करंट वाले दस्ताने पहनकर घूमेंगे अफसर! अमेरिका खर्च करेगा ₹191 करोड़
अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) जल्द ही अपने अधिकारियों को इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले स्पेशल दस्ताने देने जा रही है. ये दस्ताने विरोध करने वालों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे. इस योजना पर 20 मिलियन डॉलर खर्च होंगे और अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
अमेरिका का पूरा कंट्रोल, छेड़ा तो छोड़ेंगे नहीं; होर्मुज पर ट्रंप की ईरान को खुली धमकी
Iran America Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज में किसी भी तरह की कार्रवाई के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है…
अमेरिकी अदालत द्वारा न्याय विभाग (Department of Justice - DoJ) के आपराधिक मामले को खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद, अदाणी ग्रुप के चेय
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन की यात्रा किसी दिलचस्प जासूसी फिल्म के घटनाक्रम से कम नहीं थी। राष्ट्रपति सार्वजनिक तौर पर अपने पारंपरिक एयरफोर्स वन विमान में सवार हुए थे, लेकिन उनके साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों और व्हाइट हाउस के चुनिंदा अधिकारियों को भी इस बात की भनक तक नहीं लगी कि ट्रंप रास्ते में चुपचाप विमान बदल चुके हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति को गुपचुप तरीके से एक छोटे सैन्य विमान में शिफ्ट किया गया था, जिसके जरिए उन्होंने अपनी ब्रिटेन की यात्रा पूरी की। अब खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे वाकये और विमान बदलने के राज से पर्दा उठा दिया है।सीक्रेट सर्विस के निर्देशों पर उठाया गया कदमविमान बदलने की इस पूरी घटना पर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया को बताया कि यह फैसला पूरी तरह से सीक्रेट सर्विस (सुरक्षा एजेंसी) के दिशा-निर्देशों पर आधारित था। ट्रंप ने कहा, यह सब सीक्रेट सर्विस पर निर्भर करता है। वे जो भी करना चाहते हैं, मैं बस वही करता हूं। मैं अपनी सुरक्षा एजेंसियों और सेना के फैसलों के हिसाब से चलता हूं। वे चाहते थे कि मैं एक अलग उड़ान और एक अलग विमान से यात्रा करूं। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि सुरक्षा का स्तर हर जगह एक समान था, लेकिन सुरक्षा बलों की इच्छा थी कि यह बदलाव किया जाए इसलिए उन्होंने वैसा ही किया। ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे वही करते हैं जो उनकी सुरक्षा टीम कहती है, क्योंकि उन्हें अक्सर भारी धमकियां मिलती रहती हैं और उन्हें लगता है कि कोई गंभीर खतरा जरूर रहा होगा।ईरान की धमकियों और सुरक्षा एजेंसियों की खुफिया रिपोर्टमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ओर से डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की लगातार मिल रही गंभीर धमकियों के बाद यह असाधारण और अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई थी। तुर्किये एयरपोर्ट पर ट्रंप को बेहद गोपनीय तरीके से एक कैटरिंग वैन के जरिए एयरफोर्स वन से निकालकर छोटे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया था। इससे पहले उन्होंने कैमरों के सामने एयरफोर्स वन में प्रवेश किया था ताकि किसी को कोई संदेह न हो। ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप वापस पुराने एयरफोर्स वन विमान से ही बाहर उतरते हुए दिखाई दिए, जिससे पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि आखिर यात्रा के बीच में यह अदला-बदली कैसे की गई।अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सुरक्षा के लिए इस तरह की गोपनीय रणनीतिक अदला-बदली का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी भारत से पाकिस्तान की यात्रा के दौरान इस्लामाबाद के संक्षिप्त ठहराव के लिए एयरफोर्स वन के बजाय एक साधारण और बिना पहचान वाले गल्फस्ट्रीम विमान का इस्तेमाल किया था।यात्रा के दौरान जब पत्रकारों ने ट्रंप से सवाल किया कि क्या ईरान की तरफ से एयरफोर्स वन को कोई सीधा और विश्वसनीय खतरा था, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि उन्हें हर समय धमकियों का सामना करना पड़ता है और वे हिट लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। गौरतलब है कि ट्रंप के तुर्किये में ठहराव के दौरान अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में मालवाहक जहाजों पर ईरान समर्थित हमलों के जवाब में जवाबी कार्रवाई करते हुए कई कड़े कदम उठाए थे, जिसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क मोड पर थीं।
टेक जगत से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जकरबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका साफ तौर पर कहना है कि एआई अब केवल एक साधारण तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भविष्य की ग्लोबल सुपरपावर तय करने वाला एक नया और बेहद शक्तिशाली हथियार बन चुका है। जकरबर्ग ने चिंता जताई है कि यदि अमेरिका ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति और डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे को विकसित करने में तेजी नहीं दिखाई, तो चीन इस अत्याधुनिक एआई की दौड़ में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है।लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर होगा गहरा असरअपने एक आंतरिक नोट और हालिया बयानों में मार्क जकरबर्ग ने स्पष्ट किया है कि एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास और उसे व्यापक स्तर पर अपनाने वाले देशों का वैश्विक शक्ति संतुलन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भविष्य में लोकतंत्र, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रसार को सीधे तौर पर तय करेगी। जकरबर्ग के अनुसार, चीन जिस रफ्तार से एआई को सपोर्ट करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षमता तैयार कर रहा है, वह वाशिंगटन के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है।ऊर्जा क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन से पिछड़ रहा अमेरिकामार्क जकरबर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि सिलिकॉन डिजाइन के मामले में अमेरिका को अभी भी फायदा और बढ़त हासिल है, लेकिन एआई के लिए जरूरी विशाल भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के मामले में वह काफी पीछे छूट रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि चीन जैसे देश हर दूसरे हफ्ते एक गीगावॉट से भी ज्यादा परमाणु क्षमता ऑनलाइन ला रहे हैं। यही वजह है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए अमेरिका को ऊर्जा उत्पादन और डेटा सेंटर के निर्माण में भारी तेजी लानी होगी।इतिहास की सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री है एआईएआई तकनीक की तेज रफ्तार पर बात करते हुए जकरबर्ग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शायद मानव इतिहास की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री बन चुकी है। यहाँ नवाचार (Innovation) को बहुत तेजी से कॉपी किया जाता है और कुछ ही महीनों के भीतर उसे अपना भी लिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में मात्र दो महीने की लीड (बढ़त) भी बहुत मायने रखती है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की अपील की जो घरेलू एआई मॉडल के रिलीज को धीमा न करें, क्योंकि ऐसा होने पर विदेशी मॉडलों को आगे निकलने का सुनहरा मौका मिल सकता है।ओपन-सोर्स एआई में अमेरिकी नेतृत्व की वकालतराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर बात करते हुए जकरबर्ग ने बड़ी एआई कंपनियों के साथ सरकारी एजेंसियों के बीच और अधिक करीबी सहयोग की मांग की है। उन्होंने अमेरिका से यह भी अपील की कि वह ओपन-सोर्स एआई (Open-Source AI) की दुनिया पर अपना दबदबा बनाए रखे। उनका मुख्य लक्ष्य यह होना चाहिए कि दुनिया भर में अमेरिकी ओपन-सोर्स मॉडल ही सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद साबित हों, ताकि वैश्विक स्तर पर तकनीक का नेतृत्व अमेरिका के हाथों में सुरक्षित रह सके।
'अमेरिकी टेक कंपनियों का करो बहिष्कार' 100% टैरिफ लगाने पर RSS से जुड़ा संगठन भड़का
इसके साथ ही स्वदेशी जागरण मंच ने देश की जनता से अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार की अपील की है और भारत सरकार से अमेरिकी टेक और सोशल मीडिया दिग्गज कंपनियों पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है।
Ahmedabad, 12 अगस्त . अमेरिका की न्यूयॉर्क ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) के आपराधिक मामले को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के दो दिन बाद अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों के अनुभव ने उन्हें और अधिक विनम्र बनाया है. उन्होंने कहा कि इस ... Read more
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश सम्पूर्णानंद पांडेय ने हाल ही अपने करियर की यात्रा का एक किस्सा शेयर किया है। ये बात उस वक्त की है जब वो स्ट्रगल कर रहे थे।
OpenAI ऑफिस में घुसे प्रोटेस्टर्स, अमेरिका-यूरोप में AI के खिलाफ प्रोटेस्ट
भारत में भले ही सरकार और यहां के लोग AI के कशीदे गढ़ रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोप में इसके खिलाफ जम कर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कभी गूगल के फाउंडर की स्पीच रोक दी जाती है तो कहीं बड़े इवेंट में Amazon के टॉप ऑफिशियल को बुरा भला कहा जाता है. वजह है AI.
अमेरिका में लोग फ्रिज में दूध रखते हैं, फिर यूरोप में ऐसा क्यों नहीं होता
अमेरिका और यूरोप में दूध को स्टोर करने का तरीका अलग- अलग है. अमेरिका में हमेशा डिब्बाबंद दूध फ्रीज में रखा जाता है. वहीं यूरोप के किसी भी देश में दूध के डिब्बे को फ्रिज के बाहर रखते हैं. आखिर दूध को स्टोर करने का दोनों जगह अलग- अलग क्यों है? चलिए जानते इसके पीछे की दिलचस्प वजह.
ट्रंप ने बच्चों के जेंडर बदलने वाली सर्जरी पर कसा शिकंजा, अब इसके लिए अमेरिकी सरकार नहीं देगी पैसा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ साफ कहा- मेडिकेड अब नाबालिगों की जेंडर बदलने वाली सर्जरी और हार्मोन का खर्च नहीं उठाएगा
मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर इस वक्त युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल व्यापार मार्ग पर ईरान और अमेरिका एक बार फिर सीधे तौर पर आमने-सामने आ गए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी खलबली मच गई है। इस बीच, इस भयंकर कूटनीतिक संकट के बीच एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है, जहां पाकिस्तान के हाई-प्रोफाइल मंत्री मोहसिन नकवी (Mohsin Naqvi) अचानक तेहरान पहुंच गए हैं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है।क्यों सुलग रहा है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का यह सामरिक मार्ग?स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे बड़ा और अहम धमनियों में से एक माना जाता है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा की आपूर्ति प्राप्त करता है। हालिया दिनों में ईरान और अमेरिकी नौसेना के बीच बढ़ती तनातनी और सैन्य गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा संकट गहरा गया है। ईरान की तरफ से दी गई चेतावनियों और अमेरिका की आक्रामक सैन्य तैनाती ने इस समुद्री रास्ते को दुनिया का सबसे खतरनाक जोन बना दिया है। यदि यहां कोई भी बड़ा संघर्ष छिड़ता है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा बुरा असर पड़ सकता है।अचानक तेहरान क्यों पहुंचे मोहसिन नकवी?इस मची भगदड़ और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी का तेहरान दौरा बेहद संदिग्ध और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साये में पाकिस्तान अपने पारंपरिक क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश कर रहा है। तेहरान की इस अचानक यात्रा के पीछे गुप्त राजनीतिक संदेश और पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव से निपटने की रणनीतियां बताई जा रही हैं। इस हाई-लेवल विजिट पर अब अमेरिका सहित तमाम वैश्विक ताकतों की पैनी नजर टिकी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक गलियारों से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां महाशक्ति अमेरिका ने अपनी सामरिक सख्ती दिखाते हुए पाकिस्तान के रक्षा बजट और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के गुप्त खर्चों पर करारा हथौड़ा चलाया है। अमेरिका ने कड़े शब्दों में शहबाज शरीफ सरकार से पूछा है कि वह अपनी सेना और खुफिया तंत्र पर पानी की तरह बहने वाले पैसे का पूरा और पारदर्शी हिसाब दे। इस अमेरिकी कदम से इस्लामाबाद की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से अपने गुप्त सैन्य खर्चों और विदेशी कर्जों के असली आंकड़ों को दुनिया से छुपाता आया है।अमेरिकी सख्ती के पीछे की असली वजह और आर्थिक संकटपाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी से जूझ रहा है। देश की जनता दो वक्त की रोटी और महंगाई के बोझ से त्रस्त है, जबकि दूसरी ओर हुक्मरान अपनी फौज और खुफिया तंत्र को मजबूत करने के नाम पर अरबों-खरबों रुपये झोंक रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक से मिलने वाले बेलआउट पैकेजों के बावजूद पारदर्शिता की कमी को देखते हुए अब अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। वाशिंगटन का साफ कहना है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों या वैश्विक वित्तीय सहायता का इस्तेमाल क्षेत्रीय अस्थिरता या मनमाने गुप्त अभियानों के लिए नहीं होना चाहिए, जिसके चलते पाकिस्तान से पाई-पाई का हिसाब मांगा गया है।रक्षा तंत्र और आईएसआई के गुप्त खर्चों पर कसेगा शिकंजापाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना और आईएसआई का प्रभाव जगजाहिर है, जो अक्सर बिना किसी जवाबदेही के भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिकी प्रशासन के इस सीधे दखल के बाद अब पाकिस्तान के नीति-निर्माताओं पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तान इस गुप्त बजट का संतोषजनक विवरण देने में नाकाम रहता है, तो उसे भविष्य में मिलने वाली अमेरिकी और पश्चिमी देशों की वित्तीय सहायता या अंतरराष्ट्रीय ऋणों से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इस हाई-वोल्टेज कूटनीतिक ड्रामे ने एक बार फिर पाकिस्तानी हुक्मरानों की कलई खोलकर रख दी है।
स्वदेशी जागरण मंच ने Pepsi-Coke और अमेरिकी ऐप्स के बहिष्कार को कहा, 100% टैरिफ की धमकी से बढ़ा विवाद
स्वदेशी जागरण मंच ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ धमकी का कड़ा विरोध किया है। मंच ने पेप्सी, कोका-कोला और अमेरिकी ऐप्स सहित विदेशी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान किया है।
अमेरिका ने चीन के खिलाफ उठाए सख्त कदम, एआई क्षमताओं पर नजर रखने के लिए पेश किए बिल
वॉशिंगटन, 12 अगस्त . अमेरिका के दो सीनेटरों ने चार बिलों का एक द्विदलीय पैकेज पेश किया है, जिसका मकसद निर्यात नियंत्रण को और कड़ा करना, चीन की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षमताओं पर नजर रखना और विदेशी जासूसी से अमेरिकी तकनीक की रक्षा करना है. ओहायो के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड और वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक ... Read more
अमेरिकी वीजा के लिए दिखाई फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस, आंध्र प्रदेश के युवक के खिलाफ FIR दर्ज
अमेरिकी दूतावास की शिकायत पर पुलिस ने आंध्र प्रदेश के एक युवक पर गैर-आप्रवासी वीजा के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने का मामला दर्ज किया है।
होर्मुज को लेकर कहां फंसा ईरान-अमेरिका में पेंच? देखें US TOP-10
होर्मुज को लेकर अमेरिकाृ और ईरान एक बार फिर आमने-सामने है. ईरान ने जहां अमेरिका को अपना रवैया सुधारने की चेतावनी दी वहीं ट्रंप ने 100 प्रतिशत होर्मुज पर नियंत्रण का दावा किया है. यही नहीं युद्ध से हुए नुकसान पर ईरान के मुआवजे की शर्तों के बदले ट्रंप ने अपने मारे गए सैनिकों और घायलों के लिए मुआवजे की मांग भी की है.
अमेरिकी सीनेटरों ने स्टूडेंट वीजा में देरी को दूर करने का किया आग्रह
वॉशिंगटन, 12 अगस्त . अमेरिकी सीनेटरों के एक समूह ने विदेश विभाग से छात्र और एक्सचेंज विजिटर वीजा में हो रही देरी को दूर करने का आग्रह किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आवेदक नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले देश में प्रवेश नहीं कर पाएंगे. सीनेट की ज्यूडिशियरी इमिग्रेशन ... Read more
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
'सेना और ISI पर कितना खर्च, हिसाब दो', पाकिस्तान के सीक्रेट बजट पर अमेरिका ने मांगा जवाब
अमेरिका ने पाकिस्तान के सीक्रेट बजट को लेकर सवाल पूछा है और जवाब मांगा है कि आप सेना और आईएसआई पर कितना खर्च करते हैं, बताएं।
25 अगस्त से 3 देशों के दौरे पर मोहन भागवत, अमेरिका-कनाडा-UK में प्रवासी भारतीयों से करेंगे संवाद|
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत प्रवासी भारतीयों के संगठनों के निमंत्रण पर 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की तीन देशों की यात्रा पर जाएंगे।
Petrol Diesel Price: हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा वैट बढ़ाने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स पर सीधा असर पड़ा है।
अमेरिकी चुनाव में ट्रंप दे रहे दखल? भारतीय मूल की जज ने लगा दी लिमिट
जज इंदिरा तलवानी ने साफ कहा कि चुनाव रेगुलेट करने का अधिकार एग्जीक्यूटिव ब्रांच के पास नहीं है, इसलिए यह फैसला ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश के लिए बड़ा झटका है, जिसमें वह मिडटर्म चुनाव से पहले नियम बदलवाना चाहता था.
अमेरिका-ईरान तनाव का असर! लगातार पांचवें दिन चढ़ा क्रूड ऑयल, 89 डॉलर के पार पहुंची कीमत
अमेरिका-ईरान तनाव का असर! लगातार पांचवें दिन चढ़ा क्रूड ऑयल, 89 डॉलर के पार पहुंची कीमत
अमेरिकी सीनेटर ने तिब्बत का भविष्य सुरक्षित करने के लिए पेश किया कानून
अमेरिकी सीनेटर ने तिब्बत का भविष्य सुरक्षित करने के लिए पेश किया कानून
अमेरिका ने लॉन्च किया ‘गोल्डन डोम’ पोर्टल, रक्षा कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को मिलेगा फायदा
वॉशिंगटन, 12 अगस्त . अमेरिका ने Tuesday को एक डिजिटल पोर्टल शुरू किया है, जिसका मकसद रक्षा कंपनियों, टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप्स, निवेशकों और शोधकर्ताओं को अपने प्रस्तावित 185 अरब डॉलर के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा सिस्टम के विकास से जोड़ना है. अमेरिका के लिए ‘गोल्डन डोम’ के निदेशक जनरल माइक गुएटलीन ने सालाना ‘स्पेस एंड मिसाइल ... Read more
अमेरिका के प्रीस्कूल की फीस सुनकर चौंक जाएंगे आप! महिला ने बताया एक महीने का खर्च, वीडियो वायरल
अमेरिका के प्रीस्कूल की फीस सुनकर चौंक जाएंगे आप! महिला ने बताया एक महीने का खर्च, वीडियो वायरल
अमेरिका ने लॉन्च किया 'गोल्डन डोम' पोर्टल, रक्षा कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को मिलेगा फायदा
अमेरिका ने लॉन्च किया 'गोल्डन डोम' पोर्टल, रक्षा कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को मिलेगा फायदा
सेना-ISI के खर्च का हिसाब दो! पाकिस्तान की 'गुप्त' फंडिंग पर अमेरिका सख्त
अमेरिका ने पाकिस्तान की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सैन्य और खुफिया एजेंसियों के बजट को संसदीय या नागरिक निगरानी के दायरे में लाने की सिफारिश की है. अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तान से सरकारी कर्ज, सरकारी कंपनियों की देनदारियों और बजट प्रस्ताव को लेकर भी ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है.
पनामा के झंडे वाले मालवाहक जहाज पर अमेरिकी बलों ने दागी मिसाइल, नाकाबंदी तोड़ने का आरोप
वॉशिंगटन, 12 अगस्त . अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के एक बयान के अनुसार, अमेरिकी बलों ने पनामा के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज की स्टीयरिंग गियर निष्क्रिय कर दिया. यह जहाज कथित तौर पर ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहा था. सेंटकॉम ने कहा, “पनामा-ध्वज वाले एम/वी वेला ... Read more
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना की बड़ी कार्रवाई : ईरान जा रहे जहाज को रोकने के लिए दागीं मिसाइलें
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने ओमान की खाड़ी में एक संदिग्ध जहाज को रोककर उसके स्टीयरिंग सिस्टम को नाकाम कर दिया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह जहाज अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ते हुए ईरान के एक बंदरगाह की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था।
US-Iran Tension: 'ईरान पर भरोसा नहीं, होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण'; ट्रंप ने तेहरान को लेकर क्या कहा?
