एकता कपूर का सुपरहिट शो ‘नागिन’ अब टीवी की दुनिया से आगे बढ़कर सिनेमाघरों तक पहुंच सकता है। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बालाजी टेलीफिल्म्स इस पॉपुलर फ्रैंचाइजी को फिल्मों के रूप में पेश करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है। 2015 में मौनी रॉय और अदा खान के साथ शुरू हुआ ‘नागिन’ देखते ही देखते देश के सबसे चर्चित सुपरनैचुरल शोज में शामिल हो गया। बीते 11 सालों में इस फ्रैंचाइजी के कई सीजन आ चुके हैं और फिलहाल ‘नागिन 7’ टीवी पर ऑन-एयर है। अब मेकर्स इसकी पौराणिक और फैंटेसी दुनिया को बड़े पर्दे पर और भव्य रूप में दिखाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, ‘नागिन’ फिल्म का कॉन्सेप्ट अभी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि बड़े पर्दे पर नागिन का किरदार कौन निभाएगा। टीवी की तरह ही इस रोल के लिए भी लंबा ऑडिशन प्रोसेस रखा जा सकता है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट एकता कपूर के बेहद करीब रहा है और वह लुक से लेकर स्टाइलिंग तक हर चीज पर खास ध्यान देती हैं। एकता कपूर इन दिनों कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। उनकी और TVF की थिएट्रिकल फिल्म ‘Vvan’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया लीड रोल में नजर आएंगे। इसके अलावा अक्षय कुमार, तब्बू और परेश रावल स्टारर हॉरर-कॉमेडी ‘भूत बंगला’ भी 15 मई 2026 को रिलीज होने वाली है।
एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने हाल ही में कहा कि कई बार उनका मन सोशल मीडिया अकाउंट को डिलीट करने का करता है। एस्क्वायर इंडिया को दिए इंटरव्यू में आलिया ने कहा, “कई दिन ऐसे होते हैं जब मैं उठकर सोचती हूं कि बस सोशल मीडिया डिलीट कर दूं और सिर्फ एक्टिंग करूं। बार-बार इस बातचीत का हिस्सा नहीं बनना चाहती, लेकिन मुझे यह भी पता है कि ऐसा करने से उन लोगों से संपर्क टूट जाएगा, जिन्होंने शुरू से मेरा साथ दिया है। मैं ऐसा नहीं चाहती।” बता दें कि आलिया भट्ट देश में सबसे ज्यादा फॉलो की जाने वाली एक्ट्रेस में से एक हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 86 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। फोन की फोटो गैलरी राहा से भरी हुई है: आलिया इंटरव्यू में आलिया ने मां बनने के बाद आए बदलावों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि मां बनने के बाद उनकी पर्सनल लाइफ पूरी तरह बदल गई है। अब उनकी दुनिया ज्यादातर अपनी बेटी के इर्द-गिर्द घूमती है। आलिया ने कहा, “अब जब पर्सनल लाइफ की बात आती है, तो वह इतनी पर्सनल हो गई है कि उसे शेयर करना थोड़ा मुश्किल लगता है। मेरे फोन की फोटो गैलरी मेरी बेटी राहा से भरी हुई है। मुझे अपनी तस्वीरें लेने के लिए अलग से मेहनत करनी पड़ती है।” उन्होंने मां बनने को एक बड़ा बदलाव बताया। आलिया के मुताबिक, इससे न सिर्फ शरीर बदलता है, बल्कि सोच, प्राथमिकताएं और दुनिया को देखने का नजरिया भी बदल जाता है। आलिया के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह जल्द ही एक्शन थ्रिलर फिल्म अल्फा में नजर आएंगी। इस फिल्म का डायरेक्शन शिव रावल कर रहे हैं। इसमें आलिया एक ऑल-वुमन कॉम्बैट यूनिट की कमांडर की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में शरवरी वाघ भी अहम रोल में हैं और यह YRF स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा है। बॉबी देओल भी इसमें नजर आएंगे। फिल्म अल्फा पहले क्रिसमस 2025 पर रिलीज होने वाली थी। बाद में इसके अप्रैल में रिलीज होने की चर्चा थी और अब यह फिल्म 2026 में ही किसी बाद की तारीख पर रिलीज होने की उम्मीद है। अभी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। इसके अलावा आलिया, रणबीर कपूर और विक्की कौशल के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर में भी नजर आएंगी।
करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी सहित तीन लोगों की जमानत याचिका राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने माना कि इस स्तर जमानत की सुविधा दिया जाना उचित नहीं है। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस विनोद कुमार भारवनी ने आज इस मामले में सुनवाई की। इस दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया। उनका तर्क था कि इस मामले में अभी जांच चल रही है। अब तक की जांच में पाया गया है कि आरोपी विक्रम भट्ट व श्वेताम्बरी भट्ट द्वारा अलग-अलग नामों से अलग-अलग फर्जी बिल तैयार करवाकर परिवादी से पैसा ट्रांसफर करवाया गया है। उस पैसे को वापस अपने खातों में डलवाकर स्वयं ने ही उपयोग में ले लिया है। उन्होंने कहा- इस प्रकार आरोपियों ने मिलकर नाम से 4,23,13,424 रूपए लिए हैं। इसमें से 1,65,69,955 रूपए खुद के ही खातों में कर्जा उतारने के लिए उपयोग में ले लिए गए हैं। विशिष्ट लोक अभियोजक ने कहा- आपराधिक कृत्य में प्रार्थी मेहबूब अंसारी की सक्रिय भूमिका जांच के दौरान सामने आई है। उन्होंने यह भी कहा- प्रार्थीगण द्वारा गवाहों पर भी दबाव बनाया जा रहा है, महत्वपूर्ण अनुसंधान अभी बाकी है। अलग से अभी पूछताछ करनी है। अगर इस समय यदि प्रार्थीगण को जमानत पर छोड़ दिया गया तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं इसलिए जमानत आवेदन निरस्त किया जाए। हाईकोर्ट श्वेताम्बरी वी. भट्ट पत्नी विकम भट्ट, विकम भट्ट पुत्र प्रवीण भट्ट एवं मेहबूब अंसारी पुत्र उस्मान अंसारी की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन पत्र निरस्त करते कर दिया। जाने 30 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला? राजस्थान के उदयपुर के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप था कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था। दो मूवी रिलीज हुई, एक पर काम भी शुरू नहीं किया विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट ने केवल दो फिल्म का निर्माण कर रिलीज करवाया। तीसरी फिल्म विश्व विराट लगभग 25 प्रतिशत ही बनाई गई। चौथी फिल्म महाराणा-रण की अभी तक शूटिंग भी शुरू नहीं हुई। आरोप है कि डायरेक्टर ने फिल्म महाराणा-रण के ही 25 करोड़ हड़प लिए। इंदिरा IVF के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया (पीड़ित) ने फिल्म डायरेक्टर, उनकी पत्नी, बेटी कृष्णा निवासी अंधेरी वेस्ट, मुंबई, दिनेश कटारिया निवासी सहेली नगर उदयपुर, महबूब अंसारी प्रोड्यूसर निवासी ठाणे, मुदित बुटट्टान निवासी दिल्ली, गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव डीएससी चेयरमैन, अशोक दुबे जनरल सेक्रेटरी, फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज मुंबई के खिलाफ भूपालपुरा (उदयपुर) थाने में रिपोर्ट दी थी। ये भी पढ़ें… गुलाम-राज मूवी बनानेवाले विक्रम भट्ट 7 दिन की रिमांड पर:30 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में मुंबई से पत्नी के साथ गिरफ्तार, उदयपुर लाया गया बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को ACJM कोर्ट ने 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस सोमवार रात करीब 10 बजे मुंबई से उदयपुर लेकर आई थी। 30 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में 7 दिसंबर को दोनों को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। (पूरी खबर पढ़ें)
बॉलीवुड सिंगर-कंपोजर अमाल मलिक ने हाल ही में मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। रहमान ने इंडस्ट्री में काम की कमी और पॉवर शिफ्ट के बारे में कहा था कि यह बदलाव कुछ हद तक सांप्रदायिक पक्ष भी रखता है। ए.आर. रहमान के बयान पर फिल्म इंडस्ट्री के लोग लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक अमाल ने एक इंटरव्यू कहा, “अगर इंडस्ट्री की नजरिए से देखें तो ए.आर. रहमान ने जो बात कही है, वह काफी हद तक सही है। पर मैं इसके सांप्रदायिक पक्ष से सहमत नहीं हूं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का सिस्टम भाई-भतीजावाद या ग्रुपिज्म का है, और कई कंपनियां अपने ‘कंपार्टमेंट’ कलाकारों को प्रमोट करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज मैनेजमेंट और एजेंसियों का जमाना है, और इस वजह से निर्णय लेने की क्षमता पर कलाकारों का नियंत्रण कम हो गया है। मलिक ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ निर्देशक और प्रोड्यूसर खास कलाकारों के साथ ही काम करते हैं, जो कि इंडस्ट्री का एक वास्तविक हिस्सा बन गया है। अमाल मलिक ने कहा, “अगर कोई बेहतर संगीत बना रहा है, उसे अवसर मिलना चाहिए, चाहे वह ए.आर. रहमान हों या कोई नया कलाकार।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रहमान के बयान को उनकी असुरक्षा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह इंडस्ट्री की व्यापक समस्याओं की तरफ इशारा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब ए.आर. रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में फिल्मों में उनकी भागीदारी कम हुई है क्योंकि निर्णय लेने वाले अब उन लोगों के हैं जो रचनात्मक नहीं हैं, और यह बदलाव कहीं न कहीं “संभवतः सांप्रदायिक” भी हो सकता है। जिससे इंडस्ट्री में बहस शुरू हो गई थी।
डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने सिंगर अरिजीत सिंह से प्लेबैक सिंगिंग में वापस आने की अपील की है। अरिजीत ने हाल ही में प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का फैसला किया है। इस ऐलान से फैंस के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग भी हैरान हो गए थे। शुक्रवार को विशाल भारद्वाज ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में विशाल किसी महफिल में बैठे गाना गाते नजर आ रहे हैं। वह गा रहे हैं, “डर लगता है मुझको तू जाने वाला है, मुझे इश्क हुआ है, ये होने वाला है।” वीडियो में उन्होंने अरिजीत सिंह को टैग भी किया है। कैप्शन में विशाल भारद्वाज ने लिखा कि यह वीडियो खुद अरिजीत सिंह ने बनाया था। उन्होंने अरिजीत के लिए एक खास मैसेज भी लिखा। विशाल ने कहा कि कुछ दिन पहले दोनों साथ बैठकर इस गाने की जैमिंग कर रहे थे और उसी वक्त यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें नहीं पता था कि यह अरिजीत के साथ उनके आखिरी फिल्मी गानों में से एक होगा। इसके साथ ही विशाल ने अरिजीत से प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का फैसला वापस लेने की अपील की। पॉपुलर सिंगर अरिजीत सिंह ने 27 जनवरी को प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास ले लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। सिंगर ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकांउट पर लिखा था, नमस्ते, आप सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं। इतने सालों से श्रोताओं के रूप में मुझे जो इतना प्यार दिया है, उसके लिए आप सबका धन्यवाद। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब से मैं एक प्लेबैक सिंगर के तौर पर कोई भी नया काम नहीं लूंगा। मैं इसे यहीं खत्म कर रहा हूं। यह एक शानदार सफर रहा। प्लेबैक सिंगिंग में गानों की रिकॉर्डिंग स्टूडियो में होती है। बाद में इसे फिल्मों में एक्टर-एक्ट्रेस पर फिल्माया जाता है। यानी आवाज सिंगर की होती है, एक्टर-एक्ट्रेस इस पर लिप्सिंग करते हैं।
सनी देओल की फिल्म बॉर्डर 2 ने सिर्फ 8 दिनों में 230 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली है। हालांकि, दमदार ओपनिंग वीकेंड के बाद वीकडेज में कमाई थोड़ी घटी, लेकिन इसके बावजूद फिल्म ने एक हफ्ते में दुनियाभर में 300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। सैकनिल्क के मुताबिक, बॉर्डर 2 ने आठवें दिन यानी दूसरे शुक्रवार को भारत में 11 करोड़ रुपए की कमाई की। सातवें दिन फिल्म ने 11.25 करोड़ रुपए कमाए थे। इस तरह भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई 235.25 करोड़ रुपए हो चुकी है। अगर वर्ल्डवाइड कलेक्शन की बात करें, तो भारत से ग्रॉस कमाई 281.5 करोड़ रुपए है। विदेशों से फिल्म ने करीब 41 करोड़ रुपए कमाए हैं। इस तरह कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन 322.5 करोड़ रुपए पहुंच गया है। इस रफ्तार से फिल्म के दूसरे वीकेंड पर 350 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, फिल्म की शानदार सफलता का सनी देओल ने जश्न मनाया। सनी ने हिमाचल प्रदेश के मनाली के एक होटल में अपनी टीम के साथ केक काटा। जश्न के दौरान सनी देओल काफी खुश नजर आए। केक पर “बधाई हो बॉर्डर 2” लिखा हुआ था। सनी देओल ने केक काटा और टीम के लोगों के साथ बांटा। टीम के एक सदस्य, जिन्हें सब प्यार से “बाहुबली जी” कह रहे थे, ने सनी देओल को फूलों का गुलदस्ता भी दिया और दोनों ने गले लगकर खुशी जाहिर की। वीडियो के अंत में सनी ने फिल्म को पसंद करने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। इससे पहले सनी देओल ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने फैंस से कहा, “आवाज कहां तक गई? आपके दिलों तक। थैंक यू वेरी मच, लव यू ऑल।” कैप्शन में उन्होंने लिखा था, “मेरी, आपकी, हमारी बॉर्डर 2 को इतना प्यार देने के लिए आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद।” बता दें कि फिल्म बॉर्डर 2 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म बॉर्डर का सीक्वल है। फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है। इस फिल्म को भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता ने प्रोड्यूस किया है।
फायरिंग केस में कमाल आर खान को मिली जमानत:एक्टर-प्रोड्यूसर की पिछले हफ्ते हुई थी गिरफ्तारी
मुंबई के ओशिवारा फायरिंग मामले में एक्टर और प्रोड्यूसर कमाल आर खान उर्फ KRK को जमानत मिल गई है। उन्हें 25 हजार रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर जमानत दी गई है। KRK को पिछले हफ्ते मुंबई पुलिस ने ओशिवारा इलाके में फायरिंग की घटना से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनसे पहले पूछताछ की और बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान KRK ने बताया था कि फायरिंग उनकी लाइसेंसी बंदूक से हुई थी। न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, KRK की वकील सना रईस खान ने मामले में एक्टर की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है। उनके मुताबिक, गिरफ्तारी बिना किसी नोटिस के की गई और KRK के संवैधानिक अधिकारों का ध्यान नहीं रखा गया। वकील सना खान ने कहा कि यह भी आरोप लगाया गया कि छह कारतूस यानी गोलियां गायब हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है भी, तो यह एक प्रशासनिक गलती हो सकती है। ऐसे मामलों में लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी कार्रवाई कर सकती है। इसके लिए आपराधिक कोर्ट में केस नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि KRK पर यह आरोप नहीं है कि उन्होंने किसी व्यक्ति या इमारत को निशाना बनाकर गोली चलाई। KRK एक लाइसेंसी हथियार के मालिक हैं। वकील ने बताया कि छह दिन बाद एक व्यक्ति ने यह कहा कि उसने अपने घर से फायरिंग की आवाज सुनी। हालांकि उस व्यक्ति का नाम रिमांड रिपोर्ट में दर्ज नहीं है। वकील के मुताबिक, पिस्तौल की रेंज सिर्फ 20 से 30 मीटर तक होती है। जबकि KRK के बंगले और उस इमारत के बीच दूरी करीब 1500 मीटर है। ऐसे में वहां तक गोली पहुंचना संभव नहीं है। मुंबई पुलिस के अनुसार, फायरिंग की सूचना मिलने के बाद CCTV फुटेज देखे गए और कई लोगों से पूछताछ की गई। KRK को बाद में अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें दो हफ्ते की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई है। कौन हैं कमाल आर खान (KRK)? कमाल आर खान उर्फ KRK खुद को फिल्म क्रिटिक बताते हैं और सोशल मीडिया पर अक्सर वे फिल्मों की आलोचना करते नजर आते हैं। कई बार वे बॉलीवुड स्टार्स पर तीखी टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहे हैं। वे सलमान खान, शाहरुख खान और अजय देवगन जैसे बड़े सितारों पर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। सलमान खान ने तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराया था। वहीं, KRK ने साल 2008 में आई फिल्म देशद्रोही मुख्य भूमिका निभाई थी और इसे खुद ही प्रोड्यूस भी किया था। इसके बाद वे 2014 की फिल्म एक विलेन में सपोर्टिंग रोल में नजर आए थे।
