आईपीएल (IPL 2026) में इस बार डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के होम ग्राउंड चिन्नास्वामी स्टेडियम को कोई भी प्लेऑफ मुकाबला नहीं मिला है। इसी बीच अब BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने बताया है कि आखिर क्यों अहमदाबाद को फाइनल की मेजबानी दी गई। IPL 2026 के प्लेऑफ और फाइनल मुकाबलों के वेन्यू को लेकर काफी चर्चा हो रही है। खासकर इस बात ने फैंस को हैरान किया कि डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के होम ग्राउंड एम चिन्नास्वामी स्टेडियम को एक भी प्लेऑफ मुकाबले की मेजबानी नहीं मिली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस बार प्लेऑफ मुकाबलों के लिए धर्मशाला, न्यू चंडीगढ़ और अहमदाबाद को चुना है, जबकि नरेंद्र मोदी स्टेडियम को फाइनल की मेजबानी सौंपी गई है।आमतौर पर IPL में डिफेंडिंग चैंपियन टीम के होम ग्राउंड को कम से कम एक प्लेऑफ मुकाबला जरूर मिलता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि RCB को भी यह फायदा मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने इस फैसले के पीछे की बड़ी वजह बताई है। उन्होंने गुरुवार (7 मई) को मीडिया से बातचीत में कहा कि नियमों के मुताबिक, सभी स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन को कुल क्षमता के केवल 15% टिकट कॉम्प्लीमेंट्री मिलते हैं। लेकिन उन्हें अलग-अलग स्रोतों से जानकारी मिली कि कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) इससे कहीं ज़्यादा टिकट ले रहा है। उन्होंने 1 मई को KSCA ईमेल करके इस बारे में जानकारी माँगी और साफ कर दिया कि वे 15% से ज़्यादा टिकट नहीं ले सकते और बाकी सभी टिकट आम जनता के लिए ऑनलाइन बेचे जाएँगे, जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी है। उनका कहना है कि KSCA 2 मई को ईमेल का जवाब देते हुए 15% से ऊपर 10,000 टिकटों की और माँग कर रहा था, जिसमें विधायकों, विधान पार्षदों और सरकार के लिए टिकट शामिल थे। BCCI इन माँगों को मानने के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि इससे बहुत कम टिकट आम जनता के लिए बचते। Guwahati, Assam: BCCI Secretary Devajit Saikia says, The normal protocol, all state hosting associations get 15% of the total capacity for them as complimentary tickets. But we have come to know from various sources that during the hosting of the IPL league matches, Karnataka… pic.twitter.com/tA8MTERFQo IANS (ians_india) May 7, 2026 Also Read: LIVE Cricket Score यही वजह रही कि BCCI ने आखिरकार नरेंद्र मोदी स्टेडियम को फाइनल के लिए चुना, जहां दर्शकों की क्षमता काफी ज्यादा है और टिकट वितरण भी बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल, असम और पुदुचेरी में जीत के बाद नवादा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। जिला अध्यक्ष अनिल मेहता के नेतृत्व में शहर के प्रजातंत्र चौक पर मिठाइयां बांटी गईं और पटाखे फोड़े गए। यह आयोजन पार्टी की चुनावी सफलताओं का जश्न मनाने के लिए किया गया था। जश्न के दौरान कार्यकर्ताओं ने जय श्री राम, भारत माता की जय, वंदे मातरम् और जहाँ लिए अवतार मुखर्जी, वो बंगाल अब हमारा है जैसे नारे लगाए। यह उत्साह पार्टी की जीत के प्रति उनके समर्थन को दर्शाता था।जिलाध्यक्ष अनिल मेहता ने इस जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व, जनकल्याणकारी नीतियों और कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत का परिणाम बताया। प्रभावी मार्गदर्शन तथा कुशल चुनावी प्रबंधन उन्होंने कहा कि देश की जनता का विश्वास भाजपा के प्रति लगातार बढ़ रहा है, जो इन चुनावी परिणामों में परिलक्षित होता है। मेहता ने जीत का श्रेय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रभावी मार्गदर्शन तथा कुशल चुनावी प्रबंधन को भी दिया। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी और कहा कि यह जीत संगठन की एकजुटता, समर्पण और व्यापक जनसमर्थन का प्रतीक है।इस अवसर पर निर्वतमान जिलाध्यक्ष संजय कुमार मुन्ना, पूर्व जिलाध्यक्ष शशिभूषण बब्लु, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रमोद चून्नू, प्रताप रंजन, महामंत्री अरविन्द गुप्ता सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद थे।
30 अप्रैल 2026 की दोपहर, ढाका के बरिधारा डिप्लोमैटिक जोन में हलचल थी। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बधे को तलब किया। कूटनीति की भाषा में ‘तलब’ एक सीधा और सख्त संदेश होता है। वजह था एक बयान- ‘मैं हर सुबह भगवान से प्रार्थना करता हूं कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में और सुधार न हो, ताकि अवैध प्रवासियों को सुविधाजनक जगहों पर ले जाकर रात के अंधेरे में सीमा पार धकेलना जारी रहे।’ यह बयान असम के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का था। मौका असम के विधानसभा चुनाव, जहां हिंदू-मुसलमान और अवैध घुसपैठ बड़ा चुनावी मुद्दा है। मौजूदा बीजेपी में हिमंता का रुख कई बार कट्टर बीजेपी कार्यकर्ताओं से भी सख्त होता है। लेकिन वे हमेशा ऐसे नहीं थे। 2015 में भाजपा में आने से पहले वे असम की कांग्रेस सरकार में मंत्री थे और हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई की राजनीति करते थे। उस दौर में हिमंता नरेंद्र मोदी के कट्टर आलोचक माने जाते थे। 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार में उन्होंने मोदी पर हमला करते हुए कहा था कि ‘गुजरात में पानी के पाइपों से मुसलमानों का खून बहता है।’ हिमंता की राजनीति हालात और मौके दोनों से बदलती रही है, लेकिन चुनाव में कामयाबी इनकी मुख्य ताकत है। 2026 का चुनाव भी उन्होंने पहले से ज्यादा सीटों से जीता है। यह कहानी उन्हीं हिमंता की है, जो हर बार पाला बदलकर ताकतवर होते गए… 1 फरवरी 1969, असम का जोरहाट। एक शिक्षित ब्राह्मण परिवार में हिमंता का जन्म हुआ। उनके पिता कैलाश नाथ शर्मा जाने-माने लेखक और गीतकार थे। मां मृणालिनी देवी लेखिका थीं, जो आगे चलकर असम साहित्य सभा की उपाध्यक्ष बनीं। दिलचस्प विरोधाभास यह है कि ‘बाहरी बनाम असमिया’ की राजनीति करने वाले हिमंता के पूर्वज खुद उत्तर प्रदेश के कन्नौज से जाकर असम में बसे थे। एक अर्थ में, वे भी कभी 'बाहरी’ थे। शब्दों की विरासत घर से मिली। 10 साल की उम्र तक आते-आते भाषण देने की कला उनकी पहचान बन चुकी थी। कक्षा 5 में ही वे असमिया वक्ता के रूप में मशहूर हो गए थे। अक्सर अपने पिता के लिखे भाषण पढ़ते, लेकिन उसमें जान खुद भरते। कामरूप एकेडमी स्कूल की कक्षा 6 में वे AASU से जुड़ गए थे। इसी समय असम में भाषा और पहचान को लेकर आंदोलन तेज हो रहे थे। इसी दौरान वे AASU के उभरते नेताओं प्रफुल्ल कुमार महंत और भृगु कुमार फूकन के संपर्क में आए। 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों आए। इनसे असम की अस्मिता, संस्कृति और जनसंख्या संतुलन जैसे मुद्दे जोर पकड़ने लगे। अप्रैल 1979 में असम के शिवसागर जिले में कुछ छात्रों ने एक हथियारबंद संगठन बनाया- यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम यानी ULFA। असम एक उबलते हुए बर्तन की तरह था और हिमंता इसी उबाल के बीच पल-बढ़ रहे थे। 1985 असम के इतिहास का एक निर्णायक साल था। AASU और ऑल असम गण संग्राम परिषद के नेतृत्व में बाहरियों के खिलाफ आंदोलन अपने चरम पर था। आंदोलनकारियों ने हाईवे बंद कर दिए। तेल की सप्लाई रुक गई, स्कूल-कॉलेज बंद हो गए और सरकारी कामकाज ठप पड़ गया। इससे भी पहले 1983 में नेल्ली नरसंहार हो चुका था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उसमें 2,000 से ज्यादा लोग मारे गए। गैर-सरकारी अनुमान 5,000 तक जाते हैं। इस खून-खराबे की चर्चा दुनियाभर में थी। राजीव गांधी इस चैप्टर को बंद करना चाहते थे। समझौते के दो महीने बाद AASU के नेताओं ने असम गण परिषद (AGP) बनाई। दिसंबर 1985 के चुनाव में AGP को बहुमत मिला और महज 32-33 साल की उम्र में प्रफुल्ल कुमार महंत किसी राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। और 16 साल का हिमंता? वह भी उस इतिहास के बनने की प्रक्रिया में थे। उसी साल उन्होंने गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज में दाखिला लिया। ये पूर्वोत्तर की राजनीति का असली पावर सेंटर था। अब तक असम के 7 मुख्यमंत्री इसी कॉलेज से निकले हैं। सीएम प्रफुल्ल महंत के करीबी होने के चलते उन्हें मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय तक सीधी पहुंच मिली। कम उम्र में ही उन्होंने देख लिया कि फाइलें कैसे चलती हैं, पुलिस-प्रशासन को कैसे साधा जाता है। कॉटन कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में 1988 से 1992 तक लगातार तीन बार महासचिव चुने गए थे। ये एक रिकॉर्ड है। इस बीच 1990 में हालात बदलने लगे। ULFA ने असम में आतंक फैला दिया था। प्रफुल्ल सरकार बेबस दिखने लगी। केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लगाया। उस साल AGP चुनाव हार गई और हिमंता की जिंदगी में आया एक बड़ा तूफान। 1990 में असम पुलिस ने उनके हॉस्टल पर छापा मारा। किचन के पीछे से एक रिवॉल्वर और 25 कारतूस बरामद हुए। आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज हुआ। 1991 में उन पर ULFA से जुड़े होने के आरोप लगे। कहा गया कि वे व्यापारियों से वसूली कर रहे थे। जनवरी और मार्च 1991 में दो अलग-अलग थानों में आतंक विरोधी कानून TADA के तहत मामले दर्ज हुए। इसी दौरान कांग्रेस नेता मानवेंद्र शर्मा की हत्या हुई और इस केस में भी हिमंता का नाम आया। मार्च 1991 में उन्हें गिरफ्तार किया गया, 15 दिन पुलिस हिरासत में रहे। 22 साल की उम्र में हिमंता समझ चुके थे कि केंद्र के समर्थन के बिना असम की राजनीति में लंबा सफर संभव नहीं है। इन संकटों में फंसे हिमंता ने एक चतुर कदम उठाया। उन्होंने AASU छोड़ा और तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया की शरण में चले गए। सैकिया उनके जमीनी नेटवर्क से प्रभावित थे। 1993 में हिमंता आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गए। 1996 तक उनसे जुड़े TADA मामलों की केस डायरी और रिकॉर्ड पुलिस स्टेशनों से रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। 1996 में हिमंता ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। सैकिया ने उन्हें जालुकबारी सीट से उतारा, जो AASU के बड़े नेता भृगु कुमार फुकन की सीट थी। रणनीति थी कि आंदोलन से निकला नया चेहरा, उसी आंदोलन के पुराने चेहरे को हरा दे। लेकिन हिमंता खुद हार गए। इस बीच सैकिया का भी निधन हो गया। एक झटके में वे उस नेता से वंचित हो गए, जिन्होंने उन्हें संरक्षण दिया था। निराशा इतनी गहरी थी कि हिमंता ने असम छोड़ने का मन बना लिया। दिल्ली जाकर सुप्रीम कोर्ट में वकालत करना चाहते थे। लेकिन तभी पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने उन्हें रोका। अजीत दत्त की किताब, हिमंता बिस्वा सरमा- फ्रॉम बॉय वंडर टू सीएम, के अनुसार राव ने कहा- ‘जब कोई विधायक अपने क्षेत्र में जाता है तो लोग ध्यान नहीं देते। लेकिन जब हारने वाला उम्मीदवार बार-बार लौटकर लोगों की मदद करता है, तो लोग उसे याद रखते हैं।’ हिमंता जालुकबारी वापस लौटे। सड़क, राशन, कागजी अड़चनों जैसी लोगों की छोटी-बड़ी समस्याएं सुलझाते रहे। जमीन से जुड़े रहे। इसी दौरान उन्होंने तरुण गोगोई के साथ गठबंधन को मजबूत किया, जो दिल्ली के 10 जनपथ के करीबी थे। गोगोई को ऐसे साथी की जरूरत थी, जो मैदान में उतरकर आक्रामक राजनीति कर सके। हिमंता बिल्कुल वैसे ही थे। उन्होंने अपने पुराने AASU नेटवर्क के जरिए यह पता लगाया कि प्रफुल्ल सरकार के दौर में हुई ‘गुप्त हत्याओं’ के पीछे ULFA के पुराने मेंबर्स के संगठन SULFA और राज्य पुलिस के कुछ अफसरों का हाथ था, जिन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय का मौन समर्थन था। गोगोई ने इसे अपना चुनावी हथियार बना लिया। हर सभा में एक ही जुमला गूंजता था- ‘असम की माताओं और बहनों, रात को आपके दरवाजे पर जो नकाबपोश दस्तक देते हैं, उन्हें सचिवालय से आशीर्वाद मिला हुआ है।’ इस एक लाइन ने माहौल बदल दिया। सीएम प्रफुल्ल की छवि खराब होती गई और 2001 में कांग्रेस सत्ता में लौटी। हिमंता ने जालुकबारी से भृगु कुमार फुकन को 10 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर 1996 की हार का बदला ले लिया। धीरे-धीरे हिमंता, तरुण गोगोई के परिवार जैसे हो गए। गोगोई की पत्नी डॉली गोगोई का भरोसा जीतना उनकी बड़ी सफलता थी। जब भी गोगोई गुवाहाटी आते, हिमंता सबसे पहले एयरपोर्ट पहुंचते। राज्य की हर छोटी-बड़ी राजनीतिक जानकारी उन्हीं के जरिए गोगोई तक पहुंचती। 2002 में गोगोई सरकार के विस्तार में हिमंता राज्य मंत्री बने। कृषि, योजना, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा- एक के बाद एक बड़े विभाग उनके पास आते गए। धीरे-धीरे सरकार के ज्यादातर फैसले और विधायकों को संभालने का काम भी हिमंता देखने लगे। उन्हें असम का ‘सुपर सीएम’ कहा जाने लगा। 2011 के चुनाव में कांग्रेस ने 126 में से 78 सीटें जीतीं। पार्टी के अंदर सबको पता था- इस जीत के असली आर्किटेक्ट हिमंता थे। लेकिन गोगोई ने अपने बेटे गौरव गोगोई को आगे बढ़ाना शुरू किया। हिमंता को लगने लगा- वे उत्तराधिकारी नहीं, प्रतिद्वंद्वी समझे जा रहे हैं। फिर एक पल आया जिसने रिश्ते को लगभग खत्म कर दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने हिमंता की भूमिका पर सवाल किया, तो गोगोई ने हल्की मुस्कान के साथ कहा- हिमंता बिस्वा सरमा कौन है? आखिरकार वो मेरे एक मंत्री ही तो हैं। हिमंता को साफ हो गया कि गोगोई के रहते मुख्यमंत्री बनना असंभव है। 2012 में तनाव और बढ़ा। असम कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में गोगोई के उम्मीदवार हारे, हिमंता समर्थित जीत गए। हिमंता ने गुवाहाटी के एक होटल में 50 से ज्यादा कांग्रेस विधायकों को इकट्ठा कर ताकत दिखाई। दिल्ली को संदेश था कि गोगोई का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है। जब पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे आए, हिमंता ने गुप्त मतदान की मांग रखी। लेकिन अंत में सोनिया गांधी ने यथास्थिति बनाए रखी। 2014 में हिमंता अपनी शिकायत लेकर राहुल गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे। लेकिन यह मुलाकात एक और झटका बन गई। हिमंता के मुताबिक, बातचीत के दौरान राहुल गांधी का ध्यान अपने पालतू कुत्ते ‘पिडी’ को बिस्कुट खिलाने में था। लेखक अजीत दत्ता अपनी किताब हिमंता बिस्वा सरमा- फ्रॉम बॉय वंडर टू सीएम में हिमंता के हवाले से लिखते हैं कि यहीं से रिश्तों में दरार शुरू हुई। जब हिमंता ने बताया की इस आपसी लड़ाई से कांग्रेस कमजोर हो सकती है और विपक्ष जीत सकता है, तो जवाब मिला- तो क्या हुआ? यह आखिरी संकेत था। अप्रैल 2013 में पश्चिम बंगाल में शारदा समूह का चिटफंड घोटाला सामने आया। लाखों गरीब निवेशकों के पैसे डूब गए। शारदा के मालिक सुदीप्त सेन के साथ हिमंता के संबंधों के आरोप लगे। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद अगस्त 2014 में CBI ने उनके घर और न्यूज चैनल ‘न्यूज लाइव’ पर छापेमारी की। जुलाई 2015 में एक और मामला सामने आया। अमेरिकी कंपनी लुई बर्जर पर आरोप था कि उसने असम में जल आपूर्ति परियोजनाओं के ठेके लेने के लिए मंत्रियों को रिश्वत दी। हिमंता 2010-11 में गुवाहाटी विकास विभाग के मंत्री थे। गोगोई इन फाइलों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहे थे।हिमंता को अहसास हो गया कि कांग्रेस में रहे तो ये फाइलें कभी भी जेल तक ले जा सकती हैं। कैरावैन रिपोर्ट में दर्हैंज है कि जब हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस छोड़ना चाहते थे, तब वे बीजेपी के संगठन मंत्री राम माधव से मिले। राम माधव ने ही उन्हें बीजेपी में लाने का खाका खींचा। 21 जुलाई 2015 को जब दिल्ली में असम बीजेपी के नेता सर्बानंद सोनोवाल और किरेन रिजिजू प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमंता की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। उसी समय पर्दे के पीछे शाह से मुलाकात तय हो रही थी। 2016 में छपी कैरावैन की रिपोर्ट में छपा कि अमित शाह नें इस प्रेस वार्ता के बाद असम के बीजेपी अध्यक्ष सिद्धार्थ भट्टाचार्य से कहा- ‘ये तो गलती हुआ। फिर जो गलती हुआ तो उसको सुधारना है।‘ ‘हिमंता बिस्वा सरमा- फ्रॉम बॉय वंडर टू सीएम‘ किताब में अजीत दत्ता लिखते हैं कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और असम के प्रभारी दिग्विजय सिंह से जब हिमंता ने तकलीफ साझा की तो उन्होंने भाजपा जॉइन करने की सलाह दी। दिग्विजय का तर्क था कि इधर कांग्रेस में कुछ नहीं होने वाला है। बीजेपी का नेतृत्व गंभीर है। वही पार्टी तुम्हारे लिए बेहतर रहेगी। 