...

IMD Weather forecast: कल का मौसम: 5 सितंबर तक इन राज्यों में आफत की बारिश का अलर्ट, यूपी से उत्तराखंड तक मूसलाधार बरसात की चेतावनी

IMD Weather forecast: देश के कई हिस्सों में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, आज यानी 30 अगस्त से 5 सितंबर के बीच उत्तर भारत से लेकर मध्य, पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने कीआशंका है। कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है।सबसे ज्यादा चिंता उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा को लेकर है। छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त को कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं ओडिशा में 30 और 31 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है।उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्टवेदर बुलेटिन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में अगले कई दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30-31 अगस्त और फिर 1 से 5 सितंबर तक बारिश का दौर रहने का अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 31 अगस्त से 5 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की भी संभावना है। इसके अलावा 30 अगस्त से 1 सितंबर तक कई इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा।आज भी कई इलाकों में जमकर बरसे बादलपिछले 24 घंटे के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई। बांदा के बेबेरू में 22 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। जबकि नरैनी में 10 सेमी और अतर्रा में 8 सेमी बारिश हुई। हरियाणा के कालका में भी 16 सेमी बारिश दर्ज की गई। ओडिशा के राजघाट में 16 सेमी, कुसुमी में 13 सेमी और झारखंड के सरयू में 13 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई। छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज और रघुनाथनगर में 12-12 सेमी बारिश हुई। मध्य प्रदेश के रामनगर में भी 12 सेमी बारिश दर्ज की गई।IMD फोरकास्ट के मुताबिक, इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हुई। ओडिशा, झारखंड, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में भी बारिशहरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। पंजाब में भी इसी अवधि में बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं, उत्तराखंड में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक कई स्थानों पर व्यापक बारिश की संभावना है। 30 अगस्त से 1 सितंबर के बीच उत्तराखंड में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।हिमाचल प्रदेश में 31 अगस्त से 5 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के क्षेत्रों में 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। 31 अगस्त और 1 सितंबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना भी है।मध्य भारत में भी बिगड़ेगा मौसममध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने वाला है। छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक कई स्थानों पर व्यापक बारिश की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 1-2 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। जबकि 3 से 5 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 3 सितंबर के बीच बहुत भारी बारिश हो सकती है।सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी छत्तीसगढ़ के लिए 31 अगस्त को है।महीने के आखिरी दिन अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी अलर्टपूर्वी भारत में बिहार, झारखंड और ओडिशा के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। बिहार में 31 अगस्त से 2 सितंबर तक कई स्थानों पर व्यापक बारिश हो सकती है। 31 अगस्त को कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश की संभावना है। झारखंड में 30 अगस्त से 2 सितंबर तक व्यापक बारिश का अनुमान है। वहीं, ओडिशा में 30 और 31 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 1 सितंबर को भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।पूर्वोत्तर में भी बारिश का दौरमौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वोत्तर राज्यों में भी मानसून सक्रिय रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक कई स्थानों पर बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 31 अगस्त को बहुत भारी बारिश हो सकती है। जबकि असम-मेघालय में 30 अगस्त को ऐसीही आशंका है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 30-31 अगस्त को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है।महाराष्ट्र और पश्चिमी तट पर भी बारिशकोंकण और गोवा में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र में 4 सितंबर को कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। जबकि गुजरात, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ में भी 30 अगस्त से 5 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर बारिश का अनुमान है।दक्षिण भारत में आंधी-तूफान का खतरादक्षिण भारत के कई राज्यों में भी बारिश के साथ तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 30 अगस्त से 2 सितंबर के बीच गरज-चमक और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। इनके झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।आंध्र प्रदेश, यानम और रायलसीमा में भी 30 अगस्त से 3 सितंबर तक गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है। केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की गई है।मछुआरों के लिए भी चेतावनीIMD ने समुद्र में खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, श्रीलंका से लगे दक्षिण-पश्चिमी हिस्से और अंडमान सागर के कुछ क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति प्रतिकूल रह सकती है।ये भी पढ़ें- PM Modi in Uzbekistan: पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, 36वें अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानितवहीं, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तरी आंध्र प्रदेश और बांग्लादेश के तटों के आसपास भी समुद्री गतिविधियों को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के आसपास भी 4 सितंबर तक कुछ हिस्सों में खराब समुद्री परिस्थितियां रहने की संभावना है।

ज़ी न्यूज़ 30 Aug 2026 6:09 pm

Heavy Rain Alert: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं लैंडस्लाइड का भारी खतरा, IMD ने उत्तराखंड, हिमाचल, ओडिशा और पूर्वोत्तर समेत कई राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सक्रिय प्रवाह और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा मौसम बुलेटिन जारी करते हुए उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rain) का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से हिमालयी राज्यों—उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश के साथ भूस्खलन (Landslide), बोल्डर गिरने और नदियों के उफान पर आने का गंभीर जोखिम बना हुआ है।पहाड़ी राज्यों में आफत की बारिश: उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन की चेतावनीउत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश ने स्थानीय जनजीवन और यातायात को प्रभावित किया है:उत्तराखंड: देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पर्वतीय राजमार्गों पर भूस्खलन के कारण सड़कें बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने चारधाम यात्रा और पहाड़ों की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को संवेदनशील रास्तों पर सफर करते समय अत्यधिक सतर्क रहने और मौसम अपडेट देखकर ही आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं।हिमाचल प्रदेश: शिमला, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और चंबा के संवेदनशील इलाकों में तीव्र बारिश और अचानक जलभराव (Flash Flood) की संभावना को देखते हुए स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने टीमों को अलर्ट पर रखा है।पूर्वी और मध्य भारत: ओडिशा, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में अलर्टमैदानी और मध्य भारत के राज्यों में भी मानसूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं:ओडिशा: बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण ओडिशा के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश और 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक आकाशीय बिजली चमकने और व्यापक स्तर पर भारी बारिश की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है।बिहार और झारखंड: गंगा के मैदानी क्षेत्रों, विशेषकर झारखंड और बिहार के कई जिलों में बादलों की आवाजाही और मध्यम से भारी वर्षा का दौर जारी रहने का अनुमान है।पूर्वोत्तर के राज्यों में तेज बारिश का दौर जारीपूर्वोत्तर भारत में मानसूनी हवाओं की सक्रियता से असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ लगातार भारी बारिश दर्ज की जा रही है। भारी वर्षा के चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, जबकि असम और मेघालय के पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी धंसने और सड़क संपर्क टूटने की आशंका जताई गई है।प्रशासन और मौसम विभाग की नागरिकों को महत्वपूर्ण सलाहमौसम विभाग ने भारी बारिश और आंधी-तूफान के दौरान लोगों से सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है:गरज-चमक और बिजली गिरने के समय खुले मैदानों, पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के दौरान नदी-नालों के किनारों और संभावित लैंडस्लाइड प्रोन जोन्स (Landslide Prone Zones) से दूर रहें।जलभराव वाले रास्तों और अंडरपास में वाहन चलाने से बचें तथा स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Aug 2026 11:25 am

Jharkhand Delimitation का विरोध करेंगे आदिवासी, Bandhu Tirkey ने दी चेतावनी

झारखंड कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने शनिवार को आशंका जताई कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार इस साल ‘अवश्य’ परिसीमन लागू करेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह प्रक्रिया 2007-08 की रिपोर्ट पर आधारित हुई, तो राज्य के आदिवासी समुदाय इसका विरोध करेंगे। केंद्र सरकार ने 14 फरवरी, 2008 को परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी थी, जिससे देश का राजनीतिक मानचित्र बदल गया। हालांकि, सरकार ने असम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ झारखंड में भी परिसीमन की प्रक्रिया को 2026 तक टालने का फैसला किया था। इसके बाद संसद ने इस संबंध में एक संशोधन पारित किया। झारखंड के पूर्व मंत्री तिर्की ने रविवार को प्रस्तावित ‘आदिवासी महाजुटाव रैली’ की तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इस रैली के जरिए राज्य के आदिवासियों को केंद्र सरकार की गलत नीतियों के बारे में जागरूक किया जाएगा।’’तिर्की ने कहा, ‘‘हमें लगता है कि केंद्र सरकार इस साल निश्चित रूप से परिसीमन कराएगी, और अगर वह 2007-08 की परिसीमन रिपोर्ट के आधार पर यह प्रक्रिया करती है, तो हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सीटों की संख्या उसी अनुपात में बढ़नी चाहिए।’’झारखंड विधानसभा की मौजूदा संख्या 1971 की जनगणना पर आधारित है। झारखंड की 81 सदस्यों वाली इस विधानसभा में 28 सीट अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं, जबकि राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से पांच सीट इसी समुदाय के लिए आरक्षित हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस रैली के जरिए झारखंड के आदिवासियों को संसद में ‘खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक पारित होने से होने वाले नुकसान के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। तिर्की ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार झारखंड से कोयला ले जाना चाहती है और खनिज अधिकारों और खनिजों वाली जमीन पर कर लगाने के राज्य के अधिकार को सीमित करना चाहती है। इसे भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’उन्होंने कहा कि राज्य की झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस सरकार संशोधित खनन अधिनियम के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी और जरूरत पड़ने पर राज्य में आर्थिक नाकेबंदी भी करेगी।