कुंग-फू फिल्मों के मशहूर एक्टर जैकी चैन ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने एक ऐसा गाना रिकॉर्ड किया है, जो उनकी मौत के बाद रिलीज किया जाएगा। उन्होंने इस गाने को दुनिया के लिए अपना आखिरी संदेश बताया। यह बात उन्होंने 28 दिसंबर को बीजिंग में अपनी नई ड्रामा फिल्म अनएक्सपेक्टेड फैमिली के प्रीमियर के दौरान कही। China.org.cn की रिपोर्ट के अनुसार, जैकी चैन ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ उन्होंने अपने कई करीबी दोस्तों और अपनों को खो दिया है। इन घटनाओं ने उन्हें जिंदगी के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने महसूस किया कि जीवन बहुत छोटा है और जो बातें दिल में हैं, उन्हें समय रहते कह देना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने एक खास गाना रिकॉर्ड किया है, जिसे वह अपना आखिरी संदेश यानी फाइनल मैसेज मानते हैं। इस गाने को रिकॉर्ड करने के पीछे उनकी भावना बहुत गहरी है। जैकी चैन ने कहा कि पिछले कुछ सालों में हुई कई लोगों की मौतों ने उन्हें यह सिखाया कि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं होता। इसलिए उन्होंने सोचा कि दुनिया से विदा लेने से पहले वह अपनी भावनाएं एक गाने के जरिए लोगों तक पहुंचैना चाहते हैं। हालांकि, उनके परिवार और उनकी टीम ने इस गाने को अभी रिलीज न करने की सलाह दी है। इसलिए यह तय किया गया है कि यह गाना उनके फैंस के लिए उसी दिन जारी किया जाएगा, जब चैन इस दुनिया को अलविदा कहेंगे। प्रीमियर के दौरान जब दर्शकों ने उनसे इस गाने की कुछ पंक्तियां गाने का अनुरोध किया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए मना कर दिया। मजाक में उन्होंने कहा, “अगर मैं अभी गा दूं, तो आप सब रोने लगेंगे।” बता दें कि अपनी नई फिल्म अनएक्सपेक्टेड फैमिली में जैकी चैन बिल्कुल अलग रूप में नजर आ रहे हैं। इस बार वह एक ऐसे बुज़ुर्ग व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं, जो अल्जाइमर बीमारी से जूझ रहा है।
बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल इन दिनों कुल्लू-मनाली की वादियों में हैं। बीती शाम उन्होंने कुल्लू के शोभला मल्टीप्लेक्स पहुंचकर अपनी नई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ का प्रीमियर देखा। इस दौरान उनके फैंस ने सनी देओल के साथ फोटो खिंचवाई और काफी देर तक उनसे बात की। मल्टीप्लेक्स में सनी देओल ने आम लोगों के साथ बैठकर अपनी फिल्म का लुत्फ उठाया। अभिनेता को अपने बीच पाकर वहां मौजूद प्रशंसकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मल्टीप्लेक्स पहुंचते ही सनी देओल का जोरदार स्वागत किया गया। उनका अंदाज हमेशा की तरह सादगी भरा और मिलनसार नजर आया। सनी देओल ने खुद प्रशंसक का मोबाइल लेकर खींची सेल्फी इस दौरान एक खास पल तब देखने को मिला, जब एक प्रशंसक सेल्फी लेने में असमर्थ था। सनी देओल ने मुस्कुराते हुए खुद उसका मोबाइल हाथ में लिया और सेल्फी क्लिक की। थिएटर में बच्चों से की बात थिएटर में प्रवेश करने से पहले सनी देओल ने छोटे बच्चों से भी मुलाकात की। बच्चों के साथ उनकी आत्मीय बातचीत ने माहौल को और भी खास बना दिया। मल्टीप्लेक्स में दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर शुरुआती उत्साह साफ नजर आया, जो ‘बॉर्डर 2’ के प्रति दीवानगी का संकेत देता है। बता दें कि सनी देओल तीन दिन से कुल्लू-मनाली की वादियों में हैं।
टीवी, फिल्म और ओटीटी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकीं अभिनेत्री अमृता खानविलकर के लिए साल 2026 की शुरुआत बेहद खास रही है। इस साल उनकी दो वेब सीरीज रिलीज हुईं, जिनमें से एक में उन्होंने इमरान हाशमी के साथ स्क्रीन शेयर की है। दमदार किरदारों, एक्शन सीक्वेंस और अलग-अलग जॉनर में काम कर अमृता ने एक बार फिर अपनी वर्सेटिलिटी साबित की है। थिएटर से लेकर ओटीटी तक, हर मंच पर उनका आत्मविश्वास साफ नजर आता है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिनेत्री ने इमरान हाशमी के साथ काम करने के अनुभव, अपने हालिया प्रोजेक्ट्स और आगे की योजनाओं पर खुलकर बात की। 2026 की शुरुआत आपके लिए काफी रॉकिंग रही है। दो वेब सीरीज रिलीज हुई हैं, इसे आप कैसे देखती हैं? सच में यह शुरुआत काफी रॉकिंग रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार मैंने कोई न्यू ईयर रेजोल्यूशन भी नहीं लिया था, और फिर भी सब कुछ अपने आप सही तरीके से होता चला गया। मैं अपनी मराठी थिएटर की रिहर्सल कर रही थी, तभी दिसंबर में मुझे कॉल आया कि तस्करी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही है और प्रमोशन के लिए मेरी डेट्स चाहिए। संयोग से 7 और 8 जनवरी की जो दो डेट्स मांगी गई थीं, मैं उन दिनों फ्री थी। सब कुछ बड़े आराम से हो गया और मुझे दर्शकों से बहुत प्यार मिला। तस्करी हो या स्पेस जेन: चंद्रयान, दोनों में आपके किरदार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। इसे निभाना कितना चैलेंजिंग था? तस्करी में मुझे मिताली कामथ के रोल के लिए नहीं, बल्कि किसी और किरदार के ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। पता नहीं नीरज और राघव सर के मन में क्या आया कि उन्होंने कहा, “इसका भी ऑडिशन दे दो।” नीरज सर ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे एक्शन आता है। मैंने ईमानदारी से कहा कि एक्शन तो नहीं, लेकिन मैं डांसर हूं, इसलिए कोरियोग्राफी समझती हूं। इसके बाद डेढ़ घंटे तक स्टंट की रिहर्सल करवाई गई और फिर ऑडिशन लिया गया। ऑडिशन देखते ही उन्होंने कहा कि यही रोल मैं करूंगी। एक एक्शन सीन के दौरान गलती से मैंने अपने स्टंटमैन को मुक्का मार दिया, जो उसकी हड्डी पर जा लगा और मेरा हाथ भी सूज गया। इसके बावजूद तुरंत ग्लव्स पहनकर मुझे किक बॉक्सिंग वाले मोंटाज के लिए फोटोशूट करना था। दर्द भूलकर मैं काम पर लग गई। अब यही किस्से मैं आगे चलकर अपने ग्रैंडचिल्ड्रन को सुनाऊंगी। वहीं स्पेस जेन: चंद्रयान में मुझे एक बार फिर टीवीएफ के साथ काम करने का मौका मिला। इस सीरीज के जरिए मैंने वैज्ञानिकों की जिंदगी को बहुत करीब से महसूस किया कि कैसे उनके प्रोफेशन में 0.0001 प्रतिशत की भी कितनी अहमियत होती है। ऐसे रोल करने के बाद क्या आपके अंदर का डर खत्म हो गया है? क्या आगे आप ज्यादा एक्सपेरिमेंटल रोल करेंगी? जी हां, डर तो उसी वक्त खत्म हो गया था जब मैंने नीरज पांडे जैसे डायरेक्टर के साथ एक एक्शन सीरीज कर ली। इसके बाद मेरी इच्छा थी कि मैं टीवीएफ के साथ भी एक ठोस काम करूं, और वह मौका मुझे मिला। आगे भी मैं इसी ईमानदारी के साथ अलग-अलग तरह के काम करना चाहती हूं। तस्करी के सेट पर इमरान हाशमी को देखकर क्या आप कभी स्टारस्ट्रक हुईं? कोई खास पल जो आपके लिए यादगार रहा हो? मेरी और नंदीश की जो जबरदस्त केमिस्ट्री दिखती है, वह सिर्फ इमरान सर की वजह से ही संभव हो पाई। जब एक एक्शन सीन के दौरान मुझे चोट लगी, उस वक्त मेरे पीछे इमरान सर ही थे। उन्होंने तुरंत सीन रुकवाया, आइस बकेट मंगवाया और खुद मेरा हाथ पकड़कर उसमें डाला। दर्द के कारण मैं रो पड़ी थी, लेकिन उन्होंने मुझे संभाला। वाकई यह कहना गलत नहीं होगा कि “अख्खा बॉलीवुड एक तरफ और इमरान हाशमी एक तरफ।” सेट पर कई मेकअप आर्टिस्ट और क्रू मेंबर्स मेरे पास आकर कहते थे कि मैम, बस एक फोटो खिंचवा दीजिए या हमें उन्हें बस देखना है। उनके साथ काम करने में एक अलग ही तरह का कंफर्ट था। उनका ऑरा ही अलग है। वे ऐसे अभिनेता हैं जिन्हें न फेलियर से फर्क पड़ता है, न सक्सेस से। आपके हिसाब से ओटीटी प्लेटफॉर्म नए एक्टर्स को किस तरह मौके दे रहा है? मुझे लगता है कि ओटीटी सबसे ज्यादा राइटर्स का मीडियम है। यहां किरदारों को बहुत अलग तरीके से लिखा जा सकता है। चाहे किरदार डार्क हो या ग्रे जोन में, दर्शक उसे स्वीकार कर लेते हैं। स्टोरीटेलिंग के लिहाज से ओटीटी एक बेहद दमदार प्लेटफॉर्म है। जब जयदीप अहलावत, तिलोत्तमा शोमे, कोंकणा सेन शर्मा जैसे कलाकार हों, तो फिर क्या कहना। यहां हीरो-हीरोइन नहीं, सिर्फ कंटेंट काम करता है। फिल्मों के अलावा आप थिएटर में भी काफी एक्टिव हैं और इस बार अपना शो खुद प्रोड्यूस कर रही हैं। इसके बारे में बताइए? यह मराठी रंगभूमि में मेरा डेब्यू है, जिसमें मैं एक्टिंग के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी हूं। थिएटर मुझे बहुत पसंद है, क्योंकि जो संतुष्टि थिएटर देता है, वह कोई और मंच नहीं दे सकता। जब 700–800 लोग आपको लाइव देखने आते हैं और शो खत्म होते ही आपको उनका प्यार मिलता है, वह अनुभव अनमोल होता है। अब तक हम मुंबई, पुणे, सातारा, सांगली और कोल्हापुर मिलाकर 10 शो कर चुके हैं। नाटक का नाम लग्न पंचमी है। अपने अब तक के सफर को आप कैसे देखती हैं? इस सफर में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं। मैं भगवान का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने मुझे यह दिन दिखाया। हर कोई मेहनत करता है, लेकिन कई बार काम नोटिस नहीं हो पाता। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे दर्शकों का इतना प्यार मिला, और इसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी।
‘बॉर्डर 2’ में देशभक्ति, जज्बे और जमीन से जुड़े इमोशंस का ऐसा संगम है कि फिल्म का हर सीन दर्शकों के दिल में सीधे उतर रहा है। फिल्म के गाने भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान फिल्म के गीतकार मनोज मुंतशिर ने बताया कि जब तक अच्छे शब्द नहीं मिले तब तक गाने 9 महीनों तक लगातार लिखते रहे। कई बार गीत लिखते वक्त उनकी आंखों में आंसू आ जाता था। म्यूजिक डायरेक्टर मिथुन ने बताया कि उन्हें 20 साल के करियर के बाद भी लगा कि ‘बॉर्डर 2’ उनकी पहली फिल्म है। पेश है मनोज मुंतशिर और मिथुन से हुई बातचीत के कुछ और प्रमुख अंश.. सवाल: जब ‘बॉर्डर 2’ का ऑफर आया तो मन में पहला सवाल क्या था? पुरानी विरासत को बचाना या नई पहचान बनाना? मनोज मुंतशिर/ जवाब: पुरानी लेगेसी को सम्मान देना। ‘बॉर्डर’ ने जो इज्जत कमाई है, उसे बनाए रखना ही हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य था। हमने अन्नू मलिक और जावेद अख्तर साहब से बहुत कुछ सीखा। ‘बॉर्डर 2’ की नई कहानी और नई सिचुएशन हैं। लेकिन पुराने गानों के आगे हमारा सिर हमेशा झुका रहा। हमने अपना बेस्ट दिया। लेकिन मूल बॉर्डर साउंडट्रैक के लिए हमेशा सम्मान रहा। सभी रिक्रिएटेड गानों में हमारी श्रद्धांजलि झलकती है। सवाल: मिथुन आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगे? मिथुन/जवाब: मनोज जी जिस सम्मान की बात कर रहे रहे हैं, वो गानों में साफ सुनाई देता है। घर कब आओगे और जाते हुए लम्हों सुनिए तो पता चलेगा। ये मूल गानों के सामने नमन हैं। पूरे एहतराम और प्रार्थना के साथ बनाए गए। हमारा यही भाव था। जो लोग पसंद कर रहे हैं, उन्हें ये भावना महसूस हुई। सवाल: ‘बॉर्डर 2’ के गाने बनाते समय प्रेशर महसूस हुआ? मिथुन/ जवाब: मुझे लगता है कि प्रेशर ऐसा शब्द है, जिससे मैं या शायद मनोज जी भी ज्यादा रिलेट नहीं करते। हां, जिम्मेदारी जरूर होती है, और वो हर फिल्म में होती है, क्योंकि हर कहानी कुछ न कुछ कहना चाहती है। इसलिए संगीतकार और गीतकार से वही उम्मीद की जाती है। लेकिन जब बात ‘बॉर्डर’ की होती है, तो जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है। ये सिर्फ एक ब्रांड की बात नहीं है। अगर कुछ देर के लिए फिल्म का नाम ‘बॉर्डर’ न भी मानें, तब भी ये हमारे सैनिकों की सच्ची कहानियों पर आधारित है। 1971 में भारत ने कई मोर्चों पर युद्ध लड़े थे। ‘बॉर्डर’ लोंगेवाला की लड़ाई पर थी, जबकि इस बार कहानी एक अलग फ्रंट की है। इस फिल्म की कहानी से हमारे देश के शहीदों के नाम जुड़े हैं, और यही इसे बेहद गंभीर और संवेदनशील बनाता है। हम हाल ही में शहीदों के परिवारों से मिले और तब समझ आया कि इस कहानी से जुड़ना कितनी बड़ी जिम्मेदारी है। सवाल: ‘बॉर्डर’ के म्यूजिक से आपका रिश्ता कैसा रहा है, और नए वर्जन को लेकर आपका नजरिया क्या था? मनोज मुंतशिर/जवाब: ‘बॉर्डर’ के दो गाने मेरी जिंदगी का हिस्सा तब से हैं, जब वे कैसेट पर आए थे। तब प्लेलिस्ट का कॉन्सेप्ट नहीं था, लेकिन शायद ही कोई हफ्ता ऐसा गया हो जब मैंने उस म्यूजिक को दोबारा न सुना हो। उस म्यूजिक से हम बेहद करीबी रिश्ता महसूस करते हैं। ऐसे में न मैं और न ही मिथुन सर कभी किसी रेस में थे कि हम इससे बेहतर कुछ करेंगे। जिस चीज से आप इतना प्यार करते हैं, उससे मुकाबला नहीं, उसे एंजॉय और सेलिब्रेट किया जाता है। हमारी कोशिश बस इतनी थी कि पूरी विनम्रता के साथ देखें, क्या हम अपने तरीके से उसमें कुछ जोड़ सकते हैं। सवाल : ‘संदेशे आते हैं’ जैसे आइकॉनिक गीत में कुछ नया लिखने की जरूरत क्यों पड़ी? मनोज मुंतशिर/जवाब: ‘संदेशे आते हैं’ अपने आप में एक कम्प्लीट सॉन्ग है। जावेद अख्तर साहब ने उसमें अपनी आत्मा डाली थी। वो सिर्फ गीत नहीं, एक धड़कता हुआ दिल है। उसमें कुछ नया जोड़ना यह दिखाने के लिए नहीं था कि हम भी लिख सकते हैं। बात सिर्फ इतनी थी कि ‘बॉर्डर 2’ एक नई फिल्म है, इसके मोर्चे और इसके किरदार अलग हैं। जो किरदार सीधे ‘बॉर्डर’ पर नहीं थे, उनकी भी अपनी कहानी है, और उस कहानी को कहने के लिए एक भाषा चाहिए। अनु मलिक का म्यूजिक और जावेद साहब का इमोशनल लैंडस्केप पहले से मौजूद था। हमने बस उसी कैनवस पर अपने हिस्से के चार रंग जोड़े। ‘संदेशे’ हमेशा जावेद अख्तर, अनु मलिक, रूप कुमार राठौड़ और सोनू निगम का ही गीत रहेगा। इस पर न मिथुन की दावेदारी है, न मेरी, न किसी और की। सवाल: क्या यह गीत अचानक लिखा गया था या इसके पीछे लंबा सफर रहा? मनोज मुंतशिर/जवाब: यह गीत किसी एक दिन या कुछ घंटों में नहीं लिखा गया। इसे लगभग 9 महीनों तक लगातार लिखा और बदला गया। कई बार शब्द अच्छे लगे, फिर नई धुन आई तो लगा इससे भी गहरा लिखा जा सकता है। यह एक सतत साधना थी, जिसमें भावनाएं हर दिन शामिल रहीं। सवाल: इस गीत को लिखते समय भावनात्मक जुड़ाव कितना गहरा था? मनोज मुंतशिर/जवाब: बहुत गहरा। कई बार लिखते हुए आंसू आ जाते थे। कुछ पंक्तियां ऐसी थीं जिन्हें लिखते समय भावनाओं पर काबू नहीं पाया जा सका। यह गीत उन किरदारों और उस कहानी की पुकार था, जिसे बिना संवेदनशील हुए लिखा ही नहीं जा सकता। सवाल: मिथुन, उस पल अपनी भावनाओं को संभालना आपके लिए कितना मुश्किल था? मिथुन/जवाब: मैं इसे मुश्किल नहीं कहूंगा। जब दिल सही जगह पर हो और नीयत साफ हो, तो भावनाएं खुद बहने लगती हैं। कमरे में मनोज मुंतशिर जी और अनुराग सिंह जी जैसे लोग थे, जिनका सेना से गहरा जुड़ाव और भावनात्मक समझ बहुत मजबूत है। उनकी मौजूदगी मेरे लिए सही रोशनी जैसी थी। मुझे बस अपनी भावना को खुलकर बाहर आने देना था। जो धुन आपने सुनी, वही मेरी पहली और सच्ची अभिव्यक्ति थी। सवाल: गीत लिखना और कविता लिखना अलग कैसे होता है, और मिथुन के साथ आपका जुड़ाव कैसा रहा? मनोज मुंतशिर/जवाब: फिल्मों के गाने लिखते वक्त कविता नहीं, बल्कि ऐसे बोल लिखे जाते हैं जो संगीत के साथ सांस ले सकें। मिथुन के साथ हमेशा पूरा भरोसा रहा, क्योंकि वो शब्दों की गहराई को तुरंत समझ लेते हैं और उसी पल उसका सही एक्सप्रेशन ढूंढ लेते हैं। सवाल: जिस धुन पर गाना बना, वो कैसे तय हुआ? मनोज मुंतशिर/जवाब: मैंने उन्हें दो लाइनें सुनाईं और उसी पल उन्होंने पियानो पर जो धुन बनाई, वही आज गाने में है। उसे संवारने में एक साल लगा, लेकिन धुन वही रही। यही कनेक्शन है। मिथुन हमेशा यूनिवर्स से जुड़े हुए लगते हैं, जैसे वो बस चुने हुए इंस्ट्रूमेंट हों। सवाल: आप दोनों को बहुत शानदार फीडबैक मिले होंगे। वीर जवानों के परिवारों से भी आप मिले। ऐसा कोई खास कॉम्प्लिमेंट या प्रतिक्रिया, जो आज भी जहन में हो? मनोज मुंतशिर/जवाब: हजारों-हजारों कमेंट आए। कई लोगों ने लिखा कि सिर्फ इस गीत के लिए मैं ये फिल्म 10 बार देखूंगा। ये पढ़कर बहुत अच्छा लगा। लेकिन सच कहूं तो आप शायद गाने के लिए फिल्म देखने जाएं, मगर फिल्म इतनी अच्छी बनी है कि आप 20 बार देखेंगे। 