राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन छोड़कर हाल ही में 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी आफ इंडिया' (NCPI) का हिस्सा बनने वाले 20 बागी सांसदों के साथ मंगलवार को दिल्ली के बंग भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अगुवाई खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी करने वाले हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी की पार्टी के टिकट पर संसद में पहुंचने वाले इन सांसदों द्वारा पाला बदले जाने के बाद से ही बंगाल की राजनीति में उबाल आया हुआ है, और एनडीए खेमे में नए सियासी समीकरणों के लिहाज से इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।लोकसभा स्पीकर के फैसले से पहले सियासी खींचतानआपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले इन 20 सांसदों ने बाद में बगावत करते हुए पाला बदल लिया था और अब यह नया दल केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बन चुका है। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अभी तक इस नए राजनीतिक दल-बदल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी गई है, जिसके कारण ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। टीएमसी नेतृत्व ने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक इस पूरी प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष इन सभी बागी सांसदों की सदस्यता तुरंत रद्द करने की पुरजोर मांग उठाई है, लेकिन लोकसभा सचिवालय की तरफ से अभी तक कोई भी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।सांसद निधि और संसद के आगामी सत्र की रणनीति पर होगी चर्चामंगलवार दोपहर को होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से सांसद निधि के फंड के सही और प्रभावी इस्तेमाल, राज्य और केंद्र के बीच प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने तथा आगामी संसद सत्र के दौरान सदन में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बागी गुट से जुड़ीं बीरभूम की सांसद शताब्दी राय ने इस अहम बैठक की पुष्टि कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे संसद की कार्रवाई आगे बढ़ेगी, इन बागी सांसदों की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर विपक्षी दलों की भी पैनी नजर बनी रहेगी, जिससे यह बैठक एनडीए कुनबे के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ढहाना आसान नहीं है। दिल्ली के Gen-Z (जेन-जी) प्रदर्शन के बाद समीकरण बदले हैं। शिक्षा और छात्रों से जुड़ी यूनिवर्सिटी पर भी शासन का रुख नरम हुआ है। यही वजह है कि 27 जुलाई को मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। दूसरी ओर, किसी भी कानूनी झटके से बचने के लिए रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने कोर्ट में पहले ही कैविएट दाखिल कर रखी है। जिससे प्रशासन का पक्ष सुने बिना अदालत कोई भी एकतरफा आदेश न दे सके। वहीं, पिछले 10 दिनों से यूनिवर्सिटी के छात्र परिसर के बाहर धरने पर डटे हैं। अब सवाल उठता है कि विरोध के बावजूद क्या सरकार इन इमारतों को तोड़ देगी? 5 पॉइंट में समझते हैं- कारण 1. दिल्ली के जेन-जी आंदोलन का खौफ इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में मीडिया छात्रों को पढ़ाने वाले प्रोफेसर एसके यादव कहते हैं- NEET परीक्षा लीक को लेकर देश में युवाओं ने बड़ा प्रदर्शन किया। आखिर में केंद्र सरकार बैकफुट पर चली गई। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इस एक आंदोलन के बाद युवाओं के हौसले बुलंद हैं। अगर यूनिवर्सिटी के खिलाफ कोई एक्शन लिया जाता है, तो इस बात की संभावना ज्यादा है कि युवा एकजुट होकर इसे बचाने का प्रयास करें। ऐसी स्थिति में छात्र और प्रशासन के बीच टकराव हो सकता है। सरकार इस स्थिति से बचना चाहती है, वह भी तब जब 6-7 महीने बाद ही चुनाव होने हैं। कारण 2. लखनऊ से नहीं, रामपुर से हुए फैसले यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए सपा और कांग्रेस प्रदर्शन कर रहे हैं। इन सबके अलावा लोकल लोग भी नहीं चाहते कि यूनिवर्सिटी को गिराया जाए। इनमें बड़ी संख्या में वो लोग हैं, जो आजम खान की राजनीति और उनकी पार्टी से ताल्लुक नहीं रखते। लोकल भाजपा नेता भी इसके गिराए जाने का समर्थन नहीं करते। जब भी उनसे सवाल पूछा जाता है, वो नजरअंदाज कर देते हैं। राज्य स्तर पर भी कोई नेता यूनिवर्सिटी के गिराए जाने का समर्थन करते नजर नहीं आता। लखनऊ में सरकार के करीब रहने वाले एक अधिकारी कहते हैं- सीएम योगी या फिर सरकार की मंशा कभी भी यूनिवर्सिटी को गिराने की नहीं रही है। स्थानीय लेवल पर जो अधिकारी हैं, वह इस तरह का फैसला ले रहे हैं। हालांकि, आखिरी फैसला कोर्ट और लखनऊ से ही होगा। कारण 3. छात्रों को शिफ्ट करने के लिए इतना बड़ा कॉलेज नहीं यूनिवर्सिटी में अभी करीब 3 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी में 16 डिपार्टमेंट हैं। 14 फैकल्टी और इंस्टीट्यूट हैं। मेडिकल, इंजीनियरिंग, कानून और मैनेजमेंट से लेकर हर तरह के कोर्स की पढ़ाई होती है। यूनिवर्सिटी से जुड़े टीचर्स का दावा है कि आसपास ऐसे कॉलेज नहीं हैं, जहां सभी छात्रों को शिफ्ट किया जा सके। अगर ऐसा कर भी लेते हैं, तो अलग-अलग फैकल्टी के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाएंगे। कारण 4. यूनिवर्सिटी जब बनी, तब प्राधिकरण नहीं था यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण 2006 में शुरू हुआ था। उस समय विकास प्राधिकरण नहीं था। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया। यूनिवर्सिटी ने इस पक्ष के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट में 20 जुलाई को याचिका दाखिल की थी। 28 जुलाई को इसकी सुनवाई होनी है। 26 जुलाई को डीएम रामपुर ने यूनिवर्सिटी कैंपस में टीम भेजकर बिल्डिंग के नक्शे मांगे थे। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज और अकादमी ब्लॉक के मैप दिए। बाकी बिल्डिंग के मैप दे नहीं सके। कारण 5. UGC का सपोर्ट यूनिवर्सिटी की तरफ एक्सपर्ट कहते हैं, UGC इस मामले में यूनिवर्सिटी का ही साथ देगा। क्योंकि, यूनिवर्सिटी के निर्माण के समय लागू नियम पर UGC ने मान्यताएं दी थीं। 2014 में UGC की एक्सपर्ट कमेटी ने यूनिवर्सिटी की जांच की थी। उस वक्त अपनी रिपोर्ट में बताया था कि यूनिवर्सिटी में तमाम कोर्सेस की फीस दूसरे प्राइवेट कॉलेज की फीस से काफी कम है। यह यूनिवर्सिटी व्यावसायिक फायदे के लिए नहीं चल रही। आजम ने जिस प्राधिकरण को बनवाया, अब वही मुसीबत बना 2005 में यूपी में जब सपा सरकार थी, तब आजम खान नगर विकास मंत्री थे। उसी दौरान 15 अप्रैल, 2005 को रामपुर विकास प्राधिकरण बनाया गया था। शुरुआत में प्राधिकरण के दायरे में रामपुर नगर पालिका के साथ 23 गांव शामिल किए गए थे। 18 सितंबर, 2006 को आजम खान ने सिंगनखेड़ा गांव में जौहर यूनिवर्सिटी की नींव रखी। उस समय सिंगनखेड़ा गांव प्राधिकरण के क्षेत्र में नहीं आता था। जुलाई, 2024 में प्राधिकरण ने अपनी सीमा बढ़ाई और शहर के आसपास के 39 गांव अपने दायरे में शामिल कर लिए। इनमें सिंगनखेड़ा गांव भी शामिल था। यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ। सपा की सरकार जाने पर प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी की इमारतों की जांच कराई। इसमें पता चला कि 40 इमारतों में सिर्फ मेडिकल कॉलेज और प्रशासनिक भवन का नक्शा मंजूर है। बाकी 38 इमारतों का नक्शा मंजूर नहीं कराया गया। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी को नोटिस दिया गया। प्राधिकरण ने कहा कि 30 जुलाई तक इन 38 इमारतों को खुद गिरा दें, नहीं तो प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। हालांकि, अब यह मामला कोर्ट में है। जुर्माना लगाकर यूनिवर्सिटी को गिरने से रोका जा सकता है लीगल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाईकोर्ट सिर्फ यह नहीं देखेगा कि जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतें गिराई जाएं या नहीं। यह भी तय करेगा कि ध्वस्तीकरण के बजाय कोई दूसरा रास्ता अपनाया जा सकता है या नहीं। सबसे पहले जुर्माना और बाकी फीस लेकर मामला रेगुलराइज करने के विकल्प पर चर्चा हो सकती है। अभी रामपुर विकास प्राधिकरण 1510 रुपए प्रति वर्ग मीटर डेवलपमेंट चार्ज लेता है। इसके अलावा लेबर सेस भी लगता है, जो किसी भी प्रोजेक्ट की कुल लागत का 1% होता है। जौहर यूनिवर्सिटी की लागत करीब 1000 करोड़ रुपए बताई जाती है। इस हिसाब से सिर्फ लेबर सेस ही करीब 10 करोड़ रुपए बनता है। इसके अलावा सुपरविजन चार्ज, नक्शा पास कराने की फीस, कंपाउंडिंग फीस और दूसरे कई शुल्क भी देने पड़ सकते हैं। हालांकि, यूनिवर्सिटी को कुल कितना भुगतान करना होगा, इसका सही हिसाब ले-आउट प्लान और इमारतों का पूरा रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही लगाया जा सकेगा। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें- जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतें अवैध तो सपा विरोध में क्यों, क्या पूरी यूनिवर्सिटी गिरा दी जाएगी, इससे भाजपा को क्या फायदा जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें ढहाने के आदेश से भाजपा और सपा के बीच राजनीति तेज है। भाजपा इसे 'भूमाफिया' पर कार्रवाई बता रही है। वहीं, सपा, भाजपा को ‘यूनिवर्सिटी तोड़ने वाला आक्रांता’ कह रही है। इसे कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट और NEET पेपर लीक से जोड़कर यूपी की भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। पढ़िए पूरी खबर…
पंजाब कांग्रेस की नेतृत्व की लड़ाई में अब आर-पार की सिचुएशन बन गई है। जालंधर से सांसद व पूर्व CM चरणजीत चन्नी व गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग के गुट से पहले ही दूरी बना रखी है। अब ऐसा माना जाने लगा है कि ये चन्नी-रंधावा गुट कांग्रेस हाईकमान से भी किनारा करने लगे हैं। इसका नजारा सोमवार को स्पष्ट दिखा। दरअसल, पंजाब के कांग्रेस सांसदों ने संसद के बाहर बरनाला में सफाईकर्मियों पर हुए लाठी चार्ज और पंजाब में पेपर लीक की घटना को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में राजा वडिंग के साथ डॉ. अमर सिंह, गुरजीत औजला व शेर सिंह घुबाया दिखे। वहीं दिल्ली में होने के बावजूद सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा उस धरने में शामिल नहीं हुए। चन्नी ने भी इससे दूरी बनाई। जिससे साफ है कि चन्नी व रंधावा अब राजा वडिंग के साथ कोई स्टेज भी शेयर करने को तैयार नहीं हैं। चन्नी और रंधावा अपने समर्थकों के साथ चुनाव की तैयारियों में जुट गए। चन्नी-रंधावा गुट से जुड़े नेता रविवार को गुरदासपुर के विधायक वरिंदरमीत सिंह पाहड़ा के घर जुटे। बैठक के बाद चन्नी गुट के नेताओं ने एक वीडियो रील जारी की और उसमें जो गाना लगाया उससे अपने विपक्षियों को कड़ा संदेश दिया है। रील की बैकग्राउंड चल रहे गाने में कहा हे कि साड्डे विच कोई खच्च नहीं। केसी वेणुगोपाल से आमने-सामने होने के बाद चन्नी गुट के तेवर कैसे बदले, जानिए... रील में चल रहे गीत के चार बड़े मायने… *************** ये खबर भी पढ़ें: पंजाब कांग्रेस नेताओं का हाईकमान की चेतावनी को ठेंगा: एक ही प्रोग्राम में चन्नी और वड़िंग गुट अलग-अलग पहुंचे; दिल्ली मीटिंग बेअसर दिल्ली में हाईकमान से बैठक के बाद हाईकमान व पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल पंजाब कांग्रेस में ऑल इज वेल के दावे कर रहे हैं, लेकिन ग्राउंड लेवल पर सच्चाई यह है कि पंजाब कांग्रेस में ऑल इज नॉट वेल है। शनिवार को पंजाब के बरनाला में ऐसा हुआ कि कांग्रेस में हाईकमान के दावे फेल हो गए और पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग गुट की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। (पढ़ें पूरी खबर)
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य प्रतिवादियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (क्रिमिनल रिविजन पिटीशन) पर जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया।
देश के अधिकांश राज्यों में इस समय मानसून अपने पूरे शबाब पर है। असम और गुजरात से लेकर ओडिशा तक नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रखा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 जुलाई (मंगलवार) के लिए अपना ताजा मौसम बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 28 जुलाई को दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) का अलर्ट जारी किया गया है।इसके साथ ही, देश के 15 से अधिक अन्य राज्यों में भी मूसलाधार बारिश, 65 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं, आकाशीय बिजली और समुद्र में भीषण उथल-पुथल की चेतावनी दी गई है।दिल्ली-UP समेत इन 12 राज्यों में 'अति भारी बारिश' का अलर्टIMD के मुताबिक, 28 जुलाई को देश के 12 प्रमुख क्षेत्रों में तेज बादलों के जमावड़े के साथ भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज होने का अनुमान है:दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा व चंडीगढ़: मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ अति भारी बारिश होगी।उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश: पहाड़ी राज्यों में तेज बारिश के कारण लैंडस्लाइड (भूस्खलन) और नदियों के उफान पर आने की आशंका है।पंजाब: राज्य के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का पूर्वाकलन है।ओडिशा, छत्तीसगढ़ व विदर्भ: मध्य और पूर्वी भारत के इन हिस्सों में मानसून की गतिविधियां काफी उग्र रहेंगी।मध्य महाराष्ट्र व कर्नाटक: मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों और तटीय व दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश जारी रहेगी।इन 15 राज्यों में भी होगी मूसलाधार बरसातमौसम विभाग ने देश के 15 अन्य राज्यों में छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है:उत्तर व पश्चिम भारत: पूर्वी राजस्थान, गुजरात रीजन और कोंकण व गोवा में मूसलाधार बारिश हो सकती है।मध्य भारत: मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश का अलर्ट है।पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत: पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के पहाड़ी राज्यों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज होगी।दक्षिण भारत: तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर आंतरिक कर्नाटक और केरल व माहे में तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है।65 किमी/घंटा की तूफानी हवाएं और वज्रपात की चेतावनीबारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आंधी, बिजली और समुद्री तूफानों का खतरा बना रहेगा:तूफानी हवाएं (40-50 किमी/घंटा): अंडमान-निकोबार, तटीय आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल और पूरे कर्नाटक में तेज हवाएं चलेंगी।वज्रपात (आकाशीय बिजली): उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में बिजली गिरने का खतरा है, इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।समुद्री अलर्ट (मछुआरों के लिए चेतावनी): अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसम बेहद खराब रहेगा। ओडिशा और पश्चिम बंगाल तटों पर 55 से 65 किमी/घंटा (झोंके 75 किमी/घंटा) की रफ्तार से भयंकर हवाएं चलेंगी। मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
दिल्ली में कचरा प्रबंधन सुधरेगा:एक जोन में लागू होगा इंदौर मॉडल: एलजी
दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने सोमवार को नगर निगम (एमसीडी) के कमिश्नर संजीव खिरवार, सभी अतिरिक्त आयुक्तों और जोनल आयुक्तों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर राजधानी की प्रमुख नागरिक सेवाओं का जायजा लिया। बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन, जलभराव, नालों की डी-सिल्टिंग, डंपसाइट से पुराने कचरे के निस्तारण और मानसून की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। एलजी ने कहा कि दिल्ली में अभी भी करीब 50% कचरे का स्रोत पर पृथक्करण (सेग्रिगेशन) नहीं हो रहा है, जिससे बड़ी मात्रा में कचरा सीधे डंपसाइट तक पहुंच रहा है। उन्होंने एमसीडी के एक जोन में इंदौर नगर निगम के कचरा प्रबंधन मॉडल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, डंपसाइट से पुराने कचरे को हटाने की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिदिन आने वाले नए कचरे का भी वैज्ञानिक तरीके से तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि दोबारा कचरे का पहाड़ न बन सके। बैठक में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण से निपटने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। एलजी ने सड़कों की समयबद्ध मरम्मत, धूल नियंत्रण और एमसीडी की सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। मानसून को देखते हुए जलभराव, डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों की रोकथाम की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी, नालों की नियमित सफाई और त्वरित जल निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। टोल प्लाजा के आसपास लगने वाले ट्रैफिक जाम और उससे होने वाली नागरिक परेशानियों पर भी चर्चा हुई।
कपूरथला पुलिस ने एक माह पहले हुई जतिंदर सहगल उर्फ जिंदर धनिया हत्या मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्य आरोपी निखिल शर्मा को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है, जो विदेश भागने की फिराक में था। इसके अलावा, दो अन्य आरोपियों सौरभ और सुखविंदर सिंह को करतारपुर के पास से पकड़ा गया है। यह जानकारी एसएसपी कपूरथला गौरव तूरा ने दी है। एसएसपी गौरव तूरा ने बताया कि यह घटना 28 जून की शाम कपूरथला के लाहौरी गेट के पास हुई थी। कुछ लोगों ने जतिंदर सहगल उर्फ जिंदर धनिया पर तेजधार हथियारों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उपचार के दौरान सिविल अस्पताल में जतिंदर की मौत हो गई थी। घटना के बाद सिटी थाना पुलिस ने नौ आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस पहले ही एक नाबालिग सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी थी। फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही थी। टेक्निकल टीम की मदद और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से मुख्य आरोपी निखिल शर्मा को दबोच लिया। वहीं, आरोपी सौरभ कुमार और सुखविंदर सिंह को करतारपुर के नजदीक से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस ने मामले में नामजद 9 आरोपियों में से अब तक एक नाबालिग सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी व जांच की जा रही है। घर लौटते वक्त जिंदर की स्कूटी रोक किया था तेजधार हथियारों से हमला मृतक की बहन सोनिका ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि घटना से पहले जिंदर अपनी स्कूटी पर सवार हो कर घर लौट रहा था। जब वे लाहौरी गेट स्थित श्री गुरुद्वारा साहिब के पास पहुंचे, तो वहां पहले से खड़े निखिल शर्मा उर्फ बोवा, सौरभ कुमार, निखिल उर्फ लालू, साहिल और कुछ अज्ञात युवकों ने उनकी एक्टिवा रोक ली। उन्होंने जतिंदर को घेरकर तेजधार हथियारों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। सोनिका ने यह भी बताया था कि उनके भाई ने उन्हें बताया था कि हरसिमरनजीत सिंह, चाहत सूद और राजू शर्मा उसे लगातार जान से मारने की धमकियां देते रहते थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर निखल शर्मा, सौरभ कुमार, निखिल, साहिल, हरसिमरनजीत सिंह, चाहत सूद, राजुक शर्मा और तीन अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
दिल्ली के ग्रीन लंग्स माने जाने वाले रिज क्षेत्र को फिर से प्राकृतिक स्वरूप देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वैज्ञानिक पारिस्थितिक पुनरुद्धार (इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन) अभियान शुरू किया है। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर शुरू हुआ, यह अभियान दिल्ली रिज के स्वीकृत वर्किंग प्लान के तहत चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य देशी वनस्पतियों को बढ़ावा देकर जैव विविधता मजबूत करना, भूजल संरक्षण, कार्बन अवशोषण और वायु प्रदूषण में कमी लाना है। यह अभियान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' और 70 लाख पौधारोपण मिशन का हिस्सा है। इस मिशन के तहत डीडीए को दिल्ली में 23 लाख देशी पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। जुलाई के पहले सप्ताह से अब तक डीडीए 8.29 लाख पौधे लगा चुका है, जिनमें 35,570 पेड़ और 7.93 लाख से अधिक झाड़ियां शामिल हैं। अकेले रिज क्षेत्र में 27,062 पौधे लगाए जा चुके हैं। डीडीए का कहना है कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे पक्षियों, तितलियों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास बहाल होंगे, जबकि 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव और धूल प्रदूषण में भी कमी आएगी। 120 हेक्टेयर में हटेंगे विदेशी पेड़, लगेंगे देशी पौधे-नानकपुरा, कमला नेहरू, साउथ सेंट्रल और सेंट्रल रिज में अभियान।-करीब 16,240 विदेशी (आक्रामक) पेड़-झाड़ियां हटाई जाएंगी।-उनकी जगह 1 लाख देशी पेड़ और 81,700 देशी झाड़ियां लगाई जाएंगी।-बरगद, पीपल, नीम, अर्जुन, शीशम, जामुन, ढाक और खेजड़ी प्रमुख प्रजातियां होंगी। वैज्ञानिक मॉडल से होगा पौधारोपणडीडीए ग्रिड-आधारित और मल्टी-टियर मॉडल अपना रहा है। प्रत्येक ग्रिड में पांच देशी पेड़ और चार झाड़ियां निर्धारित दूरी पर लगाई जा रही हैं, जबकि नियमित अंतराल पर पीपल और बरगद जैसे फिकस प्रजाति के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इस मॉडल से प्राकृतिक जंगल जैसी बहु-स्तरीय संरचना तैयार होगी, जिससे पौधों की जीवित रहने की क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकाल में रिज क्षेत्र अधिक घना एवं पर्यावरणीय रूप से मजबूत बन सकेगा।
