ग्लो झील ने रचा इतिहास! अरुणाचल प्रदेश को मिली पहली रामसर साइट
अरुणाचल प्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के लोहित जिले में ग्लो झील को भारत की 101वीं रामसर साइट का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि राज्य के लिए बेहद खास मानी जा रही है और इससे अरुणाचल प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।ग्लो झील (Glow Lake) अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित ग्लो झील को रामसर साइट घोषित किया गया है। यह राज्य की पहली वेटलैंड है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। यह उपलब्धि अरुणाचल प्रदेश के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रामसर साइट बनने का मतलब है कि यह झील पर्यावरण और जैव-विविधता के लिहाज से बेहद खास है। अब इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा और संरक्षण पर पहले से ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इससे आने वाले समय में झील को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।रामसर साइट (Ramsar Site) रामसर साइट उन वेटलैंड यानी आर्द्रभूमियों को कहा जाता है, जिनका पर्यावरण और बायोडाइवर्सिटी के लिए विशेष महत्व होता है। इन जगहों को इंटरनेशनल लेवल पर संरक्षण के लिए चुना जाता है। ऐसी जगहों पर कई दुर्लभ पौधे, पक्षी और वन्यजीव रहते हैं। साथ ही ये जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए जरूरी मानी जाती है।मीठे पानी की झील (Freshwater lake) ग्लो झील ऊंचाई पर मीठे पानी की झील है। इसमें पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी जलधाराओं का साफ पानी आता है। झील चारों ओर से घने जंगलों और प्राकृतिक हरियाली से घिरी हुई है, जिससे यहां का वातावरण बेहद शांत और सुंदर दिखाई देता है। इस इलाके में 150 से ज्यादा तरह के पेड़ और 49 प्रकार के ऑर्किड पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे पूर्वी हिमालय का एक बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट माना जाता है।पर्यावरण के लिए जरूरी (Importance for Environment) ग्लो झील केवल एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी जरुरी है। यह झील पानी को सुरक्षित रखने, आसपास की नदियों में जल प्रवाह बनाए रखने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसके अलावा यह कार्बन को संग्रहित करने में भी भूमिका निभाती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के इफेक्ट को कम करने में मदद मिलती है। साइंटिस्ट भी इस झील को महत्वपूर्ण मानते हैं।लोगों और टूरिस्म को फायदा (Benefits for Local Communities and Tourism)रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद इस एरिया में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे देश-विदेश से ज्यादा टूरिस्ट यहां आ सकते हैं, जिससे यहां के लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे। लोकल आदिवासी समुदाय अपनी संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए टूरिस्म से जुड़ सकेंगे। इससे इलाके का डेवेलप भी होगा और लोगों की आजीविका भी बेहतर होगी।संरक्षण और रिसर्च (Conservation and Research)रामसर साइट बनने के बाद ग्लो झील के संरक्षण के लिए विशेष प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके साथ ही इस क्षेत्र को बेहतर कानूनी सुरक्षा और इंटरनेशनल एक्सपर्ट की टेक्निकल सलाह भी मिल सकेगी। भविष्य में यहां साइंटिस्ट रिसर्च, पर्यावरण अध्ययन और बायोडाइवर्सिटी पर निगरानी के लिए फंड मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।प्राकृतिक धरोहर की रक्षा (Protection of natural heritage)अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू (Pema Khandu) ने ग्लो झील को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लिए गर्व की बात है और इससे बायोडाइवर्सिटी कंजर्वेशन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस उपलब्धि से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आने वाली जनरेशन भी राज्य की इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए प्रेरित होंगी।
न कोई शोर, न भीड़... सिर्फ बर्फ, पहाड़ और सुकून का एहसास देती है हिमालय की गोद में छिपी ये झील!
