आरटीओ में दसनंबरी:मोबाइल नंबर 9000000000 पर 420 गाड़ियां रजिस्टर्ड, ऐसे 5 नंबरों पर 656 वाहन

मप्र की सड़कों पर देशभर से चोरी कर लाई गई गाड़ियां बड़ी संख्या में दौड़ रही हैं। परिवहन विभाग के दलालों और स्टाफ की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। इसके लिए री-रजिस्ट्रेशन की तय प्रक्रिया को ही दरकिनार कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि ऐसी 756 गाड़ियां प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिना किसी रोक-टोक के रजिस्टर्ड कर दी गईं। इनकी आरसी, एनओसी से लेकर चेसिस नंबर तक सबकुछ फर्जी हैं। चौंकाने वाली बात यह है​ कि इन 756 में से 656 गाड़ियां तो सिर्फ 5 मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर्ड कराई गईं हैं। यही नहीं, इनमें भी 420 गाड़ियां एक ही मोबाइल नंबर 9000000000 पर रजिस्टर्ड हैं। ये पूरा रजिस्ट्रेशन अरुणाचल प्रदेश में दिखाया गया। वहीं से फर्जी आरसी बनाई गईं और एमपी में एनओसी के जरिए री-रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। भास्कर संवाददाता ने कैग रिपोर्ट में दर्ज नंबरों पर कॉल किए तो एक को छोड़ बाकी सभी बंद मिले। एक नंबर चालू मिला, वह भी असम के किसी स्टेशनरी शॉप संचालक का था। जांच में सामने आया कि अरुणाचल प्रदेश के आरटीओ ने ही गलत मोबाइल नंबरों से आरसी जारी की और बाद में एमपी के आरटीओ–डीटीओ ने इन्हें पास कर दिया। जांच केंद्रीय स्तर पर हो ताकि गड़बड़ियां पकड़ी जा सके... ऑडिट टीम ने अपनी जांच में बताया है कि केंद्रीय स्तर पर जांच कराई जाए ताकि एमपी सहित अन्य राज्यों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां पकड़ी जा सकें। क्योंकि पिछले 2 साल का रिकॉर्ड खंगाला गया। इसमें 33 हजार 347 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी मिल चुकी है। जिनका अलग-अलग राज्यों में एनओसी लेकर रजिस्ट्रेशन कराया गया। एनआईसी को VAHAN सिस्टम की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि गलत मोबाइल/इंजन/चेसिस डिटेल्स पर पंजीयन को रोका जा सके। गाड़ियां एक दिन में 2-2 राज्यों से गुजर गईं ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल किसी गंभीर अपराध में हो सकता है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विवेक शर्मा ने बताया कि कैग ने हाल ही में रिपोर्ट भेजी है। इसकी जांच करा रहे हैं। सभी आरटीओ को रिपोर्ट के आधार पर जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। दलाल और स्टाफ का खेल- आरसी, एनओसी, चेसिस नंबर- सबकुछ फर्जी मिलीभगत का बड़ा उदाहरण : नीमच में 11 गाड़ियों के चेसिस नंबर जांचे, 10 फर्जी निकले, 1 स्क्रैप…... फिर भी री-रजिस्ट्रेशन समझिए पूरी प्रक्रिया...ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा

दैनिक भास्कर 29 Aug 2025 5:26 am

क्या एमपी की महिलाएं सबसे ज्यादा शराब पीती हैं?:भास्कर पड़ताल–पटवारी का दावा गलत, एमपी 15 वें नंबर पर, जानिए कौन कहां कितनी पी रहा

