'राहुल गांधी ने ली होगी ट्रेनिंग, लेकिन मुझे...', नदी में तैरने पर तुलना को लेकर बोले रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का अरुणाचल प्रदेश की उफनती नदियों में तैरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी तुलना कांग्रेस नेता राहुल गांधी से की गई थी, इसे लेकर उन्होंने प्रतिक्रिया दी है.
India Weather Update: पड़ोसी देश नेपाल में भारी बारिश के कारण मची तबाही और विनाशकारी सैलाब के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 अगस्त के लिए मौसम का ताजा बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक 27 अगस्त को उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 13 राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।इसके साथ ही पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी, वज्रपात और गर्जना को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तूफानी हवाएं चलने की आशंका है जबकि तटीय क्षेत्रों में समुद्र में उथल-पुथल को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।उत्तर भारत का मौसम: यूपी और उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का अनुमान, पूर्वी राजस्थान में भी चेतावनीउत्तर भारत के मैदानी व पहाड़ी इलाकों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 27 अगस्त को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। नेपाल से सटे इलाकों और यूपी के मैदानी भागों में बारिश की वजह से नदियों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है।पर्वतीय राज्य उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश और आंधी का संकटआईएमडी के मुताबिक 27 अगस्त को बिहार, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश होने का पूर्वानुमान दिया गया है। बारिश के साथ-साथ इन पूर्वी राज्यों में मौसम काफी खराब रह सकता है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने, बिजली कड़कने और आंधी-तूफान आने की संभावना है।पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और अरुणाचल समेत सभी 7 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्टपूर्वोत्तर भारत में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है। मौसम विभाग के अलर्ट के मुताबिक 27 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार बारिश दर्ज की जा सकती है।इन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के साथ-साथ तेज गर्जना होने और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। पूर्वोत्तर के राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।मध्य और दक्षिण भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में होगी भारी बारिशमध्य भारत के इलाकों में भी मानसून अपनी पूरी ताकत दिखा रहा है। 27 अगस्त को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही दोनों राज्यों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की गतिविधि भी देखने को मिल सकती है।दक्षिण भारत की बात करें तो केरल और माहे में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में तेज सतह हवाएं चलने का भी अनुमान है।अंडमान में तूफानी हवाओं का अलर्ट, समंदर में मछुआरों के लिए चेतावनीमौसम विभाग ने द्वीपीय क्षेत्रों और समुद्री सीमाओं पर खराब मौसम को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 27 अगस्त को 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।समुद्री स्थिति पर नजर डालें तो अरब सागर में सोमालिया और ओमान तटों के साथ-साथ उत्तर, पूर्व-मध्य और पश्चिम-मध्य अरब सागर के कई हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।ये भी पढ़ें- Nepal Flood Video: नेपाल में अचानक आई बाढ़ में 291 विदेशी लापता, 105 भारतीय पर्यटक भी सैलाब में गायबवहीं, बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सख्त हिदायत दी है।
Ceigall India Share Price: गुजरात-महाराष्ट्र में ₹609 करोड़ का मिला REC पावर प्रोजेक्ट, शेयर 4% चढ़ा
Ceigall India Share Price: इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज कंपनी Ceigall India के शेयर 26 अगस्त को एनएसई पर 4% से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। दरअसल, REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी (RECPDCL) की ओर से दिए गए एक बड़े इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनी है ।सिविल इंजीनियरिंग कंपनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 35 साल की अवधि तक सालाना ट्रांसमिशन चार्ज ₹6,086.70 मिलियन (यानी ₹608.67 करोड़) होगा।Ceigall India के शेयरों में लगातार चार दिनों से बढ़त देखी जा रही है और इस दौरान इनमें लगभग 9% की बढ़ोतरी हुई है।टैरिफ-आधारित ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बिडिंग और ई-रिवर्स ऑक्शन के ज़रिए मिले इस प्रोजेक्ट में लकाडिया फेज़-II (7.5 GW), जाम खंभालिया फेज़-II (5.5 GW) और जामनगर फेज़-I (1 GW) से बिजली पहुंचाने (इवैक्यूएशन) के लिए एक कॉमन ट्रांसमिशन सिस्टम बनाना शामिल है।फाइलिंग के अनुसार, इसके दायरे में 765/400 kV का एयर-इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) और गुजरात व महाराष्ट्र में लगभग 300 km लंबी ट्रांसमिशन लाइनें बनाना शामिल है।प्रोजेक्ट को पूरा करने की अवधि 36 महीने है, जबकि ऑपरेशनल अवधि तय कमीशनिंग तारीख से 35 साल होगी। यह प्रोजेक्ट RECPDCL (एक घरेलू कंपनी) ने टैरिफ-आधारित कॉम्पिटिटिव बिडिंग फ्रेमवर्क के तहत ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर चुनने की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर दिया था।कंपनी ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट 'रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ैक्शन' (आपसी हितों से जुड़े लेन-देन) के दायरे में नहीं आता है और न तो प्रमोटर, न ही प्रमोटर ग्रुप और न ही ग्रुप की कंपनियों का प्रोजेक्ट देने वाली कंपनी में कोई हित है।इस ट्रांसमिशन सिस्टम का मकसद पहचाने गए बिजली उत्पादन क्षेत्रों से बिजली पहुंचाने में मदद करना और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है।बुधवार को Ceigall India के शेयर इंट्राडे में 6.5% तक बढ़कर ₹345.35 पर पहुंच गए। दोपहर 2.14 बजे तक स्टॉक लगभग 5% की बढ़त के साथ ₹340.75 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले महीने इसमें 0.74% की बढ़त हुई है और इस साल अब तक यह लगभग 25% ऊपर है।सीगल इंडिया को फ्रंटियर हाईवे का ऑर्डर मिला25 अगस्त, 2026 की कंपनी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सीगल इंडिया को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटियर हाईवे के एक हिस्से के लिए ₹704.70 करोड़ का सड़क निर्माण ऑर्डर मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में GST शामिल नहीं है।यह प्रोजेक्ट सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग के साथ एक जॉइंट वेंचर के ज़रिए पूरा किया जाएगा, जिसमें सीगल इंडिया की 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि सुशी इंफ्रा के पास बाकी 26% हिस्सेदारी होगी। इस कॉन्ट्रैक्ट में NH-913 के लाडा-सारली सेक्शन के 82.4 किलोमीटर लंबे हिस्से (km 85.60 से km 168.00 तक) का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) आधार पर किया जाएगा।Advait Energy Share Price: मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी से मिला ऑर्डर, शेयर को लगे पंख, 8% उछला(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
IMD Weather Update: देश भर में मानसून की सक्रियता के बीच कई राज्यों में मौसम का मिजाज बेहद उग्र हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण उत्तर प्रदेश और उससे सटे पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से भारी से बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस मौसमी प्रणाली के असर से 26 अगस्त को दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। देश के कई अन्य राज्यों में 1 सितंबर तक मूसलाधार और तूफानी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। जबकि प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियों में सुस्ती बनी रह सकती है।बीते 24 घंटों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी या उससे अधिक) दर्ज की गई। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और तटीय कर्नाटक में 12 से 20 सेमी तक बहुत भारी बारिश दर्ज हुई। जबकि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, बिहार, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल में 7 से 11 सेमी तक भारी बारिश दर्ज की गई है।उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी में 26 अगस्त को रेड अलर्ट, उत्तराखंड में 1 सितंबर तक बारिशउत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मौसम की स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। 26 अगस्त को दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 और 27 अगस्त को, और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 अगस्त को बहुत भारी जबकि 27 अगस्त, 31 अगस्त और 1 सितंबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान है।उत्तराखंड में 26 अगस्त से 1 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश जारी रहेगी जिसमें 26 अगस्त और 30 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान भारी बारिश की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक व्यापक बारिश और 1 सितंबर को भारी वर्षा का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में भी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच बारिश होगी। जबकि पूर्वी राजस्थान में 26 अगस्त को भारी बारिश और 27 अगस्त को गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।मध्य भारत: उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश में 26 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का संकटमध्य भारत में कम दबाव के क्षेत्र के सीधे असर की वजह से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मौसमी गतिविधियां तेज रहेंगी। उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश में 26 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 26 और 27 अगस्त को, और पूर्वी मध्य प्रदेश में 26-27 अगस्त के साथ-साथ 30 अगस्त से 1 सितंबर तक भारी बारिश होने की संभावना है।छत्तीसगढ़ में 26 अगस्त से 1 सितंबर तक पूरे सप्ताह व्यापक रूप से भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। विदर्भ में 26-27 अगस्त और 31 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 30 अगस्त तक गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।पूर्वी भारत: बिहार में आकाशीय बिजली की चेतावनी, ओडिशा में 1 सितंबर तक मूसलाधार बारिशपूर्वी भारत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में 26 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश होगी। बिहार में 26 और 27 अगस्त तथा 29 अगस्त को अधिकांश जगहों पर बारिश का अनुमान है, जिसमें 26 से 29 अगस्त के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने 26 अगस्त को बिहार के अलग-अलग हिस्सों में मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की विशेष चेतावनी जारी की है।इसके अलावा झारखंड में 27 से 30 अगस्त, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 27-28 अगस्त और गांगेय पश्चिम बंगाल में 26 अगस्त व 29 से 31 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना है। जबकि 26 अगस्त को उप-हिमालयी बंगाल में बहुत भारी बारिश हो सकती है. ओडिशा में 26 से 28 अगस्त तक भारी बारिश होगी और 29 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 26 और 27 अगस्त को 50 से 60 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।पूर्वोत्तर और पश्चिम भारत: असम, अरुणाचल में भारी बारिश और कोंकण-गोवा का हालपूर्वोत्तर भारत में 26 अगस्त से 1 सितंबर तक मानसून पूरी तरह मेहरबान रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 30 अगस्त तक गरज-चमक के साथ भारी बारिश का दौर जारी रहेगा. अरुणाचल प्रदेश में 26 और 30 अगस्त को, तथा असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 30 अगस्त को पृथक स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।पश्चिम भारत की बात करें तो कोंकण और गोवा में 26 अगस्त से 1 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश जारी रहेगी। वहीं गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र एवं कच्छ में 1 सितंबर तक छिटपुट से हल्की बारिश का अनुमान है। 26 अगस्त को मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में बिजली चमकने के साथ बारिश होने के आसार हैं।दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: केरल और लक्षद्वीप में बारिश, आंध्र और तमिलनाडु में तेज हवाएंदक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक में 26 अगस्त से 1 सितंबर तक व्यापक बारिश होगी। केरल और माहे के साथ लक्षद्वीप में 26 से 28 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश का अनुमान है. 26 अगस्त को लक्षद्वीप में और 26-27 अगस्त को केरल व माहे में भारी बारिश हो सकती है।ये भी पढ़ें- Nepal Flood: नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही! सैलाब में बह गए 1000 लोग, रसुवा में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और पुल भी तबाहमौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 26 से 30 अगस्त के दौरान 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली कड़कने की चेतावनी दी है। उत्तर और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के इलाकों में मजबूत सतह हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।
कभी-कभी भारतीय राजनीति में मुद्दे इतने गंभीर होते हैं कि उन पर बहस करते-करते नेताओं को पसीना आ जाता है। और कभी मामला ऐसा होता है कि पसीना बहाने की जरूरत ही नहीं पड़ती, सीधे नदी में उतर जाइए। अरुणाचल प्रदेश की एक नदी में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की तैराकी ने कुछ ऐसा ही राजनीतिक ज्वार पैदा कर दिया है। रिजिजू पानी में थे, कांग्रेस किनारे से टिप्पणी कर रही थी और देखते-देखते इस पूरी तैराकी में राहुल गांधी भी बिना पानी छुए कूद पड़े। दरअसल, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश की एक नदी में तैरते हुए अपना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो के साथ उन्होंने लोगों को गहरे पानी में जाने से सावधान भी किया और कहा कि अरुणाचल की नदियां विशाल और बेहद गहरी हैं, इसलिए जिसे तैरना नहीं आता, उसे गहरे पानी में नहीं जाना चाहिए। लेकिन राजनीति में नदी की गहराई से ज्यादा नेताओं की टिप्पणियों की गहराई नापी जाती है। इसे भी पढ़ें: दिमागी नक्सल विवाद पर P Chidambaram का Kiren Rijiju को करारा जवाब, बोले- 'हमें गर्व है' रिजिजू की तैराकी पर पहले हल्की-फुल्की फिटनेस वाली बहस शुरू हुई। बताया गया कि उन्होंने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी इसी तरह तैरने की चुनौती दी थी। इसके बाद कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा मैदान में उतरे, या ऐसे भी कह सकते हैं कि उन्होंने नदी किनारे खड़े होकर राजनीतिक लाइफ जैकेट पहन ली। पवन खेड़ा ने रिजिजू के पहनावे पर तंज कसते हुए उन्हें “हाफ-नेकेड” बताया और कहा कि राहुल गांधी भाजपा नेताओं के दिमाग पर इस कदर छा गए हैं कि किरेन रिजिजू आधे कपड़ों में तैरने भी जाएं तो राहुल गांधी का नाम लिए बिना नहीं रह सकते। खेड़ा ने इसे भाजपा पर राहुल गांधी के प्रभाव का प्रमाण बताते हुए लिखा कि आखिर राहुल गांधी ने भाजपा नेताओं के साथ ऐसा क्या कर दिया है? बस फिर क्या था। नदी में तैरते रिजिजू को शायद इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि पानी से बाहर निकलते ही उन्हें राजनीतिक धाराओं से जूझना पड़ेगा। मंगलवार को रिजिजू ने पवन खेड़ा को तीखा जवाब दिया। उन्होंने याद दिलाया कि खेड़ा राज्यसभा के पहले कार्यकाल के सांसद हैं और पार्टी द्वारा नामित होकर सदन पहुंचे हैं, जबकि वह खुद अब तक आठ चुनाव लड़ चुके हैं। रिजिजू ने साफ कहा कि राजनीतिक अनुभव का अंतर किसी को भी व्यक्तिगत या “अशोभनीय” टिप्पणी करने का अधिकार नहीं देता। रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि जब वह अपने गांव के लोगों के साथ नदी में तैर रहे थे, तब उनके दिमाग में राहुल गांधी का कोई विचार नहीं था। उनके मुताबिक कांग्रेस की ओर से यह टिप्पणी की गई कि वह राहुल गांधी की तरह तैर नहीं सकते, जिसके बाद उन्होंने जवाब दिया। रिजिजू का दावा है कि उन्हें ऐसी गतिविधियों के लिए किसी विशेष ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ती, वह अरुणाचल की ताकतवर नदियों के “नेचुरल खिलाड़ी” हैं। यानी कांग्रेस का आरोप है कि रिजिजू पानी में भी राहुल गांधी को खोज रहे हैं, जबकि रिजिजू का कहना है कि राहुल गांधी को पानी में कांग्रेस ने ही फेंका और अब उनसे पूछा जा रहा है कि वह वहां पहुंचे कैसे! मामला यहीं नहीं रुका। पवन खेड़ा के “हाफ-नेकेड” वाले तंज पर रिजिजू ने भी ऐसा पलटवार किया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का नाम अचानक इस तैराकी प्रतियोगिता में शामिल हो गया। रिजिजू ने खेड़ा को चेतावनी भरे व्यंग्य में कहा कि अगर वह “आधे कपड़ों में तैरने” को लेकर ऐसी बातें करेंगे तो वह उनके “अनुशासनहीन व्यवहार” की शिकायत हिमंत बिस्वा सरमा से कर देंगे। साथ ही रिजिजू ने सीधा सवाल भी दाग दिया कि क्या पवन खेड़ा खुद सूट और कोट पहनकर तैरते हैं? अब इस सवाल का जवाब शायद फैशन डिजाइनर से ज्यादा राजनीतिक विश्लेषक तलाशेंगे। क्योंकि भारतीय राजनीति में यह पहला मौका हो सकता है जब किसी केंद्रीय मंत्री की तैराकी पर बहस का केंद्र जल सुरक्षा, फिटनेस या खेल नहीं, बल्कि यह बन गया हो कि स्विमिंग ड्रेस की राजनीतिक मर्यादा क्या होती है। इस पूरे प्रकरण में सबसे दिलचस्प किरदार राहुल गांधी रहे, जो बहस के केंद्र में होने के बावजूद नदी में मौजूद नहीं थे। पवन खेड़ा का कहना है कि राहुल गांधी भाजपा के नेताओं के दिमाग में इतने गहरे उतर चुके हैं कि रिजिजू तैराकी के दौरान भी उनका नाम लेते हैं। दूसरी तरफ रिजिजू का कहना है कि राहुल गांधी उनके दिमाग में नहीं थे, बल्कि कांग्रेस ने पहले उनकी तैराकी की तुलना राहुल गांधी से की और फिर जवाब मिलने पर राजनीतिक शोर शुरू कर दिया। यानी सवाल अब यह नहीं है कि अरुणाचल की नदी कितनी गहरी है। असली सवाल यह है कि भारतीय राजनीति में राहुल गांधी कितनी गहराई तक मौजूद हैं, कम से कम कांग्रेस और भाजपा के नेताओं की सोशल मीडिया बहस में तो जरूर हैं। वैसे रिजिजू ने जिस वीडियो में लोगों को चेताया था कि तैरना न आता हो तो गहरे पानी में न उतरें, शायद उसी सलाह को अब राजनीतिक संदर्भ में भी पढ़ा जा सकता है। क्योंकि यहां एक तरफ नदी का पानी गहरा है, दूसरी तरफ राजनीतिक व्यंग्य की धारा तेज है। कोई अपनी फिटनेस दिखाने नदी में उतरा था, कोई उसे “हाफ-नेकेड स्विम” बताकर मजाक उड़ाने लगा और फिर बहस चुनावी अनुभव, राज्यसभा की सदस्यता, हिमंत बिस्वा सरमा और राहुल गांधी तक पहुंच गई। देखा जाये तो भारतीय राजनीति में मुद्दे बदलते देर नहीं लगती। कल तक सवाल था कौन कितना तैर सकता है, आज बहस है कौन किसके दिमाग में तैर रहा है। फिलहाल इतना तय है कि अरुणाचल की नदी में किरेन रिजिजू अकेले तैर रहे थे, लेकिन राजनीतिक लहरें इतनी उठीं कि कांग्रेस, भाजपा, राहुल गांधी, पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा, सब किसी न किसी तरह इस “स्विमिंग पूल ऑफ पॉलिटिक्स” में पहुंच गए। अब बस इंतजार इस बात का है कि अगली चुनौती क्या होगी, तैराकी की, दौड़ की या फिर राजनीतिक गहरे पानी में बिना लाइफ जैकेट उतरे रहने की। वैसे भारतीय राजनीति में एक बात बिल्कुल तय है कि यहां नेता नदी में तैरें या नहीं, बयानबाजी जरूर रोज नई गहराइयों में गोता लगाती रहती है।
