मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा पर स्थित चित्रकुंडा इलाका उस वक्त नक्सलियों के एकतरफा कंट्रोल में था। 19 दिसंबर 1998 की रात, चित्रकुंडा थाने के अंतर्गत आने वाली मल्लिगुड़ा जुडाम पोस्ट पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। हमले में पोस्ट पर तैनात सभी पुलिसकर्मी मारे गए। इसके बाद पुलिस प्रशासन चिंतित हो गया। हालात पर काबू पाने के लिए एक स्थानीय आदिवासी पुलिस अधिकारी की तलाश शुरू हुई, जो इलाके की भौगोलिक बनावट को अच्छी तरह जानता हो और स्थानीय भाषा समझता-बोलता हो। साथ ही नक्सलियों के बीच का आदमी हो। उस वक्त मैं ओडिशा के कोरापुट जिले में तैनात था। मुझे इस जिम्मेदारी के लिए सबसे बेहतर पाया गया और बुलाकर वहां तैनात किया गया। हालांकि, मैं वहां बिल्कुल नहीं जाना चाहता था, क्योंकि वह मेरा अपना इलाका था और वहां के लोग अपने थे। मैं सोच रहा था- अपने ही लोगों के सामने एक पुलिस अफसर बनकर कैसे खड़ा हो पाऊंगा? अगर गोली चलानी पड़ी, तो कैसे चलाऊंगा? एक तरफ ड्यूटी थी, तो दूसरी तरफ अपने लोग। आखिरकार, मैंने ड्यूटी को चुना। दरअसल, नक्सलियों ने चित्रकोंडा थाने के तहत 1962 में बने बालिमेला बांध के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया था और इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए थे। उन्होंने आस-पास के गांवों और ओडिशा के दंडकारण्य क्षेत्र में लोगों को प्रशासन के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। मजदूरों के अधिकार के नाम पर गांव वालों को अपने साथ जोड़ने लगे और धीरे-धीरे उन्हें नक्सल आंदोलन में शामिल करने लगे। बांध के खिलाफ उन्होंने एक तरह से संगठित मुहिम ही छेड़ दी। उस वक्त हमारी मल्लिगुड़ा पोस्ट पर कुल 35 सुरक्षा बल के जवान तैनात थे। वहां शौच की बड़ी समस्या थी- करीब 500 मीटर दूर एक नाले के पास जाना पड़ता था। साल 2001 की बात है। उस दिन हमारा एक सिपाही उसी नाले के पास शौच के लिए गया। वहां नक्सलियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उसे 28 गोलियां मारीं। यह हमला एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। दरअसल, नक्सलियों को उम्मीद थी कि एक सिपाही पर हमला होने की खबर मिलते ही बाकी सुरक्षा बल भी मौके पर पहुंच जाएगा और फिर हम सभी को जमीन में बिछाई अपनी एंटी-बारूदी सुरंग यानि लैंडमाइन से एक साथ उड़ा देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीएसएफ ने हमें इस घटना की जानकारी दे दी थी। सभी पुलिस मुख्यालय अलर्ट हो गए थे। उसके बाद फोर्स के कमांडेंट, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, एंटी-नक्सल फोर्स और बाकी पुलिस अधिकारी मौके पर अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए तैयार हुए। वहां जाने के दो रास्ते थे- एक सड़क के जरिए और दूसरा मोटर लॉन्च के जरिए। हमने मोटर लॉन्च वाला रास्ता चुना। लेकिन उस पूरे रास्ते में नक्सलियों ने जगह-जगह लैंडमाइन बिछा रखी थीं। हम आगे बढ़ते रहे। जाते समय तो सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन लौटते वक्त अचानक रास्ते में बिछी बारूदी सुरंगें फटने लगीं। मेरी मोटर लॉन्च आगे निकल चुकी थी, इसलिए मैं और मेरे कुछ साथी बच गए। पीछे मुड़कर देखा, तो दिल दहल गया- पीछे आ रही हमारे साथियों की गाड़ियां एक-एक कर धमाकों में उड़ रही थीं। कुछ ही पलों में सब खत्म हो गया… सभी साथी मार दिए गए। उसके बाद नक्सलियों ने हमारा पीछा किया और हम पर फायरिंग शुरू कर दी। उस वक्त भागने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं था। अगर मैं भावनाओं में बहकर साथियों के लिए वापस लौटता, तो जिंदा न बचता। उस दिन अपने साथियों को पीछे छोड़कर भागना मेरे लिए सबसे दर्दनाक फैसला था। उसके बाद कई दिनों तक नींद नहीं आई। आंखें बंद करता, तो वही मंजर सामने आ जाता- साथियों की मौत, धमाकों की आवाजें… सब कुछ। उस दौरान जब भी फील्ड में जाता, उन साथियों की याद बार-बार लौट आती। आज भी वही होता है। आज भी अगर मेरे पीछे अचानक कोई गाड़ी आती दिखती है, तो चौंक जाता हूं- एक पल के लिए लगता है, कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं। आखिर वह हमला मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बन गया। मैंने तय कर लिया कि अब नक्सलियों को नहीं छोड़ूंगा। अब तक मैं बातचीत का रास्ता अपना रहा था, लेकिन यह तरीका कारगर साबित नहीं हो रहा था। मैंने