छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित सूअर फार्म में इस वायरस के कारण 300 से अधिक सूअरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बची हुई करीब 150 सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। इस वायरस से फार्म मालिक को करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। दरअसल सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम बड़ी संख्या में मुडपार गांव पहुंची थी। अधिकारी और डॉक्टर पीपीई किट पहनकर फार्म के अंदर गए और बचे हुए सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद फार्म के पीछे सभी मृत सूअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया। फिलहाल पूरे फार्म को सील करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मुडपार गांव सूअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सूअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क (Pork) की सप्लाई की जाती थी। देखिए पहले ये तस्वीरें- रिपोर्ट के आने तक हो चुकी थी 300 सूअरों की मौत फार्म मालिक पीओ जॉय ने बताया कि उनके फार्म में कुल 300 से 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जबकि 1 अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हो गई। 6 अप्रैल तक करीब 300 सूअरों की मौत हो चुकी थी और बाकी को विभाग ने मार दिया। उन्होंने बताया कि एक सूअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपए थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। फार्म में 133 गर्भवती सूअर और करीब 400 बच्चे भी थे। सोमवार को सभी को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और फार्म के पीछे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। फॉर्म के मालिक ने दी थी विभाग को सूचना पीओ जॉय ने बताया कि उन्होंने खुद ही विभाग को सूचना देकर बुलाया था, ताकि बीमारी और अधिक न फैल सके। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक पुरानी और बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। यह बीमारी लगने के बाद लगभग सभी सूअरों की मौत हो जाती है। हालांकि यह केवल सूअरों में ही फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती। प्रदेश में सूअर के मांस की सबसे ज्यादा खपत फार्म मालिक का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सूअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सूअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है। 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए कार्रवाई फार्म मालिक ने कहा किऐसी गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सके। यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने नुकसान से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह बीमारी अन्य फार्म तक न फैले। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शुरू हुई कार्रवाई पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि 2 अप्रैल को सूचना मिलने के बाद तुरंत सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी गई। फिलहाल पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए फार्म को सील करने की कार्रवाई की जा रही है। जानिए क्या है यह वायरस और कितना खतरनाक है? अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 100% तक होती है। यानी यदि कोई सूअर इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसका बच पाना लगभग असंभव होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता, लेकिन यह सूअर पालन उद्योग के लिए बेहद विनाशकारी साबित होता है और पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इस वायरस की उत्पत्ति अफ्रीका से हुई थी, लेकिन साल 2018 के बाद इसने चीन, वियतनाम और यूरोप के कई देशों में भारी तबाही मचाई। चीन में इस बीमारी के चलते करोड़ों सूअरों को मारना पड़ा, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। साल 2026 में भी पोलैंड और इटली जैसे देशों में इसके नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं। भारत में इस वायरस की पहली पुष्टि वर्ष 2020 में असम और अरुणाचल प्रदेश में हुई थी, जहां हजारों सूअरों की मौत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे यह वायरस पंजाब, केरल और अब छत्तीसगढ़ तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में यह संक्रमण बाहरी राज्यों से लाए गए संक्रमित सूअरों या दूषित मांस उत्पादों के जरिए पहुंचा हो सकता है। दुर्ग के अलावा बलौदा बाजार और महासमुंद के जंगली इलाकों में भी सूअरों की संदिग्ध मौतों के मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन और पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। ………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बिलासपुर में बर्ड फ्लू, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट किए: संक्रमण के बाद हुई पूरे संभाग में सप्लाई, कानन पेंडारी 7 दिन तक बंद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में बर्ड-फ्लू वायरस मिला है। यहां 5 हजार मुर्गियां की मौत के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार अंडे नष्ट किए गए। पढ़ें पूरी खबर…
छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित सूअर फार्म में इस वायरस के कारण 300 से अधिक सूअरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बचे हुए करीब 150 सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी को प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया। इस वायरस से फार्म मालिक को करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। दरअसल सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम बड़ी संख्या में मुडपार गांव पहुंची थी। अधिकारी और डॉक्टर पीपीई किट पहनकर फार्म के अंदर गए और बचे हुए सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया। इसके बाद फार्म के पीछे सभी मृत सूअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया। फिलहाल पूरे फार्म को सील करने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मुडपार गांव सूअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सूअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क (Pork, सूअर मांस) की सप्लाई की जाती थी। देखिए पहले ये तस्वीरें- रिपोर्ट के आने तक हो चुकी थी 300 सूअरों की मौत फार्म मालिक पीओ जॉय ने बताया कि उनके फार्म में कुल 300 से 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जबकि 1 अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हो गई। 6 अप्रैल तक करीब 300 सूअरों की मौत हो चुकी थी और बाकी को विभाग ने मार दिया। उन्होंने बताया कि एक सूअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपए थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। फार्म में 133 गर्भवती सूअर और करीब 400 बच्चे भी थे। सोमवार को सभी को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और फार्म के पीछे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। फॉर्म के मालिक ने दी थी विभाग को सूचना पीओ जॉय ने बताया कि उन्होंने खुद ही विभाग को सूचना देकर बुलाया था, ताकि बीमारी और अधिक न फैल सके। उन्होंने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक पुरानी और बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। यह बीमारी लगने के बाद लगभग सभी सूअरों की मौत हो जाती है। हालांकि यह केवल सूअरों में ही फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती। प्रदेश में सूअर के मांस की सबसे ज्यादा खपत फार्म मालिक का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सूअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सूअर यहां लाए जाते हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह वायरस नोट और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि इस बीमारी का असर इंसानों पर नहीं होता, लेकिन संक्रमित सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि वायरस गर्मी में नष्ट हो जाता है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है। 24 घंटे के भीतर होनी चाहिए कार्रवाई फार्म मालिक ने कहा कि ऐसी गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सके। समय रहते कदम उठाए जाते, तो नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने नुकसान से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह बीमारी अन्य फार्म तक न फैले। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शुरू हुई कार्रवाई पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि 2 अप्रैल को सूचना मिलने के बाद तुरंत सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी गई। फिलहाल पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए फार्म को सील करने की कार्रवाई की जा रही है। जानिए क्या है यह वायरस और कितना खतरनाक है? अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 100% तक होती है। यानी यदि कोई सूअर इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसका बच पाना लगभग असंभव होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता, लेकिन यह सूअर पालन उद्योग के लिए बेहद विनाशकारी साबित होता है और पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इस वायरस की उत्पत्ति अफ्रीका से हुई थी, लेकिन साल 2018 के बाद इसने चीन, वियतनाम और यूरोप के कई देशों में भारी तबाही मचाई। चीन में इस बीमारी के चलते करोड़ों सूअरों को मारना पड़ा, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। साल 2026 में भी पोलैंड और इटली जैसे देशों में इसके नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं। भारत में इस वायरस की पहली पुष्टि वर्ष 2020 में असम और अरुणाचल प्रदेश में हुई थी, जहां हजारों सूअरों की मौत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे यह वायरस पंजाब, केरल और अब छत्तीसगढ़ तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में यह संक्रमण बाहरी राज्यों से लाए गए संक्रमित सूअरों या दूषित मांस उत्पादों के जरिए पहुंचा हो सकता है। दुर्ग के अलावा बलौदा बाजार और महासमुंद के जंगली इलाकों में भी सूअरों की संदिग्ध मौतों के मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन और पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। ………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बिलासपुर में बर्ड फ्लू, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट किए: संक्रमण के बाद हुई पूरे संभाग में सप्लाई, कानन पेंडारी 7 दिन तक बंद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में बर्ड-फ्लू वायरस मिला है। यहां 5 हजार मुर्गियां की मौत के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार अंडे नष्ट किए गए। पढ़ें पूरी खबर…