23 अगस्त 2015 को दिल्ली में हिमंता ने अमित शाह से मुलाकात की। और आखिरकार हिमंता कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। हिमंता के आने के बाद भाजपा ने असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के साथ गठबंधन किया। वे इन दलों के नेताओं की नब्ज जानते थे। उन्होंने भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को ‘असमिया अस्मिता’ के साथ जोड़ा और चुनाव को नैरेटिव दिया- ‘35 बनाम 65’ यानी मुस्लिम-हिंदू और ‘स्थानीय बनाम घुसपैठिए’। अपने न्यूज चैनल की मदद से पूरे अभियान को एक इवेंट की तरह चलाया। इमका रैलियां और बयान 24 घंटे दिखती थीं। कई बार तो खुद मुख्यमंत्री उम्मीदवार सोनोवाल से भी ज्यादा। नतीजे आए और भाजपा गठबंधन को 86 सीटें मिलीं। विश्लेषकों का मानना था कि हिमंता के बिना यह आंकड़ा 40-45 पर ठहर जाता। सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। दिल्ली के गलियारों में एक लाइन बार-बार सुनाई देती- चेहरा सोनोवाल का है, दिमाग हिमंता का। कॉटन कॉलेज के दिनों का एक चर्चित किस्सा है। हिमंता की गर्लफ्रेंड रिनिकी भुइयां ने उनसे पूछा था- मैं अपनी मां को तुम्हारे बारे में क्या बताऊं?’ हिमंता ने बिना झिझक जवाब दिया था- मां से कह देना, तुम असम के होने वाले मुख्यमंत्री से शादी करने जा रही हो।’ उस वक्त यह दंभ लगता था। 2021 में यह भविष्यवाणी सच होने वाली थी। 2021 में बीजेपी की दोबारा जीत हुई। लेकिन 2 मई से 9 मई तक यानी ७ दिन असम का अगला मुख्यमंत्री तय नहीं हो पाया। भाजपा के इतिहास में यह दुर्लभ था कि जीतकर आए मौजूदा मुख्यमंत्री को बदलने की बात इतनी खुलकर हो। दिल्ली में तब के बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर बैठकें हुईं। अमित शाह ने दोनों नेताओं से अलग-अलग बात की। हिमंता ने कहा- मैंने 20 साल इस दिन के लिए काम किया है। शाह ने सोनोवाल को समझाया। केंद्र में भूमिका के आश्वासन के बाद वे पीछे हट गए। विधायक दल की बैठक में खुद सोनोवाल ने हिमंता के नाम का प्रस्ताव रखा। 10 मई 2021 को शपथ ग्रहण हुआ। शपथ के बाद पत्नी रिनिकी भावुक हो गईं और बोलीं कि कॉटन कॉलेज में किया गया वादा आज पूरा हुआ। मुख्यमंत्री बनते ही हिमंता ने आक्रामक प्रशासक की छवि बनाई। दशकों से चल रहे उग्रवाद को कमजोर किया। दिसंबर 2023 में ULFA के शांति गुट के साथ समझौता एक ऐतिहासिक मोड़ माना गया। असम-मेघालय और असम-अरुणाचल सीमा विवादों को सुलझाने की दिशा में समझौते हुए। सरकारी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदला गया। कानून-व्यवस्था पर सख्ती के साथ ड्रग्स के खिलाफ बड़े अभियान चले। औद्योगिक मोर्चे पर 2024-25 में जागीरोड में टाटा समूह के 27 हजार करोड़ रुपए के सेमीकंडक्टर प्लांट की आधारशिला रखी गई। ‘ओरुनोदोई योजना’ के जरिए लाखों महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे पहुंचे। माइक्रो फाइनेंस कर्ज माफी ने ग्रामीण इलाकों में बड़ा असर डाला। हिमंता ने 2026 का चुनाव भी जीत लिया है और लगातार दूसरी बार सीएम बनने की तैयारी कर रहे हैं। ******References and Further Readings: ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में BJP की सरकार बनती क्यों दिख रही:मछली का भोज, शाह की नई स्ट्रैटजी और SIR; BJP के 5 बड़े दांव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद हुए ज्यादातर एग्जिट पोल में BJP की सरकार बनती दिख रही है। 7 में से 5 बड़ी एजेंसियों के सर्वे बीजेपी को बहुमत से ज्यादा सीटें दे रहे हैं। नतीजे 4 मई को आएंगे। पढ़ें पूरी खबर…
कांग्रेस ने असम के फैसले को स्वीकार किया, जनता के मुद्दों को उठाना जारी रहेगा: गौरव गोगोई
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि पार्टी हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में जनता के जनादेश का सम्मान करती है और विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह राज्य के विकास के लिए काम करना जारी रखेगी।
अमित शाह चुनेंगे बंगाल का सीएम, असम में भाजपा ने जेपी नड्डा को सौंपी जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल में अमित शाह को पर्यवेक्षक बनाया गया है। इसके अलावा मोहन चरण माझी को शह पर्यवेक्षक की भूमिका सौंपी गई है। यह दोनों बंगाल में विधायक दल के नेता का चयन करेंगे। वहीं, असम में जेपी नड्डा को नियुक्त किया है।
बंगाल और असम में सरकार गठन की तैयारी: अमित शाह और जेपी नड्डा बने भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली प्रचंड जीत के बाद अब प्रदेश में नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में अब भाजपा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल में केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
बंगाल और असम में भाजपा की प्रचंड जीत को राहुल गांधी ने जनादेश की चोरी करार दिया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत को जनादेश की चोरी बताया है और लोकतंत्र पर बड़ा खतरा बताया है।
बंगाल और असम में जनादेश की चोरी, TMC की हार पर खुश हो रहे कांग्रेसियों को भी राहुल ने लताड़ा
Rahul Gandhi Bengal Election: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार पर निराशा व्यक्त करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा बंगाल और असम में जनादेश की चोरी हुई है। उन्होंने ममता बनर्जी की हार से खुश हो रहे कांग्रेसियों समेत अन्य लोगों को भी ...
