Himachal Pradesh: MY Bharat पहल से PM Modi तक पहुंचेगी युवाओं की आवाज, 1 लाख Youth का लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 'मेरा युवा भारत विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' में एक लाख तक युवाओं को शामिल करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। सरकार का मकसद है कि जनवरी 2027 में नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में राज्य भर से युवाओं का एक बड़ा दल भेजा जाए। बुधवार को शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ANI और पत्रकारों से बात करते हुए, हिमाचल प्रदेश सरकार के युवा, खेल और सेवा विभाग के विशेष सचिव नवीन तंवर ने कहा कि इस पहल का मकसद 15-29 साल के युवाओं को अपना हुनर, विचार और रचनात्मकता दिखाने और अपनी सोच को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का मंच देना है। तंवर ने कहा, इसका मुख्य मकसद भारत के 15 से 29 साल के युवाओं को अपनी रुचियों, हुनर, कला और क्षमताओं को दिखाने और उनके लिए पहचान पाने का मौका देना है। यह भारत की बदलती स्थिति के बारे में उनके विचारों को राष्ट्रीय मंच तक ले जाने और आखिरकार उनकी आवाज़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुँचाने का एक ज़रिया भी है। इसे भी पढ़ें: CP Radhakrishnan ने Arunachal Pradesh को बताया देश की एकता का अभिन्न अंग उन्होंने कहा कि युवा 'MY Bharat' पोर्टल और 'MY Bharat' ऐप के ज़रिए रजिस्टर कर सकते हैं और इसमें हिस्सा लेने के लिए स्कूल या कॉलेज में पढ़ाई करना ज़रूरी नहीं है। उन्होंने कहा, हम स्कूल और कॉलेजों के ज़रिए लोगों तक पहुँच रहे हैं, लेकिन किसी का स्कूल या कॉलेज में पढ़ना ज़रूरी नहीं है। 29 साल तक की उम्र का कोई भी व्यक्ति 'MY Bharat' पोर्टल या ऐप के ज़रिए खुद को रजिस्टर कर सकता है। तंवर ने बताया कि इस पहल में कई तरह की गतिविधियाँ शामिल हैं, जैसे क्विज़ प्रतियोगिता, निबंध लेखन और प्रेजेंटेशन, साथ ही लोक नृत्य, लोक गीत, नुक्कड़ नाटक, भाषण और पेंटिंग। टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और बिज़नेस में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए भी खास मौके हैं, जैसे 'Design for Bharat', हैकाथॉन और 'Entrepreneurship Challenge'। इसे भी पढ़ें: UP Elections से पहले SP का 'नीला' दांव: Student Wing का ड्रेस कोड बदला, Dalit वोटर आएंगे साथ? युवाओं को देश से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखने का मौका देने के लिए 'Youth Parliament' (युवा संसद) का भी प्लान बनाया जा रहा है। तंवर के मुताबिक, पिछले एडिशन में देश भर से लगभग 50 लाख युवाओं ने हिस्सा लिया था, जबकि इस साल एक करोड़ युवाओं के शामिल होने का लक्ष्य है। युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत 'Mera Yuva Bharat', हिमाचल प्रदेश के स्टेट डायरेक्टर ध्रुव डोगरा ने कहा कि इस प्रोग्राम का मकसद युवाओं को 'MY Bharat' से जोड़ना और उन्हें 2047 तक 'विकसित भारत' के सरकारी विज़न में योगदान देने के काबिल बनाना है।
CP Radhakrishnan ने Arunachal Pradesh को बताया देश की एकता का अभिन्न अंग
ईटानगर, नौ सितंबर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत की एकता का अभिन्न हिस्सा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से मिली गति के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के विकास का प्रमुख इंजन बनकर उभर रहा है। यहां अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य भारत की सीमाओं का एक ‘‘गौरवशाली प्रहरी’’ है और इसका विकास देश की प्रगति से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है और इसमें ‘‘असीम संभावनाएं’’ हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि केंद्र सरकारों ने समय-समय पर पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को लगातार अधिक प्राथमिकता दी है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का गठन किया था। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को ‘अष्ट लक्ष्मी’ बताना इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को दर्शाता है। पूर्वोत्तर क्षेत्र देश की विकास यात्रा में एक अहम चालक के रूप में उभर रहा है।’’उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के लिए 6,800 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र पर केंद्र सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाता है। अरुणाचल प्रदेश के विकास पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि राज्य का करीब 79 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। राज्य समृद्ध जैव विविधता, जंगलों, नदियों और पारिस्थितिक संसाधनों से संपन्न है, जो देश की पर्यावरणीय सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘अरुणाचल प्रदेश भारत के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह राज्य भारत की एकता का अभिन्न हिस्सा है। अरुणाचल प्रदेश का विकास भारत की प्रगति से जुड़ा हुआ है।’’उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश में कीवी फल का सबसे बड़ा उत्पादक बनकर उभरा है और किसानों को एक लाख से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने ‘‘राष्ट्र प्रथम’’ की भावना के साथ एक मजबूत अरुणाचल प्रदेश और मजबूत भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। मंगलवार शाम दो दिवसीय दौरे पर इस राज्य में पहुंचे राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले एक दशक में अरुणाचल प्रदेश में ग्रामीण सड़कों की कनेक्टिविटी करीब 4,000 किलोमीटर से बढ़कर 14,000 किलोमीटर से अधिक हो गई है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई करीब 1,000 किलोमीटर से बढ़कर 2,500 किलोमीटर से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय दोगुने से अधिक हो गई है, जबकि सड़क निर्माण की रफ्तार बढ़कर करीब 1,800 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गई है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान 800 से अधिक स्कूलों का उन्नयन किया गया है और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का नामांकन बढ़कर 1.7 लाख से अधिक हो गया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य में महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि करीब 16,000 स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 1.5 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य में अब करीब 16,000 ‘लखपति दीदियां’ हैं और उम्मीद जताई कि भविष्य में वे ‘करोड़पति’ बनेंगी। राधाकृष्णन ने विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति के लिए मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों, विधायकों और अरुणाचल प्रदेश की जनता को बधाई दी। विधानसभा के स्वर्ण जयंती वर्ष पूरा होने पर उन्होंने सदन को बधाई देते हुए कहा कि विधानसभा सचिवालय को प्लास्टिक मुक्त बनाने और पुस्तकालय तथा संग्रहालय स्थापित करने जैसी पहल से आने वाली पीढ़ियों को राज्य की विधायी यात्रा से सीखने में मदद मिलेगी। उन्होंने विधायकों को याद दिलाया कि चुनाव वोटों के जरिए जीते जा सकते हैं, लेकिन जनता का सम्मान केवल सेवा के जरिए हासिल किया जा सकता है। राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘विधायक के रूप में आप हजारों लोगों की आवाज हैं, जिन्हें न्याय, विकास और उम्मीद की अपेक्षा है।’’ उन्होंने कहा कि सदन में होने वाली हर नीति संबंधी चर्चा और हर विचार-विमर्श अनगिनत लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता रखता है। राधाकृष्णन ने विधायकों से 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विकास हर गांव और हर परिवार तक पहुंचे तथा युवाओं के लिए अधिक अवसर पैदा हों। राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के विधायकों से आग्रह किया कि वे नीतिगत मुद्दों और अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी चिंताओं को उठाने के लिए प्रश्नकाल और शून्यकाल का पूरा उपयोग करें। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद भी डिजिटल मंचों का इस्तेमाल कर रही है और संसदीय दस्तावेज तथा चर्चाएं कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित वॉइस-टू-टेक्स्ट उपकरणों का इस्तेमाल आठ भारतीय भाषाओं में एक साथ व्याख्या के लिए किया जा रहा है और जल्द ही सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को इसमें शामिल किया जाएगा।’’विधानसभा पहुंचने पर राधाकृष्णन ने सलामी गारद का निरीक्षण किया। उन्होंने विधानसभा की दीर्घा-सह-संग्रहालय का भी दौरा किया।
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