सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम डाउन हो गया है। इसके अलावा फेसबुक और मैसेंजर पर भी यूजर्स को दिक्कत हो रही है। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, 4000 से ज्यादा लोगों ने इंस्टाग्राम में आ रही समस्याओं की शिकायत की है। वहीं, फेसबुक पर 3000 से अधिक यूजर्स ने शिकायत की। वहीं, मैसेंजर पर भी 100 से ज्यादा लोगों ने सर्विस में रुकावट की रिपोर्ट की है। यह आउटेज पूरी तरह से ग्लोबल है। हालांकि, भारतीय यूजर्स ने डाउन की कोई शिकायत नहीं की है। हालांकि, इस आउटेज की असली वजह क्या है, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। मेटा या इसकी व्यक्तिगत सर्विसेज की तरफ से यूजर्स को आ रही दिक्कतों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं आया है। X पर एक यूजर्स ने कहा- प्रोफाइल और स्टोरीज लोड नहीं हो रही कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी शिकायतें की हैं। एक इंस्टाग्राम यूजर ने बताया कि उनका फीड तो काम कर रहा है, लेकिन प्रोफाइल नहीं देख पा रहे हैं। दूसरे यूजर ने कहा कि होम पेज लोड नहीं हो रहा है और वे स्टोरीज पोस्ट नहीं कर पा रहे हैं। X पर एक यूजर ने लिखा, इंस्टाग्राम डाउन है। मुझे फीड पर सिर्फ वेलकम पेज दिख रहा है, कोई नया कंटेंट नहीं आ रहा। क्या चल रहा है? कुछ यूजर्स ने ब्लैंक फीड के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। फेसबुक पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल का एरर मैसेज दिख रहा फेसबुक यूजर्स को लॉग-इन और फीड में एरर का सामना करना पड़ रहा है। एक यूजर ने रात 2 बजे लिखा, फीड पर सिर्फ दो पोस्ट दिखे और फिर एरर आ गया, यह दोबारा लोड नहीं हो रहा है। UK से लेकर अमेरिका के टेनेसी तक के लोगों ने मेटा की इस सर्विस में आ रही दिक्कतों की शिकायत की है। कई यूजर्स को स्क्रीन पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल (यानी साइट में दिक्कत के कारण आपका अकाउंट अभी उपलब्ध नहीं है) का मैसेज मिल रहा है। एक यूजर ने पूछा कि वे मोबाइल पर तो फेसबुक एक्सेस कर पा रहे हैं, लेकिन लैपटॉप पर नहीं, क्या किसी और के साथ भी ऐसा हो रहा है?
अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया के CEO जेन्सन हुआंग की पहचान बन चुकी उनकी खास ब्लैक लेदर जैकेट करीब 9.4 करोड़ रुपए (9.60 लाख डॉलर) में नीलाम हुई है। ऑक्शन हाउस सोथबी द्वारा आयोजित इस नीलामी में जैकेट की कीमत उम्मीद से 16 गुना ज्यादा मिली है। पहले इसके 40 हजार से 60 हजार डॉलर (करीब 33 लाख से 50 लाख रुपए) में बिकने का अनुमान लगाया गया था। इस नीलामी से मिलने वाली पूरी रकम को टेक और साइंस सेक्टर के युवा इनोवेटर्स की मदद के लिए दान किया जाएगा। फेलोशिप और रिसर्च पर खर्च होगा नीलामी में मिला पैसा फॉर्च्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीलामी से मिली राशि सैन फ्रांसिस्को की वेंचर कैपिटल फर्म 'लॉन्ग जर्नी वेंचर्स' द्वारा शुरू की गई एक पहल में जाएगी। यह पहल ‘एज इंस्टीट्यूट’ नाम के एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन की मदद के लिए काम करती है। एज इंस्टीट्यूट टेक, साइंस, कल्चर और सोसाइटी से जुड़े लोगों को एक साथ लाता है ताकि वे नए आइडियाज पर काम कर सकें। स्टीव जॉब्स और जुकरबर्ग जैसा स्टाइल स्टेटमेंट सिलिकॉन वैली में जिस तरह एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स का ब्लैक टर्टलनेक और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की ग्रे टी-शर्ट या हुडी उनका सिग्नेचर स्टाइल रही है, उसी तरह जेन्सन हुआंग की ब्लैक लेदर जैकेट टेक जगत में एक बड़ा सिंबल बन चुकी है। जेन्सन एनवीडिया के बड़े प्रोडक्ट लॉन्चेस, डेवलपर कॉन्फ्रेन्स और कीनोट प्रेजेंटेशन्स में हमेशा इसी लुक में नजर आते हैं। साल 2016 में रेडिट के एक ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन में जेन्सन ने मजाकिया अंदाज में लिखा था, शायद आप मुझे 'लेदर जैकेट वाले उस शख्स' के रूप में बेहतर जानते होंगे जो अपनी बात को तीन बार दोहराता है। उनका यह लुक इतना पॉपुलर हुआ कि 2021 में जब 'टाइम' मैगजीन ने उन्हें अपने कवर पेज पर जगह दी, तब भी वे इसी सिग्नेचर जैकेट में दिखे थे। ताइपे के इवेंट में पहनी थी यही टॉम फोर्ड जैकेट सोथबी में जिस जैकेट की नीलामी हुई है, वह लग्जरी ब्रांड टॉम फोर्ड की ब्लैक लेदर जैकेट है। हुआंग ने इसे 18 अक्टूबर 2023 को ताइपे में आयोजित ‘हॉन हाई टेक डे’ के दौरान पहना था। ऑक्शन हाउस ने इवेंट की तस्वीरों से इस जैकेट का मिलान किया है। साथ ही जैकेट पर जेन्सन हुआंग के ऑटोग्राफ की जांच 'जेम्स स्पेंस ऑथेंटिकेशन' द्वारा की गई है। टॉम फोर्ड जैकेट के दीवाने हैं हुआंग जेन्सन हुआंग को टॉम फोर्ड की जैकेट्स काफी पसंद हैं और यह सिलिकॉन वैली में चर्चा का विषय रहता है। फैशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जेन्सन की ज्यादातर जैकेट्स की कीमत कई हजार डॉलर से लेकर 10,000 डॉलर (करीब 8.3 लाख रुपए) से अधिक होती है। जेन्सेन हुआंग की नेटवर्थ 15.39 लाख करोड़ फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, कंपनी के CEO जेन्सेन हुआंग 175 बिलियन डॉलर यानी 16.84 लाख करोड़ रुपए की नेटवर्थ के साथ दुनिया के 7वें सबसे अमीर आदमी हैं।
टेक्नो ने भारत में अपना लेटेस्ट कैमरा-फोकस्ड स्मार्टफोन टेक्नो कैमॉन 50 अल्ट्रा लॉन्च किया है। फोन में सबसे खास 50 मेगापिक्सल का 3X टेलीफोटो लेंस है। इसके अलावा इसमें 6.78-इंच डिस्प्ले, 6500mAh बैटरी और वाटरप्रूफ IP69K रेटिंग मिलती है। फोन को 8GB रैम + 256GB स्टोरेज के सिंगल वैरिएंट के साथ पेश किया गया है और इसकी कीमत ₹39,999 रखी गई है। लॉन्च ऑफर में फोन पर 3 हजार रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। इसकी सेल 21 जुलाई से शुरू होगी। प्रीमियम डिजाइन, वजन और वाटर-डस्ट रेटिंग
गूगल हेल्थ, सैमसंग हेल्थ और एपल हेल्थ जैसे एप्स में दवा का रिमाइंडर, मेडिकल रिकॉर्ड, इमरजेंसी आईडी और नींद जैसी जानकारियां एक ही जगह रख सकते हैं। ऐसे में जानिए इनके फायदे और कैसे करें इनका इस्तेमाल। ये सबसे जरूरी, इमरजेंसी मेडिकल आईडी बनाएं यह सबसे उपयोगी लेकिन सबसे कम इस्तेमाल होने वाले फीचर्स में से एक है। इसमें दर्ज कर सकते हैं - ब्लड ग्रुप, एलर्जी, पुरानी बीमारी, नियमित दवाएं, इमरजेंसी कॉन्टैक्ट, अगर किसी दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी में फोन लॉक हो, तब भी कई फोन में यह जानकारी लॉक स्क्रीन से देखी जा सकती है। इससे अगर किसी इमरजेंसी कंडीशन में अस्पताल पहुंचते हैं तो डॉक्टर या राहतकर्मियों को इलाज शुरू करने में मदद मिलती है। दवा का रिमाइंडर सेट करें, इससे डोज मिस नहीं होगी अगर आप रोजाना कोई दवा लेते हैं या घर में किसी बुजुर्ग को नियमित दवा लेनी होती है, तो फोन के हेल्थ एप में उसका नाम, डोज और समय दर्ज कर सकते हैं। फायदा - तय समय पर नोटिफिकेशन मिलेगा। - कौन-सी दवा कब ली, उसका रिकॉर्ड रहेगा। - अगर कोई डोज छूट गई हो, तो हिस्ट्री में दिख जाएगी। - यह फीचर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और थायरॉयड जैसी बीमारियों के मरीजों के लिए उपयोगी है। मेडिकल रिपोर्ट और हेल्थ रिकॉर्ड एक ही जगह रखें अक्सर ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, प्रिस्क्रिप्शन और डिस्चार्ज समरी अलग-अलग वॉट्सएप चैट, ईमेल या फोल्डर में बिखरी रहती हैं। हेल्थ एप में इन्हें व्यवस्थित रखा जा सकता है। यह सैमसंग-एपल जैसे डिवाइस में है। फायदा - इसमें सभी हेल्थ रिकॉर्ड्स सेव कर सकते हैं - ब्लड टेस्ट रिपोर्ट डाल सकते हैं - एक्स-रे और स्कैन रिकॉर्ड - डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन -वैक्सीनेशन रिकॉर्ड - एलर्जी और पुरानी बीमारी की जानकारी। एंड्रॉइड और आईफोन में इस तरह से इस्तेमाल करें गूगल हेल्थ या सैमसंग हेल्थ एप खोलें। प्रोफाइल बनाकर स्टेप ट्रैकिंग ऑन करें। इसके बाद दवा का शेड्यूल, मेडिकल रिकॉर्ड और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट जोड़ें। इसी तरह आईफोन में हेल्थ एप खोलें और ऊपर प्रोफाइल आइकन पर टैप करें। यहां मेडिकल आईडी सेट करें और हेल्थ से जुड़ी जरूरी जानकारी भरें। नींद, मूड और रोजमर्रा की आदतों पर रख सकते हैं नजर इन एप्स में सिर्फ शारीरिक गतिविधि ही नहीं, बल्कि आपकी दिनचर्या भी रिकॉर्ड की जा सकती है। ये एक्टिविटी रिकॉर्ड कर सकते हैं- कितनी देर सोए, दिनभर कैसा महसूस किया, पानी कितना पिया, वजन में बदलाव, मानसिक स्थिति, कुछ हफ्तों का डेटा जमा होने पर ऐप पैटर्न दिखाता है, जिससे समझ आता है कि किन दिनों आपकी दिनचर्या या नींद प्रभावित हुई। किस फोन में कौन-सा एप मिलेगा? फोन हेल्थ एप Android Google Health Samsung Samsung Health iPhone Apple Health - तीनों एप फ्री हैं और इनके अधिकांश जरूरी फीचर बिना अतिरिक्त शुल्क के इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस आज शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च करेगी। यह लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 11:30 बजे होगी। कंपनी ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km की पृथ्वी की निचली कक्षा तक जाएगा। सोने के कलाम, साराभाई और सीवी रमन भी जाएंगे इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है। इसके तहत विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ टेक्नोलॉजी से लेकर कला से जुड़े पेलोड्स अंतरिक्ष में ले जा रहा है: कॉमर्शियल और टेक्नोलॉजी पेलोड्स: 18 कैरेट सोने से बना आर्ट पीस भी स्पेस में जाएगा कॉस्मोस डायमंड्स की कलाकृति कॉस्मिक ब्लूम और एक खास माइक्रो-आर्ट पीस भी रॉकेट में भेजा जा रहा है। यह माइक्रो-आर्ट पीस 18 कैरेट सोने से बना छोटा सा रॉकेट है। इस पर वैज्ञानिक सर सी वी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं। हल्के कार्बन-कंपोजिट से बना है पूरा रॉकेट विक्रम-1 पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना पहला ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में पांच गुना हल्का होता है। इससे रॉकेट का वजन कम हो जाता है, जिससे इसकी ईंधन दक्षता बढ़ जाती है। रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल दिया गया है। 1. तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज: इसे आप रॉकेट के नीचे लगे तीन बेहद ताकतवर 'बूस्टर्स' की तरह समझ सकते हैं, जिनमें ठोस ईंधन जैसे बारूद की तरह का ठोस केमिकल भरा होता है. रॉकेट को जमीन से उठाकर आसमान की तरफ धकेलने के लिए शुरुआत में बहुत भारी ताकत की जरूरत होती है। ये तीनों सॉलिड स्टेज एक-एक करके जलते हैं और रॉकेट को शुरुआती धक्का देकर अंतरिक्ष की सीमा लो अर्थ ऑर्बिट के पास पहुंचा देते हैं। 2. लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल यह रॉकेट के ऊपरी हिस्से में लगा एक बेहद बारीक और स्मार्ट तरल ईंधन वाला छोटा इंजन होता है। जब रॉकेट अंतरिक्ष में पहुंच जाता है, तो वहां ठोस ईंधन काम नहीं आता क्योंकि उसे अपनी मर्जी से ऑन या ऑफ नहीं किया जा सकता। यहां 'लिक्विड मॉड्यूल' काम आता है। यह अंतरिक्ष में सैटेलाइट को सही दिशा देने, रॉकेट की रफ्तार कम-ज्यादा करने और सैटेलाइट को उसकी तय की गई कक्षा में 'एडजस्ट' यानी स्थापित करने का काम करता है। अब 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: 'स्काईरूट एयरोस्पेस' की शुरुआत कब और किस उद्देश्य से हुई थी? जवाब: स्काईरूट की शुरुआत करीब 8 साल पहले 2018 में हुई थी। इसे शुरू करने का मुख्य उद्देश्य भारत में ही बेहद किफायती और भरोसेमंद रॉकेट्स का निर्माण करना है, ताकि दुनिया भर के सैटेलाइट ऑपरेटर्स को ऑन-डिमांड और बजट-फ्रेंडली लॉन्चिंग सॉल्यूशंस दिए जा सकें। सवाल 2: इस रॉकेट का नाम 'विक्रम-1' क्यों रखा गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में 'विक्रम-1' रखा गया है। डॉ. साराभाई ने ही देश के स्पेस सेक्टर की मजबूत नींव रखी थी। स्काईरूट अपने सभी रॉकेट्स के नाम उनके सम्मान में इसी सीरीज पर रखती है। साल 2022 में लॉन्च किया गया पहला सबऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-एस' भी इसी सम्मान श्रृंखला का हिस्सा था। सवाल 3: इस लॉन्चिंग से भारत के स्पेस सेक्टर को क्या फायदे होंगे? जवाब: यह लॉन्चिंग भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए गेम चेंजर हो सकती है: सवाल 4: स्काईरूट के फाउंडर्स कौन हैं और उनका क्या कहना है? जवाब: स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना पवन कुमार चंदना (फाउंडर और सीईओ) और नागा भरत डाका (को-फाउंडर और सीओओ) ने मिलकर की है। सीईओ पवन कुमार चंदना ने कहा कि यह हमारी पहली टेस्ट फ्लाइट है और इससे हमें अंतरिक्ष की कक्षा में रॉकेट के व्यवहार का बेहद कीमती डेटा मिलेगा। सीओओ नागा भरत डाका ने कहा कि हमारा और हमारी पूरी टीम का आठ वर्षों का कठोर प्रयास आज इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में साकार हो रहा है। सवाल 5: साल 2022 में लॉन्च हुए 'विक्रम-एस' और इस नए 'विक्रम-1' रॉकेट में क्या अंतर है? जवाब: इन दोनों रॉकेट्स में तकनीक और क्षमता के स्तर पर बड़ा अंतर है: विक्रम S और विक्रम-1 में अंतर नॉलेज पार्ट: क्या होता है लो अर्थ ऑर्बिट यह पृथ्वी की सबसे निचली कक्षा होती है जो जमीन से लगभग 160 से 2,000 किमी की ऊंचाई पर स्थित होती है। ज्यादातर कॉमर्शियल और मौसम संबंधी सैटेलाइट इसी ऑर्बिट में चक्कर लगाते हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी इसी ऑर्बिट में 450 किमी की ऊंचाई पर स्थित है।
इटली की सुपरकार बनाने कंपनी फरारी ने आज भारत में नई कनवर्टिबल कार अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च की है। ये 15.6 इंच डिजिटल डिस्प्ले और ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स के साथ आई है। कंपनी का दावा है कि यह 3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड से दौड़ सकती है। कंपनी ने भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.6 करोड़ रुपए रखी है। यह अपने कूपे मॉडल की तुलना में करीब 52 लाख रुपए महंगी है, जिसकी मौजूदा कीमत 4.08 करोड़ रुपए है। नई अमाल्फी स्पाइडर की बुकिंग शुरू हो चुकी है। सेफ्टी फीचर्स: एडवांस्ड ADAS से लैस फरारी अमाल्फी में सुरक्षा के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) दिया गया है। इसमें अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा बेहतर ब्रेकिंग के लिए इसमें 296 GTB से इन्स्पायर्ड ABS इवो कंट्रोल यूनिट दी गई है।
एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। ऐसी किसी भी स्थिति में होटल में ठहरने और वहां तक जाने के लिए कैब की पूरी जानकारी सीधे एप की होम स्क्रीन पर ही मिलेगी। इसके साथ ही एप के पेमेंट सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है, जिससे टिकट बुक करना और पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इन-हाउस बुकिंग इंजन से तेजी से बुक होंगे टिकट हर दिन 1 लाख से ज्यादा लोग करते हैं एप का इस्तेमाल एअर इंडिया के मुताबिक, एप अब तक करीब 1.7 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके साथ ही, रोजाना 1 लाख से ज्यादा यात्री अपनी यात्रा से जुड़े कामों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी का मानना है कि नया अपग्रेड ग्राहकों की जरूरतों पर तुरंत रिस्पॉन्स देने में मदद करेगा। टाटा ने अब तक 140 से ज्यादा डिजिटल सिस्टम बदले घाटे में चल रही एअर इंडिया को जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप ने खरीदा था। इसके बाद से ही एयरलाइन के कायाकल्प के लिए एक बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन प्लान चलाया जा रहा है। टाटा ग्रुप के टेकओवर करने के बाद से अब तक कंपनी के 140 से अधिक डिजिटल सिस्टम्स को पूरी तरह से आधुनिक और अपग्रेड किया जा चुका है। एप का यह नया अपडेट भी इसी डिजिटल सुधार प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया दुनिया की चौथी ऑन-टाइम एयरलाइन बनी: जून में 86.85% फ्लाइट्स टाइम पर पहुंचीं; सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा टाटा ग्रुप की एअर इंडिया दुनिया की चौथी सबसे पंक्चुअल (समय की पाबंद) एयरलाइंस बन गई है। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया की लगभग 86.85% फ्लाइट्स यानी 100 में से 87 उड़ानें बिल्कुल तय समय पर पहुंची हैं। टाटा ग्रुप की स्वामित्व वाली एयरलाइन ने जून महीने में अपनी कुल 15,135 उड़ानें ऑपरेट कीं। एअर इंडिया ने सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा है। एविएशन के नियमों के मुताबिक, कोई फ्लाइट अपने तय समय से 15 मिनिट में उड़ान भर लेती है, तो उसे राइट टाइम माना जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
इंस्टाग्राम पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए मेटा के कॉपीराइट सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अज्ञात लोग फेसबुक के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पोस्ट की तारीख बैकडेट में कर देते हैं और फिर असली क्रिएटर्स के कंटेंट पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक भेज रहे हैं। इस खेल के खिलाफ दो बड़े डिजिटल क्रिएटर्स पुष्कर राज ठाकुर और नीरज जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट में कॉमर्शियल सूट फाइल किया है। क्रिएटर्स ने कोर्ट में क्या आरोप लगाए? फाइनेंशियल एजुकेटर पुष्कर राज ठाकुर और डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी ने अलग-अलग दायर याचिकाओं में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ अज्ञात लोग ओरिजिनल क्रिएटर्स को परेशान करने और उनके अकाउंट बंद कराने की धमकी देने के लिए फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक को हथियार बना रहे हैं। इस सिस्टम के चलते उनके ओरिजिनल कंटेंट को डिलीट करने या उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को सस्पेंड/डिलीट करने का खतरा पैदा हो गया है। मेटा के ऑटोमेटेड सिस्टम पर उठे सवाल क्रिएटर्स का तर्क है कि मेटा का ऑटोमेटेड कॉपीराइट सिस्टम बिना किसी गहन जांच के काम कर रहा है। यह सिस्टम वीडियो के असली क्रिएटर, मेटाडेटा, एडिट हिस्ट्री या वास्तविक पब्लिशिंग क्रोनोलॉजी (अपलोड करने का सही समय) की जांच किए बिना ही स्ट्राइक की शिकायतों पर एक्शन ले लेता है। पुष्कर राज ठाकुर ने बताया कि इस फर्जी खेल की वजह से उनके दर्जनों वीडियो को हटा दिया गया, डिसेबल किया गया या रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि मेटा ने ठाकुर को अपने 'राइट्स मैनेजर' टूल का एक्सेस देने से मना कर दिया, जबकि जालसाज इसी टूल का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ लगातार फर्जी स्ट्राइक भेजते रहे। नीरज जोशी के केस में कोर्ट का आदेश डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी के मामले में 9 जुलाई को जस्टिस ज्योति सिंह की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मेटा के उस बयान को रिकॉर्ड किया, जिसमें कंपनी ने कहा कि अगर जोशी का अकाउंट अभी तक स्थायी रूप से बंद नहीं हुआ है, तो वे इन आरोपों की जांच करेंगे और उनके वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट (@Neerajjoshi5014) को सुरक्षित रखेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्ते के भीतर नीरज जोशी को संबंधित बेसिक सब्सक्राइबर इंफॉर्मेशन (BSI) और आईपी (IP) लॉग उपलब्ध कराए। इन जानकारियों से उन अज्ञात लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जो उनके अकाउंट के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। मामले में समन जारी कर दिए गए हैं और जोशी की अंतरिम रोक वाली अर्जी पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। पुष्कर राज ठाकुर के केस में क्या हुआ? जस्टिस तुषार राव गेडेला ने 29 मई को पुष्कर राज ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मेटा से पूछा था कि उसने अपने प्लेटफॉर्म के इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं या वह क्या उपाय कर सकती है। इसके बाद 1 जुलाई को यह मामला जस्टिस अनूप जयराम भंभानी के सामने आया। सुनवाई के दौरान मेटा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक ठाकुर के वीडियो को कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर नहीं हटाया जाएगा। साथ ही बार-बार आ रही कॉपीराइट स्ट्राइक की वजह से उनका अकाउंट भी बंद नहीं किया जाएगा। मेटा ने यह भी सहमति दी कि जैसे ही ठाकुर उन्हें हटाए गए वीडियो