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पीएम मोदी ने की छत्तीसगढ़ के 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की दिल खोलकर तारीफ

भारतीय लोक कल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास के इतिहास में जब भी जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुधार और कुपोषण मुक्त समाज की बात की जाएगी, तो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियानों का नाम हमेशा सबसे ऊपर लिया जाएगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक हालिया संबोधन के दौरान छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य में चलाए जा रहे बेहद लोकप्रिय और स्वास्थ्यवर्धक अभियान 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' (Sahjan / Drumstick Campaign) की खुले दिल से जमकर सराहना की है, जिसके बाद से पूरे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री द्वारा इस लोक-कल्याणकारी पहल की राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा किए जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह गर्व से कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुधार के नवाचारों को अब पूरे देश में एक नई और बड़ी पहचान मिल रही है। मुनगा यानी सहजन के पौधे में मौजूद औषधीय गुणों और पोषक तत्वों को घर-घर तक पहुंचाने वाले इस अभियान ने बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या से निपटने में एक बहुत बड़ी क्रांति ला दी है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस अभियान की क्या खासियत है और क्यों प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी इतनी सराहना की है।'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की परिकल्पना और इसके पीछे का स्वास्थ्य उद्देश्यछत्तीसगढ़ के दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के बीच कुपोषण (Malnutrition) और आयरन की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कुछ समय पहले 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' नाम से एक अनूठा जन-अभियान शुरू किया था। सहजन या ड्रमस्टिक (Drumstick / Moringa) को वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद में पोषक तत्वों का पावरहाउस माना जाता है, जिसमें दूध से कई गुना अधिक कैल्शियम, संतरे से ज्यादा विटामिन सी और गाजर से अधिक विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। सरकार का यह उद्देश्य था कि लोग महंगे सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने घरों के आसपास या बाड़ी में आसानी से उगने वाले मुनगा के पेड़ लगाएं और इसके पत्तों, फूलों तथा फलियों को अपने दैनिक भोजन में शामिल करें ताकि शरीर को सभी जरूरी विटामिन्स मुफ्त में मिल सकें। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात या अन्य राष्ट्रीय मंचों पर इस अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी की तारीफ की, तो इसने इस योजना को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया।प्रधानमंत्री मोदी की सराहना से बढ़ा छत्तीसगढ़ का मान: मुख्यमंत्री ने जताया आभारजब देश के प्रधानमंत्री किसी राज्य की किसी छोटी से छोटी और जमीनी योजना की तारीफ करते हैं, तो उससे न केवल प्रशासनिक अमले का मनोबल बढ़ता है, बल्कि उस योजना से जुड़े आम नागरिकों को भी एक नया सम्मान मिलता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होना राज्य के हर एक नागरिक के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के मेहनती किसानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिलाओं और स्थानीय प्रशासन की उस संयुक्त मेहनत का परिणाम है जिन्होंने इस अभियान को केवल कागजों तक सीमित न रखकर हर गांव और हर घर के चूल्हे तक पहुंचाया है। इस राष्ट्रीय मान्यता के मिलने से अब राज्य सरकार को ऐसे अन्य स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों को और अधिक तेजी से लागू करने की प्रेरणा मिली है, जिससे ग्रामीण इलाकों की तस्वीर तेजी से बदल रही है।कुपोषण मुक्ति की दिशा में मुनगा (सहजन) बना एक वरदान: वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्वआधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन आयुर्वेद—दोनों ही इस बात पर एकमत हैं कि सहजन का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है, क्योंकि इसका हर एक हिस्सा मानव शरीर के लिए औषधीय रूप से बेहद फायदेमंद होता है। छत्तीसगढ़ के जंगलों और ग्रामीण अंचलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले इस पौधे की खासियत यह है कि इसके लिए किसी विशेष सिंचाई या महंगे उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती, और यह कम पानी में भी तेजी से बढ़ता है। अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को यह प्रशिक्षित किया गया कि वे मुनगा की पत्तियों को सुखाकर उसका पाउडर कैसे बनाएं और कैसे उसे बच्चों के दैनिक दलिया, सूप या दाल में मिलाकर उनके पोषण स्तर को मजबूत करें। जिन क्षेत्रों में कुपोषण दर एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी, वहां इस अभियान के लागू होने के बाद से बच्चों के स्वास्थ्य में एक अभूतपूर्व और सकारात्मक सुधार देखने को मिला है, जिसे देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी अपने शोध में सराहा है।ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण का एक नया मॉडल बनकर उभरा यह अभियानयह अभियान केवल स्वास्थ्य और पोषण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) और महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की रीढ़ भी मजबूत कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को मुनगा की खेती, इसके प्रोसेसिंग और इसके विभिन्न उत्पादों को बाजार में बेचने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे उन्हें एक अतिरिक्त और स्थिर आमदनी का जरिया मिल रहा है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं, तो पूरे परिवार और समाज का विकास तेजी से होने लगता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस मॉडल की प्रशंसा किए जाने का अर्थ यह है कि अब देश के अन्य राज्य भी छत्तीसगढ़ के इस सफल फॉर्मूले को अपने यहां लागू करने पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह अभियान देश के अन्य राज्यों के लिए भी ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार का एक बेहतरीन ब्लूप्रिंट साबित होगा।भविष्य की योजनाएं और छत्तीसगढ़ में सतत विकास का नया अध्यायप्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के हौसले और अधिक बुलंद हो चुके हैं, और प्रशासन अब इस अभियान के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। राज्य के हर जिले में सहजन के लाखों पौधों का निःशुल्क वितरण करने के साथ-साथ स्कूलों और अस्पतालों के परिसरों में भी मुनगा वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं ताकि आने वाली पीढ़ी इसके औषधीय गुणों से अच्छी तरह वाकिफ हो सके। कुपोषण मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है। कुल मिलाकर, यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सही दिशा में जमीनी स्तर पर काम किया जाता है, तो उसकी गूंज देश की राजधानी तक सुनाई देती है और वह नवाचार इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Sep 2026 3:35 pm