प्लान तैयार करना शुरू किया। मैं उन्हीं के बीच पला-बढ़ा था और उनका मुझ पर भरोसा था, इसलिए मैंने उसी भरोसे को ताकत बनाया। सबसे पहले उनके इलाकों में अपनी खुफिया टीमें तैयार करनी शुरू की और उन्हें अलग-अलग जगहों पर तैनात करना शुरू किया। वे टीमें मुझे नक्सलियों की हर गतिविधि की जानकारी देने लगीं- कौन कहां जा रहा है, किस इलाके में उनकी मौजूदगी है, वगैरह-वगैरह। हालांकि, भले ही रिटायर हो चुका हूं, फिर भी एनकाउंटर की पूरी रणनीति आपसे साझा नहीं कर सकता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। फिलहाल, उन जानकारियों के आधार पर मैं अपनी रणनीति तैयार करता और एक-एक करके उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करता। उस दौरान हमने नक्सली बने अपने लगभग 20 लोगों का एनकाउंटर किया। यहीं से ओडिशा में नक्सलवाद के खात्मे की शुरुआत हुई। मैं जिस तरह एक के बाद एक एनकाउंटर कर रहा था, उससे नक्सलियों के निशाने पर आ गया। उन्हीं के बीच का आदमी था- उनकी चाल, उनका तरीका, सब जानता था… और शायद यही वजह थी कि वे भी मुझे किसी भी हालत में खत्म करना चाहते थे। कई बार तो मेरी पुलिस चौकी उड़ाने की कोशिश की। हर बार लगा कि अब बचना मुश्किल है… लेकिन किसी तरह बच जाता था। जब वह मुझे नहीं मार पाए तो मेरे परिवार को निशाना बनाने लगे। 2006 में उन्होंने सबसे पहले मेरे पिता जी को निशाना बनाया। वह एक गाड़ी से जा रहे थे। तभी, अचानक, नक्सलियों ने उनकी गाड़ी में विस्फोट कर दिया। धमाका इतना जोरदार था कि गाड़ी पलट गई। उस गाड़ी में सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई… और मेरे पिता जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। इसके बाद भी मेरे परिवार के कई लोगों पर हमले हुए। कोई बुरी तरह घायल हुआ, कोई किसी तरह बचा। दरअसल, अब नक्सली मेरा हौसला तोड़ में जुट गए थे। वे जानते थे कि सीधे मुझ तक पहुंचना मुश्किल है… इसलिए उन्होंने मेरे अपने लोगों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसी बीच… एक और घटना हुई, जिसने मुझे फिर से अंदर तक झकझोर दिया। एक लड़का जो कि कोई मुखबिर नहीं था। बस इलाके के एक गांव का जवान लड़का था। सीधा-सादा… और, सच कहूं, इंसानियत के नाते मेरी मदद कर रहा था। उस दिन वह मुझसे मिलने आया था। हम मिले, थोड़ी बात हुई… और फिर वह वापस अपने गांव लौट गया। मुझे क्या पता था कि यही मुलाकात उसकी जिंदगी की आखिरी मुलाकात बन जाएगी। रास्ते में… नक्सलियों ने उसे घेर लिया। उसे कोई मौका नहीं दिया। वहीं उसकी हत्या कर दी। जब मुझे ये खबर मिली… मैं कुछ पल के लिए बिल्कुल सन्न रह गया। एक ही बात दिमाग में घूमने लगी- क्या उसकी मौत की वजह मैं हूं? सच बताऊं, उस दिन पहली बार मुझे लगा कि ये लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं रही… इसमें अब बेगुनाह लोग भी कुर्बान हो रहे हैं। दरअसल, जंगल में काम करते-करते ऐसा होता है। लोग आपके करीब आ जाते हैं। हर कोई मुखबिर नहीं होता… हर कोई खुफिया नहीं होता। कई लोग तो बस इसलिए मदद करते हैं क्योंकि वे इस हिंसा से परेशान होते हैं… क्योंकि वे चाहते हैं कि हालात बदलें। ऐसा नहीं है कि उस दौरान मैं केवल एनकाउंटर ही कर रहा था। मैंने कई नक्सलियों की गिरफ्तारियां भी कराईं और कई लोगों को आत्मसमर्पण भी करवाया। ऐसे ही एक नक्सली की कहानी है, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाया। मैंने एक बड़े नक्सली नेता को गिरफ्तार किया था। उसका नाम नहीं बता सकता। वह अपने ग्रुप का सी-कमांडर था। दरअसल, उसके घर में चोरी हो गई थी। वह बार-बार पुलिस स्टेशन जा रहा था, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल रही थी। आखिरकार वह नक्सलियों के पास पहुंचा। नक्सलियों न सिर्फ उसका चोरी हुआ सामान बरामद करवाया, बल्कि हर तरह से उसका साथ दिया। जिसके बाद वह भी नक्सलियों बन गया। इसके अलावा नक्सल प्रभावित इलाकों में न तो ठीक से स्कूल हैं, न साफ पानी की व्यवस्था और न ही बाकी बुनियादी सुविधाएं। इन्हीं समस्याओं के नाम पर नक्सली लोगों को बरगलाते हैं और अपने गुट में शामिल करते हैं। लिहाजा, यही कहूंगा कि कुछ गलतियां हमारी भी हैं, जिनका नक्सली फायदा उठाते हैं। अगर इन चीजों को ठीक किया जाए, तो नक्सलवाद काफी हद तक अपने आप खत्म हो जाएगा। फिलहाल, आखिर में कहूंगा कि अपने काम से तो संतुष्ट हूं, लेकिन अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का मुझे अफसोस भी है। न चाहते हुए भी उन पर गोलियां चलानी पड़ीं। (शरतचंद्र बुरुदा ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मार डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
