100 फीसदी टैरिफ पर 10 दिन में ट्रंप का फैसला, भारत को मिलेगी छूट? अमेरिकी राजदूत ने क्या कहा
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर क्या 100 फीसदी टैरिफ लगाना चाहिए? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 10 दिन के अंदर इस बात पर फैसला कर सकते हैं। यह बात भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कही है।
India US Trade Deal updates: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट दिया है. गुरुवार को उन्होंने बताया कि पहला चरण फाइनल है, लीगल ड्राफ्टिंग का काम चल रहा हे. उन्होंने कहा कि हम अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बने रहेंगे.
अमेरिकी व्यापार नीतियों से प्रभावित कनाडा भारत के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) इस साल के अंत तक पूरा करना चाहता है।
अमेरिका में मंदिर में कत्लेआम मचाने की साजिश रचने वाले को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. भारत ने इस घटना पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने को कहा है.
अमेरिका के शिकागो क्षेत्र में एक हिंदू मंदिर पर बड़े हमले की कथित साजिश को नाकाम किए जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को 19 साल के एक युवक के पास AR-स्टाइल राइफल और करीब 300 कारतूस मिले हैं। युवक पर श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप है। […] यह लेख अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश नाकाम करने का दावा, 19 साल के युवक के पास मिली राइफल और 300 कारतूस सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश! 19 साल का युवक गिरफ्तार, राइफल और 300 गोलियां बरामद; भारतीयों को मारने की देता था धमकी
भारत विरोधी नफरत बर्दाश्त नहीं, अमेरिका में हिंदू मंदिर को निशाना बनाने पर सरकार का पलटवार
भारत सरकार ने अमेरिका के इलिनोइस राज्य में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी की कथित कोशिश को नाकाम किए जाने पर बयान जारी किया है।
बिना स्थानीय सहमति के हुए बलूचिस्तान खनिज समझौते खारिज करे अमेरिका: बलोच एक्टिविस्ट
वाशिंगटन, 15 अक्टूबर . बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उनका प्रशासन बलूचिस्तान खनिज खनन (माइनिंग) समझौतों को अपनी तरफ से खारिज कर दे. ये समझौते Pakistanी अधिकारियों के माध्यम से ऐसे तरीके से किए गए हैं, जिनमें बलूचों की स्वतंत्र राय ... Read more
ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'महा विनाशक' प्लान, कितना खतरनाक है मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स?
अमेरिका ईरान पर अपना सबसे बड़ा बम गिराने पर सोच रहा है। इस बम का नाम ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ है। यह बहुत बड़ा है और एक बड़े इलाके को तबाह कर सकता है।
अमेरिका में जिम्नास्टिक्स कोच सीन गार्डनर को 90 साल जेल की सजा सुनाई गई है। यूएस डिस्ट्रिक्ट जज क्रिस्टी जॉनसन ने बुधवार को यह सजा सुनाई। गार्डनर ने दिसंबर 2017 से अप्रैल 2018 के बीच 10 से ज्यादा नाबालिग छात्राओं के न्यूड वीडियो बनाया था। उसने जिम के बाथरूम में हिडेन कैमरा लगाया था। कोर्ट ने गार्डनर को तीन मामलों में दोषी करार दिया। जज ने गार्डनर को हर आरोप में 30 साल जेल की अधिकतम सजा दी। गार्डनर की उम्र 39 साल है। पहले भी आरोप लगे, अब तक कार्रवाई नहीं गार्डनर आयोवा के वेस्ट डेस मोइनेस स्थित चाउज जिम्नास्टिक्स एंड डांस इंस्टीट्यूट में भी कोच रह चुका था। वहां ट्रेनिंग लेने वाली कई पूर्व छात्राओं ने उस पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। पुलिस में शिकायतें की गईं और अदालत में मुकदमे भी दायर हुए हैं। हालांकि, आयोवा से जुड़े आरोपों में गार्डनर पर अब तक आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि संघीय मामला खत्म होने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। कोच ‘चाउ’ चियाओ के संस्थान में काम करता थागार्डनर मशहूर कोच लियांग ‘चाउ’ चियाओ के संस्थान में काम करता था। वह युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के साथ आयोवा में आयोजित होने वाली एक बड़ी सालाना प्रतियोगिता का निदेशक भी था। कुछ पूर्व छात्राओं के वकीलों का आरोप है कि USA जिम्नास्टिक्स और अमेरिकी सेंटर फॉर सेफस्पोर्ट को 2017 में ही गार्डनर के अनुचित व्यवहार की जानकारी मिल गई थी, लेकिन उसे खेल से बाहर करने में देरी हुई। सेफस्पोर्ट ने 2022 में गार्डनर को निलंबित किया था सेफस्पोर्ट ने 2022 में गार्डनर को अस्थायी रूप से निलंबित किया था। यह कार्रवाई चॉज जिम्नास्ट की ओर से लगाए गए यौन शोषण के आरोप के बाद हुई थी। इसके बाद चॉज ने गार्डनर को नौकरी से निकाल दिया था। सेफस्पोर्ट ने कहा है कि जांच के दौरान उसे पता चला कि चॉ और दूसरे कोच गार्डनर के यौन दुराचार के आरोपों से परिचित थे। संस्था के मुताबिक, उन्होंने अपनी नीति के तहत इन आरोपों की जानकारी सेफस्पोर्ट को नहीं दी। मई में एक जज ने गार्डनर की जांच ठीक से नहीं करने के आरोपों वाले दो मुकदमों से सेफस्पोर्ट को हटा दिया था। जज ने कहा था कि संघीय कानून के तहत संस्था को कानूनी सुरक्षा हासिल है। गार्डनर, यूएसए जिम्नास्टिक्स और चॉज जिम्नास्टिक्स के खिलाफ कई मुकदमे अब भी लंबित हैं।
अमेरिका में दिखा नस्लीय नफरत, मंदिर में मास शूटिंग की प्लानिंग में था युवक
अमेरिका में 19 साल के एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस पर हिंदू धार्मिक स्थल पर सामूहिक गोलीबारी की योजना बनाने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, उसके कथित मैनिफेस्टो में श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा और दक्षिण एशियाई मूल के लोगों, खासकर भारतीयों के खिलाफ हिंसा का जिक्र था.
ईरान पर अगले हमले में अमेरिका गिराएगा 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब'
अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा और परमाणु ठिकानों पर हमले में ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) के इस्तेमाल पर विचार कर रही है. ट्रंप के आदेश पर यह बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन प्रभावशीलता पर संदेह है.
अमेरिका बनाएगा दुनिया के आधे सेमीकंडक्टर: ट्रंप का दावा
वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ताइवान की चिप निर्माता कंपनी टीएसएमसी के एरिजोना में 265 अरब डॉलर के निवेश के बाद अमेरिका दुनिया के लगभग आधे सेमीकंडक्टर (चिप्स) का उत्पादन करेगा।
न्यूयॉर्क, 15 अक्टूबर . अमेरिका में नवरात्रि के बीच एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर फायरिंग की साजिश सामने आने के बाद हिंदू और भारतीय संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है. उन्होंने बढ़ती हिंदू-विरोधी घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई है. Wednesday (स्थानीय समय) को अधिकारियों की ओर से आरोपी की गिरफ्तारी की घोषणा ... Read more
भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
तीस्ता विवाद में अमेरिका की एंट्री से भड़का नया भू-राजनीतिक तूफान
भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से संवेदनशील मुद्दा बने तीस्ता नदी जल विवाद (Teesta River Project Dispute) में अब एक ऐसा खतरनाक मोड़ आ गया है जिसने पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में खलबली मचा दी है। अब तक तीस्ता नदी के पुनरुद्धार और प्रबंधन परियोजना को लेकर भारत और चीन के बीच खींचतान चल रही थी, लेकिन अब इसमें महाशक्ति अमेरिका (United States) की भी धमाकेदार एंट्री हो गई है। ढाका में पदस्थ अमेरिकी राजनयिकों और आर्थिक प्रतिनिधिमंडलों द्वारा तीस्ता बेसिन से सटे रंगपुर, पंचगढ़ और उत्तरी बांग्लादेशी इलाकों का सघन दौरा करने के बाद इस बात की पुष्टि हो गई है कि वाशिंगटन की नजरें लगभग 1 अरब डॉलर की लागत वाली इस महात्वाकांक्षी तीस्ता प्रोजेक्ट पर गड़ गई हैं। अमेरिका के इस सीधे दखल के बाद बांग्लादेश पूरी तरह से दुनिया की तीन सबसे बड़ी ताकतों—भारत, चीन और अमेरिका—का नया रणनीतिक 'ग्रेट गेम' अखाड़ा बन चुका है, जिससे न केवल बांग्लादेशी सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, बल्कि भारतीय सुरक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर भी भारी तनाव पैदा हो गया है।1 अरब डॉलर का तीस्ता प्रोजेक्ट और सुपरपावर्स के बीच रस्साकशी का असल खेलतीस्ता नदी बांग्लादेश की चौथी सबसे बड़ी नदी प्रणाली है, जो सिक्किम और उत्तरी पश्चिम बंगाल से बहती हुई बांग्लादेश की जमुना नदी में मिलती है। मानसून में भयंकर बाढ़ और शुष्क मौसम में पानी की भारी किल्लत के कारण बांग्लादेश लंबे समय से 'तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट' पर काम करना चाहता है। शुरुआत में चीन ने इस बहुचर्चित ₹9,000 करोड़ ($1 Billion) से अधिक के प्रोजेक्ट को फंडिंग देने और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का दांव खेला था। हालांकि, भारत की सीमा और 'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के बेहद करीब चीनी सैनिकों व इंजीनियरों की मौजूदगी को लेकर भारत ने कड़ी सामरिक आपत्तियां जताई थीं। इसी खींचतान के बीच अब अमेरिका-बांग्लादेश द्विपक्षीय व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश कंपनियों ने तीस्ता प्रोजेक्ट में सीधी हिस्सेदारी की मंशा जता दी है। अमेरिका का मानना है कि इस संवेदनशील जल परियोजना में चीनी एकाधिकार को तोड़ना इंडो-पैसिफिक रीजन में उसकी बैलेंस ऑफ पावर नीति के लिए बेहद जरूरी है।भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर खतरा और बांग्लादेश की पेचीदा कूटनीतिक उलझनदक्षिण एशियाई कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, अमेरिका का इस विवाद में कूदना क्षेत्रीय स्थिरता को और अधिक उलझा सकता है। भारत के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर 22 किलोमीटर चौड़ा वह नाजुक सैन्य चोकपॉइंट है जो पूरे पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यदि तीस्ता नदी के 3 किलोमीटर चौड़े और उथले बहाव को जबरन संकरा कर 816 मीटर का कृत्रिम चैनल बनाया जाता है, तो हिमालय से आने वाली करोड़ों टन मिट्टी और गाद से पूरे क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ का स्थायी खतरा मंडराने लगेगा। वहीं दूसरी ओर, ढाका की मौजूदा सरकार के सामने अब धर्मसंकट यह है कि वह बीजिंग से मिलने वाले लोन और इंफ्रास्ट्रक्चर वादों, वाशिंगटन के व्यापारिक दबाव और नई दिल्ली के साथ अपने ऐतिहासिक व भौगोलिक संबंधों के बीच संतुलन कैसे बनाएगी। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि तीस्ता को लेकर सुपरपावर्स की यह सीधी जंग आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया के नक्शे पर एक नई तनातनी को जन्म देने वाली है।
खाड़ी देशों में ईरान पर जोरदार हमला करके अमेरिका-इजरायल ने जो आग भड़काई, उसकी भारी कीमत आज उसके समर्थक चुका रहे हैं। जब ईरान ने अपनी सधी हुई रणनीति से और रूस व चीन के बल पर अमेरिका-इजरायल को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, तो उन्होंने अपनी सैन्य कार्रवाई रोक ली। इधर ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने जब सऊदी को निशाने पर लिया और ताबड़तोड़ हमले शुरू किए, तो उनके विरुद्ध अमेरिका, सऊदी अरब और इस्लामिक नाटो की सैन्य क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। आधुनिक हथियारों, उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बावजूद हूती विद्रोही सऊदी अरब के लिए सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं। जिस तरह से अक्टूबर 2026 में रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले हुए और लाल सागर के समुद्री मार्गों को लेकर तनाव बढ़ा, उसने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। आइए हम आपको इसके पीछे के दस अहम सवाल समझाएंगे, जो आगे दिए हुए हैं। इससे पहले एक मीडिया की 12–13 अक्टूबर की रिपोर्टों में सऊदी हवाई सुरक्षा की कमजोरियों और हूतियों की बढ़ती क्षमताओं का उल्लेख किया गया है, उसकी चर्चा करते हैं। यही वजह है कि इस संकट को समझने के लिए तीन सवाल महत्त्वपूर्ण हैं:- इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Saudi Arabia पर Houthis के हमले और तेज होते ही Trump ने दी युद्ध की चेतावनी, जवाब में हूतियों ने अमेरिका को फटकारा एक, अमेरिका जैसी महाशक्ति हूतियों को निर्णायक रूप से नियंत्रित क्यों नहीं कर पा रही है? शायद इसलिए कि उनके ऊपर ईरान और ईरान के ऊपर रूस व चीन का हाथ है। सभी मिलकर खाड़ी देशों से अमेरिकी पांव उखाड़ना चाहते हैं। इसलिए अमेरिका बेबस है। दो, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने नए रक्षा समझौते की वास्तविक उपयोगिता क्या है? दरअसल, यह अमेरिकी इशारे पर भारत के विरुद्ध बनवाया गया संगठन है। लेकिन इनकी आर्थिक और सैन्य क्षमता ईरान से सीधा टकराने की नहीं है। अब जान चुके हैं कि जो देश अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर सकता है, वह देश इन अमेरिकी पिल्लों को पल भर में दबोच कर शिया शासन के अधीन मिला लेगा। किसी भी लड़ाई में सारे मोर्चे एक साथ नहीं खोले जाते, बल्कि एक एक कर दुर्लभ लक्ष्य साधा जाता है। ईरान और उसके प्रॉक्सी शिया संगठनों की रणनीति यही है। तीन, सऊदी अरब के पास सैन्य कार्रवाई के अलावा कौन-कौन से विकल्प हैं? चूंकि अमेरिका व इजरायल सऊदी अरब का साथ छोड़ चुके हैं, इसलिए अब वह रूस को माध्यम बनाकर ईरान के शरणागत हो जाए। साथ ही तमाम अमेरिका सैन्य अड्डों को खाली करवा ले। इससे ईरान खुद को सुरक्षित महसूस करेगा। यदि वह सुन्नी मुल्कों पाकिस्तान व तुर्कीये के भ्रमजाल में फंसेगा तो बर्बादी भी होगी और सत्ता पलट भी होगा। अब आइए दस मौलिक सवालों से इस वैश्विक समस्या के समाधान को ढूंढने की कोशिश करते हैं, जहां पर हर पक्ष के संतुलन को दर्शाने की कोशिश की गई है। पहला सवाल यह है कि हूतियों को नियंत्रित करना इतना कठिन क्यों है? तो जवाब होगा कि सैन्य शक्ति और युद्ध के परिणाम में अंतर होता है। अमेरिका और सऊदी अरब के पास आधुनिक सैन्य संसाधन हैं, लेकिन किसी सशस्त्र संगठन को पराजित करना केवल हथियारों की श्रेष्ठता का प्रश्न नहीं है, बल्कि सैनिकों में मजबूत राष्ट्रीय जज्बा भी होना चाहिए जो अबतक दिखा नहीं। हूती आंदोलन ने यमन के गृहयुद्ध के दौरान सैन्य अनुभव हासिल किया है। वह देश के बड़े हिस्से में अपना प्रभाव बनाए हुए है और उसके पास मिसाइल तथा ड्रोन जैसी क्षमताएँ हैं। एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, हूतियों की चुनौती के पीछे अपेक्षाकृत कम लागत वाली सैन्य तकनीक, ईरान से मिली तकनीकी सहायता, स्थानीय समर्थन और विरोधी पक्षों के बीच मतभेद जैसे कारक हैं। दरअसल किसी देश की सैन्य श्रेष्ठता अपने आप यह सुनिश्चित नहीं करती कि वह अपने राजनीतिक उद्देश्यों को भी प्राप्त कर लेगा। दूसरा सवाल है कि कम लागत वाले हमले और महँगी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भी सऊदी अरब पर हुती क्यों भारी पड़ रहा है? शायद इसलिए कि हूती संकट का एक महत्त्वपूर्ण पहलू आर्थिक है। ड्रोन और अन्य अपेक्षाकृत सस्ते साधनों से खतरा उत्पन्न किया जा सकता है। हमलों को रोकने के लिए अत्याधुनिक निगरानी और वायु रक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पड़ती है। लगातार हमलों की आशंका के कारण नागरिक विमानन, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सऊदी अरब की रक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई है, बल्कि हालिया घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि क्या उसकी मौजूदा व्यवस्था सभी प्रकार के हमलों से पर्याप्त सुरक्षा दे पा रही है। मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अधिकारी रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आई कमियों की जाँच कर रहे हैं। तीसरा सवाल यह है कि यमन का भूगोल और राजनीतिक परिस्थितियाँ हुतियों की मदद कर रही हैं। यमन की भौगोलिक परिस्थितियाँ और लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता इस समस्या को जटिल बनाती हैं। हूती आंदोलन को केवल बाहरी सैन्य शक्ति से नियंत्रित करने की कोशिश में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की अनदेखी नहीं की जा सकती। यमन में एक ओर हूतियों का प्रभाव है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और दूसरे स्थानीय राजनीतिक तथा सैन्य समूह हैं। इन सभी के हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। इसलिए हूतियों के विरुद्ध कार्रवाई और यमन में स्थायी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना दो अलग-अलग चुनौतियाँ हैं। चौथा सवाल है कि आखिर इसके पीछे ईरान की भूमिका क्या है? तो जवाब होगा कि हूती आंदोलन को ईरान से समर्थन और तकनीकी सहायता मिलने की बात लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में सामने आती रही है। लेकिन हूतियों को केवल ईरान का निर्देश मानकर चलना भी अधूरा विश्लेषण होगा। एक अध्ययन के अनुसार, ईरान और हूतियों के हित कई मामलों में एक-दूसरे से मेल खाते हैं, लेकिन हूतियों के अपने स्थानीय राजनीतिक उद्देश्य भी हैं। इसका कूटनीतिक अर्थ यह है कि ईरान के साथ बातचीत उपयोगी हो सकती है, लेकिन उससे हूतियों के सभी निर्णय स्वतः नियंत्रित हो जाएँगे, इसकी गारंटी नहीं है। पांचवां सवाल यह है कि आखिर अमेरिका हूतियों को निर्णायक रूप से नियंत्रित क्यों नहीं कर पा रहा? तो जवाब होगा कि अमेरिका की स्थिति में एक महत्त्वपूर्ण विरोधाभास है: वह सऊदी अरब की सुरक्षा में सहयोग करना चाहता है, लेकिन यमन में एक और व्यापक युद्ध में उलझने से भी बचना चाहता है। इसके पीछे कुछ कारण हैं:- एक, सैन्य कार्रवाई की सीमाएँ: हूती ठिकानों पर हवाई हमले उनकी क्षमताओं को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन हवाई कार्रवाई अपने आप किसी संगठन का राजनीतिक नियंत्रण समाप्त नहीं करती। अतीत के अनुभवों से भी स्पष्ट है कि लंबे सैन्य अभियान के बावजूद हूती आंदोलन को समाप्त नहीं किया जा सका। इसलिए अमेरिका के सामने केवल हमले करने का प्रश्न नहीं, बल्कि यह भी है कि सैन्य कार्रवाई के बाद स्थायी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए? दो, अमेरिका की प्राथमिकताएँ: एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने हूतियों के विरुद्ध प्रस्तावित अभियान में अमेरिकी हवाई हमलों का समर्थन माँगा था, लेकिन उस समय वाशिंगटन ने प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार किया। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका खुफिया जानकारी और अन्य सहायता देता रहा। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका की सहायता और उसकी प्रत्यक्ष युद्ध में भागीदारी अलग-अलग विषय हैं। वाशिंगटन के लिए व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का जोखिम, सैन्य संसाधनों पर दबाव और दूसरे मोर्चों पर उसकी प्राथमिकताएँ महत्त्वपूर्ण कारक हैं। तीन, लाल सागर का सामरिक महत्त्व: लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण मार्ग हैं। यदि इन मार्गों पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो उसका असर केवल सऊदी अरब पर नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, माल ढुलाई की लागत और ऊर्जा व्यापार पर भी पड़ता है। एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि लाल सागर की सुरक्षा को लेकर बढ़ता संकट अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को कमजोर कर सकता है। अमेरिका की दुविधा यह है कि उसे समुद्री व्यापार और अपने सहयोगियों की सुरक्षा करनी है, लेकिन ऐसी कार्रवाई से बचना भी है जो संघर्ष को और व्यापक बना दे। छठा सवाल है कि क्या ‘इस्लामिक नाटो’ हूतियों को रोक सकता है? तो यहाँ पर एक महत्त्वपूर्ण तथ्यात्मक अंतर समझना आवश्यक है। वह यह कि अगस्त 2026 में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौता किया, जिसे भारत विरोधी माना गया। इस समझौते में एक हस्ताक्षरकर्ता पर सशस्त्र हमला अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं पर हमले के रूप में देखने का प्रावधान है। मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में इस व्यवस्था को कभी-कभी ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है। लेकिन इसे नाटो के समान संस्थागत, सैन्य और परिचालन क्षमता वाला संगठन मान लेना अभी उचित नहीं होगा। क्योंकि इस गठबंधन की अपनी संभावनाएँ हैं:- एक, सामूहिक प्रतिरोध का संदेश: यदि सदस्य देशों की प्रतिबद्धता विश्वसनीय होती है, तो किसी एक सदस्य पर हमले की राजनीतिक कीमत बढ़ सकती है। दो, सुरक्षा सहयोग: सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी, प्रशिक्षण और सुरक्षा समन्वय में सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि इन क्षेत्रों में वास्तविक सहयोग कितना विकसित हुआ है, इसका आकलन उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर करना होगा। तीन, सऊदी अरब के लिए अतिरिक्त कूटनीतिक विकल्प: रियाद को अमेरिका पर अपनी सुरक्षा संबंधी निर्भरता कम करने की दिशा में नए साझेदार मिल सकते हैं। फिर भी तीन बड़ी चुनौतियाँ हैं:- एक, अलग-अलग राष्ट्रीय हित: प्रत्येक देश यह तय कर सकता है कि किसी संकट में उसकी भागीदारी कितनी और किस प्रकार की होगी। दो, समझौते का व्यावहारिक क्रियान्वयन: पारस्परिक रक्षा की घोषणा अपने आप संयुक्त सैन्य कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करती। तीन, क्षेत्रीय संघर्ष का जोखिमकिसी सैन्य कार्रवाई से ईरान और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के साथ तनाव बढ़ सकता है। एक मीडिया विश्लेषण ने भी इस गठबंधन की वास्तविक प्रभावशीलता और उसके सामने मौजूद चुनौतियों पर प्रश्न उठाए थे। वास्तव में यह समझौता सऊदी अरब की सुरक्षा कूटनीति में एक नया आयाम है, लेकिन इसे हूती समस्या का स्वतः समाधान नहीं माना जा सकता। सातवां सवाल है कि सऊदी अरब के सामने अब क्या विकल्प हैं? तो जवाब होगा कि सऊदी अरब के सामने मुख्य चुनौती यह है कि वह अपनी जनता, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करे, जबकि एक और लंबा युद्ध शुरू करने के जोखिम को भी ध्यान में रखे। लिहाजा उसके सामने पाँच प्रमुख विकल्प हैं:- एक, सैन्य दबाव बढ़ाना: सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के साथ मिलकर हूतियों पर सैन्य दबाव बढ़ा सकता है। इस विकल्प का उद्देश्य हूतियों की हमले करने की क्षमता को सीमित करना और विवादित क्षेत्रों पर नियंत्रण से संबंधित परिस्थितियों को बदलना होगा। इससे संभावित लाभ यह होगा कि हूतियों की सैन्य गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। जबकि जोखिम यह है कि संघर्ष लंबा खिंच सकता है, नागरिकों को नुकसान पहुँच सकता है और सऊदी अरब के भीतर हमलों का खतरा बढ़ सकता है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब नेतृत्व यमन की सरकारी सेनाओं के साथ अभियान की योजना बना रहा था। उस समय अमेरिकी सेना की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित नहीं थी। इसलिए केवल सैन्य अभियान की घोषणा को सफलता का प्रमाण नहीं माना जा सकता है। दो, अमेरिका पर निर्भरता के साथ-साथ अन्य साझेदारों से सहयोग: सऊदी अरब अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंध बनाए रखते हुए पाकिस्तान, तुर्किये और दूसरे सहयोगियों के साथ सहयोग बढ़ा सकता है। लेकिन नए रक्षा समझौतों की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश किस प्रकार की सहायता देने को तैयार हैं और उनके बीच व्यावहारिक समन्वय कितना है। यहाँ उद्देश्य केवल गठबंधन का विस्तार करना नहीं, बल्कि सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाना होगा। तीन, ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद बनाना: हूती संकट का एक महत्त्वपूर्ण आयाम ईरान-सऊदी अरब संबंध भी हैं। यदि दोनों देश क्षेत्रीय तनाव कम करने, यमन में राजनीतिक समाधान और हमलों को रोकने के लिए संवाद आगे बढ़ाते हैं, तो इससे संघर्ष के विस्तार का जोखिम घट सकता है। हालाँकि, ईरान से बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितना प्रभाव डाल सकता है और हूती नेतृत्व किन शर्तों को स्वीकार करता है। यहां पर कूटनीतिक चुनौती यह है कि ऐसा समझौता खोजना जो सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करे, लेकिन यमन के भीतर राजनीतिक समाधान की संभावना भी बनाए रखे। चार, समुद्री सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत करना: लाल सागर की सुरक्षा केवल सऊदी अरब की समस्या नहीं है। इसलिए वह अन्य देशों के साथ समुद्री निगरानी, वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, सूचना साझा करने और संकट के समय समन्वित प्रतिक्रिया पर काम कर सकता है। चैथम हाउस ने मौजूदा बहुराष्ट्रीय समुद्री अभियानों और सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं का उल्लेख किया है। इस विकल्प का महत्त्व इसलिए है क्योंकि समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए हूती आंदोलन के साथ पूरे संघर्ष का सैन्य समाधान निकालना अनिवार्य नहीं है। पांच, यमन में राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास: यह विकल्प तत्काल राजनीतिक रूप से कठिन हो सकता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र ने सितंबर 2026 में हूतियों के हमलों की निंदा करते हुए सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और यमन के नेतृत्व में समावेशी राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करने का आग्रह किया था। राजनीतिक समाधान में युद्धविराम, नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता, बंदियों के प्रश्न और यमन की भविष्य की शासन-व्यवस्था जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में कठिन बातचीत और आपसी समझौते की आवश्यकता होगी। आठवां सवाल है कि सऊदी अरब के विकल्पों की तुलना किससे और कैसे की जा सकती है? इस विकल्प के संभावित लाभ, प्रमुख जोखिम या सीमा स्पष्ट हैं। जहां तक सैन्य दबावकी बात है तो हूतियों की क्षमताओं पर दबाव लंबा युद्ध और नागरिक नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका के साथ सहयोग, मौजूदा सुरक्षा साझेदारी का लाभ, अमेरिकी प्रत्यक्ष भागीदारी की अनिश्चितता, पाकिस्तान-तुर्किये सहित नए साझेदार सुरक्षा सहयोग का विस्तार और समझौते की वास्तविक क्षमता अभी परखी जानी है। लिहाजा ईरान के साथ संवाद क्षेत्रीय तनाव कम करने की संभावना बढ़ा सकता है। ईरान का प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा में सहयोग व्यापक राजनीतिक संघर्ष का समाधान नहीं हो सकता। इसलिए यमन में राजनीतिक समझौता और स्थायी शांति की संभावना, कठिन वार्ता और परस्पर अविश्वास को दूर करके ही हासिल की जा सकती है। यह तुलना किसी एक विकल्प को सर्वश्रेष्ठ घोषित नहीं करती, बल्कि प्रत्येक विकल्प अलग समस्या का समाधान करने का प्रयास करता है और उसके परिणाम परिस्थितियों पर निर्भर होंगे। नौवां सवाल है कि भारत के लिए इस संकट के क्या मायने हैं? तो जवाब होगा कि भारत के लिए यह संकट तीन प्रमुख कारणों से महत्त्वपूर्ण है:- एक, ऊर्जा सुरक्षा: सऊदी अरब भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। क्षेत्रीय संघर्ष से तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। दो, समुद्री व्यापार: लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में अस्थिरता से भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक जहाजों के मार्ग, परिवहन लागत और माल पहुँचने के समय पर प्रभाव पड़ सकता है। तीन, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा: पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर उनकी सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर निकासी की तैयारी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए भारत के हित में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव में कमी और सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना है। दसवां सवाल है कि क्या सऊदी अरब को सैन्य रणनीति बदलनी होगी? तो जवाब होगा कि हूतियों के साथ जारी संघर्ष यह दिखाता है कि सैन्य संसाधनों की प्रचुरता और राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के बीच सीधा संबंध नहीं है। अमेरिका की प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी की सीमाएँ, हूतियों की अपनी राजनीतिक और सैन्य संरचना, ईरान का समर्थन तथा यमन की जटिल आंतरिक परिस्थितियाँ इस संकट को लगातार कठिन बना रही हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान और तुर्किये के साथ सऊदी अरब का नया रक्षा समझौता सुरक्षा सहयोग के नए अवसर प्रस्तुत करता है, लेकिन उसकी वास्तविक प्रभावशीलता समय और परिस्थितियों के साथ ही स्पष्ट होगी। सऊदी अरब के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न केवल यह नहीं है कि हूतियों पर सैन्य दबाव कैसे बढ़ाया जाए, बल्कि यह भी है कि अपने नागरिकों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा करते हुए यमन में ऐसा राजनीतिक समाधान कैसे खोजा जाए जो बार-बार युद्ध की स्थिति पैदा होने से रोके। वस्तुतः इस संकट का आकलन तीन कसौटियों पर करना उपयोगी होगा: सऊदी अरब की सुरक्षा, लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निर्बाध आवाजाही और यमन में स्थायी शांति की संभावनाएँ। इसको साधे बिना हर सैन्य कार्रवाई व वैश्विक कूटनीतिक अधूरी रहेगी। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
