ASEAN Cup का नया अध्याय; फीफा ने फुटबॉल प्रेमियों को दिया बड़ा सरप्राइज
फीफा की भागीदारी से आसियान कप बनेगा वैश्विक टूर्नामेंट। विस्तार की योजनाओं के साथ अब जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें दे सकती हैं चुनौती। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
खेलों की दुनिया में अद्भुत ट्रेंड नजर आने लगा है। इंग्लिश फुटबॉल क्लब आर्सनल के मैक्स डॉवमैन हाल ही में प्रीमियर लीग के इतिहास में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं। स्केटबोर्डिंग में 17 वर्षीय स्काई ब्राउन और डार्ट्स में 18 वर्षीय ल्यूक लिटलर दो-दो बार वर्ल्ड चैम्पियन बन चुके हैं। क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं। टेनिस में एमा राडुकानू ने 18 की उम्र में ग्रैंड स्लैम जीता था। फॉर्मूला-1 में 19 वर्षीय किमी एंटोनेली दूसरे सबसे कम उम्र के रेस विनर बने हैं। ऐसा लगता है टीनेजर्स खेलों पर राज कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं। 1992 से 2021 के बीच ओलिंपियंस की औसत उम्र में वास्तव में दो साल का इजाफा हुआ है। टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल में खिलाड़ी अब ज्यादा उम्र तक अपने करियर के शीर्ष पर खेल रहे हैं। तो फिर औसत उम्र का बढ़ना और दूसरी तरफ 14-18 साल के युवाओं का विश्व स्तर पर धूम मचाना, आखिर इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, मनोविज्ञान और एडवांस ट्रेनिंग है। फॉर्मूला-1 की ड्राइवर एकेडमी में नेक्स्ट-जेनरेशन सिमुलेटर और ट्रेनिंग की मदद से युवाओं को कम अनुभव के बावजूद कम उम्र में ही शारीरिक और मानसिक दबाव के लिए तैयार कर लिया जाता है। फुटबॉल में भी ‘एलीट प्लेयर परफॉर्मेंस प्लान’ जैसी व्यवस्थाओं ने बड़ी क्रांति ला दी है। डेस रयान कहते हैं कि अब खिलाड़ियों को फिजिकल, मेडिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल तौर पर जो सुविधाएं मिल रही हैं, वे उन्हें बड़े मंच के लिए जल्दी तैयार कर रही हैं। प्रोफेसर शॉन कमिंग बताते हैं कि अब खेल पहले से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर हो गया है। जो बच्चे जल्दी विकसित होते हैं, उन्हें बेहतर सपोर्ट मिलता है। एकेडमी में बच्चों पर भारी वजन उठाने का दबाव नहीं डाला जाता, बल्कि उन्हें सही टेक्निक सिखाई जाती है ताकि शरीर तैयार होने पर वे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। हालांकि, सफलता के साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इन युवा एथलीटों का शरीर 22 साल की उम्र तक बढ़ता है, इसलिए चोटों से बचाने के लिए वर्कलोड मैनेज करना जरूरी है। युवाओं का दिमाग 23 साल तक पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। वे गलतियां कर सकते हैं, इसलिए मैदान के बाहर भी उन्हें सही मेंटरशिप और सुरक्षा की उतनी ही जरूरत होती है जितनी मैदान पर।
नेमार का 2026 वर्ल्ड कप खेलने का सपना लगभग खत्म: ब्राजील फुटबॉल फेडरेशन के साथ विवाद गहराया; अनसेलोटी से भी नहीं मिले, फिटनेस पर भी सवाल नेमार जूनियर के 2026 फीफा वर्ल्ड कप में खेलने की उम्मीदें अब लगभग खत्म होती नजर आ रही हैं। नेमार ने पहले संकेत दिए थे कि यह उनका आखिरी वर्ल्ड कप हो सकता है, लेकिन ब्राजील फुटबॉल फेडरेशन (CBF) के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है। सीएनएन ब्राजील की रिपोर्ट के अनुसार,CBF के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नेमार का टीम में चयन अब “अत्यंत जटिल” हो गया है और यह लगभग नामुमकिन सा लगता है। वार्म-अप मैचों से बाहर, वीडियो में जताई निराशाकुछ दिन पहले ही ब्राजील कोच कार्लो एंसेलॉटी ने आगामी वर्ल्ड कप वार्म-अप मैचों (फ्रांस और क्रोएशिया के खिलाफ) के लिए