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जागरण संपादकीय: हिमालयी राज्यों की चुनौती

यह सही समय है कि उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को ध्यान में रखकर शुरू की गई ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड संबंधी परियोजना की समीक्षा की जाए।

जागरण 3 Sep 2026 10:11 pm

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

नेपाल के प्राकृतिक हादसे के बाद अब अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे इलाके में चीन की ओर से बन रहे विशालकाय बांध को लेकर चिंता बढ़ रही है. साथ ही राज्य की पनबिजली परियोजनाओं के खतरों पर भी नए सिरे से चर्चा होने लगी है

देशबन्धु 3 Sep 2026 6:57 pm

कल का मौसम: 4 सितंबर को इन इलाकों में नहीं थमेगी बारिश! MP में बहुत भारी बारिश संग दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

Weather Update for September 4: देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर पूरी रफ्तार से बरस रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक 4 सितंबर को देश के कई राज्यों में बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं लेगा। मध्य प्रदेश समेत उत्तर भारत, पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही देश के तटीय और दक्षिणी हिस्सों में तेज तूफानी हवाएं और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है।मध्य प्रदेश में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्टमध्य प्रदेश के लोगों को 4 सितंबर को मौसम के कड़े मिजाज का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही राज्य में बारिश के दौरान कुछ जगहों पर बादलों की गरज के साथ बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को जलभराव और नदी-नालों के उफान से सतर्क रहने की सलाह दी है।दिल्ली, यूपी, पंजाब-हरियाणा और उत्तराखंड का मौसमउत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में 4 सितंबर को झमाझम बारिश होने के आसार हैं। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 4 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और पूर्वी राजस्थान में भी कुछ स्थानों पर तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। राजस्थान में बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट है।पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के क्षेत्रों में भारी बारिश का अनुमान है। उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत: बिहार और बंगाल में बारिश का अलर्टपूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम का असर खासा देखने को मिलेगा। बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 4 सितंबर को भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। बिहार, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में बारिश के दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है। गांगेय पश्चिम बंगाल में भी गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं।पूर्वोत्तर के राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कल भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। इन सभी राज्यों में बिजली गिरने और गरज के साथ बारिश होने की आशंका बनी हुई है।दक्षिण और पश्चिमी भारत में तेज हवाओं का प्रकोपदक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश के साथ-साथ तेज सतही हवाओं की चेतावनी दी गई है। आंध्र प्रदेश और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के अलग-अलग इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने और आकाशीय बिजली कड़कने का अलर्ट है। तेलंगाना, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक के इलाकों में दिनभर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी। पश्चिम भारत के मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ क्षेत्रों में भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने का अनुमान है। इसके अलावा अरब सागर में सोमालिया तट से लगे पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। इनकी स्पीड बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।ये भी पढ़ें- Vande Bharat Update: 'वंदे भारत' ट्रेन में बड़े बदलाव की आहट! एग्जीक्यूटिव क्लास से खत्म हो सकता है 180-डिग्री रोटेटिंग सीट का फीचर

ज़ी न्यूज़ 3 Sep 2026 6:03 pm

Himalayan Regions में GLOF, Avalanche का बड़ा खतरा! MHA ने राज्यों को किया अलर्ट

गृह मंत्रालय (MHA) ने हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) और बर्फ के हिमस्खलन (snow avalanches) के लिए शुरुआती चेतावनी सिस्टम और निगरानी को और मज़बूत करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश जोखिम वाले ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन की आशंका वाले इलाकों की लगातार और सक्रिय निगरानी पर ज़ोर देता है, खासकर तब जब जोखिम ज़्यादा हो। इसे भी पढ़ें: BJP अध्यक्ष Nitin Nabin का Uttarakhand दौरा, 2027 चुनावी रणनीति पर मंथन केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने नई दिल्ली में एक समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश जारी किए। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे अपनी तैयारियों की योजनाओं का फिर से आकलन करें, शुरुआती चेतावनी और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाने (इवैक्यूएशन) के तरीकों में कमियों की पहचान करें और किसी भी संभावित बड़ी घटना से पहले ज़रूरी सुधार लागू करें। इस बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हुए। साथ ही, MHA, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और डिफेंस जियो-इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में हिमालयी क्षेत्र में GLOF (ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़) के बढ़ते खतरों पर चर्चा हुई। इसमें खास तौर पर अर्ली वार्निंग सिस्टम (समय से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम), संवेदनशील झीलों और बर्फ से ढके इलाकों की निगरानी, ​​ज़्यादा जोखिम वाली जगहों और पानी के बहाव के रास्तों की पहचान, समय पर अलर्ट जारी करने, लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी और रिस्पॉन्स सिस्टम को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया। इसे भी पढ़ें: Kolkata Politics: अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में तोड़फोड़ के बाद TMC-BJP में जुबानी जंग तेज, पुलिस ने 6 को किया गिरफ्तार केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने ज़ोर देते हुए कहा कि GLOF और बर्फ़ के हिमस्खलन (snow avalanches) के लिए तैयारी सिर्फ़ घटना के बाद की कार्रवाई (रिस्पॉन्स) तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें जोखिम को ध्यान में रखकर योजना बनाना, बचाव के उपाय करना और समुदाय-स्तर पर तैयारी करना भी शामिल होना चाहिए। MHA ने यह भी कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे अपनी तैयारियों की योजनाओं की नियमित समीक्षा करें, अर्ली वार्निंग और लोगों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था में कमियों की पहचान करें और किसी भी बड़ी घटना से पहले ज़रूरी सुधारात्मक कदम उठाएं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।

प्रभासाक्षी 3 Sep 2026 5:32 pm

Vanakkam Poorvottar: हिमालय पर बढ़ते खतरे और पहाड़ों के फूटते गुस्से के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने की बैठक, India ने शुरू कर दी बड़ी तैयारी

