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Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

Ripe Yellow And Raw Banana Benefits: केला सेहत के लिए एक बेहतरीन फल है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरे कच्चे और पीले पके केले के पोषक तत्वों में थोड़ा अंतर होता है? वैसे तो दोनों में लगभग समान विटामिन पाए जाते हैं, लेकिन पकने की प्रक्रिया के दौरान ...

वेब दुनिया 30 Jun 2026 9:55 am

Healthy Living Tips: महंगी दवाइयों के बिना कैसे रहें पूरी तरह फिट? जानिए रसोई के मसालों और 10 आसान आदतों का सेहतमंद गणित

आज की भागदौड़ भरी और व्यस्त जिंदगी में हर व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखना चाहता है। लेकिन लगातार बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या, गलत खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण आजकल छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं भी बेहद आम हो गई हैं। अच्छी बात यह है कि एक सेहतमंद और निरोग जीवन जीने के लिए हमेशा महंगी दवाइयों, विदेशी सप्लीमेंट्स या मंहगे जिम मेंबरशिप की जरूरत नहीं होती।हमारे अपने घर की रसोई में मौजूद कई साधारण मसाले, प्राकृतिक चीजें और कुछ बेहद आसान आदतें हमें ताउम्र बीमारियों से दूर रखने में मदद कर सकती हैं। यदि हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत छोटे-छोटे और अनुशासित बदलाव करें, तो शरीर और मन दोनों को 100% चार्ज रखा जा सकता है। आइए बिना किसी घुमाव-फिराव के सीधे जानते हैं उन बेहतरीन आदतों के बारे में, जो आपको हमेशा फिट रखेंगी।1. सुबह गुनगुने पानी से करें दिन की शुरुआतसुबह सोकर उठने के तुरंत बाद, बिना कुछ खाए, एक या दो गिलास हल्का गुनगुना पानी (Lukewarm Water) पीने की आदत डालें। यह आसान सा नियम रात भर से सोए हुए आपके पाचन तंत्र (Digestive System) को तुरंत सक्रिय कर देता है और शरीर में पानी की कमी (Dehydration) को दूर करता है। कुछ लोग वजन घटाने के लिए इसमें नींबू का रस या शहद मिलाकर पीते हैं, लेकिन जिन लोगों को अक्सर एसिडिटी, खट्टी डकारें या पेट में जलन की समस्या रहती है, उन्हें नींबू से बचते हुए केवल सादा गुनगुना पानी ही पीना चाहिए।2. घर का ताजा खाना: सेहत और लंबी उम्र की असली नींवअच्छी और फौलादी सेहत की सबसे मजबूत नींव हमारा संतुलित भोजन (Balanced Diet) है।क्या खाएं: कोशिश करें कि रोज डिब्बाबंद खाने के बजाय ताजा और घर का बना भोजन ही ग्रहण करें। अपनी रोज की थाली में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दालें, फाइबर से भरपूर साबुत अनाज, दूध, दही, पनीर और प्रोटीन से भरपूर अंकुरित अनाज (Sprouts) जरूर शामिल करें। ये सभी चीजें शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और जरूरी एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करती हैं।क्या न खाएं: बहुत ज्यादा तेल-मसाले वाले, डीप-फ्राई किए गए, पैकेट वाले स्नैक्स, अत्यधिक मीठे और मैदे से बने जंक फूड खाने से पूरी तरह तौबा कर लें। लंबे समय तक ऐसा अस्वस्थ भोजन खाना ही मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लीवर, हृदय रोग और कब्ज जैसी गंभीर पेट संबंधी बीमारियों का मुख्य कारण बनता है।3. हमारी रसोई में छिपा है औषधियों का खजानाभारतीय रसोई केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपने बेहतरीन प्राकृतिक औषधीय गुणों (Medicinal Properties) के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है:हल्दी: इसमें 'करक्यूमिन' नाम का तत्व पाया जाता है, जो सूजन कम करने (Anti-inflammatory) और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अचूक है।अदरक और लहसुन: अदरक पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है और बदलते मौसम में खांसी-जुकाम से राहत देती है। वहीं, लहसुन का सीमित मात्रा में खाली पेट सेवन धमनियों को साफ रखता है और हृदय स्वास्थ्य (Heart Health) के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।तुलसी: यह एक बेहतरीन नेचुरल एंटीमाइक्रोबियल है, जो सर्दी-खांसी और इन्फेक्शन से शरीर की रक्षा करती है।जीरा, सौंफ और अजवाइन: दोपहर या रात के भारी भोजन के बाद थोड़ी सी मात्रा में भुना हुआ जीरा, सौंफ या अजवाइन चबाने से पेट में गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं से तुरंत राहत मिलती है।नोट: ध्यान रखें कि ये सभी घरेलू उपाय सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर रखने और बीमारियों से बचाव के लिए उपयोगी हैं, लेकिन ये किसी गंभीर बीमारी का परमानेंट इलाज नहीं हैं।4. पर्याप्त पानी: शरीर के हर हिस्से का नेचुरल फ्यूलमानव शरीर का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है, इसलिए शरीर के हर एक अंग और कोशिकाओं को सुचारू रूप से काम करने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। भरपूर पानी पीने से टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) शरीर से बाहर निकल जाते हैं, पाचन क्रिया तेज होती है और त्वचा पर एक प्राकृतिक चमक (ग्लो) बनी रहती है। इसलिए प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि पूरे दिन जरूरत के अनुसार 8 से 10 गिलास पानी पीने का नियम बनाएं।5. योग और नियमित व्यायाम: 30 मिनट में बदलें अपनी बॉडीसिर्फ अच्छा और पौष्टिक खाना ही पर्याप्त नहीं है, जब तक शरीर उस ऊर्जा को सही तरीके से बर्न न करे। रोज सुबह या शाम को कम से कम 30 मिनट का समय अपने शरीर के लिए जरूर निकालें। आप चाहें तो तेज चाल से टहल सकते हैं (Brisk Walking), योग कर सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या कोई भी हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं।विशेष रूप से योगासन और प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम और कपालभाति) शरीर की मांसपेशियों को लचीला बनाते हैं, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और मानसिक तनाव को चुटकियों में गायब कर देते हैं। नियमित वर्कआउट करने से वजन भी पूरी तरह कंट्रोल में रहता है।6. 8 घंटे की गहरी नींद: बॉडी रीबूटिंग का सबसे आसान तरीकाआजकल डिजिटल युग में देर रात तक मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करने या लैपटॉप पर काम करने की वजह से लोगों की स्लीप साइकिल (Sleep Cycle) बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्वस्थ और निरोग रहने के लिए हर वयस्क को रोज 7 से 9 घंटे की एक गहरी और सुकून भरी नींद लेना बेहद अनिवार्य है। जब हम सोते हैं, तब हमारा शरीर अंदरूनी अंगों की मरम्मत (Cellular Repair) करता है, मस्तिष्क को तरोताजा करता है और हमारे इम्यून सिस्टम (Immunity) को नए सिरे से मजबूत बनाता है।7. मानसिक स्वास्थ्य: शांत दिमाग ही है स्वस्थ शरीर का राजाअच्छी सेहत का मतलब सिर्फ बीमारियों से मुक्त शरीर नहीं है, बल्कि आपका मानसिक रूप से शांत रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। डिप्रेशन और एंग्जायटी से बचने के लिए रोज सुबह कुछ मिनट के लिए ध्यान (Meditation) लगाएं, गहरी सांसें लेने का अभ्यास करें। अपनी भागदौड़ से समय निकालकर कुछ पल प्रकृति के बीच बिताएं, पेड़-पौधों को निहारें। इसके साथ ही अपने परिवार के सदस्यों और सच्चे दोस्तों के साथ बैठकर खुलकर हंसना और मन की बातें साझा करना आपके मेंटल हेल्थ के लिए किसी रामबाण औषधि की तरह काम करता है।8. मौसमी और रंग-बिरंगे फल-सब्जियों को दें प्राथमिकताप्रकृति ने हर मौसम के अनुसार ऐसे फल और सब्जियां बनाई हैं, जो उस विशेष मौसम में हमारे शरीर की इम्युनिटी को मजबूत रखती हैं। उदाहरण के लिए गर्मियों और मानसून में आम, तरबूज, पपीता, सेब, अमरूद, लौकी, तोरी और सर्दियों में गाजर, चुकंदर, पालक जैसी चीजें भरपूर मात्रा में खानी चाहिए। कोशिश करें कि आपकी सलाद और भोजन की प्लेट में रंग-बिरंगी सब्जियां (जैसे लाल टमाटर, हरी मिर्च, बैंगनी प्याज, पीली शिमला मिर्च) शामिल हों, क्योंकि अलग-अलग रंगों के खाद्य पदार्थों से शरीर को विभिन्न प्रकार के दुर्लभ विटामिंस और मिनरल्स प्राप्त होते हैं।9. चीनी और नमक पर लगाएं कड़ा ब्रेक, सुबह की धूप से लें विटामिन Dबहुत ज्यादा रिफाइंड चीनी और अत्यधिक नमक का सेवन आज के समय में साइलेंट किलर बन चुके हैं। कोल्ड ड्रिंक्स, बाजार की मिठाइयां और पैकेट बंद नमकीनों से दूरी बनाएं, क्योंकि ये सीधे तौर पर हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को न्योता देते हैं।इसके साथ ही, हड्डियों और जोड़ों के दर्द से बचने के लिए रोज सुबह की हल्की और ताजी धूप में 15 से 20 मिनट जरूर बैठें। यह सूर्य की रोशनी हमारे शरीर के भीतर प्राकृतिक रूप से विटामिन D (Vitamin D) का निर्माण करती है, जो कैल्शियम को सोखने और हड्डियों को फौलादी बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।10. साफ-सफाई की छोटी आदतें लाएंगी आपकी जिंदगी में बड़ा बदलावसंक्रामक बीमारियों और इन्फेक्शन से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) सबसे बड़ा हथियार है। कुछ भी खाने से पहले और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं। रसोई घर को हमेशा साफ रखें और बाजार से लाए गए फल व सब्जियों को हमेशा साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही पकाएं या खाएं।इसके अतिरिक्त, हमेशा समय पर भोजन करने की आदत डालें, रात का डिनर हमेशा हल्का रखें और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले कर लें। सिगरेट, तंबाकू और शराब जैसी जानलेवा आदतों से पूरी तरह दूरी बना लें। यदि आपके परिवार में पहले से ही शुगर, बीपी या हार्ट की बीमारी का इतिहास (Family History) रहा है, तो 30 की उम्र पार करने के बाद साल में एक बार अपना रूटीन फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाएं। आपकी यही छोटी-छोटी सतर्कता आपको ताउम्र डॉक्टर और अस्पतालों के चक्कर लगाने से बचाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 9:49 am