3 राहत शिविरों में शरण लिए बैठे हैं 5,000 से अधिक लोग, लापता नागरिकों की तलाश जारी

देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर से बेहद डरावना और विकराल रूप धारण कर चुका है, जिसके कारण आम जनजीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। प्राकृतिक आपदाओं और मानसूनी बारिश के इस दौर में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य से इस समय एक बेहद चिंताजनक, दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां लगातार मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान पर होने के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। राज्य के कई जिलों में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, बेघर हुए और बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए कुल 43 राहत शिविरों (Relief Camps) का निर्माण किया गया है, जिनमें इस समय 5,000 से अधिक बेबस लोग शरण लेकर रह रहे हैं। इसके साथ ही, तेज बहाव और बाढ़ के पानी में लापता हुए लोगों को ढूंढने के लिए राज्य और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF & SDRF) की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि छत्तीसगढ़ के इस आपदा प्रभावित इलाके में इस समय जमीन पर हालात कैसे हैं और प्रशासन की तरफ से क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं।छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का तांडव: नदियां उफान पर और गांवों में भर गया सैलाब का पानीबीते कई दिनों से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आकाश से आफत बनकर बरस रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियां और नाले खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं, जिसके चलते उनका पानी आसपास के निचले इलाकों और रिहायशी बस्तियों में तेजी से घुस गया है। कई ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोगों के घरों की छतों तक पानी पहुंच गया है, और उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर केवल अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की तरफ भागना पड़ा है। मौसम विभाग ने पहले ही कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया था, लेकिन बारिश की बेहिसाब रफ्तार ने जल निकासी के सभी प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। सड़कों पर सैलाब जैसा नजारा देखने को मिल रहा है और कई जगहों पर पुल-पुलिया बह जाने के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह से कट चुका है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।43 राहत शिविरों का गठन: 5,000 से अधिक बेघर लोगों के लिए प्रशासन ने की भोजन और चिकित्सा की व्यवस्थाइस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच सरकार और स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित जिलों में कुल 43 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां इस समय 5,000 से अधिक विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। इन राहत शिविरों में लोगों को भोजन, पीने का शुद्ध पानी, कपड़े और कंबल उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि समय पर दवाइयां और चिकित्सीय सहायता दी जा सके। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इन कैंपों का दौरा कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी पीड़ित को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े। इसके अलावा, सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी आगे आकर राहत सामग्री बांटने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना शुरू कर दिया है, जो इस संकट की घड़ी में इंसानियत की एक बड़ी मिसाल पेश कर रहा है।लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारीबाढ़ के इस तेज बहाव और जलभराव के बीच छत्तीसगढ़ के कई इलाकों से लोगों के लापता होने की हृदयविदारक खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं, जिससे परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों के साथ मिलकर लापता नागरिकों को ढूंढने के लिए एक बहुत बड़ा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। मोटरबोट और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से उन इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है जहां पानी का स्तर अभी भी बहुत ज्यादा खतरनाक बना हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों ने खुद इस पूरे राहत अभियान की कमान अपने हाथ में ले रखी है और हर घंटे ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट ली जा रही है। सरकार ने यह निर्देश दिए हैं कि जब तक हर एक लापता व्यक्ति की सही सलामत खोज खबर नहीं मिल जाती और बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता, तब तक राहत एवं बचाव का यह कार्य पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।भारी बारिश के बीच जनजीवन को पटरी पर लाने की चुनौती और मौसम विभाग का आगामी अनुमानइस आपदा के कारण छत्तीसगढ़ की आर्थिक गतिविधियों, खेती-किसानी और दैनिक मजदूरी करने वाले गरीब तबके के लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। धान के खेतों में पानी भर जाने से किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे अन्नदाताओं के चेहरों पर गहरी चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग का यह अनुमान है कि आने वाले कुछ घंटों में बारिश की रफ्तार में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन तब तक प्रशासन और आम जनता को पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि पर्यावरण संरक्षण और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम कितने जरूरी हैं। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ इस समय एक बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है, और सरकार, प्रशासन तथा आम नागरिकों की सामूहिक एकजुटता ही इस आपदा के आंसुओं को पोंछकर एक बार फिर से जीवन को सामान्य बनाने में पूरी तरह कामयाब होगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Sep 2026 3:34 pm