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान पर एमपी की सियासत गर्माई हुई है। पटवारी ने सोमवार को भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, मप्र को तमगा मिला है कि महिलाएं सबसे ज्यादा शराब अगर पूरे देश में कहीं पीती हैं तो मप्र की पीती हैं। यह समृद्ध मप्र का सपना देखने वाली बीजेपी ने मप्र के हालात कर दिए हैं। देश में शराब का सबसे ज्यादा खपत कहीं हैं तो मप्र में है। पटवारी के इस बयान के बाद खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पटवारी को इस बयान के लिए बहनों से माफी मांगना चाहिए। वहीं बयान को लेकर बीजेपी महिला मोर्चा ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। जब ज्यादा बवाल मचा तो जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS) और सरकारी रिपोर्ट्स के हवाले से बात कही है। भास्कर ने जब एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के आंकड़ों की पड़ताल की तो जीतू पटवारी का ये दावा गलत साबित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक शराब पीने के मामले में मप्र की महिलाएं देश के बाकी राज्यों के मुकाबले 15वें नंबर पर हैं। पहले नंबर पर अरुणाचल प्रदेश की महिलाएं हैं। जहां तक शराब की खपत का सवाल है तो छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा शराब की खपत है। पढ़िए क्या कहती है NFHS-5 की रिपोर्ट.. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के बारे में जानिएस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण(NFHS) कराता है। कई चरणों में होने वाले सर्वे में सैंपल कलेक्ट किया जाता है। NFHS का पहला सर्वे 1992-93 में हुआ था। इसके बाद से 5 सर्वे आयोजित किए जा चुके हैं। इस सर्वे से देश और राज्यों में प्रजनन क्षमता, शिशु एवं बाल मृत्यु दर, परिवार नियोजन के अभ्यास जैसे पैरामीटर्स का अध्ययन किया जाता है। इसके अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, पोषण, रक्ताल्पता, स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन सेवाओं के उपयोग के आंकड़ों के बारे में पता चलता है। साल 2019 से 2021 के बीच किए NFHS 5 के सर्वे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने शराब और तंबाकू के सेवन जैसे नए टॉपिक जोड़े थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने साल 2022 में इसकी रिपोर्ट जारी की थी। शराब पीने के मामले में एमपी की महिलाएं 15वें स्थान परNFHS-5 की रिपोर्ट के मुताबिक शराब पीने वाली महिलाओं का सबसे ज्यादा प्रतिशत अरुणाचल प्रदेश का है। यहां 17.8% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। इसके बाद सिक्किम (14.8%) का नंबर आता है। ऐसे 4 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश हैं, जहां 3 फीसदी से ज्यादा और 5 फीसदी से कम महिलाएं शराब पीती हैं। वहीं 8 राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 1 फीसदी या इससे ज्यादा और 3 फीसदी से कम महिलाएं शराब पीती हैं। मप्र इसी कैटेगरी में आता है और उसका नंबर 15वां है। 15 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1 फीसदी से कम महिलाएं शराब पीती हैं। एमपी में 1.6% नहीं 1% महिलाएं शराब पीती हैंजीतू पटवारी ने NFHS-5 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा कि राज्य की 1.6% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं 2.1% और शहरी क्षेत्रों की 0.6% महिलाएं शामिल हैं। भास्कर ने NFHS-5 की मप्र की रिपोर्ट का एनालिसिस किया तो पाया कि मध्यप्रदेश में सिर्फ 1.0 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती है। इसमें शहरी क्षेत्र की 0.5% महिलाएं और ग्रामीण क्षेत्रों की 1.2% महिलाएं शामिल हैं। पड़ोसी राज्यों में केवल छत्तीसगढ़ आगेमप्र की सीमा से लगे राज्य गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, यूपी और महाराष्ट्र की बात करें तो मप्र चार बड़े राज्य गुजरात, राजस्थान, यूपी और महाराष्ट्र से इस मामले में आगे हैं। गुजरात, राजस्थान और यूपी की 0.1 फीसदी, महाराष्ट्र की 0.2 फीसदी महिलाएं ही शराब पीती हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में 2.8 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। जिलों में आलीराजपुर टॉप पर, 10वें नंबर पर उमरियाNFHS-5 की रिपोर्ट में ये भी बताया है कि मप्र के आदिवासी जिलों की महिलाएं शराब पीने में बाकी जिलों की तुलना में अव्वल है। एमपी टॉप 10 जिले, जहां महिलाएं सबसे ज्यादा शराब पीती हैं वो सभी आदिवासी बाहुल जिले हैं। पहले नंबर पर आलीराजपुर है यहां 7 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। इसके बाद डिंडोरी, धार, अनूपपुर, मंडला, बैतूल, बालाघाट, छिंदवाड़ा, शहडोल और उमरिया आते हैं। 