AC Side Effects on Health: दिनभर एसी में रहने वाले हो जाएं सावधान, डॉक्टर से जानिए 24 घंटे AC में रहने के 5 बड़े नुकसान

भयंकर गर्मी, चिलचिलाती धूप और उमस से बचने के लिए आजकल एयर कंडीशनर (AC) हमारी जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। घर हो, ऑफिस, कार या शॉपिंग मॉल— हर जगह हम खुद को एसी की ठंडी हवा में रखना पसंद करते हैं। एसी से तपती गर्मी से तुरंत राहत तो मिल जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार या 24 घंटे एसी के माहौल में रहना आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है?फरीदाबाद के एशियन हॉस्पिटल के रेस्पिरेट्री क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी (HOD) डॉ. मानव मनचंदा के अनुसार, दिनभर एसी में रहने से शरीर को कई गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं। खासकर यदि आपके कमरे या केबिन में वेंटिलेशन (हवा के आने-जाने का रास्ता) सही न हो, तो यह रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं एसी के कारण होने वाली मुख्य समस्याओं और उनके वैज्ञानिक कारणों के बारे में।1. सांस संबंधी बीमारियां (Respiratory Issues): अस्थमा और एलर्जी मरीजों के लिए बड़ा खतरालंबे समय तक एसी के बंद कमरे में रहने से फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर बहुत बुरा असर पड़ता है।कारण: एसी हवा को ठंडा करने के साथ-साथ उसकी प्राकृतिक नमी (Moisture) को पूरी तरह सोख लेता है। शुष्क हवा के कारण हमारे गले, सांस की नली और नाक के भीतर की श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membrane) सूख जाती है।लक्षण: इसके चलते नाक बंद होना, गले में लगातार खराश, सूखी खांसी और सांस लेने में भारीपन महसूस होने लगता है। जो लोग पहले से ही अस्थमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस या साइनस की एलर्जी से पीड़ित हैं, ठंडी और शुष्क हवा उनके लक्षणों को तुरंत ट्रिगर कर देती है जिससे अटैक का खतरा बढ़ जाता है।2. एलर्जी और गंभीर साइनस (Allergy and Sinusitis): बार-बार छींक आना और नाक बहनाकई लोगों को एसी चालू करते ही लगातार छींकें आने लगती हैं। डॉ. मानव मनचंदा के मुताबिक, अगर एसी के फिल्टर्स की समय पर सफ़ाई न की जाए, तो उनमें धूल के कण, फंगस और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। एसी चलने पर ये बारीक कण हवा के साथ पूरे कमरे में फैल जाते हैं। इसके संपर्क में आते ही लोगों को बार-बार छींक आने, नाक बहने, आंखों में तेज जलन और साइनस इन्फेक्शन की शिकायत होने लगती है।3. आंखों में सूखापन (Dry Eye Syndrome): खुजली और धुंधलापनज्यादा देर तक एसी में रहने वाले लोगों में आजकल 'ड्राई आई सिंड्रोम' (Dry Eye Syndrome) की समस्या तेजी से देखी जा रही है। एसी कमरे के भीतर की ह्यूमिडिटी (नमी) को बेहद कम कर देता है, जिससे हमारी आंखों की प्राकृतिक आंसू की परत (Tear Film) तेजी से वाष्पीकृत (Evaporate) हो जाती है। इसके कारण आंखों में हर वक्त सूखापन, लगातार जलन, आंखें लाल होना और कभी-कभी धुंधला दिखने की समस्या हो जाती है। जो लोग लेंस पहनते हैं या लगातार कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठते हैं, उन्हें यह परेशानी सबसे ज्यादा झेलनी पड़ती है।4. लगातार सिरदर्द और थकान (Headache & Fatigue): वेंटिलेशन की कमी का सीधा असरअगर आप दिनभर एसी दफ्तर या घर में बैठते हैं और वहां ताजी हवा के आने का कोई साधन नहीं है, तो आपको अक्सर शाम होते-होते सिरदर्द और भारी थकान का अहसास होने लगेगा।कारण: पूरी तरह से सील बंद कमरों में लगातार एक ही हवा री-सर्कुलेट (घूमती) होती रहती है, जिससे कमरे के भीतर ऑक्सीजन का स्तर आंशिक रूप से कम होने लगता है और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने लगती है।असर: इसके अलावा, जब आप अचानक एसी के बेहद ठंडे तापमान से निकलकर बाहर की भीषण गर्मी में जाते हैं, तो शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है। थर्मल शॉक के कारण भी गंभीर सिरदर्द और मांसपेशियों में जकड़न (Fatigue) पैदा होती है।5. ड्राई स्किन की समस्या (Dry Skin): चेहरे का ग्लो और प्राकृतिक नमी हो जाती है खत्मलगातार एसी में बैठने का सबसे पहला और प्रत्यक्ष नुकसान हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। एसी त्वचा की बाहरी परत (Epidermis) की नेचुरल नमी को खींच लेता है। इसके कारण त्वचा रूखी, बेजान और खिंची-खिंची सी होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होने से चेहरे का प्राकृतिक ग्लो (चमक) कम हो जाता है, होंठ फटने लगते हैं और त्वचा पर असमय झुर्रियां व खुजली की समस्या शुरू हो जाती है।एसी के साइड इफेक्ट्स से कैसे बचें? डॉ. मानव मनचंदा के जरूरी टिप्सतापमान रखें संतुलित: एसी को कभी भी 16 या 18 डिग्री जैसे बहुत ठंडे तापमान पर न चलाएं। डॉ. मनचंदा के अनुसार, मानव शरीर के लिए 24C से 26C का तापमान सबसे आदर्श और सुरक्षित माना जाता है। इससे बिजली भी बचती है और सेहत भी।वेंटिलेशन है जरूरी: दिनभर में कम से कम 1 से 2 घंटे के लिए एसी पूरी तरह बंद करें और कमरे के खिड़की-दरवाजे खोल दें, ताकि ताजी हवा और ऑक्सीजन अंदर आ सके और कमरे के बैक्टीरिया बाहर निकल सकें।हाइड्रेटेड रहें: एसी में रहते हुए प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी या छाछ पीते रहें। त्वचा और होंठों पर अच्छा मॉइस्चराइजर और लिप बाम लगाएं।फिल्टर्स की सफ़ाई: हर 15 दिनों में अपने एसी के एयर फिल्टर को निकाल कर पानी से अच्छी तरह साफ करें, ताकि उसमें धूल और फंगस न पनप सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 9:47 am

