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एआई के दौर में अब इंसान कहानी सुनाना सीखें:एनवीडिया सीईओ हुआंग बोले- बच्चे कौन सा विषय पढ़ें, इससे ज्यादा जरूरी है 'कैसे सीखें'

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ रफ्तार दुनिया में अक्सर यह सवाल उठता है कि बच्चों को अब कौन-सा विषय पढ़ना चाहिए ताकि भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी एआई चिप कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेसन हुआंग की राय इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि एआई के दौर में क्या पढ़ना है से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि एआई का इस्तेमाल करके कितना बेहतर सीखना है। सिंगापुर के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में हुआंग ने कहा कि माता-पिता को इस बात को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए कि उनके बच्चे कौन-सा सब्जेक्ट चुन रहे हैं। उनके मुताबिक, जो चीजें पहले महत्वपूर्ण थीं, जैसे रचनात्मकता, कहानी कहने की क्षमता, समझदारी और इंसानी जुड़ाव, वही भविष्य में भी सबसे ज्यादा मायने रखेंगी। हुआंग ने जापानी विचार वाबी-साबी का भी जिक्र किया, जिसमें अपूर्णता की सुंदरता को महत्व दिया जाता है। उनका संकेत था कि एआई की परफेक्ट दुनिया में इंसानों की भावनाएं, गलतियां और व्यक्तिगत शैली ही सबसे ज्यादा खास बन सकती हैं। जेसन हुआंग ने नौकरियों को टास्क्स की टोकरी बताया। उनके अनुसार एआई कई दोहराए जाने वाले काम ऑटोमेट कर देगा, लेकिन इससे इंसानों को ज्यादा कठिन, रचनात्मक और रणनीतिक काम करने का समय मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि एआई इंसानों को आलसी नहीं बनाएगा। जैसे कंप्यूटर, इंटरनेट और स्मार्टफोन आने के बाद लोग कम व्यस्त नहीं हुए, बल्कि और ज्यादा काम करने लगे, वैसे ही एआई भी इंसानी महत्वाकांक्षा को बढ़ाएगा। एआई के दौर में बच्चों के लिए रचनात्मक सोच, एआई टूल्स का स्मार्ट इस्तेमाल,जिज्ञासा और लगातार सीखने की मानसिकता बनाए रखना जरुरी है। पत्रकारिता, कला, स्टोरीटेलिंग कभी आउटडेटेड नहीं होगी हुआंग ने खास तौर पर पत्रकारिता, कला, डिजाइन और स्टोरीटेलिंग जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। उनका कहना है कि एआई जानकारी दे सकता है, लेकिन इंसानों जैसी संवेदनशील बातचीत, सही समय पर सही सवाल पूछना और लोगों को जोड़ने वाली कहानी गढ़ना अभी भी मानव क्षमता है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा इंटरव्यूअर सिर्फ तैयारी नहीं करता, बल्कि सामने वाले को ध्यान से सुनता है और उसी पल बेहतर प्रतिक्रिया देता है। इंसानों का यही धारणा गढ़ने का गुण भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होगी।

दैनिक भास्कर 28 May 2026 3:51 pm

रॉयल एनफील्ड ने 'बुलेट 650' लॉन्च की:दो कलर ऑप्शन कैनन ब्लैक और बैटलशिप ब्लू मिलेंगे, कीमत ₹3.65 लाख से शुरू

रॉयल एनफील्ड ने अपने नए मॉडल 'बुलेट 650' को लॉन्च कर दिया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹3.65 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। कीमत के मामले में यह बाइक हाल ही में आई क्लासिक 650 ट्विन के शुरुआती कलर्स के बराबर है, लेकिन उसके टॉप-स्पेक क्रोम वेरिएंट से काफी सस्ती है। इसमें दो कलर ऑप्शन कैनन ब्लैक और बैटलशिप ब्लू मिलेंगे। क्लासिक 650 जैसी कीमत, पर लुक में किए गए हैं कई बदलाव नई बुलेट 650 को रॉयल एनफील्ड ने अपने 650cc पैरेलल-ट्विन पोर्टफोलियो में सातवें मॉडल के रूप में जोड़ा है। जिस तरह बाजार में 350cc सेगमेंट के अंदर बुलेट 350 और क्लासिक 350 काफी चीजें शेयर करती हैं, ठीक वैसा ही फॉर्मूला कंपनी ने यहां भी अपनाया है। बुलेट 650 के ज्यादातर मैकेनिकल पार्ट्स क्लासिक 650 ट्विन जैसे ही हैं, लेकिन इसके डिजाइन और स्टाइलिंग में बुलेट की पारंपरिक पहचान को बनाए रखने के लिए कुछ खास बदलाव किए गए हैं। क्लासिक लुक के लिए क्रोम हेडलाइट हुड और पारंपरिक टेल-लाइट बाइक में क्लासिक लुक देने के लिए क्रोम हेडलाइट हुड और पारंपरिक टेल-लाइट दी गई है। इसके अलावा, बुलेट की पहचान माने जाने वाले हाथ से पेंट किए गए पिनस्ट्राइप्स (मडगार्ड और टैंक पर सुनहरी धारियां) और फ्यूल टैंक पर मेटल का सिग्नेचर बैज दिया गया है। क्लासिक 650 के मुकाबले इसका रियर फेंडर (पीछे का मडगार्ड) ज्यादा स्क्वेयर्ड-ऑफ यानी चौकोर डिजाइन में आता है, जो इसे पुरानी बुलेट वाला लुक देता है। लंबी दूरी के सफर के लिए मिलेगी ज्यादा आरामदायक सिंगल-पीस सीट बुलेट 650 में जो सबसे बड़ा और व्यावहारिक बदलाव किया गया है, वो है इसकी सीट। क्लासिक 650 में जहां रिमूवेबल पिलियन सीट (पीछे की सीट हटाने का विकल्प) मिलती है, वहीं बुलेट 650 में कंपनी ने सिंगल-पीस स्टेप्ड सीट दी है। माना जा रहा है कि यह सीट बाइक चलाने वाले और पीछे बैठने वाले (पिलियन) दोनों के लिए लंबी दूरी के सफर में क्लासिक के मुकाबले ज्यादा आरामदायक साबित होगी। इसके अलावा बाइक का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर डिजी-एनालॉग ही रखा गया है, जिसमें फ्यूल गेज और ओडोमीटर के लिए एक छोटी डिजिटल डिस्प्ले मिलती है। बाइक के हैंडल पर पॉलिश्ड एल्युमिनियम स्विचगियर दिए गए हैं जो इसके प्रीमियम लुक को बढ़ाते हैं। 648cc का पुराना भरोसेमंद इंजन, जो जनरेट करेगा 47hp की पावर इंजन की बात करें तो बुलेट 650 में कंपनी का आजमाया हुआ 648cc का पैरेलल-ट्विन, एयर/ऑयल-कूल्ड इंजन दिया गया है। यह इंजन 47hp की अधिकतम पावर और 52Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इस दमदार इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। सस्पेंशन ड्यूटी के लिए बाइक के फ्रंट में 120mm ट्रैवल के साथ शोवा टेलिस्कोपिक फोर्क और रियर में 90mm ट्रैवल के साथ ट्विन शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं, जो खराब रास्तों पर भी बेहतर राइडिंग एक्सपीरियंस देने का दावा करते हैं। ये कंपनी की सबसे सस्ती लॉन्ग-व्हीलबेस 650cc बाइक ₹3.65 लाख की कीमत के साथ यह बाइक क्लासिक 650 के टॉप-एंड क्रोम वेरिएंट से करीब ₹14,000 सस्ती है। इसी के साथ यह रॉयल एनफील्ड के लॉन्ग-व्हीलबेस 650 प्लेटफॉर्म पर आधारित सबसे किफायती मॉडल बन गई है। आपको बता दें कि इसी प्लेटफॉर्म पर कंपनी की सुपर मीटियर 650, शॉटगन 650 और क्लासिक 650 ट्विन भी बेस्ड हैं।

दैनिक भास्कर 28 May 2026 3:15 pm

भास्कर नॉलेज:क्या बिना स्मार्टफोन के भी आपको ट्रैक कर रहे हैं वाई-फाई राउटर?

डिजिटल प्राइवेसी और सर्विलांस (निगरानी) को लेकर दुनिया भर में एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जर्मनी के कार्ल्सरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि अब आपके घर या सार्वजनिक जगहों पर लगे साधारण वाई-फाई राउटर भी आपको ट्रैक कर सकते हैं। जानते हैं क्या है ये तकनीक... वाई-फाई राउटर बिना किसी फोन या डिवाइस के किसी इंसान को कैसे ट्रैक कर सकते हैं? जर्मनी के शोधकर्ताओं ने इसके लिए ‘बीएफआईडी’ नामक खास हैकिंग का तरीका विकसित किया है। यह वाई-फाई के एक सामान्य फीचर ‘बीमफॉर्मिंग फीडबैक इंफॉर्मेशन’ (बीएफआई) का फायदा उठाता है। वाई-फाई 5 और उसके बाद की तकनीक में यह फीचर इसलिए दिया गया था ताकि राउटर सिग्नल की परफॉर्मेंस को बेहतर कर सके। लेकिन ये सिग्नल बिना किसी एन्क्रिप्शन (सुरक्षा लॉक) के लगातार हवा में तैरते रहते हैं। जब कोई इंसान कमरे में चलता है, तो इन तरंगों में रुकावट आती है, जिसे पास का कोई भी वाई-फाई डिवाइस चुपके से कैप्चर कर सकता है। यह तकनीक किसी व्यक्ति की पहचान कितनी सटीकता से कर सकती है? शोधकर्ताओं ने इसके लिए मशीन लर्निंग और एआई मॉडल्स का इस्तेमाल कर इंसानी मूवमेंट की ‘रेडियो इमेजेस’ तैयार कीं। यह ठीक एक कैमरे की तरह काम करता है, लेकिन रोशनी की जगह रेडियो तरंगों के जरिए तस्वीर बनाता है। 197 लोगों पर किए गए टेस्ट में इस सिस्टम ने 99.5% सटीकता के साथ लोगों को उनकी चाल और बॉडी स्ट्रक्चर से पहचान लिया। यानी अब ट्रैकिंग के लिए स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का होना जरूरी नहीं है। यह तकनीक वाई-फाई की रेडियो तरंगों में इंसानी शरीर से होने वाली हलचल को पकड़कर निगरानी कर सकती है। अगर वाई-फाई को हमारा नाम नहीं पता, तो इससे प्राइवेसी को क्या खतरा है? साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, हालांकि वाई-फाई डेटा सीधे आपका नाम नहीं बताता, लेकिन हमलावर इस ट्रैकिंग डेटा को आपके पुराने स्मार्टफोन रिकॉर्ड या लोकेशन हिस्ट्री से जोड़कर आसानी से आपकी पूरी पहचान उजागर कर सकते हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि सार्वजनिक जगहों, मॉल या ऑफिस में आपको पता भी नहीं चलेगा और कोई आपकी हर गतिविधि को साइलेंटली मॉनिटर कर रहा होगा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के लिए यह तकनीक सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। इससे बचने का क्या उपाय है? शोधकर्ताओं ने वैश्विक टेक संस्थाओं और रेगुलेटर्स से अपील की है कि वे भविष्य के वाई-फाई मानकों में मजबूत प्राइवेसी प्रोटेक्शन और एन्क्रिप्शन लागू करें। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाई-फाई सिग्नलों को एन्क्रिप्ट नहीं किया जाता, तब तक सार्वजनिक वाई-फाई के आसपास अत्यधिक सतर्क रहना और सुरक्षा कमजोरियों को पैच करने वाले नए फर्मवेयर अपडेट का उपयोग करना ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है।

दैनिक भास्कर 28 May 2026 2:54 pm

वॉट्सएप-फेसबुक-इंस्टाग्राम के प्लस वर्जन आएंगे, इसके पैसे लगेंगे:24 घंटे के बाद भी नहीं हटेगी स्टोरी, पसंदीदा लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना पाएंगे

सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और वॉट्सएप के लिए नए सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए हैं। इसके तहत एप्स के ‘प्लस’ वर्जन रोल आउट किए जा रहे हैं। इस प्लान को लेने वाले यूजर्स को स्पेशल टूल्स और कस्टमाइजेशन के विकल्प मिलेंगे। इसके लिए पैसे चुकाने होंगे। यह कदम मेटा की विज्ञापन के अलावा कमाई का नया जरिया बनाने की रणनीति का हिस्सा है। नए प्लस प्लान कंपनी के मौजूदा 'मेटा वेरिफाइड' प्लान की जगह नहीं लेंगे। मेटा ने अभी इन नए 'प्लस' सब्सक्रिप्शन प्लान्स को वैश्विक स्तर पर रोलआउट करने की घोषणा की है, लेकिन कंपनी ने भारत में इसकी लॉन्चिंग की तारीख का ऐलान नहीं किया है। चूंकि, भारत मेटा के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यूजर बेस वाला मार्केट है, इसलिए कंपनी आमतौर पर यहां किसी भी बड़े फीचर को फेज्ड मैनर रोलआउट करती है। एप्स के हिसाब से अलग-अलग प्लान और उनकी कीमतें इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस में क्या मिलेगा खास? इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस मुख्य रूप से सोशल एक्सप्रेशन और क्रिएटर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें यूजर्स को यह देखने की सुविधा मिलेगी कि कुल कितने लोगों ने उनकी स्टोरी को दोबारा देखा है। इनके अलावा ये 5 फायदे भी मिलेंगे… वॉट्सएप प्लस में क्या होगा खास? यह पूरी तरह से पर्सनलाइजेशन और मैसेजिंग पर केंद्रित है। इसमें यूजर्स को एप थीम्स, कस्टम रिंगटोन्स, एडिशनल पिंड चैट्स, लिस्ट कस्टमाइजेशन और प्रीमियम स्टिकर्स जैसे फीचर्स मिलेंगे। मेटा एआई यूजर्स के लिए भी दो प्लान टेस्ट किए जा रहे दोनों में फीचर्स समान हैं, लेकिन प्रीमियम प्लान मुश्किल कामों के लिए डीपर रीजनिंग और हाई कंप्यूट क्वेरीज की क्षमता अनलॉक करेगा। इससे मेटा एप्स पर बेहतरीन वीडियो और इमेज-जनरेशन की सुविधा मिलेगी। सामान्य यूजर्स के लिए मेटा एआई मुफ्त रहेगा। क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए महंगे एडवांस प्लान क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए इसी हफ्ते दो प्लान टेस्ट किए जाएंगे: यह प्लान कंपनियों को अपनी वेबसाइट या शॉप पर ट्रैफिक बढ़ाने में मदद करेगा। इसमें डीपर कॉम्पिटिटिव इनसाइट्स जैसे एनालिटिक्स टूल्स, ऑप्टिमाइज्ड शेड्यूलिंग टूल्स, बिना पासवर्ड शेयर किए दूसरे मॉडरेटर्स को एक्सेस देने की सुविधा मिलेगी। साथ ही, अगर कोई दूसरा यूजर उनका कंटेंट दोबारा इस्तेमाल करता है, तो नोटिफिकेशन मिलेगा ताकि वे ओरिजिनल रील का क्रेडिट लेबल मांग सकें। क्यों बदल रहा है सोशल मीडिया का बिजनेस मॉडल? सालों तक फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप पूरी तरह मुफ्त रहे क्योंकि कंपनियां यूजर्स के डेटा और विज्ञापनों) से अरबों कमाती थीं। लेकिन अब पूरी दुनिया में इन एप्स के यूजर्स की संख्या चरम पर पहुंच चुकी है, यानी नए यूजर्स मिलने की रफ्तार धीमी हो गई है। साथ ही प्राइवेसी नियमों के कड़े होने से विज्ञापन से होने वाली कमाई पर असर पड़ा है। यही वजह है कि मेटा, इलॉन मस्क के एक्स की तरह अब सीधे यूजर्स से पैसे लेकर अपनी कमाई का जरिया सुरक्षित कर रही है।

दैनिक भास्कर 28 May 2026 1:02 pm

चैटबॉट्स के सुझाव से चेहरे के मेकओवर का ट्रेंड:चेतावनी-खर्च के बाद भी आदर्श चेहरे की गारंटी नहीं; सर्जन बोले- असल में करना जानलेवा

ब्रिटेन के जाने-माने लेखक और पत्रकार इसाक टॉम्पकिंस ने अपने फोन के कैमरे से एक सामान्य सी सेल्फी ली और उसे एक एआई चैटबॉट को सौंप दिया। कहा-‘मुझे थोड़ा और सुंदर बना दो।’ कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर ऐसा चेहरा उभर आया जो था तो उनका ही, लेकिन उसमें जादुई कशिश थी। उसकी नाक बिल्कुल सीधी थी और पलकें थोड़ी उठी हुई थीं। इसाक यह तस्वीर लेकर लंदन के मशहूर कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. एलेक्स कारिडिस के पास पहुंचे, तो डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बदलाव तो मामूली है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने का खर्च करीब 25 लाख रुपए आएगा।’ इसाक का यह प्रयोग उस कड़वी हकीकत को बयां करता है, जिससे दुनियाभर के प्लास्टिक सर्जन जूझ रहे हैं। इस नए चलन को ‘एआई फेस’ नाम दिया गया है। ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स की प्रेसिडेंट नोरा नुजेंट बताती हैं कि उनके क्लीनिक में रोज ऐसे मरीज आते हैं, जो चैटबॉट्स द्वारा बनाई गई अवास्तविक तस्वीर लेकर जिद करते हैं कि उन्हें वैसा ही दिखना है। उनकी मांग होती है... कांच जैसी बेदाग त्वचा, तराशी हुई गालों की हड्डियां और चेहरे में ऐसी समरूपता जो इंसानी शरीर में प्राकृतिक रूप से संभव ही नहीं है। इसाक यहीं नहीं रुके। उन्होंने चैटबॉट से इंटरनेट का सबसे हैंडसम व मर्दाना लुक देने को कहा। एआई ने जो तस्वीर बनाई, उसे देखकर डॉ. कारिडिस भी हैरान रह गए। चैटबॉट ने भारी जबड़े की सर्जरी, गालों की चर्बी हटाने और कई इम्प्लांट्स लगाने की सलाह दी। डॉक्टर ने गंभीर होकर कहा,‘यह बेतुका और डरावना है। इस काल्पनिक चेहरे के लिए 1 करोड़ रुपए खर्च करना होंगे, फिर भी गारंटी नहीं कि तुम ऐसे ही दिखोगे। उल्टा उम्र बढ़ने के साथ असली चेहरा भी बिगड़ जाएगा।’ डॉ. जूलियन कहते हैं,‘बीते दिनों एक वीडियो में डॉक्टर दावा करते दिखे कि सर्जरी से मरीज 30 साल छोटा दिखेगा। पर ध्यान से देखने पर पता चलता है कि मरीज के हाथ में छह अंगुलियां थीं। स्पष्ट था कि इसे एआई द्वारा बनाया गया था। डॉ. जूलियन कहते हैं,‘खूबसूरत दिखना हर किसी की चाहत है, पर इंसानी शरीर पिक्सल नहीं; एआई के भ्रमजाल से स्थायी घाव हो सकते हैं। जिसे कोई सर्जन सुधार नहीं सकता।’ स्क्रीन पर ​पिक्सल बदलना आसान, सर्जरी में इस स्तर पर काम मुश्किल डॉ. कारिडिस का कहना है कि एआई कंप्यूटर स्क्रीन पर एक-एक पिक्सल को मर्जी से बदल सकता है, पर सर्जरी इस सूक्ष्म स्तर पर काम नहीं करती। वहीं, डॉ. जूलियन डी सिल्वा इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण बताते हैं कि किसी व्यक्ति की एक आंख दूसरी आंख से कुछ मिलीमीटर ऊपर-नीचे है, तो एआई उसे एक सेकंड में ठीक कर देगा। पर हकीकत में आंखें खोपड़ी की हड्डी के खांचे में टिकी होती हैं, जिसके ठीक पीछे दिमाग होता है। सर्जरी से उन हड्डियों को हिलाना जानलेवा हो सकता है।

दैनिक भास्कर 28 May 2026 12:18 pm

टाटा मोटर्स आज टियागो फेसलिफ्ट लॉन्च करेगी:डिजाइन और इंटीरियर में 4 बड़े बदलाव; ICE, CNG और इलेक्ट्रिक तीनों ऑप्शन मिलेंगे

टाटा मोटर्स आज 28 मई को अपनी एंट्री-लेवल कार टियागो का फेसलिफ्ट लॉन्च करेगी। कार के डिजाइन, केबिन और फीचर्स में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। यह हैचबैक कार पेट्रोल (ICE), सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक (EV) तीनों पावरट्रेन ऑप्शंस के साथ बाजार में आएगी। मौजूदा मॉडल के लॉन्च के बाद से इस कार को मिला यह पहला सबसे बड़ा अपडेट है। एक्सटीरियर: शार्प फ्रंट लुक और कनेक्टेड एलईडी टेललैंप्स टाटा मोटर्स ने टियागो फेसलिफ्ट और इसके इलेक्ट्रिक वेरिएंट के बाहरी डिजाइन को काफी स्पोर्टी बनाया है। इसके हेडलाइट हाउसिंग में 'आईब्रो' जैसा नया एलईडी डीआरएल है, जो कार को शार्प लुक देता है। कार के पिछले हिस्से में वर्टिकल लाइनों वाला नया एलईडी टेललैंप्स डिजाइन मिलता है, जो बीच में कंपनी के टाटा लोगो से जुड़ा है। इसके अलावा रियर वाइपर, टेलगेट पर 'टियागो' की ब्रांडिंग और वर्टिकल रिफ्लेक्टर्स के साथ नया बंपर दिया गया है। इंटीरियर: केबिन में फ्लोटिंग स्क्रीन और नया रिफ्रेश्ड लेआउट टाटा ने 2026 टियागो फेसलिफ्ट के इंटीरियर को रीवॅम्प किया है। कार में पुराना ब्लैक और लाइट-ग्रे कलर कॉम्बिनेशन बरकरार रखते हुए डैशबोर्ड को अब पहले से ज्यादा वर्टिकल लेआउट दिया गया है। कार में अपडेटेड 2-स्पोक स्टीयरिंग व्हील मिलता है। इसके अलावा डैशबोर्ड के सेंटर में मिलने वाले 'TIAGO' बैज को अब नीचे क्लाइमेट कंट्रोल पैनल पर शिफ्ट कर दिया गया है। यह पैनल एक ब्लैक बोर्ड पर सेट है, जिसमें पुराने परिचित रोटरी नॉब्स और टॉगल स्विच मिलते हैं। इन-कैबिन टेक और फीचर्स: फ्री-स्टैंडिंग डिस्प्ले इस नए मॉडल में इंफोटेनमेंट सिस्टम के लिए एक फ्लोटिंग स्क्रीन दी गई है। इसके साथ ही ड्राइवर के इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर के लिए भी अलग से एक फ्लोटिंग स्क्रीन है। इस पहले बड़े अपडेट की वजह से कार की ओवरऑल फीचर लिस्ट पहले से काफी लंबी और मॉडर्न होने की उम्मीद है। पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक तीनों का ऑप्शन यह कार ट्रेडिशनल पेट्रोल कंबशन इंजन (ICE), पर्यावरण के अनुकूल सीएनजी (CNG) और पूरी तरह इलेक्ट्रिक (EV) तीनों ऑप्शंस में उपलब्ध होगी। टियागो ईवी का ओवरऑल स्टाइल पेट्रोल मॉडल जैसा ही है, लेकिन इलेक्ट्रिक वेरिएंट में ब्लैक पैनल की जगह बॉडी-कलर पैनल है। इसके अलावा इसके निचले हिस्से में वर्टिकल स्लैट्स हैं, जो इसे पेट्रोल इंजन वाले वर्जन से अलग पहचान देते हैं। इन कारों से सीधा मुकाबला यह अपडेट टाटा की स्थिति को इस सेगमेंट में और मजबूत करेगा। यहां इसका सीधा मुकाबला मारुति सुजुकी स्विफ्ट और हुंडई ग्रैंड आई10 नियोस जैसी कारों से होना है। नॉलेज पार्ट: 'फेसलिफ्ट' का मतलब: जब कोई ऑटो कंपनी अपनी किसी मौजूदा कार के इंजन या प्लेटफॉर्म को बदले बिना, केवल उसके बाहरी लुक (बंपर, ग्रिल, लाइट्स) और इंटीरियर को कॉस्मेटिक अपडेट देकर दोबारा उतारती है, तो उसे 'फेसलिफ्ट' मॉडल कहा जाता है। कंपनियां ऐसा कार को फ्रेश बनाए रखने और कॉम्पिटिशन में टिके रहने के लिए हर 3-4 साल में करती हैं।

दैनिक भास्कर 28 May 2026 11:24 am

ओप्पो एनको एयर 5 प्रो खरीदें या नहीं:₹5000 के बजट में नॉइस कैंसिलेशन, ट्रांसलेटर और वियर डिटेक्शन जैसे एडवांस फीचर्स