Chhattisgarh State Eligibility Test 2026: Admit Card Released

The Chhattisgarh State Eligibility Test (SET) 2026 admit card has been released, allowing candidates to download it ahead of the exam scheduled for October 4, 2026. Applications were accepted from June 14 to July 31, 2026. This article provides essential details including important dates, application fees, and instructions for downloading the admit card. Candidates are encouraged to check the official website for further updates and ensure they meet the eligibility criteria before the exam.

नौकरी नामा 28 Sep 2026 2:32 pm

छत्तीसगढ़ में बस्तर से रायगढ़ तक बाढ़ से हाहाकार... 571 गांवों के 22377 लोग प्रभावित, 16074 का रेस्क्यू, आठ की मौत

Chhattisgarh Flood Havoc: प्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से 571 गांवों के 22,377 लोग प्रभावित हुए हैं। NDRF, SDRF ने 16,074 लोगों को बचाया।

दैनिक जागरण 28 Sep 2026 10:09 am

Garhwal Commissioner ने जारी किए निर्देश, भारी बारिश के चलते थमी Char Dham Yatra

उत्तराखंड के कई ज़िलों में बारिश को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के कारण शनिवार दोपहर से रविवार तक चार धाम यात्रा रोक दी गई है। गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप ने सभी ज़िलाधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि वे देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने ज़िलों में ज़रूरी कदम उठाएं। पत्र के अनुसार, मौसम की स्थिति बेहतर होने पर यात्रा फिर से शुरू की जाएगी। इसे भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में Heavy Rain से Lucknow समेत कई जिले प्रभावित, IMD का अलर्ट उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मौसम का अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 26 और 27 सितंबर के लिए उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। शनिवार को बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून, पौडी, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोडा के लिए ऑरेंज अलर्ट है, जबकि हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी येलो अलर्ट के तहत हैं। देहरादून, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार रेड अलर्ट के तहत हैं, जबकि उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग को ऑरेंज अलर्ट के तहत रखा गया है। बागेश्वर, अल्मोडा, चंपावत, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसे भी पढ़ें: Chhattisgarh Heavy Rainfall | छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात के बीच स्कूलों में छुट्टी का ऐलान, जानें कब फिर से खुलेंगे स्कूल इस साल 50 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्रियों ने चार धाम के दर्शन किए इस साल उत्तराखंड के चार धाम तीर्थस्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 50 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 50.87 लाख श्रद्धालुओं ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन किए हैं। इस आंकड़े में वे लगभग 3.26 लाख तीर्थयात्री भी शामिल हैं जिन्होंने बुधवार तक चमोली ज़िले में हेमकुंड साहिब के दर्शन किए। बद्रीनाथ में सबसे ज़्यादा 17.47 लाख तीर्थयात्री पहुंचे, इसके बाद केदारनाथ में 15.03 लाख, गंगोत्री में 7.95 लाख और यमुनोत्री में 7.13 लाख तीर्थयात्री आए। चार धाम यात्रा 19 अप्रैल को शुरू हुई थी और इसके नवंबर तक चलने की उम्मीद है; सर्दियों की शुरुआत के साथ चारों तीर्थस्थलों के कपाट अलग-अलग तारीखों पर बंद हो जाएंगे। मानसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और मौसम से जुड़ी अन्य घटनाओं के कारण इस यात्रा, खासकर केदारनाथ मार्ग पर, बार-बार रुकावटें आईं। इस हफ़्ते की शुरुआत में, केदारनाथ ट्रेकिंग रूट पर चिरबासा के पास भारी बारिश के कारण भूस्खलन होने से यात्रा को दो दिन से ज़्यादा समय के लिए रोक दिया गया था। रास्ता साफ़ होने के बाद मंगलवार को यात्रा फिर से शुरू हुई। सितंबर में यात्रा ने तेज़ी पकड़ी है और पिछले कुछ दिनों में रोज़ाना औसतन लगभग 13,000 तीर्थयात्री चार धाम तीर्थस्थलों पर आ रहे हैं। पिछले दो-तीन सालों में इस यात्रा में हर साल 50 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री शामिल हुए हैं।