हाल ही में बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि (SR) स्तर की वार्ता आयोजित हुई। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच उपजे अभूतपूर्व तनाव को कम करने और संबंधों को पुनः पटरी पर लाने की दिशा में इस बैठक को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ माना जा रहा है। यह वार्ता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि यह आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आयोजित हुई है, जहाँ दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत की संभावना जताई जा रही है। वार्ता में सीमांकन की दिशा में आगे बढ़ने और सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी प्रयासों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि डोभाल और वांग ने भारत-चीन सीमा विवाद पर ‘‘स्पष्ट और गहन’’ विचार-विमर्श किया तथा दोनों देशों के ‘‘समग्र और दीर्घकालिक हितों’’ को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का ‘‘राजनीतिक समाधान’’ तलाशने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई। डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे थे। उनकी यात्रा को 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के जारी प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारतीय पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।’’ विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा से कुछ सप्ताह पहले हुई है। डोभाल और वांग इस वार्ता के लिए नियुक्त विशेष प्रतिनिधि हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में तथा रचनात्मक और दूरदर्शी भावना के साथ दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने भारत-चीन सीमा विवाद पर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने दोनों देशों के समग्र और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई।’’ बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के दृष्टिकोण के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों में जारी सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की। दूतावास ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने, स्थिरता बनाए रखने, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करने, सीमांकन की दिशा में प्रगति करने और सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी कार्यों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।’’ विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में एलएसी के पास चीनी सैनिकों की आक्रामक सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। बैठक में डोभाल ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल होने का सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। डोभाल ने कहा, ‘‘मुझे बहुत खुशी है कि हम 25वें दौर की वार्ता के लिए यहां हैं। यह बातचीत खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जल्द होने वाला है।’’ उन्होंने रूस में 2024 में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और पिछले साल चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और चिनफिंग की मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम अपने नेताओं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप बैठक कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने कजान और तियानजिन में हमारे संबंधों को स्पष्ट और सकारात्मक दिशा दी थी।’’ इसे भी पढ़ें: Katarniaghat में बह रहे 5 Elephants को वन और सिंचाई विभाग ने बचाया डोभाल ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि द्विपक्षीय संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संबंधों में जो सामान्य स्थिति देखने को मिली है, उसका सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।’’ डोभाल ने सीमा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेदों के स्पष्ट संदर्भ में कहा, ‘‘आज हमने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के अपने प्रयासों को किस तरह और प्रभावी तथा मजबूत बनाया जा सकता है।’’ चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। डोभाल ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल आयोजन और तीनों दर्रों के जरिये पारंपरिक सीमा व्यापार की बहाली से हमारे लोगों, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों को वास्तविक लाभ मिला है।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने साझा हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। वांग ने कहा कि चीन और भारत के संबंध अब केवल द्विपक्षीय दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका वैश्विक और रणनीतिक महत्व भी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए संवाद बढ़ाना, आपसी विश्वास मजबूत करना, बाधाएं दूर करना और मुश्किलों से पार पाना जरूरी है। हमें अच्छे पड़ोसी, अच्छे मित्र और ऐसे साझेदार बनना चाहिए जो एक-दूसरे की सफलता में योगदान दें।’’ वांग ने डोभाल के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नयी गति देने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘मैं साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर आपके साथ गहन विचार-विमर्श जारी रखने को लेकर आशान्वित हूं, ताकि हम एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकें और सीमा विवाद को उचित तरीके से संभाल सकें। इससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहेगी, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी नयी गति मिलेगी।’’ वांग ने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों पर दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य माध्यमों से नियमित संपर्क में हैं तथा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप काम कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Allahabad High Court ने Lucknow के 88 गांवों में जल संकट दूर करने के दिए निर्देश डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि हैं। यह व्यवस्था 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद के व्यापक समाधान के लिए की गई थी। विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की इस व्यवस्था से सीमा विवाद को हल करने में सफलता नहीं मिली है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न मुद्दों पर बार-बार उभरने वाले तनाव से निपटने के लिए इसे एक उपयोगी माध्यम मानते हैं। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
Ajit Doval और Wang Yi सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान पर सहमत, LAC शांति पर दिया जोर
के जे एम वर्माबीजिंग, 25 अगस्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई वार्ता के दौरान भारत ने चीन से कहा कि दोनों देशों के समग्र संबंधों के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। वार्ता में सीमांकन की दिशा में आगे बढ़ने और सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी प्रयासों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि डोभाल और वांग ने भारत-चीन सीमा विवाद पर ‘‘स्पष्ट और गहन’’ विचार-विमर्श किया तथा दोनों देशों के ‘‘समग्र और दीर्घकालिक हितों’’ को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का ‘‘राजनीतिक समाधान’’ तलाशने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई। डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे थे। उनकी यात्रा को 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के जारी प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारतीय पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।’’विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा से कुछ सप्ताह पहले हुई है। डोभाल और वांग इस वार्ता के लिए नियुक्त विशेष प्रतिनिधि हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में तथा रचनात्मक और दूरदर्शी भावना के साथ दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने भारत-चीन सीमा विवाद पर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने दोनों देशों के समग्र और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई।’’बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के दृष्टिकोण के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों में जारी सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की। दूतावास ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने, स्थिरता बनाए रखने, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करने, सीमांकन की दिशा में प्रगति करने और सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी कार्यों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।’’विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में एलएसी के पास चीनी सैनिकों की आक्रामक सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। बैठक में डोभाल ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल होने का सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। डोभाल ने कहा, ‘‘मुझे बहुत खुशी है कि हम 25वें दौर की वार्ता के लिए यहां हैं। यह बातचीत खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जल्द होने वाला है।’’उन्होंने रूस में 2024 में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और पिछले साल चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और चिनफिंग की मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम अपने नेताओं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप बैठक कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने कजान और तियानजिन में हमारे संबंधों को स्पष्ट और सकारात्मक दिशा दी थी।’’डोभाल ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि द्विपक्षीय संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संबंधों में जो सामान्य स्थिति देखने को मिली है, उसका सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।’’डोभाल ने सीमा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेदों के स्पष्ट संदर्भ में कहा, ‘‘आज हमने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के अपने प्रयासों को किस तरह और प्रभावी तथा मजबूत बनाया जा सकता है।’’चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। डोभाल ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल आयोजन और तीनों दर्रों के जरिये पारंपरिक सीमा व्यापार की बहाली से हमारे लोगों, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों को वास्तविक लाभ मिला है।’’विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने साझा हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। वांग ने कहा कि चीन और भारत के संबंध अब केवल द्विपक्षीय दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका वैश्विक और रणनीतिक महत्व भी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए संवाद बढ़ाना, आपसी विश्वास मजबूत करना, बाधाएं दूर करना और मुश्किलों से पार पाना जरूरी है। हमें अच्छे पड़ोसी, अच्छे मित्र और ऐसे साझेदार बनना चाहिए जो एक-दूसरे की सफलता में योगदान दें।’’वांग ने डोभाल के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नयी गति देने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘मैं साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर आपके साथ गहन विचार-विमर्श जारी रखने को लेकर आशान्वित हूं, ताकि हम एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकें और सीमा विवाद को उचित तरीके से संभाल सकें। इससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहेगी, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी नयी गति मिलेगी।’’वांग ने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों पर दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य माध्यमों से नियमित संपर्क में हैं तथा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप काम कर रहे हैं। डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि हैं। यह व्यवस्था 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद के व्यापक समाधान के लिए की गई थी। विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की इस व्यवस्था से सीमा विवाद को हल करने में सफलता नहीं मिली है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न मुद्दों पर बार-बार उभरने वाले तनाव से निपटने के लिए इसे एक उपयोगी माध्यम मानते हैं।
अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई, 19 बच्चों को बचाया, तीन महिलाएं गिरफ्तार
ईटानगर, 25 अगस्त . अरुणाचल प्रदेश Police ने कथित बाल तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 19 बच्चों को सुरक्षित बचाया है. इस मामले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर बिचौलिया और नेटवर्क संचालकों की मददगार होने का आरोप है. Police अधिकारियों ने Tuesday को बताया कि विशेष जांच ... Read more
अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री की अहम बैठक, LAC पर हुई चर्चा
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बीजिंग में मुलाकात की. इस दौरान भारत-चीन सीमा विवाद, पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बनाए रखने और तनाव कम करने के उपायों पर सहमति जताई.
जयशंकर और डोभाल की रूस-चीन यात्रा के कूटनीतिक संदेश को ऐसे समझिए
महान भारतीय कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने कहा था कि हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ होता है। स्वार्थ के बिना कोई मित्रता नहीं हो सकती। यह एक कड़वा सच है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर उनकी बात हू-ब-हू लागू होती है। उनकी इसी बात से प्रेरणा लेते हुए समकालीन भारतीय नेतृत्व यानी भारत दुनिया की किसी एक शक्ति-धुरी में बंधने के बजाय रूस, चीन और पश्चिम—तीनों के साथ अपने हितों के अनुसार समानांतर कूटनीति चला रहा है। स्वाभाविक है कि कूटनीतिक संतुलन में बाधाएं आएंगी ही और सम्बन्धों में थोड़ी सी गफलत भारत को बहुत क्षति पहुंचा सकती है। इसलिए जब जब ऐसी सम्भावनाएं बलवती दिखाई देती हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद सिपहसालार सक्रिय हो जाते हैं। वाकई, यह संयोग नहीं है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस में और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल चीन में लगभग एक ही समय में अपने अपने होमवर्क को दुरुस्त करने को लेकर सक्रिय हैं। गत 23–24 अगस्त को जयशंकर ने मॉस्को में भारत-रूस सहयोग पर बातचीत की, जबकि डोभाल 24–25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वें विशेष प्रतिनिधि दौर में हिस्सा लिए। इसके गहरे कूटनीतिक निहितार्थ हैं। इसे भी पढ़ें: Russia में Jaishankar, China में Doval, Japan में Piyush Goyal ने संभाला मोर्चा, आखिर क्या है Modi का मिशन? अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो एक ही समय में भारत की तरफ से दो महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्राएं चल रही है, जिसके दृष्टिगत विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस में हैं, जबकि NSA अजीत डोभाल चीन में रणनीतिक बातचीत कर रहे हैं। दरअसल, ये यात्राएं भारत की उस कुशल विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें सर्वाधिक मजबूत दुश्मन देश चीन के साथ तनाव कम करने का प्रयास तो शामिल है ही, लगे हाथ अपने पुराने वफादार मित्र रूस संग पुराने संबंधों को बदली हुई परिस्थितियों में और मजबूती देने की भगीरथ कोशिश चल रही है। इसी के तरहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सीमा विवाद को लेकर होने वाली बातचीत में हिस्सा लिए। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। खासकर अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव को जो कम करने की शुरुआत की थी, उसके बाद से ही दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है जबकि यह गलवान झड़प के बाद थम सा गया था। हालांकि सुधार के संकेतों के बावजूद यह नहीं कह सकते कि भरोसा पूरी तरह लौट आया है, क्योंकि हाल में अरुणाचल प्रदेश को लेकर पेइचिंग द्वारा अपनाया गया रुख इसका सच्चा सबूत है। यही वजह है कि चीन और रूस दोनों से पुनः बातचीत की जरूरत आन पड़ी है। वहीं ब्रिक्स की मेजबानी से पहले उपजे अरुणाचल गतिरोध के पीछे भी चीनी चाल को समझने की जरूरत है। यह ठीक है कि दोनों ही देशों का हित सीमा पर शांति और स्थिरता में निहित है। उसके मद्देनजर यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि सितंबर में भारत को ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करनी है। इसमें शी चिनफिंग के भी आने की चर्चा है, लेकिन उन्होंने कन्नी काटने के बहाने ढूंढ लिए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त के आखिर में जब पीएम मोदी SCO समिट के लिए चीन के तियानजिन गए थे, तो वहां शी के साथ मुलाकात ने द्विपक्षीय संबंधों को गति देने में मदद की थी। तब दोनों ने दोहराया था कि भारत और चीन विकास के साझेदार है और आपसी मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए। यह बात आज भी उतना ही सच है। उधर, भारत पर बढ़ते अमेरिकी दबाव के बीच जयशंकर की मॉस्को यात्रा की अहमियत भी मौजूदा भू-राजनीति को देखते हुए अहम हो जाती है, क्योंकि गत सोमवार को उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। फिर वे अपने समकक्ष से मिले। इस दौरान बातचीत के अजेंडे में व्यापार और ऊर्जा से लेकर वैश्विक मुद्दे तक शामिल रहे है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय कसौटी पर ये खरे उतरे हुए द्विपक्षीय सम्बन्ध हैं। यद्यपि नई दिल्ली-मॉस्को संबंधों को लगातार अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ा है। खासकर यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में ईरान जिस तरह उलझा पड़ा है, आगे कूटनीतिक चुनौती और बड़ी हो सकती है। याद रहे कि जब बेहद मुश्किल हालात में भी तियानजिन से मोदी, पूतिन और चिनफिंग की तस्वीर आई तो उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था, खासकर अमेरिका-यूरोप का। उस समय ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ वॉर छेड़ रखी थी। जबकि आज वैश्विक परिस्थितियां तब से ज्यादा जटिल है। दुनिया का थानेदार अमेरिका अब भी टैरिफ को हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है और ऊर्जा. संकट बरकरार है। लिहाजा भारत को संतुलित नीति अपनाने की जरूरत है। मेरे विचार में विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की कूटनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि— पहला, रूस में जयशंकर: पुरानी दोस्ती को नए आर्थिक आधार देना पसंद किए हैं। जयशंकर की मॉस्को यात्रा सिर्फ रक्षा संबंधों की औपचारिक समीक्षा नहीं थी, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान-तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इसका अर्थ है कि भारत रूस को केवल हथियारों के पुराने आपूर्तिकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और व्यापार का दीर्घकालीन साझेदार बनाना चाहता है। और यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस पर पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत अपने रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत को छोड़ना नहीं चाहता। दूसरा, चीन में डोभाल सीमा विवाद को 'सुरक्षा चैनल' में संभालना चाहते हैं। डोभाल का बीजिंग जाना बिल्कुल अलग प्रकृति की कूटनीति है। वे वांग यी के साथ सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता कर रहे हैं। 