टेक कंपनी ओप्पो ने एनको एयर 5 प्रो' लॉन्च कर दिए हैं। इस नए डिवाइस में 55dB का ANC यानी, एक्टिव नॉइस कंट्रोल है। ये बाहर के भारी शोर को गायब कर देता है। बिना ANC के यह डिवाइस 54 घंटे तक नॉन-स्टॉप प्लेबैक टाइम देता है। इसकी कीमत ₹5000 के आसपास है। अनबॉक्सिंग: बॉक्स से टाइप-सी चार्जिंग केबल नहीं इस डिवाइस की बॉक्स पैकेजिंग काफी सिंपल है। बॉक्स को ओपन करते ही सबसे ऊपर एक्चुअल हेडफोन्स मिलते हैं। इसके ठीक नीचे एडिशनल ईयर टिप्स और एक यूजर मैनुअल है। हालांकि, कंपनी ने यहां पर थोड़ी कॉस्ट कटिंग की है। इसमें टाइप-सी चार्जिंग केबल नहीं है। डिजाइन और फिटिंग: मैट ब्लैक कलर वेरिएंट में प्रीमियम लुक बिल्ड क्वालिटी के मामले में इसका मैट ब्लैक कलर वेरिएंट काफी प्रीमियम फील देता है। इसके केस पर आगे की तरफ OPPO की बैजिंग और ठीक नीचे एक एलईडी लाइट इंडिकेटर दिया गया है। बॉटम सरफेस पर टाइप-सी पोर्ट के साथ में ही एक रिसेट बटन मिलता है। ये ईयरबड्स वैक्यूम टाइप डिजाइन के साथ आते हैं, जिससे कानों में इनकी फिटिंग बढ़िया बैठती है। इसमें IP55 की रेटिंग दी गई है, यानी वर्कआउट के दौरान पसीना आने या पानी के कुछ छीटें पड़ने पर भी यह खराब नहीं होगा। इसे आउटडोर जॉगिंग या वॉकिंग में आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। स्पेसिफिकेशन्स: 12mm के टाइटेनियम कोटेड ड्राइवर्स इसमें 12mm के टाइटेनियम कोटेड ड्राइवर्स दिए गए हैं। यह ब्लूटूथ वर्जन 6.0 पर बेस्ड है। इसमें LHDC 5.0, AAC और SBC कोडेक्स के साथ गूगल फास्ट पेयर का सपोर्ट मिलता है। इसका साउंड आउटपुट बेस लवर्स के लिए बेहतरीन है। इसके मिड्स और ट्रेबल भी काफी बैलेंस्ड हैं। कनेक्टिविटी: 6 माइक्स से क्लियर कॉलिंग और बिना लैग का गेम मोड डिवाइस में डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी का फीचर है। इससे इसे एक ही समय पर लैपटॉप और स्मार्टफोन दोनों से कनेक्ट रखा जा सकता है। कॉलिंग के लिए इसके दोनों बड्स को मिलाकर कुल 6 माइक्स मिलते हैं। गेमर्स के लिए इसमें एक डेडिकेटेड गेम मोड दिया गया है, जिसमें फुटस्टेप्स और फायरिंग की आवाज़ बिना किसी लैग के काफी एक्यूरेट सुनाई देती है। एडवांस टच कंट्रोल्स: स्टेम से वॉल्यूम कंट्रोल और लाइव ट्रांसलेटर इन ईयरबड्स की स्टेम पर ही टच कंट्रोल्स दिए गए हैं। सिंगल टैप से म्यूजिक प्ले/पॉज और डबल टैप से नेक्स्ट ट्रैक पर स्विच कर सकते हैं। इसके अलावा, स्टेम पर ऊपर या नीचे स्लाइड करके सीधे वॉल्यूम को भी एडजस्ट किया जा सकता है। इसमें एक 'AI ट्रांसलेटर' भी दिया गया है। बैटरी लाइफ और एप फीचर्स: 54 घंटे का बैकअप और वियर डिटेक्शन ईयरबड में 62mAh और चार्जिंग केस में 530mAh की बैटरी है। ANC ऑन रखने पर 29 घंटे और ANC ऑफ रखने पर यह पूरे 54 घंटे तक का बैटरी बैकअप देता है । इसे 'HeyMelody' एप्लीकेशन से मैनेज किया जाता है, जहां केस और बड्स की बैटरी परसेंटेज दिखती है। एप के जरिए ANC/ट्रांसपेरेंसी मोड, डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी, 3D सराउंड साउंड के लिए 'OPPO Alive Audio', इक्वलाइज़र (EQ) प्रीसेट्स, हाई-रेज मोड, लो-लेटेंसी गेमिंग मोड, स्पॉटिफाई टैप और 'Find My Earbuds' जैसे फीचर्स को कस्टमाइज किया जा सकता है। इसमें वियर डिटेक्शन फीचर भी है, जिससे कान से ईयरबड निकालते ही गाना या वीडियो अपने आप पॉज हो जाता है और दोबारा लगाने पर प्ले हो जाता है। फाइनल वर्डिक्ट: क्या आपको इसे खरीदना चाहिए? अगर आपका बजट ₹5000 के आसपास है और आप एक ऐसे ईयरबड्स की तलाश में हैं जिसमें दमदार साउंड, हैवी बेस और कमाल का एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन मिले, तो ये 'वैल्यू फॉर मनी' डील है। ध्यान रखने वाली बात: कंपनी ने कॉस्ट कटिंग के चक्कर में बॉक्स से टाइप-सी चार्जिंग केबल हटा दी है, इसलिए आपके पास पहले से एक टाइप-सी केबल होनी चाहिए। साथ ही, बहुत ज्यादा प्रोफेशनल गेमिंग करने वालों को अब भी वायर्ड हेडफोन्स की तरफ ही देखना चाहिए। इन छोटी बातों को छोड़ दें तो फीचर्स के मामले में इस बजट में इसका कोई मुकाबला नहीं है।

दैनिक भास्कर 26 May 2026 5:48 pm

नौकरियों को एआई से गंभीर खतरा नहीं:एआई से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की मांग बढ़ी, यूएस में 76 करोड़ तक का पैकेज

गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स के ‎टेक्नोलॉजी पॉडकास्ट ‘हार्ड फोर्क’ के होस्ट्स के साथ बातचीत‎ की। इस दौरान गूगल सर्च के भविष्य, एआई एजेंट्स के‎ इस्तेमाल और कॉलेज ग्रेजुएट्स को लेकर चर्चाएं हुईं। पिचई ने‎ कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बेहद तेजी से‎ दुनिया को बदल रहा है। ऐसे में लोगों का चिंतित होना‎ स्वाभाविक है। दरअसल लोग इतने बड़े तकनीकी बदलाव को ‎समझने और उसके अनुरूप ढलने के लिए अभी तैयार नहीं‎ हैं। एक आंकड़ा सामने आया कि केवल 16% लोग ही एआई ‎को ज्यादातर अच्छा मानते हैं, जबकि 35% लोग इसे खराब ‎मानते हैं। इस पर पिचई ने कहा कि टेक कंपनियों की यह ‎जिम्मेदारी है कि वे एआई के फायदे लोगों तक पहुंचाएं और ‎दिखाएं कि यह तकनीक जीवन को कैसे बेहतर बना सकती है। ‎ एआई से नौकरियां खत्म होने और काम बदलने की‎ आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर‎ नहीं होगी, जितना अनुमान है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ‎हर पीढ़ी में भविष्य को लेकर चिंताएं होती हैं, लेकिन आखिरकार वही पीढ़ी बेहतर दुनिया बनाती है।‎ एंट्री लेवल के युवाओं की क्षमताएं बढ़ेंगी एंट्री-लेवल युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए पिचई ने कहा कि एआई लोगों की क्षमताओं को बढ़ाएगा। जैसे स्प्रेडशीट आने से काम करने का तरीका बदला था, वैसे ही एआई भी कई लोगों के लिए नई शुरुआत का रास्ता खोलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया में पहले से कहीं ज्यादा लोग कोडिंग कर पाएंगे। पिचई के मुताबिक एआई डॉक्टरी जैसे पेशों में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अभी डॉक्टरों का बहुत ज्यादा समय कागजी कार्रवाई और तकनीकी प्रक्रियाओं में चला जाता है,एआई से इस समय की बचत होगी, जिससे डॉक्टर बचे हुए समय को मरीजों के साथ बिता पाएंगे। एआई से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की मांग बढ़ी, यूएस में 76 करोड़ तक का पैकेज एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। जॉब सर्च प्लेटफॉर्म ग्लासडोर के मुताबिक इस साल की पहली तिमाही में साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी जॉब में 11% की बढ़ोतरी हुई है। बड़ी वजह एआई आधारित कोडिंग टूल्स का तेजी से इस्तेमाल माना जा रहा है, जिससे सिस्टम में बग्स व सुरक्षा खामियों का खतरा बढ़ रहा है।टेक कंपनियों के कर्मचारी अब बड़े पैमाने पर एआई से कोड जनरेट कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे काम की गति तो बढ़ती है, लेकिन कई बार सॉफ्टवेयर में कमजोरियां भी पैदा हो जाती हैं। प्रमुख एआई कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ जैसे मॉडल का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है। लिंक्डइन की चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी अफसर ली किसनर के मुताबिक सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। एआई का असर केवल साइबर सिक्योरिटी तक सीमित नहीं है। प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और एआई इंडस्ट्री में भी नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। नए कॉलेज ग्रेजुएट्स के लिए एआई इंजीनियर की मांग सबसे ज्यादा बताई जा रही है। गूगल के वाइस प्रेसिडेंट निक फॉक्स का कहना है कि पहले की तुलना में अब ज्यादा सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जरूरत है। हालांकि दूसरी तरफ टेक इंडस्ट्री में छंटनी भी हो रही है। मेटा ने पिछले सप्ताह करीब 8 हजार कर्मचारियों की छंटनी की। अमेजन हाल में 16 हजार नौकरियां खत्म कर चुकी है। स्ट्राइप, स्नैप और ब्लॉक जैसी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों को निकाला है। एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ और बाद में ओपनएआई के जीपीटी 5.4 साइबर मॉडल के आने के बाद साइबर सिक्योरिटी हायरिंग में और तेजी आई है। सिक्योरिटी एग्जीक्यूटिव्स का पैकेज 66से 76 करोड़ तक पहुंच गया है

दैनिक भास्कर 26 May 2026 4:20 pm

फरारी की पहली इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार 'लूस' लॉन्च:फुल चार्ज पर 530km चलेगी, टॉप स्पीड 310kmph; कीमत ₹6.10 करोड़

लग्जरी स्पोर्ट्स कार बनाने इटली की कंपनी फरारी ने आज 26 मई को अपनी पहली इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार लॉन्च की है। यह एक 4-डोर, 5-सीटर इलेक्ट्रिक GT कार है, जिसे रफ्तार के साथ लग्जरी भी चाहने वाले लोगों के लिए बनाया गया है। खास बात ये है कि लूस फरारी की पहली EV के अलावा पहली 5 सीटर कार भी है। इसे एपल के पूर्व डिजाइन चीफ जॉनी इव की कंपनी 'LoveFrom' ने डिजाइन किया है। कंपनी का दावा है कि कार फुल चार्ज पर 530km चलेगी और इसकी टॉप स्पीड 310kmph है। फरारी लूस की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 5.50 लाख यूरो (6.10 करोड़ रुपए) है। कार की बुकिंग दुनियाभर में शुरू कर दी गई है। भारतीय बाजार में इसकी लॉन्चिंग को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उम्मीद है कि इसे आने वाले समय में इम्पोर्ट रूट के जरिए भारत लाया जा सकता है। एक्सटीरियर: फरारी का अब तक का सबसे अलग डिजाइन लूस का डिजाइन फरारी की अन्य कारों जैसा नहीं है। इसे 'क्लीन शीट' यानी बिल्कुल नए सिरे से डिजाइन किया गया है। इंटीरियर: एपल की झलक और रेट्रो थीम का कॉम्बिनेशन कार के अंदर जोनी इव की 'एपल एस्थेटिक्स' साफ नजर आती है। इसमें एनोडाइज्ड एल्यूमीनियम और कोर्निंग ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। परफॉर्मेंस: 1050hp की पावर और क्वाड मोटर सेटअप लूस एक परफॉर्मेंस बीस्ट है। इसमें चार इलेक्ट्रिक मोटर्स (हर पहिये पर एक) दी गई हैं। बैटरी और रेंज: सिंगल चार्ज पर 530km चलेगी फरारी ने इस कार की बैटरी को मारानेलो में ही डिजाइन और तैयार किया है। सेफ्टी फीचर्स: एडवांस्ड सस्पेंशन और टॉर्क वेक्टरिंग लूस को केवल तेज ही नहीं, बल्कि आरामदायक और सुरक्षित भी बनाया गया है।

दैनिक भास्कर 26 May 2026 3:00 pm

एआई ने बिगाड़ा दिग्गज कंपनियों का बजट:माइक्रोसॉफ्ट ने रोके लाइसेंस, उबर का सालभर का फंड 4 महीने में ही साफ

बीते दो वर्षों से टेक इंडस्ट्री में नारा गूंज रहा है...‘एआई जल्द ही सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जगह ले लेगा और कंपनियों का खर्च आधा हो जाएगा।’ इस वादे ने शेयर बाजार को आसमान पर पहुंचा दिया, कंपनियों ने बड़े पैमाने पर छंटनी की और करोड़ों रुपए एआई इन्फ्रा खर्च कर दिए। पर, जब इन टूल्स को काम पर लगाया गया, तो जो इनवॉइस सामने आई उसने दिग्गज कंपनियों को हिला दिया। सबसे बड़ा झटका माइक्रोसॉफ्ट को लगा। कंपनी ने एंथ्रोपिक में 48 हजार करोड़ रु. निवेश किए और अपने 1 लाख इंजीनियरों को ‘क्लॉड कोड’ का एक्सेस दे दिया। उम्मीद थी कि उत्पादकता बढ़ेगी, पर हर शब्द पर भुगतान की मजबूरी ने लागत को बेकाबू कर दिया। ​इस वजह से जून तक सभी लाइसेंस रद्द कर दिए गए व इंजीनियरों को माइक्रोसॉफ्ट के इन-हाउस टूल पर शिफ्ट करना पड़ा। उबर ने दिसंबर 2025 में अपने 5,000 इंजीनियरों को क्लॉड कोड दिया। 84% डेवलपर्स इसका इस्तेमाल करने लगे और 70% कोड एआई से आने लगा। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियर हर महीने 47 हजार से 1.9 लाख रुपए का व्यक्तिगत बिल बनाने लगे। एक सीटीओ ने तो दो घंटे के डेमो में 1.1 लाख रु. खर्च कर दिए। अप्रैल तक ही उबर ने 2026 का पूरा एआई बजट खत्म कर दिया। एनवीडिया ने भी माना कि उनकी टीम के लिए कंप्यूटिंग की लागत कर्मचारियों की सैलरी से ज्यादा हो गई है। दरअसल, साधारण एआई लगभग मुफ्त हो चुका है, पर गंभीर कोडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले टॉप-टियर एआई के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ओपनएआई ने नया मॉडल दोगुने दाम पर उतारा, जबकि एंथ्रोपिक ने टेक्स्ट गिनने का तरीका बदल दिया, जिससे बिल बढ़ने लगा। बेजोस बोले- यह संकट नहीं ‘एआई बबल’ के डर को खारिज करते हुए अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस ने कहा कि यह संकट नहीं, बल्कि ‘सदी में एक बार मिलने वाला सबसे बड़ा अवसर’ है। वहीं, सॉफ्टबैंक के प्रमुख मासायोशी सन 9.5 लाख करोड़ रु. का नया एआई फंड ‘प्रोजेक्ट इजा नागी’ लॉन्च कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस कुछ वर्षों में इंसानी दिमाग से 10 गुना ज्यादा स्मार्ट हो जाएगा। एआई में बिग टेक का महा निवेश...एंथ्रोपिक की बादशाहत माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा व अमेजन इस साल एआई इन्फ्रा पर रिकॉर्ड 69 लाख करोड़ रु. खर्च कर रहे हैं। गार्टनर के अनुसार, वैश्विक एआई खर्च 240 लाख करोड़ रु. हो जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट का एआई बिजनेस 3.53 लाख करोड़ के रन रेट (अनुमानित लाभ) पर है, जबकि गूगल का क्लाउड बैकलॉग 43.93 लाख करोड़ रु. पार कर चुका है। एंथ्रोपिक ने इस साल 2.86 लाख करोड़ के दो फंडिंग राउंड पूरे किए, जिससे वैल्यूएशन 86 लाख करोड़ हो गई है। वहीं रिलायंस ग्रुप 7 वर्षों में भारत के एआई इन्फ्रा पर ₹10 लाख करोड़ निवेश करेगा। एक कॉल और एआई कानून ध्वस्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ऐसे सरकारी आदेश पर साइन करने वाले थे, जिसके तहत सरकार को शक्तिशाली एआई मॉडल के लॉन्च से पहले 90 दिनों तक उसकी सुरक्षा जांच का हक मिलता। इसके लिए टेक दिग्गज (ऑल्टमैन, पिचाई, नडेला) वॉशिंगटन पहुंच चुके थे। लेकिन ऐन वक्त पर, ट्रम्प के पूर्व सलाहकार और 449 एआई कंपनियों में ​भागीदार डेविड साक्स ने राष्ट्रपति को फोन किया और तर्क दिया कि नियमों से एआई डेवलपमेंट धीमा होगा व चीन बाजी मार ले जाएगा। मस्क-जुकरबर्ग ने भी यही दबाव बनाया। नतीजतन ट्रम्प ने आदेश रद्द कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि कानून स्वैच्छिक था, फिर भी टेक दिग्गजों ने महज 12 घंटे में महीनों की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पलटवा दी।

दैनिक भास्कर 26 May 2026 1:19 pm

भास्कर नॉलेज:क्या ईयरबड्स से भी डेटा चोरी और निजता में सेंधमारी हो सकती है?

