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सलमान के बाद क्या शाहरुख भी छात्रों के समर्थन में:पोस्ट में दावा- मैं आप सभी के साथ हूं; जानें वायरल पोस्ट की सच्चाई

सलमान खान के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि शाहरुख खान ने भी नीट विवाद पर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन किया है। इंटरनेट पर शाहरुख के नाम से एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें छात्रों के समर्थन में मैसेज लिखा है। इस पोस्ट में पेपर लीक के अलावा पारदर्शी सिस्टम के लिए आवाज उठाई गई है। हालांकि, पड़ताल में यह स्क्रीनशॉट पूरी तरह फर्जी निकला है। शाहरुख खान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ऐसा कोई पोस्ट शेयर नहीं किया है और न ही इस मुद्दे पर अब तक कोई प्रतिक्रिया दी है। वायरल स्क्रीनशॉट में क्या दावा किया जा रहा है?सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट में शाहरुख खान के हवाले से लिखा गया कि छात्रों ने दिखाया है कि असली ताकत किताबों, पेन और आवाज में होती है। फर्जी पोस्ट में लिखा था, यह लड़ाई सिर्फ एक एग्जाम के खिलाफ नहीं, बल्कि फेयर और पारदर्शी सिस्टम के लिए है। हर छात्र अपनी मेहनत का हिसाब चाहता है, न कि पेपर लीक या स्कैम। मैं इमोशनली और मॉरली आप सभी के साथ हूं। इस मैसेज के सामने आने के बाद कई लोगों को लगा कि शाहरुख खान ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। सामने आई सच्चाई, फैंस ने जताई नाराजगीजब शाहरुख खान के आधिकारिक इंस्टाग्राम और X (ट्विटर) अकाउंट्स की जांच की गई, तो वहां ऐसा कोई भी बयान या पोस्ट नहीं मिला। इसके बाद यह साफ हो गया कि इंटरनेट पर वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट पूरी तरह से फर्जी और एडिट किया गया है। शाहरुख के फैंस ने भी सोशल मीडिया पर फर्जी स्क्रीनशॉट शेयर करने वाले यूजर्स को आड़े हाथों लिया और गलत जानकारी फैलाने के लिए नाराजगी जताई। सलमान खान समेत कई बॉलीवुड हस्तियां आ चुकी हैं समर्थन मेंदिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन को बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियों का समर्थन मिल चुका है। सलमान खान, करीना कपूर, आलिया भट्ट, इमरान खान, शबाना आजमी और राजकुमार राव जैसे कलाकारों ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का विरोध करते हुए उनकी मांगों को सही ठहराया है। इसी बीच लोगों को शाहरुख खान के बयान का भी इंतजार था, जिसका फायदा उठाकर किसी ने यह फर्जी पोस्ट वायरल कर दिया। 'किंग' फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं शाहरुख खानशाहरुख खान इन दिनों अपनी आने वाली एक्शन फिल्म 'किंग' की शूटिंग में व्यस्त हैं। सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में शाहरुख अपनी बेटी सुहाना खान के साथ नजर आएंगे। फिल्म में दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, राघव जुयाल और रानी मुखर्जी भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। ये खबर भी पढ़ें दीया मिर्जा ने पीएम मोदी पर निशाना साधा:पेपर लीक पर 47 दिन बाद बोले, बच्चों को खोने वाले परिवारों के लिए एक शब्द भी नहीं कहा अभिनेत्री दीया मिर्जा ने नीट पेपर लीक विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान को लेकर अपनी निराशा जताई है। सोशल मीडिया पर एक नोट शेयर करते हुए दीया ने कहा कि पीएम का बयान संवेदनहीन था। पूरी खबर पढ़ें

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 4:32 pm

थलापति विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन देखने पहुंचीं तृषा:निकलते हुए भीड़ ने घेरा, एक्ट्रेस की मां बोलीं- बुरा लग रहा है, उन्हें बहुत मिस करेंगे

एक्टर से राजनेता बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन कल यानी 23 जुलाई को दुनियाभर में रिलीज हुई है। इस मौके पर उनकी रूमर्ड गर्लफ्रेंड तृषा कृष्णन फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने पहुंची थीं। थिएटर के बाहर स्पॉट हुईं तृषा ने इस पर बात करने से इनकार कर दिया, जबकि उनकी मां ने भावुक होकर कहा कि वो विजय को बड़े पर्दे पर देखना मिस करेंगी। तृषा कृष्णन की मां उमा कृष्णन भी फिल्म देखने पहुंचीं। विजय की आखिरी फिल्म पर उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, मुझे बहुत बुरा लग रहा है, हम उन्हें बहुत मिस करेंगे। फिल्म देखने पहुंचीं तृषा भीड़ में फंसी तृषा कृष्णन अपनी दोस्तों के साथ जन नायकन देखने पहुंची थीं। फिल्म देखकर निकलते हुए तृषा को भीड़ ने घेर लिया, जिसके बाद एक्ट्रेस कार तक पहुंचने में मशक्कत करती नजर आई हैं। फैंस की भीड़ के बीच पुलिस को भी एक्ट्रेस और उनकी दोस्तों को बचाने में जद्दोजहद करनी पड़ी। फिल्म देखने के कुछ देर बाद तृषा ने दोस्तों के साथ एक फोटो शेयर की है, जिसके कैप्शन में लिखा था, ‘हम जिंदा निकल कर आ गए’। वहीं फिल्म पर लिखा गया, ‘एक आखिरी बार, एक आखिरी डांस, जन नायकन का पागलपन।’ फिल्म ने पहले दिन किया 40 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, विजय की फिल्म जन नायकन ने पहले दिन देशभर में 42.70 करोड़ का नेट कलेक्शन कर लिया है। सेंसरशिप के चलते टलती रही विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन बता दें कि विजय ने बीते साल जन नायकन के बाद फिल्म से रिटायरमेंट का ऐलान किया था। ये फिल्म पहले जनवरी 2026 में रिलीज की जाने वाली थी। हालांकि सेंसरशिप के चलते फिल्म टलते हुए अब रिलीज हुई है। फिल्म रिलीज से पहले थलापति विजय के फैंस में काफी उत्साह देखने मिला। उनके कई फैंस विदेश से फिल्म देखने भारत आए हैं। साउथ के कई सिनेमाघरों के बाहर विजय के बड़े-बड़े कटआउट लगाए गए, जहां फैंस घंटों तक डांस करते रहे। ……………………………………… जन नायकन मूवी रिव्यू:विजय की आखिरी फिल्म पर राजनीति हावी, तीन घंटे का सफर बन गया थका देने वाला तमाशा विजय की आखिरी फिल्म होने के कारण 'जन नायकन' सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों के लिए भावनात्मक मौका थी। उम्मीद थी कि यह फिल्म उनके लंबे सिनेमाई सफर को यादगार विदाई देगी। लेकिन निर्देशक एच. विनोथ इसे कहानी से ज्यादा राजनीतिक संदेश और स्टार की छवि चमकाने का माध्यम बना देते हैं। नतीजा यह कि फिल्म कई बार मनोरंजन छोड़कर चुनावी भाषण जैसी लगने लगती है। विजय की मौजूदगी तालियां जरूर बटोरती है, लेकिन कमजोर पटकथा और जरूरत से ज्यादा लंबाई फिल्म का असर कम कर देती है। फिल्म की लंबाई 3 घंटे 3 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 2 स्टार दिए हैं। पूरा रिव्यू पढ़ें…

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 3:10 pm

दिया मिर्जा ने पीएम मोदी पर निशाना साधा:कहा- 47 दिन बाद बोले लेकिन कुछ नहीं कहा; प्रभावितों के लिए एक भी सहानुभूति भरा शब्द नहीं

अभिनेत्री दीया मिर्जा ने नीट पेपर लीक विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान को लेकर अपनी निराशा जताई है। सोशल मीडिया पर एक नोट शेयर करते हुए दीया ने कहा कि पीएम का बयान संवेदनहीन था। उन्होंने सवाल उठाया कि हफ्तों से अनशन पर बैठे छात्रों, विरोध कर रहे युवाओं और अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों के लिए एक भी शब्द क्यों नहीं कहा गया। यह प्रतिक्रिया पीएम मोदी के उस वीडियो मैसेज के बाद आई है, जिसमें उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कानून बनाने का आश्वासन दिया था। 'टूटे दिलों को जोड़ने वाली बात नहीं कही'दीया मिर्जा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक भावुक नोट शेयर करते हुए सरकार के रवैये की आलोचना की। उन्होंने लिखा, उन माता-पिता के लिए सहानुभूति का एक शब्द भी नहीं, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया। अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के संघर्ष, सोनम जी और हफ्तों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के लिए कुछ नहीं कहा गया। सर, इतना कठिन कैसे हो सकता है? दीया ने प्रधानमंत्री के देरी से बोलने पर सवाल उठाते हुए आगे लिखा, आपको कुछ कहने में 47 दिन लग गए। और अब जब आपने कहा है, तो भी कुछ नहीं कहा। ऐसा कुछ भी नहीं, जो उन लाखों टूटे हुए दिलों को राहत दे सके। पीएम मोदी ने वीडियो मैसेज में क्या कहा?मोदी ने गुरुवार आधी रात 12 बजे छात्रों के लिए वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला कानून बनाएगी। पीएम ने बताया कि कैबिनेट में इससे जुड़े मसौदे पर आज चर्चा होगी और सख्त फैसले लिए जाएंगे। मंजूरी मिलने के बाद इसे अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा। साथ ही इसे जल्द पास कराने की कोशिश होगी। PM मोदी ने X हैंडल पर 2.56 मिनट का एक वीडियो मैसेज पोस्ट किया। कहा- पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों छात्रों, उनके माता-पिता के लिए पीड़ादायक है। इसलिए पेपर लीक से अब तक, पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए हैं। गुनहगारों को पकड़ा है, वे जेल में हैं। हमारी जिम्मेदारी थी कि छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में 22 लाख छात्रों का एग्जाम कराया। 19 जुलाई को रिजल्ट भी आ गया। जंतर-मंतर पर एक महीने से जारी था CJP का प्रदर्शनदिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र संगठन करीब एक महीने से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में हुई धांधली के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। इसके साथ ही देश की पूरी परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार लागू किए जाएं। ये खबर भी पढ़ें करीना बोलीं- छात्रों की बात सुनना अहसान नहीं, हमारा फर्ज:कमल हासन बोले- सिस्टम सड़ चुका है; इमरान और वरुण समेत कई एक्टर्स समर्थन में उतरे दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहे नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधार आंदोलन को अब बॉलीवुड हस्तियों का बड़ा समर्थन मिल रहा है। सलमान खान, आलिया भट्ट और अनन्या पांडे के बाद अब करीना कपूर खान, कमल हासन, वरुण धवन, इमरान खान और पीयूष मिश्रा भी छात्रों के पक्ष में आ गए हैं। पूरी खबर पढ़ें

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 2:32 pm

द इंडिया स्टोरी मूवी रिव्यू:बड़ा मुद्दा भी नहीं बचा पाया फिल्म को, कमजोर लेखन और बेजान कोर्टरूम ड्रामा ने किया पूरा खेल खराब

सिनेमा की सबसे बड़ी ताकत यही होती है कि वह मनोरंजन के साथ समाज के जरूरी सवाल भी उठा सके। द इंडिया स्टोरी भी कीटनाशकों, मिलावटी भोजन और बढ़ते कैंसर जैसे बेहद गंभीर विषय को पर्दे पर लाती है। विषय ऐसा है जो हर परिवार से जुड़ा है और जिस पर मजबूत फिल्म बन सकती थी। लेकिन अफसोस, यहां इरादे बड़े हैं और फिल्म बेहद छोटी साबित होती है। कमजोर पटकथा, बिखरा स्क्रीनप्ले, फीका कोर्टरूम ड्रामा और जरूरत से ज्यादा मेलोड्रामा मिलकर इस फिल्म को एक औसत अनुभव बना देते हैं। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 20 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार रेटिंग दी है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर योगेश पाटिल (श्रेयस तलपड़े) की है, जिसकी छोटी बेटी परी (त्रिशा शारदा) कैंसर की वजह से दुनिया छोड़ देती है। जांच के दौरान योगेश को पता चलता है कि उसकी बेटी की बीमारी के पीछे फलों, सब्जियों, दूध और दूसरे खाद्य पदार्थों में मौजूद जहरीले कीटनाशक हैं। इसके बाद वह सरकार, कीटनाशक कंपनियों और जरूरत से ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल करने वाले किसानों को अदालत में कटघरे में खड़ा कर देता है। इस कानूनी लड़ाई में उसका साथ देती हैं वकील अर्चना (काजल अग्रवाल)। अदालत में सुनवाई शुरू होती है और यहीं से फिल्म को उड़ान भरनी चाहिए थी। लेकिन पूरी बहस इतनी कमजोर लिखी गई है कि मामला कभी रोमांचक बन ही नहीं पाता। विपक्ष के वकील (मनीष वाधवा) को भी सिर्फ औपचारिक मौजूदगी तक सीमित कर दिया गया है। न कोई जोरदार जिरह होती है, न चौंकाने वाले सबूत सामने आते हैं और न ही ऐसा कोई दृश्य जो दर्शकों से तालियां बटोर सके। आखिर तक फिल्म सिर्फ एक ही बात दोहराती रहती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? श्रेयस तलपड़े पूरी ईमानदारी से अपना किरदार निभाते हैं। बेटी को खोने वाले पिता का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखता है, लेकिन कमजोर लेखन उनके अभिनय को ऊंचाई तक नहीं पहुंचने देता। काजल अग्रवाल का अभिनय ठीक है, लेकिन अदालत में उनका किरदार प्रभाव नहीं छोड़ता। इतने बड़े केस की वकील होने के बावजूद उनके हिस्से कोई ऐसा दृश्य नहीं आता जो याद रह जाए। बाल कलाकार त्रिशा शारदा फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। बीमारी से जूझती बच्ची के रूप में वह दिल छू जाती हैं। मुरली शर्मा अपनी छोटी भूमिका में असर छोड़ते हैं, जबकि मनीष वाधवा जैसे सशक्त अभिनेता का पूरा इस्तेमाल ही नहीं किया गया। निर्देशन और तकनीकी पक्ष निर्देशक चेतन डीके का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन फिल्म बनाने का तरीका बेहद साधारण है। स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ है और कई दृश्य कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय सिर्फ जानकारी देने का काम करते हैं। सबसे बड़ी कमी कोर्टरूम ड्रामा में दिखाई देती है। जहां तेज बहस, मजबूत तर्क और कानूनी दांवपेंच होने चाहिए थे, वहां सब कुछ बेहद आसान और सपाट नजर आता है। सरकार, मीडिया और बड़ी कंपनियों जैसे अहम पहलुओं को भी सतही तरीके से दिखाया गया है। पहला हिस्सा डॉक्यूमेंट्री जैसा महसूस होता है, जबकि दूसरा हिस्सा जरूरत से ज्यादा भावुक हो जाता है। संपादन भी ढीला है और फिल्म कई जगह अपनी रफ्तार खो देती है। कैमरा वर्क और प्रोडक्शन डिजाइन सामान्य हैं। तकनीकी रूप से फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो बड़े पर्दे का अनुभव खास बना सके। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत पूरी तरह निराश करता है। कोई भी गीत याद नहीं रहता और पृष्ठभूमि संगीत भी फिल्म की भावनाओं को ज्यादा ऊंचाई नहीं दे पाता। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? द इंडिया स्टोरी इस बात का उदाहरण है कि सिर्फ अच्छा विषय किसी फिल्म को अच्छा नहीं बना सकता। जब पटकथा कमजोर हो, कोर्टरूम ड्रामा बेजान हो और निर्देशन में धार न हो, तो सबसे जरूरी मुद्दा भी अपना असर खो देता है। अगर आपका मकसद सिर्फ कीटनाशकों के नुकसान के बारे में जानना है तो फिल्म एक जानकारी जरूर देती है। लेकिन एक प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा और मजबूत सिनेमाई अनुभव की उम्मीद लेकर जाएंगे तो यह फिल्म निराश ही करेगी।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 1:45 pm

दीपिका चिखलिया ने साई पल्लवी के लुक पर उठाए सवाल:कहा- रामायण में सीता के घुंघराले बालों का कहीं वर्णन नहीं; मेकर्स ने पोस्टपोन किया ट्रेलर

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायणः पार्ट-1 का ट्रेलर पोस्टपोन हो चुका है। ये ट्रेलर पहले 24 जुलाई यानी आज रिलीज किया जाना था, लेकिन आखिरी वक्त में इसे टाल दिया गया है। इस फैसले से फैंस काफी नाराज दिखे। वहीं दूसरी तरफ रामानंद सागर के टीवी शो रामायण में माता सीता का किरदार निभाने वालीं दीपिका चिखलिया ने फिल्म में तथ्यों को गलत तरह दिखाने पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि फिल्म रामायण, टीवी शो रामायण को टक्कर नहीं दे पाएगी। दीपिका चिखलिया ने तथ्य गलत दिखाने पर उठाए सवाल रामानंद सागर के टीवी शो रामायण में माता सीता बनीं दीपिका चिखलिया ने फिल्म रामायण में सीता बनीं साई पल्लवी के घुंघराले बाल दिखाए जाने पर सवाल उठाए। वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में दीपिका ने साई पल्लवी पर कहा, तुलसीदास की रामायण में सीता का वर्णन बादाम जैसी आंखों वाली, एक निश्चित कद-काठी, लंबे बालों और गौर वर्ण वाली स्त्री के रूप में किया गया है। यही बात रामानंद सागर भी तलाश रहे थे और उन्हें वह रूप मुझमें दिखाई दिया। आगे उन्होंने कहा, मेरी पहचान आज भी सीता के रूप में है। कई बार लोग मेरा नाम भूल जाते हैं, लेकिन उन्हें याद रहता है कि मैंने सीता का किरदार निभाया था। यही मेरी पहचान है। मुझे लगता है कि हमारी रामायण का प्रभाव फिल्म 'रामायण' पर बहुत गहरा रहेगा। महामारी के दौरान जब हमारी रामायण का दूरदर्शन पर दोबारा प्रसारण हुआ था, तब नई पीढ़ी ने भी उसे देखा। ऐसे में उस छवि को मिटा पाना बहुत मुश्किल है। रामायण में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि सीता जी के घुंघराले बाल थे। अन्नू कपूर भी उठा चुके हैं साई पल्लवी की कास्टिंग पर सवाल सीनियर एक्टर अन्नू कपूर ने हाल ही में रणबीर कपूर स्टारर फिल्म रामायण में माता सीता का किरदार साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी को देने पर सवाल खड़े किए हैं। अन्नू कपूर ने हाल ही में जूम को दिए इंटरव्यू में कहा है कि भारत में बायोपिक नहीं बनानी चाहिए। आगे अन्नू कपूर ने नितेश तिवारी की अपकमिंग फिल्म रामायण पर कहा, ‘क्या बनाएंगे, जो बनाएंगे, वो रामानंद सागर की रामायण को टेक्नोलॉजिकली बहुत शू शां और फूं फां और शोशेबाजी कर देंगे। लेकिन उसके बाद आप ये सोचिए कि किसको आपने सीता का रोल दिया है। सीता मां हैं, इस देश का हिंदू श्री राम चंद्र को नारायण का अवतार मानते हैं और किनको लिया है माता सीता के रोल में। अब आप सोचिए।’ रामायण का ट्रेलर हुआ पोस्टपोन फिल्म रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने ऑफिशियल सोशल मीडिया से स्टेटमेंट जारी कर ट्रेलर पोस्टपोन होने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट से पार्टनरशिप होने के बाद ट्रेलर टाला गया है, क्योंकि वो अब इसे वर्ल्ड लेवल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टेटमेंट के आखिर में नमित मल्होत्रा ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा, मैं रामायण पर विश्वास रखने वाले सभी प्रशंसकों और समर्थकों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं, जिनकी वजह से यह संभव हो पाया। हमारे देश का युवा ही हमारा भविष्य है। आइए, हम सभी मिलकर अपने भविष्य की रक्षा और उसे बेहतर बनाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। जय हिंद। 8 नवंबर को रिलीज होगी रामायणः पार्ट-1 बता दें कि एपिक सागा फिल्म रामायण, इंडियन सिनेमा की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में हैं। ये फिल्म 8 नवंबर को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। सबसे मंहगे बिकेंगे रामायण के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स वैराइटी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म रामायण के हिंदी वर्जन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए फिल्म के प्रोड्यूसर्स 450 करोड़ रुपए की मांग कर रहे हैं। जबकि अब तक सबसे मंहगे डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म किंग के 250 करोड़ में बिके हैं। अगर ये फिल्म 450 की बजाए 300 करोड़ तक में भी डील करती है, तो ये बॉलीवुड के इतिहास की सबसे बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन डील बन जाएगी। फिल्म 'रामायण' से जुड़ी अहम बातें-

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 12:52 pm

टीवी इंडस्ट्री की पार्टी में ड्रग का बजट होता है:एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री बोलीं- नशे की वजह से कई बार शूटिंग कैंसिल हुई, मैंने भी सारे नशे किए

क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कुसुम और कोई अपना सा जैसे कई सुपरहिट टीवी शोज में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री ने हाल ही में टीवी इंडस्ट्री और एक्टर्स के नशे करने से जुड़ा एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुद भी कबूला है कि वो सभी तरह के नशे कर चुकी हैं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस ने ये भी दावा किया है कि टीवी इंडस्ट्री की पार्टीज के लिए ड्रग का बजट बनता था, कई बार तो शूटिंग तक कैंसिल करना पड़ता था। एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री ने हाल ही में सिद्धार्थ कानन के पॉडकास्ट में सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बात की। एक्ट्रेस ने कहा कि ड्रग्स ही एक्टर की मौत की वजह बने। उन्होंने कहा- ‘उन्होंने आत्महत्या क्यों की ये मेरी समझ से परे है। लेकिन मुझे लगता है ड्रग्स ही वजह है। पहले हमारी इंडस्ट्री में पार्टी का बजट होता था कि दारू का कितना बजट होगा। अब ड्रग्स का बजट होता है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा, ‘आप इसे पसंद करें या न करें, लेकिन मैं खुद भी देखकर शॉक थी कि ड्रग्स का बजट होता है। इसलिए बहुत सालों से मैंने पार्टी करना बंद कर दिया है। अब वो पार्टियां नहीं होतीं कि गाना लगा है चलो डांस करें, अब पार्टीज कुछ अलग होती हैं, पूरी तरह।’ एक्ट्रेस ने दावा किया है कि टीवी इंडस्ट्री की बड़ी पार्टीज में खुलेआम ड्रग्स इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन छोटी पार्टीज में ओपनली ड्रग्स इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा- ‘हर कोई जानता है कि सब नशे करते हैं। मैं पर्सनली नहीं जानती कि कौन नशे करता है, लेकिन मैं ऐसी जगह गई हूं, जहां मैंने लोगों को ड्रग्स लेते देखा है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा है, ‘मैं सती सावित्री बनने की कोशिश नहीं कर रही हूं, मैंने अपनी जिंदगी में सारे नशे किए हैं। लेकिन मैंने एक्सपेरिमेंट की तरह किया है कि ये करने से क्या होता है। वर्ना अगर आप ड्रग्स में घुस जाओ, तो जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते हो।’ नारायणी ने आगे कहा, ‘कोकेन की लत लग जाती है। मुझे लगता है कोकेन इंडस्ट्री को खा रही है। ये दुनिया को खा रही है, क्योंकि सभी ड्रग्स करते हैं। मैं बहुत कम लोगों को जानती हूं जो ड्रग्स नहीं करते हैं। मैं ये सब नहीं करती थी, लेकिन जब मैं ऐसी जगह गई, तो मैं वहां लोगों को देखकर शॉक हो जाती थी।’ एक्टर्स खड़े होने लायक नहीं होते, शूटिंग कैंसिल होती है- नारायणी जब आगे एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या एक्टर्स सेट पर या वैनिटी में ड्रग्स लेते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे नाम नहीं लेना है, लेकिन ये बहुत होता है। हमारी शूट कैंसिल हुई है, क्योंकि एक्टर्स शूट करने की हालत में नहीं है। महंगे एक्टर्स सेट पर बैठे हैं, लेकिन शूट नहीं हो रही, क्योंकि लोग खड़े होने लायक नहीं हैं। मेरे आखिरी दो शोज में ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन पिछले शोज में ये बहुत हुआ है।’ अपने विवादित बयान में नारायणी शास्त्री ने साफ किया है कि वो ड्रग एडिक्ट नहीं हैं, उन्होंने सारे नशे सिर्फ ट्राय करने के लिए इस्तेमाल किए थे। एक्ट्रेस ने सफाई में कहा है कि उन्होंने पहली बार शराब इसलिए पी, जिससे उन्हें पता रहे कि अगर कोई उन्हें छिपकर शराब पिलाए तो पता हो कि उसका स्वाद कैसा है। कौन हैं एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 11:15 am

मूवी रिव्यू: उत्तर दा पुत्तर:वास्तु के बहाने बड़ा तंज कसती है फिल्म, क्या किस्मत सच में दिशाओं से बदलती है?