अमेरिकी मंदिर में अंधाधुंध गोलीबारी की खौफनाक साजिश का खुलासा
अमेरिका में भारतीय प्रवासियों और हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहुत बड़ी और बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक प्रमुख हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर अंधाधुंध गोलीबारी करने की एक खौफनाक अंतरराष्ट्रीय साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस भयावह साजिश की भनक लगते ही अमेरिका के शीर्ष हिंदू संगठनों ने तुरंत आपातकालीन सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया है और पूरे देश में फैले हिंदू मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। इस कायरतापूर्ण साजिश की खबर फैलते ही न केवल अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय-अमेरिकियों के बीच डर और भारी अविश्वास का माहौल बन गया है, बल्कि भारत सरकार ने भी इस घटना पर अत्यंत कड़ा ऐतराज जताते हुए अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय और मानवाधिकार समर्थकों के बीच इस घटना को लेकर जबरदस्त गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है।अमेरिकी मंदिर पर हमले का खौफनाक प्लान और सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाईप्राप्त जानकारी और शुरुआती सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, चरमपंथी तत्वों द्वारा अमेरिका के एक बेहद प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध हिंदू मंदिर में अंधाधुंध गोलीबारी कर निर्दोष श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी। इस साजिश का मकसद अमेरिका में धार्मिक सद्भाव को पूरी तरह से बिगाड़ना और हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के भीतर दहशत का माहौल पैदा करना था। जैसे ही स्थानीय और संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों (FBI) के साथ-साथ हिंदू सुरक्षा नेटवर्क को इस खतरे के मजबूत संकेत और खुफिया इनपुट मिले, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) समेत कई शीर्ष सामुदायिक संगठनों ने तुरंत बयान जारी कर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की अनदेखी न करें और अपने आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से कड़ा करें। सुरक्षा बलों ने प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है और मंदिर परिसरों के आसपास विशेष निगरानी तंत्र तैनात कर दिया है।भारत सरकार का कड़ा बयान: सुरक्षा की गारंटी दे अमेरिकी प्रशासनइस गंभीर घटनाक्रम पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी बेहद सख्त और त्वरित रुख अपनाया है। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस साजिश की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों और हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है। भारत सरकार ने वाशिंगटन स्थित अपने दूतावास के माध्यम से अमेरिकी विदेश विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने इस मुद्दे को बेहद मजबूती से उठाया है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि इस घृणित साजिश के पीछे शामिल सभी दोषियों, षड्यंत्रकारियों और नफरत फैलाने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की जुर्रत न कर सके।घृणा अपराधों में बढ़ोतरी और अप्रवासी हिंदू समुदाय के बीच गहराता गुस्सापिछले कुछ समय से अमेरिका, कनाडा और पश्चिमी देशों में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने, तोड़फोड़ करने और धमकियां देने की घटनाओं में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। कभी मंदिरों की दीवारों पर नफरती नारे लिखे जाते हैं, तो कभी धार्मिक जुलूसों और उत्सवों में खलल डालने की कोशिश की जाती है। लेकिन इस बार सीधे तौर पर गोलीबारी कर नरसंहार रचने की साजिश ने स्थिति को बेहद संवेदनशील और खतरनाक बना दिया है। अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों का कहना है कि वे वर्षों से वहां शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था व समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद जिस तरह से धार्मिक पूर्वाग्रह और हेट क्राइम (Hatred Crimes) का दायरा बढ़ रहा है, उससे समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग इस साजिश के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और अमेरिकी सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।जनरेटिव एआई और वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा नीतियों पर उठे सवालआधुनिक सुरक्षा विशेषज्ञों और जियो-पॉलिटिकल विश्लेषकों का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और नफरती प्रचार फैलाने का खेल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जा रहा है। गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजन पर ट्रेंड हो रहे वैश्विक रुझानों से यह साफ झलगता है कि पश्चिमी देशों में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। अमेरिकी प्रशासन और वहां की पुलिस एजेंसियों के लिए यह मामला केवल एक संभावित अपराध को रोकने का नहीं, बल्कि अपने देश के कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के दावों की साख बचाने का है। वैश्विक स्तर पर उठ रहे इस भारी जनाक्रोश के बीच अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी जांच एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की जड़ों तक कैसे पहुंचती हैं और दोषियों को क्या सजा दी जाती है।
‘टीएसएमसी के निवेश से अमेरिका बनाएगा दुनिया के आधे सेमीकंडक्टर’, ट्रंप का दावा
वाशिंगटन, 15 अक्टूबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ताइवान की चिप निर्माता कंपनी टीएसएमसी के एरिजोना में 265 अरब डॉलर के निवेश के बाद अमेरिका दुनिया के लगभग आधे सेमीकंडक्टर (चिप्स) का उत्पादन करेगा. उन्होंने कहा कि दवा बनाने वाली कई बड़ी कंपनियां आयरलैंड, चीन और ब्रिटेन जैसे देशों से ... Read more
'टीएसएमसी के निवेश से अमेरिका बनाएगा दुनिया के आधे सेमीकंडक्टर', ट्रंप का दावा
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अमेरिकी महंगाई आंकड़ों के बाद सोने-चांदी की कीमतों में दमदार वापसी, तीन दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक
New Delhi, 15 अक्टूबर . इस हफ्ते की शुरुआत में लगातार तीन दिनों तक दबाव झेलने के बाद Thursday को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली. अमेरिकी खुदरा महंगाई (सीपीआई) के आंकड़े जारी होने के बाद वैश्विक और घरेलू दोनों बाजारों में कीमती धातुओं ने तेजी पकड़ी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ... Read more
एक्टर इमरान खान US के नागरिक हैं। उन्हें भारत छोड़ने के लिए 2 सेक्शन लगाए गए हैं। मुंबई पुलिस ने मुंबई पुलिस को भारत छोड़ने का जो नोटिस दिया है, वह इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के नियमों के तहत जारी किया गया है।
ट्रंप ने शी जिनपिंग के अमेरिकी दौरे का किया बचाव, कहा-चीन से अमेरिका को हो रहा है फायदा
वाशिंगटन, 15 अक्टूबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में चीनी President शी जिनपिंग की मेजबानी करने का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अब चीन से “बहुत पैसा” कमाता है. साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि वह ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को अब ‘सुपरइंटेलिजेंस’ (अति-बुद्धिमत्ता) के रूप में पेश कर रहे ... Read more
रूसी तेल पर प्रतिबंध हटेगा या नहीं: ट्रंप अगले 10 दिन में लेंगे फैसला, अमेरिकी राजदूत गोर ने क्या दिया संकेत?- Will ban on Russian oil lifted or not Trump decide within next 10 days what hint US Ambassador Gore provide
बॉलीवुड स्टार आमिर खान के भतीजे और अभिनेता इमरान खान कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। मुंबई पुलिस ने उन्हें एक आधिकारिक नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद मिली है। यह नोटिस उन्हें तब मिला, जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इमरान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित इस प्रदर्शन में भाग लिया था। इस प्रदर्शन के सिलसिले में मुंबई पुलिस ने अभिनेता को हिरासत में भी लिया था। CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस मिली जानकारी के अनुसार, इमरान के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट (प्रवासन अधिनियम) के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। उन पर आरोप है कि भारतीय नागरिक न होने के बावजूद उन्होंने भारत में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) कार्ड है, जो उन्हें भारत में रहने और काम करने की अनुमति देता है। हाल ही में हुए विवाद के बाद अक्टूबर 2026 में उनकी नागरिकता की स्थिति चर्चा में आ गई। 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने इमरान खान को हिरासत में लिया इससे पहले, 10 अक्टूबर को बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। इमरान को 10 अक्टूबर 2026 को शाम 5:20 बजे हिरासत में लिया गया था। इसके कुछ समय बाद, अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर पुलिस वैन के अंदर से एक तस्वीर साझा की और कैप्शन में लिखा, लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूँ। इमरान खान के अलावा, उनके चचेरे भाई और 'मेड इन हेवन' के अभिनेता ज़ैन खान को भी इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस घटना के बारे में एक मज़ेदार अंदाज़ में जानकारी साझा की। हिरासत में लिए जाने से पहले, 'दिल्ली बेली' के अभिनेता ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, मेरी कोई मांगें नहीं हैं। मैं यहां एक नागरिक के तौर पर आया हूं, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही पर रोक क्यों लगाई जा रही है—और लोगों की आवाज़ को क्यों दबाया जा रहा है। बस इसीलिए मैं यहां हूं। मैं ऐसी स्थिति में नहीं हूं कि किसी के सामने कोई मांग रख सकूं। और न ही मैं किसी संगठन से जुड़ा हूं। मैं यहां बस एक प्रतिनिधि के तौर पर आया हूं। यह विरोध प्रदर्शन 'हम भारत के लोग' (We, the People of India) के बैनर तले आयोजित किया गया था। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में दोपहर 3:30 बजे इसका कार्यक्रम तय था। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही, पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी, बैरिकेड्स लगा दिए और कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया। साथ ही, प्रदर्शन में हिस्सा लेने आ रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। View this post on Instagram A post shared by Imran Khan (@imrankhan)
मध्य पूर्व में जंग अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। रियाद में मिसाइलों के धमाके गूंज रहे हैं, तेल कंपनी अरामको के ठिकानों पर आग लग रही है और सऊदी अरब की सुरक्षा को खुली चुनौती मिल रही है। वहीं अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हूतियों पर हमले की तैयारी में हैं। ऐसे में यह लड़ाई सिर्फ सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और मध्य पूर्व की स्थिरता पर बड़ा खतरा बनकर मंडरा रही है। अरामको से एयरपोर्ट तक, सऊदी के रणनीतिक ठिकाने निशाने पर हम आपको बता दें कि हूतियों ने अपने ताजा बयान में दावा किया है कि उन्होंने धहरान स्थित सऊदी अरामको के प्रतिष्ठानों, रियाद एयरपोर्ट और राजधानी में मौजूद अरामको की रिफाइनरी को बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। मंगलवार रात धहरान में अरामको के मुख्य परिसर पर हुए हमले के बाद आग लगने की खबर सामने आई थी। सूत्रों के मुताबिक, आग कई मंजिलों तक फैल गई थी। हालांकि सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने नुकसान को सीमित बताया। सूत्रों के अनुसार, अरामको का कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा और कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया है। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Houthis के Missile Attacks से दहला Saudi Arabia, पलटवार में Yemen में मचाई भारी तबाही इसके अलावा, हूतियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, नागरिकों और कर्मचारियों से सऊदी हवाई अड्डों तथा तेल प्रतिष्ठानों को खाली करने की अपील भी की है। यह सऊदी अर्थव्यवस्था की सबसे संवेदनशील नस पर दबाव बनाने की रणनीति है। साथ ही रियाद का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कई बार हमलों का सामना कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे 17 अक्टूबर तक बंद किया गया है और सऊदी अरब के लिए कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इस घटनाक्रम ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की उन महत्वाकांक्षी योजनाओं को भी झटका दिया है, जिनके जरिए वे सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालकर विविध क्षेत्रों में विस्तार देना चाहते हैं। ईरान का मोहरा या अपने हितों की लड़ाई लड़ रहे हूती? हम आपको बता दें कि हूतियों को लंबे समय से ईरान का सहयोगी और सऊदी अरब के खिलाफ तेहरान का प्रतिनिधि माना जाता रहा है। लेकिन मौजूदा संघर्ष की एक अहम परत यह है कि हूती नेतृत्व अपनी लड़ाई को ईरान के निर्देश पर चलने वाले अभियान के बजाय यमन की संप्रभुता और सऊदी हमलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के रूप में पेश कर रहा है। देखा जाये तो हूती आंदोलन की जड़ें यमन के घरेलू संघर्षों में हैं। हूती देश के लगभग एक-तिहाई भूभाग और करीब दो-तिहाई आबादी पर नियंत्रण रखते हैं। उनके पास आधुनिक युद्धक विमान नहीं हैं, लेकिन लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों और ड्रोन का प्रभावशाली जखीरा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले शुरू होने के बाद हूतियों के तत्काल युद्ध में कूदने की आशंका थी, लेकिन उन्होंने कई महीनों तक दूरी बनाए रखी। जुलाई में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने के लिए ईरान की ओर से कथित अपील की खबरों के बावजूद उन्होंने तत्काल वैसा कदम नहीं उठाया। इसकी वजह अरब राष्ट्रवाद, यमनी पहचान और ईरान के लिए लड़ने की राजनीतिक संवेदनशीलता भी मानी जाती है। अगस्त में क्षेत्रीय संघर्ष में उनकी वापसी के साथ ही सऊदी अरब के खिलाफ उनकी बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं। सना एयरपोर्ट से शुरू हुआ बदले का नया चक्र इस टकराव की पृष्ठभूमि में सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विवाद भी अहम है। हूती-नियंत्रित राजधानी का यह हवाई अड्डा 2024 के आखिर में इजरायली हमलों के बाद बंद था। जुलाई 2026 में तेहरान से आने वाली एक उड़ान के जरिए इसे दोबारा खोलने की कोशिश हुई। इसी दौरान 13 जुलाई को सऊदी सेना ने रनवे पर बमबारी की, जिससे हूतियों को रियाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का नया आधार मिला। हम आपको याद दिला दें कि सऊदी अरब ने 2015 में यमन के गृहयुद्ध में हस्तक्षेप किया था, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से 2022 में हुआ संघर्षविराम कई वर्षों तक नाजुक शांति बनाए रखने में सफल रहा, लेकिन इस साल लड़ाई फिर भड़क गई। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान चला रहा है, जबकि हूती इसे अपने खिलाफ आक्रामकता बताते हैं। साथ ही हूतियों की रणनीति का एक उद्देश्य सना में आर्थिक संकट और नाकेबंदी के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराना भी है। हालांकि उनके शासन, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार पर उठते सवाल इस दावे को जटिल बनाते हैं। बाब अल-मंदेब पर पकड़, दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव हम आपको यह भी याद दिला दें कि सितंबर की शुरुआत में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर प्रभाव बढ़ाने की हूतियों की कोशिशों ने संकट को और गंभीर बना दिया था। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां जहाजरानी बाधित होने का असर सऊदी तेल निर्यात से लेकर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं तक पहुंच सकता है। यहां यह भी ध्यान देने की बात है कि हूतियों ने पहले गाजा युद्ध के दौरान नवंबर 2023 से मई 2025 तक लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाकर अपनी क्षमता दिखाई थी। अक्टूबर 2025 में गाजा संघर्षविराम के बाद उन्होंने इजरायल से जुड़े जहाजों पर हमले रोक दिए थे। मई 2025 में ट्रंप प्रशासन के साथ समझौते के बाद अमेरिकी जहाजों पर हमले भी निलंबित किए गए थे। सितंबर 2026 में ओमान में अमेरिकी राजनयिकों और हूती प्रतिनिधियों के बीच कथित मुलाकातों की खबरें भी सामने आईं थी। इससे संकेत मिलता है कि आक्रामक बयानबाजी के बावजूद हूती नेतृत्व परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलता रहा है। ट्रंप की चेतावनी और यमन में मानवीय त्रासदी इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हूतियों के खिलाफ हमलों में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर हूतियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमला किया तो वे पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी कर्मियों और हितों को निशाना बना सकते हैं। ऐसा हुआ तो वाशिंगटन क्षेत्रीय युद्ध में और गहराई तक खिंच सकता है। उधर, यमन में आम नागरिकों की स्थिति बदतर होती जा रही है। रेड क्रॉस के मुताबिक, कई मोर्चों पर लड़ाई तेज होने से अस्पतालों पर घायलों का दबाव बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि सरकारी नियंत्रण वाले ताइज शहर तक जीवनरक्षक सहायता पहुंचना बंद हो गया है। हूतियों से घिरे इस शहर में छह लाख से अधिक लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं, जिनमें दो लाख से ज्यादा महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। बहरहाल, सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह टकराव अब सिर्फ मिसाइलों और जवाबी हमलों की कहानी नहीं रहा। इसके केंद्र में तेल, समुद्री व्यापार, क्षेत्रीय वर्चस्व और अमेरिका की संभावित सैन्य भूमिका है। लेकिन इस भू-राजनीतिक संघर्ष की सबसे भारी कीमत यमन की वह आबादी चुका रही है, जो एक दशक से अधिक समय से युद्ध, भुखमरी और तबाह बुनियादी ढांचे के बीच जिंदगी बचाने की जद्दोजहद कर रही है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल होना पड़ा भारी: अमेरिकी नागरिक इमरान खान को भारत छोड़ने का फरमान|
विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मुंबई पुलिस ने अमेरिकी नागरिकता रखने वाले अभिनेता इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस जारी किया है।
भारत में प्रोटेस्ट के लिए अमेरिकी डोनर कर रहे CJP को फंडिंग, अमेरिकी सिंगर का दावा
इंटरनेट डेस्क। भारत में पिछले कुछ महीनों से लगातार सीजेपी के द्वारा प्रोटेस्ट किया जा रहा है। इसको लेकर फेमस अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ आवाज उठाई है। मीडिया रिपोटर्स की माने तो उन्होंने देश के युवाओं से अभिजीत दिपके की पार्टी के खिलाफ स्टैंड लेने की गुहार लगाई है। मैरी मिलबेन का आरोप है कि अमेरिका के डोनर भारत में एंटी-मोदी ताकतों को फंडिंग दे रहे हैं। जाने क्या कहा मीडिया रिपोटर्स की माने तो मैरी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने वाले अमेरिकी डोनर अभिजीत दिपके और उनके ग्रुप को फंडिंग कर रहे हैं। उनका दावा है कि वो लोग इंडिया की व्यवस्था को खंडित करना चाहते हैं, भारत के विकास में बाधा डालने के लिए ये सब कोशिशें की जा रही हैं। चल रहा हैं अभी भी प्रदर्शन बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने की मांग की है, 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी ने प्रोटेस्ट का ऐलान किया था, लेकिन अनुमति न मिलने की वजह से पुलिस कार्रवाई के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। अभिजीत समेत उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। PC-tnpnews.in
सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन को सीजेपी फंडिंग संबंधी बयान पर जवाब देते हुए कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार विदेशी नागरिकों को किसने दिया? हम अपने मुद्दों को खुद संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने ...
एक्टर इमरान खान को मुंबई पुलिस ने नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। इमरान 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे। मुंबई पुलिस ने इमरान खान को 10 अक्टूबर को हिरासत में लिया था। वे 22-23 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे। पुलिस के मुताबिक, इमरान भारतीय नागरिक नहीं हैं और विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस मामले में उनके खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। इमरान खान का जन्म अमेरिका में हुआ था प्रोटेस्ट के दौरान एक्टर को डिटेन किया था प्रदर्शन के दौरान शनिवार को हिरासत में लिए जाने के बाद इमरान खान ने पुलिस वैन के अंदर से अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी। उन्होंने लिखा था, 'लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूं'। वैन के अंदर से सामने आए एक वीडियो में जब उनकी कजिन जैन ने उनसे पूछा कि क्या वे कभी जेल गए हैं, तो इमरान ने कहा कि अभी जो हालात हैं, उसे देखकर इसके चांस लग रहे हैं। मीडिया से बातचीत में इमरान ने कहा कि उन्हें बिना वजह सड़क से उठाकर वैन में बैठा दिया गया था। रिहाई के बाद पैदल घर लौटे हिरासत से छूटने के बाद लेखा वाशिंगटन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया कि पुलिस ने उन्हें रिहाई के बाद कोई कार या कैब नहीं करने दी। लेखा ने बताया कि उनका मोबाइल भी जमा करा लिया गया था, जिसके बाद वे इमरान और जैन के साथ पैदल ही घर की तरफ निकले। वहीं, इमरान खान ने बताया कि रिहाई से पहले उन्हें और अन्य लोगों को करीब दो घंटे तक पुलिस वैन में घुमाया गया था।
कामयाब नहीं हुए तो अमेरिकी डोनर तुम्हें छोड़ देंगे, अभिजीत दीपके से कौन बोला
अभिजीत दीपके यानी कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर और अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के बीच जुबानी जंग जारी है। अब मिलबेन ने दीपके से कहा है कि अगर आप सफल नहीं हुए तो अमेरिकी डोनर साथ नहीं देंगे। इससे पहले उन्होंने US फंडिंग का दावा किया था।
US Hindu Temple Attack Plot: अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश का आरोप, 19 साल का युवक गिरफ्तार
अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश नाकाम: दूतावास ने पुलिस की तारीफ, प्रवासी भारतीयों को लेकर क्या कहा? attack Hindu temple US foiled: Embassy praises the police; what did it say regarding the Indian diaspora?
Plane Crash: अमेरिका में विमान हादसे में 6 लोगों की मौत, पंखों पर जम रही थी बर्फ; तूफान के बीच हुआ क्रैश
अमेरिका के मंदिर में करना चाहता था हिंदुओं का नरसंहार, 19 साल के लड़के की साजिश ऐसे हो गई नाकाम
अमेरिकन पुलिस ने 19 साल के एलेक्जेंड्रोस पैपोराकिस नाम के लड़के को अरेस्ट किया है. वह 11 अक्टूबर को हमला करने की योजना बना रहा था, जिसमें अमेरिकी राज्य इलिनोइस के ऑरोरा इलाके में हिंदुओं के पूजा स्थल को निशाना बनाया जाना था.
अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश नाकाम, भारतीय दूतावास ने कहा- स्थिति पर करीबी नजर
अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश नाकाम, भारतीय दूतावास ने कहा- स्थिति पर करीबी नजर
India and Canada are targeting to conclude the CEPA trade agreement by end of 2026 to boost bilateral trade to $50B by 2030. Key areas include energy, critical minerals, and IT services. Read key highlights of PM Modi-Carney talks.
