DRG: माओवादियों को जिसपर था गुरूर उसी ने भेद दिया 'चक्रव्यूह'
Chhattisgarh Ground Report: जिस स्थानीय ज्ञान और नेटवर्क का इस्तेमाल करके लाल आतंक के पैरोकार दशकों तक राज्य की नज़रों में धूल झोंकते रहे, वही ज्ञान अब उनके ताबूत की आखिरी कील साबित हुआ.
CG Weather: छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम, IMD ने जारी किया अगले 4 दिन का अपडेट
Chhattisgarh Weather Update 04 October: छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के संकेत मिलने लगे हैं। 5 से 7 अक्टूबर के बीच कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश संभव है।
Chhattisgarh में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का एक साल पूरा, 850 गांवों तक पहुंची बस सेवा
रायपुर, तीन अक्टूबर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत एक वर्ष में बस्तर और सरगुजा संभाग के 850 गांव में पहली बार नियमित बस सेवा पहुंची है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित, सुलभ और नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने अपने संचालन का एक वर्ष पूरा कर लिया है। चार अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के तहत बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर 107 बस का संचालन किया जा रहा है। इन बसों के जरिए ऐसे 850 गांव को नियमित यात्री बस सेवा से जोड़ा गया है, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने बताया कि एक वर्ष में योजना के तहत बसों ने करीब 24 लाख किलोमीटर का सफर तय किया है। वर्तमान में ये बसें प्रतिदिन करीब 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। योजना के अधिसूचित मार्गों की कुल लंबाई करीब 5,300 किलोमीटर है। इन मार्गों की लंबाई 14 से 105 किलोमीटर के बीच है और अधिकांश पर प्रतिदिन दो बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना के एक वर्ष पूरा होने पर कहा, ‘‘सुदूर गांव में रहने वाले नागरिक को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक सहज पहुंच का समान अवसर मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना इसी सोच को धरातल पर उतार रही है।’’उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नियमित यात्री बस नहीं पहुंचती थी, वहां आज ग्रामीण तय समय पर सुरक्षित बस से स्कूल, अस्पताल, हाट-बाजार, ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक पहुंच रहे हैं। साय ने कहा, ‘‘यह केवल परिवहन सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम है।’’अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की शुरुआत चार अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में की थी। शुरुआत में 34 मार्ग पर बस सेवा शुरू की गई थी और करीब 250 गांव को इससे जोड़ा गया था। एक वर्ष के भीतर योजना का दायरा बढ़कर 106 मार्ग और 107 बस तक पहुंच गया तथा नियमित बस सेवा से पहली बार जुड़े गांवों की संख्या बढ़कर 850 हो गई। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया है। बस्तर संभाग में 51 मार्ग पर 50 बस और सरगुजा संभाग में 55 मार्ग पर 57 बस संचालित की जा रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि योजना शुरू करने के पीछे सुदूर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में नियमित सार्वजनिक परिवहन की कमी एक प्रमुख कारण था। बस्तर और सरगुजा के अनेक गांवों में नियमित बस सेवा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को पिकअप एवं अन्य वाहनों में सफर करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि दुर्गम मार्गों पर यात्रियों की संख्या कम होने के कारण निजी बस संचालकों के लिए नियमित बस सेवा चलाना व्यावसायिक रूप से कठिन था और इसी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता के साथ नियमित यात्री परिवहन की व्यवस्था शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि दुर्गम और कम यात्री संख्या वाले मार्गों पर नियमित बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दे रही है। पहले वर्ष में 26 रुपये प्रति किलोमीटर, दूसरे वर्ष में 24 रुपये और तीसरे वर्ष में 22 रुपये प्रति किलोमीटर की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। यह सहायता अधिकतम तीन वर्ष तक दी जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत संचालित वाहनों को मासिक मोटरयान कर में भी अधिकतम तीन वर्ष तक छूट दी जाती है। अब तक 107 बस संचालकों को कुल 5.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।
महानदी जल विवाद सुलझाने के लिए दिल्ली पहुंचे छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय
देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त जल संसाधन के बंटवारे और अंतर-राज्यीय विवादों को लेकर एक बहुत ही बड़ी, संवेदनशील और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और पड़ोसी राज्य के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद (Mahanadi Water Dispute) को हमेशा के लिए खत्म करने और एक स्थायी समाधान निकालने की दिशा में अब निर्णायक कदम उठाए जाने शुरू हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) विशेष रूप से इसी गंभीर मुद्दे पर उच्च स्तरीय चर्चा करने और केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने के लिए राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं। दिल्ली पहुंचते ही मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक बहुत ही संतुलित, परिपक्व और बड़ा बयान देते हुए यह स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के हितों, किसानों के अधिकारों और पड़ोसी राज्य के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और दोनों राज्यों के समग्र हित में जो भी न्यायसंगत फैसला होगा, उसे पूरी सहजता के साथ स्वीकार किया जाएगा। आज के इस विस्तृत, राजनीतिक विश्लेषणात्मक और जमीनी आलेख में हम आपको महानदी के पानी पर चल रहे इस वर्षों पुराने विवाद, मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के सियासी मायने और इसके संभावित समाधान के सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।महानदी जल विवाद का पूरा इतिहास और दोनों राज्यों के बीच क्यों है खींचतान?महानदी छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्य की जीवनदायिनी नदियां में से एक है, जिस पर लाखों किसानों की खेती-किसानी, पेयजल व्यवस्था और उद्योगों का भविष्य टिका हुआ है। पिछले कई वर्षों से इस बात को लेकर दोनों राज्यों के बीच लगातार वैचारिक और कानूनी खींचतान चली आ रही है कि नदी के पानी का भंडारण, बहाव और वितरण किस अनुपात में किया जाए ताकि किसी भी राज्य के किसानों या आम नागरिकों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े। छत्तीसगढ़ का यह तर्क रहा है कि ऊपरी हिस्से में होने के कारण राज्य के जल स्रोतों और परियोजनाओं पर उसका भी न्यायसंगत अधिकार है, जबकि दूसरे पक्ष की अपनी तकनीकी और भौगोलिक चिंताएं रही हैं। इस मामले को सुलझाने के लिए पहले भी कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, ट्रिब्यूनल का गठन किया जा चुका है और कानूनी लड़ाइयां भी लड़ी गई हैं, लेकिन अब राजनीतिक इच्छाशक्ति और उच्च स्तरीय संवाद के जरिए इस जटिल पहेली को सुलझाने का एक नया प्रयास शुरू किया गया है।दिल्ली पहुंचे सीएम विष्णु देव साय की केंद्र सरकार के साथ उच्च स्तरीय बैठकेंराजधानी दिल्ली के अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ मंत्रियों, अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ मैराथन बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Mahanadi Water Disputes Tribunal) के समक्ष चल रहे मामलों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना और दोनों राज्यों के बीच एक आपसी सहमति (Consensus) का फॉर्मूला तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में यह संदेश दिया है कि टकराव की राजनीति से कभी किसी का भला नहीं होता, इसलिए संवाद के दरवाजे हमेशा खुले रखे जाने चाहिए ताकि विकास और सहयोग का नया रास्ता प्रशस्त हो सके। केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हो रही इन बैठकों पर न केवल छत्तीसगढ़ के किसानों की निगाहें टिकी हैं, बल्कि पूरे देश के जल प्रबंधन विशेषज्ञों की पैनी नजर इस बात पर है कि यह ऐतिहासिक विवाद अब किस दिशा में आगे बढ़ता है।छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों और जल सुरक्षा को लेकर सरकार का अडिग रुखकिसी भी नदी के पानी के बंटवारे के विवाद में सबसे अहम सवाल उस क्षेत्र के स्थानीय किसानों और आम जनता के अधिकारों का होता है जो अपनी फसल की सिंचाई के लिए पूरी तरह उसी पानी पर निर्भर होते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए इस बात का विशेष रूप से भरोसा दिलाया है कि छत्तीसगढ़ सरकार अपने किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और राज्य के धान के कटोरे कहे जाने वाले मैदानी इलाकों में पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखा जाएगा। सरकार का यह प्रयास है कि एक तरफ जहां राज्य की जल सुरक्षा पूरी तरह से सुरक्षित रहे, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य के साथ भी भाईचारे और कानूनी दायरे के भीतर रहकर इस विवाद का ऐसा सर्वमान्य हल निकाला जाए जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।विवादों के दौर को पीछे छोड़कर समाधान की ओर बढ़ते कदम साबित होंगे मील का पत्थरभारत जैसे संघीय ढांचे वाले देश में अंतर-राज्यीय जल विवाद अक्सर लंबे समय तक अदालतों और आयोगों में उलझे रहते हैं, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई गई यह सकारात्मक राजनीतिक इच्छाशक्ति और खुलापन इस बात का प्रमाण है कि संवाद और सहयोग के जरिए बड़े से बड़े मतभेदों को भी आसानी से सुलझाया जा सकता है। आने वाले कुछ हफ्तों में इस दिशा में कुछ और ठोस कानूनी और प्रशासनिक परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है, जो महानदी के पानी पर दशकों से चल रहे इस गतिरोध को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ की जनता और विशेष रूप से अन्नदाताओं को अब इस बात की उम्मीद बंधने लगी है कि कड़े संघर्ष और विवादों का यह दौर जल्द ही खत्म होगा और राज्य के विकास का रास्ता और अधिक प्रशस्त हो जाएगा।