भारत‑अमेरिका टैरिफ विवाद - ट्रंप और मोदी बातचीत से निकालेंगे समाधान
व्हाइट हाउस ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और अमेरिका की ओर से प्रस्तावित ऊंचे टैरिफ के मुद्दे पर आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालेंगे
US Secret Operations: कैमरों के सामने पुरानी 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन में सवार हुए डोनाल्ड ट्रंप, लेकिन गंतव्य तक पहुंचे किसी बेहद गुप्त तीसरे सैन्य विमान से—पढ़िए अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में हुए अब तक के सबसे असाधारण और सनसनीखेज हेरफेर की अंदरूनी परतें। 1. कैमरों का धोखा और एयरफोर्स वन की 'शैडो' फ्लाइट वैश्विक कूटनीति और खुफिया रणनीति के इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं दर्ज होती हैं जो किसी हॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की पटकथा से भी अधिक हैरतअंगेज होती हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा ही विस्फोटक खुलासा हुआ है जिसने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक सनसनी फैला दी है। घटनाक्रम की शुरुआत तुर्की की राजधानी अंकारा से हुई, जहां डोनाल्ड ट्रंप नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे। सम्मेलन के समापन के बाद ट्रंप को ब्रिटेन के लिए रवाना होना था। वैश्विक मीडिया के कैमरे अंकारा एयरपोर्ट के रनवे पर तैनात थे। दुनिया की नजरों के सामने डोनाल्ड ट्रंप अपने परिचित और ऐतिहासिक नीले रंग वाले पारंपरिक अमेरिकी राष्ट्रपति विमान— ' बेबी ब्लू एयरफोर्स वन' (Boeing VC-25A) में चढ़ते हुए दिखाई दिए। पत्रकारों, फोटोग्राफरों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को पूरी तरह यही विश्वास था कि अमेरिकी राष्ट्रपति इसी विशालकाय और भव्य विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भर रहे हैं। प्रेसब्रीफिंग में भी इसी आधिकारिक यात्रा योजना की पुष्टि की गई थी। खुद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' (Truth Social) पर लिखा था कि वे तुर्की से यूके जाने के लिए पुराने दिनों की यादों को ताजा करते हुए अपने पारंपरिक 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन का ही उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यह तो महज एक रचा हुआ दृश्य था—असली खेल तो पर्दे के पीछे शुरू होना था। 2. हवाई अड्डे का कैटरिंग ट्रक और 'ऑपरेशन सीक्रेट शिफ्ट' जैसे ही ट्रंप बेबी ब्लू एयरफोर्स वन के भीतर दाखिल हुए और विमान के दरवाजे बंद हुए, मीडिया का ध्यान रनवे की औपचारिकताओं पर केंद्रित हो गया। लेकिन विमान के भीतर प्रवेश करते ही पेंटागन और सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने अति-गोपनीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया। अंकारा एयरपोर्ट के एक सुनसान और मीडिया की नजरों से दूर बने हिस्से में एक साधारण एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (वह ट्रक जिससे विमानों के भीतर खाना और रसद पहुंचाया जाता है) को एयरफोर्स वन की पिछली सर्विस एंट्री से जोड़ा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेहद खामोशी से, बिना किसी तड़क-भड़क या आधिकारिक काफिले के, उस कैटरिंग ट्रक के कंटेनर में उतारा गया। कैटरिंग ट्रक रणनीति का रहस्य : रनवे पर खड़े किसी भी निगरानी उपग्रह, ईरानी ड्रोन या स्थानीय सर्विलांस नेटवर्क के लिए कैटरिंग ट्रक की आवाजाही पूरी तरह सामान्य एयरपोर्ट गतिविधि मानी जाती है। सुरक्षा एजेंसियों ने इसी अंधबिंदु (Blind Spot) का फायदा उठाकर राष्ट्रपति को मुख्य विमान से बाहर निकाला। उस कैटरिंग ट्रक के जरिए ट्रंप को एयरपोर्ट के दूसरी तरफ मुस्तैद खड़े एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान— C-32A (Boeing 757 का विशेष सैन्य रूपांतरण) में चुपके से शिफ्ट कर दिया गया। जब तक मीडिया और दुनिया सोच रही थी कि ट्रंप विशालकाय एयरफोर्स वन में आराम कर रहे हैं, तब तक ट्रंप C-32A विमान में सवार होकर वायुमंडल की ऊंचाइयों में उड़ चुके थे। 3. ईरान का डर और भौगोलिक संवेदनशीलता : सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव क्यों फूले? इस हैरतअंगेज सीक्रेट ऑपरेशन के पीछे सबसे मुख्य और प्राथमिक कारण था— ईरान से बढ़ता सैन्य तनाव और सीधी सीमा निकटता । तुर्की की पूर्वी सीमा सीधे ईरान से सटी हुई है। जिस समय ट्रंप तुर्की में मौजूद थे, उस समय मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति अत्यधिक विस्फोटक और नाजुक बनी हुई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और DIA) को इनपुट्स मिले थे कि ईरानी रिपब्लिकन गार्ड्स (IRGC) या उनके समर्थित प्रॉक्सी समूह राष्ट्रपति के विमान के फ्लाइट पाथ (Flight Path) और रडार सिग्नेचर की निगरानी कर सकते हैं। रडार सिग्नेचर और डिकॉय (Decoy) रणनीति : एयरफोर्स वन (Boeing 747 आधारित VC-25A) का अपना एक विशिष्ट रडार और थर्मल सिग्नेचर होता है जिसे ट्रैक करना आसान होता है। यदि किसी हमलावर को राष्ट्रपति के सटीक लोकेशन और फ्लाइट कोड की जानकारी हो, तो मैनपैड्स (MANPADS) या सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विमान बदलकर भ्रम पैदा करना : सीक्रेट सर्विस ने तीन अलग-अलग विमानों का इस्तेमाल करके एक त्रिकोणीय सुरक्षा घेरा तैयार किया। यदि कोई दुश्मन एयरफोर्स वन को ट्रैक कर रहा था, तो वे वास्तव में केवल डिकॉय विमान का पीछा कर रहे थे, जबकि राष्ट्रपति एक पूरी तरह अलग, छोटे और गैर-पारंपरिक सैन्य विमान C-32A में सुरक्षित सफर कर रहे थे। 4. तीन प्लेन और दो अलग-अलग लैंडिंग : RAF मिल्डनहाल पर रचा गया ड्रामा इस पूरे ऑपरेशन में कुल तीन विमानों की भूमिका रही: रात करीब 10:20 बजे अमेरिकी वायुसेना का C-32A विमान ब्रिटेन के RAF मिल्डनहाल एयरबेस पर उतरा। डोनाल्ड ट्रंप बिना किसी मीडिया कवरेज के चुपचाप उतरे और सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा दिए गए। इसके कुछ मिनटों बाद पुराना 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन रनवे पर उतरा, जिसमें से व्हाइट हाउस का मीडिया दल बाहर निकला। बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन हकीकत में इतिहास का सबसे बड़ा डिकॉय ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका था। 5. कतर से मिले नए लग्जरी प्लेन पर क्यों उठे गंभीर सवाल? इस खुलासे के बाद एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है— कतर द्वारा अमेरिका को भेंट में दिए गए नए बोइंग 747-8 विमान की सुरक्षा पर संशय। ट्रंप ने कतर से मिले इस बेहद आधुनिक और लग्जरी विमान से अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत की थी। यह इस विमान की पहली विदेशी उड़ान थी। लेकिन तुर्की से ब्रिटेन जाने के दौरान ट्रंप ने इस नए विमान का उपयोग नहीं किया। इसके दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं: सुरक्षा ऑडिट और टेस्टिग : यद्यपि विमान कतर से मिला था, लेकिन राष्ट्रपति के स्थायी उपयोग के लिए इसके संचार (Communication) और एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम का पेंटागन द्वारा पूर्ण परीक्षण किया जाना बाकी था। अति-संवेदनशील ईरानी तनाव के बीच पेंटागन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था। विमान का विशाल आकार : नया बोइंग 747-8 आकार में अत्यधिक विशाल है, जिससे तुर्की जैसे संवेदनशील इलाके में इसे गुप्त रखना असंभव था। इसलिए C-32A जैसे छोटे और फुर्तीले विमान को वरीयता दी गई। 6. पेंटागन का मौन और व्हाइट हाउस का आधिकारिक बयान इस गोपनीय उड़ान की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लीक होने के बाद हड़कंप मच गया। जब व्हाइट हाउस और पेंटागन से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उनके उत्तर बेहद नपे-तुले रहे: व्हाइट हाउस का आधिकारिक रुख: हम राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी परिचालन संबंधी (Operational) विशिष्ट जानकारियों पर टिप्पणी नहीं करते। हालांकि, कतर से मिले नए विमान और सभी राष्ट्रपतीय उड़ानों के लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं। राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोपरि है। दूसरी ओर, पेंटागन ने इस पूरे मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया । हालांकि, सेवानिवृत्त अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रिपोर्ट सटीक है, तो यह दर्शाता है कि ईरान की तरफ से खतरे का स्तर बेहद गंभीर था और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति को किसी भी तरह के सर्विलांस या टारगेटेड हमले से बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं। 7. आधुनिक इतिहास का सबसे चालाक डिकॉय ऑपरेशन ट्रंप की सीक्रेट फ्लाइट का यह खुलासा न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति की बहुस्तरीय सुरक्षा परत (Multi-layered Security Protocol) को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक कूटनीति के पीछे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) कितने खौफनाक मोड़ ले सकते हैं। कैमरों के सामने खड़ा चमकता हुआ विशालकाय एयरफोर्स वन एक छलावा मात्र था, मीडिया दल एक अनजाने डिकॉय का हिस्सा था, और कैटरिंग ट्रक के अंधेरे से होकर निकला C-32A विमान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा की नई ढाल बना। ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे चल रही इस शह और मात की जंग में, तुर्की के आसमान पर खेला गया यह 3-प्लेन गेम इतिहास के सबसे सनसनीखेज सुरक्षा ऑपरेशनों में दर्ज हो चुका है।
Mohsin Naqvi ने Tehran में अराघची से वार्ता की, अमेरिका-ईरान संघर्ष रोकने की कोशिश
ईरान-अमेरिका संघर्ष को खत्म कराने के लिए जारी मध्यस्थता प्रयासों के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी ने मंगलवार को तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से वार्ता की। ईरानी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया था कि नकवी मंगलवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान के लिए रवाना हुए थे। बाद में ‘आईआरएनए’ ने ‘एक्स’ पर नकवी की अराघची से मुलाकात की तस्वीर पोस्ट की। पाकिस्तानी एवं ईरानी अधिकारियों ने अबतक इस बारे में कोई ब्योरा नहीं दिया है। इससे एक महीने पहले ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान के दौर पर आए थे। मोमेनी ने अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तानी समकक्ष के साथ बातचीत की थी। कतर जैसे खाड़ी देशों के समर्थन से पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई कारणों से संघर्ष अब भी जारी है। इस समय संघर्ष जारी रहने का मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का अवरुद्ध होना है। जून में अमेरिका और ईरान ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से आगे की बातचीत के लिए 60 दिनों का समय मिला था। अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद स्विट्जरलैंड में एक शिखर वार्ता भी हुई थी, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद बातचीत विफल हो गई और अमेरिका तथा ईरान दोनों ने फिर से एक-दूसरे पर सैन्य हमले शुरू कर दिए।
Trump: रूस ने चार साल से हिरासत में रखे पूर्व अमेरिकी मरीन रॉबर्ट गिलमैन को छोड़ा, ट्रंप ने कैसे कराई रिहाई?
जेल में बंद अमेरिकी नागरिक रॉबर्ट गिलमैन को रूस ने किया रिहा
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को बताया कि 2022 में रूस में हिरासत में लिए गए पूर्व अमेरिकी मरीन रॉबर्ट गिलमैन को रूस ने मानवीय आधार पर रिहा कर दिया है.
US-Iran Blockade: होर्मुज में अमेरिकी कार्रवाई तेज, ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तोड़ने वाले जहाज पर किया हमला
चीन की AI रफ्तार से क्यों बढ़ी टेंशन, मार्क जुकरबर्ग ने दी बड़ी चेतावनी, अमेरिका को क्या दी सलाह
Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अमेरिका के चीन से पिछड़ने के खतरे को लेकर चेतावनी दी है। जुकरबर्ग ने कहा कि जो देश एडवांस्ड AI के विकास और उसके इस्तेमाल में नेतृत्व करेगा, वह भविष्य में वैश्विक भू-राजनीतिक ...
भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद पर बोले व्हाइट हाउस ट्रेड एडवाइजर, राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी निकालेंगे समाधान
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात कर वैश्विक सुरक्षा के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया।
अमेरिका से लौटी महिला की पोस्ट वायरल, भारत की सैलरी पर उठाए सवाल
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ट्रंप ने फिर मारी पलटी, अमेरिका के पास हथियार खत्म हो गए? देखें
जो ट्रंप कभी सीधे सीधे ईरान को धमकाया करते थे आज उनके सुर बदल गए हैं. अब ट्रंप खुद जल्द से जल्द ये मुद्दा सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. चाहते हैं कि जल्द से जल्द युद्ध खत्म हो और शांति बहाल हो लेकिन जो बीच ट्रंप ने बोए हैं उसका असर भी खतरनाक हो रहा है, क्योंकि अब ईरान भी अपने मुद्दों को लेकर अड़ा हुआ है. देखें...
ईरान ने मांगा अमेरिका से हर्जाना तो ट्रंप ने भी ठोका मुआवजे का दावा, बोले- मारे गए लोगों का देना होगा पैसा
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?
कुछ दिन पहले यूएस सेनेट में एक बिल पास हुआ। बिल था अगर कोई देश रूसी से तेल खरीदेगा तो उस पर अमेरिका 100% तक का टेरिफ लगाने का अधिकार रखेगा। भारत और चीन के लिए यह सीधा थ्रेट था क्योंकि यह दो देश रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदते हैं। लेकिन अब अगर हम कहें कि यह बिल बस मजाक है। अमेरिका और यूरोप रशियन ऑयल खरीद को लेकर दुनिया के दूसरे देशों पर टेरिफ और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहे हैं, वही देश दूसरी ओर खुद रशिया के तेल से बने रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: तातारस्तान की Oil Refinery पर भीषण ड्रोन हमला, 12 की मौत और 39 घायल हुए जुलाई के महीने में भारत ने रशिया से करीब 5.5 बिलियन यूरो यानी लगभग 55000 करोड़ का कच्चा तेल खरीदा। रशियन क्रूड की भारत को सप्लाई जुलाई में बढ़कर करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई। यानी इंडिया जितना कच्चा तेल दुनिया के दूसरे देशों से खरीद रहा है, उसमें अकेले रशिया की हिस्सेदारी करीब 55% की हो गई। ये आंकड़े सामने आए। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर यानी सीआरए की रिपोर्ट से। यहीं से अमेरिका और यूरोप की नीति को लेकर डबल स्टैंडर्ड की बहस भी शुरू हुई। क्योंकि सीआरए की एक रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा किया। इस रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में भारत, टर्की, ब्रूनोई और जॉर्जिया की रिफाइनरीज ने जुलाई में कुल 633 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट्स का निर्यात किया। इनमें 214 मिलियन यूरो के उत्पाद यूरोपीय संघ उस यूरोप को गए जो रशियन ऑयल पर प्रतिबंध लगाने की लगातार धमकी देते आया है और यहां तक कि भारत के खिलाफ कई बार बयानबाजी भी की। इसके अलावा 184 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट ऑस्ट्रेलिया और 234 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट अमेरिका भेजे गए और अनुमान है कि इनमें से करीब 284 मिलियन यूरो के रिफाइंड उत्पाद रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे। इसे भी पढ़ें: Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से $84 के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरार तमाम बयानबाजी और धमकियों के बाद भी अमेरिका और यूरोप कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरीके से रशियन ऑयल प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं और एक तरह से जो वो बार-बार धमकी दे रहे हैं कि जो देश रशिया से तेल खरीदेंगे उन पर वो टेरेफ लगाएंगे तो कायदे से देखा जाए तो पहले तो उन्हें इस पर रोक लगानी होगी। फिर दूसरे देशों से रशियन ऑयल को लेकर बात करनी होगी। देखिए अब बात उन कारगो की जो जुलाई में भारतीय रिफाइनरियों से निकलकर यूरोपीय संघ के बंदरगाहों तक पहुंचे। इन कारगोस में ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद थे जिन्हें तैयार करने में रशियन कच्चे ऑयल का इस्तेमाल हुआ था। यानी आसान भाषा में समझिए कच्चा तेल रूस से आया। भारत की रिफाइनरी में उसकी प्रोसेसिंग हुई। उससे पेट्रोलियम प्रोडक्ट तैयार हुए और फिर उसका एक हिस्सा यूरोपीय बाजार तक पहुंचा। इसी तरह जामनगर रिफाइनरी से अमेरिका को भी रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की शिपमेंट भेजी गई। इसे भी पढ़ें: MEA Briefing: Balochistan Independence, Russian Oil Purchase, Doval Sergio Gor Meeting, China, Nepal, Bangladesh और Pakistan संबंधी मुद्दों पर आया India का जवाब सीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई से पहले के तीन महीनों में जामनगर रिफाइनरी के फीड स्टॉक का करीब 35% हिस्सा रूसी क्रूड था। यानी भारत सिर्फ रूसी तेल खरीद नहीं रहा बल्कि उस तेल को रिफाइंड करके तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है और यही पेट्रोलियम उत्पाद यह देश अमेरिका यूरोप के बाजार में जा रहे हैं और देखा जाए तो सीधे तौर पर नहीं लेकिन घुमा फिराकर रशिया के प्रोडक्ट अमेरिका और यूरोप के बाजार में बेचे जा रहे हैं। तो देखा जाए तो एक तरह से अमेरिका यूरोप खुद रशियन प्रोडक्ट लेने में पीछे नहीं है। मगर वो ये भी नहीं चाहते कि भारत रशिया से कोई व्यापार करे।
Ahmedabad, 11 अगस्त . अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट द्वारा आरोप खारिज करने से अब मामला पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और दुनिया भर में उनके बिजनेस से जुड़ी गतिविधियों में आ रही कानूनी अड़चनें भी दूर हो गई हैं. यह जानकारी कानूनी विशेषज्ञों की ओर से Tuesday ... Read more
अमेरिकी अदालत के मामला खारिज किए जाने से गौतम अदाणी के खिलाफ केस बंद हुआ, कारोबार में बाधाएं भी दूर होंगी: कानूनी विशेषज्ञ
अमेरिकी राजदूत गोर और एनएसए डोभाल ने की मुलाकात, रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर हुई चर्चा
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की
भारत-अमेरिका स्पेस सहयोग को नई उड़ान, नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में दिया न्योता
New Delhi, 11 अगस्त . भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप (सीएसजेडब्ल्यूजी) की 9वीं बैठक India ने आयोजित की. इस बैठक का आयोजन 5-6 अगस्त 2026 को Bengaluru में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के हेडक्वार्टर में किया गया था. इसरो के चेयरमैन/स्पेस विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन और India में अमेरिका के राजदूत ... Read more
अमेरिका में किसने छेड़ा 'वॉटर वॉर', US के 7 राज्यों पर हमला; ट्रंप को किस पर शक? - Jagran
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क्या 'इस्लामिक नाटो' अमेरिका की बड़ी चाल है? मक्का समझौते में अभी और किन देशों की होगी एंट्री
पश्चिम एशिया की राजनीति में इन दिनों एक बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए 'मक्का समझौते' को दुनिया भर में 'इस्लामिक नाटो' की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। नाटो की तर्ज पर तैयार किए गए इस सैन्य और रक्षा समझौते के तहत यदि किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा। इस नए और ताकतवर गठबंधन को लेकर दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है कि क्या इसके पीछे अमेरिका की कोई सोची-समझी चाल है?क्या मक्का समझौते के पीछे छिपी है अमेरिका की कोई बड़ी रणनीति?सऊदी अरब के राजनीतिक वैज्ञानिक मंसूर अलमार्जूकी का मानना है कि यह मक्का समझौता किसी बहुत बड़ी वैश्विक व्यवस्था की एक मजबूत नींव है। वहीं, रणनीतिक विशेषज्ञ तारा कार्था ने भी इस समझौते में अमेरिका की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मक्का समझौते को कराने में पर्दे के पीछे से पूरी मदद की थी।सांसद जो विल्सन के मुताबिक, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान का यह आपसी रक्षा समझौता मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की ट्रंप प्रशासन की कोशिशों का ही एक हिस्सा है। हालांकि, इस समझौते को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। शिया विद्वान आगा सैयद जवाद नकवी के नेतृत्व में कई शिया मौलवियों ने इसे सीधे तौर पर 'अमेरिका-अरब की खतरनाक साजिश' करार दिया है। उनका आरोप है कि इस समझौते का असली मकसद पाकिस्तान को ईरान के साथ चल रहे तनाव और भविष्य के पश्चिम एशिया युद्धों में मोहरे की तरह इस्तेमाल करना है।मक्का समझौते में अभी किन-किन नए देशों की हो सकती है एंट्री?तुर्की की तरफ से हाल ही में ऐसे स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि यह समझौता केवल सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। आने वाले समय में इस सैन्य गठबंधन का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कई अन्य देशों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा।रणनीतिक जानकारों के अनुसार, अफ्रीका की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में शुमार मिस्र इस गठबंधन में शामिल होने वाला अगला सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। मिस्र के पास 4.4 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक, आधुनिक टैंक और एक मजबूत वायु व नौसेना है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में कतर और कुवैत को भी इस समूह का हिस्सा बनने के लिए सबसे आगे माना जा रहा है। जॉर्डन, अजरबैजान और सीरिया के भी इस नए रक्षा ढांचे में शामिल होने की प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं।सऊदी का पैसा, तुर्की के हथियार और पाकिस्तान की परमाणु ताकतइस समय मक्का समझौते में शामिल तीनों देश अपनी-अपनी खासियतों के साथ योगदान दे रहे हैं। सऊदी अरब इस गठबंधन को अपनी बेजोड़ आर्थिक ताकत और पश्चिम एशिया की सबसे आधुनिक वायु सेना दे रहा है, जबकि तुर्की के पास नाटो से प्रशिक्षित एक बेहद मजबूत सेना है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास परमाणु हथियारों की ताकत है।यदि आने वाले दिनों में मिस्र, कतर और कुवैत जैसे देश भी इस गठबंधन से जुड़ जाते हैं, तो इसकी सैन्य और रणनीतिक ताकत में बेतहाशा इजाफा हो जाएगा। मिस्र की विशाल सेना और स्वेज नहर के पास उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति इस पूरे समूह को वैश्विक स्तर पर एक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है।
ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका में पानी की सप्लाई और उससे जुड़े सिस्टम पर साइबर हमलों का मामला सामने आया है। मिनेसोटा ने बताया कि राज्य के कम से कम 30 स्थानीय जल आपूर्ति सिस्टम को एक साथ साइबर हमले का निशाना बनाया गया। जुलाई के आखिर में इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने भी चेतावनी जारी की। एजेंसी के मुताबिक, खतरनाक साइबर हमलावरों ने अमेरिका के कम से कम सात राज्यों में पानी और गंदे पानी से जुड़े सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की है।इन साइबर हमलों से कुछ जगहों पर रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी आई। साथ ही, इन घटनाओं ने पानी जैसी जरूरी सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद कमजोरियों को भी सामने ला दिया। मामला सामने आने के बाद जॉर्जिया, न्यू जर्सी और साउथ डकोटा ने भी अपने यहां इसी तरह के साइबर हमलों की जानकारी दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन राज्यों में हुए हमले एफबीआई की ओर से बताए गए सात राज्यों वाले हमलों से जुड़े हैं या नहीं।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे अमेरिका में करीब 1 लाख 52 हजार सार्वजनिक पेयजल सिस्टम और 16 हजार से ज्यादा गंदे पानी को साफ करने वाले प्लांट हैं। ज्यादातर शहरों और स्थानीय इलाकों में पानी झीलों, नदियों या जमीन के नीचे मौजूद जल स्रोतों से लिया जाता है। पानी को इलेक्ट्रिक पंप की मदद से पाइपलाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाता है। यहां पानी में मौजूद गंदगी और दूसरी अशुद्धियों को हटाया जाता है और उसे कीटाणुओं से मुक्त किया जाता है। साफ होने के बाद पानी को बड़े टैंकों में जमा किया जाता है। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए इसे घरों, दुकानों, कारोबार और सार्वजनिक जगहों तक पहुंचाया जाता है।हैकर पानी के सिस्टम को कैसे निशाना बना रहे हैं?साइबर अपराधी पानी की व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर (पीएलसी) को निशाना बना रहे हैं। ये ऐसे उपकरण होते हैं जो पानी से जुड़े कई जरूरी औद्योगिक कामों को नियंत्रित और मॉनिटर करते हैं। सीएनएन के मुताबिक, ये कंट्रोलर पानी का दबाव और उसमें मिलाए जाने वाले केमिकल की मात्रा जैसी चीजों को नियंत्रित करते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा पानी की सप्लाई और उसकी गुणवत्ता के लिए बेहद जरूरी होती है।अमेरिकन यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल सर्विस स्कूल में ग्लोबल सिक्योरिटी के सहायक प्रोफेसर विलियम अकोटो के मुताबिक, हमलावर इंटरनेट से जुड़े इन कंट्रोलरों और बाहरी कंपनियों के नेटवर्क को खोजते हैं। इसके बाद वे ऐसे सिस्टम तलाशते हैं, जिनमें दूर से पहुंच बनाई जा सके। हमलावर कई बार पहले से मौजूद डिफॉल्ट या चोरी किए गए पासवर्ड का इस्तेमाल करके सिस्टम में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। सिस्टम तक पहुंच मिलने के बाद वे पासवर्ड बदल सकते हैं या कुछ कमांड देकर उसके कामकाज में बदलाव करने की कोशिश कर सकते हैं। इस तरह साइबर हमलावर पानी की सप्लाई से जुड़े महत्वपूर्ण सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका की सुरक्षा को लेकर एक बिल्कुल नए मोर्चे से बड़ी चिंता सामने आ रही है। इस बार निशाना पारंपरिक मिसाइलें नहीं, बल्कि अमेरिका की बुनियादी जरूरत यानी उसका जल सिस्टम (Water System) है। मिनेसोटा समेत कम से कम सात अमेरिकी राज्यों के पेयजल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर समन्वित साइबर हमलों (Coordinated Cyber Attacks) की रिपोर्टों ने अमेरिकी प्रशासन की नींद उड़ा दी है। आइए जानते हैं कि इस खतरनाक साइबर हमले के पीछे आखिर क्या सच है और इसमें ईरान का नाम क्यों उछाला जा रहा है।अमेरिका के कई राज्यों के वाटर प्लांट पर कोऑर्डिनेटेड साइबर अटैकअमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के माहौल के बीच अमेरिकी जल संयंत्रों पर साइबर हमलों की खबरे तेजी से फैली हैं। मिनेसोटा राज्य ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि वहां के कम से कम 30 नगरपालिका जल सिस्टम इन समन्वित साइबर हमलों का शिकार हुए हैं। जुलाई के अंत में सामने आई इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए बताया कि दुर्भावनापूर्ण साइबर एक्टर्स ने अमेरिका के कम से कम सात अलग-अलग राज्यों में पेयजल और अपशिष्ट जल (Wastewater) प्रणालियों में सेंध लगाने की कोशिश की है।इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जॉर्जिया, न्यू जर्सी और साउथ डकोटा जैसे राज्यों से भी इसी तरह की साइबर घटनाओं की सूचनाएं मिलने लगी हैं। हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये सभी घटनाएं एफबीआई द्वारा चिह्नित सात राज्यों के हमलों का ही हिस्सा हैं या नहीं। शुरुआती दौर में कुछ चर्चाओं में ईरान से जुड़े हैकर्स पर इन हमलों का शक जताया गया था, लेकिन अमेरिकी प्रशासन की तरफ से अभी तक किसी भी देश या संगठन को इसके लिए औपचारिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।कैसे काम करती है अमेरिकी जल प्रणाली और कैसे हो रहा है सेंधमारी का खेलसरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका भर में लगभग 1,52,000 सार्वजनिक पेयजल सिस्टम और 16,000 से अधिक वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट सुविधाएं मौजूद हैं। आम तौर पर ये नगरपालिकाएं झीलों, नदियों या भूजल स्रोतों से पानी लेकर इलेक्ट्रिक पंपों के जरिए उसे ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाती हैं, जहां पानी को फिल्टर और डिसइंफेक्ट करने के बाद स्टोरेज टैंकों के रास्ते घरों और व्यवसायों तक वितरित किया जाता है। लेकिन अब साइबर अपराधी इसी पूरी प्रक्रिया में सेंध लगा रहे हैं।साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, हमलावर मुख्य रूप से इंटरनेट-फेसिंग प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर (PLC) को अपना निशाना बना रहे हैं। ये वही डिजिटल डिवाइस हैं जो पानी के बहाव, दबाव और केमिकल डोजिंग जैसी बेहद संवेदनशील औद्योगिक प्रक्रियाओं को कंट्रोल और मॉनिटर करते हैं। अमेरिकन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल सिक्योरिटी असिस्टेंट प्रोफेसर विलियम अकोटो का कहना है कि ये हैकर्स रिमोट एक्सेस पाने के लिए बाहरी कंपनियों और कंट्रोलर्स के इंटरनेट पतों को स्कैन करते हैं। इसके बाद वे डिफॉल्ट या चोरी किए गए पासवर्ड के जरिए सिस्टम में लॉगिन करके पासवर्ड बदल देते हैं या फिर सीधे कमांड जारी कर पूरी प्रणाली का दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं।क्या वाकई इन खतरनाक हमलों के पीछे ईरान का हाथ है?सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि क्या ये साइबर हमले वाकई ईरानी हैकर्स से जुड़े हुए हैं। हाल ही में एक कैबिनेट बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिनेसोटा के अधिकारियों पर गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि ऐसी लापरवाही के कारण ही हैकर्स को मौका मिला। हालांकि, उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि ईरान के पास इस वक्त अपनी खुद की इतनी बड़ी समस्याएं हैं कि उसे मिनेसोटा की चिंता करने की फुर्सत नहीं होगी।राहत की बात यह है कि अभी तक इन हमलों के चलते किसी भी वाटर सिस्टम में पानी के प्रदूषण या उसकी गुणवत्ता बिगड़ने की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसके बावजूद, सुरक्षा के एहतियाती तौर पर कई जगहों पर मैनुअल हस्तक्षेप यानी मैन्युअल रूप से सिस्टम को संभालना पड़ा है और कई इलाकों में नागरिकों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। फिलहाल अमेरिकी एजेंसियां इस पूरे हाई-टेक खतरे से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर काम कर रही हैं।
अमेरिकी कोर्ट में केस खारिज यानी अदाणी ग्रुप को 'कंप्लीट क्लीन चिट': महेश जेठमलानी
महेश जेठमलानी ने कहा, अमेरिकी कोर्ट ने आरोपों को 'विद प्रीज्यूडिस' के तहत खारिज किया है, जिसका मतलब है कि अब कभी दोबारा वही आरोप नहीं लगाए जा सकते.
