मौजूदा दौर में जब लड़कियां टीवी पर महिला वर्ल्ड कप और यूरोपियन चैम्पियनशिप जैसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट देख रही हैं, तब एक पीढ़ी ऐसी भी है जिसके दिल में एक गहरी टीस है। यह उन महिलाओं की ‘खोई हुई’ पीढ़ी है जो 70, 80 और 90 के दशक में फुटबॉल के जुनून के साथ बड़ी तो हुईं, लेकिन उन्हें खेलने का कोई मंच नहीं मिला। अब जब यही महिलाएं 40 या 50 की उम्र पार कर चुकी हैं, तो वे अपने उस छूटे हुए ख्वाब को फिर से जी रही हैं। भावनाएं इस कदर जुड़ी हैं कि जब एक 46 साल की महिला ने जिंदगी में पहली बार पूरी किट (बूट्स, शिन पैड्स और जर्सी) पहनकर मैदान पर कदम रखा, तो आंखों से आंसू छलक पड़े। फीफा की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के बाद से संगठित रूप से फुटबॉल खेलने वाली महिलाओं और लड़कियों की संख्या 24% बढ़कर 1.66 करोड़ के पार पहुंच गई है। 2027 तक इसे 6 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। लेकिन, ग्रासरूट लेवल पर उन महिलाओं की एक बड़ी तादाद है, जिन्हें उनके दौर में सुविधाओं और सामाजिक नजरिए के अभाव में पीछे छोड़ दिया गया था। करीब 40-50 साल पहले, लड़कियों के लिए शौक के तौर पर भी फुटबॉल खेलना एक बड़ा संघर्ष था। जो लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं, उन्हें अक्सर ‘टॉमबॉय’ कहकर चिढ़ाया जाता था। स्कूलों में भी खेल बंटे हुए थे। लड़कियों को नेटबॉल और हॉकी की तरफ भेज दिया जाता था, जबकि फुटबॉल और रग्बी लड़कों के लिए आरक्षित माने जाते थे। महिलाओं की कोई स्थानीय टीम या क्लब नहीं होते थे। ऐसे में लड़कियों को ऊबड़-खाबड़ मैदानों पर लड़कों की टीमों के बीच अपना खेल साबित करना पड़ता था। वर्षों बाद अब यह पीढ़ी अपने उस छूटे हुए खेल को दोबारा गले लगा रही है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ‘वेटरन विमंस क्लब’ बन रहे हैं, जहां उम्रदराज महिलाएं प्रतिस्पर्धी फुटबॉल खेल रही हैं। 2015 में कैरल बेट्स ने 25 से 80 साल की महिलाओं के लिए ‘क्रॉली ओल्ड गर्ल्स’ नाम से एक क्लब बनाया। बेट्स खुद उसी पीढ़ी से आती हैं, जिनसे उनका खेल छिन गया था। इसी तर्ज पर जो ट्रेहर्न ने उन महिलाओं के लिए ‘कैंटरबरी ओल्ड बैग्स’ की शुरुआत की, जो जिंदगी के इस पड़ाव पर खेल का हिस्सा बनना चाहती हैं। 35 से 50 साल की उम्र में मैदान पर लौट रहीं इन महिलाओं की कहानियां भावुक करने वाली हैं। इनमें से कई ने बचपन में बिना गोलपोस्ट या बुनियादी सुविधाओं के खेला था। अब जब ये महिलाएं पूरी किट पहनकर मैदान पर उतरती हैं, तो यह उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं रह जाता, बल्कि एक तरह का सशक्तिकरण बन जाता है। जो महिलाएं खेल नहीं पा रही हैं, वे अब लड़कियों की टीमों को कोचिंग देकर अपना सपना पूरा कर रही हैं। यह केवल फुटबॉल की वापसी नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी की जीत है जिसने अपने खेल से कभी हार नहीं मानी।
बारां: श्रीराम स्टेडियम में अंडर-20 फुटबॉल टीम के लिए ट्रायल और विशेष शिविर आज
राजस्थान फुटबॉल संघ के निर्देशानुसार चयनित खिलाड़ियों को चित्तौड़गढ़ में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
अंडर-20 फुटबॉल चयन: 50 खिलाड़ियों ने बहाया पसीना
