गेमिंग फोन बनाने वाली टेक कंपनी आईक्यू ने भारत में अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन आईक्यू 15R लॉन्च कर दिया है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7600mAh की बैटरी है, जो कंपनी के मुताबिक अब तक के किसी भी आइक्यू फोन में मिलने वाली सबसे बड़ी पावर यूनिट है। इसके अलावा, यह स्मार्टफोन क्वालकॉम के लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर के साथ आने वाला देश का तीसरा फोन है और इसमें फोटोग्राफी के लिए OIS के साथ 50 मेगापिक्सल का सोनी का कैमरा दिया गया है। आइकू 15R को 3 स्टोरेज वैरिएंट्स में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 44,999 रुपए रखी गई है। फोन की सेल 3 मार्च से शुरू होगी। शुरुआती सेल में फोन पर क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 4 हजार रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। डिजाइन: IP69 रेटिंग और अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर फोन का डिजाइन प्रीमियम है और इसे पकड़ने पर यह एक सॉलिड फ्लैगशिप का अहसास देता है। मटेरियल और कलर: इसे ट्रायम्फ सिल्वर और डार्क नाइट जैसे दो क्लासी कलर्स में लाया गया है। बैक पैनल पर स्मूथ टेक्स्चर दिया गया है। बिल्ड: फोन में ऊपर की तरफ IR ब्लास्टर और नीचे की तरफ टाइप-C पोर्ट व स्पीकर ग्रिल दी गई है। डिस्प्ले: फ्रंट में बेहद पतले बेजल्स वाली पंच-होल डिस्प्ले है। इसमें सुरक्षा के लिए अल्ट्रासोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है, जो गीले हाथों से भी अनलॉक हो जाता है। सेफ्टी: इसे IP68 और IP69 रेटिंग मिली है, जो इसे धूल और पानी (गर्म पानी की बौछार भी) से सुरक्षित रखती है। आईक्यू 15R: स्पेसिफिकेशन डिस्प्ले: फोन में 6.59-इंच की 1.5K एमोलेड स्क्रीन दी गई है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है और इसकी पीक ब्राइटनेस 5000 निट्स है। आंखों की सुरक्षा के लिए 4320Hz PWM डिमिंग दी गई है। कैमरा: रियर में डुअल कैमरा सेटअप है। इसमें OIS के साथ 50MP सोनी LYT700V मेन सेंसर और 8MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस है। सेल्फी के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। परफॉर्मेंस: फोन में 3nm का स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 चिपसेट है, जिसकी अधिकतम क्लॉक स्पीड 3.8GHz है। इसमें हैवी गेमिंग के लिए 6.5k आइस कोर VC कूलिंग सिस्टम लगा है। पावरबैकअप: 7600mAh की बैटरी को चार्ज करने के लिए 100W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट है। टेस्टिंग में यह फोन 45 मिनट में 20% से 100% फुल चार्ज हो गया। सॉफ्टवेयर और अन्य फीचर्स यह फोन लेटेस्ट एंड्रॉयड 16 पर आधारित ओरिजन OS 6.0 पर चलता है। कंपनी ने इसके साथ 4 साल के OS अपग्रेड और 7 साल के सुरक्षा अपडेट देने का वादा किया है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें ब्लूटूथ 6.0, Wi-Fi 7, NFC और शानदार ऑडियो अनुभव के लिए स्टीरियो स्पीकर्स दिए गए हैं।
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल कंपनियों को 20% एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल ही सप्लाई करना होगा। हालांकि, देश के कई हिस्सों में E20 (20% इथेनॉल मिक्स) पेट्रोल की शुरुआत 2023 से ही हो चुकी है, लेकिन ये ऑप्शनल था। सरकार ने हाल ही में एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया था, जिसे अब पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है। 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर का ही E20 पेट्रोल बेच सकेंगे इस फ्यूल के लिए रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) कम से कम 95 तय किया गया है, ताकि इंजनों को सुरक्षित रखा जा सके। RON यानी फ्यूल की 'नॉकिंग' (इंजन के अंदर समय से पहले आग लगना) को रोकने की क्षमता को दिखाता है। RON यह बताता है कि पेट्रोल कितना 'मजबूत' या 'सहनशील' है। जिस पेट्रोल का RON नंबर जितना ज्यादा होगा, वह उतनी ही आसानी से इंजन के दबाव को झेलेगा और बिना किसी आवाज या झटके के सही समय पर जलेगा। इससे इंजन की लाइफ बढ़ती है और वह सुचारू रूप से चलता है। अभी तक भारत में बिकने वाला साधारण पेट्रोल का 91 RON होता है और सिर्फ 'प्रीमियम' पेट्रोल (जैसे XP95) ही 95 RON का मिलता है। पुरानी गाड़ियों का माइलेज 3-7% तक गिर सकता है इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि 2023 से 2025 के बीच बने ज्यादातर वाहन E-20 ईंधन के हिसाब से ही डिजाइन किए गए हैं, इसलिए उनमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। हालांकि, बहुत पुराने वाहनों में कुछ समस्याएं दिख सकती हैं… माइलेज: पुराने वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी में 3% से 7% तक की गिरावट आ सकती है। पुर्जों पर असर: लंबे समय तक इस्तेमाल से पुराने इंजनों के रबर और प्लास्टिक के हिस्सों में खराबी आने की आशंका है। इन इलाकों में मिल सकती है थोड़ी छूट पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि असाधारण परिस्थितियों में कुछ खास इलाकों के लिए सीमित समय के लिए इस नियम से छूट दी जा सकती है। हालांकि, मुख्य रूप से यह नियम पूरे देश के फ्यूल स्टेशनों पर लागू होगा। एथेनॉल से ₹1.40 लाख करोड़ से ज्यादा विदेशी मुद्रा बचाई सरकार के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। तेल मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, 2014-15 से अब तक पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से भारत ने ₹1.40 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा, एथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का और अनाज से होता है, जिससे किसानों की आय में भी बढ़ेगी। क्या होता है एथेनॉल? एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। 1G एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठा ज्वार और मक्का से बनाया जाता है। 2G एथेनॉल : सेकंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे - चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है। 3G बायोफ्यूल : थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल को एलगी से बनाया जाएगा। अभी इस पर काम चल रहा है। अप्रैल-2023 से देश में बिक रहा E-20 पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से होने वाले एयर पॉल्यूशन को रोकने और फ्यूल के दाम कम करने के लिए दुनियाभर की सरकारें एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर काम कर रही हैं। भारत में भी एथेनॉल को पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे गाड़ियों का माइलेज भी बढ़ेगा। देश में 5% एथेनॉल से प्रयोग शुरू हुआ था जो अब 20% तक पहुंच चुका है। सरकार अप्रैल के महीने में नेशनल बायो फ्यूल पॉलिसी लागू कर E-20 (20% एथेनॉल + 80% पेट्रोल) से E-80 (80% एथेनॉल + 20% पेट्रोल) पर जाने के लिए प्रोसेस शुरू कर चुकी है। इसके अलावा देश में अप्रैल से सिर्फ फ्लेक्स फ्यूल कंप्लाइंट गाड़ियां ही बेची जा रही हैं। साथ ही पुरानी गाड़ियां एथेनॉल कंप्लाएंट व्हीकल में चेंज की जा सकेंगी। एथेनॉल मिलाने से क्या फायदा है? पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के उपयोग से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। इसके इस्तेमाल से गाड़ियां 35% कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन करती है। सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन भी एथेनॉल कम करता है। एथेनॉल में मौजूद 35% ऑक्सीजन के चलते ये फ्यूल नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को भी कम करता है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से रोकने की याचिका खारिज: सुप्रीम कोर्ट में सरकार बोली- याचिकाकर्ता इंग्लैंड का, बाहरी नहीं बताएगा कौन सा पेट्रोल इस्तेमाल करें सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के प्लान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इस प्लान के तहत देश में बिकने वाले पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जा रहा है। 2023 में एथेनॉल मिलाने की शुरुआत की गई थी। सरकार ने 2025-26 तक देश के सभी पेट्रोल पंप्स पर E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने का टारगेट रखा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने ये फैसला सुनाया। ये याचिका वकील अक्षय मल्होत्रा ने दायर की थी। पूरी खबर पढ़ें…
केंद्र सरकार ने गुरुवार को साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर धोखेबाजों का पता लगाने में मदद मिलेगी। समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर? सवाल. क्या है सिम बाइंडिंग? जवाब. सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा। सवाल. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जवाब. जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा। सवाल. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? जवाब. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। सवाल. 1 मार्च से यूजर्स को क्या करना होगा? जवाब. यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग एप काम करना बंद कर सकता है। सवाल. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? जवाब. इंडस्ट्री एसोसिएशन (IAMAI) ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉगआउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा। साथ ही उन यूजर्स को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं। सवाल. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? जवाब. केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनियों को 120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी… 1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है। 2. BSNL अफसर का मामला हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी हेल्दी कैश फ्लो जेनरेट कर रही है। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप अकाउंट हैक करने की नई ट्रिक सामने आई: CERT-In ने जारी की चेतावनी, हैकर्स घोस्ट पेयरिंग से पूरा कंट्रोल ले रहे; जानें कैसे बचें भारतीय साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In ने वॉट्सएप यूजर्स के लिए एक चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने बताया कि हैकर्स वॉट्सएप के डिवाइस लिंकिंग फीचर का गलत इस्तेमाल करके अकाउंट हैक कर रहे हैं। इस नए कैंपेन को घोस्ट पेयरिंग नाम दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
न्यूयार्क के नेवार्क में स्थित ‘वॉशिंगटन पार्क हाई स्कूल’ की एक कक्षा में इन दिनों अजीब सा सन्नाटा और फिर गहन चर्चा का शोर सुनाई देता है। यहां विषय गणित या इतिहास नहीं, बल्कि कुछ ऐसा है जो आने वाले कल की दिशा तय करेगा, एआई लिटरेसी। टीचर माइक टॉबमैन और स्कॉट कर्न ने मिलकर हाल ही में 12वीं के छात्रों के लिए अनूठा कोर्स शुरू किया है। उनका मानना है कि एआई एक कार की तरह है। वे चाहते हैं कि उनके छात्र इस टेक्नोलॉजी के सिर्फ ‘पैसेंजर’ बनकर पीछे न बैठें, बल्कि कुशल ‘ड्राइवर’ बनकर इसे सही दिशा में ले जाएं। टॉबमैन इस क्लास की तुलना ड्राइविंग टेस्ट की तैयारी से करते हैं। क्लास में वाइटबोर्ड पर एक सवाल चमकता है- ‘क्या आप तकनीक को चला रहे हैं या तकनीक आपको चला रही है?’ छात्र एड्रियन फैरेल (18) बताते हैं कि वे एआई का इस्तेमाल अपने गणित के होमवर्क की शुद्धता जांचने के लिए करते हैं। वहीं, ब्रायना पेरेज स्वीकार करती हैं कि जब वे स्पॉटिफाई का ‘एआई डीजे’ सुनती हैं, तो ‘पैसेंजर मोड’ में होती हैं क्योंकि टेक्नोलॉजी उनकी पसंद तय कर रही होती है। स्कूल के टीचर्स ने इस नए कोर्स में कुछ दिलचस्प तरीके अपनाए हैं। इतिहास की क्लास में खास चैटबॉट बनाया गया है जो छात्रों के तर्कों को चुनौती देता है। जब 17 साल की एलिसन ने दंगे के कारणों पर तर्क रखा, तो चैटबॉट ने उससे कहा-‘मैं तुम्हें इस पर थोड़ा और सोचने को कहूंगा।’ एलिसन कहती हैं, इस बहस से उनकी सोच और बेहतर हुई। एक अन्य क्लास में बच्चे एआई का इस्तेमाल ‘करियर सिमुलेशन’ के लिए कर रहे हैं। नर्स बनने की तैयारी कर रही 17 साल की अनिया ने एआई की मदद से अपने प्रोजेक्ट को ज्यादा स्पष्ट बनाया। केर्न कहते हैं,‘बच्चे आपस में बात करें या मौलिक सोच का इस्तेमाल करें, तो मैं चाहूंगा कि कभी एआई उसमें दखल न दे। कोर्स में डीपफेक, कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा जैसे गंभीर विषयों पर भी चर्चा होती है। ब्रायना कहती हैं,‘अगर ऐसे कोर्स न हों, तो हमें पता ही नहीं चलेगा कि भविष्य में हमारे सामने क्या आने वाला है।’ स्कूल अब इस एआई ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ कोर्स को 12वीं के छात्रों के लिए अनिवार्य करने की योजना बना रहा है। एआई लिटरेसी- यह ड्राइविंग टेस्ट के लिए तैयार करने जैसा एआई लिटरेसी चैटबॉट्स को समझकर इस्तेमाल करने की कला है। इसमें तीन बातें अहम हैं- पहली- स्मार्ट प्रॉम्प्टिंग, यानी चैटबॉट से सही सवाल पूछकर सही काम करवाना। दूसरी- जोखिम पहचानना, यानी देखना कि एआई कब गलत जानकारी दे रहा है या कब पक्षपाती है और तीसरी- क्रिएटिविटी, यानी एआई की मदद से कुछ नया बनाना, जैसे अब कुछ बच्चे एप खुद बना रहे हैं। टीचर इसे किशोर को ड्राइविंग टेस्ट के लिए तैयार करने जैसा मानते हैं- इसलिए इसे ‘एआई का ड्राइविंग लाइसेंस’ कहा जा रहा है|
साउथ कोरियन टेक कंपनी सैमसंग ने अपनी सबसे पावरफुल स्मार्टफोन सीरीज गैलेक्सी S26 भारत सहित ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दी है। इसमें गैलेक्सी S26 अल्ट्रा, गैलेक्सी S26+ और गैलेक्सी S26 शामिल हैं। इनकी कीमत 87,999 रुपए से शुरू होती है, जो 1,89,999 रुपए तक जाती है। वहीं, गैलेक्सी बड्स 4 सीरीज भी लॉन्च की गई है। सभी डिवाइस की प्री-बुकिंग शुरू कर दी गई है। 11 मार्च से इनकी सेल शुरू होगी। अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर स्थित सैन होजे SAP सेंटर में बुधवार रात (26 फरवरी) हुए इवेंट में कंपनी ने S26 अल्ट्रा स्मार्टफोन को खास प्राइवेसी फीचर्स के साथ पेश किया। इसमें प्राइवेसी डिस्प्ले, प्राइवेसी अलर्ट्स, प्राइवेट एल्बम, एडवांस्ड नॉक्स प्रोटेक्शन और कॉल स्क्रीनिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा तीनों स्मार्टफोन्स में क्रिएटिव स्टूडियो, फोटो असिस्ट, ऑडियो इरेजर और ऑटो ट्रिम और नोट समरी, चैट असिस्ट, रियल-टाइम लैंग्वेज ट्रांसलेशन, सर्कल टू सर्च जैसे एडवांस्ड AI फीचर्स को अपग्रेड किया गया है। S26 सीरीज के स्मार्टफोन्स में 7 साल तक सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट मिलेगा। S26 अल्ट्रा के मुख्य प्राइवेसी फीचर्स 1. प्राइवेसी डिस्प्ले डिस्प्ले के पिक्सल इस तरह से लाइट छोड़ते हैं, कि सामने से देखने वाले को सब साफ दिखता है, लेकिन साइड से देखने वाले को स्क्रीन काली या धुंधली दिखती है। आप इसे सेटिंग्स से या पावर बटन को दो बार दबाकर तुरंत ऑन/ऑफ कर सकते हैं। आप चाहें तो अपनी पसंद के एप को भी इस फीचर से प्रोटेक्ट कर सकते हैं। इसके दो मोड हैं… 2. प्राइवेसी अलर्ट्स सैमसंग ने इसमें AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया है। अगर कोई एप आपकी मर्जी के बिना बैकग्राउंड में आपकी लोकेशन, कॉल लॉग्स या कॉन्टैक्ट्स एक्सेस करने की कोशिश करता है, तो फोन आपको तुरंत 'रियल-टाइम अलर्ट' देगा। 3. एडवांस्ड नॉक्स प्रोटेक्शन 4. प्राइवेट एल्बमअब गैलरी में ही एक खास 'प्राइवेट एल्बम' का फीचर दिया गया है। इसमें आप अपनी पर्सनल फोटो और वीडियो को अलग फोल्डर बनाए बिना या सैमसंग अकाउंट में लॉग-इन किए बिना सीधे छुपा सकते हैं। यह नॉक्स सुरक्षा से लॉक रहता है। 5. कॉल स्क्रीनिंगAI की मदद से यह फीचर अनजान कॉल करने वालों की पहचान करता है और उनकी कॉल उठाने से पहले ही आपको बताएगा कि वे किस काम के लिए फोन कर रहे हैं। इससे स्पैम कॉल्स से आपकी प्राइवेसी बनी रहती है। गैलेक्सी AI की मदद से वीडियो एडिट कर सकेंगे क्रिएटिव यूजर्स के लिए फोटो असिस्ट और क्रिएटिव स्टूडियो जैसे ऑप्शन्स दिए गए हैं। इनसे इमेज में ऑब्जेक्ट हटाना, बैकग्राउंड एडजस्ट करना और फोटो में एक्स्ट्रा चीजों को जोड़ा जा सकेगा। वहीं गैलेक्सी AI की मदद से वीडियो को भी एडिट किया जा सकेगा। इसके अलावा, नया सुपर स्टडी वीडियो, होरिजोंटल लॉक स्टाइल, लो-लाइट में फोटो-वीडियो के लिए नाइटोग्राफी, 30fps पर 8K वीडियो रिकॉर्डिंग और APV कोडेक जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। APV कोडेक से कम साइज में हाई-क्वालिटी वीडियो रिकॉर्ड की जा सकेगी और सबसे बड़ी बात, बार-बार एडिट करने के बाद भी वीडियो क्वालिटी खराब नहीं होगी। सैमसंग गैलेक्सी S26 सीरीज में मुख्य एआई फीचर्स सर्किल टू सर्च 2.0 सैमसंग गैलेक्सी S26 स्मार्टफोन सीरीज में सर्किल टू सर्च फीचर अपग्रेड हो गया है। अब आप स्क्रीन पर किसी भी कठिन गणित के सवाल या फिजिक्स के फॉर्मूले को सर्किल करेंगे, तो AI न सिर्फ उसका जवाब देगा, बल्कि उसे स्टेप-बाय-स्टेप हल करने का तरीका भी बताएगा। अगर आपके बैकग्राउंड में कोई गाना बज रहा है, तो बस होम बटन दबाकर होल्ड करें, वह तुरंत उस गाने का नाम और सिंगर बता देगा। रियल-टाइम वीडियो कॉल ट्रांसलेशन पहले यह सिर्फ फोन कॉल तक सीमित था, लेकिन S26 में अब यह वॉट्सएप, इंस्टाग्राम और गूगल मीट जैसे ऐप्स पर भी काम करेगा। अगर आप किसी विदेशी से वीडियो कॉल पर बात कर रहे हैं, तो AI रियल-टाइम में उनकी भाषा को हिंदी में ट्रांसलेट करके स्क्रीन पर दिखाएगा और आपकी बात उन्हें उनकी भाषा में सुनाएगा। नोट असिस्ट और वेब समरी जनरेटिव वॉलपेपर और स्टूडियो आप अपनी किसी भी नॉर्मल सेल्फी को 3D कार्टून, वॉटरकलर पेंटिंग या स्केच में बदल सकते हैं। इसके अलावा, आप सिर्फ लिखकर अपने फोन के लिए यूनिक वॉलपेपर तैयार करवा सकते हैं। ग्राफिक -अंकित पाठक
रेनो इंडिया अपनी सबसे पॉपुलर SUV 'डस्टर' को भारतीय बाजार में 17 मार्च को लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने 27 जनवरी को इसे नए डिजाइन के साथ रिवील किया था। नई डस्टर न सिर्फ लुक में ज्यादा मस्कुलर हो गई है, बल्कि इसमें पहली बार स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन और 2 टर्बो इंजन का ऑप्शन भी दिया गया है। कंपनी ने इसे नए R-GMP प्लेटफॉर्म पर तैयार किया है। इसकी एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत करीब ₹10 लाख हो सकती है। नई डस्टर की बुकिंग ₹21,000 के टोकन अमाउंट के साथ शुरू की गई है। टर्बो-पेट्रोल वैरिएंट की डिलीवरी अप्रैल से शुरू होगी, जबकि हाइब्रिड दिवाली के आसपास शोरूम पर मिलेगा। कार में गूगल OS के साथ टच स्क्रीन इन्फॉटेन्मेंट सिस्टम, पैनोरमिक सनरूफ, 700 लीटर का बूट स्पेस, 360-डिग्री कैमरा, 18-इंच अलॉय व्हील्स जैसे फीचर्स मिलेंगे। वहीं, 6 एयरबैग्स के साथ 31 स्टैंडर्ड सेफ्टी फीचर्स और 17 एडवांस ड्राइविंग असिस्ट सिस्टम (ADAS) भी दिया जाएगा। साल 2012 में पहली बार लॉन्च हुई डस्टर ने भारत में कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की शुरुआत की थी, जिसे 2022 में डिस्कंटीन्यू कर दिया गया था। अब 3 साल बाद इसकी भारत में एंट्री हुई है। नई डस्टर हुंडई क्रेटा, टाटा सिएरा, किआ सेल्टोस, मारुति विक्टोरिस, मारुति ग्रैंड विटारा, टोयोटा हाइराइडर को टक्कर देगी। एक्सटीरियर डिजाइन: Y-शेप्ड हेडलैंप्स और 18-इंच के अलॉय व्हील्स न्यू जनरेशन डस्टर को CMF-B प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। इस प्लेटफॉर्म को डेसिया, रेनो और निसान ने मिलकर डेवलप किया है। नई डस्टर का डिजाइन ग्लोबल मार्केट में बिकने वाले मॉडल डेसिया से इन्सपायर्ड है। इंटीरियर डिजाइन: 10.1 इंच की टचस्क्रीन और डबल-लेयर डैशबोर्ड नई डस्टर में डबल-लेयर डैशबोर्ड दिया गया है, जिसमें हल्के और डार्क ब्लैक शेड्स हैं। सेंटर कंसोल ड्राइवर की ओर थोड़ा झुका हुआ है। हायर वैरिएंट में दो डिजिटल स्क्रीन मिलेंगी। इसमें ड्राइवर के लिए 7 इंच की स्क्रीन और इंफोटेनमेंट के लिए गूगल OS के साथ 10.25 इंच की टचस्क्रीन शामिल है। सेंटर AC वेंट के नीचे एक हॉरिजोंटल पैनल में कई बटन मिलते हैं, जो इंफोटेनमेंट और HVC सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। एक 12V पावर सॉकेट और USB आउटलेट को नीचे की ओर प्लेस किया गया है। ऐसा लगता है कि मैनुअल गियरबॉक्स से लैस डस्टर का गियर लीवर मौजूदा रेनॉल्ट मॉडल से लिया गया है और यह भारत में काइगर और ट्राइबर के समान दिखता है। हायर वैरिएंट में ऑटोमेटिक गियरबॉक्स ऑप्शन और एक इलेक्ट्रॉनिक पार्किग ब्रेक भी मिलता है। तीन-स्पोक स्टीयरिंग व्हील भारी दिखता है और इसमें इंफोटेनमेंट, टेलीफोनी और क्रूज कंट्रोल के लिए बटन हैं। टॉप-स्पेक डस्टर के फीचर्स में वायरलेस चार्जिंग और वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एपल कारप्ले कनेक्टिविटी, ऑटोमेटिक क्लाइमेंट कंट्रोलऔर 6 स्पीकर के साथ एक आर्कमिस 3D साउंड सिस्टम शामिल होगा। नई डस्टर में ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सहित ADAS जैसे सेफ्टी फीचर भी मिलेंगे। परफॉर्मेंस: हाइब्रिड सिस्टम के साथ 3 इंजन ऑप्शन नई रेनो डस्टर में 3 इंजन ऑप्शन दिए गए हैं। इसमें एक माइल्ड हाइब्रिड के साथ 1.3 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन है, जो 160PS की पावर और 280Nm का टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए इस इंजन के साथ 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड DCT ऑटोमेटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन दिया गया है। वहीं दूसरा, 1-लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 100PS की पावर और 160Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसके साथ 6 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन का ऑप्शन मिलेगा। वहीं तीसरा, 1.8 लीटर का स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इंजन भी है, जो 8 स्पीड DHT ट्रांसमिशन के साथ आएगा। दिवाली 2026 तक लॉन्च होने वाले इस वर्जन में 1.4kWh की बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर मिलेगी। इसका कुल सिस्टम आउटपुट 160hp होगा।
टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में मंगलवार को चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर हुई चर्चा बेनतीजा रही। मीटिंग के दौरान मतभेद उभरने के बाद खुद चंद्रशेखरन ने अपना कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को टालने की बात कही। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप तभी सबसे अच्छा काम करता है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के फैसले एक समान हों। नोएल टाटा ने नए बिजनेस के घाटे पर जताई चिंता इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने मीटिंग के दौरान ग्रुप के कुछ नए बिजनेस में हो रहे घाटे का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा की मांग की। हालांकि, बोर्ड के अन्य निदेशकों ने चंद्रशेखरन का समर्थन करते हुए कहा कि ये घाटे 'ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स' (नए शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स) से जुड़े हैं। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को मुनाफा देने में थोड़ा समय लगता है और यह पहले से तय योजना का हिस्सा है। कार्यकाल विस्तार के लिए नोएल टाटा की 4 शर्तें माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए चार प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं: चंद्रशेखरन को जून में रिटायरमेंट नियमों से चाहिए होगी छूट एन चंद्रशेखरन इस साल जून में 63 वर्ष के हो जाएंगे। टाटा संस के नियमों के मुताबिक, नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल तय है। अगर उनका कार्यकाल फरवरी 2027 के बाद भी आगे बढ़ाया जाता है, तो इसके लिए बोर्ड को एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास करना होगा और रिटायरमेंट नियमों में छूट देनी होगी। निदेशकों ने की वोटिंग की पेशकश, चेयरमैन ने टाला फैसला बोर्ड की पुनर्नियुक्ति समिति की प्रमुख अनीता जॉर्ज ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि नए प्रोजेक्ट्स में शुरुआती घाटे सामान्य बात है। चर्चा के बाद जब कुछ निदेशकों ने इस मुद्दे पर वोटिंग कराने का प्रस्ताव दिया, तो चंद्रशेखरन ने खुद इसे फिलहाल टालने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि टाटा संस और मुख्य शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स के बीच पूर्ण सहमति होना ग्रुप के भविष्य के लिए जरूरी है। टाटा ग्रुप में विवाद, सरकार को दखल देना पड़ा रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया। वहीं नवंबर 2024 में नोएल को टाटा संस के बोर्ड में भी शामिल किया गया। लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया यह फैसला ट्रस्ट के भीतर एकमत नहीं था। इससे टाटा संस को कंट्रोल करने वाले टाटा ट्रस्ट्स में बोर्ड सीट को लेकर सीधा-सीधा बंटवारा हो गया। एक गुट बोर्ड मेंबर नोएल टाटा के साथ है, तो दूसरा गुट मेहली मिस्त्री के साथ। मिस्त्री का कनेक्शन शापूरजी पल्लोनजी फैमिली से है जिसकी टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। टाटा संस की बोर्ड सीट को लेकर हुए विवाद के बीच 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने गृहमंत्री अमित शाह के घर पर 45 मिनट की मीटिंग की। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि घरेलू झगड़े को जल्द निपटा लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो। मीटिंग में गृहमंत्री शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए। टाटा ग्रुप में टाटा संस की 66% हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1868 में की थी। यह भारत की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है, 10 अलग-अलग बिजनेस में इसकी 30 कंपनियां दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करती हैं। टाटा संस टाटा कंपनियों की प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट होल्डिंग और प्रमोटर है। टाटा संस की 66% इक्विटी शेयर कैपिटल टाटा के चैरिटेबल ट्रस्ट के पास हैं, जो एजुकेशन, हेल्थ, आर्ट एंड कल्चर और लाइवलीहुड जनरेशन के लिए काम करता है। 2023-24 में टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों का टोटल रेवेन्यू 13.86 लाख करोड़ रुपए था। यह 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है। इसके प्रोडक्ट्स सुबह से शाम तक हमारी जिंदगी में शामिल है। कंपनी चाय पत्ती से लेकर घड़ी, कार और एंटरटेनमेंट सर्विसेज देती है।
रेडमी 15C रिव्यू:बजट फोन में 50MP कैमरा और 120Hz डिस्प्ले, 6000mAh बैटरी से दो दिन चलेगा
अगर आप 10 से 15 हजार की रेंज में नया 5G स्मार्टफोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो रेडमी ने नया स्मार्टफोन रेडमी 15C लॉन्च किया है। फोन मार्केट में आते ही अपनी बड़ी बैटरी और स्ट्रांग बिल्ड क्वालिटी को लेकर सुर्खियों में है। फोन एक महीने यूज करने के साथ हमने इसे परखा है और इसकी खूबियों व खामियों को जाना है, तो चलिए जानते हैं, इसमें क्या खास है… डिजाइन: IP64 रेटिंग के साथ पॉलीकार्बोनेट बॉडी इसका बैक पैनल ग्लॉसी और ग्लिटरी फिनिश में दिया गया है, जो लाइट पड़ने पर शाइन करता है। हालांकि ये पूरा पॉलीकार्बोनेट यानी प्लास्टिक का बना है, पर हाथ में प्रीमियम फील देता है। स्मार्टफोन का वजन 212 ग्राम है, जो थोड़ा भारी लग सकता है। साइड में पावर बटन में फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है। निचले हिस्से में 3.5mm हेडफोन जैक, टाइप-C पोर्ट, माइक और सिंगल डाउन-फायरिंग स्पीकर है। इसमें 3.5mm जैक भी है और आप दो सिम के साथ एक मेमोरी कार्ड भी लगा सकते हैं। सिक्योरिटी के लिए साइड में फिंगरप्रिंट स्कैनर है जो काफी फास्ट काम करता है, और हां, IP64 रेटिंग भी है, तो हल्की-फुल्की पानी की बूंदों से डरने की जरूरत नहीं है। रेडमी 15C: स्पेसिफिकेशन्स डिस्प्ले: बात करें इसकी स्क्रीन की तो यहां 6.9 इंच का HD+ डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करता है, यानी स्क्रॉलिंग एकदम स्मूथ है। कलर्स काफी वाइब्रेंट और अच्छे लगते हैं। यह TUV सर्टिफाइड स्क्रीन है, जो ज्यादा देर तक फोन चलाने पर आंखों को सुरक्षित रखती है। परफॉर्मेंस: रेडमी 15C में परफॉर्मेंस के लिए फोन में मीडियाटेक डायमेंसिटी 6300 प्रोसेसर है, जो 2.4 गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। ये इस बजट में काफी पावरफुल प्रोसेसर है। फोन में आप BGMI जैसे गैम 60fps पर खेल सकते हैं, लेकिन कहीं-कहीं थोड़ा लैग फील होता है। फोन एंड्रॉयड 15 पर बेस्ड हाइपर OS 2 पर काम करता है। इसमें दो फीचर्स काम के हैं- पहला, आप बिना किसी अनाउंसमेंट के कॉल रिकॉर्ड कर सकते हैं। दूसरा, इसमें सर्कल टू सर्च और गूगल जेमिनी AI का सपोर्ट भी है। कंपनी ने 2 साल के एंड्रॉइड अपडेट्स का भी वादा किया है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए बैक पैनल पर 50MP का मेन कैमरा है। दिन की रोशनी में ये काफी अच्छी और शार्प फोटोज लेता है, खास तौर पर इसके पोर्ट्रेट शॉट्स हमें पसंद आए। वीडियो रिकॉर्डिंग 1080p में 30fps पर रिकॉर्ड कर सकते हैं, जिसकी स्टेबिलिटी डिसेंट है। सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा है, जो सोशल मीडिया के लिए ठीक-ठाक फोटो देता है। बैटरी: फोन की सबसे बड़ी ताकत की बात करें तो पावर बैकअप के लिए इसमें 6000mAh की बैटरी दी गई है। यह 19 घंटे, 18 मिनट का PC मार्क बैटरी बेंचमार्क स्कोर हासिल कर चुकी है। अगर आप नॉर्मल यूजर हैं, तो ये बैटरी आराम से 2 दिन चलेगी। इसके साथ 33W का चार्जर दिया गया है। इसके साथ ही फोन में रिवर्स चार्जिंग भी मिलती है, जिससे दूसरे डिवाइस चार्ज कर सकते हैं। कीमत: कुल मिलाकर रेडमी 15C एक डिसेंट डिवाइस है। कंपनी ने स्मार्टफोन को 3 वैरिएंट में पेश किया है। इसके 4GB रैम वैरिएंट की कीमत 12,499 रुपए, 6GB रैम वेरिएंट की 13,999 रुपए और 8GB रैम वैरिएंट की 15,499 रुपए है। फोन डस्ट पर्पल, मूनलाइट ब्लू और मिडनाइट ब्लैक कलर ऑप्शन के साथ अवेलेबल है। फाइनल वर्डिक्ट अगर आपकी प्रायोरिटी बड़ी बैटरी, नया सॉफ्टवेयर और अच्छे लुक्स हैं, तो ये एक सॉलिड डील है। बस गेमिंग और डिस्प्ले रेजोल्यूशन में थोड़ा समझौता करना होगा।
फेसबुक और गूगल सहित अमेरिका की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के सामने एक नई तरह की चुनौती आ रही है। कई देशों की सरकारें टीनएजर्स के लिए इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म पर रोक लगा रही हैं। वे एप्स को लत लगाने वाला और नुकसानदेह बता रही हैं। हालांकि टेक्नोलॉजी कंपनियां ने जवाबी मुहिम छेड़ दी है। यूरोपियन यूनियन (ईयू) में अमेरिकी कंपनियों ने पिछले साल बड़े होर्डिंग लगाने,राजनेताओं को लुभाने और अपनी लॉबिंग लॉबी मजबूत करने पर भारी खर्च किया है। दरअसल, यूरोपीय संसद में टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने के प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं। 720 सदस्यीय संसद में सोशल मीडिया पर बैन के विधेयकों को आसानी से रोका जा सकता है। बड़ी टेक कंपनियों ने ईयू के सांसदों की लॉबिंग पर पिछले वर्ष 1615 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। कॉरपोरेट यूरोपियन ऑब्जर्वेटरी और लॉबी कंट्रोल संगठन के अनुसार 2021 से 2025 के बीच फैसलों को इंडस्ट्री के पक्ष में करने के लिए चली मुहिम में 55% से अधिक इजाफा हुआ है। सबसे अधिक खर्च फेसबुक की कंपनी मेटा ने किया है। इसके बाद गूगल है। इन कंपनियों के खिलाफ याचिका दायर करने वालों ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब को डिटिजल कैसिनो कहा है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों का आरोप है कि प्लेटफॉर्म के अनंत स्क्रॉलिंग जैसे फीचर युवा यूजरों को आदी बनाते हैं। टेक कंपनियां मानती हैं कि यूरोपियन यूनियन के 27 देशों में लागू होने वाले नए कानून से दुनिया भर में उनके कामकाज पर असर पड़ेगा। इसलिए यूरोपीय राजनेताओं को मनाने पर ज्यादा जोर लगाया जा रहा है। वे प्रतिबंध के विकल्प के लिए तगड़ी मुहिम चला रही हैं। यूरोपीय सांसदों से चर्चा में मेटाने टीन अकाउंट्स का प्रस्ताव दिया है। 2024 में पेश इन अकाउंट्स में 16 साल से कम आयु के यूजर्स के अकाउंट पर पैरेंट्स का नियंत्रण रहता है। कुछ कंपनियां ने 15,16 साल से कम आयु के लिए माता-पिता की मंजूरी जरूरी करने का प्रस्ताव दिया है। यूरोपीय आयोग इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमत हो गया है। यूरोप के प्रारूप प्रस्ताव डिजिटल फेयरनेस एक्ट पर ब्रसेल्स में इस साल मतदान हो सकता है। रेलवे स्टेशनों पर होर्डिंग से लेकर बड़े-बड़े विज्ञापन तक छप रहे वाशिंगटन के ट्रेड ग्रुप- कंप्यूटर एंड कम्युनिकेशन इंडस्ट्री एसोसिएशन ने ब्रसेल्स में रेलवे स्टेशनों पर होर्डिंग लगाए हैं। इनमें ईयू से सोशल मीडिया प्रतिबंधों को रद्द करने की अपील की गई है। विज्ञापनों में प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कारक जोहान्स गुटेनबर्ग, रेडियो बनाने वाले गुग्लिमो मार्कोनी जैसे यूरोपियन आईकन दिखाए गए हैं। पिछले साल नवंबर में मेटा ने यूरोप के अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन दिया। सांसदों को प्रभावित करने के लिए 890 लॉबिस्ट सक्रिय ब्रसेल्स में 890 फुलटाइम लॉबिस्ट काम कर रहे हैं। यह यूरोपीय संसद के सदस्यों की संख्या से अधिक है। ये लॉबिस्ट सोशल मीडिया बैन के खिलाफ अभियान चलाने के साथ यूरोप के एआई कानून और डेटा प्राइवेसी नियमों को बेअसर करना चाहते हैं। टेक कंपनियां धुर दक्षिणपंथी सांसदों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। अकेले मेटा ने जुलाई 2024 और दिसंबर 2025 के बीच सांसदों के साथ 38 बैठकें की हैं। अमेरिका के आठ राज्यों सहित कई देशों में पहल पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया है। इसके बाद फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क का कहना है कि वे जल्द अपनी नीति की घोषणा करेंगे। अमेरिका के 8 राज्यों में भी किशोरों को सोशल मीडिया से अलग रखने केविधेयक पेश किए गए हैं।
इसुजु इंडिया ने भारतीय बाजार में अपने पॉपुलर पिक-अप ट्रक वी-क्रॉस का 2026 अपडेटेड मॉडल लॉन्च कर दिया है। नए मॉडल की सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी ने अब इसके 4x2 वैरिएंट को पूरी तरह बंद कर दिया है, यानी अब यह कार केवल 4x4 ऑप्शन में ही खरीदी जा सकेगी। एडवेंचर और ऑफ-रोडिंग के शौकीनों के लिए इसमें कई हाई-टेक फीचर्स जोड़े गए हैं, जो इसे पहले से ज्यादा प्रीमियम बनाते हैं। इसुजु वी-क्रॉस: वैरिएंट वाइस प्राइस एक्सटीरियर: ब्लैक फिनिश ग्रिल और 18-इंच के अलॉय व्हील्स 2026 मॉडल के डिजाइन में छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव किए गए हैं। फ्रंट प्रोफाइल: ग्रिल के चारों ओर अब पियानो ब्लैक फिनिश वाली पट्टी दी गई है। फॉग लैंप्स के चारों ओर बॉडी कलर की फिनिशिंग है और स्किड प्लेट पर क्रोम का हल्का टच मिलता है। साइड और रियर प्रोफाइल: इसमें 18-इंच के नए अलॉय व्हील्स और लंबी काली रूफ रेल्स दी गई हैं। डोर हैंडल्स पर क्रोम फिनिश और ORVM पर इंटीग्रेटेड एलईडी टर्न इंडिकेटर्स मिलते हैं। कलर ऑप्शंस: यह कुल 7 कलर्स में उपलब्ध है, जिसमें नॉटिलस ब्लू और स्पिनेल माइका जैसे शेड्स शामिल हैं। इंटीरियर: ब्लैक-ब्राउन थीम के साथ प्रीमियम केबिन केबिन के अंदर कदम रखते ही आपको नया ब्लैक और ब्राउन कलर का डुअल-टोन केबिन मिलता है। इसमें लेदरेट अपहोल्स्ट्री और डैशबोर्ड पर सॉफ्ट-टच लेयर्स का इस्तेमाल किया गया है। सेंटर कंसोल में एक रोटरी नॉब दिया गया है, जिससे अलग-अलग मोड्स को कंट्रोल करना आसान हो जाता है। फीचर्स: 10.3-इंच की बड़ी स्क्रीन और ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग इस बार कंपनी ने टेक्नोलॉजी पर खास ध्यान दिया है। इंफोटेनमेंट: पुराने 9-इंच सिस्टम की जगह अब 10.3-इंच का बड़ा टचस्क्रीन दिया गया है। इसमें वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एपल कारप्ले की सुविधा है। खास फीचर्स: इसमें पहली बार 360-डिग्री कैमरा और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) जोड़ा गया है। साथ ही 8-स्पीकर साउंड सिस्टम, 6-वे पावर एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और क्रूज कंट्रोल जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। परफॉरमेंस: दमदार डीजल इंजन और 4WD सेटअप इंजन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें पहले वाला ही भरोसेमंद इंजन मिलता है: इंजन: 1.9-लीटर, 4-सिलेंडर डीजल इंजन। पावर/टॉर्क: यह 163 PS की पावर और 360 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन: इसमें 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक का विकल्प मिलता है। अब यह स्टैंडर्ड रूप से 4-व्हील ड्राइव (4WD) के साथ आती है। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स और ट्रैक्शन कंट्रोल सुरक्षा के लिहाज से नई वी-क्रॉस में कई फीचर्स शामिल हैं: इसमें टॉप वैरिएंट्स में 6 एयरबैग्स दिए गए हैं। एबीएस (ABS) के साथ ईबीडी (EBD), हिल स्टार्ट असिस्ट और हिल होल्ड कंट्रोल। ट्रैक्शन कंट्रोल, रियर डिफॉगर और बच्चों की सुरक्षा के लिए ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट्स।
चीनी इंजीनियर हॉवर्ड हुआंग की कहानी किसी साइंस फिक्शन फिल्म के हकीकत में बदलने जैसी है। बीजिंग में हाल ही में आयोजित दुनिया के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स में जब चीनी रोबोट ‘टिएन कूं अल्ट्रा’ ने 100 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता, तो पूरी दुनिया दंग रह गई। लेकिन इस जीत के पीछे वह खास तकनीक थी, जिसने इन मशीनों को 3-डी विजन सेंसर्स के जरिये इंसानी नजर दी। इसे हुआंग की कंपनी ऑर्बेका ने बनाया है। उन्होंने 2013 में इस कंपनी की नींव रखी थी। बीजिंग यूनिवर्सिटी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से इंजीनियरिंग कर चुके हुआंग कभी सिर्फ रिसर्च पेपर लिखते थे। 2004 की फिल्म ‘आई रोबोट’ ने उनका नजरिया बदला। उन्होंने अकैडमिक करिअर छोड़कर फैक्ट्रियों के लिए रिसर्च करना शुरू किया। उनके इस काम ने उन्हें रातोरात रोबोट की दुनिया का हीरो बना दिया है। अपने इनोवेशन पर हुआंग कहते हैं, ‘हम रोबोट को ऐसी नजर देना चाहते हैं, जो इंसानों से भी बेहतर हो।’ वे कहते हैं कि हमारी कंपनी ऐसे कैमरे बनाती है जो न केवल रंग बल्कि गहराई को भी पहचानते हैं। इससे रोबोट जटिल माहौल में इंसानों की तरह नेविगेट कर पाते हैं। ऑर्बेक की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चीन और दक्षिण कोरिया के मोबाइल सर्विस रोबोटिक्स बाजार में 3डी विजन सेंसर्स की 70% हिस्सेदारी इसी कंपनी की है। कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में फिनटेक दिग्गज और जैक मा के नेतृत्व वाला ‘आंट ग्रुप’ भी है। ये कंपनियां ऑर्बेक के कैमरों का इस्तेमाज फेशियल रिकग्निशन यानी चेहरे के जरिये होने वाले भुगतान के लिए करती हैं। बहरहाल, हुआंग का पूरा ध्यान इंसान जैसे रोबोट बनाने पर है। उनकी कंपनी न केवल सेंसर्स बना रही है, बल्कि सालाना एक लाख ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोट असेंबल करने की क्षमता भी विकसित कर चुकी है। वे अब वियतनाम में अपनी दूसरी फैक्ट्री बना रहे हैं ताकि अमेरिकी बाजार की मांग पूरी की जा सके। 2025 के शुरुआती नौ महीनों में कंपनी को 90 करोड़ का लाभ हुआ, जो एक साल पहले 140 करोड़ रुपए घाटे में थी। आय 938 करोड़ रही, पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुना है। कंपनी के शेयरों में आए उछाल ने हुआंग को अरबपति बना दिया। जनवरी के मध्य तक उनकी कुल संपत्ति करीब 15 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। एआई और 3डी सेंसर्स के मिलन से आने वाली है बड़ी क्रांति -यह तकनीक रोबोट को इंसानों की तरह गहराई को पहचानने की शक्ति देती है, जिससे वे जटिल और चुनौतीपूर्ण वातावरण में आसानी से नेविगेट कर सकते हैं और आसपास की चीजों के साथ तालमेल बिठा सकते हैं।- एडवांस्ड सेंसर के कारण एआई-पावर्ड ह्यूमनॉइड का बाजार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जो 2050 तक 7.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।-इन सेंसर्स का इस्तेमाल फैक्ट्री के कामों, साफ-सफाई करने वाले सर्विस रोबोट्स और बुजुर्गों की देखभाल करने वाले ‘ह्यूमन-केयर’ बॉट्स में बड़े स्तर पर होने जा रहा है।-लिडार और 3डी विजन सेंसर्स के मेल से सेल्फ-ड्राइविंग कारों और ड्रोन्स के लिए लंबी दूरी के नेविगेशन और पहचान की सटीक राह खुल रही है।- चीन में इन पुर्जों के बड़े स्तर पर उत्पादन से ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने की लागत अगले 5-10 वर्षों में लगभग आधी हो सकती है, जिससे यह तकनीक आम उपयोग के लिए बेहद सुलभ हो जाएगी।- जेनरेटिव एआई और स्मार्ट एआई चिप्स के साथ इन विजन सेंसर्स का एकीकरण रोबोट्स को अपने वातावरण के प्रति अधिक संवेदनशील और समझदार बना रहा है।
चैटजीपीटी में सिक्योरिटी अलर्ट:ओपनएआई ने दो स्पेशल मोड लॉन्च किए, बताएगा कब आपका डेटा खतरे में है
