एआई को लेकर अब तक सवाल था कि वह इंसानों का काम कितनी तेजी से कर सकता है। लेकिन अब चिंता इससे आगे की है। विशेषज्ञ पूछ रहे हैं- अगर एआई अगली पीढ़ी के मॉडल खुद बनाने लगे तो क्या इंसान उसे नियंत्रित कर पाएंगे? हाल में एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने कहा था कि फ्रंटियर एआई डेवलपमेंट धीमा करने या अस्थायी रूप से रोकने का विकल्प होना चाहिए। कंपनी के अनुसार, मई 2026 में प्रकाशित कोड का 80% से ज्यादा हिस्सा एआई ने लिखा था। एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जैक क्लार्क का अनुमान है कि 2028 तक ऐसा सिस्टम संभव है, जो इंसानी मदद के बिना अपना नया संस्करण तैयार कर सके। इसे रिकर्सिव सेल्फ इम्प्रूवमेंट कहते हैं। यानी एआई का एक मॉडल दूसरे को बनाए, दूसरा तीसरे को और तीसरा चौथे को। हर मॉडल पहले से ज्यादा सक्षम हो। एमआईटी के भौतिक विज्ञानी और एआई सुरक्षा विशेषज्ञ मैक्स टेगमार्क चेताते हैं कि यदि विकास की रफ्तार पर निगरानी नहीं रही तो एआई निर्णय लेने में इंसानों से आगे निकल जाएगा। ऐसे में सरकारों, कंपनियों और अहम संस्थानों में इंसानी भूमिका कमजोर हो सकती है। कुछ साल पहले तक एआई सिर्फ निर्देश मानता था। अब समाधान खोज रहा है। गूगल डीपमाइंड के एआई सिस्टम अल्फा इवॉल्व ने डेटा सेंटरों की कार्यप्रणाली सुधारने और एआई ट्रेनिंग तेज करने के तरीके सुझाए। यही वजह है कि वैज्ञानिकों का एक वर्ग मानता है कि इंसान शोधकर्ता के बजाय रिसर्च डायरेक्टर रह जाएंगे। वे सिर्फ दिशा देंगे। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ये बदलाव रातोरात नहीं होगा। एआई को अब भी डेटा सेंटर, महंगे चिप्स, बिजली और नई ट्रेनिंग सामग्री की जरूरत है। उसकी गति फिलहाल सीमित रहेगी। अभी एआई उत्तराधिकारी नहीं बनाता, पर ट्रेनिंग तेज कर रहा अभी कोई एआई मॉडल अपना उत्तराधिकारी पूरी तरह खुद नहीं बना सकता। पर बड़े मॉडल छोटे मॉडल खुद बना सकते हैं। ओपनएआई के पूर्व शोधकर्ता आंद्रेज कारपैथी ने जीपीटी-2 जितना सक्षम चैटबॉट प्रशिक्षित किया। जीपीटी-2 को ओपनएआई ने 2019 में बनाया था। तब 168 घंटे लगे थे। कारपैथी ने एक कंप्यूटर में 8 जीपीयू के साथ वही नतीजा 3 घंटे में हासिल किया। बाद में ये काम एआई एजेंट को दे दिया। उसने इसे 18% और कम कर दिया।
मई महीने में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, मई 2026 में देश की कुल ऑटो रिटेल सेल्स 9.55% बढ़कर 25,31,067 यूनिट पर पहुंच गई। पिछले साल मई में यह आंकड़ा 23,10,451 यूनिट था। इस रिकॉर्ड बिक्री के बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि देश में पहली बार कुल बिकने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की हिस्सेदारी 11% के पार निकल गई है। मिडल ईस्ट संकट के कारण पिछले दिनों देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसकी वजह से ग्राहकों का रुझान ग्रीन और फ्यूल-एफिशिएंट वाहनों की तरफ बढ़ा है। मई में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 23.25% बढ़ी FADA के आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में पैसेंजर व्हीकल्स (कार) की रिटेल बिक्री 23.25% की भारी बढ़त के साथ रिकॉर्ड 4,02,591 यूनिट रही। पिछले साल मई 2025 में यह आंकड़ा 3,26,656 यूनिट था। इसके अलावा टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहनों) की बिक्री भी 7.54% बढ़कर 18,44,947 यूनिट रही। दोपहिया वाहनों में EV का शेयर 9% के करीब पहुंचा मई में ईंधन की कीमतों में हुए बदलाव का असर ग्राहकों की पूछताछ पर साफ देखा गया। डीलर्स का कहना है कि लोग अब ज्यादा माइलेज देने वाले और वैकल्पिक ईंधन (जैसे EV और हाइब्रिड) वाले वाहनों के बारे में ज्यादा पूछ रहे हैं। यही वजह है कि दोपहिया वाहनों के बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का शेयर एक साल पहले के 6.11% से बढ़कर अब 9.25% पर पहुंच गया है। कमर्शियल और थ्री-व्हीलर सेगमेंट का प्रदर्शन थ्री-व्हीलर्स की बिक्री पिछले महीने 3.56% बढ़कर 1,11,526 यूनिट रही, जो पिछले साल मई में 1,07,688 यूनिट थी। वहीं, कमर्शियल व्हीकल्स (CV) यानी भारी वाहनों के सेगमेंट में भी 5.29% की ग्रोथ देखी गई और यह रिकॉर्ड 83,823 यूनिट पर पहुंच गया। हालांकि, पिछले साल के ऊंचे बेस के कारण कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (पहियों वाले निर्माण उपकरण) की बिक्री में 17.51% की गिरावट आई है।
एपल का एनुअल इवेंट वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस 2026 एपल पार्क में शुरू हो गया है। इस बार इवेंट में सिरी, iOS 27 और एपल इंटेलिजेंस को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सबसे खास सिरी को नए अवतार में 'सिरी AI' नाम से पेश किया गया, जो पहले से कहीं ज्यादा बातचीत करने में सक्षम और कॉन्टेक्स्ट-अवेयर (यानी संदर्भ को समझने वाला) है। सिरी AI बिना एप बदले ईमेल और मैसेज लिख सकेगी और फोटो देखकर बताएगी खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू भी बताएगी। साल 2011 में आईफोन पर डेब्यू के बाद से यह सिरी का अब तक का सबसे बड़ा अपग्रेड है, जिसके जरिए कंपनी चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने की तैयारी कर रही है। आगे जानिए एपल ने WWDC 2026 में iOS 27 में क्या नए अपडेट्स किए हैं। 1. सिरी में बड़ा बदलाव: गूगल जेमिनी के साथ अब नए स्टैंडअलोन एप में मिलेगी एपल ने अपनी पुरानी सिरी असिस्टेंट को AI के इस दौर में ज्यादा एडवांस बना दिया है। नए अपडेट के बाद सिरी अब गूगल जेमिनी मॉडल की मदद से काम करेगी। कंपनी का दावा है कि नई सिरी पहले से ज्यादा बातचीत करने लायक, विजुअल इंटेलिजेंस को समझने वाली और ज्यादा क्षमतावान होगी। अब सिरी को मौजूदा एप्स के साथ-साथ एक अलग स्टैंडअलोन एप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। 2. AI प्राइवेसी पर फोकस: डेटा सिर्फ रिक्वेस्ट पूरी करने के लिए होगा AI फीचर्स को रोलआउट करने से पहले एपल ने प्राइवेसी को लेकर अपना स्टैंड साफ किया है। एपल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट क्रेग फेडरिघी ने कहा, हम मानते हैं कि एआई में प्राइवेसी के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने भरोसा दिया कि यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल केवल उनकी रिक्वेस्ट को पूरा करने के लिए किया जाएगा और बाहरी एक्सपर्ट्स कभी भी इस वादे की जांच कर सकते हैं। 3. एपल इंटेलिजेंस: कॉलिंग के दौरान मेल और मैसेज का संदर्भ समझेगा फोन कंपनी ने अपने एप्स में कई नए एपल इंटेलिजेंस अपडेट शामिल किए हैं। सफारी ब्राउजर के लिए अब टैब मैनेजमेंट और वन-टैप पासवर्ड अपडेट की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, एप्स के बीच क्रॉस-एप कॉन्टेक्स्ट अवेयरनेस (एक एप की बात दूसरे में समझना) फीचर दिया गया है। मैसेज एप में अब AI-पावर्ड रिप्लाई सजेशन मिलेंगे, जबकि फोन एप अब कॉल के दौरान ही मेल और मैसेज जैसे अन्य एप्स से संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) निकाल सकेगा। एपल ने बताया कि इन फीचर्स के लिए उन्होंने गूगल के जेमिनी मॉडल्स की मदद से एपल फाउंडेशन मॉडल्स तैयार किए हैं। 4. iOS 27: आईफोन 11 और उसके बाद के सभी मॉडल्स को मिलेगा सपोर्ट एपल ने दावा किया है कि यह उनका अब तक का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर अपडेट होगा जो सबसे ज्यादा डिवाइसेज को सपोर्ट करेगा। कंपनी ने ऐलान किया कि आईफोन 11 और उसके बाद के सभी आईफोन मॉडल्स को iOS 27 का अपडेट मिलेगा। इस नए अपडेट से परफॉर्मेंस काफी बेहतर हो जाएगी। एपल के मुताबिक, नए फोटो अब 70% ज्यादा तेजी से दिखाई देंगे, एयरड्रॉप ट्रांसफर की स्पीड 80% बढ़ जाएगी और मल्टीटास्किंग को बेहतर करने के लिए सीपीयू शेड्यूलर्स में सुधार किया गया है। 5. पेरेंटल कंट्रोल्स: 13 साल से छोटे बच्चों के लिए 'आस्क टू ब्राउज' डिफॉल्ट रहेगा बच्चों के स्क्रीन टाइम और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एपल ने माता-पिता के लिए नए टूल्स पेश किए हैं। अब पेरेंट्स यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किसे कॉल कर सकता है और किन एप्स या वेबसाइट्स को एक्सेस कर सकता है। 13 साल से कम उम्र के बच्चों की डिवाइसेज में 'आस्क टू ब्राउज' (वेबसाइट एक्सेस लिमिट) और एप स्टोर या इन-एप परचेज के लिए 'आस्क टू बाय' फीचर बाय-डिफॉल्ट एक्टिव रहेगा। 6. फोटो एप में AI एडिटिंग: रीफ्रेम और एक्सटेंड टूल्स से बदल जाएगा तस्वीर का लुक फोटो एडिटिंग एप्स को टक्कर देने के लिए एपल फोटो एप में नए एआई टूल्स लाया है। नया स्पेशल 'रीफ्रेम' फीचर एआई की मदद से फोटो के पर्सपेक्टिव (एंगल) को ऐसे बदल देगा जैसे तस्वीर लेते वक्त कैमरा किसी दूसरी जगह रखा हो। वहीं 'एक्सटेंड' टूल इमेज के आस्पेक्ट रेशियो को बढ़ा देगा जिससे सीन में और ज्यादा चीजें जोड़ी जा सकेंगी। इसके अलावा 'क्लीनअप' टूल को भी अपग्रेड किया गया है, जो जेनरेटिव एआई की मदद से फोटो के बैकग्राउंड से अनचाही चीजों को ज्यादा रियलिस्टिक तरीके से हटा देगा। 7. लिक्विड ग्लास डिजाइन और इमेज प्लेग्राउंड में बदलाव पिछले साल के लिक्विड ग्लास डिजाइन को पसंद न करने वाले यूजर्स के लिए एपल ने इसमें कुछ बदलाव करने (ऑप्ट-इन रोलबैक) का विकल्प दिया है। अब यूजर्स इसके एलिमेंट्स को कम या ज्यादा हाइलाइट कर सकते हैं। इसके साथ ही एप्स के अंदर लिक्विड ग्लास का एक नया लेयर्ड अप्रोच दिखाया गया है। वहीं, इमेज जनरेशन एप 'इमेज प्लेग्राउंड' को परफॉर्मेंस अपडेट के साथ दोबारा पेश किया गया है। इसमें सुरक्षा रखी गई है कि इस एप से बनी तस्वीरों का इस्तेमाल एआई की ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाएगा। 8. नए फीचर्स: कीबोर्ड में इन-बिल्ट एआई डिक्टेशन और शॉर्टकट्स में नेचुरल लैंग्वेज 9. टिम कुक: 'मुझे भरोसा है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है' कीनोट के आखिर में CEO टिम कुक ने कंपनी को अलविदा कहते हुए अपना आखिरी मैसेज दिया। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों में आपने लोगों को असाधारण तरीकों से जुड़ने, सीखने और अनुभव करने में मदद की है। आज जिन शानदार क्षमताओं को हमने पेश किया है और जो आगे आने वाली हैं, उन्हें देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है। लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाना हमेशा हमारा ध्रुवतारा रहा है। ऐसी क्रिएटिव और केयरिंग टीम के साथ इस मिशन को आगे बढ़ाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।”
