मथुरा में चला MVDA का बुलडोजर:तीन अवैध कॉलोनियों पर हुई कार्यवाही, देरी और खर्च वसूली पर उठे सवाल
मथुरा–वृंदावन विकास प्राधिकरण का अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान एक बार फिर चर्चा में है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर, जब शहर में तिल-गुड़ की मिठास और उत्सव का माहौल था उसी दिन भक्ति वेदांता मंदिर क्षेत्र जैंत में MVDA का बुलडोजर गरज उठा। प्राधिकरण ने यहां तीन अवैध कॉलोनियों को जमींदोज कर दिया जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। 6 महीने पहले जारी किये थे नोटिस कार्रवाई के साथ ही MVDA की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर इस बात को लेकर कि जब जुलाई 2025 में ही ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी हो चुके थे तो फिर छह महीने बाद कार्रवाई क्यों की गई और इस दौरान अवैध निर्माण कैसे फलते-फूलते रहे। जुलाई माह में ही ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए जा चुके थे इसके बावजूद करीब छह माह तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस देरी ने न केवल अवैध कॉलोनाइजर्स को समय दिया बल्कि प्रशासनिक सख्ती पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। ध्वस्तीकरण के बाद एक और अहम सवाल यह है कि कार्रवाई में खर्च हुई सरकारी धनराशि की वसूली अवैध कॉलोनाइजर्स से कब की जाएगी। पूर्व में भी ऐसे मामलों में वसूली को लेकर सुस्ती देखी गई है जिससे प्राधिकरण की सख्ती महज़ दिखावटी न बन जाए। यहां हुई कार्यवाही पहले मामले में सुरेश चंद्र द्वारा भक्ति वेदांता मंदिर जैंत में करीब 6000 वर्ग मीटर क्षेत्र में आरसीसी सड़क बनाकर कॉलोनी विकसित की जा रही थी। प्राधिकरण ने समय रहते नोटिस जारी कर निर्माण रोकने और नक्शा विधिवत पास कराने के निर्देश दिए लेकिन आदेशों को नजर अंदाज कर दिया गया। दूसरे मामले में मेघा चौरसिया द्वारा मंदिर के समीप लगभग 9 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में गिट्टी डालकर सड़क निर्माण करते हुए अवैध कॉलोनी बसाई जा रही थी। वहीं तीसरे प्रकरण में सोहन शर्मा द्वारा हनुमंत विहार आवासीय योजना के दोनों गेटों के बीच लगभग 3500 वर्ग मीटर क्षेत्र में बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य कराया जा रहा था। एमवीडीए की जांच में तीनों स्थानों पर कोई भी नक्शा पास नहीं पाया गया। अभियान रहेगा जारी यह पूरी कार्रवाई MVDA उपाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी एन के निर्देश पर प्रवर्तन दल द्वारा की गई। मौके पर जैंत थाना पुलिस बल भी मौजूद रहा, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। MVDA सचिव आशीष कुमार सिंह का कहना है कि अवैध निर्माण और कॉलोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यमुनानगर में सरपंच की पत्नी बलजिंद्र कौर की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी गोमित राठी और उसके दोस्त पंकज का चार दिन का पुलिस रिमांड पूरा हो चुका है। रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस हत्याकांड में चार्जशीट तैयार करने की प्रक्रिया में जुट गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चार दिन की पूछताछ के दौरान आरोपी गोमित के व्यवहार में किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आया। मां की निर्मम हत्या को लेकर उसके चेहरे पर कोई अफसोस या भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दिखी, जिससे जांच अधिकारियों भी हैरान रहे। पुलिस का कहना है कि आरोपी पूरी तरह से ठंडे दिमाग से वारदात को अंजाम देने और बाद में खुद को बचाने की साजिश रचता रहा। साक्ष्यों के आधार पर तैयार होगा मजबूत केस रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपी गोमित और उसके दोस्त पंकज से कई अहम सबूत भी बरामद किए हैं। इनमें वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार, डिजिटल सबूत, कॉल डिटेल और आपसी संपर्क से जुड़े तथ्य शामिल हैं, जो इस पूरे हत्याकांड की कडिय़ों को जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। पुलिस का दावा है कि बरामद साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करने में मदद करेंगे। जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के बाद गोमित देश से बाहर भागने की तैयारी में था और अपने दोस्त पंकज की मदद से अलग-अलग ठिकानों पर छिपता रहा। पंकज ने न सिर्फ उसे पनाह दी, बल्कि सबूत छिपाने और फरारी में भी सहयोग किया। पुलिस दोनों के रोल की गहराई से जांच कर रही है। चार्जशीट तैयार करने में जुटी पुलिस पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब जांच का अगला चरण चार्जशीट तैयार करने का है। इसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, मोबाइल लोकेशन, गवाहों के बयान और रिमांड के दौरान बरामद सभी साक्ष्यों को शामिल किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि जल्द ही अदालत में चार्जशीट पेश कर मामले में सख्त सजा सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। इंगलैंड से चुपचाप लौटकर की मां की हत्या यमुनानगर के सढौरा क्षेत्र के श्यामपुर गांव में 24 दिसंबर को सरपंच जगबीर सिंह की पत्नी बलजिंद्र कौर (45) की लाश पशु-बाड़े में संदिग्ध हालत में मिली। जांच में खुलासा हुआ कि हत्या महिला के ही बेटे ने की। वह अपनी गर्लफ्रेंड से इंटरकास्ट शादी करना चाहता था, लेकिन मां इसके खिलाफ थी। इसी रंजिश और पैसों की तंगी के चलते उसने हत्या की साजिश रची। आरोपी 18 दिसंबर को चुपचाप इंगलैंड से भारत आया, करनाल में पीजी लेकर छिपा रहा और 24 दिसंबर की शाम चुपचाप गांव आया और अंधेरे में पशु-बाड़े में छिपकर मां पर कुल्हाड़ी से हमला किया, फिर गला दबाकर हत्या कर दी। शव को हादसा दिखाने के लिए पानी के हौद में डाल दिया। इसके बाद वह वापस करनाल जाकर छिप गया और खुद को विदेश में बताता रहा। हत्या के बाद दुखी बेटे का किया नाटक मां की मौत के बाद वह दुखी बेटे का नाटक करता रहा, अंतिम संस्कार में शामिल हुआ, मुखाग्नि दी और पुलिस जांच से बचने के लिए जल्द इंग्लैंड भागने की कोशिश की। गांव के ही दोस्त पंकज ने उसे छिपाने और भगाने में मदद की। मोबाइल लोकेशन, ट्रैवल हिस्ट्री और पारिवारिक विवाद सामने आने पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। रिमांड में हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी और कपड़े भी बरामद हुए।
नोएडा में दिल्ली की युवती से रेप:शादी का दिया झांसा, एक साल पहले हुई थी दोस्ती
शादी का झांसा देने के बाद फेज-3 थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में बुलाकर युवती से रेप करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दिल्ली निवासी पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस के मुताबिक, पीड़िता दिल्ली के जैतपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। उसने जैतपुर थाने में शून्य अपराध संख्या पर एफआईआर दर्ज कराई थी। विवेचना के लिए एफआईआर ट्रांसफर होकर आई है। एफआईआर में पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है। करीब एक साल पहले उसकी मुलाकात बिसरख थाना क्षेत्र निवासी एक युवक से हुई थी। दोनों के बीच शुरुआत में दोस्ती हुई। धीरे-धीरे करके दोनों के बीच प्रेम संबंध स्थापित हो गए। आरोप है कि युवक ने उसे शादी का झांसा दिया। वह सेक्टर-66 स्थित मामूरा गांव के एक होटल में उसे ले गया। जहां उसने रेप किया। इसके बाद जब युवती ने उससे शादी करने के लिए कहा तो वह मुकर गया। उसने फोन से संपर्क तोड़ लिया। पुलिस का कहना है कि केस दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बांका के बौसी प्रखंड अंतर्गत मंदार में बुधवार शाम भगवान मधुसूदन की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित इस यात्रा में मंदार क्षेत्र सहित आसपास के जिलों और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। 'जय मधुसूदन' के जयघोष से पूरा मधुसूदन धाम भक्तिमय हो उठा। निर्धारित शुभ मुहूर्त पर भगवान मधुसूदन मंदिर के गर्भगृह से बाहर आए। उन्हें 16 पहियों वाले धर्म रथ के सिंहासन पर विराजमान किया गया। इस दौरान भक्तों में दर्शन के लिए विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा-अर्चना कर भगवान के दर्शन किए। भक्तों की बारात के साथ मंदार भ्रमण पर निकले मधुसूदन भगवान मधुसूदन ने मंदार यात्रा शुरू की। यह यात्रा मधु-कैटभ को दिए गए वचन के अनुसार धर्म, संस्कृति और परंपरा का निर्वाह करते हुए निकाली गई। पीतांबर धारण किए भगवान गरुड़ रथ पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ हजारों भक्तों की बारात के साथ मंदार भ्रमण पर निकले। यात्रा मार्ग में जगह-जगह भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय पंडा समाज और धर्म रक्षिणी समाज ने भक्ति-भजन, नृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण में यात्रा संपन्न कराई। परंपरा के अनुसार, पिछले 400 वर्षों से अधिक समय से छतरी सेवा का दायित्व निभा रहे क्षत्रिय किनवार वंशज मंटू सिंह (56 वर्षीय, निवासी गुरुधाम) ने सपरिवार भगवान को छतरी सेवा प्रदान की। पुलिस ने सुरक्षा का किया इंतजाम इस धार्मिक आयोजन में सभी वर्ग, समुदाय, महिला-पुरुष और बच्चों ने भगवान के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ के कारण मधुसूदन मंदिर परिसर से लेकर कई किलोमीटर दूर स्थित मंदार पर्वत मंदिर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। शाम को भगवान मधुसूदन यात्रा पूरी कर मंदिर लौटे। इसके बाद 16 कलाओं में निपुण राजा स्वरूप सांवरिया सरकार को सिंहासन पर विराजमान किया गया। मंदिर परिसर और रथ को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
लुधियाना में पक्खोवाल रोड स्थित ओमेक्स फ्लैट्स के पास गांव ठाकुरवाल में आवारा कुत्तों का आतंक देखने को मिला। यहाँ तीन आवारा कुत्तों ने एक 7 वर्षीय मासूम बच्चे अर्पित पर जानलेवा हमला कर दिया। हमला इतना खौफनाक था कि कुत्तों ने बच्चे के सिर को बुरी तरह नोंच डाला।हाला की बच्चे का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है पिता ने बताया पूरा मामला अर्पित के पिता जो पास ही के एक फार्म हाउस में माली का काम करते हैं ने बताया कि उनका बेटा रोज की तरह फार्म हाउस के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान एक पतंग कटकर आई जिसे पकड़ने के लिए अर्पित थोड़ा आगे चला गया। वहां पहले से मौजूद तीन आवारा कुत्तों ने अचानक उस पर हमला करदिया । कुत्तों ने मासूम को जमीन पर गिरा लिया और उसके सिर और शरीर को बुरी तरह नोंचना शुरू कर दिया। पिता बोले अगर कोई नहीं आता तो जान ले लेते कुत्ते बच्चे की चीख-पुकार सुनकर जब तक लोग मदद के लिए पहुंचे कुत्ते अर्पित को लहूलुहान कर चुके थे। पिता ने बताया कुत्ते बहुत ही खतरनाक थे उन्होंने मेरे बेटे का सिर पूरा नोंच लिया था। अगर सही समय पर लोग उसे बचाने न आते तो वे उसे मार ही डालते। बता दें कि अर्पित की मां घरों में झाड़ू-पोछा कर परिवार के पालन-पोषण में हाथ बटाती हैं। निजी अस्पताल में चल रहा इलाज घटना के तुरंत बाद अर्पित को लहूलुहान हालत में सिविल अस्पताल ले जाया गया। हालांकि जख्म इतने गहरे और हालत इतनी नाजुक थी कि डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत रेफर कर दिया। परिजन अब उसे एक निजी अस्पताल में ले गए हैं जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पिता की प्रशासन से अपील: पीड़ित परिवार और स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। पिता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन कुत्तों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। उन्होंने कहा कि आज उनके बच्चे के साथ यह हादसा हुआ है कल किसी और का बच्चा भी इनका शिकार बन सकता है।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) वेस्ट यूपी में हाथरस अर्बन सिटी बसाने जा रहा है। इसके लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी तेलंगाना की आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को सौंपी है। यह ग्रीनफील्ड अर्बन सेंटर लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसका मास्टर प्लान साल 2041 तक की विकास रूपरेखा तय करेगा। अधिकारियों के अनुसार, कंसल्टेंट का चयन बोली के जरिए किया गया। जिसमें तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया था। आरवी इंजीनियरिंग ने 1.25 करोड़ रुपए की सबसे कम बोली लगाई, जबकि गरुड़ यूएवी सॉफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और एलईए एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड की वित्तीय बोलियां इससे अधिक रहीं। यह मास्टर प्लान यमुना एक्सप्रेसवे मास्टर प्लान के फेज-2 के तहत हाथरस अर्बन सेंटर के लिए तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित योजना क्षेत्र 2,000 से 4,000 हेक्टेयर के बीच होगा। परियोजना सीमा में होने वाले किसी भी बदलाव को भी कंसल्टेंट के कार्यक्षेत्र में शामिल किया गया है। GIS फार्मेट में बनेगा मास्टर प्लान मास्टर प्लान को URDPFI गाइडलाइंस 2014, यूपी इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एक्ट, 1976 और अन्य लागू राज्य व केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। यह योजना GIS फॉर्मेट में विकसित होगी। नौ महीने में तैयार होगा प्लानअधिकारियों ने बताया कि परियोजना की अवधि नौ माह तय की गई है, जिसमें अंतिम वैधानिक स्वीकृति का समय शामिल नहीं होगा। कार्य की शुरुआत 15 दिनों के अंदर इंसेप्शन रिपोर्ट से होगी, इसके बाद मौजूदा स्थिति का आकलन, विजन प्लानिंग, ड्राफ्ट मास्टर प्लान, हितधारकों से परामर्श और अंत में YEIDA व अन्य सक्षम प्राधिकरणों की मंजूरी के बाद मास्टर प्लान 2041 को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कैथल के सीवन में एक तालाब के कार्य में अनियमितता बरतने के मामले में नगरपालिका प्रबंधन की ओर से अब संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के माध्यम से आदेश जारी किए गए हैं कि काम को नियम के अनुसार किया जाए और इसमें सही सामग्री का प्रयोग किया जाए। साथ ही दो दिन में पुरानी सामग्री को हटाकर दोबारा नए सिरे से कार्य शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। काम सही न करने पर ठेकेदार को कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है। बता दें कि इस कार्य के लिए नरवाना की एजेंसी को नगरपालिका की ओर से ठेका दिया गया है। विधायक का वीडियो आया था सामने इस मामले में गुहला विधायक देवेंद्र हंस द्वारा नगर पालिका के जेई को फटकार लगाने का वीडियो सामने आया था। वीडियो में विधायक ने जेई प्रवीण कुमार को कड़ी फटकार लगाई। वीडियो में विधायक ने कहा कि कि तालाब पर जो भी कार्य किया गया है, उसे तोड़कर दोबारा नियमों के अनुसार बनाया जाए। साथ ही जो निर्माण सामग्री तालाब के सौंदर्यीकरण में प्रयोग की गई है, उसके सैंपलों की जांच करवाई जाए कि वह नियम के अनुसार सही है या नहीं। अब उसी पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर काम दोबारा करने के आदेश दिए हैं। 35 लाख में होना है काम वीडियो को लेकर जब विधायक देवेंद्र हंस से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि इस तालाब के सौंदर्य करण के लिए नगर पालिका की ओर से करीब 35 लाख रुपए का ठेका दिया गया था, लेकिन काम में अनियमितता बरती गई। संबंधित जेई द्वारा भी इस मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। भ्रष्टाचार सहन नहीं होगा विधायक ने यह भी बताया कि तालाब के सौंदर्यीकरण में प्रयोग की जा रही सामग्री तो सही नहीं मिली, दूसरी ओर तालाब को गहरा करने के लिए करीब 8 से 10 फीट तक मिट्टी उठाने का टेंडर था। मिट्टी भी 10 फुट से ज्यादा उठवा दी गई। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा। गुणवत्ता और पारदर्शिता प्राथमिकता मामले को लेकर नगरपालिका सीवन चेयरपर्सन हेमलता सैनी और उनके प्रतिनिधि संदीप सैनी ने कहा कि इस बारे में ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया गया है। काम को दोबारा नियम के अनुसार करने के आदेश दिए गए हैं। क्षेत्र में किसी भी प्रकार के घटिया या लापरवाहीपूर्ण कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बरेली के प्रेमनगर थाना पुलिस ने सड़क किनारे फुटपाथ पर रजाई की दुकान में आग लगाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में रोहित उर्फ लालू, उसका भाई मोहित और उनका साथी प्रकाश शामिल है। पुलिस ने इन तीनों को एमवी इंटर कॉलेज के पास से घेराबंदी कर पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि विवाद के बाद उन्होंने रंजिश निकालने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया है। 12 जनवरी को दर्ज हुआ था मुकदमाघटना के संबंध में जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि 12 जनवरी को पीड़ित आशीष गुप्ता ने तहरीर दी थी कि उसकी रजाई और कंबल की दुकान में आग लगा दी गई है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना पर इन तीनों युवकों के नाम सामने आए। पुलिस ने पहले इस मामले में धारा 326 (एफ) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया था, जिसे विवेचना के दौरान अपराध की गंभीरता को देखते हुए धारा 326 (जी) में तब्दील कर दिया गया। 8 लाख का माल और ई-रिक्शा जलकर हुआ था राखगिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि 11 जनवरी को दुकान पर काम करने वाले पूजन नाम के व्यक्ति से उनकी किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई थी। उस वक्त आरोपियों ने देख लेने की धमकी दी थी। उसी रात करीब 2 बजे रंजिश के चलते उन्होंने दुकान में आग लगा दी। इस अग्निकांड में पीड़ित आशीष गुप्ता का करीब 8 लाख रुपये का कीमती सामान, दुकान के पास खड़ा एक ई-रिक्शा, दो मोबाइल और गल्ले में रखे 27 हजार रुपये जलकर खाक हो गए थे।
इटावा में एक मामूली विवाद हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। कोतवाली थाना क्षेत्र के कृष्णा मैरिज होम के सामने दो पक्षों के बीच मारपीट और पथराव हुआ। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है। हालांकि दैनिक भास्कर वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं कर रहा। घटना बीती रात कोतवाली क्षेत्र स्थित कृष्णा मैरिज होम में एक शादी समारोह के दौरान हुई। मध्य प्रदेश के भिंड जिले के सरकारी इमामबाड़ा निवासी राजू अपने ममेरे भाई की शादी में शामिल होने परिवार सहित इटावा आए थे। रात में राजू के भाई चांद बाबू और मैनपुरी के भोगांव निवासी अजहर शादी स्थल से बाहर चाय पीने गए थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार बाइक ने चांद बाबू को टक्कर मार दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। टक्कर लगने के बाद घायल चांद बाबू को संभालने के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो जल्द ही विवाद में बदल गई। शादी में मौजूद लोगों ने बाइक सवार को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह मौके से फरार हो गया। इसके तुरंत बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई। आरोप है कि कुछ देर बाद वही बाइक सवार अपने लगभग दस साथियों के साथ वापस लौटा। उन्होंने आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई और आसपास पड़े ईंट-पत्थरों से पथराव होने लगा। इस अचानक हुए हमले से शादी समारोह में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इस मारपीट और पथराव में चांद बाबू, अजहर और गाड़ीपुरा निवासी साकिद गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों के सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक अधिकांश आरोपी फरार हो चुके थे। हालांकि, पुलिस ने मुख्य बाइक सवार को पकड़कर थाने भेज दिया है।
बरेली नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि खलीलपुर रोड पर किए गए अवैध निर्माणों को हर हाल में हटाया जाएगा। अधिकारी का कहना है कि इन लोगों ने सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करके मकान बना लिए हैं, जिसके कारण अब सड़क चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट में बाधा आ रही है। निगम ने कुल 300 मकानों को चिन्हित कर उन पर लाल निशान लगा दिए हैं और सभी को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए गए हैं। अभियंता राठी ने चेतावनी दी है कि यदि लोगो ने स्वयं अपने घरों को नहीं तोड़ा, तो नगर निगम बुलडोजर की कार्रवाई करेगा और इस पूरी प्रक्रिया में आने वाला खर्च भी संबंधित मकान स्वामियों से ही वसूला जाएगा। देखे जिन घरो में लाल निशान लगे है वहां की कुछ तस्वीरें सैकड़ों वर्षों की विरासत पर मंडराया संकट का सायासीबीगंज क्षेत्र के खलीलपुर रोड पर रहने वाले परिवारों के लिए यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि उनके परिवार यहां कई पीढ़ियों से, लगभग सौ वर्षों से रह रहे हैं। जिन घरों की दीवारों पर आज नगर निगम ने लाल निशान लगाए हैं, उनमें लोगों की जीवनभर की खून-पसीने की कमाई और यादें जुड़ी हुई हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जमापूंजी इन आशियानों को बनाने में लगा दी और अब बुढ़ापे की दहलीज पर उनसे उनकी छत छीनी जा रही है। सड़क चौड़ीकरण के दावे पर उठ रहे हैं सवालनगर निगम जहां एक तरफ सड़क चौड़ीकरण को इस कार्रवाई का मुख्य आधार बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि सड़क पहले से ही 12 मीटर चौड़ी है और किनारे पर पक्का नाला भी बना हुआ है। ऐसे में सड़क को और कितना चौड़ा किया जाना है, यह समझ से परे है। लोगों ने निगम के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई केवल डराने और भ्रष्टाचार के उद्देश्य से की जा रही है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे इस कार्रवाई को रोकने के बदले पैसों की मांग की गई है। मलबे में तब्दील होने से पहले दे देंगे जानमकानों पर लगे लाल निशानों को देखकर महिलाओं और बुजुर्गों का बुरा हाल है। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने बड़ी मेहनत करके एक-एक ईंट जोड़ी थी, ताकि उनके बच्चों को सिर छिपाने की जगह मिल सके। यदि बुलडोजर चला तो पूरा परिवार सड़क पर आ जाएगा। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे भाजपा के कट्टर समर्थक हैं और हमेशा सरकार के साथ खड़े रहे, लेकिन आज उन्हीं की सरकार में उन्हें बेघर किया जा रहा है। पीड़ितों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे अपने आशियाने को मलबे में तब्दील होते देखने के बजाय अपनी जान देना बेहतर समझेंगे। सरकार से इंसाफ की मांगफिलहाल नगर निगम की टीम चेतावनी देकर मौके से लौट गई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव बरकरार है। प्रभावित परिवार अब सरकार से मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यह जमीन वास्तव में सरकारी है, तो इतने वर्षों तक निगम कहां सोया हुआ था? बिजली के कनेक्शन, पानी के बिल और हाउस टैक्स लेने के बाद अब इसे अवैध बताना सरासर अन्याय है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई को रोका जाए, अन्यथा सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो जाएंगे।
नमस्कार, कानपुर में कल (बुधवार) की बड़ी खबरें…यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय बुधवार को अचानक कानपुर पहुंचे। सचेंडी में गैंगरेप पीड़िता के पिता से बात की। पिता के कंधे पर हाथ रखकर भरोसा दिया कि कांग्रेस पार्टी का हर कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। वहीं बिल्हौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही एक आशा कार्यकर्ता बेहोश हो गई। उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। IIT कानपुर में स्टूडेंट्स, टीचरों में समोसे के प्रति दिवानगी है। इस दीवानगी को पूरा करने के लिए एक इंजीनियर ने एक अनोखा समोसा बनाया। फिर हर प्रोफेसर की मेज पर एक समोसा पहुंचा दिया। इस समोसे के साथ लोग सेल्फी ले रहे हैं। कानपुर की ऐसी ही 10 बड़ी खबरों से गुजरने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें…। अब सिलसिलेवार पढ़िए 10 खबरें 1. कानपुर गैंगरेप पीड़िता के पिता से मिले अजय राय:बोले- मेरे आने से पहले पुलिस बिटिया को जबरन ले गई, सरकार क्या छिपाना चाह रही यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय बुधवार को अचानक कानपुर पहुंचे। सचेंडी में गैंगरेप पीड़िता के घर आए। यहां पीड़िता के पिता से बात की। उन्हें पिता के कंधे पर हाथ रखकर भरोसा दिया कि कांग्रेस पार्टी का हर कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। अजय राय ने कहा- 14 साल की लड़की के साथ एक दरोगा ने रेप किया। उसके बाद पुलिस ने आरोपी दरोगा को भागने का मौका दिया। पुलिस का आदमी है, कहां भाग कर जाएगा। पढ़ें पूरी खबर 2. बिल्हौर में धरना प्रदर्शन के दौरान आशा बेहोश:सीएचसी कर्मचारियों पर दुर्व्यवहार का आरोप, हंगामा बिल्हौर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं में से एक आज बेहोश हो गईं। इस घटना के बाद अन्य आशा कार्यकर्ताओं ने सीएचसी कर्मचारियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। ठंड के कारण बेहोश हुई आशा कार्यकर्ता को तत्काल इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया। सीएचसी अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र राजपूत ने स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। पढ़ें पूरी खबर 3. सोने-चांदी से लदे किन्नर रहे आकर्षक:कानपुर में देशभर से आए ट्रांसजेंडर, बोले- यजमान हमें ये गहने नेग देते हैं कानपुर में चल रहे किन्नर सम्मेलन में देश भर से हजारों किन्नर शामिल हो रहे हैं। उनका रहन-सहन और पहनावा हर किसी के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। महंगी साड़ियां और सोने-चांदी से लदे किन्नर कर किसी के सामने आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इस बारे में किन्नरों ने बताया कि यह समाज की खुशहाली का प्रतीक है। लोगों के घर में जब कोई खुशी आती है, शादी होती है या बच्चे का जन्म होता है। पढ़ें पूरी खबर 4. कानपुर में 24 घंटे में 3.4℃ गिरा तापमान:दिन में तेज धूप ने दी राहत, अमृत भारत 18 घंटे लेट आईं; रात की ठंड बढ़ी कानपुर शहर में गलन भरी ठंड ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। बुधवार सुबह कोहरा नहीं रहा, विजिबिलिटी सामान्य रही। बीते 24 घंटे में न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री गिरकर 4.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो कि सामान्य से 5.4 डिग्री कम है। देर रात से चली सर्द हवाओं ने गलन को बढ़ाया। मौसम विभाग के अनुसार, अधिकतम तापमान 21.6 डिग्री रिकार्ड किया गया, जो कि सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। देर शाम एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 250 के पार पहुंच गया। पढ़ें पूरी खबर 5. कानपुर में युवक ट्रेन के आगे कूदा:पत्नी बोली- दो साल से बीमार थे, आंख से न दिखने पर परेशान रहते थे गोविंद नगर में दो साल से पैरालाइसिस की बीमारी से परेशान युवक ने दादानगर क्रासिंग पर ट्रेन के आगे कूद कर जान दे दी। युवक मंगलवार शाम घर पर मोबाइल छोड़ कर निकल गया था। काफी देर बाद नहीं लौटा तो तलाश की गई, रेलवे ट्रैक पर देर रात उसका शव मिला। जेब में मिले वोटर कार्ड से शव की शिनाख्त हुई। मृतक की पत्नी ने बताया कि दाएं हिस्से में पैरालाइसिस होने के कारण पति को एक आंख से कम दिखाई देता था, जिससे वह परेशान रहते थे। पढ़ें पूरी खबर 6. गंगा घाट पर मकर संक्रांति पर उमड़ी भीड़:कानपुर में श्रद्धालुओं ने स्नान किया, सूर्य को अर्घ्य देकर दान दिया मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार सुबह कानपुर के सरसैया घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। तड़के से ही लोग गंगा स्नान के लिए घाट पर पहुंचने लगे और श्रद्धा के साथ गंगा में डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया। श्रद्धालुओं ने सूर्य नमस्कार भी किया। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, घाट पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जबकि नगर निगम कर्मी साफ-सफाई व्यवस्था में लगातार जुटे रहे। पढ़ें पूरी खबर 7. कानपुर IIT में सेल्फी वाला समोसा:मूंज की कटोरी में रखा गया, इंजीनियर ने समोसा शेप का पेपर वेट बनाया आईआईटी कानपुर नाम सुनते ही हाई-टेक लैब, रिसर्च और इनोवेशन की तस्वीर उभरती है, लेकिन इस बार चर्चा किसी रोबोट या सैटेलाइट की नहीं, बल्कि देसी समोसे की है। आईआईटी कानपुर में अब समोसा सिर्फ खाने की चीज नहीं रहा, बल्कि पेपर वेट बनकर सबका ध्यान खींच रहा है। आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र के असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर अंकित सिंह बताते हैं कि कैंपस में चाय-समोसे का जबरदस्त क्रेज है। स्टूडेंट्स हों या स्टाफ, चाय और समोसे के बिना दिन अधूरा लगता है। इसी देसी दीवानगी से समोसा शेप का पेपर वेट बनाने का आइडिया सामने आया। पढ़ें पूरी खबर 8. बिठूर में फर्नीचर दुकान में लगी आग:शॉर्ट सर्किट की आशंका, 40 लाख का सामान जला कानपुर के बिठूर थाना क्षेत्र के मंधना बाजार में देर रात एक फर्नीचर की दुकान में अचानक आग लग गई। आग की लपटें उठती देख गश्त कर रही पुलिस ने तत्काल दुकान मालिक और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पढ़ें पूरी खबर 9. DPS प्रिंसिपल नियुक्ति की जांच पर उठे सवाल:कानपुर नगर निगम की टीम कर रही जांच, विशेष सचिव ने CM ऑफिस को दी जानकारी कानपुर नगर निगम के डीपीएस इंटर कालेज नवाबगंज के प्रिंसिपल की नियुक्ति और प्रमोशन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। उनकी नियुक्ति और प्रमोशन को लेकर शिकायत की गई थी। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। विभाग के अनुसार अभी यह जांच जारी है। लेकिन, शिकायतकर्ता ने फिर आरोप लगाया है कि जांच पूरी हो चुकी है। इसके बाद भी अधिकारी किसी दबाव के कारण मामले में कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं इस मामले में IGRS पर शिकायत करने के बाद भी प्रिंसिपल के मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर 10. HBTU में पैर से आलू साफ करने वाला मेस-कर्मचारी हटा:श्रीधराचार्य हास्टल की मेस कमेटी बदलेगी, वीसी ने जांच के लिए बनाई कमेटी हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के श्रीधराचार्य हास्टल में पैरों में चप्पल पहनकर आलू साफ करने वाले कर्मचारी को हटा दिया गया। इसके अलावा मेस कमेटी का रिव्यू किया जा रहा है। डीन स्टूडेंट वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) प्रो. सीएल गहलोत ने बताया कि मेस कमेटी को बदला जाएगा। इसके अलावा वीसी प्रो. समशेर ने हास्टल की समस्याओं को लेकर एक कमेटी का गठन किया है। वह कमेटी हास्टल की समस्याओं की जांच करके वीसी को रिपोर्ट सौंपेंगी। पढ़ें पूरी खबर
हरियाणा में जेबीटी से टीजीटी प्रमोट हुए टीचरों से हरियाणा स्कूली शिक्षा निदेशालय ने चॉइस सेंटर पूछा है। ऐसे टीचरों को 16 जनवरी रात 12 बजे तक सेंटर चाॅइस भरने का अवसर दिया है। उसके बाद पोर्टल पर ऑप्शन बंद हो जाएगा। हरियाणा स्कूली शिक्षा विभाग ने दिसंबर 2025 में 295 जेबीटी को टीजीटी के पद पर प्रमोट किया था। इनको चॉइस सेंटर के लिए 401 ऑप्शन दिए गए हैं। नए टीजीटी के जॉइन करने पश्चात भी 106 पोस्ट प्रदेश में खाली रहेंगी। टीजीटी के पास कोई भी चाॅइस सेंटर नहीं भरने का विकल्प भी मौजूद रहेगा। लेकिन उसके लिए उन्हें ऑनलाइन अपनी सहमति दर्ज करवानी होगी। सभी टीजीटी को पोस्टिंग एमआईएस पोर्टल पर दर्ज उनकी प्वाइंट अनुसार दी जाएगी। पदोन्नति प्रक्रिया और आवश्यकताएं:
चंडीगढ़ मेयर हरप्रीत कौर बबला और नगर निगम कमिश्नर ने जिस एनिमल कारकस इनसिनरेशन प्लांट का उद्घाटन किया, वह चार माह बाद ही बंद हो गया। नतीजा यह निकला कि सात दिन से यहां पर आस पास से आने वाली करीबन 50 मृतक गाय का संस्कार नहीं हो सका। कारकस प्लांट के बरामदे में मृत गाय के शव लावारिस पड़े होने पर मौके पर पहुंचे समाज सेवियों ने खूब हंगामा किया। सोया हुआ प्रशासन जागा, मेयर हरप्रीत कौर बबला, नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार और डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव मौके पर पहुंचे। पूरा दिन बीत जाने के बाद भी कई सवाल ऐसे हैं, जिनके जवाब के लिए अब जांच कमेटी बना दी गई है। प्रशासक यह पता लगाने के लिए कि गाय की मौत कैसे हुई, गाय का पोस्टमॉर्टम करवाएगा ओर आगे की जांच की जाएगी। बहरहाल देर रात तक मखनमाजरा की गोशाला और कारकस प्लांट पर काम करने वाले 23-25 कर्मचारियों को सस्पेंड करने की कार्रवाई होने का दावा मेयर हरप्रीत कौर बबला की तरफ से किया गया। मगर इसके लिखित में ऑर्डर जारी नहीं किए गए हैं। सवाल जिनके जवाब अभी भी नहीं मिले मशीन खराब हुई मुंबई से पार्ट का इंतजार करते रहे अधिकारी विभागीय सूत्रों अनुसार मशीन में 300 किलो के पशु का शव रखकर उसे जलाया जा सकता है। मगर यह बात सामने आ रही है कि बड़ो पशु को रखने की वजह से इसकी प्लेट टूट गईं और यह प्लेट मुंबई से ही मिलती हैं। अगर सात दिन से मशीन बंद थी तो इसके अधिकारी किस चीज का इंतजार कर रहे थे। अब बात सामने आ रही है कि प्लेटें मुंबई से बाय एयर आ रही हैं, तो पहले इसका इंतजाम क्यों नहीं किया जा रहा है। मखनमाजरा की गौ शाला के प्रबंध पर भी सवाल कारकस प्लांट के साथ साथ अब मखनमाजरा की गौशाला के प्रबंध पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब समाज सेवी मौके पर पहुंचे तो पता चला कि मखन माजरा की गोशाला में भी गौ को रखने के प्रबंध ठीक नहीं थे। वहां 800 में से 400 गायब गायब हो चुकी हैं। बची हुई गाय गौबर के बीच में पड़ी हुई थीं और ठंड से कांप रही थीं। कुछेक गाय तो समाज सेवियों के सामने ही दम तोड़ रही थीं। कहीं यह गाय इसी गौ शाला में तो नहीं मरी हैं। इसकी भी जांच की मांग समाज सेवियों की तरफ से उठाई जा रही है। गाय की मौत के कारणों और इतने शव कहां से आए जांच होगीडिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव का कहना है कि कारकस प्लांट की मशीन कब से खराब थी, क्यों खराब थी और इसे ठीक क्यों नहीं करवाया गया। यह तो जांच का विष्य है हीं, हम यह भी जांच करवा रहे हैं कि इन गाय की मौत कैसे हुई है। कहां पर हुई। हम गाय का पहले पोस्टमॉर्टम करवाएंगे और इनकी मौत का कारण पता लगने के बाद ही इनका संस्कार किया जाएगा। यही नहीं हम नगर निगम की कार्य प्रणाली की भी जांच करवा रहे हैं। मशीन कब से बंद थी और क्यों बंद थी हमें नहीं बताया, मेयरसवाल- कारकस प्लांट का उदघाटन आपने किया, मशीन बंद कैसे हुईजवाब- यही तो हम पता लगाने का प्रयास कर रहे हैंसवाल- कब बंद हुईजवाब- इसकी जानकारी भी कर्मचारियों ने हमें नहीं दीसवाल- अब क्या पता चला, हल क्या होगाजवाब- कोई कर्मचारी दो दिन, कोई तीन और कोई सात दिन बता रहा है सवाल- मशीन की समस्या दूर कब होगीजवाब- मशीन की कुछ पलेट्स मुंबई से आनी हैं, हम इसे बाय ऐयर मंगवा रहे हैं सवाल- गाय के इतने शव कहां से आए और मौत कैसे हुईजवाब- यही तो जांच का विष्य है, डिप्टी कमिश्नर साहिब ने कहा है कि पोस्टमार्टम होंगे और जांच करवाई जाएगी। सवाल- मखन माजरा गौ शाला नगर निगम के अधीन है, वहां भी हालत ठीक नहीं थेजवाब देने से पहले ही फोन कट गया।
गया शहर के विष्णुपद थाना क्षेत्र स्थित जीएस रिसोर्ट में फायरिंग की घटना हुई। इस मामले में नामजद रंजन यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे एक साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानबूझकर फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने फायरिंग का एक वीडियो भी जारी किया है। मीडिया से बात करते हुए रंजन यादव ने आरोप लगाया कि जीएस रिसोर्ट के संचालक ने सुनियोजित तरीके से फायरिंग और पथराव की घटना को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें फोन करके बुलाया गया और फिर साजिश के तहत दोषी ठहराया गया। रंजन यादव ने इस घटना से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। रास्ता विवाद को लेकर पहले से ही तनाव रंजन यादव के अनुसार, जीएस रिसोर्ट और आसपास के क्षेत्र में रास्ता विवाद को लेकर पहले से ही तनाव था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे पहले वरीय अधिकारियों और विष्णुपद थाना में लिखित शिकायत दे चुके थे, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका दावा है कि यदि समय रहते विवाद का समाधान हो जाता, तो यह घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस साजिश में शंकर सिंह, उनका बेटा अंकित बजरंगी, मनीष सिंह और विक्की सिंह सहित अन्य लोगों को बुलाकर योजनाबद्ध तरीके से फायरिंग और पथराव कराया, ताकि पूरा दोष उन पर मढ़ा जा सके। रंजन यादव ने घटना के दौरान हुई गोलीबारी का एक वीडियो भी सार्वजनिक किया है, जिसे वे अपने दावे के समर्थन में प्रस्तुत कर रहे हैं। पूरे मामले की जांच की मांग रंजन यादव ने वरीय पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब वे विष्णुपद थाना में लिखित शिकायत देने पहुंचे, तो पुलिस ने उनका आवेदन लेने से इनकार कर दिया, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कम लग रही है। फिलहाल जीएस रिसॉर्ट फायरिंग मामले में पुलिस दोनों पक्षों के बयानों को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद से इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। दरअसल, बता दें कि विष्णुपद थाना इलाके में कल दिनदहाड़े फायरिंग हुई है। यहां जीएस रिसोर्ट को निशाना बनाकर गोली चलाई गई और पथराव किया गया। इसका कारण रास्ता का विवाद है। रिसोर्ट के संचालक का आरोप है कि इलाके के दबंग जबरन रास्ते की डिमांड कर रहे थे। रास्ता नहीं देने के बाद उन्होंने जानलेवा हमला किया है। 40 की संख्या में पहुंचे थे बदमाश आरोप है कि 40 की संख्या में पहुंचे उपद्रवियों ने रिसोर्ट को घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। रिसोर्ट मालिक ने कहा है कि हमलावरों ने 7 से 8 राउंड गोलियां चलाईं। इसके साथ ही रिसोर्ट परिसर की ओर जमकर पथराव भी किया गया। स्थानीय लोगों से लंबे समय से रास्ते को लेकर तनातनी चल रही थी। इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग सहम गए। मौके पर मौजूद कर्मचारी और लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। डीएसपी मनोज साह का कहना है कि रास्ते के विवाद को लेकर घटना को अंजाम दिया गया है। मामले में शामिल लोगों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर ऑडी हादसे में मुख्य आरोपी (कार चलाने वाले) दिनेश रणवा की मदद करने वाले भी बुरी तरह फंसे हैं। पुलिस का दावा है कि राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है कि आरोपी की मदद करने वालों पर धाराओं में नामजद FIR हुई है। उधर, लग्जरी कार से 16 लोगों को कुचलने वाला ऑडी कार (DD02G5709) मालिक दिनेश फरार है। अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि दिनेश ने पार्टी में दिनभर शराब पी थी। मानसरोवर इलाके के खरबास चौराहे पर एक्सीडेंट के बाद वह सीधा घर गया। वहां से 2 लाख रुपए कैश जेब में रखे और अपनी पत्नी से कहा- तुम भी गांव भाग जाओ। मामला सैटल होने के बाद वह गांव आ जाएगा। इसके बाद वो अपने फ्लैट पर गया और फोन कर दोस्तों को बुलाया। एक दोस्त के घर में रात गुजारी। अगली सुबह जब होश आया तो हादसे की खबरें पढ़ीं। इसके बाद दूसरी कार से फरार हो गया। हादसे के समय कार में मौजूद उसके एक दोस्त मांगीलाल की भी पुलिस तलाश कर रही है। दिनेश की मदद करने वाले हर व्यक्ति का इस पूरे घटनाक्रम में रोल क्या रहा? पढ़िए... हादसे के बाद मौके पर ही कार छोड़कर भाग गए थेमामले की जांच कर रहे पत्रकार कॉलोनी थानाधिकारी मदन कड़वासरा बताते हैं- 9 जनवरी की रात करीब 9.21 पर खरबास सर्किल पर हुए एक्सीडेंट के बाद मांगीलाल और दिनेश कार को मौके पर छोड़ कर फरार हो गए। जबकि कॉन्स्टेबल मुकेश पुलिस लाइन स्थित अपने क्वार्टर में जाकर सो गया। पप्पू चौधरी को लोगों ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। दिनेश ने सबसे पहले दुर्घटना की जानकारी अपने बचपन के दोस्त नितिन को दी। नितिन को दिनेश ने बताया कि खरबास चौराहे पर उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया है। नितिन मौके के लिए रवाना हुआ। इस बीच दिनेश अपने घर चला गया। 2 लाख रुपए लेकर दिनेश वहां से पत्रकार कॉलोनी में ही अपने एक फ्लैट पर चला गया। इस बीच नितिन, दिनेश को खोजता हुआ उसके घर पहुंचा। दिनेश की पत्नी ने कहा की वह फ्लैट पर गए हैं। जब नितिन वहां पहुंचा तो दिनेश लेटा हुआ मिला। दिनेश ने इतनी शराब पी रखी थी कि उसे होश नहीं था। नितिन ने दिनेश की मदद के लिए अपने दोस्त सुमित को मौके पर बुलाया। नितिन ने जब सुमित को घटना के बारे में बताया तो दोनों इतना डर गए कि कार नहीं चलाई गई। सुमित ने अपने दोस्त डॉ. अशोक मीणा को फोन कर बुलाया। अशोक के आने के बाद तीनों ने दिनेश को कार में डाला। फ्लैट की चाबी देने सेलर भागचंद चौधरी के घर पहुंच गए। भागचंद ने दिनेश की हालत देखकर उसे अपने घर में ही सुला लिया। सुबह जब दिनेश की आंख खुली और उसने अखबार देखा तो होश उड़ गए। भागचंद और नितिन ने दिनेश को भाग जाने के लिए कहा। भागचंद का भाई शिवराज, दिनेश को लेकर गौनेर होते हुए जा रहा था। इस बीच शिवराज गुटखा लेने के लिए कार से उतरा। पीछे से दिनेश कार छोड़कर गायब हो गया। काफी सर्च करने के बाद भी दिनेश का कोई सुराग नहीं लगा। इस बीच पुलिस ने कड़ी जोड़ते हुए एक के बाद एक दिनेश रणवा की मदद करने वाले पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक पांचों को दिनेश के अपराध की जानकारी थी। इसके बावजूद वो लगातार उसकी मदद कर रहे थे। ऑडी मालिक दिनेश रणवा को फरार करने में इन लोगों ने की मदद नितिन (31) : सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया में सरकारी नौकरी करता है। मूलरूप से गांव चारावास थाना खेतड़ी जिला झुंझुनूं का रहने वाला है। नितिन, दिनेश के बचपन का साथी है। दोनों ने स्कूल में साथ पढ़ाई की है। सुमित कुमार (28) : दिनेश की सोलर कंपनी में काम करता है। करीब 5 साल से दिनेश और सुमित एक-दूसरे को जानते हैं। डॉ. अशोक मीणा (40) : रजत पथ मानसरोवर में प्राइवेट प्रैक्टिस करता है। दिनेश के साथ दोस्ती ज्यादा पुरानी नहीं है। नितिन का दोस्त होने के कारण मदद करने के लिए पहुंचा था। भागचन्द (34) : प्रॉपर्टी का काम करता है। दिनेश जिस फ्लैट पर गया था, वह भागचंद ने ही उसे बेचा था। उसी दौरान दोनों में दोस्ती हुई थी। शिवराज (30) : भागचंद का छोटा भाई है। मीटर बनाने वाली कंपनी में काम करता है। इसी की कार लेकर दिनेश भागा है। कॉन्स्टेबल मुकेश और पप्पू पर भी कई धाराओं में चलेगा केस 1. मुकेश रणवा (30) : निर्भया स्क्वॉयड रिजर्व पुलिस लाइन आयुक्तालय जयपुर में कॉन्स्टेबल (कानि. 