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आज का एक्सप्लेनर:-45 डिग्री में चीनी सैनिकों के सामने खड़े 'शौर्य कमांडो' कौन, ITBP तादाद बढ़ा रहा; क्या चीन अरुणाचल प्रदेश को घेर रहा

चीनी सीमा की निगरानी करने वाली ITBP के चीफ शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को कहा- ‘हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में कई जगह फेस-ऑफ हुआ, जो अभी भी चल रहा है। वहां हमारी नई शौर्य कमांडो टीमों ने बेहतरीन काम किया।’ आखिर चीनी सैनिकों से टक्कर लेने वाले शौर्य कमांडो कौन हैं, क्या अरुणाचल प्रदेश में चीन कोई नई मुसीबत पैदा कर रहा और भारत कैसे निपटेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: शौर्य कमांडो कौन हैं?जवाब: 'शौर्य कमांडो' चीनी सीमा की सिक्योरिटी संभालने वाली इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, यानी ITBP की स्पेशल कॉम्बैट यूनिट हैं। दरअसल, 1962 में 20 अक्टूबर को भारत-चीन जंग शुरू होने के 4 दिन बाद ITBP का गठन हुआ था। इसका काम ऊंचे बर्फीले इलाके में खुफिया जानकारी जुटाना और जरूरत पड़ने पर गुरिल्ला वॉरफेयर, यानी दुश्मन की टुकड़ी पर छापामार तरीके से हमला करना था। 2004 से भारत-चीन के बीच पूरी 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा, यानी LAC की सुरक्षा की जिम्मेदारी ITBP को सौंप दी गई है। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भी ITBP ही सीमा की निगरानी करती है। फिलहाल ITBP में करीब एक लाख सैनिक हैं। जून 2020 में भारत-चीन की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में झड़प हुई। 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। उसके बाद चीन सीमा पर आमने-सामने की मुठभेड़ का खतरा बना रहा। ITBP को लगा कि सीमा पर नियमित गश्त देने वाली बटालियन काफी नहीं होगी। ऊंचाई पर चीनी सेना के मुकाबले एक खास तरह से प्रशिक्षित दस्ते की जरूरत है। ITBP ने बर्फीले इलाकों की भयंकर ठंड में काम कर सकने वाले चुस्त-दुरुस्त जवानों को छांटकर उनको खास ट्रेनिंग दी। इन जवानों की यूनिट को नाम मिला- शौर्य कमांडोज। फिलहाल ITBP की हर बटालियन में एक शौर्य टीम तैनात है। दो और टीमें बनाई जा रही हैं। ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के मुताबिक, ‘जल्द ही हमारे पास शौर्य कमांडो की एक पूरी बटालियन होगी। ऑपरेशन विंग इस पर काम कर रहा है। ये यूनिट ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में मोर्चा संभालेगी।’ सवाल-2: ITBP के शौर्य कमांडो आर्मी की ‘घातक प्लाटून’ से कैसे अलग हैं?जवाबः भारतीय सेना में 'घातक प्लाटून' नाम की एक एलीट फोर्स यूनिट होती है। इसी तर्ज पर ITBP में शौर्य कमांडो तैयार किए जा रहे हैं। घातक प्लाटून के एक दस्ते में करीब 20 जवान होते हैं। इन्हें करीब डेढ़ महीने तक कर्नाटक के बेलगावी में कमांडो ट्रेनिंग स्कूल भेजा जाता है। फिर ऊंचाई के इलाकों में वॉरफेयर के लिए जम्मू-कश्मीर के हाई-एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल, HAWS और आतंकी इलाकों या जंगल में सैन्य अभियान चलाने के लिए सिक्किम के काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वॉरफेयर स्कूल, CIJWS में ट्रेनिंग दी जाती है। ‘घातक प्लाटून’ का काम मैदानी या बर्फीले, किसी भी तरह के इलाके में सैन्य मोर्चे पर सबसे