1931 की बात थी भारत-पाकिस्तान उन दिनों एक था और कोई सीमाएं-सरहद नहीं थी। लाहौर-बॉम्बे और कोलकाता में फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, रेडियो का दौर भी आ चुका था और कुछ म्यूजिक कंपनियां गाने रिकॉर्ड कर बेचा करती थीं। लाहौर की जेनोफोन म्यूजिक कंपनी उन दिनों काफी मशहूर हुआ करती थी। एक दोपहर एक नौजवान शख्स 12 साल की बच्ची का हाथ थामे स्टूडियो में पहुंचा। बच्ची का पहनावा एक दम आम था, जैसे किसी गरीब परिवार से हो। देखकर मालूम पड़ता था कि उसे अचानक ही वहां ऑडिशन में लाया गया हो। साथ पहुंचे शख्स ने साफ किया कि वो बच्ची को उसके परिवार से छिपाकर यहां लाया था। लीजेंड्री म्यूजिक कंपोजर गुलाम हैदर सामने बैठे थे। वही गुलाम हैदर, जिन्होंन लता मंगेशकर को ब्रेक दिया था। अब गाने की बारी थी, बच्ची ने झिझकते हुए पॉजिशन ली, स्टूडियो में सन्नाटा पसरा और बच्ची ने बहादुर शाह जफर की गजल मेरा यार मुझे मिले अगर गाना शुरू किया। उस बच्ची ने दो लाइन गाई ही थीं कि गुलाम हैदर ने गाना रुकवा दिया। बच्ची डर गई। मन में बस यही ख्याल था कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई। गुलाम हैदर ने पास खड़े असिस्टेंट को देखा और कहा- बच्ची के साथ 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट बनवा लो। साथ ही कहा गया कि बच्ची को हर वो लग्जरी सुविधा दो, जो टॉप सिंगर्स को दी जाती है। उस बच्ची ने हुनर और गूंजती आवाज से वो कमाल दिखाया कि भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं और ‘सैंया दिल में आना रे…’, ‘कजरा मोहब्बत वाला….’ और ‘मुगल-ए-आजम’ का मशहूर गाना ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…’, जैसे 6 हजार गाने गाए। करीब 100 साल बाद भी उनके गाने सुने और रीमिक्स किए जाते हैं। उस बच्ची का नाम था शमशाद बेगम, जिनकी लेजेंड्री सिंगर लता मंगेशकर भी फैन थीं। जब लता नई-नई गायिकी में आईं तो उन्हें शमशाद की तरह गाने की सलाह दी जाती थी। एक दौर वो भी आया जब किशोर कुमार जैसे लीजेंड्री सिंगर भी शमशाद की खिदमद में कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे। जब सिंगर्स को एक गाने के लिए 100 रुपए फीस दी जाती थी, तब फिल्ममेकर्स शमशाद को 2000 रुपए फीस देने के लिए भी राजी हो जाया करते थे। पिता की शर्त में ताउम्र बुर्का पहनकर गाया। पाबंदी ऐसी कि जवानी के दिनों में कोई तस्वीर तक क्लिक नहीं करवाई। फिल्मों में हीरोइन बनने के बड़े मौके भी पिता के गुस्से के भेंट चढ़े। आज शमशाद बेगम की 107वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर जानिए, हिंदी सिनेमा के इतिहास में गायिकी की मिसाल शमशाद बेगम की समाजिक बेड़ियों से निकलकर इतिहास रचने की कहानी- बचपन में स्कूल और शादियों में गाने से हुनर को मिली पहचान जलियावाला हत्याकांड के ठीक एक दिन बाद 14 अप्रैल 1919 को शमशाद बेगम का जन्म ब्रिटिश इंडिया के लाहौर में हुआ। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शमशाद का जन्म लाहौर नहीं बल्कि अमृतसर में हुआ। उनके पिता मियां हुसैन बख्श के मिस्त्री थे। उन्होंने तंगहाली में 8 बच्चों की परवरिश की। शमशाद महज 10 साल की थीं, जब उन्होंने शादियों में गाना शुरू कर दिया। नन्ही सी बच्ची की आवाज इतनी बुलंद थी कि हर बार उन्हें ही गाने के लिए बुलाया जाने लगा। कुछ रिश्तेदार खुद होकर एक आना दे दिया करते थे। एक दिन शमशाद ने स्कूल के प्रोग्राम में कोरस में गाना गाया। प्रिंसिपल आवाज सुनकर दंग रह गईं। उन्होंने पास बुलाकर कहा- देखना, एक दिन तुम परिवार का नाम रौशन करोगी। इसके बाद उन्हें स्कूल प्रेयर की हेड सिंगर बना दिया गया। 12 की उम्र में 2 लाइनें सुनकर बडे़ म्यूजिक डायरेक्टर ने दिए 12 गाने शमशाद की आवाज आस-पड़ोस में पहचान बना रही थी, लेकिन पिता मियां हुसैन इससे काफी चिढ़ते। उन्हें बेटी का गाना पसंद न था। रूढ़िवादी परिवार में गाना सुनना भी हराम था। घर में रेडियो तक नहीं था। लेकिन 1931 में उनके चाचा आमिर गजल, कव्वाली के बड़े फैन थे। एक रोज उन्होंने शमशाद को गाते सुना और उन्हें हुनर परखने में देर न लगी। जैसे ही उन्हें पता चला कि लाहौर में जेनोफोन म्यूजिक कंपनी के ऑडिशन हो रहे हैं, वो परिवार से छिपकर शमशाद को अपने साथ ले गए। ऑडिशन में मशहूर सिगंर गुलाम हैदर, जो कंपनी के म्यूजिक डायरेक्टर थे ने 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट दिया। तय हुआ कि हर गाने के 12 रुपए मिलेंगे। घर लौटकर जब चाचा ने ये खबर पिता को दी, तो वो खूब नाराज हुए। नाराजगी चरम पर थी। लंबी बहस के बाद चाचा ने भाई मियां हुसैन को समझाया कि ये हुनर हर किसी में नहीं होता, अगर पूरी दुनिया गाना गा रही है तो तुम्हें क्यों ऐतराज है। आखिरकार वो मान गए, लेकिन शर्तों पर। शर्त कि शमशाद का चेहरा कोई न देखे, उन्हें हमेशा बुर्का पहनकर गाना होगा। वो कभी तस्वीर क्लिक न करवाएं और न ही उनकी पहचान दुनिया के सामने आए। गायिकी के लिए उतावलीं शमशाद बेगम ने हर एक शर्त मानी और जेनोफोन म्यूजिक कंपनी केे साथ जुड़ गईं। शमशाद बेगम के शुरुआती कुछ गाने बिना उनके नाम के रिलीज किए गए। आरती गाने पर उनकी जगह सिंगर का नाम उमा देवी लिखा जाता और पंजाबी गानों में सुरंदिर कौर। उस समय रिकॉर्डिंग कंपनियों का मानना था कि लोग अपने धर्म के लोगों के ही गाने सुनना पसंद करते थे। जेनोफोन का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद उन्हें कंपनी की तरफ से 5000 रुपए दिए गए थे। जेनोफोन म्यूजिक कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद उन्हें पेशावर रेडियो और फिर दिल्ली के एयर इंडिया रेडियो में काम मिल गया। उनके गाने और प्रोग्राम काफी हिट हुआ करते थे। परिवार के खिलाफ जाकर की हिंदू लड़के से शादी साल 1932, शमशाद 13 साल की थीं, जब उनकी मुलाकात पड़ोस में रहने वाले वकालत के स्टूडेंट गणपत लाल बट्टो से हुई। दोनों की उम्र में बड़ा फासला था, लेकिन विचार जल्द ही एक होने लगे। शमशाद अक्सर चोरी-छिपे उनसे मिला करती थीं। ये वो दौर था, जब कम उम्र में ही शादी करवाने की कवायद थी, ऊपर से शमशाद का रूढ़िवादी परिवार। 