वास्तु, किस्मत और अंधविश्वास जैसे विषयों पर कई बार बहस होती है, लेकिन फिल्मों में इसे हल्के फुल्के और मनोरंजक अंदाज में कम ही दिखाया जाता है। 'उत्तर दा पुत्तर' इसी कोशिश के साथ आती है। फिल्म हंसाती है, व्यंग्य करती है और आखिर में एक ऐसा सवाल छोड़ जाती है, जो शायद थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी आपके साथ चलता है। हालांकि कुछ कमियां इसे और बेहतर बनने से रोकती हैं। इस फिल्म की लेंथ 1 घंटा 43 मिनट है। इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की कहानी फिजिक्स के प्रोफेसर साईं राम टुटेजा (अन्नू कपूर) की है। विज्ञान पढ़ाने वाले टुटेजा खुद वास्तु पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। उनकी जिद है कि वह तभी अपना घर बनाएंगे, जब उसे उत्तर दिशा की ओर फेस करने वाली परफेक्ट जमीन मिले। इसी वजह से सालों तक किराए के घर में रहते हैं। जब आखिरकार उन्हें मनचाही जमीन मिलती है और सपनों का घर बनाने का सफर शुरू होता है, तब किस्मत उनके सामने एक के बाद एक मुश्किलें खड़ी कर देती है। इंटरवल के बाद कहानी दिलचस्प मोड़ लेती है, जब टुटेजा समझते हैं कि जिंदगी सिर्फ दिशा नहीं, बल्कि अपने फैसलों और मेहनत से बदलती है। इस सफर में उनका छात्र ज्ञान चंद उर्फ जीसी (सुमित गुलाटी) उनका सबसे बड़ा सहारा बनता है। फिल्म कॉमेडी और व्यंग्य के जरिए वास्तु और अंधविश्वास पर सवाल भी उठाती है। कई जगह इसकी झलक 'खोसला का घोंसला' की याद दिलाती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? अन्नू कपूर पूरी फिल्म की जान हैं। साईं राम टुटेजा के किरदार में उनका अभिनय इतना सहज है कि कई बार लगता है जैसे यह किरदार उन्हीं के लिए लिखा गया हो। कॉमेडी, इमोशन और टाइमिंग, हर जगह वह फिल्म को अपने कंधों पर संभाल लेते हैं। सुमित गुलाटी (ज्ञान चंद उर्फ जीसी) दूसरे हिस्से में कहानी का मजबूत आधार बनते हैं और अपने किरदार में ईमानदार नजर आते हैं। रुखसार रहमान (गिन्नी) सधी हुई एक्टिंग करती हैं। राजेंद्र सेठी (आनंद राज आनंद) कम स्क्रीन टाइम में भी असर छोड़ते हैं। बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान और नितिन अरोड़ा जैसे कलाकार अपनी मौजूदगी से फिल्म को और मनोरंजक बनाते हैं। डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष डायरेक्टर रविंदर सिवाच ने एक अच्छे आइडिया को मनोरंजक तरीके से पेश किया है। फिल्म का मैसेज साफ है और वह बिना भाषण दिए अपनी बात कह जाती है। हालांकि कुछ सीन जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और एडिटिंग थोड़ी टाइट होती तो फिल्म का असर और बढ़ सकता था। कास्टिंग में भी एक बात खटकती है। नासिर अब्दुल्ला, जो गिन्नी के पिता बने हैं, पर्दे पर अन्नू कपूर से उम्र में छोटे नजर आते हैं। ऐसे में उनका अन्नू कपूर के ससुर वाला किरदार पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगता। कैमरा वर्क और बाकी टेक्निकल पहलू कहानी के हिसाब से ठीक हैं। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का म्यूजिक कहानी के साथ चलता है। गाने सीन के हिसाब से अच्छे लगते हैं, लेकिन थिएटर से बाहर निकलने के बाद बहुत ज्यादा याद नहीं रहते। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? 'उत्तर दा पुत्तर' कोई बड़ी या भव्य फिल्म नहीं है, लेकिन एक अच्छे विषय को ईमानदारी और हल्के फुल्के अंदाज में पेश करती है। अन्नू कपूर का शानदार अभिनय, बाकी कलाकारों का साथ और व्यंग्य से भरी कहानी इसे एक बार देखने लायक बनाती है। अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो हंसाने के साथ सोचने पर भी मजबूर करें, तो 'उत्तर दा पुत्तर' आपको निराश नहीं करेगी। हालांकि थोड़ी टाइट एडिटिंग और कुछ बेहतर कास्टिंग फैसले इसे और मजबूत बना सकते थे।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 9:00 am

मूवी रिव्यू: दुल्हनिया ले आएगी:रिश्तों पर नहीं, समाज की सोच पर निशाना साधती है खुशाली कुमार की फिल्म

क्या 30 की उम्र पार होते ही लड़की की शादी कर देना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए? यही सवाल उठाती है निर्देशक आकाशादित्य लामा की फिल्म 'दुल्हनिया ले आएगी'। कॉमेडी, इमोशन और पारिवारिक रिश्तों के ताने-बाने में बुनी गई यह फिल्म मनोरंजन के साथ एक जरूरी सामाजिक संदेश भी देती है कि शादी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। हालांकि कहानी कई जगह अनुमानित लगती है, लेकिन इसका उद्देश्य और क्लाइमैक्स फिल्म को एक बार देखने लायक बना देते हैं। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 8 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। कैसी है फिल्म की कहानी? फिल्म की कहानी 32 वर्षीय नव्या (खुशहाली कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है। बढ़ती उम्र को लेकर उसके पिता (महेश मांजरेकर) लगातार उसकी शादी की चिंता करते रहते हैं। जल्दबाजी में उसकी शादी एक ऐसे लड़के से तय कर दी जाती है, जिसके पहले से कई लड़कियों के साथ अफेयर रह चुके होते हैं। नव्या को इस सच्चाई का पता चल जाता है, लेकिन वह अपने पिता का दिल नहीं तोड़ना चाहती। वह यह बात उनसे छिपा लेती है और तय करती है कि शादी तो उसी दिन होगी, लेकिन सही दूल्हे के साथ। इसके बाद शुरू होती है उसके लिए सही जीवनसाथी की तलाश, जिसमें कई मजेदार और भावुक घटनाएं सामने आती हैं। इस सफर में ओंकार कपूर का किरदार भी कहानी में अहम मोड़ लेकर आता है। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका क्लाइमैक्स है। आखिर में निर्देशक यह संदेश देते हैं कि सरकार ने भले ही लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र तय कर दी हो, लेकिन शादी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। लड़की को तभी शादी करनी चाहिए, जब उसे सही जीवनसाथी मिले। हालांकि पहले हाफ में कहानी थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ती है और कई घटनाएं पहले से अनुमानित लगती हैं। अगर स्क्रीनप्ले पर थोड़ा और काम किया जाता तो फिल्म और प्रभावशाली बन सकती थी। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? खुशहाली कुमार ने नव्या के किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। उन्होंने एक ऐसी लड़की की भावनाओं को अच्छी तरह पर्दे पर उतारा है, जो परिवार की खुशी और अपनी जिंदगी के फैसलों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। ओंकार कपूर अपने किरदार में सहज नजर आते हैं और कहानी को हल्कापन देने में सफल रहते हैं। महेश मांजरेकर एक चिंतित पिता के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। उनके और खुशहाली कुमार के बीच के भावनात्मक दृश्य फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में शामिल हैं। वहीं पीयूष मिश्रा अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और संवाद अदायगी से हर बार की तरह प्रभावित करते हैं। भले ही उनका किरदार बहुत लंबा न हो, लेकिन जहां भी नजर आते हैं, अपनी छाप छोड़ जाते हैं। डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष निर्देशक आकाशादित्य लामा ने गंभीर सामाजिक मुद्दे को भारी-भरकम बनाने के बजाय हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश किया है। यही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहानी को पारिवारिक दर्शकों के हिसाब से सरल और सहज रखा है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के माहौल के अनुरूप है और रंगों का इस्तेमाल आकर्षक लगता है। एडिटिंग पहले हाफ में थोड़ी और कसी जा सकती थी, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी अच्छी रफ्तार पकड़ लेती है। संवाद कई जगह मुस्कुराने पर मजबूर करते हैं, जबकि क्लाइमैक्स भावनात्मक असर छोड़ता है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का संगीत इसकी मजबूत कड़ियों में से एक है। 'बिटिया पराई नहीं होती' गाना भावनात्मक रूप से दिल को छूता है और फिल्म के संदेश को मजबूती देता है। वहीं 'जलवा दिखा जाए' कहानी में मनोरंजन का तड़का लगाता है। दोनों गाने फिल्म के मूड के साथ अच्छी तरह मेल खाते हैं और याद रह जाते हैं। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? 'दुल्हनिया ले आएगी' कोई बहुत अलग कहानी नहीं कहती, लेकिन समाज में लड़कियों की शादी को लेकर बने दबाव और सोच पर जरूरी सवाल जरूर उठाती है। फिल्म कॉमेडी, इमोशन और सामाजिक संदेश का संतुलित मिश्रण है। अगर आप परिवार के साथ ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं, जो मनोरंजन के साथ एक सकारात्मक संदेश भी दे, तो यह फिल्म आपके लिए अच्छी पसंद हो सकती है।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 6:30 am

करीना बोलीं- छात्रों की बात सुनना अहसान नहीं, हमारा फर्ज:कमल हासन बोले- सिस्टम सड़ चुका है; इमरान और वरुण समेत कई एक्टर्स समर्थन में उतरे

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहे नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधार आंदोलन को अब बॉलीवुड हस्तियों का बड़ा समर्थन मिल रहा है। सलमान खान, आलिया भट्ट और अनन्या पांडे के बाद अब करीना कपूर खान, कमल हासन, वरुण धवन, इमरान खान और पीयूष मिश्रा भी छात्रों के पक्ष में आ गए हैं। करीना कपूर ने कहा कि देश के युवाओं की मांग सुनना कोई अहसान नहीं, बल्कि हमारा फर्ज है। वहीं कमल हासन ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को सड़ा हुआ बताया है। इमरान खान ने मुंबई में खुद सड़क पर उतरकर छात्रों के साथ प्रदर्शन किया। इमरान खान की प्रोटेस्ट में तस्वीरें करीना बोलीं- बच्चे कल की तैयारी नहीं कर रहे, वे ही कल हैंकरीना कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नोट शेयर किया है। उन्होंने लिखा, मैं पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर शांत थी, लेकिन अब चुप नहीं रह सकती। अपनी आवाज उठाने वाले युवाओं की अनदेखी करना नामुमकिन है और ऐसा होना भी नहीं चाहिए। शिक्षा से बच्चे को भरोसा और उम्मीद मिलती है। लेकिन शिक्षा तभी काम करती है जब बच्चों को इस पर विश्वास हो। अगर उन्हें लगेगा कि ईमानदारी, मेहनत और मेरिट का कोई मतलब नहीं है, तो उनका भरोसा उठ जाएगा। करीना ने आगे लिखा, छात्रों को ऐसी व्यवस्था मिलनी चाहिए जिस पर वे भरोसा कर सकें। जब पूरी पीढ़ी अपने भविष्य के लिए एक आवाज में बोलती है, तो उन्हें सुनना अहसान नहीं, हमारा फर्ज है। हमारे बच्चे हमें देख रहे हैं। वे कल की तैयारी नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे ही हमारा कल हैं। कमल हासन बोले- सिस्टम सड़ चुका एक्टर और नेता कमल हासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देश के शिक्षा तंत्र पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, जब एक बच्चा रोया था, तब हमें सुन लेना चाहिए था। हमने तब तक इंतजार किया जब तक कई बच्चों की मौत नहीं हो गई। एक ऐसा सिस्टम जहां सीखने की जगह कोचिंग ने ले ली है, उत्सुकता की जगह चिंता ने ले ली है और मेरिट की जगह अपराध ने ले ली है, वह सिस्टम पूरी तरह सड़ चुका है। जब बच्चों को जवाबों की जगह बैरिकेड्स और लाठियां मिलती हैं, तो देश नाकाम साबित होता है। कमल हासन ने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जिक्र करते हुए उनसे अपना अनशन खत्म करने की अपील भी की। उन्होंने देश के बच्चों से कहा कि आपने अपना फर्ज निभाया है, अब देश को आपके लिए अपना फर्ज निभाना होगा। मुंबई में प्रदर्शन में शामिल हुए इमरान खानएक्टर इमरान खान बुधवार को नीट धांधली के खिलाफ मुंबई में आयोजित एक विरोध मार्च में खुद शामिल हुए। इससे पहले उन्होंने दिल्ली में 'चलो संसद' मार्च के दौरान छात्रों पर हुए आंसू गैस और लाठीचार्ज पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने लिखा था, जब मैंने देखा कि पुलिस छात्रों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज कर रही है, तो मेरा दिल टूट गया। जिन छात्रों ने मेहनत की, उन्हें सिस्टम ने धोखा दिया और जब उन्होंने अपनी बात रखनी चाही तो उन्हें लाठियों से चुप करा दिया गया। मुंबई मार्च के दौरान जब एक युवा कलाकार ने उनसे पूछा कि कई एक्टर्स राजनीति पर बोलने से बचते हैं, तो इमरान ने कहा, सच्ची कला में कलाकार का अपना नजरिया होता है। अगर आप अपनी राय के साथ खड़े नहीं हो सकते और अपनी कला में दिल नहीं डाल सकते, तो उस कला की कोई कीमत नहीं है। वरुण धवन बोले- राजनीतिक फायदे के लिए न हो इस्तेमाल एक्टर वरुण धवन ने भी इंस्टाग्राम पर छात्रों का समर्थन किया। वरुण ने लिखा, छात्र देश का भविष्य हैं। जब किसी छात्र का सपना टूटता है, तो सिर्फ एक सपना नहीं, पूरे परिवार की उम्मीदें टूटती हैं। सिस्टम के फेल होने पर उन्हें सवाल पूछने का पूरा हक है। अधिकारियों को उनकी चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए और पारदर्शी हल निकालना चाहिए। यह केवल छात्रों का आंदोलन रहना चाहिए और इस पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। पीयूष मिश्रा ने कहा- इंकलाब जिंदाबाद वहीं, सीनियर एक्टर और सिंगर पीयूष मिश्रा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा दिया। पीयूष ने कहा, जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ, वह बहुत दुखद था। मैं छात्रों के साथ हूं। पुलिस और बच्चों को चोट पहुंची, यह सब गलत था। अगर सरकार और प्रशासन पहले ही छात्रों की बात सुन लेता, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 5:00 am

बंटवारे में मां की चीखें सुनीं, भाई को मरते देखा:नकल उतारने पर शाहरुख पर केस किया, सरकार ने बैन कीं मनोज कुमार की फिल्में

सिनेमा में कई हीरो आए, कई सुपरस्टार बने, लेकिन एक अभिनेता ऐसा भी था जिसने पर्दे पर उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान जैसी फिल्मों के जरिए देशभक्ति को जिया। उनका नाम था मनोज कुमार। देशप्रम ही वो वजह था कि लोग उनका असली नाम भूलने लगे और उन्हें सिर्फ एक नाम से पुकारने लगे 'भारत कुमार'। उनकी फिल्मों में दिखने वाला जज्बा, जुनून और दर्द सिर्फ अभिनय नहीं था। उन्होंने खुद 10 साल की उम्र में भारत-पाक के बंटवारे से उठी चीखें सुनी और कई जाने जाते देखीं। बीमार मां को दर्द से कराहते देखा और छोटे भाई को दम तोड़ते भी। सिर पर छत नहीं थी, भविष्य का कोई भरोसा नहीं था और उम्मीद भी टूटने लगी, लेकिन किसे पता था कि पाकिस्तान से भागा वो बच्चा, देशभक्ति की ऐसी मिसाल बनेगा कि हर कोई उन्हें असल नाम से ज्यादा भारत कुमार के नाम से पहचानेगा। आज मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार की बर्थ एनिवर्सरी है। अप्रैल 2025 में उनका निधन हो गया है, लेकिन अगर आज वो होते तो 88 साल के हो जाते। उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए, विभाजन के दर्द से निकलकर देश का हीरो बनने की कहानी- किस्सा- 1 दंगों में भाई की मौत हुई, यमुना में शव बहाया; इलाज न करने वाले डॉक्टर्स को लाठी से पीटा 24 जुलाई 1937 ब्रिटिश इंडिया के अबोटाबाद के पंजाबी हिंदू परिवार में हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी का जन्म हुआ, जो बाद में मनोज कुमार नाम से जाने गए। वो हिस्सा जहां उनका जन्म हुआ वो बंटवारे के बाद पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा में आता है। मनोज कुमार महज 10 साल के थे, जब अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद बंटवारा शुरू हुआ। दंगे भड़के और जान बचाते हुए मनोज कुमार का परिवार दिल्ली के हडसन लाइन रिफ्यूजी कैंप में आकर रहने लगा। छोटा भाई कुक्कू महज 2 माह का था। पैदाइश से ही उसकी तबीयत खराब रहती थी और मां भी बीमार चल रही थी। दंगों के बीच डॉक्टर्स भी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे, तभी भाई की सही इलाज न मिल पाने से मौत हो गई। बचपन का वो दर्द याद कर मनोज कुमार ने संसद टीवी के शो गुफ्तगू में कहा- वो रोता हुआ बचपन, जो लाहौर से बिछड़ गया, जो अबोटाबाद से बिछड़ गया। बहुत रोता हुआ बचपन था वो, आज भी सोचता हूं तो आंखे भले ही संभाल लूं, लेकिन दिल रोता है। दिल का रोना बहुत भयानक होता है। सबसे बड़ा मैं, मुझसे छोटी बहन ललिता। जब बंटवारा हुआ तो मां ने छोटे भाई को जन्म दिया। कुक्कू नाम था उसका, बीमार, मां भी बीमार। हम रिफ्यूजी कैंप में थे। मां को दिल्ली के तीस हजारी अस्पताल में रखा गया। जब सायरन बजता था, तो डॉक्टर-नर्स अंडरग्राउंड चले जाते थे। मां मेरी तड़प रही थी, भाई तड़प रहा था। मां चीख रही थी कि डॉक्टर को बुलाओ। वो सब अंडरग्राउंड थे। मां चीख मारी, मेरा भाई कुक्कू चला गया था। मैं गुस्से में था। मैं लाठी लेकर अंडरग्राउंड गया। डॉक्टर्स को भी मारा, नर्स को भी मारा। पिता जी आए, उन्होंने संभाला। दूसरे दिन उस 2 महीने के बच्चे को जमुना जी में बहा दिया, जैसे-जैसे वो नीचे जा रहा था, वैसे-वैसे लगता था कि मैं डूब रहा हूं। फिर पिता जी ने रात को अपने सिर पर हाथ रखकर कसम खिलवाई कि जिंदगी में दंगा, मारपीट नहीं करना। आखिर में मनोज कुमार ने रुंहासी आवाज में कहा, जिसका बचपन मर गया, समझो वो आदमी ही मर गया। भाई की मौत के बाद भी मनोज कुमार, 2 महीने तक रिफ्यूजी कैंप में ही रहे और हालात बेहतर होने के बाद परिवार दिल्ली में ही बस गया। पिता स्टील की फैक्ट्री में काम करते थे, लेकिन साथ ही वो शायर थे। जब मनोज कुमार के पिता 5वीं में थे, तो लामा इकबाल ने उनकी नजम सुनकर उन्हें खिज्र का तकाजा दिया था। जब उनका कलाम छपा, तो महाराष्ट्र उर्दू एकेडमी से उन्हें सिमरन अवॉर्ड मिला। किस्सा- 2 दिलीप कुमार को फिल्मों में मरता देख मान लिया फरिश्ता, सोचा- मैं भी फरिश्ता बनूंगा दिल्ली में ही मनोज कुमार की पढ़ाई हुई। वह कम उम्र के थे, जब मामा उन्हें अक्सर फिल्में दिखाने ले जाते थे। तब दिलीप कुमार स्टार बन चुके थे, जिनकी फिल्में अक्सर सिनेमाघरों में लगती थीं। मनोज कुमार ने सबसे पहले दिलीप कुमार की 1947 में आई फिल्म जुगनू देखी, जिसमें उनके किरदार की मौत हो जाती है। तब तक मनोज कुमार नहीं जानते थे कि सिनेमा क्या होता है। कुछ समय बाद उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म शहीद (1948) देखी। उसमें भी दिलीप कुमार को मरता हुआ दिखाया गया। मनोज कुमार फिल्म देखकर घर लौटे, तो देर तक सोए ही नहीं। मन में बस एक ही ख्याल था कि जब वो शख्स एक साल पहले (फिल्म जुगनू में) मर चुके हैं, तो दोबारा (फिल्म शहीद में) कैसे मर सकते हैं। मां ने उन्हें जागते देखा, तो पूछ लिया- सोते क्यों नहीं हो? मनोज कुमार ने मासूम आवाज में कहा- बीजी (जैसा वो मां को पुकारते थे), आदमी कितनी बार मरता है? मां ने जवाब दिया- एक बार। मनोज कुमार ने फिर कहा- और जो 2-3 बार मरे? मां ने कहा- वो तो फरिश्ता ही होगा। उस दिन मनोज कुमार ने ठान लिया कि मैं भी बड़ा होकर फरिश्ता ही बनूंगा। किस्सा- 3 कजन का खत मिलने पर बॉम्बे पहुंचे, सेट पर सामान ढोने का काम मिला बढ़ती उम्र के साथ मनोज कुमार हीरो बनने का ख्याल पक्का करने लगे। उन्होंने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। मनोज कुमार के कजन लेखराज भाकरी भी हिंदी सिनेमा से जुड़ चुके थे। एक दिन जब मनोज कुमार की लेखराज से मुलाकात हुई, तो उन्होंने मनोज को देखते ही कहा- तू तो हीरो लगता है। मनोज सुनकर खड़े हुए और झट से कहा- तो बना दीजिए। लेखराज ने जब फिल्में डायरेक्ट करना शुरू किया, तो उन्हें मनोज की कही वो बात याद रही। 1956 में उन्होंने मनोज के परिवार को खत लिखकर उन्हें बॉम्बे भेजने को कहा। माता-पिता की रजामंदी के बाद मनोज बॉम्बे पहुंचे और चाचा-चाची के घर में रहने लगे। लेखराज ने शुरुआत में उन्हें सेट असिस्टेंट का काम दिया, जहां वो शूटिंग से जुड़ा सामान ढोते थे। कुछ समय बाद ही उन्हें कड़ी मेहनत की बदौलत असिस्टेंट डायरेक्टर का काम मिलने लगा। किस्सा- 4 पहली फिल्म में 19 साल के मनोज कुमार को बनाया 90 साल का भिखारी, गर्लफ्रेंड भी नहीं पहचान सकी मनोज कुमार के कजिन लेखराज ने 1957 की फिल्म फैशन डायरेक्ट की, जिसमें माला सिन्हा और प्रदीप कुमार लीड रोल में थे। इस फिल्म में मनोज ने उन्हें असिस्ट किया था। तब वह महज 19 साल के थे। शूटिंग शुरू होने से पहले लाइट टेस्टिंग के लिए मनोज को ही कैमरे के सामने खड़ा कर लाइट चेक की जाती थी। जब इस फिल्म के छोटे से रोल के लिए कोई कलाकार नहीं मिला, तो लेखराज ने मनोज से कहा कि वो इसे करें। मनोज को लगा कि कोई बढ़िया सा रोल होगा, लेकिन बाद में पता चला कि 19 साल के मनोज कुमार को 90 साल के एक भिखारी का रोल मिला है। उन्होंने इसे भी स्वीकार किया और पूरे गेटअप के साथ भिखारी बन गए। इस समय तक मनोज कुमार को दिल्ली के कॉलेज में साथ पढ़ने वाली शशि को पसंद करते थे। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। घर में टेलीफोन नहीं था, तो जब मनोज छुट्टी पर दिल्ली जाते तभी दोनों की बात होती थी। जब मनोज को फिल्म फैशन में काम मिला, तो वो घरवालों और गर्लफ्रेंड शशि को खबर नहीं दे सके। फिल्म रिलीज हुई और शशि अपनी दोस्तों के साथ फिल्म देखने पहुंचीं। उन्होंने पूरी फिल्म देखी, लेकिन भिखारी बने मनोज कुमार का गेटअप ऐसा था कि वो उन्हें पहचान ही नहीं सकीं। फिल्म फैशन में रोल छोटा जरूर था, लेकिन मनोज कुमार कुछ मिनटों के अभिनय में अपनी गहरी छाप छोड़ने में कामयाब रहे। आगे उन्हें सहारा, चांद और हनीमून जैसी और फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने लगे। किस्सा- 5 दिलीप कुमार की फिल्म से प्रेरित होकर बदला नाम मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था, हालांकि जब उन्हें फिल्मों में काम मिलने लगा तो उन्होंने नाम बदल दिया। बचपन में उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म शबनम देखी थी, जिसमें उनके किरदार का नाम मनोज कुमार था। फिल्मों के लिए उन्होंने अपना नाम ही मनोज कुमार रख लिया। हर फिल्म में उन्हें इसी नाम से क्रेडिट दिया जाता था। छोटे-मोटे रोल करने के बाद हुनर की बदौलत मनोज कुमार को फिल्म कांच की गुड़िया (1960) में लीड रोल दिया गया। आगे उन्होंने रेशमी रूमाल, चांद, बनारसी ठग, गृहस्थी, अपने हुए पराए, वो कौन थी जैसी और फिल्में कीं, लेकिन असल पहचान मिली 1962 की फिल्म हरियाली और रास्ता से। आगे शादी (1962), गृहस्थी (1963), फूलों की सेज (1964) ने उन्हें टॉप एक्टर्स में शामिल किया, जिसके बाद ब्लॉकबस्टर फिल्म वो कौन थी (1964) से मनोज कुमार स्टार बने। इस फिल्म के गाने लग जा गले और नैना बरसे रिमझिम आज भी काफी मशहूर हैं। स्टार बनने के बाद मनोज कुमार को दिलीप कुमार के साथ 1968 की फिल्म आदमी में काम मिला। किस्सा- 6 लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर बनाई फिल्म मनोज कुमार ने 1965 में फिल्म शहीद में काम किया, जो भगत सिंह पर बनी थी। फिल्म बड़ी हिट रही और इसके गाने ‘ऐ वतन, ऐ वतन हमको तेरी कसम…’, 'सरफरोशी की तमन्ना… और ओ मेरा रंग दे बसंती चोला… काफी पसंद किए गए। ये फिल्म तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को इतनी पसंद आई कि उन्होंने मनोज कुमार से कहा कि उन्हें नारे जय जवान जय किसान पर फिल्म बनाने की सलाह दी। सलाह मानते हुए मनोज कुमार ने फिल्म उपकार (1967) बनानी शुरू कर दी और इसे डायरेक्ट करने का भी फैसला किया। एक दिन मनोज कुमार ने मुंबई से दिल्ली जाने के लिए राजधानी ट्रेन की टिकट खरीदी और ट्रेन में चढ़ गए। ट्रेन में बैठे-बैठे ही उन्होंने आधी फिल्म लिखी और लौटते हुए आधी। जब मनोज कुमार ने अनाउंस किया कि वो उपकार फिल्म से डायरेक्शन में कदम रखने जा रहे हैं, तो राज कपूर ने उन्हें तीखे शब्दों में सलाह दी, या तो एक्टिंग कर लो या डायरेक्शन, क्योंकि हर कोई राज कपूर नहीं है, जो हर काम एक साथ कर ले। 1967 में आई उपकार उस साल की सबसे बड़ी फिल्म थी। फिल्म का गाना मेरे देश की धरती सोना उगले.. आज भी सबसे बेहतरीन देशभक्ति गानों में गिना जाता है। फिल्म में मनोज कुमार का नाम भारत था। फिल्म के गाने की पॉपुलैरिटी देखते हुए मनोज कुमार को मीडिया ने भारत कहना शुरू कर दिया और फिर उन्हें भारत कुमार कहा जाने लगा। फिल्म हिट होने के बाद राज कपूर ने अपनी कही बात पर पछतावा जाहिर करते हुए मनोज कुमार से कहा था- ‘मुझे लगता था कि सिर्फ मैं ही अपना कॉम्पिटिशन हूं, लेकिन अब मुझसे मुकाबला करने के लिए तुम आ गए हो।’ फिल्म भले ही लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर बनी थी, लेकिन अफसोस वो इसे देख नहीं सके। 1966 में शास्त्री जी ताशकंत, उज्बेकिस्तान की यात्रा पर निकले थे। वो लौटने के बाद फिल्म उपकार देखते, लेकिन ताशकंत में ही इंडो-पाकिस्तान वॉर में शांति पत्र साइन करने के अगले दिन 11 जनवरी 1966 को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के एक साल बाद 11 अगस्त 1967 को फिल्म रिलीज हुई। लाल बहादुर शास्त्री को फिल्म न दिखा पाने का अफसोस ताउम्र मनोज कुमार को रहा। किस्सा- 7 इमरजेंसी का विरोध किया, फिल्में बैन हुईं मनोज कुमार के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अच्छे ताल्लुकात थे, लेकिन जब इमरजेंसी की घोषणा हुई तो मनोज कुमार ने इसका जमकर विरोध किया। विरोध करने वाले कई सितारों की फिल्मों को बैन कर दिया गया, जिनमें मनोज कुमार की फिल्में भी शामिल हुईं। उनकी फिल्म दस नंबरी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बैन कर दी और फिल्म शोर सिनेमाघरों में रिलीज के 2 हफ्ते पहले ही दूरदर्शन पर दिखा दी गई। जब फिल्म सिनेमाघरों में लगी तो ये फ्लॉप हो गई। किस्सा- 8 इमरजेंसी पर फिल्म बनाने से किया इनकार, अमृता प्रीतम से कहा- क्या तुम बिक चुकी हो कुछ दिनों बाद मनोज कुमार के पास सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कॉल आया, जिसमें उनसे पूछा गया कि क्या वो इमरजेंसी पर बन रही डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन करेंगे। मनोज ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। जब उन्हें पता चला कि डॉक्यूमेंट्री को मशहूर राइटर अमृता प्रीतम लिख रही हैं, तो उन्होंने तुरंत अमृता प्रीतम को कॉल मिलाया और पूछा कि क्या तुम बिक चुकी हो। मनोज ने की बात सुनकर अमृता प्रीतम भी उदास हो गईं। आगे उन्होंने अमृता से कहा कि उन्हें इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रिप्ट फाड़ देनी चाहिए। किस्सा- 9 दिलीप कुमार को क्रांति की शूटिंग में हुई अड़चन तो रोक दी शूटिंग मनोज कुमार ने उपकार के बाद पूरब और पश्चिम, शोर, रोटी कपड़ा और मकान जैसी कई सुपरहिट फिल्में बनाईं। जब मनोज कुमार ने क्रांति (1981) बनाई, तो इसमें दिलीप कुमार को कास्ट किया। वही दिलीप कुमार, जो उनकी फिल्मों में आने की प्रेरणा थे। ये वो समय था, जब दिलीप कुमार ने 4 सालों तक कोई फिल्म नहीं की थी, इसके बावजूद वो राजी हो गए। ये एक मेगा बजट की फिल्म थी। फिल्म के एक सीन के लिए दिलीप कुमार को लोहे की जंजीरें पहनाकर राज दरबार में पेश किया जाना था। बार-बार टेक हुआ, लेकिन दिलीप कुमार भारी-भरकम जंजीरों में सही शॉट नहीं दे पाए। एक समय दिलीप साहब झुंझला गए और डायरेक्टर मनोज कुमार से कहा- तुमने मुझे ये जंजीरों वाला जवाहरात पहना दिया है, इसका वजन शरीर पर आ रहा है। पहले इसे हल्का करवाओ। अब वो जमाना गया जब हम 15 किलो वजन के साथ एक्टिंग करते थे। ये सुनते ही मनोज कुमार ने तुरंत शूटिंग रुकवा दी। उन्होंने रबर की जंजीरें बनवाईं और ऐसी पेंट करवाईं कि वो असली लगें। उन हल्की जंजीरों के साथ ही फिर दिलीप साहब ने शूटिंग की। किस्सा 10 फिल्म क्रांति, जिसके नाम पर बिकने लगे कपड़े ये उस साल की सबसे बड़ी हिट होने के साथ-साथ शोले के बाद भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। देश के 26 सेंटर में 25 हफ्तों से ज्यादा चली थी। फिल्म मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) और जूनागढ़ (गुजरात) में भी सिल्वर जुबली रही, जहां कोई फिल्म टिकती नहीं थी। करीब डेढ़ सालों तक सिनेमाघरों में चली ये फिल्म 96 दिनों तक हाउसफुल थी। फिल्म का क्रेज ऐसा था कि दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में तो इस फिल्म के पोस्टर वाली टी-शर्ट, शर्ट, जैकेट और अंडरगार्मेंट्स भी बिकने लगे थे। किस्सा- 11 बहन की मौत के बावजूद, अगले दिन मनोज कुमार के सेट पर पहुंचे थे प्राण 1966 की फिल्म दो बदन में मनोज कुमार ने पहली बार प्राण के साथ काम किया और दोनों दोस्त बन गए। फिल्मों के मशहूर विलेन प्राण को हमेशा नेगेटिव रोल ही मिलते थे। ऐसे में उनकी छवि बदलने के लिए मनोज कुमार ने उन्हें अपनी फिल्म आह में पॉजिटिव रोल दिया। ये फिल्म फ्लॉप रही और लोगों ने प्राण को नापसंद किया, लेकिन मनोज कुमार ने तब भी हार नहीं मानी। उसी समय मनोज उपकार फिल्म में काम कर रहे थे। उन्होंने इस फिल्म में उन्हें मलंग बाबा का पॉजिटिव रोल देने का फैसला किया। इस सिलसिले में दोनों की मुलाकात हुई। मनोज कुमार- क्या आप मेरी फिल्म में मलंग बाबा का रोल प्ले करोगे? प्राण ने जवाब दिया- पंडित जी, लाइए स्क्रिप्ट पढ़ लूं। वो मनोज कुमार को पंडित जी ही कहते थे। स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद उन्होंने कहा, पंडित, फिल्म की स्क्रिप्ट और मलंग का किरदार दोनों बहुत खूबसूरत हैं, लेकिन एक बार सोच लो, क्योंकि मेरी छवि खूंखार, शराबी, जुआरी और बालात्कारी की है। क्या दर्शक मुझे किसी साधू बाबा के रोल में अपना सकेंगे। इरादों के पक्के मनोज कुमार ने उन्हें वो रोल दिया और शूटिंग शुरू कर दी। प्राण साहब समय के बेहद पाबंद थे। एक दिन वो सेट पर पहुंचे तो मनोज कुमार को लगा कि वो बीमार हैं। उन्होंने पास जाकर पूछा- आपकी तबीयत तो ठीक है ना? जवाब मिला- हां, मैं एकदम फिट हूं। उस दिन दोनों ने एक्शन सीन शूट किए। जब पैकअप हुआ तो फिर मनोज ने गौर किया कि प्राण साहब कुछ ठीक नहीं लग रहे। वो तुरंत मेकअप रूम में पहुंचे और कहा- आप कुछ छिपा रहे हैं। आप आज मुझे ठीक नहीं लग रहे। अगर कुछ बात है तो बताइए। जवाब में प्राण साहब ने कहा- नहीं कुछ नहीं, दरअसल कल शाम को मेरी बड़ी बहन की अचानक मौत हो गई। उस चक्कर में मैं रात भर सो नहीं पाया। ये सुनकर मनोज कुमार दंग रहे है कि अपनी जान से प्यारी बड़ी बहन को खोने पर भी वो सेट पर पहुंच गए। मनोज ने फिर कहा- अगर ऐसा कुछ था तो आपने मुझे फोन करके बताया क्यों नहीं, मैं आज की शूटिंग कैंसिल कर देता। जवाब मिला- मैं हरगिज ऐसा नहीं चाहता था कि मेरी वजह से आपकी फिल्म का शेड्यूल खराब हो। वैसे भी आपने बहुत मुश्किल से इतने सारे कलाकारों को एक साथ जुटाया है। मेरी वजह से फिल्म को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। इसके बाद से ही दोनों की दोस्ती हर फिल्म के साथ गहरी होती चली गई। जब 12 जुलाई 2013 को मनोज कुमार ने प्राण साहब के निधन की खबर सुनी तो सदमे में चले गए। उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और बातचीत करनी बंद कर दी। कई दिनों तक मनोज कुमार ने न किसी से मुलाकात की न ही कुछ बोले। किस्सा- 12 शाहरुख खान पर किया था 100 करोड़ की मानहानी का केस 2007 की फिल्म ओम शांति ओम के एक सीन में शाहरुख खान ने मनोज कुमार की नकल उतारी थी। मनोज कुमार की मिमिक्री करते हुए उन्होंने उनका सिग्नेचर पोज भी किया था, जिसमें वो अपने हाथों को चेहरे के सामने लाते थे। फिल्म में मजाक बनता देख मनोज कुमार इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने शाहरुख खान और ईरोज पर 100 करोड़ रुपए का मानहानि का मुकदमा कर दिया। मामला बढ़ता देख शाहरुख खान ने ई-मेल के जरिए मनोज कुमार से माफी मांगी थी। मनोज कुमार ने शाहरुख को माफ कर दिया और कोर्ट ने भी फिल्ममेकर्स को उस सीन को फिल्म से हटाने के आदेश दे दिए। भारत के बाद जब जापान में ये फिल्म रिलीज हुई तब भी उस सीन को नहीं हटाया गया। इस बात से नाराज होकर मनोज ने कहा था, मैं शाहरुख को कभी माफ नहीं करूंगा, उसने मेरी और कोर्ट के आदेश की इंसल्ट की है। हालांकि, समय के साथ ये मामला खत्म हो चुका है। बता दें कि ये मामला कोर्ट के बाहर ही सेटल हो गया था।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 4:30 am