प्रभासाक्षी 29 Aug 2026 7:42 pm

कल का मौसम: IMD ने इस इलाके में भारी बारिश की रेड कलर वॉर्निंग दी, यूपी-बिहार संग कई राज्यों में 30 अगस्त को बारिश का तांडव

30 August Weather: देश के कई हिस्सों में मानसूनी आफत थमने का नाम नहीं ले रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने ओडिशा में भारी बारिश और बिगड़ते हालात को देखते हुए रेड कलर कैटेगरी की वॉर्निंग के तहत अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में 30 अगस्त को तेज बारिश और तूफानी मौसम का अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा में रेड अलर्ट: 30 अगस्त को आ सकती है आफत की बारिशमौसम विभाग के मुताबिक 30 अगस्त को ओडिशा के अलग-अलग हिस्सों में मूसलाधार से भी ज्यादा यानी अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा राज्य में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने का भी अलर्ट है। पूर्वी भारत में बन रहे मौसमी तंत्र के असर से ओडिशा में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। इसको लेकर स्थानीय प्रशासन और आम लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल में अति भारी बारिश की चेतावनीओडिशा के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भी बादलों का तांडव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गांगेय पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है। इसके अलावा गांगेय पश्चिम बंगाल में बिजली कड़कने के साथ-साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।यूपी, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड में कैसा रहेगा मौसमउत्तर भारत और मध्य भारत के राज्यों में भी 30 अगस्त को मूसलाधार बारिश की स्थिति बनी रहेगी। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने के पूरे आसार हैं। बिहार, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और पश्चिम मध्य प्रदेश में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों- नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 30 अगस्त को भारी बारिश के साथ गरज-चमक का दौर जारी रहेगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।तटीय इलाकों और समुद्र में तेज हवाओं का खतरामौसम विभाग ने समुद्र और तटीय क्षेत्रों के लिए भी चेतावनी जारी की है। अरब सागर के इलाकों में सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कई हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।वहीं बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे इलाकों में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे (झोंकों में 65 किमी प्रति घंटे) की गति से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाओं के साथ बिजली कड़कने का अलर्ट दिया गया है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।यह भी पढ़ें:Weather Update: बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया सिस्टम, यूपी से MP तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानिए कहां-कहां तूफानी मौसम

ज़ी न्यूज़ 29 Aug 2026 6:48 pm

डोभाल की कूटनीति और भारत-चीन संबंधों की नई करवट

भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों की तल्खी के बाद अब संवाद, संयम और व्यावहारिक सहयोग का एक नया दौर दिखाई दे रहा है। इसे किसी अचानक आए परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षा, कूटनीति और राष्ट्रीय हितों को साथ लेकर चलने वाली एक दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए। इस बदलते परिदृश्य में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनकर सामने आई है। 25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता ने इस प्रक्रिया को ठोस आधार दिया है। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बनाए रखने, सीमा निर्धारण की दिशा में शीघ्र एवं सार्थक प्रगति करने तथा सैन्य-द्विपक्षीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर सहमति बनाई है। डोभाल की बीजिंग यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह केवल सीमा विवाद पर बातचीत नहीं थी। यह उस व्यापक प्रश्न पर विमर्श था कि क्या भारत और चीन प्रतिस्पर्धा के बावजूद सह-अस्तित्व, स्थिरता और पारस्परिक हितों का रास्ता तलाश सकते हैं। दोनों देशों ने दो अतिरिक्त सैन्य संपर्क-बिंदु और पूर्वी तथा मध्य क्षेत्रों में दो अतिरिक्त सैन्य दूरभाष संपर्क स्थापित करने पर सहमति जताई है। सीमा व्यापार, कैलाश-मानसरोवर यात्रा और सीमा-पार सहयोग को भी आगे बढ़ाने का निर्णय हुआ है। अजीत डोभाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे सुरक्षा और कूटनीति को परस्पर विरोधी नहीं मानते। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है-मजबूत सुरक्षा-व्यवस्था ही प्रभावी कूटनीति की आधारभूमि बन सकती है। चीन के संदर्भ में भी भारत का संदेश यही रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों का पूर्ण सामान्यीकरण संभव नहीं है। 25वें दौर की वार्ता में यही भारतीय दृष्टिकोण प्रमुखता से सामने आया। डोभाल का व्यक्तित्व केवल वार्ताकार का नहीं, बल्कि सुरक्षा रणनीतिकार का है। वे लंबे समय तक खुफिया तंत्र में रहे, विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में काम किया और बाद में खुफिया ब्यूरो के प्रमुख बने। भारत सरकार के अनुसार, उन्होंने पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उनकी कार्यशैली में एक उल्लेखनीय संतुलन दिखाई देता है-जहां आवश्यक हो वहां कठोरता और जहां अवसर हो वहां संवाद। उड़ी के बाद की सर्जिकल कार्रवाई, बालाकोट की कार्रवाई, डोकलाम संकट के दौरान कूटनीतिक प्रयास और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनकी भूमिका इसी व्यापक दृष्टिकोण के उदाहरण माने जाते हैं। 2026 में उन्हें लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। इसे भी पढ़ें: जयशंकर और डोभाल की रूस-चीन यात्रा के कूटनीतिक संदेश को ऐसे समझिए भारत-चीन संबंधों का सबसे कठिन दौर वर्ष 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद आया। चार वर्षों तक सीमा पर सैन्य तनाव बना रहा। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच सैनिकों की पूर्ण वापसी और संबंधित विवादों के समाधान के बाद संबंधों को धीरे-धीरे पटरी पर लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। उसी वर्ष कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति तथा मतभेदों को संबंधों की समग्र दिशा को प्रभावित न करने देने पर जोर दिया था। यही वह बिंदु था जहां डोभाल की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई। दिसंबर 2024 में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत से शुरू हुई प्रक्रिया अब 25वें दौर तक पहुंची है। इस बार आठ बिंदुओं पर बनी सहमति संकेत देती है कि बातचीत केवल औपचारिकता नहीं रह गई है। सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ तथा कार्य समूहों को सक्रिय करना, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलतफहमी रोकने के लिए मौजूदा सैन्य एवं कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग और नए संपर्क तंत्र बनाना व्यावहारिक विश्वास निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। भारत-चीन संबंध केवल सैनिक चौकियों और राजनयिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संपर्क भी रहा है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा की पुनर्बहाली और विस्तार, सीमा व्यापार मार्गों को फिर खोलना तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। 2026 में कैलाश-मानसरोवर यात्रा लिपुलेख और नाथू ला, दोनों मार्गों से संचालित हुई है। 25वें दौर की वार्ता में तीन निर्धारित सीमा व्यापार केंद्रों को फिर खोलने की प्रगति का स्वागत किया गया तथा व्यापार और तीर्थयात्रा को और मजबूत करने पर सहमति बनी। यह छोटा कदम नहीं है। सीमा पर सैनिकों की संख्या घटाना एक सुरक्षा उपाय है, लेकिन सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के लिए व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाना दीर्घकालिक शांति की सामाजिक नींव तैयार करता है। शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा एक अवसर भी है, परीक्षा भी है। इसी पृष्ठभूमि में 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की संभावना जताई जा रही है। यदि यह यात्रा होती है तो यह सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उनके साथ लगभग चार सौ अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। हालांकि 27 अगस्त तक चीन की ओर से उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए शी की संभावित यात्रा को केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी नहीं माना जाना चाहिए। यह भारत-चीन संबंधों की वास्तविक दिशा को परखने का अवसर हो सकती है। वर्ष 2019 का चेन्नई संवाद अपेक्षाकृत सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ था, लेकिन उसके एक वर्ष बाद गलवान ने संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया। अब यदि शी नई दिल्ली आते हैं तो दोनों देशों के पास उस टूटे हुए विश्वास को सावधानी से जोड़ने का अवसर होगा। लेकिन भारत को उत्साह में अपनी मूल सुरक्षा चिंताओं को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे, सीमा निर्धारण का लंबित प्रश्न और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पारदर्शिता जैसी चुनौतियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं। इसलिए भारत की नीति मित्रता की आकांक्षा, लेकिन राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं होनी चाहिए। डोभाल की विशेषता यही है कि वे संवाद को कमजोरी नहीं बनने देते और शक्ति को टकराव का पर्याय भी नहीं बनाते। उनकी कूटनीति में संदेश स्पष्ट है-भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा कीमत पर नहीं, सहयोग चाहता है, लेकिन समानता के आधार परय संबंध सुधारना चाहता है, लेकिन सीमा की वास्तविकताओं को भुलाकर नहीं। आज भारत-चीन संबंध जिस मोड़ पर खड़े हैं, वहां डोभाल की भूमिका संकटमोचक से आगे बढ़कर विश्वास-निर्माता और सुरक्षा-आधारित कूटनीति के सूत्रधार की बनती दिखाई देती है। 25वें दौर की वार्ता में हुई आठ सूत्रीय सहमति इसका प्रमाण है कि कठिनतम मतभेदों के बीच भी संवाद के रास्ते खुले रखे जा सकते हैं। शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा इस प्रक्रिया को शीर्ष नेतृत्व की राजनीतिक दिशा दे सकती है। किंतु असली सफलता किसी एक शिखर बैठक की तस्वीर में नहीं, बल्कि सीमा पर स्थायी शांति, पारस्परिक विश्वास, व्यापारिक संपर्क और विवादों के न्यायसंगत समाधान में होगी। भारत को चीन से संबंध सुधारने हैं, लेकिन अपनी सामरिक स्वायत्तता और सुरक्षा-सजगता के साथ। डोभाल की कूटनीति का सार भी यही है-संवाद के दरवाजे खुले रहें, पर राष्ट्रीय हितों की चौखट कभी कमजोर न हो। यही दृष्टिकोण भारत-चीन संबंधों को टकराव से प्रतिस्पर्धी सह-अस्तित्व और अंततः स्थायी शांति की ओर ले जाने की सबसे व्यावहारिक राह बन सकता है। - ललित गर्ग लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

