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होंडा ZR-V भारत में लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹48 लाख:फ्लैगशिप SUV में स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड इंजन के साथ 22.8kmpl का माइलेज, लेवल-2 ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स

होंडा इंडिया ने अपनी नई फ्लैगशिप क्रॉसओवर SUV होंडा ZR-V भारत में लॉन्च कर दी है। यह भारत में होंडा के पोर्टफोलियो की सबसे प्रीमियम और महंगी SUV है। इसे जापान से सीधे कंपलीट्ली बिल्ट यूनिट (यानी पूरी तरह से बनी बनाई) के रूप में इंपोर्ट किया जाएगा। प्रीमियम SUV की सबसे बड़ी खासियत इसमें दिया गया 2.0-लीटर स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड पेट्रोल इंजन और 22.8kmpl का शानदार माइलेज है। भारतीय बाजार में इसका मुकाबला स्कोडा कोडियाक, वॉक्सवैगन टाइरॉन और टिगुआन जैसी प्रीमियम गाड़ियों से होगा। एक्स-शोरूम कीमत ₹48 लाख होंडा ZR-V को भारत में सिर्फ एक वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹48 लाख है। कार की बुकिंग शुरू कर दी गई है। जापान से इंपोर्ट होने के कारण इसकी लिमिटेड यूनिट ही अवेलेबल होगी। एक्सटीरियर: स्लीक LED लाइट्स और 18-इंच अलॉय व्हील्स होंडा ने अपनी पारंपरिक SUV डिजाइन के मुकाबले ZR-V को एक एडवांस और स्पॉटी क्रॉसओवर लुक दिया है। इंटीरियर: ऑल-ब्लैक थीम, लेदरेट सीट्स और प्रीमियम कंट्रोल कार के केबिन को काफी प्रीमियम और ड्राइवर-फ्रेंडली बनाया गया है। कम्फर्ट फीचर्स: 12-स्पीकर बोस साउंड सिस्टम और डिजिटल डिस्प्ले होंडा ZR-V में कई हाई-टेक और कम्फर्ट फीचर्स दिए गए हैं। इसमें 9-इंच का फ्रीस्टैंडिंग टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, 10.25-इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एप्पल कारप्ले का सपोर्ट शामिल है। इसके अलावा, 12-स्पीकर वाला बोस प्रीमियम ऑडियो सिस्टम, डुअल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, 8-वे पावर एडजस्टेबल ड्राइवर सीट (मेमोरी फंक्शन के साथ), 4-वे पावर पैसेंजर सीट, वायरलेस चार्जर, जेस्चर कंट्रोल के साथ इलेक्ट्रिक टेलगेट और एम्बिएंट लाइटिंग। हालांकि, लग्जरी कार में पैनोरमिक सनरूफ, वेंटिलेटेड (कूल/हीटेड) और मसाज सीट्स जैसे फीचर्स नहीं दिए गए हैं। परफॉर्मेंस और माइलेज: 184hp पावर और 22.8kmpl का माइलेज इस सेगमेंट में होंडा ZR-V इकलौती SUV है जो स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड तकनीक के साथ आती है: सेफ्टी फीचर्स: 8 एयरबैग्स और लेवल-2 ADAS सेफ्टी तकनीक सुरक्षा के मामले में इस कार में एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। इसमें होंडा सेसिंग यानी लेवल-2 ADAS तकनीक मिलती है। इसके अलावा, 8 एयरबैग्स, 360-डिग्री पार्किंग कैमरा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, हिल-स्टार्ट व हिल-डिसेंट असिस्ट, ट्रैक्शन कंट्रोल और ISOFIX चाइल्ड-सीट माउंट्स दिए गए हैं।

दैनिक भास्कर 25 Jul 2026 6:47 pm

ओप्पो F33 प्रो रिव्यू:लंबी बैटरी बैकअप चाहने वालों के लिए अच्छा ऑप्शन, 50MP सेल्फी कैमरा, लेकिन 4K वीडियो नहीं

ऑफलाइन स्मार्टफोन मार्केट में ओप्पो की F सीरीज हमेशा से सबसे ज्यादा बिकने वाली सीरीज रही है। अब, कंपनी ने नया स्मार्टफोन ओप्पो F33 प्रो 5G लॉन्च किया है। नया स्मार्टफोन कैसा है और क्या आपको इसे खरीदना चाहिए चलिए जानते हैं... डिजाइन: IP69K की वाटरप्रूफ रेटिंग और 360-डिग्री आर्मर प्रोटेक्शन सबसे पहले लुक की बात करें, तो मेरे पास यह 'पैशन रेड' कलर है जो देखने में काफी प्रीमियम लगता है। इसके अलावा यह स्टारी ब्लू और मिस्टी फॉरेस्ट कलर में भी आता है। इसका बैक और फ्रेम प्लास्टिक का है, लेकिन पीछे मैट फिनिश होने की वजह से इन-हैंड फील बहुत अच्छा है। इसका कैमरा मॉड्यूल पूरी तरह फ्लैट है। फोन का वजन 200 ग्राम से कम है और थिकनेस 8.5mm के अंदर है, यानी हाथ में साइज एकदम परफेक्ट बैठता है। मजबूती के मामले में ओप्पो ने इसमें IP69K की टॉप वाटरप्रूफ रेटिंग और 360-डिग्री आर्मर प्रोटेक्शन दी है, यानी पानी और गिरने की टेंशन खत्म! साथ ही, इसमें बढ़िया स्टीरियो स्पीकर्स और फास्ट इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर भी है। डिस्प्ले: 6.59 इंच का 120 हर्ट्ज वाला एमोलेड डिस्प्ले डिस्प्ले की बात करें तो यहां 6.59 इंच का 120 हर्ट्ज वाला एमोलेड फ्लैट डिस्प्ले दिया गया है। 1400 निट्स की पीक ब्राइटनेस है, तो धूप में विजिबिलिटी की कोई दिक्कत नहीं होगी। बेजल्स बहुत पतले और सिमिट्रिकल हैं, जिससे वीडियो देखने में मजा आता है। परफॉर्मेंस: मीडियाटेक डायेमेंसिटी 6360 मैक्स प्रोसेसर फोन में मीडियाटेक डायेमेंसिटी 6360 मैक्स प्रोसेसर है और यह एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कलर OS 16 पर चलता है। इसका एनतुतु स्कोर 6 से 7 लाख के बीच आता है। स्कोर भले ही एवरेज हो, लेकिन ओप्पो का डेली ऑप्टिमाइजेशन बहुत स्मूथ है। ऐप्स फटाफट खुलते हैं और डेली यूज में कोई लैग नहीं मिलता। गेमिंग की बात करें, तो BGMI जैसे गेम्स में बिना किसी हीटिंग इशू के 60fps पर आराम से खेल सकते हैं। कैमरा: 50 मेगापिक्सल का मेन और 2 मेगापिक्सल का डेप्थ कैमरा कैमरा सेटअप की बात करें तो पीछे 50 मेगापिक्सल का मेन और 2 मेगापिक्सल का डेप्थ कैमरा है। लेकिन इसमें OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन नहीं है। इसका मतलब है कि लो-लाइट या रात में फोटो खींचते वक्त अगर आपका हाथ जरा सा भी हिला, तो फोटो ब्लर आएगी। दिन में कलर्स और स्किन टोन अच्छे हैं, पर डिटेल्स थोड़ी कम लगती हैं। वीडियो में भी डाउनग्रेड है, आप फ्रंट और बैक दोनों से सिर्फ 1080p वीडियो ही रिकॉर्ड कर सकते हैं, जबकि पिछले मॉडल में 4K था। हालांकि, इसका 50 मेगापिक्सल का फ्रंट सेल्फी कैमरा जबरदस्त है! इसमें ऑटो-फोकस का सपोर्ट है और सेल्फीज बहुत क्रिस्प आती हैं। साथ ही, कैमरे में ऑब्जेक्ट इरेजर जैसे काम के AI फीचर्स भी दिए गए हैं। बैटरी: 7000mAh बैटरी के साथ 80W की फास्ट चार्जिंग पावरबैकअप के लिए इसमें 7000mAh की बैटरी दी गई है। इसके साथ बॉक्स में आपको 80W की फास्ट चार्जिंग मिलती है। फोन 6nm प्रोसेसर होने के कारण यह बहुत कम बैटरी खाता है, जिससे आपको आराम से डेढ़ से दो दिन का बैकअप मिल जाएगा। प्राइस और फाइनल वर्डिक्ट फोन दो वैरिएंट में आता है। इसके 8GB रैम + 128GB स्टोरेज की कीमत 37,999 रुपए और 8GB रैम + 256GB स्टोरेज की कीमत 40,999 है। अगर आपकी टॉप प्रायोरिटी लुक्स, स्लिम डिजाइन और लंबी बैटरी है, तो इसे खरीद सकते हैं। लेकिन आपका फोकस बेस्ट रियर कैमरा और 4K वीडियो रिकॉर्डिंग है, तो आप दूसरे ऑप्शंस देख सकते हैं।

दैनिक भास्कर 25 Jul 2026 6:01 pm

एपल की नई सिरी करेगी चैटजीपीटी जैसे कई काम:स्क्रीन देखकर समझेगी आपकी जरूरत; जानिए किन आईफोन मॉडल्स में मिलेंगे नए फीचर्स

एआई की दौड़ में अब एपल भी पूरी ताकत से उतरने जा रहा है। iOS 27 के साथ आने वाली नई सिरी पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट होगी। अब वह सिर्फ अलार्म लगाने या मौसम बताने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आपकी ई-मेल, मैसेज, फोटो, नोट्स और कैलेंडर को समझकर निजी सहायक की तरह काम करेगी। एपल का दावा है कि नई सिरी का मुकाबला सीधे चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई चैटबॉट्स से होगा। ये बदलाव होंगे 1. आपकी पूरी डिजिटल जिंदगी समझेगी - नई सिरी मैसेजेस, मेल, फोटोज और कैलेंडर जैसे एपल एप्स से जानकारी लेकर आपके सवालों का जवाब दे सकेगी। उदाहरण के लिए, पिछले हफ्ते लंच की फोटो दिखाओ। अगली फ्लाइट कब है? किसे कौन-सा डॉक्यूमेंट भेजना है? यानी सिरी सिर्फ कमांड नहीं मानेगी, बल्कि आपके संदर्भ को भी समझेगी। 2. स्क्रीन पर क्या चल रहा है, यह भी देखेगी - अगर आप यूट्यूब पर कोई रेसिपी देख रहे हैं, तो सिरी उससे सामग्री पहचानकर नोट्स में सेव कर सकती है। 3. चैटजीपीटी जैसा इंटरफेस - एपल पहली बार सिरी के लिए अलग चैट इंटरफेस दे रहा है। इसमें बातचीत का इतिहास रहेगा। एआई से बनाई गई फाइलें मिलेंगी। सभी चैट आईक्लाउड के जरिए दूसरे एपल डिवाइस पर भी उपलब्ध होंगी। 4. प्राइवेसी पर भी जोर - एपल का कहना है कि भारी एआई प्रोसेसिंग प्राइवेट क्लाउड कम्प्यूट पर होगी। डेटा एन्क्रिप्टेड रहेगा। इससे निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी। एआई इस्तेमाल करते समय भी गोपनीयता बनी रहेगी। 5. किन आईफोन में मिलेगी एआई सिरी - नई सिरी सिर्फ एपल इंटेलिजेंस वाले आईफोन पर चलेगी। जैसे- iPhone 15 Pro, iPhone 15 Pro Max, iPhone 16 सीरीज, iPhone 17 सीरीज। हालांकि आईओएस-27 पुराने आईफोन 11 तक मिलेगा, लेकिन एआई फीचर नहीं मिलेंगे। आईफोन-18 पर कब स्विच करें? सिर्फ एआई सिरी चाहिए, तो नहीं। आईफोन-16 और 17 में भी लगभग पूरा एआई अनुभव मिलेगा। लेकिन आईफोन 18 प्रो में बेहतर कैमरा, ज्यादा रैम और नई 2nm चिप मिलेगी। आईफोन-18 की कीमत भारत में 1 लाख रु. से शुरू होने का अनुमान है। इसलिए सिर्फ सिरी के लिए नया फोन खरीदना जरूरी नहीं है।

दैनिक भास्कर 25 Jul 2026 5:08 pm

नेटवर्क गया तो भी नहीं रुकेगी UPI:फोन से ऑफलाइन पेमेंट की तैयारी, एनएफसी के जरिए बिना नेटवर्क चलेगा भुगतान

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट न होने पर भी NFC (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) तकनीक से भुगतान किया जा सकेगा। इसका फायदा फ्लाइट, मेट्रो, सुरंगों या कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक एनपीसीआई इस साल PoS डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को प्रमाणित करना शुरू कर सकता है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से यह सुविधा शुरू होने की संभावना है। इन सवालों से समझें कैसे काम करेगा इस तरह से काम करेगा नई सुविधा में यूजर को पहले इंटरनेट के जरिए यूपीआई लाइट वॉलेट में पैसे जोड़ने होंगे। इसके बाद जहां इंटरनेट उपलब्ध नहीं होगा, वहां एनएफसी की मदद से मोबाइल को व्यापारी के PoS मशीन के पास ले जाकर भुगतान किया जा सकेगा। एक ट्रांजैक्शन की सीमा 2,000 रुपए तक हो सकती है। इस दौरान यूपीआई पिन डालने की जरूरत भी नहीं होगी। अभी ऑफलाइन यूपीआई कैसे चलता है? बिना इंटरनेट भुगतान की सुविधा पहले से मौजूद है, पर उसमें किसी न किसी नेटवर्क की जरूरत पड़ती है। 1. 99# सेवा {GSM नेटवर्क पर चलती है। इंटरनेट की जरूरत नहीं। किसी भी फोन पर चल सकती है। अधिकतम 5,000 रु. का भुगतान। UPI 123Pay {फीचर फोन यूजर्स के लिए। कॉल करके भुगतान। मोबाइल नेटवर्क जरूरी है। क्या आपका फोन इस फीचर के लिए तैयार है? फोन में इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए - एनएफसी सपोर्ट होना चाहिए। - यूपीआई लाइट सक्रिय होना चाहिए। - व्यापारी के पास एनएफसी सपोर्ट वाला PoS टर्मिनल होना चाहिए। - भुगतान से पहले UPI Lite में बैलेंस लोड करना होगा।

दैनिक भास्कर 25 Jul 2026 4:47 pm

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का टेस्ट कामयाब:पानी में पहली बार सुरक्षित लैंडिंग, अंतरिक्ष में 20 सैटेलाइट भी तैनात किए, मस्क की कंपनी का मिशन

