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ज्यादा चाय पीने के शौकीन हैं? सेहत से जुड़ी इन छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानिए जरूरी सावधानियां

हमारी सुबह की शुरुआत से लेकर दिनभर की थकान मिटाने तक, चाय हमारे दैनिक जीवन का एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है जिसके बिना कई लोगों का दिन ही शुरू नहीं होता है। भारत में तो चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं बल्कि एक इमोशन है, और मेहमाननवाज से लेकर दोस्तों की महफिल तक हर जगह चाय का अहम स्थान है। हालांकि, किसी भी चीज की अति बुरी होती है और यह नियम चाय पर भी पूरी तरह लागू होता है। यदि आप भी उन लोगों में से हैं जो दिनभर में बार-बार और अत्यधिक मात्रा में कप पर कप चाय पीने के आदी हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद चेतावनी भरी हो सकती है। ज्यादा चाय पीने की आदत भले ही आपको पल भर के लिए तरोताजा महसूस कराती हो, लेकिन अंदर ही अंदर यह आपके शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा चाय पीने वालों को कौन-कौन सी छोटी-रोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि वे सेहत से जुड़ी बड़ी परेशानियों से बच सकें।शरीर में आयरन की कमी और एनीमिया का बढ़ता खतराचाय के शौकीनों को सबसे पहले इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि अत्यधिक मात्रा में चाय का सेवन करने से शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है। चाय की पत्तियों में टैनिन (Tannin) नामक एक खास रासायनिक यौगिक पाया जाता है, जो हमारे शरीर में भोजन से मिलने वाले आयरन (Iron) के अवशोषण की क्षमता को काफी हद तक बाधित कर देता है। जब आप खाना खाने के तुरंत बाद या दिनभर में बहुत अधिक गाढ़ी और कड़क चाय पीते हैं, तो शरीर आयरन को ठीक से सोख नहीं पाता है। इसके परिणामस्वरुप धीरे-धीरे शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया (Anemia) की समस्या पैदा होने लगती है। खासकर महिलाओं और युवाओं में यह समस्या तेजी से घर कर जाती है, जिससे लगातार कमजोरी, थकान, चक्कर आना और बाल झड़ने जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इसलिए यदि आपको चाय पीने की आदत है, तो भोजन के कम से कम एक घंटे आगे-पीछे ही चाय पिएं।पाचन तंत्र की कमजोरी और एसिडिटी की गंभीर समस्याबहुत से लोगों की यह आदत होती है कि वे सुबह उठते ही खाली पेट सबसे पहले दूध वाली चाय का एक बड़ा कप गटक जाते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों ही इस आदत को सेहत के लिए बेहद हानिकारक मानते हैं। खाली पेट चाय पीने से पेट में एसिड का स्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ जाता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकारें, गैस्ट्रिक अल्सर और एसिडिटी की पुरानी समस्या जन्म ले सकती है। इसके अलावा, चाय में मौजूद कैफीन पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है जिससे भोजन ठीक से पच नहीं पाता और ब्लोटिंग या कब्ज जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं। यदि आपको सुबह उठकर कुछ पीने की आदत है, तो चाय से पहले एक या दो गिलास गुनगुना पानी पीने का नियम बनाएं ताकि आपके पेट का पीएच लेवल संतुलित रह सके और आप पेट की बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।अनिद्रा, मानसिक बेचैनी और ब्लड प्रेशर पर असरचाय में कैफीन की मात्रा पाई जाती है जो दिमाग को तुरंत एक्टिव तो कर देती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन आपके नर्वस सिस्टम को ओवरस्टिम्युलेट कर देता है। जो लोग दिनभर में पांच से छह कप या उससे भी ज्यादा चाय पीते हैं, उन्हें अक्सर रात में ठीक से नींद न आने यानी इंसोम्निया (Insomnia) की शिकायत हो जाती है। नींद पूरी न होने के कारण दिनभर सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव बना रहता है। इसके साथ ही, अत्यधिक कैफीन ब्लड प्रेशर को भी प्रभावित करता है और दिल की धड़कनों को तेज कर सकता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी अन्य समस्याएं हैं, उनके लिए ज्यादा चाय का सेवन किसी जहर से कम नहीं माना जाता है। इसलिए अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए कैफीन के इस अति सेवन पर लगाम लगाना बहुत जरूरी है।सही समय, सही मात्रा और हेल्दी चाय के विकल्प अपनाने की जरूरतइसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको अपनी प्रिय चाय से पूरी तरह तौबा कर लेनी चाहिए, बल्कि जरूरत इस बात की है कि आप चाय पीने के तौर-तरीकों में थोड़ा बदलाव लाएं। दिनभर में दो कप से ज्यादा चाय पीने से हमेशा बचें और कोशिश करें कि बहुत ज्यादा उबली हुई या पत्ती को बार-बार पकाकर बनाई गई कड़क चाय न पिएं। दूध और चीनी वाली सामान्य चाय की बजाय आप चाहें तो ग्रीन चाय, लेमन टी, जिंजर टी या हर्बल टी जैसे हेल्दी विकल्पों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने के बजाय कई फायदे पहुंचाते हैं। चाय हमेशा हल्के गर्म पानी के साथ और सीमित मात्रा में ही आनंद लें। इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर आप अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखते हुए बेफिक्र होकर अपनी पसंदीदा चाय का लुत्फ उठा सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Aug 2026 1:49 pm

खून में जमे खतरनाक रोगाणु और टॉक्सिंस को तेजी से बाहर कर देंगी ये 5 चीजें, कई गंभीर बीमारियों का होगा हमेशा के लिए अंत

आज के भागदौड़ भरे दौर में अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण हमारे शरीर के भीतर कई तरह के विषैले तत्व और टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं। हमारा खून ही पूरे शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाने का काम करता है, लेकिन जब इसी खून में हानिकारक रोगाणु, बैक्टीरिया और टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं, तो कई गंभीर बीमारियां शरीर को घेरने लगती हैं। यदि आप भी लंबे समय से शरीर में सुस्ती, थकान, चेहरे पर चमक की कमी या बार-बार बीमार पड़ने की समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसके पीछे आपके खून की अशुद्धता एक बड़ा कारण हो सकती है। अपने रक्त को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करने और खून में मौजूद गंदगी को खींचकर शरीर से बाहर फ्लश आउट करने के लिए आयुर्वेद और नेचुरोपैथी में कुछ बेहद असरदार चीजों के बारे में बताया गया है। आइए जानते हैं उन 5 चमत्कारिक चीजों के बारे में जो आपके ब्लड को पूरी तरह से डिटॉक्स करके कई बड़ी बीमारियों के खतरे को हमेशा के लिए खत्म कर सकती हैं।खून की अशुद्धता क्यों बनती है गंभीर बीमारियों का कारणमानव शरीर एक प्राकृतिक मशीन की तरह है, जिसमें लिवर और किडनी जैसे अंग खून को साफ करने का काम लगातार करते रहते हैं। हालांकि, अत्यधिक तला-भुना खाने, जंक फूड, प्रदूषण और तनाव के कारण इन अंगों पर काम का दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे खून में टॉक्सिंस और रोगाणु जमा होने लगते हैं। जब खून गंदा हो जाता है, तो इसका सबसे पहला असर त्वचा पर दिखाई देता है, जिससे मुंहासे, एक्जिमा और झाइयां होने लगती हैं। इसके अलावा ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने के कारण हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और इम्युनिटी कमजोर होने जैसी तमाम समस्याएं जन्म लेने लगती हैं। यदि समय रहते खून को डिटॉक्स न किया जाए, तो यह अंदर ही अंदर कई गुप्त बीमारियों को जन्म दे देता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी डेली डाइट में कुछ ऐसी प्राकृतिक चीजों को शामिल करें जो ब्लड को अंदर से साफ कर सकें।पहली चीज: नीम और गिलोय का रस, खून का सबसे बड़ा प्राकृतिकशोधकआयुर्वेद में नीम और गिलोय को खून साफ करने वाली औषधियों का राजा माना गया है। नीम में प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो खून में मौजूद हानिकारक रोगाणुओं और बैक्टीरिया को नष्ट करने का काम करते हैं। वहीं गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करती है और टॉक्सिंस को यूरीन या पसीने के रास्ते बाहर निकालती है। यदि आप रोज सुबह खाली पेट नीम की ताजी पत्तियों का रस या गिलोय का काढ़ा पीते हैं, तो यह आपके रक्त को पूरी तरह से शुद्ध कर देता है। इसके नियमित सेवन से त्वचा से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और खून में जमा गंदगी जड़ से खत्म हो जाती है, जिससे आप कई गंभीर संक्रमणों से सुरक्षित रहते हैं।दूसरी चीज: नींबू और गर्म पानी, टॉक्सिंस को फ्लश आउट करने का आसान तरीकासुबह की शुरुआत गुनगुने पानी और नींबू के रस के साथ करना आपके स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो लिवर के कार्य को बेहतर बनाते हैं। जब आप खाली पेट नींबू पानी पीते हैं, तो यह आपके पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और खून में घुले हुए अपशिष्ट पदार्थों को खींचकर शरीर से बाहर फ्लश आउट करने में मदद करता है। यह शरीर के पीएच लेवल को संतुलित रखता है और रक्त वाहिकाओं में जमी अशुद्धियों को साफ करता है। इसके निरंतर सेवन से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, वजन नियंत्रित रहता है और खून की सफाई होने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक और ग्लो लौटने लगता है।तीसरी चीज: हल्दी वाला दूध या कच्ची हल्दी का सेवनहल्दी भारतीय रसोई में मिलने वाला एक ऐसा खजाना है जिसके औषधीय गुणों के बारे में पूरी दुनिया जानती है। हल्दी में 'कर्क्यूमिन' नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिसमें शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-सेप्टिक गुण होते हैं। यह खून को प्राकृतिक रूप से पतला करने और उसमें जमा हानिकारक टॉक्सिंस को बाहर निकालने में बहुत प्रभावी है। रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाकर पीने से शरीर की अंदरूनी सफाई होती है। यह खून में पनप रहे रोगाणुओं को रोकता है और रक्त परिसंचरण को सुधारता है। जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने के साथ-साथ यह शरीर को कई प्रकार के गंभीर संक्रमणों और बीमारियों से बचाने में भी मददगार साबित होता है।चौथी चीज: चुकंदर और गाजर का जूस, ब्लड प्यूरीफायर का पावरहाउसचुकंदर और गाजर का मेल सेहत के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। चुकंदर में नाइट्रेट और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो लिवर को डिटॉक्स करने और नए रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करते हैं। जब आप चुकंदर और गाजर का जूस पीते हैं, तो यह खून में मौजूद टॉक्सिंस को तेजी से सोखकर शरीर से बाहर का रास्ता दिखाता है। यह प्राकृतिक रूप से हीमोग्लोबिन के स्तर को भी तेजी से बढ़ाता है। जिन लोगों के शरीर में खून की कमी होती है या जिन्हें अक्सर थकान महसूस होती है, उनके लिए यह जूस बेहद फायदेमंद है। इसके सेवन से रक्त शुद्ध होता है, दिल की सेहत सुधरती है और शरीर में दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।पांचवीं चीज: तुलसी की पत्तियां और ग्रीन टी का चमत्कारिक असरतुलसी को हमारे देश में धार्मिक रूप से पूजनीय माना ही गया है, साथ ही यह एक बेहतरीन औषधि भी है। तुलसी की पत्तियों में डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं जो खून में जमे हानिकारक रोगाणुओं और टॉक्सिंस को न्यूट्रलाइज कर देते हैं। इसके अलावा ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन नामक एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं और रक्त को शुद्ध करने में अहम भूमिका निभाते हैं। दिन में एक या दो बार ग्रीन टी पीने से या सुबह तुलसी की 4-5 ताजी पत्तियां चबाने से शरीर अंदर से पूरी तरह तरोताजा महसूस करता है। इन सभी पांच प्राकृतिक उपायों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाकर आप अपने खून को हमेशा साफ रख सकते हैं और कई गंभीर बीमारियों के खतरे को खुद से कोसों दूर रख सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Aug 2026 1:47 pm

Monsoon Clothes Care: मानसून में कपड़ों पर क्यों पड़ते हैं काले धब्बे? अलमारी की ये गलती पड़ सकती है भारी

अगर कपड़े पूरी तरह सूखे न हों, अलमारी में हवा का आवागमन कम हो या कपड़े लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के रखे रहें, तो फफूंद यानी मोल्ड के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। यही फफूंद कपड़ों पर छोटे-छोटे धब्बों के रूप में दिखाई दे सकती है।

अमर उजाला 15 Aug 2026 12:43 pm

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन का रिश्ता हो जाएगा और भी मजबूत, आज से अपनाएं ये 10 आसान तरीके

अगर आप भी अपने भाई या बहन के साथ बॉन्डिंग और मजबूत करना चाहते हैं, तो कुछ आसान आदतें रिश्ते में प्यार और अपनापन बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसे 10 आसान तरीके, जिन्हें अपनाकर भाई-बहन के रिश्ते को और खूबसूरत बनाया जा सकता है।

अमर उजाला 15 Aug 2026 12:19 pm

Independence Day: पीएम की देश को नशा-मुक्त बनाने की अपील, जानिए नशा कैसे कर देता है पूरे शरीर का नाश

स्वतंत्रता दिवस 2026 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी परिवारों से नशामुक्त भारत अभियान से जुड़ने की अपील की। युवाओं में बढ़ती नशे की लत केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य चुनौती भी है।

अमर उजाला 15 Aug 2026 11:30 am

Hariyali Teej vs Kajari Teej: हरियाली तीज और कजरी तीज में क्या है फर्क? तारीख से लेकर पूजा तक जानें पूरी बात

विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि कई स्थानों पर अविवाहित कन्याएं भी अच्छे वर की कामना से व्रत करती हैं।

अमर उजाला 15 Aug 2026 11:28 am

Hariyali Teej 2026 Wishes: 'सावन की हरियाली संग आए खुशियों की बहार', अपनों को भेजें ये खूबसूरत तीज शुभकामनाएं

Happy Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज के पावन पर्व पर आपके जीवन में प्रेम, खुशियां और समृद्धि की हरियाली हमेशा बनी रहे। हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं भेजने के लिए यहां से कुछ चुनिंदा वाॅलपेपर, संदेश और कविताएं डाउनलोड कर सकते हैं।

अमर उजाला 15 Aug 2026 10:08 am

Independence Day Delhi 2026: 15 अगस्त पर दिल्ली में कहां जाएं? ये 10 जगहें बना देंगी स्वतंत्रता दिवस यादगार

2026 में भी लाल किले के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई मार्गों पर प्रतिबंध और डायवर्जन की जानकारी दी है। ऐसे में 15 अगस्त को घूमने निकलने से पहले ट्रैफिक और एंट्री अपडेट जरूर देख लें।

अमर उजाला 15 Aug 2026 7:12 am

Independence Day 2026: 15 अगस्त को ध्वजारोहण होता है या तिरंगा फहराते हैं? जानिए सही नियम और दोनों में अंतर

15 अगस्त और 26 जनवरी के तिरंगे में कुछ अंतर हैं। एक दिन ध्वजा रोहण होता है तो दूसरे मौके पर तिरंगा फहराया जाता है। सामान्यत: लोग इसे एक ही समझ लेते हैं। लेकिन दोनों में बड़ा अतंर है। ये अंतर, स्थान, प्रक्रिया और उद्देश्य का है।

अमर उजाला 15 Aug 2026 7:03 am

Hariyali Teej 2026 Wishes: हरियाली तीज पर अपनों को भेजें ये खास संदेश, मिलेगा शिव-पार्वती का आशीर्वाद!

Happy Hariyali Teej: अगर आप भी इस हरियाली तीज पर अपनों को सामान्य मैसेज के बजाय कुछ खास और दिल छू लेने वाली शुभकामनाएं भेजना चाहते हैं, तो यहां आपको खूबसूरत शुभकामनाएं, कोट्स, संदेश और कविताएंमिलेंगी।

अमर उजाला 15 Aug 2026 6:46 am

Independence Day Wishes 2026: 'तिरंगे पर हमें नाज है...' इन संदेशों को भेजकर मनाएं आजादी का जश्न

Independence Day 2026 Images : स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओंके माध्यम से हम अपने परिवार, मित्रों और समाज में देशभक्ति का संदेश पहुंचाते हैं। साथ ही नई पीढ़ी को स्वतंत्रता के महत्व और अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हैं।

अमर उजाला 15 Aug 2026 6:32 am

दिनभर शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए कितना पानी पीना है जरूरी? 8 गिलास के मिथक से लेकर वजन के हिसाब से सही मात्रा तक, जानिए हेल्थ एक्सपर्ट्स के गोल्डन रूल्स