टीम घोषित की, जिसमें नेमार का नाम नहीं था। नेमार ने साओ पाउलो में एक इवेंट पर कहा कि वे डिसअपॉइंटेड और सैड हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी फिटनेस पर काम करने और टीम में वापसी की इच्छा जताई। लेकिन CBF के अंदर ये रिएक्शन अच्छा नहीं लिया गया। कोच कार्लो अनसेलोटी का अपमान भारी पड़ाहाल ही में एक ऐसी घटना हुई जिसने नेमार की टीम में वापसी के रास्ते लगभग बंद कर दिए। ब्राजील के हेड कोच कार्लो अनसेलोटी विशेष रूप से नेमार का खेल देखने के लिए सांतोस FC और मिरासोल के बीच मैच देखने पहुंचे थे। अनसेलोटी ने इसके लिए प्राइवेट जेट लिया और आखिरी समय में यात्रा की ताकि वे नेमार की फिटनेस का आकलन कर सकें। हालांकि, नेमार उस मैच में 'वर्कलोड मैनेजमेंट'का हवाला देकर नहीं खेले। इतना ही नहीं, उन्होंने कोच से मिलने या उनसे बात करने की भी कोई कोशिश नहीं की। बोर्ड इसे अनुशासनहीनता और कमिटमेंट की कमी मान रहा है। फिटनेस और सांतोस एफसी के लिए खराब प्रदर्शननेमार की फिटनेस लंबे समय से टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सांतोस FC के लिए खेलते हुए भी वे लगातार चोटिल रहे हैं और मैदान पर कम ही नजर आए हैं। 2023 में घुटने की गंभीर चोट के बाद से वे नियमित रूप से मैच नहीं खेल पा रहे हैं। CBF के अधिकारियों का मानना है कि इंटरनेशनल स्तर के बड़े टूर्नामेंट के लिए जिस मैच फिटनेस की जरूरत होती है, नेमार फिलहाल उसके करीब भी नहीं हैं। बार-बार लगने वाली चोटों के कारण बोर्ड का भरोसा भी उन पर कुछ कम हुआ है। ब्राजील के कोच कार्लो अनसेलोटी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि नेमार वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन इसके लिए उनका 100% फिट होना जरूरी है। फिलहाल वे पूरी तरह फिट नहीं हैं, इसलिए उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया है। अनसेलोटी ने यह भी कहा कि नेमार को ट्रेनिंग और मैच खेलकर अपनी फिटनेस और प्रदर्शन के जरिए खुद को साबित करना होगा। क्या अब भी है वापसी की कोई उम्मीद?हालांकि नेमार के पास अभी सांतोस के लिए इस सीजन में कुछ मैच बचे हैं, जहाँ वे अपनी फॉर्म और फिटनेस साबित कर सकते हैं। लेकिन फेडरेशन के भीतर चल रही चर्चाओं को देखें तो उनकी वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं होगी। जानकारों का कहना है कि कोच और फेडरेशन अब युवा खिलाड़ियों पर फोकस कर रहे हैं और नेमार के व्यवहार ने उनकी स्थिति और खराब कर दी है।34 साल के नेमार ब्राजील के ऑल-टाइम टॉप स्कोरर हैं (79 गोल), लेकिन इंजरी ने उनकी करियर को प्रभावित किया है। ------------------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… आकाशदीप की जगह सौरभ दुबे KKR में शामिल हुए:अब तक IPL डेब्यू नहीं किया; हर्षित राणा के रिप्लेसमेंट पर फैसला बाकी IPL का 19वां सीजन 28 मार्च से शुरू हो रहा है। पहला मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। सीजन शुरू होने से पहले ही 10 खिलाड़ी या तो पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं या शुरुआती मैचों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। पूरी खबर
फुटबॉल चौक से सड़क का निर्माण कार्य शुरू
जालंधर | सिटी में निगम ने सड़कों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। बारिश होने से महावीर मार्ग पर सड़क का निर्माण बंद कर दिया था। रविवार को निगम ने इस सड़क का काम शुरू कर दिया है। इसमें फुटबॉल चौक के नजदीक सड़क निर्माण का काम चल रहा है। इस सड़क को पेयजल लाइन बिछाने में क्षतिग्रस्त कर दिया था। ऐसे में बरसात होने से जलभराव और कीचड़ से लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। इस सड़क के निर्माण होने से यातायात सुगम होगा। वहीं धूल-मिट्टी से भी लोगों को राहत मिलेगी।
