्चों को पूरी तरह नहीं दर्शाते. पॉलिटिको ने शुक्रवार को रिपोर्ट किया कि रिपब्लिकन समूह जे फीली के समर्थन में 22 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च कर चुके हैं, जिनमें से बड़ा हिस्सा चुनाव अभियान के अंतिम हफ्तों में खर्च हुआ है.
अमेरिका : निवेश नियंत्रण पर प्रस्तावित नियमों पर चीन की प्रतिक्रिया
बीजिंग, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने हाल ही में वैदेशिक निवेश नियंत्रण के नए संस्करण में प्रस्तावित नियम जारी किए।
अमेरिका के वैदेशिक निवेश नियंत्रण पर प्रस्तावित नियमों पर चीन की प्रतिक्रिया
अमेरिका के वैदेशिक निवेश नियंत्रण पर प्रस्तावित नियमों पर चीन की प्रतिक्रिया
अमेरिकी चुनाव में ऑपरेशन सिंदूर की गूंज, ट्रंप को नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने का अब भी दुख
अमेरिका के मध्यावधी चुनाव में ऑपरेशन सिंदूर की धमक सुनाई दे रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस ऑपरेशन को रुकवाने का श्रेय ले रहे हैं. ये अलग बात है कि भारत ने हमेशा इससे इनकार किया है,.
फ्रांस जल रहा है क्योंकि…डोनाल्ड ट्रंप ने बताई चौंकाने वाली वजह, अमेरिका का हवाला क्यों
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को फ्रांस में चल रहे प्रोटेस्ट को लेकर बड़ा दावा किया। ट्रंप ने यह बात खारिज कर दी कि शिक्षा के मुद्दे को लेकर फ्रांस में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
सैन फ्रांसिस्को का एक स्टार्ट-अप है मैराथन फ्यूजन। दावा है कि उसने पारे को सोने में बदल दिया है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसने प्रयोग में कुल कितना सोना बनाया है। यही वजह है कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या सच में बाजार में बेचने लायक सोना बन भी पाएगा? 'द अटलांटिक' के मुताबिक, यह कोई नया विचार नहीं है। इसके पहले भी 2 बार लैब में सोना बनाने की कोशिश हो चुकी है। 10 आसान सवाल-जवाब में समझते हैं मैराथन फ्यूजन के दावे का पूरा सच…. सवाल 1: मैराथन फ्यूजन ने क्या दावा किया है? जवाब: मैराथन फ्यूजन ने कहा कि उसने पारे को सोने में बदल दिया है। दावा है कि उसकी यह उपलब्धि CERN के पिछले रिकॉर्ड से 10 गुना बेहतर है। कंपनी ने कहा कि अब, हम रिकॉर्ड बिजली/ऊर्जा पैदा करने के लिए सैन फ्रांसिस्को में एक फ्यूजन रिएक्टर बना रहे हैं। CERN दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु प्रयोगशाला है, जहां ब्रह्मांड के मूलभूत कणों और नियमों पर रिसर्च की जाती है। CERN ने भी अपने 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' में लेड कणों की टक्कर के दौरान अनजाने में सोना बनाया था, लेकिन वह बेहद मामूली मात्रा में बना था। सवाल 2: मैराथन फ्यूजन असल में सोना क्यों बनाना चाहता है? जवाब: सोना बनाना मैराथन फ्यूजन का मुख्य बिजनेस नहीं है, बल्कि यह एक साइड बिजनेस जैसा है। न्यूक्लियर फ्यूजन ऊर्जा का एक बेहद साफ और असीमित स्रोत है जो भविष्य में कोयले-पेट्रोल की जगह ले सकता है, लेकिन यह तकनीक बहुत ज्यादा महंगी है। कंपनी के को-फाउंडर एडम रुतकोव्स्की के अनुसार, फ्यूजन के दौरान बनने वाले सोने से जो करोड़ों डॉलर मिलेंगे, उससे फ्यूजन के भारी-भरकम खर्चों की भरपाई की जा सकेगी। हर धातु या तत्व की अपनी एक पहचान होती है, जो उसके केंद्र में मौजूद प्रोटॉन की संख्या से तय होती है। पारे के केंद्र में 80 प्रोटॉन होते हैं। वहीं सोने के केंद्र में 79 प्रोटॉन होते हैं। यानी अगर पारे में से सिर्फ 1 प्रोटॉन कम कर दिया जाए, तो वह अपने आप सोना बन जाएगा। सवाल 3: पारे से सोना बनाने की प्रक्रिया क्या है? जवाब: स्टेप 1- कंपनी फ्यूजन रिएक्शन के दौरान बेहद तेज रफ्तार वाले न्यूट्रॉन्स की बौछार पारे के ऊपर करती है। तेज रफ्तार न्यूट्रॉन पारे के परमाणु से टकराता है और उसके अंदर से न्यूट्रॉन को बाहर निकाल देता है। इससे पारा बदलकर 'मरकरी-197' नाम के एक अस्थायी और रेडियोएक्टिव रूप में आ जाता है। स्टेप 2- मरकरी-197 का यह रूप ज्यादा देर ऐसे नहीं रह सकता। लगभग 64 घंटे के अंदर यह खुद को शांत करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन सोख लेता है। इलेक्ट्रॉन सोखते ही पारे के अंदर का एक प्रोटॉन बदलकर न्यूट्रॉन बन जाता है। इससे प्रोटॉन की संख्या 80 से घटकर 79 रह जाती है। सवाल 4: न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक क्या है और यह काम कैसे करती है? जवाब: न्यूक्लियर फ्यूजन बिल्कुल वही प्रक्रिया है जिससे सूरज लगातार ऊर्जा पैदा करता है। इसमें दो परमाणुओं जैसे हाइड्रोजन के आइसोटोप्स को बहुत तेज तापमान और दबाव में आपस में जोड़ा जाता है। इस जुड़ाव से बहुत भारी मात्रा में साफ-सुथरी ऊर्जा पैदा होती है। सवाल 5: क्या विज्ञान की मदद से पहले भी लैब में सोना बनाया गया है? जवाब: सवाल 6: तकनीक सफल होती है, तो एक प्लांट में कितना सोना बन सकता है? जवाब: मैराथन फ्यूजन के 2025 के रिसर्च पेपर के मुताबिक, 1 गीगावाट थर्मल पावर वाले कॉमर्शियल फ्यूजन प्लांट से सालाना करीब 2 टन सोना बनाया जा सकता है। सवाल 7: इस प्रोजेक्ट के सामने सबसे बड़ी तकनीकी रुकावटें क्या हैं? जवाब: इसके सामने 2 बड़ी रुकावटें हैं: सवाल 8: इतिहास में पारस पत्थर का क्या रहस्य रहा है? जवाब: 2,000 सालों से इंसान धातुओं को सोने में बदलने का सपना देखता आया है। ऐसा माना जाता रहा है कि एक ऐसा जादुई पत्थर है जो किसी भी धातु को छूते ही सोना बना सकता है। 1782 में ब्रिटिश केमिस्ट जेम्स प्राइस ने जादुई पाउडर से पारे को सोना बनाने का दावा किया। जब वैज्ञानिकों के सामने इसका डेमो मांगा गया, तो उन्होंने जहर पीकर जान दे दी। वहीं, 20वीं सदी में रुडोल्फ हंटर ने सूरज के नियमों से रोज हजारों डॉलर का सोना बनाने का दावा किया, पर साबित करने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। सवाल 9: अन्य वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मैराथन के इस दावे पर क्या कह रहे हैं? जवाब: सवाल 10: क्या लैब-मेड गोल्ड से बाजार में सोने की कीमतें गिर जाएंगी? जवाब: कृत्रिम हीरे की तरह सोना बनाना सस्ता नहीं है। 2025 में दुनिया की खदानों से 3,672 टन सोना निकाला गया था। दुनिया में कुल 2,22,600 टन माइन्ड सोना पहले से मौजूद है। मैराथन के अनुमानित 2 टन सालाना उत्पादन से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ये खबर भी पढ़ें… स्टारलिंक बोली-हम 5 सालों से भारत में काम कर रहे: हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार, मंजूरी मिलने का इंतजार इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने कहा है कि वह भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान शेयर करते हुए बताया कि वह पिछले 5 सालों से भारतीय रेगुलेटर्स, इंडस्ट्री और ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…
ईरानी सेना : अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को मार गिराया
तेहरान, ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। रविवार सुबह ईरानी सेना ने बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।
ईरानी सेना का दावा, बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी ‘लुकास’ ड्रोन को मार गिराया
तेहरान, 25 अक्टूबर . ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. Sunday सुबह ईरानी सेना ने बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक…
ईरानी सेना का दावा, बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को मार गिराया
ईरानी सेना का दावा, बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को मार गिराया
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: जल्दबाजी के बजाय दीर्घकालिक हितों पर फोकस
वैश्विक आर्थिक पटल पर भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार चर्चाएं जारी हैं। वाशिंगटन की ओर से बार-बार संकेत दिए जा रहे हैं कि दोनों देश किसी बड़े करार के बेहद करीब हैं और अमेरिकी पक्ष इस पर जल्द हस्ताक्षर करने को लेकर उत्साह दिखा रहा है। हालांकि, इसके विपरीत नई दिल्ली का रुख बेहद नपा-तुला, सतर्क और रणनीतिक दिखाई दे रहा है। भारतीय वार्ताकार बिना किसी हड़बड़ी के सौदे की एक-एक शर्त और तकनीकी बिंदुओं की गहन समीक्षा कर रहे हैं। वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए इस बहुचर्चित व्यापारिक घटनाक्रम की पूरी तथ्यात्मक स्थिति यहाँ प्रस्तुत है।अमेरिकी उत्साह और भारत की सतर्कता के बीच का मुख्य अंतरअमेरिकी प्रशासन जहाँ द्विपक्षीय व्यापार को तेजी से विस्तार देने और अपनी कंपनियों के लिए भारतीय बाजारों में सीधी पहुँच बनाने का पक्षधर है, वहीं भारत सरकार इस बात पर अडिग है कि कोई भी समझौता देश की आर्थिक संप्रभुता और घरेलू उद्योगों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। हाल ही में उच्चस्तरीय बैठकों के दौर के बीच भारतीय नीति निर्माताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यापारिक बातचीत में अंतिम कानूनी प्रारूप (Legal Drafting) और उसके दूरगामी प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। भारत की प्राथमिकता केवल तात्कालिक टैरिफ छूट हासिल करना भर नहीं है, बल्कि वह घरेलू कृषि सेक्टर, एमएसएमई (MSME) और विनिर्माण क्षेत्र को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहता है।कृषि, डेयरी और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बनी प्रमुख वजहव्यापार समझौते में देरी और हर शर्त की फूंक-फूंक कर जांच किए जाने की सबसे बड़ी वजह भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर से जुड़ी नीतियां हैं। अमेरिका लगातार भारतीय बाजार में अपने कृषि उत्पादों, जैसे सोयाबीन तेल, पेड़ के मेवे (ट्री नट्स), और अन्य खाद्य वस्तुओं के लिए रियायत और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने की मांग करता आया है। भारत के करोड़ों किसानों और पशुपालकों की आजीविका सीधे तौर पर इन क्षेत्रों से जुड़ी है। इसके अलावा जीएम (Genetically Modified) खाद्य पदार्थों की भारत में संभावित एंट्री को लेकर सख्त नीतियां लागू हैं। भारतीय दल किसी भी ऐसी शर्त पर मुहर नहीं लगाना चाहता जो देश की खाद्य सुरक्षा या ग्रामीण अर्थव्यवस्था को किसी भी रूप में प्रभावित करे।बौद्धिक संपदा अधिकार और डिजिटल व्यापार के पेचीदा पहलूकृषि के अलावा, पेटेंट नियम, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), डेटा लोकलाइजेशन और डिजिटल ट्रेड रूल्स जैसे तकनीकी मुद्दे भी वार्ताओं को लंबा खींच रहे हैं। अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनियां अक्सर कड़े पेटेंट नियमों पर जोर देती हैं, जिससे सस्ती जेनेरिक दवाओं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। भारत दुनिया भर में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, इसलिए वह अपने पेटेंट कानूनों और जनस्वास्थ्य से जुड़े अधिकारों में ढील देने के पक्ष में नहीं है। इसी तरह डेटा सुरक्षा और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नियमों पर भी भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर शर्तें तय कर रहा है।क्या होगा आगे? भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की भावी दिशाभारत-अमेरिका व्यापार संबंध अपने आप में बेहद व्यापक और रणनीतिक हैं, जहाँ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। 'तारीख पर तारीख' की स्थिति यह दर्शाती है कि भारत अब किसी भी वैश्विक महाशक्ति के सामने आर्थिक वार्ता में पूरी मजबूती से अपनी शर्तें रख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भले ही अंतिम सहमति बनने में कुछ वक्त और लगे, लेकिन जब भी यह समझौता धरातल पर उतरेगा, वह दोनों देशों के लिए संतुलित, पारस्परिक और दीर्घकालिक रूप से लाभदायक होगा।