2020 के गलवान संकट के बाद भारत-चीन संबंधों में सबसे बड़ी समस्या यही रही है कि सीमा पर शांति के बिना सामान्य संबंध कितने आगे बढ़ सकते हैं। भारत का संदेश पहले ही स्पष्ट किया गया है—सीमा पर शांति और स्थिरता अच्छे द्विपक्षीय संबंधों की बुनियादी शर्त है। इसलिए डोभाल की बातचीत का वास्तविक परीक्षण यह होगा कि क्या LAC पर स्थायी सैन्य स्थिरता, गश्त व्यवस्था और विश्वास बहाली की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है। तीसरा, दोनों यात्राओं को साथ रखकर देखें तो असली रणनीति दिखाई देती है। वह यह कि यहाँ भारत की कूटनीति का एक दिलचस्प ढांचा दिखाई देता है: मॉस्को — सामरिक/ऊर्जा/आर्थिक सुरक्षा। नई दिल्ली — बहुपक्षीय नेतृत्व और BRICS। बीजिंग — सीमा सुरक्षा और तनाव प्रबंधन। और इसके समानांतर अमेरिका, यूरोप, जापान तथा QUAD के साथ भारत के संबंध भी चलते रहेंगे। अर्थात भारत का विकल्प Russia या USA अथवा China या USA नहीं है। विकल्प है—जहाँ भारतीय हित जिस साझेदारी की मांग करें, वहाँ उस साझेदारी को आगे बढ़ाना। यही रणनीतिक स्वायत्तता का व्यावहारिक रूप है। भारत की बहु-संरेखीय कूटनीति पर विशेषज्ञ विश्लेषण भी इसी व्यापक प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है। चौथा, सबसे महत्वपूर्ण कड़ी—शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा है। इस पूरे घटनाक्रम को सितंबर में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से अलग करके देखना कठिन है। Reuters के अनुसार शी जिनपिंग के सितंबर में नई दिल्ली आने की संभावना है, हालांकि यात्रा की आधिकारिक पुष्टि उस रिपोर्ट के समय तक नहीं हुई थी। इसलिए डोभाल-वांग बातचीत को केवल सीमा वार्ता मानना अधूरा होगा। भारत शायद पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि LAC पर तनाव नियंत्रित हो → सैन्य जोखिम घटे → राजनीतिक संवाद बढ़े → मोदी-शी मुलाकात के लिए वातावरण बने → BRICS में भारत अपनी प्राथमिकताएँ आगे बढ़ाए। पांचवां, लेकिन भारत चीन पर 'नरम' नहीं हुआ है। यह अंतर समझना बहुत जरूरी है। संवाद ≠ समझौता। तनाव कम करना ≠ सीमा विवाद छोड़ना। व्यापार बढ़ाना ≠ रणनीतिक भरोसा लौटना। भारत चीन के साथ संवाद बढ़ा रहा है क्योंकि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी हैं और लंबी सीमा पर लगातार तनाव भारत के लिए आर्थिक और सैन्य दोनों दृष्टि से महंगा है। इसलिए डोभाल का बीजिंग जाना कमजोरी का संकेत नहीं बल्कि नियंत्रित प्रतिस्पर्धा (managed competition) की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है। छठा, रूस और चीन—दोनों को एक साथ संभालने की चुनौती है। भारत के लिए असली कूटनीतिक परीक्षा यह है कि रूस और चीन की बढ़ती निकटता के बीच मॉस्को से अपने विशेष संबंध बचाए जाएँ और बीजिंग के साथ सीमा तनाव भी नियंत्रित किया जाए। यदि भारत रूस से बहुत दूर जाता है तो चीन-रूस धुरी मजबूत हो सकती है। यदि भारत चीन के साथ अत्यधिक तनाव रखता है तो दो मोर्चों पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए जयशंकर और डोभाल की यात्राएँ एक व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखाई देती हैं: रूस को दूर मत जाने दो। चीन को अनियंत्रित मत होने दो। अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर मत हो। और भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखो। सातवां, आने वाले महीनों में चार परिणाम सबसे महत्वपूर्ण होंगे। पहला—LAC: क्या चीन सीमा पर स्थायी सैन्य स्थिरता के लिए तैयार होता है? दूसरा—रूस: क्या भारत-रूस व्यापार और भुगतान व्यवस्था रक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा, तकनीक और निवेश तक पहुँचती है? तीसरा—BRICS: क्या भारत रूस-चीन प्रभाव के बीच BRICS को अपने आर्थिक और वैश्विक दक्षिण के एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर पाता है? चौथा—अमेरिका: क्या Washington भारत की रूस-नीति और चीन से संवाद को स्वीकार करते हुए भारत को Indo-Pacific में अपना प्रमुख साझेदार बनाए रखता है? निष्कर्ष यह कि जयशंकर का मॉस्को और डोभाल का बीजिंग दौरा वास्तव में दो अलग-अलग यात्राएँ नहीं, बल्कि एक ही भारतीय रणनीति के दो पहलू हैं। जयशंकर रणनीतिक गहराई संभाल रहे हैं और डोभाल सीमा सुरक्षा। भारत का लक्ष्य शायद रूस और चीन में से किसी एक को चुनना नहीं, बल्कि दोनों के साथ संबंधों को इस तरह संतुलित करना है कि भारत की सामरिक स्वायत्तता, आर्थिक सुरक्षा और सीमा-सुरक्षा—तीनों एक साथ मजबूत हों। और सितंबर का BRICS सम्मेलन इस कूटनीतिक कवायद की अगली बड़ी परीक्षा बन सकता है। इसलिए कूटनीतिक संतुलनअपरिहार्य है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
India Weather Update: देश भर के अलग-अलग हिस्सों भारी बारिश और आंधी तूफान के कहर के बीच मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक देश के 12 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी से मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत कई राज्यों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने की भी चेतावनी जारी की गई है। समुद्र तटीय इलाकों में खराब मौसम और तेज हवाओं की स्थिति को देखते हुए मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।उत्तर भारत का मौसम: यूपी, उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश और आंधी का अलर्टउत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में 26 अगस्त को सुपर एक्टिव मानसून का असर साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में गरज और चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का भी अलर्ट जारी किया गया है।पश्चिमी भारत से सटे पूर्वी राजस्थान में भी 26 अगस्त को अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, आंधी आने और बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।मध्य और पूर्वोत्तर भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम-मेघालय समेत इन राज्यों में बरसेगी आफतमध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 26 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों में बारिश के साथ-साथ गर्जना और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी 26 अगस्त को भारी बारिश होने के आसार जताए गए हैं।पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज के साथ बिजली चमकने और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड और बंगाल में भारी बारिश के साथ तेज हवाओं की चेतावनीपूर्वी भारत के राज्यों के लिए 26 अगस्त का दिन मौसम के लिहाज से काफी संवेदनशील रहने वाला है। बिहार, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कई इलाकों में तेज आंधी और झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।इन राज्यों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। साथ ही आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे न जाने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और तेज बारिश के साथ बिजली चमकने का अनुमान है।दक्षिण भारत: केरल में भारी बारिश, आंध्र और तमिलनाडु में 50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएंदक्षिण भारत में भी मानसून अपना असर दिखाएगा। केरल और माहे में 26 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही केरल, माहे और लक्षद्वीप क्षेत्र में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक का अलर्ट है।आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में मौसम अधिक उग्र रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने की संभावना है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अलग-अलग जगहों पर तेज सतही हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है।समंदर में रहेगा खराब मौसम, मछुआरों के लिए अलर्ट जारीमौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाओं और तूफानी मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक के झोंके आने की संभावना है। इसके अलावा कर्नाटक, केरल के तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र से सटे समुद्र में 35 से 45 किमी प्रति घंटे से लेकर 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने के आसार हैं।बंगाल की खाड़ी की स्थिति देखें तो मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र, श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम-मध्य व दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। मौसम विभाग ने इन सभी समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को न जाने की सख्त सलाह दी है।यह भी पढ़ें:पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी! ईरान पर अमेरिका के इस एक फैसले से भारत में पड़ेगी महंगाई की मार?
IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून का एक्टिव रूप तूफानी बारिश करा रहा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने झारखंड और इसके आसपास के क्षेत्रों में बने कम दबाव के क्षेत्र के असर को देखते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में अगले 3 दिनों के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक 25 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले तीन दिनों तक रुक-रुक कर भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके उलट प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियों में कमी देखने को मिल सकती है।IMDके बुलेटिन के मुताबिक, बीते 24 घंटों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मेघालय, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल में 12 से 20 सेमी तक बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। वहीं दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और तटीय कर्नाटक में 7 से 11 सेमी तक भारी बारिश दर्ज की गई है।उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी और उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनीउत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में 25 से 31 अगस्त के दौरान अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर 25-26 अगस्त और 30-31 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश में मानसून काफी मेहरबान रहने वाला है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 अगस्त को और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25 से 27 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश होगी। 25 और 26 अगस्त को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और 26 व 27 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान है जबकि 25 अगस्त को पूर्वी यूपी में अति भारी बारिश का अलर्ट है।हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 25 से 31 अगस्त के दौरान छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। पूर्वी राजस्थान में 25 और 26 अगस्त को भारी बारिश होने के आसार हैं और 27 अगस्त को गर्जना के साथ बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।मध्य भारत: एमपी, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में जमकर बरसेंगे बादलमध्य भारत में मौसम का मिजाज काफी असरदार रहने वाला है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 25 से 26 अगस्त, पूर्वी मध्य प्रदेश में 25 से 29 अगस्त, विदर्भ में 25 से 28 अगस्त और छत्तीसगढ़ में 25 से 31 अगस्त के दौरान व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है। 25 अगस्त को छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में अति भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश में 25 से 27 अगस्त, छत्तीसगढ़ व पूर्वी मध्य प्रदेश में 26 से 29 अगस्त और विदर्भ में 25 अगस्त को भारी बारिश होने के आसार हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 25 से 29 अगस्त के बीच गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड और ओडिशा का मौसम पूर्वानुमानपूर्वी भारत के राज्यों में 25 से 31 अगस्त के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में व्यापक बारिश जारी रहेगी। बिहार में 26 अगस्त को अधिकांश जगहों पर जबकि 25, 27 से 31 अगस्त के दौरान कुछ जगहों पर बारिश होने का अनुमान है। बिहार में 25 से 27 अगस्त तक, झारखंड में 25 से 29 अगस्त तक, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 25 से 28 अगस्त तक और गांगेय पश्चिम बंगाल में 28 से 30 अगस्त के दौरान भारी बारिश हो सकती है।ओडिशा में 25, 27 और 31 अगस्त को भारी बारिश का अलर्ट है जबकि 28 से 30 अगस्त के दौरान राज्य में अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 25 से 29 अगस्त के दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और बिजली चमकने का भी अनुमान है।पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और अरुणाचल में आफत बनेगी बारिशपूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मानसून की गतिविधियां तेज रहेंगी। अरुणाचल प्रदेश में 25-26 अगस्त और 30-31 अगस्त को अधिकांश जगहों पर बारिश होगी। असम और मेघालय में 25 अगस्त और 28 से 31 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश का अनुमान है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 25 से 31 अगस्त तक पूरे हफ्ते भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। इसमें 29 और 30 अगस्त को इन राज्यों में अति भारी बारिश होने की आशंका है।अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 25 से 31 अगस्त तक लगातार भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 25 से 29 अगस्त के बीच गर्जना और वज्रपात की भी आशंका बनी रहेगी।पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत का हाल तथा मछुआरों को चेतावनीपश्चिम भारत में कोंकण और गोवा में 25 से 31 अगस्त तक भारी से मध्यम बारिश जारी रहेगी। मध्य महाराष्ट्र में 25 और 26 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताई गई है जबकि मराठवाड़ा और गुजरात क्षेत्र में छिटपुट बारिश का अनुमान है।दक्षिण भारत की बात करें तो तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 25 अगस्त को और केरल में 25 और 26 अगस्त को भारी बारिश की संभावना है। 25 अगस्त को केरल में बहुत भारी बारिश हो सकती है।ये भी पढ़ें- यूपी में लड़कियों को स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति नहीं; इलाहाबाद HC ने खारिज की मुस्लिम छात्रा की याचिकाइसके बाद प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियों में सुस्ती आने की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के विभिन्न हिस्सों में खराब मौसम के चलते मछुआरों को 30 अगस्त तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है।
Arunachal Pradesh: पुलिस ने 19 बच्चों को बाल तस्करी से बचाया, तीन दलाल गिरफ्तार
अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी के एक गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विभिन्न हिस्सों से 19 बच्चों को बचाया गया और तीन संदिग्ध बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, नामसाई जिले की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की शिकायत के बाद 17 अगस्त को नामसाई थाने में मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि बच्चों को शि-योमी जिले के मेचुका, वेस्ट सियांग के आलो, ईस्ट सियांग के पासीघाट, नाहरलागुन, ईटानगर और लोंगडिंग से बचाया गया। पुलिस ने बताया कि मामला कई जिलों से जुड़ा होने के कारण इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से कथित तौर पर उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और देखभाल उपलब्ध कराने का वादा करके संपर्क किया गया। इसके बाद नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर दूसरे स्थानों पर ले जाकर वहां अलग-अलग लोगों के पास रखा गया। नामसाई के पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले ने बताया कि बचाए गए बच्चों में अधिकांश की उम्र आठ वर्ष से कम है और सबसे छोटे बच्चे की उम्र करीब तीन वर्ष है। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने कुछ बिचौलियों और माता-पिता के बीच हर बच्चे के लिए 10,000 रुपये से 50,000 रुपये तक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का भी पता लगाया है।’’उन्होंने बताया कि बच्चों से कथित तौर पर घरेलू काम और होटलों से जुड़े काम कराए जा रहे थे। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एसआईटी फिलहाल वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने और उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है।’’उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें ऐसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी हो, तो वे पुलिस के साथ इसे साझा करें।
Heavy Rain Alert: देश के कई राज्यों में मानसून फिर से सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग (IMD) के मुतबिक, 25 से 30 अगस्त तक देश के कई जगहों पर बारिश अभी रुकने वाली नहीं है। IMD) के मुतबिक, 25 से 30 अगस्त तक मध्य भारत, पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। इन इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर बारिश के दौरान निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव की स्थिति से सतर्क रहने की जरूरत है।कैसा होगा दिल्ली का मौसमदिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। दिल्ली में 25 अगस्त को मौसम सुहावना रह सकता है और दिनभर आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले सात दिनों में दिल्ली में कुछ-कुछ जगहों पर ही बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया है कि 26 और 27 अगस्त को भी राजधानी में हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं पूर्वी यूपी में 25-26 अगस्त को तेज बारिश हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 25 अगस्त के बाद बारिश में कमी आने की उम्मीद है। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में कुछ इलाकों में बीच-बीच में बारिश का दौर जारी रह सकता है।इन राज्यों में होगी तेज बारिशमौसम विभाग के अनुसार 25 अगस्त को छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य महाराष्ट्र, पूर्वोत्तर के कई राज्यों, पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और विदर्भ में भी भारी बारिश की संभावना है। कई राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कई राज्यों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की आशंका जताई गई है।अभी नहीं मिलेगा बारिश से राहत26 अगस्त को भी बारिश का असर कम होता नहीं दिख रहा है। मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, केरल, मध्य महाराष्ट्र, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और विदर्भ में भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान कई इलाकों में आंधी, बिजली चमकने और तेज हवा का मौसम भी बन सकता है। 27 और 28 अगस्त को भी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश जारी रहने की संभावना है।30 अगस्त तक कैसा होगा मौसम29 और 30 अगस्त को पूर्वोत्तर राज्यों, पूर्वी मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तराखंड में कुछ जगह भारी बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है। उत्तराखंड में पूरे सप्ताह बारिश के आसार हैं, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का दौर बना रहेगा। वहीं पश्चिमी राजस्थान में 26 अगस्त के बाद बारिश कम होने और मौसम सूखा रहने की संभावना है। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप में बारिश जारी रहेगी। तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी कुछ जगह बारिश और गरज-चमक हो सकती है। समुद्र में खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।लोगों को सावधानी बरतने की सलाहबारिश के साथ कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने भारी बारिश के दौरान लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। तेज बारिश और हवा के कारण पेड़ या उनकी शाखाएं गिर सकती हैं, कमजोर मकानों और दीवारों को नुकसान पहुंच सकता है और सड़क-रेल यातायात प्रभावित हो सकता है। कुछ जगहों पर जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति भी बन सकती है। बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने और खुले या पानी वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। किसानों को भी खेतों में जलभराव रोकने, अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने और भारी बारिश के दौरान खाद व कीटनाशक का इस्तेमाल टालने की सलाह दी गई है।
