नेटफ्लिक्स अपने प्लेटफॉर्म को तेजी से बदल रहा है। अब कंपनी सिर्फ शो और फिल्में दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यूजर के देखने के पूरे तरीके को बदलने की तैयारी में है। इसी के तहत कंपनी जल्द ही मोबाइल एप में टिकटॉक-रील्स जैसा वर्टिकल वीडियो फीड जोड़ने जा रही है, जो इस महीने के अंत तक रोलआउट हो सकता है। टेकक्रंच के अनुसार यह पहले अमेरिका में रोलआउट होगा। बाद में इसे ग्लोबली लॉन्च किया जाएगा। वर्टिकल वीडियो, ताकि नए शो खोजना आसान हो नेटफ्लिक्स का मानना है कि आज के यूजर्स मोबाइल पर छोटे वीडियो देखकर ही नया कंटेंट खोजते हैं। नेटफ्लिक्स के प्रोडक्ट चीफ यूनिस किम के मुताबिक, लोग पहले ट्रेलर और क्लिप्स देखकर तय करते हैं कि उन्हें आगे क्या देखना है। रील्स जैसा फीड - स्क्रॉल करके खोजें अगला शो नेटफ्लिक्स का नया फीड कंटेंट खोजने (को आसान और मजेदार बनाने के लिए लाया जा रहा है। यह नया वर्टिकल फीड यूजर्स को छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स, ट्रेलर और वीडियो पॉडकास्ट दिखाएगा, जिससे यूजर सिर्फ स्क्रॉल करके कंटेंट देख पाएंगे। हर क्लिप एक सैंपल की तरह काम करेगी, पसंद आने पर सीधे उसी शो या फिल्म पर जा सकेंगे। यह फीचर केवल मोबाइल एप पर उपलब्ध होगा। डिज्नी में भी वर्टिकल वीडियो फीड शुरू की डिज्नी प्लस ने मोबाइल एप में Verts नाम का वर्टिकल वीडियो फीड शुरू किया है, जिससे यूजर्स छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स को स्वाइप करके नया कंटेंट खोज सकते हैं। यह मार्च 2026 में लॉन्च हुआ है और इसे अभी अमेरिका में शुरू किया है।
स्मार्टफोन कैमरा पिछले कुछ सालों में काफी बेहतर हुआ है। आज आईफोन, गूगल पिक्सल या सैमसंग गैलेक्सी… सभी फोन आम यूजर के लिए शानदार फोटो क्वालिटी देते हैं। खास बात यह है कि यह सुधार अब मिड-रेंज डिवाइस तक पहुंच चुका है। यही वजह है कि स्मार्टफोन कंपनियां अब नए एक्सपेरिमेंट कर रही हैं। इस रेस में वीवो, शाओमी और ओपो एक नया रास्ता अपना रही हैं, ये अब प्रीमियम स्मार्टफोन में एक्सर्टनल लेंस जोड़ रही हैं। शाओमी - फोन के अंदर मूविंग कैमरा दे रहा शाओमी के 17 अल्ट्रा में ऐसा कैमरा सिस्टम दिया है, जो अंदर ही मूव करता है, यानी फोटो लेते समय ज्यादा कंट्रोल मिलता है। इसमें 67mm माउंट है, यानी कन्वर्टर लगाकर अलग कैमरा लेंस इस्तेमाल कर सकते हैं। फोन की कीमत भारत में 1.40 लाख रु से शुरू है। फोटोग्राफी किट की कीमत 20 हजार रु. है। ओपो - कैमरे जैसा कंट्रोल दे रहा ओपो के फाइंड X9 प्रो में 200 मेगापिक्सल टेलीफोटो कैमरा मिलता है, जबकि फाइंड X9 अल्ट्रा में दो 200 एमपी कैमरे दिए गए हैं। एक्सटर्नल लेंस लगाने पर जूम और फोकस के लिए अलग रिंग मिलती है। ओपो ने कैमरा ब्रांड Hasselblad से पार्टनरशिप की है, जिससे क्वालिटी बेहतर मिलती है। कीमत 1.10 लाख रु से शुरू है। वीवो - फोन में 105x तक का डिजिटल जूम होगा वीवो X300 अल्ट्रा में दो 200MP कैमरे हैं। एक प्राइमरी व दूसरा टेलीफोटो (जूम) कैमरा, जिसमें 105x तक डिजिटल जूम है। इसमें एक्सटर्नल लेंस भी लगा सकते हैं, जिससे जूम क्षमता 20x और बढ़ जाती है। यह लेंस जर्मन कंपनी ZEISS के साथ मिलकर बनाया गया है। फोन 6 मई को लॉन्च होगा। कैसे काम करते हैं एक्सटर्नल लेंस? ये एक्सटर्नल लेंस सीधे फोन के टेलीफोटो कैमरे के ऊपर लगाए जाते हैं और टेलीस्कोप जैसा काम करते हैं। फोन का जो बेस जूम होता है, उसे ये कई गुना बढ़ा देते हैं। आमतौर पर इससे ऑप्टिकल जूम 10x से 20x तक पहुंच सकता है। किट में दिए गए बटन से यूजर फोटो क्लिक कर सकता है, जूम कंट्रोल कर सकता है, मैनुअल फोकस जैसे सेटिंग्स भी एडजस्ट कर सकता है। एपल-सैमसंग और गूगल AI पर दे रहे जोर सैमसंग - एस23 अल्ट्रा के बाद से बड़ा हार्डवेयर अपडेट नहीं दिया। आईफोन - आईफोन 14 प्रो के बाद कैमरे में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। 15 प्रो और 16 प्रो में भी मुख्य सेंसर 48MP ही है। पिक्सल - आज भी अपने फोन में 50MP का सेंसर दे रहा है, जो पिक्सल 6 में भी दिया गया था। गूगल सॉफ्टवेयर और कैमरा के एआई फीचर्स में अपडेट दे रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की रेस में ओपनएआई ने अपना सबसे स्मार्ट और समझदार एआई मॉडल GPT-5.5 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह एआई की दुनिया में अगला बड़ा कदम है, जहां एआई अब केवल बातचीत नहीं करेगा, बल्कि असल में आपके काम को अंजाम भी देगा। पुराने एआई मॉडल्स को हर कदम पर निर्देश देने पड़ते थे, लेकिन GPT-5.5 उलझे हुए और कई हिस्सों वाले कामों को खुद-ब-खुद शुरू से आखिरी तक पूरा कर सकता है। आप इसे कोई भी प्रोजेक्ट सौंप सकते हैं और यह खुद उसकी प्लानिंग करेगा। एक्सपर्ट डेविड गेविर्ट्ज ने इस नए एआई को 10 अलग-अलग कामों में परखा। आइए जानें, इसका क्या नतीजा रहा… ओपनएआई ने 23 अप्रैल को लॉन्च किया GPT-5.5 ओपनएआई ने अपना सबसे लेटेस्ट और पावरफुल मॉडल GPT-5.5 (कोडनेम: Spud) 23 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया है। यह पिछले मॉडलों की तुलना में कहीं ज्यादा एजेंटिक यानी स्वतंत्र रूप से काम करने वाला है। GPT-5.5 की प्रमुख खासियतें: आपके लिए कौन-सा एआई बेहतर है? चैटजीपीटी, जेमिनी व क्लाउड मॉडल की खूबियां जानिए... 1. चैटजीपीटी 5.5: यह सबसे बेहतर ऑल-राउंडर है। 2. क्लाउड: लेखन और कोडिंग के काम में एक्सपर्ट। 3. जेमिनी: डेटा में महारत। ये खबर भी पढ़ें… मिथॉस AI से बैंकिंग सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा: वित्त मंत्री सीतारमण ने हाई-लेवल मीटिंग की; क्या है मिथॉस और यह क्यों खतरनाक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस बैठक में एंथ्रोपिक के 'क्लॉड मिथॉस' AI मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को होने वाले संभावित खतरों पर चर्चा की गई। यह एआई मॉडल इतना एडवांस है कि हैकर इसका इस्तेमाल दशकों पुरानी अज्ञात खामियों को खोजकर फाइनेंशियल सेक्टर पर साइबर हमले कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
BMW मोटोराड ने भारत में अपनी पॉपुलर एडवेंचर टूरर बाइक F 450 GS को भारत में लॉन्च कर दिया है। बाइक 48hp पावर वाला 420cc का पैरेलल-ट्विन इंजन से लैस है। इसमें सेफ्टी के लिए ABS प्रो और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.70 लाख रुपए है, जो टॉप वैरिएंट के लिए 5.30 लाख रुपए तक जाती है। यह नई बाइक कंपनी की पुरानी G 310 GS की जगह लेगी और इसे TVS के होसुर प्लांट में बनाया जा रहा है। बाइक की बुकिंग शुरू हो चुकी है और ग्राहकों को इसकी डिलीवरी जून 2026 से मिलना शुरू होगी। BMW F 450 GS को तीन वैरिएंट्स- बेस, एक्सक्लूसिव और GS ट्रॉफी में पेश किया गया है। बेस और एक्सक्लूसिव वैरिएंट सिर्फ कॉस्मिक ब्लैक कलर में मिलेंगे, जबकि टॉप-एंड GS ट्रॉफी वैरिएंट को BMW के क्लासिक ट्राइकलर (रेसिंग ब्लू मेटालिक) पेंट स्कीम में उतारा गया है। पावरफुल 420cc का इंजन और परफॉर्मेंस इस एडवेंचर बाइक में 420cc का लिक्विड-कूल्ड, पैरेलल-ट्विन इंजन दिया गया है। यह इंजन 8,750rpm पर 48hp (47.5PS) की पावर और 6,750rpm पर 43Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसे 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। इसमें स्लिपर क्लच और बाई-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर की सुविधा दी गई है। खास बात यह है कि इसके ट्रॉफी वैरिएंट में 'ईजी राइड क्लच' (ERC) मिलता है, जो क्लच ऑपरेशन को ऑटोमैटिक तरीके से मैनेज करता है। डिजाइन और सेफ्टी फीचर्स F 450 GS का डिजाइन कंपनी की फ्लैगशिप बाइक R 1300 GS से प्रेरित है, जिसमें सिग्नेचर क्वाड-LED डे-टाइम रनिंग लैंप्स (DRLs) और X-शेप्ड लुक दिया गया है। सेफ्टी के लिए इसमें ABS प्रो, डायनेमिक ब्रेक कंट्रोल (DBC) और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स दिए गए हैं। बाइक का वजन 178 किलोग्राम है और इसमें 14 लीटर का फ्यूल टैंक मिलता है। इसकी सीट की ऊंचाई 845mm है। स्मार्ट फीचर्स और कनेक्टिविटी बाइक में 6.5-इंच का TFT डिस्प्ले दिया गया है, जो स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, नेविगेशन और कॉल/SMS अलर्ट को सपोर्ट करता है। इसमें रेन, रोड और एंड्यूरो जैसे मल्टीपल राइडिंग मोड्स मिलते हैं। एक्सक्लूसिव और GS ट्रॉफी वैरिएंट में अतिरिक्त 'एंड्यूरो प्रो' मोड भी दिया गया है। इसके अलावा हीटेड ग्रिप्स, एडजस्टेबल लीवर्स और इंजन ड्रैग टॉर्क कंट्रोल जैसे फीचर्स इसे प्रीमियम बनाते हैं। वैरिएंट के अनुसार मुख्य अंतर मार्केट में इनसे होगा मुकाबलाभारतीय बाजार में BMW F 450 GS का सीधा मुकाबला होंडा NX500 से होगा। इसके अलावा यह रॉयल एनफील्ड हिमालयन 450 और KTM 390 एडवेंचर जैसी सिंगल-सिलेंडर बाइक्स को भी चुनौती देगी। कंपनी इसके साथ क्रॉस-स्पोक व्हील्स, अलग-अलग विंडस्क्रीन और लगेज सिस्टम जैसी एक्सेसरीज के ऑप्शन भी दे रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस बैठक में एंथ्रोपिक के 'क्लॉड मिथॉस' AI मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को होने वाले संभावित खतरों पर चर्चा की गई। यह एआई मॉडल इतना एडवांस है कि हैकर इसका इस्तेमाल दशकों पुरानी अज्ञात खामियों को खोजकर फाइनेंशियल सेक्टर पर साइबर हमले कर सकते हैं। बैंकों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश वित्त मंत्री ने बैंकों को अपने IT सिस्टम को सुरक्षित करने और कस्टमर डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा कि मिथॉस से पैदा होने वाला खतरा ऐसा है, जो पहले कभी नहीं देखा गया। इसके लिए वित्तीय संस्थानों और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल और हाई लेवल की तैयारी की जरूरत है। खतरे से निपटने के लिए भारत का प्लान वित्त मंत्रालय अब एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाने की योजना बना रहा है जो हैकिंग के प्रयासों की पहचान कर उन पर तुरंत कार्रवाई कर सके। बैंकों को सलाह दी गई है कि वे साइबर हमले की जानकारी आपस में साझा करने के लिए एक रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग मैकेनिज्म बनाएं। इसमें इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) और अन्य एजेंसियां भी शामिल होंगी। क्या है क्लॉड मिथॉस और यह क्यों खतरनाक है? मिथॉस एंथ्रोपिक का सबसे शक्तिशाली AI मॉडल है। कंपनी के मुताबिक मिथॉस ने ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउजर्स की दशकों पुरानी कमियां ढूंढ निकाली हैं, जिन्हें इंसान नहीं देख पाए। एंथ्रोपिक का कहना है कि इसे सार्वजनिक करना किसी के भी हाथ में एडवांस हैकिंग टूल देने जैसा होगा। एंथ्रोपिक ने इसका एक्सेस सिर्फ अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी चुनिंदा 40 कंपनियों को दिया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अनधिकृत यूजर्स ने इसका एक्सेस हासिल कर लिया है। इससे डर है कि वे सिस्टम की सुरक्षा खामियों का फायदा उठा सकते हैं। एंथ्रोपिक ने कहा कि अगर इसे बिना किसी नियंत्रण के रिलीज किया गया, तो अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं। डिजिटल जेल तोड़कर खुद बाहर निकला AI इस मॉडल के रोलआउट से पहले एक घटना भी सामने आई थी जो बताती है कि ये कितना एडवांस है। 