के यूआरएल (URLs) सौंपेंगे, वे उन वीडियो को रिस्टोर कर देंगे। कोर्ट ने इन आश्वासनों को दर्ज करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई तय की है। क्रिएटर्स ने मेटा से मांगा ₹2 करोड़ का मुआवजा पुष्कर राज ठाकुर ने कोर्ट से मांग की है कि मेटा को उनके ओरिजिनल कंटेंट को ऐसे फर्जी और बैकडेटेड दावों के आधार पर हटाने से रोका जाए। उन्होंने कंपनी को राइट्स मैनेजर टूल के भीतर केवाईसी (KYC) सुरक्षा उपाय, टाइमस्टैम्प सुरक्षा, मेटाडेटा वेरिफिकेशन और एंटी-मैनिपुलेशन प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश देने की भी मांग की है। इसके अलावा, ठाकुर ने उनके फॉलोअर्स घटने, मोनेटाइजेशन के मौके गंवाने, स्पॉन्सरशिप के नुकसान और उनकी कॉमर्शियल साख को ठेस पहुंचने के एवज में मेटा और अज्ञात जालसाजों से लगभग ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। इस तरह के मामलों ने डिजिटल क्रिएटर्स के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ओरिजिनल कंटेंट की सुरक्षा के लिए बने कॉपीराइट टूल्स का इस्तेमाल अब खुद क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इस विषय को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी पेंडिंग है। क्या है मेटा का राइट्स मैनेजर और कॉपीराइट स्ट्राइक ये खबर भी पढ़ें… IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च: सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट' फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। इस बड़े बदलाव को समझने के लिए पूरी खबर पढ़ें इस खास QA रिपोर्ट में… सवाल 1: IRCTC की इस नई वेबसाइट को लेकर क्या अपडेट आया है? जवाब: IRCTC की वेबसाइट का बीटा वर्जन 15 जुलाई 2026 को रात 9 बजे से लाइव हो गया है। पिछले महीने जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के दौरे पर गए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छात्रों से बातचीत के दौरान यह घोषणा की थी कि 15 जुलाई तक IRCTC की नई वेबसाइट लॉन्च कर दी जाएगी। सवाल 2: आम यात्रियों के लिए नई बीटा वेबसाइट में कौन से बड़े सुधार किए हैं? जवाब: रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत के लिए मुख्य रूप से चार बड़े तकनीकी सुधार किए गए हैं: सवाल 3: बीटा वेबसाइट एक्सेस कैसे होगी और इसका लिंक कहां मिलेगा? जवाब: यात्री https://www.irctc.co.in/eticket/ पर जाकर नए पोर्टल का अनुभव ले सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग IRCTC की पुरानी या मौजूदा होमपेज वेबसाइट पर जा रहे हैं, उन्हें भी मुख्य पेज पर ही नई बीटा वेबसाइट पर जाने के लिए सीधा लिंक उपलब्ध करा दिया गया है। सवाल 4: बीटा वर्जन जारी करने के पीछे रेलवे का असली मकसद क्या है? जवाब: बीटा वर्जन लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य आम यात्रियों से फीडबैक और सुझाव लेना है। रेल यात्री नई वेबसाइट का इस्तेमाल करके इसके फीचर्स पर अपनी राय दे सकेंगे। इस फीडबैक के आधार पर आने वाले समय में वेबसाइट में और जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि कस्टमर सेटिस्फेक्शन बढ़ सके। सवाल 5: IRCTC वेबसाइट पर कितना लोड है, जिसके चलते बदलाव की जरूरत पड़ी? जवाब: साल 2002 में लॉन्च की गई IRCTC वेबसाइट देश के सबसे व्यस्त ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है। पहले इसपर ट्राफिक कम था, लेकिन वर्तमान में इस वेबसाइट के जरिए रोजाना औसतन 14.5 लाख ट्रेन टिकट बुक किए जाते हैं। इतने बड़े यूजर बेस को बिना किसी रुकावट तेज सर्विस देने और तकनीकी रूप से अप-टू-डेट रखने के लिए इस वेबसाइट के पूरे ढांचे को अपग्रेड करना जरूरी हो गया था। सवाल 6: क्या यह बदलाव सिर्फ वेबसाइट के डिजाइन तक सीमित है? जवाब: नहीं, यह सिर्फ बाहरी डिजाइन का बदलाव नहीं है। भारतीय रेलवे इसके साथ ही अपने बैकएंड सिस्टम को भी बदल रहा है। दशकों पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन को समानांतर रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। सवाल 7: पुराना पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन बदलने में क्या चुनौतियां आ रही हैं? जवाब: रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस पूरे अपग्रेडेशन के दौरान ट्रेन टिकट बुकिंग की लाइव सर्विस को एक मिनट के लिए भी बंद नहीं किया जा सकता था। चालू सिस्टम के साथ ही बैकएंड में यह काम करना काफी चुनौतीपूर्ण था। नया पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन भी जल्द लॉन्च कर दिया जाएगा। सवाल 8: नई वेबसाइट पूरी तरह से फंक्शनल कब तक हो जाएगी? जवाब: चूंकि पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन और नई वेबसाइट दोनों पर एक साथ काम चल रहा है, इसलिए रेलवे ने स्पष्ट किया है कि बीटा वर्जन से यूजर फीडबैक लेने और इंजन का काम पूरा होने के बाद, अगले कुछ हफ्तों के भीतर पूरी तरह से फंक्शनल नया IRCTC पोर्टल सभी के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। तब तक यात्री बीटा वर्जन का इस्तेमाल कर सकते हैं और पुराने पोर्टल से भी सामान्य बुकिंग जारी रख सकते हैं। रीडर्स के लिए टिप्स: नई वेबसाइट पर फीडबैक कैसे दें?
MG मोटर्स 16 जुलाई को भारत में अपनी नई 'न्यू एनर्जी व्हीकल' टेक्नोलॉजी को पेश करने जा रही है। कंपनी इवेंट में अपनी नई प्लग-इन हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक व्हीकल तकनीक को शोकेस करेगी। इस नए पावरट्रेन का इस्तेमाल कंपनी अपनी अपकमिंग SUV में कर सकती है, जो वुलींग स्टारलाइट 560 का रीबैज्ड वर्जन होगी। भारत में '520' कोडनेम वाली यह SUV 1000km से ज्यादा की कुल रेंज और 7-सीटर ऑप्शन के साथ आ सकती है। कार 2026 के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकती है। एक्सटीरियर डिजाइन और डायमेंशन इंटीरियर और केबिन फीचर्स कार के अंदर डुअल-टोन थीम के साथ एक मिनिमलिस्टिक (साफ-सुथरा) डैशबोर्ड लेआउट दिया गया है। परफॉर्मेंस: इंजन, मोटर और ड्राइविंग रेंज अंतरराष्ट्रीय बाजार (इंडोनेशिया स्पेसिफिकेशन) के मुताबिक इस SUV को दो पावरट्रेन ऑप्शंस के साथ पेश किया गया है, जिसके भारत में भी आने की उम्मीद है: सेफ्टी फीचर्स सुरक्षा के मामले में इस SUV में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। कार में पैसेंजर्स की सुरक्षा के लिए 6 एयरबैग्स, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), हिल-होल्ड असिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे स्टैंडर्ड फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा, हादसे से बचाने के लिए इसमें एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीक भी शामिल की गई है। इन गाड़ियों से होगा मुकाबला भारतीय बाजार में लॉन्च होने के बाद इस कार के प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) मॉडल का मुकाबला महिंद्रा XUV 7XO और टाटा सफारी जैसी दमदार डीजल/पेट्रोल कारों से होगा। वहीं, इसका पूरी तरह से इलेक्ट्रिक (EV) वैरिएंट सीधे तौर पर अपकमिंग महिंद्रा XEV 9S को टक्कर देगा।
टेक ब्रैंड Ai+ ने भारत में दो नए बजट-फ्रेंडली 5G स्मार्टफोन नोवा 2 प्रो और नोवा 2 नियो लॉन्च किए हैं। कंपनी ने दोनों ही हैंडसेट्स को 15 हजार रुपए की रेंज में उतारा है। इस सीरीज में सबसे खास नोवा 2 प्रो है, जिसके बैक पैनल पर कस्टमाइजेबल LED लाइट्स दी गई हैं, जो फोन में आने वाले कॉल, मैसेज और नोटिफिकेशन्स के हिसाब से अपना कलर बदलती हैं। इसके अलावा दोनों ही डिवाइसेज में हैवी पावर बैकअप के लिए 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। Ai+ ने दोनों स्मार्टफोन को दो-दो वैरिएंट्स में पेश किया है। नोवा 2 नियो की कीमत 12,999 रुपए से शुरू होती है। वहीं, नोवा 2 प्रो की शुरुआती कीमत 15,999 है। नोवा 2 प्रो पर ₹1000 का बैंक डिस्काउंट मिलेगा। Ai+ नोवा 2 प्रो: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: नोवा 2 प्रो में 2340x1080 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.9-इंच की फुल HD+ स्क्रीन दी गई है। यह डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट और 800nits की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए इस पर 2.5D ग्लास की लेयर दी गई है। फोन की थिकनेस 8.2mm और वजन 213 ग्राम है। इसके बैक पैनल पर कस्टमाइजेबल LED लाइट्स लगी हैं, जो कॉल या मैसेज आने पर ब्लिंक करती हैं। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप है। इसमें 48 मेगापिक्सल का मेन सोनी IMX582 सेंसर है, जो 8 मेगापिक्सल अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस के साथ मिलकर काम करता है। सेल्फी के लिए 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: फोन एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड नेक्स्ट क्वांटम OS पर चलता है। इसमें 6 नैनोमीटर फेब्रिकेशन पर बना मीडियाटेक डायमेंसिटी 7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 2.4 गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन करता है। ग्राफिक्स के लिए माली-G610 जीपीयू है। बैटरी और अन्य फीचर्स: इसमें 33W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 6000mAh की बैटरी दी गई है। फोन में स्टीरियो स्पीकर्स, 3.5mm हेडफोन जैक, FM रेडियो और साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर जैसी सुविधाएं हैं। पानी और धूल से बचाव के लिए इसे IP65 रेटिंग मिली है। Ai+ नोवा 2 नियो: स्पेसिफिकेशन्स डिस्प्ले: नोवा 2 नियो 5G में 720 x 1600 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.74-इंच की HD+ डिस्प्ले दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 600nits ब्राइटनेस सपोर्ट करती है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके रियर पैनल पर 48 मेगापिक्सल का सोनी IMX582 लेंस के साथ डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जबकि फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा लगा है। इस बजट फोन में भी सुरक्षा के लिए IP65 की रेटिंग दी गई है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: परफॉर्मेंस के लिए नोवा 2 नियो में 6 नैनोमीटर वाला मीडियाटेक डायमेंसिटी 6300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर और आर्म माली-G57 MC2 जीपीयू दिया गया है। यह फोन भी एंड्रॉयड 16 बेस्ड नेक्स्ट क्वांटम OS पर काम करता है। बैटरी: पावर बैकअप के लिए इसमें भी 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। यह 18W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