मानव शरीर की पूरी संरचना और उसकी कार्यप्रणाली में पानी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। हमारे शरीर का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल पानी से बना है। मस्तिष्क की सोचने की क्षमता से लेकर मांसपेशियों की कार्यप्रणाली, जोड़ों में चिकनाई, पाचन क्रिया, विषैले तत्वों को बाहर निकालने और रक्त संचार तक हर एक बुनियादी प्रक्रिया पानी पर ही निर्भर करती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोग दिन भर चाय, कॉफी या पैकेज्ड ड्रिंक्स तो पीते रहते हैं, लेकिन शुद्ध पानी की जरूरी मात्रा को नजरअंदाज कर देते हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य के प्रति अत्यधिक सजग कुछ लोग दिन भर में जरूरत से ज्यादा पानी पीकर अपनी किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल लेते हैं। ऐसे में यह सवाल बार-बार सामने आता है कि आखिर एक स्वस्थ इंसान को दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए? क्या पारंपरिक तौर पर माना जाने वाला '8 गिलास पानी' का नियम वैज्ञानिक रूप से सही है या शरीर की जरूरतें व्यक्ति दर व्यक्ति अलग होती हैं? आइए, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार पानी के सही गणित को विस्तार से समझते हैं।8 गिलास पानी का नियम: वैज्ञानिक सच्चाई या सिर्फ एक लोकप्रिय मिथक?बचपन से ही हम सभी सुनते आ रहे हैं कि रोजाना कम से कम 8 गिलास पानी (लगभग 2 लीटर) जरूर पीना चाहिए। इसे स्वास्थ्य की दुनिया में '8x8 रूल' कहा जाता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह नियम एक सामान्य दिशा-निर्देश तो हो सकता है, लेकिन यह हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू नहीं होता।वैज्ञानिकों का मानना है कि हर व्यक्ति का शारीरिक ढांचा, उसकी दिनचर्या, काम की प्रकृति, रहने का वातावरण और मेटाबॉलिक रेट अलग होता है। उदाहरण के लिए, एक वातानुकूलित (AC) ऑफिस में बैठकर 8 घंटे काम करने वाले व्यक्ति और धूप व गर्मी में पसीना बहाकर शारीरिक श्रम करने वाले मजदूर के शरीर की पानी की आवश्यकता कभी भी एक जैसी नहीं हो सकती। इसलिए किसी एक निश्चित आंकड़े को हर किसी के लिए अनिवार्य मान लेना वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सही नहीं है।उम्र, लिंग और वजन के अनुसार प्रतिदिन पानी की कितनी है सही मात्रा?यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग एंड मेडिसिन (NASEM) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के दिशानिर्देशों के अनुसार सामान्य मौसम में एक स्वस्थ वयस्क के लिए पानी और तरल पदार्थों की दैनिक आवश्यकता कुछ इस प्रकार तय की गई है:वयस्क पुरुष: औसतन 3.5 से 3.7 लीटर तरल पदार्थ प्रतिदिन (लगभग 13 से 15 कप)।वयस्क महिलाएं: औसतन 2.5 से 2.7 लीटर तरल पदार्थ प्रतिदिन (लगभग 9 से 11 कप)।गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं: सामान्य से 500 से 700 मिलीलीटर अधिक पानी यानी लगभग 3 से 3.5 लीटर प्रतिदिन।बच्चे (4 से 13 वर्ष): 1.5 से 2.2 लीटर प्रतिदिन (उम्र और गतिविधि के आधार पर)।बुजुर्ग (60 वर्ष से अधिक): कम से कम 2 से 2.5 लीटर प्रतिदिन, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ प्यास लगने का प्राकृतिक अहसास कमजोर होने लगता है।वजन के आधार पर अपनी सही मात्रा निकालने का एक आसान फॉर्मूला यह है कि आप अपने कुल वजन (किलोग्राम में) को 30 से विभाजित (Divide) कर दें। उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 60 किलोग्राम है, तो 60/30 = 2 लीटर। इसमें दैनिक शारीरिक श्रम के आधार पर आधा से एक लीटर अतिरिक्त पानी जोड़ा जाना चाहिए।केवल सादा पानी ही नहीं, इन खाद्य पदार्थों से भी मिलता है शरीर को हाइड्रेशनहमारे द्वारा ग्रहण किए जाने वाले कुल पानी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ठोस और तरल खाद्य पदार्थों से आता है, जबकि बाकी 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे पानी और अन्य स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थों से मिलता है। यदि आप केवल सादा पानी पीकर ऊब जाते हैं, तो अपनी डाइट में इन उच्च जल-सामग्री वाले खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं:खीरा और ककड़ी: इनमें लगभग 95 से 96 प्रतिशत पानी होता है, जो पेट को ठंडक पहुंचाने के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है।तरबूज और खरबूजा: 92 प्रतिशत पानी से भरपूर ये मौसमी फल शरीर को तुरंत ऊर्जा और हाइड्रेशन देते हैं।नारियल पानी: पोटैशियम, मैग्नीशियम और सोडियम से भरपूर प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक है जो डिहाइड्रेशन से तुरंत बचाता है।छाछ और नींबू पानी: प्रोबायोटिक्स और विटामिन सी से भरपूर यह पेय पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हुए शरीर में जल संतुलन बनाए रखते हैं।टमाटर, लौकी और तोरई: हरी सब्जियों में मौजूद प्राकृतिक रस शरीर को अंदरूनी रूप से हाइड्रेटेड रखता है।शरीर में पानी की कमी के 6 छिपे संकेत: समय रहते पहचानें डिहाइड्रेशनजब शरीर में पानी का स्तर घटने लगता है, तो प्यास लगने से पहले ही शरीर कई सूक्ष्म और छिपे हुए चेतावनी संकेत देने लगता है:पेशाब का गहरा पीला रंग: हाइड्रेशन जांचने का सबसे आसान और सटीक तरीका यूरिन का रंग है। यदि पेशाब का रंग हल्का पारदर्शी या नींबू जैसा हल्का पीला है तो शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड है। गहरा पीला या भूरा रंग गंभीर पानी की कमी की ओर इशारा करता है।सिर में भारीपन और ब्रेन फॉग: दिमाग का 75 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है। पानी की हल्की सी कमी भी सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और मानसिक सुस्ती पैदा कर देती है।त्वचा और होठों का सूखापन: त्वचा का रूखा होना, होठों का फटना और आंखों में जलन महसूस होना आंतरिक निर्जलीकरण का परिणाम है।लगातार मीठा खाने की क्रेविंग: जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो लिवर में ग्लाइकोजन रिलीज करने में बाधा आती है, जिसे मस्तिष्क गलती से भूख या चीनी की तलब समझ लेता है।मुंह से बदबू आना: पानी की कमी से लार (Saliva) का उत्पादन घट जाता है, जिससे मुंह में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और सांसों से दुर्गंध आने लगती है।मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps): पसीने के जरिए जब इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी निकल जाते हैं, तो पैरों और पिंडलियों की मांसपेशियों में अचानक तेज दर्द और खिंचाव होने लगता है।क्या बहुत ज्यादा पानी पीना भी हो सकता है नुकसानदेह? जानिए 'वॉटर इंटॉक्सिकेशन' का खतरास्वास्थ्य लाभ के चक्कर में कई लोग बिना प्यास लगे जबरन 5 से 6 लीटर पानी पीने की भूल कर बैठते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, आवश्यकता से अधिक पानी पीना शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में 'हाइपोनेट्रेमिया' (Hyponatremia) या 'वॉटर इंटॉक्सिकेशन' कहा जाता है।जब हम बहुत कम समय में बहुत अधिक पानी पी लेते हैं, तो हमारी किडनी अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में असमर्थ हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप खून में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से पतला और कम हो जाता है। सोडियम की कमी के कारण शरीर और विशेष रूप से मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन आने लगती है। इसके लक्षणों में मतली, उल्टी, गंभीर सिरदर्द, दौरे पड़ना और गंभीर मामलों में कोमा या मृत्यु तक का खतरा शामिल होता है। इसलिए हमेशा अपनी प्यास और शारीरिक जरूरत के अनुसार ही पानी पिएं।आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस: पानी पीने के 5 गोल्डन रूल्सपानी केवल कितना पीना है यह जानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे किस तरह और कब पीना है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है:सुबह खाली पेट गुनगुना पानी (उषापान): सुबह उठकर 1 से 2 गिलास गुनगुना पानी पीने से रात भर आंतों में जमा विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकल जाते हैं और मेटाबॉलिज्म एक्टिव होता है।बैठकर और घूंट-घूंट करके पिएं: कभी भी खड़े होकर या बोतल से ऊपर से धार बनाकर पानी न पिएं। बैठकर शांति से घूंट-घूंट (Sip by sip) पानी पीने से मुंह की लार पानी के साथ घुलकर पेट के एसिड को संतुलित करती है।खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी न पिएं: भोजन करने के ठीक बाद बहुत ठंडा या अधिक पानी पीने से पेट की जठराग्नि (Digestive Fire) मंद पड़ जाती है और खाना पचने के बजाय सड़ने लगता है। भोजन के कम से कम 40 से 45 मिनट बाद ही पानी पिएं।वर्कआउट के दौरान और बाद में संतुलन: एक्सरसाइज करते समय एक साथ ढेर सारा पानी न पिएं। हर 15 से 20 मिनट में सिर्फ एक-दो घूंट पानी लेकर गला तर करें और वर्कआउट खत्म होने के 15 मिनट बाद पर्याप्त पानी पिएं।अत्यधिक चिल्ड पानी से बचें: फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी के बजाय मटके का पानी या सामान्य तापमान का पानी पिएं, जो गले की नसों और पाचन तंत्र के लिए सुरक्षित रहता है।पानी कोई सामान्य पेय नहीं बल्कि हमारे शरीर की जीवनरेखा है। अपने शरीर के संकेतों को सुनें, रंग देखकर अपनी हाइड्रेशन स्थिति समझें और सही समय पर संतुलित मात्रा में पानी पीकर खुद को सालभर स्वस्थ, ऊर्जावान और तरोताजा बनाए रखें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 5:46 pm

डेंगू में अचानक बढ़ रहा है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा! क्या दिमाग पर भी हमला करता है यह जानलेवा वायरस? जानिए न्यूरोलॉजिस्ट का बड़ा खुलासा, 'न्यूरो-डेंगू' के लक्षण और बचाव की पूरी मेडिकल गाइड

मानसून और उसके बाद के मौसम में हर साल देश के अलग-अलग राज्यों में डेंगू का प्रकोप तेजी से पैर पसारने लगता है। अब तक आम जनमानस में यह धारणा बनी हुई थी कि डेंगू केवल तेज बुखार, जोड़ों में असहनीय दर्द और खून में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या घटाने वाली बीमारी है। लेकिन हाल के वर्षों में अस्पतालों के आईसीयू और न्यूरोलॉजी विभागों में ऐसे मामलों में भारी उछाल देखा गया है जहां डेंगू के मरीजों को अचानक ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke), मिर्गी के दौरे (Seizures), लकवा और कोमा जैसी गंभीर दिमागी जटिलताओं का सामना करना पड़ा है। मेडिकल जगत में इस खतरनाक स्थिति को 'न्यूरो-डेंगू' (Neuro-Dengue) के नाम से जाना जा रहा है। शीर्ष न्यूरोलॉजिस्ट्स और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू संक्रमण के दौरान दिमाग पर होने वाले इस खतरे को यदि समय रहते न पहचाना जाए, तो यह मरीज के लिए जानलेवा या स्थायी दिव्यांगता का कारण बन सकता है।क्या डेंगू वायरस सच में दिमाग तक पहुंच सकता है? 'न्यूरो-डेंगू' की कड़वी सच्चाईचिकित्सा विज्ञान के अनुसार, डेंगू वायरस (DENV-1, DENV-2, DENV-3, DENV-4) मुख्य रूप से संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि डेंगू वायरस केवल रक्त कोशिकाओं और लिवर को प्रभावित करता है। हालांकि, आधुनिक न्यूरो-इमेजिंग और मेडिकल रिसर्च ने साबित कर दिया है कि डेंगू का वायरस हमारे शरीर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सुरक्षा तंत्र 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' (Blood-Brain Barrier) को भी भेदने की क्षमता रखता है।जब मरीज का इम्यून सिस्टम गंभीर रूप से कमजोर होता है या वायरस का लोड अत्यधिक बढ़ जाता है, तो वायरस रक्त प्रवाह के जरिए सीधे मस्तिष्क के ऊतकों (Brain Tissues) और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) में प्रवेश कर जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर डेंगू से पीड़ित लगभग 1 से 5 प्रतिशत मरीजों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं विकसित होने का जोखिम होता है, जो पहली नजर में सामान्य डेंगू के लक्षणों के पीछे छिप जाती हैं।डेंगू में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कैसे पैदा होता है? जानिए दोनों प्रकार के स्ट्रोक का विज्ञानडेंगू संक्रमण के दौरान मरीज के दिमाग में दो अलग-अलग प्रकार के ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा रहता है:1. हैमरेजिक स्ट्रोक (मस्तिष्क में रक्तस्राव या ब्लीडिंग): डेंगू का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव थ्रोम्बोसाइटोपेनिया यानी प्लेटलेट्स का तेजी से गिरना होता है। प्लेटलेट्स हमारे खून को जमाने और ब्लीडिंग को रोकने का काम करते हैं। जब किसी मरीज के प्लेटलेट्स 20,000 या 10,000 प्रति माइक्रोलीटर से नीचे चले जाते हैं, और साथ ही वायरस के कारण दिमाग की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Capillaries) की दीवारें कमजोर हो जाती हैं, तो दिमाग के भीतर आंतरिक रक्तस्राव (Intracranial Hemorrhage) शुरू हो जाता है। मस्तिष्क की नस फटने से होने वाला यह हैमरेजिक स्ट्रोक बेहद घातक होता है और इसमें मरीज की जान जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।2. इस्केमिक स्ट्रोक (दिमाग की नसों में खून का थक्का जमना): गंभीर डेंगू में 'प्लाज्मा लीकेज' (Plasma Leakage) की समस्या होती है, जिसमें रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ रिसकर फेफड़ों और पेट में जमा होने लगता है। इसके कारण शरीर में भारी डिहाइड्रेशन होता है और रक्त गाढ़ा (Hypercoagulable State) हो जाता है। जब खून गाढ़ा होकर धमनियों में थक्के (Clots) बनाने लगता है या डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock Syndrome) के कारण ब्लड प्रेशर अचानक बहुत नीचे गिर जाता है, तो दिमाग के किसी हिस्से तक ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति रुक जाती है। इस स्थिति को इस्केमिक स्ट्रोक कहा जाता है, जिसके कारण मरीज के शरीर का एक हिस्सा सुन्न या लकवाग्रस्त हो सकता है।डेंगू एन्सेफैलोपैथी और एन्सेफलाइटिस: दिमाग पर संक्रमण के अन्य गंभीर रूपस्ट्रोक के अलावा डेंगू वायरस दिमाग को दो अन्य प्रमुख तरीकों से भी नुकसान पहुंचा सकता है:डेंगू एन्सेफलाइटिस (Dengue Encephalitis): यह वह स्थिति है जब डेंगू वायरस सीधे मस्तिष्क की कोशिकाओं में पहुंचकर वहां सूजन (Inflammation) और संक्रमण पैदा कर देता है। इसके चलते मरीज को तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, रोशनी से चिढ़ और लगातार दौरे पड़ने लगते हैं।डेंगू एन्सेफैलोपैथी (Dengue Encephalopathy): कई बार वायरस सीधे दिमाग में नहीं जाता, लेकिन डेंगू के कारण लिवर फेलियर (Acute Liver Failure), किडनी की विफलता या शरीर में सोडियम का स्तर अचानक खतरनाक रूप से गिर जाने (Severe Hyponatremia) के कारण जहरीले टॉक्सिन्स दिमाग में जमा होने लगते हैं। इसके प्रभाव से मरीज का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है, वह अपने परिजनों को पहचानना बंद कर देता है और गहरी बेहोशी (Altered Sensorium) में चला जाता है।इन 6 'रेड फ्लैग' न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाजडेंगू के इलाज के दौरान यदि मरीज में सामान्य बुखार और बदन दर्द के अलावा नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखे, तो इसे न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी मानकर तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए:अत्यधिक और असहनीय सिरदर्द: यदि बुखार उतरने के बाद भी सिर में तेज, फटने जैसा दर्द लगातार बना रहे और सामान्य दवाओं से आराम न मिले।मानसिक भ्रम और चिड़चिड़ापन (Confusion): मरीज का अनाप-शनाप बोलना, समय और जगह का भान न रहना, अत्यधिक सुस्ती या परिजनों को पहचानने में असमर्थ होना।मिर्गी जैसे झटके या दौरे (Seizures/Convulsions): हाथ-पैरों का कांपना, आंखें ऊपर चढ़ना या अचानक शरीर का अकड़ जाना।चेहरे या अंगों का सुन्न पड़ना (F.A.S.T. Signs): चेहरे का एक तरफ लटकना, हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होना या शरीर के एक हिस्से का काम करना बंद कर देना।बोलने में लड़खड़ाहट और देखने में परेशानी: मरीज की आवाज का स्पष्ट न निकलना, शब्द लड़खड़ाना या आंखों के आगे धुंधलापन व दोहरा दिखाई देना (Double Vision)।लगातार उल्टियां और बेहोशी: पेट में कुछ भी न टिकना, बार-बार उल्टी होना और मरीज का लगातार बेहोशी की हालत में चले जाना।गलती से भी न लें ये दवाएं: प्लेटलेट्स और ब्लीडिंग का जानलेवा खेलडेंगू के दौरान होने वाली सबसे बड़ी भूल गलत दवाओं का सेवन है। कई लोग सिरदर्द और बदन दर्द से राहत पाने के लिए मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर के पर्चे के पेनकिलर्स (Painkillers) खरीद कर खा लेते हैं।डॉक्टरों की सख्त चेतावनी है कि डेंगू के दौरान एस्पिरिन (Aspirin), आइबुप्रोफेन (Ibuprofen), डिक्लोफेनाक (Diclofenac) और मेफेनामिक एसिड (Meftal-Spas) जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) का सेवन पूरी तरह से वर्जित है। ये दवाएं ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली) की तरह काम करती हैं और प्लेटलेट्स के कार्य को रोक देती हैं। इनके सेवन से दिमाग, पेट और आंतों में जानलेवा इंटरनल ब्लीडिंग और हैमरेजिक स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डेंगू में बुखार और दर्द के लिए केवल और केवल डॉक्टर द्वारा सुझाई गई निश्चित खुराक में 'पैरासिटामोल' (Paracetamol) का ही उपयोग सुरक्षित माना जाता है।दिमाग को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टरों के जरूरी सुझाव और बचाव का प्रोटोकॉलडेंगू संक्रमण के दौरान न्यूरोलॉजिकल और स्ट्रोक जैसी जानलेवा जटिलताओं से बचने के लिए इन बुनियादी सावधानियों का पालन करना अनिवार्य है:भरपूर हाइड्रेशन है सबसे बड़ा सुरक्षा कवच: डेंगू के मरीज को रोजाना कम से कम 3 से 4 लीटर तरल पदार्थ देना चाहिए। ओआरएस (ORS) का घोल, नारियल पानी, नींबू पानी, दाल का पानी और ताजे फलों का जूस पिएं। उचित हाइड्रेशन से खून गाढ़ा नहीं होता और इस्केमिक स्ट्रोक का खतरा टल जाता है।हेमेटोक्रिट (Hematocrit) और प्लेटलेट काउंट की नियमित जांच: केवल प्लेटलेट्स ही नहीं, बल्कि सीबीसी (CBC) टेस्ट में 'हेमेटोक्रिट' स्तर पर भी नजर रखें। हेमेटोक्रिट का बढ़ना प्लाज्मा लीकेज और खून के गाढ़े होने का सीधा संकेत है।इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन: मरीज के ब्लड में सोडियम और पोटैशियम के स्तर की नियमित जांच कराएं ताकि सोडियम की कमी से होने वाले ब्रेन स्वेलिंग (Cerebral Edema) से बचा जा सके।समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क: यदि मरीज के व्यवहार में थोड़ा भी बदलाव दिखे, तो बिना देरी किए एमआरआई (MRI Brain) या सीटी स्कैन (CT Scan) की सुविधा वाले टर्शियरी केयर अस्पताल में भर्ती कराएं।डेंगू को केवल एक मौसमी बुखार समझकर घर पर लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है। सतर्कता, सही दवाओं का चयन, पर्याप्त तरल पदार्थों का सेवन और शुरुआती न्यूरोलॉजिकल लक्षणों की पहचान ही मरीज को डेंगू के साथ-साथ ब्रेन स्ट्रोक के गंभीर खतरे से पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 5:44 pm

सिरदर्द ही नहीं.. माइग्रेन होने से पहले शरीर देता है ये 7 छिपे संकेत! भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानिए 4 चरण, ट्रिगर्स और कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना है जरूरी

