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राज्यसभा चुनाव- भाजपा ने 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की:एमपी से तरुण चुग, राजस्थान से सतीश पूनिया प्रत्याशी; 27 सीटों पर 18 जून को चुनाव

भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। मध्यप्रदेश की दो सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और उद्योगपति रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। राजस्थान से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है। गुजरात की चार सीटों पर राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया को उम्मीदवार बनाया गया है। अरुणाचल प्रदेश से ताई तागक और मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट मिला है। ओडिशा में 25 मई को देवाशीष सामंतराय ने बीजू जनता दल (BJD) और राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी। इस तरह ओडिशा की इस सीट पर उपचुनाव होगा। इसके लिए भाजपा ने देवाशीष को ही उम्मीदवार बनाया है। 13 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा। नामांकन भरने की लास्ट डेट 8 जून है। तमिलनाडु, मेघालय और मिजोरम में भी प्रत्याशी घोषित NDA के पास 18 सीट राज्यसभा की जिन 27 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से NDA के पास अभी 18 (आंध्र प्रदेश से 1, गुजरात से 4, कर्नाटक से 3, राजस्थान-मध्य प्रदेश से 2-2, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से एक-एक सीटे हैं)। वहीं कांग्रेस गठबंधन के पास 5 सीटे हैं। वहीं तीन अन्य सीटें YSRCP के खाते में हैं। एक बीजेडी के पास थी। इन चुनावों में NDA को 17 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को पांच, JMM को दो और TVK को एक सीट मिलने की उम्मीद है। एक सीट मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट जीत सकती है। YSRCP अपनी तीनों सीटें गंवा सकती है। 244 सदस्यों वाले उच्च सदन में NDA के पास अभी 149 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर-गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं। ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं। कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 16 मार्च: राज्यसभा की 11 सीटों में से 9 पर कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स जीते हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए थे। इनमें 9 सीटों पर NDA कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की थी। राज्यवार सीटों की बात करें तो बिहार की सभी पांचों सीटों पर NDA प्रत्याशी विजयी रहे थे। ओडिशा की 4 सीटों में से 3 NDA और 1 बीजद उम्मीदवार ने जीती। हरियाणा की दो सीटों में से एक पर भाजपा और एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 4 Jun 2026 7:00 pm

MP से तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा का टिकट:भाजपा ने जारी की कैंडिडेट्स की लिस्ट; 18 जून को डाले जाएंगे वोट

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इनमें गुजरात से 4, मध्य प्रदेश और राजस्थान से 2-2, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर से 1-1 जबकि ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव के लिए एक उम्मीदवार शामिल है। मध्य प्रदेश की दो राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि 12 राज्यों की 26 सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। उसी दिन रिजल्ट आने की बड़ी संभावना है। देखिए, तस्वीरें… राजस्थान से पूनिया और गुर्जर को टिकट BJP ने राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को टिकट दिया गया है। गुजरात की चार सीटों पर राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया को उम्मीदवार बनाया गया है। अरुणाचल प्रदेश से ताई तागक और मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट मिला है। ओडिशा में राज्यसभा की खाली सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी ने देवाशीष सामंतराय को उम्मीदवार घोषित किया है। यह सीट उपचुनाव के जरिए भरी जाएगी। मेघालय और मिजोरम में भी प्रत्याशी घोषित मेघालय में मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस-II (MDA-II) ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के जेम्स पीके संगमा को सर्वसम्मति से अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, मिजोरम की इकलौती सीट के लिए सत्ताधारी दल जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने पार्टी प्रवक्ता के. लालतलुआंगकिमा के नाम की आधिकारिक घोषणा की है। NDA के पास 26 में से 18 सीटें राज्यसभा की जिन 26 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से NDA के पास अभी आंध्र प्रदेश से 1, गुजरात से 4, कर्नाटक से 3, राजस्थान-मध्य प्रदेश से 2-2, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से एक-एक सीटे हैं। वहीं, कांग्रेस गठबंधन के पास 5 सीटें हैं। तीन अन्य सीटें YSRCP के खाते में हैं। इन चुनावों में NDA को 17 सीटें मिलने की संभावना है जबकि कांग्रेस को पांच, JMM को दो और TVK को एक सीट मिलने की उम्मीद है। एक सीट मिजोरम में जोरम पीपुल्स मूवमेंट जीत सकती है। YSRCP अपनी तीनों सीटें गंवा सकती है। 244 सदस्यों वाले उच्च सदन में NDA के पास अभी 149 सांसद हैं जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं। ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं। कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी। ये खबर भी पढ़ें… दिग्विजय की राज्यसभा सीट पर 5 दावेदार रेस में राज्यसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश कोटे की तीन सीटों पर 8 जून तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। फिलहाल, इनमें से दो पर बीजेपी जबकि एक पर कांग्रेस का कब्जा है। बीजेपी से केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी सांसद हैं। वहीं, कांग्रेस की एक सीट पर दिग्विजय सिंह दूसरी बार के सांसद हैं। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 4 Jun 2026 6:13 pm

MP दिनभर, 10 बड़ी खबरें:एक्स गर्लफ्रेंड को मारे चाकू, जवान ने पत्नी को प्रेस से जलाया; सैलरी काटी तो डिप्टी डायरेक्टर पर तानी रिवॉल्वर