ओहायो में ओबामा का भारतीय-अमेरिकी विवेक रामास्वामी पर हमला, कहा-उन्हें है अटेंशन पाने की ‘तड़प’
वाशिंगटन, 25 अक्टूबर . अमेरिका के पूर्व President बराक ओबामा ने मिडटर्म चुनाव अभियान की क्लीवलैंड में आयोजित अपनी पहली रैली में भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक…
अंतरराष्ट्रीय जगत और पश्चिमी देशों से इस वक्त एक बहुत ही दहला देने वाली और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका (United States) में गन कल्चर (Gun Culture) का खौफनाक चेहरा एक बार फिर से बेनकाब हुआ है। अमेरिका के फ्लोरिडा (Florida) राज्य के तल्लाहसी शहर में एक फुटबॉल स्टेडियम के पास शनिवार देर रात अचानक ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। इस अंधाधुंध गोलीबारी (Mass Shooting) की घटना में 6 नाबालिगों सहित कुल 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि फ्लोरिडा में घटी इस खौफनाक वारदात की पूरी पृष्ठभूमि क्या है और वर्तमान में वहां के हालात कैसे बने हुए हैं।फ्लोरिडा के तल्लाहसी में फुटबॉल स्टेडियम के बाहर हुई अंधाधुंध फायरिंगस्थानीय पुलिस विभाग और अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक हिंसक घटना फ्लोरिडा के तल्लाहसी (Tallahassee) शहर में स्थित प्रतिष्ठित फ्लोरिडा एएंडएम यूनिवर्सिटी (FAMU) के ब्रैग मेमोरियल स्टेडियम (Bragg Memorial Stadium) के बाहरी परिसर के पास घटी। शनिवार की देर रात जब इस स्टेडियम के आसपास भारी भीड़भाड़ थी और एक सार्वजनिक कार्यक्रम चल रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा और वहां अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, स्वैट टीम और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं (Emergency Services) तुरंत मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया।घायलों में 6 नाबालिग भी शामिल, तीन की हालत बेहद नाजुकतल्लाहसी पुलिस विभाग द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, इस गोलीबारी की घटना में कुल 12 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। इनमें से 11 लोगों को सीधे तौर पर गोलियां लगी हैं, जबकि एक अन्य व्यक्ति भगदड़ के दौरान घायल हुआ है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इस हिंसक वारदात का शिकार होने वाले लोगों में 6 वयस्क और 6 नाबालिग (बच्चे एवं किशोर) शामिल हैं।अस्पताल के डॉक्टरों ने जानकारी दी है कि गोलीबारी का शिकार हुए लोगों में से कम से कम तीन घायलों की हालत बेहद नाजुक (Critical) बनी हुई है, जिनका इलाज आईसीयू में चल रहा है। वहीं, बाकी नौ घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। इतनी बड़ी संख्या में नाबालिगों के घायल होने से स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों के बीच भारी रोष और डर का माहौल देखा जा रहा है।अमेरिका में लगातार बढ़ रही गन हिंसा और सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवालअमेरिका में इस तरह की सामूहिक गोलीबारी (Mass Shootings) की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन हर बार इस तरह के हमलों में मासूमों की जान खतरे में पड़ने से वहां के कड़े बंदूक कानूनों को लेकर बहस तेज हो जाती है। तल्लाहसी पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस गोलीबारी को अंजाम देने वाले हमलावर कौन थे और इसके पीछे उनकी असल मंशा क्या थी।पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) और चश्मदीदों के बयानों को खंगाल रही है, ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके। यूनिवर्सिटी प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने छात्रों और नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है, साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पूरे शहर में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।
तालाहासी पुलिस विभाग के अनुसार, घायलों में से 3 लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जबकि बाकी 9 पीड़ितों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका-इजरायल हमलों के नुकसान की भरपाई की मांग उठाई
तेहरान, 25 अक्टूबर . ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से देश को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिलाने…
गोलीबारी से फिर दहला अमेरिका: फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में चली गोलियां, छह बच्चों समेत 12 घायल; तीन की हालत गंभीर florida-am-university-shooting-tallahassee-many-injured-including-six-children
Audi अमेरिका के Georgia में लगाएगी नया प्लांट, होगा 4.2 अरब डॉलर का निवेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि जर्मनी की लक्जरी कार विनिर्माता कंपनी ऑडी अमेरिकी राज्य जॉर्जिया में एक नया कारखाना स्थापित करेगी। कंपनी इस परियोजना पर 4.2 अरब डॉलर का निवेश करेगी और इससे करीब 4,500 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। मध्यावधि चुनाव से पहले इसे ट्रंप के अमेरिका में विनिर्माण को मजबूत करने के वादे को पूरा करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने जॉर्जिया के पेरी में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि फॉक्सवैगन समूह के स्वामित्व वाली ऑडी मैकॉन के निकट यह कारखाना लगाएगी। प्रस्तावित संयंत्र में सालाना दो लाख कार का उत्पादन किया जाएगा। ट्रंप ने कहा, “जरा सोचिए, सालाना दो लाख कार। यह अविश्वसनीय है।” उन्होंने इस निवेश का श्रेय अपनी शुल्क नीति को दिया। हालांकि, उनकी आक्रामक शुल्क नीति को लेकर अमेरिका में आलोचना भी होती रही है। इस अवसर पर ऑडी के प्रबंधन बोर्ड के चेयरमैन गर्नोट डॉलनर भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि नए संयंत्र में कंपनी की सबसे बड़ी और सबसे महंगी स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) का उत्पादन होगा। डॉलनर ने कहा, “यह दीर्घकालिक निवेश है, क्योंकि हमें अमेरिकी बाजार पर भरोसा है।”ऑडी ने एक बयान में कहा कि जॉर्जिया में लगने वाला यह उसका पहला कारखाना होगा। कंपनी के अनुसार, इसमें निर्माण कार्य 2027 में शुरू होने करने की योजना है, जबकि उत्पादन 2030 के शुरुआती वर्षों में शुरू होने की उम्मीद है। इस परियोजना से लगभग 4,500 रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
अमेरिका और इस्राइल के हमले की स्थिति में ईरान ने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछीं 7 प्रमुख अंडरसी इंटरनेट केबल्स को काटने की धमकी दी है। जानिए क्या होगा इसका दुनिया और क्षेत्र पर असर।
ईरान पर कभी भी बरस सकते हैं अमेरिकी बम: डोनाल्ड ट्रंप बोले- कल हो सकता है हमला, डील का रास्ता भी खुला- US bombs could rain down on Iran at any moment Donald Trump says door to deal remains open
अमेरिका मध्यावधि चुनाव: गैर-अमेरिकी मतदाताओं की पहचान पर गरमाई राजनीति, 20 हजार डाक मतपत्रों पर भी विवाद---US Midterm Elections 2026: Voter Citizenship Checks in California, Trump Revives 250% Tariff Claim
कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी से हरियाणा, दिल्ली पुलिस को राहत मिली है। यह गैंग विदेश से रंगदारी समेत अन्य वारदातों को अंजाम देता था।
विचार: अमेरिका के समक्ष अडिग रहे भारत
यदि अमेरिका चाहता है कि भारत उसके ऊर्जा हितों की रक्षा में सहायक बने तो उसे भी भारतीय हितों की रक्षा के प्रति संवेदनशील होना होगा।
क्यों मध्य पूर्व के अपने दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या घटा रहा अमेरिका?
नई दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अभी थमा नहीं है। दोनों ही देश एक-दूसरे को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते रहते हैं। इस बीच अमेरिकी खुफिया विभाग की चेतावनी भी सामने आई है। जिसके बाद अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने कई दूतावासों में स्टाफ की संख्या घटा दी है। दरअसल अमेरिकी खुफिया […]
Hormuz Strait में Iran ने उड़ाए दो अमेरिकी सुपरटैंकर! | Iran US War | Trump | Mojtaba Khamenei
Hormuz Strait में Iran ने उड़ाए दो अमेरिकी सुपरटैंकर! | Iran US War | Trump | Mojtaba Khamenei Iran America War के बीच Strait of Hormuz से जुड़ा बड़ा दावा सामने आया है।
