आठ राज्यों की संस्कृति संजोए है राष्ट्रपति भवन का आमंत्रण-पत्र:कार्ड में प्रिंट सभी फोटो की है अलग-अलग कहानी, आईए जानते है क्या खास है इस कार्ड में

पाली के डॉ वैभव भंडारी को राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण पत्र मिला है। यह आमंत्रण कई मायनों में खास है। कार्ड न सिर्फ अपनी भव्यता के लिए चर्चा में है, बल्कि इसमें देश की सांस्कृतिक विविधता को बेहद अनोखे अंदाज में दर्शाया गया है। इस आमंत्रण कार्ड में लगे प्रत्येक फोटो की अपनी अलग कहानी है। देश के करीब 8 राज्यों की संस्कृति को तस्वीरों के माध्यम से इस कार्ड में खूबसूरती से उकेरा गया है, जो भारत की एकता और विविधता का संदेश देता है। कार्ड देखने में भी बेहद लाजवाब और कलात्मक है।आमंत्रण पत्र और बॉक्स में बांस आधारित हस्तशिल्प, त्रिपुरा की पारंपरिक बुनाई, हस्तनिर्मित काग़ज़, अष्टकोणीय बांस बुनाई से बनी वॉल हैंगिंग स्क्रोल, तथा सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, नागालैंड, मिज़ोरम और मणिपुर की विशिष्ट हस्तकलाओं को दर्शाया गया है।आइए जानते है कि इस कार्ड में कौनसी तस्वीर क्या कहानी कहती है। पाली से डॉ वैभव भंडारी 26 जनवरी को दिल्ली में लेंगे हिस्साबता दे कि दिव्यांगों के हितों के लिए पिछले कई सालों से काम करने वाले पाली शहर के आदर्श नगर निवासी डॉ वैभव भंडारी को राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिला है। वे 26 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले एट होम स्वागत समारोह में हिस्सा लेंगे। जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आएंगे। निमंत्रण कवर और बॉक्सनिमंत्रण बॉक्स में बॉस की बुनी हुई चटाई का उपयोग किया गया है, जो करघे पर तैयार की गई है। इसके ताने (वार्प) में रंगे हुए सूती धागे और बाने (वेफ़्ट) में बाँस की बारीक पट्टियां इस्तेमाल की गई हैं। यह तकनीक त्रिपुरा राज्य में प्रचलित है। बाहरी कवर पर हाथ से बने कागज के टैग पर आपका पता लिखा है जो बाँस से बनी एक कलाकृति के साथ लगाया गया है। यह कलाकृति बाँस को विशेष तरीके से धुएँ में तपाकर बनाई गई है। इस प्रक्रिया से इस कलाकृति का रंग गहरा भूरा हो जाता है। दीवार की सजावट हेतु स्क्रोलबॉस की अष्टकोणीय बुनाई पैटर्न वाली यह स्क्रोल, खुलने पर, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रत्येक राज्य की हस्तनिर्मित कृतियों का एक कलात्मक प्रदर्शन प्रस्तुत करती है। स्क्रोल की संरचना और तीन रंगों के धागे, कमर-करघे (लॉइन-लूम) के आकार का भी आभास कराते हैं। कमर-करघा बुनाई का एक उपकरण है, जिसका उपयोग भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में, विशेषकर महिलाओं द्वारा, विभिन्न प्रकार के कपड़े बुनने के लिए किया जाता है। बिच्छू बूटी से बुना कपड़ा और कढ़ाई, सिक्किमसिक्किम की विशिष्ट लेपचा बुनाई या 'थारा', परंपरागत रूप से बिच्छू घास (सिसनु) के रेशों से की जाती है। आधुनिक लेपचा बुनाई में बिच्छू घास के साथ सूती और ऊनी धागों का भी उपयोग होता है, जिन्हें कमर-करघे पर बुना जाता है। लेपचा लोक कथा के अनुसार, इस समुदाय का उद्भव कंचनजंघा पर्वत के निर्मल हिम से हुआ था। पर्वतों के साथ उनके पूर्वजों के इस विशेष संबंध, तथा भारत की पहली UNESCO 'मिक्स्ड हेरिटेज साइट', 'कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान' के प्रति, इस कढ़ाई द्वारा सम्मान व्यक्त किया गया है। रित बॉस कला बुनाई, मेघालयमेघालय के ईस्ट खासी हिल्स क्षेत्र में स्थित मौसिनराम पृथ्वी पर सबसे अधिक वर्षा के लिए तो प्रसिद्ध है ही, यहां की बॉस की बुनाई की परंपरा भी अत्यंत विकसित है। