राष्ट्रीय स्तर की एंड्योरेंस साइक्लिस्ट आशा मालवीय अपने राष्ट्रव्यापी साइक्लिंग अभियान के तहत रामगढ़ पहुंचीं, जहां स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने उनका जोरदार स्वागत किया। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की निवासी आशा महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 7,800 किलोमीटर की लंबी साइक्लिंग यात्रा पर निकली हैं। यह अभियान 78वें भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में 11 जनवरी को जयपुर से शुरू हुआ था। इस यात्रा का लक्ष्य देश के पश्चिमी छोर से पूर्वी सीमा अरुणाचल प्रदेश के कीबिथू तक पहुंचना है। अब तक आशा 5,200 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चुकी हैं। उनका यह सफर लगातार जारी है। पहले भी कर चुकी हैं कई कठिन यात्राएं आशा मालवीय का साइक्लिंग के क्षेत्र में योगदान बेहद प्रेरणादायक रहा है। इससे पहले भी उन्होंने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के संदेश के साथ 26,000 किलोमीटर की अखिल भारतीय साइक्लिंग यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है। इसके अलावा उन्होंने कन्याकुमारी से कारगिल, सियाचिन और उमलिंगला (19,024 फीट) जैसे दुर्गम इलाकों को पार करते हुए दिल्ली और भोपाल तक की कठिन यात्रा भी पूरी की है। मध्य प्रदेश में भी उन्होंने लगभग 4,000 किलोमीटर की साइक्लिंग कर अपनी क्षमता का परिचय दिया है। राष्ट्रीय स्तर की साइक्लिस्ट होने के साथ-साथ आशा 100 और 200 मीटर दौड़ की एथलीट भी रह चुकी हैं। पर्वतारोहण में भी उन्होंने बी.सी. रॉय और तेनजिंग खान जैसे ऊंचे शिखरों पर सफल चढ़ाई कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की है। उनके इस उल्लेखनीय कार्य के लिए उनका नाम नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। सीमित संसाधनों में हासिल की सफलता एक साधारण परिवार से आने वाली आशा मालवीय की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी रही है। उनकी माताजी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद आशा ने अपने हौसले और मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अपनी कमाई से अपनी बहन की शादी भी कराई, जो उनके पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण को दर्शाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद देशभर में साइक्लिंग कर समाज को जागरूक करने का उनका प्रयास लाखों युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। वह चिल्ला रहा था- ‘मैं भारतीय हूं…’ लेकिन भीड़ ने उसकी एक भी नहीं सुनी। सोचा था- मेरा बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनेगा, लेकिन उसकी लाश हवाई जहाज से वापस आई। नीडो बाकी बच्चों जैसा नहीं था। अक्सर मुझसे 5-10 हजार मांगता। मैं पूछती- कहां जाते हैं इतने पैसे? वह हंसकर टाल देता। बाद में पता चला- वह जरूरतमंदों की मदद करता था। दोस्तों की फीस भरता था। मुझे बिना बताए घर के ड्राइवरों को पैसे दे देता था। उसके भीतर इंसानियत भरी थी। वह मेरे पास बैठकर कहता- मम्मी, बड़ा होकर एक ऐसी जगह बनाऊंगा, जहां मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च और मस्जिद- सभी होंगे… और हर कोई वहां आकर एक साथ प्रार्थना कर सकेगा। मैं उसे देखती रह जाती… और सोचती- यह बच्चा आखिर बड़ा होकर क्या बनेगा? नीडो पांच बच्चों में तीसरे नंबर पर था। ईटानगर के छोटे से स्कूल से पढ़कर जब उसे हरियाणा के डीपीएस पानीपत भेज रही थी, तो दिल में डर था… लेकिन एक भरोसा भी था कि- मेरा बेटा कुछ बड़ा करेगा। पानीपत में साइंस की पढ़ाई की। 12वीं के बाद बोला- मम्मी, मैं सोशोलॉजी पढ़ूंगा और विदेश जाऊंगा। मैंने पूछा- क्या बनना चाहते हो? वह बस मुस्कुरा देता। अब समझ आता है- वह कुछ बनना नहीं, कुछ बदलना चाहता था। 