Stocks to Watch: 25 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका
Stocks to Watch: मंगलवार, 25 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों के शेयर खबरों की वजह से फोकस में रह सकते हैं। इनमें डील, बड़े ऑर्डर, OFS, फंड जुटाने और मैनेजमेंट बदलाव से जुड़ी खबरें शामिल हैं। आइए जानते हैं किन 12 शेयरों पर खास नजर रहेगी।Hindustan Copperसरकारी कॉपर कंपनी Hindustan Copper में सरकार OFS के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इसमें 3% की बेस हिस्सेदारी और 3% का ग्रीन-शू ऑप्शन शामिल है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर रखा गया है।TCSटाटा ग्रुप की आईटी कंपनी TCS ने Porsche AG की 100% हिस्सेदारी वाली MHP को खरीदने की मंजूरी दी है। यह सौदा करीब 320 मिलियन यूरो का है। इसके अलावा Porsche ने TCS और MHP के साथ 5 साल का 1.25 बिलियन यूरो का समझौता किया है।Suzlon Energyविंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy आंध्र प्रदेश में 1,325 MW के नए विंड प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही है। ये प्रोजेक्ट अनंतपुर जिले के Rayadurg विधानसभा क्षेत्र में लगाए जाएंगे। इससे राज्य में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत हो सकती है।ICICI Bankप्राइवेट सेक्टर बैंक ICICI Bank ने अपने IFSC Banking Unit के जरिए 5 साल के $1 बिलियन के सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की कीमत तय की है। इन डेट सिक्योरिटीज को S&P Global Ratings ने ‘BBB’ रेटिंग दी है।Ceigall Indiaइंफ्रास्ट्रक्चर और रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी Ceigall India को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से करीब ₹704.70 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर अरुणाचल प्रदेश में Frontier Highway के निर्माण से जुड़ा है।Lenskartआईवियर और रिटेल कंपनी Lenskart में अगले 2-3 दिनों में करीब ₹2,800-2,900 करोड़ की ब्लॉक डील की खबर है। सूत्रों के मुताबिक Alfa अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकता है। Alfa के पास कंपनी में करीब 3.4% हिस्सेदारी बताई गई है।UCO Bankसरकारी बैंक UCO Bank के बोर्ड ने 1 बिलियन डॉलर तक रकम जुटाने की मंजूरी दी है। बैंक इस रकम का इस्तेमाल अपनी जरूरतों और कारोबार को आगे बढ़ाने में कर सकता है।Afcons Infrastructureइंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure को Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority से जुड़े मामले में ₹335.50 करोड़ का Arbitral Award मिला है। मध्यस्थता प्रक्रिया के बाद फैसला कंपनी के पक्ष में आया है।Coal Indiaसरकारी कोयला कंपनी Coal India ने सिंगापुर में अपनी नई Wholly Owned Subsidiary बनाई है। इसका नाम CIL Global है। यह कंपनी दूसरे देशों में Critical Minerals से जुड़े कारोबारी अवसर तलाशेगी।Great Eastern Shippingशिपिंग कंपनी Great Eastern Shipping के बोर्ड की 27 अगस्त को बैठक होगी। इसमें कंपनी के शेयर बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव पर विचार करने की जानकारी है। अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में होगा।HEGग्रेफाइट और इलेक्ट्रिकल कार्बन प्रोडक्ट कंपनी HEG ने मैनेजमेंट में बदलाव किया है। Riju Jhunjhunwala को 1 सितंबर 2026 से CEO बनाया गया है। वहीं Neha Rajvanshi को CFO नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियों के कारण शेयर पर नजर रह सकती है।Brigade Hotel Venturesहॉस्पिटैलिटी कंपनी Brigade Hotel Ventures ने Vinay Gupta को नया CEO नियुक्त किया है। यह नियुक्ति शेयर बाजार बंद होने के बाद सामने आई। मैनेजमेंट में बदलाव के बाद निवेशकों की नजर कंपनी की आगे की रणनीति पर रहेगी।Hyundai Motor India पर नोमुरा बुलिश, दोहराई 'बाय' रेटिंग; कहा- नई लॉन्चिंग्स से वॉल्यूम को मिलेगा बूस्टDisclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
भले ही देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुटी हों, लेकिन भारतीय राजनीति की इस शतरंज पर जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक और बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ चलने की संभावना जोर पकड़ रही है। हम आपको बता दें कि ‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार अब महज बहस या चुनावी नारा नहीं रह गया है, भारत इसके क्रियान्वयन से कुछ ही कदम दूर दिखाई दे रहा है। एक ओर भाजपा देशभर में विभिन्न सामाजिक और पेशेवर वर्गों के बीच इस विचार के समर्थन में अभियान चलाकर जनमत तैयार करने में जुटी है, वहीं इस मुद्दे पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति भी राज्यों, विधायिकाओं, शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के चरण में पहुंच रही है। ऐसे में सियासी हलकों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या चुनावी राजनीति की मौजूदा बिसात बदलने वाली है और क्या ‘एक देश, एक चुनाव’ मोदी सरकार की अगली बड़ी राजनीतिक चाल साबित होगी। हम आपको बता दें कि मौजूदा विधेयकों की मूल रूपरेखा के अनुसार देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक चक्र में लाने की पहली वास्तविक संभावना 2034 से बनती है। संसद की संयुक्त समिति संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच कर रही है। इन प्रावधानों का उद्देश्य अगले चुनाव चक्र में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ लाना है। लेकिन राजनीतिक सत्ता का गणित शायद अब 2034 तक इंतजार करने के मूड में नहीं है। इसे भी पढ़ें: Russia में Jaishankar, China में Doval, Japan में Piyush Goyal ने संभाला मोर्चा, आखिर क्या है Modi का मिशन? एनडीए के शासन वाले 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 11 में अगले दो वर्षों के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं। यदि इन राज्यों में एनडीए अपनी सरकारें बरकरार रखता है, तो 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ इन्हें चुनावी चक्र में लाने के लिए जनवरी 2029 तक विधानसभाएं भंग करने का विकल्प सामने आ सकता है। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में विधानसभा चुनाव पहले से ही लोकसभा चुनाव के साथ होते रहे हैं। इस प्रकार इन चार राज्यों को समन्वित चुनावी चक्र में लाना अपेक्षाकृत आसान होगा। इसके अलावा, संवैधानिक रास्ता भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। संविधान का अनुच्छेद 174(2)(b) राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है, हालांकि सामान्य परिस्थितियों में यह फैसला मंत्रिपरिषद की सलाह पर होता है। विधानसभा भंग होने के बाद जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत निर्धारित समय सीमा में चुनाव कराना आवश्यक होता है। यही वह संवैधानिक खिड़की है, जिसके जरिए 2029 के साथ चुनावों का समन्वय करने की राजनीतिक संभावना तलाशी जा रही है। यहीं से ‘एक देश, एक चुनाव’ का प्रशासनिक तर्क सीधे राजनीतिक रणनीति में बदल जाता है। सवाल यह है कि क्या किसी निर्वाचित विधानसभा का कार्यकाल तीन या चार वर्ष तक घटाकर चुनावी चक्र को एक साथ लाना महज चुनाव सुधार होगा, या फिर यह सत्ता की सुविधानुसार राजनीतिक कैलेंडर को पुनर्गठित करने की शुरुआत होगी? एनडीए के लिए यह योजना चुनावी संसाधनों, संगठनात्मक ताकत और राष्ट्रीय नेतृत्व की लोकप्रियता को एक साथ मैदान में उतारने का अवसर बन सकती है। एक ही समय में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने पर राष्ट्रीय मुद्दों की लहर राज्य-स्तरीय समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। राजनीतिक दृष्टि से यह विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी। पंजाब में 2027 और हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम तथा तेलंगाना में 2028 में चुनाव प्रस्तावित हैं। इनके बाद चुनी जाने वाली विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 के लोकसभा चुनाव तक केवल एक या दो वर्ष पुराना होगा, जबकि यदि भविष्य में उन्हें लोकसभा चुनाव के चक्र से जोड़ा जाता है तो उनकी अवधि को लेकर अलग संवैधानिक और राजनीतिक बहस खड़ी होगी। दूसरी ओर, 2028 में मध्य प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, राजस्थान और त्रिपुरा जैसे राज्यों के चुनाव तथा 2029 के आसपास विभिन्न राज्यों के अलग-अलग चुनावी कार्यक्रम देश के मौजूदा बिखरे हुए चुनाव चक्र की जटिलता को दिखाते हैं। संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने इस संभावना पर साफ कहा है कि 2029 में चुनावों को आगे बढ़ाकर एक साथ कराने का फैसला समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और यह संबंधित एनडीए मुख्यमंत्रियों पर निर्भर करेगा। हम आपको याद दिला दें कि यह समिति दिसंबर 2024 में गठित हुई थी और राज्यों में सरकारों, विधायिकाओं, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से संवाद कर रही है। उसकी रिपोर्ट इस वर्ष संसद के शीतकालीन सत्र में आने की उम्मीद है। लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष पहले ही अपनी तलवारें खींच चुका है। कांग्रेस का तर्क है कि ‘एक देश, एक चुनाव’ असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और जवाबदेही की भावना के विरुद्ध है। विपक्ष का सवाल यह भी है कि यदि विधानसभा का जनादेश पांच वर्ष के लिए है, तो उसे राजनीतिक सुविधा के लिए बीच में समाप्त करना मतदाता के अधिकारों और संघीय ढांचे के साथ किस हद तक न्याय करेगा। यह विवाद उस समय और तीखा हो सकता है, जब परिसीमन को लेकर केंद्र और विपक्षी दलों के बीच पहले से ही अविश्वास मौजूद है। दरअसल, 2029 का संभावित प्रयोग केवल चुनावी तारीखें मिलाने की कवायद नहीं होगा। यह भारतीय राजनीति में केंद्र बनाम राज्यों, राष्ट्रीय नेतृत्व बनाम क्षेत्रीय मुद्दों और चुनावी दक्षता बनाम लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की नई लड़ाई छेड़ सकता है। एनडीए इसे स्थिरता, कम खर्च और बार-बार लगने वाली आचार संहिता से मुक्ति के रूप में पेश कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे राज्यों की राजनीतिक स्वायत्तता और अलग जनादेशों को राष्ट्रीय चुनाव की छाया में समेटने की कोशिश बता कर इसका विरोध कर रहा है। बहरहाल, 2029 का सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि लोकसभा और 22 राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे या नहीं। असली सियासी पहेली यह है कि क्या ‘एक देश, एक चुनाव’ के बहाने भारतीय राजनीति का चुनावी कैलेंडर बदलेगा, या फिर सत्ता के खेल का पूरा बोर्ड ही नए सिरे से सजाया जाएगा? वैसे यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि 2029 की लड़ाई सिर्फ वोटों की नहीं बल्कि चुनाव की टाइमिंग को लेकर भी होगी। कौन अपनी सरकार बचाएगा, किसकी विधानसभा का कार्यकाल घटेगा और किसे राष्ट्रीय लहर का सहारा मिलेगा, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। -नीरज कुमार दुबे
अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में चीन की कथित गतिविधियों और भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि तक्सिंग क्षेत्र के सेरा-5 पेट्रोलिंग पॉइंट की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या भारतीय जवान अब वहां नियमित रूप […] The post अरुणाचल में चीनी गतिविधियों के दावे पर सियासी बवाल! आरके सिंह बोले- सरकार बताए, सेरा-5 की असली स्थिति क्या है? first appeared on Sanjeevni Today .
India Weather Alert: देश के अलग-अलग राज्यों में इस वक्त मानसूनी बारिश पूरी रफ्तार से हो रही है। कम दबाव के क्षेत्र और दूसरे वेदर सिस्टम एक्टिव होने की वजह से हैवी बारिश का ये सिलसिला 25 अगस्त को भी जारी रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 25 अगस्त को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार यानी भारी से बहुत भारी बारिश की ऑरेंज कलर वॉर्निंग जारी की है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित देश के कई और राज्यों में भी तेज हवाओं और बिजली की कड़क के साथ भारी बारिश होने का पूर्वानुमान दिया गया है।मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 'भारी से बहुत भारी' बारिश का अलर्टमौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 25 अगस्त को मध्य भारत में बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा महाराष्ट्र के मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ क्षेत्रों में भी भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इन राज्यों के निचले इलाकों में पानी भर सकता है और नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत उत्तर-पूर्वी भारत का हालउत्तर भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में भी मानसून की तेजी बनी रहेगी। 25 अगस्त को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, सुदूर उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। दक्षिण भारत की बात करें तो तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल व माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएंबारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आंधी-तूफान और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और माहे, लक्षद्वीप और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल के इलाकों में बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। इनकी स्पीड बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही बिहार, पूर्वी राजस्थान, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम के कुछ हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट है।उत्तराखंड, तेलंगाना, मराठवाड़ा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में भी बादल गरजने और बिजली कड़कने की संभावना बनी रहेगी।तटीय इलाकों में तेज हवाओं का अलर्ट और समुद्र में स्थितिमौसम विभाग ने तटीय और समुद्री क्षेत्रों के लिए भी चेतावनी जारी की है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, माहे और लक्षद्वीप के तटीय इलाकों में तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के पास और मध्य-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। इनकी स्पीड 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।इसके अलावा कर्नाटक और केरल के तटों तथा लक्षद्वीप के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से खराब मौसम बना रहेगा। मौसम विभाग ने मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।यह भी पढ़ें:लो प्रेशर सिस्टम से अगले 4 दिन भारी! यूपी, बिहार, MP समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, मौसम को लेकर IMD ने दी ये चेतावनी
IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसूनी सिस्टम एक बार फिर बेहद एक्टिव हो गया है। गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तरी ओडिशा के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के असर की वजह से मौसम विभाग (IMD) ने अगले तीन से चार दिनों के दौरान देश के अलग अलग राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। IMD के मुताबिक इस नए मौसमी तंत्र के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके उलट दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियां काफी सुस्त रह सकती हैं।बीते 24 घंटों में बदला मौसम का मिजाजआपको बता दें कि पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में भीषण बारिश दर्ज की गई है। ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक की बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, केरल, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई है।उत्तर भारत का मौसम: यूपी और उत्तराखंड में तेज बारिश की संभावनाउत्तर भारत में मानसून की ट्रफ रेखा अपने सामान्य स्थान से उत्तर की ओर बनी हुई है। इसके असर से उत्तराखंड में 24 से 30 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश होगी जबकि 24 अगस्त तथा 29 से 30 अगस्त के दौरान भारी बारिश की संभावना है।उत्तर प्रदेश की बात करें तो 24 से 26 अगस्त के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक बारिश और भारी बौछारें पड़ने की उम्मीद है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी 24 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के इलाकों में भी 30 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा।मध्य भारत का हाल: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का अलर्टमध्य भारत में कम दबाव का क्षेत्र सीधा असर डाल रहा है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 24 से 26 अगस्त तक व्यापक बारिश के साथ-साथ अत्यंत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद 27 अगस्त को भी भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 24 से 26 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश होगी और यह सिलसिला 29 से 30 अगस्त तक जारी रहेगा। छत्तीसगढ़ में 24 और 25 अगस्त को बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है जबकि विदर्भ क्षेत्र में 24 से 26 अगस्त के बीच भारी बारिश और बिजली कड़कने की आशंका जताई गई है।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा और बिहार में आंधी-तूफान के साथ बारिशपूर्वी भारत में बने इस सिस्टम के चलते 24 अगस्त को ओडिशा और झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार में अगले 3 से 4 दिनों यानी 24 से 27 अगस्त तक भारी बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गांगेय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30 अगस्त तक तेज हवाओं के साथ बारिश जारी रहेगी।अंडमान में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 24 से 30 अगस्त के दौरान भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।पश्चिमी और दक्षिण भारत का पूर्वानुमानपश्चिम भारत के कोंकण और गोवा में 30 अगस्त तक व्यापक बारिश जारी रहेगी जबकि मध्य महाराष्ट्र में 24 से 26 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है। दक्षिण भारत की स्थिति देखें तो तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में 24 और 25 अगस्त को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। केरल और माहे में 24 अगस्त को बहुत भारी बारिश तथा 25 व 26 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के तटीय क्षेत्रों में 24 से 28 अगस्त के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।ये भी पढ़ें- 'VVIP विजिट से पहले ऐसी चर्चा आम बात है'; PM मोदी-ट्रंप मुलाकात में 'नो क्वेश्चन' पर सर्जियो गोर को भारत का जवाब
'अभी हम India हो गया', टिंकल की बात ने सिखाया देश को बड़ा सबक
अरुणाचल प्रदेश की 4 साल की कार्गा ट्विंकल ने लोगों से कहा था कि उन्हें 'चाइनीज' नहीं, भारतीय कहा जाए. वीडियो वायरल हुआ तो देशभर से उसे प्यार मिला और अब लोग उसे 'इंडिया की बेबी' कह रहे हैं. लेकिन ट्विंकल की इस कहानी में देश के लिए एक बड़ा सबक भी छिपा है.