'टी-सीरीज का राइवल हूं', फिर भी खुशहाली को किया कास्ट:डायरेक्टर आकाशादित्य लामा बोले- मैंने सिर्फ टैलेंटेड एक्ट्रेस देखा

फिल्म 'दुल्हनिया ले आएगी' को लेकर अभिनेत्री खुशहाली कुमार और निर्देशक-निर्माता आकाशादित्य लामा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इंटरव्यू में लामा ने मजाकिया अंदाज में खुद को टी-सीरीज का 'राइवल' बताते हुए खुशहाली की कास्टिंग की वजह बताई। दोनों ने शादी को लेकर युवाओं की बदलती सोच, रिश्तों में भरोसे की अहमियत और फिल्म के संदेश पर बात की। खुशहाली ने पीयूष मिश्रा और महेश मांजरेकर के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। साथ ही पिता गुलशन कुमार की विरासत, अपनी अलग पहचान और समाजसेवा से जुड़े किस्से भी बताए। सवाल: आजकल युवाओं में शादी को लेकर डर बढ़ रहा है। ऐसे में 'दुल्हनिया ले आएगी' जैसी फिल्म लाने का विचार कैसे आया? जवाब/आकाशादित्य लामा: शादी के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है और शादी से ही बनता है। हमारी फिल्म कॉमेडी जरूर है, लेकिन इसके जरिए रिश्तों, प्यार और पिता-बेटी के रिश्ते की बात कही गई है। गंभीर बातों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया है। खुशहाली कुमार: शादी तब करनी चाहिए, जब आप उसके लिए तैयार हों। सरकार ने शादी की न्यूनतम उम्र तय की है, लेकिन कोई एक्सपायरी डेट नहीं रखी। सही साथी मिले और आप मानसिक रूप से तैयार हों, तभी शादी का फैसला लेना चाहिए। यही बात फिल्म भी मजेदार अंदाज में कहती है। सवाल: खुशहाली कुमार को इस फिल्म के लिए कैसे चुना? जवाब/आकाशादित्य लामा: (हंसते हुए) लोग कहते हैं कि खुशहाली बड़ी म्यूजिक कंपनी की मालकिन हैं। मैं भी आजकल एक छोटी-सी म्यूजिक कंपनी चला रहा हूं, इसलिए फिलहाल हम दोनों राइवल हैं। ऐसे में मैं उनके पास क्यों जाता? लेकिन सच यह है कि मैंने उन्हें सिर्फ एक अभिनेत्री के तौर पर चुना। मैंने उनकी फिल्म 'धोखा: राउंड द कॉर्नर' देखी थी और 'स्टारफिश' के कुछ हिस्से भी। मेरी कहानी की 'नव्या' के लिए वही सबसे फिट लगीं। मैं ऐसी अभिनेत्री चाहता था, जिसकी कोई तय इमेज न हो। खुशहाली ने पहले कॉमेडी नहीं की थी, इसलिए लगा कि उनके साथ फिल्म में नई ताजगी आएगी। कहानी उन्हें पसंद आई और वहीं से हमारी यात्रा शुरू हुई। सवाल: फिल्म में पीयूष मिश्रा और महेश मांजरेकर जैसे बड़े कलाकार हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/आकाशादित्य लामा: कई लोगों ने पहले ही कहा था कि इतने बड़े कलाकारों को संभालना आसान नहीं होगा। लेकिन मेरा अनुभव बिल्कुल उल्टा रहा। अगर कलाकार को भरोसा हो जाए कि निर्देशक अपना काम जानता है और निर्माता उसका सम्मान करता है, तो कोई दिक्कत नहीं होती। दिलचस्प बात यह रही कि महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा और स्नेहिल दीक्षित खुद भी निर्देशक हैं। मैंने इस फिल्म से सीखा कि निर्देशक को डायरेक्ट करना सबसे आसान होता है। खुशहाली कुमार: पीयूष जी की एनर्जी कमाल की है। रात की शूटिंग हो या दिन की, वह हमेशा पूरे उत्साह के साथ सेट पर आते थे। महेश सर के साथ पिता-बेटी के भावनात्मक दृश्य करना मेरे लिए खास अनुभव रहा। वह इतने नैचुरल अभिनेता हैं कि उनके साथ अभिनय करना आसान हो जाता है। सवाल: अगर फिल्म की शूटिंग का बिहाइंड द सीन वीडियो रिलीज हो, तो सबसे यादगार पल कौन-सा होगा? जवाब/आकाशादित्य लामा: दो सीन मेरे सबसे करीब हैं। पहला, जब नव्या अपने पिता से कहना चाहती है कि वह शादी नहीं करना चाहती, लेकिन उनकी भावनाओं को देखकर चुप रह जाती है। दूसरा, फिल्म के आखिर में खुशहाली का लंबा मोनोलॉग। उन्होंने उसे बिना रीटेक के एक ही बार में पूरा किया। ट्रायल शो में लोग पहले हंस रहे थे, लेकिन यह सीन आते ही माहौल भावुक हो गया। खुशहाली कुमार: सेट पर सबसे ज्यादा मजा तब आता था, जब सर खुद एक्टिंग करके सीन समझाते थे। उनका थिएटर बैकग्राउंड है, इसलिए वह हर सीन निभाकर दिखाते थे। कई बार हमें हंसी रोकना मुश्किल हो जाता था। सवाल: आजकल शादी को लेकर युवाओं की सोच बदल रही है। कई लोग शादी से बचना चाहते हैं। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब/आकाशादित्य लामा: कुछ घटनाओं की वजह से लोगों के मन में डर बढ़ा है, लेकिन रिश्ते भरोसे से चलते हैं। सोशल मीडिया के दौर में हर घटना तुरंत वायरल हो जाती है। हमें सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि सामने वाले ने क्या कहा, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों कहा। रिश्तों में विश्वास और धैर्य सबसे जरूरी हैं। परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है। खुशहाली कुमार: मैं भी मानती हूं कि शादी तभी करनी चाहिए, जब दोनों लोग उसके लिए तैयार हों। कई बार परिवार या समाज के दबाव में लोग शादी कर लेते हैं और बाद में परेशानियां शुरू हो जाती हैं। आज लड़कियां खुलकर अपनी बात कह रही हैं। अगर कोई पहले करियर बनाना चाहती है, तो उसके फैसले का सम्मान होना चाहिए। हर इंसान को वही करना चाहिए, जो वह सच में चाहता है। सवाल: खुशहाली, लोग आपको अक्सर टी-सीरीज और गुलशन कुमार के परिवार से जोड़कर देखते हैं। क्या आपको लगता है कि अब आपकी अलग पहचान भी बन चुकी है? जवाब/खुशहाली कुमार: मुझे गर्व है कि मैं गुलशन कुमार जी की बेटी हूं। मैं हमेशा चाहूंगी कि लोग मुझे उनके नाम से भी याद रखें। लेकिन जब मुझे मेहनत की वजह से काम मिलता है, तो वह खुशी अलग होती है। 'धोखा' के बाद यह फिल्म मुझे मेरी एक्टिंग देखकर मिली। उससे पहले मैं फैशन डिजाइनर थी। पेरिस और न्यूयॉर्क में शो किए, हॉलीवुड कलाकारों के लिए डिजाइनिंग की। वहां मुझे कोई परिवार की वजह से नहीं जानता था। वहां जो पहचान मिली, वह मेरी मेहनत की वजह से मिली। सवाल: इस फिल्म से जुड़ी सबसे खास याद क्या रहेगी? जवाब/खुशहाली कुमार: यह मेरे प्रोडक्शन हाउस के बाहर साइन की गई पहली फिल्म और पहली कॉमेडी भी है। पहला साइनिंग अमाउंट मिलने पर मैंने उसे भगवान गणेश के चरणों में रखा। यही पल मेरे लिए सबसे खास रहेगा। मेरी कोशिश रहती है कि कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। कई लड़कियों की पढ़ाई का खर्च मैं उठाती हूं। पहले अपनी फैक्ट्री के पास बच्चों को रोज खाना भी खिलाती थी। मुझे लगता है कि ये संस्कार मुझे पापा से मिले हैं। अगर भगवान ने आपको कुछ दिया है, तो उसे दूसरों के साथ जरूर बांटना चाहिए।

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 4:30 am

सलमान खान ने लीक पेपर से दी थी परीक्षा:एक्टर बोले- मेरे लिए आता था लीक पेपर; नीट विवाद के बीच पुराना वीडियो वायरल

देशभर में चल रहे नीट पेपर लीक विवाद पर बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने छात्रों का समर्थन किया है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तारीफ करते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की अपील की। सलमान के इस पोस्ट के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर 'द कपिल शर्मा शो' का एक पुराना वीडियो वायरल होने लगा। इस वीडियो में उनके पिता सलीम खान खुलासा कर रहे हैं कि स्कूल के दिनों में सलमान के लिए एक शख्स लीक पेपर घर लाता था। सलमान ने भी शो में हंसते हुए इसे स्वीकार किया था। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं। 'गणेश मेरे लिए लाता था लीक पेपरवीडियो में सलमान खान अपने पिता सलीम खान और भाइयों अरबाज व सोहेल खान के साथ कपिल शर्मा के शो में नजर आ रहे हैं। शो में सलीम खान बताते हैं कि कैसे गणेश नाम का एक व्यक्ति उनके घर आता था और सलमान उसकी बहुत खातिरदारी करते थे। सलीम खान ने मजाकिया अंदाज में कहा था, मुझे समझ नहीं आता था कि गणेश को मुझसे भी ज्यादा इज्जत क्यों मिल रही है। बाद में पता चला कि जब परीक्षा का पेपर लीक होता था, तो वही लाकर देता था। इस पर सोहेल खान ने हंसते हुए कहा कि टीवी पर पारिवारिक राज खोले जा रहे हैं। तभी सलमान ने मुस्कुराते हुए सफाई दी कि वह पेपर सोहेल के लिए नहीं, बल्कि उनके अपने लिए आता था। बचाव में उतरे फैंस- बोले स्कूल की बात पुराना वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सलमान को घेरने की कोशिश की, लेकिन सलमान के फैंस उनके समर्थन में आ गए। सोशल मीडिया पर फैंस का कहना है कि यह उनके स्कूल के दिनों की पुरानी और हल्की-फुल्की बात थी। एक यूजर ने लिखा, सलमान अपने स्कूल के दिनों की बात कर रहे थे, इसका राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा से कोई मुकाबला नहीं है। वहीं कई यूजर्स ने उन्हें इस मुद्दे पर ट्रोल किया आंदोलन का हिंसक होना बेहद दुखद लंबी चुप्पी के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जंतर-मंतर में छात्रों के साथ हुई हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वाले सलमान खान पहले सुपरस्टार बन चुके हैं। उन्होंने न सिर्फ छात्रों के साथ हुई हिंसा की कड़ी निंदा की, बल्कि उनके विरोध प्रदर्शन को सही करार दिया। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही उनका साथ देगी और शिक्षा व्यवस्था में बेहतरी होगी। साथ ही एक्टर ने कहा कि ये सिर्फ छात्रों और शिक्षा का मुद्दा है इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश नहीं करना चाहिए। सलमान खान ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से अपने स्कूल के दिनों की एक तस्वीर शेयर कर लिखा- यह एक बेहद शांतिपूर्ण आंदोलन था। यह देखकर बहुत दुख होता है कि इसे हिंसक मोड़ लेना पड़ा। इस आंदोलन में घायल हुए छात्रों और उनके परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। यह देखकर खुशी होती है कि हमारे देश के छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग के लिए एकजुट होकर सामने आए हैं और उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। आगे सलमान खान लिखते हैं, ‘मैं छात्रों के इस कदम की दिल से सराहना करता हूं। उन्होंने जिस समर्पण, ईमानदारी और मेहनत से पढ़कर अपना भविष्य बनाने का जज्बा दिखाया है, वह काबिले-तारीफ है। यही युवा पीढ़ी एक शिक्षित और मजबूत भारत का निर्माण करेगी और देश का नाम रोशन करेगी।’ सलमान ने आगे लिखा, ‘यह आंदोलन और यह विरोध प्रदर्शन बिल्कुल सही दिशा में किया गया है और छात्रों ने इसे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया। उनका साहस, हिम्मत और शिक्षा के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है।’ ‘यह मुद्दा छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। इसका पूरा श्रेय सिर्फ हमारे देश के छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार भी उनका साथ देगी और हमारी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाएगी। यह सभी के लिए फायदे की स्थिति होगी। मैं सकारात्मक फैसले की उम्मीद और प्रार्थना करता हूं। भगवान उन सभी का भला करे जो शिक्षा हासिल करना चाहते हैं।’ इच्छा है कि शिक्षा ही अगला ट्रेंड बने- सलमान खान अपनी लंबी-चौड़ी पोस्ट के आखिर में सलमान ने लिखा है, ‘मेरी इच्छा है कि शिक्षा ही अगला ट्रेंड और फैशन बने। हर साल पढ़ाई को लेकर लोगों का उत्साह और बढ़े। इतना कि बाहर से लोग भारत में पढ़ने आएं और भारत ही एजुकेशन हब बने। कॉकरोच जनता पार्टी ने री-शेयर किया पोस्ट सलमान खान की पोस्ट सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम से इसे री-शेयर किया गया है।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 4:45 pm

शेफाली जरिवाला के पालतू कुत्ते सिंबा का निधन:बच्चा मानती थीं, पति पराग बोले- तुम दोनों से मिलने का इंतजार नहीं कर सकता