Hindu Mandir in US: अमेरिका के इलिनॉय राज्य में स्थित एक हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में अमेरिकी पुलिस ने 19 वर्षीय पैलेटाइन निवासी एलेक्जेंड्रोस पापोरकिस (Alexandros Paporakis) नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर आतंकवादी धमकी देने और अवैध रूप से हथियार रखने के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने सुनवाई के बाद उसे हिरासत में रखने का आदेश दिया है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच 11 अक्टूबर को शुरू हुई, जब माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस विभाग ने संभावित सामूहिक गोलीबारी की धमकी से संबंधित जानकारी शेयरकी। यह जानकारी एक ऐसे व्यक्ति से मिली थी, जिसने पापोराकिस की ओर से भेजे गए कथित तौर पर चिंताजनक इलेक्ट्रॉनिकमैसेजकी सूचना अधिकारियों को दी थी।हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की कथित योजना नाकामजांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी ने एक दस्तावेजशेयर किया था, जिसमें कथित तौर पर हिंदू मंदिर में सामूहिक गोलीबारी करने की योजना का उल्लेख था। इसके साथ ही उसने राइफल, राइफल की मैगजीन, बुलेटप्रूफ सुरक्षा उपकरण और अन्य सामरिक सामान की तस्वीरें भीशेयर की थीं। पुलिस का कहना है कि आरोपी 11 अक्टूबर को अपनेघर से निकल रहा था, तभी उसे हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद जांचकर्ताओं ने अदालत से प्राप्त तलाशी वारंट के आधार पर उसके घर की तलाशी ली।राइफल, भरी मैगजीन और सैकड़ों कारतूस बरामदपुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान एक राइफल, कई भरी हुई राइफल मैगजीन, सैकड़ों कारतूस,कई खतरनाक उपकरण और जांच से संबंधित अन्य सामान बरामद किया गया है। बरामद वस्तुओं में बॉडी आर्मर वाला एक सामरिक जैकेट भी शामिल था, जिस पर श्वेत वर्चस्ववादी चरमपंथ से जुड़ी तस्वीर वाला पैच लगा था। जांच मेंFBI ने भी सहयोग किया। अधिकारियों ने आरोपी से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक संदेशों और उसके कथित दस्तावेज की जांच की।दस्तावेज का शीर्षक Why I Fought: A.K.A.: (Aurora Shooter’s Manifesto) बताया गया है।अधिकारियोंके मुताबिक, इस दस्तावेज में श्वेत वर्चस्ववादी और चरमपंथी विचारधारा से संबंधित बयान थे। इसमें दक्षिण एशियाई मूल के लोगों, विशेष रूप से भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा से जुड़े संदर्भ भी शामिल थे।11 अक्टूबर को हमले की आशंकापुलिस का मानना है कि आरोपी 11 अक्टूबर को हमले को अंजाम देने की योजना बना रहा हो सकता था। जांचकर्ताओं ने आशंका जताई कि संभावित निशाने पर ऑरोरा क्षेत्र में स्थित कोई हिंदू धार्मिक स्थल हो सकता था। इस सूचना के बाद पुलिस ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले हिंदू धार्मिक स्थलों से संपर्क कर उन्हें संभावित खतरे के बारे में सतर्क किया। अधिकारियों के अनुसार, समय रहते मिली जानकारी और विभिन्न पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय से संदिग्ध की पहचान कर उसे गिरफ्तार करने में मदद मिली।आतंकवादी धमकी समेत दो आरोपपापोराकिस पर आतंकवादी धमकी देने का एक आरोप लगाया गया है, जिसे इलिनॉय कानून के तहत क्लास एक्स फेलनी बताया गया है। इसके अलावा उस पर अवैध रूप से हथियार रखने का भी आरोप है। अदालत में हिरासत संबंधी सुनवाई के बादजज ने उसे हिरासत में रखने का आदेश दिया। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपी को दोषी ठहराए जाने की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।पापोरकिस को बुधवार को रोलिंग मीडोज स्थित 'कुक काउंटी थर्ड म्युनिसिपल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट' में पेश किया गया, जहां जज ने उसे हिरासत में भेजने का आदेश दिया। उसकी अगली पेशी 30 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। यह गिरफ्तारी नवरात्र सहित हिंदू त्योहारों के उत्सव के बीच हुई है। यह घटनाक्रम ओहायो के रिचमंड हाइट्स स्थित श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना के ठीक दो सप्ताह बाद सामने आया है।पुलिस और एफबीआई ने क्या कहा?पलाटाइन पुलिस प्रमुख विलियम नॉर्ड ने कहा कि कथित धमकी की गंभीरता को कम करके नहीं आंका जा सकता। उन्होंने बताया कि पलाटाइन और माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस विभागों के बीच तत्काल सूचना साझा करने और समन्वित कार्रवाई से संदिग्ध को समय रहते हिरासत में लेना संभव हुआ। उन्होंने सबसे पहले सूचना देने वाले व्यक्ति और जांच में सहयोग के लिए एफबीआई का आभार भी जताया। वहीं, एफबीआई शिकागो के स्पेशल एजेंट प्रभारी रयान व्हेलन ने कहा कि एजेंसी कट्टरपंथी विचारधाराओं से प्रेरित हिंसा के खतरों की पहचान करने, जांच करने और उन्हें रोकने के लिए स्थानीय एवं राज्य स्तरीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है।ये भी पढ़ें- दीपावली से पहले GIDA का बड़ा तोहफा! 144 प्लॉट्स और 61 आवास के लिए 16 अक्टूबर से शुरू होगा रजिस्ट्रेशनउन्होंने कहा कि पुलिस विभागों कीतुरंत कार्रवाई से संदिग्ध को बिना किसी नुकसान के हिरासत में लिया जा सका। एफबीआई ने मामले में आगे भी उपलब्ध कानूनी और जांच संबंधी संसाधनों का इस्तेमाल करने की बात कही है। यह मामला अमेरिका में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और कथित चरमपंथी हिंसा के खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल, पुलिस और एफबीआई मामले की जांच कर रही हैं। आरोपी के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
इंटरनेट डेस्क। भारत में लगातार हो रहे सीजेपी के प्रोटेस्ट को लेकर फेमस अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ आवाज उठाई है। मीडिया रिपोटर्स की माने तो उन्होंने देश के युवाओं से अभिजीत दिपके की पार्टी के खिलाफ स्टैंड लेने की गुहार लगाई है। मैरी मिलबेन का आरोप है कि अमेरिका के डोनर भारत में एंटी-मोदी ताकतों को फंडिंग दे रहे हैं। मैरी मिलबेन ने किया दावा खबरों की माने तो मैरी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने वाले अमेरिकी डोनर अभिजीत दिपके और उनके ग्रुप को फंडिंग कर रहे हैं। उनका दावा है कि वो लोग इंडिया की व्यवस्था को खंडित करना चाहते हैं, भारत के विकास में बाधा डालने के लिए ये सब कोशिशें की जा रही हैं। सिंगर ने यूथ को आगाह करते हुए कहा कि इंडिया में हो रही एंटी मोदी एक्टिविस्ट की फंडिंग उनके देश से हो रही है। चल रहा हैं अभी भी प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने की मांग की है, 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी ने प्रोटेस्ट का ऐलान किया था, लेकिन अनुमति न मिलने की वजह से पुलिस कार्रवाई के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। अभिजीत समेत उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। pc-india tv hindi
अमेरिका ने यूक्रेन का मझधार में छोड़ा?: जेलेंस्की ने ट्रंप के सलाहकारों पर उठाए सवाल, डीजल डील पर क्या बोले? volodymyr zelenskyy criticizes donald trump russia diesel deal
कौन हैं नित्या रमन?: अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर में इतिहास रचने को तैयार, बेघर लाेगों की बनीं आवाज nithya raman los angeles mayor election kerala born indian Karen Bass usa
अमेरिका: फ्लोरिडा में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर लगेगी रोक? अदालत से कानून को मंजूरी USA Will social media accounts for children under 14 be banned in Florida? Law gets court approval
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अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन का CJP पर गंभीर आरोप, अभिजीत दिपके का रिएक्शन भी आया सामने
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने हाल ही में एक ट्वीट के जरिए भारतीय युवाओं से CJP के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की थी। अब उनके ट्वीट पर रिएक्शन देते हुए अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया है कि भारत के आंतरिक मामले में दखल देने का अधिकार विदेशी नागरिक को किसने दिया है?
अभिजीत दीपके को US से खुल्लम-खुल्ला सपोर्ट, अमेरिकी सांसद को भारत में SIR भी से दिक्कत
अमेरिकी सांसद ने सीधे सीधे आरोप लगाया है कि भारत सरकार ने मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वे इससे बेहद दुखी हैं। सांसद ने अमेरिका और भारत की तुलना भी की।
शिकागो के हिंदू मंदिर में सामूहिक गोलीबारी की साजिश नाकाम, 19 वर्षीय अमेरिकी किशोर गिरफ्तार - Jagran
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हिंदू मंदिर में मास शूटिंग की साजिश, अमेरिका में 'आतंकवादी' अरेस्ट
अमेरिका के इलिनॉय में 19 साल के एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस को हिंदू मंदिर पर कथित हमले की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस को उसके घर से राइफल, लोडेड मैगजीन, सैकड़ों कारतूस और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से जुड़ी सामग्री मिली है. FBI मामले की जांच कर रही है.
अमेरिकी: भारत विरोधी सांसद इल्हान उमर का बढ़ीं मुश्किलें; फोन जब्त, अधिकारियों ने भेजे समन, जानिए क्या है आरोप federal agents seize phone us minnesota rep ilhan omar investigation midterm election
भारत के किराना स्टोर्स की तारीफ में अमेरिकी महिला ने जो कहा, तुरंत होने लगा वायरल; Video में देखें
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अमेरिकी महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला ने भारत के किराना स्टोर्स की जमकर तारीफ की है।
केरल में जन्मीं एक लड़की, हार्वर्ड और MIT की पढ़ाई, छह साल का सिटी काउंसिल अनुभव और अब लॉस एंजिलिस की पहली भारतीय-अमेरिकी मेयर बनने की दहलीज पर. नित्या रमन का राजनीतिक सफर दुनियाभर के भारतीयों का ध्यान खींच रहा है.
अमेरिकी चुनाव: डेमोक्रेट्स का दबदबा बढ़ा तो ट्रंप की बढ़ेंगी मुश्किलें? क्रिप्टो कंपनियों पर कस सकता है शिकंजा--US Midterm Elections 2026: Democrats, Trump and Possible Impact on Crypto Companies
भारत पर टला नहीं खतरा, 100 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए कुछ भी करेगा अमेरिका!
भारत पर अतिरिक्त 100 फीसदी शुल्क लगने का खतरा टला नहीं है। अमेरिकी कानून इसे संभव बना सकता है। इससे पहले अमेरिकी संसद ने हाल ही में भारत पर शुल्क लगाने की इजाजत देने वाले बिल को मंजूरी दी थी।
अमेरिकी राजनीति: 2028 में राष्ट्रपति पद की रेस पर कमलाहैरिस ने फैसला टाला;मध्यावधि चुनाव में क्या रणनीति?
भारत की मतदाता सूची पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी: 13 करोड़ नाम हटने पर जताई चिंता, एसआईआर पर क्यों उठे सवाल?--US Congresswoman Pramila Jayapal Raises Concern Over Voter Deletions in India
अमेरिकी सांसद ने SIR पर उठाए सवाल, बोलीं- भारतीयों को निष्पक्ष चुनाव का अधिकार
भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत में ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है. उन्होंने भारत के लोगों द्वारा चलाए जा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए निष्पक्ष चुनावों की वकालत की है.
साल बाद पुरखों का पता लगाने दक्षिण अमेरिका से गाजीपुर पहुंचा परिवार, बीएचयू में दिया सैंपल
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में महंगाई को 2% के लक्ष्य तक सीमित करने की अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की कवायदों को एक बार फिर झटका लगा है। अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (Bureau of Labor Statistics - BLS) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित वार्षिक खुदरा महंगाई दर 3.7% दर्ज की गई है।बाजार विश्लेषक और अर्थशास्त्री उम्मीद कर रहे थे कि मौद्रिक सख्ती के चलते मुद्रास्फीति में और नरमी देखने को मिलेगी और यह घटकर 3.6% पर आ जाएगी। हालांकि, यह उम्मीदों से अधिक रही और पिछले महीने के 3.7% के स्तर पर ही टिकी रही। महीने-दर-महीने (Month-on-Month) आधार पर सीपीआई में 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।गैसोलीन और ऊर्जा की कीमतों में 9.1% का भारी उछाल बना मुख्य कारकसितंबर महीने में मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर पर बने रहने के पीछे सबसे बड़ा योगदान ऊर्जा क्षेत्र, विशेषकर ऑटोमोबाइल ईंधन यानी गैसोलीन (Gasoline) का रहा है:गैसोलीन इंडेक्स में उछाल: महीने-दर-महीने आधार पर गैसोलीन की कीमतों में 9.1% की तेज छलांग दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर अमेरिकी गैस स्टेशनों पर देखा गया।ऊर्जा सूचकांक का समग्र असर: ऊर्जा सूचकांक (Energy Index) में कुल मिलाकर 5.6% की मासिक वृद्धि हुई, जिसने हेडलाइन सीपीआई को नीचे आने से रोक दिया।शेल्टर और हाउसिंग कॉस्ट: आवास की लागत (Shelter Index) में भी लगातार वृद्धि जारी रही और यह मासिक आधार पर 0.6% बढ़ी। आवास लागत का कुल सीपीआई बास्केट में एक-तिहाई से अधिक वेटेज होता है, जिसके चलते किराए की ऊंची दरों ने भी महंगाई को सहारा दिया।कोर सीपीआई (Core CPI) 4.1% पर फिसला: थोड़ी राहत, लेकिन चिंता बरकरारहेडलाइन महंगाई के उलट, अधिक अस्थिर माने जाने वाले खाद्य (Food) और ऊर्जा (Energy) घटकों को अलग करके देखे जाने वाले कोर सीपीआई (Core CPI) में मामूली नरमी देखी गई:वार्षिक आधार पर कोर मुद्रास्फीति अगस्त के 4.3% से घटकर 4.1% पर आ गई, जो सितंबर 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है।मासिक आधार पर कोर सीपीआई में 0.3% की बढ़त दर्ज हुई।कोर इन्फ्लेशन में गिरावट इस बात का संकेत है कि सर्विस सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग गुड्स की कीमतों में अत्यधिक उछाल पर कुछ हद तक ब्रेक लगा है, लेकिन सेवा क्षेत्र में मजदूरी और किराए की लागत अभी भी फेड के सहज स्तर से काफी ऊपर बनी हुई है।यूएस मुद्रास्फीति: प्रमुख आंकड़े एक नजर मेंपैरामीटर (Index Component)वार्षिक बदलाव (YoY Change)मासिक बदलाव (MoM Change)मुख्य प्रभावहेडलाइन सीपीआई (All Items CPI)3.7%+0.4%अनुमान (3.6%) से अधिक, उच्च स्तर पर स्थिरकोर सीपीआई (Core CPI - Ex Food & Energy)4.1%+0.3%दो साल के निचले स्तर पर, नरमी जारीगैसोलीन इंडेक्स (Gasoline)+3.0% (YoY)+9.1%ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ी मासिक छलांगऊर्जा सूचकांक (Energy Index)-0.5% (YoY)+5.6%कच्चे तेल की तेजी से मासिक उछालशेल्टर इंडेक्स (आवास लागत)+7.2% (YoY)+0.6%कोर बास्केट में सबसे मजबूत घटकफेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति: 'हायर फॉर लॉन्गर' (Higher for Longer) का खतराइस डेटा ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है:ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी का जोखिम: फेड पहले ही अपनी बेंचमार्क नीतिगत दरों को 22 साल के उच्चतम स्तर (5.25% - 5.50%) पर ले जा चुका है। यदि ऊर्जा और सेवाओं की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो फेड वर्ष के अंत से पहले दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स (bps) की एक और बढ़ोतरी करने पर विचार कर सकता है।कटौती की संभावना टली: वॉल स्ट्रीट और वैश्विक वित्तीय बाजारों को उम्मीद थी कि 2024 के मध्य तक फेड ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू कर सकता है। लेकिन 3.7% की चिपचिपी महंगाई (Sticky Inflation) यह संदेश देती है कि दरें लंबे समय तक उच्च स्तर पर (Higher for Longer) बनी रहेंगी।यूएस बॉन्ड यील्ड में तेजी: इस आंकड़े के आने के बाद अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में मजबूती देखी गई, जिससे डॉलर इंडेक्स (DXY) को भी समर्थन मिला।भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर क्या होगा इसका असर?अमेरिकी मुद्रास्फीति में आई तेजी का सीधा प्रभाव भारत सहित सभी उभरते बाजारों पर पड़ता है:विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरें ऊंची रहने पर विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों से मुनाफावसूली कर सुरक्षित अमेरिकी डेट मार्केट की ओर रुख करते हैं, जिससे घरेलू शेयर बाजारों (Sensex और Nifty) में अस्थिरता बढ़ सकती है।रुपये पर दबाव: मजबूत डॉलर के चलते भारतीय रुपये (INR) की विनिमय दर पर दबाव बना रह सकता है, जिससे भारत का कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स आयात महंगा होने का जोखिम रहता है।आरबीआई (RBI) का रुख: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने हालिया मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट को 6.50% पर यथावत रखा है। हालांकि, यदि फेड लंबे समय तक दरों को ऊंचा रखता है और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें $90 प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत में भी केंद्रीय बैंक को अपनी दरों में कटौती की योजना को लंबे समय के लिए टालना पड़ सकता है।
अमेरिका में पति की पहली शादी को छिपाने और दहेज प्रताड़ना का आरोप, रद नहीं होगी एफआइआर
दुर्ग की महिला श्रद्धा मिश्रा द्वारा पति की पहली शादी छिपाने, अमेरिका में प्रताड़ित करने और दहेज मांगने के आरोप में दर्ज कराई गई एफआइआर को रद्द करने से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और केवल विदेशी मैरिज सर्टिफिकेट के आधार पर प्राथमिकी रद्द नहीं की जा सकती।
चीन में अमेरिकी कंपनी का बोलबाला, दनादन बिक रही है ये कार
चीनी कार मार्केट में एक बार फिर अमेरिकी कंपनी टॉप पर पहुंच गई है. हम बात कर रहे हैं टेस्ला की, जिसकी मॉडल वाई सितंबर महीने में चीनी मार्केट की बेस्ट सेलिंग कार रही है. इसकी सबसे नजदीकी कंपटीशन गेली ईएक्स 2 है, जिसकी टेस्ला मॉडल वाई से 6,084 यूनिट्स कम बिकी हैं. आइए जानते हैं चीनी मार्केट में सितंबर महीने का हाल क्या रहा है.
दैनिक जागरण द्वारा जमशेदपुर के साकची स्थित धालभूम क्लब में 'जागरण डांडिया' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका सुस्वाति मलिक अपनी संगीतमय प्रस्तुति से शहरवासियों को झूमने पर मजबूर करेंगी।
अमेरिका से आई ये खबर... अचानक ₹8000 टूटी चांदी, सोना भी पस्त!
सोने-चांदी की कीमतों में अचानक से बड़ी गिरावट आई है, क्योंकि अमेरिका ने सितंबर महीने के लिए महंगाई डाटा शेयर किया है. इस आंकड़े के अनुसार, सितंबर में अमेरिका की महंगाई बढ़ी है.
'अभिजीत दीपके को अमेरिका से मिल रही फंडिंग', US सिंगर ने CJP को लेकर किया चौंकाने वाला खुलासा
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर अमेरिका से फंडिंग लेने का गंभीर आरोप लगाया है।
अमेरिका में वीजा एक्सटेंशन के नियम बदलने की तैयारी, भारतीयों पर क्या होगा असर?
अमेरिकी प्रशासन ने एक बार फिर से एक नया नियम प्रस्तावित किया है। इस नियम का मकसद यूएससीआईएस के उस लंबे समय से चल रहे सिद्धांत को खत्म करना है, जिसमें किसी अप्रवासन याचिका को पहले मंजूरी मिल चुकी हो तो उसी तरह की नई याचिका पर आसानी से और जल्दी विचार किया जाता था।
हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन का दावा- अमेरिका से मिल रही CJP को फंडिंग
वॉशिंगटन, 14 अक्टूबर 2026 । अमेरिकी सिंगर और अभिनेत्री मैरी मिलबेन ने भारत में सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका में मौजूद कुछ डोनर्स इस संगठन को आर्थिक मदद दे रहे हैं और उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का विरोध करना है। मैरी […] The post हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन का दावा- अमेरिका से मिल रही CJP को फंडिंग appeared first on Rashtriya Ujala .
अमेरिकी विदेश मंत्री आ रहे भारत, ट्रेड डील पर बनेगी बात? एस. जयशंकर ने बताई बड़ी बात
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत दौरे पर रहेंगे, जहां वे मुंबई और जामनगर जाएंगे। इस दौरान भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, व्यापारिक सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा होगी, खासकर व्यापारिक समझौतों और टैरिफ के मुद्दों पर।
कौन बिगाड़ रहा सोने का खेल? अचानक अमेरिका का आया नाम
सोने और चांदी के दाम में इन दिनों गिरावट देखी जा रही है, क्योंकि निवेशक अमेरिकी डाटा और फेडरल रिजर्व बैंक के मॉनिटरी पॉलिसी पर नजर रख रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि दिसंबर तक अमेरिका फेड रेट हाइक कर सकता है.
अमेरिका में बाइबल की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर, पेंसिल्वेनिया में सजी कला प्रदर्शनी
फिलाडेल्फिया की कलाकार चैनमी जंग पाइल्स की 68 मौलिक कलाकृतियों की प्रदर्शनी 17 अक्टूबर से फीनिक्सविले में शुरू होगी।
केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने सितंबर में रूस से रोजाना करीब 18.2 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया, जबकि इस दौरान चीन का आयात लगभग 14.9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।
RBI के दखल से मजबूत हुआ Rupee, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे चढ़कर पहुंचा 95.17 पर
रुपये में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही और यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 19 पैसे मजबूत होकर 95.17 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप से डॉलर की मांग कम होने और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगने से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि रुपये में तेजी के साथ यह एक महीने के उच्चस्तर पर पहुंच गया। आरबीआई के सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के उपायों के अलावा डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी सरकारी बॉण्ड पर प्रतिफल घटने से भी रुपये को समर्थन मिला। हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों में कमजोरी ने रुपये की बढ़त को सीमित किया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.05 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 94.76 के उच्च स्तर तक गया और 95.19 के निचले स्तर तक आया। कारोबार के अंत में रुपया 95.17 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 19 पैसे बढ़त है। रुपया मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ था और 42 पैसे की बढ़त के साथ 95.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। पिछले चार कारोबारी सत्रों में रुपये में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले कुल 171 पैसे की तेजी आई है। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि रुपये में सकारात्मक रुख बना रहेगा। अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए आरबीआई के हस्तक्षेप से रुपये को समर्थन मिल सकता है। डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल में गिरावट भी रुपये के लिए सहायक हो सकती है।’’इस बीच, बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों, विनिर्मित वस्तुओं तथा ईंधन एवं बिजली की कीमतें बढ़ने से सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा था कि पिछले डेढ़ साल में रुपये में काफी गिरावट आई है और आरबीआई घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के प्रयास जारी रखेगा। केंद्रीय बैंक ने रुपये की गिरावट पर अंकुश लगाने के लिए कई उपायों की 10 अक्टूबर को घोषणा की थी। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05 प्रतिशत मजबूत होकर 102.23 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 0.64 प्रतिशत बढ़कर 106.37 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 251.89 अंक लुढ़ककर 72,781.89 अंक पर, जबकि निफ्टी 99.25 अंक टूटकर 22,622.70 अंक पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को शुद्ध रूप से 1,305.13 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
PM मोदी के सपोर्ट में आईं हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन, बोलीं- CJP को मिल रही अमेरिका से फंडिंग
मैरी मिलबेन ने पीएम मोदी को सपोर्ट किया है। हॉलीवुड सिंगर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भारत के युवा से अपील की है कि यह चुप रहने का वक्त नहीं है।
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने भारतीय युवाओं से CJP के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की। उन्होंने संगठन को अमेरिकी दानदाताओं से फंडिंग मिलने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन किया।
इंटरनेट डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया ने व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफिंग रूम में मंगलवार को पहली बार पत्रकारों का सामना किया। करीब 14 मिनट की इस ब्रीफिंग में उन्होंने सिर्फ तीन मीडिया संस्थानों से सवाल लिए और फिर अचानक सेशन खत्म कर दिया। ब्रीफिंग की शुरुआत में जकारिया ने ट्रंप की जमकर तारीफ की, उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति के साथ काम करने को लेकर सम्मानित महसूस कर रही हैं और लंबे समय से उनके लिए काम करना चाहती थीं। ब्रीफिंग का सबसे चर्चित पल तब आया, जब उनसे पूछा गया कि व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी जैसी व्यस्त जिम्मेदारी के साथ वह अपने चार बच्चों के लिए समय कैसे निकालेंगी। जकारिया ने जवाब में अपने पति का जिक्र किया, उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ शाम का वक्त न बिताना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है, इसी दौरान शब्दों का ऐसा उलटफेर हुआ कि वह ट्रंप को अपना पति कह बैठीं, उन्होंने कहा- मेरे प्रेसिडेंट... माफ कीजिए, मेरे पति... जब जकारिया को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने इसे मजाक में लेते हुए कहा कि यह अच्छा वाला था। इसके तुरंत बाद उन्होंने फिर ट्रंप की तारीफ की और कुछ ही देर में ब्रीफिंग खत्म कर दी। pc- aaj tak
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने दावा किया कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके को अमेरिका से फंडिंग हो रही है। उन्होंने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ काम करने वाले डोनर्स उन्हें आर्थिक मदद दे रहे हैं। हालांकि, इस दौरान ...
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में ट्रंप का क्या लगा है दांव पर? 10 सवालों में समझें
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा है. महंगाई, टैरिफ और ईरान संघर्ष के बीच क्या रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना दबदबा बचा पाएगी? इस चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि अगले दो साल राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियां क्या रहेंगी?