एक समय था जब लोगों, खासकर युवा पीढ़ी के बीच डिजिटल साधनों और सोशल मीडिया अपनाने की होड़ थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। डिजिटल साधनों, ज्यादा स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन रहने से लोगों के बीच डिजिटल थकान बढ़ने लगी है। भारत-अमेरिका सहित कई देशों में हुए अलग-अलग सर्वे के मुताबिक नई पीढ़ी लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया और डिजिटल थकान से बचने के लिए ‘डिजिटल मिनिमलिज्म’ को अपना रही है। कुछ लोग विनाइल रिकॉर्ड, सीडी और रिकॉर्ड प्लेयर खरीद रहे हैं। कुछ लोग 2000 के दशक की पुरानी चीज माने जाने वाले फ्लिप फोन या कीपैड वाले फीचर फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बॉलीवुड और हॉलीवुड के सेलेब्स समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स लेते रहते हैं। कुछ सेलेब्स ने सोशल मीडिया अकाउंट तक छोड़ दिए हैं। कई देशों की सरकारों ने छात्रों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करने के नियम बनाए हैं। भारत में भी ऐसी पहल हो रही हैं। कर्नाटक ने छात्रों के लिए मनोरंजन संबंधी स्क्रीन टाइम प्रतिदिन एक घंटे तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं चंडीगढ़ में संडे अनप्लग टू रिकनेक्ट अभियान शुरू किया गया है। महत्वपूर्ण पलों में डिजिटल साधनों से दूरी परिवारों को जोड़ने में कारगर - 91% बच्चों के मुताबिक फोन दूर रखे जाते हैं तो परिवार की आपसी बातचीत आसान हो जाती है। - 87% बच्चे फोन -फ्री डिनर के दौरान खुलकर बात करने में अधिक सहज महसूस करते हैं - 81% माता-पिता कहते हैं कि बिना फोन के बच्चों के साथ उनका रिश्ता ज्यादा मजबूत महसूस होता है। - 47% माता-पिता और 30% बच्चे साधारण फोन अपना रहे। - 54% माता-पिता और 49% बच्चे स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश कर रहे। - 51% माता-पिता और 41% बच्चे कुछ घंटों के लिए सोशल मीडिया ब्लॉक करते हैं। - 49% माता-पिता और 50% बच्चे गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद कर रहे। - 59%- माता-पिता और 47% बच्चों ने कहा कि डिजिटल व्यवहार पर ज्यादा नियंत्रण हुआ। वीवो-सीएमआर स्विच ऑफ स्टडी 2025 - वीवो इंडिया और सीएमआर द्वारा हर साल किए जाने वाले स्विच ऑफ अध्ययन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक लोग डिजिटल साधनों से दूरी बनाने लगे हैं। वीवो इंडिया के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन अधिकारी, गीताज चन्नाना कहते हैं, ‘स्विच ऑफ अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि परिवार महत्वपूर्ण क्षणों में डिजिटल डिस्कनेक्ट का विकल्प चुन रहे हैं।’ बिना फोन-मोबाइल वाले पर्यटन का उभार ट्रैवल इंडस्ट्री में ऑफ-ग्रिड ट्रैवल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पोलारिस मार्केट रिसर्च के मुताबिक डिजिटल डिटॉक्स हॉलिडे का वैश्विक बाजार 6 लाख करोड़ रु. से ज्यादा का है। ये 2034 तक 24.5% सालाना बढ़कर करीब 44 लाख करोड़ का हो सकता है। ट्रैवल ई-सिम एप सेली के सर्वे में एक चौथाई वयस्क अब बिना फोन या इंटरनेट के यात्रा करना पसंद कर रहे। व्यवसाय के नए अवसर देख रहीं कंपनियां डिजिटल डिटॉक्स एक नई लाइफस्टाइल और बड़ा व्यावसायिक अवसर बनकर उभर रहा है। डंब.को, डंबफोन्स इंडिया और किकबैक जैसी कंपनियां इसी मांग पर आधारित बिजनेस बना रहे हैं। ये पुराने सीडी प्लेयर और फीचर फोन्स बेच रही हैं। इन फोन में कॉल, मैसेज, वाट्सएप्स, यूपीआई और मैप जैसी सुविधाएं होती हैं, लेकिन सोशल मीडिया नहीं होता। उद्योग समूह भी आयोजित करवा रहे डिजिटल डिटॉक्स रिट्रीट डिटॉक्स ट्रैवल उपलब्ध कराने वाली बेंगलुरु की फर्म ट्रांसफॉर्मिंग ट्रैवल्स की फाउंडर चांदनी अग्रवाल बताती हैं, ‘हमें कॉर्पोरेट समूहों से अपनी टीमों के लिए डिजिटल डिटॉक्स रिट्रीट आयोजित करने की मांग मिलती है। इसमें लोग अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया से दूरी बनाते हैं। रिट्रीट में भाग लेने वाले अधिकांश लोग 30 से 60 आयु वर्ग के होते हैं। इनमें करीब 70-80% महिलाएं होती हैं। 90% ग्राहक लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और स्पीति घाटी जैसे क्षेत्रों में रिट्रीट आयोजित करना पसंद करते हैं।’
टेक कंपनी शाओमी ने भारत में अपना नया प्रीमियम स्मार्टफोन शाओमी 17T और शाओमी FX मिनी LED TV लॉन्च की हैं। स्मार्टफोन 120x जूम के साथ 50MP लाइका कैमरा, 6500mAh बैटरी और फ्लैगशिप लेवल फीचर्स के साथ आया है। कंपनी ने इस फोन को खासतौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया है जो प्रीमियम डिजाइन, पावरफुल परफॉरमेंस और हाई-एंड कैमरा एक्सपीरियंस चाहते हैं। शाओमी 17T को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसके 12GB रैम + 256GB स्टोरेज वाले शुरुआती वैरिएंट की कीमत 59,999 रखी गई है, लेकिन लॉन्च ऑफर में ₹5000 के डिस्काउंट के बाद इसे 54,999 रुपए में खरीदा जा सकता है। भारत में इसका मुकाबला वनप्लस 15R और वीवो V70 जैसे स्मार्टफोन्स से होगा। वहीं, शाओमी FX मिनी LED TV को 4 वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 32,999 रुपए रखी गई। लॉन्च ऑफर में फिलहाल इसे 29,999 रुपए में खरीदा जा सकता है। फोन की सेल 10 जून और TV की सेल 11 जून से शुरू होगी। शाओमी 17T: डिजाइन, डायमेंशन और इन-हैंड फील मटेरियल और टेक्स्चर: फोन का बैक पैनल और साइड फ्रेम प्रीमियम फिनिश वाले प्लास्टिक मटेरियल से बना है, जो हाथ में पकड़ने पर बिल्कुल ग्लास (कांच) जैसा स्मूथ फील देता है। इसका लुक काफी सिंपल और मिनिमलिस्टिक है। डायमेंशन और वजन: फोन सिर्फ 8.17mm पतला है और इसका वजन करीब 201.8 ग्राम है। हालांकि, स्लिम डिजाइन और वेट डिस्ट्रिब्यूशन की वजह से यह हाथ में काफी हल्का, छोटा और कॉम्पैक्ट लगता है। फोन 3 कलर ऑप्शन वॉयलेट, ब्लू और ब्लैक में मिलेगा। पोर्ट्स और बटन्स: फोन के नीचे की तरफ (बॉटम) एक स्पीकर ग्रिल, USB टाइप-C पोर्ट, माइक्रोफोन और एक डुअल नैनो सिम ट्रे दी गई है। फोन का लेफ्ट साइड पूरी तरह से क्लीन है। इसके राइट साइड पर परफेक्ट पोजीशन में पावर बटन और उसके ठीक ऊपर वॉल्यूम रॉकर बटन्स दिए गए हैं। खास बात यह है कि इसके टॉप (ऊपर) पर कोई भी पोर्ट या विजिबल होल नहीं है, लेकिन यह IR ब्लास्टर को सपोर्ट करता है। फ्रंट डिस्प्ले और सेफ्टी: फ्रंट में बेजल्स काफी पतले हैं, जिससे स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो अच्छा मिलता है। पंच-होल डिजाइन के साथ सेल्फी कैमरा सेंटर में है। पानी और धूल से सुरक्षा के लिए इसे IP68 की टॉप रेटिंग मिली है। शाओमी 17T: स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स डिस्प्ले: शाओमी 17T में 6.59-इंच का 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रिजॉल्यूशन 2756 x 1268 पिक्सल है। यह 120Hz रिफ्रेश रेट और 480Hz टच सैंपलिंग रेट को सपोर्ट करता है। इसकी पीक ब्राइटनेस 3500 निट्स है, यानी तेज धूप में भी विजिबिलिटी में कोई दिक्कत नहीं होगी। डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए इस पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i की प्रोटेक्शन मिलती है। इसके अलावा यह डॉल्बी विजन और HDR10+ सपोर्ट के साथ आता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इस फोन में कैमरा कंपनी 'लाइका' के ऑप्टिकल लेंस वाला ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है। इसमें OIS सपोर्ट के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा (लाइट फ्यूजन 800 सेंसर), 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा और 12MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा शामिल है। कैमरा एप में लाइका ऑथेंटिक और लाइका वाइब्रेंट जैसे मोड्स के साथ 120x AI जूम का सपोर्ट मिलता है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 32MP का कैमरा दिया गया है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: स्मार्टफोन 4nm आर्किटेक्चर पर बने मीडियाटेक डायेमेंसिटी 8500-अल्ट्रा प्रोसेसर पर काम करता है। ग्राफिक्स के लिए इसमें माली-G720 MC8 GPU और AI टास्क के लिए NPU 880 AI इंजन दिया गया है। फोन में LPDDR5X रैम और UFS 4.1 स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। हीटिंग से बचाने के लिए इसमें शाओमी का 3D आइसलूप कूलिंग सिस्टम लगा है। यह फोन लेटेस्ट एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड शाओमी हाइपर OS 3 पर चलता है, जिसमें कई इन-बिल्ट AI फीचर्स जैसे AI राइटिंग, सर्कल टू सर्च और गूगल जेमिनी का सपोर्ट मिलता है। पावर बैकअप: फोन में 6500mAh की बड़ी सिलिकॉन-कार्बन बैटरी दी गई है, जो लंबे समय का प्लेबैक टाइम और बैकअप देती है। यह 67W हाइपरचार्ज फास्ट चार्जिंग, 50W चार्जिंग और 22.5W वायर्ड रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करता है। हालांकि, कंपनी बॉक्स में एडॉप्टर साथ नहीं दे रही है, बॉक्स में केवल टाइप-A टू टाइप-C केबल मिलेगी। कनेक्टिविटी व अन्य: इस फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर और एआई फेस अनलॉक दिया गया है। ऑडियो के लिए डॉल्बी एटमॉस सपोर्ट वाले डुअल स्टीरियो स्पीकर्स मिलते हैं। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर यह वाई-फाई 6E, ब्लूटूथ 6.0, NFC और फिजिकल सिम के साथ eSIM सपोर्ट से लैस है। इसमें पारंपरिक 3.5mm का ऑडियो जैक नहीं मिलता है।