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अमेरिका की राजनीति में क्या यह मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी बाजी? अमेरिकी लोगों की जुबान में कहें तो क्या यह आखिरी इलेक्शन गेम? मिड टर्म इलेक्शन से दो हफ्ते पहले यह सवाल अमेरिकी मीडिया में इसीलिए चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि ट्रंप चुनाव पूर्व हुए ज्यादातर सर्वेक्षण में पीछे हैं। 10 में से नौ चुनावी सर्वे में पीछे 70% अमेरिकी ट्रंप के खिलाफ। अमेरिका में बहुप्रतीक्षित मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इस बार चुनावी बयार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के पूरी तरह खिलाफ बहती नजर आ रही है। ईरान के साथ छिड़े युद्ध और आसमान छूती पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने अमेरिकी जनता के गुस्से को भड़का दिया है, जिसका सीधा असर ट्रंप की गिरती लोकप्रियता पर दिख रहा है। 3 नवंबर के मतदान से ठीक पहले अमेरिकी राजनीति में एक अप्रत्याशित ब्लू वेव उठ खड़ी हुई है। महज कुछ महीने पहले तक जनता से कटे नजर आ रहे डेमोक्रेट्स ने अब पासा पूरी तरह पलट दिया है और कई सीनेट सीटों को कड़े रणक्षेत्र में बदल दिया है। इस बदलाव ने अमेरिकी सीनेट के हाथ से फिसलने की वास्तविक संभावना पैदा कर दी है, जहां फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का 53-47 के बेहद मामूली अंतर से कब्जा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सीनेट में यह संभावित तख्तापलट उन 6 राज्यों के दम पर तय होता दिख रहा है, आयोवा, अलास्का, टेक्सास, मिसिसिपी, कंसास और नेब्रास्का जिन्हें रिपब्लिकन्स का अभेद्य किला माना जाता था। जैसा कि न्यूज आउटलेट एक्सिओस ने रेखांकित किया है। आम चुनावी वर्षों में रिपब्लिकन्स को इन राज्यों की तरफ मुड़कर देखने की भी जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन अब समीकरण इस कदर बदल चुके हैं कि ये तथाकथित 'सुरक्षित सीटें' ही ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई हैं। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर इन 6 राज्यों में क्या चल रहा है और कैसे ये सीटें सत्ता का खेल पलटने वाली है। इसे भी पढ़ें: Android फोन में Apps का Camera और Microphone एक्सेस ऐसे करें चेक और बंद ईरान पर हमले ने बिगाड़ दिया गेम मिड टर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप को लेकर यह चुनावी आंकड़े चौंकाने वाले हैं। क्योंकि पिछले 8 महीने से ट्रंप अमेरिकी जनता को यह कहते हुए ईरान पर हमले कर रहे थे कि इसमें अमेरिका का सबसे बड़ा फायदा होने वाला है। पिछले 8 महीने में अलग-अलग मौकों पर डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान से जंग के बेहिसब फायदे गिना। मिडिल ईस्ट में ईरान अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन है। ईरान के पास न्यूक्लियर बम अमेरिका के लिए खतरा है। ईरान से कट्टरपंथी सरकार का खात्मा अमेरिकी हित में। ईरान की हार के बाद दुनिया में अमेरिका की धौंस बढ़ेगी और ईरान कमजोर होगा तो अमेरिका में तेल गैस सस्ता हो जाएगा। तेल, गैस और इससे बड़ी महंगाई को ट्रंप ईरान वॉर की छोटी कीमत बता रहे हैं। लेकिन अमेरिकी जनता का हाल इस छोटी कीमत से कितना बेहाल हुआ है, इसे कुछ आंकड़ों से समझिए। पेट्रोल की कीमत 4.35 प्रति कैलन पहुंच गई है। डीजल $6.30 प्रति कैलन, गैस $5 प्रति गैलन और इसका असर यह कि एक से $2 प्रति कैलन ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। ईंधन खर्च बढ़ने से महंगाई अमेरिका में चरम पर। वैसे ईरान जंग के बदले इस तेल गैस की महंगाई जिसे ट्रंप एक बहुत छोटी सी कीमत कह रहे थे। उसका हिसाब अमेरिकी जनता महीनों से पूछ रही है। चुनाव प्रचार से पहले ही अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ट्रंप से लोग पूछ रहे हैं कि ईरान पर हमले से आखिर हासिल क्या होगा? टेक्सास 1961 तक, 'लोन स्टार स्टेट' (टेक्सास) पूरी तरह से डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ था। 1961 में जब जॉन टॉवर ने अमेरिकी सीनेट के लिए एक विशेष चुनाव जीता, तब इस राज्य का झुकाव रिपब्लिकन पार्टी की ओर होने लगा। गौरतलब है कि 1988 में लॉयड बेंटसेन, टेक्सास से अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले आखिरी डेमोक्रेट थे। तब से टेक्सास को एक सुरक्षित रिपब्लिकन राज्य माना जाता रहा है, जिससे यहाँ से जीतने की डेमोक्रेट्स की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। हालाँकि, यह मध्यावधि चुनाव वह मौका हो सकता है जिसका डेमोक्रेट्स को लंबे समय से इंतज़ार था। नए पोलिंग के अनुसार, टेक्सास में सीनेट की दौड़ के लिए डेमोक्रेट जेम्स टालारिको और रिपब्लिकन केन पैक्सटन के बीच कड़ी टक्कर है। पैक्सटन, जिन्होंने प्राइमरी चुनाव में मौजूदा सीनेटर जॉन कॉर्निन (जो ट्रम्प के सहयोगी हैं) को हराया था, राज्य के अटॉर्नी जनरल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कई घोटालों में घिरे रहे हैं। 2023 में टेक्सास हाउस ने उन पर महाभियोग चलाया था और वे लगभग अपने पद से हटा दिए गए होते, लेकिन राज्य सीनेट में बहुत कम अंतर से उनके पक्ष में वोट पड़ा, जिससे वे बच गए। चुनाव प्रचार के बीच पैक्सटन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुबई में नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पार्टी में उन्हें अपनी विवाहेतर प्रेमिका और दो ऐसे पुरुषों के साथ देखा गया, जिन पर संघीय स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी (फेडरल हेल्थकेयर फ्रॉड) का आरोप था और जिन्हें कानून से भागने वाला (भगोड़ा) माना जाता था। इसे भी पढ़ें: लाहौर सामूहिक दुष्कर्म मामले में Maryam Nawaz ने जज पर लगाया रिश्वत लेने का आरोप अलास्का पिछले तीन दशकों में डेमोक्रेट्स ने अलास्का में सीनेट का केवल एक चुनाव जीता है। हालाँकि, यह साल उनके लिए अहम हो सकता है। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि मैरी पेल्टोला, जो पहले ही दो बार पूरे राज्य में जीत हासिल कर चुकी हैं, सीनेटर डैन सुलिवन को कड़ी टक्कर दे रही हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच इस बात को लेकर मुकाबला है कि अलास्का के लोगों के लिए खर्च कम करने का काम कौन बेहतर तरीके से करेगा, और साथ ही अमेरिकी कैपिटल में वहां के अहम मछली पकड़ने वाले उद्योग तथा तेल और गैस उद्योग का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। पिछले हफ्ते हुई बहस के दौरान यह मुकाबला व्यक्तिगत हो गया; सुलिवन ने पेल्टोला के चरित्र पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने स्टाफ के साथ बुरा बर्ताव किया था। इसके जवाब में डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेटर पर झूठ बोलने और बेईमानी करने का आरोप लगाया। रिपब्लिकन उम्मीदवार के लिए स्थिति तब और जटिल हो गई जब पता चला कि बैलेट पेपर पर एक और 'डैन सुलिवन' का नाम भी है, जिससे उनके समर्थकों के वोट बंट सकते हैं। कैनसस कैनसस एक 'रूबी रेड' (पूरी तरह से रिपब्लिकन समर्थक) राज्य है। पिछले 94 सालों से यहाँ रिपब्लिकन पार्टी को ही वोट मिलते रहे हैं। हालाँकि, अब ऐसी प्रबल संभावना दिख रही है कि डेमोक्रेट्स इस राज्य में बाजी पलट सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना पोल' और एमर्सन कॉलेज पोलिंग दोनों के अनुसार, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन (जो एक मेगाचर्च के पादरी हैं) और रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेटर रोजर मार्शल के बीच कांटे की टक्कर है। पेशे से डॉक्टर, मार्शल को अर्थव्यवस्था और ईरान युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के कारण भी उन्हें भारी आलोचना झेलनी पड़ रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे उन्होंने मेडिकल बिल बकाया होने पर सैकड़ों मरीजों के खिलाफ मुकदमा कर दिया था। आर्थिक हालात मार्शल के लिए एक और बाधा हैं। खेती पर निर्भर इस राज्य में डीजल की बढ़ती कीमतों से कई मतदाता नाराज हैं। कंसास के पशुपालक इस बात से भी नाराज हैं कि ट्रम्प ने किराने की दुकानों में आयातित बीफ (गोमांस) बिकने की अनुमति दे दी है। किसान ट्रम्प के उन आव्रजन छापों (इमिग्रेशन रेड्स) से भी परेशान हैं, जिनकी वजह से उनके यहाँ काम करने वाले मजदूर चले गए हैं। कंसास फार्म ब्यूरो के अध्यक्ष ग्लेन ब्रुन्को ने 'पोलिटिको' को बताया, लोगों में काफी निराशा और गुस्सा है। इन सब वजहों से, रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में पासा पलटने के हालात बन गए हैं। क्या ऐसा होगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन रिपब्लिकनों का मानना है कि चुनाव सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक समर्थकों के उत्साह को जरूरत से ज्यादा आंका जा रहा है। मिसिसिपी एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, दक्षिणी राज्य मिसिसिपी अब एक चुनावी अखाड़ा बन गया है। कई जानकारों का मानना है कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार स्कॉट कोलोम (जो मिसिसिपी के 16वें सर्किट के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं) के पास मौजूदा GOP सीनेटर सिंडी हाइड-स्मिथ को हराने का अच्छा मौका है। आलोचकों का कहना है कि हाइड-स्मिथ के साथ कुछ विवाद जुड़े हुए हैं। नवंबर 2018 में, उन्होंने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था जब उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी सार्वजनिक फांसी देखने के लिए बुलाया जाए, तो वह सबसे आगे की सीट पर बैठना चाहेंगी। वह ट्रम्प की कट्टर समर्थक रही हैं, जो चुनावों में उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि टैरिफ (आयात शुल्क) की वजह से राज्य के किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अलावा, वह ट्रम्प के उस एक बड़े, बेहतरीन बिल पर पूरी तरह चुप रही हैं, जिसके लागू होने से उनके क्षेत्र के कई लोगों को 'मेडिकेड' (स्वास्थ्य सुविधा) और 'SNAP' (खाद्य सहायता) जैसी सरकारी सुविधाओं से हाथ धोना पड़ सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोलोम इस स्थिति का फायदा उठाकर चुनावों में हाइड-स्मिथ को हरा पाते हैं या नहीं। नेब्रास्का नेब्रास्का एक ऐसा राज्य है, जिसका पूरे राज्य स्तर पर रिपब्लिकन उम्मीदवारों को चुनने का लंबा इतिहास रहा है। हालाँकि, निर्दलीय उम्मीदवार डैन ओसबोर्न इस साल इस चलन को बदलने की उम्मीद कर रहे हैं। वे मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर पीट रिकेट्स को चुनौती दे रहे हैं। यह मुकाबला इतना कड़ा होने के आसार हैं, जैसा कि दशकों से इस पक्के रिपब्लिकन राज्य में देखने को नहीं मिला है। गौरतलब है कि पेशे से एक इंडस्ट्रियल मैकेनिक, ऑसबोर्न ने 2024 में एक अन्य रिपब्लिकन मौजूदा सीनेटर, डेब फिशर के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जिसमें वे हार गए थे। पोल बताते हैं कि ऑसबोर्न, रिकेट्स को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में हैं। क्या वे जीत हासिल कर पाएंगे? यह हमें 3 नवंबर को पता चलेगा।
ईरान की अमेरिका को सीधी चेतावनी, नए हमले का देंगे कड़ा जवाब
ईरान की अंडरग्राउंड ड्रोन फैक्ट्री से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एक बड़ा संदेश जारी किया गया है. ईरान के आर्मी चीफ मेजर जनरल अमीर हाफ ने इस सीक्रेट ड्रोन फैक्ट्री का दौरा कर अमेरिकी राष्ट्रपति को सीधी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान पर कोई नया सैन्य हमला हुआ, तो अमेरिका और इजरायल को एक नहीं बल्कि कई सरप्राइज हमलों का सामना करना पड़ेगा.
जर्मनी की मझोली कंपनियों में अमेरिकी निवेशकों की क्यों बढ़ी दिलचस्पी?
जर्मनी की पारंपरिक औद्योगिक कंपनियों और पारिवारिक कारोबारों में अमेरिकी निवेश लगातार बढ़ रहा है, मगर क्यों?
