राजस्थान के कई शहरों में गोवा की तर्ज पर अवैध कैसिनो खुल गए हैं। लग्जरी विला या फार्महाउस को दो दिन के लिए बुक किया जाता है। देशभर से हाईप्रोफाइल लोगों को इसमें लाखों रुपए लेकर एंट्री दी जाती है। टेबल पर पत्ते बांटने के लिए लड़कियां, शराब से लेकर हुक्का पार्टी तक का इंतजाम होता है। यहां तक कि सिक्योरिटी की पूरी गारंटी भी ली जाती है। ये खुलासा जयपुर में ऐसे ही एक पार्टी के दौरान हत्थे चढ़े मास्टरमाइंड ने किया है। ये कैसिनो पार्टी शहर के नजदीक भांकरोटा में एक फार्महाउस पर हो रही थी। इसमें ऑर्गेनाइजर प्रदीप लालवानी सहित 16 लोगों को पकड़ा गया था। पूछताछ में सामने आया है कि ये प्रदेश के कई शहरों में ऐसे ही पार्टी कर चुके हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए पूरी रिपोर्ट.... अलग-अलग राज्यों से खेलने पहुंचे हाईप्रोफाइल लोग भांकरोटा एसएचओ श्रीनिवास जांगिड़ ने बताया कि 25 मार्च की रात इंप्रेस ग्रीन्स में 5 नंबर विला फार्म में अलग-अलग स्टेट की लग्जरी कारों का काफिला खड़ा था। सूत्रों ने कुछ संदिग्ध होने की सूचना दी। पड़ताल करने पर पता चला कि यह विला किसी प्रदीप लालवानी ने बुक करवाया है। इसके बाद दबिश दी गई थी। टीम अंदर पहुंची तो मौके पर मिले 20 संदिग्धों को पकड़ लिया। ऑर्गेनाइजर प्रदीप लालवानी और उसका सहयोगी रॉबिन मौके पर ही था। पूछताछ में उसने बताया कि फार्म किराए पर लिया था। पार्टी में दिल्ली, गुजरात, हरियाणा जैसे कई राज्यों के हाईप्रोफाइल लोगों को बुलाया गया था। पकड़े गए ज्यादातर युवा हैं। एंट्री फीस 1 लाख रुपए से शुरू ऐसे अवैध कैसिनो में जुआ खेलने के लिए एंट्री फीस 1 लाख से लेकर 2 लाख रुपए ली जाती थी। पैसा एडवांस मिलने के बाद टेबल और फार्महाउस में रूम बुकिंग फाइनल कर दी जाती थी। इसके बाद पार्टी से जुड़ी सारी व्यवस्थाओं का सारा जिम्मा रॉबिन को दिया जाता था। रॉबिन प्रदीप के लिए जगह, शराब, रिसोर्ट, स्टाफ मुहैया कराने का काम करता था। इसके बदले हर पार्टी का 20 हजार रुपए कमीशन लेता था। पूरा सेटअप भी रॉबिन का होता था। जगह फाइनल होने के बाद रॉबिन लोकेशन शेयर करता। फिर प्रदीप ग्रुप में जुड़े लोगों को जानकारी देता था। जुआ खेलने वालों को जयपुर बुलाकर उसी रिसॉर्ट या फार्महाउस में ठहराया जाता था। VIP और हाईप्रोफाइल लोगों की लिस्ट पुलिस पड़ताल में सामने आया कि पार्टी ऑर्गेनाइजर प्रदीप के पास (जुआ) खेलने के शौकीन हाईप्रोफाइल लोगों की लिस्ट बना रखी है, जो इसके लिए कहीं भी जाने को तैयार रहते हैं। जयपुर, दिल्ली या किसी भी शहर में पार्टी ऑर्गेनाइज करने पर उनको इनवाइट किया जाता था। पत्ते बांटने के लिए खूबसूरत लड़कियों का इंतजाम गेस्ट के एंटरटेनमेंट और पत्ते बांटने के लिए खूबसूरत लड़कियां को भी बुलवाया जाता था। जयपुर में रेड के दौरान एक लड़की को भी पकड़ा है, हालांकि उसकी पहचान उजागर नहीं की गई है। खाना बनाने के लिए दो शेफ और शराब परोसने के लिए एक्सपर्ट स्टाफ रखते थे। खेलते समय किसी गेस्ट के पास पैसा खत्म होने पर हवाला के जरिए मौके पर मंगवा लिया जाता था। गेम शुरू होते ही फ्लाइट मोड पर मोबाइल पुलिस से बचने के लिए अंधेरा होने के बाद ही टेबल का सेटअप तैयार किया जाता था। इसके बाद रिसॉर्ट या फार्महाउस को बंद कर दिया जाता था। बाहर प्राइवेट गार्ड होते थे। कोई भी गेस्ट अंदर की वीडियोग्राफी न कर पाए या अंदर की जानकारी किसी भी तरीके से लीक न हो, इसके लिए खेलने वालों का मोबाइल फ्लाइट मोड पर डाल दिया जाता था। गेम के दौरान किसी को भी मोबाइल इस्तेमाल की परमिशन