'मिथॉस' की एक सुरक्षित 'सैंडबॉक्स' में टेस्टिंग हो रही थी ताकि वह इंटरनेट का इस्तेमाल न कर सके। सैंडबॉक्स को एक तरह की डिजिटल जेल कह सकते है। लेकिन इस एआई ने सुरक्षा घेरे को तोड़कर खुद ही रास्ता बना लिया। इसका पता तब चला जब इस पर काम करने वाले एक रिसर्चर को अचानव उसी एआई मॉडल का भेजा हुआ एक ईमेल मिला। एआई का इस तरह अपनी मर्जी से बाहर निकलना बेहद खतरनाक है। अमेरिका में भी मिथॉस को लेकर हाई-लेवल मीटिंग केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका में भी इस मुद्दे पर मीटिंग्स हो रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने हाल ही में बैंक के बड़े अधिकारियों के साथ एक क्लोज-डोर मीटिंग की थी। इसमें उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा था कि वे अपने सिस्टम को मिथॉस से पैदा होने वाले संभावित खतरों के लिए तैयार रखें।
बजाज ऑटो ने नई पल्सर NS400Z को 349cc इंजन के साथ लॉन्च किया है। सरकार के नए GST 2.0 नियमों का फायदा उठाने के लिए कंपनी ने इंजन की क्षमता कम की है। इससे बाइक की कुल कीमत में काफी कमी आई है। 2026 बजाज पल्सर NS400Z में सबसे बड़ा अपडेट इसके पावरट्रेन में किया गया है। पहले इसमें 373cc का इंजन मिलता था, लेकिन अब इसे घटाकर 349cc कर दिया गया है। बजाज ने बोर साइज 89mm ही रखा है, लेकिन स्ट्रोक लेंथ में बदलाव किया है। यह नया 349cc सिंगल-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन 40.6 PS की पावर और 33.2 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। कंपनी का दावा है कि पावर में मामूली गिरावट के बावजूद, नया सेटअप बेहतर रिफाइनमेंट और ज्यादा माइलेज देगा। GST 2.0 से घट गई कीमतें इंजन को 350cc से नीचे रखने का मुख्य कारण टैक्स में बचत करना है। नए नियमों के तहत, 350cc से कम की बाइक पर अब 40% की जगह केवल 18% GST लगेगा। इसी वजह से नई पल्सर NS400Z की कीमत अब ₹1.93 लाख (एक्स-शोरूम) हो गई है, जो इसे अपने सेगमेंट की सबसे वैल्यू-फॉर-मनी बाइक बनाती है। हार्डवेयर और बनावट पहले जैसी एडवांस फीचर्स और टेक्नोलॉजी फीचर्स के मामले में यह बाइक काफी एडवांस है। इसमें ग्राहकों को ये खास फीचर्स मिलेंगे… डायमेंशन और कलर ऑप्शन बाइक की सीट हाइट 807 mm और ग्राउंड क्लीयरेंस 168 mm है। इसका कुल वजन (कर्ब वेट) 174 किलोग्राम है और इसमें 12 लीटर का फ्यूल टैंक दिया गया है। टायर की बात करें तो फ्रंट में 110-सेक्शन और रियर में 150-सेक्शन टायर मिलते हैं। यह बाइक चार कलर- ग्लॉसी रेसिंग रेड, ब्रुकलिन ब्लैक, प्यूटर ग्रे और पर्ल मेटालिक व्हाइट में उपलब्ध होगी। क्या है GST 2.0 का नियम? भारत में 350cc से ज्यादा इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों को लग्जरी की कैटेगरी में माना जाता है, जिस पर ज्यादा टैक्स (सेस मिलाकर लगभग 40%) लगता है। 350cc के नीचे आने पर टैक्स स्लैब कम हो जाता है, जिसका सीधा फायदा ग्राहकों को कम कीमत के रूप में मिलता है।
टेक कंपनी मोटोरोला ने आज 22 अप्रैल को भारत में अपनी प्रीमियम 'एज सीरीज' में नया स्मार्टफोन मोटोरोला एज 70 प्रो लॉन्च किया है। इस सीरीज का यह तीसरा मॉडल है, इससे पहले कंपनी एज 70 और एज 70 फ्यूजन पेश कर चुकी है। मोटोरोला का नया फोन मीडियाटेक के लेटेस्ट डायमेंसिटी 8500 एक्स्ट्रीम प्रोसेसर के साथ आने वाला भारत में पहला स्मार्टफोन है। फोन में 50 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा और 6500mAh की बैटरी दी गई है। मोटोरोला एज 70 प्रो को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 38,999 रुपए है। फोन की सेल 29 अप्रैल से शुरू होगी। फोन पेनटोन टी, पेनटोन लिली वाइट और पेनटोन टाइटन कलर में अवेलेबल होगा। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: मिलिट्री ग्रेड मजबूती और स्लिम बॉडी मोटोरोला ने इस फोन के डिजाइन और मजबूती पर काफी काम किया है। स्पेसिफिकेशन्स डिस्प्ले: 144Hz रिफ्रेश रेट और हाई ब्राइटनेस फोन में 6.8-इंच की 1.5K Extreme AMOLED कर्व्ड डिस्प्ले दी गई है। यह 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है। गेमिंग और आउटडोर विजिबिलिटी के लिए इसमें 5200nits की पीक ब्राइटनेस दी गई है। स्क्रीन में 'Water Touch' फीचर है, जिससे गीले हाथों से भी फोन चलाया जा सकता है। कैमरा: सेल्फी के लिए भी 50MP सेंसर फोटोग्राफी के लिए इसके रियर पैनल पर तीन कैमरे दिए गए हैं: परफॉर्मेंस: देश का पहला डाइमेंसिटी 8500 एक्सट्रीम प्रोसेसर मोटोरोला ऐज 70 प्रो मीडियाटेक डायमेंसिटी 8500 एक्सट्रीम चिपसेट पर काम करने वाला पहला फोन है। यह 4nm फेब्रिकेशन पर बना 8-कोर प्रोसेसर है, जिसकी मैक्सिमम क्लॉक स्पीड 3.4GHz है। फोन में गेमिंग के दौरान हीटिंग कम करने के लिए 4600mm का वेपर चेंबर कूलिंग सिस्टम दिया गया है। यह फोन एंड्रॉयड 16 पर चलता है। बैटरी और चार्जिंग: 29 घंटे का वीडियो प्लेबैक इसमें 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। कंपनी का दावा है कि यह 29 घंटे का वीडियो प्लेबैक टाइम देती है। बैटरी को तेजी से चार्ज करने के लिए बॉक्स में 90W टर्बोपावर फास्ट चार्जर मिलता है। कनेक्टिविटी और अन्य फीचर्स फोन में वाईफाई 6E और ब्लूटूथ 5.4 का सपोर्ट है। ऑडियो के लिए स्टीरियो स्पीकर्स दिए गए हैं। कंपनी ने इसके साथ 3 साल के OS अपग्रेड और 5 साल के सिक्योरिटी अपडेट का वादा किया है।
क्या आपने गौर किया है कि जो स्मार्टफोन खरीदते वक्त सुपरफास्ट था, वह 2-3 साल बाद दम तोड़ने लगता है। बैटरी जवाब देने लगती है, एप हैंग होने लगते हैं और अंत में आप झुंझलाकर नया फोन खरीद लेते हैं। यूरोपीय संघ (ईयू) का मानना है कि यह सोची-समझी डिजाइन (प्लान्ड ऑब्सोलेसेंस) का नतीजा है। इसमें फोन को इतना असुविधाजनक बना दिया जाता है कि यूजर नया मॉडल खरीदने के लिए मजबूर हो जाता है। ईयू इस सिस्टम पर लगाम लगाने के प्रयास में है। उसकी जॉइंट रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट बताती है कि स्मार्टफोन हर 2-3 साल में बदले जाते हैं। क्या कंपनियां जानबूझकर आपका फोन धीमा करती हैं? 2017 में एपल इंक ने स्वीकार किया था कि वह पुराने आईफोन को जानबूझकर धीमा कर रहा था। कंपनी ने इसे ‘बैटरी प्रोटेक्शन’ कहा, लेकिन ग्राहकों के लिए यह अपग्रेड का गैर-वाजिब दबाव था। इसके बाद एपल को बैटरी हेल्थ इंडिकेटर जोड़ना पड़ा, पर असली समस्या जस की तस रही। ईयू के नए नियम क्या हैं और इससे स्मार्टफोन की लाइफ कैसे बढ़ेगी? यूरोपीय संघ फरवरी 2027 से ‘इकोडिजाइन’ के कड़े नियम लागू करेगा। इसके बाद कंपनियों की जवाबदेही तय हो जाएगी। नए नियमों को मुख्य रूप से चार कैटेगरी में बांटा जा सकता है। बैटरी लाइफ और क्षमता हर स्मार्टफोन बैटरी को कम से कम 800 चार्ज साइकल के बाद भी अपनी 80% क्षमता बनाए रखनी होगी। यानी सालों इस्तेमाल के बाद भी बैटरी बैकअप अचानक कम नहीं होगा। 7 साल तक सपोर्ट, डिलीवरी मॉडल बंद होने के बाद भी कंपनियों को 7 साल तक स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराने होंगे। कंपनियों को 5-10 वर्किंग डेज के भीतर इनकी डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी। रिपेयर रेटिंग अब जरूरी जैसे फ्रिज-एसी पर स्टार रेटिंग होती है, वैसे ही फोन पर ‘रिपेयर रेटिंग’ (A से E) होगी, जिससे ग्राहक जान सकेंगे कि फोन खराब होने पर उसे ठीक करना कितना आसान है। 5 साल के अपडेट स्मार्टफोन कंपनियों के लिए अब कम से कम 5 साल तक अनिवार्य सॉफ्टवेयर अपडेट देना जरूरी होगा, ताकि पुराने फोन सुरक्षा और फीचर्स के मामले में पीछे न रह जाएं। बचत - यूरोप में नए नियम लागू होने के बाद एक औसत स्मार्टफोन की लाइफ 3 साल से बढ़कर 4.1 साल हो जाएगी। इसकी वजह से साल 2030 तक हर यूरोप के हर परिवार को सालाना करीब 10,700 रुपए (98 यूरो) की बचत होने का अनुमान है। समार्टफोन के ग्राहकों के लिए बैटरी बदलना या फोन रिपेयर करवाना इतना मुश्किल क्यों हो गया ? कंपनियों ने पतले फोन, बेहतर वाटरप्रूफिंग और आसान मैन्युफैक्चरिंग के नाम पर सील्ड डिजाइन अपनाया। इससे रिपेयर पर कंपनियों का पूरा कंट्रोल हो गया। आईफोन में तो किसी अनधिकृत दुकान से बैटरी बदलवाने पर फोन वार्निंग दिखाने लगता है और कुछ फीचर्स बंद हो जाते हैं। पिक्सेल के कुछ मॉडल्स में बैटरी फूलने की समस्या आई तो सॉफ्टवेयर अपडेट से चार्जिंग लिमिट कर दी गई और रिप्लेसमेंट ऑफर हुई। भारतीयों के लिए सख्ती के क्या मायने हैं? ये नियम यूरोप के लिए हैं, पर स्मार्टफोन कंपनियां अलग-अलग देशों के लिए अलग हार्डवेयर डिजाइन नहीं करतीं। इसलिए यूरोप में बदलावों का फायदा भारतीय ग्राहकों को भी मिलेगा। यूरोपीय संघ के देशों में नए नियम आने के बाद भी क्या कुछ खामियां रह गई हैं? ‘करेक्टिव एक्ट’ के कारण स्क्रीन बदलने की सुविधा मिलेगी, लेकिन यूजर्स इसे खुद नहीं बदल सकेंगे। ‘पार्ट पेयरिंग’ जैसी तकनीकें अब भी थर्ड-पार्टी रिपेयर में बाधा डाल सकती हैं। असली सवाल फोन की लाइफ तय करने का हक किसे? यह बहस बैटरी या स्क्रीन की नहीं, कंट्रोल की है। अब तक कंपनियां तय करती थीं कि आपका फोन कब ‘डेड’ होगा। मसलन, कब सॉफ्टवेयर सपोर्ट बंद होगा, कब रिपेयर मुश्किल हो जाएगी। ईयू के नियम इस ताकत को वापस उपभोक्ता के हाथ में देने की कोशिश हैं। अगर ये सफल रही, तो इस बाजार में एक हद तक ग्राहकों की मर्जी चलेगी।
अब आप नेटफ्लिक्स और यूट्यूब जैसे विदेशी एप के सब्सक्रिप्शन के लिए ऑटोमैटिक पेमेंट कभी भी रोक सकेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने विदेशी कंपनियों को किए जाने वाले ऑटोमैटिक पेमेंट के नियम बदल दिए हैं। अब अगर आप अपने कार्ड या UPI से किसी विदेशी सर्विस के लिए ई-मेंडेट यानी हर महीने पैसे कटने वाला सिस्टम (ई-मैन्डेट) सेट करते हैं, तो आपको पेमेंट से 24 घंटे पहले नोटिफिकेशन मिलेगा। इसके लिए बैंकों को एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP से वेरिफिकेशन करना होगा। इसका मकसद यूजर को डिजिटल फ्रॉड से बचाना और उन्हें अपने ट्रांजैक्शन पर ज्यादा कंट्रोल देना है। ट्रांजैक्शन लिमिट: ₹15,000 तक बिना एक्स्ट्रा ऑथेंटिकेशन के पेमेंट RBI ने ई-मैन्डेट ट्रांजैक्शन के लिए लिमिट भी तय की है। ग्राहक यह तय कर सकेंगे कि हर बार एक निश्चित राशि कटे या फिर एक मैक्सिमम लिमिट तय कर सकते हैं। अगर आप अलग-अलग लिमिट चुनते हैं, तो बैंक को यूजर से मैक्सिमम वैल्यू पूछनी होगी। इसके अलावा, ई-मेंडेट में किसी भी तरह के बदलाव या उसे वापस लेने के लिए बैंक को यूजर से दोबारा वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। गलत ट्रांजैक्शन की 3 दिन में रिपोर्टिंग पर पूरा रिफंड मिलेगा गलत ट्रांजैक्शन के मामले में ग्राहकों की जवाबदेही तय करने वाले RBI के नियम ई-मैन्डेट पर भी लागू होंगे। कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं, फ्री मिलेगी ई-मेंडेट सुविधा RBI ने साफ किया है कि बैंक रिकरिंग ट्रांजैक्शन के लिए ई-मेंडेट सुविधा देने पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं ले सकते। साथ ही, अगर आपका कार्ड एक्सपायर होने के बाद दोबारा जारी (Reissue) होता है, तो पुराने ई-मेंडेट नए कार्ड पर मैप किए जा सकेंगे। ------------- ये खबर भी पढ़ें… फूड-एप से 12 ऑर्डर पर ₹900 एक्स्ट्रा खर्च हो रहे: जोमैटो, स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, यहां दाम भी 15% तक ज्यादा ऑनलाइन ऑर्डर के जरिये खाना मंगवाना, OTT देखना, 10 मिनट में किराना- ये सुविधाएं अब पहले से महंगी हो चुकी हैं। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और छुपे हुए खर्च मिलकर हर महीने हजारों रुपए यूं ही खर्च हो रहे हैं। यदि आप महीने में 12 बार भी फूड डिलीवरी एप से ऑर्डर करते हैं तो अनजाने में करीब 900 रुपए अतिरक्ति खर्च कर रहे हैं। इसमें 180 रुपए प्लेटफॉर्म फीस और 720 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। यह रकम हर साल बढ़ रही है। पूरी खबर पढ़ें…
एआई की तेजी से बढ़ती क्षमता अब साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनती दिख रही है। एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने नए मॉडल क्लॉड मायथोस'' को सार्वजनिक न करने का फैसला किया है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल दशकों पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम्स में छिपी कमजोरियों को पहचानने और उनका फायदा उठाने में सक्षम है। एंथ्रोपिक का दावा है कि इस स्तर की क्षमता हासिल करने में अन्य एआई लैब अभी 6 से 18 महीने पीछे हैं। इससे चिंता बढ़ गई है कि इंटरनेट का बड़ा हिस्सा अधिक असुरक्षित हो सकता है फिर चाहे वह स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म हो, ऑनलाइन बैंकिंग या सर्च इंजन। एआई के जरिए बिना खास ट्रेनिंग के सॉफ्टवेयर बनाने का चलन भी बढ़ा है, जिससे ऐसे एप्लीकेशन तेजी से बन रहे हैं जिनमें सुरक्षा जांच नहीं होती। जैसे-जैसे एआई और उन्नत होगा, इन खामियों को ढूंढना और उनका दुरुपयोग करना आसान होता जाएगा। अब तक इंटरनेट अपेक्षाकृत सुरक्षित इसलिए रहा क्योंकि सॉफ्टवेयर बनाना जटिल था और बग्स ढूंढना कठिन। लेकिन ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर पर बढ़ती निर्भरता के बीच यह संतुलन बदल रहा है। उदाहरण के तौर पर, वीडियो स्ट्रीमिंग में इस्तेमाल होने वाला एफएफएमपीईजी और सुरक्षा से जुड़ा ओपनबीएसडी जैसे सिस्टम सीमित संसाधनों पर चल रहे हैं। एंथ्रोपिक के मुताबिक,मायथोस ने ओपनबीएसडी में 27 साल पुरानी और एफएफएमपीईजी में 16 साल पुरानी खामियां खोज निकालीं। विशेषज्ञों को आशंका है कि ऐसे टूल्स का दुरुपयोग कर हैकर अस्पतालों, नेटवर्क और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं। इस स्थिति में विशेषज्ञों का जोर है कि साइबर सुरक्षा को विकल्प नहीं, बल्कि डिफॉल्ट बनाया जाए। कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर में सुरक्षा उपाय पहले से शामिल करने होंगे, ताकि एआई के इस नए दौर में जोखिम को नियंत्रित किया जा सके। सेफ्टी को डिफाल्ट बनाएं प्रोडक्ट में ओपन सोर्स कोड डालने वाली कंपनियों को मेंटेनेंस के लिए जरूरी वर्कर रखने चाहिए। मायथोस जैसे टूल्स बनाने वाली कंपनियां ऐसे वर्कर को ये टूल्स सौंपें। सॉफ्टवेयर बनाने वाले लाखों नए क्रिएटर्स के लिए सेफ्टी के उपाय करने की जरूरत है। ये किसी प्रीमियम फीचर की बजाय डिफाल्ट के रूप में होने चाहिए।
टिम कुक की जगह अब जॉन टर्नस एपल के नए CEO होंगे। वे 1 सितंबर 2026 से कंपनी की कमान संभालेंगे। कुक अब कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। बोर्ड ने सर्वसम्मति से इस योजना को मंजूरी दे दी है। टिम कुक: एपल को 4 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनाया टिम कुक 1998 में एपल से जुड़े थे और 2011 में CEO बने थे। उनके नेतृत्व में एपल की मार्केट वैल्यू 350 बिलियन डॉलर (करीब ₹32 लाख करोड़) से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹350 लाख करोड़) हो गई है। कंपनी का सालाना रेवेन्यू भी 108 बिलियन डॉलर (करीब ₹10 लाख करोड़) से बढ़कर 2025 में 416 बिलियन डॉलर (₹39 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है। 5 बड़े प्रोडक्ट्स और सर्विसेज जिन्हें कुक के दौर में लॉन्च किया गया जॉन टर्नस: 25 साल का अनुभव और स्टीव जॉब्स के साथ काम जॉन टर्नस ने साल 2001 में इस टेक कंपनी को जॉइन किया था। वे तब प्रोडक्ट डिजाइन टीम का हिस्सा थे। वे कंपनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स के साथ भी काम कर चुके हैं। एपल से पहले उन्होंने 'वर्चुअल रिसर्च सिस्टम्स' में एक मैकेनिकल इंजीनियर के तौर पर काम किया था। टर्नस 2013 में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के वाइस प्रेसिडेंट बने और फिर 2021 में उन्हें सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बना दिया गया। इन सालों के दौरान टर्नस ने आईपैड, एयरपॉड्स, आईफोन, एपल वॉच और हाल ही में लॉन्च हुए मैकबुक नियो जैसे बड़े डिवाइसेज पर काम किया। 51 साल के टर्नस लगभग उसी उम्र के हैं, जिस उम्र में टिम कुक ने एप्पल के सीईओ की कमान संभाली थी। टर्नस के पास यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। टर्नस ने कहा, एपल के मिशन को आगे ले जाने का यह मौका मिलने पर मैं बहुत आभारी हूं। मैंने अपना लगभग पूरा करियर एप्पल में ही बिताया है, और मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे स्टीव जॉब्स के मार्गदर्शन में काम करने और टिम कुक को अपना मेंटर बनाने का मौका मिला। टिम कुक ने कहा, “जॉन टर्नस के पास एक इंजीनियर का दिमाग, एक आविष्कारक की आत्मा और ईमानदारी के साथ नेतृत्व करने वाला दिल है। वे एक विजनरी लीडर हैं जिनका पिछले 25 सालों में एपल के लिए योगदान इतना बड़ा है कि उसे गिना नहीं जा सकता।” जॉन टर्नस के सामने ये बड़ी चुनौतियां होंगी: अगले 4 महीने तक साथ काम करेंगे कुक और टर्नस टिम कुक इस साल अगस्त के आखिर तक CEO के रूप में काम जारी रखेंगे ताकि टर्नस के साथ स्मूथ ट्रांजिशन सुनिश्चित हो सके। एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनने के बाद कुक ग्लोबल पॉलिसी मेकर्स के साथ जुड़ने और कंपनी के खास पहलुओं पर ध्यान देंगे। कुक ने कहा कि एपल के CEO के रूप में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। बोर्ड में अन्य बदलाव: आर्थर लेविंसन बनेंगे लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर पिछले 15 वर्षों से एपल के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रहे आर्थर लेविंसन 1 सितंबर 2026 से लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की भूमिका में होंगे। इसी दिन जॉन टर्नस भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हो जाएंगे। लेविंसन ने कहा कि टर्नस का गहरा तकनीकी ज्ञान और बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाने का फोकस एपल को शानदार भविष्य की ओर ले जाएगा। एनवायरनमेंट और प्राइवेसी पर फोकस कुक के नेतृत्व में एपल ने अपना कार्बन फुटप्रिंट 60% तक कम किया है। टर्नस ने भी सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान देते हुए रीसायकल एल्युमीनियम और 3D प्रिंटेड टाइटेनियम (एपल वॉच अल्ट्रा 3) का इस्तेमाल शुरू कराया। साथ ही, उन्होंने प्रोडक्ट्स की मजबूती (ड्यूरेबिलिटी) और रिपेयरेबिलिटी बढ़ाने वाली तकनीकों को बढ़ावा दिया है। एपल के 50 साल के सफर में अब तक 7 सीईओ रह चुके एपल से जुड़े 3 जरूरी आंकड़े नॉलेज पार्ट: क्या होता है एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर?