कैनवा से चैटजीपीटी तक कई एप्स यूज करने में आई परेशानी: अमेरिका में आउटेज की बढ़ीं रिपोर्ट्स, जानें भारत का हाल
फरीदाबाद में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश प्रवक्ता विकास चौधरी की हत्या के मामले में वांछित गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया को भारत लाने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने 22 अक्टूबर को लास वेगास क्षेत्र में नीरज और गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को हिरासत में लिया था। इसकी जानकारी सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां दोनों को भारत लाने की प्रक्रिया में जुट गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क साधा जा रहा है। फरीदाबाद पुलिस पहले ही नीरज के प्रत्यर्पण के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को सिफारिश भेज चुकी है। ACP क्राइम वरुण दहिया ने बताया कि नीरज को हिरासत में लिए जाने की सूचना मिली है। पुलिस इस मामले में और जानकारी जुटा रही है। बता दें कि नीरज फरीदपुरिया पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, अवैध हथियार रखने और रंगदारी मांगने जैसे गंभीर अपराधों के 25 से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें फरीदाबाद और पलवल में करीब 12-12 मामले बताए जा रहे हैं। पुलिस को कई मामलों में उसकी तलाश है। विदेश में रहने के दौरान भी उसके नाम से रंगदारी मांगने की शिकायतें सामने आती रही हैं। एल्विश यादव के घर फायरिंग में भी सामने आया था गैंग का नाम अगस्त 2025 में गुरुग्राम स्थित यूट्यूबर एल्विश यादव के घर पर बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। इस मामले की जांच के दौरान नीरज फरीदपुरिया और हिमांशु भाऊ गैंग से जुड़े शूटरों का नाम सामने आया था। सोशल मीडिया पर गैंग से जुड़े एक पोस्ट में भी फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। हालांकि, नीरज फरीदपुरिया के खुद गोली चलाने की पुष्टि नहीं हुई थी। 2019 में हुई थी विकास चौधरी की हत्या 26 जून 2019 को फरीदाबाद में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश प्रवक्ता विकास चौधरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच के दौरान नीरज फरीदपुरिया का नाम सामने आया था। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी उसके फरीदपुर गांव स्थित मकान पर छापेमारी कर चुकी है। पलवल में एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप जुलाई 2024 में पलवल में रंगदारी मांगने का मामला सामने आया था। आरोप था कि चांदहट गांव निवासी योगेश कुमार को फोन कर एक करोड़ रुपये मांगे गए। फोन करने वाले ने खुद को नीरज फरीदपुरिया बताया था। रकम नहीं देने पर योगेश और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगा था। इस मामले ने विदेश में रहकर कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियां संचालित किए जाने की आशंका को फिर चर्चा में ला दिया था। हत्या में उम्रकैद के बाद हाईकोर्ट से मिली थी जमानत नीरज को वर्ष 2012 में हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2015 में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में 2019 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह विदेश चला गया। इसके बाद विकास चौधरी हत्याकांड समेत अन्य मामलों में उसकी तलाश जारी रही। NIA की छापेमारी के बाद मकान भी ढहाया गया अक्टूबर 2022 में एनआईए ने फरीदाबाद के फरीदपुर गांव स्थित नीरज के मकान पर छापेमारी की थी। इससे पहले पुलिस और नगर निगम की कार्रवाई के दौरान गांव में स्थित उसके करीब 350 वर्ग गज के मकान को ढहा दिया गया था। अब अमेरिका में हिरासत में लिए जाने की खबर के बाद जांच एजेंसियों की नजर उसे भारत लाने की प्रक्रिया पर है।
अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत पर राजा कृष्णमूर्ति चिंतित, FBI से मांगा जवाब
अमेरिका में नस्ली पूर्वाग्रह का मुद्दा उठाते हुए कृष्णमूर्ति ने टेक्सास के बो फ्रेंच का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, फ्रेंच ने फुटबॉल मैच देखने पहुंचे भारतीय मूल के बच्चों को विदेशी बताते हुए कहा था कि वे अमेरिकी नागरिकों की जगह ले रहे हैं।
ईरान : अमेरिकी दबाव का अगला केंद्र बन सकता है क्यूबा
वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के बाद क्यूबा अमेरिकी दबाव का अगला केंद्र बन सकता है। उन्होंने क्यूबा के पास अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की कूटनीतिक भूमिका की संभावना जताई है।
अमेरिका में पकड़े गए गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया, पुलिस कस्टडी की तस्वीरें आईं सामने
दोनों गैंगस्टर भारत में हत्या, फिरौती, रंगदारी और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी को भारतीय जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों को भारत लाने की प्रक्रिया और प्रत्यर्पण से जुड़ी आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
ईरान :अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज की
वाशिंगटन, अमेरिका के शीर्ष खुफिया अधिकारी ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को चेतावनी दी है कि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिशें काफी तेज कर दी हैं और कुछ जानलेवा साजिशें तो अब अपने अंतिम चरण में हैं। इस बीच, वाशिंगटन ने सऊदी अरब से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है और क्षेत्र में मौजूद कई अन्य दूतावासों में भी अपने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है।
ट्रंप : भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं पर राजनीतिक दलों की नजर
वाशिंगटन, मिशिगन में रहने वाला भारतीय-अमेरिकी समुदाय, जो राज्य का सबसे बड़ा एशियाई समुदाय है, मिडटर्म चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में राजनीतिक दलों के लिए अहम बन गया है। यह राज्य कांग्रेस में सत्ता संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारतीय-अमेरिकी : रामास्वामी के अभियान पर 41.3 मिलियन डॉलर का बकाया
वाशिंगटन, 'स्टेट अफेयर्स' द्वारा उद्धृत आम चुनाव से पहले की कैंपेन फाइनेंस रिपोर्ट के अनुसार, ओहायो के गवर्नर पद के लिए भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी के चुनाव अभियान पर अक्टूबर के मध्य तक 41.3 मिलियन डॉलर का कर्ज था। वहीं, उनकी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी एमी एक्टन ने हाल की रिपोर्टिंग अवधि में उनसे दोगुने से भी अधिक फंड जुटाया है।
ट्रंप : पुतिन ने अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा किया
वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनकी व्यक्तिगत अपील के बाद अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा करने पर सहमति जताई। ट्रंप ने इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया।
हरियाणा एसटीएफ ने अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग से विदेश में छिपे गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका से गिरफ्तार किया है। जानिए दोनों के खिलाफ कितने मुकदमे दर्ज हैं।
हरियाणा का मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया है।
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गुरुग्राम में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एलविश यादव के घर फायरिंग करवाने वाले हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया है। 24 वर्षीय हिमांशु की गैंगस्टर भाऊ बनने की कहानी भी रोचक है। 2019 तक वह एक नॉर्मल स्टूडेंट था। पढ़ाई के दौरान ही उसने रोहतक के सब्जी मंडी इलाके में जबरन वसूली के लिए फायरिंग कर दी, जिसके बाद उस पर केस दर्ज हुआ और पुलिस ने पकड़ लिया। उस वक्त हिमांशु की उम्र महज 17 साल थी। इसे देखते हुए उसे हिसार के सुधार गृह भेज दिया गया, जहां से वह 20 लड़कों के साथ फरार हो गया। इसके बाद वह कभी पुलिस के हाथ नहीं आया। सबसे पहले अपने गांव के ही बचपन के दोस्त अंकित उर्फ बाबा से उसकी दुश्मनी हुई। इस दुश्मनी में जब हत्याएं होने लगीं, तो उसने अपना ठिकाना झज्जर और फिर दिल्ली को बना लिया। यहां उसकी मुलाकात गैंगस्टर नीरज बवाना से हुई। इसके बाद उस पर हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में मर्डर, हत्या की कोशिश, रंगदारी और हथियारों की तस्करी जैसे करीब 30 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज होते चले गए और हरियाणा का यह लड़का अपराध की दुनिया में ‘भाऊ’ नाम से फेमस हो गया। उसे दिल्ली और आसपास के इलाकों में ‘दाऊद इब्राहिम’ भी कहा जाता है। हिमांशु पर हरियाणा पुलिस ने 2.5 लाख रुपये और दिल्ली पुलिस ने 1 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ गैंग से उसकी पुरानी दुश्मनी मानी जाती है। पहले जानिए कैसे पकड़ा गया हिमांशु भाऊ, 4 पॉइंट… अब जानिए कौन है हिमांशु, जो गैंगस्टर भाऊ बनकर अमेरिका पहुंचा…. बचपन के दोस्त से गैंगवार, गांव में हो चुकीं चार हत्याएं… ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… रोहतक के 2 गैंगस्टर दोस्त कैसे बने दुश्मन:कार विवाद से गैंगवार शुरू; 3 साल में 4 मर्डर, अंकित जेल में बंद, हिमांशु अमेरिका बैठा हरियाणा के रोहतक में गैंगस्टर अंकित उर्फ बाबा के चाचा अनिल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रविवार को खेत में जाते वक्त बदमाशों ने अनिल को घेरा और उस पर 7 सेकेंड में 15 राउंड फायर किए। इसमें से अनिल के सिर, माथे, छाती, मुंह और पेट में 8 गोली लगी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। (पूरी खबर पढ़ें)
कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया है. अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने उसे पकड़ा है. हिमांशु भाऊ पर दर्जनों केस दर्ज हैं. इनमें हत्या, हत्या का प्रयास और वसूली से जुड़े मामले भी हैं. इससे पहले बताया गया था कि हिमांशु भाऊ पुर्तगाल में है, लेकिन अब उसके अमेरिका में गिरफ्तार होने की सूचना आई है. गैंगस्टर हिमांशु भाऊ दिल्ली-एनसीआर से लेकर हरियाणा-पंजाब तक में खौफ का दूसरा नाम है. वह विदेश में बैठकर भारत में अपराध का साम्राज्य चलाता था. उसकी गिरफ्तारी से कई राज खुलने की संभावना है. दूसरी तरफ, अब उसे अमेरिका से भारत लाने की कोशिश की जाएगी, ताकि भारतीय कानून के तहत गैंगस्टर हिमांशु भाऊ पर मुकदमा चलाया जा सके.
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स में एनेस्थीसिया सुरक्षा पर अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल से संवाद किया
जयपुर | फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर में अमेरिका के सिटिजन एम्बेसडर प्रोग्राम के तहत आए सर्टिफाइड रजिस्टर्ड नर्स एनेस्थेटिस्ट्स के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एनेस्थीसिया सेवाओं और मरीज सुरक्षा पर संवाद हुआ। अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर मनीष कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल अमेरिका से कल्चरल विस्टास के सिटीजन एम्बेसडर प्रोग्राम के अंतर्गत कार्यक्रम में शामिल होने आया था। प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सिंग पेशेवरों और प्रशासनिक अधिकारियों से क्लिनिकल प्रक्रियाओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल, शिक्षा-प्रशिक्षण, निरंतर पेशेवर विकास और सेवा उपलब्धता से जुड़े अनुभव साझा किए। प्रतिनिधिमंडल की अगुआई डेबी मालिना ने की। उन्होंने कहा कि भारत में एनेस्थीसिया सेवाओं की कार्यप्रणाली और शिक्षा की भूमिका समझने में यह बातचीत उपयोगी रही।
