सुबह का वक्त, हल्की धुंध, घने जंगल में अजीब सी आवाजें आ रही हैं। 5 घंटे तक पैदल चलने के बाद चट्टानों पर कुछ लोग नजर आते हैं। नजदीक पहुंचे तो देखा चट्टानों में छोटी-बड़ी काली गुफाएं हैं। हमें देखते ही उनमें से कुछ छिप-छिपकर गुफाओं में जाने लगे। थोड़ी देर बाद डरे-सहमे कुछ लोग हमारे करीब आए। मैंने कैमरा निकाला तो वो अजीब हाव-भाव दिखाने लगे। मेरे साथी बोले- ये आपको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस बीच, उन्हीं में से एक बुजुर्ग आगे आया और कैमरे की ओर इशारा करते हुए अपनी भाषा में बोला- इसे दूर करो, ये हमारी शक्ति खींच लेगा। मैंने तुरंत कैमरा हटा लिया। ये बात मुझे मेरे साथी ने समझाई। अपने साथी के जरिए बुजुर्ग से पूछा– आप लोग गुफाओं में क्यों रहते हैं? बुजुर्ग हमें अपनी गुफा के पास ले गया। एक ओर इशारा करते हुए कहा- यहां हमारे बुजुर्ग सोए हैं। हम उन्हें छोड़कर नहीं जाते। ये हमारी गुफाओं के रक्षक हैं। हम अपने परिवार के लोगों को भी यहीं दफनाते हैं। ये किस्सा है चोलानाइकन जनजाति का, जो 21वीं सदी में भी घने जंगलों के बीच गुफाओं में रहती है। इनसे मिलने पहुंचे थे पर्यावरणविद केए शाहजी। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं इसी चोलानाइकन जनजाति की कहानी। चोलानाइकन जनजाति के करीब 250 लोग ही बचे हैं, जो केरलम के मलप्पुरम जिले के नीलांबूर के जंगलों में बसे हैं। जब मैं इनसे मिलने जंगल पहुंची तो रोक दिया गया। केरलम सरकार ने हाल ही में चोलानाइकन लोगों से जंगल में जाकर मिलने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। केए शाहजी वो आखिरी शख्स हैं, जो इनकी गुफाओं तक पहुंचे हैं। शाहजी ने चोलानाइकन की गुफाएं और उनके रहन-सहन को करीब से देखा है। मेरी शाहजी से मुलाकात नीलांबूर जंगलों के मुहाने पर हुई। वहीं उन्होंने ये पूरी कहानी सुनाई। यह जंगल वायनाड के करीब है। मैंने प्रशासन से चोलानाइकन की गुफाओं तक जाने की मंजूरी मांगी, लेकिन अफसर नहीं माने। लगातार प्रयास करने के बाद वन विभाग के अफसरों ने सिर्फ दो चोलानाइकन परिवारों से मिलने की मंजूरी दी। ये दो परिवार जंगल के मुहाने पर रहते हैं। इन्हें सरकार ने कच्चे घर भी बनाकर दिए हैं। बाकी 20-25 परिवार जंगल में ही गुफाओं में रहते हैं। इजाजत मिलते ही मैं अपने साथी राम कुमार और बालकृष्णन के साथ वायनाड से नीलांबूर के जंगलों की ओर निकल पड़ी। रास्ते में बालकृष्णन बताते हैं कि चोलानाइकन बाहरी लोगों से डरते हैं, जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं होते। ये पहाड़ों को देवता मानते हैं। गर्मियों के मौसम में नदियों के किनारे झोपड़ी बनाते हैं। मानसून और ठंड में वापस गुफाओं में लौट जाते हैं। ये जंगल से आमतौर पर बाहर नहीं आते। फिर ये दो परिवार यहां क्यों रहते हैं? कभी-कभी कुछ सामान वगैरह लेने के लिए चोलानाइकन जंगल से बाहर आते हैं। थोड़े दिन इन कच्चे घरों में रहते हैं। प्रशासन इनकी निगरानी करता है, ताकि कोई इन्हें परेशान न करे। बाद में जंगल के बीचोबीच अपनी गुफाओं में लौट जाते हैं। नीलांबूर के आगे करीब 20 किलोमीटर के बाद सड़क खत्म हो जाती है। आगे का सफर यहां से पैदल ही तय करना होगा। हम तीनों पथरीले रास्तों से होते हुए तो जंगल के मुहाने पर पहुंचे। यहां चारों ओर पक्षियों की आवाज आ रही है। अचानक दो कच्चे घर दिखाई देते हैं। तभी बालकृष्णन कहते हैं- चोलानाइकन के दो परिवार वहीं रह रहे हैं। हम उन घरों की ओर बढ़े, तो कुत्ते भौंककर स्वागत करते हैं। घरों के