MP दिनभर में आज की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। दिनभर की 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, एमपी में आज, क्या रहा खास… 1. भास्कर इन्वेस्टिगेशन का बड़ा असर, दो DSP को हटाया; सस्पेंशन का प्रस्ताव; अब तक 7 पर सख्त एक्शन दैनिक भास्कर डिजिटल पर पब्लिश लोकायुक्त कार्यालय में करप्शन की खबर का बड़ा असर हुआ है। लोकायुक्त ADG योगेश देशमुख ने गुरुवार को DSP बीएम द्विवेदी और मंजू सिंह को PHQ अटैच कर दिया है। दोनों को सस्पेंड करने का प्रस्ताव भी DGP कैलाश मकवाना को भेजा है। इससे पहले बुधवार को हेड कॉन्स्टेबल रामदास कुर्मी, हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह ठाकुर और कॉन्स्टेबल गौरव साहू को सस्पेंड किया गया था। प्रधान आरक्षक बृज बिहारी पांडेय को निलंबित करने और संविदा ड्राइवर अमित विश्वकर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। पढ़ें पूरी खबर… 2. एक्स गर्लफ्रेंड पर चाकू से हमला, गर्दन-चेहरे, पीठ और हाथों पर किए वार; बचाने दौड़ी बहन का गाल चीरकर भाग निकला भोपाल में युवक ने पूर्व प्रेमिका पर बीच सड़क चाकू से हमला कर दिया। युवती की गर्दन, चेहरे, पीठ और हाथों पर ताबड़तोड़ वार किए। उसे बचाने आई बड़ी बहन पर भी हमला किया, जिससे उसके बाएं गाल पर गहरा घाव हो गया। लोगों की भीड़ जुटती देख आरोपी अक्षय चंदेल वहां से फरार हो गया। घटना शंकर नगर इलाके की है। घायल युवती का अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने आरोपी अक्षय चंदेल के खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट, धमकी और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पढे़ं पूरी खबर… 3. सिंहस्थ के पहले उज्जैन में 139 करोड़ रुपए की लागत से सांदीपनि लोक बनेगा, श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा लगेगी उज्जैन में श्रीमहाकाल महालोक के बाद अब भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में 5 हेक्टेयर क्षेत्र में सांदीपनि लोक बनने जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार इसके लिए 139 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसे सिंहस्थ से पहले तैयार करने की योजना है। यह वही स्थान है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम और सुदामा के साथ 16 विद्या और 64 कलाएं सीखी थीं। आश्रम में भगवान श्री कृष्ण की 108 फीट की प्रतिमा सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र होगी। इसका डिजाइन आईआईटी/एनआईआईटी के तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार होगा। पढ़ें पूरी खबर… 4. SAF जवान ने पत्नी को पीटा, प्रेस से जलाया; मोबाइल पर बात करने पर गुस्साया, सिर दीवार पर पटका ग्वालियर में SAF जवान ने अपनी पत्नी को बेल्ट से पीटा। सिर दीवार पर पटका। इसके बाद गर्म प्रेस से दोनों हाथों और पीठ को कई जगह दाग दिया। पीड़िता पूजा परिहार (30) निवासी बिजौली की शादी राजेंद्र परिहार उर्फ राजू से हुई है। 2 जून की रात पूजा रोजाना की तरह खाना खाने के बाद पार्क में टहलने गई थी। इसी दौरान पति राजेंद्र का फोन आया। उसने तुरंत घर लौटने के लिए कहा। उसने आरोप लगाया कि पूजा पार्क में छिपकर किसी से मोबाइल पर बात कर रही थी। पूजा ने इनकार किया तो बेल्ट, लात-घूंसों और थप्पड़ों से पिटाई कर दी। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पढे़ं पूरी खबर... 5. कांग्रेस विधायक की स्कॉर्पियो में आग, अगला हिस्सा जला; गाय को बचाने में स्कूल की बाउंड्री से टकराई थी लखनादौन से कांग्रेस विधायक योगेंद्र सिंह बाबा की स्कॉर्पियो सिवनी में गाय को बचाने के प्रयास में स्कूल की बाउंड्री से टकरा गई। टक्कर के बाद गाड़ी में आग लग गई। समय रहते विधायक, उनके गनमैन और ड्राइवर बाहर निकल आए, जिससे जनहानि नहीं हुई। हादसे में तीनों को मामूली चोटें आई हैं। हादसा बंजारी गांव के पास गुरुवार सुबह करीब 7 बजे हुआ। विधायक जबलपुर से घूरवाड़ा गांव जा रहे थे। एक्सीडेंट के बाद सड़क पर जाम लग गया। धूमा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इसे क्लियर कराया। पढ़ें पूरी खबर… 6. भोपाल में आंधी-बारिश, शाजापुर में ओले गिरे; MP में 22 जून तक मानसून की एंट्री हो सकती है भोपाल में गुरुवार शाम तेज आंधी के साथ बारिश हुई। सीहोर जिले के इछावर में भी पानी गिरा। शाजापुर में ओलावृष्टि हुई। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 29 जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। श्योपुर में सबसे ज्यादा करीब पौने 2 इंच पानी गिरा, जबकि मंडला में पौन इंच बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल मध्य प्रदेश में प्री मानसून सिस्टम एक्टिव है। इसी वजह से आंधी और बारिश का दौर चल रहा है। इस बार मानसून 20 से 22 जून के बीच एमपी पहुंच सकता है। प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून मानी जाती है। पढ़ें पूरी खबर… 7. राज्यसभा चुनाव के लिए BJP प्रत्याशियों की लिस्ट जारी, MP से तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को टिकट बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इनमें गुजरात से 4, मध्य प्रदेश और राजस्थान से 2-2, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर से 1-1 और ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव के लिए एक उम्मीदवार शामिल हैं। मध्य प्रदेश की दो राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और सीनियर लीडर रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। उसी दिन रिजल्ट भी आएगा। पढ़ें पूरी खबर… पॉजिटिव खबर 8. चंबल के देवरी सेंक्चुरी में 54 और घड़ियालों का जन्म, कुल 153 हुए; सुरक्षा के लिए क्वारेंटाइन किए गए चंबल के देवरी घड़ियाल सेंक्चुरी में 54 अंडों से शावकों ने जन्म लिया है। इन सभी को सुरक्षा के लिहाज से तुरंत क्वारेंटाइन कर दिया गया है। इससे पहले भी केंद्र में 99 शावकों का जन्म हुआ था, जिससे इस साल अंडों से बाहर आने वाले घड़ियालों की कुल संख्या अब 153 तक पहुंच गई है। डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल ने बताया कि चंबल नदी के घाटों से हर साल 200 अंडों को कलेक्ट कर देवरी हैचरी केंद्र में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद अनुकूल मौसम देखकर मई और जून में इन अंडों से हैचिंग कराई जाती है। पढे़ं पूरी खबर… खबर जरा हटके 9. चपरासी ने डिप्टी डायरेक्टर पर तानी रिवॉल्वर, कहा- 5 दिन में कटी तनख्वाह नहीं आई तो तस्वीर पर माला चढ़ जाएगी मुरैना के वेटेरिनरी दफ्तर में चपरासी भूरे सिंह भदौरिया ने डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ब्रिज किशोर शर्मा पर लाइसेंसी रिवॉल्वर तान दी। उसने कहा- पांच दिन के भीतर मेरी कटी हुई तनख्वाह वापस नहीं आई तो आपकी तस्वीर पर माला चढ़ जाएगी। शर्मा की शिकायत पर कोतवाली में भदौरिया के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। शर्मा ने बताया कि भूरे सिंह ने सबसे पहले दफ्तर में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद किए और फिर सीधे उनके चेम्बर में घुस गया। इसके बाद लाइसेंसी रिवॉल्वर डॉ. शर्मा के सीने पर तान दी और जान से मारने की धमकी दी। पढे़ं पूरी खबर… कल का बिग इवेंट 10. विश्व पर्यावरण दिवस पर BJP का पौधरोपण अभियान विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भाजपा नेता प्रदेशभर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण करेंगे। अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

