नर्मदापुरम में विधायक कप नर्मदांचल फुटबॉल लीग आज बुधवार से शुरू होगी। 19 अप्रैल तक रोजाना नाइट में मैच होंगे। जिसमें नर्मदापुरम के अलावा पचमढ़ी, भुसावल, अमरावती, नागपुर, विदिशा, सीहोर, मप्र पुलिस, नागपुर की टीमें भाग लेंगी। शाम 6 बजे टूर्नामेंट का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद दर्शन सिंह चौधरी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और नर्मदापुरम-इटारसी विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा की अध्यक्षता में होगा। शुभारंभ सभी धर्मों के धर्माचायों द्वारा गुब्बारे उड़ाकर किया जाएगा। पांच दिन नाइट टूर्नामेंट के मैच होंगे। दूसरे दिन के मुकाबले मुख्य रूप से महिला फुटबॉल पर केंद्रित रहेंगे। प्रतियोगिता सीनियर, जूनियर, मिनी तीन श्रेणियों में हो रही है। अलग-अलग पुरस्कार दिए जाएंगे। पहला पुरुस्कार 21हजार, दूसरा पुरस्कार 11हजार और तीसरा पुरुस्कार 7हजार रुपए दिया जाएगा। शुभारंभ के मप्र तैराकी संघ अध्यक्ष पीयूष शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष नीतू यादव, इटारसी नगर पालिका पंकज चौरे मौजूद रहेंगे पांच दिन होंगे मैच
यूरोपियन फुटबॉल में जब भी ताकत और पैसे की बात होती है, तो पीएसजी का नाम सबसे ऊपर आता है। कतर के सुल्तानों की दौलत और दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ियों से सजी यह टीम फ्रांस की लीग-1 पर राज करती है। लेकिन इस साल पीएसजी को चुनौती वह टीम दे रही है जिसे ‘मजदूरों का क्लब’ कहा जाता है। उत्तर फ्रांस के पूर्व खनन क्षेत्र से आने वाला आरसी लेन्स क्लब फुटबॉल की दुनिया में अंडरडॉग की नई परिभाषा लिख रहा है। लेन्स शहर कभी फ्रांस का प्रमुख खनन केंद्र हुआ करता था। क्लब का स्टेडियम दो पुरानी कोयला खदानों के ऊपर बना है। जब खदानें बंद हुईं, तो शहर ने भारी आर्थिक मंदी देखी, लेकिन फुटबॉल ने लोगों को जोड़े रखा। क्लब की परंपराएं अब भी उन मजदूरों को समर्पित हैं। जब भी कोई नया खिलाड़ी क्लब से जुड़ता है, उसे अनुबंध के साथ एक ‘माइनर्स लैंप’ (खदान में इस्तेमाल होने वाली लालटेन) दी जाती है। क्लब के जनरल डायरेक्टर बेंजामिन पैरट बताते हैं, ‘यह एक प्रतीक है। हम खिलाड़ियों को समझाते हैं कि यह लालटेन कभी मजदूरों का रास्ता रोशन करती थी और अब यही रोशनी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करेगी।’ हर मैच के दौरान स्टेडियम में ‘लेस कोरन्स’ गाना गूंजता है, जो खनन विरासत को श्रद्धांजलि देने वाला एक लोकप्रिय पॉप गीत है। लेन्स ने स्थानीय प्रशासन से अपना स्टेडियम खरीदा है ताकि आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकें। क्लब का मॉडल अपनी एकेडमी से युवा प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें बड़े क्लबों को बेचकर राजस्व जुटाने पर टिका है। पैरट कहते हैं, ‘जिस इलाके में बेरोजगारी की दर देश में सबसे ज्यादा है, वहां हम चाहते हैं कि आर्थिक रूप से जिम्मेदार बनें।’ लेन्स का उदय साबित करता है कि फुटबॉल केवल पैसों का खेल नहीं है। जहां एक ओर पीएसजी जैसे क्लब बड़े खिलाड़ियों को खरीदकर सफलता पाना चाहते हैं, वहीं लेन्स ने अपनी पहचान, वित्तीय अनुशासन, खदानों से मिली जुझारू मानसिकता को सबसे बड़ी शक्ति बनाया है। 30 हजार की आबादी वाले शहर का यह क्लब जब 38 हजार की क्षमता वाले स्टेडियम में खेलता है, तो वह केवल एक टीम नहीं, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की उम्मीद बनकर उतरता है। मैदान पर प्रदर्शन - अनुभवी खिलाड़ियों और युवा जोश का मेल लेन्स की इस सफलता के पीछे उनके कोच पियरे सेज और अनुभवी खिलाड़ियों का बड़ा हाथ है। इस सीजन में फ्लोरियन थौविन क्लब के मुख्य चेहरा बनकर उभरे हैं। 33 साल के थौविन ने अब तक 10 गोल और 7 असिस्ट के साथ क्लब को वह आक्रामकता दी है, जिसकी उन्हें जरूरत थी। उनके साथ 28 वर्षीय ओडसन एडुआर्ड जैसे स्ट्राइकर ने टीम के आक्रमण को धार दी है। एडुआर्ड ने सीजन में सभी कॉम्पिटीशन में 13 गोल किए हैं और वे टीम के टॉप स्कोरर हैं।
यूनियन फुटबॉल क्लब के अध्यक्ष बने लोकेश ‘साहिल’
यूनियन फुटबॉल क्लब की नई कार्यकारिणी के चुनाव क्लब मैदान पर सम्पन्न हुए। यह क्लब 139 साल पुराना है। कोलकाता के मोहन क्लब से भी पुराना क्लब है यह। चुनाव में लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ को निर्विरोध अध्यक्ष, महिपाल स्वामी को सचिव, सनी सेबेस्टियन और अनिल शर्मा को उपाध्यक्ष, आशा को संयुक्त सचिव तथा भव्या राजावत को कोषाध्यक्ष चुना।
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