नहीं दी जाती थी। कॉइन पर 5% कमीशन पुलिस पूछताछ में सामने आया कि खेलने के लिए मिनिमम 500 रुपए में एक प्लास्टिक का कॉइन देते थे। गेस्ट को कम से कम 1 लाख रुपए लेकर ही खेलने की परमिशन थी। मान लीजिए पार्टी में 20 लोगों ने कुल 20 लाख रुपए दांव पर लगाए तो उसमें 5 प्रतिशत के हिसाब से 1 लाख रुपए बतौर कमीशन प्रदीप लालवानी रखता था। वीकेंड पर नहीं होती थी पार्टी डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि प्रदीप वीकेंड की बजाय बुधवार और गुरुवार का दिन पार्टी के लिए फिक्स करता था। क्योंकि वीकेंड पर होने वाली पार्टियों पर पुलिस नजर रखती है। पार्टी में कौन-कौन शामिल होंगे इसका भी फॉर्मूला बना रखा था। 70 प्रतिशत गेस्ट पिछली पार्टियों में शामिल हो चुके लोगों को रखता। वहीं, 30 प्रतिशत ग्राहक जिस शहर में पार्टी रखता, वहां के शामिल करता था। ताकि कोई भी एक दूसरे की आइडेंटिटी न निकाल पाए। खेलने वालों की सिक्योरिटी की पूरी गारंटी लेता था। कौन है मास्टरमाइंड प्रदीप प्रदीप लालवानी (45) मूल मूल रूप से दिल्ली का है। वह अवैध कैसिनो का काम पिछले 6 साल से कर रहा है। खुद भी जुआ खेलने का आदी है। कुछ साल पहले वह अपने दोस्तों के साथ जुआ खेलने गोवा गया था। वहां कुछ दिन रहकर उसने जुआ खेलना और खिलाने की ट्रिक्स सीखीं। इसके बाद दिल्ली लौटकर खुद के कार्ड और बोर्ड बना कर अपना सेटअप तैयार कर लिया। जयपुर में पार्टी ऑर्गेनाइज करने के लिए उसने कनेक्शन खंगाले तो रॉबिन से मुलाकात हुई। इसके बाद उसने रॉबिन (26) को ही कमीशन पर कई काम सौंप दिए। रॉबिन मूल रूप से जयपुर के राजापार्क का रहने वाला है। एसएचओ श्रीनिवास जांगिड़ ने बताया पूछताछ में सामने आया कि प्रदीप लालवानी और रॉबिन जयपुर के अलावा अजमेर, उदयपुर, पुष्कर, जयपुर-दिल्ली रोड पर बने कई फॉर्म हाउस और दौसा में अलग-अलग लोकेशन पर जुआ खिला चुके हैं। रेड में पकड़े गए थे 16 लोग 25 मार्च को हुई रेड में प्रदीप लालवानी के अलावा पुलिस ने शेखर लाल, अशोक कुमार, विक्रम सिंह, विनोद राणा, मोहित मेहता, रॉबिन को गिरफ्तार किया गया। साथ ही गेम खेलने वाले हर्षित राज, मोहित शर्मा, संजय सिंघानिया, शिवदास मीणा, अजय कुमार, जितेन्द्र चौधरी, विकास शर्मा, जुगल किशोर व अमित शर्मा के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। गोवा से सीखकर यहां करते हैं पार्टियां राजस्थान में कैसिनो लीगल नहीं है। पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो गोवा में सीखकर अलग-अलग राज्यों में इसे यही बिजनेस कर रहे हैं। कमीशन पर या एंट्री के नाम पर पैसा लेकर खुद की व्यवस्था कर लेते हैं। जो जीतता है उसे ग्रुप में जोड़ कर आगे दूसरी पार्टी में इनवाइट किया जाता है। लीगल कैसिनो में खिलाए जाते हैं 3-4 गेम, एंट्री की उम्र भी तय कैसिनो में खिलाए जाने वाले गेम एक तरह से जुआ है। इनमें एंट्री के लिए आमतौर पर आयु (21 वर्ष या उससे अधिक) तय है। खेलने वाले को अपना एक आईडी कार्ड भी देना होता है। फिर कुछ एंट्री फीस देनी होती है। कैसिनो में डायरेक्ट पैसे से नहीं खेला जाता। खेलने वाला पहले काउंटर से पैसे देकर 'चिप्स' (प्लास्टिक के टोकन जैसे) खरीदता है। यही चिप्स खेल में दांव लगाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। खेल खत्म होने पर चिप्स को वापस कैश में बदला जा सकता है। कैसिनो में कई प्रकार के खेल होते हैं... रुलेट (Roulette): एक घूमते पहिए पर नंबर या रंग पर दांव लगाया जाता है। ब्लैक जैक (Blackjack): कार्ड गेम, जिसमें 21 के करीब अंक लाने की कोशिश होती है। पोकर (Poker): रणनीति और मनोविज्ञान पर आधारित कार्ड गेम है। स्लॉट मशीन: मशीन के माध्यम से खेले जाने वाला गेम है जिस में बटन दबा कर पत्ते सामने आते हैं।