म्यांमार की जेल में 97 दिन बंद रहने के बाद रिहा हुआ पूर्व अमेरिकी मरीन अधिकारी, ट्रंप को दिया श्रेय
वाशिंगटन, 14 अक्टूबर . म्यांमार में 97 दिन तक हिरासत में रहे पूर्व यूएस मरीन एडम कैस्टिलो ने अपनी रिहाई का श्रेय अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप को दिया है. दावा किया कि इस मामले में अगर ट्रंप ने हस्तक्षेप न किया होता तो वो जीवित नहीं होते. उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्रालय पर मदद न करने ... Read more
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष संजय सिंह ने अमेरिकी दूतावास की आलोचना की है।
मैरी मिलबेन का बड़ा दावा: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को अमेरिका से मिल रही फंडिंग? PM मोदी के विरोधियों पर लगाए गंभीर आरोप
New Delhi, 14 अक्टूबर . अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और इसके संस्थापक अभिजीत दिपके से भारतीय युवाओं को आगाह रहने की अपील की है. उनका आरोप है कि Prime Minister Narendra Modi से खौफजदा कुछ अमेरिकी डोनर्स से इस आंदोलन को फंडिंग मिल रही है और इसी आधार पर ये ... Read more
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष संजय सिंह ने अमेरिकी दूतावास की आलोचना की है। लास वेगास में जारी अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए 9 पहलवानों (ग्रीको-रोमन और महिला रेसलिंग कैटेगरी में) को वीजा नहीं दिया गया क्योंकि वह 20 साल से कम उम्र के थे और उनके पास कोई फुल-टाइम नौकरी नहीं थी।
भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत होंगे, किसी बड़ी बाधा की आशंका नहीं : पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और दोनों देशों में राजनीतिक सोच में बदलाव होने के बावजूद यह साझेदारी आगे और मजबूत होती जाएगी।
किशनगंज शहर के ऐतिहासिक रुईधासा मैदान के पास इस बार दुर्गापूजा में भव्यता और कलात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। टाउन क्लब दुर्गा पूजा समिति की ओर से अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर विशाल पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। गगनचुंबी स्वरूप और आकर्षक स्थापत्य शैली के कारण निर्माणाधीन पंडाल अभी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। सड़क से गुजरने वाले लोग भी इसकी भव्यता देखने के लिए ठहर जा रहे हैं। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। हर साल नई थीम से आकर्षित होते हैं श्रद्धालु रुईधासा टाउन क्लब की दुर्गापूजा शहर के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। समिति की ओर से हर साल पंडाल की थीम और सजावट में कुछ नया करने का प्रयास किया जाता है। इस बार मंदिर की स्थापत्य शैली को पंडाल के रूप में उतारा जा रहा है। इसके लिए समिति के सदस्य और स्थानीय युवा दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पंडाल की बाहरी बनावट से लेकर आंतरिक सजावट और रोशनी की व्यवस्था तक विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पंडाल में प्रवेश करते ही मंदिर जैसी भव्यता का एहसास कराना है। विश्वकर्मा पूजा के बाद से ही निर्माण और सजावट का काम जोर पकड़ लेता है। पंडाल निर्माण और सजावट पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहता है। पांच बैंककर्मियों ने 1982 में रखी थी नींव टाउन क्लब की दुर्गापूजा का इतिहास वर्ष 1982 से जुड़ा है। उस समय पांच बैंककर्मियों ने मिलकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की शुरुआत की थी। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ यह आयोजन धीरे-धीरे शहर के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल हो गया। स्थानीय निवासी और पूजा समिति के सदस्य राजेश दुबे के अनुसार, बैंक सेवा से जुड़े पांच साथियों संदीप घोष राय, स्व. बिमल दास, सुनील कुंडू, प्रदीप मजूमदार और गौतम दास ने मिलकर पहली बार यहां दुर्गापूजा का आयोजन किया था। शुरुआत में छोटे स्तर पर आयोजित होने वाली पूजा में समय के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ती गई। आज यह आयोजन सामूहिक सहयोग और आस्था की मिसाल बन चुका है। चार दशक से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा को नई पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है। हर साल नई थीम, आकर्षक सजावट और बेहतर व्यवस्थाओं के जरिए आयोजन को खास बनाने की कोशिश की जाती है। बंगाली विधि-विधान से होती है मां दुर्गा की पूजा भव्य पंडाल के साथ यहां की पारंपरिक पूजा पद्धति भी आयोजन की खास पहचान है। टाउन क्लब में शुरुआत से ही बंगाली विधि-विधान के अनुसार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती रही है। पूजा के दौरान मंत्रोच्चार, पुष्पांजलि और आरती का विशेष महत्व रहता है। मुख्य पुजारी पंडित संजय भट्टाचार्य बताते हैं कि पहले उनके पिता यहां मुख्य पुजारी के रूप में पूजा संपन्न कराते थे। उनके बाद वे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी पीढ़ी दर पीढ़ी निभाई जा रही है। यहां सुबह आठ बजे और शाम छह बजे आरती होती है। इस दौरान मंत्रोच्चार और ढाक की थाप से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा रहेगी अहम दुर्गापूजा के दौरान रुईधासा मैदान के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भीड़ प्रबंधन, सुचारु आवागमन और परिसर में व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। भव्य पंडाल को देखने के लिए शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। टाउन क्लब की दुर्गापूजा की खासियत यह है कि समय के साथ आयोजन का स्वरूप बदलता रहा है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और पारंपरिक पूजा पद्धति आज भी कायम है। अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर बन रहा इस वर्ष का पंडाल किशनगंज के दुर्गोत्सव का प्रमुख आकर्षण बनने की ओर अग्रसर है। भव्यता, परंपरा और सामुदायिक सहभागिता के साथ रुईधासा टाउन क्लब की दुर्गापूजा एक बार फिर शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई चमक देने के लिए तैयार है।
US Navy के स्थापना दिवस पर अमेरिकी नेताओं की अजीबोगरीब गलती से मची सनसनी
अमेरिका में उस समय एक बेहद हास्यास्पद और शर्मनाक स्थिति पैदा हो गई, जब देश के शीर्ष नेताओं, सांसदों और महत्वपूर्ण सरकारी अधिकारियों ने अमरीकी नौसेना (US Navy) के स्थापना दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए सोशल मीडिया पर भारतीय नौसेना के युद्धपोतों (Indian Navy Warships) की तस्वीरें शेयर कर दीं। यूएस नेवी को बधाई देने की जल्दबाजी में अमेरिकी नेताओं ने बिना किसी जांच-परख के ऐसे नौसैनिक जहाजों की फोटो पोस्ट कर दीं, जो अमेरिकी बेड़े का हिस्सा ही नहीं थे। इस ऐतिहासिक मौके पर अपनी ही सेना के जहाजों को न पहचान पाने और भारतीय नौसेना के शक्तिशाली युद्धपोतों की तस्वीरें इस्तेमाल करने को लेकर इंटरनेट पर नेटिजन्स और रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी नेताओं की जमकर क्लास लगाई।INS विक्रमादित्य और INS त्रिकंद की तस्वीरों से भरा सोशल मीडिया, ट्रोल हुए बड़े नेताविवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका के कई जाने-माने रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से नौसेना को बधाई देने वाले ग्राफिक्स और तस्वीरें पोस्ट की गईं। इन पोस्ट्स में अमेरिकी विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) की जगह भारतीय नौसेना के फ्लैगशिप एयरक्राफ्ट कैरियर 'INS विक्रमादित्य' और अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट 'INS त्रिकंद' को प्रमुखता से दिखाया गया था। सोशल मीडिया यूज़र्स और मिलिट्री एनालिस्ट्स ने मिनटों के भीतर इस भारी चूक को पकड़ लिया। रक्षा प्रेमियों ने तुरंत ओरिजिनल तस्वीरों के सोर्स ढूंढ निकाले और अमेरिकी नेताओं को टैग करते हुए लिखा कि जिस नौसेना पर पूरे अमेरिका को गर्व है, उसके नेताओं को अपनी ही नेवी और भारतीय नौसेना के जहाजों में अंतर समझ नहीं आता है।अमेरिकी पीआर टीमों की लापरवाही और एआई जनरेटेड ग्राफिक्स का साइड इफेक्टइस बड़ी गलती के सामने आने के बाद कई अमेरिकी नेताओं को आनन-फानन में अपनी पुरानी पोस्ट डिलीट करनी पड़ी, लेकिन तब तक उनके पोस्ट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुके थे। विश्लेषकों का मानना है कि यह गलती नेताओं की सोशल मीडिया और मीडिया मैनेजमेंट टीमों की घोर लापरवाही का नतीजा है। इंटरनेट पर 'Navy Warship' या 'Aircraft Carrier' सर्च करने पर मिलने वाली पहली कुछ एचडी तस्वीरों में से भारतीय जहाजों की फोटो उठाकर ग्राफिक्स बना दिए गए। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि आधुनिक जनरेटिव एआई टूल्स का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करने से ऐसे भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जहां एआई डिज़ाइनर ने भारतीय जहाजों को अमेरिकी बेड़े के रूप में मिक्स कर दिया।भारतीय नौसेना के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और साख पर मुहरभले ही इस घटनाक्रम से अमेरिकी नेताओं को सोशल मीडिया पर भारी फजीहत और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा हो, लेकिन भारतीय रक्षा प्रेमियों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया। भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य और गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंद की शानदार और आक्रामक तस्वीरें अमेरिकी नौसेना के आधिकारिक बधाई संदेशों में छा जाना भारतीय नौसैनिक ताकत की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। हिंद महासागर में भारतीय नौसेना का दबदबा और उसके बेड़े का आकर्षण ऐसा है कि दुनिया की सबसे ताकतवर माने जाने वाली अमेरिकी नौसेना के प्रचार तंत्र को भी अनजाने में ही सही, भारत के युद्धपोतों का सहारा लेना पड़ा।
ग्रीनलैंड के कुदरती खजाने पर अमेरिका की एंट्री और ट्रम्प का बड़ा ऐलान
आर्कटिक क्षेत्र की भू-राजनीति में एक नया और ऐतिहासिक मोड़ सामने आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने औपचारिक रूप से ऐलान किया है कि ग्रीनलैंड की विशाल बर्फीली चोटियों के नीचे छिपे अटूट प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने के लिए बड़े पैमाने पर तेल, प्राकृतिक गैस और अति-दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की खोज की तैयारी शुरू हो चुकी है। अमेरिकी विशेषज्ञों के हवाले से यह दावा किया गया है कि ग्रीनलैंड की इस बर्फीली जमीन के नीचे आसानी से उपलब्ध होने वाले हाइड्रोकार्बन और कच्चे तेल का ऐसा विशाल भंडार मौजूद है, जो दुनिया के लगभग किसी भी क्षेत्र से अधिक हो सकता है। ट्रम्प की इस घोषणा ने न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजारों को चौंका दिया है, बल्कि यूरोपीय संघ और काकेशस से लेकर वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। ट्रम्प प्रशासन लंबे समय से इस रणनीतिक द्वीप पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा था और अब इस अभियान को व्यावहारिक रूप देना अमेरिकी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है।अमेरिका-डेनमार्क-ग्रीनलैंड सुरक्षा समझौता और रणनीतिक सैन्य प्रभुत्वयह विशाल अन्वेषण अभियान हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हस्ताक्षरित एक नए त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते के तुरंत बाद सामने आया है। इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को मजबूती दी गई है, जिसमें दो नए अमेरिकी सैन्य बेस स्थापित करने और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम (गोल्डन डोम) की तैनाती का मार्ग प्रशस्त हुआ है। हालांकि, इस समझौते में डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड की जनता के स्व-निर्णय के अधिकार को भी स्वीकार किया गया है, लेकिन अमेरिकी रक्षा बलों को मिली खुली छूट ने वाशिंगटन के प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस भौगोलिक स्थिति की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका पर होने वाले किसी भी भावी हमले की अग्रिम निगरानी, रक्षा और सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड सबसे मुफीद लोकेशन प्रदान करता है।तेल, गैस और रेयर अर्थ मिनरल्स का वैश्विक महत्व और तकनीकी चुनौतियांग्रीनलैंड केवल तेल और गैस जैसे पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों का गढ़ नहीं है, बल्कि यहां अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणालियों, सेमीकंडक्टर और ग्रीन टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाले अति-दुर्लभ खनिज प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वर्तमान में चीन का दुर्लभ खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर लगभग एकाधिकार माना जाता है, ऐसे में अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड के संसाधनों तक सीधी पहुंच बनना एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत है। हालांकि, आर्कटिक महासागर के इस दुर्गम इलाके से संसाधनों को निकालना बेहद जटिल और खर्चीला काम है। कई मीटर मोटी बर्फ की परतों, बुनियादी ढांचे की भारी कमी और हाड़ कंपाने वाले मौसम के कारण यहां खनन और वैज्ञानिक ड्रिलिंग कार्य करना तकनीकी रूप से काफी कठिन माना जाता है। इसके बावजूद, वैश्विक बाजार में ऊर्जा मांग को देखते हुए अमेरिकी कंपनियां इस तकनीकी चुनौती को स्वीकार करने के लिए तत्पर हैं।पर्यावरणविदों का विरोध और वैश्विक कूटनीति पर पड़ने वाला असरट्रम्प के इस आक्रामक कदम ने पर्यावरण समूहों, वैज्ञानिकों और जलवायु कार्यकर्ताओं के बीच भारी चिंता पैदा कर दी है। ग्रीनलैंड के बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में तेल और गैस की कमर्शियल ड्रिलिंग से आर्कटिक की ग्लेशियर बर्फ पिघलने की गति तेज होने और समुद्री जीवन को अपरणीय क्षति पहुंचने का खतरा जताया जा रहा है। इसके साथ ही यूरोपीय संघ (EU) के कई देश अमेरिका के इस बढ़ते एकतरफा हस्तक्षेप को लेकर सतर्क हो गए हैं। यद्यपि कानूनी तौर पर डेनमार्क ने अमेरिकी समझौते पर दस्तखत किए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर ग्रीनलैंडवासियों की स्वायत्तता और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर विरोध की आवाजें भी बुलंद हो रही हैं। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमेरिका किस प्रकार पर्यावरणीय चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय तनावों के बीच ग्रीनलैंड के खजाने का वास्तविक दोहन शुरू करता है।
अमेरिकी डोनर्स दे रहे CJP को पैसा! ये दावा करने वाली अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन कौन हैं?
Mary Millben attacks CJP: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके संगठन को अमेरिका में ऐसे डोनर से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व में भारत के भविष्य के खिलाफ हैं। मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील की है कि वे कथित तौर पर देश में अशांति फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठाएं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं।मिलबेन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नई दिल्ली में विपक्षी दलों और CJP के समर्थकों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।PM मोदी के समर्थन में क्या बोलीं मैरी मिलबेन?41 वर्षीय सिंगर मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने मैसेज में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 साल तक भारत की सेवा की है, जिनमें 12 साल PM के रूप में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि PM मोदी लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। उनके अनुसार, वह अमेरिका से आने वाली कथित विघटनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे। मिलबेन ने दावा किया कि कुछ अमेरिकी डोनर दुनियाभर में रूढ़िवादी विचारधारा वाले नेताओं को निशाना बनाने का एक पैटर्न अपनाते हैं।उनके मुताबिक, पहले संबंधित देश के किसी अमेरिकी शिक्षित व्यक्ति को तलाशा जाता है। फिर उसे कट्टर विचारों की ओर प्रेरित कर वापस भेजा जाता है और उसके बाद कथित तौर पर अशांति फैलाने के लिए फंडिंग की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों का असर संबंधित देशों के विकास और शासन व्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, अमेरिकी डोनर से CJP को फंडिंग मिलने के अपने दावे के समर्थन में मिलबेन ने इस बयान में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया।युवाओं से की शांतिपूर्ण आंदोलन की अपीलमैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए ऐसे आंदोलनों के मुकाबले एक शांतिपूर्ण जनआंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी नई आवाज उठनी चाहिए, जो देश की मिट्टी में पैदा हुई हो, यहीं पली-बढ़ी हो और यहीं शिक्षित हुई हो। उनके मुताबिक, युवाओं को संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।भारत में क्यों लोकप्रिय हैं मैरी मिलबेन?मैरी मिलबेन अफ्रीकी-अमेरिकी हॉलीवुड अभिनेत्री और मशहूर सिंगर हैं। भारत में वह खास तौर पर भारतीय राष्ट्रगान 'जन गण मन' और भक्ति गीत 'ओम जय जगदीश हरे' की अपनी प्रस्तुतियों के लिए लोकप्रिय हैं। वर्ष 2023 में अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में भी उन्होंने भारत का राष्ट्रगान गाया था। इस वजह से भारतीय दर्शकों के बीच उनकी पहचान बनी है। इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर में जबरन घुसने के आरोप में CJP के दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश में अघोषित आपातकाल लागू कर रहे हैं। To all the beautiful young patriots in India:This is not the time to be silent. @abhijeet_dipke and the @Cockroachisback are being funded by donors in the U.S. who are against Prime Minister @NarendraModi and your future under his leadership. Do not fear, my young patriots. Your Prime Minister, who has served India for 25 years, 12 years as Prime Minister, elected three consecutive terms, is not going to bow to disruptive forces from my country.And these select donors have a pattern globally - target conservative global leaders, find an U.S. educated person from the country, radicalize them, send them back to the country, and fund them to start chaos and destruction. None of them have been successful but have impacted the development and governance of the country.It is time for a new voice in #India, born, raised, educated on the soil of India, to RISE UP, organize, and peacefully protest the disruptive spirit of the Cockroach Party. There should always be a counter movement to uphold democracy and freedom.Rise up, young patriots! Rise up!— Mary Millben (@MaryMillben) October 14, 2026 दीपके ने नागपुर में पत्रकारों से कहा कि CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर कौन सा अपराध कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शांति बनाए रखने के मुचलके के उल्लंघन और प्रदर्शन के लिए गैर-अधिसूचित क्षेत्र घोषित किए जा चुके जंतर-मंतर पर जबरन घुसने के आरोप में दास और रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
अमेरिका : गुप्त रिकॉर्डिंग के आरोप में ओपनएआई इंजीनियर गिरफ्तार
वाशिंगटन, ओपनएआई में काम करने वाले एक सऊदी अरब के इंजीनियर को कंपनी के सैन फ्रांसिस्को स्थित कार्यालय में छिपा हुआ ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने मंगलवार (स्थानीय समयानुसार) को जानकारी दी कि इंजीनियर ने कार्यालय के एक एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाया था।
अभिजीत दीपके को मोदी के खिलाफ US से हो रही फंडिंग, मशहूर अमेरिकी सिंगर बोलीं
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलिबेन के आरोप हैं कि अमेरिका में कई डोनर्स अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी को फंडिंग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इन डोनर्स का ये काम करने का पैटर्न है, जिसके जरिए नेताओं को निशाना बनाया जाता है।
'CJP receiving funding from the US': Mary Millben alleges a conspiracy to incite unrest in India.
मालिक अमेरिका गया... फ्लैट में ताले काटकर घुस गए चोर!
नोएडा के सेक्टर-50 स्थित द क्रिसेंट अपार्टमेंट के दो बंद फ्लैटों में चोरों ने धावा बोलकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और नकदी चुरा ली. चोर दरवाजे का लॉक काटते हुए सीसीटीवी में कैद हुए हैं. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
'भारत में प्रोटेस्ट की US से हो रही फंडिंग...', अमेरिकी सिंगर ने CJP को लेकर किया ये दावा
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके पर बड़ा आरोप है. अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने दिपके के खिलाफ मोर्चा खोला है. उन्होंने एंटी मोदी विरोध प्रदर्शन को लेकर चेताया है. जानें क्या है पूरा विवाद.
गुप्त रिकॉर्डिंग के आरोप में ओपनएआई इंजीनियर को अमेरिका में किया गया गिरफ्तार
गुप्त रिकॉर्डिंग के आरोप में ओपनएआई इंजीनियर को अमेरिका में किया गया गिरफ्तार
Israel Flight Security: तेल अवीव पहुंची अमेरिकी फ्लाइट को बम की धमकी, इजराइल ने विदेशी पायलटों के लिए सख्त किए नियम
न्यूयॉर्क के एयरपोर्ट पर मोहम्मद यूनुस का रास्ता रोकने और नारेबाजी करने वालों के खिलाफ ढाका सरकार ने कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
एक साल में दूसरी बार भारत आ रहे मार्को रुबियो, लेकिन दिल्ली नहीं जाएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्टूबर में भारत आएंगे। अपने दौरे के दौरान वह मुंबई और जामनगर जाएंगे। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने, ऊर्जा सहयोग बढ़ाने और कारोबार के नए अवसरों पर चर्चा होगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री व्यापार और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने तथा रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए मुंबई और जामनगर की यात्रा करेंगे।
आईआरजीसी नौसेना के कमांडर ने कड़ा रुख अपनाते हुए बयान जारी किया कि वे होर्मुज़ स्ट्रेट में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की मौजूदगी का इंतजार कर रहे हैं ताकि उस पर हमला कर उसे समुद्र में डुबोया जा सके। इसके साथ ही रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह दावा भी दोहराया कि रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस समुद्री मार्ग पर पूरी तरह से ईरान का नियंत्रण स्थापित है।
देहरादून में बैठकर अमेरिका-कनाडा के लोगों को बनाते थे शिकार; नोएडा से सीखा ठगी का खेल
देहरादून में बैठकर अमेरिका और कनाडा के लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 5 लोग अरेस्ट हुए हैं। ये आरोपी एंटीवायरस के नाम पर गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आएंगे भारत, मुंबई और जामनगर के दौरे में ऊर्जा सहयोग पर होगी चर्चा
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भारत आ रहे हैं विदेश मंत्री रूबियो: जामनगर की रिफाइनरी पर अमेरिका की नजर, ऊर्जा सहयोग को लेकर क्या है तैयारी?marco rubio india visit jamnagar refinery energy cooperation
अमेरिका में बच्चे पैरेंट्स की प्रॉपर्टी क्यों नहीं लेते? भारतीय महिला ने बताई वजह; Viral हो रहा Video
ट्रेड डील पर बड़ी उम्मीद, इसी हफ्ते भारत आएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत दौरे पर रहेंगे. इस दौरान व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता किसी निष्कर्ष के करीब पहुंच रही है.
अमेरिका में वोट चोरी असंभव: मतदान का पेपर ट्रेल सबसे बड़ा सुरक्षा कवच, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
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जयशंकर का दो टूक संदेश: अमेरिका से रिश्ते आसान नहीं, चीन को भी संभालना जरूरी; एफटीए पर क्या बोले विदेश मंत्री?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते से जुड़ी एक बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि दोनों देश समझौते के अंतिम रूप देने से पहले मतभेद दूर करने के करीब हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
Maharajganj News: अमेरिकी नागरिक ट्रेविस फेलेन का दूतावास ने भरा जुर्माना, कल होगा रिहा
दूतावास की मदद से उसे अमेरिका भेजा जाएगा।
रूस के आगे फिर नरम पड़ा अमेरिका
रूस से ‘डीजल समझौता’ करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साथ कई समस्याओं से पार पाने का प्रयास किया है। इस समझौते के तहत मॉस्को तुरंत तीन लाख टन डीजल वाशिंगटन को देगा और फिर नवंबर में पांच लाख टन। अगली आपूर्ति में यह आंकड़ा बढ़कर 10 लाख टन तक हो जाएगा…
अमेरिका में माता-पिता बच्चों को क्यों नहीं देते अपनी विरासत? खुद खर्च करते हैं पूरे पैसे, जानिए वजह!
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इस जॉइंट वेंचर का उद्देश्य कई गीगावाट क्षमता वाला मैन्यूफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो भारत और ग्लोबल मार्केट के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करेगा।
अमेरिका में H-1B वीजा विस्तार के नियमों में बदलाव की तैयारी, भारतीय IT पेशेवरों पर पड़ेगा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एच-1बी सहित अन्य कुशल विदेशी कर्मचारियों के वीजा विस्तार के मामलों में पहले दी गई मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, एच-1बी वीजा धारकों के जीवनसाथियों सहित कुछ श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों के कार्य परमिट का स्वत: नवीनीकरण समाप्त करने वाले नियम को अंतिम रूप दे दिया गया है।
Opinion: भारत को बार बार इतने हल्के में क्यों ले रहा है अमेरिका, 'ब्रेकअप' आसान होगा या नहीं?
क्या अमेरिका में लोकल टैलेंट पूरी तरह से भारतीय टैलेंट की जगह ले सकता है? US भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर बनाने में सबसे आगे क्यों है.
IIT दिल्ली से पढ़े दोनों दोस्तों को कुल 1.3 करोड़ रुपये से अधिक की सैलरी वाली नौकरी मिली थी. पर उनका नौकरी में ज्यादा दिन तक मन नहीं लगा.
अमेरिका में एच-1बी वीजा विस्तार के नियमों में बदलाव की तैयारी
वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एच-1बी सहित अन्य कुशल विदेशी कर्मचारियों के वीजा विस्तार के मामलों में पहले दी गई मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही, एच-1बी वीजा धारकों के जीवनसाथियों सहित कुछ श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों के कार्य परमिट ... Read more
अदाणी ग्रुप की AI और डेटा सेंटर इक्विपमेंट बनाने की तैयारी, अमेरिकी कंपनी से मिलाया हाथ
अदाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज और अमेरिकी कंपनी Jabil Inc. ने भारत में AI और डेटा सेंटर के इक्विपमेंट बनाने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियों ने 50:50 जॉइंट वेंचर (JV) बनाने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके जरिए भारत में बड़े पैमाने पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की तैयारी है।प्रस्तावित JV में AI रैक, सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इसके अलावा, पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट, लिक्विड कूलिंग सिस्टम और ट्रांसफॉर्मर भी तैयार होंगे। इन इक्विपमेंट की सप्लाई भारत के साथ दूसरे देशों में भी की जाएगी। हालांकि, इसके लिए दोनों कंपनियों को अंतिम समझौते और जरूरी मंजूरियां लेनी होंगी।AI रैक और सर्वर बनाने की होगी बड़ी क्षमताइस JV के तहत कई गीगावॉट क्षमता वाले AI रैक बनाए जाने की योजना है। ये रैक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम को संभालेंगे। AI से जुड़े कामों में ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल होता है। दोनों कंपनियां उपकरणों की इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग की सेवाएं भी देंगी।2030 तक 8 GW हो सकती है डेटा सेंटर क्षमताभारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक 5 से 8 गीगावॉट पहुंचने का अनुमान है। AI का बढ़ता इस्तेमाल और क्लाउड सेवाओं का विस्तार इसकी बड़ी वजह हैं। डेटा को देश के भीतर रखने की जरूरत से भी इस कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।कंपनियों के मुताबिक, डेटा सेंटर, क्लाउड और AI से जुड़े क्षेत्रों में हाइपरस्केलर्स का प्रस्तावित निवेश 50 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है। वहीं, अगले सात साल में ग्लोबल AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में 3 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा के अवसर का अनुमान है।अदाणी ग्रुप की AI कारोबार में बढ़ेगी पकड़अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि AI के विकास के लिए सिर्फ बेहतर एल्गोरिदम काफी नहीं हैं। इसके लिए ऊर्जा, डेटा सेंटर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग से जुड़ा मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी चाहिए। इस JV से ग्रुप को AI के लिए जरूरी उपकरण बनाने के कारोबार में उतरने का मौका मिलेगा।Jabil के CEO माइक डस्टूर ने कहा कि इस साझेदारी से भारत और दुनिया के दूसरे बाजारों में डेटा सेंटर उपकरणों की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।मंगलवार को BSE पर अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 2.39% चढ़कर ₹2,694 पर बंद हुआ। इसने पिछले 6 महीने में 26.59% का रिटर्न दिया है।Stock in Focus: ड्रोन कंपनी को सरकार से ऑर्डर मिला, फोकस में रहेगा स्टॉकDisclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
सऊदी पर कैसे भारी पड़ रहे हूतियों के सस्ते ड्रोन? अमेरिकी एयर डिफेंस भी फेल
सऊदी अरब के पास अमेरिका के पैट्रियट और THAAD जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम हैं, लेकिन ईरान समर्थित हूती विद्रोही अब भी इनके सुरक्षा घेरे को भेदने में कामयाब हो रहे हैं. यमन से सैकड़ों किलोमीटर दूर रियाद, जेद्दा और अन्य अहम ठिकानों तक हमलों का खतरा पहुंच चुका है.