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हुई हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई है, जब नेपाल में हाल में आई भीषण हिमालयी आपदा ने पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी पैदा कर दी है। हम आपको बता दें कि नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अगस्त के अंत में ग्लेशियर और चट्टानी हिस्से के विशाल ढहाव के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत द्वारा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन के खतरों पर की गई यह समीक्षा बदलते हिमालयी पर्यावरण के सामने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रणनीतिक पहल है। हम आपको बता दें कि बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव ने विशेष रूप से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों, हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों और संभावित जल-प्रवाह मार्गों की निरंतर एवं सक्रिय निगरानी पर जोर दिया। इसे भी पढ़ें: भावी संकट की पूर्व चेतावनी है नेपाल त्रासदी देखा जाये तो नेपाल की ताजा त्रासदी ने इस आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है। वैज्ञानिक अध्ययनों और उपग्रह विश्लेषणों के अनुसार यह घटना सामान्य नदी-बाढ़ नहीं थी। नेपाल के लांगटांग क्षेत्र के निकट ग्लेशियर और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा ढहा, जिसके बाद बर्फ, पानी, चट्टानों और मलबे का विशाल प्रवाह संकरी हिमालयी घाटियों से नीचे आया और विनाशकारी फ्लैश फ्लड में बदल गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने और पर्माफ्रॉस्ट के कमजोर होने से ऊंचाई वाले पर्वतीय ढलान अधिक अस्थिर हो रहे हैं। हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक जांच आवश्यक होती है, लेकिन गर्म होते हिमालय में ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ने पर व्यापक वैज्ञानिक सहमति है। नेपाल पहले भी ऐसे खतरों का सामना कर चुका है। वर्ष 2024 में थामे घाटी में ग्लेशियल झीलों के टूटने से भारी तबाही हुई थी। ICIMOD की जांच में पाया गया कि एक विशाल रॉक एवलांच ने ग्लेशियल झील में गिरकर घटनाओं की श्रृंखला शुरू की, जिसके बाद झीलों से भारी मात्रा में पानी निकला और मलबा लगभग 80 किलोमीटर नीचे तक पहुंचा। यही कारण है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की बैठक में केवल राहत और बचाव नहीं, बल्कि Risk-informed Planning, निवारक शमन और सामुदायिक तैयारी पर जोर दिया गया। राज्यों को संवेदनशील झीलों की निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली मजबूत करने, चेतावनी को अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाने, जल-प्रवाह मार्गों की पहचान करने और निकासी योजनाओं को व्यावहारिक बनाने की सलाह दी गई। वैसे यह चिंता केवल नेपाल तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक शोध बताता है कि तथाकथित ‘थर्ड पोल’ यानि तिब्बती पठार और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में GLOF गतिविधियां बढ़ी हैं। एक अध्ययन के अनुसार दक्षिण-पूर्वी तिब्बत और चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में पिछले दशक में जोखिम विशेष रूप से बढ़ा है और संभावित GLOF से हजारों इमारतों, सड़कों, पुलों तथा 100 से अधिक जलविद्युत परियोजनाओं को खतरा हो सकता है। चीन के तिब्बती क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा विशाल बुनियादी ढांचा और जलविद्युत विकास भी इस बहस को महत्वपूर्ण बनाता है। चीन ने निचले यारलुंग जांगबो पर दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना का निर्माण शुरू किया है। यह नदी आगे भारत में ब्रह्मपुत्र के रूप में प्रवेश करती है। परियोजना के पर्यावरणीय, पारिस्थितिक और सीमा-पार प्रभावों को लेकर भारत सहित डाउनस्ट्रीम देशों में चिंताएं व्यक्त की गई हैं। इसे सीधे नेपाल की आपदा का कारण कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा, लेकिन तेजी से गर्म होते, भूकंपीय रूप से सक्रिय और भूगर्भीय रूप से नाजुक हिमालय में बड़े पैमाने पर निर्माण और जलविद्युत विस्तार के लिए अत्यंत कठोर पर्यावरणीय तथा आपदा-जोखिम आकलन आवश्यक हैं। भारत के लिए यह खतरा काल्पनिक नहीं है। 2023 की सिक्किम आपदा ने दिखाया कि हिमालयी झीलों में अस्थिरता कितनी तेजी से विनाशकारी रूप ले सकती है। ICIMOD के वैज्ञानिक अध्ययन में जलवायु परिवर्तन, पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने और मोरेन की अस्थिरता को उस आपदा के महत्वपूर्ण कारकों में शामिल किया गया था। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार ने 2024 में अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड के लिए 150 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय GLOF जोखिम शमन परियोजना को मंजूरी दी थी। केंद्र का हिस्सा 135 करोड़ रुपये है। गृह सचिव ने अब राज्यों को इस परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने का स्पष्ट निर्देश दिया है। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि हिमालयी आपदाओं से मुकाबला केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाकर नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक निगरानी, उपग्रह और जमीनी आंकड़ों का समन्वय, समयबद्ध चेतावनी, जिला प्रशासन की तत्परता, सुरक्षित निकासी मार्ग और प्रशिक्षित स्थानीय समुदाय, ये सभी एक ही सुरक्षा श्रृंखला के हिस्से हैं। बहरहाल, नेपाल की त्रासदी ने दिखा दिया है कि हिमालय में आपदा की शुरुआत ऊंचे, दूरस्थ और कभी-कभी सीमा-पार क्षेत्रों से होती है, लेकिन उसका असर सैकड़ों किलोमीटर दूर बसे लोगों तक पहुंच सकता है। इसलिए भारत की यह बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रतिक्रिया-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़कर पूर्वानुमान, रोकथाम, जोखिम आधारित विकास और अंतर-एजेंसी समन्वय की दिशा में संकेत देती है। हिमालय अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य और जलस्रोत का प्रश्न नहीं है, वह भारत और पूरे दक्षिण एशिया की जल, ऊर्जा, पर्यावरण और मानव सुरक्षा का केंद्रीय प्रश्न बन चुका है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 3 Sep 2026 4:49 pm

IMD Rain Forecast: लो-प्रेशर ने बदला मौसम का मिजाज, यूपी-दिल्ली और एमपी समेत 15+ राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट! जानिए अपने राज्य का वेदर