16वीं हॉकी इंडिया सब जूनियर मेंस नेशनल चैंपियनशिप 2026 के छठे दिन, डिवीजन 'ए' में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड की टीमों ने जीत हासिल की, जबकि डिवीजन 'बी' में दिल्ली, तेलंगाना, कर्नाटक और अरुणाचल प्रदेश ने अपने-अपने मुकाबले जीते
ऑक्टेव फेस्टिवल की मेजबानी की दौड़ में उदयपुर, वेस्ट जोन ने शुरू की 2026-27 के कैलेंडर की तैयारी
देश की लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए शहर के पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (वेस्ट जोन) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के सांस्कृतिक कैलेंडर की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और केंद्र शासित प्रदेश दमन-दीव व दादरा-नगर हवेली में वर्षभर विभिन्न महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। केंद्र के अधिकारियों के अनुसार सभी कार्यक्रमों का प्रस्ताव राजभवन भेजा जाएगा, जहां इसमें आवश्यक बदलाव या नए आयोजन जोड़े जा सकते हैं। उदयपुर में हर साल की तरह 21 से 30 दिसंबर तक 10 दिवसीय शिल्पग्राम महोत्सव होगा, जिसमें देशभर के लोक कलाकार और शिल्पकार भाग लेंगे। इसके अलावा शिल्पदर्शन, रंगशाला, मल्हार और ऋतु बसंत जैसे कार्यक्रम भी वर्षभर होंगे। अन्य राज्यों में भी बड़े आयोजनों की योजना है। गोवा में ‘लोकोत्सव’ और गांधीनगर में ‘बसंत उत्सव’ आयोजित कर स्थानीय और राष्ट्रीय लोक कलाओं को मंच दिया जाएगा। शिल्पग्राम के बाद बड़ा आयोजन ऑक्टेव फेस्टिवल शिल्पग्राम महोत्सव के बाद केंद्र का दूसरा बड़ा आयोजन ‘ऑक्टेव फेस्टिवल’ है। पांच दिवसीय इस उत्सव में पूर्वोत्तर राज्यों-अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम की संस्कृति और लोक प्रस्तुतियां शामिल होती हैं। पिछले वर्ष इसका आयोजन महाराष्ट्र में हुआ था। केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस बार ऑक्टेव फेस्टिवल के उदयपुर में आयोजित होने की प्रबल संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो शहरवासियों को पूर्वोत्तर भारत की विविध सांस्कृतिक झलक एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा। शिल्पग्राम महोत्सव सहित कई आयोजन प्रस्तावित, 4 राज्यों में सालभर होंगे कार्यक्रम
एक पहाड़ी पर सुबह 8 बजे का वक्त। एक बूढ़े की लाश पड़ी है। वह पूरी तरह काली पड़ चुकी है। लाश के बगल में 24-25 साल का लड़का घुटने के बल बैठा है। फूट-फूटकर रो रहा है। तभी कुछ महिलाएं आईं और लाश के पास बैठ गईं। एक खास तरह के पेड़ के पत्तों से लाश का चेहरा साफ करने लगीं। उनमें से एक महिला ने दूर खड़े बुजुर्ग को कुछ इशारा किया। बुजुर्ग ने उस लड़के की तरफ एक धारदार छोटी तलवार बढ़ाई। लड़के ने कांपते हाथों से तलवार थामी और धीरे-धीरे लाश का गला रेतने लगा। कुछ ही देर में लाश का सिर धड़ से अलग हो गया। ये लाश लड़के के पिता की है, जो डेढ़ महीने से इस पहाड़ी पर पड़ी थी। दरअसल, ये बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार कर रहा है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं वांचो जनजाति की कहानी। अरुणाचल प्रदेश की लोंगडिंग इलाके में बसी इस जनजाति की आबादी सिर्फ 40 हजार है… लौटते हैं अंतिम संस्कार की प्रथा पर। बूढ़े की लाश का गला कटते ही दो शख्स मटकेनुमा मिट्टी का बर्तन लेकर आए। उन्होंने कटे हुए सिर को हाथ में उठाया और गौर से देखने लगे, जैसे नाप रहे हों। फिर मिट्टी के बर्तन को औंधा करके उसे करीने से पत्थर से तोड़ने लगे, ताकि सिर उसमें समा जाए। फिर उसी बर्तन में सिर डालकर लड़के को थमा दिया। धड़ जस का तस यहीं पड़ा रहा। सभी लोग सिर को लेकर पहाड़ी के दूसरे हिस्से की तरफ चल दिए। वहां जगह-जगह पर छोटे-छोटे मिट्टी के चबूतरे जैसे बने हैं। सभी पर वैसे ही मटके रखे हैं जैसे मटके में सिर है। लड़का एक खाली चबूतरे की तरफ बढ़ा और मटका रख दिया। फिर मटके के ऊपर पत्थर रख दिया। भीड़ से एक शख्स शराब की बोतल और खाना लेकर आया और लड़के की ओर बढ़ दिया। लड़के ने कुछ बुदबुदाते हुए शराब और खाना इसी चबूतरे पर चढ़ा दिया। उधर, बिना सिर की लाश वहीं पड़ी रही। धीरे-धीरे सभी लोग अपने गांव लौट गए। वांचो लोगों में प्राकृतिक मौत होने पर लाश को इसी तरह डेढ़ महीने के लिए पहाड़ी पर छोड़ देते हैं। कोई जानवर लाश को न खा जाए इसलिए बारी-बारी से लोग रखवाली करते हैं। फिर