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अरुणाचल में आसमान से आफत: लैंडस्लाइड और सैलाब ने मचाई तबाही, चार की मौत; सेना के पांच जवान लापता

अरुणाचल में आसमान से आफत: लैंडस्लाइड और सैलाब ने मचाई तबाही, चार की मौत; सेना के पांच जवान लापता- Four people died and five Army soldiers went missing following landslides and flash floods Arunachal Pradesh

अमर उजाला 15 Aug 2026 12:45 pm

LAC पर भारत-चीन सेना की झड़प? बीजिंग से क्या जवाब आया

भारत चीन सीमा पर एक बार फिर हलचल की खबरों के बीच चीन का एक बड़ा बयान सामने आया है। इस बयान के बाद कई सवालों के जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने और हाल में भारतीय चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरों पर जब चीन के प्रवक्ता से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन बस इतना कहा गया कि फिलहाल चीन भारत सीमा पर हालात आमतौर पर स्थिर हैं। यानी चीन ने ना तो किसी नई सैन्य घटना की पुष्टि की और ना ही अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सेना की गतिविधियां बढ़ने की खबरों को साफ तौर पर खारिज किया। इसे भी पढ़ें: क्या था माओ का 5 फिंगर प्लान, जिसे फॉलो करते हुए जिनपिंग बढ़ा सकते हैं भारत की टेंशन चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोज याकुन से मीडिया ने सीधा सवाल किया। उनसे पूछा गया कि भारतीय सोशल मीडिया पर चीन की सीमा के पास बड़ी सैन्य गतिविधियों के वीडियो सामने आ रहे हैं। साथ ही भारत सरकार के एक प्रवक्ता ने हाल की सीमा घटना से इंकार नहीं किया है। ऐसे में क्या हाल में भारत और चीन के बीच कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि चीन भारत सीमा पर हालात फिलहाल आमतौर पर स्थिर हैं। चीन और भारत ने पिछले हफ्ते चीन भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म की 36वीं बैठक की। दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इतने सीधे सवाल के बावजूद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पा स अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरों पर कोई जवाब नहीं दिया। इसे भी पढ़ें: Arunachal Pradesh के 27 स्थानों के मानक नाम आधिकारिक Map में शामिल किए गए दरअसल पिछले कुछ वक्त में सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैली और कई तरह के दावे किए गए कि कुछ दिन पहले अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसेसरी जिले में तिब्बत से सटे टैक्सिंग इलाके के पास भारतीय और चीनी सेना की पेट्रोलिंग टीमें आमने-सामने आ गई थी और इसी के बाद तमाम तरह की खबरें फैलने लगी। लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की और अब जब चीनी प्रवक्ता से सीधा सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी बस इतना कह के बात पलट दी कि फिलहाल भारत चीन सीमा पर सब कुछ स्थिर है। आपको बता दें भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर पुराना विवाद है। चीन इस पूरे राज्य पर अपना गलत दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है। चीन इसे जंगना कहता है। वहीं बार-बार भारत चीन के इन दावों को पूरी तरह खारिज करता है और साफ़ कहता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है। भारत ने हाल ही में कहा था कि चीन के साथ सीमा से जुड़े मामलों को वो बेहद गंभीरता से लेता है। नई दिल्ली ने साफ किया कि एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है क्योंकि सीमा पर हालात दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करते हैं। आपको बता दें भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक नाम तय करने को लेकर चीन की आपत्ति भी खारिज कर दी। भारत का कहना है कि नाम बदलने या किसी तरह का दावा करने से जमीन पर वास्तविकता नहीं बदल जाएगी। इसे भी पढ़ें: India-China Relation क्या वाकई सुधर रहे हैं? चीन में रह रहे भारतीयों ने चौंकाने वाला सच उजागर किया है! दरअसल यह पूरा घटनाक्रम इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत और चीन के रिश्ते 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की बातचीत की।

प्रभासाक्षी 13 Aug 2026 7:29 pm

Vanakkam Poorvottar: कोई क्षेत्र नहीं खोया है, सभी पोस्ट भारतीय नियंत्रण में हैं, Arunachal Pradesh में चीनी घुसपैठ की खबरों पर Indian Army का स्पष्टीकरण

भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित ‘धीमी घुसपैठ’ के दावों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया है और सभी पोस्ट भारतीय नियंत्रण में हैं। सेना के सूत्रों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में चीन की ओर से किसी ‘स्लो एन्क्रोचमेंट’ की बात सही नहीं है और सेना तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) सीमा पर चीनी गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। चीन को यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और यहां घुसपैठ, दबाव या जमीन पर तथाकथित ‘धीरे-धीरे कब्जा जमाने’ की कोई कोशिश भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसी किसी भी हरकत का जवाब भारतीय सुरक्षा बल अपनी पूरी ताकत से देंगे। हम आपको बता दें कि यह स्पष्ट स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के तक्सिंग सेक्टर को लेकर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने गंभीर दावे किए हैं। चार सदस्यीय समिति ने 10 जुलाई 2026 को तक्सिंग का दौरा किया था और स्थानीय नेताओं, बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों के साथ-साथ वहां तैनात वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और जवानों से बातचीत की। समिति की अध्यक्षता पूर्व मंत्री और PPA के मुख्य सलाहकार कहफा बेंगिया ने की थी। इसे भी पढ़ें: Nepal ने खो दिये Sugauli Treaty के Original Document ! अब भारत के साथ कैसे सुलझायेगा सीमा विवाद? समिति का दावा है कि PLA ने भारत के कुछ निर्धारित पेट्रोलिंग प्वाइंट तक भारतीय जवानों की पहुंच को प्रभावी रूप से रोक दिया है और पारंपरिक भारतीय चराई तथा शिकार क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है। सबसे गंभीर आरोप शेरा-5 पेट्रोलिंग प्वाइंट को लेकर है। PPA के मुताबिक, 2023 में इस स्थान पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद भारतीय बल पीछे हटे और कथित तौर पर दोबारा वहां नहीं लौटे। समिति का दावा है कि PLA ने वहां मौजूद भारतीय निशान और प्रतीकात्मक ढांचे हटा दिए तथा भारतीय गश्त को रोकना शुरू कर दिया। यही वह बिंदु है जहां चीन की सीमा रणनीति पर गंभीर सवाल उठते हैं। PPA ने इसे चीन की उस कथित रणनीति से जोड़ा है जिसमें पहले किसी इलाके में पहुंच सीमित की जाती है, फिर अस्थायी रोक को जमीन पर स्थायी वास्तविकता में बदलने की कोशिश होती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये PPA समिति के निष्कर्ष हैं, भारतीय सेना का आधिकारिक आकलन नहीं। सेना ने इसके उलट कहा है कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया और सभी पोस्ट नियंत्रण में हैं। मामला केवल एक पेट्रोलिंग प्वाइंट तक सीमित नहीं है। PPA समिति ने तक्सिंग, माजा और गालमो के इलाकों में मौसमी सैन्य उपस्थिति को एक बड़ी चुनौती बताया है। उसके अनुसार, भारी बर्फबारी और कठिन मौसम के कारण नियमित भारतीय पेट्रोलिंग मुख्यतः अप्रैल से अक्टूबर तक सीमित रहती है, जबकि PLA की गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहती हैं। सर्दियों में स्थानीय पोर्टरों की सेवाएं भी काफी हद तक बंद हो जाती हैं, जिससे अग्रिम क्षेत्रों में भारतीय मौजूदगी घटने का खतरा पैदा होता है। समिति ने इसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील LAC पर ‘सीजनल वैक्यूम’ बताया है। इसका सीधा असर स्थानीय लोगों पर भी पड़ता है। नांगा पहाड़ जैसे क्षेत्र पारंपरिक रूप से नाह और मारा समुदायों के शिकार तथा याक पालन के इलाके रहे हैं, लेकिन