सुबह के ठीक 9 बजे हैं। जंगल के पथरीले और उबड़-खाबड़ रास्तों पर हमारे कदम बढ़ते जा रहे हैं। करीब 40 मिनट बाद कुछ घर नजर आने लगे। पास पहुंचे तो एक घर के आंगन में भीड़ लगी दिखी। आंगन के एक ओर महिलाएं चुपचाप बैठी हैं, तो दूसरी ओर मर्द। इनमें से तीन लोग डमरू जैसा एक वाद्य यंत्र और घुंघरू बजा रहे हैं। इनकी धीमी थाप जंगल के इस सन्नाटे को और गहरा कर रही है। तभी हमारी नजर आंगन के बीचोबीच पड़ी। झुलसाने वाली इस उमस और गर्मी के बीच जमीन पर एक शख्स बैठा है। उसे सिर से पैर तक कंबल में इस कदर बांधा गया है कि उसके शरीर का एक भी हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा। अचानक, कंबल में लिपटा वह जिस्म जोर-जोर से हिलने लगा। भीतर से अजीबोगरीब आवाजें आने लगी। आस-पास बैठे लोग टकटकी लगाए उसे देख रहे हैं। वे बातें कर रहे हैं कि अब इस जिस्म में पुरखों की आत्मा आने वाली है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं, केरल के वायनाड के जंगलों में रहने वाली अडिया जनजाति की कहानी, इनकी आबादी करीब 12 हजार है। मेरे साथ हैं अजयन। अजयन, यहीं जंगलों टूरिज्म काम काम करते हैं। वह अडिया जनजाति के रीति-रिवाज और इनकी भाषा समझते हैं। अजयन बताते हैं- ‘यह चेकाड़ी गांव है। यहां अडिया समुदाय की एक रस्म चल रही है, जिसे पैलेय रस्म कहते हैं। इस दौरान पुरखों की आत्मा को बुलाने का दावा किया जाता है।’ कंबल में लिपटा शख्स जोर से हिल रहा है। वाद्य यंत्र की थाप जिस तर तेज-धीमी होती है, उस शख्स के शरीर की हलचल भी उसी रफ्तार से बदल रही है। कई बार तो ऐसा लगा कि वह गिर जाएगा। थोड़ी देर बाद वह भारी आवाज में कुछ बोलता है। उसके पास एक बुजुर्ग बैठे हैं। वह कंबल में बंधे शख्स से अपनी भाषा में कुछ पूछ रहे हैं, जिसका वह जवाब देता है। आस-पास बैठे बाकी लोग भी सवाल पूछते हैं। कंबल में बंधा शख्स, बारी-बारी से सबको जवाब देता है। अजयन बताते हैं- ‘यह रस्म बीती रात से चल रही है। जो वाद्य यंत्र बज रहा है, उसे मुरथम कहते हैं।’ मैंने पूछा- इस रस्म की कोई खास वजह है? अजयन ने बताया- ‘10 दिन पहले इसी घर में 40 साल की एक महिला ने खुदकुशी कर ली थी। उसका नाम चिक्की था। उसने ऐसा क्यों किया? लोग यही सवाल कंबल में हिलते शख्स से पूछ रहे हैं। उनका मानना है कि शख्स में पुरखों की आत्मा आई हुई है और उसे इन बातों की जानकारी है।’ मैंने सवाल किया- क्या मरने के 10 दिन बाद ही आत्मा को बुलाते हैं? अजयन बताते हैं- ‘अडिया लोग मानते हैं कि मौत के बाद 42 दिनों तक घर के आसपास आत्मा रहती है। इस दौरान कभी भी पैलेय रस्म की जा सकती है।’ 'इस रस्म के समय पुरखों की आत्मा से प्रार्थना करते हैं कि वे मृतक की आत्मा को अपने साथ ले जाएं, ताकि वह भटकती न रहे।’ तभी एक लड़का कुछ सामान लाकर कंबल में बंधे शख्स के सामने रखता है। इसमें पानी, पान के पत्ते, सुपारी, दीये की बाती और अगरबत्ती है। इसके बाद, बुजुर्ग बाती और अगरबत्ती जलाते हैं। उसके तुरंत बाद कंबल की गांठ खोल देते हैं। कंबल में पसीने से तर-बतर एक बुजुर्ग निकलता है। वह धोती में है। उसके हाथ में सूप (सूपड़ा) है, जिस पर घुंघरू लगे हैं। इसी शख्स की शरीर में पुरखों की आत्मा आई थी। अब सामने बैठे और वाद्य यंत्र बजा रहे दूसरे बुजुर्ग अगरबत्ती से इस शख्स की आरती उतारते हैं। उसके बाद दोनों आपस में बातें करने लगते हैं। कुछ देर बाद, बगल में बैठा दूसरा बुजुर्ग केले के पत्ते पर जल रही अगरबत्ती को खेत में रखने जाता है। मैंने