आज की तनावभरी जीवनशैली, देर रात तक स्क्रीन पर काम करने की आदत, अनियमित खानपान और नींद की कमी के कारण सिरदर्द की समस्या घर-घर में देखने को मिल रही है। अक्सर जब भी सिर में तेज दर्द उठता है, तो लोग इसे सामान्य थकान या गैस का दर्द समझकर कोई भी पेनकिलर खा लेते हैं और अपनी दिनचर्या में जुट जाते हैं। लेकिन यदि आपका सिरदर्द बार-बार लौटकर आ रहा है, सिर के किसी एक हिस्से में हथौड़े चलने जैसा महसूस होता है और इसके साथ उल्टी या आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसे लक्षण उभरते हैं, तो यह कोई सामान्य सिरदर्द नहीं बल्कि 'माइग्रेन' (Migraine) हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, माइग्रेन दुनिया की तीसरी सबसे आम और अक्षम करने वाली (Disabling) न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में से एक है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि माइग्रेन का दर्द केवल सिर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरे शरीर और तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है। सबसे बड़ी बात यह है कि दर्द शुरू होने से कई घंटे या दिन पहले ही हमारा शरीर कई सूक्ष्म और छिपे हुए चेतावनी संकेत देने लगता है, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं, एक न्यूरोलॉजिकल विकार: क्या है इसके पीछे का विज्ञान?चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, माइग्रेन मस्तिष्क की नसों और रक्त वाहिकाओं में होने वाले रासायनिक और न्यूरोलॉजिकल बदलावों से पैदा होने वाली एक क्रॉनिक स्थिति है। जब दिमाग में तंत्रिका तंतु (Nerve Fibres) अत्यधिक उत्तेजित हो जाते हैं, तो वे सेरोटोनिन और कैल्सीटोनिन जीन-रिलेटेड पेप्टाइड (CGRP) जैसे रसायनों का स्राव करते हैं। इसके चलते मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है और धड़कन जैसा टीस मारने वाला (Throbbing or Pulsating Pain) दर्द पैदा होता है। सामान्य सिरदर्द (Tension Headache) में सिर के दोनों तरफ हल्का या मध्यम दबाव महसूस होता है और यह कुछ घंटों में ठीक हो जाता है, जबकि माइग्रेन का दर्द 4 घंटे से लेकर 72 घंटे (3 दिन) तक बना रह सकता है और दैनिक कामकाज को पूरी तरह ठप कर देता है।सिर फटने से पहले शरीर देता है ये संकेत: जानिए माइग्रेन के 4 मुख्य चरणमाइग्रेन का अटैक अचानक नहीं आता, बल्कि यह चार अलग-अलग चरणों (Phases of Migraine) से होकर गुजरता है। हर मरीज में सभी चरण दिखें यह जरूरी नहीं है, लेकिन इन्हें समझकर अटैक की तीव्रता को कम किया जा सकता है:1. प्रोड्रोम (Prodrome Phase - पूर्व चेतावनी): यह दर्द शुरू होने से 24 से 48 घंटे पहले का समय होता है। इस दौरान अचानक मीठा या नमकीन खाने की तीव्र इच्छा (Food Cravings), मूड में अप्रत्याशित बदलाव, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, लगातार जम्हाई आना, गर्दन में जकड़न और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं।2. ऑरा (Aura Phase - दृश्य व संवेदी भ्रम): लगभग 20 से 30 प्रतिशत माइग्रेन रोगियों में दर्द शुरू होने से ठीक 20 से 60 मिनट पहले 'ऑरा' के लक्षण दिखते हैं। इसमें आंखों के सामने चमकती हुई रोशनी, जिग-जैग रेखाएं दिखना, दृष्टि में काले धब्बे (Blind Spots), चेहरे या हाथों में सुई चुभने जैसा अहसास और बोलने में कठिनाई शामिल है।3. अटैक (Attack Phase - मुख्य दर्द): यह माइग्रेन का सबसे दर्दनाक चरण होता है। सिर के एक तरफ या दोनों तरफ असहनीय धड़कने वाला दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना, तथा तेज रोशनी और आवाज से अत्यधिक परेशानी होती है।4. पोस्टड्रोम (Postdrome Phase - माइग्रेन हैंगओवर): दर्द कम होने के बाद का यह चरण 24 घंटे तक रह सकता है। इसमें मरीज को अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, मानसिक धुंधलापन (Brain Fog) और शरीर टूटा हुआ महसूस होता है।नजरअंदाज न करें माइग्रेन के ये 7 छुपे और असामान्य लक्षणमाइग्रेन के दौरान सिर में दर्द होना सबसे प्रमुख लक्षण है, लेकिन इसके अलावा शरीर में कई अन्य असामान्य परिवर्तन भी देखने को मिलते हैं जिनकी ओर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता:रोशनी, तेज आवाज और गंध से तीव्र चिढ़ (Photophobia & Phonophobia): माइग्रेन के शिकार व्यक्ति को सामान्य कमरे की लाइट, मोबाइल की स्क्रीन, टीवी की आवाज या किसी परफ्यूम और तड़के की महक से भी गंभीर घबराहट और सिर में तेज चुभन महसूस होने लगती है।मतली, उल्टी और पेट की गड़बड़ी: माइग्रेन और हमारे पाचन तंत्र (Gut-Brain Axis) के बीच गहरा संबंध है। दर्द के दौरान पेट में मरोड़, गैस, मतली और उल्टी आना बेहद आम है। बच्चों में इसे 'एब्डोमिनल माइग्रेन' भी कहा जाता है।गर्दन, कंधों और जबड़े में अकड़न: कई लोग गर्दन और कंधों के दर्द को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस समझ लेते हैं, जबकि यह माइग्रेन के प्रोड्रोम चरण का सबसे आम लक्षण होता है।अचानक मूड बदलना और गंभीर एंग्जायटी: बिना किसी कारण के अचानक अत्यधिक उदासी, अवसाद या अत्यधिक उत्तेजना महसूस होना माइग्रेन के न्यूरोकेमिकल बदलावों का संकेत है।लगातार जम्हाई आना और बेवजह भारी थकान: पर्याप्त नींद लेने के बावजूद दिन भर बिना रुके जम्हाई आना और शरीर में ऊर्जा की भारी कमी महसूस होना डोपामाइन के स्तर में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।हाथ-पैरों और चेहरे पर सुन्नपन (Paresthesia): नसों में रक्त प्रवाह और सिग्नलिंग प्रभावित होने से उंगलियों, होठों या जीभ पर चींटियां रेंगने जैसा अहसास होना।आंखों के पीछे असहनीय खिंचाव और पानी आना: माइग्रेन का दर्द अक्सर आंख के ठीक पीछे या कनपटी (Temple) के पास केंद्रित होता है, जिससे आंख से लगातार पानी गिरने लगता है।माइग्रेन ट्रिगर्स: इन 5 आदतों और कारणों से अचानक भड़कता है दर्दमाइग्रेन अटैक को भड़काने वाले कारकों को 'ट्रिगर्स' कहा जाता है। यदि आप अपने ट्रिगर्स को पहचान लें, तो आधे से ज्यादा हमलों को रोका जा सकता है:तनाव और अनियमित स्लीप साइकिल: अत्यधिक मानसिक दबाव, बहुत कम सोना या वीकेंड पर बहुत ज्यादा देर तक सोना माइग्रेन का सबसे बड़ा ट्रिगर है।खान-पान से जुड़े कारक: भूखे पेट रहना (Fasting), शरीर में पानी की कमी (Dehydration), अत्यधिक कैफीन (चाय/कॉफी) का सेवन या अचानक कैफीन छोड़ना, पुराना चीज (Aged Cheese), प्रोसेस्ड मीट और मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) युक्त जंक फूड।मौसम और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव: अचानक तेज धूप में निकलना, उमस भरा मौसम, आंधी-तूफान के समय बैरोमीटर के दबाव में बदलाव माइग्रेन के दर्द को ट्रिगर कर सकता है।हार्मोनल बदलाव (महिलाओं में): पीरियड्स से ठीक पहले या ओव्यूलेशन के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट के कारण महिलाओं में माइग्रेन का खतरा पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक होता है। इसे 'मेंस्ट्रुअल माइग्रेन' कहा जाता है।तेज स्क्रीन टाइम और नीली रोशनी (Blue Light): घंटों बिना ब्रेक के लैपटॉप, मोबाइल या टैबलेट की चमकीली स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रखने से आंखों की नसें उत्तेजित हो जाती हैं।कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना है जरूरी? 'रेड फ्लैग' चेतावनी संकेतहर सिरदर्द केवल माइग्रेन हो यह जरूरी नहीं है। कुछ स्थितियां जानलेवा मस्तिष्क विकारों (जैसे ब्रेन हैमरेज, एन्यूरिज्म या ट्यूमर) का संकेत हो सकती हैं। यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी 'रेड फ्लैग' लक्षण महसूस हो, तो बिना एक मिनट गंवाए न्यूरोलॉजिस्ट या नजदीकी आपातकालीन अस्पताल से संपर्क करें:थंडरक्लैप हेडेक: ऐसा सिरदर्द जो बिजली कड़कने की तरह अचानक शुरू हो और 1 मिनट के भीतर अपनी चरम असहनीय तीव्रता पर पहुंच जाए।बुखार और गर्दन का मुड़ना बंद होना: सिरदर्द के साथ तेज बुखार, गर्दन में असहनीय अकड़न और भ्रम (Confused State of Mind) होना, जो मेनिनजाइटिस का लक्षण हो सकता है।शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या लकवा: चेहरे का एक तरफ लटकना, हाथ या पैर में ताकत न रहना, आवाज लड़खड़ाना (स्ट्रोक के लक्षण)।50 वर्ष की आयु के बाद नया सिरदर्द: यदि 50 साल की उम्र तक कभी गंभीर सिरदर्द नहीं हुआ और अचानक तेज दर्द की शिकायत शुरू हो जाए।सिर में चोट लगने के बाद दर्द: किसी दुर्घटना या सिर पर चोट लगने के कुछ घंटों या दिनों बाद बढ़ता हुआ सिरदर्द।माइग्रेन के दर्द से राहत और रोकथाम के आसान घरेलू व मेडिकल उपायमाइग्रेन का कोई एक जादुई इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली में सुधार और सही उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है:अटैक के समय शांत और अंधेरे कमरे में लेटें: जैसे ही दर्द का अहसास हो, तुरंत मोबाइल बंद कर दें, तेज लाइट बुझा दें और एक शांत, ठंडे कमरे में आंखें मूंदकर आराम करें।कोल्ड या हॉट कंप्रेस: माथे या गर्दन के पीछे बर्फ का पैक (Ice Pack) रखने से रक्त वाहिकाओं की सूजन कम होती है और दर्द में तुरंत राहत मिलती है।हाइड्रेशन और मैग्नीशियम युक्त आहार: भरपूर पानी पिएं। अपनी डाइट में पालक, कद्दू के बीज, बादाम, केला और साबुत अनाज जैसे मैग्नीशियम और विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन) से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।माइग्रेन डायरी मेंटेन करें: एक डायरी में नोट करें कि आपको कब-कब दर्द हुआ, उस दिन आपने क्या खाया था और कितने घंटे की नींद ली थी। इससे आपके व्यक्तिगत ट्रिगर्स की पहचान आसानी से हो जाएगी।चिकित्सकीय परामर्श और दवाएं: ट्रिप्टान्स (Triptans), बीटा-ब्लॉकर्स या नए दौर की CGRP रोधी दवाओं का सेवन केवल और केवल न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह और प्रिस्क्रिप्शन पर ही करें। बिना डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक पेनकिलर लेने से 'मेडिकेशन ओवरयूज हेडेक' (MOH) का खतरा बढ़ जाता है।माइग्रेन को एक सामान्य सिरदर्द मानकर नजरअंदाज करना आपकी सेहत और मानसिक शांति के लिए भारी पड़ सकता है। शरीर द्वारा दिए जाने वाले शुरुआती संकेतों को पहचानें, अपनी जीवनशैली में अनुशासन लाएं और जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की मदद लेकर एक स्वस्थ, सक्रिय और दर्दरहित जीवन जिएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 5:41 pm

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अमर उजाला 14 Aug 2026 8:45 am

न सर्जरी, न चीर-फाड़! चीन ने खोजा क्रांतिकारी तरीका, अब सिर्फ 10 मिनट में गर्दन की नस के रास्ते दिमाग में फिट होगी ब्रेन चिप

तकनीकी और मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव सामने आया है जो इंसानी इतिहास की धारा को पूरी तरह बदल सकता है। अब तक आपने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) और ब्रेन चिप इम्प्लांटेशन के बारे में यही सुना होगा कि इसके लिए मरीज की खोपड़ी (Skull) की जटिल सर्जरी करनी पड़ती है, जिसमें घंटों का समय लगता है और गंभीर जोखिम भी शामिल होते हैं। लेकिन अब चीन ने इस पूरी अवधारणा को पलट कर रख दिया है। चीन के एक स्टार्टअप ने ऐसी नायाब और अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जिसकी मदद से बिना किसी चीर-फाड़ और सर्जरी के केवल 10 मिनट के भीतर दिमाग के अंदर चिप स्थापित की जा सकती है। चिकित्सा जगत में इस नई तकनीक को लेकर खलबली मच गई है क्योंकि यह अरबपति उद्यमी एलन मस्क की मशहूर कंपनी 'न्यूरालिंक' (Neuralink) को सीधी और कड़ी चुनौती देती नजर आ रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि चीन की यह नई तकनीक कैसे काम करती है और मेडिकल साइंस की दुनिया में इसे इतना बड़ा मील का पत्थर क्यों माना जा रहा है।कैसे काम करती है यह 10 मिनट की अनोखी तकनीक? जानिए बिना सर्जरी का पूरा गणितपारंपरिक रूप से जब भी किसी मरीज के दिमाग में कोई इलेक्ट्रॉनिक चिप या इलेक्ट्रोड लगाने की बात आती है, तो न्यूरोसर्जन को सर्जिकल रोबोट या अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मरीज की खोपड़ी को खोलना पड़ता है। इसके बाद दिमाग के नाजुक टिशू या कॉर्टेक्स में सीधे इलेक्ट्रोड थ्रेड्स स्थापित किए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम दो से तीन घंटे या उससे अधिक का समय लग सकता है और रिकवरी का पीरियड भी काफी लंबा और दर्दनाक होता है। इसके विपरीत, चीन की शंघाई स्थित स्टार्टअप कंपनी 'स्टेयरमेड टेक्नोलॉजी' (StairMed Technology) ने चीनी अकादमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक ऐसा एंडोवैस्कुलर (Vascular) तरीका खोज निकाला है, जो इन तमाम जटिलताओं से पूरी तरह मुक्त है।इस नई तकनीक के तहत डॉक्टरों को मरीज की खोपड़ी खोलने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। इसके बजाय, शरीर के प्राकृतिक रक्त संचार तंत्र (Vascular System) का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टर गर्दन की एक मुख्य रक्त वाहिका (Blood Vessel या नस) के जरिए एक बेहद बारीक और लचीली डिवाइस को शरीर के अंदर दाखिल करते हैं। यह डिवाइस ब्लड वेसल के रास्ते से होते हुए बिना किसी रुकावट के सीधे दिमाग के उस लक्षित हिस्से तक पहुँच जाती है जहाँ न्यूरल सिग्नल्स को कैप्चर करना होता है। दिमाग के पास पहुँचने के बाद यह डिवाइस रक्त वाहिका की दीवार के बिल्कुल बाहर सुरक्षित रूप से एंकर या फिक्स हो जाती है। बीजिंग के प्रतिष्ठित शुआनवू अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डुआन वानरू के अनुसार, चार से पांच साल के अनुभव वाला एक कुशल सर्जन इस पूरी प्रक्रिया को महज 10 मिनट के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है। यह समय पारंपरिक ओपन-स्कल सर्जरी के मुकाबले बेहद कम है।एलन मस्क की Neuralink को सीधी चुनौती, ग्लोबल टेक रेस में आगे निकलने की होड़ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) की दौड़ में अब तक एलन मस्क की कंपनी 'न्यूरालिंक' (Neuralink) का दबदबा सबसे ऊपर माना जाता रहा है। न्यूरालिंक ने पिछले कुछ समय में सुअर और बंदरों के साथ-साथ इंसानों पर भी अपनी चिप के सफल क्लिनिकल ट्रायल दुनिया के सामने रखे हैं, जिसमें मरीजों ने अपने विचारों (Thoughts) की मदद से कंप्यूटर स्क्रीन पर गेम खेलने या कर्सर चलाने जैसे कारनामे करके दिखाए हैं। हालांकि, न्यूरालिंक की तकनीक में खोपड़ी को काटना और रोबोटिक सुइयों की मदद से मस्तिष्क के ऊतकों में सीधे तार पिरोना शामिल है। इस प्रक्रिया को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों के एक वर्ग में हमेशा से सुरक्षा चिंताओं और बड़े पैमाने पर जोखिम को लेकर चर्चा होती रही है।यही कारण है कि चीन का यह नया दृष्टिकोण ग्लोबल टेक और मेडिकल जगत का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। चीन न केवल इस तकनीक को विकसित कर रहा है बल्कि अपनी घरेलू बीसीआई (BCI) इंडस्ट्री को मजबूती देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश भी कर रहा है। पिछले एक साल के दौरान स्टेयरमेड टेक्नोलॉजी को चीन के दिग्गज निवेशकों जैसे कि टेनसेंट और अलीबाबा से 1.1 अरब युआन (लगभग 163 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक की फंडिंग मिल चुकी है। चीन की सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक देश में कम से कम दो से तीन ऐसी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियां खड़ी कर दी जाएं जो ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक में दुनिया का नेतृत्व कर सकें। अमेरिका की एक अन्य कंपनी 'सिंक्रोन' (Synchron) भी जुगुलर वेन के जरिए इसी तरह की वैस्कुलर तकनीक पर काम कर रही है, लेकिन चीन ने जिस गति और 10 मिनट के इम्प्लांटेशन का दावा किया है, उसने इस रेस को बेहद रोमांचक बना दिया है।पैरालिसिस और गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों से ग्रस्त मरीजों के लिए बनेगी जीवनदानआम लोगों के मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या यह ब्रेन चिप तकनीक आम इंसानों के सामान्य इस्तेमाल या स्मार्टफोन चलाने के लिए बनाई जा रही है? इसका जवाब है— बिल्कुल नहीं। इस अत्याधुनिक तकनीक का मुख्य फोकस उन गंभीर रूप से बीमार और असहाय मरीजों पर है, जो पैरालिसिस (लकवा), स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, एएलएस (Amyotrophic Lateral Sclerosis) या अन्य गंभीर मोटर न्यूरॉन विकारों के कारण अपने शरीर के अंगों को हिलाने में पूरी तरह असमर्थ हैं।जब कोई स्वस्थ व्यक्ति अपने हाथ को हिलाने या किसी वस्तु को पकड़ने का सिर्फ विचार करता है, तो उसका मस्तिष्क सूक्ष्म विद्युत तरंगें (Neural Signals) उत्पन्न करता है। लेकिन गंभीर चोट या बीमारी के कारण दिमाग से शरीर के अन्य अंगों तक यह संदेश भेजने वाले रास्ते टूट जाते हैं। ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक इन्हीं न्यूरल सिग्नल्स को सीधे तौर पर रिकॉर्ड कर लेती है। इसके बाद उन्नत सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एल्गोरिदम इन सिग्नल्स को डीकोड करके कंप्यूटर या रोबोटिक डिवाइस के लिए कमांड में बदल देते हैं। इसका मतलब यह है कि जो मरीज बोल नहीं सकते या अपने हाथों से कुछ कर नहीं सकते, वे भविष्य में केवल अपने मन की इच्छा या विचारों के बल पर कंप्यूटर पर टाइप कर सकेंगे, अपनी व्हीलचेयर को चला सकेंगे या बाहरी उपकरणों को नियंत्रित करके एक स्वावलंबी जीवन जी सकेंगे।वर्तमान परीक्षण और भविष्य की राह: अभी इंसानी ट्रायल बाकी, वैज्ञानिक और विनियामक चुनौतियाँयद्यपि चीन के इस स्टार्टअप और शोधकर्ताओं के दावे बहुत बड़े और आकर्षक लग रहे हैं, लेकिन मेडिकल साइंस के क्षेत्र में किसी भी नए आविष्कार को धरातल पर उतरने से पहले कड़े वैज्ञानिक और विनियामक (Regulatory) पैमानों से गुजरना पड़ता है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो स्टेयरमेड टेक्नोलॉजी की इस वैस्कुलर ब्रेन चिप तकनीक का परीक्षण अभी तक केवल भेड़ों (Sheep) पर ही सफलतापूर्वक किया गया है। अभी तक इस विशेष 10 मिनट की तकनीक के लिए इंसानों पर बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू नहीं किए गए हैं।चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हालांकि इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया को 10 मिनट में पूरा करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की पूरी मेडिकल प्रक्रिया में मरीज की गहन जांच, न्यूरो-इमेजिंग, सटीक प्लेसमेंट और सर्जरी के बाद की लंबी मॉनिटरिंग शामिल होती है। इसके अलावा, मस्तिष्क के अंदर लंबे समय तक विदेशी डिवाइस के रहने से किसी प्रकार की सूजन, रक्त के थक्के जमने (Blood Clots) या अन्य न्यूरोलॉजिकल प्रभावों का अध्ययन करना भी बेहद जरूरी है। बीजिंग के शुआनवू अस्पताल के डॉक्टरों ने जरूर कुछ अन्य वेनस साइनस आधारित वैस्कुलर तकनीकों के शुरुआती मानव क्लीनिकल अध्ययन शुरू कर दिए हैं और यह भी बताया है कि यदि जरूरत पड़े तो इस डिवाइस को ऑपरेशन के एक महीने के भीतर सुरक्षित रूप से बाहर भी निकाला जा सकता है। कुल मिलाकर, यह तकनीक भले ही अभी शुरुआती रिसर्च और एक्सपेरिमेंटल फेज में हो, लेकिन आने वाले समय में यह न्यूरोलॉजी और चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत करने की पूरी क्षमता रखती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 7:59 am

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

एनालॉग पनीर एक कृत्रिम या नकली पनीर है, जो पारंपरिक तरीके से शुद्ध दूध को फाड़कर नहीं बनाया जाता। यह केवल पनीर जैसा दिखने, कटने और स्वाद देने वाला एक विकल्प (Substitute) है। इसे बनाने के लिए असली दूध के फैट की जगह स्किम्ड मिल्क पाउडर, पाम ऑयल या ...