कांटा लगा एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला के पालतू कुत्ते सिंबा का आज निधन हो गया है। शेफाली, सिंबा को अपना बच्चा मानती थीं। फैंस से ये दुखद खबर शेयर करते हुए शेफाई के पति एक्टर पराग त्यागी ने भावुक पोस्ट शेयर की है। पराग त्यागी ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से शेफाली जरीवाला और सिंबा का एक वीडियो शेयर कर लिखा है, ‘अब मम्मा अकेली नहीं हैं। सिंबा मम्मा के साथ बहुत खुश है। तुम दोनों से मिलने का इंतजार नहीं कर सकता, मेरी लाइफ लाइन। दूसरी तरफ।’ सिंबा को बेटा मानती थीं शेफाली जरीवाला शेफाली पालतू डॉग सिंबा को बेटा मानती थीं। उनकी मौत के बाद पति पराग त्यागी ने सिंबा के कई वीडियोज शेयर कर दावा किया कि शेफाली के जाने के बाद से ही वो बेहद उदास है। रक्षाबंधन पर शेफाली सिंबा को राखी भी बांधती थीं। उनकी मौत के बाद पराग ने सिंबा को राखी बांधी थी। 27 जून 2025 में अचानक हुआ निधन बताते चलें कि शेफाली जरीवाला का निधन 27 जून 2025 को अचानक हुआ है। उस रोज उनके घर में पूजा रखी गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, शेफाली ने उस दिन व्रत रखा था, उन्होंने इंसुलिन ली थी, जिसके बाद फ्रिज में रखा ठंडा खाना खाते ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनका निधन हो गया। शेफाली के निधन का कारण ब्लड प्रेशर फ्लक्चुएशन माना जाता है। हालांकि परिवार ने कभी उनके निधन के कारण पर ऑफिशियल पुष्टि नहीं की है। ‘बिग बॉस 13’ में ली थी वाइल्ड कार्ड एंट्री शेफाली जरीवाला को कांटा लगा गर्ल नाम से जाना जाता था। एक्ट्रेस कई टीवी शोज और म्यूजिक एल्बम में नजर आई थीं। इसके अलावा शेफाली जरीवाला ने 2019 में बिग बॉस 13 में वाइल्ड कार्ड एंट्री ली थी, जहां उन्हें अपने एक्स-बॉयफ्रेंड सिद्धार्थ शुक्ला के साथ अच्छा बॉन्ड शेयर करते देखा गया था। बता दें कि सिद्धार्थ शुक्ला का भी निधन 2021 में कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ था।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 3:30 pm

राजकुमार राव 'मोदी है तो मुमकिन है' गाने पर घिरे:बोले- आप प्रेशर नहीं समझ सकते, मेरी आत्मा बिकाऊ नहीं; फिर कमेंट डिलीट किया

एक्टर राजकुमार राव साल 2025 में आए राजनीतिक प्रमोशनल गाने 'मोदी है तो मुमकिन है' को लेकर विवादों में आ गए हैं। दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में राजकुमार ने एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखी थी। इसके बाद यूजर्स ने उन्हें पुराने गाने की याद दिलाते हुए ट्रोल करना शुरू कर दिया। एक यूजर के कमेंट का जवाब देते हुए राजकुमार ने लिखा कि वे उनके दबाव के बारे में सोच भी नहीं सकते। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना यह कमेंट डिलीट कर दिया। अब इस कमेंट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। देरी से बोलने पर ट्रोल हुए, फिर दिया जवाबराजकुमार राव ने NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के समर्थन में देरी से पोस्ट की। इस पोस्ट के बाद लोगों ने उन्हें देर से बोलने और राजनीतिक गाने 'मोदी है तो मुमकिन है' में काम करने के लिए ट्रोल करना शुरू कर दिया। एक यूजर ने कमेंट किया, मेरे मन में आपके लिए बहुत सम्मान था, लेकिन एक प्रोपेगैंडा गाने की वजह से सब खत्म हो गया। मैं आपकी कोई फिल्म नहीं छोड़ता था, कभी नहीं सोचा था कि आप इतनी आसानी से बिक जाएंगे। इस पर राजकुमार राव ने जवाब में लिखा, भाई, मैं कभी अपनी आत्मा नहीं बेच सकता। एक गाना यह तय नहीं करता कि मैं कौन हूं, किस बात का समर्थन करता हूं या जीवन में मेरी विचारधारा क्या है। आप प्रेशर के बारे में नहीं जान सकते। मैं हमेशा सही बात और इंसानियत को जोड़ने वाली बातों के साथ खड़ा रहता हूं। जब तक मेरी अंतरात्मा साफ है और मैं मेहनत कर रहा हूं, तब तक कुछ और मायने नहीं रखता। कमेंट डिलीट करने के बाद बढ़ा विवादराजकुमार ने अपना यह जवाब बाद में इंस्टाग्राम से डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैल चुके थे। कई यूजर्स ने इसे 'साल का सबसे बड़ा कबूलनामा' कहा। वहीं, कुछ लोगों ने एक्टर को अवसरवादी करार दिया। एक यूजर ने X पर लिखा, दबाव कोई ऐसा बहाना नहीं है कि आप रीढ़ की हड्डी न होने की बात छिपा सकें। एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, इसे हिम्मत नहीं, बल्कि अवसरवादिता कहते हैं। जब माहौल बदलता दिखता है, तभी ये लोग ऐसी बातें करते हैं। छात्रों के समर्थन में पोस्ट से शुरू हुआ विवादराजकुमार राव ने इंस्टाग्राम पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के पक्ष में बात रखी थी। छात्र नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शैक्षणिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। 41 साल के एक्टर ने लिखा था, “जब युवा असहज महसूस करते हैं, तो यह समाज के लिए मैसेज है कि उनकी बात सुनी जानी चाहिए। हर आवाज को सम्मान, निष्पक्षता और गरिमा मिलनी चाहिए। शांति हमारी सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए। हिंसा किसी भी तरफ से हो, वह सिर्फ जख्म गहरे करती है। यह समय बातचीत और सहानुभूति का है।” 2025 में रिलीज हुआ था गाना, टी-सीरीज ने किया था प्रोड्यूसजिस गाने को लेकर यह विवाद चल रहा है, उसका टाइटल 'मोदी है तो मुमकिन है' है। टी-सीरीज का प्रोड्यूस किया यह गाना साल 2025 में रिलीज हुआ था। 2 मिनट 55 सेकंड लंबे इस गाने को मीत ब्रदर्स ने गाया है। गाने में राजकुमार राव के अलावा वरुण धवन, विक्रांत मैसी और अरशद वारसी जैसे कलाकार भी नजर आए थे। यह गाना अब भी यूट्यूब पर उपलब्ध है।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 2:09 pm

हम लोग डरने वाले नहीं हैं:भाई पर कुल्हाड़ी से हुए जानलेवा हमले पर बोले पंकज त्रिपाठी, कहा- संसार में किसी के साथ गलत नहीं किया

जून में पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई विजेंद्र नाथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया था। घटना के बाद वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब लंबे समय बाद पंकज त्रिपाठी ने इस हमले पर बात की है। उनका कहना है कि उनके परिवार ने कभी किसी के साथ गलत नहीं किया है, यही वजह है कि परिवार किसी से नहीं डरता। हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में एक्टर पंकज त्रिपाठी ने कहा है, ‘मेरा अपने परिवार से बहुत लगाव है, हम दिन में रोज एक बार बात जरूर करते हैं। इस घटना का मुझ पर असर जरूर पड़ा, लेकिन मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। हम लोग किसी से डरने वाले लोग नहीं हैं।’ आगे एक्टर ने कहा है, ‘हमने किसी के लिए संसार में गलत नहीं किया, तो डर किस बात का। वो एक अप्रिय घटना से ज्यादा कुछ नहीं है। जीवन में ये सब घटना चलती रहती है।’ जानिए क्या था हमले का पूरा विवाद? जून में बिहार के गोपालगंज में एक्टर पंकज त्रिपाठी के भाई विजेंद्र नाथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया। घटना बरौली थाना क्षेत्र के बेलसंड गांव की है। विजेंद्र नाथ तिवारी देर शाम अपने घर के दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान अचानक 2 लोगों ने विजेंद्र पर वार किया। हमले में वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। विजेंद्र नाथ को तुरंत सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने हालत को देखते हुए उन्हें पटना AIIMS रेफर कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि विजेंद्र का आरोपियों के साथ जमीनी विवाद था, जिसके चलते उन पर जानलेवा हमला किया गया था। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जल्द शुरू करेंगे यूट्यूब चैनल आखिरी बार इसी साल की फिल्म कृष्णा अवतारम में नजर आए पंकज त्रिपाठी जल्द ही अपना यूट्यूब चैनल शुरू करने वाले हैं। आने वाले दिनों में वो फिल्म मिर्जापुर में नजर आएंगे, जो 5 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। इसके अलावा वो फिल्म पारिवारिक मनुरंजन और ओह माय डॉग में नजर आएंगे। पंकज त्रिपाठी 12 साल बाद थिएटर में भी वापसी करने वाले हैं।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 11:41 am

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के सवाल पर भड़के सोनू निगम:रूपाली गांगुली बोलीं- कानून हाथ में लेने वाले स्टूडेंट नहीं, शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन की चुप्पी का मजाक उड़ाया

बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स लगातार जंतर मंतर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ स्टार्स ऐसे भी हैं, जो स्टूडेंट के विरोध में बयान दे रहे हैं, तो कुछ इस मुद्दे पर बात करने से भी झिझक रहे हैं। हाल ही में एक इवेंट में पहुंचे सिंगर सोनू निगम से प्रोटेस्ट पर सवाल किया गया, जिस पर वो भड़क गए। वहीं रूपाली गांगुली ने प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने पर सवाल खड़े किए हैं। सोनू निगम मंगलवार को एक इवेंट में शामिल हुए। इस समय एक रिपोर्टर ने देश में जारी प्रोटेस्ट पर पूछा- देश में जो सिचुएशन चल रही है, स्टूडेंट का प्रोटेस्ट चल रहा। इसी बीच सोनू निगम हंसते हुए चिढ़ गए और तुरंत सवाल काटते हुए कहा- मैं यहां किस लिए आया हूं। आगे उन्होंने चुप करवाते हुए कहा-'बस, बस।' रिपोर्टर तब भी शांत नहीं हुआ तो सिंगर ने कहा- ‘अभी हो गया, हो गया।’ वीडियो वायरल होने के बाद सोनू निगम ट्रोलर्स के निशाने पर आ चुके हैं। कई फैंस ने वीडियो पर कमेंट कर लिखा है कि वो उनके कॉन्सर्ट के टिकट कैंसिल करवा रहे हैं। रूपाली गांगुली बोलीं- पुलिस पर हमला करने वालों को स्टूडेंट नहीं कह सकते अनुपमा एक्ट्रेस रूपाली गांगुली ने प्रोटेस्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा, ‘जो लोग कानून अपने हाथ में लेते हैं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं और पुलिस पर हमला करते हैं, उन्हें छात्र नहीं कहा जा सकता। ऐसे कृत्य किसी भी जायज आंदोलन को कमजोर ही करते हैं।’ भाजपा से जुड़ी हुईं रूपाली ने छात्रों की मांगो को जायज कहा, लेकिन साथ ही कहा कि प्रोटेस्ट हिंसक नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा है, ‘दुर्भाग्य से जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा का रूप ले लेता है, तो छात्रों की वास्तविक चिंताएं पीछे छूट जाती हैं। अगर देशविरोधी या राजनीतिक स्वार्थ रखने वाले तत्व छात्र आंदोलनों का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए करते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों का होता है जो न्याय की मांग कर रहे हैं।’ ‘भारत अपने छात्रों के साथ है। भारत अपने नागरिकों के साथ है। यह लड़ाई पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सुधारों के लिए होनी चाहिए, न कि हिंसा और तोड़फोड़ के लिए।’ शशि थरूर ने बिग बी की चुप्पी पर ली फिरकी कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन का प्रोटेस्ट से जुड़ा 14 साल पुराना पोस्ट शेयर कर फिरकी ली है। री-शेयर की गई पोस्ट में अमिताभ बच्चन ने दिल्ली गैंगरेप से जुड़े विरोध में आंसू गैस के इस्तेमाल का विरोध किया था, जबकि इस प्रोटेस्ट में हिंसा होने के बावजूद उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। विवेक ऑबेरॉय ने भी टाला था प्रोटेस्ट से जुड़ा सवाल कुछ समय पहले ही विवेक ऑबेरॉय से सोनम वांगचुक और उनके अनशन पर सवाल किया गया, तो एक्टर ने मुद्दे पर राय रखने की बजाए कहा, ‘मैं अभिनेता हूं, नेता नहीं हूं, मैं पॉलिटिकल चीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता।’ विवेक का ये बयान सामने आने के बाद कई लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 10:34 am

आंदोलन का हिंसक होना बेहद दुख की बात:लंबी चुप्पी के बाद सलमान खान ने किया प्रोटेस्ट का समर्थन, कहा- राजनीतिक रंग न दें, ये शिक्षा का मुद्दा

लंबी चुप्पी के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जंतर-मंतर में छात्रों के साथ हुई हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वाले सलमान खान पहले सुपरस्टार बन चुके हैं। उन्होंने न सिर्फ छात्रों के साथ हुई हिंसा की कड़ी निंदा की, बल्कि उनके विरोध प्रदर्शन को सही करार दिया। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही उनका साथ देगी और शिक्षा व्यवस्था में बेहतरी होगी। साथ ही एक्टर ने कहा कि ये सिर्फ छात्रों और शिक्षा का मुद्दा है इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश नहीं करना चाहिए। सलमान खान ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से अपने स्कूल के दिनों की एक तस्वीर शेयर कर लिखा- यह एक बेहद शांतिपूर्ण आंदोलन था। यह देखकर बहुत दुख होता है कि इसे हिंसक मोड़ लेना पड़ा। इस आंदोलन में घायल हुए छात्रों और उनके परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। यह देखकर खुशी होती है कि हमारे देश के छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग के लिए एकजुट होकर सामने आए हैं और उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। आगे सलमान खान लिखते हैं, ‘मैं छात्रों के इस कदम की दिल से सराहना करता हूं। उन्होंने जिस समर्पण, ईमानदारी और मेहनत से पढ़कर अपना भविष्य बनाने का जज्बा दिखाया है, वह काबिले-तारीफ है। यही युवा पीढ़ी एक शिक्षित और मजबूत भारत का निर्माण करेगी और देश का नाम रोशन करेगी।’ सलमान ने आगे लिखा, ‘यह आंदोलन और यह विरोध प्रदर्शन बिल्कुल सही दिशा में किया गया है और छात्रों ने इसे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया। उनका साहस, हिम्मत और शिक्षा के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है।’ ‘यह मुद्दा छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। इसका पूरा श्रेय सिर्फ हमारे देश के छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार भी उनका साथ देगी और हमारी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाएगी। यह सभी के लिए फायदे की स्थिति होगी। मैं सकारात्मक फैसले की उम्मीद और प्रार्थना करता हूं। भगवान उन सभी का भला करे जो शिक्षा हासिल करना चाहते हैं।’ इच्छा है कि शिक्षा ही अगला ट्रेंड बने- सलमान खान अपनी लंबी-चौड़ी पोस्ट के आखिर में सलमान ने लिखा है, ‘मेरी इच्छा है कि शिक्षा ही अगला ट्रेंड और फैशन बने। हर साल पढ़ाई को लेकर लोगों का उत्साह और बढ़े। इतना कि बाहर से लोग भारत में पढ़ने आएं और भारत ही एजुकेशन हब बने। कॉकरोच जनता पार्टी ने री-शेयर किया पोस्ट सलमान खान की पोस्ट सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम से इसे री-शेयर किया गया है। प्रोटेस्ट के सपोर्ट में उतर रहे हैं बॉलीवुड सेलेब्स एक्टर अनुपम खेर ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को सबसे निष्पक्ष और ईमानदार बताया, साथ ही उन्हें बाहरी राजनीतिक दलों के एजेंडे से सावधान रहने की हिदायत दी। वहीं, रत्ना पाठक शाह ने मौजूदा स्थिति की तुलना पौराणिक कथा के द्रोणाचार्य से की और सीमा पाहवा ने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। नसीरुद्दीन शाह बोले- जाहिल देश चलाए तो चाहेगा सब जाहिल बनें नसीरुद्दीन शाह ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा- अगर एक जाहिल इस मुल्क की रहनुमाई करे, तो उसका दिल यही चाहेगा कि पूरा मुल्क उसी की तरह जाहिल, नासमझ, नाकाम और बेरहम बने। मेरी पूरी हमदर्दी छात्रों के साथ है। मैं उन्हें हजार-हजार हर सांस के साथ दुआएं देता हूं और हर टीचर्स डे पर उन्हें सलाम करता हूं। इस वक्त मेरा दिल भी भरा हुआ है और मैं गुस्से से खौल भी रहा हूं यह देखकर कि हमारे इन बच्चों के साथ किस तरह ज़ुल्म का बर्ताव किया जा रहा है उन गुंडों के हाथों, जो मुझे अमरीका के ICE एजेंट्स की याद दिलाते हैं, मुंह पर नकाब लगाए हुए, हाथ में डंडा लिए हुए। आखिर में नसीरुद्दीन शाह ने कहा, ‘कभी अपने बच्चों के बारे में भी सोचा करो और यह भी सोचो कि तुम्हारा अंजाम तुम्हें भी एक दिन मिलेगा जरूर। इन सब बच्चों से मैं कहना चाहता हूं कि हिम्मत न हारें। बहुत से लोगों की हमदर्दी आपके साथ है, बहुत से लोग आपके साथ हैं। आप लड़ते रहें। मुझे हमारे मुल्क की युवा पीढ़ी से हमेशा उम्मीद रही है और अब वह उम्मीद और उजागर हो गई है। आप लोग अपनी लड़ाई लड़ते रहें, हम सब आपके साथ हैं। और इस मुल्क की हुकूमत को मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं, सब याद रखा जाएगा।’ अनुपम खेर बोले- 'छात्रों का प्रदर्शन सबसे ईमानदारएक्टर अनुपम खेर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर कर जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज पर दुख जताया। छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शैक्षणिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। अनुपम खेर ने कहा, छात्रों, प्रदर्शन के वीडियो देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। जब छात्र सिर्फ अपनी मांग रखना चाहते हैं, तो उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए। मैं भी कभी छात्र था और अधिकारियों से सवाल पूछता था। इसलिए आपकी बेचैनी, गुस्सा और भविष्य की उम्मीदों को अच्छे से समझता हूं। छात्र प्रदर्शन सबसे ईमानदार प्रदर्शन होता है, क्योंकि वे सिर्फ अपने भविष्य, अधिकार और देश के सुधार के लिए चिंतित होते हैं। मैं दिल से आपका समर्थन करता हूं। राजनीतिक हस्तक्षेप पर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, एक बड़े भाई के नाते कहना चाहता हूं कि जब आपके प्रदर्शन में बाहरी राजनीतिक दल शामिल होने लगते हैं, तो सावधान रहें। उनका मकसद आपका मुद्दा आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि अपना स्वार्थ पूरा करना होता है। शुरुआत में लगता है कि ज्यादा लोग आने से प्रदर्शन मजबूत होगा, लेकिन ये लोग आपकी आवाज का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए करने लगते हैं। बाद में मुद्दा आपका नहीं रहता, वे कैमरे और नारे अपने साथ ले जाते हैं। इससे आपकी सच्चाई को नुकसान पहुंचता है। अपना विरोध खुद का रखें, किसी को अपनी आवाज का गलत इस्तेमाल न करने दें। रत्ना पाठत बोलीं- छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रहे'एक्टर नसीरुद्दीन शाह के समर्थन के बाद उनकी पत्नी और सीनियर एक्ट्रेस रत्ना पाठक शाह ने भी इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा, मुझे हमेशा से एकलव्य की कहानी गलत लगती थी कि गुरु द्रोणाचार्य ने अंगूठा मांगकर उसका पूरा भविष्य दांव पर लगा दिया। अब समझ आ रहा है कि वे किस तरह के गुरु थे। हम विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, लेकिन अपने छात्रों से संवाद तक नहीं बना पा रहे। हम चाहते हैं कि छात्र अपना पूरा भविष्य इसलिए कुर्बान कर दें ताकि कुछ लोग अपनी राजनीतिक सत्ता बचा सकें? ये किस तरह के गुरु हैं? अपनी पीढ़ी की तरफ से माफी मांगते हुए उन्होंने कहा, हम देख रहे थे कि क्या गलत हो रहा है, लेकिन सही समय पर सही तरीके से उसे रोक नहीं पाए। इसलिए हमने आपको मार्गदर्शन देने का अधिकार खो दिया है। लेकिन हमारे पास आपका समर्थन करने का संकल्प है। हमें बुलाइए, हम आपके साथ हैं। सीमा पाहवा ने कहा- 'चूहों की तरह छिपे हैं बड़े स्टार्स'एक्ट्रेस सीमा पाहवा ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो शेयर कर इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों की चुप्पी पर नाराजगी जताई। उन्होंने सीजेपी (CJP) को टैग करते हुए कहा, मैं इन बच्चों, इनके परिवारों और देश के साथ हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे रुकेगा, क्योंकि इंसानियत खत्म हो चुकी है। इतने सारे लोग अब भी चुप हैं, यह बहुत शर्मनाक है। क्या आपको लगता है कि सरकार खिलाफ हो जाएगी तो काम या पद चला जाएगा? अपनी इंसानियत जगाइए। रोते, तड़पते और पिटते बच्चों को देखिए। क्या आप इसलिए घरों में दुबके हैं ताकि आपके अवॉर्ड्स न रुकें? क्या आप सब कायर हैं? शर्म आनी चाहिए! बाहर निकलिए और छात्रों का साथ दीजिए। सीमा पाहवा ने जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ सड़क पर उतरीं 75 वर्षीय सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, मैं उस महिला की बड़ी प्रशंसक बन गई हूं जो इस उम्र में वहां मार्च कर रही हैं। अगर मुझे अपनी व्यक्तिगत समस्या न होती, तो मैं भागकर जाती और बच्चों के साथ लाठीचार्ज झेलती। राजकुमार राव की अपील- 'बातचीत से निकलेगा समाधान'एक्टर राजकुमार राव ने भी सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए शांतिपूर्ण बातचीत पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, जब युवा महसूस करते हैं कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही, तो यह समाज के लिए याद दिलाने वाली बात है कि उसे सुनना चाहिए। हर आवाज को गरिमा, निष्पक्षता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। साथ ही, शांति ही हमारी सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए। हिंसा केवल जख्मों को गहरा करती है और समाधान से दूर ले जाती है। यह बातचीत और सहानुभूति का समय है। उन्होंने आगे कहा, छात्रों को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए और अधिकारियों को सहानुभूति व खुलेपन के साथ सुनना चाहिए। असली और स्थायी बदलाव टकराव से नहीं, बातचीत से आता है। हम सभी देश का विकास चाहते हैं और उसकी नींव निष्पक्ष शिक्षा है। क्या है जंतर-मंतर प्रदर्शन का पूरा मामलादेशभर में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के पेपर लीक होने की घटनाओं के बाद से छात्रों का आक्रोश बढ़ा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मुख्य मांग नीट परीक्षा में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में कड़े सुधार लागू करना है। सोमवार को संसद घेराव के लिए निकले छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसके बाद से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 8:28 am

छात्रों पर लाठीचार्ज, बॉलीवुड दिग्गजों ने उठाई आवाज:अनुपम खेर बोले- ये बर्ताव नहीं होना चाहिए; रत्ना-सीमा, राजकुमार राव भी समर्थन में आए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद बॉलीवुड की कई हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अनुपम खेर, रत्ना पाठक शाह, सीमा पाहवा और राजकुमार राव ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। एक्टर अनुपम खेर ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को सबसे निष्पक्ष और ईमानदार बताया, साथ ही उन्हें बाहरी राजनीतिक दलों के एजेंडे से सावधान रहने की हिदायत दी। वहीं, रत्ना पाठक शाह ने मौजूदा स्थिति की तुलना पौराणिक कथा के द्रोणाचार्य से की और सीमा पाहवा ने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। अनुपम खेर बोले- 'छात्रों का प्रदर्शन सबसे ईमानदारएक्टर अनुपम खेर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर कर जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज पर दुख जताया। छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शैक्षणिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। अनुपम खेर ने कहा, छात्रों, प्रदर्शन के वीडियो देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। जब छात्र सिर्फ अपनी मांग रखना चाहते हैं, तो उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए। मैं भी कभी छात्र था और अधिकारियों से सवाल पूछता था। इसलिए आपकी बेचैनी, गुस्सा और भविष्य की उम्मीदों को अच्छे से समझता हूं। छात्र प्रदर्शन सबसे ईमानदार प्रदर्शन होता है, क्योंकि वे सिर्फ अपने भविष्य, अधिकार और देश के सुधार के लिए चिंतित होते हैं। मैं दिल से आपका समर्थन करता हूं। राजनीतिक हस्तक्षेप पर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, एक बड़े भाई के नाते कहना चाहता हूं कि जब आपके प्रदर्शन में बाहरी राजनीतिक दल शामिल होने लगते हैं, तो सावधान रहें। उनका मकसद आपका मुद्दा आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि अपना स्वार्थ पूरा करना होता है। शुरुआत में लगता है कि ज्यादा लोग आने से प्रदर्शन मजबूत होगा, लेकिन ये लोग आपकी आवाज का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए करने लगते हैं। बाद में मुद्दा आपका नहीं रहता, वे कैमरे और नारे अपने साथ ले जाते हैं। इससे आपकी सच्चाई को नुकसान पहुंचता है। अपना विरोध खुद का रखें, किसी को अपनी आवाज का गलत इस्तेमाल न करने दें। रत्ना शाह बोलीं- छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रहे'एक्टर नसीरुद्दीन शाह के समर्थन के बाद उनकी पत्नी और सीनियर एक्ट्रेस रत्ना पाठक शाह ने भी इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने महाभारत के एकलव्य प्रसंग का जिक्र करते हुए व्यवस्था पर निशाना साधा। रत्ना पाठक शाह ने कहा, मुझे हमेशा से एकलव्य की कहानी गलत लगती थी कि गुरु द्रोणाचार्य ने अंगूठा मांगकर उसका पूरा भविष्य दांव पर लगा दिया। अब समझ आ रहा है कि वे किस तरह के गुरु थे। हम विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, लेकिन अपने छात्रों से संवाद तक नहीं बना पा रहे। हम चाहते हैं कि छात्र अपना पूरा भविष्य इसलिए कुर्बान कर दें ताकि कुछ लोग अपनी राजनीतिक सत्ता बचा सकें? ये किस तरह के गुरु हैं? अपनी पीढ़ी की तरफ से माफी मांगते हुए उन्होंने कहा, हम देख रहे थे कि क्या गलत हो रहा है, लेकिन सही समय पर सही तरीके से उसे रोक नहीं पाए। इसलिए हमने आपको मार्गदर्शन देने का अधिकार खो दिया है। लेकिन हमारे पास आपका समर्थन करने का संकल्प है। हमें बुलाइए, हम आपके साथ हैं। सीमा पाहवा ने कहा- 'चूहों की तरह छिपे हैं बड़े स्टार्स'एक्ट्रेस सीमा पाहवा ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो शेयर कर इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों की चुप्पी पर नाराजगी जताई। उन्होंने सीजेपी (CJP) को टैग करते हुए कहा, मैं इन बच्चों, इनके परिवारों और देश के साथ हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे रुकेगा, क्योंकि इंसानियत खत्म हो चुकी है। इतने सारे लोग अब भी चुप हैं, यह बहुत शर्मनाक है। क्या आपको लगता है कि सरकार खिलाफ हो जाएगी तो काम या पद चला जाएगा? अपनी इंसानियत जगाइए। रोते, तड़पते और पिटते बच्चों को देखिए। क्या आप इसलिए घरों में दुबके हैं ताकि आपके अवॉर्ड्स न रुकें? क्या आप सब कायर हैं? शर्म आनी चाहिए! बाहर निकलिए और छात्रों का साथ दीजिए। सीमा पाहवा ने जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ सड़क पर उतरीं 75 वर्षीय सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, मैं उस महिला की बड़ी प्रशंसक बन गई हूं जो इस उम्र में वहां मार्च कर रही हैं। अगर मुझे अपनी व्यक्तिगत समस्या न होती, तो मैं भागकर जाती और बच्चों के साथ लाठीचार्ज झेलती। राजकुमार राव की अपील- 'बातचीत से निकलेगा समाधान'एक्टर राजकुमार राव ने भी सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए शांतिपूर्ण बातचीत पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, जब युवा महसूस करते हैं कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही, तो यह समाज के लिए याद दिलाने वाली बात है कि उसे सुनना चाहिए। हर आवाज को गरिमा, निष्पक्षता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। साथ ही, शांति ही हमारी सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए। हिंसा केवल जख्मों को गहरा करती है और समाधान से दूर ले जाती है। यह बातचीत और सहानुभूति का समय है। उन्होंने आगे कहा, छात्रों को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए और अधिकारियों को सहानुभूति व खुलेपन के साथ सुनना चाहिए। असली और स्थायी बदलाव टकराव से नहीं, बातचीत से आता है। हम सभी देश का विकास चाहते हैं और उसकी नींव निष्पक्ष शिक्षा है। क्या है जंतर-मंतर प्रदर्शन का पूरा मामलादेशभर में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के पेपर लीक होने की घटनाओं के बाद से छात्रों का आक्रोश बढ़ा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मुख्य मांग नीट परीक्षा में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में कड़े सुधार लागू करना है। सोमवार को संसद घेराव के लिए निकले छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसके बाद से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 4:30 am