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले कच्चे बांस में प्राकृतिक रूप से जलरोधी रेशे होते हैं, जिनमें हल्की हरी चमक बनी रहती है जो अन्य बाँस प्रजातियों से अलग है। स्क्रोल पर हरे बॉस का कोस्टर, यहाँ सामान्य रूप से उपयोग होने वाली वर्षा-ढाल या 'नुप' से प्रेरित है। इसमें बारीक बाँस की दो परतों को षट्कोणीय बुनाई में पिरोया जाता है, जिनके बीच ताड़ के पत्तों की एक परत रखी जाती है। इस तरह, भारी वर्षा से सुरक्षा देने वाला हल्का और टिकाऊ आवरण तैयार होता है। मोन शुगु कागज, अरुणाचल प्रदेशअरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कमेंग जिले में, मोनपा लोग जंगलों में शुगु शेंग झाड़ी की भीतरी छाल इकट्ठा करने जाते हैं। छाल को उबालकर गूंथा जाता है और पल्प में तब्दील किया जाता है, फिर इसे पतला किया जाता है। इस मिश्रण को फ्रेम में डाला जाता है, और सूखने के लिए रखा जाता है, जिससे कागज की परतें बनती हैं। यह कागज बहुत मजबूत होता है, और आसानी से फटता नहीं है। मोन शुगु हस्तनिर्मित कागज का उपयोग ग्रंथों के लेखन, और रोजमर्रा के कार्यों के लिए किया जाता है। स्क्रोल पर, इस बहु प्रयोगी कागज को अरुणाचल प्रदेश के राज्य-पशु 'मिथुन' के विशेष आकार में ढाला गया है। गोगना –बॉस से बना वाद्य यंत्र, असम असम में रोंगाली बिहू (नववर्ष) का स्वागत गोगना की मधुर धुनों के साथ किया जाता है, जिसके साथ ढोल और पेपा भी बजाय जाते हैं। बाँस से बनी यह जॉ-हार्प इन उत्सवों का अभिन्न अंग है। इस वाद्य यंत्र की बनावट वादक के अनुसार कुछ परिवर्तित होती है। पुरुषों की रामधन गोगना छोटी, चौड़ी और भारी होती है; जबकि महिलाओं की लाहोरी गोगना लंबी और पतली होती है, जिसे वे नृत्य के दौरान कभी-कभी बालों में हेयर पिन की तरह लगाती हैं। स्क्रोल में प्रदर्शित बच्चों की गोगना छोटी और हल्की होती है, तथा बजाने में सबसे सरल बॉस और बेंत का आभूषण, त्रिपुरात्रिपुरा में कुशल जनजातीय शिल्पकार बाँस और बेंत की बारीक पट्टियों से उत्कृष्ट आभूषण और सजावटी वस्तुएँ बनाते हैं। इन प्राकृतिक सामग्रियों को आकार देकर और बुनकर हल्के, टिकाऊ तथा आकर्षक रूपों में ढाला जाता है। ये सुंदर वस्तुएँ सरल उपकरणों और चिपकने वाले प्राकृतिक पदार्थों से बनाई जाती हैं। ये शिल्पकारों की कल्पना, दक्षता और कौशल को दर्शाती हैं। ऑरेंज वाइल्ड रिया और बिच्छू घास का कपड़े, नगालैंडनगालैंड की खियामनियुंगन नागा जनजाति द्वारा पहने जाने वाले इस वस्त्र के पीछे धीरे-धीरे विलुप्त होती परंपराओं के पुनर्निर्माण की एक गहरी कहानी है। स्थानीय महिलाएं ऑरेंज वाइल्ड रिया पौधे और बिच्छू घास (जिसे वहाँ 'एहलोन निउ' कहा जाता है) के तनों से प्राप्त रेशों से यह दुर्लभ वस्त्र बनाती हैं। रेशों को जंगलों से इकट्ठा किया जाता है, हाथ से बारीक धागों में अलग किया जाता है, सूत में काता जाता है और हाथ से बुना जाता है। चुनौतियों के बीच जन्मी यह कला, अब परंपराओं और गौरव का प्रतीक बन गई है। स्क्रॉल पर प्रदर्शित नमूना जॉब्स टीयर्स (गवेधुका या एडले मिलेट) पौधे के दानों से सजाया गया है, जिनका उपयोग इस क्षेत्र में आभूषण बनाने के लिए किया जाता है। हाथ से बुना पुआन चेई, मिज़ोरमपुआन चेई एक शॉल अथवा घेरदार स्कर्ट है, जो मिज़ोरम में लोकप्रिय है। 'पुआन' शब्द का प्रयोग, मिज़ो लोगों के परिधान या कपड़ों के लिए किया जाता है; 'पुआन' से जुड़े उपसर्ग या प्रत्यय से उसके उपयोग की जानकारी मिलती है। 