वेब दुनिया 13 Aug 2026 4:03 pm

क्या आप भी गलत समय पर खा रहे हैं केला? सुबह, रात या खाली पेट, जानिए सेहत के लिए केला खाने का सबसे सही वक्त

फलों का राजा कहे जाने वाला केला (Banana) एक ऐसा सुपरफूड है जो एनर्जी से भरपूर होता है और शरीर को तुरंत ताकत देने का काम करता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले लोग हों या कामकाजी पेशेवर, हर कोई अपनी डाइट में केले को जरूर शामिल करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेहतमंद माना जाने वाला केला यदि गलत समय पर खा लिया जाए, तो यह फायदे की जगह शरीर को भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है? लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि क्या सुबह खाली पेट केला खाना सही है या रात के वक्त इसका सेवन करना चाहिए? आइए हेल्थ एक्सपर्ट्स से जानते हैं केला खाने का सबसे सही और सटीक समय कौन सा है।सुबह खाली पेट केला खाना कितना सही या खतरनाक?अक्सर लोग सुबह की भागदौड़ में जल्दबाजी के चक्कर में ब्रेकफास्ट के रूप में खाली पेट केला खा लेते हैं, ताकि तुरंत एनर्जी मिल सके। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खाली पेट कभी भी केला नहीं खाना चाहिए। केले में नेचुरल शुगर और मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। जब इसे खाली पेट खाया जाता है, तो शरीर में अचानक मैग्नीशियम और शुगर का स्तर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे दिल से जुड़ी समस्याएं और पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा जिन लोगों को एसिडिटी या पेट से जुड़ी दिक्कतें हैं, उन्हें खाली पेट केला खाने से गैस और कब्ज की शिकायत हो सकती है।क्या रात के समय केला खाना चाहिए?रात के वक्त केला खाने को लेकर भी लोगों के मन में तमाम तरह की शंकाएं रहती हैं। आयुर्वेद और मॉडर्न डाइटिशियन के अनुसार, रात के समय या सोने से ठीक पहले केले का सेवन करने से बचना चाहिए। केला पचने में थोड़ा भारी होता है और इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है। रात के समय इसे खाने से कफ, सर्दी-जुकाम और पाचन से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थ या सांस की तकलीफ है, उनके लिए रात में केला खाना नुकसानदायक साबित हो सकता है, क्योंकि यह गले में बलगम बढ़ा सकता है।जानिए केला खाने का सबसे सही और असरदार समयअब सवाल यह उठता है कि आखिर केला खाने का सबसे परफेक्ट टाइम कौन सा है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वर्कआउट (Workout) करने से ठीक पहले या वर्कआउट के बाद केला खाना सबसे बेहतरीन माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। इसके अलावा आप इसे दिन के समय स्नैक्स के रूप में, दोपहर के भोजन के बाद या ब्रेकफास्ट के साथ खा सकते हैं। दिन के वक्त मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे केला आसानी से पच जाता है और शरीर को इसके सभी पोषक तत्व बिना किसी साइड-इफेक्ट के मिल जाते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Aug 2026 1:05 pm

बारिश के मौसम में क्यों बढ़ रहे हैं खांसी-जुकाम और त्वचा रोग? डॉक्टर ने खोले चौंकाने वाले कारण और बताए बचाव के अचूक तरीके

झमाझम बारिश का मौसम अपने साथ चिलचिलाती गर्मी से तो राहत लेकर आता है, लेकिन यह अपने साथ कई तरह की सेहत से जुड़ी परेशानियां भी साथ लाता है। मानसून के इस सुहावने मौसम में इन दिनों हर घर में सर्दी, खांसी, जुकाम, वायरल बुखार और फंगल इन्फेक्शन जैसी त्वचा की बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। आखिर इस मौसम में अचानक से बीमारियां क्यों बढ़ जाती हैं और इससे बचने के लिए हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, इस बारे में जाने-माने डॉक्टरों ने बेहद अहम खुलासे और सलाह दी हैं।क्यों मानसून आते ही बढ़ जाती है खांसी, जुकाम और वायरल बीमारियां?स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के मौसम में हवा में नमी (Humidity) का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस उमस भरे और नम वातावरण में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं। जब हम सांस लेते हैं या दूषित हवा और पानी के संपर्क में आते हैं, तो ये रोगाणु आसानी से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके अलावा लगातार भीगने या मौसम में अचानक होने वाले बदलाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हो जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम और गले के संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।त्वचा रोगों और फंगल इन्फेक्शन के बढ़ने की असली वजहखांसी-जुकाम के साथ-साथ इस सीजन में स्किन एलर्जी और त्वचा रोगों के मामले रिकॉर्ड तोड़ रूप से बढ़ रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि बारिश के गंदे पानी में लगातार पैर भीगने, कपड़ों के ठीक से न सूखने और शरीर में नमी बने रहने के कारण रिंगवर्म (दाद), खुजली और एक्जिमा जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। पसीना और नमी मिलकर त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे बैक्टीरिया आसानी से पनपने लगते हैं और स्किन इंफेक्शन का शिकार बन जाते हैं।इन आसान तरीकों से करें बचाव और रहें हमेशा फिटइस मानसून खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ रखने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। हमेशा उबला हुआ या शुद्ध पेयजल पिएं ताकि पेट के संक्रमण से बचा जा सके। बारिश में भीगने से बचें और यदि भीग जाएं तो घर पहुंचते ही साफ पानी से नहाकर खुद को पूरी तरह सुखा लें। अपनी डाइट में विटामिन सी से भरपूर फल, तांत्रिक सब्जियां और गर्म काढ़े को शामिल करें ताकि इम्युनिटी मजबूत बनी रहे। यदि त्वचा से जुड़ी कोई भी समस्या शुरू हो, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और घरेलू नुस्खों के चक्कर में न पड़ें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Aug 2026 1:04 pm

अंडा और चिकन से भी दस गुना ज्यादा ताकतवर है यह सुपरफूड, प्रोटीन और मिनरल्स का खजाना देख हैरान रह जाएंगे आप

भागदौड़ भरी आज की इस लाइफस्टाइल में हर कोई खुद को फिट और सेहतमंद रखने के लिए तमाम तरह के जतन करता है। शरीर को ताकतवर बनाने और मसल्स मजबूत करने की बात जब भी आती है, तो सबसे पहले लोगों की जुबान पर अंडा (Egg) और चिकन (Chicken) का नाम आता है। जिम जाने वाले लोग हों या फिटनेस फ्रीक, प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए इन्हीं चीजों पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शाकाहारी और प्राकृतिक आहार में एक ऐसा चमत्कारी सुपरफूड छिपा है, जिसमें अंडा और चिकन से भी कई गुना ज्यादा प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं? आइए जानते हैं इस अद्भुत आहार के बारे में जो आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।क्यों जरूरी है शरीर के लिए भरपूर प्रोटीन और मिनरल्स?हमारे शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों के विकास और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए प्रोटीन सबसे मुख्य पोषक तत्व माना जाता है। इसके अलावा आयरन, कैल्शियम, जिंक और विभिन्न मिनरल्स इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। अक्सर लोगों को लगता है कि नॉन-वेज फूड्स के बिना शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल सकता, जिस वजह से वे शाकाहारी विकल्पों को लेकर असमंजस में रहते हैं। लेकिन प्रकृति ने हमें ऐसे कई बेहतरीन विकल्प दिए हैं जो पोषण के मामले में मांसाहारी खाद्य पदार्थों को भी पीछे छोड़ देते हैं।कौन सा है वह सुपरफूड जो देता है अंडे-चिकन से ज्यादा पोषण?हेल्थ एक्सपर्ट्स और डायटीशियन के अनुसार, विभिन्न प्रकार के स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज), सोयाबीन और कुछ विशेष प्रकार के सीड्स (जैसे चिया और कद्दू के बीज) शाकाहारी डाइट में प्रोटीन का पावरहाउस माने जाते हैं। विशेष तौर पर सोया चंक्स और भुने हुए चने या स्प्राउटेड मूंग-चना का सेवन शरीर को वह ताकत देता है जो चिकन और अंडे खाने से मिलती है, बल्कि कई मामलों में इनमें कैलोरी की मात्रा संतुलित होती है जो वजन नियंत्रित करने में भी मदद करती है। इनमें मौजूद प्लांट-बेस्ड प्रोटीन पचने में आसान होते हैं और शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं।आज ही अपनी डाइट में करें शामिल और पाएं गजब की ऊर्जायदि आप भी अपनी सेहत में सुधार करना चाहते हैं और बिना किसी साइड-इफेक्ट के अपने शरीर को फौलादी ताकत देना चाहते हैं, तो अपनी डेली डाइट में इन सुपरफूड्स को जरूर जगह दें। सुबह के नाश्ते में अंकुरित अनाज या सोया से बनी चीजों का सेवन आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखेगा। सही खानपान और नियमित जीवनशैली अपनाकर आप लंबे समय तक स्वस्थ और निरोगी रह सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Aug 2026 1:03 pm

Monsoon Health Tips: क्या बरसात में कम पानी पीना सही है? जानें एक्सपर्ट की राय

Risk of Dehydration in Rainy Season: अक्सर आपने सुना होगा कि बरिश के मौसम में डिहाइड्रेशन नहीं होता। इस बात में कितनी सच्चाई है, आइए जानते हैं।

अमर उजाला 13 Aug 2026 11:58 am

Independence Day Recipe: 15 अगस्त पर दोपहर के खाने को बनाएं खास, ऐसे तैयार करें तिरंगा लंच

Tricolor Food Ideas: 15 अगस्त पर दोस्तों या परिवार के साथ लंच करना है, तो देशभक्ति के रंग अपनी खाने की प्लेट पर भी नजर आ सकते हैं। दोपहर के लंच में ऐसी डिशेज को शामिल करें जो स्वादिष्ट तो हों ही, साथ ही तिरंगे के रंग से सजी हों।

अमर उजाला 13 Aug 2026 11:17 am

Dengue Alert: डेंगू में प्लेटलेट्स का गिरना कितना खतरनाक? इन संकेतों से समझें गंभीरता

Dengue Warning Signs: आपने अक्सर सुना होगा कि डेंगू में प्लेटलेट्स काफी तेजी से गिरती हैं। ये स्थिति कब आती है और कितनी खतरनाक होती है, आइए जानते हैं। हम आपको प्लेटलेट्स बढ़ाने के तरीके भी यहां बताएंगे।

अमर उजाला 13 Aug 2026 10:55 am

Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस से पहले खुद को दें फिटनेस की आजादी, रोज करें ये 7 आसान योगासन

Independence Day 2026 से पहले फिटनेस रूटीन शुरू करें। जानिए रोज करने वाले 7 आसान योगासन, सही तरीका, फायदे, सावधानियां और 10-15 मिनट की आसान योग रूटीन।

अमर उजाला 13 Aug 2026 10:35 am

World Organ Donation Day: यहां जानें अंगदान से जुड़े 4 बड़े सवालों के जवाब, इन मिथकों पर अब न करें भरोसा

World Organ Donation Day 2026: अंगदान से जुड़ी कई मिथ्या को लोग आज भी सच मान लेते हैं। आज हम आपसे ऐसी की कुछ गलत अफवाहों के बारे में बात करेंगे, ताकि आप उनकी सच्चाई जान सकें।

अमर उजाला 13 Aug 2026 10:01 am

सुबह उठते ही पिएं ये 5 बेहतरीन पेय पदार्थ, दिनभर बनी रहेगी तरोताजगी और ऊर्जा से भरपूर सेहत

भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और काम के बढ़ते तनाव के बीच अक्सर सुबह की शुरुआत थकान और सुस्ती के साथ होती है। कई लोग अपनी दिन की शुरुआत चाय या कॉफी के कप के साथ करते हैं, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए हमेशा फायदेमंद साबित नहीं होता। सुबह का समय हमारे शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि रातभर की रिकवरी के बाद हमारे मेटाबॉलिज्म को एक्टिव करने के लिए सही ईंधन की जरूरत होती है। यदि आप भी चाहते हैं कि आपका पूरा दिन ऊर्जावान, तरोताजा और तंदुरुस्त बीते, तो अपनी सुबह की दिनचर्या में कुछ खास और प्राकृतिक पेय पदार्थों को शामिल करना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे 5 बेहतरीन विकल्पों के बारे में जो आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।1. गुनगुना नींबू और शहद का पानीसुबह उठते ही गुनगुने पानी में आधा नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर पीना सबसे पुराने और असरदार नुस्खों में से एक है। नींबू में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जबकि शहद शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। यह ड्रिंक पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और वजन को नियंत्रित रखने में भी बेहद मददगार साबित होता है। इसे खाली पेट पीने से पेट साफ रहता है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है।2. डिटॉक्सिफाइंग ग्रीन टी या हर्बल टीअगर आपको सुबह-सुबह गर्म पेय पीने की आदत है, तो दूध वाली चाय की जगह ग्रीन टी या किसी अच्छी हर्बल टी का सेवन करना शुरू करें। ग्रीन टी में भरपूर मात्रा में कैटेचिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो मानसिक सतर्कता को बढ़ाते हैं और सुस्ती को दूर भगाते हैं। यह शरीर की चर्बी को कम करने और कोशिकाओं को फ्रेश रखने का काम करती है। दिनभर की भागदौड़ के लिए यह आपको अंदर से शांत और ऊर्जावान बनाए रखती है।3. नारियल पानी का ताजगी भरा अहसाससुबह खाली पेट नारियल पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटेशियम और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) को तुरंत दूर करते हैं। यदि आप सुबह उठकर भारीपन महसूस करते हैं या कमजोरी लगती है, तो एक गिलास ताजा नारियल पानी आपकी सारी थकान पलभर में गायब कर सकता है। यह दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा होता है और त्वचा में चमक बनाए रखता है।4. पुदीने और खीरे का डिटॉक्स वॉटरगर्मियों के दिनों में या शरीर को ठंडा रखने के लिए पुदीने की पत्तियों और खीरे के टुकड़ों को पानी में भिगोकर रखा गया डिटॉक्स वॉटर एक बेहतरीन विकल्प है। पुदीना पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है और मुंह की फ्रेशनेस बनाए रखता है, जबकि खीरा शरीर को हाइड्रेट रखता है। सुबह के समय इस पानी को पीने से शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं और पाचन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं, जिससे आप दिनभर हल्का और तरोताजा महसूस करते हैं।5. हल्दी और अदरक की खास हर्बल चायआयुर्वेद में हल्दी और अदरक को औषधीय गुणों का खजाना माना गया है। सुबह के वक्त गुनगुने पानी में थोड़ी सी घिसी हुई अदरक और चुटकी भर हल्दी उबालकर पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) मजबूत होती है। अदरक पाचन को सुधारता है और जोड़ों के दर्द या सूजन से राहत दिलाता है, जबकि हल्दी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है। यह ड्रिंक आपको अंदरूनी ताकत देता है और मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से बचाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Aug 2026 8:13 am

सेब खाने से पहले सावधान! क्या इन लोगों के लिए सचमुच जहर के समान है यह फल? जानिए इसके चौंकाने वाले सच और जरूरी बातें

सेब को दुनिया भर में एक बेहद स्वास्थ्यवर्धक और गुणकारी फल माना जाता है। अंग्रेजी में एक मशहूर कहावत भी है कि एन एप्पल ए डे, कीप्स द डॉक्टर अवे यानी रोज एक सेब खाने से डॉक्टर से दूर रहा जा सकता है। इसमें मौजूद विटामिंस, फाइबर्स और एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही सेहतमंद फल कुछ खास लोगों के लिए खतरनाक या यूं कहें कि नुकसानदायक साबित हो सकता है? सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में अक्सर ऐसी खबरें सामने आती हैं कि कुछ लोगों के लिए सेब का सेवन जहर के समान हो सकता है। आइए इस बात की पूरी सच्चाई जानते हैं कि आखिर यह किन लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है।सेब के बीज और उससे जुड़ा बड़ा सचसेब के फल में तो कोई जहर नहीं होता, लेकिन इसके अंदर मौजूद बीज कई मायनों में खतरनाक साबित हो सकते हैं। सेब के बीजों में एमिग्डालिन (Amygdalin) नामक एक प्राकृतिक रसायन पाया जाता है, जो जब हमारे पेट के पाचक एंजाइम्स के संपर्क में आता है, तो यह हाइड्रोजन साइनाइड में बदल जाता है। साइनाइड एक बेहद जहरीला पदार्थ है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति गलती से एक-दो बीज निगल लेता है, तो शरीर उसे आसानी से डिटॉक्स कर लेता है और कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन अगर कोई जानबूझकर बड़ी मात्रा में सेब के बीजों को पीसकर या चबाकर खा ले, तो यह उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए यह चेतावनी दी जाती है कि सेब खाते समय इसके बीजों को कभी नहीं चबाना चाहिए।किन स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को रहना चाहिए सतर्कआम लोगों के लिए सेब भले ही अमृत समान हो, लेकिन कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को इसका सेवन बहुत सावधानी से या डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। जिन लोगों को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या गंभीर एसिडिटी की शिकायत रहती है, उनके लिए सेब में मौजूद फ्रुक्टोज और फाइबर कई बार पचने में मुश्किल हो जाते हैं। इसके कारण पेट में भारीपन, गैस, ऐंठन और सूजन जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा, जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें भी डॉक्टर द्वारा बताए गए निश्चित मात्रा में ही सेब का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें नेचुरल शुगर पाई जाती है।सेब से होने वाली एलर्जी और अन्य सावधानियांकई लोगों को विशेष प्रकार के फलों से फूड एलर्जी होती है। बर्च पोलन (Birch pollen) एलर्जी से पीड़ित कुछ लोगों को सेब खाने से मुंह में खुजली, गले में खराश या होंठों पर सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसे ओरल एलर्जी सिंड्रोम कहा जाता है। ऐसे लोगों के लिए भी कच्चा सेब खाना परेशानी का सबब बन सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि सेब सचमुच किसी के लिए मौत का परवाना है, बल्कि यह इस बात की ओर इशारा करता है कि अति हर चीज की बुरी होती है और हर किसी का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है।सुरक्षित तरीके से सेब खाने के उपायअगर आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं, तो रोजाना एक सेब खाना आपके दिल और पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद है। बस आपको कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए। सेब खाने से पहले उसे हमेशा साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उसकी सतह पर मौजूद कीटनाशकों और मोम के अवशेष निकल जाएं। सेब खाते समय हमेशा उसके छिलके को साफ कर सकते हैं यदि आपको पाचक संबंधी समस्या है, और इसके बीजों को हमेशा बाहर थूक दें। यदि आपको किसी भी प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी है, तो अपनी डाइट में किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Aug 2026 8:12 am

एक शक्तिशाली फल जो दिल के दौरे से बचाता है, महीने में एक बार खाने से दूर हो जाती हैं रक्त वाहिकाओं की रुकावटें

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खानपान के कारण दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कम उम्र में ही लोगों को हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अपने दिल को स्वस्थ रखना और धमनियों में जमा होने वाले बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना बेहद जरूरी हो गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हमारी डाइट में कुछ ऐसे चमत्कारी और शक्तिशाली फल शामिल होते हैं जो न केवल हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, बल्कि नसों की ब्लॉकेज को साफ करने में भी असरदार साबित होते हैं। आज हम एक ऐसे ही खास फल के बारे में बात कर रहे हैं जिसे सही तरीके से डाइट में शामिल करने से दिल की सेहत पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।दिल की सेहत के लिए क्यों खतरनाक है नसों में ब्लॉकेजजब हमारे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) की मात्रा बढ़ने लगती है, तो वह धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं यानी धमनियों की दीवारों पर जमने लगता है। इस स्थिति को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है, जिसके कारण रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है। जब दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट आ जाती है, तो दिल का दौरा पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस गंभीर समस्या से बचने के लिए लोग तमाम तरह की दवाइयों और महंगे उपचारों का सहारा लेते हैं, लेकिन प्राकृतिक रूप से खानपान में सुधार करके भी इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। ऐसे में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स से भरपूर फल वरदान साबित होते हैं।कौन सा है वह शक्तिशाली फल और उसके गुणआयुर्वेदिक और आधुनिक स्वास्थ्य शोधों के अनुसार, अनार (Pomegranate) को एक बेहद शक्तिशाली और चमत्कारी फल माना गया है। अनार में भरपूर मात्रा में पॉलीफिनोल्स, एंथोसायनिन और प्यूनिकैलगिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और धमनियों की सूजन को कम करते हैं। यह फल नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ावा देता है, जिससे रक्त वाहिकाएं चौड़ी होती हैं और रक्त संचार सुचारू रूप से चलता है। नियमित रूप से या संतुलित तरीके से इस फल का सेवन करने से धमनियों में जमी प्लाक और रुकावटों को धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से साफ करने में मदद मिलती है।क्या महीने में एक बार खाने से दूर हो जाती है रुकावटयह एक आम धारणा है कि किसी भी फल को सिर्फ एक बार खाने से दिल की बड़ी से बड़ी बीमारी या नसों की ब्लॉकेज रातों-रात छूमंतर हो जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सेहतमंद दिल के लिए निरंतरता बहुत जरूरी है। हालांकि, अनार जैसे शक्तिशाली फलों को अपनी डाइट में नियमित रूप से शामिल करने से रक्त वाहिकाओं की सफाई प्रक्रिया तेज हो जाती है और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। यदि कोई व्यक्ति यह सोचता है कि महीने में सिर्फ एक बार इस फल को खाने से सारी रुकावटें दूर हो जाएंगी, तो यह वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। इसके लिए एक स्वस्थ जीवनशैली, सही खानपान और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।दिल को स्वस्थ रखने के लिए अन्य जरूरी सावधानियांकेवल एक फल के भरोसे रहने से दिल की गंभीर बीमारियों से पूरी तरह बचाव नहीं किया जा सकता। अपने दिल को सुरक्षित रखने के लिए तली-भुनी और पैकेटबंद चीजों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, रोजाना कम से कम तीस मिनट टहलना, योग या प्राणायाम करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि ये आदतें सीधे तौर पर दिल की नसों को कमजोर करती हैं। अपने डॉक्टर की सलाह समय-समय पर लेते रहें और किसी भी गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Aug 2026 8:11 am

20 साल से ऊपर हैं तो हर 6 महीने कराएं किडनी की जांच: स्वास्थ्य समिति ने क्यों दी यह बड़ी सलाह?