34 जिलों में 1 फीसदी से कम महिलाएं शराब पीती हैंमप्र में महिलाओं के शराब पीने का औसत 1 फीसदी है, लेकिन 34 जिले ऐसे हैं जहां एमपी के औसत से कम महिलाएं शराब पीती हैं। सतना, दमोह और विदिशा ऐसे जिले हैं जहां 0.1 फीसदी महिलाएं ही शराब पीती हैं। वहीं NFHS-5 की रिपोर्ट के मुताबिक रतलाम, रायसेन, मुरैना, इंदौर, ग्वालियर, दतिया और भोपाल में केवल 0.2 फीसदी महिलाएं ही शराब पीती हैं। जबलपुर, मंदसौर, नरसिंहपुर, पन्ना, सागर, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, टीकमगढ़ में 0.3 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं तो भिंड, गुना, कटनी, खंडवा, नीमच में ये आंकड़ा 0.4 फीसदी है। आगर मालवा, अशोकनगर, छतरपुर, देवास, राजगढ़ ऐसे जिले हैं जहां 0.5 फीसदी महिलाएं शराब पीती हैं। वहीं रीवा(0.6) हरदा और सीधी( 0.7) और उज्जैन में 0.8 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। पांच शहरों में उज्जैन टॉप पर, 7 जिलों का आंकड़ा औसत से ज्यादापांच बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में शराब पीने वाली महिलाओं का प्रतिशत इंदौर-भोपाल जैसे बड़े शहरों से 4 गुना ज्यादा है। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में 0.2 फीसदी महिलाएं शराब पीती हैं, तो जबलपुर में ये आंकड़ा 0.3 फीसदी है। रिपोर्ट के मुताबिक उज्जैन में 0.8 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। 7 जिले जिसमें बुरहानपुर, झाबुआ, खरगोन, नर्मदापुरम, सिंगरौली, बड़वानी और सिवनी शामिल हैं। यहां 1 फीसदी से ज्यादा और 2 फीसदी से कम महिलाएं शराब पीती हैं। अब जानिए जीतू पटवारी ने महिलाओं को लेकर कहा क्या था?जीतू पटवारी सोमवार को भोपाल में अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाएं सबसे ज्यादा शराब, अगर पूरे देश में कहीं पीती हैं तो मध्य प्रदेश की पीती हैं। मध्य प्रदेश को यह तमगा मिला है। यह समृद्ध मध्य प्रदेश का सपना देखने वाली बीजेपी ने प्रदेश के ऐसे हालात कर दिए हैं। देश में शराब की सबसे ज्यादा खपत कहीं हैं तो मध्य प्रदेश में है। शराब की बिक्री और खपत आपकी सरकार ने प्रदेश में सबसे ज्यादा कर दी। विवाद बढ़ने पर पटवारी ने जबलपुर में कहा- नरेंद्र मोदी ने जो रिपोर्ट दी उस रिपोर्ट के आधार पर मैं कह रहा हूं, मेरा आरोप नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार हेल्थ सर्वे और सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह बात कही। सीएम बोले- बहनों को शराबी कहना आधी आबादी का अपमान पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के बयान पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने पलटवार करते हुए कहा, मप्र सरकार लाड़ली बहनों के लिए लगातार काम कर रही है। 50% आबादी के लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा कई योजनाएं भी चलाई गई थी। प्रधानमंत्री जी तो 33% अलग से आरक्षण देकर लोकसभा विधानसभा में भी जोड़ रहे हैं। सीएम ने कहा- कांग्रेस की सरकार ने न कभी आरक्षण दिया। न कभी बहनों को तवज्जो दी। न कभी लाड़ली लक्ष्मी से लेकर लाड़ली बहना जैसी कोई योजना चलाई। उल्टे कांग्रेस के द्वारा बहनों को शराबी कहना ये सारी बहनों आधी आबादी का अपमान है। पटवारी के इस बयान से नाराज भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भोपाल, इंदौर और उज्जैन में राहुल गांधी और जीतू पटवारी के पुतले जलाकर प्रदर्शन किया। राहुल और जीतू पटवारी मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। कहां-कहां विरोध हुआ ये जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर

दैनिक भास्कर 27 Aug 2025 5:32 am

राजवाड़ा पर फूंका जीतू पटवारी और राहुल गांधी का पुतला:बीजेपी महिला मोर्चा ने कहा- प्रदेश की मातृशक्ति से माफी मांगे, यह कांग्रेस की दूषित मानसिकता

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा प्रदेश की मातृ शक्तियों पर दिए गए बयान के बाद राजनीति गर्म है। पटवारी ने मध्यप्रदेश की महिलाओं को सबसे ज्यादा शराब पीने वाली बताया है। इंदौर बीजेपी महिला मोर्चा ने राजवाड़ा पर जीतू पटवारी और राहुल गांधी का पुतला फूंका। नगर अध्यक्ष शैलजा मिश्रा ने कहा कि हरतालिका तीज जैसे पावन अवसर पर जब देशभर की महिलाएं श्रद्धा और आस्था के साथ निर्जला व्रत रखती हैं, उस दिन प्रदेशभर कि मातृशक्तियों का अपमान करना कांग्रेस की दूषित मानसिकता को उजागर करता है। क्या यही कांग्रेस की महिलाओं के प्रति असली सोच है क्या राहुल गांधी के इशारे पर जीतू पटवारी तीज जैसे पवित्र पर्व पर महिलाओं का घोर अपमान कर रहे हैं। भारतीय संस्कृति और मातृशक्ति का अपमान करने वाली कांग्रेस की यह संकीर्ण व दूषित सोच प्रदेश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। महिलाओं से माफी मांगे पटवारी बीजेपी महिला मोर्चा ने मांग की है कि जीतू पटवारी को इस टिप्पणी के लिए सभी मातृशक्तियों से माफी मांगनी होगी। बीजेपी इंदौर मीडिया सह प्रभारी नितिन द्विवेदी ने कहा कि विपक्ष मुद्दों की बजाय महिलाओं को बदनाम करने वाली राजनीति कर रहा है। जो हमेशा से रही कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। कभी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह महिला को टंच माल कहते हैं तो कभी प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चुनाव के समय कहा था कि महिलाएं 200 ,300 रुपए लेकर पोलके (ब्लाउज) में रख लेती है ये इतने में भी बाज़ नहीं आते और पूर्व मंत्री रही दलित समाज से आने वाली महिला इमरती देवी पर चाशनी को लेकर ऊलजलूल बयान देते हैं। अब तो इन्होंने हद कर दी है झूठे आंकड़े दिखाकर मध्य प्रदेश की महिलाओं का अपमान करने का कृत्य कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी कर रहे हैं उसके लिए उन्हें प्रदेश की मातृशक्ति से अविलंब माफी मांगनी चाहिए। सर्वेक्षण में एमपी सबसे पीछे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के मुताबिक, देश में महिलाओं के बीच शराब की सबसे ज्यादा खपत अरुणाचल प्रदेश में है, जहां करीब 26 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। सिक्किम में यह आंकड़ा 16.2 प्रतिशत है, जबकि असम, तेलंगाना और झारखंड भी शीर्ष राज्यों में शामिल हैं. वहीं, मध्यप्रदेश में केवल 1.6 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

दैनिक भास्कर 26 Aug 2025 8:06 pm

शराब की तस्करी कर खोली 4 फैक्ट्रियां, करोड़ों की प्रॉपर्टी:इलेक्शन ईयर में दोगुनी बढ़ी खपत, 5 राज्यों से सप्लाई, बिहार में तस्करी का नेटवर्क