'चेई' का अर्थ है 'सजाना'। इसलिए, 'पुआन चेई' उन सजीले परिधानों को कहा जाता है जिन्हें महिलाएं त्योहारों और शादियों जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर पहनती हैं। कपास के बने ये परिधान कमर-करघों पर बुने जाते हैं, और उनमें बारीक डिज़ाइन होती है। काली मिट्टी का लोंगपी शिल्प, मणिपुरबर्तन बनाने की इस प्राचीन तकनीक का उपयोग मणिपुर के तांगखुल नागा समुदाय द्वारा नवपाषाण काल से किया जा रहा है। लोंगपी पहाड़ियों के काले सर्पेन्टाइन पत्थरों के चूर्ण को स्थानीय मिट्टी के साथ मिलाकर बनाया जाना, इन बर्तनों की विशेषता है। इन्हें हाथ से आकार दिया जाता है, भट्टी में तपाया जाता है, और फिर पत्तियों से पॉलिश किया जाता है, जिससे इन्हें प्राकृतिक चमक प्राप्त होती है। स्क्रोल पर लगाई गई काली मिट्टी की कलाकृति, मणिपुर के राज्य-पुष्प 'शिरुई लिली' को दर्शाती है। जाने कौन हैं डॉक्टर वैभव भंडारीडॉ वैभव भंडारी पाली के आदर्श नगर में रहते है। पिछले कई सालों से दिव्यांगों के हितों को लेकर काम कर रहे है। पिता चंद्रभान भंडारी व्यवसायी है और माता शशि भंडारी गृहिणी है। उन्होंने PHD (कानून), MA (मनो विज्ञान), प्रोफेशनल डिप्लोमा इन क्लिनिकल साइकोलॉजी (RCI), MSW, LML, LLB, B.com त की पढ़ाई की है। उनका स्वावलंबन फाउंडेशन आज देश के 25 से अधिक राज्यों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।डॉ. भंडारी के प्रयासों से पाली में बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष केंद्र की स्थापना हुई। अब तक 47,534 से अधिक दिव्यांग जन एवं दुर्लभ रोगी एवं आमजन जागरूकता अभियान के जरिए लाभान्वित। जेनेटिक टेस्टिंग, सरकारी योजनाओं, कानूनी सहायता और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा।डॉ. वैभव भंडारी के प्रयासों से कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लागू हुए, जिनमें प्रमुख हैं- प्रदेश के सभी कॉलेजों में अनिवार्य व्हीलचेयर सुविधा- राजस्थान में मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन कर दिव्यांग अनुकूल परिवहन- रोडवेज में बुकिंग काउंटर से सीधी सीट आवंटन व्यवस्था- सिलिकोसिस मरीजों के लिए प्रत्येक जिले में मासिक शिविर- “दिव्यांग ” शब्द के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द का सरकारी प्रयोग सहकारिता विभाग से आदेश संस्थाओं हेतु ।- बौद्धिक दिव्यांगजनों को मतदान प्रक्रिया में शामिल करने हेतु विशेष निर्देश- ‘इंक्लूसिफिट’ कार्यक्रम के माध्यम से फैशन डिजाइन विद्यार्थियों के साथ मिलकर उन्होंने प्रगतिशील दिव्यांगता, व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं और अधिक सहारे की आवश्यकता वाले व्यक्तियों के लिए सुलभ, आरामदायक और गरिमापूर्ण कपड़े विकसित किए।- दिव्यांग बाल मेला को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज।- मस्कुलर डिस्ट्रॉफी प्रभावित व्यक्तियों के लिए विशेष हल्की इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर पर राष्ट्रीय स्तर का आदेश।- राजस्थान के पहले व्यक्ति जिन्होंने इच्छा मृत्यु पर Living Will बनाई। पुरस्कार और सम्मान- राष्ट्रीय पुरस्कार 2022 — राष्ट्रपति द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ दिव्यांगजन’- हेलेन केलर अवार्ड 2023 — NCPEDP- प्रो. यशवंतराव केलकर राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2023- Rare Star Award 2024 सहित अनेक राज्य व जिला स्तरीय सम्मान