12018) तैनात है। हादसे के समय ऑडी कार में ही सवार था। पुलिसकर्मी होने के बाद भी दिनेश को नशे में कार चलाने दी। घटना के बाद मुकेश ने पुलिस को जानकारी नहीं दी। मौके से भागकर पुलिस लाइन चला गया। घटना के तथ्यों को मिटाने का प्रयास किया। 2. पप्पू चौधरी (28) : प्रॉपर्टी का काम करता है। दुर्घटना के बाद लोगों ने उसे कार से निकाल कर पीटा। दिनेश ने अत्यधिक शराब पी रखी थी। इसकी जानकारी होने के बावजूद कार चलाने से नहीं रोका। ऑडी कार कंपनी के इंजीनियर पुलिस की मदद करेंगेपुलिस के पास दिनेश रणवा के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं कि उसने दोपहर में आमेर में एक ठेके से 2500 रुपए की शराब खरीदी। इससे प्रमाणित होता है कि शराब पार्टी दोपहर में ही शुरू हो गई थी। उस दौरान कार में कौन-कौन लोग थे। कार किन-किन रास्तों में रुकी, कौन-कौन लोग कार में कब-कब बैठे। दुर्घटना से पहले किस कार से शराब ऑडी में डाली गई। गिरफ्तार पप्पू चौधरी और मुकेश जाट के बयान भी हैं, जिसमें वह बता रहे हैं कि उन लोगों ने कई बार दिनेश को कार धीरे चलाने के लिए कहा था। बावजूद सके दिनेश ने कार की रफ्तार कम नहीं की। पुलिस टीम अब एफएसएल (फॉरेंसिक टीम) के सामने ऑडी कार के इंजीनियरों को बुलाकर गाड़ी की जांच कराएगी। कार में लगी चिप (ODI) से पते चलेगा कि दुर्घटना के दौरान कार की स्पीड क्या थी। ब्रेक लगाने का प्रयास किया गया या नहीं। इससे टेक्निकल एविडेंस बनेंगे। डीसीपी बोले- दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगींडीसीपी नॉर्थ राजर्षि राज ने बताया- ऑडी कार (DD02G5709) चला रहे दिनेश और उसके साथी मांगीलाल की तलाश में कई टीमें लगी हुई हैं। दिनेश की मदद करने वाले पांच साथी गिरफ्तार किए हैं। अगर और लोग भी इस में शामिल पाए गए तो उन की भी गिरफ्तारी होगी। घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है। आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। 9 जनवरी को हुआ था हादसाजयपुर में 9 जनवरी की रात रेसिंग कर रहे एक ऑडी कार ने कहर मचा दिया था। मानसरोवर के भीड़भाड़ वाले इलाके में 120 की रफ्तार से दौड़ रही ऑडी कार पहले बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई। फिर सड़क किनारे लगी फूड स्टॉल्स में घुस गई। इस दौरान वहां 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे। कार 16 लोगों को रौंदते हुए एक पेड़ से टकराकर रुकी। हादसे में एक युवक की मौत हो गई। चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। --- ऑडी हादसे की ये खबरें भी पढ़िए... जयपुर-रेस लगा रही ऑडी ने 16 को रौंदा, एक मौत,VIDEO:120 की स्पीड थी, बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई, गाड़ी का नहीं था इंश्योरेंस जयपुर में शुक्रवार रात रेसिंग कर रहे एक ऑडी कार ने कहर मचा दिया। मानसरोवर के भीड़भाड़ वाले इलाके में 120 की रफ्तार से दौड़ रही ऑडी कार पहले बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई, फिर सड़क किनारे लगी फूड स्टॉल्स में घुस गई। इस दौरान वहां 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे। कार करीब 16 लोगों को रौंदते हुए एक पेड़ से टकराकर रुकी। हादसे में एक युवक की मौत हो गई। वहीं, चार लोग गंभीर घायल हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के लिए कांग्रेस की चिंताभाजपा में 'दादा' के नाम से मशहूर पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की हालत इन दिनों अपनी ही पार्टी में बेरोजगार जैसी हो गई है। मतलब उनके पास न तो सत्ता और न ही संगठन में कोई खास जिम्मेदारी है। ऐसे में कांग्रेस ने उनकी चिंता की है। कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मध्य प्रदेश को चरागाह बना रखा है। एक कुरियन हैं, एक मुरुगन हैं। ये दोनों लोग साउथ से आते हैं। भाजपा का जो नेता बरसों से यहां काम कर रहा है, उसका अधिकार आप छीन रहे हैं। सज्जन वर्मा ने कहा- भाजपा की लीडरशिप अपने ही नेताओं का हक मार रही है। जैसे नरोत्तम मिश्रा हैं। उनमें काम करने की शक्ति है, माद्दा है। प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी उनका नाम चला था, लेकिन जब भी मौका आता है, उन्हें आश्वासन देकर नए कपड़े सिलवा देते हैं। ऐसे लोगों को भाजपा को मौका देना चाहिए। सज्जन वर्मा के इस बयान को नरोत्तम मिश्रा के लिए राजनीतिक समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस के इस रुख से भले ही दतिया के 'दादा' के अरमानों को हवा मिल गई हो, लेकिन सियासी हकीकत यह है कि भाजपा में फैसले दिल्ली में बैठे शीर्ष नेता ही करते हैं। पटवारी क्लीन बोल्ड, बोले- हार के बाद ही जीत हैदिग्विजय सिंह के ग्राउंड पर बल्लेबाजी करने उतरे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एक बॉल पर क्लीन बोल्ड हो गए। पटवारी दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह के साथ राघौगढ़ में एक स्पोर्ट्स फेस्टिवल में शामिल हुए थे। बल्लेबाजी में हाथ आजमाने के बाद मंच पर बोलने की बारी आई तो जीतू पटवारी ने मुस्कुराते हुए कहा- जिंदगी की यही रीत है, हार के बाद ही जीत है। उन्होंने पास ही खड़े विधायक जयवर्धन सिंह के लिए कहा- जेवी भैया इस बार आपकी सरकार नहीं बनी। पिछली बार बनी थी, आप मंत्री बन गए थे। अगली बार फिर बन जाओगे। पटवारी ने भले ही इशारों में कांग्रेस की सरकार बनने और जयवर्धन के मंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी। लेकिन राजनीति की पिच को लेकर जानकारों का कहना है कि यहां हर कदम संभलकर रखना पड़ता है, क्योंकि जरा-सी चूक पर खिलाड़ी सीधे ‘क्लीन बोल्ड’ हो सकता है। सीएम के आभार के बहाने मंत्री का शक्ति प्रदर्शन रायसेन जिले में एक सिंचाई परियोजना के लिए राशि मंजूर होने पर मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल किसानों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताने सीएम हाउस पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान भी उनके साथ मौजूद थे। जब किसान मुख्यमंत्री से मिलने और उनका आभार जताने पहुंचे, तो उनके साथ फोटो खिंचवाने की होड़ मच गई। स्थिति यह हो गई कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को लोगों को जल्दी-जल्दी आगे बढ़ाना पड़ा। किसी को आगे खींचा गया तो किसी को हल्का धक्का भी देना पड़ा। हालांकि मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने आराम से मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनका स्वागत और आभार जताया। अब इस पूरे घटनाक्रम को सीएम के सामने मंत्री के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मोहन मंत्रिमंडल में विस्तार होना है और ऐसे में मुखिया की नजरों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना राजनीतिक तौर पर फायदेमंद माना जा रहा है। गुजराती रंग में रंगे नजर आए मामा शिवराज सिंहराजनीति का असली मजा इन दिनों ‘मामा जी’ यानी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान लेते नजर आ रहे हैं। पत्नी साधना सिंह के साथ गुजरात दौरे पर पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात के आदर्श गांव हणोल का दौरा किया, जहां वे पूरी तरह गांव के रंग में रंगे दिखाई दिए। गांव पहुंचते ही शिवराज सिंह और साधना सिंह का पारंपरिक तरीके से जोरदार स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों रथ पर सवार होकर पूरे गांव में घूमे और ग्रामीणों का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों के साथ गरबा भी खेला। उन्होंने खुद कुएं से पानी निकालकर अपने साथ मौजूद केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया को पिलाया। इसके बाद वे खाट पर बैठकर चाय की चुस्कियां लेते भी नजर आए। यहीं नहीं, शिवराज सिंह ने गांव की परंपरा के मुताबिक सुपड़ा लेकर अनाज का कचरा भी निकाला और खुद को एक आम ग्रामीण की तरह गतिविधियों में शामिल किया। कुल मिलाकर मामा जी एक बार फिर अपने अंदाज में नजर आए। वे जहां भी जाते हैं, वहां सुर्खियों में आने का मौका नहीं छोड़ते और अपने सहज, देसी अंदाज से लोगों का ध्यान खींच ही लेते हैं। इनपुट सहयोग - विजय सिंह बघेल (भोपाल), आशीष रघुवंशी (गुना) ये भी पढ़ें - भाजपा नेता ने धमकाया- शहर की फिजा बिगाड़ दूंगा: कलेक्टर के सामने बांसुरी बजाकर शिकायत वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा नहीं जाने का फैसला कर सबको चौंका दिया है। उनके इस फैसले को लेकर कांग्रेस के अंदर ही अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। दिग्विजय सिंह के फैसले से पार्टी में कहीं खुशी का माहौल है तो कहीं मायूसी भी। पूरी खबर पढ़ें
कांग्रेस नेता परगट सिंह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार जनता के हकों का पैसा अपनी राजनीतिक रैलियों पर बर्बाद कर रही है। उन्होंने बताया कि एक तरफ सरकारी बसों का इस्तेमाल रैलियों के लिए हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ रोडवेज कर्मचारियों को तनख्वाह और पेंशन तक नहीं मिल रही है। परगट सिंह ने इसे शासन नहीं, बल्कि पंजाब के संसाधनों की बेशर्मी से की जा रही लूट करार दिया है। पंजाब की राजनीति में आर्थिक कुप्रबंधन को लेकर घमासान छिड़ गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता परगट सिंह ने सोशल मीडिया पर कुछ चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए 'आप' सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परगट सिंह के मुताबिक, सरकार ने अपनी एक राजनीतिक रैली को सफल बनाने के लिए सरकारी खजाने से 1600 सरकारी बसों का इंतजाम किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जहां सरकारी तंत्र को अपनी ब्रांडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं विभाग कर्ज और बकाये के बोझ तले दबे हुए हैं। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना के तहत PRTC और Punbus का 750 करोड़ रुपए का भुगतान अभी भी अटका हुआ है। इसके साथ ही, बिजली सब्सिडी का 10,500 करोड़ रुपए और अन्य सरकारी विभागों का 2700 करोड़ रुपए का बकाया अभी तक नहीं चुकाया गया है। इस वित्तीय संकट का सबसे बुरा असर कर्मचारियों पर पड़ रहा है। परगट सिंह ने बताया कि पटियाला में PRTC कर्मचारी अपनी तनख्वाह और पेंशन की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास जनता और कर्मचारियों के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन मंचों से 'जुमले' सुनाने और रैलियों पर खर्च करने के लिए खजाना खुला है।
जालंधर के मॉडल टाउन में लगी आग:सिल्वर शोरूम में लाखों का सामान राख, फायर बिग्रेड ने आग पर पाया काबू
जालंधर के सबसे व्यस्त और पॉश इलाके मॉडल टाउन में उस समय हड़कंप मच गया जब KFC के समीप स्थित सिल्वर के शोरूम में अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते पूरे इलाके में धुआं फैल गया और लोगों में दहशत भर गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस हादसे में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है, हालांकि किसी जानी नुकसान की खबर नहीं है। प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। जालंधर के मॉडल टाउन इलाके में देर रात सिल्वर के शोरूम में आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में धुआं कम था, लेकिन महज कुछ ही मिनटों के भीतर आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। आग की ऊंची लपटें देखकर आसपास के दुकानदारों और राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। दमकल विभाग ने आग पर पाया काबू आग के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां सायरन बजाती हुई घटना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को आसपास की अन्य दुकानों और रिहायशी इमारतों में फैलने से रोक लिया। लाखों का सामान जलकर राख इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन आग से लाखों रूपए का समान जलकर राख हो गया है।दुकान मालिक और प्रशासन अभी नुकसान के सटीक आंकड़ों का आकलन करने में जुटे हैं। आग बुझने के बाद भी दुकान से काफी समय तक धुआं निकलता रहा, जिसे पूरी तरह शांत करने में समय लगा।
लखनऊ के मोहन रोड स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में तैनात बैंक मित्र द्वारा फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि बैंक मित्र ने 50 से अधिक खाताधारकों को झांसा देकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प ली। पीड़ितों के मुताबिक किसी ग्राहक के खाते से 33 लाख रुपये, किसी से 10 लाख तो किसी अन्य खाताधारक के 6 लाख रुपये गायब हैं। जब एफडी की अवधि पूरी होने पर खाताधारकों ने रकम निकालनी चाही, तब पता चला कि उन्हें दी गई एफडी रसीदें और बैंक से जुड़े दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। 2 करोड़ जब्त होने का दावा, बैंक की चुप्पी पीड़ित खाताधारकों का दावा है कि मामला उजागर होने के बाद बैंक प्रबंधन ने करीब 2 करोड़ रुपये की राशि जब्त की है। हालांकि, इस संबंध में बैंक की ओर से अब तक कोई लिखित या आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसे लेकर ग्राहकों में नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शाखा में हड़कंप, प्रदर्शन से कामकाज प्रभावित फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद बैंक शाखा में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में पीड़ित खाताधारक शाखा पहुंचे और आरोपी बैंक मित्र के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते कुछ समय तक बैंक का कामकाज भी प्रभावित रहा। 4-5 साल से चल रहा था खेल ग्राहकों का आरोप है कि यह धोखाधड़ी पिछले चार से पांच वर्षों से चल रही थी। बैंक मित्र ने बैंक की प्रक्रिया और भरोसे का हवाला देकर ग्राहकों का विश्वास जीता और उसी का फायदा उठाते हुए फर्जी एफडी के जरिए भारी रकम हड़प ली। पुलिस जांच शुरू, विभागीय कार्रवाई के आदेश मामले की सूचना पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शाखा प्रबंधक हिमांशु कुकरेती के अनुसार, प्रारंभिक जांच में बैंक मित्र शिवा राव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।पुलिस का कहना है कि आरोपी ने कुछ ग्राहकों को उनकी राशि लौटाने का आश्वासन दिया है, लेकिन पीड़ित किसी भी आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। पीड़ित खाताधारकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जमा पूंजी जल्द वापस नहीं की गई, तो वे बैंक स्तर पर आंदोलन तेज करेंगे।
नो मैपिंग वाले 7871 मतदाताओं को बुलाया, 3665 ही आए
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में जिले में 25143 मतदाता ऐसे मिले हैं जिनकी मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से नहीं हुई है। यानी इनके या इनके माता, पिता या किसी परिजन का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिला है। अब इन मतदाताओं को नोटिस भेजकर जवाब देने बुलाया जा रहा है। अब तक जिले में 7871 को नोटिस देकर बुलाया गया है, लेकिन जवाब देने के लिए करीब 46.18 प्रतिशत यानी 3665 मतदाता ही आए हैं। मतदाता सूची में नाम बनाए रखने में मतदाता रुचि नहीं दिखा रहे हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में 23 दिसंबर को मतदाता सूची का अंतरिम प्रकाशन किया गया है। इसके बाद नो मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस भेजकर बुलाया जा रहा है। सुनवाई की जा रही है। जिले में कुल 25143 मतदाता नो मैपिंग वाले आए हैं। इन सभी 25143 मतदाताओं के नोटिस तैयार हैं, बीएलओ नोटिस भेजकर सुनवाई के लिए बुला रहे हैं। 7871 लोगों को नोटिस देकर बुलाया गया, इनमें से 3665 मतदाताओं ने आकर अफसरों के सामने अपना जवाब दिया है। बाकी सुनवाई के लिए अब तक नहीं आए हैं। जिले की आठों विधानसभा में नो मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस भेजकर जवाब देने बुलाया जा रहा है। देवरी विधानसभा में सबसे कम लोग अपना जवाब देने आए हैं। यहां 832 लोग नो मैपिंग वाले हैं। इन सभी को नोटिस देकर बुलाया गया। अब तक मात्र 95 यानी केवल 11.41 प्रतिशत मतदाता जवाब देने आए हैं। जवाब देने वालों में सबसे आगे बीना विधानसभा के मतदाता हैं। यहां अब तक 650 को बुलाया गया है। इनमें से 550 यानी 84 प्रतिशत सुनवाई में शामिल हुए और अपने जवाब दिए हैं। सागर व बंडा विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता भी सुनवाई के लिए नहीं आ रहे हैं। सागर में अब तक जारी नोटिस में से 35.07 व बंडा में 25.49 प्रतिशत मतदाताओं ने आकर जवाब दिया है।
राजघाट से मोतीनगर रोड पर खुला नाला दे रहा हादसे को न्योता
राजघाट तिराहे से मोतीनगर रोड तक किए गए सड़क चौड़ीकरण के दौरान बालाजी मंदिर मार्ग के मोड़ पर सड़क चौड़ीकरण का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। यहां सड़क के एक ओर नाला खुला पड़ा है। नाले के ऊपर स्लैब या सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से यह स्थान बेहद खतरनाक बन गया है।
दिन व रात का तापमान सामान्य से ज्यादा, अब छाएंगे बादल, बूंदाबांदी की भी संभावना
मौसम के मिजाज में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हवाओं के रुख में आए बदलाव के कारण सागर में दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से ऊपर पहुंच गया है। बुधवार को शहर के न्यूनतम तापमान में 1.2 डिग्री का उछाल आया, जिससे यह बढ़कर 12 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं, अधिकतम तापमान भी 26.7 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2 डिग्री ज्यादा है। दिन में धूप के तेवर तीखे होने और रात में बादलों की लुकाछिपी के कारण लोगों को कड़ाके की ठंड से फिलहाल राहत मिली है। तापमान बढ़ने के साथ हवा में नमी के स्तर में भी गिरावट आई है। बुधवार सुबह हवा में नमी की मात्रा में 18 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 61% पर आ गई। शाम होते-होते नमी का स्तर और गिरकर 54% रह गया। हवा में नमी कम होने से दिन के समय हल्की शुष्क सर्दी महसूस की जा रही है।
मकर संक्रांति पर बांदा में अनोखा मेला लगता है। इसे आशिकों का मेला कहते हैं। प्रेमी-प्रेमिका की समाधि पर नट बाबा मंदिर बना है। जहां कपल पूजा पाठ कर अपने प्यार के लिए मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि यहां प्रेमी-प्रेमिका की मनोकामना पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने के बाद समाधि पर रेवड़ी और फूल चढ़ाते हैं। शादीशुदा जोड़े भी यहां आशीर्वाद लेने आते हैं। ये परंपरा आज की नहीं, बल्कि करीब 175 साल पुरानी है। इसके पीछे एक अनोखी प्रेम कहानी भी है। मकर संक्रांति के दिन ही किले के राजा की बेटी ने प्रेमी की हत्या के बाद किले से कूदकर जान दे दी थी। दोनों की प्रेम कहानी अमर हो गई। जिसके बाद से हर साल मकर संक्रांति पर यहां भव्य मेला लगता चला आ रहा है। पहले आपको किले से जुड़ी प्रेम कहानी पढ़वाते हैं… बांदा जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर भूरागढ़ किला है। करीब 6 एकड़ में फैला ये किला अब खंडहर में तबदील हो चुका है। किले के नीचे ही प्रेमी-प्रेमिका समाधि बनी है जो आज भी गुलजार है। मान्यता है कि सन् 1850 में महोबा के सुगिरा के रहने वाले नोने अर्जुन सिंह भूरागढ़ दुर्ग (अब भूरागढ़ किला) राजा थे। यहां से करीब 40 किमी दूर मध्य प्रदेश के सरबई गांव में नट जाति के 21 साल के बीरन रहते थे। बीरन कई घंटों तक रस्सियों पर चलन, उल्टे पैर दौड़ने और कई फीट लंबे बांसों के सहारे छलांग लगाने में माहिर थे। बीरन इसी भूरागढ़ किले में नौकर थे और अपना हैरतअंगेज करतब दिखाया करते थे। जिसका लुत्फ राजा के साथ प्रजा भी उठाती थी। राजा की एक बेटी थी सोनालिका। राजा की बेटी को मगरमच्छ से बीरन ने बचायाखुद को नट बीरन के वंशज बताने वाले फर्सलान बताते हैं- एक दिन राजा नोने अर्जुन सिंह की बेटी सोनालिका अपनी दोस्तों के साथ किले से सटकर बहने वाली केन नदी में नहाने गईं। तभी मगरमच्छ ने उन पर अटैक कर दिया। मगरमच्छ देखकर सहेलियों ने शोर मचाया तो आनन-फानन में राजा के सैनिक पहुंचे, लेकिन मगरमच्छ से लड़ने की हिम्मत कोई नहीं जटा पाया। राजकुमारी को नट बीरन से हुआ प्यारउसी समय किले में बीरन करतब दिखा रहे थे। शोर मचने पर वो दौड़कर नदी में कूद गए। मगरमच्छ से लड़कर बीरन ने राजा की बेटी की जान बचाई। लंबे इलाज के बाद राजा की बेटी को होश आया। उसने जान बचाने वाले का नाम पूछा। बीरन की मगरमच्छ से लड़ने की हिम्मत देखकर राजा की बेटी को उससे प्यार हो गया। फर्सलान बताते हैं- लंबे समय तक दोनों छिप छिपकर मिलते रहे। लेकिन इसकी भनक राजा को नहीं हुई। बीरन लंबे बांसों के सहारे छलांग लगाकर राजा की बेटी से मिलने किले के कमरे में घुस जाया करते थे। राजा ने बेटी से शादी की रखी शर्तराजा को दोनों के मिलने की खबर मिल गई। राजा ने बेटी को बुलाकर फटकारा। कहने लगे कि एक नौकर से तुम्हारी शादी नहीं कर सकता। लेकिन बेटी बीरन से ही शादी करने की जिद पर अड़ गई। काफी मनाने के बाद जब बेटी नहीं मानी तो राजा ने बीरन से सशर्त शादी कराने की बात कही। नट बीरन मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी रतन यादव बताते हैं- किले से करीब डेढ़ किमी की दूरी पर बांबेश्वर पर्वत है। राजा ने कहा कि उस पर्वत से किले तक कच्चे सूत की रस्सी बांधी जाएगी। अगर उसपर अपने पैरों से चलकर बीरन किले तक आ गया, तो मैं धूमधाम से उसके साथ अपनी बेटी की शादी करूंगा। यही नहीं राजपाठ भी बीरन के नाम कर देगा। ये शर्त सुनकर राजा की बेटी के होश उड़ गए। लेकिन राजकुमारी के प्यार में बीरन नट ने शर्त स्वीकार कर ली। इसके बाद राजा ने मकर संक्रांति के दिन शर्त पूरी करने की बात कही। 14 जनवरी 1850 को पूरी होनी थी शर्तरतन कहते हैं- 14 जनवरी 1850 को मकर संक्रांति के दिन बाम्बेश्वर पर्वत से लेकर केन नदी होते हुए भूरागढ़ किले तक सूत की मोटी रस्सी बांधी गई। इसके बाद बीरन शर्त के अनुसार रस्सी पर चलकर आने लगा। करतबों में माहिर बीरन नट ने सूत पर चलते हुए केन नदी पार कर ली और भूरागढ़ दुर्ग की तरफ बढ़ने लगा। ये देखकर राजकुमारी खुश हो गईं लेकिन राजा परेशान हो गया। बड़े मुनीम ने नट बीरन की हत्या का रचा षड़यंत्रराजा अपने बड़े मुनीम से कहने लगा कि अब इसी नट से बेटी की शादी करानी पड़ेगी। लेकिन मुनीम ने राजा को षड़यंत्र रचने को कहा। कहने लगा कि से सूत की रस्सी काट दी जाए तो बीरन गिर जाएगा। शर्त पूरी नहीं होगी तो शादी नहीं होगी। लेकिन ये रस्सी किसी कुल्हाड़ी और बांके से नहीं कटेगी। इसके लिए मोची के पास मिलने वाली रापी (चमड़ा काटने वाला औजार) लानी होगी। रस्सी कटी तो 80 फीट की ऊंचाई से गिरे नट बीरनराजा ने किले में मौजूद मोची से वापी मंगवाई और चुपके से किले की दीवार से बंधे सूत को काट दिया। सूत कटते ही नट बीरन करीब 80 फीट की ऊंचाई से नीचे नदी की चट्टानों पर गिर गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। प्रेमी की मौत पर राजकुमारी ने भी जान दीइधर, राजकुमारी सोनालिका किले की खिड़की से अपने प्रेमी को देख रही थीं। उसके गिरते ही वो बाहर आईं। रस्सी कटने और पिता के षड़यंत्र के बारे में सुना तो खिड़की से जाकर छलांग लगा दी। राजकुमारी की भी मौके पर ही मौत हो गई। किले के नीचे बना मंदिरफर्सलान बताते हैं- दोनों की मौत के बाद किले के नीचे ही हमारे पूर्वजों ने नट बीरन और उनकी प्रेमिका सोनालिका की प्रेम कहानी को याद रखने के लिए समाधि बनवा दी। इसी समाधि पर लोग पूजा-पाठ करने लगे। बाद में 1925 में इसी समाधि पर मंदिर का निर्माण हुआ। अब ये मंदिर महाबली नट बीरन बाबा के नाम से प्रसिद्ध है। जहां हर साल मकर संक्रांति पर मेला लगता है। सबसे ज्यादा यहां प्रेमी जोड़े ही अपनी मन्नत मांगने आते हैं। मनोज बोले- अपनी प्रेमिका के लिए मन्नत मांगने आया हूंबुधवार को भूरागढ़ किले में पहुंचे मनोज ने कहा- मैं भी एक लकड़ी काजल से प्यार करता हूं। हमारा प्यार सफल हो, इसके लिए मन्नत मांगने आया हूं। यहां जो भी आता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। मैं भी इसीलिए आया हूं। मैंने अपनी प्रेमिका का नाम भी यहीं आकर अपने हाथ में गुदवाया है। यहां मेरे जैसे कई प्रेमी और प्रेमिका आए हैं। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें डॉग कर रहा बजरंगबली और मां दुर्गा की परिक्रमा, VIDEO:बिजनौर में तीन दिनों से बिना खाए-पिए चल रहा; भीड़ उमड़ी यूपी के बिजनौर से हैरान करने वाला सामने आया है। यहां एक डॉग बीते तीन दिन से मंदिर में बजरंगबली और मां दुर्गा की प्रतिमा के चारों ओर घूम रहा है। लोग इस घटना को परिक्रमा मान रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉग ने पहले दो दिन हनुमानजी की प्रतिमा के चक्कर लगाए। बुधवार को उसने मां दुर्गा की प्रतिमा के चारों ओर घूमना शुरू किया है। बिना रुके और खाए–पिए उसकी परिक्रमा जारी है। थकने पर एक पैर को उठा लेता है। पूरी खबर पढ़ें
धोखाधड़ी:सोनम बन बेरोजगार युवतियों को फंसाता रहा अमन, 5 मामले दर्ज
मंत्री, नेता व अधिकारियों का खास बताकर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले जालसाज अमन पाठक के खिलाफ शहर के सिविल लाइन थाने में भी एफआईआर दर्ज हुई है। सोनम के नाम से सोशल साइट्स पर फेक आईडी बनाकर वह बेरोजगार लड़कियों को जाल में फंसा रहा था। उसने जैसीनगर की 3 युवतियों को इंदौर-भोपाल में हाई सैलरी पर जॉब दिलाने और मकरोनिया के एक युवक को सागर नगर निगम में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की थी। इसके पहले एक अन्य युवती को महिला बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर के पद पर भर्ती के नाम पर जाल में फंसा था। इसी मामले में आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। सिविल लाइन व मोतीनगर थाने में अब तक ऐसे 5 मामलों में एफआईआर हुई है। ठगी की रकम 9 लाख से ज्यादा है। गोपालगंज थाने में दो और मामले जांच में हैं। रहली विधानसभा क्षेत्र के गढ़ाकोटा का रहने वाला अमन भाजपा नेताओं के बीच काफी दखल रखता है। उसने केंद्रीय मंत्री, सीएम, डिप्टी सीएम, मंत्री और अमूमन सत्ता-संगठन के सभी बड़े नेताओं के साथ फोटो खिंचवाए। वीडियो-फोटो सोनम नाम की फेक आईडी के जरिए सोशल साइट्स पर डालता और लड़कियों को जॉब दिलाने की गारंटी लेता। चैटिंग के दौरान जब कोई युवक-युवती जॉब की बात करती तो सोनम लिखती है कि मेरे भाई अमन की नेता, मंत्री व अधिकारियों से अच्छी पहचान है। वह नौकरी दिला सकता है। इसके बाद सौदेबाजी होती थी। अमन अपनी कार पर डिप्टी सीएम प्रतिनिधि की नेम प्लेट लगाकर रखता था। मोतीनगर पुलिस ने यह कार जब्त की है। मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह राजपूत ने बताया कि बुधवार को ठगी के शिकार दो और लोग आवेदन लेकर थाने पहुंचे थे, जिन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गोपालगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराने को कहा गया है। जिलेभर से ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। सिविल लाइन थाना प्रभारी आनंद सिंह ने बताया कि जैसीनगर की तीन युवती व मकरोनिया के एक युवक की रिपोर्ट पर अमन पाठक के खिलाफ जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज किया है। तीन युवतियों से 5 लाख 80 हजार रु. और एक युवक से 1 लाख 75 हजार रु. ऐंठे हैं। परिचित व रिश्तेदारों के खातों में ऑनलाइन पेमेंट कराया ठग अमन पाठक नकद राशि लेने के अलावा अपने परिचित, परिजन व रिश्तेदारों के खातों में ऑनलाइन भी रकम डलवा रहा था। सागर व गढ़ाकोटा के किसी सुधांशु व दीपक का नाम भी सामने आ रहा है। हाईप्रोफाइल नामों के जुड़ाव के कारण इस मामले को दबाने का प्रयास भी चला। ठगी के शिकार लोगों को पैसे लौटाने का आश्वासन, कभी दबाव तो कभी लालच दिया गया। दावा किया जा रहा है कि यदि महिला बाल विकास विभाग में हुई सुपरवाइजर की भर्ती की जांच हो तो ठगी के और भी मामले सामने आ सकते हैं। नए मामलों में सुयश शर्मा नाम के युवक को नगर निगम में फायरमैन की नौकरी दिलाने के नाम पर 15000 रुपए ऑनलाइन व भोपाल बुलाकर 60 हजार रुपए नगद लिए गए। रोहित चौबे के परिजन को महिला बाल विकास में नौकरी लगवाने के नाम पर 1.55 लाख रुपए ऐंठे जाने का मामला सामने आया है।
चायनीज मांझे से महिला के पैरों में घाव, दो युवकों का गला कटा
मकर संक्रांति पर चाइनीज मांझे का खौफ पूरे शहर में दिखा। सुबह से हादसे शुरू हुए, जो शाम तक जारी रहे। हर गली और सड़क पर लोग सतर्क नजर आए। पुरुषों ने गले में मफलर और गमछा लपेटा। महिलाएं चुनरी और दुपट्टे से चेहरा और गर्दन ढंककर निकलीं। दोपहिया वाहन चालकों ने बाइक के आगे लोहे की तार तक बंधवाई। कई लोग बच्चों को बाइक पर बैठाने से बचते दिखे। वाहन धीमी रफ्तार से चले। इसके बावजूद 10 लोग घायल हो गए।सुबह 11 बजे आगर नाके के पास रतलाम निवासी अंतर बंजारा (28) बाइक से जा रहे थे। अचानक गले में मांझा उलझ गया। गला गहराई तक कट गया। खून बहने लगा। राहगीरों ने तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने गले में आठ टांके लगाए। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज नहीं होता तो जान को खतरा हो सकता था। कुछ देर बाद फाजलपुरा मंडी में सब्जी लेने गई सीमा पति भीमराज (45) मांझे की चपेट में आ गईं। मांझा दोनों पैरों से होकर गुजरा। दोनों पैरों में गहरे घाव हो गए। दर्द से तड़पती महिला को साथ आई महिलाओं ने जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने मांझा निकाला। दाएं-बाएं पैर में कुल सात टांके लगाए। महिला को कुछ समय अस्पताल में भर्ती रखा गया। अस्पताल में पूरे दिन केस आते रहे जिला अस्पताल में दोपहर 11 से 2 बजे के बीच तीन केस दर्ज हुए। इनमें पतंग उड़ाते समय आकाश मालवीय का अंगूठा कट गया। खून नहीं रुकने पर डॉक्टरों को तुरंत प्राथमिक उपचार करना पड़ा। दोपहर 2 से शाम 6 बजे के बीच सबसे ज्यादा छह केस सामने आए। गला, हाथ, चेहरा और ठोड़ी पर कट के कुल 9 मामले केवल जिला अस्पताल में दर्ज हुए। इसके अलावा कई घायल निजी अस्पतालों में भी पहुंचे। गला कटा, बाइक रोकी तो टला हादसा दानीगेट निवासी 38 वर्षीय धर्मेंद्र निरभाण भी शिकार हुए। बाइक से ससुराल नागझिरी जाते समय डी-मार्ट और लालगेट के बीच धर्मेंद्र के गले में चायनीज मांझा उलझने गला कट गया। शुक्र है बाइक की स्पीड कम थी और मांझा गले में उलझते ही उन्होंने हाथ से पकड़कर उसे खींचने का प्रयास किया और बाइक रोक दी। धर्मेंद्र ने बताया यदि बाइक की स्पीड थोड़ी तेज होती तो बड़ी घटना हो जाती। शाम 5.20 बजे महावीर कॉलोनी मक्सी रोड के सामने मांझा दो बाइकों में उलझ गया। दोनों आपस में टकराने से घायल हो गए।
मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी में “गुणवत्ता नियंत्रण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर एक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में 300 से 350 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसमें मोहम्मद अतीक ने अध्यक्षता की। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एस. जमील क़ाज़मी ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया, जबकि डीन एकेडमिक्स इमरान खान ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर हुई चर्चा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. अनिल भंडारी ने अपने मुख्य वक्तव्य में गुणवत्ता नियंत्रण, गुणवत्ता आश्वासन, जोखिम प्रबंधन तथा नियामक अनुपालन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक तकनीकें शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग जगत में व्यापक परिवर्तन ला रही हैं। एआई के व्यावहारिक उपयोगों पर जोर तकनीकी सत्रों के दौरान विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्ता प्रणाली, फार्मास्यूटिकल एवं औद्योगिक प्रक्रियाओं में एआई के व्यावहारिक उपयोगों पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। प्रतिभागियों ने सत्रों में सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न भी रखे। कार्यक्रम के अंत में आयोजक समिति द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षणिक एवं कौशल-विकास से संबंधित गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जाएगा।
रात का पारा भी चढ़ा, कोहरा अलसुबह तक सिमटा
मकर संक्रांति के साथ दिन और रात का पारा चढ़ने लगा है। इसी तरह कोहरे का दायरा अलसुबह तक सिमटकर रह गया है। शाम ढलने के बाद भी सर्द हवा का ज्यादा असर महसूस नहीं हो रहा है। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री रहा, जबकि न्यून. तापमान 11.2 डिग्री पर पहुंच गया है। आर्द्रता सुबह 88 और शाम को 56 फीसदी रही। हवा की रफ्तार सुबह शून्य और शाम को 6 किलोमीटर दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार आसमान साफ रहने से दिन में धूप के तेवर तीखे होने लगेंगे, जबकि रात में सर्द हवा एक सप्ताह तक ठंड का एहसास करवाएगी।
फ्रीगंज ब्रिज के पास बन रहे नए ओवरब्रिज के लिए पोल गाड़ने को खोदे गए गड्ढे ने निर्माण एजेंसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गड्ढा खोदते समय पुरानी डायरेक्ट पाइपलाइन फूट गई। इससे तीन दिन से हजारों गैलन पानी व्यर्थ बह रहा है।सबसे बड़ी परेशानी यह है कि नगर निगम की पीएचई टीम और रेलवे अफसरों को जानकारी नहीं कि लाइन कहां से जुड़ी है और इसका वॉल कहां से बंद होगा। दोनों विभागों के कर्मचारी सुधार में जुटे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। कर्मचारियों ने बताया कि यह पाइपलाइन करीब 60-70 साल पुरानी है। तब के कर्मचारी अब नहीं हैं। इस कारण इसकी कनेक्टिविटी की जानकारी किसी के पास नहीं है। लाइन करीब 7-8 फीट गहराई में है। पानी खाली करे बिना सुधार मुश्किल है। ब्रिज के पोल खड़े करने वाली कंपनी को भी तीन दिन से काम रोकना पड़ा है। ट्रैक्टर का इंजन लगाया फिर भी पानी खत्म नहीं हुआ : मरम्मत के लिए पानी में उतरकर मशक्कत कर रहे निगम पीएचई के कर्मचारियों ने बताया इस गड्ढे से पानी ही खत्म नहीं हो रहा, क्योंकि जो लाइन फूटी है, वह बड़ी लाइन है और 24 घंटे चालू रहती है। ट्रैक्टर का इंजन चालू कर गड्ढे का पानी खत्म करने का भी प्रयास किया, लेकिन पाइपलाइन से इतना ज्यादा पानी बाहर निकल रहा है कि इंजन से खाली नहीं हो सका। जल्द मरम्मत करवाएंगे : पीएचई के ईई वैभव भावसार ने कहा क्षेत्र में पाइपलाइन शिफ्टिंग का काम चल रहा है। जो पाइपलाइन फूटी उसकी जानकारी लेंगे और जल्द से मरम्मत करवाकर व्यर्थ बह रहा पानी रोकेंगे।
आपको हम बता रहे हैं, भोपाल शहर में आज कहां-क्या हो रहा है। यहां हर वो जानकारी होगी, जो आपके काम आएगी। संगीत-संस्कृति, आर्ट, ड्रामा के इवेंट से लेकर मौसम, सिटी ट्रैफिक, बिजली-पानी की सप्लाई से जुड़ा हर अपडेट मिलेगा। काम की जरूरी लिंक्स
ग्वालियर में ‘बहुएं’ दहेज के लिए रोज प्रताड़ित हो रही हैं। शादी के कुछ ही समय बाद कई घरों में पति, सास और ससुर बहुओं पर दहेज को लेकर ताने कसने लगते हैं। ताने धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक यातना में बदल जाते हैं। रोज की प्रताड़ना से टूटकर कई महिलाएं जानलेवा कदम उठाने तक को मजबूर हैं। पुलिस के आंकड़े कहते हैं कि साल 2025 में 1733 परिवारों में पति-पत्नी के बीच झगड़े हुए। 426 महिलाओं ने दहेज प्रताड़ना से परेशान होकर पति और ससुराल वालों पर केस दर्ज कराया। 2023 की बात करें तो 341 मामले सामने आए थे। यानी दो सालों में 24.9% दहेज प्रताड़ना के केस बढ़े हैं। 2024 में 497 बहुओं ने पुलिस से मदद मांगी थी। साफ है कि 2 सालों में दहेज प्रताड़ना के केस बढ़े हैं। विशेषज्ञों की मानें तो दहेज प्रथा की जड़ में शिक्षा का अभाव और लालच बड़ा कारण है। जब तक सोच नहीं बदलेगी और कानून का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक बहुओं की पीड़ा यूं ही बढ़ती रहेगी। इन 4 केसों से समझिए... दहेज की आग में कैसे बुझ गईं जिंदगियां पीड़िता बातों को न छुपाएं, तुरंत शिकायत करें, तभी रुकेगी सुसाइड दहेज प्रथा समाज की गंभीर समस्या है। शिक्षा का अभाव और लालच ही पारिवारिक कलह के सबसे बड़े कारण हैं। जिन परिवारों में पैसों को रिश्तों से ऊपर रखा जाता है, वहां विवाह लंबे समय तक नहीं टिकते। ससुराल में महिलाओं को मिलने वाले रोज़-रोज़ के ताने धीरे-धीरे शारीरिक हिंसा का रूप ले लेते हैं। बदनामी के कारण कई महिलाएं समय पर शिकायत नहीं करतीं। यदि पीड़िता या उसके परिजन समय रहते पुलिस से संपर्क करें तो आत्महत्या जैसे मामलों को रोका जा सकता है। -रश्मि भदौरिया, टीआई, महिला थाना