चीन के हाथ में अमेरिकी 'वॉर मशीन' की चाबी? कभी भी लगा सकता है लॉक
अमेरिका के पास हथियारों की ताकत है, तो चीन के पास उन हथियारों की सप्लाई चेन का अहम हिस्सा. रेयर अर्थ की यही कहानी बताती है कि आज सप्लाई चेन भी बेहद अहम है.
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। जहां एक ओर यह दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अब सिर्फ अमेरिकी नौसेना का कंट्रोल है वहीं उन्होंने ईरान से युद्ध के दौरान हुए नुकसान को लेकर मुआवजे की मांग भी रख दी है। मीडिया रिपोटर्स की माने तो मुआवजे की यहा मांग उन्होंने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए की है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा कि इस पर अब केवल अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है और इस इलाके में अमेरिकी नाकाबंदी पूरी तरह से मजबूत है। उन्होंने इस नाकाबंदी को स्टील के दीवार की तरह बताया और कहा कि अमेरिका उन्हीं जहाजों को रास्ता देगा जिन्हें वह इस क्षेत्र से गुजरने देना चाहता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार चर्चा में है। दोनों देशों की ओर से तरह-तरह के बयान आ रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंचा जा सका है। pc- abcnews.com
अचानक अमेरिका, यूके और कनाडा क्यों जा रहे मोहन भागवत? RSS प्रमुख के दौरे के पीछे क्या है बड़ी वजह?
Mohan Bhagwat US Visit:
अमेरिका में पढ़ाई का सपना रह गया अधूरा, सड़क हादसे में भारतीय छात्र की मौत
इस हादसे के बाद न्यूयॉर्क स्थित भारतीय दूतावास ने परिवार से संपर्क कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है, जबकि नॉर्थ अमेरिका तेलुगु सोसाइटी ने आर्थिक मदद के लिए फंडरेजर शुरू किया है. परिवार अब अंतिम संस्कार के लिए शव को भारत लाने की तैयारी में जुटा है.
होर्मुज स्ट्रेट संकट पर ईरान-जर्मनी की चर्चा, अराघची ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
होर्मुज स्ट्रेट संकट पर ईरान-जर्मनी की चर्चा, अराघची ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले दिनों तुर्की (Trkiye) में एक गंभीर और पुख्ता जानलेवा खतरे (Assassination Threat) का सामना करना पड़ा था। इस खतरनाक खतरे से बचाने के लिए अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद गोपनीय और फिल्मी प्लान तैयार किया, जिसके तहत ट्रंप को एयर फोर्स वन (Air Force One) से चुपचाप एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (Food/Catering Truck) के जरिए निकालकर दूसरी सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट में शिफ्ट करना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दुनिया और यहां तक कि उनके साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को भी यही लगता रहा कि राष्ट्रपति मुख्य विमान में ही मौजूद हैं।क्या था पूरा मामला और क्यों पड़ी फूड ट्रक में छुपने की जरूरत?यह पूरी घटना तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल नाटो (NATO) समिट के दौरान की है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ईरान की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप पर हमले का एक बेहद खतरनाक और गंभीर इनपुट मिला था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए व्हाइट हाउस और सुरक्षा अधिकारियों ने तुर्की से उनकी सुरक्षित वापसी के लिए एक चालाक कूटनीतिक चाल (Ruse) चली। योजना के अनुसार, मीडिया और आम लोगों की नजरों के सामने डोनाल्ड ट्रंप को आधिकारिक एयर फोर्स वन विमान में चढ़ते हुए दिखाया गया ताकि हमलावरों या किसी भी बाहरी शख्स को उनकी असली लोकेशन का पता न चल सके।कैसे दिया गया इस सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम?जैसे ही कैमरे के सामने ट्रंप मुख्य विमान के अंदर गए, उसके तुरंत बाद उन्हें विमान के दूसरे हिस्से से एक हाइड्रोलिक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (खाने-पीने का सामान लोड करने वाली गाड़ी) के जरिए चुपचाप नीचे उतारा गया। इस फूड ट्रक के भीतर ट्रंप और उनके चुनिंदा करीबी सहयोगी छिपे हुए थे। इसके बाद उस ट्रक ने मुख्य विमान से दूर खड़े एक छोटे और सुरक्षित मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (C-32A) तक का सफर तय किया। उधर, पुराना एयर फोर्स वन विमान एक 'डिकॉय' (Decoy/धोखा देने वाला विमान) की तरह इस्तेमाल किया गया, जिसमें सिर्फ पत्रकार और कुछ व्हाइट हाउस के कर्मचारी सवार थे। इस तरह ट्रंप ने सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट से ब्रिटेन का सफर तय किया और उनकी सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक नहीं होने दी गई।
Gautam Adani को अमेरिकी अदालत से बड़ी राहत, शेयरों में आया जबरदस्त उबाल
उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिकी कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिलने के बाद भारतीय शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों ने जोरदार वापसी की है। फैसले की खबर सामने आते ही निवेशकों का भरोसा एक बार फिर लौट आया, जिसके चलते अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारी देखने को मिली और कुछ शेयर 3.5% तक उछल गए। इस बड़े घटनाक्रम के बाद बाजार के जानकारों का मानना है कि इससे समूह की कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने और भविष्य की परियोजनाओं को गति देने में बड़ी मदद मिलेगी।अमेरिकी कोर्ट के फैसले से निवेशकों का लौटा विश्वासअडानी समूह के खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों में अमेरिकी अदालत से आए इस सकारात्मक फैसले को एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से इस अनिश्चितता के कारण निवेशकों के मन में संशय बना हुआ था, जिससे शेयरों पर दबाव देखा जा रहा था। जैसे ही अदालत का यह फैसला सार्वजनिक हुआ, घरेलू और विदेशी निवेशकों ने अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी लिवाली शुरू कर दी, जिससे बाजार में तेजी का माहौल बन गया।किन शेयरों में दिखा सबसे ज्यादा एक्शन और आगे का आउटलुकइस राहत भरी खबर के बाद अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी पावर जैसे प्रमुख शेयरों में शानदार बढ़त दर्ज की गई। 3.5% तक की इस तेजी ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह बदल दिया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि कानूनी अड़चनें दूर होने से अब कंपनी का पूरा फोकस अपने बिजनेस एक्सपेंशन और नए प्रोजेक्ट्स पर रहेगा, जिससे आने वाले दिनों में शेयरों में और अधिक मजबूती देखने को मिल सकती है।
ईरान ने फिर ट्रंप को दिखाई आंख! कहा- आपके जाने के बाद ही अमेरिका से होगी बातचीत, बढ़ा तनाव
ईरान ने फिर ट्रंप को दिखाई आंख! कहा- आपके जाने के बाद ही अमेरिका से होगी बातचीत, बढ़ा तनाव
अमेरिकी अदालत ने रिश्वतखोरी और सिक्योरिटीज़-फ्रॉड के कथित मामले में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ आपराधिक आरोपों को 'विद प्रिजुडिस' (हमेशा के लिए) खारिज कर दिया है। इससे लगभग दो साल से चल रही कानूनी कार्यवाही खत्म हो गई है। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र (indictment) को खारिज करने के लिए जस्टिस डिपार्टमेंट की 'रूल 48(a)' याचिका को मंज़ूरी दे दी। इन आरोपों में सिक्योरिटीज़-फ्रॉड करने की साज़िश, वायर फ्रॉड और सिक्योरिटीज़-फ्रॉड करने की साज़िश शामिल थी। इसे भी पढ़ें: Gautam Adani मामला: US Court ने आपराधिक आरोपपत्र खारिज किया, कार्यवाही समाप्त जज निकोलस गारौफिस ने केस छोड़ने के फैसले के बारे में फेडरल प्रॉसिक्यूटर से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगने के बाद इस बर्खास्तगी को मंज़ूरी दी। 'विद प्रिजुडिस' बर्खास्तगी का मतलब है कि आपराधिक कार्यवाही हमेशा के लिए खत्म हो गई है और इन आरोपों को दोबारा दायर नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने यह तय कर दिया है कि मूल आरोप साबित हो गए थे या गलत साबित हुए थे। गौतम अडानी ने केस खारिज होने का स्वागत किया इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, गौतम अडानी ने एक्स पर एक पोस्ट में अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मैं अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं। इस मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा भरोसा अटूट रहा। मैं उन सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने हम पर, सिस्टम पर और न्याय दिलाने की भारत की क्षमता पर कभी भरोसा नहीं खोया। हम वही काम करते रहेंगे जो मायने रखता है: अपने देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी बनी रहे और खुद से भी बड़े मकसद के लिए काम करना। क्या है पूरा मामला यह आपराधिक मामला नवंबर 2024 में दर्ज किया गया था, जब अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी, सागर अडानी, विनीत जैन और अन्य पर सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की योजना में शामिल होने का आरोप लगाया था। अभियोजकों का आरोप था कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स से दो दशकों की अवधि में टैक्स के बाद 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का मुनाफ़ा होने की उम्मीद थी। उन्होंने आरोपियों पर अमेरिकी बाज़ारों में लोन और बॉन्ड के ज़रिए 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की रक़म जुटाते समय निवेशकों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया और कहा कि उसने लागू कानूनों और रेगुलेटरी ज़रूरतों का पालन किया है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के एक अलग सिविल मामले का भी गौतम अडानी के ख़िलाफ़ अंतिम फ़ैसले के ज़रिए निपटारा हो गया है। उन्होंने आरोपों को स्वीकार किए बिना ही इस फ़ैसले को मान लिया। इस आदेश के तहत, अडानी को 30 दिनों के भीतर SEC को 6 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना देना होगा।
अमेरिका की चाल है इस्लामिक नाटो? मक्का समझौते में अभी कई देशों की होगी एंट्री
तुर्की ने संकेत दिया है कि यह समझौता केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहेगा। तुर्की की ओर से कहा गया है कि इस समझौते का विस्तार किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कई देशों को इसके दायरे में लाया जाना चाहिए। क्या यह अमेरिका की चाल है?
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RSS: अमेरिका-ब्रिटेन-कनाडा के दौरे पर जाएंगे मोहन भागवत; शताब्दी वर्ष के बीच प्रवासी भारतीयों से करेंगे संवाद
अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला, गौतम अडानी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप हुए खारिज
अमेरिकी अदालत ने मंगलवार को भारतीय अरबपति और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी को राहत देते हुए उनके खिलाफ सभी आपराधिक आरोप खारिज कर दिए। यह कदम जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी का मामला वापस लेने का फैसला करने के बाद उठाया गया।
सुनील शेट्टी ने एक बार अपनी लाइफ का ऐसा किस्सा सुनाया था जिसे वह आज तक नहीं भूल पाए हैं। अमेरिका की पुलिस ने जब उन्हें हथकड़ी पहना दी थी होटल में।
Gautam Adani US Court Case: अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी और अन्य अधिकारियों के लिए अमरीका से बहुत बड़ी कानूनी राहत की खबर आई है। न्यूयॉर्क की अमरीकी जिला अदालत ने गौतम अडाणी और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा केस वापस लेने की याचिका को स्वीकार करते हुए जज निकोलस गारौफिस ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की और कहा कि उनका सत्य, निष्पक्षता और न्याय प्रणाली में विश्वास हमेशा अटूट रहा है।'सत्य और कानून के शासन में अटूट विश्वास'अमेरिकी कोर्ट का फैसला आने के बाद गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, 'मैं नम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ अमरीकी अदालत के इस फैसले का स्वागत करता हूं। इस पूरे कठिन दौर के दौरान सत्य, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा विश्वास अटूट रहा। मैं उन सभी लोगों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने हम पर, हमारी प्रणाली पर और भारत की न्याय करने की क्षमता पर भरोसा नहीं खोया। हम देश के निर्माण और एक बड़े उद्देश्य की सेवा में अपना योगदान जारी रखेंगे। जय हिंद।'अदालत ने क्यों खारिज किया मामला?यह मामला नवंबर 2024 में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अडाणी ग्रीन एनर्जी को सौर ऊर्जा आपूर्ति के ठेके दिलाने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की कोशिश की गई और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया गया। हालांकि, अमरीकी न्याय विभाग ने समीक्षा के बाद मामले को आगे न बढ़ाने का फैसला किया।अमरीकी न्याय विभाग ने कोर्ट को बताया कि यह मामला मुख्य रूप से भारत से जुड़ा है। इसमें भारतीय नागरिक, भारतीय बिजली सौदे और भारत में हुए कथित घटनाक्रम शामिल थे। इसलिए अमरीका का 'ग्लोबल पुलिस' की तरह काम करना सही नहीं है।निवेश मीडिया में ऐसी खबरें थीं कि अडाणी समूह के अमरीका में 10 अरब डॉलर के निवेश के वादे के कारण केस हटाया जा रहा है। हालांकि, जज ने स्पष्ट किया कि DoJ का यह फैसला किसी निवेश सौदेबाजी से प्रभावित नहीं था।DoJ ने यह स्वीकार किया कि सिक्योरिटीज फ्रॉड के ये आरोप कानूनी रूप से बेहद कमजोर थे और इन्हें लाया ही नहीं जाना चाहिए था।अडाणी समूह के लिए क्या हैं इसके मायने?हमेशा के लिए बंद हुआ केस: कोर्ट ने मामले को 'Dismissed with prejudice' के तहत खारिज किया है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में इन्हीं आरोपों पर इस केस को दोबारा शुरू या दर्ज नहीं किया जा सकता।पिछले दो सालों से अडाणी समूह के शेयरों और कॉर्पोरेट छवि पर अमरीकी जांच की वजह से जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह अब पूरी तरह खत्म हो गई है। अडाणी समूह ने यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के साथ चल रहे नागरिक मामलों को भी बिना कोई दोष स्वीकार किए आपसी सहमति से सुलझा लिया है।
गौतम अदाणी को बड़ी राहत! अमेरिकी कोर्ट ने खारिज किए सभी क्रिमिनल चार्ज, 2 साल पुराना मामला खत्म
अमेरिका की एक अदालत ने गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है।
वॉशिंगटन/New Delhi, 11 अगस्त . अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अमेरिकी अदालत द्वारा उनके, सागर अदाणी और सहयोगी विनीत जैन के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप खारिज किए जाने के बाद इस फैसले का “न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विनम्रता और गहरे सम्मान” के साथ स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इस पूरे कठिन दौर ... Read more
अडाणी का अमेरिकी केस खत्म! कोर्ट ने खारिज किए रिश्वत और अमेरिकी निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप
अडाणी का अमेरिकी केस खत्म! कोर्ट ने खारिज किए रिश्वत और अमेरिकी निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप
Gautam Adani: अमेरिकी अदालत ने गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी के मामले को किया खारिज
इंटरनेट डेस्क। भारत के बड़े बिजनेसमैन गौतम अडाणी को अमेरिका अदालत से राहत मिली है। यह राहत अडाणी के लिए बहुत बड़ी है। मीडिया रिपोटर्स की माने तो अमेरिकी अदालत ने सोमवार को गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी के मामले को खारिज कर दिया। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग की केस खत्म करने की मांग मंजूरी दी। सन 2024 में लगा था आरोप मीडिया रिपोटर्स की माने तो गौतम अडाणी पर साल 2024 में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताई थी, ताकि अडाणी ग्रुप की एक सहायक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट विकसित करने का ठेका मिल सके। अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया था। अडाणी ने क्या कहा मीडिया रिपोटर्स की माने तो अदालत का फैसला आने के बाद गौतम अडाणी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “मैं न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं। मामले में एक और विवाद गौतम अडाणी के अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश के वादे को लेकर रहा। अडाणी ने 15 जुलाई को अदालत में दिए एफिडेविट में कहा था कि उन्हें ऐसे किसी समझौते की जानकारी नहीं है। उन्होंने माना कि वह पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने का वादा कर चुके हैं। अडाणी ने बताया कि उनके वकीलों ने न्याय विभाग के साथ बैठकों में कहा था कि यह निवेश वादा इन मामलों के समाधान का हिस्सा हो सकता है। pc- reuters.com
होर्मुज संकट गहराया: अमेरिका-ईरान तनाव से तेल कीमतें ऊंचे स्तर पर, WTI 82 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के मध्य चल रहे युद्ध के चलते खाड़ी में संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसका असर ये हो रहा है कि तेल की सप्लाई बाधित हो गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें एक हफ्ते के ऊंचे स्तर के करीब बनी हुई हैं। निकट समय में […]
जापानी पत्नी ने उत्तराखंड पहुंचकर पूरी की अमेरिकी पति की आखिरी इच्छा
जापान की अंग्रेजी प्रोफेसर मियाको केटलेट अपने अमेरिकी पति रोबर्ट की आखिरी इच्छा पूरी करने उत्तराखंड के बागेश्वर पहुंचीं. वर्ष 2007 में बागेश्वर आए रोबर्ट का इस पवित्र भूमि से गहरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया था. 2022 में उनके निधन के बाद मियाको ने उनकी अस्थियां संभालकर रखीं. वैदिक मंत्रोच्चारण और हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उन्होंने सरयू की पावन धारा में अस्थियां प्रवाहित कर पति को अंतिम विदाई दी.