'शराब दिखती नहीं है, पर बिकती जरूर है।' शराबबंदी वाले बिहार में यह कहावत प्रचलित है। रातों-रात अमीर बनने की चाहत में युवा से लेकर बुजुर्ग तक इस धंधे में उतर गए हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, चुनावी साल में तो शराब की तस्करी दोगुनी हो गई है। पुलिस विभाग के आंकड़े के मुताबिक, 2024 की तुलना में इस साल अब तक शराब जब्ती 26 प्रतिशत बढ़ी है। बीते 7 महीने (1 जनवरी से लेकर 31 जुलाई तक) में 39 लाख लीटर शराब जब्त की गई है। इसे अलग-अलग खेप और रूट से लाया गया। जब्त शराब की कीमत करीब 245 करोड़ रुपए है। एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रस्ताव पर अब तक 17 जिलों के 71 बड़े शराब माफियाओं पर क्राइम कंट्रोल एक्ट (CCA) लगाया गया है। वहीं, पुलिस के प्रस्ताव पर 1,344 माफियाओं को जिला बदर किया गया है। 8 हजार 546 तस्करों का नाम गुंडा रजिस्टर में दर्ज किया गया है। चुनावी साल में कैसे बढ़ रही शराब की तस्करी? शराब तस्करी का रूट मैप क्या है? बिहार में कहां हो रही शराब की ज्यादा खपत? सबसे बड़े सप्लाई करने वालों पर एक्शन क्या है और किस लेवल के लोग इसमें जुड़े हैं? जानेंगे संडे बिग स्टोरी में…। सबसे पहले कहानी 3 तस्करों की, जो करोड़पति बन गए कहानी-1ः शराब से खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य समस्तीपुर के विभूतिपुर का रहने वाला वीडियो राय बड़ा शराब माफिया रहा है। शराबबंदी के बाद से ही एक्टिव है। इसका कनेक्शन यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले सुनील भारद्वाज और अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले फुंसो दोरजी करीमी से था। तीनों के ऊपर बिहार के अलग-अलग जिलों में 22 केस दर्ज हैं। बिहार पुलिस की मद्य निषेध इकाई ने गुवाहटी के एक होटल से दोनों पार्टनर को गिरफ्तार किया था। जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई थी। सुनील 12 कंपनियों का मालिक था। इसमें 6 कंपनी फर्जी तरीके से चल रही थी। इनमें 4 कंपनी शराब बनाती थी। दोनों पार्टनर के फर्जीवाड़ा में वीडियो राय भी शामिल था। सुनील के पास दो चैरिटेबल ट्रस्ट भी थे। इसके जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट में बदला जाता था। इन तीनों का मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुंचा। इसके बाद ED ने बिहार, यूपी, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में ठिकाने पर छापेमारी की थी और शराब के रुपए से बनाई गई संपत्ति को अटैच किया था। कहानी-2ः फैक्ट्री सील, फिर ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर शराब की सप्लाई अवैध तरीके से बिहार में विदेशी शराब की खेप भेजने वाला अनिल सिंह बड़ा माफिया था। झारखंड के बोकारो में परिवार रहता है। वहीं, बियाडा की जमीन पर इसने बॉटलिंग प्लांट लगाया था। फैक्ट्री दिखावे की थी। फैक्ट्री में अनिल ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली शराब बनाता था। फिर उसकी सप्लाई बिहार के अलग-अलग जिलों में करता था। लंबे वक्त से इसका खेल चल रहा था। पहली बार इसका नाम तब सामने आया, जब 2021 में मलयपुर थाना के तहत इसकी शराब की खेप लेकर जा रही एक ट्रक पकड़ी गई। फिर पटना के आलमगंज और बांका में भी अलग-अलग खेप पकड़ी गई। तब मद्य निषेध इकाई की टीम ने झारखंड के बोकारो में इसके ठिकाने पर छापेमारी की थी। वह फरार हो गया था, पर फैक्ट्री सील कर दी गई थी। वहां से अलग-अलग कंपनियों के नाम पर बने रैपर बरामद हुए थे। डेढ़ लाख लीटर से अधिक शराब भी जब्त हुई थी। इसे बिहार भेजा जाना