एपल ने अपने वॉइस असिस्टेंट 'सिरी' को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली है। कंपनी ने अपनी वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस (WWDC) के लिए लोगो जारी किया है, जिसमें ये संकेत मिले हैं। WWDC 2026 का आयोजन 8 जून से 12 जून तक किया जाएगा। इवेंट में सिरी के अलावा iOS 27, iPadOS 27 और macOS 27 जैसे नए ऑपरेटिंग सिस्टम भी पेश किए जाएंगे। डायनामिक आइलैंड में दिखेगा सिरी का नया लुक ब्लूमबर्ग के मार्क गुरमन के मुताबिक लोगो में चमकता हुआ 26 नंबर सिरी के नए इंटरफेस की ओर इशारा करता है। नए अपडेट के बाद सिरी आईफोन के 'डायनामिक आइलैंड' में शिफ्ट हो सकता है। जब यूजर सिरी को एक्टिव करेंगे, तो वहां एक Search or Ask प्रॉम्प्ट दिखाई देगा। इसके साथ ही स्क्रीन के चारों ओर एक पतली लाइट और ग्लोइंग कर्सर वाला इफेक्ट नजर आएगा। कहा जा रहा है कि एप्पल एक खास सिरी एप पर भी काम कर रहा है, जिसमें चैट जैसा इंटरफेस होगा। इसमें आप पुरानी बातें देख सकेंगे और लगातार बातचीत भी कर पाएंगे। एक ही कमांड में होंगे मल्टीपल टास्क एक खास फीचर जिस पर काम चल रहा है, वह है सिरी का एक साथ कई रिक्वेस्ट को समझना। यानी यूजर्स एक ही बार में मौसम पूछने, मीटिंग शेड्यूल करने और मैसेज भेजने जैसे काम एक साथ कह सकेंगे। अभी इन कामों को अलग-अलग कहना पड़ता है। 'सिरी एक्सटेंशन फ्रेमवर्क' भी ला रहा एपल एपल थर्ड-पार्टी एप्स के साथ बेहतर तालमेल के लिए एक नया 'सिरी एक्सटेंशन फ्रेमवर्क' भी ला रहा है। इससे सिरी एप स्टोर से डाउनलोड किए गए एप्स के साथ आसानी से काम कर पाएगा। इनमें से कुछ फीचर्स शुरुआत में Preview के तौर पर लॉन्च हो सकते हैं। गूगल के जेमिनी AI मॉडल की मिलेगी ताकत सिरी को स्मार्ट बनाने के लिए एपल ने गूगल के साथ मल्टी-ईयर पार्टनरशिप की है। एपल के फाउंडेशन मॉडल्स गूगल के जेमिनी AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर तैयार किए जा रहे हैं। कंपनी ने जनवरी में बताया था कि ये मॉडल्स फ्यूचर एपल इंटेलिजेंस फीचर्स को पावर देंगे। यह सिरी को ज्यादा पर्सनलाइज्ड बनाएगा। खास बात यह है कि डेटा प्रोसेसिंग ऑन-डिवाइस और प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट सिस्टम पर होगी, ताकि यूजर की प्राइवेसी सुरक्षित रहे। 2024 से पेंडिंग था सिरी का ओवरहाल एपल ने साल 2024 में सिरी के AI वर्जन की झलक दिखाई थी, लेकिन इंजीनियरिंग चुनौतियों के कारण इसकी रिलीज टाल दी गई थी। अब 2026 के इस इवेंट के जरिए कंपनी सिरी को जेनरेटिव AI के दौर का एक सक्षम असिस्टेंट बनाना चाहती है। एपल का इतिहास रहा है कि वह अपने इवेंट के ग्राफिक्स में ही आने वाले बड़े फीचर्स के संकेत दे देता है।
टेक्नोलॉजी; रियल टाइम ट्रांसलेशन कर रहे चश्मे:कोरियाई थिएटर एआई चश्मों से तोड़ रहा भाषा की दीवार
कोरियाई पॉप कल्चर की लोकप्रियता अब सिर्फ संगीत और फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कोरियाई थिएटर भी तेजी से वैश्विक दर्शकों को आकर्षित कर रहा है। ताइवान के 22 वर्षीय युरोय वांग कोरियाई थियेटर के प्रशंसक हैं, लेकिन उन्हें कोरियाई भाषा नहीं आती। पर एआई-संचालित स्मार्ट चश्मे की बदौलत अब वांग अब बिना किसी परेशानी के नाटक का आनंद ले पा रहे हैं। ये एआई-संचालित स्मार्ट चश्मे थिएटर में चल रहे लाइव प्रदर्शन के दौरान रियल-टाइम में संवादों का अनुवाद कर देते हैं। ये चश्मे एक स्मार्टफोन एप से जुड़े होते हैं, जिसमें दर्शक अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं। जैसे ही कलाकार मंच पर संवाद बोलते हैं, एआई सिस्टम उन्हें तुरंत अनुवादित कर चश्मे के लेंस पर दिखा देता है। सरकार भी दे रही बढ़ावा दक्षिण कोरिया में सरकार पर्यटन मंत्रालय की मदद से इस तरह के प्रयोगों को बढ़ावा दे रही है। कोरिया टूरिज्म ऑर्गनाइजेशन के ‘स्मार्ट थिएटर’ कार्यक्रम के तहत कई शो में इन चश्मों का इस्तेमाल हो रहा है। तकनीक परफेक्ट नहीं हालांकि तकनीक अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कभी-कभी अनुवाद में देरी या गलतियां भी सामने आती हैं, फिर भी इसे थिएटर इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। कंपनियां अब हल्के और ज्यादा सटीक मॉडल पर काम कर रही हैं।
हुंडई ने भारत में अपनी हुंडई वेन्यू का नाइट एडिशन 2026 लॉन्च कर दिया है। नई ब्लैक-थीम वाली इस सब-4-मीटर SUV की शुरुआती कीमत ₹9.69 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। दक्षिण कोरियाई ऑटोमेकर की यह नई पेशकश न केवल विजुअल अपडेट के साथ आती है, बल्कि इसमें कई नए फीचर्स भी जोड़े गए हैं। 2026 वेन्यू नाइट एडिशन: नए कलर्स और बोल्ड लुक के साथ हुंडई वेन्यू नाइट एडिशन को दो नए कलर ऑप्शंस - हेजल ब्लू मैट और मिस्टिक सैफायर मैट के साथ पेश किया गया है। इस एडिशन को फुल ब्लैक थीम पर डिजाइन किया गया है। जिसमें ब्लैक फ्रंट ग्रिल, मैट ब्लैक हुंडई लोगो और नाइट एडिशन का खास एम्बलम दिया गया है। एक्सटीरियर में ब्लैक और सिल्वर स्किड प्लेट्स, ब्लैक रूफ रेल्स और रेड ब्रेक कैलीपर्स जैसे एलिमेंट्स इसे एग्रेसिव लुक देते हैं। इंटीरियर: कर्व्ड डिस्प्ले और प्रीमियम फिनिश गाड़ी के अंदर पूरी तरह से ब्लैक-आउट इंटीरियर दिया गया है, जिसमें ब्रास-कलर्ड इंसर्ट्स इसे प्रीमियम फील देते हैं। इसमें लेदर गियर नॉब, डी-कट स्टीयरिंग व्हील और डुअल 12.3-इंच कर्व्ड पैनोरमिक डिस्प्ले दी गई है। पैसेंजर्स की सुविधा के लिए 2-स्टेप रिक्लाइनिंग सीट्स, रियर AC वेंट्स और सनशेड्स जैसे फीचर्स मौजूद हैं। नए फीचर्स: डैशकैम और एप सपोर्ट हुंडई ने इसमें एक नया डैशकैम पेश किया है जो HX6T, HX10 और N10 जैसे टॉप वेरिएंट्स में मिलेगा। यह कैमरा ड्राइविंग रिकॉर्डिंग, इवेंट-बेस्ड रिकॉर्डिंग और वेकेशन मोड को सपोर्ट करता है। खास बात यह है कि इन सभी रिकॉर्डिंग्स को यूजर हुंडई के एप के जरिए एक्सेस कर सकते हैं। इंजन और गियरबॉक्स: तीन विकल्प मौजूद नाइट एडिशन के पावरट्रेन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ग्राहकों के पास तीन ऑप्शन अवेलेबल हैं… 1.2L पेट्रोल: 83hp की पावर के साथ मैनुअल गियरबॉक्स। 1.0L टर्बो पेट्रोल: 120hp की पावर और DCT ऑटोमैटिक गियरबॉक्स। 1.5L डीजल: 116hp की पावर के साथ मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों ट्रांसमिशन। सेफ्टी: लेवल 2 ADAS और 6 स्टैंडर्ड एयरबैग्स सुरक्षा के लिहाज से इसमें स्मार्टसेंस लेवल 2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) दिया गया है। इसके अलावा 6 स्टैंडर्ड एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, व्हीकल स्टेबिलिटी मैनेजमेंट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और हिल स्टार्ट असिस्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसमें फ्रंट पार्किंग सेंसर्स और चारों पहियों पर डिस्क ब्रेक भी मिलते हैं। कीमत और ट्रिम्स: ₹9.70 लाख से ₹14.79 लाख तक पेट्रोल: रेगुलर पेट्रोल वेरिएंट के HX5 ट्रिम की शुरुआत ₹9.70 लाख से होती है, जबकि टॉप HX6T ट्रिम की कीमत ₹13.85 लाख है। डीजल: HX5 डीजल ट्रिम ₹11.12 लाख और टॉप HX8 डीजल ऑटोमैटिक ₹13.85 लाख में अवेलेबल है। टर्बो पेट्रोल: टॉप-ऑफ-द-लाइन HX10 टर्बो पेट्रोल DCT ट्रिम की कीमत ₹14.79 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। क्या होता है लेवल-2 ADAS और DCT गियरबॉक्स? लेवल-2 ADAS: यह एक ड्राइविंग तकनीक है जिसमें कार खुद से स्टीयरिंग, एक्सेलेरेशन और ब्रेकिंग को कंट्रोल कर सकती है, हालांकि ड्राइवर को हमेशा अलर्ट रहना पड़ता है। DCT (डुअल क्लच ट्रांसमिशन): यह एक ऑटोमैटिक गियरबॉक्स है जो दो क्लच का इस्तेमाल करता है। इससे गियर बहुत तेजी से और बिना झटके के बदलते हैं, जिससे बेहतर माइलेज और परफॉरमेंस मिलती है। ये खबर भी पढ़ें… MG मोटर्स ने लॉन्च की विंडसर EV की टैक्सी 'कम्यूट': कीमत ₹13.49 लाख, सिंगल चार्ज पर चलेगी 332 किमी; इसमें 6 एयरबैग्स मिलेंगे MG मोटर इंडिया ने अपनी पॉपुलर विंडसर EV का टैक्सी वेरिएंट लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे 'MG कम्यूट' नाम दिया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 13.49 लाख रुपए रखी गई है। यह विंडसर EV का सबसे सस्ता वेरिएंट है, जो खासतौर पर फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए तैयार किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
कल्पना कीजिए कि आप अपने घर में झाड़ू लगा रहे हैं, खाना बना रहे हैं या बगीचे में पानी दे रहे हैं, और कोई आपको इन कामों के लिए पैसे दे रहा हो। यकीन करना मुश्किल है, लेकिन भविष्य के एक बड़े दांव ने इसे मुमकिन बना दिया है। यह ‘ह्यूमनॉइड रोबोट्स’ (इंसान जैसी मशीनें) को प्रशिक्षित करने का एक नए वैश्विक अभियान का हिस्सा है। आज की तारीख में आपके घर के काम की वीडियो क्लिप्स उन ‘एंड्रॉयड बटलर’ (रोबोटिक सहायक) के लिए सबसे कीमती डेटा बन गई हैं, जो आने वाले समय में आपके दफ्तरों और रसोई घरों की जिम्मेदारी संभालेंगे। मशीनों के लिए क्यों जरूरी हैं इंसानी वीडियो? दशकों से रोबोट्स को रिमोट कंट्रोल या वर्चुअल सिम्युलेशन (सॉफ्टवेयर) के जरिये सिखाया जाता रहा है। लेकिन सिम्युलेशन में रोबोट यह नहीं समझ पाता कि कांच का एक गिलास उठाने में कितनी ताकत लगानी है। एनवीडिया की रिपोर्ट से चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने आए जब रोबोट की ट्रेनिंग में 20,000 घंटे के ‘फर्स्ट-पर्सन वीडियो’ (इंसान की नजर से शूट किए गए वीडियो) शामिल किए गए, तो उनकी सफलता की दर 50% से ज्यादा बढ़ गई। अब ये रोबोट टी-शर्ट की तह बनाना, ताश के पत्ते छांटना और बोतल का ढक्कन खोलने जैसे जटिल काम बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं। रोबोट की ट्रेनिंग के लिए अरबों घंटों के डेटा जरूरी रोबोट को काम सिखाने के लिए इंसानी वीडियो चाहिए। इसे ‘इगोसेंट्रिक डेटा’ या ‘ह्यूमन डेटा’ कहा जा रहा है। इसके लिए दुनियाभर के स्टार्टअप्स कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स रख रहे हैं। ये सिर पर कैमरा बांधकर रोजमर्रा के काम करना। कैलिफोर्निया की कंपनी माइक्रो1 के पास 71 देशों में लगभग 4,000 रोबोटिक्स ट्रेनर्स हैं। ये लोग हर माह 1.6 लाख घंटे से ज्यादा का वीडियो डेटा भेज रहे हैं। कंपनी के वीपी एरियन सादेघी का कहना है कि यह तो अभी शुरुआत है। रोबोट को पूरी ट्रेनिंग के लिए अरबों घंटों के डेटा की जरूरत होगी। डेटा कलेक्शन इंडस्ट्री की सबसे तेज ग्रोथ एशिया में रोबोटिक्स के क्षेत्र में डेटा कलेक्शन और लेबलिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। मार्केट रिसर्च फर्म्स के मुताबिक, यह इंडस्ट्री सालाना औसतन 30% बढ़ रही है। 2030 तक यह ~92,600 करोड़ का बाजार होगा। सर्वाधिक ग्रोथ एशिया में देखी जा रही है। ऑब्जेक्टवेज जैसी कंपनियों के मुताबिक, अमेरिकी कंपनियां भारत जैसे देशों की तुलना में अमेरिकी घरों के डेटा के लिए 3 गुना वेतन दे रही हैं। ऑब्जेक्टवेज के संस्थापक रवि राजालिंगम कहते हैं, ‘रोबोट को जहां तैनात करना है, उसे वहीं का डेटा देना सटीक होता है।’ घरेलू काम में सुरक्षा से जुड़े लेकर सवाल गंभीर भले ही रोबोट फैक्ट्रियों में 99.9% सटीक काम कर रहे हैं, लेकिन घरों के अनिश्चित माहौल में उनकी सफलता दर 70-80% के बीच ही है। ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स’ के चेयरमैन अलेक्जेंडर वर्ल के मुताबिक यह व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए कम है। सबसे बड़ा खतरा सुरक्षा का है। राजालिंगम चेताते हैं, ‘यदि रोबोट गुड़िया और बच्चे के बीच फर्क नहीं कर पाया, तो नतीजे घातक हो सकते हैं। इसीलिए बच्चों के साथ रोबोट की टेस्टिंग नहीं हो रही, पर पालतू जानवरों के साथ डेटा कलेक्शन शुरू हो चुका है।’