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप की 13वीं टेस्ट उड़ान कामयाब रही। इस मिशन में स्टारशिप के अपर स्टेज ने हिंद महासागर में लैंड किया, जबकि इसके बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में लैंडिंग की। पिछले हफ्ते इंजन इग्निशन में खराबी के कारण इसकी लॉन्चिंग टाल दी गई थी। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली 'स्टारशिप' कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है। स्टारशिप ने टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ से भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 4 बजे उड़ान भरी थी। ये टेस्ट 1 घंटे 3 मिनट का था। इस टेस्ट की सफलता स्पेसएक्स और नासा दोनों के लिए बेहद जरूरी थी। अगले साल नासा की मून लैंडिंग इसी पर निर्भर है। पहली बार पानी में सुरक्षित तैरता दिखा स्टारशिप स्पेसएक्स के प्रवक्ता डैन हुओट ने लाइव स्ट्रीम के दौरान कहा कि यह पहली बार है जब हमने पूरे स्टारशिप को सुरक्षित पानी में उतारा। लैंडिंग के दौरान स्टारशिप अपनी 'बेली-फ्लॉप' स्थिति से सीधा हुआ और पानी पर लंबवत उतरा। इसके बाद यह धीरे-धीरे एक तरफ झुककर समुद्र में तैरने लगा। पहली बार असली स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स की तैनाती इस मिशन में स्टारशिप ने पहली बार नए वर्जन के 20 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में तैनात किया। स्पेसएक्स ने पुष्टि की कि उसने सभी 20 टेस्ट सैटेलाइट्स से संपर्क स्थापित कर लिया है। ये सैटेलाइट्स सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर थे और इन्हें स्थायी रूप से अंतरिक्ष में रहने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। तैनात होने के लगभग 20 मिनट बाद ये पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो गए। सुपर हैवी बूस्टर और 'हॉट स्टेजिंग' में सुधार लॉन्च के समय सुपर हैवी बूस्टर के सभी 33 रैप्टर इंजनों ने उड़ान भरी, जिससे 1.8 करोड़ पाउंड का थ्रस्ट पैदा हुआ। स्पेसएक्स के स्टारशिप लॉन्च के सीनियर डायरेक्टर जस्टिन स्टेयर के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे बड़ी मशीन गन की तरह है जो गोलियों की जगह हर सेकंड 11 पिकअप ट्रक फायर कर रही हो। उड़ान के 2 मिनट बाद मेन इंजन कटऑफ (MECO) के बाद 'हॉट स्टेजिंग' के जरिए स्टारशिप बूस्टर से अलग हुआ। मई में हुई पिछली उड़ान में सभी 6 इंजन एक साथ चालू न होने से बूस्टर उल्टा घूम गया था, जिसे इस बार सुधार लिया गया था। अलग होने के बाद बूस्टर ने 13 इंजनों का इस्तेमाल करके बूस्टबैक बर्न किया। लैंडिंग के समय इसकी स्पीड थोड़ी ज्यादा थी और सभी 13 इंजन चालू नहीं हो पाए, फिर भी इसने खाड़ी में एक नियंत्रित लैंडिंग की। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 12वां टेस्ट: इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग 'स्टारशिप' का 12वां टेस्ट सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा था। इसमें स्टारशिप के नए और बड़े वर्जन (V3) का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित 'स्टारबेस' लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। इस टेस्ट को भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया। 11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च 2025 को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया था, लेकिन शिप (ऊपरी हिस्सा) में ऑक्सीजन लीक से ब्लास्ट हो गया था। छठा टेस्ट: लॉन्चपैड पर उतरने में दिक्कत दिखी तो पानी पर लैंड कराया, ट्रम्प भी मौजूद रहे स्टारशिप का छठा टेस्ट 20 नवंबर 2024 को सुबह 03:30 बजे किया गया था। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी टेस्ट देखने के लिए स्टारबेस पहुंचे थे। इस टेस्ट में बूस्टर को लॉन्च करने के बाद वापस लॉन्चपैड पर कैच किया जाना था, लेकिन सभी पैरामीटर ठीक नहीं होने के कारण इसे पानी में लैंड कराने का फैसला लिया गया। स्टारशिप के इंजन को स्पेस में फिर से चालू किया गया। इसके बाद हिंद महासागर में लैंडिंग हुई। पांचवां टेस्ट: पहली बार बूस्टर को लॉन्चपैड पर कैच किया था स्टारशिप का पांचवां टेस्ट 13 अक्टूबर 2024 को किया गया था। इस टेस्ट में पृथ्वी से 96 Km ऊपर भेजे गए सुपर हैवी बूस्टर को लॉन्चपैड पर वापस लाया गया, जिसे मैकेजिला ने पकड़ा। मैकेजिला दो मेटल आर्म हैं जो चॉपस्टिक्स की तरह दिखाई देती हैं। वहीं स्टारशिप की पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंट्री कराकर हिंद महासागर में कंट्रोल्ड लैंडिंग कराई गई। स्टारशिप ने जब पृथ्वी के वातावरण में एंट्री की तब उसकी रफ्तार 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे थी और तापमान 1,430C तक पहुंच गया था। चौथा टेस्ट: स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पानी में लैंडिंग हुई स्टारशिप का चौथा टेस्ट 6 जून 2024 को हुआ था, जो सक्सेसफुल रहा था। 1.05 घंटे के इस मिशन को बोका चिका से शाम 6.20 बजे लॉन्च किया गया था। इसमें स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पृथ्वी पर वापस लाकर पानी पर लैंड कराया गया। टेस्ट का मेन गोल यह देखना था कि स्टारशिप पृथ्वी के वातावरण में एंट्री के दौरान सर्वाइव कर पाता है या नहीं। टेस्ट के बाद कंपनी के मालिक इलॉन मस्क ने कहा था, 'कई टाइल्स के नुकसान और एक डैमेज्ड फ्लैप के बावजूद स्टारशिप ने समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग की।' तीसरा टेस्ट: रीएंट्री के बाद स्टारशिप से संपर्क टूटा था ये टेस्ट 14 मार्च 2024 को हुआ था। स्पेसएक्स ने बताया था कि स्टारशिप रीएंट्री के दौरान सर्वाइव नहीं कर पाया, लेकिन उसने उड़ान के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। वहीं इलॉन मस्क ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल आधा दर्जन स्टारशिप उड़ान भरेंगे। दूसरा टेस्ट: स्टेज सेपरेशन के बाद खराबी आ गई थी स्टारशिप का दूसरा टेस्ट 18 नवंबर 2023 को शाम करीब 6:30 बजे किया गया था। लॉन्चिंग के करीब 2.4 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप का सेपरेशन हुआ। बूस्टर को वापस पृथ्वी पर लैंड होना था, लेकिन 3.2 मिनट बाद 90 Km ऊपर यह फट गया। वहीं स्टारशिप तय प्लान के अनुसार आगे बढ़ गया। करीब 8 मिनट बाद पृथ्वी से 148 Km ऊपर स्टारशिप में भी खराबी आ गई, जिस कारण उसे नष्ट करना पड़ा। फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम के जरिए इसे नष्ट किया गया था। दूसरे टेस्ट में रॉकेट और स्टारशिप को अलग करने के लिए पहली बार हॉट स्टैगिंग प्रोसेस का इस्तेमाल किया गया था, जो पूरी तरह सक्सेसफुल रही थी। सभी 33 रैप्टर इंजनों ने भी लॉन्च से सेपरेशन तक ठीक से फायर किया था। पहला टेस्ट: लॉन्चिंग के 4 मिनट बाद विस्फोट हो गया था 20 अप्रैल 2023 को स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट किया गया था। इस टेस्ट में बूस्टर 7 और शिप 24 को लॉन्च किया गया था। उड़ान भरने के 4 मिनट बाद ही मेक्सिको की खाड़ी के पास 30 किलोमीटर ऊपर स्टारशिप में विस्फोट हो गया था। स्टारशिप के फेल होने के बाद भी इलॉनमस्क और एम्प्लॉइज खुशी मना रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि रॉकेट का लॉन्च पैड से उड़ना ही बड़ी सफलता थी। मस्क ने लॉन्चिंग से दो दिन पहले कहा था- सफलता शायद मिले, लेकिन एक्साइटमेंट की गारंटी है। स्पेसएक्स ने कहा था- सेपरेशन स्टेज से पहले ही इसका एक हिस्सा अचानक अलग हो गया, जबकि यह तय नहीं था। इस तरह के एक टेस्ट के साथ हम जो सीखते हैं, उससे सफलता मिलती है। आज का टेस्ट हमें स्टारशिप की रिलायबिलिटी में सुधार करने में मदद करेगा। टीमें डेटा को रिव्यू करना जारी रखेंगीं और अगले फ्लाइट टेस्ट की दिशा में काम करेंगीं।

दैनिक भास्कर 25 Jul 2026 6:38 am

2026 मारुति ब्रेजा फेसलिफ्ट लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹7.40 लाख:नए टर्बो-पेट्रोल इंजन के साथ 20.47kmpl का माइलेज, सेफ्टी के लिए ADAS फीचर्स

मारुति सुजुकी ने आज 24 जुलाई को भारत में सेकंड जनरेशन ब्रेजा लॉन्च कर दी है। कंपनी ने अपनी इस पॉपुलर सब-4 मीटर कॉम्पैक्ट SUV को 4 साल बाद अपडेट किया है और इसके एक्सटीरियर-इंटीरियर डिजाइन, फीचर्स और इंजन में बड़े बदलाव किए गए हैं। अपडेटेड मॉडल में सबसे खास नया 1-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, 10.1-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम और लेवल-1 ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स हैं। कंपनी का दावा है कि कार नए टर्बो इंजन के साथ 20.47kmpl का माइलेज देती है। कीमत: 4 ट्रिम्स के साथ ₹7.40 लाख से कीमत शुरू 2026 मारुति ब्रेजा को 4 वैरिएंट्स- LXI, VXI, ZXI और ZXI+ में पेश किया गया है। कंपनी ने इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹7.40 लाख रखी है, ये इंट्रोडक्ट्री प्राइस लिमिटेड समय के लिए है। मारुति ने अभी इसके बेस मॉडल की कीमत का खुलासा किया है, जबकि अन्य वैरिएंट्स की प्राइस लिस्ट जल्द ही जारी की जाएगी। इसकी बुकिंग शुरू कर दी गई है।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 8:58 pm

किआ सिरोस EV लॉन्च, कीमत ₹7.99 लाख से शुरू:इलेक्ट्रिक SUV फुल चार्ज में 526km चलेगी, BaaS मॉडल में ₹3.3/किमी का चार्ज

किआ इंडिया ने अपनी प्रीमियम SUV सिरोस का इलेक्ट्रिक वर्जन भारत में लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि ये प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV एक बार फुल चार्ज करने पर 526km चलेगी। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 13.50 लाख रुपए से 20 लाख रुपए के बीच रखी गई है। कंपनी ने इसे बैटरी-एज-ए-सर्विस (BaaS) स्कीम के साथ भी पेश किया है, जिसके तहत इसकी शुरुआती कीमत 7.99 लाख रुपए है और ₹3.3 प्रति किलोमीटर एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा। इसका सीधा मुकाबला टाटा नेक्सॉन EV और महिंद्रा XUV 3XO EV से होगा। इसकी डिलीवरी 30 जुलाई से शुरू होगी। किआ सिरोस EV को 5 वैरिएंट- HTK, HTK+, HTX, HTX+ और X-Line में पेश किया गया है। छोटा बैटरी पैक शुरुआती तीन ट्रिम्स में मिलता है, जबकि बड़ा बैटरी पैक दूसरे ट्रिम (HTK+) से अवेलेबल है। कैरेंस क्लाविस के बाद दूसरी मास-मार्केट EV यह भारत में किआ का सबसे किफायती इलेक्ट्रिक मॉडल है। कैरेंस क्लाविस के बाद यह ब्रांड की दूसरी मास-मार्केट EV है। कंपनी इसमें लाइफटाइम बैटरी वारंटी और एश्योर्ड बायबैक प्रोग्राम दे रही है, जो 3 साल बाद 80% तक की रीसेल वैल्यू का दावा करता है। बैटरी, रेंज और परफॉर्मेंस किआ सिरोस EV में 42kWh और 51.4kWh के दो बैटरी पैक ऑप्शन दिए गए हैं। ये दोनों बैटरी पैक किआ कैरेंस क्लेविस EV और हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि, सिरोस EV साइज में छोटी होने के कारण ज्यादा रेंज देती है। चार्जिंग टाइम: 100kW DC फास्ट चार्जर से 39 मिनट में 80% चार्ज कंपनी इलेक्ट्रिक SUV के साथ 7.4kW और 10.8kW के AC चार्जर ऑप्शन दे रही है। 7.4kW चार्जर से छोटी बैटरी को 10 से 100% चार्ज होने में 6 घंटे लगते हैं, जबकि बड़ी बैटरी 7 घंटे 15 मिनट का समय लेती है। वहीं, 100kW DC फास्ट चार्जर का उपयोग करने पर 51.4kWh की बैटरी को 10 से 80% तक सिर्फ 39 मिनट में चार्ज किया जा सकता है। एक्सटीरियर डिजाइन: 17-इंच के अलॉय व्हील्स इसके पेट्रोल/डीजल (ICE) मॉडल के मुकाबले एक्सटीरियर और इंटीरियर में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है। केबिन फीचर्स: 12.3-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर कार के अंदर 'ट्रिनिटी पैनोरमिक डिस्प्ले' मुख्य आकर्षण है। इसमें 12.3-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, 12.3-इंच की सेंट्रल इंफोटेनमेंट स्क्रीन और क्लाइमेट कंट्रोल के लिए 5.0-इंच की अलग यूनिट शामिल है। सेफ्टी फीचर्स : लेवल-2 ADAS के साथ 6 एयरबैग स्टैंडर्ड सेफ्टी के लिए किआ सिरोस ईवी में 6 एयरबैग (स्टैंडर्ड), 360-डिग्री कैमरा ESC, हिल-स्टार्ट असिस्ट, फ्रंट पार्किंग सेंसर्स और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा लेवल-2 एडवांस ड्राइविंग असिस्ट सिस्टम (ADAS) भी है। इसमें अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 11:10 am

अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 98 डॉलर पार:कतर से LNG सप्लाई भी अटकने की आशंका; महंगाई बढ़ सकती है

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड आज 23 जुलाई को 4% बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह पिछले 6 हफ्तों में सबसे ज्यादा है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। कच्चे तेल के महंगे होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फ्यूल मार्जिन पर दबाव बढ रहा है। अगर लंबे समय तक क्रूड महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला, हूतियों ने नाकेबंदी का ऐलान किया तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का बिगड़ता माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ अब यह विवाद फारसी खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है। यह हमला हुती ग्रुप की ओर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी की घोषणा करने के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। तेल कंपनियों के शेयर 2.5% तक टूटे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है… भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। अक्टूबर तक LNG सप्लाई अटकने के आसार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर एनर्जी मिड-अक्टूबर तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के शिपमेंट पर 'फोर्स मैज्योर' को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कतर ने जून में ही एशिया और यूरोप के कुछ ग्राहकों को सूचित किया था कि अगस्त और सितंबर के कार्गो रद्द रहेंगे। अगर यह पाबंदी अक्टूबर तक खिंचती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले गैस का ग्लोबल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि यूरोप और एशियाई देश सीमित LNG सप्लाई के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे। सेंसेक्स 364 और निफ्टी 127 अंक गिरी कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया है। 23 जुलाई को सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 76,391 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 127 अंक की गिरावट रही, ये 23,870 पर बंद हुआ। रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। आगे क्या? पश्चिम एशिया में अगर यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग, ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सोना ₹274 बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंचा: 4 दिन में ₹4,398 महंगा हो चुका, चांदी आज ₹360 चढ़कर ₹2.26 लाख पर पहुंची सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 23 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 360 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 274 रुपए चढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 4 दिन में सोना 4,398 रुपए और 10,346 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 3:52 pm