दैनिक भास्कर 4 Jun 2026 6:00 pm

रायसेन की बेटी ने फतह किया एवरेस्ट, लहराया तिरंगा:भोपाल में अंजना बोलीं- वहां हर कदम पर मौत, कई शव देखे; आखिर में जर्नी पूरी की

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के ग्राम सेमरी की रहने वाली पर्वतारोही अंजना यादव ने 27 मई को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रचा है। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर (8848.86 मीटर) की चढ़ाई की। उनकी यह जर्नी करीब 2 महीने तक चली। अंजना एक साधारण ग्रामीण परिवार से आती हैं। एवरेस्ट अभियान से लौटने के बाद दैनिक भास्कर ने उनसे खास बातचीत की। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की अपनी स्टोरी साझा की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…. सवाल: एवरेस्ट शिखर तक पहुंचने में किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? जवाब: इसके लिए मानसिक रूप से बहुत मजबूत होना पड़ता है। आपको पता होता है कि हर कदम पर मौत का खतरा है। रास्ते में कई बार लोगों के शव भी दिखाई देते हैं। वहां तापमान - 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। शुरुआत में मुझे भी डर लगा था, लेकिन धीरे-धीरे खुद को संभाल लिया। मैं 3 अप्रैल को नेपाल के काठमांडू पहुंची थी। वहां से एवरेस्ट बेस कैंप गई। इसके बाद करीब दो महीने 5 हजार मीटर की ऊंचाई पर रहकर शरीर को तैयार किया। इस दौरान लगातार माउंट एवरेस्ट पर कई रोटेशन हुए। सवाल: अभियान का सबसे कठिन पल कौन सा था? जवाब: शुरुआत में मौसम की वजह से समिट विंडो नहीं मिल रही थी। इस बार काफी भीड़ भी थी। 20 मई को मैं समिट के लिए निकली थी और 7 हजार मीटर ऊंचे तीसरे कैंप तक पहुंची। वहां मेरे गाइड ने कहा कि मौसम बेहद खराब है, ऊपर जाना खतरनाक हो सकता है। मुझे वापस लौटना पड़ा। उस समय मैं काफी भावुक हो गई थी। मैंने गाइड से कहा कि इस बार मुझे हर हाल में तिरंगा एवरेस्ट पर फहराना है। इसके बाद मैं फिर नीचे आई, खुद को दोबारा तैयार किया और 23 मई को दूसरा मौका मिला। सवाल: क्या एवरेस्ट चढ़ाई एक बार में पूरी हो जाती है? जवाब: नहीं, 7 हजार मीटर तक पहुंचने के लिए 4-5 बार रोटेशन करना पड़ता है। बार-बार ऊपर जाना और नीचे लौटना बेहद कठिन होता है। यह पूरी प्रक्रिया हमें शरीरिक और मानसिक शिखर तक जाने के लिए तैयार करती है। सवाल: क्या कभी लगा कि अब आगे नहीं बढ़ पाएंगी? जवाब: हां, कई बार ऐसा लगा कि अब लौट जाना चाहिए। मेरे सामने कुछ लोगों की मौत भी हुई। शव देखकर एक बार मैं घबरा गई थी, लेकिन फिर खुद को संभाला। 25 मई को दोबारा आगे बढ़ी। 26 मई को चौथे कैंप पहुंची और शाम को अंतिम चढ़ाई शुरू की। मैं करीब 36 घंटे तक बिना पानी पिए आगे बढ़ती रही। चौथे कैंप के बाद इतनी तेज हवा थी कि कई टेंट उड़ गए थे। आखिरकार करीब 9 घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद मैं शिखर तक पहुंची और वहां तिरंगा फहराया। सवाल: परिवार का कितना सहयोग मिला? जवाब: परिवार ने पूरा साथ दिया। मेरे पति ने सबसे ज्यादा सहयोग किया। 2024 में मैंने एवरेस्ट पर जाने का सपना देखा था। बाद में शादी हो गई तो लगा कि शायद सपना पूरा नहीं हो पाएगा। लेकिन मेरे पिता ने कहा था, 'तेरा सपना मेरा सपना है और यह जरूर पूरा होगा।' इसके बाद मैंने तैयारी शुरू की। साइक्लिंग की और अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक करीब 4600 किलोमीटर की साइक्लिंग भी की। सवाल: गांव से निकलकर एवरेस्ट तक पहुंचने का सफर कैसा रहा? जवाब: यह सफर चुनौतियों से भरा रहा। गांवों में अक्सर लोग बड़े सपने तो देखते हैं, लेकिन उन्हें पूरा नहीं कर पाते। मैंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और सीमित संसाधनों में आगे बढ़ी। मैं 2018 से खेलों में सक्रिय हूं। अब तक 22 नेशनल और तीन इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हूं। मैं 20 पर्वत चोटियों पर चढ़ाई कर चुकी हूं। गांव में आज भी कई लड़कियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिलता, लेकिन मैंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। सवाल: देश की लड़कियों और महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी? जवाब: मैं सभी लड़कियों और महिलाओं से कहना चाहती हूं कि अपनी क्षमता को पहचानें। ऐसा कोई काम नहीं है जो आप नहीं कर सकतीं। अपने सपनों को कभी मत छोड़िए। अगर आप सपना ही नहीं देखेंगी तो उसे पूरा कैसे करेंगी? जब मैं एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंच सकती हूं, तो देश की हर बेटी भी अपने सपने पूरे कर सकती है। सवाल: आपका अगला लक्ष्य क्या है? जवाब: अब दुनिया की अन्य ऊंची चोटियों पर चढ़ाई की तैयारी करना चाहती हूं। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और समाजसेवा के क्षेत्र में भी योगदान देने की कोशिश रहेगी। ------------- ये खबर भी पढ़ें… इंडियन एस्ट्रोनॉमर राशि जैन ने खोजी नई गैलेक्सी भारतीय वैज्ञानिक राशि जैन ने अपने गाइड प्रो. योगेश वाडदेकर के साथ मिलकर एक नई गैलेक्सी की खोज की है। यह एक सर्पिलाकार (Spiral) गैलेक्सी है, जिसका नाम अलकनंदा रखा गया है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 3 Jun 2026 1:46 pm

