यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार 2 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। सरकार ने आशंका जताई कि इससे ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और ठगी की घटनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार ने वॉट्सएप को फिलहाल यह फीचर लागू नहीं करने का निर्देश दिया है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। टेलीग्राम से पूछा- सुरक्षा के लिए क्या किया सरकार ने टेलीग्राम और सिग्नल जवाब मांगा कि इस फीचर के दुरुपयोग और साइबर ठगी रोकने के लिए कौन से सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं। दोनों प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है। नीट पेपरलीक के बाद भी टेलीग्राम पर लगा था बैन पिछले महीने NEET पेपर लीक, फर्जी प्रश्न पत्रों के सर्कुलेशन और धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप में सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। वॉट्सएप ने सरकार को जवाब दिया- हमारा फीचर सुरक्षित वॉट्सएप ने सरकार के नोटिस पर कहा था कि यूजरनेम फीचर में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जो फर्जी पहचान, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों से सुरक्षा करेंगे। भारत वॉट्सएप का सबसे बड़ा बाजार है। देश में इसके 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Lenovo ने भारतीय बाजार में अपना नया Lenovo Tab Plus Gen 2 टैबलेट लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने नई LOQ Gaming Monitor सीरीज भी पेश की है। नया टैबलेट एंटरटेनमेंट, मल्टीटास्किंग, पढ़ाई, ऑफिस वर्क और गेमिंग को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
ओप्पो ने आज भारत में नई स्मार्टफोन सीरीज रेनो 16 लॉन्च की है। इसमें कंपनी ने रेनो 16 और रेनो 16C पेश किए हैं। दोनों ही मोबाइल को स्टाइलिश लुक, 50 मेगापिक्सल टेलीफोटो और 50MP अल्ट्रा वाइड सेल्फी कैमरा और स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर के साथ प्रीमियम मिड रेंज में उतारा गया है। ओप्पो रेनो 16C को तीन वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 46,999 रुपए है। वहीं, ओप्पो रेनो 16 को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 61,999 रुपए से शुरु होती है। इसके अलावा कंपनी ने ओप्पो एनको एयर 5 बड्स भी पेश किए हैं। स्मार्टफोन की सेल 9 जुलाई 2026 से शुरू होगी। लॉन्च ऑफर्स के में बैंक कार्ड्स पर 10% तक इंस्टेंट कैशबैक, एक्सचेंज बोनस, 180 दिन की स्क्रीन डैमेज प्रोटेक्शन और ओप्पो एनको बड्स 3 प्रो+ पर 50% तक की छूट भी दी जा रही है। डिजाइन: भारत में पहली बार होलोवर्स 3D डिजाइन ओप्पो रेनो 16 में दोनों स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसका नया होलोवर्स 3D डिजाइन है। जिसे कंपनी भारत में पहली बार लेकर आई है। स्टारी वाइट कलर वैरियंट में मिलने वाला यह डिजाइन अलग-अलग एंगल से देखने पर 3D इफेक्ट देता है, जिससे फोन का लुक प्रीमियम लगता है। दोनों फोन के डिजाइन को जानते हैं। बैक पैनल और मटीरियल डायमेंशन, वजन और इन-हैंड फील फ्रंट डिस्प्ले, बेजल्स और सेल्फी कैमरा पोर्ट्स और बटन्स कलर और वॉटरप्रूफिंग ओप्पो रेनो 16: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.32 इंच की फुल HD+ एमोलेड स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है, जिससे फोन का इस्तेमाल और स्क्रॉलिंग बहुत स्मूद लगती है। ये 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस का सपोर्ट करती है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: इस फोन में नया और पावरफुल क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4 नैनोमीटर तकनीक पर बना है। यह पुराने मॉडल के मुकाबले ज्यादा फास्ट है। बेहतर गेमिंग के लिए इसमें AI हाइपर बूस्ट 2.0 और मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए AI लिंक बूस्ट 4.0 तकनीक दी गई है। फोन लेटेस्ट एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड कलरOS 16 पर चलता है, जो इस्तेमाल करने में काफी आसान है। कैमरा सेटअप: इसके बैक पैनल पर 50-50 मेगापिक्सल के तीन कैमरे हैं। इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा, 50MP का 3.5x टेलीफोटो पोर्ट्रेट कैमरा और 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है। वहीं, फ्रंट में भी 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा है, जो 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ आता है। इससे ग्रुप सेल्फी में सभी लोग आसानी से आ जाते हैं। फोन के सभी कैमरों से 60fps पर 4K HDR वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। साथ ही इसमें जूम फ्री वीडियो और ऑटो स्ट्रेटन वीडियो जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। स्मार्ट AI फीचर्स: यह फोन कई एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स से लैस है… बैटरी और चार्जिंग: फोन में 6700mAh की बहुत बड़ी और दमदार बैटरी दी गई है, जो आराम से लंबा बैकअप देती है। इस बड़ी बैटरी को तेजी से चार्ज करने के लिए 80W सूपरवूक फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। सेल्फी डिवाइस ओप्पो बबल भी लॉन्च ओप्पो ने रेनो 16 सीरीज के साथ नया स्मार्ट कैमरा एक्सेसरी ओप्पो बबल भी लॉन्च किया है। यह 27.5 ग्राम का डिवाइस है, इसमें 1.73-इंच एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो रियर कैमरे का लाइव प्रीव्यू शो करता है और बेहतर सेल्फी और कंटेंट क्रिएशन में मदद करता है। इसकी कीमत 7,999 रुपए है यह भी फोन के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर मिलेगा।
वॉट्सएप ने अपने आने वाले 'यूजरनेम' फीचर को लेकर एक डिटेल्ड FAQs यानी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की गाइडलाइन जारी की है। केंद्र सरकार ने हाल ही में वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस जारी कर इस फीचर से होने वाले संभावित फ्रॉड के खतरों पर चिंता जताई थी। सरकार ने चेतावनी दी थी कि जब तक इस मुद्दे पर पूरी संतुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इसे रोलआउट न किया जाए। इसके बाद वॉट्सएप ने स्पष्ट किया है कि वह सुरक्षा के क्या-क्या कदम उठा रहा है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। 9 आसान सवाल-जवाब में जानें वॉट्सएप की नई गाइडलाइन सवाल 1: वॉट्सएप पर यूजरनेम बनाना क्या सभी के लिए जरूरी होगा? जवाब: नहीं, यह बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है। वॉट्सएप ने साफ किया है कि यूजरनेम बनाना पूरी तरह से ऑप्शनल होगा। अगर आप अपनी पहचान या फोन नंबर छिपाना चाहते हैं, तभी इसे बनाएं। सवाल 2. मुझे अपनी पसंद का यूजरनेम नहीं मिला, तो इसकी क्या वजह हो सकती है? जवाब: इसके तीन मुख्य कारण हो सकते हैं: सवाल 3. मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर फ्रॉड करने वालों को वॉट्सएप कैसे रोकेगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि अभी यूजरनेम से मैसेज भेजने का फीचर लाइव नहीं किया गया है, सिर्फ नाम रिजर्व हो रहे हैं। जब यह लाइव होगा और आपको किसी अनजान यूजरनेम से मैसेज आएगा, तो वॉट्सएप आपको उस अकाउंट के देश की जानकारी देगा। साथ ही पहली बार मैसेज आने पर एक वॉर्निंग भी स्क्रीन पर दिखेगी। इसके अलावा कंपनी ब्लॉक और रिपोर्ट करने वाले अकाउंट्स पर कड़ी नजर रखेगी ताकि स्कैमर्स पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। सवाल 4. क्या कोई भी अनजान व्यक्ति मेरा यूजरनेम गेस करके मुझे मैसेज भेज सकता है? जवाब: जैसे आज आप वॉट्सएप पर किसी का भी फोन नंबर सर्च नहीं कर सकते, वैसे ही किसी का यूजरनेम भी सर्च नहीं किया जा सकेगा। अनजान लोगों से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप एक बिल्कुल अलग यूजरनेम चुनें और वॉट्सएप के नए सुरक्षा फीचर 'यूजरनेम की' को ऑन कर लें। सवाल 5. यह 'यूजरनेम की' क्या है और यह कैसे सुरक्षा देगी? जवाब: यह आपकी सुरक्षा की एक एक्स्ट्रा लेयर है। इसे एक्टिवेट करने के बाद अगर कोई नया व्यक्ति आपसे कनेक्ट होना चाहता है, तो उसे आपके 'यूजरनेम' के साथ-साथ आपकी 'यूजरनेम की' भी पता होनी चाहिए। इसके बिना वह आपको मैसेज नहीं भेज पाएगा। आप इस 'की' को कभी भी रिसेट कर सकते हैं, जिससे पुराने लोग आपके यूजरनेम के जरिए दोबारा नया संपर्क नहीं कर पाएंगे। सवाल 6. क्या यूजरनेम बनाने के लिए मुझे अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट को लिंक करना पड़ेगा? जवाब: अगर आप वही यूजरनेम चाहते हैं जो आपके इंस्टाग्राम या फेसबुक पर है, तो आपको अकाउंट लिंक करना होगा। यह इसलिए किया गया है ताकि फ्रॉड को कम किया जा सके और पहचान वेरिफाई हो सके। हालांकि, एक बार यूजरनेम मिलने के बाद आप चाहें तो इन अकाउंट्स को अनलिंक कर सकते हैं या फिर वॉट्सएप के लिए बिल्कुल अलग यूजरनेम चुन सकते हैं। सवाल 7. क्या मैं अपना वॉट्सएप यूजरनेम बाद में बदल सकता हूं? जवाब: हां, आप इसे बाद में कभी भी बदल सकते हैं, बशर्ते आपका नया पसंदीदा नाम प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 8. इंटरनेट पर मशहूर नामों को एडवांस में बुक करने के दावे किए जा रहे हैं, क्या यह सच है? जवाब: वॉट्सएप ने इसे पूरी तरह अफवाह बताया है। कंपनी ने कहा कि जो लोग पॉपुलर या मशहूर नामों को रिजर्व करने का दावा कर रहे हैं, वे झूठे हैं। सेलिब्रिटीज और सरकारी संस्थाओं के नाम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें सिर्फ उनके असली और लीगल मालिक ही क्लेम कर सकते हैं। सवाल 9. वॉट्सएप इस फीचर को इतनी जल्दी में क्यों लेकर आया और यह कब से शुरू होगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि उन्होंने यूजरनेम लॉन्च करने से काफी पहले ही नाम रिजर्व करने की प्रक्रिया इसलिए शुरू की क्योंकि लोग अपनी पसंद के नाम को लेकर काफी गंभीर होते हैं। कंपनी अभी सरकार और यूजर्स के फीडबैक को सुन रही है। इस साल के अंत में जब इसे पूरी तरह से रोलआउट किया जाएगा, तब तक इसे पूरी तरह सुरक्षित और परफेक्ट बना दिया जाएगा।
भारतीय रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को पूरी तरह से अपग्रेड कर रहा है। इस बड़े बदलाव के बाद रेलवे का नया बुकिंग सिस्टम हर मिनट 1.25 लाख टिकट बुक कर सकेगा। यह मौजूदा क्षमता से पूरे 5 गुना ज्यादा है। अभी रेलवे का सिस्टम एक मिनट में सिर्फ 25 हजार टिकट ही प्रोसेस कर पाता है, जिससे तत्काल बुकिंग या भारी लोड के समय यात्री परेशान होते हैं। सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने बुधवार को अपने 41वें स्थापना दिवस पर यह जानकारी दी। बढ़ती डिमांड पूरा करेगा नया सिस्टम, हैंग होने की समस्या कम होगी CRIS के मुताबिक, टिकट बुकिंग क्षमता में 5 गुना बढ़ोतरी से सिस्टम की परफॉर्मेंस में बड़ा सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे यात्रियों की रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को तेजी से पूरा कर सकेगा। आम यात्रियों को अब तत्काल टिकट बुक करते समय एप या वेबसाइट के बार-बार हैंग होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। सुपर रेलवन एप: 4.35 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल लॉन्च हुए रेलवे के सुपर एप 'रेलवन' को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इसका आसान डिजाइन यात्रियों को बेहतर अनुभव देता है। अब तक इसे 4.35 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और इस एप से हर दिन औसतन 10 लाख ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। रेलवे में AI तकनीक से क्या बदलेगा रेलवे अब कामकाज को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसके आने से ट्रेनों के मेंटेनेंस का काम खराबी आने से पहले ही हो जाएगा, जिससे हादसे रुकेंगे और सुरक्षा मजबूत होगी। CRIS के MD जीवीएल सत्य कुमार ने कहा कि चाहे नया ऐप हो या AI तकनीक, हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि तकनीक का पूरा फायदा देश के आम नागरिकों को मिले।
केंद्र सरकार वॉट्सएप के नए यूजरनेम फीचर की जांच करेगी। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इस फीचर से पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड का खतरा काफी बढ़ सकता है। पेरेंट कंपनी मेटा ने अपने इंस्टेंट मैसेजिंग एप में मोबाइल नंबर बताए बिना चैट करने वाला फीचर लॉन्च किया था। इसमें लोग सिर्फ यूजरनेम के जरिए किसी नए व्यक्ति से चैट कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, सरकार वॉट्सएप के इस अपकमिंग यूजरनेम फीचर की बारीकी से जांच करेगी। चिंता इस बात को लेकर है कि जब यूजर्स को फोन नंबर छिपाने की आजादी मिल जाएगी, तो जालसाजों के लिए किसी दूसरे के नाम का फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है। भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इतने बड़े यूजर बेस की सुरक्षा और फेक प्रोफाइल से होने वाले फ्रॉड रोकने के लिए सरकार नए फीचर के सेफ्टी स्टैंडर्ड्स परखना चाहती है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। सबसे पहले जानें, जल्दी यूजरनेम बुक करना क्यों जरूरी है दुनियाभर में करोड़ों यूजर्स एक जैसे या मिलते-जुलते यूजरनेम चुन सकते हैं। ऐसे में जो लोग पहले अपना यूजरनेम रिजर्व करेंगे, उन्हें अपनी पसंद का यूजरनेम मिलने की संभावना ज्यादा होगी। WhatsApp के हेड कुणाल शाह ने X पर लिखा सही समय ही सब कुछ है। दुनिया भर में यह फीचर जारी होने से पहले ही WhatsApp से जुड़ें और अपना यूजरनेम सुरक्षित कर लें। अब अपनी पसंद का यूजरनेम लेने का समय है। लोगों से जुड़ने का एक अधिक निजी (प्राइवेट) तरीका जल्द ही आपके WhatsApp पर आने वाला है। इस नए फीचर से क्या बदलेगा यूजरनेम फीचर आने के बाद कुछ स्थितियों में फोन नंबर अपने-आप दिखाई नहीं देगा। इनमें शामिल हैं: जब आपको किसी बड़े ग्रुप चैट में जोड़ा जाएगा। जब आप पहली बार किसी व्यक्ति को मैसेज करेंगे। इस बदलाव से आपका फोन नंबर निजी (प्राइवेट) रहेगा। वह तभी दिखाई देगा, जब आप खुद उसे साझा करना चाहेंगे। वॉट्सएप Username फीचर से जुड़े 8 सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है वॉट्सएप यूजरनेम फीचर क्यों लाया: वॉट्सएप का कहना है कि कई बार लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन अपना मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना चाहते। जैसे किसी नेटवर्किंग इवेंट में मिले व्यक्ति, नए क्लासमेट, पड़ोसी या बच्चों के स्कूल/स्पोर्ट्स ग्रुप के दूसरे पैरेंट्स से बात करते समय प्राइवेसी बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसे में अब मोबाइल नंबर की जगह सिर्फ यूजरनेम शेयर किया जा सकेगा। यूजरनेम बनाने के नियम क्या हैं: यूजरनेम 3 से 35 कैरेक्टर का होगा। इसमें केवल a-z (छोटे अंग्रेजी अक्षर), 0-9 (अंक), डॉट (.) और अंडरस्कोर (_) का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा। जरूरत पड़ने पर इसे बदला, हटाया या अपडेट किया जा सकेगा। क्या मोबाइल नंबर पूरी तरह नहीं दिखेगा: हां, लेकिन केवल उन लोगों के लिए जो पहली बार आपसे संपर्क करेंगे। अगर आपने यूजरनेम सेट किया है, तो नया व्यक्ति आपका मोबाइल नंबर नहीं देख पाएगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर सेव है, वे पहले की तरह ही आपसे चैट कर सकेंगे। क्या कोई भी यूजरनेम सर्च करके नंबर ढूंढ सकेगा: नहीं। वॉट्सएप कोई सार्वजनिक यूजरनेम डायरेक्टरी नहीं बनाएगा। कंपनी किसी दूसरे यूजर को आपका यूजरनेम सुझाव (Suggest) भी नहीं देगी। कोई व्यक्ति तभी आपको मैसेज भेज सकेगा, जब उसे आपका सही यूजरनेम पता होगा। Username Key क्या है: वॉट्सएप Username Key नाम का एक नया ऑप्शनल सुरक्षा फीचर भी ला रहा है। यह सिक्योरिटी कोड एक पिन की तरह काम करेगा। अगर यूजर इसे चालू करता है, तो कोई अनजान व्यक्ति सिर्फ आपका यूजरनेम जानकर आपको मैसेज नहीं कर सकेगा। पहली बार मैसेज भेजने वाले व्यक्ति को पहले यह Key दर्ज करनी होगी। इसके बाद ही चैट शुरू हो सकेगी। यूजर जब चाहें इस Key को बदल भी सकेंगे। इसका उद्देश्य स्पैम और अनचाहे मैसेज कम करना है। पुराने चैट्स और कॉन्टैक्ट्स पर क्या असर पड़ेगा: मौजूदा चैट, कॉन्टैक्ट और ग्रुप पहले की तरह ही काम करेंगे। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर है, उनके लिए कुछ नहीं बदलेगा। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, ब्लॉक और रिपोर्ट जैसे सभी सुरक्षा फीचर्स पहले की तरह ही काम करते रहेंगे। इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा क्या होगा: नए लोगों से बात करने के लिए मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना पड़ेगा। यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। स्पैम और अनचाहे मैसेज कम करने में मदद मिलेगी। क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए Meta के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक जैसी डिजिटल पहचान बनाए रखना आसान होगा। इन लोगों को आपसे संपर्क करने के लिए यूजरनेम की जरूरत नहीं होगी जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर पहले से सेव है। जिन लोगों से आप पहले चैट कर चुके हैं। जो आपके साथ किसी जॉइंट ग्रुप में हैं। जिन्होंने आपका क्यूआर कोड स्कैन किया है। जिन्हें आपने पहले मैसेज किया है। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
WhatsApp पर बिना मोबाइल नंबर शेयर किए करें चैट, आ रहा है नया Username फीचर, जानिए कैसे करेगा काम
अगर आप किसी नए व्यक्ति से WhatsApp पर बात करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना चाहते तो जल्द ही यह संभव होगा। WhatsApp एक नया Username फीचर ला रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स बिना फोन नंबर बताए भी बातचीत शुरू कर सकेंगे। कंपनी ने इसकी ...