13 की उम्र में ही उनके लिए लड़के देखे जाने लगे। एक रोज घरवालों तक शमशाद और गणपत लाल के रिश्ते की भनक लग गई। घर में हंगामा हुआ और लड़के देखने की गति बढ़ा दी गई। पिता की हर छोटी-बड़ी बात और शर्त मान लेने वालीं शमशाद इस बार अड़ गईं। उन्होंने कह दिया कि वो गणपत से ही शादी करेंगी। घरवाले इस रिश्ते के खिलाफ रहे, लेकिन इसके बावजूद शमशाद ने महज 15 साल की उम्र में गणपत लाल बट्टो से 1935 में शादी कर ली। हीरोइन बनने का मिला ऑफर, पिता की सख्ती के चलते ठुकराया साल 1937 में शमशाद बेगम के गानों की बदौलत उन्हें लाहौर के ऑल इंडिया रेडियो में काम मिला। उनके हर गाने और हर प्रोग्राम जबरदस्त हिट रहे। ये वो दौर था, जब फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, लेकिन रिकॉर्डिंग और एडिटिंग की तकनीकें नहीं आई थीं। उस समय हीरो-हीरोइन अपने गाने खुद गाया करते थे। जब दलसुख पंचोली ने एक रोज रेडियो में शमशाद की आवाज सुनी तो उन्होंने तय कर लिया कि वो उन्हें अपनी फिल्म की हीरोइन बनाएंगे और उनकी आवाज में गाने भी डालेंगे। जबकि उन्होंने कभी शमशाद को असल में देखा तक नहीं था। उन्होंने ये ऑफर दिया, तो शमशाद ने भी हामी भर दी। शमशाद ने एक स्क्रीन टेस्ट भी दिया, जो सफल रहा। लेकिन जैसे ही ये बात उनके पिता तक पहुंची, उनका गुस्सा फट पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्होंने ऐसी कोई ख्वाहिश पाली तो उनका गाना भी बंद करवा दिया जाएगा। उस दिन शमशाद ने गायिकी को चुना और पिता से कहा कि वो वादा करती हैं कि कभी कैमरे के सामने नहीं आएंगी। वादे के मुताबिक, शमशाद हमेशा बुर्के में ही प्रोग्राम करती थीं। कुछ साथ काम करने वालों ने उन्हें देखा था, लेकिन उन्होंने कभी तस्वीर क्लिक नहीं करवाई। महबूब खान ने मुंबई आने के लिए दिया बंगले, गाड़ी, नौकर का ऑफर साल 1941 में रेडियो में शमशाद की आवाज सुनकर डायरेक्टर महबूब खान इतने इंप्रेस हुए कि उन्होंने शमशाद को बॉम्बे लाने का फैसला कर लिया। वो सीधे उनके लाहौर स्थित घर पहुंचे। पति के सामने बात रखी, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इस पर महबूब खान ने कहा कि अगर शमशाद उनके साथ बॉम्बे आएंगी, तो बदले में वो उन्हें बंगला, गाड़ी और हर सामान के साथ नौकर भी देंगे। अगर शमशाद चाहें तो अपने साथ 3-4 लोग भी ला सकती हैं। पति राजी हो गए, लेकिन पिता फिर अड़ गए। इस पर महबूब खान ने उनसे कहा- 'आखिर कब तक बेटी को कुएं का मेंढ़क बनाए रखेंगे? इसे समुद्र में छोड़िए।' जब शमशाद ने खुद भी जाने का फैसला कर लिया, तो पिता को भी मानना ही पड़ा। भले ही शमशाद को महबूब खान बॉम्बे लाए, लेकिन उन्हें पहली बार फिल्मों में गाने का मौका गुलाम हैदर ने फिल्म खजानची (1941) दिया। इस फिल्म के लिए शमशाद को हर एक गाने के लिए 200 रुपए फीस दी जाने वाली थी, लेकिन वो इससे नाखुश थीं। एक दिन उन्होंने फीस बढ़ाने की बात कही। प्रोड्यूसर ने पूछा वो क्या उम्मीद करती हैं। जवाब मिला- ‘हर गाने के लिए 700 रुपए।’ प्रोड्यूसर ने हामी भरते हुए हंसकर कहा- 'अगर आप हर गाने के 2 हजार भी मांगतीं तो हम वो भी देते।' फीस बढ़ने पर जहां एक तरफ खुशी थी, दूसरी तरफ नाराजगी थी कि उन्होंने ज्यादा क्यों नहीं मांगे, लेकिन समय के साथ आगे खानदान (1942), तकदीर (1943), पूंजी, जमींदार जैसी फिल्में करते हुए उनकी फीस लगातार बढ़ती चली गई। उस दौर में जब हीरोइन खुद अपने गाने गाती थीं, तब शमशाद बेगम ने दूसरी एक्ट्रेसेस के लिए गाने रिकॉर्ड किए और इस तरह वो भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं। लोगों की डिमांड में शमशाद की कॉपी करती थीं लता मंगेशकर शमशाद बेगम के बाद और भी कई सिंगर्स हिंदी सिनेमा से जुड़ने लगीं। 40 के दशक में सुरैया, मुबारक बेगम पहचान बना चुकी थीं और आशा भोसले, लता मंगेशकर नई-नई आई थीं। लता मंगेशकर, शमशाद के कई गानों में कोरस सिंगर रही थीं। लता मंगेशकर पतली और सुरीली आवाज में गाती थीं, जबकि शमशाद की आवाज में खनक थी और भारीपन। तब लता से अक्सर कहा जाता था कि शमशाद की ही तरह गाओ। जब लता मंगेशकर को 1949 की फिल्म महल का गाना आएगा, आएगा, आनेवाला…, मिला तो उन्होंने इसे शमशाद की कॉपी करते हुए ही गाया था। इसी तरह आशा भोसले ने भी 1948 की फिल्म मुकद्दर का गाना आती है याद हमको भी.., शमशाद की स्टाइल में गाया। पीछे-पीछे कुर्सी उठाए चलते थे किशोर कुमार, भविष्यवाणी हुई थी सच स्क्रीन मैगजीन को दिए एक पुराने इंटरव्यू में शमशआद बेगम ने गायिकी के दिनों को याद कर कहा था, मैं कभी फिल्मी पार्टियों में नहीं जाती थी, लेकिन स्टूडियो में मेरी कई यादें हैं। फिल्मिस्तान स्टू़डियो में रिकॉर्डिंग करती थी, तो दो