भास्कर संवाददता| सीहोर शहर के चर्च मैदान पर पांच अप्रैल से होने वाली अंडर-20 फुटबॉल प्रतियोगिता को लेकर रविवार को चयन प्रक्रिया हुई। इसमें 50 से ज्यादा फुटबॉल खिलाड़ियों ने चयन के लिए पसीना बहाया। अब टीम का गठन किया जाएगा। जिला फुटबॉल एसोसिएशन के तत्वाधान में यह प्रतियोगिता आयोजित होगी। यह जानकारी एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने दी। चर्च मैदान पर जारी ब्लाक स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में सीहोर बॉयज ने सीहोर चिल्ड्रन को 2-0 से हराया। मैच में सीहोर बॉयज की ओर से आदित्य ने एक गोल किया। अनुज ने एक गोल किया। मौके पर टीम के कोच सुयश कन्नोजिया, विपिन पवार, मनोज अहिरवार मौजूद रहे। चयन समिति की ओर से आनंद उपाध्याय, मनोज कन्नोजिया, मनोज दीक्षित मामा, अरुण राठौर भी मौजूद रहे।
फुटबॉल प्रतियोगिता शुरू, 27 टीमों में होगा मुकाबला
उदयपुर | बीएन संस्थान के खेल मैदान में तीन दिवसीय मामा अमान फुटबॉल प्रतियोगिता शनिवार को शुरू हुई। इसमें अंचल की 27 टीमें दमखम दिखा रही हैं। आयोजन अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. रेणु राठौड़ ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्घाटन ओलंपियन व अर्जुन अवॉर्ड विजेता अशोक ध्यानचंद ने किया। उनके साथ प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़, संयुक्त मंत्री राजेंद्र सिंह ताणा और वित्त मंत्री शक्ति सिंह कारोही भी थे। उद्घाटन मैच में गुड मॉर्निंग क्लब ने वायबीएफसी डबोक को हराकर विजयी शुरुआत की। इस मौके पर अशोक कुमार ध्यानचंद ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खेल को खेल भावना से खेलें, हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण खेल का जज्बा होता है। करण सिंह उमरी, नवल सिंह जूड़, चंद्रवीर सिंह करेलिया, अतीत सिंह, जयदीप सिंह चुंडावत, स्पोर्ट्स ऑफिसर डॉ. ऊम सिंह राठौड़ और नाहर सिंह झाला सहित कई गणमान्य मौजूद रहे, जिन्होंने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।
मुंगेर जिला मुख्यालय स्थित पोलो मैदान में लगभग 55 लाख रुपए की लागत से एस्ट्रो टर्फ तैयार हो गया है। यह सुविधा जल्द ही फुटबॉल खिलाड़ियों को समर्पित की जाएगी, जिससे वे दिन-रात अभ्यास कर सकेंगे। गुरुवार को डीएम निखिल धनराज निप्पीणीकर ने खुद फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ इस टर्फ पर पूर्वाभ्यास किया। डीएम ने बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से पोलो मैदान में इस एस्ट्रो टर्फ का निर्माण कराया गया है। इसका उद्घाटन जल्द ही किया जाएगा, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से फुटबॉल खिलाड़ियों को सौंप दिया जाएगा। फुटबॉल प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित उन्होंने जानकारी दी कि खेल प्रोत्साहन नीति के तहत पोलो मैदान में अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इस एस्ट्रो टर्फ पर फुटबॉल और क्रिकेट खिलाड़ी दिन और रात दोनों समय अभ्यास कर सकेंगे। खिलाड़ियों को रात में अभ्यास करने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए दूधिया रोशनी की व्यवस्था की गई है। टर्फ में वियतनाम से मंगाई गई कृत्रिम घास का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त, खेलने के दौरान चोट से बचाव के लिए रबर के दाने भी डाले गए हैं। तारापुर प्रखंडों में एस्ट्रो टर्फ बनाने की योजना डीएम ने यह भी बताया कि आने वाले समय में जमालपुर, खड़गपुर और तारापुर प्रखंडों में भी एस्ट्रो टर्फ बनाने की योजना है, जिस पर कार्य जारी है। जिले में एस्ट्रो टर्फ बनाने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के फुटबॉल खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देना है, ताकि वे अपनी प्रतिभा निखारकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें। फुटबॉल खिलाड़ियों ने इस पहल पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिले में पहले फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए ऐसी कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी। जिला प्रशासन की इस पहल से पोलो मैदान में एस्ट्रो टर्फ का निर्माण मुंगेर को एक नई पहचान देगा और खिलाड़ियों को दिन-रात प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। खिलाड़ियों ने बताया की पटना, रजगीर के बाद अब मुंगेर में एस्ट्रो टर्फ का निर्माण कराया गया है।