पटना में दैनिक भास्कर वुमन प्राइड अवॉर्ड-2026 का शनिवार को आयोजन हुआ। समारोह में 29 महिलाओं को सम्मानित किया गया। किसी ने जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को बेहद कम कीमत में खाना उपलब्ध कराया, तो किसी ने दूरदराज इलाकों के वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य को नई दिशा दी। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, उद्यमिता, कला, साहित्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करने वाली कई महिलाओं ने समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश की है। इन महिलाओं की सफलता की कहानियां सिर्फ उपलब्धियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह समाज के प्रति जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सेवा भावना का भी उदाहरण हैं। इन्होंने छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव किए हैं। मुख्य अतिथि बिहार सरकार के कला, संस्कृति युवा सह पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने समारोह का उद्घाटन किया। वहीं, विशिष्ट अतिथि में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयालक्ष्मी और पुलिस अधीक्षक (ERSS-112) शीला ईरानी मौजूद रहीं। देखें तस्वीरें… समारोह का उद्देश्य नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देना ये वार्षिक समारोह समाज-देश के लिए योगदान देने वाली, चुनौतियों से ऊपर उठकर सफलता पाने वाली महिलाओं के लिए है। मंच विभिन्न क्षेत्रों- जैसे उद्यमिता, चिकित्सा, शिक्षा, खेल, और समाजसेवा में कार्य करने वाली महिलाओं के संघर्ष और सफलता की कहानियों को चिह्नित करता है। इसका उद्देश्य नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करना है। भास्कर के समारोह में सम्मानित होने वालीं महिलाएं… अमृता सिंह-पल्लवी सिंह : पिछले 8 वर्षों से ‘साईं की रसोई' से PMCH में मरीजों और उनके परिजन को मात्र 5 रुपए में खाना उपलब्ध कराकर मानवता की मिसाल पेश की है। अनुरंजना भारद्वाज: सीमित संसाधनों के बावजूद दूरदराज क्षेत्र में अपनी संस्था स्थापित की। इनके प्रयासों से कई वंचित बच्चों को शिक्षा का अवसर और उज्जवल भविष्य की दिशा मिली है। अमरीन खान: पूर्णिया की शिक्षिका, जिन्होंने पिछले 18 साल से स्कूल को सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को उड़ान देने वाला परिवार बनाया है। Kidzee Johnny Kids और Mount Litera Zee School की प्रिंसिपल के रूप में सैकड़ों बच्चों के भविष्य को दिशा दे रही हैं। आशा अनुरागिनी पोद्दार: ‘Bamboo Art' से परंपरा-प्रकृति से जुड़ी कला को नई पहचान देने वाली एक महिला उद्यमी हैं। बांस की कला को हजारों महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया है। डॉ. आयशा फातिमा: वनस्पति विज्ञान में पीएचडी सहित उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ. आयशा फातिमा ने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। गया इंजीनियरिंग कॉलेज और ICMR-NIE, चेन्नई में अपनी सेवाओं के साथ-साथ वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं। वंचित बच्चों को किताबें उपलब्ध कराना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में सहयोग करना उनकी संवेदनशीलता का उदाहरण है। डॉ. आयुषी सिन्हा: बेगूसराय की युवा डॉक्टर