एआई नियमों और कागजी डेटा को तो आसानी से रट लेता है, लेकिन इंसानों के उस हुनर को नहीं सीख पाता जो बरसों के अनुभव, अंतःप्रेरणा और सूझबूझ से आता है। उदाहरण के लिए, एक अनुभवी डॉक्टर को रिपोर्ट देखने से पहले ही मरीज की सांसें देखकर बीमारी का अंदाजा हो जाता है, या कोडर बिना किसी नियम के भी पेचीदा बग ढूंढ लेता है। इंसान इस हुनर को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। इस हुनर को चुराने के लिए कंपनियां कर्मचारियों के कंप्यूटर के हर क्लिक व हरकत पर नजर रख रही हैं, हेड कैमरे लगाकर एआई को ट्रेंड किया जा रहा है जिससे कर्मचारी नाराज हैं और जानकारी छिपा रहे हैं, जानिए कर्मचारियों की इन्हीं तरकीबों के बारे में... रफ पेपर पर लिख रहे लॉजिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स जानते हैं कि उनके की स्ट्रोक्स और कोडिंग पैटर्न एआई मॉडल द्वारा ट्रैक किए जा रहे हैं। इससे बचने के लिए वे अब शैडो थिंकिंग करते हैं। इसमें डेवलपर्स कंप्यूटर पर सीधे सोचने के बजाय कोड का लॉजिक और एल्गोरिदम रफ कागज या डायरी पर लिखते हैं। सिस्टम पर वे सिर्फ फाइनल कोड टाइप करने आते हैं। एआई को भ्रमित करने के लिए वे जानबूझकर जंक कोड डालते हैं और बाद में उसे हटा देते हैं। इस रणनीति से एआई उनके सोचने की सटीक क्रोनोलॉजी पकड़ नहीं पाता। चैट बॉक्स से दूरी कॉल सेंटर्स और कंसल्टिंग फर्म्स में एआई चैट और वॉयस को ट्रैक करता है। इससे बचने के लिए कर्मचारियों ने ‘बिटवीन द लाइन्स’ (बातों के बीच की बात) का तरीका निकाला है। जब कोई पेचीदा केस आता है, तो वे एआई-निगरानी वाले आधिकारिक चैट बॉक्स के बजाय आपस में बात करने के लिए कोडवर्ड्स या पर्सनल फोन इस्तेमाल करते हैं। समाधान आपस में ‘ऑफ-द-रिकॉर्ड’ तय करते हैं और स्क्रीन पर औपचारिक उत्तर लिखते हैं, जिससे एआई नहीं सीख पाता कि कठिन ग्राहक को किस मानवीय सूझबूझ से मनाया गया। माउस जिटरर्स का इस्तेमाल मेटा जैसे टेक दिग्गज माउस क्लिक और कर्सर की स्पीड तक को एआई ट्रेनिंग के लिए ट्रैक करते हैं। डिजाइनर्स ने इसे चकमा देने के लिए ‘माउस जिटरर्स’ या ऐसे हार्डवेयर टूल्स का इस्तेमाल शुरू किया है जो बैकग्राउंड में कर्सर को स्क्रीन पर रैंडम तरीके से घुमाते रहते हैं। जब डिजाइनर असल में डिजाइन की बारीकियों पर सोच रहा होता है, तब यह टूल एआई को नकली डेटा फीड कर रहा होता है। इससे एआई एल्गोरिदम असली क्रिएटिव चॉइस व नकली मूवमेंट में फर्क नहीं कर पाता और कन्फ्यूज हो जाता है। एआई पॉइजनिंग कलाकार अब फाइनल वर्क सबमिट करने या स्क्रीन पर प्रोसेस करने से पहले ‘नाइटशेड’ व ‘ग्लैज’ जैसे एंटी-एआई टूल्स का इस्तेमाल बैकग्राउंड में कर रहे हैं। शिकागो यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए ये टूल डिजिटल पेंटिंग के पिक्सल में ऐसे बदलाव कर देते हैं जो सामान्य रूप से नहीं दिखते, पर जब एआई इस डेटा को चुराता है, तो उसका दिमाग खराब हो जाता है। उदाहरण के लिए, आर्टिस्ट बना रहा होगा ‘कुत्ता’, पर एआई ट्रैकर उसे ‘बिल्ली’ समझकर फीड कर लेगा, जिससे पूरी एआई ट्रेनिंग का कबाड़ा हो जाता है।
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब ग्रीस में भी लाइव हो गया है। ग्रीस इस डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ने वाला नया देश बन गया है। एथेंस में यूरोबैंक के हेडक्वार्टर में यूरोबैंक और NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की पार्टनरशिप से शुरू हुई इस सर्विस का लाइव डेमो भी देखा गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में डेमो हुआ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एथेंस की अपनी ऑफिशियल विजिट के दौरान इस सर्विस के लाइव डेमो को देखा। उन्होंने कहा कि UPI को मिल रही वैश्विक स्वीकार्यता से यह साबित होता है कि भारत की टेक्नोलॉजी पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है। यह तकनीक सीमाओं के पार भी बेहतरीन तरीके से काम कर सकती है। अब 10 देशों में मिलेगी UPI की सुविधा ग्रीस के इस नेटवर्क में शामिल होने के बाद अब दुनिया के 10 देशों में अलग-अलग रूपों में UPI का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह भारतीय यात्रियों के लिए QR-कोड आधारित मर्चेंट पेमेंट से लेकर क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस सर्विसेज (पैसे ट्रांसफर करने) तक की सुविधा देता है। ग्रीस से पहले कंबोडिया में शुरू हुआ था UPI ग्रीस से ठीक पहले कंबोडिया इस लिस्ट में शामिल होने वाला 9वां देश बना था। इसके लिए NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड ने वहां के ACLEDA बैंक के साथ पार्टनरशिप की थी। इसके तहत कंबोडिया के नेशनल QR कोड 'KHQR' के जरिए क्रॉस-बॉर्डर UPI पेमेंट्स की शुरुआत की गई थी। इससे पहले सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर और श्रीलंका को उन आठ देशों के रूप में लिस्ट किया था, जहां UPI को स्वीकार किया जा रहा है। फ्रांस के एफिल टॉवर से हुई थी शुरुआत यूरोप में UPI के विस्तार में फ्रांस एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। साल 2024 में पेरिस के एफिल टॉवर से UPI को लॉन्च किया गया था। इसके बाद इस सर्विस का विस्तार वहां के बड़े रिटेल डेस्टिनेशंस जैसे नीस में स्थित 'गैलरीज लाफायेट' तक किया गया। क्या है UPI और इसके ग्लोबल विस्तार का भविष्य कैसे काम करता है विदेशी धरती पर UPI? भारतीय यात्री विदेशों में इंटरनेशनल रोमिंग या एक्टिवेटेड UPI एप के जरिए वहां के स्थानीय QR कोड (जैसे कंबोडिया में KHQR या ग्रीस में यूरोबैंक मर्चेंट नेटवर्क) को स्कैन करके सीधे अपने भारतीय बैंक अकाउंट से पेमेंट कर सकते हैं। इससे उन्हें विदेशी करेंसी एक्सचेंज कराने के झंझट से मुक्ति मिलती है। ये खबर भी पढ़ें… अब यूजरनेम से भी होगी WhatsApp पर चैट: 29 जून से बुकिंग शुरू; बिना मोबाइल नंबर बताए बातचीत भी कर सकेंगे अब तक वॉट्सएप पर किसी नए व्यक्ति से बात करने के लिए मोबाइल नंबर देना जरूरी होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने यूजरनेम फीचर लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसके बाद लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
अब तक वॉट्सएप पर किसी नए व्यक्ति से बात करने के लिए अपना मोबाइल नंबर देना जरूरी होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने यूजरनेम फीचर लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसके बाद लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे। कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम रिजर्वेशन शुरू कर दिया है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर आपके इलाके में उपलब्ध होगा, तब वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। वॉट्सएप सीआओ कुणाल शाह ने X पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने फीचर सार्वजनिक होने से पहले ही अपना यूजरनेम रिजर्व कर लिया है। उन्होंने लोगों से भी जल्द अपना पसंदीदा यूजरनेम लेने की अपील की। वॉट्सएप Username फीचर से जुड़े 8 सवालों के जवाब ……………….. यह खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
अब खराब विजिबिलिटी में भी प्लेन सुरक्षित लैंड कर सकेंगे। क्योंकि, भारत में पहली बार किसी बड़े कॉमर्शियल जेट को ग्राउंड से रेडियो सिग्नल भेजे बिना सीधे सैटेलाइट सिग्नल्स की मदद से सुरक्षित उतारने का सफल ट्रायल कर लिया गया है। विमानन नियामक DGCA की देखरेख में 27 जून को इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने स्वदेशी 'गगन' नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर यह ऐतिहासिक लैंडिंग की। हालांकि इंडिगो ने 2022 में छोटे ATR विमानों पर इसका परीक्षण किया था, लेकिन बड़े कॉमर्शियल जेट के साथ देश में यह पहला सफल ट्रायल है। इसे ऐसे समझें पहले: जैसे रास्ता पूछने के लिए आपको हर चौराहे पर किसी व्यक्ति की मदद चाहिए।अब: आपके फोन में GPS हो और वह सीधे सैटेलाइट से रास्ता बताता रहे। विमान के लिए भी यही हुआ। अब उसे एयरपोर्ट के रेडियो उपकरणों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और सैटेलाइट आधारित 'गगन' सिस्टम उसे अधिक सटीक तरीके से रनवे तक पहुंचाएगा। इससे क्या फायदा होगा 5 सवाल-जवाब से जानिए गगन सिस्टम के बारे में… सवाल: क्या है स्वदेशी गगन सिस्टम? जवाब: गगन का पूरा नाम 'जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) है। यह भारत का अपना सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर तैयार किया है। गगन, भारत के नाविक या अमेरिका के GPS की तरह कोई स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम नहीं है, जो सीधे लोकेशन बताता हो। बल्कि, यह पहले से मौजूद GPS सिग्नल्स की कमियों और गलतियों को ठीक करके उन्हें विमानों के लिए और ज्यादा सटीक व भरोसेमंद बनाता है। सवाल: सैटेलाइट लैंडिंग पारंपरिक सिस्टम से कैसे अलग है? जवाब: आमतौर पर बड़े और प्रमुख एयरपोर्ट्स पर विमानों को उतारने के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत रनवे के आसपास महंगे ग्राउंड-बेस्ड उपकरण और रेडियो बीम लगाए जाते हैं, जो पायलट को रनवे का सटीक रास्ता बताते हैं। इसके उलट, 27 जून को हुए टेस्ट में सैटेलाइट-बेस्ड लैंडिंग सिस्टम (SLS) का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में जमीन पर लगे भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती, बल्कि आसमान में मौजूद सैटेलाइट्स सीधे प्लेन को गाइड करते हैं। प्लेन में बैठे यात्रियों को इस बदलाव का बिल्कुल भी अहसास नहीं हुआ, लेकिन एविएशन सेफ्टी और खर्च के लिहाज से यह बेहद क्रांतिकारी बदलाव है। सवाल: यह तकनीक छोटे एयरपोर्ट्स के लिए गेम चेंजर क्यों हो सकती है? जवाब: भारत के कई छोटे और सेकेंडरी शहरों के एयरपोर्ट्स पर ILS सिस्टम नहीं लगा है। इसका कारण इसकी भारी-भरकम इंस्टॉलेशन कॉस्ट और हर महीने रखरखाव पर होने वाला बड़ा खर्च है। सैटेलाइट गाइडेड सिस्टम आने से अब इन छोटे एयरपोर्ट्स पर भी खराब मौसम या कम विजिबिलिटी के दौरान विमानों की सटीक और सुरक्षित लैंडिंग कराई जा सकेगी। विमान बनाने वाली दिग्गज कंपनी 'एयरबस' के मुताबिक, यह तकनीक पायलटों को खराब मौसम में भी बिना किसी अतिरिक्त एयरपोर्ट इक्विपमेंट के स्थिर और सीधी अप्रोच बनाने में मदद करती है। मुख्य सिस्टम के फेल होने या मेंटेनेंस के वक्त यह एक बेहतरीन बैकअप की तरह भी काम करेगा। सवाल: स्मार्टफोन वाला GPS प्लेन क्यों नहीं उतार सकता? जवाब: हमारे स्मार्टफोन में जो GPS होता है, वह कुछ मीटर तक की सटीकता देता है, जो सड़क पर रास्ता ढूंढने के लिए तो ठीक है लेकिन बादलों के बीच से आ रहे तेज रफ्तार कमर्शियल विमान को सुरक्षित रनवे पर उतारने के लिए काफी नहीं है। जब GPS सिग्नल्स अंतरिक्ष से जमीन की तरफ आते हैं, तो वायुमंडल की ऊपरी परत (आयनोस्फीयर) के कारण उनमें थोड़ी देरी और गड़बड़ी आ जाती है। भारत के ऊपर यह गड़बड़ी और तेजी से बदलती है क्योंकि हमारा देश इक्वेटोरियल आयनाइजेशन एनोमली के ठीक नीचे आता है। विमानों को सटीक लैंडिंग के लिए न सिर्फ एकदम सटीक डेटा चाहिए होता है, बल्कि इस बात की गारंटी भी चाहिए होती है कि जो डेटा मिल रहा है, वह 100% सही है। सवाल: इस साल 40 से ज्यादा एयरपोर्ट्स पर सुविधा मिलेगी जवाब: इंडिगो अब इस सैटेलाइट-बेस्ड तकनीक को अपने पूरे बेड़े में तेजी से लागू कर रहा है। भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने देश के कई एयरपोर्ट्स पर पहले ही 23 सैटेलाइट गाइडेड अप्रोच प्रोसीजर पब्लिश कर दिए हैं और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक यह संख्या 40 के पार चली जाएगी। इसरो के मुताबिक, गगन सिस्टम के दो मुख्य लक्ष्य हैं- पहला, नागरिक उड्डयन को बेहद सुरक्षित और सटीक बनाना और दूसरा, विमानों को सीधे और छोटे रूट्स पर उड़ाकर एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर करना है, जिससे ईंधन की बचत हो सके। यह सिस्टम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया गया है, जिससे विदेशी सीमाओं को पार करते समय भी विमान बिना किसी रुकावट के नेविगेट कर सकेंगे। कमर्शियल जेट की यह पहली सफल लैंडिंग भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन नेटवर्क को अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब में हेलिकॉप्टर क्रैश, 14 लोगों की मौत:मरने वाले सभी सऊदी के नागरिक, हेलिकॉप्टर दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का था सऊदी अरब के रास तनुरा में रविवार को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में हेलिकॉप्टर सवार सभी 14 लोगों की मौत हो गई। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के मुताबिक, हेलिकॉप्टर में सवार सभी लोग सऊदी अरब के ही नागरिक थे। हालांकि, क्रैश की वजह की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