10 बार गाने के लिए और 10 बार फिल्म के लिए। सवाल: मिथुन, आपको कोई ऐसा फीडबैक मिला जो दिल को छू गया हो? मिथुन/जवाब: मैं फीडबैक से थोड़ा दूर रहता हूं, सोशल मीडिया से भी दूरी रखता हूं। लेकिन जब मेरा गाना लोगों तक पहुंचता है, तो उसकी फ्रीक्वेंसी मुझे महसूस होती है। मेरे लिए सबसे खास लम्हा तब था जब हम INS विक्रांत पर परफॉर्म कर रहे थे। स्टेज पर सोनू निगम जी, मनोज जी, 50 म्यूजिशियन और हमारे भारतीय नौसेना के अफसर मौजूद थे। दो अंतरों के बाद मुझे लगा जैसे वक्त थम गया हो। मैंने सब से खड़े होकर हमारे “मिट्टी के बेटों” को श्रद्धांजलि देने की गुजारिश की। फिर कोरस ने गाया- “कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं…” वो पल कला, सिनेमा, अवॉर्ड्स, व्यूज, सब से परे था। वो अनुभव किसी भी सम्मान से बड़ा था। सवाल: मनोज जी, आप सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव हैं। पॉजिटिव और क्रिटिकल फीडबैक को कैसे फिल्टर करते हैं? मनोज मुंतशिर/जवाब:मेरे पास सिर्फ एक फिल्टर है कि क्या मेरी बात से देश का, समाज का, लोगों का भला हो रहा है? अगर जवाब “हां” है, तो मैं डरता नहीं। लेकिन अगर कोई बात सिर्फ मुझे मजा दे और समाज को नुकसान पहुंचाए, तो मैं उसे कभी नहीं कहूंगा। मेरे लिए सब कुछ मुझसे बड़ा है। ये मेरे बारे में नहीं, देश के बारे में है। सवाल: जब लोग कहते हैं कि आपके गीतों या धुनों ने उनकी जिंदगी बदल दी, तब आप क्या महसूस करते हैं? मनोज मुंतशिर/जवाब: हम बस ईश्वर का आभार मानते हैं। अगर सब कुछ हमारी काबिलियत से होता, तो मैं रोज सुबह उठकर एक बड़ा गीत लिख देता। सच ये है कि हम बहुत सीमित हैं। हम पत्थर हैं और हमारे वीरों की कहानियां वो पारस हैं, जो हमें सोना बना देती हैं। सवाल: मिथुन, आप इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे? मिथुन/ जवाब: नम्रता एक कलाकार की सबसे बड़ी ताकत है। मैंने ये अपने गुरुओं से सीखा है। प्यारेलाल जी कहा करते थे कि ईश्वर हमें तभी इस्तेमाल करता है, जब हम खाली होते हैं। 20 साल के करियर के बाद भी मुझे लगता है कि ‘बॉर्डर 2’ मेरी पहली फिल्म है और हर काम ऐसे करता हूं जैसे ये आखिरी हो। सवाल: इतना गहरा असर छोड़ने वाले गीत कैसे रचे जाते हैं? मनोज मुंतशिर/जवाब: फैज साहब ने कहा था कि जिस दिन मेरे सीने का नासूर रिसना बंद हो जाएगा, मैं लिखना छोड़ दूंगा। जिस दिन मैं दूसरों का दर्द महसूस करना बंद कर दूं, उस दिन मैं लिखना भी छोड़ दूंगा। आज मैं लिखता हूं क्योंकि मैं तड़पता हूं। मेरी आंखों में आंसू हैं, और शायद यही वजह है कि मेरे गीत लोगों को छू पाते हैं। सवाल: आज देशभक्ति को पैट्रियोटिज्म बनाम जिंगोइज्म के चश्मे से क्यों देखा जा रहा है? आप क्या कहना चाहेंगे? मनोज मुंतशिर/जवाब: ये फिल्म बनाने वालों की नीयत पर निर्भर करता है। अगर इरादा सिर्फ भावनाएं भड़काकर पैसा कमाने का है, तो जिंगोइज्म लगेगा। लेकिन अगर ईमानदारी से कहानी कही जाए, तो उस पर कभी जिंगोइज्म की मुहर नहीं लगती।
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा आज 51 साल की हो गई हैं। फिल्म दिल से करियर की शुरुआत करने वाली प्रीति ने दिल चाहता है, कल हो ना हो, कोई… मिल गया, वीर-जारा और कभी अलविदा ना कहना जैसी कई फिल्मों में काम किया। आज प्रीति जिंटा के बर्थडे के खास मौके पर आइए उनकी जिंदगी को करीब से छूते हैं- प्रीति का जन्म एक हिमाचली राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता दुर्गानंद जिंटा भारतीय सेना में अधिकारी थे। बचपन से पिता की डिसिप्लिन वाली लाइफस्टाइल ने एक्ट्रेस की पर्सनैलिटी पर गहरी छाप छोड़ी, लेकिन जब प्रीति 13 साल की थीं, तब उनके पिता का एक कार एक्सीडेंट में निधन हो गया। उस कार में उनकी मां नीलप्रभा भी थीं। किस्मत से उनकी जान बच गई, लेकिन उनके शरीर की लगभग हर हड्डी, यहां तक कि रीढ़ की हड्डी भी टूट गई। वह करीब एक साल तक बिस्तर पर रहीं। सिमी गरेवाल के शो में प्रीति ने पिता के साथ हुए हादसे को लेकर बताया था कि हादसे से कुछ दिन पहले उन्हें अजीब सा एहसास हो रहा था। वह स्कूल में रोज न्यूजपेपर पढ़ती थीं और एक दिन उन्होंने अपनी दोस्त शगुन से कहा था कि न जाने क्यों उन्हें लगता है कि वे अपने पिता से जुड़ी कोई बुरी खबर न्यूजपेपर में पढ़ने वाली हैं। जिस पर दोस्त ने कहा था कि तुम पागल हो गई हो। जब एक्ट्रेस के पिता का एक्सीडेंट हुआ था, उस समय प्रीति स्कूल में थीं। एक सुबह एक नन उन्हें जगाने आईं और बेहद प्यार से कहा कि उन्हें कहीं जाना है। प्रीति को यह अजीब लगा, क्योंकि स्कूल में शरारत के चलते नन आमतौर पर उनसे रूड तरीके से पेश आती थीं। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि एक छोटा सा हादसा हुआ है। उन्हें सीधे अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अपनी मां को स्ट्रेचर पर देखा। मां बेहोश थीं। पिता के बारे में किसी ने कुछ नहीं बताया। अगले दिन जब प्रीति स्कूल लौटीं, तो स्कूल चल रहा था और उन्हें पार्लर में बैठाया गया। वहीं उन्होंने अखबार में अपने पिता की मौत की खबर पढ़ी थी। प्रीति ने बताया था कि उस घटना पर उन्होंने महीनों तक कोई रिएक्शन नहीं दिया। करीब छह महीने तक वह रोई तक नहीं। उन्हें कभी पिता का शव देखने नहीं दिया गया था, इसलिए उनके मन ने इस सच को स्वीकार ही नहीं किया। फिर एक रात अचानक नींद में उनकी चीख निकल गई और सारा दर्द आंसुओं के साथ बाहर आ गया। अपने पिता को याद करते हुए प्रीति ने बताया था कि उन्होंने उन्हें हमेशा बराबरी का दर्जा दिया। वह कहते थे कि बेटियों को कमजोर बनाकर नहीं पालना चाहिए। अगर बेटे बैग उठाते थे, तो बेटी भी उठाती थी। अगर बेटी खाना बनाना सीखती थी, तो बेटे भी सीखते थे। भाई को झगड़े में पत्थर मार दिया था प्रीति जिंटा बचपन से ही बहुत निडर और शरारती थीं। एक बार उनका अपने बड़े भाई से झगड़ा हो गया। गुस्से में उन्होंने पत्थर उठाकर भाई के सिर पर मार दिया। भाई रोने लगा। तब प्रीति को अपने पापा की बात याद आ गई। उनके पापा हमेशा कहते थे, “राजपूत रोते नहीं हैं।” बस फिर क्या था, प्रीति ने भाई को थप्पड़ मारकर कहा, “तुम राजपूत नहीं हो क्या? रोना बंद करो!” भाई के सिर से खून निकल रहा था, लेकिन वो चुपचाप बैठ गया। तभी मां आ गईं। प्रीति को पता था कि अब तो पिटाई पक्की है, इसलिए वो डर के मारे टेबल के नीचे छुप गईं। पूरी रात वो वहीं सोती रहीं। घरवालों को लगा कि प्रीति डरकर घर से भाग गई है। पुलिस तक बुला ली गई। सुबह जब घर साफ करने वाली बाई आई, तब पता चला कि प्रीति तो टेबल के नीचे ही सो रही थीं। किताब नहीं थी, फिर भी सब्जेक्ट में टॉप किया टीवी शो जीना इसी का नाम है में प्रीति की मां ने बताया था कि प्रीति स्कूल में तो खूब पढ़ती थीं, लेकिन घर आकर किताबें कम खोलती थीं। जब उनकी मां को दसवीं के इंग्लिश पेपर से एक दिन पहले पता चला कि प्रीति के पास इंग्लिश की किताब ही नहीं है, तो वो बहुत घबरा गईं और तुरंत बाजार से किताब लाकर दी। प्रीति को कोई घबराहट नहीं थी, लेकिन मां को लग रहा था कि अब ये फेल हो जाएगी। पर जब रिजल्ट आया तो सब हैरान रह गए क्योंकि प्रीति पूरे हिमाचल प्रदेश में इंग्लिश में फर्स्ट आई थीं। स्कूल के बाद प्रीति ने शिमला के सेंट बीड्स कॉलेज से अंग्रेजी में ऑनर्स किया और फिर साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन और क्रिमिनल साइकोलॉजी की पढ़ाई की। एक्टिंग में जाने की उनकी प्लानिंग नहीं थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दिलचस्प तरीके से हुई करियर की शुरूआतसाल 1996 में प्रीति अपने एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में गई थीं। वहीं उनकी मुलाकात एक ऐड फिल्ममेकर कुणाल से हुई। बातों-बातों में कुणाल को प्रीति की पर्सनैलिटी इतनी पसंद आई कि दो दिन बाद उन्होंने फोन कर कहा कि उन्होंने एक चॉकलेट का ऐड प्रीति को ध्यान में रखकर लिखा है और उन्होंने प्रीति को ऑडिशन के लिए बुलाया। प्रीति थोड़ी घबराई हुई थीं, लेकिन उन्होंने सोचा कि ऑडिशन देने से क्या नुकसान होगा? वहां बस चार-पांच लोग होंगे और बात खत्म हो जाएगी, लेकिन जब वह ऑडिशन के लिए पहुंचीं, तो वहां करीब 50 लड़कियां खड़ी थीं। प्रीति घबरा गईं, लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत जुटाई और हाथ में चॉकलेट लेकर सिर्फ दो लाइनें बोलीं। वहीं से किस्मत ने करवट ले ली। एक्ट्रेस ने सिर्फ दो लाइन बोलकर दिखाई और उनका सिलेक्शन हो गया। यह पर्क चॉकलेट का ऐड था। इसके बाद उन्होंने लिरिल का मशहूर ऐड किया और यहीं से उनकी पहचान बननी शुरू हो गई। सिक्का उछाल फिल्मों में आने का किया था फैसला प्रीति एक ऑडिशन के लिए गई थीं, तभी उनकी मुलाकात फिल्ममेकर शेखर कपूर से हुई। वो सीढ़ियों से उतर रही थीं, हाथ में दो किताबें थीं। तभी शेखर ने उनसे पूछा, “आप ऑडिशन में क्या करना चाहेंगी?” प्रीति ने सीधा कहा, “मैं ऑडिशन देने नहीं आई हूं।” शेखर ने माइक लेकर सबके सामने बोल दिया कि ये लड़की ऑडिशन देने आई है, लेकिन घबरा गई है। प्रीति का चेहरा लाल हो गया और उन्होंने आखिरकार ऑडिशन दे ही दिया। दो हफ्ते बाद शेखर कपूर ने उन्हें बुलाया और कहा, “क्या आप मेरे साथ ये फिल्म (ता रा रम पम पम) करेंगी?” प्रीति को यकीन ही नहीं हुआ, उन्होंने सिक्का उछाल करके फिल्मों में काम करने का फैसला किया। हालांकि, यह फिल्म नहीं बन पाई। फिल्मी करियर की शुरुआतप्रीति की पहली रिलीज हुई फिल्म मणिरत्नम की फिल्म दिल से थी। इसमें उनका रोल भले ही छोटा था, लेकिन उनकी शानदार एक्टिंग ने उन्हें पहचान दिलाई। जब प्रीति फिल्म दिल से कर रही थीं, तो कई लोगों ने उन्हें डरा दिया कि फिल्म में मनीषा कोइराला उनके रोल को दबा देंगी। प्रीति थोड़ा घबराई हुई थीं, लेकिन सेट पर मनीषा के साथ काम करके उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। प्रीति ने कहा था कि इस अनुभव की वजह से आज जब भी कोई नई लड़की उनके साथ काम करती है, तो वो खासतौर पर कोशिश करती हैं कि उसके साथ अच्छे से पेश आएं। लीड रोल के तौर पर वह फिल्म सोल्जर में नजर आई थीं। सरोज खान की डांट के बाद रो पड़ी थीं प्रीति जिंटा ने सिमी गरेवाल के शो में बताया था कि जब वह फिल्म क्या कहना की शूटिंग कर रही थीं, तब एक गाने के सीन में वह ठीक से लिपसिंक नहीं कर पा रही थीं। इस बात पर मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान काफी नाराज हो गई थीं। प्रीति के अनुसार, उसी दिन उन्हें पहली बार असली पैशन का एहसास हुआ। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है मेरा असली जुनून तब शुरू हुआ, जब सेट पर मुझ पर चिल्लाया गया था। मुझे आज भी याद है, मेरी पहली फिल्म क्या कहना के दौरान सरोज जी ने कहा था, ‘कहां से ले आए हो इस लड़की को? इसे यह नहीं पता कि डांस कैसे करना है?’ प्रीति ने आगे बताया था कि सरोज खान ने गुस्से में यह भी कहा था कि उन्हें लिपसिंक तक नहीं आती और सवाल उठाया कि वह आखिर यहां कर क्या रही हैं। उस पल को याद करते हुए प्रीति ने कहा था, “उस वक्त मैं खुद को बहुत मूर्ख महसूस कर रही थी और रो भी पड़ी थी।” हालांकि उसी डांट ने उन्हें खुद को बदलने की प्रेरणा दी। प्रीति ने बताया था कि उन्हें तभी समझ आ गया था कि अगर उन्हें फिल्मों में टिकना है, तो आधे मन से नहीं बल्कि पूरी मेहनत और लगन के साथ काम करना होगा। कई हिट फिल्मों में काम किया 2003 से 2006 का दौर प्रीति जिंटा के करियर का सबसे बेस्ट टाइम रहा है। कोई मिल गया, कल हो ना हो, वीर जारा, सलाम नमस्ते और कभी अलविदा ना कहना जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार की कैटेगरी में ला खड़ा किया। प्रीति जिंटा ने अंडरवर्ल्ड डॉन के खिलाफ गवाही दी थी प्रीति जिंटा सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने साहस के लिए भी जानी जाती हैं। साल 2003 में अंडरवर्ल्ड के खिलाफ अदालत में गवाही देना उनके जीवन का सबसे साहसी फैसला माना जाता है। यह मामला फिल्म चोरी चोरी चुपके चुपके के फाइनेंसर भारत शाह से जुड़ा था, जिन पर मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील से संबंध रखने का आरोप लगा था। इस मामले में भारत शाह को गिरफ्तार किया गया था। इसी दौरान प्रीति को 50 लाख रुपए की रंगदारी की धमकी मिली। इस केस में कई बड़े फिल्मी सितारों को गवाह बनाया गया था, जिनमें सलमान खान और शाहरुख खान भी शामिल थे, लेकिन बाद में सभी अपने बयानों से मुकर गए, लेकिन प्रीति ने अदालत में अपने बयान से पीछे हटने से इनकार कर दिया। वह इकलौती गवाह थीं, जिन्होंने अपने पहले दिए गए बयान को कोर्ट में दोहराया और प्रॉसिक्यूटर का साथ दिया। कोर्ट में गवाही देने के बाद प्रीति को दो महीने तक विटनेस प्रोटेक्शन में रखा गया और वह पब्लिक लाइफ से दूर रहीं। उनके इस कदम की देशभर में सराहना हुई। इसी बहादुरी के लिए उन्हें रेड एंड व्हाइट ब्रेवरी अवॉर्ड्स में माइंड ऑफ स्टील अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 2016 में जीन गुडइनफ से शादी की प्रीति जिंटा की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने 2016 में अमेरिकी बिजनेसमैन जीन गुडइनफ से शादी की और अब वे लॉस एंजिलिस में रहती हैं। 2021 में सरोगेसी के जरिए वे जुड़वां बच्चों की मां बनीं। प्रीति एक्टिंग के अलावा स्पोर्ट्स की फील्ड में भी एक्टिव हैं। वह आईपीएल टीम पंजाब किंग्स की को ओनर हैं। 600 करोड़ की संपत्ति का ऑफर ठुकराया दिग्गज फिल्म निर्माता कमाल अमरोही के बेटे शानदार अमरोही ने साल 2011 में घोषणा की थी कि वे अपनी 600 करोड़ रुपए की संपत्ति प्रीति जिंटा के नाम कर देंगे। वे प्रीति को अपनी बेटी समान मानते थे क्योंकि उन्होंने एक पारिवारिक विवाद के दौरान शानदार का काफी सपोर्ट किया था। हालांकि प्रीति ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उन्हें किसी और की संपत्ति की जरूरत नहीं है और न ही उनका इसमें कोई स्वार्थ है। उन्होंने साफ किया कि वे केवल एक मित्र और मददगार के नाते उनके साथ थीं। बुर्का पहनकर फिल्म दबंग देखने गई थीं प्रीतिजब सलमान प्रीति के टॉक शो: अप क्लोज एंड पर्सनल विद पीजेड में गेस्ट के तौर पर आए, तो एक्ट्रेस ने बताया था कि जब फिल्म दबंग रिलीज हुई थी, तो वह ऑडियंस का रिएक्शन देखने के लिए बुर्का पहनकर गेटी थिएटर गई थीं। फिल्म के दौरान उन्होंने सलमान के कुछ सीन पर बाकी ऑडियंस के साथ सीटियां भी बजाई थीं। जल्द बड़े पर्दे में नजर आएंगी प्रीतिप्रीति जल्द ही फिल्म लाहौर 1947 में सनी देओल के साथ नजर आएंगी। यह बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म है, जिसे राजकुमार संतोषी डायरेक्ट कर रहे हैं और आमिर खान प्रोड्यूस कर रहे हैं। यह फिल्म साल 2026 में रिलीज हो सकती है। इसके अलावा चर्चा है कि संजय लीला भंसाली की नेटफ्लिक्स सीरीज हीरामंडी सीजन 2 में भी उन्हें एक रोल मिल सकता है। ________________________ बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... जावेद अख्तर @81, बंटवारे को ऐतिहासिक भूल बताया:आरएसएस की तुलना तालिबान से कर दी थी, बुर्का-घूंघट को व्यक्तिगत पसंद नहीं, ब्रेनवाश का नतीजा कहा जावेद अख्तर की धारदार कलम ने 'शोले', 'दीवार', ‘डॉन’, 'मिस्टर इंडिया' जैसी कालजयी फिल्मों को अमर संवाद दिए, तो उनकी बेबाक जुबान ने समाज, धर्मनिरपेक्षता और राजनीति पर कड़े प्रहार किए। पूरी खबर पढ़ें....