नए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए दिल्ली से मुंबई तक 29 शहरों में कैंपस प्लेसमेंट
भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) ने कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम की घोषणा की है। इस बार कैंपस प्लेसमेंट का दायरा और भी बड़ा है। देश के 29 शहरों में कैंपस इंटरव्यू आयोजित होंगे, जहां 78 बड़ी कंपनियां करीब 5339 पदों पर भर्ती करेंगी। सबसे अधिक आकर्षण दिल्ली, मुंबई, पुणे, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों का रहेगा। यह प्लेसमेंट मई 2026 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी की अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंटों के लिए है।
पंजाबी म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने सितारे जस्सी गिल (Jassie Gill) को गहरा सदमा लगा है। उनकी माता सरदारनी रविंदर कौर का निधन हो गया है। वे पिछले लगभग 6 महीने से कैंसर जैसी गंभीर और नामुराद बीमारी से जूझ रही थीं। उनका लगातार इलाज चल रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें बचाया नहीं जा सका। दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली और इस फानी संसार को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। जानकारी के मुताबिक, जस्सी गिल की माता जी की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी और कैंसर डिटेक्ट होने के बाद से ही उनका इलाज किया जा रहा था। परिवार ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन अंत 27 जुलाई 2026 को उन्होंने अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर ली। इस दुखद खबर के सामने आने के बाद से ही जस्सी गिल के फैंस और पूरी पंजाबी संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। कल पैतृक गांव जंडाली में होगा अंतिम संस्कार परिवार की ओर से जारी किए गए आधिकारिक शोक कार्ड के अनुसार माता सरदारनी रविंदर कौर (सुपुत्नी स. गुरमिंदर सिंह) का अंतिम संस्कार कल यानी 28 जुलाई 2026 को सुबह 10:30 बजे किया जाएगा। यह संस्कार उनके पैतृक गांव जंडाली (पायल, जिला लुधियाना) में संपन्न होगा। परिवार द्वारा शुभचिंतकों और करीबियों से अंतिम दर्शनों और संस्कार के लिए गांव जंडाली पहुंचने का आग्रह किया गया है। अपने सादे स्वभाव के लिए जाने जाते हैं जस्सी गिल जस्सी गिल पंजाबी इंडस्ट्री का एक बहुत बड़ा और सम्मानित नाम हैं। उनके गाने पंजाब ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब चाव से सुने जाते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग उनके संगीत के दीवाने हैं। इतने बड़े स्टारडम के बावजूद, जस्सी गिल को उनके बेहद सादे, निग्ये और विनम्र स्वभाव के लिए जाना जाता है। गायक बब्बल राय के साथ उनकी गहरी और पुरानी दोस्ती भी इंडस्ट्री में एक मिसाल मानी जाती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने साहेबगंज से भाजपा विधायक और पूर्व पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह को 2018 के हर्ष फायरिंग और हत्याकांड मामले में राहत दी है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा पर तत्काल रोक लगाते हुए उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। इससे पहले, दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने विधायक राजू सिंह को 4 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। मामला 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस की है। जहां नए साल की पार्टी चल रही थी। आरोप है कि पार्टी के दौरान जश्न में फायरिंग हुई। जिसमें डॉ. अर्चना गुप्ता नाम की महिला को गोली लगी थी। उनकी मौत हो गई थी। आर्म्स एक्ट के उल्लंघन पर 2 महीने की अतिरिक्त सजा भी मिली थी प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पता चला कि विधायक राजू सिंह की ओर से गोली चलाई गई थी। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की एमपी-एमएलए अदालत ने इस मामले में आईपीसी की धारा 304 (भाग-2) यानी गैर-इरादतन हत्या के तहत 4 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। आर्म्स एक्ट के उल्लंघन पर 2 महीने की अतिरिक्त सजा भी दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी निचली अदालत के फैसले के बाद विधायक राजू सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने विधायक के वकीलों की दलीलों पर सुनवाई करते हुए उनकी सजा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी और जमानत याचिका स्वीकार कर ली। राजू कुमार सिंह मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं। वह नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री भी रह चुके हैं। पुलिस मौके पर पहुंची तो फरार मिले राजू सिंह घटना की सूचना पुलिस को 1 जनवरी 2019 को मिली। इसके बाद पुलिस फार्म हाउस पहुंची, लेकिन राजू सिंह और फायरिंग में शामिल उनके करीबी साथी घटनास्थल से फरार हो चुके थे। घटनास्थल को पानी से साफ कर दिया गया था। इस्तेमाल किए गए कारतूस गायब थे। एक पुलिस अधिकारी के बयान पर हत्या के प्रयास और सबूत नष्ट करने का मामला दर्ज किया गया। अर्चना के पति विकास समेत चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने जांच के दौरान राजू सिंह और उनके ड्राइवर हरी सिंह को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने तक दोनों को 7 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। राजू सिंह ने नशे में गोलियां चलाईं- अर्चना के पति उधर, अर्चना के पति विकास गुप्ता ने पुलिस को बताया था कि वे फतेहपुर बेरी के मंडी गांव में राजू सिंह के फार्म हाउस में आयोजित पार्टी में गए थे। वे कभी राजू सिंह के भाई संजय सिंह की एक बंद हो चुकी दवा कंपनी में पार्टनर थे। फिलहाल वे गौतम नगर में रीयल एस्टेट का कारोबार करते थे और राजू सिंह के भाई से उनका संपर्क बना हुआ था। उन्होंने बताया था कि जैसे-जैसे एक जनवरी की ओर घड़ी की सुईयां बढ़ रही थी, राजू सिंह नशे में धुत होकर नाच रहे थे। इसी दौरान उन्होंने राइफल उठाई और हवा में गोलियां चलाना शुरू दी। कुछ गोलियों के चलने के बाद अर्चना अचानक गिर पड़ीं थी। खून साफ करने के लिए डीजे कर्मियों दिए थे 500-500 रुपए का ऑफर घटना को लेकर 28 सितंबर 2019 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। चार्जशीट तैयार करने वाले एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, फायरिंग के बाद राजू सिंह ने घटनास्थल पर मौजूद डीजे कर्मियों और वेटर को फर्श से खून साफ करने के लिए 500-500 रुपए की पेशकश की, लेकिन उन लोगों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन लोगों को जाने के लिए कहा गया। इसके बाद राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह, उनके भाई राणा राजेश और दोस्त रमिंदर सिंह ने खून साफ किया। उन्होंने खाली कारतूस भी उठाए और पास की झाड़ियों में फेंक दिए। इस मामले में डीजे और विकास गुप्ता के परिवार के 3 सदस्यों समेत 32 गवाहों से पूछताछ की गई थी। फार्म हाउस के सीसीटीवी फुटेज खंगाले अधिकारी के मुताबिक, राजू सिंह ने पूछताछ में डीजे को पैसे देने की पेशकश से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि कोई रिश्वत नहीं दी गई। ये एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फार्म हाउस के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, गवाहों के बयान दर्ज किए और राजू सिंह के बयान दर्ज किए। इससे पुष्टि हुई है कि उस रात 3 राउंड गोलियां चलाई गई थीं। राजू सिंह ने अपनी .22 पिस्टल से दो राउंड फायरिंग की थी। जबकि हरि सिंह ने अपनी 315 बोर राइफल से एक गोली चलाई। इनमें एक गोली अर्चना गुप्ता के सिर में जा लगी। जांच में पता चला कि दोनों हथियार लाइसेंसी थे। 24 नवंबर 2023 को तय हुए आरोप दिल्ली की अदालत ने 24 नवंबर 2023 को राजू सिंह के खिलाफ आरोप तय किया था। स्पेशल जज विकास ढुल ने मामले में 3 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोप तय किए थे, जिनमें राजू सिंह की पत्नी भी शामिल थी। जिन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 201 (सबूतों को गायब करने का कारण बनना) के तहत आरोप लगाया गया था। राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विकास ढुल ने कहा, आरोपी राजू सिंह की ओर से न्यू ईयर पार्टी में अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायरिंग करना, ये दर्शाता है कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि भीड़भाड़ वाली पार्टी में गोली चलाने से किसी की जान जा सकती है। इसलिए, आरोपी राजू सिंह प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 304 (भाग II) और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत आरोप के लिए उत्तरदायी है।
सलमान खान को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 'काला हिरण' फिल्म का टीजर हटाने का आदेश
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को दिल्ली हाईकोर्ट से कानूनी मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने प्रोड्यूसर अमित जानी की अपकमिंग फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लीगेसी' के विवादित टीजर, पोस्टरों और इससे जुड़े तमाम ऑनलाइन लिंक्स को 24 घंटे के भीतर ...
चित्तौड़गढ़ में रविवार को गौ संरक्षण और गौ सम्मान की मांग को लेकर जिला स्तरीय रैली निकाली गई। इंदिरा गांधी स्टेडियम में जिलेभर के गांवों और ढाणियों से संत, गौभक्त, किसान और सनातन समाज के लोग जुटे। यहां से गौ माता की जय, गौ हत्या बंद करो और गौ माता को राष्ट्रमाता बनाओ के नारे लगाते हुए जिला कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली गई। कुछ किसान बैलगाड़ियां लेकर भी पहुंचे। 27 अप्रैल को तहसील स्तर से शुरू हुआ अभियान रामस्नेही संप्रदाय के दिग्विजय रामजी महाराज ने बताया कि गौ सम्मान अभियान की शुरुआत 27 अप्रैल को तहसील स्तर पर हुई थी। उस समय सरकार तक मांग पहुंचाई गई थी। तीन महीने बाद भी ठोस निर्णय नहीं होने पर अब जिला स्तर पर गौभक्तों को एकजुट किया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे चित्तौड़गढ़ जिले के गांवों और ढाणियों से लोग अभियान में शामिल हुए हैं। उनकी मांग है कि पूरे देश में गौ हत्या बंद हो, गौ माता के संरक्षण के लिए अलग कानून बने और उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए। दिग्विजय रामजी महाराज ने कहा कि यदि सरकार ने मांग नहीं मानी तो अगला चरण जयपुर और उसके बाद दिल्ली में होगा। मांग पूरी नहीं होने पर संत आमरण अनशन पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इसे किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि हर सनातनी की आवाज बताया। स्वामी सुदर्शनाचार्य बोले- समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी बड़ी सादड़ी गोपाल सत्संग आश्रम के स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने कहा कि गौ संरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ संत समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सनातन समाज का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर की रैली के बाद सुनवाई नहीं हुई तो प्रदेश मुख्यालय और फिर दिल्ली में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने गौ हत्या करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान करने की मांग की। साथ ही गौचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, गौशालाओं को मजबूत करने और गौवंश की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सड़कों पर घूम रहे गौवंश के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। हालांकि, सिर्फ सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। गाय पालने वालों को उन्हें सड़कों पर खुला नहीं छोड़ना चाहिए और चराने ले जाने पर उनकी देखभाल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गौ सेवा की शुरुआत हर घर से होनी चाहिए। विधायक ने बताया जायज मांग, भाजपा नेता ने गिनाए प्रयास विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा कि संत और सनातन समाज लंबे समय से गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने और गौ हत्या रोकने की मांग उठा रहा है। उन्होंने इसे सामान्य और उचित मांग बताते हुए केंद्र सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने गौशालाओं को बेहतर बनाने और गौचर भूमि से अतिक्रमण हटाने की भी मांग की। भाजपा के श्रवण सिंह राव ने बताया कि गौ सम्मान आह्वान अभियान का यह दूसरा चरण है। पहले तहसील स्तर पर लोगों को जोड़ा गया और अब जिला स्तर पर हजारों गौभक्त एक मंच पर आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्णय नहीं लिया तो 27 अक्टूबर को जयपुर में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। राव ने कहा कि पिछले कुछ सालों में गौ संरक्षण को लेकर कई सकारात्मक काम हुए हैं। सरकार गौशालाओं को अनुदान दे रही है। CSR के माध्यम से भी कई गौशालाओं को मजबूत किया जा रहा है। सांवलियाजी मंदिर मंडल से भी सहयोग की मांग की गई है। उन्होंने आने वाले समय में गौशालाओं के और मजबूत होने की उम्मीद जताई। बैलगाड़ियों के साथ निकली रैली इंदिरा गांधी स्टेडियम से जिला कलेक्ट्रेट तक निकली रैली में महिलाएं, युवा, किसान, संत और कई बटुक शामिल हुए। कुछ किसान बैलगाड़ियां लेकर पहुंचे, जो रैली का आकर्षण रहीं। पूरे रास्ते गौ संरक्षण और गौ सम्मान के समर्थन में नारे लगाए गए। स्टेडियम में संतों ने गौ संरक्षण को लेकर लोगों से संकल्प लेने का आह्वान किया। इसके बाद रैली निकाली गई। इस दौरान गौ माता की जय, गौ हत्या बंद करो और गौ माता को राष्ट्रमाता बनाओ जैसे नारे लगाए गए। समाज से गौवंश को सड़कों पर नहीं छोड़ने की अपील कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गौ माता की सुरक्षा केवल कानून बनाने से संभव नहीं होगी। समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। लोगों से गौवंश को सड़कों पर बेसहारा नहीं छोड़ने और गौशालाओं के संचालन में सहयोग करने की अपील की गई। संतों ने कहा कि जब तक गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने और गौ हत्या रोकने को लेकर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। चित्तौड़गढ़ से शुरू हुई आवाज को अब प्रदेश और देश के स्तर तक पहुंचाने की तैयारी है। कार्यक्रम में भाजपा महामंत्री रघु शर्मा, हर्षवर्धन सिंह रुद, भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव त्यागी, गौभक्त मुकेश नाहटा, राजन माली, हरीश ईनाणी, सीपी नामधराणी, ओमप्रकाश शर्मा और विनीत तिवारी सहित अन्य संत मौजूद रहे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के टीजर को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर प्रोड्यूसर 24 घंटे के अंदर टीजर के लिंक नहीं हटाते हैं, तो एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसी इंटरनेट कंपनियों को इसे हटाने के आदेश दिए जाएंगे। अभिनेता सलमान खान ने अपने पर्सनालिटी राइट्स और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी। सलमान का आरोप है कि फिल्म में उन्हें अंडरवर्ल्ड से जुड़ा दिखाकर उनकी छवि खराब की जा रही है। 'कानून से ऊपर कोई नहीं'- प्रोड्यूसर के रवैये पर कोर्ट नाराजमामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह ने फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि आरोपी हर दिन अपनी सीमाएं पार कर रहा है और खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है। जज ने टिप्पणी की कि किसी सामान्य नागरिक के साथ भी ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। साख बनाने में बहुत मेहनत लगती है और एक बार छवि खराब होने के बाद उसे वापस पाना आसान नहीं होता। सलमान का आरोप- ब्रेसलेट और शक्ल दिखाकर भ्रम फैलायासलमान खान के पक्ष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि 29 मई को जारी हुए टीजर में एक किरदार को सलमान जैसी शक्ल और उनका मशहूर ब्रेसलेट पहनाकर दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि फिल्म सलमान खान और 1998 के काला हिरण केस पर आधारित है। सलमान की ओर से बताया गया कि उन्होंने पहले प्रोड्यूसर को लीगल नोटिस भेजा था, लेकिन अमित जानी ने एक इंटरव्यू में उस नोटिस को फाड़ दिया और इंटरनेट पर धमकियां मिलने का दावा करने लगे। प्रोड्यूसर की दलील- किसी का नाम इस्तेमाल नहीं हुआसुनवाई के दौरान प्रोड्यूसर अमित जानी के वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि फिल्म में सलमान खान का नाम कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ है। टीजर में किसी एआई (AI) या डीपफेक तकनीक का प्रयोग भी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टीजर है और सार्वजनिक घटनाओं पर फिल्म बनाने से किसी के पर्सनल राइट्स का हनन नहीं होता। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मामला अदालत में लंबित रहने के दौरान ऐसी चीजें सार्वजनिक करना अवमानना के दायरे में आता है। 1998 से जुड़ा है काला हिरण शिकार का मामलासाल 1998 में फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान राजस्थान में काले हिरण के शिकार का मामला दर्ज हुआ था। सलमान के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस मामले से जुड़े चार केसों में से तीन में वे बरी हो चुके हैं, जबकि एक केस में मिली सजा पर अभी राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील पेंडिंग है। ऐसे में फिल्म के जरिए किसी समुदाय को भड़काने की कोशिश हो रही है, जिससे निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार पर बुरा असर पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की समीक्षा बैठक 29 जुलाई को नई दिल्ली में होगी। बैठक की अध्यक्षता लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करेंगे। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत समेत प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। बैठक में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज, विधानसभा के मानसून सत्र में पार्टी की रणनीति और प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा संगठन को मजबूत करने, विभिन्न जिलों में पार्टी की गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नकटी विस्थापन, कानून-व्यवस्था, किसानों, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर लगातार हमलावर है। मानसून सत्र के बाद पार्टी की आगे की रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों पर भी मंथन किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रदेश संगठन से जुड़े कुछ अहम मुद्दों और भविष्य के कार्यक्रमों को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व दिशा-निर्देश दे सकता है। दीपक बैज और चरणदास महंत बैठक में प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और संगठन की गतिविधियों का फीडबैक केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखेंगे।प्रदेश कांग्रेस में बदलाव की चर्चाओं के बीच हो रही बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में संगठन में बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। 29 जुलाई को दिल्ली में होने वाली समीक्षा बैठक को इन चर्चाओं के बीच अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में संगठन की स्थिति, प्रदेश नेतृत्व और आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, बैठक के एजेंडे में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