भारत में क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD) के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल सुधार समिति ने एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली सिफारिश जारी की है। समिति ने सुझाव दिया है कि 20 वर्ष से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को वर्ष में दो बार यानी हर 6 महीने में अपनी किडनी (गुर्दे) की बुनियादी जांच जरूर करानी चाहिए। अब तक किडनी की बीमारियों को 50 या 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की समस्या माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में 20 से 40 वर्ष के युवाओं में किडनी डैमेज के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।20 की उम्र के बाद क्यों जरूरी है नियमित किडनी जांच? समिति के फैसले की मुख्य वजहेंस्वास्थ्य समिति के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली, खान-पान में आए बदलाव और तनाव के कारण युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और टाइप-2 डायबिटीज की समस्या बहुत कम उम्र में शुरू हो रही है। डायबिटीज और उच्च रक्तचाप किडनी खराब होने के दो सबसे बड़े कारण हैं। जब शरीर में शर्करा का स्तर बढ़ा रहता है या खून का दबाव अधिक होता है, तो यह किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Glomeruli) को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है।इसके अतिरिक्त, युवाओं में बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) खाने की आदत, अत्यधिक सप्लीमेंट्स का सेवन, पैकेज्ड फूड में सोडियम की अधिकता और पानी कम पीने की आदतें गुर्दों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं। समिति का मानना है कि यदि 20 साल की उम्र से ही नियमित जांच शुरू कर दी जाए, तो किडनी की बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़कर पूर्ण डैमेज से बचाया जा सकता है।'साइलेंट किलर' है किडनी की बीमारी: 80-90% फंक्शन बिगड़ने तक नहीं दिखते स्पष्ट लक्षणगुर्दे की बीमारी को 'साइलेंट किलर' (घास में छुपा सांप) कहा जाता है। मानव शरीर में दो किडनी होती हैं, जो काफी हद तक डैमेज होने के बावजूद अपने काम को संभालती रहती हैं। जब तक दोनों किडनियां 70 से 80 प्रतिशत तक खराब नहीं हो जातीं, तब तक इंसान को कोई गंभीर शारीरिक लक्षण या दर्द महसूस नहीं होता।जब मरीज को उल्टी, पैरों में सूजन, सांस फूलना या कम भूख लगने जैसे स्पष्ट लक्षण दिखने शुरू होते हैं, तब तक बीमारी अंतिम चरणों (Stage 4 या Stage 5) में पहुंच चुकी होती है, जहां मरीज के पास केवल डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) ही विकल्प बचता है। हर 6 महीने में जांच कराने से इस घातक स्थिति से आसानी से बचा जा सकता है।युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ रहा है किडनी डैमेज का खतरा?पेनकिलर्स (NSAIDs) और एंटासिड का अत्यधिक सेवन: सिरदर्द, बदन दर्द या हल्का बुखार होने पर बिना सोचे-समझे काउंटर से पेनकिलर्स खरीदकर खाना किडनी के लिए जहर के समान साबित हो रहा है।गलत खान-पान और पैकेज्ड फूड: प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद अतिरिक्त नमक, प्रिजर्वेटिव्स और प्यूरीन गुर्दों पर टॉक्सिक असर डालते हैं।जिम सप्लीमेंट्स और हाई प्रोटीन डाइट: विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लिए बिना बाजार में मिलने वाले घटिया प्रोटीन पाउडर और स्टेरॉयड का सेवन युवाओं के गुर्दों को समय से पहले फेल कर रहा है।डिहाइड्रेशन और पानी की कमी: दिन भर में पर्याप्त पानी न पीने से किडनी शरीर के विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे पथरी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।हर 6 महीने में कौन-कौन से टेस्ट कराने का दिया गया है सुझाव?समिति ने यह स्पष्ट किया है कि हर 6 महीने में बहुत महंगे या जटिल टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं है। केवल दो से तीन बहुत सस्ते और आसान टेस्ट के माध्यम से किडनी की सेहत का पूरा रिपोर्ट कार्ड सामने आ जाता है:सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine Test): यह एक साधारण ब्लड टेस्ट है। क्रिएटिनिन शरीर का एक वेस्ट प्रोडक्ट है। यदि रक्त में इसका स्तर बढ़ता है, तो इसका सीधा मतलब है कि किडनी इसे सही ढंग से फ़िल्टर नहीं कर पा रही है।इस्टीमेटेड जीएफआर (eGFR): सीरम क्रिएटिनिन के आधार पर eGFR की गणना की जाती है, जिससे यह पता चलता है कि आपकी किडनी कितने प्रतिशत क्षमता से काम कर रही है।यूरीन एल्ब्यूमिन / प्रोटीन टेस्ट (Urine Albumin Test): स्वस्थ किडनी पेशाब के रास्ते प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) को बाहर नहीं जाने देती। यदि पेशाब की जांच में प्रोटीन लीक होता मिलता है, तो यह किडनी डैमेज का सबसे पहला शुरुआती संकेत होता है।ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच: नियमित रूप से बीपी और शुगर की निगरानी करना बेहद जरूरी है।शुरुआती संकेत जिन्हें भूलकर भी न करें नजरअंदाजयद्यपि शुरुआती दौर में लक्षण कम दिखते हैं, फिर भी शरीर कुछ छोटे-छोटे संकेत अवश्य देता है:सुबह उठने पर आंखों के नीचे या चेहरे पर सूजन आना।पैरों, टखनों या हाथों में शाम के समय सूजन (Edema) दिखाई देना।पेशाब में बहुत अधिक झाग बनना या पेशाब का रंग गहरा होना।रात में बार-बार पेशाब करने जाना।बिना किसी कारण के लगातार थकान, कमजोरी और भूख में कमी महसूस होना।स्वस्थ किडनी के लिए जीवनशैली में करें ये जरूरी बदलावसमिति ने जांच के साथ-साथ बचाव के लिए कुछ बुनियादी आदतों को अपनाने की सलाह दी है:दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी अवश्य पीएं।भोजन में ऊपर से नमक डालने से बचें और सोडियम की मात्रा सीमित रखें।बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी भी प्रकार की दर्द निवारक दवा का सेवन न करें।प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या पैदल चलना दिनचर्या में शामिल करें।यदि परिवार में किसी को डायबिटीज या किडनी रोग का इतिहास रहा है, तो जांच के प्रति और अधिक सतर्क रहें।स्वास्थ्य समिति का मानना है कि हर 6 महीने में एक बार कराया गया मामूली सा टेस्ट किसी भी युवा को भविष्य की बड़ी और खर्चीली मेडिकल इमरजेंसी से सुरक्षित रख सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Aug 2026 4:02 pm

Protein Maxxing Trend: क्या प्रोटीन मैक्सिंग ट्रेंड शरीर के लिए फायदेमंद है? हाई प्रोटीन डाइट का सच जानें

Protein Maxxing Trend Kya Hai: आज के समय में युवा अपनी सेहत को लेकर काफी सजग रहते हैं। ऐसे में वो ज्यादा प्रोटीन का सेवन करना पसंद करते हैं। पर, ये कितना सही है, आइए इस बारे में जानते हैं।

अमर उजाला 12 Aug 2026 12:58 pm

त्वचा पर लौट आएगी 16वें साल जैसी चमक! जवां दिखने और मन को तरोताजा रखने के लिए रोज सुबह पीएं बस 1 कटोरा यह जादुई चीज

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अस्वस्थ जीवनशैली के बीच हर कोई चाहता है कि उसकी त्वचा हमेशा बेदाग, ग्लोइंग और जवां बनी रहे। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स और महंगे स्किन केयर ट्रीटमेंट्स पर हजारों रुपये खर्च करने के बावजूद कई बार मनचाहा निखार नहीं मिल पाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद का मानना है कि असली खूबसूरती और जवानी बाहरी क्रीमों से नहीं, बल्कि अंदरूनी पोषण से आती है। यदि आप भी बढ़ती उम्र के लक्षणों को पीछे छोड़ना चाहते हैं और चेहरे पर टीनएज जैसी नेचुरल चमक पाना चाहते हैं, तो अपनी रसोई में मौजूद एक खास देसी चीज को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बना लें। रोजाना सुबह बस एक कटोरा इस खास चीज का सेवन आपकी काया को पूरी तरह से बदल सकता है।स्किन को अंदर से पोषण देती है यह नेचुरल डाइटहमारी त्वचा और मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारे खान-पान से होता है। जब शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और हेल्दी फैट्स मिलते हैं, तो ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। नियमित रूप से इस खास पोषक तत्व से भरपूर रेसिपी का सेवन करने से त्वचा की कोशिकाओं (Skin Cells) की मरम्मत तेजी से होती है, जिससे झुर्रियां, फाइन लाइन्स और चेहरे का ढीलापन धीरे-धीरे गायब होने लगता है। इसके साथ ही यह मानसिक तनाव को कम कर मन को पूरे दिन ऊर्जावान और शांत रखने में भी बेहद मददगार साबित होता है।ऐसे करें तैयार और अपनाएं सही सेवन का तरीकाइस जादुई और सेहतमंद चीज को अपनी डाइट में शामिल करना बेहद आसान है। आप इसे अपनी पसंद के अनुसार ताजे फलों, ड्राई फ्रूट्स, अंकुरित अनाजों (Sprouts) या आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से तैयार कर सकते हैं। इसे बनाने का सबसे सही समय सुबह खाली पेट या नाश्ते के रूप में माना जाता है। नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक इसका सेवन करने से न केवल आपकी त्वचा पर 16 साल की उम्र जैसी प्राकृतिक चमक और कसाव लौटने लगेगा, बल्कि आपका पाचन तंत्र और संपूर्ण स्वास्थ्य भी पूरी तरह से दुरुस्त हो जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Aug 2026 12:49 pm

सावन आते ही क्यों बदल जाता है खान-पान? बैंगन और दही से दूरी बनाने की वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

पवित्र सावन का महीना शुरू होते ही चारों तरफ हरियाली, उत्साह और भक्ति का माहौल छा जाता है। मंदिरों की घंटियों और गूंजते मंत्रोच्चार के बीच इस महीने का एक और अहम पहलू होता है, जो हमारी रसोई और खान-पान की थाली से जुड़ा होता है। सावन का महीना आते ही घरों में लहसुन-प्याज से लेकर कई खास सब्जियों और खाद्य पदार्थों जैसे कि बैंगन और दही का सेवन अचानक बंद कर दिया जाता है। आखिर सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे की वजह क्या है? क्या इसके पीछे सिर्फ धार्मिक मान्यताएं हैं या फिर इसके पीछे छिपा है कोई गहरा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य से जुड़ा राज? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी सच्चाई।सावन में क्यों छोड़ दी जाती हैं हरी सब्जियां और बैंगन?आयुर्वेदिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सावन का महीना साल का वह दौर होता है जब मानसून अपने चरम पर होता है और लगातार बारिश के कारण वातावरण में अत्यधिक नमी (Humidity) बढ़ जाती है। इस मौसम में नमी के कारण कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं, जो सब्जियों और पत्तों में आसानी से छिप जाते हैं। विशेष तौर पर बैंगन को लेकर यह माना जाता है कि बारिश के दिनों में बैंगन में कीड़े लगने की संभावना सबसे ज्यादा होती है, और यह पचने में भी बहुत भारी होता है, जिससे पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं और फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।दही और अन्य खान-पान से दूरी बनाने के वैज्ञानिक कारणधार्मिक मान्यताओं के अलावा सावन के महीने में खान-पान से जुड़े इन नियमों के पीछे ठोस आयुर्वेदिक कारण भी छिपे हुए हैं। आयुर्वेद के अनुसार, बरसात के इस मौसम में हमारी पाचन शक्ति (Digestion Power) प्राकृतिक रूप से काफी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण भारी और पचने में कठिन चीजें आसानी से नहीं पच पाती हैं। यही वजह है कि इस दौरान दही खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि दही की तासीर खट्टी और ठंडी होती है, जिससे मानसून में कफ, सर्दी-जुकाम और जोड़ों में दर्द की शिकायत बढ़ सकती है। इसके अलावा सात्विक भोजन अपनाने से शरीर की अंदरूनी सफाई होती है और मौसमी बीमारियों से बचाव रहता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Aug 2026 12:48 pm

कड़वा है पर सेहत का सुपरस्टार! मानसून में नीम का पानी पीने के अद्भुत फायदे, जो आपको रखेंगे एकदम फिट और एनर्जेटिक

मानसून का मौसम अपने साथ सुहाना मौसम और बारिश की फुहारें तो लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही यह अपने पीछे कई तरह की बीमारियां, संक्रमण और पेट से जुड़ी समस्याएं भी छोड़ जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस चिपचिपे और उमस भरे मौसम में अगर आप अपनी दिनचर्या में एक बेहद आसान सी चीज शामिल कर लें, तो कई गंभीर बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। हम बात कर रहे हैं आयुर्वेद में औषधीय गुणों की खान कहे जाने वाले नीम के पत्तों से तैयार पानी की। भले ही स्वाद में यह बेहद कड़वा होता है, लेकिन शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने और मानसून की बीमारियों से बचाने में यह किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है।मानसून में क्यों जरूरी है नीम के पानी का सेवन?बरसात के दिनों में हवा में नमी बढ़ जाने के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जिससे सर्दी-जुकाम, गले का संक्रमण और पेट के रोग होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसके अलावा गंदे पानी और खानपान की वजह से होने वाले स्किन इन्फेक्शन भी इस मौसम में आम हो जाते हैं। नीम के अंदर प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जब आप नियमित रूप से नीम के पानी का सेवन करते हैं, तो यह आपके शरीर के खून को साफ करने का काम करता है, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और मानसून के संक्रमण आपके आसपास भी नहीं फटकते हैं।ऐसे तैयार करें सेहतमंद नीम का पानी और जानें पीने का सही तरीकानीम के पानी को घर पर बनाना बेहद आसान है। इसके लिए आपको ताजे और साफ नीम के कुछ पत्तों की जरूरत होती है। इसे बनाने की सही विधि नीचे दी गई है:एक गिलास साफ पानी में लगभग 10 से 15 ताजे नीम के पत्ते अच्छी तरह से धोकर डाल लें।इस पानी को धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक पानी का रंग हल्का हरा न हो जाए और वह आधा न रह जाए।अब इस पानी को आंच से उतारकर ठंडा होने दें और फिर छानकर एक बोतल में सुरक्षित रख लें।बेहतर परिणामों के लिए इस पानी का सेवन सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य समस्या में इसका सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 12 Aug 2026 12:47 pm

Hariyali Teej 2026: तीज पर पति-पत्नी जरूर करें ये 5 काम, रिश्ते में बढ़ेगा प्यार

Teej Relationship Tips: पति तीज पर पत्नी की पसंद का छोटा सा उपहार दे सकते हैं, उसकी तारीफ कर सकते हैं, त्योहार की तैयारियों में मदद कर सकते हैं और कुछ समय सिर्फ उसके साथ बिताकर उसे खास महसूस करा सकते हैं।

अमर उजाला 12 Aug 2026 12:29 pm

Kuttu Atta Recipes: सिर्फ पूड़ी ही नहीं, कुट्टू के आटे से बनाएं ये स्वादिष्ट रेसिपीज, व्रत में भी आएंगी काम

Vrat Food Recipes: कुट्टू के आटे से सिर्फ पूड़ी ही नहीं, चीला, रोटी, डोसा, पकौड़े और हलवा भी बनाएं। जानिए व्रत के लिए इन आसान और स्वादिष्ट रेसिपीज का तरीका।

अमर उजाला 12 Aug 2026 11:54 am

Health Tips: कुल्हड़ वाली चाय सेहत के लिए लाभदायक या हानिकारक? बारिश में पीने से पहले जानें जरूरी बातें

Health Tips: बारिश का मौसम है, ऐसे में अगर कुल्हड़ वाली चाय मिल जाए तो बात ही बन जाती है। पर, क्या ये शरीर के लिए सही है ? आइए जानते हैं इस लेख में।

अमर उजाला 12 Aug 2026 11:50 am

Eating Saunf and Mishri: खाने के बाद सौंफ-मिश्री खाने से क्या होता है?

Benefits of Eating Saunf and Mishri: अक्सर आपने देखा होगा कि खाने के बाद लोग सौंफ और मिश्री खाने की सलाह देते हैं। इसके क्या फायदे होते हैं, आइे जानते हैं।

अमर उजाला 12 Aug 2026 10:02 am

International Youth Day 2026: आज है अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस; जानें इतिहास, थीम और महत्व

International Youth Day 2026: इस साल युवा दिवस12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाया जा रहा है। यह दिन युवाओं से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और उनकी सामाजिक, आर्थिक तथा विकास संबंधी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है।

अमर उजाला 12 Aug 2026 9:37 am

Eye Diseases: आंखों में रहती है ड्राइनेस और अंधेरे में कम दिखता है? जानिए आखिर क्यों हो रही है ये दिक्कत

विटामिन-ए की कमी को केवल आंखों की समस्या मानना सही नहीं होगा। इसकी गंभीर कमी होने पर आंखों में सूखापन, नाइट ब्लाइंडनेस और आगे चलकर कॉर्निया को गंभीर नुकसान तक हो सकता है।

अमर उजाला 12 Aug 2026 8:40 am

Hariyali Teej 2026 Surprise: हरियाली तीज पर पति को कैसे कराएं खास महसूस? ये छोटे-छोटे सरप्राइज जीत लेंगे दिल

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज पर पति को स्पेशल फील कराने के लिए अपनाएं ये 5 आसान और प्यारे सरप्राइज आइडिया। जानें बिना ज्यादा खर्च किए पति का दिल जीतने के तरीके।

अमर उजाला 11 Aug 2026 12:44 pm

World Organ Donation Day 2026: अंगदान से बच सकती है कई लोगों की जिंदगी, जानें इस दिन का महत्व और इतिहास

World Organ Donation Day 2026: अंगदान को सबसे बड़ा दान माना जाता है। ऐसे में इस दिन का महत्व लोगों को समझाने के लिए हर साल विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। यहां हम इस लेख में हम आपको बताएंगे इस दिन का महत्व और इतिहास।

अमर उजाला 11 Aug 2026 11:51 am

Sawan Shivratri Vrat Food: साबूदाना खिचड़ी से मखाना तक, 10 मिनट में तैयार करें सावन शिवरात्रि व्रत की थाली

Sawan Shivratri Vrat Food: सावन शिवरात्रि के उपवास में बनाएं साबूदाना खिचड़ी, मखाना, दही-आलू चाट समेत ये 5 फलाहारी व्यंजन। जानें 10 मिनट में व्रत की थाली तैयार करने का आसान तरीका।

अमर उजाला 11 Aug 2026 11:00 am

Newborn Baby Care: नवजात बच्चे में दिखें ये संकेत तो न करें नजरअंदाज, तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

Newborn Baby Care: अगर आपके घर पर भी नवजात बच्चा है तो आपको ये जानने की काफी जरूरत है कि ये कैसे पहचाने कि आपका बच्चा किसी परेशानी में है।

अमर उजाला 11 Aug 2026 10:49 am

Sawan Shivratri 2026 Wishes: आज है सावन शिवरात्रि, इन खास शुभकामनाओं के साथ कहें 'हर-हर महादेव'

Happy Sawan Shivrati: सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जा रही है। यह श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। इस मौके पर महादेव का नाम लेते हुए सभी को शिव मंत्रों के साथ शुभकामनाएं दें।

अमर उजाला 11 Aug 2026 10:39 am

Hariyali Teej Swing Decoration: इन आसान आइडियाज से सजाएं झूला, देखते रह जाएंगे सभी

Hariyali Teej Jhula Decoration Ideas: तीज पर झूला सजाने के 10 यूनिक आइडियाज जानें। फूल, लाइट्स, दुपट्टे, बेल और कुशन से घर को दें खूबसूरत फेस्टिव लुक।

अमर उजाला 11 Aug 2026 9:26 am

Health Tips: पीरियड्स के दर्द से लेकर पेट की परेशानी तक, महिलाओं के लिए बहुत कारगर है ये घरेलू औषधि

पीरियड्स की जटिलताओं के कारण महिलाओं को हर महीने कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार दर्द और क्रैंप्स इतने गंभीर हो जाते हैं कि उसमें पेन किलर्स भी लेना पड़ता है।

अमर उजाला 11 Aug 2026 8:40 am

सुबह उठते ही सिरदर्द: घरेलू नुस्खे आजमाएं या तुरंत पहुंचें डॉक्टर के पास

सुबह आंख खुलते ही होने वाला सिरदर्द एक बेहद आम लेकिन अत्यधिक परेशान करने वाली समस्या है। कई बार यह सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी की तरफ इशारा नहीं करता, बल्कि आपकी खराब जीवनशैली या दैनिक आदतों का नतीजा होता है। अच्छी बात यह है कि इस तरह की सामान्य परेशानियों को अक्सर अपनी दिनचर्या और रहन-सहन में थोड़ा सुधार करके बिना किसी डॉक्टर की मदद के ठीक किया जा सकता है। हालांकि, अगर सुबह उठने पर सिरदर्द की शिकायत लगातार बनी रहती है, तो यह किसी अंदरूनी शारीरिक समस्या या न्यूरोलॉजिकल परेशानी का संकेत हो सकता है, जिस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की सख्त जरूरत होती है। आइए जाने-माने न्यूरोसर्जन की इस गाइड से विस्तार से समझते हैं कि सुबह का सिरदर्द कब सामान्य होता है और कब इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।सुबह उठते ही क्यों होता है सिरदर्द, प्रमुख वजहेंयदि आपको अक्सर सुबह उठते ही सिरदर्द का सामना करना पड़ता है, तो इसके पीछे कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), रात में पर्याप्त और गहरी नींद न लेना, अत्यधिक मानसिक तनाव, तथा सोते समय शरीर की गलत या असहज मुद्रा इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ अन्य बुरी आदतें जैसे सोने से ठीक पहले अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करना, रात का खाना यानी डिनर स्किप कर देना, या दिनभर में जरूरत से ज्यादा कैफीन (चाय या कॉफी) का सेवन करना भी सुबह के सिरदर्द को न्योता देता है। कई मामलों में इंसोम्निया (अनिद्रा) या स्लीप डिसऑर्डर जैसी स्थितियां भी सुबह के वक्त होने वाले तेज सिरदर्द का बड़ा कारण बनती हैं।सामान्य सिरदर्द से राहत पाने के आसान उपायअपनी दैनिक आदतों और खानपान में थोड़े से सकारात्मक बदलाव करके सुबह होने वाले अधिकांश सामान्य सिरदर्दों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिए नीचे दिए गए सुझावों को अपना सकते हैं:सोने और जागने का एक निश्चित और फिक्स शेड्यूल बनाएं।दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।सुबह के समय एक हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता जरूर करें।तनाव को कम करने के लिए योग, मेडिटेशन या गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।शराब और कॉफी के सेवन को सीमित करें।सोते समय अपनी गर्दन और रीढ़ की हड्डी को आराम देने वाले सही तकिए का इस्तेमाल करें।किन लक्षणों वाले सिरदर्द को भूलकर भी न करें नजरअंदाजसुबह के समय होने वाले सभी सिरदर्द सामान्य नहीं होते। यदि सिरदर्द के साथ आपको कुछ खास लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। इनमें रोजाना लगातार सिरदर्द होना, आंखों से धुंधला दिखाई देना, बार-बार उल्टी या मिचली आना, भ्रम की स्थिति पैदा होना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, अंगों का सुन्न पड़ जाना, या बोलने में कठिनाई होना शामिल है। ये सभी खतरनाक लक्षण हाई ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, स्लीप एपनिया या किसी गंभीर ब्रेन डिसऑर्डर की ओर इशारा करते हैं। यदि सिरदर्द इतना तेज हो कि आपकी नींद खुल जाए, कोई भी घरेलू नुस्खा असर न दिखाए, या सिरदर्द की समस्या रोज की बन जाए, तो तुरंत किसी योग्य न्यूरोसर्जन या डॉक्टर से परामर्श करना बेहद जरूरी है।स्लीप एपनिया और मेडिकल जांच की जरूरतजो लोग 'स्लीप एपनिया' जैसी गंभीर मेडिकल कंडीशन से पीड़ित होते हैं, वे अक्सर सुबह के समय सिरदर्द के साथ-साथ रात में तेज खर्राटे लेने, दिनभर अत्यधिक थकान व नींद महसूस होने, तथा सोते समय अचानक सांस रुकने जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इस तरह के मामलों में घरेलू नुस्खे काम नहीं आते, बल्कि विशेष चिकित्सीय इलाज की आवश्यकता होती है। डॉक्टर सिरदर्द के पैटर्न को गहराई से समझकर और स्थिति सामान्य न लगने पर ब्लड टेस्ट, ब्लड प्रेशर की जांच, स्लीप स्टडी, तथा आवश्यकता पड़ने पर सीटी स्कैन (CT Scan) या एमआरआई (MRI) जैसे आधुनिक टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं, ताकि सिरदर्द की असली जड़ का पता लगाया जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Aug 2026 5:46 pm