12वीं के बाद उसने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। फीस थी 68 हजार रुपए सालाना। लेकिन जब उसकी मार्कशीट देखी गई- तो यूनिवर्सिटी ने कहा- इतना इंटेलिजेंट बच्चा हमारे यहां पढ़ेगा, यही हमारे लिए काफी है। उसने फीस घटाकर 13 हजार कर दी। उस दिन मुझे लगा- मेरा बेटा सच में कुछ अलग है। लेकिन एक डर लगा रहता था। मैंने नस्लवाद झेला था, इसलिए उसे हमेशा समझाती- सावधान रहना, सब जगह लोग एक जैसे नहीं होते, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की- न डीपीएस में, न यूनिवर्सिटी में। छुट्टियों में घर आता तो खाली हाथ नहीं आता। सबके लिए कुछ न कुछ लाता। हमारे घर के ड्राइवर मुस्लिम हैं- ईद पर उनके लिए टोपी लाता। उनके लिए क्रिसमस और न्यू ईयर पर पार्टी करता। वह सबको हंसाता था, घर का माहौल हल्का कर देता था। नीडो मुझे कभी उदास नहीं देख पाता था। जैसे ही चेहरे पर जरा-सी उदासी दिखती, वह तुरंत कोई न कोई मजाक कर देता। एक दिन हंसते-हंसते बोला- मम्मी, मैं दो शादियां करूंगा। मैं चौंकी- क्या? वह हंसकर बोला- ताकि आपको हमेशा खुश रख सकूं… फिर घर में किसी नौकर की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह उसकी बचकानी बातें थीं, लेकिन इरादा सच्चा था- मुझे खुश देखना। कभी-कभी वह किचन में चला जाता, कुछ बनाकर खुद ही चखता और कहता- मम्मी, एक दिन मैं सब संभाल लूंगा। सच कहूं, मुझे उस पर भरोसा था। फिर एक दिन आया, जब सब कुछ बदल गया। उस दिन वह दिल्ली में अपनी बहन के घर था। बैग पैक था, कार नीचे खड़ी थी। वह झुककर जूते के फीते बांध रहा था… तभी फोन बजा। दूसरी तरफ से एक लड़की की घबराई हुई आवाज थी- भैया, मेरे भाई की तबीयत बहुत खराब है। हम लाजपत नगर में, चौथी मंजिल पर हैं… प्लीज आ जाओ। मैं अकेली हूं। नीडो ने एक सेकंड भी नहीं सोचा। ड्राइवर से कहा- रुको, कॉलेज बाद में जाएंगे। उसने तुरंत एंबुलेंस बुलाई और लाजपत नगर के लिए निकल पड़ा। तंग गलियों में वह भटकता रहा- घर मिल नहीं रहा था। फोन कान से लगा था- उधर से जल्दबाजी भरी आवाज आती- जल्दी आओ, हालत और खराब हो रही है… पास में एक मिठाई की दुकान है, वहीं से पता पूछ लो। वह सीधे उसी दुकान पर पहुंचा- अंकल, एक पता पूछना है। दुकानदार ने बिना देखे ही कह दिया- नहीं पता। वह फिर गलियों में भटकने लगा। फोन दोबारा बजा- इस बार आवाज और घबराई हुई थी- भैया, जल्दी आ जाओ। थककर वह उसी मिठाई की दुकान पर वापस लौटकर गया। बोला- अंकल, प्लीज, मेरे दोस्त की जान जा सकती है। दुकानदार भड़क गया- क्या समझता है खुद को? सलमान खान, अक्षय कुमार? बार-बार क्यों आ रहा है? इतना कहकर उसने धक्का दे दिया। बस यहीं से सब बदल गया। नीडो ने पलटकर कुछ नहीं कहा, बस गुस्से में दुकान के काउंटर पर हाथ मार दिया- शीशे में हल्की दरार पड़ गई। अगले ही पल आसपास के दुकानदार जमा हो गए। किसी ने कॉलर पकड़ा, किसी ने मुक्का मारा। वह कुछ कह भी नहीं कह पाया। फिर पुलिस को बुला लिया गया। उधर, लाजपत नगर जाते वक्त उसने मुझे फोन पर बताया था और 10 हजार रुपए मांगे थे। मैंने पैसे भेज दिए थे। वही पैसे उसने पुलिस को दे दिए। पुलिस ने उसमें से 6 हजार दुकानदार को दिए और 4 हजार अपने पास रख लिए। पुलिस उसे अपने साथ ले गई। थाने में बिठाए रखा- चोट लगी थी, फिर भी अस्पताल नहीं ले गई। थोड़ी देर बाद पुलिस फिर उसी दुकान पर लेकर गई- कहा, समझौता करना है। लेकिन वहां फिर भीड़ जुट गई। किसी ने कहा- यही है, शीशा तोड़ने वाला लड़का! और भीड़ ने दोबारा हमला कर दिया। उसे फिर से बेरहमी से पीटा गया। मैं लगातार फोन कर रही थी, लेकिन वह उठा नहीं पा रहा था। जब भीड़ ने छोड़ा, तो उसने कॉल उठाया। आवाज बहुत धीमी थी- सब ठीक है मम्मी… बस हल्की चोट