दैनिक भास्कर 18 Jan 2026 2:03 pm

राज्यपाल परनाइक का आह्वान– अरुणाचल के युवा NDA के लिए तैयार हों

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने राज्य के छात्रों से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में शामिल होने के लिए खुद को तैयार करने का आग्रह किया।

देशबन्धु 18 Jan 2026 4:30 am

तवांग की जमी हुई सेला झील पर सेल्फी के चक्कर में टूटी जिंदगी की डोर, केरल के दीनू और महादेव की डूबने से मौत

अरुणाचल प्रदेश के तवांग स्थित सेला झील में केरल के दो पर्यटकों, दीनू और महादेव की डूबने से मौत। जमी हुई झील की कमजोर बर्फ टूटने से हुआ हादसा। प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज कर फोटो खींचने के चक्कर में गई जान। पूरी रिपोर्ट में जानें कैसे एक बचाव प्रयास दुखद हादसे में बदल गया।

प्रातःकाल 17 Jan 2026 12:23 pm

अरुणाचल में किरेन रिजिजू का 'देसी' अंदाज़; पारंपरिक धुन पर थिरके मंत्री, देखें सरोक का उल्हास

अरुणाचल प्रदेश में 'सरोक' उत्सव की धूम: अका (ह्रसो) जनजाति ने प्रकृति की पूजा और पारंपरिक लोक नृत्य के साथ मनाया अपना महापर्व। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बाना में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में शिरकत की और पारंपरिक नृत्य कर संस्कृति के प्रति अपना प्रेम साझा किया। जानिए इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक उत्सव के धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक महत्व की पूरी जानकारी।

प्रातःकाल 16 Jan 2026 3:46 pm

DDU बास्केटबॉल, पहले दिन कोर्ट पर दिखा जलवा:50-04 के स्कोर के साथ संत गहिरा गुरु विवि की धमाकेदार जीत