IMD Weather Update: पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में बने वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया के चलते देश के बड़े हिस्से में मानसून एक बार फिर अत्यधिक सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक यह मौसमी सिस्टम अगले 24 घंटों के दौरान दक्षिण उत्तर प्रदेश और उससे सटे उत्तरी मध्य प्रदेश में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के 15 से अधिक राज्यों में झमाझम बारिश और गरज-चमक के साथ मूसलाधार स्थिति बनने के आसार हैं।पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत भारी (12-20 सेमी) बारिश दर्ज की गई है। वहीं गांगेय पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र और असम में भारी (7-11 सेमी) बारिश देखने को मिली है।मध्य प्रदेश और मध्य भारत में रेड अलर्ट जैसी स्थितिमध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के दौरान अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। खासकर 3 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में अत्यंत मूसलाधार बारिश को लेकर चेतावनी दी गई है। 3 से 5 सितंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी 3 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में 3 से 7 सितंबर तक गरज-चमक और बिजली कड़कने की घटनाएं हो सकती हैं।उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली, यूपी, पंजाब और पहाड़ी राज्यों में मूसलाधार बारिशउत्तर भारत में मानसून की ट्रफ लाइन और ऊपरी हवा के साइक्लॉनिक सर्कुलेशन की वजह से भारी बारिश होती रहेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अनुमान है जबकि 4 से 7 सितंबर के दौरान भारी बारिश जारी रहेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3 सितंबर और फिर 6 से 8 सितंबर के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में 3 से 5 सितंबर तक व्यापक स्तर पर बारिश और अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड में 3 से 9 सितंबर तक पूरे हफ्ते भारी बारिश और बिजली चमकने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 4 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है जबकि पूर्वी राजस्थान में 3 से 5 सितंबर के दौरान तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का मौसमपूर्वी भारत में उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 3 से 8 सितंबर तक जबकि गांगेय पश्चिम बंगाल में 3 से 5 सितंबर और 8 से 9 सितंबर को भारी बारिश होने के आसार हैं। बिहार में 3 से 6 सितंबर और 8-9 सितंबर के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। झारखंड में 5 सितंबर और 8-9 सितंबर को भारी बारिश दर्ज हो सकती है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 3 सितंबर को भीषण बिजली कड़कने का खतरा जताया गया है।पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 3 से 9 सितंबर के दौरान व्यापक रूप से भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश में 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।पश्चिमी और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत का हालपश्चिम भारत के कोंकण और गोवा में 3 से 9 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश देखने को मिलेगी। मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात और सौराष्ट्र व कच्छ में हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश होने की संभावना है। दक्षिण भारत में प्रायद्वीपीय इलाकों में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियां थोड़ी कम रहेंगी। तटीय कर्नाटक और लक्षद्वीप में 3 सितंबर को अच्छी बारिश हो सकती है।ये भी पढ़ें- Raghav Chadha SIR Row: 'दिल्ली वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कोशिश'; राघव चड्ढा के पंजाब ड्राफ्ट लिस्ट विवाद में नया मोड़, AAP का बड़ा आरोपउत्तर आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना में 3 से 5 सितंबर के दौरान 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बिजली चमकने और मजबूत सतही हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

ज़ी न्यूज़ 3 Sep 2026 3:03 pm

Monsoon Fury: देश के 19 राज्यों में घने बादलों ने डाला डेरा! आज भारी बारिश और आंधी का IMD अलर्ट, खिसक सकते हैं पहाड़; पर्यटकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी

देश भर में विदाई की ओर बढ़ रहे मानसून ने एक बार फिर अपना आक्रामक और तूफानी रुख अख्तियार कर लिया है। बंगाल की खाड़ी से लगातार उठ रही नम पूर्वी हवाओं और दक्षिणी उत्तर प्रदेश व मध्य भारत के ऊपर बने सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के चलते देश के एक बड़े हिस्से पर घने काले बादलों ने डेरा डाल रखा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा मौसम बुलेटिन में देश के 19 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली को लेकर अलर्ट जारी किया है।विशेष रूप से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र यानी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते चट्टानें दरकने और भूस्खलन (Landslides) का भारी संकट खड़ा हो गया है। पहाड़ी रास्तों पर खतरे को भांपते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और स्थानीय प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर दी है।19 राज्यों में मानसूनी आफत: कहां-कहां भारी बारिश की चेतावनी?मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम से लेकर पूर्वी, मध्य और पूर्वोत्तर भारत तक मानसूनी ट्रफ पूरी तरह सक्रिय है। इन 19 राज्यों में अगले 24 से 48 घंटे मौसमी गतिविधियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहेंगे:उत्तर और मध्य भारत: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़।पहाड़ी राज्य: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर।पूर्वी और तटीय भारत: पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड।पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और तमिलनाडु।मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान मैदानी और तटीय इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंके वाली हवाएं चल सकती हैं, जिससे कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंच सकता है।दिल्ली-एनसीआर और यूपी-बिहार: जलभराव और आकाशीय बिजली का सायादिल्ली-एनसीआर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही जारी है। दोपहर और शाम के समय तेज गरज-चमक के साथ कई दौर की बौछारें पड़ने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।उत्तर प्रदेश: राज्य के 20 से अधिक जिलों में मध्यम से मूसलाधार बारिश का अनुमान है। दक्षिणी यूपी और तराई वाले जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं। किसानों को खुले खेतों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।बिहार और झारखंड: पटना, गया, भागलपुर और रांची-जमशेदपुर समेत आसपास के इलाकों में मेघगर्जन और वज्रपात (ठनका) को लेकर यलो व ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।पहाड़ों पर खिसक रही हैं चट्टानें: सड़कें बंद, नदियां उफान परपहाड़ी राज्यों में हालात सबसे ज्यादा नाजुक बने हुए हैं:उत्तराखंड: देहरादून, नैनीताल, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश के चलते चारधाम यात्रा मार्गों पर लगातार बोल्डर और मलबा गिर रहा है। कई प्रमुख संपर्क मार्ग बंद होने से वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं।हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा, मंडी, सिरमौर, शिमला और कुल्लू में भारी बारिश के कारण दर्जनों संपर्क सड़कें और कई राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हुए हैं। ब्यास, सतलुज और उनकी सहायक खड्डों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब बह रहा है।पर्यटकों और यात्रियों के लिए सख्त एडवाइजरीपहाड़ों में लगातार हो रहे भूस्खलन और जलभराव को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है:अनावश्यक पहाड़ी सफर से बचें: जब तक मौसम साफ न हो या बहुत जरूरी काम न हो, तब तक ऊंचाई वाले संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों और घाटियों की यात्रा टालने की सलाह दी गई है।नदी-नालों और झरनों के पास न जाएं: सेल्फी लेने या नहाने के चक्कर में उफनते प्राकृतिक नालों, नदियों और झरनों के किनारे जाने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। अचानक जलस्तर बढ़ने (Flash Flood) का खतरा रहता है।रात के समय सफर करने से परहेज: अंधेरे में पहाड़ों से गिरते पत्थरों और मलबे का अंदाजा नहीं लग पाता, इसलिए रात के वक्त पहाड़ी ढलानों और संकरे मोड़ों पर वाहन चलाने से बचें।मौसम और ट्रैफिक अपडेट लेकर ही निकलें: किसी भी मार्ग पर निकलने से पहले राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष (SDRF), स्थानीय पुलिस हेल्पलाइन और मौसम विभाग के लाइव बुलेटिन की पुष्टि अवश्य करें।आपदा प्रबंधन टीमों और एनडीआरएफ (NDRF) को संवेदनशील जिलों में हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 3 Sep 2026 8:19 am