अरुणाचल प्रदेश सिंघम स्टैक मॉर्निंग लॉटरी रिजल्ट: विजेता को मिले ₹26 लाख
लॉटरी आईडी 3285 के तहत शनिवार को ड्रॉ निकाला गया, जिसमें प्रथम पुरस्कार के साथ द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की गई है।
अरुणाचल के राज्यपाल 15 से उदयपुर में
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक 15 से 18 अप्रैल तक उदयपुर प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे शहर में आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेंगे। राज्यपाल के दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिला कलक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा कार्यक्रम के मद्देनजर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएं, ताकि दौरे के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज अरुणाचल प्रदेश और असम समेत 9 राज्यों में आंधी के साथ हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। हालांकि, देश के ज्यादातर हिस्सों में आज से मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गुरुवार को बारिश हुई। हिमाचल के कुमसैरी, कल्पा और केलांग में तापमान माइनस में पहुंच गया। वहीं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी समेत 7 जिलों में बारिश हुई। मध्य प्रदेश में आज से गर्मी बढ़ेगी। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान में 5 से 6 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, कुछ जिलों में बारिश, आंधी और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। दिल्ली-NCR में आसमान साफ रहेगा। दिन का तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। दिन में 20 से 30 किमी/घंटा की रफ्तार से उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलेंगी, जिससे हल्की ठंडक महसूस होगी। राजस्थान में अगले 4-5 दिन मौसम साफ रहेगा। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी बढ़ सकती है। पिछले 20 दिनों से बदले मौसम के कारण अप्रैल में भी ठंडक का एहसास बना हुआ है। इधर, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और गोवा में गर्मी के साथ उमस बनी रहीगा। मौसम की तीन तस्वीरें… 11 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी के साथ 30-40 किमी/घंटा की हवा चल सकती है। असम, मेघालय में बारिश हो सकती है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में गरज-चमक की संभावना। 12 अप्रैल: पश्चिम बंगाल और सिक्किम में हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट। अरुणाचल प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण कर्नाटक में भी गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित सूअर फार्म में इस वायरस के कारण 300 से अधिक सूअरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बची हुई करीब 150 सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। इस वायरस से फार्म मालिक को करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। दरअसल सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम बड़ी संख्या में मुडपार गांव पहुंची थी। अधिकारी और डॉक्टर पीपीई किट पहनकर फार्म के अंदर गए और बचे हुए सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद फार्म के पीछे सभी मृत सूअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया। फिलहाल पूरे फार्म को सील करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मुडपार गांव सूअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सूअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क (Pork) की सप्लाई की जाती थी। देखिए पहले ये तस्वीरें- रिपोर्ट के आने तक हो चुकी थी 300 सूअरों की मौत फार्म मालिक पीओ जॉय ने बताया कि उनके फार्म में कुल 300 से 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जबकि 1 अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हो गई। 