आरा-सासाराम रूट पर ट्रेन की चपेट में आने से असम के एक युवक की मौत हो गई। कमर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया है। मृतक हजरत बिलाल चिरंगा जिले के पनवारी इलाके का रहने वाला था। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। घटना उदवंतनगर थाना क्षेत्र के तिनडारा पुल के पास की है। मृतक के ममेरे भाई अमीनुल इस्लाम ने बताया कि दो दोस्तों के साथ काम करने के लिए दिल्ली जा रहा था। रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। पुलिस से परिवार के लोगों को हादसे की जानकारी मिली। जिसके बाद हमलोग यहां पहुंचे। सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। एक साल पहले शादी हुई थी हजरत बिलाल चार भाई-बहन में सबसे बड़ा था। एक साल पहले लव मैरिज हुई थी। किसी कारण से उसकी पत्नी छोड़कर चली गई है। परिवार में मां बिहीना खातून, बहन हमीदा खातून, फातिमा खातून और भाई मनीरूल इस्लाम है। मां और परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पश्चिम बंगाल, असम व पुडुचेरी चुनावों में भाजपा की जीत पर कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर मिठाई बांटी
भास्कर न्यूज | बाड़मेर पश्चिम बंगाल, असम व पुडुचेरी चुनावों में भाजपा की जीत पर बाड़मेर में कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़ मिठाई बांटी। भाजपा जिला प्रवक्ता अरविंद शारदा ने बताया कि परिणाम आते ही सोमवार शाम करीब 6:30 बजे अहिंसा सर्किल पर समर्थक जुटे। असम व पश्चिम बंगाल में भी सरकार बनने की खुशी बधाई दी। जश्न में भाजपा जिलाध्यक्ष अनंतराम बिश्नोई, विधायक आदूराम मेघवाल, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दिलीप पालीवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह खारा, जिला उपाध्यक्ष रमेशसिंह इन्दा, जिला महामंत्री देवीलाल कुमावत मौजूद रहे। अनंतराम बिश्नोई ने कहा कि बंगाल में कुशासन का अंत हुआ। विधायक आदूराम मेघवाल ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। दिलीप पालीवाल व स्वरूपसिंह खारा ने कहा कि बंगाल की जनता ने नरेंद्र मोदी पर विश्वास किया।
पश्चिम बंगाल में पहली बार तो असम में तीसरी बार बनेगी भाजपा की सरकार: शहजाद पूनावाला
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पांच राज्यों में से तीन राज्यों में मिली भाजपा की जीत पर खुशी जताई।
मंत्री प्रवेश वर्मा ने बंगाल और असम में भाजपा की जीत पर जताई खुशी, जलेबी और झालमुड़ी बांटी
पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की जीत पर दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा के आवास के बाहर जलेबी बनी। प्रवेश वर्मा खुद जलेबी छानते हुए नजर आए। इसके साथ ही उन्होंने झालमुड़ी और जलेबी बांटकर खुशी का इजहार किया।
भारत में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है
जहानाबाद में सोमवार को पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत पर कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। भाजपा जिलाध्यक्ष धीरज कुमार के नेतृत्व में स्थानीय अरवल मोड़ पर पटाखे फोड़े गए और मिठाइयां बांटी गईं। जिला महामंत्री अमरेन्द्र कुमार ने बताया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता अरवल मोड़ पर एकत्र हुए। उन्होंने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी और उत्साहपूर्ण माहौल बनाया। जिलाध्यक्ष धीरज कुमार ने इस जीत को बंगाल की जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जनता ने विकास और सुशासन की राजनीति पर भरोसा जताया है। इस अवसर पर जिला महामंत्री अमरेन्द्र कुमार, जिला उपाध्यक्ष जय प्रकाश केसरी, कृष्णा गुप्ता, मुन्नी चन्द्रवंशी, कृष्णकांत कुमार, जिला मंत्री मनोज पासवान, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष पूनम कुमारी, जिला कोषाध्यक्ष महेन्द्र कुमार, जिला प्रवक्ता विनोद पाठक, चिकित्सा मंच के जिलाध्यक्ष डॉ. अमरेन्द्र कुमार, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष गौरव कुमार, जिला महामंत्री मुकेश कुमार, मंडल अध्यक्ष रिजु साव, पूर्व जिला उपाध्यक्ष सुनीता कुमारी, रेणु देवी, धर्मेन्द्र पांडेय, संजय बाबा और दीपक गुप्ता सहित सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बरनाला में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल और असम में मिली चुनावी सफलता का जश्न मनाया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने लड्डू बांटकर खुशी जाहिर की। कार्यक्रम में पंजाब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय सांपला, जिला अध्यक्ष यादविंदर शंटी, महासचिव नरेंद्र गर्ग नीटा और एससी मोर्चा के अध्यक्ष धर्म सिंह फौजी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। भाजपा पर जनता ने जताया भरोसा इस मौके पर केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि यह जीत भाजपा की जन-हितैषी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में जनता के विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावी नतीजे दर्शाते हैं कि देश की जनता विकास, सुशासन और एक स्थिर सरकार को प्राथमिकता देती है। ढिल्लों ने आगे कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। उन्होंने इसका श्रेय भाजपा की विकासवादी नीतियों को दिया, जो इन राज्यों को सही दिशा प्रदान कर रही हैं। केवल ढिल्लों ने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम के बाद अब पंजाब की बारी है। मान सरकार पर साधा निशाना केवल सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि राज्य मौजूदा सरकारों की गलत नीतियों के कारण नशे, गैंगस्टरवाद, अपराध और आर्थिक संकट जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। ढिल्लों ने दावा किया कि इन सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत से उतरेगी और राज्य में सरकार बनाएगी। कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया और उन्होंने जीत के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