न्यू फीचर्स; नए अपडेट्स में रोलआउट होगा:वॉट्सएप पर बिजनेस चैट्स के लिए अलग से इनबॉक्स होगा
वॉट्सएप में यूं तो विज्ञापन नहीं आते है, लेकिन कई बार कंपनियों के ऑफर्स और मैसेज परेशान करते हैं। अब इस समस्या को कम करने के लिए मेटा एक नया फीचर लाने की तैयारी में है, जो वॉट्सएप पर बिजनेस मैसेजेस को ऑटोमैटिक अलग सेक्शन में कर देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, वॉट्सएप एक ऐसा सिस्टम बना रहा है जो बिजनेस अकाउंट्स के मैसेज को पहचान लेगा और उन्हें मेन चैट से हटाकर अलग सेक्शन में डाल देगा, यानी आपका पर्सनल चैट इनबॉक्स साफ रहेगा। ऑटोमेटेड मैसेज पर लागू होगा यह फीचर कोई बिजनेस मैसेज आने के बाद करीब 24 घंटे में वह अपने आप अलग लिस्ट में शिफ्ट हो सकता है। यह फीचर खासतौर पर उन मैसेजेस पर लागू होगा जो ऑटोमेटेड होते हैं, जैसे ऑफर, प्रमोशन या अपडेट। दोस्तों और फैमिली के मैसेज अलग और मार्केटिंग मैसेज अलग होंगे। वॉट्सएप पर तीन नए अपडेट्स भी आ रहे - वॉट्सएप हाल में कई नए फीचर्स पर काम कर रहा है। जैसे- - यूजरनेम फीचर: बिना नंबर शेयर किए चैट कर सकेंगे यूजर्स। - नाइज कैंसिलेशन: कॉल में बैकग्राउंड शोर कम कर सकेंगे। - चैट प्राइवेसी अपडेट्स: इससे सुरक्षा पर फोकस बढ़ेगा। फीचर कब आएगा? फीचर अभी डेवलपमेंट में है। बीटा टेस्टिंग में भी उपलब्ध नहीं है। वॉट्सएप के आने वाले अपडेट में इसे रोलआउट किया जा सकता है।
एआई अब छात्रों के लिए एक पर्सनल ट्यूटर बन चुका है। एडोब एक्रोबैट और गूगल जेमिनी ने हाल ही में ऐसे स्टडी फीचर्स पेश किए हैं जो पढ़ाई के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह बदल रहे हैं। जहां एडोब छात्रों को नोट्स से कुछ सेकंड्स में पॉडकास्ट और फ्लैशकार्ड्स बनाने की सुविधा दे रहा है, वहीं गूगल भारत के नीट स्टूडेंट्स के लिए फ्री मॉक टेस्ट लेकर आया है। गूगल ने फिलिक्सवाला और अन्य बड़े स्टडी प्लेटफॉर्म्स के साथ पार्टनरशिप की है। जानते हैं आप कैसे इन फीचर्स को अपना सकते हैं। एडोब एक्रोबैट- ये चार फीचर्स पढ़ाई में मददगार समरी जनरेटर- इस टूल पर सबसे पहले पूरी पीडीएफ अपलोड करें। एआई 2 मिनट में उसके मुख्य बिंदु बता देता है कि संघर्ष की शुरुआत कब हुई और वर्तमान स्थिति क्या है। स्टडी गाइड्स - इस टूल से ‘परमाणु समझौता’ और ‘आर्थिक प्रतिबंध’ जैसे मुख्य विषयों के माइंड मैप बन जाते हैं, जिससे पूरा बैकग्राउंड समझ आ जाता है। एआई ट्यूटर - कोई तकनीकी बात समझ नहीं आए तो एआई ट्यूटर से पूछें ‘10 साल के बच्चे की तरह समझाएं।’ फिर भाषा आसान हो जाएगी। एआई पॉडकास्ट - आप अपने नोट्स को ‘पॉडकास्ट’ मोड में डाल सकते हैं। अगर कहीं बाहर भी हैं तो इस संघर्ष पर हो रही चर्चा को सुन सकते हैं... जिससे रिवीजन आसान होगा। ‘स्टूडेंट स्पेसेस’ के साथ पढ़ाई स्मार्ट एडोब ने छात्रों के लिए स्टूडेंट स्पेसेस लॉन्च किया है। यह टूल पीडीएफ फाइलों और नोट्स को इंटरैक्टिव स्टडी मटेरियल में बदल देता है। इसमें छात्रों के लिए 8 टूल्स हैं। मान लीजिए यूएस-ईरान संघर्ष पर आपके पास 100 पन्नों की पीडीएफ फाइल है। आप टूल का इस्तेमाल यूं कर सकते हैं। गूगल जेमिनी नीट और यूजी के छात्रों के लिए फ्री मॉक टेस्ट गूगल ने छात्रों की जरूरतों को समझते हुए जेमिनी एआई में नीट यूजी के लिए फ्री मॉक टेस्ट फीचर रोलआउट किया है। चूंकि नीट एग्जाम 3 मई को है, ऐसे में ये छात्रों की तैयारी में मदद करेगा। फ्री मॉक टेस्ट - छात्र बिना किसी फीस के नीट के पूरे सिलेबस पर आधारित प्रैक्टिस टेस्ट दे सकते हैं। हाई-क्वालिटी कंटेंट - ये टेस्ट फिजिक्सवाला और करियर 360 जैसे पार्टनर्स के साथ मिलकर तैयार किए गए हैं।}रियल-टाइम फीडबैक: एआई गलतियों को सुधारने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप एक्सप्लेनेशन देता है। उपलब्धता - इसे पर्सनल गूगल अकाउंट या वर्कस्पेस अकाउंट से इस्तेमाल कर सकते हैं। गूगल जेईई और सैट के लिए भी इसी तरह के टेस्ट लॉन्च कर चुका है।
सिंपल एनर्जी ने अपना नया इलेक्ट्रिक स्कूटर 'सिंपल अल्ट्रा' भारतीय बाजार में उतार दिया है । इसकी कीमत ₹2.35 लाख है। कंपनी का दावा है कि यह देश का सबसे ज्यादा रेंज देने वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है, जो एक बार फुल चार्ज होने पर 400 किमी तक चल सकता है । 6.5kWh की बैटरी और 115 किमी टॉप स्पीड सिंपल अल्ट्रा को कंपनी के जेन 2 पोर्टफोलियो के तहत पेश किया गया है। इसमें 6.5kWh की बड़ी बैटरी दी गई है । इसकी टॉप स्पीड 115 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह मात्र 2.77 सेकंड में 0 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पकड़ लेता है। कंपनी के मुताबिक, यह भारत का दूसरा सबसे तेज इलेक्ट्रिक स्कूटर है। इससे तेज केवल 'सिंपल वन' का 5kWh वाला वेरिएंट है। चार लेवल का ट्रैक्शन कंट्रोल और स्मार्ट फीचर्स सिंपल अल्ट्रा में सुरक्षा और तकनीक का खास ध्यान रखा गया है। इसमें फोर-लेवल ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम दिया गया है, जो अलग-अलग रास्तों पर स्कूटर की पकड़ मजबूत बनाए रखता है। इसके अलावा, स्कूटर में 7-इंच का बड़ा डिजिटल डिस्प्ले भी मिलता है। कंपनी का पोर्टफोलियो और एकस्पेंशन प्लान इस साल जनवरी में कंपनी ने अपनी दूसरी जनरेशन के स्कूटर 'सिंपल वन' और 'सिंपल वन-एस' लॉन्च किए थे। अल्ट्रा अब इस लाइनअप में सबसे ज्यादा रेंज वाला वेरिएंट बन गया है। वर्तमान में सिंपल एनर्जी के बेंगलुरु, दिल्ली, पटना, भोपाल, आगरा, गोवा, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों में लगभग 70 टचपॉइंट्स (शोरूम और सर्विस सेंटर) हैं। आने वाले समय में कंपनी नागपुर, रांची और भुवनेश्वर जैसे शहरों में भी विस्तार करने की योजना बना रही है। टेस्ट राइड और बुकिंग शुरू सिंपल अल्ट्रा अब देशभर के 'सिंपल स्टोर्स' पर टेस्ट राइड के लिए उपलब्ध है। ग्राहक इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से भी खरीद सकते हैं। इन प्रीमियम स्कूटर्स से मुकाबला होगा सिंपल अल्ट्रा का भारतीय बाजार में मुकाबला ओला S1 प्रो , एथर 450X और टीवीएस आईक्यूब एसटी जैसे प्रीमियम स्कूटर्स से होगा। इनकी रेंज 150 से 200 किमी के बीच है। नॉलेज पार्ट IDC रेंज क्या है?: इसका मतलब 'इंडियन ड्राइव साइकिल' है। यह बंद लैब में टेस्ट की गई रेंज होती है। असली सड़क यानी रियल वर्ल्ड में रेंज इससे थोड़ी कम हो सकती है। ट्रैक्शन कंट्रोल: यह एक सेफ्टी फीचर है जो पहियों को फिसलने से रोकता है, खासकर गीली या रेतीली सड़कों पर। यह सिस्टम टायर और सड़क के बीच की ग्रिप बनाए रखता है।
टेक कंपनी गूगल ने 2025 में भारत में नियमों का उल्लंघन करने वाले 48.37 करोड़ विज्ञापनों को हटाया या ब्लॉक किया है। इसी दौरान कंपनी ने अपने AI प्लेटफॉर्म जेमिनी की मदद से 17 लाख एडवरटाइजर अकाउंट्स भी सस्पेंड किए हैं। गुरुवार को जारी गूगल की 2025 एड्स सेफ्टी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल लेवल पर कार्रवाई और भी बड़े पैमाने पर हुई है। पिछले साल दुनिया भर में 830 करोड़ से ज्यादा खराब विज्ञापनों को हटाया गया। इसके साथ ही 2.49 करोड़ एडवरटाइजर अकाउंट्स को भी सस्पेंड किया गया है। कंपनी का दावा है कि हटाए गए कुल विज्ञापनों में से 99% को यूजर्स के देखने से पहले ही रोक दिया गया था। जेमिनी AI ने गूगल की ताकत बढ़ाई गूगल ने बताया कि जेमिनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के जुड़ने से उसकी क्षमता में जबरदस्त सुधार हुआ है। आजकल स्कैमर्स भ्रामक विज्ञापन बनाने के लिए जेनेरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। जेमिनी की मदद से ऐसे धोखेबाजों को रियल-टाइम में पहचानना और रोकना आसान हो गया है। इसकी कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2024 के मुकाबले 2025 में यूजर्स की रिपोर्ट पर चार गुना तेजी से एक्शन लिया गया। की-वर्ड्स की जगह अब 'इरादा' समझता है सिस्टम गूगल के एड्स प्राइवेसी एंड सेफ्टी विभाग के वीपी और जनरल मैनेजर कीरत शर्मा ने बताया कि उनकी टीमें 24 घंटे काम करती हैं। कंपनी के नए मॉडल्स अब केवल कीवर्ड्स पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे विज्ञापनों के पीछे के इंटेंट यानी इरादे को भी समझते हैं। ये मॉडल अकाउंट की उम्र और व्यवहार जैसे अरबों संकेतों का एनालिसिस करते हैं। जिससे पकड़ में आने से बचने के लिए डिजाइन किए गए विज्ञापनों को भी पहले ही ब्लॉक कर दिया जाता है। क्या होता है जेनेरेटिव एआई और एड्स सेफ्टी? यूजर्स को कैसे सतर्क रहना चाहिए? एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री पर असर इतने बड़े पैमाने पर अकाउंट सस्पेंड होने का असर दो तरह से पड़ता है… इसलिए गूगल लगातार अपने सिस्टम को और सटीक बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि गलत अकाउंट ही टारगेट हों। ये खबर भी पढ़ें… चीन; अब पैंथर संभालेगा घर की कमान: सारे घरेलू काम करने को तैयार है ह्यूमनॉइड रोबोट, डिलीवरी शुरू अगर आप हाउस हेल्प या मेड की समस्या से परेशान हैं तो चिंता न करें। ह्यूमनॉइड रोबोट आपकी मदद के लिए बाजार में आ रहे हैं। चीनी रोबोटिक्स कंपनी यूनिक्स एआई ने पैंथर नाम का एक मानवाकार (ह्यूमनॉइड) रोबोट लॉन्च किया है। इसे खासतौर पर घरेलू कामों में मदद के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह घरों में उपयोग के लिए तैयार है। इसकी ग्लोबल डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है। इसकी कीमत करीब 1 लाख डॉलर (करीब 90 लाख रुपए) बताई जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…