अदाणी का मास्टरस्ट्रोक! अमेरिकी कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर का एलान, खर्च होंगे 4754239115000 रुपये
अदाणी एंटरप्राइजेज और जेबिल इंक ने भारत में एआई और डेटा सेंटर उपकरण विनिर्माण के लिए 50:50 संयुक्त उद्यम हेतु गैर-बाध्यकारी एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का लक्ष्य भारत की बढ़ती डेटा सेंटर मांग को पूरा करना और वैश्विक एआई कंप्यूटिंग बाजार में अवसरों का लाभ उठाना है।
साउथ बिहार सेंट्रल यूनिवर्सिटी (CUSB) के 7 प्रोफेसर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में वे शामिल हैं। इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ा है। प्रशासन ने इसे शोध और शैक्षणिक उत्कृष्टता में सफलता बताया। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह और कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा ने बधाई दी। कुलपति बोले- ये शैक्षणिक प्रतिष्ठा की मजबूती का उदाहरण कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि ज्ञान संवर्धन और अनुसंधान के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाती है। यह शैक्षणिक प्रतिष्ठा मजबूत करती है। फार्मेसी, भूविज्ञान, भौतिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभागों के शिक्षक इस सूची में हैं। फार्मेसी से प्रो. सुब्रत कुमार भट्टमिश्र, प्रो. विवेक दवे और डॉ. अरुण कुमार तीन प्रोफेसर हैं। उनके योगदान को औषधि विज्ञान और औषधीय पदार्थ विज्ञान के उपक्षेत्र में मान्यता मिली है। यह महत्वपूर्ण सफलता है। भूविज्ञान और ऊर्जा के क्षेत्र में भी चमके शिक्षक भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह को भूवैज्ञानिक एवं भू-स्थानिक अभियांत्रिकी के उपक्षेत्र में सूची में जगह मिली है। वहीं, भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रोहित रंजन शाही को ऊर्जा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए शामिल किया गया है। दोनों प्राध्यापकों की उपलब्धि ने विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में सीयूएसबी की शोध क्षमता को रेखांकित किया है। जैव प्रौद्योगिकी के दो प्राध्यापकों ने भी हासिल की उपलब्धि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार और प्रो. नीतीश कुमार भी विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हुए हैं। इस तरह फार्मेसी विभाग के तीन, भूविज्ञान के एक, भौतिकी के एक और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के दो प्राध्यापकों ने यह उपलब्धि हासिल की है। इन मानकों पर तैयार होती है सूची विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर की ओर से जारी सूची तैयार करने में उद्धरणों की संख्या, एच-सूचकांक, सह-लेखन और समग्र अंक (सी-अंक) जैसे विभिन्न मानकों के मानकीकरण को ध्यान में रखा जाता है। इन मानकों के माध्यम से वैज्ञानिकों के प्रकाशित शोधपत्रों और उनके शोध कार्यों के प्रभाव का आकलन किया जाता है। सीयूएसबी के सात प्राध्यापकों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध और अकादमिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे संस्थान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूती मिलने के साथ ही भावी शोधकर्ताओं को भी नई उपलब्धियां हासिल करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
अमेरिका से पढ़कर लौटी बेटी सहेज रही एक-एक बूंद, अब तक 80 तालाबों को दे चुकी हैं नया जीवन
शुभी केसरवानी ने गुरुजल संस्था के माध्यम से गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी में 80 तालाबों के पुनरुद्धार के लिए डीपीआर तैयार कर प्रशासन को सौंपी है।
विरोधाभासी चरित्र से अमेरिका पर भरोसा कठघरे में
अमेरिका पर भरोसा कठघरे में The post विरोधाभासी चरित्र से अमेरिका पर भरोसा कठघरे में appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
इंटरनेट डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के देशों को रूस से तल नहीं खरीदने की कहते हैं और अब खुद ने ही रूस से डीजल खरीदने की डील फाइनल कर ली। रूस के साथ डीजल डील करके ट्रंप निशाने पर आ गए हैं, ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस समझौते का बचाव किया है। विशेष बात ये है कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने भी इस समझौते का विरोध किया था। दोनों पार्टियों ने कहा कि रूस के तेल का आयात अमेरिकी कानून का उल्लंघन है, जो इसे प्रतिबंधित करता है। जब तक रूस यूक्रेन के खिलाफ आक्रामक अभियान नहीं बंद करता, तब तक ये आयात अवैध ही रहेगा। मीडिया रिपोटर्स की माने तो ट्रंप ने कहा कि तेल की ऊंची कीमतों को नियंत्रण में लाने के लिए उन्होंने आयात मंजूरी दी है, जिसके चलते तीन नवंबर को होनेवाले मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी पर संकट था। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी लोगों के लिए मैंने सही विकल्प चुना है- हमेशा, अमेरिका पहले रहेगा। pc- telanganatoday.com
राष्ट्रपति ली : अमेरिका के साथ गठबंधन अहम
सोल, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने मंगलवार को अमेरिका के साथ अपने देश के गठबंधन को बेहद अहम बताते हुए कहा कि कूटनीति में किसी भी तरह के दब्बूपन या दूसरे देश के सामने झुकने की नीति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की विदेश नीति का मूल सिद्धांत व्यावहारिकता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।
सोल, 13 अक्टूबर . दक्षिण कोरिया के President ली जे म्युंग ने Tuesday को अमेरिका के साथ अपने देश के गठबंधन को बेहद अहम बताते हुए कहा कि कूटनीति में किसी भी तरह के दब्बूपन या दूसरे देश के सामने झुकने की नीति से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की विदेश नीति का ... Read more
मशहूर अमेरिकी टीवी सीरीज ब्रेकिंग बैड में वॉल्टर व्हाइट के बेटे का किरदार निभाने वाले अभिनेता आरजे मिटे की 34 साल की उम्र में मौत हो गई। अमेरिकी एंटरटेनमेंट वेबसाइट TMZ ने आरजे मिटे के रिप्रेजेंटेटिव के हवाले से बताया कि एक्टर ने सोमवार को टेक्सास में आत्महत्या की। जन्म के समय हुई थी दिमाग को चोट आरजे मिटे का पूरा नाम रॉय फ्रैंक मिटे तृतीय था। उनका जन्म 21 अगस्त 1992 को अमेरिका के मिसिसिपी राज्य के जैक्सन शहर में हुआ था। जन्म के समय उनकी हालत गंभीर थी। उन्हें इमरजेंसी सिजेरियन ऑपरेशन से पैदा किया गया था। जन्म के समय वह सांस नहीं ले रहे थे। इसके कारण उनके दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा था। जन्म के कुछ हफ्तों बाद उन्हें रॉय फ्रैंक मिटे जूनियर और डायना मिटे ने गोद लिया था। जब वह सिर्फ दो महीने के थे, तब उनके माता-पिता अलग हो गए। इसके बाद उनकी मां ने उनकी परवरिश की। उनका बचपन लुइसियाना के लाफायेट और टेक्सास के ऑस्टिन शहरों में बीता। बचपन में पैरों पर लगाए गए थे प्लास्टर मिटे को तीन साल की उम्र में सेरेब्रल पाल्सी होने का पता चला। सेरेब्रल पाल्सी का मतलब है कि उन्हें बचपन से चलने-फिरने और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में परेशानी होती थी। उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल हॉलीवुड में दिव्यांग कलाकारों के अधिकारों की आवाज उठाने के लिए किया था। डॉक्टरों ने उनके पैरों को सीधा करने के लिए छह महीने तक प्लास्टर लगाया था। बचपन में वह पैरों में सपोर्ट लगाने वाले उपकरणों और बैसाखियों की मदद से चलते थे। हालांकि, खेल और एक्सरसाइज की मदद से धीरे-धीरे उनका शरीर मजबूत हुआ। किशोरावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें चलने के लिए इन उपकरणों की जरूरत नहीं रही। जब मिटे 13 साल के थे, तब उनकी मां लकवाग्रस्त हो गईं। इसके बाद उन्होंने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालनी शुरू कर दी। उस समय उनकी छोटी बहन भी परिवार का हिस्सा थीं। इतनी कम उम्र में उन्होंने परिवार की मदद के लिए काम करना शुरू किया। ‘ब्रेकिंग बैड’ से मिली दुनिया भर में पहचान मिटे ने अपने करियर की शुरुआत छोटे रोल से की थी। वह डिज्नी के शो ‘हाना मोंटाना’ में भी नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। जल्द ही उन्हें अमेरिकी टीवी सीरीज ‘ब्रेकिंग बैड’ में वॉल्टर व्हाइट जूनियर का किरदार मिला। इस सीरीज में उनके किरदार को भी सेरेब्रल पाल्सी था और वह बैसाखियों की मदद से चलता था। हालांकि, असल जिंदगी में उस समय मिटे को बैसाखियों की जरूरत नहीं थी। सीरीज में उन्होंने ब्रायन क्रैंस्टन और अन्ना गन के साथ काम किया। दोनों ने उनके ऑन-स्क्रीन माता-पिता का किरदार निभाया था। इस शो में उनके अभिनय को दिव्यांग लोगों की बेहतर पहचान और प्रतिनिधित्व के लिए भी सराहा गया। फिल्मों और टीवी में भी किया काम ‘ब्रेकिंग बैड’ के अलावा मिटे ने ‘द ओक रूम’, ‘ट्रायम्फ’, ‘द गार्डियंस ऑफ जस्टिस’ और ‘द अनसीन’ जैसी फिल्मों और सीरीज में काम किया। 2019 में आई फिल्म ‘स्टैंडिंग अप फॉर सनी’ में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। ब्रायन क्रैंस्टन ने जताया दुख 'ब्रेकिंग बैड' के लीड एक्टर ब्रायन क्रैंस्टन ने मिटे के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि कुछ हफ्ते पहले ही दोनों लंच पर मिलने की योजना बना रहे थे। क्रैंस्टन ने लिखा, “आज रात यह लिखते हुए मैं गहरे दुख में हूं। ब्रेकिंग बैड में मेरे प्यारे बेटे आरजे मिटे का निधन हो गया।” उन्होंने लिखा, “जब वह सिर्फ 14 साल के थे, तब मैं उनसे मिला था। उन्हें वॉल्टर व्हाइट जूनियर के किरदार के लिए चुना गया था। उन्होंने यह भूमिका खुशी और उत्साह के साथ निभाई।” क्रैंस्टन ने कहा, “सेरेब्रल पाल्सी के साथ जन्म लेने के बावजूद, आरजे ने कभी इस चुनौती को किसी काम के लिए बहाना नहीं बनने दिया।” उन्होंने आगे लिखा, “उन्होंने शूटिंग के कठिन शेड्यूल का पूरी दृढ़ता से सामना किया। वह अपनी टीवी मां अन्ना गन और मुझसे मिली सलाह हमेशा सुनते थे, लेकिन किशोर होने के नाते, वह कभी-कभी शरारत से हमारी सलाह नजरअंदाज भी कर देते थे। वह मुश्किल तरीके से सीखना चाहते थे। वह एक हिट टीवी शो के सितारों में से एक थे, लेकिन फिर भी एक बच्चे थे।” क्रैंस्टन ने कहा कि जब मिटे टीम से जुड़े थे, तब वह अभिनय में कच्चे थे। बाद में वह एक बेहतरीन अभिनेता बने। उन्होंने कहा कि मिटे ने शो में अपने अनुभव का इस्तेमाल दिव्यांग कलाकारों के लिए खुलकर आवाज उठाने में किया। क्रैंस्टन ने लिखा, “उनकी सारी उम्मीद और क्षमता अब खो गई है। यह जानना बेहद दुखद है कि उन्होंने अपनी जान ले ली। क्यों?”
अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन से रिपब्लिकन पर मेहरबान हुए मस्क
दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क ने साल 2026 के अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बनाए रखने के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है। चुनाव अभियान से जुड़े वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, मस्क अब तक लगभग 366 मिलियन डॉलर खर्च कर चुके हैं। इसमें से 276 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम राशि …
बांग्लादेश के पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट पर बांग्लादेशी प्रवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. एक व्यक्ति ने उन्हें आतंकवादी तक कहा और बांग्लादेश के राजनीतिक संकट में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए.
सऊदी अरब पर हूतियों के हमले रोकने में अमेरिका मदद क्यों नहीं कर रहा, ये हैं चार कारण
सऊदी अरब इतने हमले झेल रहा है, ऐसे में ज़्यादातर लोगों के मन में यही सवाल है कि अमेरिका उसकी मदद क्यों नहीं कर रहा है?
भारत विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान उमर के घर एफबीआई की छापेमारी, ट्रंप ने भी साधा निशाना
अमेरिकी सांसद इल्हान उमर के घर FBI की तलाशी से सियासी विवाद बढ़ा। ट्रंप ने आरोपों पर प्रतिक्रिया दी, जबकि डेमोक्रेट नेताओं ने चुनाव से पहले कार्रवाई पर सवाल उठाए।
बदलती वैश्विक व्यवस्था: ऋषि सुनक बोले- भारत अपना रास्ता खुद तय करने में सक्षम, अमेरिका और चीन पर क्या कहा?- Rishi Sunak said India will no longer guided US and China it will make decisions based on its own interests
अमेरिका में भारतीय टेक वर्कर्स को बड़ा झटका, 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड और वीजा बैन
अमेरिका में बसने और स्थायी निवासी (Permanent Resident) बनने का सपना देख रहे भारतीय आईटी पेशेवरों और कुशल टेक वर्कर्स के लिए अमेरिकी आव्रजन और श्रम विभाग से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार और लेबर डिपार्टमेंट (US Department of Labor) ने आव्रजन नियमों, वेतन मानकों और रोजगार शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में कुल 8 प्रमुख टेक कंपनियों और आईटी कंसल्टिंग फर्मों पर बड़ा शिकंजा कस दिया है।प्रशासन ने इन 8 चिह्नित कंपनियों के माध्यम से प्रोसेस होने वाले 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM Certification) और ग्रीन कार्ड (Green Card) के आवेदनों को रोक दिया है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और लेबर विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई के बाद इन कंपनियों में कार्यरत हजारों भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, सिस्टम एनालिस्ट्स और डेटा साइंटिस्ट्स के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।किन 8 कंपनियों पर गिरी अमेरिकी प्रशासन की गाज, जानिए क्या हैं उन पर लगे गंभीर आरोपअमेरिकी अधिकारियों द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिन 8 कंपनियों पर यह प्रतिबंध लगाया गया है उनमें कई प्रमुख आईटी परामर्श, आउटसोर्सिंग और स्टाफिंग फर्में शामिल हैं जो मुख्य रूप से भारत और एशियाई देशों से कुशल श्रमिकों को अमेरिका बुलाती रही हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे अमेरिकी आव्रजन कानूनों की कमियों का फायदा उठाकर स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों की अनदेखी कर रही थीं और विदेशी श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन (Prevailing Wage) से कम का भुगतान कर रही थीं।इसके अलावा, लेबर डिपार्टमेंट ने अपनी जांच में पाया कि इनमें से कुछ कंपनियों ने PERM प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेज पेश किए और स्पॉन्सर्ड ग्रीन कार्ड पदों के लिए योग्य अमेरिकी नागरिकों के आवेदनों को जानबूझकर खारिज किया। इस प्रकार के गैर-कानूनी आचरण पर लगाम लगाने के लिए ही अमेरिकी श्रम विभाग ने इन कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाए हैं।भारतीय आईटी पेशेवरों पर क्या पड़ेगा सीधा प्रभाव, जानिए क्या बदलेगा अबअमेरिका में कार्य कर रहे भारतीय कर्मचारियों के लिए यह फैसला एक बड़े दोहरे झटके की तरह सामने आया है। भारत से आने वाले आईटी प्रोफेशनल अमूमन H-1B वीजा पर अमेरिका जाते हैं और इसके बाद वे वहां ग्रीन कार्ड (PERM प्रोसेस) के लिए अपनी नियोक्ता कंपनी के माध्यम से आवेदन दाखिल करते हैं।इस नई प्रशासनिक रोक का मतलब यह है कि जो भारतीय कर्मचारी इन 8 ब्लैकलिस्टेड कंपनियों में काम कर रहे हैं, उनका ग्रीन कार्ड का इंतजार अब अनिश्चितकाल के लिए लटक गया है। इतना ही नहीं, यदि इन कर्मचारियों का H-1B वीजा अपनी अधिकतम 6 साल की सीमा पूरी करने वाला है और उनका PERM सर्टिफिकेशन अटका रहता है, तो उन्हें अमेरिका छोड़कर भारत वापस लौटना पड़ सकता है या फिर तुरंत किसी दूसरी मान्यता प्राप्त अमेरिकी कंपनी में अपनी नौकरी ट्रांसफर करानी होगी।क्या हैं प्रभावित भारतीय टेक वर्कर्स के पास कानूनी विकल्प, एक्सपर्ट्स की क्या है राय?अमेरिकी इमिग्रेशन वकीलों और लीगल एक्सपर्ट्स ने प्रभावित कर्मचारियों को घबराने के बजाय त्वरित और रणनीतिक कदम उठाने की सलाह दी है। यदि कोई कर्मचारी इन प्रतिबंधित कंपनियों में से किसी एक में कार्यरत है, तो उसके पास सबसे पहला और सुरक्षित रास्ता यह है कि वह जल्द से जल्द किसी ऐसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी का रुख करे जिसका PERM रिकॉर्ड बेदाग हो।दूसरा विकल्प यह है कि कर्मचारी यदि संभव हो तो O-1 वीजा या EB-1B/EB-2 NIW (National Interest Waiver) जैसी उच्च श्रेणी की वीजा कैटेगरी में शिफ्ट होने का प्रयास करें, जिनमें कंपनी के स्पॉन्सरशिप की आवश्यकता कम या अलग होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद आव्रजन नियमों में आ रही यह सख्ती यह साफ संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में अमेरिका में विदेशी टेक वर्कर्स के लिए कानूनी मानक और अधिक कड़े होने वाले हैं।
'फ्रांस प्रोटेस्ट के पीछे वामपंथी, भारत अगला टारगेट!', अमेरिकी पत्रकार ने चेताया
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट ने फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की है, जिनमें लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट संगठनों के शामिल होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं कि ये प्रदर्शन विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए बढ़ाए जा रहे हैं.
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव:जनता ट्रंप से नाराज...सुरक्षित सीटों पर भी कड़ा मुकाबला;बहाए जा रहे करोड़ों डॉलर
Kroger Layoffs: अमेरिकी ग्रॉसरी चेन में फिर छंटनी की तैयारी, 3000 जॉब हो सकती हैं कट
ग्रॉसरी यानि कि किराना सामान बेचने वाली अमेरिकी कंपनी क्रोगर अपने काम के तरीकों में AI को शामिल कर रही है। इसके चलते कंपनी अगले 3 सालों में लगभग 3,000 कॉरपोरेट रोल कम करने की योजना बना रही है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह बात क्रोगर के CEO ग्रेग फोरन ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में कही है। कंपनी के इस कदम के बारे में सबसे पहले ब्लूमबर्ग न्यूज ने खबर दी थी। फोरन ने मेमो में लिखा कि क्रोगर को एक जैसा काम दोबारा करने से बचना चाहिए और टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल बिठाना चाहिए। नौकरियों में कटौती से कंपनी को कीमतें कम करने और स्टोर में काम करने वाले कर्मचारियों पर निवेश करने में मदद मिलेगी।फोरन ने फरवरी में क्रोगर के CEO का पद संभाला था। फोरन ने मेमो में कहा कि नौकरियों में कटौती के बारे में डिटेल आने वाले महीनों में शेयर की जाएगी। इस कदम से कंपनी के 8,200 कॉरपोरेट कर्मचारियों में से लगभग 37 प्रतिशत प्रभावित होंगे। पिछले साल जून में, कंपनी ने लगभग 1,000 कॉरपोरेट रोल कम किए थे।पिछले महीने AI रणनीति पर डाली थी रोशनीपिछले महीने क्रोगर ने अपनी AI रणनीति के बारे में बताया था। इसमें काम के तरीकों को मैनेज करने के लिए मॉडल्स का इस्तेमाल और AI शॉपिंग असिस्टेंट जैसे टूल को बेहतर बनाने के लिए कस्टमर डेटा का इस्तेमाल शामिल है। कंपनी अपनी सालाना 'आइडेंटिकल सेल्स' का टारगेट भी कम कर चुकी है। क्रोगर, वॉलमार्ट और एल्डी जैसे प्रतिस्पर्धियों से बेहतर मुकाबला करने के लिए कीमतें कम करना चाहती है। पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के दबाव में ग्राहक अब ज्यादा सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं।
आ गई भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी, चीन-अमेरिका-ब्रिटेन सब छूट जाएंगे पीछे
IMF On India GDP Growth: चीन हो, अमेरिका हो या फिर रूस और ब्रिटेन, भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार के आगे कोई टिकने वाला नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने एक बार फिर इंडियन इकोनॉमी की तेज रफ्तार पर अपनी मोहर लगाई है.
Elon Musk: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ₹3,500 करोड़ झोंकने की तैयारी, ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के लिए चला रहे बड़ा अभियान
इल्हान उमर के घर एफबीआई की छापेमारी: भारत विरोधी हैं अमेरिकी सांसद, ट्रंप लगा चुके हैं भाई से शादी का आरोप- FBI raids Ilhan Omar home US lawmaker is anti-India Trump has alleged she married her brother
किम जोंग से मिलने के लिए ट्रंप उत्साहित: कब हो सकती है दोनों की मुलाकात? हूतियों पर भी बोले अमेरिकी राष्ट्रपति- Kim Jong Un and Donald Trump may meet in November indications given of military action against Houthis
Saudi Arabia vs Houthis: अमेरिकी हथियारों के बावजूद हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा सऊदी अरब? ड्रोन-मिसाइलों ने बढ़ाई चुनौती
अमेरिका में बदलाव की मांग: कटघरे में न्यूयॉर्क पुलिस की बलप्रयोग नीति, ममदानी ने क्यों दिए समीक्षा के निर्देश?- Mayor Mamdani tightens screws on NYPD Use-of-force policies to be investigated what prompted this decision
36.6 करोड़ डॉलर का चुनावी चंदा! अमेरिका में सवालों के घेरे में एलन मस्क
टेक्नोलॉजी दिग्गज एलन मस्क अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा 'स्टारलिंक' को भारत के बाजार में उतारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं अमेरिका में, सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने रिपब्लिकन पार्टी को जिताने के लिए मस्क द्वारा 36.6 करोड़ डॉलर खर्च किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है.
Maharajganj News: अमेरिकी नागरिक ट्रेविस फेलेन को जेल में बिताई अवधि व पांच हजार जुर्माने की सजा
135 दिन में सीजेएम कोर्ट का फाइनल जजमेंट, फरेंदा के छतरी चौराहे से 30 मई को हुई थी गिरफ्तारी
'कुछ लोगों की हरकतों से विश्वसनीयता को पहुंच सकता है नुकसान', विदेश सचिव ने अमेरिका को लिया आड़े हाथ
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने टैलेंट मोबिलिटी इकोसिस्टम की विश्वसनीयता पर चिंता जताई, खासकर अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा कुछ कंपनियों को निलंबित करने के बाद।
पश्चिम बंगाल: 'भारत पर अमेरिका का भरोसा, हर क्षेत्र में बढ़ा रहे सहयोग'; राजदूत सर्जियो गोर ने क्या-क्या कहा?
अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर अमेरिकी प्रतिबन्ध, ‘न्याय व्यवस्था पर आघात’
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा एक संस्थान के तौर पर अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर प्रतिबन्ध थोपे जाने की कठोर निन्दा की है और चिन्ता जताई है कि इस स्थिति में कोर्ट के लिए अपने दायित्वों को निभाने की क्षमता पर असर होगा.
'अमेरिका से सशर्त होगी परमाणु वार्ता', ईरान बोला- पुरानी स्थिति में नहीं लौटेंगे
ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के दरवाजे खुले रखे हैं, लेकिन साफ किया है कि बातचीत पुरानी परिस्थितियों में नहीं होगी और वह बीते अनुभवों को ध्यान में रखेगा।
कोलकाता, 12 अक्टूबर . India में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर कोलकाता के दौरे पर हैं. पश्चिम बंगाल में बड़े ही धूमधाम के साथ दुर्गापूजा का त्योहार मनाया जाता है. इस मौके पर अमेरिकी राजदूत ने कोलकाता में दुर्गापूजा पंडाल का भी दौरा किया और तस्वीरें साझा कर सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दी. सर्जियो ... Read more
अमेरिका में चुनावी गड़बड़ी के आरोप, 3 पाकिस्तानी नागरिक समेत 16 लोगों पर कार्रवाई
वॉशिंगटन, 12 अक्टूबर . अमेरिका में होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से एक महीने से भी कम समय बचा है. न्याय विभाग ने चुनाव से जुड़े मामलों में तीन Pakistanी नागरिकों समेत 16 लोगों के खिलाफ आरोपों की घोषणा की है. इन मामलों में अवैध मतदान, फर्जी मतदाता पंजीकरण, अमेरिकी नागरिक होने का झूठा दावा ... Read more
विश्व राजनय में विडंबना या विरोधाभास की पराकाष्ठा बेहद दुखद और शर्मनाक है। अमेरिका ने रूस के साथ डीजल आयात के लिए समझौता किया है। वह रूस से पहले ही यूरेनियम और उर्वरक आयात करता रहा है। स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने…
Woman Comes Alive: अमेरिका में अंतिम संस्कार से ठीक पहले जिंदा हुई महिला, लोगों ने दोबारा से पहुंचाया हॉस्पिटल
इन दो 2 अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को मिला Economics का नोबेल पुरस्कार
इंटरनेट डेस्क। इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के विजेताओं के नाम का भी ऐलान हो गया है। इस बार का ये पुरस्कार अमेरिकी अर्थशास्त्रियों रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड को दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने आज विजेताओं के नाम का ऐलान किया है। दोनों को इस पुरस्कार के तहत कुल 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी 11.5 करोड़ रुपए प्रदान की जाएगी। ये राशि दोनों को आपस में बराबर बांटनी होगी। खबरों के अनुसार, 2026 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दोनों को ऐसे आर्थिक मॉडल विकसित करने के लिए दिया गया है, जिनसे मंदी और महंगाई जैसी समस्याओं से निपटने के लिए बेहतर नीतियां बनाने में सहायता मिलेगी। अर्थशास्त्रियों की उनकी रिसर्च बताती है कि लोगों के खर्च और कंपनियों के फैसले अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं। इससे सरकारों और केंद्रीय बैंकों को यह समझने में सहायता मिलेगी कि आर्थिक संकट के समय कौन-से कदम उठाए जाने चाहिए। PC:livehindustan अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
अमेरिका के एडमिरल पापारो ने वाइस एडमिरल विनीट मैककार्टी से की मुलाकात
New Delhi, 12 अक्टूबर India और अमेरिका ने अपने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अमेरिका की पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो ने अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी से मुलाकात की है. इस ... Read more
अमेरिका: टूटे एंकल के इलाज के लिए अस्पताल गई 21 वर्षीय छात्रा की मौत
अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य में पैर का टखना टूटने पर इलाज कराने गई 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा की पेनकिलर्स के ओवरडोज़ के कारण मौत हो गई। मृतका डेल एलिस मार्टिन टेक्सास की ट्रिनिटी यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी और इतिहास की पढ़ाई कर रही थीं। उनके परिवार ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अदालत …
IIT कानपुर से पढ़े भारतीय मूल के देव गौतम अमेरिका में 2 साल से फुल टाइम जॉब के लिए भटक रहे हैं।
इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दो अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को मिला है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने सोमवार को इसकी घोषणा की। रॉबर्ट ई हॉल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और माइकल वुडफोर्ड कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
अमेरिकी सरकार के नए आदेश के बाद यूनिवर्सिटी ने बंद की लॉ एक्सटर्नशिप
अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे और भविष्य में वहां जाने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और निराश करने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वर्क परमिट और ऑफ-कैंपस ट्रेनिंग से जुड़े नियमों में हाल ही में किए गए कड़े बदलावों और नए दिशानिर्देशों के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल (HLS) ने बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय जेडी (J.D.) छात्रों के लिए अपनी सभी 13 लॉ एक्सटर्नशिप क्लिनिक प्रोग्राम्स में काम करने की मंजूरी (वर्क ऑथराइजेशन) को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इस फैसले का सीधा असर अमेरिका में पढ़ रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों पर पड़ा है, जिनमें भारतीय छात्रों की संख्या भी अच्छी-खासी है। अमेरिकी सरकार द्वारा करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (CPT) के नियमों को सख्त किए जाने के बाद यूनिवर्सिटी को कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह कदम उठाना पड़ा है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी लॉ फर्मों, सरकारी एजेंसियों और गैर-लाभकारी संगठनों में प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करने के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं।अमेरिकी सरकार के कड़े नियम और CPT वर्क ऑथराइजेशन पर लगा ब्रेकअमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए फेडरल गाइडलाइन के अनुसार, विदेशी छात्रों को ऑफ-कैंपस वर्क परमिट यानी सीपीटी (Curricular Practical Training) देने के मानकों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को केवल उन्हीं वर्क प्रोग्राम्स में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है जो उनके डिग्री पाठ्यक्रम के लिए पूरी तरह से अनिवार्य हों। हार्वर्ड लॉ स्कूल में एक्सटर्नशिप क्लिनिक एक वैकल्पिक यानी इलेक्टिव कोर्स का हिस्सा थे, जिसके कारण नए नियमों के तहत विदेशी छात्रों को इन क्लिनिक्स में काम करने के लिए ऑथराइजेशन देना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता था। इस कड़े रुख के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 13 प्रमुख एक्सटर्नशिप प्रोग्राम्स से बाहर रखने का फैसला लिया है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने यह स्पष्ट किया है कि एलएलएम (LL.M.) प्रोग्राम के छात्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जेडी (J.D.) डिग्री ले रहे भारतीय व अंतरराष्ट्रीय छात्र इससे सीधे प्रभावित हुए हैं।भारतीय छात्रों के करियर पर बड़ा असर और प्रैक्टिकल एक्सपीरिएंस का संकटअमेरिका में कानून की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एक्सटर्नशिप केवल क्रेडिट हासिल करने का जरिया नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वे अमेरिकी कानूनी प्रणाली, शीर्ष अदालतों, बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनियों और मानवाधिकार संगठनों में काम करने का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते थे। हार्वर्ड के इस फैसले के बाद भारतीय छात्रों को अब केवल यूनिवर्सिटी के इन-हाउस (ऑन-कैंपस) क्लिनिकल प्रोग्राम्स तक ही सीमित रहना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रैक्टिकल अनुभव के बिना अमेरिकी जॉब मार्केट में प्रवेश करना और पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां वर्क वीजा (H-1B) हासिल करना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जो छात्र प्रैक्टिकल अनुभव के लिए ऑप्टेशनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) का इस्तेमाल करेंगे, उनका पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क टाइम कोटा समय से पहले ही खत्म हो जाएगा, जिससे उनका करियर प्लान पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है।अमेरिकी नीतियों में बदलाव और वैश्विक उच्च शिक्षा का बदलता परिदृश्यपिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन द्वारा छात्र वीजा (F-1 वीजा) और उससे जुड़ी रोजगार नीतियों में लगातार सख्ती बरती जा रही है। केवल हार्वर्ड ही नहीं, बल्कि अमेरिका की कई अन्य प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ भी इन नए फेडरल नियमों की वजह से अपने इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम्स और वर्क परमिट पॉलिसी में बदलाव करने पर मजबूर हो रही हैं। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के मन में असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। लाखों रुपये की फीस और भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर अमेरिका पढ़ने जाने वाले छात्रों के सामने अब पढ़ाई के साथ-साथ वर्क एक्सपीरियंस हासिल करने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी नीतियां इसी तरह सख्त होती रहीं, तो भारतीय छात्र अमेरिका के बजाय ब्रिटेन, कनाडा या यूरोप के अन्य देशों का रुख कर सकते हैं।
TCS का दावा: अमेरिका में आईटी कंपनियों को देश के आधार पर नहीं बनाया जा रहा निशाना
देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मानना है कि अमेरिका की ओर से प्रौद्योगिकी कंपनियों को उनके देश के आधार पर निशाना बनाए जाने के आसार नहीं हैं। पिछले सप्ताह ग्रीन कार्ड आवेदन कार्यक्रम को निलंबित करने जैसे कदम स्थानीय स्तर पर रोजगार को लेकर संवेदनशीलता के कारण उठाए गए हैं। टीसीएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने कहा कि कंपनियां अमेरिका के प्रौद्योगिकी तंत्र में गहराई से जुड़ी हुई हैं और महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। कृतिवासन ने यहां कंपनी के कॉरपोरेट मुख्यालय में ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि सरकारें वास्तव में कंपनियों के देश के आधार पर इस मुद्दे को देखेंगी। मेरा मानना है कि सरकारें रोजगार के नजरिये से विचार कर रही हैं।’’उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को लेकर संवेदनशीलता के कारण सरकारें टीसीएस समेत आठ कंपनियों के खिलाफ पिछले सप्ताह की गई कार्रवाई जैसे कदम उठा रही होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले सप्ताह के फैसले का टीसीएस पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। सीईओ ने कहा कि टीसीएस अपने ग्राहकों की मांग के अनुसार कर्मचारियों को अमेरिका भेजती रही है। कंपनी ने पिछले साल केवल करीब 10 ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि एच-1बी वीजा के लिए कुल आवेदन भी 300 से कम थे। एच-1बी वीजा के कई आवेदन उन लोगों के थे, जो पहले से ही अमेरिका में रह रहे हैं। इससे उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत से किसी नए कर्मचारी को अमेरिका नहीं भेजा गया था। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव और कंपनी के नजरिये के बारे में पूछे जाने पर कृतिवासन ने कहा कि टीसीएस अमेरिका में दीर्घकालिक रणनीति के साथ काम कर रही है। अमेरिका राजस्व के लिहाज से उसका सबसे बड़ा बाजार है और चुनाव के नतीजों से उसकी रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में टीसीएस कारोबार करती है, वहां की गतिविधियों में पूरी तरह शामिल होने के प्रयास के तहत कंपनी स्थानीय लोगों को नौकरी देने पर ध्यान देती है। अमेरिका में कंपनी के 30,000 से अधिक कर्मचारियों में आधे से ज्यादा स्थानीय लोग हैं। अमेरिका में अगले पांच साल में 15,000 और लोगों को रोजगार देने की पहले की गई घोषणा के बारे में पूछे जाने पर टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमण्यम ने कहा कि कंपनी कौशल संबंधी जरूरतें पूरी करने वाले विविध पृष्ठभूमि के लोगों को नियुक्त करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें विभिन्न क्षेत्रों में काम करने और वहां की विविधता से लाभ उठाने का गहरा अनुभव है।’’सुब्रमण्यम ने यह भी माना कि इनमें भारतीय मूल के लोग हो सकते हैं, जिनमें अमेरिका में जन्मे या पहले वहां जाकर बसे लोग भी शामिल हैं। अमेरिका द्वारा टीसीएस समेत आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े एक प्रमुख कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के बाद उद्योग संगठन नैसकॉम ने कहा कि आव्रजन और कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही ‘‘दो अलग-अलग मुद्दे’’ हैं और इन्हें एक ही नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों को पहले से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें कार्य वीजा की कड़ी जांच और एच-1बी वीजा आवेदकों के लिए बढ़ती लागत शामिल हैं। अमेरिका में हालिया घटनाक्रम से 300 अरब डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग के सबसे बड़े बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसका असर उन प्रौद्योगिकी कंपनियों पर पड़ सकता है, जो कुशल पेशेवरों की सीमापार आवाजाही पर निर्भर हैं।
वीजा नीतियों का असर: सपने छोड़ अमेरिका से स्वदेश लौट रहे भारतीय टेक पेशेवर, पिछले साल की तुलना में कितना अधिक?