आगे रहना और दुश्मन की टोह लेकर उस पर हमला करना है। वहीं शौर्य कमांडो का काम खास तौर पर बेहद ठंडे इलाकों में सैन्य अभियान के दौरान आगे मोर्चा संभालना और डिफेंसिव तरीके से जवाब देना है। शौर्य कमांडो 3 खास तरह के कामों के लिए तैयार किए गए हैं… 1. बर्फीले इलाकों में तैनाती, मुश्किल हालात में सैन्य मोर्चा संभालना 2. आमने-सामने की झड़प या हाथापाई जैसी स्थिति से निपटना 3. ड्रोन जैसे मॉडर्न हथियारों का इस्तेमाल सवाल-3: तो क्या वाकई चीन अरुणाचल प्रदेश को घेरने की कोशिश कर रहा?जवाब: चीन अरुणाचल प्रदेश के इलाके पर अपना दावा करता है और इसको दक्षिणी तिब्बत या जांगनान कहता है। पिछले दिनों इस इलाके में 3 तरह की हरकतें रिपोर्ट की गई हैं… 1. भारतीय इलाके में टेंट लगाए, चौकियों पर कब्जे की कोशिश 2. सीमाई इलाकों में मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर, हैलीपैड बना रहा 3. भारतीय इलाकों के नाम बदले, लोगों का जाना मुश्किल हो रहा हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर को कहा, ‘LAC पर समय-समय पर हालात तब बिगड़ते हैं, जब चीनी सेना गश्त के तय तौर-तरीकों से हटकर काम करती है। दोनों पक्ष बॉर्डर मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए LAC की समझ बढ़ाने पर बातचीत करने को राजी हैं।’ सवाल-4: चीन से निपटने के लिए भारत को किन तैयारियों की जरूरत?जवाब: ITBP के DG शत्रुजीत कपूर ने मोटे तौर पर 4 जरूरतें बताईं… स्पेशल फोर्स: आज के समय में हमें गुरिल्ला युद्ध की जरूरत नहीं है। एक स्पेशलाइज्ड हाई-एल्टीट्यूड माउंटेन फाइटिंग फोर्स तैयार की जा रही है, जो सेना से अलग होगी। मॉडर्न वेपन: 50 साल से ज्यादा उम्र के ITBP जवान जानते हैं कि वे उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उनके फोर्स में शामिल होते वक्त थे। हथियारों में कुछ बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन काफी हद तक एक जैसे ही हैं। मॉडर्नाइजेशन जरूरी है और हमने इसके लिए बड़े प्रावधान किए हैं। अंडरग्राउंड शेल्टर: नए तरीके की जंग में जमीन पर किसी को भी आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। तेजी से बदलते जंग के हालात में बड़े पैमाने पर अंडरग्राउंड शेल्टर बनाने की जरूरत है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत ITBP की कंपनियों ने अपनी सीमा चौकियों पर अंडरग्राउंड ढांचे बनाना शुरू कर दिया है। ड्रोन वॉरफेयर: यूक्रेन ने रूस जैसी सुपरपावर को चुनौती दी। 10-15 हजार रूसी सैनिक मारे जा रहे हैं। ईरान ने भी ड्रोन से अमेरिका को चुनौती दी। हमें ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की दिशा में बढ़ना होगा। हमने 4 हजार करोड़ रुपए की योजना में 1 हजार करोड़ रुपए ड्रोन के लिए रखे हैं। ***** ये खबर भी पढ़ें… भारतीय जगहों के नाम क्यों बदल रहा है चीन:25 साल बाद की प्लानिंग; इस स्ट्रैटजी से पहले भी जमीनें हड़प चुका 'जेंगनेन (अरुणाचल प्रदेश) चीन की टेरिटरी का हिस्सा है।' चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को ये बड़ा दावा कर दिया। इससे पहले चीन ने अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों के नाम बदलने की लिस्ट जारी की थी। 2017 के बाद चीन की तरफ से इस तरह की ये तीसरी लिस्ट है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 24 Oct 2026 6:37 pm