देश की राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े धरना स्थल जंतर-मंतर पर जारी एक बड़े विरोध प्रदर्शन के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ी और ऐतिहासिक टिप्पणी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक नई और बेहद स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींच दी है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि सिर्फ इसलिए कि कहीं कोई आंदोलन या विरोध प्रदर्शन चल रहा है, सुरक्षा बल नागरिकों पर सीधे लाठीचार्ज या बल प्रयोग नहीं कर सकते।लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवालसुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान सीजेआई (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि भारत के संविधान में हर नागरिक को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने व विरोध जताने का मौलिक अधिकार मिला हुआ है। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करने में लिप्त न हों, तब तक पुलिस बल को बेहद संयम बरतने की जरूरत है।कानून व्यवस्था और पुलिस बल के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी व्याख्यामुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के लिए गाइडलाइंस की ओर इशारा करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए लाठीचार्ज या आंसू गैस के गोलों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जाए। अदालत ने साफ किया कि प्रशासन को किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बल प्रयोग की बजाय बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस टिप्पणी को भविष्य में होने वाले तमाम जन आंदोलनों और पुलिसिया एक्शन के लिहाज से एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कानून के मोर्चे पर बड़ा बदलावभौगोलिक और स्थानीय सुरक्षा के नजरिए से देखें तो जंतर-मंतर, लुटियंस दिल्ली और संसद भवन के आसपास का पूरा इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हर छोटे-बड़े आंदोलन पर पूरे देश की नजर रहती है। सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को अपनी रणनीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा। आने वाले दिनों में नई दिल्ली जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक और अहिंसक तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि देश की राजधानी से सुरक्षा के मोर्चे पर कोई भी नकारात्मक संदेश न जाए।
राजधानी दिल्ली में रविवार (26 जुलाई) को मौसम सामान्य से अधिक गर्म और उमस भरा रहा, जिससे दिल्लीवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज (सोमवार, 27 जुलाई) के लिए राहत भरी खबर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली-एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान जताया गया है।रविवार को 36.6C तक पहुंचा तापमान, उमस से छूटे पसीनेIMD की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.7 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम के समय हवा में नमी का स्तर (सापेक्ष आर्द्रता) 63 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे वास्तविक तापमान के मुकाबले काफी ज्यादा चिपचिपी गर्मी महसूस हुई। हालांकि, उमस के बावजूद दिल्ली की हवा साफ बनी रही और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 83 के साथ 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज किया गया।सोमवार को कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?मौसम विभाग ने सोमवार को सुबह से लेकर दोपहर के बीच राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है, जबकि रात के समय हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है।तापमान: दिन का अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।हवा की रफ्तार: सुबह के समय दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 15 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो दोपहर और शाम तक बढ़कर 15 से 20 किमी/घंटा हो सकती हैं।अगले 3 दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौरदिल्लीवासियों को मंगलवार से गर्मी और उमस से और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। IMD के अनुसार:मंगलवार और बुधवार: राजधानी में मौसम की गतिविधियां तेज होंगी और ज्यादातर इलाकों में मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है।सप्ताह का तापमान: बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और पूरे हफ्ते अधिकतम पारा 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा।यात्रियों के लिए सावधानी की सलाहभले ही बारिश से तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन IMD ने निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) और सड़कों पर धीमी रफ्तार वाले ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) की चेतावनी दी है। ऐसे में दफ्तर या काम पर निकलने वाले लोगों को थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
भारत में सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र को नई दिशा और मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। सामाजिक विज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, भारतीय सामाजिक विज्ञान संस्थान संघ (IASSI) की भूमिका विषय पर आधारित इस सम्मेलन की संयुक्त मेजबानी नालंदा विश्वविद्यालय और IASSI की ओर से की गई। नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों का जमावड़ा इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ प्रोफेसरों, नीति निर्माताओं और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के दिग्गजों ने एक मंच पर आकर हिस्सा लिया। इस दौरान विदेश मंत्रालय भारत सरकार, और नालन्दा विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति सचिन चतुर्वेदी की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। दिग्गजों ने देश में सामाजिक विज्ञान के वर्तमान स्वरूप और इसके भविष्य को लेकर गहन मंथन किया। रणनीतिक उपायों पर चर्चा हुई सम्मेलन में चर्चा के मुख्य बिंदु सामाजिक विज्ञान के समग्र विकास में शैक्षणिक और शोध संस्थानों की सक्रिय और सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, थिंक-टैंक और शोध केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय व साझेदारी स्थापित करने के रणनीतिक उपायों पर चर्चा हुई। भारत में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान और शिक्षा के स्तर को उन्नत कर वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। शिक्षाविदों का मानना है कि नालंदा विश्वविद्यालय और IASSI की यह संयुक्त पहल भारत में सामाजिक विज्ञान के परिदृश्य को आधुनिक बनाने और शोधकर्ताओं के लिए एक अधिक सहयोगी और मजबूत ढांचा तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल की जांच तेज हो गई है। RAF जवान की पहचान कर ली गई है और CRPF की जांच रिपोर्ट अगले सप्ताह आने की संभावना है।
धार्मिक नगरी चित्रकूट में रविवार रात बीच सड़क पर जन्मदिन के नाम पर हुक्का पार्टी, शराबखोरी और हुड़दंग का मामला सामने आया है। दिल्ली नंबर की कार से आए करीब आधा दर्जन युवकों ने नगर परिषद कार्यालय के सामने सड़क पर हुक्का रखकर तेज संगीत पर डांस किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवकों ने मौके पर शराब का सेवन भी किया। इस घटना से वहां मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। विरोध शुरू होते ही सभी युवक अपनी कार में सवार होकर मौके से फरार हो गए। देखें तस्वीरें… चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थल पर खुलेआम हुक्का और शराब के साथ जन्मदिन मनाने की इस घटना ने लोगों को आक्रोशित कर दिया। राहगीरों ने युवकों की हरकत का विरोध किया, जिसके बाद कुछ देर तक बहस भी हुई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन से कार्रवाई की मांग कीस्थानीय लोगों का कहना है कि चित्रकूट की पहचान एक धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी के रूप में है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का कृत्य न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों ने प्रशासन से मामले की जांच कर संबंधित युवकों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही धर्मनगरी में शराबबंदी और सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने की भी मांग उठाई गई है।
एअर इंडिया की जयपुर से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट सोमवार सुबह लेट होने पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने नाराजगी जताते हुए सरकार पर निशाना साधा। बेनीवाल को सुबह 11 बजे से चल रहे संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले दिल्ली पहुंचकर विपक्ष के साथी सांसदों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करनी थी। लेकिन एअर इंडिया की जयपुर-दिल्ली उड़ान (AI 1834) निर्धारित समय 8:50 बजे उड़ान नहीं भर सकी। विमान ने एक घंटे और 20 मिनट की देरी से करीब 10:10 बजे उड़ान भरी। lसमय पर दिल्ली नहीं पहुंच पाने से नाराज बेनीवाल ने X (ट्विटर) पर लिखा- देश में आए दिन उड़ानों में हो रही देरी और अव्यवस्था से लाखों यात्री परेशान हैं। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी और सिविल एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू इस गंभीर समस्या पर मौन हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि भारत सरकार का एयरलाइंस के संचालन और समयबद्धता पर कोई प्रभावी नियंत्रण ही नहीं बचा है। उन्होंने लिखा- सरकार को यह समझने की आवश्यकता है कि देश की विमानन व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना और यात्रियों के समय का सम्मान करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। इससे लगातार मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। एअर इंडिया को टैग करते हुए उन्होंने लिखा- अक्सर उनकी उड़ानों में लेटलतीफी होती है, लेकिन सरकार न तो एअर इंडिया की जवाबदेही तय करती है और न ही सुधार के प्रयास करती है। एअर इंडिया ने जताया खेद बेनीवाल की इस पोस्ट के बाद एअर इंडिया ने जवाब देते हुए इस पर खेद जताया। कंपनी के अधिकारिक अकाउंट से लिखा गया- ‘हम आपकी चिंता को समझते हैं। उड़ान AI 1834 में देरी आने वाले विमान के लेट पहुंचने के कारण हुई है।’ --- यह खबरें भी पढ़िए… टेकऑफ के बाद प्लेन में कार्गो गेट साइन ऑन मिला:एयर इंडिया की फ्लाइट की जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई जयपुर एयरपोर्ट पर शुक्रवार को एअर इंडिया फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग हुई। यह फ्लाइट जयपुर से मुंबई के लिए रवाना हुई थी। टेकऑफ के महज 18 मिनट बाद ही फ्लाइट में टेक्निकल प्रॉब्लम आ गई। इसके बाद पायलट ने जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई। पढ़ें पूरी खबर
कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में दिल्ली-जम्मू नेशनल हाईवे-44 (जीटी रोड) पर देर रात चलती टाटा नेक्सॉन कार में अचानक आग लग गई। आग लगते ही ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए कार की रफ्तार कम की और तुरंत बाहर निकल गया। ड्राइवर के उतरते ही कार पूरी तरह आग की चपेट में आ गई। कुछ ही मिनटों में कार धू-धू कर जलने लगी। घटना शाहाबाद के रतनगढ़ गांव के पास हुई। कार चला रहे नीतिश चोपड़ा पंजाब के रहने वाले हैं और अभी दिल्ली उत्तम नगर में रहते हैं। वह दिल्ली से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक उन्हें कार से धुआं निकलता दिखाई दिया। स्थिति को भांपते हुए उन्होंने तुरंत कार की स्पीड कम की और सड़क किनारे रोककर बाहर निकल गए। उतरते ही भड़की आग नीतिश के कार से उतरने के कुछ ही सेकेंड बाद आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं। हाईवे से गुजर रहे अन्य वाहन ड्राइवर भी मौके पर रुक गए। घटना की सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड ने बुझाई आग फायर ब्रिगेड की गाड़ी ने करीब आधे घंटे की मशक्त के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक आग की वजह से कार लोहे का ढांचा बन चुकी है। शुरुआती जांच में कार में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि आग लगने के सही कारणों की जांच की जा रही है। कुछ देर के लिए ट्रैफिक प्रभावित हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। ड्राइवर सुरक्षित है, लेकिन कार पूरी तरह जलकर खाक हो गई। रात के समय हाईवे पर हुई इस घटना के कारण कुछ देर के लिए ट्रैफिक भी प्रभावित रहा। हालांकि पुलिस टीम ने कुछ देर में ट्रैफिक को क्लियर कर दिया।
मौसम ने उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 10 राज्यों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 14 घंटे अहम रहेंगे। दिल्ली-एनसीआर में उमस के बीच बारिश और तेज हवाओं की भी संभावना है।
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने पीएचडी दाखिला नियमों में बहुत बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू किए गए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (NHEQF) को अपनाते हुए डीयू ने पीएचडी अध्यादेश में संशोधन किया है। इस नए नियम के तहत अब चार साल का ग्रेजुएशन पूरा करने वाले मेधावी छात्र बिना पोस्ट-ग्रेजुएशन (मास्टर डिग्री) के सीधे पीएचडी में दाखिला पा सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं का समय बचाना और उन्हें कम उम्र में ही रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के शानदार अवसर प्रदान करना है।मास्टर डिग्री की अनिवार्यता हुई खत्म, बचेगा छात्रों का समयपारंपरिक अकादमिक व्यवस्था के अनुसार, किसी भी छात्र को पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए पहले 3 साल की स्नातक डिग्री और उसके बाद 2 साल की मास्टर डिग्री (जैसे एमए, एमएससी या एमकॉम) पास करना अनिवार्य होता था। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। लेकिन अब नए नियमों के लागू होने के बाद, जिन विद्यार्थियों ने 8-सेमेस्टर यानी 4 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा कर लिया है, वे बिना किसी मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी रिसर्च के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इससे छात्रों का एक से दो साल का कीमती समय बचेगा और वे सीधे शोध की दुनिया में कदम रख सकेंगे।सीधे पीएचडी एडमिशन के लिए 75% अंकों की कड़ी शर्तचार साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला पाना हालांकि आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कड़े पात्रता मानदंड तय किए हैं। इस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के 4-वर्षीय स्नातक कोर्स में कम से कम 75% अंक या इसके समकक्ष सीजीपीए (CGPA) होना अनिवार्य किया गया है।इसके साथ ही, आरक्षित वर्गों के छात्रों को राहत दी गई है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL), दिव्यांगजन (PwBD) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंकों की सीमा में 5% की छूट का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब यह है कि इन आरक्षित श्रेणियों के छात्रों के लिए 4-वर्षीय स्नातक में कम से कम 70% अंक होना आवश्यक होगा।3-वर्षीय ग्रेजुएशन और पारंपरिक पोस्ट-ग्रेजुएशन वालों के लिए क्या हैं नियम?डीयू ने स्पष्ट किया है कि पुरानी शिक्षा प्रणाली के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जो इस प्रकार हैं:1-वर्षीय मास्टर डिग्री: जिन छात्रों ने 4-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 1 साल की मास्टर डिग्री की है, उन्हें पीजी स्तर पर कम से कम 55% अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 50%) प्राप्त करने होंगे।2-वर्षीय मास्टर डिग्री: पारंपरिक 3-वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद 2 साल की मास्टर डिग्री पूरी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी न्यूनतम 55% अंकों की पात्रता पूर्ववत लागू रहेगी।एम.फिल (M.Phil) धारक: जिन विद्यार्थियों ने कम से कम 55% अंकों के साथ एम.फिल कोर्स पूरा किया है, वे भी पीएचडी में प्रवेश के लिए पूरी तरह योग्य माने जाएंगे।प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा अंतिम चयनचार साल के ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में दाखिला चाहने वाले सभी अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके तहत उम्मीदवारों को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा (जैसे यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट या डीयू की प्रवेश परीक्षा) पास करनी होगी। परीक्षा में सफल होने के बाद संबंधित विभाग के इंटरव्यू (साक्षात्कार) के आधार पर अंतिम रूप से छात्रों का चयन किया जाएगा। डीयू के इस दूरदर्शी कदम से यूनिवर्सिटी में रिसर्च का स्तर और अधिक उन्नत होगा तथा युवा शोधकर्ता कम उम्र में ही देश के विकास में अपना वैज्ञानिक व शैक्षणिक योगदान दे सकेंगे।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर चेचट टनल की एक साइड सोमवार सुबह 8 बजे से ट्रायल के तौर पर खोल दी गई है। फिलहाल मध्य प्रदेश और झालावाड़ से कोटा आने वाले वाहनों का संचालन इसी टनल से होगा। एनएचएआई (NHAI) के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप अग्रवाल ने बताया- कोटा से झालावाड़ जाने वाली दूसरी टनल भी अगले 15 दिनों में शुरू कर दी जाएगी। टनल शुरू होने से दरा की नाल में लगने वाले लंबे जाम से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में करीब 50 फीसदी वाहन दरा की नाल से होकर गुजर रहे हैं, जिससे अक्सर यातायात बाधित रहता है। दूसरी ओर, दरा में बन रहे रेलवे अंडरपास के दूसरे हिस्से में गर्डर डालने और नई पटरी बिछाने के काम के चलते सोमवार को कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्ट रहेगा। सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक करीब 16 घंटे सड़क यातायात प्रभावित रहेगा। इस दौरान अप और डाउन रेलवे लाइन पर भी 11 ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा। डायवर्जन व्यवस्था -झालावाड़ और मध्य प्रदेश जाने वाले वाहन: कोटा से एनएच-52 पर 'ढाड़ का मोका' से भटवाड़ा होकर डायवर्ट किए जाएंगे। -रामगंजमंडी, मोड़क और सुकेत से कोटा आने वाले वाहन: इन्हें मोड़क और चेचट होते हुए एक्सप्रेस-वे की ओर भेजा जाएगा। -दिल्ली जाने वाले भारी वाहन: मध्य प्रदेश और एक्सप्रेस-वे की ओर से आने वाले सभी भारी वाहन चेचट टनल के जरिए दिल्ली की ओर निकल सकेंगे।
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पीएम मोदी के कदमों की सराहना की
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और मजबूती के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।
NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद बिहार पुलिस ने 600 स्टूडेंट्स को डिटेन किया। यह कार्रवाई तब की गई है, जब दिल्ली में केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स पर पुलिसिया कार्रवाई नहीं करने का ऐलान किया। पकड़े गए एक छात्र की दादी ने सीएम सम्राट चौधरी के नाम पत्र में गिरफ्तार छात्रों को जेल नहीं भेजने और दिल्ली का समझौता मानने की गुहार लगाई है। पुलिस ने पटना समेत 8 जिलों में 247 लोगों को गिरफ्तार किया है। पटना में 30 महिलाओं और 30 नाबालिगों को छोड़ गया है। भास्कर स्पेशल में पढ़िए, माता-पिता के दर्द जो थाने और कचहरी के चक्कर काट रहे हैं। यह पत्र है पटना की रहने वाली रामसखी देवी का, जिनके पोते को पुलिस ने 25 जुलाई के प्रदर्शन में गिरफ्तार किया है। रामसखी ऐसी एक महिला नहीं हैं। बिहार के पूरे आंदोलन में ऐसे 600 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके परिजन अब पुलिस और कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। मेरा बेटा तो परीक्षा देकर लौट रहा था, पुलिस पकड़ ले गई बेगूसराय में पुलिस ने अभिषेक झा नाम के छात्र को गिरफ्तार किया है। वह वीरपुर थाना क्षेत्र स्थित डीहपर गांव का रहने वाला है। बेटे की गिरफ्तारी के बाद से मां विभा देवी सदमे में हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा बेटा अभिषेक ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के आरसीएस कॉलेज मंझौल में बीएससी सेकेंड सेमेस्टर में पढ़ता है। उसका परीक्षा केंद्र एसकेएम महिला कॉलेज बेगूसराय था। 23 जुलाई को सेकंड सीटिंग में उसका पेपर था। परीक्षा देने के बाद शाम को वह पैदल ही पावर हाउस बस स्टैंड की ओर जा रहा था। यहां से अपने गांव के लिए बस पकड़ता। पुलिस ने ट्रैफिक चौक के पास उसे पकड़ लिया।' 'मेरा बेटा सीधा-साधा है। सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देता है। पता नहीं वह कहां है। किस हाल में है। उसे छुड़ाने के लिए थाना-थाना भटक रही हूं।' मेरा बेटा दुकान में काम करता है, पुलिस ने पकड़ लिया पटना के कोतवाली थाना के बाहर बेटे की रिहाई की उम्मीद में खड़ी आशा देवी से बताया, 'मेरा घर भोजपुर जिले के बिहिया में है। 27 साल का मेरा बेटा सतीश कुमार दुकान में लिफ्ट का काम करता है। वह एक लिफ्ट को बनवाने के लिए पटना आया था। शनिवार को पटना से लौटते समय पुलिस ने मेरे बेटे को गिरफ्तार कर लिया। मुझे पता नहीं चल रहा है कि वह कहां है।' घर में सोते हुए बेटे को उठाकर ले गई पुलिस गिरफ्तार छात्र अंकित की मां रिंकू ने कहा, 'मेरा बेटा रात में घर पर सो रहा था। पुलिस आई और उसे नींद में ही उठाकर ले गई। उसका मोबाइल फोन भी ले गई। मैंने पूछा कि कहां ले जा रहे हैं तो कोई जवाब नहीं दिया। मेरा बेटा जेल में बंद है।' 'मेरे बेटे ने कोई अपराध नहीं किया है। वह पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की आर्थिक मदद के लिए अंडे की दुकान चलाता है। उसका सपना सरकारी नौकरी करना है। कहता था कि मां नौकरी लगेगी तो परिवार की गरीबी दूर हो जाएगी। अब पता नहीं आगे वह किस तरह पढ़ पाएगा।' रिंकू देवी ने कहा, 'मेरा बेटा दुकान से कुछ सामान खरीदने बाजार गया था। इसी दौरान वहां पर कुछ बच्चों ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। इसमें अंकित भी शामिल हो गया। वह भी एग्जाम की तैयारी करता है। अगर वह प्रदर्शन में शामिल हो भी गया तो क्या पुलिस उसे इस तरह से उठाकर ले जाएगी। अगर उसने कोई गलती थी तो थाने बुलाकर पूछताछ करती। घर में सो रहे बच्चे को छत के रास्ते से आकर उठाकर ले जाना और फिर मारपीट करना कहां का न्याय है?' गिरफ्तारी की 4 तस्वीरें देखिए अब जानिए कितनी और कहां से गिरफ्तारी हुई नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से 24 जुलाई तक कॉकरोच जनता पार्टी ने बड़ा धरना-प्रदर्शन किया। 25 जुलाई (शनिवार) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। बिहार में प्रदर्शन के दौरान कई जगह हालात तनावपूर्ण रहे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जबकि कुछ स्थानों पर पुलिस पर पथराव और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ विधायकों के साथ मारपीट भी हुई। प्रदर्शन के समर्थन में 25 जुलाई को बिहार बंद भी बुलाया गया। बंद के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के मामलों में 600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। राज्य के सबसे अधिक प्रभावित 10 जिलों में कार्रवाई हुई, जिनमें अकेले पटना से करीब 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं, अटेम्प्ट टू मर्डर के आरोप में लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को भी गिरफ्तार किया गया है। पटना में 86 गिरफ्तार, 60 को पुलिस ने छोड़ापुलिस मुख्यालय के अनुसार पटना में 2 केस दर्ज किए गए। 86 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 30 महिला और 30 नाबालिगों को रिहा किया गया है। छपरा में 4 FIR दर्ज किए गए हैं। 56 को गिरफ्तार किया गया है। सीवान में 3 FIR दर्ज कर 25 को गिरफ्तार किया गया है। भागलपुर में दर्ज FIR में नामजद 49 आरोपियों में से 41 को गिरफ्तार किया गया है। सीतामढ़ी में 4 FIR दर्ज कर 13 को गिरफ्तार किया गया है।छात्रों पर दर्ज केस वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन होगा राजद नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद बिहार में आंदोलन में शामिल लोगों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने X पर पोस्ट किया, 'सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की। AK-47 से गोली चलाई गई। जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती हैं। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। तेजस्वी ने कहा, ‘मेरे बड़े भाई तेज प्रताप यादव को जेल में डाला गया। पटना समेत कई जिलों में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को हिरासत में लिया गया और हजारों छात्रों के नाम एफआईआर में शामिल किए गए। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।’ क्या कहते हैं प्रदर्शनकारी, ‘धर्मेंद्र गए, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी’ मुजफ्फरपुर में NSUI जिला अध्यक्ष आदित्य कुमार करण ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष की एक उपलब्धि है। आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी है। छात्रों पर जिस तरह अत्याचार हुआ और बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया, उसके विरोध में अब आंदोलन होगा।' पटना में प्रदर्शन में शामिल हुईं 12वीं की छात्रा भाव्या ने कहा, 'मैं दो साल बाद मतदान के लिए योग्य हो जाऊंगी। आज छात्रों के साथ जो कुछ हो रहा है, उसे Gen-Z के युवा भविष्य में अपने वोट के जरिए जरूर याद रखेंगे। एजुकेशन सिस्टम के फेल्योर की वजह से हमें जो कुछ सहना पड़ा है, उसे अपने वोट के जरिए जरूर दिखाएंगे।' सुप्रिया ने कहा, 'छात्रों को मौजूदा व्यवस्था से उम्मीद नहीं रह गई है। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां करप्शन न हो। प्रदर्शन में जितनी पुलिसकर्मियों की तैनात की गई थी, उतनी पुलिस लड़कियों की सुरक्षा पर नजर रखेंगे तो हर रेपिस्ट जेल में होगा। पुलिस और प्रशासन की नाकामियों की वजह से कई आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।' एक छात्र ने बताया कि देश के युवाओं की आवाज सुनने के लिए सरकार के पास सात सेकंड का समय नहीं है। एक तरफ युवा अपनी पढ़ाई, परीक्षा और भविष्य को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री विदेश में जाकर मेलोनी को चॉकलेट देने में व्यस्त थे। प्रधानमंत्री को सात समंदर पार जाकर दूसरे देश के नेता से मिलने का समय मिल सकता है, लेकिन भारत के करोड़ों युवाओं की आवाज सुनने के लिए समय क्यों नहीं मिलता है? औरंगाबाद में प्रदर्शन कर रहे छात्र ने बताया कि यह सिर्फ केंद्र सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि राज्यों का भी उतना ही बड़ा मुद्दा है। पेपर लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर कोई नेता गंभीरता से बात नहीं कर रहा है। नेताओं के लिए चुनाव जरूरी है, लेकिन छात्रों की परीक्षा और भविष्य का मुद्दा पीछे क्यों चला जाता है? कोरोना के समय भी चुनाव हुए, लेकिन जब छात्रों के भविष्य की बात आती है तो उनकी समस्याओं को टाल दिया जाता है।
दिल्ली: एनडीएमसी वीसी कुलजीत सिंह चहल जंतर मंतर विरोध स्थल पर सफाई अभियान में शामिल हुए
नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल जंतर-मंतर पर सफाई और पुनर्स्थापना अभियान में शामिल हुए
'पेपर लीक जैसी अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई' प्रधानमंत्री के ऐलान पर बोलीं दिल्ली सीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है
दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने रविवार को शहर भर के 6,450 स्थानों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड को सुनने के लिए शहर के भाजपा कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया।
सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में आयोजित इंटरनेशनल स्कूल स्पोर्ट्स फेडरेशन (ISF) के कार्यकारिणी चुनाव में भारत के स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) ने सफलता हासिल की। जिसके बाद अध्यक्ष और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक कुमार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान SGFI के कार्यकारिणी सदस्य व यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह भी मौजूद रहे। दीपक कुमार ने मुख्यमंत्री को बेलग्रेड में हुई निर्वाचन प्रक्रिया और वहां मिली सफलता के बारे में बताया। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी और इसे देश व प्रदेश के खेल जगत के लिए गर्व की बात बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश को वर्ष 2036 तक देश के शीर्ष तीन खेल-राष्ट्रों में शामिल करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य पेश करते हुए यह रोडमैप 'विजन 2036' बताया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि 2036 में भारत में प्रस्तावित ओलंपिक के सफल आयोजन के लिए स्कूली स्तर से ही वैश्विक अनुभवों व नीतियों का क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने सभी राज्य खेल संस्थाओं से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महासंघों की कार्यकारिणी में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया और पारंपरिक खेलों कबड्डी व योग को ओलंपिक में शामिल कराने हेतु विशेष रणनीति पर जोर दिया। इस दौरान दीपक कुमार ने SGFI में हुए डिजिटल सुधारों व उपलब्धियों की जानकारी दी। जनवरी 2023 से अध्यक्षत्व संभालने के बाद SGFI ने स्कूली खिलाड़ियों का पंजीकरण, प्रतियोगिता प्रबंधन और परिणामों का पूर्ण डिजिटलीकरण किया। पारदर्शिता बढ़ाई और फर्जीवाड़े पर रोक लगाई। 5 लाख से अधिक खेल प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर अपलोड किए गए हैं। उन्होंने बताया कि SGFI की पहुंच अब प्रतिवर्ष 2.62 लाख से अधिक विद्यालयों व 4.14 करोड़ छात्रों तक है। सत्र 2025-26 में 44 खेलों में 250 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 61,000 से अधिक छात्र-एथलीट भागीदार रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत ने उपलब्धि दर्ज की। ISF U15 वर्ल्ड स्कूल वॉलीबॉल 2025 में भारतीय बालक टीम ने कांस्य जीता। 2027 में दिल्ली में ISF वर्ल्ड स्कूल कुश्ती व बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी भारतीय पक्ष को मिली है। जिसमें दुनिया के 35 से अधिक देशों के 1,100 से अधिक एथलीट भाग लेंगे। उन्होंने स्कूली स्तर से 'ओलंपिक रेडी' खिलाड़ी तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई और कहा कि यह पहल प्रदेश व देश में खेल प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लेकर जाएगी।
राजसमंद की ग्राम पंचायत मण्डावर की सरपंच (प्रशासक) प्यारी कुमारी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘द गुड पॉलिटिशियन’ राष्ट्रीय सेमिनार में मेवाड़ का गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत मेवाड़ की वीर भूमि का उल्लेख करते हुए की और कहा कि वे महाराणा प्रताप, राणा कुम्भा, महाराणा राजसिंह, पन्ना धाय, हल्दीघाटी और दिवेर की पावन धरती से आती हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नेतृत्व, पारदर्शी शासन और जनसेवा ही भारत के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि यदि गांव सशक्त होंगे तो देश भी अधिक मजबूत और समृद्ध बनेगा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी, सुशासन और विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित अलग अलग राज्यों के जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने उनके विचारों की सराहना की। साथ ही पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय मंच पर मेवाड़ की संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर क्षेत्रवासियों ने इसे गर्व का क्षण बताया।
भागदौड़ भरी जिंदगी और कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके महानगरों में सुकून के दो पल बिताना आज के समय में किसी विलासिता से कम नहीं है। यदि आप भी दिल्ली की रोजमर्रा की भीड़भाड़, ट्रैफिक और प्रदूषण से उब चुके हैं और किसी ऐसी शांत जगह की तलाश में हैं जहाँ प्रकृति की गोद में शांति मिल सके, तो राजधानी के भीतर ही एक ऐसी खूबसूरत जगह छिपी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यहां चारों तरफ फैली हरियाली, मन को मोह लेने वाला कमल का तालाब (Lotus Pond) और फिटनेस प्रेमियों के लिए आधुनिक ओपन-एयर जिम इस जगह को वीकेंड पर घूमने के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं।शोर-शराबे से दूर प्रकृति की गोद में बसा सुकून का आशियानादिल्ली के इस गुप्त और खूबसूरत नगीने तक पहुंचते ही आपको ऐसा महसूस होगा जैसे आप शहर के कोलाहल से कोसों दूर किसी शांत हिल स्टेशन पर आ गए हैं। इस शांत पार्क या ग्रीन जोन में प्रवेश करते ही ताजी हवा और चिड़ियों की चहचहाहट आपका स्वागत करती है। यहां की शांत और हरी-भरी वादियां तनाव को पल भर में दूर कर देती हैं। स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह मेडिटेशन, योग और सुबह-शाम टहलने के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां परिवार के साथ सुकून भरा समय बिताया जा सकता है।कमल के तालाब की सुंदरता और ओपन-एयर जिम का अनोखा संगमइस पार्क की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका शानदार कमल का तालाब है, जहां खिलने वाले कमल के फूल पानी की सतह पर अद्भुत छटा बिखेरते हैं। तालाब के आसपास की साफ-सुथरी और शांत जगह फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए जन्नत जैसी है। इसके साथ ही, सेहत के प्रति जागरूक लोगों के लिए यहां एक बेहतरीन ओपन-एयर जिम भी स्थापित किया गया है, जहां प्राकृतिक वातावरण के बीच खुले आसमान के नीचे एक्सरसाइज करने का एक अलग ही मजा मिलता है।इस वीकेंड बनाएं प्लान और लें ताजी हवा का आनंदयदि आप इस वीकेंड दिल्ली में कुछ नया और शांतिपूर्ण तलाश रहे हैं, तो बिना देर किए इस शानदार ठिकाने का रुख करें। मेट्रो या पर्सनल वाहन से आसानी से पहुंचने वाली यह जगह आपके संडे को बेहद खास बना देगी। काम के भारी तनाव से राहत पाने और मानसिक शांति हासिल करने के लिए यह दिल्ली का सबसे बेहतरीन और छुपा हुआ कोना साबित हो सकता है, जहां आप अपनी पूरी फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं।
मुरादाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान लागू होने वाले रूट डायवर्जन का असर अब रोडवेज यात्रियों पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने मुरादाबाद से संचालित कई प्रमुख मार्गों की बसों के किराए में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। संशोधित किराया 30 जुलाई से लागू होगा। क्षेत्रीय प्रबंधक अम्बरीन अख्तर ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कई मार्गों पर यातायात का डायवर्जन रहेगा। ऐसे में बसों को लंबी दूरी वाले वैकल्पिक मार्गों से होकर गुजरना पड़ेगा। अतिरिक्त दूरी तय होने से डीजल की खपत और संचालन खर्च बढ़ेगा, जिसके कारण किराए में संशोधन किया गया है। इन मार्गों पर बढ़ा किराया नई दरों के अनुसार मुरादाबाद से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को 35 रुपये अधिक किराया देना होगा। बिजनौर के लिए 59 रुपये, देहरादून के लिए 67 रुपये और हरिद्वार के लिए 66 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, कौशांबी जाने वाली साधारण बस का किराया 41 रुपये और वातानुकूलित बस का किराया 72 रुपये बढ़ाया गया है। नई किराया सूची सभी डिपो और बस अड्डों पर उपलब्ध करा दी गई है। गोवर्धन मेले के लिए विशेष व्यवस्था राजकीय मुड़िया पूर्णिमा गोवर्धन मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिवहन निगम ने 100 अतिरिक्त रोडवेज बसें आगरा भेजने का निर्णय लिया है। ये बसें 29 जुलाई तक श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए संचालित रहेंगी। अलग-अलग डिपो से भेजी जाएंगी बसें अतिरिक्त बसों में मुरादाबाद और पीतलनगरी डिपो से 21-21 बसें, नजीबाबाद और अमरोहा डिपो से 13-13 बसें, रामपुर डिपो से 15 बसें तथा बिजनौर डिपो से 17 बसें शामिल हैं। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, सभी बसों की तकनीकी जांच पूरी कर ली गई है। साथ ही पर्याप्त संख्या में चालक और परिचालकों की तैनाती भी की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा की सुविधा मिल सके।
फिरोजाबाद के साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास मालगाड़ी के पटरी से उतरने का असर दिल्ली रूट पर लगातार पांचवें दिन भी देखने को मिला। रेलवे प्रशासन ने शनिवार को दिल्ली और नई दिल्ली जाने वाली कई पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया। इससे दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रयागराज मंडल की जनसंपर्क अधिकारी रागिनी सिंह ने बताया कि परिचालन प्रभावित होने के कारण दिल्ली-दनकौर, शकूरबस्ती-दनकौर, दिल्ली-खुर्जा, दिल्ली-हाथरस किला, टूंडला-दिल्ली और आगरा सिटी-टूंडला-गाजियाबाद पैसेंजर ट्रेनों का संचालन शनिवार को रद्द किया गया। लगातार ट्रेनों के निरस्त होने से टूंडला, फिरोजाबाद और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। कई यात्रियों को मजबूरी में निजी वाहनों और बसों से सफर करना पड़ा, जिससे उनका यात्रा खर्च भी बढ़ गया। यात्रियों ने दादरी तक ट्रेन चलाने की उठाई मांग दैनिक रेल यात्रियों का कहना है कि यदि फिलहाल ट्रेनों का संचालन दिल्ली तक संभव नहीं है, तो कम से कम दादरी तक पैसेंजर ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाए। उनका कहना है कि इससे हजारों यात्रियों को वैकल्पिक सुविधा मिल सकेगी और परेशानी कुछ हद तक कम होगी। रेलवे ने यात्रा से पहले स्थिति जांचने की दी सलाह रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रैक पूरी तरह सामान्य होने तक सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं। यात्रियों से अपील की गई है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की वर्तमान स्थिति की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।
देशभर में मानसून अब पूरी तरह से रफ्तार पकड़ चुका है। मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचे पहाड़ी राज्यों तक बादलों की जोरदार आवाजाही जारी है। लगातार बारिश के कारण एक तरफ जहां मैदानी इलाकों में नदियां उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं, वहीं पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslide) के चलते कई मुख्य रास्ते ठप पड़ गए हैं।भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 26 जुलाई 2026 को देश के अधिकांश राज्यों में हल्की से मध्यम और कई इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है।दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर बौछारें, उमस से थोड़ी राहतराजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्र में आज दिनभर बादलों का डेरा बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, दिन में एक से दो बार हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा।आज दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। हालांकि, बारिश के बीच उमस का स्तर अधिक रहने के कारण हल्की चिपचिपाहट महसूस हो सकती है।पहाड़ी राज्यों में लैंडस्लाइड की चेतावनी, सतर्कता बरतने की सलाहउत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मानसूनी बारिश अपने चरम पर है। IMD ने इन राज्यों के कई संवेदनशील इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है और नदियां-नाले उफान पर हैं। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों व निवासियों को पहाड़ों की अनावश्यक यात्रा टालने की सख्त हिदायत दी है।मुंबई, गुजरात और मध्य भारत में भारी बारिश का दौर जारीमध्य, पश्चिम और पूर्वी भारत में भी मानसून पूरी तरह मेहरबान नजर आ रहा है।महाराष्ट्र और गुजरात: कोंकण, गोवा और तटीय गुजरात में तेज बारिश का सिलसिला जारी है। मुंबई और उसके उपनगरीय इलाकों में रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश का अनुमान है। गुजरात के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।मध्य व पूर्वी राज्य: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और झारखंड में भी गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश के अच्छे आसार हैं।दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत का मौसम कैसा रहेगा?दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक और केरल में मध्यम से व्यापक स्तर पर बारिश होने का अनुमान है, जबकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बौछारें गिर सकती हैं।वहीं, पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली गिरने और कुछ संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन का जोखिम बना रहेगा।
तेंदूपत्ता संघ:6 साल दिल्ली के चक्कर काटे, अब होगी घाटे की भरपाई