सिर काटकर अंतिम संस्कार किया जाता है। दिलचस्प बात ये है कि इस तरह से अंतिम संस्कार सिर्फ प्राकृतिक मौत होने पर ही करते हैं। दुर्घटना या हत्या होने पर ये लोग लाश को पहाड़ी पर ही फेंक देते हैं। जिसे जानवर नोच-नोचकर खा जाते हैं। दरअसल, इनका मानना है कि आत्मा सिर में बसती है। इसलिए सिर को सुरक्षित रखा जाता है, ताकि पूर्वजों के दर्शन होते रहें। जब कोई शख्स अप्राकृतिक मौत मरता है तो उसकी आत्मा उसी वक्त निकल जाती है। वांचो लोग जिस तलवार से लाश का गला रेतते हैं, उसे चंग कहते हैं। जहां लाश का धड़ पड़ा रहता है, उसे जुकथो कहते हैं। जिस जगह पर मिट्टी का प्लेटफॉर्म बनाकर सिर रखा जाता है वो जालो है। वांचो लोग अरुणाचल प्रदेश की पटकाई की पहाड़ियों में बसते हैं। ये जगह लोंगडिंग जिले में आती है जो गुवाहाटी से 350 किलोमीटर दूर है। इनको जानने मैं पहुंची हूं पटकाई की पहाड़ियों पर। मेरे साथ हैं इस समुदाय को जानने वाले एंथ्रोपोलोजिस्ट नोट्टोई वांगसाहम। जो लोंगडिंग से ही साथ आए हैं। दोपहर के 12 बजे थे। हम पहाड़ी से पैदल ही गांव की तरफ बढ़ने लगे। रास्ते में नोट्टोई ने बताया कि- ‘वांचो लोगों में आज भी राजा का शासन है। इनसे मिलने के लिए राजा की इजाजत जरूरी है। इसलिए हमें सबसे पहले राजा के सामने जाकर हाजिरी लगानी होगी। तभी बस्ती में घुस पाएंगी।’ ‘कौन है यहां के राजा?’ मैंने पूछा ‘पहले तो जितवंग वाहम यहां के राजा थे लेकिन, चार साल पहले उनकी मौत हो गई। अब रानी का राज है।’ ‘तो राजा की जगह रानी से इजाजत लेनी पड़ती है?’ ‘हां, अभी तो रानी ही सब देखती हैं लेकिन, उनके बेटे को अब लोग राजा कहने लगे हैं।’ अब तक हम 5 किलोमीटर चल चुके थे। कुछ ही दूर बांस से बने घर नजर आने लगे। किसी की टीन की छत चमक रही थी तो किसी की छत यहां के स्थानीय पेड़ टोको लीफ से बनी थी। यहां सिर्फ एक घर ऐसा दिखा जो आधा सीमेंट और आधा बांस से बना है। ये घर काफी बड़ा है। नोट्टोई ने बताया कि ‘यही रानी का घर है।’ जैसे ही रानी के घर के सामने पहुंचे, एक महिला हमें अंदर ले गई। नजरें घुमाकर देखा तो दीवारों पर जानवरों की खाल और खोपड़ियां टंगी हैं। मैंने नोट्टोई से इशारे में पूछा तो कहने लगे- ‘पहले के समय में वांचो जंगली जानवरों का शिकार करते थे। ये ऐसे ही शिकार किए हुए जानवरों की खाल हैं। नोट्टोई बताते हैं कि ‘वांचो लोग कबीले की शान बढ़ाने के लिए दुश्मनों के सिर, बाजू और टांग काटकर ले आते थे। हर वांचो बस्ती में म्यूजियम की तरह एक जगह होती थी, जिसे ‘साउतुंग’ कहते थे। यहीं दुश्मन के कटे हुए सिर सजाए जाते थे। साल में एक बार उन्हें शराब और खाना चढ़ाकर पूजा भी की जाती थी। अब यहां लोग क्रिश्चियैनिटी को मानने लगे हैं। इसलिए धीरे-धीरे ये सब बंद हो गया और साउतुंग भी खत्म हो गए। अब सिर्फ जानवरों के सिर और खाल बची हैं।’ हम लोग ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठकर रानी सेंगम वांग्चा वांचो का इंतजार करने लगे। दीवार पर चीते की खाल टंगी है। पास ही बंदूकें और जंगली सुअर के सिर भी। तभी एक महिला कमरे में आती हैं, सफेद रंग की शॉर्ट कुर्ती और नीले रंग की शॉलनुमा लॉन्ग स्कर्ट लपेटे। गले में चांदी के सिक्कों की माला और माथे पर रंग-बिरंगे मोतियों से बनी पट्टी पहने। पहनावा देखकर पता चल रहा है कि यही रानी हैं। मैंने रानी से सबसे पहले उनके कपड़ों के बारे में पूछा, वो बताने लगीं कि- ‘ये शॉलनुमा स्कर्ट हमारी पारंपरिक पोषाक है। इसे नीथो कहते हैं।’ मैंने दीवार पर टंगे जंगली सुअर के सिर को देखकर पूछा, ‘इसका शिकार राजा ने किया था?’ रानी बताती हैं कि- ‘बस्ती में जब भी कोई जंगली सुअर का शिकार करता है, तो उसका सिर और रीढ़ की हड्डी के पास का मांस हमारे घर भेजते हैं। बाकि जानवरों का केवल सिर ही राजा के घर भेजते हैं। उसके बाद ही वो खुद खा सकते हैं। अगर कोई ऐसा नहीं करता तो उसे बस्ती से निकाल दिया जाता है।’ ‘रीढ़ की हड्डी का मांस?’ ‘हां, इसे हम घरों में लटकाकर सुखाते हैं और जब मन हो पका लेते हैं।’ ये कहते हुए रानी मुझे रसोई में ले गईं। यहां एक लकड़ी से सहारे छत से मांस के लंबे और चपटे टुकड़े लटक रहे हैं। कुछ तो एकदम ताजे हैं लेकिन कुछ सूख हुए। यहीं नोट्टोई बताते हैं कि ‘वांचो की हर बस्ती का एक राजा होता है। बस्तियों के राजा मिलकर एक चीफ चुनते हैं, जो वांचो लोगों से जुड़े सभी अहम फैसले लेता है।’ आखिर में रानी से बस्ती में जाने की इजाजत लेते हुए हम यहां से निकल पड़े। टीन की छत वाले घर के बाहर एक शख्स बैठा है। उसने गले में मोतियों की माला और किसी जानवर की खोपड़ी जैसा कुछ पहना है। नोट्टोई उनसे मिलवाने ले गए। शख्स का नाम है एल जेवंग वांगसु। मैंने सबसे पहले उनके पहनावे के बारे में पूछा, वो बोले- ‘ये बंदर का सिर है। इसका कपाल लकड़ी से बना है, लेकिन इसपर चढ़ी चमड़ी असली बंदर की है। इसके अलावा माला में जानवरों के नाखून और दांत भी पिरोए हुए हैं। सिर पर जो पहना है वो भालू के बाल से बना है। इसे खोहम कहते हैं।’ जेवंग की पत्नी मंगखाऊ वांगसु अंदर आने के लिए कहती हैं। घुसते ही मछली पकने की महक आने लगी। नजरें घुमाकर देखा तो फर्श से लेकर दीवारें तक सब बांस का बना है। छत से मांस के लंबे, चपटे टुकड़े लटक रहे हैं। कमरे के एक कोने में साड़ी का झूला बंधा है। महिलाओं के शरीर पर गुदे टैटू से पता चलती है उम्र मंगखाऊ के पैर के निचले हिस्से में बना टैटू देखकर मैंने उसका मतलब पूछा। वो कहने लगीं- ‘टैटू हम वांचो महिलाओं की पहचान है। इससे महिलाओं की उम्र का पता लगता है। जब लड़की किशोरावस्था में कदम रखती है तो नाभि के पास टैटू बनाया जाता है। पैर के निचले हिस्से पर टैटू का मतलब वो जवान हो गई यानी रजस्वला हो चुकी है। जांघ पर बने टैटू का मतलब है कि अब लड़की जीवनसाथी चुन सकती है। महिलाओं के छाती पर बने टैटू का मतलब है कि वे शादीशुदा हैं।’ ‘लड़कियां अपना जीवनसाथी कैसे चुनती हैं?’ मैंने पूछा वो बताने लगीं- ‘ज्यादातर प्रेम विवाह होते हैं। लड़की को जब कोई लड़का पसंद आता है तो उसे एक झुमका देती है। जिसे माएपो कहते हैं। यही विवाह का प्रस्ताव माना जाता है। इसके बाद लड़के वाले, लड़की के घर जाते हैं। उन्हें- पान, तंबाकू और स्थानीय पेड़ की छाल पेनखोन और केकखोन देते हैं। इससे होंठ लाल हो जाते हैं। फिर लड़का-लड़की एकदूसरे को माला पहनाते हैं। यह रस्म ‘हिंगहो एलाई’ कही जाती है।’ लड़की की मां को घर बुलाकर शराब परोसते हैं लड़के वाले जेवांग बताते हैं कि ‘कुछ दिन बाद लड़के वाले लड़की की मां को घर बुलाते हैं। मेहमाननवाजी करते हैं। वहां हमारी खास शराब यानी ‘जू’ के साथ मछली और तरह-तरह के जानवरों का मांस परोसा जाता हैं। लड़की की मां वापस घर जाकर बेटी की शादी तय होने का ऐलान करती है। फिर लड़के की मां को बुलाकर यही रस्म लड़की वाले निभाते हैं।’ बीच में ही जेवांग की पत्नी मंगखाऊ, चाय ले आईं। ये लाल रंग की है। बिना दूध वाली। ये जड़ी-बूटी से बनी है, इसे खलप कहते हैं। स्वाद थोड़ा कड़वा सा है, ब्लैक टी जैसा। रिश्ता तय होने के बाद लड़का-लड़की बना सकते हैं संबंध जेवांग शादी की परंपरा के बारे में बताते हैं- ‘जब दोनों तरफ से रिश्ता तय होने का ऐलान होता है, तब ‘टोईकट’ परंपरा होती है। इसमें लड़के वाले लड़की और उसकी सहेलियों को घर बुलाते हैं। लड़का सबको अपने खेत दिखाने ले जाता है। वहां नाच-गाना भी होता है। फिर लड़का सभी लड़कियों को कपड़े और गहने तोहफे में देता है। इसके बाद से लड़का-लड़की जब चाहें मिल सकते हैं। एक-दूसरे के घर जा सकते हैं। अगर घर पर न मिलना हो, तो बस्ती के कम्युनिटी हॉल में भी जा सकते हैं। जिसे ‘जिप्सम नाइलो’ कहते हैं। यहां कपल्स जब चाहें आ सकते हैं और संबंध भी बना सकते हैं। प्रेग्नेंट होने के बाद मिलता है बहू का दर्जा जब लड़की प्रेग्नेंट हो जाती है तो तीसरे महीने लड़के के घर जाती है। तब खोकम की रस्म होती है, यानी लड़की के छाती के बीचों-बीच ‘खाहू’ नाम का टैटू बनाया जाता है। फिर पूजा होती है, जिसमें अंडा, अदरक और शराब चढ़ाई जाती है। इस रस्म के बाद पुजारी ऐलान करता है कि ‘ये लड़की आज से लड़के के परिवार का हिस्सा है।’ इसके बाद भैंसा या बड़ा सुअर काटा जाता है। जानवर की खाल के छोटे-छोटे टुकड़े साफ कर के लड़की के घर भेज देते हैं। जिसे पूरे गांव में बांटा जाता है, जैसे-शादी के बाद मिठाई बांटी जाती है। खोकम के बाद रिश्ते को तोड़ना आसान नहीं होता। अगर पति या पत्नी में से कोई अलग होना चाहे, तो उसे कीमत चुकानी पड़ती है- कभी सूअर देकर तो कभी जमीन देकर।’ लकड़ी की तलवार से काटी जाती है बच्चे की नाल मेरे साथी नोट्टोई बच्चे के जन्म से जुड़ी परंपरा के बारे में बताते हैं कि- बच्चे के जन्म के समय एक बुजुर्ग महिला को बुलाया जाता है। वो बांस से बनी चाकू से नाल काटती है, फिर उसे ओनोक नाम के पेड़ से बांध देती है। बड़ी बेटी को गहने और बड़े बेटे को मिलती है जमीन जायदाद वांचो लोगों में घर की बागडोर महिलाओं के हाथ में होती है। मां के गहने सबसे बड़ी बेटी को मिलते हैं। जमीन-जायदाद सबसे बड़े बेटे के हिस्से जाती है। बाकी बच्चों को कुछ भी नहीं दिया जाता है। हां, अगर परिवार थोड़ा संपन्न हो, तो उन्हें भी थोड़ा-बहुत हिस्सा दे दिया जाता है। यहां आज भी शिकार की परंपरा है। लोग कभी समूह में, तो कभी अकेले शिकार पर निकलते हैं। शिकार के बाद जानवर की पूजा होती है। फिर उसका सिर राजा को दिया जाता है और बाकी मांस पूरी बस्ती में बांट दिया जाता है। यहां से निकलकर हम दूसरी वांचो बस्ती की ओर गए। यहां एक खास तरह की पोषाक में कुछ मर्द खड़े हैं। सभी के सिर पर बांस की टोपी है। यह हॉर्नबिल पक्षी के पंखों से सजी है। इसमें भालू, बंदर, बकरी के बाल लगे हैं। गले में मोतियों की माला है, जिसमें जंगली सूअर के दांत, भालू के नाखून, शेर के दांत या बंदर की चमड़ी से बनी चीजें लगी हैं। शरीर के निचले हिस्से में लंगोट की तरह कुछ पहना हुआ है, जिससे केवल प्राइवेट पार्ट ढका है। परेशानी दूर करने के लिए पुजारी चढ़ाता है बलि वांचो लोग आत्माओं में विश्वास करते हैं। अगर किसी के साथ कुछ बुरा होता है तो पुजारी को बताते हैं। फिर वो सपना देखकर समस्या का कारण बताता है। कई बार पुजारी को घर भी बुलाया जाता है। रास्ते में उसको शराब पिलाई जाती है। परेशानी दूर करने के लिए कुत्ता, बकरी या मुर्गा-मुर्गी की बलि दी जाती