मोटोरोला ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन मोटो G77 पावर लॉन्च कर दिया है। फोन में सबसे खास 7000mAh की बड़ी बैटरी और रैम बूस्ट टेक्नोलॉजी है, जो वर्चुअल रैम के जरिए फोन को 24GB रैम की ताकत देती है। मोटोरोला ने इसे 50 मेगापिक्सल सोनी कैमरा और मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6400 प्रोसेसर के साथ उतारा है। मोटो G77 पावर को 8GB रैम और 128GB स्टोरेज के सिंगल वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 25,999 रुपए है। कंपनी फोन पर लॉन्च ऑफर में 2 हजार रुपए का डिस्काउंट दे रही है, जिससे इसे 23,999 में खरीदा जा सकेगा। फोन ऑफिशियल वेबसाइट और ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए अवेलेबल है। डिजाइन और बिल्ड: प्रीमियम प्लास्टिक-पॉलीकार्बोनेट मटीरियल डिस्प्ले: 6.72-इंच का फुल HD+ स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट फोन में 2400 1080 पिक्सल रेजोल्यूशन वाला 6.72-इंच का फुल HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट और 1050nits की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है, जिससे आउटडोर या तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है। डिस्प्ले की सेफ्टी के लिए इस पर गोरिल्ला ग्लास 7i का प्रोटेक्शन दिया गया है। परफॉर्मेंस: मीडियाटेक डायमेंसिटी 6400 ऑक्टाकोर प्रोसेसर कैमरा: 50 मेगापिक्सल का सोनी LYT600 सेंसर पावर बैकअप: 7000mAh के साथ 3 दिन का बैकअप अन्य फीचर्स: डुअल-बैंड वाई-फाई और GPS कनेक्टिविटी के लिए इसमें मजबूत 5G नेटवर्क सपोर्ट, लेटेस्ट ब्लूटूथ, डुअल-बैंड वाई-फाई, GPS और चार्जिंग व डेटा ट्रांसफर के लिए टाइप-C पोर्ट दिया गया है। बेहतर ऑडियो एक्सपीरियंस के लिए इसमें स्टीरियो स्पीकरों के साथ 3.5mm का ऑडियो जैक भी बरकरार रखा गया है।
ओप्पो ने बजट सेगमेंट में नया इयरबड्स एनको एयर 5 लॉन्च किया है। जिन लोगों को कम प्राइस रेंज में एक अच्छा बेस, स्मार्टफोन के साथ अच्छी कनेक्टिविटी, डुअल पेयरिंग और इन-इयर डिटेक्शन जैसे फीचर्स चाहिए, तो उन्हें ये सभी इस इयरबड में मिल जाएंगी। हमने इसका ENC टेस्ट किया, बहुत सारे गाने सुने और मूवीज भी देखीं हैं, तो चलिए इसके साउंड प्रोफाइल के बारे में जानते हैं... केस, डिजाइन और कंफर्ट इसके केस का शेप काफी अच्छा है और हाथ में यह हल्का सा सॉफ्ट फील होता है, जिससे वह सस्ते प्लास्टिक वाली फील नहीं देता। फ्रंट में आपको एक LED लाइट है, नीचे टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट और एक रिसेट बटन दिया गया है। इयरबड्स काफी कॉम्पैक्ट और लाइटवेट हैं। पहनने पर इनका लुक बढ़िया आता है और इसकी इयरटिप कानों में कंफर्टेबली फिट हो जाती है। इसके साथ हमने पूरी मूवी देखी और गाने सुने लेकिन, कानों में जरा भी दर्द या चुभन महसूस नहीं हुई। शार्प मूवमेंट या अचानक सिर हिलाने पर भी ये कानों से गिरते नहीं हैं। यानी आप इसे जिम में वर्कआउट या रनिंग के दौरान आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। ये इयरबड्स IP55 की रेटिंग के साथ आते हैं, जो इसे पानी और पसीने से भी सेफ रखते हैं। एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन और माइक ओप्पो एनको एयर 5 में 12mm का ड्राइवर मिलता है। साथ ही इसमें 3+ 3 (टोटल 6) माइक्रोफोन्स दिए गए हैं, जिससे यह इयरबड अप टू 52dB तक का शोर कैंसिल कर देता है। साल 2026 के हिसाब से यह अच्छा नॉइज कैंसिलेशन है। यह सिर्फ नॉर्मल एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन के साथ नहीं आता, बल्कि इसमें हाइब्रिड एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन मिलता है। इसका फायदा यह है कि आप खुद सिलेक्ट कर सकते हैं कि आपको बाहर की आवाज को कितना कम करना है- हाई, मीडियम या लो। इसमें एक ऑटो ANC का फीचर भी है। इसे सेट करने के बाद आप चाहे घर पर हों, बाहर घूम रहे हों या ट्रेन में सफर कर रहे हों, यह 6 माइक्रोफोन्स की मदद से ऑटोमेटिकली बाहर के शोर को डिटेक्ट करके उसके हिसाब से नॉइज कैंसिलेशन को एडजस्ट कर लेता है। हमारी टेस्टिंग के दौरान हर स्टेज पर इसका नॉइज कैंसिलेशन साफ महसूस हो रहा था और यह बहुत अच्छी तरह काम करता है। कनेक्टिविटी, स्मार्ट फीचर्स और बैटरी लाइफ यह इयरबड AAC को सपोर्ट करता है और इसमें डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी मिलती है, यानी आप एक साथ दो डिवाइस को पेयर कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें इन-इयर डिटेक्शन का फीचर भी है, जो मूवीज या कोई भी कंटेंट देखते समय कान से निकालते ही वीडियो पॉज हो जाता है। इस बार ओप्पो ने बैटरी भी इंप्रूव की है। केस में 530mAh और हर एक इयरबड में 62mAh की बैटरी मिलती है। अगर पावर बैकअप की बात करें, तो बिना ANC यूज किए सिंगल इयरबड करीब 13 घंटे का बैकअप दे देता है और केस के साथ 54 घंटे का एप्रोक्सिमेट बैकअप मिलता है। अगर आप ANC ऑन करके भी यूज करते हैं, तो इयरबड करीब 6 घंटे चल जाता है, जिसमें आप बिना रुके दो मूवी देख सकते हैं। गेमर्स के लिए इसमें एक डेडिकेटेड गेम मोड भी है, जो शूटिंग गेम्स खेलते वक्त गनशॉट्स जैसी ऑडियो को एनहांस कर देता है। साउंड क्वालिटी और बेस अब बात करते हैं सबसे जरूरी चीज यानी इसके साउंड की। सबसे पहले वॉल्यूम की बात करें तो फुल वॉल्यूम पर भी आवाज बिल्कुल फटती नहीं है और कोई क्रैकलिंग साउंड सुनाई नहीं देती। ओप्पो ने इसकी ट्यूनिंग बहुत अच्ची की है। एप के प्रीसेट्स- जैसे अल्टीमेट साउंड, वोकल्स और बेस सभी अच्छे से काम करते हैं। 'अल्टीमेट साउंड' पर बाय-डिफॉल्ट ऑडियो काफी एनहांस होकर आती है। अगर आप न्यूज देख रहे हैं, तो वोकल्स प्रोफाइल सिलेक्ट कर सकते हैं, जिससे आवाज साफ हो जाती है। मूवी देखते समय 'थंडरिंग बेस' सिलेक्ट करने पर बेस का लेवल काफी बढ़ जाता है। इयरबड्स में आपको हैवी बेस मिलता है। इसके अलावा, जिन्हें अपना पर्सनल साउंड कस्टमाइज करना पसंद है, उनके लिए एप में इक्वलाइजर का ऑप्शन भी दिया गया है। कमियां: वॉल्यूम कंट्रोल फीचर इसमें सिर्फ एक चीज पसंद नहीं आई, वो है इसका वॉल्यूम कंट्रोल करने का तरीका। आमतौर पर प्रीमियम इयरबड्स में स्वाइप कंट्रोल होता है या फिर एक साइड टैप करने से वॉल्यूम कम और दूसरी साइड से बढ़ता है। लेकिन, इसमें वॉल्यूम कम या ज्यादा करने के लिए आपको इयरबड को लॉन्ग-प्रेस करके होल्ड रखना पड़ता है, जो मुझे थोड़ा टाइम-कंज्यूमिंग और अजीब लगा। निष्कर्षवॉल्यूम कंट्रोल के अलावा मुझे इस इयरबड में कोई कमी नहीं दिखी। जिस साउंड प्रोफाइल और बेहतरीन फीचर्स के साथ ओप्पो एनको एयर 5 आता है, वह इस बजट में वाकई टॉप-नॉच है।
एआई के दौर में करियर सुरक्षित रखने की चिंता स्वाभाविक है। विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा, कानून, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों में जहां मानवीय निर्णय, संवेदनशीलता और कुशल कारीगरी की जरूरत है, वहां नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा एआई को लेकर एक अलग ट्रेंड भी है। टॉप यूनिवर्सिटी के होनहार छात्र अब मोटी सैलरी वाली नौकरियों को छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के छात्र चार्ल्स म्यूलबर्गर ने बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप करने के बजाय खुद का एआई स्टार्टअप शुरू किया है। एआई के चलते डेटा व तकनीक से जुड़ी नौकरियों में तेजी आएगी, जहां हाथों के हुनर की जरूरत है वहां नौकरी जाने का खतरा नहीं चिकित्सा - इलाज के फैसले लेने वाली नौकरियां सुरक्षित फार्मासिस्ट हीरा मलिक के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में दफ्तर का काम, दवाइयों की पर्ची बनाना और कॉल उठाना जैसे काम एआई से प्रभावित हो सकते हैं, पर डॉक्टरों और नर्सों की जरूरत बनी रहेगी। डॉ. रियाज आगा के मुताबिक प्लास्टिक सर्जरी सुरक्षित है। शिक्षा - पढ़ाई और बच्चों की देखभाल में इंसानी जरूरत शिक्षा में एआई टीचर्स की जगह लेने पर नहीं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जनरेशनल सक्सेस लैब के फाउंडर शरथ जीवन कहते हैं कि छात्रों को सीखने के लिए भरोसेमंद वयस्क रिश्तों की जरूरत हमेशा रहेगी। चाइल्डकेयर एक्सपर्ट विगडॉर्ट्ज के मुताबिक बच्चे की देखभाल के लिए लोग इंसान ही चाहते हैं। कारीगरी - हाथों से होने वाला काम हमेशा सुरक्षित रहेगा फेडरेशन ऑफ मास्टर बिल्डर्स के सीईओ ब्रायन बेरी का कहना है कि निर्माण क्षेत्र में एआई का असर सीमित है। राजमिस्त्री, बढ़ई और प्लास्टर जैसे हाथों के हुनर हमेशा सुरक्षित रहेंगे। हमें इस क्षेत्र के बारे में सोच बदलनी होगी क्योंकि ये काम एआई से ज्यादा भरोसेमंद हैं। बैंकिंग-फाइनेंस - रूटीन जॉब्स पर असर, डेटा और एआई रोल बढ़ेंगे ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के सीनियर बैंकिंग एनालिस्ट टोमाश नोएट्जेल के मुताबिक, बैंकिंग में ग्राहकों की सामान्य सेवा और दफ्तर के दोहराव वाले काम एआई की चपेट में आएंगे। हालांकि, डेटा और तकनीक से जुड़े रोल बढ़ेंगे। जोखिम परखने और फैसले लेने वाले काम सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि बैंकों को इन पर भी इंसान की निगरानी की जरूरत है।