प्रभासाक्षी 29 Aug 2026 5:30 pm

Weather Update: बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया सिस्टम, यूपी से MP तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानिए कहां-कहां तूफानी मौसम

IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून की चाल एक बार फिर से तेज हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम को लेकर ताजा बुलेटिन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र आकार ले रहा है। इसके असर से आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और इसके आसपास के इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र की वजह से पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल व उत्तर ओडिशा के तटों पर 29 अगस्त के आसपास एक और नया लो-प्रेशर एरिया बनने वाला है। इस नए सिस्टम के चलते ओडिशा में अति भारी बारिश का खतरा मंडरा रहा है।उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आफत की बारिश, पिछले 24 घंटों का हालमौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी या उससे अधिक) दर्ज की गई है। वहीं उत्तराखंड, मेघालय, मिजोरम और पूर्वी मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश (12 से 20 सेमी) हुई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, बिहार, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश में भी कुछ जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है।उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी-उत्तराखंड और हिमाचल में मूसलाधार बारिश का अनुमानउत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश का जोर बना रहेगा। उत्तराखंड में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक काफी बारिश की संभावना जताई गई है। इसमें 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में 30 अगस्त से 3 सितंबर के दौरान काफी बारिश और 31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।उत्तर प्रदेश के संदर्भ में पश्चिम यूपी में 28 अगस्त और 2 से 3 सितंबर के दौरान भारी बारिश का अनुमान है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के इलाकों में भी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच व्यापक बारिश हो सकती है।मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में झमाझम बारिश की चेतावनीमध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इलाकों में मौसम विभाग ने काफी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 28 से 30 अगस्त और 2 से 3 सितंबर के बीच मध्यम से तेज बारिश होगी। 28 अगस्त और 3 सितंबर को बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।पश्चिम मध्य प्रदेश में 28 अगस्त और 2-3 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। विदर्भ क्षेत्र में भी 28 अगस्त और 2-3 सितंबर के दौरान झमाझम बारिश होने के आसार हैं।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश और तूफानी हवाएंपूर्वी भारत के राज्यों पर बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए मौसमी तंत्र का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। ओडिशा में 28 से 31 अगस्त के दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होगी जबकि 30 अगस्त को राज्य में कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 28 और 29 अगस्त को 50 से 60 किमी प्रति घंटे (जो बढ़कर 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है) की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 28 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान मध्यम से भारी बारिश के साथ 30 से 50 किमी प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। बिहार में 28 अगस्त को आकाशीय बिजली चमकने और बिजली गिरने की गंभीर चेतावनी भी दी गई है। पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी बारिश और बिजली कड़कने की गतिविधियां जारी रहेंगी।पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण-गोवा में बारिश, दक्षिण भारत में कमजोर रहेगा मानसूनपश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा के तटीय इलाकों में 28 अगस्त से 3 सितंबर के दौरान बारिश जारी रहने का अनुमान है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र व कच्छ में छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की बात करें तो अगले एक हफ्ते के दौरान यहां मानसूनी गतिविधियां थोड़ी सुस्त रहने की संभावना है। हालांकि, तटीय कर्नाटक, केरल, माहे और लक्षद्वीप में 28-29 अगस्त और 2-3 सितंबर को अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने और छिटपुट बारिश होने की संभावना जताई गई है।यह भी पढ़ें:आज का मौसम 29 अगस्त: मुंबई और ओडिशा में बारिश की चेतावनी, दिल्ली-NCR, यूपी में अचानक बदलेगा मौसम, IMD ने दिया बड़ा अलर्ट

ज़ी न्यूज़ 29 Aug 2026 5:09 pm

Arunachal Vision 2036: CM Pema Khandu का बड़ा प्लान, 1 लाख युवाओं को मिलेगी Skill Training और वैश्विक पहचान

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को राज्य के युवाओं को 2036 तक ज़्यादा कुशल, उद्यमी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक रोडमैप जारी किया। उन्होंने कहा कि 'अरुणाचल ह्यूमन कैपिटल एंड इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन विज़न 2036' और 'अरुण MSME मिशन' का मकसद पूरे राज्य में रोज़गार और उद्यम के नए अवसर पैदा करना है। खांडू ने कहा कि इस योजना का लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार वर्कफ़ोर्स, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमी और इनोवेशन पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाना है। उन्होंने कहा कि 2036 तक का यह सफ़र ऐसी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए है जो टैलेंट, मौकों और वैश्विक पहचान से आगे बढ़ेगी। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Kiren Rijiju की एक डुबकी से आई सियासी सुनामी! Pawan Khera को Half Naked वाले तंज पर मिला करारा जवाब मुख्यमंत्री के अनुसार, इस विज़न का लक्ष्य 1 लाख युवाओं, 10,000 उद्यमियों और 10,000 अप्रेंटिस को ट्रेनिंग देना; 10,000 लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने में मदद करना; 100 इंडस्ट्री पार्टनरशिप बनाना; और सभी 10 ITI को आधुनिक स्किल हब और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में बदलना है। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे हुनर ​​और मौके देने पर ध्यान दिया जाएगा, जिनसे वे न सिर्फ़ राज्य और देश में, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी मुकाबला कर सकें। खांडू ने युवाओं में बढ़ती उद्यमिता की इच्छा पर ज़ोर देते हुए कहा, आज का युवा सिर्फ़ नौकरी ही नहीं, बल्कि रोज़गार के अवसर भी तलाश रहा है। उन्होंने कहा इस उद्यमिता की भावना को मज़बूत करने के लिए हमने 'अरुण MSME मिशन' शुरू किया है। उन्होंने आगे बताया कि हर साल 500 MSME को रिवाइवल और क्षमता अपग्रेडेशन, मार्केट लिंकेज, क्षमता बढ़ाने और निर्यात में मदद के ज़रिए सहायता दी जाएगी। इसे भी पढ़ें: केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने अरुणाचल प्रदेश की वायरल बच्ची Tinkle से वीडियो कॉल पर की बात उन्होंने कहा कि सभी 10 ITI को आधुनिक स्किल हब और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में बदलने से स्किल डेवलपमेंट के लिए एक मज़बूत आधार मिलेगा, जबकि इंडस्ट्रीज़ के साथ पार्टनरशिप से ट्रेनिंग को नए रोज़गार के मौकों के हिसाब से ढालने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, रोज़गार पैदा होंगे और राज्य में युवाओं के नेतृत्व में आर्थिक बदलाव तेज़ी से आएगा।

प्रभासाक्षी 29 Aug 2026 2:00 pm

यूपी-बिहार-मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में अगले 24 घंटे बहुत तेज बारिश की चेतावनी, IMD ने जारी किया ताजा अपडेट

मौसम विभाग ने अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, बिहार, मिजोरम, त्रिपुरा, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, विदर्भ, उत्तराखंड, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ जगहों पर भारी मॉनसून बारिश का अनुमान लगाया है।

खबर इंडिया टीवी 29 Aug 2026 12:10 pm

अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे में महसूस किए गए भूकंप के झटके

अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे में महसूस किए गए भूकंप के झटके

समाचार नामा 28 Aug 2026 6:54 pm

अग्निवीर की टांके में डूबने से मौत:एक सप्ताह पहले छुट्टी पर घर आए थे, अरुणाचल प्रदेश में थी पोस्टिंग