Monsoon Diseases Rules: बरसात के मौसम में तेजी से फैलती हैं ये 4 खतरनाक बीमारियां, जानें इनके लक्षण और खुद को बचाने के उपाय

कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के बाद जब बरसात का मौसम आता है, तो मौसम सुहाना हो जाता है और लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलती है। लेकिन यह खूबसूरत मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई गंभीर चुनौतियां और बीमारियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में अचानक नमी (Humidity) का स्तर बेतहाशा बढ़ जाता है, और जगह-जगह जलभराव (Waterlogging) की समस्या आम हो जाती है। ऐसे रुके हुए पानी और उमस भरे माहौल में हानिकारक मच्छर, वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं।यही कारण है कि मानसून के दस्तक देते ही देश भर में संक्रामक बीमारियों का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर होती है, उन्हें अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए। आइए बिना किसी काट-छांट के सीधे जानते हैं कि बरसात के मौसम में कौन-कौन सी मुख्य बीमारियां फैलती हैं और उनके लक्षण क्या हैं।1. डेंगू (Dengue): रुके हुए साफ पानी में पनपता है इसका मच्छर, प्लेटलेट्स गिरना है मुख्य संकेतबरसात के दिनों में सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारियों में से एक डेंगू है, जिसका रिस्क इस मौसम में सबसे ज्यादा होता है।कारण: डेंगू की बीमारी एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) प्रजाति के मादा मच्छर के काटने से फैलती है। इस मच्छर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गंदे पानी में नहीं, बल्कि आपके घरों के आसपास जमा साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। जैसे— घर की छत पर पड़े पुराने टायर, बंद पड़े कूलर, गमलों की ट्रे, खुली हुई पानी की टंकी या डिब्बे।प्रमुख लक्षण: डेंगू होने पर अचानक बहुत तेज बुखार आता है, जिसे 'हड्डी तोड़ बुखार' भी कहते हैं। इसके अलावा तेज सिरदर्द, आंखों के पिछले हिस्से में तेज चुभन और दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में भयंकर दर्द की समस्या होती है। इस बीमारी में मरीज के खून में मौजूद प्लेटलेट्स (Platelets) का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है, जिससे समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति बेहद नाजुक और जानलेवा हो सकती है।2. टाइफाइड (Typhoid): दूषित पानी और संक्रमित भोजन से लीवर-पाचन तंत्र पर होता है हमलाबारिश के मौसम में भारी जलभराव के कारण अक्सर पीने के पानी के पाइपलाइन में सीवेज या गंदा पानी मिक्स हो जाता है, जिससे जल स्रोत पूरी तरह संक्रमित हो जाते हैं।कारण: यह बीमारी साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नाम के बैक्टीरिया के कारण होती है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और मक्खियों द्वारा संक्रमित किए गए भोजन के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करता है। टाइफाइड का सीधा हमला इंसान के पाचन तंत्र और आंतों पर होता है।प्रमुख लक्षण: टाइफाइड के मरीजों को कई दिनों तक लगातार रहने वाला तेज बुखार, पेट में मरोड़ और तेज दर्द, लगातार सिरदर्द, अत्यधिक शारीरिक कमजोरी और भूख में भारी कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।3. वायरल फीवर (Viral Fever): तापमान के उतार-चढ़ाव से एक-दूसरे में तेजी से फैलता है संक्रमणबरसात के दिनों में कभी तेज धूप तो कभी अचानक तेज बारिश होने के कारण तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। हवा में मौजूद अत्यधिक नमी के कारण वायरस हवा में लंबे समय तक जीवित रहते हैं।कारण: मौसम में यह अचानक बदलाव हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को धीमा कर देता है, जिससे रेस्पिरेट्री और अन्य वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। वायरल फीवर एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो खांसने, छींकने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत आसानी से फैल जाती है।प्रमुख लक्षण: इसमें मरीज को कंपकंपी के साथ तेज बुखार, गले में भयंकर खराश या दर्द, सूखी या बलगम वाली खांसी, पूरे शरीर और पीठ में जकड़न व दर्द और अत्यधिक सुस्ती महसूस होती है।4. फूड पॉइजनिंग और दस्त (Food Poisoning & Diarrhea): सड़क किनारे के खुले खाने से पूरी तरह बनाएं दूरीउमस और गर्मी के इस मिले-जुले मौसम में बैक्टीरिया इतनी तेजी से बढ़ते हैं कि घर या बाहर रखा हुआ से खाना बहुत जल्दी खराब या बासी हो जाता है।कारण: कई बार अनजाने में खराब या फंगस लगा हुआ भोजन खा लेने से पेट में भयंकर इन्फेक्शन हो जाता है, जिसे फूड पॉइजनिंग कहते हैं। खासकर मानसून के दौरान सड़क किनारे (Street Food) मिल रहे खुले कटे हुए फल, चाट-पकौड़ी और दूषित पानी से बने जूस का सेवन करने से इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। लापरवाही बरतने पर फूड पॉइजनिंग इतनी गंभीर हो सकती है कि मरीज के शरीर में पानी की कमी (Dehydration) के कारण जान पर बन आती है।प्रमुख लक्षण: खाना खाने के कुछ घंटों बाद ही लगातार उल्टियां होना, पेट में असहनीय मरोड़ और दर्द, बार-बार दस्त (Diarrhea) होना, जी मिचलाना और शरीर का तापमान बढ़ना इसके मुख्य संकेत हैं।मानसून में सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये जरूरी हेल्थ टिप्सकूलर और गमलों की सफ़ाई: अपने घर के भीतर या आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी हफ्ते में एक बार जरूर बदलें और उसमें थोड़ा सा केरोसिन या पेट्रोल डाल दें।उबला हुआ पानी: इस पूरे मौसम में पानी को हमेशा अच्छी तरह उबालकर और छानकर ही पिएं, ताकि सभी बैक्टीरिया नष्ट हो जाएं।फुल आस्तीन के कपड़े: मच्छरों के काटने से बचने के लिए सोते समय मच्छरदानी या मॉस्किटो लिक्विड का इस्तेमाल करें और बाहर निकलते समय फुल आस्तीन के कपड़े पहनें।ताजा भोजन: हमेशा पूरी तरह ढका हुआ और ताजा बना हुआ गर्म भोजन ही ग्रहण करें। फ्रिज में रखे बहुत पुराने बासी खाने को खाने से पूरी तरह परहेज करें।सलाह: बरसात में होने वाली किसी भी बीमारी को साधारण मौसमी बुखार समझने की भूल न करें। यदि बुखार 2 दिन से ज्यादा रहता है, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क कर ब्लड टेस्ट करवाएं और बिना चिकित्सकीय परामर्श के मेडिकल स्टोर से लेकर कोई भी एंटीबायोटिक या पेनकिलर दवा न खाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 9:46 am

Cow Urine Study on Chikungunya: आईआईटी रुड़की की बड़ी खोज, चिकनगुनिया वायरस को 99% तक बेअसर कर सकता है गौ-मूत्र डिस्टिलेट