सिंगर-कंपोजर विशाल मिश्रा ने अपने बहुप्रतीक्षित डेब्यू एल्बम ‘पागलपन’ का पहला गाना ‘क्या बताऊं तुझे’ रिलीज कर दिया है। इस गाने के साथ विशाल ने अपने म्यूजिकल सफर के एक बेहद निजी और इमोशनल चैप्टर की शुरुआत की है। विशाल ने इस गाने के जरिए बेचैनी, अकेलेपन और उन जज्बातों को आवाज दी है, जिन्हें अक्सर लोग शब्दों में बयां नहीं कर पाते। ‘पागलपन’ का पहला गाना ‘क्या बताऊं तुझे’ एल्बम की इमोशनल दुनिया की झलक दिखाता है। गाने को एल्बम का पहला ट्रैक बनाए जाने को लेकर विशाल ने बताया कि यह गाना उनकी जिंदगी के उस दौर से निकला है, जहां पिछले दो साल बेचैनी, तन्हाई और खामोश दर्द से भरे रहे। उनके मुताबिक, यही वह पहला एहसास था, जिसे बाहर आना जरूरी था, और इसलिए उन्होंने इस गाने से ‘पागलपन’ की शुरुआत की। विशाल ने कहा कि यह एल्बम ईश्वर और उनके फैंस के आशीर्वाद का नतीजा है। पागलपन उन लोगों को समर्पित है जो गहराई से महसूस करते हैं, चुपचाप संघर्ष करते हैं और कई बार सही वक्त पर अपने प्यार या दर्द को शब्द नहीं दे पाते। ‘क्या बताऊं तुझे’ को ऐसे ही तमाम लोगों को डेडिकेट करता हूं। ‘पागलपन’ एक इंटरनेशनल एल्बम है, जिसमें भारतीय भावनाओं की झलक देखने को मिलेगी। इसे भूषण कुमार के साथ मिलकर कल्पना किया गया है। इस प्रोजेक्ट में दुनिया भर के कलाकार, साउंड्स और संस्कृतियों को एक साथ लाया गया है, ताकि एक ऐसा म्यूजिकल एक्सपीरियंस तैयार हो सके जो सीमाओं से परे हो। ‘क्या बताऊं तुझे’ सभी म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जबकि इसका वीडियो टी-सीरीज के यूट्यूब चैनल पर एक्सक्लूसिव तौर पर रिलीज किया गया है।
मल्हार पाटेकर ने शेयर की अजित पवार की तस्वीरें:नाना पाटेकर के फार्महाउस में दिखे पूर्व उपमुख्यमंत्री
नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने गुरुवार को दिवंगत अजित पवार को याद करते हुए सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने पवार परिवार और पाटेकर परिवार के बीच पुराने रिश्ते की बात भी बताई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद पर रहे अजित पवार का बुधवार को विमान हादसे में निधन हो गया, जिसके बाद पूरे महाराष्ट्र में दुख का माहौल है। मल्हार ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें अजित पवार, नाना पाटेकर और उनके परिवार के साथ पुणे के पास स्थित फार्महाउस में नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अजित पवार वहां प्राइवेट लंच के लिए गए थे और परिवार के साथ समय बिता रहे थे। ये तस्वीरें डोंजे इलाके में स्थित नाना पाटेकर के फार्महाउस की हैं। अजित पवार को याद करते हुए मल्हार ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अजित पवार का जाना उनके लिए निजी नुकसान है। उन्होंने कहा कि पवार उनके परिवार की तरह थे और हमेशा रहेंगे। उनके साथ बिताए गए पल कभी भुलाए नहीं जा सकते। मल्हार ने यह भी लिखा कि यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता। अजित पवार अक्सर नाना पाटेकर के फार्महाउस पर आते थे। यहां वे नाना पाटेकर के साथ बैठकर खाना खाते और बातचीत करते थे। नाना पाटेकर ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर अजित पवार की तारीफ भी की थी। उन्होंने कहा था कि पवार अपने काम को बिना दिखावे के करते थे और हमेशा जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ते थे। …………………. अजित पवार से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अजित पवार का अंतिम संस्कार, पत्नी ने गंगाजल चढ़ाया: बेटों ने मुखाग्नि दी, गन सैल्यूट दिया गया बारामती के काटेवाड़ी स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान में गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार का अंतिम संस्कार हो गया। उनके दोनों बेटों पार्थ और जय पवार ने मुखाग्नि दी। पत्नी सुनेत्रा पवार ने पति के पार्थिव शरीर पर गंगाजल चढ़ाकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर चाचा शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले, गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। पूरी खबर पढ़ें…
फिल्म प्रोड्यूसर शैलेन्द्र सिंह ने हाल ही में बताया कि विवेक ओबेरॉय द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सलमान पर आरोप लगाने के बाद सलमान बहुत गुस्से में थे। गौरतलब है कि फिल्म इंडस्ट्री में सलमान खान और विवेक ओबेरॉय के बीच पुराना विवाद रहा है। यह विवाद उस समय और बढ़ गया था, जब विवेक ने आरोप लगाया था कि सलमान ने उन्हें धमकी दी है। अब इस मामले को लेकर प्रोड्यूसर शैलेन्द्र सिंह ने कुछ बातें सामने रखी हैं। हाल ही में सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि विवेक की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद वे सलमान के घर गए थे। उस वक्त एक्टर काफी नाराज थे। शैलेन्द्र ने कहा कि उन्होंने सलमान को सलाह दी थी कि जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। उन्होंने एक्टर से कहा, “जिंदगी में हमें रिएक्ट नहीं, बल्कि एक्ट करना चाहिए। जो करना है, वह बाद में भी किया जा सकता है। अभी शांति से बैठो और समय को अपना काम करने दो।” शैलेन्द्र के मुताबिक, सलमान ने उनकी बात मानी और उस समय कोई रिएक्शन नहीं दिया। सलमान ने लड़ाई चुपचाप लड़ी: शैलेन्द्र फिल्म प्रोड्यूसर ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उसने (सलमान) वह लड़ाई चुपचाप लड़ी। मुझे लगता है कि अब विवेक बॉलीवुड में काम नहीं कर रहा है। मुझे पूरी तरह नहीं पता, लेकिन ऐसा ही लगता है। विवेक भी ऐसा कहते हैं, वह बहुत समझदारी भरा कदम था। किसी को चोट न पहुंचाना और खुद पर आरोप न आने देना, मुझे लगता है कि यह सही तरीका था। इंटरव्यू में शैलेन्द्र ने सलमान को लेकर यह भी कहा कि सलमान जंगल में पैदा हुआ टाइगर है, लेकिन अब जू में है। उनके मुताबिक सफलता मिलने के बाद सलमान डरपोक हो गए।
जब क्राइम कहानियां सिर्फ रहस्य सुलझाने तक सीमित न रहकर इंसान के मन में झांकने लगती हैं, तब उनका असर अलग होता है। दलदल भी ऐसी ही एक वेब सीरीज है। यह समझने की कोशिश करती है कि अपराध कैसे और किन हालात में पैदा होता है। यह सीरीज डराने से ज्यादा बेचैन करती है और देखने वाले के मन में कई सवाल छोड़ जाती है। सीरीज की कहानी 7 एपिसोड की इस वेब सीरीज की कहानी मुंबई की एसीपी रीता फरेरा के इर्द-गिर्द घूमती है। वह एक सीरियल किलर से जुड़े केस की जांच कर रही हैं, लेकिन यह जांच सिर्फ क्राइम सीन तक सीमित नहीं रहती। यह उसे उसके अपने अतीत, पुराने जख्मों और अंदर के डर से भी आमने-सामने खड़ा कर देती है। बचपन का दर्द, ऑफिस में खुद को बार-बार साबित करने का दबाव और खुद पर भरोसे की कमी कहानी की रीढ़ हैं। आइडिया दमदार है, लेकिन कुछ जगह कहानी की पकड़ ढीली पड़ती है। कई सीन ऐसे हैं, जहां तर्क पूरी तरह काम नहीं करता। सीरीज में एक्टिंग भूमि पेडनेकर ने एसीपी रीता फरेरा के किरदार को पूरी गंभीरता और संतुलन के साथ निभाया है। उनके सख्त एक्सप्रेशन्स, कम डायलॉग्स और अंदर की बेचैनी को दबाकर रखने का तरीका इस किरदार पर पूरी तरह फिट बैठता है। कई सीन में उनका अभिनय असर छोड़ता है। समारा तिजोरी अपने किरदार से कहानी में गहराई जोड़ती हैं। उनके अभिनय में दर्द और कड़वाहट साफ नजर आती है, जो सीरीज को भावनात्मक मजबूती देती है। आदित्य रावल ने भी अपने किरदार को ईमानदारी से निभाया है। सहायक भूमिकाओं में गीता शर्मा का काम कहानी को बैंलेंस देता है। सीरीज में निर्देशन और तकनीकी पक्ष डायरेक्टर अमृत राज गुप्ता ने कहानी को शोरगुल से दूर, धीमी और गंभीर रफ्तार में आगे बढ़ाया है। उन्होंने अपराध दिखाने के बजाय उसके असर और किरदारों की मानसिक हालत पर फोकस रखा है। मुंबई को अंधेरी, भारी और दबाव भरी जगह के रूप में दिखाया गया है। सीमित रोशनी और रंग सीरीज के मूड को मजबूत बनाते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक तनाव बढ़ाता है और सीन का ट्रांजिशन सहज रहता है। सीरीज को लेकर फाइनल वर्डिक्ट दलदल एक महत्वाकांक्षी सीरीज है, जो अपराध को सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि अंदर की टूटन के रूप में देखने की कोशिश करती है। भूमि पेडनेकर का अभिनय मजबूत है, वहीं समारा तिजोरी की मौजूदगी सबसे ज्यादा असर छोड़ती है। कुछ कमियों के बावजूद यह सीरीज गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाला अनुभव देती है।
फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर शैलेन्द्र सिंह ने एक्टर अक्षय कुमार को लेकर कहा कि वह मनी माइंडेड हैं। वह पहले बिजनेसमैन हैं और बाद में एक्टर हैं। शैलेन्द्र सिंह ने यह बात हाल ही में सिद्धार्थ कन्नन को दिए एक इंटरव्यू में कही। इंटरव्यू में शैलेन्द्र ने साल 2009 की फिल्म 8 x 10 तस्वीर से जुड़ा अपना अनुभव शेयर। उन्होंने यह कहा कि इस फिल्म की असफलता के बाद उन्होंने फिल्म बनाना छोड़ दिया था। शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि उनका बयान किसी निजी नाराजगी पर आधारित नहीं है। उन्होंने बताया कि अक्षय एक अच्छे इंसान हैं और दोनों के बीच रिश्ता ठीक था। उन्होंने बताया कि वे साथ में खेल भी खेलते थे। शैलेन्द्र ने कहा कि जब उन्हें अक्षय के साथ फिल्म बनाने का मौका मिला, तो वे बहुत खुश थे। उन्होंने बताया कि फिल्म 8 x 10 तस्वीर उस समय बनी थी जब अक्षय कुमार और डायरेक्टर नागेश कुकुनूर दोनों अपने करियर के अच्छे दौर में थे। शुरुआत में यह फिल्म 30 से 35 करोड़ रुपए के बजट में बनाई जानी थी। शूटिंग के लिए मुनार की जगह तय की गई, लेकिन अक्षय के व्यस्त शेड्यूल की वजह से प्लानिंग बदलती चली गई। शैलेन्द्र ने कहा, “मुनार से हम कैलगरी गए, फिर केप टाउन गए और उसके बाद कई दूसरी जगहों पर शूटिंग हुई।” उन्होंने बताया कि बार-बार लोकेशन बदलने से फिल्म का बजट काफी बढ़ गया। यह फिल्म अक्षय की सुपरहिट फिल्म सिंह इज किंग के तुरंत बाद रिलीज हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म पूरी तरह फ्लॉप रही। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद शैलेन्द्र ने अक्षय से उनकी फीस का कुछ हिस्सा वापस करने की बात कही। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि भाई, आपकी फिल्म देखने कोई नहीं आया। आपको भी कुछ जिम्मेदारी लेनी होगी। आपने मुझसे बहुत पैसे लिए हैं।” शैलेन्द्र के मुताबिक, अक्षय ने पैसे लौटाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ भी पैसे वापस नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने फिल्म बनाना बंद कर दिया। शैलेन्द्र ने आगे कहा कि अक्षय पैसे के मामले में बहुत स्ट्रेटजी से काम करते हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान उनकी फीस धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। शैलेन्द्र के अनुसार, “पहले 15 करोड़ रुपए होते हैं, फिर 21 करोड़ रुपए, फिर 27 करोड़ रुपए और बाद में अचानक 36 करोड़ रुपए हो जाते हैं। यह उनका लकी नंबर 9 है।”
जावेद जाफरी ने अपने चार दशक के करियर में हर तरह के किरदार निभाए हैं, लेकिन ‘माया सभा’ को वह अपने लिए खास फिल्म मानते हैं। उनसे इस अपकमिंग फिल्म को लेकर हुई खास बातचीत... ‘माया सभा’ की स्क्रिप्ट में ऐसा क्या था जिसने आपको तुरंत इस प्रोजेक्ट से जोड़ दिया? जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तो अपने करीब 40 साल के करियर में एक अभिनेता के तौर पर जो स्क्रिप्ट्स मुझे पढ़ने को मिली हैं, उनमें से यह सबसे पावरफुल लगी। सबसे खास बात यह थी कि यह एक कैरेक्टर-ड्रिवन स्क्रिप्ट है, न कि सिर्फ कहानी के सहारे चलने वाली फिल्म। यहां पूरा नैरेटिव मेरे किरदार के इर्द-गिर्द आगे बढ़ता है और उस किरदार में इतने इमोशनल और साइकोलॉजिकल लेयर्स हैं कि एक्टर को बहुत कम ऐसा मौका मिलता है। ईमानदारी से कहूं तो यह नो-ब्रेनर था। सोचने का मौका ही नहीं मिला, बस हां कहना था। इसके साथ-साथ एक अलग तरह का सम्मान भी महसूस हुआ कि निर्देशक ने मुझे इस रोल के लिए सोचा। आमतौर पर लोग मुझे कॉमेडी या डांस से जोड़ते हैं, ऐसे में मुझे एक अभिनेता के रूप में देखने के लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं। टाइटल में ‘माया’ और ‘सभा’ दोनों शब्दों की परतें आपके किरदार से कैसे जुड़ती हैं? ‘माया सभा’ असल में एक इल्यूजन की दुनिया है। यहां जो सिनेमा हॉल है, जो किरदार दिखाई देते हैं, वो वैसे नहीं हैं जैसे पहली नजर में लगते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है और किरदारों की परतें खुलती हैं, आपको एहसास होता है कि जो दिख रहा था, असलियत उससे बिल्कुल अलग है। यहां ‘सभा’ एक जगह भी है, लोग भी हैं, लेकिन सब कुछ माया यानी भ्रम में लिपटा हुआ है। धीरे-धीरे दर्शक समझता है कि यहां कोई और ही खेल चल रहा है। ‘माया सभा’ आपके करियर की उन फिल्मों में से है जो दर्शक से सोचने की मांग करती हैं? देखिए, कुछ फिल्में होती हैं जो कहती हैं कि आइए, बैठिए, एंटरटेन होइए, टाइम पास कीजिए। लेकिन ‘माया सभा’ में परतें हैं। यह फिल्म रिश्तों की जटिलता दिखाती है-एक पिता और बेटे का रिश्ता, उनके बीच की दूरी, बोझ, दर्द। बाहर से आए दो किरदारों का उनके जीवन में क्या असर पड़ता है, ये सब बहुत धीरे-धीरे सामने आता है। यह जरूरी नहीं कि आपको बहुत गहराई से सोचने की जरूरत पड़े, लेकिन फिल्म का अंदाज ऐसा है कि चीजें धीरे-धीरे रिवील होती हैं। दूसरी बार देखने पर यह फिल्म और ज्यादा एंजॉय होती है। मेरे हिसाब से यह एक बेहद खूबसूरत और अलग दुनिया है, जो इस कहानी के जरिए रची गई है। इस फिल्म में आपका किरदार क्या किसी मानसिक दुविधा से भी गुजरता है? यह किरदार कई तरह के बोझ अपने भीतर लिए हुए है। उसकी जिंदगी में क्या-क्या बीत चुका है-पत्नी का छोड़कर जाना, बेटे के साथ उलझा रिश्ता, करियर में उतार-चढ़ाव, पैसों और फिल्मों को लेकर असफलताएं—ये सब धीरे-धीरे सामने आता है। दर्शक भी कन्फ्यूज रहता है कि यह इंसान आखिर है क्या—नेगेटिव है, पॉजिटिव है, पागल है, होश में है, या किसी को मैनिपुलेट कर रहा है? जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, आपको समझ आता है कि यह किरदार किस दिशा में जा रहा है और उसकी मानसिक स्थिति क्या है। क्या आपको लगता है कि आज ऐसी फिल्में मेनस्ट्रीम में कम बन रही हैं? आज मेनस्ट्रीम का मतलब ही बदल गया है। लोग उसे मेनस्ट्रीम कहते हैं जो ज्यादा पैसा कमाती है लेकिन यह जरूरी नहीं कि वही सिनेमा का असली पैमाना हो। ‘माया सभा’ में कोई पारंपरिक फॉर्मूला नहीं है—न हीरो-विलेन, न गाने-डांस। यह एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है, एक रात की कहानी है, चार किरदार हैं और एक थिएटर है। इसके बावजूद आप एक सेकंड के लिए भी बोर नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी राइटिंग है। यही इस फिल्म का असली हीरो है। क्या यह रोल आपको एक अभिनेता के तौर पर आपको कंफर्ट जोन से बाहर ले गया? नहीं देखिए, अगर एक अभिनेता हमेशा अपने कंफर्ट जोन में ही काम करता रहे, तो वह बेहतर कैसे बनेगा? जब तक चुनौती नहीं होगी, तब तक परफॉर्मेंस भी आगे नहीं बढ़ सकती। अगर मैं वही करता रहूं, जो मैं सालों से करता आ रहा हूं, तो इसमें नया क्या रह जाएगा? एक अभिनेता के तौर पर ज़रूरी है कि आप ऐसे रोल्स चुनें जो आपको चैलेंज करें, जहां आप यह सोचें कि मैं इस किरदार को कैसे निभाऊं, उसे कैसे गढ़ूं और उसमें खुद को पूरी तरह शामिल कर सकूं। जब दर्शक यह कहें कि “ये हमने जावेद जाफरी को पहले कभी ऐसे करते नहीं देखा,” तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। मैं ऊपर वाले का शुक्रगुजार हूं कि मुझे अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के मौके मिले। माया सभा का यह किरदार उसी तरह का था, जो मुझे मेरे कंफर्ट जोन से बाहर लेकर गया। चाहे फिल्म सलाम नमस्ते हो, ‘धमाल’ सीरीज हो, ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया!’ जैसी फिल्म हो या ‘बूगी वूगी’ डांस शो हो। या फिर ‘ताकेशी कैसल' में सिर्फ आवाज़ के ज़रिए लोगों से जुड़ना, इन सभी अनुभवों ने मुझे एक कलाकार के तौर पर लगातार कुछ नया करने का मौका दिया। मेरे लिए यह ‘छाप छोड़ने’ से ज़्यादा अपनी कला का प्रदर्शन है कि एक अभिनेता के तौर पर मैं किसी किरदार को अपनी नजर से कैसे पेश कर सकता हूं। डायरेक्टर और राइटर की अपनी सोच होती है, लेकिन एक अभिनेता के रूप में मैं उस किरदार में क्या जोड़ सकता हूं, यही मेरे लिए सबसे अहम है। पिछले 40 सालों में अगर मुझे इतना कुछ करने का अवसर मिला है, तो इसके लिए मैं सच में ऊपर वाले का शुक्रगुजार हूं। डारेक्टर राही अनिल बर्वे के साथ क्या क्रिएटिव डिस्कशन होता रहा सेट पर? यह करीब 22 दिनों की बेहद इंटेंस शूटिंग थी। कई बार 18-19 घंटे, यहां तक कि 22 घंटे तक काम किया। सिनेमा हॉल के अंदर धुआं, धूल, केरोसीन—हालात मुश्किल थे, एलर्जी भी हुई, लेकिन अंत में जो सटिस्फैक्शन मिलता है, वही सब कुछ भुला देता है। दर्शक को इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपने कितने टेक लिए या बजट कितना था। उन्हें सिर्फ एंड रिजल्ट दिखता है और अगर रिजल्ट अच्छा हो, तो एक कलाकार के तौर पर वही सबसे बड़ी खुशी है।