मेडिकल साइंस में पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने सूअरों का सफल ऑपरेशन किया है। 'सर्जी' निकनेम वाले इन रोबोट्स ने सूअरों के पेट से गॉलब्लेडर को सुरक्षित बाहर निकाला। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों और इंजीनियर्स का यह प्रयोग मेडिकल दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए कोई स्पेशल रोबोट नहीं बनाया गया था। डॉक्टरों ने बाजार में मिलने वाले दो आम रोबोट्स का इस्तेमाल किया। इन रोबोट्स की लंबाई करीब 4 से 5 फीट है और इनकी कीमत 20,000 डॉलर यानी करीब ₹19 लाख से भी कम है। दो रोबोट्स ने अकेले पूरी की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी रोबोट्स ने लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी विधि से यानी सूअरों के पेट में बिना बड़ा चीरा लगाए गालब्लेडर निकालने का बेहद मुश्किल ऑपरेशन किया। रोबोट्स ने इंसानी डॉक्टरों की तरह बहुत ही सावधानी से अंदर के टिश्यूज हटाए, उसकी जांच की, नसों को क्लिप से बंद किया और लिवर से गालब्लैडर को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित बाहर निकाल दिया। दो तरीके से ऑपरेशन किया एडवांस्ड सॉफ्टवेयर और खास टूल से मदद मिली ह्यूमनॉइड रोबोट्स को इस सर्जरी के काबिल बनाने के लिए रिसर्च टीम ने खास फिजिकल एडॉप्टर तैयार किए, ताकि रोबोट्स सर्जिकल टूल्स को मजबूती और सटीकता से पकड़ सकें। इसके साथ ही एक खास सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया गया। यह सॉफ्टवेयर इंसानी हाथों के इशारों और मूवमेंट को आसानी से ट्रांसलेट करके रोबोट की कलाई से जुड़े सर्जिकल टूल्स को कंट्रोल करता है। टेस्टिंग का मकसद डॉक्टरों की अनुपस्थिति में इलाज करना इस सफल सर्जरी की पूरी डिटेल 8 जुलाई को साइंस जर्नल 'नेचर' में पब्लिश की गई है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है। इस टेस्टिंग से भविष्य में दूरदराज के इलाकों या डॉक्टरों की अनुपस्थिति में भी मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज और सर्जरी की सुविधा दी जा सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के 'सेंटर फॉर द फ्यूचर ऑफ सर्जरी' के अंतरिम निदेशक डॉ. रयान ब्रोडेरिक ने बताया कि एक 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' के रूप में यह एक्सपेरिमेंट पूरी तरह से सफल रहा है। नॉलेज पार्ट: गालब्लैडर रिमूवल: इस तरीके से लिवर के नीचे मौजूद गालब्लैडर को टिश्यूज से अलग करके, क्लिप लगाकर शरीर से सुरक्षित बाहर निकाला जाता है।
इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में किशोरों के लिए दर्जनों नए सुरक्षा फीचर लॉन्च कर चुकी हैं। कंपनियों का दावा है कि इनके जरिए बच्चों को अनजान लोगों, आपत्तिजनक कंटेंट और सोशल मीडिया की लत से बचाया जा सकता है। लेकिन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शोधकर्ताओं ने इन प्लेटफॉर्म के सुरक्षा फीचर की जांच की और पाया कि कई फीचर या तो ठीक से काम नहीं करते, कुछ को कुछ सेकंड में बायपास किया जा सकता है, जबकि कुछ सिर्फ दावों तक सीमित हैं। इन तीन प्लेटफॉर्म्स में सामने आईं बड़ी खामियां स्नैपचेट - अंजानों से बचाने का दावा, पर यूजरनेम से पहुंचे बच्चों तकस्नैपचैट ने 2023 में कहा था कि अब किशोर सिर्फ उन्हीं लोगों को दिखाई देंगे, जो उनके परिचित (Mutual Friends) हों। लेकिन रिचर्स में पाया गया कि यदि किसी को किशोर का यूजरनेम पता हो, तो वह आसानी से उसका अकाउंट खोज सकता है। स्नैपचैट खुद भी किशोरों को ऐसे वयस्कों की प्रोफाइल सुझा रहा था, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं था। इंस्टाग्राम - अकाउंट प्राइवेट, लेकिन एल्गोरिदम से अजनबी सुझावमेटा ने टीन अकाउंट लॉन्च करते समय कहा था कि किशोरों के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहेंगे और अनचाहे संपर्क कम हो जाएंगे। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने एक बच्ची का नया अकाउंट बनाया, तो Suggested for You सेक्शन में लगभग सभी प्रोफाइल ऐसे वयस्क पुरुषों की थीं जिन्हें वह जानती भी नहीं थी। यूट्यूब - स्क्रीन टाइम लिमिट खुद बंद करने के सुझाव दे रहा यूट्यूब यूट्यूब किशोरों के लिए 60 मिनट की स्क्रीन टाइम लिमिट और ‘टेक अ ब्रेक’ रिमाइंडर देता है। रिसर्च में पाया गया कि समय पूरा होते ही यूट्यूब खुद ही Ignore limit for today और Change limit जैसे विकल्प दिखा देता है। यूट्यूब का कहना है कि यदि माता-पिता फैमिली लिंक के जरिए स्क्रीन टाइम तय करें, तो बच्चे उसे बदल नहीं सकते। सुरक्षा फीचर मौजूद, लेकिन उन्हें खोज पाना मुश्किल इन प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षा फीचर इतने जटिल मेन्यू में छिपे हुए हैं कि सामान्य अभिभावकों को उनके बारे में जानकारी ही नहीं होती। कुछ फीचर डिफॉल्ट रूप से चालू नहीं थे। मेटा ने कहा- टीन फीचर्स की वजह से स्क्रीन टाइम घटा मेटा ने कहा कि टीन अकाउंट लागू होने के बाद किशोर कम संवेदनशील कंटेंट देख रहे हैं, रात में Instagram पर कम समय बिता रहे हैं और अनचाहे संपर्क भी घटे हैं। विशेषज्ञ बोले- समस्या कमजोर सुरक्षा टूल मेटा की पूर्व मनोवैज्ञानिक एनेके बफोन का कहना है कि कई बार ये टूल या तो अधूरे होते हैं या इतने जटिल कि उनका पूरा फायदा मिल ही नहीं पाता। इन्हें और सख्त बनाने की जरूरत है।
गूगल एआई:आपका डेटा इस्तेमाल कर रहा गूगल; प्राइवेसी सुरक्षित रखने तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग्स
गूगल ने अपनी टर्म्स ऑफ सर्विस और एआई डेटा नीति में बदलाव किया है। अब जेमिनी, गूगल सर्च और लेंस जैसे एआई फीचर्स के साथ साझा किए गए फोटो, ऑडियो और अन्य फाइलों का इस्तेमाल एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। अगर आप नहीं चाहते कि आपका डेटा एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो, तो कुछ सेटिंग्स बदलकर इसे सीमित कर सकते हैं। गूगल के नए नियमों के तहत यदि आप जेमिनी से बातचीत करते हैं, गूगल लेंस में फोटो अपलोड करते हैं या एआई फीचर्स के साथ ऑडियो और फाइल साझा करते हैं, तो यह डेटा एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मामलों में गुणवत्ता जांच के लिए प्रशिक्षित मानव समीक्षक भी इस डेटा को देख सकते हैं। हालांकि अभी जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटोज का सामान्य डेटा इस एआई ट्रेनिंग कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। निजी जानकारी देने से बचें आज गूगल सिर्फ एक सर्च इंजन ही नहीं है। कई लोग इससे मेडिकल सलाह पूछते हैं। कानूनी दस्तावेज समझते हैं। ऑफिस फाइलों का विश्लेषण भी कराते हैं। निजी फोटो एडिट कराते हैं। आवाज से जेमिनी से बातचीत करते हैं। ऐसे में कई बार यूजर अनजाने में निजी जानकारी भी एआई के साथ साझा कर देते हैं। यही वजह है कि प्राइवेसी विशेषज्ञ संवेदनशील दस्तावेज एआई टूल्स पर अपलोड करने से बचने की सलाह देते हैं। कैसे रोकें एआई ट्रेनिंग के लिए डेटा का इस्तेमाल? 1. सर्च सेटिंग्स - Google अकाउंट में Search Services Settings पर जाएं। 2. सेव मीडिया बंद करें - Save Media विकल्प का टिक हटाएं। इससे एआई के लिए हिस्ट्री सेव नहीं होगी। 3. ऑटो डिलीट चालू करें - सर्च हिस्ट्री को 3, 6, 18 या 36 महीने बाद अपने-आप डिलीट होने के लिए सेट करें। 4. सर्च पर्सनलाइजेशन बंद करें - यदि आप नहीं चाहते कि गूगल आपकी पुरानी गतिविधि के आधार पर परिणाम दिखाए, तो सर्च पर्सनलाइजेशन बंद कर दें। 5. माय एक्टिविटी - My Activity में जाकर देखें कि किस-किस प्लेटफॉर्म से डेटा सेव हो रहा है। इसे रिव्यू करें। अगर सेटिंग्स बंद कर देंगे तो क्या बदलेगा? - गूगल सर्च, मैप्स, लेंस और जेमिनी पहले की तरह काम करेंगे, लेकिन वे कम व्यक्तिगत हो सकते हैं। उदाहरण के लिए: -आपके पसंदीदा रेस्तरां की सिफारिशें कम सटीक होंगी। - पुरानी सर्च जल्दी नहीं मिलेंगी। - गूगल मैप्स आपकी पसंद के हिसाब से स्थान कम सुझाएगा। - एआई को आपकी पिछली गतिविधि का कम संदर्भ भी मिलेगा। किन चीजों को एआई पर अपलोड करने से बचें? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI चैटबॉट्स पर यह जानकारी साझा न करें... - आधार-पैन-पासपोर्ट कॉपी - बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय दस्तावेज - पासवर्ड - मेडिकल रिपोर्ट - कानूनी अनुबंध - ऑफिस की गोपनीय फाइलें - ओटीपी
दुनिया के सबसे अमीर टेक-अरबपतियों और एआई से नए-नए बने करोड़पतियों का ‘शौक’ और ‘फितूर’ आम रईसों से बिल्कुल अलग है। पुराने अमीर लोग जहां सोना, हीरे-जवाहरात या महंगी पेंटिंग्स खरीदते थे, वहीं आज के टेक दिग्गज कुछ बेहद अजीब और अप्रत्याशित चीजों पर पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग अपनी गायों को मैकडामिया नट्स खिलाते हैं, ये दुनिया का सबसे महंगा मेवा है। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भविष्य में आने वाले प्रलय से बचने की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने करोड़ों रु. खर्च कर बंदूकें, एंटीबायोटिक दवाएं, पानी और इजराइली डिफेंस फोर्स वाले ‘मिलिट्री-ग्रेड गैस मास्क’ रखे हैं। ऑल्टमैन ने न्यूक्लियर रेडिएशन से बचाने वाले पोटैशियम आयोडाइड का स्टॉक कर रखा है। उन्होंने कैलिफोर्निया में घने जंगलों के बीच जमीन ले रखी है, जहां वे संकट के समय प्राइवेट प्लेन से उड़कर जा सकते हैं। विज्ञान की चमत्कारिक कहानियों के क्रेजी इलॉन मस्क ने जेम्स बॉन्ड की फिल्म में इस्तेमाल हुई असली सबमरीन कार को करीब 9.2 करोड़ रु. में खरीदा। वे अपने घर में सजावट के लिए स्पेस रॉकेट्स का मलबा व कल-पुर्जे रखते हैं। वहीं, मस्क की ‘स्पेसएक्स’ के शेयरों से रातों-रात करीब 34 करोड़ रु. की मालकिन बनीं वियतनाम की 50 वर्षीय डेटा साइंटिस्ट ह्यूयेन चिप के गैरेज में कोई रोल्स रॉयल नहीं, बल्कि 4.2 लाख रु. का एक पुराना फायर ब्रिगेड ट्रक है। उनके घर की मेज पर 9 लाख रु. का उल्कापिंड (स्पेस रॉक्स) रखा है। चिप कहती हैं, ‘मुझे नहीं पता मैं इस फायर ट्रक का क्या करूंगी, शायद अपने 3 साल के बच्चे के जन्मदिन पर बच्चों को घुमाऊं। लेकिन इस नई दौलत ने मुझे अपने सपने पूरे करने की आजादी दी है।’ अनुभवों, व्यक्तिगत फितूरों पर निवेश का रुझान यूबीएस की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, केवल अमेरिका में पिछले साल 4.4 लाख लोग नए करोड़पति बने हैं। लेकिन पारंपरिक लग्जरी ब्रांडों (जैसे गुच्ची, अरमानी) के लिए ये नए रईस एक अनसुलझी पहेली बन गए हैं। कंसल्टेंसी फर्म ‘बैन एंड कंपनी’ की पार्टनर फेडेरिका लेवातो के अनुसार, आज का टेक-करोड़पति गुच्ची के लेदर बैग या अरमानी के सूट पर पैसे खर्च करने के बजाय ‘अनुभवों’ और ‘व्यक्तिगत फितूरों’ पर निवेश कर रहा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप का डेटा बताता है कि पुराने अमीर लोगों की तुलना में नए टेक रईस कपड़ों और लेदर आइटम पर 33% कम खर्च करते हैं।
मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने तीन साल से अधिक समय के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वापसी की है। उन्होंने कंपनी का सबसे नया और एडवांस AI मॉडल 'म्यूज स्पार्क 1.1' लॉन्च करने की घोषणा की है। जुकरबर्ग का यह कदम एआई मार्केट में OpenAI और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देने की मेटा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कम कीमत में कोडिंग और एजेंटिक परफॉर्मेंस मार्क जुकरबर्ग ने अपनी पोस्ट में लिखा, आज हम म्यूज स्पार्क 1.1 रिलीज कर रहे हैं। यह बहुत ही कम कीमत पर एक मजबूत एजेंटिक और कोडिंग मॉडल है। यह हमारे नए मेटा मॉडल API और मेटा AI में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल टूल यूज, कंप्यूटर यूज और एजेंटिक परफॉर्मेंस में सबसे मजबूत है। यह 10 लाख टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो के साथ लंबे समय तक चलने वाले टास्क को आसानी से पूरा कर सकता है। यह समानांतर चलने वाले सब-एजेंट्स को काम सौंपने में सक्षम है और इसे डेस्कटॉप, मोबाइल या ब्राउज़र पर कंप्यूटर इंटरफेस का उपयोग करने के लिए ट्रेन किया गया है। म्यूज स्पार्क से डेवेलपर्स बना सकेंगे एप्लिकेशन्स जुकरबर्ग ने बताया कि डेवेलपर्स म्यूज स्पार्क का उपयोग करके नए एप्लिकेशन्स बना सकेंगे। कंपनी का पूरा फोकस बहुत कम लागत पर मजबूत एजेंटिक और मल्टीमॉडल मॉडल देने पर है। अमेरिका में डेवेलपर्स अब मेटा मॉडल API के पब्लिक प्रीव्यू के जरिए म्यूज स्पार्क 1.1 का एक्सेस पा सकते हैं। कम इंसानी दखल के पूरे होंगे जटिल काम मेटा ने इस अपग्रेडेड मॉडल को कोडिंग, एजेंटिक वर्कफ़्लो और सॉफ़्टवेयर ऑटोमेशन के लिए अपना अब तक का सबसे सक्षम एआई सिस्टम बताया है। यह मॉडल न केवल कोड लिख और डिबग कर सकता है, बल्कि सॉफ़्टवेयर टूल्स के साथ इंटरैक्ट भी कर सकता है। यह टेक्स्ट, इमेज और वीडियो को समझकर बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के बेहद जटिल और मल्टी-स्टेप टास्क को पूरा करने की क्षमता रखता है। सुपरइंटेलिजेंस लैब्स ने किया तैयार इस मॉडल को मेटा की 'सुपरइंटेलिजेंस लैब्स' ने डेवलप किया है। इससे पहले कंपनी ने अप्रैल में अपना ओरिजिनल म्यूज स्पार्क मॉडल पेश किया था, जिसका मकसद एआई के क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों के साथ अंतर को कम करना था। इस नए लॉन्च के साथ मेटा ने पेड एआई मॉडल API मार्केट में औपचारिक रूप से एंट्री कर ली है। 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट और प्राइसिंग का गणित मेटा मॉडल API के लिए साइन अप करने वाले डेवेलपर्स को 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट मिलेगा, जिसके बाद वे 'पे-एज-यू-गो' (जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान) प्राइसिंग मॉडल पर शिफ्ट हो जाएंगे। मेटा ने इस सर्विस की कीमत 1.25 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 4.25 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन तय की है। यह कीमत OpenAI के एंट्री-लेवल 'GPT-5 mini' और एंथ्रोपिक के 'क्लॉड हायकू 4.5' से अधिक है, लेकिन एंथ्रोपिक के प्रीमियम 'क्लॉड सॉनेट 4.6' मॉडल से कम है। वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के ल्लामा मॉडल्स बदलेंगे म्यूज स्पार्क 1.1 को फिलहाल मेटा AI एप और वेबसाइट के 'थिंकिंग मोड' में रोल आउट किया जा रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल धीरे-धीरे वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेटा के एआई-इनेबल्ड स्मार्ट ग्लासेस में मौजूद मौजूदा ल्लामा मॉडल्स की जगह लेगा। हाल ही में मेटा ने अपनी सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा विकसित पहला इमेज-जनरेशन मॉडल 'म्यूज इमेज' भी पेश किया था, जिससे कंपनी का जेनरेटिव एआई पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है। नॉलेज पार्ट: क्या होते हैं एजेंटिक मॉडल और टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो?
सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने भारत में नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इसकी कीमत टैक्स मिलाकर 1,34,166 रुपए रखी गई है। यह रेगुलर स्मार्टफोन से बिल्कुल अलग है, जो बिना सिम और नेटवर्क के बजाय सीधे सैटेलाइट की मदद से काम करता है। फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नेटवर्क विहीन और ऑफ-ग्रिड जगहों पर भी बिना किसी रुकावट के वॉयस कॉल करने की सुविधा देता है, जबकि आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फोन नजदीकी मोबाइल टावर की मदद से काम करते हैं। सेटेलाइट फोन को खरीदने के लिए सरकार की मंजूरी लेना होगी। आपातकालीन स्थिति में कनेक्टिविटी आसान होगा इस फोन का फायदा उन सुदूर इलाकों में भी काम करेगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाते हैं। इससे आपदा या आपातकालीन स्थितियों में लोगों से संपर्क बनाए रखना आसान हो जाएगा। कंपनी ने बताया कि इस हैंडसेट को ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर 'इनमारसैट' के साथ पार्टनरशिप में बनाया गया है। खरीदने के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य यह आम फोन या गैजेट की तरह सीधे दुकान पर नहीं मिलेगा। भारत में सैटेलाइट फोन को लेकर कड़े नियम हैं। इस फोन को खरीदने या इस्तेमाल करने से पहले यूजर को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से मंजूरी या ऑथराइजेशन लेना अनिवार्य होगा। सरकार की बिना मंजूरी के सैटेलाइट फोन रखना या इसे ऑपरेट करना भारतीय नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। BSNL का यह सैटेलाइट फोन रोजमर्रा के स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नहीं है। इसे उन लोगों और ऑर्गेनाइजेशन्स के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में भरोसेमंद कम्युनिकेशन की जरूरत होती है।
टेक कंपनी नथिंग ने भारत में अपनी नई 'b' सीरीज का पहला ट्रांसपेरेंट स्मार्टफोन नथिंग फोन (4b) लॉन्च कर दिया है। यह फोन अपने अनोखे डिजाइन, नथिंग के सिग्नेचर ग्लिफ इंटरफेस, 6000mAh बैटरी और क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 4 प्रोसेसर के साथ आया है। फोन में कई एडवांस्ड AI फीचर्स भी दिए गए हैं। नथिंग फोन (4b) को दो वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 34,999 रुपए रखी गई है। कंपनी लॉन्च ऑफर में 7.5% का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस दे रही है। इसके बाद फोन की प्रभावी शुरुआती कीमत ₹29,999 हो जाती है। स्मार्टफोन की सेल 14 जुलाई 2026 से शुरू होगी। डिजाइन, बिल्ड क्वालिटी और कलर्स नथिंग ने अपने इस नए फोन में सिग्नेचर ट्रांसपेरेंट लुक को बरकरार रखा है, जो हाथ में प्रीमियम फील देता है। फोन के बैक पैनल पर नया 'ग्लिफ बार' दिया गया है। इसमें 45 अलग-अलग कंट्रोल होने वाली मिनी LED लाइट्स हैं। ये लाइट्स बिना स्क्रीन ऑन किए ही यूजर को चार्जिंग स्टेटस, नोटिफिकेशन, रिकॉर्डिंग और कस्टम अलर्ट की जानकारी देती हैं। डिस्प्ले और परफॉर्मेंस कैमरा और बैटरी बैकअप सॉफ्टवेयर और AI फीचर्स स्मार्टफोन एंड्रॉइड 16 पर बेस्ड नथिंग OS 4.1 पर चलता है। इसमें चैटजीपीटी इंटीग्रेशन, गूगल जेमिनी और 'सर्कल टू सर्च' जैसे कई एसेंशियल AI टूल्स इन-बिल्ट मिलते हैं। कंपनी फोन के साथ 3 साल के एंड्रॉएड अपडेट और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट देगी। मार्केट में इसका सीधा मुकाबला मोटोरोला एज 70 फ्यूजन और सैमसंग गैलेक्सी A27 5G जैसे स्मार्टफोन्स से होगा।
अगर आपके बच्चों की तस्वीरें, बैंक खातों के पासवर्ड और आपकी डिजिटल पहचान एक ही ‘की’ से सुरक्षित हो और वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए, तो सब खतरे में पड़ सकता है। कॉमर्शियल एयरलाइन पायलट रेयान पेटिट के साथ ऐसा ही हुआ। विमानन क्षेत्र में काम करने वाले पेटिट जानते हैं कि सुरक्षा के लिए हमेशा कई स्तरों पर बैकअप होता है, पर डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा एक कमजोर कड़ी पर टिक गई थी। एक साधारण-सा टेक्स्ट मैसेज आया और उनकी पूरी डिजिटल पहचान उनसे छिन गई। पढ़िए उनकी कहानी और एक्सपर्ट से जानिए किन गलतियों से बचना चाहिए... मुझे गोल्डमैन साक्स एपल कार्ड पर एक संदिग्ध लेन-देन का ‘फ्रॉड अलर्ट’ मैसेज मिला। मैसेज में सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देने को कहा गया था। सुरक्षा के लिए मैंने ‘ना’ लिखकर भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद कॉल आया। कॉलर आईडी पर एपल कार्ड सपोर्ट का नंबर दिख रहा था। मुझे शक नहीं हुआ, क्योंकि मैसेज भी उसी आधिकारिक i Message थ्रेड में एपल लोगो व ग्रे बबल के साथ आ रहे थे। कॉलर ने कहा कि मेरी पहचान सत्यापित करने के लिए कोड भेजा जा रहा है। जैसे ही कोड बताया, सब कुछ बदल गया। मैंने पहचान पूछी, तो उसने मेरा सोशल सिक्योरिटी नंबर व जन्मतिथि तक बता दी। तब लगा कि मैं ठगी का शिकार हो चुका हूं। आंखों के सामने मेरी पूरी डिजिटल दुनिया बिखरने लगी। मैं देख रहा था कि एपल वॉलेट से कैश एप, वीसा कार्ड और एपल कार्ड एक-एक करके गायब हो रहे थे। हैकर ने मेरे अकाउंट में अपना फोन नंबर जोड़ दिया और मेरा नंबर हटा दिया। कुछ ही देर बाद मैं अपने ही अकाउंट से बाहर हो गया। मेरा आईफोन रीसेट हो गया और बेकार डिवाइस बनकर रह गया। मैं बिना डिजिटल वॉलेट व पैसों के होनोलूलू पहुंचा। किसी तरह लैपटॉप पर वाई-फाई जोड़कर पत्नी को मैसेज किया। उन्होंने मेरे लिए उबर बुक की। एपल स्टोर पहुंचने पर पता चला कि हैकर ने फोन पर एक्टिवेशन लॉक लगा दिया है। पहचान व खरीद के सबूत दिखाने के बावजूद एपल कर्मचारी मदद नहीं कर सके। नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। हैकर के हाथ मेरी एक लाख से ज्यादा फैमिली फोटो, पासवर्ड और मैसेज हिस्ट्री लग चुकी थी। उसने मेरे निवेश बेचकर नकदी निकाल ली। पत्नी को मेरे नाम पर मैसेज भेजकर हजारों डॉलर ठग लिए। मेरे अकाउंट खाली हो गए। स्मार्टवॉच का डेटा हटा दिया, इससे वह मुझे नहीं पहचान सकी। पुलिस भी मदद नहीं कर सकी।’- रेयान ऑथेंटिकेटर एप रखें साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट केविन मिटनिक सुझाव देते हैं,‘अपने डिजिटल वर्ल्ड की एक ‘मास्टर की’ न रखें। लॉगिन हैक होते ही बैंक, फोटो व डेटा खतरे में पड़ सकते हैं; सभी खाते अलग रखें। हार्डवेयर सिक्योरिटी की या ऑथेंटिकेटर एप इस्तेमाल करें, जिससे पासवर्ड व नंबर लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। कॉलर आईडी पर दिखने वाले नाम या नंबर पर भरोसा न करें। बैंक या संस्थान को कॉल करके जांच कर लें।