भारत में हर साल मानसून और मौसमी बदलावों के दौरान मच्छरों से पनपने वाली चिकनगुनिया (Chikungunya) जैसी खतरनाक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। इसकी वजह से न केवल हजारों लोगों की सेहत गंभीर रूप से बिगड़ती है और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, बल्कि आम जनता की खून-पसीने की कमाई भी इलाज में पानी की तरह बह जाती है। लेकिन अब इस जानलेवा वायरल बीमारी से निपटने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों को एक बहुत बड़ी और अभूतपूर्व सफलता हाथ लगी है।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT Roorkee) के शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में दावा किया है कि गौ-मूत्र डिस्टिलेट (Cow Urine Distillate - CUD) में कुछ बेहद प्रभावशाली जैव-सक्रिय यौगिक (Bioactive Compounds) मौजूद हैं, जो चिकनगुनिया वायरस के खिलाफ एक अचूक और मजबूत एंटीवायरल हथियार की तरह काम करते हैं।आईआईटी रुड़की की टीम ने लैब में किया परीक्षण, नतीजों ने वैज्ञानिकों को चौंकायायह ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण रिसर्च आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रसिद्ध प्रोफेसर शैली तोमर और उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा अंजाम दिया गया है। इस विस्तृत शोध पत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित ACS Agricultural Science & Technology जर्नल में आधिकारिक तौर पर प्रकाशित किया गया है। इस शोध को पूरा करने में देश भर के कई चोटी के आयुर्वेद विशेषज्ञों और बायोमेडिकल संस्थानों का भी तकनीकी सहयोग लिया गया।लैब में किए गए परीक्षणों के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि गौ-मूत्र डिस्टिलेट में चिकनगुनिया के वायरस को लगभग पूरी तरह खत्म करने की अद्भुत क्षमता है। इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने लैब डिश में चिकनगुनिया वायरस से संक्रमित मानव कोशिकाओं पर इसका प्रयोग किया। जब संक्रमित कोशिकाओं में महज 2 प्रतिशत की मात्रा में गौ-मूत्र डिस्टिलेट मिलाया गया, तो वायरस की क्षमता में 90 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, जब इस मिश्रण की मात्रा को बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया, तो वायरस का प्रभाव 99 प्रतिशत से भी ज्यादा कम हो गया।एंजाइम ब्लॉक कर वायरस का प्रसार रोकता है बेंजोइक और हिप्यूरिक एसिडइस जटिल वैज्ञानिक शोध को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए आईआईटी के शोधकर्ताओं ने वायरोलॉजी, मेटाबोलॉमिक्स, मॉलेकुलर डॉकिंग और अत्याधुनिक बायोकेमिकल विश्लेषण (Biochemical Analysis) जैसी हाई-टेक तकनीकों का सहारा लिया। गहन जांच में सामने आया कि गौ-मूत्र डिस्टिलेट के भीतर प्राकृतिक रूप से बेंजोइक एसिड (Benzoic Acid), हिप्यूरिक एसिड (Hippuric Acid) और ओलेइक एसिड (Oleic Acid) जैसे बेहद शक्तिशाली कार्बनिक यौगिक पाए जाते हैं।ये यौगिक वायरस को मानव शरीर में जिंदा रहने और बढ़ने के लिए जरूरी प्रोटीनों के निर्माण को पूरी तरह बाधित कर देते हैं। इन अम्लों ने चिकनगुनिया वायरस के सबसे महत्वपूर्ण एंजाइम को चारों तरफ से ब्लॉक कर दिया, जिससे वायरस अपनी संख्या बढ़ाने (Replication) में पूरी तरह असमर्थ हो गया और दम तोड़ दिया।कलौंजी और काली मिर्च के साथ मिलकर बना 99.85% प्रभावी महा-मिश्रणइस पूरे वैज्ञानिक रिसर्च का सबसे जादुई और प्रभावशाली परिणाम तब देखने को मिला, जब शोधकर्ताओं ने इस गौ-मूत्र डिस्टिलेट को दो अन्य प्राकृतिक चीजों के साथ मिक्स किया। वैज्ञानिकों ने इसमें कलौंजी से निकाले गए तत्व थाइमोक्विनोन (Thymoquinone) और काली मिर्च से प्राप्त होने वाले पाइपरिन (Piperine) को एक निश्चित अनुपात में मिलाया।इन तीनों प्राकृतिक तत्वों के अनूठे मिश्रण ने लैब में मौजूद खतरनाक वायरल लोड को रिकॉर्ड 99.85 प्रतिशत तक पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया। रिसर्च हेड प्रोफेसर शैली तोमर के मुताबिक, इस चमत्कारी निष्कर्ष से आने वाले समय में चिकनगुनिया के साथ-साथ मच्छरों से फैलने वाले अन्य वायरल संक्रमणों जैसे डेंगू और जिका के खिलाफ भी एक सुरक्षित और प्रभावी एंटीवायरल दवा विकसित करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।क्या सीधे तौर पर गौ-मूत्र का सेवन है सुरक्षित? विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनीहालांकि इस वैज्ञानिक रिसर्च में बेहद सकारात्मक और उम्मीद से बढ़कर परिणाम सामने आए हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आम जनता चिकनगुनिया होने पर सीधे तौर पर कच्चे या घरेलू स्तर पर गौ-मूत्र का सेवन शुरू कर दे। चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वयं शोधकर्ताओं ने इस पर कड़ी चेतावनी जारी की है।लैब में इस्तेमाल किया गया तत्व एक बेहद रिफाइंड 'डिस्टिलेट' (Distillate) था, जिसे वैज्ञानिक पद्धतियों से तैयार किया गया था। इस खोज को एक प्रामाणिक दवा का रूप देने के लिए अभी इंसानों पर व्यापक क्लिनिकल ट्रायल्स (Clinical Trials) किए जाने बाकी हैं। बिना किसी योग्य डॉक्टर की लिखित सलाह के सीधे इसका इस्तेमाल करना लिवर, किडनी या पेट के लिए बेहद खतरनाक और नुकसानदेह साबित हो सकता है।पारंपरिक आयुर्वेद ज्ञान और आधुनिक एलोपैथी विज्ञान के बीच बनेगा मजबूत सेतुहेल्थ एक्सपर्ट्स और फार्मा वैज्ञानिकों के अनुसार, यह शोध भविष्य में भारत के आम और गरीब लोगों के लिए बेहद सस्ती, सुलभ और बिना किसी साइड-इफेक्ट वाली स्वदेशी दवा के निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह अध्ययन इस बात का सबसे बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे हमारे भारत के प्राचीन पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान (Traditional Ayurvedic Knowledge) को आधुनिक एलोपैथी विज्ञान और उन्नत तकनीकों की कसौटी पर कसकर दुनिया के सामने एक प्रामाणिक इलाज के रूप में पेश किया जा सकता है। चूंकि यह शुरुआती परिणाम है, इसलिए अंतिम रूप से मार्केट में दवा आने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। तब तक मौसमी बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह पर ही दवाओं का सेवन करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 9:44 am

सिर्फ 5 मिनट का यह एक आसन बदल देगा आपकी जिंदगी, जानिए रोज पश्चिमोत्तानासन करने के जादुई फायदे और सही तरीका

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब लाइफस्टाइल और घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत ने लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से थका दिया है। ऐसे में खुद को फिट और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए योग से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। योग विज्ञान में कई ऐसे आसन हैं जो पूरे शरीर पर एक साथ काम करते हैं, और उन्हीं में से एक बेहद प्रभावशाली आसन है 'पश्चिमोत्तानासन' (Seated Forward Bend Pose)। अगर आप इसे अपनी डेली रूटीन में शामिल करते हैं, तो यह आपके सिर से लेकर पैर के अंगूठे तक की मांसपेशियों को टोन करने की ताकत रखता है। आइए एक रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि रोजाना इस आसन का अभ्यास करने से आपके शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं।पेट की चर्बी पिघलाने और पाचन तंत्र दुरुस्त करने में मददगारपश्चिमोत्तानासन का सबसे बड़ा और सीधा असर हमारे पेट और पाचन तंत्र पर पड़ता है। जब आप आगे की ओर झुकते हैं, तो आपके पेट के आंतरिक अंगों जैसे लिवर, किडनी और पैनक्रियाज पर गहरा दबाव बनता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होता है। यह आसन पेट की जिद्दी चर्बी (Belly Fat) को तेजी से कम करने और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करता है। इसके नियमित अभ्यास से कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी पेट की पुरानी समस्याओं से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह आसन इंसुलिन के प्रोडक्शन को संतुलित करने में बेहद कारगर माना गया है।रीढ़ की हड्डी को बनाएगा लोहे जैसा मजबूत और लचीलालगातार गलत पोस्चर में बैठने के कारण आजकल युवाओं में पीठ दर्द, कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी का कड़ा होना एक आम समस्या बन चुका है। पश्चिमोत्तानासन करते समय जब पूरी पीठ आगे की तरफ खिंचती है, तो इससे रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) का लचीलापन बढ़ता है और वह मजबूत होती है। यह आसन आपकी हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों, कंधों और कूल्हों को एक बेहतरीन स्ट्रेच देता है। यदि आपको अक्सर काम के बाद पीठ में दर्द या भारीपन महसूस होता है, तो रोजाना सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करने से आपकी मांसपेशियों का तनाव पूरी तरह से खत्म हो जाएगा और शरीर का पोस्चर सुधरेगा।मानसिक तनाव दूर कर दिमाग को शांत करने की अचूक दवाशारीरिक फायदों के अलावा पश्चिमोत्तानासन मानसिक स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आगे झुकने की इस मुद्रा से मस्तिष्क में रक्त का संचार (Blood Circulation) बेहतर होता है, जिससे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र शांत होता है। यह आसन कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन के स्तर को कम करके मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षणों को नियंत्रित करता है। जिन लोगों को रात में नींद न आने (Insomnia) की बीमारी है, उनके लिए यह आसन बेहद फायदेमंद है। यह दिमाग को गहरी शांति का एहसास कराता है, जिससे मन एकाग्र होता है और नींद की क्वालिटी में जबरदस्त सुधार होता है।जानिए पश्चिमोत्तानासन करने का सबसे सही और सुरक्षित तरीकाइस आसन का पूरा लाभ उठाने के लिए इसे सही तकनीक से करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले फर्श पर योग मैट बिछाकर दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाकर बैठ जाएं (दंडासन)। अपनी रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें। अब सांस भरते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और शरीर को ऊपर की तरफ खींचें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ झुकें और अपने हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़ने का प्रयास करें। कोशिश करें कि आपका माथा आपके घुटनों को छुए, लेकिन शुरुआत में शरीर के साथ ज्यादा जबरदस्ती न करें। इस अंतिम मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक सामान्य रूप से सांस लेते रहें और फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं। गर्भवती महिलाओं, स्लिप डिस्क और गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोगों को इसके अभ्यास से बचना चाहिए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 4:09 am