बजाज ऑटो ने भारत में अपनी पल्सर N125 बाइक को बंद कर दिया है। अक्टूबर 2024 में लॉन्च हुई यह बाइक भारतीय बाजार में दो साल भी पूरे नहीं कर पाई। कंपनी ने देश के डीलर्स को इसकी सप्लाई बंद कर दी है। कम बिक्री के कारण कंपनी ने इसे भारतीय बाजार से हटाने का फैसला किया। बजाज ऑटो का इतिहास रहा है कि जो बाइक्स पर्याप्त संख्या में नहीं बिकती हैं, उन्हें कंपनी बंद कर देती है। पल्सर N125 इसका नया उदाहरण है। हालांकि, बाइक अभी भी बजाज की भारतीय वेबसाइट पर दिखाई दे रही है। बिल्कुल नए प्लेटफॉर्म पर तैयार हुई थी बाइक अजीब लुक और डिजाइन पसंद नहीं आया इस बाइक का पतला और फैला हुआ लुक भारतीय ग्राहकों को पसंद नहीं आया। इसके मुकाबले बाजार में मौजूद दूसरी बाइक्स जैसे हीरो एक्सट्रीम 125R और होंडा CB125 हॉरनेट काफी लोकप्रिय हैं। ये बाइक्स अपनी वास्तविक क्षमता से ज्यादा बड़ी और स्पोर्टी दिखती हैं, जो ग्राहकों को आकर्षित करती हैं। TFT डिस्प्ले और ABS जैसे फीचर्स की थी कमी पल्सर N125 में लिमिटेड फीचर्स होना भी इसके बंद होने की एक बड़ी वजह बना। इस बाइक में कई ऐसे फीचर्स मौजूद नहीं थे, जो इसके कॉम्पिटिटर्स में मिलते हैं। उदाहरण के लिए, इस बाइक में ग्राहकों को TFT डिस्प्ले और ABS (एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) की सुविधा नहीं मिलती थी। विदेशी बाजारों में बिकती रहेगी बाइक भारत में बंद होने के बावजूद पल्सर N125 का सफर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कंपनी इस बाइक को कई विदेशी बाजारों में बेचना जारी रखेगी। इनमें नेपाल, पेरू, कोलंबिया और मोरक्को जैसे देश शामिल हैं। हालांकि, बदले हुए लुक और ज्यादा फीचर्स के साथ यह बाइक या इसका प्लेटफॉर्म भविष्य में भारत में वापसी करेगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। क्या होता है TFT डिस्प्ले और ABS?
महाराष्ट्र के ठाणे में एक खड़ी कार में अचानक एयरबैग खुलने से 25 साल के युवक मौत हो गई। युवक एक कार डीलर था। इसका नाम मोहित सोनी है। वह एक 15 साल पुरानी कार के अंदर बैठा था। तभी अचानक गाड़ी का सेफ्टी सिस्टम एक्टिव हो गया। एयरबैग इतनी तेजी से खुला कि उसके जोरदार झटके से युवक को गंभीर चोटें आईं और मेडिकल मदद मिलने से पहले ही ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौत हो गई। युवक को चोट कहां लगी इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है। यह घटना बुधवार को ठाणे के काशिमीरा इलाके में हुई। पुलिस ने जानकारी शनिवार को दी। घटना के बाद की 2 तस्वीरें… पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज किया ठाणे पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि कार भले ही पुरानी थी, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उसके पास वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट था। पुलिस ने मामले में एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज किया है। पुलिस जांच के लिए ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स से भी सलाह ले रही है। एयरबैग खुलने की स्पीड 200 से 300 किमी/घंटा के बीच हो सकती है। इस वजह से तेज झटका लगता है। इससे बचने के लिए सीट बेल्ट लगाना जरूरी होता है। सीट बेल्ट ना लगाने की स्थिति में जोरदार झटका लगने से गंभीर चोट लग सकती है या मौत भी हो सकती है। एयरबैग क्या है एयरबैग कार का एक सेफ्ट टूल है। ये गुब्बारे की तरह कॉटन का बना एक थैला होता है। जिस पर सिलिकॉन की कोटिंग होती है। कार की टक्कर होने जैसा फील होते ही यह तुरंत एक्टिव होकर कार में बैठे व्यक्ति को स्टीयरिंग व्हील, डैशबोर्ड या दरवाजों से यात्री के सिर और छाती को टकराने से बचाता है। इसके खुलने की प्रोसेस सेंटीकंड्स में होती है। एयरबैग कैसे काम करता है एयरबैग से दूरी 10 इंच रखना जरूरी, तभी सुरक्षित ------------------- महाराष्ट्र की ये खबर भी पढ़ें… महाराष्ट्र में TET पेपर लीक, कल एग्जाम होना था:सरकार ने परीक्षा रद्द की, पेपर ठाणे से बरामद; सरकारी टीचर्स के लिए ये परीक्षा जरूरी महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का पेपर करीब 24 घंटे पहले लीक हो गया। एग्जाम रविवार को होना था। महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल (MSEC) ने इसके बाद परीक्षा स्थगित कर दी है। नई तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें
अगर आप अमेजन पर नई किताबें खोजते हैं, तो हो सकता है उनमें बड़ी संख्या ऐसी हो जिन्हें किसी लेखक ने नहीं, बल्कि एआई ने लिखा हो। 2022 में चैटजीपीटी जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल आने के बाद अमेजन पर हर महीने प्रकाशित होने वाली ई-बुक्स की संख्या करीब 1 लाख से बढ़कर 3 लाख हो गई है। यानी सिर्फ तीन साल में यह आंकड़ा लगभग तीन गुना हो गया। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री इमके रीमर्स और यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के प्रोफेसर जोएल वाल्डफोगेल ने करीब 50 हजार किताबों का विश्लेषण किया। उन्होंने एआई डिटेक्शन टूल्स, अमेजन रेटिंग और बिक्री के आधार पर तुलना की। निष्कर्ष साफ था कि एआई किताबों की संख्या तेजी से बढ़ी। लेकिन उन्हें कम रेटिंग मिली। बिक्री भी इंसानी लेखकों की किताबों से कम रही। पाठकों ने उन्हें कम उपयोगी माना। प्रकाशक भी एआई को अपना रहे हैं। प्रसिद्ध ट्रैवल गाइड कंपनी Fodor’s ने अपना चैटबॉट तैयार किया है। यह उनके संपादित कंटेंट के आधार पर ट्रैवल गाइड बनाता है।
यूजर के अनुभव के हिसाब से जवाब देगा एआई:अब फेसबुक पर भी AI सर्च; 8 सवालों से जानें कैसे काम करेगा
अगर आप नया फोन खरीदना चाहते हैं, किसी शहर में घूमने की जगह तलाश रहे हैं या अपनी कार के लिए बेहतर एक्सेसरी ढूंढ रहे हैं, तो अब इसके लिए गूगल पर दर्जनों वेबसाइट खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेटा ने फेसबुक में नया एआई मोड शुरू किया है। इसमें आप सामान्य भाषा में सवाल पूछ सकते हैं और मेटा एआई, फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप पर लोगों द्वारा साझा किए गए अनुभवों के आधार पर आपको विस्तृत जवाब देगा... यानी फेसबुक अब सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एआई सर्च इंजन बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। सवाल-जवाब से जानें कैसे बदलेगा अनुभव? क्या है फेसबुक एआई? पहले सर्च बार में कोई शब्द लिखने पर सिर्फ पोस्ट, पेज या ग्रुप दिखते थे। अब अगर आप पूरा सवाल लिखेंगे, जैसे 50 हजार में सबसे अच्छा फोन कौन-सा है? तो मेटा का एआई यूजर्स को इन सवालों का सीधा जवाब देगा। कैसे करेगा काम? - सबसे पहले फेसबुक एप खोलें। - सर्च बार में में सवाल लिखें। - एआई मोड अपने-आप सक्रिय हो जाएगा। फिर मेटा एआई जवाब देगा। - जवाब पसंद न आए तो बातचीत में दूसरा सवाल पूछ सकते हैं, बिल्कुल चैटजीपीटी की तरह। जानकारी कहां से आएगी? गूगल जहां पूरी इंटरनेट दुनिया में खोज करता है, वहीं फेसबुक एआई मोड मुख्य रूप से इन स्रोतों से जानकारी जुटाता है। - फेसबुक की सार्वजनिक पोस्ट - फेसबुक ग्रुप्स - रील्स - इंस्टाग्राम की सार्वजनिक सामग्री। सबसे बड़ी चुनौती क्या? फेसबुक पर मौजूद हर पोस्ट सही नहीं होती। सोशल मीडिया पर पुरानी जानकारी, अफवाहें, स्पैम, प्रायोजित पोस्ट और व्यक्तिगत राय भी बड़ी मात्रा में मौजूद रहती हैं। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर एआई किसी क्रिएटर की पोस्ट का सार बताकर जवाब दे देगा, तो क्या लोग मूल पोस्ट तक जाएंगे? मेटा ने साफ नहीं किया है कि स्रोत का जिक्र होगा या नहीं। किन कामों में उपयोगी? 1. यात्रा - अगर पूछेंगे कि जयपुर में दो दिन में क्या देखें? तो AI उन लोगों के अनुभव भी जोड़ सकता है जो वहां घूम चुके हैं। 2. खरीदारी - शॉपिंग के बारे में पूछेंगे, तो एआई फेसबुक ग्रुप्स में लोगों के अनुभवों का सार बताएगा। कहां इस्तेमाल न करें? मेटा एआई के जवाब लोगों की पोस्ट पर आधारित हो सकते हैं। इसलिए इन मामलों में भरोसा नहीं करना चाहिए। - बीमारी और इलाज - दवाइयों की सलाह - कानूनी सलाह - निवेश संबंधी निर्णय - ब्रेकिंग न्यूज - सरकारी नियम पर सतर्क रहे। गूगल और चैटजीपीटी से कितना अलग? गूगल/चैटजीपीटी - वेबसाइट, रिसर्च पेपर, वीडियो समेत पूरे इंटरनेट से जानकारी खोजते हैं। फेसबुक एआई मोड - मेटा प्लेटफॉर्म (वॉट्सएप-इंस्टाग्राम) के कंटेंट पर अधिक निर्भर रहता है। इसमें विज्ञापन दिखेंगे? एआई सर्च के जवाबों में अलग से विज्ञापन नहीं हैं। लेकिन भविष्य में स्पॉन्सर्ड पोस्ट और रील्स को भी एआई सर्च का हिस्सा बना सकता है। भारत में जल्द आएगा - मेटा ने एआई मोड का रोलआउट शुरू कर दिया है। अभी यह सभी देशों में उपलब्ध नहीं है, लेकिन भारत मेटा का सबसे बड़ा बाजा है। ऐसे में यह फीचर भारतीय बाजार में जल्द उपलब्ध होगा।
सिलिकॉन वैली के एक आलीशान टेक ऑफिस में सन्नाटा पसरा है। स्क्रीन पर कोडिंग की लाखों लाइनें तैर रही हैं। एक तरफ दुनिया के बेहतरीन कंप्यूटर इंजीनियर्स सिर पकड़े बैठे हैं, और दूसरी तरफ शांत मुद्रा में दार्शनिक दिख रहे हैं। यह दृश्य उस हकीकत को बयां करता है, जिसने टेक वर्ल्ड के पुराने ढर्रे को पूरी तरह पलट दिया है। एक दशक पहले युवाओं को कहा जाता था-‘नौकरी चाहिए तो कोडिंग सीखो।’ लेकिन अब कोडर्स नौकरियों को लेकर चिंतित हैं, जबकि फिलॉसफी के छात्रों की मांग बढ़ रही है। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर 7%, जबकि दर्शनशास्त्र ग्रेजुएट्स की सिर्फ 5.1% है। येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लुसियानो फ्लोरिडी कहते हैं,‘दर्शनशास्त्र विभागों से छात्रों और प्रोफेसरों का ‘टेक कंपनियों में जाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कंप्यूटर को तो गणित व कोड की भाषा समझ आती है, तो दार्शनिकों की जरूरत क्यों..? प्रो. फ्लोरिडी कहते हैं, क्योंकि कंप्यूटर को कोडिंग सिखाने से ज्यादा मुश्किल उसे नैतिकता सिखाना है। आज के एआई मॉडल्स की सबसे बड़ी समस्या ‘चापलूसी’ और ‘मतिभ्रम’ है। वे अक्सर वही कहते हैं जो यूजर सुनना चाहता है, चाहे झूठ ही क्यों न हो। इसे सुधारने के लिए दार्शनिकों ने सुकरात की पद्धति अपनाई, जिससे एआई को अपनी अज्ञानता का अहसास कराया जाता है। गूगल डीपमाइंड के दार्शनिक इयासोन गैब्रिएल बताते हैं कि इस दार्शनिक विनम्रता से एआई के झूठ बोलने की आदत में भारी कमी आई है। इतना ही नहीं, एंथ्रोपिक ने क्लाउड मॉडल के लिए 78 पन्नों का ‘संविधान’ बनाया है, जिसे कर्मचारी कंप्यूटर की ‘आत्मा का दस्तावेज’ कहते हैं। इसमें जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के विचारों की मदद ली गई, जिससे मॉडल को नैतिक दिशा मिली। जैसे-जैसे गाड़ियां खुद चलने लगी हैं और एआई हथियारों पर फैसले लेने लगा है, उलझनें गहरी हो रही हैं। क्या बुजुर्ग की जान बचाने के लिए बच्चे की जान दांव पर लगाई जाए? पर्यावरण बचाने के लिए विकास रोका जाए? ऐसे सवालों का हल सिर्फ कोडिंग से नहीं, बल्कि सदियों पुराने दार्शनिक विचार के मंथन से ही निकल सकता है। कंप्यूटर को गुरु बनाना खतरनाक आलोचक ‘नैतिक कौशल के खत्म होने’ को लेकर चिंतित हैं... अगर कंप्यूटर ही नैतिक फैसले लेने लगेंगे, तो क्या इंसान फैसले लेने की क्षमता खो देंगे? लुइसविले यूनिवर्सिटी के एआई सिद्धांतकार रोमन याम्पोल्सकी तर्क देते हैं कि सही-गलत का पैमाना हर देश, काल व परिस्थिति में बदलता रहता है। इसलिए, कंप्यूटर को ‘गुरु’ बना देना खतरनाक है, क्योंकि वह सिर्फ कोड समझता है, इंसानी भावना व बदलती दुनिया की पेचीदगियां नहीं। एआई को इंसानों की तरह संवेदनशील बनाने पर जोर प्रो. फ्लोरिडी कहते हैं,‘एआई कंपनियां दो दार्शनिक सिद्धांतों पर जंग लड़ रही हैं। पहला- कर्तव्यवाद जो सख्त नियमों पर आधारित है... कभी झूठ न बोलना या धोखा न देना। एंथ्रोपिक और इंफ्लेक्शन एआई इसी सिद्धांत पर चलते हैं, जिससे उनका एआई ज्यादा ईमानदार और इंसानों की मानसिक स्थिति के प्रति संवेदनशील बनता है। दूसरा- परिणाम आधारित सोच... यानी फैसले से होने वाले नफे-नुकसान को तौलना। चैटजीपीटी और जेमिनी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं। जैसे- वेमो की सेल्फ-ड्राइविंग कारें इसी सिद्धांत पर दुर्घटना की स्थिति में दिशा वही चुनती हैं, जिससे सबसे कम नुकसान या मौतें हों।