भारत के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को अमेरिका में FBI ने गिरफ्तार किया है। हिमांशु पर दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों में मर्डर, हत्या की कोशिश, रंगदारी और हथियारों की तस्करी जैसे करीब 30 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी सामने आई है। इंटरपोल ने उसके खिलाफ 2023 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। हरियाणा पुलिस ने उस पर 2.5 लाख और दिल्ली पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। 2022 में हरियाणा में 24 घंटे में तीन हत्याओं के बाद हिमांशु चर्चा में आया था। हिमांशु भाऊ की गैंग ने ही 2025 में यूट्यूबर एल्विश यादव के गुरुग्राम स्थित घर के बाहर फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी। हिमांशु की लॉरेंस और गोल्डी बराड़ गैंग से दुश्मनी मानी जाती है। इसी मामले में एक अन्य भगोड़े नीरज फरीदपुरिया को भी पकड़ा गया। बताया गया है कि वह इस साल जमानत पर रिहा होने के बाद अपने टखने में लगा निगरानी ट्रैकर हटाकर गिरफ्तारी से बच रहा था। हिमांशु ने लास वेगास में बना रखा था ठिकाना इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के एक सूत्र ने बताया कि दिल्ली और हरियाणा पुलिस की कई टीमें गैंगस्टर हिमांशु भाऊ की अमेरिका में तलाश कर रही थीं। तकनीकी निगरानी और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर लास वेगास में उसका ठिकाना पता लगाया गया। इसके बाद अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उसकी लोकेशन शेयर की गई, जिन्होंने गुरुवार शाम उसे गिरफ्तार कर लिया। 17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम, 24 घंटे में 3 हत्याओं से चर्चा में आया एल्विश यादव के घर के बाहर फायरिंग में भी नाम 2025 में यूट्यूबर एल्विश यादव के गुरुग्राम स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी हिमांशु भाऊ गैंग ने लेने का दावा किया था। इसके अलावा दिल्ली के राजौरी गार्डन में बर्गर किंग आउटलेट पर हत्या और कार शोरूम पर गोलीबारी जैसी घटनाओं में भी गिरोह का नाम सामने आया। लॉरेंस गैंग से दुश्मनी, विदेश से चलाता था नेटवर्क हिमांशु भाऊ के नीरज बवाना और बंबीहा गैंग से करीबी संबंध बताए जाते हैं, जबकि लॉरेंस और गोल्डी बराड़ गैंग से उसकी दुश्मनी मानी जाती है। उसका गिरोह दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में सक्रिय बताया जाता है। वह पुर्तगाल में रह चुका है और विदेश से गिरोह चलाने के आरोप हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, गिरोह के सदस्य वर्चुअल नंबर और सोशल मीडिया के जरिए कारोबारियों से संपर्क कर रंगदारी मांगते थे। कई एजेंसियां कर रही थीं तलाश दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस की एसटीएफ और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) समेत कई एजेंसियां हिमांशु भाऊ की तलाश कर रही थीं। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी था। अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी के बाद अब भारत प्रत्यर्पण और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली में जिम ट्रेनर की 15 राउंड फायरिंग कर हत्या:चार में से 2 गोलियां सिर में लगीं, हिमांशु भाऊ गैंग ने ली जिम्मेदारी दिल्ली आया नगर में एक जिम ट्रेनर विजय कुमार की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। दो बाइकों पर आए चार बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए। विजय को चार गोलियां लगीं थीं, जिसमें से दो गोलियां उसके सिर में लगीं, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। पूरी खबर पढ़ें…
Agra News: अमेरिका में आगरा के तजिंदर ने 48 गेंदों पर ठोक दिए 111 रन
अमेरिका की माइनर लीग क्रिकेट के प्लेऑफ मुकाबले में आगरा के बल्केश्वर निवासी तजिंदर ढिल्लों ने अपने बल्ले से ऐसा धमाल मचाया कि विरोधी टीम के गेंदबाज बेबस नजर आए।
विचार: अमेरिका में बढ़ता हिंदूफोबिया
अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई है
पन्ना में शुक्रवार शाम अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के तहत ऐतिहासिक खेजड़ा मंदिर से महामति श्री प्राणनाथ जी की सवारी निकाली गई। इसमें देश-विदेश से हजारों सुन्दरसाथ और साधु-संत शामिल हुए। सवारी के दौरान श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया और जयकारे लगाए। मुख्य रास्तों से निकली सवारी शाम 5 बजे सवारी नगर के मुख्य रास्तों से गुजरी। भजन-कीर्तन और श्री जी के जयघोष से शहर गूंज उठा। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और नेपाल के साथ अमेरिका व कनाडा से भी श्रद्धालु पहुंचे। तेरस की सवारी का खास महत्व प्रणामी धर्म में तेरस की सवारी का विशेष महत्व है। महाराजा छत्रसाल ने सद्गुरु महामति श्री प्राणनाथ जी के सम्मान में यह परंपरा शुरू की थी, जो आज भी जारी है। नेपाल से आए सुजन तिमिल्सिना ने बताया कि वे 1500 किलोमीटर दूर से सवारी देखने आते हैं। उन्होंने कहा कि पन्ना प्राणनाथ जी की पावन भूमि है। नेपाल से पहली बार आईं निशा मैनाली ने भी बड़ी संख्या में लोगों को देखकर खुशी जताई।
दिल्ली की एक अदालत ने म्यांमार हथियार प्रशिक्षण मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को भारत से बाहर रहने की अनुमति अगले साल 24 फरवरी तक बढ़ा दी है।
अमेरिका में रह रहे लुधियाना के जगराओं क्षेत्र के परिवार के इकलौते बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई। सिद्धवां बेट निवासी मृतक परिवार के साथ अमेरिका में रह रहा था। कुछ दिन पहले वह सड़क हादसे में घायल हुआ था। बेटे की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे सिद्धवां बेट में शोक की लहर दौड़ गई। माता-पिता के इकलौते बेटे की असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में हर आंख नम है और हर कोई इस दुखद खबर से स्तब्ध है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिद्धवां बेट निवासी गुरलाल सिंह उर्फ गग्गना, पुत्र चमकौर सिंह और बलजीत कौर, पिछले कुछ समय से अपनी पत्नी के साथ अमेरिका में रह रहा था। बीते दिनों वह सड़क हादसे का शिकार हो गया था। उसका अस्पताल इलाज चल रहा था। बीती रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। गुरलाल की दो बहनें कनाडा में रहती हैं। परिवार के इकलौते बेटे के इस तरह दुनिया से चले जाने से परिजनों और रिश्तेदारों को गहरा सदमा पहुंचा है।़ दोस्त ने हादसे की जानकारी गुरलाल सिंह गग्गना की मौत की जानकारी देते हुए उसके करीबी दोस्त बब्बू कलसी ने बताया कि उन्हें अमेरिका से फोन के जरिए इस दुखद घटना का पता चला। उन्होंने कहा कि गुरलाल की मौत की खबर सुनते ही उसके दोस्तों और गांववासियों में शोक छा गया। उन्होंने बताया कि गुरलाल सिंह का अंतिम संस्कार अमेरिका में ही किया जाएगा। शोक जताने घर पहुंचे लोग परिवार के साथ दुख साझा करने वालों में मार्केट कमेटी सिद्धवां बेट के चेयरमैन परमिंदर सिंह सिद्धू, ब्लॉक प्रधान बलकार सिंह लाडी, कुलविंदर सिंह चंदी, जर्नैल सिंह सिद्धू, पूर्व ब्लॉक समिति सदस्य हमन कुमार टीटा, गुरप्रताप सिंह सफीपुरा शोक जताने घर पहुंचे सभी ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए अरदास की।
पानीपत में अमेरिका से डिपोर्ट हुए युवक राहुल मलिक (28) की हत्या के मामले में एक वीडियो सामने आया है। इसमें राहुल फर्श पर खून से लथपथ पड़ा दिखाई दे रहा है और पूरे कमरे में खून फैला हुआ है। वीडियो में शराब की बोतल और ऑफिस का टूटा हुआ सामान भी नजर आ रहा है। पुलिस ने इस वीडियो को भी अपनी जांच में शामिल किया है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि राहुल मलिक और आरोपी बचपन के दोस्त थे। दोनों वर्ष 2023 में अमेरिका गए थे। अमेरिका जाने के लिए उन्होंने करीब 50 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन दोनों को वहां से डिपोर्ट कर दिया गया था। परिजनों का आरोप है कि राहुल के उसी बचपन के दोस्त ने उसकी हत्या की है। परिवार ने तीन अन्य युवकों के नाम भी बताए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर ग्रामीण सिविल अस्पताल के बाहर जीटी रोड पर जाम लगाने पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। फिलहाल, पुलिस ने चारों युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। युवक राहुल के मर्डर की दो तस्वीरें… पिता की ओर से दर्ज एफआईआर में ये बातें… कहासुनी के बाद दी धमकी, बाद में मांगी माफी : पुलिस को दी शिकायत में मृतक राहुल के पिता राकेश ने बताया कि कुछ दिन पहले राहुल की आर्यन के साथ कहासुनी हो गई थी। आर्यन ने राहुल को देख लेने की धमकी भी दी थी। राहुल ने ये बात राकेश को बताई थी। इस पर राकेश ने आर्यन से बात की। इसके बाद आर्यन ने घर आकर राहुल से माफी मांग ली थी। पार्टी देने की बात कहकर ले गया था आर्यन : राकेश ने बताया कि विजयदशमी के दिन आर्यन उनके घर आया और राहुल को पार्टी देने की बात कहकर ले गया। राकेश को आर्यन की नीयत पर शक हो गया। इसलिए राकेश भी उनके पीछे चल पड़ा। आरोप है कि आरोपी पहले ही राहुल के मर्डर की योजना बना चुके थे। इसलिए उसे अपने ऑफिस ले गए। जबकि राकेश अपने बेटे को वापस बुलाना चाहता था। अंदर देखा तो हाथ में थे चाकू, जमीन पर पड़ा था राहुल : राकेश ने बताया कि जैसे ही वह ऑफिस के अंदर गया तो देखा कि आर्यन और राकू के हाथ में चाकू थे। रिंकू व एक अन्य के हाथ में डंडे थे। रिंकू ने राहुल को पीछे से जकड़ रखा था। इसके बाद आर्यन ने राहुल के पेट के नीचे चाकू से वार किया और राहुल जमीन पर गिर गया। इसके बाद आर्यन और राकू ने राहुल पर चाकू से किए वार किए। जबकि रिंकू और अन्य राहुल के पैर और कमर पर डंडे बरसाते रहे। पिता चिल्लाया तो दी जान से मारने की धमकी : राकेश ने बताया कि ये देखकर वह चिल्ला पड़ा। इस पर आरोपियों ने राकेश को भी जान से मारने की धमकी दी और मौके से भाग गए। वह अपने बेटे को इलाज के लिए निजि अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चोट ज्यादा होने की वजह से उनके बेटे की मौत हो गई। राहुल के परिवार की ओर से कराई गई FIR की कॉपी पुलिस ने अब तक ये कार्रवाई की… राहुल की बॉडी पर 7-8 शार्ट कट मिले औद्योगिक सेक्टर-29 थाना पुलिस के मुताबिक, पानीपत सिविल हॉस्पिटल में राहुल के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। डॉक्टरों का कहना है कि राहुल की शरीर पर चाकू के 7-8 शार्प कट मिले हैं। हमले के बाद से ही राहुल होश में नहीं आ सका, बाद में उसकी अस्पताल में मौत हुई। चार के खिलाफ केस, एसआई को सौंपी जांच मामले में औद्योगिक सेक्टर-29 थाना पुलिस ने राहुल के पिता राकेश मलिक की शिकायत पर आर्यन, राकू और रिंकू समेत एक अन्य युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले की जांच सब इंस्पेक्टर रोबिन नैन को सौंपी गई है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… गुरुग्राम में नीतू के हत्यारों को अमीर बनाने का लालच:मास्टरमाइंड जेठ बोला- घर में 40 लाख और जेवर मिलेंगे, विरोध करे तो मार देना गुरुग्राम के चर्चित नीतू हत्याकांड में क्राइम ब्रांच की पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। नीतू के पति प्रशांत के ताऊ के बेटे संदीप ने अनुज और अविनाश के साथ बैठकर पूरी प्लानिंग तैयार की थी। संदीप ने दोनों को यह नहीं बताया था कि वह जमीन के लिए नीतू की हत्या करना चाहता है। (पूरी खबर पढ़ें)
हर आईआईटीएन का सपना होता है कि वह दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनी में काम करे। भारतीय मूल की प्रणीता पुजारी ने भी ऐसा ही किया। आईआईटी कानपुर से पढ़ाई करने के बाद अमेरिका में एमबीए किया। फिर उन्होंने फ्लिपकार्ट और अमेजॉन के साथ अपने करियर की शुरुआत की
भारतीय कंपनियों पर पाबंदी से अमेरिका को भी नुकसान
चुनाव नजदीक आते ही राजनेता लुभावनी घोषणाएं करते हैं। रियायतों का ढेर लगाते हैं। समर्थकों का भरोसा बनाए रखने के वास्ते उनकी पसंद के फैसले लेते हैं