एक्टर विशाल जेठवा की नीरज घायवान के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘होमबाउंड’ भले ही ऑस्कर की रेस से बाहर हो गई हो। लेकिन इस फिल्म ने विशाल को इंटरनेशनल स्टार बना दिया। कान्स फिल्म फेस्टिवल सहित इस फिल्म की कई प्रमुख इंटरनेशनल फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई। जहां पर फिल्म को खूब सराहा गया। इस फिल्म के जरिए विशाल जेठवा भले ही ग्लोबल मंच पर छा गए हों, लेकिन यहां तक पहुंचने की उनकी जर्नी इतनी भी आसान नहीं थी। एक्टर का बचपन बहुत ही गरीबी में मुंबई की चॉल में बीता। उनके पिता नरेश जेठवा नारियल पानी बेचते थे। विशाल जब 13 साल के थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई। विशाल जेठवा की मां प्रीति जेठवा ने परिवार का पेट पालने के लिए घरों में सफाई का काम किया, यहां तक कि सैनिटरी पैड्स बेचे। लेकिन बेटे के सपने को कभी टूटने नहीं दिया। मां के ही सपोर्ट से विशाल एक्टर बने। शुरुआत में उन्हें काफी रिजेक्शन का समाना करना पड़ा, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। आज की सक्सेस स्टोरी में जानेंगे, विशाल जेठवा के करियर और उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास किस्से उन्हीं की जुबानी.. मेरे पिता ने नारियल पानी भी बेचा है मैं लोअर मिडिल क्लास फैमिली से आता हूं। आप इसे गरीब परिवार भी कह सकते हैं। मेरे पिता ने नारियल पानी भी बेचा है। बियर बार के लिए सींग-चने के पैकेट भी बनाए हैं। मैं खुद बियर बार के सींग-चने के पैकेट बनाने में उनकी मदद करता था। मैं 13 साल का था, जब पिता की मृत्य हो गई। यह 2008 की बात है। वह सबसे बुरा दौर था। उस समय हम लोग मलाड के चॉल वाले घर पर रहते थे। घर में पंखा और एसी तक नहीं था। बहुत सारा कर्ज हो गया था। उस कर्ज को चुकाने के लिए हमें अपना घर बेचना पड़ा, फिर भी हम सिर्फ 20 प्रतिशत ही कर्ज उतार पाए थे। हम लोग मलाड से मीरा रोड किराए के घर पर शिफ्ट हो गए थे। गुजराती मीडियम स्कूल से पढ़ाई की मैंने मलाड में गुजराती मीडियम स्कूल से छठी क्लास तक पढ़ाई की। उसके बाद मीरा रोड शिफ्ट हो गए। आगे की पढ़ाई भायंदर के अभिनव विद्या मंदिर से की। उसके बाद कांदीवली के ठाकुर कॉलेज में बी.कॉम में एडमिशन लिया, लेकिन ग्रेजुएशन पूरा नहीं कर पाया। पिता की मौत के बाद मेरी मां को बहुत संघर्ष करना पड़ा। परिवार का पेट पालने के लिए मां ने घरों में झाड़ू-पोछा लगाया, यहां तक कि सैनिटरी पैड्स भी बेचे। मां ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। कड़ा संघर्ष, भूख और गरीबी बहुत देखी ग्रेजुएशन बीच में इस लिए छोड़ दिया ताकि मैं भी कुछ काम कर सकूं। मैंने कड़ा संघर्ष देखा, भूख और गरीबी बहुत देखी। कुछ ना कुछ काम करके घर का सहारा बनाना चाह रहा था। बैकग्राउंड डांसर से करियर की शुरुआत 2009 में मैं बैकग्राउंड डांसर बन गया था। मैं ‘सा रे गा मा पा लिल चैंप्स’ में बैकग्राउंड डांसर था। उसके ग्रैंड फिनाले में सलमान खान सर, अजय देवगन सर और असीन मैम अपनी फिल्म ‘लंदन ड्रीम्स’ के प्रमोशन के लिए आए थे। सलमान से मिलने का मौका हाथ से निकल गया मैं भी उन्हीं डांसर्स में से एक था, जिन्हें उनके पीछे परफॉर्म करना था। बैकस्टेज में हमें साफ हिदायत दी गई थी कि डांस खत्म होने के बाद कोई भी सलमान सर के पास नहीं जाएगा और उन्हें परेशान नहीं करेगा। मैं एक गुड बॉय की तरह वहीं खड़ा रहा। लेकिन जैसे ही डांस खत्म हुआ, बाकी सभी लोग सलमान सर के पास चले गए। उस वक्त मुझे बहुत लेफ्ट-आउट महसूस हुआ। लगा कि मौका हाथ से निकल गया। एक दिन एक्टिंग क्लास देखी, तो लगा डांस मेरे लिए नहीं है। क्लास जॉइन की, तो एक्टिंग मेरी हॉबी बन गई। एक्टिंग क्लास जॉइन की जब मुझे एक्टिंग क्लास जॉइन करनी थी, तब हमारी फाइनेंशियल कंडीशन ज्यादा अच्छी नहीं थी। ऐसे में मम्मी ने ही बहुत जुगाड़ करके बात की। कहीं इंस्टॉलमेंट में फीस भरवाई, कहीं कम पैसे करवाए, कहीं डिस्काउंट दिलवाया। अलग-अलग तरीकों से उन्होंने सब अरेंज किया और मुझे एक्टिंग क्लास में डाला। दरअसल, उन्हें भी इस फील्ड का शौक था। शायद उनके बचपन के कुछ सपने जो पूरे नहीं हो पाए, वो मुझमें देख रही थीं। उस समय डेडिकेशन इतना था कि बारिश में साइकिल से भीगते हुए क्लास जाता था। गुरुजी कहते, विशाल, तुम गीले हो गए हो , फिर भी आ गए? लेकिन एक्टिंग से मुझे प्यार इतना था कि कुछ भी मुश्किल नहीं लगता था। नुक्कड़ नाटक में छोटे रोल्स में भी लोग तालियां बजाते थे। मेरे जोक्स पर हंसते थे। मुझे लगने लगा कि अब रास्ते खुद बनने लगे हैं। पहली बार एक्टिंग की क्लास बोरिंग लगी हालांकि पहली बार एक्टिंग की क्लास बोरिंग लगी थी। सोचा था कि शाहरुख खान वाले जैसे बड़े डायलॉग मिलेंगे। गुरुजी ने कहा था कि इंडस्ट्री में आए हो? सेल्फ ब्रेक मत लो, कभी हार मत मानो। एक्टर बनने से पहले अच्छा इंसान बनो। सेट पर जो कपड़े मिलें, बिना शिकायत के पहनो। डायरेक्टर जो कहे, वैसा करो। मैं रोज ऑडिशन में फेल हो रहा था मैंने एक्टिंग के लिए ऑडिशन देना शुरू किया। हर रोज ऑडिशन में फेल होकर घर आता था। बहुत कोशिश के बाद भी कोई रिजल्ट सामने नहीं आ रहा था। मुझे दुखी देखकर मां बहुत चिंतित होती थीं। इसी चिंता में वो कहती थीं कि नहीं हो रहा है तो छोड़ दे। लेकिन फिर एक्टिंग क्लास की एक कविता याद आती थी। लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।’’ इसे गुरु जी कहते थे कि रोज पढ़कर आना है। उससे सीख मिली कि जिंदगी ट्राई करते रहने का नाम है। रिजल्ट न मिले तो भी जारी रखो। ट्राई बंद करना ही सबसे बड़ा फेलियर है। छोटे पर्दे पर शुरुआत महाराणा प्रताप से हुई छोटे पर्दे पर मेरी शुरुआत सोनी टीवी के शो ‘भारत का वीर पुत्र- महाराणा प्रताप’ से हुई। इसमें मैंने युवा अकबर का रोल निभाया था। इसमें काम मिलने की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। मैं असल में इस शो के लिए मेरा भाई ऑडिशन देने गया था। मैं भी उसके साथ चला गया। वहां मैंने देखा कि ज्यादातर लड़के पतले-दुबले थे। तभी उन्होंने मुझसे कहा कि आप भी ऑडिशन दे दीजिए, जबकि असल में टेस्ट मेरे भाई का था। मैंने भी ऑडिशन दे दिया। उन्हें मेरा ऑडिशन पसंद आया और उन्होंने मुझे दोबारा बुलाया। मैंने एक-दो बार और ऑडिशन दिए, और हर बार उन्हें मेरा काम अच्छा लगा। उस समय अकबर के रोल के लिए तीन बार कास्टिंग बदली गई थी। दो अकबर बदल चुके थे, और मैं तीसरा था। पहले मैं शॉर्टलिस्ट हुआ, लेकिन मेरा फाइनल सिलेक्शन नहीं हुआ। मुझे बहुत बुरा लगा। पहली बार बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट (मेल) अवॉर्ड मिला बाद में जब मैंने टीवी पर देखा, तो कोई और लड़का वह रोल कर रहा था। लेकिन वह लड़का भी एक-दो एपिसोड या एक-दो दिन काम करने के बाद कुछ हेल्थ इश्यूज की वजह से शो छोड़कर चला गया। फिर दूसरा लड़का आया, वह भी एक-दो दिन काम करने के बाद किसी वजह से निकल गया। तीसरी बार नंबर लग गया। सीरियल में रिप्लेसमेंट तो आम है। दो एपिसोड ये अकबर, फिर निकालो। फिर मेरा टर्न आया। सबने एक्सेप्ट किया, लोगों को मजा आया। बस, जिंदगी बन गई। इस शो के लिए मुझे इंडियन टेली अवॉर्ड्स 2015 में बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट (मेल) का अवॉर्ड मिला था। मुझे अकबर के बारे में ज्यादा नहीं पता था हालांकि ‘भारत का वीर पुत्र- महाराणा प्रताप’ करते वक्त मुझे अकबर के बारे में ज्यादा नहीं पता था। लगा कि राजा है, रॉयलिटी जैसा चलेगा, बात करेगा। सोचा प्रताप हीरो है तो अकबर उसका दोस्त होगा। उस समय बेवकूफी भरी सोच थी, लेकिन उसी में काम किया। करते-करते सब सीख गया। एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था जिंदगी में कई बार गिव अप करने का मन आया है। एक बार तो ऐसा समय भी था जब मैं लगातार सीरियल्स कर रहा था और मुझे लगने लगा था कि शायद मेरे अंदर अब कुछ नया बचा ही नहीं है। वही टाइप के रोल आने लगे थे। मन में सवाल उठने लगे कि अब मैं लोगों को क्या नया दिखाऊं? जो भी कला थी, क्या वो खत्म हो चुकी है? शायद लोग बस वही देखना चाहते हैं, और शायद मेरे अंदर भी अब वही बचा है। तब ऐसा लगा कि छोड़ देना चाहिए, बहुत हो गया। मम्मी के सामने फूट-फूट कर रोया उस वक्त मैंने मम्मी से बात की। मैं सच में रो रहा था। अंदर से पूरी तरह टूटा हुआ। आंसू रुक ही नहीं रहे थे। मम्मी ने मुझे समझाया, हौसला दिया। भले ही मैंने गिव अप नहीं किया, लेकिन मन में ये ख्याल जरूर था कि अब बस, छोड़ देता हूं। हालांकि टीवी कभी नहीं छोड़ा। काम मिलता रहा, लेकिन अंदर का एक्टर पूछता रहा कि इससे आगे क्या? बेहतर क्या? लगा कि मनचाहा काम नहीं मिल रहा। एक दिन का रोल भी करता। फिर सोचा कि अब कुछ बचा नहीं। ‘मर्दानी 2’ ने सेल्फ डाउट से बाहर निकाला फिर मेरी जिंदगी में ‘मर्दानी 2’ आई। इसमें यशराज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा मैम का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने मुझे सेल्फ डाउट से बाहर निकाला। आज मैं खुद पर शक नहीं करता। कभी-कभी मौके सही समय पर नहीं मिलते, थोड़ा वक्त लग जाता है, लेकिन खुद पर डाउट करना सबसे गलत चीज है। एक बार शानू मैम ने मुझे फोन पर बताया कि उन्हें मेरा ऑडिशन पसंद आया है। तब मैं सोचने लगा कि जो इंसान बॉलीवुड में इतने बड़े-बड़े स्टार्स नहीं, बल्कि पर्सनैलिटीज बनाती है, जिसने बेहतरीन से बेहतरीन एक्टिंग देखी है, उसे मेरे काम में क्या अच्छा लगा होगा? वो मुझे फोन करके बात क्यों कर रही हैं? तभी मुझे एहसास हुआ कि अगर कोई मुझमें इतना कॉन्फिडेंस देख पा रहा है, तो वो कॉन्फिडेंस मेरे अंदर पहले से ही था। और फिर मैं ‘मर्दानी 2’ में सिलेक्ट हुआ। उसके बाद मेरी जिंदगी सच में बदल गई। एक साल तक ‘मर्दानी 2’ के किरदार से बाहर नहीं निकल पाया मर्दानी 2 का सनी का किरदार मेरे लिए सबसे मुश्किल अनुभवों में से एक था। मैं करीब एक साल तक उस किरदार से बाहर नहीं निकल पाया। शूटिंग खत्म हो चुकी थी, लेकिन मन में यही चलता रहता था कि कहीं पैचवर्क का कॉल आ गया तो? अगर मैंने किरदार छोड़ दिया, तो वापस उसमें कैसे जाऊंगा?” अपने कपड़े पहनता था तो अनकंफर्टेबल लगता था। फिर धीरे-धीरे मैंने खुद को वापस लाने के लिए पुराने दोस्तों से मिलना शुरू किया, म्यूजिक सुना, फैमिली के साथ वक्त बिताया और खुद से कहा कि अब फिल्म खत्म हो गई है, इस किरदार को जाने देना ठीक है।” सलमान सर के साथ शूट में बहुत नर्वस था सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर 3’ में मेरा किरदार बहुत छोटा था। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं बहुत नर्वेस था। जब मैं टाइगर के शूट पर पहुंचा, तो मुझसे डायलॉग ही नहीं निकल रहे थे। लगातार फम्बल हो रहे थे। सभी लोग हैरान थे कि आज मुझे क्या हो गया है। जबकि उसी सेट पर मैंने मर्दानी 2 फिल्म की शूटिंग पूरी की थी, वो भी बिना एक भी फम्बल के, क्योंकि मैं पूरी तरह तैयार होकर गया था। तब मैंने साफ-साफ बता दिया कि मैं पहली बार सलमान सर के साथ शूट कर रहा हूं और बहुत नर्वस हूं। यह बात कहने के बाद मैं थोड़ा रिलैक्स हो गया। सेट पर कभी सुनता कि ‘एसके सर आ रहे हैं’, कभी उन्हें लोगों से मिलते, हंसते, कभी साइकिल पर सेट पर आते देखता था। एक कलाकार के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऑडियंस की तरह सलमान खान को देखना मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। ‘होमबाउंड’ रोल के लिए चोट के बावजूद ऑडिशन दिया होमबाउंड मुझे ऑडिशन के जरिए मिली थी। उस वक्त मेरे पैर में गंभीर चोट लगी थी। पैर में प्लास्टर और टांके लगे थे। लेकिन मैंने कास्टिंग डायरेक्टर्स से कहा कि प्रोड्यूसर या डायरेक्टर को मत बताना, वरना वो सोचेंगे कि मैं शूट नहीं कर पाऊंगा। क्योंकि मुझे ये रोल किसी भी हालत में छोड़ना नहीं था। मेरे कई राउंड ऑडिशन हुए। फाइनल राउंड ऑडिशन ईशान खट्टर के साथ हुआ। ताकि पता चल सके कि फिल्म में हमारी केमिस्ट्री कैसे दिखेगी। फिल्म देखने के बाद मम्मी रो रहीं थीं एक पार्टी में एक दोस्त ने सच में मेरे पैर छुए। पहले मुझे लगा मजाक कर रहा है, लेकिन वो बिल्कुल सीरियस था। तब समझ आया कि हमारा काम लोगों को कितनी गहराई से छू सकता है। कान्स फिल्म फेस्टिवल में मम्मी ने पहली बार फिल्म देखी थी। वहां 9 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन मिला। मम्मी रो रही थीं। मैं उन्हें पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लेकर गया था, वो पल हमेशा याद रहेगा। मुझे पिताजी की बहुत याद आती है। उन्होंने ये सब देखा ही नहीं। काश आज पापा जिंदा होते मुझे अपने बुरे दिनों से ज्यादा अच्छे दिनों में उनकी बहुत याद आती है। क्योंकि उन्हें कभी अच्छी चीजे नसीब नहीं हुईं। वो चाहते थे कि घर में सोफा हो, हमारे पास एक बाइक हो, एसी वाले कमरे में मैं सोऊं। यही उनकी छोटी-छोटी इच्छाएं थीं। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है जिंदगी बहुत बदल गई है। घर में एसी है, सोफा है, ठीक-ठाक घर है, अच्छी गाड़ी में सफर कर पाता हूं। तब मन में ख्याल आता है कि काश वो होते। उन्हें ब्लेजर पहनाता, अपने साथ इवेंट्स में ले जाता, काम पर साथ ले जाता, वो मेरे लिए गाड़ी चलाते। ये सब सोचकर दिल भर आता है। जिंदगी में जो चला गया, वो वापस नहीं आता। अब उसे स्वीकार करना ही जीवन है। __________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... रानी मुखर्जी की कद-काठी, रंग और आवाज का उड़ा मजाक:लोगों ने कहा- हीरोइन बनने के लायक नहीं, 8 फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड मिले बॉलीवुड में अक्सर यह माना जाता है कि फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों के लिए रास्ते आसान होते हैं, लेकिन रानी मुखर्जी की कहानी इस धारणा को पूरी तरह तोड़ देती है। पिता के सख्त विरोध, इंडस्ट्री में मजाक, आर्थिक परेशानियों और उनके आत्मविश्वास पर लगातार हमले किए गए।पूरी खबर पढ़ें..
शाहरुख खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान एक्टर से चश्मा उतरवाया जाता है। इस दौरान एक्टर ने नियमों का पालन किया और मुस्कुराते हुए नजर आए। वहीं, अब इस वीडियो पर यूजर्स जमकर रिएक्शन भी दे रहे हैं। दरअसल, शाहरुख खान को आज सुबह मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया, जहां से वह दुबई के लिए रवाना हुए। शाहरुख खान दुबई मॉल ग्लोबल फैशन अवार्ड्स में शिरकत करेंगे, जहां उन्हें ग्लोबल स्टाइल आइकन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। पैपराजी ताहिर जासूस द्वारा शेयर किए गए वीडियो में शाहरुख खान एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चेकिंग करते नजर आए। इस दौरान एक्टर सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक में दिखाई दिए। उन्होंने सफेद शर्ट के ऊपर नीली हुडी पहनी हुई थी और साथ में डेनिम कार्गो पैंट कैरी किया था। सामने आए वीडियो में एंट्री गेट पर मौजूद सिक्योरिटी गार्ड ने पहले शाहरुख का पासपोर्ट चेक किया और फिर उन्हें चश्मा उतारने को कहा। शाहरुख खान ने पूरी तरह से सुरक्षा नियमों का पालन किया और बिना किसी हिचक के गाइडलाइंस फॉलो कीं। शाहरुख खान की यह सिक्योरिटी चेकिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर्स जहां एक तरफ शाहरुख की सादगी और नियमों के प्रति सम्मान की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सिक्योरिटी गार्ड की भी सराहना हो रही है, जिसने स्टारडम से प्रभावित हुए बिना अपना फर्ज निभाया। बता दें कि 29 और 30 जनवरी को आयोजित होने वाले दुबई मॉल ग्लोबल फैशन अवार्ड्स में फैशन, संस्कृति और ग्लोबल आइकन का जश्न मनाया जाएगा। इस इवेंट में दुनिया भर की नामी हस्तियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में मशहूर कॉउचर डिजाइनर रीम एकरा, लग्जरी फैशन के दिग्गज ब्रुनेलो कुसिनेली और अरमानी ग्रुप के सीनियर एग्जीक्यूटिव की मौजूदगी रहेगी। साथ ही सेरेमनी में अरमानी ग्रुप के चेयरमैन और सीईओ जियोर्जियो अरमानी को विशेष श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिसे ग्यूसेप्पे मार्सोची रिप्रेजेंट करेंगे।
फिल्ममेकर फरहान अख्तर ने रणवीर सिंह को ‘डॉन 3’ से बाहर कर दिया है। इसके बाद फिल्म को अस्थायी रूप से होल्ड पर रख दिया गया और अब नए एक्टर की तलाश जारी है। इसी बीच फरहान अपनी दूसरी फिल्म जी ले जरा पर ध्यान दे रहे हैं। इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा, कटरीना कैफ और आलिया भट्ट नजर आएंगी। पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, फरहान अख्तर के लिए ‘डॉन 3’ की कास्टिंग बेहद अहम है। वह पूरी तरह सुनिश्चित होना चाहते हैं कि इस भूमिका के लिए सही एक्टर ही चुना जाए, इसी वजह से यह प्रक्रिया लंबी चल रही है। इसी कारण फरहान फिलहाल ‘जी ले जरा’ पर फोकस कर रहे हैं। यह फिल्म उनके लिए हमेशा से खास रही है। बताया जा रहा है कि वह कटरीना कैफ, आलिया भट्ट और प्रियंका चोपड़ा जोनास से फिर से संपर्क कर रहे हैं, ताकि प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दिया जा सके। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि फिल्म की स्क्रिप्ट पूरी हो चुकी है और उसे लॉक भी कर दिया गया है, लेकिन तीनों एक्ट्रेसेस की शूटिंग डेट्स का मेल न बैठ पाने की वजह से देरी हो रही है। जैसे ही तीनों की डेट्स फाइनल होती हैं, फिल्म की शूटिंग शुरू की जा सकती है। हालांकि, फरहान अख्तर इस चुनौती का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं और तीनों एक्ट्रेसेस के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं, ताकि शूटिंग के लिए कोई शेयर समय तय किया जा सके। बता दें, पहले खबरें थीं कि रणवीर सिंह डॉन-3 से अलग हो गए हैं। एक्टर ने ये फैसला धुरंधर की सफलता की वजह से लिया था। लेकिन फिर नई जानकारी आई थी कि रणवीर ने ये फिल्म नहीं छोड़ी बल्कि उनके अनुचित मांगों और क्रिएटिव डिफरेंस की वजह से उन्हें फिल्म से निकाला गया है। इंडिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर की फिल्म छोड़ने की खबर पूरी तरह अफवाह है। मेकर्स और रणवीर के बीच क्रिएटिव मतभेद थे। इसका नतीजा ये हुआ कि मेकर्स ने एक्टर को फिल्म से बाहर निकाल दिया। मेकर्स रणवीर की मांगों से सहमत नहीं थे। सोर्स ने ये भी दावा किया था कि रणवीर की पिछले तीन फिल्में लगातार फ्लॉप रहीं लेकिन उसके बाद भी फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने उन्हें मौका दिया। फिल्में फ्लॉप होने की वजह से संजय लीला भंसाली ने बैजू बावरा कैंसिल कर दी थी लेकिन फरहान-रितेश उनके साथ खड़े रहे थे।