खूबसूरत वादियां और सुंदरता के लिए अरुणाचल प्रदेश पहले ही जाना जाता हैं। अब यहां की एक और छिपी हुई झील ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। तवांग की ऊंची पहाड़ियों के बीच मौजूद पेमा त्सो झील का खूबसूरत वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।तवांग की खूबसूरती (Beauty of Tawang) अरुणाचल प्रदेश के तवांग की ऊंची पहाड़ियों के बीच पेमा त्सो झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण लोगों का ध्यान खींच रही है। यह झील चारों तरफ से पहाड़ों, बर्फ और ग्लेशियर से घिरी हुई है, जिससे यहां का नजारा शांत और मनमोहक दिखाई देता है। झील का साफ और नीला पानी आसपास की बर्फीली चोटियों को अपने अंदर दिखाता है। यहां शहरों की भीड़ और शोर से दूर सिर्फ प्रकृति की शांति महसूस होती है। नेचर लवर, फोटोग्राफी पसंद करने वाले लोग और एडवेंचर करने वाले ट्रैवलर के लिए तवांग एक शानदार जगह बन सकता है। यहां की हिमालयी सुंदरता इसे एक अनोखी पहचान देती है।पेमा त्सो झील(Pema Tso Lake) तवांग के बारे में सबसे पहले राज्य बोर्ड के सदस्य जंबे डोंडू ने जानकारी दी। झील के आसपास फैली बर्फीली पहाड़ियां, साफ पानी और बादलों से ढका खूबसूरत वातावरण दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में कई ऐसी प्राकृतिक जगहें मौजूद हैं, जो आम लोगों की नजरों से दूर रहती हैं। कुछ झीलें पहाड़ों, ग्लेशियर और चट्टानों के बीच छिपी होती हैं और वहां पहुंचने के लिए मुश्किल रास्तों से गुजरना पड़ता है। जिसके बाद कई लोगों को तवांग की इस अनदेखी खूबसूरती के बारे में जानकारी मिली। इस जानकारी ने छिपी हुई झील को देश-दुनिया के लोगों तक पहुंचाने का काम किया है।हिमालय का शांत रूप (Himalayan Peaceful Beauty)अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी तवांग का वीडियो शेयर किया और इसे हिमालय की शांत सुंदरता का प्रतीक बताया। उन्होंने इस जगह की खूबसूरती को लोगों के सामने रखा और तवांग को उजागर किया। तवांग जैसी जगहें दिखाती हैं कि हिमालय में आज भी कई ऐसी जगह मौजूद हैं। यहां न ज्यादा भीड़ होती है और न ही शहरी भागदौड़ का असर। मुख्यमंत्री के वीडियो शेयर करने के बाद इस झील को लेकर लोगों की रुचि और बढ़ी है। अब यहां जाने वाले टूरिस्ट तवांग की इस झील को देखने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।तवांग का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व (Historical and Cultural Importance of Tawang)तवांग अरुणाचल प्रदेश का एक खूबसूरत शहर है, जो भूटान और तिब्बत की सीमा के पास है। यह जगह पहाड़ों और प्राकृतिक नजारों के साथ ही अपने इतिहास और संस्कृति के लिए भी पॉपुलर है। तवांग में स्थित तवांग मठ (Tawang Monastery) एशिया के सबसे बड़े और पुराने बौद्ध मठों में से एक है। यह मठ बौद्ध धर्म और मोनपा समुदाय की संस्कृति का हब माना जाता है। यहां की पहाड़ी लाइफस्टाइल टूरिस्ट को एक अलग एक्सपीरियंस देती है।तवांग में बढ़ रहा एडवेंचर टूरिज्म (Growing Adventure Tourism in Tawang)तवांग अब सिर्फ घूमने के लिए ही नहीं, बल्कि एडवेंचर एक्टिविटीज के लिए भी तेजी से पॉपुलर हो रहा है। राज्य सरकार यहां विंटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। बर्फ से ढके पहाड़ों और ठंडे मौसम के कारण यहां स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और अन्य विंटर एडवेंचर एक्टिविटी के लिए बेहतर संभावनाएं हैं। तवांग को बड़े एडवेंचर डेस्टिनेशन में डेवेलप करने की कोशिश की जा रही है, जिससे यहां ज्यादा से ज्यादा टूरिस्ट यहां आ सकें।विंटर एडवेंचर ट्रेनिंग (Winter Adventure Training)विंटर एडवेंचर तवांग 2026 के तहत स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग की ट्रेनिंग आयोजित की जा रही है। राज्य में विंटर स्पोर्ट्स को बढ़ाने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने यहां पहुंचकर ट्रेनिंग ले रहे युवाओं से मुलाकात की और उनके एक्सपीरियंस जाने। उन्होंने बताया कि ऐसी एक्टिविटीज तवांग में एडवेंचर टूरिज्म को मजबूत करेगी। यह ट्रेनिंग युवाओं को खेल के साथ-साथ टूरिस्ट के नए अवसर भी देगी।अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट (First Ramsar Site of Arunachal Pradesh)अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में ग्लॉ झील को राज्य की पहली रामसर साइट का दर्जा मिला है। इससे यहां रह रहे लोगों के लिए टूरिस्म और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। साथ ही आने वाली जनरेशन के लिए इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने में मदद मिलेगी।
देश के कोने-कोने घूम लीजिए, लेकिन भारत के सबसे खास नजारे मिलेंगे सिर्फ इस छोर पर!