आज के स्मार्ट हेडफोन और ईयरबड्स सिर्फ म्यूजिक सुनने के उपकरण नहीं रहे। इनमें हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर, माइक्रोफोन, लोकेशन, एआई ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन जैसे फीचर जुड़ चुके हैं। 10 साल में 2,000 से ज्यादा हेडफोन और ईयरबड्स टेस्ट कर चुकीं लॉरेन ने बताया कि इनसे सेंधमारी कैसे होती है और बचने के उपाय क्या हैं? हेडफोन अब कौन-कौन सा डेटा जुटाते हैं? टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए ईयरबड्स में ब्लूटूथ चिप, माइक्रोफोन, सेंसर और एप कनेक्टिविटी होती है। ये डिवाइस हार्ट रेट, चलने-फिरने का पैटर्न, आवाज, लोकेशन और सुनने की क्षमता रिकॉर्ड कर सकते हैं। यह डेटा फोन के जरिए कंपनी के एप तक पहुंचता है। क्या हेल्थ डेटा अपने आप सुरक्षित होता है? डिजिटल प्राइवेसी विशेषज्ञ बताते हैं कि हेल्थ डेटा हमेशा कानून से सुरक्षित नहीं होता। अमेरिका का कानून डॉक्टर और मरीज के बीच की जानकारी पर लागू होता है। लेकिन अगर वही डेटा किसी हेडफोन या फिटनेस एप से इकट्ठा हुआ है, तो वह मार्केटिंग या एनालिटिक्स में इस्तेमाल हो सकता है। क्या कंपनियां यह डेटा बेच सकती हैं? अधिकांश कंपनियां प्राइवेसी पॉलिसी में डेटा शेयरिंग की बात लिखती हैं। यूजर को ऑप्ट-आउट का विकल्प मिल सकता है, लेकिन अक्सर शर्तें जटिल भाषा में होती हैं। टेक एनालिस्ट्स के अनुसार, कुछ डेटा एआई ट्रेनिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ब्लूटूथ और एप से खतरा कितना है? टेक कंपनियों के ब्लूटूथ की खामियां सामने आ चुकी हैं। हालांकि बड़ा खतरा एप से होता है। अगर एप अपडेट न हो या जरूरत से ज्यादा परमिशन हो, तो डेटा आसानी से चोरी हो सकता है। यूजर अपनी प्राइवेसी कैसे बचाए? गैर-जरूरी परमिशन बंद रखें। डेटा शेयरिंग से ऑप्ट-आउट करें। एप और फर्मवेयर अपडेट रखें। संवेदनशील बातचीत में ईयरबड्स दूर रखें। ध्यान रहे कि स्मार्ट हेडफोन सुविधा देते हैं, लेकिन डेटा भी लेते हैं। इसलिए इनके उपयोग में सतर्कता जरूरी है। भारत के यूजर के लिए जोखिम क्या है? भारत में ईयरबड्स और फिटनेस एप तेजी से आम हो रहे हैं। लोग इन्हें फोन से जोड़कर लोकेशन, माइक्रोफोन, हेल्थ और फिटनेस परमिशन दे देते हैं। ईयरबड्स शरीर और व्यवहार से जुड़ा डेटा पढ़ सकते हैं। यदि एप को माइक्रोफोन, लोकेशन और हेल्थ डेटा की अनुमति है, तो वह चलने-फिरने, बातचीत, फिटनेस और आदतों से जुड़ी जानकारी जुटा सकता है। इसलिए हेडफोन खरीदते समय प्राइवेसी पॉलिसी भी देखनी चाहिए।

दैनिक भास्कर 25 May 2026 4:52 pm

आइटेल A100 प्रो भारत में लॉन्च, कीमत ₹8,999:100 दिन फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट के साथ 90Hz डिस्प्ले और 5000mAh बैटरी, बिना सिग्नल कॉल कर सकेंगे

टेक ब्रांड आइटेल ने भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन 'आइटेल A100 प्रो' लॉन्च किया है। यह इस साल फरवरी में आए A100 का अपग्रेडेड वर्जन है। फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती और फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट का ऑफर है। कंपनी इस बजट फोन के साथ 100 दिन की फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट वारंटी दे रही है, जो आमतौर पर महंगे फोन के साथ ही देखने को मिलती है। आइटेल A100 प्रो को सिंगल वैरिएंट में पेश किया गया है। इसमें 3GB रैम के साथ 64GB की इंटरनल स्टोरेज मिलती है। कंपनी ने इसमें 'मेमोरी फ्यूजन' तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिससे वर्चुअल रैम की मदद से इसे 8GB (3GB+5GB) तक बढ़ाया जा सकता है। इसकी कीमत ₹8,999 रखी गई है। डिजाइन और बिल्ड: मिलिट्री ग्रेड मजबूती के साथ प्रीमियम लुक स्पेसिफिकेशन्स: एंड्रॉइड 15 गो एडिशन और डायनैमिक बार खास तकनीक: बिना सिग्नल के भी होगी कॉल इस फोन में अल्ट्रालिंक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि इस फीचर की मदद से 'नो नेटवर्क' वाले इलाकों में भी मोबाइल सिग्नल के बिना कॉल की जा सकती है। यह तकनीक उन लोगों के लिए काम की है जो बेसमेंट या पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। क्या होता है 'मिलिट्री ग्रेड' सर्टिफिकेशन? MIL-STD-810H अमेरिका का एक खास पैमाना (स्टैंडर्ड) है, जो किसी चीज की मजबूती जांचने के लिए बनाया गया है। जिस फोन के पास यह सर्टिफिकेट होता है, उसे कई मुश्किल हालातों से गुजारा जाता है—जैसे ऊंचाई से जमीन पर पटकना, बहुत ज्यादा गर्मी और नमी (उमस) में रखकर देखना। आइटेल का दावा है कि इस सर्टिफिकेट की वजह से यह फोन अपनी कीमत वाली कैटेगरी में सबसे ज्यादा टिकाऊ और मजबूत है।

दैनिक भास्कर 23 May 2026 7:39 pm

फोन में अब गूगल-एपल ला रहे 8 बदलाव:एपल ‘आईओएस-27’ से देगा अपडेट्स, गूगल जेमिनी व जीमेल में भी नए फीचर्स

इस साल आईओएस 27 के साथ एपल नए एआई फीचर्स ला सकता है। नई सिरी सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देगी, बल्कि फोन के कई काम खुद संभाल सकेगी। उदाहरण के तौर पर रिमाइंडर्स लगाना, मैसेजेस तैयार करना या एप्स के बीच काम करना आसान हो सकता है। वहीं गूगल भी एंड्रॉइड में जेमिनी को जोड़ने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य है कि एआई छोटे काम खुद करने लगे। जानते हैं कौन से बदलाव आएंगे। एपल लॉन्च करेगा नई सिरी... जीमेल में आ रहा एआई इनबॉक्स गूगल - अब ब्लिंकिट जैसे एप्स जेमिनी से जुड़ेंगे 1. ब्लिंकिट जैसे एप्स भी एआई से जुड़ेंगे - जेमिनी अब ब्लिंकिट, जेप्टो और उबर जैसे एप्स के साथ सीधे काम कर सकेगा। यह इन सभी एप्स पर तुलना करके आपके लिए सबसे सही विकल्प चुनने में मदद करेगा। 2. नया एजेंट ‘जेमिनी स्पार्क’लॉन्च होगा यह गूगल का नया ‘पर्सनल एआई एजेंट’ होगा। ऑनलाइन टास्क पूरे कर सकेगा। रिमाइंडर्स व बुकिंग्स भी संभाल लेगा। 3. जीमेल एआई इनबॉक्स - यह ईमेल्स का सार खुद तैयार करेगा। यूजर बिना पूरा मेल पढ़े ही जरूरी जानकारी समझ सकेंगे और सीधे उसी जगह से जवाब दे पाएंगे। यह अब बड़े स्तर पर जारी किया जा सकता है। 4. जीमेल लाइव - नया वॉइस-बेस्ड फीचर होगा। इसमें जेमिनी से बोलकर ईमेल मैनेज कर सकेंगे। जैसे, किसी मेल के बारे में पूछना, जवाब लिखना आवाज से होगा। एपल- नई सिरी से ज्यादा स्मार्ट होगा आईफोन 1. लिखने और सुधारने में मदद- Write With Siri और Help Me Write जैसे फीचर्स यूजर को लिखने में मदद करेंगे। सिरी टेक्स्ट सुधार सकेगी, बेहतर वाक्य सुझा सकेगी और टाइपिंग को आसान बना सकेगी। 2. आवाज से बनेंगे शॉर्टकट- यूजर सिर्फ बोलकर बता सकेंगे कि उन्हें कौन सा काम जल्दी करना है। इसके बाद सिरी अपने आप उस काम का शॉर्टकट तैयार कर देगी। 3. निजी डिजिटल सहायक की तरह काम - सिरी सुबह न्यूज, रिमाइंडर्स, शेयर बाजार की जानकारी और पूरे दिन की प्लानिंग जैसी चीजों में मदद कर सकती है। यानी फोन एक पर्सनल असिस्टेंट की तरह काम करने लगेगा। 4. ऑटो डिलीट चैट हिस्ट्री- प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए सिरी में ऑटो-डिलीट फीचर होगा। इसमें तय कर सकेंगे कि चैट्स 30 दिन बाद अपने आप डिलीट हो जाएं।

दैनिक भास्कर 23 May 2026 2:58 pm

37% बच्चे ओटीटी इस्तेमाल कर रहे; एडल्ट कंटेंट की भरमार:ओटीटी प्लेटफॉर्म का एक्सेस देने से पहले ये जरूरी सेटिंग्स ऑन करें

मोबाइल, टैबलेट और स्मार्ट टीवी अब बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लोकल सर्कल के सर्वे के अनुसार, 37% पैरेंट्स ने बताया कि उनके बच्चे सबसे ज्यादा वीडियो और ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे प्राइम वीडियो या नेटफ्लिक्स देखते हैं। समस्या यह है कि कई घरों में पूरा परिवार एक ही अकाउंट का इस्तेमाल करता है। बच्चों के सामने कई बार एडल्ट कंटेंट भी आ जाता है। ऐसे में जानें कि हर ओटीटी प्लेटफॉर्म में कौन सी सेटिंग्स बंद करें। नेटफ्लिक्स... उम्र के हिसाब से कंटेंट सीमा तय करें - बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बनाएं, इसके लिए Netflix → Manage Profiles - सभी नेटफ्लिक्स प्रोफाइल पर पिन जरूर लगाएं। इसके लिए नेटफ्लिक्स के अकाउंट सेक्शन में जाकर प्रोफाइल लॉक करने का विकल्प चुनें। - तीसरा जरूरी स्टेप है ‘पैरेंटल कंट्रोल्स’। अकाउंट सेटिंग्स में इस विकल्प को चुनिए। यहां पर अभिभावक बच्चों की उम्र के हिसाब से ‘मैच्योरिटी रेटिंग’ चुन सकते हैं। इसमें बच्चों से लेकर वयस्कों तक के लिए अलग-अलग विकल्प मिलते हैं। अमेजन प्राइम वीडियो में ये 3 सेटिंग्स जरूर बदलें - सबसे जरूरी है पैरेंटल कंट्रोल्स चालू करें। इसे अकाउंट सेक्शन में एक्टिव करें। - यहां ‘परचेज रेस्ट्रिक्शन’ भी लगाएं। बच्चे गलती से किराये वाली फिल्में खरीद सकते हैं। इसलिए पिन आधारित खरीदारी सुरक्षा जरूरी है। - उम्र के हिसाब से कंटेंट चुनें। यहां U, U/A 13+, U/A 16+ और A जैसे विकल्प मिलते हैं। बच्चे की उम्र के अनुसार सही श्रेणी चुनें। जियो हॉटस्टार, पैरेंटल लॉक का विकल्च चुनिए - घरों में बच्चों को कार्टून या क्रिकेट दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन उसी खाते पर एडल्ट वेब सीरीज के सुझाव भी दिख सकते हैं। ये दो बदलाव जरूरी हैं... - माय स्पेस सेक्शन में जाएं। बच्चों को एप किड्स मोड में खोलकर दें। - पैरेंटल लॉक का विकल्प चुनें। इससे बच्चे पैरेंट्स के अकाउंट को लॉगिन नहीं कर पाएंगे। यूट्यूब, रिमाइंडर और डेली लिमिट जैसे फीचर्स उपयोगी यूट्यूब पर फैमिली सेंटर नाम का विकल्प है। इसे चुनिए। यहां पर बच्चे का अलग अकाउंट बना सकते हैं। इससे उन्हें उनकी उम्र के हिसाब से ही कंटेंट दिखाया जाएगा। इन दो विकल्पों को भी चुनें - रिमांडर: इसमें हर आधे या 1 घंटे में ब्रेक लेने का कहा जाता है। - डेली लिमिट: यूट्यूब शॉर्ट्स देखने की तय समय सीमा चुन सकते हैं। डिजिटल सेफ्टी गाइड 37% बच्चे ओटीटी इस्तेमाल कर रहे हैं... यहां एडल्ट कंटेंट की भरमार, इन एप्स पर पिन और पैरेंटल कंट्रोल सेट करना चाहिए