है… दवा ले ली… बाय बाय…, फोन कट गया। शायद उसे खुद भी नहीं पता था- यही उसकी जिंदगी की आखिरी बात होगी। अगले दिन फोन आया। स्क्रीन पर बड़ी बेटी का नाम था। आवाज टूटी हुई थी- मम्मी… नीडो एम्स में है… अब वो… नहीं रहा। बस इतना सुनते ही मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया। बेहोश हो गई। होश आया, तो खुद को अस्पताल में पाया। उधर, बेटे का शव हेलिकॉप्टर से गुवाहाटी लाया गया। हम हेलीकॉप्टर से पहुंचे। ताबूत में उसे देखा, तो लगा- यह वही बच्चा नहीं है, जो हंसते हुए घर से गया था। मेरा शरीर कांप रहा था। हम किसी तरह उसे ईटानगर लेकर आए और अंतिम संस्कार किया। करीब 15 दिन बाद हम 300 लोग इकट्ठा होकर दिल्ली पहुंचे। सड़कें, दफ्तर, कोर्ट- हर जगह एक ही आवाज गूंज रही थी- नीडो के लिए न्याय चाहिए। मैंने जंतर-मंतर पर भाषण दिया। ‘मरीना नीडो स्पीच’ नाम से वह वीडियो यूट्यूब पर है। उस पर दुनिया भर के छात्रों का समर्थन मिला- जापान, अफ्रीका, कश्मीर… हर जगह से हमारे पक्ष में आवाज उठी। लोग लिख रहे थे- आंटी, हम भी यह झेल चुके हैं… पीछे मत हटना, हम आपके साथ हैं। ये पढ़कर मुझे नीडो की वह बात याद आई- मम्मी, मैं बड़ा होकर कुछ ऐसा करूंगा कि दुनिया याद रखेगी। उसने सच में कुछ बड़ा कर दिया था। पूरी दुनिया उसे जान गई थी। बस फर्क इतना था कि वह खुद इसे देखने के लिए जिंदा नहीं था। कुछ दिन बाद लंदन से बीबीसी की टीम आई। कैमरा मेरे सामने था, लेकिन मुझे सिर्फ अपने बेटे का चेहरा दिख रहा था। इस तरह नीडो के जाने के बाद मुझे रोने का वक्त नहीं मिला। मैं उसकी न्याय की लड़ाई में जुट गई। आंसू आते, पर हर बार उन्हें पोंछकर एक नई फाइल उठा लेती। दिल्ली की सड़कें, दफ्तरों के बाहर, कोर्ट के गलियारे- बस कागजों के साथ भटकती रही। सरकार ने वकील दिया, भरोसा भी दिलाया कि दोषियों को सजा मिलेगी। लेकिन हकीकत अलग थी- कार्यवाही धीमी, फाइलें खिसकती रहीं, तारीखें बढ़ती रहीं। हुआ कुछ नहीं। मैंने कई वकील बदले। इस तरह एक वकील जाता, दूसरा आता। करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। आखिरकार मैंने निजी वकील किया। तब केस कुछ आगे खिसका। इस दौरान मामला सीबीआई तक पहुंचा। उम्मीद जगी, लेकिन वहां भी सवाल मेरे बेटे पर ही उठे- कहा गया कि उसके कागज नहीं है, उसका एससी का सर्टिफिकेट नहीं है। तभी सोच लिया- अगर बेटे को इंसाफ नहीं मिल रहा, तो कम से कम उसकी कहानी देश तक पहुंचे। मैंने सरकार को एक मांगपत्र दिया। उसमें मांग थी- दिल्ली के किसी व्यस्त रोड के किनारे नीडो की ऊंची मूर्ति बनाई जाए, जिस पर लिखा हो- उसे सिर्फ अलग दिखने की वजह से मार दिया गया। सिनेमा हॉल में फिल्मों से पहले चेतावनी दिखाई जाए- नॉर्थ-ईस्ट के लोग भी इसी देश के हैं। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी यह संदेश लिखा हो। स्कूल और विश्वविद्यालयों में हमारे कल्चर के बारे में पढ़ाया जाए। कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम चलें। लेकिन आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। खैर उधर, कोर्ट में पहली सुनवाई का दिन आया। कोर्टरूम खचाखच भरा था। विरोधी वकील खड़ा हुआ और बोला कि नीडो ड्रग्स लेता था। बहुत गुस्सैल था। यह सुनते ही मेरा खून खौल गया। खुद को रोक नहीं पाई। कटघरे से निकलकर वकील के पास पहुंची और गिरेबान पकड़ लिया। बोली- मेरे बेटे के बारे में ऐसा मत कहो। कोर्ट में हड़कंप मच गया। वकील मुस्कुराया और बोला- देखिए इन्हें… ऐसा ही इनका बेटा भी गुस्सैल था। तभी जज ने वकील को रोका और कहा- वो मां हैं, उनका गुस्सा स्वाभाविक है। फिर मेरी तरफ देखकर अगली सुनवाई में आने से मुझे रोक दिया। इसके बाद मामला खिंचता रहा- लंबा, थकाने वाला रहा। फिर एक दिन फैसला आया। कोर्टरूम में सन्नाटा था। जज ने दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई। लोग कह रहे थे- न्याय मिला है। लेकिन मैं वहीं खड़ी सोच रही थी- क्या 10 साल एक जिंदगी के बराबर हो सकते हैं? 