टेक कंपनी गूगल ने 2025 में भारत में 48.37 करोड़ नियमों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों को हटाया या ब्लॉक किया है। इसी दौरान कंपनी ने अपने AI प्लेटफॉर्म जेमिनी की मदद से 17 लाख एडवरटाइजर अकाउंट्स भी सस्पेंड किए हैं। गुरुवार को जारी गूगल की 2025 एड्स सेफ्टी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। गूगल की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल लेवल पर कार्रवाई और भी बड़े पैमाने पर हुई है। पिछले साल दुनिया भर में 8.3 बिलियन यानी 830 करोड़ से ज्यादा खराब विज्ञापनों को हटाया गया। इसके साथ ही 2.49 करोड़ एडवरटाइजर अकाउंट्स को भी सस्पेंड किया गया है। कंपनी का दावा है कि हटाए गए कुल विज्ञापनों में से 99% को यूजर्स के देखने से पहले ही रोक दिया गया था। जेमिनी AI ने गूगल की ताकत बढ़ाई गूगल ने बताया कि जेमिनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के जुड़ने से उसकी क्षमता में जबरदस्त सुधार हुआ है। आजकल स्कैमर्स भ्रामक विज्ञापन बनाने के लिए जेनेरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। जेमिनी की मदद से ऐसे धोखेबाजों को रियल-टाइम में पहचानना और रोकना आसान हो गया है। इसकी कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2024 के मुकाबले 2025 में यूजर्स की रिपोर्ट पर चार गुना तेजी से एक्शन लिया गया। की-वर्ड्स की जगह अब 'इरादा' समझता है सिस्टम गूगल के एड्स प्राइवेसी एंड सेफ्टी विभाग के वीपी और जनरल मैनेजर कीरत शर्मा ने बताया कि उनकी टीमें 24 घंटे काम करती हैं। कंपनी के नए मॉडल्स अब केवल कीवर्ड्स पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे विज्ञापनों के पीछे के इंटेंट यानी इरादे को भी समझते हैं। ये मॉडल अकाउंट की उम्र और व्यवहार जैसे अरबों संकेतों का एनालिसिस करते हैं। जिससे पकड़ में आने से बचने के लिए डिजाइन किए गए विज्ञापनों को भी पहले ही ब्लॉक कर दिया जाता है। भारत में 5 वजहों से सबसे ज्यादा विज्ञापन हटाए गए रिपोर्ट में भारत का विशेष जिक्र करते हुए बताया गया है कि यहां विज्ञापन हटाने की मुख्य वजहें क्या रहीं। टॉप 5 उल्लंघन इस प्रकार हैं... क्या होता है जेनेरेटिव एआई और एड्स सेफ्टी? ये खबर भी पढ़ें… चीन; अब पैंथर संभालेगा घर की कमान: सारे घरेलू काम करने को तैयार है ह्यूमनॉइड रोबोट, डिलीवरी शुरू अगर आप हाउस हेल्प या मेड की समस्या से परेशान हैं तो चिंता न करें। ह्यूमनॉइड रोबोट आपकी मदद के लिए बाजार में आ रहे हैं। चीनी रोबोटिक्स कंपनी यूनिक्स एआई ने पैंथर नाम का एक मानवाकार (ह्यूमनॉइड) रोबोट लॉन्च किया है। इसे खासतौर पर घरेलू कामों में मदद के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह घरों में उपयोग के लिए तैयार है। इसकी ग्लोबल डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है। इसकी कीमत करीब 1 लाख डॉलर (करीब 90 लाख रुपए) बताई जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…
चीन; अब पैंथर संभालेगा घर की कमान:सारे घरेलू काम करने को तैयार है ह्यूमनॉइड रोबोट, डिलीवरी शुरू
अगर आप हाउस हेल्प या मेड की समस्या से परेशान हैं तो चिंता न करें। ह्यूमनॉइड रोबोट आपकी मदद के लिए बाजार में आ रहे हैं। चीनी रोबोटिक्स कंपनी यूनिक्स एआई ने पैंथर नाम का एक मानवाकार (ह्यूमनॉइड) रोबोट लॉन्च किया है। इसे खासतौर पर घरेलू कामों में मदद के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह घरों में उपयोग के लिए तैयार है। इसकी ग्लोबल डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है। इसकी कीमत करीब 1 लाख डॉलर (करीब 90 लाख रुपए) बताई जा रही है। नाश्ता बनाएगा, किचन की सफाई भी करेगा पैंथर - पैंथर सुबह जगा सकता है, खाना बना सकता है, रसोई की सफाई कर सकता है, बिस्तर जमा सकता है, टॉयलेट भी क्लीन कर सकता है।- इसे घरेलू कामों के साथ कई उपयोगों के लिए डिजाइन किया गया है।- करीब 80 किलोग्राम वजन और 5 फीट 3 इंच ऊंचाई वाला पैंथर एक बार चार्ज करने पर 12 घंटे तक काम कर सकता है।- पैंथर की ऊंचाई 31 इंच तक और बढ़ सकती है। यह ऊंची अलमारियों तक आसानी से पहुंच सकता है।
कल्पना कीजिए, एक अपराधी को किसी की हत्या करनी है। उसे अब बम या शार्पशूटर की जरूरत नहीं है। वह दूर बैठकर उस व्यक्ति के घर के स्मार्ट डिवाइस (आईओटी) को हैक कर सकता है, कार के ब्रेक फेल कर सकता है, या सस्ता ड्रोन भेजकर हमला कर सकता है। 3डी प्रिंटिंग ने तो और भी कमाल कर दिया है; अपराधी अड्डों पर ही घातक राइफलें ‘प्रिंट’ कर रहे हैं, जिससे हथियारों की तस्करी व उनके पकड़े जाने का डर खत्म होता जा रहा है। यह कहानी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी लग सकती है, पर यह भविष्य की कड़वी हकीकत है। दशकों से आतंकी व अपराधी गिरोहों की ताकत उनके कब्जे वाली जमीन से मापी जाती थी- जैसे तालिबान या मैक्सिकन कार्टेल। अगले दो दशक में यह सब बदलने वाला है। अब अपराध को न जमीन चाहिए, न बहुत सारे लड़ाके; उसे तो बस ‘डेटा’ व ‘टेक्नोलॉजी’ चाहिए। ब्रुकिंग इंस्टिट्यूशन के स्ट्रोब टैलबॉट सेंटरमें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व संघर्ष मामलों की एक्सपर्ट वांडा ब्राउन बताती हैं,‘पहले अफीम या कोकीन उगाने के लिए मीलों लंबी जमीन चाहिए होती थी, पर अब सिंथेटिक ड्रग्स छोटे से बेसमेंट में बन जाती हैं। अपराधियों को वसूली के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। एआई-स्कैम्स, रैनसमवेयर व क्रिप्टोकरेंसी के जरिए वे घर बैठे खरबों डॉलर्स की कमाई कर रहे हैं। ‘शक्ति’ का केंद्र अब भौगोलिक नक्शा नहीं, बल्कि डिजिटल सर्वर बन गया है। वांडा कहती हैं,‘पहले किसी शहर पर कब्जा करने के लिए हजारों सैनिकों की जरूरत होती थी। पर अब ड्रोन स्वार्म्स और ऑटोमेटेड साइबर अटैक के जरिए मुट्ठी भर लोग पूरे शहर की बिजली और पानी ठप कर उसे बंधक बना सकते हैं। अपराध अब मेहनत वाला नहीं, बल्कि ‘टेक्नोलॉजी’ वाला हो गया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि आने वाले समय में सबसे बड़ी लड़ाई डेटा की होगी। जो गिरोह सरकार के सिस्टम में सेंध लगाकर डेटा चुरा सकेगा या उसमें छेड़छाड़ कर सकेगा, जीत उसी की होगी। सबसे बड़ा अपराधी वह होगा जिसके पास सबसे ज्यादा ‘डेटा एक्सेस’ है। पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती यह है कि वे इन अपराधियों को पकड़ने के लिए जिस सर्विलांस तकनीक का उपयोग करेंगे, कहीं वह नागरिकों की निजता व मानवाधिकारों का हनन न करने लगे। हैकर्स की टीम के साथ घर में सेंध लगा सकते हैं अपराधी स्ट्रोब टैलबॉट सेंटर में सीनियर रिसर्च असिस्टेंट डायना गार्सिया कहती हैं, ‘अपराध और आतंकवाद का चेहरा अब ‘खून-खराबे वाली जमीन’ से हटकर ‘साफ-सुथरे डेटा सेंटर्स’ की ओर मुड़ रहा है। यह तकनीक और सुरक्षा के बीच एक ऐसी दौड़ है, जहां जीत उसी की होगी जो डेटा को नियंत्रित करना और उसे सुरक्षित रखना जानता हो। भविष्य का अपराधी एक ‘हैकर्स’ की टीम के साथ आपके बेडरूम तक पहुंच सकता है, और यही आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती है।
टेक कंपनी ओप्पो ने आज (15 अप्रैल) भारत में अपनी नई 5G स्मार्टफोन सीरीज 'ओप्पो F33' लॉन्च की है। इसमें दो मॉडल- ओप्पो F33 और ओप्पो F33 प्रो पेश किए गए हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत मजबूती और पावरफुल बैटरी है। इनमें IP69K रेटिंग दी गई है, जिसका मतलब है कि यह फोन न सिर्फ पानी और धूल से सुरक्षित है, बल्कि 85C तक के गर्म पानी की बौछारें भी झेल सकता है। साथ ही, 50 मैगापिक्स सेल्फी कैमरा और 80W फास्ट चार्जिंग के साथ 7000mAh की बैटरी दी गई है। ओप्पो F33 को तीन स्टोरेज और ओप्पो F33 प्रो को दो स्टोरेज ऑप्शन के साथ पेश किया गया है। ओप्पो F33 की शुरुआती कीमत 31,999 रुपए और ओप्पो F33 प्रो की शुरुआती कीमत 37,999 रुपए है। दोनों फोन की प्री बुकिंग शुरू कर दी गई है।
टेक कंपनियां हर साल मोबाइल का नया मॉडल उतारती हैं और दावा करती हैं कि नया वाला पिछले से बेहतर है। ओप्पो ने हाल ही में K13 के अपग्रेडेड वर्जन K14 उतारा है। दोनों की कीमत लगभग बराबर है… 19 हजार रुपए से थोड़ा कम। हमनें इस फोन का एक महीने तक इस्तेमाल किया। चलिए जानते हैं ये फोन वैल्यू फॉर मनी है या नहीं… डिजाइन: मैटेलिक फिनीश के साथ आपको बॉक्स में चार्जर से लेकर कवर सब कुछ मिलता है, कुछ भी अलग से खरीदने की जरूरत नहीं है। डिजाइन की बात करें तो फोन दिखने में अच्छा है, पीछे एक नया पैटर्न मिलता है और कैमरा मॉड्यूल को पहले से थोड़ा ज्यादा प्रीमियम बनाया गया है, जिस पर मैटेलिक फिनिश दी गई है। फोन की ओवरऑल बिल्ड वैसी ही है जैसी पहले थी, लेकिन यहां एक बड़ा बदलाव IP रेटिंग में है। पहले जहां सिर्फ IP65 रेटिंग मिलती थी, अब ओप्पो K14 में IP69 की भी रेटिंग दी गई है। यानी हाई-प्रेशर वॉटर जेट और धूल से पूरी तरह सुरक्षित है। इसे SGS 5-Star और MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन मिला है, यानी गिरने या झटके लगने पर यह आसानी से खराब नहीं होगा। फोन आईसी ब्लू, प्रिज्म वॉयलेट और प्रिज्म वाइट जैसे कलर्स में अवेलेबल है। फ्रंट में पतले बेजल्स के साथ 6.75 इंच की बड़ी स्क्रीन दी गई है। ओप्पो K14: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: पिछले साल आए Oppo K13 में कंपनी ने AMOLED डिस्प्ले दी थी, लेकिन नए K14 में इसे हटाकर 6.75 इंच का LCD डिस्प्ले लगा दी गई है। एमोलेड छोड़कर LCD की तरफ जाना ग्राहकों के लिए एक 'डाउनग्रेड' है। इससे वीडियो देखने का अनुभव फीका हो गया है। हालांकि, यह 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है और इसकी पीक ब्राइटनेस 1125 निट्स है, जिससे तेज धूप में भी विजिबिलिटी अच्छी रहती है। इसमें स्प्लैश टच फीचर भी है, जिससे गीले हाथों से भी टच काम करता है। परफॉर्मेंस: पिछले साल के मॉडल में स्नैपड्रैगन प्रोसेसर था, जिसका बेंचमार्क स्कोर 7 से 8 लाख के करीब आता था। इस बार ओप्पो ने मीडियाटेक डायमेंसिटी 6300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर इस्तेमाल किया है, जिसका स्कोर सिर्फ 4 से 5 लाख के बीच है। ऐसा प्रोसेसर अमूमन 10 हजार के बजट वाले फोंस में मिलता है। यानी प्रोसेसर और स्टोरेज के मामले में कंपनी ने भारी कटौती की है। फोन कलर OS 15 पर बेस्ड सॉफ्टवेयर पर चलता है। गेमिंग के दौरान फोन को ठंडा रखने के लिए इसमें सुपर कूल VC कूलिंग सिस्टम लगाया गया है। साउंड और कैमरा: पिछले फोन की तरह इसमें भी डुअल स्पीकर्स मिलते हैं। कैमरा डिपार्टमेंट में पीछे की तरफ 50MP का मेन कैमरा और 2MP का मोनोक्रोम सेंसर है। दिन की रोशनी में फोन से फोटोज अच्छी आती हैं। फ्रंट में पहले 16 मेगापिक्सल का कैमरा मिलता था, लेकिन अब इसमें 8 MP का ही कैमरा मिलता है। इसमें AI इरेजर 2.0 जैसे स्मार्ट फीचर्स मिलते हैं। बैटरी और चार्जिंग: पावर बैकअप के लिए ओप्पो ने 7000mAh की बैटरी रखी है, लेकिन चार्जिंग स्पीड पिछले मॉडल के 80 वाट के मुकाबले इस बार सिर्फ 45 वाट कर दी है। यानी जिस बड़ी बैटरी को आप पिछले साल फटाफट चार्ज कर लेते थे, अब उसे फुल चार्ज करने के लिए आपको दुगना इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि कंपनी का दावा है कि यह करीब 92 मिनट में फुल चार्ज हो जाता है। इसमें रिवर्स चार्जिंग का भी सपोर्ट है। फाइनल वर्डिक्ट: अगर आप ओप्पो का फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो नए K14 के बजाय पिछले K13 ज्यादा बेहतर ऑप्शन हो सकता है।