करीब पहुंचते ही एक आदमी दिखता है। बालकृष्णन बताते हैं– ये मुरगन है। इस बीच, मुरगन अपने काम में लगा रहा, हमें देखा तक नहीं। वह जमीन पर बैठे-बैठे कटहल को फोड़कर उसके बीजों को खा रहा है। बालकृष्णन ने उसी की भाषा में पूछा- यह कहां से लाए हो? वह बताता है- जंगल से एक आदमी लेकर आया था। अभी वो और फल लेने जंगल गया है। इस दौरान, जब मैं इस बातचीत का वीडियो बना रही थी, तो मुरगन कुछ कहते-कहते रुक गया। बालकृष्णन के थोड़ा समझाने के बाद मुरगन मान गया। वह बताता है- गर्मी से एक महीने पहले जंगल से कटहल लाते हैं। इसे उबालते हैं। इसके बाद, इसमें शहद और मिर्च डालकर छोटे–छोटे गोले बनाकर खाते हैं। बालकृष्णन बताते हैं- 'इनके पास हर बीमारी का इलाज जंगल में ही है। ये हर तरह की जड़ी–बूटी पहचानते हैं। बालकृष्णन, मुरगन से पूछता है कि तुम्हारे यहां शादी कैसे होती है?' वो बताता है- ‘जब लड़की को लड़का पसंद कर लेता है, तो हमारे मुखिया और गांव के बुजुर्ग एक जगह सभी को बुलाते हैं। वहां वे तुलसी की दो माला बनाकर दोनों को देते हैं। लड़का, लड़की एक दूसरे को माला पहनाते हैं। इसके बाद, दोनों साथ रहने लगते हैं। उन्हें अलग से एक गुफा भी दे दी जाती है। किसी तरह का कोई भोज या लेन-देन नहीं होता।’ इतने में एक महिला आती हैं। दुबली-पतली, घुंघराले बालों वाली। बालकृष्णन ने नाम पूछा, तो बोली- बिंदु। मुझे देखते ही वह गुफा के दूसरी ओर चली जाती है और वहां कुछ सुखाने लगती है। बालकृष्णन पास में जाकर पूछते हैं- यह क्या कर रही हो? वो बताती है- ये काली मिर्च है, इसे सुखा रही हूं। जंगली शहद और काली मिर्च बेचकर थोड़ा बहुत पैसा मिल जाता है। इस दौरान मैं उनके घर में झांकती हूं, तो मुरगन–बिंदु मुझे गौर से देखते हैं। घर की दीवारें गंदी थीं और चारों तरफ धूल ही धूल है। नीचे दाल–चावल बिखरे पड़े हैं। शायद एक–दो दिन पहले उन्हें किसी ने राशन किट दी थी। जंगल से लाई गई सब्जियां हैं और नींबू भी रखे हैं। रसोई में सिर्फ 2–3 एल्युमिनियम के बर्तन दिखाई दिए। न मसाला, न नमक, न तेल। मुरगन, बालकृष्ण को बताता है कि हम जंगलों से कुछ भी तोड़कर सीधे ही खा लेते हैं, पकाते नहीं हैं। आग में मछली भून लेते हैं या चावल उबालकर कांजी बनाते हैं। तभी, मेरे साथी राम कुमार ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर निकली, तो उन्होंने मुझे घर के पास से ही एक हल्दी की गांठ निकालकर दी। कहा– 'इसकी खुशबू लेकर देखिए।' मैंने सूंघी तो, वाकई हल्दी की ऐसी खुशबू मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। राम कुमार ने बताया– दुनिया में आपको इससे ज्यादा शुद्ध हल्दी कहीं नहीं मिलेगी। चोलानाइकन इसे खाते हैं। घाव होने पर शरीर पर लगाते हैं। इसके बाद राम कुमार ने एक पेड़ से पत्ता तोड़कर दिया। कहा- ये तेजपत्ता है। उसकी खुशबू भी लाजवाब थी। मैंने पूछा- जंगल में हर समय फल-फूल नहीं होते, ऐसे में ये क्या खाते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– चोलानाइकन जंगल से शहद इकट्ठा करते हैं। बांस के लंबे खोखले डंडों में भरकर इसे हल्की आंच पर गर्म करते हैं। इसके बाद इसे मिट्टी में दबा देते हैं। जब जंगल में खाने के लिए कुछ नहीं मिलता, तब ये लोग इस शहद को बाहर निकालकर उसमें पानी मिलाते हैं और पके चावल से खाते हैं। क्या, इनके नाम भी खास होते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– ‘हर चोलानाइकन की गुफा का एक नाम होता है, इसलिए गुफा के नाम से ही परिवार पहचाने जाते हैं। ये लोग भले ही संख्या में कम हैं, लेकिन अपने मुखिया की हर बात मानते हैं।’ ‘कौन सा परिवार किस गुफा में रहेगा, कब जंगल में नई जगह जाना है या शहद का बंटवारा कैसे होगा, ये सब मुखिया ही तय करता है।’ चोलानाइकन छोटे–छोटे कबीलों में जंगलों में अलग-अलग जगह रहते हैं। हर कबीले का एक मुखिया होता है। कबीले आपस में बहुत मेल-जोल नहीं रखते। क्या चोलानाइकन कोई उत्सव भी मनाते हैं? दैवओट्टू, इनका एक पारंपरिक उत्सव है। यह आमतौर पर अप्रैल में होता है। इस उत्सव के लिए हर परिवार शहद एकत्रित करता है। फिर शहद का एक हिस्सा पर्वत और पुरखों को अर्पित करते हैं। क्या आपको पता है, चोलानाइकन तारों को देखकर मौसम का हाल बता देते हैं। मैंने पूछा- कैसे? वो बताते हैं- ये लोग तारों की स्थिति और उनकी चमक के आधार पर मानसून के आने का अनुमान लगा लेते हैं। साथ ही, अपनी गुफा बदल लेते हैं। भारी बारिश से बचने के लिए ये लोग पहाड़ों पर बनी गुफाओं में चले जाते हैं। मौत के बाद मिट्टी से दूरी… लाश को पत्तों–बेलों से ढंकते हैं बालकृष्णन बताते हैं कि चोलनाइकन समुदाय में अंतिम संस्कार अनूठे तरीके से होता है। मौैत के बाद वे एक गहरा गड्ढा खोदते हैं। लाश को बेलों और पत्तों में लपेटकर उसमें रखते हैं। ऊपर से मिट्टी नहीं डालते, बल्कि गड्ढे को सूखी लकड़ियों और पत्तों से ढंक देते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि मिट्टी का एक भी कण शव को न छू पाए। ऐसा क्यों? चोलनाइकन के लिए मिट्टी 'संसार का भार' है। शव को मिट्टी से दूर रखने के पीछे उनकी गहरी आस्था है। उनका मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा बिना किसी सांसारिक बंधन में उलझे, जंगल की हवाओं और पेड़ों की चेतना में विलीन हो जाती है। अब शाम होने वाली है। हम वापस वायनाड की ओर निकल पड़ते हैं। अगले दिन, वायनाड में पर्यावरणविद केए शाहजी के घर पहुंची। शाहजी बताते हैं- बारिश के दिन थे। जब मैं पहली बार चोलानाइकन लोगों की गुफा के पास पहुंचा, तो लगा जैसे किसी दूसरी सदी में आ गया हूं। मैंने चोलानाइकन के बीच रात गुजारी है। रात में हाथियों की चिंघाड़ पूरे जंगल में गूंज रही थी। गुफाओं के पास तक भी कुछ हाथी आ गए थे, लेकिन चोलानाइकन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। वो रात मैंने करवटें बदल–बदल कर गुजारी। चोलानाइकन की खासियत बताता हूं। वे पक्षियों की चहचहाहट, हवा का रुख और पेड़ों की पत्तियों के हिलने के तरीके से बता सकते हैं कि बारिश कब होगी या जंगल में खतरा कितना करीब है। ‘वे कौन सी भाषा बोलते हैं?’ चोलानाइकन अपनी भाषा को 'चोलानाइक्कन' कहते हैं। इस भाषा में मलयालम के अलावा तमिल और कन्नड़ के भी कुछ शब्द मिलते हैं। शाहजी से मिलकर मैं वायनाड के स्थानीय पत्रकार दीपक कुमार के घर पहुंची। दीपक भी चोलानाइकन और उनकी गुफाओं को करीब से देख चुके हैं। कुछ बताने से पहले वो मुझे चोलानाइकन की तस्वीरें दिखाते हैं। इसके बाद वे कहते हैं- ये लोग अपने पूर्वजों की तरह गुफाओं में ही रहना पसंद करते हैं। सरकार ने जंगल में इनके लिए घर बनाकर दिए हैं, लेकिन वह अधूरे हैं। वे बताते हैं– चोलानाइकन समुदाय की एक महिला को गर्भवती होने पर वायनाड के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन वह रात में ही वहां से चली गई। अफरा–तफरी मच गई। आखिर, वह जंगल में अपने लोगों के बीच मिली। ऐसे और भी किस्से हैं। लेकिन सबसे बड़ा संकट यह है कि यदि इस जनजाति को नहीं संभाला गया तो ये ‘केवमैन’ जंगलों में ही खत्म हो जाएंगे। --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