फुटबॉल मैदान पर इन दिनों इंग्लिश क्लब चेल्सी का एक नया तरीका सुर्खियों में है। मैच शुरू होने से ठीक पहले खिलाड़ी मैदान के बीचों-बीच रखी गेंद के चारों ओर एक गोल घेरा (हडल) बनाते हैं। मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व दिग्गज गैरी नेविले को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। उनका मानना है कि फैंस इन हरकतों से बेवकूफ नहीं बनेंगे, वे केवल खेल देखते हैं। हालांकि चेल्सी के कोच लियाम रोसेनियोर का नजरिया अलग है। उनका कहना है कि यह घेरा बनाने का फैसला उनका नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के लीडरशिप ग्रुप का था। टीम इसके जरिए अपनी एकजुटता दिखाना चाहती है और ‘गेंद का सम्मान’ करना चाहती है। प्री-मैच रस्में नई बात नहीं खेल जगत में प्री-मैच रस्में (मैच से पहले की आदतें) नई बात नहीं हैं। जीत और हार के बीच के फासले को कम करने के लिए टीमें ऐसे तरीके अपनाती हैं। 2019 वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल से पहले ऑस्ट्रेलिया के कोच जस्टिन लैंगर ने अपनी टीम को एजबेस्टन के मैदान पर नंगे पैर घास पर चलने को कहा था। उनका मानना था कि इससे खिलाड़ियों को धरती से ‘सकारात्मक ऊर्जा’ मिलती है। वहीं, लिवरपूल के पूर्व मैनेजर जुर्गन क्लॉप मैच से पहले वॉर्म-अप के दौरान मैदान के बीच खड़े होकर विपक्षी टीम को घूरते थे, ताकि विरोधी खिलाड़ियों की शारीरिक भाषा और कमियों को समझ सकें। रग्बी में भी इसके उदाहरण रग्बी में भी इसके दिलचस्प उदाहरण हैं। 2003 में इंग्लैंड के कप्तान मार्टिन जॉनसन अपनी टीम को लेकर विपक्षी टीम आयरलैंड के ‘रेड कार्पेट’ वाले हिस्से पर खड़े हो गए और हटने से साफ इनकार कर दिया। इस जिद ने इंग्लैंड की टीम में जबरदस्त जोश भर दिया। इसका असर मैच के दौरान खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज में साफ दिखा और उन्होंने मैच एकतरफा अंदाज में जीत लिया। ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की रग्बी टीम का पारंपरिक ‘हाका’ डांस पूरी दुनिया में मशहूर है, जो विरोधी टीम को खुली चुनौती देता है। खेल मनोवैज्ञानिक जमील कुरैशी मानते हैं कि इन रस्मों का खिलाड़ियों पर गहरा असर होता है। चेल्सी का ‘गेंद के प्रति सम्मान’ इस बात का प्रतीक है कि खिलाड़ी उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो उनके नियंत्रण में हैं। जीत की नींव रखने वाला मनोवैज्ञानिक हथियार मैच से पहले एक जैसी रूटीन अपनाने से दिमाग एकाग्र होता है। पूर्व रग्बी खिलाड़ी विल ग्रीनवुड का भी मानना है कि जब पूरी टीम मिलकर ऐसा करती है, तो यह सामूहिक ताकत बन जाती है। जाहिर है, सिर्फ गेंद के चारों ओर खड़े होने या नंगे पैर घास पर चलने से कोई टीम मैच नहीं जीत सकती, लेकिन अगर खिलाड़ी इन रस्मों पर पूरी तरह विश्वास करते हैं, तो यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि जीत की नींव रखने वाला एक मजबूत मनोवैज्ञानिक हथियार बन सकता है।
ट्रैक एंड फील्ड की दुनिया में एक नई स्प्रिंट सनसनी उभरकर सामने आई है। अमेरिका के 21 वर्षीय जॉर्डन एंथनी ने वर्ल्ड इंडोर चैम्पियनशिप की 60 मीटर दौड़ में गोल्ड जीतकर न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि अपनी संघर्ष भरी कहानी से सभी को प्रेरित भी किया। एंथनी ने 6.41 सेकंड का समय निकाला, जो इतिहास का चौथा सबसे तेज समय है। रेस से सिर्फ 36 घंटे पहले उन्हें गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा था। पोलैंड पहुंचने के बाद डोप टेस्ट के दौरान एक अधिकारी ने जब खून लिया तो सुई नस में नहीं लगी, बल्कि बाहर लग गई, जिससे उनके हाथ में ब्लड क्लॉट हो गया। वे अपना हाथ ठीक से हिला भी नहीं पा रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दर्द के साथ ही मैदान में उतरने का फैसला किया। नौ महीने पहले फुटबॉल छोड़कर चुना एथलेटिक्स जॉर्डन एंथनी की कहानी और भी खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने महज नौ महीने पहले ही पेशेवर एथलेटिक्स में कदम रखा है। इससे पहले वे कॉलेज फुटबॉल में अर्कांसस रेजरबैक्स टीम से खेलते थे। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने एनएफएल का सपना क्यों छोड़ा, तो उन्होंने साफ कहा, ‘क्योंकि यहां कोई मुझे टक्कर मारने के लिए मेरी तरफ नहीं दौड़ रहा है।’ रोमांचक रहा फाइनल, 0.01 सेकंड से चूके अजू रोमांचक फाइनल में कांटे की टक्कर दिखी। जमैका के किशाने थॉम्पसन ने 6.45 सेकंड के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि अमेरिका के ट्रेवॉन ब्रोमेल ने भी 6.45 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया। इसका फैसला फोटो फिनिश से हुआ। ब्रिटेन के जेरमायाह अजू महज 0.01 सेकंड से मेडल से चूक गए। ओलिंपिक चैम्पियन लायल्स के साथ ट्रेनिंग एंथनी 100 मीटर के ओलिंपिक चैम्पियन नोआ लायल्स के ट्रेनिंग ग्रुप का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं दूसरों की रेस देखता हूं। यह ठीक वैसा ही है जैसे फुटबॉल में हम दूसरी टीम का विश्लेषण करते हैं। ट्रैक एंड फील्ड में कई लोग ऐसा नहीं करते, लेकिन मैं माइंड गेम पर ध्यान देता हूं। मुझे पता होता है कि सामने वाला क्या अच्छा करता है और क्या नहीं।’ डेब्यू में जीता गोल्ड, अब घरेलू ओलिंपिक पर नजर इस जीत से एंथनी का आत्मविश्वास बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैंने डेब्यू में गोल्ड जीता और इसे अमेरिका लेकर जा रहा हूं। मैंने कॉलेज फुटबॉल में ज्यादा दर्शकों के सामने खेला है, लेकिन यहां आकर मैं ज्यादा उत्साहित था। यह मेरे लिए आसान लगा।’ अब उनका अगला लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 2028 में गोल्ड जीतना है। -------------------------------- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… आकाश दीप IPL 2026 से बाहर हुए:KKR के पेसर इंजरी के कारण नहीं खेलेंगे; मेगा ऑक्शन में एक करोड़ में खरीदा था कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को IPL 2026 से पहले एक और झटका लगा है। टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप पूरे सीजन से बाहर हो गए हैं। शनिवार को क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज को फ्रेंचाइजी के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। पूरी खबर
सहरसा स्टेडियम को आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करने की राज्य सरकार की योजना में संभावित बदलावों का जिले के खेल प्रेमियों और विभिन्न खेल संघों ने विरोध किया है। शुक्रवार को इन संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्टेडियम में प्रस्तावित तीरंदाजी मैदान के स्थान पर पूर्व निर्धारित एथलेटिक्स ट्रैक और फुटबॉल मैदान के निर्माण की मांग की। स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक की मांग खेल संघों के अनुसार, पहले की योजना में स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान, मल्टीपरपस हॉल और प्रशासनिक भवन का निर्माण शामिल था। हालांकि, हाल ही में उन्हें जानकारी मिली है कि एथलेटिक्स और फुटबॉल सुविधाओं की जगह तीरंदाजी मैदान विकसित करने की तैयारी चल रही है। संघों ने इस बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि कोसी प्रमंडल में तीरंदाजी के लिए उपयुक्त माहौल विकसित नहीं है, जबकि एथलेटिक्स और फुटबॉल यहां पहले से ही काफी लोकप्रिय खेल हैं। उन्होंने बताया कि एथलेटिक्स ट्रैक बनने से उसके भीतर फुटबॉल