जर्मन ऑटोमेकर फॉक्सवैगन ने अपनी पॉपुलर मिड-साइज SUV टाइगुन का फेसलिफ्ट मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। 2026 टाइगुन फेसलिफ्ट में कंपनी ने कॉस्मेटिक बदलावों के साथ-साथ मैकेनिकल अपडेट्स भी किए हैं। कार की सबसे बड़ी खासियत इसका नया 8-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स और पैनोरमिक सनरूफ है, जिसकी मांग लंबे समय से थी। इसके अलावा, कंपनी ने ग्राहकों के लिए एक खास 'बायबैक स्कीम' भी पेश की है। कीमत और बायबैक ऑफर: ₹11 लाख से शुरू होती है रेंज फॉक्सवैगन टाइगुन फेसलिफ्ट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹11 लाख तय की गई है, जो टॉप मॉडल के लिए ₹19.3 लाख तक जाती है। एक्सटीरियर: नई हेडलाइट्स और सीक्वेंशियल इंडिकेटर्स टाइगुन फेसलिफ्ट के फ्रंट लुक में काफी बदलाव किए गए हैं। इसमें नए शेप की हेडलाइट्स और अपडेटेड बंपर दिए गए हैं। इंटीरियर और फीचर्स: पैनोरमिक सनरूफ और डिजिटल डिस्प्ले कैबिन का लेआउट पहले जैसा ही है, लेकिन फीचर्स को काफी अपग्रेड किया गया है: परफॉर्मेंस और माइलेज: नया 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स इंजन में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन ट्रांसमिशन को अपडेट किया गया है: सेफ्टी फीचर्स: अब रियर में भी मिलेंगे डिस्क ब्रेक्स सुरक्षा के लिहाज से फॉक्सवैगन ने ग्राहकों की पुरानी मांग को पूरा करते हुए इसके हायर वेरिएंट्स में 'रियर डिस्क ब्रेक्स' दिए हैं। इसके अलावा कार में 6 एयरबैग्स, एबीएस के साथ ईबीडी, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड तौर पर मिलते हैं।
बजाज ऑटो ने अपनी पॉपुलर टूरर बाइक डोमिनार 400 का नया वर्जन भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। इस नए मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत और इंजन में हुआ बदलाव है। कंपनी ने डोमिनार 400 की कीमत में 37,000 रुपए की बड़ी कटौती की है। अब दिल्ली में इसकी एक्स-शोरूम कीमत 2.04 लाख रुपए तय की गई है। इससे पहले इस बाइक की कीमत 2.40 लाख रुपए थी। कीमत कम करने के पीछे मुख्य वजह इंजन के साइज (डिस्प्लेसमेंट) को घटाना है, जिससे बाइक अब कम टैक्स स्लैब के दायरे में आ गई है। 18% टैक्स ब्रैकेट में आई बाइक, इसलिए दाम घटे दरअसल, भारत में 350cc से ज्यादा इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर 40% टैक्स (GST + सेस) लगता है। वहीं 350cc से कम क्षमता वाली बाइक्स पर केवल 18% टैक्स लगता है। बजाज ने डोमिनार के पुराने 373cc इंजन को डाउनसाइज करके अब 349cc कर दिया है। इंजन के इस छोटे बदलाव की वजह से बाइक सीधे तौर पर कम टैक्स वाले ब्रैकेट में आ गई, जिसका फायदा कंपनी ने कीमत घटाकर ग्राहकों को दिया है। हाल ही में बजाज ने ट्रायम्फ रेंज के साथ भी यही प्रयोग किया था। इंजन में क्या बदला: स्ट्रोक कम किया, पावर बरकरार तकनीकी तौर पर देखें तो बजाज ने 349cc का यह नया इंजन पुराने इंजन के बोर को बरकरार रखते हुए उसके स्ट्रोक को छोटा करके तैयार किया है। डोमिनार 250 से अब सिर्फ 26 हजार रुपए महंगी कीमत में भारी कटौती के बाद डोमिनार 400 अब डोमिनार 250 के काफी करीब पहुंच गई है। डोमिनार 250 की कीमत से यह नया मॉडल अब सिर्फ 26,000 रुपए महंगा है। ऐसे में जो ग्राहक पहले बजट की वजह से 250cc मॉडल चुन रहे थे, उनके लिए अब 400cc (ब्रैंडिंग के अनुसार) सेगमेंट में जाना आसान हो गया है। 3 किलो कम हुआ वजन, लुक में कोई बदलाव नहीं इंजन में बदलाव के साथ ही बाइक के वजन में भी थोड़ी कमी आई है। नई डोमिनार 400 अब 190 किलो की है, जो पुराने मॉडल से 3 किलो कम है। वजन कम होने से बाइक का पावर-टू-वेट रेशियो बेहतर होने की उम्मीद है। डिजाइन की बात करें तो बाइक में कोई कॉस्मेटिक बदलाव नहीं किया गया है। यह अभी भी ग्रीन और ब्लैक कलर ऑप्शन में अवेलेबल है। इसके अलावा फीचर्स, LED हेडलाइट, डिजिटल कंसोल और टूरिंग एक्सेसरीज पहले जैसे ही रहेंगे। NS400Z में भी मिल सकता है यही इंजन ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजाज अपनी हालिया लॉन्च हुई पल्सर NS400Z में भी जल्द ही यह 349cc वाला इंजन दे सकता है। अगर ऐसा होता है, तो NS400Z की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे यह अपने सेगमेंट की सबसे सस्ती और वैल्यू-फॉर-मनी बाइक बन जाएगी। क्यों कम हुआ टैक्स? भारत में दोपहिया वाहनों पर लगने वाला GST स्ट्रक्चर इंजन की क्षमता पर निर्भर करता है… यही कारण है कि कंपनियां अब 349cc या 348cc के इंजन पर फोकस कर रही हैं ताकि वे 12% अतिरिक्त सेस से बच सकें। पुरानी डोमिनार 400 VS नई डोमिनार 400 ये खबर भी पढ़ें… रेडमी का बजट स्मार्टफोन A7 प्रो भारत में लॉन्च: जेमिनी और सर्कल टू सर्च जैसे AI फीचर्स, 6.9 इंच डिस्प्ले के साथ शुरुआती कीमत ₹12,499 शाओमी के सब-ब्रांड रेडमी ने सोमवार को भारत में अपना नया 5G स्मार्टफोन रेडमी A7 प्रो लॉन्च किया है। बजट सेगमेंट का यह फोन बड़ी बैटरी और लेटेस्ट गूगल जेमिनी और सर्कल टू सर्च AI फीचर्स के साथ पेश किया गया है। इसमें 6.9 इंच डिस्प्ले, 6300mAh बैटरी और 13MP कैमरा मिलेगा। फोन को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 12,499 रुपए है। कंपनी शुरुआती सेल में ₹1,000 का डिस्काउंट दे रही है। फोन की सेल 15 अप्रैल से शुरू होगी। पूरी खबर पढ़ें…
देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है। मौजूदा ट्रेंड संकेत दे रहे हैं कि अगले 10 साल में स्कूटरों की बिक्री मोटरसाइकिलों से ज्यादा होने लगेगी। तेज शहरीकरण, कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और दोपहिया वाहनों का तेज इलेक्ट्रिफिकेशन इसके प्रमुख कारण होंगे। इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 से 2030 के बीच स्कूटरों की बिक्री हर साल औसतन 9% बढ़ने का अनुमान है। इसके उलट मोटरसाइकिलों की बिक्री में सालाना औसत वृद्धि सिर्फ 4% ही रहने की संभावना है। इस अंतर की सबसे बड़ी वजह इलेक्ट्रिक दोपहिया (ईवी) का तेज विस्तार है, जहां स्कूटरों ने पकड़ मजबूत कर ली है। ईवी - 4 साल में स्कूटर की पहुंच 38% तक होगी - इलेक्ट्रिक दोपहिया की बाजार हिस्सेदारी अभी 10% से कम, 2030 तक इसके 19% और 2040 तक 50% से अधिक होने की उम्मीद है। - टू-व्हीलर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक स्कूटर सबसे आगे रहेंगे। अनुमान है कि 2030 तक इनकी पैठ 38% और 2040 तक 80% हो जाएगी। - रेंज की चिंता और ज्यादा कीमतों की वजह से इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की पैठ 2030 तक मात्र 5% तक ही रहने की संभावना जताई गई है। पुरानी गाड़ी के बदले नई खरीदने का ट्रेंड जोर पकड़ रहा, मांग बढ़ी रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी वर्षों में भारत में पुरानी गाड़ी के बदले नई खरीदने का ट्रेंड बढ़ेगा। टीवीएस मोटर के सीएमडी सुदर्शन वेणु ने बताया है कि स्कूटरों ने दो साल असाधारण तेजी दिखाई। यह ट्रेंड जारी रहेगा। अभी ग्रामीण इलाकों और एंट्री-लेवल सेगमेंट में मोटरसाइकिलों का दबदबा है, लेकिन शहरी भारत की प्राथमिकताएं स्कूटरों की ओर शिफ्ट हो रही हैं।
शाओमी के सब-ब्रांड रेडमी ने सोमवार को भारत में अपना नया 5G स्मार्टफोन रेडमी A7 प्रो लॉन्च किया है। बजट सेगमेंट का यह फोन बड़ी बैटरी और लेटेस्ट गूगल जेमिनी और सर्कल टू सर्च AI फीचर्स के साथ पेश किया गया है। इसमें 6.9 इंच डिस्प्ले, 6300mAh बैटरी और 13MP कैमरा मिलेगा। फोन को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 12,499 रुपए है। कंपनी शुरुआती सेल में ₹1,000 का डिस्काउंट दे रही है। फोन की सेल 15 अप्रैल से शुरू होगी। डिजाइन: आर्मर जैसी मजबूती और वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले रेडमी का यह फोन मॉडर्न डिजाइन के साथ आता है। इसमें तीन कलर- ब्लैक, मिस्ट ब्लू और सनसेट ऑरेंज का ऑप्शन मिलते हैं। स्पेसिफिकेशंस: बड़ी स्क्रीन और लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम डिस्प्ले: इसमें 6.9 इंच की HD+ LCD स्क्रीन है। स्मूथ विजुअल्स के लिए 120Hz का रिफ्रेश रेट और तेज धूप में स्क्रीन साफ देखने के लिए 800 निट्स की पीक ब्राइटनेस दी गई है। यह आंखों की सुरक्षा के लिए ब्लू लाइट सर्टिफाइड है। परफॉर्मेंस: बेहतर स्पीड के लिए इसमें यूनिसोक T8300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर लगा है। ग्राफिक्स के लिए माली G57 GPU दिया गया है। इसमें 4GB फिजिकल रैम के साथ 4GB वर्चुअल रैम का सपोर्ट है, जिससे कुल रैम 8GB तक हो जाती है। सॉफ्टवेयर: यह फोन एंड्रॉयड 16 पर आधारित लेटेस्ट हाइपर OS 3 पर काम करता है। कंपनी ने 4 साल के OS अपग्रेड और 6 साल के सुरक्षा अपडेट का वादा किया है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए बैक पैनल पर 13 मेगापिक्सल का मेन AI कैमरा और LED फ्लैश दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलता है। बैटरी और चार्जिंग: इसमें 6300mAh की बड़ी बैटरी है जो 15W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसमें 7.5W की रिवर्स चार्जिंग तकनीक भी है, जिससे आप अपना दूसरा फोन या ईयरबड्स भी चार्ज कर सकते हैं।
देश में हर साल 60 वर्ष से अधिक उम्र के 30 लाख से ज्यादा बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर गिरते हैं। बुजुर्गों के लिए यह घर का सबसे जोखिम भरा कोना बन जाता है, लेकिन अब आधुनिक तकनीक इतनी सस्ती और आसान हो गई है कि मामूली बदलाव से सुरक्षित बुजुर्ग रह सकते हैं। एम्स दिल्ली की एक रिसर्च कहती है कि बाथरूम में किए गए छोटे बदलाव गिरने के खतरे को 75% तक कम कर देते हैं। ये 3 स्टेप की सुरक्षा बाथरूम में गिरने के जोखिम को 75% तक कम कर सकती है स्टेप 1- रेलिंग और शावर सहारे के साथ आपको सुरक्षा भी देंगेएलईडी ग्रैब बार - इनमें लाइट होने से बाथरूम जैसी जगह पर देखना आसान होता है। सहारे की जरूरत पर तत्काल पकड़ में आ जाते हैं। ये हजार से दो हजार ₹की कीमत में मिल जाते हैं। एंटी-स्काल्ड शावर - ये तापमान को कंट्रोल रखते हैं। अचानक गर्म पानी आने से जलने का खतरा नहीं रहता है। स्टेप 2- एंटी स्टीकर फिसलने से तो मोशन लाइट गिरने से बचाएगीस्मार्ट एंटी स्लिप टाइल स्टिकर - यह पारदर्शी स्टिकर फर्श पर चिपक जाते हैं और गीले होने पर भी पैर की पकड़ मजबूत रखते हैं। इसे ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। कीमत 299 से 499 रुपए। मोशन सेंसर लाइट - बाथरूम में जाते ही यह लाइट चालू हो जाती। इसे 3-4 सौ रुपए में ऑनलाइन मंगा सकते हैं। स्टेप 3 - टॉयलेट सीट से आराम, पुल कॉर्ड से तुरंत अलर्ट मिलेगा स्मार्ट बिडेट सीट - गर्म पानी और ड्रायर वाली रिमोट कंट्रोल सीट बुजुर्गों के लिए आरामदायक होती है। इसे ऑफलाइन या ऑनलाइन खरीद सकते हैं। साढ़े 4 से 10 हजार रु. की रेंज में आ जाएगी। इमरजेंसी पुल कॉर्ड - बाथरूम में गिरने पर इस अलॉर्म को खींचते ही परिजन के मोबाइल पर अलर्ट जाता है।