कैमरा देखकर भागे चोलानाइकन, गुफा में छिपने लगे:मानते हैं कि शक्ति चली जाएगी, गुफाओं में रहने वाली एशिया की आखिरी जनजाति, 250 ही बचे

सुबह का वक्त, हल्की धुंध, घने जंगल में अजीब सी आवाजें आ रही हैं। 5 घंटे तक पैदल चलने के बाद चट्‌टानों पर कुछ लोग नजर आते हैं। नजदीक पहुंचे तो देखा चट्‌टानों में छोटी-बड़ी काली गुफाएं हैं। हमें देखते ही उनमें से कुछ छिप-छिपकर गुफाओं में जाने लगे। थोड़ी देर बाद डरे-सहमे कुछ लोग हमारे करीब आए। मैंने कैमरा निकाला तो वो अजीब हाव-भाव दिखाने लगे। मेरे साथी बोले- ये आपको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस बीच, उन्हीं में से एक बुजुर्ग आगे आया और कैमरे की ओर इशारा करते हुए अपनी भाषा में बोला- इसे दूर करो, ये हमारी शक्ति खींच लेगा। मैंने तुरंत कैमरा हटा लिया। ये बात मुझे मेरे साथी ने समझाई। अपने साथी के जरिए बुजुर्ग से पूछा– आप लोग गुफाओं में क्यों रहते हैं? बुजुर्ग हमें अपनी गुफा के पास ले गया। एक ओर इशारा करते हुए कहा- यहां हमारे बुजुर्ग सोए हैं। हम उन्हें छोड़कर नहीं जाते। ये हमारी गुफाओं के रक्षक हैं। हम अपने परिवार के लोगों को भी यहीं दफनाते हैं। ये किस्सा है चोलानाइकन जनजाति का, जो 21वीं सदी में भी घने जंगलों के बीच गुफाओं में रहती है। इनसे मिलने पहुंचे थे पर्यावरणविद केए शाहजी। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं इसी चोलानाइकन जनजाति की कहानी। चोलानाइकन जनजाति के करीब 250 लोग ही बचे हैं, जो केरलम के मलप्पुरम जिले के नीलांबूर के जंगलों में बसे हैं। जब मैं इनसे मिलने जंगल पहुंची तो रोक दिया गया। केरलम सरकार ने हाल ही में चोलानाइकन लोगों से जंगल में जाकर मिलने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। केए शाहजी वो आखिरी शख्स हैं, जो इनकी गुफाओं तक पहुंचे हैं। शाहजी ने चोलानाइकन की गुफाएं और उनके रहन-सहन को करीब से देखा है। मेरी शाहजी से मुलाकात नीलांबूर जंगलों के मुहाने पर हुई। वहीं उन्होंने ये पूरी कहानी सुनाई। यह जंगल वायनाड के करीब है। मैंने प्रशासन से चोलानाइकन की गुफाओं तक जाने की मंजूरी मांगी, लेकिन अफसर नहीं माने। लगातार प्रयास करने के बाद वन विभाग के अफसरों ने सिर्फ दो चोलानाइकन परिवारों से मिलने की मंजूरी दी। ये दो परिवार जंगल के मुहाने पर रहते हैं। इन्हें सरकार ने कच्चे घर भी बनाकर दिए हैं। बाकी 20-25 परिवार जंगल में ही गुफाओं में रहते हैं। इजाजत मिलते ही मैं अपने साथी राम कुमार और बालकृष्णन के साथ वायनाड से नीलांबूर के जंगलों की ओर निकल पड़ी। रास्ते में बालकृष्णन बताते हैं कि चोलानाइकन बाहरी लोगों से डरते हैं, जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं होते। ये पहाड़ों को देवता मानते हैं। गर्मियों के मौसम में नदियों के किनारे झोपड़ी बनाते हैं। मानसून और ठंड में वापस गुफाओं में लौट जाते हैं। ये जंगल से आमतौर पर बाहर नहीं आते। फिर ये दो परिवार यहां क्यों रहते हैं? कभी-कभी कुछ सामान वगैरह लेने के लिए चोलानाइकन जंगल से बाहर आते हैं। थोड़े दिन इन कच्चे घरों में रहते हैं। प्रशासन इनकी निगरानी करता है, ताकि कोई इन्हें परेशान न करे। बाद में जंगल के बीचोबीच अपनी गुफाओं में लौट जाते हैं। नीलांबूर के आगे करीब 20 किलोमीटर के बाद सड़क खत्म हो जाती है। आगे का सफर यहां से पैदल ही तय करना होगा। हम तीनों पथरीले रास्तों से होते हुए तो जंगल के मुहाने पर पहुंचे। यहां चारों ओर पक्षियों की आवाज आ रही है। अचानक दो कच्चे घर दिखाई देते हैं। तभी बालकृष्णन कहते हैं- चोलानाइकन के दो परिवार वहीं रह रहे