मैदान भी तैयार हो सकेगा, जिससे एक साथ दो प्रमुख खेलों को बढ़ावा मिलेगा। नक्शे में कुछ व्यावहारिक बदलावों का सुझाव ज्ञापन में खेल प्रतिनिधियों ने स्टेडियम के नक्शे में कुछ व्यावहारिक बदलावों का भी सुझाव दिया। उन्होंने नए प्रशासनिक भवन की बजाय खिलाड़ियों के लिए छात्रावास निर्माण की मांग की। इसके अतिरिक्त, बाहरी परिसर में प्रस्तावित मल्टीपरपस हॉल का स्थान बदलकर इंडोर स्टेडियम के पूर्वी हिस्से में करने का सुझाव दिया गया, ताकि उत्तर बिहार क्रिकेट एकेडमी को बचाया जा सके। संघों ने अतिरिक्त शौचालयों के स्थान पर वॉलीबॉल, हैंडबॉल, बास्केटबॉल, कबड्डी और खो-खो के स्थायी कोर्ट बनाने की भी मांग की। उन्होंने स्टेडियम के पूर्वी हिस्से को अतिक्रमण मुक्त कर खेल गतिविधियों के लिए विकसित करने का आग्रह किया। शहर के अन्य मैदानों, जैसे जिला स्कूल, केंद्रीय विद्यालय या पटेल मैदान में हॉकी या क्रिकेट के लिए टर्फ मैदान विकसित करने का सुझाव भी दिया गया। बुनियादी खेल सुविधाओं का विकास आवश्यक प्रतिनिधियों ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद, सहरसा के लगभग 40 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और विभिन्न खेलों में पदक भी जीते हैं। ऐसे में, बुनियादी खेल सुविधाओं का विकास अत्यंत आवश्यक है। ज्ञापन सौंपने वालों में एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, साइक्लिंग, बैडमिंटन और कबड्डी सहित कई खेल संघों के पदाधिकारी शामिल थे।
राजस्थान पुरुष फुटबॉल लीग आज से, 7 क्लबों के बीच होंगे 42 मैच
पूर्णिमा राजस्थान पुरुष फुटबॉल ए डिवीजन लीग शुक्रवार से खेली जाएगी। इसमें 7 क्लबों के बीच कुल 42 मैच होंगे। हर क्लब को 12 मैच खेलने को मिलेंगे। यह जानकारी राजस्थान फुटबॉल संघ के सचिव दिलीप सिंह शेखावत ने दी। सभी मैच एक ही मैदान पर खेले जाएंगे। लीग की विजेता टीम अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ की तीसरी डिवीजन लीग में खेलेगी। लीग 28 अप्रैल तक चलेगी। ये 7 क्लब लेंगे हिस्सा; जिंक फुटबॉल एकेडमी उदयपुर, जयपुर सिटी फुटबॉल क्लब, फुटबॉल क्लब ब्रदर्स यूनाइटेड जयपुर, सनराइज फुटबॉल क्लब सिरोही, एएसएल फुटबॉल क्लब जयपुर, जैरथी फुटबाल क्लब सीकर, रेहान फुटबॉल क्लब अजमेर। आज के मैच : सनराइज क्लब बनाम एएसएल क्लब (सुबह 7:30 बजे से), रिहान क्लब बनाम ब्रदर्स यूनाइटेड (सुबह 10:30 बजे से), जेरथी क्लब बनाम जिंक फुटबॉल अकादमी (शाम 4:00 बजे से)।
इंटर कॉलेज फुटबॉल स्पर्धा : निकेश और शुभम ने दागे मैदानी गोल, गोलकीपर नितिन का बेहतर सेफ
इंदौर | ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल और क्रिश्चियन कॉलेज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अटल बिहारी वाजपेई कप इंटर कॉलेज फुटबॉल स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश किया। ऑक्सफोर्ड कॉलेज की मेजबानी में खेली जा रही स्पर्धा के पहले सेमीफाइनल में क्रिश्चियन कॉलेज ने एक्रोपोलिस को 4-0 से हराया। विजेता टीम के लिए निकेश और शुभम ने दो-दो मैदानी गोल दागे। दूसरा सेमीफाइनल मेजबान ऑक्सफोर्ड और इंदौर इंटरनेशनल कॉलेज के बीच हुआ। निर्धारित समय और अतिरिक्त समय तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकी। परिणाम के लिए पेनॉल्टी शूटआउट का सहारा लेना पड़ा, जिसमें ऑक्सफोर्ड कॉलेज विजयी रहा। दक्ष और जय शर्मा ने गोल किए, जबकि गोलकीपर नितिन के बेहरत सेफ के कारण टीम फाइनल में पहुंची। पुरस्कार वितरण डॉ. सुरेश चोपड़ा, संचालक डॉ. अक्षांशु तिवारी और प्रिंसिपल डॉ. विशाल पुरोहित के आतिथ्य में होगा।
इंटर-अफ्रीकन फुटबॉल में जिम्बाब्वे चैंपियन, पेनल्टी शूटआउट में जीते