DDU में चल रहे पूर्वी क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) टूर्नामेंट में खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। पहले दिन कुल चार मैच खेले गए। इनमें कुछ टीमों के बीच कड़ी टक्कर रही, तो कुछ टीमों ने अपने बेहतरीन खेल प्रदर्शन से एकतरफा जीत दर्ज कर ली। शानदार मुकाबला करते हुए कुल आठ टीमें अगले राउंड में पहुंच गईं हैं। पहला मैच संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर और सिक्किम-मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बीच खेला गया। जिसमें संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने सिक्किम-मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को 50-04 के बड़े अंतर से हराया। दूसरा मुकाबला ब्रह्मपुर यूनिवर्सिटी, ओडिशा और रमा देवी वूमेन यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर के बीच खेला गया। जिसमें ब्रह्मपुर यूनिवर्सिटी ने रमा देवी वूमेन यूनिवर्सिटी को 31-25 से हराया । तीसरे मैच में छत्तीसगढ़ की स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी, भिलाई को पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी ने 40-06 से जीत दर्ज की। पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी ने 40-06 से जीत दर्ज की चौथे मैच में जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता और अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, बिलासपुर के बीच हुआ। जिसमें जादवपुर विश्वविद्यालय ने 39-27 से मैच पर कब्जा जमाया। इसके साथ ही विनोबा भावे यूनिवर्सिटी, हजारीबाग, मणिपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ और बर्दवान यूनिवर्सिटी अगले राउंड में पहुंच गई हैं। ऊर्जा के सकारात्मक उपयोग का बेहतर माध्यम खेल इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेल पर काफी जोर है। खेल में महिलाओं की प्रतिभागिता से परिवार समाज व देश मजबूत होता है। खेल ऊर्जा के सकारात्मक उपयोग का बेहतर माध्यम है। प्रोफेसर प्रशांत कुमार दास बने ऑब्जर्वरप्रतिकुलपति प्रोफेसर शांतनु रस्तोगी ने कहा कि जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है प्रतिभागिता। टूर्नामेंट का ऑब्जर्वर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज द्वारा त्रिपुरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रशांत कुमार दास को नियुक्त किया गया है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय को आवंटित इस टूर्नामेंट की शुरुआत झंडारोहण, कैप्टन ओथ सेरेमनी से हुई। इसका विधिवत उद्घाटन दिनांक 16 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज सुबह 9:00 बजे से करेंगे। 26 टीमों ने लिया हिस्सा पूर्वी क्षेत्र के अंतर्गत पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आंशिक मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालय आते हैं। इस टूर्नामेंट में अब तक कुल 22 टीमें आ चुकी हैं, जबकि चार टीमें रास्ते में हैं। ज्यूरी ऑफ अपील मेंबर के अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी टूर्नामेंट में अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी अनंत सिंह, स्कंद राय भी ज्यूरी ऑफ अपील के सदस्य के रूप में सहभागिता कर रहे हैं। इस टूर्नामेंट के चीफ रेफरी वीरेंद्र वीर विक्रम सिंह समेत रोहित शर्मा, सौरभ गुप्ता, एल के बिस्वाल, मनोज दुबे, अफरोज जमाल, राहुल सक्सेना, सोनेंद्र श्रॉतिया, आरसी सिंह, अजीत कुमार तथा वीपी दुबे निर्णायक की भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के क्वालिफाइड नेशनल रेफरी हैं। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार ऐसा आयोजन आयोजन सचिव डॉ राजवीर सिंह ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास में महिला संवर्ग में पहली बार पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय बास्केटबॉल प्रतियोगिता हो रही है। क्रीडा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर विमलेश मिश्र ने कहा कि 14 राज्यों से आई हुई टीमों के लिए हमने सुनिश्चित किया है कि सभी खिलाड़ी अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। इसके लिए खेल के मैदान से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद की गई हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, विद्यार्थियों समेत राज्य युवा कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष डॉ विभ्राट चंद कौशिक आदि उपस्थित रहे.

दैनिक भास्कर 16 Jan 2026 5:56 am

DDU में बास्केटबॉल मुकाबला:CM योगी आज करेंगे उद्घाटन, 14 राज्यों की 31 टीमें लेंगी हिस्सा