क्रांतिकारी तकनीक: अब रियल-टाइम में लाइव देखी जा सकेंगी जीवित कैंसर कोशिकाएं, दवाओं पर ट्यूमर की प्रतिक्रिया का चलेगा सटीक पता

चिकित्सा विज्ञान ने पिछले कुछ दशकों में अनगिनत उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन आज भी अधिकांश वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में कोशिकाओं का अध्ययन उन्हें केमिकल के माध्यम से फिक्स या नष्ट करने के बाद ही किया जाता है। इस पारंपरिक तरीके से किसी भी गतिशील और जटिल जैविक प्रक्रिया की केवल एक रुकी हुई तस्वीर या मृत अंश ही हाथ लग पाता है। जरा सोचिए कि अगर वैज्ञानिक कैंसर की कोशिकाओं को बिल्कुल जीवित अवस्था में, अपनी आंखों के सामने रियल-टाइम में लाइव ट्रैक कर सकें, तो मेडिकल रिसर्च में कितनी बड़ी क्रांति आ जाएगी। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि जल्द ही हकीकत बनने जा रही एक ऐसी तकनीक है जो कैंसर के खिलाफ लड़ाई और नई दवाओं की खोज के पूरे समीकरण को बदलकर रख सकती है।कैंसर के इलाज और ड्रग्स की प्रतिक्रिया को समझने में मिलेगी मदददुनियाभर के शोधकर्ता और वैज्ञानिक इन दिनों एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक को विकसित करने में दिन-रात जुटे हैं, जिसकी मदद से जीवित कैंसर कोशिकाओं और ट्यूमर के विकास को सीधे रियल-टाइम में देखा जा सकेगा। मेडिकल और ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में यह एक अभूतपूर्व मील का पत्थर साबित होगा। इस नई तकनीक के जरिए वैज्ञानिकों को यह लाइव देखने और गहराई से समझने में मदद मिलेगी कि ट्यूमर शरीर के अंदर कैसे पनपता, फैलता और बढ़ता है, तथा अलग-अलग दवाओं के इस्तेमाल पर वह किस तरह की प्रतिक्रिया या प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) दिखाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमेडिकल रिसर्च के इतिहास में जीवित कोशिकाओं के व्यवहार को लाइव ट्रैक करना ही शोध का अगला सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण अध्याय है।कैंसर कोशिकाओं को लाइव देखना क्यों है बेहद जरूरीकैंसर की बीमारी का इलाज करना मेडिकल साइंस के लिए आज भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कैंसर कोशिकाएं बेहद शातिर होती हैं और लगातार अपना रूप, स्वभाव और जेनेटिक सरंचना बदलती रहती हैं। ये खतरनाक कोशिकाएं शरीर के अंदरूनी माहौल के अनुसार खुद को पल-पल ढाल लेती हैं और कई बार डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली कीमोथेरेपी या अन्य दवाइयों के खिलाफ खुद को मजबूत कर प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती हैं। यही कारण है कि पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर इन कोशिकाओं का लाइव अध्ययन करना अनिवार्य हो गया है, ताकि इनकी हर हरकत, बदलाव और कमजोरी को बेहद करीब से ट्रैक किया जा सके।चार आधुनिक विज्ञानों के संगम से तैयार हो रहा है गेम-चेंजर प्लेटफॉर्मइस दिशा में सैन फ्रांसिस्को स्थित एक अग्रणी बायोटेक स्टार्ट-अप 'प्रीसिजेनिटिक्स' (Precigenetics) ने एक ऐतिहासिक पहल की है। कंपनी की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) परमिता मिश्रा ने मीडिया से साझा करते हुए बताया कि उनकी विशेषज्ञ टीम एक ऐसा क्रांतिकारी तकनीकी प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है, जो कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में पूरी तरह से गेम-चेंजर साबित होगा। इस नए प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए जीवित कोशिकाओं को बिना किसी केमिकल रंग, लेबुलिंग या नमूने को नष्ट किए सीधे माइक्रोस्कोपिक स्तर पर लाइव देखा जा सकेगा। यह आधुनिक तकनीक मुख्य रूप से विज्ञान की इन चार प्रमुख शाखाओं को आपस में जोड़ती है:रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी (Raman Spectroscopy)फोटोनिक्स (Photonics)माइक्रोफ्लुइडिक्स (Microfluidics)कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी (Computational Biology)इन अत्याधुनिक तकनीकों के अनूठे और शक्तिशाली संगम से जीवित कोशिकाओं के अंदर चल रही वास्तविक जैव रासायनिक गतिविधियों की सटीक जानकारी रियल-टाइम में हासिल की जा सकेगी। विज्ञान की यह अनूठी सफलता आने वाले समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ मानवता का सबसे बड़ा और अचूक हथियार बनकर उभरेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Aug 2026 5:43 pm

सिर्फ 10 मिनट में घर पर बनाएं केले का यह क्रीमी और हेल्दी डेजर्ट: बिना चीनी के मिलेगा बाजार जैसी आइसक्रीम का स्वाद

अक्सर रात के खाने के बाद या दिन में कुछ मीठा (Dessert) खाने की इच्छा होती है। लेकिन बाजार की मिठाइयों या आइसक्रीम में मौजूद अत्यधिक चीनी, मैदा और प्रिजर्वेटिव्स सेहत और वजन के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं। अगर आपके घर में पके हुए केले रखे हैं, तो आप बिना किसी झंझट के केवल 10 मिनट में एक बेहद स्वादिष्ट, क्रीमी और न्यूट्रिशियस डेजर्ट तैयार कर सकते हैं। केला प्राकृतिक मिठास से भरपूर होता है, जिससे इसमें अलग से चीनी मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती। पोटैशियम, फाइबर और विटामिन्स से भरपूर यह 'बनाना चीया पुडिंग व नो-शुगर बनाना नाइस-क्रीम' बड़ों से लेकर बच्चों तक सभी को खूब पसंद आती है। आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान विधि और सामग्री।आवश्यक सामग्री (Ingredients)पके हुए केले: 2 बड़े (फ्रीजर में 2 घंटे के लिए जमे हुए - Frozen Bananas)चीया सीड्स (Chia Seeds): 2 बड़े चम्मच (आधे कप पानी/दूध में 15 मिनट भीगे हुए)दूध या बादाम का दूध (Milk/Almond Milk): 1/2 कपशहद या खजूर का सिरप (ऑप्शनल): 1 छोटा चम्मचकोको पाउडर या डार्क चॉकलेट: 1 बड़ा चम्मच (चॉकलेट फ्लेवर के लिए)ड्राई फ्रूट्स: कटे हुए बादाम, अखरोट और पिस्ता (गार्निशिंग के लिए)अनार के दाने या बेरीज: सजावट के लिएबनाने की आसान विधि (Step-by-Step Recipe)केले को ब्लेंड करें: जमे हुए (फ्रोजन) केलों को छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें। इन्हें मिक्सी या फूड प्रोसेसर के जार में डालें। इसमें 1/2 कप ठंडा दूध और कोको पाउडर (यदि चॉकलेट स्वाद पसंद हो) मिलाएं।क्रीमी टेक्सचर बनाएं: मिक्सी को 1-2 मिनट तक चलाएं जब तक कि केले पूरी तरह से स्मूथ और गाढ़े सॉफ्ट-सर्व आइसक्रीम जैसे टेक्सचर में न बदल जाएं।लेयरिंग (Layering) करें: एक सुंदर कांच का गिलास या सर्विंग बाउल लें। सबसे नीचे पहले से भीगे हुए चीया सीड्स की एक लेयर लगाएं।डेजर्ट को सेट करें: चीया सीड्स के ऊपर ब्लेंड किए हुए ठंडे और क्रीमी बनाना मिक्स की दूसरी लेयर डालें। यदि चाहें तो इसके ऊपर थोड़े कटे हुए ताजे केले के टुकड़े भी रख सकते हैं।गार्निश और सर्व करें: ऊपर से बारीक कटे हुए बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज और अनार के दानों से गार्निश करें। मिठास बढ़ाने के लिए ऊपर से थोड़ा सा शहद ड्रिजल (छिड़क) कर सकते हैं।ठंडा सर्व करें: आपकी झटपट, बिना चीनी और बिना पकाए (No-Cook) तैयार होने वाली 'हेल्दी बनाना डेजर्ट' तैयार है। इसे तुरंत ठंडा-ठंडा सर्व करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Aug 2026 4:57 pm

उम्र बढ़ने के बावजूद दिमाग रहेगा कंप्यूटर की तरह तेज: डाइट में शामिल करें ये 6 ब्रेन-बूस्टिंग सुपरफूड्स, दूर रहेगी भूलने की बीमारी

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग की सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो गया है। दिनभर का अत्यधिक काम, मानसिक तनाव, नींद की कमी और अस्वस्थ खान-पान के कारण कम उम्र में ही लोगों को भूलने की बीमारी, ध्यान केंद्रित न कर पाना (Lack of Focus) और मानसिक थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिस तरह हमारे दिल और मांसपेशियों को सही पोषण की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह हमारे मस्तिष्क (Brain) को भी सुचारू रूप से काम करने के लिए खास पोषक तत्वों जैसे—ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स की आवश्यकता होती है। न्यूट्रिशनिस्ट्स और न्यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, यदि आप अपनी रोजमर्रा की डाइट में कुछ सुपरफूड्स को शामिल कर लें, तो आप अपनी याददाश्त (Memory Power) को तेज बना सकते हैं और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली अल्जाइमर जैसी अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। आइए जानते हैं दिमाग को हेल्दी और सुपर-एक्टिव रखने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थों के बारे में।1. अखरोट और बादाम (Walnuts & Almonds)सूखे मेवे (नट्स) दिमाग की सेहत के लिए सबसे उत्तम माने जाते हैं, और इनमें भी अखरोट (Walnuts) सबसे आगे है। इत्तेफाक से अखरोट की बनावट भी इंसान के दिमाग जैसी ही होती है।अखरोट: अखरोट में भरपूर मात्रा में 'अल्फा-लिनोलेनिक एसिड' (DHA युक्त ओमेगा-3 फैटी एसिड) पाया जाता है। डीएचए (DHA) मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और याददाश्त को मजबूत करने में मदद करता है।बादाम: बादाम में विटामिन-ई (Vitamin E) की प्रचुर मात्रा होती है, जो उम्र के साथ दिमाग के ढलने की प्रक्रिया को धीमा करता है और फ्री-रेडिकल्स से मस्तिष्क की कोशिकाओं का बचाव करता है। रोजाना 4-5 भीगे हुए बादाम और अखरोट खाना बेहद फायदेमंद है।2. फैटी फिश (Fatty Fish - ओमेगा-3 का खजाना)शाकाहारी लोगों के अलावा जो लोग नॉन-वेज खाते हैं, उनके लिए फैटी फिश जैसे—साल्मन, ट्रॉट और सार्डिन दिमाग का सबसे बेहतरीन खाना हैं।ओमेगा-3 का रोल: हमारे दिमाग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा फैट से बना होता है, और उस फैट का आधा हिस्सा ओमेगा-3 प्रकार का होता है।फायदे: ओमेगा-3 मस्तिष्क की नई कोशिकाओं (Brain Cells) के निर्माण में मदद करता है, जिससे सीखने की क्षमता और याददाश्त बढ़ती है। जो लोग नियमित रूप से मछली का सेवन करते हैं, उनमें डिप्रेशन और मानसिक तनाव की संभावना कम पाई जाती है।3. कद्दू के बीज और अलसी (Pumpkin & Flax Seeds)कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds) छोटे जरूर होते हैं, लेकिन ये दिमाग के लिए शक्तिशाली पोषक तत्वों का भंडार हैं।जिंक और मैग्नीशियम: कद्दू के बीजों में जिंक, मैग्नीशियम, कॉपर और आयरन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। जिंक नसों के संकेतों (Nerve Signaling) को बेहतर बनाता है, जिससे सोचना और फैसले लेना आसान होता है।मैग्नीशियम और कॉपर: मैग्नीशियम तनाव को कम करके मूड को बेहतर रखता है और अल्जाइमर जैसे न्यूरोलॉजिकल विकारों से रक्षा करता है।4. हरी पत्तेदार सब्जियां और ब्रोकोली (Green Leafy Vegetables & Broccoli)पालक, मेथी, सरसों और ब्रोकोली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां मस्तिष्क के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।विटामिन-के और ल्यूटिन: ब्रोकोली और पालक में विटामिन-के (Vitamin K), फोलेट, बीटा-कैरोटीन और ल्यूटिन जैसे तत्व पाए जाते हैं।स्मृति क्षमता बढ़ाएं: रिसर्च के मुताबिक, रोजाना हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से दिमागी उम्र घटने की रफ्तार धीमी हो जाती है और सोचने-समझने की क्षमता लंबे समय तक युवाओं जैसी बनी रहती है।5. डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate)यदि आप चॉकलेट के शौकीन हैं, तो डार्क चॉकलेट (कम से कम 70% कोको युक्त) आपके दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है।फ्लेवोनॉयड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स: डार्क चॉकलेट में पाए जाने वाले 'फ्लेवोनॉयड्स' दिमाग के उन हिस्सों में जमा होते हैं जो सीखने और याददाश्त से जुड़े होते हैं।ब्लड फ्लो में सुधार: यह मस्तिष्क तक रक्त के प्रवाह को बढ़ाती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही, यह एंडोर्फिन हार्मोन को बढ़ाकर तनाव और चिंता को कम करती है।6. ब्लूबेरी और खट्टे फल (Blueberries & Citrus Fruits)एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल दिमाग को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन (Inflammation) से बचाते हैं।एंथोसियानिन (Anthocyanin): ब्लूबेरी और जामुन में पाया जाने वाला यह एंटीऑक्सीडेंट ब्रेन सेल्स के बीच संचार (Communication) को बेहतर बनाता है।विटामिन-सी: संतरा, आंवला और नीबू में मौजूद विटामिन-सी मानसिक थकावट को दूर करता है और दिमाग को लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Aug 2026 4:55 pm

महिलाओं का मल्टीटास्किंग दिमाग और हार्मोनल बदलाव हैं मुख्य वजह: जानें पुरुषों की तुलना में महिलाओं को क्यों चाहिए 20 मिनट ज्यादा नींद

अक्सर आपने देखा होगा कि दिनभर के कामों के बाद महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा थकान महसूस करती हैं या उन्हें थोड़ी देर और सोने की इच्छा होती है। यदि आपको लगता है कि यह महज एक आलस है, तो आप पूरी तरह गलत हैं। न्यूरोलॉजिस्ट्स और स्लीप रिसर्च एक्सपर्ट्स के अनुसार, महिलाओं को पुरुषों की तुलना में हर रात औसतन 11 से 20 मिनट ज्यादा नींद की जरूरत होती है। अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो महिलाओं के मस्तिष्क की अनूठी बनावट, उनकी कार्यप्रणाली और शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव इसके मुख्य जिम्मेदार हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर महिलाओं को पुरुषों से अधिक नींद की जरूरत क्यों पड़ती है।1. महिलाओं का 'मल्टीटास्किंग' दिमाग (Multi-Tasking Brain)महिलाओं के अधिक नींद लेने का सबसे बड़ा और प्राथमिक कारण उनके दिमाग की जटिल बनावट है। महिलाएं एक ही समय में कई काम करने (मल्टीटास्किंग) में माहिर होती हैं। वे दिनभर अपने दिमाग के कई हिस्सों का एक साथ इस्तेमाल करती हैं—जैसे ऑफिस का काम, घर की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल और भविष्य की योजनाएं बनाना।जब दिमाग दिनभर इतना सक्रिय रहता है, तो उसकी न्यूरोनल कोशिकाओं को खुद को रिपेयर और रिकवर करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। नींद का मुख्य उद्देश्य दिमाग को तरोताजा करना और खुद को डिटॉक्स करना होता है। चूंकि महिलाएं अपने मस्तिष्क की ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल करती हैं, इसलिए उनके दिमाग को पूर्ण रिकवरी के लिए अतिरिक्त समय और गहरी नींद (Deep Sleep) की आवश्यकता होती है।2. हार्मोनल बदलाव और पीरियड्स का असरमहिलाओं के शरीर में जीवन के विभिन्न चरणों में हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव तेजी से होता है। मासिक धर्म (Periods), गर्भावस्था (Pregnancy) और रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स का स्तर लगातार बदलता रहता है।पीरियड्स: मासिक धर्म के दौरान शरीर में एंठन, ऐंठन और दर्द के कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे शरीर ज्यादा थका हुआ महसूस करता है।गर्भावस्था: प्रेगनेंसी के दौरान भ्रूण के विकास और शारीरिक वजन बढ़ने के कारण महिलाओं को अत्यधिक शारीरिक थकान होती है, जिसके लिए अतिरिक्त विश्राम की आवश्यकता होती है।मेनोपॉज: मेनोपॉज के दौरान 'हॉट फ्लैशेस' (अचानक गर्मी लगना) और रात में पसीना आने से नींद बार-बार टूटती है, जिससे अगली सुबह थकान बनी रहती है।3. मानसिक तनाव और एंक्वाइटी (Mental Stress & Anxiety)स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद (Depression), एंग्जायटी और मानसिक तनाव के मामले अधिक देखे जाते हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और करियर के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद में महिलाओं का दिमाग रात में भी शांत नहीं हो पाता, जिसे 'मेंटल लोड' (Mental Load) कहा जाता है।तनाव के कारण जब शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन का स्तर बढ़ता है, तो शरीर को आराम की मुद्रा में जाने में ज्यादा समय लगता है। पर्याप्त नींद न मिलने पर महिलाओं में मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा पुरुषों की तुलना में तेजी से बढ़ता है।4. नींद की खराब गुणवत्ता (Sleep Disruption)कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि भले ही महिलाएं बिस्तर पर उतना ही समय बिताएं जितना पुरुष, लेकिन उनकी नींद की गुणवत्ता (Quality of Sleep) अक्सर पुरुषों की तुलना में खराब होती है। छोटे बच्चों की देखभाल, नवजात शिशु को रात में दूध पिलाना, घर के काम या किसी परिजन की बीमारी के कारण महिलाओं की नींद रात में कई बार टूटती है। इस अधूरी या खंडित नींद (Fragmented Sleep) की भरपाई करने के लिए उनके शरीर को थोड़ी अतिरिक्त नींद की आवश्यकता होती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Aug 2026 4:52 pm

एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के बाद भी बना रहता है दिल का दौरा पड़ने का जोखिम: एक्सपर्ट्स से जानें दोबारा अटैक आने की वजहें और दिल को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय

आज के समय में हृदय रोग (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज) एक बेहद गंभीर और आम स्वास्थ्य समस्या बन चुके हैं। जब किसी व्यक्ति की कोरोनरी धमनी (हृदय तक खून ले जाने वाली नस) में ब्लॉकेज हो जाता है, तो डॉक्टर एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया के जरिए उसमें 'स्टेंट' (एक छोटी धातु की जालीदार ट्यूब) डालते हैं। स्टेंट नसों को खोलकर रक्त के प्रवाह को तुरंत बहाल कर देता है, जिससे मरीज की जान बच जाती है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि एक बार स्टेंट डल जाने के बाद उन्हें कभी दोबारा हार्ट अटैक नहीं आ सकता और उनका दिल हमेशा के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। कार्डियोलॉजिस्ट्स (हृदय रोग विशेषज्ञ) इस धारणा को पूरी तरह गलत मानते हैं। आइए एक्सपर्ट्स से विस्तार से समझते हैं कि स्टेंटिंग के बाद दोबारा हार्ट अटैक का खतरा क्यों बना रहता है और इससे बचने के लिए मरीज को किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।स्टेंटिंग के बाद भी क्यों आ सकता है दोबारा हार्ट अटैक?हृदय विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेंट कोई ऐसा इलाज नहीं है जो दिल की बीमारियों को जड़ से खत्म कर दे, बल्कि यह केवल एक बंद पड़ी नस को खोलने की एक यांत्रिक (मैकेनिकल) प्रक्रिया है। स्टेंट डलवाने के बाद भी मरीज को दोबारा हार्ट अटैक आने के दो मुख्य कारण होते हैं। पहला कारण है 'इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस' (In-Stent Restenosis)। इस स्थिति में जिस जगह पर स्टेंट लगाया गया है, वहां समय के साथ दोबारा नई टिश्यू ग्रोथ (ऊतक) होने लगती है या थक्का (क्लॉट) जमने लगता है, जिससे वही नस फिर से बंद हो जाती है।दूसरा और सबसे प्रमुख कारण है शरीर की अन्य नसों में नया ब्लॉकेज बनना। यदि मरीज अपनी जीवनशैली, खान-पान और आदतों में बदलाव नहीं करता, तो कोलेस्ट्रॉल और फैट (प्लाक) दिल की दूसरी नई नसों में जमा होने लगता है। जब ये नई नसें 70 से 90 प्रतिशत तक ब्लॉक हो जाती हैं या उनमें मौजूद प्लाक फट जाता है, तो मरीज को दोबारा गंभीर हार्ट अटैक का सामना करना पड़ सकता है।स्टेंट थ्रोम्बोसिस और दवाइयां छोड़ने का खतरास्टेंट डलवाने के शुरुआती कुछ हफ्तों या महीनों में 'स्टेंट थ्रोम्बोसिस' का खतरा सबसे ज्यादा होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें स्टेंट के अंदर अचानक खून का थक्का बन जाता है, जो पूरी तरह से ब्लड सप्लाई को रोक देता है। यह स्थिति बेहद जानलेवा साबित हो सकती है और इसके कारण तत्काल मैसिव हार्ट अटैक आ सकता है।डॉक्टर्स का कहना है कि स्टेंट थ्रोम्बोसिस होने का सबसे बड़ा कारण मरीजों द्वारा लापरवाही बरतना है। एंजियोप्लास्टी के बाद डॉक्टर मरीज को खून पतला करने वाली दवाइयां (एंटी-प्लेटलेट मेडिसिन) नियमित रूप से लेने की सख्त सलाह देते हैं। कई बार मरीज खुद को ठीक महसूस करने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना बंद कर देते हैं या खुराक छोड़ देते हैं। दवाइयां रोकने से खून गाढ़ा होने लगता है और स्टेंट के अंदर थक्का जमने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।एंजियोप्लास्टी के बाद दिल को सेहतमंद रखने के लिए एक्सपर्ट टिप्सयदि आपकी एंजियोप्लास्टी हुई है और स्टेंट लगा है, तो दोबारा हार्ट अटैक के खतरे को टालने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन बिना एक भी दिन मिस किए समय पर करें। अपनी जीवनशैली में तुरंत सुधार लाएं। अपने आहार से सैचुरेटेड फैट, तला-भुना खाना, अत्यधिक नमक, चीनी और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह हटा दें। इसके स्थान पर ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और ऑलिव ऑयल जैसी सेहतमंद चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें।धूम्रपान और शराब के सेवन से पूरी तरह दूरी बना लें, क्योंकि तंबाकू नसों में प्लाक जमाने की प्रक्रिया को बहुत तेज कर देता है। डॉक्टर की अनुमति से रोजाना 30 मिनट हल्की वॉक या योग करें ताकि ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहे। इसके अलावा, अपने ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल (डायबिटीज) और कोलेस्ट्रॉल को हमेशा नियंत्रण में रखें तथा समय-समय पर अपने कार्डियोलॉजिस्ट से फॉलो-अप चेकअप कराते रहें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Aug 2026 4:06 pm

गर्भावस्था में अचानक क्यों बढ़ जाता है ब्लड शुगर: एक्सपर्ट्स से जानें गेस्टेशनल डायबिटीज का असली कारण, लक्षण और इससे बचाव के आसान उपाय

गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक बेहद खूबसूरत और नाजुक दौर होता है। इस दौरान महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आते हैं। लेकिन कई बार इस अवधि में महिलाओं को कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें से एक है 'गेस्टेशनल डायबिटीज' यानी गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह। अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या प्रेगनेंसी के कारण डायबिटीज हो सकती है, जबकि उन्हें पहले कभी शुगर की बीमारी नहीं थी? स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्त्री रोग विशेषज्ञों (गायनेकोलॉजिस्ट्स) का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड शुगर का स्तर बढ़ना एक आम लेकिन गंभीर स्थिति है। आइए एक्सपर्ट्स से गहराई से समझते हैं कि आखिर गर्भावस्था में डायबिटीज क्यों होती है और इसका मां व होने वाले बच्चे पर क्या असर पड़ता है।प्रेगनेंसी में डायबिटीज क्यों होती है? जानें इसके पीछे की मुख्य वजहजब कोई महिला गर्भवती होती है, तो उसका शरीर भ्रूण के विकास और पोषण के लिए प्लेसेंटा (अपरा) का निर्माण करता है। यह प्लेसेंटा कई प्रकार के हार्मोन्स स्रावित करता है, जैसे कि ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन और एस्ट्रोजन। ये हार्मोन्स मां के शरीर में इंसुलिन के असर को कम करने लगते हैं। इंसुलिन वह हार्मोन है, जो हमारे रक्त में मौजूद ग्लूकोज (शर्करा) को कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा में बदलने का काम करता है।जब प्लेसेंटा के हार्मोन्स इंसुलिन के काम में रुकावट डालते हैं, तो इसे 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' कहा जाता है। सामान्य स्थिति में महिला का अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) इस प्रभाव से निपटने के लिए अधिक मात्रा में इंसुलिन का निर्माण करता है। लेकिन जब पैन्क्रियाज पर्याप्त मात्रा में अतिरिक्त इंसुलिन नहीं बना पाता, तो रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है। इसी स्थिति को डॉक्टरी भाषा में 'गेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस' (GDM) कहा जाता है। आमतौर पर यह समस्या गर्भावस्था की दूसरी या तीसरी तिमाही (24वें से 28वें हफ्ते) में अधिक देखने को मिलती है।किन महिलाओं में होता है गेस्टेशनल डायबिटीज का अधिक खतरा?हालांकि गेस्टेशनल डायबिटीज किसी भी गर्भवती महिला को हो सकती है, लेकिन कुछ महिलाओं में इसका जोखिम अधिक होता है। यदि महिला का वजन प्रेगनेंसी से पहले ही सामान्य से अधिक या मोटापा है, तो उसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, जिन महिलाओं के परिवार में पहले से टाइप-2 डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री रही हो, उन्हें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित महिलाओं, 30 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं या जिनकी पिछली प्रेगनेंसी में भी शुगर बढ़ा हुआ था, उनमें गेस्टेशनल डायबिटीज होने का खतरा काफी ज्यादा होता है। इसके अलावा, निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वस्थ खान-पान भी इसके मुख्य कारकों में शामिल हैं।मां और बच्चे की सेहत पर प्रभाव तथा बचाव के उपाययदि समय रहते गेस्टेशनल डायबिटीज को नियंत्रित न किया जाए, तो इसका असर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ सकता है। मां में हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एक्लैम्पसिया) और सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, होने वाले बच्चे का वजन सामान्य से काफी अधिक (मैक्रोसोमिया) हो सकता है, जिससे जन्म के समय कठिनाई आ सकती है। बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसका ब्लड शुगर अचानक कम होने (हाइपोग्लाइसीमिया) और भविष्य में उसे मोटापा व टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा भी रहता है।गेस्टेशनल डायबिटीज से बचाव और नियंत्रण के लिए नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह से ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (GTT) करवाएं। अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ, हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें तथा मीठे व मैदे से बनी चीजों से पूरी तरह परहेज करें। डॉक्टर की अनुमति से रोजाना हल्की वॉक या योग करें। ज्यादातर मामलों में संतुलित आहार और सक्रिय दिनचर्या से ब्लड शुगर नियंत्रित हो जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इंसुलिन की खुराक या दवाइयां दे सकते हैं। डिलीवरी के बाद आमतौर पर यह डायबिटीज अपने आप ठीक हो जाती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Aug 2026 3:58 pm

Health Tip: गैस, ब्लोटिंग और कब्ज से हैं परेशान? जानें कौन-से फूड बढ़ा सकते हैं समस्या और कौन देंगे राहत

Best And Worst Food: अगर आप पेट की समस्याओं से घिरे हुए हैं तो इस लेख को आखिर तक पढ़ें। हम आपको बताएंगे कि पेट की किस समस्या में क्या खाएं और क्या नहीं।

अमर उजाला 10 Aug 2026 12:46 pm

Teej Mela 2026: हरियाली तीज पर कहां लगता है सबसे बड़ा मेला? जयपुर से लेकर इन जगहों तक जानें पूरी लिस्ट

Hariyali Teej 2026: जानें भारत में हरियाली तीज पर कहां होते हैं भव्य आयोजन। जयपुर की तीज माता शाही सवारी, मंदिर पूजा, मेले और कजली तीज की पूरी जानकारी।

अमर उजाला 10 Aug 2026 12:32 pm

Earphone Side Effects: हमेशा हेडफोन लगाकर रखते हैं ? जान लें ये कितना सही है

Side Effects Of Using Earphone For Long Time: अगर आप उन लोगों में से हैं, जो हमेशा इयरबड, इयरफोन या फिर हेडफोन लगाकर रखते हैं, तो इस लेख को आखिर तक अवश्य पढ़ें।

अमर उजाला 10 Aug 2026 11:57 am

Cause of Skin Infection: बरसात में इन गलतियों की वजह से बढ़ जाता है स्किन इंफेक्शन, जानें बचाव के तरीके

Cause of Skin Infection: अक्सर लोग बारिश के मौसम में स्किन इंफेक्शन से परेशान रहते हैं। इसके पीछे की क्या वजह है, आइए जानते हैं।

अमर उजाला 10 Aug 2026 10:47 am

Hariyali Teej Drinks: हरियाली तीज पर घर आए मेहमानों को पिलाएं ये 6 ठंडी-ठंडी ड्रिंक्स, रेसिपी सेव कर लें

Teej Drink Recipes: हरियाली तीज पर बनाएं 6 स्पेशल ड्रिंक्स, जैसे केसर ठंडाई, गुलाब लस्सी, आम पन्ना, नींबू-पुदीना कूलर, जलजीरा और केसर दूध। जानें आसान रेसिपी और बनाने का तरीका।

अमर उजाला 10 Aug 2026 10:22 am

Experts Warning: क्या गर्दन पर परफ्यूम लगाना चाहिए? जानें एक्सपर्ट्स की जरूरी सलाह

Experts Warning: अक्सर आपने लोगों को ये कहते सुना होगा कि अगर चाहते हैं कि परफ्यूम की खुशबू देर तक टिके तो गर्दन पर इसे लगाना चाहिए। ये कितना सही है, आइए इस लेख में जानते हैं।

अमर उजाला 10 Aug 2026 9:45 am

Best Gift Idea For Wife: तीज पर पत्नी को दें ये 10 यादगार गिफ्ट्स, चेहरे पर आ जाएगी मुस्कान

Best Gift Idea For Wife: अगर आप हरियाली तीज के मौके पर आप अपनी पत्नी को तोहफा देना चाहते हैं तो यहां हम आपको 10 तोहफों के विकल्प देंगे।

अमर उजाला 9 Aug 2026 12:34 pm

मानसिक सेहत का राज: शरीर में इन 4 विटामिन्स की कमी बनती है डिप्रेशन की वजह, समय रहते पहचानें लक्षण और तुरंत बदलें डाइट

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में डिप्रेशन, चिंता और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अक्सर लोग मानसिक तनाव का कारण केवल काम का दबाव, नींद की कमी या भावनात्मक कारणों को मानते हैं। हालांकि, मेडिकल रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि कई बार डिप्रेशन के पीछे शरीर में कुछ खास पोषक तत्वों की कमी होती है। हमारे मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स, जो मूड और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं, उन्हें सुचारू रूप से काम करने के लिए विशिष्ट विटामिन्स की आवश्यकता होती है। यदि शरीर में इन चार विटामिन्स का स्तर गिर जाए, तो व्यक्ति धीरे-धीरे अवसाद (Depression) का शिकार हो सकता है।डिप्रेशन का खतरा बढ़ाने वाले 4 सबसे जरूरी विटामिन्सविटामिन D (सनशाइन विटामिन): यह विटामिन मस्तिष्क में सेरोटोनिन (हैप्पी हार्मोन) के निर्माण और उसके स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में विटामिन D का स्तर कम होने पर मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और मौसमी अवसाद (SAD) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।विटामिन B12 (कोबालमिन): यह न्यूरोलॉजिकल फंक्शन और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है। B12 की कमी से ब्रेन फॉग (सोचने में कठिनाई), याददाश्त कमजोर होना, अत्यधिक थकान और गहरा अवसाद हो सकता है। शाकाहारी लोगों में इसकी कमी अधिक देखी जाती है।विटामिन B9 (फोलेट / फोलिक एसिड): फोलेट मस्तिष्क में मूड को स्थिर रखने वाले केमिकल्स (जैसे डोपामाइन और सेरोटोनिन) को बनाने में मदद करता है। शरीर में फोलेट की कमी होने पर अवसाद के लक्षण तेजी से उभरते हैं और मरीजों पर एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं भी कम असरदार साबित होती हैं।विटामिन B6 (पाइरिडॉक्सिन): यह विटामिन सेरोटोनिन और जीएबीए (GABA) जैसे न्यूरोट्रांसमीटर्स के संश्लेषण के लिए जिम्मेदार है। B6 की कमी होने से व्यक्ति में घबराहट, एंग्जायटी, नींद न आना और मानसिक थकान जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।लक्षण और बचाव के आसान उपाययदि आप बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार उदासी, एकाग्रता में कमी, अकारण थकावट या चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं, तो केवल थेरेपी या दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपने ब्लड टेस्ट के जरिए विटामिन लेवल्स की जांच जरूर कराएं।सुबह की गुनगुनी धूप में 15-20 मिनट बिताना, डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, खट्टे फल, दूध, दही, पनीर, अंडे, नट्स, बीज (Seeds) और अंकुरित अनाज को शामिल करके इन विटामिन्स की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है। यदि कमी अधिक गंभीर है, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स लेना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Aug 2026 9:46 am

Hariyali Teej Recipes: घेवर से हो गए हैं बोर? इस तीज ट्राई करें ये 4 स्वादिष्ट और आसान मिठाइयां

Hariyali Teej Recipes: तीज पर इस बार घेवर से हटकर कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं तो आप चार नए विकल्प आजमा सकती हैं। ये मिठाइयां स्वादिष्ट होने के साथ बच्चों को भी पसंद आएंगी।

अमर उजाला 9 Aug 2026 9:26 am

Healthy Habits: सुबह की पहली गलती पड़ सकती है भारी, खाली पेट इन चीजों से रहें दूर वरना बढ़ सकती है मु्श्किल

सुबह का सबसे महत्वपूर्ण भोजन नाश्ता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, साबुत अनाज और अन्य पोषक तत्वों को शामिल करना लंबे समय तक पेट भरा रखने और संतुलित आहार का हिस्सा बनने में मदद कर सकता है।

अमर उजाला 9 Aug 2026 9:00 am

चाय में चुटकी भर नमक डालकर पीना फायदेमंद या खतरनाक? डॉक्टरों ने बताई चौंकाने वाली सच्चाई, जानें सेहत पर पड़ने वाला असर और किसे बचना चाहिए

भारत में चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा है। सुबह की शुरुआत से लेकर शाम की थकान मिटाने तक, चाय हर भारतीय घर में अलग-अलग तरीकों से बनाई और पी जाती है। अदरक, इलायची और तुलसी वाली चाय के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा, लेकिन पिछले कुछ समय से चाय में नमक (Salt in Tea) डालकर पीने का चलन और चर्चा तेजी से बढ़ी है। कुछ लोग चाय की कड़वाहट कम करने या स्वाद बढ़ाने के लिए उसमें चुटकी भर नमक मिलाते हैं, तो कुछ क्षेत्रों में नमकीन चाय (जैसे कश्मीर की नून चाय) पारंपरिक रूप से पी जाती है।लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या रोजाना सामान्य चाय में नमक डालकर पीना सेहत के लिए सही है? डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस आदत को लेकर कुछ चौंकाने वाली बातें और सावधानियां उजागर की हैं, जिन्हें जानना हर चाय प्रेमी के लिए बेहद जरूरी है।चाय में नमक मिलाने का वैज्ञानिक कारण और चलनस्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार, जीभ पर मौजूद स्वाद ग्रंथियों (Taste Buds) में कड़वाहट और नमकीन स्वाद को महसूस करने वाले रिसेप्टर्स होते हैं। जब आप कड़क चाय या ब्लैक टी में चुटकी भर नमक मिलाते हैं, तो नमक का सोडियम चाय की कड़वाहट को दबा देता है। यही वजह है कि कई लोग बिना चीनी की चाय में कड़वाहट कम करने के लिए नमक का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, भारत के पहाड़ी और ठंडे इलाकों में सदियों से नमकीन चाय (Kashmiri Noon Chai) पी जाती है, जो शरीर को गर्मी और इलेक्ट्रोलाइट्स प्रदान करने के लिए मानी जाती है।हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि पारंपरिक तरीके से सही सामग्री के साथ बनाई गई नमकीन चाय और रोजमर्रा की दूध-चीनी वाली चाय में ऊपर से नमक मिलाकर पीना, इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है।डॉक्टर की चेतावनी: चाय में नमक डालकर पीने के 4 बड़े नुकसाननेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और डाइटिशियंस का मानना है कि दूध और चीनी वाली सामान्य चाय में रोजाना नमक मिलाकर पीना आपके शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। डॉक्टरों ने निम्नलिखित 4 गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति आगाह किया है:1. ब्लड प्रेशर (BP) और दिल के रोगों का खतराचाय में पहले से ही कैफीन (Caffeine) मौजूद होता है, जो रक्त वाहिकाओं को संकुचित करके ब्लड प्रेशर को अस्थायी रूप से बढ़ाता है। जब आप इसमें ऊपर से नमक मिला लेते हैं, तो सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है। कैफीन और सोडियम का यह कॉम्बिनेशन हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।2. किडनी पर बढ़ता है काम का अतिरिक्त बोझहमारे शरीर में सोडियम और पानी का संतुलन बनाए रखने का काम किडनी करती है। जब आप चाय के साथ बार-बार नमक का सेवन करते हैं, तो शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ता है। इससे किडनी को अतिरिक्त पानी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक ऐसा करने से वॉटर रिटेंशन (शरीर में पानी जमना) और किडनी स्टोन या किडनी डैमेज की समस्या हो सकती है।3. पाचन तंत्र में गड़बड़ी और एसिडिटी की समस्यादूध, कैफीन और नमक का संयोजन पेट के पीएच लेवल (pH Level) को बिगाड़ सकता है। दूध में मौजूद प्रोटीन (केसीन) और नमक जब एक साथ पेट में जाते हैं, तो कुछ लोगों में एसिडिटी, ब्लोटिंग (पेट फूलना), गैस और सीने में जलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। खाली पेट नमकीन चाय पीने से पेट की अंदरूनी परत में सूजन भी आ सकती है।4. हड्डियों की मजबूती पर बुरा असरअत्यधिक सोडियम का सेवन शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बाधित करता है। जब शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ती है, तो अतिरिक्त सोडियम के साथ यूरिन के रास्ते शरीर से कैल्शियम भी बाहर निकलने लगता है। इससे धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।क्या कभी चाय में नमक मिलाना फायदेमंद हो सकता है?डॉक्टरों के अनुसार, हर परिस्थिति में चाय में नमक नुकसानदेह नहीं होता। कुछ विशेष परिस्थितियों में सीमित मात्रा में चुटकी भर नमक मिलाना फायदेमंद भी हो सकता है:इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति: अत्यधिक गर्मी या भारी वर्कआउट के बाद जब शरीर से पसीने के रूप में नमक बाहर निकल जाता है, तब ब्लैक टी या नींबू वाली चाय में चुटकी भर काला नमक या सेंधा नमक डालकर पीने से शरीर को तुरंत इलेक्ट्रोलाइट्स मिलते हैं।गले की खराश और कफ में राहत: काली मिर्च, लौंग और सेंधा नमक मिलाकर बनाई गई हर्बल चाय (काढ़ा) गले के इंफेक्शन और कफ को शांत करने में मदद करती है।पारंपरिक नून चाय: कश्मीरी नून चाय में बेकिंग सोडा, खास चाय की पत्तियां और दूध मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है, जो ठंडे मौसम में शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक होती है।किन लोगों को भूलकर भी नहीं पीनी चाहिए नमकीन चाय?स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे लोगों को अपनी चाय में नमक मिलाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए:हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के मरीज: ऐसे लोगों के लिए अतिरिक्त नमक किसी भी रूप में जहर समान है।किडनी और दिल की बीमारी से पीड़ित लोग: जिन्हें डॉक्टरों ने सोडियम की मात्रा सीमित करने की सलाह दी है।गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान शरीर में सूजन (Swelling) और बीपी बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए नमकीन चाय से बचना चाहिए।गंभीर एसिडिटी या अल्सर के मरीज: जिन लोगों को पेट में अल्सर या लगातार एसिड रिफ्लक्स की शिकायत रहती है।स्वस्थ तरीके से चाय पीने के डॉक्टर के सुझावयदि आप चाय के शौकीन हैं और अपनी सेहत को नुकसान से बचाना चाहते हैं, तो इन आसान टिप्स को जरूर अपनाएं:दिन भर में 2 कप से ज्यादा चाय न पिएं।सुबह उठते ही सबसे पहले खाली पेट चाय पीने की आदत बदलें, पहले एक गिलास गुनगुना पानी पिएं।चाय में साधारण सफेद नमक की जगह यदि कभी आवश्यकता हो तो केवल चुटकी भर सेंधा नमक या काला नमक ही इस्तेमाल करें।चाय में अत्यधिक चीनी या ज्यादा देर तक उबाली गई कड़क दूध वाली चाय से बचें।चाय का आनंद तभी तक है जब तक यह आपकी सेहत को नुकसान न पहुंचाए। स्वाद के चक्कर में अपनी रोजमर्रा की चाय में नमक मिलाने की आदत बनाने से पहले अपने डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह जरूर लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Aug 2026 4:15 pm