रूस से तेल खरीदेगा अमेरिका, झुके ट्रंप, भारत को होगा तगड़ा फायदा?
अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला किया है।
दोहरे तर्क: कटघरे में अमेरिकी नीतियों की विश्वसनीयता, खुद जरूरत पड़ी तो रूस से डीजल आयात करने को राजी हुए ट्रंप
अमेरिका में वीजा का एक पहलू यह भी: जेडी वेंस की बात अपमानजनक, लेकिनजिस निर्भरता की ओर इशारा किया, वह असली
अरे बाप रे! हरियाणा के खेतों में बैठकर अमेरिका को ऐसे लगा रहे थे चूना, अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार
रोहतक पुलिस ने विदेशी नागरिकों को फर्जी उड़ान टिकट बुक कराने के नाम पर ठगने वाले गिरोह के दो और सदस्यों, रवित और अंकित, को गिरफ्तार किया है।
ताजमहल में बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है, रविवार को अमेरिकी और आंध्र प्रदेश के पर्यटकों को बंदरों ने काट लिया। प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
बैतूल शहर की साक्षी अवस्थी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए केटलबेल लिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 4 से 9 अक्टूबर तक आयोजित इंटरनेशनल यूनियन ऑफ केटलबेल लिफ्टिंग (IUKL) चैंपियनशिप में साक्षी ने महिला वेटरन वर्ग (35 से 39 वर्ष) की डबल जर्क स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने दोनों हाथों में 16-16 किलोग्राम की केटलबेल उठाकर यह उपलब्धि हासिल की। साक्षी अवस्थी बैतूल के कमानी गेट क्षेत्र में रहती हैं। वह व्यवसायी बृजेश अवस्थी की बेटी हैं। खेल के साथ साक्षी फिटनेस कोच के रूप में भी सक्रिय हैं। वह ऑनलाइन लोगों को ट्रेनिंग देती हैं और वजन कम करने (वेट लॉस) के साथ मसल गेन यानी मांसपेशियां मजबूत बनाने के लिए व्यायाम और डाइट से जुड़ी सलाह देती हैं। 9 देशों के खिलाड़ियों ने लिया हिस्सानई दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत सहित 9 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसमें ऑस्ट्रेलिया, रूस, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल करना साक्षी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिटनेस कोच के रूप में भी सक्रियसाक्षी लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। ऑनलाइन ट्रेनिंग के जरिए वह लोगों को उनकी फिटनेस संबंधी जरूरतों के अनुसार मार्गदर्शन देती हैं। वेट लॉस और मसल गेन के लिए व्यायाम के साथ डाइट पर भी उनका फोकस रहता है। निरंतर अभ्यास, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण के दम पर साक्षी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से बैतूल का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहुंचा है।
Houthis Attack on Riyadh Airport: Saudi पर बड़ा हमला, अमेरिकी सहित 12 की मौत, 300 घायल | Yemen War
Saudi Arabia Riyadh Airport Attack ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। रियाद के King Khalid International Airport पर हुए हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की खबर है
नमस्कार, कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर मार्च का ऐलान किया था। पुलिस ने 7000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। मार्च नहीं होने दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से ईंधन खरीदने की घोषणा की। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में जानिए कि राहुल गांधी ने चेन्नई में 'छात्रों की गूंज कार्यक्रम' में क्या मुद्दा उठाया। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर… 1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेन्नई दौरा, ट्रेन में सफर करेंगे। 2. कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर मार्च। सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने पर सुनवाई। कल की बड़ी खबरें... 1. दीपके, सौरभ और रांका को पकड़ा, ममता-केजरीवाल समेत 7000 लोगों को हिरासत के बाद छोड़ा; आज भी CJP का प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग को लेकर जंतर-मंतर मार्च का एलान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने ऐसा होने नहीं दिया। शनिवार को CJP फाउंडर अभिजीत दीपके अपने साथियों के साथ मुंबई से दिल्ली लैंड हुए, सभी को प्लेन से ही हिरासत में लिया। AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और TMC (ममता) की चीफ ममता बनर्जी को सड़क से डिटेन किया। 7000 से ज्यादा लोगों को भी पकड़ा, दिनभर के हंगामे के बाद शाम को सभी को छड़ा गया। प्रदर्शन के चलते दिल्ली में 250 से ज्यादा ट्रेनें रद्द रही, 45 मेट्रो स्टेशन बंद रहे। 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रही। आज फिर मार्च का ऐलान: पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके का पुराना वीडियो जारी किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि अब प्रदर्शन की कमान अजिंक्य शिंदे संभालेंगे। बाद में अजिंक्य ने एलान किया कि रविवार को भी जंतर-मंतर मार्च निकाला जाएगा। पूरी खबर पढ़ें... 2. राहुल बोले- लोकतंत्र खत्म करने वालों से न डरें, चेन्नई में छात्रों की गूंज में कहा- वोट चोरी हो रहा; दक्षिण के 7.5 करोड़ युवाओं पर फोकस राहुल गांधी ने चेन्नई में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कहा कि लोकतंत्र खत्म करने वालों से डरने की जरूरत नहीं हैं। सवाल पूछना हर स्टूडेंट की जिम्मेदारी है। सरकार तमिलनाडु पर हिंदी थोप रही है। तमिल कल्चर, भाषा इतिहास पर हमला किया जा रहा है। आपका वोट चोरी किया जा रहा है। राहुल के भाषण की 5 बड़ी बातें... पीएम मोदी पर: पीएम इंटरनेशनल दबाव में हैं। अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं। देश का मूड जनता जान गई है दिल्ली प्रोटेस्ट पर: पूरी दिल्ली बंद है। पुलिस बच्चों को मार रही है, इंटरनेट बंद है। भाजपा के गुंडे सड़क पर घूम रहे, बच्चों को पीट रहे हैं। तमिल कल्चर पर: तमिल कल्चर, भाषा और इतिहास पर हमला किया जा रहा है। तमिलनाडु पर हिंदी थोपी जा रही है। सरकार के लिए तमिल कल्चर और इतिहास सेकेंड्री है। पेरियार पर: पेरियार महान इंसान थे, क्योंकि वे सवाल करते थे। पेरियार ने स्टूडेंट को सिखाया कि बिना समझे किसी भी विचार को फॉलो न करें। एजुकेशन सिस्टम पर: सेंट्रलाइजेशन, 87% MBBS तमिल सीट कम की जा रही हैं। 70% यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर नहीं है, उसको RSS के गर्वनर चला रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें... 3. योगी ने अखिलेश से कहा अयोध्या से आप लड़िए, हम भी लड़ते हैं; अखिलेश का जवाब- हमारा सिपाही ही काफी सीएम योगी ने अखिलेश यादव की अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती स्वीकार कर ली। बलरामपुर में शनिवार को कहा- अरे अखिलेश जी, अयोध्या से आप भी लड़िए, हम भी लड़ते हैं। आप भी नामांकन करिए, मैं भी करता हूं। चलिए, एक बार किस्मत आजमा लेते हैं। लड़ाई चेलों से क्यों, आमने-सामने होनी चाहिए। एक बार आमना-सामना हो ही जाए। अखिलेश का जवाब लोकसभा भूल गए क्या: करीब 1 घंटे बाद अखिलेश ने बिना नाम लिए योगी के बयान पर पलटवार किया। X पर लिखा- चढ़ावा चोरों को हराने के लिए हमारा एक युवा ‘पीडीए प्रहरी’ ही काफी है। चोरों को क्लीन चिट देने वाले हिस्सेदार होते हैं। इस बार जनता घमंड का सारा पानी उतार देगी। लोकसभा भूल गए क्या? पूरी खबर पढ़ें… 4. अमेरिकी चुनाव से पहले डीजल महंगा, ट्रम्प रूस से खरीदेंगे; जेलेंस्की बोले- पैसा जंग में इस्तेमाल होगा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूसी डीजल खरीदने पर लगी रोक 7 अप्रैल 2027 तक हटा दी है। अब अमेरिका रूस से डीजल खरीद सकेगा। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था। इसके बाद अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिए थे। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब ईरान जंग के बाद अमेरिका में डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। फिलहाल वहां डीजल करीब 6.28 डॉलर प्रति गैलन बिक रहा है, जबकि जंग से पहले इसकी कीमत करीब 3.70 डॉलर थी। अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रम्प प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। कीमतें कम करने के लिए ट्रम्प तेल और डीजल की सप्लाई बढ़ाने जैसे कदम उठा रहे हैं। फैसले से यूक्रेनी राष्ट्रपति नाराज: ट्रम्प के फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। उन्होंने कहा कि इससे रूस को पैसा मिलेगा, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ करेगा। पूरी खबर पढ़ें... 5. केरलम में आंधी में स्कूल की छत उड़ी, उत्तराखंड के कोटद्वार में गाड़ियां बहीं, हरिद्वार में ओले गिरे देश के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी है। केरलम के कन्नूर जिले में आंधी और बारिश के कारण वायथुर यूपी स्कूल की करीब 15 साल पुरानी भारी छत उखड़कर पीछे की इमारत पर जा गिरी। इसकी चपेट में आने से तीन कारें क्षतिग्रस्त हुईं। उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में शुक्रवार को रुक-रुककर बारिश हुई। छह जिलों में बड़े-बड़े ओले भी गिरे। पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में तेज बारिश के कारण सड़कों पर खड़ी स्कूटी और बाइक समेत कई गाड़ियां पानी के तेज बहाव में बह गईं। हरिद्वार में ओले गिरने से कई गाड़ियों के शीशे टूट गए। इधर, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार 12वें दिन बढ़ रहा है। 40 हजार से ज्यादा घर आधे से ज्यादा पानी में डूब चुके हैं, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। फैजुल्लागंज की सड़कों पर नावें चल रही हैं। पूरी खबर पढ़ें... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. इंटरनेशनल: NIA फ्लाई दुबई कॉकपिट अटैक की जांच करेगी: एंटी हाइजैकिंग एक्ट में FIR दर्ज की, भारतीय पायलट पर हमले की साजिश खंगालेगी (पूरी खबर पढ़ें) 2. नेशनल: मणिपुर में हिंसा भड़की, 5 की मौत:उग्रवादियों ने पुलिस स्टेशन, घर जलाए; इस साल हुई घटनाओं में 40 से ज्यादा मौतें (पूरी खबर पढ़ें) 3. नेशनल: 124 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स बोले- चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा रखें: हम जानते हैं धांधली कैसे होती है, बाहुबली बूथ कैप्चर करने कट्टा लेकर आते थे (पूरी खबर पढ़ें) 4. नेशनल: नितिन नवीन बोले- INDIA ब्लॉक और CJP दो अराजक गुट: दोनों में अराजकता फैलाने की होड़, सरकार सख्ती से निपटेगी; मंसूबे कामयाब नहीं होंगे (पूरी खबर पढ़ें) 5. पंजाब: जासूसी के आरोप में महिला गिरफ्तार, सैनिक पति से सेना की जानकारी लेकर PAK भेज रही थी; भारत-चीन सीमा पर तैनात 2 जवान नामजद (पूरी खबर पढ़ें) 6. क्रिकेट: सहवाग बोले- वैभव सूर्यवंशी में मेरी सोच दिखती है:पहली गेंद पर शॉट लगाना चाहते हैं; उम्र नहीं, प्रदर्शन तय करे भारतीय टीम में जगह (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... जुआ खेलने के लिए 14 शादियां अमेरिका में एक महिला ने जुए की लत पूरी करने के लिए 14 शादी कर ली। वह शादी के बाद लड़कों से पैसे ऐंठती थी। अब कोर्ट ने महिला को ₹2.7 करोड़ लौटाने का आदेश दिया है। पूरी खबर पढ़ें... फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. भास्कर एक्सप्लेनर: प्रोटेस्ट मौलिक अधिकार, फिर पुलिस की अनुमति क्यों जरूरी: हिरासत और गिरफ्तारी में क्या फर्क है, प्रदर्शन से जुड़े 8 सवालों के जवाब 2. आज का एक्सप्लेनर: CJP के सारे नेता हिरासत में, क्या दब जाएगा प्रोटेस्ट; आखिर इतनी सख्ती के पीछे असली वजह क्या है 3. विजुअल गाइड: अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी का अनकट VIDEO: महिला पुलिस फ्लाइट में घुसी; CJP लीडर बोले- हम डरते नहीं, हाथ पकड़कर निकाला 4. भास्कर एक्सप्लेनर: आप बहादुर हैं या डरपोक, जोशीले हैं या सुस्त, सब केमिकल लोचा है; मेंटल हेल्थ डे पर शरीर के हॉर्मोन्स की रोचक कहानी 5. जरूरत की खबर: गरबा खेलने से पहले 5 जरूरी तैयारियां:साथ रखें 9 मेडिकल एसेंशियल्स, गरबा पंडाल में पहुंचते ही चेक करें ये 3 चीजें 6. आपका पैसा: इन्वेस्टमेंट की 8 कॉमन गलतियां:सेविंग होती कम, लॉन्ग टर्म फंड पर बुरा असर, एक्सपर्ट से जानें इन गलतियों से कैसे बचें 7. यूपी एक्सप्लेनर: पुलिस-होमगार्ड भर्ती की दौड़ में 20 दिन में 7 मौतें: दिल ने साथ छोड़ा या गर्मी ने जान ली; कौन है अभ्यर्थियों की मौत का जिम्मेदार 8. राजस्थान एक्सप्लेनर: राजस्थान एक्सप्लेनर EWS यात्रा छोड़ यूनुस खान से क्यों मिलने पहुंचे भाटी?:वसुंधरा के करीबी से सीक्रेट मीटिंग ने बढ़ाई सियासी हलचल, क्या होने वाला है बड़ा खेला? 9. भास्कर एक्सक्लूसिव: राजस्थान- सरकारी इंजीनियर की सैलरी से 253 फीसदी ज्यादा प्रॉपर्टी: 2 साल तक एसीबी का कैलकुलेशन; 30 बैंक अकाउंट, करोड़ों की FD का खुलासा 10. भास्कर एक्सक्लूसिव: दिल्ली प्रदर्शन में जा रहे छात्रों को ट्रेन से उतारा: 14 को पुणे भेजा, रिसोर्ट में नजरबंद किया था; स्टूडेंट बोले- लगा जैसे हम अपराधी हों 11. मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर: OBC आरक्षण फैसला, 13% होल्ड पदों का क्या होगा: सामान्य वर्ग को नौकरी मिलेगी; क्या पहले की नियुक्तियां रद्द होंगी, नई भर्तियों पर कितना असर? 12. बिहार फाइल्स: बिहार में डॉक्टर के अपहरण की कहानी, लालू टेंशन में: बीच रास्ते से कार सहित उठा ले गए अपराधी, बाहुबली सुनील पांडेय को कैसे हुई सजा 13. भास्कर एनालिसिस: MLC चुनाव में NDA को क्यों सता रहा डर: 6 दिन में 3 बड़ी बैठक, मैसेज-बागी को बाहर का रास्ता दिखाएं, अनंत सिंह कितना खेल बिगाड़ेंगे 14. भास्कर एक्सक्लूसिव: छत्तीसगढ़ में ₹200 का स्मारक सिक्का होगा जारी: माता साहिब हासी देवी का सम्मान, राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी लॉन्च, कोलकाता टकसाल में बना, 35 ग्राम वजन 15. एंटरटेंमेंट: रेखा@72, अमिताभ बच्चन से प्यार, अफेयर से इनकार: विनोद मेहरा को पति मानने से भी मना किया, एक्ट्रेस ने बताई रिश्तों की सच्चाई ⏳आज के दिन का इतिहास ️ मौसम का मिजाज मेष वालों की प्रॉपर्टी डील पूरी हो सकती है और धनु राशि के लोगों को आर्थिक राहत मिलने के योग हैं। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Iran attack on US Base का वीडियो देखिए, इधर-उधर भागते दिखे अमेरिकी सैनिक | Iran America war
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नमस्कार, आज की सबसे बड़ी खबर जयपुर से है। सीजेपी के प्रदर्शन में जाने वालों को रोका। चलिए सिलसिलेवार पढ़ते हैं, राजस्थान दिनभर में क्या कुछ खास रहा... पहले टॉप 5 खबरें 1. राजस्थान से CJP-प्रदर्शन में जाने वाले लोगों को रोकाकॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दिल्ली में आज के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले ही जयपुर में शुक्रवार रात 24 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पाबंद कर दिया। सीकर के रींगस में वकील सुरेंद्र उर्फ संजू वर्मा को डिटेन किया। रेलवे ने दिल्ली की ओर जाने वाली राजस्थान से जुड़ी 12 ट्रेनों को रद्द किया गया है। पूरी खबर पढ़ें 2. डबल डेकर ट्रेन के आगे कूदी प्रिंसिपल की प्रेग्नेंट पत्नीअलवर में शुक्रवार देर रात अरावली थाना क्षेत्र में 7 महीने की गर्भवती ने डबल डेकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान जनता कॉलोनी निवासी अंतिमा (28) पुत्री रामनरेश के रूप में हुई है। अंतिमा का पति, सौम्य राजपूत (35) राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सकरपुर (भरतपुर) में प्रिंसिपल है। पूरी खबर पढ़ें 3. गहलोत बोले-BJP-अध्यक्ष को चुनाव आयोग का वकील बनना पड़ रहापूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने के आरोप पर पलटवार किया। गहलोत ने एक्स पर लिखा- सवालों से डरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अब चुनाव आयोग का वकील बनना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें 4. RPSC में अधिकारी के सामने बैठकर समस्या बता सकेंगे कैंडिडेट्सराजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में कैंडिडेट्स को भर्ती से संबंधित कोई समस्या होने पर वह अधिकारी के सामने बैठकर बता सकेंगे। हर महीने में 2 बार आयोग अध्यक्ष, मेंबर और अफसर कैंडिडेट्स की समस्याएं सुनेंगे। ऑनलाइन आवेदन करने पर हर 15 दिन में करीब 30 कैंडिडेट्स का सिलेक्शन होगा। पूरी खबर पढ़ें 5. वायुसेना प्रमुख बोले- F-35 पर अमेरिका का कोई ऑफर नहींजोधपुर में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि अमेरिका ने भारत को F-35 लड़ाकू विमान बेचने की कोई आधिकारिक पेशकश नहीं की है। गौरतलब है कि यह अटकलें थी कि अमेरिका ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 बेचने की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने इसे ठुकरा दिया। पूरी खबर पढ़ें अब 3 अहम खबरें6. मिड-डे मील में छिपकली आई, 60 बच्चों की तबीयत बिगड़ीचूरू के सुजानगढ़ क्षेत्र के सुरवास सरकारी स्कूल में मिड-डे मील में छिपकली आ गई। खाना खाने के बाद करीब 60 बच्चों को की तबीयत बिगड़ गई। सभी को राजकीय बगड़िया अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। पूरी खबर पढ़ें 7. बारां में झाड़ियों में मिली नवजातबारां शहर के नटराज गार्डन के पास झाड़ियों में एक नवजात मिली। देर रात रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। गौसेवक अमित भार्गव ने मासूम को हॉस्पिटल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। पूरी खबर पढ़ें 8. कोटा-बारां डोल मेले से लौट रहे दो युवकों की मौतकोटा बारां फोरलेन पर देर रात सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई। दोनों युवक अपने तीन मौसेरे भाइयों के साथ दो बाइकों पर सवार होकर बारां से कोटा लौट रहे थे। फोरलेन पर डायरा के पास दोनों बाइकों का एक्सीडेंट हो गया। पूरी खबर पढ़ें खबर जो हटकर है 9. पितृपक्ष की अमावस्या पर कौवों की खूब मनुहारपितृपक्ष के अंतिम श्राद्ध दिवस सर्वपितृ अमावस्या पर शनिवार को सूरतगढ़ में कौवों की खूब मनुहार हुई। अपने पूर्वजों के निमित्त अन्न ग्रास अर्पित करने के लिए लोगों ने एसडीएम ऑफिस की चारदीवारी पर थालियां रखी। पूरी खबर पढ़ें कल क्या है खास 10. शारदीय नवरात्रा कल से, नौ स्वरूपों की होगी पूजामां दुर्गा की उपासना का सबसे पवित्र पर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगा। घटस्थापना के लिए मुख्य मुहूर्त सुबह 06 बजकर 19 मिलट से सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक है।
Ramleela in North America By Team Dhishum of Lucknow:भारत में पारंपरिक रूप से नौ दिनों तक चलने वाली इस रामलीला के छोटे रूप ने टोरंटो, एटोबिओक, ब्रैम्पटन, ओकविले, लंदन और ओटावा जैसे कनाडा के कई शहरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
अमेरिका को जाएं भूल: इन 5 देशों में जॉब के बाद आसानी से मिल जाता है PR
विदेशों में जाकर नौकरी करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका (USA) अब इकलौता विकल्प नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के कड़े वीजा नियमों, ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार और अनिश्चितताओं के चलते भारतीय प्रोफेशनल्स अब दुनिया के दूसरे देशों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अगर आपका भी सपना विदेश में जाकर काम करने और वहां की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) हासिल करने का है, तो आपको अमेरिका के बजाय दुनिया के उन पांच प्रमुख देशों पर नजर डालनी चाहिए जहां नौकरी मिलने के बाद बेहद आसानी से और पारदर्शी नियमों के तहत पीआर मिल जाती है। आज के इस विशेष आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही 5 शानदार देशों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जो भारतीय युवाओं और स्किल्ड वर्कर्स के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।कनाडा: भारतीय युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय और आसान पीआर प्रक्रिया वाला देशविदेशों में बसने की चाह रखने वाले भारतीयों की सूची में कनाडा (Canada) हमेशा से शीर्ष पर रहा है। एक्सप्रेस एंट्री (Express Entry) सिस्टम और प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) जैसी बेहतरीन नीतियों के चलते कनाडा में स्किल्ड वर्कर्स के लिए पीआर हासिल करना काफी सुगम माना जाता है। यदि आपके पास अच्छा वर्क एक्सपीरियंस, अंग्रेजी या फ्रेंच भाषा में अच्छी पकड़ और उच्च शिक्षा है, तो आप कम समय में कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी हासिल कर सकते हैं। हालांकि हाल के दिनों में वहां कुछ नियमों में बदलाव जरूर किए गए हैं, लेकिन आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए कनाडा आज भी दुनिया का सबसे पसंदीदा और भारतीय-अनुकूल देश बना हुआ है।जर्मनी: यूरोप का पावरहाउस जहां टैलेंटेड प्रोफेशनल्स के लिए तेजी से खुल रहे हैं पीआर के द्वारयूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था और औद्योगिक केंद्र जर्मनी (Germany) ने हाल के वर्षों में विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे बहुत ज्यादा खोल दिए हैं। भारत जैसे देशों से कुशल इंजीनियरों, आईटी एक्सपर्ट्स, डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी मांग को देखते हुए जर्मनी ने 'ऑपर्चुनिटी कार्ड' (Chancenkarte) और 'यूूरोपीय ब्लू कार्ड' (EU Blue Card) जैसी कई क्रांतिकारी योजनाएं शुरू की हैं। जर्मनी के नए आप्रवासन कानूनों के अनुसार, यदि आप वहां नौकरी पा लेते हैं और जर्मन भाषा का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, तो आप बहुत ही कम वर्षों में स्थाई निवास (Permanent Residency) के लिए पात्र बन जाते हैं। उच्च जीवन स्तर और मजबूत सामाजिक सुरक्षा के कारण भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच जर्मनी तेजी से पसंदीदा विकल्प बनता जा रहा है।ऑस्ट्रेलिया: प्वॉइंट-बेस्ड सिस्टम के जरिए पीआर पाने का बेहतरीन और सुनहरा मौकाअपनी खूबसूरत जीवनशैली, बेहतरीन जलवायु और उच्च वेतनमान के लिए पहचाना जाने वाला ऑस्ट्रेलिया (Australia) भी भारतीय युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। ऑस्ट्रेलिया का इमीग्रेशन सिस्टम पूरी तरह से प्वॉइंट-बेस्ड (Points-Based System) है, जहां आपकी उम्र, शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेजी दक्षता (PTE/IELTS) और कार्य अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते हैं। यदि आपकी स्किल्स ऑस्ट्रेलिया की 'स्किल ऑक्यूपेशन लिस्ट' (Skilled Occupation List) में शामिल हैं, तो आप स्वतंत्र स्किल्ड वीजा के माध्यम से सीधे पीआर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय इलाकों (Regional Areas) में पढ़ाई या नौकरी करने वाले युवाओं को पीआर हासिल करने में अतिरिक्त लाभ और प्राथमिकता मिलती है।न्यूजीलैंड: वर्क-टू-रेसिडेंसी पाथवे के साथ शांतिपूर्ण और स्थिर भविष्य की गारंटीप्रकृति की गोद में बसे शांत और विकसित देश न्यूजीलैंड (New Zealand) ने स्किल्ड माइग्रेंट्स के लिए अपनी नीतियों को काफी सरल और आकर्षक बना दिया है। न्यूजीलैंड सरकार की 'ग्रीन लिस्ट' (Green List) और 'वर्क-टू-रेसिडेंसी' (Work to Residence) पाथवे के तहत यदि आप निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईटी या कृषि क्षेत्र में कुशल नौकरी प्राप्त कर लेते हैं, तो आपको बिना किसी जटिल प्रक्रिया के सीधे रेजिडेंसी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। न्यूजीलैंड में काम करने वाले भारतीयों को न केवल बेहतरीन वर्क-लाइफ बैलेंस मिलता है, बल्कि वहां का सुरक्षित और प्रगतिशील माहौल परिवार के साथ बसने के लिए आदर्श माना जाता है।यूनाइटेड किंगडम (UK): स्किल्ड वर्कर वीजा के जरिए ब्रिटिश पीआर पाने का आसान रास्तापारंपरिक रूप से भारतीयों के पसंदीदा देशों में शामिल यूके ने ब्रेक्जिट के बाद से अपनी वीजा प्रणाली में बड़े और सकारात्मक बदलाव किए हैं। यूके का 'स्किल्ड वर्कर वीजा' (Skilled Worker Visa) उन सभी भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है जो ब्रिटेन में करियर बनाना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवा (NHS), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, फाइनेंस और अकादमिक क्षेत्रों में कुशल कामगारों की भारी मांग है। यूके के नियमों के अनुसार, यदि आप लगातार 5 वर्षों तक वैध वर्क वीजा पर वहां नौकरी करते हैं और न्यूनतम आय के मानदंडों को पूरा करते हैं, तो आप ब्रिटेन में सेटेलमेंट (Indefinite Leave to Remain) यानी पीआर के लिए आवेदन करने के योग्य हो जाते हैं। अमेरिका के मुकाबले यूके में पीआर की राह काफी स्पष्ट और व्यवस्थित है।