सैमसंग गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट आज:पासपोर्ट डिजाइन वाला Z फोल्ड 8 आएगा, अल्ट्रा में 200MP कैमरा और टाइटेनियम बॉडी मिलेगी

टेक कंपनी सैमसंग का गैलेक्सी अनपैक्ड 2026 इवेंट आज शाम 7 बजे से होगा। इसमें कंपनी नए पासपोर्ट डिजाइन वाला गैलेक्सी Z फोल्ड 8, गैलेक्सी Z फ्लिप 8 और 200 मैगापिक्सल कैमरे गैलेक्सी Z फोल्ड 8 अल्ट्रा लॉन्च करेगी। इसके अलावा, नए सैमसंग गैजेट्स और सॉफ्टवेयर जैसे गैलेक्सी वॉच 9 सीरीज, गैलेक्सी AI और एंड्रॉएड XR, गैलेक्सी ग्लासेस भी पेश किए जाएंगे। सैमसंग गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट में ये डिवाइस आएंगे सैमसंग गैलेक्सी Z फोल्ड 8 ये मोबाइल पासपोर्ट शेप में लाया जाएगा। लीक के अनुसार इसमें 4:3 आस्पेक्ट रेश्यो वाली 7.6-इंच की मेन डिस्प्ले दी जाएगी और 5.5-इंच की कवर स्क्रीन मिलेगी। दोनों ही QXGA+ डायनामिक एमोलेड 2X पैनल पर बनाई जा सकती है। फोटोग्राफी के लिए गैलेक्सी Z फोल्ड 8 के बैक पैनल पर 50 मेगापिक्सल अल्ट्रा वाइड कैमरा और 10 मेगापिक्सल टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है। वहीं मेन डिस्प्ले और कवर डिस्प्ले दोनों पर ही 10 मेगापिक्सल सेल्फी कैमरा मिलेगा। गैलेक्सी Z फोल्ड 8 को स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर पर लॉन्च किया जा सकता है, जो एंड्रॉयड 16 बेस्ड वन UI 9 पर काम करेगा। पावर बैकअप के लिए फोन में 4800mAh बैटरी के साथ 45W वायर्ड और 15W वायरलेस चार्जिंग दी जा सकती है। सैमसंग गैलेक्सी Z फ्लिप 8 नया गैलेक्सी फ्लिप क्लैमशेल फोल्डेबल डिजाइन के साथ आएगा। इसमें 6.9 इंच की डायनामिक एमोलेड 2X LTPO मेन डिस्प्ले और 4.1-इंच की सुपर एमोलेड फ्लेक्स विंडो कवर स्क्रीन मिल सकती है। दोनों में ही 120Hz रिफ्रेश रेट और 2600nits पीक ब्राइटनेस का सपोर्ट दिया जा सकता है। फोल्ड 8 की ही तरह कंपनी फ्लिप 8 को भी स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर पर लॉन्च कर सकती है, जिसमें एंड्रॉयड 16 बेस्ड वन UI 9 दिया जा सकता है। बैक पैनल पर 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा और 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिल सकता है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 10 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। पावर बैकअप के लिए इसमें 4300mAh की बैटरी के साथ 45W फास्ट वायर्ड चार्जिंग, 15W वायरलेस चार्जिंग और वायरलेस पावर शेयर सपोर्ट भी मिल सकता है। फोन को आर्मर एल्यूमीनियम फ्रेम पर बनाया जा सकता है, जिसके साथ गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 की प्रोटेक्शन मिल सकती है। सैमसंग गैलेक्सी Z फोल्ड 8 अल्ट्रा ये फोन भी फ्लेक्स टाइटेनियम स्ट्रक्चर के साथ आएगा। इसमें टाइटेनियम अलॉय फिल्म और टाइटेनियम सपोर्ट प्लेट शामिल होगा। यह नॉर्मल पॉलिमर फिल्म से 20x मजबूत और इंसानी बाल से भी 30% पतली बताई गई है। फोन में QXGA+ डायनामिक एमोलेड 2X पैनली पर बनी 8-इंच की मेन स्क्रीन और 6.5-इंच की कवर डिस्प्ले दी जा सकती है। फोटोग्राफी के लिए इसमें 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा के साथ 50 मेगापिक्सल अल्ट्रा वाइड और 10 मेगापिक्सल टेलीफोटो सेंसर मिलेगा। इसकी सेकेंडरी और प्राइमरी डिस्प्ले पर 10 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। ये भी क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 पर लॉन्च हो सकता है। पावर बैकअप के लिए इसमें 5000mAh बैटरी के साथ 45W वायर्ड, 15W वायरलेस और वायरलेस पावरशेयर सहित Qi वायरलेस फीचर भी दिया जा सकता है। सैमसंग गैलेक्सी वॉच 9 सीरीज इवेंट में कंपनी नई गैलेक्सी वॉच 9 सीरीज भी पेश कर सकती है, इसके अलावा गैलेक्सी वॉच अल्ट्रा 2 भी आने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गैलेक्सी वॉच 9 में जहां 40mm और 44mm डायल ऑप्शन मिलेंगे, वहीं वॉच अल्ट्रा 2 बड़े 47mm डायल के साथ आ सकती है। दोनों में सुपर एमोलेड ऑलवेस-वन डिस्प्ले, सेफायर क्रिस्टल ग्लास प्रोटेक्शन और 3000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस देखने को मिल सकती है। इनमें 5ATM वॉटर रेजिस्टेंस, IP68 रेटिंग और MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी भी देखने को मिल सकती है। गैलेक्सी वॉच 9 और गैलेक्सी वॉच अल्ट्रा 2 को एग्जीनोस W1000 पर लाया जा सकता है जो वेयर OS 7 बेस्ड वन UI वॉच 9 पर काम करेगी। पावर बैकअप के लिए गैलेक्सी वॉच 9 में 435mAh और गैलेक्सी वॉच अल्ट्रा 2 में 590mAh बैटरी दी जा सकती है। कनेक्टिविटी के लिए GPS, ब्लूटूथ 5.4, वाई-फाई, NFC और सैमसंग वॉलेट सहित कुछ मॉडल्स में LTE का सपोर्ट दिया जा सकता है। यूजर्स को इनमें हार्ट रेट मॉनिटरिंग, बायोएक्टिव सेंसर, ECG, SpO2, बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस, स्लीप ट्रैकिंग और स्ट्रेस मॉनिटरिंग के साथ गैलेक्सी AI जैसे फीचर्स मिल सकते हैं।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 4:49 pm

मारुति की कारें अगस्त से ₹30,000 तक महंगी हो जाएंगी:2 महीने में दूसरी बार कीमतें बढ़ाईं, कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से फैसला लिया

देश की सबसे बड़ी पैसेंजर वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोत्तरी का ऐलान किया है। कंपनी अपनी कारों के दाम 30,000 रुपए तक बढ़ाएगी। नई कीमतें अगस्त 2026 से लागू होंगी। कंपनी ने 21 जुलाई, मंगलवार को शेयर बाजारों को भेजी जानकारी यानी रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है। अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग दाम बढ़ाए जाएंगे। कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से लेना पड़ा फैसला कंपनी ने बताया कि लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा है। पिछले कुछ महीनों में कंपनी ने अपने स्तर पर लागत घटाने की कोशिश की, ताकि ग्राहकों पर सीधा असर न पड़े। हालांकि, महंगाई दर ऊंची रहने और कारोबारी माहौल अनुकूल न होने की वजह से बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना मजबूरी हो गया है। 2 महीने में दूसरी बार बढ़ेंगे दाम इस साल मारुति सुजुकी की तरफ से यह पहली बढ़ोत्तरी नहीं है। इससे पहले कंपनी ने जून 2026 में भी अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में 30,000 रुपए तक का इजाफा किया था। उस बढ़ोत्तरी का ऐलान 21 मई 2026 को किया गया था। उस समय भी कंपनी ने इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव को ही मुख्य वजह बताया था। अगस्त से लागू होने वाला नया संशोधन जून में हुई बढ़ोतरी के ऊपर अतिरिक्त इजाफा होगा। ₹3.50 लाख से ₹25 लाख तक के वाहन बेचती है कंपनी मारुति सुजुकी भारतीय बाजार में एंट्री-लेवल हैचबैक से लेकर प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियां बेचती है। इनमें एंट्री-लेवल मॉडल S-Presso से लेकर प्रीमियम MPV इनविक्टो शामिल हैं। फिलहाल कंपनी के पोर्टफोलियो की एक्स-शोरूम कीमतें ₹3.50 लाख से शुरू होकर ₹25 लाख तक जाती हैं। अगस्त से होने वाली बढ़ोतरी के बाद एंट्री-लेवल और प्रीमियम दोनों सेगमेंट की कारें महंगी हो जाएंगी। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? रेगुलेटरी फाइलिंग: शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी बड़े बिजनेस फैसले, मुनाफे, नुकसान या कीमतों में बदलाव की जानकारी 'सेबी' या स्टॉक एक्सचेंज को दें। इसी आधिकारिक दस्तावेज को रेगुलेटरी फाइलिंग कहते हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी कार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, प्लास्टिक, एल्युमिनियम, रबर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की कुल लागत को इनपुट कॉस्ट कहा जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है।

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 4:00 pm

सिट्रोएन बेसाल्ट X कम्फर्ट एडिशन भारत में लॉन्च:शुरुआती कीमत ₹8.75 लाख; यू और प्लस ट्रिम्स में अवेलेबल, 10.25-इंच टचस्क्रीन जैसे फीचर्स

सिट्रोएन ने अपनी कूपे SUV बेसाल्ट X का नया 'कम्फर्ट एडिशन' भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। पिछले महीने एयरक्रॉस कम्फर्ट एडिशन को मिली सफलता के बाद कंपनी ने अब बेसाल्ट X को भी कम्फर्ट एडिशन का ट्रीटमेंट दिया है। इस कार की शुरुआती कीमत 8.75 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) रखी गई है। 1. 'यू' और 'प्लस' ट्रिम्स में अवेलेबल बेसाल्ट X कम्फर्ट एडिशन को कंपनी ने दो वेरिएंट्स- 'यू' और 'प्लस' ट्रिम्स में पेश किया है। इस नए एडिशन के साथ 'कम्फर्ट AXS' पैक दिया गया है। यह पैकेज कार के इंटीरियर और फीचर्स को पहले से ज्यादा प्रीमियम और सुविधाजनक बनाता है। 2. केबिन और इंटीरियर फीचर्स कंपनी ने नई बेसाल्ट X कम्फर्ट एडिशन के इंटीरियर में कई बड़े अपडेट्स दिए हैं… 3. इंजन और परफॉर्मेंस कार के इंजन या गियरबॉक्स में कंपनी ने कोई मेकैनिकल बदलाव नहीं किया है। यह अपने स्टैंडर्ड इंजन ऑप्शंस के साथ ही उपलब्ध रहेगी। 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन: बेस वेरिएंट में 1.2-लीटर का इंजन मिलता है, जो 81 BHP की पावर और 115 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। यह 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ आता है। 1.2-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन: इसके 'प्लस' ट्रिम में ज्यादा पावरफुल 1.2-लीटर टर्बो-पेट्रोल यूनिट दी गई है, जो 108 BHP की पावर और 190 Nm का टॉर्क देती है। इसे 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ खरीदा जा सकता है। 4. सिट्रोएन बेसाल्ट X कम्फर्ट एडिशन: स्पेसिफिकेशन्स क्या होता है 'ड्यूल डैशकैम' और कार में यह क्यों जरूरी है? ड्यूल डैशकैम : यह एक ऐसा कैमरा सेटअप होता है जिसमें एक कैमरा कार के आगे की सड़क और दूसरा कैमरा पीछे की गतिविधियों को एक साथ रिकॉर्ड करता है। किसी दुर्घटना, रोड रेज या चोरी के समय यह फुल HD वीडियो रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर देता है। इंश्योरेंस क्लेम पास कराने और कानूनी कार्रवाई में यह अहम भूमिका निभाता है। सिट्रोएन बेसाल्ट X में यह फीचर इन-बिल्ट/फैक्ट्री-फिटेड कम्फर्ट पैक के तहत दिया जा रहा है।

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 3:36 pm

संसद में सरकार बोली- E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं:23 करोड़ गाड़ियां बिना परेशानी चल रहीं, पुरानी गाड़ियों का माइलेज मामूली गिरा

देश में 20% एथेनॉल मिला पेट्रोल यानी E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब होने या उनके अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को राज्यसभा यानी संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देशभर में चल रहे 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चलाने के अनुभवों और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। 20 करोड़ टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ कारें बिना किसी शिकायत के चल रहीं राज्यसभा में मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें वर्तमान में एथेनॉल मिश्रित ईंधन यानी पर चल रही हैं। इनमें एक बड़ी संख्या उन पुराने वाहनों की भी है, जिन्हें E20 सर्टिफिकेशन मिलने से पहले मैन्युफैक्चर किया गया था। इन सभी गाड़ियों के डेटा और सर्विस रिकॉर्ड देखने के बाद भी इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन फेल होने या किसी बड़े व्हीकल ब्रेकडाउन की कोई पुख्ता पुष्टि नहीं हुई है। बिना सोचे-समझे नहीं किया बदलाव सरकार ने सदन में बताया कि देश को E20 फ्यूल की तरफ ले जाने का फैसला अचानक नहीं हुआ है। यह पूरी तरह से चरणबद्ध और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित रहा है। साल 2013-14 में जहां पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग सिर्फ 1.53% थी, उसे साइंटिफिकली और सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ हर स्तर पर विचार-विमर्श के बाद ही साल 2025-26 तक बढ़ाकर 20% (E20) किया गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस डेटा से भी पुष्टि मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश की एक प्रमुख फोर-व्हीलर निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। चौंकाने वाली बात यह है कि इन गाड़ियों में 1.5 करोड़ ऐसे पुराने वाहन शामिल थे जो नॉन-E20 सर्टिफाइड थे यानी जिन्हें E20 फ्यूल के हिसाब से नहीं बनाया गया था। इसके बावजूद कंपनी के सर्विस रिकॉर्ड में E20 फ्यूल की वजह से गाड़ी को किसी भी तरह का नुकसान होने की एक भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसी तरह, देश की एक प्रमुख टू-व्हीलर निर्माता कंपनी के बड़े सर्विस डेटा में भी पहले के फ्यूल ब्लेंड की तुलना में E20 पर चलने वाले वाहनों में खराबी की कोई अलग घटना सामने नहीं आई है। माइलेज पर असर: पुरानी गाड़ियों में 3 से 5% की कमी संभव, पर मिलेंगे ये 4 बड़े फायदे फ्यूल एफिशिएंसी (माइलेज) के सवाल पर सरकार ने साफ किया कि किसी भी गाड़ी का माइलेज ड्राइविंग कंडीशन, ड्राइवर की आदतों और गाड़ी के मेंटेनेंस पर निर्भर करता है। हालांकि, सरकार ने स्वीकार किया कि E10 (10% इथेनॉल) के लिए डिजाइन की गई कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज में करीब 3% से 5% तक की मामूली कमी आ सकती है। लेकिन इसके बदले E20 फ्यूल वाहन और पर्यावरण को कई फायदे देता है: फिलहाल 20% से ज्यादा ब्लेंडिंग का कोई फैसला नहीं राज्यसभा में जब मंत्री से पूछा गया कि क्या भविष्य में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% से आगे बढ़ाया जाएगा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आगे का कोई भी फैसला ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिसर्च संस्थानों के साथ गहन तकनीकी स्टडी के बाद ही लिया जाएगा। ----------------------------------------------------------------------------- E-20 पेट्रोल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रायपुर में E-20 पेट्रोल डालने से इंजन खराब:कंज्यूमर कोर्ट बोला- मारुति सुजुकी नई कार दे या 20 लाख लौटाए; देश का पहला मामला देशभर में पेट्रोल में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी बीच रायपुर में E20 पेट्रोल से कार के इंजन के खराब होने का मामला सामने आया है। इससे जुड़े मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि नई कार दी जाए या 20 लाख लौटाए जाएं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 20 Jul 2026 6:34 pm