बालाघाट में बंगाल और असम में जीत का जश्न:भाजपा कार्यकर्ताओं ने की आतिशबाजी, एक-दूसरे को खिलाई मिठाई
बालाघाट में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत का जश्न मनाया। इस अवसर पर पार्टी कार्यालय के सामने आतिशबाजी की गई और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया गया। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए थे। इन परिणामों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा पश्चिम बंगाल और असम दोनों राज्यों में बहुमत के साथ सरकार बना रही है। भाजपा अध्यक्ष रामकिशोर कावरे ने इस जीत पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा सरकार बना रही है। उन्होंने बताया कि गरीब लोगों के उत्थान के भाव को लेकर काम कर रही भाजपा को पश्चिम बंगाल की जनता ने स्वीकार किया है। कावरे ने विश्वास व्यक्त किया कि इसके बाद अब अनेक राज्यों में भाजपा की सरकार बनेगी। अध्यक्ष ने आगे कहा कि भाजपा ने अपनी योजनाओं के साथ किसान और गरीब के लिए जो कार्य किया है, यह उसकी जीत है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने 'जान पर खेलने जैसी' परिस्थितियों में काम करके भाजपा को सरकार बनाने तक पहुंचाया। तस्वीरें देखिए…
डूंगरपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत का जश्न मनाया। यह जश्न प्रभारी मंत्री बाबूलाल खराड़ी की मौजूदगी में शहर के तहसील चौराहे पर आयोजित किया गया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया। शहर के साथ-साथ जिले के अन्य क्षेत्रों में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने जीत का उत्साह मनाया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि बंगाल में अहंकारी, अत्याचारी और निरंकुश शासन का अंत हो गया है। खराड़ी ने इस जीत को पूरे देश में खुशी का माहौल पैदा करने वाली और जनता के विश्वास की जीत बताया।
बंगाल में बीजेपी की जीत के अलावा इस समय लोगों के मन में तीन बड़े सवाल हैं। असम में तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनती क्यों दिख रही है, तमिलनाडु में सुपरस्टार विजय ने पहले ही चुनाव में इतना बड़ा करिश्मा कैसे कर दिखाया और चारों राज्यों में हार रही कांग्रेस केरलम में कैसे जीती? इन तीनों सवालों के जवाब और नतीजों का असर; जानेंगे इलेक्शन एक्सप्लेनर में… असम में बीजेपी 95 सीटों पर जीतती दिख रही है। लेटेस्ट टैली ये रही- असम में BJP की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. परिसीमन के बाद 36% मुस्लिम बहुल सीटें घटीं 2. कांग्रेस और AIUDF के मुस्लिम वोट बंटे, बीजेपी को फायदा 3. हिमंता बिस्व सरमा की पॉपुलैरिटी और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण 4. कांग्रेस के सीनियर नेता बीजेपी में आए असम नतीजों का क्या असर होगा? पूरे नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की पकड़ मजबूत होगी: हिमंता पहले ही अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय में BJP के विस्तार का काम कर चुके हैं। मेघालय, नागालैंड और सिक्किम में बीजेपी सहयोगी पार्टी है, जबकि मिजोरम में अभी एक छोटी पार्टी है। तीसरी बार असम जीतने का मतलब होगा कि नॉर्थ ईस्ट में उनका 'हिंदुत्व मॉडल' स्थापित हो रहा है। हिमंता की राष्ट्रीय छवि चमकेगी: हिमंता बिस्वा सरमा का कद बढ़ेगा। अभी तक उन्हें नॉर्थ-ईस्ट की ही जिम्मेदारियां और अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार का काम दिया गया है। इस जीत के बाद केंद्र में भी उनकी भूमिका बढ़ सकती है। नॉर्थ ईस्ट में कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट: कांग्रेस के सीनियर नेता लगातार बीजेपी में जा रहे हैं। इससे ग्राउंड कैडर और कार्यकर्ताओं में मोटिवेशन कम हो रहा है। ऐसे में नॉर्थ-ईस्ट में फिर से पार्टी को रिवाइव करना मुश्किल होगा। तमिलनाडु में TVK 105 सीटों पर जीतती दिख रही है। मौजूदा टैली ये रही- तमिलनाडु में TVK की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. फिल्म करियर के पीक पर रहते हुए राजनीति में एंट्री 2. युवा और महिला वोटरों को साधने में सफल हुए विजय 3. DMK के गढ़ में सेंधमारी की, वोट काटे 4. पारंपरिक पार्टियों से ऊबे वोटर्स के लिए तीसरा विकल्प बनकर उभरे तमिलनाडु नतीजों का क्या असर होगा? केरलम में कांग्रेस की अगुआई वाली UDF 60 सीटों पर जीतती दिख रही है। मौजूदा टैली ये रही- केरलम में UDF की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. LDF की 10 साल की एंटी-इनकम्बेंसी 2. मुस्लिम और ईसाई वोटों का एकजुट होना 3. LDF विवादों में घिरी 4. BJP ने हिंदू और ईसाई वोट काटे केरलम नतीजों का क्या असर होगा? देश में एक भी लेफ्ट नेतृत्व की सरकार नहीं रहेगी: पूरे देश में केरलम इकलौता राज्य है जहां लेफ्ट सत्ता में है। LDF की हार से देश में वामपंथ के अस्तित्व पर खतरा होगा। बीजेपी के लिए स्कोप बनेगा: इस चुनाव में बीजेपी बड़ा नंबर नहीं ला पाई, लेकिन उसने वोट काटने का काम किया है। बीजेपी ने हिंदुओं और ईसाइयों को साधकर लेफ्ट और UDF दोनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। लेफ्ट के कमजोर होने से बीजेपी को यहां पैर जमाने का मौका मिलेगा। दक्षिण में कांग्रेस मजबूत होगी: दक्षिण भारत में अभी कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस सरकार है। अब केरलम में भी जीत के साथ दक्षिण में कांग्रेस और मजबूत होगी।------------------- ग्राउंट इनपुट्स ------------------ ये खबर भी पढ़ें… गढ़ में 55% सीटें हार रहीं ममता, क्या मुसलमान छिटके:बीजेपी ने सिर्फ 7% वोट से 117 सीटें कैसे बढ़ाईं; बंगाल नतीजों के 5 फैक्टर्स पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार होगी। दोपहर 1 बजे तक के रुझानों में बीजेपी 184 सीटों के साथ बहुमत से कहीं आगे है, जबकि टीएमसी 91 सीटों पर सिमटती दिख रही है। 