कल का मौसम: 3 सितंबर को मूसलाधार आफत! यूपी, विदर्भ और बंगाल में बहुत भारी बारिश, इन राज्यों में आंधी-बिजली का अलर्ट

IMD Weather Forecast for September 3: देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 सितंबर के लिए मौसम की गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 3 सितंबर को देश के कई राज्यों में मध्यम से लेकर अत्यधिक भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके साथ ही तेज हवाएं चलने, बादलों की गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है।पूर्वी मध्य प्रदेश में बेहद भारी बारिश, यूपी, विदर्भ और बंगाल में अलर्टमध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 3 सितंबर का दिन मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहने वाला है। IMD के बुलेटिन के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार बारिश के साथ बेहद भारी बारिश होने की पूरी आशंका जताई गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विदर्भ (महाराष्ट्र) और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इन राज्यों में बारिश की वजह से निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के उफान पर आने का खतरा बढ़ गया है।दिल्ली, बिहार, पंजाब और हिमाचल समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनीमौसम विभाग ने देश के एक बड़े हिस्से में 3 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। उत्तर भारत में हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर तेज बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी और मध्य भारत के बिहार, छत्तीसगढ़, और पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।आंधी-तूफान, बिजली और तेज हवाओं का प्रकोपबारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली और तेज आंधी को लेकर भी चेतावनी जारी की है। आंध्र प्रदेश में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने, आंधी आने और बिजली चमकने का पूर्वानुमान है।तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ बिजली गिरने की आशंका है। इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में मजबूत सतही हवाएं चलने का भी अनुमान जताया गया है।समुद्र में खराब रहेगा मौसम, मछुआरों को सतर्क रहने की सलाहतटीय और समुद्री क्षेत्रों में 3 सितंबर को हवाओं का रुख बेहद तेज रहेगा। अरब सागर में सोमालिया तट के पास और उससे सटे, पश्चिम-मध्य एवं दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। बंगाल की खाड़ी में मन्नार की खाड़ी से लगे दक्षिण तमिलनाडु तट और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक के झोंके आने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों को इन इलाकों से दूर रहने की हिदायत दी है।ये भी पढ़ें- राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, ऑपरेशन सिंदूर से भी रहा है नाता

ज़ी न्यूज़ 2 Sep 2026 6:05 pm

2-5 सितंबर के बीच दिल्ली, यूपी-बिहार से MP तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, मौसम के अगले 48 घंटे इन इलाकों में पड़ेंगे भारी!

Weather Update: उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया और कई एक्टिव वेदर सिस्टम के चलते देश के बड़े हिस्से में मानसून एक बार फिर काफी आक्रामक रूप दिखा रहा है। इसे देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 से 5 सितंबर के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।खासकर अगले 48 घंटों के अंदर मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बेहद भारी बारिश की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां धीमी रहेंगी।मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी, 02 और 03 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश का अलर्टमध्य भारत में बारिश का दौर सबसे ज्यादा परेशानी की वजह बन सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दक्षिण उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ेगा। इस वजह से पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 और 3 सितंबर को कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश (20 सेमी से अधिक) हो सकती है।पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 से 5 सितंबर तक और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 2 से 7 सितंबर तक मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। इसके अलावा विदर्भ में 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश और छत्तीसगढ़ में 2 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर में 2 से 5 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम?उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों के लिए भी मौसम अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 से 4 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश देखने को मिल सकती है। राजधानी दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 3 और 4 सितंबर को काफी बारिश होगी और 2 से 5 सितंबर तक अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में 2 से 8 सितंबर के बीच लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यहां भी 2 सितंबर को भारी से अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी 2 से 5 सितंबर के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का अनुमानपूर्वी भारत के राज्यों पर भी मानसून मेहरबान रहेगा। बिहार और गांगेय पश्चिम बंगाल में 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 3 और 4 सितंबर को भी बिहार में भारी बारिश जारी रहेगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 2 और 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।वहीं, झारखंड में 2 और 8 सितंबर को भारी बारिश के साथ 2 से 4 सितंबर तक बादलों की गरज और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 से 8 सितंबर तक लगातार तेज बारिश का दौर जारी रहेगा।पिछले 24 घंटों का हाल और चक्रवातीय प्रणालियांबीते 24 घंटों की बात करें तो उत्तराखंड, झारखंड और गांगेय पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश (20 सेमी से ज्यादा) दर्ज की गई है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में 12 से 20 सेमी तक बारिश हुई। मौसम प्रणालियों की बात करें तो मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति में है।ये भी पढ़ें- Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने SCO में उठाया सिंधु जल संधि का केस फिर क्या हुआ?इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से बांग्लादेश तक एक ट्रफ रेखा फैली हुई है। वहीं उत्तर-पूर्वी अरब सागर और सौराष्ट्र के ऊपर एक साइक्लॉनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इन मौसमी प्रणालियों की वजह से देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी राज्यों में अगले 3-4 दिनों तक मौसमी गतिविधियां काफी तेज रहने वाली हैं।

ज़ी न्यूज़ 2 Sep 2026 2:27 pm

2 सितंबर मौसम: यूपी-उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने दिल्ली-बिहार समेत 15+ राज्यों के लिए जारी की ये चेतावनी

Aaj Ka Mausam: देश भर में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 सितंबर के लिए मौसम का ताजा बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक देश के 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मध्यम से लेकर मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा। कई राज्यों में आकाशीय बिजली चमकने, तेज आंधी-तूफान चलने और समुद्री इलाकों में खतरनाक तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।यूपी, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अलर्टउत्तर भारत और मध्य भारत के कुछ राज्यों में 2 सितंबर को मूसलाधार बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। IMD के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है। इन राज्यों के कई जिलों में बारिश के साथ-साथ बादलों की गरज और बिजली कड़कने की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं।दिल्ली, बिहार, पंजाब और हरियाणा समेत 15 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिशदेश के एक बड़े हिस्से में 2 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, विदर्भ, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर तेज बारिश दर्ज की जा सकती है। पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कई जगहों पर मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है।आंधी-तूफान, बिजली और तेज हवाओं का अलर्टमौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर भी चेतावनी जारी की है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा और रायलसीमा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली कड़कने का पूर्वानुमान है।बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मराठवाड़ा, विदर्भ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में मजबूत सतही हवाएं चलने की भी संभावना है। समुद्र और तटीय इलाकों में तूफानी हवाएं, मछुआरों को चेतावनीसमुद्री क्षेत्रों में मौसम का मिजाज काफी खराब रहने वाला है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों से सटे क्षेत्रों, पश्चिम-मध्य अरब सागर के बड़े हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर व पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। इनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।ये भी पढ़ें- Ghaziabad Traffic: गाजियाबाद वालों के लिए बड़ी राहत! शाहबेरी रोड होगी चौड़ी, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जाने वाले 50,000 लोगों को जाम से मिलेगी मुक्तिइसी तरह बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी के कुछ हिस्सों और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक झोंके आने का अनुमान है। अंडमान सागर में भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी मौसम और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है।