PPA के अनुसार अब स्थानीय लोगों की वहां पहुंच प्रतिबंधित है। समिति का दावा है कि इस तरह के प्रतिबंध PLA को आगे बढ़ने के लिए अधिक गुंजाइश दे सकते हैं। सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ सुरक्षा का प्रश्न नहीं, बल्कि उनकी सदियों पुरानी आवाजाही, चराई और पारंपरिक अधिकारों का सवाल भी है। यही कारण है कि अरुणाचल की सीमा नीति में सड़क, संचार और सैन्य ढांचे को हथियार से कम महत्वपूर्ण नहीं माना जा सकता। PPA ने Nacho-Taksing BRO सड़क को युद्धस्तर पर पूरा करने, 68 किलोमीटर लंबी Galemo-Pokorla सड़क को प्राथमिकता देने और Taksing-Pokorla मार्ग को Yaja तथा Huri होते हुए समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की है। समिति ने Sipi-2 में हेलीपैड तथा Sipi-4 और Sipi-6 में स्थायी सेना बेस बनाने, अग्रिम इलाकों में विश्वसनीय बिजली और Maza-Galemo में बेहतर टेलीफोन व नेटवर्क कनेक्टिविटी की भी मांग की है। देखा जाये तो सामरिक दृष्टि से यह पूरा क्षेत्र इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अपर सुबनसिरी का यह इलाका भारत-चीन सीमा के उन कठिन और दुर्गम हिस्सों में आता है जहां भौगोलिक परिस्थितियां ही सैन्य चुनौती बन जाती हैं। चीन ने पिछले वर्षों में सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत कर अपनी निगरानी और पेट्रोलिंग क्षमताओं को बढ़ाया है। भारतीय पक्ष भी इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमा प्रभुत्व पर लगातार जोर दे रहा है। सेना के अनुसार, अनिर्धारित सीमा के कारण पेट्रोलिंग के दौरान दोनों पक्षों के सैनिकों का आमना-सामना हो सकता है और ऐसे मामलों को स्थापित प्रोटोकॉल के जरिए संभाला जाता है। बीजिंग ने भी फिलहाल स्थिति को ‘सामान्यतः स्थिर’ बताया है और कहा है कि दोनों देश सैन्य तथा कूटनीतिक माध्यमों से संवाद बनाए हुए हैं। लेकिन चीन की भाषा चाहे जितनी संयमित हो, भारत के लिए असली कसौटी जमीन पर वास्तविक स्थिति है। इतिहास भी भारत को सतर्क रहने की वजह देता है। 1959 में चीन ने Longju में Assam Rifles की चौकी पर हमला कर उसे कब्जे में लिया था और यह क्षेत्र लंबे समय से चीन की गतिविधियों तथा बुनियादी ढांचा निर्माण के कारण चर्चा में रहा है। 1962 के युद्ध में भी Kameng, Subansiri, Siyom, Siang और Lohit घाटियों में बड़े चीनी सैन्य अभियान हुए थे। युद्धविराम के बाद PLA LAC के उत्तर में लौट गया था। इसलिए आज की चुनौती केवल यह साबित करने की नहीं है कि किसी खास बिंदु पर जमीन गई या नहीं। असली चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि सीमा पर भारत की मौजूदगी कभी कमजोर न पड़े। चीन यदि दबाव, बुनियादी ढांचे, स्थानीय आवाजाही पर प्रतिबंध या लगातार पेट्रोलिंग के जरिए जमीन पर नई ‘वास्तविकताएं’ बनाने की कोशिश करता है, तो भारत को हर मोर्चे पर उससे आगे रहना होगा। बहरहाल, अरुणाचल पर भारत का रुख दोटूक है न जमीन छोड़ी जाएगी, न भारतीय संप्रभुता पर कोई सवाल स्वीकार किया जाएगा। सेना का यह स्पष्ट संदेश कि भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया और सभी पोस्ट नियंत्रण में हैं, चीन के लिए पर्याप्त चेतावनी है। अब जरूरत इस चेतावनी को सड़क, सुरंग, हेलीपैड, संचार, स्थायी सैन्य ठिकानों और सालभर सक्रिय सीमा निगरानी की ताकत में बदलने की है। अरुणाचल की बर्फीली चोटियों पर भारत की मौजूदगी जितनी मजबूत होगी, चीन की ‘धीरे-धीरे दबाव बनाने’ की कोई भी रणनीति उतनी ही पहले चरण में नाकाम होगी। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 13 Aug 2026 1:36 pm