आर्यन खान ड्रग केस के जांच अधिकारी रहे समीर वानखेड़े को गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा। अदालत ने आर्यन खान की वेब सीरीज द बैड्स ऑफ बॉलीवुड के खिलाफ दायर उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का उसके पास अधिकार नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समीर वानखेड़े चाहें तो उचित अदालत में दोबारा याचिका दायर कर सकते हैं। अंतरिम याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने दो अहम सवालों पर विचार किया। पहला- क्या यह मुकदमा दिल्ली में सुनवाई योग्य है? दूसरा- क्या सीरीज में समीर वानखेड़े का चित्रण प्रथम दृष्टया उनके लिए कानूनी रूप से नुकसानदेह है? समीर वानखेड़े की वकील जे. साई दीपक ने दलील दी थी कि यह मामला दिल्ली में सुनवाई योग्य है। उन्होंने कहा कि वानखेड़े से जुड़े विभागीय मामले दिल्ली में लंबित हैं और उनके खिलाफ खबरें प्रकाशित करने वाले मीडिया संस्थान, जैसे हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस भी दिल्ली में स्थित हैं। दीपक ने यह भी कहा कि इस मामले में पहले से ही दोनों पक्षों के बीच विवाद रहा है। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति को पहले गिरफ्तार किया गया था, वही इस सीरीज का निर्देशक है और सीरीज के एक सीन में सीधे तौर पर समीर वानखेड़े को निशाना बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि सीरीज निर्माताओं की नाराजगी और बदले की भावना का सीधा संबंध उस कथित मानहानि से है, जिसका सामना वानखेड़े को इस कंटेंट की वजह से करना पड़ा। 2 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग समीर वानखेड़े ने इस मुकदमे में 2 करोड़ रुपए का मुआवजा भी मांगा था। उनका कहना था कि वह इस राशि को टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दान करना चाहते हैं। किस सीन पर हुआ विवाद? दरअसल, सीरीज बॉलीवुड बैकड्रॉप पर बनी है। इसके पहले एपिसोड में दिखाया गया है बॉलीवुड सेलेब्स एक सक्सेस पार्टी का हिस्सा बने हैं, जिसके बाहर एक अधिकारी को ड्रग का सेवन कर रहे लड़के को गिरफ्तार करते दिखाया गया है। इस किरदार को समीर वानखेड़े से काफी मिलता-जुलता दिखाया गया है। सीरीज जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर भी उस किरदार की तुलना समीर वानखेड़े से हुई थी। आर्यन खान के ड्रग केस में जांच अधिकारी थे समीर वानखेड़े 2 अक्टूबर 2021 में नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने गोवा जा रहे कोर्डिएला क्रूज से आर्यन खान और उनके दोस्तों को ड्रग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। तत्कालीन जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े की टीम, पैसेंजर बनकर शिप पर चढ़ी। रात 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली छापेमारी में कोकीन और चरस सहित दूसरे ड्रग्स बड़ी मात्रा में जब्त किए गए। आर्यन खान को इस मामले में कई हफ्तों तक आर्थर रोड जेल में रखा गया था। जमानत के कागजात में देरी के कारण आर्यन 30 अक्टूबर को आर्थर रोड जेल से रिहा हुए। फिर 27 मई, 2022 को आर्यन खान और 5 अन्य को पर्याप्त सबूत के अभाव में क्लीन चिट दे दी गई। इस रेड के चलते समीर वानखेड़े भी जांच के दायरे में आ गए थे। उस समय उनकी और शाहरुख खान के बीच हुई चैट भी पेश की गई थी। चैट में शाहरुख, समीर वानखेड़े से मदद मांग रहे थे। विवादों में रही सीरीज बैड्स ऑफ बॉलीवुड इस सीरीज में कई बॉलीवुड एक्टर्स ने कैमियो किया है। सीरीज के 7वें एपिसोड में रणबीर कपूर को ई-सिगरेट पीते दिखाया गया है। जिसके बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। IANS के अनुसार, यह शिकायत विनय जोशी नामक व्यक्ति ने दर्ज कराई। उनका कहना है कि शो के सातवें एपिसोड में रणबीर कपूर ई-सिगरेट का इस्तेमाल करते दिखे, लेकिन इस दौरान किसी तरह की हेल्थ वॉर्निंग या डिस्क्लेमर नहीं दिया गया। शिकायत के बाद NHRC ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा है। आयोग ने कहा कि मंत्रालय इस तरह के कंटेंट को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए। आयोग ने यह भी कहा कि इस तरह के सीन युवा दर्शकों पर गलत असर डाल सकते हैं।
बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में बुधवार को बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ हिंदू धार्मिक भावनाओं और कर्नाटक की चावुंडी दैव परंपरा का अपमान करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला 28 नवंबर 2025 को गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) से जुड़ा है। रणवीर सिंह के खिलाफ यह एफआईआर बेंगलुरु के वकील प्रशांत मेथल ने दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रणवीर सिंह ने मंच पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और ऐसा अभिनय किया, जिससे दैवा परंपरा के पवित्र तत्वों का मजाक उड़ाया गया। शिकायत में कहा गया है कि रणवीर ने पंजुरली और गुलिगा दैवा से जुड़े भाव-हावभाव की नकल की और उन्हें भद्दे, हास्यास्पद और अपमानजनक तरीके से प्रस्तुत किया। इसके अलावा अभिनेता पर चावुंडी दैव को ‘महिला भूत’ कहने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, चावुंडी दैवा कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में पूजनीय रक्षक देवी मानी जाती हैं और वे दिव्य स्त्री शक्ति का प्रतीक हैं। उन्हें ‘भूत’ कहना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया है। अब यह मामला बेंगलुरु की प्रथम अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (CMM) अदालत को भेज दिया गया है और 8 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई की जाएगी। बता दें, वकील प्रशांत मेथल ने 27 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु में अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक निजी शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद 23 जनवरी 2026 को अदालत ने बीएनएस की धारा 175, उपधारा 3 के तहत हाई ग्राउंड्स पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। जानिए क्या है पूरा मामला? रणवीर सिंह 28 नवंबर 2025 को गोवा में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया का हिस्सा बने थे। इस दौरान मंच पर उन्होंने फिल्म कांतारा में दिखाई गईं चावुंडी (चामुंडा) देवी का मजाक बनाया था। रणवीर सिंह ने फिल्म के डायरेक्टर और एक्टर ऋषभ शेट्टी से कहा, 'ऋषभ मैंने इसे (कांतारा) थिएटर में देखा था। वो एक आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस थी, खासकर जब फीमेल घोस्ट (भूत) आपके शरीर में आती है। वो परफॉर्मेंस, वो एक शॉट आउटस्टैंडिंग था।' आगे रणवीर सिंह ने कहा, 'क्या आपने कांतारा देखी है। जब वो शॉट आता है'। आगे रणवीर सिंह ने खुद उस कैरेक्टर की मिमिक्री करते हुए मजाक उड़ाया। आगे रणवीर ने कहा, 'क्या यहां कोई है, जो मुझे कांतारा 3 में देखना चाहता है, वो इस आदमी से कहे।' फिल्म फेस्टिवल से रणवीर सिंह का एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें वो मंच से उतरने के बाद भी ऋषभ शेट्टी के सामने चावुंडी देवी की मिमिक्री करते दिखाई दिए, हालांकि ऋषभ शेट्टी लगातार इशारा कर उन्हें रोकते नजर आए थे। वहीं, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद एक्टर की जमकर आलोचना भी हुई थी। पणजी में भी दर्ज हुई शिकायत, माफी मांगी थी बैंगलोर में दर्ज हुई इस शिकायत से पहले भी रणवीर सिंह के खिलाफ पणजी में शिकायत दर्ज हो चुकी है। 2 दिसंबर को हिंदू जनजागृति समिति ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में रणवीर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने कानूनी कार्यवाही के साथ माफी की भी मांग की थी, जिसके बाद एक्टर ने सार्वजनिक तौर पर माफीनामा जारी किया था। रणवीर सिंह ने माफीनामा जारी कर आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से लिखा है- मेरा इरादा फिल्म (कांतारा) में ऋषभ की शानदार परफॉर्मेंस को उजागर करने का था। एक अभिनेता होने के नाते, मैं जानता हूं कि उस खास सीन को जिस तरह से उन्होंने निभाया, उसके लिए कितनी मेहनत लगती है और इसके लिए मैं उनका अत्यधिक सम्मान करता हू। मैंने हमेशा हमारे देश की हर संस्कृति, परंपरा और आस्था का गहरा सम्मान किया है। अगर मेरी किसी बात से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं दिल से माफी चाहता हूं।
नीरज पांडे की ‘तस्करी' नेटफ्लिक्स ग्लोबल टॉप 10 नॉन इंग्लिश टीवी लिस्ट में नंबर 1 स्पॉट पर पहुंचने वाली पहली भारतीय सीरीज बन चुकी है। यह सिर्फ शो के लिए बल्कि बड़े पैमाने पर भारतीय कहानी कहने के लिए भी एक अहम पल है। इस शो को नीरज पांडे के साथ राघव एम.जयराथ और बी.ए फिदा ने डायरेक्ट किया है। इस सीरीज में इमरान हाशमी के साथ जोया अफरोज, अमृता खानविलकर, शरद केलकर, नंदीश सिंह संधू और अनुराग सिन्हा लीड रोल में हैं। यह सीरीज एयरपोर्ट कस्टम और स्मगलिंग की हाईटेक दुनिया की कहानी है। हाल ही में इस सीरीज को लेकर राघव एम. जयराथ ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: हर तरफ ‘तस्करी’ की चर्चा हो रही है। दर्शकों की जिस तरह से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वो सब आप देख रहे हैं। कैसा लग रहा है? जवाब: बहुत अच्छा लग रहा है। मैं हमेशा कहता हूं कि ये हमारा बाय-प्रोडक्ट है, जब हम कोई अच्छी चीज बना लेते हैं। अभी तो मैं, मेरी फैमिली, हमारी पूरी टीम, आर्टिस्ट्स और सब टैलेंट्स जो इसमें लगे थे। सब टॉप ऑफ द वर्ल्ड महसूस कर रहे हैं। सवाल: इमरान हाशमी ने एक वीडियो डाला है, जिसमें वो दर्शकों, फैंस और आपको सबको धन्यवाद दे रहे हैं। कह रहे हैं कि इस सीरीज को इतना प्यार मिला। इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? जवाब: मुझे लगता है इमरान ने बिल्कुल सही कहा। हमें जितना प्यार मिल रहा है, वो टीम की मेहनत का नतीजा है। कहानी पर इतनी रिसर्च की गई। कस्टम वाले लोगों की भी मेहनत कम नहीं, वो रोज फाइट करते हैं, सिस्टम के गैप्स भरते हैं। क्रिमिनल्स नई तकनीक बनाते रहते हैं, वो उन्हें रोकते हैं। हम उनसे ही इंस्पायर्ड हुए। नीरज पांडे सर के साथ को-डायरेक्ट करने का मौका मिला। हम सब खुश हैं, बहुत प्यार मिला। इसे कस्टम डिपार्टमेंट को भी डेडिकेट करना चाहूंगा। सवाल: इस कहानी का आइडिया कहां से आया? जवाब: नीरज सर बेहतर बता पाएंगे। लेकिन एयरपोर्ट पर शूटिंग के दौरान कस्टम वालों को देखते रहते हैं। बैगेज चेक करते समय सवाल पूछते हैं, वो क्यूरियस लगता है। कस्टम्स लोगों से मिले तो उनकी स्टोरीज पता चलीं। यूनिफॉर्म वालों को हमेशा रिस्पेक्ट मिलता है। मेरे पिता आर्मी में थे, चंडीगढ़ कनेक्शन है। हर जगह घूमे, लोकल कल्चर फील किया। कस्टम को दिखाने का आइडिया वहीं से आया, उन्हें सलाम। सवाल: कस्टम की ड्यूटी हीरो जैसी लगती है, लेकिन आम लोगों को इसकी असलियत नहीं पता। आपने इसे रियल रखा, न गोलियां-बम, न हीरो वाली फील। रियलिटी और सिनेमाई बैलेंस कैसे किया कि एंगेजिंग बनी? जवाब: स्क्रिप्ट में नीरज सर ने रियल रखा। रिसर्च में तय किया कि कोई गाड़ी उड़ाना, बम या गोलियां नहीं होगी। कस्टम वाले दिमाग से खेलते हैं। एयरपोर्ट पर बैग चेक से पहले पता चल जाता है। आपकी बॉडी लैंग्वेज, चाल से बता देते हैं कि एक्स्ट्रा फोन, आईपैड या बॉटल है या नहीं। ट्रैफिक पुलिस जैसा। सवाल:आप नीरज पांडे के साथ असिस्टेंट के तौर पर सालों काम कर चुके हैं। डिस्कवरी की 'सीक्रेट्स' के बाद ये इंडिपेंडेंट था। पहली बार कब पता चला कि ‘तस्करी’ पर आप लीड करोगे? जवाब: 'सीक्रेट्स ऑफ बुद्ध' डॉक्यूमेंट्री के दौरान रिसर्च चल रही थी। नीरज सर की तस्करी वाली स्क्रिप्ट लिखाई चल रही थी, मुझे इंटरेस्ट हो गया। एक दिन सर ने स्क्रिप्ट दी और बोले कि पढ़कर नोट्स बनाओ। 10 दिन बाद लौटे, विपुल जी के साथ फाइनल ड्राफ्ट देखा। 5-6वें एपिसोड की रीडिंग पर अचानक सर ने पूछा, करना चाहोगे? मैं हैरान रह गया। वो ड्रीम पूरी हो गई। नीरज सर ने मौका दिया, यहीं से तस्करी की जर्नी शुरू हुई। सवाल: स्क्रिप्ट की रीडिंग के समय कास्टिंग फाइनल हो रही थी या बाद में? जवाब: नीरज सर पहले कहानी लिखते हैं, फिर किरदार पेपर पर बनाते हैं। जिसमें पर्सनालिटी, बाउंड्रीज, डायलॉग्स तय होता है। 7वें एपिसोड के बाद डिस्कशन शुरू हुआ। ट्रिकी रोल था, किसी ने नाम नहीं सुझाया। नीरज सर ने इमरान हाशमी का नाम लिया। सभी इमरान हाशमी के नाम पर सहमत हो गए। सवाल: इमरान का नाम सुनकर आपकी क्या फीलिंग हुई? जवाब: बहुत अच्छी लगी, क्योंकि इमरान सर फैंटास्टिक एक्टर हैं। उन्होंने ‘शंघाई’ और ‘हक’ जैसी फिल्मों में डायवर्स रोल्स निभाए। एक्सपेरिमेंट करते हैं। अर्जुन मीणा के किरदार के लिए परफेक्ट लगे। एक सेकंड में फिट हो गए। रिजल्ट सामने है, ऑडियंस को उनका रोल और कहानी पसंद आ रही है। सवाल: पहले दिन का शूट कैसा रहा? और आप एक्टर्स को उनके कैरेक्टर नेम से पुकारते हैं, जैसे इमरान को अर्जुन। इसके पीछे क्या वजह है? जवाब: कोई प्लान्ड वजह नहीं। शूटिंग के दौरान उसी वर्ल्ड में ही रहना चाहता हूं। इमरान सर को अर्जुन, अमृता को मिताली बोलता था। सभी एक्टर्स को उनके कैरेक्टर के नाम से ही बुलाता था। एक दिन अमृता ने कहा कि मेरा नाम भी तो अमृता है। मैंने कहा कि शूट खत्म होने तक तुम वही किरदार हो। सवाल: इमरान हाशमी के साथ पहले दिन शूट कैसा रहा? जवाब: बहुत अच्छा एक्सपीरियंस रहा। नीरज सर गाइड करने आए। आउटडोर शूट, सब किरदार-टीम एक साथ। इमरान जी बहुत ही प्रोफेशनल और डेडिकेटेड एक्टर हैं। इतनी तैयारी के साथ आते हैं कि फर्स्ट टेक में मैजिक दिखा देते हैं। पहले 2-3 दिन सेटल होने में लगते हैं। हमारा क्रू पुराना था, लेकिन डायरेक्टर बनकर कमांड देना मेरे लिए नया था। पहला दिन थकान भरा रहा, लेकिन आखिरी दिन अब लोग अभूत ही इमोशनल हो गए थे। सवाल: इमरान से पहली मुलाकात कब हुई? जवाब: पहली मुलाकात तो ऑफिस में ही हुई थी। जब वो स्क्रिप्ट की नरेशन सुनने आए थे। सीधे नीरज सर के केबिन में गए। हमें लगा कि 2-3 घंटे के बाद केबिन से निकलेंगे, लेकिन नीरज सर ने ऐसा ब्रिलियंट नरेशन दिया कि 3-4 मिनट में ही बाहर आ गए। फिर कुछ दिनों तक ऑफिस में रीडिंग्स कीं, किरदार समझा। एक बार फ्लश आउट हुआ, फिर सीधा शूट पर मिले। सवाल: इमरान के साथ आपने इतना समय बिताया, सबसे अच्छी बातें क्या लगीं? जवाब: ब्रिलियंट इंसान हैं। सबकी मेहनत समझते हैं, सबको बराबर ट्रीट करते। बहुत ही डेडिकेटेड एक्टर हैं। डायलॉग सोच-समझकर ऐसा बोलते हैं कि फर्स्ट टेक में जादू नजर आता है। कैमरे में उनकी आंखों से इमोशन दिखता है। सेट छोड़कर कभी नहीं जाते थे। सवाल: एयरपोर्ट जैसे लाइव लोकेशन पर शूटिंग करना कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल था। इमरान को देखने के लिए क्राउड जमा हो जाती थी। क्राउड की वजह से 2 घंटे में कई सीन शूट करने पड़े। एयरपोर्ट पर एंट्री के लिए 3-4 घंटे पहले पहुंचना पड़ता था। कैमरा, जूनियर आर्टिस्ट सब स्कैन होते हैं। कॉस्ट्यूम ले जाना हो तो कैंची तक नहीं मिलती। मेकअप सामान सीमित, हल्का ट्रिम भी मुश्किल होता था। एक बार अंदर चले गए तो पैकअप होने के बाद ही वापस आ सकते थे। सवाल: सुबह का समय एयरपोर्ट पर बहुत भीड़ भाड़ वाला होता है? जवाब: हां, यात्री फ्लाइट पकड़ने जाते, लेकिन इमरान सर को देखने के लिए फ्लाइट मिस कर देते थे। क्राउड इधर उधर भागता था। हम कहते थे कि इमरान सर उधर गए, फिर छुपाकर सीन शूट करते थे। कभी पीछे कोई दिख जाता था तो रीटेक करना पड़ता था। सवाल: सीरीज की सबसे खूबसूरत चीज क्या लगी, और सबसे इमोशनल पल कौन सा था? जवाब: लास्ट डे शूट सबसे इमोशनल था, क्योंकि टीम से बिछड़ना पड़ता है। फिर एडिटिंग, म्यूजिक, ग्राफिक्स का काम शुरू। Netflix ने पूरा साथ दिया, डेडलाइन रखी। आर्मी से डिसिप्लिन मिला, लेकिन नीरज सर का लेवल अलग ही रहा। रेकी में सबसे आगे रहते थे। सेट पर दिनभर खड़े रहते थे। सवाल: नीरज पांडे के साथ कई प्रोजेक्ट में आप काम कर चुके हैं। उससे पहले टीवी शोज (KBC, बिग बॉस, सच का सामना) में फ्लोर डायरेक्टर के तौर पर एक्सपीरियंस और लर्निंग क्या रही? जवाब: बहुत अलग लर्निंग रही। 2007 में इंडस्ट्री में आया। 'ए वेडनेसडे' फिल्म देखने के बाद नीरज सर से जुड़ने का मन था। ‘स्पेशल 26’ से पहले मुझे टीवी में मौका मिला। संदीप कौल, आनंद सर, सिद्धार्थ बासू, हुजैफा भाई, अरुण जी ने गाइड किया। नॉन-फिक्शन में रियलिज्म हाई था। सवाल: टीवी में लाइव शोज पर रिटेक नहीं ले सकते, एक्सपीरियंस कैसा रहा? क्या सीखा? जवाब: लाइव में परफेक्शन जरूरी होती है, रीटेक की हिम्मत नहीं होती है। जब नीरज सर के साथ फिल्म ‘बेबी’ में काम कर रहा था तब अक्षय सर से सीखा रीटेक कितना आसान होता है। रीटेक का मतलब अलग-अलग एंगल से शॉटलेना भी होता है। India's Got Talent पर रॉ टैलेंट देखा। छोटे शहरों से आए बच्चे, मोटिवेट होते हैं। टीआरपी से ऊपर क्रू का पैशन देखा। नीरज सर, शीतल भाटिया सर ने प्यार, डांट और क्रिएटिव फ्रीडम दी। डॉक्यू से फिक्शन तक को-डायरेक्ट का चांस दिया। सवाल: शुरुआत में जब आप नॉन-फिक्शन शोज कर रहे थे। जब अमिताभ बच्चन जैसे बड़े-बड़े स्टार्स से मिलना हुआ तो क्या कभी स्टार-स्ट्रक महसूस हुआ था? जवाब: जी हां, बिल्कुल। इतने बड़े कलाकारों का एक अलग ही औरा होता है। उनके सामने आते ही आदमी थोड़ा खो-सा जाता है। वो सिर्फ किरदार नहीं होते, एक पूरी मौजूदगी होती है। सवाल: अमिताभ बच्चन से पहली मुलाकात कैसी रही? जवाब: सच कहूं तो आवाज ही नहीं निकलती थी। पहली बार जब उन्होंने मुझसे कुछ कहा, तो मैं इतना नर्वस था कि समझ ही नहीं पाया उन्होंने क्या कहा। बाद में कंट्रोल रूम जाकर लोगों से पूछा कि उन्होंने कहा क्या था। सब लोग मेरे ऊपर हंसने लगे थे, लेकिन धीरे-धीरे आदत पड़ी, लेकिन पहली मुलाकात में तो इंसान बिल्कुल थम हो जाता है। सवाल: और बाकी स्टार्स के साथ भी ऐसा हुआ? जवाब: हां, जैसे माधुरी दीक्षित का मैं बहुत बड़ा फैन हूं। एक डांस शो में मुझे उन्हें स्क्रिप्ट समझाने वैनिटी में जाना था। उन्होंने स्माइल किया और मैं 10–15 सेकंड तक बस उन्हें देखता रह गया। फिर उन्होंने खुद मुझे बैठाया, तब जाकर मैं नॉर्मल हुआ। शाहरुख खान सर भी कई बार KBC के सेट पर आए। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करते हुए स्टार-स्ट्रक से ज्यादा उनके औरा से इंसान सम्मोहित हो जाता है। सवाल: नीरज पांडे के साथ काम करते हुए कोई यादगार अनुभव? जवाब: बहुत सारे। उन्हें शूट करते देखना अपने आप में एक सीख है। वो तब तक लिखना शुरू नहीं करते जब तक उन्हें पूरी क्लैरिटी न हो। कई बार हम स्क्रिप्ट पढ़कर सोचते हैं कि सीन ऐसे होगा, लेकिन शूट पर वो उसे पूरी तरह उलट देते हैं और वही जादू होता है। छोटी-छोटी चीजों से वो सीन का पूरा डायनेमिक बदल देते हैं और किरदार बहुत रियल लगने लगते हैं। सवाल: डायरेक्टर के तौर पर एक्टर के साथ उनका रिश्ता कैसा रहता है? जवाब: मेरे हिसाब से सारे एक्टर्स उनके साथ काम इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें अपने किरदार की पूरी समझ होती है। हर सवाल का जवाब, हर चीज का रीजन उनके पास होता है। वो एक्टर्स को आजादी भी देते हैं, लेकिन उन्हें साफ पता होता है कि कैरेक्टर कैसे मूव करेगा, कैसे बिहेव करेगा। इसी क्लैरिटी से शानदार कोलैबोरेशन होता है। सवाल: अक्षय कुमार, सुशांत सिंह राजपूत जैसे एक्टर्स को उन्होंने जिस तरह पेश किया, उस पर आपका क्या कहना है? जवाब: कमाल है। सुशांत जी ने ‘एमएस धोनी’ के लिए बहुत मेहनत की थी। नीरज सर खुद स्पोर्ट्स-लवर हैं, बहुत एथलेटिक हैं। उन्हें खेलों की समझ है, इसलिए वो ऐसे किरदारों को बहुत सच्चाई से निकाल पाते हैं। चाहे अक्षय सर हों, केके मेनन सर, इमरान हाशमी, सारे किरदार बहुत साफ और रियल लगते हैं। सवाल: ‘तस्करी’ पर सबसे अच्छा और सबसे क्रिटिकल फीडबैक क्या मिला? जवाब: सबसे खूबसूरत फीडबैक ये है कि लोग शो को बिंज-वॉच कर रहे हैं। रात 3:30 से 5 बजे के बीच सबसे ज्यादा मैसेज आते हैं। इसका मतलब लोग पूरी रात शो देख रहे हैं। क्रिटिकल फीडबैक ज्यादातर पर्सनल ओपिनियन हैं, जैसे किसी को कोई किरदार थोड़ा अलग चाहिए था। लेकिन ये भी दिखाता है कि लोग किरदारों से जुड़े हुए हैं। सवाल: एक डायलॉग को लेकर लोगों ने कहा कि गलती हो गई? जवाब: हां, एक सीन में एक कैरेक्टर डर के मारे गलत बोल देता है। लोग बोले कि डायलॉग गलत है। लेकिन वो जानबूझकर ऐसा रखा गया था, क्योंकि कैरेक्टर शॉक में था। ये बात खुद में एक कॉम्प्लिमेंट है कि लोग इतना ध्यान से देख रहे हैं। सवाल: अब जब शो को इतनी पहचान मिल रही है, आगे की प्लानिंग क्या है? जवाब: हम कहानियां बनाना चाहते हैं जो ऑडियंस को इमोशनल जर्नी पर ले जाएं।चाहे ड्रामा हो, थ्रिलर, फैंटेसी, सुपरहीरो या वॉर, जॉनर मायने नहीं रखता, कहानी मायने रखती है। बहुत सारी स्क्रिप्ट्स लिखी हुई हैं, अब उन्हें एक साथ समेट रहे हैं। जल्द ही अगला प्रोजेक्ट अनाउंस करेंगे। सवाल: क्या शूट के दौरान इमरान हाशमी को कोई नई स्क्रिप्ट सुनाई? जवाब: नहीं। शूट के दौरान हम सिर्फ उसी प्रोजेक्ट पर फोकस रखते हैं। एक काम पूरा होने के बाद ही दूसरे पर जाते हैं, वरना कन्फ्यूजन हो जाता है। हां, किस्से और रिसर्च से जुड़ी बातें खूब हुईं। इमरान जी के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा और सही वक्त आने पर हम फिर से उन्हें नई कहानी पिच करेंगे।