ओपनएआई ने चैटजीपीटी में दो नए सिक्योरिटी फीचर जोड़ दिए है। लॉकडाउन मोड और एलिवेटेड रिस्क लेबल्स। इन टूल्स का उद्देश्य है कि यूजर का डेटा एआई से चोरी न हो जाए। डिजिटल पेमेंट, आधार-लिंक्ड सर्विसेज, ऑनलाइन बैंकिंग और तेजी से बढ़ते एआई इस्तेमाल के दौर में भारत जैसे देश के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। खासकर तब, जब साइबर ठगी और डेटा लीक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। साइबर ठगी से बचाव एक नया साइबर खतरा भी सामने आया है प्रॉम्प्ट इंजेक्शन। इसमें हैकर किसी डॉक्युमेंट में छिपे निर्देश डाल देता है। यूजर उसे चैटजीपीटी जैसे एआई टूल से पढ़वाता है, तो एआई अनजाने में गोपनीय जानकारी उजागर कर सकता है। मान लीजिए, आपने किसी संदिग्ध वेबसाइट का टेक्स्ट एआई से एनालाइज कराया, तो उसमें छिपा हुआ कमांड एआई को आपके सिस्टम से डेटा खींचने के लिए उकसाता है। एलिवेटेड रिस्क लेबल: पहले अलर्ट, फिर एक्शन यह फीचर यूजर को पहले ही चेतावनी देगा कि जिस फीचर या वेब-कनेक्टेड टूल का इस्तेमाल हो रहा है, वह ज्यादा डेटा एक्सपोज कर सकता है। यानी अगर चैटजीपीटी किसी बाहरी थर्ड पार्टी वेबसाइट या एप से कनेक्ट हो रहा है, तो स्क्रीन पर साफ दिखेगा कि इसमें संभावित जोखिम हो सकते हैं। इससे यूजर खुद भी तय कर सकेगा कि उसे एआई के साथ चैट में आगे बढ़ना है या नहीं। लॉकडाउन मोड: पूरी तरह ‘सेफ मोड’ चुनने का विकल्प लॉकडाउन मोड भी यूजर्स के लिए उपयोगी साबित होगा। इसे ऑन करने पर चैटजीपीटी बाहरी सिस्टम, थर्ड-पार्टी एप्स और वेब कनेक्शन को सीमित कर देगा। इससे डेटा बाहर जाने की आशंका घट जाएगी। यह फीचर खासतौर पर पत्रकारों, कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स, सरकारी अधिकारियों या संवेदनशील जानकारी से जुड़े यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकता है। वे लॉकडाउन मोड में सेफ चैट कर सकेंगे।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) देश के टोल प्लाजा को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन को पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इसके बाद टोल का भुगतान केवल फास्टैग (FASTag) या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही हो सकेगा। NHAI का उद्देश्य टोल ऑपरेशन को ज्यादा पारदर्शी और सही बनाना है। अभी देश के 1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम लागू है। टोल प्लाजा पर भीड़ कम करने के लिए लिया गया फैसलाNHAI के अनुसार टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट की वजह से अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। खास तौर पर पीक ऑवर्स (भीड़ वाले समय) में नकद लेनदेन के कारण गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाती हैं और छुट्टे पैसों को लेकर विवाद भी होते हैं। डिजिटल पेमेंट पूरी तरह अनिवार्य होने से ये समस्या नहीं रहेगी। 98% गाड़ियों पर पहले से ही लगा है FASTagदेश में फास्टैग का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल 98% से ज्यादा वाहनों में फास्टैग लगा हुआ है। नेशनल हाईवे शुल्क नियमों के मुताबिक, अगर कोई वाहन बिना एक्टिव फास्टैग के टोल प्लाजा की फास्टैग लेन में जाता है और नकद भुगतान करता है, तो उससे दोगुना टोल वसूला जाता है। वहीं, अगर कोई यूजर UPI के जरिए भुगतान करता है, तो उसे लागू टोल दर का 1.25 गुना चार्ज देना होता है। 1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर बदल जाएगा सिस्टमNHAI का यह कदम देश के 1,150 से अधिक टोल प्लाजा और एक्सप्रेसवे पर लागू होगा। अथॉरिटी का मानना है कि पूरी तरह डिजिटल ट्रांजेक्शन होने से डेटा मैनेजमेंट में आसानी होगी और राजस्व की लीकेज भी रुकेगी। यह पहल सरकार के उस बड़े उद्देश्य का हिस्सा है जिसमें नेशनल हाईवे नेटवर्क को टेक्नोलॉजी से जोड़कर हाई-एफिशिएंसी वाला बनाना है।
भारतीय मूल की आशा शर्मा को माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग का नया सीईओ नियुक्त किया गया है। वे लंबे समय से इस पद को संभाल रहे फिल स्पेंसर की जगह लेंगी। स्पेंसर लगभग 40 साल तक कंपनी के साथ रहने के बाद रिटायर हो रहे हैं। वें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला को रिपोर्ट करेंगी। मेटा और इंस्टाकार्ट में लीडरशिप रोल निभा चुकी हैं आशा आशा शर्मा माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग की कमान संभालने से पहले कंपनी के ही एआई प्लेटफॉर्म और प्रोडक्ट लीडरशिप टीम का हिस्सा थीं। इससे पहले वे मशहूर डिलीवरी फर्म 'इंस्टाकार्ट' में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और ‘मेटा’ में प्रोडक्ट लीडरशिप जैसे अहम पदों पर रह चुकी हैं। आशा ने मिनेसोटा यूनिवर्सिटी के कार्लसन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से बिजनेस की डिग्री ली है। उन्हें बिजनेस स्केल करने और मुश्किल समय में टीमों को लीड करने का एक्सपर्ट माना जाता है। नियुक्ति के बाद पहला आधिकारिक मेमो भेजा आशा ने अपना पहला आधिकारिक मेमो भेजा है, जिसमें उन्होंने एक्सबॉक्स के भविष्य और गेमिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर अपनी विजन साफ कर दी है। उन्होंने कहा आज मैं माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग के CEO के तौर पर अपनी नई जिम्मेदारी शुरू कर रही हूं। मैं इस वक्त दो चीजें एक साथ महसूस कर रही हूं: विनम्रता और काम को लेकर तेजी। विनम्रता इसलिए क्योंकि इस टीम ने दशकों की मेहनत से कुछ बहुत ही शानदार खड़ा किया है। और काम में तेजी इसलिए क्योंकि गेमिंग की दुनिया बहुत बदलावों से गुजर रही है। मेरा पहला काम बहुत सीधा है: यह समझना कि यह सब कैसे काम करता है और इसे सुरक्षित रखना। इसकी शुरुआत तीन वादों के साथ होती है… 1. पहला, बेहतरीन गेम्स हर चीज की शुरुआत यहीं से होती है। इससे पहले कि हम कुछ और करें, हमारे पास ऐसे गेम्स होने चाहिए जिन्हें खिलाड़ी पसंद करें। यादगार किरदार, दिल को छू लेने वाली कहानियां, खेलने का नया तरीका और बेहतरीन क्रिएटिविटी। हम अपने स्टूडियो को और ताकत देंगे, बड़े ब्रांड्स में निवेश करेंगे और नए आइडियाज का साथ देंगे। हम रिस्क लेंगे। मैंने इसी वादे को पूरा करने के लिए मैट बूटी को प्रमोट किया है। वे गेम बनाने की कला और इसकी चुनौतियों को समझते हैं। पूरी इंडस्ट्री के डेवलपर्स उन पर भरोसा करते हैं। 2. दूसरा, एक्सबॉक्स की वापसी हम अपने उन पुराने एक्सबॉक्स फैंस और खिलाड़ियों के लिए फिर से पूरी लगन से काम करेंगे, जो पिछले 25 सालों से हमारे साथ जुड़े हैं। साथ ही उन डेवलपर्स के लिए भी जो ऐसी शानदार दुनिया और अनुभव बनाते हैं जिन्हें दुनिया भर के खिलाड़ी पसंद करते हैं। गेमिंग अब केवल एक हार्डवेयर तक सीमित नहीं है, यह हर डिवाइस पर मौजूद है। जैसे-जैसे हम PC, मोबाइल और क्लाउड की तरफ बढ़ रहे हैं। हम उन बाधाओं को दूर करेंगे ताकि डेवलपर्स एक बार गेम बनाएं और बिना किसी समझौते के हर जगह खिलाड़ियों तक पहुंच सकें। 3. तीसरा, गेमिंग का भविष्य हम गेमिंग के बदलते तौर-तरीकों को देख रहे हैं। इस दौर की जरूरतों को पूरा करने के लिए हम नए बिजनेस मॉडल और खेलने के नए तरीके खोजेंगे। इसके लिए हम अपने पास मौजूद मशहूर टीमों, किरदारों और दुनिया का सहारा लेंगे जिन्हें लोग प्यार करते हैं। जैसे-जैसे कमाई के तरीके और AI भविष्य को प्रभावित करेंगे, हम केवल थोड़े समय के फायदे के पीछे नहीं भागेंगे और न ही अपने इकोसिस्टम में बिना जान वाला 'AI स्लोप') भरेंगे। गेम्स हमेशा एक आर्ट रहेंगे, जिसे इंसानों ने बनाया है और हमारी सबसे नई टेक्नोलॉजी ने उसे निखारा है। फिल स्पेंसर गर्मियों तक सलाहकार की भूमिका में रहेंगे गेमिंग जगत का बड़ा चेहरा माने जाने वाले फिल स्पेंसर अचानक कंपनी नहीं छोड़ रहे हैं। वे इस साल गर्मियों तक कंपनी के साथ एक सलाहकार के तौर पर जुड़े रहेंगे। स्पेंसर के कार्यकाल में ही माइक्रोसॉफ्ट ने 'एक्टिविज़न ब्लिज़ार्ड' जैसी बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण किया था। गेमिंग डिवीजन में और भी कई बड़े बदलाव हुए सिर्फ सीईओ ही नहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने पूरी लीडरशिप टीम में फेरबदल किया है। मैट बूटी को चीफ कंटेंट ऑफिसर बनाया गया है, जो अब गेम स्टूडियो और नए टाइटल्स की जिम्मेदारी देखेंगे। सारा बॉन्ड ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है। इन बदलावों से साफ है कि माइक्रोसॉफ्ट अब एआई और क्लाउड गेमिंग के जरिए एक्सबॉक्स की पहचान बदलने की तैयारी में है। माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग के सामने 3 बड़ी चुनौतियां सत्या नडेला की कोर टीम में एक और भारतीय चेहरा सत्या नडेला के नेतृत्व में माइक्रोसॉफ्ट में भारतीय मूल के अधिकारियों का दबदबा बढ़ा है। वहीं आशा शर्मा की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि कंपनी गेमिंग को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एआई और क्लाउड बिजनेस का भविष्य मान रही है। नॉलेज बॉक्स: 1. 'AI Slop' क्या है जिसका जिक्र आशा ने किया? टेक की भाषा में 'AI Slop' उस कंटेंट को कहा जाता है जो एआई द्वारा बिना किसी मानवीय रचनात्मकता या गुणवत्ता जांच के भारी मात्रा में तैयार किया जाता है। आशा का कहना है कि गेमिंग में इमोशन्स और ह्यूमन टच जरूरी है, जो केवल मशीनें नहीं दे सकतीं। 2. क्या है Xbox?
टाटा मोटर्स ने आज 20 फरवरी को अपनी सबसे पॉपुलर इलेक्ट्रिक माइक्रो SUV 'पंच EV' का फेसलिफ्ट मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। नई पंच EV में न सिर्फ डिजाइन और फीचर्स को अपडेट किया गया है, बल्कि कंपनी ने इसकी बैटरी क्षमता को भी बढ़ाया है। नया फेसलिफ्ट मॉडल काफी हद तक पंच के पेट्रोल (ICE) वर्जन से इंस्पायर्ड है। नई पंच EV 12.3 इंच की स्क्रीन, कनेक्टेड LED टेललाइट्स और वेंटिलेटेड सीट्स जैसे लग्जरी फीचर्स के साथ आई है। वहीं, सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग्स और 360 कैमरा जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड मिलेंगे। नई पंच मौजूदा मॉडल से 30 हजार रुपए सस्ती हुई इसकी कीमत 9.69 लाख रुपए से शुरू होती है, जो टॉप वैरिएंट में ₹12.59 लाख रुपए तक जाती है। टाटा ने नई पंच EV को 5 ट्रिम- स्मार्ट, स्मार्ट+, एडवेंचर, एम्पावर्ड और एम्पावर्ड+ में पेश किया है। इलेक्ट्रिक कार का नया बेस वैरिएंट पुराने मॉडल से ₹30,000 सस्ता है, वहीं बड़ी बैटरी वाला टॉप वैरिएंट अब ₹1.85 लाख तक किफायती हो गया है। कार की बुकिंग शुरू हो चुकी है और जल्द ही इसकी डिलीवरी भी शुरू कर दी जाएगी। टाटा पंच फेसलिफ्ट: वैरिएंट वाइस प्राइस एक्सटीरियर डिजाइन: बदला हुआ फ्रंट लुक और नए अलॉय व्हील्स फ्रंट प्रोफाइल: कार के अगले हिस्से में सबसे बड़ा बदलाव इसकी ग्रिल और लाइट सेटअप में है। फेसलिफ्ट मॉडल में हेडलैम्प्स को जोड़ने वाली काली पट्टी को हटा दिया गया है। साथ ही कनेक्टेड LED DRLs के डिजाइन में भी बदलाव किया गया है। फ्रंट स्कफ प्लेट को भी नया किया गया है। साइड और रियर: साइड प्रोफाइल में नेक्सॉन ईवी से इन्सपायर्ड नए 'एरो-ऑप्टिमाइज्ड' अलॉय व्हील्स दिए गए हैं, जो रेंज बढ़ाने में मदद करते हैं। पीछे की तरफ इसके पेट्रोल वर्जन की तरह कनेक्टेड LED टेल-लैम्प मिलने की उम्मीद है। कलर ऑप्शन: कंपनी ने इसमें एक नया 'ब्राइट येलो' कलर पेश किया है, जो हैरियर के सनलिट येलो जैसा दिखता है। इसमें कॉन्ट्रास्टिंग ब्लैक रूफ (डुअल टोन) का विकल्प भी मिलेगा। इंटीरियर: 12.3 इंच की बड़ी स्क्रीन और लग्जरी केबिन केबिन के अंदर कंपनी ने टेक्नोलॉजी और कंफर्ट पर फोकस किया है... डैशबोर्ड और डिस्प्ले: इसमें नया 12.3-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिल सकता है, जो वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एप्पल कारप्ले सपोर्ट करेगा। सीटिंग और सनरूफ: प्रीमियम फील के लिए नई सीट अपहोल्स्ट्री और वेंटिलेटेड सीट्स दी जा सकती हैं। साथ ही इसमें इलेक्ट्रिक सनरूफ का फीचर भी रहेगा। स्टीयरिंग: टाटा का नया टू-स्पोक और इल्लुमिनेटेड लोगो वाला स्टीयरिंग व्हील इसमें देखने को मिलेगा। परफॉरमेंस: 9.5 सेकंड में 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार मैकेनिकल तौर पर नई पंच ईवी में बड़े बदलाव की उम्मीद कम ही है। इसमें पहले की तरह दो बैटरी ऑप्शंस मिल सकते हैं। यह ईवी केवल 9.5 सेकेंड में 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 140kmph है। ईवी में दो ई-ड्राइव ऑप्शन है: एक 120bhp, 190Nm टॉर्क वर्जन और एक 80bhp, 114 एनएम टॉर्क वर्जन। कार में दो बैटरी पैक ऑप्शन- 25kWh (मिड रेंज) और 35kWh (लॉन्ग रेंज) मिलेंगे। मिड रेंज ट्रिम में सिंगल चार्ज पर कार 315km और लॉन्ग रेंज में 421km तक की रेंज (MIDC) मिलेगी। स्टैंडर्ड में केवल 3.3kW AC चार्जर मिलता है, जबकि लॉन्ग रेंज में 7.2kW AC चार्जर के साथ 50kW DC फास्ट चार्जिंग भी मिलती है। सेफ्टी फीचर्स: ADAS और 6 एयरबैग्स से होगी लैस ADAS टेक्नोलॉजी: पंच EV में रडार और कैमरा बेस्ड ADAS सिस्टम दिया जा सकता है, जिसमें ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन कीप असिस्ट जैसे फीचर्स होंगे। स्टैंडर्ड सेफ्टी: 6 एयरबैग्स, ABS के साथ EBD, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स इसे सेगमेंट की सबसे सेफ इलेक्ट्रिक कार बनाएंगे।
'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के आखिरी दिन भारत और अमेरिका ने 'पैक्स सिलिका' डिक्लेरेशन पर साइन किए हैं। इस समझौते का मकसद दुनिया भर में सेमीकंडक्टर और AI की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना और गैर-मित्र देशों पर निर्भरता कम करना है। अश्विनी वैष्णव बोले- सेमीकंडक्टर का हब बनेगा भारत केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी आर्थिक मामलों के सचिव जैकब हेलबर्ग ने इसपर साइन किए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अब पैक्स सिलिका का हिस्सा बन गया है, जिससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। उन्होंने बताया- भारत में पहले से ही 10 प्लांट्स पर काम चल रहा है। बहुत जल्द देश के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट में चिप का कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। वैष्णव ने यह भी साझा किया कि भारतीय इंजीनियर अब देश में ही एडवांस '2-नैनोमीटर' चिप डिजाइन कर रहे हैं। सेमिकंडक्टर इंडस्ट्री को 10 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को आने वाले समय में करीब 10 लाख अतिरिक्त स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी और दुनिया की यह उम्मीद भारत से ही है। उन्होंने कहा, देश के पास अब एक साफ दिशा और लक्ष्य है। हमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में ग्लोबल लीडरशिप लेनी है। अमेरिका बोला- भारत का प्रवेश सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं समिट में शामिल अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस गठबंधन में भारत की एंट्री को रणनीतिक रूप से अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा, भारत के पास ऐसा टैलेंट है जो किसी भी चुनौती का मुकाबला कर सकता है। भारत की इंजीनियरिंग गहराई इस गठबंधन के लिए बहुत जरूरी है। मोदी और ट्रम्प की जल्द हो सकती है मुलाकात सर्जियो गोर ने भारत में हो रही इस समिट को बेहद प्रभावशाली बताया। जब उनसे पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने संकेत देते हुए कहा- बने रहिए। मुझे यकीन है कि सही समय पर यह मुलाकात जरूर होगी। भारत-अमेरिका की साझेदारी से बिजनेस के नए रास्ते खुलेंगे भारत और अमेरिका के बीच हुए 'पैक्स सिलिका' समझौते के दौरान गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि इस समझौते का मकसद सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई चेन सुनिश्चित करना है। साथ ही, इससे अहम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बिजनेस के नए रास्ते खुलेंगे। सुंदर पिचाई ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि एआई (AI) का फायदा सबको मिलना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि गूगल अपने प्रोडक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और खास बिजनेस सॉल्यूशंस के जरिए भारत में एआई की ग्रोथ को पूरा सपोर्ट कर रहा है। क्या है पैक्स सिलिका और इसमें कौन-कौन शामिल? इसे दिसंबर 2025 में लॉन्च किया गया था। इसका मकसद एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां कच्चे माल से लेकर एडवांस इंफ्रास्ट्रक्चर तक की सप्लाई चेन सुरक्षित रहे। सदस्य देश: भारत के अलावा इस गठबंधन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इजरायल, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूएई, कतर, ग्रीस और ब्रिटेन शामिल हैं। विकासशील देश में होने वाली पहली AI समिट यह अपनी तरह का पहली एआई समिट है जो विकासशील देश में हो रही है। 5 दिन की समिट में दुनिया भर के लीडर्स, मंत्रियों और टेक कंपनियों के सीईओ ने हिस्सा लिया। समिट के दौरान टेक कंपनियों ने भारत में कई नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और डील्स का एलान किया है। आज शाम को ये लीडर्स AI को संभालने और इसके रिस्क को कम करने पर एक साझा विजन पेश करेंगे। 200 बिलियन डॉलर का निवेश आने की उम्मीद इस समिट के जरिए भारत ने खुद को ग्लोबल AI और चिप मैन्युफैक्चरिंग के केंद्र के रूप में पेश किया है। सरकार का अनुमान है कि अगले दो साल में देश में एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 200 बिलियन डॉलर का निवेश आएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (ट्विटर), यू-ट्यूब, स्नैपचैट और फेसबुक को आज से अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जाने वाले AI, यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंटेंट पर लेबल लगाना होगा। इसके साथ ही अगर कोई डीपफेक वीडियो-फोटो अपलोड होता है, तो उसे 3 घंटे में हटाने होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसके लिए IT रूल्स 2021 में बदलाव किया है। मंत्रालय ने 10 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी कर प्लेटफॉर्म्स को नए नियमों का पालन करने के आदेश जारी किए थे। नए नियम डीपफेक और AI से बने कंटेंट को लेबल और ट्रेस करने के लिए हैं। अब AI कंटेंट में साफ लिखना होगा कि यह असली नहीं, AI की मदद से बनाया गया है। इससे मिस इनफॉर्मेशन और चुनावी धांधली जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी। पीएम बोले- कंटेंट पर 'ऑथेंटिसिटी लेबल' की जरूरत पीएम ने AI समिट के दौरान सुझाव दिया कि जैसे खाने के सामान पर 'न्यूट्रिशन लेबल' होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी स्पष्ट लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी एआई से बनाया गया है। सभी AI ऑडियो-वीडियो में लेबल लगाना होगा नए रूल 3 (3) के तहत, जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म AI कंटेंट जैसी 'सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन' क्रिएट करेगा, उसे हर ऐसे कंटेंट पर प्रॉमिनेंट लेबल लगाना होगा। परमानेंट यूनिक मेटा डेटा/आइडेंटिफायर एम्बेड भी करना पड़ेगा। ये लेबल विजुअल में कम से कम 10% एरिया कवर करेगा या ऑडियो में पहले 10% टाइम में सुनाई देगा। मेटाडेटा को कोई चेंज, हाइड या डिलीट नहीं कर पाएगा। प्लेटफॉर्म्स को टेक्निकल तरीके अपनाने पड़ेंगे ताकि अपलोड होने से पहले ही चेक हो जाए कि ये AI वाला है या नहीं। नए IT नियमों में ये 3 बदलाव भी यूजर्स और इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? यूजर्स अब फेक कंटेंट आसानी से पहचान सकेंगे। मिस-इनफॉर्मेशन कम होगी, लेकिन क्रिएटर्स को एक्स्ट्रा स्टेप्स लेने पड़ेंगे, जैसे लेबल लगाना। इंडस्ट्री के लिए चैलेंज ये होगा कि उन्हें मेटाडेटा और वेरिफिकेशन के लिए टेक इन्वेस्टमेंट करना होगा, जो ऑपरेशंस को थोड़ा महंगा कर सकता है। ओवरऑल, ये AI मिसयूज रोकने में मददगार साबित होगा। मंत्रालय ने इन नियमों पर क्या कहा? सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप 'ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट' बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। क्या है डीपफेक? डीपफेक एक तरह की फेक वीडियो होती है, जिसमें किसी शख्स के चेहरे, आवाज और एक्सप्रेशन बदले जाते हैं। AI टूल्स के जरिए एडिटिंग इतनी सफाई से होती है कि सही और फेक वीडियो में पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… X ने अश्लील AI कंटेंट पर सरकार को जवाब सौंपा:आईटी मंत्रालय जांच कर रहा, महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें क्रिएट कर शेयर करने का आरोप दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क के AI चैटबॉट ग्रोक (Grok) के जरिए महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरें बनाने के मामले में भारत सरकार को अपना जवाब सौंप दिया है। आईटी मंत्रालय ने 2 दिसंबर को मस्क की कंपनी को बुधवार शाम 5 बजे तक का समय दिया था। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल कर दी है, जिसकी मंत्रालय जांच कर रहा है। सरकार ने चेतावनी दी थी कि अगर AI टूल्स के गलत इस्तेमाल पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो X को भारतीय कानूनों के तहत मिल रही कानूनी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (ट्विटर), यू-ट्यूब, स्नैपचैट और फेसबुक को कल 20 जनवरी से अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जाने वाले AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कंटेंट पर लेबल लगाना होगा। इसके साथ ही अगर कोई डीपफेक वीडियो-फोटो अपलोड करता है, तो 3 में हटाने होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसके लिए IT रूल्स 2021 में बदलाव किया है, जिसका ड्राफ्ट सरकार ने 22 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था। इसके बाद मंत्रालय ने 10 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी कर प्लेटफॉर्म्स को नए नियम का पालन करने का आदेश जारी किया था। नए नियम डीपफेक और AI से बने कंटेंट को लेबल और ट्रेस करने के लिए हैं। मतलब, अब AI कंटेंट में साफ लिखना होगा कि यह कंटेंट असली नहीं, AI वाला है। इससे मिस इनफॉर्मेशन और चुनावी धांधली जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी। पीएम बोले- कंटेंट पर 'ऑथेंटिसिटी लेबल' की जरूरत पीएम ने आज AI समिट में संबोधन के दौरान सुझाव दिया कि जैसे खाने के सामान पर 'न्यूट्रिशन लेबल' होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी स्पष्ट लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या एआई द्वारा बनाया गया (फैब्रिकेटेड) है। सभी AI ऑडियो-वीडियो लेबल लगाना होगा नई रूल 3(3) के तहत, जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म AI कंटेंट जैसी 'सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन' क्रिएट करने देगा, उसे हर ऐसे कंटेंट पर प्रॉमिनेंट लेबल लगाना होगा। परमानेंट यूनिक मेटाडेटा/आइडेंटिफायर एम्बेड भी करना पड़ेगा। ये लेबल विजुअल में कम से कम 10% एरिया कवर करेगा या ऑडियो में पहले 10% टाइम में सुनाई देगा। मेटाडेटा को कोई चेंज, हाइड या डिलीट नहीं कर पाएगा। प्लेटफॉर्म्स को टेक्निकल तरीके अपनाने पड़ेंगे ताकि अपलोड होने से पहले ही चेक हो जाए कि ये AI वाला है या नहीं। नए IT नियमों में ये 3 बदलाव भी यूजर्स और इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? यूजर्स अब फेक कंटेंट आसानी से पहचान सकेंगे, मिसइनफॉर्मेशन कम होगी। लेकिन क्रिएटर्स को एक्स्ट्रा स्टेप्स करने पड़ेंगे, जैसे लेबल लगाना। इंडस्ट्री के लिए चैलेंज ये होगा कि उन्हें मेटाडेटा और वेरिफिकेशन के लिए टेक इन्वेस्टमेंट करना होगा, जो ऑपरेशंस को थोड़ा महंगा कर सकता है। लेकिन ओवरऑल, ये AI मिसयूज रोकने में मददगार साबित होगा। मंत्रालय ने इन नियमों पर क्या कहा? सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप 'ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट' बनाने के लिए है, जो जनरेटिव AI से आने वाली मिसइनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। क्या है डीपफेक? डीपफेक एक तरह की फेक वीडियो होती है, जिसमें किसी शख्स के चेहरे, आवाज और एक्सप्रेशन बदले जाते हैं। AI टूल्स के जरिए एडिटिंग इतनी सफाई से होती है कि सही और फेक वीडियो में पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… X ने अश्लील AI कंटेंट पर सरकार को जवाब सौंपा:आईटी मंत्रालय जांच कर रहा, महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें क्रिएट कर शेयर करने का आरोप दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क के AI चैटबॉट ग्रोक (Grok) के जरिए महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरें बनाने के मामले में भारत सरकार को अपना जवाब सौंप दिया है। आईटी मंत्रालय ने 2 दिसंबर को मस्क की कंपनी को बुधवार शाम 5 बजे तक का समय दिया था। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल कर दी है, जिसकी मंत्रालय जांच कर रहा है। सरकार ने चेतावनी दी थी कि अगर AI टूल्स के गलत इस्तेमाल पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो X को भारतीय कानूनों के तहत मिल रही कानूनी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