नमस्कार, कल की बड़ी खबर ईरान में मौजूद भारतीयों से जुड़ी रही। भारत सरकार ने उन्हें तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी। वहीं, दूसरी बड़ी खबर यूपी बीजेपी अध्यक्ष के SIR को लेकर दिए बयान पर है। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... कल की बड़ी खबरें... 1. ईरान में हालात बिगड़े, भारतीयों को तुरंत निकलने की सलाह, तेहरान में 300 शवों को दफनाया गया ईरान में हिंसक प्रदर्शन के बीच भारत सरकार ने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, इसलिए भारतीय नागरिक बिना देरी किए ईरान छोड़ दें। सरकार ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक विरोध प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहें। प्रदर्शनकारी को मौत की सजा: ईरान में 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को आज फांसी दी जा सकती है। उन्हें 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। 11 जनवरी को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। ईरान में महंगाई-बेरोजगारी के खिलाफ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। अब तक 12 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। पढ़ें पूरी खबर... 2. काशी के मणिकर्णिका घाट पर मंदिर तोड़ने का विरोध, लोग बोले- बिना बताए अहिल्याबाई की मूर्ति हटाई काशी के मणिकर्णिका घाट को तोड़ा जा रहा है। यहां नए सिरे से घाट तैयार होगा। स्थानीय लोग मंदिर तोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शिवलिंग और अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को गिरा दिया गया। एक पुजारी ने कहा कि घाट में 300 साल पुराना शिव मंदिर था और वो वहां पूजा करते थे। लेकिन बिना बताए मंदिर को तोड़ दिया गया और सारा सामान फेंक दिया गया। 3 साल पहले PM मोदी ने शिलान्यास किया था: साल 2023 में PM मोदी ने पुनर्निर्माण के काम का शिलान्यास किया था। बाढ़ की वजह से करीब डेढ़ साल से काम बंद था। अब इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट को नए तरीके से तैयार किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर... 3. यूपी BJP अध्यक्ष बोले- SIR सरकार की जिम्मेदारी, ड्राइविंग सीट पर हम नहीं यूपी के BJP के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि SIR सरकार की जिम्मेदारी है। संगठन हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। लेकिन ड्राइविंग सीट पर सरकार ही है। चौधरी ने ये बातें बीते मंगलवार (13 जनवरी) को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्षों की बैठक में कही। पंकज चौधरी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वे दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करके लौटे हैं। अब इस बयान को सत्ता के गलियारों में सरकार और संगठन के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा। चौधरी ने बैठक में कहा- SIR सरकार की जिम्मेदारी है, हमें केवल सहयोग कर सकते हैं कि हर पात्र का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो सके। पढ़ें पूरी खबर... 4. विराट कोहली 5 साल बाद नंबर-1 वनडे बल्लेबाज बने, टॉप-10 में 4 भारतीय बैटर विराट कोहली 5 साल बाद ICC वनडे रैंकिंग में नंबर-1 बन गए हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ 93 रन की पारी से उन्हें फायदा मिला। रोहित शर्मा तीसरे स्थान पर खिसके। वहीं, दूसरे नंबर पर न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल पहुंच गए हैं। टॉप-10 में 4 भारतीय बल्लेबाज हैं। विराट-रोहित के अलावा शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर हैं। कोहली 825 दिन तक नंबर-1 स्पॉट पर रहे: विराट ने अक्टूबर 2013 में पहली बार टॉप रैंकिंग हासिल की थी। विराट कुल मिलाकर 825 दिनों तक नंबर-1 स्थान पर रह चुके हैं। कोई अन्य भारतीय बल्लेबाज वनडे में इतने दिनों तक नंबर-1 नहीं रहा है। दुनिया में वे इस मामले में 10वें स्थान पर हैं। पढ़ें पूरी खबर... 5. आठ महीने बाद तेजप्रताप की लालू फैमिली में वापसी, लालू बोले- अब वो साथ ही रहेंगे 8 महीने बाद तेजप्रताप यादव की लालू प्रसाद यादव परिवार में वापसी हुई। तेजप्रताप ने आवास पर दही-चूड़ा भोज रखा। इसमें लालू यादव भी पहुंचे और कहा कि वो तेजप्रताप से नाराज नहीं है। वो परिवार के साथ ही रहें। वहीं, तेजप्रताप ने कहा, 'लालू की असली पार्टी अब जनशक्ति जनता दल है। तेजस्वी राजद का विलय जनशक्ति जनता दल में कर दें।' तेज प्रताप बिहार यात्रा पर निकलेंगे: तेज प्रताप ने कहा कि जल्द ही हम पूरे बिहार की यात्रा पर निकलेंगे, कब से निकलेंगे, इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनकी पार्टी MCD इलेक्शन लड़ेगी। तेजप्रताप का वो पोस्ट देखिए, जिस पर लालू ने उन्हें निकाला था पढ़ें पूरी खबर... 6. चांदी तीन दिन में ₹34 हजार बढ़ी, ₹2.78 लाख प्रति किलो बिक रही सोने-चांदी लगातार तीसरे दिन भी ऑलटाइम हाई रहे। एक किलो चांदी की कीमत 14,480 रुपए बढ़कर 2,77,512 रुपए हो गई है। तीन दिन में चांदी 34 हजार रुपए महंगी हो चुकी है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब तक 1,91,495 रुपए प्रति किलो बढ़ी है। सोना ₹1.42 लाख पहुंचा: 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,533 रुपए बढ़कर 1,42,015 रुपए पर बंद हुआ। पिछले साल यानी 2025 में सोने की कीमत 57,033 रुपए (75%) बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब तक 65,853 रुपए बढ़ चुका है। पढ़ें पूरी खबर... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... भगवान शिव को चढ़ाए गए 60 हजार से ज्यादा केकड़े गुजरात के सूरत में स्थित रामनाथ घेला महादेव मंदिर में पौष एकादशी पर अनोखी आस्था दिखी। भगवान शिव को एक दिन में 60 हजार से ज्यादा जीवित केकड़े चढ़ाए गए। मान्यता है कि इससे कान की बीमारियां ठीक होती हैं। हालांकि, फिर सभी केकड़ों को तापी नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया। फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… करेंट अफेयर्स ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज कर्क राशि वालों की पैतृक संपत्ति के काम पूरे होंगे। कन्या राशि के लोगों को कारोबार में मौके मिलेंगे। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन 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यूपी के जिला सहारनपुर में पुलिस-प्रशासन की टीम ने 9 जनवरी को टोल प्लाजा मालिक समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया। इस टोल प्लाजा पर सभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से जबरन टोल टैक्स वसूला जा रहा था। SP सागर जैन ने कहा- एक साल में करीब 50 करोड़ रुपए की टोल वसूली अवैध तरीके से कर ली गई, ऐसा अनुमान है। बाकी हम 5 साल का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं, उससे चीजें और क्लियर होंगी। टोल प्लाजा के मालिक कमलजीत प्रधान समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। नकुड़ विधानसभा सीट से टिकट मांगने की दौड़ में हैं। सपा नेता सीधे तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि मौजूदा BJP विधायक मुकेश चौधरी ने सपा नेता को पकड़वाया है, जिससे उनका पॉलिटिकल फ्यूचर बना रहे। दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पूरा मामला समझा। पुलिस अफसरों से बात करके जाना कि फर्जीवाड़ा कैसे हो रहा था? सपा और भाजपा नेताओं से भी इस कंट्रोवर्सी पर अलग-अलग बात की। यह रिपोर्ट पढ़िए... सबसे पहले पूरा केस समझिए टोल मालिक समेत चार गिरफ्तार, फर्जी रसीदें बरामदसहारनपुर DM मनीष बंसल को पिछले दिनों सूचना मिली कि सरसावा टोल प्लाजा पर हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपए वसूले जा रहे हैं। जबकि हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से टोल वसूली का कोई नियम ही नहीं। DM ने एक टीम बनाई और 9 जनवरी को छापेमारी कराई। इसमें शिकायत सही मिली। मामले में टोल प्लाजा मालिक कमलजीत प्रधान, टोल मैनेजर कालू सिंह राणावत, टोल-कर्मी अक्षय कुमार और सागर की गिरफ्तारी हुई। इनसे एक रसीद बुक, 8 कटी हुई रसीदें और 3 पर्चियां मिलीं, जिन पर वसूली का विवरण लिखा था। क्षेत्रीय लेखपाल रामप्रसाद गुप्ता ने थाना सरसावा में FIR कराई। 12 जनवरी को सहारनपुर की सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से लिए जाते थे 130 रुपएवसूली का खेल समझने के लिए हमने सहारनपुर के SP (ग्रामीण) सागर जैन से फोन पर बात की। उन्होंने बताया- हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से 130 रुपए वसूले जा रहे थे। इसके लिए टोल प्लाजा संचालक ने अपने स्तर पर फर्जी रसीदें छपवा रखी थीं, जो किसानों को पैसे लेकर दी जाती थीं। शुरुआती पूछताछ में टोल प्लाजा मालिक कमलजीत ने करीब एक साल से वसूली होने की जानकारी दी है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 50 करोड़ रुपए की अवैध वसूली हो चुकी थी। हम टोल प्लाजा का 5 साल का डेटा खंगाल रहे हैं। सभी डॉक्यूमेंट्स की छानबीन की जा रही है। अभी तक की जानकारी में पता चला है कि पिछले साल भी कमलजीत प्रधान के पास ही टोल संचालन का जिम्मा था। इस पूरे केस की बारीकी से जांच चल रही है। जांच में कुछ और युवकों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है। सहारनपुर में 50 हजार किसान कर रहे पॉपुलर की खेतीआखिर इतनी ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कहां से आ रहीं, जिन्हें टोल प्लाजा वालों ने कमाई का जरिया बना लिया। यह जानने के लिए हमने जानकारों से बात की। दरअसल, सहारनपुर में लकड़ी पर नक्काशी (वुड कार्विंग) का बड़ा काम है। यहां लकड़ी के फर्नीचर और इससे जुड़े सजावटी सामान तैयार करके पूरे देश-विदेश में सप्लाई किए जाते हैं। इस वजह से पॉपुलर की खेती बहुत होती है। मौजूदा वक्त में सहारनपुर में 50 हजार से ज्यादा किसान पॉपुलर की खेती कर रहे हैं। सहारनपुर से सटा हरियाणा राज्य का यमुनानगर है, जहां प्लाईवुड की 350 से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं। सहारनपुर और देहरादून रीजन के पॉपुलर की ज्यादातर सप्लाई यमुनानगर की फैक्ट्रियों को होती है। प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि प्लाईवुड फैक्ट्रियों ने अपने-अपने कांटे सहारनपुर के खेतों में लगा दिए हैं, जहां सीधे खेत से पॉपुलर के पेड़ इकट्ठा करके फैक्ट्रियों तक पहुंचाए जाते हैं। टोल प्लाजा से रोजाना गुजरते हैं 13 हजार से ज्यादा वाहनसहारनपुर से यमुनानगर की पॉपुलर फैक्ट्रियों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता कस्बा सरसावा है। सरसावा को पार करते ही टोल प्लाजा पड़ता है। ये हाईवे देहरादून को पंचकूला से भी जोड़ता है। स्थिति ये है कि हर मिनट ट्रैक्टर-ट्रॉली इस टोल प्लाजा को पार करती है। सरसावा से भरी हुई ट्रॉलियां जाती हैं और यमुनानगर से खाली होकर आती हैं। इसी क्षेत्र में यमुना नदी बहती है, जहां खनन होता है। खनन की ट्रैक्टर–ट्रॉलियां भी यहीं से गुजरती हैं। हमने टोल प्लाजा पर पहुंचकर वहां मौजूदा कर्मचारियों से ऑफ कैमरा बात की। उन्होंने बताया कि पिछले साल 13 हजार वाहन रोजाना इस टोल प्लाजा से गुजरते थे। एक साल में ये संख्या अब और बढ़ गई है। हालांकि, उन्होंने इसका सटीक डेटा नहीं बताया। हमने पूछा- अब टोल का संचालन कैसे हो रहा है? इस पर उन्होंने कहा कि टोल मालिक/मैनेजर जेल चले गए। कर्मचारी जैसे-तैसे टोल प्लाजा चला रहे। हमने कुछ देर तक टोल प्लाजा पर खड़े होकर सच्चाई परखी। पुलिस एक्शन के बाद से अब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से टोल वसूली बंद कर दी गई है। हमने कई ट्रैक्टर-ट्रॉली ड्राइवरों से बात करने की कोशिश की, लेकिन रोजाना यहां से गुजरने की वजह से वो ऑन कैमरा बातचीत करने को तैयार नहीं हुए। सपा नेता बोले- कमलजीत ने SIR में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया, इसलिए जेल भेजाअब इस पूरे प्रकरण में राजनीति भी शुरू हो गई है। कुछ सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि नकुड़ क्षेत्र से मौजूदा BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपना पॉलिटिकल करियर बचाए रखने के लिए प्रतिद्वंद्वी कमलजीत प्रधान को जेल भिजवा दिया है। दरअसल, कमलजीत सिंह सरसावा क्षेत्र में गांव शेखपुरा का रहने वाला है। वो समाजवादी पार्टी से नकुड़ विधानसभा सीट से टिकट मांग रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कमलजीत की पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई बड़े नेताओं के साथ फोटो भी मौजूद है। कमलजीत के जेल जाते ही सोशल मीडिया वॉर शुरू हो गई है। सपा के तमाम लोग कमलजीत के पक्ष में आ गए हैं। वो इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। सहारनपुर में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फरहद गाड़ा कहते हैं- कमलजीत हमारी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। इस नाते सपा का प्रतिनिधिमंडल उनके घर गया। फैमिली का कहना है कि हमारा टोल प्लाजा से कोई मतलब नहीं। सरसावा एसओ ने फोन करके कमलजीत को बुलाया। कमलजीत खुद थाने गए थे, न कि पुलिस उन्हें लेकर गई। इसके बाद करीब 7-8 घंटे तक कमलजीत को अलग-अलग थानों में घुमाते रहे। पुलिस ने उनके घरवालों को कुछ नहीं बताया और अचानक कमलजीत को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया। अब पुलिस कह रही कि पिछले एक साल से टोल प्लाजा पर अवैध वसूली हो रही थी। हमारा कहना है कि अगर ऐसा हो रहा था तो पुलिस-प्रशासन ने पिछले एक साल से किसानों से ये लूट क्यों होने दी? फरहद गाड़ा, कमलजीत को जेल भेजने के पीछे दूसरी कहानी बताते हैं। कहते हैं- पिछले दिनों सहारनपुर में SIR का काम चला। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रखा था कि वो एक-एक बूथ पर जाकर चौकन्ना रहें। 20 दिसंबर को जिला प्रशासन ने बीएलओ के साथ 36 सहायक लगाए, जो विशेष समुदाय (मुस्लिम) के थे। इसके बाद 26 दिसंबर को सहायकों की दूसरी लिस्ट आई। इसमें 36 में से 31 मुस्लिम सहायकों के नाम काट दिए गए। हम इस बाबत DM के पास गए। कमलजीत प्रधान ने सोशल मीडिया पर आकर उन सभी मुस्लिम नामों की लिस्ट पढ़ डाली, जिन्हें सहायक कार्य से हटाया गया था। सत्ता के लोगों को ये बात चुभी और उन्होंने खुन्नस में कमलजीत को जेल भेज दिया। कमलजीत को साजिश का शिकार बनाया गया है। पूर्व BJP विधायक ने भी कार्रवाई पर उठाए सवालपूर्व भाजपा विधायक शशिबाला पुंडीर ने फेसबुक पर 2 पोस्ट डालकर टोल प्लाजा मामले में कमलजीत प्रधान की अरेस्टिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा- कमलजीत प्रधान को राजनीति का शिकार बनाया गया है। वह लड़का बहुत प्रोग्रेस कर रहा था। उसको झूठा फंसाया गया है। राजनीति करनी चाहिए, लेकिन इतना गिरकर नहीं। मुख्यमंत्री जी को भी पत्र लिखूंगी कि अपने जनप्रतिनिधियों पर ध्यान नहीं देते, उनकी जांच नहीं करते, जिन्होंने जिला लूट खाया। एक दूसरी पोस्ट में शशिबाला पुंडीर ने लिखा- मैं आज जेल में जाकर कमलजीत से मिली हूं। सारी घटना पूछी। कमलजीत के नाम सरसावा टोल प्लाजा पर कहीं कुछ नहीं है। टोल पहले उसके नाम पर था, अब नहीं है। उसका कहीं कोई पैसे का ट्रांजैक्शन टोल प्लाजा से नहीं है। मैंने डीएम से भी निष्पक्ष जांच के लिए कहा है। BJP विधायक बोले- कमलजीत मेरा भतीजा, मैंने तो छुड़ाने के प्रयास किएइस प्रकरण में लगातार लग रहे आरोपों पर नकुड़ क्षेत्र से BJP विधायक मुकेश चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- कमलजीत मेरा भतीजा है। हमारे दोस्त का मित्र है। मेरे चुनाव में साथ रहा। मैं उसे क्यों जेल भिजवाऊंगा? राजनीतिक रूप से मेरा नाम लिया जा रहा। मेरा इसमें कोई रोल नहीं। घटना वाले दिन मेरे पास उनके चचेरे भाई के लड़के का फोन आया और उसने पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद मैंने अधिकारियों से फोन पर बात की। अधिकारियों ने मुझे पूरी कार्रवाई समझाई। रुद्रसेन जी (सपा नेता) हमारे बड़े भाई हैं। उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। हमें खुद टोल की पूरी जानकारी नहीं थी। इसके बाद मैंने सरकारी शासनादेश मंगवाकर पढ़ा था। उसमें स्पष्ट है कि ट्रैक्टर के पीछे कुछ भी जुड़ा हो, उससे टोल नहीं ले सकते। ये पुष्टि हो चुकी है कि टोल लिया जा रहा था। विधायक ने आगे कहा- कमलजीत को छुड़ाने के लिए हमारे मंत्री बृजेश सिंह, विधायक कीरत सिंह ने भी अधिकारियों को फोन किया। फोन करने वालों में मैं अकेला नहीं था। उसके सबसे संबंध हैं। जिसने चुनाव में मेरे साथ काम किया हो, मैं उसे कैसे बंद करवा दूंगा। 2 साल से टोल उसके पास ही है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें... 'भाजपा नेता संगीत सोम मीट कारोबारी हैं', मेरठ में सपा विधायक अतुल प्रधान के गंभीर आरोप यूपी के मेरठ की सरधना सीट से विधायक रह चुके संगीत सोम एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह शाहरुख खान की IPL टीम केकेआर में शामिल मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने की मांग को लेकर चर्चा में आए। संगीत सोम की गिनती फायर ब्रांड नेता के रूप में होती रही है। लेकिन, बांग्लादेश के विरोध के बाद उनके अतीत के रिकॉर्ड को लेकर सरधना से मौजूदा सपा विधायक अतुल प्रधान ने उन पर हमला बोला है। उनके अतीत के कुछ दस्तावेज भी उन्होंने पेश किए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में संगीत सोम किसी मीट के उत्पादन या निर्यात के काम में शामिल रहे हैं? अगर सच है, तो किन-किन कंपनियों में वे रहे? किस पद पर रहे? कब तक रहे? अब क्या स्थिति है? पढ़ें पूरी खबर
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। 15 साल से अधिक पुरानी यात्री बसों के संचालन पर रोक लगाते हुए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) ने 44 रूटों पर चलने वाली 59 बसों के परमिट दो माह के लिए सस्पेंड कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद ग्वालियर संभाग के चार जिलों में हजारों यात्रियों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ज्यादातर ग्रामीण रूट की बसें हैं। इससे यात्रियों का सफर मुश्किल होना वाला है। आरटीओ का कहना है कि जिन बसों के परमिट सस्पेंड किए गए हैं, उन्हें नोटिस जारी कर रहे हैं। बताते चलें कि परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटरों को पहले ही निर्देश दिए थे कि वे 15 साल पुरानी बसों को हटाकर नई बसों से परमिट रिप्लेस करें, लेकिन निर्धारित समय सीमा के बावजूद अधिकांश ऑपरेटरों ने नियमों का पालन नहीं किया। इसके चलते विभाग को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। जानिए... किस रूट के कितनी बसों के परमिट सस्पेंड किए गए सस्पेंड बसें रूट पर चलती मिली तो एक हजार रुपए प्रति सीट जुर्माना भरना होगा सस्पेंड बसें यदि रूट पर चलते मिलती हैं तो ऐसे बस ऑपरेटर को प्रति सीट एक हजार रुपए जुर्माना भरना होगा। आरटीओ के अनुसार जिन बसों के परमिट सस्पेंड किए हैं यदि वह संचालित होते पाई जाती हैं तो उन पर बिना परमिट के बसों को मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। जिन बसों के परमिट सस्पेंड किए गए हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जिससे सस्पेंशन के दौरान ऐसी यात्री बसों का संचालन न किया जाए। अभी पुरानी बसों के परमिट सस्पेंड किए, बसें तय समय में नहीं बदली तो रद्द करेंगे15 साल से अधिक पुरानी यात्री बसों के संचालन पर रोक है। अंचल के चार जिलों में 59 ऐसी बसें थीं, जिन्हें नई बसों से रिप्लेस करने का अवसर दिया था। तय समय में ऐसा नहीं होने पर 44 रूटों पर चलने वाली इन बसों के परमिट 2 माह के लिए सस्पेंड किए गए हैं। यदि इस अवधि में भी रिप्लेसमेंट नहीं हुआ तो परमिट निरस्त कर दिए जाएंगे।-विक्रमजीत सिंह कंग, आरटीओ
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प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है। आज मकर संक्रांति पर श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। यहां यमुना के काली घाट पर राेज शाम को वाटर लेजर शो हो रहा है। त्रिवेणी की महिमा के साथ महाकुंभ, समुद्र मंथन की कहानी को लेजर शो के जरिए दिखाया जा रहा है। VIDEO में देखिए अद्भुत नजारा...
विधर्मियों के लिए भारत में जगह नहीं है, उनका स्थान पाकिस्तान है, वो समय पर पहुंच जाए, क्योंकि यहां विकास का राफेल उड़ चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सतुआ बाबा ने ये बातें कही। बाबा माघ मेला की सुर्खियों में बने हुए हैं। शाही लाइफ स्टाइल को अक्सर वो इंज्वाय करते दिखते हैं। 14 जनवरी को 3 करोड़ की लैंड रोवर डिफेंडर छोड़कर स्पोर्ट्स कार पोर्शे टर्बो 911 ले ली है, इस कार की कीमत करीब 4.40 करोड़ बताई जा रही है। हमने पूछा- हर दिन आप नई सवारी में दिखते हैं। सतुआ बाबा कहते हैं- मुझे इनका शौक नहीं, सिर्फ इतना पता है कि इनमें बैठूंगा, तो ये मुझे काशी, प्रयागराज, अयोध्या पहुंचा देंगी। ये सनातन की रफ्तार है। सनातन को बांटने वाले, जो राम पर गोलियां चलाने वाले हैं, उनको इन्हीं गाड़ियों की रफ्तार से रौंद दिया जाएगा। योगी मंच से सतुआ बाबा से जुड़ने के संदेश देते हैं, इस पर वह कहते हैं- उन्होंने मेरे लिए नहीं, संन्यासी स्वरूप के लिए कहा। पीले रंग के कुर्ते-धोती में बेहद सामान्य दिखने वाले सतुआ बाबा के आश्रम में पॉलिटिकल और ब्यूरोक्रेसी की हस्तियों का ताता लगा रहता है, वो सबसे मिलते भी हैं, मगर सबसे ज्यादा ध्यान आश्रम में रहने वाले कल्पवासियों का रख रहे हैं। सतुआ बाबा का पूरा इंटरव्यू पढ़िए… सवाल : कभी चार्टर्ड प्लेन, कभी 4 करोड़ की कार, कभी ठेला, इन नई सवारी का राज?जवाब : सतुआ बाबा कल भी थे, आज भी हैं, हर कुंभ और माघ मेले में रहते हैं। व्यक्ति की सोच अलग-अलग है, मैं अध्यात्म के सबसे बड़े मेले में हूं, जिसे माघ मेला कहते हैं। मुझे लगता है कि यहां हर चीज से जुड़ाव होना चाहिए। हमारा भारत तो यही सिखाता है। सवाल : क्या लग्जरी कारों का आपको शौक है?जवाब : न मुझे शौक है, न मुझे इन गाड़ियों की खूबियों का कुछ पता है। मुझे तो सिर्फ गाड़ी में चलने का पता है। काशी से बैठूंगा तो प्रयागराज आ जाऊंगा। यहां से बैठूंगा तो अयोध्या चला जाऊंगा, इसके सिवा कुछ नहीं। हमारा तो मकसद सिर्फ पड़ाव तक पहुंचने का है। मुझे इन गाड़ियों के नाम नहीं पता हैं, ये भी नहीं पता कि कितने की आती हैं? उसके लिए गूगल बाबा हैं। सवाल : आप अध्यात्म से जुड़े हैं, फिर इतनी महंगी गाड़ियों में क्यों चलते हैं?जवाब : क्या अध्यात्म इन गाड़ियों में नहीं चल सकता है? क्या सनातन को मानने वाला इन गाड़ियों में बैठ नहीं सकता है? ये सनातन की रफ्तार है, सनातन को बांटने, दबाने के लिए जो लोग प्रयास कर रहे थे, जो राम पर गोलियां चलाने वाले हैं, उनको इन्हीं गाड़ियों की रफ्तार से रौंद दिया जाएगा। सवाल : आपको नहीं लगता कि संत को लग्जरी गाड़ियों में देखकर गलत समझा जाएगा?जवाब : क्या भारत का सनातन इतना कमजोर है...गाड़ियों में बैठने से कोई गलत समझेगा। भारत में लोकतंत्र है, जिसको जो समझना है, वो समझे। मेरे लिए जेसीबी, बुलेट, ठेला, जीप, डिफेंडर और फरारी भी महंगा है। ये हमारा विषय नहीं है, हमें तो सिर्फ अपने पड़ाव तक पहुंचकर सनातन की ध्वजा को आगे बढ़ाना है। सवाल : CM ने मंच से कहा कि सतुआ बाबा से जुड़ना जरूरी है, इसका आशय?जवाब : मैं अध्यात्म में हूं, जो सनातन से जुड़ेगा, वो भारत का होगा। जो नहीं जुड़ेगा, भारत को जातियों में तोड़ने का काम करेगा। उसको तो मणिकर्णिका घाट ही जाना पड़ेगा। क्योंकि उस घाट पर मेरा आश्रम है। वहीं पर अंतिम संस्कार होता है। जो भारत से नहीं जुड़ेगा, उसका तो रामनाम सत्य ही होगा। सवाल: योगी ने प्रयागराज के मंच से जो कहा, वो आपके लिए कहा था?जवाब : व्यक्तिगत मेरे लिए नहीं, बल्कि मेरे संन्यासी स्वरूप के लिए कहा गया था। सबकी अपनी-अपनी सोच है। सवाल : आपने श्रद्धालुओं के लिए बहुत व्यवस्थाएं की है, CM ने भी सराहना की?जवाब : माघ मेला में श्रद्धालुओं का आगमन रहता है, श्रद्धा भक्ति के साथ जो यहां आ रहे हैं, एक संत होने के नाते कर्तव्य है कि उन्हें आश्रय दिया जाए। यही काम हम यहां पर कर रहे हैं। इतना कहना चाहता हूं कि जिन्होंने अंधकार में गरीब की कुटिया में लाइट नहीं दी। जिन्होंने भूखे को भोजन नहीं दिया। जिन्होंने रोड पर रफ्तार नहीं दी थी। अब ये प्रधानमंत्री मोदी और योगीजी का भारत है, यहां सब कुछ अच्छा होगा। विकास की रफ्तार तेज होगी। सवाल : माघ मेला में जो आ रहे हैं, उन्हें क्या संदेश देते हैं?जवाब : श्रद्धा-भक्ति के साथ यहां आए, त्रिवेणी संगम पर स्नान करें। अपने परिवार और समाज को एक करें। माघ मेला ही नहीं, पूरा भारत ही विश्व में चर्चा में आ गया है। 500 सालों के बाद राम अयोध्या पहुंच सके। भारत में प्रकाशमय सूर्य खिल चुका है। आपने देखा होगा कि महाकुंभ में 75 करोड़ लोगों ने इसी त्रिवेणी में स्नान किया था। ----------------------------- ये पढ़ें - सतुआ बाबा की सुपरकार, 4.40 करोड़ की पोर्शे, तिलक लगाकर आरती की; ठेले से लेकर चार्टर्ड प्लेन में नजर आए माघ मेले में सबसे ज्यादा चर्चा में सतुआ बाबा हैं। अपने शाही ठाठ बाट और लग्जरी गाड़ियों के शौक के लिए जाने जाने वाले सतुआ बाबा मेले में कभी ठेले तो कभी ऊंट की सवारी करते नजर आए। अब बाबा अपनी नई सुपर कार के लिए चर्चा में हैं। उन्होंने 3 करोड़ की लैंड रोवर डिफेंडर छोड़कर स्पोर्ट्स कार पोर्श टर्बो 911 ले ली है। इस कार की कीमत करीब 4.40 करोड़ बताई जा रही है। पढ़िए पूरी खबर...
दिल्ली का इंदरपुरी इलाका। एक छोटा-सा खस्ताहाल मकान। दिसंबर, 1977 की एक सर्द रात थी। अचानक रात 11 बजे किसी ने घर की कुंडी खटखटाई। घर के मालिक प्रभुदास ने दरवाजा खोला, तो देखा कि बाहर मुड़े-तुड़े कपड़ों में गले में मफलर डाले, लगभग गंजा हो चला एक अधेड़ शख्स खड़ा था। उस अधेड़ ने अपना परिचय दिया- ‘मैं बामसेफ का अध्यक्ष हूं…आपकी बेटी को पुणे में एक भाषण देने के लिए आमंत्रित करने आया हूं।’ ये शख्स कोई और नहीं, कांशीराम थे। जो प्रभुदास की छठी संतान मायावती के संबंध में बात कर रहे थे। इस एक मुलाकात ने मायावती की जिंदगी बदल दी। IAS बनने का सपना देखने वाली ये लड़की आगे चलकर देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की 4 बार सीएम बनीं। समर्थक उन्हें प्यार से ‘बहनजी’ कहकर बुलाते हैं। आज मायावती का 70वां जन्मदिन है। इस मौके पर दैनिक भास्कर में पढ़िए उनकी जिंदगी के कुछ अनोखे किस्से… पहले पढ़ते हैं मायावती की किस बात से कांशीराम प्रभावित हुए हुआ ये कि एक दिन पहले दिल्ली के कान्सटीट्यूशन क्लब में 21 साल की मायावती ने उस समय के स्वास्थ्य मंत्री राज नारायण पर जबरदस्त हमला बोला था। राज नारायण अपने भाषण में दलितों को बार-बार 'हरिजन' कहकर संबोधित कर रहे थे। इसके बाद जब मायावती मंच पर पहुंची तो जोर से चिल्लाईं, ‘आप हमें 'हरिजन' कह कर अपमानित कर रहे हैं।’ मायावती के तीखे तेवरों की चर्चा अगले दिन दिल्ली के अखबारों की बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनकर छपी थी। यही खबर पढ़कर कांशीराम उनके घर पहुंचे। आईएएस की तैयारी में जुटी मायावती के घर बिजली नहीं थी। वह लालटेन की रोशनी में पढ़ रही थीं। कांशीराम की जीवनी कांशीराम 'द लीडर ऑफ दलित्स' में बद्री नारायण लिखते हैं, ‘कांशीराम ने मायावती से पहला सवाल पूछा कि वो क्या करना चाहती हैं? मायावती ने कहा कि वो आईएएस बनना चाहती हैं, ताकि अपने समुदाय के लोगों की सेवा कर सकें।’ कांशीराम ने कहा- तुम आईएएस बनकर क्या करोगी? मैं तुम्हें एक ऐसा नेता बना सकता हूं, जिसके पीछे एक नहीं कई 'कलेक्टरों' की लाइन लगी रहेगी। तुम सही मायने में तब अपने लोगों की सेवा कर पाओगी। मायावती की समझ में तुरंत आ गया कि उनका भविष्य कहां है? हालांकि उनके पिता इसके सख्त खिलाफ थे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी आईएएस की तैयारी छोड़कर कांशीराम के आंदोलन में शामिल हो और उनके साथ घूमे। मायावती अपनी आत्मकथा 'बहुजन आंदोलन की राह में मेरी जीवन संघर्ष गाथा' में लिखती हैं कि एक दिन उनके पिता उन पर चिल्लाए। कहने लगे- तुम कांशीराम से मिलना बंद करो और आईएएस की तैयारी फिर से शुरू करो, वरना तुरंत मेरा घर छोड़ दो। मायावती ने अपने पिता की बात नहीं मानी। उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और पार्टी ऑफिस में आकर रहने लगीं। उनकी जीवनी लिखने वाले अजय बोस अपनी किताब 'बहनजी- ए पॉलिटिकल बायोग्राफी' में लिखते हैं, ‘मायावती ने स्कूल अध्यापिका के तौर पर मिलने वाले वेतन के पैसों को उठाया, जिन्हें जोड़ रखा था। एक सूटकेस में कुछ कपड़े भरे और उस घर से बाहर आ गईं। एक लड़की का घर छोड़कर अकेले रहना उस समय बड़ी बात थी। मायावती असल में किराए का कमरा लेकर रहना चाहती थीं, लेकिन इसके लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसलिए पार्टी ऑफिस में रहना उनकी मजबूरी थी। उनके और कांशीराम के बीच बहुत ही अच्छी 'केमिस्ट्री' थी। दोनों ने मिलकर बहुजन आंदोलन को आगे बढ़ाया और फिर 1984 बहुजन समाज पार्टी की नींव रखी। संघर्ष के दिनों में दलित मूवमेंट को आगे बढ़ाने के लिए कांशीराम के साथ मायावती कई-कई किमी साइकिल से यात्रा करती थीं। मायावती बचपन से दृढ़ और बहादुर थींमायावती का जन्म 15 जनवरी, 1956 में दिल्ली में हुआ था। उनके पिता प्रभुदास गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के पैतृक गांव बादलपुर में एक डाकघर कर्मचारी थे। वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। मायावती की मां का नाम रामरती था। मायावती 9 भाई-बहनों में छठे नंबर पर हैं। मायावती ने बीए करने के बाद दिल्ली के कालिंदी कॉलेज से एलएलबी और बाद में बीएड किया। राजनीति में आने से पहले वह दिल्ली के एक स्कूल में टीचर के रूप में काम करती थीं। उनके बचपन का एक किस्सा बहुत मशहूर है। मायावती 5वीं में पढ़ रही थीं। उनके भाई सुभाष को जन्मे 2 दिन ही हुए थे। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। पिता प्रभुदास किसी काम के चलते बाहर गए हुए थे और मां इस स्थिति में नहीं थीं कि बेटे को अस्पताल ले जाएं। सबसे पास का सरकारी अस्पताल 7 किमी दूर था। तब मायावती अपने भाई को अकेले ही कंधे पर उठाकर पैदल अस्पताल के लिए निकल पड़ी थीं। छोटी-सी उम्र की एक बच्ची अपने भाई को कंधे पर लेकर जब अस्पताल पहुंची, तो डॉक्टरों को भी आश्चर्य हुआ। उन्होंने सुभाष का इलाज किया और कुछ घंटों बाद मायावती अपने भाई को लेकर घर वापस आ गईं। मायावती के भाई सुभाष की मौत 2016 में हुई थी। 40 साल पुराना मायावती का भाषण...जब जनता मुरीद हुई14 अप्रैल, 1984 को कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी बना ली। मायावती की उस वक्त पार्टी में नंबर-2 की पोजिशन थी। पार्टी के विस्तार के लिए शुरू किए गए जन जागरण अभियान की कमान मायावती संभाल रही थीं। वह हर दिन कभी पैदल, तो कभी साइकिल से कई-कई रैलियां करती थीं। 1986 में 30 साल की मायावती एक सभा को संबोधित करने हरिद्वार पहुंचीं। उस वक्त हरिद्वार यूपी का ही हिस्सा था। वहां उन्होंने जो भाषण दिया, वह इतना ऐतिहासिक था कि सारे दलित और पिछड़ा वर्ग एकजुट हो गए। नतीजा ये रहा कि वह 1989 का लोकसभा चुनाव जीत गईं। बसपा का वोट शेयर बीजेपी से ज्यादा हो गया। मायावती ने मंच पर से ही जनता से एक-एक कर पांच सवाल पूछे, फिर अपने ही अंदाज में उसके जवाब दिए। अजय बोस अपनी किताब में लिखते हैं- मायावती जनता से मुखातिब होकर पूछती हैं कि क्या आप लोग मुझे ऐसे दलित व्यक्ति का नाम बता सकते हैं, जो पिछले 40 सालों में कांग्रेस सरकार की आर्थिक योजनाओं के कारण फला-फूला हो? जनता चुप रही। फिर मायावती खुद उसका जवाब देते हुए कहती हैं- तो तुम मानते हो कि कांग्रेस ने दलितों को मूर्ख बनाया? जनता हां में जोर से जवाब देती है, ‘हां, कांग्रेस ने हम सबको मूर्ख बनाया।’ मायावती ने इसके बाद दूसरा सवाल पूछा, ‘1952 के पहले चुनाव के बाद से हर चुनाव में कांग्रेस के 95% वोट दलितों के होते हैं और सिर्फ 5% वोट ब्राह्मणों के। लेकिन कांग्रेस शासित राज्यों में या फिर केंद्र में 5% दलित मंत्री होते हैं और 55% ब्राह्मण मंत्री। देश के 22 राज्यों के मुख्यमंत्रियों में एक भी दलित नहीं है। तुम्हारे ख्याल से ऐसा क्यों हैं? भीड़ चिल्लाते हुए बोली, ‘आप ठीक कहती हैं, कांग्रेस ने हमें मूर्ख बनाया।’ मायावती जोश से भर चुकी भीड़ के सामने फिर कहती हैं- हम सब जानते हैं कि ये ऊंची जाति के मनुवादी नहीं चाहते कि दलित अच्छा खाए, अच्छे कपड़े पहने और अच्छा काम करे। तो क्या कोई ऐसी मशीन राज्य में या केंद्र में ऐसी बनाई जा सकती है जो इन ऊंची जाति वाले लोगों और मंत्रियों का हृदय परिवर्तन कर दे। भीड़ चिल्लाकर कहती है, नहीं, यह नामुमकिन है, वे हमसे नफरत करते हैं, वे कभी हमारी भलाई नहीं चाहेंगे। मायावती चौथा सवाल पूछती हैं कि दलितों को आरक्षण देने वाले बाबा साहेब किसी मनुवादी संगठन में शामिल होते तो क्या कुछ कर पाते? भीड़ से जवाब आता है कि कभी नहीं। वे लोग बाबा साहेब अंबेडकर को कभी भी ऐसा नहीं करने देते। फिर मायावती आखिरी सवाल दागती हैं- क्या आप नहीं चाहते कि दमन और शोषण झेल रहे दलितों के लिए अलग पार्टी बनाई जाए? मायावती पूरी रौ में आ चुकी होती हैं। फिर कहती हैं- क्या तुम लोग यह नहीं चाहते कि दमन और शोषण के शिकार 85% लोग मिलकर अपनी अलग पार्टी बनाएं? मायावती के इस आखिरी सवाल के बाद जनता नारा लगाना शुरू कर देती है... कांशीराम तुम संघर्ष करो, हम सब तुम्हारे साथ हैं। मायावती तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। मायावती के इस भाषण का कमाल था कि दलित तेजी से बसपा से जुड़ने लगे। वह बसपा के विस्तार में जुट गईं। 15 अगस्त, 1987 को दिल्ली की जामा मस्जिद पर वह पार्टी के भाईचारा बनाओ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं। बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज उन्हें सुनने पहुंचा था। मायावती कहती हैं कि आजादी से पहले देश में 33% मुस्लिमों के पास नौकरी थी, आज महज 2% नौकरी रह गई है। इस भाषण का प्रभाव कुछ ऐसा हुआ कि मुस्लिम वोटर कांग्रेस से दूर होते चले गए। नतीजा ये रहा कि बसपा को 1989 के लोकसभा चुनाव में 10% वोट मिले। यह भाजपा को मिले वोट शेयर से 2.5% ज्यादा था। मायावती ने पहला चुनाव 84 में लड़ा, लेकिन हार गईं। 1985 में बिजनौर सीट पर हुए उपचुनाव फिर मैदान में उतरी। उनका मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमारी से था। मायावती ये चुनाव भी हार गईं। 4 साल बाद वे 1989 में बिजनौर से ही चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा में पहुंची थीं। फिर 1998, 1999 और 2004 में लगातार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं। यही नहीं, 1999 में वह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) संसदीय दल की नेता भी बनीं। मायावती 1994 में राज्यसभा के लिए पहली बार निर्वाचित हुईं। वो कांड जिसके चलते मायावती ने साड़ी पहननी छोड़ीरामजन्मभूमि आंदोलन के बाद मुलायम सिंह यादव ने 1992 में समाजवादी पार्टी नाम से नई पार्टी बनाई। भाजपा बाबरी विध्वंस के चलते जनसमर्थन के उफान पर थी। सपा ने भाजपा को टक्कर देने के लिए बसपा से गठबंधन किया। रिजल्ट आया तो सपा 109 और बसपा 67 सीटें जीतने में कामयाब रही। भाजपा 177 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सत्ता के लिए बहुमत नहीं जुटा पाई। मुलायम सिंह ने कांग्रेस समेत दूसरे छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बना ली। मायावती गठबंधन की सरकार पर बारीक नजर बनाए हुए थीं। वह सरकार के निर्णयों में पूरा दखल देती थीं। 1995 में यूपी पंचायत चुनाव में सपा को बड़ी जीत मिली। 50 जिलों में से 30 पर सपा का परचम फहरा। 9 जिलों में भाजपा, पांच पर कांग्रेस और बसपा को सिर्फ एक सीट ही मिली। यहीं से मुलायम सिंह यादव बसपा के विधायकों को अपने खेमे में करने की कोशिश करने लगे। उधर, भाजपा इस गठबंधन को तोड़ने के लिए बसपा पर डोरे डाल रही थी। 23 मई, 1995 को मुलायम सिंह यादव ने अस्पताल में भर्ती कांशीराम से बात करनी चाही, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, उसी रात कांशीराम ने भाजपा के लालजी टंडन से फोन पर गठबंधन को लेकर बात की। जब मायावती अस्पताल पहुंचीं, तो उनसे कांशीराम ने पूछा कि क्या वो सीएम बनेंगी? 1 जून, 1995 को मायावती लखनऊ पहुंचीं और गठबंधन टूटने का ऐलान कर दिया। इसके अगले दिन ही गेस्ट हाउस कांड के रूप में यूपी की सियासत का सबसे काला अध्याय लिखा गया। 2 जून, 1995 को लखनऊ के मीराबाई स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती बसपा के विधायकों के साथ मीटिंग कर रही थीं। समर्थन वापस लेने से मुलायम सिंह यादव के समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। अजय बोस अपनी किताब में लिखते हैं- सैकड़ों की संख्या में सपा के कार्यकर्ता और विधायक गेस्ट हाउस में घुस आए। कुछ बसपा विधायकों को जबरन अपने साथ ले गए। कई विधायकों के साथ मारपीट तक करने लगे। मायावती ने भीड़ से बचने के लिए खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। मायावती को गेस्ट हाउस कांड से बचाने वालों में पुलिस अफसर विजय भूषण और सुभाष सिंह बघेल की बड़ी भूमिका थी। इन्होंने ही उन्मादी सपा कार्यकर्ताओं को पीछे खिसकने पर मजबूर किया। मीडियाकर्मियों की मौजूदगी भी सपा कार्यकर्ताओं की राह में रोड़ा बन गई थी। बाद में वहां भाजपा के विधायक भी पहुंच गए। इनमें ब्रह्मदत्त द्विवेदी की बड़ी भूमिका बताई जाती है। मायावती ने ताउम्र उन्हें अपना बड़ा भाई माना और कभी भी उनकी सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। खैर, हम कहानी में आगे बढ़ते हैं। देर रात जब गेस्ट हाउस में भारी पुलिस फोर्स पहुंची, तो माहौल पूरी तरह से शांत हुआ। तब मायावती को बाहर निकाला गया। मायावती अपनी आत्मकथा 'मेरा संघर्षमय जीवन एवं बहुजन समाज मूवमेंट का सफरनामा' में लिखती हैं कि 'मुलायम सिंह का आपराधिक चरित्र उस समय सामने आया, जब उन्होंने अपने बाहुबल का इस्तेमाल करते हुए न सिर्फ हमारे विधायकों का अपहरण करने की कोशिश की, बल्कि मुझे मारने का भी प्रयास किया। उसी रात भाजपा के समर्थन से राज्यपाल ने यूपी की पहली दलित सीएम के तौर मायावती को शपथ दिलाई। इस तरह 3 जून, 1995 से 18 अक्टूबर, 1995 तक वह प्रदेश की पहली दलित सीएम बनीं। भाजपा के ही समर्थन से वह दूसरी बार 21 मार्च, 1997 को, तीसरी बार 3 मई, 2002 में सीएम बनीं। राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग का प्रयोग कर मायावती ने 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा को अकेले बहुमत दिलवा दिया। इस तरह वह 12 मई, 2007 को चौथी बार खुद की पार्टी की बहुमत के साथ सीएम बनीं। लंबे बालों वाली मायावती ने क्यों कराए शॉर्ट हेयरमायावती ने जब राजनीति शुरू की तो उनके लंबे बाल हुआ करते थे। यहां तक कि जब पहली बार लोकसभा में पहुंचीं, तब भी वह बाल लंबे रखती थीं। पर 90 के दशक के अंत में मायावती एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचीं तो उनकी हेयर स्टाइल बदली हुई थी। लंबे बालों की जगह शॉर्ट हेयर कट में वह मीडिया के सामने पहुंची थीं। बाद में ये खबर की सुर्खियां भी बनी। पोनी टेल बांधने वाली मायावती को शॉर्ट हेयर स्टाइल में देखना बहुत से लोगों के लिए अचंभे का विषय था, क्योंकि उस दौर में शॉर्ट हेयर फैशन माना जाता था। कुछ दिनों बाद मायावती ने एक इंटरव्यू में खुद इसका रहस्य खोला था। बताया था कि 'एक दिन में कई कार्यक्रमों में जाना पड़ता है। बड़े बालों की वजह से कई बार कंघी करने में समय खराब होता था। इसलिए मैंने अपना टाइम बचाने के लिए बालों को कटवाना ही बेहतर समझा। जब 1 वोट से गिरवाई वाजपेयी की सरकारमायावती के मिजाज के बारे में भविष्यवाणी करना बहुत कठिन है। बात 17 अप्रैल, 1999 की है। जयललिता के समर्थन वापसी के चलते तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से लोकसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए कहा। सरकार आश्वस्त थी, क्योंकि चौटाला एनडीए खेमे में वापस आने का ऐलान कर चुके थे। मायावती की तरफ से संकेत मिले थे कि उनकी पार्टी मतदान में भाग नहीं लेगी। उस दिन संसद भवन के पोर्टिको में जब अटल बिहारी वाजपेयी अपनी कार में बैठ रहे थे तो पीछे आ रही मायावती ने चिल्ला कर कहा था 'आपको चिंता करने की जरूरत नहीं।’ मतदान से कुछ समय पहले, संसदीय कार्यमंत्री कुमारमंगलम ने बसपा सांसदों से बात कर कहा, अगर आपने सहयोग किया तो शाम तक मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री हो सकती हैं। सरकार के खेमे में बढ़ती गतिविधियों को देखकर शरद पवार मायावती के पास पहुंचे। मायावती ने उनसे सीधा सवाल किया, ‘अगर हम सरकार के खिलाफ वोट करते हैं तो क्या सरकार गिर जाएगी?’ पवार ने हां में जवाब दिया। जब बहस के बाद वोटिंग का समय आया तो पूरे सदन में सन्नाटा छाया हुआ था। बसपा वोटिंग का बहिष्कार करने की बजाय इस प्रक्रिया में शामिल हो गई। मायावती, आरिफ मोहम्मद खां और अकबर अहमद डंपी की तरफ देखकर गरजीं, 'लाल बटन दबाओ' ये उस जमाने की सबसे बड़ी 'राजनीतिक कलाबाजी' थी। परिणाम 'फ्लैश' हुआ तो वाजपेयी सरकार 1 मत से विश्वास मत खो चुकी थी। कांशीराम को बंधक बनाने का लगा आरोपअजय बोस लिखते हैं- कांशीराम गर्म मिजाज के शख्स थे। उनकी जुबान भी खराब थी। नाराज होने पर उन्हें अपने हाथ इस्तेमाल करने में भी कोई परहेज नहीं था। मायावती भी मुखर थीं। वो भी कांशीराम के लिए उतने ही चुनिंदा शब्दों का इस्तेमाल करती थीं, जितने कांशीराम करते थे। मायावती कांशीराम के प्रति बहुत 'पजेसिव' थीं। अगर कोई भी शख्स उनके पास 5 मिनट से अधिक बैठ जाता, तो वो कमरे में किसी न किसी बहाने से आ जाती थीं। गिरती सेहत के कारण कांशीराम ने 15 दिसंबर, 2001 में मायावती को अपना राजनीतिक वारिस घोषित कर दिया। 14 सितंबर, 2003 को कांशीराम को लकवा की वजह से अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। तब मायावती सीएम थीं। उन्होंने कांशीराम की देखभाल का सारा जिम्मा अपने हाथों में ले लिया। इसी दौरान कांशीराम के परिवार ने मायावती पर उन्हें बंधक बनाकर रखने के आरोप लगाए। हाईकोर्ट में याचिका तक दाखिल की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद कांशीराम की मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कांशीराम की स्थिति को जांचने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया। लेकिन, फैसला आने से पहले ही याचिकाकर्ता मां की मौत होने से केस खारिज हो गया। अजय बोस अपनी किताब में लिखते हैं कि कांशीराम के अंतिम दिनों में जिस तरह मायावती ने उनकी सेवा की, उसकी मिसाल मिलना बहुत मुश्किल है। वह पूरे तीन साल तक मायावती के घर में रहे। जिस तरह से मायावती अपने हाथों से उनके कपड़े धोती और उन्हें खाना खिलाती, वो बताता था कि कांशीराम के लिए उनके दिल में क्या जगह थी। उस समय कांशीराम उन्हें कुछ देने की स्थिति में नहीं थे। मायावती जो कुछ भी उनके लिए कर रही थीं, वो सिर्फ उनके प्रति स्नेह-वश कर रही थीं। 9 अक्टूबर, 2006 में उनके निधन पर मायावती ने मुखाग्नि दी थी। मायावती के कमरे में कोई जूता पहन कर क्यों नहीं जा सकता2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा और रालोद ने गठबंधन किया था। गठबंधन दल के नेताओं की देवबंद में संयुक्त रैली थी। इस रैली में मायावती, अखिलेश यादव और अजीत सिंह को शामिल होना था। मंच पर मायावती और अखिलेश यादव पहुंच चुके थे। अजीत सिंह जूता पहन कर मंच पर चढ़ने के लिए आगे बढ़े कि तभी बसपा के एक नेता ने उन्हें रोक दिया। उनसे जूते उतारने के लिए कहा। बोला कि बहन मायावती को ये पसंद नहीं कि वो जब मंच पर चढ़ें तो उनके अलावा कोई वहां जूता पहने रहे। अजीत सिंह को अपने जूते उतारने पड़े और तब जाकर उन्हें मंच पर मायावती के साथ खड़े होने का मौका मिला। मायावती के जीवनीकार अजय बोस लिखते हैं कि सफाई के प्रति मायावती की 'सनक' के पीछे भी एक कहानी है। दरअसल, जब मायावती पहली बार लोकसभा में चुन कर आईं तो उनके तेल लगे बाल और देहाती लिबास तथाकथित संभ्रांत महिला सांसदों के लिए मजाक का विषय बन गया था। वो अक्सर शिकायत करती थीं कि मायावती को बहुत पसीना आता है। उनमें से एक वरिष्ठ महिला सांसद से यहां तक कहा था कि वो मायावती से कहें कि वो अच्छा 'परफ्यूम' लगा कर सदन में आया करें।’ मायावती के नजदीकी लोगों के मुताबिक, बार-बार उनकी जाति का उल्लेख करके ये आभास दिलाने की कोशिश करते कि दलित अक्सर गंदे होते हैं। इसका उन पर बड़ा गहरा असर पड़ा। मायावती ने इसके बाद हुक्म दिया कि उनके कमरे में कोई भी व्यक्ति वो चाहे जितना बड़ा ही क्यों ना हो, जूता पहन कर नहीं जाएगा। मायावती की एक और जीवनीकार नेहा दीक्षित ने भी कारवां पत्रिका में लिखती हैं कि मायावती में सफाई के लिए इस हद तक जुनून है कि वो अपने घर में दिन में तीन बार पोंछा लगवाती हैं। भ्रष्टाचार के आरोप, राजनीतिक के नेपथ्य में जाना और फिर कमबैक की कोशिश2007 से 2012 तक यूपी में 5 साल पूरे बहुमत से शासन करने वाली मायावती ने दलितों के लिए खूब काम किए। लखनऊ से लेकर नोएडा तक दलित नायकों के पत्थरों की मूर्तियां तक लगवाईं। वह अपने समर्थकों से महंगे गिफ्ट लेती थीं। 2012 के आखिरी तक उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे। ताज कॉरिडोर मामले से लेकर एनआरएचएम घोटाले में उनके नाम खूब उछाले गए। साल- 2012 में उन्होंने राज्यसभा के नामांकन पत्र के समय 112 करोड़ की कुल संपत्ति होने का हलफनामा दाखिल किया। उन्होंने दिल्ली के मशहूर सरदार पटेल मार्ग पर करोड़ों रुपए देकर 22 और 23 नंबर की कोठियों का सौदा किया। इसके अलावा अपने पुश्तैनी गांव बादलपुर में उन्होंने शाही शान-शौकत वाली आलीशान कोठी बनवाई। 2012 वाले हलफनामे में ही उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास लगभग एक करोड़ मूल्य के आभूषण हैं। मायावती के नजदीकी रिश्तेदारों पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगे। इन आरोपों से वह कानूनी दांव-पेंच में घिरती चली गईं। इसी के साथ बसपा का ग्राफ भी गिरता चला गया। 2012 में प्रमुख विपक्षी दल वाली बसपा 2014 के लोकसभा में अपना खाता तक नहीं खोल पाई। 2017 विधानसभा में तीसरे नंबर पर खिसक गई। 2019 में सपा-रालोद से गठबंधन किया तो लोकसभा में 10 सांसद जीते। लेकिन, 2022 के विधानसभा में बसपा का वोट शेयर गिरकर 12.88% रह गया। दो साल बाद हुए लोकसभा में ये वोट शेयर 9 के नीचे पहुंच गया। आज लोकसभा में एक भी बसपा का सांसद नहीं है। विधानसभा में भी सिर्फ एक विधायक है। मायावती राजनीतिक रूप से अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं। हालांकि, 2025 में बसपा सुप्रीमो ने एक बार फिर कमबैक की ताकत का प्रदर्शन किया है। भतीजे आकाश को पार्टी में अंदर-बाहर करने वाली मायावती अब अपने भतीजे को पार्टी में नंबर-2 का ओहदा दे चुकी हैं। 9 अक्टूबर, 2025 को कांशीराम की पुण्यतिथि पर लाखों की भीड़ जुटाकर मायावती ने एक बार फिर 2027 विधानसभा के लिए पार्टी की उम्मीदों को जिंदा कर दिया है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें- मेरठ में जहां युवक को जिंदा जलाया, वहां से रिपोर्ट, OBC बनाम ठाकुर की राजनीति 'मुजफ्फरनगर से सोनू मुझसे मिलने आ रहा था। फोन करके कहने लगा कि मौसी मैं 80 हजार लेकर आ रहा हूं, भैया के साथ बाइक खरीदने जाएंगे। यही उसकी आखिरी बात थी। तब क्या पता था कि सोनू मुझसे मिल ही नहीं पाएगा। कोई ऑटो वाला उसको मार डालेगा।' पढ़िए पूरी खबर...