गौतम अदाणी और अन्य लोगों के खिलाफ अमेरिका में दर्ज मामला भारत में सौर ऊर्जा से जुड़े अनुबंधों में कथित रिश्वतखोरी की योजना पर आधारित था। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि इन अनुबंधों को हासिल करने के लिए रिश्वत देने की योजना बनाई गई और इस प्रक्रिया में अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह किया गया।
'हम अकेले बोझ नहीं उठाएंगे': चीन के बढ़ते दबदबे का असर, क्या एशिया को भी बेसहारा छोड़ रहा अमेरिका?
'हम अकेले बोझ नहीं उठाएंगे': चीन के बढ़ते दबदबे का असर, क्या एशिया को भी यूरोप की तरह बेसहारा छोड़ रहा अमेरिका?
अमेरिका में इमिग्रेशन का पेपरवर्क होगा खत्म! ऑनलाइन होगी फाइलिंग
अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस बदलाव से ट्रेजरी की फिजिकल लॉकबॉक्स सेवाओं पर निर्भरता घटेगी, फीस का इलेक्ट्रॉनिक भुगतान बढ़ेगा, धोखाधड़ी पकड़ना और पहचान प्रबंधन आसान होगा, आवेदन में गलतियां और देरी कम होंगी.
'सच्चाई और न्याय की जीत हुई', अमेरिकी अदालत द्वारा आरोप खारिज किए जाने पर बोले गौतम अदाणी
अमेरिकी कोर्ट ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदाणी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए न्याय व्यवस्था और सच्चाई में अपने अटूट विश्वास को दोहराया है।
Donald Trump प्रशासन में अमेरिका ने 1.75 लाख से अधिक US Visa रद्द किए
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, 10 अगस्त अमेरिका ने सोमवार को घोषणा की कि उसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में लापरवाही से वाहन चलाने से लेकर यौन उत्पीड़न तक कई तरह के अपराधों के कारण 1.75 लाख से अधिक वीजा रद्द किए हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि ये वीजा लगातार की जाने वाली जांच के तहत रद्द किए गए, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वीजा पाने वाले लोग इसकी शर्तों का पालन करें और अमेरिकियों के लिए खतरा न बनें। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका के विदेश विभाग ने ऐसे विदेशी नागरिकों के 1,75,000 से अधिक वीजा रद्द किए हैं, जिन्होंने अपने वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया, अपराध किए, अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ हिंसा का आह्वान किया, अमेरिकियों के साथ धोखाधड़ी की, हमारी आव्रजन व्यवस्था का दुरुपयोग किया या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला।’’देशवार वीजा रद्द किए जाने का ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं था। बयान में कहा गया, ‘‘अमेरिकी वीजा अधिकार नहीं, बल्कि विशेषाधिकार है। विभाग उन लोगों से हमारे समुदायों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध हर उपाय का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो इसका दुरुपयोग करते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण बरकरार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला है: ट्रंप
अमेरिका के प्रीस्कूल की फीस ने उड़ाए होश, महिला ने वीडियो में बताया इतना खर्च
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Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
Adani Case: गौतम और सागर अदानी के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में आपराधिक आरोप खारिज, फैसले पर क्या बोले भारतीय उद्योगपति?
अपराधिक केस खारिज, अमेरिकी कोर्ट के फैसले का गौतम अडानी ने किया स्वागत
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को वापस लेने के बाद ब्रुकलिन की अदालत ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ दर्ज केस खारिज कर दिया है. अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए गौतम अडानी ने न्याय प्रणाली और सत्य में अपना गहरा विश्वास जताया है.
बिहार के खगड़िया से पकड़ा गए फर्जी IAS की कुंडली अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। 41 साल के मनीष गुप्ता ने शादी नहीं की थी। उसने 5 कट्ठे की कोठी को अपना ऐसा ठिकाना बनाया था, जिसमें से वो सब पर नजर रख सके, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी बाहर नहीं आए। दिल्ली से लौटने के बाद वो अपने बचपन के दोस्तों से भी कट गया। वो किसी को भी अपने घर के अंदर तक नहीं आने देता था। बताया जाता है कि उसने अपने कोठी में जो स्वीमिंग पुल बना रखा था, उसमें कछुआ पाल रखा था। लोग बताते हैं कि वो मानता था कि कछुआ रखने से धन में बढ़ोत्तरी होती है। अब पुलिस के इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर फर्जी IAS ने 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कैसे कमाई। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मनीष कनाड़ा और अमेरिका से ट्रांजेक्शन करता था। पुलिस उसके पास से बरामद 5 आईफोन और आईपैड से उसके नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। इस पूरी खबर में पढ़िए फर्जी IAS मनीष की कहानी, क्लासमेट और पुलिस की जुबानी… पहले फर्जी IAS के घर रेड की तस्वीरें देखिए 10वीं क्लास का टॉपर था मनीष गुप्ता मनीष गुप्ता अपना रौब ऐसा रखता था कि उसके पड़ोसी उससे दूर ही रहते थे। वो खुद को PMO में काम करने वाला अधिकारी बताता था। वो कहता था कि उसकी बात सीधे पीएम मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से होती है। लिहाजा आसपास के लोग भी उससे दूरी बनाकर रहते थे। मनीष के बारे में जानने के लिए भास्कर की टीम ने उसके बचपन के दोस्तों की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद हमें मनीष का एक क्लासमेट मिला। उसने बताया कि मनीष का जन्म 1975 में हुआ था। उसके पिता खगड़िया के केडीएस कॉलेज में हिन्दी के प्रोफेसर थे। मनीष की शुरुआती पढ़ाई जमालपुर-गोगरी इलाके के सरकारी स्कूल में हुई। 1991 में मैट्रिक के एग्जाम में मनीष ने टॉप किया था। वो बचपन से ही पढ़ने में तेज था। इंटर तक उसने अपनी पढ़ाई यहीं पर पूरी की। इसके बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए अपने बड़े भाई के पास दिल्ली चला गया। उसके बाद हमलोगों की बात मनीष से कम हो गई। बेटे की पैरवी के लिए दो साल चक्कर लगाया, काम नहीं हुआ फर्जी IAS के दोस्त ने बताया कि मैं अपने बेटे से जुड़े एक काम की पैरवी के लिए मनीष के पास गया था। मुझे लगा कि बचपन का दोस्त बड़ा अधिकारी है। वो मेरी मदद कर सकता है। उस समय मुझे यह अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को मैं बड़ा सरकारी अधिकारी समझ रहा हूं, उसकी पहचान ही पुलिस जांच में फर्जी निकल सकती है। अब जब मनीष की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई की खबर सामने आई तो पहले मुझे भरोसा नहीं हुआ। मनीष गुप्ता के दोस्त ने बताया कि एक बार किसी विवाद को लेकर मध्य विद्यालय जमालपुर कचहरी के एक शिक्षक को मनीष ने दूर से ही अपना ID कार्ड दिखाया था। उसने खुद को CBI का अधिकारी बताकर टीचर को भी धमकाया था। सरकारी बोर्ड वाली दो गाड़ियां, एक ड्राइवरलेस टेस्ला भी खगड़िया के गोगरी पुलिस को सूचना मिली थी कि जमालपुर में रहने वाला मनीष अपनी गाड़ियों पर ‘GOVT OF INDIA’ का बोर्ड लगाकर खुद को IAS बताता है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने 8 अगस्त की रात उसके घर पर छापेमारी की। घर के सामने दो गाड़ियां खड़ी थीं और दोनों पर सरकारी बोर्ड लगा था। घर के बाहर एक आदमी हाफ पैंट-टी शर्ट में घूम रहा था। पुलिस ने जब उससे उसके बारे में पूछा तो उसने कहा कि 'मेरे नाम मनीष गुप्ता है। मैं सीनियर IAS हूं। मैं अजित डोभाल की टीम में काम करता हूं। तुमलोग की हिम्मत कैसे हुई मेरे घर तक आने की। मनीष गुप्ता ने अपने मोबाइल पर आई कार्ड भी दिखाया। आई कार्ड और उसका कॉन्फिडेंस देखकर पुलिस भी कुछ देर के लिए बैकफुट पर आ गई। लेकिन पुलिस के अधिकारी ने आईकार्ड की जांच की तो पता चला ये फर्जी है।' जब तक रेड चली पुलिस से तू-तड़ाक करता रहा फर्जी IASपुलिस सूत्रों के मुताबिक मनीष गुप्ता के घर पर करीब 7 घंटे तक रेड चली। रेड के दौरान वो पुलिस से सीनियर ऑफिसर को भी तू-तड़ाक करता रहा। वो बार बार खुद को बड़ा अधिकारी बताकर पुलिस वालों को सस्पेंड करवाने की धमकी देता रहा। फोन-आईपैड का पासवर्ड नहीं बता रहा फर्जी IAS पुलिस ने आरोपी के पास से 5 Apple मोबाइल फोन, MacBook, iPad और 4 TB की हार्ड डिस्क बरामद की है। इन डिवाइस में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, चैट, ई-मेल, सोशल मीडिया अकाउंट, फोटो, वीडियो, दस्तावेज और बैंकिंग गतिविधियों से पुलिस को पूरे नेटवर्क की जानकारी मिल सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि मनीष किन लोगों से संपर्क में था। लेकिन फर्जी IAS फोन और आईपैड का पासवर्ड नहीं बता रहा है। पुलिस अब एक्सपर्ट से मनीष का फोन-आईपैड अनलॉक करवा सकती है। 20 क्रेडिट कार्ड और 8 डेबिट कार्ड का डिटेल खंगाल रही पुलिस तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस ने 20 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड और 4 चेकबुक बरामद किए हैं। कुछ कार्डों पर दूसरे नाम दर्ज होने की बात भी FIR में है। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग कार्ड मिलने के बाद पुलिस अब इनके खातों और लेनदेन की जांच कर सकती है। किस कार्ड का इस्तेमाल किसने किया, किन खातों से पैसा आया और कहां गया, यह जानकारी बैंक स्टेटमेंट और KYC रिकॉर्ड से सामने आएगी। मनीष के घर में CCTV की व्यवस्था भी मिली है। पुलिस ने CCTV का DVR जब्त किया है। इससे घर पर आने-जाने वाले लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। अमेरिका-कनाडा से लेनदेन की बात, अभी पुष्टि बाकी मनीष के नेटवर्क से अमेरिका और कनाडा से ट्रांजेक्शन होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध FIR में विदेशी लेनदेन की स्पष्ट पुष्टि दर्ज नहीं है। इसलिए फिलहाल यह पुलिस जांच का विषय है। अगर बैंक खातों की जांच में अमेरिका, कनाडा या किसी अन्य देश से जुड़े लेनदेन मिलते हैं तो पुलिस को यह पता लगाना होगा कि पैसा किसके खाते से आया, किस खाते में गया और उसका उद्देश्य क्या था। विदेशी लेनदेन मिलने की स्थिति में जांच का दायरा स्थानीय स्तर की ठगी से बढ़कर अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल लेनदेन तक पहुंच सकता है। विदेशी शराब, बारहसिंगा के सींग और कछुआ भी बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस को 31 लीटर विदेशी शराब भी मिली है। इसके अलावा बारहसिंगा के दो सींग औक एक कछुआ भी बरामद किया गया है। मनीष जानवरों के सिगों का क्या करता था, पुलिस उसके बारे में भी पता लगा रही है। घर में स्वीमिंग पूल- पर्सनल थियेटर, 25 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे पड़ोसी के मुताबिक, करीब पांच कट्ठे की जमीन पर बने परमेश्वरी भवन में ऐशो-आराम की हर चीजें मौजूद है। जब से गाजियादबाद से मनीष पहुंचा, तब से लगातार कोठी को और बेहतर बना रहा था। घर में स्वीमिंग पुल-थियेटर भी है। कोठी के अंदर महंगी इटैलियन टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है। पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। मनीष का एक भाई कनाडा में रहता है मनीष कुमार गुप्ता का परिवार शिक्षित और प्रतिष्ठित रहा है। मनीष के पिता परमेश्वर प्रसाद गुप्ता गोगरी-जमालपुर के केडीएस कॉलेज में प्रोफेसर थे। परिवार का यहां पुश्तैनी घर है। उनके बड़े भाई संजय कुमार गुप्ता दिल्ली में प्रोफेसर हैं, जबकि एक अन्य भाई डंपी कुमार कनाडा में रहते हैं। परिवार के अन्य भाई भी अलग-अलग शहरों में प्राइवेट कंपनियों में जॉब करते हैं।
अमेरिका ने कबाड़ में बेचे वेनेजुएला से जब्त 2 तेल टैंकर, भारत में होंगे डिमोलिश
अमेरिका ने वेनेजुएला से जब्त प्रतिबंधित दो तेल टैंकरों को कबाड़ में बेच दिया है. ये टैंकर भारत के शिप-ब्रेकिंग यार्ड में डिमोलिश किए जाएंगे. रूसी झंडे वाले इन टैंकरों को अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने जनवरी में समुद्र से जब्त किया था. ये डील दुबई की कंपनी ग्लोबल मार्केटिंग सिस्टम्स ने की है.
गौतम अडानी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत, रिश्वत-धोखाधड़ी का केस हुआ खत्म
अमेरिकी वकीलों ने 2024 में अडानी के खिलाफ आरोप तय किए थे। अडानी पर आरोप थे कि उन्होंने भारत में सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की सहमति जताई थी।
Rohtak News: अमेरिका में हरविंदर मलिक की हरियाणवी पेंटिंग प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
अमेरिका में हरविंदर मलिक की हरियाणवी पेंटिंग प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
Pratapgarh News: अमेरिका में कांस्य, शाहनवाज ने बढ़ाया तिरंगे का मान
एथलेटिक्स कोच शोभनाथ यादव ने बताया कि इससे पहले दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चोट के कारण शाहनवाज को सफलता नहीं मिल सकी थी।
Sirmour News: अमेरिका के साथ कृषि समझौते के विरोध में किसानों और मजदूरों ने किया प्रदर्शन
अमेरिका के साथ किए गए कृषि समझौते और चार लेबर कोड के विरोध में सोमवार को हिमाचल किसान सभा के बैनर तले किसानों और मजदूरों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने रद्द किए 1.75 लाख से ज्यादा वीजा
अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लापरवाही से गाड़ी चलाने से लेकर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों में शामिल विदेशी नागरिकों के 1.75 लाख से अधिक वीजा रद्द किए गए हैं. ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है.
अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब: होर्मुज के कारण तेल कीमतों में उछाल; फेडरल रिजर्व पर दबाव घटा
Yamuna Nagar News: भारत-अमेरिका डील का विरोध कर रहे 250 किसानों को हिरासत में लेकर छोड़ा
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को किसानों ने जेल भरो आंदोलन किया।
Udham Singh Nagar News: अमेरिका से ट्रेड डील के विरोध में सांकेतिक चक्का जाम
अमेरिका से ट्रेड डील के विरोध में सांकेतिक चक्का जाम
अमेरिकी राजदूत गोर की विदेश सचिव मिस्री और मिलिंद देवड़ा से मुलाकात, यूएस-भारत साझेदारी पर हुई चर्चा
New Delhi, 10 अगस्त . India में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने Monday को विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की. इसके अलावा, गोर और राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा की भी मीटिंग हुई. गोर ने जानकारी दी कि राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा के साथ भारत-अमेरिका साझेदारी को लेकर चर्चा की. अमेरिकी राजदूत गोर ने ... Read more
ईरान जंग में ट्रंप की नई डिमांड... बोले- तेहरान से मुआवाजा वसूलेगा अमेरिका
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से संघर्षों में मारे गए और गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य की सभी बातचीत में शामिल किया जाएगा.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ में चीन ने अद्वितीय लाभ प्रदर्शित किए: अमेरिकी मीडिया
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ में चीन ने अद्वितीय लाभ प्रदर्शित किए: अमेरिकी मीडिया
Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से $84 के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरार
तेल की कीमतों में सोमवार सुबह एक बार फिर तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी हुई है। सबसे ज्यादा नजर होर्मुज स्ट्रेट पर है, जहां से तेल की आवाजाही फिर शुरू होने को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है। इसी अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं। सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे भारतीय समय के अनुसार ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 1.32 प्रतिशत बढ़कर 84.65 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 1.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78.99 डॉलर प्रति बैरल रही। हालांकि, इससे पहले पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख तेल मानकों में सात प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। उस समय उम्मीद थी कि ईरान और ओमान के बीच समझौता हो सकता है और इसके बाद होर्मुज स्ट्रेटसे जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाएगी। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेटदुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब पांचवीं तेल आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती थी। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है और कीमतों में तेजी आने का खतरा बढ़ जाता है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच समुद्री रास्ते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ समझौता अंतिम दौर में है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेटसे जहाजों के लिए नए समुद्री रास्ते तय किए जा सकते हैं। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि इन रास्तों का इस्तेमाल तभी शुरू होगा, जब अमेरिका उसकी कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार करेगा। ईरान की मांगों में मुआवजा, प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकी खत्म करना शामिल है। दोनों देशों के बीच फिलहाल सीधी बातचीत नहीं हो रही है। अराघची के मुताबिक, ईरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक अपने संदेश पहुंचा रहा है। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करता, तब तक सीधे बातचीत की स्थिति नहीं बन सकती है। इस बीच क्षेत्र में तेल से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रविवार को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी पर हमला करने का दावा किया। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की है। मंत्रालय के अनुसार, आग पर काबू पा लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि, आग लगने की वजह के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई है। बता दें कि हूती विद्रोही लाल सागर और अदन की खाड़ी के आसपास भी जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। यह इलाका भी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार और तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। पिछले महीने हूती समूह ने लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की थी। उसने इसे यमन में हूतियों पर सऊदी दबाव का जवाब बताया था। सऊदी अरब इन आरोपों से इनकार करता है और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है। उधर, संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी ने बताया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसके 15 जहाज होर्मुज स्ट्रेटसे गुजरते समय हमलों की चपेट में आ चुके हैं। इन घटनाओं ने तेल की सुरक्षित आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि तेल बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है, लेकिन मौजूदा कीमतें युद्ध के शुरुआती दौर में देखे गए 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से काफी नीचे हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि होर्मुज स्ट्रेटकब दोबारा पूरी तरह खुलेगा और ईरान, ओमान तथा अमेरिका के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। इन घटनाक्रमों के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहने की आशंका जताई जा रही है।
'रूस तो बहाना अमेरिका का असली निशाना है भारत...'ट्रंप के 100% टैरिफ बिल को लेकर विशेषज्ञों का बड़ा खुलासा
अमेरिका के कोलंबिया में जबरदस्त भूकंप, रिक्टर स्केल पर 6.8 तीव्रता रिकॉर्ड
कोलंबिया में ज़ोरदार भूकंप आया। US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने शुरुआती तौर पर इसकी तीव्रता 7.4 मापी। USGS के मुताबिक, भूकंप 12:34 UTC यानी सुबह करीब 7:34 बजे (स्थानीय समय) कोलंबिया के चोको डिपार्टमेंट में सैन होज़े डेल पाल्मार से लगभग 5 किलोमीटर पूर्व में आया। यह ज़मीन से लगभग 107 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। हालांकि, US सुनामी वॉर्निंग सिस्टम ने भूकंप की तीव्रता अलग मापी और इसे 7.1 बताया। सिस्टम ने कहा कि कोलंबिया में भूकंप आने के बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई। भूकंप के झटके कोलंबिया के कई हिस्सों में महसूस किए गए, जिनमें भूकंप के केंद्र (एपीसेंटर) से दूर के इलाके भी शामिल थे। शुरुआती रिपोर्टों से यह भी पता चला कि झटके कोलंबिया के बाहर, वेनेजुएला की सीमा की ओर भी महसूस किए गए। इसे भी पढ़ें: Colombia में नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के अगले दिन Car Bomb विस्फोट कोलंबिया दक्षिण अमेरिका के सबसे ज़्यादा भूकंप-संवेदनशील देशों में से एक है। कई टेक्टोनिक प्लेट बाउंड्री और बड़े फॉल्ट सिस्टम के पास होने के कारण, देश के अलग-अलग हिस्सों में भूकंप आ सकते हैं। कोलंबियाई जियोलॉजिकल सर्विस का कहना है कि देश में 100 से ज़्यादा विनाशकारी भूकंप दर्ज किए गए हैं, खासकर एंडियन क्षेत्र, ईस्टर्न कॉर्डिलेरा की पूर्वी तलहटी और प्रशांत क्षेत्र में। इस देश ने अतीत में कई शक्तिशाली भूकंपों का सामना किया है। इनमें से सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक 1979 में दक्षिण-पश्चिमी कोलंबिया के टुमाको के पास आया 8 तीव्रता का भूकंप था।
अमेरिकी लेबर मार्केट में 'शोर' या संकट? जुलाई में गई 23000 नौकरियां फिर भी बेरोजगारी दर में गिरावट
अमेरिकी श्रम बाजार में जुलाई 2026 के आंकड़े विरोधाभासी रहे, जहां 23,000 नौकरियां कम हुईं, वहीं बेरोजगारी दर घटकर 4.1% पर आ गई।