हाइब्रिड कारों के लिए MG नई ADAPT टेक्नोलॉजी लाई:एक ही कार में 4 ड्राइव ऑप्शन मिलेंगे, दुनिया का पहला ई-क्लच भी पेश किया

JSW MG मोटर इंडिया ने अपना नया एडवांस्ड प्लेटफॉर्म 'ADAPT' यानी एडवांस्ड ड्राइव आर्किटेक्चर प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी रिवील कर दिया है। यह एक ऐसा न्यू एनर्जी व्हीकल प्लेटफॉर्म है, जिस पर कंपनी भविष्य में चार अलग-अलग तरह की गाड़ियां तैयार करेगी- इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड, रेंज-एक्सटेंडर और स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड। सबसे खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म पर सिर्फ इको-फ्रेंडली गाड़ियां ही बनेंगी, कोई भी प्योर पेट्रोल या डीजल कार नहीं बनाई जाएगी। कम पेट्रोल खपत के साथ 43% थर्मल एफिशिएंसी ADAPT प्लेटफॉर्म पर बेस्ड हाइब्रिड गाड़ियों में कंपनी एक नया नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन इस्तेमाल करेगी। कंपनी का दावा है कि यह इंजन पेट्रोल की कम खपत करेगा और इसकी थर्मल एफिशिएंसी 43% तक होगी। आमतौर पर पेट्रोल इंजनों की थर्मल एफिशिएंसी 20 से 35% के बीच ही होती है, ऐसे में MG का यह दावा काफी बेहतर माना जा रहा है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस इंजन के डिस्प्लेसमेंट (cc), सिलेंडरों की संख्या और पावर आउटपुट की जानकारी नहीं दी है, लेकिन यह साफ किया है कि इसे DHT (डायरेक्ट हाइब्रिड ट्रांसमिशन) के साथ जोड़ा जाएगा। दुनिया के पहले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ई-क्लच से लैस DHT इस डायरेक्ट हाइब्रिड ट्रांसमिशन (DHT) में दुनिया का पहला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ई-क्लच लगाया गया है। कंपनी का दावा है कि यह पारंपरिक क्लच यूनिट्स के मुकाबले 4 गुना तेजी से रिस्पॉन्स देता है। हाइब्रिड कारों में आमतौर पर दिखने वाले e-CVT गियरबॉक्स के मुकाबले यह DHT तकनीक ज्यादा जटिल है, जिसमें मैकेनिकल गियर्स का इस्तेमाल होता है। यह तकनीक गाड़ी को बेहतर टॉर्क डिलीवरी और पारंपरिक ड्राइविंग का अहसास देगी। इसके साथ ही इसमें 10-इन-1 ड्राइव यूनिट दी गई है, जिसमें परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर और 2-स्टेज रिडक्शन गियरबॉक्स को इंटीग्रेट किया गया है। यह यूनिट पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर के आउटपुट को मैनेज करके पहियों तक पहुंचाती है। 4 अलग-अलग मोड्स में चलेगी गाड़ी गाड़ी में दिए गए ये सभी पावरट्रेन कंपोनेंट्स और बैटरी मिलकर 4 अलग-अलग ड्राइविंग मोड्स में काम कर सकते हैं:

दैनिक भास्कर 20 Jul 2026 11:56 am

इंस्टाग्राम और फेसबुक की सर्विस ठप:दुनियाभर में 4000 से ज्यादा यूजर्स प्रभावित; बोले- न प्रोफाइल दिख रही, न लोड हो रही स्टोरीज

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम डाउन हो गया है। इसके अलावा फेसबुक और मैसेंजर पर भी यूजर्स को दिक्कत हो रही है। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, 4000 से ज्यादा लोगों ने इंस्टाग्राम में आ रही समस्याओं की शिकायत की है। वहीं, फेसबुक पर 3000 से अधिक यूजर्स ने शिकायत की। वहीं, मैसेंजर पर भी 100 से ज्यादा लोगों ने सर्विस में रुकावट की रिपोर्ट की है। यह आउटेज पूरी तरह से ग्लोबल है। हालांकि, भारतीय यूजर्स ने डाउन की कोई शिकायत नहीं की है। हालांकि, इस आउटेज की असली वजह क्या है, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। मेटा या इसकी व्यक्तिगत सर्विसेज की तरफ से यूजर्स को आ रही दिक्कतों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं आया है। X पर एक यूजर्स ने कहा- प्रोफाइल और स्टोरीज लोड नहीं हो रही कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी शिकायतें की हैं। एक इंस्टाग्राम यूजर ने बताया कि उनका फीड तो काम कर रहा है, लेकिन प्रोफाइल नहीं देख पा रहे हैं। दूसरे यूजर ने कहा कि होम पेज लोड नहीं हो रहा है और वे स्टोरीज पोस्ट नहीं कर पा रहे हैं। X पर एक यूजर ने लिखा, इंस्टाग्राम डाउन है। मुझे फीड पर सिर्फ वेलकम पेज दिख रहा है, कोई नया कंटेंट नहीं आ रहा। क्या चल रहा है? कुछ यूजर्स ने ब्लैंक फीड के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। फेसबुक पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल का एरर मैसेज दिख रहा फेसबुक यूजर्स को लॉग-इन और फीड में एरर का सामना करना पड़ रहा है। एक यूजर ने रात 2 बजे लिखा, फीड पर सिर्फ दो पोस्ट दिखे और फिर एरर आ गया, यह दोबारा लोड नहीं हो रहा है। UK से लेकर अमेरिका के टेनेसी तक के लोगों ने मेटा की इस सर्विस में आ रही दिक्कतों की शिकायत की है। कई यूजर्स को स्क्रीन पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल (यानी साइट में दिक्कत के कारण आपका अकाउंट अभी उपलब्ध नहीं है) का मैसेज मिल रहा है। एक यूजर ने पूछा कि वे मोबाइल पर तो फेसबुक एक्सेस कर पा रहे हैं, लेकिन लैपटॉप पर नहीं, क्या किसी और के साथ भी ऐसा हो रहा है?

दैनिक भास्कर 19 Jul 2026 4:06 pm

50MP टेलीफोटो लेंस वाला टेक्नो कैमॉन 50 अल्ट्रा लॉन्च:6.78-इंच डिस्प्ले, 6500mAh बैटरी और वाटरप्रूफ IP69K रेटिंग; शुरुआती कीमत ₹39999

टेक्नो ने भारत में अपना लेटेस्ट कैमरा-फोकस्ड स्मार्टफोन टेक्नो कैमॉन 50 अल्ट्रा लॉन्च किया है। फोन में सबसे खास 50 मेगापिक्सल का 3X टेलीफोटो लेंस है। इसके अलावा इसमें 6.78-इंच डिस्प्ले, 6500mAh बैटरी और वाटरप्रूफ IP69K रेटिंग मिलती है। फोन को 8GB रैम + 256GB स्टोरेज के सिंगल वैरिएंट के साथ पेश किया गया है और इसकी कीमत ₹39,999 रखी गई है। लॉन्च ऑफर में फोन पर 3 हजार रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। इसकी सेल 21 जुलाई से शुरू होगी। प्रीमियम डिजाइन, वजन और वाटर-डस्ट रेटिंग

दैनिक भास्कर 18 Jul 2026 8:50 pm

गूगल, सैमसंग और एपल हेल्थ में सेव करें मेडिकल रिकॉर्ड:फोन को ऐसे बनाएं हेल्थ असिस्टेंट, इमरजेंसी में मेडिकल ID आएगी काम

गूगल हेल्थ, सैमसंग हेल्थ और एपल हेल्थ जैसे एप्स में दवा का रिमाइंडर, मेडिकल रिकॉर्ड, इमरजेंसी आईडी और नींद जैसी जानकारियां एक ही जगह रख सकते हैं। ऐसे में जानिए इनके फायदे और कैसे करें इनका इस्तेमाल। ये सबसे जरूरी, इमरजेंसी मेडिकल आईडी बनाएं यह सबसे उपयोगी लेकिन सबसे कम इस्तेमाल होने वाले फीचर्स में से एक है। इसमें दर्ज कर सकते हैं - ब्लड ग्रुप, एलर्जी, पुरानी बीमारी, नियमित दवाएं, इमरजेंसी कॉन्टैक्ट, अगर किसी दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी में फोन लॉक हो, तब भी कई फोन में यह जानकारी लॉक स्क्रीन से देखी जा सकती है। इससे अगर किसी इमरजेंसी कंडीशन में अस्पताल पहुंचते हैं तो डॉक्टर या राहतकर्मियों को इलाज शुरू करने में मदद मिलती है। दवा का रिमाइंडर सेट करें, इससे डोज मिस नहीं होगी अगर आप रोजाना कोई दवा लेते हैं या घर में किसी बुजुर्ग को नियमित दवा लेनी होती है, तो फोन के हेल्थ एप में उसका नाम, डोज और समय दर्ज कर सकते हैं। फायदा - तय समय पर नोटिफिकेशन मिलेगा। - कौन-सी दवा कब ली, उसका रिकॉर्ड रहेगा। - अगर कोई डोज छूट गई हो, तो हिस्ट्री में दिख जाएगी। - यह फीचर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और थायरॉयड जैसी बीमारियों के मरीजों के लिए उपयोगी है। मेडिकल रिपोर्ट और हेल्थ रिकॉर्ड एक ही जगह रखें अक्सर ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, प्रिस्क्रिप्शन और डिस्चार्ज समरी अलग-अलग वॉट्सएप चैट, ईमेल या फोल्डर में बिखरी रहती हैं। हेल्थ एप में इन्हें व्यवस्थित रखा जा सकता है। यह सैमसंग-एपल जैसे डिवाइस में है। फायदा - इसमें सभी हेल्थ रिकॉर्ड्स सेव कर सकते हैं - ब्लड टेस्ट रिपोर्ट डाल सकते हैं - एक्स-रे और स्कैन रिकॉर्ड - डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन -वैक्सीनेशन रिकॉर्ड - एलर्जी और पुरानी बीमारी की जानकारी। एंड्रॉइड और आईफोन में इस तरह से इस्तेमाल करें गूगल हेल्थ या सैमसंग हेल्थ एप खोलें। प्रोफाइल बनाकर स्टेप ट्रैकिंग ऑन करें। इसके बाद दवा का शेड्यूल, मेडिकल रिकॉर्ड और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट जोड़ें। इसी तरह आईफोन में हेल्थ एप खोलें और ऊपर प्रोफाइल आइकन पर टैप करें। यहां मेडिकल आईडी सेट करें और हेल्थ से जुड़ी जरूरी जानकारी भरें। नींद, मूड और रोजमर्रा की आदतों पर रख सकते हैं नजर इन एप्स में सिर्फ शारीरिक गतिविधि ही नहीं, बल्कि आपकी दिनचर्या भी रिकॉर्ड की जा सकती है। ये एक्टिविटी रिकॉर्ड कर सकते हैं- कितनी देर सोए, दिनभर कैसा महसूस किया, पानी कितना पिया, वजन में बदलाव, मानसिक स्थिति, कुछ हफ्तों का डेटा जमा होने पर ऐप पैटर्न दिखाता है, जिससे समझ आता है कि किन दिनों आपकी दिनचर्या या नींद प्रभावित हुई। किस फोन में कौन-सा एप मिलेगा? फोन हेल्थ एप Android Google Health Samsung Samsung Health iPhone Apple Health - तीनों एप फ्री हैं और इनके अधिकांश जरूरी फीचर बिना अतिरिक्त शुल्क के इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

दैनिक भास्कर 18 Jul 2026 2:23 pm

भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की लॉन्चिंग आज:450 किमी की कक्षा में पेलोड तैनात करेगा; सोने से बने कलाम, साराभाई और सीवी रमन भी जाएंगे

हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस आज शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च करेगी। यह लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 11:30 बजे होगी। कंपनी ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km की पृथ्वी की निचली कक्षा तक जाएगा। सोने के कलाम, साराभाई और सीवी रमन भी जाएंगे इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है। इसके तहत विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ टेक्नोलॉजी से लेकर कला से जुड़े पेलोड्स अंतरिक्ष में ले जा रहा है: कॉमर्शियल और टेक्नोलॉजी पेलोड्स: 18 कैरेट सोने से बना आर्ट पीस भी स्पेस में जाएगा कॉस्मोस डायमंड्स की कलाकृति कॉस्मिक ब्लूम और एक खास माइक्रो-आर्ट पीस भी रॉकेट में भेजा जा रहा है। यह माइक्रो-आर्ट पीस 18 कैरेट सोने से बना छोटा सा रॉकेट है। इस पर वैज्ञानिक सर सी वी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं। हल्के कार्बन-कंपोजिट से बना है पूरा रॉकेट विक्रम-1 पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना पहला ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में पांच गुना हल्का होता है। इससे रॉकेट का वजन कम हो जाता है, जिससे इसकी ईंधन दक्षता बढ़ जाती है। रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल दिया गया है। 1. तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज: इसे आप रॉकेट के नीचे लगे तीन बेहद ताकतवर 'बूस्टर्स' की तरह समझ सकते हैं, जिनमें ठोस ईंधन जैसे बारूद की तरह का ठोस केमिकल भरा होता है. रॉकेट को जमीन से उठाकर आसमान की तरफ धकेलने के लिए शुरुआत में बहुत भारी ताकत की जरूरत होती है। ये तीनों सॉलिड स्टेज एक-एक करके जलते हैं और रॉकेट को शुरुआती धक्का देकर अंतरिक्ष की सीमा लो अर्थ ऑर्बिट के पास पहुंचा देते हैं। 2. लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल यह रॉकेट के ऊपरी हिस्से में लगा एक बेहद बारीक और स्मार्ट तरल ईंधन वाला छोटा इंजन होता है। जब रॉकेट अंतरिक्ष में पहुंच जाता है, तो वहां ठोस ईंधन काम नहीं आता क्योंकि उसे अपनी मर्जी से ऑन या ऑफ नहीं किया जा सकता। यहां 'लिक्विड मॉड्यूल' काम आता है। यह अंतरिक्ष में सैटेलाइट को सही दिशा देने, रॉकेट की रफ्तार कम-ज्यादा करने और सैटेलाइट को उसकी तय की गई कक्षा में 'एडजस्ट' यानी स्थापित करने का काम करता है। अब 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: 'स्काईरूट एयरोस्पेस' की शुरुआत कब और किस उद्देश्य से हुई थी? जवाब: स्काईरूट की शुरुआत करीब 8 साल पहले 2018 में हुई थी। इसे शुरू करने का मुख्य उद्देश्य भारत में ही बेहद किफायती और भरोसेमंद रॉकेट्स का निर्माण करना है, ताकि दुनिया भर के सैटेलाइट ऑपरेटर्स को ऑन-डिमांड और बजट-फ्रेंडली लॉन्चिंग सॉल्यूशंस दिए जा सकें। सवाल 2: इस रॉकेट का नाम 'विक्रम-1' क्यों रखा गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में 'विक्रम-1' रखा गया है। डॉ. साराभाई ने ही देश के स्पेस सेक्टर की मजबूत नींव रखी थी। स्काईरूट अपने सभी रॉकेट्स के नाम उनके सम्मान में इसी सीरीज पर रखती है। साल 2022 में लॉन्च किया गया पहला सबऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-एस' भी इसी सम्मान श्रृंखला का हिस्सा था। सवाल 3: इस लॉन्चिंग से भारत के स्पेस सेक्टर को क्या फायदे होंगे? जवाब: यह लॉन्चिंग भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए गेम चेंजर हो सकती है: सवाल 4: स्काईरूट के फाउंडर्स कौन हैं और उनका क्या कहना है? जवाब: स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना पवन कुमार चंदना (फाउंडर और सीईओ) और नागा भरत डाका (को-फाउंडर और सीओओ) ने मिलकर की है। सीईओ पवन कुमार चंदना ने कहा कि यह हमारी पहली टेस्ट फ्लाइट है और इससे हमें अंतरिक्ष की कक्षा में रॉकेट के व्यवहार का बेहद कीमती डेटा मिलेगा। सीओओ नागा भरत डाका ने कहा कि हमारा और हमारी पूरी टीम का आठ वर्षों का कठोर प्रयास आज इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में साकार हो रहा है। सवाल 5: साल 2022 में लॉन्च हुए 'विक्रम-एस' और इस नए 'विक्रम-1' रॉकेट में क्या अंतर है? जवाब: इन दोनों रॉकेट्स में तकनीक और क्षमता के स्तर पर बड़ा अंतर है: विक्रम S और विक्रम-1 में अंतर नॉलेज पार्ट: क्या होता है लो अर्थ ऑर्बिट यह पृथ्वी की सबसे निचली कक्षा होती है जो जमीन से लगभग 160 से 2,000 किमी की ऊंचाई पर स्थित होती है। ज्यादातर कॉमर्शियल और मौसम संबंधी सैटेलाइट इसी ऑर्बिट में चक्कर लगाते हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी इसी ऑर्बिट में 450 किमी की ऊंचाई पर स्थित है।

दैनिक भास्कर 18 Jul 2026 7:28 am

फरारी अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च, कीमत ₹4.6 करोड़:3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड, 15.6-इंच डिस्प्ले और ADAS जैसे फीचर्स

इटली की सुपरकार बनाने कंपनी फरारी ने आज भारत में नई कनवर्टिबल कार अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च की है। ये 15.6 इंच डिजिटल डिस्प्ले और ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स के साथ आई है। कंपनी का दावा है कि यह 3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड से दौड़ सकती है। कंपनी ने भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.6 करोड़ रुपए रखी है। यह अपने कूपे मॉडल की तुलना में करीब 52 लाख रुपए महंगी है, जिसकी मौजूदा कीमत 4.08 करोड़ रुपए है। नई अमाल्फी स्पाइडर की बुकिंग शुरू हो चुकी है। सेफ्टी फीचर्स: एडवांस्ड ADAS से लैस फरारी अमाल्फी में सुरक्षा के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) दिया गया है। इसमें अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा बेहतर ब्रेकिंग के लिए इसमें 296 GTB से इन्स्पायर्ड ABS इवो कंट्रोल यूनिट दी गई है।

दैनिक भास्कर 17 Jul 2026 2:29 pm

अमेरिका को टक्कर देने आया चीन का AI मॉडल:किमी K3 में इंसानों जैसी आंखें और दिमाग; कोडिंग और रिसर्च मिनटों में करेगा

चीनी कंपनी मूनशॉट AI ने अपना नया AI मॉडल किमी K3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स वाला दुनिया का पहला ओपन मॉडल है। इसमें 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है। पिछले मॉडल किमी K2 की तुलना में इसकी स्केलिंग दक्षता करीब 2.5 गुना बेहतर है। इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए एआई मॉडल एक इंसानी दिमाग की तरह है, जिसे एक बहुत बड़ी परीक्षा की तैयारी करनी है। 1. पैरामीटर्स क्या हैं? पैरामीटर्स को आप एआई का 'अनुभव' मान सकते हैं। एक बच्चा जब बड़ा होता है, तो वह जितनी ज्यादा बातें सीखता है, उसका दिमाग उतना ही तेज चलता है। एआई की दुनिया में जिस मॉडल के पास जितने ज्यादा पैरामीटर्स होते हैं, वह उतना ही समझदार माना जाता है। 28 लाख करोड़ पैरामीटर्स होने का मतलब है कि इस मॉडल का दिमाग बेहद विशाल है और यह बहुत ही पेचीदा और मुश्किल सवालों को इंसानों की तरह समझकर हल कर सकता है। 2. 3T क्लास क्या है? यहां 'T' का मतलब है ट्रिलियन। चूंकि इस मॉडल में 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स हैं, जो कि 3 ट्रिलियन (3.0T) के बेहद करीब है, इसलिए इसे '3T क्लास' का मॉडल कहा गया है। एआई की दुनिया में 3T क्लास में पहुंचना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इतने बड़े मॉडल अब तक सिर्फ अमेरिका की ओपन एआई जैसी चुनिंदा कंपनियों के पास ही थे। 3. 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो क्या है? कॉन्टेक्स्ट विंडो का मतलब है एआई की 'याददाश्त' या एक बार में पढ़ने की क्षमता। जब आप एआई से चैट करते हैं, तो वह एक बार में कितना लंबा पैराग्राफ या दस्तावेज याद रख सकता है, यही उसकी कॉन्टेक्स्ट विंडो है। उदाहरण: एक आम एआई मॉडल को अगर आप 5-10 पन्ने देंगे, तो वह उसे पढ़ लेगा, लेकिन पूरी किताब देने पर उसके हाथ-पैर फूल जाएंगे। किमी K3 की 10 लाख टोकन की क्षमता का मतलब है कि आप इसे पूरी की पूरी मोटी किताब, हजारों लाइनों का कंप्यूटर कोड या साल भर की बैंक स्टेटमेंट एक साथ दे दीजिए; यह एक सेकंड में उस पूरी जानकारी को दिमाग में रखकर आपको उसका सटीक विश्लेषण करके दे देगा। 4. स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर होने का क्या मतलब है? 'स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर' होने का मतलब है कि मूनशॉट कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर को इतना कुशल बना दिया है कि यह अपने पिछले मॉडल के मुकाबले ढाई गुना कम कंप्यूटर पावर और खर्चे में, उससे कहीं ज्यादा तेजी से और बड़ा काम कर सकता है। 5. 'ओपन मॉडल' होने का क्या फायदा है? अब तक अमेरिका की कंपनियां अपने इतने बड़े मॉडल्स को छुपाकर रखती हैं। इसे क्लोज्ड मॉडल कहते हैं। वे सिर्फ आपको इस्तेमाल करने देती हैं, लेकिन यह नहीं बतातीं कि इसे अंदर से कैसे बनाया गया है। चीन की कंपनी ने इसे 'ओपन मॉडल' रखा है। इसका मतलब है कि वह इस शक्तिशाली दिमाग की 'ब्लूप्रिंट' दुनिया भर के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और वैज्ञानिकों के लिए मुफ्त या खुले तौर पर जारी कर देगी। इससे दुनिया का कोई भी आम इंजीनियर इस एआई को लेकर अपने हिसाब से बदल सकता है, नया ऐप बना सकता है या अपने काम में इस्तेमाल कर सकता है। मूनशॉट 27 जुलाई को ओपन करेगा अपना सीक्रेट फॉर्मूला मूनशॉट AI ने ब्लॉग में बताया कि Kimi K3 को 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' पर बनाया गया है। इसमें नेटिव विजन क्षमताएं भी हैं। यह मॉडल कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग जैसे जटिल कामों के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसके फुल मॉडल वेट्स 27 जुलाई तक जारी कर दिए जाएंगे। 1. 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' क्या है? उदाहरण से समझिए: जब आप कोई बहुत मोटी किताब पढ़ते हैं, तो क्या आप हर एक शब्द पर बराबर ध्यान देते हैं? नहीं। आपका दिमाग केवल मुख्य शब्दों और जरूरी लाइनों पर 'अटेंशन' देता है और फालतू शब्दों को छोड़ देता है। फायदा: मूनशॉट AI ने 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' नाम का जो नया फॉर्मूला बनाया है, वह इस एआई को यही सुपर पावर देता है। जब आप इसे बहुत बड़ा काम या लाखों शब्दों की फाइल देते हैं, तो यह तकनीक एआई के दिमाग को भटकने नहीं देती। यह केवल सबसे जरूरी पॉइंट पर फोकस करती है और पुरानी पढ़ी हुई बातों का 'असर' (रेजिड्यूल्स) दिमाग में बनाए रखती है। इससे एआई बिना थके और बिना गलती किए बहुत तेजी से काम कर लेता है। 2. ‘नेटिव विजन क्षमताएं’ क्या हैं? उदाहरण से समझिए: पहले के एआई सिर्फ टेक्स्ट समझ सकते थे। अगर आप उन्हें फोटो दिखाते, तो उन्हें पहले उस फोटो को शब्दों में बदलना पड़ता था, तब वो समझ पाते थे। लेकिन 'नेटिव विजन' का मतलब है कि Kimi K3 के पास देखने की क्षमता है। फायदा: आप इसे कोई फोटो, कोई पेचीदा ग्राफ, मेडिकल स्कैन (जैसे एक्स-रे या एमआरआई) या कोई वीडियो दिखाएंगे, तो यह उसे इंसानी आंखों की तरह देखकर तुरंत समझ जाएगा और उस पर आपके सवालों के जवाब दे देगा। 3. कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग का क्या मतलब है? कंपनी का कहना है कि यह मॉडल तीन बड़े काम करेगा: लॉन्ग-होराइजन कोडिंग : इसका मतलब सिर्फ छोटा-मोटा कोड लिखना नहीं है। यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की तरह एक साथ हजारों लाइनों का पूरा का पूरा बड़ा कंप्यूटर प्रोग्राम या ऐप खुद लिख सकता है और उसमें कमियां ढूंढकर ठीक कर सकता है। नॉलेज वर्क: यह रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और बड़े वकीलों की तरह काम कर सकता है। सालों पुरानी फाइलों को खंगालना, बड़े कानूनी मामलों का विश्लेषण करना या किसी विषय पर पूरी रिसर्च रिपोर्ट तैयार करना इसके लिए चुटकियों का काम है। रीजनिंग: इसका मतलब है 'सोचने-समझने और तर्क करने की क्षमता'। यह सिर्फ रटी-रटाई बातें नहीं बताएगा, बल्कि इंसानों की तरह गणित के मुश्किल सवालों या बिजनेस की उलझनों में 'अगर-मगर' लगाकर सही फैसला लेने में मदद करेगा। अमेरिका के लेटेस्ट AI मॉडल्स से पीछे है Kimi K3 कंपनी ने माना कि Kimi K3 का प्रदर्शन अमेरिका के क्लॉड फेबल 5 और GPT 5.6 Sol जैसे मॉडल्स से पीछे है। हालांकि, कई बेंचमार्क टेस्ट में इसने अमेरिका के पुराने मॉडल्स को पीछे छोड़ दिया है। मूनशॉट AI को चीनी कंपनी अलीबाबा और टेनसेंट का समर्थन हासिल है। चीनी फर्मों ने 24 हजार फर्जी अकाउंट बनाकर चुराया डेटा इसी बीच, अमेरिकी कंपनियों ने चीनी फर्मों के सस्ते में मॉडल जारी करने पर चिंता जताई है। एंथ्रोपिक ने आरोप लगाया है कि डीपसीक, मूनशॉट और मिनीमैक्स ने उनके मॉडल की क्षमताओं को अवैध रूप से निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए। एंथ्रोपिक के मुताबिक, करीब 24,000 फर्जी खातों से 1.6 करोड़ बार क्लॉड का इस्तेमाल किया गया।

दैनिक भास्कर 17 Jul 2026 12:41 pm

एयर इंडिया का नया एप लॉन्च:फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर होम स्क्रीन पर फ्री होटल-कैब की डिटेल मिलेगी, पेमेंट भी आसान होगा

एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। ऐसी किसी भी स्थिति में होटल में ठहरने और वहां तक जाने के लिए कैब की पूरी जानकारी सीधे एप की होम स्क्रीन पर ही मिलेगी। इसके साथ ही एप के पेमेंट सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है, जिससे टिकट बुक करना और पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इन-हाउस बुकिंग इंजन से तेजी से बुक होंगे टिकट हर दिन 1 लाख से ज्यादा लोग करते हैं एप का इस्तेमाल एअर इंडिया के मुताबिक, एप अब तक करीब 1.7 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके साथ ही, रोजाना 1 लाख से ज्यादा यात्री अपनी यात्रा से जुड़े कामों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी का मानना है कि नया अपग्रेड ग्राहकों की जरूरतों पर तुरंत रिस्पॉन्स देने में मदद करेगा। टाटा ने अब तक 140 से ज्यादा डिजिटल सिस्टम बदले घाटे में चल रही एअर इंडिया को जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप ने खरीदा था। इसके बाद से ही एयरलाइन के कायाकल्प के लिए एक बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन प्लान चलाया जा रहा है। टाटा ग्रुप के टेकओवर करने के बाद से अब तक कंपनी के 140 से अधिक डिजिटल सिस्टम्स को पूरी तरह से आधुनिक और अपग्रेड किया जा चुका है। एप का यह नया अपडेट भी इसी डिजिटल सुधार प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया दुनिया की चौथी ऑन-टाइम एयरलाइन बनी: जून में 86.85% फ्लाइट्स टाइम पर पहुंचीं; सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा टाटा ग्रुप की एअर इंडिया दुनिया की चौथी सबसे पंक्चुअल (समय की पाबंद) एयरलाइंस बन गई है। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया की लगभग 86.85% फ्लाइट्स यानी 100 में से 87 उड़ानें बिल्कुल तय समय पर पहुंची हैं। टाटा ग्रुप की स्वामित्व वाली एयरलाइन ने जून महीने में अपनी कुल 15,135 उड़ानें ऑपरेट कीं। एअर इंडिया ने सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा है। एविएशन के नियमों के मुताबिक, कोई फ्लाइट अपने तय समय से 15 मिनिट में उड़ान भर लेती है, तो उसे राइट टाइम माना जाता है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 17 Jul 2026 9:57 am