12 साल बाद मिला यह फैसला… मेरे लिए अब भी अधूरा है। मैं आज भी अपने बेटे के लिए लड़ रही हूं। मेरी मेज पर एक फाइल हमेशा रहती है- जिस पर लिखा है, बेजवाड़ा कमेटी। 2014 में सरकार ने इस मामले की जांच के लिए यह कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी पड़ताल के बाद सिफारिश की थी- नस्लवाद के खिलाफ सख्त कानून बने। नॉर्थ-ईस्ट के लिए पुलिस में अलग सेल हो। नॉर्थ-ईस्ट वालों के लिए हेल्पलाइन शुरू की जाए और लोगों को बताया जाए कि नॉर्थ-ईस्ट भी भारत का हिस्सा है। लेकिन ये सिफारिशें कागजों तक रह गईं। आज 12 साल हो गए, लेकिन नीडो कहीं गया नहीं है। वह किसी न किसी रात, मेरे सपनों में लौट आता है। मैं देखती हूं- वह खड़ा है, बिल्कुल वैसे ही, मासूम सा। सपने में कहता है- मम्मी, टिकट दिलवा दो, मुझे जाना है। मैं नींद में ही उसे रोकना चाहती हूं, कुछ पूछना चाहती हूं, लेकिन वह चला जाता है। जैसे वह पूछ रहा हो- मम्मी आप मेरे लिए कुछ कर क्यों नहीं रही हैं? नींद टूटती है और रात फिर से लंबी हो जाती है। आज भी उसके सारे सर्टिफिकेट मेरे पास हैं- आईडी कार्ड, एटीएम कार्ड, मार्कशीट्स सभी। कभी-कभी मैं उन्हें निकालकर देखती हूं और लगता है, जैसे वह अभी दरवाजे से अंदर आ जाएगा। अभी देहरादून से खबर आई- त्रिपुरा के एंजेल चकमा की हत्या कर दी गई। खबर पढ़ते ही नीडो की याद ताजा हो गई। लगा, जैसे वही सीन फिर सामने है- नीडो भीड़ के बीच चिल्ला रहा है- 'मैं भारतीय हूं…’ और भीड़… बस उसकी शक्ल देख रही है, कुछ सुन नहीं रही। एंजेल की मां के बारे में सोचती हूं- वह भी शायद कहीं बैठी रो रही होगी, बिल्कुल मेरी तरह। कई बार मन हुआ कि त्रिपुरा जाकर उससे मिलूं, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाती। अब तो एंजेल भी सपनों में आने लगा है, जबकि मैंने उसे कभी देखा तक नहीं। नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से बस इतना कहूंगी- मैं यहां तक लड़कर आ गई हूं, अब कोई और आगे बढ़े… वर्ना हमारे साथ यह सब यूं ही होता रहेगा। एंजेल की खबर के बाद मैंने सोशल मीडिया देखना छोड़ दिया है। हर तस्वीर में मुझे अपना नीडो दिखने लगता है। आज नीडो होता, तो 31 साल का होता। शायद उसकी शादी हो चुकी होती, घर में बच्चे खेल रहे होते। वह मेरे पास बैठकर कहता- मम्मी, चिंता मत करो, मैं हूं। लेकिन आंखों के सामने आज भी वही तस्वीर घूमती है- एयरपोर्ट, एक सफेद ताबूत… और उसमें मेरा बेटा। मैंने उसे अपने हाथों से रिसीव किया था, फिर अग्नि दी थी। ईटानगर में हमारे घरों और दफ्तरों में उत्तर भारत के लोग काम करते हैं। हम उन्हें मेहमान मानते हैं, सम्मान देते हैं। लेकिन दिल में एक सवाल अटका जाता है- हमारे साथ ऐसा क्यों नहीं किया जाता? अगर हम भी आपके लोगों के साथ नीडो जैसा सलूक करें तो फिर क्या होगा? हम चाहें तो एक फोन कॉल पर नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं- नागालैंड, गुवाहाटी, सिक्कम… हर जगह से। फिर आपके साथ वही सुलूक होगा, जो हमारे साथ होता है। उन्होंने मेरे बेटे को मारकर हेलिकॉप्टर से भेजा, हम भी चाहें तो ट्रेनों की बोगियों को लाशों से भरकर भेज सकते हैं। तब मेनलैंड इंडिया वालों को समझ नहीं आएगा कि अचानक क्या हो गया। इसलिए नस्लवाद के खिलाफ सख्त कानून बने। इसे नहीं रोका गया, तो मेरी तरह जख्म खाया कोई और भी एक दिन खड़ा हो जाएगा। मैं ये बातें बोलना नहीं चाहती। लेकिन नीडो को याद में गुस्सा आ जाता है। हमारे बच्चे दिल्ली में फ्री में नहीं पढ़ने जाते। वे किराया देते हैं, फीस भरते हैं। हमारे यहां यूपीएससी