हैं। हम उन घरों की ओर बढ़े, तो कुत्ते भौंककर स्वागत करते हैं। घरों के करीब पहुंचते ही एक आदमी दिखता है। बालकृष्णन बताते हैं– ये मुरगन है। इस बीच, मुरगन अपने काम में लगा रहा, हमें देखा तक नहीं। वह जमीन पर बैठे-बैठे कटहल को फोड़कर उसके बीजों को खा रहा है। बालकृष्णन ने उसी की भाषा में पूछा- यह कहां से लाए हो? वह बताता है- जंगल से एक आदमी लेकर आया था। अभी वो और फल लेने जंगल गया है। इस दौरान, जब मैं इस बातचीत का वीडियो बना रही थी, तो मुरगन कुछ कहते-कहते रुक गया। बालकृष्णन के थोड़ा समझाने के बाद मुरगन मान गया। वह बताता है- गर्मी से एक महीने पहले जंगल से कटहल लाते हैं। इसे उबालते हैं। इसके बाद, इसमें शहद और मिर्च डालकर छोटे–छोटे गोले बनाकर खाते हैं। बालकृष्णन बताते हैं- 'इनके पास हर बीमारी का इलाज जंगल में ही है। ये हर तरह की जड़ी–बूटी पहचानते हैं। बालकृष्णन, मुरगन से पूछता है कि तुम्हारे यहां शादी कैसे होती है?' वो बताता है- ‘जब लड़की को लड़का पसंद कर लेता है, तो हमारे मुखिया और गांव के बुजुर्ग एक जगह सभी को बुलाते हैं। वहां वे तुलसी की दो माला बनाकर दोनों को देते हैं। लड़का, लड़की एक दूसरे को माला पहनाते हैं। इसके बाद, दोनों साथ रहने लगते हैं। उन्हें अलग से एक गुफा भी दे दी जाती है। किसी तरह का कोई भोज या लेन-देन नहीं होता।’ इतने में एक महिला आती हैं। दुबली-पतली, घुंघराले बालों वाली। बालकृष्णन ने नाम पूछा, तो बोली- बिंदु। मुझे देखते ही वह गुफा के दूसरी ओर चली जाती है और वहां कुछ सुखाने लगती है। बालकृष्णन पास में जाकर पूछते हैं- यह क्या कर रही हो? वो बताती है- ये काली मिर्च है, इसे सुखा रही हूं। जंगली शहद और काली मिर्च बेचकर थोड़ा बहुत पैसा मिल जाता है। इस दौरान मैं उनके घर में झांकती हूं, तो मुरगन–बिंदु मुझे गौर से देखते हैं। घर की दीवारें गंदी थीं और चारों तरफ धूल ही धूल है। नीचे दाल–चावल बिखरे पड़े हैं। शायद एक–दो दिन पहले उन्हें किसी ने राशन किट दी थी। जंगल से लाई गई सब्जियां हैं और नींबू भी रखे हैं। रसोई में सिर्फ 2–3 एल्युमिनियम के बर्तन दिखाई दिए। न मसाला, न नमक, न तेल। मुरगन, बालकृष्ण को बताता है कि हम जंगलों से कुछ भी तोड़कर सीधे ही खा लेते हैं, पकाते नहीं हैं। आग में मछली भून लेते हैं या चावल उबालकर कांजी बनाते हैं। तभी, मेरे साथी राम कुमार ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर निकली, तो उन्होंने मुझे घर के पास से ही एक हल्दी की गांठ निकालकर दी। कहा– 'इसकी खुशबू लेकर देखिए।' मैंने सूंघी तो, वाकई हल्दी की ऐसी खुशबू मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। राम कुमार ने बताया– दुनिया में आपको इससे ज्यादा शुद्ध हल्दी कहीं नहीं मिलेगी। चोलानाइकन इसे खाते हैं। घाव होने पर शरीर पर लगाते हैं। इसके बाद राम कुमार ने एक पेड़ से पत्ता तोड़कर दिया। कहा- ये तेजपत्ता है। उसकी खुशबू भी लाजवाब थी। मैंने पूछा- जंगल में हर समय फल-फूल नहीं होते, ऐसे में ये क्या खाते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– चोलानाइकन जंगल से शहद इकट्ठा करते हैं। बांस के लंबे खोखले डंडों में भरकर इसे हल्की आंच पर गर्म करते हैं। इसके बाद इसे मिट्टी में दबा देते हैं। जब जंगल में खाने के लिए कुछ नहीं मिलता, तब ये लोग इस शहद को बाहर निकालकर उसमें पानी मिलाते हैं और पके चावल से खाते हैं। क्या, इनके नाम भी खास होते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– ‘हर चोलानाइकन की गुफा का एक नाम होता है, इसलिए गुफा के नाम से ही परिवार पहचाने जाते हैं। ये लोग भले ही संख्या में कम हैं, लेकिन अपने मुखिया की हर बात मानते हैं।’ ‘कौन सा परिवार किस गुफा में रहेगा, कब जंगल में नई जगह जाना है या शहद का बंटवारा कैसे होगा, ये सब मुखिया ही तय करता है।’ चोलानाइकन छोटे–छोटे कबीलों में जंगलों में अलग-अलग जगह रहते हैं। हर कबीले का एक मुखिया होता है। कबीले आपस में बहुत मेल-जोल नहीं रखते। क्या चोलानाइकन कोई उत्सव भी मनाते हैं? दैवओट्टू, इनका एक पारंपरिक उत्सव है। यह आमतौर पर अप्रैल में होता है। इस उत्सव के लिए हर परिवार शहद एकत्रित करता है। फिर शहद का एक हिस्सा पर्वत और पुरखों को अर्पित करते हैं। क्या आपको पता है, चोलानाइकन तारों को देखकर मौसम का हाल बता देते हैं। मैंने पूछा- कैसे? वो बताते हैं- ये लोग तारों की स्थिति और उनकी चमक के आधार पर मानसून के आने का अनुमान लगा लेते हैं। साथ ही, अपनी गुफा बदल लेते हैं। भारी बारिश से बचने के लिए ये लोग पहाड़ों पर बनी गुफाओं में चले जाते हैं। मौत के बाद मिट्टी से दूरी… लाश को पत्तों–बेलों से ढंकते हैं बालकृष्णन बताते हैं कि चोलनाइकन समुदाय में अंतिम संस्कार अनूठे तरीके से होता है। मौैत के बाद वे एक गहरा गड्ढा खोदते हैं। लाश को बेलों और पत्तों में लपेटकर उसमें रखते हैं। ऊपर से मिट्टी नहीं डालते, बल्कि गड्ढे को सूखी लकड़ियों और पत्तों से ढंक देते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि मिट्टी का एक भी कण शव को न छू पाए। ऐसा क्यों? चोलनाइकन के लिए मिट्टी 'संसार का भार' है। शव को मिट्टी से दूर रखने के पीछे उनकी गहरी आस्था है। उनका मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा बिना किसी सांसारिक बंधन में उलझे, जंगल की हवाओं और पेड़ों की चेतना में विलीन हो जाती है। अब शाम होने वाली है। हम वापस वायनाड की ओर निकल पड़ते हैं। अगले दिन, वायनाड में पर्यावरणविद केए शाहजी के घर पहुंची। शाहजी बताते हैं- बारिश के दिन थे। जब मैं पहली बार चोलानाइकन लोगों की गुफा के पास पहुंचा, तो लगा जैसे किसी दूसरी सदी में आ गया हूं। मैंने चोलानाइकन के बीच रात गुजारी है। रात में हाथियों की चिंघाड़ पूरे जंगल में गूंज रही थी। गुफाओं के पास तक भी कुछ हाथी आ गए थे, लेकिन चोलानाइकन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। वो रात मैंने करवटें बदल–बदल कर गुजारी। चोलानाइकन की खासियत बताता हूं। वे पक्षियों की चहचहाहट, हवा का रुख और पेड़ों की पत्तियों के हिलने के तरीके से बता सकते हैं कि बारिश कब होगी या जंगल में खतरा कितना करीब है। ‘वे कौन सी भाषा बोलते हैं?’ चोलानाइकन अपनी भाषा को 'चोलानाइक्कन' कहते हैं। इस भाषा में मलयालम के अलावा तमिल और कन्नड़ के भी कुछ शब्द मिलते हैं। शाहजी से मिलकर मैं वायनाड के स्थानीय पत्रकार दीपक कुमार के घर पहुंची। दीपक भी चोलानाइकन और उनकी गुफाओं को करीब से देख चुके हैं। कुछ बताने से पहले वो मुझे चोलानाइकन की तस्वीरें दिखाते हैं। इसके बाद वे कहते हैं- ये लोग अपने पूर्वजों की तरह गुफाओं में ही रहना पसंद करते हैं। सरकार ने जंगल में इनके लिए घर बनाकर दिए हैं, लेकिन वह अधूरे हैं। वे बताते हैं– चोलानाइकन समुदाय की एक महिला को गर्भवती होने पर वायनाड के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन वह रात में ही वहां से चली गई। अफरा–तफरी मच गई। आखिर, वह जंगल में अपने लोगों के बीच मिली। ऐसे और भी किस्से हैं। लेकिन सबसे बड़ा संकट यह है कि यदि इस जनजाति को नहीं संभाला गया तो ये ‘केवमैन’ जंगलों में ही खत्म हो जाएंगे। --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 2 Jun 2026 7:21 am