दुनियाभर में दोहरेपन और खोखलेपन की सबसे बड़ी मिसाल हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला कर लिंडसे ग्राहम को मानो श्रद्धांजलि दे दी है! यह कटाक्ष इसलिए है, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदे तो उस पर सौ फीसदी टैरिफ लगा दिया जाता है, लेकिन अमेरिका वही काम करे तो उसे शानदार फैसला बताया जाता है। यही नहीं, नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, तो ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय पर ही प्रतिबंध लगा दिए। आखिर यह कैसी नीति है? दूसरों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले ट्रंप जब अपने देश के हितों की बात आती है, तो उन्हीं नियमों को भूल जाते हैं। भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने का दबाव बनाने वाले ट्रंप अब खुद रूस से डीजल खरीद रहे हैं, इस फैसले ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है इसलिए सवाल उठ रहा है कि रूस से तेल खरीदना गलत है, या गलत सिर्फ तब है जब भारत खरीदे? यही है ट्रंप की नीति का दोहरापन और खोखलापन! देखा जाये तो रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाने वाले ट्रंप का ताजा फैसला उनकी कथनी और करनी के बीच की खाई को उजागर करता है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने रूस से तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति के साथ नवंबर में पांच लाख टन, उसके बाद दस लाख टन और फिर कुछ ही समय में तीस लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए अस्थायी सामान्य अनुमति भी जारी की है, जिसके अंतर्गत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले कुछ माल पर अप्रैल 2027 तक प्रतिबंधों में छूट का प्रावधान किया गया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर Norway पर साधा निशाना, 8 युद्ध रुकवाने का किया दावा गौरतलब है कि यह वही प्रशासन है जिसने रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिबंधों को सख्त करने की नीति अपनाई थी। लेकिन जब अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ीं और किसानों, ट्रक चालकों तथा कारोबारियों पर दबाव बढ़ा, तो रूस से ऊर्जा खरीद अचानक स्वीकार्य हो गई। दरअसल अमेरिका में नवंबर की शुरुआत में मध्यावधि चुनाव होने हैं और ट्रंप की नीतियों के चलते वहां महंगाई अप्रत्याशित रूप से बढ़ गयी है जिसके चलते जनता नाराज है। रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर में अमेरिकी डीजल की कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गयी थी और शुक्रवार को लगभग 6.28 डॉलर प्रति गैलन रही। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई का सवाल ट्रंप के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है। सर्वेक्षणों के मुताबिक, 78 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने बढ़ती जीवन-यापन लागत के लिए ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार माना है। इसलिए जब अमेरिकी मतदाताओं की जेब का सवाल आया, तो रूस से डीजल खरीदना ट्रंप के लिए राष्ट्रीय हित बन गया। लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों के अनुसार रूसी तेल खरीदे, तो उसे टैरिफ का सामना करना पड़ता है। इसलिए सवाल उठता है कि यह कैसी निष्पक्षता है? यह कैसी नियम-आधारित व्यवस्था है, जिसमें नियम दूसरों के लिए हैं और छूट अपने लिए? दूसरी ओर, ट्रंप के इस फैसले ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की नाराजगी भी बढ़ा दी है। उन्होंने इसे अनुचित और बेईमानी भरा कदम बताते हुए कहा कि इससे पुतिन को जन्मदिन का उपहार मिलने जैसा संदेश जाता है। जेलेंस्की की आपत्ति इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि यह घोषणा ऐसे समय हुई, जब ट्रंप के प्रतिनिधि यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ युद्ध समाप्त करने के प्रस्तावों पर बातचीत कर रहे थे। जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यदि ऊर्जा प्रतिबंधों में ढील दोनों देशों की ओर से सर्दियों में ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने जैसे पारस्परिक समझौते का हिस्सा होती, तो उसका समर्थन किया जा सकता था। लेकिन बिना ऐसी शर्तों के रियायत देना रूस की युद्ध क्षमता को आर्थिक सहारा देने जैसा दिखाई देता है। वहीं अमेरिकी रिपब्लिकन नेता डॉन बेकन ने भी इस फैसले की आलोचना की। उनका तर्क था कि अमेरिकी किसानों और उपभोक्ताओं के लिए डीजल सस्ता करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए रूस से ईंधन खरीदना गलत रास्ता है। उन्होंने पूछा कि जब अमेरिकी संसद ने रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए कानून पारित किया और ट्रंप ने स्वयं उस पर हस्ताक्षर किए, तो अब उसी दबाव को कमजोर करने का औचित्य क्या है? इसके अलावा, ट्रंप की राजनीति का दूसरा चिंताजनक पहलू अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति उनका रवैया है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप प्रशासन ने न्यायालय के विरुद्ध प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। नवी पिल्लै को सम्मान ऐसे समय मिला, जब अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ने को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं। नोबेल समिति ने युद्ध अपराधियों को जवाबदेह ठहराने और पीड़ितों को न्याय दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को शांतिपूर्ण विश्व की अनिवार्य शर्त बताया। नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलते ही ट्रंप जैसे बौखला गये और कुछ घंटों बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी नागरिकों पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय का अभियोजन स्वीकार नहीं करेंगे। अमेरिकी प्रशासन ने न्यायालय के साथ लेन-देन पर रोक लगाने और उसके संसाधनों को बाधित करने की मंशा जाहिर की। वहीं अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने इसे कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की बुनियाद पर हमला बताया। देखा जाये तो यहां भी वही पुराना सवाल सामने आता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय कानून केवल कमजोर देशों और विरोधियों पर लागू होना चाहिए? क्या अमेरिका को अपने नागरिकों और अधिकारियों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से ऊपर रखने का अधिकार मिल जाना चाहिए? ऐसा लगता है कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही की सीमाएं अपने हिसाब से तय करना चाहता है। ट्रंप की राजनीति में सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि वे राष्ट्रीय हित का इस्तेमाल कभी प्रतिबंधों को उचित ठहराने के लिए करते हैं, तो कभी उन्हीं प्रतिबंधों को कमजोर करने के लिए। भारत के लिए रूसी तेल आर्थिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतों का प्रश्न है, लेकिन अमेरिका के लिए वही रूसी ऊर्जा घरेलू महंगाई घटाने और चुनावी नुकसान रोकने का साधन बन जाती है। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय न्याय की बात तब तक स्वीकार्य दिखाई देती है, जब तक वह अमेरिकी सत्ता और उसके सहयोगियों के हितों से न टकराए। जैसे ही जवाबदेही का सवाल उठता है, स्वतंत्र न्यायिक संस्था को ही निशाना बनाया जाने लगता है। यह केवल नीतिगत असंगति नहीं, बल्कि उस नैतिक दावे की कमजोरी है जिसके आधार पर अमेरिका दुनिया को नियमों, लोकतंत्र और न्याय का उपदेश देता रहा है। ट्रंप ने अपने फैसलों से यह धारणा मजबूत की है कि उनके लिए सिद्धांत स्थायी नहीं, बल्कि परिस्थितियों और राजनीतिक लाभ के अनुसार बदलने वाली चीज हैं। बहरहाल, ट्रंप चाहे अपने कदमों को अमेरिकी हितों की रक्षा बताएं, लेकिन जब वही कदम दूसरों पर थोपे गए नैतिक मानदंडों को ध्वस्त करते हैं, तो उनकी राजनीति का खोखलापन उजागर होता है। अमेरिका को रूसी डीजल और भारत पर सौ फीसदी टैरिफ, इससे बड़ा दोहरा मापदंड क्या होगा? साथ ही अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पर प्रतिबंध लगाकर यदि कोई देश खुद को कानून से ऊपर समझने लगे, तो दुनिया उसे न्याय का संरक्षक नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ का प्रहरी ही मानेगी। -नीरज कुमार दुबे
अमेरिका के कैलिफोर्निया में ट्राला पलटने से करनाल जिले के गांव सिकरी के 25 वर्षीय युवक जतिन की मौत हो गई। हादसे का करीब 10 सेकेंड का वीडियो सामने आया है, जिसमें ट्राला सड़क किनारे हरी घास पर दौड़ता दिखाई देता है। इसके बाद वह घास से सड़क की तरफ आता है, डिवाइडर पार करता है और पलट जाता है। हादसे में जतिन के सिर में चोट लगी और खून बहने लगा। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत से परिवार सदमे में है। परिजनों ने सरकार से शव भारत लाने और आर्थिक सहायता देने की अपील की है। 2022 में 40 लाख रुपए खर्च कर गया था इंग्लैंडगांव सिकरी का जतिन वर्ष 2022 में करीब 40 लाख रुपए खर्च करके भारत से इंग्लैंड गया था। इसके बाद वह डंकी रूट के रास्ते अमेरिका पहुंचा। वह कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में रहकर ड्राइवरी करता था। परिजनों के मुताबिक, बुधवार अलसुबह अमेरिका में ट्राला पलटने से उसकी जान चली गई। हादसे की सूचना जतिन के साथ रहने वाले उसके ममेरे भाई विशाल ने परिवार को दी। वीडियो में घास से सड़क पर आकर पलटता दिखा ट्रालासामने आए वीडियो में ट्राला पहले सड़क के किनारे हरी घास पर चलता नजर आता है। कुछ ही देर बाद वह घास से सड़क की तरफ आता है और डिवाइडर पार करके पलट जाता है। वीडियो देखकर आशंका जताई जा रही है कि चालक को नींद आने या ट्राले का संतुलन बिगड़ने से हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि, दुर्घटना की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है और इसकी जांच की जरूरत है। ट्राला पलटने के दौरान जतिन का सिर केबिन में टकराया, जिससे उसे गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा। मौके पर पहुंचे लोग, पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजाहादसे के बाद आसपास के लोग मौके पर एकत्रित हो गए और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद कैलिफोर्निया पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जतिन को मृत घोषित कर दिया। परिवार को उसके ममेरे भाई विशाल के जरिए हादसे की जानकारी मिली। पिता ने पांच घंटे पहले की थी बेटे से बातजतिन के पिता रामपाल ने हादसे से करीब पांच घंटे पहले ही बेटे से फोन पर बात की थी। परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ समय बाद उन्हें उसकी मौत की खबर मिलेगी। जतिन के परिवार में पिता रामपाल, मां रेखा, बड़ा भाई साहिल और छोटी बहन हैं। रामपाल खेतीबाड़ी करते हैं। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अंतिम दर्शन के लिए शव भारत लाने की गुहारपरिजन जतिन के अंतिम दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका से शव भारत लाने की प्रक्रिया में आर्थिक परेशानी आ रही है। परिवार ने सरकार से अपील की है कि शव को जल्द भारत लाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सकें। परिवार को अब शव के भारत पहुंचने का इंतजार है।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी निवास कार्यक्रम से बाहर करने और वीजा नियमों को सख्त करने को भारत विरोधी और अहंकारी बताया गया है
अमेरिका में ट्राला पलटने से करनाल के 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई। वह 2022 में इंग्लैंड से डंकी रूट के रास्ते अमेरिका गया था। वहां वह ट्राला चलाता था। घटना के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार शव भारत आने का इंतजार कर रहा है। परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है, ताकि शव को भारत लाकर अंतिम संस्कार किया जा सके। उधर, युवक की मां ने रोते हुए कहा- हमारे ऊपर बिजली गिर गई। हमारे बच्चे को ले आओ। 40 लाख खर्च कर इंग्लैंड गया था मृतक की पहचान सीकरी गांव निवासी जतिन (25) के रूप में हुई है। वह वर्ष 2022 में करीब 40 लाख रुपए खर्च कर भारत से इंग्लैंड गया था। वहां से वह डंकी रूट के रास्ते अमेरिका पहुंचा। वह कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में रहकर ड्राइवरी करता था। संतुलन बिगड़ने से ट्राला पलटा हादसा बुधवार अलसुबह अमेरिका में हुआ। बताया गया कि सड़क पर ट्रक का संतुलन बिगड़ने से ट्राला पलट गया। इस दौरान जतिन के सिर में चोट लगी और खून निकलने लगा। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जतिन के ममेरा भाई विशाल भी साथ ही रहता है। उसने जतिन के परिवार को घटना की सूचना दी। 5 घंटे पहले पिता से की थी बात परिवार के अनुसार, उसके पिता रामपाल ने हादसे से करीब 5 घंटे पहले ही बेटे से फोन पर बात की थी। परिवार को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद उन्हें यह दुखद खबर सुननी पड़ेगी। परिवार अपने बेटे के अंतिम दर्शन करना चाहता है, लेकिन अमेरिका से शव भारत लाने की प्रक्रिया में आर्थिक परेशानी आ रही है। परिजनों ने सरकार से अपील की है कि शव को जल्द भारत लाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सकें। खेतीबाड़ी करता है परिवार जतिन के परिवार में पिता रामपाल, मां रेखा, बड़ा भाई साहिल और एक छोटी बहन है। उसके पिता खेतीबाड़ी करते हैं। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और अब परिजनों को उसके शव के भारत पहुंचने का इंतजार है।
अमेरिका में भारतीय प्रतिभा का लोहा मानने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अब उसी प्रतिभा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जिसने अमेरिकी तकनीकी उद्योग को वैश्विक ताकत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। एक तरफ ट्रंप भारतीय मूल के माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्य नडेला की तारीफ करते हैं, तो दूसरी तरफ उपराष्ट्रपति जेडी वांस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और कॉग्निजेंट समेत आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े PERM कार्यक्रम से निलंबित कर देता है। इस फैसले से हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों के भविष्य और अमेरिका में स्थायी निवास पाने की उम्मीदों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया है कि PERM कार्यक्रम और एच-1बी वीजा अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं तथा PERM आवेदनों पर रोक लगने से मौजूदा एच-1बी वीजा या उनके धारकों और आश्रितों की स्थिति अपने आप प्रभावित नहीं होती, भले ही पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोटूक कहा है कि प्रतिभाओं की आवाजाही भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। इससे अमेरिकी कंपनियों को उच्च कौशल वाले पेशेवर, नवाचार, अनुसंधान, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और रोजगार सृजन में मदद मिलती है। मंत्रालय ने वांस की उन टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें विदेशी कर्मचारियों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। भारत ने कहा कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं तथा उन्हें औपनिवेशिक इतिहास की पीड़ादायक याद दिलाने वाली भाषा से संबोधित करना गहरे तौर पर आपत्तिजनक है। देखा जाये तो भारत का यह बयान महज औपचारिक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि वाशिंगटन के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारतीय प्रतिभा को अपमानित करके और उसके अवसर सीमित करके दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। अब बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिकी रोजगार की सुरक्षा तक सीमित है या इसके पीछे चुनावी राजनीति, भारत पर आर्थिक दबाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों के समीकरण भी काम कर रहे हैं? उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति जेडी वांस, श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स पहल के तहत आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल हैं। प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया, जिससे अमेरिकी कामगारों के रोजगार और वेतन पर प्रतिकूल असर पड़ा। अब सवाल उठता है कि आखिर PERM है क्या और इस पर रोक से भारतीयों को कितना नुकसान होगा? हम आपको बता दें कि PERM यानी Permanent Labor Certification रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। सामान्यतः नियोक्ता को अमेरिकी श्रम विभाग से प्रमाणित कराना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त इच्छुक और योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद ही नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। इस कार्यक्रम से आठ कंपनियों को बाहर करने का मतलब यह है कि वे नई PERM अर्जियां दाखिल नहीं कर पाएंगी और उनकी लंबित अर्जियों पर भी प्रक्रिया रुक जाएगी। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इन कंपनियों में काम कर रहे सभी भारतीयों के एच-1बी वीजा रद्द हो गए हैं या उन्हें तत्काल अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। असली खतरा उन कर्मचारियों के लिए है जो छह साल की सामान्य एच-1बी अवधि के करीब पहुंच रहे हैं और अमेरिका में लंबे समय तक बने रहने के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर निर्भर हैं। कुछ परिस्थितियों में ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के निर्धारित चरण पूरे होने पर एच-1बी अवधि बढ़ाई जा सकती है। PERM प्रक्रिया रुकने से ऐसे कर्मचारियों के लिए भविष्य की योजना बनाना कहीं अधिक मुश्किल हो सकता है। देखा जाये तो अमेरिकी प्रशासन की इस कार्रवाई ने भारतीय आईटी उद्योग से लेकर अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी करने का सपना देखने वाले युवाओं तक अनिश्चितता बढ़ा दी है। जेडी वांस ने माइक्रोसॉफ्ट पर सबसे तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, लेकिन साथ ही 6,000 से अधिक एच-1बी वीजा की मंजूरी हासिल की और 3,600 से अधिक PERM आवेदन भी दाखिल किए। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को 'फॉरेन इंडेंचर्ड सर्वेंट्स' और ऐसी कंपनियों को 'वीजा मिल्स' तक कह दिया। श्रम सचिव सॉन्डरलिंग का दावा है कि केवल इन कंपनियों ने 2009 से लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए, 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर कराए और एक लाख से अधिक PERM प्रमाणन हासिल किए। प्रशासन इन आंकड़ों को अमेरिकी कामगारों के अवसर छिनने से जोड़ रहा है। लेकिन आवेदन, मंजूरी, वास्तविक नियुक्ति और अमेरिकी कर्मचारी की जगह विदेशी कर्मचारी रखे जाने के आंकड़े अलग-अलग हैं। माइक्रोसॉफ्ट का पक्ष भी इस बहस में महत्वपूर्ण है। कंपनी ने कहा है कि उसके करीब 6,000 एच-1बी आवेदनों में लगभग 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों के वीजा विस्तार या उनकी स्थिति बदलने से संबंधित थे। इसका अर्थ है कि सभी आवेदनों को नई विदेशी भर्तियों के रूप में नहीं देखा जा सकता। साथ ही नेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के संस्थापक राजीव दाभाडकर की व्याख्या इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने लाती है। उनके मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन अब केवल यह नहीं पूछ रहा कि विदेशी कर्मचारी योग्य है या नहीं, बल्कि यह भी जांच रहा है कि विदेशी श्रम की भर्ती, भुगतान और आपूर्ति का कारोबारी मॉडल किस तरह काम करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी तकनीकी पद के लिए अमेरिकी कंपनी एक लाख पचास हजार डॉलर खर्च करती है और कोई मध्यस्थ विदेशी कर्मचारी को उसकी वास्तविक आर्थिक कीमत से काफी कम भुगतान करके अंतर अपने मुनाफे के रूप में रखता है, तो सवाल भारतीय कर्मचारी बनाम अमेरिकी कर्मचारी का नहीं, बल्कि पारदर्शी वेतन बनाम श्रम लागत के अनुचित लाभ का बनता है। यह जांच का वैध विषय हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सभी भारतीय पेशेवरों को संदेह के घेरे में रखने के लिए नहीं होना चाहिए। अब सवाल उठता है कि ट्रंप ने सत्य नडेला की तारीफ क्यों की और वांस ने माइक्रोसॉफ्ट पर इतना सख्त रुख क्यों अपनाया? इसका उत्तर अमेरिकी राजनीति की दो प्राथमिकताओं में है। ट्रंप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और तकनीकी निवेश में अमेरिकी नेतृत्व मजबूत करना है। माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी इस लक्ष्य में महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, वांस और रिपब्लिकन राजनीति का एक प्रमुख संदेश अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देना और विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता घटाना है। किसी कंपनी के सीईओ की उपलब्धियों की प्रशंसा करना और उसी कंपनी की श्रम नीतियों की जांच करना प्रशासन के लिए विरोधाभासी नहीं है। लेकिन यदि नियमों का इस्तेमाल चुनिंदा कंपनियों को दबाने या राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाता है, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस कार्रवाई का चुनावी पहलू भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी कामगारों की नौकरियों की रक्षा करने का संदेश रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से उपयोगी है। ट्रंप प्रशासन विदेशी श्रम के खिलाफ सख्त रुख दिखाकर अपने मतदाताओं को यह भरोसा देना चाहता है कि वह अमेरिकी रोजगार को प्राथमिकता दे रहा है। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि अपने तेवर कड़े दिखाकर जेडी वांस अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। साथ ही भारतीय छात्रों के लिए भी स्थिति चिंताजनक है। पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने का अवसर देने वाला OPT कार्यक्रम और एच-1बी वीजा व्यवस्था दोनों राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्रों से संबंधित OPT प्रस्ताव में पहली बार कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रत्येक छात्र के लिए संस्थानों पर 70,000 डॉलर और नवीनीकरण पर 30,000 डॉलर शुल्क लगाने की बात सामने आई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों और नियोक्ताओं पर लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ छात्रों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, नए एच-1बी आवेदनों से संबंधित 1,00,000 डॉलर भुगतान की शर्त को लेकर भी विवाद है। इस शुल्क की लागू करने की प्रक्रिया संघीय अदालतों के आदेशों से फिलहाल बाधित है और मुकदमे जारी हैं। माना जा रहा है कि भारतीय आईटी कंपनियों के शुरुआती और मध्यम स्तर के इंजीनियरों पर दबाव अधिक पड़ सकता है। वरिष्ठ इंजीनियरों और बड़ी अमेरिकी तकनीकी कंपनियों में स्थापित पदों पर काम करने वाले कुछ पेशेवर अपेक्षाकृत सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन भारतीय कंसल्टिंग कंपनियों के माध्यम से अमेरिका जाने वाले युवाओं के लिए रास्ता कठिन होता जा रहा है। PERM पर रोक, एच-1बी संबंधी शुल्क विवाद और चयन प्रक्रिया में बदलाव मिलकर उस व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं जिसके सहारे पिछले तीन दशकों में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर अमेरिकी तकनीकी उद्योग तक पहुंचे। यहां एक सवाल यह भी उठता है कि क्या ट्रंप यह सब इसलिए कर रहे हैं कि भारत पर लगाए गए टैरिफ का अपेक्षित असर नहीं हुआ और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाने के लिए नया रास्ता अपनाया जा रहा है? देखा जाये तो इन कंपनियों में भारतीय आईटी उद्योग की प्रमुख हिस्सेदारी और प्रभावित पेशेवरों में भारतीयों की बड़ी संख्या के कारण भारत पर असर गंभीर हो सकता है। फिर भी प्रशासन का घोषित आधार अमेरिकी श्रम बाजार और आव्रजन व्यवस्था है। देखा जाए तो ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई का असर वीजा और ग्रीन कार्ड तक सीमित रहने वाला नहीं है, बल्कि यह भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी की बुनियाद को भी चुनौती दे सकता है। जिन भारतीय कंपनियों और पेशेवरों ने अमेरिकी तकनीकी उद्योग को अपनी मेहनत, विशेषज्ञता और नवाचार से मजबूत किया, आज उन्हीं के रास्ते में नए अवरोध खड़े किए जा रहे हैं। भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में भर्ती, परियोजनाओं के संचालन और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने की रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। लेकिन अमेरिका को भी समझना होगा कि भारतीय प्रतिभा के लिए दरवाजे संकरे करके वह अपनी ही तकनीकी ताकत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने का जोखिम उठा रहा है। भारत को इस दबाव के आगे झुकने के बजाय वाशिंगटन से दोटूक कहना चाहिए कि भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही, भारत को अपनी तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और उच्च कौशल वाले रोजगार में इतना निवेश करना होगा कि भारतीय प्रतिभा के भविष्य का फैसला केवल अमेरिकी नीतियां न करें। बहरहाल, ट्रंप की नीति भारत के लिए महज एक चेतावनी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर तकनीकी शक्ति बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का संकेत है। अमेरिका एक ओर भारतीय मूल के तकनीकी दिग्गजों की सफलता का गुणगान करता है और दूसरी ओर भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर सीमित करने वाली नीतियां अपनाता है। यह दोहरा रवैया उस साझेदारी पर सवाल खड़ा करता है, जिसे दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित बताते हैं। भारत को अमेरिका से संबंध तोड़ने की जरूरत नहीं, लेकिन यह भी स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय इंजीनियरों का भविष्य अमेरिकी घरेलू राजनीति और चुनावी लाभ-हानि का मोहरा बन जाए। अब वक्त है कि भारत अपनी प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और विशाल बाजार की ताकत को कूटनीतिक आत्मविश्वास में बदले और स्पष्ट संदेश दे कि भारत अमेरिका के साथ साझेदारी चाहता है, किसी की राजनीतिक मजबूरियों की कीमत पर अपने नागरिकों और कंपनियों के हितों से समझौता नहीं होगा। -नीरज कुमार दुबे
मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प से रिश्ते सुधार लिए हैं। अब जुकरबर्ग का प्रभाव AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में भी दिख रहा है। AI सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने में उनका बड़ा रोल है। जुकरबर्ग ने ट्रम्प से बिगड़े रिश्ते कैसे सुधारे 2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि ट्रम्प की पोस्ट से हिंसा और बढ़ सकती है। इस फैसले से ट्रम्प नाराज हो गए। उन्होंने जुकरबर्ग पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें उम्रकैद तक की धमकी दी। दोनों के रिश्ते सुधरने की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई। पेंसिल्वेनिया की एक चुनावी रैली में ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे शानदार चीजों में से एक था। जुकरबर्ग की इस तारीफ के कुछ हफ्ते बाद ट्रम्प ने भी उनके प्रति नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अब वे जुकरबर्ग को पहले से ज्यादा पसंद करते हैं। ट्रम्प के करीब आने के लिए क्या-क्या किया? ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए। ट्रम्प से नजदीकी का जुकरबर्ग को फायदा मिला ट्रम्प और जुकरबर्ग की बढ़ती नजदीकी का असर सरकारी फैसलों पर भी दिख रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया। पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रम्प और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। समझौते का मकसद AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच कराना है। जुकरबर्ग का मानना है कि AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तकनीकी सुधारों से दूर किया जा सकता है। हालांकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसमें कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। ट्रम्प से दोस्ती आगे चलकर भारी भी पड़ सकती है CNN के मुताबिक जुकरबर्ग को ट्रम्प के करीब आने का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसके नुकसान भी हो सकते हैं। अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में बहुमत मिलता है या 2028 में उसका राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को लैटर लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं को कितना पैसा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए भारी रकम खर्च की और अब उसे इसका फायदा मिल रहा है। ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी जुकरबर्ग पर भरोसा नहीं करते। उन्हें लगता है कि जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीति के पीछे कोई विचारधारा नहीं, बल्कि अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। यानी जुकरबर्ग ने कभी जिस ट्रम्प से टकराव मोल लिया था, आज उसी के साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन यह दोस्ती कितनी टिकेगी, इसका फैसला आने वाले चुनाव और अमेरिकी राजनीति का रुख करेगा। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे: मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने विपक्ष को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर पढ़ें…
H-1B विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे।
एच-1बी विवाद पर माइक्रोसॉफ्ट ने दी सफाई, अमेरिका की कार्रवाई के बीच किया अपनी नीतियों का बचाव
वाशिंगटन, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी वीजा के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके लगभग 6,000 आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों से संबंधित थे। यह बयान तब सामने आया, जब ट्रंप प्रशासन ने एक प्रमुख रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड कार्यक्रम के माध्यम से विदेशी श्रमिकों को स्पॉन्सर करने की कंपनी की क्षमता को निलंबित कर दिया था।
आलू भुजिया के मसालों से ठीक हुआ अस्थमा? अमेरिकी शख्स का दावा, भारतीय खाने को बताया फायदेमंद
भारतीय मसालों और खाने के कई फायदे आपने सुने होंगे लेकिन क्या कभी पैकेट वाली आलू भुजिया को अस्थमा के इलाज के लिए खाया है। अमेरिकन शख्स सैम ने वीडियो में आलू भुजिया के पैकेट की फोटो दिखाई और उसमें लिखे मसालों को अस्थमा-एलर्जी का इलाज बताया। चलिए पूरी स्टोरी जानते हैं।
हितों से समझौता नहीं: व्यापार घाटे से टैरिफ तक, भारत-अमेरिका समझौते की राह में कई पेच
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'तब आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति बुलाएंगे', बिहार के छात्र ने छोड़ा अमेरिका, फिर सच कर दिखाया सपना
“मेरे अंदर के बिहारी ने कहा, ‘मैं तब वापस आऊंगा जब आपके राष्ट्रपति मुझे बुलाएंगे’”: जब शरद सागर ने भारत में काम करने के लिए अमेरिका छोड़ा, तो लोग हंसे, लेकिन उन्होंने भविष्य को सच कर दिखाया।
Iran US War: ईरान ने दागी Sayyad-3 मिसाइल, क्या अमेरिकी एयरक्राफ्ट था निशाने पर? | Trump | Mojtaba
ईरान ने अचानक ऐसी मिसाइल दागी कि अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है...क्योंकि जिस जगह से यह मिसाइल चली, वहां कुछ मिनट पहले अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान देखे गए थे.