दैनिक भास्कर 23 May 2026 2:03 pm

होंडा की नई अपडेटेड सिटी लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹12 लाख:कार में ADAS और नए फीचर्स, हुंडई वरना और फॉक्सवैगन वर्चूस से होगा मुकाबला

होंडा कार्स इंडिया ने आखिरकार भारत में अपनी पॉपुलर सेडान कार सिटी का अपडेटेड वर्जन लॉन्च कर दिया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹12 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। कंपनी ने इस कार के लुक और फीचर्स में कई जरूरी बदलाव किए हैं, ताकि बाजार में मिल रही कड़ी टक्कर के बीच इसे बिल्कुल फ्रेश लुक दिया जा सके। बाहर से कितनी बदली कार: रिवाइज्ड ग्रिल और नए अलॉय व्हील्स डिजाइन की बात करें तो होंडा ने कार के लुक को पहले से थोड़ा और शार्प बनाया है। इसके फ्रंट में रिवाइज्ड ग्रिल, नया बंपर डिजाइन और नए अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। कार के LED लाइटिंग एलिमेंट्स में भी बदलाव किया गया है, जिससे इसका लुक काफी क्लीन नजर आता है। हालांकि, कंपनी ने इसके पुराने सिग्नेचर लुक को बरकरार रखा है। केबिन और फीचर्स: टचस्क्रीन और एडवांस कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी कार के अंदर का लेआउट पहले जैसा ही रखा गया है, लेकिन फीचर्स की लिस्ट में नए अपडेट्स जोड़े गए हैं। इसमें स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के साथ बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, कनेक्टेड कार टेक और सनरूफ जैसे फीचर्स मिलेंगे। सुरक्षा में क्या है खास: होंडा सेंसिंग सुइट के साथ ADAS कार को सुरक्षित बनाने के लिए होंडा ने अपनी प्रेजेंटेशन के दौरान ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) पैकेज पर खास जोर दिया है। नई अपडेटेड सिटी में ग्राहकों को पहले की तरह 'होंडा सेंसिंग सुइट' का सपोर्ट मिलता रहेगा, जो सफर के दौरान सेफ्टी को बेहतर बनाता है। इंजन और गियरबॉक्स: पुराना 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन ही मिलेगा मैकेनिकल तौर पर कार में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। अपडेटेड सिटी में पुराना ही 1.5-लीटर नेचुरल एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन मैनुअल (MT) और CVT गियरबॉक्स दोनों ऑप्शन्स के साथ आता है। कंपनी ने इस बार पावरट्रेन में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे साफ है कि उनका पूरा फोकस कार के लुक और अपील को बढ़ाने पर था। इन गाड़ियों से होगा सीधा मुकाबला: वरना और स्लाविया को टक्कर मिडसाइज सेडान सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए कंपनी ने इसमें रिफ्रेश्ड फ्रंट-एंड स्टाइलिंग, नए अलॉय व्हील्स और एडवांस कनेक्टेड फीचर्स दिए हैं। भारतीय बाजार में लॉन्च होने के बाद इस अपडेटेड होंडा सिटी का सीधा मुकाबला हुंडई वरना, फॉक्सवैगन वर्चूस और स्कोडा स्लाविया जैसी कारों से होगा।

दैनिक भास्कर 22 May 2026 3:07 pm

मारुति की कारें ₹30,000 तक महंगी होंगी:नई कीमतें जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई ये नई कीमतें जून 2026 से प्रभावी होंगी। लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत के कारण कंपनी ने यह फैसला किया है। मारुति के अनुसार, पोर्टफोलियो के सभी मॉडल्स पर कीमतों में यह बढ़ोतरी लागू होगी। हालांकि, किस कार के दाम कितने बढ़ेंगे, यह उसके मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है। एरिना-नेक्सा के सभी मॉडल्स के प्राइस बढ़ेंगे कंपनी अपने वाहनों की बिक्री दो अलग-अलग डीलरशिप चैनल्स के जरिए करती है, जिनमें एरिना और नेक्सा शामिल हैं। जून से इन दोनों ही चैनल्स से बिकने वाली कारें महंगी हो जाएंगी। कंपनी के लागत कम करने के प्रयास विफल ग्राहकों पर कम से कम असर डालने की कोशिश कंपनी ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के कारण बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना अब जरूरी हो गया था। इसके बावजूद कंपनी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस प्राइस हाइक का आम ग्राहकों पर कम से कम असर पड़े। 1 साल से ज्यादा समय बाद बढ़ रहे हैं दाम मारुति सुजुकी ने इससे पहले आखिरी बार अप्रैल 2025 में अपनी कारों की कीमतें बढ़ाई थीं। उस समय कंपनी ने अलग-अलग मॉडल्स के दाम में ₹62,000 तक की बढ़ोतरी की थी। अब करीब 1 साल से भी ज्यादा समय के अंतराल के बाद कंपनी ने दोबारा कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इस बीच मास-मार्केट और लग्जरी सेगमेंट की कई अन्य कार कंपनियां जनवरी 2026 में ही अपने वाहनों के दाम बढ़ा चुकी हैं चौथी तिमाही में मुनाफा ₹3,659 करोड़ रहा मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 52,946 करोड़ रुपए की कुल कमाई की। यह पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़ी है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 42,431 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसी तिमाही में कंपनी ने 6.76 लाख कारें बेचीं। कुल कमाई में से सैलरी, टैक्स, कच्चे माल की कीमत जैसे खर्चे निकाल दें तो कंपनी के पास 3,659 करोड़ रुपए शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) के रूप में बचे। यह 2025 की जनवरी-मार्च तिमाही से 6.44% कम रहा है। पिछले साल कंपनी को 3,911 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 28.20% बढ़कर ₹52,462 करोड़ रहा चौथी तिमाही में कंपनी को प्रोडक्ट और सर्विस बेचकर 52,462 करोड़ रुपए का राजस्व यानी रेवेन्यू हासिल हुआ। सालाना आधार पर यह 28.20% बढ़ा है। जनवरी-मार्च 2025 में कंपनी ने 40,920 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था। चौथी तिमाही में गाड़ियों की बिक्री 11.8% बढ़ी चौथी तिमाही में मारुति सुजुकी ने कुल 6,76,209 गाड़ियां बेचीं। घरेलू मार्केट में कंपनी की सेल इस दौरान सालाना आधार पर 3.7% बढ़ी, जबकि एक्सपोर्ट 61.3% ज्यादा रहा। इसके चलते कंपनी की सालाना आधार पर ओवरऑल सेल्स ग्रोथ 11.8% रही। डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी ने 5,38,994 गाड़ियां बेचीं, जबकि 1,37,215 गाड़ियों को एक्सपोर्ट किया। यह कंपनी का ऑल-टाइम-हाई एक्सपोर्ट है। 1982 में बनी थी मारुति सुजुकी इंडिया मारुति सुजुकी की स्थापना 24 फरवरी 1981 को भारत सरकार के स्वामित्व में मारुति इंडस्ट्रीज लिमिटेड रूप में हुई थी। 1982 में कंपनी ने जापान की सुजुकी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर 'मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड' बनाई। भारतीयों के लिए पहली बजट कार 1983 में मारुति 800 लॉन्च हुई। 47,500 रुपए की एक्स शोरूम कीमत पर कंपनी ने देश के एक बड़े तबके को कार खरीदने के लिए सक्षम बनाया था। मारुति सुजुकी पिछले 40 साल में देश में 3 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बेच चुकी है। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? ये खबर भी पढ़ें… ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू: छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 21 May 2026 7:44 pm

‘स्मार्ट’ से ऊबे लोग, ‘बेसिक’ चीजों में सुकून की तलाश:टेक सेवी युवा चुन रहे, क्या कनेक्ट करना जरूरी है, क्या नहीं

टेक्नोलॉजी की दुनिया में कुछ साल पहले तक ‘स्मार्ट’ शब्द जादू जैसा लगता था। स्मार्ट फोन, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट वॉच, स्मार्ट होम... हर नई चीज भविष्य के और करीब ले जाने का दावा करती। सपना ये था कि फ्रिज खुद दूध ऑर्डर करेगा, दरवाजा मोबाइल से खुलेगा और माइक्रोवेव जवाब देगा। लेकिन, अब ‘स्मार्ट’ के उलट ‘बेसिक’ चीजों का ट्रेंड उभर रहा है। यानी ऐसे फोन, टीवी और उपकरण, जो सिर्फ अपना काम करें। हर वक्त इंटरनेट या एप से जुड़े न रहें। अमेरिका सहित पश्चिमी बाजारों में युवा बेसिक फोन की ओर लौट रहे हैं। इनमें सिर्फ कॉल, मैसेज और कुछ जरूरी फीचर होते हैं। गजेल की रिपोर्ट के मुताबिक 2021-24 के बीच जेन-जी में ऐसे फोन की बिक्री 148% बढ़ी। 16% जेन जी वयस्कों के पास ऐसे फोन थे। 28% खरीदने के इच्छुक थे। भारत में स्मार्ट गैजेट्स की हाइप ठंडी पड़ने का संकेत वियरेबल मार्केट में दिखा। आईडीसी के मुताबिक, 2024 में भारत का वियरेबल मार्केट 11.3% घटकर 11.9 करोड़ यूनिट रहा। स्मार्टवॉच शिपमेंट 34.4% गिरी। लोग ‘बेसिक टीवी’ खोज रहे हैं। ऐसी स्क्रीन, जो सिर्फ वही दिखाए जो आप चलाना चाहें, न कि आपके देखने की आदतें ट्रैक करे। इस बदलाव की वजह अतीत की कसक नहीं, बल्कि डिजिटल थकान है। प्यू रिसर्च के अनुसार, अमेरिका के आधे किशोर लगभग हर वक्त ऑनलाइन रहते हैं। ये ट्रेंड प्रौद्योगिकी विरोधियों में नहीं, बल्कि टेक सेवी युवाओं में दिख रहा है। वे टेक्नोलॉजी का अपनी शर्तों पर प्रयोग चाहते हैं। उनके लिए स्मार्टनेस हर चीज को कनेक्ट करना नहीं, बल्कि ये चुनना है कि कौनसी चीज कनेक्ट करनी है और कौनसी नहीं। बेसिक चीजें पिछड़ेपन का नहीं, बल्कि सुकून, प्राइवेसी और अपने वक्त पर नियंत्रण का प्रतीक हैं। शायद अगली टेक क्रांति यही हो- कम बोलने वाली, लेकिन ज्यादा समझदार। भारत में स्मार्ट होम का बाजार अभी बढ़ने के ट्रेंड में है अमेरिका में कोपलैंड के 2024 के सर्वे में 27% लोगों ने स्मार्ट डिवाइसेज में डेटा सुरक्षा पर चिंता जताई थी, जबकि 2022 में ये आंकड़ा 23% था। हालांकि, भारत में स्मार्ट होम अभी बढ़ने वाला बाजार है। यह 2024 में 3.23 अरब डॉलर (करीब 31 हजार करोड़ रु.) था, जो 2030 तक 16.39 अरब डॉलर (करीब 1.57 लाख करोड़ रु.) तक पहुंच सकता है।

दैनिक भास्कर 19 May 2026 4:19 pm

ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू:छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स

ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… डिजाइन: रिबन पैटर्न और दमदार मजबूती पहली नजर में रेनो 15 प्रो मिनी अपने फ्लैट मेटल फ्रेम और मैट ग्लास बैक की वजह से बहुत प्रीमियम दिखता है। इसके बैक पैनल पर दिया गया रिबन पैटर्न डिजाइन इसे दूसरे फोन्स से अलग और क्लासी लुक देता है। खास बात यह है कि यह फोन IP69 रेटिंग के साथ आता है, जिसका मतलब है कि यह पानी और धूल के प्रति बेहद सख्त है। 4.55mm की मोटाई (ओपन होने पर) के साथ यह हाथ में काफी सॉलिड और कंफर्टेबल महसूस होता है। डिस्प्ले और परफॉर्मेंस: छोटा पैकेट, बड़ा धमाका फोन में 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दी गई है। 120Hz रिफ्रेश रेट की वजह से स्क्रॉलिंग काफी स्मूथ है। छोटे साइज के कारण इसे एक हाथ से चलाना बहुत आसान है। कैमरा: 200MP का पावरफुल सेंसर कैमरा डिपार्टमेंट में ओप्पो ने कोई कसर नहीं छोड़ी है: बैटरी और स्मार्ट फीचर्स: कॉम्पैक्ट साइज में 'जम्बो' पावर अक्सर छोटे फोंस में बैटरी लाइफ की समस्या होती है, लेकिन यहां ओप्पो ने चौंका दिया है। इतने कॉम्पैक्ट साइज में भी 6200mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जिसे चार्ज करने के लिए 80W का फास्ट चार्जर मिलता है। स्मार्ट फीचर्स के तौर पर इसमें गूगल जेमिनी एआई का फुल सपोर्ट है। 'AI माइंड स्पेस' जैसे फीचर्स स्क्रीन के कंटेंट को तुरंत समराइज कर देते हैं। साथ ही, ओप्पो का अपना डायलर है जिससे आप बिना सामने वाले को पता चले (बिना अनाउंसमेंट) कॉल रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।