आईटेल ने भारतीय बाजार में अपना नया फीचर फोन 'आईटेल पावर 451' लॉन्च कर दिया है। ₹1,699 की कीमत वाले इस फोन में एआई एनवायरनमेंटल नॉइज कैंसिलेशन (AI-ENC), टाइप-C चार्जिंग और 55 दिनों के स्टैंडबाय वाली बड़ी बैटरी दी गई है। 1 साल की रिप्लेसमेंट वारंटी और 4 स्टाइलिश कलर्स यह फोन चार कलर्स - ब्लू, ग्रीन, पर्पल और ब्लैक में आता है। आईटेल इस फीचर फोन पर किसी भी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के लिए 1 साल की 'काउंटर रिप्लेसमेंट' ऑफर भी दे रही है। फीचर फोन सेगमेंट में पहली बार AI-ENC तकनीक आईटेल भारत का एकमात्र ऐसा ब्रांड है जो फीचर फोन सेगमेंट में AI-ENC तकनीक दे रहा है। यह एडवांस फीचर भीड़भाड़ वाले बाजारों, व्यस्त सड़कों या दफ्तरों के शोर-शराबे को कम कर देता है। इससे यूजर को बिल्कुल साफ आवाज में बात करने का अनुभव मिलता है। 2.4-इंच की स्क्रीन और ऑटो कॉल रिकॉर्डिंग जैसे फीचर्स बैक कवर मिलेगा और फोन में टाइप-C चार्जिंग पोर्ट फोन के साथ कंपनी एक प्रोटेक्टिव बैक कवर भी दे रही है। इसके अलावा, फोन में टाइप-C चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है, जो आमतौर पर सिर्फ स्मार्टफोन्स में मिलता है। 2500 mAh की बड़ी बैटरी और 55 दिनों का स्टैंडबाय टाइम आईटेल पावर 451 में 2500 mAh की पावरफुल बैटरी दी गई है। कंपनी के मुताबिक, यह बैटरी 'सुपर बैटरी मोड' और 'AI मोड' के साथ 55 दिनों तक का स्टैंडबाय टाइम देने में सक्षम है। यह उन यूजर्स के लिए बेहद मददगार साबित होगा जो दिनभर घर से बाहर रहते हैं। कंपनी के सीईओ बोले- 'रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना ही इनोवेशन' इस नए फोन के लॉन्च पर आईटेल इंडिया के सीईओ अरिजीत तालापात्रा ने कहा, आईटेल में हमारा फोकस हमेशा से ऐसे काम के इनोवेशन लाने पर रहा है जो भारतीय उपभोक्ताओं की असली समस्याओं को हल कर सकें और तकनीक को हर बजट में उपलब्ध कराएं। आईटेल ने ही फीचर फोन में AI ENC तकनीक की शुरुआत की थी। हमारे लिए इनोवेशन का मतलब हमेशा से यही रहा है कि जो उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बना सके. नॉलेज पार्ट:
सैमसंग ने अपनी गैलेक्सी A-सीरीज का नया स्मार्टफोन गैलेक्सी A27 5G ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है। यह नया हैंडसेट पुराने गैलेक्सी A26 5G का अपग्रेड वर्जन है। इस स्मार्टफोन में ग्राहकों को 6.7-इंच की सुपर AMOLED डिस्प्ले, क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 3 चिपसेट और एडवांस AI फीचर्स के साथ 6 साल का सॉफ्टवेयर सपोर्ट मिलेगा। 3 जुलाई से चुनिंदा बाजारों में बिक्री शुरू, 4 कलर ऑप्शन्स मिलेंगे सैमसंग ने बताया है कि नया गैलेक्सी A27 5G स्मार्टफोन 3 जुलाई से चुनिंदा वैश्विक बाजारों में बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगा। कंपनी इस फोन को चार कलर ऑप्शन्स में लेकर आई है, जिसमें ब्लैक, ब्लू, लाइट ग्रीन और लाइट पिंक शामिल हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी कीमतों और भारतीय बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 120Hz रिफ्रेश रेट वाली सुपर AMOLED डिस्प्ले और स्लिम डिजाइन सैमसंग गैलेक्सी A27 5G में 6.7-इंच का फुल HD+ सुपर AMOLED इन्फिनिटी-O डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। कंपनी का कहना है कि इसके नए पंच-होल डिजाइन की वजह से कैमरा एरिया अब कम दिखाई देता है। इसके साथ ही फोन की बॉडी को 7.8mm स्लिम बनाया गया है, जिससे इसे हाथ में पकड़ना आरामदायक हो जाता है। 4nm स्नैपड्रैगन प्रोसेसर और 2TB तक स्टोरेज बढ़ाने की सुविधा परफॉर्मेंस के लिए इस स्मार्टफोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 3 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4nm प्रोसेस पर बेस्ड है। यह फोन बाजार में तीन स्टोरेज वेरिएंट्स में उपलब्ध होगा, जिसमें 6GB RAM + 128GB स्टोरेज, 8GB RAM + 128GB स्टोरेज और 8GB RAM + 256GB स्टोरेज शामिल हैं। यूजर्स माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से इसके स्टोरेज को 2TB तक बढ़ा सकते हैं। ओआईएस सपोर्ट के साथ 50MP का मेन कैमरा फोटोग्राफी और वीडियो कॉलिंग के लिए गैलेक्सी A27 5G के रियर पैनल पर ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) सपोर्ट के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा, 5MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर और 2MP का मैक्रो कैमरा शामिल है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल्स के लिए फोन के फ्रंट में 12MP का कैमरा मिलता है। 5,000mAh की बड़ी बैटरी और एंड्रॉयड 16 ऑपरेटिंग सिस्टम स्मार्टफोन में 5,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 25W की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह डिवाइस आउट ऑफ द बॉक्स एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड वन यूआई 8.5 ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करता है। धूल और पानी से सुरक्षा के लिए इसे IP64 की रेटिंग मिली है। 22 भाषाओं में वॉइस ट्रांसलेशन और एडवांस AI फीचर्स सैमसंग ने गैलेक्सी A27 5G में अपने AI फीचर्स के दायरे को और बढ़ा दिया है। इस फोन में गूगल का 'सर्कल टू सर्च' फीचर दिया गया है, जो अब मल्टी-ऑब्जेक्ट रिकग्निशन को सपोर्ट करता है। इसके अलावा फोन में ऑब्जेक्ट इरेज़र और 22 भाषाओं में ट्रांसलेशन सपोर्ट करने वाला वॉइस ट्रांसक्रिप्शन फीचर भी शामिल है। डिवाइस को नेचुरल लैंग्वेज से कंट्रोल करने के लिए इसमें गूगल जेमिनी , परप्लेक्सिटी और बिक्सबी जैसे AI असिस्टेंस का सपोर्ट दिया गया है। 6 साल का सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स गैलेक्सी A27 5G खरीदने वाले यूजर्स को 6 जनरेशन तक एंड्रॉयड ओएस और वन यूआई अपग्रेड्स मिलेंगे। इसके साथ ही कंपनी 6 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स भी देगी। फोन की डेटा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इसमें सैमसंग नॉक्स वॉल्ट को शामिल किया गया है। नॉलेज पार्ट :
एपल ने गुरुवार को अमेरिका में अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतों में 300 डॉलर तक की बढ़ोतरी कर दी है। भारत में भी इनकी कीमतों में ₹1 लाख तक का इजाफा हुआ है। कंपनी का कहना है कि AI इंडस्ट्री के डेटा सेंटर बनाने के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते अब ग्राहकों को इस बढ़ी हुई कीमत से बचाना संभव नहीं रह गया है। कीमत बढ़ने से अमेरिका में कौन-से प्रोडक्ट्स महंगे हुए इस फैसले से एपल के सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट आईफोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी के सबसे कम कीमत वाले लैपटॉप 'नियो' की शुरुआती कीमत लॉन्च के कुछ महीने बाद ही 599 डॉलर से बढ़कर 699 डॉलर हो जाएगी। इसके अलावा 512 गीगाबाइट वाले मैकबुक एयर की कीमत 200 डॉलर बढ़ गई है, जबकि 1 टेराबाइट स्टोरेज वाले मैकबुक प्रो की कीमत में 300 डॉलर का इजाफा होगा। एपल ने अपने होमपॉड स्मार्ट स्पीकर के दोनों वर्जन और एपल टीवी सेट-टॉप बॉक्स की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इस घोषणा के बाद एपल के शेयर करीब 5% गिर गए, जबकि उसकी कॉम्पिटिटर कंपनी डेल के शेयर 8% से ज्यादा टूट गए। चिप मेकर्स ने एनवीडिया जैसी कंपनियों को दी प्राथमिकता माइक्रोन जैसी मेमोरी मैन्युफैक्चरर कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में एनवीडिया जैसे AI चिपमेकर्स के ऑर्डर्स को प्राथमिकता दी है। इस कदम से मेमोरी मैन्युफैक्चरर को रिकॉर्ड मुनाफा तो हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए इसकी सप्लाई बेहद कम बची है। सप्लाई कम होने के कारण कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एपल के सप्लायर्स के साथ बेहतरीन संबंध होने के बावजूद वह इस संकट से नहीं बच पाई है। हालांकि, मजबूत संबंधों के कारण एपल को कुछ राहत जरूर मिली है, क्योंकि उसके कॉम्पिटिटर्स को कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ी है। कंपोनेंट की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी एपल ने एक बयान जारी कर कहा कि हमने किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी तेजी से और इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी है। हम अब तक अपने ग्राहकों को इन बढ़ी हुई कीमतों से बचाते आ रहे थे, लेकिन अब हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें आईपैड और मैक सहित कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना शुरू करना पड़ रहा है। अगले फेज में आईफोन की कीमतें बढ़ने की आशंका मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगला नंबर आईफोन का हो सकता है। रिसर्च फर्म IDC की सीनियर रिसर्च डायरेक्टर नबीला पोपल ने कहा कि आईफोन इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं है, इसकी कीमतें भी जल्द ही बढ़ने वाली हैं। एपल के लिए आईफोन की फॉल लॉन्चिंग से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा करना बेहद स्ट्रैटेजिक कदम था, ताकि लॉन्चिंग के समय सुर्खियां कीमतों में बढ़ोतरी के बजाय नए फोन की वैल्यू पर फोकस रहें। क्या है रैम-एगेडन का पूरा बैकग्राउंड मॉडर्न टेक गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) की कीमतों में 2026 की पहली तिमाही में 98% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर ट्रेंडफोर्स के मुताबिक, चालू तिमाही में भी इसकी कीमतों में 58% से 63% तक का उछाल आने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स इस स्थिति को रैम-एगेडन कह रहे हैं। यह संकट AI डेटा सेंटर डेवलपमेंट में आए उछाल के कारण पैदा हुआ है, जहां एनवीडिया जैसी कंपनियां मेमोरी मैन्युफैक्चरर के साथ लॉन्ग-टर्म डील कर रही हैं। माइक्रोन ने बुधवार को बताया कि उसने अपनी मेमोरी सप्लाई सुरक्षित करने के इच्छुक ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट लॉक किए हैं। गैजेट्स मार्केट के फ्यूचर पर असर लागत में हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर इस साल डिवाइस की बिक्री पर पड़ने की उम्मीद है। रिसर्च फर्म IDC के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़ती लागत के कारण स्मार्टफोन बाजार में इस साल करीब 14% की अब तक की सबसे बड़ी सालाना गिरावट देखने को मिल सकती है, जबकि पीसी (PC) मार्केट में भी 11.3% की कमी आने की आशंका है। ये खबर भी पढ़ें… चीन में 7 लाख डिलीवरी वर्कर्स की जगह लेंगे रोबोट: ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू का चाइना सीईओ फोरम में बयान चीन में एक ही कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी कर्मचारियों की जगह रोबोट ले सकते हैं। ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू ने एपीईसी चाइना सीईओ फोरम में कहा कि भविष्य में डिलीवरी कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं होगी। सारी डिलीवरी रोबोट द्वारा की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
चीन में एक ही कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी कर्मचारियों की जगह रोबोट ले सकते हैं। ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू ने एपीईसी चाइना सीईओ फोरम में कहा कि भविष्य में डिलीवरी कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं होगी। सारी डिलीवरी रोबोट द्वारा की जाएगी। कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी और फ्रंटलाइन कर्मचारी इस बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं। जेडी.कॉम पहले से ही अपने वेयरहाउस, सॉर्टिंग सेंटर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन का उपयोग कर रही है। रिचर्ड लियू ने बताया कि उनकी कंपनी ने एआई और रोबोटिक्स से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों के लिए एक निर्वाण योजना शुरू की है। इसके तहत चीन के लगभग 120 शिक्षण संस्थानों की मदद से कर्मचारियों को रोबोट मरम्मत, रखरखाव, मॉनिटरिंग और तकनीकी संचालन जैसे कौशल सिखाए जाएंगे। 100 से ज्यादा काम रोबोट से करवाने की कोशिश चीन की कोशिश है कि इस साल के आखिर तक ह्यूमनॉइड रोबोट 100 से ज्यादा तरह के असल जिंदगी के कामों में सक्रिय हो जाएं। चीन के उद्योग मंत्रालय ने सरकारी उद्यमों को निर्देश दिए हैं कि वे रोबोट्स को ‘वर्क मोड’ में लाएं। भारत में क्या स्थिति है? भारत में अभी लास्ट-माइल डिलीवरी काफी हद तक मानव श्रमिकों पर निर्भर है। हालांकि बड़े वेयरहाउस, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और ग्राहक सेवा क्षेत्रों में एआई व ऑटोमेशन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। नौकरियों की प्रकृति बदल सकते हैं रोबोट विशेषज्ञों के अनुसार रोबोट जॉब खत्म नहीं करेंगे, बल्कि नौकरियों की प्रकृति बदलेंगे। इंसान रोबोट की मरम्मत, मेंटेनेंस, मॉनिटरिंग और तकनीकी संचालन जैसे काम करेंगे। रोबोट ऑपरेटर और रोबोट मेंटेनेंस इंजीनियर जैसी नई नौकरियां उभर सकती हैं। चीन की 44% वर्कफोर्स अस्थायी रोजगार में लगी थिंक चाइना की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की गिग इकोनॉमी दुनिया में सबसे बड़ी है। डिलीवरी और राइड-हेलिंग जैसे प्लेटफॉर्म पर 8.4 करोड़ लोग काम करते हैं। अस्थायी रोजगार पर निर्भर आबादी 32 करोड़ (करीब 44%) तक पहुंच गई है।