भास्कर अपडेट्स:पश्चिम बंगाल में CID ने सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले में TMC के 13 विधायकों के बयान दर्ज किए

पश्चिम बंगाल में सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले की जांच कर रही CID ने अब तक TMC के 13 विधायकों के बयान दर्ज किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, तीन विधायकों ने कहा है कि 6 मई की बैठक के रजिस्टर में मौजूद सिग्नेचर उनके नहीं हैं। CID ने TMC सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजकर बैठक का रजिस्टर पेश करने को कहा है। मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और चीफ व्हिप की नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव में कथित गड़बड़ी और फर्जी सिग्नेचर के आरोपों से जुड़ा है। दो TMC विधायकों ने दावा किया था कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक नहीं हुई थी। उनका कहना है कि उन्होंने रजिस्टर पर 19 मई को सिग्नेचर किए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 6 मई की तारीख वाला प्रस्ताव बाद में तैयार किया गया और उसमें कई सिग्नेचर ब्लॉक लेटर में किए गए। विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के बाद 27 मई को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया था। अगले दिन CID ने जांच शुरू कर दी। आज की अन्य खबरें रनवे मरम्मत के चलते जुलाई से सितंबर तक सप्ताह में दो दिन बंद रहेगा श्रीनगर एयरपोर्ट श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे की मरम्मत और री-सर्फेसिंग के काम के चलते 1 जुलाई से 30 सितंबर तक हर सोमवार और मंगलवार को उड़ान सेवाएं बंद रहेंगी। अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले से करीब 2 लाख यात्रियों के प्रभावित होने की आशंका है। वर्तमान में श्रीनगर एयरपोर्ट पर प्रतिदिन 35 से 40 उड़ानें संचालित होती हैं। फिलहाल भी मरम्मत कार्य के कारण उड़ानों का संचालन सीमित समय के लिए किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 5 नए जज आज शपथ लेंगे; जजों की कुल संख्या 32 से बढ़कर 37 होगी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त पांच नए जज आज शपथ लेने वाले हैं। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत इन पांचों नए जजों को पद की शपथ दिलाएंगे। इस शपथ ग्रहण के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी, जो कि स्वीकृत संख्या (38) से केवल एक कम है। केंद्र सरकार ने सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा, और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। बंगाल की खाड़ी में 4.6 तीव्रता का भूकंप, कोई नुकसान नहीं बंगाल की खाड़ी में मंगलवार सुबह 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप सुबह 7:43 बजे दर्ज किया गया। इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। NCS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र बंगाल की खाड़ी में 14.027 डिग्री नार्थ लैटिट्यूड और 93.132 डिग्री ईस्ट लॉन्गिट्यूड पर स्थित था। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन शुरू, 18 जून को वोटिंग चुनाव आयोग ने सोमवार को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। आज से इसके लिए नामांकन शुरू हो जाएंगे। इनमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात की 4-4 सीटें; राजस्थान और मध्य प्रदेश की 3-3 सीटें; झारखंड की 2 सीटें; और अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर व मेघालय की 1-1 सीट शामिल है। इन सीटों पर 18 जून को वोट डाले जाएंगे और उसी दिन नतीजे भी आ जाएंगे। चुनाव के लिए पर्चा भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आखिरी तारीख 8 जून है। इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा की 1-1 सीट पर उपचुनाव के लिए भी नोटिफिकेशन जारी हुआ है। दिल्ली में 17 साल के युवक की चाकू मारकर हत्या; मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम उत्तर पूर्वी दिल्ली के न्यू उस्मानपुर इलाके में सोमवार देर रात एक 17 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। DCP राहुल अलवाल ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो वहां 17 साल का अभिषेक जमीन पर पड़ा हुआ मिला। चश्मदीदों के मुताबिक, यह वारदात दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई, जहां स्थानीय बाजार होने के कारण लोगों की लगातार आवाजाही बनी हुई थी। फॉरेंसिक टीम ने अपराध स्थल का निरीक्षण कर जरूरी सबूत जुटा लिए हैं और इस मामले में बीएनएस (BNS) की धारा 103(1) के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। जम्मू में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान पुलिस पर पथराव; 3 पुलिसकर्मी घायल जम्मू के वन क्षेत्र में चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ बुलाए गए एक विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के पथराव में एक महिला पुलिस DSP सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हवा में फायरिंग करनी पड़ी। 26 मई को निचली शिवालिक पहाड़ियों में कार्रवाई के दौरान 30 से अधिक अवैध ढांचों को गिराकर करोड़ों रुपए मूल्य की करीब 60 कनाल वन भूमि को मुक्त कराया गया था। पुलिस के मुताबिक, इस विरोध मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

दैनिक भास्कर 2 Jun 2026 5:47 am

देश में घट रहा तंबाकू सेवन, मध्यप्रदेश में बढ़ा:हर दूसरा पुरुष और 10 में से 1 महिला करती है सेवन, राष्ट्रीय औसत से 11% ज्यादा