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

Drug Addiction: नशे की लत से उबरना एक क्रमिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसमें केवल इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि सही थेरेपी, मेडिकल सपोर्ट और लाइफस्टाइल बदलाव की जरूरत होती है। अलग-अलग लोगों के लिए तरीका अलग हो सकता है, लेकिन कुछ इलाज और कदम सबसे ज्यादा ...

वेब दुनिया 25 Jun 2026 3:40 pm

क्या यह सच्चा प्यार है या सिर्फ टाइम पास? इन 4 बड़े संकेतों से पहचानें अपने पार्टनर का असली इरादा

आज के दौर में एक ईमानदार और सच्चा रिश्ता ढूंढना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। किसी को पसंद करना और किसी से निश्छल, सच्चा प्यार करना—दोनों दो बेहद अलग बातें हैं। अक्सर लोग किसी इंसान की केवल मौजूदगी, उसके साथ चंद अच्छे पल बिताने या उसके मीठे शब्दों को ही 'सच्चा प्यार' समझने की भूल कर बैठते हैं। लेकिन असलियत यह है कि सच्चा प्यार केवल खोखले शब्दों में नहीं, बल्कि इंसान के व्यवहार और उसके एक्शन (Actions) में दिखाई देता है। जो आपसे वाकई मोहब्बत करता है, उसकी परवाह उसके कदमों में दिखेगी, न कि सिर्फ बड़ी-बड़ी बातों में।आजकल बहुत से लोग ऐसे रिलेशनशिप में फंसे हुए हैं, जहां वे हर पल इसी कशमकश और उलझन में रहते हैं कि उनका साथी गंभीर है या केवल टाइम पास कर रहा है। रिश्ते में लगातार बनी रहने वाली असुरक्षा, मानसिक तनाव और हर वक्त का इंतजार मन में कई तरह के सवाल खड़े करता है। अगर आप भी इस दोराहे पर खड़े हैं, तो आइए जानते हैं उन स्पष्ट संकेतों के बारे में, जो आपके पार्टनर के असली इरादों की पोल खोल सकते हैं।1. व्यवहार में लगातार उतार-चढ़ाव (मूड स्विंग्स) होनाअगर आपका पार्टनर किसी दिन आपको दुनिया का सबसे खास इंसान महसूस कराता है, आपके ऊपर बेशुमार प्यार लुटाता है, लेकिन अगले ही दिन उसका व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है और वह ऐसा बर्ताव करता है जैसे आप उसके लिए कोई मायने ही नहीं रखते—तो इस बात को बिल्कुल भी हल्के में न लें। प्यार में निरंतरता (Consistency) होती है। यदि आपके पार्टनर का मूड और व्यवहार आपके प्रति लगातार बदल रहा है, तो यह एक सामान्य बात नहीं है। इसके लिए आपको बार-बार बहाने ढूंढने या ओवरथिंकिंग करने की जरूरत नहीं है; यह अस्थिर व्यवहार साफ तौर पर दर्शाता है कि यह सच्चा प्यार तो बिल्कुल नहीं है।2. भविष्य और गंभीर (सीरियस) बातचीत से कतरानाकिसी भी रिश्ते की नींव को मजबूत और गहरा बनाने के लिए खुलकर बातचीत करना बेहद जरूरी होता है। जब आप अपने रिश्ते में आगे बढ़ने, भविष्य की योजनाओं या अपनी गहरी भावनाओं को लेकर कोई बात शुरू करते हैं, और आपका पार्टनर तुरंत विषय बदल देता है या इमोशनली जुड़ने से कतराता है, तो यह एक बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) है। यह इस बात का सीधा संकेत है कि वह आपके साथ अपना कोई भविष्य नहीं देखता और इस रिश्ते में गहराई तक नहीं जाना चाहता। एक सच्चा और स्वस्थ रिश्ता वही होता है, जिसमें दोनों पार्टनर बिना किसी डर के अपनी भावनाओं और भविष्य पर खुलकर चर्चा कर सकें।3. सुकून की जगह रिश्ते में लगातार बेचैनी और असुरक्षा रहनाप्यार एक ऐसा एहसास है जो इंसान को दुनिया का सबसे बड़ा सुकून और मानसिक शांति देता है। इसके विपरीत, अगर आपको अपने ही रिश्ते में हर समय केवल तड़प, असुरक्षा और इंतजार का सामना करना पड़ रहा है; यदि आप चौबीसों घंटे उसके एक मैसेज या कॉल की राह देखते रहते हैं और बार-बार उसके अजीब बिहेवियर को डिकोड करने की कोशिश में जुटे रहते हैं, तो समझ जाएं कि आपका मेंटल पीस (मानसिक शांति) पूरी तरह डिस्टर्ब हो चुका है। जब किसी इंसान के कहे गए शब्द और उसका असल व्यवहार आपस में मेल नहीं खाते, तब दिल में बेचैनी पैदा होती है। अगर कोई रिश्ता आपको लगातार मानसिक तनाव और ओवरथिंकिंग की ओर धकेल रहा है, तो वहां प्यार नहीं, सिर्फ टाइम पास हो रहा है।4. हर बार सिर्फ आपकी तरफ से एकतरफा कोशिशें होनाक्या आपके रिश्ते में बातचीत शुरू करने के लिए पहला कॉल या मैसेज हमेशा आपको ही करना पड़ता है? क्या मिलने का प्लान, डेट ऑर्गेनाइज करना या रिश्ते को बचाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ आपकी बन चुकी है? अगर जवाब हां है, तो आपको तुरंत कदम पीछे खींचने चाहिए और इस रिश्ते की हकीकत को ठंडे दिमाग से समझना चाहिए। कोई भी रिश्ता कभी भी एक इंसान की बैसाखी पर लंबा नहीं चल सकता। एक खूबसूरत रिश्ता तभी फलता-फूलता है जब दोनों तरफ से बराबर की कोशिशें हों, दोनों एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें और रिलेशन को बनाए रखने के लिए समान रूप से प्रयास करें। एकतरफा खींचा जाने वाला रिश्ता सिर्फ समझौता होता है, प्यार नहीं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jun 2026 9:52 am

Glowing Skin Tips: सुबह उठते ही चेहरे पर लगाएं ठंडे पानी का गोता; चमक उठेगा चेहरा और गायब हो जाएंगी झुर्रियां