डॉ. आयुषी सिन्हा ने मात्र 2 साल में 1700 से अधिक सफल सर्जरी कर पहचान बनाई है। इसके साथ ही 15,000 से अधिक मरीजों को निःशुल्क परामर्श देकर समाज सेवा की मिसाल पेश की है। अपनी सेवा-समर्पण से वे स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रेरणा बनकर उभरी हैं। डॉ. बंदना तिवारी: MBBS, MS के साथ पूर्व रजिस्ट्रार, IGIMS की अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ हैं। कैटरेक्ट, कॉर्निया और रिफ्रैक्टिव सर्जरी की विशेषज्ञ के रूप में हजारों मरीजों की दृष्टि में नई रोशनी ला रही हैं। वर्तमान में Drishtipunj Eye Hospital की डायरेक्टर हैं। डॉ. दीपशिखा: MBBS और DNB (पीडियाट्रिक्स) से प्रशिक्षित डॉ. दीप्तिशिखा नवजात और बच्चों की सेहत के लिए समर्पित एक संवेदनशील चिकित्सक हैं। उनकी देखभाल और विशेषज्ञता ने कई नन्हीं जिंदगियों को नई उम्मीद और स्रक्षित भविष्य दिया है। अपनी सेवा और समर्पण से वे चाइल्ड केयर के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मिसाल हैं। डॉ. जूली बनर्जी: 22 वर्षों से कॉरपोरेट नेतृत्व और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. जूली बनर्जी महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए उनका योगदान प्रेरणादायी रहा है। अपने कार्यों से वे समाज में बदलाव की एक मजबूत आवाज बनी हैं। कुमारी बबिता: LIC बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में एक अलग पहचान बनाया है। अपनी लगन और अच्छे प्रदर्शन से उन्होंने सफलता की नई मिसाल कायम की है। वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उनका योगदान प्रेरणादायी है। वैदय लीला गुप्ता: प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद की शक्ति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वैदय लीला गुप्ता ने लोगों को प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रहने की प्रेरणा दी है। समाज के स्वास्थ्य जागरूकता के लिए उनका योगदान सराहनीय है। डॉ. ममता सिंह: नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। शिक्षा और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में डॉ. ममता सिंह योगदान दे रहीं हैं। इसके साथ ही GOAL Institute की जॉइंट डायरेक्टर हैं। अपने ज्ञान और समर्पण से वे नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं। ममता सिंह: अशीर्वाद एंगिकॉन की ममता सिंह कम बजट वाले प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट्स से निम्न वर्गीय परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने का कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से कई परिवारों को अपने सपनों का घर मिला है। डॉ. मनीषा सिन्हा: पिछले 3 दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. मनीषा सिन्हा Radiant International School की प्रिंसिपल हैं। अपने नेतृत्व और अनुभव से उन्होंने विद्यार्थियों के लिए सीखने का माहौल तैयार किया है। मनीषा श्रीवास्तव: भोजपुरी लोक संगीत की लोकप्रिय गायिका हैं। अपनी पारंपरिक और शुद्ध विधाओं- विवाह गीत, सोहर और अन्य लोक गीतों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने शुद्ध और बिना वल्गर भोजपुरी संगीत को बढ़ावा देकर बिहार और हिंदी भाषी क्षेत्रों में अपनी खास पहचान बनाई है। नीलम देवी: मॉरल एजुकेशन आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और बेटियों की पढ़ाई को समाज की प्राथमिकता बनाने के लिए हमेशा समर्पित रहीं। नीलम देवी अपने प्रयासों से