टाटा मोटर्स अपनी पॉपुलर इलेक्ट्रिक SUV पंच ईवी का फेसलिफ्ट कल 20 फरवरी को भारत में लॉन्च करने जा रही है। पंच EV जनवरी 2024 पहली बार भारत में लॉन्च हुई थी। अब दो साल बाद इसे पहला बड़ा अपडेट दिया जाएगा। कंपनी ने हाल ही में अपडेटेडेट पंच ईवी का फर्स्ट लुक रिवील किया था। नया फेसलिफ्ट मॉडल काफी हद तक पंच के पेट्रोल (ICE) वर्जन से इंस्पायर्ड होगा, जिसे पिछले महीने ही अपडेट किया गया है। नई पंच EV 12.3 इंच की स्क्रीन, कनेक्टेड LED टेललाइट्स और वेंटिलेटेड सीट्स जैसे लग्जरी फीचर्स के साथ आएगी। वहीं, सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग्स और 360 कैमरा जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड मिलेंगे। इसके साथ पहली बार कार में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) फीचर्स भी दिया जा सकता है। नई पंच ईवी की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत ₹11 से ₹15 लाख के बीच हो सकती है। कीमत और मुकाबला: मौजूदा मॉडल से थोड़ी महंगी हो सकती है कार टाटा पंच ईवी फेसलिफ्ट की कीमतों का खुलासा 20 फरवरी को लॉन्चिंग के दौरान होगा। फिलहाल मौजूदा पंच ईवी की एक्स-शोरूम कीमत ₹9.99 लाख से ₹14.44 लाख के बीच है। माना जा रहा है कि नए फीचर्स और डिजाइन अपडेट के बाद इसकी कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार में इसका सीधा मुकाबला सिट्रोएन eC3 और आने वाली हुंडई एक्सटर EV से रहेगा। एक्सटीरियर डिजाइन: बदला हुआ फ्रंट लुक और नए अलॉय व्हील्स फ्रंट प्रोफाइल: कार के अगले हिस्से में सबसे बड़ा बदलाव इसकी ग्रिल और लाइट सेटअप में है। फेसलिफ्ट मॉडल में हेडलैम्प्स को जोड़ने वाली काली पट्टी को हटा दिया गया है। साथ ही कनेक्टेड LED DRLs के डिजाइन में भी बदलाव किया गया है। फ्रंट स्कफ प्लेट को भी नया किया गया है। साइड और रियर: साइड प्रोफाइल में नेक्सॉन ईवी से इन्सपायर्ड नए 'एरो-ऑप्टिमाइज्ड' अलॉय व्हील्स दिए गए हैं, जो रेंज बढ़ाने में मदद करते हैं। पीछे की तरफ इसके पेट्रोल वर्जन की तरह कनेक्टेड LED टेल-लैम्प मिलने की उम्मीद है। कलर ऑप्शन: कंपनी ने इसमें एक नया 'ब्राइट येलो' कलर पेश किया है, जो हैरियर के सनलिट येलो जैसा दिखता है। इसमें कॉन्ट्रास्टिंग ब्लैक रूफ (डुअल टोन) का विकल्प भी मिलेगा। इंटीरियर: 12.3 इंच की बड़ी स्क्रीन और लग्जरी केबिन केबिन के अंदर कंपनी ने टेक्नोलॉजी और कंफर्ट पर फोकस किया है... डैशबोर्ड और डिस्प्ले: इसमें नया 12.3-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिल सकता है, जो वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एप्पल कारप्ले सपोर्ट करेगा। सीटिंग और सनरूफ: प्रीमियम फील के लिए नई सीट अपहोल्स्ट्री और वेंटिलेटेड सीट्स दी जा सकती हैं। साथ ही इसमें इलेक्ट्रिक सनरूफ का फीचर भी रहेगा। स्टीयरिंग: टाटा का नया टू-स्पोक और इल्लुमिनेटेड लोगो वाला स्टीयरिंग व्हील इसमें देखने को मिलेगा। परफॉरमेंस: 9.5 सेकंड में 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार मैकेनिकल तौर पर नई पंच ईवी में बड़े बदलाव की उम्मीद कम ही है। इसमें पहले की तरह दो बैटरी ऑप्शंस मिल सकते हैं। यह ईवी केवल 9.5 सेकेंड में 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 140kmph है। ईवी में दो ई-ड्राइव ऑप्शन है: एक 120bhp, 190Nm टॉर्क वर्जन और एक 80bhp, 114 एनएम टॉर्क वर्जन। कार में दो बैटरी पैक ऑप्शन- 25kWh (मिड रेंज) और 35kWh (लॉन्ग रेंज) मिलेंगे। मिड रेंज ट्रिम में सिंगल चार्ज पर कार 315km और लॉन्ग रेंज में 421km तक की रेंज (MIDC) मिलेगी। स्टैंडर्ड में केवल 3.3kW AC चार्जर मिलता है, जबकि लॉन्ग रेंज में 7.2kW AC चार्जर के साथ 50kW DC फास्ट चार्जिंग भी मिलती है। सेफ्टी फीचर्स: ADAS और 6 एयरबैग्स से होगी लैस ADAS टेक्नोलॉजी: पंच EV में रडार और कैमरा बेस्ड ADAS सिस्टम दिया जा सकता है, जिसमें ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन कीप असिस्ट जैसे फीचर्स होंगे। स्टैंडर्ड सेफ्टी: 6 एयरबैग्स, ABS के साथ EBD, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स इसे सेगमेंट की सबसे सेफ इलेक्ट्रिक कार बनाएंगे।
मारुति सुजुकी ने आज (19 फरवरी) अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा की पूरी प्राइस लिस्ट जारी कर दी है। ई-विटारा 49kWh और 61kWh के दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आई है। कंपनी का दावा है कि कार एक बर फुल चार्ज करने पर 543 किलोमीटर से ज्यादा चलती है। इलेक्ट्रिक SUV में 360 डिग्री कैमरा, एयरबैग और लेवल-2 एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसे सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹15.99 लाख रुपए रखी गई है। वहीं, BAAS प्रोग्राम के तहत बिना बैटरी के कार ₹10.99 लाख में खरीद सकेंगे। इसे मारुति के प्रीमियम नेक्सा शोरूम के जरिए बेचा जाएगा। मारुति सुजुकी ई-विटारा: वैरिएंट वाइस प्राइस ₹3.99 प्रति किलोमीटर का रेंट देना होगा, फ्री चार्ज कर सकेंगे ग्राहकों को बैटरी के लिए 'बैटरी-एज-ए-सर्विस' (BaaS) प्रोग्राम के तहत ₹3.99 प्रति किलोमीटर का रेंट देना होगा। कंपनी ने फिलहाल 49kWh बैटरी पैक वाले बेस 'डेल्टा' वैरिएंट की कीमत बताई है, पूरी प्राइस लिस्ट बाद में जारी होगी। कार डेल्टा, जेटा और अल्फा में वैरिएंट्स में मिलेगी। कार की बुकिंग 21 हजार रुपए में शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही इसकी डिलीवरी भी शुरू हो गई है। यह कार मार्केट में हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक और टाटा कर्व EV जैसी गाड़ियों को टक्कर देगी। बैटरी पैक पर 8 साल या 1,60,000 किलोमीटर तक की और गाड़ी पर 3 साल की वारंटी मिलेगी। गाड़ी की वारंटी को 5 साल तक बढ़वाया जा सकता है। इसके साथ घर पर चार्जर लगाने की सुविधा मुफ्त दी जाएगी। साथ ही, मारुति के 'e for me' एप के जरिए एक साल तक फ्री चार्जिंग की सुविधा भी मिलेगी। बैटरी एज ए सर्विस प्रोग्राम क्या है? बैटरी एज ए सर्विस (BAAS) एक बैटरी रेंटल प्रोग्राम है। इसके तहत इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर उसकी कीमत में बैटरी पैक की कीमत शामिल नहीं होती है। इसकी जगह आपसे बैटरी के इस्तेमाल के हिसाब से पैसे लिए जाएंगे। यानी आप गाड़ी जितने किलोमीटर चलाओगे उस हिसाब से बैटरी की कॉस्ट रेंटल फीस के तौर पर वसूली जाएगी। जहां हर महीने आपको EMI के तौर पर देनी होगी, लेकिन आपको बैटरी चार्ज करने के अलग से पैसे देने होंगे। एक्सटीरियर : LED हेडलैंप और 19-इंच ब्लैक व्हील सुजुकी ई विटारा को नए हार्टेक्ट-ई प्लैटफॉर्म पर डेवलप किया गया है, जिसे कंपनी ने टोयोटा के साथ मिलकर बनाया है। सुजुकी ई विटारा का एक्सटीरियर डिजाइन EVX कॉन्सेप्ट मॉडल की तरह ही है। इसके फ्रंट में पतली LED हेडलाइट और वाई-शेप्ड LED DRL और स्टाइलिश बंपर के साथ इंटीग्रेटेड फॉग लाइट दी गई हैं। बॉडी क्लेडिंग और 19-इंच ब्लैक व्हील के साथ मिड साइज SUV साइड से काफी मस्क्यूलर दिखाई देती है। पिछले गेट पर डोर हैंडल को सी-पिलर पर दिया गया है। इसके अलावा रुफ पर एक इलेक्ट्रिक सनरुफ भी है। ई विटारा के रियर में कॉन्सेप्ट वर्जन की तरह 3-पीस लाइटिंग एलिमेंट वाली कनेक्टेड LED टेल लाइट दी गई है। इंटीरियर : 6 एयरबैग स्टैंडर्ड और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक मिलेंगे ई-विटारा में डुअल-टोन ब्लैक और ऑरेंज केबिन दी गई है। इसमें 2-स्पोक फ्लेट बॉटम स्टीयरिंग व्हील और वर्टिकल ओरिएंटेड AC वेंट्स के चारों ओर क्रोम टच दिया गया है। इसके केबिन का प्रमुख हाइलाइट इंटीग्रेटेड फ्लोटिंग स्क्रीन सेटअप दिया गया है, जिसमें एक इंफोटेनमेंट और दूसरी ड्राइवर डिस्प्ले है। सुजुकी ने ई विटारा के फीचर्स का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है मारुति की इलेक्ट्रिक कार में ऑटोमैटिक AC, वेंटिलेटेड फ्रंट सीटें और वायरलेस फोन चार्जर जैसे फीचर दिए जा सकते हैं। वहीं, सुरक्षा के लिए इसमें 6 एयरबैग स्टैंडर्ड, 360 डिग्री कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे सेफ्टी फीचर मिलेंगे। परफॉर्मेंस: बैटरी पैक और रेंज यूरोपियन मार्केट में ई विटारा को दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ पेश किया गया है। इसमें 49kWh और 61kWh का बैटरी पैक ऑप्शन शामिल है। कार में 2 व्हील ड्राइव और 4 व्हील ड्राइव का ऑप्शन भी दिया गया है। 1 लाख चार्जिंग पॉइंट्स का नेटवर्क खड़ा करेगी मारुति ई-विटारा इलेक्ट्रिक को पिछले साल रिवील किया गया था कंपनी ने ईवी को पिछले साल जनवरी में हुए भारत ग्लोबल मोबिलिटी एक्सपो-2025 में रिवील किया था। इससे पहले मारुति की पेरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने पिछले साल अक्टूबर में इटली के मिलान में हुए मोटर शो EICMA-2024 में ई-विटारा को ग्लोबल मार्केट में रिवील किया था। मिड साइज इलेक्ट्रिक एसयूवी EVX का प्रोडक्शन वर्जन है, जिसे पहली बार ऑटो एक्सपो-2023 में पेश किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त 2025 को गुजरात के हंसलपुर में ई-विटारा को एक्सपोर्ट के लिए फ्लैग-ऑफ किया था। ये पूरी तरह से मेड-इन-इंडिया इलेक्ट्रिक कार है और इसे 100 से ज्यादा देशों, जैसे यूरोप और जापान में निर्यात किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त 2025 को गुजरात के हंसलपुर में ई-विटारा को एक्सपोर्ट के लिए फ्लैग-ऑफ किया था। ये पूरी तरह से मेड-इन-इंडिया इलेक्ट्रिक कार है और इसे 100 से ज्यादा देशों, जैसे यूरोप और जापान में निर्यात किया जाएगा।
चाइनीज रोबोट को गलगोटिया यूनिवर्सिटी का इन्वेंशन बताने वाली प्रोफेसर नेहा सिंह अब नई नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने लिंक्डइन प्रोफाइल पर 'ओपन टू वर्क' का स्टेटस अपडेट कर दिया है। इस मामले के आने के बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर कर दिया था। वहीं यूनिवर्सिटी ने इस पूरे मामले के लिए प्रोफेसर को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी है। यूनिवर्सिटी ने कहा, हमारी एक प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी। वे कैमरे पर आने के उत्साह में गलत तथ्य दे गईं। उन्हें प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया गया था। आईटी सचिव बोले- गलत जानकारी बर्दाश्त नहीं विवाद पर बात करते हुए आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा, हम चाहते हैं कि लोग एक्सपो में जो भी प्रदर्शित करें, उसमें उनका वास्तविक काम दिखे। हम नहीं चाहते कि ऐसे आयोजनों का इस्तेमाल किसी और तरीके से किया जाए। गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। जब उनसे पूछा गया कि क्या मंत्रालय ने पहले मॉडल्स की जांच नहीं की थी, तो उन्होंने कहा, ये चीजें बिक्री के लिए नहीं थीं, जहां हमें सर्टिफिकेशन की जरूरत हो। जब कोई प्रोडक्ट का डेमो देता है, तो हम मानकर चलते हैं कि उन्हें पता है वे क्या कह रहे हैं। अगर हम प्रदर्शनी की हर चीज को सर्टिफाई करने लगेंगे, तो लोग कहेंगे कि हम इनोवेशन को रोक रहे हैं। वीडियो वायरल होने से शुरू हुआ विवाद वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम 'ओरियन' है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी 'यूनिट्री' का 'Go2' मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में उपलब्ध है। वहीं एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस ड्रोन को कैंपस में 'शुरुआत से' तैयार करने का दावा कर रही हैं, उसे यूजर्स ने ₹40 हजार वाला रेडीमेड 'स्ट्राइककर V3 ARF' मॉडल बताया है। यूनिवर्सिटी ने माना था, हमने नहीं बनाया ये डॉग वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा था- हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है और न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है। लेकिन हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे, उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें यहीं बनाएंगे। नॉलेज बॉक्स: क्या है यूनिट्री Go2 रोबोटिक डॉग यूनिट्री Go2 चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी द्वारा बनाया गया एक एआई-पावर्ड रोबोटिक डॉग है, जो अपनी फुर्ती और एडवांस सेंसर्स के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इसमें 4D LiDAR तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जिसकी मदद से यह सीढ़ियां चढ़ने, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने और अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानता है। लगभग 2 से 3 लाख रुपए की कीमत वाला यह रोबोट वॉयस कमांड पर भी काम करता है और मुख्य रूप से तकनीकी रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है। कैसे काम करती है यह तकनीक रोबोटिक डॉग बनाने में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर का गहरा तालमेल होता है: आर्टिफिशियल मांसपेशियां: इनके पैरों में सर्वो मोटर्स या एक्चुएटर्स लगे होते हैं, जो मांसपेशियों की तरह काम करते हैं। इससे रोबोट सीढ़ियां चढ़ने और कूदने में सक्षम होता है। लिडार (LiDAR) तकनीक: लेजर पल्स के जरिए ये रोबोट अपने आसपास का 3D मैप बना लेते हैं। इससे इन्हें पता चलता है कि सामने दीवार है या कोई और रुकावट। खुद का दिमाग: मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से ये बिना किसी इंसान के बताए खुद फैसला ले सकते हैं कि किस रास्ते से जाना सुरक्षित होगा। 2011 में शुरू हुई थी गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी 2011 में शुरू हुई थी। ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग स्कूलों के जरिए डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती हैं। सुनील गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर और ध्रुव गलगोटिया CEO हैं। अब दिल्ली में चल रही AI समिट के बारे में जानें…
माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स नई दिल्ली में चल रही AI समिट में अपना मुख्य भाषण नहीं देंगे। गेट्स फाउंडेशन ने इसकी जानकारी दी। फाउंडेशन ने कहा कि यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया गया है ताकि समिट का पूरा ध्यान अपनी प्राथमिकताओं पर बना रहे। फाउंडेशन ने बताया कि समिट में बिल गेट्स की जगह अब अंकुर वोरा फाउंडेशन का पक्ष रखेंगे। अंकुर वोरा गेट्स फाउंडेशन के अफ्रीका और भारत कार्यालयों के प्रेसिडेंट हैं। वे आज समिट के एक सत्र में अपनी बात रखेंगे। अंकुर वोरा फाउंडेशन के कामों को लंबे समय से देख रहे हैं। एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेजों में नाम आने पर हटे गेट्स बिल गेट्स के समिट से हटने से वजह अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में आए उनके नाम को बताया जा रहा है। इन गुप्त दस्तावेजों को हाल ही में जारी किया गया है। एपस्टीन पर यौन अपराधों और नाबालिगों की तस्करी के गंभीर आरोप थे। 2019 में आत्महत्या के बाद, उससे जुड़े कई क्लासीफाइड दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। इन फाइलों में दावा किया गया है कि एपस्टीन और गेट्स के बीच गहरे संबंध थे। एपस्टीन ने गेट्स के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स और अन्य निजी गतिविधियों में मदद की थी। बिल गेट्स ने एक इंटरव्यू में इन मुलाकातों पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि मैंने एपस्टीन के साथ जो भी समय बिताया, मुझे उसका पछतावा है और मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। एनवीडिया CEO ने भी भारत दौरा टाला इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में गूगल के सीईओ सुंदर पिचई और ओपन-एआई के सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज शामिल हो रहे हैं। इसमें एनवीडिया के CEO जेंसेन हुआंग भी शामिल होने वाले थे, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम रद्द कर दिया है। कयास थे कि उनके हटने की वजह बिल गेट्स की मौजूदगी हो सकती है। हालांकि कंपनी ने कोई आधिकारिक कारण नहीं दिया है। PM मोदी ने AI इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन किया था PM मोदी ने 16 फरवरी को दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट में से एक 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का उद्घाटन किया था। इसके बाद उन्होंने इवेंट में शामिल हुए स्टार्टअप्स के पवेलियंस में जाकर उनके इनोवेशंस की जानकारी ली थी। ये इवेंट 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में चलेगा। समिट के साथ-साथ 'इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का भी आयोजन किया गया है। यहां दुनियाभर की कंपनियां अपने लेटेस्ट AI सॉल्यूशंस को दुनिया के सामने पेश किया है। यहां आम लोग देख सकते हैं कि एआई असल जिंदगी में कैसे काम करता है और भविष्य में AI से खेती, सेहत और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्या बदलाव लाने वाला है। 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की थीम पर समिट इस समिट की थीम राष्ट्रीय विजन 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' (सभी का कल्याण, सभी का सुख) पर आधारित है। इसका उद्देश्य मानवता के लिए AI के वैश्विक सिद्धांत को बढ़ावा देना है। समिट में 110 से ज्यादा देश और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन हिस्सा ले रहे हैं। इसमें लगभग 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 45 से ज्यादा मंत्री शामिल होने पहुंचे हैं। तीन 'सूत्रों' पर टिका है समिट का विजन इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 तीन मुख्य स्तंभों (सूत्रों) पर आधारित है - पीपल (लोग), प्लैनेट (ग्रह) और प्रोग्रेस (प्रगति)। पीपल: ह्यूमन-सेंट्रिक AI को बढ़ावा देना जो लोगों के अधिकारों की रक्षा करे। प्लैनेट: पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ AI विकास सुनिश्चित करना। प्रोग्रेस: समावेशी आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर जोर देना, ताकि समाज के हर वर्ग को लाभ मिले।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में कम्युनिकेशंस विभाग की प्रमुख (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) हैं। वह कोर टेक्निकल फैकल्टी का हिस्सा नहीं हैं। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया। विवाद के बाद मीडिया बातचीत में नेहा सिंह ने कहा कि ...