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय चल रहे पूर्वी क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) टूर्नामेंट का आज सुबह 9 बजे सीएम योगी आदित्यनाथ औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन 15 से 19 जनवरी तक विश्वविद्यालय के क्रीड़ा परिषद स्थित बास्केटबॉल कोर्ट में किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने गुरुवार को किया। प्रतियोगिता में पूर्वी क्षेत्र के 14 राज्यों की कुल 31 विश्वविद्यालय टीमें प्रतिभाग कर रही हैं। जिसके लिए विभिन्न जगहों से टीमें पहुंच चुकी हैं। पहले दिन बास्केटबॉल कोर्ट में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। प्रोफेसर प्रशांत कुमार दास बने ऑब्जर्वर प्रतिकुलपति प्रोफेसर शांतनु रस्तोगी ने कहा कि जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है प्रतिभागिता। टूर्नामेंट का ऑब्जर्वर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज द्वारा त्रिपुरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रशांत कुमार दास को नियुक्त किया गया है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय को आवंटित इस टूर्नामेंट की शुरुआत झंडारोहण, कैप्टन ओथ सेरेमनी से हुई। इसका विधिवत उद्घाटन दिनांक 16 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज सुबह 9:00 बजे से करेंगे। 26 टीमों ने लिया हिस्सा पूर्वी क्षेत्र के अंतर्गत पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आंशिक मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालय आते हैं। इस टूर्नामेंट में अब तक कुल 22 टीमें आ चुकी हैं, जबकि चार टीमें रास्ते में हैं। ज्यूरी ऑफ अपील मेंबर अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ीटूर्नामेंट में अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी अनंत सिंह, स्कंद राय भी ज्यूरी ऑफ अपील के सदस्य के रूप में सहभागिता कर रहे हैं। इस टूर्नामेंट के चीफ रेफरी वीरेंद्र वीर विक्रम सिंह समेत रोहित शर्मा, सौरभ गुप्ता, एल के बिस्वाल, मनोज दुबे, अफरोज जमाल, राहुल सक्सेना, सोनेंद्र श्रॉतिया, आरसी सिंह, अजीत कुमार तथा वीपी दुबे निर्णायक की भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के क्वालिफाइड नेशनल रेफरी हैं। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार ऐसा आयोजन आयोजन सचिव डॉ राजवीर सिंह ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास में महिला संवर्ग में पहली बार पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय बास्केटबॉल प्रतियोगिता हो रही है। क्रीडा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर विमलेश मिश्र ने कहा कि 14 राज्यों से आई हुई टीमों के लिए हमने सुनिश्चित किया है कि सभी खिलाड़ी अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। इसके लिए खेल के मैदान से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद की गई हैं। गर्ल्स हॉस्टल में रुकेंगी खिलाड़ी क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रो. विमलेश मिश्रा ने बताया महिला खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था और टीम मैनेजर व कोच के लिए गेस्ट हाउस में की गई है। बुधवार शाम सभी टीमों के मैनेजरों की एक आवश्यक समन्वय बैठक आयोजित की गई । 33 मैच में 27 नॉक आउट और 6 फाइनल मैच होंगे क्रीड़ा परिषद के सचिव डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई है। इस दौरान कुल 33 मैच होंगे, 27 नॉक आउट और 6 फाइनल मैच होंगे. कुलपति ने जताया हर्ष इस मौके पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा- विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि हमें पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता के आयोजन का अवसर प्राप्त हुआ है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं न केवल विश्वविद्यालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती हैं, बल्कि छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और टीम भावना जैसे मूल्यों का भी विकास करती हैं। विभिन्न राज्यों की प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस मंच पर एकत्र होकर आपसी समन्वय और साझा सांस्कृतिक चेतना को भी सुदृढ़ करेंगी।

दैनिक भास्कर 16 Jan 2026 5:33 am

पर्वतारोही और साइक्लिस्ट आशा मालवीय का ब्यावर में स्वागत:78वें सेना दिवस पर राष्ट्रीय साइकिलिंग अभियान के तहत पहुंचीं

78वें भारतीय सेना दिवस-2026 के अवसर पर देशव्यापी साइक्लिंग अभियान पर निकलीं राष्ट्रीय स्तर की एथलीट, पर्वतारोही और सोलो साइक्लिस्ट आशा मालवीय का ब्यावर पहुंचने पर जिला प्रशासन ने स्वागत किया। जिला कलेक्टर कम राम मीना ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। इस अवसर पर जिला कलेक्टर मीना ने बताया कि आशा मालवीय दक्षिण पश्चिमी कमान, जयपुर से किबिथू (अरुणाचल प्रदेश) तक लगभग 7,800 किलोमीटर की राष्ट्रीय साइक्लिंग यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य नारी शक्ति, देशभक्ति और अदम्य साहस का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। यह यात्रा उनके अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट संकल्प का उदाहरण है। कलेक्टर मीना ने आशा के साहस एवं समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि वे देश के युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने उनकी आगामी यात्रा के सुरक्षित एवं सफल संचालन की शुभकामनाएं दीं।आशा मालवीय ने इस राष्ट्रीय साइक्लिंग अभियान की शुरुआत 11 जनवरी को जयपुर से की थी। यह अभियान भारत के पश्चिमी छोर से पूर्वी छोर तक आयोजित किया जा रहा है। आशा मालवीय अब तक कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण साइक्लिंग अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं। इनमें असरवाला वॉर मेमोरियल (फाजिल्का) से जयपुर तक 800 किलोमीटर साइकिल रैली, भोपाल-पचमढ़ी सोलो साइकिल अभियान, सैनिकों के साथ, सैनिकों के लिए साइकिल अभियान, 17,500 किलोमीटर का राष्ट्रीय मिशन सशक्त सेना, समृद्ध भारत और 26,000 किलोमीटर का राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण साइकिल अभियान प्रमुख हैं। वे अब तक कुल लगभग 60,000 किलोमीटर की साइकिल यात्राएं पूर्ण कर चुकी हैं।