है। वांचो लोगों के पास खेती ही कमाई का कोई साधन नहीं है। ये लोग धान के अलावा कई तरह के मिलेट की खेती करते हैं। जैसे- मीखा, कामई, पोलोम, कच्चू, मनसा, जोक, विक्वप, विकुअत, बाह और शिनेई। बच्चों के लिए प्राइमरी स्कूल तो गांव में ही लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए लोंगडिंग जाना पड़ता है। इनके ज्यादातर बच्चे सरकारी नौकरी में हैं। कई घरों के बच्चे आर्मी में भी हैं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए ऐसे ही अनोखे मैतेई लोगों की कहानी…. ---------------------------------------------------- 1- 100 किलो का पत्थर उठाया, लड़की बोली- तुमसे करूंगी शादी:औरतें 5 पति भी रख सकती हैं, 1800 अनोखे ‘टोडा’ लोगों की कहानी सुबह की हल्की धुंध अभी पहाड़ियों से हटी नहीं है। घास पर जमी ओस चमक रही है। मैदान के किनारे जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे लोग जमा हुए हैं। इसी पेड़ के नीचे एक बड़ा इम्तिहान होने वाला है। पूरी कहानी यहां पढ़ें 2- शरीर के ऊपरी हिस्से पर कपड़े नहीं पहनतीं बोंडा महिलाएं:शादी ठुकराने पर लड़कीवालों का घर तोड़ देते हैं, मृत्युभोज में खाते हैं गाय का मांस सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। पूरी कहानी यहां पढ़ें
Arunachal Singam Peak Result हुए घोषित; 26.03 लाख का प्रथम पुरस्कार जाहीर
अरुणाचल प्रदेश सिंघम पीक लॉटरी के 6 अप्रैल 2026 सुबह 10:55 बजे के परिणाम घोषित। टिकट संख्या 62J 27451 ने जीता 26.03 लाख का प्रथम पुरस्कार। पूरी सूची यहाँ देखें।
सिक्किम के मंगन जिले में रविवार को लाचेन-चुंगथांग रोड पर तेज बारिश और बर्फबारी हुई। इसके कारण लैंडस्लाइड भी हुआ और सड़क में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। यहां 800 टूरिस्ट फंस गए । यहां आज सुबह से ही पर्यटकों का रेस्क्यू जारी है। इधर, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से उत्तर भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में यमुनोत्री धाम समेत 3 जिलों में रविवार को बर्फबारी हुई। वहीं 6 जिलों में बारिश के साथ ओले गिरे। हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति के ऊंचे इलाकों में भी बर्फबारी हुई। गोंदला में 28.5 सेंटीमीटर, केलांग में 20.0 सेमी, हंसा में 5 सेमी बर्फ गिरी। जबकि शिमला, कुल्लू और मंडी में ओले गिरने से सेब की फसल को नुकसान हुआ। यूपी में आंधी-बारिश और बिजली गिरने से 72 घंटे में 15 लोगों की मौत हुई है। काशी, गोंडा, सुल्तानपुर और कानपुर समेत 11 जिलों में रविवार को रुक-रुककर बारिश हुई। कानपुर, मथुरा, संभल में ओले गिरे। राजस्थान में आज से नया वेदर सिस्टम एक्टिव होगा। 14 जिलों में आंधी के साथ तेज बारिश का अलर्ट है। दिल्ली-NCR और हरियाणा के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना है। देशभर में बारिश-बर्फबारी की 3 तस्वीरें… अगले दो दिन मौसम का हाल 5-6 अप्रैल- हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरलम और आंध्र प्रदेश में आंधी-तूफान की संभावना है। आंध्र प्रदेश, केरलम और पुडुचेरी में ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं, राजस्थान, बिहार और झारखंड में तेज बारिश हो सकती है। पंजाब और राजस्थान में कुछ जगहों पर 60 किमी/घंटा तक की रफ्तार से हवा चल सकती है। राज्यों के मौसम का हाल… मध्य प्रदेश: राज्य में 9 अप्रैल तक आंधी-बारिश का दौर, ग्वालियर समेत 24 जिलों में अलर्ट मध्य प्रदेश में 9 अप्रैल तक आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा। टर्फ के सक्रिय होने से सोमवार को ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा और शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में असर बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 7 अप्रैल से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। इसके कारण आंधी-बारिश की स्थिति बनी रहेगी। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान: राज्य के 14 जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी, ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट राजस्थान में नया स्ट्रॉन्ग वेदर सिस्टम एक्टिव होने से आज से तेज आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी है। 14 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राज्य के कुछ शहरों के तापमान में 1C-2C की बढ़ोतरी हुई है। पूरी खबर पढ़ें… छत्तीसगढ़: बंगाल में बने सिस्टम से राज्य में बारिश का अलर्ट, 3C तक गिर सकता है तापमान पश्चिम बंगाल में बने सिस्टम के असर से छत्तीसगढ़ का मौसम बदला हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार एक ट्रफ लाइन छत्तीसगढ़ के ऊपर से गुजर रही है, जिसके कारण बादल, बारिश की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान जगदलपुर में 36.9C का रहा। पूरी खबर पढ़ें… बिहार: राज्य के 6 जिलों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट, आंधी के साथ ओले गिरने की संभावना बिहार में आज 6 जिलों में बारिश-आंधी का ऑरेंज अलर्ट है। इन इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान तेज हवा, गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। अगले 3 दिनों तक पारा 40C के नीचे रहने के आसार हैं। अधिकतम तापमान में 2C से 4C तक गिरावट आ सकती है। पूरी खबर पढ़ें… पंजाब: 20 जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का यलो अलर्ट, अगले दो दिन ऑरेंज अलर्ट पंजाब के 20 जिलों में आज आंधी-बारिश का यलो अलर्ट है। कल से ऑरेंज अलर्ट है। बीते 24 घंटे में राज्य के तापमान में 1.6C की बढ़ोतरी हुई। सबसे ज्यादा तापमान 33.4C फरीदकोट का रहा। पूरी खबर पढ़ें…