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ की माली हालत चिरौंजी, हर्रा, कोदो-कुटकी जैसे वनोपज की अंधाधुंध खरीदी ने बिगाड़ दी है। बाजार के बेहतर विकल्प न होने के बावजूद संघ के माध्यम से अफसरों ने 2014 से करोड़ों के वनोपज की समर्थन मूल्य में खरीदी शुरू कर दी। करीब 300 करोड़ से ज्यादा का गोदामों में सड़ गया। इससे संघ के पास कभी तेंदूपत्ता के मुनाफे से करीब 1600 करोड़ रुपए की बैंक एफडी हुआ करती थी, वह खत्म हो गई। हालत यह हो गई कि जमा पूंजी खत्म होने के बाद कारोबार चलाने के लिए 400 करोड़ रुपए का बैंक कर्ज लेना पड़ गया। करीब 6 साल से अफसर दिल्ली स्थित ट्राइफेड मुख्यालय के चक्कर काटते रहे। अब शनिवार को तीन सौ करोड़ के घाटे की भरपाई की मंजूरी मिली है। ट्राइफेड (भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ)से तेंदूपत्ता संघ ने वनोपज खरीदी के लिए करार किया था। इसके तहत तेंदूपत्ता के अलावा महुआ, इमली, चिरौंजी, हर्रा-बहेरा, साल बीज, लाख, शहद और कोदो-कुटकी जैसी लघु वनोपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी शुरू की गई। घाटे का पूरा संकट 2014 के बाद से शुरू हुआ। 2019-20 से स्थिति ज्यादा बिगड़ी। करार के तहत इन खरीदे गए उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की मुख्य जिम्मेदारी ट्राइफेड की थी। लेकिन अफसरों ने ये ध्यान नहीं दिया कि ट्राइफेड छत्तीसगढ़ के हिसाब से बेहतर बाजार दे पा रहा है या नहीं, अंधाधुंध खरीदी जारी रखी। 2019 से सिर्फ कागजी पत्राचार करते रहे अफसरहैरानी की बात यह है कि करार में स्पष्ट लिखा था कि घाटे की भरपाई में ट्राइफेड अपनी हिस्सेदारी देगा। लेकिन नुकसान होने के बाद वर्ष 2019-20 से लगातार अफसर सिर्फ पत्राचार और कागजी लिखापढ़ी ही करते रहे। ट्राइफेड से राशि जारी नहीं हुई और पूरा वित्तीय बोझ राज्य वनोपज संघ की एफडी तोड़कर उठाया जाता रहा। जब 1600 करोड़ की जमा पूंजी खत्म हो गई, तब तेंदूपत्ता खरीदी और संग्राहकों को भुगतान करने के लिए 400 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बैंक लोन लेना पड़ा। दिल्ली दौड़े अफसर, तब जाकर खुली राहत की राहकर्ज और चरमराई आर्थिक स्थिति के बीच वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ)अरुण पांडे और तेंदूपत्ता संघ के एमडी संजीता गुप्ता ने ट्राइफेड मुख्यालय जाकर डेरा डाला। अधिकारियों ने ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) और वरिष्ठ अफसरों के सामने करार का ब्योरा रखा। अफसरों को यह स्वीकारना पड़ा कि बाजार उपलब्ध नहीं होने से राज्य वनोपज संघ को खासा नुकसान हो चुका है। इस बैठक के बाद अब जाकर ट्राइफेड ने घाटे में अपनी हिस्सेदारी देने पर सहमति जताई है। तेंदूपत्ता संघ ही नहीं वनवासियों को भी मिलेगा फायदापीसीसीएफ ट्राइफेड से मंजूरी मिलने के बाद संघ का घाटा कम होगा। इसका फायदा सीधे तौर पर तेंदूपत्ता और वनोपज संग्राहकों को मिलेगा। तेंदूपत्ता संघ की आय का बड़ा हिस्सा ब्याज अदा करने में नहीं जाएगा। संग्राहकों के हितों के लिए बेहतर उपाय किए जाएंगे। - अरुण पांडे, प्रधान मुख्य मुख्य वन संरक्षक
दिल्ली में 31 जुलाई को होगा खटीक समाज का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, जयपुर में पोस्टर विमोचन
जयपुर | ग्लोबल खटीक ऑफिसर्स एवं प्रोफेशनल्स ग्रुप का चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलन एवं निशुल्क कॅरियर मार्गदर्शन सम्मेलन 31 जुलाई को स्कोप कन्वेंशन सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली में होगा। इसके प्रचार के लिए शनिवार को मानसरोवर स्थित गुलाबगढ़ रिजॉर्ट में पोस्टर विमोचन किया गया। कार्यक्रम में आईएएस अजय असवाल, पूर्व वरिष्ठ आईएएस उर्मिला राजोरिया सहित समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बड़वानी जिला मुख्यालय के कारंजा चौराहे पर शनिवार रात 8:30 बजे छात्रों और विभिन्न संगठनों के समर्थन में एक कैंडल मार्च निकाला गया। यह मार्च दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में आयोजित किया गया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद छात्रों और सामाजिक संगठनों ने इसे आंदोलन की जीत बताया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा थी। इस्तीफे की घोषणा के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर के साथ-साथ बड़वानी में भी छात्रों ने जश्न मनाया। कारंजा चौराहे पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और कांग्रेस कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। सभी ने मोमबत्तियां जलाकर आंदोलन के दौरान घायल हुए साथियों को याद किया। ये छात्रों के संघर्ष और लोकतंत्र की जीत इस कैंडल मार्च में कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि छात्रों का यह संघर्ष लोकतंत्र की जीत है। विधायक मंडलोई ने जोर दिया कि शिक्षा और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को छात्रों की आवाज सुननी पड़ी। उन्होंने आंदोलनकारियों के हौसले की सराहना की। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ी शुरुआत कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने शांतिपूर्ण ढंग से मोमबत्तियां जलाईं और एक सभा की। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। छात्रों ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी इस इस्तीफे का जश्न मनाया गया। बड़वानी के छात्रों ने साफ किया कि शिक्षा, पेपर लीक और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठन और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
देवास में शनिवार को दिल्ली छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया गया। भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उज्जैन तिराहे स्थित धरना स्थल से कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। लगभग दो किलोमीटर लंबे इस मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और पूर्व मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'छात्रों पर हर लाठी का जवाब मिलेगा' जैसे नारे लगाए। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दिल्ली में छात्रों पर हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष रूपेश बामनिया ने कहा कि दिल्ली में छात्रों के साथ हुई घटना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में विभिन्न मांगों से जुड़े बैनर और पोस्टर थे। कई पोस्टरों पर छात्रों के समर्थन में संदेश लिखे थे, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर पर क्रॉस का निशान बनाकर विरोध दर्ज कराया गया।
शेखपुरा में 'मान्यता' संस्था ने चिकित्सकों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया। दिल्ली से आईं डॉ. कृति जायसवाल ने इस दौरान कहा कि सुरक्षित प्रसव के लिए जीएनएम, एएनएम और कंपाउंडर का प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। यह कार्यशाला शहर के स्टेशन रोड स्थित आईआईएमएस हॉल में आयोजित की गई। कार्यशाला में पूर्व सीएस डॉ. एमपी सिंह, डॉ. केएमपी सिंह, डॉ. के पुरुषोत्तम, डॉ. रामाश्रय प्रसाद सिंह, डॉ. अर्जुन प्रसाद, डॉ. मंजु भदानी, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. मुनेश्वर प्रसाद और डॉ. संजय कुमार सहित कई सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने भाग लिया। 'मान्यता' टीम की सदस्य डॉ. अलका पांडेय ने बताया कि उनकी संस्था सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी के परिणामस्वरूप प्रसव में मृत्यु दर घटकर मात्र 18 प्रतिशत रह गई है। बांझपन के संबंध में पूछे जाने पर डॉ. अलका पांडेय ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि फास्ट फूड, गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के कारण पुरुषों और महिलाओं दोनों में शुक्राणुओं की संख्या में लगातार कमी आ रही है। सिजेरियन प्रसव को लेकर दोनों डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर ही सिजेरियन किया जाता है और इसके कारण ही मृत्यु दर में कमी आई है। 'मान्यता' संस्था प्रशिक्षण के माध्यम से सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के आह्वान पर जिला फरीदकोट इकाई की ओर से विशाल रोष मार्च निकाला गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने घंटाघर चौक पर एकत्र होकर केंद्र सरकार के खिलाफ थालियां बजाकर जोरदार प्रदर्शन किया और अपना विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व 'आप' के जिला प्रधान एवं जिला योजना समिति के अध्यक्ष गुरतेज सिंह खोसा ने किया। कार्यक्रम में फरीदकोट के विधायक गुरदित्त सिंह सेखों, जैतो के विधायक अमोलक सिंह, और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट फरीदकोट के चेयरमैन गगनदीप सिंह धालीवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। केंद्र सरकार के रवैये की कड़े शब्दों में निंदा घंटाघर चौक में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यशैली की जमकर आलोचना की। नेताओं ने कहा कि नीट (NEET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पेपर लीक के खिलाफ जब देश के छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं, तो उनकी आवाज सुनने के बजाय केंद्र सरकार उन पर अत्याचार कर रही है। इससे देशभर के युवाओं और छात्रों में भारी रोष है। आम आदमी पार्टी नेताओं का कहना है कि भले ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन केंद्र सरकार को छात्रों के साथ किए गए दुर्व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान को तो पेपर लीक का मामला सामने आते ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उसी दिन इस्तीफा दे देना चाहिए था, लेकिन सरकार अपनी नाकामी स्वीकार करने से बचती रही। पेपर लीक से टूटते हैं युवाओं के सपने प्रदर्शन के दौरान फरीदकोट के विधायक गुरदित्त सिंह सेखों ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर और उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद कम उम्र से ही उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाने में मेहनत करते हैं। लेकिन जब पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो छात्रों और उनके परिवारों के सपने पल भर में टूट जाते हैं। ऐसे माहौल में युवाओं को अपना भविष्य असुरक्षित और अंधकारमय दिखाई देने लगता है। पार्टी नेताओं ने मांग की कि परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएं।
सिरोही नगर में शनिवार को नीट पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस पर छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। संयम लोढ़ा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर नगर कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कहा कि नीट पेपर लीक और छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारत की छवि प्रभावित हुई है। तख्तियों और नारों के साथ जताया विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर शामिल हुए। तख्तियों पर 'पेपर लीक बंद करो', 'मेहनत का सम्मान करो', 'छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो', 'पेपर माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करो', 'ईमानदार छात्रों को न्याय दो' और 'भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा व्यवस्था लागू करो' जैसे संदेश लिखे थे। कार्यकर्ताओं ने सरजावाव दरवाजे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। कई कांग्रेस पदाधिकारी रहे मौजूद प्रदर्शन में प्रदेश महासचिव हेमलता शर्मा, जिलाध्यक्ष रेणु व्यास, नगर अध्यक्ष पुनीत कुमार जैन, जिला उपाध्यक्ष मोहनलाल सीरवी, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश मीणा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता हनुवंत सिंह वेरा, कुशल देवड़ा, शिवगंज ब्लॉक अध्यक्ष प्रवीण रावल, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष चंपालाल त्रिगर, हरीश राठौड़, पूर्व संगठन महामंत्री जोगाराम मेघवाल, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष तेजाराम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पलवल में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया। शनिवार को दोनों संगठनों के युवाओं ने देवीलाल पार्क से लघु सचिवालय तक पैदल मार्च निकाला और राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में दिया गया। भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष नकुल और आजाद समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष गौतम ने बताया कि ज्ञापन में छात्र आंदोलनों के दौरान जान गंवाने वाले प्रत्येक छात्र के परिवार को एक-एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देने की भी मांग की गई। संगठनों ने संसद सत्र के दौरान पेपर लीक के मुद्दों और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और शिक्षा माफिया व पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ समयबद्ध व कठोर कदम उठाए जाएं। संगठन ने छात्र आंदोलनों के दौरान सुरक्षाबलों की सख्ती पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ हुई अमर्यादित घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, आंदोलन स्थल पर सादी वर्दी में मौजूद संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक करने और उन्हें लाठियां व अन्य उपकरण किसने उपलब्ध कराए थे, यह स्पष्ट करने की भी मांग की गई। ज्ञापन में परीक्षा एवं भर्ती प्रणाली में सुधार के सुझाव भी दिए गए। इनमें नीट यूजी, जेईई मेन सहित सभी सरकारी और प्रवेश परीक्षाओं की प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना, सभी प्रतियोगी व सरकारी भर्ती परीक्षाओं का आवेदन शुल्क समाप्त करना और महिला अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र उनके गृह जनपद में ही आवंटित करना शामिल है। इस अवसर पर लीगल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट एस आर्य, लीगल सेल के अध्यक्ष ध्रूव चौधरी, राज कुमार नेताजी, गौतम, राजगुरू, नेम सिंह, अभिषेक व खेमचंद आदि ने भी संबोधित किया।
दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह शनिवार को बहादुरगढ़ पहुंचे। उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर युवाओं का मंच नहीं, बल्कि देश को तोड़ने और अराजकता फैलाने वाले लोगों का मंच लगा हुआ है। इस आंदोलन के जरिए देश के विकास के खिलाफ काम करने वाली मानसिकता रखने वाले लोग बेनकाब हो गए हैं। मंत्री रविन्द्र इन्द्राज बहादुरगढ़ में डूसू अध्यक्ष आर्यन मान के घर पहुंचे थे। इस दौरान लोवा-17 के प्रधान अशोक मान ने उनका स्वागत किया। पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने विभिन्न मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। आंदोलन आकलन पर बोले- कोई चूक नहीं हुई जंतर-मंतर आंदोलन का सही आकलन नहीं कर पाने को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि यह किसी प्रकार की चूक नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के जरिए देश विरोधी और विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले लोग सामने आ गए हैं। लाठीचार्ज पर को बताया सही छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर मंत्री ने कहा कि व्यवस्था बनाए रखने और अराजकता रोकने के लिए कई बार सख्ती जरूरी होती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। NEET परीक्षा में चूक मानी, कार्रवाई का दिया हवाला NEET परीक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि परीक्षा में चूक जरूर हुई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। दोषियों को गिरफ्तार किया गया और दोबारा सफलतापूर्वक परीक्षा करवाई गई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने युवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन किया है।
दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। इसी कड़ी में अलवर में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए कंपनी बाग से मिनी सचिवालय तक रैली निकाली। मिनी सचिवालय के मुख्य द्वार पर पहुँचकर कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और महिलाओं के साथ पुलिस व प्रशासन ने बर्बरता की है। जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष रामनिवास बरवाड़ा ने कहा जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छोटे-छोटे बच्चों, छात्राओं और महिलाओं पर दिल्ली पुलिस और प्रशासन द्वारा बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया। यह पूरी तरह से गलत और निंदनीय है। इसी तानाशाही के विरोध में आज हमने एडीएम के माध्यम से देश के राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। जन आंदोलन का किया था ऐलान उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भ्रष्ट व्यवस्था और NEET धांधली की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो भीम आर्मी एक बड़ा जनांदोलन करेगी और आगामी समय में भाजपा सरकार का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। इस्तीफे की खबर के बाद युवाओं का गुस्सा हुआ शांत हालांकि, हाल ही में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे जाने की खबर के बाद पिछले एक-दो दिनों से अलवर में उग्र प्रदर्शन की तैयारी कर रहे युवाओं का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ है। इसके बावजूद, छात्र और युवा संगठन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के साथ हुए टकराव के बाद दंगारोधी विशिष्ट बल रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला किया है। भविष्य में होने वाले किसी भी आंदोलन या भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान अब जवानों द्वारा पैलेट गन (Pellet Guns) और इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाएगा। रैपिड एक्शन फोर्स के आला अधिकारियों ने इन घातक और विवादित उपकरणों के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, जिसे देश की आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिहाज से एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।जंतर-मंतर के प्रदर्शनों के बाद क्यों लेना पड़ा यह फैसला?पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों के बड़े आंदोलनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। इस दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ आधुनिक हथियारों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक शॉक स्टिक और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। कई मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज ने इन हथियारों से प्रदर्शनकारियों को होने वाली गंभीर चोटों पर गहरी आपत्ति जताई थी। इसी फीडबैक और आंतरिक समीक्षा के बाद आरएफ ने अपनी रणनीतियों में यह बड़ा और मानवीय बदलाव करने का फैसला किया।अब उपद्रवियों से निपटने के लिए क्या होगी सुरक्षा बलों की नई रणनीति?इस नए आदेश के बाद रैपिड एक्शन फोर्स ने अपने जवानों के लिए भीड़ प्रबंधन (Crowd Control) के नियमों को पूरी तरह से अपग्रेड कर दिया है। पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों की जगह अब गैर-घातक (Non-Lethal) और सुरक्षित विकल्पों पर जोर दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन, आधुनिक आंसू गैस के गोलों और हल्के लाठीचार्ज जैसे पारंपरिक लेकिन सुरक्षित तरीकों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही जवानों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे बिना किसी को गंभीर नुकसान पहुंचाए कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से बहाल रख सकें।दिल्ली-NCR की सुरक्षा और स्थानीय कानून व्यवस्था पर इसका सीधा असरइस फैसले का सीधा असर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे संवेदनशील दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा, जहां आए दिन बड़े धरने और प्रदर्शन होते रहते हैं। दिल्ली पुलिस और आरएएफ की संयुक्त टुकड़ियां अब नए प्रोटोकॉल के तहत ही तैनात की जाएंगी। जानकारों का मानना है कि इस कदम से जहां एक ओर पुलिस और जनता के बीच टकराव के दौरान होने वाली गंभीर हिंसक घटनाओं और मौतों में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों में भी सुरक्षा बलों के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में एक मोड़ पर नियंत्रण खोने के बाद 20 साल के एक युवक की कार एक खुले नाले में जा गिरी, जिससे उसकी मौत हो गई।
बाराबंकी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में शनिवार को बाराबंकी में भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं और छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। अंबेडकर छात्रावास से पटेल चौराहे तक मार्च निकालकर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं तथा छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि सरकार भर्ती घोटालों, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के आह्वान पर देशभर में विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। 'मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा तेज' प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को बड़े शहरों से लेकर गांव-गांव तक और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल पूरे समय तैनात रहा। हालांकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और बाद में प्रदर्शनकारी अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।
उदयपुर के जगत निवास होटल की खिड़की से दो साल की बच्ची पिछोला झील में गिर गई। झील में डूबने से बच्ची की मौत हो गई। कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची के शव को बाहर निकाला गया। घंटाघर पुलिस थाने के एएसआई ईशाक मोहम्मद ने बताया- नई दिल्ली के फतहपुर बेरी असोला निवासी सोनू सिंह तंवर (34) अपनी पत्नी डॉ. मोनिका (29) और 2 साल की बेटी धीमही के साथ उदयपुर घुमने आए थे। वे जगत निवास होटल में ठहरे हुए थे। शनिवार सुबह दूसरी मंजिल पर ब्रेकफास्ट करने आए। वे नाश्ता लेने आगे बढ़े तभी पीछे से बच्ची होटल की गोखड़े (खिड़की) से झील में गिर गई। लोग बच्ची को झील से निकालकर अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। होटल जगत निवास झील के बगल में ही बना हुआ है। शव को एमबी हॉस्पिटल की मॉर्च्यूरी में रखवाया गया है। खबर अपडेट की जा रही है….