नमस्कार, रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन आतंकी हेडक्वार्टर को तबाह किया था। पाकिस्तान ने उन्हें दोबारा बना लिया है। राजस्थान के जोधपुर में कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकार्ता को भाजपा के लोगों ने पीटा। मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में आगे बताएंगे कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की मदद की मांग कई पूर्व क्रिकेटर्स ने उठाई है। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... 1. दिल्ली में नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी कॉन्फ्रेंस की 9वीं बैठक का पहला दिन, गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे। कल की बड़ी खबरें... 1. ऑपरेशन सिंदूर में तबाह जैश हेडक्वार्टर दोबारा तैयार: रिपोर्ट- बहलावलपुर में मरकज सुभानअल्लाह के गुंबदकी मरम्मत, नया संगमरमर और प्लास्टर लगा ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का मरकज सुभानअल्लाह हेडक्वार्टर तबाह कर दिया था। अब यह फिर से बनकर तैयार हो गया है। मीडिया रिपोर्ट में दावा है कि गया है कि इसके री-कंस्ट्रक्शन में 15 महीने लगे। मरकज सुभानअल्लाह के क्षतिग्रस्त गुंबद फिर बना दिए गए हैं, नया संगमरमर और प्लास्टर लगाया गया, नया पेंट भी किया गया है। दीवारों समेत पूरी इमारत की मरम्मत कर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने जैश को मरम्मत के लिए 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपए दिए। मदरसा अल-सबीर और जैश कमांडरों के रहने के लिए इस्तेमाल होने वाले एरिया का भी दोबारा निर्माण भी किया जा रहा है। भर्ती और ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होता था बेस मरकज सुभानअल्लाह भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर दूर है। यहां जैश नए आतंकियों की भर्ती, ट्रेनिंग और ब्रेनवॉश करता था। 18 एकड़ में फैले इस परिसर को उस्मान-ओ-अली कैंपस के नाम से भी जाना जाता है। यहां एक मस्जिद और दूसरी सुविधाएं भी मौजूद थीं। पूरी खबर पढ़ें... 2. यूपी विधानसभा अध्यक्ष महाना राष्ट्रगान छोड़कर चले गए, आयोजक बोले- दूसरी जगह बज रहा था यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का शनिवार को राष्ट्रगान बीच में छोड़कर जाने का वीडियो सामने आया है। उन्नाव में कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने प्रोटोकॉल के तहत महाना को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके तुरंत बाद राष्ट्रगान शुरू हुआ। सतीश महाना ने चलते राष्ट्रगान में ही तिरंगे को सलामी दी, हाथ जोड़ा और मंच के पीछे की ओर उतर गए। कुछ दूरी पर खड़े समर्थक भी उनके पास पहुंचे और पैर छूने लगे। इसके बाद महाना कार में बैठे और वहां से रवाना हो गए। कार्यक्रम आयोजकों ने दैनिक भास्कर से कहा- जिस जगह सतीश महाना मौजूद थे, राष्ट्रगान वहां से काफी दूर बज रहा था। वहीं, सतीश महाना ने भी मामले पर सफाई दी। उन्होंने कहा- नियमों के अनुसार किसी गणमान्य व्यक्ति को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के दौरान राष्ट्रगान नहीं बजाया जाता। क्या हर व्यक्ति किसी ऐसे कार्यक्रम स्थल से गुजरते समय रुककर सावधान की मुद्रा में खड़ा हो जाता है, जहां राष्ट्रगान बजाया जा रहा हो? पढ़ें पूरी खबर… 3. पाकिस्तान सरकार को गावस्कर, कपिल देव समेत 21 पूर्व क्रिकेट कप्तानों की चिट्टी, पूर्व पीएम इमरान खान को सही इलाज देने की मांग पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और कप्तान ग्रेग चैपल ने पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिखी है। इममें सुनील गावस्कर और कपिल देव समेत 20 पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेट टीम कप्तानों को साइन हैं। चिठ्ठी में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सही मेडिकल इलाज देने की मांग की गई। । चैपल ने लिखा कि 6 महीने पहले 14 पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेट कप्तानों ने इमरान के साथ मानवीय व्यवहार और सही मेडिकल इलाज की अपील की थी। क्रिकेट मैदान पर बना यह रिश्ता उन सीमाओं और मतभेदों से ऊपर है, जो अक्सर देशों को बांटते हैं। अब हम फिर लिख रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें... 4. अयोध्या में कांग्रेस के सम्मेलन में मछली खिलाई, भाजपा अध्यक्ष बोले- ये सनातन का अपमान यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय रविवार को अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन किए। इसके बाद अजय राय गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र के तारुन बाजार में हुए कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। यह हनुमानगढ़ी से करीब 38 किलोमीटर दूर है। इस सम्मेलन में मछली भोज कराया गया। यह सम्मेलन हाल ही में भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए राम निहाल निषाद ने कराया। उन्होंने कहा- संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि सावन में मछली नहीं खाई जाती। हम संविधान का पालन कर रहे हैं। पंकज चौधरी ने किया पलटवार: यूपी भाजपा अध्यक्ष ने कहा- प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या धाम में कांग्रेस अध्यक्ष (उत्तर प्रदेश) के स्वागत समारोह में 'मछली भोज' का आयोजन करना अत्यंत निंदनीय और अक्षम्य है। कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि इन्होंने हमेशा हिंदू समाज की धार्मिक मान्यताओं, सांस्कृतिक मूल्यों और करोड़ों सनातनियों की आस्था पर कुठाराघात किया है। पढ़ें पूरी खबर… 5. रिजिजू ने नदी में तैरने का वीडियो शेयर किया: लिखा- मेरे लिए यह बच्चों का खेल; स्कूबा डाइविंग पर राहुल गांधी से तुलना हुई थी केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी नदी में तैरने का वीडियो X पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा- अगर आपको तैरना नहीं आता, तो कभी गहरे पानी में न जाएं। नदी में कई लोग डूब चुके हैं। अरुणाचल प्रदेश की नदियां बहुत बड़ी और गहरी हैं। रिजिजू ने 6 घंटे बाद एक और पोस्ट में राहुल गांधी से खुद की तुलना करने वालों को पर लिखा कि मेरे लिए तैराकी बच्चों का खेल है। कई लोग कह रहे हैं कि मैं भी राहुल गांधी जैसा कर रहा हूं। राहुल जी शायद इसके लिए ट्रेनिंग लेते हों, लेकिन मेरी जिंदगी में यह आम बात है। जून 2026 में राहुल गांधी का निकोबार में स्कूबा डाइविंग का वीडियो सामने आया था। इसके बाद किरेन रिजिजू ने स्वराजद्वीप में स्कूबा डाइविंग की थी। तब से यह कहा जा रहा था कि रिजिजू ने राहुल की देखा-देखी स्कूबा डाइविंग की थी। इसी के जवाब में रिजिजू ने नदी में तैराकी का वीडियो बनाया। पूरी खबर पढ़ें... 6. राजस्थान में CJP कार्यकर्ता पर तीन दिन में दूसरा हमला; पार्टी बोली- केंद्र सराकर ने वादा नहीं निभाया, समीक्षा करेंगे राजस्थान में एकबार फिर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता पर हमला हुआ। जोधपुर में गांधी शांति प्रतिष्ठान में पार्टी के कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता ने हमला किया। इसके बाद दोनों संगठनों के लोगों के बीच झड़प हुई। तीन दिन में झड़प की दूसरी घटना है। आज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आज अपनी नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक करेगी। इसमें 25 जुलाई को राष्ट्रव्यापी आंदोलन वापस लेने के बाद केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। CJP ने कहा कि वादे पूरे कराने के लिए सभी विकल्पों पर विचार होगा, जिसमें दोबारा शांतिपूर्ण राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करना भी शामिल है। 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, जेपी नड्डा ने CJP के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। जिसमें आंदोलन खत्म करने और CJP की मांगें मानने की बात कही थी। पूरी खबर पढ़ें... 7. स्मृति ईरानी बोलीं- राहुल महिलाओं के समर्थक हैं तो साबित करें: 33% महिला आरक्षण लागू होने दें; पूरा वंदे मातरम भी गाएं भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने कहा कि अगर राहुल गांधी महिलाओं के समर्थक हैं तो उन्हें पहले महिला आरक्षण लागू करने का समर्थन करना चाहिए।वे 33% आरक्षण लागू कराने और पूरे वंदे मातरम के गायन का समर्थन करके अपनी बात साबित करें। स्मृति ने कहा कि वंदे मातरम के आखिरी 2 पैरा देवी दुर्गा को समर्पित हैं। स्मृति का यह बयान राहुल गांधी के पुणे में हुए छात्रों की गूंज इवेंट के बाद आया है। जहां राहुल ने लड़कियों से कहा था कि उन्हें पितृसत्ता को खत्म करना चाहिए। राहुल ने महिलाओं से पितृसत्ता खत्म करने को कहा था: राहुल गांधी ने 22 अगस्त को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में ‘मनुस्मृति की मानसिकता’ पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि इसने महिलाओं को पुरुषों के अधीन रहने मजबूर किया है। महिला को जीवन के हर पड़ाव पर पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रहना पड़ता है। पूरी खबर पढ़ें… आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… 1. नेशनल: भारत की स्पेस में पेट्रोल-पंप लगाने, दवाइयां बनाने की तैयारी: पीएम से मिले स्पेस स्टार्टअप्स के फाउंडर्स ने बताए प्लान, स्काईरूट हर महीने रॉकेट लॉन्च करेगी (पूरी खबर पढ़ें) 2. महाराष्ट्र: NCP विधायक रोहित पवार के PA की बेटी की मौत: बारामती में नाले के पास नाबालिग का शव मिला; घर से नाराज होकर निकली थी (पूरी खबर पढ़ें) 3. उत्तर प्रदेश: आपत्तिजनक REEL पर सस्पेंड महिला दरोगा सामने आई:मेरठ में बोलीं- 5 दिन से कमरे में बंद हूं, जान देने के ख्याल आ रहे (पूरी खबर पढ़ें) 4. हरियाणा: पति की हत्या करके आंतें बोरी में भरीं: सीने से प्राइवेट पार्ट तक एक फीट काटा; लीवर-किडनी गायब; पत्नी छत से कूदी (पूरी खबर पढ़ें) 5. उत्तर प्रदेश: विधानसभा अध्यक्ष महाना राष्ट्रगान छोड़कर चले गए, VIDEO: अचानक मंच से उतरे, कार में बैठकर रवाना; आयोजक बोले- दूसरी जगह बज रहा था (पूरी खबर पढ़ें) 6. इंटरनेशनल: बांग्लादेश-हिंदू परिवार के 4 लोगों की संदिग्ध हालात में मौत: बंद घर से रिटायर्ड शिक्षक, पत्नी-बच्चों के शव मिले; CID मामले की जांच कर रही (पूरी खबर पढ़ें) 7. इंटरनेशनल: फ्रांस के पहले BAPS हिंदू मंदिर का उद्घाटन सितंबर में:13 दिन चलेगा भारतीय संस्कृति उत्सव; पेरिस से 30 किमी दूर बना (पूरी खबर पढ़ें) 8. राजस्थान: कुत्ते ने 5 साल की बच्ची को नोंचा,VIDEO: सड़क पर पटककर काटता रहा; कलाई, पीठ और सिर पर गहरे घाव (पूरी खबर पढ़ें) 9. नेशनल: दिल्ली में कार डिवाइडर पार कर दूसरी कार से टकराई:हादसे में दो विधायक समेत 6 घायल, सभी की हालत स्थिर; पुलिस जांच जारी (पूरी खबर पढ़ें) 10. नेशनल: महाराष्ट्र पहाड़ हादसे से पहले मां ने किया था पोस्ट:कहा- रिश्ता ऐसा हो तो तोड़ देना चाहिए, दावा- आईफोन के लिए पहाड़ी से कूदा था बेटा (पूरी खबर पढ़ें) 11. नेशनल: अप्रैल से अबतक 150 पाकिस्तानी दुल्हनें भारत पहुंचीं:ऑपरेशन सिंदूर के बाद से वीजा बैन था; 300 अब भी शादी के इंतजार में (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... 113 kmph की रफ्तार से चलाई जूते जैसी कार नीदरलैंड्स में एक शख्स ने जूते जैसी कार चलाकर अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। टीवी होस्ट क्लास वैन क्रुइस्टम और उनकी टीम ने इसे तैयार किया। इलेक्ट्रिक गो-कार्ट के फ्रेम से तैयार इस गाड़ी ने ब्रेडा एयरपोर्ट पर 113 किमी/घंटे की रफ्तार पकड़ी और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। पूरी खबर पढ़ें… फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… 1. आज का एक्सप्लेनर:क्या H1N1 वायरस, कोविड जैसा खतरनाक; भारत में 13000 से ज्यादा मामले, स्वाइन फ्लू से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब 2. स्पाई फाइल्स: जासूस का मैसेज- सबसे ऊंची चोटी पर पाकिस्तान का कब्जा:शहीदों की लाशें तोड़ी गईं, शव को खाना परोसा; भारत ने कैसे जीता सियाचिन, पार्ट-2 3. जरूरत की खबर: राखी से हो सकती है स्किन एलर्जी:ये सिंथेटिक मटेरियल त्वचा के लिए नुकसानदायक, खरीदते हुए बरतें 9 सावधानियां 4. साइबर लिटरेसी: क्या वॉट्सएप पर इनकम टैक्स नोटिस आया है:ये फ्रॉड मैसेज है, ठगों से सावधान रहें, इन 7 तरीकों से पहचानें फेक मैसेज 5. सायरा बानो@82: दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी सच हुई:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से 6. भास्कर इंटरव्यू: संजय निषाद बोले- विधानसभा चुनाव में मुझे सीट नहीं चाहिए:सरकार चाहे तो मेरा मंत्रालय छीन ले; बस निषादों को SC आरक्षण दे 7. भास्कर एनालिसिस: बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री का इम्पैक्ट-रोज 100 करोड़ का नुकसान:जमीन खरीदने-बेचने वाले कंफ्यूज, कातिब हड़ताल पर, ऑनलाइन रजिस्ट्री की पूरी प्रोसेस जानें 8. लिव-इन रिलेशनशिप: में पैदा बच्चे भी पैतृक प्रॉपर्टी के हकदार:नहीं रख सकेंगे 2 पत्नियां; राजस्थान में जन्मे हर व्यक्ति पर लागू होगा UCC 9. भास्कर एक्सक्लूसिव: टंकी-टावर पर चढ़ने वालों से होगी सरकारी खर्च की वसूली:पुलिसवालों की उस दिन की सैलरी, दमकल-एंबुलेंस के पेट्रोल का पैसा प्रदर्शन करने वालों से लेंगे 10. भास्कर एक्सक्लूसिव: हरियाणा- कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट के पते पर 4 मुस्लिम वोटर:SIR में खुलासा, 2 के आधार कार्ड भी मिले; परिवार को गलत इस्तेमाल का डर 11. भास्कर एक्सक्लूसिव: 7 युवकों को दुबई भेजने वाला AIMIM नेता:औवेसी संग मीटिंग-मंच साझा करते दिखा नाहिद; जॉब के नाम पर डेढ़ लाख लिए, सभी विदेश में फंसे करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास ️ मौसम का मिजाज मेष राशि वालों का अटका सरकारी काम आगे बढ़ सकता है। वृष राशि वालों के लिए फंसा पेमेंट निकालने का अच्छा समय है। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