अब आपकी प्राइवेसी और पर्सनल डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को आपके फोन, इंटरनेट इस्तेमाल और कॉलिंग से जुड़ा सभी तरह का डेटा और लॉग्स अब भारत में ही स्टोर करना होगा। कोई भी कंपनी आपका पर्सनल डेटा देश के बाहर नहीं भेज पाएगी और न ही किसी विदेशी संस्था के साथ शेयर कर सकेगी। दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने बुधवार को टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। आइए टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े सरकार के नए नियम और उनसे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं... 1. लाइसेंस राज खत्म, टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल शुरू DoT ने कंपनियों के लिए टेलीकॉम सेक्टर में दशकों पुराना लाइसेंस राज खत्म कर एक नया और आसान मंजूरी सिस्टम शुरू किया है। इसके साथ ही सरकार ने 'टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल' नाम की एक वेबसाइट भी बनाई है, ताकि सारा काम डिजिटल हो सके। अब तक कंपनियों को मोबाइल या इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए सरकार से जटिल और लंबी 'लाइसेंस' प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसमें महीनों लग जाते थे। पुराने लाइसेंस वाले भी नए सिस्टम में आ सकेंगे जो टेलीकॉम कंपनियां पहले से काम कर रही हैं और जिनके पास पुराने सिस्टम के तहत अलग-अलग तरह के लाइसेंस (जैसे इंटरनेट या कॉलिंग के लिए) हैं, सरकार ने उन्हें भी इस नए और आसान सिस्टम में शिफ्ट होने की सुविधा दी है। इसका मतलब है कि पुरानी कंपनियों को भी अब कागज़ी कार्रवाई से राहत मिलेगी। 2. सस्ते और नए प्लान्स मिल सकते हैं नए नियमों के तहत अब कंपनियां एक ही डिजिटल पोर्टल से नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस के लिए एक साथ अप्लाई कर सकती हैं। 3. सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर सरकार सख्त अगर आप आने वाले समय में इलॉन मस्क की स्टारलिंक या अमेजॉन जैसी कंपनियों से सीधे सैटेलाइट (बिना तार या टावर वाला डायरेक्ट इंटरनेट) लेने की सोच रहे हैं, तो सरकार ने आपकी सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए हैं। 4. आपका पर्सनल डेटा सुरक्षित रहेगा आजकल सबसे बड़ा डर डेटा चोरी या लीक होने का होता है। सरकार ने इस पर बेहद सख्त नियम बनाया है। टेलीकॉम कंपनियों के लिए अब यह जरूरी कर दिया गया है कि वे भारतीय यूजर्स का सारा डेटा और रिकॉर्ड भारत के अंदर ही स्टोर कर रखेंगी। 5. देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं जम्मू-कश्मीर या उत्तर-पूर्व जैसे संवेदनशील इलाकों में नेटवर्क लगाने के लिए कंपनियों को विशेष सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, देश विरोधी या संदिग्ध संदेशों पर नजर रखने के लिए भी कंपनियों को सिस्टम बनाना होगा।
इससे सस्ता नहीं कभी न मिलेगा iPhone 17, आने वाली है धमाकेदार सेल!
Apple iPhone 17 Sale: अगर आप भी काफी समय से Apple का लेटेस्ट और प्रीमियम स्मार्टफोन iPhone 17 खरीदने की सोच रहे थे, लेकिन बजट के कारण अपने कदम पीछे खींच रहे थे, तो अब आपके लिए जश्न मनाने का समय आ गया है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर साल की सबसे बड़ी ...
इस साल की शुरुआत में टेक कंपनियां कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही थीं। कई जगह कर्मचारियों के बीच एआई टूल्स पर खर्च होने वाले ‘टोकन’ की गिनती को लेकर प्रतिस्पर्धा तक चल रही थी, लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल गई है। अब मेटा, अमेजन, उबर और वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियां कर्मचारियों से एआई का उपयोग सीमित रखने को कह रही हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बढ़ती लागत है। एआई सेवाएं देने वाली कंपनियों ओपन एआई और एंथ्रोपिक के बिल तेजी से बढ़ने लगे हैं। एआई की दुनिया में ‘टोकन’ भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है, जिस पर उपयोग की लागत तय होती है। कर्मचारियों के बीच अधिक से अधिक टोकन इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति को‘टोकन मैक्सिंग’ कहा जाता है। अब इसकी जगह ‘टोकनमिनि माइजिंग’ का दौर शुरू होता दिख रहा है। मेटा और अमेजन जैसी कंपनियों में कर्मचारियों के बीच टोकन उपयोग के लीडर बोर्ड तक बनाए गए थे। लेकिन अब हजारों कर्मचारियों द्वारा एआई टूल्स के इस्तेमाल में होने वाला खर्च कंपनियों के लिए भारी पड़ने लगा है। सब्सक्रिप्शन फीस के अलावा कंपनियों को इस्तेमाल किए गए टोकनों का अलग भुगतान भी करना पड़ता है। खर्च इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि नए एआई मॉडल पहले की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली और महंगे हैं। एंथ्रोपिक का नया मॉडल ‘फेबल’ उसके पुराने मॉडल ‘ओपस’ से करीब दोगुना महंगा बताया जा रहा है। वहीं इंजीनियर अब साधारण चैटबॉट की जगह जटिल कार्य करने वाले एआई एजेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें हजारों टोकन खर्च हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एआई को कंपनी की बैठक का संक्षिप्त ब्योरा तैयार करने जैसे सरल कम में कुछ सौ टोकन लग सकते हैं जबकि नया प्रोडक्ट या फीचर बनाने जैसे काम के कोड लिखने में हजारों टोकन लगते हैं। न्यूरोमेट्रिक के सीईओ रॉब में के मुताबिकएआई की दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि कंपनियां खुद तय नहीं कर पा रहीं कि किस रणनीति पर आगे बढ़ें। ऐसे में कई कंपनियां अब एआई पर किए जा रहे निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न का दोबारा आकंलन कर रही हैं। लागू किया जा रहा है फायदे-नुकसान का गणित कुछ माह में ही एआई के उपयोग पर अनिश्चितता का माहौल। सीमित उपयोग किए जाने से खर्च में भारी कटौती संभव। जहां ज्यादा फायदा वहां उपयोग, बाकी जगह कटौती। निवेश पर रिटर्न के पहलू कोध्यान में रखा जाएगा। सही एआई मॉडल अपनाने से 90% खर्च बच सकता है टेलीकॉम कंपनी एटीएंडटी के चीफ एआई अधिकारी एंडी मार्कस कहते हैं, कंपनियां कम आधुनिक एआई मॉडल्स को अपनाकर खर्च में 90 फीसदी तक बचत कर सकती हैं। हमारे इंजीनियर कुछ कामों के लिए सबसे अधिक ताकतवर और अन्य कामों के लिए कम शक्तिशाली एआई मॉडल का उपयोग करते हैं। कंपनियां कम खर्च में बेहतर नतीजों पर कर रहीं फोकस कंपनियां एआई पर भारी खर्च जारी रखेंगी लेकिन वे ऐसी जगह खोज रही हैं जहां कम खर्च में बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकें। सेल्सफोर्स के सीई मार्क बेनिऑफ का कहना है, उनकी कंपनी की योजना इस साल एआई पर करोड़ों रुपए खर्च करने की है पर टोकनों की जगह काम पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। उबर और वॉलमार्ट ने एआईटूल्स के लिए सीमा तय की मई में टैक्सी सर्विस कंपनी उबर ने कहा कि उसका साल भर के लिए अनुमानित एआई खर्च सिर्फ चार माह में खत्म हो गया है। कंपनी ने एआई कोडिंग टूल्स पर कुछ मासिक सीमा लगाई है। रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने अलग-अलग एआई टूल्स के लिए सीमा तय की है। टोकन के उपयोग को बताने वाले लीडर बोर्ड्स हटाए फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने पिछले सप्ताह अपने कर्मचारियों से कहा है कि खर्च में बहुत भारी बढ़ोतरी को देखते हुए वह जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल सीमित करेगी। एआई के उपयोग को सीमित करने के लिए अमेजन और मेटा ने टोकन मैक्सिंग की बढ़त बताने वाले लीडरबोर्ड्स भी हटा लिए हैं।
कोरोना ने हमें सिखाया कि खुली हवा जितनी ही अहम बंद कमरों की हवा भी है। इसी सबक को ध्यान में रखते हुए, अब वैज्ञानिक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे इमारतें इंसानी शरीर की तरह खुद ही हवा में मौजूद बीमारियों से लड़ सकेंगी। अमेरिकी सरकार की एजेंसी एआरपीए-एच (एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी फॉर हेल्थ) इसे हकीकत में बदलने के लिए 1250 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इस प्रोजेक्ट को ‘ब्रीद’ नाम दिया गया है। फिलहाल हवा में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस की जांच करने में लैब को कई घंटे या दिन लग जाते हैं। तब तक संक्रमण फैल चुका होता है। वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी की पर्यावरण इंजीनियर डॉ. लिंसी मार ने ऐसा सेंसर बनाया है, जो ‘रियल-टाइम’ में हवा में मौजूद खतरनाक कणों को पहचान लेता है।हाल ही में इस प्रोजेक्ट के डेमो में दिखाया गया कि सेंसर ने हवा में मौजूद ‘डस्ट माइट’ (अस्थमा बढ़ाने वाले धूल के कणों में मौजूद बारीक जीव) को तुरंत पकड़ लिया। यह सेंसर फिलहाल कोरोना वायरस, इन्फ्लूएंजा और ई-कोलाई सहित 10 तरह के पैथोजन्स (रोगजनकों) को पहचान सकता है। वैज्ञानिक जल्द ही इसकी क्षमता बढ़ाकर 25 और आगे चलकर 100 पैथोजन्स तक करने में जुटे हैं। हालांकि, कुछ वैज्ञानिक इस तकनीक को थोड़ा पेचीदा और खर्चीला मान रहे हैं। इटली के इंजीनियर जियोर्जियो बुओनान्नों का कहना है कि सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर लगाना और वेंटिलेशन सुधारना ज्यादा व्यावहारिक है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एरोबायोलॉजिस्ट जोशुआ सेंटार्पिया का मानना है कि बड़े बदलावों के लिए बड़े कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें सिर्फ ज्यादा डाक (चिठ्ठियां) भेजने से इंटरनेट नहीं मिला, उसके लिए नई खोज करनी पड़ी।’ इस तकनीक का पहला वास्तविक परीक्षण 2028 में वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर और अमेरिका के कुछ डे-केयर सेंटर्स में किया जाएगा। इसकी सटीकता के बाद भविष्य में हमारे घर, स्कूल और दफ्तर सिर्फ कंक्रीट के ढांचे नहीं, बल्कि बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा कवच बन जाएंगे। फायर अलार्म और स्प्रिंकलर की तरह काम करती है तकनीक प्रोजेक्ट की प्रोग्राम मैनेजर डॉ. जेसिका ग्रीन कहती हैं, ‘यह तकनीक बिल्डिंग में लगे फायर अलार्म और स्प्रिंकलर की तरह काम करती है। सेंसर को हवा में वायरस या एलर्जी बढ़ाने वाले तत्व की भनक लगते ही बिल्डिंग का कंट्रोल सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। ये सिस्टम अस्पताल व स्कूल में वायरस का पता चलते ही वेंटिलेशन में लगी यूवी लाइट और एयर फिल्टर चालू कर देंगे। डे-केयर के लिए सॉफ्टवेयर अनुमान लगाएगा कि हवा किस कमरे से कहां बह रही है और खतरा बढ़ते ही बाहर की ताजी हवा अंदर भेजना शुरू कर देगा। हमारा लक्ष्य इमारतों को इस तरह तैयार करना है कि वे सांस संबंधी बीमारियों को 25% तक घटा सकें।