दैनिक भास्कर 19 May 2026 2:35 pm

पेटीएम का पॉकेट मनी फीचर लॉन्च:बच्चे बिना बैंक अकाउंट कर सकेंगे UPI पेमेंट, मंथली लिमिट ₹15000; पैरेंट्स के पास खर्च का पूरा कंट्रोल होगा

पेटीएम ने टीनेजर्स के लिए 'पेटीएम पॉकेट मनी' फीचर लॉन्च किया है, जिसके जरिए वे बिना खुद का बैंक अकाउंट खोले सुरक्षित डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे। इस नए फीचर में पैरेंट्स को बच्चों के खर्च पर नजर रखने, मंथली लिमिट तय करने और रीयल-टाइम ट्रैकिंग करने की पूरी सुविधा मिलेगी। फिनटेक फर्म वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पेटीएम) ने 18 मई, सोमवार को आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान किया है। पैरेंट्स के पास रहेगा खर्च का पूरा कंट्रोल कंपनी के बयान के मुताबिक, पैरेंट्स और परिवार के भरोसेमंद सदस्य अपने बच्चों को सुरक्षित और रेगुलेटेड पेमेंट एक्सेस दे सकते हैं। वे अपने पेटीएम एप के जरिए बच्चों के लिए एक तय खर्च सीमा निर्धारित कर सकेंगे। इससे पैरेंट्स अपने बच्चों के हर ट्रांजैक्शन को लगातार ट्रैक कर पाएंगे और उनका कंट्रोल हमेशा बना रहेगा। रोजमर्रा के खर्चों को डिजिटल बनाने की कोशिश भारत में टीनेजर्स हर दिन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, मेट्रो किराया, कैब बुकिंग और स्कूल-कॉलेज की कैंटीन जैसे जरूरी कामों के लिए लगातार डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। वर्तमान में कई बच्चे इन खर्चों के लिए पूरी तरह पैरेंट्स या कैश पर निर्भर हैं। 'पेटीएम पॉकेट मनी' के जरिए बच्चों को एक सुरक्षित माध्यम मिलेगा, जिससे परिवारों में छोटी उम्र से ही जिम्मेदार वित्तीय आदतें विकसित करने में मदद मिलेगी। अब ओटीपी मांगने की जरूरत नहीं होगी इस फीचर के एक्टिवेट होने के बाद टीनेजर्स अपने खुद के फोन में पेटीएम एप का इस्तेमाल करके ऑनलाइन और ऑफलाइन मर्चेंट्स को सुरक्षित यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए अब उन्हें पेमेंट करते समय पैरेंट्स से ओटीपी मांगने, उनका फोन उधार लेने या पैरेंट्स को वॉट्सएप पर क्यूआर कोड भेजने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। 15 हजार का मंथली कैप तय किया गया पेटीएम पॉकेट मनी के तहत पैरेंट्स एनपीसीआई के 'यूपीआई सर्कल' के माध्यम से बच्चों को इनवाइट कर सकते हैं। इसके तहत पूरे यूपीआई नेटवर्क पर मंथली लिमिट अधिकतम 15,000 रुपए और एक बार में इंडिविजुअल पेमेंट की लिमिट 5,000 रुपए तक सेट की जा सकती है। यह सर्विस सेविंग्स और करंट दोनों तरह के अकाउंट्स पर अवेलेबल है, लेकिन इससे इंटरनेशनल पेमेंट्स और कैश विड्रॉल करने पर पाबंदी रहेगी। स्पेंड समरी से पूरा बजट ट्रैक होगा यह नया फीचर पेटीएम स्पेंड समरी के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट है, जो हर एक पेमेंट को ऑटोमैटिकली अलग-अलग कैटेगरीज में बांट देता है। इससे परिवार आसानी से अपने कुल खर्चों पर नजर रख सकते हैं, पॉकेट मनी के बजट को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं और बच्चों को पैसों के सही इस्तेमाल की सीख दे सकते हैं। एप में पेमेंट हिस्ट्री देखने का भी पूरा ऑप्शन मिलेगा। सुरक्षा के लिए इन-बिल्ट सेफ्टी मेजर्स पेटीएम ने इसमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। फीचर एक्टिवेट होने के शुरुआती 30 मिनट में केवल 500 रुपए और पहले 24 घंटों में अधिकतम 5,000 रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा। किसी भी समय जरूरत पड़ने पर पैरेंट्स अपने पेटीएम यूपीआई पिन का इस्तेमाल करके खर्च की लिमिट को बदल सकते हैं या बच्चों का एक्सेस तुरंत कैंसल कर सकते हैं। इसके अलावा डिवाइस लॉक होना भी अनिवार्य है। क्या होता है यूपीआई सर्कल और इन-बिल्ट सेफ्टी?

दैनिक भास्कर 18 May 2026 6:55 pm

वनप्लस 15R स्मार्टफोन ₹7000 महंगा हुआ:स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर और 32 मेगापिक्सल कैमरा जैसे फीचर, शुरुआती कीमत ₹54,999

टेक कंपनी वनप्लस ने अपने फ्लैगशिप फोन वनप्लस 15R की कीमत 7 हजार रुपए बढ़ा दी है। वनप्लस ने फोन को दिसंबर-2025 में 47,999 रुपए की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया था। अब इसकी कीमत 54,999 रुपए हो गई है। वनप्लस 15R दो वैरिएंट में स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर, 7400mAh बैटरी और 32 मेगापिक्सल कैमरा के साथ आता है। वनप्लस 15R: वैरिएंट वाइस प्राइस वनप्लस 15R: स्पेसिफिकेशंस परफॉर्मेंस: वनप्लस 15R में परफॉर्मेंस के लिए स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर दिया गया है। यह मोबाइल चिपसेट 3 नैनोमीटर प्रोसेस पर बना ऑक्टा-कोर प्रोसेसर है, जो 3.8 गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। ये पावरफुल और लैगफ्री प्रोसेसिंग देता है। वहीं, ग्राफिक्स के लिए फोन में एड्रेनो 830 GPU दिया गया है। हैवी गेमिंग के दौरान फोन को हीट होने से बचाने के लिए इसमें 360 डिग्री क्रेयो वेलोसिटी कूलिंग सिस्टम भी लगाया गया है। फोन एंड्रॉएड 15 पर बेस्ड ColorOS 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें LPDDR5X रैम दी गई है, जो स्मूथ मल्टीटास्किंग करने में मदद करती है। मोबाइल में UFS 4.1 स्टोरेज लगी है, जिससे फास्ट डाटा ट्रांसफर होता है। इसके अलावा फोन में NFC, वाई-फाई 7 और ब्लूटूथ 5.4 का सपोर्ट दिया गया है। बैटरी: पावरबैकअप के लिए वनप्ल्स 15R में 7400mAh की बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए 80W सुपरवूक चार्जिंग तकनीक मिलेगी। इससे पहले वनप्लस का कोई भी फोन इतनी बड़ी बैटरी के साथ नहीं आया है। हाल ही में लॉन्च हुआ वनप्लस 15 स्मार्टफोन 7300mAh बैटरी पर लॉन्च हुआ था। वनप्लस 15R की बैटरी को सिलीकॉन नेनोस्टेक टेक्नोलॉजी पर बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि 4 साल बाद भी इसकी बैटरी हेल्थ 80% से कम नहीं जाएगी। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए वनप्लस 15R डिटेलमैक्स इंजन वाला डुअल रियर कैमरा सपोर्ट करता है। इसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन के साथ 50 मेगापिक्सल का सोनी IMX906 मेन रियर सेंसर और 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड एंगल लेंस शामिल है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन में अल्ट्रा क्लीयर मोड, क्लीयर बर्स्ट और क्लियर नाइट इंजन जैसे एडवांस फीचर्स मिलेंगे। डिस्प्ले: वनप्लस 15R में 28001272 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.83-इंच की 1.5K स्क्रीन दी गई। यह एमोलेड पैनल पर बनी डिस्प्ले 165Hz तक के हाई रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है। इसके साथ 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस और 450PPI ऑटो डिमिंग मिलेगी। कंपनी ने बताया कि मोबाइल TUV राइनलैंड इंटेलीजेंट आई केयर 5.0 सर्टिफाइड है, जो अंधेरे में फोन चलाने पर भी आंखों को नुकसान से बचाने में मदद करेगा। स्क्रीन में इन-डिस्प्ले ​अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर भी है।

दैनिक भास्कर 18 May 2026 5:06 pm

दिल्ली-NCR और MP में CNG आज से ₹3 तक महंगी:दिल्ली में ₹80.09 और नोएडा-गाजियाबाद में ₹88.70 किलो हुई, भोपाल में ₹93.75 पर पहुंची

दिल्ली-NCR में आज यानी 17 मई से CNG के दाम 1 रुपए बढ़ गए हैं। दिल्ली में अब CNG 80.09 रुपए किलो में मिलेगी। वहीं नोएडा-गाजियाबाद में इसके दाम 88.70 रुपए हो गए हैं। 2 दिनों में कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को CNG के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाए थे। इसके अलावा मध्यप्रदेश में भी शनिवार रात से 3 रुपए प्रतिकिलो तक रेट बढ़े हैं। भोपाल में 1 किलो गैस के रेट अब 93.75 रुपए हो गए हैं। पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं, कंपनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी कर दी। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। क्या अभी और बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹3 की यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। अपना घाटा पूरी तरह खत्म करने और 'ब्रेक-ईवन' यानी नो प्रॉफिट-नो लॉस की स्थिति में आने के लिए इन कंपनियों को अभी पेट्रोल के दाम ₹28 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹32 प्रति लीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल पेट्रोल पर 29.5% और डीजल पर 36.5% की कमी बनी हुई है। अगर ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही, तो आने वाले दिनों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है। -------------------------------------------------------

दैनिक भास्कर 17 May 2026 9:31 am

दिल्ली-NCR में CNG आज ₹1 महंगी:दो दिन में दाम ₹3 बढ़े, दिल्ली में ₹80.09 और नोएडा-गाजियाबाद में ₹88.70 किलो हुई

दिल्ली-NCR में आज यानी 17 मई से CNG के दाम 1 रुपए बढ़ गए हैं। दिल्ली में अब CNG 80.09 रुपए किलो में मिलेगी। वहीं नोएडा-गाजियाबाद में इसके दाम 88.70 रुपए हो गए हैं। 2 दिनों में कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को CNG के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाए थे। पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं, कंपनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी कर दी। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। क्या अभी और बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹3 की यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। अपना घाटा पूरी तरह खत्म करने और 'ब्रेक-ईवन' यानी नो प्रॉफिट-नो लॉस की स्थिति में आने के लिए इन कंपनियों को अभी पेट्रोल के दाम ₹28 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹32 प्रति लीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल पेट्रोल पर 29.5% और डीजल पर 36.5% की कमी बनी हुई है। अगर ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही, तो आने वाले दिनों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है। -------------------------------------------------------

दैनिक भास्कर 17 May 2026 9:31 am

स्मार्टफोन की लाइफ लंबी करने के पांच टिप्स:100% चार्जिंग और फुल स्टोरेज से घटती है फोन की लाइफ, अपडेट्स भी जरूरी

हर साल टेक कंपनियां नए स्मार्टफोन लॉन्च करती हैं। यूजर्स को अपग्रेड करने के लिए आकर्षित किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आपका मौजूदा फोन ठीक चल रहा है, तो क्या हर दो-तीन साल में नया फोन लेना जरूरी है? ज्यादातर लोग हर 2-3 साल में फोन बदल देते हैं, जबकि सही देखभाल की जाए तो स्मार्टफोन कहीं ज्यादा समय तक चल सकता है। आज ऐसे 5 तरीके जानें, जिससे फोन की लाइफ बढ़ सकती है। चार्जिंग से स्टोरेज तक... ये टिप्स अपनाएं 1. बार-बार फोन को ‘ओवरहीटिंग’ से बचाएं एपल, गूगल और सैमसंग जैसी कंपनियां सलाह देती हैं कि फोन को बहुत ज्यादा गर्म या बहुत ज्यादा ठंडे तापमान में इस्तेमाल न करें। 35 डिग्री से ज्यादा गर्मी बैटरी को नुकसान पहुंचाती है। धूप में फोन छोड़ना, कार की धूप में ज्यादा गर्म होने देना, लगातार ओवरहीटिंग बैटरी लाइफ कम कर सकता है। 2. हर बार 100% चार्ज करना जरूरी नहीं फोन को रोज 100% तक चार्ज करना बैटरी की उम्र घटा सकता है। अगर फोन की बैटरी 20% से 80% के बीच रखी जाए, तो उसकी लाइफ बढ़ सकती है। आईफोन व सैमसंग जैसे फोन ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग फीचर देते हैं, जो बैटरी को जरूरत से ज्यादा चार्ज होने से बचाते हैं। 3. बैटरी बचाने के लिए ये 6 सेटिंग्स बदलें अगर बैटरी जल्दी खत्म होती है, तो कुछ छोटे बदलाव मदद कर सकते हैं।- डार्क मोड इस्तेमाल करें - ऑटो ब्राइटनेस चालू रखें -स्क्रीन टाइमआउट 60 सेकेंड से कम - लो पावर मोड ऑन करें -जरूरत न हो तो जीपीएस आधारित एप्स कम ही इस्तेमाल करें 4. फोन में 20% तक स्टोरेज खाली रखें फोन की स्टोरेज लगभग भर जाने पर उसका परफॉर्मेंस भी धीमा होने लगता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपके फोन में कम से कम 10% और आदर्श रूप में 20% स्टोरेज खाली होना चाहिए। अगर फोन की कुल स्टोरेज 128 जीबी है तो 24 जीबी तक फोन में खाली स्पेस होना परफॉर्मेंस तेज करता है। 5. सॉफ्टवेयर अपडेट्स को नजरअंदाज न करें अपडेट्स सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी होते हैं। फोन को नए सिक्योरिटी अपडेट्स न मिले तो… - हैकिंग रिस्क बढ़ सकता है - एप्स ठीक से काम नहीं करते - प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है -एपल लगभग हर 4-6 हफ्ते में सिक्योरिटी अपडेट्स देता है, इन्हें जरूर अपडेट रखना चाहिए।