Arunachal Pradesh: अरुणाचल की 27 जगहों का भारत ने कर दिया पक्का नामकरण! चीन को मिर्ची क्यों लगी ये भी समझिए

Arunachal Pradesh: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बार-बार बदले जाने के जवाब में भारत ने पिछले सप्ताह औपचारिक रूप से राज्य के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र पर उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किया था। चीन के नागरिक मामलों का मंत्रालय 2017 से समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के लिए चीनी नाम जारी करता रहा है। ताकि उस क्षेत्र पर चीन के दावे को मजबूत किया जा सके। इससाल अप्रैल में भी नामों की एक नई लिस्ट जारी की गई थी।अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारत ने लगातार ऐसे कदमों को निरर्थक और बेतुक बताया है। भारत ने कहा है कि इस तरह के प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।चीन तिब्बत को शीजांग और अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है।भारत ने दिया सख्त संदेशभारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक क्षेत्रों को उनके आधिकारिक भारतीय नामों के साथ सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र पर दर्ज करना चीन को सख्त संदेश है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थानों को अपने हिसाब से नाम देने की कोशिश करता रहा है। भारत ने चीन के इस कदम को पहले भी खारिज करते हुए साफ कहा है कि नाम बदलने से जमीन की वास्तविक स्थिति नहीं बदल सकती।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-चीन सीमा से जुड़े मामलों को भारत बेहद गंभीरता से लेता है और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।27 जगहों के नाम तय करने का क्या मतलब है?भारत ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक नक्शे में 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक भारतीय नामों से दर्ज किया है। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य इन स्थानों की सटीक पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों के बीच इनके बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इन स्थानों में कुछ ऐसे इलाके भी शामिल हैं, जिनका भारत-चीन सीमा विवाद के इतिहास और रणनीतिक दृष्टि से खास महत्व है।जैसे लोंगजू (Long Ju) LAC के पास स्थित है। वर्ष 1959 में यह भारत-चीन तनाव के शुरुआती बड़े फ्लैशप्वाइंट में से एक रहा था, जब चीनी सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया था। इसके अलावा अपर सुबनसिरी जिले का माजा गांव भी लिस्ट में शामिल है।इसके अलावा इस लिस्ट में बिसा गांव तथा ऊंचाई वाले महत्वपूर्ण दर्रे ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला भी शामिल हैं। वहीं, थाग ला भी इस लिस्ट का हिस्सा है, जो 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र रहा था।थाग ला और 1962 के युद्ध का कनेक्शनथाग ला का नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती दौर में यहां बड़ी सैन्य कार्रवाई हुई थी। यह इलाका ऊंचाई पर स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।इसी तरह जयरामपुर को भीलिस्ट में शामिल किया गया है। चांगलांग जिले में स्थित जयरामपुर पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक केंद्र है और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिहाज से इसका महत्व है।लिस्टमें सांभो सरोवर, बारा कुंडुन, छोटा कुंडुन, धनबाड़ी, प्रीतनगर, तेरीतनगर, रामनगर और जसवंतगढ़ जैसे स्थान भी शामिल हैं। जसवंतगढ़ में 1962 के युद्ध में शहीद भारतीय सैनिक जसवंत सिंह रावत की स्मृति से जुड़ा स्मारक है। इसके अलावा सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी जैसे गांव भी सूची में हैं।चीन अरुणाचल के नाम क्यों बदलता रहा है?चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता रहा है। वह इसे जांगनान कहता है। इसी दावे के तहत चीन ने समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थानों के लिए चीनी नाम जारी किए हैं। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में पहली बार अरुणाचल प्रदेश के छह स्थानों के लिए नामों कीलिस्ट जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 और 2023 में 11 स्थानों के नामों कीलिस्ट जारी की गई।भारत ने हर बार इन कोशिशों को खारिज किया है। नई दिल्ली का स्पष्ट रुख है कि किसी भारतीय इलाके का नाम बदलने की कोशिश से उसकी संप्रभुता या वास्तविक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता।इसी बीच अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों के आक्रामक रुख की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है। हालांकि चीन ने सीमा पर स्थिति को फिलहाल सामान्य और स्थिर बताया है।अभी सीमा पर कैसे हैं हालात? चीन ने बुधवार को कहा कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। हालांकि, उसने अरुणाचल प्रदेश में सीमा के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने संबंधी खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन मीडिया के इन सवालों का जवाब दे रहे थे कि क्या हाल में भारत के साथ कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं।गुओ ने कहा, चीन-भारत सीमा पर स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। उन्होंने बताया कि बीजिंग और नई दिल्ली ने भारत-चीन सीमा मामलों पर36वीं बैठक पिछले हफ्ते आयोजित की थी।भारत ने क्या कहा?भारत ने मंगलवार को कहा था कि वह चीन की सीमा से लगे इलाकों से जुड़े मामलों को बेहद गंभीर मानता है। उसने इस बात पर जोर दिया था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूर है, क्योंकि सीमा की स्थिति दोनों देशों के आपसी संबंधों की आगे की दिशा तय करेगी। यह बयान अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रुख अपनाने की अपुष्ट खबरों के बीच आया।भारत ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान उनके आधिकारिक नामों से करने के अपने फैसले की चीन की ओर से की गई आलोचना को भी खारिज कर दिया। उसने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अटूट एवं अभिन्न हिस्सा है। इस अविवादित सत्य को कोई नहीं बदल सकता।2020 से भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाववर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई भीषण झड़पों और उसके बाद चार साल से ज्यादा समय तक चले सैन्य टकराव के कारण भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था। इसके बाद द्विपक्षीय रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों ने पिछले करीब एक साल से ज्यादा समय में कई कदम उठाए हैं।अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में गतिरोध वाले अंतिम दो स्थान-देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी से जुड़े समझौते को अंतिम रूप दिया था। समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के कजान में मुलाकात करके संबंध सुधारने के लिए कई फैसले लिए थे।ये भी पढ़ें- Pitbull attack: पटियाला में किराए का घर देखने गए कपल पर पिटबुल कुत्ते ने किया जानलेवा हमला, खौफनाक CCTV वीडियो देखिएपिछले साल अगस्त में मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के तियानजिन शहर गए थे। एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर pm मोदी और जिनपिंगके बीच विस्तृत बातचीत हुई थी। इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ज़ी न्यूज़ 13 Aug 2026 8:56 am