न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में हादसे का शिकार हुए पठानकोट निवासी रोमांच महाजन के नाम पर अमेरिका में बना नया कानून 'रोमांच लॉ' पास हो गया। इसके साथ ही न्यूयॉर्क शहर की सड़कों पर दशकों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों का सफर अब हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है। राइडर लॉ के नाम से जाना जाने वाला यह कानून अब रोमांच की स्मृति में रोमांच लॉ कहलाएगा। 'रोमांच लॉ' विधेयक के पक्ष में 49 में से 40 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 7 वोट आए और 2 सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया। बता दें कि परिवार सहित अमेरिका घूमने गए 18 साल के रोमांच महाजन न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में जिस बग्गी में बैठे थे, उसका घोड़ा बिदक गया। रोमांच की मां प्रिया बग्गी से गिर गईं। मां को बचाने के लिए रोमांच ने भी छलांग लगा दी। हादसे में प्रिया को हल्की चोटें आईं, लेकिन रोमांच के सिर पर गंभीर चोट आने से उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद से न्यूयॉर्क की कई संस्थाएं और नेता सामने आए और राइडर लॉ को रोमांच के नाम पर रखकर पास करने की मांग ने जोर पकड़ा। न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल में यह विधेयक काउंसिल मेंबर क्रिस्टोफर मार्टे द्वारा प्रायोजित किया गया था, जिसे मेयर जोहरान ममदानी और स्पीकर जूली मेनिन की सहमति के बाद बहुमत से पास कर दिया गया। रोमांच के पिता दीपक महाजन ने बताया कि गुरुवार देर रात सिटी काउंसिल में रोमांच की याद में मौन रखा गया और फिर यह कानून पास हो गया। इसके बाद राइडर लॉ को रोमांच लॉ के नाम से जाना जाएगा। 'रोमांच लॉ' के मुख्य प्रावधान: जून 2028 तक पूर्ण प्रतिबंध: जून 2028 तक पूरे न्यूयॉर्क शहर में घोड़ा-गाड़ियों के संचालन को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। घोड़ों की बिक्री और कत्ल पर रोक: इन घोड़ों को किसी बूचड़खाने या किसी अन्य बग्गी/कैरिज व्यवसाय में बेचने या स्थानांतरित करने पर सख्त मनाही होगी। चालकों के लिए रोजगार पुनर्वास: घोड़ा-गाड़ी चलाने वाले चालकों/ड्राइवरों के लिए एक विशेष वर्कफोर्स ट्रांजिशन (पुनर्वास) कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, ताकि उनका रोजगार प्रभावित न हो। क्या है रोमांच लॉ, जिसका बदला गया नाम? यह विधेयक न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल में है। इसके तहत घोड़ा-बग्गी चालकों के लिए नए लाइसेंस जारी करने पर तुरंत रोक लगाई जाएगी। इसको समाप्त कर दिया जाएगा। हाल ही में सिटी काउंसिल की स्वास्थ्य समिति की सुनवाई के दौरान रोमांच के परिवार और एमी पुरस्कार विजेता अभिनेत्री एडी फाल्को सहित कई समर्थकों ने हिस्सा लिया। काउंसिल की स्पीकर जूली मेनिन इस प्रतिबंध का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने वाली पहली सिटिंग स्पीकर बन गई हैं। 51 में से 32 काउंसिल सदस्यों ने इस विधेयक पर सहमति दी है। 70% न्यूयॉर्क निवासी प्रतिबंध के पक्ष में सर्वेक्षणों के अनुसार, न्यूयॉर्क के 70% नागरिक घोड़ा-बग्गी उद्योग को बंद करने के पक्ष में हैं। घोड़ों को भीषण गर्मी और ठंड में कंक्रीट की सड़कों पर दौड़ना पड़ता है, जिससे वे सांस और पैरों की गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। गाड़ियों के धुएं और हादसों के कारण कई घोड़ों और इंसानों की जान जा चुकी है। ट्री ऑफ लाइफ पर नाम लिखवाने वाले भी पहले भारतीय रोमांच महाजन को अमेरिका में मरणोपरांत बड़ा सम्मान मिला है। PETA ने अपने मुख्यालय स्थित 'ट्री ऑफ लाइफ' मेमोरियल में रोमांच की स्मृति में एक विशेष पत्ती समर्पित करने का फैसला किया है। दुनिया की सबसे बड़ी पशु अधिकार संस्था पेटा (पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) द्वारा यह विशेष सम्मान पाने वाले रोमांच पहले भारतीय हैं। रोमांच के पिता दीपक महाजन ने बताया कि PETA का 'ट्री ऑफ लाइफ' मेमोरियल वर्जीनिया स्थित उसके मुख्यालय (सैम साइमन सेंटर) में स्थापित है। यह उन नायकों और दयालु आत्माओं को याद करता है, जिन्होंने जानवरों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। रोमांच के नाम की पत्ती पर लिखा होगा, “रोमांच महाजन की प्यारी याद में- पशुओं का एक फरिश्ता।” पठानकोट स्थित रोमांच के घर में माता-पिता उनके कमरे में इस स्मारक पट्टिका की एक प्रति लगाने जा रहे हैं। पिता दीपक बोले- देश के लिए गर्व की बात दीपक महाजन ने कहा कि भले ही इस हादसे ने उन्हें कभी खत्म न होने वाला दर्द दिया है, लेकिन सरकारों और संस्थाओं की ओर से बरती जा रही संजीदगी से कई लोगों की जान बच जाएगी। रोमांच के हादसे के बाद मिस्र, बॉम्बे, बेल्जियम, स्पेन, इटली और पराग्वे में घोड़ा-गाड़ी पर प्रतिबंध लग गया है। इसके अलावा, PETA के 'ट्री ऑफ लाइफ' में पहले भारतीय के नाम का जुड़ना और अमेरिका में पहले भारतीय के नाम पर कानून 'रोमांच लॉ' बनना हर देशवासी के लिए गर्व की बात है। अब जानिए पूरा मामला…
जयपुर से नई दिल्ली के रास्ते रांची तक कोकीन और नशीली दवाइयों की सप्लाई कई महीनों से किए जाने की बात सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। रांची के अलावा जमशेदपुर और गिरिडीह के युवक कथित तौर पर पूरे सिंडिकेट का संचालन कर रहे थे। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को आरोपियों के मोबाइल फोन से यूनाइटेड किंगडम (यूके), अमेरिका और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर मिले हैं। अब पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के विशेषज्ञ इन नंबरों के आधार पर संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रहे हैं। जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत में उत्पादित नहीं होने वाली महंगी कोकीन झारखंड तक कैसे पहुंची। अधिकारियों को आशंका है कि अंतरराष्ट्रीय तस्करों से सीधे संपर्क के जरिए खेप महानगरों के रास्ते झारखंड लाई जा रही थी। इस कड़ी में आरोपियों के पासपोर्ट और विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, विदेशी नंबरों की मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय तस्करी में सीधे संलिप्तता अभी साबित नहीं हुई है। लेकिन दुनिया में कोकीन की करीब 65 से 70 प्रतिशत आपूर्ति दक्षिण अमेरिका के एंडीज क्षेत्र के कोलंबिया, पेरू और बोलीविया से होती है। इसी पृष्ठभूमि में जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि झारखंड पहुंची कोकीन का स्रोत क्या था और क्या इसके तार विदेशी तस्करों से जुड़े हैं। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय नंबरों, आरोपियों की विदेश यात्राओं और कथित सप्लाई रूट की जांच जारी है। एनसीबी को शोभित सहाय उर्फ गोलू नाम के युवक के भी सिंडिकेट में सक्रिय सदस्य होने की जानकारी मिली है। वह फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि शोभित की गिरफ्तारी से गिरोह के अन्य सदस्यों, सप्लाई नेटवर्क और नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है। सिंडिकेट में शामिल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच में इस बात की जानकारी मिली है कि अलग-अलग इवेंट कंपनी पिछले कई महीनों से खास दिनों पर रेव पार्टी का आयोजन करती थी। इस पार्टी में पुलिस की खलल ना पड़े, इसके लिए ग्रामीण इलाकों को चिह्नित किया जाता था। वहां देर रात तक पार्टी का आयोजन किया जाता था, जिसमें लड़के-लड़कियां पहुंचते थे और कोकीन के अलावा नशीली दवाइयों का सेवन करते थे। जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि नामकुम के होरहाप जंगल और खूंटी रोड स्थित हुटार चौक के पास भी रेव पार्टी का आयोजन किया गया था, जिसमें इवेंट कंपनी के संचालक ने कोकीन की सप्लाई की थी। ऐसे में अब इन इवेंट कंपनी संचालकों के बारे में भी जानकारी जुटाकर उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कार्रवाई की जा सके। पूरे नेटवर्क की रीढ़ माने जाने वाले रांची के हर्ष की तलाश में पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक हर्ष का राजनीति और नौकरशाही के गलियारों में गहरा रसूख है, जिसका इस्तेमाल वह ड्रग्स नेटवर्क को ढाल देने में करता था। इसके साथ ही जयपुर में बैठकर नेटवर्क को फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स देने वाले रजत जैन के रिश्तेदार आर. जैन को भी नामजद कर लिया गया है। कोकीन और अन्य नशीली दवाइयां रजत जैन ही रेलवे स्टेशन के पास रिसीव करता था, जिसके बाद संबंधित जगह पर पहुंच कर वह सिंडिकेट में शामिल आकाश मल्होत्रा को देकर चला जाता था। इसके बाद आकाश बोड़ेया रोड स्थित युवती के फ्लैट पहुंचता था, जहां स्नेहा की मदद से नशीले पदार्थ छुपाकर रखे जाते थे। गिरोह का सरगना मिलन सिंह को बताया गया है।
Mohali News: अमेरिका में बैठे लोगों के साथ मिल महिला ने ठगे 80.65 लाख
A woman, in collusion with individuals based in America, swindled 80.65 lakh
Jammu News: भारत की वर्दी से अमेरिका की सैन्य सेवा तक पहुंची परिवार की गौरवगाथा
Jammu and kashmir
पंजाब के रोमांच महाजन की न्यूयॉर्क में घोड़ागाड़ी दुर्घटना में मौत के बाद, 22 अक्टूबर को 'रोमांच लॉ' पर मतदान होगा, जिसका उद्देश्य जून 2028 तक शहर में घोड़ागाड़ियों पर प्रतिबंध लगाना है।
गुजरात स्थित जामनगर में बुधवार को एक ऐसी मुलाकात हुई, जिसके मायने किसी औद्योगिक दौरे से कहीं ज्यादा बड़े हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट ऑयल रिफाइनरी देखने पहुंचे, जहां रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी तथा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने उनका स्वागत किया। उनके साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद रहे। सवाल यह है कि अमेरिका के शीर्ष राजनयिक ने दिल्ली के बजाय जामनगर को इतना महत्व क्यों दिया? जवाब है तेल, ऊर्जा सुरक्षा, वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव। हम आपको बता दें कि जामनगर में रुबियो को केवल रिफाइनरी की विशाल मशीनें और अत्याधुनिक तकनीक नहीं दिखाई गई, बल्कि रिलायंस के उस औद्योगिक सामर्थ्य से भी परिचित कराया गया, जिसकी जरूरत आज अमेरिका को भी महसूस हो रही है। कंपनी के मुताबिक, अंबानी ने उन्हें रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के अलावा निर्माणाधीन डेटा सेंटरों और चरणबद्ध तरीके से शुरू हो रही न्यू एनर्जी गीगा-फैक्ट्रियों की जानकारी दी। बातचीत में पारंपरिक ऊर्जा, नई ऊर्जा, तकनीकी सहयोग, मजबूत सप्लाई चेन और डेटा सेंटरों के लिए भरोसेमंद बिजली की जरूरत जैसे मुद्दे शामिल रहे। यानी चर्चा सिर्फ तेल खरीदने-बेचने की नहीं, बल्कि ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था के भविष्य की भी थी। इसे भी पढ़ें: मार्को रूबियो की भारत यात्रा के पीछे की रणनीतिक साझेदारी या दबाव की कूटनीति को बारीकी से समझिए आखिर जामनगर में ऐसा क्या है? हम आपको बता दें कि जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स की संयुक्त कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता प्रतिदिन 14 लाख बैरल है। इसमें 1999 में शुरू हुई पहली रिफाइनरी और 2008 में चालू हुई निर्यात-केंद्रित दूसरी रिफाइनरी शामिल हैं। रिलायंस के मुताबिक, यह कॉम्प्लेक्स 216 से अधिक प्रकार के कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर चुका है। इसकी सबसे बड़ी ताकत भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल को भी उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने की क्षमता है। यही क्षमता इसे अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम बनाती है। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल दुनिया की हर रिफाइनरी आसानी से संसाधित नहीं कर सकती। लेकिन रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी इस मामले में विशिष्ट क्षमता रखती है। अमेरिका की वेनेजुएला-केंद्रित तेल रणनीति और वहां से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों के बीच रिलायंस एक महत्वपूर्ण संभावित साझेदार बनकर उभरी है। रुबियो ने साफ कहा कि रिलायंस के पास वेनेजुएला समेत पश्चिमी देशों में निकलने वाले भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की खास क्षमता है। यही वजह है कि अमेरिका रिलायंस के साथ मिलकर काम करने के नए रास्ते तलाश रहा है। अनुमानों के मुताबिक, अक्टूबर में रिलायंस हर दिन वेनेजुएला से करीब 3.5 लाख से 3.7 लाख बैरल कच्चा तेल मंगा सकती है। इससे साफ है कि वेनेजुएला के तेल को इस्तेमाल करने की अमेरिकी रणनीति में जामनगर रिफाइनरी की भूमिका बेहद अहम हो सकती है। अमेरिका की परेशानी और रिलायंस की अहमियत इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू अमेरिकी घरेलू अर्थव्यवस्था है। अमेरिका में डीजल की कीमतों में उछाल और ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर भारी दबाव है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले महंगे ईंधन का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। रिलायंस इस तस्वीर में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जामनगर से डीजल, पेट्रोल और विमानन ईंधन सहित बड़ी मात्रा में रिफाइंड उत्पाद दुनिया भर में भेजे जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 2025 की पहली छमाही में जामनगर से 2.166 करोड़ टन रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात हुआ। इसमें 98.1 लाख टन डीजल, 61.4 लाख टन पेट्रोल और 20.6 लाख टन जेट ईंधन शामिल था। यूरोप इन उत्पादों का सबसे बड़ा क्षेत्रीय बाजार रहा। साथ ही अमेरिका के लिए रिलायंस की अहमियत सिर्फ उसकी रिफाइनरी तक सीमित नहीं है। भारत में अमेरिकी गैस की बढ़ती मांग भी इसकी बड़ी वजह है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, पिछले एक साल में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिकी गैस की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से बढ़कर 67 प्रतिशत हो गई है। यानी अब भारत को एलपीजी सप्लाई करने वाला अमेरिका सबसे बड़ा देश बन गया है। अमेरिका में अंबानी का निवेश भी चर्चा के केंद्र में इसके अलावा, रुबियो के दौरे के पीछे एक और बड़ा आर्थिक पहलू है। ट्रंप प्रशासन अमेरिका में औद्योगिक उत्पादन और रोजगार वापस लाने की नीति को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश करता रहा है। इसी सिलसिले में टेक्सास के पोर्ट ऑफ ब्राउन्सविल में प्रस्तावित नई तेल रिफाइनरी में रिलायंस की भागीदारी को खास महत्व दिया जा रहा है। अमेरिका में करीब पांच दशकों बाद लगने जा रही इस प्रमुख नई रिफाइनरी पर लगभग 3 से 4 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसकी सालाना प्रसंस्करण क्षमता करीब 6 करोड़ बैरल अमेरिकी कच्चे तेल की होगी। रिलायंस ने इसके उत्पादन का बड़ा हिस्सा खरीदने के लिए 20 साल का समझौता किया है और इसके 2029 के आसपास परिचालन शुरू करने की उम्मीद है। रूस का तेल, यूक्रेन युद्ध और भारत पर अमेरिकी दबाव रिलायंस की अहमियत का तीसरा पहलू रूस-यूक्रेन युद्ध है। 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार बनकर उभरा और रिलायंस ने भी रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया। कंपनी के तेल स्रोतों में रूस की हिस्सेदारी 2022 से पहले लगभग 3 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच गई। रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ का दबाव बनाया। इसके बाद रिलायंस ने रूसी कच्चे तेल का आयात घटाया। रुबियो ने स्वीकार किया कि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रहा है, लेकिन रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदना तुरंत बंद करना आसान नहीं है। उन्होंने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार भी बताया। अमेरिकी मीडिया की नजर में यह दौरा क्यों खास है? उधर, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इस दौरे को सिर्फ एक कारोबारी मुलाकात के तौर पर नहीं देख रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि रिलायंस अमेरिका के कई अहम हितों से जुड़ी हुई है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करे, वेनेजुएला के तेल का ज्यादा इस्तेमाल हो, ईंधन की कीमतों पर काबू पाया जा सके और अमेरिकी कंपनियों में निवेश बढ़े। इन सभी मुद्दों पर रिलायंस की भूमिका अहम हो सकती है। अंबानी बनाम मस्क: अमेरिकी हितों की एक और पेचीदगी दिलचस्प बात यह है कि जहां ट्रंप प्रशासन रिलायंस के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है, वहीं ट्रंप के करीबी एलन मस्क का रिलायंस से टकराव भी सामने आया है। मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में परिचालन लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रही है। मस्क ने आरोप लगाया कि भारत में जियो को फायदा पहुंचाने के लिए स्टारलिंक के प्रवेश में बाधाएं डाली जा रही हैं। रिलायंस ने जवाब दिया कि उसे प्रतिस्पर्धा से कभी डर नहीं लगा और वह घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय निवेश एवं नवाचार का स्वागत करने वाले भारत में विकसित हुई है। देखा जाये तो यही विरोधाभास इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बनाता है। अमेरिका के कारोबारी और राजनीतिक हित हर मुद्दे पर एक जैसे नहीं हैं, लेकिन ऊर्जा के मोर्चे पर रिलायंस की क्षमता वॉशिंगटन को उसके साथ बातचीत के लिए प्रेरित कर रही है। कुल मिलाकर देखें तो जामनगर में मार्को रुबियो का दौरा भारत की औद्योगिक ताकत और मुकेश अंबानी के कारोबारी सामर्थ्य का भी बड़ा संकेत है। दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में शामिल अमेरिका के विदेश मंत्री का भारत आकर किसी उद्योगपति के साथ ऊर्जा और निवेश जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करना अपने आप में खास है। इससे पता चलता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में रिलायंस की क्षमता और जामनगर रिफाइनरी की अहमियत को अमेरिका भी गंभीरता से लेता है। रिलायंस ने भी अपने बयान में कहा है कि इस दौरे के दौरान पारंपरिक और नई ऊर्जा के क्षेत्र में कारोबारी साझेदारी की संभावनाओं, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति, आधुनिक तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन पर चर्चा हुई। कंपनी ने अमेरिकी कंपनियों के साथ तकनीक, इंजीनियरिंग और आधुनिक विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी अपने विचार रखे। बहरहाल, जामनगर से निकला संदेश साफ है कि भारत की औद्योगिक ताकत और मुकेश अंबानी की कारोबारी क्षमता को अमेरिका भी नजरअंदाज नहीं कर सकता। अमेरिकी विदेश मंत्री का किसी भारतीय उद्योगपति से मिलने के लिए उसके औद्योगिक परिसर तक पहुंचना इस बात को रेखांकित करता है कि वैश्विक ऊर्जा की राजनीति में रिलायंस की भूमिका कितनी अहम हो गई है। यह सिर्फ अंबानी की कारोबारी सफलता की कहानी नहीं, बल्कि भारत की उस बढ़ती ताकत का भी संकेत है, जिसके साथ अमेरिका अपने ऊर्जा और आर्थिक हितों को जोड़कर देख रहा है। -नीरज कुमार दुबे
यूपी: अमेरिकी सांसद जेसन स्मिथ ने परिवार संग निहारा ताजमहल, सूर्योदय की सुनहरी छटा ने मोहा मन
अमेरिकी सांसद ने परिवार संग किया ताज का दीदार।
आईआईटी के बाद अमेरिका से PhD, अब AI चिप्स की हीट कम करने की तैयारी, कंपनी को मिले 80 करोड़ रुपये
आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र आकाश रामदास ने अपनी रिसर्च को ही बिजनेस आइडिया बनाया है। उनके एआई स्टार्टअप को करीब 80 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है।
अमेरिका में कंट्रोल, मुंबई में फायरिंग... टाइगर श्रॉफ गोली कांड में बिश्नोई गैंग का नाम
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार हुए और 17 साल के एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया. जांच में लारेंस बिश्नोई गैंग का नाम और अमेरिका से उसका कंट्रोल होने की बात सामने आने से बॉलीवुड को धमकाकर उगाही के आरोप फिर केंद्र में हैं.
Iran America War: अमेरिका बना रहा MOAB से हमले का प्लान,ईरान का पलटवार क्या होगा?|Trump
इस बार भी सुगबुगाहट बढ़ रही है कि अमेरिका ईरान पर बहुत तगड़ा अटैक करने जा रहा है...ये हमला न्यूक्लियर तो नहीं होगा..लेकिन उससे कम भी नहीं होगा...क्यों की अमेरिका मदर ऑफ ऑल बम्बस का इस्तेमाल करेगा और ईरान इसका जवाब देने की तैयारी कर रहा है…
विचार: भारतीय आकांक्षाओं को समझे अमेरिका
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब व्यापार वार्ता और रूसी तेल खरीद को लेकर भारत-अमेरिका संबंध निर्णायक मोड़ पर हैं
अमेरिकी बॉक्स ऑफिस पर रामायण का धमाका, टूटेगा धुरंधर 2 का रिकॉर्ड?
रामायण फिल्म के एक ट्रेलर ने अमेरिकी ऑडियंस में कैसा भौकाल मचाया है, इसकी एक झलक अब देखने मिल गई है. बीते दिन फिल्म की प्री-सेल एडवांस बुकिंग की शुरुआत हुई, और इसने खुलते ही धमाका कर दिया है.
विचार: अमेरिका के लिए संकट की घड़ी
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका से हूतियों पर हमले की अपील की थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध और यूक्रेन में खुले मोर्चे के चलते हथियारों की किल्लत के कारण यमन में नया मोर्चा खोलने से मना कर दिया।
बॉलीवुड स्टार आमिर खान के भतीजे और अभिनेता इमरान खान कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। मुंबई पुलिस ने उन्हें एक आधिकारिक नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद मिली है। यह नोटिस उन्हें तब मिला, जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इमरान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित इस प्रदर्शन में भाग लिया था। इस प्रदर्शन के सिलसिले में मुंबई पुलिस ने अभिनेता को हिरासत में भी लिया था। CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस मिली जानकारी के अनुसार, इमरान के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट (प्रवासन अधिनियम) के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। उन पर आरोप है कि भारतीय नागरिक न होने के बावजूद उन्होंने भारत में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) कार्ड है, जो उन्हें भारत में रहने और काम करने की अनुमति देता है। हाल ही में हुए विवाद के बाद अक्टूबर 2026 में उनकी नागरिकता की स्थिति चर्चा में आ गई। 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने इमरान खान को हिरासत में लिया इससे पहले, 10 अक्टूबर को बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। इमरान को 10 अक्टूबर 2026 को शाम 5:20 बजे हिरासत में लिया गया था। इसके कुछ समय बाद, अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर पुलिस वैन के अंदर से एक तस्वीर साझा की और कैप्शन में लिखा, लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूँ। इमरान खान के अलावा, उनके चचेरे भाई और 'मेड इन हेवन' के अभिनेता ज़ैन खान को भी इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस घटना के बारे में एक मज़ेदार अंदाज़ में जानकारी साझा की। हिरासत में लिए जाने से पहले, 'दिल्ली बेली' के अभिनेता ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, मेरी कोई मांगें नहीं हैं। मैं यहां एक नागरिक के तौर पर आया हूं, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही पर रोक क्यों लगाई जा रही है—और लोगों की आवाज़ को क्यों दबाया जा रहा है। बस इसीलिए मैं यहां हूं। मैं ऐसी स्थिति में नहीं हूं कि किसी के सामने कोई मांग रख सकूं। और न ही मैं किसी संगठन से जुड़ा हूं। मैं यहां बस एक प्रतिनिधि के तौर पर आया हूं। यह विरोध प्रदर्शन 'हम भारत के लोग' (We, the People of India) के बैनर तले आयोजित किया गया था। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में दोपहर 3:30 बजे इसका कार्यक्रम तय था। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही, पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी, बैरिकेड्स लगा दिए और कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया। साथ ही, प्रदर्शन में हिस्सा लेने आ रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। View this post on Instagram A post shared by Imran Khan (@imrankhan)
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत दौरे पर रहेंगे. इस दौरान व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता किसी निष्कर्ष के करीब पहुंच रही है.