एलिवेटेड रोड के दूसरे चरण में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की शिफ्टिंग का हो रहा काम मार्च के बाद गर्मी के सीजन में शहरवासियों की परेशानी बढ़ा सकता है। खुद बिजली कंपनी के अधिकारियों ने नोटिस में इस बात का उल्लेख किया है कि ठेकेदार मैसर्स मनोज वर्मा द्वारा बिना टेस्टिंग के उपकरण व अन्य सामान लगाया जा रहा है। इसलिए इस सामान की क्वालिटी को लेकर संदेह है। यदि खराब क्वालिटी का सामान लग गया तो गर्मी में सप्लाई में व्यवधान आने की संभावना है। जिस कारण उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ेगा। गिरवाई से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के लिए इस रूट पर मौजूदा बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को हटाया जा रहा है। साथ ही दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। जिसमें ठेकेदार द्वारा बिजली कंपनी और लोक निर्माण विभाग की ईएंडएम विंग के नियम व अनुबंध शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा। बल्कि खुद की मर्जी से काम किया जा रहा है। जिसमें ठेकेदार को इन जिम्मेदार विभागों के अधिकारी भी बचाव करते हुए संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। ठेकेदारों के इंकार पर अफसरों की चुप्पी बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 19 करोड़ से अधिक का ठेका मैसर्स मनोज वर्मा फर्म को दिया गया है। वहीं इस मामले में काम की गुणवत्ता और नियमों की अवहेलना के मामले में जब फर्म के मनोज वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ग्वालियर में साकेत सेंगर को पेटी कांट्रेक्ट पर काम दे दिया है, और उन्हीं के द्वारा काम किया जा रहा है। इसलिए इस काम के बारे में कुछ भी वह ही बता सकते हैं। वहीं साकेत सेंगर का कहना है कि मुझे तो मनोज वर्मा ने साइड पर बुलाया था, मैं कोई काम नहीं कर रहा। मूल और पेटी कांट्रेक्ट के मामले को लेकर दोनों के अपने-अपने दावों के बीच सवाल ये खड़ा हो गया है कि जब दोनों ही काम करने से इंकार कर रहे हैं तो काम कर कौन रहा है? इस मामले में अधिकारी भी ऊपरी दबाव को देखकर चुप्पी साधे हुए हैं। पत्र भेजा, गर्मी में सप्लाई सिस्टम में परेशानी बढ़गीसामान की टेस्टिंग कराए जाने के लिए ईएंडएम काे पत्र भेजा है। बताया गया है कि यदि बिना टेस्टिंग अमानक उपकरण लग गए तो गर्मी के सीजन में सप्लाई सिस्टम में परेशानी आएगी।-श्रीनिवास यादव, डीजीएम/ एसटीसी बिजली कंपनी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज हिसार जिले में प्री-बजट को लेकर किसानों व पार्षदों के साथ बैठक करेंगे, वह सुबह करीब 10 बजे एचएयू आ सकते हैं, वह शाम 4 बजे तक हिसार में रहेंगे। इस दौरान वह चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में बजट को लेकर किसानों व कृषि वैज्ञानिकों संग चर्चा करेंगे। इस दौरान कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा मौजूद रहेंगे। इसके बाद वह करीब बजे गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) में पार्षदों व सरपंचों के साथ प्री-बजट पर सुझाव ले सकते हैं। इस दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा उपस्थित रहेंगे। हिसार में प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। मुख्यमंत्री के दौरे को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से बुधवार को डीसी महेंद्र पाल एवं एसपी शशांक कुमार सावन ने विभिन्न कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीसी ने व्यवस्थाओं का लिया जायजा डीसी ने प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल, मंच व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा घेरा एवं अन्य व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व सभी तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नजर न आए। इसके पश्चात डीसी एवं एसपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था सुचारू रखी जाए, पार्किंग स्थलों को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाए और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने बिजली, पेयजल, साफ-सफाई, शौचालय, चिकित्सा सुविधा एवं अग्निशमन व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर विशेष बल दिया। एसपी ने सीसीटीवी से निगरानी के आदेश एसपी शशांक कुमार सावन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दौरे के दृष्टिगत सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि सभी कार्यक्रम स्थलों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाए, प्रवेश एवं निकास बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही यातायात पुलिस को विशेष निर्देश देते हुए कहा कि रूट डायवर्जन, ट्रैफिक कंट्रोल एवं पार्किंग व्यवस्था को लेकर पहले से ठोस योजना तैयार की जाए। हिसार में धारा-163 रहेगी लागू वहीं जिलाधीश महेंद्र पाल ने आज मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा अन्य स्थलों के दौरे के दृष्टिगत कार्यक्रम स्थलों पर कानून व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 में वर्णित प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत कार्यक्रम स्थल को ड्रोन नियम 2021 के तहत रेड जोन घोषित करते हुए निषेधाज्ञा के आदेश पारित किए गए हैं।
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद प्रदेशभर में जल की शुद्धता की जांच की जा रही है। इसी बीच जबलपुर में दूषित पानी की शिकायतों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस और नगर निगम दोनों ने अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए हैं। नगर निगम का दावा है कि जल सुनवाई और हेल्पलाइन पर नाममात्र की शिकायतें मिली हैं। वहीं, कांग्रेस ने अपनी हेल्पलाइन जारी की है और दावा किया है कि बड़ी संख्या में शिकायतें मिल रही हैं। इस ‘हेल्पलाइन पॉलिटिक्स’ के बीच हकीकत यह है कि शहर के कई इलाकों में आज भी नालों में डूबी पाइप लाइनों से जलापूर्ति हो रही है। कांग्रेस का आरोप- अब भी नहीं चेता निगमकांग्रेस के नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा का कहना है कि इंदौर की घटना के बाद भी जबलपुर नगर निगम नहीं जागा। कई क्षेत्रों में लोग आज भी गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जबकि महापौर शिकायतें न मिलने की बात कह रहे हैं। यही वजह है कि जनता का भरोसा नगर निगम से उठता जा रहा है। एक साल से आ रहा गंदा पानीनेपियर टाउन, रसल चौक निवासी सीनियर सिटीजन राजेंद्र कुमार का कहना है कि उनके घर पिछले एक साल से नल में गंदा पानी आ रहा है। कई बार नगर निगम में शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। निजी स्तर पर पाइपलाइन भी चेक करवाई, फिर भी गंदगी का स्रोत नहीं मिल पाया। राजेंद्र के मुताबिक सप्लाई शुरू होते ही बेहद गंदा पानी आता है, कुछ देर बाद थोड़ा साफ होता है, लेकिन फिर दोबारा गंदा हो जाता है। मजबूरी में वे पीने का पानी खरीदकर उपयोग कर रहे हैं। H2S टेस्ट किट से जांचकांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने राजेंद्र के घर H2S टेस्ट किट से पानी की जांच की। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं को साधारण केमिकल बोतलें दी गई हैं, जिनमें पानी भरने के बाद तीन दिन में उसकी गुणवत्ता सामने आ जाती है। महापौर बोले-विधिवत लैब टेस्ट कराना चाहिएजबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर अन्नू ने कहा कि कांग्रेस द्वारा हेल्पलाइन जारी करना सकारात्मक कदम है, लेकिन शिकायतों को सही जगह तक पहुंचाकर विधिवत लैब टेस्ट कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीति के लिए गंदे पानी का मुद्दा उठाना उचित नहीं है। मीम और वीडियो जारीदूषित पानी के मुद्दे पर कांग्रेस ने महापौर और एमआईसी सदस्यों को लेकर मीम वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। वीडियो में गंदे पानी की आपूर्ति वाले क्षेत्रों को दिखाने का दावा किया गया है।
आज से पढ़िए नई सीरीज ‘राजनीति की रंगभूमि’। ये सीरीज उत्तर प्रदेश की उस सियासी ‘महाभारत’ की कहानी कहती है, जहां नेताओं की हर चाल एक नया अध्याय रचती है। पढ़िए विचारधारा के टकराने, रिश्ते बदलने, गुट बनने-टूटने और सत्ता की बिसात पर नए दांव की कहानियां। पहले एपिसोड में राज नारायण V/S इंदिरा गांधी की कहानी। क्यों इंदिरा के लिए परेशानी का सबब थे राज नारायण? वो राज नारायण जिनकी वजह से इंदिरा अयोग्य साबित हुईं, चुनाव हारीं और देश ने देखी इमरजेंसी… दिसंबर, 1970 की वो रात दिल्ली की हड्डियों में कंपकंपी पैदा कर रही थी। राष्ट्रपति भवन के भीतर जो लावा उबल रहा था, उसने पूरे देश की राजनीति को झुलसा दिया। अचानक खबर आई- ‘लोकसभा भंग हुई। वक्त से एक साल पहले चुनाव होंगे।’ विपक्ष के खेमे में जैसे किसी ने बम फेंक दिया हो। सिगार के धुएं से भरे एक गुप्त कमरे में कुछ नेता जमा हुए। एक नेता ने धुएं का छल्ला छोड़ते हुए कहा- मैडम ने मास्टरस्ट्रोक खेला है। दूसरे नेता ने कड़ककर जवाब दिया- अकेले लड़ेंगे तो गाजर-मूली की तरह काट दिए जाएंगे। तो फिर रास्ता क्या है? तीसरे ने पूछा। सबकी निगाहें एक-दूसरे से मिलीं और एक ही आवाज निकली, मिलकर लड़ेंगे। दरअसल, 1969 में कांग्रेस के सीनियर नेताओं की जब इंदिरा गांधी से नहीं पटी तो उन्होंने इंदिरा को कांग्रेस से बाहर कर दिया। इसके साथ ही कांग्रेस में दो फाड़ हो गए। इंदिरा के समर्थन वाला खेमा कहलाया कांग्रेस (R)… R मतलब रिवोल्यूशनरी। वहीं, पार्टी के पुराने नेतृत्व वाले गुट को नाम मिला कांग्रेस (O) मतलब कांग्रेस ऑर्गनाइजेशन। दोनों गुट एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े। कांग्रेस (O) का निशान ‘चरखा चलाती हुई महिला’ था और इंदिरा गुट को ‘गाय और बछड़ा’ चिह्न दिया मिला। लड़ाई अपने गुट को असली कांग्रेस साबित करने की थी। चुनाव का ऐलान होते ही कांग्रेस (O), जनसंघ और सोशलिस्ट सबने हाथ मिला लिए। 29 दिसंबर की सुबह। प्रेस कॉन्फ्रेंस का हॉल खचाखच भरा था। इंदिरा गांधी मंच पर आईं। तभी एक पत्रकार ने विस्फोटक सवाल किया- मैडम पीएम, चर्चा है कि आप रायबरेली छोड़कर गुड़गांव से चुनाव लड़ेंगी? हॉल में ऐसी खामोशी छाई कि सुई गिरे तो आवाज हो जाए। इंदिरा ने सीधे कहा- नहीं…। पत्रकार ने फिर पूछा- क्या कोई खास वजह? सपाट लहजे में जवाब आया- मैं ऐसा नहीं कर रही हूं, बस इतना ही काफी है। 19 जनवरी 1971, विपक्ष की एक और गुप्त बैठक में सन्नाटा पसरा था। सवाल बड़ा था, रायबरेली में इंदिरा के सामने बलि का बकरा कौन बनेगा? तभी एक नाम गूंजा- राज नारायण…। एक नेता ने मेज थपथपाते हुए कहा- यही वो आदमी है जो सत्ता की नींद उड़ा सकता है। दूसरे ने टोकते हुए पूछा- क्या वो तैयार होंगे? वो हार से नहीं डरते, उन्हें तो बस लड़ने का जुनून चाहिए। एक आवाज आई। मुकाबला तय हो गया- राज नारायण V/S इंदिरा गांधी। अब ये चुनाव नहीं, एक महायुद्ध बन चुका था। अगले ही दिन कोयंबटूर के विशाल मंच पर इंदिरा गांधी गरज रही थीं। जब उन्होंने राज नारायण का नाम सुना, तो उनके होंठों पर एक तंजिया मुस्कान तैर गई। इंदिरा ने माइक संभाला और सीधा वार किया- विपक्ष के पास कोई चेहरा नहीं है। भीड़ से आवाज आई- और राज नारायण…? इंदिरा ने व्यंग्य किया- रायबरेली में उन्होंने एक ऐसे शख्स को उतारा है, जिसकी राजनीति आलोचना की बैसाखियों पर टिकी है। उन्हें बस शोर मचाने का शौक है। वे केवल नेहरूजी के खिलाफ बोलते रहते हैं। 7 मार्च, 1971 को वोटिंग हुई। उन दिनों EVM नहीं थी, बैलेट पेपर की गिनती का दौर कई दिनों तक चलता था। राज नारायण का कॉन्फिडेंस ऐसा था कि गिनती शुरू होने से पहले ही 8 मार्च को उन्होंने रायबरेली में 'विजय जुलूस' निकाल दिया। राज नारायण चिल्ला रहे थे- जनता का शुक्रिया, ये लोकतंत्र की जीत है…। 10 मार्च की सुबह जब गिनती शुरू हुई, तो पासा पलट गया। कांग्रेस (R) की ऐसी आंधी चली कि राज नारायण के पैरों तले जमीन खिसक गई। नतीजा आया, इंदिरा को मिले 1,83,309 वोट और राज नारायण को 71,499…। 1.10 लाख से ज्यादा वोटों का फासला। राज नारायण के लिए ये हार नहीं, एक सदमा था। वे बुदबुदाए- ये नहीं हो सकता… जो जनता जुलूस में साथ थी, उसने वोट किसे दिया? यहीं से उस गॉसिप ने जन्म लिया जिसने आगे चलकर इतिहास बदल दिया। रायबरेली की गलियों में 'जादुई स्याही' की खुसफुसाहट फैल रही थी। एक समर्थक ने राज नारायण से कहा- नेताजी, ये वोट का नहीं, केमिकल का खेल है। राज नारायण ने चौंककर पूछा- क्या मतलब? समर्थक बोला- सुना है बैलेट पेपर पर जादुई स्याही लगी थी। वोटर जहां मुहर लगाता, वो निशान गायब हो जाता है और गिनती से पहले कांग्रेस के निशान वाली मुहर अपने आप उभर आती है। राज नारायण बोले- अगर ये सच है, तो मैं इस स्याही को अदालत तक खींच ले जाऊंगा। यही वो शक था, जिसने उस ऐतिहासिक अदालती लड़ाई की नींव रखी। हार का जख्म अभी ताजा था और दिमाग में 'गायब होने वाली स्याही' का भूत सवार था। अप्रैल 1971 की दोपहर। राज नारायण इलाहाबाद के वकील रमेश श्रीवास्तव के दफ्तर में दाखिल हुए। राज नारायण ने मेज थपथपाते हुए कहा- रमेश, मुझे इंदिरा को कोर्ट में घसीटना है। रमेश श्रीवास्तव ने माथे का पसीना पोंछा- होश में तो हो? सामने प्रधानमंत्री है। राज नारायण ने कहा- कानून की किताब में 'प्रधानमंत्री' जैसा कोई शब्द नहीं होता रमेश, वहां सिर्फ मुजरिम होता है। ठीक है, पर ये पहाड़ हिलाने के लिए तुम्हें शांति भूषण चाहिए। वकील साहब ने मशविरा दिया। राज नारायण बोले- वही सही, सुना है कांग्रेस (O) के आदमी हैं और फीस भी नहीं लेंगे। रमेश- फीस छोड़ो, उनके पास वो जिगरा है जो हमें चाहिए। 22 अप्रैल 1971, शांति भूषण का चैंबर राज नारायण ने अपनी याचिका का ड्राफ्ट शांति भूषण की मेज पर रखा। शांति भूषण ने पन्ने पलटे और एक फीकी हंसी हंसे, बोले- ये क्या मजाक है राज नारायण जी? राज नारायण चौंके- क्यों… क्या हुआ? शांति भूषण ने कड़ककर कहा- ये याचिका है या किसी मदारी का खेल? जादुई स्याही… गायब होने वाले निशान…? आप अदालत जा रहे हैं या सर्कस? राज नारायण झुंझलाए- जनता में यही चर्चा है वकील साब। शांति भूषण ने फाइल बंद करते हुए कहा- जनता गपशप करती है, लेकिन अदालत सबूत मांगती है। मैं ये केस तभी लड़ूंगा, जब ये जादुई स्याही वाली बकवास हटाई जाएगी। लेकिन… राज नारायण ने कुछ कहना चाहा। शांति भूषण ने बात काट दी- कोई लेकिन-वेकिन नहीं… मुझे ये केस 'सीरियस' बनाना है, कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं। मंजूर है…? राज नारायण ने बेदिली से सिर हिलाया- ठीक है, जैसा आप कहें। शांति भूषण ने कलम उठाई और दो नए आरोप जोड़ दिए। “वायुसेना के विमानों का इस्तेमाल और सरकारी अफसरों से मंच बनवाना।” रमेश श्रीवास्तव ने पूछा- जीत की क्या उम्मीद है भूषण साब?शांति भूषण ने ठंडी सांस ली- जीरो…।रमेश ने हैरानी से कहा- फिर भी लड़ेंगे…? शांति भूषण बोले- हां… इस उम्मीद में कि शायद कोई ऐसा जज मिल जाए, जिसके सीने में फौलाद का दिल हो और जमीर जिंदा हो। अगली सुबह सूरज की पहली किरण खिलते ही राज नारायण फिर शांति भूषण के सामने खड़े थे। आंखें लाल थीं। शांति भूषण ने पूछा- रातभर सोए नहीं क्या? राज नारायण ने दर्द भरे लहजे में कहा- नींद को गोली मारिए वकील साब। वो जादुई स्याही वाला मुद्दा हटाकर मुझे लग रहा है जैसे मैं अपनी आत्मा बेच आया हूं। शांति भूषण- जिद मत कीजिए राज नारायण जी…। राज नारायण अड़ गए- मैं पूरी रात तड़पा हूं। उसे वापस लाइए, वरना मेरा दम घुट जाएगा। शांति भूषण ने कुछ पल उन्हें देखा, फिर बोले- ठीक है। मैं उसे फिर से जोड़ देता हूं। राज नारायण की आंखों में चमक आई- सच...? शांति भूषण ने मुस्कुराते हुए कहा- हां, लेकिन 'केमिकल' के नाम पर नहीं। हम इसे 'मैकेनिकल फ्रॉड' कहेंगे। हम कहेंगे कि मुहरें इंसानों ने नहीं, मशीनों ने एक ही जगह लगाई हैं। अब राजी हैं…? राज नारायण चहके- बिल्कुल राजी…। आखिरकार, 258 पन्नों की उस ऐतिहासिक याचिका का ड्राफ्ट तैयार हुआ। इसमें आठ ‘बम’ फिट किए गए: 1. यशपाल कपूर: सरकारी अफसर रहते हुए चुनाव एजेंट बनना। 2. रिश्वत: स्वामी अद्वैतानंद को चुनाव में खड़ा करने के लिए पैसे देना। 3. वायुसेना का दुरुपयोग: एयरफोर्स के विमानों से चुनावी उड़ानें। 4. प्रशासनिक धांधली: डीएम और एसपी से मंच और लाउडस्पीकर लगवाना। 5. लालच: मतदाताओं को शराब और कंबल बांटना। 6. धार्मिक भावना: 'गाय-बछड़ा' के जरिए धर्म का कार्ड खेलना। 7. वाहनों का काफिला: वोटरों को लाने-ले जाने के लिए सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल। 8. चुनावी खर्च सीमा: चुनावी खर्च में 35 हजार रुपए की लिमिट नहीं मानी। शांति भूषण ने राज नारायण की आंखों में झांका और धीमी आवाज में कहा- याद रखिएगा राज नारायण जी, अगर इनमें से एक भी साबित हो गया, तो प्रधानमंत्री को मुश्किल हो सकती है। राज नारायण मुस्कुराए- इतिहास के पन्ने पलटने का वक्त आ गया है वकील साब। इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई। गवाही, कानूनी दांवपेंच और चार साल की लंबी बहस के बाद फैसला आया। 12 जून 1975, सुबह 9:50 बजे।1, सफदरजंग रोडप्रधानमंत्री आवास, नई दिल्ली। सन्नाटा इतना गहरा था कि सांसों की आवाज भी किसी धमाके जैसी लग रही थी। कमरे में रखे PTI और UNI के दो टेलीप्रिंटर किसी खूंखार जानवर की तरह रह-रहकर खड़खड़ा उठते और कागज उगलने लगते। पीएम इंदिरा गांधी के निजी सचिव एनके शेषन के माथे पर पसीना था। वो एक मशीन से दूसरी मशीन तक ऐसे चक्कर काट रहे थे, जैसे पिंजरे में कोई बाघ बंद हो। ये खामोशी मार डालेगी। शेषन बुदबुदाए और घड़ी देखी। 10 बजने में 10 मिनट कम थे। तभी फोन की घंटी बजी। शेषन ने झपट्टा मारकर रिसीवर उठाया। हैलो, हां… क्या खबर है? सर, जज साब अभी घर से नहीं निकले हैं। दूसरी तरफ से दबी आवाज आई। शेषन ने दांत पीसते हुए रिसीवर पटक दिया। अजीब आदमी है ये सिन्हा, पत्थर का बना है या फौलाद का…? अब थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं ये कुछ दिन पहले की बात है- इलाहाबाद के एक कमरे में यूपी के रसूखदार सांसद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा के सामने नोटों से भरा सूटकेस खोला। जज साब, पांच लाख की छोटी-सी भेंट है। बस फैसला थोड़ा… नर्म रखिएगा। सांसद ने जहरीली मुस्कान के साथ कहा। सिन्हा ने सूटकेस की तरफ देखा भी नहीं। उनकी निगाहें सांसद के चेहरे को घूर रही थीं। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। सन्नाटा ऐसा कि सांसद की सिट्टी-पिट्ठी गुम हो गई। सांसद के साथ आए एक नेताजी ने कहा- सिन्हा साब, क्यों जिद कर रहे हैं? इस एक फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट की कुर्सी आपका इंतजार कर रही है। सिन्हा ने अपनी ऐनक उतारी, नफरत भरी निगाहों से उसे देखा और उठकर चले गए। इसके पहले भी सिन्हा को शीशे में उतारने की कोशिश हुई थी। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रेम प्रकाश नैय्यर एक गुप्त मिशन पर देहरादून पहुंचे। मिशन था- इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को 'समझाना'। नैय्यर ने चाय की चुस्की लेते हुए धीरे से कहा- जज साब, पीएम का विदेश दौरा तय है। मुल्क की इज्जत का सवाल है। क्या इस फैसले को कुछ समय के लिए टाला नहीं जा सकता? बस जब तक मैडम वापस न आ जाएं। कोई भी नेगेटिव खबर पूरे देश को शर्मसार कर देगी। ये सुनते ही जस्टिस सिन्हा की आंखों में अंगारे दहक उठे। उन्होंने बिना एक पल गंवाए फोन का रिसीवर उठाया और सीधे कोर्ट के रजिस्ट्रार को नंबर मिलाया। रजिस्ट्रार साब, अभी के अभी नोटिस बोर्ड पर चढ़वा दीजिए… फैसला 12 जून को सुनाया जाएगा। हर हाल में…। जस्टिस सिन्हा जानते थे कि वे पहले ही एक बड़ी रियायत दे चुके थे। 8 जून को गुजरात विधानसभा चुनाव थे। उन्होंने जान-बूझकर फैसला रोके रखा ताकि वोटर्स पर असर न पड़े, लेकिन बार-बार रियायत देना ठीक नहीं था। पूरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) इस वक्त एक ही काम में लगी थी। उस फैसले की एक लाइन कहीं से लीक हो जाए, जो जस्टिस सिन्हा देने वाले थे। दिल्ली से आए जासूस इलाहाबाद की गलियों में धूल छान रहे थे। उनका एकमात्र निशाना था- जज साहब का स्टेनोग्राफर नेगीराम निगम। जासूसों ने नेगीराम को घेरा। पहले लालच दिया, फिर 'ऊपर' का डर दिखाया और आखिर में धमकियां भी दीं। निगम भी उसी फौलाद का बना था, जिससे उसके साहब जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा बने थे। 11 जून की रात। फैसला टाइप हो चुका था। जस्टिस सिन्हा ने स्टेनो की आंखों में देखा और एक इशारा किया। अगली सुबह जब खुफिया विभाग के लोग आखिरी कोशिश करने स्टेनोग्राफर के घर पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर पर ताला लटका था। निगम और उनकी पत्नी गायब थे। ये देखकर इंटेलिजेंस के अफसर सिर पकड़कर रह गए। फैसला जस्टिस सिन्हा की जेब में था और टाइप करने वाला परिंदा पिंजरा तोड़कर उड़ चुका था। अब जो कुछ भी होना था, वो सीधे अदालत के कमरा नंबर- 24 में होना था। अब दोबारा लौटते हैं 12 जून, 1975 की सुबह 10 बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट का कमरा नंबर- 24, भीड़ ऐसी कि तिल रखने की जगह नहीं थी। आखिर प्रधानमंत्री के खिलाफ लगी याचिका पर फैसला आना था। खुफिया विभाग के अफसर सादी वर्दी में इधर-उधर डोल रहे थे। उनकी सारी कोशिशें नाकाम हो चुकी थीं। 55 साल के दुबले-पतले जस्टिस सिन्हा अपनी कुर्सी पर बैठे। पेशकार ने गला साफ किया और गरजकर कहा- खामो ऽऽऽ श, जब फैसला सुनाया जाएगा। कोई ताली नहीं बजाएगा। सिन्हा ने 258 पन्नों की फाइल खोली। उनकी आवाज सपाट थी, जैसे कोई मशीन बोल रही हो। जस्टिस सिन्हा ने फैसला पढ़ना शुरू किया- तमाम सबूतों और गवाहों के मद्देनजर ये साबित होता है कि श्रीमती गांधी ने चुनाव प्रचार में सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया था। जस्टिस सिन्हा के ये शब्द सुनकर कोर्ट रूम में सन्नाटा एक सेकेंड के लिए ठहरा और फिर शोर का समंदर उमड़ पड़ा। जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी को उस चुनाव में दो भ्रष्ट आचरणों का दोषी माना था। उसमें से एक था- ‘प्रधानमंत्री सचिवालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी यशपाल कपूर का उपयोग चुनाव में अपनी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए किया।’ सिन्हा ने कहा कि भले ही कपूर ने मिसेज गांधी के लिए चुनाव प्रचार 7 जनवरी को शुरू किया। इस्तीफा 13 जनवरी को दिया, लेकिन वे सरकारी सेवा में 25 जनवरी तक बने हुए थे। मिसेज गांधी ने उसी दिन अपने आपको एक उम्मीदवार मान लिया था, जब 29 दिसंबर 1970 को उन्होंने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था और चुनाव में उतरने की घोषणा की थी। दिल्ली: सुबह 10:20 बजे। UNI की मशीन पर घंटी बजी। शेषन ने झपटकर कागज फाड़ा। मोटे अक्षरों में छपा था- 'Indira Gandhi Unseated' (मिसेज गांधी अपदस्थ) शेषन बदहवास होकर गलियारे में भागे। सामने पायलट की सफेद वर्दी में राजीव गांधी आ रहे थे। शेषन ने कांपते हाथों से कागज उनकी तरफ बढ़ाया। राजीव ने पढ़ा और तेजी से अपनी मां के कमरे की ओर मुड़े। मम्मी... उन्होंने आपको डिस्क्वालिफाई कर दिया है। राजीव की आवाज में एक अजीब सी गंभीरता थी। मिसेज गांधी ने सिर उठाया, चेहरे पर कोई शिकन नहीं। बस इतना कहा- “तो आखिर उन्होंने कर ही दिया।” तभी टेलीप्रिंटर पर अगला फ्लैश आया- 'छह साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक'। इलाहाबाद का फैसला आने के बाद दिल्ली की सियासत में जलजला आ गया था। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद उस वक्त श्रीनगर में थे। वे फौरन दिल्ली लौटना चाहते थे, लेकिन इंदिरा ने उन्हें रोक दिया। राष्ट्रपति अहमद ने फोन पर पूछा- मैडम, मेरा दिल्ली लौटना जरूरी है। मैं तुरंत आता हूं। इंदिरा ने ठंडे लहजे में जवाब दिया- नहीं, अभी आपका आना ठीक नहीं होगा। आप अपना दौरा जारी रखिए। अगले तीन दिन तक राष्ट्रपति हर सुबह फोन करते- क्या अब मैं लौट आऊं? इंदिरा हर बार एक ही जवाब देतीं- अभी नहीं। वे अच्छी तरह जानती थीं कि अगर राष्ट्रपति अचानक दिल्ली लौटे, तो शोर मच जाएगा कि वे मैडम का इस्तीफा स्वीकार करने की जल्दी में आए हैं। इधर राष्ट्रपति भवन के बाहर विपक्ष ने डेरा डाल दिया था और एक ही रट थी- पीएम का इस्तीफा…। 16 जून को जैसे ही राष्ट्रपति दिल्ली पहुंचे, इंदिरा उनसे मिलने पहुंचीं। ये मुलाकात सिर्फ 15 मिनट की थी। इंदिरा गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा- मैं इलाहाबाद के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही हूं। याचिका तैयार है। राष्ट्रपति अहमद ने बस इतना कहा- ठीक है, जैसा आप उचित समझें। उसी शाम विपक्षी नेताओं का एक बड़ा दल राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा। उनकी आवाज में तल्खी थी। विपक्षी नेता बोले- राष्ट्रपति जी, आपको फौरन उन्हें कुर्सी छोड़ने का आदेश देना चाहिए। अहमद ने शांति से जवाब दिया- हमें कांग्रेस संसदीय दल की बैठक का इंतजार करना चाहिए। विपक्ष के नेता बिफर पड़े- बैठक का इंतजार? यानी आप अब भी उन्हीं का पक्ष ले रहे हैं? राष्ट्रपति अहमद को फौरन अपनी गलती का एहसास हुआ कि कहीं उन्हें इंदिरा गांधी का 'रबर स्टैंप' न मान लिया जाए। उन्होंने तुरंत अपनी बात सुधारी- मेरा मतलब ये था कि हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक रुकना चाहिए। उनके प्रेस सचिव ने फौरन एक हैंडआउट जारी किया ताकि अखबारों में ये न छप जाए कि राष्ट्रपति झुक गए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने भले ही कुर्सी हिला दी थी, लेकिन 1 सफदरजंग रोड के भीतर बगावत का खून उबल रहा था। इंदिरा गांधी के दोनों बेटों राजीव और संजय ने साफ कर दिया कि पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। राजीव ने मां की आंखों में झांककर कहा- मम्मी, आपको इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं। संजय ने और भी तीखे तेवर में जोड़ा- इस्तीफा कमजोर लोग देते हैं। हम दुनिया को दिखा देंगे कि असली नेता कौन है। अगले ही पल दिल्ली की सड़कों पर सरकारी मशीनरी का तांडव शुरू हो गया। DTC (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कमीशन) की बसों और ट्रकों का काफिला गांवों की ओर दौड़ पड़ा। लोगों को भरकर लाया जाने लगा, ताकि दुनिया देखे कि भीड़ किसके साथ है। 20 जून 1975 की दोपहर, दिल्ली का बोट क्लब। तपती धूप में एक विशाल रैली बुलाई गई। मंच पर इंदिरा गांधी के साथ उनका पूरा परिवार खड़ा था- संजय, राजीव और सोनिया गांधी। पहली बार इंदिरा ने सार्वजनिक रूप से अपने परिवार का जिक्र किया। भीड़ ने नारे लगाए, पर इंदिरा का चेहरा गंभीर था। वे बोलीं- बड़ी ताकतें न केवल मुझे सत्ता से बेदखल करना चाहती हैं, बल्कि वे मेरा जीवन भी समाप्त कर देना चाहती हैं। रैली कामयाब रही, लेकिन संजय गांधी के लिए इतना काफी नहीं था। उनका पारा तब चढ़ गया, जब दूरदर्शन ने इस रैली का लाइव टेलीकास्ट नहीं किया। सूचना और प्रसारण मंत्री इंद्र कुमार गुजराल पीएम हाउस पहुंचे। उनका सामना संजय गांधी से हुआ। संजय का चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था। संजय ने झल्लाते हुए कहा- देखिए गुजराल साब, ऐसा नहीं चलेगा। मॉम की स्पीच रेडियो पर क्यों नहीं आई? गुजराल ने शांति से जवाब दिया- देखिए संजय, जब तक मैं मंत्री हूं, नियम ऐसे ही चलेंगे। संजय चिल्लाने लगे- आप जानते हैं आप किससे बात कर रहे हैं? गुजराल ने उनकी आंखों में आंखें डालकर कहा- बात करनी है तो थोड़ा सलीका सीखिए। आपको ये तक नहीं पता कि बड़ों से कैसे बात की जाती है? मैं आपकी मां का मंत्री हूं, आपका नहीं। गुजराल उठे और वहां से चले गए। कुछ ही दिनों में गुजराल से मंत्रालय छीन लिया गया। 23 जून 1975, सुप्रीम कोर्ट इंदिरा V/S राज नारायण केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे के लिए सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस कृष्ण अय्यर मामला सुन रहे थे। इंदिरा गांधी की तरफ से मशहूर वकील नानी पालखीवाला पेश हुए। राजनारायण की तरफ से शांति भूषण अदालत पहुंचे। पालखीवाला ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। जस्टिस अय्यर ने दोनों पक्षों को सुना। उनका फैसला भी किसी सस्पेंस फिल्म के ट्विस्ट जैसा था। 24 जून को फैसला आया। जस्टिस अय्यर ने कहा- मिसेज गांधी पर कोई गंभीर चुनावी अपराध साबित नहीं हुआ है। फिर भी जब तक अपील का फैसला नहीं आता, वो लोकसभा में वोट नहीं दे सकेंगी। संजय गांधी की टीम ने फौरन रेडियो और टीवी पर प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया। हर तरफ बस एक ही शोर मचा- अदालत ने कह दिया है, इंदिरा ही प्रधानमंत्री रहेंगी। सच्चाई को सरकारी प्रचार की परतों के नीचे दबा दिया गया, लेकिन जेपी की रैली में उमड़ी भीड़ ने बता दिया कि तूफान अब ‘सिंहासन’ के बेहद करीब है। 25 जून 1975, दिल्ली का रामलीला मैदान। लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की रैली में जनसैलाब उमड़ पड़ा। जेपी मंच से दहाड़ रहे थे। कुछ देर बाद राज नारायण ने माइक संभाला और बोलना शुरू करते ही बिजली गिरा दी- अदालत ने मैडम को अयोग्य करार दे दिया है, फिर भी वे कुर्सी से चिपक कर बैठी हैं। कल 26 जून को हम उनके आवास का घेराव करेंगे। याद रहे… याचना नहीं, अब रण होगा। सभा खत्म हुई और राज नारायण दिल्ली में अपने भगवानदास रोड वाले मकान पर लौट आए। उन्हें लग रहा था कि वे कल इतिहास रचेंगे, पर वे नहीं जानते थे कि मैडम ने इतिहास को ही 'लॉक' करने की तैयारी कर ली है। रात के सन्नाटे में राष्ट्रपति भवन की लाइटें जलीं और एक कागज पर दस्तखत होते ही पूरे देश की किस्मत पर कालिख पुत गई। देश में 'इमरजेंसी' लागू हो चुकी थी। 26 जून की भोर में राज नारायण के दरवाजे पर पुलिस खड़ी थी। पुलिस अफसर ने कड़ककर कहा- राज नारायण जी, दिल्ली पुलिस। आप गिरफ्तार हैं। राज नारायण ठंडी हंसी हंसे- “मैडम डर गईं? चलिए…।” अगले कुछ ही घंटों में विपक्ष के सारे धुरंधर हरियाणा की अलग-अलग जेलों में थे। राज नारायण को हिसार जेल में रखा गया। 10 अगस्त को संसद ने संविधान में 39वां संशोधन किया गया। अनुच्छेद 71 हटाया गया और अनुच्छेद 329 A जोड़ा गया। इसके तहत प्रावधान किया गया कि प्रधानमंत्री के चुनाव को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। नतीजा, अब सुप्रीम कोर्ट इंदिरा गांधी V/S राज नारायण केस की सुनवाई नहीं कर सकता था। हाईकोर्ट का फैसला भी शून्य हो गया। फिर भी आपातकाल का दौर जारी रहा। करीब 19 महीने बाद जब इंदिरा गांधी को विश्वास हो गया कि चुनाव हुए तो भी वही जीतेंगी, तब 18 जनवरी, 1977 को लोकसभा भंग करके आम चुनाव कराने का ऐलान हुआ। इमरजेंसी इसके भी दो महीने बाद 21 मार्च को खत्म हुई। जेल में बंद विपक्षी नेताओं की रिहाई शुरू हुई। राज नारायण के साथ उनके करीबी राज कुमार जैन भी हिसार जेल में बंद थे। राज कुमार की रिहाई का आदेश आ चुका थी, लेकिन राज नारायण का नहीं। राज नारायण ने तीन खुफिया चिट्ठियां लिखीं। राज कुमार को बुलाकर चिटि्ठयां उनकी मुट्ठी में दबा दीं। फिर फुसफुसाते हुए कहा- राज कुमार, ये विपक्ष का भविष्य हैं। इन्हें चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी और मोरारजी देसाई तक पहुंचा देना। कहना, राज नारायण ने संदेश भेजा है। क्या लिखा है इसमें नेताजी? राज कुमार ने उत्सुकता से पूछा। इसमें लिखा है कि मैं भले ही जेल में सड़ रहा हूं, लेकिन तुम तीनों को मैदान नहीं छोड़ना है। इंदिरा के खिलाफ चुनाव लड़ना ही होगा, वरना ये देश हमें कभी माफ नहीं करेगा। राज कुमार जैन रिहा हुए और उन्होंने एक-एक करके तीनों नेताओं के दरवाजे खटखटाए। लेकिन, जवाब सुनकर उनके होश उड़ गए। वाजपेयी चिट्ठी पढ़कर मुस्कुरा दिए। इंदिरा के खिलाफ लड़ना सीधे हार के कुएं में कूदने जैसा था। मोरारजी ने भी पल्ला झाड़ लिया। जैसे ही राज नारायण जेल से बाहर आए। उन्होंने प्रेस के सामने गर्जना की- अगर कोई नहीं लड़ेगा, तो राज नारायण अकेला लड़ेगा।” ये ऐलान नहीं था, इंदिरा की राजनीतिक हार की शुरुआत थी। 1971 की उस हार का बदला अब रायबरेली की धूल में लिया जाने वाला था। चुनाव की तारीखें नजदीक थीं। दिल्ली के एक कमरे में राज नारायण के एक हितैषी ने उनसे कहा- राज नारायण, जिद छोड़ो। दो सीटों से पर्चा भरो। प्रतापगढ़ की सीट बिल्कुल सुरक्षित है। हमारी पार्टी का वहां कब्जा है। तुम वहां से आसानी से निकल जाओगे। राज नारायण ने अपनी मोटी भौहें सिकोड़ीं- दो सीटें क्यों? क्या मुझे अपनी ताकत पर शक है? हितैषी ने समझाया- अरे भाई, इंदिरा पीएम है। अगर दांव उल्टा पड़ गया तो? जनता पार्टी की सरकार बन रही है, तुम्हारा मंत्री बनना तय है। मंत्री बनने के लिए जीतना जरूरी है। प्रतापगढ़ से भी पर्चा भर दो। राज नारायण कुर्सी छोड़कर खड़े हो गए और गरज कर बोले- क्या मैं पद का लोभी दिखता हूं? क्या मैं कुर्सी के लिए राजनीति में आया हूं? मेरा फैसला अटल है… मैं सिर्फ रायबरेली से लड़ूंगा। मैं उस भ्रष्ट महिला को सबक सिखाकर रहूंगा। चुनाव प्रचार शुरू हो चुका था। रायबरेली की धूल राज नारायण के लिए पराई नहीं थी। एक जनसभा में राज नारायण बोलने पहुंचे। हाथ में एक साधारण सी थैली थी। भीड़ शांत हुई, तो उन्होंने थैली ऊपर उठाकर दिखाई। वे कुछ चबा रहे थे। राज नारायण ने माइक पर तंजिया लहजे में कहा- देखो भाइयों, हम तो गुड़-चना खाकर गुजारा करते हैं। ये रहा प्रमाण, हम जनता के आदमी हैं। दूसरी तरफ इंदिरा जी हैं- वीआईपी… हमसे अच्छे तो उनके कुत्ते हैं। ऐशो-आराम में रहते हैं। अब वक्त आ गया है कि शाही ठाठ मिट्टी में मिला दें। अब जनता की बारी है। पूरा मैदान 'राज नारायण जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा। सत्ता की चूलें हिलने लगी थीं। वोटिंग के बाद गिनती शुरू हुई। रेडियो पर जो खबर आई, उससे 1 सफदरजंग रोड पर मातम छा गया। राज नारायण को 52% (1,77,719) वोट मिले थे, जबकि सत्ता की स्वामिनी इंदिरा गांधी 35.7% (1,22,517) वोटों पर सिमट गई थीं। *** रेफरेंस The Case That Shook India: The Verdict That Led to the Emergency - Prashant Bhushan | Emergency Retold - Kuldip Nayar | Emergency Chronicles: Indira Gandhi and Democrac y's Turning Point - Gyan Prakash | राजनारायण एक नाम नहीं इतिहास - शाहनवाज अहमद कादरी | राजनारायण विचार पथ - धीरेंद्र श्रीवास्तव | State of Uttar Pradesh v. Raj Narain (इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला) व्यक्ति: प्रो. आनंद कुमार, सुरेश खैरनार, विजय विद्रोही, धीरेंद्र श्रीवास्तव, शाहनवाज अहमद कादरी। कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का उपयोग किया गया है।
रामकृष्ण आश्रम:क्राइम ब्रांच की जांच पर सवाल आरोपी तुषार ने 2.5 करोड़ निकाले, रिकवरी जीरो
रामकृष्ण मिशन आश्रम के साथ हुई 2.53 करोड़ की ठगी के मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की भूमिका सवालों के घेरे में है। इस केस के प्रमुख आरोपियों में से एक, तुषार गोमे ने 10 जनवरी से 28 मार्च 2025 के बीच चेक से ढाई करोड़ रुपए निकाले। ये राशि अलग-अलग लोगों के खाते में ट्रांसफर हुई थी। इससे ये स्पष्ट है कि तुषार व उसके साथियों ने रामकृष्ण मिशन आश्रम के साथ हुई 2.53 करोड़ की ठगी के अलावा देशभर में अन्य जगह भी डिजीटल अरेस्ट की वारदात को अंजाम दिया और उससे प्राप्त राशि तुषार गोमे ने चेक के माध्यम से निकाली। हालांकि, क्राइम ब्रांच अभी तक उससे एक रुपया भी बरामद नहीं किया जा सका है। बता दें कि तुषार गोमे 19 अप्रैल 2025 से जेल में बंद है। इन कारणों से क्राइम ब्रांच की जांच पर उठे सवाल पूरा मामला एक नजर में ... 11 अप्रैल 2024 को रामकृष्ण मिशन आश्रम के तत्कालीन सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद के साथ 2,52,99,000 रुपए की डिजीटल ठगी हुई। डिजीटल अरेस्ट कर उनके साथ घटना को अंजाम दिया गया। इसकी रिपोर्ट क्राइम ब्रांच में 15 अप्रैल को दर्ज की गई। एटीएम से 30.49 लाख, चेक से 95.51 लाख निकाले क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में जो जवाब पेश किया, उसमें बेहद चौकाने वाली जानकारी सामने आई। इसमें खुलासा हुआ कि शुरुआत में ठगी की राशि 2.53 करोड़, को 10 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। उसके बाद इसी राशि को 538 अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद एटीएम से 30.49 लाख (61 बैंक खातों से), 15 बैंक खातों से चेक के माध्यम से 95.51 लाख रुपए निकाले गए। इसके अलावा अन्य माध्यम से 42 बैंक खातों में 96.53 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। जवाब में ये भी बताया गया कि इस केस में कार्रवाई करते हुए कुल 178 बैंक खातों को होल्ड किया गया है। इसमें होल्ड की गई राशि 9.70 लाख रुपए है।
दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक व पूर्व CM आतिशी मार्लेना के बयान पर पंजाब और दिल्ली की राजनीति में घमासान अभी थमा नहीं है। दिल्ली भाजपा ने आतिशी गुमशुदा के पोस्टर लगा दिए हैं। वहीं जालंधर में जिस इकवाल सिंह के नाम पर FIR हुई है,वह भी खुलकर इस मामले सामने नहीं आए हैं।आतिशी के गुरुओं के अपमान के आरोप मामले में शिकायत करने वाले आईएस बग्गा (इकवाल सिंह) जालंधर की मिट्ठू बस्ती के रहने वाले हैं। भास्कर टीम ने जब मिट्ठू बस्ती का दौरा किया तो पता चला कि यहां घरों के बाहर नंबर प्लेट ही नहीं लगी हैं जबकि पुलिस ने हाउस नंबर 180 लिखा है। काफी ढूंढने के बाद भी शिकायतकर्ता का घर नहीं मिला। जब बग्गा को फोन किया तो उन्होंने कहा वह घर से बाहर हैं। चंडीगढ़ आए हैं और लौट रहे हैं। बग्गा ने कहा कि मैं कहीं भी भागा नहीं हूं। मुझ पर आप वर्कर होने के नाते जानबूझकर FIR दर्ज करवाने के जो आरोप लगाए जा रहें वो झूठे हैं। मैंने तो वीडियो जांच की एप्लिकेशन दी थी। मामला ज्यादा बड़ा हो गया तो मेरा नाम उछल गया। बता दें कि बस्ती बावा खेल पुलिस ने 7 जनवरी को रात के 11 बजकर 20 मिनट पर FIR दर्ज की थी। दिल्ली भाजपा ने जारी किए आतिशी गुमशुदा के पोस्टरसिख गुरुओं पर टिप्पणी के मामले को लेकर दिल्ली भाजपा ने आतिशी के गुमशुदगी के पोस्टर लगवा दिए हैं। दिल्ली भाजपा के मंत्री कपिल मिश्रा ने वीडियो जारी कर कहा-आतिशी तुम विधानसभा में क्यों नहीं आ रही। कहां चली गई हो। तुम्हें विधानसभा में आकर इस मामले में स्पष्टीकरण देना चाहिए। विधानसभा के सदस्य तुम्हारे जवाब का इंतजार कर रहे हैं। भागने से पहले शायद तुम्हें ये जानकारी न हो कि आज तक भागने से कोई कानून या कार्रवाई से नहीं बच पाया है। सुनील जाखड़ ने कहा-इतनी तेज कार्रवाई कभी नहीं देखीपंजाब भाजपा के प्रधान सुनील जाखड़ ने आतिशी के सिख गुरुओं पर टिप्पणी मामले में कहा कि आम आदमी पार्टी के राज में कई ऐसे वीडियो और मामले हैं जिनकी फोरेंसिक जांच सालों से नहीं हो पाई। आतिशी के दिल्ली में बने वीडियो की पंजाब के मोहाली की फोरेंसिक लैब में एक दिन में ही जांच पूरी हो गई। इतनी तेज जांच तो कभी नहीं देखी। ये जांच तेज इसलिए भी हुई क्योंकि FIR जो दर्ज करनी थी। कैंट MLA परगट बोले-टारगेट FIR दर्ज की गईआतिशी के वीडियो मामले में हुई FIR में जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक परगट सिंह का भी नाम है। इस मामले को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत में परगट सिंह ने कहा कि ये राजनीति से प्रेरित FIR है। ऐसे कितनी भी एफआईआर दर्ज कर लें, इससे क्या होने वाला। मैंने तो जालंधर पुलिस को भी कहा है कि एफआईआर तो आपने दर्ज कर ली, अब आप जब बुलाओगे मैं आने के लिए भी तैयार हूं। परगट सिंह ने कहा कि आईएस बग्गा की शिकायत पर ये FIR दर्ज की गई है और बग्गा आप के ही कार्यकर्ता हैं। ये एफआईआर करने के लिए उनसे शिकायत दिलवाई गई है। दिल्ली का मामला है। जालंधर में एफआईआर हो रही है। इसका कोई तुक नहीं है। अगर मुझे पर या अन्य पर वीडियो शेयर करने का पर्चा दर्ज किया गया है तो फिर तो ये इस हिसाब से पूरी दिल्ली विधानसभा पर बनता है, क्योंकि वीडियो तो मूल रूप से हाउस की है। अब जानें FIR में पुलिस ने क्या लिखा- क्लिप को जानबूझकर एडिट किया गयाशिकायतकर्ता इकबाल सिंह ने आरोप लगाया है कि 7 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो क्लिप प्रसारित की गई । इस वीडियो में कथित तौर पर आतिशी को सिख गुरुओं और सिख समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। आतिशी ने बाद में खुद उसी भाषण का असली और पूरा वीडियो अपलोड किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वायरल क्लिप को जानबूझकर एडिट और डॉक्टर्ड किया गया था ताकि उनके बयानों का अर्थ बदला जा सके ।वीडियो शेयर करने वालों के खिलाफ जांच की मांगशिकायतकर्ता आईएस बग्गा उर्फ इकवाल सिंह ने इस वीडियो की जांच करवाने, इसे शेयर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसमें दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा, कांग्रेस के जालंधर कैंट विधायक परगट सिंह, सुखपाल सिंह खैहरा, सुखबीर बादल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पुलिस ने मोहाली की फारेंसिक लैब से वीडियो जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 196(1) धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना । धारा 353(1)(b) और 353(2) सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से झूठी जानकारी या अफवाह फैलाना , धारा 66(C) आईटी एक्ट के तहत कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करके पहचान की चोरी या धोखाधड़ी करने के मामले में केस दर्ज किया। इस केस का आईओ बस्ती बावा खेल के परमिंदर सिंह को बनाया गया है। शिकायतकर्ता बग्गा बोले-मेरा नाम उछल गया, मैंने तो शिकायत दी थीशिकायतकर्ता आईएस बग्गा (इकवाल सिंह) घर पर नहीं मिले। मगर जब उनको फोन किया गया तो उन्होंने बताया कि वह चंडीगढ़ में और लौट रहे हैं। FIR को लेकर बग्गा ने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। उन पर आप वर्कर होने के नाते जानबूझकर FIR दर्ज करवाने के आरोप गलत हैं। उन्होंने इससे पहले जालंधर में नहर से स्वरूप मिलने के मामले में भी सबसे पहले शिकायत की की थी। तब भी उनकी शिकायत पर केस दर्ज हुआ था। इस बार भी उन्होंने शिकायत ही थी कि इस वीडियो की जांच की जाए। बाद में ये मामला ज्यादा उछल गया। जल्दी कार्रवाई हो गई और मेरा नाम भी इसमें आ गया। अन्यथा उन्होंने राजनीति से प्रेरित होकर, सोच समझकर या जानबूझकर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करवाई। इन्फोग्राफिक्स में पढ़ें इस मामले में कौन क्या कह चुका
जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में स्क्रीनिंग और ऑडियोमेट्री जांच बंद
बच्चों में जन्मजात विकारों का पता लगाने के लिए जिला अस्पताल मुरार में बनाए गए जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में ओई स्क्रीनिंग और उनके सुनने की क्षमता का पता लगाने के लिए होने वाली ऑडियोमेट्री जांच बंद है। करीब दो माह पहले कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र का निरीक्षण किया था। उन्होंने बच्चों के लिए लगाया झूला फटा होने पर नाराजगी जताते हुए उसे जल्द ठीक कराने के आदेश दिए थे। कलेक्टर के आदेश के दो माह बाद भी अभी तक मशीनें ठीक होना तो दूर झूला भी ठीक नहीं हुआ है। इसके चलते इन जांचों के लिए बच्चों को जेएएच जाना पड़ रहा है। जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में 0 से 6 साल तक के बच्चों में जन्मजात दोष, कमियां, बीमारियां और विकासात्मक देरी (4डी) जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्र पता लगाने और उपचार के लिए विशेषज्ञ सेवाएं एक ही छत के नीचे प्रदान करता है। जिला अस्पताल मुरार में बना जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में पूरे जिले से मरीज आते हैं। इसके बाद भी यहां मरीजों को सुविधा मिल रही हैं। इस मामले में अस्पताल के प्रबंधक डॉ.राजेश बिरथरिया का कहना है कि मशीन के ऑर्डर कर दिए हैं। झूला एक-दो दिन में ठीक हो जाएगा। केंद्र में अग्निशमन यंत्र भी खाली केंद्र में आगजनी से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां कहने को तो अग्निशमन यंत्र रखा हुआ है लेकिन वह खाली है। इतना ही नहीं उसमें यह तक नहीं लिखा है कि आखिरी बार अब इसमें गैस भरी गई और उसकी एक्सपायरी कब की है। ऐसी स्थिति में अगर कभी आगजनी की घटना हुई तो कैसे निपटा जाएगा इसका अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है।
मकर संक्रांति पर 14 जनवरी को सियासी गलियारों में दही चूड़ा भोज की धूम रही। भोज के बहाने लालू के बड़े लाल तेज प्रताप यादव की फैमिली में वापसी भी हो गई। तेज प्रताप ने अपने आवास पर भोज रखा, जिसमें पिता लालू यादव, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, साधु यादव सहित कई चर्चित नेताओं ने शिरकत की। इस दौरान सभी ने एक दूसरे को तिलकुट खिलाया और त्योहार की बधाइयां दीं। वहीं, पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के घर भी भोज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश सहित कई दिग्गज पहुंचे। बीजेपी ऑफिस में भी आयोजन खास रहा। आर्टिस्ट ने परफॉर्म भी किया। वीडियो देखने के लिए क्लिक करें ऊपर...
एक त्योहार, 2 जिले और 2 तारीखें...:लोकल छुट्टियों को लेकर ग्वालियर-दतिया में अंतर
नए साल में ग्वालियर और दतिया जिले में 3-3 छुट्टी के लिए बुधवार को दोनों कलेक्टर ने अलग-अलग आदेश जारी किए। इसमें त्योहारों की तारीख अलग-अलग हैं। दतिया कलेक्टर के आदेश में 5 मार्च (गुरुवार) को होली की भाईदूज पर लोकल छुट्टी का उल्लेख है। वहीं ग्वालियर के आदेश में 4 मार्च को शुक्रवार बताते हुए होली की दौज पर छुट्टी घोषित की। ऐसे ही ग्वालियर में 18 जून (गुरुवार) को लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस पर लोकल छुट्टी, 11 नवंबर (बुधवार) को भाई दौज पर ऐच्छिक अवकाश के दिन छुट्टी घोषित की। वहीं दतिया कलेक्टर ने 29 अक्टूबर (गुरुवार) को करवाचौथ, 20 नवंबर (शुक्रवार) को देव उठनी ग्यारस पर छुट्टी घोषित की है।
दक्षिण भारतीय शैली के उत्तर भारत में स्थित विशालतम रंगनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान का विवाहोत्सव का आयोजन किया गया । दो दिवसीय आयोजन में बुधवार को माता गोदा (लक्ष्मी) जी का वैदिक मंत्रों के मध्य अभिषेक किया गया। यहां देर शाम विवाह मंडप में भगवान का गोदा जी के साथ विधि विधान से विवाह कराया गया। मकर संक्रांति पर होता है आयोजन धार्मिक नगरी वृंदावन के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में श्री गोदा रंगमन्नार विवाहोत्सव का दिव्याकर्षक आयोजन वैदिक परंपरानुसार किया गया। यहां प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर श्री रामानुज संप्रदाय के उत्तर भारत में सर्व प्रमुख श्री रंगनाथ मंदिर में श्री लक्ष्मी स्वरूपा गोदम्मा जी का विवाहोत्सव भगवान विष्णु स्वरूप रंगनाथ भगवान के साथ पौष मास में मनाया जाता है। यह है मान्यता श्री वैष्णव संप्रदाय की धार्मिक मान्यतानुसार दक्षिण भारत के विल्लीपुत्तुर नामक ग्राम निवासी भगवद भक्त विष्णुचित्त भट्ट नाथ स्वामी की पुत्री रूप में अवतरित गोदा जी ने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए पौष मास में धनु संक्रांति से मकर संक्रांति तक कठिन व्रत का निर्वाहन किया। माह पर्यंत दिव्य प्रबंध पाठ कर तिरुप्पावे की रचना की। व्रत पूर्ण होने पर श्री भूदेवी अवतार गोदा जी को भगवान रंगनाथ ने सहधर्मिणी रूप में वरण किया। सहस्त्र धारा अभिषेक किया मंगलोत्सव की बेला में मां गोदाम्मा का केसर मिश्रित हल्दी, चन्दन से लेपन कर पवित्र नदियों के जल से सहस्त्र धारा अभिषेक करने के बाद सुवासित तेल से केश बनाए गए। इसके बाद नवीन पोशाक आभूषण धारण करवा कर कुंभ आरती की गई। विवाह मंडप के समक्ष हुई माला अदला बदली विवाह की मांगलिक रस्म वैदिक मंत्रोचार के साथ अदा की गई। विवाह उत्सव के अंतर्गत पुष्करिणी द्वार के समीप माला अदला बदली की गई। इसमें मंदिर के पुजारी नाचते गाते माता गोदा जी की माला भगवान रंगनाथ के लिए और भगवान रंगनाथ की माला गोदा जी के लिए लेकर गए।यह क्रम 3 बार चला। इस दर्शन को कर श्रद्धालु अभिभूत हो गए। माला अदला बदली के बाद भगवान रंगनाथ और माता गोदा जी की आरती की गई और फिर दोनों को मंडप में ले जाया गया। विवाह मंडप में हुआ विवाह विवाह मंडप में भगवान रंगनाथ और माता गोदा जी का विवाह उत्सव हुआ। राजू स्वामी ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य विवाह उत्सव कराया। इससे पहले मंगलवार को माता गोदा जी अपनी सखियों को जगाने गईं। इसके बाद उनको हल्दी लगाई और मेंहदी लगाई गई थी। मंदिर के महंत जी ने भात दिया। दो दिवसीय इस आयोजन के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति के साथ साथ मंगल वैवाहिक माहौल में रंगा नजर आया।
तेजस्वी के मुंह पर दही जमा गए तेजू भइया:ऑन दी स्पॉट सांसद का फैसला; महिला सरपंच का VIP काफिला
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
'मेरी बेटी तन्नू ने मेरे ही पट्टीदार के भाई यानी अपने चाचा से शादी करके मेरी इज्जत मिट्टी में मिला दी थी। पहले तो दोनों के बीच अफेयर चला, जब इसकी जानकारी मिली तो हमने दोनों को समझाया, लेकिन दोनों नहीं माने और डेढ़ साल पहले घर से भाग गए। जब लौटे तो मेरी बेटी शादी के जोड़े में थी, ये देख मैं गुस्से की आग में जलने लगा था। उसी दिन कसम खा ली थी कि अपनी बेटी की मांग खुद अपने हाथ से उजाड़ूंगा। विधवा बनकर मेरी बेटी घर में रहेगी, लेकिन समाज का ताना मुझसे सहा नहीं जाएगा।' ये मुजफ्फरपुर के सिवाई पट्टी के बनघारा के रहने वाले 45 साल के प्रेम कुमार का कबूलनामा है। आरोप है कि प्रेम ने अपने साले और दो अन्य के साथ मिलकर अपनी ही बेटी के पति आयुष की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी प्रेम कुमार और उसके साले अभिषेक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मृतक की पहचान 28 साल के आयुष कुमार के रूप में हुई थी। आयुष की प्रेम कहानी क्या थी, उसने कब शादी की, हत्याकांड के बाद आयुष की पत्नी का क्या कहना है, पुलिस ने दो दिनों के अंदर हत्याकांड का खुलासा कैसे किया, आरोपी ने अपने कबूलनामा में क्या-क्या कहा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट...। सबसे पहले दामाद की हत्या के आरोपी ससुर का कबूलनामा 'उसने मेरी बेटी को बरगलाया था, पता नहीं क्या खिला-पिला दिया था कि मेरी बेटी जिद पर अड़ गई थी। दोनों को काफी समझाया,लेकिन नहीं माने। शुरुआत में बेटी एक बार समझने को तैयार हो गई थी, कुछ दिनों तक ठीक भी रही, लेकिन पता नहीं आयुष ने उसे दोबारा क्या समझाया, वो अपने ही चाचा के साथ भागने को तैयार हो गई।' 'आयुष पट्टीदार का भाई था। उसका घर भी मेरे घर से मात्र 50 मीटर दूर है। लिहाजा उसका मेरे घर और मेरे घरवालों का आयुष के घर आना जाना लगा रहता था, लेकिन हम दोनों में से किसी के भी परिवार को भनक नहीं लगी। करीब 2 साल पहले हम लोगों को दोनों के अफेयर के बारे में पता चला था। इसके बाद आयुष के घरवाले और हम लोग एक जुट हुए थे, आयुष और तन्नू दोनों को समझाया था।' 'तन्नू तो कुछ दिनों के लिए घर पर थी, हम लोगों को लगता था कि सब कुछ खत्म हो गया है। करीब डेढ़ साल पहले अचानक मेरी बेटी घर से गायब हो गई। रात को खाना खाकर सोई थी। सुबह जब उसके कमरे में देखा तो वो गायब थी। थोड़ी ही देर के बाद पता चला कि आयुष भी गायब है। हम दोनों के परिवार ने दोनों को खोजने की पूरी कोशिश की, लेकिन दोनों का कुछ पता नहीं चला।' 'कुछ ही दिनों के बाद आयुष और तन्नू लौट आए, लेकिन दोनों शादी के जोड़े में थे। तन्नू मेरे घर न आकर सीधा आयुष के घर ही आई थी। हम लोगों को पता चला तो काफी गुस्सा आया, लेकिन उस वक्त झगड़ा करके कुछ नहीं मिलता। हम लोगों की इज्जत तो पहले से मिट्टी में मिल गई थी, जिस दिन तन्नू घर छोड़कर भागी थी। रही सही कसर उसने अपने ही चचेरे चाचा से शादी करके पूरी कर दी।' 'हम लोगों ने शर्म की वजह से घर से निकलना बंद कर दिया था। एक दिन रास्ते में तन्नू मिली तो उसने टोका। मेरी बात हुई, लेकिन दिखावे के लिए मैंने कुछ नहीं कहा, लेकिन अंदर ही अंदर गुस्सा आ रहा था। मैं घर आया और फिर कसम खाई कि खुद अपने ही हाथों से अपनी बेटी का सुहाग उजाड़ दूंगा। दामाद की हत्या सिर्फ इसलिए कि क्योंकि वो तन्नू का चाचा था, उसे समझा सकता था, लेकिन तन्नू को समझाने के बजाय उससे शादी कर ली।' आयुष की हत्या के लिए 5 लाख की सुपारी दी, 3.5 लाख एडवांस में दिए सिवाई पट्टी पुलिस के मुताबिक, आरोपी प्रेम कुमार ने आयुष की हत्या की साजिश अपने साले अभिषेक कुमार उर्फ हंसलाल के साथ मिलकर रची। दोनों ने एक कॉन्ट्रैक्ट किलर से संपर्क किया और 5 लाख रुपए में हत्या की सुपारी दी। एडवांस के रूप में प्रेम कुमार ने कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को 3.5 लाख रुपए भी दिए। पुलिस की पूछताछ में आरोपी प्रेम ने बताया, हत्या के लिए सुपारी दी थी, लेकिन मैंने खुद अपने हाथों से बेटी का सुहाग उजाड़ने की कसम खाई थी। 11 जनवरी यानी रविवार की रात हत्या का प्लान बना था। कॉन्ट्रैक्ट किलर अपने एक साथी के साथ देर शाम आया। मैं और मेरा साले ने उनसे मुलाकात की। तय हुआ कि घर में घुसकर गोली मारी जाएगी।' आरोपी के मुताबिक, देर रात करीब 12 बजे मैं, मेरा साला, कॉन्ट्रैक्ट किलर और उसका साथी आयुष के घर पहुंचे। अंदर पहुंचने के बाद देखा कि आयुष की मां एक कमरे में अकेले सो रही है। हम लोगों ने उसके कमरे को बाहर से बंद कर दिया। इसके बाद आयुष के कमरे में पहुंचे। वहां देखा तो आयुष, उसका 6 महीने का बेटा और तन्नू सो रहे थे। फिर कॉन्ट्रैक्ट किलर से मैंने पिस्टल मांगी और आयुष की दो गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद तन्नू उठी, लेकिन उसे मैंने कुछ नहीं किया, अपने साले और दोनों अन्य साथियों के साथ घर से बाहर आ गया। वारदात के बाद मैं अपने काम पर चला गया, जबकि मेरा साला अभिषेक अपने घर चला गया। वहीं, दोनों अन्य आरोपी अपने-अपने घर निकल गए। हत्या की सूचना पर पहुंची पुलिस, तन्नू ने चीख-चीखकर बताया- पापा ने मार डाला पुलिस के मुताबिक, सोमवार सुबह वारदात की सूचना के बाद हम लोग घटनास्थल पर पहुंचे। यहां मृतक आयुष की पत्नी तन्नू ने पुलिस को बताया कि पापा देर रात मामा और अन्य दो लोगों के साथ घर आए थे। उन्होंने ही गोली मारकर मेरे पति की हत्या की है। मृतक की पत्नी के बयान के बाद पुलिस ने आरोपी प्रेम कुमार, उसके साले अभिषेक कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में प्रेम कुमार ने पूरी कहानी बयां की। तन्नू के भागने के बाद दर्ज कराई थी FIR तन्नू को भगाए जाने के बाद हत्या कांड के मुख्य आरोपी प्रेम कुमार ने आयुष के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। शादी करने के बाद जब आयुष और तन्नू लौटी तो पुलिस के सामने बयान दिया कि मुझे अपने पति के साथ रहना है। चूंकि तन्नू बालिग थी, पुलिस ने प्रेम कुमार को अपने घर रहने और नव दंपती के किसी मामले में किसी तरह के हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी थी। आयुष हत्याकांड के खुलासे के बाद SDPO ईस्ट अलय वत्स ने बताया कि दामाद की हत्या में ससुर व ममेरे ससुर काे जेल भेजा गया है। मृतक एनडीपीएस और अवैध हथियार में आरोपी रहा है। बैक ग्राउंड उसका भी अच्छा नहीं था। प्रेम विवाह के खुन्नस में हत्या की गई है।
व्यवसायी के घर फायरिंग मामले का खुलासा, यूपी के दो शूटर समेत 6 अपराधी गिरफ्तार
रामगढ़ पुलिस की एसआईटी टीम ने नया मोड़ स्थित व्यवसायी डब्बू सिंह के आवास पर फायरिंग करने वाले छह अपराधियों को गिरफ्तार कर अंतर्राज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो पिस्टल, एक देसी कट्टा, 42 गोलियां, आठ मोबाइल फोन और एक बाइक बरामद की है। एसपी अजय कुमार ने बताया कि अनुसंधान के दौरान सामने आया कि राहुल दुबे गैंग और सत्यम शुक्ला उर्फ आशीष शुक्ला के आदेश पर रंगदारी नहीं मिलने के कारण गोलीबारी की गई थी। पुलिस ने कुजू के राजू कुमार करमाली, मुकेश करमाली, रांची के रंजीत साव, यूपी जौनपुर के जयेश पाल को देसी कट्टा, गोली और मोबाइल के साथ तथा सन्नी सिंह को पिस्टल और गोलियों के साथ गिरफ्तार किया। यूपी के दो शूटरों पर दर्ज हैं कई मामले गिरफ्तार आरोपियों में यूपी के दो बड़े शूटर जयेश पाल और सन्नी सिंह उर्फ आशुतोष सिंह पर यकई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। राहुल दुबे ने सत्यम शुक्ला के साथ मिलकर दोनों शूटरों को पैसे देकर रांची के एक बड़े व्यवसायी की हत्या की जिम्मेदारी दी थी। इनमें राज कुमार करमाली पर मांडू (कुजू) थाना में 2. रंजीत साव पर रांची में 2 और मांडू थाना में 1, जयेश पाल पर जौनपुर के 5 थानों में और सन्नी सिंह पर अयोध्या और जौनपुर के 5 थानों में आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हैं।
रांची रॉयल्स ने दिल्ली को 6-2 से हराकर टॉप फोर में, लांसर्स ने हैदराबाद को 1-0 से हराया
रांची के मरांग गोमके जयपाल सिंह एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम में जारी मेंस हॉकी इंडिया लीग 2025-26 में बुधवार को खेले गए दो मुकाबलों में दर्शकों को अलग-अलग अंदाज का हाई-वोल्टेज खेल देखने को मिला। पहले मुकाबले में वेदांता कलिंगा लांसर्स ने हैदराबाद तूफान्स को 1-0 से हरा कर लगातार चौथी जीत दर्ज की और अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। वहीं दिन के दूसरे मुकाबले में रांची रॉयल्स ने कप्तान टॉम बून की ऐतिहासिक पांच गोल की पारी की बदौलत एसजी पाइपर्स को 6-2 से हराकर जोरदार वापसी की और चौथे स्थान पर छलांग लगा दी। पहले मुकाबले में वेदांता कलिंगा लांसर्स ने अनुशासित डिफेंस और शानदार काउंटर अटैक के दम पर हैदराबाद तूफान्स को 1-0 से मात दी। मैच का एकमात्र गोल अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स (40वें मिनट) ने पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार ड्रैग फ्लिक के जरिए किया, जो इस सीजन का उनका पांचवां गोल भी रहा। पहले क्वार्टर में दोनों टीमें संतुलित नजर आईं। हैदराबाद ने बॉल पजेशन ज्यादा रखा, लेकिन गोल के मौके लांसर्स ने बनाए। लियाम हेंडरसन को शुरुआती बढ़त दिलाने का मौका मिला, लेकिन गोलकीपर जीन-पॉल डैनेबर्ग ने शानदार बचाव कर स्कोर बराबर बनाए रखा। दूसरे क्वार्टर में हैदराबाद ने दबाव बढ़ाया और सर्कल एंट्री में बढ़त बनाई, लेकिन गोल के सामने फिनिशिंग कमजोर रही। लांसर्स के हेंडरसन का एक शक्तिशाली शॉट पोस्ट से टकरा गया, जिससे गोल का मौका चूक गया। तीसरे क्वार्टर में खेल का रुख बदल गया। पेनल्टी कॉर्नर पर अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स ने सटीक ड्रैग फ्लिक से गेंद को जाल में पहुंचाया और लांसर्स को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद टीम ने मजबूत डिफेंस अपनाया और अंतिम क्वार्टर में हैदराबाद को गोल पर कोई प्रभावी शॉट लगाने का मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ लांसर्स अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंच गई।
सरकारी स्कूलों को इस वित्तीय वर्ष में नहीं मिली विकास राशि, कार्य बाधित
झारखंड के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को प्रतिवर्ष मिलने वाली विद्यालय विकास निधि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जारी नहीं की गई है। इस कारण प्रदेश के हजारों सरकारी विद्यालयों में दैनिक शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य बाधित हो गए हैं। शिक्षकों को विद्यालय संचालन के लिए जरूरी सामग्री अपनी जेब से खरीदनी पड़ रही है और कई विद्यालयों में बुनियादी व्यवस्था चरमरा गई है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाई और प्रशासन के लिए आवश्यक खल्ली, झाड़ू, शौचालय सफाई सामग्री, साबुन, उपस्थिति पंजी, कैश बुक, मध्यान्ह भोजन पंजी, लेजर बुक, मीटिंग बुक और अन्य 40–45 प्रकार के अनिवार्य रजिस्टर की खरीद विकास निधि से होती है। लेकिन निधि नहीं मिलने से यह सब सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सबसे खराब स्थिति उन विद्यालयों की है, जहां एकल शिक्षक या पारा शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहा है। सीमित मानदेय में कार्यरत पारा शिक्षकों के लिए निजी खर्च के साथ विद्यालय संचालन का खर्च उठाना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे ऐसे विद्यालयों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। विकास निधि के अभाव में विद्यालयों का रंग-रोगन नहीं हो पा रहा है, भवन जर्जर दिखने लगे हैं।
दतिया निवासी मुकेश(40) करीब डेढ़ साल से सांस की परेशानी से जूझ रहा था। हालात ज्यादा बिगड़ने पर 22 दिसंबर को मुकेश जब मेरे पास ओपीडी में आए, तो उनकी हालत देख कलेजा कांप गया। वह पिछले डेढ़ साल से घुट-घुटकर जी रहे थे और एक महीने से तो पूरी तरह ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। जांच की तो पता चला कि उनके फेफड़ों में बीड़ी के अत्यधिक सेवन के कारण एक बड़ा गुब्बारा (बुल्ला) बन गया था। इस गुब्बारे ने फेफड़े के फैलने की जगह ही नहीं छोड़ी थी। सर्जरी में थी चुनौती... ऑक्सीजन सप्लाई रुकती तो जा सकती थी जान यह सर्जरी बेहद चुनौती भरी थी। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ऑपरेशन के दौरान हमें फेफड़े के उस हिस्से की ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह बंद करनी थी, जहां गुब्बारा था। अगर गलती से भी ऑक्सीजन वहां पहुंच जाती, तो मरीज की टेबल पर ही मौत हो सकती थी। इसके चलते सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने मिलकर ‘थोरोकोटॉमी एंड एक्सीजन ऑफ बुल्ला’ तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया। आर्थिक स्थिति थी कमजोर, जेएएच में दी नई जिंदगी मरीज की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जा सके। मैंने (डॉ. अचल) तय किया कि जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) में ही मुकेश को नई जिंदगी देंगे। मैंने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति गोयल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शक्ति सिंघल और दोनों विभागों के जूनियर डॉक्टरों के साथ मिलकर सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। ढाई घंटे चला संघर्ष... ट्यूब व ब्रोंकोस्कोप फेफड़े में फिटएनेस्थीसिया टीम की मदद से हमने एक विशेष ‘डबल ल्यूमैन ट्यूब’ मंगवाई। फाइबर ऑप्टिक ब्रोंकोस्कोप के जरिए इसे फेफड़े में सटीक जगह फिट किया गया। हमने एक तरफ की ऑक्सीजन रोकी और दूसरे फेफड़े से कृत्रिम सांस बहाल रखी। ढाई घंटे तक चले इस बेहद जटिल ऑपरेशन के बाद हमने उस ‘मौत के गुब्बारे’ को काटकर बाहर निकाल दिया। ग्वालियर-चंबल संभाग में इस तरह की ओपन चेस्ट सर्जरी का यह पहला सफल मामला है। अब मुकेश बिना मशीन के खुद सांस ले पा रहे हैं।
प्राथमिक शिक्षक... 15 दिन में स्कूलों में पोस्टिंग करने का था निर्देश, शिक्षकों का लंबा हुआ इंतजार रांची में अंतर जिला तबादला के माध्यम से आए 166 सहायक शिक्षकों की छह माह बाद भी स्कूलों में पोस्टिंग नहीं हो सकी है। आज भी इन शिक्षकों को स्कूल आवंटित होने का इंतजार है, जबकि प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने स्थानांतरण के 15 दिनों के भीतर शिक्षकों को विद्यालय आवंटित कर पदस्थापित करने के लिए कहा था। रांची जिला इस आदेश के पालन में न सिर्फ पीछे है, बल्कि अब यह प्रशासनिक उदासीनता उदाहरण बन चुका है। विभिन्न जिलों से रांची जिले में स्थानांतरित शिक्षकों को पोस्टिंग में विलंब की वजह भी नहीं बताई गई है। बताते चलें कि राज्य के 24 जिलों में से 19 जिलों ने समय पर पदस्थापन कर दिया है। केवल पांच जिले रांची, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और एक अन्य जिला ऐसा है, जहां आज भी स्थानांतरित शिक्षक बिना पदस्थापन के हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या रांची जिले की है। शिक्षकों का आरोप है कि डीएसई कार्यालय से संपर्क करने पर हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। लेकिन स्कूलों में पोस्टिंग नहीं की जाती है। स्थिति यथावत बनी हुई है। यह टालमटोल अब प्रशासनिक शैली बन चुकी है। शिक्षकों ने कहा कि इसमें जवाबदेही भी नहीं है और समय सीमा भी नहीं। शिक्षकों ने शीघ्र स्कूलों में पदस्थापन की मांग की है। स्थानांतरित होने के बाद स्कूलों में पोस्टिंग नहीं होना सिर्फ लापरवाही नहीं, शिक्षकों को मानसिक, शारीरिक रूप से परेशान करना है। स्कूली शिक्षा विभाग से शीघ्र हस्तक्षेप कर संबंधित जिलों को पदस्थापन का निर्देश दिया जाना चाहिए। तबादला के 6 माह बाद पदस्थापन नहीं होना समझ से परे है। - नसीम अहमद, मुख्य प्रवक्ता,शिक्षक संघ बीमारी, दिव्यांगता और पारिवारिक मजबूरी जैसे मानवीय आधार पर अंतर जिला तबादला किया गया था। शिक्षकों ने कहा कि नगर निकाय चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। आचार संहिता लागू होते ही पदस्थापन फिर तकनीकी कारणों से रोका जा सकता है।
बिहार में मंत्रियों और विधायकों को अब 2-2 सरकारी आवास मिलेंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 13 जनवरी को कैबिनेट में इसकी मंजूरी दे दी। इस नियम से सीनियर विधायकों को मंत्री वाला बंगला मिल सकता है। वहीं, मंत्रियों को मंत्री आवास के अलावा उनके क्षेत्र के लिए आवंटित आवास भी मिल सकता है। इस कानून से क्या राबड़ी देवी को आवास खाली करने से राहत मिल सकती है। इस नियम से किसे फायदा होगा। 5-स्टार होटल जैसा घर मिलने के बाद विधायकों को दूसरा बंगला क्या देना चाहिए। इन सवालों का जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में...। सवाल-1ः नीतीश सरकार के सरकारी बंगला को लेकर नया नियम क्या है? जवाबः 13 जनवरी को नीतीश कैबिनेट ने 2 नियमों को मंजूरी दी। पहला- सीनियर विधायक और विधान परिषद (जो फिलहाल मंत्री नहीं है) को विधानमंडल पूल के तहत अलॉट आवास के अलावा पटना केन्द्रीय पूल से आवास मिलेगा। इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से तय किराया देना होगा। इसका मतलब हुआ कि MLA-MLC को सरकार एक सरकारी बंगला देगी। इसके तहत कुल 15 आवास अलॉट किए जाएंगे। दूसरा- मंत्री, बिहार विधान परिषद के सभापति एवं उप सभापति तथा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को कुछ शर्तों के साथ पटना केंद्रीय पूल से पहले से आवंटित आवास के अलावा विधानमंडल पूल के तहत आने वाले विधायक/पार्षद फ्लैट दिए जाएंगे। इस नियम से मंत्रियों को दूसरा आवास देने का रास्ता साफ किया गया है। सवाल-2ः सरकार ने नियम क्यों बनाया? इससे किसको फायदा होगा? जवाबः एक्सपर्ट इसके पीछे 2 बड़े मकसद बताते हैं… 1. नेताओं को खुश करने की कोशिश सीनियर जर्नलिस्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, 'नीतीश सरकार के इस फैसले को नेताओं को खुश करने की कोशिश के रूप में देख सकते हैं। कुछ मंत्रियों को पहले भी दो आवास मिलता रहा है। जो नियम के खिलाफ था। हाल में बिहार में बंगला को लेकर विवाद भी हुआ था। उसे खत्म करने के लिए अब नियम बना दिया गया।' अभिरंजन कुमार कहते हैं, 'यह पूरी तरह से नीतीश कुमार की मैनेज वाली पॉलिटिक्स का हिस्सा है। इस नियम के सहारे जिन सीनियर नेताओं को मंत्री नहीं बनाया जायेगा, उन्हें ऐसे बंगला देकर साधने की कोशिश की जाएगी। अब देखना है कि सरकार किसे यह बंगला देती है।’ 2. सरकार की बंगला पॉलिसी से विधायक नाराज थे सूचना है कि सरकार की नई बंगला पॉलिसी से कुछ सीनियर विधायक नाराज थे। उनका कहना था कि बंगला में सिनियरिटी का ख्याल नहीं रखा गया है। पहली बार जीतने वाले विधायक को जैसा आवास मिल रहा है, वैसा ही छठी बार जीतने वाले को भी। किसे मिल सकता है फायदाः अनंत सिंह, अमरेंद्र पांडेय, शीला मंडल, जयंत राज, नीरज कुमार बबलू, नीतीश मिश्रा, जनक राम, तारकिशोर प्रसाद, महेश्वर हजारी, रेणु देवी, रत्नेश सदा आदि। सरकार ने कोई शर्त नहीं लगाई है। यानी टॉप लीडरशिप की जिस पर कृपा बरसेगी उसे मंत्री वाला बंगला मिल जाएगा। RJD ने जताया कड़ा एतराज सवाल-3ः नए नियम से राबड़ी देवी को आवास खाली करने से राहत मिल सकती है? जवाबः नहीं। उन्हें 10 सर्कुलर रोड वाले सरकारी बंगले को खाली करना ही होगा। इसे ऐसे समझिए… हालांकि, एक फैक्ट यह भी है कि सरकार ने राबड़ी देवी को अब तक 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला खाली करने का नोटिस नहीं दिया है। सिर्फ नया बंगला आवंटित किया है। जब तक सरकार नोटिस नहीं देगी, बंगला खाली करने का प्रोसेस चालू नहीं होगा। सवाल-4ः बिहार में विधायकों को क्या-क्या सुविधा मिलती है? जवाबः बिहार में विधायकों और मंत्रियों के लिए शाही इंतजाम हैं। 5 स्टार होटल जैसा घर, मुफ्त इलाज, ट्रेन-फ्लाइट से मुफ्त यात्रा।
20 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले के आरोपी कैशियर ने ईडी के दो अफसरों पर केस किया
चुटिया निवासी संतोष कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दो अधिकारियों पर मारपीट, जानलेवा हमला, गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस मामले में ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम को नामजद आरोपी बनाया गया है। संतोष पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के स्वर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल रांची में शहरी जलापूर्ति योजना की राशि में से 20 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला करने के आरोपी हैं। पीएचईडी प्रमंडल रांची में कार्यरत कैशियर संतोष कुमार को पूर्व में रांची पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह जमानत पर जेल से बाहर हैं। घोटाले के इस मामले की जांच ईडी कर रहा है। इधर, संतोष की ओर से दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, संतोष को 12 जनवरी को सुबह 10 बजे ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश मोबाइल फोन पर दिया गया था। वह सुबह 9.45 बजे ईडी कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि अपराह्न करीब 1.35 बजे सहायक निदेशक प्रतीक ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाया, जहां पहले से शुभम मौजूद थे। पूछताछ के दौरान उनसे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। मना करने पर दोनों अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई और गालियां दी गईं। आरोप नहीं स्वीकारने पर धमकी भी दी । पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कैशियर संतोष कुमार के विरुद्ध 18 दिसंबर 2023 में रांची के सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उन पर आरोप था कि उन्होने मार्च 2020 में एलएंडटी कंपनी के फर्जी बिल के आधार पर 2.17 करोड़ रुपये को फर्जी खाते में हस्तांतरित कर लिया था। इसी केस के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज किया और अनुसंधान कर रही है। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि उनसे 16 जनवरी को दोबारा ईडी कार्यालय में उपस्थित होने से संबंधित आवेदन जबरन लिखवाया गया और रात 10.45 बजे तक उन्हें कार्यालय में रोके रखा गया, ताकि वे घटना की सूचना अपने परिवार, अधिवक्ता, थाना या मीडिया को न दे सकें। छोड़ते समय भी उन्हें और उनके परिवार को जेल भेजने की धमकी दी गई। इधर, एयरपोर्ट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि दोनों ने डंडे से संतोष पर हमला किया और जान से मारने की नीयत से लगातार मारते हुए कहा कि अगर मर भी जाओगे तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मारपीट के कारण उनका सिर फट गया और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। संतोष कुमार का आरोप है कि अपराह्न करीब 2 बजे उन्हें सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया, जहां सिर में छह टांके लगे। अस्पताल में भी उन्हें धमकाया गया कि डॉक्टर को चोट लगने की सच्चाई न बताएं, अन्यथा उन्हें और उनके परिवार को जेल भेज दिया जाएगा। प्राथमिकी के अनुसार, अस्पताल से लौटने के बाद उन्हें दोबारा ईडी कार्यालय ले जाया गया, जहां साक्ष्य मिटाने की नीयत से जबरन खून से सनी टी-शर्ट उतरवा कर नई टी-शर्ट पहनाई गई। आरोप है कि इसके बाद उनसे इंसिडेंट रिपोर्ट लिखे एक कागज पर जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए, जिसे उन्हें पढ़ने तक नहीं दिया गया।
बिहार के कई जिलों में धूप निकलने के बाद ठंड से राहत जरूर मिली है, लेकिन जल्द ही मौसम फिर बदलेगा। 17 जनवरी को एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ आने वाला है, इससे उत्तर-पश्चिमी हवा की रुख में बदलाव होने की उम्मीद है। पटना सहित पूरे राज्य में सुबह आठ बजे से ही खिली धूप निकल रही है। इससे दोपहर होते-होते मौसम में गर्माहट महसूस हो रही है, लेकिन शाम चार बजते ही ठंड से कनकनी बढ़ जा रही है। मौसम विभाग ने अगले 72 घंटे में प्रदेश का बारिश की संभावना जताई है। इससे तापमान में एक बार फिर गिरावट हो सकती है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 8 जिलों में आज हल्का कोहरा छाया रहेगा। दिन चढ़ने के साथ ही धूप निकलने की संभावना है, लेकिन रात में पछुआ हवा के चलते ठंड बढ़ सकती है। मौसम विभाग की माने तो 18 जनवरी बाद फिर से कड़ाके की ठंड सता सकती है। ठंडी हवा चलने से तापमान में गिरावट आ सकती है। साथ ही बारिश के भी आसार हैं। 21 जनवरी तक प्रदेश में बूंदाबांदी की संभावना बन रही है। इसके बाद मौसम साफ रहने की उम्मीद है। 9 जिलों में 8 डिग्री से नीचे लुढ़का पारा बीते 24 घंटे में 9 जिलों में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। सबसे ठंडे इलाके औरंगाबाद और डेहरी (रोहतास) रहे, जहां न्यूनतम तापमान 7.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा गया में 7.2 डिग्री, बक्सर में 7.4 डिग्री, जहानाबाद में 7.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। मौसम वैज्ञानिकों ने क्या कहा मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल उत्तर भारत में सक्रिय ठंडी हवाओं की तीव्रता में कमी आई है। इसी कारण न्यूनतम तापमान में बड़ी गिरावट नहीं हो रही है। वैज्ञानिकों ने बताया कि वातावरण में नमी की मात्रा अधिक होने और हवाओं की रफ्तार कम रहने के कारण कोहरे की स्थिति बन रही है। यही वजह है कि उत्तर और उत्तर-पूर्व बिहार के जिलों में कोहरा अधिक देखने को मिल रहा है। 18 जनवरी के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके प्रभाव से पश्चिम और उत्तर-पश्चिम बिहार के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बन रही है। बारिश होती है तो 20 जनवरी के बाद तापमान में फिर से गिरावट आ सकती है। ठंड एक बार फिर बढ़ सकती है। ऐसे में जो राहत फिलहाल महसूस की जा रही है, वह पूरी तरह स्थायी नहीं मानी जा सकती। पटना में आज कैसा रहेगा मौसम राजधानी में मौसम सामान्य है, दिन में धूप और शाम-रात में कनकनी रहती है। आज भी सुबह में हल्का कोहरा छा सकता है, जबकि दिन में धूप निकलने से लोगों को राहत मिलेगी। पटना में न्यूनतम तापमान में ज्यादा गिरावट की संभावना नहीं है। तापमान 10 से 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है। आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार अगले 3-4 दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य रहेगा। दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि रात के तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कोहरे का असर खासतौर पर सीमावर्ती जिलों में देखने को मिल सकता है।
झारखंड में नगर निगम को दो वर्गों में बांटने पर सुनवाई पूरी, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
झारखंड के नगर निगम को दो वर्गों में बांटने के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ता शांतनु कुमार चंद्रा की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संविधान में नगर निगमों के वर्गीकरण का कोई प्रावधान नहीं है। राज्य सरकार ने संविधान के खिलाफ जाकर नगर निगम का वर्गीकरण किया है। राज्य सरकार कार्यपालक आदेश जारी कर इस तरह के प्रावधान को लागू नहीं कर सकती। लेकिन सरकार ने नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर कुल 9 नगर निगम को दो भागों वर्ग क आैर वर्ग ख में बांट दिया है। वर्ग क में रांची-धनबाद को रखा गया है। वर्ग ख में अन्य नगर निगम को रखा गया है। इस आदेश को रद्द किया जाना चाहिए। धनबाद में मेयर का पद अनारक्षित करने पर भी आपत्ति याचिकाकर्ता ने जनसंख्या के आधार पर धनबाद में मेयर का पद अनारक्षित करने और गिरिडीह नगर निगम को आरक्षित करने पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट को बताया गया कि राज्य में वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर नगर निकाय चुनाव कराया जा रहा है। वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार धनबाद में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 2 लाख है। इसलिए वहां मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होना चाहिए था। लेकिन धनबाद में मेयर का पद अनारक्षित कर दिया गया। वहीं, गिरिडीह में अनुसूचित जाति की जनसंख्या मात्र 30 हजार है, लेकिन वहां मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। सरकार की यह नीति भी संविधान के खिलाफ है। कोर्ट के फैसले से प्रभावित हो सकती है चुनाव प्रक्रिया राज्य के कुछ नगर निकायों का तीन साल तो कुछ का पांच साल पहले ही कार्यकाल पूरा हो गया है। निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट को बताया है कि 30 मार्च से पहले चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे। लेकिन अगर हाईकोर्ट का फैसला सरकार के वर्गीकरण या आरक्षण नीति के खिलाफ आता है तो चुनाव प्रक्रिया टल सकती है या फिर इसमें बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।
रांची समेत राज्य के सभी जिलों में वर्ष 2023 में नियुक्त 4449 हाईस्कूल शिक्षक अब तक अपनी सेवा के 24 महीने पूरे कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा कंफर्म नहीं की गई है। नियम के अनुसार, नियुक्ति के बाद अधिकतम दो साल की प्रोबेशन अवधि होती है। इस अवधि में सेवा संतोषजनक रहने पर शिक्षक की नौकरी स्थायी (कंफर्म) की जानी चाहिए। दो साल बीत जाने के बाद भी सैकड़ों शिक्षक अब तक तकनीकी रूप से अस्थायी माने जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि उनके खिलाफ न कोई विभागीय जांच चल रही है, न कोई कोर्ट का स्टे है और न ही सेवा से जुड़ी कोई समस्या। इसके बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ रहीं। निदेशालय ने पत्र लिखा, जिलों ने सूची नहीं भेजी हाईस्कूल शिक्षकों के कंफर्मेशन को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों को पत्र लिखकर कंफर्म होने वाले शिक्षकों की सूची मांगी थी। इसके बावजूद अधिकांश जिलों ने अब तक सूची नहीं भेजी है। इससे साफ है कि मामला जिला स्तर पर ही अटका हुआ है। 3 चरण में हुई थी नियुक्ति 18 मई 2023 : 3459 शिक्षक 16 अक्टूबर 2023 : 827 शिक्षक 10 दिसंबर 2023 : 163 शिक्षक कंफर्मेशन नहीं होने से तीन बड़ी परेशानियां {तबादला नहीं हो पा रहा: सेवा कंफर्म होने के बाद ही शिक्षक तबादला प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। कंफर्मेशन न होने से वे वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। इससे परिवार, बच्चों की पढ़ाई और निजी जीवन पर असर पड़ रहा है। {बैंक लोन में दिक्कत: अधिकांश बैंक स्थायी (कंफर्म) नौकरी को ही लोन का आधार मानते हैं। प्रोबेशनर होने के कारण शिक्षकों को होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य वित्तीय सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। {करियर व प्रमोशन पर असर: कंफर्म पद पर रहते हुए ही शिक्षक एनओसी लेकर उच्च पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। कंफर्मेशन न होने से प्रमोशन, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर ग्रोथ पर सीधा असर पड़ रहा है। जानिए... क्या कहता है स्थायी करने का नियम {नियुक्ति के बाद शिक्षक को अधिकतम 2 साल के लिए प्रोबेशन पर रखा जाता है। {इस अवधि में कार्य संतोषजनक रहने पर कंफर्मेशन आदेश जारी करना जरूरी है। {कंफर्मेशन की प्रक्रिया जिला स्थापना समिति के माध्यम से पूरी करनी होती है। {बिना कारण देरी होना प्रशासनिक लापरवाही माना जाता है।
