फरीदाबाद के ऐतिहासिक सूरजकुंड परिसर में 31 जनवरी से 15 फरवरी तक 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले का उद्घाटन देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन करेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करेंगे। इस बार मेला वैश्विक सहभागिता और नई तकनीकी सुविधाओं के चलते खास रहने वाला है। मेले में 45 देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। लगातार तीसरी बार मिस्र को कंट्री पार्टनर बनाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश को थीम स्टेट के रूप में चुना गया है। अब तक मिडिल ईस्ट, मिस्र समेत 25 देशों के कलाकारों की भागीदारी को लेकर सहमति मिल चुकी है। वहीं बांग्लादेश और ईरान से कलाकारों के आने को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। आयोजन में देश-विदेश के बुनकरों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को 1200 से अधिक स्टॉल आवंटित किए जा चुके हैं। इस बार टर्की की सजावटी फेंसिंग लाइटें और ट्यूनीशिया की ओलिव वुड से बनी कलाकृतियां पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होंगी। उत्तर प्रदेश की शिल्प विरासत बनेगी केंद्र बिंदू थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के पवेलियन में फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां, कन्नौज की इत्र परंपरा, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और वाराणसी, लखनऊ व भदोही की जरी-जरदोजी कला को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यटन विभाग की ओर से लोक नृत्य, लोक संगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक झलक पेश की जाएगी। ओडीओपी योजना के तहत प्रदेश के 40 विशेष हस्तशिल्प स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। दिनभर सांस्कृतिक रंग, फैशन शो भी होंगे शामिल मेले में रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ तीन विशेष अवसरों पर फैशन शो भी होंगे, जिनमें पारंपरिक और आधुनिक परिधानों के साथ आभूषणों की झलक देखने को मिलेगी। क्यूआर कोड और फास्टैग से मिलेगी स्मार्ट सुविधा मेला परिसर के पाथवे पर विभिन्न जिलों की पहचान को दर्शाने वाले डिजाइन बनाए जाएंगे। हर शिल्प और जिले के लिए विशेष साइनेज और क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिनके जरिए पर्यटक शिल्प निर्माण प्रक्रिया और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की जानकारी ले सकेंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग शुल्क का भुगतान फास्टैग के जरिए भी किया जा सकेगा। नकद और अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प भी उपलब्ध रहेंगे। प्रशासन ने पांच स्थानों पर पार्किंग स्थल विकसित किए हैं, जहां एक साथ हजारों वाहन खड़े किए जा सकेंगे। पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति की भी झलक इस बार सूरजकुंड मेले में पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति भी खास तौर पर प्रदर्शित की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, असम के कामाख्या मंदिर और मेघालय की खासी हिल्स जैसे पर्यटन स्थलों की झलक के साथ-साथ आठों पूर्वोत्तर राज्यों की लोक कला, पारंपरिक वेशभूषा और खानपान पर्यटकों को आकर्षित करेगा। मेले के नोडल अधिकारी हरविंद्र सिंह यादव के अनुसार, इस बार करीब 1300 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे और हर स्टॉल किसी न किसी राज्य या देश की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएगा। हर साल की तरह इस बार भी करीब 10 लाख से अधिक पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है।
कोलकाता की शेल कंपनियों से 450 करोड़ की फर्जी बिलिंग
फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), ईटानगर ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल, मणिपुर और झारखंड में 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 658 करोड़ रुपए की जाली बिलिंग और करीब 100 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई। ईडी ने यह कार्रवाई मेसर्स सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट, अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की। जांच में सामने आया कि फर्म ने अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 के बीच छह माह में 11 राज्यों की 58 कंपनियों को 15,258 फर्जी चालान जारी किए, जिनके जरिए वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 99.31 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ उठाया गया। तलाशी के दौरान सामने आया कि दयाल कमर्शियल, एपी एंटरप्राइजेज, फीनिक्स हाइड्रोलिक्स, राम अवतार बंसल एंड कंपनी और भीमा शंकर इंडस्ट्रीज जैसी कोलकाता आधारित कंपनियां केवल बिल बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट पास करने का काम कर रही थीं। इन संस्थाओं ने करीब 450 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाए और वाहन खरीद-बिक्री के नकली रिकॉर्ड दिखाकर जीएसटी रिफंड का दावा किया।