प्रभासाक्षी 26 Sep 2026 6:34 pm

Chhattisgarh में Dalli Rajhara-Rowghat रेलवे लाइन का अंतिम 17.5 किमी ट्रैक तैयार

छत्तीसगढ़ में 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट रेलमार्ग परियोजना ताडोकी और रावघाट के बीच आखिरी 17.5 किलोमीटर के हिस्से में ट्रैक बिछाने के साथ पूरी हो गयी है। अधिकरियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों को देश के व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना के अंतिम 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी-रावघाट खंड का कार्य पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे दक्षिण छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर अंचल की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि रावघाट तक रेल पटरी पहुंचना केवल रेल कनेक्टिविटी का विस्तार नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों में विकास और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अवसंरचना के विस्तार को अभूतपूर्व गति मिली है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को भी आधुनिक कनेक्टिविटी से जोड़ने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।’’साय ने कहा कि दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल संपर्क का विस्तार इस अंचल के सामाजिक और आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने वाला सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से स्थानीय नागरिकों के लिए आवागमन सुगम होगा और राज्य की राजधानी रायपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच बेहतर होगी। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के अंतर्गत दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना की कुल लंबाई 95 किलोमीटर है। इसके अंतिम 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी-रावघाट खंड का कार्य पूरा कर लिया गया है। यह सिंगल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉड गेज रेल खंड है। अधिकारियों ने बताया कि नई रेल लाइन को परिचालन के लिए तैयार करने की निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत इस खंड का रेलवे सुरक्षा आयुक्त द्वारा निरीक्षण एवं गति परीक्षण किया गया है। फिलहाल दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक रेल सेवाएं उपलब्ध हैं। ताड़ोकी-रावघाट खंड में रेल परिचालन प्रारंभ होने के बाद आसपास के क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। रायपुर रेलवे संभाग के वरिष्ठ अधिकारी शिव प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दल्लीराजहरा और ताडोकी के बीच यात्री ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं, जो इस मार्ग का 77.5 किलोमीटर हिस्सा कवर करती हैं। उन्होंने कहा कि तय सुरक्षा और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नए बने ताडोकी-रावघाट खंड पर ट्रेन का संचालन शुरू होगा। दल्लीराजहरा-रावघाट खंड लगभग 240 किलोमीटर लंबे दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेलवे परियोजना का हिस्सा है। प्रसाद ने बताया कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ सरकार, ‘नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (एनएमडीसी), ‘स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (सेल) और रेलवे का एक संयुक्त उद्यम है। अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना को 1993 में सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी, जबकि इसका निर्माण 2010-11 में शुरू हुआ था। प्रसाद ने कहा कि यह रेलवे लाइन रायपुर, भिलाई और छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों से परिवहन को बेहतर बनाएगी। उन्होंने कहा कि यह लाइन दुर्ग जिले में सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र तक लौह अयस्क के परिवहन को और आसान बनाएगी, जिससे इस्पात उद्योग को मदद मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि इस रेलवे परियोजना की सुरक्षा के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की दो बटालियन को खास तौर पर तैनात किया गया है। ऐसा एक दशक से अधिक समय से किया जा रहा है क्योंकि पहले वामपंथी उग्रवाद से इस परियोजना की सुरक्षा को खतरा था।

