Bhilai Steel Plant से लोहा चोरी मामले में CBI जांच को मिली Chhattisgarh सरकार की मंजूरी
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक रिकेश सेन ने कहा कि राज्य सरकार ने दुर्ग जिले में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से लोहा और कबाड़ की कथित चोरी से जुड़े मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने को मंजूरी दे दी है। जिले के वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सेन ने कहा कि राज्य सरकार ने इस संबंध में 25 सितंबर को अधिसूचना जारी की है। सेन ने सोमवार रात जारी एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘यह भिलाई के लोगों के लिए बड़ी बात है। जिन लोगों ने 40 साल तक भिलाई इस्पात संयंत्र को लूटा और राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी की, उन्हें अब सीबीआई जांच का सामना करना पड़ेगा।’’सेन द्वारा साझा की गई अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार ने ‘भारतीय न्याय संहिता’ की विभिन्न धाराओं के तहत पुरानी भिलाई थाने में दर्ज मामले की जांच के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना’ के सदस्यों की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने की मंजूरी दी है। सेन ने कहा कि वह स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के मुख्य संयंत्र से लोहा और कबाड़ की कथित चोरी का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का आभार जताया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हमेशा कहता था कि मेरी कोशिशें बेकार नहीं जाएंगी और सीबीआई आएगी। इस मुद्दे पर संज्ञान लेने का सबसे बड़ा श्रेय अमित शाह को जाता है, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने यह तय किया कि राष्ट्रीय संपत्ति लूटने वालों पर कार्रवाई होगी।’’सेन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ‘‘सफेदपोश’’ लोगों को भी अब कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा जिन्होंने राष्ट्रीय संपत्ति की कथित चोरी में शामिल लोगों का समर्थन किया था। सेन लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि भिलाई इस्पात संयंत्र से बड़े पैमाने पर लोहे की चोरी के पीछे एक संगठित गिरोह का हाथ है, जिसमें कथित तौर पर पुलिसकर्मी, नौकरशाह और बीएसपी अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि पुरानी भिलाई थाने में दर्ज मामला 26 मई को एके ट्रेडर्स के परिसर से बड़ी मात्रा में लोहे का स्क्रैप बरामद होने से जुड़ा है। उसने बताया कि इस मामले में अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें भाजपा का एक पदाधिकारी तथा बीएसपी और एक निजी इस्पात कंपनी के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने तब कहा था कि इस्पात संयंत्र के अंदर और बाहर काम करने वाला एक संगठित गिरोह कथित तौर पर पिछले चार-पांच महीनों से बीएसपी से लोहे का कबाड़ चुरा रहा था। वे इसे ‘फ्लू डस्ट’ की खेप में छिपाकर और व्यावसायिक लाभ के लिए बेचने से पहले अवैध तरीके से जमा करते थे। उन्होंने बताया कि 26 मई को मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने भिलाई के हथखोज इलाके में एके ट्रेडर्स के परिसर पर छापा मारा और ट्रकों तथा भारी वाहनों में लदी लोहे की प्लेटें, बीम, कटिंग और अन्य कबाड़ के साथ-साथ ‘फ्लू डस्ट’ भी बरामद किया। उन्होंने बताया कि जब्त किए गए स्क्रैप, वाहनों और मशीनरी की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें करीब 90 लाख रुपये मूल्य का लोहे का कबाड़ भी शामिल है।
पीएम मोदी ने की छत्तीसगढ़ के 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की दिल खोलकर तारीफ
भारतीय लोक कल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास के इतिहास में जब भी जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुधार और कुपोषण मुक्त समाज की बात की जाएगी, तो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियानों का नाम हमेशा सबसे ऊपर लिया जाएगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक हालिया संबोधन के दौरान छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य में चलाए जा रहे बेहद लोकप्रिय और स्वास्थ्यवर्धक अभियान 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' (Sahjan / Drumstick Campaign) की खुले दिल से जमकर सराहना की है, जिसके बाद से पूरे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री द्वारा इस लोक-कल्याणकारी पहल की राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा किए जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह गर्व से कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुधार के नवाचारों को अब पूरे देश में एक नई और बड़ी पहचान मिल रही है। मुनगा यानी सहजन के पौधे में मौजूद औषधीय गुणों और पोषक तत्वों को घर-घर तक पहुंचाने वाले इस अभियान ने बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या से निपटने में एक बहुत बड़ी क्रांति ला दी है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस अभियान की क्या खासियत है और क्यों प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी इतनी सराहना की है।'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की परिकल्पना और इसके पीछे का स्वास्थ्य उद्देश्यछत्तीसगढ़ के दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के बीच कुपोषण (Malnutrition) और आयरन की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कुछ समय पहले 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' नाम से एक अनूठा जन-अभियान शुरू किया था। सहजन या ड्रमस्टिक (Drumstick / Moringa) को वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद में पोषक तत्वों का पावरहाउस माना जाता है, जिसमें दूध से कई गुना अधिक कैल्शियम, संतरे से ज्यादा विटामिन सी और गाजर से अधिक विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। सरकार का यह उद्देश्य था कि लोग महंगे सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने घरों के आसपास या बाड़ी में आसानी से उगने वाले मुनगा के पेड़ लगाएं और इसके पत्तों, फूलों तथा फलियों को अपने दैनिक भोजन में शामिल करें ताकि शरीर को सभी जरूरी विटामिन्स मुफ्त में मिल सकें। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात या अन्य राष्ट्रीय मंचों पर इस अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी की तारीफ की, तो इसने इस योजना को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया।प्रधानमंत्री मोदी की सराहना से बढ़ा छत्तीसगढ़ का मान: मुख्यमंत्री ने जताया आभारजब देश के प्रधानमंत्री किसी राज्य की किसी छोटी से छोटी और जमीनी योजना की तारीफ करते हैं, तो उससे न केवल प्रशासनिक अमले का मनोबल बढ़ता है, बल्कि उस योजना से जुड़े आम नागरिकों को भी एक नया सम्मान मिलता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होना राज्य के हर एक नागरिक के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के मेहनती किसानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिलाओं और स्थानीय प्रशासन की उस संयुक्त मेहनत का परिणाम है जिन्होंने इस अभियान को केवल कागजों तक सीमित न रखकर हर गांव और हर घर के चूल्हे तक पहुंचाया है। इस राष्ट्रीय मान्यता के मिलने से अब राज्य सरकार को ऐसे अन्य स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों को और अधिक तेजी से लागू करने की प्रेरणा मिली है, जिससे ग्रामीण इलाकों की तस्वीर तेजी से बदल रही है।कुपोषण मुक्ति की दिशा में मुनगा (सहजन) बना एक वरदान: वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्वआधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन आयुर्वेद—दोनों ही इस बात पर एकमत हैं कि सहजन का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है, क्योंकि इसका हर एक हिस्सा मानव शरीर के लिए औषधीय रूप से बेहद फायदेमंद होता है। छत्तीसगढ़ के जंगलों और ग्रामीण अंचलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले इस पौधे की खासियत यह है कि इसके लिए किसी विशेष सिंचाई या महंगे उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती, और यह कम पानी में भी तेजी से बढ़ता है। अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को यह प्रशिक्षित किया गया कि वे मुनगा की पत्तियों को सुखाकर उसका पाउडर कैसे बनाएं और कैसे उसे बच्चों के दैनिक दलिया, सूप या दाल में मिलाकर उनके पोषण स्तर को मजबूत करें। जिन क्षेत्रों में कुपोषण दर एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी, वहां इस अभियान के लागू होने के बाद से बच्चों के स्वास्थ्य में एक अभूतपूर्व और सकारात्मक सुधार देखने को मिला है, जिसे देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी अपने शोध में सराहा है।ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण का एक नया मॉडल बनकर उभरा यह अभियानयह अभियान केवल स्वास्थ्य और पोषण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) और महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की रीढ़ भी मजबूत कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को मुनगा की खेती, इसके प्रोसेसिंग और इसके विभिन्न उत्पादों को बाजार में बेचने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे उन्हें एक अतिरिक्त और स्थिर आमदनी का जरिया मिल रहा है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं, तो पूरे परिवार और समाज का विकास तेजी से होने लगता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस मॉडल की प्रशंसा किए जाने का अर्थ यह है कि अब देश के अन्य राज्य भी छत्तीसगढ़ के इस सफल फॉर्मूले को अपने यहां लागू करने पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह अभियान देश के अन्य राज्यों के लिए भी ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार का एक बेहतरीन ब्लूप्रिंट साबित होगा।भविष्य की योजनाएं और छत्तीसगढ़ में सतत विकास का नया अध्यायप्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के हौसले और अधिक बुलंद हो चुके हैं, और प्रशासन अब इस अभियान के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। राज्य के हर जिले में सहजन के लाखों पौधों का निःशुल्क वितरण करने के साथ-साथ स्कूलों और अस्पतालों के परिसरों में भी मुनगा वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं ताकि आने वाली पीढ़ी इसके औषधीय गुणों से अच्छी तरह वाकिफ हो सके। कुपोषण मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह 'हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा' अभियान आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है। कुल मिलाकर, यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सही दिशा में जमीनी स्तर पर काम किया जाता है, तो उसकी गूंज देश की राजधानी तक सुनाई देती है और वह नवाचार इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है।
3 राहत शिविरों में शरण लिए बैठे हैं 5,000 से अधिक लोग, लापता नागरिकों की तलाश जारी
देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर से बेहद डरावना और विकराल रूप धारण कर चुका है, जिसके कारण आम जनजीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। प्राकृतिक आपदाओं और मानसूनी बारिश के इस दौर में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य से इस समय एक बेहद चिंताजनक, दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां लगातार मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान पर होने के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। राज्य के कई जिलों में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, बेघर हुए और बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए कुल 43 राहत शिविरों (Relief Camps) का निर्माण किया गया है, जिनमें इस समय 5,000 से अधिक बेबस लोग शरण लेकर रह रहे हैं। इसके साथ ही, तेज बहाव और बाढ़ के पानी में लापता हुए लोगों को ढूंढने के लिए राज्य और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF & SDRF) की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि छत्तीसगढ़ के इस आपदा प्रभावित इलाके में इस समय जमीन पर हालात कैसे हैं और प्रशासन की तरफ से क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं।छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का तांडव: नदियां उफान पर और गांवों में भर गया सैलाब का पानीबीते कई दिनों से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आकाश से आफत बनकर बरस रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियां और नाले खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं, जिसके चलते उनका पानी आसपास के निचले इलाकों और रिहायशी बस्तियों में तेजी से घुस गया है। कई ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोगों के घरों की छतों तक पानी पहुंच गया है, और उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर केवल अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की तरफ भागना पड़ा है। मौसम विभाग ने पहले ही कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया था, लेकिन बारिश की बेहिसाब रफ्तार ने जल निकासी के सभी प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। सड़कों पर सैलाब जैसा नजारा देखने को मिल रहा है और कई जगहों पर पुल-पुलिया बह जाने के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह से कट चुका है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।43 राहत शिविरों का गठन: 5,000 से अधिक बेघर लोगों के लिए प्रशासन ने की भोजन और चिकित्सा की व्यवस्थाइस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच सरकार और स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित जिलों में कुल 43 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां इस समय 5,000 से अधिक विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। इन राहत शिविरों में लोगों को भोजन, पीने का शुद्ध पानी, कपड़े और कंबल उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि समय पर दवाइयां और चिकित्सीय सहायता दी जा सके। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इन कैंपों का दौरा कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी पीड़ित को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े। इसके अलावा, सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी आगे आकर राहत सामग्री बांटने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना शुरू कर दिया है, जो इस संकट की घड़ी में इंसानियत की एक बड़ी मिसाल पेश कर रहा है।लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारीबाढ़ के इस तेज बहाव और जलभराव के बीच छत्तीसगढ़ के कई इलाकों से लोगों के लापता होने की हृदयविदारक खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं, जिससे परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों के साथ मिलकर लापता नागरिकों को ढूंढने के लिए एक बहुत बड़ा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। मोटरबोट और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से उन इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है जहां पानी का स्तर अभी भी बहुत ज्यादा खतरनाक बना हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों ने खुद इस पूरे राहत अभियान की कमान अपने हाथ में ले रखी है और हर घंटे ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट ली जा रही है। सरकार ने यह निर्देश दिए हैं कि जब तक हर एक लापता व्यक्ति की सही सलामत खोज खबर नहीं मिल जाती और बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता, तब तक राहत एवं बचाव का यह कार्य पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।भारी बारिश के बीच जनजीवन को पटरी पर लाने की चुनौती और मौसम विभाग का आगामी अनुमानइस आपदा के कारण छत्तीसगढ़ की आर्थिक गतिविधियों, खेती-किसानी और दैनिक मजदूरी करने वाले गरीब तबके के लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। धान के खेतों में पानी भर जाने से किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे अन्नदाताओं के चेहरों पर गहरी चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग का यह अनुमान है कि आने वाले कुछ घंटों में बारिश की रफ्तार में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन तब तक प्रशासन और आम जनता को पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि पर्यावरण संरक्षण और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम कितने जरूरी हैं। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ इस समय एक बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है, और सरकार, प्रशासन तथा आम नागरिकों की सामूहिक एकजुटता ही इस आपदा के आंसुओं को पोंछकर एक बार फिर से जीवन को सामान्य बनाने में पूरी तरह कामयाब होगी।
Chhattisgarh State Eligibility Test 2026: Admit Card Released
The Chhattisgarh State Eligibility Test (SET) 2026 admit card has been released, allowing candidates to download it ahead of the exam scheduled for October 4, 2026. Applications were accepted from June 14 to July 31, 2026. This article provides essential details including important dates, application fees, and instructions for downloading the admit card. Candidates are encouraged to check the official website for further updates and ensure they meet the eligibility criteria before the exam.
Chhattisgarh Flood Havoc: प्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से 571 गांवों के 22,377 लोग प्रभावित हुए हैं। NDRF, SDRF ने 16,074 लोगों को बचाया।
छत्तीसगढ़: सनरूफ और चारों दरवाजे खोलकर हाईवे पर स्टंट, वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने दर्ज किया केस
Chhattisgarh News: बलरामपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग-343 पर सनरूफ और चारों दरवाजे खोलकर कार से खतरनाक स्टंट करने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
छत्तीसगढ़ 12वीं बोर्ड: पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट हुए जारी, cgbse.nic.in पर करें चेक
Chhattisgarh CGBSE 12th Revaluation Result 2024: छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन(CGBSE) ने छत्तीसगढ़ कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2024 के लिए पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट की घोषणा कर दी है। यहां देखें ड