सीजेपी प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा, 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल; 15 एफआईआर दर्ज
दिल्ली में सीजेपी के 20 जुलाई के 'संसद चलो' प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा। 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल, 15 एफआईआर दर्ज, एफआरएस कैमरों से 2,000 से अधिक लोगों की पहचान।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे नीट और पेपर लीक विरोधी आंदोलन की गूंज अब राजस्थान की राजधानी जयपुर तक पहुंच गई है। नीट समेत प्रदेश की अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के विरोध में छात्रों और युवाओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। आज जयपुर में कई जगहों पर प्रदर्शन, भूख हड़ताल और कैंडल मार्च के जरिए सरकार के खिलाफ विरोध तेज होगा। वहीं बढ़ते आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रशासन और पुलिस को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। राजस्थान यूनिवर्सिटी (आरयू) के मुख्य गेट पर छात्र नेता शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में तीसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी है। उनके साथ बड़ी संख्या में छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लगातार पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं, शहर के जवाहर सर्किल पर शुक्रवार दोपहर सैकड़ों छात्र और युवा विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के साथ विभिन्न छात्र संगठनों के शामिल होने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाएगी कांग्रेस कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सड़क पर उतरेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में आज शाम साढ़े 6 बजे कैंडल मार्च निकाला जाएगा। कैंडल मार्च स्टेच्यू सर्किल से अंबेडकर सर्किल तक निकलेगा। कांग्रेस इस दौरान केंद्र सरकार को परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर घेरते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाएगी। सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की राजधानी में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रखने, प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने और किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से तत्काल निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम करने को कहा गया है। संभावित प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस लगाई पुलिस प्रशासन ने भी राजधानी के संवेदनशील इलाकों, राजस्थान यूनिवर्सिटी, जवाहर सर्किल और अन्य संभावित प्रदर्शन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। दिल्ली से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब राजस्थान में भी राजनीतिक और सामाजिक रूप लेता नजर आ रहा है। एक ओर छात्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
दिल्ली में सुरक्षा कारणों से शराब की दुकानों का समय बदला। अब सप्ताहांत तक सभी सरकारी शराब की दुकानें रात 8 बजे बंद होंगी। CJP प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने लिया फैसला।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए रीवा से बड़ी संख्या में छात्र और युवा ट्रेन से दिल्ली रवाना हुए। यात्रा के दौरान ट्रेन के भीतर छात्रों ने जोरदार नारेबाजी की। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो और छात्र एकता जिंदाबाद जैसे नारों से कई कोच गूंज उठे। छात्रों के हाथों में पोस्टर और बैनर भी थे, जिनके माध्यम से उन्होंने शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताई। ट्रेन के अंदर की नारेबाजी के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने निकले छात्र प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने बताया कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में भाग लेने के लिए रवाना हुए हैं। उनका कहना है कि वे छात्रों की मांगों के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को गंभीरता से निर्णय लेने की जरूरत है। लाठीचार्ज के विरोध में जताया आक्रोश छात्रों का कहना है कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में वे राजधानी पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से रीवा सहित विंध्य क्षेत्र के कई युवा आंदोलन में शामिल होने दिल्ली जा रहे हैं। ट्रेन में लगातार लगते रहे नारे यात्रा के दौरान छात्र पूरे उत्साह के साथ नारे लगाते रहे। कई कोचों में छात्रों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो और छात्र एकता जिंदाबाद जैसे नारों से ट्रेन का माहौल गूंजता रहा। इस दौरान कई छात्रों के हाथों में पोस्टर और बैनर भी दिखाई दिए। यात्रियों का भी गया ध्यान ट्रेन के भीतर चल रही नारेबाजी और प्रदर्शन के कारण अन्य यात्रियों का भी ध्यान इस ओर गया। छात्रों ने यात्रा के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग उठाई और अपनी बात को शांतिपूर्ण तरीके से रखने की बात कही। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ट्रेन के अंदर नारेबाजी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में बड़ी संख्या में छात्र एक साथ नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने की बात छात्रों का कहना है कि वे दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय की आवश्यकता है और इसी मांग को लेकर वे आंदोलन का हिस्सा बनने राजधानी जा रहे हैं।
दिल्ली में आज 18 मेट्रो स्टेशन बंद, जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच DMRC का बड़ा फैसला
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए आज सुबह 7.30 बजे से अगली सूचना तक 18 मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। पिछले कई दिनों से मेट्रो बंद होने की वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
साहिबाबाद में मालगाड़ी डिरेल होने का असर:दिल्ली रूट की कई पैसेंजर ट्रेनें रद्द, दैनिक यात्री परेशान
फिरोजाबाद। साहिबाबाद रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी के छह डिब्बे बेपटरी होने के बाद रेल यातायात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है। बहाली कार्य जारी होने के कारण रेल प्रशासन ने दिल्ली, नई दिल्ली और शकूरबस्ती रूट की कई पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रयागराज मंडल के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि साहिबाबाद रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी के डिरेल होने के बाद ट्रैक बहाली का काम लगातार जारी है। रेल यातायात पर दबाव कम करने और संचालन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए कई पैसेंजर ट्रेनों को अस्थायी रूप से निरस्त किया गया है। ये पैसेंजर ट्रेनें रहीं रद्द रेल प्रशासन के अनुसार अलीगढ़-दिल्ली, अलीगढ़-नई दिल्ली, खुर्जा-शकूरबस्ती, टूंडला-दिल्ली, दनकौर-शकूरबस्ती, हाथरस-हाथरस किला और हाथरस किला-दिल्ली पैसेंजर ट्रेनों का संचालन रद्द किया गया है। ट्रेनों के लगातार रद्द होने से दिल्ली रूट पर यात्रा करने वाले दैनिक यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनें बंद होने से उन्हें सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय के साथ यात्रा खर्च भी बढ़ गया है। खुर्जा तक ट्रेन चलाने की मांग रेल यात्री महेश चंद्र ने बताया कि टूंडला-दिल्ली पैसेंजर ट्रेन को कम से कम खुर्जा तक संचालित किया जाना चाहिए। इससे बरहन, जलेसर रोड, हाथरस, अलीगढ़ और खुर्जा तक आने-जाने वाले हजारों दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी। यात्रियों ने रेल प्रशासन से जल्द से जल्द ट्रेनों का संचालन सामान्य करने और खुर्जा तक सेवा शुरू करने की मांग की है।
राजधानी दिल्ली में जारी प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी (Traffic Advisory) जारी की है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील इलाकों में भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत सख्त पाबंदियां लागू की गई हैं।पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे नई दिल्ली जिले के मुख्य क्षेत्रों में बिना किसी बेहद जरूरी काम के जाने से बचें और अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाकर निकलें।इन इलाकों में यात्रा से बचने की सलाहदिल्ली पुलिस ने विशेष रूप से निम्नलिखित संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक आवाजाही न करने का आग्रह किया है:जंतर-मंतर और संसद भवन परिसरसेंट्रल विस्टा (Central Vista)कनॉट प्लेस (Connaught Place)संपूर्ण नई दिल्ली जिलावाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे इन क्षेत्रों की तरफ जाने वाले रास्तों के बजाय वैकल्पिक मार्गों (Alternate Routes) का चयन करें और चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।कैब, फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं के लिए निर्देशदिल्ली पुलिस ने ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स (जैसे- ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी और क्विक-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स) को भी विशेष सलाह जारी की है:सेवाओं पर नियंत्रण: कंपनियों से कहा गया है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में अपनी डिलीवरी और राइड सेवाओं को जरूरत के अनुसार नियंत्रित रखें।जियो-फेंसिंग (Geo-Fencing) तकनीक: कंपनियों को संवेदनशील क्षेत्रों में जियो-फेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल करने या अस्थायी रूप से सेवाएं निलंबित रखने की सलाह दी गई है।सुरक्षा प्राथमिकता: पुलिस के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।आपातकालीन सेवाएं और हेल्पलाइन नंबरइमरजेंसी गाड़ियां रहेंगी फ्री: दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अधिकृत सरकारी वाहनों जैसी सभी आपातकालीन सेवाओं पर कोई रोक नहीं रहेगी और वे बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी।अफवाहों से बचें: लोगों से केवल आधिकारिक घोषणाओं और पुलिस अपडेट पर ही भरोसा करने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति या सहायता के लिए नागरिक दिल्ली पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर संपर्क कर सकते हैं।
देशभर के सराफा बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। 25 जुलाई 2026 की सुबह राजधानी दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट गोल्ड के दामों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में 24 कैरेट सोना फिसलकर ₹1,44,470 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है, जबकि एक दिन पहले ही इसमें ₹2,000 की भारी नरमी दर्ज की गई थी।घरेलू बाजार में कमजोर खरीदारी और स्थानीय मांग में आई सुस्ती के चलते सोने पर दबाव बना हुआ है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) $4,052.78 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से नीचे आने के कारण वैश्विक बाजार में सोने को हल्का सहारा मिला है, लेकिन घरेलू बाजार में कमजोरी हावी है।देश के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट (₹/10 ग्राम)शहर22 कैरेट सोने का भाव (₹)24 कैरेट सोने का भाव (₹)दिल्ली₹1,32,440₹1,44,470मुंबई₹1,32,290₹1,44,320कोलकाता₹1,32,290₹1,44,320चेन्नई₹1,32,290₹1,44,320लखनऊ₹1,32,440₹1,44,470जयपुर₹1,32,440₹1,44,470अहमदाबाद₹1,32,340₹1,44,370भोपाल₹1,32,340₹1,44,370चंडीगढ़₹1,32,440₹1,44,470हैदराबाद₹1,32,290₹1,44,320चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावटसोने के साथ-साथ चांदी (Silver) की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 25 जुलाई की सुबह घरेलू बाजार में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत ₹2,34,900 प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है, जबकि इससे पहले दिल्ली सराफा बाजार में चांदी ₹5,000 तक टूट चुकी है।वैश्विक बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट सिल्वर मामूली बढ़त के साथ $58.11 प्रति औंस और प्लेटिनम $1,587.17 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।क्यों बदलती हैं सोने-चांदी की कीमतें?भारत में सोने और चांदी के भाव केवल घरेलू मांग और आपूर्ति पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इन मुख्य कारकों से भी तय होते हैं:वैश्विक आर्थिक स्थिति व अंतरराष्ट्रीय दरें: अमेरिका और वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों का असर।डॉलर-रुपया विनिमय दर: भारतीय रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी।कच्चे तेल की कीमतें: ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले उतार-चढ़ाव।इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स: भारत सरकार द्वारा लगाए जाने वाले सीमा शुल्क और स्थानीय वैट (VAT)/जीएसटी।
राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मौसम सुहावना बना रहेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आज दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और हल्की से बहुत हल्की बारिश होने की संभावना है।शुक्रवार को हुई बूंदाबांदी और हल्की फुहारों के बाद दिल्लीवासियों को काफी समय से परेशान कर रही उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग का अनुमान है कि शनिवार को भी बारिश और ठंडी हवाओं के चलते तापमान नियंत्रण में रहेगा।आज कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम और तापमान?मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक:बादल और बारिश: शनिवार सुबह से ही आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच हल्की से मध्यम फुहारें पड़ सकती हैं, जबकि दोपहर और शाम के वक्त भी रुक-रुक कर हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है।तेज हवाएं: दिन के दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 40 किमी/घंटा तक पहुंच सकते हैं।तापमान में गिरावट: आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 33C से 35C के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24C से 26C के आसपास दर्ज किया जा सकता है।बीते 24 घंटों में कैसा रहा मौसम?शुक्रवार को दिनभर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में छिटपुट बारिश दर्ज की गई, जिससे पारा सामान्य से नीचे बना रहा:सफदरजंग: अधिकतम तापमान 34.6C दर्ज किया गया।पालम: अधिकतम तापमान 32.9C रहा।लोधी रोड और रिज: दोनों मौसम केंद्रों पर तापमान 33.3C रिकॉर्ड हुआ।आया नगर: अधिकतम तापमान 33.3C रहा।बारिश के आंकड़ों की बात करें तो बीते 24 घंटों के दौरान पालम में 3.3 मिमी, सफदरजंग में 0.6 मिमी और रिज क्षेत्र में 3.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।दिल्ली की हवा हुई साफ, AQI 'संतोषजनक' श्रेणी मेंमानसून की लगातार गतिविधियों और बारिश के कारण दिल्ली की आबोहवा में बड़ा सुधार देखने को मिला है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार शाम को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 70 दर्ज किया गया, जो 'संतोषजनक' (Satisfactory) श्रेणी में आता है। साफ हवा और सुहावने मौसम के कारण सप्ताहांत (Weekend) पर लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय के रोजगार अधिकारों को लेकर दिल्ली सरकार से पूछा कि जब सरकारी भर्ती विज्ञापनों में रिक्तियां केवल पुरुष और महिला श्रेणी में बांटी जाती हैं, तो ट्रांसजेंडरों की नियुक्ति कैसे होगी। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि सिर्फ आवेदन पोर्टल में थर्ड जेंडर का विकल्प जोड़ना इस समस्या का समाधान नहीं है। अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आवेदन पोर्टल में तीसरे लिंग का विकल्प जोड़ दिया गया है और याचिकाकर्ता आवेदन कर चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडरों को आरक्षण देने का फैसला न्यायिक आदेश से नहीं, बल्कि विधायिका के स्तर पर किया जा सकता है। कोर्ट बोला- वे भी इंसान हैं, सहानुभूति से देखें याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि शिक्षकों की भर्ती समेत कई सरकारी विज्ञापनों में अब भी पद ‘पीजीटी बायोलॉजी (महिला)’ और ‘पीजीटी केमिस्ट्री (पुरुष)’ जैसी श्रेणियों में बांटे जाते हैं। इस पर पीठ ने कहा, “वे भी इंसान हैं, उन्हें सहानुभूति से देखें।” कोर्ट ने यह भी कहा कि आवेदन करने के बाद भी ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को यह कहकर बाहर किया जा सकता है कि वे तय श्रेणी में फिट नहीं बैठते। इसी मुद्दे पर अदालत ने दिल्ली सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। इनपुट में अगली सुनवाई की तारीख की जानकारी नहीं दी गई है। --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अब सोशल-मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे कोर्ट की कार्यवाही:सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा- न्यायालय 24x7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट की सुनवाई की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग बिना पहले से अनुमति लिए सोशल मीडिया या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट नहीं की जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि इस फैसले से मीडिया की खबरों पर कोई रोक नहीं लगेगी। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शनिवार 25 जुलाई को केंद्रीय दिल्ली के 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने का फैसला किया है। यह लगातार चौथा दिन है जब प्रदर्शन के चलते दिल्ली मेट्रो की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सुबह 7:30 बजे से प्रभावित स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री और एग्जिट बंद रखी गई है और यह व्यवस्था अगले आदेश तक जारी रहने की बात कही गई है। सड़क मार्ग पर भी बढ़ा दबाव मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से बहादुरगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से नौकरी, कारोबार और अन्य जरूरी कामों के लिए रोजाना दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर केंद्रीय दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों और दूसरे परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे सड़क मार्ग पर भी दबाव बढ़ने और यात्रियों को अतिरिक्त समय लगने की स्थिति बन रही है। इन स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री-एग्जिट बंद सुरक्षा कारणों से प्रभावित स्टेशनों में लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, ITO, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोरबाग, शिवाजी स्टेडियम और झंडेवालान समेत 18 स्टेशन शामिल हैं। हालांकि कुछ प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर यात्रियों को लाइन बदलने की सुविधा उपलब्ध रहने की जानकारी दी गई है। बहादुरगढ़ के यात्रियों को भी झेलनी पड़ रही परेशानी दिल्ली मेट्रो पर लगातार सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण बहादुरगढ़ की तरफ से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नौकरी पेशा लोगों और व्यापारियों को मेट्रो के बजाय बस, कैब और ऑटो जैसे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे कई यात्रियों को लंबा सफर तय करना पड़ रहा है और अतिरिक्त किराया भी देना पड़ रहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि दिल्ली जाने से पहले मेट्रो की ताजा स्थिति और अपने रूट की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि बंद स्टेशनों के कारण बीच रास्ते में परेशानी का सामना न करना पड़े।
दिल्ली में 18 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद, जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के बीच डीएमआरसी का बड़ा फैसला
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए शनिवार (25 जुलाई) सुबह 7.30 बजे से अगले आदेश तक 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने की घोषणा की
मूंडवा से दिल्ली जा रहे तमिलनाडु के यात्री को बस में आया हार्ट अटैक, इलाज के दौरान मौत
भास्कर न्यूज। डीडवाना मूंडवा से दिल्ली की ओर रोडवेज बस में सफर कर रहे एक यात्री की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। दस्तावेजों के आधार पर शिनाख्त हो सकी। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान रविचंद्र (46) पुत्र राजवेलू निवासी 96 वस्तम नगर तमिलनाडु के रूप में हुई है। रविचंद्र मूंडवा से दिल्ली जा रहे थे, तभी यात्रा के दौरान बस में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अटैक आ गया। घटना की जानकारी मिलते ही बस स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत डीडवाना के राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने मृतक के पास मिले दस्तावेजों व मोबाइल के जरिए तमिलनाडु में उनके परिजनों को सूचना दी। परिजनों के आने तक शव को बांगड़ अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया था। शुक्रवार को परिजनों के डीडवाना पहुंचने के बाद पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और पंचनामा तैयार कर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है।
कटरा-नई दिल्ली के लिए विशेष ट्रेन 27 को चलेगी
लुधियाना| नई दिल्ली में उत्तर रेलवे ने रेल यात्रियों की सुविधा और गर्मी के मौसम में अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी कटरा–नई दिल्ली–श्री माता वैष्णो देवी कटरा के लिए विशेष ट्रेन संख्या 04678/04677 चलाने का निर्णय लिया है। कटरा से नई दिल्ली जाने वाली 04678 श्री माता वैष्णों देवी कटरा से 09:40 पर प्रस्थान कर पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लुधियाना जं., अंबाला कैंट और पानीपत जं. होते हुए नई दिल्ली 21:40 पर पहुंचेगी। वापसी में 04677 नई दिल्ली से 23:45 पर रवाना होकर पानीपत जं., अंबाला कैंट, लुधियाना जं., जालंधर कैंट, पठानकोट कैंट होते हुए श्री माता वैष्णो देवी कटरा पहुंचेगी।
छात्र आंदोलन के समर्थन में सब-इंस्पेक्टर के इस्तीफे का वायरल दावा फर्जी : दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक व्यक्ति के वीडियो में किए गए दावों को गलत बताया। इस वीडियो में व्यक्ति ने दावा किया था कि उसने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ दी है।
भास्कर अपडेट्स:दिल्ली हाईकोर्ट बोला- नाम में राम होने से जरूरी नहीं कि व्यक्ति भगवान राम जैसा हो
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति का नाम उसके चरित्र या आचरण को तय नहीं करता। नाम से ज्यादा इंसान के कर्म मायने रखते हैं। कोर्ट ने कहा कि उत्तर भारत में बच्चों का नाम राम रखना आम है और कई मुस्लिमों के नाम में मोहम्मद भी होता है, लेकिन सिर्फ नाम से किसी की शख्सियत तय नहीं होती। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कलयुग में कोई भी रामचंदर जरूरी नहीं कि भगवान राम जैसा हो। कोर्ट ने मामले में 13 साल की लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में सजा काट रहे रामचंदर को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी का जुर्म साबित करने में नाकाम रहा और गवाहियों में भारी विरोधाभास हैं, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। अभियोजन के मुताबिक अप्रैल 2006 में लड़की गायब हुई थी और बाद में उसे आरोपी रामचंदर के साथ बरामद किया गया था। आरोपी का दावा था कि लड़की अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी और वह बालिग थी। पीड़िता ने अदालत में कहा कि वह आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती। आज की अन्य बड़ी खबरें… ममता की तृणमूल पर एफआईआर दर्ज, कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया था कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन के आरोप में कोलकाता पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 21 जुलाई को कैथेड्रल रोड पर आयोजित इस रैली के लिए कोर्ट ने अधिकतम 2,500 लोगों की अनुमति दी थी और सड़क की एक लेन ट्रैफिक के लिए चालू रखने का निर्देश दिया था। इस सीमा से ज्यादा भीड़ जुटने के कारण सड़क की दोनों लेन पूरी तरह बंद हो गईं। के. श्रीकर रेड्डी कतर में भारत के नए राजदूत नियुक्त वरिष्ठ राजनयिक के. श्रीकर रेड्डी को कतर में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को उनकी नियुक्ति की घोषणा की। भारतीय विदेश सेवा के 2001 बैच के अधिकारी रेड्डी फिलहाल अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारत के महावाणिज्यदूत के रूप में कार्यरत हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह जल्द ही दोहा में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। रेड्डी कतर में मौजूदा भारतीय राजदूत विपुल का स्थान लेंगे। नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब भारत और कतर के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश तथा प्रवासी भारतीयों से जुड़े संबंध महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