युवा लड़के कोरस में काम करते थे। दोनों रिकॉर्डिंग के समय मेरी कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे। एक लड़का सलीके वाला था और दूसरा अजीब सा दिखता, मजाक करता और खुद को नाकाम कहता था। बात करने पर खुद का मजाक उड़ाकर कहता था कि मेरे बड़े भाई बड़े अभिनेता हैं। लेकिन आवाज ऐसी थी कि कोरस में भी अलग सुनाई देती थी। मैं हमेशा उससे कहती थी कि देखना एक दिन तुम अपने भाइयों से भी बहुत आगे जाओगे। आगे वो अजीब सा लड़का संगीत जगत के सबसे महान सिंगर्स में शआमिल हुआ, बताइए क्या कोई किशोर कुमार के बिना भारतीय संगीत की कल्पना कर सकता है। समय के साथ किशोर कुमार इतने हिट हुए कि उन्हें शमशाद बेगम के साथ फिल्म अंगारे के गाने गोरी के नैनों में नींद भरी और नया अंदाज का गाना मेरी नींदों में तुम गाने का मौका मिला। कभी नौशाद भी थे ऑफिस बॉय, कई न्यूकमर्स के लिए गाए गाने जिस समय शमशाद बेगम ऑल इंडिया रेडियो में गाती थीं, तब उनके ऑफिस बॉय नौशाद हुआ करते थे। उन्हें शमशाद की देखरेख और खिदमद का काम दिया गया था। जब नौशान ने कंपोजिशन शुरू किया और उन्हें पहली फिल्म मंगू मिली, तो वो इसके लिए सीधे शमशाद के पास ही गए। नौशाद नए थे, लेकिन शमशाद मान गईं और उनके लिए ‘मोहब्बत दिल के बस इतने से अफसाने’ और ‘जरा प्यार कर ले बाबू’ को आवाज दी। 1941 में एसडी बर्मन भी जब सिनेमा से जुड़े तो उन्होंने पहली बड़ी फिल्म बहार (1941) मिलने पर शमशाद से ही मदद मांगी। शमशाद ने फिल्म के लिए ‘सैंया दिल में आना रे’ गाना गाया, जो आज भी सुना जाता है। जब राज कपूर ने कहा- मैं इतनी फीस नहीं दे सकता साल 1948 में आई फिल्म आग में राज कपूर, शमशाद की आवाज चाहते थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनकी फीस दूसरे सिंगर्स से 10 गुना ज्यादा है तो वो कतराने लगे। एक दिन हिम्मत कर राज कपूर, शमशाद के पास पहुंच गए। उन्होंने कहा- मैं चाहता हूं कि आप मेरी फिल्म आग में गाना गाएं, लेकिन मैं आपको इतनी फीस नहीं दे सकता। ये बेबाकी और जुनून शमशाद को भा गया। एक समय में वो राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर की फैन भी हुआ करती थीं। उन्होंने राज कपूर से कहा कि वो कम फीस में ही उनके लिए गाएंगी। पति की मौत से ऐसी बिखरीं कि लगा दिया सिंगिंग पर विराम साल 1955 में शमशाद बेगम के पित गणपत लाल बट्टो का एक रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया। पति की मौत के बाद शमशाद ने गायिकी से दूरी बना ली। कई प्रोड्यूसर्स, कंपोजर ने शमशाद ने विनती की, लेकिन वो नहीं मानीं। शमशाद की गैरमौजूदगी में ही लता मंगेशकर को लगातार मौके मिलने लगे और स्टारडम मिला। साल 1957 में जब महबूब खान ने मदर इंडिया बनाना शुरू की, तो नरगिस की आवाज बनने के लिए शमशाद के अलावा किसी दूसरे सिंगर के बारे में न सोचा। शमशाद गायिकी छोड़ चुकी थीं, लेकिन महबूब खान भी उनसे गंवाने की जिद पर अड़े रहे। डेढ़ साल की मशक्कत के बाद आखिरकार शमशाद राजी हो ही गईं। 1957 में वो सफेद साड़ी पहनकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचीं। पहला गाना गाया, पी के घर आज प्यारी दुल्हनिया चली। गाना सुनते ही स्टूडियो में मौजूद हर कोई रो पड़ा। गाना खत्म करते करते, उन्होंने गायिकी छोड़ने की जिद भी खत्म कर दी। और कहा- रोने के लिए सारा दिन, सारी रात है, मैं एक आर्टिस्ट हूं। फिल्म मदर इंडिया का गाना ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया’, ‘होली आई रे’, ‘पी के घर आज प्यारी दुल्हनिया चली’ हिट रहे। आगे उन्होंने हावड़ा ब्रिज, जाली नोट, लव इन शिमला, और मुगल-ए-आजम जैसी सुपरहिट फिल्मों को आवाज दी। फिल्म मुगल-ए-आजम का गाना तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…, शमशाद बेगम ने लता मंगेशकर के साथ गाया था। शमशाद ने निगार सुल्ताना को आवाज दी, जबकि लता मंगेशकर मधुबाला की आवाज बनीं। 1965 में शमशाद ने हमेशा के लिए फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। हालांकि कुछ कंपोजर्स की जिद पर उन्होंने चंद फिल्मों में आवाज दी। रिटायरमेंट के बाद 1968 की फिल्म किस्मत का गाना कजरा मोहब्बत वाला जबरदस्त हिट रहा था। बेटी को नहीं दी गायिकी की इजाजत गायिकी छोड़ने के बाद शमशाद बेटी ऊषा और दामाद लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश रत्र के साथ मुंबई में रहने लगीं। शमशाद बेगम की इकलौती बेटी ऊषा भी सिंगर बनना चाहती थीं, लेकिन शमशाद ताउम्र इसके खिलाफ रहीं। उनका मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री में बहुत राजनीति बढ़ चुकी है। 6 सालों तक शमशाद को मृत समझते रहे लोग 1998 में खबर आई कि सिंगर शमशाद बेगम गुजर गईं। फिर 2004 में खबर आई कि जिसे 1998 में लोगों ने मरा हुआ मान लिया था, वो शमशाद अभी जिंदा है। पहले जिस शमशाद बेगम का इंतकाल हुआ था, वो सायरा बानो की दादी थीं। आखिरकार 23 अप्रैल 2012 में लेजेंड्री सिंगर शमशाद बेगम का 94 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी मौत की खबर कम लोगों को ही दी गई। वैसे तो शमशाद बेगम मुस्लिम थीं, लेकिन उनकी आखिरी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया जाए।(नोट- ये कहानी शमशाद बेगम के राइटर गजेंद्र खन्ना को दिए गए इंटरव्यू, स्क्रीन को दिए गए इंटरव्यू और रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।)
आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में शोक की लहर है। कई दिग्गजों ने उनसे जुड़ी यादें साझा कीं। उदित नारायण ने उन्हें भारतीय संगीत का एक युग बताया और उनके साथ गाना जीवन की बड़ी उपलब्धि कहा। अनु मलिक ने बताया कि चोटिल होने के बावजूद उन्होंने उनके पहले गाने की रिकॉर्डिंग में सहयोग दिया। हरिहरन और कैलाश खेर ने उनके विनम्र स्वभाव और ऊर्जा को प्रेरणादायक बताया। अनुप जलोटा, ललित पंडित, डब्बू मलिक, उत्तम सिंह और रमेश सिप्पी ने भी अनुभव साझा किए। सभी ने कहा कि उनकी आवाज, सादगी और विरासत हमेशा अमर रहेगी। उनकी सरलता, मेहनत और नए कलाकारों को आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति सामने आई। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उदित नारायण बोले- संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है गायक उदित नारायण ने कहा कि आशा जी के निधन की खबर सुनकर उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उनके अनुसार वह सिर्फ गायिका नहीं, बल्कि संगीत इतिहास का अहम हिस्सा थीं। उदित नारायण ने बताया कि उनका बचपन नेपाल में बीता, जहां वे रेडियो पर आशा जी को सुनते थे। उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन वे मुंबई आकर उनके साथ गाएंगे और माइक साझा करेंगे। उन्होंने फिल्म ‘लगान’ का किस्सा याद करते हुए कहा कि ए.आर. रहमान ने उन्हें “राधा कैसे ना जले” के लिए बुलाया था। पहले उन्होंने अपना हिस्सा रिकॉर्ड किया, फिर आशा जी ने उसे यादगार बना दिया। उदित नारायण ने कहा कि आशा जी की सबसे बड़ी खासियत उनकी वर्सेटिलिटी थी। वे हर तरह का गाना, क्लासिकल, रोमांटिक और पॉप आसानी से गा लेती थीं। उन्होंने कहा कि स्टूडियो में आशा जी खुशमिजाज और मजाकिया थीं, लेकिन माइक के सामने आते ही उनकी आवाज में जबरदस्त ताकत और जादू आ जाता था। उदित नारायण ने कहा कि बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी आवाज में थकान नहीं आई और वे युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी रहीं। अंत में उन्होंने कहा कि आशा जी का जाना संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है, लेकिन उनकी आवाज और विरासत हमेशा दिलों में जिंदा रहेगी। अनु मलिक ने कहा- हाथ में चोट लगी थी, फिर भी मेरे लिए रिकॉर्डिंग पर आईं “मेरी मां चली गई थी 2021 में, और मुझे लगता है फिर से मेरी माँ चली गई… यह बहुत दुखद खबर है,” यह कहते हुए अनु मलिक भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहला गाना रिकॉर्ड किया, तब उनकी उम्र 14 साल थी। उस समय उन्हें गाने के लिए आशा भोसले को स्टूडियो बुलाना था। आशा भोसले उस वक्त व्यस्त थीं और उनके हाथ में चोट थी, प्लास्टर चढ़ा था। इसके बावजूद वे एक बच्चे के पहले गाने के लिए स्टूडियो आईं। अनु मलिक ने कहा कि वह पल कभी नहीं भूल सकते। उस दौर में आर.डी. बर्मन और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे बड़े संगीतकारों के गाने चल रहे थे, फिर भी आशा भोसले ने उन्हें सहयोग दिया और हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने कहा कि अगर आज वह अनु मलिक बन पाए हैं, तो उसमें आशा भोसले का बड़ा योगदान और आशीर्वाद है। हरिहरन बोले- आशा जी ने कभी छोटा महसूस नहीं होने दिया गायक हरिहरन ने कहा कि आशा भोसले ने अपने सुरों और गीतों से कई दशकों तक लोगों को खुशी दी है। उनके अनुसार, इतने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन करना आम इंसान के बस की बात नहीं, बल्कि “आशीर्वाद से भरी हुई प्रतिभा” है। हरिहरन ने कहा कि उन्हें आशा जी के साथ काम करने का सौभाग्य मिला और वह उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं। उनके लिए उनका जाना किसी परिवार के सदस्य जैसा दुख है। उन्होंने कहा कि आशा जी ने हर तरह के संगीत, क्लासिकल, रोमांटिक और अन्य जॉनर्स में अपनी अलग पहचान बनाई। 90 की उम्र के बाद भी उनमें वही ऊर्जा और जोश था, जो युवा कलाकार में होता है। हरिहरन ने बताया कि 1984–85 में उन्होंने आशा जी के लिए एक गजल एल्बम कंपोज किया था। उसमें आठ गजलें थीं, जिनमें छह सोलो उन्होंने गाईं और दो डुएट उन्होंने खुद गाए थे। उन्होंने बताया कि उस समय वे नए कलाकार थे, लेकिन आशा जी ने उन्हें छोटा महसूस नहीं होने दिया। उनका व्यवहार सरल और प्यार से भरा था। उन्होंने हर गाने को ध्यान और मेहनत से सीखा और गाया। हरिहरन ने कहा कि उस अनुभव से उन्हें बड़ा सबक मिला, अगर बड़ा बनना है तो सरल रहना और काम पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यही सीख उन्होंने आज तक संभाल कर रखी है। अंत में उन्होंने आशा जी को सरल, विनम्र और हंसमुख कलाकार बताया, जिनकी मुस्कान हर माहौल को रोशन करती थी। कैलाश खेर बोले- आशा जी हमेशा विनम्र और मिलनसार रहीं “हमारी मुलाकातें कई बार मंच पर हुई हैं- कभी रियलिटी शो में, कभी इवेंट्स में,” यह कहते हुए कैलाश खेर ने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 2007 में, करियर के शुरुआती दौर में पहली एल्बम 2006 में आई थी। उन्हें आशा भोसले के साथ यूएस और कनाडा का करीब एक महीने का टूर मिला। इस दौरान उन्होंने करीब 10 शहरों में परफॉर्म किया। कैलाश खेर ने कहा कि उस टूर में उन्होंने उन्हें करीब से जाना। इतनी बड़ी सीनियर कलाकार होने के बावजूद उनका व्यवहार सरल और अपनापन भरा था। गाड़ी या फ्लाइट—हर जगह वह कॉर्डियल और