था। लंबे वक्त के बाद दिल्ली में छापेमारी कर अनिल को एक फाइव स्टार होटल से गिरफ्तार कर बिहार लाया गया था। कहानी-3ः शराबबंदी के बाद लुधियाना में बना लिया घर पंकज कुमार और दिनेश कुमार समस्तीपुर जिले के मूल निवासी हैं। मगर, बिहार में शराब बंदी लागू होने के बाद ये दोनों पंजाब चले गए। लुधियाना में डाबा थाना के तहत पिपरा चौक इलाके में घर बनाया और वहीं रहने लगे। वहीं, से ये दोनों विदेशी शराब की खेप को बिहार भेजने लगे। बिहार पुलिस की मद्य निषेद्य इकाई के रिकॉर्ड के अनुसार ये दोनों हर महीने 10 ट्रक विदेशी शराब की खेप पंजाब से भेजा करते थे। इस धंधे से दोनों ने अकूत संपत्ति बनाई। करोड़ों रुपए की कमाई की। इनके बारे में पुलिस को पहली बार तब पता चला, जब सारण जिले में शराब से भरी पूरी एक ट्रक पकड़ी गई। रिविलगंज थाना में FIR नंबर 270/22 दर्ज हुई थी। जांच करते हुए मद्य निषेद्य इकाई की टीम पंजाब गई। लुधियाना में छापेमारी की और फिर दोनों को वहां से गिरफ्तार कर बिहार लाया गया। किस रूट से बिहार आ रही शराब बिहार के 23 जिले पश्चिम बंगाल, झारखंड और UP से सटे हैं। इन राज्यों से बिहार के अंदर एंट्री के कई पॉइंट हैं। इसके बारे में तस्कर अच्छे से वाकिफ हैं। छोटी गाड़ियों से शराब की खेप को इन रास्तों से बड़ी आसानी से तस्कर ले आते हैं और अपने ठिकानों पर पहुंचा देते हैं। शराब तस्करी का सबसे बड़ा रूट सड़क है। सबसे अधिक 97 प्रतिशत विदेशी शराब की खेप सड़क के रास्ते आती है। जबकि, 3 प्रतिशत खेप ट्रेन के जरिए आती है। इसी तरह देसी शराब की 85.97 प्रतिशत खेप सड़क से, नदी के रास्ते 8.45 प्रतिशत, दियारा एरिया से 4.92 प्रतिशत और 0.64 प्रतिशत ट्रेन से आती है। तस्करी के 5 प्रचलित तरीके बिहार पुलिस मुख्यालय और एक्साइट डिपार्टमेंट की मानें तो बिहार में सबसे अधिक शराब की सप्लाई पंजाब और यूपी से हो रही है। बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, जब्त शराब का 20 फीसदी हिस्सा पंजाब और 28 फीसदी हिस्सा UP से आ रहा है। वहीं, एक्साइट डिपार्टमेंट के मुताबिक, जब्त शराब का 32 फीसदी हिस्सा पंजाब और 20 फीसदी UP से आया। क्यूआर कोड और बैच हटा देते हैं माफिया बदलते वक्त के साथ शराब माफियाओं ने तस्करी का तरीका बदल लिया है। पुलिस और एक्साइज डिपार्टमेंट के अधिकारियों की मानें तो शराब माफिया और तस्कर पहले की तुलना में बेहद शातिर हो गए हैं। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बार-बार अपना तरीका बदलते हैं। इनका नया तरीका यह है कि शराब की खेप पहुंचने से पहले ही बैच नंबर और QR कोड हटा देते हैं। इससे होता यह है कि जब खेप पकड़ी जाती है तो पता नहीं चल पाता है कि शराब बनी कहां और किस जगह से आ रही है? इससे रिटेलर की पहचान भी नहीं हो पाती है। शराब की खेप जिस गाड़ी से भेजी जाती है, उसके ड्राइवर को एक अलग फोन दिया जाता है। तस्कर इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल कर ड्राइवर से बात करते हैं और स्टेप बाई स्टेप लोकेशन बताते हैं। जिन गाड़ियों से शराब भेजी जाती है, वो चोरी की होती है या फिर कई बार की बिकी हुई। इससे पुलिस और एक्साइज की टीम को जांच करने और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने में परेशानी भी हो रही है। जब्त होगी 240 माफियाओं की संपत्ति पुलिस विभाग के मुताबिक, 240 शराब माफियाओं की लिस्ट तैयार की गई है। BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 107 का इस्तेमाल कर उनकी अवैध संपत्ति को जब्त करने के लिए तैयार की गई है। इनमें 76 माफियाओं के खिलाफ संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव कोर्ट में जमा किया गया है। कोर्ट की मंजूरी मिलते ही कार्रवाई होगी। पुलिस केस में 305 शराब माफिया और तस्कर वांटेड हैं। जो बिहार छोड़कर फरार हो गए हैं और दूसरे राज्यों में छीपकर रह रहे हैं। जिला स्तर पर टॉप-20 माफियाओं की लिस्ट तैयार की गई है। तस्करी रोकने के लिए क्या कर रही बिहार सरकार बिहार में शराब की तस्करी रोकने और माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस 3 स्तरों पर काम कर रही है। पहला- जिला पुलिस थाना स्तर पर काम करती है। इसके तहत सब डिवीजन लेवल एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF) काम करती है। राज्य में इसकी संख्या 187 है। दूसरा- पुलिस की मद्य निषेध इकाई काम करती है। इसकी पूरी टीम अलग है। इन्होंने 10 स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) बना रखा है। इनके पास बिहार से बाहर जाकर माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। पंजाब, हरियाण, झारखंड, यूपी, वेस्ट बंगाल सहित कई दूसरे राज्यों में जाकर कई बड़े शराब माफियाओं के खिलाफ मद्य निषेध इकाई कार्रवाई कर चुकी है। साथ ही जहरीली शराब कांडों की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिेगेशन ग्रुप (SIG) भी है। तीसरा- एक्साइज डिपार्टमेंट को कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। बिहार में एक्साइज के 80 थाने बनाए गए हैं। अकेले पटना जिला में सब डिवीजन स्तर पर 6 थाना है। पूर्णिया के दालकोला, नवादा के रजौली, गया के डोभी, कैमूर के करमनासा और गोपालगंज के बलथरी में बड़े स्तर पर इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट बनाए गए हैं। इसके अलावा 84 जगहों पर चेकपोस्ट बना है। इनमें 67 चेकपोस्ट इंटर स्टेट हैं। सभी चेक पोस्ट CCTV से लैश हैं। इन्हीं चेकपोस्टों से होकर वेस्ट बंगाल, झारखंड और UP बॉर्डर के रास्ते छोटी-बड़ी गाड़ियां की एंट्री बिहार में होती है। गाड़ियों की चेकिंग की जिम्मेवारी एक्साइज डिपार्टमेंट के पास ही है। गाड़ियों की जांच के लिए इनके पास मात्र 12 हैंड हेल्ड स्कैनर है। एक्साइज की अपनी एक इंटेलिजेंस यूनिट भी है। उत्पाद एवं मद्य निषेद्य विभाग के कमिश्नर रजनीश कुमार ने बताया, 'चुनावी साल में सर्च अभियान में तेजी लाई गई है। चेक पोस्ट पर पहले से अधिक चौकसी बरती जा रही है। पड़ोसी राज्यों के एक्साइज कमिश्नर के साथ मीटिंग हुई है। रेलवे और SSB के अधिकारियों के साथ भी मीटिंग हो रही है। बड़े स्तर पर एक अभियान चलाया जा रहा है।' सीनियर जर्नलिस्ट अमिताभ ओझा कहते हैं, ‘मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला वोटर्स को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी कानून को लागू किया था। पर आज इस कानून का पाल सिर्फ कागजों पर ही सख्ती से लागू किया जा रहा है। क्योंकि, शराब तस्कर पूरी तरह से एक्टिव हैं। शराब दिखती कहीं नहीं है, पर बिकती हर जगह है। वोटर्स और उनके वोट प्रभावित नहीं हो, इसके लिए पुलिस और चुनाव आयोग, दोनों के सामने बड़ी चुनौती है।' --------------- ये भी पढ़ें... बिहार की करप्शन इंडस्ट्री, क्लर्क से अफसर तक भ्रष्ट:रेप में फंसाने की धमकी, FIR का डर दिखाकर वसूला पैसा;घूस लेने में महिलाएं भी कम नहीं सादे कपड़े में पहुंची स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम ने अमीन स्वाती चौरसिया और रवि राज को 50 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। दोनों ने जमीन सर्वे की रिपोर्ट देने के नाम पर मोटी रकम की डिमांड की थी। पूरी खबर पढ़िए