हिट फिल्म के बाद भी 15 महीने बेरोजगार रहीं कृति:स्टारकिड्स ने छीने बड़े रोल, जिस किरदार पर सवाल उठे, उसी ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड

पहले रैंप शो के बाद मैं ऑटो में बैठकर पूरे रास्ते रोती रही थी... पहले फोटोशूट के बाद भी घर जाकर रोई थी। हिट फिल्म के बाद भी 15 महीने काम नहीं मिला। कई बार ऐसा हुआ कि जिस फिल्म के लिए ऑडिशन दिया, आखिर में वह किसी स्टार किड को मिल गई। कई-कई महीने तक कोई ऑडिशन नहीं आता था। मैं मां को दिन में दस-दस बार फोन करके रोती थी। आज कृति सेनन बॉलीवुड की सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उनके नाम नेशनल अवॉर्ड, कई सुपरहिट फिल्में और अपना प्रोडक्शन हाउस है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता रिजेक्शन, अकेलेपन, तानों और आत्मविश्वास की लड़ाई से होकर गुजरा है। यह कहानी उस लड़की की है, जिसने कभी एक्टिंग का सपना नहीं देखा था, लेकिन रास्ता चुना तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज की सक्सेस स्टोरी में कृति सेनन के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें। दिल्ली की इंजीनियरिंग स्टूडेंट, जिसने सपनों के दम पर बॉलीवुड तक का सफर तय किया कृति सेनन का जन्म 27 जुलाई 1990 को नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता राहुल सेनन चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जबकि मां गीता सेनन दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर रह चुकी हैं। उनकी छोटी बहन नूपुर सेनन भी अभिनय और सिंगिंग की दुनिया में सक्रिय हैं। कृति ने शुरुआती पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), आर.के. पुरम से की। इसके बाद जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। 'मैं पढ़ाई में अच्छी थी, फिल्मों में आने का कभी नहीं सोचा' कृति सेनन ने बॉलीवुड बबल को दिए इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहता था। वह पढ़ाई में अच्छी थीं, लेकिन बेहद शर्मीली भी थीं। वह कहती हैं,मुझे स्टेज पर जाने से भी डर लगता था। डांस करना पसंद था, लेकिन एक्टिंग, थिएटर या ड्रामा में मैंने कभी हिस्सा नहीं लिया। फिल्मों में आने का तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था। स्कूल के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू हुई। जिंदगी तय रास्ते पर चल रही थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यही लड़की आगे चलकर बॉलीवुड की बड़ी स्टार बनेगी। बी.टेक के दौरान एक सलाह ने बदल दी जिंदगी इंजीनियरिंग के दौरान एक दिन किसी ने कृति से कहा, तुम्हारी हाइट अच्छी है, मॉडलिंग क्यों नहीं ट्राय करती? पहली प्रतिक्रिया थी- नहीं... ये मेरे बस की बात नहीं। लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि कोशिश करने में नुकसान नहीं है। अगर कुछ नहीं हुआ, तो कम से कम कॉन्फिडेंस बढ़ जाएगा। यही फैसला उनकी जिंदगी का बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गया। बहन ने खींचीं तस्वीरें... और किस्मत ने नया दरवाजा खोल दिया कृति के पास प्रोफेशनल पोर्टफोलियो नहीं था। उनकी छोटी बहन नूपुर ने घर पर ही कुछ तस्वीरें खींचीं। आज उन तस्वीरों को देखकर कृति खुद हंस पड़ती हैं। वह कहती हैं, आज भी जब वो तस्वीरें देखती हूं तो हंसी आती है कि कितनी अजीब थीं। उन्होंने वही तस्वीरें एक वेबसाइट पर चल रहे फ्रेश फेस कॉन्टेस्ट में भेज दीं। इनाम था- मशहूर फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी से मुफ्त पोर्टफोलियो शूट। कृति को सिर्फ इतना पता था कि डब्बू रत्नानी से फोटोशूट महंगा होता है। फैशन और मॉडलिंग की दुनिया के बारे में उन्हें कुछ भी नहीं मालूम था। किस्मत ने साथ दिया...वह कॉन्टेस्ट जीत गईं। यहीं से मॉडलिंग का पहला कॉन्ट्रैक्ट मिला और फिल्मों तक जाने वाली राह खुली। पहला फोटोशूट... और घर जाकर फूट-फूटकर रोईं किसी नए इंसान के लिए कैमरे के सामने खड़ा होना आसान नहीं होता। कृति के लिए भी नहीं था। उन्हें नहीं पता था कि कैमरे की तरफ कैसे देखना है, हाथ कहां रखने हैं और एक्सप्रेशन कैसे देने हैं। शूट के दौरान फोटोग्राफर ने मुस्कुराते हुए सिर्फ इतना कहा,ये तुम्हारा पहला फोटोशूट है ना? बात सामान्य थी, लेकिन कृति को लगा कि शायद वह खराब काम कर रही हैं। शूट खत्म हुआ… वह सीधे घर पहुंचीं और रो पड़ीं। आज भी कृति मानती हैं कि अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने 100 प्रतिशत नहीं दिया, तो यह बात उन्हें लंबे समय तक परेशान करती है। पहले रैंप शो में सबके सामने डांट पड़ी... ऑटो में बैठकर रोती रहीं अगर फोटोशूट मुश्किल था, तो पहला रैंप शो उससे भी कठिन साबित हुआ। नर्वसनेस के कारण रैंप पर कोरियोग्राफी में गलती हो गई। शो खत्म हुआ तो कोरियोग्राफर ने करीब 50 मॉडल्स के सामने उन्हें डांट दिया। कृति कुछ नहीं बोलीं। चुपचाप बाहर निकलीं...एक ऑटो में बैठीं...और पूरे रास्ते रोती रहीं। घर पहुंचकर भी काफी देर तक उनके आंसू नहीं रुके। मां ने उन्हें समझाते हुए कहा, मुझे नहीं लगता कि यह दुनिया तुम्हारे लिए बनी है। यहां टिकना है तो बहुत मजबूत बनना पड़ेगा। लोगों की बातें सुनकर टूटोगी तो आगे नहीं बढ़ पाओगी। शायद यही वह दिन था, जब कृति ने तय किया कि अब रोना बंद... सीखना शुरू। हार मानना कभी नहीं सीखा कृति मानती हैं कि उनके अंदर यह आदत हमेशा से रही है। अगर वह गिरती हैं, तो दोबारा उठकर कोशिश करती हैं। वह कहती हैं, मैं आसानी से हार नहीं मानती। शायद यही वजह है कि हर बार गिरने के बाद मैंने खुद को एक और मौका दिया। धीरे-धीरे मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया। यही जिद आगे चलकर उन्हें मॉडल से अभिनेत्री और फिर नेशनल अवॉर्ड विजेता कलाकार बनाने वाली थी। मुंबई में अकेली रहने लगीं, GMAT की तैयारी भी करती थीं... परिवार ने कहा- पहले सपना पूरा करो पहले रैंप शो की डांट और शुरुआती असफलताओं के बाद कृति सेनन ने हार नहीं मानी। मॉडलिंग आगे बढ़ रही थी, लेकिन फिल्मों का रास्ता अभी भी धुंधला था। इसी बीच उन्होंने मुंबई आने का फैसला किया। यह आसान नहीं था, क्योंकि वह कभी घर से दूर नहीं रही थीं। 'मैं कभी हॉस्टल में नहीं रही थी' कृति बताती हैं, मैं हमेशा अपने परिवार के साथ रही थी। घर में हर सुविधा थी। कॉलेज तक कार चलाना सीख लिया था, लेकिन कभी अकेले रहने की नौबत नहीं आई थी। मुंबई आने के शुरुआती पांच-छह महीने आसान रहे, क्योंकि उस समय उनके पिता की पोस्टिंग भी मुंबई में थी। लेकिन उसके बाद... पापा वापस चले गए और पहली बार कृति पूरी तरह अकेली रह गईं। किराए का घर... कामवाली... खाना... सारी जिम्मेदारी खुद संभाली जिंदगी बदल चुकी थी। किराए का घर लेना, खर्च संभालना, खाना बनवाना, कामवाली का इंतजाम करना... हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। इसके साथ ही वह फिल्मों के लिए ऑडिशन दे रही थीं। इसी दौरान वह GMAT की तैयारी भी कर रही थीं। घरवालों ने उनके लिए प्लान-बी भी तैयार रखा था। अगर एक्टिंग में बात नहीं बनी, तो आगे की पढ़ाई करके दूसरा करियर बनाया जा सकता था। लेकिन कृति के मन में अब सिर्फ एक सपना था। फिल्म इंडस्ट्री के बारे में कुछ नहीं जानती थीं मुंबई पहुंचकर उन्हें सबसे ज्यादा अनजान दुनिया ने परेशान किया। कृति कहती हैं, मुझे समझ ही नहीं आता था कि शुरुआत कहां से करूं। किससे मिलूं, किस प्रोडक्शन हाउस में जाऊं, कौन-सी फिल्म करनी चाहिए और कौन-सी नहीं। मुझे कुछ भी नहीं पता था। वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं थीं। उनके लिए बॉलीवुड सिर्फ पर्दे की चमक थी। पर्दे के पीछे की दुनिया बिल्कुल नई थी। 'मैं सिर्फ शाहरुख, माधुरी और ऋतिक की फैन थी' कृति बताती हैं कि उन्हें फिल्मों से प्यार था। वह माधुरी दीक्षित, शाहरुख खान और ऋतिक रोशन की बड़ी फैन थीं। लेकिन वह मानती हैं कि फैन होना और इंडस्ट्री को समझना अलग बातें हैं। उन्हें यह भी नहीं पता था कि करियर कैसे बनाया जाता है, किससे मिलना चाहिए और कौन सही सलाह देगा। एजेंसी बनी सबसे बड़ी ताकत कृति मानती हैं कि शुरुआती दिनों में उनकी मॉडलिंग एजेंसी ने उनका काफी साथ दिया। उन्हें समझाया गया कि कब ऑडिशन देना चाहिए, कब किसी रोल के लिए इंतजार करना चाहिए और कब किसी फिल्म को छोड़ना चाहिए। नए कलाकार के लिए सही सलाह बड़ी ताकत होती है। कृति को यह सहारा मिल गया था। मां ने कहा- 'सपनों को मत रोकना' कृति की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत रहा। वह बताती हैं कि उनकी मां अपनी जिंदगी में बहुत कुछ करना चाहती थीं। गाना सीखना... तैरना सीखना... और भी कई सपने... लेकिन उन्हें उतनी आजादी नहीं मिली। शायद यही वजह थी कि उन्होंने अपनी बेटी से हमेशा कहा,जो करना चाहती हो, अभी कर लो। सपनों को कभी मत रोकना। वरना बाद में सिर्फ पछतावा रह जाएगा। यही बात कृति के दिल में बस गई। पापा का भरोसा नहीं होता, तो शायद यह फैसला कभी नहीं ले पाती कृति मानती हैं कि परिवार का साथ नहीं होता तो वह शायद कभी फिल्मों में आने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं। वह कहती हैं, अगर उस समय पापा का भरोसा मेरे साथ नहीं होता, तो शायद मैं इतना बड़ा फैसला कभी नहीं ले पाती। हर स्ट्रगल करने वाले कलाकार को ऐसा परिवार नहीं मिलता। कृति मानती हैं कि यह उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। दोस्त ने कहा- फिल्मों में गई तो शादी नहीं होगी सपनों के रास्ते में सिर्फ संघर्ष नहीं आया...लोगों की सोच भी सामने आई। कृति बताती हैं कि उनके एक दोस्त ने उनसे कहा था,अगर तुम मॉडलिंग या फिल्मों में गई, तो बाद में शादी करने में दिक्कत होगी। यह सुनकर उन्हें हैरानी हुई। उन्हें लगा कि उनकी ही पीढ़ी के लोग आज भी इतनी पुरानी सोच रखते हैं। लेकिन उन्होंने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। उनके लिए उस समय शादी नहीं...सपना ज्यादा जरूरी था। एक बात ने जिंदगी बदल दी कृति कहती हैं, मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने कोशिश ही नहीं की, तो पूरी जिंदगी यही सोचती रहूंगी कि शायद मैं कर सकती थी। यही सोच उन्हें हर मुश्किल के बाद आगे बढ़ाती रही। उन्हें मंजिल नहीं दिख रही थी...लेकिन भरोसा था कि चलते रहे, तो रास्ता जरूर मिलेगा। स्टार किड्स ले गए फिल्में, महीनों तक नहीं मिला एक भी ऑडिशन मुंबई आकर कृति सेनन ने सोचा था कि मेहनत करेंगी और धीरे-धीरे रास्ता बन जाएगा। लेकिन जल्द ही समझ आ गया कि बॉलीवुड में सिर्फ टैलेंट काफी नहीं होता, खासकर तब जब फिल्मी बैकग्राउंड न हो। हर दिन उम्मीद से शुरू होता था...और कई दिन निराशा के साथ खत्म हो जाते थे। कृति बताती हैं कि कई फिल्मों के लिए उन्होंने ऑडिशन दिए। फिल्म में नए चेहरे की तलाश थी। उन्हें बुलाया गया...उन्होंने तैयारी की...ऑडिशन दिया...उम्मीद भी जगी...लेकिन आखिर में रोल किसी स्टार किड या स्थापित कलाकार को मिल गया। कृति कहती हैं, उस समय मन में यही सवाल आता था कि अगर लेना ही नहीं था, तो फिर ऑडिशन क्यों कराया? हर बार उम्मीद टूटती थी, लेकिन अगली सुबह फिर नए ऑडिशन की तैयारी शुरू हो जाती थी। महीने गुजर जाते थे, कोई ऑडिशन नहीं आता था रिजेक्शन से ज्यादा मुश्किल था... इंतजार। कई-कई महीने गुजर जाते थे, जब कोई ऑडिशन नहीं आता था। फोन नहीं बजता था। कोई कॉल नहीं... कोई मीटिंग नहीं... कोई उम्मीद नहीं... नए कलाकार के लिए यही सबसे कठिन दौर होता है। कृति कहती हैं कि उस समय लगता था जैसे जिंदगी रुक गई हो, क्योंकि इंडस्ट्री में कोई उन्हें जानता तक नहीं था। 'मैं मां को दिन में 10-10 बार फोन करती थी' अकेलापन धीरे-धीरे मानसिक दबाव में बदलने लगा। भविष्य की चिंता... काम न मिलने का डर... और परिवार से दूर रहने के दर्द के बीच उनकी सबसे बड़ी ताकत थीं- उनकी मां। कृति उस दौर को याद कर इमोशनल हो जाती हैं। वह करती हैं, मैं मां को दिन में दस-दस बार फोन करती थी। कई बार सिर्फ रोती रहती थी। समझ नहीं आता था कि आगे क्या होगा। हर बार मां उन्हें एक ही बात कहतीं- धैर्य रखो... मेहनत करती रहो... सही समय जरूर आएगा। यही भरोसा उन्हें टूटने नहीं देता था। आउटसाइडर होना सबसे बड़ी चुनौती था कृति मानती हैं कि किसी फिल्मी परिवार से न होना अपने आप में संघर्ष है। वह कहती हैं, आज किसी स्टार किड की पहली फिल्म आती है, तो लोग पहले से उसे जानते हैं। मीडिया में चर्चा होती है। लेकिन जब कोई बिल्कुल नया लड़का या लड़की आता है, तो लोगों को पता भी नहीं चलता कि उसकी फिल्म कब रिलीज हुई। यही वजह थी कि उन्हें हर फिल्म, हर ऑडिशन और हर किरदार के लिए खुद को बार-बार साबित करना पड़ता था। 'मॉडल्स एक्टिंग नहीं कर सकतीं' संघर्ष सिर्फ रोल पाने का नहीं था। लोगों ने उन्हें लेकर पहले से राय बना ली थी। कई लोगों का मानना था कि मॉडल सिर्फ दिखने में अच्छी होती हैं, वे अभिनय नहीं कर सकतीं। कृति को अक्सर सिर्फ 'खूबसूरत चेहरा' समझा जाता था। उन्हें लगता था कि लोग उनकी मेहनत नहीं, सिर्फ उनका लुक देख रहे हैं। 'बरेली की बर्फी' के लिए भी लोगों को भरोसा नहीं था जब अश्विनी अय्यर तिवारी की फिल्म 'बरेली की बर्फी' का ऑफर मिला, तब भी कई लोगों ने सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि कृति छोटे शहर की साधारण लड़की का किरदार नहीं निभा पाएंगी। लेकिन कृति ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने किरदार को समझा, उसकी भाषा सीखी, उसका व्यवहार अपनाया। फिल्म रिलीज हुई, तो वही किरदार उनके करियर का बड़ा मोड़ बन गया। 'बिट्टी मिश्रा' के रूप में कृति ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ ग्लैमरस रोल निभाने वाली अभिनेत्री नहीं हैं। 'पानीपत' में कहा गया- मराठी लड़की जैसी नहीं लगती 'बरेली की बर्फी' के बाद भी सवाल खत्म नहीं हुए। फिल्म 'पानीपत' के दौरान लोगों ने कहा- कृति मराठी लड़की जैसी नहीं लगतीं। शुरुआत में यह डर खुद कृति के मन में भी था। वह सोचती थीं कि पता नहीं इस किरदार में कैसी लगेंगी। लेकिन जैसे ही उन्होंने कॉस्ट्यूम पहना, मेकअप किया और किरदार में उतरना शुरू किया, सारा डर गायब हो गया। उन्हें एहसास हुआ कि कलाकार की असली पहचान उसका अभिनय होता है, सिर्फ चेहरा नहीं। कृति की सबसे बड़ी सीख लगातार रिजेक्शन, आलोचना और इंतजार ने उन्हें एक बात सिखाई- दूसरों की राय आपकी पहचान तय नहीं कर सकती। उन्होंने हर 'नहीं' को अगली 'हां' की तैयारी बना लिया। यही सोच आगे चलकर उन्हें उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म तक ले गई। 'मिमी' करने से लोगों ने रोका, लेकिन उसी फिल्म ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड 'बरेली की बर्फी' के बाद कृति सेनन ने साबित कर दिया था कि वह सिर्फ ग्लैमरस रोल निभाने वाली अभिनेत्री नहीं हैं। फिर भी उन्हें लगता था कि इंडस्ट्री उन्हें पूरी तरह कलाकार के रूप में स्वीकार नहीं कर रही। उन्हें ऐसे किरदारों का इंतजार था, जो उनके अभिनय की असली परीक्षा लें। यह इंतजार फिल्म 'मिमी' के साथ खत्म हुआ। 'इतनी जल्दी मां का रोल मत करो' जब कृति के पास 'मिमी' की स्क्रिप्ट आई, तो कई लोगों ने सलाह दी कि इतनी कम उम्र में मां का किरदार निभाना सही फैसला नहीं होगा। लोगों का मानना था कि इससे उनकी ग्लैमरस इमेज प्रभावित होगी और करियर पर असर पड़ सकता है। लेकिन कृति ने वही किया, जो हमेशा करती आई थीं। उन्होंने लोगों की नहीं, कहानी की सुनी। कृति कहती हैं, मेरे लिए सबसे जरूरी कहानी थी। मुझे उस किरदार का सफर बहुत खूबसूरत लगा। अगर कहानी दिल को छू रही है, तो बाकी बातें मायने नहीं रखतीं। मुझे वह फैसला कभी जोखिम नहीं लगा। किरदार के लिए बढ़ाया वजन, खुद को पूरी तरह बदल दिया 'मिमी' सिर्फ एक फिल्म नहीं थी। यह कृति के करियर की सबसे बड़ी चुनौती थी। सरोगेट मां के किरदार को पर्दे पर सच्चाई के साथ उतारने के लिए उन्होंने वजन बढ़ाया, लुक बदला और किरदार की भावनाओं को समझने में महीनों लगाए। जब फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शकों के साथ समीक्षकों ने भी उनके अभिनय की जमकर तारीफ की। जिस अभिनेत्री को कभी सिर्फ 'खूबसूरत चेहरा' कहा जाता था, वही अब अभिनय के लिए सराही जा रही थी। नेशनल अवॉर्ड ने बदल दी पहचान 'मिमी' के लिए कृति सेनन को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) मिला। यह सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं था। यह उन तमाम रिजेक्शन, इंतजार, तानों और संघर्षों का जवाब था, जिनसे वह वर्षों तक गुजरी थीं। जिस लड़की को कभी कहा गया था कि मॉडल एक्टिंग नहीं कर सकती... उसी ने देश का सबसे बड़ा अभिनय सम्मान जीत लिया। आज भी मानती हैं- रिजेक्शन जरूरी थे आज जब कृति अपने संघर्ष के दिनों को याद करती हैं, तो उन्हें किसी से शिकायत नहीं होती। वह मानती हैं कि अगर शुरुआत में उन्हें इतनी असफलताएं नहीं मिली होतीं, तो शायद वह इतनी मजबूत कलाकार नहीं बन पातीं। उनके शब्दों में, अगर मुझे शुरुआत में इतने रिजेक्शन नहीं मिले होते, तो शायद मैं आज की कृति सेनन नहीं होती। हर रिजेक्शन ने मुझे कुछ नया सिखाया और बेहतर बनने के लिए मजबूर किया। हर किरदार के साथ तोड़ा एक नया स्टीरियोटाइप 'बरेली की बर्फी' में छोटे शहर की लड़की... 'पानीपत' में ऐतिहासिक किरदार... 'मिमी' में सरोगेट मां... 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' में रोबोट... और 'दो पत्ती' में अभिनेत्री के साथ निर्माता... कृति ने हर बार नया जोखिम उठाया। शायद यही वजह है कि आज उन्हें सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि भरोसेमंद अभिनेत्री माना जाता है। ___________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... 20-25 ऑडिशन में रिजेक्ट हुईं रश्मिका मंदाना:कहा गया- एक्ट्रेस जैसा चेहरा नहीं; घर जाकर रोती थीं, फिर बनीं पैन इंडिया स्टार आज रश्मिका मंदाना देश की बड़ी अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। 'पुष्पा', 'एनिमल' और 'छावा' जैसी फिल्मों से उन्होंने पैन इंडिया स्टार का दर्जा हासिल किया। लेकिन करियर की शुरुआत में उन्हें लगातार रिजेक्शन झेलने पड़े। उन्होंने करीब 20-25 ऑडिशन दिए, जिनमें ज्यादातर में यह कहकर रिजेक्ट कर दिया गया कि उनका चेहरा एक्ट्रेस जैसा नहीं है।पूरी खबर पढ़ें..

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 4:30 am

'धुरंधर' एक्ट्रेस आयशा खान को पुलिस ने पकड़ा:4 पुलिसकर्मियों ने खींचकर वैन में बिठाया; बोलीं- न नारेबाजी की, न भीड़ का हिस्सा थी, फिर क्यों पकड़ा?