मध्य प्रदेश में कुपोषण की समस्या अब सिर्फ कम वजन तक सीमित नहीं रह गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) -6 में आलीराजपुर, बड़वानी, श्योपुर और डिंडौरी जैसे जिलों में महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स BMI (शरीर द्रव्यमान सूचकांक) सबसे कम मिला है। दूसरी तरफ, इंदौर, भोपाल और जबलपुर की महिलाओं में ओवरवेट या मोटापे का अनुपात काफी ज्यादा है। तंबाकू खाने के मामले में मंडला की औरतें 34.9% और डिंडौरी के पुरुष 64.8% के साथ सबसे आगे हैं। प्रदेशभर में आलीराजपुर की महिलाएं और डिंडौरी के पुरुष सबसे ज्यादा शराब पीते हैं। इनका प्रतिशत क्रमश: 13.4% और 41.4% है। यानी आदिवासी बहुल जिलों में तंबाकू और शराब की समस्या विशेष रूप से उभर रही है। बालाघाट में बढ़ी तंबाकू खाने वाली महिलाएं मंडला में महिलाओं के तंबाकू खाने की दर NFHS-5 में 29.5% थी, जो NFHS-6 में बढ़कर 34.9% हो गई। इसमें 5.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। नरसिंहपुर में यह 27.2% से बढ़कर 30% हुई यानी इसमें 2.8 अंक का उछाल आया है। बालाघाट में सबसे तेज बढ़ोतरी दिखी, जहां 20.2% से यह आंकड़ा 28.4% पहुंच गया है। यह आंकड़ा छिंदवाड़ा में 21.1% से 26.9% और डिंडौरी में 22.8% से 26.8% हो गया है। यानी शीर्ष पांच जिलों में बालाघाट में महिलाओं के तंबाकू सेवन की वृद्धि सबसे ज्यादा रही। तंबाकू सेवन में डिंडौरी के पुरुष नंबर एक पुरुषों के मामले में यह तस्वीर और भी गंभीर है। मध्य प्रदेश में 15 साल और उससे अधिक उम्र के पुरुषों में तंबाकू खाने की औसत दर 47.7% है। यह दर डिंडौरी में 64.8%, मंडला में 64.2% और उमरिया में 64.1% है। डिंडौरी में पुरुषों के तंबाकू सेवन की दर NFHS-5 में 60.6% थी, जो NFHS-6 में बढ़कर 64.8% हो गई यानी इसमें 4.2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी आई। ये आंकड़ा मंडला में 57.5% से 64.2% और उमरिया में 59.1% से 64.1% हो गया जबकि नरसिंहपुर में 55.2% से 60.5% और पन्ना में 55.5% से 60.4% पर पहुंच गया है। पांचों जिलों में पुरुष तंबाकू सेवन बढ़ा है, लेकिन मंडला में वृद्धि 6.7 प्रतिशत अंक के साथ सबसे ज्यादा रही। आलीराजपुर में महिलाओं को सबसे ज्यादा शराब की लत 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं में शराब सेवन का राज्य का औसत 1.2% है। आलीराजपुर में यह 13.4% दर्ज किया गया, जो प्रदेश के औसत से कई गुना ज्यादा है। इस मामले में डिंडौरी 9.6%, मंडला 7.8%, उमरिया 4.4% और अनूपपुर 3.1% पर हैं। 3.1% पर बालाघाट, बैतूल और छिंदवाड़ा हैं। महिलाओं के शराब सेवन के मामले में आलीराजपुर का आंकड़ा NFHS-5 के 7% की तुलना में 13.4% हो गया है यानी इसमें 6.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। यह डिंडौरी में 6.8% से 9.6%, मंडला में 3.6% से 7.8% जबकि उमरिया में 2% से बढ़कर 4.4% हुआ। वहीं, अनूपपुर में उल्टा रुझान रहा और यह दर 3.7% से घटकर 3.1% रह गई। पुरुषों के शराब पीने का प्रतिशत डिंडौरी में सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पुरुषों में शराब सेवन की औसत दर 18.5% है। इसमें डिंडौरी 41.4% के साथ सबसे ऊपर है। आलीराजपुर 41.2%, उमरिया 39.6%, मंडला 36.3% और अनूपपुर 35.5% पर हैं। डिंडौरी में पुरुषों के शराब सेवन की दर NFHS-5 में 36% थी, जो NFHS-6 में बढ़कर 41.4% हो गई। इसमें 5.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है। आलीराजपुर में ये दर 37.4% से 41.2%, उमरिया में 29.8% से 39.6% और मंडला में 28.6% से 36.3% हुई है। इन शीर्ष पांच जिलों में उमरिया में वृद्धि सबसे ज्यादा 9.8 प्रतिशत अंक रही। अनूपपुर में ये दर 36.2% से घटकर 35.5% हुई है। आलीराजपुर की महिलाओं को कम वजन की समस्या 15-49 वर्ष की महिलाओं में सामान्य से कम BMI का राज्य औसत 26.5% है। ये आलीराजपुर में 43% है यानी जिले में करीब हर 2.3 महिलाओं में से एक महिला कम BMI की श्रेणी में है। इसके बाद बड़वानी 39.6%, श्योपुर 36.8%, डिंडौरी 34.2% और बालाघाट 33.8% का नंबर है। हालांकि, आलीराजपुर में यह आंकड़ा NFHS-5 के 19.6% से बढ़कर 43% हुआ है। यहां सिर्फ पांच साल के अंतराल में 23.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15-49 वर्ष की महिलाओं में मोटापे की दर 22.2% रही मध्य प्रदेश में 15-49 वर्ष की महिलाओं में ओवरवेट या मोटापे की दर 22.2% है। इंदौर 37.8% के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद भोपाल 36.6%, होशंगाबाद 31.4%, जबलपुर 29.6% और रीवा 29.3% हैं। इंदौर में महिलाओं का ओवरवेट/मोटापा NFHS-5 के 19% से बढ़कर 37.8% हुआ है। दो उलट तस्वीरें, कम वजन के साथ मोटापा भी बढ़ा NFHS-6 में मध्य प्रदेश के वयस्कों की पोषण स्थिति की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि यहां कम वजन और मोटापा दोनों बढ़े हैं। प्रदेश में 15-49 वर्ष की महिलाओं में कम BMI की दर 23% से बढ़कर 26.5% हुई है, यानी 3.5 प्रतिशत अंक की वृद्धि। पुरुषों में यह 20.8% से बढ़कर 28.3% पहुंच गई। इसमें 7.5 अंक का उछाल आया है। दूसरी तरफ, महिलाओं में ओवरवेट/मोटापा 16.6% से बढ़कर 22.2% और पुरुषों में 15.6% से 17.6% हुआ है। इसका मतलब है कि राज्य में पोषण की समस्या अब केवल कम वजन की नहीं है, यहां कम पोषण और अधिक पोषण दोनों साथ बढ़ रहे हैं। महिलाओं में ब्लड शुगर के केस इंदौर में सबसे ज्यादा हाई या बहुत ज्यादा ब्लड शुगर और शुगर नियंत्रित करने की दवा लेने वाली महिलाओं का राज्य औसत 14.5% है। इंदौर में यह अनुपात 20.3% है। इसके बाद भिंड 18.4%, कटनी 18.2%, भोपाल 17.9% और जबलपुर 17.7% का नंबर है। इंदौर की दर इस बार NFHS-5 के 9.9% से दोगुने से भी अधिक हो गई है। महिलाओं में हाई BP के मामलों में बालाघाट सबसे आगे मध्य प्रदेश में हाई BP या उसे नियंत्रित करने की दवा लेने वाली महिलाओं का अनुपात 14.2% है। यहां बालाघाट 22.6% के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद भोपाल 21.1%, सिवनी 21%, डिंडौरी 20.2% और होशंगाबाद 19.2% हैं। पुरुषों में हाई BP के मामले जबलपुर में सबसे ज्यादा हाई बीपी के मामलों में पुरुषों में राज्य की औसत दर 15.4% है, लेकिन जबलपुर में यह 24.2% है। इसके बाद बालाघाट 21.7%, सिवनी 21.6%, भोपाल 21.3% और होशंगाबाद 21.3% आते हैं। जबलपुर की स्थिति NFHS-5 के 20.1% से भी खराब हुई है। शुगर में पुरुषों की स्थिति ज्यादा तेजी से बिगड़ी मध्य प्रदेश में हाई या वेरी हाई ब्लड शुगर अथवा उसे नियंत्रित करने की दवा लेने वाली महिलाओं का अनुपात NFHS-5 के 9.8% से बढ़कर 14.5% हो गया है। इसमें 4.7 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। पुरुषों में यह 12.2% से बढ़कर 18.3% हुआ है, यानी 6.1 अंक की वृद्धि। इस लिहाज से शुगर संबंधी समस्याओं के मामले में पुरुषों के आंकड़ों में वृद्धि ज्यादा रही। वहीं, ब्लड प्रेशर के मामले में NFHS-6 की तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर है। हाई BP या इसे कंट्रोल करने की दवा लेने वाली महिलाओं की दर 20.6% से घटकर 14.2% हुई है, यानी इसमें 6.4 प्रतिशत अंक की कमी आई है। पुरुषों में भी यह 22.7% से घटकर 15.4% हुई है, इसमें 7.3 प्रतिशत अंक की कमी दिखी है। ऐसे में शराब, तंबाकू, शुगर और BMI के कई संकेतकों के विपरीत हाई ब्लड प्रेशर का राज्य औसत नीचे आया है। ये खबर भी पढ़ें… एमपी नहीं, अरुणाचल की महिलाएं पीती हैं सबसे ज्यादा शराब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS)-5 की रिपोर्ट के मुताबिक, शराब पीने के मामले में मध्य प्रदेश की महिलाएं देश के बाकी राज्यों के मुकाबले 15वें नंबर पर हैं। पहले नंबर पर अरुणाचल प्रदेश की महिलाएं हैं। जहां तक शराब की खपत का सवाल है तो छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा शराब की खपत है। पढ़ें पूरी खबर…
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Arunachal Pradesh Tinkle Karga Gongo Viral Video: प्यारी सी बच्ची को मिला ढेर सारा प्यार ऐसे कहा थैंक यू
जिनपिंग की भारत यात्रा- बॉर्डर पर तैनाती और निगरानी बढ़ाने का समय आ गया
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आने की तैयारी कर रहे हैं। भारत यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे। जिनपिंग इससे पहले वर्ष 2019 में शिखर वार्ता के लिए भारत आएं थे। चीनी राष्ट्रपति के भारत यात्रा के दौरान जाहिर तौर पर दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर भी बातचीत होगी। हाल के दिनों में भारत चीन सीमा पर खासकर अरुणाचल प्रदेश को लेकर जो खबरें आ रही है, उसने पूरे देश को चिंतित कर दिया है। बदले माहौल में अब भारत की कोई भी सरकार सिर्फ शांति और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के नाम पर पड़ोसी देश की इस तरह की नापाक हरकतों को ठंडे बस्ते में नहीं डाल सकती है। ऐसे में नई दिल्ली में स्वागत की तैयारियों से भी ज्यादा जरूरी हो जाता है भारत-चीन सीमा पर सैनिकों को पूरे साजो-सामान के साथ 24 घंटे रेडी मोड में रखना। चीन का इतिहास भी यही बताता है कि भारत को अब और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। भारत-चीन संबंधों के बीच सबसे बड़ी विडंबना शीर्ष नेताओं के दौरे के दौरान या दौरे के आसपास ही शुरू होती है। आमतौर पर जब भी किसी दो देशों के बीच शीर्ष स्तर पर यात्रा की कोई योजना बनती है तो दोनों ही देश, इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान तो कम से कम कहीं कोई तनाव न पैदा हो। लेकिन चीन इसके बिल्कुल उल्टा करता है। चीन का इतिहास यह बताता है कि भारत की तरफ से संबंध सुधारने के लिए जब भी शीर्ष स्तर पर कोई नेता चीन जाता है या फिर भारत के निमंत्रण पर जब भी चीन से कोई शीर्ष नेता भारत आता है तो अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और राजनयिक शिष्टाचार को पूरी तरह से धत्ता बताते हुए चीन की सेना सीमा पर खुराफात शुरू कर देती है। एक तरफ शीर्ष स्तर पर बातचीत, शांति और व्यापारिक संबंधों के ढोल बज रहे होते हैं तो वहीं दूसरी तरफ चीन की सेना भारत के क्षेत्र में जबरदस्ती घुसपैठ करने और भारतीय सेना से लड़ती-भिड़ती नज़र आती है। आपको बता दें कि, चीन की सेना पाकिस्तानी सेना की तरह बेलगाम नहीं है यानी चीन की सेना जो कुछ भी करती है वह राष्ट्रपति की मंजूरी से ही करती है। इसे भी पढ़ें: Modi ने पिछले साल China जाने से पहले चली थी तगड़ी चाल, अब Xi Jinping के India आने से पहले खेल दिया बड़ा दाँव वैसे तो शीर्ष स्तर पर यात्राओं के दौरान चीन की इस तरह की हरकतों का लंबा इतिहास रहा है। लेकिन आपके सामने कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं को उदाहरण के तौर पर रख देते हैं। वर्ष 2003 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चीन यात्रा के दौरान ही चीनी सेना की एक टुकड़ी ने अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के असफीला इलाके में LAC पार करके भारतीय सीमा में न केवल घुसपैठ किया था बल्कि भारतीय सैनिकों की एक छोटी सी टुकड़ी से उनके हथियार तक छीन लिए थे। चीनी सेना ने इससे भी बड़ी नापाक हरकत वर्ष 2013 में अपने ही प्रधानमंत्री ली केकियांग के भारत दौरे से पहले की थी। मनमोहन सिंह सरकार के दौरान वर्ष 2013 में चीनी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से पहले PLA यानी चीनी सेना पूर्वी लद्दाख ( भारतीय क्षेत्र ) में 19 किलोमीटर तक न केवल अंदर घुस आई थी बल्कि वहां तंबू लगाकर कब्जा भी कर लिया था। दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थी और लगभग 20 दिनों तक यह गतिरोध बना रहा था। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद वर्ष 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत यात्रा पर आएं। जिनपिंग के भारत पहुंचने से महज कुछ घंटे पहले ही चीन की सेना ने लद्दाख में घुसपैठ कर, अवैध तरीके से सड़क बनाना शुरू कर दिया। यहां भी दोनों देशों की सेनाएं लगभग दो सप्ताह तक आमने-सामने खड़ी रहीं। इस तरह के अनगिनत उदाहरण भरे पड़े हैं जब भारत और चीन के शीर्ष नेता बातचीत कर रहे थे या बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे, ठीक उसी समय चीन की सेना नापाक हरकतें कर रही थी। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही खड़ा हो रहा है कि क्या चीन सितंबर के महीने में बॉर्डर पर फिर से कोई बड़ी खुराफात करने की योजना तो नहीं बना रहा है ? यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि भारत में 12-13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसमें शामिल होने के लिए भारत आएंगे। चीन के राष्ट्रपति के भी इस सम्मेलन में आने की तैयारियां चल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के विदेश मंत्रालय के सूत्र यह बता रहे हैं कि जिनपिंग के दौरे की अभी आधिकारिक तौर पर औपचारिक सूचना भले ही न मिली हो लेकिन एडवांस टीमों के दौरे और बाकी तैयारियों से यह लग रहा है कि वह भारत आ सकते हैं। अगर ऐसा है तो भारत और चीन की सीमा पर चौकसी को और ज्यादा बढ़ाने का समय आ गया है। बॉर्डर से लगती भारत की हर चौकी पर सेना को पूरी ताकत और साजो-सामान के साथ तैनात करना पड़ेगा। वहां पर संचार के साधन और बिजली की उपलब्धता को हर हाल में सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था करनी होगी। रिजर्व फौज को भी तैयार रखना होगा ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। दोनों देशों के बीच सीमा पर हथियार नहीं चलाने का समझौता हो रखा है तो ऐसे में जाहिर तौर पर लड़ने के लिए अलग तरह की तैयारियां तो करनी ही पड़ेगी। इस तरह के हालात में सैन्य साजो-सामान, हथियार, बेहतर संचार के साधन, 24 घंटे बिजली की उपलब्धता, बेहतर सड़क और खाने-पीने के सामानों की भरपूर उपलब्धता के साथ ही बड़ी-बड़ी नुकीले कील लगे डंडे की भी जरूरत पड़ती है। सबसे जरूरी बात यह है कि नई दिल्ली की तरफ से इनके पास स्पष्ट ऑर्डर होना चाहिए कि चीनी सेना की नापाक हरकतों का जवाब कैसे और किस हद तक जाकर देना है। - संतोष कुमार पाठक लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं
'मुझे चाइनीज मत बोलो, मैं इंडियन हूं...' मां ने बनाया था वीडियो, बेटी का जवाब सुनकर भावुक हुए लोग
अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर की छोटी-सी बच्ची करगा टिंकल गोंगो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। टिंकल ने एक वीडियो में लोगों से कहा कि उसे चाइनीज न कहा जाए। उसका यह मासूम और भावुक वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया।
दिबांग घाटी में बाढ़ के बाद भोजपुर का आर्मी जवान आठ दिन से लापता
22 शनिवार, अगस्त: भोजपुर का आर्मी जवान अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ और बादल फटने के बाद पांच जवानों के साथ लापता हो गया। आठ दिन बाद भी उसका पता नहीं चला है। परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ के बाद भोजपुर का जवान आठ दिन से लापता
22 शनिवार, अगस्त: भोजपुर का रहने वाला आर्मी जवान अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाढ़ और बादल फटने के बाद पांच जवानों के साथ लापता हो गया। आठ दिन बाद भी जवान का पता नहीं चला है, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