झारखंड ने 2 स्वर्ण और 1 रजत पर कब्जा जमाया
रांची मणिपुर के खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 14 से 18 जनवरी तक आयोजित 69वीं राष्ट्रीय स्कूली तीरंदाजी प्रतियोगिता (स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया- एसजीएफ आई) अंडर-19 वर्ग में झारखंड के खिलाड़ियों ने पहले ही दिन शानदार शुरुआत करते हुए दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया है। झारखंड की उभरती तीरंदाज प्रिया महली ने 30 मीटर और 40 मीटर इंडियन राउंड में बेहतरीन निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं, बालक वर्ग में घनश्याम झामुड़ा ने 30 मीटर इंडियन राउंड में शानदार प्रदर्शन कर रजत पदक हासिल किया। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से पूरे राज्य में खुशी की लहर है। झारखंड की टीम स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के नेतृत्व में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग ले रही है। टीम के साथ गए कोच और मैनेजर रोहित कुमार, गंगाधर, ललिता लुगुन, प्रवीण बजराई एवं एचओडी सुशील कच्छप ने खिलाड़ियों को तकनीकी मार्गदर्शन और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका असर पहले दिन के प्रदर्शन में साफ नजर आया। प्रिया महली की दोहरी स्वर्णिम सफलता पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी धीरसेन ए. सोरेंग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह सफलता झारखंड की अन्य बालिका खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। इस शानदार उपलब्धि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह, परियोजना निदेशक शशि रंजन, प्रशासकीय पदाधिकारी सच्चिदानंद द्विवेदी तिग्गा, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी धीरसेन ए. सोरेंग सहित राज्य खेल कोषांग के सदस्यों ने खिलाड़ियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कहा कि इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा ।
मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को दही-चूड़ा का भोज देकर राजद प्रमुख लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने शक्ति प्रदर्शन किया। इस मौके पर लालू परिवार में टूट साफ दिखी। पिता लालू प्रसाद यादव तेज प्रताप के घर पहुंचे, लेकिन निमंत्रण देने पर भी मां राबड़ी देवी, भाई तेजस्वी यादव और बहनें नहीं आईं। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए, बड़े भाई के घर नहीं जाकर तेजस्वी यादव ने कौन से 5 बड़े मैसेज दिए? परसेप्शन की लड़ाई में तेजप्रताप किस तरह तेजस्वी से आगे निकले? तेजप्रताप तेजस्वी से कैसे आगे निकले, 3 पॉइंट तेजस्वी यादव क्यों भोज में नहीं गए, 5 कारण दही-चूड़ा भोज से तेजप्रताप ने किया शक्ति प्रदर्शन तेजप्रताप ने दही-चूड़ा भोज से शक्ति प्रदर्शन किया है। पटना के राजनीतिक गलियारे में इसकी खूब चर्चा रही। उनके घर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद, भाजपा नेता व डिप्टी CM विजय सिन्हा, जदयू नेता अशोक चौधरी, पशुपति पारस, आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद, साधु यादव और प्रभुनाथ यादव समेत कई खास लोग पहुंचे। तेजप्रताप ने रात 9 बजे तक किया तेजस्वी का इंतजार तेजप्रताप ने तेजस्वी यादव को भी भोज का न्योता दिया था, लेकिन वह नहीं आए। वह रात 9 बजे तक छोटे भाई का इंतजार करते रहे। बुधवार को मीडियाकर्मी ने तेजस्वी के नहीं आने पर पूछा तो कहा कि रात के 9 बजे तक तेजस्वी का इंतजार करूंगा। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ चुनाव लड़ेंगे या खिलाफ? इस सवाल पर तेजप्रताप ने कहा, ‘साथ कैसे लड़ेंगे? खिलाफ में ही लड़ेंगे न। ममता दीदी अभी जयचंदों के गिरोह में हैं।’ खिड़की बंद नहीं की जाती तेजप्रताप के भोज में यह भी दिखा कि राजनीति में अक्सर खिड़कियां खुली रखी जाती हैं। आप मान सकते हैं कि आरजेडी की तरफ से लालू प्रसाद पहुंचे। जेडीयू की तरफ से अशोक चौधरी और बीजेपी की तरफ से विजय सिन्हा। विधानसभा चुनाव में पशुपति पारस को न तो एनडीए ने पूछा न महागठबंधन ने। वह भी तेजप्रताप के भोज में पहुंचे। सीएम नीतीश कुमार ने कार्ड रखवा लिया था, लेकिन वह नहीं गए। गाना के साथ परोसा गया दही-चूड़ा तेजप्रताप यादव ने भोज के मौके पर गायकों के लिए मंच भी सजाया था। लोग गानों का आनंद लेते रहे और दही-चूड़ा खाते रहे। इस गाना को लोग खूब गौर से सुनते रहे- ‘किया जो वादा था वह निभाऊंगा, मैं वापस आऊंगा…..क्योंकि ये घर सूना-सूना है…’। लालू के दही-चूड़ा भोज से कितना अलग दिखा तेजप्रताप का भोज मकर संक्रांति पर लालू यादव का दही-चूड़ा भोज चर्चा में रहता था। इसमें साथी दलों के नेता के साथ ही विरोधी भी आते थे। हजारों आम लोग और पार्टी कार्यकर्ता खाते थे। किसी को रोक नहीं। सबके लिए खाने की करीब-करीब एक जैसी व्यवस्था। लालू के घर के दरवाजे आम आदमी से लेकर खास तक, सभी के लिए खुले होते थे। तेजप्रताप ने जब दही-चूड़ा का भोज दिया तो लोगों को लालू के भोज की याद आ गई। हालांकि दोनों के आयोजन में बड़े अंतर साफ नजर आए। तेजप्रताप के घर का गेट सभी के लिए पूरी तरह नहीं खुला। दो तरह का इंतजाम दिखा। खास के लिए अलग, आम के लिए अलग। एक तरफ पटना के एक बड़े होटल की ओर से बेहतरीन कैटरर्स वाली व्यवस्था थी। बैरे सर्व कर रहे थे। खास व्यवस्था में रबड़ी, गाजर का हलवा, पनीर की सब्जी, कचौड़ी, मिठाई आदि व्यंजन थे। दूसरी तरफ आम लोगों के लिए दही-चूड़ा तिलकुट, गुड़ और आलू-गोभी-मटर की सब्जी थी। खास व्यवस्था में आम लोगों का प्रवेश वर्जित था। लालू प्रसाद के समय ऐसा नहीं था। वीआईपी के बैठने की अलग व्यवस्था जरूर होती थी, लेकिन आम और खास बिल्कुल अलग नहीं किए जाते थे। लालू यादव खुद परोसते थे खाना, लगाते थे दही का टीका लालू प्रसाद का भोज पंगत का सुख देता था। वह खुद खाना परोसते थे। बिहार के विभिन्न हिस्सों से आए कार्यकर्ताओं को नाम से पुकार-पुकार कर दही परोसते थे। कई दिन पहले से लोग चूड़ा, दूध, तिलकुट, गुड़, आलू प्याज, गोभी लेकर पहुंचने लगते थे। लालू और राबड़ी की निगरानी में दही घर पर ही जमाया जाता था। भोज के दूसरे दिन लालू अलग से अल्पसंख्यकों को दही-चूड़ा का भोज देते थे। इस तरह राजनीति में लालू प्रसाद ने दही-चूड़ा को सामाजिकता का बड़ा पर्व बना दिया। दो दिन पहले से लोगों के पास लालू यादव का फोन आने लगता था। किसी एक को लालू अपने पास बैठाते और वह फोन लगा-लगा कर उन्हें देता। लालू कहते-दही चूड़ा के भोज बा, सब के आबे के बा.. अहिअ सब लोग…। भोज में लालू द्वारा लगाया जाने वाला दही का टीका भी खूब पॉपुलर हुआ। एक बार तो उन्होंने नीतीश कुमार को भी दही का टीका लगाया था। इसे विजय-तिलक का सिंबल माना जाता रहा। खास लोगों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करने में व्यस्त रहे तेजप्रताप तेजप्रताप यादव की व्यस्तता खास लोगों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करने में ज्यादा रही। लालू प्रसाद, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, पशुपति पारस से लेकर दोनों मामा सुभाष और साधु यादव को उन्होंने सम्मानित किया। लालू ने सुभाष और साधु से आरजेडी को वर्षों पहले मुक्त कर लिया था। दोनों तेजप्रताप के काफी निकट दिखते रहे। इस साल राबड़ी आवास में क्यों नहीं हुआ दही-चूड़ा भोज इस साल राबड़ी देवी आवास पर दही-चूड़ा का भोज नहीं हुआ। इसकी वजह लालू परिवार का केस-मुकदमा में उलझा होना है। तेजस्वी यादव यूरोप यात्रा से लौटे तो जरूर, लेकिन कोर्ट के चक्कर में पड़े रहे। इसके चलते दही-चूड़ा भोज की तैयारी नहीं हो पाई। विधानसभा चुनाव में पार्टी और महागठबंधन की करारी हार से कार्यकर्ताओं में भी वैसा उत्साह नहीं दिख रहा। तेजप्रताप चुनाव हारे, मुश्किल समय को अवसर में बदलने में जुटे तेजप्रताप यादव महुआ से विधानसभा चुनाव हार गए थे। उनकी पार्टी का एक भी प्रत्याशी नहीं जीत सका। वह मुश्किल के इस समय को अवसर में बदलने में जुटे हैं। उनके चेहरे पर खूब मुस्कान दिख रही है। तेजप्रताप ने पूरे जोश के साथ घूम-घूम कर दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया। भाजपा के नेताओं को भी कार्ड दिया, उनके साथ फोटो खिंचवाई। सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। तेजप्रताप भविष्य की ओर देख रहे हैं। दही-चूड़ा भोज में जनशक्ति जनता दल की खूब ब्रांडिंग की। बैनर से लेकर पानी के बोतल तक पर पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह दिखा।
शादी से पहले उम्र और आपराधिक पृष्ठभूमि छिपाना पति के साथ मानसिक क्रूरता : हाईकोर्ट
चाईबासा सदर अस्पताल में नाबालिग बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में पुलिस के प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। पीड़ित परिवार के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा है कि यह गंभीर लापरवाही का मामला है, जो बच्चों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने लापरवाही के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की है, जबकि यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों और रक्त सुरक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है। इसलिए इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाए। विशेष संवाददाता|रांची झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े फैमिली कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दाखिल मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि विवाह से पहले पत्नी द्वारा अपनी उम्र और आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना पति के साथ मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। अदालत ने कहा है कि ऐसी स्थिति में वैवाहिक संबंध निभाना संभव नहीं है। अदालत ने इस निर्देश के साथ तलाक के खिलाफ पत्नी की अपील याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट के तलाक दिए जाने के आदेश को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का निर्णय न तो मनमाना है और न ही साक्ष्यों के विपरीत। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह विश्वास पर आधारित होता है और यदि शुरुआत में ही महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया जाए, तो यह मानसिक क्रूरता मानी जाएगी। ऐसे में फैमिली कोर्ट के आदेश में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की जरुरत नहीं है। गुमला जिले से जुड़े इस मामले में पति ने वर्ष 2022 में फैमिली कोर्ट गुमला में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 के तहत तलाक की याचिका दाखिल की थी। पति ने आरोप लगाया था कि 15 अप्रैल, 2019 को हुई शादी से पहले पत्नी ने अपनी वास्तविक उम्र और आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई। पति का कहना था कि पत्नी की उम्र लगभग 40 वर्ष थी जबकि शादी के समय 27 वर्ष बताई गई। इसके अलावा पत्नी हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुकी थी और जमानत पर बाहर थी। इस बात की जानकारी भी विवाह से पहले नहीं दी गई। पति ने आरोप लगाया कि शादी के बाद पत्नी उसे और उसके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देती थी। हालांकि, सुनवाई दौरान पत्नी ने फैमिली कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों में आरोपों से इंकार किया। लेकिन अदालत ने पत्नी की ओर से दाखिल अपील याचिका को खारिज कर दिया। रांची| झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को भाजपा नेता अनिल टाइगर हत्याकांड में अंतिम जमानत मिलने के बावजूद एक युवक को अगवा करके अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की अदालत ने सरकार से पूछा कि युवक को कब हिरासत में लिया गया और कब छोड़ा गया ? किस मामले में और कब उसे खूंटी थाना भेजा गया? इस दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद कांके थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। थाना प्रभारी ने स्पष्टीकरण दे दिया है। इस पर अदालत ने पुलिस को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की है। अदालत ने युवक के परिजनों को खूंटी कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर रांची के एसएसपी, कांके और खूंटी के थाना प्रभारी कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए। थाना प्रभारी की ओर से अदालत को बताया गया कि देवव्रत नाथ शाहदेव को न तो अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और न ही किसी प्रकार की जबरदस्ती की गई। कांके थाना क्षेत्र के एक मामले में देवव्रत नाथ शाहदेव अप्राथमिक अभियुक्त है। इस मामले में उन्हें अग्रिम जमानत मिली है। इस कांड का मुख्य अभियुक्त अभिषेक सिन्हा उर्फ सूरज सिन्हा फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि देवव्रत नाथ शाहदेव का संपर्क फरार अभियुक्त से बना हुआ है। वह उसे आर्थिक सहयोग भी दे रहा है। साक्ष्य को प्रभावित करने और गवाहों को धमकाने की भी आशंका जताई गई है। मालूम हो कि देवव्रत नाथ शाहदेव के पिता दामोदर नाथ शाहदेव ने हैवियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दाखिल की है। मंगलवार को मामले पर सुनवाई हुई थी।
भागीरथपुरा में दूषित जल ने 23 लोगों की जिंदगी छिन ली। कई लोग आज भी इस दूषित पानी के कारण अस्पताल में भर्ती है, जबकि 3 लोग अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। सैकड़ों लोग अस्पताल में अपना इलाज करा चुके हैं। अब भागीरथपुरा में नर्मदा और ड्रेनेज का काम तेजी से किया जा रहा है। हालांकि इस काम के चलते रास्ते उबड़-खाबड़ जरूर हो गए है, लेकिन लोगों को उम्मीद है कि इस काम से उनके यहां हुई त्रासदी से मुक्ति मिल जाएगी। इधर, गुरुवार को इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। चौकी के सामने भी शुरू हुआ काम, अंदर भी ऐसे ही हालत भागीरथपुरा टंकी के पास बने गार्डन और भागीरथपुरा चौकी के सामने वाली रोड पर नर्मदा की लाइन डालने का काम शुरू हो गया है। नर्मदा के पाइप डालने के लिए यहां पर जेसीबी से सड़क खोदी जा रही थी। साथ ही यहां पर लाइन डालने के लिए पाइप रखे हुए थे। यहां काम करने वालों का कहना था कि नर्मदा की लाइन डालने का काम किया जा रहा है।यहीं से थोड़ा आगे बढ़ने पर भागीरथपुरा के अंदर जाने पर भी ड्रेनेज और नर्मदा लाइन का काम किया जा रहा था। यहां एक चाय की दुकान के सामने से जा रही रोड पर जेसीबी से जो खुदाई कर लाइन डाली गई, उसे भरने का काम चल रहा था। जिसके कारण यहां से लोगों की आवाजाही लगभग ना के बराबर ही थी। रास्ता बंद होने के कारण लोग गलियों से आना-जाना करते नजर आए। इससे आगे बढ़ने पर अंदर जहां आयुष्मान आरोग्य मंदिर बना है। उसके सामने भी लाइन डालने का काम किया गया। उससे थोड़ा आगे बढ़ने के बाद स्थिति ऐसी थी कि रोड़ पर कीचड़ फैला हुआ था। जगह-जगह रोड उबड़-खाबड़ हो रही थी। जिससे दो पहिया वाहन चालकों के साथ ही पैदल चलने वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। 5 याचिकाओं पर आज एक साथ सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़े मामलों में दायर 5 याचिकाओं पर आज 15 जनवरी को एक साथ सुनवाई होगी l पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार के जवाब को असंवेदनशील बताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि स्वच्छ पेयजल केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय की जाएगी। कहा गया कि यदि पीड़ित परिवारों को मुआवजा कम मिला है, तो उस पर भी अदालत निर्देश दे सकती है।खास बात यह कि पिछले सुनवाई में मामले में 18 मौत हो चुकी थी जबकि हम म्यूट का आंकड़ा 23 तक पहुंच गया है और तीन मरीज वेंटिलेटर पर हैl 8 मरीजों का आईसीयू में चल रहा इलाज स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के मुताबिक गुरुवार को इंडेक्स आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की मदद से हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। एक मरीज डायरिया का मिला, जिसे भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। वहीं भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुरुवार को 3 मरीज डायरिया की शिकायत लेकर पहुंचे थे, जिनका वहीं उपचार किया गया। देखा जाए तो वर्तमान में अस्पतालों में 27 मरीज भर्ती है, इनमें से 8 आईसीयू में है और इनमें 3 वेंटिलेटर पर है। जिनका इलाज चल रहा है। ये खबर भी पढ़ें... भागीरथपुरा हादसा : अभी भी 33 मरीज एडमिट भागीरथपुरा दूषित पानी के मामले में मंगलवार को डायरिया के 5 मरीज सामने आए। हालांकि गंभीर नहीं होने से उन्हें सामान्य ट्रीटमेंट ही दिया गया। अस्पताल में एडमिट मरीज 39 से घटकर 33 हो गए हैं। इनमें से 10 आईसीयू में हैं। इनमें से तीन मरीज लंबे समय से वेंटिलेटर पर हैं और उनकी हालत में खास सुधार नहीं हुआ है।पूरी खबर पढ़ें
गुब्बारे बेचने वाले बिहार के दंपती ने किया था अंश-अंशिका का अपहरण
धुर्वा के मौसीबाड़ी से अपहृत अंश कुमार (5) और उसकी बहन अंशिका कुमारी (4) को बुधवार सुबह रांची पुलिस ने रामगढ़ के अहमद नगर स्थित एक घर से बरामद कर लिया। पुलिस ने दोनों के अपहरण के आरोपी नव खेरवार उर्फ सूर्या (24) और उसकी प|ी सोनी कुमारी (20) को गिरफ्तार कर लिया है। नव खेरवार बिहार के औरंगाबाद के बारून का निवासी है, जबकि सोनी कुमारी रामगढ़ के कोठार की रहने वाली है। ये दोनों धुर्वा के शालीमार बाजार में गुब्बारे बेचते थे। अंश और अंशिका 2 जनवरी को पिता से 10 रुपए लेकर घर के पास ही एक दुकान से चूड़ा खरीदने निकले थे। पांच रुपए में लॉलीपॉप खरीदकर दोपहर करीब 2:35 बजे लौट रहे थे। तभी नव खेरवार और सोनी ने दोनों को उठा लिया। दो दिन तक दोनों बच्चों को उसके घर से करीब एक किमी दायरे में ही छिपाकर रखा। फिर चुपचाप वहां से निकल गए। इधर पुलिस बच्चों की तलाश में खाक छानती रही। बुधवार सुबह सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक और रांची एसएसपी राकेश रंजन को बच्चों के चितरपुर के अहमद नगर में होने की सूचना मिली। इसके बाद रामगढ़ एसपी अजय कुमार ने वहां छापेमारी कर दोनों बच्चों को बरामद कर लिया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस को पता चला है कि ये दोनों अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा-अपहरणकर्ताओं के चंगुल से आजाद हुई दो मासूम जिंदगियांसीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा-अपहरणकर्ताओं के चंगुल से आजाद हुई दो मासूम जिंदगियां। आखिर कोई इतना कैसे गिर सकता है। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए पिछले कुछ दिन परेशान करने वाले रहे। शुरुआत में सफलता नहीं मिल रही थी, फिर जिस ढंग से दूसरे राज्य में हुई इसी ढंग की घटना के तार जोड़कर रांची पुलिस ने अपराधियों तक पहुंचकर बच्चों को मुक्त कराया, वह प्रशंसनीय है। मैं इस अभियान को यहीं पर नहीं छोड़ रहा। ऐसी घटनाओं की गहन पड़ताल करते हुए आपराधिक गिरोह की कमर तोड़ने की कार्रवाई करेंगे। पास, 3 दिन हटिया रेलवे स्टेशन के पास बच्चों को रखाअपहर्ताओं ने अपहरण के बाद दोनों बच्चों को दो दिन तक उसके घर से महज एक किमी दूर शालीमार बाजार के पास छुपाकर रखा। फिर ऑटो से दोनों बच्चों को लेकर हटिया स्टेशन पहुंचा। तीन दिन तक स्टेशन के पास ही बच्चों के साथ रहा। सात जनवरी को दोनों आरोपी बच्चों को लेकर ट्रेन से रामगढ़ पहुंचे। वहां से चितरपुर के अहमद नगर गए। वहां रोशन आरा के घर किराए पर कमरा लिया, जहां दोनों बच्चों के साथ रह रहे थे। बच्चे भी उनके साथ आराम से रह रहे थे, इसलिए किसी को शक नहीं हुआ। लेकिन मुखबिरों को सूचना मिल गई और वे पकड़े गए। डीजीपी बोलीं- 500 सीसीटीवी फुटेज खंगाले, 5000 वाहनों का हुआ सत्यापन डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि बच्चों को ढूंढ़ने के लिए रांची के ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई थी। इसमें सिटी एसपी व ट्रैफिक एसपी सहित 48 अधिकारी थे। इस टीम ने 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। 5000 से ज्यादा गाड़ियों का सत्यापन किया। बच्चों की सूचना देने वालों को चार लाख रुपए इनाम देने की भी घोषणा की गई। इस संबंध में रोजाना 1000 से ज्यादा फोन कॉल पुलिस को आए। कई राज्यों में ऐसे मामलों से संबंधित अभियुक्तों की छानबीन की गई। झारखंड में महत्वपूर्ण स्थलों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, ऑटो स्टैंड और हाट-बाजार की छानबीन की गई। पूरे मामले की निगरानी खुद सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक कर रहे थे। उन्होंने पूरे देश में ह्यू एंड क्राई नोटिस भी जारी किया। दो दिन शालीमार बाजार के मकान मालकिन बोलीं-गरीब जानकर किराए पर कमरा दिया पुलिस ने मकान मालिकन रोशन आरा और उनकी नतिनी से भी पूछताछ की। रोशन ने कहा-उन दोनों ने खुद को पति-प|ी बताया। कहा कि वे पटना में फेरी का काम करते थे। घर टूट जाने के कारण यहां आए हैं। उनके साथ दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। हमने गरीब समझकर उन्हें 1000 रुपए के किराए पर उन्हें कमरा दे दिया। बच्चे अपने माता-पिता के साथ अपहरण के आरोपी पुलिस ने अपहरण के आरोपी नव खेरवार और उसकी प|ी को किया गिरफ्तार
आदित्य साहू प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष
राज्यसभा सदस्य और प्रदेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू को बुधवार को झारखंड भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। केंद्रीय मंत्री व प्रदेश चुनाव अधिकारी जुएल उरांव ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में इसकी घोषणा की। आदित्य साहू अब अगले तीन वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी की झारखंड इकाई का नेतृत्व करेंगे। जुएल उरांव ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केवल एक ही नामांकन प्राप्त हुआ था, जो आदित्य साहू का था। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय परिषद की 21 सीटों के लिए भी 21 नेताओं को निर्वाचित घोषित किया। - पेज दो भी पढ़ें राष्ट्रीय परिषद के 21 सदस्य निर्वाचित झारखंड से राष्ट्रीय परिषद के लिए जिन नेताओं को निर्वाचित किया गया, उनमें कड़िया मुंडा, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, मधु कोड़ा, संजय सेठ, अन्नपूर्णा देवी, अभयकांत प्रसाद, यदुनाथ पांडेय, पशुपति नाथ सिंह, रवींद्र कुमार राय, दिनेशानंद गोस्वामी, दीपक प्रकाश, प्रदीप वर्मा, समीर उरांव, अनंत ओझा, गीता कोड़ा, अमर कुमार बाउरी, नीलकंठ सिंह मुंडा, भानु प्रताप शाही और जीतू चरण राम शामिल हैं। जनता का भरोसा भाजपा पर: आदित्य प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद आदित्य साहू ने कहा कि हमें एक साथ दो-दो जिम्मेवारी निभानी है। संगठन को और मजबूत करना है। दूसरी ओर राज्य की भ्रष्ट सरकार की सत्ता से जनता को मुक्ति दिलानी है। जनता को अब भी भाजपा पर ही भरोसा है।
वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को तोड़ा जा रहा है। यहां रखी मूर्तियों में भी टूट-फूट हुई है। यह जानकारी लगने के बाद खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट के प्रेसीडेंट यशवंतराव होलकर तृतीय आज घाट पर पहुंचे। उन्होंने प्रतिमाओं की पूजा कर सफेद कपड़े से ढंक दिया ताकि उन्हें नुकसान न पहुंचे। उन्होंने वाराणसी के निगमायुक्त, संभागायुक्त और अन्य अफसरों से मुलाकात कर वस्तुस्थिति बताई। यशवंतराव होलकर ने कहा कि क्षतिग्रस्त मूर्तियां हमें सौंप दी जाए, ताकि हम उन्हें यहां फिर से स्थापित कर सकें, जिससे लोगों की श्रद्धा बनी रहे। वाराणसी के कलेक्टर सत्येंद्र ने कहा कि घाट की मूर्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्हें सुरक्षित रखा गया है। कुछ लोग AI से घाट के गलत वीडियो बनाकर जारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ट्रेस किया जा रहा है। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए हर साल लाखों लोग आते हैं। जगह की कमी रहती है और सफाई व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई आती है। उन समस्याओं को देखते हुए परियोजनाओं को विकसित किया गया है। प्रशासन ने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मूर्तियों को उसी स्थान पर लगाया जाएगा। मणिकर्णिका का घाट पर कलाकृतियां को संरक्षित कराया गया है। जो इसे लेकर भ्रम फैला रहे हैं उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर उन पर कार्रवाई भी की जाएगी। यशवंतराव बोले- घाट की हालत खराब, हमने मांगी प्रतिमाएंइधर, यशवंतराव होलकर ने वाराणसी से वीडियो जारी कर घटनाक्रम के बारे में बताया और कहा कि स्थानीय प्रशासन से पूरा सहयोग मिल रहा है। वीडियो में उन्होंने आगे कहा कि 'मणिकर्णिका घाट पर मां अहिल्या देवी द्वारा विकसित घाट की तोड़फोड़ के बाद आज मैं यहां काशी आया हूं। आज उसकी हालत क्या हो गई है, मेरे पीछे देख सकते हैं। स्थानीय प्रशासन संभागायुक्त और निगमायुक्त से मुलाकात कर घटनाक्रम की जानकारी दी है। मैंने उनसे मांग की है कि इस घटना की जांच की जाए। जो जिम्मेदार लोग हैं, उन पर कार्रवाई की जाए। ये सबसे महत्वपूर्ण बात है कि मां साब की चार प्राचीन प्रतिमा जो मां साब ने खुद स्थापित की थी, अब दो बची है। तोड़फोड़ के बाद सरकार ने उन प्रतिमाओं को सुरक्षित कर लिया है। हमने प्रशासन से मांग की है कि इन प्रतिमाओं को खासगी ट्रस्ट को सौंप दिया जाए। ताकि हम सही ढंग से उन्हें मंदिर में रख सकें। अफसरों ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। हम मां से प्रार्थना करते हैं कि जिन लोगों ने ये गलती की है उन्हें माफ करें। और हम इस प्राचीन घाट को फिर से बनाएं।' इंदौर के इतिहासकार बोले- देवी अहिल्या द्वारा विकसित घाटों में ये प्रमुखइंदौर के इतिहासकार और समाजसेवी सुनील मतकर ने दैनिक भास्कर को बताया कि देवी अहिल्या बाई होलकर ने देशभर में कई घाटों का निर्माण और मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया है। इनमें मणिकर्णिका घाट प्रमुख है। देवी अहिल्या बाई होलकर द्वारा विकसित किए जाने के कारण इसके लिए हमारी आस्था और बढ़ जाती है। प्रशासन द्वारा यहां जो कार्रवाई की गई है हम उसका विरोध करते हैं। मूर्तियों को संरक्षित किया जाए और इन्हें फिर से स्थापित किया जाए इसके लिए क्षत्रिय धनगर समाज की ओर से गुरुवार शाम को बैठक रखी गई है। इसमें हम आगे की रणनीति तय करेंगे। यह है पूरा मामला वाराणसी के मणिकर्णिका महाश्मशान घाट के पुनर्विकास का कार्य चल रहा। संस्था ने घाट पर निर्माण का कार्य शुरू किया है। इस बीच पक्के घाटों के पत्थरों को तोड़ा जा रहा है। उन्हें बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेजा जा रहा। वहीं, इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद 300 साल पुरानी मणि (पत्थर की बनी हुई संरचना) भी हटाई गई है। लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन, प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर कर शांत कराया। विरोध की सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अब जानिए क्या है प्रोजेक्ट 18 करोड़ से मिलेगा नया स्वरूप मणिकर्णिका का पुनर्विकास कार्य CSR फंड से 18 करोड़ रुपए में किया जाना है। इससे नगर निगम की देख-रेख में कार्यदायी संस्था बना रही है। संस्था के अधिकारियों के अनुसार, 29 हजार 350 वर्गमीटर एरिया में काम कराया जाना है। यहां की मिट्टी दलदली है। इसलिए 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग कराई गई है। सख्त मिट्टी तक पाइलिंग का काम किया गया है। जिससे बाढ़ में यहां के निर्माण में किसी भी तरह की दिक्कत न हो। 25 मीटर ऊंची चिमनी बनेगी ताकि घरों तक न पहुंचे राख इस श्मशान घाट पर 25 मीटर ऊंची चिमनी लगाई जाएगी। जिससे चिता की रखा हवा के साथ उड़ जाए और आसपास रहने वाले लोगों के घरों में न जाए। कायाकल्प में शवों के स्नान के लिए पवित्र जलकुंड, अपशिष्ट ट्रॉलियां, मुंडन क्षेत्र होंगे। चारों तरफ से कवर दाह संस्कार क्षेत्र में पांच बर्थ, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था, सीढ़ियां, वेटिंग एरिया, भूतल पर पंजीकरण कक्ष, खुले में दाह संस्कार के लिए 18 प्लेटफॉर्म, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षाकक्ष, दो सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। यहां पूरा निर्माण कार्य चुनार और जयपुर के पत्थरों से किया जाएगा। 84 प्रमुख घाटों में शामिल है मणिकर्णिका मणिकर्णिका काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। यह देवी अहिल्याबाई होल्कर के बनाए 5 घाटों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी जगह पर भगवान विष्णु की मणि गिरी थी, जिससे इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा। घाट पर पारंपरिक स्थापत्य, ऐतिहासिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। देवी अहिल्याबाई ने यहां तीर्थयात्रियों के लिए कई सुविधाओं का विकास कराया था। अब जानिए मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के बारे में ये खबर भी पढ़ें... इंदौर में सज्जन सिंह वर्मा ने दिया धरना वाराणसी (काशी) में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को ध्वस्त करने से पूरे देश के साथ-साथ इंदौर में भयंकर जनाक्रोश पैदा कर दिया है। इंदौर शहर कांग्रेस के नेतृत्व में आज राजबाड़ा स्थित देवी अहिल्या प्रतिमा के समक्ष विशाल मौन धरना आयोजित किया गया। कांग्रेस द्वारा आयोजित मौन धरने मे मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने इस घटना पर कहा कि यह भाजपा सरकार का सनातन आस्था पर सीधा और घिनौना प्रहार है।पूरी खबर पढ़ें
भागीरथपुरा में दूषित पानी से लगातार मौतें हो रही हैं। अकसर लोग दूषित पानी के कारण होने वाली समस्या को पेट की बीमारी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर किडनी और लिवर पर होता है। दूषित पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों को चपेट में ले लेते हैं। कई बार ऑर्गन फेल्योर की स्थिति बन जाती है। एक्सपर्ट्स की संयुक्त राय है कि दूषित पानी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर को धीरे-धीरे बीमार करने वाली समस्या है। शुरुआत उल्टी-दस्त से, फिर किडनी व लिवर तक पहुंच जाता है संक्रमण बच्चों पर असर ज्यादा खतरनाकपीडियाट्रिशियन बताते हैं कि बच्चों का शरीर दूषित पानी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। बार-बार डायरिया से उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। वहीं फ्लोराइड और आर्सेनिक जैसे रसायन हड्डियों, दांतों और त्वचा को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। 27 मरीजों का अस्पताल में इलाज जारी, 8 आईसीयू में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार क्षेत्र में संक्रमण के 3 नए मरीज सामने आए हैं। फिलहाल शहर के विभिन्न अस्पतालों में 27 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 8 की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया है। अब तक 440 मरीज पहुंचे अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 24 दिसंबर से अब तक कुल 440 मरीजों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है। राहत की बात यह है कि इनमें से 413 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि नए मरीजों की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन सतर्कता कम नहीं की गई है। स्वास्थ्य टीमें भागीरथपुरा में लगातार घर-घर सर्वे कर रही हैं। संदिग्ध मरीजों की मौके पर ही जांच कर ओआरएस और जरूरी दवाइयों का वितरण किया जा रहा है।
व्यवसायी का पुत्र अगवा; इंडोनेशिया के नंबर से मांगी 5 करोड़ की फिरौती
एसिया के उपाध्यक्ष उद्यमी देवांग गांधी के व पुत्र कैरव गांधी का फिरौती के लिए अपहरण किया गया है। अपहर्ताओं ने इंटरनेट कॉलिंग के जरिए बुधवार को परिजनों से संपर्क किया और कैरव की सकुशल वापसी के लिए 5 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। इस मामले में न तो परिजन और न ही पुलिस कुछ बता रही है। प्रारंभिक के अपहरण में इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। मंगलवार की देर शाम कैरव की गाड़ी कांदरबेड़ा के समीप लावारिस स्थिति में मिली थी। परिजनों द्वारा अपहरण की आशंका जताए जाने के बाद भी पुलिस ने लापता का मामला माना था। इधर, बुधवार को फिरौती का फोन आने के बाद देवांग गांधी के बयान पर इंडोनेशिया के नंबर (+62-831-94765544) के संचालक के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई। कैरव गांधी की सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस की सात टीमें झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल और ओडिशा में बदमाशों की तलाश में जुटी है। कार की फॉरेंसिक जांच कर फिंगर प्रिंट के जरिए अपराध में शामिल बदमाशों की पहचान की कोशिश की जा रही है। वहीं, कॉल डिटेल और उस क्षेत्र में उस समय सक्रिय मोबाइल फोन की कॉल डंपिंग के जरिए जानकारी इकट्ठा की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि अपहर्ता उन्हें लेकर पश्चिम बंगाल या बिहार की ओर जा सकते हैं। पिता को आया था वॉट्सएप कॉल मंगलवार को आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर में 16 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम को लेकर बैठक चल रही थी। इस बैठक में देवांग गांधी के मोबाइल पर 10 बार वॉट्सएप कॉल आया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। कुछ कॉल को कट कर दिया। बैठक के बाद दोपहर दो बजे कैरव गांधी के बारे में जानकारी लेने के लिए फोन किया तो उसका फोन बंद मिला। इसके बाद कंपनी में फोन किया तो पता चला कि उनका बेटा कंपनी नहीं पहुंचा। फिर मैसेज आया, जिसमें बेटे की अपहरण की बात लिखी गई थी। तब उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस लिखी जिस स्कॉर्पियो से अपहरण की आशंका, उसका नंबर बाइक का निकला पुलिस ने घटना के बाद कैरव गांधी से घर से निकलने से लेकर कांदरबेड़ा जाने तक के मार्ग का सीसीटीवी फुटेज खंगाला। पुलिस जांच में पता चला कि कैरव की कार के आगे-पीछे एक ही नंबर की स्कॉर्पियो कई बार गुजरी। स्कॉर्पियो पर पुलिस का बोर्ड लगा हुआ था। स्कॉर्पियो पर लगे नंबर की जांच की गई तो वह किसी बाइक का नंबर था। अंदेशा लगाया जा रहा है कि टोल प्लाजा से बचने के लिए अपहरणकर्ताओं ने पुलिस का बोर्ड लगाया था। पुलिस की टीम चांडिल से आगे रांची, रामगढ़ से बिहार को जाने वाले मार्ग का फुटेज खंगाल कर स्कॉर्पियो का पता लगाने में जुटी है। कार में मिला 25 लाख का चेक पुलिस ने कैरव के मोबाइल का लोकेशन जांचा, तो अंतिम लोकेशन मंगलवार सुबह 11:30 बजे मरीन ड्राइव बिंदल मॉल के पास मिला। इसके बाद पुलिस और परिजन चांडिल से लेकर हाइवे पर तलाशने लगे। इसी दौरान कैरव की कार कांदरबेड़ा के पास सिल्वर सैंड रिसॉर्ट के सामने लवारिस अवस्था में मिली। कार में चाबी और 25 लाख का चेक मिला। इसी चेक को लेकर कैरव बैंक अॉफ इंडिया बिष्टुपुर जाने की बात कह कर दिन के सवा दस बजे निकला था।
इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाडिया पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में भोपाल के ड्रग तस्कर अबान शकील को गिरफ्तार किया है। अबान भोपाल में सेंट माइकल स्कूल और सेंट माइकल क्रिकेट अकादमी चलाता है। बॉडी बिल्डिंग का शौकीन है। अबान ने पुलिस को बताया कि भोपाल में जिमिंग के दौरान उसने एमडी ड्रग्स का सेवन शुरू किया था। नशे में वर्कआउट करने के दौरान वेट लिफ्टिंग करने पर वजन का एहसास नहीं होता। अबान थार से ड्रग डिलीवरी देने के इंतजार में था, इसी दौरान पुलिस की गिरफ्त में आ गया। वह भोपाल के लोकल तस्करों से ड्रग लेकर इंदौर में खपाने का काम करता था। इंदौर के कुछ खास लाउंज और पब में उसके ग्राहक थे। अबान दस हजार रुपए प्रति ग्राम के हिसाब से ड्रग्स बेचता था। मुखबिर की सूचना पर पकड़ में आया13 जनवरी को इंदौर पुलिस को सूचना मिली थी कि अबान शकील कनाडिया में नशीले पदार्थों की खेप लेकर आने वाला है। मुखबिर के बताए रोड पर घेराबंदी कर पुलिस ने अबान की थार को रोक लिया। तलाशी में 5.5 ग्राम एमडी ड्रग्स जब्त की गई। शुरुआती पूछताछ में अबान ने बताया कि किसी को शक न हो, इसलिए ड्रग सप्लाई के लिए वह खुद की ही थार का उपयोग करता था। आधे एकड़ में बनी करोड़ों रुपए की कोठीअबान कोहेफिजा इलाके में स्थित सैफिया कॉलेज मैदान में आधा एकड़ में बनी करोड़ों रुपए की कोठी में रहता है। उसके घर के पोर्च में लग्जरी कारें खड़ी रहती हैं। सेंट माइकल स्कूल चलाने में उसकी बहन भी सहयोगी है। पुराने भोपाल का रहने वाला अबान आमतौर पर नए भोपाल के क्लब और लाउंज में उठता-बैठता था। ड्रग्स पैडलर बाबा ने दी थी एमडीअबान शकील ने इंदौर पुलिस को बताया कि उसे ड्रग्स बाबा ने दी थी। भोपाल का ड्रग पैडलर बाबा पार्टी और पब में नशा करने वालों को ड्रग्स मुहैया कराता है। अबान ने बताया कि वह शनिवार को दोस्तों के साथ पार्टी करता था। इसी दौरान एक पब में उसकी बाबा से पहचान हुई थी। मोबाइल में मिली नशे को लेकर चैटिंगअबान के मोबाइल में बाबा और उसके बीच वाट्सऐप चैट भी मिली है। इसमें नशा देने के लिए बाबा उससे कोडवर्ड में बात कर रहा था। वह करीब दो साल से इसी तरह के नेटवर्क में जुड़ा है। बाबा पुलिस के लिए मुखबिरी भी करता है।सूत्रों के मुताबिक, बाबा ने तीन लोगों को मिलाकर 60 ग्राम एमडी दी थी, लेकिन पुलिस ने इस मामले में साढ़े 5 ग्राम का ही केस बनाया है। अबान के पिता भी बॉडी बिल्डर थेअबान के पिता शकील मध्य प्रदेश के पुराने और नामी बॉडी बिल्डर रहे हैं। कोरोना काल में उनकी मौत हो गई थी। शकील ने ही सेंट माइकल स्कूल की नींव रखी थी। सेंट माइकल क्रिकेट एकेडमी की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी। इस एकेडमी से रणजी से लेकर स्टेट तक खेलने वाले कई क्रिकेटर निकले। शकील फिटनेस को लेकर बेहद संजीदा रहते थे। महिला ड्रग तस्कर से संबंधों की पड़तालइससे पहले 15 नवंबर 2025 को भोपाल की टीला जमालपुरा पुलिस ने ड्रग तस्करी के मामले में अक्सा खान (25) को गिरफ्तार किया था। वह ग्राहक के इंतजार में इस्लामी गेट के पास खड़ी थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। अक्सा के कब्जे से 9 ग्राम एमडी और 1.52 लाख रुपए का मोबाइल जब्त किया गया है। अक्सा भी कोहेफिजा में ही 5-2 चित्रांश अपार्टमेंट में रहती है। तलाशी लेने पर उसके पर्स के अंदर छोटी-छोटी 8 पारदर्शी पन्नियों में 9 ग्राम एमडी मिली थी। वह फिलहाल भोपाल सेंट्रल जेल में है। सूत्रों के मुताबिक अक्सा, अबान के पैडलर के तौर पर काम करती थी। इस इनपुट पर भोपाल पुलिस ने अबान के लोकल नेटवर्क की गोपनीय जांच शुरू कर दी है। हाई प्रोफाइल फैमिली से ताल्लुक रखती है अक्साअक्सा उर्फ आसिया खान भोपाल के कोहेफिजा के हाई प्रोफाइल घराने से ताल्लुक रखती है। उसके पिता आजम, शहर के एयरपोर्ट रोड स्थित बड़वई स्पोर्ट्स ग्राउंड का संचालन करते हैं। आसिया बी.कॉम ग्रेजुएट है और शहर के अलग-अलग हुक्का लॉज पर उसका उठना-बैठना है। ये खबर भी पढ़ें... 10 करोड़ की एमडी ड्रग्स जब्त, अंतरराष्ट्रीय कीमत 50 करोड़ आगर मालवा जिले में नर्सरी की आड़ में चल रही MD ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। नारकोटिक्स विभाग ने शनिवार तड़के आमला क्षेत्र स्थित तीर्थ नर्सरी पर छापा मारकर 31 किलो 250 ग्राम MD ड्रग्स जब्त की है। जब्त ड्रग्स की कीमत घरेलू बाजार में करीब 10 करोड़ जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। पढ़ें पूरी खबर...