बालोतरा जिले में टांके में डूबने से अग्निवीर की मौत हो गई। वह एक सप्ताह पहले घर आए थे। सुबह नहाने के लिए टांके से पानी खींच रहे थे, इसी दौरान पैर फिसलने से टांके में गिर गए। अग्निवीर जोगाराम (25) पुत्र खेताराम की परेऊ गांव के रहने वाले थे।्र अरुणाचल प्रदेश में पोस्टिंग थी। अभी शादी नहीं हुई थी।हादसा शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे गिड़ा थाना क्षेत्र के परेऊ गांव में हुआ। सूचना पर गिड़ा थानाधिकारी अचलाराम पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे और शव को टांके से निकालकर गिड़ा अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया। पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। तीन साल पहले अग्निवीर में भर्ती हुए थे जोगाराम साल, 2023 में जोगाराम का भारतीय सेना के अग्निवीर में सिलेक्शन हुआ था। वह करीब एक सप्ताह पहले ही छुट्टी पर गांव आए थे। परिवार को लगा जोगाराम सुबह वॉक के लिए गए हैं। करीब 9 बजे तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उनके मोबाइल पर फोन किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद परिजन तलाश करते हुए खेत पर पहुंचे। वहां टांके के पास जोगाराम के कपड़े पड़े मिले। टांके में उनका शव पड़ा था। आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सिक्किम और महाराष्ट्र से भाई रवानागिड़ा थानाधिकारी अचलाराम ने बताया- घर के पास बने टांके में डूबने से अग्निवीर जोगाराम (25) की मौत हुई है। परिजनों की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है। पोस्टमॉर्टम करवा दिया गया है। भाइयों के आने के बाद शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। जोगाराम के बड़े भाई सवाईराम भारतीय सेना की आर्टिलरी में सिक्किम में तैनात हैं। परिवार में माता-पिता और चार भाई हैं, जिनमें जोगाराम दूसरे नंबर का था। रक्षाबंधन के पर्व के बीच अग्निवीर जोगाराम की मौत से परिवार में मातम छा गया। परिवार में माता-पिता और तीन भाई हैं। हादसे की सूचना पर बाड़मेर के जालीपा से सेना अधिकारी भी परेऊ पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। ये खबर भी पढ़िए… जैसलमेर के 19 साल के अग्निवीर का हार्टअटैक से निधन:2 महीने पहले भर्ती हुए, दिल्ली में कर रहे थे ट्रेनिंग; सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के रहने वाले अग्निवीर गोपाल सिंह भाटी (19) का मंगलवार को हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे दो महीने पहले ही अग्निवीर भर्ती हुए थे। दिल्ली में भारतीय सेना की ट्रेनिंग ले रहे थे। पूरी खबर पढ़िए

दैनिक भास्कर 28 Aug 2026 6:46 pm

कल का मौसम: यूपी-बिहार समेत पूर्वी भारत में फिर तेज बारिश, 29 अगस्त को इन राज्यों में Heavy Rain का अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश भर में मानसून का असर लगातार देखा जा रहा है और कई क्षेत्रों में बारिश एक बार फिर जोर पकड़ने लगी हैं। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 29 अगस्तके लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए पूर्वी भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक ओडिशा में जहां मूसलाधार बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा, वहीं बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में तेज बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा जताया गया है। ओडिशा में अति भारी बारिश का अलर्ट, बिहार, झारखंड और बंगाल में भी बिगड़ेगा मौसमपूर्वी भारत के राज्यों में 29 अगस्त को बारिश की तीव्रता काफी अधिक रहेगी। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही ओडिशा में अलग-अलग जगहों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।इसी तरह बिहार, झारखंड और गांगेय पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार बारिश होने के आसार हैं। इन राज्यों में बारिश के साथ-साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अंधड़ और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने स्थानीय निवासियों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।उत्तर भारत का मिजाज: उत्तराखंड में भारी बारिश, जम्मू-कश्मीर में आंधी-बिजली की चेतावनीउत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में भी मानसूनी हवाओं का असर बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 29 अगस्त को उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही उत्तराखंड में अलग अलग जगहों पर गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट भी जारी किया गया है।जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के क्षेत्रों में अलग अलग जगहों पर तेज गरज के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अनुमान जताया गया है। पर्वतीय इलाकों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को भूस्खलन व खराब मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।मध्य भारत और पूर्वोत्तर का हाल: एमपी, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के सातों राज्यों में बरसेगी आफतमध्य भारत में भी मानसूनी बारिश का सिलसिला थमने वाला नहीं है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 29 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूरे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग अलग इलाकों में गरज के साथ बिजली कड़कने और गिरने का जोखिम बना रहेगा।पूर्वोत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां बेहद तेज रहने वाली हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश का अलर्ट है। पूर्वोत्तर के इन सभी सातों राज्यों में भारी बारिश के साथ तेज गर्जना और बिजली चमकने का अनुमान जताया गया है।दक्षिण भारत में तेज हवाओं का जोर, अंडमान में तूफानी अंधड़ की आशंकादक्षिण भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश से ज्यादा तेज तूफानी हवाओं का असर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और सिक्किम में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से अंधड़ आ सकता है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के अलग-अलग हिस्सों में तेज सतही हवाएं चलने का पूर्वानुमान है।द्वीपीय क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मौसम बेहद तूफानी बना रहेगा। यहां पृथक स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं (Thundersquall) का अलर्ट जारी किया गया है।समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के लिए अलर्टतटीय और समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के पास, पश्चिम-मध्य अरब सागर के बड़े हिस्से, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर तथा उत्तरी व पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ इलाकों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु के तटीय इलाकों में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक के झोंके आने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन क्षेत्रों में गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है।यह भी पढ़ें:IMD Heavy Rain Alert: मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट! यूपी-MP में आसमान से आफत, इन राज्यों में 3 सितंबर तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट

ज़ी न्यूज़ 28 Aug 2026 5:45 pm

IMD Heavy Rain Alert: मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट! यूपी-MP में आसमान से आफत, इन राज्यों में 3 सितंबर तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर खतरनाक रूप लेता दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा समेत कई राज्यों में आने वाले दिनों मेंमूसलाधार बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का भी खतरा जताया गया है। पिछले 24 घंटे में ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। उत्तराखंड, मेघालय, मिजोरम और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ गया है।यूपी-मध्य प्रदेश में फिर भारी बारिश की दस्तकपूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से 28 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। उत्तर प्रदेश में भी 28 अगस्त को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार यह कम दबाव का क्षेत्र फिलहाल पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में मौजूद है, हालांकि अगले 24 घंटे में इसके कमजोर पड़ने की संभावना है।मध्य प्रदेश में इन दिनों सतर्क रहेंपूर्वी मध्य प्रदेश में 28 से 30 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश की संभावना है। इसके बाद 2 और 3 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रह सकता है:- पूर्वी मध्य प्रदेश में 29 अगस्त से 2 सितंबर तक कहीं-कहीं भारी बारिश होगी। 28 अगस्त और 3 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 28 अगस्त तथा 2-3 सितंबर को भारी बारिश की आशंका है। छत्तीसगढ़ में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी सावधानी की जरूरत है। ओडिशा में सबसे बड़ा खतरा! 30 अगस्त को बेहद भारी बारिश का अलर्टबंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तट के पास 29 अगस्त के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा में 28 से 31 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। लेकिन 30 अगस्त को स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि मौसम विभाग ने इस दिन अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।ओडिशा में 28-29 अगस्त और 31 अगस्त को भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा राज्य में गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है।उत्तराखंड में भी लगातार बारिश का दौर जारीउत्तराखंड में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। 28 से 30 अगस्त और फिर 2-3 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच बहुत भारी बारिश की भी आशंका है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और सड़क संपर्क प्रभावित होने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।बिहार में बिजली और तेज हवाओं का अलर्टबिहार में आज यानी 28 अगस्त को मध्यम से गंभीर बिजली गतिविधि की संभावना जताई गई है। राज्य में 28 अगस्त से 1 सितंबर तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 28 अगस्त से 3 सितंबर के बीच गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है। झारखंड में भी 28 से 31 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है।बंगाल और पूर्वोत्तर में भी मौसम बिगड़ेगापश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी 28 अगस्त से 3 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक बारिश का असरपिछले 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान में 7-11 सेंटीमीटर, जबकि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ में भी इस दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।दक्षिण भारत में बारिश अपेक्षाकृत कम, लेकिन तेज हवाओं का खतरामौसम विभाग ने बताया है कि प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं। फिर भी तटीय कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। उत्तर आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 28-29 अगस्त को तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 50-60 किमी प्रति घंटे तक झोंकों के साथ पहुंच सकती है।मछुआरों के लिए भी समुद्र में जाने की मनाही जैसा अलर्टमौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्री परिस्थितियों को लेकर मछुआरों को चेतावनी दी है। बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश के तटों के आसपास 29 अगस्त से 1 सितंबर के बीच मौसम खराब रहने की संभावना है। अंडमान सागर में भी तेज हवाओं और 50-70 किमी प्रति घंटे तक की थंडरस्क्वॉल की संभावना जताई गई है।अगले कुछ दिन बेहद अहमIMD के पूर्वानुमान से साफ है कि 28 अगस्त से 3 सितंबर तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। सबसे ज्यादा चिंता ओडिशा की है, जहां 30 अगस्त को अत्यधिक भारी बारिश का खतरा है। वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भी अलग-अलग दिनों में भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह है।ये भी पढ़ें- Sonia Gandhi Book Row: 'हम पुस्तक को पब्लिश करने के लिए तैयार थे, लेकिन...'; Penguin ने सोनिया गांधी की किताब छापने से किया इनकार? दी ये सफाई