की कोचिंग नहीं, इसलिए हम उन्हें बाहर भेजते हैं- पढ़ने के लिए, जीने के लिए… मरने के लिए नहीं। हमारी आंखें और चेहरा अलग हैं- इसे हमने नहीं, भगवान ने बनाया है। भगवान से पूछिए, उसने हमें अलग क्यों बनाया है। अगर आप चाहते हैं सब एक जैसे दिखें, तो सरकार से कहिए- सभी कपड़ा फैक्ट्रियां सिर्फ साड़ियां बनाएं, पूरे देश में सिर्फ गेहूं उगाया जाए। फिर सब एक जैसा पहनें, एक जैसा खाएं। तब शायद हम भी आपके जैसे दिखने लगें। लेकिन क्या सच में ऐसा संभव है, तब भी हमारा चेहरा नहीं बदलेगा? (मरीना नीडो ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) -------------------------------------------------- 1- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-तीरंदाज बेटी मरी तो MBBS बेटे को खिलाड़ी बनाया:जब डॉक्टर बेटा भी नहीं रहा तो 55 की उम्र में बेटी पैदाकर बनाया तीरंदाज मेरी कहानी एक साधारण स्पोर्ट्स कोच की नहीं, उस पिता की है, जिसने अपने दोनों अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बच्चों को खो दिया… लेकिन खेल और सपने को मरने नहीं दिया। 2004 में नेशनल चैंपियन तीरंदाज बेटी वोल्गा एक सड़क हादसे में चली गई। अकादमी बंद हो गई। परिवार बिखरने लगा। उसके बाद बेटे लेनिन ने MBBS छोड़ धनुष उठा लिया- अपने लिए नहीं, मेरे और अपनी बहन के अधूरे सपने के लिए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की कुश्ती प्रतियोगिता सरगुजा में शुरू हो गई है। इसमें पुरुष और महिला वर्ग के 144 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। यह प्रतियोगिता गांधी स्टेडियम में सुबह 8 बजे शुरू हुई। कुश्ती के मुकाबले 31 मार्च तक होंगे। प्रतिदिन तीन चरणों में कुश्ती प्रतियोगिता होगी। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में जम्मू-कश्मीर, मध्यप्रदेश, झारखंड, असम, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, गुजरात, ओडिशा, मिजोरम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मेजबान छत्तीसगढ़ सहित कुल 144 रेसलर्स (पुरुष और महिला) हिस्सा लेने पहुंचे हैं। अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में यह प्रतियोगिता आयोजित की गई है। डीडी स्पोर्ट्स पर लाइव प्रसारणइस भव्य आयोजन को भारत के जनजातीय खेल, छत्तीसगढ़ मा सुंदर मेल की प्रेरणादायी टैगलाइन के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। इस आयोजन का सीधा प्रसारण डीडी स्पोर्ट्स और प्रसार भारती पर किया जा रहा है। जिससे लोग घर बैठे इसे देख सकते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भी मैचों का प्रसारण किया जा रहा है। पहले दिन एक खिलाड़ी घायल, हॉस्पिटल में भर्ती प्रतियोगिता के पहले दिन मैच के दौरान तेलंगाना का खिलाड़ी घायल हो गया। उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। गांधी स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए मेडिकल टीम और एम्बुलेंस तैनात है। किसी खिलाड़ी को ज्यादा चोट आने पर उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल भेजा जाएगा।
देश के अलग-अलग हिस्सों में बदलते मौसम का असर जनजीवन पर दिखाई दे रहा है। उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी है। मैदानी राज्यों राजस्थान और मध्यप्रदेश में बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है, जबकि उत्तरप्रदेश और हरियाणा में आंधी, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। मध्य प्रदेश में सतना के चित्रकूट में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। चित्रकूट में रामनवमी का कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने राज्य के 20 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट जारी किया है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को लखनऊ, कानपुर समेत 10 जिलों में रुक-रुक कर बारिश हुई। हरदोई में आकाशीय बिजली गिरने से किसान की मौत हो गई। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 5 दिनों तक मौसम ऐसे ही रहेगा। कहीं-कहीं ओले गिर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-लेह हाईवे पर एवलांच से बड़ा हादसा हुआ, जिसमें कई गाड़ियां बर्फ में दब गईं और 7 लोगों की जान चली गई। अगले दो दिन मौसम का हाल 29 मार्च- अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में तेज बारिश की आशंका है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में हल्की बारिश की संभावना। 30 मार्च- पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में हल्की बारिश की संभावना है।
इंदौर में नौकरी और निवेश के नाम पर ठगी:50 लाख जमा करने पर दिया दो करोड़ रुपए देने का झांसा
इंदौर के एरोड्रम इलाके में ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने पहले निवेश और फिर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की वारदात को अंजाम दिया। हालांकि, मामले की जानकारी साइबर पुलिस को दी गई। इसके बाद जांच एरोड्रम पुलिस को सौंपी गई है। 25 लाख रुपए की और मांग की एरोड्रम पुलिस ने कमलेश वैष्णव की शिकायत पर करीब आधा दर्जन से अधिक अकाउंट होल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज की है। कमलेश ने बताया कि जून 2024 में फेसबुक के माध्यम से मुंबई, पुणे और चेन्नई की कंपनियों में निवेश का ऑफर आया। जिसमें 50 लाख रुपए जमा करने पर दो करोड़ रुपए देने की बात कही गई। इसमें अनिका और एलिना के अकाउंट में करीब 11 और 12 लाख रुपए जमा कराए गए। इसके बाद 25 लाख रुपए की और मांग की गई, लेकिन रुपए नहीं होने पर मार्च 2025 तक का समय दिया गया। इसके बाद सोफी अन्ना नाम की युवती ने फेसबुक पर संपर्क किया, जिसमें अरुणाचल प्रदेश की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी से पाउडर सैंपल ब्रिटेन भेजने की बात कही गई। इसमें 3 लाख 37 हजार रुपए जमा कराए गए, जिसे ब्रिटेन की कंपनी ने 8 लाख रुपए में खरीदने की बात कही। इसके बाद ब्रिटेन की कंपनी में विलियम नाम के डॉक्टर ने 5 किलो से कम सैंपल खरीदने की बात कही, जिसमें और निवेश करने के लिए कहा गया। रुपये नहीं होने पर कमलेश ने इनकार कर दिया। अच्छी नौकरी का ऑफर देने की भी बात कही तीसरी बार अंबानी फाउंडेशन के पेज की तरफ से संपर्क किया गया, जिसमें 5 लाख रुपए के निवेश पर 25 लाख रुपए का लाभ देने की बात कही गई। इसमें किरण सिंह, संगीता सिंह सहित अन्य लोगों के अकाउंट में करीब 4 लाख रुपए ट्रांसफर कराए गए। उन्होंने अच्छी नौकरी का ऑफर देने की भी बात कही। कमलेश ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि इतने रुपये निवेश करने के चलते उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। जब उसने नौकरी की तलाश की, तब ठगों ने अमेरिका की एक कंपनी में नौकरी के नाम पर भी हजारों रुपए अकाउंट में जमा कराए। बाद में जब अमेरिका की कंपनी की जानकारी निकाली गई तो वह फर्जी निकली। इसके बावजूद नौकरी नहीं मिली। अंततः ठगी का पता चलने पर साइबर सेल में शिकायत की गई।