Arunachal Pradesh में 'सियांग महा-परियोजना' के खिलाफ उग्र विरोध: पुलिस-प्रदर्शनकारी झड़प में 4 महिलाएं घायल, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग, सीएम खांडू ने की शांति की अपील

अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (SUMP) को लेकर तनाव काफी बढ़ गया है। 23 अक्टूबर को परियोजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस बलों के बीच हुई हिंसक झड़प में कम से कम चार महिलाएं घायल हो गईं। स्थिति को बेकाबू होते देख भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह घटना सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों के विभिन्न हिस्सों में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान घटी। प्रभावित इलाकों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। यह टकराव सियांग जिले के गेकू के पास 'डाइट-डाइम' (Dite-Dime) में हुआ, जहां बंद के समर्थन में लगभग 150-200 प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया। सियांग के पुलिस अधीक्षक (SP) कामदाम सिखोम ने बताया कि अपर सियांग जिले के गेकू और कोमकार इलाकों से आए प्रदर्शनकारी सुबह करीब 7 बजे घटनास्थल पर जमा हुए थे। उन्होंने कहा कि भीड़ ने बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की और निषेधाज्ञा (prohibitory orders) का उल्लंघन किया, जिसके बाद एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट (executive magistrate) की मौजूदगी में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि चार महिलाएं घायल हुई हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई लोगों को आंसू गैस के गोले लगे, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई। इस बंद के कारण प्रभावित इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा; दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और लोग ज्यादातर अपने घरों के अंदर ही रहे। अधिकारियों ने बताया कि सियांग और अपर सियांग जिलों के बाकी हिस्सों में बंद शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों ने कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की यह बंद संयुक्त रूप से 'आदि बाने केबांग यूनाइटेड', 'SUMP अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन', 'सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम यूथ विंग' और 'आदि गैलो वेलफेयर सोसाइटी' द्वारा बुलाया गया था। इन संगठनों ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित 'गांव बुरा' (गांव के मुखिया) को बहाल करने, परियोजना के लिए चल रही शुरुआती गतिविधियों (pre-feasibility activities) को रोकने और इलाके में तैनात अर्धसैनिक बलों व केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाने की मांग की है। जिन कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की गई है, उनकी संख्या के बारे में अलग-अलग जानकारी मिल रही है। विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने स्थानीय समुदायों, जमीन, आजीविका और पर्यावरण पर इस परियोजना के पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने लोगों से परियोजना के मूल्यांकन में सहयोग करने की अपील की विरोध प्रदर्शनों के बीच, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने निवासियों से आग्रह किया कि वे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) द्वारा परियोजना की 'प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट' (PFR) तैयार करने के काम में सहयोग करें। खांडू ने सियांग क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे हिंसा का सहारा लेने के बजाय राज्य सरकार और उसके नेतृत्व से जानकारी मांगें। सरकार ने इस परियोजना को एक रणनीतिक पहल बताया है, जिसका उद्देश्य सियांग बेसिन में पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद करना है। सरकार ने इस परियोजना के रणनीतिक महत्व को तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित मेगा जलविद्युत परियोजना से भी जोड़ा है। प्रस्तावित परियोजना की क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट होने की बात कही गई है, हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 11,500 मेगावाट बताया गया है। कांग्रेस ने सर्वेक्षण रोकने की मांग की पूर्व सांसद ताकम संजॉय के नेतृत्व वाली अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने इस प्रस्तावित परियोजना का विरोध किया है और 'प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट' के लिए किए जा रहे फील्ड सर्वेक्षणों को अस्थायी रूप से रोकने की मांग की है। पार्टी ने प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षा बलों को हटाने, हिरासत में लिए गए 'आदि' (Adi) समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ताओं को रिहा करने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने, और परियोजना का विरोध करने वाले ग्राम प्रमुखों तथा सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस ने 350 करोड़ रुपये के प्रस्तावित 'विशेष विकास पैकेज' पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का तर्क है कि विकास कार्यों का उद्देश्य प्रभावित समुदायों का भरोसा जीतना होना चाहिए, न कि परियोजना के लिए उनकी सहमति हासिल करना। चीन की जलविद्युत योजनाओं को लेकर जताई गई चिंताओं को स्वीकार करते हुए भी, पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर स्थानीय लोगों से परामर्श करने और उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। इन अलग-अलग दृष्टिकोणों ने प्रस्तावित परियोजना को लेकर बहस तेज कर दी है। जहां सरकार इसके रणनीतिक महत्व पर जोर दे रही है, वहीं विरोध करने वाले पक्ष व्यापक परामर्श, स्थानीय हितों की सुरक्षा और परियोजना की तैयारी से जुड़े कार्यों को रोकने की मांग कर रहे हैं। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 24 Oct 2026 12:03 pm

India-China Arunachal Pradesh Border Standoff | अरुणाचल के असाफिला और लोंगजू में बनी हुई है संवेदनशीलता, लेकिन नियंत्रण में है स्थिति, सैन्य और कूटनीतिक तंत्र सक्रिय

अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग सर्कल में स्थित असाफिला (Asafila) और लोंगजू (Longju) के सीमावर्ती इलाके 'वास्तविक नियंत्रण रेखा' (LAC) को लेकर भारत और चीन की अलग-अलग समझ और धारणा (Overlapping Perceptions) के कारण संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि, रक्षा और सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ज़मीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह से स्थिर, शांत और पूर्ण नियंत्रण में है। इन दूरदराज के क्षेत्रों में नियमित गश्त के दौरान दोनों देशों के गश्ती दल समय-समय पर एक-दूसरे के आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे अल्पकालिक तनाव की स्थिति बनती है। हालांकि, मौजूदा तंत्र और सैन्य संयम के कारण किसी भी प्रकार के हिंसक टकराव की कोई खबर नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इन इलाकों में सुरक्षा के माहौल के बीच ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच किसी हिंसक टकराव की कोई खबर नहीं है। उन्होंने कहा कि ज़मीनी कमांडर संयम बरत रहे हैं और स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित रखे हुए हैं। आमना-सामना होने की स्थिति को संभालने के लिए सैन्य तंत्र का इस्तेमाल सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर होने वाले आमना-सामना को सुलझाने के लिए पहले से तय सैन्य तंत्र का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 'फ्लैग मीटिंग' और हॉटलाइन के ज़रिए बातचीत शामिल है। इन माध्यमों का मकसद स्थानीय तनाव को कम करना और ऐसी घटनाओं को बढ़ने से रोकना है। सूत्रों ने पूर्वोत्तर में 'कोर कमांडर' स्तर की बातचीत का भी ज़िक्र किया। इसे इस क्षेत्र में उच्च-स्तरीय संवाद को एक संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया। अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत ज़रूरी है, खासकर उन इलाकों में जहाँ LAC को लेकर दोनों देशों की समझ अलग-अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि विवादित इलाकों में तनाव बढ़ने से कूटनीतिक बातचीत और वार्ताओं की ज़रूरत बढ़ सकती है, ताकि सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाया जा सके। दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास सूत्रों ने बताया कि दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के साथ-साथ, वहां बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। विकास कार्यों में हर मौसम में काम आने वाली सड़कें, पुल, दूरसंचार नेटवर्क और नागरिक सुविधाएं शामिल हैं, जिनसे सुरक्षा बलों और स्थानीय निवासियों दोनों को फायदा होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे दूरदराज के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले समुदायों के लिए आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर पैदा होंगे। अधिकारियों का कहना है कि अगर सुरक्षा और कूटनीतिक हालात अनुकूल रहते हैं, तो बेहतर बुनियादी ढांचे की मदद से भविष्य में सीमा पर नियंत्रित व्यापार और लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है। सांस्कृतिक संबंध और नागरिक-सैन्य सहयोग इस क्षेत्र का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है, जिसमें ऐतिहासिक 'त्सारी' तीर्थ यात्रा मार्ग शामिल है। यह मार्ग सीमा के दोनों ओर रहने वाले बौद्ध समुदायों के लिए पवित्र है। सूत्रों के अनुसार, यदि लंबे समय तक स्थिरता बनी रहती है, तो भविष्य में सीमा पार तीर्थ यात्रा की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। ऐसी कोई भी व्यवस्था सुरक्षा की स्थिति और दोनों देशों के बीच होने वाले समझौते पर निर्भर करेगी। सूत्रों ने आगे बताया कि सीमावर्ती इलाकों में सशस्त्र बलों की मौजूदगी से नागरिक-सैन्य पहलों को बढ़ावा मिला है। इनमें स्वास्थ्य शिविर लगाना, आपातकालीन स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, स्कूलों का निर्माण करना और स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में लोगों की आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना और सुरक्षा बलों तथा स्थानीय समुदायों के बीच आपसी जुड़ाव को मजबूत करना है। एक सूत्र ने कहा, हालांकि LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण असाफिला और लोंगजू जैसे इलाके संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिरता बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक तंत्र के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास भी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत-चीन सीमा विवादों को स्थापित संचार माध्यमों और निरंतर बातचीत के जरिए सुलझाने के व्यापक प्रयासों के बीच, इन दोनों इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 24 Oct 2026 11:33 am

Arunachal Pradesh में LAC पर India, China Army के बीच टकराव जारी, ITGB DG ने क्या खुलासा किया?

Arunachal Pradesh में LAC पर India, China Army के बीच टकराव जारी, ITGB DG ने क्या खुलासा किया?