ये इंस्टाग्राम स्टोरी देखिए… ये मोहतरमा हैं अमेरिकी सांसद अलेक्जेंड्रिया। एग्स फ्रीजिंग का होर्मोनल इजेंक्शन लगा रही हैं। कहती हैं- व्यस्त राजनीतिक करियर के बीच मैंने ये फैसला अपने जीवन पर कंट्रोल पाने के लिए लिया, ताकि जब चाहे परिवार शुरू कर सकूं। 36 साल की अलेक्जेंड्रिया 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार हो सकती हैं। आखिर एग फ्रीजिंग क्यों कराती हैं महिलाएं, इससे बच्चे कैसे पैदा होते हैं और क्या हैं इसके फायदे-नुकसान; आज के एक्सप्लेनर में सभी जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: एग फ्रीजिंग क्या है और ये कैसे होता है? जवाब: एक सामान्य महिला पूरी जिंदगी में 400 से 500 अंडे प्रोड्यूस करती है। बढ़ती उम्र के साथ इन एग्स की क्वालिटी खराब होती जाती है और महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसलिए महिलाएं कम उम्र में ही अपने स्वस्थ अंडे फ्रीज करा लेती हैं, जिससे उम्र बढ़ने के बाद भी प्रेग्नेंसी में दिक्कत न हो। असल में महिलओं की ओवरी यानी अंडाशय में छोटे-छोटे अविकसित अंडे होते हैं। इन्हें इंजेक्शन देकर विकसित किया जाता है। फिर सर्जरी के जरिए निकालकर फ्रीज कर दिया जाता है। इसे ही एग फ्रीजिंग या 'ऊसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन’ कहते हैं। सवाल-2: फ्रीज किए गए एग से बच्चे कैसे पैदा होते हैं? जवाब: जब भी महिला प्रेग्नेंट होना चाहती है, इन अंडों को लैब में स्पर्म के साथ फर्टिलाइज करके भ्रूण बनाकर महिला के गर्भाशय यानी यूटेरस में इम्प्लांट कर दिया जाता है। प्रक्रिया के ४ अहम स्टेप्स… भारत में 2021 के असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एक्ट, यानी ART एक्ट के अनुसार अधिकतम 10 साल के लिए एज फ्रीजिंग करवाई जा सकती है। दुनियाभर में अलग-अलग नियम हैं। सवाल-3: किन महिलाओं के लिए एग फ्रीजिंग सबसे मुफीद होती है? जवाब: ART एक्ट के नियमों के तहत 21 से 50 साल की उम्र तक की कोई महिला अपने एग्स फ्रीज करवा सकती है। पिछले कुछ सालों में भारत समेत दुनियाभर में एग फ्रीजिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है। खासकर, 2020 में कोरोना के बाद, जब फैमिली प्लानिंग पर खुलकर बात की जाने लगी। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ऑफ अकाउंटिंग एंड रिपोर्टिंग यानी ISAR की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में 2022 से 2024 के बीच एग फ्रीजिंग कराने वाली महिलाओं की संख्या 50% तक बढ़ी है। गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति गुप्ता बताती हैं कि एग फ्रीजिंग उन महिलाओं के लिए वरदान है, जिनमें प्राकृतिक रूप से स्पर्म फर्टिलाइजेशन नहीं हो पाता या किसी और वजह से वह बच्चा कंसीव नहीं कर पातीं। वे महिलाएं, जिन्हें कैंसर है या फिर जो ज्यादा उम्र में मां बनना चाहती हैं, वह एग फ्रीजिंग के जरिए ऐसा कर सकती हैं। कई वुमेन सेलिब्रिटीज ‘एग फ्रीजिंग’ इसलिए अपना रही हैं, ताकि अभी उन्हें करियर से ब्रेक न लेना पड़े और वह जब चाहें तब मां बन सकें। यंग वर्किंग प्रोफेशनल महिलाओं के बीच यह चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। सुपरस्टार रामचरण की पत्नी उपासना ने पिछले दिनों कहा था- ‘महिलाओं के लिए सबसे बड़ा इंश्योरेंस अपने अंडे फ्रीज करना है। इससे वे अपनी मर्जी से तय कर सकती हैं कि शादी और बच्चे कब करने हैं।' सानिया मिर्जा ने भी अपने एग फ्रीज कराने का खुलासा करते हुए कहा था- ये लाइफ का सबसे अच्छा फैसला है और सभी महिलाओं को एग फ्रीजिंग कराना चाहिए। सवाल-4: अमेरिकी सांसद अलेक्जेंड्रिया एग फ्रीज क्यों करवा रही हैं? जवाब: अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज ने एग फ्रीजिंग की प्रोसेस शुरू करते हुए बताया… सवाल-5: एग फ्रीजिंग में कितना खर्च आता है? जवाब: भारत में एग फ्रीजिंग में 1 से 2 लाख रुपए तक का खर्च आ सकता है। हालांकि, इसकी फाइनल कॉस्ट कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है। जैसे- आपने कौन-सा क्लिनिक चुना है, कितने समय के लिए एग स्टोर करना चाहते हैं और इस दौरान डॉक्टर आपको किस तरह की एडिशनल दवाएं देते हैं। इस प्रोसेस में कई एक्स्ट्रा चार्जेस भी होते हैं। जैसे- सवाल-6: क्या एग फ्रीजिंग के कुछ नुकसान भी होते हैं? जवाब: एक्सपर्ट एग फ्रीजिंग को आम तौर पर एक ‘सेफ प्रोसेस’ बताते हैं, लेकिन कुछ मामलों में परेशानी भी हो सकती है। फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मीरा शाह बताती हैं… 2023 में अमेरिकन सिंगर केशा ने बताया कि उन्हें गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स हुए। हॉर्मोन इंजेक्शन से ओवरी सूज गई और दर्द असहनीय था। उन्होंने महिलाओं को इससे बचने की सलाह दी। 2023 में ब्रिटिश टीवी स्टार विकी पैटिसन ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘हॉर्मोन इंजेक्शन से पेट बहुत सूज गया, सिर्फ 3 एग्स ही यूजेबल निकले, जिससे मैं मानसिक रूप से टूट गई थी।’ ------------ ये खबर भी पढ़िए… दुनिया में ऐसा क्या होने जा रहा कि अरबपति बच्चे चीनी भाषा सीख रहे; ट्रम्प की पोती, मस्क के बेटे तक शामिल दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क का एक पोस्ट वायरल है। वो लिखते हैं- मेरा बेटा मैंडरिन (चाइनीज भाषा) सीख रहा है। मई 2026 में मस्क अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ चीन दौरे पर गए, तब भी उनका 6 साल का बेटा चीन की पारंपरिक कढ़ाई वाली जैकेट पहने साथ दिखा था। पूरी खबर पढ़िए…
24 साल की एक लड़की की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में 24 साल की एक महिला ने अपनी जिंदगी के पिछले कुछ सालों के सफर के बारे में बताया है। महिला ने अमेरिका में पढ़ाई से लेकर मैनहैटन में नौकरी करने और कम उम्र में एजुकेशन लोन चुकाने तक के कई बड़े पड़ावों के बारे में बताया है। वायरल वीडियो में महिला ने बताया कि 20 साल की उम्र में लिया गया एक फैसला उनके लिए काफी अहम साबित हुआ। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका गईं और न्यूयॉर्क में अपना करियर शुरू किया। इस दौरान उन्होंने एजुकेशन लोन चुकाया और अकेले कई देशों की यात्रा भी की। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।6 महीने में चुकाया लोनमहिला ने बताया कि अमेरिका में फाइनेंस की मास्टर डिग्री करने के लिए उन्होंने करीब 45 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया था। उन्होंने 21 साल की उम्र में अपनी पढ़ाई पूरी कर ली और इसके बाद नौकरी की तलाश शुरू कर दी। कुछ ही समय बाद, 22 साल की होने से पहले उन्हें मैनहैटन में फाइनेंशियल एनालिस्ट की नौकरी मिल गई। महिला ने इस मौके को अपनी मेहनत का बड़ा नतीजा और सपने के पूरा होने जैसा बताया। वीडियो में महिला ने अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई बातें शेयर कीं। उन्होंने दावा किया कि नौकरी शुरू करने के महज छह महीने के भीतर ही उन्होंने अपना पूरा स्टूडेंट लोन चुका दिया था। Brilliant Girl Komal Khandelwal - Took a Rs 45 Lakh Loan & Did Her Masters in Finance in USA, Got a Job in Manhattan, Paid off her Loan, Travelled the World and Now at Age 24 she's returning to Indiapic.twitter.com/WCRUz1i8VH— Rosy (@rose_k01) August 9, 2026 अब भारत लौटने का किया फैसलाइसके अलावा, उन्होंने अपनी कमाई से अकेले 10 देशों की यात्रा करने की बात भी बताई। उनके मुताबिक, कम उम्र में ही उन्होंने अपने खर्च खुद संभालना शुरू कर दिया और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ीं। 24 साल की उम्र में महिला अब अपनी जिंदगी का अगला पड़ाव शुरू करने जा रही हैं। अमेरिका में करीब चार साल बिताने और मैनहैटन में काम करने के बाद उन्होंने भारत वापस लौटने का फैसला किया। उन्होंने अपनी 20 की उम्र के शुरुआती वर्षों में पढ़ाई पूरी करने के साथ नौकरी की, यात्रा की और अपने करियर को आगे बढ़ाया। अब अमेरिका के अनुभवों के बाद वह भारत में नई शुरुआत करने की तैयारी कर रही हैं।लोगों ने दिए रिएक्शनसोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने महिला की कहानी को प्रेरणादायक बताया और कहा कि कम उम्र में भी सही फैसले लेकर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। लोगों का मानना था कि अगर इंसान मेहनत करने और नए मौके आजमाने का साहस रखता है, तो उम्र उसके रास्ते में बड़ी रुकावट नहीं बनती।(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के रक्षा समझौते को ईरान ने माना अमेरिका विरोधी
ईरान के मुताबिक हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता 'अमेरिका विरोधी' है। सोमवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा ये 'सोच में बदलाव का संकेत' है।
अब हमारी शर्तें पूरी होने के बाद ही खुलेगा होर्मुज, अमेरिका के सामने अड़ा ईरान
ईरान ने कहा है कि अमेरिका की शर्तें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा. ईरान अमेरिका से नाकाबंदी हटाने, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देने, आर्थिक प्रतिबंध हटाने और जब्त संपत्तियां जारी करने की मांग कर रहा है.
ईरान ने साफ किया रुख, अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी जारी रही तो होर्मुज फिर से नहीं खुलेगा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को कहा कि जब तक अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा, तब तक होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोला जाएगा।
अमेरिकी दबाव से ईरान रियायत देने को मजबूर होगा: अमेरिकी डिप्लोमैट माइक वॉल्ट्ज
वाशिंगटन, 10 अगस्त . संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज को लगता है कि आर्थिक दबाव ईरान को झुकने पर मजबूर कर देगा. उनका दावा है कि बातचीत की मेज पर रियायतें देने के लिए तेहरान मजबूर हो जाएगा. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की आर्थिक रणनीति को उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था पर ... Read more
बच्चों को एडिक्ट बना रहा सोशल मीडिया, US में Meta की मुश्किलें बढ़ीं; अमेरिकी कर रहे बैन की मांग
अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त सरकारी नियंत्रण और 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एज-वेरिफिकेशन की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही बैन की मांग कर रहे हैं…
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान और उसके सहयोगी गुटों के साथ लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालात ने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के सैन्य रक्षा तंत्र पर गहरा दबाव बना दिया है। सतह से देखने पर अमेरिकी सेना बेहद आधुनिक और अजेय नजर आती है, लेकिन हालिया सैन्य अभियानों में मिसाइलों के भारी इस्तेमाल ने पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मुख्यालय) की एक बड़ी कमजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान के साथ यह टकराव लंबे समय तक चलता है, तो अमेरिका के सामने उन्नत मिसाइलों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की भारी किल्लत खड़ी हो जाएगी। आइए जानते हैं कि इस संघर्ष में अब तक कितनी मिसाइलें दागी जा चुकी हैं और अमेरिका को अपने भंडारों को फिर से भरने में कितना समय लगेगा।ईरानी हमलों को रोकने में खर्च हुईं अरबों डॉलर की कीमती मिसाइलेंलाल सागर (Red Sea) में हूती विद्रोहियों के ड्रोन व मिसाइल हमलों से जहाजों की सुरक्षा करने और ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को नाकाम करने के लिए अमेरिकी नौसेना और वायुसेना को भारी मात्रा में अपने उन्नत हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने पैट्रियट (Patriot) एयर डिफेंस सिस्टम, एसएम-2 (SM-2), एसएम-3 (SM-3) और एसएम-6 (SM-6) जैसी बेहद कीमती इंटरसेप्टर मिसाइलों को दागा है। एक-एक एसएम-3 मिसाइल की कीमत लगभग 9 से 12 मिलियन डॉलर (करीब 75 से 100 करोड़ रुपये) होती है।कुछ ही महीनों के भीतर अमेरिका ने अपने उस वार्षिक मिसाइल स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है, जिसे बनाने में सालों का समय लगा था। इसके अलावा, ईरान समर्थित ठिकानों पर सटीक हमले (प्रिसीजन स्ट्राइक) करने के लिए टॉमहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलों और गाइडेड बमों का भी अत्यधिक प्रयोग किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर मिसाइलों की खपत ने अमेरिकी रक्षा थिंक-टैंकों की नींद उड़ा दी है।कितनी मिसाइलें बची हैं और क्यों खाली हो रहा है अमेरिकी भंडार?यद्यपि पेंटागन सुरक्षा कारणों से अपने सटीक मिसाइल भंडारों (शस्त्रागार) के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की रक्षा समितियों की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि अमेरिका का 'क्रिटिकल म्यूनिशन स्टॉक' (महत्वपूर्ण हथियारों का भंडार) खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अमेरिका पिछले कुछ सालों से एक साथ कई मोर्चों पर हथियारों की आपूर्ति कर रहा है।यूक्रेन-रूस युद्ध में यूक्रेन की मदद, ताइवान को सैन्य सहायता और अब मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष के कारण अमेरिकी रक्षा भंडार पर तिहरा दबाव पड़ा है। विशेष रूप से एसएम-3 और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का बचा हुआ स्टॉक अब इतना सीमित हो गया है कि यदि एशिया-प्रशांत क्षेत्र (उदा. चीन के खिलाफ) में कोई नया युद्ध छिड़ता है, तो अमेरिका के लिए एक साथ दो बड़े मोर्चों को संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।नया मिसाइल स्टॉक तैयार करने में आखिर कितने साल लगेंगे?अमेरिकी सेना के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय उनका सुस्त 'डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस' (रक्षा उत्पादन ढांचा) है। शीत युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका ने अपने रक्षा कारखानों की संख्या कम कर दी थी। आधुनिक मिसाइलें बेहद जटिल होती हैं, जिनमें उच्च तकनीक वाले सेमीकंडक्टर्स, विशेष रॉकेट मोटर्स और दुर्लभ रसायनों की आवश्यकता होती है।सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि जितने बड़े पैमाने पर मिसाइलें दागी गई हैं, उनकी भरपाई करने और शस्त्रागार को युद्ध-पूर्व वाले स्तर पर लाने में अमेरिका को कम से कम 3 से 5 साल का लंबा समय लगेगा। वर्तमान में लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन जैसी प्रमुख अमेरिकी रक्षा कंपनियां प्रति वर्ष केवल कुछ सौ पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलों का ही उत्पादन कर पाती हैं। रक्षा उत्पादन की इस धीमी गति ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद, लंबे समय तक चलने वाले भीषण युद्ध में अमेरिका के पास हथियारों की तत्काल आपूर्ति करने की क्षमता सीमित है।
एशिया में ईरान और रूस के दांवपेंच से निपटने के लिए या फिर अमेरिका और चीन की शह पर पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच और अब तुर्किये के साथ भी मक्का में जो रक्षा समझौते हुए हैं, उसके दृष्टिगत भारतवासियों के दिलोदिमाग में बस एक ही सवाल कौंध रहा है कि क्या कथित 'इस्लामिक नाटो' से भारत की कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ेंगी? क्या इससे निपटने में रूस-ईरान से रक्षा सम्बन्धों को और मजबूती दी जानी चाहिए? या फिर अमेरिका या चीन या फिर दोनों के इशारे पर हुए इस गठबंधन के पीछे कोई परोक्ष चाल तो नहीं है? तो जवाब होगा कि हाँ—भारत की कूटनीतिक चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं, लेकिन इसे अभी सीधे-सीधे “इस्लामिक NATO” कहना जल्दबाजी होगी। दरअसल, गत 7 अगस्त 2026 को मक्का में सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने एक संयुक्त रक्षा समझौता किया है, जिसमें एक पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। यह पहले के सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते का विस्तार है। लिहाजा भारत के लिए असली चिंता यह है कि- इसे भी पढ़ें: तीन तिगाड़ा काम...पाक-सऊदी-तुर्किये की यारी क्या भारत पर पड़ेगी भारी? 'सुन्नी NATO' से हम कितने मजबूत, इस रिपोर्ट में जानें पहली, पाकिस्तान को नया रणनीतिक ऑक्सीजन मिल सकता है: पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता, तुर्किये के पास मजबूत रक्षा उद्योग/सैन्य क्षमता और सऊदी अरब के पास वित्तीय व ऊर्जा शक्ति है। इन तीनों का संयोजन पाकिस्तान को भारत के मुकाबले कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाने के नए साधन दे सकता है। दूसरा, तुर्किये का शामिल होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है: भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्किये ने कई बार इस्लामाबाद के पक्ष में राजनीतिक रुख अपनाया है। अब यदि वह किसी औपचारिक सामूहिक रक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, तो भविष्य के भारत-पाकिस्तान संकट में उसका वजन और बढ़ सकता है। तीसरा, सऊदी अरब को पाकिस्तान का “स्थायी सैन्य सहयोगी” मान लेना भी गलत होगा: रियाद के भारत के साथ बड़े आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक हित हैं। इसलिए सऊदी नेतृत्व के लिए पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग और भारत के साथ रणनीतिक संबंध—दोनों को साथ लेकर चलना संभवतः अधिक उपयोगी है। यक्ष प्रश्न : क्या इसके पीछे रूस विरोधी अमेरिका की चाल हो सकती है? जवाब: संभावना को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन अभी इसका प्रमाण नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि जनवरी 2026 में ही रणनीतिक विश्लेषण में यह कहा जा रहा था कि तुर्किये इस तरह के गठबंधन का इस्तेमाल NATO के भीतर अपनी bargaining power बढ़ाने और “hedging” के लिए कर सकता है। चूंकि अमेरिका के लिए ऐसा ढांचा कुछ परिस्थितियों में उपयोगी भी हो सकता है, क्योंकि ईरान के विरुद्ध क्षेत्रीय deterrence बढ़ाना, पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य बोझ कम करना, सऊदी सुरक्षा को वैकल्पिक रूप से मजबूत करना, तुर्किये को पश्चिमी सुरक्षा ढांचे से पूरी तरह दूर जाने से रोकना और पाकिस्तान को चीन के पूर्ण प्रभाव में जाने से रोकना उसका असली मकसद है। इसलिए इसे “अमेरिका के खिलाफ गठबंधन” मानना उतना ही गलत होगा जितना इसे निश्चित रूप से “अमेरिकी परियोजना” मान लेना। सुलगता सवाल: और जहाँ तक चीन की बात है? यहाँ मामला और दिलचस्प है। जवाब: चीन के पाकिस्तान के साथ अत्यंत गहरे रक्षा संबंध हैं और सऊदी अरब के साथ उसके आर्थिक संबंध लगातार बढ़े हैं। यदि यह त्रिकोण आगे चलकर विस्तृत होता है, तो बीजिंग को पश्चिम एशिया–पाकिस्तान–हिंद महासागर के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन चीन के लिए भी समस्या है: सऊदी अरब अमेरिका से पूरी तरह अलग नहीं होना चाहता और तुर्किये NATO का सदस्य है। इसलिए इसे अभी चीन-नेतृत्व वाला गठबंधन कहना वास्तविकता से आगे निकलना होगा। # आखिर भारत को किस बात से सबसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए? मेरे आकलन में “इस्लामिक NATO” शब्द से ज्यादा महत्वपूर्ण इसके संभावित नेटवर्क प्रभाव हैं। यदि भविष्य में इसमें कतर, अजरबैजान, मिस्र या अन्य मुस्लिम-बहुल देश किसी रूप में जुड़ते हैं, तो तस्वीर बदल सकती है। मई में पाकिस्तान की ओर से तुर्किये और कतर के संभावित जुड़ाव की बात भी सामने आई थी। तब भारत को तीन मोर्चों पर चुनौती मिल सकती है: पश्चिम एशिया → पाकिस्तान → तुर्किये, यानी पाकिस्तान को पहली बार भारत के विरुद्ध केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि बहु-देशीय कूटनीतिक समर्थन तंत्र बनाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन भारत की स्थिति भी कमजोर नहीं है, क्योंकि भारत को प्रतिक्रिया में किसी “anti-Islamic bloc” में जाने की जरूरत नहीं है। उलटे भारत की ताकत उसकी multi-alignment diplomacy है। चूंकि भारत को एक साथ सऊदी अरब और UAE से रणनीतिक संबंध है, इजरायल से रक्षा एवं तकनीकी सहयोग है, मिस्र और ग्रीस से समुद्री सहयोग है, ईरान से चाबहार संपर्क है, अमेरिका से Indo-Pacific साझेदारी है, रूस से रक्षा संबंध है और खाड़ी देशों में विशाल भारतीय प्रवासी समुदाय है, जिसका लाभ भारत को उठाना चाहिए। यही भारत का सबसे बड़ा जवाब होगा—किसी एक धुरी में शामिल होना नहीं, बल्कि इतनी मजबूत बहुध्रुवीय स्थिति बनाना कि कोई धुरी भारत को घेर न सके। निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि अभी इसे “भारत को घेरने की साजिश” कहना अतिशयोक्ति होगी। लेकिन पाकिस्तान–तुर्किये–सऊदी रक्षा समझौता भारत के लिए एक वास्तविक strategic signal जरूर है। और सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि “इसके पीछे अमेरिका है या चीन?”, बल्कि यह है कि क्या दोनों महाशक्तियाँ अपने-अपने हित के लिए इस नए क्षेत्रीय समीकरण का इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगी? इसकी संभावना काफी अधिक है। और एक महत्वपूर्ण बात: इस गठबंधन को “इस्लामिक NATO” कहना स्वयं इन देशों की आधिकारिक भाषा नहीं है; विश्लेषकों ने भी इस लेबल को भ्रामक बताया है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
दक्षिण कोरिया: सफेद फॉस्फोरस लीक की सूचना पर अमेरिकी सेना से संपर्क नहीं कर सका प्योंगटेक
सोल, 10 अगस्त . दक्षिण कोरिया के प्योंगटेक शहर ने पिछले महीने ओसान एयर बेस पर कथित सफेद फॉस्फोरस रिसाव को लेकर नया खुलासा किया गया है. सोल के अनुसार अमेरिकी सेना से संपर्क करने के लिए तीन बार हॉटलाइन पर फोन किया गया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया. शहर के अधिकारियों ने Monday ... Read more
अमेरिका में बंद होगा फेसबुक और इंस्टा? मेटा के विरोध में लोग
अमेरिका में फेसबुक और इंस्टाग्राम के खिलाफ गुस्सा देखा जा रहा है. दरअसल सोशल मीडिया की लत लोगों को तेजी से लग रही है. एक सर्वे में ये आया है कि ज्यादातर अमेरिकी सोशल मीडिया पर रेस्ट्रिक्शन चाहते हैं.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि अमेरिका ने मध्य पूर्व में 20 से अधिक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ अपनी नाकेबंदी को और सख्त बनाने के बीच उठाया गया है
मिडिल कॉरिडोर को बढ़ावा, अमेरिका ने ट्रांस-कैस्पियन ट्रेड रूट के लिए 201 मिलियन डॉलर का फंड किया शुरू
युद्ध जितना लंबा चलेगा उतना ही अमेरिका को होगा नुकसान, हार चुके हैं राष्ट्रपति: डेमोक्रेटिक सीनेटर