राजस्थान से गुजरात नकली पनीर (एनालॉग पनीर) सप्लाई किया जा रहा है। मामले का खुलासा करते हुए अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के फूड विभाग ने दो लग्जरी बसों से 408 किलो प्रतिबंधित पनीर जब्त किया है। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) का दावा है कि इस पनीर को जोधपुर और पाली में तैयार किया गया है। 450 रुपए वाला एमआरपी वाले पनीर 240 रुपए प्रतिकिलो में बेचा जा रहा था, जिसे बचने के लिए दो लोग आए थे। दो बसों में मारा था छापा, तब सामने आया मामला AMC के फूड विभाग ने 21 अगस्त की सुबह अहमदाबाद के कांकरिया दड़की गार्डन के पास पार्किंग प्लॉट में दो लग्जरी बसों पर छापा मारा। इस दौरान 408 किलो लो फैट पनीर का जखीरा जब्त कर सीज किया गया। 240 प्रति किलो के भाव पर जखीरा खरीद रहे थे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के फूड विभाग के अधिकारी डॉ. तेजस शाह ने बताया- दूसरे राज्य से लग्जरी बसों के जरिए अहमदाबाद शहर में पनीर का जखीरा लाए जाने की जानकारी मिली थी। इसके आधार पर अरुणाचल प्रदेश के सिंबल वाली दो लग्जरी बसों की जांच की गई। इनमें लो फैट पनीर का जखीरा मिला। यह जखीरा नरोडा और मणिनगर क्षेत्र के दो लोग 240 रुपए प्रति किलो के भाव से खरीदने के लिए आए थे। जोधपुर और पाली में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का दावा इस पनीर की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट राजस्थान के जोधपुर और पाली में होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में इस लो फैट एनालॉग पनीर को राजस्थान से लाए जाने की पूरी संभावना है। फूड विभाग ने पनीर के जखीरे को सीज कर दिया है। जांच के लिए लैब भेजा है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, पनीर लाने वालों और इसे खरीदने वालों सभी की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुरुवार रात दरभंगा पहुंचे। शहर के वार्ड नंबर 25 स्थित पुरानी मुंशफी मोहल्ला में यामाहा शोरूम के मैनेजर मो. फैज के परिजनों से मुलाकात की। 2 महीने पहले लोहे की रॉड से पीट-पीटकर फैज की हत्या कर दी गई थी। तेजस्वी यादव ने परिवार से घटना की जानकारी ली और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और राजद कार्यकर्ता उनके साथ मौजूद रहे। नेता प्रतिपक्ष ने मो. फैज हत्याकांड को लेकर बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस परिवार से उनका पुराना संबंध रहा है। जिस तरह हत्या की गई, उसका सीसीटीवी फुटेज बेहद दर्दनाक था। अभी तक सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन साजिश में शामिल एक-दो अन्य लोगों की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है। इस मामले को लेकर वह डीजीपी से बात करेंगे। मांग करेंगे कि हत्याकांड में शामिल कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए। इसके बाद तेजस्वी यादव स्वर्ण कारोबारी राहुल कुमार साह के परिजनों से मिलने पहुंचे। गोली मारकर राहुल की हत्या हुई थी। परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर के सवाल पर कहा कि बिहार में अपराध का रिकॉर्ड बन गया है। जब सीएम पर ही आपराधिक मामले चल रहे हों, तो उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है। दावा किया कि बिहार में अपराध की स्थिति बेहद गंभीर है। आए दिन हत्या और गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं। अखबार खोलने पर ऐसा लगता है कि अखबारों का रंग लाल हो चुका है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। आम लोग भय के माहौल में जी रहे हैं। मंत्री मदन सहनी के बयान पर सरकार को घेरा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंत्री मदन सहनी के बयान पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य के मंत्री ही सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, तो फिर मंत्री पद पर रहने का क्या फायदा है। उन्हें यह बताना चाहिए कि कौन लोग अवैध वसूली कर रहे हैं और कौन घूस ले रहा है। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। केवल बैठकर झाल बजाने से काम नहीं चलेगा। वंदे मातरम के नाम पर हो रही राजनीति को लेकर भाजपा पर बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी से लोग परेशान हैं। पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र-छात्राएं परेशान हैं, लेकिन इन मुद्दों पर सभी लोग मौन हैं। बिहार में एके-47 से गोलियां चल रही हैं, लेकिन इस पर भी लोग चुप हैं। डस्टबिन घोटाले और 71 हजार करोड़ रुपए के कथित हिसाब-किताब का भी जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि सरकार की एजेंसियों के दुरुपयोग से जनता परेशान है और आने वाले दिनों में भाजपा के प्रति लोगों का गुस्सा दिखाई देगा। चीन के मुद्दे पर भी केंद्र को घेरा अरुणाचल प्रदेश में चीन के कथित कब्जे के मुद्दे पर भी तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि चीन हिंदुस्तान में घुसकर जमीन कब्जा कर रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर कोई बात नहीं कर रहा है। देश के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय भाजपा लोगों को बांटने की राजनीति कर रही है। तेजस्वी यादव का भव्य स्वागत दरभंगा पहुंचने पर नेता प्रतिपक्ष का पार्टी के नेताओं और कर्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। सिमरी में पूर्व विधायक डॉ. फराज फातमी सहित स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मिथिला परंपरा के अनुसार पाग-चादर देकर स्वागत किया। केवटी प्रखंड के पाराडीह में स्वागत समारोह की अगुवाई पन्ना यादव कर रहे थे। इस दौरान राजद नेता सुवंश यादव, रवि यादव, जगदीर यादव, रामदेव पासवान सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। तेजस्वी यादव के काफिले के आगे बढ़ने के दौरान भी कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। उनके साथ राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, पूर्व विधायक ललित यादव, भोला यादव, राकेश नायक, पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी, डॉ. फराज फातमी,धर्मवीर यादव, शक्ति यादव, गोपाल मंडल सहित कई नेता मौजूद थे।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा ने चीनी-पाकिस्तानी चालों को किया दुरुस्त!
जरा गौर कीजिए, जब चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत को आंखें दिखा रहा हो, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर/लद्दाख पहुंचना और जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भारतीय कूटनीति की कितनी बड़ी सफलता है, क्योंकि यह परोक्ष रूप से चीन को संदेश है कि भारत का साथ मिलते ही अमेरिका अन्य एशियाई 'बदमाशों' को रौंद डालेगा। उधर, पाकिस्तान को संदेश है कि इस्लामिक नाटो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं बनेगा, यदि अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहेगा। जी हां, अमेरिकी राजदूत की 19–20 अगस्त 2026 की जम्मू-कश्मीर और लद्दाख यात्रा को केवल एक राजनयिक दौरा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: Sergio Gor के बयान से तिलमिलाये Pakistan ने Trump Administration पर उतारी भड़ास, US Diplomat Natalie Baker को तलब कर थमाया Strong Demarche खासकर श्रीनगर में उनका यह कहना कि जम्मू-कश्मीर “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” है और अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत देना, वाशिंगटन के पुराने कश्मीर-संबंधी सार्वजनिक रुख की तुलना में महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामरिक संकेत देता है। इससे कई सवाल उपजते हैं, जिनके निहितार्थ को समझना भी जरूरी है:- पहला सवाल है कि क्या वास्तव में अमेरिकी स्टैंड बदल गया है? तो जवाब होगा कि अपेक्षित सावधानी जरूरी है। अभी इसे अमेरिका की औपचारिक कश्मीर-नीति में पूर्ण परिवर्तन कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन राजनयिक भाषा और व्यवहार में बदलाव का संकेत स्पष्ट है। पहले अमेरिकी नीति का सार्वजनिक ढांचा मुख्यतः यह रहा कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित विषय है और दोनों देशों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। 2019 के बाद भी अमेरिकी अधिकारियों ने इस मूल स्थिति को बनाए रखा था। इसके विपरीत, गोर ने भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर में जाकर उसे “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा। पाकिस्तान ने इसे अमेरिकी पारंपरिक रुख से विचलन मानते हुए अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इसलिए फिलहाल इसे “नीति परिवर्तन” से अधिक “नीति-संकेत में परिवर्तन” कहना उचित होगा। दूसरा सवाल है कि इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश क्या है? क्या कश्मीर को जमीन पर देखकर आकलन हुआ है? तो जवाब होगा कि गोर का दौरा छह साल से अधिक अंतराल के बाद किसी अमेरिकी राजदूत की कश्मीर यात्रा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और सुरक्षा व्यवस्था तथा बदलते माहौल का प्रत्यक्ष आकलन किया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अमेरिका की कश्मीर संबंधी धारणा अब केवल इस्लामाबाद, नई दिल्ली या अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रह सकती। राजदूत का स्वयं श्रीनगर जाना और फिर सुरक्षा स्थिति पर सकारात्मक टिप्पणी करना वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को एक अलग जमीनी इनपुट देता है। तीसरा सवाल यह है कि Travel Advisory में बदलाव—छोटा दिखने वाला बड़ा संकेत है? तो जवाब होगा कि गोर ने जम्मू-कश्मीर के लिए अमेरिकी यात्रा-परामर्श की समीक्षा के संकेत दिए हैं। अगर आगे अमेरिका अपने मौजूदा “Do Not Travel” स्तर को नीचे करता है, तो इसका असर केवल अमेरिकी पर्यटकों पर नहीं पड़ेगा। यह संदेश जाएगा कि सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार हुआ है। सामान्य आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। पर्यटन के लिए क्षेत्र अधिक खुल रहा है। अंतरराष्ट्रीय जोखिम-धारणा बदल रही है। यानी कश्मीर के लिए यह सुरक्षा से पर्यटन और पर्यटन से निवेश की दिशा में सकारात्मक कूटनीतिक संकेत बन सकता है। चौथा सवाल यह है कि क्या यह परिदृश्य पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका है? तो कहना न होगा कि इस बयान की सबसे तीखी प्रतिक्रिया पाकिस्तान से आई है। इस्लामाबाद ने इसे अपनी दशकों पुरानी कश्मीर कूटनीति के प्रतिकूल माना और अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। पाकिस्तान के लिए समस्या सिर्फ गोर का बयान नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि यदि अमेरिका जैसा प्रभावशाली देश धीरे-धीरे कश्मीर को “भारत-पाकिस्तान के विवाद” की भाषा से हटाकर “भारत के महत्वपूर्ण हिस्से” की भाषा में संबोधित करने लगे, तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रणनीति कमजोर हो सकती है। पांचवां सवाल यह है कि क्या चीन का कोण भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता? तो जवाब होगा कि गोर का कार्यक्रम केवल श्रीनगर तक सीमित नहीं रहा; वह लद्दाख भी गए। यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि लद्दाख भारत-चीन सीमा-सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए यात्रा का एक व्यापक संदेश यह भी हो सकता है कि अमेरिका भारत के पश्चिमी और उत्तरी दोनों रणनीतिक मोर्चों को अपने Indo-Pacific और South/Central Asia दृष्टिकोण से देख रहा है। छठा सवाल यह है कि क्या भारत-अमेरिका संबंधों में कश्मीर की भूमिका बदल सकती है? तो कहना न होगा कि यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका संबंधों के उस व्यापक पुनर्संतुलन का हिस्सा हो सकता है जिसमेंआतंकवाद के विरुद्ध सहयोग, चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला, हिंद-प्रशांत रणनीति, रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा एवं व्यापार, और दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। गोर स्वयं भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ South and Central Asian Affairs के Special Envoy भी हैं। इसलिए उनकी टिप्पणी का महत्व सामान्य राजदूत की टिप्पणी से अधिक माना जा सकता है। सातवां सवाल यह है कि क्या भारत को अति-उत्साहित होने से भी बचना होगा? तो जवाब होगा कि यहां एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सावधानी बरतनी जरूरी है क्योंकि एक राजदूत का बयान अमेरिकी सरकार की पूरी औपचारिक विदेश नीति का विकल्प नहीं होता। जब तक अमेरिकी विदेश विभाग या व्हाइट हाउस अपनी आधिकारिक नीति में स्पष्ट बदलाव घोषित नहीं करता, तब तक यह कहना कि “अमेरिका ने कश्मीर पर पाकिस्तान को छोड़कर भारत का पक्ष ले लिया है” अतिशयोक्ति होगी। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि अमेरिकी सार्वजनिक कूटनीतिक भाषा में एक उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दे रहा है। आठवां सवाल यह है कि सबसे बड़ा रणनीतिक निहितार्थ क्या है? तो जवाब होगा कि मेरे आकलन में इस यात्रा का वास्तविक महत्व चार शब्दों में है: “Narrative → Ground Reality → Policy.” यदि अमेरिका को जमीनी स्तर पर कश्मीर में सुरक्षा, राजनीतिक प्रक्रिया, पर्यटन और आर्थिक सामान्यीकरण दिखाई देता है और उसके आधार पर उसकी यात्रा चेतावनी कम होती है, तो धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव भी बदल सकता है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा। निष्कर्षतः, सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे अभी अमेरिकी कश्मीर नीति का अंतिम परिवर्तन घोषित करना जल्दबाजी होगी। असली परीक्षा अगले चरण में होगी—क्या Washington अपनी आधिकारिक भाषा बदलेगा, क्या travel advisory घटेगी और क्या भविष्य में अमेरिकी अधिकारी कश्मीर को भारत के आंतरिक प्रशासनिक-सुरक्षा संदर्भ में अधिक स्पष्टता से देखेंगे? अगर इन तीनों प्रश्नों का उत्तर “हाँ” होता है, तो गोर की यह यात्रा दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण turning point सिद्ध हो सकती है। # क्या ईरान में पिटी अमेरिकी भद्द और पाकिस्तान के दोगले रवैये से अचंभित अमेरिका ने ऐसा किया हाँ—इसे एक संभावित कारण के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन निर्णायक कारण कहना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध घटनाक्रम को जोड़ें तो अमेरिकी सोच में पाकिस्तान को लेकर विश्वसनीयता का प्रश्न जरूर उभरता है। सवाल है कि क्या ईरान प्रकरण ने अमेरिका को पाकिस्तान को नए नजरिये से देखने पर मजबूर किया? जवाब होगा कि ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान ने एक तरफ अमेरिका के साथ संवाद और मध्यस्थता की भूमिका निभाई, जबकि दूसरी तरफ ईरान के प्रति अपनी निकटता और क्षेत्रीय हितों को भी साधता रहा। विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं—विशेषकर ईरान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब से उसके एक साथ जुड़े हितों को देखते हुए। यानी Washington के लिए संदेश यह हो सकता है कि पाकिस्तान को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार की बजाय आवश्यकता पड़ने पर उपयोगी लेकिन स्वार्थ-आधारित साझेदार के रूप में देखना अधिक व्यावहारिक है। लेकिन कश्मीर पर गोर का बयान सिर्फ पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए? मेरे आकलन में नहीं। क्योंकि सर्जियो गोर ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए अमेरिकी Travel Advisory की समीक्षा की बात कही। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि यह अमेरिकी पारंपरिक कश्मीर-रुख के विपरीत है। इसलिए इसके पीछे कई परतें हो सकती हैं: 1. ईरान: पाकिस्तान की मध्यस्थता और दोहरे हितों से अमेरिकी रणनीतिक संदेह बढ़ा हो। 2. आतंकवाद: अमेरिका के लिए पाकिस्तान की उपयोगिता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन फिर से हो रहा हो। 3. भारत: चीन के मुकाबले भारत का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। 4. कश्मीर: जमीनी सुरक्षा परिस्थितियों को देखकर अमेरिकी धारणा में बदलाव की शुरुआत हुई हो। 5. पाकिस्तान: Washington अब Islamabad को South Asia का अनिवार्य रणनीतिक केंद्र मानने की बजाय भारत को अधिक महत्व दे रहा हो। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि यह बदलाव ईरान संकट के बाद पाकिस्तान की भूमिका बढ़ने के ठीक उसी दौर में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपनी कूटनीतिक उपयोगिता बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन यदि उसी समय अमेरिका का शीर्ष राजनयिक भारत में जाकर कहता है कि J&K भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, तो यह पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से बड़ा कूटनीतिक झटका है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अमेरिका का संदेश है: “Pakistan may be useful, but India is strategically indispensable.” हालांकि अभी इसे अमेरिकी नीति का औपचारिक परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। अगली निर्णायक परीक्षा यह होगी कि Washington अपनी आधिकारिक Kashmir language और Travel Advisory में वास्तव में क्या बदलाव करता है। और एक बड़ा प्रश्न इससे निकलता है—क्या ईरान संकट, पाकिस्तान की कथित दोहरी कूटनीति और चीन की बढ़ती चुनौती ने अमेरिका को अंततः यह समझा दिया है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान से अधिक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार भारत है? यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण यक्ष प्रश्न है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
क्या सच में अरुणाचल प्रदेश में 60 KM तक अंदर घुस आया चीन ? वायरल दावे पर सरकार ने बताया सच
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अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.