सीएमआर सर्वे में खुलासा:रिपोर्ट के मुताबिक हाईवे पर 79% स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप की दिक्कत
देश में हाईवे पर मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। सीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईवे पर सफर करने वाले 79% स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप या नेटवर्क बाधा का सामना करना पड़ता है। कामकाज पर असर 64% बिजनेस यूजर्स ने कहा- कॉल ड्रॉप की वजह से क्लाइंट डील गंवाई। हर 3 में से 2 यूजर्स बोले- खराब सिग्नल से क्लाइंट खोना पड़ा। 71% को ग्राहक को दोबारा फोन करना पड़ा, इससे प्रोफेशनल इमेज खराब हुई। मानसिक दबाव भी बढ़ा 83% ने कहा- जरूरी कॉल कटने से बेचैनी-लाचारी महसूस होती है। लगातार नेटवर्क टूटने से तनाव व असुरक्षा की भावना बढ़ रही। मेट्रो व इंडोर लो-सिग्नल जोन में स्थिर कनेक्टिविटी चुनौती है। फोन डिजाइन का असर ट्रिपल-सिग्नल चिपसेट से लैस फोन वाले 81% ने बेहतर नेटवर्क अनुभव की बात कही। 74% यूजर्स को हाईवे यात्रा के दौरान कॉलिंग ज्यादा भरोसेमंद लगी। क्या कहते हैं विशेषज्ञ?साइबर मीडिया रिसर्च (CMR) के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट, प्रभु राम ने कहा, “भारत ने मोबाइल नेटवर्क की कवरेज बढ़ाने में बहुत अच्छी तरक्की की है। इसके बावजूद हाईवे, मेट्रो और कमजोर सिग्नल वाले इनडोर इलाकों में लगातार अच्छी कनेक्टिविटी मिलना आज भी एक बड़ी चुनौती है।” क्या फोन की तकनीक से सुधर सकता है नेटवर्क? रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि आपके फोन का डिजाइन और उसकी टेक्नोलॉजी भी नेटवर्क पकड़ने में अहम भूमिका निभाती है। हाईवे पर अक्सर सफर करने वाले जिन यूजर्स ने ट्रिपल-सिग्नल चिपसेट वाले फोन पर स्विच किया, उनमें से 81% ने बताया कि उनका नेटवर्क एक्सपीरियंस पहले से बेहतर हो गया। 74% यूजर्स को कॉलिंग में ज्यादा भरोसा दिखा और 72% ने माना कि खराब नेटवर्क वाले इलाके से बाहर निकलते ही उनके फोन ने बहुत तेजी से सिग्नल रिकवर कर लिया।
85% एथेनॉल मिक्स वाला E85 फ्यूल दिल्ली में आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडियन ऑयल (IOC) के पूसा रोड आउटलेट पर दिल्ली के पहले E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। खास बात ये है कि यह पेट्रोल से ₹20 प्रति लीटर सस्ता है। इससे न सिर्फ आम लोगों का गाड़ी चलाने का खर्च कम होगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता भी घटेगी। दिल्ली में E85 फ्यूल की कीमत ₹82.12 प्रति लीटर तय की गई है। यह दिल्ली में बिक रहे रेगुलर E20 पेट्रोल से पूरे ₹20 कम है। पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को किसी तरह का भ्रम न हो, इसके लिए E85 फ्यूल देने वाली मशीनों (डिस्पेंसर्स) पर एक खास ब्रांडिंग और अलग से साफ दिखने वाला लेबल लगाया जाएगा। इस साल खुलेंगे 500 पंप, 2027 तक 5000 का टारगेट दिल्ली के पूसा रोड पर खुला यह स्टेशन देश का पहला पंप है, लेकिन सरकार का प्लान इसे बहुत बड़े स्तर पर ले जाने का है। शुरुआती फेज में सरकार दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में करीब 50 से 100 ऐसे E85 फ्यूल स्टेशन स्थापित करेगी। योजना के मुताबिक, इस साल अंत तक देश में ऐसे स्टेशनों का नेटवर्क बढ़ाकर करीब 500 किया जाएगा। वहीं, साल 2027 अंत तक केंद्र सरकार का टारगेट देश के सभी मुख्य शहरों में लगभग 5000 आउटलेट्स शुरू करने का है। सरकार ने हाल ही में E22, E25, E27 और E30 जैसे ज्यादा एथेनॉल मिक्स वाले फ्यूल स्टैंडर्ड्स को भी नोटिफाई किया है। E85 फ्लेक्स फ्यूल में क्या खास है अभी देशभर में फ्यूल स्टेशन पर जो पेट्रोल मिल रहा है वह E20 है, यानी उसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल मिक्स है। इसके उलट, नए E85 फ्यूल में 85% तक एथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल है। सरकार E100 यानी 100% एथेनॉल जैसे फ्लैक्स फ्यूल की ओर बढ़ना चाहती है, ताकि कच्चे तेल के आयात को कम किया जा सके। 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। एथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है, इसलिए इसकी लागत कम आती है। यही वजह है कि ग्राहकों के लिए यह काफी किफायती साबित होगा, बशर्ते उनके पास इस फ्यूल को सपोर्ट करने वाली गाड़ियां हों। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को भी कम करने में भी मदद करता है। सिर्फ इन चुनिंदा गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा E85 फ्यूल को सामान्य पेट्रोल गाड़ियों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसके लिए गाड़ियों का इंजन खास तौर पर 'फ्लेक्स-फ्यूल' तकनीक पर आधारित होना चाहिए। फिलहाल भारत में अभी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां अवेलेबल नहीं है। क्रूड इम्पोर्ट घटाना है सरकार की प्राथमिकता अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में तेल आयात बिल पिछले साल के $137 बिलियन से घटकर $123 बिलियन रहा है, लेकिन सरकार इसे और कम करना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन अपनाने पर जोर दिया है। क्या होता है एथेनॉल? एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। -------------- ये भी पढ़ें… इस हफ्ते सोने-चांदी में गिरावट रही: चांदी की कीमत ₹6442 कम होकर ₹2.57 लाख किलो हुई, सोना ₹2225 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,225 रुपए गिरकर 1.54 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 30 मई को 1.56 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.63 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.57 लाख रुपए पर आ गई है। यानी इसकी कीमत 6,442 रुपए कम हुई। पूरी खबर पढ़ें…
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के रूसी हिस्से में हवा का रिसाव (एयर लीक) बढ़ने के बाद नासा ने वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को अपने स्पेसक्राफ्ट में छिपने और संभावित सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। रूसी चालक दल फिलहाल इस लीक को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। क्रू-12 मिशन के यात्रियों को मिला स्पेससूट पहनने का आदेश नासा के अनुसार, स्टेशन पर मौजूद 'क्रू-12' मिशन के 4 अंतरिक्ष यात्रियों को नासा मिशन कंट्रोल से शुक्रवार सुबह 9:04 बजे (ET) यह निर्देश मिला। इनमें दो अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जैक हैथवे और जेसिका मीर, एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनोट और एक रूसी अंतरिक्ष यात्री आंद्रेई फेदयेव शामिल हैं। उन्हें स्टेशन से जुड़े 'क्रू ड्रैगन' स्पेसक्राफ्ट के अंदर जाने और अपने स्पेससूट पहनने के लिए कहा गया है, ताकि एयर लीक बढ़ने पर आपातकालीन स्थिति में वहां से तुरंत निकला जा सके। रूस के 'ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल' में हो रहा है रिसाव स्पेस स्टेशन के दो मुख्य संचालक- नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस- पिछले कई महीनों से रूस के 'ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल' में हो रहे छोटे हवा के रिसाव के कारणों और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कर रहे हैं। फुटबॉल के मैदान के आकार की इस पूरी प्रयोगशाला (ISS) में यह मॉड्यूल एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक दिन में लीक डबल हुआ, 1 पाउंड से बढ़कर 2 पाउंड नुकसान हुआ नासा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल के महीनों में यह एयर लीक काफी कम था। लेकिन सोमवार को स्थिति अचानक तब बिगड़ गई, जब लीक होने वाली हवा की मात्रा रोजाना एक पाउंड से बढ़कर दो पाउंड (लगभग दोगुनी) हो गई। इसी वजह से नासा को यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह अलर्ट जारी करना पड़ा। 27 साल के इतिहास में कभी खाली नहीं करना पड़ा ISS स्पेस स्टेशन पर 'सेफ-हेवन' जैसे आदेश बहुत कम दिए जाते हैं। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब अंतरिक्ष का कचरा स्टेशन से टकराने वाला हो या हवा के दबाव में कोई बड़ा बदलाव आए। अच्छी बात यह है कि पिछले 27 साल से लगातार इंसानों के घर बने हुए इस स्पेस स्टेशन को आज तक कभी भी आपातकालीन स्थिति में पूरी तरह खाली नहीं करना पड़ा है। इस बार भी दो घंटे बाद स्थिति की समीक्षा कर नासा ने अलर्ट हटा दिया और यात्री वापस स्टेशन के काम में जुट गए। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है? इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसमें एस्ट्रोनॉट रहते हैं और माइक्रो ग्रेविटी में एक्सपेरिमेंट करते हैं। यह 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करता है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर लेता है। 5 स्पेस एजेंसीज ने मिलकर इसे बनाया है। स्टेशन का पहला पीस नवंबर 1998 में लॉन्च किया गया था। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहकर लौटे शुभांशु: स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग कैलिफोर्निया के तट पर हुई, पहली बार कोई भारतीय ISS गया था शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। करीब 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की आज यानी 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई। इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं। चारों एस्ट्रोनॉट एक दिन पहले यानी सोमवार की शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। पूरी खबर पढ़ें…