ज़ी न्यूज़ 2 Sep 2026 9:27 am

कल का मौसम: 2 सितंबर को होगी मूसलाधार बारिश! IMD ने दिल्ली, यूपी, बिहार समेत 15 से ज्यादा राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

Weather update for September 2nd: देश के अलग अलग इलाकों में मानसून के एक्टिव होने की वजह से भारी बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 सितंबर के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी किया है। IMD ने देश के 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मध्यम से मूसलाधार बारिश का अलर्ट दिया है। कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी प्रणालियों के चलते देश के मैदानी, पहाड़ी और तटीय इलाकों में 2 सितंबर को बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली कड़कने का खतरा बना रहेगा।उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश की चेतावनीमौसम विभाग के मुताबिक 2 सितंबर को उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का प्रकोप सबसे अधिक रहेगा। IMD ने इन तीनों राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में बिजली कड़कने और गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।दिल्ली, यूपी, बिहार और झारखंड समेत मैदानी राज्यों का हालदिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी 2 सितंबर को बारिश की गतिविधियां तेजी पकड़ेंगी। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और पूर्वी राजस्थान में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की आशंका व्यक्त की गई है।पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसमपहाड़ी क्षेत्रों की बात करें तो उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में भारी बारिश के साथ-साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। वहीं पूर्वोत्तर भारत में भी मानसूनी बारिश का तांडव जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक का दौर बना रहेगा।तटीय क्षेत्रों में तूफानी हवाओं की चेतावनी और समुद्र का हालदक्षिण भारत और तटीय इलाकों में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा और रायलसीमा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और आकाशीय बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और मजबूत सतही हवाएं चलने का अनुमान है।समुद्री गतिविधियों को लेकर IMD ने बताया है कि अरब सागर में सोमालिया व ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर व पूर्व-मध्य अरब सागर में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण श्रीलंका से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन तटीय और समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।

ज़ी न्यूज़ 1 Sep 2026 4:53 pm

IMD Rain Alert: बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम से अलर्ट पर ये 6 राज्य! यूपी-बिहार संग इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

India Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश का दौर एक बार फिर बेहद उग्र रूप धारण करने वाला है। गांगेय पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तर तटीय ओडिशा, झारखंड और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र के असर से कई राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 सितंबर को ताजा वेदर बुलेटिन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यह नया मौसमी तंत्र अगले 48 घंटों के दौरान उत्तर ओडिशा और झारखंड के पार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके असर से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश समेत 6 प्रमुख राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।झारखंड में अत्यंत भारी बारिश, ओडिशा में बीते 24 घंटे में बरसा 20 सेमी पानीमौसम विभाग के मुताबिक 1 सितंबर को झारखंड में अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं ओडिशा, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और गांगेय पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर देखने को मिलेगा। बीते 24 घंटों के दौरान भी मानसूनी बारिश ने जमकर तबाही मचाई है, जहां ओडिशा में 20 सेमी से अधिक बेहद भारी बारिश दर्ज की गई।इसके अलावा उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, त्रिपुरा और झारखंड में बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश दर्ज हुई है।उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसमउत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मानसूनी ट्रफ और निचले व मध्य ट्रोपोस्फीयर स्तर पर बने ट्रफ के प्रभाव से व्यापक बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 1 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर और 6 से 7 सितंबर के दौरान तेज बारिश का सिलसिला बना रहेगा।जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 सितंबर तक भारी बारिश होगी। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 2 से 5 सितंबर के बीच भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है। पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड में 1 से 7 सितंबर तक और हिमाचल प्रदेश में 1 से 5 सितंबर तक व्यापक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगातार 5 दिनों तक मूसलाधार बारिश का अनुमानमध्य भारत के राज्यों में कम दबाव के क्षेत्र का काफी असर देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ में 1 और 2 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होगी। जबकि 3 सितंबर को भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 4 सितंबर के दौरान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के बीच बेहद भारी बारिश होने के आसार हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग अलग हिस्सों में 1 से 5 सितंबर तक आकाशीय बिजली गिरने और गरज-चमक की स्थिति लगातार बनी रहेगी।पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत का पूर्वानुमानपूर्वोत्तर भारत में 1 सितंबर को असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है जबकि अरुणाचल प्रदेश में 1 से 4 सितंबर और 6 से 7 सितंबर के दौरान भारी बारिश होगी।ये भी पढ़ें- Nepal Floods: बाढ़ से भयानक तबाही के बाद भारत-अमेरिका-चीन से मुआवजा क्यों मांगने लगा नेपाल?दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अगले एक सप्ताह के दौरान मानसूनी गतिविधियां धीमी बनी रहेंगी। वैसे तटीय कर्नाटक और केरल में 2 से 4 सितंबर के बीच अधिकांश जगहों पर बारिश होगी। तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक और तेलंगाना में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।

ज़ी न्यूज़ 1 Sep 2026 2:37 pm

Operation Lotus के तहत BJP फिर करेगी खेल? Mamata Banerjee को झटका? TMC। Arunachal Pradesh। Meghalaya

Operation Lotus के तहत बीजेपी करने वाली है खेल, Mamata Banerjee को फिर लगेगा झटका? मेघालय की राजनीति में 2028 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 31 Aug 2026 11:21 am