शिक्षा क्षेत्र में एआई की एंट्री ने पहले ही टीचर्स की नींद उड़ा रखी थी। लेकिन, अब मामला गंभीर हो चुका है। बड़ी टेक कंपनियों से लेकर छोटे स्टार्टअप्स तक, ऐसे नए एआई टूल्स का जमकर प्रचार कर रहे हैं, जो छात्रों को टीचर्स और एआई डिटेक्टर्स को चकमा देने की खुली छूट दे रहे हैं। दिलचस्प पहलू ये है कि छात्रों को ऐसे टूल्स देने वाली कंपनियां ही टीचर्स और संस्थानों को चोरी पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर बेच रही हैं। टेक जगत में इसे ‘डिटेक्शन आर्म्स रेस’ यानी पकड़ने और बचने की आधुनिक जंग कहा जा रहा है। ऐसे में, हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटीज अब पारंपरिक निबंधों के बजाय ‘इन-क्लास पेन-पेपर टेस्ट’ और मौखिक परीक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों छात्रों के लिए ट्यूटोरियल्स और विज्ञापनों की बाढ़ है। ऑफर दिया जा रहा है- ‘एआई से होमवर्क कराओ और पकड़े भी मत जाओ।’ दो टूल ह्यूमनाइजर्स और ऑटोटाइपर्स छात्रों के पसंदीदा बने हुए हैं। शिक्षक छात्रों की चोरी पकड़ने के लिए असाइनमेंट की वर्जन हिस्ट्री जांचते हैं। अगर एक हजार शब्दों का निबंध अचानक एक मिनट में कॉपी-पेस्ट हो जाए, तो साफ हो जाता है कि यह एआई का काम है। टेक कंपनियों ने इसका तोड़ निकाला है। ह्यूमनाइजर्स टूल एआई टेक्स्ट को इंसानी अंदाज में बदल देता है। वहीं, ऑटोटाइपर्स टूल शब्दों को धीरे-धीरे टाइप करता है, टाइपिंग में जानबूझकर गलतियां करता है और उन्हें सुधारता है, ताकि लगे कि इंसान सोच-समझकर लिख रहा है। कुछ एप प्रचार कर रहे हैं कि जब छात्र सैर-सपाटे पर हों और असाइनमेंट की डेडलाइन करीब हो तो वे ऐसा डॉक्यूमेंट बनाकर देंगे, जो छात्रों द्वारा लिखा गया ही दिखेगा। ऐसे टूल्स ज्यादातर वही कंपनियां दे रही हैं, जो एआई चोरी पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर बेचती हैं। जैसे- ‘ग्रामरली’ प्रोफेसर्स को एआई की चोरी पकड़ने के लिए ‘ऑथरशिप टूल’ बेचता है, तो छात्रों को पूरा निबंध लिखने और एआई डिटेक्टर से बचने के लिए टेक्स्ट को ह्यूमनाइज करने की छूट देता है। ‘जीपीटीजीरो’ एआई कंटेंट पकड़ने का दावा करता है, लेकिन सोशल मीडिया पर ‘फर्जी प्रोफेसर’ का किरदार बनाकर छात्रों को सिखाया कि कैसे इस टूल के जरिए वे असली प्रोफेसर्स को चकमा देकर बेहतर ग्रेड ला सकते हैं। टाइपिंग पैटर्न, राइटिंग रीप्ले जैसी तकनीकों से हो रही निगरानी एआई जनरेटेड असाइनमेंट व चीटिंग टूल्स से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर 3 उपाय कारगर हैं। ‘जीपीटी जीरो’ छात्रों के टाइपिंग पैटर्न, सोचने के समय और बदलावों का बैकग्राउंड में लाइव वीडियो ट्रैक रिकॉर्ड रखती हैं। यह राइटिंग रीप्ले तकनीक ऑटोटाइपर्स की चोरी पकड़ने में सबसे सटीक है। ‘गूगल डीपमाइंड’ एआई-टेक्स्ट में अदृश्य कोड (डिजिटल वॉटरमार्किंग) छिपाते हैं, जिससे एआई डिटेक्टर्स उसे तुरंत पहचान लेते हैं।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने क्रेड (CRED) एप के फाउंडर कुणाल शाह को वॉट्सएप का नया ग्लोबल हेड बनाया है। वे विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जो 7 साल से वॉट्सएप की कमान संभाल रहे थे। कैथकार्ट अब मेटा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। सोमवार को यह जानकारी मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग ने एक पोस्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने यह फैसला उस डील के तहत लिया है, जिसमें मेटा UPI और बिल पेमेंट एप क्रेड में करीब 8,550 करोड़ रुपए निवेश करेगी। इसके बदले मेटा को क्रेड में 20% की हिस्सेदारी मिलेगी। इसके बाद क्रेड कंपनी की कुल वैल्यूएशन बढ़कर ₹43,239 करोड़ हो जाएगी। वॉट्सएप में AI इंटीग्रेशन और विज्ञापन से कमाई बढ़ाने पर फोकस होगा मेटा के मुताबिक, कुणाल शाह के बॉस बनने के बाद वॉट्सएप का पूरा ध्यान दो बड़ी चीजों पर होगा। मितेन संपत बने क्रेड के अंतरिम CEO, IPO लाने की तैयारी तेज वॉट्सएप के ग्लोबल हेड की कमान संभालने के लिए कुणाल शाह क्रेड CEO के अपने मौजूदा ऑपरेटिंग पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद वह मेटा का हिस्सा बनेंगे। क्रेड ने फिलहाल मितेन संपत को कंपनी का अंतरिम CEO बनाया है। मितेन संपत साल 2020 से क्रेड में स्ट्रेटजी और फाइनेंस विभाग की कमान संभाल रहे थे। क्रेड के बोर्ड और मैनेजमेंट ने बताया कि वे कंपनी के लिए एक लॉन्ग-टर्म मैनेजमेंट स्ट्रक्चर तैयार करने पर काम कर रहे हैं, क्योंकि कंपनी आने वाले समय में अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO लाने की योजना बना रही है। वॉट्सएप-फेसबुक-इंस्टाग्राम के प्लस वर्जन आएंगे मेटा ने हाल ही में इंस्टाग्राम, फेसबुक और वॉट्सएप के लिए नए सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए हैं। इसके तहत एप्स के ‘प्लस’ वर्जन रोल आउट किए गए हैं। इस प्लान को लेने वाले यूजर्स को स्पेशल टूल्स और कस्टमाइजेशन के विकल्प मिलेंगे। पूरी खबर पढ़ें… क्रेड का डेटा सुरक्षित, मेटा को नहीं मिलेगी जानकारीइस बड़ी डील के बाद क्रेड के ग्राहकों के मन में डेटा प्राइवेसी को लेकर सवाल उठ रहे थे। हालांकि, मेटा ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि एक रणनीतिक निवेशक (Strategic Investor) बनने के बावजूद उसे क्रेड के ग्राहकों की किसी भी तरह की निजी या फाइनेंशियल जानकारी का एक्सेस नहीं दिया जाएगा। ग्राहकों का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। नई फंडिंग से बिजनेस बढ़ाने और क्रेड को आगे ले जाने का प्लान निवेश और लीडरशिप में हुए इस बड़े बदलाव पर बात करते हुए कुणाल शाह ने कहा कि क्रेड की शुरुआत सिर्फ अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले लोगों को रिवॉर्ड देने के एक आइडिया से हुई थी, जो आज लाखों मेंबर्स और मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल के साथ एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। उन्होंने बताया कि क्रेड की लीडरशिप टीम अगले फेज में कंपनी को और आगे ले जाएगी। नए अंतरिम CEO मितेन संपत ने भी कहा कि इस फ्रेश कैपिटल (नई फंडिंग) का इस्तेमाल अलग-अलग वर्टिकल्स में लीडरशिप मजबूत करने और क्रेड को शेयर बाजार में लिस्ट कराने से पहले बिजनेस का दायरा बढ़ाने के लिए किया जाएगा। ------------------ पूरी खबर पढ़ें… ब्रोकरेज हाउसेज ने डिकोड की रिलायंस की AGM: जियो IPO से कमाई का रास्ता खुलेगा, न्यू एनर्जी और AI से ग्रोथ मिलेगी; शेयर आज 2% चढ़ा रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयर में आज कारोबार के दौरान 2% से ज्यादा की तेजी है। कंपनी का शेयर ₹1,345 के स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को हुई 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के बाद कई बड़े ब्रोकरेज हाउसेज ने इसके भविष्य के रोडमैप और जियो इन्फोकॉम के IPO के लिए सेबी (Sebi) के पास दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) को लेकर अपनी एनालिसिस रिपोर्ट जारी की है। पूरी खबर पढ़ें…
इंडियन टू-व्हीलर मैन्यूफैक्चरर रॉयल एनफील्ड ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक बाइक 'फ्लाइंग फ्ली C6' की डिलीवरी शुरू कर दी है। कंपनी ने बेंगलुरु से इसकी शुरुआती की। रॉयल एनफील्ड ने बेंगलुरु में एक खास सर्विस और सपोर्ट नेटवर्क भी तैयार किया है, ताकि ग्राहकों को मेंटेनेंस या चार्जिंग से जुड़ी समस्या न हो। ये 3.91kWh की बैटरी पैक के साथ आती है, जिसे फुल चार्ज करने पर बाइक 154km चलेगी। कंपनी का दावा है कि बाइक सिर्फ 3.7 सेकेंड में 0 से 60kmph की स्पीड हासिल कर सकती है। कीमत: बैटरी सब्सक्रिप्शन के साथ ₹1.99 लाख से शुरुआत रॉयल एनफील्ड ने इस इलेक्ट्रिक बाइक को दो अलग-अलग प्राइस ऑप्शंस के साथ बाजार में उतारा है… डिजाइन और वजन: केवल 124kg की बाइक, 19-इंच के बड़े व्हील्स फ्लाइंग फ्ली C6 को कंपनी ने यूनिक और रेट्रो-फ्यूचरिस्टिक लुक दिया है। इसमें गर्डर फोर्क सस्पेंशन का इस्तेमाल किया गया है, जो आजकल की बाइक्स में बहुत कम देखने को मिलता है। कंपनी ने इस बाइक को केवल 124 किलो का रखा है ताकि रेंज बेहतर मिल सके। इसमें 19-इंच के बड़े पहिए और पतले टायर हैं। इससे रोलिंग रेजिस्टेंस कम होता है और बैटरी कम खर्च होती है। परफॉर्मेंस: टॉप स्पीड 115 किमी/घंटा, फुल चार्ज पर 154 किमी की रेंज इसमें 3.91kWh का बैटरी पैक दिया गया है। कंपनी का दावा है कि एक बार फुल चार्ज होने पर यह 154 किमी तक चलेगी। इसमें लगी मोटर 60Nm का टॉर्क जनरेट करती है। रफ्तार के मामले में भी यह पीछे नहीं है; यह बाइक महज 3.7 सेकंड में 0 से 60 किमी/घंटा की स्पीड पकड़ लेती है। इसकी टॉप स्पीड 115 किमी/घंटा बताई गई है। चार्जिंग टेक्नोलॉजी: 2 घंटे में फुल चार्ज, मोबाइल एप से कंट्रोल होगी स्पीड इस इलेक्ट्रिक बाइक को 0 से 100% तक चार्ज होने में 2 घंटे 16 मिनट का समय लगता है, जबकि 20 से 80% तक यह मात्र 1 घंटा 5 मिनट में चार्ज हो जाती है। खास बात यह है कि राइडर मोबाइल एप के जरिए अपनी सुविधा के अनुसार चार्जिंग की स्पीड भी तय कर सकता है। सेफ्टी फीचर्स: 5 राइडिंग मोड्स और कॉर्नरिंग ट्रैक्शन कंट्रोल राइड को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए इसमें 3.5-इंच का कलर TFT डिस्प्ले दिया गया है। बाइक में 5 राइडिंग मोड्स- सिटी, रेन, हाईवे, स्पोर्ट और कस्टम मिलते हैं। इसके अलावा इसमें एडजस्टेबल रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, लीन-सेंसिटिव ट्रैक्शन कंट्रोल और डुअल-चैनल ABS जैसे मॉडर्न फीचर्स दिए गए हैं। इसके रियर ABS को बंद भी किया जा सकता है, जो ऑफ-रोडिंग में काम आएगा। ग्राउंड क्लीयरेंस और सीट हाइट: एडवेंचर बाइक जैसा अहसास बाइक की सीट हाइट 823mm है। इसमें 207mm का ग्राउंड क्लीयरेंस दिया गया है, जो आमतौर पर एडवेंचर बाइक्स में मिलता है। मोटर और बैटरी को एक ही मैग्नीशियम केसिंग में रखा गया है। मार्केट कॉम्पिटिशन: रॉयल एनफील्ड की 350cc बाइक्स से भी महंगी ₹2.79 लाख की कीमत के साथ यह बाइक रॉयल एनफील्ड की सभी 350cc बाइक्स जैसे क्लासिक, बुलेट, हंटर और नई गुरिल्ला 450 से महंगी है। इलेक्ट्रिक सेगमेंट में इसका मुकाबला अल्ट्रावॉयलेट F77 से हो सकता है, लेकिन अपने खास डिजाइन और ब्रांड वैल्यू के कारण यह एक अलग ही क्लास की बाइक मानी जा रही है। रॉयल एनफील्ड इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य शहरों में लॉन्च करेगी। नॉलेज बॉक्स: सेकेंड वर्ल्ड वॉर से लिया बाइक का नाम: 'फ्लाइंग फ्ली' नाम रॉयल एनफील्ड की उस मशहूर बाइक से लिया गया है जिसे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पैराशूट के जरिए विमानों से नीचे गिराया जाता था। वह बहुत हल्की थी, ताकि सैनिक उसे कहीं भी ले जा सकें। क्या होता है BaaS (बैटरी एज़ अ सर्विस): यह एक ऐसा सब्सक्रिप्शन मॉडल है जिसमें ग्राहक को पूरी बाइक की कीमत नहीं देनी पड़ती। वह केवल बाइक का ढांचा खरीदता है और बैटरी का इस्तेमाल किराए या सब्सक्रिप्शन के तौर पर करता है। इससे बाइक की शुरुआती कीमत कम हो जाती है।
टेक कंपनी मोटोरोला ने मार्च में एज 70 फ्यूजन लॉन्च किया था, आज कंपनी ने इसका 12GB रैम और 512GB स्टोरेज वाला नया वैरिएंट लॉन्च किया है। यह फोन 50MP सोनी कैमरा, स्नैपड्रैगन 7s जेन 4 प्रोसेसर और 7000mAh बैटरी के साथ आता है। वहीं, इसमें मिलिट्री ग्रेड बॉडी के साथ IP69 प्रोटेक्शन भी मिलेगी। इसकी कीमत 36,999 रुपए रखी गई है। फोन अब 4 वैरिएंट में अवेलेबल है। इसे 26,999 रुपए शुरुआती कीमत में उतारा गया था, लेकिन अब इसका प्राइस बढ़कर 29,999 रुपए हो चुका है। नया वैरिएंट ऑफलाइन और ऑनलाइन अवेलेबल है। इस पर 2000 रुपए के बैंक कार्ड डिस्काउंट के साथ भी खरीदा जा सकता है। मोटोरोला एज 70 फ्यूजन: वैरिएंट वाइस प्राइस डिजाइन: मिलिट्री ग्रेड बॉडी और क्वाड-कर्व्ड स्क्रीन स्पेसिफिकेशन: पावरफुल प्रोसेसर और AI का सपोर्ट डिस्प्ले: इसमें 6.8-इंच की 1.5K एक्सट्रीम एमोलेड स्क्रीन है। यह 144Hz रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है। डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i लगा है। इसमें 'स्मार्ट वॉटर टच' फीचर भी है, जिससे हाथ गीले होने पर भी टच काम करता है। परफॉर्मेंस: फोन में परफॉर्मेंस के लिए क्वालकॉम का स्नैपड्रैगन 7s जेन 4 प्रोसेसर दिया गया है। कंपनी का दावा है कि इसका AnTuTu स्कोर 11.49 लाख से ज्यादा है। यह फोन 'मोटो एआई 2.0' के साथ आता है, जो स्मार्ट फीचर्स को आसान बनाता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए फोन के रियर पैनल पर ट्रिपल कैमरा सेटअप है। इसमें मेन कैमरा 50MP सोनी LYT710 सेंसर है, जो ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) के साथ आता है। साथ में 13MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस और लाइट सेंसर दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 32MP का कैमरा है। बैटरी और चार्जिंग: फोन में 7000mAh की बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए बॉक्स में 68W का टर्बोपावर फास्ट चार्जर मिलेगा। सॉफ्टवेयर और अन्य फीचर्स फोन एंड्रॉयड 16 पर चलता है। कंपनी ने वादा किया है कि इस पर 3 साल तक OS अपग्रेड (एंड्रॉयड 19 तक) और 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स मिलते रहेंगे। कनेक्टिविटी के लिए इसमें Wi-Fi 6E, ब्लूटूथ 6.0 और NFC जैसे फीचर्स दिए गए हैं। सिक्योरिटी के लिए इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर है।