मारुति सुजुकी ने आज (4 जून) भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगन-आर फ्लेक्स-फ्यूल को पेश कर दी है। नई वैगन-आर पूरी तरह से E85 फ्यूल (85% तक एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलने में सक्षम है। फिलहाल गाड़ी सिर्फ फ्लीट ऑपरेटर्स और ओला और उबर जैसे कैब एग्रीगेटर्स के लिए ही अवेलेबल होगी। इसी कारण मारुति ने वैगन-आर फ्लेक्स-फ्यूल की कीमतों का खुलासा नहीं किया है। कार के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन E85 फ्यूल के अनुकूल बनाने के लिए इसमें कई मैकेनिकल अपडेट्स किए गए हैं, जिससे उम्मीद है कि इसकी कीमत पेट्रोल और CNG वर्जन से ज्यादा हो सकती है। 2027 के तक 5000 एथेनॉल पंप लगाने का टारगेट केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी कार को लॉन्च के मौके पर कहा कि, सरकार का लक्ष्य साल 2027 के अंत तक देश में 5000 तक E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन लगाने का है। पुरी ने कहा, “शुरुआत में हमारे पास दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में लगभग 50 से 100 डिस्पेंसिंग स्टेशन होंगे। इस साल दिसंबर तक इसका विस्तार 500 स्टेशनों तक किया जाएगा।” इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने यह भी भरोसा दिया कि E85 फ्यूल की कीमत मौजूदा E20 पेट्रोल के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी। पहली बार सामने आया प्रोडक्शन-स्पेक मॉडल वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल इससे पहले भी कई मौकों पर दिखाई दे चुकी है। यह सबसे पहले साल 2022 में और उसके बाद साल 2024 के भारत मोबिलिटी शो में नजर आई थी। हालांकि, पिछले सभी वर्जन केवल प्रोटोटाइप (टेस्टिंग मॉडल) थे, जबकि आज जिसे पेश किया गया है, वह इसका प्रोडक्शन-स्पेक (उत्पादन के लिए तैयार) मॉडल है। एक्सटीरियर: रेगुलर मॉडल जैसा ही बॉक्सी लुक, 'फ्लेक्स फ्यूल' की बैजिंग नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल का ओवरऑल डिजाइन स्टैंडर्ड मॉडल जैसा ही है, लेकिन इसे एक अलग पहचान देने के लिए कुछ कॉस्मेटिक बदलाव किए गए हैं।
रिलायंस जियो ने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MP-CG) टेलीकॉम सर्किल में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सर्किल में कंपनी के मोबाइल ग्राहकों की संख्या 5 करोड़ के बेहद करीब पहुंच गई है, वहीं ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं का आंकड़ा 20.3 लाख से अधिक हो गया है।
ऑटो मोबाइल कंपनियों ने आज (1 जून) मंथली सेल्स रिपोर्ट्स जारी कर दी हैं। मई में मारुति सुजुकी ने कुल 2,42,688 लाख गाड़ियां बेचीं, जो मई-2025 में बेची गई 1,80,077 यूनिट्स के मुकाबले 34% ज्यादा है। ये भारत में किसी भी कंपनी की ओर से एक महीने में सबसे ज्यादा गाड़ियां बेचने का नया रिकॉर्ड है। कंपनी की ग्रोथ में भारतीय बाजार (घरेलू बिक्री) के साथ-साथ विदेशों में होने वाले एक्सपोर्ट का भी बड़ा हाथ रहा है। वहीं, हुंडई ने मई में पूरे भारत में 9% ग्रोथ के साथ 47,837 और महिंद्रा ने 11% ग्रोथ के साथ 58,021 कारें ज्यादा बेचीं। आइए जानते हैं पिछले महीने देशबर में किस कंपनी की कितनी गाड़ियां बिकीं।
गर्मी बढ़ी तो फोन भी खतरे में:हीटवेव का असर फोन पर भी; जानिए बचाव के तरीके
देश के कई शहरों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है और अब फोन भी जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहे हैं, चार्जिंग बीच में रुक जा रही है, कैमरा बंद हो रहा है और बैटरी तेजी से खत्म हो रही है। लगातार ओवरहीटिंग सिर्फ बैटरी को ही नहीं, बल्कि प्रोसेसर, कैमरा सेंसर, डिस्प्ले और पूरे फोन की परफॉर्मेंस को नुकसान पहुंचा सकती है। कई कंपनियां चेतावनी देती हैं कि 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान में स्मार्टफोन पर स्थायी असर भी पड़ सकता है। ऐसे में जानते हैं फोन को ओवरहीट से कैसे बचाएं? थर्मल थ्रॉटलिंग हीट में फोन खुद को यूं सुरक्षित करता है अगर फोन लगातार गर्म रहे तो बैटरी हेल्थ तेजी से गिरती है, चार्जिंग धीमी हो जाती है, प्रोसेसर स्पीड घटा देता है और फोन धीमा महसूस होने लगता है। इसे ‘थर्मल थ्रॉटलिंग’ कहा जाता है। यानी फोन खुद को बचाने के लिए परफॉर्मेंस कम कर देता है। गर्म फोन को तुरंत चार्ज करना बड़ी गलती कई लोग धूप से आने के बाद तुरंत फोन चार्जिंग पर लगा देते हैं। यह गलत है। अगर फोन पहले से गर्म है और उसी समय चार्जिंग शुरू कर दी जाए, तो बैटरी पर अतिरिक्त थर्मल दबाव पड़ता है। क्योंकि चार्जिंग खुद भी गर्मी पैदा करती है। इससे फोन ज्यादा गर्म हो सकता है, चार्जिंग अपने आप रुक सकती है। गर्म कार में फोन छोड़ने से बचें, इससे भी खतरे कार के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में कई डिग्री ज्यादा हो सकता है। अगर फोन कार में रख छोड़ दिया तो बैटरी और डिस्प्ले दोनों को नुकसान हो सकता है। ऐसी स्थिति में बैटरी फूल सकती है, स्क्रीन पर दाग या लाइनें आ सकती हैं, कैमरा सेंसर प्रभावित हो सकता है व फोन अचानक बंद हो सकता है। फोन गर्म हो तो क्या करें? - फोन को धूप से हटाएं - चार्जिंग बंद करें - कैमरा व रिकॉर्डिंग रोक दें - फोन कवर निकाल दें, ताकि गर्मी बाहर निकल सके - फोन को फ्रिज, बर्फ या एसी के ठीक सामने न रखें। अचानक तापमान बदलने से फोन के अंदर नमी बन सकती है, जो सर्किट को नुकसान पहुंचा सकती है। ये सेटिंग्स भी उपयोगी बैटरी सेवर मोड चालू करें- इससे बैकग्राउंड में चल रही कई प्रक्रियाएं कम हो जाती हैं। डार्क मोड इस्तेमाल करें - यह कम पावर इस्तेमाल करता है, जिससे गर्मी भी कम पैदा होती है। कमजोर नेटवर्क में 5G बंद - जहां नेटवर्क कमजोर हो, वहां फोन लगातार सिग्नल खोजता रहता है। इससे गर्मी बढ़ती है। सिर्फ बैटरी नहीं, पूरा फोन प्रभावित होता है फोन में लगातार ओवरहीटिंग से प्रोसेसर की क्षमता घटा सकती है। डिस्प्ले को नुकसान पहुंचा सकती है। कैमरा सेंसर खराब कर सकती है और लंबे समय में फोन की लाइफस्पैन कम कर सकती है।
जेमिनी का नया ‘डिजिटल अवतार:कैमरे के सामने आए बिना बनेंगे आपके वीडियो; जाने कैसे उपयोग करें
गूगल जेमिनी ने अब एक नया ‘डिजिटल अवतार’ फीचर पेश किया है, जिससे यूजर्स अपना एक डिजिटल क्लोन तैयार कर सकते हैं। यह क्लोन जेमिनी द्वारा तैयार किए गए किसी भी वीडियो में मुख्य किरदार की भूमिका निभा सकता है। यह नया फीचर गूगल के ‘जेमिनी ओम्नी’ मॉडल पर आधारित है। यह नया फीचर कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मददगार हो सकता है, क्योंकि वे इससे अपने नए-नए वीडियो बना सकेंगे। यह वैश्विक स्तर पर सभी जेमिनी प्रो यूजर्स के लिए उपलब्ध है। जानें इसे बनाने की पूरी प्रक्रिया। ट्यूटोरियल- जेमिनी में डिजिटल अवतार बनाने की प्रक्रिया gemini.google.com वेबसाइट खोलकर नीचे दिए गए ‘+’ (प्लस) बटन पर क्लिक करें। - वहां उपलब्ध ‘More Uploads’ पर कर्सर ले जाएं और ‘Avatar’ पर क्लिक करें। - इसके बाद स्क्रीन पर एक क्यूआर दिखाई देगा, जिसे मोबाइल फोन से स्कैन करना होगा। - स्कैन करते ही मोबाइल पर चेहरा रिकॉर्ड करने का एक पेज खुलेगा। यहां यूजर्स को कुछ चुनिंदा नंबर्स बोलने और चेहरे को अलग-अलग एंगल्स से दिखाने के लिए कहा जाता है, ताकि सिस्टम चेहरे का सटीक डिजिटल मॉडल तैयार कर सके। - प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह अवतार यूजर्स के जीमेल यूजरनेम के नाम से सेव हो जाता है। उपयोग - यूजर्स इस तरह से बनाएं अपने डिजिटल क्लोन डिजिटल अवतार तैयार होने के बाद इसका उपयोग करने के लिए जेमिनी के प्रॉम्ट बॉक्स में जाकर ‘@’ के साथ अपना यूजरनेम लिखना है। - यदि किसी यूजर्स की ईमेल आईडी aryan@gmail.com है, तो उसका यूजरनेम @aryan होगा। वीडियो बनाने के लिए आपको अंग्रेजी में प्रोॅम्प्ट देना है और इसमें यूजरनेम जोड़ना होगा। जैसे- लंदन की सड़कों पर घूमते हुए @aryan का एक वीडियो बनाएं। - जेमिनी केवल सिंगल ह्यूमन कैरेक्टर को ही सपोर्ट करता है, यानी वीडियो में एक समय पर एक ही अवतार का उपयोग किया जा सकता है। ऑफर्स की मदद से ऐसे मिलेगा फ्री एक्सेस यह फीचर पूरी तरह से मुफ्त नहीं है। यह केवल गूगल के ‘एआई प्रो’ या ‘अल्ट्रा’ टियर के ग्राहकों के लिए उपलब्ध है, जिसकी भारत में मासिक फीस लगभग 1,950 रुपए है। हालांकि, भारत में टेलीकॉम ऑपरेटर्स की मदद से फ्री एक्सेस मिल सकता है। रिलायंस जियो - सभी ग्राहकों को 18 महीने के लिए जेमिनी एआई प्रो का सब्सक्रिप्शन मुफ्त दिया जा रहा है। इसे माय जियो में एक्टिवेट करें। भारती एयरटेल - एयरटेल अपने पोस्टपेड यूजर्स को 6 महीने के लिए यह सेवा मुफ्त दे रहा है। वीडियो व्लॉग बना सकेंगे यूजर्स - आने वाले समय में वीडियो कॉल्स में भी हमारी जगह हमारे डिजिटल अवतार दिखाई दे सकते हैं, जैसा कि एपल अपने विजन प्रो में पहले ही दिखा चुका है। लोग एआई व्लॉग भी बना सकेंगे।