6 अप्रैल तक करीब 300 सूअरों की मौत हो चुकी थी और बाकी को विभाग ने मार दिया। उन्होंने बताया कि एक सूअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपए थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। फार्म में 133 गर्भवती सूअर और करीब 400 बच्चे भी थे। सोमवार को सभी को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और फार्म के पीछे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। फॉर्म के मालिक ने दी थी विभाग को सूचना पीओ जॉय ने बताया कि उन्होंने खुद ही विभाग को सूचना देकर बुलाया था, ताकि बीमारी और अधिक न फैल सके। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक पुरानी और बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। यह बीमारी लगने के बाद लगभग सभी सूअरों की मौत हो जाती है। हालांकि यह केवल सूअरों में ही फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती। प्रदेश में सूअर के मांस की सबसे ज्यादा खपत फार्म मालिक का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सूअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सूअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है। 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए कार्रवाई फार्म मालिक ने कहा किऐसी गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सके। यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने नुकसान से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह बीमारी अन्य फार्म तक न फैले। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शुरू हुई कार्रवाई पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि 2 अप्रैल को सूचना मिलने के बाद तुरंत सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी गई। फिलहाल पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए फार्म को सील करने की कार्रवाई की जा रही है। जानिए क्या है यह वायरस और कितना खतरनाक है? अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 100% तक होती है। यानी यदि कोई सूअर इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसका बच पाना लगभग असंभव होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता, लेकिन यह सूअर पालन उद्योग के लिए बेहद विनाशकारी साबित होता है और पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इस वायरस की उत्पत्ति अफ्रीका से हुई थी, लेकिन साल 2018 के बाद इसने चीन, वियतनाम और यूरोप के कई देशों में भारी तबाही मचाई। चीन में इस बीमारी के चलते करोड़ों सूअरों को मारना पड़ा, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। साल 2026 में भी पोलैंड और इटली जैसे देशों में इसके नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं। भारत में इस वायरस की पहली पुष्टि वर्ष 2020 में असम और अरुणाचल प्रदेश में हुई थी, जहां हजारों सूअरों की मौत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे यह वायरस पंजाब, केरल और अब छत्तीसगढ़ तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में यह संक्रमण बाहरी राज्यों से लाए गए संक्रमित सूअरों या दूषित मांस उत्पादों के जरिए पहुंचा हो सकता है। दुर्ग के अलावा बलौदा बाजार और महासमुंद के जंगली इलाकों में भी सूअरों की संदिग्ध मौतों के मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन और पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। ………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बिलासपुर में बर्ड फ्लू, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट किए: संक्रमण के बाद हुई पूरे संभाग में सप्लाई, कानन पेंडारी 7 दिन तक बंद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में बर्ड-फ्लू वायरस मिला है। यहां 5 हजार मुर्गियां की मौत के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार अंडे नष्ट किए गए। पढ़ें पूरी खबर…
छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित सूअर फार्म में इस वायरस के कारण 300 से अधिक सूअरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बचे हुए करीब 150 सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। इस वायरस से फार्म मालिक को करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। दरअसल सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम बड़ी संख्या में मुडपार गांव पहुंची थी। अधिकारी और डॉक्टर पीपीई किट पहनकर फार्म के अंदर गए और बचे हुए सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद फार्म के पीछे सभी मृत सूअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया। फिलहाल पूरे फार्म को सील करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मुडपार गांव सूअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सूअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क (Pork, सूअर मांस) की सप्लाई की जाती थी। देखिए पहले ये तस्वीरें- रिपोर्ट के आने तक हो चुकी थी 300 सूअरों की मौत फार्म मालिक पीओ जॉय ने बताया कि उनके फार्म में कुल 300 से 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जबकि 1 अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हो गई। 