इंस्टाग्राम पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का खेल:एडिट फीचर से बैकडेट की जा रहीं पोस्ट; दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे दो डिजिटल क्रिएटर्स

इंस्टाग्राम पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए मेटा के कॉपीराइट सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अज्ञात लोग फेसबुक के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पोस्ट की तारीख बैकडेट में कर देते हैं और फिर असली क्रिएटर्स के कंटेंट पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक भेज रहे हैं। इस खेल के खिलाफ दो बड़े डिजिटल क्रिएटर्स पुष्कर राज ठाकुर और नीरज जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट में कॉमर्शियल सूट फाइल किया है। क्रिएटर्स ने कोर्ट में क्या आरोप लगाए? फाइनेंशियल एजुकेटर पुष्कर राज ठाकुर और डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी ने अलग-अलग दायर याचिकाओं में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ अज्ञात लोग ओरिजिनल क्रिएटर्स को परेशान करने और उनके अकाउंट बंद कराने की धमकी देने के लिए फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक को हथियार बना रहे हैं। इस सिस्टम के चलते उनके ओरिजिनल कंटेंट को डिलीट करने या उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को सस्पेंड/डिलीट करने का खतरा पैदा हो गया है। मेटा के ऑटोमेटेड सिस्टम पर उठे सवाल क्रिएटर्स का तर्क है कि मेटा का ऑटोमेटेड कॉपीराइट सिस्टम बिना किसी गहन जांच के काम कर रहा है। यह सिस्टम वीडियो के असली क्रिएटर, मेटाडेटा, एडिट हिस्ट्री या वास्तविक पब्लिशिंग क्रोनोलॉजी (अपलोड करने का सही समय) की जांच किए बिना ही स्ट्राइक की शिकायतों पर एक्शन ले लेता है। पुष्कर राज ठाकुर ने बताया कि इस फर्जी खेल की वजह से उनके दर्जनों वीडियो को हटा दिया गया, डिसेबल किया गया या रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि मेटा ने ठाकुर को अपने 'राइट्स मैनेजर' टूल का एक्सेस देने से मना कर दिया, जबकि जालसाज इसी टूल का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ लगातार फर्जी स्ट्राइक भेजते रहे। नीरज जोशी के केस में कोर्ट का आदेश डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी के मामले में 9 जुलाई को जस्टिस ज्योति सिंह की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मेटा के उस बयान को रिकॉर्ड किया, जिसमें कंपनी ने कहा कि अगर जोशी का अकाउंट अभी तक स्थायी रूप से बंद नहीं हुआ है, तो वे इन आरोपों की जांच करेंगे और उनके वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट (@Neerajjoshi5014) को सुरक्षित रखेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्ते के भीतर नीरज जोशी को संबंधित बेसिक सब्सक्राइबर इंफॉर्मेशन (BSI) और आईपी (IP) लॉग उपलब्ध कराए। इन जानकारियों से उन अज्ञात लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जो उनके अकाउंट के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। मामले में समन जारी कर दिए गए हैं और जोशी की अंतरिम रोक वाली अर्जी पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। पुष्कर राज ठाकुर के केस में क्या हुआ? जस्टिस तुषार राव गेडेला ने 29 मई को पुष्कर राज ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मेटा से पूछा था कि उसने अपने प्लेटफॉर्म के इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं या वह क्या उपाय कर सकती है। इसके बाद 1 जुलाई को यह मामला जस्टिस अनूप जयराम भंभानी के सामने आया। सुनवाई के दौरान मेटा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक ठाकुर के वीडियो को कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर नहीं हटाया जाएगा। साथ ही बार-बार आ रही कॉपीराइट स्ट्राइक की वजह से उनका अकाउंट भी बंद नहीं किया जाएगा। मेटा ने यह भी सहमति दी कि जैसे ही ठाकुर उन्हें हटाए गए वीडियो के यूआरएल (URLs) सौंपेंगे, वे उन वीडियो को रिस्टोर कर देंगे। कोर्ट ने इन आश्वासनों को दर्ज करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई तय की है। क्रिएटर्स ने मेटा से मांगा ₹2 करोड़ का मुआवजा पुष्कर राज ठाकुर ने कोर्ट से मांग की है कि मेटा को उनके ओरिजिनल कंटेंट को ऐसे फर्जी और बैकडेटेड दावों के आधार पर हटाने से रोका जाए। उन्होंने कंपनी को राइट्स मैनेजर टूल के भीतर केवाईसी (KYC) सुरक्षा उपाय, टाइमस्टैम्प सुरक्षा, मेटाडेटा वेरिफिकेशन और एंटी-मैनिपुलेशन प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश देने की भी मांग की है। इसके अलावा, ठाकुर ने उनके फॉलोअर्स घटने, मोनेटाइजेशन के मौके गंवाने, स्पॉन्सरशिप के नुकसान और उनकी कॉमर्शियल साख को ठेस पहुंचने के एवज में मेटा और अज्ञात जालसाजों से लगभग ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। इस तरह के मामलों ने डिजिटल क्रिएटर्स के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ओरिजिनल कंटेंट की सुरक्षा के लिए बने कॉपीराइट टूल्स का इस्तेमाल अब खुद क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इस विषय को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी पेंडिंग है। क्या है मेटा का राइट्स मैनेजर और कॉपीराइट स्ट्राइक ये खबर भी पढ़ें… IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च: सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट' फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 16 Jul 2026 2:41 pm

IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च:सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट' फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा

भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। इस बड़े बदलाव को समझने के लिए पूरी खबर पढ़ें इस खास QA रिपोर्ट में… सवाल 1: IRCTC की इस नई वेबसाइट को लेकर क्या अपडेट आया है? जवाब: IRCTC की वेबसाइट का बीटा वर्जन 15 जुलाई 2026 को रात 9 बजे से लाइव हो गया है। पिछले महीने जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के दौरे पर गए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छात्रों से बातचीत के दौरान यह घोषणा की थी कि 15 जुलाई तक IRCTC की नई वेबसाइट लॉन्च कर दी जाएगी। सवाल 2: आम यात्रियों के लिए नई बीटा वेबसाइट में कौन से बड़े सुधार किए हैं? जवाब: रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत के लिए मुख्य रूप से चार बड़े तकनीकी सुधार किए गए हैं: सवाल 3: बीटा वेबसाइट एक्सेस कैसे होगी और इसका लिंक कहां मिलेगा? जवाब: यात्री https://www.irctc.co.in/eticket/ पर जाकर नए पोर्टल का अनुभव ले सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग IRCTC की पुरानी या मौजूदा होमपेज वेबसाइट पर जा रहे हैं, उन्हें भी मुख्य पेज पर ही नई बीटा वेबसाइट पर जाने के लिए सीधा लिंक उपलब्ध करा दिया गया है। सवाल 4: बीटा वर्जन जारी करने के पीछे रेलवे का असली मकसद क्या है? जवाब: बीटा वर्जन लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य आम यात्रियों से फीडबैक और सुझाव लेना है। रेल यात्री नई वेबसाइट का इस्तेमाल करके इसके फीचर्स पर अपनी राय दे सकेंगे। इस फीडबैक के आधार पर आने वाले समय में वेबसाइट में और जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि कस्टमर सेटिस्फेक्शन बढ़ सके। सवाल 5: IRCTC वेबसाइट पर कितना लोड है, जिसके चलते बदलाव की जरूरत पड़ी? जवाब: साल 2002 में लॉन्च की गई IRCTC वेबसाइट देश के सबसे व्यस्त ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है। पहले इसपर ट्राफिक कम था, लेकिन वर्तमान में इस वेबसाइट के जरिए रोजाना औसतन 14.5 लाख ट्रेन टिकट बुक किए जाते हैं। इतने बड़े यूजर बेस को बिना किसी रुकावट तेज सर्विस देने और तकनीकी रूप से अप-टू-डेट रखने के लिए इस वेबसाइट के पूरे ढांचे को अपग्रेड करना जरूरी हो गया था। सवाल 6: क्या यह बदलाव सिर्फ वेबसाइट के डिजाइन तक सीमित है? जवाब: नहीं, यह सिर्फ बाहरी डिजाइन का बदलाव नहीं है। भारतीय रेलवे इसके साथ ही अपने बैकएंड सिस्टम को भी बदल रहा है। दशकों पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन को समानांतर रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। सवाल 7: पुराना पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन बदलने में क्या चुनौतियां आ रही हैं? जवाब: रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस पूरे अपग्रेडेशन के दौरान ट्रेन टिकट बुकिंग की लाइव सर्विस को एक मिनट के लिए भी बंद नहीं किया जा सकता था। चालू सिस्टम के साथ ही बैकएंड में यह काम करना काफी चुनौतीपूर्ण था। नया पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन भी जल्द लॉन्च कर दिया जाएगा। सवाल 8: नई वेबसाइट पूरी तरह से फंक्शनल कब तक हो जाएगी? जवाब: चूंकि पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन और नई वेबसाइट दोनों पर एक साथ काम चल रहा है, इसलिए रेलवे ने स्पष्ट किया है कि बीटा वर्जन से यूजर फीडबैक लेने और इंजन का काम पूरा होने के बाद, अगले कुछ हफ्तों के भीतर पूरी तरह से फंक्शनल नया IRCTC पोर्टल सभी के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। तब तक यात्री बीटा वर्जन का इस्तेमाल कर सकते हैं और पुराने पोर्टल से भी सामान्य बुकिंग जारी रख सकते हैं। रीडर्स के लिए टिप्स: नई वेबसाइट पर फीडबैक कैसे दें?

दैनिक भास्कर 16 Jul 2026 10:42 am

Ai+ की नई स्मार्टफोन सीरीज नोवा 2 लॉन्च:कलर बदलने वाली कस्टमाइजेबल लाइट्स और 6000mAh बैटरी; शुरुआती कीमत ₹12,999

टेक ब्रैंड Ai+ ने भारत में दो नए बजट-फ्रेंडली 5G स्मार्टफोन नोवा 2 प्रो और नोवा 2 नियो लॉन्च किए हैं। कंपनी ने दोनों ही हैंडसेट्स को 15 हजार रुपए की रेंज में उतारा है। इस सीरीज में सबसे खास नोवा 2 प्रो है, जिसके बैक पैनल पर कस्टमाइजेबल LED लाइट्स दी गई हैं, जो फोन में आने वाले कॉल, मैसेज और नोटिफिकेशन्स के हिसाब से अपना कलर बदलती हैं। इसके अलावा दोनों ही डिवाइसेज में हैवी पावर बैकअप के लिए 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। Ai+ ने दोनों स्मार्टफोन को दो-दो वैरिएंट्स में पेश किया है। नोवा 2 नियो की कीमत 12,999 रुपए से शुरू होती है। वहीं, नोवा 2 प्रो की शुरुआती कीमत 15,999 है। नोवा 2 प्रो पर ₹1000 का बैंक डिस्काउंट मिलेगा। Ai+ नोवा 2 प्रो: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: नोवा 2 प्रो में 2340x1080 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.9-इंच की फुल HD+ स्क्रीन दी गई है। यह डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट और 800nits की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए इस पर 2.5D ग्लास की लेयर दी गई है। फोन की थिकनेस 8.2mm और वजन 213 ग्राम है। इसके बैक पैनल पर कस्टमाइजेबल LED लाइट्स लगी हैं, जो कॉल या मैसेज आने पर ब्लिंक करती हैं। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप है। इसमें 48 मेगापिक्सल का मेन सोनी IMX582 सेंसर है, जो 8 मेगापिक्सल अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस के साथ मिलकर काम करता है। सेल्फी के लिए 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: फोन एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड नेक्स्ट क्वांटम OS पर चलता है। इसमें 6 नैनोमीटर फेब्रिकेशन पर बना मीडियाटेक डायमेंसिटी 7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 2.4 गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन करता है। ग्राफिक्स के लिए माली-G610 जीपीयू है। बैटरी और अन्य फीचर्स: इसमें 33W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 6000mAh की बैटरी दी गई है। फोन में स्टीरियो स्पीकर्स, 3.5mm हेडफोन जैक, FM रेडियो और साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर जैसी सुविधाएं हैं। पानी और धूल से बचाव के लिए इसे IP65 रेटिंग मिली है। Ai+ नोवा 2 नियो: स्पेसिफिकेशन्स डिस्प्ले: नोवा 2 नियो 5G में 720 x 1600 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.74-इंच की HD+ डिस्प्ले दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 600nits ब्राइटनेस सपोर्ट करती है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके रियर पैनल पर 48 मेगापिक्सल का सोनी IMX582 लेंस के साथ डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जबकि फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा लगा है। इस बजट फोन में भी सुरक्षा के लिए IP65 की रेटिंग दी गई है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: परफॉर्मेंस के लिए नोवा 2 नियो में 6 नैनोमीटर वाला मीडियाटेक डायमेंसिटी 6300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर और आर्म माली-G57 MC2 जीपीयू दिया गया है। यह फोन भी एंड्रॉयड 16 बेस्ड नेक्स्ट क्वांटम OS पर काम करता है। बैटरी: पावर बैकअप के लिए इसमें भी 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। यह 18W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

दैनिक भास्कर 15 Jul 2026 11:30 am

मोटो G77 पावर 5G स्मार्टफोन लॉन्च, कीमत ₹23,999:50MP सोनी कैमरा और 24GB तक की रैम के साथ 7000mAh बैटरी, सिंगल चार्ज में 3 दिन चलेगा

मोटोरोला ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन मोटो G77 पावर लॉन्च कर दिया है। फोन में सबसे खास 7000mAh की बड़ी बैटरी और रैम बूस्ट टेक्नोलॉजी है, जो वर्चुअल रैम के जरिए फोन को 24GB रैम की ताकत देती है। मोटोरोला ने इसे 50 मेगापिक्सल सोनी कैमरा और मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6400 प्रोसेसर के साथ उतारा है। मोटो G77 पावर को 8GB रैम और 128GB स्टोरेज के सिंगल वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 25,999 रुपए है। कंपनी फोन पर लॉन्च ऑफर में 2 हजार रुपए का डिस्काउंट दे रही है, जिससे इसे 23,999 में खरीदा जा सकेगा। फोन ऑफिशियल वेबसाइट और ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए अवेलेबल है। डिजाइन और बिल्ड: प्रीमियम प्लास्टिक-पॉलीकार्बोनेट मटीरियल डिस्प्ले: 6.72-इंच का फुल HD+ स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट फोन में 2400 1080 पिक्सल रेजोल्यूशन वाला 6.72-इंच का फुल HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट और 1050nits की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है, जिससे आउटडोर या तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है। डिस्प्ले की सेफ्टी के लिए इस पर गोरिल्ला ग्लास 7i का प्रोटेक्शन दिया गया है। परफॉर्मेंस: मीडियाटेक डायमेंसिटी 6400 ऑक्टाकोर प्रोसेसर कैमरा: 50 मेगापिक्सल का सोनी LYT600 सेंसर पावर बैकअप: 7000mAh के साथ 3 दिन का बैकअप अन्य फीचर्स: डुअल-बैंड वाई-फाई और GPS कनेक्टिविटी के लिए इसमें मजबूत 5G नेटवर्क सपोर्ट, लेटेस्ट ब्लूटूथ, डुअल-बैंड वाई-फाई, GPS और चार्जिंग व डेटा ट्रांसफर के लिए टाइप-C पोर्ट दिया गया है। बेहतर ऑडियो एक्सपीरियंस के लिए इसमें स्टीरियो स्पीकरों के साथ 3.5mm का ऑडियो जैक भी बरकरार रखा गया है।