भोपाल | आरएनटीयू में इंटरनेशनल सेल द्वारा आयोजित इंटर-अफ्रीकन स्टूडेंट्स फुटबॉल टूर्नामेंट का समापन रोमांचक मुकाबलों के साथ हुआ। जिम्बाब्वे, नाइजीरिया और लाइबेरिया की टीमों ने हिस्सा लिया। जिम्बाब्वे ने नाइजीरिया को 2-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। खिताबी मुकाबला जिम्बाब्वे और लाइबेरिया के बीच खेला गया जिसमें पेनल्टी शूटआउट में जिम्बाब्वे ने 3-0 से जीत दर्ज की। जिम्बाब्वे के टाडू टॉप स्कोरर रहे, जबकि युगांडा के जैफसन को बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। जिम्बाब्वे के न्याशा को बेस्ट गोलकीपर का पुरस्कार मिला। पुरस्कार वितरणर कुल सचिव डॉ. संगीता जौहरी और इंटरनेशनल सेल की डॉ. रितु कुमारन ने किया।
फुटबॉल खेलते समय युवक पर हमला, 2 पर केस
अमृतसर| फुटबॉल खेलते समय एक युवक पर हमला कर उसे घायल कर दिया गया। इस संबंध में पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कथूनंगल थानांतर्गत रंगीलपुरा गांव निवासी रंजीत सिंह ने बताया कि 14 मार्च की शाम करीब साढ़े 6 बजे वह गांव के ग्राउंड में अन्य युवकों के साथ फुटबॉल खेल रहा था। इसी दौरान आरोपी अमनदीप सिंह और जसराज सिंह के साथ उसकी कहासुनी हो गई। इसी दौरान अमनदीप सिंह ने ग्राउंड में पड़ी ईंट उठाकर उसके सिर पर वार कर दिया, जिससे वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज कर लिया है।
सीतापुर के मेजर ध्यान चंद्र स्टेडियम में खेल निदेशालय के तत्वाधान में जिला खेल कार्यालय द्वारा ओपन राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ किया गया। प्रतियोगिता का उद्घाटन जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर.के. ने फीता काटकर किया। इस दौरान खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए खेल प्रेमियों और अधिकारियों की भी मौजूदगी रही। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जनपदों की कुल 10 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इनमें मेजबान सीतापुर के अलावा बरेली, पीलीभीत, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर, बस्ती, उन्नाव, हरदोई और गाजीपुर की टीमें शामिल हैं। प्रतियोगिता लीग नॉकआउट आधार पर आयोजित की जा रही है, जो आगामी पांच दिनों तक चलेगी। प्रतियोगिता का पहला मुकाबला पीलीभीत और उन्नाव के बीच खेला गया, जिसमें दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। हालांकि पूरे मैच के दौरान कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी और मुकाबला बिना गोल के समाप्त हुआ। वहीं दूसरा मुकाबला मेजबान सीतापुर और कानपुर के बीच खेला गया, जो काफी रोमांचक रहा। मैच के 25वें मिनट में कानपुर की टीम ने शानदार तालमेल का प्रदर्शन करते हुए पहला गोल कर बढ़त बनाई। हालांकि सीतापुर की टीम ने जल्द ही वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर लिया। इसके बाद सीतापुर को कई मौके मिले, लेकिन खिलाड़ी उन्हें गोल में तब्दील नहीं कर सके। निर्धारित समय तक दोनों टीमें बराबरी पर रहीं, जिसके बाद निर्णायक प्रक्रिया में कानपुर की टीम ने सीतापुर को हराकर जीत दर्ज की। आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रदेश में फुटबॉल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और खेलों के प्रति युवाओं को प्रेरित करना है। प्रतियोगिता के आगामी मुकाबलों को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
फुटबॉल कोच के बाद अब बड़े परदे पर क्रिकेटर बनकर चमकेंगे Ajay Devgan,एक्टर की नई बायोपिक फिल्म पर आया बड़ा अपडेट
Maidaan Review:अजय देवगन की दमदार डायलॉग डिलीवरी और एक्टिंग ने दिखाया रियल सिनेमा, जरूर देखेफुटबॉल कोच की ये कहानी
‘भीड़ से साथ की उम्मीद मत रखना', Ajay Devgan की मच अवेटेड फिल्म Maidaan काट्रेलर हुआ लॉन्च,फुटबॉल कोच बनकर छा गए एक्टर