6 अप्रैल तक करीब 300 सूअरों की मौत हो चुकी थी और बाकी को विभाग ने मार दिया। उन्होंने बताया कि एक सूअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपए थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। फार्म में 133 गर्भवती सूअर और करीब 400 बच्चे भी थे। सोमवार को सभी को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और फार्म के पीछे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। फॉर्म के मालिक ने दी थी विभाग को सूचना पीओ जॉय ने बताया कि उन्होंने खुद ही विभाग को सूचना देकर बुलाया था, ताकि बीमारी और अधिक न फैल सके। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक पुरानी और बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। यह बीमारी लगने के बाद लगभग सभी सूअरों की मौत हो जाती है। हालांकि यह केवल सूअरों में ही फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती। प्रदेश में सूअर के मांस की सबसे ज्यादा खपत फार्म मालिक का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सूअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सूअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है। 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए कार्रवाई फार्म मालिक ने कहा कि ऐसी गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सके। समय रहते कदम उठाए जाते, तो नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने नुकसान से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह बीमारी अन्य फार्म तक न फैले। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शुरू हुई कार्रवाई पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि 2 अप्रैल को सूचना मिलने के बाद तुरंत सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी गई। फिलहाल पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए फार्म को सील करने की कार्रवाई की जा रही है। जानिए क्या है यह वायरस और कितना खतरनाक है? अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 100% तक होती है। यानी यदि कोई सूअर इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसका बच पाना लगभग असंभव होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता, लेकिन यह सूअर पालन उद्योग के लिए बेहद विनाशकारी साबित होता है और पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इस वायरस की उत्पत्ति अफ्रीका से हुई थी, लेकिन साल 2018 के बाद इसने चीन, वियतनाम और यूरोप के कई देशों में भारी तबाही मचाई। चीन में इस बीमारी के चलते करोड़ों सूअरों को मारना पड़ा, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। साल 2026 में भी पोलैंड और इटली जैसे देशों में इसके नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं। भारत में इस वायरस की पहली पुष्टि वर्ष 2020 में असम और अरुणाचल प्रदेश में हुई थी, जहां हजारों सूअरों की मौत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे यह वायरस पंजाब, केरल और अब छत्तीसगढ़ तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में यह संक्रमण बाहरी राज्यों से लाए गए संक्रमित सूअरों या दूषित मांस उत्पादों के जरिए पहुंचा हो सकता है। दुर्ग के अलावा बलौदा बाजार और महासमुंद के जंगली इलाकों में भी सूअरों की संदिग्ध मौतों के मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन और पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। ………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बिलासपुर में बर्ड फ्लू, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट किए: संक्रमण के बाद हुई पूरे संभाग में सप्लाई, कानन पेंडारी 7 दिन तक बंद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में बर्ड-फ्लू वायरस मिला है। यहां 5 हजार मुर्गियां की मौत के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार अंडे नष्ट किए गए। पढ़ें पूरी खबर…