अजयन से पूछा- कंबल में लिपटे शख्स से बुजुर्ग ने क्या सवाल पूछे? मेरे पूछते ही अजयन सामने बैठे बुजुर्ग की तरफ मुड़ते हैं। दोनों के बीच कुछ देर बातें होती हैं। इसके बाद, अजयन बताते हैं- बुजुर्ग ने आत्माओं से पहला सवाल पूछा कि चिक्की ने खुदकुशी क्यों की? कंबल में बंधे शख्स में आई पुरखों की आत्मा ने क्या जवाब दिया? वह बताते हैं कि आत्माओं ने बताया कि चिक्की पिछले कुछ समय से तनाव में थी। घर वाले बात-बात पर उसे तंग करते थे, इसी कारण उसने खुदकुशी कर ली। अजयन बताते हैं- ‘चिक्की की मौत को 10 दिन हो चुके हैं, लोगों का मानना है कि उसकी आस-पास ही कहीं भटक रही है। अब कुछ दिन बाद फिर यह रस्म होगी।’ बाकी आस-पास बैठे लोगों ने क्या पूछा? बुजुर्ग बताते हैं- किसी ने अपने घर की कलह के बारे में पूछा तो किसी ने अपने बच्चों की बीमारी के बारे में। क्या आत्माओं ने सबके जवाब दिए?, मैंने सवाल किया बुजुर्ग बताते हैं- हां, आत्माओं ने सबको कुछ न कुछ उपाय बताए, लेकिन इस बारे में आपको नहीं बता सकता। नहीं तो उसका असर नहीं होगा। इसके बाद, बुजुर्ग वहां से चले गए। अजयन बताते हैं- ‘अडिया लोगों का मानना है कि पूर्वजों की आत्माएं केवल मृतक की आत्मा को रास्ता दिखाने नहीं आतीं, बल्कि वे अपने लोगों की परेशानियों और भविष्य के संकेतों के बारे में भी बताती हैं।’ ‘अगर किसी परिवार पर कोई संकट हो, घर में परेशानी चल रही हो या गांव पर कोई मुसीबत आने वाली हो, तो लोग पूर्वजों की आत्माओं से उसके बारे में सवाल पूछते हैं। उनसे समस्या का समाधान भी पूछते हैं।’ ‘खेती, बारिश, फसल और गांव के फैसलों तक के बारे में पुरखों की आत्माओं से सलाह ली जाती है। अडिया समुदाय का मानना है कि पुरखे हमेशा अपने लोगों की रक्षा करते हैं।’ क्या किसी भी शख्स के अंदर पुरखों की आत्मा आ जाती है?, मैंने सवाल किया अजयन कहते हैं- ‘ऐसा नहीं है। गांव में कुछ ही बुजुर्ग ऐसे होते हैं, जिनके शरीर में आत्मा आती है। जहां तक बात आत्मा को बुलाने की है, तो इसके लिए मुरथम की थाप जरूरी है। बिना मुरथम के थाप के आत्माएं नहीं आतीं’ 'मुरथम की थाप के बिना आत्माएं क्यों नहीं आती?' अजयन बताते हैं- ‘मुरथम, अडिया लोगों का प्रमुख वाद्य यंत्र है। इसकी खासियत यह है कि हर अवसर के लिए इससे निकलने वाली आवाज अलग-अलग होती है। पुरखों की आत्मा को बुलाने के लिए अलग आवाज, विवाह या मृत्यु के शोक पर अलग आवाज, मुरथम हर बार अलग तरह से बजता है। साथ में घुंघरू भी बजाना जरूरी होता है, क्योंकि इनके बिना कोई भी आयोजन पूरा नहीं माना जाता।’ इसी बीच, अडिया लोग आंगन में खड़े हो जाते हैं। बड़ी तादात में पान के पत्तों पर सुपारी सजाई जा रही है। अब एक लड़का इन पानों को बांटना शुरू करता है। उसके बाद एक दूसरा लड़का ग्लास में सभी को खीर जैसी कोई चीज परोसना शुरू करता है। पूछने पर वे बताते हैं- ‘यह पायसम है। इसे गन्ने के रस में नारियल, ड्रायफ्रूट और चावल मिलाकर बनाया जाता है। यह गाढ़ा और पौष्टिक होता है।’ इसके बाद महिलाओं को भी पान दिया जाता है। अब अजयन मुझे इस परिवार घर के अंदर ले जाते हैं। घर के अंदर चूल्हे पर खाना बन रहा है। दीवारों पर पेंटिंग की गई है। घर के अंदर एक पत्थर रखा है। मैंने पूछा यह पत्थर क्या है? अजयन बताते हैं- यह पत्थर ही इनका मंदिर है। यहां बैठकर अडिया परिवार के लोग अपने पुरखों का याद करते हैं। ये मूर्ति नहीं रखते, न पूजा में कोई सामान इस्तेमाल करते हैं। बस एक पत्थर, जिसे ये अपना रक्षक मानते हैं। यहां महिलाओं के पहनावे में काफी फर्क है। कुछ ने साड़ी के ऊपर ब्लाउज नहीं पहना है, तो कुछ ने पल्लू को ब्लाउज के तौर पर बांधा है। थोड़ी ही देर बाद, एक लड़का हमें खाना खाने के लिए बुलाता है। सभी मर्द कतार में बैठते हैं। महिलाएं पत्तलों में खाना परोसती हैं। खाने में चावल, सब्जी, दाल, रसम, पापड़, छाछ और अचार है। अजयन के साथ मैं भी खाने का स्वाद लेती हूं। कुट्टम त्योहार, पुरखों की आत्मा करती है न्याय खाना खाते-खाते मैंने पूछा- अडिया लोग कोई त्योहार भी मनाते हैं? अजयन बताते हैं- ‘कुट्टम, यहां का प्रमुख त्योहार है। फसलों की कटाई के बाद इस त्योहार को मनाते हैं। इस दौरान सभी लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं। नए धान से भोजन बनाकर पुरखों की आत्माओं को भोग लगाते हैं।’ ‘अडिया लोग मानते हैं कि इस दौरान जब मुरथम और ढोल की थाप गूंजती है, तो अडिया समुदाय के पुजारी के शरीर में पुरखों की आत्माएं उतरती हैं। गांव के आपसी विवाद या पारिवारिक झगड़े उन्हीं के सामने रखे जाते हैं। पुजारी जो भी फैसला सुनाता है, सबको मंजूर होता है।’ बीमारी और बुरी आत्माओं के लिए गाधिका अनुष्ठान अजयन बताते हैं- ‘अडिया समुदाय के लोग गाधिका अनुष्ठान भी करते हैं। इसे बीमारी और बुरी आत्माओं को दूर भगाने के लिए किया जाता है। अनुष्ठान में शामिल पुरुष और महिलाएं तरह सजते-संवरते हैं और गीतों की धुन पर नाचते हैं। अनुष्ठान के पूरा होने से पहले पुजारी बीमार व्यक्ति के पास जाकर मंत्रोच्चार करता है। साथ ही पुरखों से प्रार्थना करता है कि बुरी आत्माओं को गांव से दूर ले जाएं।’ अडिया लोग मंदिर में करते हैं शादी अब हम खाना खा चुके हैं। इसके बाद, अजयन मुझे अडिया लोगों के मंदिर ले जाते हैं। मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है, सिर्फ एक पत्थर है। वे बताते हैं- ‘अडिया लोग इसी मंदिर में शादी करते हैं। शादी से एक रात पहले मंदिर में दो तुलसी की माला रखते हैं। अगले दिन दूल्हा-दुल्हन बुजुर्गों के सामने एक-दूसरे को यह माला पहनाते हैं, और शादी की रस्म पूरी हो जाती है। इसे थापूकोडी कहते हैं। लड़की वाले दहेज में अनाज और नारियल देते हैं।’ शाम के 6 बज चुके हैं। हमें रात होने से पहले चेकाड़ी गांव से वायनाड के लिए निकलना है। जंगल को पैदल पार करने में करीब 40 मिनट लगेंगे। चलते-चलते मैंने अजयन को बताया कि जंगलों में हमें अडिया समुदाय के कुछ लोग दिखे थे। जैसे ही हम उनके पास पहुंचे तो किसी ने हमें दूर ही रुकने को कहा, तो कोई हमें देखते ही भाग गया, ऐसा क्यों? अजयन बताते हैं- ये लोग जल्दी किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं। सरकार ने भी इनसे मिलने पर रोक लगाई है। बहुत मुश्किल से इनसे मिलने की परमिशन मिलती है। मैंने कहा- हां, मुझे भी काफी परेशानी हुई। दो-तीन दिन तक परमिशन नहीं मिली। बाद में वन विभाग के अधिकारियों ने हमारे साथ एक ड्राइवर को जंगल के मुहाने तक भेजा। आगे का रास्ता हमने खुद तय किया। वे बताते हैं- ‘यह जंगल हाथियों के उत्पात के लिए मशहूर है। इसलिए वन विभाग की सख्ती है। रात होते ही यहां से हाथियों के झुंड गुजरने लगते हैं।’ करीब 40 मिनट के बाद हम वहां पहुंच जाते हैं, जहां वन विभाग की गाड़ी खड़ी है। अजयन से विदा लेकर वायनाड की ओर चल देती हूं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए केरल के चोला नाइकन की कहानी…. --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