डोभाल की कूटनीति और भारत-चीन संबंधों की नई करवट

भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों की तल्खी के बाद अब संवाद, संयम और व्यावहारिक सहयोग का एक नया दौर दिखाई दे रहा है। इसे किसी अचानक आए परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षा, कूटनीति और राष्ट्रीय हितों को साथ लेकर चलने वाली एक दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए। इस बदलते परिदृश्य में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनकर सामने आई है। 25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता ने इस प्रक्रिया को ठोस आधार दिया है। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बनाए रखने, सीमा निर्धारण की दिशा में शीघ्र एवं सार्थक प्रगति करने तथा सैन्य-द्विपक्षीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर सहमति बनाई है। डोभाल की बीजिंग यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह केवल सीमा विवाद पर बातचीत नहीं थी। यह उस व्यापक प्रश्न पर विमर्श था कि क्या भारत और चीन प्रतिस्पर्धा के बावजूद सह-अस्तित्व, स्थिरता और पारस्परिक हितों का रास्ता तलाश सकते हैं। दोनों देशों ने दो अतिरिक्त सैन्य संपर्क-बिंदु और पूर्वी तथा मध्य क्षेत्रों में दो अतिरिक्त सैन्य दूरभाष संपर्क स्थापित करने पर सहमति जताई है। सीमा व्यापार, कैलाश-मानसरोवर यात्रा और सीमा-पार सहयोग को भी आगे बढ़ाने का निर्णय हुआ है। अजीत डोभाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे सुरक्षा और कूटनीति को परस्पर विरोधी नहीं मानते। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है-मजबूत सुरक्षा-व्यवस्था ही प्रभावी कूटनीति की आधारभूमि बन सकती है। चीन के संदर्भ में भी भारत का संदेश यही रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों का पूर्ण सामान्यीकरण संभव नहीं है। 25वें दौर की वार्ता में यही भारतीय दृष्टिकोण प्रमुखता से सामने आया। डोभाल का व्यक्तित्व केवल वार्ताकार का नहीं, बल्कि सुरक्षा रणनीतिकार का है। वे लंबे समय तक खुफिया तंत्र में रहे, विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में काम किया और बाद में खुफिया ब्यूरो के प्रमुख बने। भारत सरकार के अनुसार, उन्होंने पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उनकी कार्यशैली में एक उल्लेखनीय संतुलन दिखाई देता है-जहां आवश्यक हो वहां कठोरता और जहां अवसर हो वहां संवाद। उड़ी के बाद की सर्जिकल कार्रवाई, बालाकोट की कार्रवाई, डोकलाम संकट के दौरान कूटनीतिक प्रयास और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनकी भूमिका इसी व्यापक दृष्टिकोण के उदाहरण माने जाते हैं। 2026 में उन्हें लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। इसे भी पढ़ें: जयशंकर और डोभाल की रूस-चीन यात्रा के कूटनीतिक संदेश को ऐसे समझिए भारत-चीन संबंधों का सबसे कठिन दौर वर्ष 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद आया। चार वर्षों तक सीमा पर सैन्य तनाव बना रहा। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच सैनिकों की पूर्ण वापसी और संबंधित विवादों के समाधान के बाद संबंधों को धीरे-धीरे पटरी पर लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। उसी वर्ष कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति तथा मतभेदों को संबंधों की समग्र दिशा को प्रभावित न करने देने पर जोर दिया था। यही वह बिंदु था जहां डोभाल की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई। दिसंबर 2024 में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत से शुरू हुई प्रक्रिया अब 25वें दौर तक पहुंची है। इस बार आठ बिंदुओं पर बनी सहमति संकेत देती है कि बातचीत केवल औपचारिकता नहीं रह गई है। सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ तथा कार्य समूहों को सक्रिय करना, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलतफहमी रोकने के लिए मौजूदा सैन्य एवं कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग और नए संपर्क तंत्र बनाना व्यावहारिक विश्वास निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। भारत-चीन संबंध केवल सैनिक चौकियों और राजनयिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संपर्क भी रहा है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा की पुनर्बहाली और विस्तार, सीमा व्यापार मार्गों को फिर खोलना तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। 2026 में कैलाश-मानसरोवर यात्रा लिपुलेख और नाथू ला, दोनों मार्गों से संचालित हुई है। 25वें दौर की वार्ता में तीन निर्धारित सीमा व्यापार केंद्रों को फिर खोलने की प्रगति का स्वागत किया गया तथा व्यापार और तीर्थयात्रा को और मजबूत करने पर सहमति बनी। यह छोटा कदम नहीं है। सीमा पर सैनिकों की संख्या घटाना एक सुरक्षा उपाय है, लेकिन सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के लिए व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाना दीर्घकालिक शांति की सामाजिक नींव तैयार करता है। शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा एक अवसर भी है, परीक्षा भी है। इसी पृष्ठभूमि में 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की संभावना जताई जा रही है। यदि यह यात्रा होती है तो यह सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उनके साथ लगभग चार सौ अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। हालांकि 27 अगस्त तक चीन की ओर से उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए शी की संभावित यात्रा को केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी नहीं माना जाना चाहिए। यह भारत-चीन संबंधों की वास्तविक दिशा को परखने का अवसर हो सकती है। वर्ष 2019 का चेन्नई संवाद अपेक्षाकृत सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ था, लेकिन उसके एक वर्ष बाद गलवान ने संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया। अब यदि शी नई दिल्ली आते हैं तो दोनों देशों के पास उस टूटे हुए विश्वास को सावधानी से जोड़ने का अवसर होगा। लेकिन भारत को उत्साह में अपनी मूल सुरक्षा चिंताओं को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे, सीमा निर्धारण का लंबित प्रश्न और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पारदर्शिता जैसी चुनौतियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं। इसलिए भारत की नीति मित्रता की आकांक्षा, लेकिन राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं होनी चाहिए। डोभाल की विशेषता यही है कि वे संवाद को कमजोरी नहीं बनने देते और शक्ति को टकराव का पर्याय भी नहीं बनाते। उनकी कूटनीति में संदेश स्पष्ट है-भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा कीमत पर नहीं, सहयोग चाहता है, लेकिन समानता के आधार परय संबंध सुधारना चाहता है, लेकिन सीमा की वास्तविकताओं को भुलाकर नहीं। आज भारत-चीन संबंध जिस मोड़ पर खड़े हैं, वहां डोभाल की भूमिका संकटमोचक से आगे बढ़कर विश्वास-निर्माता और सुरक्षा-आधारित कूटनीति के सूत्रधार की बनती दिखाई देती है। 25वें दौर की वार्ता में हुई आठ सूत्रीय सहमति इसका प्रमाण है कि कठिनतम मतभेदों के बीच भी संवाद के रास्ते खुले रखे जा सकते हैं। शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा इस प्रक्रिया को शीर्ष नेतृत्व की राजनीतिक दिशा दे सकती है। किंतु असली सफलता किसी एक शिखर बैठक की तस्वीर में नहीं, बल्कि सीमा पर स्थायी शांति, पारस्परिक विश्वास, व्यापारिक संपर्क और विवादों के न्यायसंगत समाधान में होगी। भारत को चीन से संबंध सुधारने हैं, लेकिन अपनी सामरिक स्वायत्तता और सुरक्षा-सजगता के साथ। डोभाल की कूटनीति का सार भी यही है-संवाद के दरवाजे खुले रहें, पर राष्ट्रीय हितों की चौखट कभी कमजोर न हो। यही दृष्टिकोण भारत-चीन संबंधों को टकराव से प्रतिस्पर्धी सह-अस्तित्व और अंततः स्थायी शांति की ओर ले जाने की सबसे व्यावहारिक राह बन सकता है। - ललित गर्ग लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