पश्चिम बंगाल में सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले की जांच कर रही CID ने अब तक TMC के 13 विधायकों के बयान दर्ज किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, तीन विधायकों ने कहा है कि 6 मई की बैठक के रजिस्टर में मौजूद सिग्नेचर उनके नहीं हैं। CID ने TMC सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजकर बैठक का रजिस्टर पेश करने को कहा है। मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और चीफ व्हिप की नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव में कथित गड़बड़ी और फर्जी सिग्नेचर के आरोपों से जुड़ा है। दो TMC विधायकों ने दावा किया था कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक नहीं हुई थी। उनका कहना है कि उन्होंने रजिस्टर पर 19 मई को सिग्नेचर किए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 6 मई की तारीख वाला प्रस्ताव बाद में तैयार किया गया और उसमें कई सिग्नेचर ब्लॉक लेटर में किए गए। विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के बाद 27 मई को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया था। अगले दिन CID ने जांच शुरू कर दी। आज की अन्य खबरें रनवे मरम्मत के चलते जुलाई से सितंबर तक सप्ताह में दो दिन बंद रहेगा श्रीनगर एयरपोर्ट श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे की मरम्मत और री-सर्फेसिंग के काम के चलते 1 जुलाई से 30 सितंबर तक हर सोमवार और मंगलवार को उड़ान सेवाएं बंद रहेंगी। अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले से करीब 2 लाख यात्रियों के प्रभावित होने की आशंका है। वर्तमान में श्रीनगर एयरपोर्ट पर प्रतिदिन 35 से 40 उड़ानें संचालित होती हैं। फिलहाल भी मरम्मत कार्य के कारण उड़ानों का संचालन सीमित समय के लिए किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 5 नए जज आज शपथ लेंगे; जजों की कुल संख्या 32 से बढ़कर 37 होगी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त पांच नए जज आज शपथ लेने वाले हैं। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत इन पांचों नए जजों को पद की शपथ दिलाएंगे। इस शपथ ग्रहण के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी, जो कि स्वीकृत संख्या (38) से केवल एक कम है। केंद्र सरकार ने सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा, और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। बंगाल की खाड़ी में 4.6 तीव्रता का भूकंप, कोई नुकसान नहीं बंगाल की खाड़ी में मंगलवार सुबह 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप सुबह 7:43 बजे दर्ज किया गया। इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। NCS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र बंगाल की खाड़ी में 14.027 डिग्री नार्थ लैटिट्यूड और 93.132 डिग्री ईस्ट लॉन्गिट्यूड पर स्थित था। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन शुरू, 18 जून को वोटिंग चुनाव आयोग ने सोमवार को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। आज से इसके लिए नामांकन शुरू हो जाएंगे। इनमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात की 4-4 सीटें; राजस्थान और मध्य प्रदेश की 3-3 सीटें; झारखंड की 2 सीटें; और अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर व मेघालय की 1-1 सीट शामिल है। इन सीटों पर 18 जून को वोट डाले जाएंगे और उसी दिन नतीजे भी आ जाएंगे। चुनाव के लिए पर्चा भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आखिरी तारीख 8 जून है। इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा की 1-1 सीट पर उपचुनाव के लिए भी नोटिफिकेशन जारी हुआ है। दिल्ली में 17 साल के युवक की चाकू मारकर हत्या; मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम उत्तर पूर्वी दिल्ली के न्यू उस्मानपुर इलाके में सोमवार देर रात एक 17 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। DCP राहुल अलवाल ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो वहां 17 साल का अभिषेक जमीन पर पड़ा हुआ मिला। चश्मदीदों के मुताबिक, यह वारदात दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई, जहां स्थानीय बाजार होने के कारण लोगों की लगातार आवाजाही बनी हुई थी। फॉरेंसिक टीम ने अपराध स्थल का निरीक्षण कर जरूरी सबूत जुटा लिए हैं और इस मामले में बीएनएस (BNS) की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। जम्मू में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान पुलिस पर पथराव; 3 पुलिसकर्मी घायल जम्मू के वन क्षेत्र में चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ बुलाए गए एक विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के पथराव में एक महिला पुलिस DSP सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हवा में फायरिंग करनी पड़ी। 26 मई को निचली शिवालिक पहाड़ियों में कार्रवाई के दौरान 30 से अधिक अवैध ढांचों को गिराकर करोड़ों रुपए मूल्य की करीब 60 कनाल वन भूमि को मुक्त कराया गया था। पुलिस के मुताबिक, इस विरोध मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
इसे देश का दुर्भाग्य कहें या क्या कहें कि एक तरफ एक प्रदेश में लोग सबसे ज्यादा शराब पी रहे हैं, महिलाएं भी शराब पीने में पीछे नहीं हैं। वहीं इसी देश में हजारों बच्चों को एक वक्त का भरपेट खाना तक नहीं मिल रहा है।
देश के अधिकांश हिस्सों में रविवार को बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक देशभर में हीटवेव की स्थिति समाप्त हो गई है। कई राज्यों में बारिश और आंधी के चलते मौसम में बदलाव आया है। राजस्थान के कई हिस्सों में लगातार दूसरे दिन धूल भरी आंधी चली, जिससे तापमान में गिरावट आई। जैसलमेर में रेतीला तूफान आया। इससे विजिबिलिटी पर असर हुआ, हालांकि किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। राज्य के फलौदी में अधिकतम तापमान 42.6C रहा। उत्तर प्रदेश के बलिया में 34.4mm और मुरादाबाद में 21.8mm बारिश हुई। लखनऊ में भी 2.4mm बारिश हुई। यहां अधिकतम तापमान 36.3C रहा, जो सामान्य से 3.9C कम है। न्यूनतम तापमान 24.7C रहा। उत्तराखंड में भारी बारिश और खराब मौसम के कारण केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। चंपावत के श्री रीठा साहिब गुरुद्वारे के वार्षिक जोड़ मेले के दौरान उफनती नदी में 50 से ज्यादा श्रद्धालु फंस गए, जिन्हें बाद में रेस्क्यू किया गया। राज्यों से मौसम की तस्वीरें… राजस्थान में लगातार दूसरे दिन रेतीला तूफान राजस्थान के जैसलमेर में रविवार शाम को फिर से रेतीला बवंडर उठा। इससे दिन में अंधेरा छा गया। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आसमान में दूर से ही धूल का गुबार उठता दिखाई दिया, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ा। इससे पहले शनिवार दोपहर 3 बजे राजस्थान के 5 जिलों श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़ और सीकर में रेतीला तूफान आया था। इसका असर करीब 200 वर्ग किलोमीटर के इलाके में रहा। रेतीले तूफान की शुरुआत हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर से हुई थी। इस दौरान 56kmph की रफ्तार से आंधी चली। मानसून 4 जून तक केरलम पहुंचेगा मौसम विभाग ने बताया कि मानसून 4 जून तक केरलम पहुंच सकता है। हालांकि विभाग ने इस साल मानसून के सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान भी जताया है। IMD के मुताबिक जून से सितंबर तक देश में औसतन सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इस बार मानसून सीजन में 78 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है। देश में सामान्य मानसूनी बारिश का औसत 87 सेंटीमीटर माना जाता है। मौसम विभाग ने कहा कि बिहार, यूपी में सामान्य बारिश हो सकती है, लेकिन बाकी कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। खासकर बारिश पर निर्भर खेती वाले इलाकों में मानसून कमजोर रह सकता है। अगले दो दिन के मौसम का हाल 2 जून: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और राजस्थान के कुछ हिस्सों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं चल सकती है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ इलाकों में भी तेज हवा चलने और बिजली गिरने की संभावना है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और कर्नाटक में कई जगहों पर बारिश का अनुमान जताया गया है। कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी बारिश और आंधी-तूफान का दौर जारी रहने की संभावना है। 3 जून: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी की भी संभावना है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ क्षेत्रों में बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। तटीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश भी हो सकती है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश और आंधी-तूफान की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में उमस भरी गर्मी के साथ गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है।
भोपाल एम्स में एक महिला ने बताया कि उनके पति ओरल कैंसर से पीड़ित हैं। डॉक्टर के मुताबिक तंबाकू खाने से ये हुआ है। अब कैंसर तीसरी स्टेज पर है और ऑपरेशन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। समझ नहीं आ रहा पैसे कहां से आएंगे। घर में वो अकेले कमाने वाले थे। इस तंबाकू ने मेरा पूरा परिवार बर्बाद कर दिया है। घर में खाने तक को पैसा नही हैं। रिश्तेदार को भरोसे बच्चों को छोड़ा है। ये सिर्फ एक कहानी नहीं है ये एक छोटे से शौक से शुरू होने वाला वो खौफनाक सफर है जिसका अंत जानलेवा होता है। तंबाकू सिर्फ व्यक्ति को नहीं उसके पूरे परिवार को खत्म कर देता है। चौकाने वाली बात तो ये है कि ये जानते हुए कि यह जानलेवा है लोग इसका सेवन कर रहे हैं। अगर, मध्यप्रदेश की बात करें तो मई 2026 में आई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 15 साल से अधिक आयु के 47.7% पुरुष और 11.6% महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं। यानी प्रदेश में हर 10 में से लगभग 5 पुरुष तंबाकू की लत के शिकार हैं। राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे मध्यप्रदेश NFHS-6 के अनुसार मध्यप्रदेश में पुरुषों में तंबाकू सेवन की दर 47.7% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 