युद्ध जितना लंबा चलेगा उतना ही अमेरिका को होगा नुकसान, हार चुके हैं राष्ट्रपति: डेमोक्रेटिक सीनेटर
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। इस आंदोलन के तहत देशभर के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ मानसा के माल गोदाम में भी बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और कर्मचारी एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए रोष जताया। यह प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा शुरू किए गए 'जेल भरो आंदोलन' का हिस्सा है। मानसा में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में राम सिंह, राजविंदर सिंह, कृष्ण चौहान, कुलविंदर सिंह, लखबीर सिंह और मक्खन सिंह सहित कई प्रमुख किसान-मजबूर नेता शामिल हुए। ट्रेड डील से कृषि और डेयरी क्षेत्र पर मंडराया संकट प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश में किसान, मजदूर और व्यापारी वर्ग पहले से ही गंभीर आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं। ऐसे संकट के समय में केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की जा रही ट्रेड डील से देश का आम नागरिक और उत्पादक बुरी तरह प्रभावित होगा। किसान नेताओं ने गंभीर आशंका व्यक्त की कि यदि यह समझौता लागू होता है, तो डेयरी कारोबार, मछली पालन और कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। छोटे और स्थानीय कारोबारियों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएगा। किसान नेताओं का कहना है कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते अमेरिका के साथ इस ट्रेड डील को रद्द नहीं किया, तो आने वाले दिनों में इस जन-आंदोलन को और अधिक उग्र एवं तेज किया जाएगा। कर्मचारियों की लंबित मांगें भी प्रमुखता से उठीं प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन केवल भारत-अमेरिका ट्रेड डील तक सीमित नहीं है। वे लंबे समय से लंबित अपनी अन्य बुनियादी मांगों को लेकर भी सरकार के खिलाफ संघर्षरत हैं। इन मांगों में प्रमुख रूप से सभी विभागों में कार्यरत अस्थाई कर्मियों को स्थायी रोजगार देना। कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के अधिकार को बहाल करना। मजदूर व कर्मचारी वर्ग की अन्य जायज मांगों को तुरंत पूरा करना। रोष मार्च निकालकर देंगे गिरफ्तारी माल गोदाम में एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की है कि वे अपनी मांगों के समर्थन में शहर में एक विशाल रोष मार्च निकालेंगे। रोष मार्च के समापन पर किसान और मजदूर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर अपनी गिरफ्तारी देंगे। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकार को जनविरोधी नीतियों को वापस लेना ही होगा।
Gold का भाव अब युद्ध से नहीं बल्कि अमेरिकी Fed के फैसलों और ब्याज दरों से होगा तय
सोने की कीमतों और भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच पारंपरिक संबंध बदल रहा है तथा मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और मौद्रिक नीति सर्राफा कीमतों को प्रभावित करने वाले अधिक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरे हैं। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (एमओएफएसएल)) की एच1 2026 प्रेशियस मेटल्स रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष की पहली छमाही में यह स्पष्ट हुआ कि केवल भू-राजनीतिक जोखिम सोने में तेजी बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। निवेशक अब संघर्षों का आकलन इस आधार पर अधिक कर रहे हैं कि उनका मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर क्या असर पड़ता है। एमओएफएसएल में जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, 2026 की पहली छमाही ने दिखाया कि युद्ध और सोने के बीच संबंध अब पहले की तुलना में अधिक परिस्थितियों पर निर्भर हो गया है। उन्होंने कहा कि बाजार अब केवल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि यह देख रहा है कि उनका मुद्रास्फीति, वास्तविक ब्याज दरों और मौद्रिक नीति की अपेक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसे भी पढ़ें: Jaipur Police ने पुरानी इमारत का सोना चांदी हड़पने के आरोप में 5 लोगों को किया गिरफ्तार दमानी ने कहा कि ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) सोने के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी। इससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की पारंपरिक मांग पर भी असर पड़ा, जबकि भू-राजनीतिक तनाव ऊंचे स्तर पर बने रहे। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में नीतिगत अनिश्चितता, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से सोने की कीमतों को मजबूती मिली। इसे भी पढ़ें: IGI Airport पर जब्त हुआ 869 ग्राम सोना, खिलौने वाले स्कूटर के टायरों में छिपाकर लाया था यात्री रिपोर्ट में कहा गया कि बाद में शुल्क बढ़ने से उत्पादन लागत और मुद्रास्फीति की अपेक्षाएं बढ़ीं। इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका मजबूत हुई और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की वास्तविक प्रतिफल तथा डॉलर में तेजी आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष भी इस बदलते रुख का उदाहरण है। संघर्ष बढ़ने पर शुरुआती दौर में सोने की मांग बढ़ी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ी और मौद्रिक नीति में ढील की उम्मीद कमजोर हुई। इससे सोने की तेजी सीमित रही और बाद में कीमतों में सुधार आया। रिपोर्ट में कहा गया, शुल्क अब केवल आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे मुद्रास्फीति बढ़ाने वाली ताकत बन गए हैं। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Budget पेश, TVK सरकार महिलाओं को देगी सोना, नवजात को अंगूठी और पशु रिपोर्ट के अनुसार, आगे भी मुद्रास्फीति का रुख, फेडरल रिजर्व के संकेत, वैश्विक नकदी की उपलब्धता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ईटीएफ में निवेश और सट्टा निवेश सोने और चांदी की कीमतों के प्रमुख चालक बने रहेंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ जेल भरो आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर आज 10 अगस्त को सभी संगठन एकजुट होना शुरू हो गए हैं। इसे लेकर सभी संगठनों ने शहीद भगत सिंह स्टेडियम में पड़ाव डाल दिया हुआ है और धरना प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध किया जा रहा है। इस आंदोलन में किसान यूनियन से किसान नेता जसवीर भाटी, हरजिंद्र सिंह, दिवान सहारण भूपेंद्र सिंह वैदवाला, सफाई कर्मचारी यूनियन, आशा वर्कर यूनियन, आंगनवाड़ी वर्कर, बिजली कर्मचारी यूनियन व अन्य सामाजिक संगठन समर्थन करने पहुंचे। संगठन नेताओं ने मंच से संबोधन में कहा, सरकार बहकाने का काम कर रही है। किसान को हर फसल बेचने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है और यूरिया के लिए लिमिट कर दी है। कॉरपोरेट से ज्यादा टैक्स दे रहे बाद में किसान को मिलती नहीं और महंगे दामों पर यूरिया खरीदनी पड़ रही है। फसल के पूरे दाम नहीं मिलते। फिर सरकार कहती है कि टैक्स पेयर का पैसा आप पर खर्च नहीं होगा। किसान-मजदूर और देश की आधी आबादी इन कॉरपोरेट से ज्यादा टैक्स दे रही है। देश की एक प्रतिशत कारपोरेट वाले 40 प्रतिशत धन पर कब्जा किए हुए हैं। संयुक्त मोर्चा बोला-नीतियों को आगे बढ़ा रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार देश के किसानों और मजदूरों को प्रभावित करने वाली नीतियों को लगातार आगे बढ़ा रही है। सरकार द्वारा अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों से भारतीय कृषि और किसानों के हितों पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
नेपाल से सबसे ज्यादा चीनी नागरिक हुए डिपोर्ट, अमेरिकी भी पीछे नहीं; देखें लिस्ट - Jagran
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पूरी दुनिया इस वक्त भारत और रूस की यारी से हैरान है और हैरानी भी क्यों ना हो भारत और रूस ने एक के बाद एक ऐसे कदम उठाए हैं जिसने दुनिया की महाशक्ति अमेरिका और भारत के पड़ोस में भारत को आंख दिखाने वाले चीन को हर बार चौकाया है और इसमें व्लादमीर पुतिन ने हमेशा भारत का साथ दिया है। अब वाशिंगटन के पेंटागन में हड़कंप है जो ट्रंप की रातों की नींद उड़ा चुकी है और इस्लामिक नाटो के मुल्क भी सन्न रह गए हैं। क्योंकि पुतिन ने भारत के साथ मिलकर वो सुपर प्लान एक्टिवेट कर दिया है जिसे अमेरिका या चीन अपना सबसे बुरा सपना मानते थे। जब पश्चिमी देशों ने समंदर में घेराबंदी की, जब रूस के खिलाफ बिल पास किए गए तो पुतिन ने पन्नों पर नहीं बल्कि जमीन के सीने पर अपनी ताकत दिखा दी। इसे भी पढ़ें: देश को America के हाथों गिरवी रख रहे PM Modi, Trump की गुलामी क्यों: Kejriwal का बड़ा हमला रूस से सीधे भारत तक एक ऐसी डायरेक्ट रेल लाइन का ऐलान जो अमेरिका के हर प्रतिबंध को कचरे के डिब्बे में डाल देगी। यह सिर्फ एक रेल मार्ग नहीं है। यह अमेरिका के ग्लोबल दबदबे की अर्थी है। दरअसल अमेरिका ने सोचा था कि वो होर्मुज को ब्लॉक कर देगा। ब्लैक सी में रूस को फंसा देगा और भारत की तेल सप्लाई काटकर दिल्ली को घुटने पर ले आएगा। लेकिन पुतिन ने कहा शतरंज के असली खिलाड़ी हम भी हैं और रूसी उप प्रधानमंत्री मरात खुसनो लीन का वो एक बयान कि भारत तक पहुंचने के लिए कोई भी रास्ता मंजूर है। दरअसल अमेरिका के लिए खुला युद्ध है यह और इसका मतलब है कि अब रूस को तुर्की के बास्फोरस या अमेरिका के चहेते किसी भी समुद्री रास्ते की परवाह नहीं है। वह पटरियों से सीधे हिंद महासागर के सीने पर उतरेगा और भारत को ताकत देगा। अब यहां सबसे बड़ा धमाका है इस्लामिक मुल्कों का एंगल। एक तरफ पूरी मिडिल ईस्ट ईरान और इजराइल की जंग में जल रहा है तो दूसरी तरफ पुतिन तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारत के लिए रास्ता बना रहे हैं। यह भारत की कूटनीति का वो प्रचंड रूप है जिसे देखकर पूरी दुनिया दंग है। इसे भी पढ़ें: Kyiv क्षेत्र में Russia के हमले से चार लोगों की मौत, बेलग्रेड पहुंचे जेलेंस्की रूस का सस्ता तेल, गैस और कोयला जब इन इस्लामिक देशों को चीरता हुआ भारत पहुंचेगा तो अमेरिका का इंडोपेसिफिक वाला पूरा प्लान धरा का धरा रह जाएगा। यह इस्लामिक नाटो और पश्चिमी गठबंधन के बीच भारत का वो धमाका है जिसकी गूंज अब दशकों तक सुनाई देगी। भारत ने अमेरिका को ठेंगा दिखाकर रूस से 55% तेल खरीदना शुरू कर दिया है। 2030 तक भारत और रूस 100 अरब डॉलर का व्यापार करने वाले हैं। अमेरिका ने तेल के जहाजों पर बैन लगाया तब पुतिन ने ट्रेन की पटरिया बिछाने की तैयारी कर ली। एक बार यह रेल मार्ग शुरू हुआ तो समंदर में तैनात अमेरिकी जंगी जहाज सिर्फ धुआं फकेंगे और रूस की ऊर्जा शक्ति सीधे भारत के कारखानों को दहाड़ने की ताकत देगी। यह सुपर पावर भारत और महाशक्ति रूस का वो गठबंधन है जिसने पश्चिमी दुनिया की उल्टी गिनती शुरू कर दी है। इसे भी पढ़ें: Russia हिंद महासागर तक rail network बनाने का इच्छुक: Deputy PM Marat Khusnullin जब मॉस्को से चली ट्रेन सीधे मुंबई-दिल्ली स्टेशन पर रुकेगी तो क्या होगा? तब डॉलर की दादागिरी खत्म हो जाएगी। तब समुद्री लुटेरों का डर खत्म हो जाएगा और तब खत्म हो जाएगा अमेरिका का वो घमंड कि वो किसी भी देश की सप्लाई लाइन काट सकता है। चीन भी इस रेल मार्ग के पीछे खड़ा है क्योंकि उसे पता है कि अगर यह रूट बन गया तो अमेरिका का वर्चस्व हमेशा हमेशा के लिए दफन हो जाएगा।
अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन बिल 2026 को लेकर फैली गलतफहमियों का खंडन किया।
Yash Toxic: अमेरिका में रिलीज से पहले ही छाया यश की 'टॉक्सिक' का क्रेज, एडवांस बुकिंग में शानदार रिस्पॉन्स, जानें टिकट की कीमत
अमेरिकी दस्तावेजों में पीएम मोदी की तारीफ, ट्रंप संग रिश्तों और कूटनीति को मिला समर्थन
वॉशिंगटन, 10 अगस्त . अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, फरवरी 2025 में वॉशिंगटन यात्रा के दौरान Prime Minister Narendra Modi की कूटनीतिक पहल, रक्षा समझौतों और President डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों की भारतीय social media यूजर्स ने काफी सराहना की. Prime Minister Narendra Modi की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा ... Read more
तेजस के लिए अमेरिकी इंजन आने में हुई देरी तो DRDO ने पलट दी बाजी
DRDO नया कावेरी 2.0 इंजन लेकर आया है. 55-60kN ड्राई और 90-100kN आफ्टरबर्नर थ्रस्ट के साथ यह GE F404 इंजन की जगह लेगा. वजन घटाया गया है. तेजस और घातक यूसीएवी में इस्तेमाल होगा.
'FCRA पर मिसगाइड मत करो', राज्यसभा MP ने अमेरिकी सांसद रिले मूर को लिखी चिट्ठी
FCRA पर सियासी बवाल के बीच राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद रिले मूर को खत लिखा है. अपनी चिट्ठी में सुजीत कुमार ने लिखा कि भारत के एक सांसद के रूप में मैं यह अपना कर्तव्य समझता हूं कि आपके बयानों में FCRA बिल को लेकर उठाए गए चिंताओं और आशंकाओं को दूर करूं.
'FCRA पर मिसगाइड मत करो', राज्यसभा MP ने अमेरिकी MP को लिखी चिट्ठी
FCRA पर सियासी बवाल के बीच राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद रिले मूर को खत लिखा है. अपनी चिट्ठी में सुजीत कुमार ने लिखा कि भारत के एक सांसद के रूप में मैं यह अपना कर्तव्य समझता हूं कि आपके बयानों में FCRA बिल को लेकर उठाए गए चिंताओं और आशंकाओं को दूर करूं.
भारतीय राजदूत ने अमेरिकी सांसद को दिया जवाब, FCRA बिल पर गिनाए 5 ‘भ्रम’ और बताई सच्चाई
FCRA Amendment Bill को लेकर अमेरिकी सांसद के आरोपों के बीच भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पांच प्रमुख भ्रमों पर सफाई दी और भारत का पक्ष रखा।
अमेरिका में कई राज्यों में खाने-पीने की चीजों से जुड़ी बीमारियां फैलीं, एनआईएच ने जताई चिंता
वॉशिंगटन, 10 अगस्त . अमेरिका की हेल्थ एजेंसियां कई राज्यों में लेट्यूस (सलाद पत्ता), मीट, पोल्ट्री, अंडे और ताजी उपज से जुड़ी बीमारियों के फैलने और उनमें गंदगी या संक्रमण के खतरों की जांच कर रही हैं. वहीं, देश के टॉप मेडिकल रिसर्च अधिकारी ने Sunday को ग्राहकों को खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा के ... Read more
ट्रंप के लिए खतरे की घंटी अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में हार के 65% चांस, हारे तो नहीं कर सकेंगे मनमानी
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न्यूक्लियर डील के बिना युद्ध खत्म करने की तैयारी में ट्रंप? होर्मुज खोलनेकी रखी शर्त, जानें अमेरिका का नया प्लान
FCRA बिल में खास धर्म को बनाया जाएगा निशाना? भारत ने अमेरिका की 5 गलतफहमियों पर दिया जवाब
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने विदेशों से मिलने वाले चंदे के नियमों में बदलाव वाले FCRA संशोधन बिल, 2026 को लेकर उठ रहे सवालों और आरोपों पर जवाब दिया है.
भारतीय राजदूत ने अमेरिकी सांसद को दिया करारा जवाब, FCRA बिल पर दूर किए 5 भ्रम
इससे पहले अमेरिकी सांसद ने इस विधेयक को लेकर यह कहते हुए आपत्ति जताई है कि इससे ईसाई संस्था और चर्च प्रभावित होंगे। उनका यह भी कहना है कि इसका विदेशों से अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सहायता प्रभावित होगी।
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को यमुनानगर में किसानों ने जेल भरो आंदोलन किया। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर के नेतृत्व में किसान सुबह करीब 11 बजे जगाधरी अनाज मंडी के गेट पर एकत्रित हुए। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील को तत्काल रद्द करने की मांग की। आंदोलन को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से मंडी गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। किसानों की गिरफ्तारी के लिए तीन सरकारी बसें भी मौके पर मंगवाई गई थीं। डेढ़ घंटा चला प्रदर्शन करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान किसान मंडी गेट पर ही बैठे रहे और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की। पुलिसकर्मी गिरफ्तारी दर्ज करने के लिए कागजात लेकर मौके पर बैठे रहे। किसान एक-एक करके पुलिस के पास पहुंचे और अपनी गिरफ्तारी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें बसों में बैठाकर मौके से ले गई। ट्रेड डील से छोटे किसानों पर पड़ेगा असर किसान नेता सुभाष गुर्जर ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लागू होने की स्थिति में छोटे और मध्यम किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है। इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र भी प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मौजूदा नीतियां किसानों के हित में नहीं हैं। गुर्जर ने कहा कि किसानों की मांग है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को तत्काल रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि सोमवार को देशभर में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जेल भरो आंदोलन किया गया है। यमुनानगर में भी किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी गिरफ्तारी दी है। गिरफ्तारी के लिए पहले से तैयार था प्रशासन किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पहले से अलर्ट था। मंडी गेट पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तीन सरकारी बसें भी मौके पर खड़ी कराई गई थीं। पुलिस ने किसानों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया के लिए मौके पर ही दस्तावेज तैयार किए। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद किसानों को बसों में बैठाकर ले जाया गया। सुभाष गुर्जर ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में किसान परेशान और बर्बाद हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो किसान आंदोलन को और व्यापक करने की रणनीति तैयार करेंगे।
अमेरिका में गोलीबारी की वारदातों से दहशत: शिकागो में 3 की मौत, नॉर्थ कैरोलिना में एक परिवार पर टूटा कहर
US Iran Conflict Update: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने वाशिंगटन को किसी भी तरह के जमीनी सैन्य हमले के खिलाफ सख्त लहजे में चेतावनी जारी की है। ईरान की सेना ने स्पष्ट किया है कि उसकी सीमाएं पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं और अगर अमेरिकी सैनिक ईरान में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें कड़ा और विनाशकारी जवाब दिया जाएगा।वहीं दूसरी ओर, सैन्य चेतावनियों के बावजूद मध्यस्थ देशों के जरिए दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष कूटनीतिक बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत जारी है।'हम उन्हें काटकर अलग कर देंगे': ईरानी जनरल की सीधी चेतावनीईरान की थल सेना के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अली जहांशाही ने देश की सीमाओं पर जवानों की युद्ध तैयारियों का जिक्र करते हुए अमेरिका को कड़ा संदेश दिया।उन्होंने कहा, 'अगर किसी भी अमेरिकी सैन्यकर्मी ने ईरान की धरती पर कदम रखा, तो हम उन्हें काटकर अलग कर देंगे।'जनरल जहांशाही ने जोर देकर कहा कि ईरानी बल दुश्मन की हर हरकत और संभावित खतरे पर पैनी नजर रख रहे हैं और किसी भी दुस्साहस का माकूल और आक्रामक जवाब दिया जाएगा।अमेरिका के साथ सीधी बातचीत बंद, मध्यस्थों के जरिए हो रहा मैसेज ट्रांसफरसैन्य मोर्चे पर जारी तल्खी के बीच कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने साफ किया कि वाशिंगटन के साथ कोई भी सीधी बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' के उल्लंघन को बंद नहीं करता और हुए नुकसान की भरपाई नहीं करता, तब तक सीधी बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।कई मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान और बातचीत का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।होर्मुज जलडमरूमध्य पर ओमान के साथ डील करीबदुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को लेकर कानूनी और तकनीकी फ्रेमवर्क पर बातचीत अंतिम चरण में है।विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, ओमान के साथ ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम और जहाजों के नए रूट तय करने को लेकर समझौता होने वाला है। पुराना रूट अब ईरान को स्वीकार्य नहीं है।ईरान ने स्पष्ट किया है कि केवल ओमान के साथ समझौता होने से होर्मुज जलडमरूमध्य अपने आप नहीं खुलेगा। इसके लिए अमेरिका द्वारा किए गए उल्लंघनों की भरपाई और अन्य शर्तों का पूरा होना जरूरी है।ओमान-ईरान बातचीत में प्रगति, नाकाबंदी हटाने का संकेतअमेरिकी प्रशासन ने भी माना है कि ओमान और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, जैसे ही वाणिज्यिक जहाजों की बिना किसी रुकावट के आवाजाही बहाल करने वाले समझौते की घोषणा होगी, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी समुद्री नाकाबंदी को हटा देगा।इस समझौते से क्षेत्र में वाणिज्यिक नौवहन बहाल होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के निर्यात में आ रही रुकावटों के दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका में गर्लफ्रेंड की हत्या का आरोपी भारतीय छात्र जर्मनी में गिरफ्तार, भारत भागने की थी तैयारी
अमेरिका के एरिजोना में गर्लफ्रेंड की हत्या के आरोपी भारतीय छात्र वरुण बाचिगारी को जर्मनी में गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर हत्या और अपहरण के गंभीर आरोप हैं।
Iran School Attack Aftermath: अमेरिकी हमले में मिनाब के स्कूल में मारे गए थे 120 बच्चे, शिक्षिका का दर्द छलका
'भारत में बंद नहीं हो रहे NGO', अमेरिका के 'भ्रम' पर भारत ने दिखाया आईना
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को लेकर उठ रहे सवालों पर ‘मिथ बनाम रियलिटी’ के जरिए भारत का पक्ष रखा. उन्होंने विदेशी फंडिंग, एनजीओ की संपत्ति, धार्मिक संस्थानों और समुदायों को लेकर चल रही चर्चाओं पर सफाई देते हुए कहा कि बिल का मकसद पारदर्शिता और बेहतर नियमन है.