प्रभासाक्षी 26 Sep 2026 6:03 pm

Chhattisgarh में भारी बारिश: CM Vishnu Deo Sai ने शनिवार को सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया

छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार, 26 सितंबर को राज्य के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और मौजूदा मौसम की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शनिवार को सभी स्कूलों में अवकाश रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव, नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि तथा आवागमन में कठिनाई की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में स्कूली बच्चों को किसी प्रकार का जोखिम न उठाना पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर के विद्यालयों में अवकाश रखने का निर्णय लिया गया है।’’साय ने अभिभावकों से बच्चों को घर पर रखने, सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों और सभी जिला कलेक्टरों को आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बस्तर संभाग सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश के कारण उत्पन्न बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को पूरी सतर्कता के साथ राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे। साय ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश देते हुए कहा कि निचले इलाकों तथा नदी-नालों के आसपास बसे गांवों और बस्तियों पर विशेष नजर रखी जाए। जलस्तर बढ़ने या बाढ़ की आशंका होने पर लोगों को समय रहते सचेत किया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने आगामी दिनों में लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राहत एवं बचाव दलों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रखने को कहा है। साय ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों के लिए आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित आश्रय, भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ और जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने जिला कलेक्टरों से मैदानी अमले को सक्रिय रखने तथा स्थानीय स्तर पर मिलने वाली प्रत्येक सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। साय ने प्रदेशवासियों से भी सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों, उफनती नदियों-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों पर नहीं जाने तथा जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है।

प्रभासाक्षी 26 Sep 2026 5:32 am

आज कैसा रहेगा मौसम?: यूपी के शहरों के लिए रेड अलर्ट, ओडिशा में बारिश-बाढ़ से हड़कंप, छत्तीसगढ़ में स्कूल बंद

आज कैसा रहेगा मौसम?: यूपी के शहरों के लिए रेड अलर्ट, ओडिशा में बारिश-बाढ़ से हड़कंप, छत्तीसगढ़ में स्कूल बंद- IMD Rain alert for across country today Chaos in Odisha due to floods schools closed in Chhattisgarh UP Bihar

अमर उजाला 26 Sep 2026 2:13 am

छत्तीसगढ़ में बाढ़ का कहर... 300 से अधिक गांव बने टापू, रेल-सड़क और हवाई यात्रा बाधित, सभी 7 जिलों में स्कूल बंद

Chhattisgarh Flood Alert: बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब के प्रभाव से पिछले तीन दिनों से बस्तर संभाग में त्राहि-त्राहि मच गई है।

दैनिक जागरण 25 Sep 2026 8:53 pm

छत्तीसगढ़: सनरूफ और चारों दरवाजे खोलकर हाईवे पर स्टंट, वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने दर्ज किया केस

Chhattisgarh News: बलरामपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग-343 पर सनरूफ और चारों दरवाजे खोलकर कार से खतरनाक स्टंट करने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

अमर उजाला 24 Sep 2026 11:12 am

'कच्चा बादाम' फेम Anjali Arora का बॉलीवुड डेब्यू! Mahakavya Shri Ramayan Katha में निभाएंगी माता सीता का किरदार, टीज़र और रिलीज़ डेट आउट!