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस ने शुक्रवार को इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी (साइड) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत पांचवीं सबसे अधिक डिजिटलाइज्ड इकॉनोमी बन गया है। 2025 में यह आठवें स्थान पर था। वहीं देश एआई प्रदर्शन के मामले में चिप्स-एआई इंडेक्स में अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे स्थान पर है। यह उछाल डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक विकास और नवाचार क्षमता में सुधार का परिणाम है। दुनिया की जीडीपी के 96% को कवर करने वाले 71 देशों में की गई स्टडी से पता चलता है कि भारत डिजिटल प्रदर्शन में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा सहित प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल रहा है। भारत ने डिजिटल माध्यमों से करीब 31 लाख करोड़ रुपए का ट्रेड किया और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एआई टैलेंट का हब है। दुनिया के 72% एआई यूजर विकासशील देशों में रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि दुनिया के 72% एआई उपयोगकर्ता अब विकासशील देशों में हैं। भारत और चीन मिलकर वैश्विक एआई उपयोग का लगभग 40% हिस्सा रखते हैं। भारत अकेले वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं का लगभग 26% हिस्सा रखता है। निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे ज्यादा चुनौती भारत में एआई उपयोग और प्रतिभा तो बहुत है, लेकिन वैश्विक निजी एआई निवेश का केवल 1% हिस्सा ही मिलता है। एडवांस चिप्स, कंप्यूटिंग क्षमता और बड़े एआई मॉडल अभी कुछ ही देशों के पास केंद्रित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अपने डिजिटल स्केल को इनोवेशन के लिए अधिक निवेश, रिसर्च और स्टार्टअप यूनिवर्सिटी सहयोग को मजबूत करना होगा। ---------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एआई के दौर में अब इंसान कहानी सुनाना सीखें: एनवीडिया सीईओ हुआंग बोले- बच्चे कौन सा विषय पढ़ें, इससे ज्यादा जरूरी है 'कैसे सीखें' आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ रफ्तार दुनिया में अक्सर यह सवाल उठता है कि बच्चों को अब कौन-सा विषय पढ़ना चाहिए ताकि भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी एआई चिप कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेसन हुआंग की राय इससे बिल्कुल अलग है। पूरी खबर पढ़ें…
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ रफ्तार दुनिया में अक्सर यह सवाल उठता है कि बच्चों को अब कौन-सा विषय पढ़ना चाहिए ताकि भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी एआई चिप कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेसन हुआंग की राय इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि एआई के दौर में क्या पढ़ना है से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि एआई का इस्तेमाल करके कितना बेहतर सीखना है। सिंगापुर के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में हुआंग ने कहा कि माता-पिता को इस बात को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए कि उनके बच्चे कौन-सा सब्जेक्ट चुन रहे हैं। उनके मुताबिक, जो चीजें पहले महत्वपूर्ण थीं, जैसे रचनात्मकता, कहानी कहने की क्षमता, समझदारी और इंसानी जुड़ाव, वही भविष्य में भी सबसे ज्यादा मायने रखेंगी। हुआंग ने जापानी विचार वाबी-साबी का भी जिक्र किया, जिसमें अपूर्णता की सुंदरता को महत्व दिया जाता है। उनका संकेत था कि एआई की परफेक्ट दुनिया में इंसानों की भावनाएं, गलतियां और व्यक्तिगत शैली ही सबसे ज्यादा खास बन सकती हैं। जेसन हुआंग ने नौकरियों को टास्क्स की टोकरी बताया। उनके अनुसार एआई कई दोहराए जाने वाले काम ऑटोमेट कर देगा, लेकिन इससे इंसानों को ज्यादा कठिन, रचनात्मक और रणनीतिक काम करने का समय मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि एआई इंसानों को आलसी नहीं बनाएगा। जैसे कंप्यूटर, इंटरनेट और स्मार्टफोन आने के बाद लोग कम व्यस्त नहीं हुए, बल्कि और ज्यादा काम करने लगे, वैसे ही एआई भी इंसानी महत्वाकांक्षा को बढ़ाएगा। एआई के दौर में बच्चों के लिए रचनात्मक सोच, एआई टूल्स का स्मार्ट इस्तेमाल,जिज्ञासा और लगातार सीखने की मानसिकता बनाए रखना जरुरी है। पत्रकारिता, कला, स्टोरीटेलिंग कभी आउटडेटेड नहीं होगी हुआंग ने खास तौर पर पत्रकारिता, कला, डिजाइन और स्टोरीटेलिंग जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। उनका कहना है कि एआई जानकारी दे सकता है, लेकिन इंसानों जैसी संवेदनशील बातचीत, सही समय पर सही सवाल पूछना और लोगों को जोड़ने वाली कहानी गढ़ना अभी भी मानव क्षमता है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा इंटरव्यूअर सिर्फ तैयारी नहीं करता, बल्कि सामने वाले को ध्यान से सुनता है और उसी पल बेहतर प्रतिक्रिया देता है। इंसानों का यही धारणा गढ़ने का गुण भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होगी।
रॉयल एनफील्ड ने अपने नए मॉडल 'बुलेट 650' को लॉन्च कर दिया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹3.65 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। कीमत के मामले में यह बाइक हाल ही में आई क्लासिक 650 ट्विन के शुरुआती कलर्स के बराबर है, लेकिन उसके टॉप-स्पेक क्रोम वेरिएंट से काफी सस्ती है। इसमें दो कलर ऑप्शन कैनन ब्लैक और बैटलशिप ब्लू मिलेंगे। क्लासिक 650 जैसी कीमत, पर लुक में किए गए हैं कई बदलाव नई बुलेट 650 को रॉयल एनफील्ड ने अपने 650cc पैरेलल-ट्विन पोर्टफोलियो में सातवें मॉडल के रूप में जोड़ा है। जिस तरह बाजार में 350cc सेगमेंट के अंदर बुलेट 350 और क्लासिक 350 काफी चीजें शेयर करती हैं, ठीक वैसा ही फॉर्मूला कंपनी ने यहां भी अपनाया है। बुलेट 650 के ज्यादातर मैकेनिकल पार्ट्स क्लासिक 650 ट्विन जैसे ही हैं, लेकिन इसके डिजाइन और स्टाइलिंग में बुलेट की पारंपरिक पहचान को बनाए रखने के लिए कुछ खास बदलाव किए गए हैं। क्लासिक लुक के लिए क्रोम हेडलाइट हुड और पारंपरिक टेल-लाइट बाइक में क्लासिक लुक देने के लिए क्रोम हेडलाइट हुड और पारंपरिक टेल-लाइट दी गई है। इसके अलावा, बुलेट की पहचान माने जाने वाले हाथ से पेंट किए गए पिनस्ट्राइप्स (मडगार्ड और टैंक पर सुनहरी धारियां) और फ्यूल टैंक पर मेटल का सिग्नेचर बैज दिया गया है। क्लासिक 650 के मुकाबले इसका रियर फेंडर (पीछे का मडगार्ड) ज्यादा स्क्वेयर्ड-ऑफ यानी चौकोर डिजाइन में आता है, जो इसे पुरानी बुलेट वाला लुक देता है। लंबी दूरी के सफर के लिए मिलेगी ज्यादा आरामदायक सिंगल-पीस सीट बुलेट 650 में जो सबसे बड़ा और व्यावहारिक बदलाव किया गया है, वो है इसकी सीट। क्लासिक 650 में जहां रिमूवेबल पिलियन सीट (पीछे की सीट हटाने का विकल्प) मिलती है, वहीं बुलेट 650 में कंपनी ने सिंगल-पीस स्टेप्ड सीट दी है। माना जा रहा है कि यह सीट बाइक चलाने वाले और पीछे बैठने वाले (पिलियन) दोनों के लिए लंबी दूरी के सफर में क्लासिक के मुकाबले ज्यादा आरामदायक साबित होगी। इसके अलावा बाइक का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर डिजी-एनालॉग ही रखा गया है, जिसमें फ्यूल गेज और ओडोमीटर के लिए एक छोटी डिजिटल डिस्प्ले मिलती है। बाइक के हैंडल पर पॉलिश्ड एल्युमिनियम स्विचगियर दिए गए हैं जो इसके प्रीमियम लुक को बढ़ाते हैं। 648cc का पुराना भरोसेमंद इंजन, जो जनरेट करेगा 47hp की पावर इंजन की बात करें तो बुलेट 650 में कंपनी का आजमाया हुआ 648cc का पैरेलल-ट्विन, एयर/ऑयल-कूल्ड इंजन दिया गया है। यह इंजन 47hp की अधिकतम पावर और 52Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इस दमदार इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। सस्पेंशन ड्यूटी के लिए बाइक के फ्रंट में 120mm ट्रैवल के साथ शोवा टेलिस्कोपिक फोर्क और रियर में 90mm ट्रैवल के साथ ट्विन शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं, जो खराब रास्तों पर भी बेहतर राइडिंग एक्सपीरियंस देने का दावा करते हैं। ये कंपनी की सबसे सस्ती लॉन्ग-व्हीलबेस 650cc बाइक ₹3.65 लाख की कीमत के साथ यह बाइक क्लासिक 650 के टॉप-एंड क्रोम वेरिएंट से करीब ₹14,000 सस्ती है। इसी के साथ यह रॉयल एनफील्ड के लॉन्ग-व्हीलबेस 650 प्लेटफॉर्म पर आधारित सबसे किफायती मॉडल बन गई है। आपको बता दें कि इसी प्लेटफॉर्म पर कंपनी की सुपर मीटियर 650, शॉटगन 650 और क्लासिक 650 ट्विन भी बेस्ड हैं।
भास्कर नॉलेज:क्या बिना स्मार्टफोन के भी आपको ट्रैक कर रहे हैं वाई-फाई राउटर?