दैनिक भास्कर 14 Jul 2026 6:17 pm

ओप्पो एनको एयर 5 रिव्यू:बजट सेगमेंट में 54 घंटे का बैकअप, 52dB नॉइज कैंसिलेशन और हाइब्रिड ANC जैसे फीचर

ओप्पो ने बजट सेगमेंट में नया इयरबड्स एनको एयर 5 लॉन्च किया है। जिन लोगों को कम प्राइस रेंज में एक अच्छा बेस, स्मार्टफोन के साथ अच्छी कनेक्टिविटी, डुअल पेयरिंग और इन-इयर डिटेक्शन जैसे फीचर्स चाहिए, तो उन्हें ये सभी इस इयरबड में मिल जाएंगी। हमने इसका ENC टेस्ट किया, बहुत सारे गाने सुने और मूवीज भी देखीं हैं, तो चलिए इसके साउंड प्रोफाइल के बारे में जानते हैं... केस, डिजाइन और कंफर्ट इसके केस का शेप काफी अच्छा है और हाथ में यह हल्का सा सॉफ्ट फील होता है, जिससे वह सस्ते प्लास्टिक वाली फील नहीं देता। फ्रंट में आपको एक LED लाइट है, नीचे टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट और एक रिसेट बटन दिया गया है। इयरबड्स काफी कॉम्पैक्ट और लाइटवेट हैं। पहनने पर इनका लुक बढ़िया आता है और इसकी इयरटिप कानों में कंफर्टेबली फिट हो जाती है। इसके साथ हमने पूरी मूवी देखी और गाने सुने लेकिन, कानों में जरा भी दर्द या चुभन महसूस नहीं हुई। शार्प मूवमेंट या अचानक सिर हिलाने पर भी ये कानों से गिरते नहीं हैं। यानी आप इसे जिम में वर्कआउट या रनिंग के दौरान आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। ये इयरबड्स IP55 की रेटिंग के साथ आते हैं, जो इसे पानी और पसीने से भी सेफ रखते हैं। एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन और माइक ओप्पो एनको एयर 5 में 12mm का ड्राइवर मिलता है। साथ ही इसमें 3+ 3 (टोटल 6) माइक्रोफोन्स दिए गए हैं, जिससे यह इयरबड अप टू 52dB तक का शोर कैंसिल कर देता है। साल 2026 के हिसाब से यह अच्छा नॉइज कैंसिलेशन है। यह सिर्फ नॉर्मल एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन के साथ नहीं आता, बल्कि इसमें हाइब्रिड एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन मिलता है। इसका फायदा यह है कि आप खुद सिलेक्ट कर सकते हैं कि आपको बाहर की आवाज को कितना कम करना है- हाई, मीडियम या लो। इसमें एक ऑटो ANC का फीचर भी है। इसे सेट करने के बाद आप चाहे घर पर हों, बाहर घूम रहे हों या ट्रेन में सफर कर रहे हों, यह 6 माइक्रोफोन्स की मदद से ऑटोमेटिकली बाहर के शोर को डिटेक्ट करके उसके हिसाब से नॉइज कैंसिलेशन को एडजस्ट कर लेता है। हमारी टेस्टिंग के दौरान हर स्टेज पर इसका नॉइज कैंसिलेशन साफ महसूस हो रहा था और यह बहुत अच्छी तरह काम करता है। कनेक्टिविटी, स्मार्ट फीचर्स और बैटरी लाइफ यह इयरबड AAC को सपोर्ट करता है और इसमें डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी मिलती है, यानी आप एक साथ दो डिवाइस को पेयर कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें इन-इयर डिटेक्शन का फीचर भी है, जो मूवीज या कोई भी कंटेंट देखते समय कान से निकालते ही वीडियो पॉज हो जाता है। इस बार ओप्पो ने बैटरी भी इंप्रूव की है। केस में 530mAh और हर एक इयरबड में 62mAh की बैटरी मिलती है। अगर पावर बैकअप की बात करें, तो बिना ANC यूज किए सिंगल इयरबड करीब 13 घंटे का बैकअप दे देता है और केस के साथ 54 घंटे का एप्रोक्सिमेट बैकअप मिलता है। अगर आप ANC ऑन करके भी यूज करते हैं, तो इयरबड करीब 6 घंटे चल जाता है, जिसमें आप बिना रुके दो मूवी देख सकते हैं। गेमर्स के लिए इसमें एक डेडिकेटेड गेम मोड भी है, जो शूटिंग गेम्स खेलते वक्त गनशॉट्स जैसी ऑडियो को एनहांस कर देता है। साउंड क्वालिटी और बेस अब बात करते हैं सबसे जरूरी चीज यानी इसके साउंड की। सबसे पहले वॉल्यूम की बात करें तो फुल वॉल्यूम पर भी आवाज बिल्कुल फटती नहीं है और कोई क्रैकलिंग साउंड सुनाई नहीं देती। ओप्पो ने इसकी ट्यूनिंग बहुत अच्ची की है। एप के प्रीसेट्स- जैसे अल्टीमेट साउंड, वोकल्स और बेस सभी अच्छे से काम करते हैं। 'अल्टीमेट साउंड' पर बाय-डिफॉल्ट ऑडियो काफी एनहांस होकर आती है। अगर आप न्यूज देख रहे हैं, तो वोकल्स प्रोफाइल सिलेक्ट कर सकते हैं, जिससे आवाज साफ हो जाती है। मूवी देखते समय 'थंडरिंग बेस' सिलेक्ट करने पर बेस का लेवल काफी बढ़ जाता है। इयरबड्स में आपको हैवी बेस मिलता है। इसके अलावा, जिन्हें अपना पर्सनल साउंड कस्टमाइज करना पसंद है, उनके लिए एप में इक्वलाइजर का ऑप्शन भी दिया गया है। कमियां: वॉल्यूम कंट्रोल फीचर इसमें सिर्फ एक चीज पसंद नहीं आई, वो है इसका वॉल्यूम कंट्रोल करने का तरीका। आमतौर पर प्रीमियम इयरबड्स में स्वाइप कंट्रोल होता है या फिर एक साइड टैप करने से वॉल्यूम कम और दूसरी साइड से बढ़ता है। लेकिन, इसमें वॉल्यूम कम या ज्यादा करने के लिए आपको इयरबड को लॉन्ग-प्रेस करके होल्ड रखना पड़ता है, जो मुझे थोड़ा टाइम-कंज्यूमिंग और अजीब लगा। निष्कर्षवॉल्यूम कंट्रोल के अलावा मुझे इस इयरबड में कोई कमी नहीं दिखी। जिस साउंड प्रोफाइल और बेहतरीन फीचर्स के साथ ओप्पो एनको एयर 5 आता है, वह इस बजट में वाकई टॉप-नॉच है।

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 7:25 pm

एआई का दौर; करियर की चिंता और हकीकत:सुरक्षित रहेंगी ये नौकरियां- डॉक्टर, टीचर, वकील और कारीगरों को खतरा नहीं

एआई के दौर में करियर सुरक्षित रखने की चिंता स्वाभाविक है। विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा, कानून, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों में जहां मानवीय निर्णय, संवेदनशीलता और कुशल कारीगरी की जरूरत है, वहां नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा एआई को लेकर एक अलग ट्रेंड भी है। टॉप यूनिवर्सिटी के होनहार छात्र अब मोटी सैलरी वाली नौकरियों को छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के छात्र चार्ल्स म्यूलबर्गर ने बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप करने के बजाय खुद का एआई स्टार्टअप शुरू किया है। एआई के चलते डेटा व तकनीक से जुड़ी नौकरियों में तेजी आएगी, जहां हाथों के हुनर की जरूरत है वहां नौकरी जाने का खतरा नहीं चिकित्सा - इलाज के फैसले लेने वाली नौकरियां सुरक्षित फार्मासिस्ट हीरा मलिक के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में दफ्तर का काम, दवाइयों की पर्ची बनाना और कॉल उठाना जैसे काम एआई से प्रभावित हो सकते हैं, पर डॉक्टरों और नर्सों की जरूरत बनी रहेगी। डॉ. रियाज आगा के मुताबिक प्लास्टिक सर्जरी सुरक्षित है। शिक्षा - पढ़ाई और बच्चों की देखभाल में इंसानी जरूरत शिक्षा में एआई टीचर्स की जगह लेने पर नहीं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जनरेशनल सक्सेस लैब के फाउंडर शरथ जीवन कहते हैं कि छात्रों को सीखने के लिए भरोसेमंद वयस्क रिश्तों की जरूरत हमेशा रहेगी। चाइल्डकेयर एक्सपर्ट विगडॉर्ट्ज के मुताबिक बच्चे की देखभाल के लिए लोग इंसान ही चाहते हैं। कारीगरी - हाथों से होने वाला काम हमेशा सुरक्षित रहेगा फेडरेशन ऑफ मास्टर बिल्डर्स के सीईओ ब्रायन बेरी का कहना है कि निर्माण क्षेत्र में एआई का असर सीमित है। राजमिस्त्री, बढ़ई और प्लास्टर जैसे हाथों के हुनर हमेशा सुरक्षित रहेंगे। हमें इस क्षेत्र के बारे में सोच बदलनी होगी क्योंकि ये काम एआई से ज्यादा भरोसेमंद हैं। बैंकिंग-फाइनेंस - रूटीन जॉब्स पर असर, डेटा और एआई रोल बढ़ेंगे ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के सीनियर बैंकिंग एनालिस्ट टोमाश नोएट्जेल के मुताबिक, बैंकिंग में ग्राहकों की सामान्य सेवा और दफ्तर के दोहराव वाले काम एआई की चपेट में आएंगे। हालांकि, डेटा और तकनीक से जुड़े रोल बढ़ेंगे। जोखिम परखने और फैसले लेने वाले काम सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि बैंकों को इन पर भी इंसान की निगरानी की जरूरत है।

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 1:12 pm

आइटेल A100 प्रो रिव्यू:मिलिट्री ग्रेड बॉडी के साथ ₹8,999 में रफ यूज के लिए बजट फ्रेंडली फोन, बिना सिग्नल कॉल कर सकेंगे

टेक ब्रांड आइटेल ने भारत में नया बजट स्मार्टफोन 'आइटेल A100 प्रो' लॉन्च किया है। यह इस साल फरवरी में आए A100 का अपग्रेडेड वर्जन है। फोन 100 दिन की फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट वारंटी के साथ आया है, जो कई महंगे फोन के साथ भी नहीं मिलती है। तो चलिए जानते हैं इसमें क्या खास है... डिजाइन: पत्थर पर भी गिरने के बाद फोन सेफ रहेगा सबसे पहले बात करें इसके डिजाइन की तो, पहली नजर में फोन प्रीमियम नजर आता है। बैक पैनल पर टेक्स्चर है, जिससे हाथ में सॉलिड ग्रिप बनती है। फोन मिलिट्री ग्रेड सर्टिफाइड है, यानी पत्थर पर भी गिरने के बाद ये सेफ रहेगा। पोर्ट्स और स्विच की बात करें, तो दाईं तरफ पावर और वॉल्यूम बटन्स हैं। ऊपर की तरफ आपको IR ब्लास्टर मिलता है, जिससे आप अपने घर का TV या एसी कंट्रोल कर सकते हैं। और हां, म्यूजिक लवर्स के लिए 3.5mm का ऑडियो जैक भी मौजूद है। डिस्प्ले: 90Hz रिफ्रेश रेट से स्क्रॉलिंग, एप ओपनिंग अच्छी बात करें इसके डिस्प्ले की तो। यहां 6.6-इंच की बड़ी HD+ IPS LCD स्क्रीन मिलती है, जो 90Hz के रिफ्रेश रेट के साथ आती है, जिससे स्क्रॉलिंग और एप ओपनिंग का एक्सपीरियंस काफी स्मूथ मिलता है। फ्रंट में वॉटरड्रॉप नॉच है। बेजल्स साइड से तो पतले हैं, लेकिन नीचे की तरफ थोड़े चौड़े हैं, जो इस बजट में नॉर्मल है। इसमें आईफोन की तरह एक डायनैमिक बार भी है। यानी जब भी आप फोन चार्जिंग पर लगाएंगे, कोई कॉल या नोटिफिकेशन आएगा, तो ऊपर कैमरे के पास एक पॉप-अप खुलेगी, जो देखने में बहुत कूल लगती है। परफॉर्मेंस: यूनिसोक का T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर बात करें परफॉर्मेंस की तो इसमें यूनिसोक का T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर लगा है। फोन 3GB रैम और 64GB स्टोरेज के साथ सिंगल वैरिएंट में आता है। कंपनी ने इसमें 'मेमोरी फ्यूजन' तकनीक दी है, जिससे वर्चुअल रैम की मदद से आप इसकी रैम को 8GB तक बढ़ा सकते हैं। A100 प्रो लेटेस्ट एंड्रॉइड 15 गो एडिशन पर चलता है। गूगल के गो एप्स बहुत हल्के होते हैं, इसलिए कम रैम होने के बावजूद फोन हैंग नहीं होता, बहुत स्मूथ चलता है और आपकी बैटरी भी बचाता है। डेली यूज, सोशल मीडिया और नॉर्मल काम के लिए इसकी परफॉर्मेंस अच्छी है। फोन में सबसे खास अल्ट्रालिंक टेक्नोलॉजी दी गई है। इस फीचर से आप मोबाइल नेटवर्क नहीं होने पर भी बिना सिग्नल के कॉल कर पाएंगे। फोटोग्राफी: दिन की रोशनी में ठीक क्वालिटी कैमरे की बात करें तो बैक पैनल पर LED फ्लैश के साथ 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और फ्रंट में 5 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा है। बजट के हिसाब से यह एक बेसिक कैमरा है, जिससे आप दिन के उजाले में ठीक-ठाक फोटो खींच सकते हैं और वीडियो कॉलिंग का काम आराम से हो जाएगा। पावर बैकअप की बात करें तो, फोन में 5000mAh की बैटरी दी गई है। बॉक्स में 10W का चार्जर है। नॉर्मल यूज पर यह बैटरी आराम से डेढ़ से दो दिन तक का बैकअप देती है। फाइनल वर्डिक्ट: मजबूत फोन चाहने वालों के लिए बेस्ट ₹8,999 की कीमत में आइटेल A100 प्रो उन लोगों के लिए बेस्ट है जिन्हें एक मजबूत, टिकाऊ और बिना टूटने-फूटने के डर वाला फोन चाहिए। मिलिट्री ग्रेड बॉडी, फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट और बिना सिग्नल कॉल करने वाली तकनीक इसे इस बजट का पैसा वसूल फोन बनाती है।

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 10:33 am

मेडिकल साइंस में पहली बार दो रोबोट्स ने ऑपरेशन किया:सूअरों के पेट से गॉलब्लेडर बाहर निकाला, सर्जरी में इंसान की मदद नहीं ली गई