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran US War Update: अमेरिका ने भेजे 10,000 सैनिक, सामने तैयार बैठा ईरान | Trump | Mojtaba Khamenei
Iran America war में ईरान ने अमेरिका को Middle East से ही खदेड़ दिया? Prof Peter Kuznik का बड़ा दावा
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रही उथल-पुथल अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। वैश्विक मामलों के जानकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में दशकों से चला आ रहा अमेरिकी दबदबा अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है
अमेरिका में भारतवंशी छात्रों का कमाल, बनाया ऐसा कॉफी पॉड कि कचरा ही नहीं बचेगा
अमेरिका के छात्रों आदित्य हेरेकर और करण वर्मा ने बायोडिग्रेडेबल कॉफी पॉड Naturista बनाया है। करीब 200 प्रोटोटाइप के बाद तैयार इस इनोवेशन ने एक चैलेंज में 25 हजार डॉलर का पुरस्कार जीता। जानिए कैसे बना यह अनोखा कॉफी कैप्सूल।
पीसीएस 2025 के साक्षात्कार के तीसरे दिन एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि अमेरिका में चीन के राष्ट्रपति का स्वागत करने ट्रंप क्यों गए और उनका स्वागत क्यों हुआ।
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा!
बोरिया-बिस्तर समेट भागी अमेरिकी सेना,अब Iran के रजिस्टेंस का दबदबा! असली मुद्दा ये है कि इराक में मुकीम सबसे बड़ी फोर्स हशदुशशाबी के लिए ये नाजुक और इम्तेहान की घड़ी है...वो इसलिए क्यों कि अमेरिका और इजरायल किसी भी सूरत में इराक में ईरान हिमायती इन फोर्सेस का खात्मा चाहते हैं..
US Troops Withdrawal From Iraq: बोरिया-बिस्तर समेट क्यों भागी अमेरिकी सेना! Trump। Iran। Middle East
Iran America War के बीच Iraq से क्यों निकल रही US की फोर्सेस,अब कौन हावी?| Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक की। बैठक में AI की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, ओपनएआई, X-AI और एनवीडिया के CEO ने एक समझौते पर साइन किए। इस दौरान ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस (SI) करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। उन्होंने कहा कि AI को आर्टिफिशियल यानी बनावटी कहना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक, यह इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है। ट्रम्प ने कहा कि AI की दौड़ अब अमेरिका और चीन के बीच है और फिलहाल अमेरिका इस मुकाबले में आगे चल रहा है। उन्होंने पिछले हफ्ते UN महासभा में पहली बार AI को सुपर इंटेलिजेंस (SI) कहा था। समझौते में कंपनियों ने 4 बातें मानने पर सहमति दी 1. अपने AI सिस्टम की खुद जांच करेंगी: कंपनियां खुद जांचेंगी कि उनके AI मॉडल सुरक्षा के तय नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। 2. अलग टीम निगरानी करेगी: कंपनियां एक टीम बनाएंगी, जो AI सिस्टम की निगरानी करेगी और यह देखेगी कि कहीं कोई खतरा या गड़बड़ी तो नहीं है। 3. बाहर के विशेषज्ञ भी जांच करेंगे: कंपनियां अपने AI मॉडल की जांच बाहरी विशेषज्ञों या किसी स्वतंत्र संस्था से भी कराएंगी। 4. कंपनी का बोर्ड भी नजर रखेगा: कंपनियों के बोर्ड की एक स्वतंत्र समिति इन जांच रिपोर्टों को देखेगी। अगर कोई समस्या सामने आती है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी भी होगी। ट्रम्प ने टेक कंपनियों से कहा- डेटा सेंटर बनाने में स्थानीय लोगों को साथ लें बैठक में AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी चर्चा हुई। ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, टेक कंपनियों को वहां की स्थानीय कम्युनिटी के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियों को इन इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करनी चाहिए। इसमें स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना भी शामिल हो सकता है। ट्रम्प के मुताबिक, डेटा सेंटर बनाने से पहले कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि इन प्रोजेक्ट्स का फायदा वहां रहने वाले लोगों को भी मिल सके। AI के लिए डेटा सेंटर इतने जरूरी क्यों हैं? हम जिस AI से सवाल पूछते हैं, उसके पीछे हजारों-लाखों शक्तिशाली कंप्यूटर काम करते हैं। ये बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। इसलिए AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ेगी। जुकरबर्ग बोले- लोगों को AI पर भरोसा होना जरूरी मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का मकसद लोगों का भरोसा बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोगों और ग्राहकों को भरोसा होना चाहिए कि AI तकनीक उसी तरह काम करेगी, जिस तरह इसे बनाया गया है। एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि सभी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि इस तकनीक का विकास सुरक्षित तरीके से हो। अमेरिका-चीन की AI रेस में 4 मोर्चे पर मुकाबला 1. चिप्स: AI का दिमागAI को चलाने के लिए बहुत ताकतवर चिप्स चाहिए। जिसके पास बेहतर और ज्यादा चिप्स होंगे, वह बड़े और तेज AI सिस्टम बना सकेगा। 2. डेटा सेंटर: जहां AI चलता हैAI को चलाने वाले हजारों कंप्यूटर बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ऐसे डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ रही है। 3. बिजली: AI को चलाने के लिए ईंधनडेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली खाते हैं। इसलिए AI की रेस में सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, पर्याप्त और लगातार बिजली मिलना भी जरूरी है। 4. AI मॉडल: किसका AI ज्यादा काम का?आखिर में मुकाबला इस बात का भी है कि कौन ज्यादा तेज, समझदार और मुश्किल काम करने वाला AI मॉडल बना सकता है। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन ने जंग में विस्फोटकों से लैस रोबोट सैनिक उतारे: रूस के 3000 सैनिकों को मारने का दावा रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
विचार: अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजे भारत
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
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अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन : राष्ट्रपति शी का दबदबा, और ट्रंप के पत्ते
एआई के मुद्दे पर, राष्ट्रपति शी ने एआई विकास पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण का विरोध किया और ओपन-सोर्स एआई का समर्थन किया।
Iran America War में IRGC ने Hormuz Strait में उड़ाया अमेरिकी सुरक्षा में तैनात जहाज | Trump
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चल रहे जहाजों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर है। एक तेल टैंकर के प्रभावित होने की भी प्रारंभिक सूचना है
अमेरिकी नागरिकों से 72 लाख डॉलर की ठगी: अहमदाबाद से चल रहे अवैध कॉल सेंटर सिंडिकेट का भंडाफोड़
सीबीआई ने अहमदाबाद से संचालित अवैध कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों से 72.1 लाख डॉलर (60 करोड़ रुपये से अधिक) की साइबर ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को यूएस अटॉर्नी और एफटीसी जैसे अमेरिकी संघीय अधिकारी बताकर पीड़ितों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी केस में फंसाने का डर दिखाते थे और बैंक खातों से रकम निकालकर सोना खरीदने व कूरियर को सौंपने के लिए मजबूर करते थे। डिजिटल साक्ष्य जब्त कर एजेंसी पूरे सिंडिकेट की जांच कर रही है।
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
नेताओं के हेल्दी खानपान के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डाइट जानते हैं। जिन चीजों को अनहेल्दी समझकर खाने से इनकार किया जाता है, उसी डाइट कोक, बर्गर, पिज्जा को खाकर राष्ट्रपति करते हैं बड़े-बड़े फैसलें।
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
CBSE पोर्टल की सुरक्षा खामी उजागर करने वाले 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को अमेरिकी न्याय विभाग (US DOJ) के हॉल ऑफ फेम में शामिल कर सम्मानित किया गया है।
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
हार्वर्ड-स्टैनफर्ड नहीं... MIT है अमेरिकी नंबर वन कॉलेज, जानिए आइवी लीग कॉलेजों की रैंक
यूएस न्यूज बेस्ट कॉलेज 2027 रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने प्रिंसटन के 15 साल के वर्चस्व को खत्म कर पहला स्थान हासिल कर लिया है। सभी 8 आइवी लीग कॉलेज लिस्ट में शामिल हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
बिहार के नीरज को अमेरिका में मिली 2.6 करोड़ की स्कॉलरशिप, पिता चलाते हैं पान की दुकान
सारण जिले के नीरज को अमेरिका में करीब 2.6 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप पर PhD कर रहे हैं। बिहार के छोटे से गांव से अमेरिका तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष की अच्छी मिसाल है।
पिता के संघर्ष को सम्मान: कभी अमेरिका ने किया वीजा खारिज, आज नासा कर रहा स्वागत; कैसे लिखी सफलता की कहानी?
Iran Tehran Rally: सड़कों पर हथियार लेकर उतरा जनसैलाब, अमेरिका-इजरायल को खुला चैलेंज! | Trump
एक तरफ युद्ध चल रहा है, दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर लाखों लोगों की भीड़ है… हाथों में ईरान का झंडा है… सैन्य वर्दी पहने लोग हैं… ड्रोन और हथियारों का प्रदर्शन हो रहा है…
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
Houthis Saudi Arabia War के बीच धोखा खाकर भी अमेरिका के साथ क्यों सऊदी?| MBS |Trump| Yemen| Iran
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री जाएंगे अमेरिका, ट्रंप ने दे दिया वीजा! - ABP News
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अमेरिकी टैरिफ से डरने की जरूरत नहीं
जिस बात के कयास लगाए जा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया ऐंड ईरान ऐक्ट’ को मंजूर कर लिया है। वहां की सीनेट, यानी ऊपरी सदन ….
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में खुद को तंदुरुस्त और एनर्जेटिक बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के सप्लीमेंट्स, जिम वर्कआउट और हाई-प्रोटीन डाइट का सहारा लेते हैं। विशेष रूप से पश्चिमी देशों और अमेरिका में यह माना जाता है कि यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल कर लिया जाए, तो शरीर की सारी कमजोरियां दूर हो जाती हैं और ऊर्जा का स्तर हमेशा उच्च बना रहता है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) द्वारा जारी की गई एक बेहद चौंकाने वाली और व्यापक रिपोर्ट ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। सीडीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 71.5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो भरपूर मात्रा में प्रोटीन या अन्य पोषक तत्व लेने के बाद भी हर वक्त अत्यधिक थकान, सुस्ती और शारीरिक कमजोरी का शिकार रहते हैं। यह आंकड़ा न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि आधुनिक चिकित्सा जगत और पोषण विशेषज्ञों (Nutritionists) के लिए भी एक गहरी चिंता का विषय बन गया है। इस आलेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर भरपूर प्रोटीन लेने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर लोग क्रोनिक थकान और ऊर्जा की कमी का सामना क्यों कर रहे हैं, और इसके पीछे छिपे असली वैज्ञानिक व जीवनशैली से जुड़े कारण क्या हैं।प्रोटीन का सेवन बनाम शरीर की ऊर्जा: क्या सिर्फ प्रोटीन खाने से ही मिल जाती है एनर्जी?आम तौर पर लोगों के मन में यह भ्रम बैठा हुआ है कि यदि वे अपने रोजाना के खाने में चिकन, अंडे, प्रोटीन पाउडर, पनीर या अन्य हाई-प्रोटीन स्रोतों को शामिल कर लेते हैं, तो उनका शरीर स्वतः ही ऊर्जा से भर जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) और ऊर्जा उत्पादन का तंत्र केवल एक पोषक तत्व यानी प्रोटीन पर निर्भर नहीं करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी डाइट में अत्यधिक प्रोटीन तो जोड़ लेता है, लेकिन साथ ही जरूरी विटामिंस (जैसे विटामिन बी12, विटामिन डी), आयरन, सही प्रकार के कार्बोहाइड्रेट और पर्याप्त हाइड्रेशन की अनदेखी करता है, तो शरीर उस प्रोटीन को पूरी तरह पचाने और ऊर्जा में बदलने में असमर्थ हो जाता है। इसके अलावा, आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है। सीडीसी की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि सिर्फ मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (Protien, Fats, Carbs) की मात्रा पूरी कर लेने मात्र से ही कोई व्यक्ति अंदर से स्वस्थ या ऊर्जावान महसूस नहीं कर सकता, जब तक कि शरीर की कोशिकीय स्तर पर पोषण संबंधी जरूरतें पूरी न हो रही हों।नींद की कमी और मानसिक तनाव: थकान का सबसे बड़ा और अनदेखा कारणसीडीसी की इस व्यापक रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है कि शारीरिक थकान का सीधा संबंध केवल भोजन या डाइट से ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे आधुनिक युग की सबसे बड़ी बीमारियां—नींद की कमी (Sleep Deprivation) और मानसिक तनाव (Chronic Stress)—मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। आज के समय में कॉर्पोरेट कल्चर, नाइट शिफ्ट्स, और रातभर मोबाइल स्क्रीन या लैपटॉप के सामने समय बिताने के कारण लोगों की नींद का चक्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। जब शरीर को रात में गहरी और कम से कम 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं मिलती, तो शरीर के हारमोनल संतुलन में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है। कोर्टिसोल (Cortisol) यानी तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने से शरीर हमेशा 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड में रहता है, जिससे मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र लगातार थका हुआ महसूस करते हैं। आप चाहे दुनिया का सबसे महंगा प्रोटीन शेक पी लें या सबसे बेहतरीन डाइट फॉलो कर लें, लेकिन यदि आपकी नींद पूरी नहीं है और आप मानसिक रूप से तनावग्रस्त हैं, तो आपके शरीर की कोशिकाएं कभी भी तरोताजा महसूस नहीं कर सकतीं। यही कारण है कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी करोड़ों लोग अंदर से पूरी तरह खोखले और थके हुए महसूस कर रहे हैं।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) और खराब पाचन तंत्र की भूमिकाथकान और सुस्ती के इस महामारी जैसे फैलने के पीछे एक और बहुत बड़ा कारण हमारी आधुनिक शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle) है। आजकल अधिकांश नौकरियां ऐसी हो गई हैं जिनमें लोगों को लगातार 8 से 10 घंटे अपनी कुर्सी या डेस्क पर बैठकर बिताना पड़ता है। शारीरिक रूप से कोई मेहनत न होने के कारण शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुस्त हो जाता है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और खाया हुआ भोजन सही ढंग से पच नहीं पाता। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इस बात को मानते हैं कि जब तक आपका पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत और सक्रिय नहीं है, तब तक आप चाहे कितना भी पौष्टिक भोजन या प्रोटीन क्यों न खा लें, आपके शरीर को उसकी सही ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकती। अपच, कब्ज और आंतों (Gut Health) से जुड़ी समस्याएं शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा देती हैं, जिससे लगातार सुस्ती, सिरदर्द और भारीपन बना रहता है। सीडीसी की रिपोर्ट इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करती है कि जब तक लोग अपनी दिनचर्या में व्यायाम, वॉक और शारीरिक श्रम को शामिल नहीं करेंगे, तब तक केवल डाइट बदलने से थकान की इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता।निष्कर्ष: इस समस्या से बाहर निकलने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव जरूरी हैं?सीडीसी की यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी और आंखें खोलने वाला संदेश है। यह हमें यह सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल जिम जाने या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले किसी एक फिटनेस ट्रेंड को फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समग्र संतुलन (Holistic Balance) है जिसमें सही खानपान, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सक्रिय जीवनशैली का होना अनिवार्य है। यदि आप भी अक्सर खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो सिर्फ प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के बजाय अपनी नींद के पैटर्न को सुधारें, पानी की मात्रा बढ़ाएं, योग या मेडिटेशन को अपनाएं और डॉक्टर से सलाह लेकर अपने शरीर में विटामिंस व मिनरल्स की जांच करवाएं। आधुनिक दुनिया की इस अंधी दौड़ में अपने शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना और समय रहते आवश्यक बदलाव करना ही एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन की असली कुंजी है।
रूसी तेल पर 100% टैरिफ, अमेरिकी बिल से कैसे भारत की मुश्किल बढ़ सकती है? हर सवाल का जवाब - AajTak
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अमेरिका में कॉलेज छात्रों के लिए ‘किराये की मां’ जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सालाना करीब 1.5 लाख रुपये में छात्रों को देखभाल और पेरेंटिंग से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
कर्नाटक की नकल कर रहे ट्रंप? CM बोले- अमेरिका तक कॉपी हो रहा कांग्रेस मॉडल
CM डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5000 डॉलर देने के प्रस्ताव को कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं से जोड़ा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी कांग्रेस मॉडल की नकल हो रही है. शिवकुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार ने पहले कर्नाटक की योजनाओं को अपनाया था. अब ट्रंप भी इसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं.
ब्रिक्स की कामयाबी काबिलियत का प्रमाण: अमेरिकी नीति विशेषज्ञ एलिसा की राय- दुनिया भारत के लिए जगह बना रही है
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump
Iran US War: अमेरिकी सैनिकों पर हमले में ईरान की मदद चीन ने की? सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा | trump हाल ही में ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक अल-सलती एयरबेस पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा और कई घायल सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा
Iran US War: अमेरिकी जहाजों का शिकार करेगी Electro-Optical Camera वाली Ballistic Missile। Hormuz
अमेरिका जिस तरह की जुर्रत फारस की खाड़ी में अंजाम दे रहा है उसके बाद से ईरान का पारा चढ़ा हुआ है...वो भी दनादन अमेरिकी एसेट्स और मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हावी है...अब तो ईरान के हथियारों का जादुई बक्सा भी खुलता चला जा रहा है…
IRGC Captures US submarine के बाद ईरान का बड़ा दावा.अमेरिका सन्न | Hormuz| Trump
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Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान| Trump | IRGC
Iran attack US base के घबराया अमेरिका,खित्ते से निकलने का खुफिया प्लान
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump
Iran America War Update: ईरान ने Gulf of Oman में अमेरिकी जंगी बेड़े पर दाग दी मिसाइल| Trump असली तबाही मच गई है...अमेरिकी जंगी बेड़े फारस के समुंदर से भाग रहे हैं...ईरान ने वो कर दिया..जो बरसों से किसी और के करने की हिम्मत नहीं हुई थी…
Donald Trump's Approval Rating का बुरा हाल, Reuters/Ipsos के सर्वे में डेटा आया सामने | Iran US War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरती लोकप्रियता ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
Iran America War Update ईरान ने अमेरिका पर किया हमला, भड़के Donald Trump लगे खिसियाने !
Iran America War के बीच Gulf Countries के समुद्री इलाकों में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Iran America War: IRGC ने Khyber Shikan Missile से मिडिल ईस्ट में अमेरिका की हालत खराब की|Trump
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला | Middle East
Iran Attack On Kuwait: ईरान का American Strike के खिलाफ Kuwait US Base हमला
अमेरिका के मिनियापोलिस में गोलीबारी से दहशत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
अमेरिका में मिनियापोलिस के पॉश इलाके में बुधवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैल गई...एक रिहायशी इमारत में अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई...संदिग्ध हमलावर भी ढेर हो गया...गोलीबारी में मिनियापोलिस पुलिस के कम से कम दो अधिकारी भी घायल हो गए...पूरे इलाके में एफबीआई समेत सुरक्षाबलों की भारी तादाद में तैनाती देखी गई. देखें...
अमेरिका का बदला! ईरान के दो तेल टैंकर उड़ाए, सैन्य ठिकानों को भी बनाया निशाना
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
'फिल्में अमेरिका में ही बनें', डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हॉलीवुड की बिगड़ी हालत
हॉलीवुड की घटती हालत पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा प्लान बताया है. ट्रंप फिल्म और टीवी प्रोडक्शन के लिए फेडरल टैक्स इंसेंटिव चाहते हैं, ताकि नौकरियां अमेरिका लौटें.
Iran America War Update: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, दागी मिसाइलें | Oman | Trump | Hormuz
अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने के महज कुछ ही देर बाद, ईरान ने ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर एंटी-शिप मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर दिया है
Iran Attack on American Bases के बाद Jordan से हटाए UA Attack Helicopter? | Trump। Hormuz
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब फारस की खाड़ी से लेकर जॉर्डन तक पहुंचता नजर आ रहा है। लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से कथित बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी कार्रवाई की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
Iran America War:अमेरिका ने ईरान के Larak Island क्यों डाली बुरी नजर,अंदर की कहानी| Trump
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
Houthi Attack Saudi Arabia: हूतियों ने सऊदी के American Abrams Tank की निकाली हवा | Yemen War
इस वीडियो में जानिए कि कैसे एक छोटे से 6 पंखों वाले (Hexacopter) ड्रोन ने $1 करोड़ डॉलर (लगभग 80-85 करोड़ रुपये) की कीमत वाले अमेरिकी M1A2S Abrams Tank को सिर्फ एक मोर्टार शैल से तबाह कर दिया। युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है।
Hormuz Strait Update News: Trump के दावे में ईरान ने रख दी शर्त, क्या मानेगा अमेरिका | Iran US War
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता नजर आ रहा है।
Iran America War Update: Hormuz पर Trump के दावे पर भड़का Iran, अमेरिका को दे डाली धमकी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान ने भी दो टूक जवाब दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को खोलने पर सहमति नहीं होगी
Trump ने CEC Gyanesh Kumar की तारीफ की, Congress बोली- तुरंत ले जाओ अमेरिका | EVM | Pawan Khera
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ.. ऐसे में विपक्ष ने फौरन घेर लिया. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाना चाहिए
शाहरुख की ‘स्वदेश’ का असर, अमेरिका से लौटे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ ने उन्हें अमेरिका से भारत लौटकर अपने गांव के लिए काम करने को प्रेरित किया. हिंगोली में उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया. युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई थी.
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