डिजिटल प्राइवेसी और सर्विलांस (निगरानी) को लेकर दुनिया भर में एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जर्मनी के कार्ल्सरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि अब आपके घर या सार्वजनिक जगहों पर लगे साधारण वाई-फाई राउटर भी आपको ट्रैक कर सकते हैं। जानते हैं क्या है ये तकनीक... वाई-फाई राउटर बिना किसी फोन या डिवाइस के किसी इंसान को कैसे ट्रैक कर सकते हैं? जर्मनी के शोधकर्ताओं ने इसके लिए ‘बीएफआईडी’ नामक खास हैकिंग का तरीका विकसित किया है। यह वाई-फाई के एक सामान्य फीचर ‘बीमफॉर्मिंग फीडबैक इंफॉर्मेशन’ (बीएफआई) का फायदा उठाता है। वाई-फाई 5 और उसके बाद की तकनीक में यह फीचर इसलिए दिया गया था ताकि राउटर सिग्नल की परफॉर्मेंस को बेहतर कर सके। लेकिन ये सिग्नल बिना किसी एन्क्रिप्शन (सुरक्षा लॉक) के लगातार हवा में तैरते रहते हैं। जब कोई इंसान कमरे में चलता है, तो इन तरंगों में रुकावट आती है, जिसे पास का कोई भी वाई-फाई डिवाइस चुपके से कैप्चर कर सकता है। यह तकनीक किसी व्यक्ति की पहचान कितनी सटीकता से कर सकती है? शोधकर्ताओं ने इसके लिए मशीन लर्निंग और एआई मॉडल्स का इस्तेमाल कर इंसानी मूवमेंट की ‘रेडियो इमेजेस’ तैयार कीं। यह ठीक एक कैमरे की तरह काम करता है, लेकिन रोशनी की जगह रेडियो तरंगों के जरिए तस्वीर बनाता है। 197 लोगों पर किए गए टेस्ट में इस सिस्टम ने 99.5% सटीकता के साथ लोगों को उनकी चाल और बॉडी स्ट्रक्चर से पहचान लिया। यानी अब ट्रैकिंग के लिए स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का होना जरूरी नहीं है। यह तकनीक वाई-फाई की रेडियो तरंगों में इंसानी शरीर से होने वाली हलचल को पकड़कर निगरानी कर सकती है। अगर वाई-फाई को हमारा नाम नहीं पता, तो इससे प्राइवेसी को क्या खतरा है? साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, हालांकि वाई-फाई डेटा सीधे आपका नाम नहीं बताता, लेकिन हमलावर इस ट्रैकिंग डेटा को आपके पुराने स्मार्टफोन रिकॉर्ड या लोकेशन हिस्ट्री से जोड़कर आसानी से आपकी पूरी पहचान उजागर कर सकते हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि सार्वजनिक जगहों, मॉल या ऑफिस में आपको पता भी नहीं चलेगा और कोई आपकी हर गतिविधि को साइलेंटली मॉनिटर कर रहा होगा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के लिए यह तकनीक सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। इससे बचने का क्या उपाय है? शोधकर्ताओं ने वैश्विक टेक संस्थाओं और रेगुलेटर्स से अपील की है कि वे भविष्य के वाई-फाई मानकों में मजबूत प्राइवेसी प्रोटेक्शन और एन्क्रिप्शन लागू करें। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाई-फाई सिग्नलों को एन्क्रिप्ट नहीं किया जाता, तब तक सार्वजनिक वाई-फाई के आसपास अत्यधिक सतर्क रहना और सुरक्षा कमजोरियों को पैच करने वाले नए फर्मवेयर अपडेट का उपयोग करना ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है।
सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और वॉट्सएप के लिए नए सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए हैं। इसके तहत एप्स के ‘प्लस’ वर्जन रोल आउट किए जा रहे हैं। इस प्लान को लेने वाले यूजर्स को स्पेशल टूल्स और कस्टमाइजेशन के विकल्प मिलेंगे। इसके लिए पैसे चुकाने होंगे। यह कदम मेटा की विज्ञापन के अलावा कमाई का नया जरिया बनाने की रणनीति का हिस्सा है। नए प्लस प्लान कंपनी के मौजूदा 'मेटा वेरिफाइड' प्लान की जगह नहीं लेंगे। मेटा ने अभी इन नए 'प्लस' सब्सक्रिप्शन प्लान्स को वैश्विक स्तर पर रोलआउट करने की घोषणा की है, लेकिन कंपनी ने भारत में इसकी लॉन्चिंग की तारीख का ऐलान नहीं किया है। चूंकि, भारत मेटा के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यूजर बेस वाला मार्केट है, इसलिए कंपनी आमतौर पर यहां किसी भी बड़े फीचर को फेज्ड मैनर रोलआउट करती है। एप्स के हिसाब से अलग-अलग प्लान और उनकी कीमतें इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस में क्या मिलेगा खास? इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस मुख्य रूप से सोशल एक्सप्रेशन और क्रिएटर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें यूजर्स को यह देखने की सुविधा मिलेगी कि कुल कितने लोगों ने उनकी स्टोरी को दोबारा देखा है। इनके अलावा ये 5 फायदे भी मिलेंगे… वॉट्सएप प्लस में क्या होगा खास? यह पूरी तरह से पर्सनलाइजेशन और मैसेजिंग पर केंद्रित है। इसमें यूजर्स को एप थीम्स, कस्टम रिंगटोन्स, एडिशनल पिंड चैट्स, लिस्ट कस्टमाइजेशन और प्रीमियम स्टिकर्स जैसे फीचर्स मिलेंगे। मेटा एआई यूजर्स के लिए भी दो प्लान टेस्ट किए जा रहे दोनों में फीचर्स समान हैं, लेकिन प्रीमियम प्लान मुश्किल कामों के लिए डीपर रीजनिंग और हाई कंप्यूट क्वेरीज की क्षमता अनलॉक करेगा। इससे मेटा एप्स पर बेहतरीन वीडियो और इमेज-जनरेशन की सुविधा मिलेगी। सामान्य यूजर्स के लिए मेटा एआई मुफ्त रहेगा। क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए महंगे एडवांस प्लान क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए इसी हफ्ते दो प्लान टेस्ट किए जाएंगे: यह प्लान कंपनियों को अपनी वेबसाइट या शॉप पर ट्रैफिक बढ़ाने में मदद करेगा। इसमें डीपर कॉम्पिटिटिव इनसाइट्स जैसे एनालिटिक्स टूल्स, ऑप्टिमाइज्ड शेड्यूलिंग टूल्स, बिना पासवर्ड शेयर किए दूसरे मॉडरेटर्स को एक्सेस देने की सुविधा मिलेगी। साथ ही, अगर कोई दूसरा यूजर उनका कंटेंट दोबारा इस्तेमाल करता है, तो नोटिफिकेशन मिलेगा ताकि वे ओरिजिनल रील का क्रेडिट लेबल मांग सकें। क्यों बदल रहा है सोशल मीडिया का बिजनेस मॉडल? सालों तक फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप पूरी तरह मुफ्त रहे क्योंकि कंपनियां यूजर्स के डेटा और विज्ञापनों) से अरबों कमाती थीं। लेकिन अब पूरी दुनिया में इन एप्स के यूजर्स की संख्या चरम पर पहुंच चुकी है, यानी नए यूजर्स मिलने की रफ्तार धीमी हो गई है। साथ ही प्राइवेसी नियमों के कड़े होने से विज्ञापन से होने वाली कमाई पर असर पड़ा है। यही वजह है कि मेटा, इलॉन मस्क के एक्स की तरह अब सीधे यूजर्स से पैसे लेकर अपनी कमाई का जरिया सुरक्षित कर रही है।
ब्रिटेन के जाने-माने लेखक और पत्रकार इसाक टॉम्पकिंस ने अपने फोन के कैमरे से एक सामान्य सी सेल्फी ली और उसे एक एआई चैटबॉट को सौंप दिया। कहा-‘मुझे थोड़ा और सुंदर बना दो।’ कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर ऐसा चेहरा उभर आया जो था तो उनका ही, लेकिन उसमें जादुई कशिश थी। उसकी नाक बिल्कुल सीधी थी और पलकें थोड़ी उठी हुई थीं। इसाक यह तस्वीर लेकर लंदन के मशहूर कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. एलेक्स कारिडिस के पास पहुंचे, तो डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बदलाव तो मामूली है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने का खर्च करीब 25 लाख रुपए आएगा।’ इसाक का यह प्रयोग उस कड़वी हकीकत को बयां करता है, जिससे दुनियाभर के प्लास्टिक सर्जन जूझ रहे हैं। इस नए चलन को ‘एआई फेस’ नाम दिया गया है। ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स की प्रेसिडेंट नोरा नुजेंट बताती हैं कि उनके क्लीनिक में रोज ऐसे मरीज आते हैं, जो चैटबॉट्स द्वारा बनाई गई अवास्तविक तस्वीर लेकर जिद करते हैं कि उन्हें वैसा ही दिखना है। उनकी मांग होती है... कांच जैसी बेदाग त्वचा, तराशी हुई गालों की हड्डियां और चेहरे में ऐसी समरूपता जो इंसानी शरीर में प्राकृतिक रूप से संभव ही नहीं है। इसाक यहीं नहीं रुके। उन्होंने चैटबॉट से इंटरनेट का सबसे हैंडसम व मर्दाना लुक देने को कहा। एआई ने जो तस्वीर बनाई, उसे देखकर डॉ. कारिडिस भी हैरान रह गए। चैटबॉट ने भारी जबड़े की सर्जरी, गालों की चर्बी हटाने और कई इम्प्लांट्स लगाने की सलाह दी। डॉक्टर ने गंभीर होकर कहा,‘यह बेतुका और डरावना है। इस काल्पनिक चेहरे के लिए 1 करोड़ रुपए खर्च करना होंगे, फिर भी गारंटी नहीं कि तुम ऐसे ही दिखोगे। उल्टा उम्र बढ़ने के साथ असली चेहरा भी बिगड़ जाएगा।’ डॉ. जूलियन कहते हैं,‘बीते दिनों एक वीडियो में डॉक्टर दावा करते दिखे कि सर्जरी से मरीज 30 साल छोटा दिखेगा। पर ध्यान से देखने पर पता चलता है कि मरीज के हाथ में छह अंगुलियां थीं। स्पष्ट था कि इसे एआई द्वारा बनाया गया था। डॉ. जूलियन कहते हैं,‘खूबसूरत दिखना हर किसी की चाहत है, पर इंसानी शरीर पिक्सल नहीं; एआई के भ्रमजाल से स्थायी घाव हो सकते हैं। जिसे कोई सर्जन सुधार नहीं सकता।’ स्क्रीन पर पिक्सल बदलना आसान, सर्जरी में इस स्तर पर काम मुश्किल डॉ. कारिडिस का कहना है कि एआई कंप्यूटर स्क्रीन पर एक-एक पिक्सल को मर्जी से बदल सकता है, पर सर्जरी इस सूक्ष्म स्तर पर काम नहीं करती। वहीं, डॉ. जूलियन डी सिल्वा इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण बताते हैं कि किसी व्यक्ति की एक आंख दूसरी आंख से कुछ मिलीमीटर ऊपर-नीचे है, तो एआई उसे एक सेकंड में ठीक कर देगा। पर हकीकत में आंखें खोपड़ी की हड्डी के खांचे में टिकी होती हैं, जिसके ठीक पीछे दिमाग होता है। सर्जरी से उन हड्डियों को हिलाना जानलेवा हो सकता है।