फिल्म 'धुरंधर' की एक्ट्रेस आयशा खान को मुंबई पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आयशा का दावा है कि वे सड़क पर शांति से खड़ी थीं और उन्होंने कोई प्रदर्शन नहीं किया था। इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई वीडियो शेयर कर आयशा ने बताया कि वे पुलिस वैन में हैं और उनके हाथ कांप रहे हैं। आयशा के मुताबिक, पुलिस ने पहले उनके भाई और दोस्तों को हिरासत में लिया था, जिसके बाद वे सड़क पर खड़ी थीं। मुंबई पुलिस की ओर से इस पूरे मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वीडियो शेयर कर जताई नाराजगीआयशा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई वीडियो शेयर कर पूरी घटना की जानकारी दी। एक वीडियो में उन्होंने कहा, इस वक्त मेरे हाथ कांप रहे हैं। मुझे सिर्फ सड़क पर शांति से खड़े रहने की वजह से पुलिस वैन में बिठा लिया गया। मैंने तो कोई प्रोटेस्ट शुरू भी नहीं किया था। मेरे भाई और दोस्तों को पुलिस ने हिरासत में लिया था, इसलिए मैं सिर्फ सड़क पर खड़ी थी। आयशा ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने कोई हंगामा या बातचीत भी नहीं की, तो उन्हें किस आधार पर पकड़ा गया। 4 महिला पुलिसकर्मियों ने खींचकर वैन में बिठायाआयशा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन पर ट्रैफिक बाधित करने का आरोप भी नहीं लग सकता, क्योंकि वे पांच लोगों के ग्रुप का हिस्सा भी नहीं थीं। उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें चार महिला पुलिसकर्मी उन्हें खींचकर वैन के अंदर ले जाती दिख रही हैं। इस वीडियो के कैप्शन में आयशा ने लिखा, मुझे अंदर खींचने के लिए चार महिला पुलिसकर्मियों को लगना पड़ा। लेकिन मेरा सवाल वही है कि आखिर क्यों? आयशा ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है, तो कोई जवाब नहीं दिया गया। वैन में मौजूद छात्र बोले- प्रैक्टिकल एग्जाम छूट जाएगाआयशा की ओर से शेयर किए गए वीडियो में पुलिस वैन में बैठे कुछ अन्य छात्र भी नजर आ रहे हैं। वैन में मौजूद एक छात्र ने कहा कि उसे बिना किसी वजह के पकड़ा गया है। छात्र ने चिंता जताते हुए कहा कि उसका मैथ्स का प्रैक्टिकल एग्जाम है और अगर वह छूट गया तो उसके लिए बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। आयशा ने इन वीडियो के जरिए छात्रों के साथ हुई इस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। 'धुरंधर' फिल्म से मिली पहचानआयशा खान हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'धुरंधर' में नजर आई थीं। इससे पहले वे टीवी रियलिटी शोज और कुछ म्यूजिक वीडियोज में भी काम कर चुकी हैं। इस पूरी घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैंस और यूजर्स लगातार मुंबई पुलिस से जवाब मांग रहे हैं। हालांकि, आयशा खान के आरोपों और उन्हें हिरासत में लिए जाने की वजह को लेकर मुंबई पुलिस ने अब तक कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 7:04 pm

अश्नीर ग्रोवर की बायोपिक से अलग हुए आमिर खान:क्रिएटिव डिफरेंस के बाद छोड़ा प्रोजेक्ट; श्रद्धा कपूर हैं फिल्म की प्रोड्यूसर

बॉलीवुड एक्टर आमिर खान भारतपे के पूर्व को-फाउंडर और बिजनेसमैन अश्नीर ग्रोवर की बायोपिक से बाहर हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के डायरेक्टर राहुल मोदी के साथ क्रिएटिव डिफरेंस की वजह से आमिर ने इस प्रोजेक्ट को छोड़ने का फैसला किया है। पहले खबर थी कि आमिर इस फिल्म में अश्नीर ग्रोवर का किरदार निभाने वाले थे और उनके साथ श्रद्धा कपूर मुख्य भूमिका में थीं। आमिर के फिल्म छोड़ने के बावजूद मेकर्स इस प्रोजेक्ट पर काम जारी रखेंगे। अब श्रद्धा कपूर और राहुल मोदी अश्नीर के रोल के लिए किसी युवा एक्टर की तलाश कर रहे हैं। क्रिएटिव डिफरेंस की वजह से अलग हुए आमिर आमिर खान को स्टार्टअप्स की दुनिया काफी पसंद है। वे अश्नीर ग्रोवर की बायोपिक को लेकर काफी उत्सुक थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने खुद फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम किया था और इसे अपने हिसाब से तैयार करने की कोशिश की। हालांकि, स्क्रिप्ट और फिल्म के डायरेक्शन को लेकर डायरेक्टर राहुल मोदी और आमिर के विचार अलग थे। लगातार बातचीत के बाद भी जब सहमति नहीं बनी, तो आमिर ने खुद को इस प्रोजेक्ट से अलग कर लिया। मेकर्स को नए यंग एक्टर की तलाश आमिर खान के हटने के बाद भी बायोपिक पर काम बंद नहीं हुआ है। डायरेक्टर राहुल मोदी और एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर फिल्म को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब मेकर्स अश्नीर ग्रोवर के रोल के लिए किसी युवा एक्टर की तलाश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मेकर्स की इंडस्ट्री के दो से तीन बड़े युवा एक्टर्स से बात चल रही है और जल्द ही मुख्य किरदार के नाम पर मुहर लग सकती है। फिल्म में एक्टिंग के साथ प्रोडक्शन भी संभालेंगी श्रद्धाइस बायोपिक में श्रद्धा कपूर अहम भूमिका में नजर आएंगी। वे फिल्म में अश्नीर ग्रोवर की पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर का किरदार निभा सकती हैं। इसके साथ ही श्रद्धा कपूर एक बड़े स्टूडियो के साथ मिलकर इस फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रही हैं। एक्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर यह फिल्म श्रद्धा के करियर का बड़ा प्रोजेक्ट मानी जा रही है। मार्च 2027 में शुरू होने वाली थी फिल्म की शूटिंगशुरुआती योजना के मुताबिक, इस फिल्म की शूटिंग मार्च 2027 में शुरू होनी थी। आमिर खान निर्देशक आशुतोष गोवारिकर के साथ अपनी पीरियड ड्रामा फिल्म की शूटिंग पूरी करने के बाद इस बायोपिक का काम शुरू करने वाले थे। हालांकि, अब कास्टिंग में बदलाव होने के बाद शूटिंग शेड्यूल पर भी असर पड़ सकता है। कौन हैं अश्नीर ग्रोवर?अश्नीर ग्रोवर देश के जाने-माने बिजनेसमैन और भारतपे के पूर्व को-फाउंडर हैं। दिल्ली के मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे अश्नीर ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई की है। साल 2018 में उन्होंने भारतपे की शुरुआत की, जिसने छोटे दुकानदारों के लिए सिंगल क्यूआर कोड से पेमेंट आसान बनाया। साल 2021 में रियलिटी शो 'शार्क टैंक इंडिया' के पहले सीजन में बतौर जज नजर आने के बाद वे घर-घर में लोकप्रिय हो गए। अपनी बेबाक शैली, किताब 'दोगलापन' और बाद में भारतपे से विवादित विदाई को लेकर भी वे लगातार सुर्खियों में रहे।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 4:03 pm

मूवी रिव्यू: मैक्स, मिन एंड म्याऊजाकी:रिश्तों, अकेलेपन और हीलिंग की संवेदनशील कहानी, लेकिन लंबी लेंथ और धीमी रफ्तार दर्शकों की सब्र की परीक्षा लेती है

निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति की 'मैक्स, मिन एंड म्याऊजाकी' परिवार, रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक हीलिंग पर आधारित धीमी रफ्तार लेकिन दिल छू लेने वाली कहानी पेश करती है। फिल्म में हायाओ म्याऊजाकी की फिल्मों की गर्मजोशी और बिल्लियों के प्रति प्रेम की झलक महसूस होती है। इसकी लेंथ 2 घंटे 18 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की शुरुआत मैक्स (सिद्धार्थ मेनन) और उसकी गर्लफ्रेंड मिन (मेधा शंकर) के ब्रेकअप से होती है। कभी दोनों को हायाओ मियाजाकी की फिल्में जोड़ती थीं, लेकिन अब उनका रिश्ता खत्म हो चुका है। अब उनके बीच सिर्फ उनकी पालतू बिल्ली म्याऊजाकी का रिश्ता बचा है। मिन कुछ समय के लिए बिल्ली को मैक्स के पास छोड़ देती है। जानवरों के बालों से एलर्जी के कारण मैक्स उसे रखने के लिए तैयार नहीं होता। धीरे-धीरे यही बिल्ली दोनों की जिंदगी में फिर से भावनात्मक जुड़ाव की वजह बनती है। यह सिर्फ ब्रेकअप की कहानी नहीं है। मैक्स मां वसुधा की कैंसर से हुई मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर पिता रमेश पत्नी के जाने के बाद अकेलेपन, अपराधबोध और अंदरूनी संघर्ष से जूझ रहे हैं। कहानी तीन पीढ़ियों की भावनात्मक उलझनों को जोड़ती है। मैक्स के दादा श्रीधर महादेवन नर्सिंग होम में जीवन को नए नजरिए से देखते हैं। जेनिफर सेक्वेरा और कैरोल जैसे किरदार दिखाते हैं कि उम्र चाहे कोई भी हो, इंसान को अपनापन और प्यार की जरूरत हमेशा रहती है। फिल्म रिश्तों के टूटने, माता-पिता और बच्चों की बढ़ती दूरियों, मानसिक स्वास्थ्य, थेरेपी, अकेलेपन, इस्लामोफोबिया, लैंगिक भूमिकाओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों जैसे कई सामाजिक मुद्दों को बिना भाषण दिए स्वाभाविक ढंग से कहानी में पिरोती है। हालांकि कई सब-प्लॉट के कारण फिल्म कुछ जगहों पर बिखरी हुई और जरूरत से ज्यादा लंबी महसूस होती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? सिद्धार्थ मेनन ने मैक्स के किरदार में टूटे इंसान की भावनाओं को ईमानदारी से निभाया है। मां की मौत और रिश्ते के खत्म होने के बाद की उथल-पुथल को वह प्रभावी ढंग से स्क्रीन पर लाते हैं। मेधा शंकर ने मिन के किरदार में संयमित अभिनय किया है। ज्यादा ड्रामेटिक दृश्य नहीं होने के बावजूद वह किरदार को सहज बनाए रखती हैं। फिल्म की सबसे मजबूत परफॉर्मेंस आदिल हुसैन की है। रमेश महादेवन के रूप में उन्होंने अपराधबोध, अकेलेपन और आत्मस्वीकृति के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से निभाया है। खासकर थेरेपी वाले दृश्य और बेटे मैक्स के साथ उनके भावुक संवाद याद रहते हैं। नासर ने श्रीधर महादेवन का किरदार निभाया है। वह सीमित स्क्रीन टाइम में भी असर छोड़ते हैं। उनकी मौजूदगी फिल्म में अनुभव और भावनात्मक गहराई जोड़ती है। नफीसा अली जेनिफर सेक्वेरा के रूप में गरिमा और संवेदनशीलता लेकर आती हैं। विदात्री बंदी कैरोल के किरदार में सहजता और जीवन से थकी लेकिन सकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित करती हैं। मंदिरा बेदी धारा के किरदार में कहानी को संतुलन देती हैं। हालांकि उनका रोल छोटा है, लेकिन वह प्रभाव छोड़ती हैं। डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष कैसा है? निर्देशक पद्मकुमार नरसिम्हामूर्ति ने भावनात्मक विषयों को संवेदनशीलता से पेश किया है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके किरदार हैं, जिन्हें पर्याप्त समय मिला है। हालांकि इसी वजह से फिल्म कई जगह जरूरत से ज्यादा फैली हुई महसूस होती है। सिनेमैटोग्राफी साधारण लेकिन प्रभावी है। कैमरा पात्रों की भावनाओं पर फोकस करता है। प्रोडक्शन डिजाइन मजबूत है। मैक्स का आधुनिक अपार्टमेंट, स्टूडियो घिबली के पोस्टर और कैरोल का बोहेमियन घर किरदारों की मानसिक दुनिया को दर्शाते हैं। कॉस्ट्यूम डिजाइन किरदारों के व्यक्तित्व के अनुरूप है और छोटे-छोटे विजुअल डिटेल्स फिल्म को वास्तविक बनाते हैं। म्यूजिक कैसा है? फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर शांत और भावनात्मक है। संगीत कहानी पर हावी होने की बजाय उसका मूड बेहतर बनाता है। कहीं भी जरूरत से ज्यादा शोर या मेलोड्रामा नहीं है। हालांकि कोई गाना लंबे समय तक याद नहीं रह जाता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी 2 घंटे 18 मिनट की लंबी अवधि है। कई दृश्य और सब-प्लॉट छोटे किए जा सकते थे। कुछ जगहों पर भावुक संवाद लंबे लगते हैं और फिल्म की गति धीमी पड़ जाती है। कुछ कलाकारों का अभिनय निर्देशक की सोच के अनुरूप पूरा प्रभाव नहीं छोड़ पाता। कई गंभीर विषयों को एक साथ शामिल करने से कहानी कुछ हिस्सों में बिखरी हुई लगती है। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? अगर आपको तेज रफ्तार मसाला फिल्में पसंद हैं तो 'मैक्स, मिन एंड म्याऊजाकी' धीमी लग सकती है। लेकिन रिश्तों, परिवार, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक हीलिंग पर आधारित संवेदनशील कहानियां पसंद हैं तो यह फिल्म पसंद आ सकती है। यह फिल्म मनोरंजन से ज्यादा इंसानी भावनाओं को समझने और महसूस करने का अनुभव देती है। लंबी लेंथ इसकी कमजोरी है, लेकिन ईमानदार कहानी और आदिल हुसैन का दमदार अभिनय इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 3:15 pm

CJP के प्रदर्शन में पिटे टीवी एक्टर सेहबान:कहा- हाथ सूज गया है, पुलिस ने कई लाठियां मारीं; 2 लड़कियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे

बेपनाह, दिल मिल गए और तुझसे है राब्ता जैसे पॉपुलर टीवी शोज में नजर आ चुके एक्टर सेहबान अजीम लाठीचार्ज में घायल हो गए। एक्टर 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में जंतर मंतर पहुंचे थे, जहां दो लड़कियों को लाठीचार्ज से बचाते हुए एक्टर के हाथ और शरीर के कई हिस्सों पर लाठी पड़ गई। एक्टर ने दावा है कि पुलिस जानबूझ कर लाठियां चला रही थी। मिड डे को दिए इंटरव्यू में एक्टर सेहबान ने कहा, वह मंजर बेहद दिल तोड़ देने वाला था। मैं छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने गया था। मेरी मुंबई से आई दो महिला दोस्त भी वहां मौजूद थीं। उन्हें लाठीचार्ज से बचाने की कोशिश में मुझे चोट लग गई। मेरा हाथ सूज गया है। पुलिस ने मेरे हाथ, पैरों और शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी कई बार लाठियां मारीं। आगे एक्टर ने कहा, हम जंतर-मंतर के अंदर तक भी नहीं पहुंच पाए, जहां असल में प्रदर्शन हो रहा था। पुलिस ने चारों तरफ बैरिकेडिंग कर रखी थी। हमें बीच में घेर लिया और फिर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि वे किस पर लाठी चला रहे हैं। वहां बच्चे थे, महिलाएं थीं, लेकिन किसी को नहीं बख्शा गया। आगे अभिनेता ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सुनियोजित लग रही थी और उसका मकसद बलपूर्वक भीड़ को वहां से हटाना था। उन्होंने कहा, मुझे लगा कि यह लाठीचार्ज जानबूझकर किया गया था। वे बस चाहते थे कि हम सभी वहां से चले जाएं। मेरा दिल उन बच्चों के लिए दुखता है, जो इस प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। कई छात्र ट्रेन और बसों से कई दिनों का सफर तय करके पहुंचे थे। सेहबान ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल कई लोग घायल हुए। उन्होंने कहा, पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से पीटा। कई लोगों के शरीर से खून बह रहा था। ये युवा छात्र वहीं डटे रहे और उन्होंने यह सारी मार झेली। सेहबान अजीम के साथ प्रोटेस्ट में शामिल हुईं दोस्तों ने उनके वीडियो भी पोस्ट किए हैं, जिसमें वो लगातार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। पोस्ट में उनकी दोस्त ने लिखा है कि लाठीचार्ज के समय एक्टर अपनी दो दोस्तों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। इन टीवी शोज में नजर आए सेहबान अजीम सेहबान अजीम, दिल मिल गए, एक हजारों में मेरी बहना है, हमसफर्स, थपकी प्यार की, बेपनाह और तुझसे है राब्ता जैसे शोज का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा वो टाइम्स मोस्ट डिजायरेबल मैन की लिस्ट में लगातार तीन सालों तक शामिल हुए हैं। सेहबान को आखिरी बार स्पाय बहू टीवी शो में देखा गया था। शबाना आजमी प्रोटेस्ट में पहुंचीं, अस्थमा अटैक आया 20 जुलाई को सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी, प्रकाश राज जैसे बड़े चेहरे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे। इस दौरान शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई। अब एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से उन्हें अस्थमा अटैक आया। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, लेकिन उनका पंप उनके पास था। पास की बिल्डिंग में ले जाकर उन्हें शुरुआत उपचार दिया गया। कुछ देर बाद तबीयत ठीक होने पर उन्होंने दोबारा प्रोटेस्ट जॉइन किया। बाकी कलाकारों के शामिल न होने पर शबाना का जवाबबॉलीवुड सेलिब्रिटीज के न आने पर सवाल पूछा गया, तो शबाना ने कहा कि लोग सिर्फ फिल्मी सितारों की अनुपस्थिति पर बात करते हैं। कोई भी बड़े बिजनेसमैन या उद्योगपतियों के शामिल न होने पर सवाल नहीं उठाता। ऐसे सवाल पूछकर मुख्य मुद्दे को भटकाया जाता है और गैर-जरूरी विवाद खड़ा किया जाता है। दिलजीत दोसांझ बोले- छात्रों के साथ गलत हुआ दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, आज जो हुआ, बहुत गलत हुआ। छात्रों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे छात्रों की मांगें सुनें। लोगों की आवाज ही भगवान की आवाज होती है। मुझे पहले भी कई बार 'एंटी-नेशनल' कहा गया है। अब भी शायद मुझे यही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं खुलकर बात भी नहीं कर सकता। बाकी सब भगवान देख रहे हैं। भगवान सबका भला करें। कंगना ने आंदोलन को बताया दबाव बनाने की कोशिशसोमवार को कंगना रनोट ने कहा था कि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए संसद सही जगह है, न कि सड़कें। उन्होंने कहा कि जनता ने एक सरकार चुनी है और सरकार चलाने का फैसला उसी का होना चाहिए। कंगना ने कहा की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। प्रदर्शन के जरिए सरकार को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि किसे पद पर रखना है और किसे हटाना है। हेमा मालिनी बोलीं- छात्रों को गुमराह न करेंबीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने भी न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इस प्रदर्शन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। मोदी सरकार देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। हेमा मालिनी ने कहा कि इस मामले को बातचीत से हल किया जाना चाहिए और इसमें शामिल छात्रों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इन बड़े सेलेब्रिटीज ने भी किया आंदोलन का समर्थनजंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शबाना आजमी और प्रकाश राज के अलावा कुणाल कामरा और स्वरा भास्कर भी जमीनी स्तर पर शामिल हुए हैं। वहीं सोनी राजदान, जीनत अमान, अभय देओल, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य और सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुहिम का समर्थन किया है। गीतकार जावेद अख्तर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखकर इस मामले पर बातचीत शुरू करने की मांग की है। इनके अलावा विशाल ददलानी, दीया मिर्जा और फिल्म मेकर ओनिर ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताई है।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 1:55 pm

मनोज मुंतशिर ने जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बताया:कहा- वहां 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' गैंग, मैं शामिल होने नहीं जाऊंगा, सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल

फिल्म 'आदिपुरुष' के डायलॉग राइटर और गीतकार मनोज मुंतशिर अपने एक बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गए हैं। दिल्ली में NEET पेपर लीक और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर मनोज मुंतशिर ने एक इंटरव्यू में प्रदर्शनकारियों को 'देशद्रोही' बता दिया। उन्होंने कहा कि वे पूरी जिम्मेदारी के साथ यह बात कह रहे हैं और वे कभी जंतर-मंतर नहीं जाएंगे। हालांकि, इसी इंटरव्यू में उन्होंने NEET पेपर लीक मामले पर सरकार और प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठाते हुए युवाओं का समर्थन भी किया था। जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर क्या बोले मनोज मुंतशिर'टाइम्स नाउ नवभारत' के साथ बातचीत में 50 साल के गीतकार मनोज मुंतशिर ने साफ किया कि वे कभी जंतर-मंतर नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, मैं जंतर-मंतर इसलिए नहीं जाऊंगा क्योंकि इस वक्त वहां का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग ऐसे नहीं हैं, जिनके साथ खड़े होकर मुझे अच्छा लगे। उन्होंने आगे कहा कि वे भाषण सुन रहे हैं और वहां आने वाले लोगों को देख रहे हैं। वहां 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' और 'कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है' जैसी बातें करने वाले लोग आ रहे हैं। मनोज ने कहा कि वे बड़ी जिम्मेदारी के साथ इन्हें देशद्रोही बोल रहे हैं। NEET पेपर लीक पर सरकार और सिस्टम को घेराइंटरव्यू के दौरान जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों का विरोध करने के साथ ही मनोज मुंतशिर ने NEET पेपर लीक मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के युवा इससे बेहतर व्यवस्था के हकदार हैं। दुनिया में कोई यह नहीं कह सकता कि NEET का पेपर लीक होना अच्छी बात है। यह सरासर गलत हुआ है। अगर इस पूरी व्यवस्था की वजह से एक भी बच्चे की जान जाती है, तो यह पूरे सिस्टम की नाकामी और जवाबदेही है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने किया ट्रोल मनोज मुंतशिर के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर सामने आते ही यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा, देशद्रोही की परिभाषा क्या है मनोज मुंतशिर? करियर के लिए विचारधारा बदल लेना सही नहीं है। अगर देश के हजारों युवा देशद्रोही हैं तो फिर इस देश को कोई नहीं बचा सकता। वहीं एक अन्य यूजर ने कमेंट किया कि भगवान से प्रार्थना है कि आने वाली पीढ़ियों के साथ वैसा बर्ताव न हो, जैसा आप इस पीढ़ी के साथ कर रहे हैं। अमेठी से निकलकर बॉलीवुड तक का सफर और विवादउत्तर प्रदेश के अमेठी में जन्मे मनोज मुंतशिर लंबे समय से बॉलीवुड में बतौर गीतकार काम कर रहे हैं। उन्होंने 'तेरी गलियां', 'तेरी मिट्टी' और 'देश मेरे' जैसे कई चर्चित गाने लिखे हैं। हालांकि, साल 2023 में आई फिल्म 'आदिपुरुष' के बाद वे बड़े विवाद में घिर गए थे। फिल्म में भगवान राम, सीता और हनुमान से जुड़े संवादों की भाषा को लेकर देशभर में उनका भारी विरोध हुआ था। भारी विरोध के बाद मेकर्स को फिल्म के डायलॉग बदलने पड़े थे। इसके बाद भी मनोज मुंतशिर अपने राजनीतिक और सामाजिक बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 1:43 pm

आमिर के सौतेले भाई ने एक्ट्रेस-पत्नी को पीटा:ईवा ग्रोवर बोलीं- शादी के तीसरे दिन इंटीमेट होते हुए मारा था, आमिर को परिवार फूंटी आंख नहीं पसंद