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में Jio ने रखा 'नेशन-फर्स्ट AI स्टैक' का खाका
Jio AI Stack : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो ने अपने 'नेशन-फर्स्ट AI स्टैक' की रूपरेखा पेश की। कंपनी तकनीकी रूप से इसे 'जियो AI स्टैक' नाम देती है और दावा करती है कि इसे भारत की जरूरतों और बड़े पैमाने की मांग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा ...
निसान इंडिया ने अपनी नई कॉम्पैक्ट MPV 'ग्रेवाइट' को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत ₹5.65 लाख (एक्स-शोरूम) रखी है। यह कीमत शुरुआती 5 हजार ग्राहकों के लिए लागू होगी। ग्रेवाइट को रेनो ट्राइबर के प्लेटफॉर्म पर ही बनाया गया है। 5 हजार ग्राहकों को 5 साल तक फ्री सर्विस ग्रेवाइट पर 3 साल या 1 लाख किमी की स्टैंडर्ड वारंटी मिलेगी। लेकिन ग्राहक इसे अपनी जरूरत के हिसाब से 10 साल या 2 लाख किलोमीटर तक बढ़वा सकते हैं। पहले 5 हजार ग्राहकों को शुरुआती 5 सालों के लिए 'जीरो सर्विस कॉस्ट' का फायदा मिलेगा। साथ ही, इन ग्राहकों को कार अपग्रेड करने जैसे अन्य बेनेफिट्स भी दिए जाएंगे। इंजन और माइलेज: 19.3 kmpl का दावा निसान ने अपनी नई कार ग्रेवाइट में 1.0-लीटर का 3-सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह 72hp की पावर और 96Nm का टॉर्क जनरेट करता है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही डीलर लेवल पर इसमें 'डुअल-सिलेंडर CNG किट' लगवाने की सुविधा भी मिलेगी। इंटीरियर और सीटिंग: 7 लोगों के बैठने की जगह कार के अंदर 5+2 सीटिंग कॉन्फिगरेशन मिलता है। डैशबोर्ड का लेआउट सरल है। इसमें 8-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और ड्राइवर के लिए 7-इंच का डिजिटल डिस्प्ले दिया गया है। इंटीरियर की कलर स्कीम और ट्रिम्स ट्राइबर से अलग हैं, जिससे यह अंदर से फ्रेश महसूस होती है। इसमें वायरलेस चार्जिंग पैड और कूल्ड ग्लव बॉक्स जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। एक्सटीरियर: ट्राइबर जैसा लुक, लेकिन मॉडर्न टच ग्रेवाइट का बाहरी डिजाइन काफी हद तक ट्राइबर से मिलता-जुलता है, लेकिन निसान ने इसमें कई 'कॉस्मेटिक' बदलाव किए हैं। कार के फ्रंट में नई हनीकॉम्ब पैटर्न वाली ग्रिल और हेडलाइट्स में नए सिग्नेचर वाली DRLs दी गई हैं। इसके बंपर को दोबारा डिजाइन किया गया है। इसमें C-शेप के सिल्वर फिनिश वाले हिस्से मिलते हैं। कार को अलग पहचान देने के लिए इसके बोनट और पीछे के दरवाजे (टेलगेट) पर बड़े अक्षरों में 'GRAVITE' लिखा है। ग्राहक इसे पांच रंगों-फॉरेस्ट ग्रीन, ओनिक्स ब्लैक, ब्लेड सिल्वर, स्नो व्हाइट और मेटालिक ग्रे में खरीद सकते हैं। फीचर्स: सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग्स और क्रूज कंट्रोल निसान ने इसमें फीचर्स की लंबी लिस्ट दी है। टॉप मॉडल्स में वायरलेस एपल कारप्ले और एंड्रॉइड ऑटो, पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप, ऑटोमैटिक LED हेडलैंप्स, रेन-सेंसिंग वाइपर्स और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे फीचर्स हैं। सेफ्टी के लिए इसमें 6 एयरबैग्स और रियर पार्किंग सेंसर दिए गए हैं। लॉन्च एडिशन: 1,001 यूनिट्स के लिए खास ऑफर कंपनी ने ग्रेवाइट का एक 'लॉन्च एडिशन' भी पेश किया है। इसकी केवल 1,001 यूनिट्स बेची जाएंगी। इसमें JBL का साउंड सिस्टम, डैशकैम, एम्बिएंट लाइटिंग और एयर प्यूरीफायर जैसे एक्स्ट्रा फीचर्स मिलेंगे। इसकी कीमत 8.35 लाख रुपए से शुरु होगी। नॉलेज बॉक्स 1. प्लेटफॉर्म शेयरिंग' क्या होती है जैसे मारुति और टोयोटा अपनी गाड़ियां शेयर करते हैं, वैसे ही निसान और रेनो ने एक ही ढांचे पर दो अलग दिखने वाली कारें बनाई हैं। इससे गाड़ियों की कीमत कम रखने में मदद मिलती है। 2. 10 साल की वारंटी का गणित मिडिल क्लास परिवार के लिए इसके दो बड़े फायदे हैं…
'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर चीनी रोबोटिक डॉग को अपना बताकर पेश करने के आरोप लगे हैं। हालांकि यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने इसे डेवलप करने का दावा कभी नहीं किया, बल्कि यह छात्रों के सीखने के लिए लाया गया एक टूल है। वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि मीडिया से बातचीत के दौरान रोबोटिक डॉग के फीचर्स समझा रही हैं। वीडियो में इसे 'ओरियन' नाम दिया गया और कहा गया कि इसे यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने तैयार किया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी 'यूनिट्री' का 'Go2' मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में उपलब्ध है। यूनिवर्सिटी ने माना, हमने नहीं बनाया ये डॉग वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा- हमने लगातार कैंपस में बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश की है। क्यों? क्योंकि जब छात्र नई चीजें देखते हैं, तभी उनकी सोच विकसित होती है। और यही सोच नए रचनाकारों को जन्म देती है। हाल ही में यूनिट्री से लिया गया रोबोटिक डॉग इसी सफर का एक हिस्सा है। यह सिर्फ दिखाने के लिए रखी गई कोई मशीन नहीं है, यह एक चलता-फिरता क्लासरूम है। हमारे छात्र इस पर प्रयोग कर रहे हैं, इसकी क्षमताओं को परख रहे हैं और इस प्रक्रिया में अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं। हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है और न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है। लेकिन हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे, उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें यहीं बनाएंगे। इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती। सीखने की भी नहीं होनी चाहिए। हम दुनिया भर से बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाना जारी रखेंगे ताकि हमारे छात्र उनका अध्ययन कर सकें, उन्हें चुनौती दे सकें और उनमें सुधार कर सकें और अंत में भारत से दुनिया के लिए वर्ल्ड-क्लास समाधान तैयार कर सकें। एक्स ने यूनिवर्सिटी के दावे को गलत बताया यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने इस पोस्ट पर एक 'कम्युनिटी नोट' जोड़ दिया। इसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी का यह दावा कि उन्होंने इसे अपना नहीं बताया, भ्रामक है। एक्स का कम्युनिटी नोट एक ऐसा फीचर है, जिसमें आम यूजर्स ही किसी भ्रामक पोस्ट पर सही जानकारी और संदर्भ जोड़कर उसे फैक्ट-चेक करते हैं। नॉलेज बॉक्स: क्या है यूनिट्री Go2 रोबोटिक डॉग रोबोटिक डॉग और ह्युमनॉइड रोबोट बनाती है यूनिट्री यूनिट्री चीन की एक मशहूर टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो हाई-परफॉर्मेंस वाले रोबोटिक डॉग और ह्युमनॉइड रोबोट बनाने के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। यह कंपनी मुख्य रूप से किफायती और एडवांस सेंसर वाली रोबोटिक्स तकनीक विकसित करती है, जिसका इस्तेमाल रिसर्च, एजुकेशन और इंडस्ट्रियल कामों के लिए किया जाता है।
दुनिया का सबसे पॉपुलर वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब की सर्विस अचानक ठप हो गई। डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, दुनियाभर में सुबह करीब 6 बजकर 20 मिनट से लगभग 8 बजे तक लाखों यूजर्स को इसे एक्सेस करने में परेशानी हो रही थी। सबसे ज्यादा दिक्कत इसके मोबाइल एप में आई जहां यूजर्स को समथिंग वेंट रॉन्ग मैसेज दिख रहा था। हालांकि जब इसे दो-तीन बार रिफ्रेश किया तो वीडियोज दिखने लगे थे। लेकिन पूरी तरह से ये काम नहीं कर रहा था। वहीं इसकी वेबसाइट एक्सेस हो रही थी। आउटेज ट्रैकिंग वेबसाइट डाउनडिटेक्टर के मुताबिक अमेरिका में करीब 2.83 लाख लोगों ने यूट्यूब न चलने की शिकायत की। भारत में आज सुबह 7 बजे के करीब डाउनडिटेक्टर पर शिकायतों का आंकड़ा 18 हजार को पार कर गया। यहां 71% यूजर्स एप इस्तेमाल में दिक्कत हुई। यूट्यूब टीम ने कहा- रिकमेंडेशन सिस्टम में खराबी आई यूट्यूब की टीम ने इस आउटेज को लेकर आज सुबह 07:26 मिनट पर एक X पोस्ट में कहा- अगर आपको अभी यूट्यूब चलाने में दिक्कत आ रही है, तो आप अकेले नहीं हैं। हमारी टीमें इस मामले की जांच कर रही हैं और जो भी अपडेट होगा, हम यहां जानकारी देंगे। इसके बाद एक और अपडेट में यूट्यूब ने कहा कि हमारे रिकमेंडेशन सिस्टम में एक खराबी की वजह से यूट्यूब के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स जैसे होमपेज, यूट्यूब एप, यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब किड्स पर वीडियो नहीं दिख रहे थे। होमपेज अब ठीक हो गया है, लेकिन हम अभी भी इसे पूरी तरह ठीक करने पर काम कर रहे हैं। जल्द ही और जानकारी दी जाएगी! नॉलेज बॉक्स: क्या होता है आउटेज? आउटेज एक ऐसी स्थिति होती है जब कोई सर्विस जैसे इंटरनेट, एप, वेबसाइट अचानक काम करना बंद कर देती है या उपलब्ध नहीं रहती। यह कुछ समय के लिए हो सकता है। जैसे कुछ मिनट से लेकर घंटों तक। इसका कारण सर्वर फेल होना, नेटवर्क समस्या, रखरखाव, मौसम की मार, हार्डवेयर खराबी या ज्यादा लोड पड़ना हो सकता हैं।
मारुति सुजुकी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। ई-विटारा 49kWh और 61kWh के दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आई है। कंपनी का दावा है कि कार एक बर फुल चार्ज करने पर 543 किलोमीटर से ज्यादा चलती है। इलेक्ट्रिक SUV में 360 डिग्री कैमरा, एयरबैग और लेवल-2 एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसे सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹10.99 लाख रखी गई है, लेकिन इसमें बैटरी के दाम शामिल नहीं है। इसे मारुति के प्रीमियम नेक्सा शोरूम के जरिए बेचा जाएगा। ₹3.99 प्रति किलोमीटर का रेंट देना होगा, फ्री चार्ज कर सकेंगे ग्राहकों को बैटरी के लिए 'बैटरी-एज-ए-सर्विस' (BaaS) प्रोग्राम के तहत ₹3.99 प्रति किलोमीटर का रेंट देना होगा। कंपनी ने फिलहाल 49kWh बैटरी पैक वाले बेस 'डेल्टा' वैरिएंट की कीमत बताई है, पूरी प्राइस लिस्ट बाद में जारी होगी। कार डेल्टा, जेटा और अल्फा में वैरिएंट्स में मिलेगी। कार की बुकिंग 21 हजार रुपए में शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही इसकी डिलीवरी भी शुरू हो गई है। यह कार मार्केट में हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक और टाटा कर्व EV जैसी गाड़ियों को टक्कर देगी। बैटरी पैक पर 8 साल या 1,60,000 किलोमीटर तक की और गाड़ी पर 3 साल की वारंटी मिलेगी। गाड़ी की वारंटी को 5 साल तक बढ़वाया जा सकता है। इसके साथ घर पर चार्जर लगाने की सुविधा मुफ्त दी जाएगी। साथ ही, मारुति के 'e for me' एप के जरिए एक साल तक फ्री चार्जिंग की सुविधा भी मिलेगी। बैटरी एज ए सर्विस प्रोग्राम क्या है? बैटरी एज ए सर्विस (BAAS) एक बैटरी रेंटल प्रोग्राम है। इसके तहत इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर उसकी कीमत में बैटरी पैक की कीमत शामिल नहीं होती है। इसकी जगह आपसे बैटरी के इस्तेमाल के हिसाब से पैसे लिए जाएंगे। यानी आप गाड़ी जितने किलोमीटर चलाओगे उस हिसाब से बैटरी की कॉस्ट रेंटल फीस के तौर पर वसूली जाएगी। जहां हर महीने आपको EMI के तौर पर देनी होगी, लेकिन आपको बैटरी चार्ज करने के अलग से पैसे देने होंगे। एक्सटीरियर : LED हेडलैंप और 19-इंच ब्लैक व्हील सुजुकी ई विटारा को नए हार्टेक्ट-ई प्लैटफॉर्म पर डेवलप किया गया है, जिसे कंपनी ने टोयोटा के साथ मिलकर बनाया है। सुजुकी ई विटारा का एक्सटीरियर डिजाइन EVX कॉन्सेप्ट मॉडल की तरह ही है। इसके फ्रंट में पतली LED हेडलाइट और वाई-शेप्ड LED DRL और स्टाइलिश बंपर के साथ इंटीग्रेटेड फॉग लाइट दी गई हैं। बॉडी क्लेडिंग और 19-इंच ब्लैक व्हील के साथ मिड साइज SUV साइड से काफी मस्क्यूलर दिखाई देती है। पिछले गेट पर डोर हैंडल को सी-पिलर पर दिया गया है। इसके अलावा रुफ पर एक इलेक्ट्रिक सनरुफ भी है। ई विटारा के रियर में कॉन्सेप्ट वर्जन की तरह 3-पीस लाइटिंग एलिमेंट वाली कनेक्टेड LED टेल लाइट दी गई है। इंटीरियर : 6 एयरबैग स्टैंडर्ड और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक मिलेंगे ई-विटारा में डुअल-टोन ब्लैक और ऑरेंज केबिन दी गई है। इसमें 2-स्पोक फ्लेट बॉटम स्टीयरिंग व्हील और वर्टिकल ओरिएंटेड AC वेंट्स के चारों ओर क्रोम टच दिया गया है। इसके केबिन का प्रमुख हाइलाइट इंटीग्रेटेड फ्लोटिंग स्क्रीन सेटअप दिया गया है, जिसमें एक इंफोटेनमेंट और दूसरी ड्राइवर डिस्प्ले है। सुजुकी ने ई विटारा के फीचर्स का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है मारुति की इलेक्ट्रिक कार में ऑटोमैटिक AC, वेंटिलेटेड फ्रंट सीटें और वायरलेस फोन चार्जर जैसे फीचर दिए जा सकते हैं। वहीं, सुरक्षा के लिए इसमें 6 एयरबैग स्टैंडर्ड, 360 डिग्री कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे सेफ्टी फीचर मिलेंगे। परफॉर्मेंस: बैटरी पैक और रेंज यूरोपियन मार्केट में ई विटारा को दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ पेश किया गया है। इसमें 49kWh और 61kWh का बैटरी पैक ऑप्शन शामिल है। कार में 2 व्हील ड्राइव और 4 व्हील ड्राइव का ऑप्शन भी दिया गया है। 1 लाख चार्जिंग पॉइंट्स का नेटवर्क खड़ा करेगी मारुति ई-विटारा इलेक्ट्रिक को पिछले साल रिवील किया गया था कंपनी ने ईवी को पिछले साल जनवरी में हुए भारत ग्लोबल मोबिलिटी एक्सपो-2025 में रिवील किया था। इससे पहले मारुति की पेरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने पिछले साल अक्टूबर में इटली के मिलान में हुए मोटर शो EICMA-2024 में ई-विटारा को ग्लोबल मार्केट में रिवील किया था। मिड साइज इलेक्ट्रिक एसयूवी EVX का प्रोडक्शन वर्जन है, जिसे पहली बार ऑटो एक्सपो-2023 में पेश किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त 2025 को गुजरात के हंसलपुर में ई-विटारा को एक्सपोर्ट के लिए फ्लैग-ऑफ किया था। ये पूरी तरह से मेड-इन-इंडिया इलेक्ट्रिक कार है और इसे 100 से ज्यादा देशों, जैसे यूरोप और जापान में निर्यात किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त 2025 को गुजरात के हंसलपुर में ई-विटारा को एक्सपोर्ट के लिए फ्लैग-ऑफ किया था। ये पूरी तरह से मेड-इन-इंडिया इलेक्ट्रिक कार है और इसे 100 से ज्यादा देशों, जैसे यूरोप और जापान में निर्यात किया जाएगा।
जीप इंडिया ने अपनी पॉपुलर 7-सीटर प्रीमियम SUV मेरिडियन का स्पेशल ट्रैक एडिशन भारत में लॉन्च किया है। यह एक लिमिटेड-रन मॉडल है, जिसे मेरिडियन के टॉप-स्पेक 'ओवरलैंड' ट्रिम पर तैयार किया गया है। कंपनी ने इसमें कई कॉस्मेटिक बदलाव किए हैं, जो इसे स्टैंडर्ड मॉडल के मुकाबले ज्यादा स्पोर्टी और प्रीमियम लुक देते हैं। कार में वेंटिलेटेड सीट्स, पैनोरमिक सनरूफ, 10.1 इंच की स्क्रीन और सेफ्टी के लिए लेवल-2 ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। इस स्पेशल एडिशन को 4x2 और 4x4 दोनों वैरिएंट्स में उतारा गया है। जीप मेरिडियन का मुकाबला टोयोटा फॉर्च्यूनर, स्कोडा कोडिएक, MG ग्लोस्टर और एमजी मेजेस्टर से है। कीमत और बुकिंग: स्टैंडर्ड मॉडल से ₹34,000 महंगा जीप मेरिडियन ट्रैक एडिशन के 4x2 ऑटोमैटिक वैरिएंट की कीमत ₹35.95 लाख है, जबकि इसके 4x4 ऑटोमैटिक वैरिएंट की कीमत ₹37.82 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। यह अपने बेस मॉडल ओवरलैंड से करीब ₹34,000 महंगा है। कंपनी ने इसकी बुकिंग डीलरशिप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शुरू कर दी है। आपको एक्स-शोरूम कीमत के अलावा 9,200 रुपए का AXS पैक भी लेना होगा।
जियो आरोग्य AI से मिनटों में हेल्थ स्क्रीनिंग, AI क्लिनिक मॉडल पेश
Jio Arogya AI Enabled : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो पैवेलियन पर प्रदर्शित 'जियो आरोग्य AI' ने प्राइमरी हेल्थकेयर के क्षेत्र में AI आधारित क्लिनिक मॉडल पेश किया है। यह AI पावर्ड सिस्टम कुछ ही मिनटों में मरीज के अहम हेल्थ पैरामीटर्स की स्क्रीनिंग ...