बेटियों के सपनों को शिक्षा से नई उड़ान दे रही हैं। उनका समर्पण समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव की मिसाल है। निर्मला कुमारी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में अपनी मेहनत और अच्छे प्रदर्शन से खास पहचान बनाई है। निर्मला कुमारी ने लगन-समर्पण से वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सफलता की मिसाल कायम की है। डॉ. नीतू कुमारी नवगीत: लोक गायिका डॉ. नीतू कुमारी नवनीत अपनी आवाज से लोगों के दिलों में खास पहचान बना चुकी हैं। पटना नगर निगम की ब्रांड एम्बेसडर के रूप में वे गीतों से स्वच्छता अभियान का संदेश जन-जन तक पहुंचा रही हैं। कला और सामाजिक जागरूकता को जोड़ने का उनका प्रयास प्रेरणादायी है। पिंकी देवी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में अपनी मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन से खास पहचान बनाई है। पिंकी देवी ने वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सफलता हासिल की है। प्रीति सिंह: राजनीतिक परिवार से संबंध होने के बावजूद समाज के प्रति उनका समर्पण और सक्रियता काबिल-ए-तारीफ है। शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उन्होंने अपनी मेहनत और पहल से एक अलग पहचान बनाई है। प्रियंका कुमारी: कंचनजंघा फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन में असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। विदद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और धार्मिक-संवेदनशील व्यक्तित्व के साथ वे जरूरतमंद और गरीब छात्रों की मदद के लिए हमेशा आगे रहती हैं। एक सशक्त महिला के रूप में परिवार और समाज दोनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पूनम कुमारी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में अपनी मेहनत और बेहतर प्रदर्शन से अलग पहचान बनाने वाली पूनम कुमारी ने सफलता पाई है। ऋतिका गुप्ता: एमबीए (मार्केटिंग) के साथ 16 साल का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। अनुभवी बिजनेस लीडर ऋतिका गुप्ता ने अमेरिका, चीन और भारत जैसे देशों में काम करते हुए नेतृत्व और उद्यमिता की मजबूत पहचान बनाई है। सीमा कुमारी: एलआईसी बिहार में 'बेस्ट बिजनेस परफॉर्मर' के रूप में खास पहचान बनाई है। सीमा कुमारी ने वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सफलता पाई है। डॉ. सुनीता कुमारी: जहानाबाद में जन्मीं डॉ. सुनीता कुमारी ने मनोविज्ञान के क्षेत्र में शोध किया है। इसके अलावा कामकाजी महिलाओं की समस्याओं को आवाज दी है। उनके प्रयासों से सरकारी कार्यालयों में महिलाओं के लिए रेस्ट रूम की व्यवस्था संभव हो सकी। आज सचिवालय के कई भवनों में ये सुविधा उनके प्रयासों की देन हैं। श्वेता कुमारी: बिहार का अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म The Arch Go, जहां घर बैठे चुटकियों में ऑर्डर की सुविधा उपलब्ध है। उद्यमिता और इनोवेशन से लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। वीणा अमृत: हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्तमान में आरा के डीके कॉलेज की प्राचार्या के हैं। उनका कार्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. विजया सिंह: प्रोफेसर हैं। विवाह के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज RK College, मधुबनी में राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष HOD हैं।
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