Arunachal Pradesh में 27 भारतीय नामों को China ने अमान्य बताया, जांगनान क्षेत्र पर जताया दावा

के जे एम वर्माबीजिंग, 10 अगस्त चीन ने सोमवार को भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किए जाने के फैसले को ‘‘अवैध और अमान्य’’ करार दिया। भारत की हालिया घोषणा पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, ‘‘चीन, भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित तथाकथित ‘अरुणाचल प्रदेश’ को मान्यता नहीं देता।’’उन्होंने विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अपने जवाब में कहा, ‘‘भारत द्वारा चीन में लंबे समय से प्रचलित नामों को अपने तथाकथित ‘मानक नामों’ से बदलने का प्रयास अवैध और अमान्य है।’’उन्होंने कहा, ‘‘इससे यह तथ्य बिल्कुल नहीं बदलता कि जांगनान क्षेत्र चीन का हिस्सा है।’’चीन तिब्बत को ‘शीजांग’ और अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ कहता है। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बार-बार बदले जाने के जवाब में भारत ने पिछले सप्ताह औपचारिक रूप से राज्य के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किया था। चीन के नागरिक मामलों का मंत्रालय 2017 से समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के लिए चीनी नाम जारी करता रहा है, ताकि उस क्षेत्र पर चीन के दावे को मजबूत किया जा सके। इस वर्ष अप्रैल में भी नामों की एक नयी सूची जारी की गई थी। अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारत ने लगातार ऐसे कदमों को ‘‘निरर्थक और बेतुका’’ बताया है और कहा है कि इस तरह के प्रयास इस ‘‘अटल’’ सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश ‘‘हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 8:14 am

Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट

सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

वेब दुनिया 10 Jan 2025 2:40 pm