निसान मोटर इंडिया आज 17 फरवरी को सब-4 मीटर सेगमेंट में नई कार ग्रेवाइट लॉन्च करने जा रही है। कंपनी की नई 7-सीटर मल्टी पर्पस व्हीकल (MPV) भारत में रेनो ट्राइबर, मारुति अर्टिगा, मारुति XL6, किआ कैरेंस और किआ कैरेंस क्लाविस को टक्कर देगी। निसान ने नई MPV का फर्स्ट लुक (18 जनवरी) रिवील किया था। ये रेनो ट्राइबर के प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है और भारत में डेवलप की गई है। कार में डिजिटल क्लस्टर और सेफ्टी के लिए 360 डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। ये बजट 7-सीटर MPV सेगमेंट में निसान की नई एंट्री है। ये रेनो ट्राइबर की तरह बजट फैमिली कार होगी और इसकी एक्स-शोरूम कीमत 6 से 9 लाख रुपए के बीच हो सकती है। बुकिंग की जानकारी फिलहाल नहीं आई हैं। ट्राइबर की तरह सब-4 मीटर साइज में 7 सीट्स ग्रेवाइट की सबसे बड़ी खासियत इसका सब-4 मीटर साइज है, जिसमें 7 सीट्स के साथ फ्लेक्सिबल सीटिंग मिलेगी। थर्ड रो सीट्स रिमूवेबल होंगी, जिससे बूट स्पेस ज्यादा हो जाएगा। ये शहर में आसानी से चलने वाली और फैमिली यूज के लिए प्रैक्टिकल MPV होगी। रेनो ट्राइबर की तरह मॉड्यूलर सीटिंग सेटअप मिलेगा। एक्सटीरियर डिजाइन: स्लिम LED DRLs के साथ हनीकॉम्ब ग्रिल कार का डिजाइन कंपनी की अपकमिंग SUV टेक्टॉन की तरह होगा। इसके फ्रंट में हनीकॉम्ब डिजाइन वाली बोल्ड ग्रिल मिलेगी, जिसके बीच में निसान का लोगो है। वहीं बोनट पर ग्रेवाइट की बैजिंग दी गई है। स्लिम LED DRLs लाइट बार से कनेक्टेड हैं और हेडलैंप्स नए डिजाइन के साथ आएंगे। साइड प्रोफाइल में रूफ रेल्स, पुल टाइप डोर हैंडल्स और डुअल-टोन अलॉय व्हील्स दिखेंगे। सिल्हूट ट्राइबर जैसा ही है, लेकिन निसान स्टाइलिंग से अलग लुक मिलेगा। रियर में डिसकनेक्टेड टेल लाइट्स हैं, जिन्हें थिन क्रोम स्ट्रिप जोड़ेगी। टेलगेट पर GRAVITE लेटरिंग और सिंपल बंपर में C-शेप एलिमेंट होगा। कुल मिलाकर मॉडर्न और बोल्ड डिजाइन है। डायमेंशन सब-4 मीटर रखी गई है, कलर ऑप्शन की डिटेल लॉन्च पर आएगी। इंटीरियर: ट्राइबर से इंस्पायर्ड केबिन डिजाइन इंटीरियर ट्राइबर से इंस्पायर्ड होगा, लेकिन निसान के अपने कलर थीम और अपहोल्स्ट्री मिलेगी। डैशबोर्ड बेसिक लेआउट वाला होगा। स्टीयरिंग व्हील और सीट्स कॉम्फी होंगी। थर्ड रो तक AC वेंट्स दिए गए हैं। पैनोरमिक सनरूफ की उम्मीद कम है, लेकिन मैनुअल AC और अच्छा स्पेस मिलेगा। फुल इंटीरियर डिटेल अभी अनवील नहीं हुई है। परफॉरमेंस: 1.0 लीटर का 3 सिलेंडर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन कार में परफॉर्मेंस के लिए 1.0 लीटर का 3 सिलेंडर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो 72PS की पावर और 96Nm का टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए 5-स्पीड मैनुअल या 5-स्पीड AMT गियरबॉक्स ऑप्शनल होंगे। माइलेज की डिटेल लॉन्च पर आएगी, लेकिन ट्राइबर जैसी अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी मिलने की उम्मीद है। बाद में CNG ऑप्शन भी आ सकता है। टर्बो पेट्रोल की संभावना कम है। फीचर्स: 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम कंफर्ट और कन्वीनियंस में 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलेगा, जो एंड्रॉएड ऑटो और एपल कार प्ले सपोर्ट करेगा। 7-इंच सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, वायरलेस फोन चार्जर, पुश बटन स्टार्ट-स्टॉप, कूल्ड स्टोरेज और सेकंड रो में स्लाइड-रिक्लाइन सीट्स जैसे फीचर्स आएंगे। रियर पैसेंजर्स के लिए AC वेंट्स और 6-स्पीकर साउंड सिस्टम भी होगा। कुल मिलाकर प्रैक्टिकल फीचर्स की लिस्ट अच्छी है। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम सेफ्टी में 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), हिल स्टार्ट असिस्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), फ्रंट-रियर पार्किंग सेंसर्स और रियर पार्किंग कैमरा जैसे फीचर्स मिलेंगे। ये सेगमेंट में अच्छी सेफ्टी पैकेज देगी।
एपल ने साल 2026 के अपने पहले बड़े इवेंट की घोषणा कर दी है। इसमें कंपनी अपना अब तक का सबसे सस्ता मैकबुक, नया बजट आईफोन 17e और नया आईपैड पेश कर सकती है। यह इवेंट 4 मार्च को भारतीय समयानुसार शाम करीब 7:30 बजे शुरू होगा। 1. सबसे सस्ता मैकबुक: आईफोन वाली चिप और ब्राइट कलर्स रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपल पहली बार मैकबुक में अपनी 'M' सीरीज की जगह आईफोन में इस्तेमाल होने वाली 'A' सीरीज चिप दे सकता है। इसे खासतौर पर स्टूडेंट्स और ऑफिस यूजर्स के लिए तैयार किया गया है। इसकी कीमत 70 से 80 हजार रुपए के बीच हो सकती है। कंपनी ने न्यूयॉर्क में हो रहे इस इवेंट के जो इन्विटेशन कार्ड भेजे हैं उसमें एपल का लोगो पीले, हरे और नीले रंग में रखा है। इससे कयास हैं कि नया लैपटॉप कई ब्राइट कलर्स में आएगा। 2. आईफोन 17e: बजट सेगमेंट में नया फोन लॉन्च होने की उम्मीद एपल अपने बजट आईफोन लाइनअप में आईफोन 17e लॉन्च कर सकती है। इसमें आईफोन 17 वाली ही A19 चिप मिलने की उम्मीद है, जो पुराने मॉडल के मुकाबले काफी तेज होगी। 3. नए आईपैड और डिस्प्ले: M4 चिप के साथ पेश होने की उम्मीद आईपैड लवर्स के लिए भी इस इवेंट में काफी कुछ हो सकता है। कंपनी आईपैड एयर को M4 चिप के साथ अपडेट कर सकती है। इसके अलावा 12वीं जनरेशन का बेस मॉडल आईपैड भी पेश किया जा सकता है, जिसमें पहली बार 'एपल इंटेलिजेंस' (AI) का सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही काफी समय से पेंडिंग 'स्टूडियो डिस्प्ले' का नया वर्जन भी पेश हो सकता है। 4. एपल इंटेलिजेंस: सिरी पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट होगी कंपनी सिरी के नए AI अवतार की झलक दिखा सकती है। ये ज्यादा स्मार्ट होगी और यूजर्स के सवालों के बेहतर जवाब दे पाएगी। एपल इसे अपनी 'एप्पल इंटेलिजेंस' सर्विस के तहत प्रमोट कर रहा है, जो आईफोन और मैक के इस्तेमाल को काफी आसान बना देगा। न्यूयॉर्क, लंदन और शंघाई में एक साथ इवेंट एपल ने इस बार इवेंट का फॉरमेट थोड़ा अलग रखा है। न्यूयॉर्क के मुख्य इवेंट के साथ-साथ लंदन और शंघाई में भी प्रेस के लिए प्रोग्राम रखे गए हैं। इसे 'इवेंट' की जगह 'एक्सपीरियंस' नाम दिया है। यानी वहां मौजूद लोग तुरंत नए गैजेट्स को टेस्ट कर सकेंगे। नॉलेज बॉक्स: क्या आप जानते हैं? एपल का न्यूयॉर्क कनेक्शन: एपल ने अपना पहला रिटेल स्टोर न्यूयॉर्क के फिफ्थ एवेन्यू में खोला था, जो आज दुनिया के सबसे मशहूर स्टोर्स में से एक है। A-सीरीज बनाम M-सीरीज: लैपटॉप में आईफोन वाली चिप लगाने से बैटरी लाइफ तो बढ़ती है, लेकिन बहुत भारी काम (जैसे 4K वीडियो एडिटिंग) में यह M-सीरीज जितनी पावरफुल नहीं।
टेक कंपनी गूगल 18 फरवरी को अपना सबसे सस्ता स्मार्टफोन पिक्सल 10a भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। हालांकि लॉन्च से पहले ही फोन के लगभग सभी फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस ऑनलाइन लीक हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार कंपनी का फोकस डिजाइन में बड़े बदलाव के बजाय हार्डवेयर और बैटरी को और बेहतर बनाने पर है। फोन में 48MP कैमरा और 5100mAh की बैटरी मिलेगी। इसके अलावा, फोन के साथ 7 साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट्स मिलेंगे। 53,600 रुपए हो सकती है शुरुआती कीमत रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरोप में गूगल पिक्सल 10a की शुरुआती कीमत €499 (लगभग 53,600 रुपए) हो सकती है। खास बात यह है कि लॉन्च ऑफर के तहत कंपनी इसके 256GB वैरिएंट को भी शुरुआत में इसी कीमत पर पेश कर सकती है, जबकि इसकी रेगुलर प्राइस लगभग 64,343 रुपए रहने की उम्मीद है। यह फोन ऑब्सीडियन, फॉग, लैवेंडर और बेरी जैसे चार आकर्षक रंगों में आ सकता है। डिजाइन: पिछले मॉडल जैसी झलक, पर ज्यादा मजबूत डिजाइन की बात करें तो पिक्सल 10a काफी हद तक अपने पिछले मॉडल जैसा ही दिखेगा। इसमें गूगल का सिग्नेचर कैमरा बार सेटअप मिलेगा। फोन में प्रीमियम फिनिश के साथ IP68 रेटिंग दी जा सकती है, जो इसे धूल और पानी से सेफ रखेगी। सामने पतले बेजल्स के साथ डिस्प्ले के टॉप सेंटर में सेल्फी कैमरे के लिए पंच-होल कटआउट होगा। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए इसमें कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i का इस्तेमाल किया गया है, जो पहले से ज्यादा ड्यूरेबिलिटी ऑफर करेगा। स्पेसिफिकेशंस: पावरफुल प्रोसेसर और 7 साल का अपडेट डिस्प्ले: फोन में 6.3 इंच का OLED डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 2424 x 1080 पिक्सल रेजोल्यूशन सपोर्ट करेगा। प्रोसेसर: इसमें गूगल का लेटेस्ट Tensor G4 चिपसेट दिया जाएगा, जो Titan M2 सिक्योरिटी चिप के साथ आएगा। यह कॉम्बिनेशन एआई प्रोसेसिंग को फास्ट और फोन को ज्यादा सुरक्षित बनाएगा। सॉफ्टवेयर: यह फोन Android 16 के साथ लॉन्च होने वाला दुनिया के शुरुआती स्मार्टफोन्स में से एक हो सकता है। कंपनी इस पर 7 साल तक सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा कर सकती है। मेमोरी: इसमें 8GB LPDDR5X रैम और 128GB/256GB (UFS 3.1) स्टोरेज के विकल्प मिलेंगे। कैमरा: OIS के साथ 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमराफोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर डुअल कैमरा सेटअप होगा। इसमें 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है, जो डुअल-पिक्सल ऑटोफोकस और ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) के साथ आएगा। इसके साथ 13 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड लेंस (120 डिग्री व्यू) होगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलने की उम्मीद है। बैटरी और चार्जिंग: पहली बार बड़ी बैटरी का सपोर्टपावर बैकअप के लिए गूगल पिक्सल 10a में 5100mAh की बैटरी दी जा सकती है। इसे तेजी से चार्ज करने के लिए 45W फास्ट वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। इसके अलावा, फोन में वायरलेस चार्जिंग की सुविधा भी दी जाएगी।
India AI Impact Summit : PM मोदी ने किया Jio Pavilion का दौरा, आकाश अंबानी ने दिखाया AI इकोसिस्टम
इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जियो के AI पवेलियन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जियो द्वारा विकसित विभिन्न AI आधारित मॉडलों और समाधानों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने जियो इंटेलिजेंस, जियो ...
इलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) की सर्विस आज (16 फरवरी) को दुनियाभर में 2 घंटे ठप रहीं। हजारों यूजर्स फीड एक्सेस नहीं कर पाने और ब्लैंक स्क्रीन दिखने की शिकायत की। हालांकि यह बीच में कुछ समय के लिए फिर से चालू और बंद होता रहा। आउटेज को ट्रैक करने वाली वेबसाइट 'डाउनडिटेक्टर' पर शाम 6.30 से 8.30 बजे तक 45,000 से ज्यादा लोगों ने शिकायतें की। हालांकि फिर सर्विस बहाल हो गई। इस दौरान यूजर्स का कहना था कि वे न तो अपनी टाइमलाइन देख पा रहे थे और न ही नई पोस्ट कर पा रहे थे। X की सर्विस 1 महीने में दूसरी बार ठप हुई है। इससे पहले 16 जनवरी को भी भारत,अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों में हजारों यूजर्स को एक्सेस करने में परेशानी हुई थी। 49% यूजर्स वेबसाइट नहीं चला पा रहे थे डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, दुनियाभर में X के 49% यूजर्स वेबसाइट नहीं चला पा रहे थे। वहीं,41% लोगों को एप इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है और करीब 10% ने बताया कि टाइमलाइन लोड करने में दिक्कत हुई। एप और वेब दोनों पर लोडिंग की समस्या, ग्रोक AI भी बंद रहा इस आउटेज का असर मोबाइल एप्लिकेशन और डेस्कटॉप वर्जन दोनों पर देखा गया। यूजर्स ने बताया कि एप खोलने पर उन्हें सिर्फ ब्लैंक स्क्रीन दिखी। इसके साथ ही मस्क की कंपनी xAI का चैटबॉट 'ग्रोक' भी काम नहीं कर रहा था। यूजर्स के रिफ्रेश करने पर पुरानी पोस्ट गायब हो रहीं और कोई नया डेटा लोड नहीं हो रहा था। X की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं इलॉन मस्क या X की सपोर्ट टीम ने अभी तक इस आउटेज की वजह या इसके ठीक होने के समय को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। आमतौर पर X ऐसे मामलों में आंतरिक रूप से पैच अपडेट जारी करता है, जिसके बाद सर्विस धीरे-धीरे बहाल होती है। बार-बार होने वाले इन तकनीकी हादसों ने प्लेटफॉर्म की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। X के 4 आउटेज इलॉन मस्क ने 2022 में खरीदा था X 27 अक्टूबर 2022 को इलॉन मस्क ने ट्विटर (अब X) खरीदा था। ये डील 44 बिलियन डॉलर में हुई थी। आज के हिसाब से ये रकम करीब 3.84 लाख करोड़ रुपए होती है। मस्क ने सबसे पहले कंपनी के चार टॉप ऑफिशियल्स CEO पराग अग्रवाल, फाइनेंस चीफ नेड सेगल, लीगल एग्जीक्यूटिव विजया गड्डे और सीन एडगेट को निकाला था। 5 जून 2023 को लिंडा याकारिनो ने X के CEO के तौर पर जॉइन किया था। इससे पहले वो NBC यूनिवर्सल में ग्लोबल एडवर्टाइजिंग एंड पार्टनरशिप की चेयरमैन थीं। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… रेलवे टिकट बुकिंग वेबसाइट और एप फिर से डाउन: छठ पर्व पर हजारों यात्री परेशान; तत्काल टिकट बुक नहीं कर पाए छठ पर्व के पहले दिन आज यानी, 25 अक्टूबर को IRCTC की वेबसाइट और एप डाउन हो गए। लोगों को सुबह 10 बजे से रेल टिकट बुक करने में परेशानी हो रही है। इससे पहले दिवाली पर भी IRCTC की वेबसाइट और एप डाउन हो चुके हैं। आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म डाउन डिटेक्टर के मुताबिक सुबह 9:00 बजे से लोगों ने साइट और एप डाउन होने की शिकायत दर्ज करानी शुरू कर दी थी। सुबह 10 बजे करीब 180 लोगों ने इसे रिपोर्ट किया था। सोशल मीडिया पर भी लोग वेबसाइट डाउन होने की शिकायत करते रहे। पूरी खबर पढ़ें…
निसान मोटर इंडिया कल 17 फरवरी को सब-4 मीटर सेगमेंट में नई कार ग्रेवाइट लॉन्च करने जा रही है। कंपनी की नई 7-सीटर मल्टी पर्पस व्हीकल (MPV) भारत में रेनो ट्राइबर, मारुति अर्टिगा, मारुति XL6, किआ कैरेंस और किआ कैरेंस क्लाविस को टक्कर देगी। निसान ने नई MPV का फर्स्ट लुक (18 जनवरी) रिवील किया था। ये रेनो ट्राइबर के प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है और भारत में डेवलप की गई है। कार में डिजिटल क्लस्टर और सेफ्टी के लिए 360 डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। ये बजट 7-सीटर MPV सेगमेंट में निसान की नई एंट्री है। ये रेनो ट्राइबर की तरह बजट फैमिली कार होगी और इसकी एक्स-शोरूम कीमत 6 से 9 लाख रुपए के बीच हो सकती है। बुकिंग की जानकारी फिलहाल नहीं आई हैं। ट्राइबर की तरह सब-4 मीटर साइज में 7 सीट्स ग्रेवाइट की सबसे बड़ी खासियत इसका सब-4 मीटर साइज है, जिसमें 7 सीट्स के साथ फ्लेक्सिबल सीटिंग मिलेगी। थर्ड रो सीट्स रिमूवेबल होंगी, जिससे बूट स्पेस ज्यादा हो जाएगा। ये शहर में आसानी से चलने वाली और फैमिली यूज के लिए प्रैक्टिकल MPV होगी। रेनो ट्राइबर की तरह मॉड्यूलर सीटिंग सेटअप मिलेगा। एक्सटीरियर डिजाइन: स्लिम LED DRLs के साथ हनीकॉम्ब ग्रिल कार का डिजाइन कंपनी की अपकमिंग SUV टेक्टॉन की तरह होगा। इसके फ्रंट में हनीकॉम्ब डिजाइन वाली बोल्ड ग्रिल मिलेगी, जिसके बीच में निसान का लोगो है। वहीं बोनट पर ग्रेवाइट की बैजिंग दी गई है। स्लिम LED DRLs लाइट बार से कनेक्टेड हैं और हेडलैंप्स नए डिजाइन के साथ आएंगे। साइड प्रोफाइल में रूफ रेल्स, पुल टाइप डोर हैंडल्स और डुअल-टोन अलॉय व्हील्स दिखेंगे। सिल्हूट ट्राइबर जैसा ही है, लेकिन निसान स्टाइलिंग से अलग लुक मिलेगा। रियर में डिसकनेक्टेड टेल लाइट्स हैं, जिन्हें थिन क्रोम स्ट्रिप जोड़ेगी। टेलगेट पर GRAVITE लेटरिंग और सिंपल बंपर में C-शेप एलिमेंट होगा। कुल मिलाकर मॉडर्न और बोल्ड डिजाइन है। डायमेंशन सब-4 मीटर रखी गई है, कलर ऑप्शन की डिटेल लॉन्च पर आएगी। इंटीरियर: ट्राइबर से इंस्पायर्ड केबिन डिजाइन इंटीरियर ट्राइबर से इंस्पायर्ड होगा, लेकिन निसान के अपने कलर थीम और अपहोल्स्ट्री मिलेगी। डैशबोर्ड बेसिक लेआउट वाला होगा। स्टीयरिंग व्हील और सीट्स कॉम्फी होंगी। थर्ड रो तक AC वेंट्स दिए गए हैं। पैनोरमिक सनरूफ की उम्मीद कम है, लेकिन मैनुअल AC और अच्छा स्पेस मिलेगा। फुल इंटीरियर डिटेल अभी अनवील नहीं हुई है। परफॉरमेंस: 1.0 लीटर का 3 सिलेंडर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन कार में परफॉर्मेंस के लिए 1.0 लीटर का 3 सिलेंडर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो 72PS की पावर और 96Nm का टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए 5-स्पीड मैनुअल या 5-स्पीड AMT गियरबॉक्स ऑप्शनल होंगे। माइलेज की डिटेल लॉन्च पर आएगी, लेकिन ट्राइबर जैसी अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी मिलने की उम्मीद है। बाद में CNG ऑप्शन भी आ सकता है। टर्बो पेट्रोल की संभावना कम है। फीचर्स: 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम कंफर्ट और कन्वीनियंस में 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलेगा, जो एंड्रॉएड ऑटो और एपल कार प्ले सपोर्ट करेगा। 7-इंच सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, वायरलेस फोन चार्जर, पुश बटन स्टार्ट-स्टॉप, कूल्ड स्टोरेज और सेकंड रो में स्लाइड-रिक्लाइन सीट्स जैसे फीचर्स आएंगे। रियर पैसेंजर्स के लिए AC वेंट्स और 6-स्पीकर साउंड सिस्टम भी होगा। कुल मिलाकर प्रैक्टिकल फीचर्स की लिस्ट अच्छी है। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम सेफ्टी में 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), हिल स्टार्ट असिस्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), फ्रंट-रियर पार्किंग सेंसर्स और रियर पार्किंग कैमरा जैसे फीचर्स मिलेंगे। ये सेगमेंट में अच्छी सेफ्टी पैकेज देगी।