12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाली छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। देश के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी अजीम प्रेमजी के नेतृत्व वाले 'अजीम प्रेमजी फाउंडेशन' (Azim Premji Foundation) ने वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए 'अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026' (Azim Premji Scholarship 2026) के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली मेधावी छात्राओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके सपनों को नई उड़ान देना है। इस छात्रवृत्ति योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी गई है और योग्य छात्राएं 31 अगस्त 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं।अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026: क्या है योजना और कितनी मिलेगी सहायता राशि?अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संचालित यह स्कॉलरशिप प्रोग्राम देश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा में लड़कियों के ड्रॉप-आउट रेट (पढ़ाई छोड़ने की दर) को कम करने के लिए शुरू किया गया एक क्रांतिकारी कदम है। इस योजना के तहत चुनी गई प्रत्येक पात्र छात्रा को उनकी उच्च शिक्षा की पूरी अवधि के लिए सालाना ₹30,000 की वित्तीय सहायता राशि प्रदान की जाती है।सालाना छात्रवृत्ति: ₹30,000 प्रति वर्ष।कोर्स की अवधि: 2 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक के अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए सहायता मिलेगी।कुल वित्तीय मदद: यदि कोई छात्रा 3 साल का ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स कर रही है, तो उसे कुल ₹90,000 मिलेंगे, जबकि 5 साल के प्रोफेशनल/एकीकृत कोर्स (जैसे BA LLB, B.Tech आदि) के लिए कुल सहायता राशि ₹1,50,000 तक होगी।भुगतान का माध्यम: स्कॉलरशिप की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थी छात्रा के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।उपयोग की स्वतंत्रता: प्राप्त छात्रवृत्ति राशि का उपयोग छात्राएं अपनी कॉलेज ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल खर्च या पढ़ाई से जुड़े किसी भी व्यक्तिगत खर्च को पूरा करने के लिए कर सकती हैं।निशुल्क आवेदन: फाउंडेशन द्वारा इस पूरी आवेदन प्रक्रिया के लिए किसी भी स्तर पर कोई आवेदन शुल्क या प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती है।कौन सी छात्राएं हैं पात्र? जानिए योग्यता की पूरी शर्तेंअजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026 के लिए पात्रता मानदंड बेहद सरल और सुलभ रखे गए हैं, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लड़कियां इसका लाभ उठा सकें। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह किसी जाति, धर्म, पारिवारिक आय या केवल बोर्ड परीक्षा के अंकों (मेरिट) के आधार पर सीमित नहीं है।शैक्षणिक पृष्ठभूमि: छात्रा ने अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा किसी मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूल या सरकारी कॉलेज से नियमित (Regular) छात्रा के रूप में पास की हो।कॉलेज प्रवेश: सत्र 2026-27 में किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी विश्वविद्यालय/कॉलेज में अंडरग्रेजुएट (UG) डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के प्रथम वर्ष (First Year) में नियमित प्रवेश लिया हो।योग्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश: यह स्कॉलरशिप योजना देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली (NCT), आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और पुडुचेरी शामिल हैं।अपात्रता की स्थिति: जो छात्राएं ओपन/डिस्टेंस लर्निंग (दूरस्थ शिक्षा) से पढ़ाई कर रही हैं या जो पहले से ही द्वितीय, तृतीय या चतुर्थ वर्ष में हैं, वे नए आवेदक के रूप में पात्र नहीं होंगी। इसके अलावा अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी या विप्रो की अन्य स्कॉलरशिप पाने वाली छात्राएं इसके दायरे से बाहर रहेंगी।आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज हैं जरूरी?ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अभ्यर्थियों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। ध्यान रहे कि सभी दस्तावेज स्पष्ट और निर्दिष्ट साइज में ही अपलोड किए जाएं।आवेदक छात्रा की हाल की पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर।आधार कार्ड (पहचान पत्र के रूप में)।10वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।12वीं कक्षा की मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट।वर्तमान कॉलेज/यूनिवर्सिटी में प्रवेश का प्रमाण (फीस रसीद या बोनाफाइड सर्टिफिकेट)।बैंक खाता विवरण (पासबुक के पहले पन्ने की कॉपी या कैंसिल चेक)।ध्यान दें कि अपलोड किए जाने वाले सभी दस्तावेज केवल PDF, PNG या JPG फॉर्मेट में होने चाहिए, जिनका साइज 30 KB से 500 KB के बीच होना आवश्यक है।ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियास्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक छात्राएं नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपना फॉर्म जमा कर सकती हैं:सबसे पहले अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट azimpremjifoundation.org पर जाएं।होमपेज पर दिए गए 'Azim Premji Scholarship' सेक्शन के अंतर्गत 'Register New Applicants Cohort 2026' लिंक पर क्लिक करें।अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी (OTP) के जरिए सत्यापन करें।अपना यूजर आईडी और मजबूत पासवर्ड बनाकर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरा करें।अब अपने आईडी व पासवर्ड से लॉगिन करें और आवेदन पत्र में मांगी गई व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक संबंधी सभी जानकारियां सही-सही भरें।मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट और साइज में स्कैन करके अपलोड करें।फॉर्म को अच्छी तरह री-चेक करें और 'Submit' बटन पर क्लिक करके आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।भविष्य के संदर्भ के लिए भरे गए आवेदन पत्र का एक प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।महत्वपूर्ण तारीखें और आगे की समय-सारणीअजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने पहले चरण के लिए आवेदन की समय-सीमा तय कर दी है:राउंड 1 आवेदन शुरू होने की तिथि: 10 अगस्त 2026राउंड 1 आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026राउंड 2 आवेदन अवधि: 10 जनवरी 2027 से 31 जनवरी 2027 तकपुराने छात्रों के लिए रिन्यूअल की तिथि: सितंबर 2026 में रिन्यूअल विंडो खुलेगी।महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदमअजीम प्रेमजी फाउंडेशन का लक्ष्य प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक लड़कियों को इस स्कॉलरशिप के माध्यम से उच्च शिक्षा से जोड़ना है। फाउंडेशन का मानना है कि जब एक लड़की शिक्षित होती है, तो वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारती है, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यदि आप या आपके परिचित में कोई योग्य छात्रा है जिसने हाल ही में 12वीं पास करके कॉलेज में दाखिला लिया है, तो 31 अगस्त 2026 से पहले इस योजना में आवेदन करके इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के दावे से बांग्लादेश सीमा का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो चांपाईनवाबगंज के शिबगंज सीमा क्षेत्र पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच हुई कहासुनी का है.
अरुणाचल प्रदेश में स्थित तवांग मठ देश के सबसे प्रसिद्ध बौद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। समुद्र तल से लगभग 10,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह मठ प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इसे “गोल्डन नामग्याल ल्हात्से” के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है “दिव्य स्वर्ग में स्थित पवित्र स्थान”। तवांग मठ की स्थापना सन् 1680 में मेरक लामा लोद्रे ग्यात्सो ने की थी। यह मठ तिब्बती बौद्ध धर्म की गेलुग्पा परंपरा से जुड़ा हुआ है और दलाई लामा के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा तथा विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। मठ की विशाल इमारत, रंग-बिरंगी चित्रकारी और शांत वातावरण पर्यटकों को गहरे रूप से आकर्षित करते हैं। मठ के भीतर लगभग 28 फीट ऊँची भगवान बुद्ध की स्वर्णिम प्रतिमा स्थापित है, जो इसकी मुख्य विशेषताओं में से एक है। यहाँ की प्रार्थना सभाएँ, बौद्ध मंत्रों की ध्वनि और घूमते प्रार्थना चक्र पर्यटकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं। मठ में एक विशाल पुस्तकालय भी है, जिसमें प्राचीन बौद्ध ग्रंथ और हस्तलिखित पांडुलिपियाँ सुरक्षित रखी गई हैं। इसे भी पढ़ें: Ujjain Travel Guide: सावन में बाबा महाकाल के दर्शन के साथ इन 5 Famous Places को अपनी List में करें शामिल तवांग मठ केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी अत्यंत लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़, बादलों से घिरी घाटियाँ और ठंडी हवाएँ यहाँ आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। सर्दियों में जब पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है, तब इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। तवांग मठ के आसपास भी कई दर्शनीय स्थल स्थित हैं। इनमें सबसे प्रमुख है सेला दर्रा, जो तवांग का प्रवेश द्वार माना जाता है। लगभग 13,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा अपनी प्राकृतिक झीलों और बर्फीले दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का सेला झील पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इसके अतिरिक्त माधुरी झील भी अत्यंत सुंदर स्थल है। यह झील चारों ओर पहाड़ियों और देवदार के वृक्षों से घिरी हुई है। कहा जाता है कि हिन्दी फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की एक फिल्म की शूटिंग यहाँ हुई थी, जिसके बाद इस झील का नाम माधुरी झील पड़ गया। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटक तवांग युद्ध स्मारक भी देख सकते हैं। यह स्मारक 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है। यहाँ प्रतिदिन होने वाला लाइट एंड साउंड शो देशभक्ति की भावना से भर देता है। तवांग आने का सबसे अच्छा समय मार्च से अक्टूबर के बीच माना जाता है, जब मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है। हालांकि, जो पर्यटक बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं, वे दिसंबर और जनवरी में भी यहाँ आ सकते हैं। यहाँ पहुँचने के लिए सबसे निकटतम हवाई अड्डा तेजपुर और रेलवे स्टेशन असम में स्थित हैं, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा तवांग पहुँचा जा सकता है। तवांग मठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है। यहाँ की शांत वादियाँ, बौद्ध संस्कृति और हिमालय की भव्यता हर पर्यटक के मन में अविस्मरणीय स्मृतियाँ छोड़ जाती हैं। जो भी व्यक्ति जीवन में शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करना चाहता है, उसके लिए तवांग मठ एक आदर्श पर्यटन स्थल है। -प्रीटी
आजकल युवाओं में घूमने-फिरने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर किसी शांत प्लेस को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। मानसून के समय हर कोई हरियाली से भरपूर, बादल, झरने और सुकून हो वाली जगहों पर घूमने का प्लान बनाते हैं। इस बार आप बरसात के समय भारत के कुछ खूबसूरत गांव को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इस मौसम में यहां पर पहाड़ हरे रंग को हे जाते हैं, बादल घरों के बीच से गुजरने नजर आते हैं और हर तरफ आपको ताजगी का माहौल देखने को मिलता है। इस बार आप भी इन जगहों का आनंद जरुर लें। चलिए आपको इस लेख में बताते हैं मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली आपके लिए सबसे बेहतरीन रहने वाली है। आइए आपको बताते हैं इन तीन गांवों में ऐसा क्या खास है,जो आपको मानसून के समय जरुर विजिट करना चाहिए। मावल्यान्नॉन्ग (मेघालय) आपको बताते चलें कि मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग गांव अपनी साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में काफी फेमस है। इसकी गिनती एशिया के सबसे साफ गांव में मानी जाती है। यहां पर रहने वाले सभी लोग इस गांव को हमेशा साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधे, फूल और बारिश से धुले रास्ते गांव की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यहां आप इन जगहों पर विजिट कर सकते हैं- - लिविंग रुट ब्रिज - बांस से बना स्काई व्यू पॉइंट - छोटे-छोटे झरने - खासी गांव की लाइफस्टाइल खोनोमा (नागालैंड) अगर आप नेचर लवर हैं, नागालैंड के खोनोमा गांव में जरुर विजिट करें। यहां की नेचुरल ब्यूटी और पर्यावरण संरक्षण बेहद लोकप्रिय है। बता दें कि, इसे भारत के पहले ग्रीन विलेज में गिना जाता है। बरसात के समय यहां पर सीढ़ीदार वाली खेती, पहाड़ और जंगल के काफी खूबसूरत नजर आते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ भी इस गांव की खूबसूरती को बढ़ा देते हैं। यहां पर इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। - गांव में पैदल वॉक करना - सीढ़ीदार खेत देखना - लोकर नागा कल्चर को करीब से देख सकते हैं - नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग जीरो (अरुणाचल प्रदेश) मानसून के समय अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली में घूमने का प्लान जरुर बनाएं। यह जगह अपनी नेचुरल ब्यूटी और अपतानी जनजाति की अनोखी कल्चर के लिए जानी जाती है। इधर मानसून के समय काफी खूबसरत लगता है। बरसात के समय धान के खेत, पहाड़ और हल्का कोहरा मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जिसे देखकर मन एकदम खुश ही हो जाती है। यहां आप क्या-क्या कर सकती हैं- - हरे-भरे धान के खेतों को देख सकती हैं - अपतानी जनजाति के पारंपरिक गांव को एक्सप्लोर कर सकती है - खूबसूरती पहाड़ी रास्ते - यहां लोकल बाजार और खाने का जायका लेना मानसून के समय इन गांव में यात्रा करने से पहले जानें जरुरी बातें - बरसात से बचने के लिए रेनकोट और बढ़िया क्वालिटी की छतरी साथ रखें। - इस दौरान फिसलन ज्यादा हो सकती है, इसलिए मजबूत ग्रिप वाले शूज ही पहनें। - मौसम का अपडेट देखकर ही ट्रिप प्लान करें। - वहां के नियमों का पालन जरुर करें। - दरअसल, पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो जाती है, इसलिए समय का भी ध्यान जरुर रखें। - प्लास्टिक या कचरा कहीं भी ने फेंकें, ताकि इन गांवों के सुंदरता बनीं रहे।
Bigg Boss 18 : चुम दरांग को मिला अरुणाचल प्रदेश के सीएम का सपोर्ट
सलमान खान का पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 18' अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। हर कोई इस सीजन का विनर बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन दिनों शो में 'टिकट टू फिनाले' टास्क चल रहा है। इस टास्क में विवियन डीसेना और चुम दरंग आमने-सामने खड़े हैं। वहीं ...