पॉपुलर टीवी एक्ट्रेस ईवा ग्रोवर ने आमिर खान के सौतेले भाई हैदर अली खान से शादी की थी। हालांकि, शादी के बाद घरेलु हिंसा के चलते ईवा ने तलाक ले लिया। अब सालों बाद एक्ट्रेस ने दावा किया है कि हैदर को सिजोफ्रेनिया था, वो उनके साथ मारपीट करते थे। एक्ट्रेस ने ये भी दावा किया है कि आमिर खान नहीं चाहते थे कि उनकी सौतेले भाई हैदर से शादी हो। उन्होंने ये भी कहा कि आमिर, सौतेले भाई और परिवार से दूरी बनाए रखते हैं। एक्ट्रेस ईवा ग्रोवर ने हाल ही में सिद्धार्थ कानन को दिए इंटरव्यू में शादी टूटने पर कहा, ‘बहुत उतार-चढ़ाव आए, बहुत वायलेंस हुआ, बहुत कोशिश की शादी संभालने की, लेकिन मैं नहीं संभाल पाई। मैं नहीं बर्दाश्त कर पाई। बच्चा भी पैदा किया। मुझे पहले ही पीछे हट जाना था। मैंने सोचा बच्चा होगा तो सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हालात और बिगड़ गए। जैसे ही बच्ची पैदा हुई, वैसे ही तलाक फाइल करवा दिया गया और मुझे घर भेज दिया गया।’ एक्ट्रेस ने बताया है कि उस समय वो टीवी शो वक्त बताएगा कौन अपना कौन पराया की शूटिंग कर रही थीं। सेट पर लोगों ने उनके शरीर में चोटों के निशान देखे और उनकी तलाक लेने में मदद की। शादी के तीसरे दिन ही की गई मारपीट ईवा ने बताया है कि शादी के तीसरे दिन ही हैदर ने उन पर हाथ उठाया था। एक्ट्रेस ने इस पर कहा, ‘उन्हें सिजोफ्रेनिया था, तब मैं इसका मतलब ठीक से जानती नहीं थी। शादी के तीसरे दिन पता नहीं उन्हें क्या हुआ कि उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया, फिजिकली अब्यूस करना शुरू कर दिया। तब तो मुझे नहीं समझ आया कि ऐसा क्यों हुआ।’ आगे एक्ट्रेस ने बताया कि ये घटना अचानक तब हुई जब वो इंटीमेट हो रही थीं। एक्ट्रेस ने बताया, ‘उन्हें पहले से सिजोफ्रेनिया था, लेकिन कतर एयरलाइन की नौकरी छोड़ने के बाद वो और फ्रस्टेटेड रहने लगे। उन्हें पीटने से खुशी मिलती थी। मुझे लगता था मुझ में कोई कमी है। वो मुझ पर शक करते थे कि मेरा अफेयर ड्राइवर और सेट पर मेकअप आर्टिस्ट के साथ है। तब मैं बहुत बड़े-बड़े शोज कर रही थी।’ ईवा ग्रोवर ने बताया है कि आमिर खान के पिता ताहिर अली खान ने शहनाज खान से दूसरी शादी की थी। शहनाज पहले से तलाकशुदा थीं, जिससे उन्हें दो बच्चे हैदर और नाजलीन थे। बाद में ताहिर ने उन्हें अपना नाम दिया था। ईवा ने दावा किया हैदर के बायोलॉजिकल पिता उन्हें बचपन में सेक्शुअली अब्यूज करते थे, जिससे उन्हें चाइल्डहुड ट्रॉमा था। आमिर जानते थे कि ये परिवार ठीक नहीं है- ईवा एक्ट्रेस ने कहा, ‘आमिर को ये परिवार जाहिर तौर पर फूटी आंख भी पसंद नहीं था। वो जानते थे कि ये फैमिली सही नहीं है। उन्होंने मुझसे डायरेक्टली ये नहीं कहा था, लेकिन मैंने उड़ती-उड़ती खबर सुनी थी कि आमिर सर ने कहीं कहा है कि मैं हैदर से शादी करके सही फैसला नहीं ले रही हूं।’ एक्ट्रेस ने दावा किया है कि तब आमिर के पिता ताहिर, उनकी सास और बेटे हैदर के साथ उसी घर में रहते थे, जहां वो शादी करके आई थीं। ताहिर भी सौतेले बेटे की हरकतों से परेशान रहते थे। हालांकि जब ताहिर की तबीयत बिगड़ने लगी तो आमिर उन्हें इलाज के लिए पुणे ले गए और फिर अपने साथ रखने लगे। इस समय उनकी दूसरी पत्नी शहनाज को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी, जिससे उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी। वो सिर्फ उनका नाम लेती थीं। बाद में ब्रेन हेमरेज से उनका निधन हो गया। ईवा ने बताया है कि आमिर सौतेल भाई और इस परिवार से कोई लेना-देना नहीं रखते हैं, यही वजह है कि वो कभी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए। ईवा के अनुसार, अब आमिर के सौतेले भाई हैदर बेघर हो चुके हैं और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। वो कभी सिग्नल पर खड़े रहते हैं, तो कभी चॉल में रह लेते हैं और पूरी तरह शराबी बन चुके हैं। बता दें कि ईवा ग्रोवर ने हैदर से घरवालों के खिलाफ भागकर शादी की थी, जिससे उन्हें घरवालों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। तलाक के बाद जब वो घर लौटीं, तो उन पर बेटी से मिलने की पाबंदी लगा दी गई। यही वजह रही कि उन्होंने 9 साल तक बेटी को नहीं देखा। फिलहाल उनकी बेटी, हैदर की बहन के साथ रहती है और कभी-कभी उनसे मिलने आती है। इन पॉपुलर टीवी शोज में नजर आईं ईवा ईवा ग्रोवर एक दौर की मशहूर एक्ट्रेस थीं। वो जी हॉरर शो, रिश्ते, कुमकुम, करिश्मा का करिश्मा, सपना बाबुल का और बड़े अच्छे लगते हैं जैसे कई शोज में नजर आ चुकी हैं। ईवा ग्रोवर ने सलमान खान के साथ फिल्म रेडी में भी काम किया है।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 12:19 pm

अमिताभ बच्चन की नहीं हुई सर्जरी:ICU में होने के दावों पर खुद सफाई दी, कहा- मैं बिल्कुल ठीक, पोस्ट को गलत समझा, वो मेसी पर थी

मंगलवार को अमिताभ बच्चन ने एक पोस्ट शेयर कर लिखा ‘अस्पताल में, एक सर्जरी के बाद और आईसीयू में, अनुभवी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की देखभाल में, फिर अस्पताल से छुट्टी और घर वापसी।' पोस्ट सामने आने के बाद से ही अनुमान लगाया जाने लगा कि बिग बी सर्जरी के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हुए हैं। अब उन्होंने खुद एक नए ब्लॉग में साफ किया है कि न ही वो आईसीयू में थे और न ही उनकी कोई सर्जरी हुई है। उनकी पोस्ट को गलत समझा गया। अमिताभ बच्चन ने नए ब्लॉग में सफाई देते हुए लिखा है- मैं बिल्कुल ठीक हूं। मेरी पोस्ट को गलत समझ लिया गया। मैं सिर्फ एक उदाहरण दे रहा था। मेरा मतलब यह था कि किसी बड़ी सर्जरी या आईसीयू में रहने के बाद सबसे मुश्किल समय तब शुरू होता है, जब आप घर लौटते हैं और अपनी कमजोर या क्षतिग्रस्त हालत का सामना करते हैं। ठीक उसी तरह, जब कोई चैंपियन हारता है, तो उसके लिए सबसे कठिन लड़ाई अपने भीतर चल रही भावनाओं से होती है। मेरा इशारा अर्जेंटीना की हार और उस समय लियोनेल मेसी की मानसिक स्थिति की ओर था, एक ऐसे चैंपियन की, जिसे हार का सामना करना पड़ा। लेकिन लोगों ने यह मान लिया कि मैं यह बात अपने बारे में कह रहा हूं। आगे उन्होंने लिखा है, ‘लोगों ने इसे गलत समझ लिया। हर चैंपियन को यह स्वीकार करना पड़ता है कि समय के साथ कोई और नया चैंपियन आएगा। किसी चैंपियन के लिए यह मानना आसान नहीं होता कि अब उसकी जगह किसी और ने ले ली है। लेकिन यही जिंदगी का नियम है, और यह हमेशा होता रहेगा।’ आखिर में बिग बी लिखते हैं, ‘मान लीजिए, भगवान न करे, आपको किसी बीमारी या समस्या के इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़े। जब आप अस्पताल जाते हैं, तब तक आपका शरीर अपनी सामान्य अवस्था में होता है। फिर सर्जरी या इलाज के बाद बीमारी तो ठीक हो जाती है, लेकिन उसके बाद बदले हुए शरीर के साथ जीना और खुद को फिर से संभालना सबसे मुश्किल दौर होता है।’ ‘हो सकता है कि इलाज के बाद आपका शरीर पहले जैसा न रहे। उसके काम करने का तरीका बदल जाए। इस बदलाव को स्वीकार करना आसान नहीं होता। लेकिन हमारा शरीर अद्भुत है। वह खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेता है, फिर से काम करना सीखता है। शायद पहले जैसा नहीं, लेकिन फिर भी वह आगे बढ़ता है। हार चुके चैंपियन की मनःस्थिति भी कुछ ऐसी ही होती है।’ किस पोस्ट से हुई गलतफहमी अमिताभ बच्चन ने मंगलवार की आधी रात को सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, ‘खेल समाप्त हो गया है, लेकिन काम चल रहा है।’ कुछ देर बाद उन्होंने ब्लॉग में लिखा था, ‘अस्पताल में, एक सर्जरी के बाद और आईसीयू में, अनुभवी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की देखभाल में, फिर अस्पताल से छुट्टी और घर वापसी। यह घर वापसी का दौर सबसे मुश्किल होता है। शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से और रोजमर्रा की जिंदगी के लिहाज से भी। आप एक सम्मानित चैंपियन रहे हों और एक दिन हार आपके सामने खड़ी हो जाए। यह जिंदगी का सबसे कठिन दौर होता है।’ मई में भी थी एडमिट होने की खबरें 19 मई को अमिताभ बच्चन के मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती होने का दावा पत्रकार विक्की ललवानी ने अपने यूट्यूब चैनल पर किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें 16 मई को भर्ती करवाया गया है। हालांकि, दैनिक भास्कर ने खबर कन्फर्म करने के लिए परिवार के करीबी सूत्र से संपर्क किया, तो सामने आया था कि अमिताभ को रूटीन चेकअप के लिए 16 मई को नानावटी अस्पताल ले जाया गया था। वह हर महीने रूटीन चेकअप करवाते रहते हैं। इसके तुरंत बाद वह घर लौट आए थे। एडमिट होने की खबरों के बीच किया व्लॉग और पोस्ट अमिताभ बच्चन ने 20 मई को आधिकारिक X अकाउंट से कुछ अजीबोगरीब शब्दों के साथ बेमायने वाली पोस्ट की थी। उन्होंने रात 12 बजकर 3 मिनट पर लिखा- पिलोरी बड़ुंबा। बिग बी का 75% लिवर खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। फिल्म कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके थे। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब अमिताभ बच्चन का एक्स-रे हुआ, लेकिन अब भी सही कारण पता नहीं चल सका था। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुआ तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर उसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल, चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने-माने सर्जन एच. एस. भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 डिग्री बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फट चुकी थीं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वह चार दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 10:30 am

छात्रों पर हुई बर्बरता देख भावुक नसीरुद्दीन शाह:कहा- जाहिल देश चलाए, तो चाहेगा पूरा देश जाहिल बने; शबाना आजमी को प्रोटेस्ट में आया था अस्थमा अटैक

बॉलीवुड के सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह प्रोटेस्ट के बीच बच्चों के साथ हुई मारपीट और बर्बरता देख भावुक हो गए हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में सरकार की निंदा की और छात्रों को सपोर्ट दिया। एक्टर का कहना है कि अगर देश चलाने वाले जाहित हैं, तो वो यही चाहेंगे कि पूरा देश जाहिल ही बने। नसीरुद्दीन शाह ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा- आदाब, नमस्कार। मैं नसीरुद्दीन शाह दो बातें अर्ज करना चाहता हूं आप सब से। पहली बात तो यह है, कि अगर एक जाहिल इस मुल्क की रहनुमाई करे, तो उसका दिल यही चाहेगा कि पूरा मुल्क उसी की तरह जाहिल, नासमझ, नाकाम और बेरहम बने। अभिनय के दो अलग-अलग कोर्स राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और पूना फिल्म इंस्टीट्यूट में पूरे करने के बावजूद मैंने अभिनय के बारे में सबसे ज्यादा जो सीखा है, वह उन बच्चों से, उन तालिब-ए-इल्म से जिन्हें सिखाने की कोशिश मैंने की है। आगे नसीरुद्दीन शाह ने कहा, मेरी पूरी हमदर्दी उनके साथ है। मैं उन्हें हजार-हजार हर सांस के साथ दुआएं देता हूं और हर टीचर्स डे पर उन्हें सलाम करता हूं। इस वक्त मेरा दिल भी भरा हुआ है और मैं गुस्से से खौल भी रहा हूं यह देखकर कि हमारे इन बच्चों के साथ किस तरह ज़ुल्म का बर्ताव किया जा रहा है उन गुंडों के हाथों, जो मुझे अमरीका के ICE एजेंट्स की याद दिलाते हैं, मुंह पर नकाब लगाए हुए, हाथ में डंडा लिए हुए। आखिर में नसीरुद्दीन शाह ने कहा, कभी अपने बच्चों के बारे में भी सोचा करो और यह भी सोचो कि तुम्हारा अंजाम तुम्हें भी एक दिन मिलेगा जरूर। इन सब बच्चों से मैं कहना चाहता हूं कि हिम्मत न हारें। बहुत से लोगों की हमदर्दी आपके साथ है, बहुत से लोग आपके साथ हैं। आप लड़ते रहें। मुझे हमारे मुल्क की युवा पीढ़ी से हमेशा उम्मीद रही है और अब वह उम्मीद और उजागर हो गई है। आप लोग अपनी लड़ाई लड़ते रहें, हम सब आपके साथ हैं। और इस मुल्क की हुकूमत को मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं, सब याद रखा जाएगा। प्रोटेस्ट में शामिल होने का था दावा कुछ समय पहले नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके साथ दावा किया गया था कि एक्टर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट का हिस्सा बने हैं और जंतर मंतर पहुंचे हैं। हालांकि फैक्ट चैक करने पर सामने आया कि नसीरुद्दीन शाह और उनके बेटे का वो वीडियो पुराना है। शबाना आजमी प्रोटेस्ट में पहुंचीं, अस्थमा अटैक आया 20 जुलाई को सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी, प्रकाश राज जैसे बड़े चेहरे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे। इस दौरान शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई। अब एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से उन्हें अस्थमा अटैक आया। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, लेकिन उनका पंप उनके पास था। पास की बिल्डिंग में ले जाकर उन्हें शुरुआत उपचार दिया गया। कुछ देर बाद तबीयत ठीक होने पर उन्होंने दोबारा प्रोटेस्ट जॉइन किया। बाकी कलाकारों के शामिल न होने पर शबाना का जवाबबॉलीवुड सेलिब्रिटीज के न आने पर सवाल पूछा गया, तो शबाना ने कहा कि लोग सिर्फ फिल्मी सितारों की अनुपस्थिति पर बात करते हैं। कोई भी बड़े बिजनेसमैन या उद्योगपतियों के शामिल न होने पर सवाल नहीं उठाता। ऐसे सवाल पूछकर मुख्य मुद्दे को भटकाया जाता है और गैर-जरूरी विवाद खड़ा किया जाता है। दिलजीत दोसांझ बोले- छात्रों के साथ गलत हुआ दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, आज जो हुआ, बहुत गलत हुआ। छात्रों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे छात्रों की मांगें सुनें। लोगों की आवाज ही भगवान की आवाज होती है। मुझे पहले भी कई बार 'एंटी-नेशनल' कहा गया है। अब भी शायद मुझे यही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं खुलकर बात भी नहीं कर सकता। बाकी सब भगवान देख रहे हैं। भगवान सबका भला करें। कंगना ने आंदोलन को बताया दबाव बनाने की कोशिशसोमवार को कंगना रनोट ने कहा था कि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए संसद सही जगह है, न कि सड़कें। उन्होंने कहा कि जनता ने एक सरकार चुनी है और सरकार चलाने का फैसला उसी का होना चाहिए। कंगना ने कहा की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। प्रदर्शन के जरिए सरकार को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि किसे पद पर रखना है और किसे हटाना है। हेमा मालिनी बोलीं- छात्रों को गुमराह न करेंबीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने भी न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इस प्रदर्शन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। मोदी सरकार देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। हेमा मालिनी ने कहा कि इस मामले को बातचीत से हल किया जाना चाहिए और इसमें शामिल छात्रों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इन बड़े सेलेब्रिटीज ने भी किया आंदोलन का समर्थनजंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शबाना आजमी और प्रकाश राज के अलावा कुणाल कामरा और स्वरा भास्कर भी जमीनी स्तर पर शामिल हुए हैं। वहीं सोनी राजदान, जीनत अमान, अभय देओल, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य और सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुहिम का समर्थन किया है। गीतकार जावेद अख्तर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखकर इस मामले पर बातचीत शुरू करने की मांग की है। इनके अलावा विशाल ददलानी, दीया मिर्जा और फिल्म मेकर ओनिर ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताई है।

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 9:33 am

हरियाणा के सिंगर छात्रों के समर्थन में उतरे:एमसी स्क्वायर-ढांडा ने अपने नए गाने रोके; गुलजार-देवा बोले- PM छात्रों की बात सुनिए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में अब हरियाणा के चर्चित कलाकार भी खुलकर उतर आए हैं। हरियाणवी रैपर एमसी स्क्वायर और सिंगर ढांडा न्योलिवाला ने छात्रों के समर्थन में अपने आगामी गानों की रिलीज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का ऐलान किया। वहीं, गुलजार छानीवाला और देव कुमार देवा ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों की बात सुनने और उन्हें न्याय दिलाने की अपील की। सभी कलाकारों ने पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही तय करने और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। ढांडा न्योलिवाला ने सोशल मीडिया पर स्टोरी में क्या लिखा गुलजार छानीवाला ने प्रधानमंत्री से न्याय की अपील की देव कुमार देवा ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया एमसी स्क्वायर ने छात्रों के समर्थन में जारी किया वीडियो

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 6:11 am

शहनाज गिल को भीड़ से बचाने पर राघव जुयाल बोले:मरते दम तक प्रोटेक्ट करूंगा; कार में सरेआम शहनाज को गोद में बैठाया था

एक्टर और डांसर राघव जुयाल ने अपनी बर्थडे पार्टी के उस वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें वे एक्ट्रेस शहनाज गिल को पैपराजी और फैंस की भीड़ से बचाते नजर आए थे। उन्होंने अपनी बर्थडे पार्टी के बाद शहनाज को लोगों से बचाते हुए कार के अंदर गोद में बैठा लिया था। पिंकविला से बातचीत में राघव ने साफ किया कि किसी भी महिला की सुरक्षा करना उनके लिए कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं, बल्कि उनकी मूल प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई महिला उनके साथ होगी, वे 'मरते दम तक उसकी रक्षा करेंगे'। राघव के मुताबिक, उनके माता-पिता ने उन्हें किसी भी परिस्थिति में महिलाओं का सम्मान और उनकी रक्षा करना सिखाया है। राघव जुयाल का पूरा बयान राघव ने कहा मेरे माता-पिता ने मुझे एक जिम्मेदार पुरुष बनना सिखाया है। अगर मैं पुरुषों के किसी समूह को किसी महिला को परेशान करते देखूंगा, तो मैं तुरंत बीच में आऊंगा क्योंकि मेरी परवरिश ऐसी ही हुई है। मुझे कभी भी ऐसी स्थितियों को नजरअंदाज करना नहीं सिखाया गया। मुझे सिखाया गया है कि जरूरत पड़ने पर मैं उस इंसान को करारा जवाब दे सकता हूं। मैं मरते दम तक रक्षा करूंगा। चाहे आप हों या कोई भी अन्य महिला, अगर वह मेरे साथ है, तो मेरी पहली आदत उसकी सुरक्षा करना ही होगी। यह मेरी फितरत है और यह कभी नहीं बदलेगी। अगर मैं किसी भी महिला को परेशान होते देखता हूं, तो मैं उसे नजरअंदाज नहीं कर सकता। मुझे पता है कि ऐसी स्थितियों को कैसे संभालना है। उस समय मैं अपनी सेलिब्रिटी इमेज या लोग क्या कहेंगे, इस बारे में बिल्कुल नहीं सोचता। मैं सिर्फ वही करता हूं जो मुझे सही लगता है। शहनाज गिल बोलीं- राघव हैं खास दोस्त डेटिंग की अफवाहों के बीच शहनाज गिल ने राघव जुयाल को अपना बेहद करीबी और अच्छा दोस्त बताया। साथ ही उन्होंने लोगों से उनकी आगामी फिल्म को सपोर्ट करने की अपील की। पिंकविला को दिए इंटरव्यू के दौरान जब शहनाज से राघव जुयाल के साथ उनके रिश्ते को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, प्लीज, मुझसे पर्सनल सवाल मत पूछिए। हालांकि, शहनाज ने कहा, मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि मेरे दोस्त की फिल्म आ रही है। 'भाई तेरा स्टार है', इसलिए आप सभी से गुजारिश है कि उसकी फिल्म को जरूर सपोर्ट करें। वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त है और उसकी फिल्म का चलना बेहद जरूरी है। लंबे समय से चर्चा में है दोस्ती शहनाज गिल और राघव जुयाल की दोस्ती लंबे समय से चर्चा में है। दोनों ने साल 2023 में सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' में साथ काम किया था। तभी से दोनों के अफेयर की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि, शहनाज और राघव हमेशा एक-दूसरे को सिर्फ अच्छा दोस्त बताते आए हैं। फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' में राघव ने 'इश्क' और शहनाज गिल ने इश्क की प्रेमिका 'सुकून' का रोल प्ले किया था। वर्कफ्रंट की बात करें तो राघव की अपकमिंग फिल्म 'भाई तेरा स्टार है' का ट्रेलर कल रिलीज हुआ। ट्रेलर में राघव कॉमिक अवतार में नजर आ रहे हैं। वह फिल्म में अजय सिंह का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में संजय कपूर, चंदन रॉय सान्याल, बरखा सिंह, टीना देसाई और विवान भटेना समेत कई कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म को विवेक बी. अग्रवाल ने डायरेक्ट किया है और यह 30 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। बता दें कि राघव जुयाल का जन्म 10 जुलाई 1991 को हुआ था। आज वह 35 साल के हो गए हैं। मुंबई में हुई राघव की बर्थडे पार्टी में आर्यन खान, मुनव्वर फारूकी, बादशाह, सान्या मल्होत्रा, मोना सिंह, संजय कपूर और अमीषा पटेल जैसे कई सेलेब्स शामिल हुए। देखें राघव की बर्थडे पार्टी की तस्वीरें-

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 4:30 am

'द प्राइड ऑफ भारत' के लिए इंटरनेशनल एक्शन टीम तैयार:ऋषभ शेट्टी की फिल्म में एक्शन डिजाइन करेंगे 'गेम ऑफ थ्रोन्स' फेम मार्क हेंसन

फिल्म निर्माता संदीप सिंह अपनी आने वाली बड़ी ऐतिहासिक फिल्म ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज’ को बड़े स्तर पर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। फिल्म में ऋषभ शेट्टी, छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका निभाते नजर आएंगे। अब इस फिल्म को और खास बनाने के लिए निर्माताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक्शन टीम को शामिल किया है, जो फिल्म के युद्ध और एक्शन सीन्स को शानदार बनाने पर काम करेगी। युद्ध के सीन को भव्य के लिए किया जा रहा है इस पीरियड फिल्म को भव्य बनाने के लिए जो टीम जोड़ी गई है वह फिल्म के युद्ध और एक्शन सीन्स को तैयार करने में जुट गई है। लोकप्रिय सीरीज ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ के अलावा ‘वाइकिंग्स’, ‘द विचर’ और ऑस्कर विनर फिल्म ‘ग्रैविटी’ में अपने एक्शन डिजाइन के लिए पहचाने जाने वाले मार्क हेंसन इसके एक्शन की कमान संभालेंगे। हॉलीवुड के दो और अनुभवी शामिल फिल्म की एक्शन टीम में हॉलीवुड के दो और अनुभवी नाम भी शामिल किए गए हैं। पहले व्लाद रिमबर्ग, जिन्होंने ‘द फेट ऑफ द फ्यूरियस’, ‘ब्लडशॉट’ और ‘लूसिफर’ जैसे प्रोजेक्ट पर काम किया है, दूसरे क्रेग मैक्रे, जो ‘ट्रॉय: फॉल ऑफ ए सिटी’ के लिए चर्चित रहे हैं। मेकर्स का दावा है कि यह टीम भारतीय ऐतिहासिक सिनेमा के सबसे बड़े युद्ध सीन्स में से एक तैयार करेगी। विवेक ओबेरॉय मुगल सम्राट औरंगजेब के रोल में दिखेंगे करीब 500 करोड़ रुपए के बजट में बन रही यह फिल्म दो पार्ट में रिलीज होगी। ऋषभ के अलावा इसमें अर्जुन रामपाल, विवेक ओबेरॉय और शेफाली शाह भी अहम किरदार निभाते नजर आएंगे। फिल्म में शेफाली उनकी मां राजमाता जीजाबाई के किरदार में नजर आएंगी, जबकि विवेक, मुगल सम्राट औरंगजेब की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं अर्जुन फिल्म के मुख्य विलेन के रूप में दिखाई देंगे। मेकर्स का दावा है कि सभी किरदारों को ऐतिहासिक संदर्भों के अनुरूप बड़े पैमाने पर परदे पर उतारा जाएगा। अधिकांश शूटिंग महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किलों में होगी फिल्म की अधिकांश शूटिंग महाराष्ट्र के विभिन्न ऐतिहासिक किलों और लोकेशनों पर की जाएगी, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। मेकर्स का उद्देश्य युद्ध, किलों और ऐतिहासिक परिवेश को वास्तविकता के करीब दिखाना है। फिल्म को हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मराठी समेत कई भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। इसका लक्ष्य भारतीय दर्शकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाना है। ये फिल्म 21 जनवरी 2027 को थिएटर्स में रिलीज हो सकती है। छत्रपति पर अब तक फिल्म और टीवी में 60 से अधिक प्रोजेक्ट्स बन चुके हैं 17वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के सबसे प्रेरणादायक योद्धाओं में गिने जाते हैं। उनके जीवन पर अब तक फिल्म और टेलीविजन में 60 से अधिक प्रोजेक्ट्स बन चुके हैं। इसकी शुरुआत 1923 में आई मूक फिल्म ‘सिंहगढ़’ से हुई थी। मेकर्स का कहना है कि ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति....’ इस ऐतिहासिक विरासत को नए पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचाएगी।

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 5:31 pm

एक्टर पीयूष मिश्रा के साथ हादसा, हाथ फ्रैक्चर हुआ:बाथरूम में फिसलकर गिरे, डायरेक्टर बोले- बेड से भी नहीं उठ पा रहे एक्टर