राजस्थान में दंगा प्रभावित या तनावग्रस्त इलाकों में हिंदू-मुस्लिम बिना परमिशन के एक दूसरे को प्रॉपर्टी नहीं बेच पाएंगे। बेचने से पहले कलेक्टर से मंजूरी लेना जरूरी होगा। नियम तोड़ने पर कलेक्टर सौदा कैंसिल कर सकता है और प्रॉपर्टी भी सीज हो सकती है। प्रदेश में एक धर्म के लोगों का पलायन रोकने के लिए ‘डिस्टर्ब एरिया एक्ट’ को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है। अब अगले सप्ताह विधानसभा में होने वाले बजट सत्र में बिल पेश किया जाएगा। इसके बाद इसे कानूनी रूप देने की तैयारी की जाएगी। गुजरात में यह कानून पहले से लागू है। वहीं, इसके कुछ प्रावधान नगालैंड, असम, मणिपुर व अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी लागू हैं। इस कानून को लागू करने वालों में गुजरात के बाद राजस्थान का नाम शामिल करने की तैयारी है। अब इस एक्ट को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। जैसे- राजस्थान में इसकी जरूरत क्यों पड़ी? सेंसेटिव एरिया में रहने वाले अपनी प्रॉपर्टी कैसे बेच पाएंगे? एक्ट में किस तरह के प्रावधान होंगे? नहीं मानने पर कितने साल की सजा होगी? भास्कर ने लीगल और पॉलिटिकल एक्सपर्ट से ऐसे ही सवालों के जवाब जाने। सवाल : ‘डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट’ क्या है और इसके प्रावधान क्या हो सकते हैं?जवाब : कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राजस्थान विधानसभा में ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल’ लाया जाएगा। यहां पारित होता है, तो राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद ये कानून का रूप ले लेगा। जब ये कानून का रूप ले लेगा, तब उसके प्रावधानों के तहत किसी क्षेत्र में दो समुदायों के बीच दंगा-फसाद होता रहता है या ऐसी कोई संभावना रहती है, कलेक्टर उसे डिस्टर्ब एरिया घोषित कर सकेंगे। उस क्षेत्र में कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति के साथ प्रॉपर्टी का सीधे सौदा नहीं कर पाएंगे। पहले उसे जिला कलेक्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। सूत्रों के अनुसार इस बिल में कहीं भी हिंदू या मुस्लिम या किसी समुदाय का जिक्र नहीं होगा। लेकिन दोनों तरह की मेजोरिटी (हिंदू या मुस्लिम) को संबंधित डिस्टर्ब एरिया में घर बेचने से पहले कलेक्टर से परमिशन लेनी होगी। वहीं, किसी इलाके में चाहे मुस्लिम मेजोरिटी में हों या हिंदू मेजोरिटी में हों, तब भी यही प्रोसेस फॉलो करना होगा। सूत्रों के अनुसार इस बिल में ये मुख्य प्रावधान होंगे... सवाल : गुजरात के जैसे राजस्थान में भी इस कानून की जरूरत है क्या?जवाब : एक्सपट्र्स के अनुसार डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट का उद्देश्य दंगा प्रभावित क्षेत्रों से पलायन रोकने, जबरन या किसी डर से संपत्ति के होने वाले सौदों को रोकने आदि से है। एक्सपट्र्स के अनुसार जयपुर सहित अन्य जिलों में भी कहीं न कहीं दंगे भड़क जाते हैं। वहीं पलायन होने के मुद्दे भी बार-बार उठते रहे हैं। ऐसे में सरकार संबंधित क्षेत्रों की प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त के मामलों में अपनी निगरानी रखना चाह रही है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जो दबाव में या डर से अपनी प्रॉपर्टी बेचने पर मजबूर हो जाते हैं। गुजरात में भी संबंधित एक्ट के पीछे सरकार का मकसद दंगों की वजह से पलायन को रोकना था। इधर, सरकार का भी तर्क है कि इस एक्ट को केवल मुस्लिमों के नजरिये से नहीं देखना चाहिए। ये सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होगा। यदि कलेक्टर ने संबंधित क्षेत्र को डिस्टर्ब एरिया घोषित किया है, तो वहां हिंदू भी मुस्लिम से प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकेगा। सवाल : कलेक्टर कैसे तय करेगा कि संबंधित क्षेत्र एक डिस्टर्ब्ड एरिया है?