'कच्चा बादाम' वायरल ट्रेंड से रातों-रात सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाली मशहूर पर्सनैलिटी अंजलि अरोड़ा (Anjali Arora) अब बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी का जादू चलाने के लिए तैयार हैं। अंजलि अरोड़ा रामायण पर आधारित आगामी फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' के साथ अपना फीचर फिल्म डेब्यू करने जा रही हैं। इस फिल्म में वह माता सीता के मुख्य और पवित्र किरदार में नजर आएंगी। फिल्म के मेकर्स ने पहला पोस्टर और टीज़र जारी कर दिया है, जिसमें अंजलि अरोड़ा की माता सीता के रूप में पहली मनमोहक झलक दिखाई गई है। इसे भी पढ़ें: 23 साल बाद Emraan Hasmi की जबरदस्त वापसी, Awarapan 2 की सफलता पर पत्नी परवीन ने कही दिल छू लेने वाली बात फिल्म में देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं। यह फिल्म रामायण पर आधारित है और इसमें महाकाव्य की मुख्य घटनाओं को दिखाया गया है। टीज़र में राम और सीता की शादी, उनके वनवास की यात्रा और रावण की झलकियाँ दिखाई गई हैं। इसे भी पढ़ें: 15 साल बाद Zindagi Na Milegi Dobara के सीक्वल पर Zoya Akhtar का बड़ा खुलासा, स्क्रिप्ट पर शुरू हुआ काम अंजलि अरोड़ा माता सीता का किरदार निभाएंगी अंजलि अरोड़ा 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' में माता सीता का किरदार निभाएंगी। यह उनकी पहली फीचर फिल्म है और यह उस सोशल मीडिया कंटेंट से बिल्कुल अलग है जिससे उन्हें शुरुआती पहचान मिली थी। हाल ही में रिलीज़ हुए टीज़र में भगवान राम के रूप में देव शर्मा के साथ अरोड़ा की भूमिका की एक छोटी सी झलक दिखाई गई है। मेकर्स ने टीज़र में किरदारों की पूरी कहानी का खुलासा नहीं किया है, बल्कि मुख्य किरदारों और रामायण की अहम घटनाओं पर फोकस रखा है। देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभाएंगे देव शर्मा को भगवान राम के किरदार के लिए चुना गया है। टीज़र में राम और सीता की शादी और उसके बाद उनके वनवास की यात्रा के दृश्य दिखाए गए हैं। टीज़र में रावण भी नज़र आ रहा है, जिससे पता चलता है कि फिल्म में राम और राक्षस राजा के बीच के संघर्ष को भी दिखाया जाएगा। इस समय रामायण पर आधारित कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, और 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' एक और आने वाली फिल्म है जो राम, सीता और रावण की कहानी को बड़े पर्दे पर लाएगी। 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' के मेकर्स 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' का निर्देशन अभिषेक सिंह ने किया है। फिल्म को प्रकाश महोबिया और संजय बुंदेला ने महोबिया फिल्म्स बैनर के तहत प्रोड्यूस किया है। अजय कनौजिया का AJ फिल्म एंटरटेनमेंट वर्ल्ड इस फिल्म को पेश कर रहा है। फिल्म की शूटिंग हिंदी और छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में की गई है और इसे दोनों भाषाओं में रिलीज़ किया जाएगा। 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' की रिलीज़ डेट यह फिल्म 25 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। मेकर्स ने पहले पोस्टर और टीज़र के साथ ही रिलीज़ डेट की घोषणा की। इस फ़िल्म में अंजलि अरोड़ा माता सीता के तौर पर फ़ीचर फ़िल्म में डेब्यू करेंगी, जबकि देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभाएंगे। फ़िल्म का टीज़र आ चुका है, और अब फ़िल्म की कास्ट, स्केल और रामायण को किस तरह दिखाया गया है, इस बारे में और जानकारी इसके थिएटर में रिलीज़ होने के आस-पास सामने आने की उम्मीद है। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi 'MAHAKAVYA SHRI RAMAYAN KATHA' FIRST POSTER + TEASER OUT NOW – 25 SEPT 2026 RELEASE IN HINDI & CHHATTISGARHI... The first poster and teaser of #MahakavyaShriRamayanKatha have been unveiled… The film features #DevSharma as Shri Ram and marks #AnjaliArora 's feature-film debut as… pic.twitter.com/oSa8mdBBXT — taran adarsh (@taran_adarsh) August 18, 2026

प्रभासाक्षी 19 Aug 2026 10:39 am

छत्तीसगढ़ 12वीं बोर्ड: पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट हुए जारी, cgbse.nic.in पर करें चेक

Chhattisgarh CGBSE 12th Revaluation Result 2024: छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन(CGBSE) ने छत्तीसगढ़ कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2024 के लिए पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट की घोषणा कर दी है। यहां देखें ड

लाइव हिन्दुस्तान 25 Jun 2024 12:50 pm