भारत में घूमने के लिए सिर्फ मशहूर जगहें ही नहीं हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसी खूबसूरत जगहें भी हैं, जहां बहुत कम लोग पहुंच पाते हैं। यहां आपको शांत माहौल, शानदार नजारे और कुछ नया देखने का मौका मिलेगा। अगर इस बार छुट्टियों में किसी अलग जगह जाने का प्लान बना रहे हैं, तो ये डेस्टिनेशन आपकी ट्रिप को यादगार बना सकते हैं। धनुषकोडी, तमिलनाडु (Dhanushkodi, Tamil Nadu) धनुषकोडी भारत के दक्षिण-पूर्व में एक शानदार जगह है। यह वहीं है, जहां बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर एक-दूसरे से मिलते हैं। साल 1964 में आए एक भयानक चक्रवात ने इस पूरे शहर को खत्म कर दिया था। इसके बाद यहां रहने वाले लोग दूसरी जगह चले गए और आज यह लगभग वीरान है। यहां टूटे हुए रेलवे स्टेशन, चर्च और पुराने मकानों के टुकड़े आज भी देखे जा सकते हैं। समुद्र के बीच बनी सड़क और चारों तरफ का नजारा बेहतरीन है। जीरो पॉइंट, सिक्किम (Zero Point, Sikkim) जीरो पॉइंट उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन बॉर्डरके पास है। यह करीब 15,000 फीट की ऊंचाई पर है और साल के ज्यादातर समय बर्फ से ढका रहता है। यहां से हिमालय की बर्फीली चोटियां और चारों ओर फैले सफेद पहाड़ बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं। बर्फबारी का मजा लेने और शानदार नजारों के लिए हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट यहां पहुंचते हैं। किब्बर, हिमाचल प्रदेश (Kibber, Himachal Pradesh) हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में बसा किब्बर भारत के सबसे ऊंचाई पर बसा गांव है। यह समुद्र तल से करीब 4,200 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से बर्फ से ढके पहाड़, खुला नीला आसमान और शांत घाटियां दिखाई देती हैं। किब्बर वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी भी यहीं है, जहां हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), नीली भेड़ और कई दुर्लभ जानवर पाए जाते हैं। आपको पहाड़ और एडवेंचर पसंद हैं, तो यह जगह जरूर घूमनी चाहिए। गुहार मोती, गुजरात (Guhar Moti, Gujarat)गुहार मोती गुजरात के कच्छ जिले का सबसे पश्चिम में बसा गांव है। यह भारत-पाकिस्तान सीमा के बहुत पास है। यहां चारों ओर नमक वाले मैदान, दलदली इलाके और समुद्र का नजारा देखने को मिलता है। यह इलाका नारायण सरोवर के पास होने के कारण नेचर लवर और पक्षियों को देखने के शौकीनों के बीच भी काफी पॉपुलर है। यहां का शांत माहौल और बारिश में हरियाली लोगों को अपनी ओर अट्रैक्ट करता है। गुरेज घाटी, जम्मू और कश्मीर (Gurez Valley, Jammu and Kashmir)गुरेज घाटी जम्मू-कश्मीर की सबसे खूबसूरत और शांत घाटियों में से एक है। यह लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास किशनगंगा नदी के किनारे बसी है। चारों ओर ऊंचे पहाड़, हरे-भरे मैदान, लकड़ी के घर और बहती नदी इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। पुराने समय में यह इलाका भारत और मध्य एशिया के बीच बिज़नेस करने का रास्ता हुआ करता था। भीड़ से दूर सुकून भरी जगह पर जाना चाहते हैं, तो गुरेज घाटी परफेक्ट है। माना गांव , उत्तराखंड (Mana Village, Uttarakhand)माना गांव उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम के पास है और इसे लंबे समय से भारत का आखिरी गांव कहा जाता है। यह तिब्बत सीमा से पहले पड़ता है। इस गांव का संबंध महाभारत की कई कहानियों से भी माना जाता है। यहां सरस्वती नदी, भीम पुल, व्यास गुफा और गणेश गुफा कई धार्मिक और ऐतिहासिक जगह हैं। पहाड़ों के बीच बसा यह छोटा-सा गांव अपनी सुंदरता और शांत माहौल के कारण टूरिस्ट को अट्रैक्ट करता है। काहो, अरुणाचल प्रदेश (Kaho, Arunachal Pradesh)काहो भारत के सबसे पूर्व में बसे गांवों में से एक है। यह अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में भारत-चीन बॉर्डर के पास है। कहा जाता है कि भारत में सबसे पहले सूरज की किरणें इसी इलाके में दिखाई देती हैं। यहां का शांत वातावरण, हरे-भरे पहाड़ और जनजातियों की संस्कृति टूरिस्ट को अलग एक्सपीरियंस देती है। इंदिरा पॉइंट, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Indira Point, Andaman and Nicobar Islands)इंदिरा पॉइंट भारत का सबसे दक्षिणी स्थान है, जो ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है। यहां बना लाइटहाउस इस जगह की सबसे बड़ी पहचान है। साल 2004 में आई सुनामी के बाद इस इलाके का कुछ हिस्सा समुद्र में धंस गया था। फिर भी यह जगह अपनी खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व के कारण खास मानी जाती है। यहां का नीला समुद्र और शांत वातावरण देखने लायक होता है।
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