आज के इस आधुनिक दौर में ग्लोइंग, बेदाग और खूबसूरत स्किन पाना हर किसी की चाहत होती है। चेहरे की चमक (Skin Glow) बढ़ाने के लिए लोग बाजार में मिलने वाले महंगे और केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कई बार इन केमिकल प्रोडक्ट्स को लगाने के बाद भी चेहरे पर कोई खास असर या निखार देखने को नहीं मिलता है, बल्कि स्किन को नुकसान होने का खतरा अलग से बढ़ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना एक भी रुपया खर्च किए, आप सिर्फ कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से अपने चेहरे पर मनचाहा निखार ला सकते हैं?ग्लोइंग स्किन के लिए आप रोज सुबह उठते ही बर्फ का एक छोटा सा और जादुई उपाय कर सकते हैं। इस आसान से नुस्खे को आजमाने से न सिर्फ चेहरे की रंगत सुधरेगी, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ चेहरे पर दिखने वाली महीन रेखाएं (Fine Lines) और झुर्रियां भी काफी कम हो सकती हैं। आइए जानते हैं निखरी और स्वस्थ त्वचा के लिए आपको सुबह-सुबह क्या करना चाहिए और क्या है 'आइस वॉटर थेरेपी'।क्या है आइस वॉटर थेरेपी और इसे घर पर कैसे तैयार करें?चमकदार त्वचा पाने के लिए आपको सुबह सोकर उठते ही इस बेहद असरदार होममेड स्किन ट्रीटमेंट को करना होगा। इसे तैयार करना बेहद आसान है।सबसे पहले एक बड़ा सा बाउल (कटोरा) लें, जिसमें आपका चेहरा आसानी से आ सके।अब इस बाउल में फ्रिज से निकालकर कुछ आइस क्यूब्स (बर्फ के टुकड़े) डाल दें।इसके बाद इसमें सामान्य या थोड़ा सा साफ पानी मिला लें।लीजिए, आपका थेरेपी के लिए बिल्कुल ठंडा-ठंडा बर्फ का पानी बनकर तैयार है।चेहरे की सूजन दूर कर फाइन लाइन्स को कम करता है ठंडा पानीइस तैयार बर्फ के पानी वाले बाउल में आपको सुबह-सुबह अपने चेहरे को कम से कम 15 से 20 बार डुबाना (डिप करना) है। ध्यान रहे कि चेहरे को कुछ-कुछ सेकंड के लिए ही पानी में डालें और फिर बाहर निकालें।जब हमारा चेहरा इस अत्यधिक ठंडे पानी के संपर्क में आता है, तो त्वचा के बड़े हो चुके रोमछिद्र (Open Pores) सुड़कर छोटे हो जाते हैं। पोर्स छोटे होने की वजह से त्वचा में प्राकृतिक रूप से कसाव (Skin Tightening) आने लगता है। इसके अलावा, रातभर सोने के कारण सुबह चेहरे पर जो पफिनेस या सूजन दिखाई देती है, वह बर्फ के पानी से तुरंत दूर हो जाती है। नियमित रूप से ऐसा करने पर चेहरे की महीन रेखाएं और झुर्रियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।25 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए सबसे बेहतरीन नुस्खायह घरेलू उपाय खासकर 25 साल से अधिक उम्र की महिलाओं और पुरुषों के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। दरअसल, 25 वर्ष की उम्र पार करने के बाद त्वचा में कोलाजन का बनना थोड़ा कम हो जाता है, जिससे चेहरे पर हल्की फाइन लाइन्स नजर आने लगती हैं। ऐसे में यह थेरेपी एंटी-एजिंग का काम करती है।हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि छोटे बच्चों की नाजुक त्वचा के लिए यह कोल्ड ट्रीटमेंट बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता है, इसलिए उन्हें इससे दूर रखें। इसके अलावा, जिन लोगों की स्किन बहुत ज्यादा ऑयली होती है, उनके लिए भी आइस वॉटर थेरेपी किसी वरदान से कम नहीं है। यह चेहरे के एक्स्ट्रा ऑयल (Sebum) को कंट्रोल करती है और आपको देती है एक इंस्टेंट फ्रेश लुक। अगर आपको किसी पार्टी या शादी में जाना है और तुरंत निखार चाहिए, तो आप इस थेरेपी की मदद ले सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jun 2026 9:51 am

प्रेग्नेंसी में कमर दर्द और अनिद्रा से हैं परेशान, रोज करें ये खास योग, मिलेंगे हैरान कर देने वाले फायदे

गर्भावस्था का सफर जितना खूबसूरत होता है, उतनी ही चुनौतियां भी लेकर आता है। जैसे-जैसे वजन बढ़ता है, शरीर में दर्द, हार्मोनल बदलाव और रात-रात भर करवट बदलते हुए नींद न आने की समस्या आम हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक नियमित 'योग' अभ्यास आपकी इन तमाम परेशानियों को दूर कर सकता है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, 'प्रीनेटल योग' (Prenatal Yoga) न केवल शरीर को आराम देता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम कर प्रसव (Delivery) की प्रक्रिया को भी आसान बनाता है।शारीरिक और मानसिक शांति का अचूक नुस्खाडॉ. नेहा शुक्ला बताती हैं कि गर्भावस्था में एक सक्रिय जीवनशैली बनाए रखना मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी है। प्रीनेटल योग में नियंत्रित श्वास (Breathing), हल्की स्ट्रेचिंग और रिलैक्सेशन तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यह न सिर्फ आपके शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करता है, बल्कि प्रसव से जुड़ी चिंताओं, भविष्य की जिम्मेदारियों और हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण होने वाले तनाव को कम कर मन को शांत रखने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से महिलाओं में आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन बना रहता है।प्राणायाम: प्रसव के समय का सबसे बड़ा सहाराप्रीनेटल योग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्राणायाम है। गहरी और नियंत्रित सांस लेने की तकनीकें शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह (Blood Flow) को बेहतर बनाती हैं। ये ब्रीदिंग एक्सरसाइज प्रसव के दौरान महिलाओं को शांत और केंद्रित रहने में मदद करती हैं। इसके अलावा, जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, पीठ, कमर और कूल्हों पर दबाव बढ़ने लगता है। विशेष योगासन न केवल शरीर की लचक बढ़ाते हैं, बल्कि सही पोस्चर बनाए रखकर कमर दर्द, शरीर की जकड़न और सूजन जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार साबित होते हैं।योग शुरू करने से पहले रखें इन बातों का ध्यानयोग के कई फायदे हैं, लेकिन गर्भावस्था एक संवेदनशील अवस्था है, इसलिए हर योगासन सुरक्षित नहीं होता। डॉ. नेहा शुक्ला के अनुसार, गहरे ट्विस्ट, कठिन बैकबेंड और ज्यादा तीव्र व्यायाम से हमेशा बचना चाहिए। विशेष रूप से जिन महिलाओं को हाई बीपी, गंभीर एनीमिया, प्लेसेंटा प्रिविया या समय से पहले प्रसव (Preterm Labor) का खतरा हो, उन्हें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। बिना डॉक्टर और किसी प्रशिक्षित योग एक्सपर्ट की सलाह के योग शुरू न करें। सही गाइडेंस में किया गया योग आपकी प्रेग्नेंसी को एक खुशनुमा अनुभव बना सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jun 2026 4:16 pm

कजिन मैरिज पर सबसे बड़ा वैज्ञानिक खुलासा: क्यों पाकिस्तान में तेजी से गायब हो रहे हैं इंसानी जीन?