गोरखपुर मंडल के खिलाड़ियों के लिए जूनियर राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप 2026 को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मई के मध्य प्रस्तावित इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए खिलाड़ियों को निर्धारित आयु सीमा और जरूरी दस्तावेजों की शर्त पूरी करनी होगी। मंडल सचिव हमजा खान ने बताया कि प्रतियोगिता में वही खिलाड़ी शामिल हो सकेंगे, जिनका जन्म 1 जनवरी 2007 से 31 दिसंबर 2009 के बीच हुआ है। इससे बाहर के खिलाड़ियों को पात्र नहीं माना जाएगा। आयु प्रमाण पत्र को लेकर सख्ती उन्होंने स्पष्ट किया कि आयु प्रमाण पत्र जन्म के एक साल के भीतर नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत द्वारा जारी होना चाहिए। अन्य किसी प्रकार के प्रमाण पत्र को मान्यता नहीं दी जाएगी, इसलिए खिलाड़ियों को अपने दस्तावेज पहले से जांच लेने की सलाह दी गई है। गोरखपुर मंडल टीम के गठन के दौरान केवल उन्हीं खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, जिनके पास सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होंगे। दस्तावेज अधूरे होने पर खिलाड़ी को मौका नहीं मिलेगा। CRS प्लेयर ID बनवाना जरूरी अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ द्वारा जारी CRS (प्लेयर ID) भी अनिवार्य कर दी गई है। बिना इस ID के किसी भी खिलाड़ी को प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जाएगा। मंडल सचिव ने इच्छुक खिलाड़ियों से अपील की है कि वे अपने सभी दस्तावेज समय रहते तैयार कर लें और प्लेयर ID भी बनवा लें, ताकि चयन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
प्रयागराज के डीएसए ग्राउंड में बुधवार को अंतर मंडलीय रेलवे फुटबॉल लीग चैंपियनशिप-2026 का शुभारंभ हुआ। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) रजनीश अग्रवाल ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मंडल क्रीड़ा अधिकारी एवं मंडल वित्त प्रबंधक शैलेन्द्र कुमार सिंह सहित कई अधिकारी और खेल प्रेमी उपस्थित रहे। उद्घाटन के बाद खेले गए पहले मुकाबले में प्रयागराज मंडल की टीम ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को 5-0 से हराया। प्रयागराज की टीम ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए शुरुआत से ही विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा। टीम के बेहतर तालमेल और अनुशासित खेल ने दर्शकों को प्रभावित किया। इस मैच में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राकेश यादव जूनियर को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। कबीर खान, योगेश चंद और विवेक ने निर्णायक मंडल के रूप में मैच का संचालन किया। कार्यक्रम का संचालन मंडल क्रीड़ा सचिव धर्मेंद्र कुमार निषाद और राकेश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सुरेश शर्मा, सुशील ओझा, राजेश कुमार, जफर आलम और अभिषेक सहित कई खिलाड़ी और खेल अधिकारी भी उपस्थित थे। प्रतियोगिता के तहत बुधवार को दूसरा मुकाबला झांसी वर्कशॉप और उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, प्रयागराज की टीमों के बीच शाम 4 बजे से खेला जाएगा। इस लीग में प्रयागराज मंडल, झांसी