वॉशिंगटन, 10 अगस्त (आईएएनएस)। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के डायरेक्टर डॉ. जे भट्टाचार्य ने रविवार को अमेरिकी माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्टैंडर्ड टीके लगवाएं, जिनमें खसरे से बचाव का टीका भी शामिल है, क्योंकि अमेरिका में पिछले 35 सालों में खसरे के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।
अमेरिका में ऐसा क्या है कि भारतीय वापस नहीं आना चाहते?
अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय युवक का कहना है कि विदेश में बसने की सबसे बड़ी वजह सिर्फ अच्छी सैलरी नहीं, बल्कि बेहतर 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' है. उन्होंने अपने घर के आसपास की सुविधाएं दिखाते हुए बताया कि आखिर क्यों कई लोग भारत लौटने से पहले दो बार सोचते हैं.
Iran-US War News Update: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब जंग से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ईरान के साथ परमाणु समझौते की मांग पर पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते हैं, अगर तेहरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोल देता है। साथ ही यहां से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाती है।अखबार ने बताया कि अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव में तीन महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में ट्रंप अमेरिकी जनता को यह बताने का तरीका ढूंढ रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध जीत लिया है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने बिना किसी परमाणु समझौते के बातचीत से पीछे हटने का विचार रखा है। ट्रंप प्रशासन संघर्ष को खत्म करने और उसे राजनीतिक रूप से एक उपलब्धि के रूप में पेश करने का रास्ता तलाश रहा है।ईरान ने रखीं कई बड़ी शर्तेंईरान ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रख दीं। इनमें अरबों डॉलर का अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। ईरान की इन शर्तों ने ट्रंप के लिए स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री ट्रैफिक जल्द से जल्द सामान्य हो, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी रूट्स में से एक है।मिसाइल और ड्रोन हमलों से बाधित हुआ समुद्री ट्रैफिकरिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से समय-समय पर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर भी पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रूट है। यहां किसी भी लंबे समय तक चलने वाली बाधा से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।ट्रंप के लिए घरेलू मोर्चे पर बढ़ी चुनौतीअमेरिका में मध्यावधि चुनाव करीब आने के साथ ट्रंप प्रशासन के सामने राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अभी भी काफी अधिक हैं। ऐसे में ट्रंप के लिए युद्ध को अमेरिकी जनता के सामने सफल सैन्य अभियान के रूप में पेश करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े सैन्य हमले की चेतावनी तक दी थी।लेकिन अमेरिका के सहयोगी देशों ने उन्हें ऐसा कदम उठाने से रोकने की कोशिश की। शुक्रवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा आर्टिकल भी शेयर किया, जिसका शीर्षक था- Donald Trump Won the Iran War यानी डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध जीता।...। इससे संकेत मिला कि ट्रंप परमाणु समझौता हुए बिना भी संघर्ष को अमेरिकी जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।जेडी वेंस बोले- अभी खेल खत्म नहीं हुआइस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 'फॉक्स न्यूज' को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका अभी ईरान के साथ संघर्ष के बीच में है। यानी वाशिंगटन फिलहाल यह मानकर नहीं चल रहा कि संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वेंस ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि तेहरान वॉशिंगटन के साथ अपने संबंधों में लंबे समय के लिए बदलाव करे।ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार?अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के दिनों में बातचीत के दौरान लगातार बदलते रुख और कई बार लिए गए यू-टर्न से यह संकेत मिला है कि ईरान खुद को लंबे और कठिन संघर्ष के लिए तैयार कर रहा है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ ईरान युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकालना और दूसरी तरफ अमेरिकी जनता के सामने इसे अपनी जीत के रूप में पेश करना। होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान की मांगों पर सहमति बनाने में क्या समझौता होता है, इस पर अब भारत समेत पूरी दुनिया की नजर है।ये भी पढ़ें- ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका
अमेरिका में भारतीय राजदूत ने बताया कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूरोपीय देशों में पहले से ही ऐसे कानून लागू हैं। ऐसे में भारत कोई अलग कानून नहीं ला रहा है। यह कानून विदेशी फंड के बेहतर मैनेजमेंट के लिए है।
Indian student arrested in Germany for girlfriend’s murder in Arizona, News in Hindi - Indian Student Arrested: जर्मनी में भारतीय छात्र गिरफ्तार, अमेरिका के एरिजोना में प्रेमिका की हत्या का आरोप
नेतन्याहू ने खारिज की ट्रंप की 15-सूत्रीय गाजा शांति योजना, अमेरिका से मतभेद खुले
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को एक बयान में अमेरिका समर्थित 15-सूत्रीय गाजा शांति योजना को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इसी के साथ नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के बीच के मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा कि वे इजराइल की कमजोरी और […]
अमेरिका ने ईरानी ब्लॉकेड किया और सख्त, 55 जहाजों का बदला रास्ता
अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) ने रविवार को सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि मिडिल ईस्ट में तैनात 20 से अधिक अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान नाकेबंदी को सख्ती से लागू करते हुए 55 व्यावसायिक जहाजों को रिडायरेक्ट किया है, दो को निष्क्रिय कर दिया है और दो अन्य पर चढ़कर जांच की है.
भारत और अमेरिका की नौसेनाएं आज से कोच्चि में आतंकवाद और बारूदी सुरंगों से निपटने के लिए एक विशेष संयुक्त अभ्यास शुरू कर रही हैं।
गर्लफ्रेंड की हत्या कर अमेरिका से जर्मनी भागा भारतीय छात्र, गिरफ्तार
एरिजोना में 19 वर्षीय प्रेमिका जुलिसा रूबी सालाजार की गला घोंटकर हत्या करने के आरोपी 20 वर्षीय भारतीय छात्र वरुण बचीगारी को जर्मनी के बर्लिन एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपी वारदात के बाद अमेरिका से भारत भागने की फिराक में था.
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Strait of Hormuz पर झुका अमेरिका! युद्ध से हटेंगे Trump!
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब युद्ध खत्म करने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने को बड़ी सफलता के तौर पर पेश कर सकते हैं. हालांकि, तेहरान ने इसके बदले अमेरिकी नाकाबंदी हटाने, सैनिकों की वापसी, प्रतिबंध खत्म करने, जब्त संपत्ति लौटाने और युद्ध का मुआवजा देने जैसी बड़ी मांगें रखी हैं, जिससे समझौते की राह मुश्किल बनी हुई है.
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
मुज्तबा खामेनेई का नया वीडियो जारी कर ईरान ने कैसे बढ़ाई अमेरिका की टेंशन? समझिए - India TV Hindi
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मुज्तबा खामेनेई का नया वीडियो जारी कर ईरान ने कैसे बढ़ाई अमेरिका की टेंशन? समझिए
मुज्तबा खामेनेई का एक नया वीडियो जारी किया गया, जिसमें वह 28 फरवरी के बाद अब नजर आए हैं। इसको लेकर दुनियाभर में खलबली मच गई है। जानें अगर मुज्तबा खामेनेई सेहतमंद हैं, जैसा कि वीडियो में दिख रहा है तो यह अमेरिका की टेंशन कैसे बढ़ा सकता है।
ईरान के राष्ट्रपति ने अयातुल्लाह खामेनेई से की मुलाकात, अमेरिका और इजरायल के हमलों पर चर्चा
नई दिल्ली, 9 अगस्त . ईरान के President मसूद पेजेश्कियन ने अपने President कार्यकाल के तीसरे साल की शुरुआत में इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा होसैनी खामेनेई से मुलाकात की. इस बैठक में ईरान आर्थिक, सुरक्षा और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा हुई. इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपार्ट के अनुसार, नेता के ... Read more
होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने के बदले ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं ये छह शर्तें - BBC
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भारत-अमेरिका की नौसेनाएं करेंगी समुद्र में छिपे विस्फोटकों से निपटने का अभ्यास
भारत-अमेरिका की नौसेनाएं करेंगी समुद्र में छिपे विस्फोटकों से निपटने का अभ्यास
अमेरिकी महिला का भारतीय दुल्हन लुक बना सोशल मीडिया सेंसेशन, वीडियो ने जीता दिल
अमेरिकी महिला का भारतीय दुल्हन लुक बना सोशल मीडिया सेंसेशन, वीडियो ने जीता दिल
ईरान ने ठुकराई अमेरिका से बातचीत, तेहरान ने रखी बड़ी शर्त, अब क्या करेंगे ट्रंप?
ईरान ने अमेरिका के साथ तत्काल बातचीत फिर से शुरू करने से साफ इनकार कर दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जब तक वाशिंगटन मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के उल्लंघन पर ध्यान नहीं देता और मुआवजा नहीं देता, तब तक तेहरान वार्ता की मेज पर नहीं लौटेगा।
अखिल भारतीय किसान महासभा के तत्वावधान में रविवार को अगस्त क्रांति के मौके पर कार्यकर्ताओं ने अमेरिका के साथ हुए कृषि समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में जुटे वामपंथी संगठन से जुड़े किसानों ने प्रतिरोध मार्च निकाला और स्टेशन चौराहे पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। कार्यक्रम का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष महावीर पोद्दार ने किया। झंडा-बैनर लेकर निकाला प्रतिरोध मार्चइससे पूर्व भाकपा माले के जिला कार्यालय से जिला सचिव ललन कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने झंडा-बैनर और पुतला लेकर नारेबाजी करते हुए प्रतिरोध मार्च निकाला। इस दौरान लोग अमेरिका के साथ कृषि व्यापार समझौता रद्द करने, परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण बंद करने, सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने और सस्ते दामों पर खाद-बीज मुहैया कराने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। प्रतिरोध मार्च शहर के स्टेशन रोड, जीआरपी थाना होते हुए स्टेशन चौराहे पहुंचा, जहां लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया। इस दौरान मौके पर सभा भी आयोजित की गई। कृषि समझौते को लेकर सरकार पर निशानासभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष महावीर पोद्दार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिका के साथ किया गया कृषि व्यापार समझौता किसानों की मौत का सौदा करने के बराबर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कृषि उत्पाद अब भारत के बाजारों में खुलेआम बेचे जाएंगे, जिससे भारत की कृषि और किसान बदहाल और बर्बाद हो जाएंगे। सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव ललन कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट कंपनियों के माध्यम से कृषि योग्य भूमि को बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित कर रही है। इससे किसानों के सामने संकट गहरा रहा है। उन्होंने कहा कि नया बीज विधेयक स्वदेशी बीज प्रणाली को खत्म करने की साजिश है। इसके जरिए बीज बाजार में मॉन्सेंटो, बायर और सिंजेंटा जैसी विदेशी बीज कंपनियों को भारत के बाजारों में बिक्री की खुली छूट दे दी गई है। इन लोगों ने भी सभा को किया संबोधित सभा को सुनील कुमार राय, नंद किशोर यादव, दिलीप कुमार राय, मो. उस्मान, अनिल कुमार चौधरी, राजेश्वर राय, विजय कुमार, रमेश कुमार सहित अन्य लोगों ने संबोधित किया।
क्या अमेरिका ने किया ईरान का परमाणु कार्यक्रम तबाह? देखें दुनिया आजतक
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य क्षमता को लेकर बड़ा दावा किया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है. साथ ही ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को भी नुकसान पहुंचने की बात कही. अमेरिका अब ईरान में लंबे दौर के बदलावों पर नजर बनाए हुए है.
हथियारों और गोला-बारूद का प्रोडक्शन तेजी से बढ़ा रहा अमेरिका, महायुद्ध की तैयारी या कुछ और?
उप रक्षा मंत्री स्टीव फीनबर्ग ने कहा कि वर्षों तक चलने वाली विकास और उत्पादन प्रक्रिया अब स्वीकार्य नहीं है। अमेरिका को कार्यक्रमों की समयसीमा में भारी तेजी लाने के साथ उत्पादन क्षमता का तत्काल विस्तार करना होगा।
मार्केट आउटलुक: पहली तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगा शेयर बाजार का रुझान
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। इस बीच इजरायल ने बड़ा कदम उठाया है। इजरायली सैन्य बलों ने सभी मिलिट्री छुट्टियां रद्द कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान पर नए बड़े हमले की तैयारी कर सकते हैं।
अमेरिकी बच्चे पुलिस से नहीं घबराते, बल्कि दोस्त की तरह करते हैं भरोसा! पार्क में पुलिसकर्मी के साथ दिखा दिल छू लेने वाला नजारा
अमेरिका: यूटा में जंगल की आग बुझाते समय क्रैश हुआ हेलिकॉप्टर
अमेरिका के यूटा में जंगल की आग बुझाते समय दुर्घटनाग्रस्त हुए दो हेलीकॉप्टर पायलटों की मौत हो गई है। इस बात की पुष्टि अधिकारियों ने शनिवार को की। सेवियर काउंटी शेरिफ के अनुसार, शुक्रवार सुबह जब उनका सिकोरस्की स्काईक्रेन हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ तो पायलटों की मौत हो गई। यह हेलीकॉप्टर उन हेलीकॉप्टरों में शामिल था …
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। बातचीत के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, ...
अमेरिका में भारतीयों पर एक और संकट! नौकरी गई तो 60 दिन की मोहलत भी खत्म कर सकता है ट्रंप प्रशासन
अमेरिका में नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर काम करने वाले विदेशी नागरिकों को मौजूदा नियमों के तहत नौकरी खत्म होने के बाद 60 दिनों तक अमेरिका में रुककर नई नौकरी तलाशने का अवसर मिलता है। इस अवधि का इस्तेमाल वे नया नियोक्ता खोजने और अपनी इमिग्रेशन स्थिति को बनाए रखने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कर सकते हैं।
पीएम मोदी से जेडी वेंस की फोन पर बातचीत, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर
पीएम मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस को उनके बेटे के जन्म पर बधाई भी दी। उन्होंने वेंस परिवार के लिए शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
अमेरिका में पंडित जी का आलीशान ठिकाना देख रह जाएंगे दंग, घर के बाहर लग्जरी कारें और अंदर शाही सुविधाएं, VIDEO वायरल
कैसे खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट? अमेरिका के सामने ईरान ने रख दी अपनी अहम शर्तें, जानिए क्या-क्या?
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर अमेरिका के सामने अपनी मुख्य मांगें रख दी हैं। इसमें सबसे प्रमुख अमेरिका को ईरान के साथ हुए युद्ध का हर्जाना देने की मांग की गई है। इन मांगों पर अभी तक अमेरिका की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।
रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ सकता है भारी? अमेरिका के 100% टैरिफ प्लान से बढ़ी चिंता|
रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 100% टैरिफ बिल से भारत और अमेरिका के संबंधों पर प्रभाव पड़ रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि उनका देश अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा, लेकिन ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी सीनेट में रूस प्रतिबंध विधेयक हुआ पास, देखें US TOP-10
अमेरिकी सीनेट ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को आसानी से पास कर दिया है. सीनेट ने इसे 86-11 से मंजूरी दी. इस विधेयक में रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदारों जैसे चीन और भारत को दंडित करने की बात कही गई है. ये विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को रूस के तेल और गैस के टॉप-5 आयातक देशों से आने वाले सामान पर 100% टैरिफ लगाने की अनुमति देता है.
मध्य पूर्व में अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बावजूद ईरान ने कूटनीतिक समाधान की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने दुनिया के सामने तेहरान का रुख स्पष्ट करते हुए शांति का रास्ता खुला रखने की बात कही है। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने आधिकारिक बयानों और वैश्विक नेताओं के साथ बातचीत में जोर देकर कहा कि ईरान किसी भी दबाव या जबरन आत्मसमर्पण के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्र में स्थायी शांति चाहते हैं, तो उन्हें ईरान के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करना होगा और भविष्य में किसी भी सैन्य आक्रामकता को रोकने के लिए ठोस शर्तें माननी होंगी।शांति वार्ता के लिए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान की तीन प्रमुख शर्तेंईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने युद्ध समाप्त करने और शांति वार्ता शुरू करने के लिए तीन मुख्य शर्तें रखी हैं। पहली शर्त के तहत अमेरिका और पश्चिमी देशों को ईरान के वैध राष्ट्रीय एवं व्यापारिक अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता देनी होगी। दूसरी प्रमुख शर्त में अमेरिकी और इजराइली हमलों के कारण ईरान को हुए भारी ढांचागत व आर्थिक नुकसान के लिए उचित मुआवजे (Reparations) के भुगतान की मांग शामिल है। इसके अलावा, तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त भविष्य में ईरान की संप्रभुता पर किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता को रोकने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी (Firm International Guarantees) की है। पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट किया कि जब तक इन मूलभूत शर्तों पर सहमति नहीं बनती, तब तक कोई भी स्थायी शांति समझौता संभव नहीं होगा।'न सरेंडर करेंगे, न शांति से पीछे हटेंगे': तेहरान की दोहरी रणनीतिईरान के सरकारी प्रसारण चैनल पर बोलते हुए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने अपनी सरकार और सशस्त्र बलों के बीच पूर्ण समन्वय का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहने और संप्रभुता बनाए रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि कब लड़ना है और कब शांति का रास्ता चुनना है। पेज़ेश्कियान ने उन दावों को भी खारिज किया जिसमें ईरान के भीतर नेतृत्व स्तर पर मतभेद की बात कही जा रही थी। उन्होंने साफ किया कि कूटनीतिक समझौते की पहल देश के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से की गई है। तेहरान का मानना है कि यदि अमेरिका समझौते से पीछे हटता है या अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है, तो ईरान भी अपनी ओर से सैन्य जवाब देने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा।ग्लोबल एनर्जी मार्केट और वैश्विक राजनीति पर प्रभावअमेरिका और ईरान के बीच जारी इस तनातनी ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों को झकझोर कर रख दिया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और मध्य पूर्व के समुद्री मार्गों पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेज़ेश्कियान का यह बयान अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है। अमेरिका जहां एक ओर सैन्य बल का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लंबे युद्ध से बचने के कूटनीतिक विकल्प भी तलाश रहा है। ऐसे में ईरान द्वारा रखी गई ये शर्तें आने वाले दिनों में होने वाली अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं के रुख को तय करेंगी।
ईरान युद्ध और अमेरिका की लाचारियां
आज सूरत यह है कि ट्रंप ने अमेरिका को ऐसे युद्ध में उलझा रखा है, जिससे अमेरिका की कमजोरियां रोज-ब-रोज दुनिया के सामने उजागर हो रही हैं।
स्कारबोरो रीफ पर चीन की 'चाल' से भड़का अमेरिका, कहा- फिलीपींस के साथ हैं
अमेरिका ने स्कारबोरो रीफ पर चीन के राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व स्थापित करने के कदम को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. अमेरिका का कहना है कि इस कदम से फिलीपींस के पारंपरिक मत्स्य पालन क्षेत्रों में मछुआरों की पहुंच मुश्किल हो जाएगी. अमेरिका ने इसे 2016 के मध्यस्थता फैसले का उल्लंघन भी करार दिया है.
लड़ाई में हथियार घटने से अमेरिका परेशान: ईरान जंग ने खोली पोल; पेंटागन ने डिफेंस कंपनियों को दिया नया टारगेट- US Concerned Depleting Weapon Stocks in Iran Conflict Pentagon pushes companies to boost weapons production
अगर अमेरिका भरोसा बनाए तो ईरान शांति का रास्ता अपनाएगा: ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन
तेहरान, 9 अगस्त . ईरान के President मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ हाल ही में हस्ताक्षर किए गए ज्ञापन समझौते (एमओयू) के तहत शांति के रास्ते पर चलता रहेगा, बशर्ते वाशिंगटन भरोसे का माहौल बनाने में मदद करे. पेजेश्कियन ने Saturday को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईरान एमओयू के ... Read more
भागलपुर के सुप्रियो मुखर्जी की बंगाली लघु फिल्म 'प्रायश्चित्त' रिलीज के लिए तैयार है, जो मां-बेटे के भावनात्मक रिश्ते और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित है। वहीं, कहलगांव की अदिति अरोड़ा का राष्ट्रीय संगीत ऑडिशन के पहले राउंड के लिए चयन हुआ है, जिससे भागलपुर का मान बढ़ा है।
Bhadohi News: अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ को लेकर कालीन उद्यमी चिंतित
Carpet entrepreneurs concerned about additional US tariffs
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ से भारतीय निर्यातकों, खासकर कानपुर के उद्यमियों को भारी झटका लगा है। इससे निर्यात लागत बढ़ने और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा घटने से वे नए बाजारों की तलाश में हैं।
अमेरिकी टैरिफ का झटका: क्या सुरक्षित है आपका निवेश? जानें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के तरीके
The US Senate's new tariff bill on Russian oil buyers could impact Indian markets.