रायपुर में 10 दिनों तक चले पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का समापन शुक्रवार को हुआ। इसमें कर्नाटक की टीम 23 गोल्ड मेडल के साथ ओवरऑल चैंपियन रही। वहीं, ओडिशा (21 गोल्ड) और झारखंड (16 गोल्ड) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। मेजबान छत्तीसगढ़ ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 गोल्ड, 10 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज समेत कुल 19 मेडल जीतकर 9वें स्थान पर रहा। मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के सभी पदक विजेताओं के लिए नकद पुरस्कारों की घोषणा की। सीएम ने कहा कि व्यक्तिगत स्पर्धाओं में गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ियों को 2 लाख रुपए, सिल्वर के लिए 1.5 लाख और ब्रॉन्ज के लिए 1 लाख रुपए दिए जाएंगे। वहीं, टीम इवेंट्स में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज विजेताओं को क्रमशः 1 लाख, 75 हजार और 50 हजार रुपए मिलेंगे। फुटबॉल में पुरुष टीम ने जीता सिल्वरअंतिम दिन पुरुष फुटबॉल के फाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल की टीम आमने-सामने थी। दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। 45वें मिनट में बंगाल के चाको ने गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। जबकि प्रदेश के खिलाड़ी फुल टाइम तक गोल करने में असफल रहे। इसके साथ ही टीम को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा, जबकि ब्रॉन्ज अरुणाचल प्रदेश और गोवा को मिला। वहीं, इसके पहले गुरुवार को छत्तीसगढ़ की महिला टीम ने झारखंड को हराकर गोल्ड जीता। मल्लखंभ में भी हम अव्वल:ट्राइबल गेम्स में मल्लखंभ को डेमोस्ट्रेशन गेम के रूप में शामिल किया गया। अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में हुए मल्लखंभ प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ ने 124.35 अंक के साथ पहला स्थान हासिल किया। महाराष्ट्र 118.35 अंक के साथ दूसरे और झारखंड 86.95 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। रोप, पोल और हैंगिंग मल्लखंभ में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रदेश को व्यक्तिगत खेल में 16 पदकछत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत खेलों में 16 मेडल जीते। इंटरनेशनल स्वीमिंग पूल में हुए इवेंट में हमारी टीम ने चार सिल्वर, 3 ब्रॉन्ज मेडल जीते। इसमें अनुष्का भगत ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए चारों सिल्वर मेडल हासिल किए। वहीं, वेटलिफ्टिंग में एकमात्र गोल्ड 77 किग्रा में निकिता ने जीता। इसके अलावा जगदलपुर में हुए एथलेटिक्स में मेंस शॉटपुट में सिद्धार्थ नागेश ने गोल्ड हासिल किया। इस तरह छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत खेलों में कुल 2 गोल्ड, 9 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज जीते। इंजरी के बाद गोल्ड जीतने वाली बॉक्सर मैरी कॉम से खास बातचीत मैरी कॉम ने जताई इच्छा- छत्तीसगढ़ सरकार एकेडमी का सेटअप देगी तो युवाओं को बॉक्सिंग की ट्रेनिंग और कोर्स कराने को तैयार सुमय कर की रिपोर्ट खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में शिरकत करने पहुंची 6 बार की वर्ल्ड चैम्पियन मुक्केबाज मैरी कॉम ने अपने जीवन के सबसे कठिन संघर्षों, ओलिंपिक के दबाव और अपनी एकेडमी को लेकर खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि 2022 में उन्हें एक गंभीर चोट लगी थी। दर्द और डर के कारण मैं 6 महीने तक रोती रही। उन्होंने इच्छा जताई कि मैं छत्तीसगढ़ में बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देना चाहती हूं। पेश है मैरी कॉम के साथ भास्कर से खास बातचीत... आपकी एकेडमी का रूटीन क्या है, क्या छत्तीसगढ़ में कोचिंग देना चाहेंगी?मणिपुर में मेरी एकेडमी में 100 से ज्यादा बच्चे हैं, जो अरुणाचल, असम, झारखंड के हैं। अगर छत्तीसगढ़ सरकार एकेडमी सेटअप करके देती है, तो मैं बॉक्सिंग कोर्स और ट्रेनिंग देने को तैयार हूं। आपकी फिल्म में बच्चे की बीमारी का एक इमोशनल सीन है, असलियत क्या थी?-फिल्म में दिखाया गया है कि मुझे विदेश में फोन पर सूचना मिली, लेकिन असलियत अलग थी। मुझे चीन जाने से पहले ही पता चल गया था कि मेरे बच्चे के दिल में छेद है। मेरा मन ट्रेनिंग में नहीं लग रहा था। तब आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, मैं सब-इन्स्पेक्टर थी और सैलरी मात्र 20-30 हजार थी। मैंने हिम्मत जुटाई और देश के लिए खेलने गई। वहां गोल्ड जीता और टूर्नामेंट की ‘बेस्ट बॉक्सर’ भी चुनी गई। आज की खेल सुविधाओं में क्या बदलाव ?