Kidney Damage Causes: आपकी ये 5 आदतें चुपचाप किडनी को कर रही हैं बेकार, डॉक्टरों ने दी सख्त चेतावनी, जानें शुरुआती लक्षण और बचाव के आसान उपाय

हमारे शरीर में किडनी (गुर्दा) एक साइलेंट फिल्टर की तरह काम करती है, जो दिन-रात खून को साफ करके विषाक्त पदार्थों (Toxins) और अतिरिक्त पानी को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है। लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खान-पान और अनजाने में की जाने वाली कुछ दैनिक गलतियों के कारण किडनी की बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नेफ्रोलॉजिस्ट (Kidney Specialists) के अनुसार, किडनी की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह 70 से 80 प्रतिशत तक खराब होने के बाद भी स्पष्ट संकेत नहीं देती। यही वजह है कि इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। अक्सर जब लोगों को समस्या का अहसास होता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि हमारी रोजमर्रा की 5 आम आदतें किडनी को धीरे-धीरे छलनी कर रही हैं।किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण और चेतावनी संकेतकिडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए तो किडनी को फेलियर के खतरे से बचाया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों में पैरों, टखनों और आंखों के नीचे सूजन आना (Edema) सबसे प्रमुख है, क्योंकि जब किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकाल पाती तो वह पानी टिश्यू में जमने लगता है। इसके अलावा अचानक बहुत कम या बहुत ज्यादा बार यूरिन आना, यूरिन में झाग (Foam) बनना या खून आना, हर समय अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना, भूख कम लगना, जी मिचलाना और त्वचा में लगातार तेज खुजली होना भी किडनी में खराबी के स्पष्ट संकेत हैं। खून में टॉक्सिन्स बढ़ने के कारण मुंह से बदबू आना और सांस लेने में तकलीफ होना भी गंभीर अवस्था को दर्शाता है।डॉक्टर की चेतावनी: आपकी ये 5 दैनिक गलतियां जो किडनी को कर रही हैं बेकारनेफ्रोलॉजिस्ट की मानें तो किडनी खराब होने के पीछे कोई एक वजह नहीं होती, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कई छोटी-छोटी गलतियां मिलकर किडनी के नेफ्रॉन्स (फिल्टर यूनिट्स) को नष्ट कर देती हैं। यदि आप अपनी किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इन 5 गलतियों को तुरंत सुधारना बेहद जरूरी है:1. बहुत कम पानी पीना (Dehydration)किडनी का मुख्य काम शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालना है, और इस काम के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। जब आप कम पानी पीते हैं, तो शरीर में यूरिक एसिड और टॉक्सिन्स जमने लगते हैं। इससे न केवल किडनी स्टोन (पथरी) का खतरा बढ़ता है, बल्कि किडनी की खून को साफ करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। हालांकि, अत्यधिक पानी पीना भी सही नहीं है, लेकिन एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।2. पेनकिल्स का अंधाधुंध और लगातार इस्तेमालहल्के सिरदर्द, बदन दर्द या जोड़ों के दर्द में बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से पेनकिलर (Painkillers/NSAIDs) खरीदकर खा लेना बहुत खतरनाक आदत है। इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनेक और पैरासिटामोल जैसी दवाओं का अत्यधिक या लंबे समय तक सेवन किडनी के ब्लड फ्लो को कम कर देता है। डॉक्टरों की चेतावनी है कि खुद से दवा लेने (Self-Medication) की यह आदत धीरे-धीरे एक्यूट या क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का कारण बन जाती है।3. यूरिन (पेशाब) को ज्यादा देर तक रोके रखनाकाम की व्यस्तता या आलस के कारण अगर आप भी यूरिन को लंबे समय तक रोककर रखते हैं, तो यह सीधे आपकी किडनी पर दबाव डालता है। यूरिन रोकने से मूत्राशय (Bladder) में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) हो जाता है। जब यह इंफेक्शन ऊपर की ओर बढ़ता है, तो यह किडनी इंफेक्शन (Pyelonephritis) का रूप ले लेता है, जिससे किडनी के सेल्स हमेशा के लिए डैमेज हो सकते हैं।4. डाइट में अत्यधिक नमक और चीनी का सेवनजरूरत से ज्यादा नमक (Sodium) खाने से शरीर में वाटर रिटेंशन बढ़ता है और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। ठीक इसी तरह, भोजन में बहुत ज्यादा चीनी या मीठी चीजों का सेवन करने से डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ता है। दुनिया भर में किडनी फेलियर का सबसे पहला और बड़ा कारण अनियंत्रित डायबिटीज (Diabetic Nephropathy) ही है।5. नींद की कमी, स्मोकिंग और अत्यधिक शराब का सेवनसोते समय हमारी किडनी के टिश्यू अपने आप को रिपेयर और रीजनरेट करते हैं। जब आप रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद नहीं लेते हैं, तो किडनी का रिपेयरिंग फंक्शन प्रभावित होता है। इसके अलावा, स्मोकिंग (धूम्रपान) करने से किडनी में खून का प्रवाह धीमा पड़ जाता है, और अत्यधिक शराब पीने से शरीर डिहाइड्रेट होकर किडनी पर काम का बोझ बढ़ा देता है।किडनी को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये जरूरी नियमकिडनी को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव करना जरूरी है। सबसे पहले अपने ब्लड प्रेशर (120/80 mmHg) और ब्लड शुगर लेवल को पूरी तरह नियंत्रण में रखें। अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, नारियल पानी और कम नमक वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या हल्की कसरत जरूर करें। यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है या परिवार में किसी को डायबिटीज या बीपी की समस्या रही है, तो साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), क्रिएटिनिन (Creatinine) और यूरिन रूटीन टेस्ट जरूर करवाएं।समय पर दी गई सही जानकारी और सुधरी हुई जीवनशैली आपकी किडनी को जीवनभर दुरुस्त रख सकती है। यदि आपको अपने शरीर में कोई भी अस्वाभाविक बदलाव दिखे, तो घरेलू उपायों के चक्कर में न पड़कर तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Aug 2026 4:14 pm

ख़राब पेट से मानसिक तनाव हमारा जीवन बर्बाद

डिप्रेशन पेट से किसी संक्रमण की तरह फैलता नहीं है, लेकिन पेट (Gut) और दिमाग (Brain) का सीधा संबंध होता है

खास खबर 8 Aug 2026 4:01 pm

हर मच्छर का अपना 'फेवरेट' इंसान! 119 लोगों पर हुई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

अगर आपको लगता है कि मच्छर आपको दूसरों से ज्यादा काटते हैं, तो हो सकता है कि आप किसी खास प्रजाति के मच्छर के 'फेवरेट' हों। लेकिन जरूरी नहीं कि हर मच्छर आपको पसंद करे।

खास खबर 8 Aug 2026 2:25 pm

मुरमुरे लॉलीपॉप,जानिए रेसिपी

एक बड़ा बाउल मुरमुरे, एक बड़ा प्याज बारीक कटा, एक शिमला मिर्च बड़ी कटी हुई,

खास खबर 8 Aug 2026 2:05 pm

Independence Day Craft Ideas: 15 अगस्त पर बच्चों के लिए 5 आसान DIY क्राफ्ट, घर और स्कूल में जरूर करें ट्राई

DIY Tricolor Crafts: 15 अगस्त पर बच्चों के लिए आसान DIY क्राफ्ट आइडियाज खोज रहे हैं? जानिए तिरंगा फ्लैग, पेपर प्लेट वॉल हैंगिंग, फोटो फ्रेम, पिनव्हील और अन्य क्रिएटिव स्वतंत्रता दिवस क्राफ्ट आइडियाज

अमर उजाला 8 Aug 2026 10:13 am

वजन कम करने के बाद दोबारा बढ़ने से कैसे रोकें? अपनाएं ये 5 कारगर तरीके

वजन कम करना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता, लेकिन असली चुनौती तो उसके बाद शुरू होती है। अक्सर देखा गया है कि लोग कड़ी मेहनत, डाइटिंग और वर्कआउट करके वजन तो घटा लेते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनका वजन दोबारा बढ़ने लगता है। इसे फिटनेस की भाषा में 'यो-यो इफेक्ट' (Yo-Yo Effect) कहा जाता है। जब आप अचानक से अपनी सख्त डाइट या वर्कआउट बंद कर देते हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और घटाया हुआ वजन तेजी से वापस लौटने लगता है। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं और अपने फिट शरीर को लंबे समय तक मेंटेन रखना चाहते हैं, तो आपको अपनी जीवनशैली में कुछ स्थायी बदलाव करने होंगे।1. क्रैश डाइटिंग छोड़ें और सस्टेनेबल डाइट अपनाएंवजन दोबारा बढ़ने का सबसे बड़ा कारण क्रैश डाइट या अत्यधिक सख्त डाइटिंग होती है। जब आप शरीर को अचानक बहुत कम कैलोरी देते हैं, तो वजन तेजी से घटता है, लेकिन जैसे ही आप सामान्य भोजन पर लौटते हैं, वजन दोगुना तेजी से बढ़ता है। इसलिए ऐसी डाइट चुनें जिसे आप जिंदगी भर आसानी से फॉलो कर सकें। अपनी थाली में प्रोटीन, फाइबर, कॉम्पलेक्स काबोर्हाइड्रेट्स और हेल्दी फैट्स का सही संतुलन रखें। प्रोटीन और फाइबर से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती।2. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वेट लिफ्टिंग को रूटीन में शामिल करेंकेवल कार्डियो (जैसे दौड़ना या साइकिल चलाना) करने से फैट के साथ-साथ मसल्स (मांसपेशियां) भी कम होने लगती हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है। वजन को मेंटेन रखने के लिए हफ्ते में कम से कम 3 से 4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या वेट लिफ्टिंग जरूर करें। मांसपेशियों का निर्माण होने से शरीर आराम की स्थिति में भी ज्यादा कैलोरी बर्न करता है, जिससे वजन दोबारा नहीं बढ़ता।3. रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि (NEAT) बढ़ाएंजिम में 1 घंटा बिताने के अलावा यह भी मायने रखता है कि आप दिन के बाकी 23 घंटे कैसे बिताते हैं। इसे NEAT (Non-Exercise Activity Thermogenesis) कहा जाता है। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें, फोन पर बात करते समय टहलें, और लगातार घंटों एक ही जगह बैठने से बचें। दिन भर में कम से कम 8,000 से 10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें।4. पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करेंकम नींद लेना और ज्यादा तनाव होना वजन बढ़ने के दो सबसे बड़े गुप्त कारण हैं। जब आप पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो शरीर में 'ग्रेलिन' (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ता है और 'लेप्टिन' (पेट भरने का अहसास कराने वाला हार्मोन) घटता है। इसके अलावा, मानसिक तनाव से 'कोर्टिसोल' हार्मोन रिलीज होता है, जो पेट के आसपास जिद्दी फैट जमा करता है। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें और योग या मेडिटेशन के जरिए तनाव कम करें।5. नियमित रूप से अपना वजन ट्रैक करेंवजन कम होने के बाद पूरी तरह बेफिक्र न हो जाएं। हफ्ते में या 15 दिन में एक बार निश्चित समय पर (सुबह खाली पेट) अपना वजन जरूर मापें। यदि आपको लगता है कि आपका वजन 1-2 किलो बढ़ रहा है, तो आप तुरंत सावधान हो सकते हैं और अपनी डाइट या वर्कआउट में समय रहते सुधार कर सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Aug 2026 9:05 am

करवट लेकर या सीधे सोना... कौन सी स्लीपिंग पोजीशन है बेहतर? जानें इसका सही जवाब

अच्छी सेहत के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह जानना भी है कि आप किस पोजीशन में सो रहे हैं। अक्सर लोग बिना सोचे-समझे किसी भी पोजीशन में सो जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सोने की स्थिति (Sleeping Position) आपके पाचन, रीढ़ की हड्डी (Spine) और दिल की सेहत को सीधे प्रभावित करती है? हेल्थ एक्सपर्ट्स और नींद शोधकर्ताओं के अनुसार, हर स्लीपिंग पोजीशन के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। आइए जानते हैं कि करवट लेकर सोना और सीधे पीठ के बल सोना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद या नुकसानदेह साबित हो सकता है।1. करवट लेकर सोना (Side Sleeping): अधिकांश लोगों के लिए सबसे बेहतरदुनिया भर में ज्यादातर लोग करवट लेकर सोना पसंद करते हैं, और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसे काफी अच्छा माना जाता है।बाईं करवट (Left Side) सोने के फायदे: बाईं करवट सोना पाचन तंत्र (Digestive System) के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस पोजीशन में पेट का एसिड नीचे की ओर रहता है, जिससे एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) और एसिडिटी की समस्या नहीं होती। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं और खर्राटे लेने वाले लोगों के लिए बाईं करवट सोना सबसे सुरक्षित और आरामदायक होता है।दाहिनी करवट (Right Side) सोने के नुकसान: दाहिनी तरफ सोने से दिल पर दबाव पड़ सकता है और पेट का एसिड भोजन नली में वापस आ सकता है, जिससे सीने में जलन (Heartburn) की शिकायत हो सकती है।2. सीधे पीठ के बल सोना (Back Sleeping): स्पाइन और चेहरे की त्वचा के लिए वरदानपीठ के बल यानी सीधे सोना रीढ़ की हड्डी के संरेखण (Spine Alignment) के लिए सबसे बेहतरीन पोजीशन मानी जाती है।फायदे: इस पोजीशन में सोने से शरीर का वजन बराबर बंट जाता है, जिससे गर्दन, कंधे और पीठ दर्द की संभावना कम हो जाती है। इसके अलावा, चेहरा तकिये से नहीं सटता, जिससे चेहरे पर झुर्रियां (Wrinkles) और मुंहासे होने का खतरा कम रहता है।नुकसान: जो लोग खर्राटे लेते हैं या जिन्हें स्लीप एप्निया (Sleep Apnea) की बीमारी है, उनके लिए सीधे सोना नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि इस स्थिति में जीभ पीछे गिरकर सांस की नली को बाधित कर सकती है।3. पेट के बल सोना (Stomach Sleeping): सबसे हानिकारक पोजीशनडॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स पेट के बल सोने से पूरी तरह बचने की सलाह देते हैं। इस पोजीशन में आपकी रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक झुकाव बिगड़ जाता है और गर्दन को घंटों तक एक तरफ मोड़कर रखना पड़ता है। इसके कारण गर्दन में अकड़न, पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।निष्कर्ष: आपके लिए कौन सी पोजीशन है सबसे बेस्ट?यदि आपको एसिडिटी, पाचन की समस्या, खर्राटे या आप गर्भवती हैं, तो बाईं करवट लेकर सोना (Left-side sleeping) आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। वहीं, यदि आपको पीठ दर्द या गर्दन दर्द रहता है और आप अपनी त्वचा की देखभाल करना चाहते हैं, तो पीठ के बल सीधे सोना (Back sleeping) आपके लिए सही रहेगा। बस ध्यान रखें कि सोते समय सही और आरामदायक तकिये का इस्तेमाल करें ताकि आपकी रीढ़ और गर्दन को सही सपोर्ट मिल सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Aug 2026 9:04 am

Hand Feet Numbness: हाथ-पैर सुन्न होना कब सामान्य और कब खतरे की घंटी? आप भी हैं परेशान तो जरूर जानिए ये बातें

हाथ-पैर सुन्न होने या झुनझुनी महसूस होने की स्थिति को पेरेस्थीसिया कहा जाता है। यह तब होती है जब त्वचा या अंगों तक संवेदना पहुंचाने वाली नसों पर दबाव पड़ता है, उनमें चोट लगती है या वे किसी बीमारी के कारण ठीक से काम नहीं कर पातीं।

अमर उजाला 8 Aug 2026 9:00 am

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

नई दिल्ली, भारत| 07 अगस्त 2026: 'द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन' में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व 'एंथोसायनिन' का अधिक सेवन स्वस्थ ...

वेब दुनिया 7 Aug 2026 4:28 pm

Mouth Ulcer Causes: मुंह में बार-बार छाले होना नहीं है सामान्य! इन 5 गंभीर बीमारियों का हो सकते है संकेत

Mouth Ulcer Causes: अगर आप उन लोगों में से हैं, जिनके मुंह में बार-बार छाले हो जाते हैं तो इस लेख को आखिर तक पढ़ें। क्योंकि ये आगे चलकर बड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

अमर उजाला 7 Aug 2026 12:53 pm

Independence Day 2026: देशभक्ति से भर देंगे भारत के ये 5 संग्रहालय, स्वतंत्रता दिवस पर बनाएं घूमने का प्लान

Historical Museums India: भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्रहालयों के बारे में जानिए। क्रांति मंदिर, गांधी स्मृति, जलियांवाला बाग, नेताजी भवन और सेल्युलर जेल जैसे ऐतिहासिक स्थानों का महत्व, इतिहास और खास बातें पढ़ें।

अमर उजाला 7 Aug 2026 12:51 pm

Independence Day: बिना फूड कलर के बनाएं तिरंगा व्यंजन, इन 9 प्राकृतिक चीजों से पाएं केसरिया, सफेद और हरा रंग

Natural Food Colors Recipe: बिना कृत्रिम फूड कलर के तिरंगा व्यंजन कैसे बनाएं? जानिए गाजर, पालक, नारियल, दही और केसर जैसी प्राकृतिक चीजों से हेल्दी तिरंगा रेसिपी बनाने के आसान तरीके, टिप्स और बेहतरीन आइडियाज।

अमर उजाला 7 Aug 2026 12:09 pm

Best Food For Healthy Hair: इन चीजों का सेवन आपके बालों को घना, चमकदार और मजबूत बना सकता है

Hair Care: अगर बारिश के मौसम में आप भी झड़ते, कमजोर और रूखे बालों से परेशान हैं, तो इस लेख को आखिर तक पढ़ें। हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे फूड्स के बारे में, जो आपके बालों को स्वस्थ रखेंगे।

अमर उजाला 7 Aug 2026 11:45 am

Kidney Health Tips: अगर किडनी सही से काम न करे तो शरीर में क्या होता है? जानिए पूरी सच्चाई

How Kidney Works In Human Body: अक्सर लोगों को ये समझ नहीं आता कि शरीर का कौन सा अंग क्या काम करता है। खासतौर पर अगर बात करें किडनी और फेफड़ों की। ऐसे में यहां हम आपको किडनी का काम और उसकी जरूरत बताएंगे।

अमर उजाला 7 Aug 2026 11:06 am

National Handloom Day 2026: भारत के बुनकरों को समर्पित खास दिन, जानिए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का इतिहास

National Handloom Day 2026 Date in Hindi: जानिए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 कब है, इतिहास, महत्व, थीम, क्यों मनाया जाता है, कैसे मनाते हैं।

अमर उजाला 7 Aug 2026 10:04 am

Monsoon Skin Care: बारिश के मौसम में हाथ-पैर से उतरने लगी है स्किन? जानें ऐसे समय में क्या करें

Skin Care Tips: बारिश के मौसम में हाथ-पैर से स्किन निकलना काफी आम बात है। ऐसे समय में आपको क्या करना चाहिए, इस लेख में हम आपसे इसी बारे में बात करेंगे।

अमर उजाला 7 Aug 2026 9:53 am