कॉमेडियन भारती सिंह और उनके राइटर-एंकर पति हर्ष लिम्बाचिया हाल ही में दूसरी बार पेरेंट्स बने हैं। कपल ने बुधवार को अपने दूसरे बेटे के लिए नामकरण सेरेमनी का आयोजन किया। इस खास मौके की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने अपने लाडले का नाम भी रिवील किया। भारती और हर्ष ने इंस्टाग्राम पर नामकरण सेरेमनी की तस्वीरें करते हुए कैप्शन में यशवीर लिखा। नाम के साथ उन्होंने हार्ट इमोजी लगाया है। हालांकि कपल ने बेटे का चेहरा नहीं दिखाया। सेरेमनी के लिए हर्ष अपने दोनों बेटों लक्ष्य और यशवीर के साथ लैवेंडर और वाइट कुर्ता-पजामा में ट्विनिंग करते नजर आए। वहीं भारती रेड ट्रेडिशनल पंजाबी सलवार सूट में बेहद खूबसूरत दिखीं। एक तस्वीर में बड़े बेटे लक्ष्य अपने छोटे भाई यशवीर को गोद में लिए पोज दे रहे हैं। अब इन तस्वीरों पर फैंस और इंडस्ट्री सेलेब्स जमकर प्यार लुटा रहे हैं। रुबीना दिलैक ने कमेंट किया- “अति सुंदर।” वहीं, मलाइका अरोड़ा, सुनील शेट्टी, ईशा सिंह समेत कई सेलेब्स ने हार्ट इमोजी शेयर किए। एक फैन ने लिखा, “यशवीर… टचवुड, किसी की नजर न लगे,” तो वहीं दूसरे ने लिखा- “लक्ष्य और यशवीर, कितने प्यारे नाम हैं।” बता दें कि भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया की मुलाकात एक कॉमेडी शो के सेट पर हुई थी, जहां भारती परफॉर्मर थीं और हर्ष राइटर। दोस्ती से शुरू हुआ ये रिश्ता साल 2017 में शादी तक पहुंचा। कपल ने 2022 में अपने पहले बेटे लक्ष्य का स्वागत किया था, जबकि 2025 में उनके घर दूसरे बेटे यशवीर का जन्म हुआ। वर्कफ्रंट की बात करें तो दूसरी डिलीवरी के महज तीन हफ्ते बाद ही भारती काम पर लौट आई थीं। वह इन दिनों रियलिटी कुकिंग शो ‘लाफ्टर शेफ सीजन 3’ को होस्ट कर रही हैं।
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ओरी उर्फ ओरहान अवात्रामणि ने एक बार फिर सारा अली खान और उनके परिवार को लेकर बयान दिया है। हाल ही में सारा के करियर पर तंज कसने के बाद अब ओरी ने एक्ट्रेस के भाई इब्राहिम अली खान को “बेशरम” कहा है। दरअसल, ओरी एल्विश यादव के पॉडकास्ट का हिस्सा बने। यहां पर एल्विश ने ओरी से सवाल पूछा कि इंडस्ट्री में सबसे बेशरम कौन है? इस पर ओरी ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया, इब्राहिम अली खान। और साथ ही यह भी कहा कि उन्हें पॉडकास्ट पर बुलाया जाना चाहिए। इतना ही नहीं ओरी ने पॉडकास्ट में सारा के करियर पर तंज कसने को लेकर भी सफाई दी। ओरी ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत कहा। मैंने बस एक छोटा सा मजाक किया था। पूरा इंटरनेट सारा की फिल्मों का मजाक उड़ाता है। उनकी सबसे बड़ी पहचान मीम्स बन चुकी है। लोग मुझे भी बेरोजगार कहते हैं, तो ये कोई बड़ी बात नहीं है।” इससे पहले, ओरी ने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में सारा और इब्राहिम की मां अमृता सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। इंटरव्यू में ओरी ने दावा किया कि सारा की मां अमृता सिंह की वजह से उन्हें मेंटल ट्रॉमा झेलना पड़ा। उन्होंने कहा, “मैंने सारा को काफी पहले अनफॉलो कर दिया था और इब्राहिम को तो सालों से फॉलो नहीं करता। सारा के साथ दोस्ती निभाने का मतलब उस ट्रॉमा के साथ ठीक होने का दिखावा करना है, जो उनकी मां ने मुझे दिया। मैं अब ऐसा नहीं कर सकता।” ओरी ने आगे यह भी कहा कि अगर फ्यूचर में अमृता सिंह उनसे माफी मांगती हैं, तो शायद वह इस बात को जाने देने के बारे में सोच सकते हैं। बता दें कि विवाद तब शुरू हुआ जब हाल में ओरी ने एक रील शेयर की, जिसका टाइटल 'लड़कियों के तीन सबसे बुरे नाम' था। इसमें उन्होंने बिना सरनेम लिख सारा, अमृता और पलक नाम गिनाए थे। इसके बाद सारा और उनके भाई इब्राहिम अली खान ने इंस्टाग्राम पर ओरी को अनफॉलो कर दिया। ओरी इतने पर भी नहीं रुके। 25 जनवरी को उन्होंने एक रील शेयर की, जो कंटेंट क्रिएटर अमूल्य रत्तन के वीडियो से इंस्पायर्ड थी। वीडियो में ओरी नीले रंग का टॉप पहने नजर आए, जिस पर ब्रा का प्रिंट बना हुआ था। एक यूजर ने कमेंट किया, “जेनुइन सवाल- ये ब्रा आखिर किस चीज को संभाल रही है?” इस पर ओरी ने जवाब देते हुए लिखा- “सारा अली खान की हिट फिल्में।” हालांकि, ओरी को इस कमेंट के लिए काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। सोशल मीडिया यूजर्स ने सारा पर तंज कसने के लिए ओरी को घटिया इंसान बताया था।
एक्टर करण वाही और जेनिफर विंगेट इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर दोनों की शादी को लेकर लगातार अफवाहें उड़ रही हैं और इंटरनेट पर इससे जुड़ी कई रिपोर्ट्स भी सामने आ रही हैं। हालांकि, इन खबरों की सच्चाई कुछ और ही है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, जब इन रूमर्स को लेकर उन्होंने करण वाही से संपर्क किया, तो एक्टर ने साफ शब्दों में इन खबरों को खारिज करते हुए कहा, “फेक न्यूज।” करण के इस बयान के बाद दोनों की शादी को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। बता दें कि करण वाही और जेनिफर विंगेट इंडस्ट्री में लंबे समय से हैं और दोनों काफी अच्छे दोस्त हैं। दोनों ने अपने करियर के शुरुआती दौर में फेमस टीवी शो ‘दिल मिल गए’ में साथ काम किया था। जहां जेनिफर ने डॉ. रिद्धिमा गुप्ता और करण ने डॉ. सिद्धांत मोदी का किरदार निभाया था। साल 2024 में लगभग 14 साल बाद दोनों वेब सीरीज ‘रायसिंघानी वर्सेस रायसिंघानी’ में एक बार फिर स्क्रीन पर साथ नजर आए। इस सीरीज में उनकी केमिस्ट्री को ऑडियंस ने काफी पसंद किया, जिसके बाद उनके डेटिंग की अफवाहें भी तेज हो गईं। पर्सनल लाइफ की बात करें तो करण लंबे समय से सिंगल हैं, जबकि जेनिफर विंगेट की शादी पहले एक्टर करण सिंह ग्रोवर से हुई थी। दोनों ने साल 2012 में शादी की थी, लेकिन दो साल बाद अलग हो गए और नवंबर 2014 में अपने अलगाव की आधिकारिक घोषणा की। दोनों की आने वाले प्रोजेक्ट्स की बात करें तो जेनिफर विंगेट जल्द ही एक अनटाइटल्ड नेटफ्लिक्स वेब सीरीज में नजर आएंगी, जिसका निर्देशन रेंसिल डी’सिल्वा कर रहे हैं। यह सीरीज परिणीति चोपड़ा की वेब सीरीज डेब्यू भी होगी और इसमें ताहिर राज भसीन और सुमित व्यास भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। वहीं करण वाही अभिनेता सुरभि ज्योति के साथ शो ‘सेवन एंड ए हाफ डेट्स’ में दिखाई देंगे। इसके अलावा वह हाल ही में ‘कपल गोल्स सीजन 5’ में शिवांगी जोशी के साथ नजर आए थे।
देशभर में UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन) बिल 2026 के खिलाफ देशभर में विरोध जारी है। अब मनोज मुंतशिर ने भी इसे काला कानून कहा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे रद्द करने की अपील की है। मनोज मुंतशिर ने ऑफिशियल X अकाउंट (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा, अगर किसी बाग में एक पौधा छोटा रह गया, तो इसका मतलब ये तो नहीं कि प्रोटेक्शन और समानता के नाम पर दूसरे पौधों को ऊपर से काट दिया जाए। अतीत का पन्ना बंद हो चुका है, 21वीं सदी के जिस दौर में हम जी रहे हैं, वो जातियों की विदाई का समय है। आगे मनोज मुंतशिर ने कहा, मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी से 140 करोड़ भारतवासियों की तरफ से हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि हम सब के लिए आप पिता समान हैं। एक बच्चे को खुद करने के लिए दूसरे को बेवजह थप्पड़ मत मारिया। आपकी ममता और स्नेह पर हम सबका बराबर अधिकार है। यूजीसी का काला कानून वापस ले लीजिए। हमारी एकता को कमजोर होने से बचा लीजिए। अगर इस देश में जातियां जीत गईं तो भारत हार जाएगा। क्या है UGC कानून, जिस पर हुआ विवाद? UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन) ने हाल ही में एक नया बिल पास किया है, जिसके अनुसार हर सरकारी और प्राइवेट विश्वविधालय और कॉलेजों में पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए एक कमेटी बनाई जाए। ये कमेटी उस वर्ग के स्टूडेंट के साथ होने वाले जातिवाद, नस्लवाद को रोकने के लिए गठित होगी, जिसमें स्टूडेंट्स शिकायत कर सकते हैं। इससे जनरल कोटा को बाहर रखा गया है, जिससे पूरे देश में आक्रोश है। कई जनरल कोटा वाले स्टूडेंट्स इस बिल के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। जनरल कोटा में डर है कि इस कमेटी का इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा सकता है।
विपुल अमृतलाल शाह की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ का मोशन पोस्टर रिलीज कर दिया गया है। हर फ्रेम में डर, गुस्सा और सच्चाई को समेटे यह मोशन पोस्टर दर्शकों को झकझोर देने वाला नजर आ रहा है। साथ ही मेकर्स ने फिल्म के टीजर की रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया है, जो 30 जनवरी को रिलीज होगा। ‘द केरल स्टोरी’ के जरिए कड़वी और असहज करने वाली सच्चाइयों को सामने लाने वाले विपुल अमृतलाल शाह अब इसके सीक्वल के साथ और भी आगे जाने का दावा कर रहे हैं। ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ का मोशन पोस्टर इस बात की झलक देता है कि फिल्म पहले भाग से कहीं ज्यादा गंभीर, डरावनी और बेचैन करने वाली होने वाली है। मोशन पोस्टर में महिलाओं के आंसुओं, डर और गुस्से से भरे चेहरे दिखाई देते हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि यह फिल्म धोखे, नफरत और इंसानियत से जुड़ी उन सच्चाइयों को उजागर करेगी, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। पोस्टर का हर फ्रेम दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देने वाला है और फिल्म में सामने आने वाली खौफनाक हकीकत की झलक देता है। गौरतलब है कि ‘द केरल स्टोरी’ साल 2023 में बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल रही थी, जिसने लव जिहाद और कन्वर्ज़न जैसे संवेदनशील मुद्दों को बेखौफ अंदाज में उठाया था। फिल्म ने पूरे देश में चर्चा पैदा की और बाद में इसे दो श्रेणियों में नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ को सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले बनाया गया है। फिल्म का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड विजेता कमाख्य नारायण सिंह ने किया है। कहानी और स्क्रीनप्ले अमरनाथ झा और विपुल अमृतलाल शाह ने लिखा है। फिल्म को आशिन ए शाह ने को-प्रोड्यूस किया है। म्यूजिक मनन शाह का है, जबकि गानों के बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं। फिल्म 27 फरवरी को रिलीज होने वाली है।
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का आज सुबह एक विमान हादसे में निधन हो गया है। उनके असमय निधन के बाद कई बॉलीवुड सेलेब्स भावुक अंदाज में उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनोट को संविधान सदन से निकलते हुए मीडिया के जरिए अजीत पवार के निधन की खबर मिली। इस पर उन्होंने कहा, ये बेहद शॉकिंग है। ये बहुत शॉकिंग खबर है। मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं इमोशन अलाइन करने के बाद थोड़ी देर में स्टेटमेंट दूंगी। अजय देवगन ने लिखा है, “माननीय उपमुख्यमंत्री अजित पवार जी के दुखद निधन से मैं स्तब्ध और बेहद दुखी हूं। इस अपार क्षति से प्रभावित सभी लोगों तथा उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। ओम शांति। सीनियर एक्टर अनुपम खेर ने ऑफिशियल X अकाउंट से लिखा है, “महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार दादा के दुखद निधन से मैं बेहद स्तब्ध और शोकाकुल हूं। जब भी मैं उनसे मिला, वे बहुत ही विनम्र और दयालु थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। ओम शांति। साउथ एक्टर और राजनेता पवन कल्याण ने अजीत पवार के साथ की तस्वीरें शेयर कर लिखा, “महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनडीए गठबंधन के नेता, श्री अजित दादा पवार जी के आज एक भीषण विमान दुर्घटना में निधन की दुखद खबर से मैं बेहद स्तब्ध हूं। जनसेवा के प्रति उनका समर्पण और महाराष्ट्र के लोगों के कल्याण व विकास के लिए उनके अपार योगदान को हमेशा याद किया जाएगा, और जनता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को सदैव सम्मान के साथ देखा जाएगा। आगे एक्टर ने लिखा, मैं उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और इस गहरे शोक के समय उनके परिवारजनों, प्रशंसकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी हार्दिक सहानुभूति प्रकट करता हूं।” एक्टर संजय दत्त ने अजीत पवार की एक तस्वीर के साथ श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है, “माननीय उपमुख्यमंत्री अजित पवार जी के दुखद निधन से मैं स्तब्ध और बेहद दुखी हूं। इस अपार क्षति से प्रभावित सभी लोगों तथा उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। ओम शांति।” रितेश देशमुख ने अजीत पवार की तस्वीर के साथ लिखा है, “अजीत दादा को एक दुखद हादसे में खो देने की खबर सुनकर मैं बेहद स्तब्ध और गहरे दुख में हूं। महाराष्ट्र के सबसे गतिशील नेताओं में से एक, वे काम में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे और अपने आसपास के लोगों को लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते थे। आगे एक्टर ने लिखा, वे कभी अपने शब्दों को तोल-मोल कर नहीं बोलते थे, उनकी बुद्धिमत्ता बेमिसाल थी और उन्हें पूरे राज्य में बेहद प्यार किया जाता था। उनका असमय निधन एक अपूरणीय क्षति और ऐसी खाली जगह छोड़ गया है जिसे भरा नहीं जा सकता। मुझे उनसे कई बार मिलने का सौभाग्य मिला और उन्होंने मुझ पर जो अपनापन दिखाया, उसे मैं हमेशा याद रखूंगा। पवार परिवार, उनके प्रियजनों और उनके लाखों समर्थकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।” सिंगर राहुल वैद्य ने अजीत पवार के साथ तस्वीर शेयर कर लिखा, बहुत ज्यादा शॉकिंग है। दादा, आपकी आत्मा को शांति मिले। ओम शांति।