ज़ी न्यूज़ 28 Aug 2026 4:56 pm

रक्षाबंधन पर आज दिनभर आपके इलाके में कैसा रहेगा मौसम? आंधी-तूफान के साथ कहां होगी बारिश; 3 राज्यों में ऑरेंट अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल में भारी बारिश की उम्मीद है। मध्य प्रदेश में बारिश मुख्य रूप से ग्वालियर संभाग में होने की संभावना है, जबकि उत्तर प्रदेश में बांदा, कानपुर और झांसी जैसे इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।

खबर इंडिया टीवी 28 Aug 2026 9:31 am

रक्षाबंधन पर आज दिनभर आपके इलाके में कैसा रहेगा मौसम? आंधी के साथ कहां होगी बारिश; 3 राज्यों में ऑरेंट अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल में भारी बारिश की उम्मीद है। मध्य प्रदेश में बारिश मुख्य रूप से ग्वालियर संभाग में होने की संभावना है, जबकि उत्तर प्रदेश में बांदा, कानपुर और झांसी जैसे इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।

खबर इंडिया टीवी 28 Aug 2026 9:31 am

Vanakkam Poorvottar: एक Water Bomb भारत के बगल में भी रख रहा है China, Brahmaputra पर बन रहा China Motuo Hydropower Project ला सकता है आपदा

नेपाल में ग्लेशियर ढहने से आई विनाशकारी बाढ़ ने सिर्फ हिमालय की नाजुक भौगोलिक संरचना को उजागर नहीं किया है, बल्कि भारत की सीमा से सटे तिब्बत में चीन के निर्माणाधीन 60,000 मेगावाट के मेदोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर भी खतरे की घंटी तेज कर दी है। नेपाल में सैंकड़ों लोगों की मौत और 750 लोगों के लापता होने की खबरों के बीच अब यह सवाल और गंभीर हो गया है कि दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक हिमालय में इतना विशाल बांध आखिर कितना सुरक्षित है। हम आपको बता दें कि शुरुआत में नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई इस आपदा को 4.4 तीव्रता के भूकंप से जोड़कर देखा गया था। लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के नए विश्लेषण ने तस्वीर बदल दी। यूएसजीएस के अनुसार, अतिरिक्त भूकंपीय आंकड़ों और उपग्रह तस्वीरों के अध्ययन से पता चला कि यह भूकंप नहीं था, बल्कि ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद मलबे के तेज बहाव से उत्पन्न कंपन थे। ऊंचाई वाले इलाके से टूटकर नीचे आया बर्फ और मलबे का विशाल हिस्सा देखते ही देखते विनाशकारी जलप्रवाह में बदल गया और नेपाल के रसुवा तथा धादिंग जिलों में भारी तबाही मचा दी। इसे भी पढ़ें: 15 दिनों के भीतर दो बार एक मंच पर आएंगे मोदी-पुतिन और शी, ट्रंप की बेचैनी बढ़ी इस आपदा में 133 भारतीय नागरिकों समेत सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं। बड़ी संख्या में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं के भी प्रभावित होने की खबर है। घर, सड़कें और बिजली परियोजनाएं पानी के तेज बहाव में बह गईं। भू-आकृति विशेषज्ञ डेनियल शुगर के आकलन के मुताबिक, ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर के खिसककर टूटने और पिघलती बर्फ से बने पानी ने इस भयावह घटना को जन्म दिया। लेकिन नेपाल की यह त्रासदी अब भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। इसकी वजह है चीन का मेदोग या मोटुओ हाइड्रोपावर स्टेशन, जिसका निर्माण यारलुंग त्सांगपो नदी पर किया जा रहा है। यही नदी भारत में प्रवेश करते ही अरुणाचल प्रदेश में सियांग और आगे असम में ब्रह्मपुत्र कहलाती है। करीब 60 गीगावाट क्षमता वाली यह परियोजना पूरी होने पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बन सकती है। इसके 2033 तक चालू होने का लक्ष्य बताया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत 137 अरब डॉलर से 170 अरब डॉलर के बीच है और इसमें यारलुंग त्सांगपो के विशाल मोड़ वाले क्षेत्र में पांच चरणों में जलविद्युत ढांचा विकसित करने की योजना है। सबसे बड़ा सवाल इसकी विशालता नहीं, बल्कि इसका स्थान है। मेदोग परियोजना उस हिमालयी क्षेत्र में बनाई जा रही है जहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव होता है। जुलाई में चीन की सरकारी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण व्यवस्था से जुड़े भूवैज्ञानिकों के एक अध्ययन ने भी परियोजना स्थल के नीचे सक्रिय पाइझेन फॉल्ट होने की बात कही थी। यानी जिस क्षेत्र में धरती की हलचल स्वयं एक स्थायी खतरा है, वहीं दुनिया का सबसे विशाल बांध खड़ा किया जा रहा है। रणनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने इसे “वॉटर बम” की संज्ञा देते हुए चेतावनी दी है कि किसी बड़े भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन या अचानक जलप्रवाह की स्थिति में इसका असर भारत के पूर्वोत्तर और आगे बांग्लादेश तक पड़ सकता है। पूर्व राजदूत राजीव डोगरा ने भी अरुणाचल और असम के लिए कहीं बड़ी तबाही की आशंका जताई है। वहीं भारत की चिंता केवल संभावित बांध दुर्घटना तक सीमित नहीं है। चीन नदी के ऊपरी हिस्से को नियंत्रित करता है। हालांकि ब्रह्मपुत्र के जल का बड़ा हिस्सा भारत में मानसूनी सहायक नदियों से आता है, फिर भी तिब्बत से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा और समय में बड़े बदलाव अरुणाचल और असम के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। भारी बारिश के दौरान अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया तो बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, जबकि सूखे दौर में प्रवाह कम होने से कृषि, मत्स्य पालन और स्थानीय समुदाय प्रभावित हो सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पहले ही इस परियोजना को अस्तित्व से जुड़ा खतरा बता चुके हैं। भारत ने जवाबी रणनीति के तौर पर सियांग नदी पर 11,000 मेगावाट की अपर सियांग मल्टीपर्पज परियोजना को आगे बढ़ाया है, जिसका एक उद्देश्य ऊपरी हिस्से से आने वाले अचानक जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कवच तैयार करना है। हालांकि इस परियोजना को लेकर अपर सियांग की आदि जनजातीय समुदायों में विस्थापन और पारदर्शिता को लेकर विरोध भी मौजूद है। देखा जाये तो नेपाल की त्रासदी ने पूर्व चेतावनी का एक गंभीर सवाल खड़ा किया। आरोप है कि तिब्बत की ओर से आने वाली इस विशाल जलराशि के बारे में नेपाल को समय पर सूचना नहीं मिली। भारत के लिए भी यह चिंता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन और भारत के बीच ऐसा कोई व्यापक जल-साझेदारी समझौता नहीं है, जिसके तहत वास्तविक समय में व्यापक हाइड्रोलॉजिकल जानकारी साझा करना अनिवार्य हो। हिमालय ने नेपाल की बाढ़ के जरिए एक बार फिर बता दिया है कि यहां खतरा केवल भूकंप का नहीं है। ग्लेशियर ढह सकते हैं, पहाड़ टूट सकते हैं, भूस्खलन नदी का रास्ता बदल सकते हैं और देखते ही देखते शांत जलधारा विनाश की दीवार बन सकती है। ऐसे में सक्रिय फॉल्ट लाइन के ऊपर खड़ा हो रहा चीन का मेदोग मेगा डैम केवल इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि भारत की जल सुरक्षा, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है। बहरहाल, नेपाल की तबाही एक स्थानीय आपदा भर नहीं है। यह पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए चेतावनी है, क्योंकि पहाड़ जब करवट लेता है, तो सीमाएं उसकी तबाही को रोक नहीं पातीं। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 27 Aug 2026 3:23 pm