2021 के मुकाबले बीजेपी के महज 7% वोट बढ़े, लेकिन सीटें 117 बढ़ती दिख रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के आए नतीजों में पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा को बहुमत मिलने पर जोधपुर में कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। भाजपा की जीत पर जोधपुर शहर के जालोरी गेट चौराहे पर सोमवार शाम को भाजपा कार्यकर्ता एकत्रित हुए और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां जताई। साथ ही आतिशबाजी भी की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जालोरी गेट चौराहे पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने बंगाल, असम चुनाव में भाजपा की जीत पर खुशी मनाई। भाजपा प्रवक्ता जगदीश धाणदिया ने बताया- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि अरब सागर से लेकर गंगा सागर तक एक दिन भाजपा सरकार बनेगी और आज यह दिन आया है। जगदीश धाणदिया ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं की मेहनत के बूते ये जीत संभव हुई। इस मौके भाजपा के सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी, जिला अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल, पूर्व जिला अध्यक्ष जगत नारायण जोशी, जिला महामंत्री पवन आसोपा, भाजपा प्रवक्ता जगदीश धाणदिया, नरेश सुराणा, रणजीत कड़वासरा, जिला कार्यकारिणी सदस्य नरेश पारीक सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।
पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत का असर कटनी जिले में भी दिखा। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक के निवास पर एकत्रित होकर विजय का जश्न मनाया। इस दौरान परिसर 'भारत माता की जय' और 'भाजपा जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा। चुनाव परिणामों की घोषणा होते ही पाठक के बंगले पर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। जीत की खुशी में कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की और ढोल-नगाड़ों की धुन पर नृत्य किया। उन्होंने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। कार्यकर्ताओं ने इस जीत को लोकतंत्र और विकास की विजय बताया। मोदी की विचारधारा पर मुहर लगाई इस अवसर पर विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने कहा कि यह केवल चुनावी जीत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और राष्ट्रवादी विचारधारा पर जनता की मुहर है। पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश नई ऊंचाइयों को छू रहा है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अखंड भारत के सपने को साकार करने की दिशा में यह जीत एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटाना हो या बंगाल में राष्ट्रवादी ताकतों को मजबूत करना, जनता अब केवल सुशासन और विकास को प्राथमिकता दे रही है। कार्यक्रम में मौजूद अन्य वक्ताओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संगठनात्मक क्षमता और प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास' के संकल्प को इस जीत का मुख्य आधार बताया। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि बंगाल जैसे राज्य में भाजपा की यह सफलता सिंडिकेट राज और तुष्टीकरण की राजनीति के अंत की शुरुआत है।
भाजपा की जीत पर मऊ कार्यालय में जश्न:पश्चिम बंगाल, असम और पुदुचेरी में मिली सफलता का उत्सव
भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल, असम और पुदुचेरी में जीत के बाद मऊ स्थित भाजपा जिला कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। चुनाव परिणाम स्पष्ट होते ही कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और मिठाई बांटी। इस दौरान नरेंद्र मोदी जिंदाबाद, भाजपा जिंदाबाद और भारत माता की जय जैसे नारे लगाए गए। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रामाश्रय मौर्य ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' मंत्र और भाजपा की राष्ट्रवादी नीतियों की सफलता है। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की जनता ने हिंसा और तुष्टिकरण की राजनीति को नकार कर विकास को चुना है। असम और पुदुचेरी की जनता ने भी डबल इंजन सरकार पर भरोसा जताया है। इस दौरान क्षेत्रीय महामंत्री सुनील गुप्ता, अखिलेश तिवारी, मुन्ना दूबे, संजय पाण्डेय, राघवेंद्र राय शर्मा, सचिंद्र सिंह, नूपुर अग्रवाल, प्रीतूलता पांडेय, पूजा राय, प्रतीक जायसवाल, कृष्णकांत राय, रामशरण चौहान, रवीन्द्र उपाध्याय, राकेश तिवारी, मुन्ना खरवार, संजय कुमार मौर्य, सुनील दूबे, सुनील यादव, आकाश मल्ल, प्रिंस यादव, बृजेश यादव, नागेंद्र मद्धेशिया, रमेश दूबे, रमेश राय, परमहंस राजभर, आलोक विश्वकर्मा, आलोक सिंह, सरोज सिंह, नीतिश गोङ, सन्नों गुप्ता सहित जिले के वरिष्ठ नेतागण, पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, मोर्चा अध्यक्ष और सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर और मिठाई बांटकर इस जीत का उत्सव मनाया।
पश्चिम बंगाल, असम में भाजपा की सरकार:निवाड़ी में जश्न, कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को खिलाई मिठाई
पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली प्रचंड बहुमत की जीत के बाद पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है। इसी क्रम में निवाड़ी में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। क्षेत्रीय विधायक अनिल जैन के निवास और भाजपा कार्यालय पर कार्यकर्ताओं ने हर्षोल्लास के साथ जीत का जश्न मनाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, आतिशबाजी की और जयघोष करते हुए अपनी खुशी व्यक्त की। इस अवसर पर निवाड़ी विधायक अनिल जैन ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, सशक्त निर्णय क्षमता और जनकल्याणकारी नीतियों में देशवासियों के अटूट विश्वास का परिणाम है। उन्होंने केंद्र सरकार की लोकहितकारी योजनाओं की सराहना की, जिन्होंने समाज के हर वर्ग तक विकास पहुंचाया है। विधायक जैन ने आगे कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की निष्ठा, परिश्रम और समर्पण इस सफलता की आधारशिला है। उन्होंने कार्यकर्ताओं के उत्साह, ऊर्जा और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को इस जीत को और भी गौरवपूर्ण बनाने वाला बताया। जश्न के इस मौके पर जिलाध्यक्ष राजेश पटैरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर नापित, चेयरमैन गुलाब अहिरवार, महेंद्र सिंह दांगी, राजेश साहू, अमित तिवारी, पुष्पेंद्र प्रजापति, दिनेश दुबे, पवन चतुर्वेदी, अमित गुप्ता, अखिलेश अहिरवार सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बंगाल व असम में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत पर सहादतगंज स्थित भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने जमकर जश्न मनाया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और आतिशबाजी के बीच जनप्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की खुशी साझा की। महंत राजू दास हनुमानगढ़ी ने संतों के साथ पटाखे जलाकर खुशी जताई।उन्होंने कहा कि सनातन के उगते सूरत को अब कोई नहीं रोक पाएगा। भारत ही नहीं पूरे विश्व में सनातन संस्कृति छाती जा रही है। कार्यालय परिसर में उत्साह का माहौल देर तक बना रहा। इस दौरान जय श्री राम , भारत माता की जय, वंदे मातरम्क, के जय घोष से परिवेश गुंजायमान हो गया।इस दौरान विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि यह विजय केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि देश में राष्ट्रवादी विचारधारा और विकास मॉडल की स्वीकार्यता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अब स्थिर, पारदर्शी और विकासोन्मुखी सरकार चाहती है। बंगाल की जनता ने वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति को नकारते हुए भाजपा के सुशासन को स्वीकार किया है।महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि बंगाल और असम की जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनने जा रही है, जो सुशासन और विकास की नई दिशा तय करेगी। जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठन की मजबूती का परिणाम है कि भाजपा को ऐतिहासिक सफलता मिली है। उन्होंने इसे राष्ट्रवाद और विकास की विचारधारा की विजय बताते हुए कहा कि जनता ने तुष्टिकरण की राजनीति को नकार दिया है।महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने कहा कि यह जीत भाजपा की नीतियों, कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण की विजय है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं—गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण, किसान हित और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर—को जनता ने सराहा है।मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, अवधेश पाण्डेय बादल, कमला शंकर पाण्डेय, महानगर महामंत्री शैलेन्द्र कोरी, तिलकराम मौर्या, ब्लाक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष शिवेन्द्र सिंह, रवि सिंह, शिवम् शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष अखण्ड सिंह डिम्पल, कृष्ण कुमार पांडेय जिला महामंत्री राघवेंद्र पांडेय, शिवम सिंह,अशोक कसौधन, करुणाकर पाण्डेय, गिरीश पाण्डेय डिप्पुल, बाल कृष्ण वैश्य, हरभजन गौड, अरविंद सिंह, मनोज बर्मा, सुशील मिश्रा, अमित कुमार मिश्र, रवि सोनकर, शशि प्रताप सिंह, हेमंत जायसवाल, सर्वज्ञ सिंह, बब्लू मिश्र, जेपी श्रीवास्तव, ओमिश अग्रहरि सहित बडी संख्या में कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।
'असम विधानसभा चुनाव- 2026' की मतगणना सोमवार को पूरे राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू होगी। इसके साथ ही चुनावी मुकाबला अपने निर्णायक चरण में पहुंच जाएगा। इस चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटेगा या विपक्षी गठबंधन कोई बड़ी बढ़त हासिल करेगा।
बंगाल, असम समेत पांच राज्यों की मतगणना जारी, सुबह से हाई सिक्योरिटी में काउंटिंग
सम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों की मतगणना आज सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है
बंगाल, असम समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आज, ममता से लेकर विजयन तक की किस्मत का होगा फैसला
बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजें 4 मई को आने वाले हैं। चुनाव आयोग ने मतगणना को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 5 राज्यों की कुल 823 विधानसभा सीटों का फैसला आज हो जाएगा।
पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, असम सीएम की पत्नी के मामले में मिली अग्रिम जमानत
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। असम पुलिस द्वारा दर्ज जालसाजी और मानहानि मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है। जानिए मामले की पूरी जानकारी।
सिंगर जुबीन गर्ग की मौत का सच गहराया, असम सरकार ने जांच के लिए गठित की एसआईटी
फेमस असमिया और बॉलीवुड सिंगर जुबीन गर्ग के अचानक निधन से उनके फैंस के बीच शोक की लहर है। जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में स्कूबा डाइविंग के दौरान निधन हो गया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के डीजीपी से जुबीन गर्ग ...
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
घर पर ताला लगाकर गायब हुए रणवीर अल्लाहबादिया, खाली हाथ लौटी मुंबई और असम पुलिस!
कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में माता-पिता पर भद्दा कमेंट करके यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया मुश्किलों में घिर चुके हैं। देश के कई राज्यों में रणवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं यह मामला संसद तक उठ चुका है। अब खबर आ रही है कि ...