सहज रहती थीं। उन्होंने कहा, “इससे मुझे उनके स्वभाव का असली पता चला, बहुत मिलनसार और विनम्र। ऐसा नहीं था कि सीनियर होने का घमंड हो। वह सबके साथ बराबरी और प्यार से बात करती थीं।” कैलाश खेर ने कहा कि लंबे टूर से इंसान की असली प्रकृति सामने आती है, कैसा व्यवहार और कितनी विनम्रता है। आशा भोसले में उन्होंने यही खूबी देखी, सीनियर होकर भी सरल, जमीन से जुड़ी और संवेदनशील व्यक्तित्व। अनूप जलोटा बोले- आशा जी अमर हैं और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की प्लेबैक सिंगिंग की दूसरी मजबूत स्तंभ चली गई हैं। दो बड़े स्तंभ थे, लता मंगेशकर और आशा भोसले। नई सिंगर्स इन्हीं को आदर्श मानती हैं। उन्होंने अपनी गायकी से एक यूनिवर्सिटी बनाई, जिससे पीढ़ियां सीखती रहेंगी। भजन सम्राट अनूप जलोटा ने कहा कि आशा जी का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ा नुकसान है। उन्होंने बताया कि आशा भोसले को खाना बनाने का शौक था और उन्होंने कई बार कबाब और बिरयानी बनाकर खिलाई। उन्होंने कहा कि इसी शौक के कारण कई जगहों पर उनके नाम से रेस्टोरेंट शुरू हुए। दुबई समेत कई देशों में उनके रेस्टोरेंट हैं, जहां उनकी पसंद की डिशेज परोसी जाती हैं। अनूप जलोटा के अनुसार, आशा भोसले को भुलाया नहीं जा सकता। वे भारतीय फिल्म संगीत की मजबूत स्तंभ थीं। उन्होंने हर तरह के गाने, भजन, गजल और फिल्मी गाए। हर शैली में उनकी पकड़ शानदार थी। उनकी आवाज में चुलबुलापन और ठहराव दोनों थे। यही उन्हें अलग बनाता है। ललित पंडित बोले- आशा भोसले आखिरी दिग्गज थीं, उनके जैसा न कोई था, न होगा संगीतकार ललित पंडित ने आशा भोसले को याद करते हुए कहा, “दो हफ्ते पहले ही मेरी उनसे बात हुई थी। मैंने फोन कर उनकी तबीयत पूछी तो उन्होंने बहुत प्यार से लंबी बातचीत की। बोलीं- तबीयत ठीक नहीं है, मगर चल रहा है। उस बातचीत में भी वही अपनापन था, जो हमेशा रहा।” वह कहते हैं, “हमारा रिश्ता बहुत पुराना है। मैं बचपन से उनके साथ गा रहा हूं, वो हमें तब से जानती थीं। बाद में खिलाड़ी, प्यार तो होना ही था और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसी फिल्मों में उन्होंने हमारे लिए गाया। हर गाने में उन्होंने अपनी जान डाल दी। ‘ज़रा सा झूम लूं मैं’ में जो एक्सप्रेशन उन्होंने दिए, वो आज भी मिसाल हैं।” ललित पंडित बताते हैं, “वो बड़ी कलाकार थीं, लेकिन कभी महसूस नहीं होने देती थीं। हर गाने से पहले म्यूजिक रूम में आकर रिहर्सल करती थीं और ऐसा माहौल बना देती थीं कि हम सीखते रहते थे। उनका स्वभाव विनम्र और खुशमिजाज था।” वह याद करते हैं, “हमारे करियर में उनका बड़ा हाथ रहा। उन्होंने ही यश चोपड़ा को फोन कर हमें सुनने को कहा था। उस एक कॉल ने हमारी जिंदगी बदल दी।” अंत में वह कहते हैं, “उनकी वर्सेटिलिटी का कोई मुकाबला नहीं है। जैसा काम उन्होंने किया है, वैसा फिर कभी नहीं होगा। ये इंडस्ट्री के लिए बड़ा नुकसान है, लेकिन उनके गाने हमेशा जिंदा रहेंगे। वो सच में आखिरी दिग्गज कलाकार थीं।” उत्तम सिंह ने कहा- रात डेढ़ बजे आशा जी ने खुद खाना बनाकर खिलाया संगीतकार उत्तम सिंह ने बताया कि आशा जी के साथ काम करते हुए कई यादें बनीं, जिनमें फिल्म दिल तो पागल है का दौर भी शामिल है। उस समय उन्होंने उनके काम के प्रति समर्पण और ऊर्जा को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि एक बार रात 1:30 बजे तक काम चल रहा था। जब वे बाहर निकल रहे थे, तभी आशा जी आईं। उन्हें पता चला कि किसी ने खाना नहीं खाया, तो उन्होंने 15 मिनट में चिकन और चावल बनाकर सबको खिलाया। यह उनके अपनापन को दिखाता है। उत्तम सिंह ने बताया कि आशा जी काम को लेकर प्रोफेशनल थीं। एक बार वे रिकॉर्डिंग के लिए आईं, चेहरा उतरा था और आंखें नम थीं, लेकिन गाने के वक्त उन्होंने शानदार कैबरे सॉन्ग गाया और किसी को उनकी हालत का अंदाजा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आशा भोसले जैसी कलाकार बहुत कम पैदा होते हैं। उन्होंने हजारों गाने गाए, जो दिलों में जिंदा रहेंगे। उनके जाने से इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन उनकी आवाज और काम उन्हें अमर बनाए रखेगा। डब्बू मालिक बोले- संगीत का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया गायक-संगीतकार डब्बू मलिक ने कहा कि आशा भोसले के निधन की खबर सुनकर उन्हें लगा जैसे संगीत का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया। उनके मुताबिक उनका जीवन प्रेरणादायक रहा है और उनकी संगीत यात्रा किसी ग्रंथ जैसी है। डब्बू मलिक ने बताया कि उनके परिवार, सरदार मलिक, अनु मलिक और पूरे परिवार से आशा जी का गहरा रिश्ता था। उन्होंने कठिन समय में उनके पिता सरदार मलिक की मदद की और हमेशा परिवार की चिंता करती थीं। उन्होंने कहा कि आशा जी न सिर्फ महान गायिका थीं, बल्कि बड़ी इंसान भी थीं, जो हर किसी की फिक्र करती थीं। उन्होंने बताया कि एक बार स्टूडियो में वे उन्हें गाना सिखा रहे थे, तभी आशा जी ने कहा, “अच्छा, तुम गाकर सुनाओ।” जब उन्होंने कहा कि उन्हें हारमोनियम नहीं आता, तो आशा जी ने उन्हें छोटा महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि आशा जी ने उन्हें समझाया कि हर इंसान का तरीका अलग होता है और हर कलाकार हर चीज में माहिर नहीं होता। उन्होंने उन्हें आत्मविश्वास दिया और कहा कि अपने आप को कभी कम मत समझो। डब्बू मलिक ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए मां जैसी सीख था और उनके जीवन की बड़ी सीखों में से एक है। रमेश सिप्पी बोले- संगीत की वह जादुई आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई निर्देशक रमेश सिप्पी ने लता मंगेशकर और आशा भोसले को भारतीय संगीत के दो मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि तुलना होती रही, लेकिन आशा जी ने अपनी अलग पहचान बनाई। सिप्पी बताते हैं कि आशा भोसले के सामने चुनौती थी कि लता मंगेशकर पहले ही शिखर पर थीं। ऐसे में उन्हें अपनी अलग शैली बनानी पड़ी। उन्हें सही दिशा ओ.