दिग्गज एक्टर पीयूष मिश्रा हादसे में चोटिल हो गए हैं। फिल्म 'दुल्हनिया ले आएगी' के डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये खुलासा किया है। दरअसल पीयूष मिश्रा भी फिल्म 'दुल्हनिया ले आएगी' के पार्ट हैं। उन्हें आज डायरेक्टर और एक्ट्रेस खुशाली कुमार के साथ फिल्म के प्रमोशन इवेंट में पहुंचना था। जब पीयूष मिश्रा नहीं पहुंचे, तो उनकी अनुपस्थिति के सवाल पर डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पीयूष मिश्रा अपने घर के बाथरूम में फिसलकर गिर गए हैं, जिससे उनके हाथ में फ्रैक्चर आ गया है। डॉक्टरों की सलाह पर वे फिलहाल पूरी तरह बेड रेस्ट पर हैं और फिल्म के सभी प्रमोशन और इवेंट्स से दूर रहेंगे। मैनेजर ने फोन कर दी हादसे की जानकारीफिल्म 'दुल्हनिया ले आएगी' के प्रमोशन इवेंट के दौरान डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने पूरा वाकया साझा किया। लामा ने बताया कि कल रात को ही पीयूष मिश्रा के मैनेजर का फोन आया था। मैनेजर ने जानकारी दी कि पीयूष जी बाथरूम में गिर गए हैं, जिससे उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया है। इस वजह से वे अब फिल्म के प्रमोशन और इंटरव्यू का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। लंबे समय से अस्वस्थ थे, फिर भी काम कर रहे थेडायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने बताया कि पीयूष मिश्रा पिछले कुछ समय से लगातार अस्वस्थ चल रहे थे। इसके बावजूद एक समर्पित कलाकार की तरह वे पूरे साहस और धैर्य के साथ इवेंट्स और प्रमोशन में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि इस हादसे के बाद उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि वे इस समय बिस्तर से उठ भी नहीं पा रहे हैं। 'दुल्हनिया ले आएगी' का ट्रेलर रिलीज आकाशादित्य लामा की फिल्म 'दुल्हनिया ले आएगी' का ट्रेलर रिलीज हो गया। कॉमेडी, रोमांस, पारिवारिक रिश्तों और शादी की अफरा-तफरी से भरपूर यह ट्रेलर एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर की झलक दिखाता है, जिसमें हंसी के साथ-साथ इमोशंस और कई मजेदार ट्विस्ट भी देखने को मिलेंगे। फिल्म में खुशाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा दिखाई देंगे। फिल्म की कहानी एक ऐसी दुल्हन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके सामने समय की बड़ी चुनौती है। इसी डेडलाइन के बीच उसकी जिंदगी में कई संभावित दूल्हों की एंट्री होती है और शुरू हो जाता है दूल्हों की तलाश का ऐसा मजेदार सिलसिला, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करता है। शादी के रंगों और उत्सव से सजा इसका माहौल फिल्म को और भी आकर्षक बनाता है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर डायरेक्टर आकाशादित्य लामा ने कहा, हर शादी में ड्रामा होता है, लेकिन 'दुल्हनिया ले आएगी' में यह ड्रामा फेरों से पहले ही शुरू हो जाता है। हमारी कोशिश थी कि ट्रेलर देखने के बाद दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान हो और साथ ही उनके मन में यह जानने की उत्सुकता भी बनी रहे कि आगे क्या होने वाला है। यह तेज रफ्तार, मजेदार, इमोशनल और ऐसे किरदारों से भरी फिल्म है, जिनसे दर्शक आसानी से जुड़ जाएंगे। यह पूरी तरह से एक फैमिली एंटरटेनर है और मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे देखकर उतना ही आनंद लेंगे, जितना हमें इसे बनाने में आया।

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 2:19 pm

अमिताभ बच्चन अस्पताल में भर्ती हुए थे:ब्लॉग में सर्जरी और ICU का जिक्र, लिखा- जो डटे रहते हैं, वे चैंपियन

अमिताभ बच्चन ने सोमवार को अपने ब्लॉग में अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी और आईसीयू (ICU) में एडमिट होने का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कब, किस अस्पताल में, कितने दिन और क्यों भर्ती थे। इसी साल मई में अमिताभ बच्चन के अस्पताल में भर्ती होने की खबरें सामने आई थीं। अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा, ‘अस्पताल में, एक सर्जरी के बाद और आईसीयू में, अनुभवी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की देखभाल में, फिर अस्पताल से छुट्टी और घर वापसी। यह घर वापसी का दौर सबसे मुश्किल होता है। शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से और रोजमर्रा की जिंदगी के लिहाज से भी। आप एक सम्मानित चैंपियन रहे हों और एक दिन हार आपके सामने खड़ी हो जाए। यह जिंदगी का सबसे कठिन दौर होता है।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘कुछ लोग इसका बहादुरी से सामना करते हैं। कुछ हार मान लेते हैं। जो लोग हिम्मत नहीं छोड़ते और डटे रहते हैं, वे हमेशा चैंपियन बने रहते हैं। और जो ऐसा नहीं कर पाते, वे अपनी पुरानी उपलब्धियों के सहारे जिंदगी बिताते हैं। यह हर इंसान की अपनी-अपनी पसंद होती है। दोनों में कुछ भी गलत नहीं है। स्वस्थ रहें, खुश रहें।’ ब्लॉग पोस्ट के बाद अमिताभ बच्चन ने सोमवार देर रात X पर लिखा, ‘T 5806 - खेल समाप्त हो गया! पर काम चल रहा है।’ अमिताभ के अस्पताल में भर्ती होने का दावा किया गया था 19 मई को अमिताभ बच्चन के मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती होने का दावा पत्रकार विक्की ललवानी ने अपने यूट्यूब चैनल पर किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें 16 मई को भर्ती करवाया गया है। विक्की ललवानी ने यह भी कहा था कि वह खबर कन्फर्म करने मंगलवार शाम नानावटी अस्पताल पहुंचे थे। बिग बी को ए-विंग की तीसरी मंजिल पर रखा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अभिषेक बच्चन भी पिता को देखने अस्पताल पहुंचे थे। हालांकि, दैनिक भास्कर ने खबर कन्फर्म करने के लिए परिवार के करीबी सूत्र से संपर्क किया, तो सामने आया था कि अमिताभ को रूटीन चेकअप के लिए 16 मई को नानावटी अस्पताल ले जाया गया था। वह हर महीने रूटीन चेकअप करवाते रहते हैं। इसके तुरंत बाद वह घर लौट आए थे। विक्की ललवानी का दावा था कि अमिताभ बच्चन 16 मई से अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन फैक्ट चेक में यह भी सामने आया था कि 17 मई यानी रविवार को बिग बी हमेशा की तरह फैंस से मिलने के लिए जलसा से बाहर आए थे। इसका वीडियो भी सामने आया था। एडमिट होने की खबरों के बीच किया व्लॉग और पोस्ट अमिताभ बच्चन ने 20 मई को आधिकारिक X अकाउंट से कुछ अजीबोगरीब शब्दों के साथ बेमायने वाली पोस्ट की थी। उन्होंने रात 12 बजकर 3 मिनट पर लिखा- पिलोरी बड़ुंबा। इसके ठीक बाद उन्होंने 12 बजकर 20 मिनट पर ब्लॉग में लिखा था- चील जब होवे शांत तो भैया, तोते बोलन सुरु करें, इर बीर फत्ते, कहन ,चल हमऊ, पिलावे सुरु करें। बाजरे दी रोटी खा दी, फू पड़ियों दा, साग रे, मुंह में डालन लागै जैसे , बोलन लागे काग रे। एक रहे ‘हिल’ भैया की पढ़ाई का दर्पण; औ दूसर विलिंग्टन की याद। लव, प्रेयर एंड मोर। बिग बी का 75% लिवर खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। फिल्म कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके थे। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब अमिताभ बच्चन का एक्स-रे हुआ, लेकिन अब भी सही कारण पता नहीं चल सका था। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुआ तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर उसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल, चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने-माने सर्जन एच. एस. भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 डिग्री बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फट चुकी थीं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वह चार दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया। पहले ही अस्थमा, लिवर प्रॉब्लम और निमोनिया से जूझ रहे थे बिग बी हादसे से पहले ही अमिताभ बच्चन को लिवर की समस्या थी और साथ ही वो अस्थमैटिक भी थे। ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें निमोनिया हुआ जिससे हालत और बिगड़ गई। बैंगलोर में इलाज के बाद उन्हें एयरबस से मुंबई लाया गया था। क्रेन से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया था। 8 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के बाहर उनके चाहने वालों की चौबीसो घंटे भीड़ रहती थी। पूरे देश में कहीं पूजा करवाई जा रही थी तो कहीं यज्ञ। जया बच्चन खुद भी अमिताभ की सलामती के लिए सिद्धि विनायक गई थीं, लेकिन जब वो पहुंचीं तो देखा कि उनसे पहले ही कई लोग बिग बी के लिए वहां पूजा कर रहे थे। लोगों की दुआएं रंग लाईं। एक नजर अमिताभ बच्चन की जिंदगी पर-

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 12:50 pm

अमिताभ बच्चन अस्पताल में भर्ती हुए थे:ब्लॉग में सर्जरी और ICU का जिक्र, X पर लिखा- खेल समाप्त हो गया

अमिताभ बच्चन ने सोमवार को अपने ब्लॉग में अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी और आईसीयू (ICU) में समय बिताने का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कब, किस अस्पताल में, कितने दिन और क्यों भर्ती थे। गौरतलब है कि मई 2026 में अमिताभ बच्चन के अस्पताल में भर्ती होने की खबरें सामने आई थीं। अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा, ‘अस्पताल में, एक सर्जरी के बाद और आईसीयू में, अनुभवी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की देखभाल में, फिर अस्पताल से छुट्टी और घर वापसी। यह घर वापसी का दौर सबसे मुश्किल होता है। शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से और रोजमर्रा की जिंदगी के लिहाज से भी। आप एक सम्मानित चैंपियन रहे हों और एक दिन हार आपके सामने खड़ी हो जाए। यह जिंदगी का सबसे कठिन दौर होता है।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘कुछ लोग इसका बहादुरी से सामना करते हैं। कुछ हार मान लेते हैं। जो लोग हिम्मत नहीं छोड़ते और डटे रहते हैं, वे हमेशा चैंपियन बने रहते हैं। और जो ऐसा नहीं कर पाते, वे अपनी पुरानी उपलब्धियों के सहारे जिंदगी बिताते हैं। यह हर इंसान की अपनी-अपनी पसंद होती है। दोनों में कुछ भी गलत नहीं है। स्वस्थ रहें, खुश रहें।’ ब्लॉग पोस्ट के बाद अमिताभ बच्चन ने सोमवार देर रात X पर लिखा, ‘T 5806 - खेल समाप्त हो गया! पर काम चल रहा है।’ अमिताभ के अस्पताल में भर्ती होने का दावा किया गया था 19 मई को अमिताभ बच्चन के मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती होने का दावा पत्रकार विक्की ललवानी ने अपने यूट्यूब चैनल पर किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें 16 मई को भर्ती करवाया गया है। विक्की ललवानी ने यह भी कहा था कि वह खबर कन्फर्म करने मंगलवार शाम नानावटी अस्पताल पहुंचे थे। बिग बी को ए-विंग की तीसरी मंजिल पर रखा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अभिषेक बच्चन भी पिता को देखने अस्पताल पहुंचे थे। हालांकि, दैनिक भास्कर ने खबर कन्फर्म करने के लिए परिवार के करीबी सूत्र से संपर्क किया, तो सामने आया था कि अमिताभ को रूटीन चेकअप के लिए 16 मई को नानावटी अस्पताल ले जाया गया था। वह हर महीने रूटीन चेकअप करवाते रहते हैं। इसके तुरंत बाद वह घर लौट आए थे। विक्की ललवानी का दावा था कि अमिताभ बच्चन 16 मई से अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन फैक्ट चेक में यह भी सामने आया था कि 17 मई यानी रविवार को बिग बी हमेशा की तरह फैंस से मिलने के लिए जलसा से बाहर आए थे। इसका वीडियो भी सामने आया था। एडमिट होने की खबरों के बीच किया व्लॉग और पोस्ट अमिताभ बच्चन ने 20 मई को आधिकारिक X अकाउंट से कुछ अजीबोगरीब शब्दों के साथ बेमायने वाली पोस्ट की थी। उन्होंने रात 12 बजकर 3 मिनट पर लिखा- पिलोरी बडुंबा। इसके ठीक बाद उन्होंने 12 बजकर 20 मिनट पर ब्लॉग में लिखा था- चील जब होवे शांत तो भैया, तोते बोलन सुरु करें, इर बीर फत्ते, कहन ,चल हमऊ, पिलावे सुरु करें। बाजरे दी रोटी खा दी, फू पड़ियों दा, साग रे, मुंह में डालन लागै जैसे , बोलन लागे काग रे। एक रहे ‘हिल’ भैया की पढ़ाई का दर्पण; औ दूसर विलिंग्टन की याद। लव, प्रेयर एंड मोर। बिग बी का 75% लिवर है खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके थे। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब अमिताभ बच्चन का एक्स-रे हुआ, लेकिन अब भी सही कारण पता नहीं चल सका था। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुआ तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर उसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल, चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने-माने सर्जन एच. एस. भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 डिग्री बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फट चुकी थीं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वह चार दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया। पहले ही अस्थमा, लिवर प्रॉब्लम और निमोनिया से जूझ रहे थे बिग बी हादसे से पहले ही अमिताभ बच्चन को लिवर की समस्या थी और साथ ही वो अस्थमैटिक भी थे। ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें निमोनिया हुआ जिससे हालत और बिगड़ गई। बैंगलोर में इलाज के बाद उन्हें एयरबस से मुंबई लाया गया था। क्रेन से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया था। 8 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के बाहर उनके चाहने वालों की चौबीसो घंटे भीड़ रहती थी। पूरे देश में कहीं पूजा करवाई जा रही थी तो कहीं यज्ञ। जया बच्चन खुद भी अमिताभ की सलामती के लिए सिद्धि विनायक गई थीं, लेकिन जब वो पहुंचीं तो देखा कि उनसे पहले ही कई लोग बिग बी के लिए वहां पूजा कर रहे थे। लोगों की दुआएं रंग लाईं। एक नजर अमिताभ बच्चन की जिंदगी पर-

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 12:50 pm

CJP प्रदर्शन में मौत के दावे पर भड़कीं कुणिका सदानंद:बोलीं- गलत-गलत बात मत फैलाइए; एक्ट्रेस की पुलिस से बहस भी हुई

दिल्ली में चल रहे CJP प्रदर्शन के दौरान एक बच्चे की मौत का दावा करने पर एक्ट्रेस कुनिका सदानंद भड़क गईं। दरअसल, नई दिल्ली में ANI के साथ बातचीत के दौरान एक्ट्रेस से एक शख्स कहता है, ‘एक बच्चे की डेथ भी हो गई है मैम।’ इस पर कुनिका तुरंत जवाब देतीहैं, ‘नहीं, नहीं... कोई डेथ नहीं। मैंने पुलिस से पूछा है। ऐसी कोई घटना नहीं हुई। गलत-गलत बात मत फैलाइए।’ कुणिका की पुलिसकर्मी से बहस हुईकुनिका सदानंद का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उनकी एक पुलिसकर्मी के साथ बहस होती नजर आ रही है। वीडियो में कुनिका और उनके साथ मौजूद लोग आगे जाने की अनुमति मांगते दिखते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें रोक देती है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस होती है। गौरतलब है कि कुनिका सदानंद ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन में पहुंचकर आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। वहीं, रविवार को जंतर-मंतर पर संसद मार्च के दौरान छात्रों पर किए गए पुलिस लाठीचार्ज की भी एक्ट्रेस ने आलोचना की। एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर कहा, 'आज जो तस्वीरें हमने देखीं, वे किसी भी इंसान को अंदर तक हिला देने के लिए काफी हैं। अभिजीत दीपके को डिटेन किया गया, स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज हुआ, टियर गैस छोड़ी गई और हां, गुस्सा आना बिल्कुल स्वाभाविक है, लेकिन मैं हाथ जोड़कर एक बात कहना चाहती हूं। प्लीज अपना गुस्सा किसी भी हिंसा में मत बदलने दीजिए।' उन्होंने आगे कहा, ‘यह वही पल होता है, जहां एक जन-आंदोलन की असली परीक्षा होती है। पुलिस को गाली मत दीजिए, पत्थर मत उठाइए, किसी भी तरह की तोड़-फोड़ मत कीजिए, क्योंकि जिस पल प्रोटेस्ट वायलेंट दिखने लगता है, उसी पल असली मुद्दा पीछे चला जाता है। और जिस मुद्दे के लिए आप इतनी दूर आए हैं, इतने दिन से बैठे हैं, वह दब जाता है।’ कुणिका ने सरकार पर सवाल उठाए पीटीआई के साथ बातचीत में कुनिका ने कहा, “एक महीने से भी ज्यादा हो गया है। नीट पेपर लीक हुए भी कितना टाइम हो गया है। सरकार को कुछ तो संज्ञान लेना चाहिए। आप अपना मानसून सत्र शुरू कर रहे हैं। कुछ तो पता चलता हमें, ताकि तसल्ली होती कि आप इस पर डिस्कस करने वाले हैं, लेकिन आज जब डिस्कशन शुरू हुआ, तो आपने पार्लियामेंट का सेशन ही रद्द कर दिया। एक इंसान को लोकतंत्र में अपनी जान देनी पड़ेगी, उसके बाद ही आप सुनेंगे या उसके बाद भी नहीं सुनेंगे, क्योंकि हम ये भी देख चुके हैं।' प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। सुबह 8 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। आंदोलनकारी जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक होते हुए संसद के करीब पहुंचे। संसद में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद संसद की सुरक्षा बढ़ा दी गई, मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। देर शाम को पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं। इसमें 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी और इतने ही प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। CJP ने आरोप लगाया कि निहत्थे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोल दागे। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की फोटो सामने आईं। पूरी खबर यहां पढ़ें.... यह खबर भी पढ़ें…. CJP आंदोलन पर आमने-सामने फिल्मी सितारे:शबाना आजमी-प्रकाश राज ने ट्रक पर चढ़कर किया प्रदर्शन, कंगना-हेमा ने कहा- प्रोटेस्ट का मतलब नहीं, उत्पात मचा रहे नीट परीक्षा में गड़बड़ी और शिक्षा सुधारों को लेकर दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन पर बॉलीवुड दो धड़ों में बंट गया है। एक तरफ जहां शबाना आजमी और प्रकाश राज जैसे सीनियर कलाकार सड़कों पर उतरकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी सांसद कंगना रनोट और हेमा मालिनी ने इस प्रदर्शन को गलत बताया है। पूरी खबर यहां पढ़ें….

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 12:18 pm

नसीरुद्दीन शाह CJP के सपोर्ट में जंतर-मंतर नहीं पहुंचे:दावा गलत, मुंबई के रीगल सिनेमा के बाहर का है वायरल वीडियो

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के बीच एक्टर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। दावा किया गया कि वह अपने बेटे विवान शाह के साथ प्रदर्शन के समर्थन में वहां पहुंचे थे। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि नसीरुद्दीन शाह ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया और चुपचाप एक खंभे के सहारे खड़े होकर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद लौटते छात्रों को देखते रहे। इन दावों के साथ वीडियो को बड़े पैमाने पर शेयर किया गया। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो दिल्ली का नहीं, बल्कि मुंबई के कोलाबा स्थित रीगल सिनेमा के बाहर का है। वीडियो में नसीरुद्दीन शाह अपने बेटे के साथ सड़क किनारे खड़े दिखाई देते हैं। यह फुटेज सबसे पहले राजेश गौर नाम के एक इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर किया था। वीडियो में कैमरा घुमाकर रीगल सिनेमा के बाहर का सीन भी दिखाया गया है, जहां फिल्म 'राजा शिवाजी' और 'पति पत्नी और वो 2' का प्रदर्शन हो रहा था। दूसरी फिल्म में आयुष्मान खुराना, वामिका गब्बी, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह नजर आए हैं। वहीं, वायरल क्लिप में वीडियो का वह हिस्सा हटा दिया गया, जिससे यह साफ होता था कि नसीरुद्दीन शाह थिएटर के बाहर थे, न कि जंतर-मंतर पर। वीडियो में रीगल सिनेमा लिखा और 'राजा शिवाजी' व 'पति पत्नी और वो 2' के पोस्टर दिख रहे हैं।राजेश गौर नाम के इंस्टाग्राम यूजर ने यह वीडियो पहली बार 15 जुलाई को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था और 20 जुलाई को दोबारा शेयर किया। बाद में सोमवार को इसे इस दावे के साथ वायरल किया गया कि नसीरुद्दीन शाह जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। वहीं, खास बात यह है कि सोमवार को ही नसीरुद्दीन शाह का 76वां जन्मदिन था। शबाना आजमी जंतर-मंतर प्रदर्शन में पहुंचीं गौरतलब है कि शबाना आजमी, स्वरा भास्कर और प्रकाश राज जैसे कई सेलेब्स आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे थे। पिछले तीन सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता नेहा, अमीन और मनीष कुमार का अनशन सोमवार को एक्ट्रेस शबाना आजमी और एक्टर प्रकाश राज ने उन्हें पानी पिलाकर खत्म कराया। पूरी खबर यहां पढ़ें भले ही नसीरुद्दीन शाह जंतर-मंतर नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने CJP के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रिएक्शन दिया था। नसीरुद्दीन शाह ने अपनी पत्नी रत्ना पाठक शाह, लेखिका अरुंधति रॉय और अर्थशास्त्री जयती घोष के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया था। उन्होंने बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने का अनुरोध करते हुए कहा था, 'यह लड़ाई एक मैराथन है, कोई स्प्रिंट (छोटी दौड़) नहीं। देश के युवाओं के नेतृत्व के लिए हमें आगे आपकी जरूरत है, इसलिए सेहत बचाना जरूरी है।'

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 10:57 am

छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की सेलेब्स ने की आलोचना:सलमान के जीजा आयुष बोले- प्रदर्शन में लाठीचार्ज दुखद; भूमि पेडनेकर, अनुराग कश्यप ने भी जताई नाराजगी

सोनू सूद, अनुराग कश्यप, आयुष शर्मा, हुमा कुरैशी और भूमि पेडनेकर समेत बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की आलोचना की है। बॉलीवुड एक्टर और सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा ने जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र की असली पहचान सिर्फ वोट नहीं, बल्कि हर नागरिक की आवाज है। उनके मुताबिक, चाहे छात्र हों या देश का कोई भी नागरिक, जब वे अपनी बात रखते हैं तो उसे सुना जाना चाहिए, दबाया नहीं जाना चाहिए। आयुष शर्मा ने कहा कि सरकार ने आखिरकार छात्रों की आवाज सुनी, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों को टियर गैस और लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए युवाओं को ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, जो चिंताजनक है। एक्टर सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।' पुलिस कार्रवाई पर अनुराग ने सवाल उठाए फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, वर्दी पहनने के लिए आत्मा का, आत्मीयता का, सबका सौदा करना पड़ता है। मालूम नहीं था। क्या इस देश में कोई पुलिसवाला है, जो खड़ा होकर बोल सके, 'मैं इस आदेश का पालन नहीं करूंगा, क्योंकि यह गलत है?' हुमा कुरैशी ने लाठीचार्ज को दुखद बताया हुमा कुरैशी ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, आज की तस्वीरें मेरे जहन में लंबे समय तक रहेंगी। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इतनी बेरहमी और लाठियों का इस्तेमाल होते देख मुझे बहुत दुख हुआ। इसे निश्चित रूप से ज्यादा सब्र, लोगों की बात सुनने और बातचीत के जरिए संभाला जा सकता था। उन्होंने आगे लिखा, हम भारत के लोगों ने ही इस सरकार को चुना है और आज हम सभी को सवाल पूछने और जवाबदेही की उम्मीद करने की जरूरत है। हम एक बहुत बड़ा और विविधताओं वाला देश हैं। जरूरी नहीं कि हम हर मुद्दे पर सहमत हों, लेकिन हम निश्चित रूप से इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि बल प्रयोग करने से पहले हर नागरिक की बात सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए। हुमा ने अंत में कहा कि हर उस छात्र और नागरिक का सम्मान है, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मान्यताओं के लिए खड़े होने का फैसला किया। जय हिंद। एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिखा, ‘हिंसा समाधान नहीं है।’ भूमि पेडनेकर बोलीं- हिंसा समाधान नहीं है भूमि ने कहा कि देश का अपने युवाओं के प्रति यह फर्ज है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आंदोलन हिंसक न हो और अपने मकसद से न भटके। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र बातचीत से ही बनते हैं। भूमि ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की भी मांग की और पेपर लीक, परीक्षा में विफलता, समान अवसर न मिलना, शिक्षकों की कमी और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव जैसे मुद्दों को उठाया, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। यूट्यूबर एल्विश यादव ने भी हिंसा का विरोध करते हुए X अकाउंट पर लिखा, मैं न तो बीजेपी का समर्थक हूं और न ही कांग्रेस का, लेकिन छात्रों के साथ जो हो रहा है, वह पूरी तरह गलत है। जो छात्र अपनी जायज समस्याओं को लेकर सामने आए, उनके साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए थी। उनकी बातों को सुना जाना चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। सुबह 8 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। आंदोलनकारी जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक होते हुए संसद के करीब पहुंचे। संसद में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद संसद की सुरक्षा बढ़ा दी गई, मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। देर शाम को पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं। इसमें 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी और इतने ही प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। CJP ने आरोप लगाया कि निहत्थे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोल दागे। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की फोटो सामने आईं। पूरी खबर यहां पढ़ें.... संसद भवन के पास से प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें यह खबर भी पढ़ें…. CJP आंदोलन पर आमने-सामने फिल्मी सितारे:शबाना आजमी-प्रकाश राज ने ट्रक पर चढ़कर किया प्रदर्शन, कंगना-हेमा ने कहा- प्रोटेस्ट का मतलब नहीं, उत्पात मचा रहे नीट परीक्षा में गड़बड़ी और शिक्षा सुधारों को लेकर दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन पर बॉलीवुड दो धड़ों में बंट गया है। एक तरफ जहां शबाना आजमी और प्रकाश राज जैसे सीनियर कलाकार सड़कों पर उतरकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी सांसद कंगना रनोट और हेमा मालिनी ने इस प्रदर्शन को गलत बताया है। पूरी खबर यहां पढ़ें….

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 9:30 am