लाइव हिन्दुस्तान 23 Oct 2026 9:27 pm

Arunachal Pradesh में PLA से Face-Off पर खड़गे का वार, PM Modi देश को बताएं सीमा का सच

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत की चीन नीति पर स्पष्टता देने की मांग की है। उन्होंने सीमा सुरक्षा, आर्थिक संबंधों और राजनयिक मामलों को संभालने के सरकार के तरीके की आलोचना की है। 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, खड़गे ने प्रधानमंत्री से तीन खास सवाल पूछे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक निर्भरता और राजनयिक जवाबदेही से जुड़े हैं। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक के उस बयान का जिक्र किया, जिससे पुष्टि होती है कि अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ आमना-सामना चल रहा है। इसे भी पढ़ें: अरुणाचल सीमा तनाव पर PM Narendra Modi संसद को विश्वास में लें: Congress खरगे ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ लगातार हो रहे टकराव की ITBP के DG द्वारा पुष्टि, बेहद चिंताजनक है। डोकलाम और गलवान के बाद, क्या एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है? अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। फिर भी, वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी - जो कि कथित तौर पर यहाँ से केवल 180 किमी दूर है - टकराव जारी है। क्या भारत की पेट्रोलिंग (गश्त) की पहुँच प्रभावित हुई है? अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है? उन्होंने 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गलवान में भारतीय सेना के 20 बहादुर जवानों की शहादत (FY2020-21) के बाद से, चीन से आयात में 102% की भारी वृद्धि हुई है, जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 155% बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है। यहाँ तक कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मानती हैं कि चीन भारतीय निर्यात में बाधा डालता है। इसके बावजूद, सरकार चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में ढील दे रही है और चीन से जुड़ी पात्र कंपनियों को 'प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) देने पर विचार कर रही है। क्या 'मेक इन इंडिया' अब 'इंपोर्ट फ्रॉम चाइना' (चीन से आयात) बन गया है? इसे भी पढ़ें: India China LAC Tension | अरुणाचल सीमा पर चीन के साथ टकराव जारी: ITBP प्रमुख के खुलासे के बाद कांग्रेस ने PM मोदी पर बोला हमला राजनयिक प्रयासों के संबंध में, खड़गे ने कहा कि मोदी और शी के बीच कम से कम 23 मुलाकातें और बातचीत हुईं, NSA अजीत डोभाल के साथ विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर की वार्ताएं हुईं, 'परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र' (WMCC) की 36 बैठकें हुईं, और इसके अलावा SCO तथा BRICS के लगातार शिखर सम्मेलन हुए। इन मुलाकातों और वार्ताओं का क्या ठोस नतीजा निकला? क्या मई 2020 से पहले भारत को हासिल गश्त (पेट्रोलिंग) करने के अधिकार पूरी तरह से बहाल हो गए हैं? उन्होंने सशस्त्र बलों पर भरोसा जताते हुए सरकार की राजनयिक कार्यशैली की आलोचना की: हमें अपने सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जवाबदेही जरूरी है, न कि राजनयिक फोटो-अवसर या गले मिलने वाली कूटनीति (हगप्लोमेसी)! विपक्ष पर हमला करने के बजाय, प्रधानमंत्री मोदी को संसद और पूरे देश को विश्वास में लेना चाहिए।

प्रभासाक्षी 23 Oct 2026 6:07 pm

'अपर सियांग पावर प्रोजेक्ट' को लेकर अरुणाचल प्रदेश में प्रदर्शन, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले; झड़प में चार महिलाएं घायल

अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' के विरोध में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें चार महिलाएं घायल हो गईं।

जागरण 23 Oct 2026 3:30 pm

Operation Lotus के तहत BJP फिर करेगी खेल? Mamata Banerjee को झटका? TMC। Arunachal Pradesh। Meghalaya

Operation Lotus के तहत बीजेपी करने वाली है खेल, Mamata Banerjee को फिर लगेगा झटका? मेघालय की राजनीति में 2028 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 31 Aug 2026 11:21 am

Arunachal Pradesh Tinkle Karga Gongo Viral Video: प्यारी सी बच्ची को मिला ढेर सारा प्यार,कहा थैंक यू

Arunachal Pradesh Tinkle Karga Gongo Viral Video: प्यारी सी बच्ची को मिला ढेर सारा प्यार ऐसे कहा थैंक यू

लाइव हिन्दुस्तान 22 Aug 2026 11:05 pm

Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट

सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

वेब दुनिया 10 Jan 2025 2:40 pm