भारत में इस हफ्ते 6 नए स्मार्टफोन लॉन्च होंगे। इनमें ज्यादातर बजट सेगमेंट के फोन हैं। 13 से 19 अगस्त के बीच रेडमी, रियलमी, इनफिनिक्स, वीवो और ओप्पो अपने नए डिवाइस लॉन्च करेंगी। इन फोन्स में AI फीचर्स के साथ 50 मेगापिक्सल का कैमरा मिलेगा। इसके अलावा 6.3-इंच स्क्रीन भी देखने को मिलेगा। चलिए डिटेल में जानते हैं... इनफिनिक्स नोट 60 प्रो लॉन्च डेट – 13 अप्रैल हफ्ते की शुरुआत इनफिनिक्स नोट 60 प्रो 5G के साथ होगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके बैक पैनल पर कैमरा मॉड्यूल के पास दी गई 'एक्टिव मैट्रिक्स डिस्प्ले' है, जो इसे अलग लुक देती है। कंपनी पहली बार इस सीरीज में स्नैपड्रैगन प्रोसेसर का इस्तेमाल कर रही है, जो 6.78-इंच की स्मूथ 144Hz एमोलेड डिस्प्ले के साथ मिलकर बेहतरीन परफॉर्मेंस देगा। फोटोग्राफी के लिए इसमें 50MP का डुअल रियर कैमरा सेटअप है, लेकिन इसकी असली ताकत इसकी 6500mAh की भारी-भरकम बैटरी है। यह फोन न सिर्फ 90W की तेज चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है, बल्कि इसमें 'रिवर्स चार्जिंग' की सुविधा भी दी गई है जिससे आप दूसरे छोटे गैजेट्स को भी चार्ज कर सकेंगे। रेडमी A7 प्रो 5G लॉन्च डेट – 13 अप्रैल शाओमी 13 अप्रैल को ही अपना किफायती 5G स्मार्टफोन रेडमी A7 प्रो भारत में लॉन्च करेगी। मात्र ₹15,000 से कम की कीमत आने वाले इस फोन में 6.9-इंच की काफी बड़ी स्क्रीन और 6300mAh की दमदार बैटरी दी गई है, जो फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। फोन लेटेस्ट एंड्रॉयड 16 और हाइपर OS 3 पर काम करेगा, जिसमें गूगल जेमिनी AI और 'सर्कल टू सर्च' जैसे प्रीमियम फीचर्स भी मिलेंगे। फोटोग्राफी के लिए इसमें 32MP का AI डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है, जो इसे बजट सेगमेंट में एक स्मार्ट और एडवांस ऑप्शन बनाता है। रियलमी नार्जो 80 लाइट 5G लॉन्च डेट – 14 अप्रैल रियलमी 14 अप्रैल को अपना नया बजट-फ्रेंडली स्मार्टफोन रियलमी नार्जो 80 लाइट 5G लॉन्च करगी। फोन की सबसे बड़ी ताकत 7000mAh बैटरी है, जो न सिर्फ लंबे समय तक चलेगी, बल्कि रिवर्स चार्जिंग के जरिए दूसरे डिवाइस भी चार्ज कर सकेगी। इसमें 144Hz रिफ्रेश रेट वाली 6.8-इंच की बड़ी स्क्रीन और स्मूथ परफॉर्मेंस के लिए मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 प्रोसेसर दिया गया है। लेटेस्ट एंड्रॉयड 16 पर चलने वाला यह फोन धूल और पानी की बूंदों से बचाव के लिए IP64 रेटिंग के साथ आएगा, जो इसे ₹15,000 के आसपास के सेगमेंट में एक टिकाऊ और पावरफुल 5G विकल्प बनाता है। वीवो T5 प्रो लॉन्च डेट – 15 अप्रैल वीवो 15 अप्रैल को भारत में अपना अब तक का सबसे बड़ी बैटरी वाला स्मार्टफोन वीवो T5 प्रो लॉन्च करने जा रहा है। इस फोन की सबसे हैरान करने वाली खूबी इसकी 9020mAh की बैटरी है, जो 90W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी। परफॉर्मेंस के लिए इसमें स्नैपड्रैगन 7s जेन 4 चिपसेट और 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दी गई है। फोटोग्राफी के लिए इसमें 50MP का सोनी कैमरा सेंसर मिलेगा, वहीं मजबूती के मामले में इसे IP69 प्रो रेटिंग दी जा सकती है, जो इसे पानी और धूल से पूरी तरह सुरक्षित बनाएगी। यह फोन उन लोगों के लिए गेम चेंजर हो सकता है जो बार-बार चार्जिंग की झंझट से छुटकारा चाहते हैं। ओप्पो F33, F33 प्रो लॉन्च डेट – 15 अप्रैल ओपो 15 अप्रैल को अपनी नई F33 सीरीज भारत में उतारने जा रहा है, जिसमें F33 और F33 प्रो 5G मॉडल शामिल होंगे। सीरीज की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद मजबूत '360-डिग्री आर्मर' बॉडी और IP69K रेटिंग है, जो फोन को गिरने और पानी से सुरक्षित बनाएगी। परफॉर्मेंस के लिए मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6360 मैक्स प्रोसेसर और पावर के लिए 7000mAh की बड़ी बैटरी के साथ 80W फास्ट चार्जिंग मिल सकती है। सेल्फी के लिए इसके प्रो मॉडल में 50MP का अल्ट्रा-वाइड फ्रंट कैमरा दिया गया है, जो इस सेगमेंट में एक नया अनुभव होगा।
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026-2030 का नया ड्राफ्ट शनिवार को जारी किया है। इसके मुताबिक, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स (ऑटो) का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से टू-व्हीलर सेगमेंट में भी सिर्फ इलेक्ट्रिक मॉडल ही रजिस्टर किए जा सकेंगे। नई पॉलिसी का मकसद दिल्ली की हवा को साफ करना और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए एक बेहतर इकोसिस्टम तैयार करना है। ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कार पर रोड टैक्स नहीं सरकार ने मध्यम वर्ग के खरीदारों को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। ड्राफ्ट के मुताबिक: पुरानी कार स्क्रैप करने पर ₹1 लाख की सब्सिडी अगर आप अपनी पुरानी BS-IV या उससे भी पुरानी कार को किसी ऑफिशियल स्क्रैपिंग सेंटर पर स्क्रैप करते हैं, तो नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर ₹1 लाख तक का इंसेंटिव मिलेगा। शर्त: यह फायदा तभी मिलेगा, जब पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने के 6 महीने के भीतर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदी जाए। साथ ही, नई कार की कीमत ₹30 लाख से कम होनी चाहिए। टू-व्हीलर और ऑटो पर भी भारी बचत सरकार ने छोटे वाहनों के लिए साल दर साल घटने वाला सब्सिडी मॉडल पेश किया है: सरकारी गाड़ियां और स्कूल बसें भी होंगी इलेक्ट्रिक ड्राफ्ट पॉलिसी में केवल निजी वाहन ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को बदलने की तैयारी है: जनता से मांगे सुझाव, 30 दिन का समय परिवहन विभाग ने इस ड्राफ्ट पर जनता और विशेषज्ञों से फीडबैक मांगा है। अगले 30 दिनों तक लोग अपनी राय 'evpolicy2026@gmail.com' पर ईमेल कर सकते हैं या डाक के जरिए परिवहन विभाग के ऑफिस भेज सकते हैं। बता दें कि दिल्ली की पहली EV पॉलिसी 2020 में आई थी, जिसे अब अपडेट कर 2030 तक के लिए नया रूप दिया जा रहा है।
स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बैटरी हमेशा सबसे बड़ी चिंता रही है। रोज चार्ज करना एक आदत बन चुकी है। लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। कंपनियां एक नई बैटरी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं, जो बिना फोन का साइज बढ़ाए ज्यादा बैटरी देने का वादा करती है। इस टेक्नोलॉजी को सिलिकॉन-कार्बन बैटरी कहा जाता है। यह नए स्मार्टफोन्स में आ रही है। हाल ही में वनप्लस के नॉर्ड-6 में पहली बार 9 हजार mAH बैटरी दी गई है। सैमसंग ने भी पुष्टि की है कि उसके आने वाले स्मार्टफोन में सिलिकॉन बैटरी लाने की योजना है। कैसे अलग है यह बैटरी? लिथियम-आयन बैटरी में ग्रेफाइट का इस्तेमाल होता है, जहां लिथियम आयन मूव करते हैं और बिजली पैदा होती है। सिलिकॉन-कार्बन बैटरी में ग्रेफाइट की जगह सिलिकॉन का इस्तेमाल होता है। सिलिकॉन ग्रेफाइट के मुकाबले कई गुना ज्यादा लिथियम आयन स्टोर कर सकता है। इसे आसान भाषा में समझें तो जैसे एक कमरे में ज्यादा लोगों को जगह मिल जाए, वैसे ही इस बैटरी में ज्यादा ऊर्जा स्टोर हो सकती है। यूजर्स को ये तीन फायदे - इस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि फोन का साइज बढ़ाए बिना बैटरी क्षमता बढ़ाई जा सकती है। यानी जहां पहले 5,000mAh की बैटरी मिलती थी, अब उसी साइज में 6,500mAh या उससे ज्यादा बैटरी दी जा रही है। - नई तकनीक से कंपनियाें के पास विकल्प है। वे दो तरीकेअपना सकती हैं या तो ज्यादा बैटरी देकर फोन का बैकअप बढ़ाएं या फिर वही बैटरी रखकर फोन को और पतला और हल्का बनाएं। - यह बैटरियां अलग-अलग मौसम में भी बेहतर काम करती हैं। ठंड या ज्यादा गर्मी में भी इनकी परफॉर्मेंस ज्यादा स्थिर रहती है। फोन गर्म होने पर चार्जिंग स्पीड पर कम असर पड़ता है।वनप्लस-ओपो ने अपनाया वनप्लस 15 7,300mAhवनप्लस नॉर्ड 6 9,000mAhरियलमी P4 पावर 10,001mAhशाओमी 17 प्रो मैक्स 7,500mAhओपो फाइंड X9 प्रो 7,500mAh एपल-गूगल में कब आएगी? कुछ रिपोर्ट के अनुसार एपल-सैमसंग दोनों इस तकनीक पर काम कर रहे हैं। सैमसंग ने कार्बन सिलिकॉन बैटरी टेस्ट भी की है। वहीं, एपल अभी इस तकनीक पर काम करने से बच रहा है।
अब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लाउड, सर्वर और लगातार इंटरनेट कनेक्शन के बिना नहीं चलता था। लेकिन यह ट्रेंड अब बदलने लगा है। गूगल ने AI Edge Gallery नाम का ऐसा एप पेश किया है, जो एआई को सीधे स्मार्टफोन के अंदर ले आता है। यानी यूजर अपने फोन पर ही गामा-4 जैसे मॉडल चला सकता है, वो भी बिना इंटरनेट के। यह बदलाव सिर्फ एक नया एप नहीं, बल्कि एआई के इस्तेमाल का तरीका बदलने वाला कदम है। अब तक जब भी यूजर कोई सवाल पूछता था, फोटो समझने को कहता था या ऑडियो ट्रांसक्राइब करता था, तो पूरा डेटा इंटरनेट के जरिए क्लाउड सर्वर तक जाता था। फिर रिजल्ट वापस फोन पर आता था। अब एआई का काम सीधे आपके फोन या डिवाइस पर ही होने लगा है। फोटो पहचानना, वॉइस समझना, टेक्स्ट प्रोसेस करना... सब कुछ लोकल डिवाइस परस्टोर होता है। आपके डेटा को सर्वर पर भेजने की जरूरत खत्म हो जाती है। इंटरनेट न होने पर भी इसके लगभग सभी फीचर्स काम करेंगे। इस तरह से एक्टिवेट करें - प्ले स्टोर या एप स्टोर से AI Edge Gallery डाउनलोड करें। - फोन की क्षमता के हिसाब से गामा मॉडल सिलेक्ट करें। यहां 2 से 4 जीबी का वर्जन डाउनलोड करना होगा, यानी फोन में इतनी स्टोरेज बची होनी चाहिए। - इसके बाद इसमें चार मोड्स हैं। टेक्स्ट से इमेज तक के लिए... उन्हें इस्तेमाल करें। प्राइवेसी से लेकर 4 मोड्स तक; यूजर्स को ये फायदे 1. फायदा - रिमोट एरिया में भी काम करेगा एआई सबसे बड़ा फायदा प्राइवेसी और एक्सेस का है। एआई इस्तेमाल करते समय आपका डेटा फोन से बाहर नहीं जाता है, इसलिए आपकी जानकारी सुरक्षित रहती है। साथ ही ऑफलाइन मोड में भी एआई काम करता है, जिससे बिना इंटरनेट वाले इलाकों में भी इसका इस्तेमाल संभव है। 2. तकनीक - नए प्रोसेसर पर बेहतर काम करेगी एप यह एप और इसके मॉडल फोन के एनपीयू (न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट) का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सभी फोन पर चल सकता है, लेकिन फ्लैगशिप और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स पर बेहतर काम करता है, जिनमें एआई-सक्षम चिपसेट (जैसे गूगल टेंसर या लेटेस्ट स्नैपड्रैगन) मौजूद हों। 3. प्राइवेसी - आपकी निजी फाइलें इंटरनेट पर शेयर नहीं होंगी इसके एजेंट स्किल्स और थिंकिंग मोड का इस्तेमाल करके आप फोन में सेव फाइलों को एनालाइज कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आपकी कॉन्फिडेंशियल फाइलें इंटरनेट पर अपलोड नहीं होतीं। 4. मोड्स - इमेज भी बना सकेंगे, ऑडियो जनरेट होगी इसमें एआई चैट के साथ थिंकिंग मोड मिलता है, जिससे यह समझा जा सकता है कि एआई जवाब कैसे बना रहा है। आस्क इमेज में फोटो अपलोड कर उससे जुड़ी जानकारी ली जा सकती है। किस भी ऑडियो को टेक्स्ट में बदलने और ट्रांसलेशन करने में मदद करता है। 5. सीमाएं - रियल टाइम सर्च जैसे फीचर्स नहीं हैं यह एआई पूरी तरह फोन पर चलता है और इंटरनेट से जुड़ा नहीं होता, इसलिए इसमें रियल-टाइम सर्च की सुविधा नहीं है। यह उन डेटा और नॉलेज पर आधारित होता है जो पहले से मॉडल में मौजूद होता है। कुछ मॉडल्स की जानकारी जून 2024 तक के डेटा पर आधारित है।