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तीसरे दिन कर्नाटक के एथलीट्स ने स्विमिंग इवेंट में कमाल का प्रदर्शन किया। कर्नाटक अब 13 स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला राज्य बन गया है। इसमें मणिकांता एल का कमाल रहा, जिन्होंने अकेले 8 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। तीसरे दिन कर्नाटक ने दो और स्वर्ण व एक रजत पदक जीते। अब उसके कुल 13 स्वर्ण, 5 रजत और 1 कांस्य हो गए हैं। ओडिशा 6 स्वर्ण, 2 रजत और 9 कांस्य के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि असम 8 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है। मेजबान छत्तीसगढ़ ने तीसरे दिन अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। अनुष्का भगत ने महिलाओं की 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में रजत पदक जीता, जबकि निखिल जाल्को (50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक) और न्यासा पैकरा (100 मीटर बटरफ्लाई) को कांस्य पदक मिला। छत्तीसगढ़ अब 6 पदकों (3 रजत, 3 कांस्य) के साथ त्रिपुरा के साथ संयुक्त सातवें स्थान पर है। महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश ने खोला स्वर्ण खाता तीसरे दिन महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश ने भी अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। महाराष्ट्र की तन्वी धुर्वे ने महिलाओं की 100 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा। वे कर्नाटक या ओडिशा के बाहर इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली तैराक बनीं। अरुणाचल प्रदेश की अनाई वांगसू ने महिलाओं के 58 किग्रा वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। तैराकी के प्रमुख नतीजे (तीसरा दिन) महिला: 100 मीटर बटरफ्लाई: स्वर्ण - तन्वी धुर्वे (महाराष्ट्र), रजत - सृष्टि वर्मा (मध्य प्रदेश), कांस्य - न्यासा पैकरा (छत्तीसगढ़) 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक: स्वर्ण - मेघांजलि (कर्नाटक), रजत - अनुश्का भगत (छत्तीसगढ़) 50 मीटर फ्रीस्टाइल: स्वर्ण - मेघांजलि (कर्नाटक) पुरुष: 100 मीटर बटरफ्लाई: स्वर्ण - मणिकांता एल (कर्नाटक) 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक: स्वर्ण - मणिकांता एल (कर्नाटक), कांस्य - निखिल जाल्को (छत्तीसगढ़) 50 मीटर फ्रीस्टाइल: स्वर्ण - धूनीश एन (कर्नाटक), रजत - मणिकांता एल (कर्नाटक) वेटलिफ्टिंग में अरुणाचल और ओडिशा का जलवा महिलाओं के 58 किग्रा: स्वर्ण - अनाई वांगसू (अरुणाचल प्रदेश) महिलाओं के 63 किग्रा: स्वर्ण - बिदु स्मिता भोई (ओडिशा) पुरुषों के 79 किग्रा: स्वर्ण - रिचिन चोंगरुजू (अरुणाचल प्रदेश) मोनिका सोनोवाल जैसी युवा प्रतिभाओं के साथ ट्राइबल गेम्स में प्रतिभाओं का उजागर होना जारी है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3800 खिलाड़ी 9 खेलों में भाग ले रहे हैं।
प्रदेश में दौड़ रहीं 10 हजार बसें बाहर रजिस्टर्ड, अब यहीं जरूरी
ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाहनों को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की नई गाइडलाइन से राजस्थान में बस ऑपरेटरों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। क्योंकि नए नियमों के तहत अब दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड होकर राजस्थान में चल रही बसों को यहीं पंजीकरण कराना होगा। इससे प्रदेश में संचालित करीब 10 हजार प्राइवेट बसें सीधे तौर पर प्रभावित होंगी। मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन 1 अप्रैल से लागू होगी और यह उन सभी वाहनों पर लागू होगी, जो नया परमिट लेंगे या पुराने परमिट का रिन्यूअल कराएंगे। नए प्रावधानों के अनुसार अब परमिट उसी राज्य से जारी होगा, जहां वाहन का रजिस्ट्रेशन है और वाहन मालिक रहता या व्यवसाय करता है। दरअसल अब तक बड़ी संख्या में बस ऑपरेटर टैक्स बचाने के लिए अपने वाहनों को मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में रजिस्टर कराकर राजस्थान में संचालन कर रहे थे। लेकिन नए नियमों के बाद यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी और सभी बसों को राजस्थान में पुनः पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। नई