नीट पेपर लीक में गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच शुक्रवार को दूसरे दौर की बातचीत हुई। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि CJP ने 3 मांगें और परीक्षा सुधार के 5 सुझाव रखे हैं। सरकार इन पर चर्चा कर रही है। शनिवार दोपहर 3.30 बजे तीसरे दौर की बैठक होगी। जिसमें सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अपना पक्ष बताएगी। सीजेपी ने सरकार से कहा हैकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार ने सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजन को 1-1 करोड़ मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस खत्म करने की दो मांगों पर सैद्धांतिक सहमति दी है। हालांकि, सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वहीं, सरकार के सूत्रों के अनुसार, 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि पद छोड़ना सबसे आसान काम होगा और यह जिम्मेदारी से भागने के बराबर होगा। हम काम करके दिखाएंगे।’ इधर, प्रदर्शन के चलते दिल्ली सरकार ने पुलिस की सलाह पर वीकेंड तक सभी शराब दुकानें रात 8 बजे बंद करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को भी बिना सूचना के दुकानें समय से पहले बंद कर दी गईं, जिससे लोगों को वापस लौटना पड़ा। जंतर-मंतर समेत शुक्रवार को देशभर में हुए प्रदर्शन की तस्वीरें… दिल्ली में आज से 2 बदलाव… पिछले 5 दिन में क्या-क्या हुआ, यहां पढ़ें… 24 जुलाई- सरकार-CJP में दूसरे दौर की बातचीत; वांगचुक का अनशन खत्म 23 जुलाई- कॉकरोच जनता पार्टी बोली- सरकार बात करने जंतर-मंतर आए 22 जुलाई- सोनम वांगचुक बोले- सरकार से भरोसा मिला तो अनशन तोडूंगा 21 जुलाई- अभिजीत दीपके बोले- बात करना है तो सरकार खुद जंतर-मंतर आए 20 जुलाई- CJP का संसद मार्च, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का लाठीचार्ज, कई सिर फूटे जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़े अपडेट के लिए ब्लॉग से गुजर जाएं…
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में शुक्रवार शाम मऊगंज में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने जोरदार प्रदर्शन किया। शासकीय केदारनाथ कॉलेज के मुख्य गेट से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन रात होते-होते एक विशाल मशाल जुलूस में बदल गया। बड़ी संख्या में NSUI कार्यकर्ता और कांग्रेस नेता सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कॉलेज चौराहा, ब्लॉक चौराहा और बस स्टैंड होते हुए चाक मोड़ तक करीब 4 किलोमीटर पैदल चले। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए छात्रों के समर्थन में आवाज बुलंद की। 'भाजपा के पाप का घड़ा' मटकी फोड़कर जताया विरोध चाक मोड़ पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक रूप से विरोध दर्ज कराने के लिए 'भाजपा के पाप का घड़ा' लिखी मटकी को फोड़ा। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर पुलिस बल भी तैनात रहा और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। हालांकि पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। दिग्गजों की मौजूदगी में संघर्ष का आह्वान जुलूस में पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना, जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिलाल कोल, पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष पद्मेश गौतम और NSUI जिला अध्यक्ष नीलेश केशरी 'बच्चा भैया' समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पूर्व विधायक बन्ना ने कहा कि देश में आज आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ी जा रही है और देश व छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा।
दिल्ली पुलिस की सख्त ट्रैफिक एडवाइजरी : प्रतिबंधित क्षेत्रों में यात्रा से बचें
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा को देखते हुए नागरिकों और डिजिटल सेवा प्रदाताओं के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है
अयोध्या में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। छात्रसभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम छह सूत्रीय ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में नीट परीक्षा की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा, जंतर-मंतर पर हुए कथित लाठीचार्ज की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र सभा और सपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। पुलिस ने रास्ते में रोक लिया इधर, समाजवादी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव पंडित समरजीत को शुक्रवार दोपहर दिल्ली रवाना होने के दौरान पुलिस ने रास्ते में रोक लिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा मामले में निष्पक्ष जांच के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। समरजीत ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण का भी जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने 15 दिन में जांच पूरी कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक उसकी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। उन्होंने सरकार से जांच की प्रगति सार्वजनिक करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आ रहे कथित पेपर लीक और नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर शुक्रवार, 24 जुलाई को पठानकोट में जिला यूथ कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उग्र कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एक के बाद एक सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। लगातार हो रही धांधलियों से रात-दिन मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का परीक्षाओं और व्यवस्था से विश्वास उठ रहा है। प्रदर्शन के अंत में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और छात्रों को न्याय दिलाने की अपनी मांग को दोहराया। पेपर रद्द होने या विवाद में फंसने के कारण लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता है, जिससे उनके समय, मेहनत और आर्थिक संसाधनों का भारी नुकसान होता है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक इस पूरे मामले में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक पीड़ित छात्रों को सच्चा न्याय मिलना असंभव है। दिल्ली में छात्रों पर हुए बल प्रयोग की निंदा इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई (लाठीचार्ज) की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की आवाज उठाने वाले शांतिपूर्ण छात्रों पर बल प्रयोग करना पूरी तरह से तानाशाही और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पार्टी देश के छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक पुरजोर तरीके से लड़ती रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में इस जन-आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और आम लोगों पर बीती 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में आज जलालाबाद में व्यापक रोष प्रदर्शन देखने को मिला। 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन' (AISF) और 'ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन' (AIYF) के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं ने स्थानीय गर्ल्स कॉलेज में एकत्र होकर अपना विरोध दर्ज कराया और पूरे शहर में एक विशाल रोष मार्च निकाला। यह प्रदर्शन देशव्यापी आह्वान के तहत जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारियों के समर्थन में मिनी जंतर-मंतर बनाकर आयोजित किया गया था। इस रोष मार्च और प्रदर्शन का नेतृत्व AISF के प्रदेश अध्यक्ष रमन धर्मूवाला, जिला सचिव स्टालिन लामोचड़, जिला परिषद सदस्य मनजिंदर कौर बग्गे के, सर्व भारतीय नौजवान सभा के नेता सोना धुन्नकियां तथा धर्मेंद्र मुरकवाला ने संयुक्त रूप से किया। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र होगा। गर्ल्स कॉलेज से एसडीएम कार्यालय तक गूंजे नारे स्थानीय गर्ल्स कॉलेज में एकत्रित हुई छात्राओं और युवाओं ने दिल्ली पुलिस व केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद कॉलेज परिसर से लेकर एसडीएम (SDM) कार्यालय जलालाबाद तक एक विशाल रोष मार्च निकाला गया, जिसमें युवाओं का आक्रोश साफ देखने को मिला। प्रदर्शनकारी छात्रों और युवा नेताओं ने केंद्र सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी। उनका कहना था कि दिल्ली पुलिस की बर्बर कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। शिक्षा के लगातार हो रहे व्यवसायीकरण और निजीकरण को तुरंत रोका जाए। संसद में एक विशेष कानून पारित कर देश के सभी युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार की कानूनी गारंटी तय की जाए।
कोडरमा जिले के मरकच्चो थाना क्षेत्र में शुक्रवार शाम एक युवक का शव रेलवे ट्रैक के पास संदेहास्पद स्थिति में मिला। यह घटना कोडरमा-मधुपुर रेल मार्ग पर नावाडीह स्टेशन से लगभग 100 मीटर दूर रेलवे ब्रिज के पास हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम नावाडीह गांव के कुछ बच्चे रेलवे पुल के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी नजर रेलवे ट्रैक पर पड़ी, जहां उन्होंने एक युवक को गिरा हुआ देखा। बच्चों ने तुरंत आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी, जिसके बाद ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। कुछ दिन पहले बेंगलुरु से लौटा था गांव शव की शिनाख्त मरकच्चो पश्चिमी मोहल्ला निवासी बबलू गोस्वामी के रूप में की गई है। मृतक के भाई विक्रम गोस्वामी ने बताया कि बबलू अभी हाल ही में बेंगलुरू से अपने गांव वापस लौटा था। उन्होंने बताया कि बबलू शराब का काफी ज्यादा सेवन किया करता था। इसको लेकर घर में आए दिन विवाद होते रहता था। उसने बताया कि तीन दिन पूर्व भी बबलू का उसकी पत्नी के साथ विवाद हुआ था। इसके बाद उसके ससुराल के लोग उसके घर आए और समझौता कर मामले को शांत करवाया था। उसने बताया कि बबलू को उसके ससुर ने दिल्ली जाने के लिए किराए के लिए 1 हजार रुपाए भी दिया था। बीते बुधवार को ही बबलू दिल्ली जाने की बात कहकर घर से निकला था। इधर, शुक्रवार को उसकी यह खबर सुनकर पूरा परिवार स्तब्ध है। पुलिस फिलहाल मौत के कारणों को तलाशने में जुटी हुई है। दोनों कान से काफी खून बह रहा था ग्रामीणों ने देखा कि युवक मृत अवस्था में रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा था। उसके दोनों कान से काफी खून बह रहा था। इस स्थिति को देखकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि युवक की मौत किसी ट्रेन से गिरने के कारण हुई होगी। वहीं, कुछ अन्य लोग हत्या की आशंका जता रहे हैं, उनका कहना है कि युवक की हत्या कर शव को रेलवे दुर्घटना का रूप देने के लिए यहां फेंका गया हो सकता है।
सावन माह में हरिद्वार और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर दिल्ली पहुंचने वाले शिवभक्त कांवड़ियों के स्वागत और उनकी सुविधाओं के लिए दिल्ली सरकार ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम और श्रद्धापूर्ण बनाने के लिए विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। दिल्ली सरकार का संकल्प है कि राजधानी में आने वाला प्रत्येक शिवभक्त स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और अपनत्व से घिरा हुआ महसूस करे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा की सभी तैयारियों में सेवा भाव और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। बैठक में कला एवं संस्कृति मंत्री और कांवड़ समिति के अध्यक्ष कपिल मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दिल्ली के प्रमुख मार्गों पर होगा भव्य स्वागतसरकार कांवड़ियों के स्वागत के लिए दिल्ली के प्रमुख प्रवेश मार्गों और कांवड़ मार्गों पर स्वागत द्वार बनाएगी। शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा की व्यवस्था भी की जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्वयं भी विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर कांवड़ियों का स्वागत करेंगी। कांवड़ समितियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टमकांवड़ समितियों को अनुमति और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की गई है। इससे समितियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। शिविरों में 24 घंटे रहेंगी सुविधाएंमुख्यमंत्री ने कांवड़ शिविरों में 24 घंटे सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शिविरों में पर्याप्त संख्या में उच्च गुणवत्ता वाले मोबाइल शौचालय लगाए जाएंगे, जिनकी नियमित सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी। इसके अलावा, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अलग-अलग शिफ्टों में तैनाती की जाएगी, ताकि दिन-रात चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रह सकें। स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति और बारिश के दौरान जलभराव से निपटने के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए, ताकि यह यात्रा श्रद्धा, सेवा और सुचारु व्यवस्थाओं के साथ संपन्न हो सके।
दिल्ली पुलिस फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FCR) के जरिए जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करने वालों की पहचान कर रही है। 216 लोग ऐसे मिले हैं जिनका पिछला क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है। इनमें वेस्ट दिल्ली, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली, साउथ दिल्ली और बाकी अन्य जिलों के हैं। सूत्रों के मुताबिक, वायरल सोशल मीडिया पोस्ट, सीसीटीवी फुटेज की FCR से जांच करने पर इन क्रिमिनल्स की पहचान हुई। जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई थी। कई वीडियोज ऐसे भी आए थे, जिनमें फोर्सेस पर भी हमला हुआ। फोर्सेस पर गलत बल प्रयोग के आरोप भी लगे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस प्रदर्शन की फुटेज और फोटो जांच रहा है। इस बीच, रैपिड एक्शन फोर्स ने भी जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और पेलेट गन चलाने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। प्रदर्शन में शामिल संदिग्धों की फोटोज पुलिस के किसी अधिकारी पर एक्शन नहीं दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर देवेश कुमार श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर से कहा कि CJP प्रोटेस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस के किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। किसी पुलिस कर्मचारी या अधिकारी को सस्पेंड करने या विभागीय कार्रवाई करने की सोशल मीडिया पर आई खबर गलत है। पुलिस की तरफ से लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने के लिए कानून के तहत कार्रवाई की गई। जितने पुलिस ऑफिशियल घायल हुए थे इनमें ज्यादातर को अब अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। उनकी अब ड्यूटी भी लगाई जा रही है। RAF पैलेट गन चलाने के आरोपों की जांच करेगी रैपिड एक्शन फोर्स ने दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि RAF यह जांचेगी कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान RAF की टीमों ने क्या कार्रवाई की और किन परिस्थितियों में जवानों पर हमला हुआ। अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर RAF जवानों की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। इनमें कुछ वीडियो में जवानों को बंदूक और लाठी का इस्तेमाल करते तथा लाठीचार्ज करते हुए देखा जा सकता है। वहीं कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा RAF जवानों को घेरकर उन पर हमला करते हुए भी दिखाया गया है। 20 जुलाई: संसद मार्च में पुलिस का लाठीचार्ज कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। सुबह 8 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। आंदोलनकारी जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक होते हुए संसद के करीब पहुंचे। संसद में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद संसद की सुरक्षा बढ़ा दी गई, मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।50 से ज्यादा पुलिसकर्मी और इतने ही प्रदर्शनकारी भी घायल हुए थे। ये खबर भी पढ़ें… पैलेट्स से जख्मी इरशाद से बोले नड्डा-प्रदर्शन में क्यों गए: जवान ने बंदूक तानी 25 साल के इरशाद शेख दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एडमिट हैं। चेहरे और आंख पर जख्म के निशान हैं। गुरुग्राम में नौकरी करने वाले इरशाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट में गए थे। तभी पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली पुलिस फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FCR) से जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने वालों की पहचान कर रही है। इस दौरान प्रोटेस्ट साइट पर ऐसे आरोपियों की जानकारी मिली है जो पहले से ही दिल्ली पुलिस के क्रिमिनल रिकॉर्ड में दर्ज है। कुल 216 आरोपियों को FCR से पहचाना गया है। इनमें सबसे ज्यादा 26 वेस्ट दिल्ली से है। इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से 23, साउथ दिल्ली से 22 और अन्य जिलों के हैं। दैनिक भास्कर को दिल्ली पुलिस आधिकारिक सूत्रों से पता चला वायरल सोशल मीडिया पोस्ट, सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। जिसके आधार पर इनके चेहरे पुलिस रिकॉर्ड में भी मिले हैं। इस आधार पर दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि कई क्रिमिनल भी प्रोटेस्ट में शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने इनकी पहचान फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से की। खबर का वीडियो देखने के लिए कवर इमेज पर क्लिक करें…
भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)के प्रस्तावित समझौते के विरोध में शुक्रवार को करनाल सहित हरियाणा और पंजाब के किसान संगठनों ने ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से करनाल लोकसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि इस ट्रेड डील पर हस्ताक्षर न किए जाएं और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक अधिकार लगातार कमजोर किए जा रहे हैं। किसानों और आम लोगों को अपनी मांगें शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अवसर तक नहीं दिया जा रहा। उनका आरोप था कि विरोध की हर आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बॉर्डर पर रोकने के लगाए आरोप किसान नेताओं ने बताया कि जब वे अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के किसान घाट की ओर बढ़ रहे थे, तब हरियाणा पुलिस और प्रशासन ने बस्तारा टोल प्लाजा, शंभू बॉर्डर समेत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। किसानों का आरोप है कि उनके ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया गया, जिससे उनके शांतिपूर्ण आंदोलन में बाधा उत्पन्न हुई। सस्ते विदेशी उत्पादों से बढ़ेगा संकट किसान नेताओं ने आशंका जताई कि यदि भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हुआ तो अमेरिका के सस्ते कृषि उत्पाद, डेयरी उत्पाद और मेवे भारतीय बाजारों में बड़ी मात्रा में आएंगे। अखिल किसान महासभा के राज्य प्रधान बलबीर सिंह ने कहा कि इससे भारतीय किसानों की फसलों को उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। साथ ही कृषि लागत बढ़ेगी और छोटे व मध्यम किसान आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। किसानों ने सरकार से इस समझौते पर पुनर्विचार करने की मांग की। युवाओं के आंदोलन को दिया समर्थन प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं का भी खुलकर समर्थन किया। रतन मान ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। संसद में चिंताओं को मजबूती से उठाएं उन्होंने कहा कि किसान संगठन युवाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं और जरूरत पड़ी, तो संयुक्त किसान नेतृत्व के आह्वान पर दोबारा दिल्ली कूच किया जाएगा। किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से केंद्रीय मंत्री एवं करनाल के सांसद मनोहर लाल खट्टर से अपील की, कि वे संसद में किसानों की चिंताओं को मजबूती से उठाएं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिना किसानों के हितों को ध्यान में रखे इस तरह की ट्रेड डील पर कोई भी फैसला नहीं लिया जाना चाहिए।
दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में पलवल जिले में भी धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा है। दिल्ली के आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में शहर के देवीलाल पार्क में शुक्रवार को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष नकुल और आजाद समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष गौतम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के शासन में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं, लेकिन दोषियों को अभी तक सजा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज नहीं सुन रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा कि देश का युवा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, समय पर भर्ती और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहा है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। साथ ही, दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की अन्य मांगों को भी तुरंत मानने की अपील की। इस दौरान भीम आर्मी के जिला प्रभारी नेमचंद, जिला कार्यकारिणी सदस्य अभिषेक और जिला सचिव खेमचंद सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित किया।