नई कार खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन-सा कलर चुनें? सिर्फ पसंद का नहीं, बल्कि मेंटेनेंस, गर्मी, रीसेल वैल्यू और ट्रेंड का भी। BASF की जनवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में बिकने वाली कुल कारों में 48% सफेद रहीं। यानी हर दो में से एक खरीदार सफेद कलर की कार खरीद रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सफेद कलर का मेंटेनेंस अन्य कलर की तुलना में सबसे कम है, यानी सफेद कलर में स्क्रैच छुपाना सबसे आसान होता है। साथ ही सफेद कार की रीसेल वैल्यू भी सबसे ज्यादा होती है। हालांकि, अब ट्रेंड बदल रहा है और अलग लुक के लिए लोग ग्रे, ब्लैक, ब्लू और ग्रीन जैसे बोल्ड कलर वाली कार भी खरीद रहे हैं। परफेक्ट कार कलर चुनने की 5-स्टेप प्रोसेस स्टेप 1: अपना प्राइमरी यूज और इलाका देखें सबसे पहले यह तय करें कि आप गाड़ी कहां और कैसे चलाने वाले हैं: स्टेप 2: अपनी मेंटेनेंस की आदत पहचानें आप गाड़ी की साफ-सफाई को कितना वक्त दे सकते हैं, यह बहुत जरूरी है: मेंटेनेंस के लिए 'बेस्ट' VS 'वर्स्ट' कलर स्क्रैच ठीक करने में आसान 'स्पेशल एडिशन' रंग खरीदने के नुकसान स्टेप 3: रोड सेफ्टी और विजिबिलिटी को तवज्जो दें रात के समय होने वाले एक्सीडेंट्स से बचने के लिए कलर की विजिबिलिटी मायने रखती है: स्टेप 4: बजट और वेरिएंट की उपलब्धता चेक करें शोरूम जाने से पहले बजट का गणित समझें: कम बजट: अगर बजट टाइट है, तो फ्लैट वाइट चुनें। इसके लिए ज्यादातर कंपनियां एक्स्ट्रा पैसे नहीं लेतीं और स्क्रैच आने पर इसका री-पेंट भी सबसे सस्ता होता है। फ्लेक्सिबल बजट: अगर आप एक्स्ट्रा कॉस्ट उठाने को तैयार हैं, तभी मैट फिनिश, ट्रेंडी कलर्स या स्पेशल एडिशंस जैसे जेट या काजीरंगा एडिशन की तरफ कदम बढ़ाएं। स्टेप 5: फ्यूचर रिसेल वैल्यू का आकलन करें गाड़ी को 4-5 साल में बदलने का प्लान है या लंबे समय तक रखने का, यह सोच लें: शॉर्ट समरी गाइड
अगर आप एंड्रॉएड स्मार्टफोन यूजर हैं और अपने फोन का बैकअप गूगल अकाउंट पर रखते हैं, तो अब अकाउंट का फ्री 15GB स्टोरेज जल्दी फुल हो सकता है। क्योंकि, गूगल ने अपनी स्टोरेज पॉलिसी बदल दी है। गूगल की अपडेटेड पॉलिसी के मुताबिक, आपके फोन के फोटो-वीडियो ही नहीं, बल्कि अब SMS, कॉल हिस्ट्री और एप डेटा का बैकअप भी आपकी इसी फ्री लिमिट में सेव होगा। यह नियम सबसे पहले नए एंड्रॉयड यूजर्स पर लागू होगा। अभी गूगल फोटोज पर अपलोड इमेज, वीडियो सेव होता है वहीं, मौजूदा यूजर्स के अकाउंट्स में आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब बाय डिफॉल्ट आपके गूगल अकाउंट की ज्यादा स्टोरेज खर्च होगी। अभी तक गूगल आपकी फ्री 15GB क्लाउड स्टोरेज में सिर्फ गूगल फोटोज पर अपलोड की गई इमेज, वीडियो और MMS डेटा में शामिल फोटो-वीडियो को ही काउंट करता था। एक्स्ट्रा स्पेस के लिए भारत में ₹59 से शुरू हैं प्लान गूगल अपनी स्टोरेज पॉलिसी में लगतार बदलाव कर रहा है। इससे पहले मई में कंपनी ने कुछ नए अकाउंट्स के लिए फोन नंबर लिंक न करने की स्थिति में डिफॉल्ट फ्री स्टोरेज लिमिट को 15GB से घटाकर 5GB करने की टेस्टिंग शुरू की थी। यदि आप अपने अकाउंट के लिए अतिरिक्त स्टोरेज खरीदना चाहते हैं, तो भारत में गूगल वन के प्लान ₹59 प्रति माह से शुरू होते हैं, जिसमें 30GB स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा गूगल AI प्लान्स के साथ भी फ्री स्टोरेज दी जा रही है। आप चाहें तो ज्यादा लिमिट वाले पेड गूगल वन या गूगल AI प्लान भी चुन सकते हैं। स्पेस मैनेज करने के लिए नए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे इस बदलाव के साथ ही गूगल यूजर्स को बैकअप पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए नए फीचर्स भी जोड़ रहा है। अब तक मिलने वाले प्रति-एप कंट्रोल्स के साथ ही यूजर्स को SMS, MMS, कॉल हिस्ट्री और डिवाइस सेटिंग्स के लिए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे। इसकी मदद से आप खुद चुन सकेंगे कि किस डेटा का बैकअप लेना है और किसका नहीं। इसे सेट करने के लिए आप अपने डिवाइस की सेटिंग्स में 'गूगल बैकअप' पेज पर जा सकते हैं। गूगल का दावा- औसत सिर्फ 40MB डेटा बढ़ेगा हालांकि, इस बदलाव से यूजर्स की फ्री स्टोरेज लिमिट जल्दी खत्म होने का डर है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इसका असर बेहद मामूली होगा। एक गूगल प्रवक्ता ने कहा, हमने अपनी पॉलिसी को अपडेट किया है, ताकि अब सभी एंड्रॉयड बैकअप डेटा गूगल अकाउंट स्टोरेज में काउंट हों। हमें उम्मीद है कि इससे औसतन केवल 40MB डेटा ही बढ़ेगा। हम यूजर्स को ज्यादा पारदर्शिता और नए कंट्रोल्स भी दे रहे हैं, जिससे वे खुद चुन सकें कि किस डेटा और ऐप का बैकअप लेना है। नॉलेज पार्ट: क्लाउड स्टोरेज और बैकअप डेटा क्या होता है?
मारुति सुजुकी ने मिडसाइज एसयूवी विक्टोरिस के कुछ वैरिएंट्स ₹39,000 तक सस्ते कर दिए हैं। कार 6 वैरिएंट्स- LXI, VXI, ZXI, ZXI(O), ZXI प्लस और ZXI+ (O) के साथ आती है। कंपनी ने विक्टोरिस के ZXi (O) और ZXi+ (O) ट्रिम्स के मैनुअल ट्रांसमिशन (MT) और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन (AT) वैरिएंट्स के दाम घटाए हैं। कार के (O) यानी ऑप्शनल वैरिएंट्स पैनोरमिक सनरूफ के साथ आते हैं, यानी सनरूफ वाला ऑप्शन सस्ता हो गया है। हालांकि, इसके नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन वाले अन्य स्टैंडर्ड वैरिएंट्स की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विक्टोरिस की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10.50 लाख रुपए है।विक्टोरिस 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग और लेवल-2 ADAS के साथ आती है स्लीक एक्सटीरियर डिजाइन और मॉर्डन इंटीरियर के साथ विक्टोरिस में बड़ी टचस्क्रीन, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले हाइब्रिड और CNG ऑप्शन के साथ लेवल-2 ADAS सेफ्टी फीचर भी शामिल है। कार को भारत एनकैप ने क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिल चुकी है। इसका डिजाइन इलेक्ट्रिक SUV ई-विटारा से लिया गया है। कार का मुकाबला हुंडई क्रेटा, किआ सेल्टोस, टोयोटा अर्बन क्रूजर हायराइडर, MG एस्टर और होंडा इलिवेट जैसी गाड़ियों से रहेगा। डिजाइन: मॉडर्न और बोल्ड लुक विक्टोरिस में सामने की तरफ चंकी एलईडी हेडलाइट्स हैं, जो एक पतली ग्रिल कवर से जुड़ी हुई हैं और ऊपर क्रोम स्ट्रिप है। बॉडी के चारों तरफ मोटी प्लास्टिक क्लैडिंग दी गई है, जो इसे रफ एंड टफ लुक देती है, साथ ही सिल्वर स्किड प्लेट भी लगी है। साइड प्रोफाइल में 18-इंच अलॉय व्हील्स, सिल्वर रूफ रेल्स और स्क्वेयर्स-ऑफ बॉडी क्लैडिंग है, जो इसे स्पोर्ट लुक देते हैं। पीछे की तरफ सेगमेंटेड एलईडी लाइट बार है और 'VICTORIS' की बैजिंग दी गई है। कुल मिलाकर, यह डिजाइन मॉडर्न और प्रीमियम लगता है, जो शहर की सड़कों से लेकर हाईवे तक सूट करेगा। इंटीरियर की बात करें तो डैशबोर्ड टेक-फोकस्ड है, जिसमें 10.25-इंच इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और थ्री-स्पोक स्टीयरिंग व्हील है। यह 5-सीटर कैबिन देती है, जिसमें फैमिली के लिए काफी स्पेस है। लेदरेट सीट अपहोल्स्ट्री, एम्बिएंस लाइटिंग और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल जैसे फीचर्स इसे कम्फरटेबल बनाते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस: तीन ऑप्शन मिलेंगे विक्टोरिस में तीन तरह के पावरट्रेन दिए गए हैं, जो हर तरह के ग्राहक की जरूरत पूरी करेंगे: ये सभी ऑप्शन्स फ्यूल-एफिशिएंट हैं, जो मारुति की खासियत है। डाइमेंशन्स की डिटेल्स अभी पूरी तरह कन्फर्म नहीं हैं, लेकिन यह मिड-साइज होने से ब्रेजा से बड़ी और ग्रैंड विटारा से कॉम्पैक्ट लगेगी। फीचर्स और सेफ्टी: पैनोरमिक सनरूफ और लेवल 2 ADAS विक्टोरिस फीचर्स के मामले में टॉप क्लास है। इंफोटेनमेंट में 10.25-इंच टचस्क्रीन है, जो वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो सपोर्ट करती है। 8-स्पीकर साउंड सिस्टम डॉल्बी एटमॉस के साथ आता है, साथ ही कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी भी है। कम्फर्ट फीचर्स में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जर, 8-वे इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, हेड्स-अप डिस्प्ले, कैबिन एयर फिल्टर और पावर्ड टेलगेट शामिल हैं। सेफ्टी की बात करें तो यह मारुति की पहली कार है जिसमें लेवल 2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) है। स्टैंडर्ड फीचर्स में 6 एयरबैग्स, ABS विद EBD, ट्रैक्शन कंट्रोल, ब्रेक असिस्ट, हिल होल्ड कंट्रोल और ISOFIX चाइल्ड सीट एंकरेज हैं। हायर वैरिएंट्स में 360-डिग्री कैमरा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम है। इस कार को भारत एनकैप क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी है।