पी. नैयर ने दी, जिन्होंने उनकी आवाज़ में चुलबुलापन और आधुनिकता पहचानी। इसके बाद “जाइए आप कहाँ जाइएगा” से उन्होंने साबित किया कि वे किसी से कम नहीं हैं। रमेश सिप्पी ने फिल्म ‘शान’ का किस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ताज होटल में मुहूर्त के दौरान आशा जी ने “प्यार करने वाले प्यार करते हैं शान से” गाया, जबकि परवीन बॉबी स्क्रीन पर थीं। उस सीन ने फिल्म को यादगार बना दिया। वे बताते हैं कि ‘शोले’ और कई फिल्मों में गानों का चुनाव मूड और किरदार के हिसाब से होता था। जहां भावनात्मक गाने होते, वहां लता जी चुनी जाती थीं और जहां ऊर्जा व शरारत होती, वहां आशा जी उपयुक्त थीं। सिप्पी के मुताबिक, आर.डी. बर्मन के साथ आशा भोसले की जोड़ी ने नए प्रयोग किए और “चुरा लिया है” जैसे गाने आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने कहा कि आशा भोसले अनुशासित कलाकार थीं, जो हर गाने को परफेक्ट बनाने के लिए घंटों रिहर्सल करती थीं। अंत में सिप्पी ने कहा कि आज जब आशा भोसले हमारे बीच नहीं हैं, तो लगता है जैसे संगीत की वह जादुई आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई हो।
थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के इंटरनेट पर लीक होने के मामले में तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर फिल्म के क्लिप्स और मूवी को ऑनलाइन लीक करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार इन लोगों ने क्लाउड स्टोरेज और शेयर्ड ड्राइव लिंक के जरिए फिल्म को सोशल मीडिया पर फैलाया था। 300 से ज्यादा पाइरेटेड लिंक हटाए गएसाइबर क्राइम विंग ने फिल्म की पायरेसी को रोकने के लिए स्पेशल टीमें बनाई थीं। इन टीमों ने अब तक इंटरनेट से 300 से ज्यादा अवैध लिंक ट्रैक करके उन्हें हटा दिया है। पुलिस गिरफ्तार किए गए लोगों के फोन और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। अथॉरिटीज अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स और फाइल-शेयरिंग ऐप्स पर नजर रखे हुए हैं ताकि फिल्म को और ज्यादा लीक होने से बचाया जा सके। आरोपियों ने क्लाउड स्टोरेज का किया इस्तेमालइंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट, कॉपीराइट एक्ट और सिनेमैटोग्राफ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने फिल्म को शेयर करने के लिए क्लाउड स्टोरेज डिजिटल तकनीक का सहारा लिया था ताकि वे पकड़ में न आ सकें। फिलहाल सभी 6 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं। प्रोडक्शन हाउस ने दी चेतावनीफिल्म के मेकर्स 'KVN प्रोडक्शंस' ने एक आधिकारिक बयान जारी कर लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अवैध लिंक को शेयर न करें। उन्होंने कहा, हम 'जन नायकन' के एक्सक्लूसिव कॉपीराइट मालिक हैं। हमारे संज्ञान में आया है कि कुछ लोगों ने गैरकानूनी तरीके से फिल्म के सीन और क्लिप्स को कॉपी करके सर्कुलेट किया है, जो डिजिटल पायरेसी का गंभीर मामला है। क्या है फिल्म का बैकग्राउंडएच. विनोद के निर्देशन में बनी फिल्म ‘जन नायकन’ एक बड़े बजट की एक्शन फिल्म है। इसमें थलापति विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज और गौतम वासुदेव मेनन जैसे बड़े स्टार्स नजर आएंगे। थलापति विजय की यह फिल्म उनकी आखिरी फिल्मों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद वे राजनीति में सक्रिय होने वाले हैं।
रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर द रिवेंज’ सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म को रिलीज हुए 26 दिन हो गए हैं और चौथे हफ्ते के बाद भी इसकी कमाई में मजबूती बनी हुई है। सैक्निल्क के मुताबिक, फिल्म अब अल्लू अर्जुन की 'पुष्पा 2: द रूल' के वर्ल्डवाइड कलेक्शन के रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गई है। 25वें दिन तक धुरंधर 2 का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 1,712.98 करोड़ रुपए हो गया है। पुष्पा 2 का लाइफटाइम वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1,742.10 करोड़ रुपए है। फिल्म को यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए अब 30 करोड़ रुपए से भी कम की जरूरत है। भारत में कमाई में अब भी 150 करोड़ पीछेटिकटों की बिक्री के मामले में 'धुरंधर 2' फिलहाल 'पुष्पा 2' से पीछे चल रही है। बुकमायशो के डेटा के मुताबिक, धुरंधर 2 के अब तक 1.71 करोड़ टिकट बिके हैं। वहीं पुष्पा 2 के 1.92 करोड़ टिकट बिके थे। भारत में कमाई की बात करें तो पुष्पा 2 ने 1,234.10 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया था। धुरंधर 2 अब तक 1,083.67 करोड़ रुपए ही कमा पाई है। यानी घरेलू बाजार में फिल्म अभी 150.43 करोड़ रुपए पीछे है। हिंदी बेल्ट में दबदबा, साउथ में सुस्तधुरंधर 2 की सबसे ज्यादा कमाई हिंदी बेल्ट से हो रही है। फिल्म के कुल कलेक्शन का 94% हिस्सा यानी 1,017.79 करोड़ रुपए सिर्फ हिंदी मार्केट से आया है। तुलना करें तो पुष्पा 2 को साउथ के साथ-साथ हिंदी बेल्ट (812.14 करोड़) से भी भारी सपोर्ट मिला था। हालांकि, धुरंधर 2 को तेलुगु मार्केट से सिर्फ 41.85 करोड़ रुपए ही मिले हैं। यही कारण है कि फिल्म इंडिया नेट कलेक्शन में पुष्पा 2 से पीछे है। विदेशों में धुरंधर की जबरदस्त कमाईधुरंधर 2 के वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड के करीब पहुंचने की सबसे बड़ी वजह इसका ओवरसीज कलेक्शन है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस फिल्म ने पुष्पा 2 को काफी पीछे छोड़ दिया है। धुरंधर 2 ने विदेशों में 415.50 करोड़ रुपए बटोरे हैं, जबकि पुष्पा 2 का विदेशी कलेक्शन 259.50 करोड़ रुपए था। विदेशों से हुई 156 करोड़ की ज्यादा कमाई ने भारत में हुए कलेक्शन के अंतर को कम कर दिया है।
गुरुग्राम शहर में रविवार देर शाम बॉलीवुड स्टार राजकुमार राव और उनकी को-स्टार सान्या मल्होत्रा एंबियंस मॉल पहुंचे। उन्होंने फैंस के साथ खूब वक्त बिताया और आगामी फिल्म टोस्टर के बारे में रोचक चर्चा की। राजकुमार राव गुरुग्राम के मूल निवासी हैं और एक पुराने स्कूल के दोस्त ने उनसे पूछा, “भाई, ब्लू बेल्स के दिन याद हैं। राजकुमार राव ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि “हां यार, मुझे सब याद है। इस बातचीत ने पूरे माहौल को और भी गर्म कर दिया। अभिनेता ने फैंस के साथ सेल्फी ली, ऑटोग्राफ दिए और फिल्म की कहानी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि फिल्म 'टोस्टर' एक डार्क कॉमेडी है, जिसमें राजकुमार राव कंजूस (मिजर) रामकांत की भूमिका में हैं। कहानी एक साधारण टोस्टर गिफ्ट से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे हत्या और अराजकता तक पहुंच जाती है। 5 अप्रैल को आएगी टोस्टर कोस्टार सान्या मल्होत्रा उनकी पत्नी की भूमिका में हैं। फिल्म में अर्चना पूरन सिंह, अभिषेक बनर्जी, फराह खान समेत कई दिग्गज कलाकार भी शामिल हैं। यह फिल्म राजकुमार राव और उनकी पत्नी पात्रालेखा के प्रोडक्शन हाउस कंपा फिल्म की पहली प्रोडक्शन है। यह 15 अप्रैल 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है। राजकुमार-सान्या की जोड़ी देखने पहुंचे फैंस एंबियंस मॉल में आयोजित इस इवेंट में काफी भीड़ उमड़ी। फैंस ने दोनों अभिनेताओं का जोश भरा स्वागत किया। राजकुमार राव ने कहा कि गुरुग्राम उनके लिए हमेशा खास रहा है और यहां के लोगों से मिलना उन्हें हमेशा एनर्जी देता है। सान्या कई बार गुरुग्राम आ चुकी सान्या मल्होत्रा ने बताया कि 'टोस्टर' में हंसी के साथ-साथ कई अनोखे ट्विस्ट हैं, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखेंगे। गुरुग्राम में वह पहले भी कई बार आ चुकी है और जब भी वह यहां आती है तो माॅल्स में घूमना मिस नहीं करती। फैंस के साथ इंटरैक्टिव सेशन भी किया एंबियंस मॉल में आयोजित इस इवेंट में माहौल बेहद उत्साही रहा। राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा ने फैंस के साथ इंटरैक्टिव सेशन भी किया, जिसमें दर्शकों ने फिल्म से जुड़े सवाल पूछे। राजकुमार राव ने बताया कि 'टोस्टर' उनकी सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इसमें उन्हें एक बेहद कंजूस व्यक्ति का किरदार निभाना पड़ा है। इवेंट के दौरान फिल्म का एक छोटा-सा मजेदार क्लिप भी दिखाया, जिससे फैंस और ज्यादा उत्साहित हो गए। इस मौके पर मॉल में सिक्योरिटी के कड़े इंतजाम किए गए थे। कई युवा फैंस ने कहा कि राजकुमार राव को अपने शहर में देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।
सिंगर आशा भोसले का आज 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था। वे 92 साल की थीं। आशा को कई मेडिकल समस्याएं होने के चलते शनिवार रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मल्टी-ऑर्गन फेल्योर (शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था) के कारण डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके। आशा भोसले ने 82 साल के सिंगिंग करियर में 9 फिल्फमेयर समेत 100 से अधिक अवॉर्ड जीते। उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित थीं। इसलिए उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। 10 साल की उम्र में गाया पहला गानाआशा भोसले क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था। इस कारण लता की तरह आशा को भी कम उम्र में ही सिंगिंग की शुरुआत करनी पड़ी। आशा ने पहला गाना 10 साल की उम्र में गाया था। आशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके गाने 'इन आंखों की मस्ती', 'दम मारो दम', 'पिया तू अब तो आजा' और 'चुरा लिया है तुमने' आज भी लोकप्रिय हैं। पीएम मोदी समेत कई लोगों ने दुख जताया आशा भोसले के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी, शाहरुख खान, हेमा मालिनी समेत कई लोगों ने दुख जताया। नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक आशा भोसले जी के निधन से मैं बेहद दुखी हूं।उनका असाधारण संगीत सफर, जो दशकों तक चला, हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता रहा और दुनिया भर के अनगिनत दिलों को छू गया। चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएं, उनकी आवाज में एक कालातीत चमक थी।