36.3% है। यानी प्रदेश देश के औसत से 11.4 प्रतिशत अंक पीछे है। महिलाओं में भी स्थिति बेहतर नहीं है। प्रदेश में 11.6% महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 8.4% है। यह अंतर बताता है कि तंबाकू नियंत्रण अभियान के बावजूद प्रदेश में लत कम होने के बजाय बढ़ी है। एमपी में बढ़ा सेवन रिपोर्ट के मुताबिक जहां एक ओर देश में तंबाकू सेवन कम हुआ है, वहीं मध्यप्रदेश में यह बढ़ रहा है। पुरुषों में तंबाकू सेवन NFHS-5 के 46.4% से बढ़कर 47.7% हो गया है। महिलाओं में यह आंकड़ा 10.3% से बढ़कर 11.6% पहुंच गया। इसके विपरीत राष्ट्रीय स्तर पर पुरुषों में तंबाकू सेवन 38% से घटकर 36.3% और महिलाओं में 8.9% से घटकर 8.4% हो गया। बिहार, झारखंड और असम ने सुधारी स्थिति रिपोर्ट बताती है कि कई ऐसे भी राज्य हैं जहां NFHS 5 में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों का प्रतिशत एमपी से ज्यादा था। उनकी स्थिति NFHS 6 में एमपी से तेजी से सुधार हुआ है। बिहार, झारखंड और असम में पुरुषों का तंबाकू सेवन मध्यप्रदेश से ज्यादा था। बिहार में यह दर 48.9%, झारखंड में 47.4% और असम में 51.9% थी। महिलाओं में महाराष्ट्र ने छोड़ा मध्यप्रदेश को पीछे महिलाओं में भी ऐसा ही NFHS-5 में महाराष्ट्र में 11% महिलाएं तंबाकू का सेवन करती थीं और मध्यप्रदेश के 10.3% महिलाएं तंबाकू खाती थी। लेकिन NFHS-6 में महाराष्ट्र का आंकड़ा घटकर 8.8% रह गया। इसके उलट मध्यप्रदेश में महिलाओं का तंबाकू सेवन बढ़कर 11.6% हो गया। देश के इन राज्यों में एमपी से ज्यादा तंबाकू सेवन रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू सेवन के मामले में मिजोरम सबसे ऊपर है, जहां 73.6% पुरुष और 61% महिलाएं तंबाकू का उपयोग करती हैं। इसके अलावा त्रिपुरा, मेघालय, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड भी मध्यप्रदेश से आगे हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा चिंता रिपोर्ट बताती है कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में तंबाकू सेवन की समस्या सबसे गंभीर बनी हुई है। मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में पुरुषों और महिलाओं दोनों में तंबाकू सेवन की दर राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है। हालांकि इनमें से कुछ राज्यों में कमी आई है, फिर भी ये देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्यों की सूची में शामिल हैं। क्यों बढ़ रहा है तंबाकू सेवन का ग्राफ मोनोचिकित्सक डॉ. सत्याकांत त्रिवेदी कहते हैं कि तंबाकू इस्तेमाल नहीं करने वाले बच्चे, जब अपने रोल मॉडल या किसी साथी को बीड़ी-सिगरेट पीते देखतें हैं तो उनमें भी इसको लेकर क्रेज बढ़ता है। जिससे उनमें लत लगने का खतरा बढ़ता है। तंबाकू सेवन से बढ़ रही कैंसर की शिकायतें सिर्फ हमीदिया अस्पताल में साल 2021 में 5 हजार 96 यानी रोजाना लगभग 14 कैंसर के मरीज इलाज के लिए आए। वहीं साल 2022 में यह आंकड़ा 6 हजार 112 दर्ज किया गया। यानी हर दिन 18 लोग कैंसर के इलाज के लिए हमीदिया आए। भोपाल में रोज 10 लाख से अधिक का करोबार राजधानी में पान-मसाला सिगरेट और गुटखे का कारोबार दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। शहर में ही करीब 10 लाख रुपए रोज के गुटखे की खपत है। पान-मसाला, बीड़ी और सिगरेट की खपत अलग से है। मांग बढ़ने के साथ ही दो नंबर का व्यवसाय चरम पर है।
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