गाइडलाइन में तकनीकी निगरानी को भी सख्त किया गया है। सभी टूरिस्ट बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा, जिससे उनकी मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही ऑपरेटर को यात्रा के दौरान यात्रियों की पूरी सूची और तय रूट की जानकारी रखना जरूरी होगा। नियमों के तहत अब बीच रास्ते में सवारी बैठाने या उतारने पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इससे टूरिस्ट परमिट के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई है। इसके अलावा, जिन वाहनों पर टोल टैक्स बकाया है या 45 दिन से अधिक पुराने चालान लंबित हैं, उनका परमिट जारी या नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘नेशनल ट्राइबल गेम्स- 2026’ का आगाज आज से होने जा रहा है। देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से खिलाड़ी रायपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के साथ राज्य के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। यह प्रतियोगिता 3 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें कुल सात खेलों का आयोजन किया जाएगा। डे-वन का पूरा शेड्यूल (रायपुर) स्विमिंग (इंटरनेशनल स्विमिंग पूल) सुबह 9:00 बजे से पुरुष-महिला वर्ग में 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक, 50 मीटर बटरफ्लाई और 200 मीटर फ्रीस्टाइल की हीट्स होंगी। दोपहर 4:30 बजे से फाइनल मुकाबले – 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई। वेटलिफ्टिंग दोपहर 2:00 बजे ज्यूरी और टेक्निकल ऑफिशियल्स की मीटिंग होगी। हॉकी सुबह 11:00 बजे टीम मैनेजर्स की मीटिंग (सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम)। फुटबॉल (महिला वर्ग) सुबह 7:30 बजे – ग्रुप ए: तमिलनाडु बनाम गुजरात। दोपहर 4:00 बजे – ग्रुप बी:सिक्किम बनाम झारखंड,आंध्र प्रदेश बनाम छत्तीसगढ़,असम बनाम अरुणाचल प्रदेश देखिए पहले ये तस्वीरें- प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल तय जानकारी के मुताबिक, कुश्ती प्रतियोगिता अंबिकापुर में आयोजित होगी। एथलेटिक्स का आयोजन जगदलपुर में किया जाएगा। अंबिकापुर में ही मलखंब प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। छत्तीसगढ़ के 180 खिलाड़ी लेंगे भाग इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के लगभग 180 खिलाड़ी भी हिस्सा लेने जा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने और उनके खेल को करीब से देखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके प्रदर्शन और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कुल मिलाकर यह आयोजन छत्तीसगढ़ के खेल और खिलाड़ियों दोनों के लिए नई ऊर्जा और नई दिशा देने वाला साबित होगा। इसे राज्य के लिए एक सौभाग्यपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मांडविया बोले- आदिवासी बच्चों को मिलेगा बड़ा फायदा केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” विजन का हिस्सा है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मांडविया ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिभाओं को सामने लाना बेहद जरूरी है। सरकार का फोकस है कि प्रतिभाओं की जल्दी पहचान हो, उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण मिले और राष्ट्रीय खेल ढांचे में शामिल किया जाए। 23 दिसंबर को लोगो हुआ और मैस्कॉट हुआ लॉन्च बतादें कि 23 दिसंबर को बिलासपुर के दिवंगत बी.आर. यादव स्पोर्ट्स स्टेडियम में इन खेलों का लोगो, थीम सॉन्ग और मैस्कॉट ‘मोरवीर’ लॉन्च किया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी मौजूद रहे।
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