दैनिक भास्कर 16 May 2026 4:13 pm

टर्बो 5 नाम से आएगी रेडमी की गेमिंग स्मार्टफोन सीरीज:मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट और 100W फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स मिलेंगे

शाओमी का सब-ब्रांड रेडमी अपनी परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड 'टर्बो' सीरीज भारत में पहली बार लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसका टीजर जारी किया है। फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट के साथ आएगा। ये फोन चीन में लॉन्च हो चुका है, जहां इसकी शुरुआती कीमत युआन1,999 (करीब ₹28,200) है। भारत में इसकी कीमत 45 हजार रुपए के आसपास रह सकती है और इसे 5 जून को पेश किया जा सकता है। यह वनप्लस नॉर्ड 6 और वीवो V70 FE जैसे स्मार्टफोन्स को टक्कर देगा। मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट से होगा लैस परफॉर्मेंस के लिए फोन में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट दिया गया है। यह फोन खास तौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो गेमिंग और हैवी टास्क करते हैं। फोन में बेहतरीन थर्मल स्टेबिलिटी और गेमिंग परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद है। मजबूती के लिए मिली है IP69K रेटिंग फोन में मेटल फ्रेम के साथ ग्लास बैक दिया गया है। ड्यूरेबिलिटी के मामले में भी यह फोन काफी एडवांस है। इसे धूल और पानी से बचाव के लिए IP66, IP68 और IP69K जैसी हाई रेटिंग्स मिली हैं। स्टोरेज की बात करें तो इसमें 16GB तक LPDDR5X रैम और 512GB तक की UFS 4.1 इंटरनल स्टोरेज दी गई है। 7560mAh बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग रेडमी टर्बो 5 की सबसे बड़ी खूबी इसकी 7560mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बैटरी क्षमता 9000mAh तक भी हो सकती है। फोन को चार्ज करने के लिए 100W की वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 27W की रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और 50MP कैमरा रेडमी टर्बो 5 में 6.59-इंच का 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP का सोनी IMX882 प्राइमरी कैमरा मिलता है।

दैनिक भास्कर 15 May 2026 10:48 pm

सब्सक्रिप्शन का ‘चक्रव्यूह’, नुकसान में ग्राहक:75% अमेरिकी कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकीं; एक क्लिक से शुरू सफर, हर महीने तनाव

ब्रुकलिन की 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेनोर लुई की कहानी आज हर दूसरे शख्स की कहानी है। एलेनोर हर महीने ऐसे वीडियो गेम के लिए भुगतान कर रही हैं, जिसमें उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। वह कहती हैं, ‘मैंने 5 साल से यह गेम नहीं खेला है। पर समझ नहीं आ रहा कि इससे पीछा कैसे छुड़ाऊं...।’ यह तो सिर्फ बानगी है। अगर आप क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट या यूपीआई की ऑटो-डेबिट हिस्ट्री खंगालेंगे, तो हैरान रह जाएंगे। वहां लंबी फेहरिस्त मिलेगी- स्ट्रीमिंग एप, क्लाउड स्टोरेज, ई-कॉमर्स साइट्स की प्राइम मेंबरशिप, जिम व फिटनेस एप्स और यहां तक कि आरओ मशीन भी... सबकुछ सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आ गया है। और तो और अब ‘सब्सक्रिप्शन’ के अंदर भी एक और सब्सक्रिप्शन छिपा होता है। किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म का बेस पैक लीजिए, फिर उसमें बिना एड के कंटेंट या लाइव स्पोर्ट्स देखने के लिए ‘प्रीमियम’ का खर्च अलग। और यह याद रखने के लिए कि कौन सा रीचार्ज कब खत्म हो रहा है- सारे सब्सक्रिप्शन ट्रैक करने वाले एक और एप की मेंबरशिप लेनी पड़ती है। ब्रिटिश प्लेटफॉर्म ‘बैंगो’ की स्टडी के मुताबिक ब्रिटेन व अमेरिका में एक औसत व्यक्ति हर माह करीब 5,700 से 16 हजार रु. खर्च कर रहा है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की रिपोर्ट के अनुसार सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाली 75% कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकी हैं। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रो. गिल एपल कहते हैं, कंपनियां चालाकी से चीजें अलग-अलग बेचती हैं। जैसे दही खरीदें पर चम्मच सब्सक्रिप्शन पर लें। सामान्य रूप से यह संभव नहीं है, पर एप्स की दुनिया में यह आम है। इसका सबसे पेचीदा पहलू ‘कैंसिलेशन’ है। कंपनियों के एप्स में ‘सब्सक्राइब’ करना आसान होता है, पर उसे बंद करना बेहद कठिन। इसकी प्रक्रिया लंबी और उलझी होती है या कस्टमर केयर पर लंबा इंतजार करना पड़ता है। प्रो. एपल कहते हैं,‘अगली बार जब किसी एप पर ‘स्टार्ट सब्सक्रिप्शन’ पर क्लिक करें, तो ध्यान रखें- शुरुआत आसान दिखेगी, पर हर महीने कटने वाला छोटा हिस्सा कंपनियों को ताकतवर और आपको लाचार बना देगा।’ स्टेटमेंट का ऑडिट करें, सालाना के बजाय मंथली प्लान बेहतर अमेरिकी फाइनेंस एक्सपर्ट व ‘आई विल टीच यू टू बी रिच’ के लेखक रमित सेठी के अनुसार, सब्सक्रिप्शन के चक्रव्यूह से निकलने का सबसे प्रभावी तरीका सचेत होकर खर्च करना है। अपने बैंक स्टेटमेंट का ‘निर्दयी ऑडिट’ करें, जिस सेवा का इस्तेमाल 30 दिनों में नहीं किया है, उसे बिना सोचे तुरंत कैंसल कर देना चाहिए। किसी भी ‘फ्री ट्रायल’ के लिए साइन-अप करते ही उसे तुरंत कैंसल कर दें, ताकि ट्रायल अवधि का फायदा भी उठा सकें और भविष्य में भूलवश कटने वाले पैसों से भी बच जाएं। सालाना डिस्काउंट के बजाय मासिक प्लान बेहतर है क्योंकि हर महीने जेब से कटने वाला पैसा आपको सचेत रखता है।

दैनिक भास्कर 15 May 2026 5:15 pm

देश में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की लॉन्चिंग अटकी:ऑटो कंपनियां बोलीं- पहले फ्यूल मिले, तेल कंपनियों ने कहा- पहले गाड़ियां आएं

सरकार देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां तेजी से सड़क पर उतारना चाहती है, लेकिन यह प्लान अब ' पहले मुर्गी आई या अंडे' वाली उलझन में फंस गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियां बड़े पैमाने पर तब तक हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाली गाड़ियां बनाने को तैयार नहीं हैं, जब तक बाजार में पर्याप्त मात्रा में फ्लैक्स फ्यूल उपलब्ध न हो। वहीं, तेल कंपनियां तब तक E85 और E100 जैसे फ्यूल के स्टोरेज और सप्लाई में निवेश करने से कतरा रही हैं, जब तक सड़कों पर इन्हें चलाने वाली गाड़ियां न आ जाएं। अब सरकार दोनों पक्षों से बात कर रही है। क्या है फ्लेक्स-फ्यूल और भारत की जरूरत? फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य गाड़ियों से अलग होती हैं, क्योंकि ये पेट्रोल के साथ किसी भी मात्रा में एथेनॉल-मिक्स पेट्रोल पर चल सकती हैं। अभी भारत में 20% एथेनॉल वाले (E20) पेट्रोल अनिवार्य है। सरकार अब E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) और E100 यानी 100% एथेनॉल जैसे फ्लैक्स फ्यूल की ओर बढ़ना चाहती है, ताकि कच्चे तेल के आयात को कम किया जा सके। एथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। तेल कंपनियों की चिंता: एथेनॉल स्टॉक खराब होने का डर तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल को लंबे समय तक स्टोर करना जोखिम भरा है। अगर स्टॉक का उपयोग तुरंत नहीं हुआ, तो एथेनॉल नमी सोख लेता है, जिससे इंजन खराब या कोरोड (जंग लगना) हो सकता है। कंपनियों का मानना है कि जब तक मांग सुनिश्चित नहीं होती, तब तक स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना घाटे का सौदा है। ऑटो सेक्टर की मांग: फ्यूल सप्लाई पर मिले स्पष्टता दूसरी तरफ, ऑटो कंपनियों का तर्क है कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले महंगी होंगी। ऐसे में ग्राहक इन्हें तभी खरीदेंगे जब उन्हें देशभर में फ्यूल की उपलब्धता का भरोसा मिले। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक फ्यूल सप्लाई पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक इन गाड़ियों की डिमांड पैदा करना मुश्किल है। क्रूड इम्पोर्ट घटाना है सरकार की प्राथमिकता अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में तेल आयात बिल पिछले साल के $137 बिलियन से घटकर $123 बिलियन रहा है, लेकिन सरकार इसे और कम करना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन अपनाने पर जोर दिया है। एथेनॉल उत्पादकों के पास सरप्लस स्टॉक, सरकार से लगाई गुहार देश के एथेनॉल उत्पादक फिलहाल ओवरकैपेसिटी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (Aida) के मुताबिक, उन्होंने करीब 20 अरब लीटर एथेनॉल बनाया है, जबकि सरकार के 20% ब्लेंडिंग टारगेट से केवल 11 अरब लीटर के ऑर्डर मिले हैं। एथेनॉल मेकर्स ने सरकार को पत्र लिखकर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए इंसेंटिव और ऊंचे ब्लेंडिंग टारगेट की मांग की है। ब्राजील मॉडल से सीख और पायलट प्रोजेक्ट का सुझाव एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को ब्राजील से सीखना चाहिए, जहां 2003 में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां आईं और आज वहां 90% से ज्यादा नई गाड़ियां इसी तकनीक पर चलती हैं। टेरी (TERI) की एसोसिएट डायरेक्टर संयुक्ता सुबुद्धि ने सुझाव दिया है कि एक छोटे लेवल पर 'पायलट प्रोजेक्ट' शुरू करना चाहिए। इससे तेल और ऑटो कंपनियों को जरूरी डेटा मिलेगा और बड़े स्तर पर रोलआउट करना आसान होगा। विदेशी मुद्रा की बचत: मंत्री ने गिनाए फायदे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, साल 2025 में E20 ब्लेंडिंग की वजह से भारत ने लगभग $19.3 बिलियन (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बचाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों और ईंधन, दोनों पर खरीदारी की छूट देती है, तो इस डेडलॉक को तोड़ा जा सकता है। टोयोटा, मारुति इथेनॉल वाले वाहन पेश कर चुके टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां पहले ही हाई इथेनॉल ब्लेंड से चलने वाले वाहन पेश कर चुकी हैं। टीवीएस मोटर के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी संकेत दिए हैं कि कंपनी अपाचे सहित अपने कई सेगमेंट में इथेनॉल से चलने वाले वाहन लाने की योजना बना रही है। इन 4 मोर्चों पर चुनौतियों से निपटना होगा SP ग्लोबल के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता का कहना है कि E85 को अपनाने के लिए बड़े इकोसिस्टम की जरूरत होगी। इसमें 4 मुख्य चुनौतियां हैं: माइलेज और कीमत बन सकती है रुकावट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमत और माइलेज है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज 20 से 30% तक गिर सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमत कम रखनी होगी ।

दैनिक भास्कर 14 May 2026 10:17 pm

मोटोरोला रेजर फोल्ड प्रीमियम स्मार्टफोन भारत में लॉन्च:50MP के तीन रियर कैमरे और 8.1 इंच 2K डिस्प्ले, शुरुआती कीमत ₹1.50 लाख

टेक कंपनी मोटोरोला ने भारत में अपना सबसे प्रीमियम फोल्डेबल स्मार्टफोन मोटोरोला रेजर फोल्ड लॉन्च किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 8.1-इंच का फोल्डेबल डिस्प्ले और लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर है। फोन 50 मेगापिक्सल के तीन रियर कैमरे के साथ आया है। मोटोरोला ने इस रेजर फोल्ड को दो स्टोरेज वैरिएंट और एक स्पेशल एडिशन के साथ उतारा है। इसकी कीमत ₹1.50 लाख से शुरू होती है। मोटोरोला रेजर फोल्ड: वैरिएंट वाइस प्राइस लॉन्च ऑफर में 10,000 रुपए का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट या एक्सचेंज बोनस मिलेगा। साथ ही 18 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का भी ऑप्शन है। 20 जून तक फोन खरीदने वालों को 1 साल के लिए 'फ्री वन-टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट' की सुविधा मिलेगी। फोन के प्री-ऑर्डर शुरू हो चुके हैं। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: फोल्ड होने पर भी काफी स्लिम मोटोरोला रेजर फोल्ड का डिजाइन काफी प्रीमियम और स्लीक है। ओपन होने पर इसकी मोटाई सिर्फ 4.55mm रह जाती है, जिससे यह पकड़ने में काफी हल्का महसूस होता है। स्पेसिफिकेशंस: डिस्प्ले से लेकर परफॉर्मेंस तक सब 'एक्सट्रीम' 1. डिस्प्ले: दो स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट 2. कैमरा: ट्रिपल 50MP सेटअप 3. परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर 4. पावरबैकअप: 6000mAh की बड़ी बैटरी