दुनियाभर के कई देशों और संस्कृतियों में कजिन मैरिज (चचेरे, ममेरे, फुफेरे भाई-बहनों के बीच शादी) का चलन काफी पुराना है। खासकर मुस्लिम देशों में सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर इसे बेहद सामान्य और सही माना जाता है। वर्ल्ड पापुलेशन रिव्यू (World Population Review) के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में कजिन मैरिज की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है। हालांकि, सामाजिक रूप से स्वीकार्य होने के बावजूद, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस तरह की शादियां आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं। हालिया साइंटिफिक रिसर्च में यह चेतावनी दी गई है कि कजिन मैरिज के कारण बच्चों में गंभीर जेनेटिक डिसऑर्डर (आनुवंशिक विकार) और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।क्या है 'ह्यूमन नॉकआउट', जिसने वैज्ञानिकों को चौंकाया?मशहूर विज्ञान पत्रिका 'नेचर' (Nature) में प्रकाशित एक बेहद चौंकाने वाली स्टडी के अनुसार, पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर 'ह्यूमन नॉकआउट' (Human Knockout) की स्थिति देखी जा रही है। रिसर्च में शामिल लगभग 34,000 लोगों में यह दुर्लभ कंडीशन पाई गई है। ह्यूमन नॉकआउट एक ऐसी आनुवंशिक स्थिति है, जिसमें इंसान के शरीर में मौजूद कम से कम एक जीन या तो पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है (स्विच ऑफ हो जाता है) या फिर वह शरीर से हमेशा के लिए गायब हो जाता है।कजिन मैरिज से कैसे गायब हो जाते हैं शरीर के जरूरी जीन?जीव विज्ञान के अनुसार, हर इंसान के शरीर में प्रत्येक जीन की दो कॉपी होती हैं—एक कॉपी माता से और दूसरी पिता से मिलती है। जब आपस में करीबी खून के रिश्ते या कजिन के बीच शादी होती है, तो माता और पिता दोनों का पारिवारिक डीएनए (DNA) एक जैसा होने के कारण बच्चों में दोनों तरफ से एक जैसा ही म्यूटेशन (आनुवंशिक बदलाव) ट्रांसफर हो जाता है। इस म्यूटेशन के टकराव से बच्चे के शरीर में वह विशेष जीन पूरी तरह से नष्ट या गायब हो जाता है। पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स में शामिल हर पांच में से एक इंसान में कम से कम एक जीन पूरी तरह गायब पाया गया है, और पूरी रिसर्च के दौरान लगभग 6500 जीन 'स्विच ऑफ' मिले हैं।चूहों पर नहीं, अब इंसानी जीन पर होगी रिसर्च; दवा उद्योग में आएगा बड़ा बदलावइस ऐतिहासिक जीनोमिक अध्ययन में दक्षिण एशियाई देशों के करीब 1,73,303 जीनोम का बारीकी से आकलन किया गया है। अब तक किसी भी नई दवा या इलाज का परीक्षण (Medical Trial) इंसानों से पहले चूहों पर किया जाता था। लेकिन वैज्ञानिक कई बार इस बात से परेशान रहते थे कि चूहों और इंसानों के जीन पूरी तरह अलग तरीके से काम करते हैं, जिससे चूहों पर सफल रही दवाएं इंसानों पर बेअसर साबित हो जाती थीं और करोड़ों डॉलर व बरसों की मेहनत बर्बाद हो जाती थी। अब पाकिस्तान में मिले इन 'ह्यूमन नॉकआउट्स' की मदद से वैज्ञानिक सीधे यह पता लगा सकेंगे कि किसी खास जीन के गायब होने से इंसानी शरीर और सेहत पर क्या सीधा असर पड़ता है, जिससे कई असाध्य बीमारियों के सटीक इलाज और नई दवाएं बनाने में एक बहुत बड़ा क्लू (सुराग) मिल गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jun 2026 3:51 pm

FSSAI Ghee Adulteration Test: रसोई में रखा घी असली है या नकली? FSSAI ने बताया घर पर मिलावट पहचानने का सबसे आसान तरीका

भारतीय व्यंजनों में घी का एक बेहद खास स्थान है। दाल में तड़का लगाना हो, गरमा-गरम रोटियों पर चुपड़ना हो या फिर स्वादिष्ट मिठाइयां बनानी हों, घी के बिना हर स्वाद अधूरा लगता है। शुद्ध देसी घी न केवल खाने का जायका बढ़ाता है, बल्कि इसमें मौजूद गुड फैट्स हमारी सेहत, इम्यून सिस्टम और हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं। यही वजह है कि अमूमन हर भारतीय घर के किचन में घी का डिब्बा जरूर मिल जाएगा।लेकिन, आज के दौर में सेहत के लिए इतना जरूरी होने के बाद भी कई लोग घी खाने से कतराने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बाजार में मिलने वाले घी में बढ़ती मिलावट है। चंद पैसों के मुनाफे के लिए मिलाया जाने वाला नकली घी सेहत सुधारने के बजाय शरीर को गंभीर रूप से बीमार कर रहा है। ऐसे में देश की शीर्ष खाद्य सुरक्षा संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए घर पर ही घी की शुद्धता जांचने के कुछ बेहद असरदार टिप्स शेयर किए हैं।मिलावटी घी क्या होता है और इसमें किन खतरनाक चीजों को मिलाया जाता है?मिलावटी या नकली घी तैयार करने के लिए माफिया बेहद घटिया और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तरकीबों का इस्तेमाल करते हैं। घी की मात्रा और उसका वजन बढ़ाने के लिए इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें मिलाई जाती हैं:सस्ते तेल और डालडा (वनस्पति): हाइड्रोजनीकृत खाद्य वसा या वनस्पति घी को असली घी में सबसे ज्यादा मिक्स किया जाता है।स्टार्च और उबले आलू: घी को गाढ़ा और दानेदार टेक्सचर देने के लिए इसमें मैश किए हुए उबले आलू या शकरकंद मिला दिए जाते हैं।केमिकल और आर्टिफिशियल फ्रेशनर: नकली घी में असली जैसी खुशबू और पीलापन लाने के लिए प्रतिबंधित फ्रेशनर, स्वीटनर और यूरिया जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो लिवर और किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं।FSSAI का 'शुगर टेस्ट': घर बैठे मिंटों में ऐसे करें असली-नकली घी की पहचानFSSAI ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर एक वीडियो जारी कर बताया है कि आप अपने घर की रसोई में ही बेहद आसान वैज्ञानिक तरीके से यह पता लगा सकते हैं कि आपके घी में वनस्पति या डालडा की मिलावट है या नहीं। इस टेस्ट को करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि नीचे दी गई है:सबसे पहले एक साफ कांच की परखनली (Test Tube) या छोटा कांच का पारदर्शी गिलास लें और उसमें 1 मिलीलीटर पिघला हुआ घी डालें।अब इस पिघले हुए घी में बराबर मात्रा में यानी 1 मिलीलीटर सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड (Concentrated HCl) मिलाएं।इसके बाद इस मिश्रण में आधा चम्मच टेबल शुगर (घर में इस्तेमाल होने वाली सामान्य पिसी हुई चीनी) डालें।अब टेस्ट ट्यूब के मुंह को सुरक्षित तरीके से बंद करके इस पूरे मिश्रण को कम से कम दो मिनट तक बहुत अच्छी तरह हिलाएं (Shake करें)।हिलाने के बाद मिश्रण को करीब 5 मिनट के लिए बिल्कुल स्थिर छोड़ दें ताकि एसिड और घी की परतें अलग-अलग हो सकें।जांच का परिणाम (Result):यदि घी पूरी तरह शुद्ध है: तो घी या एसिड के रंग में कोई भी बदलाव नहीं होगा, वह अपने प्राकृतिक रंग में ही रहेगा।यदि घी मिलावटी है: अगर घी में वनस्पति, डालडा या खराब फैट मिलाया गया होगा, तो एसिड वाली नीचे की परत का रंग बदलकर गहरा लाल या गुलाबी (Red or Pink) हो जाएगा।केमिकल टेस्ट करते समय बरतें विशेष सावधानीFSSAI ने साफ किया है कि चूंकि इस टेस्ट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) का उपयोग होता है, जो कि एक बेहद तेज और ज्वलनशील एसिड है, इसलिए इसे करते समय अत्यधिक सावधानी रखनी चाहिए।एसिड की बूंदें आपकी त्वचा या आंखों पर न गिरें, इसके लिए टेस्ट करते समय हाथों में ग्लव्स (दस्ताने) जरूर पहनें। यदि आप घर पर यह टेस्ट करने में असहज महसूस करते हैं, तो अपने नजदीकी सरकारी या FSSAI द्वारा प्रमाणित नेशनल लैब में भी घी का सैंपल भेजकर उसकी शुद्धता की प्रामाणिक जांच करवा सकते हैं। सेहत से समझौता न करें; सूचित रहें, सुरक्षित रहें!