जयशंकर और डोभाल की रूस-चीन यात्रा के कूटनीतिक संदेश को ऐसे समझिए

महान भारतीय कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने कहा था कि हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ होता है। स्वार्थ के बिना कोई मित्रता नहीं हो सकती। यह एक कड़वा सच है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर उनकी बात हू-ब-हू लागू होती है। उनकी इसी बात से प्रेरणा लेते हुए समकालीन भारतीय नेतृत्व यानी भारत दुनिया की किसी एक शक्ति-धुरी में बंधने के बजाय रूस, चीन और पश्चिम—तीनों के साथ अपने हितों के अनुसार समानांतर कूटनीति चला रहा है। स्वाभाविक है कि कूटनीतिक संतुलन में बाधाएं आएंगी ही और सम्बन्धों में थोड़ी सी गफलत भारत को बहुत क्षति पहुंचा सकती है। इसलिए जब जब ऐसी सम्भावनाएं बलवती दिखाई देती हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद सिपहसालार सक्रिय हो जाते हैं। वाकई, यह संयोग नहीं है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस में और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल चीन में लगभग एक ही समय में अपने अपने होमवर्क को दुरुस्त करने को लेकर सक्रिय हैं। गत 23–24 अगस्त को जयशंकर ने मॉस्को में भारत-रूस सहयोग पर बातचीत की, जबकि डोभाल 24–25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वें विशेष प्रतिनिधि दौर में हिस्सा लिए। इसके गहरे कूटनीतिक निहितार्थ हैं। इसे भी पढ़ें: Russia में Jaishankar, China में Doval, Japan में Piyush Goyal ने संभाला मोर्चा, आखिर क्या है Modi का मिशन? अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो एक ही समय में भारत की तरफ से दो महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्राएं चल रही है, जिसके दृष्टिगत विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस में हैं, जबकि NSA अजीत डोभाल चीन में रणनीतिक बातचीत कर रहे हैं। दरअसल, ये यात्राएं भारत की उस कुशल विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें सर्वाधिक मजबूत दुश्मन देश चीन के साथ तनाव कम करने का प्रयास तो शामिल है ही, लगे हाथ अपने पुराने वफादार मित्र रूस संग पुराने संबंधों को बदली हुई परिस्थितियों में और मजबूती देने की भगीरथ कोशिश चल रही है। इसी के तरहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सीमा विवाद को लेकर होने वाली बातचीत में हिस्सा लिए। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। खासकर अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव को जो कम करने की शुरुआत की थी, उसके बाद से ही दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है जबकि यह गलवान झड़प के बाद थम सा गया था। हालांकि सुधार के संकेतों के बावजूद यह नहीं कह सकते कि भरोसा पूरी तरह लौट आया है, क्योंकि हाल में अरुणाचल प्रदेश को लेकर पेइचिंग द्वारा अपनाया गया रुख इसका सच्चा सबूत है। यही वजह है कि चीन और रूस दोनों से पुनः बातचीत की जरूरत आन पड़ी है। वहीं ब्रिक्स की मेजबानी से पहले उपजे अरुणाचल गतिरोध के पीछे भी चीनी चाल को समझने की जरूरत है। यह ठीक है कि दोनों ही देशों का हित सीमा पर शांति और स्थिरता में निहित है। उसके मद्देनजर यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि सितंबर में भारत को ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करनी है। इसमें शी चिनफिंग के भी आने की चर्चा है, लेकिन उन्होंने कन्नी काटने के बहाने ढूंढ लिए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त के आखिर में जब पीएम मोदी SCO समिट के लिए चीन के तियानजिन गए थे, तो वहां शी के साथ मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों को गति देने में मदद की थी। तब दोनों ने दोहराया था कि भारत और चीन विकास के साझेदार है और आपसी मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए। यह बात आज भी उतना ही सच है। उधर, भारत पर बढ़ते अमेरिकी दबाव के बीच जयशंकर की मॉस्को यात्रा की अहमियत भी मौजूदा भू-राजनीति को देखते हुए अहम हो जाती है, क्योंकि गत सोमवार को उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। फिर वे अपने समकक्ष से मिले। इस दौरान बातचीत के अजेंडे में व्यापार और ऊर्जा से लेकर वैश्विक मुद्दे तक शामिल रहे है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय कसौटी पर ये खरे उतरे हुए द्विपक्षीय सम्बन्ध हैं। यद्यपि नई दिल्ली-मॉस्को संबंधों को लगातार अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ा है। खासकर यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में ईरान जिस तरह उलझा पड़ा है, आगे कूटनीतिक चुनौती और बड़ी हो सकती है। याद रहे कि जब बेहद मुश्किल हालात में भी तियानजिन से मोदी, पूतिन और चिनफिंग की तस्वीर आई तो उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था, खासकर अमेरिका-यूरोप का। उस समय ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ वॉर छेड़ रखी थी। जबकि आज वैश्विक परिस्थितियां तब से ज्यादा जटिल है। दुनिया का थानेदार अमेरिका अब भी टैरिफ को हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है और ऊर्जा. संकट बरकरार है। लिहाजा भारत को संतुलित नीति अपनाने की जरूरत है। मेरे विचार में विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की कूटनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि— पहला, रूस में जयशंकर: पुरानी दोस्ती को नए आर्थिक आधार देना पसंद किए हैं। जयशंकर की मॉस्को यात्रा सिर्फ रक्षा संबंधों की औपचारिक समीक्षा नहीं थी, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान-तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इसका अर्थ है कि भारत रूस को केवल हथियारों के पुराने आपूर्तिकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और व्यापार का दीर्घकालीन साझेदार बनाना चाहता है। और यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस पर पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत अपने रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत को छोड़ना नहीं चाहता। दूसरा, चीन में डोभाल सीमा विवाद को 'सुरक्षा चैनल' में संभालना चाहते हैं। डोभाल का बीजिंग जाना बिल्कुल अलग प्रकृति की कूटनीति है। वे वांग यी के साथ सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता कर रहे हैं। 2020 के गलवान संकट के बाद भारत-चीन संबंधों में सबसे बड़ी समस्या यही रही है कि सीमा पर शांति के बिना सामान्य संबंध कितने आगे बढ़ सकते हैं। भारत का संदेश पहले ही स्पष्ट किया गया है—सीमा पर शांति और स्थिरता अच्छे द्विपक्षीय संबंधों की बुनियादी शर्त है। इसलिए डोभाल की बातचीत का वास्तविक परीक्षण यह होगा कि क्या LAC पर स्थायी सैन्य स्थिरता, गश्त व्यवस्था और विश्वास बहाली की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है। तीसरा, दोनों यात्राओं को साथ रखकर देखें तो असली रणनीति दिखाई देती है। वह यह कि यहाँ भारत की कूटनीति का एक दिलचस्प ढांचा दिखाई देता है: मॉस्को — सामरिक/ऊर्जा/आर्थिक सुरक्षा। नई दिल्ली — बहुपक्षीय नेतृत्व और BRICS। बीजिंग — सीमा सुरक्षा और तनाव प्रबंधन। और इसके समानांतर अमेरिका, यूरोप, जापान तथा QUAD के साथ भारत के संबंध भी चलते रहेंगे। अर्थात भारत का विकल्प Russia या USA अथवा China या USA नहीं है। विकल्प है—जहाँ भारतीय हित जिस साझेदारी की मांग करें, वहाँ उस साझेदारी को आगे बढ़ाना। यही रणनीतिक स्वायत्तता का व्यावहारिक रूप है। भारत की बहु-संरेखीय कूटनीति पर विशेषज्ञ विश्लेषण भी इसी व्यापक प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है। चौथा, सबसे महत्वपूर्ण कड़ी—शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा है। इस पूरे घटनाक्रम को सितंबर में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से अलग करके देखना कठिन है। Reuters के अनुसार शी जिनपिंग के सितंबर में नई दिल्ली आने की संभावना है, हालांकि यात्रा की आधिकारिक पुष्टि उस रिपोर्ट के समय तक नहीं हुई थी। इसलिए डोभाल-वांग बातचीत को केवल सीमा वार्ता मानना अधूरा होगा। भारत शायद पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि LAC पर तनाव नियंत्रित हो → सैन्य जोखिम घटे → राजनीतिक संवाद बढ़े → मोदी-शी मुलाकात के लिए वातावरण बने → BRICS में भारत अपनी प्राथमिकताएँ आगे बढ़ाए। पांचवां, लेकिन भारत चीन पर 'नरम' नहीं हुआ है। यह अंतर समझना बहुत जरूरी है। संवाद ≠ समझौता। तनाव कम करना ≠ सीमा विवाद छोड़ना। व्यापार बढ़ाना ≠ रणनीतिक भरोसा लौटना। भारत चीन के साथ संवाद बढ़ा रहा है क्योंकि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी हैं और लंबी सीमा पर लगातार तनाव भारत के लिए आर्थिक और सैन्य दोनों दृष्टि से महंगा है। इसलिए डोभाल का बीजिंग जाना कमजोरी का संकेत नहीं बल्कि नियंत्रित प्रतिस्पर्धा (managed competition) की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है। छठा, रूस और चीन—दोनों को एक साथ संभालने की चुनौती है। भारत के लिए असली कूटनीतिक परीक्षा यह है कि रूस और चीन की बढ़ती निकटता के बीच मॉस्को से अपने विशेष संबंध बचाए जाएँ और बीजिंग के साथ सीमा तनाव भी नियंत्रित किया जाए। यदि भारत रूस से बहुत दूर जाता है तो चीन-रूस धुरी मजबूत हो सकती है। यदि भारत चीन के साथ अत्यधिक तनाव रखता है तो दो मोर्चों पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए जयशंकर और डोभाल की यात्राएँ एक व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखाई देती हैं: रूस को दूर मत जाने दो। चीन को अनियंत्रित मत होने दो। अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर मत हो। और भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखो। सातवां, आने वाले महीनों में चार परिणाम सबसे महत्वपूर्ण होंगे। पहला—LAC: क्या चीन सीमा पर स्थायी सैन्य स्थिरता के लिए तैयार होता है? दूसरा—रूस: क्या भारत-रूस व्यापार और भुगतान व्यवस्था रक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा, तकनीक और निवेश तक पहुँचती है? तीसरा—BRICS: क्या भारत रूस-चीन प्रभाव के बीच BRICS को अपने आर्थिक और वैश्विक दक्षिण के एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर पाता है? चौथा—अमेरिका: क्या Washington भारत की रूस-नीति और चीन से संवाद को स्वीकार करते हुए भारत को Indo-Pacific में अपना प्रमुख साझेदार बनाए रखता है? निष्कर्ष यह कि जयशंकर का मॉस्को और डोभाल का बीजिंग दौरा वास्तव में दो अलग-अलग यात्राएँ नहीं, बल्कि एक ही भारतीय रणनीति के दो पहलू हैं। जयशंकर रणनीतिक गहराई संभाल रहे हैं और डोभाल सीमा सुरक्षा। भारत का लक्ष्य शायद रूस और चीन में से किसी एक को चुनना नहीं, बल्कि दोनों के साथ संबंधों को इस तरह संतुलित करना है कि भारत की सामरिक स्वायत्तता, आर्थिक सुरक्षा और सीमा-सुरक्षा—तीनों एक साथ मजबूत हों। और सितंबर का BRICS सम्मेलन इस कूटनीतिक कवायद की अगली बड़ी परीक्षा बन सकता है। इसलिए कूटनीतिक संतुलनअपरिहार्य है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