झारखंड में डिजिटल इलाज की तैयारी, 54 विशेषज्ञ बहाल होंगे
झारखंड सरकार ने राज्य में मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ा जाएगा, ताकि इलाज तेज, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण हो सके। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी मेडिकल कॉलेज और जिला स्तर पर दो-दो तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह राज्यभर में कुल 54 तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होगी। इनमें जिला अस्पतालों के लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) मैनेजर के 42 पद और मेडिकल कॉलेजों में 12 पद हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बहाली के लिए पद सृजन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। मंत्री की स्वीकृति के बाद यह प्रस्ताव प्रशासी पदवर्ग समिति को भेजा जाएगा। समिति की मंजूरी मिलते ही बहाली की प्रक्रिया शुरू होगी। सभी पद संविदा के आधार पर भरे जाएंगे। क्या है मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना क्या है मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना झारखंड में डिजिटल इलाज की तैयारी, 54 विशेषज्ञ बहाल होंगे झारखंड सरकार ने राज्य में मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ा जाएगा, ताकि इलाज तेज, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण हो सके। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी मेडिकल कॉलेज और जिला स्तर पर दो-दो तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह राज्यभर में कुल 54 तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होगी। इनमें जिला अस्पतालों के लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) मैनेजर के 42 पद और मेडिकल कॉलेजों में 12 पद हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बहाली के लिए पद सृजन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। मंत्री की स्वीकृति के बाद यह प्रस्ताव प्रशासी पदवर्ग समिति को भेजा जाएगा। समिति की मंजूरी मिलते ही बहाली की प्रक्रिया शुरू होगी। सभी पद संविदा के आधार पर भरे जाएंगे। अभ्यर्थियों के लिए जरूरी योग्यता... बीटेक/बीटेक या कोई इंजीनियरिंग डिग्री या एमबीए/पीजी डिप्लोमा (मैनेजमेंट) या पब्लिक हेल्थ/एमबीबीएस/बीडीएस या में मास्टर डिग्री जरूरी है। कम से कम 4 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। सरकारी परियोजना में 2+ वर्ष का अनुभव (वरीयता) और एमएस ऑफिस में दक्षता अनिवार्य है। नियुक्त विशेषज्ञ मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के साथ-साथ आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन से जुड़े सभी तकनीकी कार्य भी देखेंगे। अभ्यर्थियों के लिए जरूरी योग्यता... बीटेक/बीटेक या कोई इंजीनियरिंग डिग्री या एमबीए/पीजी डिप्लोमा (मैनेजमेंट) या पब्लिक हेल्थ/एमबीबीएस/बीडीएस या में मास्टर डिग्री जरूरी है। कम से कम 4 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। सरकारी परियोजना में 2+ वर्ष का अनुभव (वरीयता) और एमएस ऑफिस में दक्षता अनिवार्य है। नियुक्त विशेषज्ञ मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के साथ-साथ आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन से जुड़े सभी तकनीकी कार्य भी देखेंगे।
तीन माह से ऊर्जा विभाग के 3 अहम पद खाली... नतीजा- सामान की खरीदारी बंद, ऑपरेशन-मेंटेनेंस का काम रुका
तीन माह से ऊर्जा विभाग के तीन अहम पद खाली हैं। अविनाश कुमार के मुख्य सचिव बनने के बाद 1 अक्टूबर से ऊर्जा विभाग के सचिव का पद, ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी और जेबीवीएनएल के एमडी का पद रिक्त है। इन अहम पदों के खाली होेने का साइड इफेक्ट भी अब दिखने लगा है। ऊर्जा सचिव का पद रिक्त होने से तमाम तरह के वित्तीय फाइलों की मूवमेंट बंद है। पहले तो 3 महीने से आम जनता को मिलने वाली 200 यूनिट फ्री बिजली और सब्सिडी की राशि का पैसा जेबीवीएनएल को ट्रांसफर नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त अन्य बिजली एवं केंद्रीय प्रायोजित स्कीम का पैसा भी जेबीवीएनएल को नहीं मिला रहा है। इसके कारण जेबीवीएनएल का वित्तीय संकट गहरा गया है। इसका असर ऑपरेशन-मेटेनेंस के समानों पर भी दिखने लगा है। सामानों की खरीदारी बंद है। नतीजतन रांची स्टोर रूम सहित राज्य के सातों सर्किल में डेली ऑपरेशन-मेटनेंस के सामान की भारी किल्लत हो गई है। जरूरी से जरूरी सामान भी स्टोर रूम से डिविजनों को नहीं मिल पा रहा है। इससे ऑपरेशन-मेटनेंस का काम प्रभावित हो रहा है। यही स्थिति जारी रही तो आने वाले एक-दो महीनों में इसका असर बिजली के ऑपरेशन-मेटेनेंस पर पड़ सकता है। किन-किन सामानों की कमीपिन, ब्रैकेट, तार, चैनल, इंसुलेटर, सकल, डीस, 200 केवी के क्लैम, 400 केवी के क्लैम, नट-बोल्ट, एरियल बंच केबल, 11 केवी तार, ट्रांसफॉर्मर। रांची सहित पूरे राज्य में कुल सात स्टोर रूम हैं। इन स्टोरों पर जरूरी ऑपरेशन-मेटनेंस तक के समान तक नहीं हैं। कई ठेकेदारों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ऑपरेशन-मेटेनेंस का काम तो दे दिया, मगर सामान नहीं मिलने से जरूरी काम पूरी तरह से बंद हैं। हालत ऐसी है कि जो तार डैमेज घोषित हैं, उसे ही कॉन्ट्रैक्टरों को दिया जा रहा है। कमी का मूल कारण जेबीवीएनएल हेडक्वार्टर स्तर से होनेवाली सामान की खरीदारी पूरी तरह से बंद होना है। इसमें एरियल बंच केबल, 11 केवी तार, ट्रांसफार्मर आदि प्रमुख हैं। यह हालत करीब-करीब सारे सर्किल के स्टोर रूम की है। क्या कहते हैं जिम्मेवार जेबीवीएनएल के निदेशक पीके श्रीवास्तव ने बताया कि कहीं कोई कमी नहीं है। जो कमी है, उसे दूर किया जा रहा है। वहीं रांची जीएम मनमोहन कुमार ने बताया कि एरिया बोर्ड स्तर से खरीदी की जाने वाली जरूरी सामानों की खरीदारी पहले ही करके दी जा चुकी है। कुछ और सामानों की खरीदारी की प्रक्रिया जारी है। अगर कमी की बात आ रही है, तो हम इसे दिखवाते हैं।
नियम तोड़ने वाले 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता होगी रद्द
झारखंड में फार्मेसी शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर अब बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। विभागीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी-फार्मा) पाठ्यक्रम संचालित कर रहे राज्य के 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन संस्थानों को सरकार की ओर से जारी किया गया ‘लेटर ऑफ कंसेंट’ अब निरस्त किया जाएगा। जांच में खुलासा हुआ है कि इन संस्थानों ने न तो सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया और न ही इसके लिए आवेदन किया। हैरानी की बात यह है कि कई संस्थानों के पास न तो खुद की जमीन है, न भवन, न पर्याप्त शिक्षक और न ही नन-टीचिंग स्टाफ। यह कार्रवाई यूं ही नहीं हुई। दैनिक भास्कर ने लगातार खबरें प्रकाशित कर झारखंड में फार्मेसी शिक्षा के नाम पर चल रहे खेल को उजागर किया था। भास्कर की रिपोर्टिंग के बाद ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और जांच समिति का गठन किया गया। अब जांच रिपोर्ट के बाद उन संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी है। जांच समिति ने उजागर की सच्चाई स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर अगस्त 2025 में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति की अध्यक्षता विभागीय उप सचिव रंजीत लोहरा कर रहे थे। समिति ने राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की भौतिक जांच की। रिपोर्ट में सामने आया कि बड़ी संख्या में कॉलेज न तो सरकारी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं और न ही फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों पर खरे उतरते हैं। जिन 34 संस्थानों को मान्यता से बाहर करने की तैयारी है, उनके खिलाफ फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली को पत्र भेजकर 2025-26 में नए नामांकन पर रोक लगाने की अनुशंसा की जाएगी। छात्रों की परीक्षा और रजिस्ट्रेशन पर भी संकट स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जिन संस्थानों ने अब तक वैध एनओसी नहीं ली है, उनके छात्रों का परीक्षा पंजीकरण रोका जा सकता है। केवल लेटर ऑफ कंसेंट के आधार पर परीक्षा लेने की अंतरिम व्यवस्था को वर्ष 2025-26 से समाप्त कर दिया जाएगा। 36 अन्य संस्थानों पर भी संकट जांच में 36 ऐसे फार्मेसी कॉलेज भी चिह्नित किए गए हैं, जहां आंशिक रूप से भवन और भूमि तो है, लेकिन टीचिंग व नन-टीचिंग स्टाफ की भारी कमी है। इन संस्थानों ने भी अब तक एनओसी नहीं ली है। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी संस्थानों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
11वीं में नामांकन की प्रक्रिया शुरू, टेस्ट के बाद प्रोविजनल एडमिशन
राजधानी के निजी स्कूलों में कक्षा 11वीं में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जनवरी के पहले सप्ताह से ही कई स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन फॉर्म उपलब्ध करा दिए हैं। अधिकतर स्कूल जनवरी के अंतिम सप्ताह तक नामांकन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। फॉर्म स्कूलों की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। फॉर्म भरने के बाद छात्रों का ऑफलाइन माध्यम से एडमिशन टेस्ट लिया जाएगा। उसमें चयनित छात्रों को पहले प्रोविजनल एडमिशन मिलेगा, जबकि 10वीं का रिजल्ट जारी होने के बाद अंकों और एप्टीट्यूड टेस्ट के आधार पर ही फाइनल सीट कंफर्म की जाएगी। वहीं, बेहतर एकेडमिक रिकॉर्ड और राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके छात्रों को कई स्कूलों में डायरेक्ट एडमिशन की सुविधा भी दी जा रही है। बेहतर करियर के लिए स्टूडेंट्स नए संस्थान में लेते हैं नामांकन नर्सरी से 10वीं तक एक ही स्कूल में पढ़ने के बाद बच्चे उस स्कूल के वातावरण में पूरी तरह ढल जाते हैं। लेकिन उनमें हमेशा बेहतर करने और बेहतर संस्थान में पढ़ने की इच्छा रहती है। ऐसे शिक्षण संस्थान जहां स्टूडेंट्स को लगता है कि उनके करियर के लिए जाना जरूरी है, 10वीं के बाद वे उसका चुनाव करते हैं। नए संस्थान में जाने के बाद जीवन में भी नयापन आता है और वे एक नई ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं। कब किस स्कूल में मिल रहा 11वीं का एडमिशन फॉर्म जेवीएम: जनवरी के अंतिम सप्ताह से नामांकन के लिए फॉर्म मिलेगा। कीमत 2000 रुपए रखी जा सकती है। फॉर्म स्कूल की वेबसाइट www.jvmshyamali.com पर भी उपलब्ध होगी। लगभग एक महीने तक नामांकन के लिए स्कूल का पोर्टल खुला रहेगा। डीपीएस: 10 जनवरी से नामांकन के लिए फॉर्म उपलब्ध है, जो 30 जनवरी तक मिलेगा। स्कूल की वेबसाइट www.dpsranchi.com पर इच्छुक छात्र रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फॉर्म की कीमत 3500 रुपए है। एप्टीट्यूड टेस्ट की तिथि भी जल्द घोषित की जाएगी। एकेडमिक और स्पोर्ट्स में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र डायरेक्ट एडमिशन भी ले सकते हैं। केरलि स्कूल: जनवरी के अंतिम सप्ताह में नामांकन के लिए फॉर्म उपलब्ध होंगे। स्कूल की वेबसाइट www.kairlyschool.com पर जाकर स्टूडेंट फॉर्म भर सकते हैं। कीमत 2000 रुपए है। लगभग 20 दिन तक स्टूडेंट फॉर्म भर सकेंगे। नामांकन के लिए एप्टीट्यूड टेस्ट अॉफलाइन होगा। डीएवी, गांधीनगर: 15 जनवरी से नामांकन के लिए फॉर्म उपलब्ध होंगे। पैरेंट्स स्कूल के फी काउंटर से अॉफलाइन भी फॉर्म ले सकते हैं। सुबह 8.30 बजे से 1.00 बजे के बीच स्कूल आकर फॉर्म लिया जा सकता है। वहीं, स्कूल की वेबसाइट davgandhinagar.com पर भी फॉर्म उपलब्ध है। पैरेंट्स वेबसाइट से डाउनलोड कर फॉर्म भरने के बाद अॉफलाइन जमा कर सकते हैं। फॉर्म का शुल्क 1500 रुपए है। शारदा ग्लोबल स्कूल : 11वीं में नामांकन के लिए फॉर्म 18 जनवरी से मिलना शुरू हो जाएगा। कीमत 1200 रुपए है। www.sardaglobalschool.com पर फॉर्म मिलेगा। अॉफलाइन फॉर्म स्कूल से मिलेगा। राजेश पिल्लई, प्रिंसिपल, केरलि स्कूल सिटी एंकर
ये लालच की इंतेहा है:चाइनीज मांजे से फिर सड़कें लहूलुहान...
चंद कारोबारियों के लालच व कुछ पतंगबाजों की थोड़ी देर की मौज-मस्ती के कारण बुधवार को भी शहर की सड़कों पर लोग लहू-लुहान होते रहे। मकर संक्रांति पर दिनभर में एक दर्जन से ज्यादा लोग चाइनीज मांजे के शिकार हुए। तीन इमली ब्रिज पर बाइक सवार हेमराज चौरसिया (29) का गला बुरी तरह कट गया। सड़क खून से सन गई। पांच पक्षियों की मौत हो गई, 15 घायलावस्था में रेस्क्यू सेंटर भेजे गए। जूनी इंदौर ब्रिज, जयरामपुर कॉलोनी, नंदानगर, धार रोड, रीगल, एयरपोर्ट रोड पर भी कई लोग मांजे की चपेट में आए। अभी कुछ बोल नहीं पा रहा हैपंपकर्मी हेमराज के भाई कालू ने बताया कि उसका 4 घंटे तक ऑपरेशन चला। अभी उसे कुछ भी बोलने और खाने-पीने से परहेज रखने को कहा है। डॉक्टरों ने कहा है कि 2-3 दिन में स्थिति देखेंगे। यदि ठीक नहीं हुआ तो एक और सर्जरी करना पड़ेगी। गनीमत है उसका कंठ नहीं कटा, वरना जान भी जा सकती थी। ये भी जख्मी : खून की धार देख आने-जाने वाले लोग भी घबरा गए नंदानगर के महेश सोनी को गले में चोट आई। बंगाली चौराहे पर एक युवक की नाक पर कट लगा। मानव निवासी रामानंद नगर की ठुड्डी कट गई। 10 टांके आए। एयरपोर्ट पर एक जवान का गाल कटा। जूनी इंदौर ब्रिज पर प्रेम कुमार भंडारी की डोर से ठुड्डी कट गई। खूब खून बहा। आठ टांके आए हैं।
एमपी में कई ऐसे नेता हैं जो किसी पद पर नहीं हैं फिर भी मंत्रियों वाले सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए हुए हैं। वहीं भोपाल में ही मंत्रियों वाला एक ऐसा बंगला है जो मरीजों का ठिकाना बना हुआ है। राजधानी के 74 बंगला क्षेत्र के बंगला नंबर बी-1 जो कि सागर जिले की रहली से विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का सरकारी आवास है। मंत्री के तौर पर भार्गव को आवंटित हुआ यह घर अब मरीजों का घर बना हुआ है। बच्चों के लिए प्ले स्कूल की तरह बनाया गेस्ट रूमगोपाल भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने बीमार बच्चों विशेषकर जिन्हें दिल से जुड़ी बीमारियां हैं उनके ठहरने के लिए एक खास गेस्ट रूम प्ले स्कूल की तर्ज पर तैयार कराया है। इस किड्स गेस्ट रूम में बच्चों के लिए झूला, खिलौने से लेकर बच्चों के लिए स्पेशल बेड की व्यवस्था की है। बीमार बच्चों का मूड ठीक रखने के लिए दीवारों पर कार्टून और आकर्षक पेंटिंग्स बनवाई हैं। मरीजों के लिए 50 बिस्तर गोपाल भार्गव के बंगले में बीमार मरीजों के लिए 50 बिस्तरों के तीन हॉल रेनोवेट कराए गए हैं। इस बंगले में मरीजों के रुकने से लेकर आने-जाने के लिए एम्बुलेंस, भोजन और राजधानी के अस्पतालों में इलाज कराने के लिए कर्मचारी मौजूद रहते हैं। मरीजों के लिए खास मेन्यूभार्गव के बंगले में इलाज के पहले और बाद में रुकने वाले मरीजों के लिए सुबह नाश्ते, चाय के साथ दो टाइम फ्री भोजन की व्यवस्था है। इसे गोपाल जी की रसोई नाम दिया है। इस किचन में अलग-अलग दिनों में मरीजों के लिए मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, पालक पनीर, शाही पनीर, बैगन भर्ता, बैगन मसाला, सेव टमाटर, आलू टमाटर, आलू पालक, भिंडी, आलू मैथी की भाजी, कढ़ी-पकौड़ा, बूंदी रायता, दाल तड़का, दाल फ्राइ, दाल मखनी, मूंग दाल, दलिया, जीरा राइस, हलवा, खिचड़ी, गरम रोटियों के साथ अचार, पापड़, चटनी और सलाद परोसा जाता है। हर रविवार को तीन एम्बुलेंस से भोपाल पहुंचते हैं मरीजगोपाल भार्गव के गृह नगर गढ़ाकोटा स्थित निज निवास गणनायक से तीन एम्बुलेंस हर रविवार को भोपाल के लिए मरीजों को लेकर रवाना होती हैं। जिन मरीजों को भोपाल में इलाज के लिए आना होता है वे गढ़ाकोटा आवास पर रजिस्ट्रेशन कराते हैं। रविवार सुबह 10 बजे तक गढ़ाकोटा पहुंचने के बाद मरीजों को एम्बुलेंस से भोपाल रवाना कर दिया जाता है। भोपाल में भार्गव के बंगले पर पहुंचते ही कर्मचारी मरीजों का पंजीयन करते हैं। इसमें मरीज का आधार कार्ड, बीमारी की जानकारी लेकर मरीज से इलाज के लिए अस्पताल का नाम पूछते हैं। फिर जांचें कराकर इलाज के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता है। आने-जाने, रुकने-खाने और इलाज सब फ्रीगोपाल भार्गव के क्षेत्र के मरीजों को गढ़ाकोटा, रहली से भोपाल तक आने-जाने की व्यवस्था फ्री है। भोपाल में रुकने और भोजन भी निशुल्क है। इलाज की व्यवस्था आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता से कराई जाती है यदि इन माध्यमों से भी इलाज में मदद नहीं मिल पाई तो गोपाल भार्गव अपने निजी फंड से इलाज की व्यवस्था करते हैं। अभिषेक भार्गव ने मरीजों के लिए की गई व्यवस्थाओं को लेकर भास्कर को जानकारी दीभास्कर: प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम बनाने के पीछे की क्या सोच है? अभिषेक भार्गव: इसके पीछे मेरी पत्नी शिल्पी भार्गव की सोच है। वे ही वेदिका फाउंडेशन का संचालन करती हैं। उनकी सोच ऐसी थी कि जो बीमारी से ग्रस्त बच्चे होते हैं उनमें चिडचिड़ापन रहता है। जब बच्चे अनजान माहौल में जाते हैं तो असहज हो जाते हैं। शिल्पी भी एक मां हैं इसलिए बच्चों के मन को वे भी समझती हैं। उन्होंने इसीलिए यह एक कॉन्सेप्ट बनाया कि जब बच्चे इलाज के लिए आएं तो उन्हें ऐसा माहौल दें जहां प्ले स्कूल की तरह खिलौने, झूले हों। ताकि बच्चे यहां आकर न डरें, उन्हें अनुकूल वातावरण देने की कोशिश है। भास्कर: इस बंगले में रेनोवेशन का काम चल रहा है, काफी बदला सा लग रहा है?अभिषेक भार्गव: क्षेत्र से यहां पर बहुत सारे मरीज इलाज करवाने आते हैं। उनके लिए तमाम व्यवस्थाएं देने का काम हम लोग 25 वर्षों से कर रहे हैं। साल-दर-साल उसमें बेहतरी करने का प्रयास करते हैं। इसे और रेनोवेट किया है। ज्यादा से ज्यादा मरीज यहां पर रुक सकें इसके लिए व्यवस्थाएं बढ़ा रहे हैं। 2004 में जब गोपाल भार्गव मंत्री बने तब से यहां यह व्यवस्था भोपाल में हम लोग चला रहे हैं। पहले जब मरीज यहां पर आते थे तो उनके रुकने, खाने-पीने की समस्या रहती थी। ये भी जानकारी नहीं रहती थी कि इलाज कहां पर कराएं। उनके रूकने से लेकर आने-जाने, भोजन और इलाज की व्यवस्था हम लोग करते हैं। कई मरीज आर्थिक अभाव के कारण इलाज नहीं करवा पाते। रविवार को गढ़ाकोटा निवास से मरीजों की संख्या के अनुसार एंबुलेंस चलतीं हैं वहां ये भोपाल तक निशुल्क एंबुलेंस आती है। भोपाल के बडे़ अस्पताल जिनमें कई प्रायवेट अस्पतालों में हम लोग निशुल्क इलाज कराते हैं। भास्कर: यदि किसी मरीज की मृत्यु हो जाए तो उसके शव को पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था है?अभिषेक भार्गव: कभी ऐसा होता है कि किसी मरीज की मृत्यु हो जाए तो हमारे वाहन से ही उनके शव को घर तक पहुंचाते हैं। जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी...हमारे और भी प्रकल्प हैं। जैसे किसी की हमारे क्षेत्र में जब मृत्यु हो जाती है तो बरमान घाट पर मां नर्मदा में अस्थि विसर्जन होता है। अस्थि विसर्जन के लिए भी हमारी ओर से यह व्यवस्था बनाई है कि अस्थि विसर्जन के लिए लोग फोन पर हमारे कार्यालय में संपर्क करते हैं तो उनके आने-जाने की व्यवस्था हमारी तरफ से करते हैं। बरमान घाट पर रहली क्षेत्र के लोगों के लिए अलग पंडित जी, नाई की व्यवस्था है। नर्मदा जी में अस्थि विसर्जन के लिए नाव की व्यवस्था भी है। ये सारी व्यवस्थाएं भैया गोपाल भार्गव अपने क्षेत्र में करते आ रहे हैं। तेरहवीं संस्कार में सहयोग हो या बेटियों के कन्यादान में मदद करनी हो यथायोग्य सहायता गोपाल जी करते हैं। भास्कर: मंत्री बनने के बाद कुछ असर आया क्या? अभिषेक भार्गव: जब सरकार में मंत्री थे तो लोग कहते हैं कि मंत्रियों के यहां ऐसी चीजें होती रहती हैं। लेकिन अब दो साल से हम सरकार में मंत्री नहीं हैं लेकिन, कोई प्रकल्प बंद नहीं हुआ। क्योंकि ये व्यवस्थाएं हम शासकीय रूप से नहीं करते बल्कि निजी स्तर से करते हैं। जैसे यह सरकारी बंगला है तो यहां पर सिविल का काम जरूर सरकार ने कराया है लेकिन, बाकी के जो भी काम हैं साजो सामान है या मरीजों के लिए जो व्यवस्थाएं हैं वो सारी निजी खर्चे से होती हैं। ये एंबुलेंस भी निजी खर्चे पर चलतीं हैं। हमारे पिताजी का ध्येय वाक्य है निरंतर कर्म, यही मेरा धर्म। भास्कर: आपकी ये व्यवस्थाएं सिर्फ रहली विधानसभा के लोगों के लिए हैं क्या दूसरे क्षेत्रों के लोग भी आते हैं?अभिषेक भार्गव: हम लोग बाध्यता इसलिए रखते हैं क्योंकि बहुत प्रयास के बाद भी यहां पर अधिकतम सौ लोगों के रूकने की व्यवस्था हो पाती है। सोचिए एक घर में सौ लोग हों तो उनके लिए होटल या आश्रम चाहिए होगा। बहुत ज्यादा भीड न हो इसलिए बाध्यता रखते हैं। कई बार क्षेत्र के रिश्तेदार हमारे क्षेत्र के किसी व्यक्ति को लेकर आ जाते हैं तो उनके लिए पिताजी मना नहीं करते। वो लोग भी यहां पर रुकते हैं। कोई गरीब ऐसा है जिसके पास कोई व्यवस्था नहीं हैं उसके लिए भी यहां व्यवस्था करते हैं। कुल मिलाकर 90% यहां पर क्षेत्र और 10% बाहर के लोग रहते हैं। भास्कर: बच्चों में भी क्या क्षेत्र के मरीजों को ही प्राथमिकता रहती है?अभिषेक भार्गव: वेदिका फाउंडेशन में हमने क्षेत्र की बाध्यता नहीं रखी। ह्रदय रोग से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त बच्चा रहली नहीं पूरे भारत देश ही नहीं दुनिया का कोई बच्चा संपर्क करता है तो उसके आने-जाने और इलाज सर्जरी की पूरी व्यवस्था हम करते हैं। भास्कर: बंगले में मरीजों के लिए व्यवस्थाएं कर दीं आपके परिवार का कौन यहां रहता है?अभिषेक भार्गव: मजेदार बात ये है कि हमारे परिवार का कोई यहां नहीं रहता। पिताजी को जब काम होता है तब वे यहां आते हैं। बाकी मरीजों की देखरेख में लगा रहता स्टाफ यहां रहता है। जो बच्चे एग्जाम देने के लिए भोपाल आते हैं उनके लिए भी यहां व्यवस्था रहती है। यहां पर एक हॉल, एक पिताजी का पूजा कक्ष, शयन कक्ष और एक ऑफिस...बस ये निजी हमारे लिए हैं बाकी पूरा बंगला मरीजों और क्षेत्र के लोगों के लिए है।
करनाल से आई थी शराब, 7 जनवरी को बनी:भिवानी में एक की मौत, 5 गंभीर, पिता बोले- बिना बताए घर से गया था
भिवानी के गांव जाटू लोहारी में 14 जनवरी को शराब के सेवन से एक व्यक्ति की मौत व 5 लोगों की गंभीर हालत के बाद शराब ठेके को सील कर दिया। वहीं जिस बैच की शराब पी थी, उसको भी सील कर दिया है। ताकि किसी अन्य के साथ कोई घटना ना होने का खतरा रहे। इधर, पुलिस जांच के अनुसार शराब करनाल से लाई गई थी। वहीं इसकी मेन्यूफेक्चरिंग डेट (उत्पादन तिथि) 7 जनवरी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। मृतक की पहचान भिवानी के गांव जाटू लोहारी निवासी जितेंद्र के रूप में हुई है। वहीं हरकेश, अनिल, सुदेश उर्फ कालू, कृष्ण और अर्जुन की हालत गंभीर हो गई थी। करनाल से भिवानी पहुंचे पूरे शराब के बैच को ही सील किया गया है। ताकि इसका जांच से पहले इस्तेमाल ना हो पाए। वहीं शराब के सैंपल लेकर भी जांच के लिए भेज दिया गया है। ट्रक ड्राइवरी करता है जितेंद्र, 10 दिन से घर पर थागांव जाटू लोहारी निवासी जितेंद्र के पिता नृतक ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करता है। वहीं उसको 4 बच्चे (3 बेटे व एक बेटी) थे। जिसमें से सबसे बड़ा बिट्टू, दूसरे नंबर का जितेंद्र, तीसरे नंबर की पिंकी व सबसे छोटा रवि उर्फ टोनी था। रवि उर्फ टोनी की करीब ढाई-तीन साल पहले हो गई थी। अब जितेंद्र की भी मौत हो गई, वहीं अब उसके पास एक बेटा व एक बेटी बची है। उसने बताया कि उसका बेटा जितेंद्र ट्रक ड्राइवर था। जो करीब 10 दिन से ट्रक की ड्राइवरी की ड्यूटी करके घर आया था और करीब 10 दिन से ही घर पर था। बिना बताए सुबह घर से गया थाउसने बताया कि जितेंद्र सुबह करीब 7 बजे घर से गया था। जितेंद्र की शादी हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद जितेंद्र व उसकी पत्नी अलग-अलग हो गए। सुबह के समय बिना बताए घर से करीब 7 बजे निकला था। बाद में पता लगा कि जितेंद्र की मौत हो गई। करनाल से आई थी शराबभिवानी के एसपी सुमित कुमार ने बताया कि गांव जाटू लोहारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं जो 5 लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनमें से 3 को छुट्टी मिल चुकी है और 2 का उपचार चल रहा है। वहीं घटनास्थल से शराब की 4 खाली बोतल मिली थी। वहीं शराब के सैंपल भी लिए गए हैं। साथ ही उस बैच में करनाल से जितनी भी शराब आई थी, उसको सील कर दिया गया है। ताकि आगे किसी भी प्रकार की घटना की संभावना ना रहे। 7 जनवरी को बनी थी शराबघटना का पता लगने के बाद डीएसपी दलीप सिंह व बवानीखेड़ा एसएचओ ओम प्रकाश के साथ पुलिस बल मौके पर पहुंचा। वहीं एक्साइज इंस्पेक्टर अमरजीत व डीईटीसी भी मौके पर पहुंचे। जिन्होंने शराब ठेके को सील करके सैंपल लेकर भेज दिए। वहीं पुलिस जांच के अनुसार यह शराब 7 जनवरी को बनी (तैयार हुई) थी। इन बोतलों पर 7 जनवरी की मेन्यूफेक्चरिंग डेट मिली है। सीन ऑफ क्राइम की टीम भी घटना का पता लगते ही मौके पर पहुंची और घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाए।
ठाकुर प्रसाद ने तन-मन-धन सब समर्पित कर दिया: विजय सिन्हा
ठाकुर प्रसाद जनसंघ और भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्होंने पार्टी के लिए तन-मन-धन सब कुछ समर्पित कर दिया, उसी का परिणाम है कि आज पार्टी इतनी ऊंचाई पर है। यह बात उप मुख्यमंत्री ने ठाकुर प्रसाद की 106वीं जयंती समारोह में कहा। कार्यक्रम कार्यकर्ता सम्मान दिवस के रूप में बुधवार को हुआ। यह ठाकुर प्रसाद स्मृति की ओर से ठाकुर प्रसाद कम्युनिटी हॉल में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, समिति के अध्यक्ष रामजी सिंह, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव और पद्म विभूषण डॉ. सीपी ठाकुर के साथ अन्य मौजूद रहे। नंदकिशोर यादव ने कहा कि ठाकुर प्रसाद का सपना विकसित बिहार का था, जिसका उदाहरण फतुहा का औद्योगिक क्षेत्र है। कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि ठाकुर बाबू बिहार में उद्योगों का जाल बिछाना चाहते थे और हम सभी उनके सपने को पूरा करने के लिए संकल्पित हैं। रामजी सिंह ने कहा कि ठाकुर प्रसाद एक महान नेता रहे। ठाकुर प्रसाद के सुपुत्र और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि संघ पर लगे प्रतिबंध को हटवाने में ठाकुर प्रसाद की भूमिका अहम रही, जो उनकी शानदार वकालत का प्रमाण है। कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ताओं को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। मकर संक्रांति के मौके पर सभी लोगों ने एक साथ बैठकर खिचड़ी-चोखा और पापड़ का भोज भी किया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन और उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
हनी ट्रैप!:महिला ने विधायक से मांगे दो करोड़, प्रेस कॉन्फ्रेंस की तब केस दर्ज
धरमपुरी के भाजपा विधायक कालूसिंह ठाकुर का आरोप है कि मदद मांगने आई एक महिला और उसके पति ने केस में फंसाने की धमकी देकर उनसे दो करोड़ रुपए मांगे। घटना दिसंबर माह की है, जिसके लिए उन्होंने 23 दिसंबर को ही पुलिस को आवेदन दे दिया था। मंगलवार को मुख्यमंत्री से भी मिले। बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस ली, उसके बाद धार पुलिस ने केस दर्ज किया। अभी केस उनकी होटल मैनेजर की शिकायत पर दर्ज हुआ है। विधायक ठाकुर का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन से अपेक्षित सहयोग ही नहीं मिल पा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा सरकार में भाजपा विधायक की ही सुनवाई क्यों नहीं हो रही, तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए। प्रेस वार्ता के बाद बुधवार देर शाम महिला दीपिका ठाकुर और उसके पति कासिम खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर विधायक ने नहीं, बल्कि उनकी होटल मैनेजर बबीता पाटीदार द्वारा दर्ज कराई गई है। धार-भोपाल कहीं सुनवाई नहीं 1. विधायक के अनुसार, महिला 23 दिसंबर को उनके धामनोद स्थित कार्यालय पर आर्थिक सहायता मांगने पहुंची। उस समय विधायक भोपाल में थे, इसलिए महिला कार्यालय में ही रुक गई।2. अगले दिन महिला विधायक के भोपाल स्थित निवास पर पहुंची और 15 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मांगी। विधायक ने एक हजार रुपए देकर उसे वापस भेज दिया। इसके बाद महिला ने झूठे मामले में फंसाने और बदनाम करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।3. विधायक का कहना है कि भोपाल से जाने के करीब एक घंटे बाद महिला ने फोन कर आरोप लगाया कि उसे गलत काम के लिए भोपाल बुलाया गया था और 2 करोड़ रुपए नहीं देने पर एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी। इस पर मैंने तत्काल भोपाल से एसपी और आईजी को फोन कर सूचना दी और व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन भी भेजा।4. विधायक के अनुसार, महिला का पति कानपुर का रहने वाला है और फिलहाल खलघाट में किराए के मकान में रह रहा है। महिला उसे पिछले दो वर्षों से जानती है और उसके साथ रह रही है। विधायक का आरोप : एसपी ने कहा, विधायक पर भी हो सकता है केसविधायक ठाकुर ने आरोप लगाया कि एसपी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। एसपी ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी तो विधायक के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज हो सकता है। इसके बाद विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की, जहां से उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला। विधायक के आवेदन पर विधि संगत कार्रवाई कर रहे हैं विधायक द्वारा दिए गए आवेदन की जांच की जा रही है। उस पर विधि-संगत कार्रवाई की जा रही है। विधायक से चर्चा हो चुकी है और उन्हें स्थिति से अवगत करा दिया है। सहयोग नहीं करने जैसी कोई बात नहीं है।-मयंक अवस्थी, एसपी धार
नीट पीजी कटऑफ में बड़ी गिरावट, 40 अंक वालों को भी मिलेगा एडमिशन
नीट पीजी 2025 की कटऑफ में भारी गिरावट की गई है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज ने अलग-अलग कैटेगरी के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल काफी कम कर दिया है। अब कुछ वर्गों में 0 पर्सेंटाइल यानी -40 स्कोर वाले उम्मीदवार भी काउंसिलिंग में शामिल हो सकेंगे। इस फैसले से उन हजारों एमबीबीएस डॉक्टरों को राहत मिलेगी, जो पहले कटऑफ ज्यादा होने के कारण काउंसिलिंग में हिस्सा नहीं ले पा रहे थे। अब वे तीसरे राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड में सीट के लिए आवेदन कर सकेंगे। क्यों घटाई गई कटऑफ: हर साल पहले और दूसरे राउंड की काउंसिलिंग के बाद भी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में कई पीजी सीटें खाली रह जाती हैं। इस बार भी करीब 18 हजार सीटें खाली हैं। इन्हें भरने के लिए कटऑफ में बड़ी छूट दी गई है।
वाहनों का गलत चालान काटा तो कार्रवाई होगी
ट्रैफिक एसपी सागर कुमार ने गांधी मैदान स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का औचक निरीक्षण किया। पुलिसकर्मियों से कहा कि ई-चालान काटते समय सावधानी बरतें। उन्होंने शहर के विभिन्न यातायात पोस्ट का भी निरीक्षण किया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से कहा कि चालान काटें तो सावधानी जरूर बरतें। यह शिकायत नहीं आनी चाहिए कि किसी का गलत चालान कट गया है। ऐसा होने पर कर्मियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए जल्द ही ठोस उपाय किए जाएंगे। चालान प्रक्रिया को और पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि ड्यूटी के प्रति सजगता और अनुशासन बनाए रखें। आमजन की सुविधा को सर्वोपरि रखें। इस दौरान उन्होंने पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से जगह-जगह लगाए गए कैमरे के माध्यम से कंट्रोल रूम से शहर की यातायात व्यवस्था को देखा। उन्होंने गांधी मैदान, सगुना मोड़, फुलवारीशरीफ, एम्स गोलंबर स्थित यातायात पोस्ट का भी निरीक्षण किया।
बोर्ड ने कहा, लोकेशन बदलें:वायु प्रदूषण गलत जांच रहा निगम, 4 स्टेशनों पर रोक
शहर में साफ हवा की मॉनिटरिंग की भी पोल खुलने लगी है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत नगर निगम के चार वायु प्रदूषण मापन केंद्रों की लोकेशन पर सवाल उठाए हैं। इनके डाटा को ऑनलाइन पोर्टल से हटाते हुए उपयोग पर भी रोक लगा दी है। रिपोर्ट में लिखा है कि इन केंद्रों से भ्रामक और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करने वाला डाटा जनरेट हो रहा है। वायु प्रदूषण मापन केंद्रों की जगह तुरंत बदली जाए। पोर्टल पर पिछले आठ दिनों 8 में से 7 केंद्र बंद दिख रहे हैं। इनमें से चार नगर निगम के हैं। शहर में 2019-20 से इन केंद्रों पर मापन चल रहा है। केंद्र के सामने हमारी वायु गुणवत्ता अच्छे मानक पर खरी उतरी और शहर को सबसे प्रदूषित शहर की श्रेणी से राहत भी दी गई। सीएस की समीक्षा के लिए तैयार नोट में भी इंदौर की आबोहवा बेहतर है। हालांकि इस संबंध में क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड और निगम अफसर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन पत्र जारी होने के बाद 7 जनवरी से सभी चार केंद्रों का डाटा ऑनलाइन नहीं दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक बीते सप्ताह एक्यूआई 120 से 220 तक दर्ज किया जा रहा है।ये सिफारिशें की गईं - उपकरण वैज्ञानिक और गाइडलाइन से लगाएं।- डाटा डिस्प्ले नहीं करें, विश्लेषण उपयोग नहीं करें।- वेंडरों की कमियां सुधारें।- केलिब्रेशन, वेलिडेशन के लिए नगर निगम कुशल अधिकारी नियुक्त करें।- केंद्रों की नियमित जांच करवाएं। रिपोर्ट में यह कमियां बताईं चार केंद्रों पर मिली बड़ी गड़बड़ी दिसंबर 2025 में प्रदूषण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रेमचंद उछारिया के नेतृत्व में एक टीम इंदौर आई थी और मापन कार्यों की जांच की। पोर्टल और डाटा की जांच करने के बाद एयरपोर्ट, रीजनल पार्क, रेसीडेंसी और मेघदूत पार्क के केंद्रों का निरीक्षण किया गया। इनमें गंभीर अनियमितताएं मिली हैं।
सिगरेट खरीदने से बचा पैसा नहीं लौटाने पर पीटा तो छात्र की हत्या
महज कुछ रुपए के विवाद में छात्र गौरव कुमार की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। इससे पहले उसे लाठी-रॉड से भी पीटा। घटना कंकड़बाग के एमआईजी पार्क के पास मंगलवार की रात घटी। 20 साल के गौरव को पास के अस्पताल में ले जाया गया, जहां बुधवार को मौत हो गई। वह लखीसराय के बड़हिया रामनगर हृदय बिगहा का रहने वाला था। बाढ़ स्थित आरआर कॉलज में बीए पार्ट वन का छात्र था। उसके पिता की एमआईजी पार्क से कुछ दूरी पर शटर बनाने की दुकान है। परिजनों के बयान पर 8 नामजद और अन्य अज्ञात पर केस दर्ज किया गया। सदर एएसपी अभिनव ने बताया कि छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सभी की उम्र 14 से 16 साल के बीच है। तीन-चार फरार हैं। गौरव के भाई सौरव ने बताया कि घटना के दौरान ही डायल 112 को फोन किया गया, पर नहीं पहुंची। पुलिस समय से पहुंच जाती तो गौरव की जान बच जाती। तीन बार मारपीट, पुलिस को भनक तक नहीं लगी 15 दिन के बाद गौरव गांव से आया था। उसके पिता गांव गए थे। मंगलवार की शाम अपने से छोटे एक पड़ोसी नाबालिग को सिगरेट के लिए 200 रुपए दिए थे। वह सिगरेट लेकर आया पर शेष रकम नहीं दी। उसके बाद गौरव ने उस पड़ोसी के साथ मारपीट शुरू कर दी। उसने अपने दोस्तों को यह बात कह दी। फिर वह दोस्तों के साथ गौरव के पास पहुंच गया। वहां भी मारपीट हुई। उसके बाद गौरव के करीबी लोग भी जुट गए। करीब आधे घंटे तक दोनों गुटों में लाठी-डंडे और रॉड चलने लगे। इतने में एक ने चाकू से गर्दन पर हमला कर दिया। यही उसकी मौत की वजह बनी। ढाई-तीन घंटे के दौरान दोनों गुटों के बीच तीन राउंड मारपीट हुई, पर पुलिस को भनक तक नहीं लगी। सभी एक-दूसरे के परिचित हैं। गौरव के भाई सौरव ने बताया कि मंगलवार की शाम एमआईजी पार्क में गौरव ने एक लड़के को सिगरेट लाने के लिए 200 रुपए दिए थे। उसने सिगरेट लाई, पर शेष रकम नहीं लौटाई। इसी को लेकर विवाद बढ़ गया। दुकान के गेट पर ही गौरव को घेर कर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर जख्मी कर दिया। बीच-बचाव में घर के अन्य लोग भी घायल हो गए। सौरव का कहना है कि बुधवार की सुबह भी हमलावर लाठी-रॉड, हॉकी स्टिक लेकर दुकान के पास रेकी करने आए थे।