रूस के आगे फिर नरम पड़ा अमेरिका
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विश्व राजनय में विडंबना या विरोधाभास की पराकाष्ठा बेहद दुखद और शर्मनाक है। अमेरिका ने रूस के साथ डीजल आयात के लिए समझौता किया है। वह रूस से पहले ही यूरेनियम और उर्वरक आयात करता रहा है। स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने…
अमेरिकी सरकार के नए आदेश के बाद यूनिवर्सिटी ने बंद की लॉ एक्सटर्नशिप
अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे और भविष्य में वहां जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और निराश करने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वर्क परमिट और ऑफ-कैंपस ट्रेनिंग से जुड़े नियमों में हाल ही में किए गए कड़े बदलावों और नए दिशानिर्देशों के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल (HLS) ने बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय जेडी (J.D.) छात्रों के लिए अपनी सभी 13 लॉ एक्सटर्नशिप क्लिनिक प्रोग्राम्स में काम करने की मंजूरी (वर्क ऑथराइजेशन) को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इस फैसले का सीधा असर अमेरिका में पढ़ रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों पर पड़ा है, जिनमें भारतीय छात्रों की संख्या भी अच्छी-खासी है। अमेरिकी सरकार द्वारा करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (CPT) के नियमों को सख्त किए जाने के बाद यूनिवर्सिटी को कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी लॉ फर्मों, सरकारी एजेंसियों और गैर-लाभकारी संगठनों में प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करने के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं।अमेरिकी सरकार के कड़े नियम और CPT वर्क ऑथराइजेशन पर लगा ब्रेकअमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए फेडरल गाइडलाइन के अनुसार, विदेशी छात्रों को ऑफ-कैंपस वर्क परमिट यानी सीपीटी (Curricular Practical Training) देने के मानकों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को केवल उन्हीं वर्क प्रोग्राम्स में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है जो उनके डिग्री पाठ्यक्रम के लिए पूरी तरह से अनिवार्य हों। हार्वर्ड लॉ स्कूल में एक्सटर्नशिप क्लिनिक एक वैकल्पिक यानी इलेक्टिव कोर्स का हिस्सा थे, जिसके कारण नए नियमों के तहत विदेशी छात्रों को इन क्लिनिक्स में काम करने के लिए ऑथराइजेशन देना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता था। इस कड़े रुख के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 13 प्रमुख एक्सटर्नशिप प्रोग्राम्स से बाहर रखने का फैसला लिया है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने यह स्पष्ट किया है कि एलएलएम (LL.M.) प्रोग्राम के छात्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जेडी (J.D.) डिग्री ले रहे भारतीय व अंतरराष्ट्रीय छात्र इससे सीधे प्रभावित हुए हैं।भारतीय छात्रों के करियर पर बड़ा असर और प्रैक्टिकल एक्सपीरिएंस का संकटअमेरिका में कानून की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक्सटर्नशिप केवल क्रेडिट हासिल करने का जरिया नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वे अमेरिकी कानूनी प्रणाली, शीर्ष अदालतों, बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनियों और मानवाधिकार संगठनों में काम करने का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते थे। हार्वर्ड के इस फैसले के बाद भारतीय छात्रों को अब केवल यूनिवर्सिटी के इन-हाउस (ऑन-कैंपस) क्लिनिकल प्रोग्राम्स तक ही सीमित रहना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रैक्टिकल अनुभव के बिना अमेरिकी जॉब मार्केट में प्रवेश करना और पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां वर्क वीजा (H-1B) हासिल करना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जो छात्र प्रैक्टिकल अनुभव के लिए ऑप्टेशनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) का इस्तेमाल करेंगे, उनका पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क टाइम कोटा समय से पहले ही खत्म हो जाएगा, जिससे उनका करियर प्लान पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।अमेरिकी नीतियों में बदलाव और वैश्विक उच्च शिक्षा का बदलता परिदृश्यपिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन द्वारा छात्र वीजा (F-1 वीजा) और उससे जुड़ी रोजगार नीतियों में लगातार सख्ती बरती जा रही है। केवल हार्वर्ड ही नहीं, बल्कि अमेरिका की कई अन्य प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ भी इन नए फेडरल नियमों की वजह से अपने इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम्स और वर्क परमिट पॉलिसी में बदलाव करने पर मजबूर हो रही हैं। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के मन में असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। लाखों रुपये की फीस और भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर अमेरिका पढ़ने जाने वाले छात्रों के सामने अब पढ़ाई के साथ-साथ वर्क एक्सपीरियंस हासिल करने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी नीतियां इसी तरह सख्त होती रहीं, तो भारतीय छात्र अमेरिका के बजाय ब्रिटेन, कनाडा या यूरोप के अन्य देशों का रुख कर सकते हैं।
दोहरे तर्क: कटघरे में अमेरिकी नीतियों की विश्वसनीयता, खुद जरूरत पड़ी तो रूस से डीजल आयात करने को राजी हुए ट्रंप
अमेरिका में वीजा का एक पहलू यह भी: जेडी वेंस की बात अपमानजनक, लेकिनजिस निर्भरता की ओर इशारा किया, वह असली
Houthis Attack on Riyadh Airport: Saudi पर बड़ा हमला, अमेरिकी सहित 12 की मौत, 300 घायल | Yemen War
Saudi Arabia Riyadh Airport Attack ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। रियाद के King Khalid International Airport पर हुए हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की खबर है
Iran attack on US Base का वीडियो देखिए, इधर-उधर भागते दिखे अमेरिकी सैनिक | Iran America war
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अमेरिका को जाएं भूल: इन 5 देशों में जॉब के बाद आसानी से मिल जाता है PR
विदेशों में जाकर नौकरी करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका (USA) अब इकलौता विकल्प नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के कड़े वीजा नियमों, ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार और अनिश्चितताओं के चलते भारतीय प्रोफेशनल्स अब दुनिया के दूसरे देशों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर आपका भी सपना विदेश में जाकर काम करने और वहां की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) हासिल करने का है, तो आपको अमेरिका के बजाय दुनिया के उन पांच प्रमुख देशों पर नजर डालनी चाहिए जहां नौकरी मिलने के बाद बेहद आसानी से और पारदर्शी नियमों के तहत पीआर मिल जाती है। आज के इस विशेष आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही 5 शानदार देशों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जो भारतीय युवाओं और स्किल्ड वर्कर्स के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।कनाडा: भारतीय युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय और आसान पीआर प्रक्रिया वाला देशविदेशों में बसने की चाह रखने वाले भारतीयों की सूची में कनाडा (Canada) हमेशा से शीर्ष पर रहा है। एक्सप्रेस एंट्री (Express Entry) सिस्टम और प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) जैसी बेहतरीन नीतियों के चलते कनाडा में स्किल्ड वर्कर्स के लिए पीआर हासिल करना काफी सुगम माना जाता है। यदि आपके पास अच्छा वर्क एक्सपीरियंस, अंग्रेजी या फ्रेंच भाषा में अच्छी पकड़ और उच्च शिक्षा है, तो आप कम समय में कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी हासिल कर सकते हैं। हालांकि हाल के दिनों में वहां कुछ नियमों में बदलाव जरूर किए गए हैं, लेकिन आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए कनाडा आज भी दुनिया का सबसे पसंदीदा और भारतीय-अनुकूल देश बना हुआ है।जर्मनी: यूरोप का पावरहाउस जहां टैलेंटेड प्रोफेशनल्स के लिए तेजी से खुल रहे हैं पीआर के द्वारयूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था और औद्योगिक केंद्र जर्मनी (Germany) ने हाल के वर्षों में विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे बहुत ज्यादा खोल दिए हैं। भारत जैसे देशों से कुशल इंजीनियरों, आईटी एक्सपर्ट्स, डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी मांग को देखते हुए जर्मनी ने 'ऑपर्चुनिटी कार्ड' (Chancenkarte) और 'यूूरोपीय ब्लू कार्ड' (EU Blue Card) जैसी कई क्रांतिकारी योजनाएं शुरू की हैं। जर्मनी के नए आप्रवासन कानूनों के अनुसार, यदि आप वहां नौकरी पा लेते हैं और जर्मन भाषा का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, तो आप बहुत ही कम वर्षों में स्थाई निवास (Permanent Residency) के लिए पात्र बन जाते हैं। उच्च जीवन स्तर और मजबूत सामाजिक सुरक्षा के कारण भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच जर्मनी तेजी से पसंदीदा विकल्प बनता जा रहा है।ऑस्ट्रेलिया: प्वॉइंट-बेस्ड सिस्टम के जरिए पीआर पाने का बेहतरीन और सुनहरा मौकाअपनी खूबसूरत जीवनशैली, बेहतरीन जलवायु और उच्च वेतनमान के लिए पहचाना जाने वाला ऑस्ट्रेलिया (Australia) भी भारतीय युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। ऑस्ट्रेलिया का इमीग्रेशन सिस्टम पूरी तरह से प्वॉइंट-बेस्ड (Points-Based System) है, जहां आपकी उम्र, शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेजी दक्षता (PTE/IELTS) और कार्य अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते हैं। यदि आपकी स्किल्स ऑस्ट्रेलिया की 'स्किल ऑक्यूपेशन लिस्ट' (Skilled Occupation List) में शामिल हैं, तो आप स्वतंत्र स्किल्ड वीजा के माध्यम से सीधे पीआर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय इलाकों (Regional Areas) में पढ़ाई या नौकरी करने वाले युवाओं को पीआर हासिल करने में अतिरिक्त लाभ और प्राथमिकता मिलती है।न्यूजीलैंड: वर्क-टू-रेसिडेंसी पाथवे के साथ शांतिपूर्ण और स्थिर भविष्य की गारंटीप्रकृति की गोद में बसे शांत और विकसित देश न्यूजीलैंड (New Zealand) ने स्किल्ड माइग्रेंट्स के लिए अपनी नीतियों को काफी सरल और आकर्षक बना दिया है। न्यूजीलैंड सरकार की 'ग्रीन लिस्ट' (Green List) और 'वर्क-टू-रेसिडेंसी' (Work to Residence) पाथवे के तहत यदि आप निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईटी या कृषि क्षेत्र में कुशल नौकरी प्राप्त कर लेते हैं, तो आपको बिना किसी जटिल प्रक्रिया के सीधे रेजिडेंसी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। न्यूजीलैंड में काम करने वाले भारतीयों को न केवल बेहतरीन वर्क-लाइफ बैलेंस मिलता है, बल्कि वहां का सुरक्षित और प्रगतिशील माहौल परिवार के साथ बसने के लिए आदर्श माना जाता है।यूनाइटेड किंगडम (UK): स्किल्ड वर्कर वीजा के जरिए ब्रिटिश पीआर पाने का आसान रास्तापारंपरिक रूप से भारतीयों के पसंदीदा देशों में शामिल यूके ने ब्रेक्जिट के बाद से अपनी वीजा प्रणाली में बड़े और सकारात्मक बदलाव किए हैं। यूके का 'स्किल्ड वर्कर वीजा' (Skilled Worker Visa) उन सभी भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है जो ब्रिटेन में करियर बनाना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवा (NHS), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, फाइनेंस और अकादमिक क्षेत्रों में कुशल कामगारों की भारी मांग है। यूके के नियमों के अनुसार, यदि आप लगातार 5 वर्षों तक वैध वर्क वीजा पर वहां नौकरी करते हैं और न्यूनतम आय के मानदंडों को पूरा करते हैं, तो आप ब्रिटेन में सेटेलमेंट (Indefinite Leave to Remain) यानी पीआर के लिए आवेदन करने के योग्य हो जाते हैं। अमेरिका के मुकाबले यूके में पीआर की राह काफी स्पष्ट और व्यवस्थित है।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी निवास कार्यक्रम से बाहर करने और वीजा नियमों को सख्त करने को भारत विरोधी और अहंकारी बताया गया है
आलू भुजिया के मसालों से ठीक हुआ अस्थमा? अमेरिकी शख्स का दावा, भारतीय खाने को बताया फायदेमंद
भारतीय मसालों और खाने के कई फायदे आपने सुने होंगे लेकिन क्या कभी पैकेट वाली आलू भुजिया को अस्थमा के इलाज के लिए खाया है। अमेरिकन शख्स सैम ने वीडियो में आलू भुजिया के पैकेट की फोटो दिखाई और उसमें लिखे मसालों को अस्थमा-एलर्जी का इलाज बताया। चलिए पूरी स्टोरी जानते हैं।
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
'तब आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति बुलाएंगे', बिहार के छात्र ने छोड़ा अमेरिका, फिर सच कर दिखाया सपना
“मेरे अंदर के बिहारी ने कहा, ‘मैं तब वापस आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति मुझे बुलाएंगे’”: जब शरद सागर ने भारत में काम करने के लिए अमेरिका छोड़ा, तो लोग हंसे, लेकिन उन्होंने भविष्य को सच कर दिखाया।
Iran US War: ईरान ने दागी Sayyad-3 मिसाइल, क्या अमेरिकी एयरक्राफ्ट था निशाने पर? | Trump | Mojtaba
ईरान ने अचानक ऐसी मिसाइल दागी कि अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है...क्योंकि जिस जगह से यह मिसाइल चली, वहां कुछ मिनट पहले अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान देखे गए थे.
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran America war में ईरान ने अमेरिका को Middle East से ही खदेड़ दिया? Prof Peter Kuznik का बड़ा दावा
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रही उथल-पुथल अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। वैश्विक मामलों के जानकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में दशकों से चला आ रहा अमेरिकी दबदबा अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है
अमेरिका में भारतवंशी छात्रों का कमाल, बनाया ऐसा कॉफी पॉड कि कचरा ही नहीं बचेगा
अमेरिका के छात्रों आदित्य हेरेकर और करण वर्मा ने बायोडिग्रेडेबल कॉफी पॉड Naturista बनाया है। करीब 200 प्रोटोटाइप के बाद तैयार इस इनोवेशन ने एक चैलेंज में 25 हजार डॉलर का पुरस्कार जीता। जानिए कैसे बना यह अनोखा कॉफी कैप्सूल।
पीसीएस 2025 के साक्षात्कार के तीसरे दिन एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति का स्वागत करने ट्रंप क्यों गए और उनका स्वागत क्यों हुआ।
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा!
बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा! असली मुद्दा ये है कि इराक में मुकीम सबसे बड़ी फोर्स हशदुशशाबी के लिए ये नाजुक और इम्तेहान की घड़ी है...वो इसलिए क्यों कि अमेरिका और इजरायल किसी भी सूरत में इराक में ईरान हिमायती इन फोर्सेस का खात्मा चाहते हैं..
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट क्यों भागी अमेरिकी सेना! Trump। Iran। Middle East
Iran America War के बीच Iraq से क्यों निकल रही US की फोर्सेस,अब कौन हावी?| Trump
विचार: अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजे भारत
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
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अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन : राष्ट्रपति शी का दबदबा, और ट्रंप के पत्ते
एआई के मुद्दे पर, राष्ट्रपति शी ने एआई विकास पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण का विरोध किया और ओपन-सोर्स एआई का समर्थन किया।
Iran America War में IRGC ने Hormuz Strait में उड़ाया अमेरिकी सुरक्षा में तैनात जहाज | Trump
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चल रहे जहाजों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक तेल टैंकर के प्रभावित होने की भी प्रारंभिक सूचना है
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
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अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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