प्रभासाक्षी 25 Aug 2026 6:40 pm

'मैं यहां का खिलाड़ी हूं' जब नदी के उलट तैरे किरेन रिजिजू

मोदी सरकार में मंत्री किरेन किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर अरुणाचल प्रदेश की एक तेज बहाव वाली उफनती नदी में तैरते हुए अपना एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने लोगों को बिना तैराकी जाने गहरे और खतरनाक पानी में न उतरने की सलाह दी और बताया कि राज्य की नदियां बहुत गहरी और बड़ी हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 23 Aug 2026 2:52 pm

Arunachal Pradesh Tinkle Karga Gongo Viral Video: प्यारी सी बच्ची को मिला ढेर सारा प्यार,कहा थैंक यू

Arunachal Pradesh Tinkle Karga Gongo Viral Video: प्यारी सी बच्ची को मिला ढेर सारा प्यार ऐसे कहा थैंक यू

लाइव हिन्दुस्तान 22 Aug 2026 11:05 pm

'मुझे चाइनीज मत बोलो, मैं इंडियन हूं...' मां ने बनाया था वीडियो, बेटी का जवाब सुनकर भावुक हुए लोग

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर की छोटी-सी बच्ची करगा टिंकल गोंगो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। टिंकल ने एक वीडियो में लोगों से कहा कि उसे चाइनीज न कहा जाए। उसका यह मासूम और भावुक वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया।

खास खबर 22 Aug 2026 12:28 pm

दिबांग घाटी में बाढ़ के बाद भोजपुर का आर्मी जवान आठ दिन से लापता

22 शनिवार, अगस्त: भोजपुर का आर्मी जवान अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ और बादल फटने के बाद पांच जवानों के साथ लापता हो गया। आठ दिन बाद भी उसका पता नहीं चला है। परिजनों की चिंता बढ़ गई है।

लाइव हिन्दुस्तान 22 Aug 2026 12:15 pm

अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ के बाद भोजपुर का जवान आठ दिन से लापता

22 शनिवार, अगस्त: भोजपुर का रहने वाला आर्मी जवान अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ और बादल फटने के बाद पांच जवानों के साथ लापता हो गया। आठ दिन बाद भी जवान का पता नहीं चला है, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई है।

लाइव हिन्दुस्तान 22 Aug 2026 11:51 am

क्या सच में अरुणाचल प्रदेश में 60 KM तक अंदर घुस आया चीन ? वायरल दावे पर सरकार ने बताया सच

क्या सच मेंअरुणाचल प्रदेश में 60 KM तक अंदर घुस आया चीन ? वायरल दावे पर सरकार ने बताया सच

समाचार नामा 19 Aug 2026 6:00 pm

Azim Premji Scholarship 2026: 12वीं पास छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए हर साल मिलेंगे ₹30,000, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की इस स्कॉलरशिप के लिए 31 अगस्त तक करें आवेदन

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाली छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। देश के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी अजीम प्रेमजी के नेतृत्व वाले 'अजीम प्रेमजी फाउंडेशन' (Azim Premji Foundation) ने वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए 'अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026' (Azim Premji Scholarship 2026) के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली मेधावी छात्राओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके सपनों को नई उड़ान देना है। इस छात्रवृत्ति योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी गई है और योग्य छात्राएं 31 अगस्त 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं।अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026: क्या है योजना और कितनी मिलेगी सहायता राशि?अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित यह स्कॉलरशिप प्रोग्राम देश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा में लड़कियों के ड्रॉप-आउट रेट (पढ़ाई छोड़ने की दर) को कम करने के लिए शुरू किया गया एक क्रांतिकारी कदम है। इस योजना के तहत चुनी गई प्रत्येक पात्र छात्रा को उनकी उच्च शिक्षा की पूरी अवधि के लिए सालाना ₹30,000 की वित्तीय सहायता राशि प्रदान की जाती है।सालाना छात्रवृत्ति: ₹30,000 प्रति वर्ष।कोर्स की अवधि: 2 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक के अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए सहायता मिलेगी।कुल वित्तीय मदद: यदि कोई छात्रा 3 साल का ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स कर रही है, तो उसे कुल ₹90,000 मिलेंगे, जबकि 5 साल के प्रोफेशनल/एकीकृत कोर्स (जैसे BA LLB, B.Tech आदि) के लिए कुल सहायता राशि ₹1,50,000 तक होगी।भुगतान का माध्यम: स्कॉलरशिप की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थी छात्रा के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।उपयोग की स्वतंत्रता: प्राप्त छात्रवृत्ति राशि का उपयोग छात्राएं अपनी कॉलेज ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल खर्च या पढ़ाई से जुड़े किसी भी व्यक्तिगत खर्च को पूरा करने के लिए कर सकती हैं।निशुल्क आवेदन: फाउंडेशन द्वारा इस पूरी आवेदन प्रक्रिया के लिए किसी भी स्तर पर कोई आवेदन शुल्क या प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती है।कौन सी छात्राएं हैं पात्र? जानिए योग्यता की पूरी शर्तेंअजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026 के लिए पात्रता मानदंड बेहद सरल और सुलभ रखे गए हैं, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लड़कियां इसका लाभ उठा सकें। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह किसी जाति, धर्म, पारिवारिक आय या केवल बोर्ड परीक्षा के अंकों (मेरिट) के आधार पर सीमित नहीं है।शैक्षणिक पृष्ठभूमि: छात्रा ने अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा किसी मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूल या सरकारी कॉलेज से नियमित (Regular) छात्रा के रूप में पास की हो।कॉलेज प्रवेश: सत्र 2026-27 में किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी विश्वविद्यालय/कॉलेज में अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के प्रथम वर्ष (First Year) में नियमित प्रवेश लिया हो।योग्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश: यह स्कॉलरशिप योजना देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली (NCT), आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और पुडुचेरी शामिल हैं।अपात्रता की स्थिति: जो छात्राएं ओपन/डिस्टेंस लर्निंग (दूरस्थ शिक्षा) से पढ़ाई कर रही हैं या जो पहले से ही द्वितीय, तृतीय या चतुर्थ वर्ष में हैं, वे नए आवेदक के रूप में पात्र नहीं होंगी। इसके अलावा अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी या विप्रो की अन्य स्कॉलरशिप पाने वाली छात्राएं इसके दायरे से बाहर रहेंगी।आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज हैं जरूरी?ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अभ्यर्थियों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। ध्यान रहे कि सभी दस्तावेज स्पष्ट और निर्दिष्ट साइज में ही अपलोड किए जाएं।आवेदक छात्रा की हाल की पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर।आधार कार्ड (पहचान पत्र के रूप में)।10वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।12वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।वर्तमान कॉलेज/यूनिवर्सिटी में प्रवेश का प्रमाण (फीस रसीद या बोनाफाइड सर्टिफिकेट)।बैंक खाता विवरण (पासबुक के पहले पन्ने की कॉपी या कैंसिल चेक)।ध्यान दें कि अपलोड किए जाने वाले सभी दस्तावेज केवल PDF, PNG या JPG फॉर्मेट में होने चाहिए, जिनका साइज 30 KB से 500 KB के बीच होना आवश्यक है।ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियास्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक छात्राएं नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं:सबसे पहले अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट azimpremjifoundation.org पर जाएं।होमपेज पर दिए गए 'Azim Premji Scholarship' सेक्शन के अंतर्गत 'Register New Applicants Cohort 2026' लिंक पर क्लिक करें।अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी (OTP) के जरिए सत्यापन करें।अपना यूजर आईडी और मजबूत पासवर्ड बनाकर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरा करें।अब अपने आईडी व पासवर्ड से लॉगिन करें और आवेदन पत्र में मांगी गई व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक संबंधी सभी जानकारियां सही-सही भरें।मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट और साइज में स्कैन करके अपलोड करें।फॉर्म को अच्छी तरह री-चेक करें और 'Submit' बटन पर क्लिक करके आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।भविष्य के संदर्भ के लिए भरे गए आवेदन पत्र का एक प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।महत्वपूर्ण तारीखें और आगे की समय-सारणीअजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने पहले चरण के लिए आवेदन की समय-सीमा तय कर दी है:राउंड 1 आवेदन शुरू होने की तिथि: 10 अगस्त 2026राउंड 1 आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026राउंड 2 आवेदन अवधि: 10 जनवरी 2027 से 31 जनवरी 2027 तकपुराने छात्रों के लिए रिन्यूअल की तिथि: सितंबर 2026 में रिन्यूअल विंडो खुलेगी।महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदमअजीम प्रेमजी फाउंडेशन का लक्ष्य प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक लड़कियों को इस स्कॉलरशिप के माध्यम से उच्च शिक्षा से जोड़ना है। फाउंडेशन का मानना है कि जब एक लड़की शिक्षित होती है, तो वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारती है, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यदि आप या आपके परिचित में कोई योग्य छात्रा है जिसने हाल ही में 12वीं पास करके कॉलेज में दाखिला लिया है, तो 31 अगस्त 2026 से पहले इस योजना में आवेदन करके इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 9:43 am

अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के दावे से बांग्लादेश सीमा का वीडियो वायरल

बूम ने पाया कि वीडियो चांपाईनवाबगंज के शिबगंज सीमा क्षेत्र पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच हुई कहासुनी का है.

बूमलाइव 11 Aug 2026 6:04 pm

भारत का सबसे बड़ा Tawang Monastery: हिमालय की गोद में बसी Spiritual खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत का संगम

अरुणाचल प्रदेश में स्थित तवांग मठ देश के सबसे प्रसिद्ध बौद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। समुद्र तल से लगभग 10,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह मठ प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इसे “गोल्डन नामग्याल ल्हात्से” के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है “दिव्य स्वर्ग में स्थित पवित्र स्थान”। तवांग मठ की स्थापना सन् 1680 में मेरक लामा लोद्रे ग्यात्सो ने की थी। यह मठ तिब्बती बौद्ध धर्म की गेलुग्पा परंपरा से जुड़ा हुआ है और दलाई लामा के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा तथा विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। मठ की विशाल इमारत, रंग-बिरंगी चित्रकारी और शांत वातावरण पर्यटकों को गहरे रूप से आकर्षित करते हैं। मठ के भीतर लगभग 28 फीट ऊँची भगवान बुद्ध की स्वर्णिम प्रतिमा स्थापित है, जो इसकी मुख्य विशेषताओं में से एक है। यहाँ की प्रार्थना सभाएँ, बौद्ध मंत्रों की ध्वनि और घूमते प्रार्थना चक्र पर्यटकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं। मठ में एक विशाल पुस्तकालय भी है, जिसमें प्राचीन बौद्ध ग्रंथ और हस्तलिखित पांडुलिपियाँ सुरक्षित रखी गई हैं। इसे भी पढ़ें: Ujjain Travel Guide: सावन में बाबा महाकाल के दर्शन के साथ इन 5 Famous Places को अपनी List में करें शामिल तवांग मठ केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी अत्यंत लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़, बादलों से घिरी घाटियाँ और ठंडी हवाएँ यहाँ आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। सर्दियों में जब पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है, तब इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। तवांग मठ के आसपास भी कई दर्शनीय स्थल स्थित हैं। इनमें सबसे प्रमुख है सेला दर्रा, जो तवांग का प्रवेश द्वार माना जाता है। लगभग 13,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा अपनी प्राकृतिक झीलों और बर्फीले दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का सेला झील पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इसके अतिरिक्त माधुरी झील भी अत्यंत सुंदर स्थल है। यह झील चारों ओर पहाड़ियों और देवदार के वृक्षों से घिरी हुई है। कहा जाता है कि हिन्दी फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की एक फिल्म की शूटिंग यहाँ हुई थी, जिसके बाद इस झील का नाम माधुरी झील पड़ गया। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटक तवांग युद्ध स्मारक भी देख सकते हैं। यह स्मारक 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है। यहाँ प्रतिदिन होने वाला लाइट एंड साउंड शो देशभक्ति की भावना से भर देता है। तवांग आने का सबसे अच्छा समय मार्च से अक्टूबर के बीच माना जाता है, जब मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है। हालांकि, जो पर्यटक बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं, वे दिसंबर और जनवरी में भी यहाँ आ सकते हैं। यहाँ पहुँचने के लिए सबसे निकटतम हवाई अड्डा तेजपुर और रेलवे स्टेशन असम में स्थित हैं, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा तवांग पहुँचा जा सकता है। तवांग मठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है। यहाँ की शांत वादियाँ, बौद्ध संस्कृति और हिमालय की भव्यता हर पर्यटक के मन में अविस्मरणीय स्मृतियाँ छोड़ जाती हैं। जो भी व्यक्ति जीवन में शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करना चाहता है, उसके लिए तवांग मठ एक आदर्श पर्यटन स्थल है। -प्रीटी

प्रभासाक्षी 8 Aug 2026 4:50 pm

Offbeat Destinations for Monsoon: भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश? Meghalaya और Arunachal के इन गांवों में लें आनंद

आजकल युवाओं में घूमने-फिरने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर किसी शांत प्लेस को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। मानसून के समय हर कोई हरियाली से भरपूर, बादल, झरने और सुकून हो वाली जगहों पर घूमने का प्लान बनाते हैं। इस बार आप बरसात के समय भारत के कुछ खूबसूरत गांव को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इस मौसम में यहां पर पहाड़ हरे रंग को हे जाते हैं, बादल घरों के बीच से गुजरने नजर आते हैं और हर तरफ आपको ताजगी का माहौल देखने को मिलता है। इस बार आप भी इन जगहों का आनंद जरुर लें। चलिए आपको इस लेख में बताते हैं मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली आपके लिए सबसे बेहतरीन रहने वाली है। आइए आपको बताते हैं इन तीन गांवों में ऐसा क्या खास है,जो आपको मानसून के समय जरुर विजिट करना चाहिए। मावल्यान्नॉन्ग (मेघालय) आपको बताते चलें कि मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग गांव अपनी साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में काफी फेमस है। इसकी गिनती एशिया के सबसे साफ गांव में मानी जाती है। यहां पर रहने वाले सभी लोग इस गांव को हमेशा साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधे, फूल और बारिश से धुले रास्ते गांव की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यहां आप इन जगहों पर विजिट कर सकते हैं- - लिविंग रुट ब्रिज - बांस से बना स्काई व्यू पॉइंट - छोटे-छोटे झरने - खासी गांव की लाइफस्टाइल खोनोमा (नागालैंड) अगर आप नेचर लवर हैं, नागालैंड के खोनोमा गांव में जरुर विजिट करें। यहां की नेचुरल ब्यूटी और पर्यावरण संरक्षण बेहद लोकप्रिय है। बता दें कि, इसे भारत के पहले ग्रीन विलेज में गिना जाता है। बरसात के समय यहां पर सीढ़ीदार वाली खेती, पहाड़ और जंगल के काफी खूबसूरत नजर आते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ भी इस गांव की खूबसूरती को बढ़ा देते हैं। यहां पर इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। - गांव में पैदल वॉक करना - सीढ़ीदार खेत देखना - लोकर नागा कल्चर को करीब से देख सकते हैं - नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग जीरो (अरुणाचल प्रदेश) मानसून के समय अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली में घूमने का प्लान जरुर बनाएं। यह जगह अपनी नेचुरल ब्यूटी और अपतानी जनजाति की अनोखी कल्चर के लिए जानी जाती है। इधर मानसून के समय काफी खूबसरत लगता है। बरसात के समय धान के खेत, पहाड़ और हल्का कोहरा मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर मन एकदम खुश ही हो जाती है। यहां आप क्या-क्या कर सकती हैं- - हरे-भरे धान के खेतों को देख सकती हैं - अपतानी जनजाति के पारंपरिक गांव को एक्सप्लोर कर सकती है - खूबसूरती पहाड़ी रास्ते - यहां लोकल बाजार और खाने का जायका लेना मानसून के समय इन गांव में यात्रा करने से पहले जानें जरुरी बातें - बरसात से बचने के लिए रेनकोट और बढ़िया क्वालिटी की छतरी साथ रखें। - इस दौरान फिसलन ज्यादा हो सकती है, इसलिए मजबूत ग्रिप वाले शूज ही पहनें। - मौसम का अपडेट देखकर ही ट्रिप प्लान करें। - वहां के नियमों का पालन जरुर करें। - दरअसल, पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो जाती है, इसलिए समय का भी ध्यान जरुर रखें। - प्लास्टिक या कचरा कहीं भी ने फेंकें, ताकि इन गांवों के सुंदरता बनीं रहे।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 4:52 pm

Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट

सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

वेब दुनिया 10 Jan 2025 2:40 pm