पॉपुलर सिंगर अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास ले लिया है। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा की है। सिंगर ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से लिखा है, नमस्ते, आप सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं। इतने सालों से श्रोताओं के रूप में मुझे जो इतना प्यार दिया है, उसके लिए आप सबका धन्यवाद। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब से मैं एक प्लेबैक सिंगर के तौर पर कोई भी नया काम नहीं लूंगा। मैं इसे यहीं खत्म कर रहा हूं। यह एक शानदार सफर रहा। प्लेबैक सिंगिंग छोड़कर क्या करेंगे अरिजीत सिंह अचानक नहीं लिया सिंगिंग छोड़ने का फैसला अरिजीत सिंह ने कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया है। उन्होंने लंबे समय से इस पर विचार किया और अब उन्हें लगता है कि यही सही समय है। वे अपने प्रशंसकों के प्यार और समर्थन के लिए हमेशा आभारी रहेंगे और भविष्य में नए अंदाज में उनसे जुड़ते रहेंगे। कई कारणों से विवादों में रहे हैं सिंगर सलमान खान से हुआ विवाद, सुल्तान फिल्म से हटाए गए साल 2014 के गिल्ड अवॉर्ड में सिंगर अरिजीत सिंह गाने तुम ही हो के लिए अवॉर्ड लेने पहुंचे। इस समय सलमान खान और रितेश देशमुख स्टेज पर मौजूद थे, जो लगातार सिंगर से मजाक कर रहे थे। मंच पर आकर अरिजीत ने कहा, 'आप लोगों ने सुला दिया।' इस पर सलमान ने कहा था, 'इसमें हमारा कोई दोष नहीं है, ऐसे गाने (तुम ही हो) बजते रहेंगे तो ऑडियंस सोएगी ही।' अरिजीत बिना जवाब दिए स्टेज से उतर गए, लेकिन उनके बाद इसी गाने 'तुम ही हो' के लिए बेस्ट लिरिक्स का अवॉर्ड लेने पहुंचे मिथून ने अरिजीत की बेइज्जती का जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'तुम ही हो गाने ने लोगों को सुलाया नहीं, जगाया है।' इस पर सलमान ने फिर मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, 'अरे आपके सिंगर सोते-सोते आए हैं।' जवाब में मिथुन ने कहा, 'अरिजीत ने बहुत सब्र से गाया है और ये सब्र म्यूजिक इंडस्ट्री की जरुरत है।' पहले तो सलमान मिथून की पैंट पर चिपका हुआ एक कागज का टुकड़ा निकालते हैं और उनका भी मजाक बनाते हैं। इस पर मिथून ने जवाब दिया, 'आप 6 घंटे बैठाकर रखते हो, इसलिए ये होता है।' उनकी बात पर सलमान हंसते-हंसते रुक जाते हैं और फिर गुस्से में चिल्लाकर कहते हैं, 'हो गया तुम्हारा अब निकलो।' इस पर मिथून ने कहा था- 'मैं नहीं डरा।' दोनों के बीच अनबन देख हर कोई सीरियस हो गया था। अरिजीत सिंह ने सलमान खान की फिल्म सुल्तान के लिए गाना गाया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही फिल्म से उनका गाना हटा दिया गया। खबर मिलने के बाद अरिजीत सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सलमान से माफी मांगी और विनती की कि उनका गाना फिल्म से न हटाया जाए। हालांकि माफी का कोई असर नहीं हुआ। अब हो चुकी है सलमान-अरिजीत की सुलह बिग बॉस 19 के वीकेंड का वार एपिसोड में कॉमेडियन रवि गुप्ता बतौर होस्ट पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सलमान से कहा कि उन्हें यहां आने में डर लग रहा था क्योंकि उनकी शक्ल अरिजीत सिंह से काफी मिलती है। इस पर सलमान हंस पड़े और कहा, अरिजीत और मैं बहुत अच्छे दोस्त हैं, वो मिसअंडरस्टैंडिग थी और वो गलतफहमी मेरी साइड से हुई थी। गेरुआ सॉन्ग पर हुआ विवाद कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान अरिजीत सिंह ने फिल्म दिलवाले का गाना गेरुआ गाया था। उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थी। इसके कुछ दिनों बाद अरिजीत सिंह के कुछ कॉन्सर्ट कैंसिल कर दिए गए। भाजपा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी गेरुआ रंग से डर गईं। इसके बाद अरिजीत ने विवाद पर कहा था, 'एक रंग को लेकर इतना विवाद। गेरुआ रंग संन्यासियों का होता है। स्वामी जी (विवेकानंद) का है। अगर उन्होंने सफेद पहना होता तो क्या सफेद रंग पर भी विवाद होता?' हालांकि बाद में पार्टी की तरफ से सफाई दी गई कि कॉन्सर्ट G-20 समित के चलते कैंसिल किए गए, गाने या उसके बोल के लिए नहीं। एक नजर अरिजीत सिंह के करियर पर अरिजीत सिंह का जन्म 25 अप्रैल 1987 को पश्चिम बंगाल के जीयागंज में हुआ। संगीत उन्हें विरासत में मिला। मां शास्त्रीय गायिका थीं और मौसी तबला वादक। कम उम्र में ही उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। साल 2005 में उन्होंने रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ में हिस्सा लिया। हालांकि वे शो जीत नहीं पाए, लेकिन इस मंच ने उन्हें इंडस्ट्री की वास्तविकता समझने और खुद को निखारने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने बतौर म्यूजिक प्रोग्रामर और बैकग्राउंड सिंगर काम किया, जो उनके करियर का एक अहम लेकिन कम चर्चित हिस्सा रहा। ‘आशिकी 2’ में मिला बड़ा मौका 2013 में आई फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना “तुम ही हो” अरिजीत सिंह के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस एक गाने ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। उनकी आवाज सीधे दिल को छू गई और वे हर म्यूजिक डायरेक्टर की पहली पसंद बन गए। इसके बाद “चाहूं मैं या ना”, “रब्ता”, “अगर तुम साथ हो”, “गेरुआ” और “ऐ दिल है मुश्किल” जैसे सुपरहिट गानों ने उनके करियर ग्राफ को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया।
नीरज ग्रोवर हत्याकांड के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि कैसे कास्टिंग डायरेक्टर अपनी दोस्त एक्ट्रेस मारिया सुसईराज के घर गए और लापता हो गए। एक्ट्रेस मारिया ने नीरज के परिवार के साथ उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस जांच में नीरज के मोबाइल पर आए एक कॉल की मदद से मारिया पर शक हुआ, जिसके बाद वो लगातार गुमराह करने वाले बयान देने लगीं। मारिया की बिल्डिंग के गार्ड ने पूछताछ में बताया कि मारिया 7 मई 2008 की शाम कुछ भारी बैग्स ले जाती दिखी थीं, जिस समय उनके बॉयफ्रेंड जेरोम मैथ्यू भी साथ थे, जबकि पूछताछ में जेरोम ने कहा था कि वो मारिया की बिल्डिंग गए ही नहीं थे। नीरज की गुमशुदगी के करीब 2 हफ्ते बाद सख्ती करने पर मारिया ने कहा कि नीरज की हत्या हो चुकी है। जेरोम ने नीरज का कत्ल किया, उन्होंने लाश के सामने एक्ट्रेस का रेप किया, जिसके बाद दोनों ने मिलकर लाश के टुकड़े किए और उन्हें ठिकाने लगाया। नीरज ग्रोवर हत्याकांड के पार्ट- 2 में कहानी आगे- मारिया के शॉकिंग बयान के बाद 22 मई 2008 को मुंबई पुलिस की टीम ने जेरोम मैथ्यू को कोच्चि से हिरासत में लिया। कुछ देर तक अलग-अलग कहानियां सुनाने के बाद उन्होंने कहा कि नीरज की हत्या की मास्टरमाइंड मारिया हैं। दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे थे। दोनों को कोर्ट में पेश कर हिरासत में लिया गया। मारिया इस बयान पर अड़ी थीं कि जेरोम ने नीरज की हत्या की और उनका रेप किया। नीरज की हत्या करने के बाद जेरोम ने उन्हें धमकी दी कि अगर किसी को कुछ कहा, तो वो उन्हें भी मार देंगे। ऐसे में मारिया को मजबूरन उनका साथ देना पड़ा और लाश के टुकड़े करने पड़े। 22 मई को मारिया पुलिस को मुंबई से करीब 90 किलोमीटर दूर मनोर के जंगल लेकर गई, जहां सुनसान झाड़ियों में उन्होंने नीरज की लाश ठिकाने लगाई थी। एक स्पॉट पर पहुंचकर मारिया ने जमीन की तरफ इशारा किया। जगह देखकर मालूम पड़ता था कि मानों किसी ने कचरा जलाया हो। पुलिस पास पहुंची तो वहां लाश के कुछ अधजले टुकड़े, कुछ हड्डियां, जले हुए फूल, कुछ बोतलें और जले हुए कपड़े थे। छानबीन की गई तो उस जगह एक मोतियों की माला थी, जिसमें भगवान गणेश का पेंडेंट था। नीरज के पिता अमरनाथ ग्रोवर और कुछ दोस्तों ने कन्फर्म किया कि वो पेंडेंट नीरज का ही था। मारिया का कन्फेशन, जिसमें बयां की गई उस रात की कहानी… “मेरा नाम मिस मारिया जोसेफ सुसईराज है। घटना के दिन मैं मलाड (वेस्ट) में रह रही थी। 6 मई 2008 को मैंने मलाड (पश्चिम) में किराए पर एक फ्लैट लिया था। मैं मार्च 2008 से नीरज ग्रोवर को जानती थी। वह मेरा दोस्त था। मार्च 2008 से मैं उनसे फोन पर संपर्क में थी। 29 अप्रैल 2008 से घटना की तारीख तक मैं उनसे रोज मिलती रही थी। 6 मई 2008 को मैं पूरे दिन सामान की खरीदारी कर रही थी। उस दिन करीब 10:30 बजे नीरज ने मुझे कॉल किया।। मैंने उससे कहा था कि मैं नहीं मिल सकती क्योंकि मैं थकी हुई थी। रात करीब 11:00 बजे, मैं अपने पड़ोसी के घर से नहाकर बाहर आई, तो मैंने देखा कि नीरज मेरे घर के दरवाजे पर खड़ा था। मैंने उसे अपनी पड़ोसी दोस्त मिस मयूरी से मिलवाया। फिर हम मेरे घर के अंदर गए। मैंने उससे पूछा कि वह क्यों आया है। उसने कहा कि वह घर जमाने में मदद करना चाहता है।” “रात लगभग 11:30 बजे मुझे मिस्टर एमिल जेरोम का फोन आया, जिनसे मैं शादी करने का इरादा रखती थी। मैंने उन्हें बताया कि नीरज मेरे घर पर है। जेरोम ने कोचीन से मुझे फोन किया था। मेरे मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई थी। इसके बाद जेरोम ने नीरज के मोबाइल फोन पर मुझे कॉल किया। मैंने जेरोम को बताया कि नीरज उस दिन कुछ अजीब-सा व्यवहार कर रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि डिनर के बाद नीरज चला जाएगा। यह सब लगभग रात 12:30 बजे हुआ।” “इसके बाद मैंने नीरज के साथ खाना खाया। नीरज अपने फोन कॉल में व्यस्त थे। मैं घर की सफाई कर रही थी। नीरज को उनके दोस्तों ने पार्टी में आने के लिए बुलाया था, लेकिन वह नहीं गए। मैंने भी उनके साथ जाने से मना कर दिया। नीरज को सुबह मलाड में काम था। उन्होंने मुझसे अनुरोध किया कि मैं उन्हें अपने घर में रुकने की अनुमति दे दूं ताकि वह काम पर जा सकें। वह मेरे घर पर ही रुक गए।” “7 मई 2008 को सुबह लगभग 7:30 बजे मेरे घर की डोरबेल बजी। मैंने दरवाजा खोला तो पाया कि जेरोम सामने थे। वह सीधे अंदर आ गए। नीरज भी जाग गया। मैं जेरोम के पीछे-पीछे अंदर गई। नीरज ने मुझसे पूछा कि क्या जेरोम मेरा बॉयफ्रेंड है। नीरज ने उन्हें पहचान लिया था क्योंकि उन्होंने हमारी तस्वीरें देखी थीं। नीरज को यह भी पता था कि मेरी शादी जेरोम से होने वाली है। इसके तुरंत बाद जेरोम ने नीरज को पीटना शुरू कर दिया। दोनों आपस में लड़ने लगे। मैं उन्हें रोक नहीं सकी। दोनों ने मुझे धक्का दे दिया, जिससे मैं गिर पड़ी। जब मैं उठी तो मैंने देखा कि जेरोम ने मेरी रसोई के चाकू से नीरज पर वार किया। मैंने जेरोम द्वारा नीरज को मारे जा रहे चाकू को पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान मेरी दाहिनी हथेली में भी चोट लग गई। जेरोम ने फिर मुझे धक्का दे दिया और नीरज को चाकू मारते रहे। नीरज फर्श पर गिर पड़ा और जेरोम उसे पीटते रहे।” “इस घटना से मैं चीखने लगी। जेरोम ने मेरा मुंह बंद कर दिया और मुझे जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने मुझे बिस्तर पर पटका और मेरे साथ बलात्कार किया। उन्होंने कभी चाकू नहीं छोड़ा। यह सब सुबह 8:00 बजे हुआ। उन्होंने मुझे मारा-पीटा भी और किसी को यह घटना न बताने की धमकी दी। मैंने जेरोम से कहा कि नीरज को अस्पताल ले चलें। उन्होंने मुझसे कहा कि नीरज 4 से 5 घंटे तक नहीं मरेंगे। उन्होंने मुझे बाथरूम में जाकर नहाने के लिए कहा। इसके बाद जेरोम बाथरूम में आए और फिर से मेरे साथ बलात्कार किया। सुबह 11:00 बजे के बाद जेरोम ने मुझसे कहा कि मैं नीरज के किसी दोस्त को फोन करूं और उसे यह जानकारी दूं कि नीरज रात 12:30 बजे मेरे घर से चला गया था और वह अपना मोबाइल फोन मेरे घर पर भूल गया है और दोस्त से उसका फोन ले जाने के लिए कहूं।” “मैंने नीरज के मोबाइल फोन से निशांत को कॉल किया। मैंने वही कहा जो एमिल ने कहा था। मिस्टर निशांत मेरे घर नहीं आए। इसके बाद जेरोम ने नीरज के शव को घसीटकर घर के बाथरूम वाले हिस्से में ले जाकर रख दिया। फिर जेरोम ने मुझसे मलाड के हाइपरसिटी मॉल से बैग और पर्दे खरीदने को कहा। उन्होंने यह नहीं बताया कि ये चीजें किस लिए मंगवा रहे हैं। उन्होंने मुझे एक चाकू और रूम फ्रेशनर खरीदने को भी कहा। मैंने ये चारों चीजें खरीदीं और अपने घर वापस आ गई। जब मैं ये सामान खरीदने के लिए घर से बाहर थी, तब जेरोम मोबाइल फोन पर मुझसे बात कर रहे थे। मैं घर पहुंची और उन्हें चाकू सौंप दिया। उन्होंने मुझे बाथरूम के अंदर न जाने को कहा। उन्होंने मुझसे खून से सना हुआ हॉल साफ करने को कहा। मनोर में जलाए गए नीरज की लाश के टुकड़े... मारिया ने बताया कि इसके बाद उन्होंने जेरोम के कहने पर दोस्त किरण से कार मांगी और मनोर जाकर लाश के टुकड़े फेंके और उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी और लौट आए। मारिया की कलाई कट गई थी, तो घर आकर जेरोम ने बचा हुआ खून साफ किया। शाम को मारिया ने ब्रोकर को कॉल कर घर में पुताई करवाई। इन सबके बीच 7 मई की रात साढ़े 10 बजे निशांत लाल का कॉल आया, जिन्होंने बताया कि वो शिकायत दर्ज करवाने पुलिस स्टेशन जा रहे हैं। निशांत बिल्डिंग के नीचे आए, नीरज का मोबाइल लिया और मारिया को लेकर पुलिस स्टेशन गए। मारिया के कन्फेशन के अनुसार, वो और नीरज सिर्फ दोस्त थे, हालांकि उनके साथ कॉफी शॉप में मिलने वाले दोस्तों का कहना था कि उन्होंने एक क्लब में मारिया और नीरज को किस करते देखा था। पुलिस को शक था कि काम न मिलने से नाराज मारिया ने ये मान लिया होगा कि नीरज ने झूठा दिलासा देकर उनसे रिश्ता कायम किया। इस नाराजगी में उन्होंने बॉयफ्रेंड जेरोम के जरिए नीरज की हत्या करवाई। हालांकि जांच में साफ था कि 6 मई को मारिया ने नीरज को घर नहीं बुलाया। वो नीरज ही थे, जो मारिया के घर आने की जिद कर रहे थे और अचानक वहां पहुंचे। जांच में सामने आया कि मारिया और नीरज एक-दूसरे को पसंद करते थे। यही वजह थी कि नीरज उस रात मारिया के घर पर ही रुके। जब कॉल के जरिए जेरोम को नीरज की मौजूदगी का एहसास हुआ तो उन्होंने मारिया से गुस्से में कहा कि वो नीरज को घर से भेज दें। मारिया ने ऐसा नहीं किया। अगली सुबह जब जेरोम अचानक घर पहुंचे तो वो नीरज को मारिया के बेडरूम में देखकर आगबबूला हो गए और आक्रोश में हत्या को अंजाम दिया। कोर्ट में 3 सालों तक रहा नीरज ग्रोवर केस… क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, 'जेरोम अपनी नेवी पर्सनैलिटी के साथ हट्टा-कट्टा कोर्ट में दाखिल होता था। बिल्कुल बन-ठन कर कोर्ट में आता था। उसके चेहरे पर कोई इमोशन ना एक्सप्रेशन होते थे, और देखकर ऐसा नहीं लगता था कि उसे इस बात का कोई भी पछतावा है। उसके साथ उसका भाई कोर्ट में आता था। और मारिया के साथ उसका भाई और पिता आते थे।' नीरज ग्रोवर की हत्या के 3 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने जेरोम मैथ्यू को हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई, जबकि मारिया सुसईराज को सबूत मिटाने के आरोप में महज 3 साल की सजा हुई। 3 साल बाद आए फैसले से जनता में दिखा आक्रोश… फैसला आते ही नीरज के परिवार, फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने इसका विरोध किया और मुंबई में प्रोटेस्ट किया। हालांकि कोर्ट ने फैसला बरकरार रखा। रजा मुराद, नीरज को करीब से जानते थे। उन्होंने फैसला आने के बाद इसके खिलाफ प्रोटेस्ट किया था। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा, 'मैं इस घटना से बहुत दुखी था और उससे भी ज्यादा अफसोस इस बात का था कि कोर्ट ने जेरोम मैथ्यू और मारिया को जो सजा सुनाई, वो नाकाफी थी। मारिया को केवल सबूत मिटाने के जुर्म में सजा दी गई, जबकि वो इस केस में उतनी ही जिम्मेदार थी जितना जेरोम मैथ्यू। हमने इसके विरोध में 3 जुलाई 2011 को एक मार्च निकाला।' आगे उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो उनकी मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जिस तरह से उन्हें मारा गया, वैसे तो जानवरों को भी नहीं मारा जाता। यह एक क्राइम ऑफ पैशन था। उस समय नीरज इंडस्ट्री का बड़ा नाम थे, तो सभी उनकी गुड बुक्स में रहना चाहते थे। मारिया ने भी उन्हें अपने चार्म से लुभाने की कोशिश की और इसमें वो काफी हद तक कामयाब रहीं।' 'मारिया बहुत ही महत्त्वाकांक्षी लड़की थी। और ऐसी लड़कियां शॉर्टकट अपनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं। उन्हें लगता है कि किसी से जिस्मानी ताल्लुक रखकर वो आगे बढ़ जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं होता।' नीरज के साथ बालाजी प्रोडक्शन में काम करने वाले रविंद्र कहते हैं, 'इस पर सच कहूं तो कहने के लिए शब्द नहीं हैं। नीरज के साथ बहुत ट्रैजिक हुआ। इतना यंग, वाइब्रेंट, शांत और वेल-स्पोकन लड़का था वो। ऐसा हादसा कैसे हुआ? और कैसे कम हो सकते हैं ऐसे इंसिडेंट, जब नीरज के दोषी को मारिया सुसाइराज को सिर्फ 3 साल की सज़ा देकर छोड़ दिया गया? मुझे बहुत आहत किया इसने। मेरे लिए ये एक बड़ा शॉक था।' राम गोपाल वर्मा ने नीरज ग्रोवर हत्याकांड पर बनाई फिल्म…. नीरज ग्रोवर की मौत के कुछ सालों बाद पॉपुलर फिल्ममेकर रामगोपाल ने केस पर नॉट ए लव स्टोरी फिल्म बनाई थी। फिल्म में एक्टर अजय गेही ने नीरज का, दीपक डोबरियाल ने जेरोम का और माही गिल ने मारिया का किरदार निभाया था। फिल्म का क्लाइमैक्स सीन उसी जगह शूट किया गया, जहां नीरज की हत्या हुई थी। अजय गेही ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, 'हम उसी बिल्डिंग, उसी रूम में क्लाइमैक्स सीन की शूटिंग कर रहे थे, जहां ये पूरा वाकया हुआ था। क्लाइमैक्स सीन में मैं नग्न था और पूरा ब्लड से सना हुआ था। हमें बस स्टोरी बताई थी कि ऐसा सीन है, लेकिन इस सीन को लेकर कोई रिहर्सल नहीं हुई। रामू सर ने कहा कि “जो करने का मन करे, करो।” ये पहली ऐसी फिल्म थी जो 5-7 D में शूट हो रही थी। हुआ यूं कि इसी सीन को शूट करते दौरान बिल्डिंग के कुछ लोग विरोध करने घुस आए और मुझे ऐसी हालत में देख हक्का-बक्का रह गए। आगे अजय ने कहा, 'सोचिए, सिनेमा में इसका क्या इम्पैक्ट पड़ा होगा लोगों पर। मैं बस उस बंदे की साइकोलॉजी को पकड़ रहा था कि वो कैसे रिएक्ट करता। जब दूसरा इंसान कमरे में घुसता है, तो उस सीन में हमारे बीच हाथापाई होती है। मैं एक-दो बार बाथरूम में गिरा और चोटें भी आईं। दिक्कतें तो आईं करने में, लेकिन रूह कांप जाती है ये सोचकर कि ये सब असलियत में हुआ था।' (नोटः ये खबर नीरज ग्रोवर हत्याकांड की चार्जशीट, क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा ,एक्टर रजा मुराद से बातचीत और दैनिक भास्कर की सीनियर रिपोर्टर वर्षा राय की रिसर्च के आधार पर लिखी गई है। ) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय ........................................................ पार्ट-1, एक्ट्रेस के घर से लापता हुए कास्टिंग डायरेक्टर नीरज ग्रोवर: एक कॉल से पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, कातिलों ने लाश के सामने बनाए शारीरिक संबंध मई 2008 की बात है उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी?’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस की रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया- ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ पूरी खबर पढ़िए... बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस 3 में अगले मंगलवार-बुधवार पढ़िए कहानी मशहूर एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी की मौत की कहानी, जिनके परिवार ने बॉयफ्रेंड पर लगाए हत्या के आरोप। ............................................ बॉयफ्रेंड को फंदे से लटकी मिलीं प्रत्युषा बनर्जीः परिवार ने लगाए हत्या के आरोप, आखिरी कॉल रिकॉर्ड्स से बदली केस की दिशा बालिका वधु फेम एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी, राहुल राज के साथ लिव इन में थीं। दोनों गोरेगांव वेस्ट की एक बिल्डिंग की 7वीं मंजिल पर रहते थे। राहुल काम से बाहर गए थे। लौटे तो देर तक खटखटाने, बेल बजाने के बावजूद प्रत्युषा ने कोई जवाब नहीं दिया। राहुल और प्रत्युषा अक्सर चाबियां खो देते थे, तो उनके पास हमेशा चाबी बनाने वाले का नंबर होता था। राहुल ने उन्हें बुलाया। हल्ला सुनकर पड़ोसी भी आए। राहुल ने पड़ोस के नौकर से बालकनी के रास्ते अंदर जाकर दरवाजा खोलने को कहा। जैसे ही नौकर बालकनी से अंदर पहुंचा तो मंजय देख वो चीख उठा। प्रत्युषा से पंखे से लटकी हुई थी। राहुल ने फंदा काटकर उन्हें उतारा, तो उनकी सांसें चल रही थीं। हॉस्पिटल में प्रत्युषा ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार ने राहुल पर हत्या का आरोप लगाया। पूरी कहानी पढ़िए, अगले मंगलवार-बुधवार बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-3 में।