दैनिक भास्कर 14 May 2026 4:47 pm

नासा का नया सुपर स्पेस सूट:चांद पर उछलने की जरूरत नहीं, 8 घंटे का ‘टॉयलेट’ बैकअप; चंद्र मिशन के लिए 2031 तक तैयार

नासा के 2028 तक इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजने के मिशन को झटका लग सकता है। अमेरिकी ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एक्जिओम स्पेस’ के नए स्पेस सूट तैयार होने में 2031 तक की देरी हो सकती है। हालांकि, नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरड इसाकमैन ने भरोसा जताया है कि 2028 तक अंतरिक्ष यात्री इन्हीं सूट्स में चांद पर उतरेंगे। जानें स्पेस सूट की खासियतें। - इटली की फैशन कंपनी ‘प्राडा’ भी नासा के नए स्पेस सूट को बनाने के प्रोजेक्ट में जुड़ी है। उसने सूट के फैब्रिक व डिजाइन पर काम किया है। नासा के नए एक्सईएमयू की 7 खास बातें - लिक्विड कूलिंग सिस्टम - सूट के अंदर ‘लिक्विड कूलिंग’ सिस्टम वाला खास अंडरगारमेंट होगा, जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखेगा।- स्मार्ट शूज - खास ‘स्मार्ट’ जूते चांद की सतह पर अच्छी ग्रिप देंगे। पिछले मिशन की तरह उछलकर चलने की जरूरत नहीं होगी।- वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम - 8 घंटे का टॉयलेट बैकअप रहेगा। यानी सूट उतारे बिना काम कर सकेंगे। माइनस 2000 तक ठंड में भी सुरक्षित रखेगा। - फैब्रिक - चंद्रमा की धूल कांच के टुकड़ों की तरह नुकीली और चिपकने वाली होती है। सूट का बाहरी फैब्रिक चांद की महीन धूल को कम चिपकने देगा। - रियर एंटी सिस्टम - नए सूट में ‘रियर एंट्री’ सिस्टम होगा। यानी अंतरिक्ष यात्री पीछे की तरफ से सूट में प्रवेश करेंगे। इसे पहनना और उतारना आसान होगा। - विशेष सूट - अपोलो मिशन के समय सूट पुरुषों के हिसाब से ही बने थे। नए सूट को पुरुष और महिला दोनों अंतरिक्ष यात्री पहन सकेंगे। - स्मार्ट हेलमेट - हेलमेट में एचडी कैमरा, लाइट्स और 4जी/एलटीई कम्युनिकेशन सिस्टम होगा, जिससे संपर्क और रिकॉर्डिंग बेहतर होगी। आर्टेमिस-3 मिशन के लिए सूट बनने में देरी क्यों हो रही? नया स्पेस सूट ऐसा बनाना है, जो चंद्रमा की सतह व अंतरिक्ष की भारहीन स्थिति में काम कर सके। 2022 में नासा ने ‘एक्सिओम स्पेस’ और ‘कॉलिन्स एयरोस्पेस’ को यह प्रोजेक्ट दिया था, लेकिन बाद में कॉलिन्स इससे अलग हो गई। अब ‘एक्सिओम स्पेस’ कंपनी पर पूरे प्रोजेक्ट का भार है, जिसकी वजह से टेस्टिंग और डेवलपमेंट में देरी हो रही है। क्या है आर्टेमिस-3 मिशन इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। उद्देश्य वहां स्थायी बेस बनाना है।

दैनिक भास्कर 14 May 2026 1:01 pm

चीन में नया संघर्ष; रोबोट-ड्रोन से ड्राइवर खतरे में:रोबोटैक्सी और फूड-डिलीवरी ड्रोन तेजी से सड़कों पर कब्जा कर रहे, ट्रेंड का विरोध बढ़ा

चीन एआई और ऑटोमेशन के दुष्प्रभाव से जूझ रहा है। बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने का खतरा मंडरा रहा है। किंगदाओ जैसे शहर ऑटोमेशन और इंसानी संघर्ष की लैब बन गए हैं। महज एक साल पहले इस शहर में ऑटोनॉमस व्हीकल गिने-चुने थे। आज यह दुनिया के सबसे उन्नत शहरों में है। नियोलिक्स कंपनी ने यहां 1,200 मानवरहित डिलीवरी वैन उतारी है। दिसंबर तक इसे बढ़ाकर 4,000 करने का लक्ष्य है। यह शहर उस बदलाव का प्रतीक है, जहां रोबोटैक्सी और फूड-डिलीवरी ड्रोन तेजी से सड़कों पर कब्जा कर रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स के आंकड़ों के अनुसार 2025 के अंत तक चीन की सड़कों पर 33,000 शॉर्ट-रेंज डिलीवरी वाहन थे। 2026 के अंत तक मानवरहित कैब 14,000 होने की उम्मीद है। 5 साल में, चीनी शहरों में 7 लाख रोबोटैक्सी होंगी। यह कुल राइड-हेलिंग सेवाओं का 12% होगी। दिग्गज एप मीटुआन का अनुमान है कि वह चीन की 10% क्विक फूड डिलीवरी ड्रोन के जरिए कर सकता है। पिछले वर्ष 6 हजार करोड़ डिलीवरी हुई थीं। इससे ड्राइवरों की रोजी-रोटी छिनने लगी है। ऐसे में चीनी नेतृत्व ने रणनीति बदली है। सरकार ने मार्च में जारी पंचवर्षीय आर्थिक योजना में स्पष्ट कहा कि बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के जोखिम को रोकना होगा। अप्रैल में जारी एक मसौदा दस्तावेज में डेवलपर्स को सख्त हिदायत दी गई कि वे रोजगार खत्म करने के इरादे से एआई का इस्तेमाल न करें। रिसर्च फर्म टॉम ननलिस्ट के मुताबिक, चीनी एआई रेगुलेशन में रोजगार बचाने के लिए किया गया अनुरोध दुर्लभ है। इससे पहले नीतिगत स्तर पर मानव श्रम के संरक्षण का ऐसा उदाहरण नहीं मिलता। असली खतरा उन 2.2 करोड़ ड्राइवरों को है जो सवारियां ढोते हैं या ग्राहकों को पार्सल पहुंचाते हैं। तनाव कम करने के लिए मीटुआन जैसी कंपनियां ड्राइवरों को नई भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं। शंघाई में ड्राइवरों को ड्रोन डिलीवरी संचालित करने, खाना लोड करने और कमांड सेंटर से निगरानी करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। वुहान में ऑटोमेशन कारों से जाम बढ़ रहा, ड्राइवर संगठित हो रहे चीन में ऑटोमेशन की राह आसान भी नहीं है। वुहान जैसे शहरों में, जहां बायडू लगभग 1,000 रोबोटैक्सी चला रहा है, तकनीकी खामियां ट्रैफिक जाम कर रही हैं। मार्च में दर्जनों टैक्सियां अचानक सड़क पर ‘फ्रीज’ हो गईं, जिससे यातायात ठप हो गया। इसके बाद सरकार ने रोबोटैक्सी के नए लाइसेंस पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, ड्राइवर अब संगठित होकर विरोध कर रहे हैं। 2024 में वुहान में हुए प्रदर्शनों के बाद, अधिकारियों ने बायडू को अपने रोबोटैक्सी के आंकड़े सार्वजनिक करने से मना कर दिया।

दैनिक भास्कर 13 May 2026 4:27 pm

टाटा अल्ट्रोज iCNG AMT लॉन्च, कीमत ₹8.70 लाख से शुरू:ये CNG के साथ ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली भारत में पहली प्रीमियम हैचबैक, 360° कैमरा जैसे फीचर्स

टाटा मोटर्स ने आज (12 मई) अपनी प्रीमियम हैचबैक अल्ट्रोज के CNG मॉडल को AMT (ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन) गियरबॉक्स के साथ भारत में लॉन्च किया है। इसी के साथ टाटा अल्ट्रोज iCNG भारत में CNG के साथ ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली पहली प्रीमियम हैचबैक बन गई है। टाटा ने इसे 5 वैरिएंट्स- प्योर, प्योर S, क्रिएटिव, क्रिएटिव S और अकम्प्लिश्ड S में पेश किया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 8.70 लाख रुपए है, जो टॉप मॉडल में ₹10.77 लाख तक जाती है। वैरिएंट के आधार पर AMT मॉडल्स मैनुअल से ₹55,000 से ₹60,000 तक महंगे हैं। मारुति बलेनो और टोयोटा ग्लाजा से मुकाबला अल्ट्रोज का सीधा मुकाबला मारुति बलेनो, टोयोटा ग्लाजा और हुंडई i20 से है। बलेनो और ग्लैंजा में भी CNG का ऑप्शन मिलता है, लेकिन इनमें सिर्फ मैनुअल गियरबॉक्स ही आता है। ऐसे में अल्ट्रोज उन ग्राहकों को अपनी ओर खींचेगी जो लग्जरी के साथ ऑटोमैटिक CNG कार ढूंढ रहे हैं। अल्ट्रोज कई सेगमेंट फर्स्ट फीचर के साथ आती है। एक्सटीरियर: ट्विन पॉड प्रोजेक्टर LED हेडलैंप्स और फ्लश डोर हैंडल्स अल्ट्रोज के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी ने इसके उसी आइकोनिक 'एरो-डायनेमिक' लुक को जारी रखा है इंटीरियर: बैज कलर थीम के साथ 10.25-इंच के दो डिस्प्ले टाटा अल्ट्रोज 2025 में डुअल-टोन डैशबोर्ड और बैज कलर की नई प्रीमियम अपहोल्स्ट्री दी गई है। कैबिन में अब नेक्सन की तरह 'टू-स्पोक इल्लुमिनेटेड स्टीयरिंग व्हील' और टच-बेस्ड AC कंट्रोल पैनल मिलता है। ऑटोमैटिक वैरिएंट में अपडेटेड गियर लिवर और डैशबोर्ड पर ग्लॉस ब्लैक फिनिश के साथ एम्बिएंट लाइटिंग दी गई है। कार में सेगमेंट फर्स्ट 10.25-इंच का फुली डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें मैप्स और कस्टमाइजेशन के विकल्प मिलते हैं। सेंटर में भी 10.25-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मौजूद है। इसके अलावा वॉइस कमांड सनरूफ, ऑटो AC, क्रूज कंट्रोल, एयर प्यूरीफायर, 8-स्पीकर साउंड सिस्टम और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। परफॉर्मेंस: पेट्रोल इंजन के साथ CNG का भी ऑप्शन मिलेगा अपडेटेड मॉडल में मैकेनिकली कोई बदलाव नहीं किया गया है। टाटा अल्ट्रोज इस सेगमेंट की पहले की तरह एकमात्र हैचबैक है, जो 3 इंजन ऑप्शन- पेट्रोल, टर्बो पेट्रोल और डीजल ऑफर करती है। इसके अलावा, पेट्रोल इंजन के साथ CNG का ऑप्शन भी मिलता है। 1.2-लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 88hp की पावर और 113Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन और 6-स्पीड DCA (ऑटोमैटिक) का ऑप्शन मिलता है। यह इंजन रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए अच्छा है, लेकिन टर्बो की तुलना में कम पावरफुल है। इसके साथ कार 19.05-19.33 kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। DCA गियरबॉक्स, आमतौर पर प्रीमियम कारों में देखा जाता है, इस सेगमेंट में AMT या CVT की तुलना में ज्यादा रिफाइंड एक्सपीरियंस ऑफर करता है। 1.2-लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन CNG में 73.5hp की पावर और 103Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ अब ऑटोमेटिक गियरबॉक्स भी मिलेगा। इसके साथ कार 26.2 km/kg का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। CNG वैरिएंट किफायती रनिंग कॉस्ट के लिए है, लेकिन पावर थोड़ी कम हो जाती है। अल्ट्रोज में 1.2-लीटर का टर्बो-पेट्रोल इंजन का ऑप्शन भी मिलता है, जिसमें 110hp की पावर और 170Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलती है। इसके साथ कार 18.5kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। यह स्पोर्टी ड्राइविंग के लिए बेहतर है, खासकर हाईवे पर अच्छी पावर देता है। अल्ट्रोज में चौथा और आखिरी पावरट्रेन ऑप्शन 1.5-लीटर के डीजल इंजन का मिलता है, जो 90hp की पावर और 200Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलती है। इसके साथ कार 23.64 - 25.11kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। डीजल इंजन कम rpm पर हाई टॉर्क देता है, जो लंबी दूरी की ड्राइविंग और माइलेज के लिए अच्छा ऑप्शन है। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स के साथ 360-डिग्री कैमरा टाटा अल्ट्रोज भारत की सबसे सुरक्षित हैचबैक है, जिसे ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग मिली है। यह इस सेगमेंट में एकमात्र हैचबैक है जो इस रेटिंग को हासिल करने में सफल रही है। इसकी मजबूत बिल्ड क्वालिटी और सेफ्टी फीचर्स इसे अलग बनाते हैं। सेफ्टी फीचर्स में शामिल हैं: CNG वेरिएंट में टैंक की सुरक्षा के लिए एडिशनल फीचर्स भी मिलते हैं, जो इस सेगमेंट में रेयर है। ड्यूल क्लच ऑटोमेटिक (DCA) गियरबॉक्स में भी सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं, जैसे कि ड्राइव मोड में गलती से डोर खोलने पर गाड़ी का आगे न बढ़ना, जो नए ड्राइवर्स के लिए खास तौर पर उपयोगी है।

दैनिक भास्कर 12 May 2026 7:43 pm