भोपाल एम्स में एक महिला ने बताया कि उनके पति ओरल कैंसर से पीड़ित हैं। डॉक्टर के मुताबिक तंबाकू खाने से ये हुआ है। अब कैंसर तीसरी स्टेज पर है और ऑपरेशन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। समझ नहीं आ रहा पैसे कहां से आएंगे। घर में वो अकेले कमाने वाले थे। इस तंबाकू ने मेरा पूरा परिवार बर्बाद कर दिया है। घर में खाने तक को पैसा नही हैं। रिश्तेदार को भरोसे बच्चों को छोड़ा है। ये सिर्फ एक कहानी नहीं है ये एक छोटे से शौक से शुरू होने वाला वो खौफनाक सफर है जिसका अंत जानलेवा होता है। तंबाकू सिर्फ व्यक्ति को नहीं उसके पूरे परिवार को खत्म कर देता है। चौकाने वाली बात तो ये है कि ये जानते हुए कि यह जानलेवा है लोग इसका सेवन कर रहे हैं। अगर, मध्यप्रदेश की बात करें तो मई 2026 में आई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 15 साल से अधिक आयु के 47.7% पुरुष और 11.6% महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं। यानी प्रदेश में हर 10 में से लगभग 5 पुरुष तंबाकू की लत के शिकार हैं। राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे मध्यप्रदेश NFHS-6 के अनुसार मध्यप्रदेश में पुरुषों में तंबाकू सेवन की दर 47.7% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 36.3% है। यानी प्रदेश देश के औसत से 11.4 प्रतिशत अंक पीछे है। महिलाओं में भी स्थिति बेहतर नहीं है। प्रदेश में 11.6% महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 8.4% है। यह अंतर बताता है कि तंबाकू नियंत्रण अभियान के बावजूद प्रदेश में लत कम होने के बजाय बढ़ी है। एमपी में बढ़ा सेवन रिपोर्ट के मुताबिक जहां एक ओर देश में तंबाकू सेवन कम हुआ है, वहीं मध्यप्रदेश में यह बढ़ रहा है। पुरुषों में तंबाकू सेवन NFHS-5 के 46.4% से बढ़कर 47.7% हो गया है। महिलाओं में यह आंकड़ा 10.3% से बढ़कर 11.6% पहुंच गया। इसके विपरीत राष्ट्रीय स्तर पर पुरुषों में तंबाकू सेवन 38% से घटकर 36.3% और महिलाओं में 8.9% से घटकर 8.4% हो गया। बिहार, झारखंड और असम ने सुधारी स्थिति रिपोर्ट बताती है कि कई ऐसे भी राज्य हैं जहां NFHS 5 में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों का प्रतिशत एमपी से ज्यादा था। उनकी स्थिति NFHS 6 में एमपी से तेजी से सुधार हुआ है। बिहार, झारखंड और असम में पुरुषों का तंबाकू सेवन मध्यप्रदेश से ज्यादा था। बिहार में यह दर 48.9%, झारखंड में 47.4% और असम में 51.9% थी। महिलाओं में महाराष्ट्र ने छोड़ा मध्यप्रदेश को पीछे महिलाओं में भी ऐसा ही NFHS-5 में महाराष्ट्र में 11% महिलाएं तंबाकू का सेवन करती थीं और मध्यप्रदेश के 10.3% महिलाएं तंबाकू खाती थी। लेकिन NFHS-6 में महाराष्ट्र का आंकड़ा घटकर 8.8% रह गया। इसके उलट मध्यप्रदेश में महिलाओं का तंबाकू सेवन बढ़कर 11.6% हो गया। देश के इन राज्यों में एमपी से ज्यादा तंबाकू सेवन रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू सेवन के मामले में मिजोरम सबसे ऊपर है, जहां 73.6% पुरुष और 61% महिलाएं तंबाकू का उपयोग करती हैं। इसके अलावा त्रिपुरा, मेघालय, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड भी मध्यप्रदेश से आगे हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा चिंता रिपोर्ट बताती है कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में तंबाकू सेवन की समस्या सबसे गंभीर बनी हुई है। मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में पुरुषों और महिलाओं दोनों में तंबाकू सेवन की दर राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है। हालांकि इनमें से कुछ राज्यों में कमी आई है, फिर भी ये देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्यों की सूची में शामिल हैं। क्यों बढ़ रहा है तंबाकू सेवन का ग्राफ मोनोचिकित्सक डॉ. सत्याकांत त्रिवेदी कहते हैं कि तंबाकू इस्तेमाल नहीं करने वाले बच्चे, जब अपने रोल मॉडल या किसी साथी को बीड़ी-सिगरेट पीते देखतें हैं तो उनमें भी इसको लेकर क्रेज बढ़ता है। जिससे उनमें लत लगने का खतरा बढ़ता है। तंबाकू सेवन से बढ़ रही कैंसर की शिकायतें सिर्फ हमीदिया अस्पताल में साल 2021 में 5 हजार 96 यानी रोजाना लगभग 14 कैंसर के मरीज इलाज के लिए आए। वहीं साल 2022 में यह आंकड़ा 6 हजार 112 दर्ज किया गया। यानी हर दिन 18 लोग कैंसर के इलाज के लिए हमीदिया आए। भोपाल में रोज 10 लाख से अधिक का करोबार राजधानी में पान-मसाला सिगरेट और गुटखे का कारोबार दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। शहर में ही करीब 10 लाख रुपए रोज के गुटखे की खपत है। पान-मसाला, बीड़ी और सिगरेट की खपत अलग से है। मांग बढ़ने के साथ ही दो नंबर का व्यवसाय चरम पर है।

दैनिक भास्कर 31 May 2026 4:08 pm

Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट

सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

वेब दुनिया 10 Jan 2025 2:40 pm