25 साल से इंटरनेट पर कुछ भी ढूंढने का तरीका लगभग एक जैसा रहा है। जब भी किसी प्रोडक्ट, फ्लाइट टिकट या किसी खबर की जानकारी चाहिए होती है, हमें गूगल पर जाकर सर्च करना पड़ता है। कई बार लोग किसी सेल का इंतजार करते हैं, स्टॉक में वापस आने वाले प्रोडक्ट के लिए वेबसाइट रिफ्रेश करते रहते हैं या किसी खास विषय पर लगातार अपडेट देखते रहते हैं। अब गूगल इस पूरी प्रक्रिया को बदलना चाहता है। कंपनी ने सर्च एजेंट्स नाम का नया एआई फीचर पेश किया। यह ऐसा डिजिटल एजेंट है, जो आपके लिए 24 घंटे इंटरनेट पर नजर रखता है। यूजर्स के लिए चार फायदे 1. कोई प्रोडक्ट स्टॉक में आते ही अपडेट देता है मान लीजिए आप किसी लिमिटेड एडिशन किताब या नए स्मार्टफोन का इंतजार कर रहे हैं। एआई को सिर्फ ये प्रॉम्प्ट दीजिए कि यह प्रोडक्ट भारत में उपलब्ध होते ही आपको अपडेट करे। जैसे ही वह स्टॉक में आएगा, गूगल आपको अलर्ट भेज देगा। 2. फ्लाइट सस्ती होते ही मिलेगा नोटिफिकेशन अगर आप किसी शहर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो एआई को बता सकते हैं कि टिकट का किराया कम होने पर जानकारी दे। एआई लगातार अलग-अलग वेबसाइट्स पर कीमतें देखता रहेगा। 3. खबर पर लगातार अपडेट करेगा परीक्षा से जुड़े अपडेट चाहते हैं, तो इंटरनेट पर नई जानकारी के आधार पर इससे जुड़े अपडेट देता रहेगा। 4. प्रॉपर्टी या रेंट पर घर लेने में भी मदद करेगा अभी हर प्रॉपर्टी वेबसाइट पर जाकर बजट, लोकेशन और दूसरे फिल्टर दोबारा भरने पड़ते हैं। सर्च एजेंट में अपनी जरूरत एक बार बताने के बाद एआई वेबसाइट्स पर उसी आधार पर नए विकल्प मिलने पर सूचना देगा। ऐसे काम करेगा सर्च एजेंट अभी तक गूगल पर कोई सवाल पूछने पर यूजर्स को सर्च रिजल्ट, वेबसाइट्स के लिंक और एआई ओवरव्यू दिखाई देता है। अगर विस्तार से जानकारी चाहिए तो एआई मोड का इस्तेमाल करना पड़ता है। सर्च एजेंट्स के साथ यह तरीका बदल जाएगा। यूजर एआई मोड में जाकर सिर्फ एक बार अपनी जरूरत बताएगा। इसके बाद एआई बैकग्राउंड में लगातार इंटरनेट स्कैन करता रहेगा। जैसे ही उससे जुड़ी कोई नई जानकारी मिलेगी, वह खुद नोटिफिकेशन भेज देगा। इस्तेमाल कैसे करेंगे? एआई मोड खोलिए व अपनी जरूरत लिखिए। उदाहरण के लिए... मुझे दिल्ली से टोक्यो जाना है। इसकी फ्लाइट जैसी ही सस्ती हो, तो मुझे अपडेट कीजिए... यानी जितना स्पष्ट निर्देश देंगे, उतने बेहतर परिणाम देगा। जल्द सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा - शुरुआत में अमेरिका में उपलब्ध है। - इसका इस्तेमाल केवल गूगल एआई अल्ट्रा सब्सक्राइबर कर सकते हैं। - जल्द ही इसे एआई प्रो सब्सक्राइबर्स के लिए भी जारी किया जाएगा।
डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म फोनपे अपने यूजर्स से इनएक्टिव वॉलेट के लिए मेंटेनेंस फीस वसूलने की तैयारी कर रहा है। कंपनी के नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी यूजर का PhonePe वॉलेट लगातार 365 दिनों (1 साल) तक इस्तेमाल नहीं किया जाता है, तो उसे 'डॉर्मेंट' या इनएक्टिव मान लिया जाएगा। ऐसे वॉलेट्स से हर तिमाही ₹100 का चार्ज काटा जाएगा। कंपनी के इस फैसले का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) और Reddit पर कड़ा विरोध हो रहा है। कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट शेयर कर बताया है कि उन्हें वॉलेट रिचार्ज करने या ट्रांजैक्शन करने के SMS मिलने शुरू हो गए हैं, ताकि वे इस पेनाल्टी से बच सकें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजर्स जता रहे नाराजगी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) और रेडिट पर इस फैसले को लेकर यूजर्स ने स्क्रीनशॉट शेयर कर बताया कि उन्हें फोनपे की तरफ से SMS मिल रहे हैं, जिसमें वॉलेट रिचार्ज करने या मेंटेनेंस फीस देने की बात कही जा रही है। यूजर्स इस बात से ज्यादा परेशान हैं कि यह चार्ज सालाना न होकर तिमाही (हर 3 महीने में) के आधार पर लागू हो रहा है, जो उन्हें एक पेनल्टी की तरह लग रहा है। बैलेंस ₹100 से कम होने पर पूरा वॉलेट खाली हो जाएगा कंपनी की नियम और शर्तों के अनुसार, 15 दिन के नोटिस पीरियड के दौरान यूजर्स को कई बार अलर्ट भेजा जाएगा। इसके बाद भी अगर वॉलेट एक्टिव नहीं होता है, तो वॉलेट बैलेंस से फीस काट ली जाएगी। यदि आपके वॉलेट में 100 रुपए से कम का बैलेंस है, तो कंपनी पूरी रकम काट लेगी और वॉलेट बैलेंस को माइनस में ले जाने के बजाय जीरो (0) कर देगी। इसके साथ ही फोनपे के पास अपनी फीस पॉलिसी में बदलाव करने और मौजूदा सर्विसेज पर नए चार्ज लगाने का अधिकार सुरक्षित है। मोबिक्विक और एयरटेल पेमेंट्स बैंक भी लेते हैं चार्ज डिजिटल वॉलेट इंडस्ट्री में इनएक्टिविटी चार्ज लगाने वाली फोनपे पहली कंपनी नहीं है। इससे पहले साल 2021 में मोबिक्विक ने अपने इनएक्टिव यूजर्स पर 100 से 140 रुपए सालाना वॉलेट मेंटेनेंस चार्ज लगाने का ऐलान किया था। इसके अलावा एयरटेल पेमेंट्स बैंक भी अपने चार्ज शेड्यूल में इनएक्टिव वॉलेट के लिए मेंटेनेंस फीस की लिस्ट रखता है। इससे साफ है कि डिजिटल वॉलेट बिजनेस मॉडल में अब इनएक्टिविटी पेनल्टी एक सामान्य बात बनती जा रही है। UPI के आने से घटा वॉलेट का इस्तेमाल बाजार में UPI के तेजी से बढ़ने के कारण लोग रोजाना के पेमेंट के लिए वॉलेट का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं। इस वजह से कई यूजर्स के वॉलेट में छोटी-मोटी रकम पड़ी रह जाती हैं। टेक कंपनियों का तर्क है कि इन वॉलेट्स को चालू रखने के लिए उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्लायंस (नियमों का पालन) और सिक्योरिटी पर लगातार पैसा खर्च करना पड़ता है। इस खर्च को निकालने के लिए ही कंपनियां इनएक्टिविटी फीस वसूलती हैं। हालांकि, फोनपे के बड़े यूजर बेस और तिमाही के आधार पर ₹100 वसूलने के तरीके को यूजर्स काफी आक्रामक मान रहे हैं।
टेक कंपनी एपल जल्द ही आईफोन और अपने अन्य प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा सकती है। कंपनी के CEO टिम कुक ने 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि 'दुनियाभर में चल रही मेमोरी और स्टोरेज चिप की कमी के कारण कंपोनेंट्स की लागत बहुत बढ़ गई है।' उन्होंने कहा कि, एपल अभी तक उन कंपनियों में से एक थी, जिसने मेमोरी संकट के बावजूद लॉन्चिंग के बाद अपने स्मार्टफोन की कीमतें नहीं बढ़ाई थीं। अब तक कंपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही थी, लेकिन सप्लायर्स की तरफ से बढ़ते दबाव के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी हो गया है।' आईफोन 18 सीरीज महंगी हो सकती है, अन्य ब्रांड्स बढ़ा चुके दाम हाल ही में ऐसी रिपोर्ट आई थीं कि ज्यादा रैम होने के बावजूद नेक्स्ट जनरेशन के आईफोन 18 की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन टिम कुक के बयान ने इन कयासों को बदल दिया है। स्मार्टफोन इंडस्ट्री में कुछ महीनों से लगातार महंगाई देखी जा रही है। शाओमी, वनप्लस, ओप्पो जैसे अन्य बड़े ब्रांड्स ने अपने हैंडसेट्स के दाम बढ़ाए हैं। इसके विपरीत एपल ने अपने फ्लैगशिप मॉडल्स की शुरुआती कीमतों को स्थिर रखकर बाजार में अपनी पकड़ बनाई थी, लेकिन अब इस रणनीति को बरकरार रखना मुश्किल हो रहा है। फोल्डेबल आईफोन की लॉन्चिंग के बीच लिया गया फैसला टिम कुक का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब एपल इसी साल के अंत में अपने पहले फोल्डेबल आईफोन के साथ आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स को बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है। ट्रेडिशनल स्मार्टफोन की तुलना में फोल्डेबल डिवाइसेस के कंपोनेंट्स की लागत पहले ही ज्यादा होती है। ऐसे में सप्लाई चेन पर बढ़ता दबाव कंपनी के प्राइसिंग डिसीजन को प्रभावित कर सकता है। कंपनी खुद की फैक्ट्री नहीं लगाएगी, सप्लाई सुधारने के लिए तलाशेगी ऑप्शन टिम कुक ने कहा कि एपल कंपोनेंट्स की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए अपने वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल करने को तैयार है। हालांकि, उन्होंने कंपनी द्वारा खुद की मेमोरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने की संभावना खारिज कर दी। उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनी को नए सोर्सिंग विकल्पों पर विचार करना चाहिए। इसमें उन सप्लाई चेन्स का मूल्यांकन भी शामिल है, जो जियोपॉलिटिकल और नियामक प्रतिबंधों की वजह से सीमित हैं। स्मार्टफोन महंगे होने की वजह: AI बूम ने बढ़ाई चिप की डिमांड पूरी दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान महंगे होने की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल AI बूम है। पिछले एक साल में AI सर्वर्स और डेटा सेंटर्स की मांग में भारी उछाल आया है। इससे DRAM और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) जैसे कंपोनेंट्स को खरीदने की होड़ मच गई है। चिप बनाने वाली कंपनियां अब ज्यादा मुनाफा देने वाले AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही हैं। इस वजह से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड्स को कम कंपोनेंट्स से काम चलाना पड़ रहा है और उनके बीच कॉम्पिटिशन बढ़ गया है। सिर्फ एपल या फोन नहीं, अन्य कंज्यूमर प्रोडक्ट्स भी होंगे प्रभावित चिप की यह कमी केवल एपल या स्मार्टफोन इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। इसी महीने ऑटोमेकर्स, रिटेलर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि मेमोरी की कमी के कारण कई तरह के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा सप्लाई चेन में फिर बड़ा व्यवधान पैदा होने की आशंका है। नथिंग के को-फाउंडर कार्ल पेई ने भी संकेत दिए हैं कि कंपोनेंट्स की कीमतों में आ रहा यह उछाल जल्द थमने वाला नहीं है। नॉलेज पार्ट: DRAM क्या है और स्मार्टफोन में इसका क्या काम? DRAM का मतलब डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी होता है। यह स्मार्टफोन, आईपैड और कंप्यूटर की अस्थाई मेमोरी यानी रैम है, जो डिवाइस को तेजी से एप्स रन करने और मल्टीटास्किंग में मदद करती है। गेम खेलने या भारी AI फीचर्स इस्तेमाल करने के दौरान DRAM बैकग्राउंड में डेटा प्रोसेस करती है। आज AI सर्वर्स को बहुत ज्यादा DRAM की जरूरत पड़ रही है, जिससे मार्केट में इसकी कमी हो गई है और स्मार्टफोन कंपनियों की लागत बढ़ गई है। ------------ ये भी पढ़ें… एपल WWDC 2026, एप बदले बिना ईमेल-मैसेज लिखेगी सिरी AI: बच्चों के लिए 'आस्क टू ब्राउज' डिफॉल्ट मिलेगा, iOS27 में 11 बड़े फीचर्स एपल का एनुअल इवेंट वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस 2026 एपल पार्क में शुरू हो गया है। इस बार इवेंट में सिरी, iOS 27 और एपल इंटेलिजेंस को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सबसे खास सिरी को नए अवतार में 'सिरी AI' नाम से पेश किया गया, जो पहले से कहीं ज्यादा बातचीत करने में सक्षम और कॉन्टेक्स्ट-अवेयर (यानी संदर्भ को समझने वाला) है। सिरी AI बिना एप बदले ईमेल और मैसेज लिख सकेगी और फोटो देखकर बताएगी खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू भी बताएगी। पूरी खबर पढ़ें…
टाटा मोटर्स ने अपने कॉमर्शियल व्हीकल्स की कीमतों में 2.5% तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो जाएंगी। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी की तरफ से कीमतों में की गई यह दूसरी बढ़ोतरी है। कंपनी ने बताया कि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और अन्य इनपुट कॉस्ट के असर को कम करने के लिए यह कदम उठाना पड़ रहा है। कीमतों में यह इजाफा अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगा। 1 जुलाई से लागू होंगी नई दरें टाटा मोटर्स ने 18 जून को जारी एक बयान में कहा कि नई कीमतें 1 जुलाई से उसके पूरे कॉमर्शियल व्हीकल्स पोर्टफोलियो पर प्रभावी होंगी। कंपनी ने फिलहाल मॉडल के हिसाब से कीमतों में बदलाव का खुलासा नहीं किया है। टाटा मोटर्स भारत में छोटे कॉमर्शियल वाहनों, पिक-अप ट्रकों, इंटरमीडिएट और हैवी कॉमर्शियल वाहनों के साथ-साथ बस भी बेचती है। इस साल दूसरी बार बढ़े दाम कॉमर्शियल व्हीकल्स बिजनेस के लिए टाटा मोटर्स ने इस वित्त वर्ष में दूसरी बार प्राइस हाइक की है। इससे पहले अप्रैल महीने में भी कंपनी ने बढ़ती कमोडिटी कीमतों और इनपुट कॉस्ट का हवाला देते हुए अपने कॉमर्शियल वाहनों के दाम 1.5% तक बढ़ाए थे। ताजा बदलाव के पीछे भी कंपनी ने मुख्य रूप से बढ़ी हुई लागत को ही बड़ी वजह बताया है। इस बार की 2.5% तक की बढ़ोतरी, अप्रैल में की गई 1.5% की बढ़ोतरी से ज्यादा है। पैसेंजर व्हीकल्स की कीमतें भी बढ़ेंगी इससे कुछ दिन पहले ही टाटा मोटर्स ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स पोर्टफोलियो की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। पैसेंजर व्हीकल्स के नए दाम भी 1 जुलाई से ही लागू होंगे। कंपनी ने इस बढ़ोतरी के लिए बढ़ती इनपुट कॉस्ट और इन्फ्लेशनरी प्रेशर (महंगाई के दबाव) को जिम्मेदार ठहराया था। यह बढ़ोतरी कंपनी के बेचे जाने वाले इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) मॉडल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) दोनों पर लागू होगी। क्या होती है इनपुट कॉस्ट? किसी भी वाहन को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, एल्युमीनियम, प्लास्टिक और रबर) की कीमत, मजदूरी और फैक्ट्री के अन्य खर्चों को मिलाकर जो कुल लागत आती है, उसे इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो कंपनियां इसका कुछ बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। ये खबर भी पढ़ें… फुली सेल्फ ड्राइव टेस्ला मॉडल YL की डिलीवरी शुरू: 6 सीटर इलेक्ट्रिक SUV सिंगल चार्ज पर 681kmचलेगी; शुरुआती कीमत ₹61.99 लाख इलॉन मस्क की EV कंपनी टेस्ला इंडिया ने भारत में अपनी सबसे लंबी इलेक्ट्रिक SUV मॉडल YL की डिलीवरी शुरू कर दी है। यह भारत में टेस्ला की पहली कार 'मॉडल वाई' का ज्यादा स्पेस वाला और थ्री-रो वर्जन है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 681km का रेंज और 6-सीटर सीटिंग लेआउट है। पूरी खबर पढ़ें…