सिक्किम के मंगन जिले में रविवार को लाचेन-चुंगथांग रोड पर तेज बारिश और बर्फबारी हुई। इसके कारण लैंडस्लाइड भी हुआ और सड़क में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। यहां 800 टूरिस्ट फंस गए । यहां आज सुबह से ही पर्यटकों का रेस्क्यू जारी है। इधर, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से उत्तर भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में यमुनोत्री धाम समेत 3 जिलों में रविवार को बर्फबारी हुई। वहीं 6 जिलों में बारिश के साथ ओले गिरे। हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति के ऊंचे इलाकों में भी बर्फबारी हुई। गोंदला में 28.5 सेंटीमीटर, केलांग में 20.0 सेमी, हंसा में 5 सेमी बर्फ गिरी। जबकि शिमला, कुल्लू और मंडी में ओले गिरने से सेब की फसल को नुकसान हुआ। यूपी में आंधी-बारिश और बिजली गिरने से 72 घंटे में 15 लोगों की मौत हुई है। काशी, गोंडा, सुल्तानपुर और कानपुर समेत 11 जिलों में रविवार को रुक-रुककर बारिश हुई। कानपुर, मथुरा, संभल में ओले गिरे। राजस्थान में आज से नया वेदर सिस्टम एक्टिव होगा। 14 जिलों में आंधी के साथ तेज बारिश का अलर्ट है। दिल्ली-NCR और हरियाणा के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना है। देशभर में बारिश-बर्फबारी की 3 तस्वीरें… अगले दो दिन मौसम का हाल 5-6 अप्रैल- हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरलम और आंध्र प्रदेश में आंधी-तूफान की संभावना है। आंध्र प्रदेश, केरलम और पुडुचेरी में ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं, राजस्थान, बिहार और झारखंड में तेज बारिश हो सकती है। पंजाब और राजस्थान में कुछ जगहों पर 60 किमी/घंटा तक की रफ्तार से हवा चल सकती है। राज्यों के मौसम का हाल… मध्य प्रदेश: राज्य में 9 अप्रैल तक आंधी-बारिश का दौर, ग्वालियर समेत 24 जिलों में अलर्ट मध्य प्रदेश में 9 अप्रैल तक आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा। टर्फ के सक्रिय होने से सोमवार को ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा और शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में असर बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 7 अप्रैल से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। इसके कारण आंधी-बारिश की स्थिति बनी रहेगी। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान: राज्य के 14 जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी, ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट राजस्थान में नया स्ट्रॉन्ग वेदर सिस्टम एक्टिव होने से आज से तेज आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी है। 14 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राज्य के कुछ शहरों के तापमान में 1C-2C की बढ़ोतरी हुई है। पूरी खबर पढ़ें… छत्तीसगढ़: बंगाल में बने सिस्टम से राज्य में बारिश का अलर्ट, 3C तक गिर सकता है तापमान पश्चिम बंगाल में बने सिस्टम के असर से छत्तीसगढ़ का मौसम बदला हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार एक ट्रफ लाइन छत्तीसगढ़ के ऊपर से गुजर रही है, जिसके कारण बादल, बारिश की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान जगदलपुर में 36.9C का रहा। पूरी खबर पढ़ें… बिहार: राज्य के 6 जिलों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट, आंधी के साथ ओले गिरने की संभावना बिहार में आज 6 जिलों में बारिश-आंधी का ऑरेंज अलर्ट है। इन इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान तेज हवा, गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। अगले 3 दिनों तक पारा 40C के नीचे रहने के आसार हैं। अधिकतम तापमान में 2C से 4C तक गिरावट आ सकती है। पूरी खबर पढ़ें… पंजाब: 20 जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का यलो अलर्ट, अगले दो दिन ऑरेंज अलर्ट पंजाब के 20 जिलों में आज आंधी-बारिश का यलो अलर्ट है। कल से ऑरेंज अलर्ट है। बीते 24 घंटे में राज्य के तापमान में 1.6C की बढ़ोतरी हुई। सबसे ज्यादा तापमान 33.4C फरीदकोट का रहा। पूरी खबर पढ़ें…
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