दैनिक भास्कर 13 Jan 2026 6:11 pm

रेवाड़ी के नरेंद्र फिर करेंगे अमेरिका की माउंट एकांकागुआ फतेह:गणतंत्र दिवस पर फहराएंगे राष्ट्रीय ध्वज, 12 साल में 23 रिकार्ड दर्ज किए अपने नाम

रेवाड़ी के गांव नेहरूगढ़ निवासी पर्वतारोही नरेंद्र यादव एक बार फिर एक रिकार्ड अपने नाम दर्ज करने का तैयार है। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर वह दूसरी बार दक्षिणी अमेरिका की सर्वोच्च चोटी माउंट एकांकागुआ (6,962 मीटर) को फतेह करेंगे। इससे पहले 12 साल में नरेंद्र यादव 23 रिकार्ड अपने नाम दर्ज कर चुके हैं। अन्तर्राष्ट्रीय दल का करेंगे नेतृत्व सेवन समिट्स विजेता नरेंद्र यादव इस अभियान के दौरान पर्वतारोही के अन्तर्राष्ट्रीय दल का नेतृत्व करेंगे। 14 जनवरी 2026 को भारत से अर्जेंटीना के लिए प्रस्थान करेंगे। यह अभियान विश्व के विभिन्न देशों के अनुभवी पर्वतारोहियों की सहभागिता से संपन्न होगा। 26 जनवरी 2026 को एकांकागुआ शिखर पर तिरंगा फहराने का उनका संकल्प भारत की राष्ट्रीय भावना को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करेगा। विश्व की सर्वोच्च चोटियां कर चुके फतेहनरेंद्र यादव सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों पर सफल आरोहण करने वाले भारत के पहले युवा पर्वतारोही हैं। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर दो सफल चढाई की हैं, जिनमें एक चढ़ाई उन्होंने बिना किसी पूर्व अनुकूलन के मात्र छह दिनों में पूरी कर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय को चौंका दिया। दिसंबर 2024 में उन्होंने 30 वर्ष और 10 दिन की आयु में सेवन समिट्स पूर्ण कर भारत के सबसे कम उम्र के पुरुष सेवन समिट्स पर्वतारोही बनकर इतिहास रच दिया।रन फॉर राम और अल्ट्रा मैराथन अभियान चलायानरेंद्र यादव आरएसएस स्वयंस्वेक और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। उन्होंने “रन फॉर राम” नामक एक अनूठा अल्ट्रा मैराथन अभियान शुरू कर राष्ट्र के प्रति अपना समर्पण दिखाया। इसमें अब तक रामेश्वरम, सोमनाथ और बूढ़ा अमरनाथ से अयोध्या तक कुल 6,211 किलोमीटर की दूरी पूरी कर चुके हैं। अभियान में प्रतिदिन औसतन 51 किलोमीटर दौड़ते हैं। जिसे अंतिम चरण की दौड़ परशुराम कुंड (अरुणाचल प्रदेश) से अयोध्या तक वर्ष 2026 में प्रस्तावित है। एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम को पूर्ण करना लक्ष्य नरेंद्र यादव का लक्ष्य एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम को पूर्ण करना है। जिसमें सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों के साथ-साथ उत्तर और दक्षिण ध्रुव तक पहुंचना शामिल है। वह सातों महाद्वीपों के प्रमुख ज्वालामुखी पर्वतों पर आरोहण कर भारत का परचम वैश्विक मंच पर और अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। गणतंत्र दिवस 2026 पर उनका यह अभियान निश्चय ही भारत के गौरव को विश्व की ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

दैनिक भास्कर 13 Jan 2026 2:23 pm

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