100 की रफ्तार से आई बस ने 6 कारों को रौंदा, 5 घायल, एक गंभीर, बस के ओवरस्पीड सहित 12 चालान हो चुके
जयपुर-सीकर हाईवे पर शनिवार शाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित काफिले की आवाजाही से पहले रोके गए ट्रैफिक में तेज रफ्तार स्लीपर बस घुस गई। बड़पीपली बस स्टैंड के पास सनसिटी गेट के सामने हुए हादसे में एक के बाद एक छह कारें आपस में भिड़ गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा से अधिक थी। सामने वाहनों की लंबी कतार देखकर चालक नियंत्रण खो बैठा और बस खड़ी कारों में जा घुसी। हादसे में करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए, जिनमें अमन जैन की हालत गंभीर है। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दो कारें डिवाइडर पर चढ़ गईं, जबकि एक कार बस और दूसरी कार के बीच फंस गई। बड़पीपली स्थित निजी गार्डन में भाजपा का दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण शिविर चल रहा था, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी शामिल होने पहुंचे थे। शाम करीब 6:15 बजे मुख्यमंत्री के रवाना होने की तैयारी थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने जयपुर-सीकर हाईवे पर यातायात रोक दिया था, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। इसी दौरान अहमदाबाद से पुष्कर होते हुए खाटूश्यामजी जा रही स्लीपर बस तेज गति से पहुंची और खड़ी कारों को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से कारों के फाटक जाम, चीख-पुकार मची हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई। कई वाहन चालक घायलों की मदद के लिए दौड़े। कुछ कारों में लोग फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने बाहर निकाला। घायल अमन जैन अपनी प|ी प्रियांशी जैन और परिजनों के साथ खाटूश्यामजी जा रहे थे। उनकी कार सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुई। दूसरी कार में सवार ममता चौधरी और प्रेमसुख भी घायल हुए। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के दौरान हरमाड़ा थाने के कांस्टेबल राजेश ने क्षतिग्रस्त कारों के कांच और गेट तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला। सूचना पर एडिशनल डीसीपी पश्चिम राजेश गुप्ता, वैशाली एसीपी अनिल शर्मा, झोटवाड़ा एसीपी आलोक कुमार, हरमाड़ा थानाधिकारी उदय सिंह यादव और ट्रैफिक टीआई मौके पर पहुंचे। 108 एंबुलेंस और 112 टीम ने राहत एवं बचाव कार्य संभाला। बस जब्त, चालक से कर रहे पूछताछ प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अरुणाचल प्रदेश पंजीयन वाली इस बस के खिलाफ पहले भी 12 ट्रैफिक चालान दर्ज हैं, जिनमें 5 लंबित हैं। इनमें ओवरस्पीड सहित अन्य नियम उल्लंघन के मामले शामिल हैं। पुलिस ने बस को जब्त कर चालक से पूछताछ शुरू कर दी है। बस चालक के खिलाफ आक्रोश दुर्घटना के बाद हाईवे पर करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा। पुलिस ने क्रेन से वाहनों को हटवाकर यातायात बहाल कराया। लोगों में बस चालक के खिलाफ नाराजगी रही। कुछ ने बस पर पथराव का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने स्थिति नियंत्रित कर ली। टक्कर मारने वाली बस मुख्यमंत्री के काफिले के लिए सीकर रोड पर रोक रखा था यातायात जवान, 108 एंबुलेंस, 112 टीम ने किए बचाव कार्य हादसे के बाद सिग्नल पर तैनात पुलिसकर्मियों ने क्षतिग्रस्त कारों के कांच और गेट तोड़कर घायलों को निकाला, एक घंटे तक लंबा जाम
कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया निवासी 17 वर्षीय आकाश कुमार ने अरुणाचल प्रदेश की बर्फीली चोटियों पर तिरंगा फहराकर जिले और पूरे झारखंड का मान बढ़ाया है। उन्होंने 17,500 फीट की ऊंचाई पर यह उपलब्धि हासिल की। आकाश ने अरुणाचल प्रदेश के दिरांग स्थित राष्ट्रीय पर्वतारोहण एवं साहसिक खेल संस्थान (NIMAS) से उन्नत पर्वतारोहण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस उपलब्धि के साथ, आकाश कोडरमा जिले के पहले ऐसे एनसीसी कैडेट बन गए हैं, जिन्होंने यह कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। कठोर प्रशिक्षण प्राप्त कियाएनसीसी के एएनओ नीरज कुमार ने बताया कि आकाश ने यह उपलब्धि महज 17 साल की उम्र में हासिल की है। उन्होंने लगभग एक महीने तक अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम और बर्फ से ढके क्षेत्र में रहकर कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान, आकाश चीन सीमा के निकट ऊंचाई वाले इलाकों में रहे, जहां चारों ओर बर्फ ही बर्फ थी। कठिन मौसम और सीमित संसाधनों के बीच, उन्होंने तंबू में रहकर अपना प्रशिक्षण पूरा किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराकर अपने साहस और देशभक्ति का परिचय दिया। परिवार के संपर्क में नहीं रह सके थेऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचार सुविधा सीमित होने के कारण आकाश लंबे समय तक अपने परिवार से संपर्क में नहीं रह सके थे। इसके बावजूद, उन्होंने धैर्य, अनुशासन और इच्छाशक्ति के बल पर यह उपलब्धि हासिल की। इस प्रशिक्षण के लिए पूरे भारत के 20 लाख एनसीसी कैडेट्स में से केवल 8 कैडेटों का चयन किया गया था। इनमें बिहार से दो और झारखंड से केवल आकाश का चयन हुआ था। इन 8 में से केवल 5 कैडेट्स ही 17,450 फीट की ऊंचाई पर पहुंचने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सफल रहे। कोडरमा पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागतइधर, इस उपलब्धि को हासिल करने के बाद आकाश शनिवार को कोडरमा पहुंचे। यहां पहुंचने पर कोडरमा रेलवे स्टेशन पर उनका एनसीसी कैडेट और उनके परिवार वालों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान आकाश की मां ने उनकी आरती उतार कर तथा मस्तक पर तिलक लगाकर बेटे की सफलता पर उसे बधाई दी। वहीं, एनसीसी के कैडेट्स और पदाधिकारियों ने आकाश का फूल माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान आकाश के भाई व परिवार के अन्य सदस्यों ने वहां मौजूद सभी लोगों को मिठाई खिलाकर अपनी अपनी खुशी जाहिर की। कई कठिनाइयों से भी गुजरना पड़ाइस दौरान बातचीत के क्रम में आकाश ने बताया कि यह प्रशिक्षण उनके लिए काफी महत्वपूर्ण था। साथ ही इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने में उन्हें कई कठिनाइयों से भी गुजरना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने अपने गुरुओं द्वारा हासिल मोटिवेशन और माता-पिता के आशीर्वाद से इस मुकाम को हासिल किया। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों, अपने मित्रों और साथ ही साथ अपने एनसीसी कैडेट्स को दिया। उन्होंने बताया कि इस मुकाम को हासिल करने में उनके माता-पिता का विशेष सहयोग रहा है, जिन्होंने सीमित संसाधन के बावजूद इन्हें उनके सपने को पूरा करने में उनकी हर संभव मदद की है। इधर, बेटे की इस सफलता पर उनकी मां भावुक हो उठीं और कहा कि यह हमारे लिए हमें गौरवांवित करने वाला क्षण है। हर मां-बाप का एक ही सपना होता है, उसका बेटा अपने कार्यों से अपने मां-बाप का सिर ऊंचा करें। उन्होंने कहा कि उनके पुत्र ने नाम के अनुरूप कार्य किया है और उसने आकाश की ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि उनका पुत्र भविष्य में और भी ऊंचाइयों को छुए और अपने शहर, जिले, राज्य के साथ-साथ भारत देश का मान बढ़ाएं। बताते चलें कि आकाश के पिता एक पोकलेन चालक है, जो तमिलनाडु में रहकर पोकलेन चलाते हैं। पोकलेन चलाकर वे अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। सीमित संसाधन और एक गरीब परिवार से आने वाले आकाश की उपलब्धि पर पूरा जिला आज गर्व महसूस कर रहा है।
शिवगंज में बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस कमेटी ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कहा कि स्वर्गीय राजीव गांधी आधुनिक भारत के निर्माता थे। उन्होंने देश को सूचना क्रांति के माध्यम से 21वीं सदी की सोच से जोड़ा। लोढ़ा ने बताया कि राजीव गांधी ने सबसे पहले महिला आरक्षण बिल संसद में पेश किया था। इसमें पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। उन्होंने शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 लागू की। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को निखारने और निःशुल्क शिक्षा देने के लिए 'नवोदय स्कूल' की स्थापना की। राजीव गांधी ने 61वें संविधान संशोधन के माध्यम से युवाओं के मताधिकार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी। इस ऐतिहासिक फैसले से करोड़ों युवाओं को लोकतंत्र में सीधी भागीदारी का अवसर मिला। उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था की नींव रखी और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की वकालत की, जिससे ग्रामीण स्तर पर विकास को गति मिली। इसके अतिरिक्त उन्होंने मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया और लाइसेंस राज को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए। लोढ़ा ने कहा कि आज देश को राजीव गांधी जैसे दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, जिन्होंने सदैव लोकतंत्र, भाईचारे और विकास की राजनीति को प्राथमिकता दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से राजीव गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान कांग्रेस पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष वाजिंग राम घांची ने कहा कि कांग्रेस सदैव देशहित और जनहित की राजनीति करती आई है तथा राजीव गांधी का योगदान भारतीय राजनीति में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश मीणा ने युवाओं से संगठन को मजबूत करने एवं कांग्रेस की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।कांग्रेस जिला महासचिव कुशल सिंह देवड़ा ने कहा कि राजीव गांधी ने देश को आधुनिक सोच और नई दिशा देने का कार्य किया। वहीं, जिला एनएसयूआई अध्यक्ष चंपा लाल तिरगर ने कहा कि छात्र एवं युवा वर्ग आज भी राजीव गांधी के विचारों से प्रेरणा ले रहा है।कार्यक्रम में सुरेश सिंह राव, जगवीर सिंह गोहिल, किस्तूर घांची, राजेंद्र सिंह, महेंद्र वाघेला, फूला राम सुथार, पुरुषोत्तम सूथार, दशरथ सिंह, हबीब शेख, राहुल चावरिया, सुमित परमार,महिराज सिंह, कल्पेश, मयंक भाटी आदि के साथ कांग्रेस अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी, पार्षदगण एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