टाटा मोटर्स आज 28 मई को अपनी एंट्री-लेवल कार टियागो का फेसलिफ्ट लॉन्च करेगी। कार के डिजाइन, केबिन और फीचर्स में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। यह हैचबैक कार पेट्रोल (ICE), सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक (EV) तीनों पावरट्रेन ऑप्शंस के साथ बाजार में आएगी। मौजूदा मॉडल के लॉन्च के बाद से इस कार को मिला यह पहला सबसे बड़ा अपडेट है। एक्सटीरियर: शार्प फ्रंट लुक और कनेक्टेड एलईडी टेललैंप्स टाटा मोटर्स ने टियागो फेसलिफ्ट और इसके इलेक्ट्रिक वेरिएंट के बाहरी डिजाइन को काफी स्पोर्टी बनाया है। इसके हेडलाइट हाउसिंग में 'आईब्रो' जैसा नया एलईडी डीआरएल है, जो कार को शार्प लुक देता है। कार के पिछले हिस्से में वर्टिकल लाइनों वाला नया एलईडी टेललैंप्स डिजाइन मिलता है, जो बीच में कंपनी के टाटा लोगो से जुड़ा है। इसके अलावा रियर वाइपर, टेलगेट पर 'टियागो' की ब्रांडिंग और वर्टिकल रिफ्लेक्टर्स के साथ नया बंपर दिया गया है। इंटीरियर: केबिन में फ्लोटिंग स्क्रीन और नया रिफ्रेश्ड लेआउट टाटा ने 2026 टियागो फेसलिफ्ट के इंटीरियर को रीवॅम्प किया है। कार में पुराना ब्लैक और लाइट-ग्रे कलर कॉम्बिनेशन बरकरार रखते हुए डैशबोर्ड को अब पहले से ज्यादा वर्टिकल लेआउट दिया गया है। कार में अपडेटेड 2-स्पोक स्टीयरिंग व्हील मिलता है। इसके अलावा डैशबोर्ड के सेंटर में मिलने वाले 'TIAGO' बैज को अब नीचे क्लाइमेट कंट्रोल पैनल पर शिफ्ट कर दिया गया है। यह पैनल एक ब्लैक बोर्ड पर सेट है, जिसमें पुराने परिचित रोटरी नॉब्स और टॉगल स्विच मिलते हैं। इन-कैबिन टेक और फीचर्स: फ्री-स्टैंडिंग डिस्प्ले इस नए मॉडल में इंफोटेनमेंट सिस्टम के लिए एक फ्लोटिंग स्क्रीन दी गई है। इसके साथ ही ड्राइवर के इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर के लिए भी अलग से एक फ्लोटिंग स्क्रीन है। इस पहले बड़े अपडेट की वजह से कार की ओवरऑल फीचर लिस्ट पहले से काफी लंबी और मॉडर्न होने की उम्मीद है। पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक तीनों का ऑप्शन यह कार ट्रेडिशनल पेट्रोल कंबशन इंजन (ICE), पर्यावरण के अनुकूल सीएनजी (CNG) और पूरी तरह इलेक्ट्रिक (EV) तीनों ऑप्शंस में उपलब्ध होगी। टियागो ईवी का ओवरऑल स्टाइल पेट्रोल मॉडल जैसा ही है, लेकिन इलेक्ट्रिक वेरिएंट में ब्लैक पैनल की जगह बॉडी-कलर पैनल है। इसके अलावा इसके निचले हिस्से में वर्टिकल स्लैट्स हैं, जो इसे पेट्रोल इंजन वाले वर्जन से अलग पहचान देते हैं। इन कारों से सीधा मुकाबला यह अपडेट टाटा की स्थिति को इस सेगमेंट में और मजबूत करेगा। यहां इसका सीधा मुकाबला मारुति सुजुकी स्विफ्ट और हुंडई ग्रैंड आई10 नियोस जैसी कारों से होना है। नॉलेज पार्ट: 'फेसलिफ्ट' का मतलब: जब कोई ऑटो कंपनी अपनी किसी मौजूदा कार के इंजन या प्लेटफॉर्म को बदले बिना, केवल उसके बाहरी लुक (बंपर, ग्रिल, लाइट्स) और इंटीरियर को कॉस्मेटिक अपडेट देकर दोबारा उतारती है, तो उसे 'फेसलिफ्ट' मॉडल कहा जाता है। कंपनियां ऐसा कार को फ्रेश बनाए रखने और कॉम्पिटिशन में टिके रहने के लिए हर 3-4 साल में करती हैं।
हुंडई मोटर इंडिया की कारें 1 जून 2026 से महंगी होने जा रही हैं। कंपनी ने अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर तय की जाएंगी। इससे पहले कंपनी ने 8 अप्रैल 2026 को कीमतों को बढ़ाने के संबंध में एक लेटर जारी किया था, लेकिन अब मौजूदा मार्केट की स्थिति को देखते हुए इसे 1 जून से लागू करने का फैसला लिया गया है। कंपनी ने यह कदम बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और ग्राहकों के हितों के बीच एक संतुलित तालमेल बनाने के उद्देश्य से उठाया है। कारें महंगी होने की 3 बड़ी वजहें हुंडई ने अपनी कारों की कीमतों को बढ़ाने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण बताए हैं। कंपनी के मुताबिक, बिजनेस ऑपरेशन में आ रहे बदलावों की वजह से यह फैसला जरूरी हो गया था… कंपनी का फ्यूचर प्लान क्या है? कंपनी ने कहा कि वह लगातार अपनी लागत को कंट्रोल और बेहतर करने का प्रयास करती है। हुंडई का उद्देश्य हमेशा यही रहता है कि बढ़ती लागत का असर उसके ग्राहकों पर कम से कम पड़े। इसके बावजूद, मौजूदा परिस्थितियों में कंपनी के पास बढ़ती हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार में ट्रांसफर करने के अलावा कोई दूसरा ऑप्शन नहीं बचा था। क्या होती है इनपुट कॉस्ट और ऑपरेशनल खर्च? ये खबर भी पढ़ें… मारुति की कारें ₹30,000 तक महंगी होंगी: नई कीमतें जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई ये नई कीमतें जून 2026 से प्रभावी होंगी। लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत के कारण कंपनी ने यह फैसला किया है। पूरी खबर पढ़ें…
टेक कंपनी ओप्पो ने एनको एयर 5 प्रो' लॉन्च कर दिए हैं। इस नए डिवाइस में 55dB का ANC यानी, एक्टिव नॉइस कंट्रोल है। ये बाहर के भारी शोर को गायब कर देता है। बिना ANC के यह डिवाइस 54 घंटे तक नॉन-स्टॉप प्लेबैक टाइम देता है। इसकी कीमत ₹5000 के आसपास है। अनबॉक्सिंग: बॉक्स से टाइप-सी चार्जिंग केबल नहीं इस डिवाइस की बॉक्स पैकेजिंग काफी सिंपल है। बॉक्स को ओपन करते ही सबसे ऊपर एक्चुअल हेडफोन्स मिलते हैं। इसके ठीक नीचे एडिशनल ईयर टिप्स और एक यूजर मैनुअल है। हालांकि, कंपनी ने यहां पर थोड़ी कॉस्ट कटिंग की है। इसमें टाइप-सी चार्जिंग केबल नहीं है। डिजाइन और फिटिंग: मैट ब्लैक कलर वेरिएंट में प्रीमियम लुक बिल्ड क्वालिटी के मामले में इसका मैट ब्लैक कलर वेरिएंट काफी प्रीमियम फील देता है। इसके केस पर आगे की तरफ OPPO की बैजिंग और ठीक नीचे एक एलईडी लाइट इंडिकेटर दिया गया है। बॉटम सरफेस पर टाइप-सी पोर्ट के साथ में ही एक रिसेट बटन मिलता है। ये ईयरबड्स वैक्यूम टाइप डिजाइन के साथ आते हैं, जिससे कानों में इनकी फिटिंग बढ़िया बैठती है। इसमें IP55 की रेटिंग दी गई है, यानी वर्कआउट के दौरान पसीना आने या पानी के कुछ छीटें पड़ने पर भी यह खराब नहीं होगा। इसे आउटडोर जॉगिंग या वॉकिंग में आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। स्पेसिफिकेशन्स: 12mm के टाइटेनियम कोटेड ड्राइवर्स इसमें 12mm के टाइटेनियम कोटेड ड्राइवर्स दिए गए हैं। यह ब्लूटूथ वर्जन 6.0 पर बेस्ड है। इसमें LHDC 5.0, AAC और SBC कोडेक्स के साथ गूगल फास्ट पेयर का सपोर्ट मिलता है। इसका साउंड आउटपुट बेस लवर्स के लिए बेहतरीन है। इसके मिड्स और ट्रेबल भी काफी बैलेंस्ड हैं। कनेक्टिविटी: 6 माइक्स से क्लियर कॉलिंग और बिना लैग का गेम मोड डिवाइस में डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी का फीचर है। इससे इसे एक ही समय पर लैपटॉप और स्मार्टफोन दोनों से कनेक्ट रखा जा सकता है। कॉलिंग के लिए इसके दोनों बड्स को मिलाकर कुल 6 माइक्स मिलते हैं। गेमर्स के लिए इसमें एक डेडिकेटेड गेम मोड दिया गया है, जिसमें फुटस्टेप्स और फायरिंग की आवाज़ बिना किसी लैग के काफी एक्यूरेट सुनाई देती है। एडवांस टच कंट्रोल्स: स्टेम से वॉल्यूम कंट्रोल और लाइव ट्रांसलेटर इन ईयरबड्स की स्टेम पर ही टच कंट्रोल्स दिए गए हैं। सिंगल टैप से म्यूजिक प्ले/पॉज और डबल टैप से नेक्स्ट ट्रैक पर स्विच कर सकते हैं। इसके अलावा, स्टेम पर ऊपर या नीचे स्लाइड करके सीधे वॉल्यूम को भी एडजस्ट किया जा सकता है। इसमें एक 'AI ट्रांसलेटर' भी दिया गया है। बैटरी लाइफ और एप फीचर्स: 54 घंटे का बैकअप और वियर डिटेक्शन ईयरबड में 62mAh और चार्जिंग केस में 530mAh की बैटरी है। ANC ऑन रखने पर 29 घंटे और ANC ऑफ रखने पर यह पूरे 54 घंटे तक का बैटरी बैकअप देता है । इसे 'HeyMelody' एप्लीकेशन से मैनेज किया जाता है, जहां केस और बड्स की बैटरी परसेंटेज दिखती है। एप के जरिए ANC/ट्रांसपेरेंसी मोड, डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी, 3D सराउंड साउंड के लिए 'OPPO Alive Audio', इक्वलाइज़र (EQ) प्रीसेट्स, हाई-रेज मोड, लो-लेटेंसी गेमिंग मोड, स्पॉटिफाई टैप और 'Find My Earbuds' जैसे फीचर्स को कस्टमाइज किया जा सकता है। इसमें वियर डिटेक्शन फीचर भी है, जिससे कान से ईयरबड निकालते ही गाना या वीडियो अपने आप पॉज हो जाता है और दोबारा लगाने पर प्ले हो जाता है। फाइनल वर्डिक्ट: क्या आपको इसे खरीदना चाहिए? अगर आपका बजट ₹5000 के आसपास है और आप एक ऐसे ईयरबड्स की तलाश में हैं जिसमें दमदार साउंड, हैवी बेस और कमाल का एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन मिले, तो ये 'वैल्यू फॉर मनी' डील है। ध्यान रखने वाली बात: कंपनी ने कॉस्ट कटिंग के चक्कर में बॉक्स से टाइप-सी चार्जिंग केबल हटा दी है, इसलिए आपके पास पहले से एक टाइप-सी केबल होनी चाहिए। साथ ही, बहुत ज्यादा प्रोफेशनल गेमिंग करने वालों को अब भी वायर्ड हेडफोन्स की तरफ ही देखना चाहिए। इन छोटी बातों को छोड़ दें तो फीचर्स के मामले में इस बजट में इसका कोई मुकाबला नहीं है।