मंडल, उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, रेलवे सुरक्षा बल और झांसी कारखाना की टीमें भाग ले रही हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ऐसी प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करती हैं। साथ ही, ये कर्मचारियों के बीच खेल भावना, आपसी समन्वय और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘नेशनल ट्राइबल गेम्स- 2026’ का आगाज आज से होने जा रहा है। देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से खिलाड़ी रायपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के साथ राज्य के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। यह प्रतियोगिता 3 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें कुल सात खेलों का आयोजन किया जाएगा। डे-वन का पूरा शेड्यूल (रायपुर) स्विमिंग (इंटरनेशनल स्विमिंग पूल) सुबह 9:00 बजे से पुरुष-महिला वर्ग में 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक, 50 मीटर बटरफ्लाई और 200 मीटर फ्रीस्टाइल की हीट्स होंगी। दोपहर 4:30 बजे से फाइनल मुकाबले – 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई। वेटलिफ्टिंग दोपहर 2:00 बजे ज्यूरी और टेक्निकल ऑफिशियल्स की मीटिंग होगी। हॉकी सुबह 11:00 बजे टीम मैनेजर्स की मीटिंग (सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम)। फुटबॉल (महिला वर्ग) सुबह 7:30 बजे – ग्रुप ए: तमिलनाडु बनाम गुजरात। दोपहर 4:00 बजे – ग्रुप बी:सिक्किम बनाम झारखंड,आंध्र प्रदेश बनाम छत्तीसगढ़,असम बनाम अरुणाचल प्रदेश देखिए पहले ये तस्वीरें- प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल तय जानकारी के मुताबिक, कुश्ती प्रतियोगिता अंबिकापुर में आयोजित होगी। एथलेटिक्स का आयोजन जगदलपुर में किया जाएगा। अंबिकापुर में ही मलखंब प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। छत्तीसगढ़ के 180 खिलाड़ी लेंगे भाग इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के लगभग 180 खिलाड़ी भी हिस्सा लेने जा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने और उनके खेल को करीब से देखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके प्रदर्शन और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कुल मिलाकर यह आयोजन छत्तीसगढ़ के खेल और खिलाड़ियों दोनों के लिए नई ऊर्जा और नई दिशा देने वाला साबित होगा। इसे राज्य के लिए एक सौभाग्यपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मांडविया बोले- आदिवासी बच्चों को मिलेगा बड़ा फायदा केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” विजन का हिस्सा है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मांडविया ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिभाओं को सामने लाना बेहद जरूरी है। सरकार का फोकस है कि प्रतिभाओं की जल्दी पहचान हो, उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण मिले और राष्ट्रीय खेल ढांचे में शामिल किया जाए। 23 दिसंबर को लोगो हुआ और मैस्कॉट हुआ लॉन्च बतादें कि 23 दिसंबर को बिलासपुर के दिवंगत बी.आर. यादव स्पोर्ट्स स्टेडियम में इन खेलों का लोगो, थीम सॉन्ग और मैस्कॉट ‘मोरवीर’ लॉन्च किया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी मौजूद रहे।
फुटबॉल कोच के बाद अब बड़े परदे पर क्रिकेटर बनकर चमकेंगे Ajay Devgan,एक्टर की नई बायोपिक फिल्म पर आया बड़ा अपडेट
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‘भीड़ से साथ की उम्मीद मत रखना', Ajay Devgan की मच अवेटेड फिल्म Maidaan काट्रेलर हुआ लॉन्च,फुटबॉल कोच बनकर छा गए एक्टर