-हमारे समय में सुविधाएं बहुत कम थीं। हम कच्चे मैदानों पर खेलते थे। आज सरकार साईं, टॉप्स स्कीम और स्कॉलरशिप से खिलाड़ियों को सब कुछ दे रही है। यहां तक कि अब साइकोलॉजिस्ट भी उपलब्ध है। ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर मेडल के करीब आकर खिलाड़ी क्यों चूक जाते हैं? - इसका सबसे बड़ा कारण ‘प्रेशर’ है। खिलाड़ियों पर देश, माता-पिता और दोस्तों की उम्मीदों का बहुत बोझ होता है। हर कोई इस मानसिक दबाव को हैंडल नहीं कर पाता, जिससे परफॉर्मेंस ऊपर-नीचे हो जाती है। मैं युवाओं को यही कहती हूं कि इस दबाव को साइड में रखकर सिर्फ अपने बेस्ट प्रदर्शन पर ध्यान दें।
झांसी में पूर्व डिप्टी सीएम एवं राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा की तारीफ की। उन्होंने कहा- राघव चड्ढा एक अच्छे वक्ता हैं। उन्होंने कुछ पब्लिक इश्यू उठाए हैं, जो आम आदमी पार्टी को अच्छे नहीं लगे। रही बात भाजपा के प्रति झुकाव की तो सभी स्पीच में वे भाजपा के खिलाफ ही बोलते हैं। सांसद के तौर पर उनकी परफॉरमेंस अच्छी रही है। अब वो आम आदमी पार्टी नहीं रही, वो खास आदमी पार्टी हो गई है। पार्टी में बहुत सारे उद्योगपति सदस्य बन गए। इसलिए वहां कार्यकर्ता और नेता का कोई महत्व नहीं है। राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा शुक्रवार को झांसी में सखी हनुमान मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां से भाजपा नेता रामजी परिहार और सदर विधायक रवि शर्मा के घर पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत की। लोग अफवाह फैला रहे हैं दिनेश शर्मा ने कहा- दूसरे दलों के लोग गैस और पेट्रोल को लेकर अफवाह फैला रहे हैं। मगर ये बात सही है कि विश्व में संकट है, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 रुपए लीटर पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में छूट कर दी। प्रोडक्ट और खाद पर कस्टम ड्यूटी हटा दी। जीएसटी का सरलीकरण कर दिया। क्राइसिस का मैनेजमेंट किया जा रहा है। देश के विपक्ष को उनकी आरती उतारनी चाहिए, मगर वो आरती अमेरिका से लेकर चीन तक की उतार रहे हैं। उस पाकिस्तान के बारे में बोलते हैं, जहां बुखमरी मची है। किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा दिनेश शर्मा ने यूजीसी पर कहा- थोड़े दिन प्रतीक्षा कर लीजिए। धर्मेंद्र प्रधान का 1 मार्च को बयान आ चुका है। उन्होंने कहा- अगड़ा, पिछड़ा, दलित समेत किसी के साथ कोई भेदभाव न हो। ये सरकार की प्राथमिकता पहले भी थी और आज भी है। अभी सुप्रीम कोर्ट में मामला है। अखिलेश के भारत के विश्वगुरु खोने का मौका गंवाने वाले बयान पर कहा- विश्व गुरु कौन बनता है, जो नेतृत्व करता है। अभी G20 हुआ तो जापान, जर्मनी, फांस, अमेरिका के लोग सामने की रो में बैठे थे और मोदी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे थे। अब गुरु तो हो ही गए न। गुरू का मतलब, नेतृत्वकर्ता और मोदी आज विश्व में है। 102 जिले हिंदू अल्पसंख्यक, उन्हें सुविधा मिले उन्होंने कहा- 2 की जगह अब हम एक बच्चे के सिद्धांत पर बढ़ रहे हैं। ये रिश्तों को समाप्त कर रहा है। संस्कृति को खत्म कर रहा है। डेमोग्राफी का परिवर्तन कर रहा है। अमेरिका रिसर्च कहती है कि जिनके यहां एक बच्चा होता है तो वे अवसादग्रस्त हो जाते हैं। सरसंघचालक ने 3 बच्चों के लिए कहा है। इस पर अमल होना चाहिए। सब लोगों को मिलकर एक राष्ट्रीय नीति तैयार करनी होगी। जनसंख्या के स्थाईकरण के संदर्भ में कानून बने। कश्मीर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश समेत 10 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं। हिंदू अल्पसंख्यक है, लेकिन उसको बहूसंख्यक का दर्जा मिलता है। 102 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक है, उसको अल्पसंख्यक के अधिकार मिलने चाहिए। इसमें मुस्लिम, सिख या किश्चियन का विरोध नहीं है, बल्कि देश के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रत्यन की बात है। भारत बुजुर्ग भारत देश न कहलाए, इसलिए ये प्रयास करना चाहिए। मैंने खतरा बताया है, अब मानना और न मानना समाज के ऊपर है। इस दौरान मंत्री मनोहर लाल मन्नू कोरी, सांसद अनुराग शर्मा, सदर विधायक रवि शर्मा, विधायक डॉ. रश्मि आर्य, जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह आदि मौजूद थे। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें… अयोध्या में बुर्का पहनकर लूटने वाली महिला हिंदू निकली:4 महीने की गर्भवती, खिलौना पिस्टल दिखाकर ज्वेलरी लूटी; बॉयफ्रेंड के साथ गिरफ्तार अयोध्या में ज्वेलरी शॉप में बुर्का पहनकर लूट करने वाली महिला हिंदू निकली। बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर उसने वारदात की थी। पुलिस ने गुरुवार देर रात दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। महिला का नाम पायल (25) और लड़के का नाम राहुल (27) है। पढ़ें पूरी खबर….
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