प्रभासाक्षी 29 Aug 2026 5:30 pm

Arunachal Pradesh Tinkle Karga Gongo Viral Video: प्यारी सी बच्ची को मिला ढेर सारा प्यार,कहा थैंक यू

Arunachal Pradesh Tinkle Karga Gongo Viral Video: प्यारी सी बच्ची को मिला ढेर सारा प्यार ऐसे कहा थैंक यू

लाइव हिन्दुस्तान 22 Aug 2026 11:05 pm

'मुझे चाइनीज मत बोलो, मैं इंडियन हूं...' मां ने बनाया था वीडियो, बेटी का जवाब सुनकर भावुक हुए लोग

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर की छोटी-सी बच्ची करगा टिंकल गोंगो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। टिंकल ने एक वीडियो में लोगों से कहा कि उसे चाइनीज न कहा जाए। उसका यह मासूम और भावुक वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया।

खास खबर 22 Aug 2026 12:28 pm

दिबांग घाटी में बाढ़ के बाद भोजपुर का आर्मी जवान आठ दिन से लापता

22 शनिवार, अगस्त: भोजपुर का आर्मी जवान अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ और बादल फटने के बाद पांच जवानों के साथ लापता हो गया। आठ दिन बाद भी उसका पता नहीं चला है। परिजनों की चिंता बढ़ गई है।

लाइव हिन्दुस्तान 22 Aug 2026 12:15 pm

अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ के बाद भोजपुर का जवान आठ दिन से लापता

22 शनिवार, अगस्त: भोजपुर का रहने वाला आर्मी जवान अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ और बादल फटने के बाद पांच जवानों के साथ लापता हो गया। आठ दिन बाद भी जवान का पता नहीं चला है, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई है।

लाइव हिन्दुस्तान 22 Aug 2026 11:51 am

क्या सच में अरुणाचल प्रदेश में 60 KM तक अंदर घुस आया चीन ? वायरल दावे पर सरकार ने बताया सच

क्या सच मेंअरुणाचल प्रदेश में 60 KM तक अंदर घुस आया चीन ? वायरल दावे पर सरकार ने बताया सच

समाचार नामा 19 Aug 2026 6:00 pm

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल

बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.

बूमलाइव 14 Aug 2026 6:24 pm

Azim Premji Scholarship 2026: 12वीं पास छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए हर साल मिलेंगे ₹30,000, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की इस स्कॉलरशिप के लिए 31 अगस्त तक करें आवेदन

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाली छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। देश के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी अजीम प्रेमजी के नेतृत्व वाले 'अजीम प्रेमजी फाउंडेशन' (Azim Premji Foundation) ने वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए 'अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026' (Azim Premji Scholarship 2026) के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली मेधावी छात्राओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके सपनों को नई उड़ान देना है। इस छात्रवृत्ति योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी गई है और योग्य छात्राएं 31 अगस्त 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं।अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026: क्या है योजना और कितनी मिलेगी सहायता राशि?अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित यह स्कॉलरशिप प्रोग्राम देश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा में लड़कियों के ड्रॉप-आउट रेट (पढ़ाई छोड़ने की दर) को कम करने के लिए शुरू किया गया एक क्रांतिकारी कदम है। इस योजना के तहत चुनी गई प्रत्येक पात्र छात्रा को उनकी उच्च शिक्षा की पूरी अवधि के लिए सालाना ₹30,000 की वित्तीय सहायता राशि प्रदान की जाती है।सालाना छात्रवृत्ति: ₹30,000 प्रति वर्ष।कोर्स की अवधि: 2 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक के अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए सहायता मिलेगी।कुल वित्तीय मदद: यदि कोई छात्रा 3 साल का ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स कर रही है, तो उसे कुल ₹90,000 मिलेंगे, जबकि 5 साल के प्रोफेशनल/एकीकृत कोर्स (जैसे BA LLB, B.Tech आदि) के लिए कुल सहायता राशि ₹1,50,000 तक होगी।भुगतान का माध्यम: स्कॉलरशिप की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थी छात्रा के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।उपयोग की स्वतंत्रता: प्राप्त छात्रवृत्ति राशि का उपयोग छात्राएं अपनी कॉलेज ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल खर्च या पढ़ाई से जुड़े किसी भी व्यक्तिगत खर्च को पूरा करने के लिए कर सकती हैं।निशुल्क आवेदन: फाउंडेशन द्वारा इस पूरी आवेदन प्रक्रिया के लिए किसी भी स्तर पर कोई आवेदन शुल्क या प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती है।कौन सी छात्राएं हैं पात्र? जानिए योग्यता की पूरी शर्तेंअजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026 के लिए पात्रता मानदंड बेहद सरल और सुलभ रखे गए हैं, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लड़कियां इसका लाभ उठा सकें। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह किसी जाति, धर्म, पारिवारिक आय या केवल बोर्ड परीक्षा के अंकों (मेरिट) के आधार पर सीमित नहीं है।शैक्षणिक पृष्ठभूमि: छात्रा ने अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा किसी मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूल या सरकारी कॉलेज से नियमित (Regular) छात्रा के रूप में पास की हो।कॉलेज प्रवेश: सत्र 2026-27 में किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी विश्वविद्यालय/कॉलेज में अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के प्रथम वर्ष (First Year) में नियमित प्रवेश लिया हो।योग्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश: यह स्कॉलरशिप योजना देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली (NCT), आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और पुडुचेरी शामिल हैं।अपात्रता की स्थिति: जो छात्राएं ओपन/डिस्टेंस लर्निंग (दूरस्थ शिक्षा) से पढ़ाई कर रही हैं या जो पहले से ही द्वितीय, तृतीय या चतुर्थ वर्ष में हैं, वे नए आवेदक के रूप में पात्र नहीं होंगी। इसके अलावा अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी या विप्रो की अन्य स्कॉलरशिप पाने वाली छात्राएं इसके दायरे से बाहर रहेंगी।आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज हैं जरूरी?ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अभ्यर्थियों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। ध्यान रहे कि सभी दस्तावेज स्पष्ट और निर्दिष्ट साइज में ही अपलोड किए जाएं।आवेदक छात्रा की हाल की पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर।आधार कार्ड (पहचान पत्र के रूप में)।10वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।12वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।वर्तमान कॉलेज/यूनिवर्सिटी में प्रवेश का प्रमाण (फीस रसीद या बोनाफाइड सर्टिफिकेट)।बैंक खाता विवरण (पासबुक के पहले पन्ने की कॉपी या कैंसिल चेक)।ध्यान दें कि अपलोड किए जाने वाले सभी दस्तावेज केवल PDF, PNG या JPG फॉर्मेट में होने चाहिए, जिनका साइज 30 KB से 500 KB के बीच होना आवश्यक है।ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियास्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक छात्राएं नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं:सबसे पहले अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट azimpremjifoundation.org पर जाएं।होमपेज पर दिए गए 'Azim Premji Scholarship' सेक्शन के अंतर्गत 'Register New Applicants Cohort 2026' लिंक पर क्लिक करें।अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी (OTP) के जरिए सत्यापन करें।अपना यूजर आईडी और मजबूत पासवर्ड बनाकर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरा करें।अब अपने आईडी व पासवर्ड से लॉगिन करें और आवेदन पत्र में मांगी गई व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक संबंधी सभी जानकारियां सही-सही भरें।मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट और साइज में स्कैन करके अपलोड करें।फॉर्म को अच्छी तरह री-चेक करें और 'Submit' बटन पर क्लिक करके आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।भविष्य के संदर्भ के लिए भरे गए आवेदन पत्र का एक प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।महत्वपूर्ण तारीखें और आगे की समय-सारणीअजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने पहले चरण के लिए आवेदन की समय-सीमा तय कर दी है:राउंड 1 आवेदन शुरू होने की तिथि: 10 अगस्त 2026राउंड 1 आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026राउंड 2 आवेदन अवधि: 10 जनवरी 2027 से 31 जनवरी 2027 तकपुराने छात्रों के लिए रिन्यूअल की तिथि: सितंबर 2026 में रिन्यूअल विंडो खुलेगी।महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदमअजीम प्रेमजी फाउंडेशन का लक्ष्य प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक लड़कियों को इस स्कॉलरशिप के माध्यम से उच्च शिक्षा से जोड़ना है। फाउंडेशन का मानना है कि जब एक लड़की शिक्षित होती है, तो वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारती है, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यदि आप या आपके परिचित में कोई योग्य छात्रा है जिसने हाल ही में 12वीं पास करके कॉलेज में दाखिला लिया है, तो 31 अगस्त 2026 से पहले इस योजना में आवेदन करके इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 9:43 am

अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के दावे से बांग्लादेश सीमा का वीडियो वायरल

बूम ने पाया कि वीडियो चांपाईनवाबगंज के शिबगंज सीमा क्षेत्र पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच हुई कहासुनी का है.

बूमलाइव 11 Aug 2026 6:04 pm

Offbeat Destinations for Monsoon: भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश? Meghalaya और Arunachal के इन गांवों में लें आनंद

आजकल युवाओं में घूमने-फिरने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर किसी शांत प्लेस को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। मानसून के समय हर कोई हरियाली से भरपूर, बादल, झरने और सुकून हो वाली जगहों पर घूमने का प्लान बनाते हैं। इस बार आप बरसात के समय भारत के कुछ खूबसूरत गांव को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इस मौसम में यहां पर पहाड़ हरे रंग को हे जाते हैं, बादल घरों के बीच से गुजरने नजर आते हैं और हर तरफ आपको ताजगी का माहौल देखने को मिलता है। इस बार आप भी इन जगहों का आनंद जरुर लें। चलिए आपको इस लेख में बताते हैं मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली आपके लिए सबसे बेहतरीन रहने वाली है। आइए आपको बताते हैं इन तीन गांवों में ऐसा क्या खास है,जो आपको मानसून के समय जरुर विजिट करना चाहिए। मावल्यान्नॉन्ग (मेघालय) आपको बताते चलें कि मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग गांव अपनी साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में काफी फेमस है। इसकी गिनती एशिया के सबसे साफ गांव में मानी जाती है। यहां पर रहने वाले सभी लोग इस गांव को हमेशा साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधे, फूल और बारिश से धुले रास्ते गांव की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यहां आप इन जगहों पर विजिट कर सकते हैं- - लिविंग रुट ब्रिज - बांस से बना स्काई व्यू पॉइंट - छोटे-छोटे झरने - खासी गांव की लाइफस्टाइल खोनोमा (नागालैंड) अगर आप नेचर लवर हैं, नागालैंड के खोनोमा गांव में जरुर विजिट करें। यहां की नेचुरल ब्यूटी और पर्यावरण संरक्षण बेहद लोकप्रिय है। बता दें कि, इसे भारत के पहले ग्रीन विलेज में गिना जाता है। बरसात के समय यहां पर सीढ़ीदार वाली खेती, पहाड़ और जंगल के काफी खूबसूरत नजर आते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ भी इस गांव की खूबसूरती को बढ़ा देते हैं। यहां पर इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। - गांव में पैदल वॉक करना - सीढ़ीदार खेत देखना - लोकर नागा कल्चर को करीब से देख सकते हैं - नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग जीरो (अरुणाचल प्रदेश) मानसून के समय अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली में घूमने का प्लान जरुर बनाएं। यह जगह अपनी नेचुरल ब्यूटी और अपतानी जनजाति की अनोखी कल्चर के लिए जानी जाती है। इधर मानसून के समय काफी खूबसरत लगता है। बरसात के समय धान के खेत, पहाड़ और हल्का कोहरा मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर मन एकदम खुश ही हो जाती है। यहां आप क्या-क्या कर सकती हैं- - हरे-भरे धान के खेतों को देख सकती हैं - अपतानी जनजाति के पारंपरिक गांव को एक्सप्लोर कर सकती है - खूबसूरती पहाड़ी रास्ते - यहां लोकल बाजार और खाने का जायका लेना मानसून के समय इन गांव में यात्रा करने से पहले जानें जरुरी बातें - बरसात से बचने के लिए रेनकोट और बढ़िया क्वालिटी की छतरी साथ रखें। - इस दौरान फिसलन ज्यादा हो सकती है, इसलिए मजबूत ग्रिप वाले शूज ही पहनें। - मौसम का अपडेट देखकर ही ट्रिप प्लान करें। - वहां के नियमों का पालन जरुर करें। - दरअसल, पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो जाती है, इसलिए समय का भी ध्यान जरुर रखें। - प्लास्टिक या कचरा कहीं भी ने फेंकें, ताकि इन गांवों के सुंदरता बनीं रहे।

प्रभासाक्षी 4 Aug 2026 4:52 pm

Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट

सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

वेब दुनिया 10 Jan 2025 2:40 pm