जवाब : सूत्रों के अनुसार एक्ट के प्रावधानों के तहत डिस्टर्ब्ड एरिया तय करने के लिए अमूमन उस इलाके में सांप्रदायिक दंगों का इतिहास देखा जाएगा। गुजरात में भी इसी तरह से स्थानीय प्रशासन (कलेक्टर) संबंधित एरिया को डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित करता है। गुजरात में हर 5 साल में एक बार डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट में संशोधन किया जाता है। सवाल : यदि कानून बनने के बाद प्रॉपर्टी बेचने की इजाजत नहीं ली, तो क्या कार्रवाई हो सकती है?जवाब : बिना इजाजत के संपत्ति बेचने का सौदा किया, तो डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट के तहत दोनों पर केस दर्ज हो सकेगा। कानून का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की जेल होने के प्रावधान इस कानून में लागू हो सकते हैं। साथ ही प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री रद्द कर दी जाएगी। हालांकि इस कानून को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अगर कलेक्टर के आदेश पर डील रद्द हो गई है, तो प्रॉपर्टी का खरीदार हाईकोर्ट में अपील दायर कर सकता है। इसके बाद जज इस मामले पर फैसला सुना सकते हैं। गुजरात में ऐसे कई मामलों में वहां हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सवाल : गुजरात में हिंदू महिला की प्रॉपर्टी क्या इसी एक्ट के तहत सीज हुई थी, मामला क्या था?जवाब : गुजरात में डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट, 1991 लागू है। साल 1986 में गुजरात विधानसभा में इसका विधेयक पेश किया गया और 1991 में यह कानून बना। सरकारी दस्तावेज में इस एक्ट का पूरा नाम ‘द गुजरात प्रॉहिबिटेशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम इविक्शन फ्रॉम प्रिमिसिस इन डिस्टर्ब एरिया एक्ट' है। इस एक्ट के तहत सूरत कलेक्टर ने सलाबतपुरा एरिया को डिस्टर्ब एरिया घोषित किया हुआ था। मामले के तहत जून 2025 में सूरत में एक हिंदू महिला अपनी प्रॉपर्टी किसी मुस्लिम महिला को बेच रही थी। इसका एडवांस पैसा भी ले लिया था। सोसाइटी के लोगों को खरीदार से ही आपत्ति थी। वे नहीं चाहते थे कि कोई संबंधित धर्म का खरीदार सोसाइटी में आकर रहे। सौदे की शिकायत सोसाइटी के लोगों ने ही कलेक्टर तक पहुंचा दी। प्रॉपर्टी की मालिक अपने फैसले पर अड़ी रही। उसने सौदे का पूरा पैसा ले लिया। इसके बाद उसने प्रॉपर्टी बेचने के डॉक्यूमेंट्स तैयार करवाए। शिकायत के बाद सूरत कलेक्टर ने डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट यानी अशांत क्षेत्र अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर प्रॉपर्टी सील कर दी। साथ ही सौदे पर रोक लगा दी थी। एक्सपर्ट का मानना है कि यह मामला तो सोसाइटी के अन्य निवासियों की अपनी राय या इच्छा पर आधारित था। शायद वहां संबंधित हिंदू महिला के पलायन जैसी स्थिति नहीं थी। सवाल : क्या सरकार के इस कदम के पीछे कोई राजनीति छिपी हुई है?जवाब : एक्सपट्र्स के अनुसार बीजेपी को गुजरात में जिस तरह की सफलता मिली और उसके बाद देश में और यूपी सहित अन्य राज्यों में, उसके पीछे हिंदू-मुस्लिम मुद्दों का बड़ा योगदान है। बीजेपी की राजनीति को ऐसे मुद्दे सूट करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि जयपुर की वॉल सिटी हो या अजमेर का दरगाह क्षेत्र, यहां हिंदुओं ने मकान खाली किए हैं और मुस्लिमों ने खरीदे हैं। पलायन एक बड़ा मुद्दा रहा है। यदि कानून वाकई पलायन को रोकता है, तो उद्देश्य पर कोई शंका नहीं रहेगी। लेकिन एक आशंका और है कि डिस्टर्ब एरिया में संपत्ति खरीद-फरोख्त के लिए सरकारी मशीनरी से मंजूरी लेने के मामले में कहीं नए भ्रष्टाचार को हवा न मिल जाए। मंजूरी के लिए 'दक्षिणा' का चलन कहीं भी किसी से छिपा हुआ नहीं है। गुजरात के डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट में धर्म का सीधा जिक्र नहीं है। इसमें दंगा, भीड़ की हिंसा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन कई एक्टिविस्ट मानते हैं कि इस एक्ट के जरिए मुसलमानों को कुछ क्षेत्रों तक सीमित किया जा रहा है। ... यह खबर भी पढ़ें... एक धर्म के लोगों का पलायन रोकने कानून लाएगी राजस्थान-सरकार:अल्पसंख्यक इलाकों को अशांत क्षेत्र घोषित कर सकेगी, प्रॉपर्टी बेचने पर रहेगी रोक
अरुणाचल पर चीन का दावा भाजपा की गलती का नतीजा
चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति और हड़पने वाली नीयत का परिचय देते हुए फिर से अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया है
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