लग्जरी स्पोर्ट्स कार बनाने इटली की कंपनी फरारी ने आज 26 मई को अपनी पहली इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार लॉन्च की है। यह एक 4-डोर, 5-सीटर इलेक्ट्रिक GT कार है, जिसे रफ्तार के साथ लग्जरी भी चाहने वाले लोगों के लिए बनाया गया है। खास बात ये है कि लूस फरारी की पहली EV के अलावा पहली 5 सीटर कार भी है। इसे एपल के पूर्व डिजाइन चीफ जॉनी इव की कंपनी 'LoveFrom' ने डिजाइन किया है। कंपनी का दावा है कि कार फुल चार्ज पर 530km चलेगी और इसकी टॉप स्पीड 310kmph है। फरारी लूस की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 5.50 लाख यूरो (6.10 करोड़ रुपए) है। कार की बुकिंग दुनियाभर में शुरू कर दी गई है। भारतीय बाजार में इसकी लॉन्चिंग को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उम्मीद है कि इसे आने वाले समय में इम्पोर्ट रूट के जरिए भारत लाया जा सकता है। एक्सटीरियर: फरारी का अब तक का सबसे अलग डिजाइन लूस का डिजाइन फरारी की अन्य कारों जैसा नहीं है। इसे 'क्लीन शीट' यानी बिल्कुल नए सिरे से डिजाइन किया गया है। इंटीरियर: एपल की झलक और रेट्रो थीम का कॉम्बिनेशन कार के अंदर जोनी इव की 'एपल एस्थेटिक्स' साफ नजर आती है। इसमें एनोडाइज्ड एल्यूमीनियम और कोर्निंग ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। परफॉर्मेंस: 1050hp की पावर और क्वाड मोटर सेटअप लूस एक परफॉर्मेंस बीस्ट है। इसमें चार इलेक्ट्रिक मोटर्स (हर पहिये पर एक) दी गई हैं। बैटरी और रेंज: सिंगल चार्ज पर 530km चलेगी फरारी ने इस कार की बैटरी को मारानेलो में ही डिजाइन और तैयार किया है। सेफ्टी फीचर्स: एडवांस्ड सस्पेंशन और टॉर्क वेक्टरिंग लूस को केवल तेज ही नहीं, बल्कि आरामदायक और सुरक्षित भी बनाया गया है।
बीते दो वर्षों से टेक इंडस्ट्री में नारा गूंज रहा है...‘एआई जल्द ही सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जगह ले लेगा और कंपनियों का खर्च आधा हो जाएगा।’ इस वादे ने शेयर बाजार को आसमान पर पहुंचा दिया, कंपनियों ने बड़े पैमाने पर छंटनी की और करोड़ों रुपए एआई इन्फ्रा खर्च कर दिए। पर, जब इन टूल्स को काम पर लगाया गया, तो जो इनवॉइस सामने आई उसने दिग्गज कंपनियों को हिला दिया। सबसे बड़ा झटका माइक्रोसॉफ्ट को लगा। कंपनी ने एंथ्रोपिक में 48 हजार करोड़ रु. निवेश किए और अपने 1 लाख इंजीनियरों को ‘क्लॉड कोड’ का एक्सेस दे दिया। उम्मीद थी कि उत्पादकता बढ़ेगी, पर हर शब्द पर भुगतान की मजबूरी ने लागत को बेकाबू कर दिया। इस वजह से जून तक सभी लाइसेंस रद्द कर दिए गए व इंजीनियरों को माइक्रोसॉफ्ट के इन-हाउस टूल पर शिफ्ट करना पड़ा। उबर ने दिसंबर 2025 में अपने 5,000 इंजीनियरों को क्लॉड कोड दिया। 84% डेवलपर्स इसका इस्तेमाल करने लगे और 70% कोड एआई से आने लगा। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियर हर महीने 47 हजार से 1.9 लाख रुपए का व्यक्तिगत बिल बनाने लगे। एक सीटीओ ने तो दो घंटे के डेमो में 1.1 लाख रु. खर्च कर दिए। अप्रैल तक ही उबर ने 2026 का पूरा एआई बजट खत्म कर दिया। एनवीडिया ने भी माना कि उनकी टीम के लिए कंप्यूटिंग की लागत कर्मचारियों की सैलरी से ज्यादा हो गई है। दरअसल, साधारण एआई लगभग मुफ्त हो चुका है, पर गंभीर कोडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले टॉप-टियर एआई के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ओपनएआई ने नया मॉडल दोगुने दाम पर उतारा, जबकि एंथ्रोपिक ने टेक्स्ट गिनने का तरीका बदल दिया, जिससे बिल बढ़ने लगा। बेजोस बोले- यह संकट नहीं ‘एआई बबल’ के डर को खारिज करते हुए अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस ने कहा कि यह संकट नहीं, बल्कि ‘सदी में एक बार मिलने वाला सबसे बड़ा अवसर’ है। वहीं, सॉफ्टबैंक के प्रमुख मासायोशी सन 9.5 लाख करोड़ रु. का नया एआई फंड ‘प्रोजेक्ट इजा नागी’ लॉन्च कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस कुछ वर्षों में इंसानी दिमाग से 10 गुना ज्यादा स्मार्ट हो जाएगा। एआई में बिग टेक का महा निवेश...एंथ्रोपिक की बादशाहत माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा व अमेजन इस साल एआई इन्फ्रा पर रिकॉर्ड 69 लाख करोड़ रु. खर्च कर रहे हैं। गार्टनर के अनुसार, वैश्विक एआई खर्च 240 लाख करोड़ रु. हो जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट का एआई बिजनेस 3.53 लाख करोड़ के रन रेट (अनुमानित लाभ) पर है, जबकि गूगल का क्लाउड बैकलॉग 43.93 लाख करोड़ रु. पार कर चुका है। एंथ्रोपिक ने इस साल 2.86 लाख करोड़ के दो फंडिंग राउंड पूरे किए, जिससे वैल्यूएशन 86 लाख करोड़ हो गई है। वहीं रिलायंस ग्रुप 7 वर्षों में भारत के एआई इन्फ्रा पर ₹10 लाख करोड़ निवेश करेगा। एक कॉल और एआई कानून ध्वस्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ऐसे सरकारी आदेश पर साइन करने वाले थे, जिसके तहत सरकार को शक्तिशाली एआई मॉडल के लॉन्च से पहले 90 दिनों तक उसकी सुरक्षा जांच का हक मिलता। इसके लिए टेक दिग्गज (ऑल्टमैन, पिचाई, नडेला) वॉशिंगटन पहुंच चुके थे। लेकिन ऐन वक्त पर, ट्रम्प के पूर्व सलाहकार और 449 एआई कंपनियों में भागीदार डेविड साक्स ने राष्ट्रपति को फोन किया और तर्क दिया कि नियमों से एआई डेवलपमेंट धीमा होगा व चीन बाजी मार ले जाएगा। मस्क-जुकरबर्ग ने भी यही दबाव बनाया। नतीजतन ट्रम्प ने आदेश रद्द कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि कानून स्वैच्छिक था, फिर भी टेक दिग्गजों ने महज 12 घंटे में महीनों की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पलटवा दी।
भास्कर नॉलेज:क्या ईयरबड्स से भी डेटा चोरी और निजता में सेंधमारी हो सकती है?
आज के स्मार्ट हेडफोन और ईयरबड्स सिर्फ म्यूजिक सुनने के उपकरण नहीं रहे। इनमें हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर, माइक्रोफोन, लोकेशन, एआई ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन जैसे फीचर जुड़ चुके हैं। 10 साल में 2,000 से ज्यादा हेडफोन और ईयरबड्स टेस्ट कर चुकीं लॉरेन ने बताया कि इनसे सेंधमारी कैसे होती है और बचने के उपाय क्या हैं? हेडफोन अब कौन-कौन सा डेटा जुटाते हैं? टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए ईयरबड्स में ब्लूटूथ चिप, माइक्रोफोन, सेंसर और एप कनेक्टिविटी होती है। ये डिवाइस हार्ट रेट, चलने-फिरने का पैटर्न, आवाज, लोकेशन और सुनने की क्षमता रिकॉर्ड कर सकते हैं। यह डेटा फोन के जरिए कंपनी के एप तक पहुंचता है। क्या हेल्थ डेटा अपने आप सुरक्षित होता है? डिजिटल प्राइवेसी विशेषज्ञ बताते हैं कि हेल्थ डेटा हमेशा कानून से सुरक्षित नहीं होता। अमेरिका का कानून डॉक्टर और मरीज के बीच की जानकारी पर लागू होता है। लेकिन अगर वही डेटा किसी हेडफोन या फिटनेस एप से इकट्ठा हुआ है, तो वह मार्केटिंग या एनालिटिक्स में इस्तेमाल हो सकता है। क्या कंपनियां यह डेटा बेच सकती हैं? अधिकांश कंपनियां प्राइवेसी पॉलिसी में डेटा शेयरिंग की बात लिखती हैं। यूजर को ऑप्ट-आउट का विकल्प मिल सकता है, लेकिन अक्सर शर्तें जटिल भाषा में होती हैं। टेक एनालिस्ट्स के अनुसार, कुछ डेटा एआई ट्रेनिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ब्लूटूथ और एप से खतरा कितना है? टेक कंपनियों के ब्लूटूथ की खामियां सामने आ चुकी हैं। हालांकि बड़ा खतरा एप से होता है। अगर एप अपडेट न हो या जरूरत से ज्यादा परमिशन हो, तो डेटा आसानी से चोरी हो सकता है। यूजर अपनी प्राइवेसी कैसे बचाए? गैर-जरूरी परमिशन बंद रखें। डेटा शेयरिंग से ऑप्ट-आउट करें। एप और फर्मवेयर अपडेट रखें। संवेदनशील बातचीत में ईयरबड्स दूर रखें। ध्यान रहे कि स्मार्ट हेडफोन सुविधा देते हैं, लेकिन डेटा भी लेते हैं। इसलिए इनके उपयोग में सतर्कता जरूरी है। भारत के यूजर के लिए जोखिम क्या है? भारत में ईयरबड्स और फिटनेस एप तेजी से आम हो रहे हैं। लोग इन्हें फोन से जोड़कर लोकेशन, माइक्रोफोन, हेल्थ और फिटनेस परमिशन दे देते हैं। ईयरबड्स शरीर और व्यवहार से जुड़ा डेटा पढ़ सकते हैं। यदि एप को माइक्रोफोन, लोकेशन और हेल्थ डेटा की अनुमति है, तो वह चलने-फिरने, बातचीत, फिटनेस और आदतों से जुड़ी जानकारी जुटा सकता है। इसलिए हेडफोन खरीदते समय प्राइवेसी पॉलिसी भी देखनी चाहिए।