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। 10 सवालों के जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: ARAI की इस रिपोर्ट में सबसे मुख्य बात क्या निकलकर सामने आई है? जवाब: ARAI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सवाल 2: क्या रिपोर्ट को आम जनता के लिए जारी किया गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: नहीं, इस स्टडी रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार और देश के प्रमुख वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच इस पूरे मामले पर नीति बनाने और तकनीकी सुधार करने के लिए एक मुख्य रेफरेंस पॉइंट बनी हुई है। सवाल 3: चार पहिया वाहनों के इंजन पर E20 ईंधन के असर को लेकर क्या टेस्टिंग की गई थी? जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही। सवाल 4: दूसरे चार पहिया वाहन निर्माता की गाड़ी में क्या तकनीकी समस्या देखी गई? जवाब: दूसरे OEM के इंजन की जब 809 घंटे तक टेस्टिंग की गई, तो उसके एग्जॉस्ट वाल्व में 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' देखा गया। हालांकि, इस मामले के जानकारों का कहना है कि एग्जॉस्ट वाल्व के फेल होने के पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। सवाल 5: यह 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' क्या होता है और इससे इंजन को क्या नुकसान है? जवाब: थर्मोमैकेनिकल फेलियर तब होता है जब अत्यधिक गर्मी और तेज व बार-बार होने वाली हलचल (मैकेनिकल स्ट्रेस) एक साथ मिलती हैं। इन दोनों के संयुक्त दबाव के कारण इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व मुड़ सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह पूरी तरह से टूट सकता है। सवाल 6: BS-IV और BS-VI इंजन वाली चार पहिया गाड़ियों की टेस्टिंग में क्या अंतर मिला? जवाब: रिपोर्ट में 4-व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के तहत बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान एक BS-IV इंजन का परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य रहा। इसके विपरीत, एक BS-VI टर्बो चार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद ही समस्या देखी गई। सवाल 7: दो पहिया वाहनों पर इस टेस्टिंग का क्या परिणाम रहा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, तीन दो पहिया वाहन निर्माताओं ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए गए थे। इन टेस्ट्स में इंजनों में कोई समस्या नहीं पाई गई। इन्हें E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य पाया गया है। सवाल 8: क्या E20 ईंधन से गाड़ियों के मैटेलिक पार्ट्स या उत्सर्जन पर बुरा असर पड़ता है? जवाब: नहीं, सभी टेस्ट किए गए वाहनों पर इस स्टडी में पाया गया कि E20 ईंधन का मैटेलिक कंपोनेंट्स पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, E10-कंप्लायंट वाहनों में E20 ईंधन डालने पर भी साइलेंसर से होने वाला उत्सर्जन तय कानूनी सीमाओं के भीतर ही पाया गया। सवाल 9: गाड़ियों की माइलेज या ईंधन की खपत पर इससे क्या प्रभाव पड़ा? जवाब: ARAI की स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E10 ईंधन की तुलना में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने पर वाहनों की ईंधन खपत 2% से 6% तक बढ़ जाती है। यानी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि, ईंधन की खपत में होने वाली यह बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल और कैटेगरी के हिसाब से बदलती है। सवाल 10: गाड़ी के स्टार्ट होने, चलने और वाष्पीकरण उत्सर्जन पर क्या असर दिखा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, E20 ईंधन के साथ गाड़ियों का इवैपोरेटिव एमिशन भी पूरी तरह से कानूनी सीमा के भीतर पाया गया। इसके साथ ही, गाड़ियों की स्टार्टेबिलिटी (आसानी से स्टार्ट होना) और ड्राइवैबिलिटी (चलने की परफॉर्मेंस) भी E20 ईंधन के साथ बिल्कुल ठीक पाई गई। सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे। पेट्रोल में 25% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला टाल सकती है सरकार E20 फ्यूल के विरोध के बीच सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।
अब टेलीग्राम एप पर फ्री पायरेटेड फिल्में और वेब सीरीज नहीं मिल पाएंगी। केंद्र सरकार ने टेलीग्राम से फिल्मों और OTT कंटेंट के पायरेटेड वर्जन देने वाले चैनल्स और ग्रुप्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज कंपनी को नोटिस भेजा। मंत्रालय ने कहा कि टेलीग्राम अगले 15 दिन में पायरेटेड कंटेंट पर लिए एक्शन की रिपोर्ट सौंपे। एप को 3 दिन में सरकार का दूसरा नोटिस मिला है। इससे पहले टेलीग्राम को 2 जुलाई को एक नोटिस भेजा गया था, जिसमें आईटी मिनिस्ट्री ने यूजरनेम फीचर और यूजर्स की प्राइवेसी पर सवाल पूछे थे। टेलीग्राम पर 3000 से ज्यादा चैनल ब्लॉक हो चुके नीट पेपर लीक के बाद भी टेलीग्राम पर बैन लगा था इससे पहले जून में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की सिफारिश पर सरकार ने पेपर लीक मामले में टेलीग्राम पर 16 जून से 22 जून तक बैन लगा दिया था। इसके अलावा, 21 जून को हुई NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक अपना 'मैसेज-एडिटिंग' फीचर बंद रखने का भी आदेश दिया था। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूजरनेम फीचर पर वॉट्सएप के बाद टेलीग्राम को नोटिस: सरकार ने पूछा- इससे साइबर अपराधों का खतरा, रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…
भारत सरकार के E20 यानी 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के फैसले पर जहां देश में विवाद और विरोध चल रहा है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल कंपनियों (OMCs) के E20 पेट्रोल लेने से मना कर दिया है। भूटानी मीडिया 'द भूटानीज' की रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान ने भारत से अनुरोध किया है कि जब तक भारतीय बाजार में नॉर्मल पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उन्हें बिना मिलावट वाला पुराना पेट्रोल ही सप्लाई किया जाए। पुरानी स्टोरेज और वाटर लीकेज सबसे बड़ा कारण भूटान के अधिकारियों के मुताबिक, देश का फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पुराना है। वहां के पेट्रोल पंपों के फ्यूल टैंक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बने हैं, जिनमें पानी रिसने यानी सीपेज का खतरा रहता है। नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल में हाइड्रोक्सिल ग्रुप होता है, जो हवा या आसपास की नमी को बहुत तेजी से सोखता है (हाइग्रोस्कोपिक नेचर)। अगर E20 पेट्रोल को ऐसे टैंकों में रखा जाए जहां पानी का रिसाव हो, तो पेट्रोल में पानी मिल जाएगा। इस पानी को पेट्रोल से अलग करना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, टैंक में पानी होने से स्टील के टैंकों और पाइपलाइनों में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों के परफॉर्मेंस की चिंता भूटान का इलाका पूरी तरह से पहाड़ी और ऊंचा-नीचा है। ऐसी चढ़ाई वाले रास्तों पर गाड़ियों को चलने के लिए मैक्सिमम पावर यानी ज्यादा ताकत की जरूरत होती है। भूटानी अधिकारियों को डर है कि एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों को वो परफॉर्मेंस और पावर नहीं दे पाएगा, जो नॉर्मल पेट्रोल देता है। भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है। भूटान को कैसे पता चलेगा कि पेट्रोल में मिलावट है? भूटान अपनी जरूरत का पूरा ईंधन भारत से ही खरीदता है। फिलहाल भूटान भारत से महंगे और हाई-एक्सपोर्ट क्वालिटी वाले पेट्रोल-डीजल की खरीद करता है, जो भारतीय पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले फ्यूल से ज्यादा शुद्ध और महंगा होता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत गलती से E20 पेट्रोल भूटान भेज भी देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है। एथेनॉल वाले पेट्रोल में जरा सा भी पानी मिलते ही उसका रंग दूधिया हो जाता है, जिससे टेस्ट के दौरान तुरंत पकड़ में आ जाएगा। एडवांस नोटिस और लीक-प्रूफ टैंक की मांग चुनौतियों को देखते हुए भूटान सरकार ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से कहा है कि अगर वे भविष्य में एथेनॉल का ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाते हैं या पूरी तरह एथेनॉल पेट्रोल ही सप्लाई करने का फैसला करते हैं, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। साथ ही भूटान ने भारत से लीक-प्रूफ टैंक उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
वॉट्सएप जल्द ही इंस्टाग्राम और टेलीग्राम की तरह यूजरनेम फीचर लाने वाला था। इसके जरिए लोग बिना मोबाइल नंबर शेयर किए एक-दूसरे को मैसेज कर सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के चलते सरकार ने फिलहाल इस फीचर की लॉन्चिंग पर रोक लगा दी है। दरअसल भारत में वॉट्सएप के करीब 90 करोड़ यूजर्स हैं। इसमें कई फीचर्स ऐसे भी हैं जिनके बारे में ज्यादातर यूजर्स नहीं जानते। ये प्राइवेसी बढ़ाने से लेकर चैट को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने में मदद कर सकते हैं। आज इन्हीं फीचर्स के बारे में जानते हैं। वॉइस नोट को अपने आप टेक्स्ट में कन्वर्ट करें, चैट को लॉक करने का भी विकल्प; जानें पूरी प्रक्रिया चैट लॉक - इससे चैट को छिपाया जा सकता है। इसके लिए पहले चैट लॉक करें। फिर लॉक्ड चैट्स फोल्डर में जाकर चैट लॉक सेटिंग्स में Hide Locked Chats ऑन करें और एक सीक्रेट कोड बना लें। अब चैट तब तक नहीं दिखेगी, जब तक सर्च बार में वही कोड टाइप नहीं होगा। यूजरनेम फीचर - इसके जरिए किसी को सीधे मैसेज नहीं भेजा जा सकेगा। बातचीत शुरू करने के लिए सामने वाले यूजर को अपना पिन साझा करना होगा। पिन मिलने के बाद ही दोनों के बीच चैट शुरू हो सकेगी। हालांकि भारत सरकार ने इस फीचर पर फिलहाल रोक लगाई है। वॉइस ट्रांसक्रिप्शन - वॉट्सएप अब वॉइस मैसेज ट्रांसक्रिप्ट फीचर देता है, जिससे वॉइस नोट टेक्स्ट में बदल सकते हैं। ऑन करने के लिए... Settings > Chats > Voice Message Transcripts| यह अभी अंग्रेजी-स्पेनिश जैसी कुछ भाषाओं में उपलब्ध है। चैट लिस्ट - अब ऑफिस, परिवार, दोस्तों या किसी प्रोजेक्ट से जुड़ी चैट्स को अलग-अलग लिस्ट्स में रखा जा सकता है। किसी चैट को दबाकर रखें, फिर Add to List चुनें और इसे नई या पुरानी लिस्ट में जोड़ दें। इससे जरूरी चैट्स ढूंढने में समय नहीं लगता है। मेटा एआई सपोर्ट - अब मेटा एआई को अलग चैट में खोलने की जरूरत नहीं है। चैट के दौरान ही एआई से जानकारी लेना, टेक्स्ट लिखवाना, ट्रांसलेट कराना या आइडिया बनाना संभव है। इससे किसी दोस्त से बात करते हुए भी बिना चैट छोड़े जानकारी हासिल की जा सकती है। बिना नंबर सेव के मैसेज - नए व्यक्ति को मैसेज भेजने के लिए नंबर सेव नहीं करना होगा। ब्राउजर में wa.me/91XXXXXXXXXX टाइप करें। यहां 91 भारत का कंट्री कोड है और उसके बाद व्यक्ति का मोबाइल नंबर लिखें। इससे सीधे उस व्यक्ति की वॉट्सएप चैट खुल जाएगी। क्लाउड बैकअप - वॉट्सएप चैट्स तो पहले से एंड-टु-एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं, लेकिन गूगल ड्राइव या आई क्लाउड पर इनके सेव बैकअप अलग से सुरक्षित नहीं होता है। ऐसे में यह सेटिंग सक्रिय करना जरूरी हो जाता है। इसे सुरक्षित करने के लिए जाएं: Settings > Chats > Chat Backup > End-to-End Encrypted Backup चुनें। इसके बाद एक पासवर्ड सेट करें। ध्यान रखें कि पासवर्ड भूलने पर बैकअप वापस नहीं मिलेगा।