इलॉन मस्क की EV कंपनी टेस्ला इंडिया ने भारत में अपनी सबसे लंबी इलेक्ट्रिक SUV मॉडल YL की डिलीवरी शुरू कर दी है। यह भारत में टेस्ला की पहली कार 'मॉडल वाई' का ज्यादा स्पेस वाला और थ्री-रो वर्जन है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 681km का रेंज और 6-सीटर सीटिंग लेआउट है। टेस्ला मॉडल वाई एल की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 61.99 लाख रुपए है। यह स्टैंडर्ड मॉडल वाई (₹59.89 लाख) से करीब ₹2.10 लाख महंगी है। यह गाड़ी उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर उतारी गई है, जो लॉन्ग रेंज और प्रीमियम फीचर्स के साथ एक बड़ी फैमिली कार ढूंढ रहे हैं। कंपनी ने बताया कि गाड़ियों के पहले बैच की डिलीवरी उसके डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर बिजनेस मॉडल के जरिए की जा रही है। इस खास मॉडल की मदद से टेस्ला गाड़ी खरीदने से लेकर उसकी डिलीवरी देने तक के ग्राहक के पूरे अनुभव को खुद मैनेज करती है। एक्सटीरियर डिजाइन: 19-इंच एरो व्हील्स और स्लीक लुक साइज और डायमेंशन: 150mm ज्यादा बड़ा व्हीलबेस मॉडल वाई एल का मुख्य आकर्षण इसका बढ़ा हुआ साइज है। यह कार स्टैंडर्ड मॉडल के मुकाबले 179 मिलीमीटर ज्यादा लंबी है। इसके व्हीलबेस का साइज भी 150 मिलीमीटर बढ़ाया गया है। कार की ऊंचाई में भी 44 मिलीमीटर का इजाफा हुआ है। बड़े 'ग्लासहाउस' (खिड़कियों वाला हिस्सा) की वजह से इसे सड़क पर आसानी से पहचाना जा सकता है। इंटीरियर और फीचर्स: 16-इंच का टचस्क्रीन और पैनोरमिक रूफ केबिन के अंदर टेस्ला की सिग्नेचर 'मिनिमल' थीम दी गई है। इसमें सबसे खास 16-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है, जिससे कार के लगभग सभी फंक्शन कंट्रोल होते हैं। परफॉर्मेंस: ऑल-व्हील-ड्राइव के साथ 201kmph की टॉप स्पीड पावर के मामले में यह कार बेहद दमदार है। इसमें दो इलेक्ट्रिक मोटर (ऑल-व्हील-ड्राइव) का सेटअप दिया गया है: सेफ्टी फीचर्स: ADAS और फुल सेल्फ ड्राइविंग का ऑप्शन सुरक्षा के लिए टेस्ला ने इसमें स्टैंडर्ड तौर पर एडवांस फीचर्स दिए हैं। इसमें 6 एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), और पार्किंग सेंसर्स मिलते हैं।
लॉजिस्टिक्स में सबसे ज्यादा 16.3% फ्रॉड:देश में डिजिटल फ्रॉड का खतरा दुनिया से दोगुना- ट्रांसयूनियन
दुनिया के मुकाबले भारत में ऑनलाइन धोखाधड़ी (डिजिटल फ्रॉड) का खतरा बहुत ज्यादा है। ट्रांसयूनियन की टॉप फ्रॉड ट्रेंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में देशभर में ग्राहकों से जुड़े 7.1% ऑनलाइन लेनदेन (डिजिटल ट्रांजैक्शन) संदिग्ध पाए गए, जो कि वैश्विक औसत (3.8%) से करीब दोगुना है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन फ्रॉड अब असली ग्राहकों के खातों (अकाउंट) को निशाना बनाकर किया जा रहा है। दुनिया भर के ट्रेंड से अलग, भारत में ऑनलाइन फ्रॉड का सबसे ज्यादा खतरा अकाउंट लॉगिन करते समय (3.9%) देखा गया। इसके बाद नया अकाउंट बनाते समय (3.1%) और पैसों का लेनदेन (फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन) करते समय (1.2%) सबसे अधिक जोखिम पाया गया। टेलीकॉम सेक्टर में सबसे तेज 3.08% उछालसेक्टर फ्रॉड % बदलावरिटेल 2.50% - 99%ट्रैवल, टूरिज्म 0.50% - 68%फाइनेंशियल 2.60% - 65%गेमिंग 9.60% - 36%कम्युनिटी 4.70% - 21%लॉजिस्टिक्स 16.30% 0.31%इंश्योरेंस 11.50% 1.45%टेलीकॉम 14.70% 3.08% भारत में व्यवसायों को अब तेज़ और अधिक अनुकूलनीय हमले के तरीकों का सामना करना पड़ रहा है जो पारंपरिक पहचान प्रणालियों के लिए चुनौती पेश करते हैं। धोखाधड़ी करने वाले अब केवल फर्जी खाते बनाने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे मौजूदा उपयोगकर्ताओं और खातों को भी तेजी से निशाना बना रहे हैं। इस बदलाव ने खाता सुरक्षा को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि बैंकिंग, दूरसंचार, लॉजिस्टिक्स और बीमा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार हो रहा है।
टेक कंपनी शाओमी की सब-ब्रांड रेडमी ने आज भारत में अब तक अपना सबसे पावरफुल गेमिंग स्मार्टफोन रेडमी टर्बो 5 लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे अब तक का सबसे फास्ट और पावरफुल मिड-रेंज रेडमी फोन बताया है। फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट के साथ आया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी 7540mAh की बड़ी बैटरी है, जो कंपनी के दावे के मुताबिक, सिंगल चार्ज पर 2 दिन से ज्यादा का बैकअप दे सकती है। फोन हैवी गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए हाई-परफॉर्मेंस डिवाइस तलाश करने वाले यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है। रेडमी टर्बो 5: शुरुआती कीमत ₹35,999 फोन को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसके 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वैरिएंट की कीमत ₹37,999 रखी गई है, लेकिन ₹2000 के बैंक ऑफर डिस्काउंट के बाद इसे ₹35,999 की शुरुआती कीमत पर खरीदा जा सकता है। वहीं, इसके टॉप वैरिएंट 12GB रैम और 256GB स्टोरेज मॉडल की कीमत ₹38,999 है। लॉन्च ऑफर्स के तहत SBI, ICICI या एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड EMI पर ₹2,000 का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा 9 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन भी है। फोन की सेल भारत में 19 जून से शुरू होगी। इसे शाओमी की ऑफिशियल वेबसाइट, रिटेल स्टोर्स और ई-कॉमर्स वेबसाइट से खरीदा जा सकेगा। यह वनप्लस नॉर्ड 6 और वीवो V70 FE जैसे स्मार्टफोन्स को टक्कर देगा। डिजाइन: एयरोस्पेस-ग्रेड मेटल फ्रेम और पिक्सल मैट्रिक्स रिंग लाइट डिजाइन के मामले में यह फोन काफी प्रीमियम फील देता है। फोन के दोनों तरफ (फ्रंट और बैक) ग्लास फिनिश दी गई है, जिससे हाथ में पकड़ने पर इसकी ग्रिप और इन-हैंड फील काफी स्मूद लगती है। बड़ी बैटरी होने के बावजूद फोन की मोटाई सिर्फ 8.18mm है। इसके बैक पैनल पर कैमरे के पास रेडमी पिक्सल मैट्रिक्स रिंग लाइट्स दी गई हैं, जो कॉल, म्यूजिक, गेमिंग और नोटिफिकेशन आने पर अलग-अलग कलर में चमकती हैं। मजबूती के लिए इसमें एयरोस्पेस-ग्रेड मेटल फ्रेम लगाया गया है और फ्रंट में कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i का प्रोटेक्शन मिलता है। फोन में नीचे की तरफ टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट, सिम ट्रे और स्पीकर ग्रिल दिए गए हैं, जबकि साइड में पावर बटन और वॉल्यूम रॉकर्स (स्विचेस) मिलते हैं। पानी और धूल से सुरक्षा के लिए इसे IP66, IP68, IP69 और IP69K की ऑल-राउंड रेटिंग मिली है, जो इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाती है। रेडमी टर्बो 5: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.59 इंच की 1.5K एमोलेड स्क्रीन दी गई है। यह डिस्प्ले 12-बिट कलर सपोर्ट, 3500 निट्स की पीक ब्राइटनेस और 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। गेमिंग को स्मूद बनाने के लिए इसमें 2560Hz का इंस्टेंट टच सैंपलिंग रेट है। आंखों की सेफ्टी के लिए 3840 हर्ट्ज PWM डिमिंग और TUV रीनलैंड ट्रिपल सर्टिफिकेशन दिया गया है। फ्रंट में बेहद पतले बेजल्स के साथ बीच में पंच-होल सेल्फी कैमरा मिलता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर डुअल कैमरा सेटअप है। प्राइमरी कैमरा OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन और EIS सपोर्ट के साथ 50MP का सोनी IMX882 सेंसर है, जिससे 60fps पर 4K वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। इसके साथ 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 20MP का कैमरा मिलता है। इसमें मूविंग ऑब्जेक्ट्स की तेज फोटो खींचने के लिए 'टर्बो स्नैप' और AI इरेज व AI एक्सपैंड जैसे फीचर्स शामिल हैं। परफॉर्मेंस: इसमें मीडियाटेक डिमेंसिटी 8500 अल्ट्रा प्रोसेसर दिया गया है, जो 4nm तकनीक पर बेस्ड है और इसकी क्लॉक स्पीड 3.4GHz है। इसमें LPDDR5X अल्ट्रा रैम और UFS 4.1 स्टोरेज मिलती है। कंपनी का दावा है कि इसका AnTuTu स्कोर 23 लाख से ज्यादा है। गेमिंग के दौरान फोन को ठंडा रखने के लिए इसमें 3D आइसलूप कूलिंग सिस्टम, वाइल्डबूस्ट ऑप्टिमाइजेशन और गेम टर्बो मोड दिया गया है। यह फोन शाओमी के हाइपरओएस पर चलता है, जिसमें 4 साल के एंड्रॉएड अपडेट और 6 साल के सुरक्षा अपडेट मिलेंगे। बैटरी और चार्जर: पावरबैकअप के लिए फोन में 7540mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। इसके साथ रिटेल बॉक्स में ही 100W का हाइपरचार्ज फास्ट चार्जर मिलता है। यह फोन को 30 मिनट में 51% और करीब 70 मिनट में फुल चार्ज कर देता है। इसमें 27W की वायर्ड रिवर्स चार्जिंग भी है, जिससे आप दूसरे फोन या गैजेट्स चार्ज कर सकते हैं। अन्य फीचर्स: कनेक्टिविटी के लिए यह वाई-फाई 7, ब्लूटूथ 6.0, IR ब्लास्टर और ऑफलाइन कम्युनिकेशन को सपोर्ट करता है। इसमें 3.5mm का ऑडियो जैक नहीं मिलता है, लेकिन बेहतर साउंड के लिए डॉल्बी एटमॉस सपोर्ट वाले डुअल स्टीरियो स्पीकर्स दिए गए हैं, जो 200% तक वॉल्यूम आउटपुट दे सकते हैं। साथ ही इसमें सर्किल टू सर्च और गूगल जेमिनी AI जैसे एडवांस फीचर्स भी इन-बिल्ट हैं।
आज के माता-पिता एक अजीब दुविधा में फंसे हैं। एक तरफ बच्चों का स्क्रीन-टाइम बढ़ने का डर, दूसरी ओर काम और व्यस्त जीवन। इसी खाली जगह में एंट्री कर रहे हैं नए जमाने के एआई आधारित, ‘स्क्रीन-फ्री’ खिलौने। दावा है कि बच्चों के दोस्त भी हैं, शिक्षक भी और स्क्रीन की लत से बचाने का सुरक्षित रास्ता भी। लेकिन क्या तकनीक से लैस ये खिलौने सच में स्क्रीन-फ्री हैं या सिर्फ माता-पिता के अपराधबोध को कम करने का नया तरीका भर हैं? अमेरिका और यूरोप में तेजी से ऐसे खिलौने आ रहे हैं, जो दिखने में सॉफ्ट टॉय हैं, लेकिन अंदर एआई है। ये खिलौने बच्चों से बात करते हैं। सवालों के जवाब देते हैं। कहानियां सुनाते हैं और यहां तक कि होमवर्क में भी मदद करते हैं। कंपनियों का दावा है कि इनमें कोई स्क्रीन नहीं है। ना मोबाइल, टैबलेट, ना टीवी। बाजार में एक ऐसा स्मार्ट खिलौना आ गया है, जो 27 भाषाओं में बात करता है। इसकी कीमत करीब 28 हजार रु. है। माता-पिता के लिए इसमें एक एप भी है, जिससे वे बच्चे और खिलौने में हुई बातचीत भी देख सकते हैं। माता-पिता को क्यों पसंद हैं ये खिलौने बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ‘आज के माता-पिता खुद स्क्रीन के दौर में पले हैं और अब बच्चों को उससे बचाना चाहते हैं। लेकिन पूरी तरह समय देना हर किसी के लिए संभव नहीं। ऐसे में यह खिलौने ‘सुरक्षित साथी’ का भ्रम देते हैं। माता-पिता का अपराध बोध कम होता है।’ टेक विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन न होना और टेक्नोलॉजी न होना, दो अलग बातें हैं। इन खिलौनों में वही कंप्यूटिंग पावर है, जो स्मार्ट डिवाइस में होती है। बस इंटरफेस बदला है। ऐसे खिलौने स्क्रीन-फ्री जरूर हैं, लेकिन डिजिटल इंटरएक्शन से मुक्त नहीं हैं। यानी स्क्रीन न दिखे, पर एल्गोरिद्म, डेटा और एआई मौजूद हैं। खतरा - दिमाग मशीन की नकल करने लगता है डिजिटल पैरेंटिंग पर काम करने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे बच्चों की कल्पनाशीलता और इंसानी बातचीत पर असर पड़ सकता है। इसका फायदा यह है कि बच्चे लंबे समय तक मोबाइल नहीं पकड़ते। खतरा है कि भावनात्मक जुड़ाव मशीन से बनने लगता है। बच्चों का मानसिक स्तर इंसानी होने के बजाय मशीन की नकल करने लगता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कह चुका है कि बच्चों के लिए तकनीक का उपयोग कम, उद्देश्यपूर्ण और माता-पिता की मौजूदगी में होना चाहिए। बच्चे से मानवीय बातचीत, खेल और इंसानी संबंधों का होना जरूरीं है।