दैनिक भास्कर 24 Aug 2025 5:19 am

चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री:30 मौजूदा CM की कुल संपत्ति में 57% सिर्फ नायडू के पास; ममता के पास सिर्फ ₹15 लाख

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। उनके पास 931 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है। देश के मौजूदा 30 मुख्यमंत्रियों के पास कुल 1632 करोड़ रुपए की संपत्ति है। इसका करीब 57% हिस्सा चंद्रबाबू के पास है। उनके पास 810 करोड़ रुपए की चल संपत्ति (कैश डिपॉजिट, जेवर आदि) और 121 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति (मकान, जमीन आदि) है। चंद्रबाबू पर 10 करोड़ रुपए का कर्ज भी है। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सबसे कम संपत्ति है। उनके पास सिर्फ 15.38 लाख रुपए की चल संपत्ति है। ममता के पास किसी प्रकार की अचल संपत्ति नहीं है। चुनाव सुधार के लिए काम करने वाले NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की एक रिपोर्ट से इस बात की जानकारी मिली है। 27 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मौजूदा 30 मुख्यमंत्रियों के हलफनामों का एनालिसिस करके यह रिपोर्ट तैयार की है। डेटा पिछला चुनाव लड़ने से पहले दायर हलफनामों से लिया गया है। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है। अरुणाचल के CM सबसे ज्यादा कर्जदार332 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति के साथ अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू दूसरे सबसे अमीर CM नंबर पर हैं। उनके पास करीब 165 करोड़ रुपए की चल संपत्ति और 167 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है। हालांकि, खांडू कर्जदार मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। उनके ऊपर 180 करोड़ रुपए से ज्यादा की देनदारी है। कर्नाटक CM सिद्धारमैया तीसरे नंबर पर हैं। उनके पास 51 करोड़ रुपए की संपत्ति है। इसमें 21 करोड़ रुपए की चल संपत्ति और 30 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है। सबसे कम संपत्ति वाले अन्य मुख्यमंत्रियों में जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला दूसरे नंबर पर हैं। इनके पास भी सिर्फ 55.24 लाख रुपए की चल संपत्ति ही है। तीसरे नंबर पर केरल के CM पिनराई विजयन हैं। उनके पास 1.18 करोड़ रुपए की संपत्ति है। इसमें 31.8 लाख रुपए की चल और 86.95 रुपए की अचल संपत्ति है। देश के 40% मुख्यमंत्रियों पर क्रिमिनल केसदेश के 30 मुख्यमंत्रियों में से 12 यानी 40% मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 10 यानी 33 फीसदी पर हत्या की कोशिश, किडनैपिंग और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर केस हैं। तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी पर सबसे ज्यादा 89 मामले दर्ज हैं। चुनाव सुधार के लिए काम करने वाले NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब सरकार तीन बिल लाई है, जिनमें गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन की हिरासत में लिए जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद के लिए अयोग्य मान लिया जाएगा। ADR ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मौजूदा 30 मुख्यमंत्रियों के हलफनामों का एनालिसिस करके यह रिपोर्ट तैयार की है। डेटा पिछला चुनाव लड़ने से पहले दायर हलफनामों से लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें... -------------------------------------- ADR की रिपोर्ट से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें... राष्ट्रीय पार्टियों में BJP को सबसे ज्यादा ₹2064 करोड़ चंदा, कांग्रेस को ₹190 करोड़ का कॉरपोरेट डोनेशन ADR ने अप्रैल 2025 में बताया था कि वित्त वर्ष 2023-24 में नेशनल पार्टियों को 20 हजार रुपए से ज्यादा के चंदों में सबसे ज्यादा BJP को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, BJP को मिला चंदा कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPEP) और माकपा (CPI-M) को मिले कुल चंदे से 6 गुना ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें... लोकसभा चुनाव 2024- भाजपा ने ₹1494 करोड़ खर्च किए, कांग्रेस ₹620 करोड़ के साथ दूसरे नंबर पर भाजपा ने 2024 के लोकसभा और साथ में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा पैसा खर्च किया। पार्टी ने लगभग 1494 करोड़ रुपए खर्च किए। वहीं, कांग्रेस ने 620 करोड़ रुपए खर्च किए। ये जानकारी ADR ने अपनी रिपोर्ट में दी है। पूरी खबर पढ़ें...

दैनिक भास्कर 23 Aug 2025 4:53 pm

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सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

वेब दुनिया 10 Jan 2025 2:40 pm