दिल्ली में प्रदर्शनकारी युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भिवानी में प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की। पीपल ऑफ भिवानी के बैनर तले भिवानी के हुडा पार्क में युवा, विद्यार्थी एवं जागरूक नागरिकों ने एकत्र होकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज एवं दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के उपरांत सभी प्रतिभागियों ने डीसी कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि पीपल ऑफ भिवानी किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिक एजेंडे से जुड़ा संगठन नहीं है। यह भिवानी के उन युवाओं की एक पहल है, जो इस मुद्दे पर चल रहे विभिन्न राजनीतिक संगठनों के विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं बनना चाहते। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्ष परीक्षाएं तथा युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकारप्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जलवायु कार्यकर्ता लोकेश तथा विशाल सैनी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे युवाओं के साथ बल प्रयोग किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों ने लाखों विद्यार्थियों का विश्वास कमजोर किया है। ऐसे समय में सरकार की प्राथमिकता युवाओं की बात सुनना और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना होना चाहिए, न कि उनकी आवाज को दबाना। शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की आत्माजलवायु कार्यकर्ता लोकेश भिवानी तथा विशाल सैनी ने कहा “हम दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर हुए दमन की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की आत्मा है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। हमारी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष की नहीं, बल्कि देश के विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित करने की है।” कलाकार सोनू रोंझिया ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाना चाहिए। इस दौरान मीनाक्षी, मोनू कश्यप, आयुष नांगल, कविता सोलंकी, आयुष दहिया व राहुल भिवानी आदि शामिल रहे।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों, युवाओं के आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए पलवल जिले की ट्रेड यूनियनों और सर्व कर्मचारी संघ ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन देवीलाल पार्क में आयोजित किया गया और केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों के समाधान की मांग की गई। प्रदर्शन की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जितेंद्र तेवतिया, सीटू जिला प्रधान रामरति चौहान और किसान सभा जिला प्रधान रूप राम तेवतिया ने की। संचालन रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरीशचंद्र वर्मा ने किया। प्रदर्शनकारियों ने देवीलाल पार्क से आगरा चौक तक जुलूस भी निकाला। वक्ता बोले- लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन स्वीकार नहीं किसान सभा जिला प्रधान रूप राम तेवतिया और सीटू जिला प्रधान राम रति चौहान ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं पर लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का प्रयोग निंदनीय है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन स्वीकार्य नहीं है और छात्रों की आवाज को बल प्रयोग से दबाने का प्रयास लोकतंत्र की मूल भावना पर हमला है। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जितेंद्र तेवतिया और किसान मोर्चा व किसान सभा के नेता धर्मचंद ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसे व्यापार का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय छात्रों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। लाठीचार्ज के आरोपियों पर कार्रवाई की मांग आंदोलनकारियों ने मांग की कि जंतर-मंतर लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, नई शिक्षा नीति (एनईपी) की वापसी, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे समाप्त करना और एक देश–एक परीक्षा जैसी व्यवस्था को लागू न करना शामिल है। मुआवजा दिए जाने की मांग उन्होंने मांग की कि, पेपर लीक के कारण जिन छात्रों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा उनके आश्रितों को उचित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि ऐसी नीतियां शिक्षा में समान अवसरों को कमजोर करती हैं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती हैं। प्रदर्शनकारियों ने देवीलाल पार्क से आगरा चौक तक जुलूस भी निकाला। प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में सीटू जिला सचिव उर्मिला रावत, सर्व कर्मचारी संघ के सचिव हरेंद्र देशवाल, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के नेता मास्टर बलजीत सिंह शास्त्री, अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के श्रीपाल सिंह भाटी तथा बबली सैनी, योगेश शर्मा, देवी सिंह सहजवाल, राजकुमार डागर, सुधीर डागर, सुबेदार सुधीर डागर, राजकुमार, डॉ. रघुवीर सिंह व समय राम कुंडू सहित अन्य शामिल थे।
दिल्ली में जारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के मद्देनज़र फरीदाबाद पुलिस ने राजधानी से लगने वाली सभी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना और कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए बदरपुर बॉर्डर सहित सभी प्रमुख एंट्री प्वाइंट्स पर पुलिस ने 24 घंटे के लिए विशेष नाकाबंदी की गई है। दिल्ली की ओर जाने वाले हर छोटे-बड़े वाहन की सघन जांच की जा रही है, जबकि संदिग्ध गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। बदरपुर बॉर्डर पर तैनात पुलिसकर्मी वाहनों को रोक कर उनकी डिग्गी, केबिन और अन्य हिस्सों की तलाशी ले रहे हैं। दोपहिया वाहनों से लेकर कार, टैक्सी, बस और मालवाहक वाहनों तक की जांच की जा रही है। पुलिस का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या आपत्तिजनक सामान दिल्ली की ओर न ले जाया जा सके और आंदोलन की आड़ में कोई असामाजिक तत्व माहौल खराब न कर सके। इन 6 प्रमुख स्थानों पर पुलिस की नाकाबंदी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे स्थित दुर्गा बिल्डर एमसीडी टोल, सराय ख्वाजा टोल, डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज के पास, सूरजकुंड-प्रह्लादपुर मार्ग, इस्माइलपुर-जैतपुर मार्ग और बसंतपुर पुस्ता रोड सहित दिल्ली से जुड़े प्रमुख प्रवेश मार्गों पर पुलिस ने नाके लगाकर वाहनों की जांच की गई। लोगों की सुरक्षा को लेकर नाकाबांदी पुलिस एसएसआई संजय कुमार ने बताया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया जा सकता है। बॉर्डर पर सीसीटीवी कैमरों और पुलिस टीमों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, सुरक्षा जांच के कारण कुछ स्थानों पर वाहनों की रफ्तार धीमी जरूर हुई, लेकिन यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी लगातार ट्रैफिक का संचालन भी करते रहे।
देश के सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में इन दिनों भारी राजनीतिक और वैचारिक जंग छिड़ गई है। परीक्षा प्रणालियों और हालिया प्रशासनिक सुधारों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रुख पर विश्वविद्यालय पूरी तरह से दो गुटों में बंट गया है। एक तरफ जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ बड़े और प्रमुख कॉलेजों के प्राचार्यों व शिक्षक संघों ने शिक्षा मंत्री की नीतियों और सुधारवादी कदमों का खुला समर्थन किया है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख छात्र संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कैंपस में विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन धरना पूरी तरह जारी रहेगा।कुछ कॉलेजों ने क्यों किया केंद्रीय शिक्षा मंत्री का समर्थनविश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों और कई कॉलेज काउंसिलों की तरफ से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में एक सकारात्मक सुर देखने को मिला है। समर्थन करने वाले कॉलेजों का तर्क है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उच्च शिक्षा में पारदर्शिता लाने और तकनीकी बदलावों को लागू करने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे लंबी अवधि में छात्रों के हित में हैं। इन कॉलेजों के प्रबंधकों का मानना है कि परीक्षा सुधारों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन से दिल्ली यूनिवर्सिटी की वैश्विक रैंकिंग और शैक्षणिक स्तर में बड़ा सुधार होगा। इसी वजह से वे सरकार के इन फैसलों के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं।छात्र संगठनों का आर-पार का मूड, कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था सख्तदूसरी तरफ, वामपंथी और अन्य विपक्षी विचारधारा वाले छात्र संगठनों ने इस समर्थन को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। छात्र नेताओं का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय के हालिया फैसले आम छात्रों के हितों के खिलाफ हैं और इससे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। कैंपस में सुबह से ही भारी नारेबाजी और पोस्टर वॉर का दौर शुरू हो गया है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। दिल्ली के नॉर्थ और साउथ दोनों ही कैंपस में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और यूनिवर्सिटी सिक्योरिटी ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती कर दी गई है।संवाद या टकराव: दिल्ली यूनिवर्सिटी में आगे क्या होगाइस कूटनीतिक और वैचारिक खींचतान के बीच आम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा भी मंडराने लगा है। अकादमिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों पक्षों के बीच जल्द ही कोई सकारात्मक संवाद (Dialogue) स्थापित नहीं हुआ, तो यह टकराव आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को एक मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है ताकि कैंपस के शांत और शैक्षणिक माहौल को दोबारा बहाल किया जा सके। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्रालय और यूनिवर्सिटी के शीर्ष अधिकारी इस सुलगते विवाद को शांत करने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालते हैं।
बागपत में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता बिल्लू प्रधान को शुक्रवार को पुलिस ने उनके कार्यालय पर रोक दिया। वह अपने समर्थकों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। बिल्लू प्रधान ने पुलिस की कार्रवाई को सरकार की तानाशाही करार देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित अन्याय हो रहा है और समाजवादी पार्टी उनके समर्थन में मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना था कि वह दिल्ली जाकर छात्रों का समर्थन करना चाहते थे और सपा उनके संघर्ष के साथ है। जानकारी के अनुसार, बिल्लू प्रधान के दिल्ली रवाना होने की सूचना मिलने पर पुलिस उनके कार्यालय पहुंची और उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इस कार्रवाई के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई। फिलहाल पुलिस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता समर्थन जता रहे हैं।
फिरोजाबाद शहर में कई जगहों पर 'दिल्ली चलो' और नीट पेपर लीक मामले में प्रदर्शन के समर्थन वाले पोस्टर पाए गए। आर्यनगर, गांधी पार्क और अटल पार्क जैसे क्षेत्रों में इन पोस्टरों के मिलने से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सबसे अधिक चर्चा आर्यनगर में नगर विधायक मनीष असीजा के आवास के पास पोस्टर लगाए जाने को लेकर रही। सूचना मिलते ही सीओ सिटी संतोष कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और सभी पोस्टर हटवा दिए। पुलिस ने तत्काल क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। जांच के लिए कई स्थानों के डीवीआर भी कब्जे में लिए गए हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की, लेकिन पोस्टर लगाने वालों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पोस्टर चस्पा करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने क्षेत्रीय लोगों से अपील की है कि किसी के बहकावे में ना आएं। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने में अपना योगदान दें। असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर-दिल्ली हाईवे पर गुरुवार देर रात अर्द्धनग्न हालत में एक युवक का शव पड़ा मिला। कंधे-कमर का मांस निकले होने के साथ ही वह खून से लथपथ हालत में पड़ा था। पुलिस को कुछ ही दूरी पर बाइक के टूटे पार्ट्स भी बिखरे मिले। दौलतपुरा थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को कांवटिया हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया है। पुलिस मृतक की पहचान के साथ ही हिट एण्ड रन और मर्डर एंगल को लेकर जांच कर रही है। कंधे और कमर का मांस ज्यादा फटा SHO (दौलतपुरा) महेन्द्र सिंह ने बताया- दौलतपुरा में अप्पू घर के पास हाईव व सिविस लाइन के बीच में अर्द्धनग्न हालत में लहूलुहान युवक पड़ा था। रात करीब 2 बजे सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। हाईव पर खून से लथपथ हालत में युवक पड़ा हुआ था। उसके शरीर पर अण्डरगारमेंट के अलावा कुछ नहीं था। कंधे और कमर का मांस बहुत ज्यादा फटा हुआ था। घटनास्थल की जांच करने पर बाइक के टूटे पार्ट्स भी बिखरे हुए मिले।। पुलिस ने तुरंत लहूलुहान हालत में उसे कांवटिया हॉस्पिटल भिजवाया। डॉक्टर्स ने चेक कर उसको मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए शव को मॉर्च्युरी में रखवा दिया। एक्सीडेंट या मर्डर पुुलिस ने FSL टीम की मदद से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि मृतक की उम्र करीब 35 साल है। उसके सीने और हाथ पर टैटू गुदा हुआ है। प्रथमदृष्टया मृतक अच्छे परिवार का होना प्रतीत होता है। कपड़े गायब होने पर मर्डर का शक कपड़े गायब होने व बाइक के टूटे पार्ट्स को लेकर हत्या का शक जताया जा रहा है। किसी वाहन से टक्कर मारकर हत्या को एक्सीडेंट दिखाने का प्रयास किया गया हो। पुलिस मृतक की पहचान के साथ ही जांच में जुट गई है।
छतरपुर में छात्रों ने गुरुवार रात को एक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। यह अभियान नीट पेपर लीक मामले और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में चलाया जा रहा है। शहर के कॉलेज चौराहे पर विभिन्न छात्र संगठनों और युवाओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। अभियान का नेतृत्व कर रहे सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि यह हस्ताक्षर अभियान लगातार जारी रहेगा। जिलेभर के हजारों छात्र-छात्राओं से हस्ताक्षर करवाकर एक मांग पत्र तैयार किया जाएगा, जिसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा। शर्मा ने दिल्ली में अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया। उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। सत्येंद्र शर्मा ने नीट पेपर लीक मामले पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मामले ने लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग की। अभियान के पहले दिन ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कॉलेज चौराहे पर पहुंचकर बैनर पर हस्ताक्षर किए और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया। आयोजकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक छात्र इसमें शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद कर सकें।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व जालंधर से सांसद चरणजीत चन्नी कांग्रेस हाईकमान को बड़ा झटका दे सकते हैं। चन्नी गुट से जुड़े नेताओं के मुताबिक वह जल्द ही 2027 चुनाव की कैंपेन कमेटी के चेयरमैन का पद छोड़ सकते हैं। दिल्ली में 2 दिन हुई हाईकमान की मीटिंग के बाद यह हालात बनते जा रहे हैं। मीटिंग में मौजूद कुछ नेताओं के मुताबिक दिल्ली में केसी वेणुगोपाल की अगवाई में हुई बैठक में चन्नी गुट ने फिर से बागी तेवर अपनाए। चन्नी ने पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल को यहां तक कह दिया कि पंजाब में मौजूदा प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की अगुआई में कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकती। अगर वड़िंग कुर्सी पर बरकरार रहे तो हार या जीत की जिम्मेदारी आपकी होगी। पार्टी सोर्सेज के मुताबिक तल्खी तब ज्यादा बढ़ी जब कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चरणजीत सिंह चन्नी समेत उनके गुट के नेताओं को कहा कि पार्टी ने आपको इतने बड़े पद दिए हैं और आप फिर भी साथ चलने को तैयार नहीं हैं। यह सुनते ही चन्नी ने पलटकर कहा कि अगर ऐसा है तो वह कंपेन कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देते हैं। इस दिल्ली मीटिंग में प्रधान राजा वडिंग पहले चुप रहे लेकिन जब चन्नी गुट ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया तो राजा वडिंग ने कह दिया कि अगर नेताओं को उनसे प्रॉब्लम है तो वो इस्तीफा दे देते हैं। जिस पर केसी वेणुगोपाल ने उन्हें टोक दिया और कहा कि राजा वडिंग को हाईकमान ने प्रधान बनाया है। वही प्रधान रहेंगे। केसी वेणुगोपाल ने सुखजिंदर सिंह रंधावा की भी क्लास लगाई और कहा कि पिछली मीटिंग में जब सब कुछ ठीक हो गया था तो आपने फिर राजा वडिंग के खिलाफ स्टेटमेंट क्यों दी जिस पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी कह दिया कि उन्होंने जो कहा सच कहा। पार्टी सोर्सेज के मुताबिक जब तल्खी ज्यादा हुई तो केसी वेणुगोपाल मीटिंग छोड़कर चले गए। वेणुगोपाल के जाते ही चरणजीत सिंह चन्नी भी मीटिंग से चले गए। चन्नी गुट की नाराजगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनमें से किसी ने भी हाईकमान के साथ हुई बैठक की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं की। पंजाब कांग्रेस की दिल्ली बैठक में क्या-क्या हुआ जानिए.. मीटिंग की फोटो नहीं की चन्नी गुट ने शेयरदिल्ली में मीटिंग खत्म होने के बाद केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, सुखपाल सिंह खैहरा समेत अन्य नेताओं ने दिल्ली में हुई बैठक के फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किए लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा व उनके गुट के नेताओं ने ये फोटो शेयर नहीं किए। सूत्रों के मुताबिक चन्नी गुट ने नाराजगी जताने के लिए इन फोटोज को शेयर नहीं किया है। इससे पहले उन्होंने नियुक्ति को लेकर भी न कुछ पोस्ट किया और न ही हाईकमान का धन्यवाद किया था। जिससे साफ है कि कांग्रेस हाईकमान के साथ चरणजीत सिंह चन्नी गुट की अभी सुलह नहीं हुई है। दिल्ली के प्रदर्शन में पंजाब के सांसदों में रही सुपर दिखने की होड़दिल्ली में केवल बंद कमरे की बैठक ही नहीं, बल्कि सड़कों पर हुए विरोध प्रदर्शनों में भी नेताओं के बीच खुद को हाईकमान का सबसे करीबी दिखाने की होड़ साफ दिखी। जब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेसी सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया, तो पंजाब के नेता भी अग्रिम पंक्ति में दिखे। राजा वडिंग धरना स्थल पर राहुल गांधी के ठीक पास बैठकर नारेबाजी करते दिखे। पुलिस अधिकारियों के साथ बहस के दौरान भी वडिंग राहुल गांधी के साथ साये की तरह डटे रहे और जिस बस में राहुल को हिरासत में लिया गया, वडिंग उसकी छत पर चढ़ गए। दूसरी ओर, हिरासत में लिए जाने पर चरणजीत सिंह चन्नी भी आक्रामक अंदाज में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर बरसे। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि वह राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरी तरह समर्पित हैं और हाईकमान के हर फैसले के साथ खड़े हैं। चन्नी को अलग-थलग नहीं करना चाहता हाईकमानपॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में चन्नी हाशिए पर चल रहे थे और हाईकमान उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौर पर डेरा सचखंड बल्लां के संत निरंजन दास से बार-बार मुलाकात करने से कांग्रेस को अपना दलित वोट बैंक खिसकने का डर बना है। ऐसे में अगर चरणजीत सिंह चन्नी को किनारे कर दिया तो कांग्रेस का यह पारंपरिक वोट बैंक पूरी तरह से डायवर्ट हो जाएगा। इसलिए कांग्रेस हाईकमान चरणजीत सिंह चन्नी को फिर से तवज्जो देने लगी। चन्नी को दिया था यह ऑफर
संभल जिले में शादी के महज ढाई महीने बाद एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। महिला अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दंपती शादी के बाद दिल्ली में रहकर गोलगप्पे बेचते थे और तीन दिन पहले ही गांव लौटे थे। घटना गुन्नौर तहसील के जुनावई थाना क्षेत्र के दुबारी कलां गांव की है। यहां के रहने वाले कुलदीप कुमार की शादी 2 मई को अलीगढ़ जिले के दादों थाना क्षेत्र के अजमानठेर गांव निवासी भगवान दास की 22 वर्षीय बेटी भूरी से हुई थी। परिजनों के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 9 बजे कुलदीप अपनी ननिहाल कपड़ों का थैला लेने गया था। इस दौरान उसने कई बार पत्नी को फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। दोपहर करीब 12 बजे जब वह घर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से झांककर देखा तो भूरी फंदे से लटकी हुई थी। डॉक्टर ने मृत घोषित किया कुलदीप ने तत्काल पत्नी को फंदे से नीचे उतारा और गांव के एक डॉक्टर के पास लेकर पहुंचा, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। शाम तक मृतका के मायके पक्ष के लोग भी गांव पहुंच गए। तीन दिन पहले ही गांव लौटे थे परिजनों ने बताया कि शादी के बाद दोनों दिल्ली में रहकर गोलगप्पे बेचने का काम करते थे। तीन दिन पहले ही वे मनौना धाम और कादराबाद स्थित कालिका देवी मंदिर के दर्शन के लिए गांव आए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार घटना की सूचना पर थाना प्रभारी धीरज सिंह और नायब तहसीलदार उदयवीर सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी ने बताया कि मृतका के गले पर रस्सी के निशान मिले हैं। मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल इस मामले में किसी पक्ष की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है।
गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट क्षेत्र में कानून व्यवस्था को खराब करने की कोशिश का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया अकाउंट पर भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के मामले में साइबर थाने में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। यह एफआईआर सोशल मीडिया के तीन अकाउंट संचालकों के खिलाफ दर्ज की गई है। इस तरह का किया गया पोस्टपुलिस के मुताबिक, 22 जुलाई को सोशल इंस्टाग्राम अकाउंट जंतर-मंतर लाइव 24 सच की बात जेन जेड के नाम से एक भ्रामक वीडियो पोस्टम किया गया। उसके टाइटल में लिखा कि नोएडा में क्या हो रहा है। सेक्टर-63 में 45 हजार से अधिक श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसको लेकर सेक्टर-63 और चिल्ला बॉर्डर पर यातायात प्रभावित हो रहा है, जबकि राज्य सरकार ने मांगों के अनुसार वेतन में वृद्धि कर दी है, लेकिन कुछ समूह अब भी इसे हवा देकर कानून व्यवस्था खराब करने में जुटे हैं। दूसरे पोस्ट में लिखा कि पुलिस ने की अभद्रता वर्तमान में कोई भी आंदोलन नोएडा में नहीं चल रहा है। पुलिस ने इस पोस्ट को फर्जी और भ्रामक बताया है। इसे कानून व्यवस्था खराब करने की कोशिश माना है। वहीं, दूसरी एफआईआर इंस्टाग्राम अकाउंट चर्चा जंक्शन न्यूज और एक्स पर बने ट्रूथफुल क्रिटिकल नामक अकाउंट के खिलाफ के खिलाफ की गई है। एफआईआर में कहा गया है कि दोनों अकाउंट के जरिये एक वीडियो पोस्ट किया गया है। वीडियो पोस्ट करने के बाद टाइटल लिखा है कि कथित वीडियो में पुलिसर्मियों द्वारा आम लोगों के साथ अभद्र और कठोर व्यवहार दिखाया गया है। साथ ही यह भी लिखा गया है कि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। वीडियो कब का है, किस घटना से जुड़ा है और पूरा घटनाक्रम क्या था, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। पुलिस ने माना सुनियोजित साजिश क्या पुलिस की कार्रवाई उचित थी या मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों से टिप्पणी भी करने के लिए कहा। पुलिस ने वीडियो वायरल करने के पीछे सुनियोजित साजिश माना है। ताकि भ्रामक नैरेटिव तैयार कर लोगों को भड़काया जा सके। पुलिस सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
शादी-विवाह का सीजन समाप्त होते ही जौनपुर से महानगरों की ओर लौटने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लंबी दूरी की लगभग सभी ट्रेनों में सीटें पूरी तरह भर चुकी हैं और वेटिंग लिस्ट 100 के पार पहुंच गई है। अगस्त माह में भी टिकट मिलने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। जौनपुर जिले से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए कानपुर, दिल्ली, नोएडा, मुंबई, सूरत और गुजरात जैसे शहरों में काम करते हैं। शादी समारोह में शामिल होने के लिए घर आए लोग अब वापस अपने कार्यस्थलों पर लौटना चाहते हैं, लेकिन ट्रेनों में सीटें उपलब्ध नहीं होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तत्काल टिकट भी नहीं बन रहा सहारा सीटों की कमी के चलते यात्रियों के पास तत्काल टिकट ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालांकि, आरक्षण केंद्रों पर लंबी कतार लगने के बावजूद शुरुआती दो-तीन यात्रियों को ही तत्काल टिकट मिल पा रहा है। अधिकांश यात्रियों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। 15 सितंबर के बाद मिल सकती है राहत बक्शा निवासी दिनेश सिंह और बदलापुर निवासी भोलानाथ यादव ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि अगस्त में मुंबई जाने वाली ट्रेनों में टिकट आसानी से मिल जाएगा, लेकिन अब भी सभी ट्रेनें फुल चल रही हैं। वहीं, जौनपुर के आरक्षण प्रभारी सुनील मिश्रा ने बताया कि लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में सीटें पूरी तरह बुक हैं। उनके अनुसार, 15 सितंबर के बाद ही कुछ ट्रेनों में सीटें उपलब्ध होने की संभावना है।