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jun 2026 9:49 am

किडनी के मरीज आज ही दूरी बना लें इन 5 चीजों से, पोटैशियम की अधिक मात्रा बढ़ा सकती है गंभीर खतरा

शरीर को स्वस्थ रखने में किडनी (गुर्दा) की भूमिका सबसे अहम होती है, जो खून को साफ करने और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है। लेकिन जब किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है, तो शरीर में कुछ खास पोषक तत्वों, विशेषकर पोटैशियम को फिल्टर करना मुश्किल हो जाता है। रक्त में पोटैशियम का स्तर बढ़ना (हाइपरकलेमिया) किडनी के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, जिससे दिल की धड़कन अनियंत्रित होने का खतरा रहता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 तरह के फूड्स के बारे में जिन्हें किडनी की बीमारी में तुरंत अपनी डाइट से बाहर कर देना चाहिए।1. केला और एवोकैडो जैसे हाई-पोटैशियम फलआम तौर पर फलों को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन किडनी के मरीजों के लिए कुछ फल जहर के समान काम कर सकते हैं। केले में पोटैशियम की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके अलावा एवोकैडो, कीवी, संतरा और खुबानी (एप्रिकॉट) भी पोटैशियम के बड़े स्रोत हैं। अगर आपकी किडनी सही से काम नहीं कर रही है, तो इन फलों का सेवन करने से बचें। इनकी जगह डॉक्टर की सलाह पर सेब, पपीता या अमरूद का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।2. हरी पत्तेदार सब्जियां और पालकपालक, ब्रोकली और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां वैसे तो आयरन और विटामिन्स से भरपूर होती हैं, लेकिन इनमें पोटैशियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। पकाने के बाद भी इनमें पोटैशियम की डेंसिटी बनी रहती है। किडनी के मरीजों को कच्चा सलाद या पालक का सूप पीने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। सब्जियों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें 'लीचिंग' प्रक्रिया (काटकर गर्म पानी में कुछ देर उबालकर पानी फेंक देना) से गुजारना बेहतर होता है, जिससे पोटैशियम की मात्रा कुछ हद तक कम हो जाती है।3. आलू, शकरकंद और जमीन के नीचे उगने वाली कंदभारतीय रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला आलू और सर्दियों में चाव से खाया जाने वाला शकरकंद (स्वीट पोटैटो) भी पोटैशियम का खजाना हैं। इसके साथ ही अरबी और जिमीकंद जैसी कंद वाली सब्जियों में भी यह तत्व बहुत ज्यादा होता है। किडनी की गंभीर समस्याओं (CKD) से जूझ रहे लोगों को आलू या शकरकंद का अत्यधिक सेवन करने से सख्त मना किया जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर क्रिएटिनिन और पोटैशियम के स्तर को बिगाड़ सकता है।4. टमाटर और उससे बनी प्यूरी या सॉससब्जी का स्वाद बढ़ाने वाला टमाटर भी किडनी रोगियों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। एक कप टमाटर की प्यूरी में बहुत अधिक मात्रा में पोटैशियम होता है। बाजार में मिलने वाले टोमैटो केचप, सॉस और रेडी-टू-ईट कढ़ी या सूप का सेवन करने से किडनी पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। डाइट एक्सपर्ट्स के अनुसार, किडनी के मरीजों को अपनी सब्जियों में टमाटर की ग्रेवी का उपयोग न्यूनतम या बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।5. सूखे मेवे, नट्स और साबुत अनाजबादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता और किशमिश जैसे कड़क और सूखे मेवे सेहत के लिए जितने अच्छे हैं, किडनी के लिए उतने ही भारी पड़ सकते हैं। नट्स और बीजों में पोटैशियम के साथ-साथ फास्फोरस भी बहुत ज्यादा होता है, जो कमजोर किडनी के लिए फिल्टर करना नामुमकिन हो जाता है। इसके अलावा सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस और होल व्हीट (साबुत अनाज) में पोटैशियम का स्तर अधिक होता है, इसलिए डॉक्टर किडनी के मरीजों को रिफाइंड अनाज का सीमित सेवन करने की सलाह देते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jun 2026 12:46 pm

belly fat yoga: योगा डे 2026: तोंद कम करने के 5 परफेक्ट योगासन, कोई भी 1 करें

yoga for stomach fat: योग दिवस 2026 सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान और बैठकर काम करने की आदत के कारण पेट की चर्बी (Belly Fat) एक आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में वजन कम करने और शरीर ...

वेब दुनिया 19 Jun 2026 3:54 pm

Hair Care Tips: बालों में तेल लगाने के बाद भी नहीं मिल रहा कोई फायदा? जानिए वजह

जब भी बालों की नेचुरल केयर की बात होती है, तो सबसे पहले तेल लगाने का ख्याल ही दिमाग में आता है। सदियों से दादी-नानी सिल्की, स्मूथ व मजबूत बालों के लिए तेल लगाने की सलाह देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोगों के बाल तेल लगाने के बाद और ज्यादा चिपचिपे, बेजान या कमजोर क्यों दिखने लगते हैं? यह हम सभी ने कभी ना कभी जरूर अनुभव किया है। सच तो यह है कि तेल लगाना हर किसी के लिए एक जैसा काम नहीं करता। जिस चीज़ से किसी के बालों को फायदा मिलता है, वही दूसरे व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। तो चलिए जानते हैं कि आपको भी बालों में तेल लगाने के बाद मिल कोई फायदा क्यों नहीं मिल रहा है- इसे भी पढ़ें: बस 3 चीजों से घर पर बनाएं यह Natural Hair Toner, पाएं Super Shiny बाल स्कैल्प का नेचर अलग होना जिस तरह हर किसी की स्किन अलग होती है, ठीक वैसे ही स्कैल्प भी अलग होती है। जहां कुछ लोगों की स्कैल्प पहले से ही काफी ऑयली होती है। ऐसे में बार-बार तेल लगाने से स्कैल्प पर अतिरिक्त तेल जमा हो सकता है। जिससे बालों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है। इससे कभी-कभी खुजली या डैंड्रफ जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ज्यादा देर तक तेल लगा रहना तेल लगाने से बालों को फायदा होता है तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप रात भर या दो-दो दिन तक बालों में तेल लगाए रखें। कुछ लोगों में लंबे समय तक तेल लगा रहने से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं, जिससे स्कैल्प में भारीपन का अहसास होने लगता है। खासकर गर्मियों और उमस वाले मौसम में यह समस्या और भी ज्यादा हो सकती है। गलत तेल का इस्तेमाल करना बालों में तेल लगाते समय इस बात का ख्याल भी रखना चाहिए कि आप कौन सा तेल लग रहे हैं। हर तेल हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। जहां किसी व्यक्ति को नारियल तेल सूट करता है, तो किसी के लिए बादाम या आर्गन ऑयल ज्यादा अच्छा रहता है। इसलिए, अगर तेल लगाने के बाद खुजली, रेडनेस या ज्यादा हेयर फॉल हो रहा हो, तो हो सकता है कि वह तेल आपके लिए सही न हो। ऑयलिंग का तरीका सही ना होना बालों में तेल लगाते समय आपको उसके तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। कुछ लोग ऑयलिंग करते हुए बहुत ज्यादा जोर से मसाज करते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा रगड़ने से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं, जिससे बालों को नुकसान हो सकता है। तो क्या तेल लगाना बंद कर देना चाहिए? बालों में तेल लगाना नुकसानदायक नहीं है। आप बालों को मुलायम रखने, ड्राइनेस कम करने और रिलैक्स महसूस कराने में मदद करता है। बस जरूरी है कि आप अपने बालों और स्कैल्प की जरूरत को समझें और उसके अनुसार सही तेल व तरीका अपनाएं। - मिताली जैन

प्रभासाक्षी 16 Jun 2026 5:42 pm

क्या गर्मियों में आपकी त्वचा सांवली हो गई है? रात को सोने से पहले 'यह' घरेलू पेस्ट लगाएं

गर्मियों की तेज धूप, पसीना और प्रदूषण के कारण चेहरे पर टैनिंग (Tanning) होना और त्वचा का रंग दबा हुआ दिखना बहुत आम बात है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो महंगे केमिकल वाले प्रोडक्ट्स की जगह रात को सोने से पहले यह जादुई घरेलू पेस्ट आजमाएं। यह ...

वेब दुनिया 10 Jun 2026 2:36 pm

पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

Best Healthy Breakfast: सुबह-सुबह वही पोहा और समोसा खाकर बोर हो चुके हैं? टेस्ट तो बढ़िया है, लेकिन रोज़-रोज़ का तला-भुना या हैवी नाश्ता आपको सुस्त बना सकता है। अगर आप अपने ब्रेकफास्ट में कुछ चटपटा, रिफ्रेशिंग और बेहद हेल्दी ढूंढ रहे हैं, तो ...

वेब दुनिया 1 Jun 2026 4:15 pm

Nautapa Health Tips : नौतपा में सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय

nautapa me suraksha ke upay: नौतपा की तेज गर्मी में थोड़ी सी सावधानी आपको लू, डिहाइड्रेशन और थकावट जैसी समस्याओं से बचा सकती है। सही खानपान, पर्याप्त पानी और धूप से बचाव के उपाय अपनाकर आप इस मौसम को आसानी से झेल सकते हैं।

वेब दुनिया 1 Jun 2026 9:57 am