मेडिकल साइंस में पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने सूअरों का सफल ऑपरेशन किया है। 'सर्जी' निकनेम वाले इन रोबोट्स ने सूअरों के पेट से गॉलब्लेडर को सुरक्षित बाहर निकाला। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों और इंजीनियर्स का यह प्रयोग मेडिकल दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए कोई स्पेशल रोबोट नहीं बनाया गया था। डॉक्टरों ने बाजार में मिलने वाले दो आम रोबोट्स का इस्तेमाल किया। इन रोबोट्स की लंबाई करीब 4 से 5 फीट है और इनकी कीमत 20,000 डॉलर यानी करीब ₹19 लाख से भी कम है। दो रोबोट्स ने अकेले पूरी की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी रोबोट्स ने लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी विधि से यानी सूअरों के पेट में बिना बड़ा चीरा लगाए गालब्लेडर निकालने का बेहद मुश्किल ऑपरेशन किया। रोबोट्स ने इंसानी डॉक्टरों की तरह बहुत ही सावधानी से अंदर के टिश्यूज हटाए, उसकी जांच की, नसों को क्लिप से बंद किया और लिवर से गालब्लैडर को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित बाहर निकाल दिया। दो तरीके से ऑपरेशन किया एडवांस्ड सॉफ्टवेयर और खास टूल से मदद मिली ह्यूमनॉइड रोबोट्स को इस सर्जरी के काबिल बनाने के लिए रिसर्च टीम ने खास फिजिकल एडॉप्टर तैयार किए, ताकि रोबोट्स सर्जिकल टूल्स को मजबूती और सटीकता से पकड़ सकें। इसके साथ ही एक खास सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया गया। यह सॉफ्टवेयर इंसानी हाथों के इशारों और मूवमेंट को आसानी से ट्रांसलेट करके रोबोट की कलाई से जुड़े सर्जिकल टूल्स को कंट्रोल करता है। टेस्टिंग का मकसद डॉक्टरों की अनुपस्थिति में इलाज करना इस सफल सर्जरी की पूरी डिटेल 8 जुलाई को साइंस जर्नल 'नेचर' में पब्लिश की गई है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है। इस टेस्टिंग से भविष्य में दूरदराज के इलाकों या डॉक्टरों की अनुपस्थिति में भी मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज और सर्जरी की सुविधा दी जा सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के 'सेंटर फॉर द फ्यूचर ऑफ सर्जरी' के अंतरिम निदेशक डॉ. रयान ब्रोडेरिक ने बताया कि एक 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' के रूप में यह एक्सपेरिमेंट पूरी तरह से सफल रहा है। नॉलेज पार्ट: गालब्लैडर रिमूवल: इस तरीके से लिवर के नीचे मौजूद गालब्लैडर को टिश्यूज से अलग करके, क्लिप लगाकर शरीर से सुरक्षित बाहर निकाला जाता है।

दैनिक भास्कर 11 Jul 2026 10:00 pm

बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी में सेंध:रिसर्च के मुताबिक- यूट्यूब-इंस्टाग्राम के प्राइवेसी फीचर टेस्ट में फेल, आपत्तिजनक कंटेंट से बचाने वाले फीचर नाकाम

इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में किशोरों के लिए दर्जनों नए सुरक्षा फीचर लॉन्च कर चुकी हैं। कंपनियों का दावा है कि इनके जरिए बच्चों को अनजान लोगों, आपत्तिजनक कंटेंट और सोशल मीडिया की लत से बचाया जा सकता है। लेकिन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शोधकर्ताओं ने इन प्लेटफॉर्म के सुरक्षा फीचर की जांच की और पाया कि कई फीचर या तो ठीक से काम नहीं करते, कुछ को कुछ सेकंड में बायपास किया जा सकता है, जबकि कुछ सिर्फ दावों तक सीमित हैं। इन तीन प्लेटफॉर्म्स में सामने आईं बड़ी खामियां स्नैपचेट - अंजानों से बचाने का दावा, पर यूजरनेम से पहुंचे बच्चों तकस्नैपचैट ने 2023 में कहा था कि अब किशोर सिर्फ उन्हीं लोगों को दिखाई देंगे, जो उनके परिचित (Mutual Friends) हों। लेकिन रिचर्स में पाया गया कि यदि किसी को किशोर का यूजरनेम पता हो, तो वह आसानी से उसका अकाउंट खोज सकता है। स्नैपचैट खुद भी किशोरों को ऐसे वयस्कों की प्रोफाइल सुझा रहा था, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं था। इंस्टाग्राम - अकाउंट प्राइवेट, लेकिन एल्गोरिदम से अजनबी सुझावमेटा ने टीन अकाउंट लॉन्च करते समय कहा था कि किशोरों के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहेंगे और अनचाहे संपर्क कम हो जाएंगे। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने एक बच्ची का नया अकाउंट बनाया, तो Suggested for You सेक्शन में लगभग सभी प्रोफाइल ऐसे वयस्क पुरुषों की थीं जिन्हें वह जानती भी नहीं थी। यूट्यूब - स्क्रीन टाइम लिमिट खुद बंद करने के सुझाव दे रहा यूट्यूब यूट्यूब किशोरों के लिए 60 मिनट की स्क्रीन टाइम लिमिट और ‘टेक अ ब्रेक’ रिमाइंडर देता है। रिसर्च में पाया गया कि समय पूरा होते ही यूट्यूब खुद ही Ignore limit for today और Change limit जैसे विकल्प दिखा देता है। यूट्यूब का कहना है कि यदि माता-पिता फैमिली लिंक के जरिए स्क्रीन टाइम तय करें, तो बच्चे उसे बदल नहीं सकते। सुरक्षा फीचर मौजूद, लेकिन उन्हें खोज पाना मुश्किल इन प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षा फीचर इतने जटिल मेन्यू में छिपे हुए हैं कि सामान्य अभिभावकों को उनके बारे में जानकारी ही नहीं होती। कुछ फीचर डिफॉल्ट रूप से चालू नहीं थे। मेटा ने कहा- टीन फीचर्स की वजह से स्क्रीन टाइम घटा मेटा ने कहा कि टीन अकाउंट लागू होने के बाद किशोर कम संवेदनशील कंटेंट देख रहे हैं, रात में Instagram पर कम समय बिता रहे हैं और अनचाहे संपर्क भी घटे हैं। विशेषज्ञ बोले- समस्या कमजोर सुरक्षा टूल मेटा की पूर्व मनोवैज्ञानिक एनेके बफोन का कहना है कि कई बार ये टूल या तो अधूरे होते हैं या इतने जटिल कि उनका पूरा फायदा मिल ही नहीं पाता। इन्हें और सख्त बनाने की जरूरत है।

दैनिक भास्कर 11 Jul 2026 3:49 pm

गूगल एआई:आपका डेटा इस्तेमाल कर रहा गूगल; प्राइवेसी सुरक्षित रखने तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग्स

गूगल ने अपनी टर्म्स ऑफ सर्विस और एआई डेटा नीति में बदलाव किया है। अब जेमिनी, गूगल सर्च और लेंस जैसे एआई फीचर्स के साथ साझा किए गए फोटो, ऑडियो और अन्य फाइलों का इस्तेमाल एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। अगर आप नहीं चाहते कि आपका डेटा एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो, तो कुछ सेटिंग्स बदलकर इसे सीमित कर सकते हैं। गूगल के नए नियमों के तहत यदि आप जेमिनी से बातचीत करते हैं, गूगल लेंस में फोटो अपलोड करते हैं या एआई फीचर्स के साथ ऑडियो और फाइल साझा करते हैं, तो यह डेटा एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मामलों में गुणवत्ता जांच के लिए प्रशिक्षित मानव समीक्षक भी इस डेटा को देख सकते हैं। हालांकि अभी जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटोज का सामान्य डेटा इस एआई ट्रेनिंग कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। निजी जानकारी देने से बचें आज गूगल सिर्फ एक सर्च इंजन ही नहीं है। कई लोग इससे मेडिकल सलाह पूछते हैं। कानूनी दस्तावेज समझते हैं। ऑफिस फाइलों का विश्लेषण भी कराते हैं। निजी फोटो एडिट कराते हैं। आवाज से जेमिनी से बातचीत करते हैं। ऐसे में कई बार यूजर अनजाने में निजी जानकारी भी एआई के साथ साझा कर देते हैं। यही वजह है कि प्राइवेसी विशेषज्ञ संवेदनशील दस्तावेज एआई टूल्स पर अपलोड करने से बचने की सलाह देते हैं। कैसे रोकें एआई ट्रेनिंग के लिए डेटा का इस्तेमाल? 1. सर्च सेटिंग्स - Google अकाउंट में Search Services Settings पर जाएं। 2. सेव मीडिया बंद करें - Save Media विकल्प का टिक हटाएं। इससे एआई के लिए हिस्ट्री सेव नहीं होगी। 3. ऑटो डिलीट चालू करें - सर्च हिस्ट्री को 3, 6, 18 या 36 महीने बाद अपने-आप डिलीट होने के लिए सेट करें। 4. सर्च पर्सनलाइजेशन बंद करें - यदि आप नहीं चाहते कि गूगल आपकी पुरानी गतिविधि के आधार पर परिणाम दिखाए, तो सर्च पर्सनलाइजेशन बंद कर दें। 5. माय एक्टिविटी - My Activity में जाकर देखें कि किस-किस प्लेटफॉर्म से डेटा सेव हो रहा है। इसे रिव्यू करें। अगर सेटिंग्स बंद कर देंगे तो क्या बदलेगा? - गूगल सर्च, मैप्स, लेंस और जेमिनी पहले की तरह काम करेंगे, लेकिन वे कम व्यक्तिगत हो सकते हैं। उदाहरण के लिए: -आपके पसंदीदा रेस्तरां की सिफारिशें कम सटीक होंगी। - पुरानी सर्च जल्दी नहीं मिलेंगी। - गूगल मैप्स आपकी पसंद के हिसाब से स्थान कम सुझाएगा। - एआई को आपकी पिछली गतिविधि का कम संदर्भ भी मिलेगा। किन चीजों को एआई पर अपलोड करने से बचें? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI चैटबॉट्स पर यह जानकारी साझा न करें... - आधार-पैन-पासपोर्ट कॉपी - बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय दस्तावेज - पासवर्ड - मेडिकल रिपोर्ट - कानूनी अनुबंध - ऑफिस की गोपनीय फाइलें - ओटीपी

दैनिक भास्कर 11 Jul 2026 2:23 pm

X पर 3 साल बाद लौटे मार्क जुकरबर्ग:मेटा ने लॉन्च किया 'म्यूज स्पार्क 1.1' AI मॉडल, OpenAI और एंथ्रोपिक से मुकाबला

मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने तीन साल से अधिक समय के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वापसी की है। उन्होंने कंपनी का सबसे नया और एडवांस AI मॉडल 'म्यूज स्पार्क 1.1' लॉन्च करने की घोषणा की है। जुकरबर्ग का यह कदम एआई मार्केट में OpenAI और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देने की मेटा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कम कीमत में कोडिंग और एजेंटिक परफॉर्मेंस मार्क जुकरबर्ग ने अपनी पोस्ट में लिखा, आज हम म्यूज स्पार्क 1.1 रिलीज कर रहे हैं। यह बहुत ही कम कीमत पर एक मजबूत एजेंटिक और कोडिंग मॉडल है। यह हमारे नए मेटा मॉडल API और मेटा AI में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल टूल यूज, कंप्यूटर यूज और एजेंटिक परफॉर्मेंस में सबसे मजबूत है। यह 10 लाख टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो के साथ लंबे समय तक चलने वाले टास्क को आसानी से पूरा कर सकता है। यह समानांतर चलने वाले सब-एजेंट्स को काम सौंपने में सक्षम है और इसे डेस्कटॉप, मोबाइल या ब्राउज़र पर कंप्यूटर इंटरफेस का उपयोग करने के लिए ट्रेन किया गया है। म्यूज स्पार्क से डेवेलपर्स बना सकेंगे एप्लिकेशन्स जुकरबर्ग ने बताया कि डेवेलपर्स म्यूज स्पार्क का उपयोग करके नए एप्लिकेशन्स बना सकेंगे। कंपनी का पूरा फोकस बहुत कम लागत पर मजबूत एजेंटिक और मल्टीमॉडल मॉडल देने पर है। अमेरिका में डेवेलपर्स अब मेटा मॉडल API के पब्लिक प्रीव्यू के जरिए म्यूज स्पार्क 1.1 का एक्सेस पा सकते हैं। कम इंसानी दखल के पूरे होंगे जटिल काम मेटा ने इस अपग्रेडेड मॉडल को कोडिंग, एजेंटिक वर्कफ़्लो और सॉफ़्टवेयर ऑटोमेशन के लिए अपना अब तक का सबसे सक्षम एआई सिस्टम बताया है। यह मॉडल न केवल कोड लिख और डिबग कर सकता है, बल्कि सॉफ़्टवेयर टूल्स के साथ इंटरैक्ट भी कर सकता है। यह टेक्स्ट, इमेज और वीडियो को समझकर बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के बेहद जटिल और मल्टी-स्टेप टास्क को पूरा करने की क्षमता रखता है। सुपरइंटेलिजेंस लैब्स ने किया तैयार इस मॉडल को मेटा की 'सुपरइंटेलिजेंस लैब्स' ने डेवलप किया है। इससे पहले कंपनी ने अप्रैल में अपना ओरिजिनल म्यूज स्पार्क मॉडल पेश किया था, जिसका मकसद एआई के क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों के साथ अंतर को कम करना था। इस नए लॉन्च के साथ मेटा ने पेड एआई मॉडल API मार्केट में औपचारिक रूप से एंट्री कर ली है। 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट और प्राइसिंग का गणित मेटा मॉडल API के लिए साइन अप करने वाले डेवेलपर्स को 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट मिलेगा, जिसके बाद वे 'पे-एज-यू-गो' (जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान) प्राइसिंग मॉडल पर शिफ्ट हो जाएंगे। मेटा ने इस सर्विस की कीमत 1.25 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 4.25 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन तय की है। यह कीमत OpenAI के एंट्री-लेवल 'GPT-5 mini' और एंथ्रोपिक के 'क्लॉड हायकू 4.5' से अधिक है, लेकिन एंथ्रोपिक के प्रीमियम 'क्लॉड सॉनेट 4.6' मॉडल से कम है। वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के ल्लामा मॉडल्स बदलेंगे म्यूज स्पार्क 1.1 को फिलहाल मेटा AI एप और वेबसाइट के 'थिंकिंग मोड' में रोल आउट किया जा रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल धीरे-धीरे वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेटा के एआई-इनेबल्ड स्मार्ट ग्लासेस में मौजूद मौजूदा ल्लामा मॉडल्स की जगह लेगा। हाल ही में मेटा ने अपनी सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा विकसित पहला इमेज-जनरेशन मॉडल 'म्यूज इमेज' भी पेश किया था, जिससे कंपनी का जेनरेटिव एआई पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है। नॉलेज पार्ट: क्या होते हैं एजेंटिक मॉडल और टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो?

दैनिक भास्कर 10 Jul 2026 12:17 pm