Chhattisgarh Guest Lecturer Policy: अतिथि व्याख्याता भर्ती में बड़ा बदलाव, समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी को मिलेगी वरीयता
Chhattisgarh Rain Alert: भारी बारिश से रायपुर-दुर्ग समेत कई जिलों में बाढ़, नदियां उफान पर; सड़क और रेल सेवाएं प्रभावित
'कच्चा बादाम' वायरल ट्रेंड से रातों-रात सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाली मशहूर पर्सनैलिटी अंजलि अरोड़ा (Anjali Arora) अब बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी का जादू चलाने के लिए तैयार हैं। अंजलि अरोड़ा रामायण पर आधारित आगामी फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' के साथ अपना फीचर फिल्म डेब्यू करने जा रही हैं। इस फिल्म में वह माता सीता के मुख्य और पवित्र किरदार में नजर आएंगी। फिल्म के मेकर्स ने पहला पोस्टर और टीज़र जारी कर दिया है, जिसमें अंजलि अरोड़ा की माता सीता के रूप में पहली मनमोहक झलक दिखाई गई है। इसे भी पढ़ें: 23 साल बाद Emraan Hasmi की जबरदस्त वापसी, Awarapan 2 की सफलता पर पत्नी परवीन ने कही दिल छू लेने वाली बात फिल्म में देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं। यह फिल्म रामायण पर आधारित है और इसमें महाकाव्य की मुख्य घटनाओं को दिखाया गया है। टीज़र में राम और सीता की शादी, उनके वनवास की यात्रा और रावण की झलकियाँ दिखाई गई हैं। इसे भी पढ़ें: 15 साल बाद Zindagi Na Milegi Dobara के सीक्वल पर Zoya Akhtar का बड़ा खुलासा, स्क्रिप्ट पर शुरू हुआ काम अंजलि अरोड़ा माता सीता का किरदार निभाएंगी अंजलि अरोड़ा 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' में माता सीता का किरदार निभाएंगी। यह उनकी पहली फीचर फिल्म है और यह उस सोशल मीडिया कंटेंट से बिल्कुल अलग है जिससे उन्हें शुरुआती पहचान मिली थी। हाल ही में रिलीज़ हुए टीज़र में भगवान राम के रूप में देव शर्मा के साथ अरोड़ा की भूमिका की एक छोटी सी झलक दिखाई गई है। मेकर्स ने टीज़र में किरदारों की पूरी कहानी का खुलासा नहीं किया है, बल्कि मुख्य किरदारों और रामायण की अहम घटनाओं पर फोकस रखा है। देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभाएंगे देव शर्मा को भगवान राम के किरदार के लिए चुना गया है। टीज़र में राम और सीता की शादी और उसके बाद उनके वनवास की यात्रा के दृश्य दिखाए गए हैं। टीज़र में रावण भी नज़र आ रहा है, जिससे पता चलता है कि फिल्म में राम और राक्षस राजा के बीच के संघर्ष को भी दिखाया जाएगा। इस समय रामायण पर आधारित कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, और 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' एक और आने वाली फिल्म है जो राम, सीता और रावण की कहानी को बड़े पर्दे पर लाएगी। 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' के मेकर्स 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' का निर्देशन अभिषेक सिंह ने किया है। फिल्म को प्रकाश महोबिया और संजय बुंदेला ने महोबिया फिल्म्स बैनर के तहत प्रोड्यूस किया है। अजय कनौजिया का AJ फिल्म एंटरटेनमेंट वर्ल्ड इस फिल्म को पेश कर रहा है। फिल्म की शूटिंग हिंदी और छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में की गई है और इसे दोनों भाषाओं में रिलीज़ किया जाएगा। 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' की रिलीज़ डेट यह फिल्म 25 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। मेकर्स ने पहले पोस्टर और टीज़र के साथ ही रिलीज़ डेट की घोषणा की। इस फ़िल्म में अंजलि अरोड़ा माता सीता के तौर पर फ़ीचर फ़िल्म में डेब्यू करेंगी, जबकि देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभाएंगे। फ़िल्म का टीज़र आ चुका है, और अब फ़िल्म की कास्ट, स्केल और रामायण को किस तरह दिखाया गया है, इस बारे में और जानकारी इसके थिएटर में रिलीज़ होने के आस-पास सामने आने की उम्मीद है। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi 'MAHAKAVYA SHRI RAMAYAN KATHA' FIRST POSTER + TEASER OUT NOW – 25 SEPT 2026 RELEASE IN HINDI & CHHATTISGARHI... The first poster and teaser of #MahakavyaShriRamayanKatha have been unveiled… The film features #DevSharma as Shri Ram and marks #AnjaliArora 's feature-film debut as… pic.twitter.com/oSa8mdBBXT — taran adarsh (@taran_adarsh) August 18, 2026
छत्तीसगढ़ 12वीं बोर्ड: पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट हुए जारी, cgbse.nic.in पर करें चेक
Chhattisgarh CGBSE 12th Revaluation Result 2024: छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन(CGBSE) ने छत्तीसगढ़ कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2024 के लिए पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट की घोषणा कर दी है। यहां देखें ड