भारत में आज से दुनिया के सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी इवेंट 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' शुरू होने जा रहा है। ये इवेंट 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। इवेंट में 30 से ज्यादा देशों की 300+ कंपनियां अपने एआई गैजेट्स और तकनीक दिखाएंगी। यहां आम लोग देख सकेंगे कि एआई असल जिंदगी में कैसे काम करता है और भविष्य में AI से खेती, सेहत और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्या बदलाव लाने वाला है। समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और बिल गेट्स समेत 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष और 100 से अधिक ग्लोबल सीईओ शामिल होंगे। सुंदर पिचाई से लेकर सैम ऑल्टमैन तक शामिल होंगे इस इवेंट में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों के प्रमुख शामिल हो रहे हैं। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई) के सैम ऑल्टमैन, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और माइक्रोसॉफ्ट-गूगल के अन्य बड़े नाम इसमें हिस्सा लेंगे। इन ग्लोबल नामों के साथ भारत के बड़े बिजनेसमैन भी मंच साझा करेंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा संस के एन. चंद्रशेखरन, इंफोसिस के नंदन नीलेकणि, भारती एंटरप्राइजेज के सुनील भारती मित्तल, टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन और एचसीएल टेक की रोशनी नादर मल्होत्रा भी शामिल होंगी। PM मोदी के व्यक्तिगत निमंत्रण पर आ रहे 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में सिर्फ टेक लीडर्स ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत निमंत्रण पर दुनिया के कई ताकतवर देशों के नेता भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज शामिल हैं। इसके अलावा भूटान, श्रीलंका, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और मॉरीशस जैसे देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी इस चर्चा का हिस्सा बनेंगे। कुल 45 से ज्यादा देशों के मंत्री स्तर के प्रतिनिधिमंडल और संयुक्त राष्ट्र (UN) के वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान भारत में होंगे। 19 फरवरी को शामिल होंगे पीएम मोदी 16 फरवरी (सोमवार): समिट के पहले दिन की शुरुआत एक्सपर्ट्स और पॉलिसी मेकर्स के बीच 'राउंडटेबल' चर्चाओं से होगी।इसी दिन 'इंडिया एआई एक्सपो' का उद्घाटन होगा, जहां स्टार्टअप्स और इनोवेशन का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां 300 से ज्यादा भारतीय और विदेशी स्टार्टअप्स अपने ऐसे गैजेट्स दिखाएंगे जो एआई की मदद से चलते हैं। 17 फरवरी (मंगलवार): दूसरे दिन का पूरा फोकस उन क्षेत्रों पर होगा जिनका आम आदमी की जिंदगी से सीधा संबंध है। सरकार खेती, सेहत, शिक्षा,एनर्जी, जेंडर एम्पावरमेंट और दिव्यांगों की मदद के लिए 6 विशेष रिसर्च बुक्स लॉन्च करेगी। ये किताबें बताएंगी कि कैसे एआई की मदद से इन क्षेत्रों में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। 18 फरवरी (बुधवार): दुनिया के टॉप वैज्ञानिक, रिसर्चर और थिंक टैंक अपनी 'कटिंग-एज' रिसर्च दुनिया के सामने रखेंगे। टेक कंपनियां और स्टार्टअप्स डेमो देकर दिखाएंगे कि उनकी एआई तकनीक असल में कैसे काम करती है और भविष्य की मशीनें कैसी होंगी। 19 फरवरी (गुरुवार): पीएम मोदी आधिकारिक तौर पर उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे। सुंदर पिचाई , सैम ऑल्टमैन और बिल गेट्स जैसे 100 से ज्यादा ग्लोबल दिग्गज पीएम मोदी के साथ एक मेज पर बैठेंगे। इसमें भारत में एआई सेक्टर में बड़े निवेश और रणनीतिक पार्टनरशिप पर अहम फैसले होंगे। 20 फरवरी (शुक्रवार): GPAI काउंसिल की मीटिंग होगी। सदस्य देशों के प्रतिनिधि एक साथ बैठेंगे ताकि एआई को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके। विदेश मंत्रालय के वीडियो में देखिए समिट की जानकारी आम लोगों के लिए समिट में ये 5 चीजें होंगी खास AI इम्पैक्ट एक्सपो: 70,000 वर्ग मीटर से ज्यादा बड़े एरिया में एक मेगा प्रदर्शनी लगेगी। इसमें 30 से ज्यादा देशों की 300+ कंपनियां अपने एआई गैजेट्स और तकनीक दिखाएंगी। आम लोग देख सकेंगे कि एआई असल जिंदगी में कैसे काम करता है। एजुकेशन और स्किलिंग: छात्रों और युवाओं के लिए 'YUVAi' और 'AI for ALL' जैसे प्रोग्राम होंगे। इसके जरिए लोग यह सीख सकेंगे कि एआई टूल्स का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई और करियर को बेहतर बनाने के लिए कैसे किया जाए। रोजमर्रा की समस्याओं पर फोकस: एक्सपो में ऐसे एआई मॉडल्स का डेमो होगा जो खेती में फसल की बीमारी पहचानने, अस्पतालों में बेहतर इलाज करने और भाषा अनुवाद को आसान बनाने में मदद करते हैं। स्टार्टअप्स लीडर्स से मुलाकात: देश-विदेश के स्टार्टअप्स अपने अनोखे प्रोडक्ट्स पेश करेंगे। आम लोग इन इनोवेटर्स से सीधे बात कर सकेंगे और समझ सकेंगे कि भविष्य की तकनीक कैसी होगी। एक्सपीरिएंस जोन: समिट में कई 'थीमैटिक पैवेलियन' बनाए गए हैं। यहां लोग खुद एआई पावर्ड मशीनों और सॉफ्टवेयर का अनुभव ले सकेंगे, जैसे स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग और एआई ट्यूटर।
ओप्पो के किफायती ईयरबड्स एनको बड्स 3 प्रो+ को लॉन्च हुए करीब 2 महीने बीत चुके हैं। ₹2,499 की कीमत वाले ये बड्स एक्टिव नॉइस कैंसलेशन और डुअल-डिवाइस कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स के साथ आते हैं। हमने पिछले 60 दिनों तक इनका इस्तेमाल किया। लंबी टेस्टिंग के बाद डिटेल्ड रिव्यू… 1. डिजाइन और कलर: इनका डिजाइन ओप्पो के पुराने वर्जन से काफी मिलता-जुलता है। ये 'सोनिक ब्लू' और मिडनाइट ब्लैक कलर में उपलब्ध हैं। बड्स का केस बाहर से मैट फिनिश के साथ आता है, जिससे इस पर उंगलियों के निशान नहीं पड़ते। अंदर का हिस्सा ग्लॉसी है। इसमें फास्ट पेयरिंग का सपोर्ट दिया गया है, जिससे यह फोन से तुरंत कनेक्ट हो जाते हैं। बड्स पर लेफ्ट (L) और राइट (R) की मार्किंग दी गई है ताकि पहनने में कोई गलती न हो। राउंड एजेस और छोटे साइज की वजह से लंबे समय तक इस्तेमाल पर भी दर्द या थकान महसूस नहीं होती। बॉक्स में चार्जिंग केबल नहीं दी गई है। हालांकि आजकल ज्यादातर घरों में टाइप-सी केबल होती है, लेकिन एक नए प्रोडक्ट के साथ केबल न मिलना कुछ यूजर्स को अखर सकता है। 2. ऑडियो क्वालिटी: बेहतर साउंड के लिए इसमें 12.4 mm का बड़ा ड्राइवर दिया गया है। बड़े ड्राइवर की वजह से म्यूजिक सुनते समय बेस काफी पावरफुल महसूस होता है। कॉलिंग के लिए हर बड में ड्यूल माइक्रोफोन सेटअप दिया गया है। एक माइक ऊपर और एक नीचे की तरफ। इन बड्स में 'एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन' (ANC) फीचर भी दिया गया है। ये 32 डेसीबल्स (dB) तक का ANC सपोर्ट करते हैं। ये ऑडियो एक्सपीरियंस को बेहतर बना देता है। लगातार 60 दिनों तक इस्तेमाल करने के बाद भी इसके साउंड और बेस की क्लेरिटी में कोई कमी नहीं आई है। लेकिन इसका ANC ऑफिस या घर के हल्के शोर को तो काट देता है, लेकिन बहुत ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह या ट्रैफिक के तेज शोर में यह उतना असरदार नहीं है। 3. बैटरी: बिना ANC के इस पूरे पैकेज (केस + बड्स) से 43 घंटे तक का बैकअप मिलता है। वहीं ANC मोड ऑन रहने पर यह 28 घंटे का बैकअप देता है। सिर्फ बड्स की बात करें, तो बिना ANC के ये एक बार में 12 घंटे और ANC के साथ 8 घंटे का प्लेबैक टाइम देते हैं। हमने इन बड्स को अलग-अलग स्थितियों में इस्तेमाल किया और इसकी बैटरी ने निराश नहीं किया। बड्स ने एक बार चार्ज करने पर 6 घंटे का बैकअप दिया। ये बड्स फास्ट चार्जिंग भी सपोर्ट करते हैं, यानी सिर्फ 10 मिनट चार्ज करके आप 2 घंटे तक म्यूजिक सुन सकते हैं। 4. प्रोटेक्शन: हल्की बारिश से बचाव के लिए इसे IP55 रेटिंग दी गई है। ओप्पो का इन बड्स को लेकर ये भी दावा है कि 1000 बार चार्ज करने के बाद भी बैटरी अपनी 80% क्षमता को बरकरार रखेगी। आमतौर पर ईयरफोन्स की बैटरी एक-डेढ़ साल में कम बैकअप देने लगती है, लेकिन ओप्पो की यह तकनीक इसे लंबे समय तक चलने वाला गैजेट बनाती है। 5. अन्य फीचर्स: केस पर सामने की तरफ एक LED लाइट और नीचे चार्जिंग के लिए USB-C पोर्ट दिया गया है। इस बजट में वायरलेस चार्जिंग तो नहीं है, लेकिन इसमें ड्यूल कनेक्शन (एक साथ दो डिवाइस से जुड़ना) और टच कंट्रोल्स जैसे फीचर्स मिल जाते हैं। मुकाबला: बाजार में ओप्पो एनको बड्स 3 प्रो+ का मुकाबला रियलमी बड्स एयर सीरीज और बोट एयरडोप्स के उन मॉडल्स से होगा जो ₹2,000 से ₹3,000 की रेंज में आते हैं। ये ब्रांड्स इस कीमत पर एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन और लंबी बैटरी लाइफ जैसे फीचर्स देते हैं। फैसला: कम कीमत में ऐसे फीचर्स बड्स को वैल्यू फॉर मनी प्रोडक्ट बनाते हैं। अगर आप 3 हजार रुपए से कम कीमत में बढ़िया ऑडियो एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो इसे खरीद सकते हैं।
टेक कंपनी टेक्नो (TECNO) ने पोवा सीरीज में नया स्मार्टफोन टेक्नो पोवा कर्व 2 लॉन्च कर दिया है। ये भारत में डायमेंसिटी 7100 प्रोसेसर वाला पहला स्मार्टफोन है। यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ी बैटरी वाला फोन है। इसमें पावर बैकअप के लिए 8000mAh बैटरी की बैटरी दी गई है। टेक्नो पोवा कर्व 2 को भारत में दो स्टोरेज वैरिएंट्स में पेश किया गया है। इसके 8GB रैम 128GB स्टोरेज वाले बेस वैरिएंट की कीमत 27,999 रुपए और 8GB रैम + 256GB स्टोरेज वाले दूसरे वैरिएंट की कीमत 29,999 रुपए रखी गई है। इस स्मार्टफोन की सेल 20 फरवरी से शुरू होगी। शुरुआती सेल में कंपनी इस पर 3000 रुपए तक का डिस्काउंट और 3 या 6 महीने की नो-कॉस्ट EMI का ऑफर भी दे रही है। डिजाइन: दुनिया का सबसे पतला कर्व्ड डिस्प्ले वाला फोन टेक्नो पोवा कर्व 2 का डिजाइन काफी स्लिम और प्रीमियम है। फोन की थिकनेस सिर्फ 7.42mm है और वजन 195 ग्राम रखा गया है। इतनी बड़ी 8000mAh बैटरी के साथ यह दुनिया का सबसे पतला कर्व्ड डिस्प्ले वाला फोन बताया जा रहा है। फ्रंट पर 3D कर्व्ड एमोलेड डिस्प्ले है, जिसमें पतले बेजल्स और सेंटर में पंच-होल सेल्फी कैमरा दिया गया है। बैक पैनल पॉलीकार्बोनेट मटेरियल का बना है जिसमें ग्लॉसी टेक्स्चर है और कैमरा मॉड्यूल वर्टिकल स्ट्रिप में है। फोन काफी लाइट और कम्फर्टेबल फील देता है। पोर्ट्स और बटन्स की बात करें तो राइट साइड पर वॉल्यूम रॉकर और पावर बटन है, बॉटम पर USB टाइप-C पोर्ट, स्पीकर और माइक दिया गया है। फोन में IP64 डस्ट और स्प्लैश रेसिस्टेंट रेटिंग भी मिली है। आप इसे मिस्टिक पर्पल, स्टॉर्म टाइटेनियम और मेल्टिंग सिल्वर कलर में खरीद सकेंगे। टेक्नो पोवा कर्व 2: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.78 इंच की स्क्रीन दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन 26441208 पिक्सल है। यह 1.5K कर्व्ड एमोलेड पैनल पर बनी है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है। इसकी पीक ब्राइटनेस 4500 निट्स है और 2304Hz PWM डिमिंग की सुविधा भी मिलती है। प्रोटेक्शन के लिए कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i लगा है। स्क्रीन गेमिंग और वीडियो के लिए काफी स्मूद और ब्राइट है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए टेक्नो पोवा कर्व 2 के बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें LED फ्लैश के साथ 50 मेगापिक्सल का मेन सेंसर और 2 मेगापिक्सल का मैक्रो लेंस शामिल है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 13 मेगापिक्सल का कैमरा है। कैमरा नाइट मोड और पोर्ट्रेट जैसे फीचर्स सपोर्ट करता है। परफॉर्मेंस: टेक्नो पोवा कर्व 2 में परफॉर्मेंस के लिए मीडियाटेक डायमेंसिटी 7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 6nm फैब्रिकेशन पर बना है और 2.4GHz तक की क्लॉक स्पीड तक रन कर सकता है। यह भारत का पहला डायमेंसिटी 7100 वाला फोन है। इसके साथ LPDDR5X रैम और UFS 2.2 स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा। फोन में डेडिकेटेड G1 चिप से 20 5G बैंड्स और SE1 वाईफाई चिप से स्ट्रॉन्ग कनेक्टिविटी मिलती है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड हाईOS 16 के साथ आता है। इला AI 2.0 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। पावर बैकअप: टेक्नो पोवा कर्व 2 में कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी 8000mAh बैटरी दी गई है। बैटरी को चार्ज करने के लिए 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट है। नॉर्मल यूज में 2 दिन तक का बैकअप आसानी से मिल जाएगा। अन्य फीचर्स: कनेक्टिविटी के लिए डुअल 5G, वाईफाई, ब्लूटूथ और डुअल सिम सपोर्ट है। ऑडियो के लिए स्टीरियो स्पीकर्स दिए गए हैं। 3.5mm जैक नहीं है।
ओपनएआई ने कुछ चुनिंदा यूजर्स के लिए चैट जीपीटी में विज्ञापनों की टेस्टिंग शुरू कर दी है। कंपनी ने इसका पोस्ट भी जारी किया है। इसी तरह गूगल ने गूगल सर्च और जेमिनी में सीधे खरीदारी का विकल्प जोड़ दिया है। एआई कंपनियों का उद्देश्य है कि यूजर जब एआई से प्रोडक्ट ढूंढे, तुलना करें या सलाह लें और वहीं से खरीद भी सकें। इससे गूगल को एआई के इस्तेमाल से सीधी कमाई का रास्ता मिलेगा। लेकिन ओपनएआई–गूगल के इतर एंथ्रोपिक की पॉलिसी बिल्कुल अलग है। एंथ्रोपिक ने एआई मॉडल्स में विज्ञापनों का विरोध किया है। जानते हैं तीनों कंपनी की स्ट्रेटजी। इन तीन कंपनियों की ये होगी रणनीति ओपनएआई: फ्री यूजर्स भी बंद कर सकेंगे विज्ञापन,पर मैसेज कम मिलेंगे सिर्फ फ्री और गो प्लान के यूजर्स के लिए विज्ञापन होंगे। अन्य प्लान पूरी तरह विज्ञापन-मुक्त रहेंगे। चैट के जवाब में साफ ‘स्पॉन्सर्ड लेबल’ लिखा होगा। विज्ञापन ब्रॉड टॉपिक्स और यूजर के ऐड-इंटरैक्शन के आधार पर चुने जाएंगे। फ्री यूजर भी विज्ञापन बंद कर सकेंगे, लेकिन बदले में रोज के फ्री मैसेज कम मिलेंगे। गूगल: डायरेक्ट ऑफर्स नाम का नया फीचर लॉन्च किया गूगल ने विज्ञापनदाताओं को भेजे एक पत्र में बताया कि सर्च के एआई मोड में नए विज्ञापन के फॉर्मेट टेस्ट किए जा रहे हैं। रिटेलर और ब्रांड अपने प्रोडक्ट सीधे एआई रिजल्ट्स में दिखा सकेंगे। डायरेक्ट ऑफर्स नाम का नया फीचर ब्रांड्स को संभावित ग्राहकों को छूट/डिस्काउंट देने की सुविधा देगा। एंथ्रोपिक: विज्ञापनों से दूरी की रणनीति एंथ्रोपिक ने कहा है कि क्लाउड में पारंपरिक विज्ञापन जोड़ने की कोई योजना नहीं है। कंपनी का मानना है कि चैट के बीच सेल्स पिच या प्रमोशनल मैसेज यूजर के भरोसे को कमजोर करते हैं। कंपनी की कमाई का फोकस सब्सक्रिप्शन और एंटरप्राइज लाइसेंस पर है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए AI टूल 'क्लॉड' का इस्तेमाल किया है। यह पहली बार है जब एआई का इस्तेमाल किसी इतने बड़े और गुप्त ऑपरेशन में किया गया है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। अमेरिकी सेना ने जनवरी की शुरुआत में काराकास में बमबारी करने के बाद मादुरो को गिरफ्तार किया था। उन पर ड्रग तस्करी के आरोप हैं। फिलहाल वे न्यूयॉर्क की जेल में हैं। डेटा फर्म पालान्टिर के जरिए हुआ AI का इस्तेमाल रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने सीधे एनट्रॉपिक से नहीं बल्कि डेटा कंपनी 'पैलेंटियर' के जरिए क्लॉड का इस्तेमाल किया है। पैलेंटियर पहले से ही अमेरिकी रक्षा विभाग और फेडरल पुलिस के लिए काम करती है। एनट्रॉपिक की चिंताओं को देखते हुए अब ट्रम्प प्रशासन उसके 200 मिलियन डॉलर (करीब ₹1,800 करोड़) के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने पर विचार कर रहा है। हिंसा के लिए क्लॉड AI के इस्तेमाल पर पाबंदी क्लॉड AI को बनानी वाली कंपनी एंथ्रोपिक ने कहा, हम किसी विशेष ऑपरेशन पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन हमारा हर यूजर हमारी 'यूसेज पॉलिसी' मानने के लिए बाध्य है। क्लॉड एआई की गाइडलाइन्स में साफ लिखा है कि इस तकनीक का इस्तेमाल हिंसा फैलाने, हथियार बनाने या किसी की जासूसी करने के लिए नहीं किया जा सकता। युद्ध लड़ने से रोकने वाले AI का इस्तेमाल नहीं करेगी अमेरिकी सेना अमेरिकी रक्षा विभाग चाहता है कि ओपनAI और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां अपने टूल्स को मिलिट्री के क्लासिफाइड नेटवर्क पर बिना किसी कॉमर्शियल पाबंदी के उपलब्ध कराएं। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हाल ही में कहा था कि हम ऐसे AI मॉडल इस्तेमाल नहीं करेंगे जो हमें युद्ध लड़ने से रोकें। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट भी इस रेस में शामिल एनट्रॉपिक पहली ऐसी एआई कंपनी है जिसका इस्तेमाल सेना के गुप्त ऑपरेशन्स में हुआ है, लेकिन वह अकेली नहीं है। इलॉन मस्क की कंपनी xAI, गूगल का जेमिनी और माइक्रोसॉफ्ट के निवेश वाली ओपन एआई भी सेना के लिए विशेष AI प्लेटफॉर्म तैयार करने में जुटी हैं। इनका इस्तेमाल फिलहाल डॉक्यूमेंट्स का विश्लेषण करने, रिपोर्ट बनाने और रिसर्च करने में हो रहा है। क्या है एंथ्रोपिक का 'क्लॉड' AI? क्लॉड एक एडवांस AI चैटबॉट है, जो टेक्स्ट जनरेशन, डेटा एनालिसिस और कोडिंग जैसे कामों में माहिर है। इसे ओपन AI के पूर्व एग्जीक्यूटिव्स ने 2021 में शुरू किया था। हाल ही में एक फंडिंग राउंड के बाद एंथ्रोपिक की वैल्यूएशन 380 बिलियन डॉलर यानी, करीब 34 लाख करोड़ रुपए हो गई है। नॉलेज पार्ट: युद्ध में कैसे मदद करता है AI? मिलिट्री ऑपरेशंस में AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन कामों के लिए किया जाता है:
एपल भारत में अपने रिटेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी 26 फरवरी को मुंबई के बोरीवली में अपना 6वां एक्सक्लूसिव स्टोर खोलने जा रही है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में यह एपल का दूसरा स्टोर होगा। इससे पहले कंपनी ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) और दिल्ली के साकेत में अपने फ्लैगशिप स्टोर्स खोले थे। बोरीवली का यह नया स्टोर मुंबई के ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। एपल ने भारत में अपने पैर जमाने के लिए मुंबई को केंद्र बनाया है। बोरीवली से पहले अभी मुंबई में बीकेसी में एपल का स्टोर मौजूद है। बोरीवली का स्टोर उत्तर मुंबई के लोगों के लिए एपल प्रोडक्ट्स और सर्विसेज तक पहुंच आसान बनाएगा। कंपनी का लक्ष्य उन इलाकों में पहुंचना है, जहां प्रीमियम कंज्यूमर बेस ज्यादा है। एपल के बोरीवली स्टोर में क्या-क्या खास होगा? बोरीवली स्टोर में ग्राहकों को एपल के सभी लेटेस्ट प्रोडक्ट्स जैसे आईफोन 16 सीरीज, मैकबुक, आईपैड और वॉच सीरीज देखने और खरीदने को मिलेगी। स्टोर की डिजाइन एपल के ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से रखी गई है। यहां 'जीनियस बार' की सुविधा भी होगी, जहां एक्सपर्ट्स ग्राहकों की तकनीकी समस्याओं को मौके पर ही हल करेंगे। इसके अलावा, ग्राहक यहां ट्रेड-इन प्रोग्राम के जरिए अपने पुराने फोन बदलकर नया आईफोन ले सकेंगे। एपल ने अप्रैल 2023 में मुंबई में अपना पहला इंडिया स्टोर और दिल्ली में अपना दूसरा स्टोर खोला था। फिर कंपनी ने 2025 में तीन और आउटलेट्स के साथ अपनी रिटेल प्रेजेंस को बढ़ाया। ये तीन स्टोर्स बेंगलुरु, पुणे और नोएडा में खोले गए। कंपनी के मुताबिक, भारत उनके लिए एक स्ट्रैटेजिक मार्केट है और वे आने वाले समय में हैदराबाद जैसे शहरों में भी विस्तार का प्लान बना रहे हैं। भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से मदद मिली एपल की रिटेल स्ट्रैटेजी में बदलाव के पीछे भारत में बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग एक बड़ी वजह है। सरकार की PLI स्कीम के तहत अब भारत में आईफोन का प्रोडक्शन बड़े स्तर पर हो रहा है। जानकारों का कहना है कि लोकल प्रोडक्शन की वजह से कंपनी को सप्लाई चेन में आसानी हो रही है, जिससे वह अपने रिटेल स्टोर्स का विस्तार तेजी से कर पा रही है। 2027 तक स्टोर्स की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य एपल के CEO टिम कुक ने पिछले भारत दौरे के दौरान संकेत दिया था कि वे भारत को लेकर बेहद उत्साहित हैं। कंपनी की योजना 2027 तक भारत में अपने स्टोर्स की संख्या बढ़ाकर 10 से ज्यादा करने की है। बोरीवली स्टोर इसी कड़ी का हिस्सा है। कंपनी अब सिर्फ टियर-1 ही नहीं, बल्कि बड़े मेट्रो शहरों के उपनगरीय इलाकों पर भी फोकस कर रही है। ये खबर भी पढ़ें… एपल मार्च में लॉन्च कर सकता है सस्ता आईफोन 17e: लेटेस्ट A19 चिप और मैगसेफ चार्जिंग मिलेगी; कीमत ₹50 हजार के करीब संभव एपल अगले महीने अपने किफायती आईफोन लाइनअप में नया मॉडल 'आईफोन 17e' लॉन्च कर सकता है। इस सस्ते आईफोन में भी लेटेस्ट A19 चिपसेट मिलने की उम्मीद है। ये चिप अभी आईफोन 17 सीरीज में मिलती है। रैम और स्टोरेज की बढ़ती कीमतों के बावजूद एपल इसकी कीमत 599 डॉलर यानी, करीब 50 हजार रुपए के आसपास रख सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
JSW MG मोटर इंडिया ने नई 'मैजेस्टर' को रिवील कर दिया है। यह भारत में पहली D+ सेगमेंट वाली और सबसे बड़ी साइज वाली बॉडी ऑन फ्रेम SUV है। कंपनी की नई फ्लैगशिप SUV को ग्लोस्टर के ऊपर पोजीशन किया गया है। ये लग्जरी और फुली ऑफरोडिंग कार का कॉम्बिनेशन है। इसमें ट्विन-टर्बो डीजल इंजन और 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ 10 ऑफ-रोड मोड्स मिलते हैं और इसे 810mm गहरे पानी में भी चलाया जा सकता है। नई मैजेस्टर में ट्रिपल डिफरेंशियल लॉक और क्रॉल कंट्रोल मोड, फ्रंट सीटों में वेंटिलेशन और मसाज फंक्शन, डुअल वायरलेस चार्जर, लेवल-2 ADAS सेफ्टी और पैनोरमिक सनरूफ जैसे फीचर्स मिलेंगे। तीन वैरिएंट्स और 6-7 सीटर का ऑप्शन MG मैजेस्टर को तीन वैरिएंट्स- शार्प 4x2, सैवी 4x2 और टॉप-स्पेक सैवी 4x4 में उतारा गया है। इसमें ग्राहकों को 6 और 7 सीटर कॉन्फिगरेशन चुनने का मौका मिलेगा। कंपनी ने इसकी बुकिंग ₹41,000 के टोकन अमाउंट के साथ शुरू कर दी है। अप्रैल में इसकी टेस्ट ड्राइव और मई 2026 से डिलीवरी शुरू होगी। कंपनी ने शुरुआती 3,000 ग्राहकों के लिए खास ऑफर भी रखा है, जिसमें 5 साल की अनलिमिटेड किलोमीटर वारंटी, 5 साल का रोडसाइड असिस्टेंस और 5 साल का लेबर-फ्री सर्विस कॉन्ट्रैक्ट शामिल है। भारतीय बाजार में इसका सीधा मुकाबला टोयोटा फॉर्च्यूनर और स्कोडा कोडियाक जैसी प्रीमियम SUV से होगा। एक्सटीरियर: मस्कुलर लुक और 19-इंच के अलॉय व्हील्स डिजाइन के मामले में मैजेस्टर काफी अग्रेसिव और मस्कुलर दिखती है। यह ग्लोबल मार्केट में बिकने वाली मैक्सस D90 पर बेस्ड है। इसके फ्रंट में 'मोजेक मैट्रिक्स' ग्रिल दी गई है, जिसके दोनों तरफ वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल LED DRLs मिलते हैं। साइड प्रोफाइल में मस्कुलर क्लैडिंग और 19-इंच के ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स इसे बोल्ड लुक देते हैं। पीछे की तरफ पूरी चौड़ाई वाली LED टेललाइट्स और 'मैजेस्टर' की बैजिंग दी गई है। यह कार मेटल ब्लैक, पर्ल वाइट, कंक्रीट ग्रे और मेटल ऐश जैसे कलर में मिलेगी। इंटीरियर: मसाज फंक्शन वाली सीटें और बड़ा केबिन मैजेस्टर का केबिन बेहद प्रीमियम है। इसमें टू-टोन थीम के साथ सॉफ्ट-टच मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। 6-सीटर वैरिएंट में मिडिल रो के लिए इंडिपेंडेंट कैप्टन सीटें दी गई हैं। सबसे खास फीचर इसकी फ्रंट सीटें हैं, जो न केवल हीटेड और कूल्ड हैं, बल्कि इनमें मल्टीपल मसाजिंग फंक्शन भी मिलते हैं। इसमें 12.3-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और इतना ही बड़ा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है। प्रैक्टिकलिटी के लिए इसमें जेस्चर-कंट्रोल टेलगेट (हाथ के इशारे से खुलने वाला बूट) मिलता है, जो थर्ड रो की सीट फोल्ड करने पर 1,350 लीटर तक का स्पेस देता है। परफॉर्मेंस: 215hp का ट्विन-टर्बो डीजल इंजन मैजेस्टर में परफॉर्मेंस के लिए 2.0-लीटर का ट्विन-टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन दिया गया है, जो 215hp की पावर और 478Nm का टॉर्क जनरेट करता है। यह वही इंजन है जो ग्लोस्टर के टॉप वैरिएंट्स में मिलता है। इसे ZF 8-स्पीड टॉर्क-कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। ऑफ-रोडिंग के लिए इसमें 'M-Hub' ऑल-टेरेन मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर है, जिसमें 10 ड्राइव मोड्स मिलते हैं। कंपनी का दावा है कि इसकी वॉटर-वेडिंग कैपेसिटी (पानी में चलने की क्षमता) 810mm है। सेफ्टी फीचर्स: लेवल-2 ADAS और 6 एयरबैग्स सुरक्षा के लिहाज से MG ने इसमें लेवल-2 ADAS (यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) दिया है। इसमें अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, कोलिजन डिटेक्शन, ऑटो-इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन-डिपार्चर वार्निंग और ब्लाइंड-स्पॉट मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, हिल-होल्ड असिस्ट और सराउंड-व्यू कैमरा इसे एक सुरक्षित एसयूवी बनाते हैं।
रूस में Telegram पर डिजिटल स्ट्राइक, पुतिन ने लगाई पाबंदियां, फाउंडर बोले- हम झुकेंगे नहीं
रूसी अधिकारियों ने देश के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप में से एक, 'टेलीग्राम' पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार का यह कदम रूसी नागरिकों को विदेशी तकनीकी प्लेटफार्मों के बजाय खुद के नियंत्रित विकल्पों की ओर धकेलने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा ...
दुनिया के सबसे अमीर इंसान इलॉन मस्क चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाएंगे। मस्क ने बताया कि वे इसके जरिए सूरज की ऊर्जा कैप्चर करना चाहते हैं। मस्क ने अपनी AI कंपनी XAI की इंटरनल मीटिंग का 45 मिनट का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ये जानकारी सामने आई है। इलॉन मस्क की मीटिंग से जुड़ी 10 बड़ी बातें… 1. सूरज की ऊर्जा का इस्तेमाल 2. फाउंडिंग टीम के 12 मेंबर्स में से 6 को निकाला मीटिंग में मस्क ने बताया कि कंपनी से कई पुराने कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया है। इसमें कंपनी की शुरुआत करने वाली फाउंडिंग टीम के सदस्य भी शामिल हैं। xAI की शुरुआत करने वाले 12 मुख्य सदस्यों में से अब केवल आधे ही मस्क के साथ बचे हैं। मस्क ने इसे कंपनी के 'ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर' में बदलाव का नाम दिया है। 3. चार टीमों में बंटी xAI, 'मैक्रोहार्ड' प्रोजेक्ट सबसे खास यह प्रोजेक्ट सिर्फ साधारण सॉफ्टवेयर नहीं बनाएगा, बल्कि पूरी की पूरी कंपनियों का 'डिजिटल सिमुलेशन' तैयार करेगा। इसका मतलब है कि एआई एक कंपनी के हर विभाग, सप्लाई चेन और बिजनेस फैसलों का एक कंप्यूटर मॉडल बना देगा। इससे किसी भी बड़े फैसले को असल में लागू करने से पहले एआई पर टेस्ट किया जा सकेगा कि उसका नतीजा क्या होगा। मैक्रोहार्ड का एक बड़ा लक्ष्य एआई के जरिए जटिल मशीनों को डिजाइन करना है। यह एआई इतना एडवांस होगा कि खुद ही रॉकेट के इंजन और उनके पार्ट्स के डिजाइन तैयार करेगा, जिससे इंसानी गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और काम की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी। 4. इंसानों की जगह सॉफ्टवेयर खुद लिखेगा अपना प्रोग्राम अब AI मॉडल्स किसी भी समस्या को एक अनुभवी इंजीनियर की तरह समझते हैं। अगर प्रोग्राम में कोई गलती आती है, तो वे उसे ढूंढकर खुद ही ठीक भी कर सकते हैं। मस्क ने कहा कि इस साल के अंत तक शायद कोडिंग लिखने की जरूरत ही न पड़े। AI सीधे 'बाइनरी' (कंप्यूटर की अपनी भाषा यानी 0 और 1) में फाइलें बना देगा। यह काम किसी भी इंसानी प्रोग्रामर या मौजूदा सॉफ्टवेयर (कंपाइलर) से कहीं ज्यादा बेहतर और तेज होगा। मस्क का दावा है कि अगले 2-3 महीनों में उनका 'ग्रोक कोड' दुनिया का सबसे बेहतरीन कोडिंग मॉडल बन जाएगा, जो चुटकियों में जटिल से जटिल सॉफ्टवेयर तैयार कर देगा। 5. AI बना पाएगा 20 मिनट तक लंबे वीडियो XAI की इमेजिन टीम साल के अंत तक ऐसे मॉडल्स लाएगी जो एक बार में 10 से 20 मिनट के लंबे वीडियो बना सकेंगे। इसमें किसी मानवीय दखल की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। 6. 'मेम्फिस क्लस्टर' धरती का सबसे बड़ा सुपरकंप्यूटर मस्क के पास दुनिया का सबसे बड़ा GPU क्लस्टर है। ये 24 घंटे बिना रुके काम करता है। इसका मुख्य काम AI चैटबॉट 'ग्रोक' के अगले और एडवांस वर्जन को ट्रेनिंग देना है। यहां हजारों ऑपरेटिंग सिस्टम एक साथ मिलकर विशाल दिमाग की तरह काम कर रहे हैं। मस्क की टीम ने इस प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि डेटा सेंटर का एक बड़ा हिस्सा मात्र 6 हफ्ते में तैयार किया गया है। हॉल के अंदर 1363 किलोमीटर लंबी फाइबर केबल बिछाई गई है। पूरा क्लस्टर तैयार होने पर यह 1 गीगावाट से ज्यादा बिजली खर्च करेगा। 7. छत पर लिखवाया 'मैक्रो हार्ड' मस्क ने अपनी सफलता का मंत्र 'कंप्यूट एडवांटेज' (ज्यादा से ज्यादा मशीनी ताकत) को बताया। एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने भी माना कि मस्क जितनी तेजी से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया में कोई नहीं बना सकता। मस्क ने डेटा सेंटर की छत पर 'Macro Hard' (माइक्रोसॉफ्ट के नाम पर तंज) लिखवाया है। 8. ग्रोक वॉइस और 'एवरीथिंग एप' का विजन वॉइस टीम ने बताया कि सितंबर 2024 तक उनके पास कोई वॉइस मॉडल नहीं था, लेकिन सिर्फ 6 महीने में उन्होंने स्क्रैच से ऐसा मॉडल बनाया जो ओपन एआई को टक्कर दे रहा है। उनका लक्ष्य इसे सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित न रखकर एक 'एवरीथिंग एप' बनाना है।
कोरियन टेक कंपनी सैमसंग अपनी फ्लैगशिप स्मार्टफोन सीरीज गैलेक्सी S26 लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। कंपनी इस साल भी तीन नए मॉडल्स- गैलेक्सी S26, S26 प्लस और S26 अल्ट्रा बाजार में उतारेगी। इस बार मुख्य फोकस एडवांस AI फीचर्स, स्लिम डिजाइन और अल्ट्रा मॉडल में मिलने वाले पावरफुल 'स्नैपड्रैगन एलीट जेन 5' प्रोसेसर पर है। तीनों फोन एनुअल इवेंट 'गैलेक्सी अनपैक्ड' में पेश किए जाएंगे। ये इवेंट 25 फरवरी को होगा। सीरीज के बेस मॉडल गैलेक्सी S26 की शुरुआती कीमत ₹79,999 हो सकती है। वहीं, गैलेक्सी S26 प्लस ₹99,999 और सबसे प्रीमियम मॉडल गैलेक्सी S26 अल्ट्रा ₹1,29,000 की शुरुआती कीमत में आ सकते हैं। अल्ट्रा के 1TB वैरिएंट की कीमत ₹1.60 लाख तक जा सकती है। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: स्लिम बॉडी और टाइटेनियम फ्रेम गैलेक्सी S26 सीरीज में इस बार डिजाइन को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सैमसंग गैलेक्सी S26 सीरीज एक्सपैक्टेड स्पेसिफिकेशंस
महिंद्रा एंड महिंद्रा का वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 47% बढ़कर ₹4,675 करोड़ हो गया है। एक साल पहले की समान तिमाही (Q3FY25) में कंपनी को ₹3,181 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (11 फरवरी) को कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजे जारी किए हैं। नतीजों के बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर 0.16% की तेजी के साथ 3,681 रुपए पर कारोबार कर रहा है। बीते एक साल में शेयर 20% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 4.41 लाख करोड़ रुपए है। रेवेन्यू 26% बढ़कर ₹52,100 करोड़ रहा महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑपरेशन से रेवेन्यू में सालाना आधार पर 26% की बढ़ोतरी हुई है। FY26 की तीसरी तिमाही में ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹52,100 करोड़ रहा। एक साल पहले की समान तिमाही यानी FY25 की तीसरी तिमाही में रेवेन्यू ₹41,470 करोड़ रहा था। तीसरी तिमाही में कंपनी की टोटल इनकम सालाना आधार (YoY) पर 26% बढ़कर 52,958 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की समान तिमाही में 41,881 करोड़ रुपए थी। वहीं तिमाही आधार पर कंपनी की टोटल इनकम 13% बढ़ी है। कंपनी की गाड़ियों की सेल्स भी सालाना आधार पर 23% बढ़कर 3.02 लाख यूनिट्स रही। कंपनी की कमाई बढ़ने के 5 बड़े कारण कंसॉलिडेटेड यानी पूरी कंपनी की रिपोर्ट कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कंसॉलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। ये खबर भी पढ़ें… भारत-PAK मैच, दिल्ली–मुंबई से कोलंबो फ्लाइट 5 गुना महंगी हुई: ₹1.45 लाख तक खर्च करने होंगे, होटल का किराया ₹1.13 लाख तक पहुंचा भारत और पाकिस्तान के बीच टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2026 का मैच 15 फरवरी को श्रीलंका के कोलंबो में शाम 7 बजे से खेला जाएगा। अगर आप इस मैच को देखने के लिए 14 और 15 फरवरी को फ्लाइट से कोलंबो जाना चाहते हैं, तो आपको 5 गुना तक किराया चुकाना पड़ेगा। मेकमायट्रिप की वेबसाइट पर मंगलवार (10 फरवरी) को 14 और 15 फरवरी को दिल्ली-मुंबई से कोलंबो फ्लाइट का किराया एक पैसेंजर के लिए ₹1.45 लाख तक दिखा रहा है। आम दिनों में कोलंबो की डायरेक्ट फ्लाइट का किराया 30 हजार रुपए के आस-पास तक रहता है। वहीं कोलंबो में बड़े होटलों का किराया भी ₹1.14 लाख तक पहुंच गया है। पूरी खबर पढ़ें…
टेक कंपनी ओपो ने भारतीय बाजार में अपना नया बजट 5G स्मार्टफोन ओप्पो K14x लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने फोन को 50MP कैमरा और 120Hz रिफ्रेश रेट वाले डिस्प्ले के साथ उतारा है। इसमें पावर बैकअप के लिए 6500mAh की बैटरी दी गई है। ओपो K14X को भारत में दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 14,999 रुपए रखी गई है। ओपो K14x : वैरिएंट वाइस प्राइस ओपो K14x : स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: ओप्पो K14x फोन को 1570 x 720 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.75-इंच की HD+ डिस्प्ले पर लॉन्च किया गया है। यह पंच-होल स्टाइल वाली स्क्रीन LCD पैनल पर बनी है जो 120Hz रिफ्रेश रेट, 256ppi और 1125 निट्स पीक ब्राइटनेस आउटपुट प्रदान करती है। यह नया ओपो मोबाइल IP64 रेटिंग के साथ आया है जो इसे पानी व धूल से सुरक्षित रखने में मदद रखता है। परफॉर्मेंस: ओप्पो K14x फोन को एंड्रॉयड 16 पर लाया गया है जो कलरOS पर काम करता है। प्रोसेसिंग के लिए इस स्मार्टफोन को मीडियाटेक डायमेंसिटी 6300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर पर लॉन्च किया गया है। यह 6नैनोमीटर फेब्रिकेशन्स पर बना मोबाइल चिपसेट है जो 2.0गीगाहर्ट्ज़ से लेकर 2.4गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन करने की क्षमता रखता है। इस फोन में ट्रिनिटी इंजन लगा है जो स्मूथ परफॉर्मेंस देने में मदद करता है। बैटरी: पावर बैकअप के लिए 15 हजार का कम का ओपो 5जी फोन तगड़ी 6,500mAh बैटरी की ताकत से लैस होकर आया है। यह बड़ी बैटरी कई घंटों का बैकअप देती है जो एक पूरा दिन आराम से निकाल देती है। वहीं मोबाइल को तेजी से चार्ज करने के लिए ओप्पो K14x को 45W सुपरवूक फास्ट चार्जिंग तकनीक से लैस किया गया है। ओपो के14एक्स 5जी रिवर्स चार्जिंग भी सपोर्ट करता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए लिए ओपो के14एक्स 5जी फोन डुअल रियर कैमरा सपोर्ट करता है। इसके बैक पैनल पर एलइडी फ्लैश से लैस एफ/ अपर्चर वाला 50 मेगापिक्सल मेन सेंसर दिया गया है जो 2 मेगापिक्सल सेकेंडरी सेंसर के साथ मिलकर काम करता है। इस फोन में यूजर्स को डुअल-व्यू वीडियो मोड मिलता है जो व्लॉगिंग में काम आएगा। अन्य: ओप्पो K14x 5G फोन में कनेक्टिविटी के लिए Wi-Fi और ब्लूटूथ 5.4 सहित OTG का सपोर्ट भी दिया गया है। फोन अनलाकिंग और सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर मौजूद है। बताते चलें कि यह 5जी ओप्पो मोबाइल रैम एक्सपेंशन तकनीक से लैस है जो फिजिकल रैम में वचुर्अल रैम जोड़कर इसकी ताकत को बढ़ाती है।