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
उर्स-ए-रजवी: बरेलवी उलमा बोले- अमेरिका-ईरान की जंग सियासी है; बेटियों की तालीम और तरबियत पर जोर
उर्स-ए-रजवी में आयोजित तहफ्फुज मजहब ओ मसलक कॉन्फ्रेंस में बेटियों की तालीम और तरबियत पर जोर
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
नमस्कार, अमेरिका भारत पर 100% टैरिफ लगाने जा रहा है। सीनेट में इससे जुड़ा बिल पास हुआ। NEET-UG 2026 पेपर लीक में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। इसमें जो आरोप लगाए गए उनका दैनिक भास्कर ने 2 महीने पहले ही खुलासा कर दिया था। राहुल गांधी ने कहा E-20 पेट्रोल दाल में काला नहीं बल्कि काली दाल है। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... कल की बड़ी खबरें... 1. भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, बाद में 100% किया गया। बिल का मकसद रूस की कमाई कम करना: बिल का मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। बिल के तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। पहले भारत ने पिछले महीने आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा: जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा रूस से आया। मई के मुकाबले जून में करीब 39% की बढ़ोतरी हुई। पूरी खबर पढ़ें... 2. CBI बोली- NEET पेपर लीक साजिश महीनों पहले हुई, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय सवाल याद कर लेते थे NEET-UG 2026 पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले रची गई थी। NTA के एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करने के दौरान ही सवाल याद कर लिए थे। NTA की टॉप अथॉरिटी ने दो महीने पहले ही भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा था कि सालों से जो लोग हमारे साथ काम कर रहे थे, उन्होंने ही पेपर लीक कर दिए। शुक्रवार को CBI की दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट की जानकारी सामने आई, जो 28 जुलाई को दाखिल की गई थी। इसके मुताबिक, एक्सपर्ट्स NTA ऑफिस से होटल लौटकर याद किए गए सवाल पर्चियों पर लिखते थे। इसके बाद बिचौलियों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाते थे। CBI ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स शामिल हैं। आरोप है कि तीनों ने पेपर तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान अपने पद का दुरुपयोग कर पेपर लीक किए, जिन्हें टेलीग्राम, वॉट्सएप, PDF और अन्य डिजिटल माध्यमों से फैलाया गया। पूरी खबर पढ़ें... 3. जेल में बंद अतीक के दोनों बेटे बाहर आएंगे, कल जनाजे में शामिल होंगे; अबान जिस कार में था, उसके 16 चालान माफिया अतीक अहमद के जेल में बंद दोनों बेटे अली और उमर छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार दोपहर साढ़े 3 बजे दोनों भाइयों को पैरोल दे दी। उमर लखनऊ और अली झांसी जेल में बंद है। अबान को प्रयागराज में आज शनिवार रात 8 बजे सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा- ‘अतीक के कर्मों की सजा उसका परिवार भुगत रहा है। दो बच्चे मर गए। दो जेल में है। बीवी फरार है। ईश्वर सजा दे रहा है।’ अबान की कार के 16 चालान, इनमें 6 ओवरस्पीड के: अबान जिस क्रेटा कार (UP70 FW 2432) में बैठा था। परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के मुताबिक, साल 2022 से 2026 के बीच 16 चालान हुए। इनमें 6 चालान ओवरस्पीड के हैं। कार का आखिरी बार चालान 27 जून, 2026 को हुआ था। पूरी खबर पढ़ें… 4. योगी बोले- बरेली का दंगाई मौलाना जेल में नाक रगड़ रहा, कह रहा साहब जान बख्श दो, पहले सम्मानित होता था सीएम योगी ने शुक्रवार को अंबेडकरनगर में कहा- संभल में सपा के जिस गुंडे ने दंगा कराया। सरकार उसे घुटनों पर लाकर नाक रगड़वा रही। बरेली का एक मौलाना दंगे कराता था। आज वह गुंडा जेल में है। कह रहा है कि छोड़ दो, गलती हो गई। पहले उसे सीएम आवास में बुलाकर के सम्मानित किया जाता था। योगी ने अंबेडकरनगर के जलालपुर, आलापुर और टांडा विधानसभा क्षेत्रों में शुक्रवार को 706.81 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 194 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। योगी ने विधानसभा सत्र पर कहा- सपा के लोगों ने विधानसभा नहीं चलने दी। हो-हल्ला करने लगे। उनके लोगों ने कोहराम मचाया। हमने बजट में सामाजिक विभूतियों को सम्मानित करने की योजना बनाई थी। पूरी खबर पढ़ें… 5. CM विजय की पत्नी ने तलाक की अर्जी वापस ली, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप लगाया था, CM बनने के 3 महीने बाद केस खत्म तमिलनाडु के CM विजय की पत्नी संगीता ने चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में दाखिल तलाक की अर्जी वापस ली है। शुक्रवार को इस केस के सुनवाई थी, इसमें वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं। जज ने करीब 15 मिनट तक उनसे पूछताछ की और फिर अर्जी स्वीकार करते हुए तलाक का केस खत्म कर दिया। संगीता के विजय पर आरोप 1. संगीता ने फरवरी 2026 में तलाक की अर्जी दायर की थी। आरोप लगाया विजय का एक एक्ट्रेस से एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है। उन्हें इसकी जानकारी 2021 में लगी। 2. संगीता ने विजय पर मानसिक प्रताड़ित करने, भावनात्मक रूप से दूर होने, अपमानजनक व्यवहार करने और ऐसी परिस्थितियां पैदा करने का आरोप लगाया, जिससे दोनों को एक ही घर में अलग रहना पड़ा। एक्ट्रेस तृषा से जुड़ा विजय का नाम विजय का एक्ट्रेस तृषा से नाम जोड़ा जाता है। हालांकि, दोनों ने अब तक अपने रिश्ते को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। 10 मई को तृषा विजय के तमिलनाडु मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुईं थीं। 4 मई को चुनाव परिणाम के दिन तृषा विजय के नीलांकरई स्थित घर भी पहुंची थीं। पूरी खबर पढ़ें... 6. राहुल ने कार की टंकी खोली, E20-पेट्रोल पर सवाल उठाए, कहा- ये कार-स्कूटर खराब कर रहा राहुल गांधी ने X पर 53 सेकेंड का वीडियो शेयर किया, जिसमें E-20 पेट्रोल पर सवाल उठाए। उन्होंने एक कार के पेट्रोल टैंक का ढक्कन खोला, अंदर झांका और कहा- नॉर्मली हम कहते हैं कि दाल में काला है, लेकिन यहां पूरी दाल ही काली है। इस समय देश में करप्शन की लाइन लगी है। उनमें से एक E20 ईंधन का मामला है। इसके चलते लोगों की कार और स्कूटर खराब हो रहे हैं। यह लोगों के जीवन को प्रभावित करने के साथ उनकी जेब से पैसे भी चुरा रहा है। राहुल ने जो कार दिखाई, वह E20 वाली: राहुल ने जो कार दिखाई, वो किस कंपनी की है और उसका मॉडल क्या है। इसकी जानकारी सामने नहीं आई। हालांकि राहुल जब पेट्रोल टंकी खोलते नजर आए तब ढक्कन में E20 लिखा नजर आया। भारत में E20 पेट्रोल का विरोध क्यों: देश में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है। इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें... 7. डाबर के '100% प्योर' दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें डाबर कंपनी के '100% प्योर', '100% नेचुरल' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। जानें क्या कहता है FSSAI का 'क्लेम्स रेगुलेशन'? शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है। सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में '100% Pure' लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है। पूरी खबर पढ़ें... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: सरकार बोली– Meta डीपफेक और प्रोपेगैंडा कंटेंट तेजी से हटाए: कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत (पूरी खबर पढ़ें) 2. नेशनल: क्या आप बैटमैन हैं, राहुल ने इंस्टाग्राम पर दिया जवाब: पसंदीदा BJP नेता का नाम बताया, कहा- आधी रात को आए PM के वीडियो सबसे अच्छे थे (पूरी खबर पढ़ें) 3. इंटरनेशनल: थाईलैंड- 9वीं के छात्र ने 8 लोगों की हत्या की:घर में दादा-दादी को मारा, फिर स्कूल में फायरिंग की; बाद में आत्महत्या की (पूरी खबर पढ़ें) 4. इंटरनेशनल: जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका (पूरी खबर पढ़ें) 5. नेशनल: केंद्र का हलफनामा- SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट से कहा- यह सिद्धांत सिर्फ OBC और SEBC पर लागू (पूरी खबर पढ़ें) 6. नेशनल: बोफोर्स केस 40 साल बाद बंद: सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी याचिका खारिज की, घोटाले के आरोप से राजीव गांधी 1989 का चुनाव हारे थे (पूरी खबर पढ़ें) 7. नेशनल: पीएम की एनडीए के 45 नए सांसदों के साथ बैठक: इनमें TMC और उद्धव गुट के बागी सांसद भी थे; कहा- चिंता करने की जरूरत नहीं, हम साथ हैं (पूरी खबर पढ़ें) 8. नेशनल: सुप्रीम कोर्ट बोला- सांसद अंडे फेंके जाने से डरते हैं: स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां झेलीं, महुआ मोइत्रा की हेट स्पीच से जुड़ी याचिका खारिज की (पूरी खबर पढ़ें) 9. मौसम: दिल्ली-NCR में तेज बारिश, कई इलाकों में ट्रैफिक जाम:यूपी के 30 गांवों में बाढ़, उत्तराखंड में बद्रीनाथ-गंगोत्री हाईवे बंद (पूरी खबर पढ़ें) 10. उत्तर प्रदेश: BJP विधायक बोले-अतीक के गुनाहों की सजा परिवार भुगत रहा: जेल में बंद माफिया के दोनों बेटे बाहर आएंगे, भाई के जनाजे में शामिल होंगे (पूरी खबर पढ़ें) 11. नेशनल: मैगी विवाद में दुकानदारों पर लगे सभी क्रिमिनल केस हटे: हाईकोर्ट बोला- लैब जांच में लेड लिमिट में मिला, अब केस का कोई आधार नहीं (पूरी खबर पढ़ें) 12. इंटरनेशनल: हूती विद्रोहियों का यमन और सऊदी अरब पर हमला: यमन के 58 सैनिकों की मौत, सऊदी में 11 घायल, कई जगह आग लगी (पूरी खबर पढ़ें) 13. पटना: एक्सीडेंट में युवक की मौत पर बवाल, 10 गाड़ियां फूंकीं: ट्रैफिक पुलिस चौकी जलाई, हाईवे जाम; 9 थानों की फोर्स मौके पर (पूरी खबर पढ़ें) 14. पश्चिम बंगाल: मिथुन चक्रवर्ती की सर्जरी हुई: हाथ में लगी प्लेट निकाली गई, सीएम शुभेंदु ने अस्पताल जाकर हालचाल लिया (पूरी खबर पढ़ें) 15. महाराष्ट्र: 'रामायण को ऑस्कर नहीं मिला तो मुझे निराशा होगी': सीएम फडणवीस बोले- यह एक डिकेड की नहीं, बल्कि पूरे मिलेनियम की फिल्म (पूरी खबर पढ़ें) 16. असम: बाढ़ पीड़ितों के 500 घर बनवाएंगे सलमान खान: एक्टर रणदीप हुड्डा भी राहत कार्य में लगे, भूमि पेडनेकर ने प्रभावित इलाकों में पहुंची (पूरी खबर पढ़ें) 17. यूपी की कांवड़: 95 साल की दादी को लेकर 35 पोते निकले: 9 महीने की बेटी को कांवड़ पर रखकर चला पिता, 7 साल की शिवन्या बोलीं- शिव की शक्ति है (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... कुएं में समुद्र जैसी लहरें उठीं गुजरात के मोरबी में 18 फीट गहरे एक कुएं के पानी में अचानक समुद्र जैसी लहरें उठने लगीं। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग की भीड़ जुटी। प्रशासन और जियोलॉजिस्ट की टीम इसकी जांच कर रही है। पूरी खबर पढ़ें... फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर: क्या चर्च-मस्जिद की संपत्ति जब्त होगी, FCRA बिल पर अमेरिका तक में हंगामा; सरकार दुविधा में, क्या पास करा पाएगी 2. भास्कर इंटरव्यू: बृजभूषण बोले- संसद जरूर लौटूंगा, चरित्र हत्या की कोशिश हुई: प्रियंका को बरगलाया; यौन शोषण नहीं, मामला 'गुड-बैड टच' का था 3. संसद सत्र: सदन के बाहर बारिश में विपक्ष का प्रदर्शन, अंदर नारेबाजी:रिजिजू बोले- सरकार चर्चा से नहीं भाग रही, विपक्ष चलने दे सदन 4. जरूरत की खबर: स्कूलों के बाहर जंक फूड पर बैन: बच्चों को अनहेल्दी खाने से कैसे रोकें, हेल्दी ईटिंग हैबिट सिखाने के 8 टिप्स 5. मेंटल हेल्थ: बुढ़ापे में बीमारी का डर: मामूली दर्द भी हार्ट अटैक लगता है, टेस्ट में कुछ नहीं आता, लेकिन डर नहीं जाता, क्या करूं 6. कानपुर एक्सप्रेस: वे की बदहाली पर बड़े अफसर बचे, छोटे नपे: जिम्मेदारों ने आंखें मूंदकर फाइलें पास कीं, फील्ड पर गए ही नहीं 7. भास्कर एक्सक्लूसिव: तनाव वाले युवाओं को इंस्टाग्राम पर मिल रही सुसाइड पोस्ट:मेडिकल कॉलेज की स्टडी में खुलासा; 63.5% पोस्ट दिखा रहीं ‘खुदकुशी का रास्ता’ 8. राजस्थान में कमजोर मानसून से 246 बांध खाली:1.16-करोड़ लोगों की लाइफलाइन बीसलपुर में 1 इंच भी पानी नहीं आया, 23 जिलों में सूखे जैसे हालात 9. भास्कर एक्सक्लूसिव: 5 लोगों की हत्या में 40 आरोपी कैसे हुए बरी?:आरोपी पक्ष की 4 दलीलें पड़ी भारी, CBI के तर्क कहां कमजोर पड़े; पढ़ें पूरी बहस 10. भास्कर एक्सक्लूसिव: बिहार में डेवलपमेंट स्पीड स्लो-14,000 करोड़ के 13 प्रोजेक्ट लेट:मोदी से जिसका उद्घाटन कराना था, वो समय से पूरा नहीं, सिक्स लेन पुल-एक्सप्रेसवे की रिपोर्ट 11. भास्कर एक्सक्लूसिव: 'भरत तिवारी को 5 अलग-अलग पुलिसकर्मियों ने मारी थी गोली':हेडक्वार्टर को झूठी रिपोर्ट देकर बुलाई STF; सुप्रीम कोर्ट के वकील के 5 दावे करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज वृश्चिक राशि के लोगों के कारोबार में अच्छा मुनाफा होगा। कुंभ राशि वालों को विदेश जाने से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Saharanpur News: देवबंद में अमेरिकी नागरिक मौलाना मुफ्ती यासिर नदीम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
FIR registered in Deoband against American citizen Maulana Mufti Yasir Nadeem.
Ghaziabad News: रक्षाबंधन पर सजा बाजार, कुंदन और अमेरिकन डायमंड वाली भा रही राखी
रक्षाबंधन पर सजा बाजार, कुंदन और अमेरिकन डायमंड वाली भा रही राखी
अमेरिका और ईरान की जंग मजहबी नही सियासी : बरेलवी उलमा
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विदेशों में बेहतर भविष्य और रोजी-रोटी की तलाश में जाने वाले पंजाब के नौजवानों से जुड़ी दुखद खबरों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन सात समंदर पार से पंजाबी युवकों की अकाल मौत की खबरें सामने आती हैं, जो उनके परिवारों के सपनों को पल भर में चकनाचूर कर देती हैं। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला अमेरिका से सामने आया है। इसमें पंजाब के पटियाला जिले के रहने वाले 24 वर्षीय युवक खुशकरनदीप सिंह की अमेरिका के कैलिफोर्निया में गोली मारकर हत्या कर दी गई। खुशकरनदीप पांच साल पहले अमेरिका गया था और वहां ट्रक ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था। 30 जुलाई के बाद से परिजनों का उससे संपर्क कट गया था और फोन बंद आ रहा था। परिवार की शिकायत पर कैलिफोर्निया पुलिस द्वारा शुरू की गई खोजबीन के दौरान उसका शव एक सुनसान और जंगली इलाके से बरामद हुआ। शुरुआती जांच के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने गाड़ी में सफर के दौरान उसे निशाना बनाया। पुलिस मामला दर्ज कर हमलावरों की तलाश और हत्या के कारणों की जांच में जुट गई है। पांच साल पहले संजोए थे अमेरिका जाने के सपनेखुशकरनदीप करीब पांच साल पहले अपने सुनहरे भविष्य की आस में अमेरिका गया था। वहां वह कैलिफोर्निया राज्य में एक ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम करके अपना और अपने परिवार का जीवन संवारने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसकी हत्या की खबर से परिवार का पूरा सपना चकनाचूर हो गया। 30 जुलाई से टूटा था परिवार का संपर्कपरिजनों के अनुसार, खुशकरनदीप से उनकी आखिरी बार बात जुलाई के अंत में हुई थी। 30 जुलाई के बाद से अचानक उसका अपने परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। परिजनों ने जब भी उससे बात करने की कोशिश की, उसका मोबाइल फोन लगातार बंद आता रहा। कई दिनों तक कोई खबर न मिलने पर भारत में बैठा परिवार किसी अनहोनी की आशंका से घबरा गया। जंगल से बरामद हुई लाश, पुलिस जांच में जुटीजब खुशकरनदीप से संपर्क के सारे रास्ते बंद हो गए, तो परेशान परिजनों ने अमेरिका स्थित स्थानीय पुलिस और कैलिफोर्निया में रहने वाले जान-पहचान के लोगों से मदद की गुहार लगाई। परिवार की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कैलिफोर्निया पुलिस ने लापता युवक की तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया। सघन छानबीन के बाद पुलिस को खुशकरनदीप का शव एक सुनसान और झाड़ियों वाले जंगली इलाके से बरामद हुआ। अमेरिकी पुलिस की शुरुआती जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि खुशकरनदीप सिंह को उस वक्त निशाना बनाया गया जब वह अपनी गाड़ी में सफर कर रहा था। हमलावरों ने उस पर गोलियां चलाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई और उसके बाद शव को सुनसान जगह फेंक दिया गया। परिवार में पसरा मातम, इंसाफ की गुहारहालांकि, इस जघन्य हत्या के पीछे का असली कारण क्या था और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे, यह अभी तक साफ नहीं हो सका है। कैलिफोर्निया पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और संदिग्धों की धरपकड़ शुरू कर दी है। उधर, जैसे ही खुशकरनदीप की मौत की खबर पटियाला स्थित उसके पैतृक गांव अतला पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हंसते-खेलते बेटे की मौत की खबर सुनते ही माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर किसी की आंखें नम हैं और ग्रामीण सरकार से खुशकरनदीप के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द पंजाब लाने तथा दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
ड्रग्स-रोधी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एनसीबी ने की भारत-अमेरिका काउंटर नारकोटिक्स वर्किंग ग्रुप की बैठक
मेरठ निवासी आयकर विभाग के प्रधान मुख्य आयुक्त रह चुके असित सिंह के क्रेडिट कार्ड का डेटा चुराकर किराए पर कार्ड देने वाली विदेशी कंपनी को भुगतान किया गया। पुलिस ने साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज मामले की जांच शुरू कर दी है।
बिहार म्यूजियम के आज 11 साल हो गए हैं। साल 2015 में सीएम नीतीश कुमार ने इसका उद्धाटन किया था। करोड़ों की लागत से बनी यह म्यूजियम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से सुसज्जित है। आज इसका स्थापना दिवस मनाया जाएगा। इसे लेकर खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। इस अवसर पर कलाकार राजेश राम की विशेष कला प्रदर्शनी 'कागज की कश्ती: रीट्रेसिंग मेमोरीज ऑफ बॉयहुड' प्रदर्शित किए जाएंगे। पटना म्यूजियम में अमेरिका से वापस लाई गई मिथिला पेंटिंग के 101 दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी 'द टाइमलेस आर्ट ऑफ मिथिला' सबसे खास आकर्षण होगी। 6 अक्टूबर तक प्रमुख कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि इस मौके पर देश के नामचीन और कालजयी कलाकारों की चुनिंदा कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। बिहार म्यूजियम में 7 अगस्त से 6 अक्टूबर तक देश के प्रमुख कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। पटना म्यूजियम में 7 अगस्त से 20 सितंबर तक मिथिला पेंटिंग की दुर्लभ प्रदर्शनी आयोजित होगी। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध विरासत से जोड़ना है। अमेरिका से लौटी दुर्लभ मिथिला पेंटिंग्स होंगी प्रदर्शित संग्रहालय प्रशासन के अनुसार, 1970 के दशक में मिथिला पेंटिंग की 100 से अधिक कलाकृतियां अमेरिका चली गई थीं। अब इन्हें बिहार वापस लेकर आया गया है। वहीं, कला प्रदर्शनी 'कागज की कश्ती' आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में उनकी चुनिंदा मूर्तियां और कलाकृतियां प्रदर्शित होंगी। आयोजन के दौरान कलाकार स्वयं भी मौजूद रहेंगे और आगंतुकों को अपनी कला, उसकी तकनीक और बारीकियों के बारे में जानकारी देंगे।
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Mirzapur News: सावन में चूड़ियों की खनक से बाजार गुलजार, अमेरिकन डायमंड डिजाइन की बढ़ी मांग
Markets buzz with the clinking sound of bangles during Sawan; demand for American Diamond designs rises
Meta और भारत सरकार के बीच बढ़ी तकरार! 'भारत में नहीं चलेगा अमेरिकी कानून', एल्गोरिदम को लेकर बड़ा विवाद
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
पंजाब विधानसभा में मनरेगा फंड पर गरमाई बहस, स्पीकर ने अमेरिका और इथेनॉल पर कसा तंज
पंजाब विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मनरेगा फंड, दूषित पेयजल, राशन वितरण और सीवरेज बिल के मुद्दों पर सरकार घिरी। स्पीकर की इथेनॉल संबंधी टिप्पणी चर्चा का केंद्र रही।
नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के 78वें स्थापना दिवस पर भावुक हुए सीईसी, उद्यमियों को बताया शहर का भविष्य।
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
अमेरिका में भारत से ₹30 हजार सस्ता होगा iPhone 18 Pro Max, कहां से खरीदने में फायदा
अगर आप iPhone 18 Pro Max खरीदने की सोच रहे हैं, तो अमेरिका से खरीदना आपकी जेब के लिए फायदेमंद हो सकता है। जानिए खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
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पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
भारत अमेरिका को पछाड़ दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला सोलर एनर्जी मार्केट बना
नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 2014 में सिर्फ 3 गीगावाट से बढ़कर 30 जून, 2026 तक 162.15 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है, जो देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई।
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
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