हरियाणा के गुरुग्राम में गाजियाबाद के हिस्ट्रीशीटर मनोज ओझा मर्डर केस में नया खुलासा हुआ है। मनोज अपने दोस्त तनिष और टैक्सी ड्राइवर लोकेश के साथ एक व्यक्ति का मर्डर करने हिसार गया था। लौटते समय तीनों में झगड़ा हो गया। मानेसर के पास तनिष ने उसकी बगल में गोली मार दी। उसके बाद मनोज को जख्मी हालत में छोड़कर दोनों भाग गए। मनोज किसी तरह हिम्मत जुटा कर ड्राइविंग सीट पर पहुंचा और बोलेरो स्टार्ट कर 5 किमी दूर खेड़की दौला टोल तक पहुंच गया। वहां उसने टोलकर्मियों से कहा कि उसे गोली मारी गई है, अस्पताल पहुंचा दो। हालांकि, फेफड़ा फटने की वजह से बाद में उसकी मौत हो गई। मामले की जांच करते हुए मानेसर क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली के पटपड़गंज के रहने वाले टैक्सी ड्राइवर लोकेश को दिल्ली से अरेस्ट किया है। 21 साल का लोकेश 12वीं पास है। सिलसिलेवार जानिए कैसे आपस में ही उलझ गए बदमाश 12 जनवरी को खाटू श्याम गया भाई टोनी का कहना है कि मनोज राजस्थान के धार्मिक स्थल खाटू श्यामजी दर्शन के लिए गया था। दोस्त तनिष उसके साथ था। मंगलवार शाम को मनोज ओझा NH-48 दिल्ली-जयपुर हाईवे से दिल्ली की तरफ लौट रहा था। शाम को 4:48 बजे उसने अपने भाई को वाइस मैसेज में बताया कि तनिष ने उसे गोली मार दी है। घटना के बाद से तनिष लापता है। टोनी बताया कि मनोज करीब 5 बजे अपनी बोलेरो कार चलाते हुए खेड़की दौला टोल प्लाजा पर पहुंचा और एम्बुलेंस से मदद मांगी। उसने टोलकर्मियों को बताया कि 5 किमी पहले उसे किसी ने गोली मार दी है। उसे अस्पताल पहुंचाया जाए। वह घायल हालत में तड़प रहा था। मनोज की बोलेरो कार से दो लोडेड पिस्टल, मैगजीन और कुल 26 कारतूस बरामद हुए, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उसने हमले के दौरान जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की होगी। बोलेरो के लेफ्ट साइड के पायदान पर बिखरा खूनपुलिस जांच में कार के लेफ्ट साइड के पायदान यानी फुटबोर्ड पर खून के दाग मिले हैं। फोरेंसिक टीम ने खून और बोलेरो की खिड़कियों से सेंपल और फिंगरप्रिंट लेकर जांच के लिए भेजे। अनुमान लगाया जा रहा है कि हमलावर को भी शायद गोली लगी होगी और यह उसका खून हो सकता है। कार के अंदर या बाहर गोली का कोई निशान नहीं है। अपराधी बैकग्राउंड, 16 मामले दर्जजांच में पता चला कि मनोज ओझा आपराधिक पृष्ठभूमि का था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट और चोरी सहित कुल 16 आपराधिक मामले दर्ज थे। वह दो मामलों में सजायाफ्ता था और 2025 में जमानत पर जेल से बाहर आया। पुलिस का मानना है कि यह पुरानी रंजिश या गैंग वॉर का मामला हो सकता है। क्राइम ब्रांच की टीम जांच कर रहीइस संबंध में पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि खेड़की दौला थाना पुलिस और मानेसर CIA टीम संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। टैक्सी ड्राइवर लोकेश को अरेस्ट कर लिया है, जबकि तनिष की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। इस दौरान आरोपी हत्या की वजह पूछी जाएगी। साथ ही हिसार में किस व्यक्ति का मर्डर करना था, इसकी भी जानकारी लेनी है।
पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में माघी मेले में कॉन्फ्रेंसों से राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल फूंक दिया। पार्टियों ने खुद को पंजाब का सियासी भविष्य पेश करने के लिए पूरी ताकत झोंगी। माघी मेले की कॉन्फ्रेंस में जुटी भीड़ से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल गदगद हुए तो आम आदमी पार्टी के सियासी दंगल में CM भगवंत मान ही नजर आए। पहली बार माघी मेले में कॉन्फ्रेंस करने उतरी भाजपा का भी यह प्रयोग सफल रहा। उधर, खुद को पंजाब का राजनीतिक विकल्प बनाने का दावा करने वाला पंथक मोर्चा यानि शिरोमणि अकाली दल वारिस पंजाब दे की चाल माघी मेला कॉन्फ्रेंस में अलगाव वाली ही दिखी। माघी मेले की कॉन्फ्रेंसों में शिअद सबसे ज्यादा ताकतवर बनकर उभरता हुआ नजर आया। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी कॉन्फ्रेंस नहीं की। कॉन्फ्रेंस न करना पब्लिक में चर्चा का विषय रहा, क्योंकि कांग्रेस इस समय सूबे में मुख्य विपक्षी पार्टी है। माघी मेले में कॉन्फ्रेंसों का सियासी मायनेमाघी मेले में पूरे पंजाब से काफी संख्या में संगत पहुंचती है। राजनीतिक दलों की सियासी रैलियों में जुटी भीड़ से उनकी ताकत का आकलन किया जाता है और इससे पूरे पंजाब में पार्टियों के ताकतवर होने का मैसेज पहुंचता है। इसलिए इस मेले में राजनीतिक दल सियासी रैलियां करते हैं और अधिक से अधिक भीड़ जुटाते हैं। कॉन्फ्रेंस में जुटी भीड़, शिअद का कम बैकलंबे समय बाद शिरोमणि अकाली दल की किसी सियासी रैली में इतनी बड़ी गिनती में कार्यकर्ता व लोग पहुंचे। तरनतारन उपचुनाव ने शिअद के लिए संजीवनी का काम किया। उसके बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता गया। श्री मुक्तसर साहिब की कॉन्फ्रेंस में जुटी भीड़ से साफ हो गया कि शिअद कम बैक कर रही है। सियासी मेले में सबसे ज्यादा चर्चा सुखबीर बादल के कम बैक को लेकर रही। रैली में आए लोगों का कहना है कि सुखबीर बादल ने पार्टी को मजबूत करने के लिए ग्रामीण स्तर पर मुहिम शुरू कर दी। जिसका नतीजा रैली में जुटी भीड़ है। 2027 विधानसभा चुनाव तक सुखबीर बादल कार्यकर्ताओं के इस जोश को मेंटेन रख पाते हैं या नहीं यह तो भविष्य ही बताएगा। आप की रैली में भीड़ सबसे ज्यादा, पर उत्साह कम आम आदमी पार्टी की सियासी कॉन्फ्रेंस में पूरी पंजाब सरकार मंच पर दिखी। निसंदेह माघी मेले की सियासी कॉन्फ्रेंसों में सबसे बड़ा पांडाल और सबसे ज्यादा भीड़ आम आदमी पार्टी की रैली में नजर आई। विपक्षी दलों का कहना है कि आप सरकारी बसों के जरिए लोगों को मुक्तसर साहिब लेकर आई और उन्हें अपनी रैली में बैठा दिया। इसीलिए उनकी रैली में भीड़ तो दिखी पर वहां बैठे लोगों में उत्साह नहीं दिखा। आप के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने सिर्फ तीन मिनट का भाषण दिया। उन्होंने विधानसभा चुनाव 2027 भगवंत मान की अगुवाई में लड़ने का ऐलान करते हुए अपना भाषण खत्म कर दिया। उसके बाद CM भगवंत मान ने मोर्चा संभाला। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व शिअद पर जमकर हमले करके रैली में बैठे लोगों में उत्साह भरने की कोशिश की। अब देखना होगा कि आप की रैली में जो भीड़ आई थी वो 2027 तक आप के साथ बनी रहती है या नहीं। मालवा में भाजपा की बढ़त के संकेतश्री मुक्तसर साहिब में भाजपा ने पहली बार सियासी कॉन्फ्रेंस की। कॉन्फ्रेंस में उमड़ी कार्यकर्ताओं की भीड़ से भाजपा नेताओं को मालवा में पार्टी के बढ़ने के संकेत नजर आने लगे हैं। इस रैली से भाजपा को ग्रामीण हलकों में भी जनाधार बढ़ने की आस नजर आने लगी है। भाजपा नेताओं को डर था कि कुछ कट्टरपंथी संगठन और किसान जत्थेबंदियां रैली के दौरान विरोध कर सकते हैं, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। माघी मेले में तमाम कट्टरपंथी संगठनों की मौजूदगी के बावजूद रैली में भारी संख्या में लोग उमड़े। भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस रैली से साफ हो गया है कि लोग भाजपा के पक्ष में हैं और केंद्र सरकार की नीतियों का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन कुछ लोग हैं जो जानबूझकर भाजपा के विरोध का माहौल पैदा करना चाहते हैं। पंथक मोर्चा के मंच से खालिस्तान की मांगपंथक मोर्चा शिरोमणि अकाली दल वारिस पंजाब दे खुद को सूबे में विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है। माघी मेले में खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह की अगुवाई में पंथक मोर्चा ने सियासी कॉन्फ्रेंस की। पंथक मोर्चा की सियासी कॉन्फ्रेंस में मनप्रीत अयाली, लक्खा सिडाना व कई कट्टरपंथी संगठनों के प्रमुख शामिल हुए। इस कॉन्फ्रेंस में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। पंथक मोर्चा के मंच से खालिस्तान बनाने की बात कही गई। वहीं मनप्रीत अयाली ने मंच से पंथक पार्टियों को एकजुट करके विधानसभा चुनाव 2027 में उतरने की बाद दोहराई। अगर मनप्रीत ऐसा करने में सफल रहे तो पंथक मोर्चा 2027 विधानसभा चुनाव में अन्य राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है। शिअद-भाजपा का एक दूसरे के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर श्री मुक्तसर साहिब में भाजपा और शिअद ने अलग-अलग सियासी कॉन्फ्रेंस की। लेकिन दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखा। दोनों पार्टियों के नेताओं ने एक दूसरे के प्रति कोई बात नहीं की। भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने तो यहां तक कहा कि भाजपा ने 1996 से लगातार अकाली दल का साथ दिया। ससुर अकाली की स्टेज पर तो बहू भाजपा कीरैलियों में एक और रोचक बात सामने आई कि ससुर अकाली दल की स्टेज पर बैठे थे, जबकि बहू भाजपा की स्टेज पर बैठी थी। सिकंदर सिंह मलूका अकाली दल के सीनियर नेता हैं और वो अकाली दल की स्टेज पर आगे की सीट पर बैठे थे। वहीं उनकी बहू परमपाल कौर भाजपा में हैं तो वो रैली के दौरान भाजपा की स्टेज पर पहली पंक्ति में बैठी थीं। श्री मुक्तसर साहिब में माथा टेकने के लिए लगाई बसें विपक्षी नेताओं ने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाए कि रैली के लिए लोगों को सरकारी बसों में लाया गया। उस पर कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने कहा कि पंजाब के अलग-अलग जिलों से लोग श्री मुक्तसर साहिब में माथा टेकने आना चाहते थे। इसलिए सरकार ने उनके लिए बसों की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि लोग गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आए। इसके बाद सियासी रैलियों में शामिल हुए। ................ माघी कॉन्फ्रेंस, CM बोले- स्वरूप ढूंढना प्राप्ति नहीं फर्ज:सुखबीर बोले- केजरीवाल को पंजाब लूटकर भागने नहीं देंगे; जाखड़ बोले- आतिशी को भी लाते पंजाब के मुक्तसर में माघी मेले पर सियासी कॉन्फ्रेंस हुईं। इस दौरान आम आदमी पार्टी (AAP), भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने अलग-अलग रैलियां कर शक्ति प्रदर्शन किया। हालांकि कांग्रेस ने रैली नहीं की। इस दौरान CM भगवंत मान के निशाने पर अकाली दल और भाजपा रही। पूरी खबर यहां पढ़ें...
पंजाब में शीतलहर-घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट:16 जनवरी से बदलेगा मौसम, बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना
पंजाब और चंडीगढ़ के लोगों को अभी 2 दिन शीतलहर का सामना करना पड़ेगा। मौसम विभाग के मुताबिक आज (गुरुवार) पंजाब में शीतलहर और घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट है। बीते 24 घंटे में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में मामूली बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अधिकतम तापमान अभी भी सामान्य से 6.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री कम दर्ज किया गया है। बुधवार को बठिंडा और फरीदकोट में सबसे कम 3.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया । वहीं, मौसम विभाग के अनुसार 16 तारीख से पहाड़ों पर बर्फबारी और पंजाब में हल्की बारिश की स्थिति बन रही है। जबकि अगले सप्ताह बारिश और ओले गिरने की भी संभावना है। धुंध की वजह से 22 फ्लाइट हुईं कैंसिलचंडीगढ़ एयरपोर्ट पर धुंध की वजह से बुधवार रात 10 बजे तक आने-जाने वाली कुल 22 फ्लाइटस कैंसिल हुईं। चंडीगढ़ से जाने वाली 6E681 (पुणे), 6E2113 (दिल्ली), 6E7413 (जयपुर), 6E5261 (मुंबई), 6E2315 (दिल्ली), 6E146 (लखनऊ), 6E627 (कोलकाता), 6E7743 (जयपुर), 6E6634 (बेंगलुरु), 6E2195 (दिल्ली), 5E5019 (मुंबई) फ्लाइट्स कैंसिल हुई है। इसी तरह चंडीगढ़ आने वाली 6E6448 (दिल्ली), 6E6552 (लखनऊ), 6E7414 (जयपुर), 6E6204 (मुंबई), 6E6506 (अहमदाबाद), 6E6252 (हैदराबाद), 6E242 (पुणे), 6E7742 (जयपुर), 6E7517 (धर्मशाला), 6E2196 (दिल्ली) फ्लाइट्स कैंसिल हुई। आज 7 जिलों में शीतलहर का अलर्टमौसम विभाग के मुताबिक आज अमृतसर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, बरनाला, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला, एसएएस नगर (मोहाली) और मालेरकोटला में घना कोहरा पड़ने की संभावना है। वहीं पठानकोट, गुरदासपुर, तरनतारन, होशियारपुर, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा और मानसा में कुछ जगहों पर घना कोहरा पड़ सकता है। जबकि अमृतसर और तरनतारन में कोल्ड डे रहने की संभावना है। इसी तरह फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा और लुधियाना में शीत लहर (Cold Wave) चल सकती है। मौसम ड्राई रहने की संभावना है। मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल का कहना है कि 17 तारीख तक मौसम ड्राई रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। लेकिन 18 से 20 तारीख के बीच राज्य के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। अगले 5 दिनों में न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री तक धीरे-धीरे बढ़ेगा। इसके बाद तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। 16 तारीख से तापमान बढे़गामौसम विभाग के मुताबिक इस समय बर्फीली हवाएं जम्मू-कश्मीर और हिमाचल से आ रही हैं, जिस कारण ठंड बढ़ी हुई है। हालांकि आज दिन में तापमान में हल्की बढ़ोतरी होगी। लेकिन 16 तारीख से हवाओं का रुख बदल जाएगा। हवाएं अरब सागर से पहाड़ों की ओर चलेंगी। पहाड़ों पर पहले वेस्टर्न डिस्टरबेंस बनेगा, जिसकी वजह से पहाड़ों पर बर्फबारी और पंजाब में बारिश की संभावना बन रही है। ऐसे में न्यूनतम तापमान तेजी से बढ़ेगा और यह 5 से 7 डिग्री तक पहुंच सकता है। पाले में कमी आएगी और इस दौरान बादल भी छा सकते हैं। बारिश हो सकती है। अगले हफ्ते ओले गिरने की संभावना19 तारीख को पाकिस्तान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन जाएगा। इसकी वजह से पहाड़ों से आने वाली हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से नमी लेकर फिर पहाड़ों की ओर जाएंगी। इससे एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होगा। 20, 21, 22 और 23 जनवरी को पंजाब और हरियाणा में अच्छी बारिश हो सकती है। इस दौरान ओले भी गिर सकते हैं। 19 तारीख को सबसे पहले अमृतसर, गुरदासपुर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना और पटियाला में बारिश होगी, इसके बाद बाकी इलाकों में बारिश का असर दिखेगा। ऐसे रहेगा आने वाले दिनों में मौसम...
गोरखनाथ मंदिर परिसर में चल रहे खिचड़ी मेले में इन दिनों जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। रोजाना हजारों की संख्या में लोग मेला घूमने पहुंच रहे हैं और परिवार व दोस्तों के साथ मेले का भरपूर आनंद उठा रहे हैं। बच्चे हों या बड़े, हर किसी के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। मेले में लगे ऊंचे-ऊंचे और रोमांचक झूले लोगों को खूब लुभा रहे हैं। 360 डिग्री झूला, डबल डिस्क और कोलंबस जैसे झूलों पर लोगों की लंबी लाइन लगी हुई है। इसके साथ ही इस बार पहली बार आई ‘जलपरी’ बच्चों और बड़ों दोनों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। जलपरी को देखने के लिए लोगों में होड़ मची है।मेले के अंदर कदम रखते ही हर तरफ शोर, संगीत और खुशियों का माहौल नजर आता है। मनोरंजन के साथ-साथ खरीदारी के शौकीनों के लिए भी मेले में बहुत कुछ है। इटावा से आए हैंडमेड वुडन आइटम इस बार मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बनकर सामने आए हैं। लकड़ी से बनी सुंदर और यूनिक कलाकृतियों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और जमकर खरीदारी कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बात करते हुए सिद्धि पाण्डेय ने कहा, “मैं मेला घूमने आई हूं, आकर बहुत अच्छा फील हो रहा है। अभी मैं झूला झूलकर आई, मजा आ गया। प्रशासन की भी काफी अच्छी व्यवस्था है।” वहीं देवरिया से आईं सारिका ने बताया, “मंदिर में दर्शन की हूं, अब मेला घूमना है। श्रृंगार के सामान और बच्चों के लिए खिलौने लूंगी।”मेले में हर बार की तरह इस बार भी ‘मौत का कुआं’ लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां स्टंट मैन बाइक के साथ-साथ कार से भी खतरनाक स्टंट दिखा रहे हैं, जिसे देखकर दर्शक दंग रह जा रहे हैं। इसके अलावा गुब्बारे फोड़ने वाली शूटिंग रेंज में लोग अपना निशाना आजमा रहे हैं।खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी मेले में खूब इंतजाम हैं। खजला, खाजा और मेले के पारंपरिक पकवानों का लोग जमकर स्वाद ले रहे हैं। खाने की दुकानों पर भी अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है।मेले में सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा किया गया है। श्रद्धालुओं और दर्शकों की सुविधा के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। हर गतिविधि पर पुलिस की नजर बनी हुई है, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के मेले का आनंद उठा सकें।
मुस्लिम आदमी ने फर्जी पंडित बनकर शादी कराई। 7 दिन बाद नियाजुल और उसकी बहन गोमांस खाने के लिए दबाव डालने लगे। पहले कहा हिंदू बन जाऊंगा, बाद में मुकर गया। जबरदस्ती बुर्का पहनाया। मेरा ब्रेनवाश किया। धर्म बदलने को मजबूर किया।’ यह कहना है मुंगेर की मंशा कुमारी का। वह शादी करने के लिए अपने गांव के नियाजुल नाम के मुस्लिम लड़के के साथ घर से भाग गई थी। 10 दिन बाद माता-पिता के पास लौटी। बताया कि लड़का और उसकी बहन ने गाय का मांस खाने का दबाव डाला। जबरदस्ती बुर्का पहनाया। प्राइवेट वीडियो वायरल करने की धमकी दी। कहा कि मुसलमान हो गोमांस खाना होगा। भास्कर की रिपोर्ट में जानिए मंशा के साथ 10 दिन में ऐसा क्या हुआ कि वह 4 साल पुराने प्यार को ठुकराकर घर लौट आई। मुस्लिम लड़के के पास से आई लड़की का हुआ शुद्धीकरण 29 दिसंबर को मंशा लापता हो गई थी। 31 दिसंबर को उसने एक वीडियो जारी किया। इसमें वह मांग में सिंदूर लगाए हुए थी। उसके साथ नियाजुल भी था। मंशा ने कहा, ‘मैंने नियाजुल से अपनी मर्जी से शादी की है। वह अब मेरा पति है।’ वीडियो जारी करने के 7 दिन बाद 7 जनवरी को वह मुंगेर कोर्ट पहुंची। कहा कि मुझे मुस्लिम लड़के के साथ नहीं रहना है। इसके बाद हिंदू संगठनों से जुड़े लोग उसे महावीर मंदिर ले गए। गंगाजल से स्नान और पूजा-पाठ कराकर उसका शुद्धीकरण किया गया। लड़का और उसके घर वाले दे रहे हत्या की धमकी एक हिंदू लड़की किस तरह मुस्लिम लड़के के प्यार में पड़ी? शादी के लिए उससे क्या वादे किए गए? 10 दिन में ऐसा क्या हुआ कि 4 साल पुराने प्यार से मोहभंग हुआ और लड़की घर लौट आई? इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने मुंगेर, बांका, भागलपुर और जमुई में लड़की की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। लड़की और उसके परिवार के लोग लोक-लज्जा और लड़के वालों की धमकी के चलते घर छोड़कर चले गए थे। 6 दिन बाद हमें लड़की के पिता मिले। हमने उनसे बात की। उन्होंने बताया कि बेटी घर पर नहीं है। लड़का और उसके घर के लोग हमें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। हमने बेटी को गांव से बाहर रखा है। लड़के वाले लड़की को घर से उठाकर ले जाने की धमकी दे रहे हैं। कह रहे हैं कि पूरे परिवार को जान से मार देंगे। आगे पढ़िए, मंशा की जुबानी, कैसे हुआ नियाजुल से प्यार इसके बाद हमने हिंदूवादी संगठन के लोगों से बात की, उन्होंने लड़की का शुद्धिकरण कराया था। उनकी मदद से हम मंशा के पास पहुंचे। उसकी आपबीती सुनी। मंशा की सुरक्षा के लिए हम उसका पता पब्लिक नहीं कर रहे हैं। आगे पढ़ें जैसा मंशा ने बताया… सीन 1- पढ़ाने घर आया, भाई मानती थी, प्यारी बातों से फंसाया इस सबकी शुरुआत करीब 4 साल पहले हुई थी। 10वीं की परीक्षा के बाद मैं इंटर में गई। पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि मुझे शहर भेज सकें। उन्होंने नियाजुल से कहा कि घर आकर पढ़ा दो। मैं जानती थी कि वह मुसलमान है। उसने मुझसे कहा कि मैं हिंदू बन जाऊंगा। कहता था तुम्हारे लिए मैं आर्यन हूं। मैं तो उसे अपना भाई मानती थी। पढ़ाने के दौरान वह मुझसे मीठी-मीठी बातें करता। धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ने लगीं। वह मुझसे प्यार भरी बातें करता था। एक दिन उसने मुझे प्रपोज किया। मैंने साफ मना कर दिया। कहा कि हम दोनों एक गांव के हैं। हम तो भाई-बहन हुए। अलग-अलग धर्म से हैं। हमारे बीच प्यार नहीं हो सकता। सीन 2- कहता था- हां कर दो, नहीं तो जान दे दूंगा, मुझे भी हो गया प्यार मैंने उसके प्रपोजल को ठुकराया तो उसने इमोशनल ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी। दिखावा करता कि मेरे बिना नहीं रह सकता। कहता हां कर दो, नहीं तो जान दे दूंगा। मैं कुछ नहीं मांगती थी फिर भी महंगे-महंगे गिफ्ट लेकर आता था। कहता था कि एक बार प्यार के लिए हां कह दो, तुम्हें रानी की तरह रखूंगा। दुनिया की सारी खुशियां दूंगा। तुम जो कहोगी वह करूंगा। तुम्हारे बिना नहीं जी सकता, तुम्हें पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाऊंगा। तुम्हारे माता-पिता को भी खुश रखूंगा। उसकी इन बातों में मैं फंस गई। धीरे-धीरे मुझे भी उससे प्यार हो गया। सीन 3- कहता था तुमसे शादी करने के लिए हिंदू बन जाऊंगा 4 साल तक ऐसे ही चलता रहा। मुझे पता था कि मैं हिन्दू हूं, वह मुसलमान। हमारी शादी नहीं होगी। नियाजुल ने मुझे झांसा दिया कि वह हिंदू बन जाएगा। मुझे यकीन दिलाता रहा कि शादी के समय हिंदू धर्म अपना लेगा। मैंने अपने घर के लोगों से शादी के लिए कहा तो वे तैयार नहीं हुए। मेरी उससे बातचीत बंद करा दी। नियाजुल ने एक दिन चुपके से मुझसे बात की। कहा कि चलो भाग चलते हैं। मैं पहले तैयार नहीं हुई। उसने मुझे प्यार का वास्ता देकर अपने साथ चलने के लिए तैयार कर लिया। घर से भागने से घर लौटने तक, मंशा ने कैसे गुजारे 10 दिन दिन 1- 29 दिसंबर 2025 29 दिसंबर की सुबह 9 बजे मैं घर से प्रैक्टिकल क्लास करने के बहाने निकली। नियाजुल मुझे रास्ते में मिला। उसके एक दोस्त की मदद से हम दोनों मुंगेर रेलवे स्टेशन पहुंचे। भागकर कहां जाना है, यह तय नहीं था। जल्दी से जल्दी हमें मुंगेर से बाहर निकलना था। स्टेशन पर पहली ट्रेन दिल्ली की आई। हम दोनों उसी ट्रेन में बैठ गए। अगले दिन दिल्ली पहुंचे। दिन 2- 30 दिसंबर 2025 दिल्ली पहुंचने के बाद नियाजुल शादी करने से मुकर गया। मैंने दबाव डाला तो कहा कि निकाह करूंगा। मैं निकाह करने को तैयार नहीं हुई। इसके बाद उसने कहा कि हिंदू रीति-रिवाज से मंदिर में शादी कर लेंगे। उसने अपने किसी जानने वाले को फोन किया फिर हम स्टेशन से दिल्ली के तीस हजारी पहुंचे। उसने बताया कि वह मुझे एक आर्य समाज मंदिर लेकर आया है। हालांकि वहां कोई मंदिर नहीं था। एक कमरा था और उसी कमरे में कुछ लोग थे। मुझे तो पहले शक हुआ, लेकिन नियाजुल ने कहा कि हम बाहर कहीं दूसरी जगह शादी नहीं कर सकते। तुम्हारे घर वालों ने थाने में शिकायत की है, पुलिस हमें खोज रही है। बाहर शादी करेंगे तो पुलिस पकड़ लेगी। यह सुनकर मैं शादी करने के लिए तैयार हो गई। वहां जो लोग थे, उनपर मुझे शक हो रहा था। उनकी बोली मुसलमानों जैसी थी। वहां जो पंडित था वह भी ढंग से मंत्र नहीं पढ़ रहा था। उसने जल्दी-जल्दी कागज के टुकड़े जलाकर हवन कराकर शादी करवा दी। इनकी हरकतों से मुझे शक होने लगा कि मेरे साथ कुछ गलत हो रहा है। शादी के बाद नियाजुल ने अपने दोस्त को फोन किया और मुझे उसके कमरे पर ले गया। उस दिन हम दोनों साथ रहे। दिन 3- 31 दिसंबर 2025 मेरे घरवालों ने नियाजुल और उसके परिवार पर केस किया था। उसने मुझ पर दबाव बनाया कि वीडियो बनाकर बोलो कि अपनी मर्जी से शादी की है। खुद लड़का को भगाकर ले आई हूं। मैंने इसके लिए मना कर दिया। नियाजुल ने मेरे साथ बिताए प्राइवेट टाइम का वीडियो बनाया था। उसने उसे वायरल करने की धमकी दी। बोला कि वीडियो में अपनी मर्जी से घर से भागने की बात नहीं कहती हो तो सारे प्राइवेट वीडियो वायरल कर दूंगा। मैं डर गई। मैंने वीडियो बनाया। बताया कि अपनी मर्जी से नियाजुल के साथ आई हूं। वीडियो के साथ शादी के कागज भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। दिन 4: 1 जनवरी 2026 मेरे एक जानने वाले दादा ने शादी का पेपर देखा। उन्होंने बताया कि यह फर्जी कागज है। मुझे तो पहले से शक था। जब उन्होंने बताया कि यह फर्जी कागज और फर्जी शादी है तो मैं उसके बारे में पता करने लगी। नियाजुल जिस दोस्त के रूम पर मुझे रखे हुए था उसकी गर्लफ्रेंड भी वहीं रहती थी। मैंने उसे पूरी बात बताई। उसने कहा कि इधर ऐसे ही शादियां करते हैं। पंडित और लोग सारे फर्जी हैं। उस शादी के नाम पर पंडित ने मुझसे 25 हजार रुपए लिए थे। मुझे पूरा यकीन हो गया कि मेरे साथ धोखा हुआ है। दिन 5: 2 जनवरी 2026 नियाजुल को उसके दोस्त ने बताया कि वह उसके यहां ज्यादा दिन नहीं रुक सकता। अपने रहने की कोई व्यवस्था कर लो। दिल्ली में हमें रखने के लिए कोई तैयार नहीं था। नियाजुल ने कई दोस्तों से बात की, लेकिन कोई उसे अपने पास बुलाने को तैयार नहीं था। आखिर में उसने अपनी बहन से बात की। उसकी दीदी खगड़िया जिले में अपने घर पर बुलाने के लिए तैयार हो गई। नियाजुल उसी दिन से मुझे प्रताड़ित करने लगा। कहने लगा कि तुम्हारी मम्मी ने मेरे खिलाफ बयान दिया है। वह हर जगह कह रही है कि मैंने तुम्हारे साथ लव जिहाद किया है। इमोशनल ड्रामा करने लगा। कहने लगा कि तुम्हारी मम्मी ने मेरा जीवन खराब कर दिया है। बार-बार मुझपर आरोप लगाने लगा कि मेरी वजह से उसका जीवन खराब हो गया है। दिन 6: 3 जनवरी 2026 3 जनवरी को खगड़िया आने के लिए हम न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन पकड़ी। दिन 7: 4 जनवरी 2026 4 जनवरी को हम खगड़िया पहुंचे। उसने मुझे जबरदस्ती बुर्का पहनाया। कहा कि ऐसे बाहर गई तो कोई तुम्हें पहचान लेगा। नियाजुल के साथ मैं उसकी दीदी के घर पहुंची। उसकी दीदी और उसके घर के लोग कहने लगे कि बिना निकाह के इसे नहीं रख सकते। वे लोग मुझपर मांस खाने के लिए दबाव बनाने लगे। कहते थे मुसलमान घर में शादी हुई है तो गाय का मांस तो खाना पड़ेगा। मैं गुस्सा होती थी तो बोलते थे कि मजाक किया है। खासकर उसकी दीदी धीरे-धीरे मुझपर गोमांस खाने का दबाव बनाने लगी। उस दिन घर में मीट भी बनाया था। मीट किसका था, मुझे नहीं पता। उन्होंने मेरे ऊपर खाने का काफी दबाव दिया। दिन 8: 5 जनवरी 2026 गाय का मांस खाने के लिए दबाव डाले जाने के बाद मैं बहुत डर गई थी। सोच रही थी कि इन लोगों के चक्कर में कहां फंस गई। वे लोग बार-बार बोलने लगे कि लड़का जिस धर्म का होता है शादी के बाद लड़की भी उसी धर्म की मानी जाती है। वे लोग मुझसे कहते कि तुमने मुसलमान से शादी की है तो तुम भी मुसलमान हो गई हो। मुझे कलमा और 5 वक्त नमाज पढ़ने के लिए कहने लगे। मेरा माइंड वॉश कर मुझे बार-बार इस्लाम अपनाने को कहते। मुझे हथियार दिखाकर डराते थे। नियाजुल की बहन और उसके घर के लोग गाय का मांस खाने के लिए दबाव डालते थे। इससे मुझे समझ आ गया कि किस मुसीबत में फंस गई हूं। लड़के ने पहले कहा था कि मैं भी हिंदू बन जाउंगा, बाद में मुझे मुस्लिम बनाने पर सभी तुले थे। दिन 9: 6 जनवरी 2026 मैं वहां से निकलना चाहती थी। नियाजुल से कहा कि मुझे यहां नहीं रहना। इतना सुनते ही उसकी बहन के घर के लोग मुझे धमकाने लगे। मेरा मोबाइल फोन छीन लिया। वे लोग मुझे किसी से बात नहीं करने देते थे। मुझे बाहर निकलने नहीं देते थे। मेरे घर वाले नियाजुल पर लव जिहाद का आरोप लगा रहे थे। वह मुझसे कहता कि सब कुछ तुम्हारी वजह से हुआ है। इससे मेरे दिमाग में आइडिया आया कि यहां से निकलने का यही मौका है। मैंने नियाजुल से कहा कि तुम्हारे फेवर में कोर्ट में बयान दूंगी कि अपनी मर्जी से भागकर शादी की है। वह शुरू में मुझे कोर्ट ले जाने को तैयार नहीं हुआ। काफी कोशिश के बाद वह मुझे मुंगेर कोर्ट ले जाने को राजी हुआ। मैंने उसे यकीन दिलाया था कि कोर्ट में तुम्हारे फेवर में बयान दूंगी तो तुम बच जाओगे। उसने धमकी दी कि अगर खिलाफ बोला तो मेरे पूरे परिवार को जान से मार देगा। दिन 10: 7 जनवरी 2026 मैं कोर्ट के लिए निकल रही थी तो नियाजुल के घर वालों ने मुझे जबरदस्ती बुर्का पहनाया। कहा कि इस्लाम में महिलाएं बिना बुर्का के घर से बाहर नहीं निकलती हैं। कोर्ट में बयान होने के बाद विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल वालों ने मुझे मेरी मम्मी से मिलवाया। मैंने मम्मी को पूरी बात बताई। मम्मी ने मुझे हिम्मत दी। मैं अब वापस उसके पास नहीं जाना चाहती। नियाजुल और उसके परिवार वाले जान मुझे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। बोल रहे हैं कि घर से उठा लेंगे। पूरे परिवार को खत्म कर देंगे। उन लोगों के डर से मैं दूसरी जगह रह रही हूं। मुझे डर है कि मेरे और मेरे परिवार के साथ कुछ अनहोनी ना हो जाए।
युवती से छेड़खानी, भाई को पीटा:पुलिस ने पूछा-छेड़खानी का क्या सबूत है
गर्दनीबाग थाना इलाके में एक दलित युवती से छेड़खानी हुई। इसका विरोध करने पर बदमाशों ने उसके भाई के साथ मारपीट की। पीड़िता जब थाने में लिखित शिकायत करने आई तो पुलिस ने पूछा-छेड़खानी का क्या सबूत है? इसपर युवती ने कहा कि बाथरूम में नहाने के दौरान झांकता है। वह परिजनों के साथ किराया के मकान में रहती है। हालांकि उसकी लिखित शिकायत पुलिस ने ले ली। केस दर्ज नहीं हुआ है। उसका आरोप है कि प्रिंस नाम का लड़का छेड़खानी करता है। अश्लील कमेंट करता है। नहाने के दौरान बाथरूम में झांकता है। पीड़िता का कहना है कि ड्यूटी पर जाती हूं तो रास्ते में छेड़खानी करता है। इसपर ध्यान नहीं देती थी। मंगलवार की शाम नहा रही थी, तो हर बार की तरह बाथरूम में झांककर मुझे देख रहा था। मैंने रंगे हाथ पकड़ लिया। फिर हिम्मत जुटाकर इसका विरोध किया। उसके बाद प्रिंस और उसके लोगों ने मारपीट की। थाने पर मुझसे कहा गया कि प्रिंस ने भी तुम्हारे भाई के खिलाफ 30 लाख लूटने का आरोप लगाया है। पुलिस ने प्रिंस के परिजनों को केस करने को उकसाया छेड़खानी का मामला दबाने के लिए पुलिस ने ही खेल कर दिया। पुलिस ने ही आरोपी के परिजनों को उकसाया कि तुमलोग भी उसके भाई पर चोरी और लूट का केस कर दो। ऐसा करने पर दोनों पर एफआईआर हो जाएगी। फिर दोनों के बीच समझौता हो जाएगा।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज (15 जनवरी) को अमृतसर में सिखों के सर्वोच्च तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे। अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने एक आपत्तिजनक वीडियो और गोलक समेत दूसरे सिख मुद्दों पर की बयानबाजी को लेकर तलब किया है। अमृतधारी सिख न होने की वजह से सीएम अकाल तख्त की फसील की जगह सचिवालय में पेश होंगे। अकाल तख्त जत्थेदार ने CM भगवंत मान को पहले सुबह 10 बजे बुलाया था लेकिन कल (13 जनवरी) को सीएम के प्रोग्राम का हवाला देकर दोपहर बाद साढ़े 4 बजे आने को कहा। हालांकि इसके जवाब में CM मान ने कहा कि उनका कोई कार्यक्रम नहीं है। वह सुबह 10 बजे ही अकाल तख्त में पेश होने पहुंचेंगे। अगर तब तक अकाल तख्त जत्थेदार नहीं पहुंचे तो CM को इंतजार करना होगा। अकाल तख्त में तलब होने वाले सीएम भगवंत मान चौथे मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले दिवंगत भीम सेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल को भी अकाल तख्त में तलब किया जा चुका है। CM को तलब करते हुए अकाल तख्त जत्थेदार ने क्या कहा था... तलब करने के बाद CM भगवंत मान की अहम बातें... ***************************ये खबर भी पढ़ें... CM मान बोले- पेशी का लाइव टेलीकास्ट कराएं जत्थेदार:अकाल तख्त पर गोलक का हिसाब-किताब लाऊंगा; SGPC बोली- शर्तें न लगाएं पंजाब के CM भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज से अपील की कि 15 जनवरी को जब वह अकाल तख्त पर पेश हों तो सभी चैनलों पर उसका लाइव टेलीकास्ट किया जाए (पढ़ें पूरी खबर)
भगवंत मान पंजाब के चौथे मुख्यमंत्री हैं, जाे अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हो रहे हैं। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुओं के दसवंध के सिद्धांत-गुरू की गोलक, एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है। भगवंत मान से पहले 3 और मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। भीमसेन सच्चर अविभाजित पंजाब के दूसरे मुख्यमंत्री थे। अकाल तख्त पर पेश होने वाले मुख्यमंत्रियों में सबसे सख्त सजा सुरजीत सिंह बरनाला को दी गई थी। उन्हें पंथ से निष्कासित करने के साथ गले में तख्ती डालकर पेश होने को कहा गया था। सबसे ज्यादा विवाद प्रकाश सिंह बादल को लेकर हुआ। इसकी वजह ये थी कि सजा पूरी करने के बाद उन्हें फक्र ए कौम अवार्ड से नवाजा गया। जिसका सिखों के भीतर ही विरोध हुआ। पंजाब के मुख्यमंत्री अकाल तख्त पर कब पेश हुए, उन्हें क्यो तलब किया गया, क्या सजा मिली, पढ़िए पूरी रिपोर्ट.... 1. भीम सेन सच्चर 2 . सुरजीत सिंह बरनाला 3 .प्रकाश सिंह बादल CM भगवंत मान को धार्मिक सजा नहीं होगी...सीएम भगंवत मान पर आरोप है कि उन्होंने सिखों की पवित्र परंपरा दसवंध और गुरुद्वारों की गोलक के मिसयूज को लेकर टिप्पणियां कीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोगों से गोलक में पैसे न डालने की बात कही थी, जिसे सिख सिद्धांतों पर हमला माना गया। सीएम ने बार-बार ऐसे बयान दिए जो सिख रहत मर्यादा और अकाल तख्त की सर्वोच्चता को चुनौती देते हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मुख्यमंत्री के कैरेक्टर को लेकर सवाल उठे। अकाल तख्त ने इसे सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना। हालांकि सीएम मान को धार्मिक सजा नहीं मिलेगी क्योंकि अकाल तख्त उन्हें पूर्ण सिख नहीं मानता। उनसे सिर्फ स्पष्टीकरण लिया जाएगा। जानें श्री अकाल तख्त क्या है?SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की। उन्होंने देखा कि दुनिया में बहुत बड़ा जुल्म हो रहा था। इस पर उन्होंने दो तलवारें अपनाने का सिद्धांत बनाया। एक मीरी और दूसरी पीरी। इसका मतलब ये था कि धर्म और सियासत पर फैसले एक मंच से लिए जाएंगे। श्री अकाल तख्त अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त स्थित है। अकाल तख्त का मतलब काल रहित परमात्मा का सिंहासन है। यह सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। यह हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है। ************************