मैं उनके साथ हुई मुलाकातों को हमेशा संजोकर रखूंगा। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के साथ हैं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे। शाहरुख खान ने कहा, आशा ताई के निधन की खबर बेहद दुखद है। उनकी आवाज भारतीय सिनेमा के स्तंभों में से एक रही है और सदियों तक दुनिया भर में गूंजती रहेगी। वह ऐसी प्रतिभा थीं, जो समय से परे है। उन्होंने हमेशा मुझ पर अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखा, मैं उन्हें बहुत मिस करूंगा। रेस्ट इन पीस आशा ताई। लव यू। आशा भोसले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। पूरी खबर यहां पढ़ें… इंदौर में बीता आशा भोसले का बचपन:सराफा की गुलाब जाबुन और रबड़ी से था खास लगाव; सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां थीं पसंद आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार शाम उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए। इनमें से राजस्थानी भी एक है। उन्होंने अपने करियर में 14 राजस्थानी फिल्मों के 45 गाने गाए। 8 से ज्यादा राजस्थानी भजनों को भी अपनी आवाज दी। वहीं, 2019 में वे जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में भी आई थीं। जहां उन्होंने गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपने दिल की बात की थी। आशा भोसले को याद करते हुए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- मेरी राजस्थानी फिल्म के लिए उन्होंने गाना गाया था। गाने से पहले मुंबई में राजस्थानी शब्दों को लेकर उनकी ट्रेनिंग हुई। इसके लिए मैंने उन्हें सिर्फ 7 हजार रुपए दिए थे, लेकिन उन्होंने बिना रोक टोक के वो ले लिए। जानिए कैसे राजस्थानी फिल्मों में शुरू हुआ आशा भोसले का सफर… राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ में आशाजी से पहली बार राजस्थानी भाषा में पांच गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो...’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा….’ गीत गाए। इसके बाद ‘नानीबाई को मायरो’ में भी आशाजी ने अपनी आवाज दी। इसमें “म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो...” और “म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा...” जैसे गीत लोकप्रिय हुए। कभी रीजनल के रूप मे नहीं देखा राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी ने बताया- उस दौर में आशाजी ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के सभी आठ गीत आशाजी से गवाकर इतिहास रच दिया। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत श्रोताओं की जुबां पर कई साल तक रहे। आशा भोसले ने कभी राजस्थानी सिनेमा को रीजनल के रूप में नहीं देखा, वे हमेशा अच्छी कंपोजिशन के साथ जुड़ना चाहती थीं। 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए इसके बाद ‘थारी म्हारी’, ‘घर में राज लुगायां को’, ‘चूनड़ी’, ‘बेटी हुई पराई रे’, ‘बीनणी होवै तो इसी’ और ‘राधू की लिछमी’ (1996) जैसी फिल्मों में भी उनकी आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया। कुल मिलाकर 14 फिल्मों में करीब 45 गीतों को आशाजी ने अपनी आवाज दी। फिल्मों के अलावा आशाजी ने राजस्थानी भजनों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है, जिसमें गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी। गाने के लिए दिए थे सात हजार रुपए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- 1996 में आई मेरी राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी का गाना ‘रात ढलती जाए’ आशा जी ने गाया था। आरडी बर्मन साहब की डेथ हो गई थी, उसी समय में आशाजी से मिलने के लिए डेट ले रहा था। एक महीने बाद उनकी तरफ से समय दिया, जब वहां गया तो मैंने इस गाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पूछा- क्या यह बच्चों का गाना है। मैंने मना कर दिया। हारमोनियम पर गाकर बताया तो वे गाने की कंपोजिशन से बेहद प्रभावित हुईं। इस गाने पर दो घंटे तक हमारी बातचीत चली। मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने एक-एक शब्द की जानकारी ली। घर पर कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग भी हुई। कंपोजिंग पसंद आ जाती तो वह किसी भी इंडस्ट्री को छोटा बड़ा नहीं समझती। रिेकॉडिंग के बाद मुझे कहा- तुम मुम्बई में नए हो, किसी प्रकार की कोई परेशानी हो तो सीधे बताना। अब मैं आपको एक रोचक बात बताता हूं। इस गाने के लिए हमारी 25 हजार पर बात हुई थी, लेकिन मैंने सात हजार रुपए ही दिए। उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के वह ले लिए। गाने की दी सहमति, रिकॉर्ड नहीं करने का मलाल वीणा म्यूजिक के डायरेक्टर केसी मालू ने बताया- मैं गाना उनके साथ करना चाहता था। इसी सिलसिले में आशाजी से मिलने भी गया था। उन्होंने राजस्थानी गाने के लिए हामी भी भरी थी, लेकिन मैं ही गाना तैयार नहीं कर पाया। उन्होंने मुझे बताया कि जयपुर से महिपाल और भरत व्यास उनके मित्र थे। आशाजी ने ही मुझे बताया था कि राजस्थानी में आठ भजन उन्होंने गाए थे। मैं यह सुनकर हैरान था। ये भजन भरत व्यास ने लिखे थे। उन्होंने कहा कि आशाजी के हामी भरने के बाद भी मैं काम नहीं कर पाया। मैं उनके लिए गाना बनवा नहीं पाया। इसका आज तक अफसोस रहेगा। उन्होंने कई राजस्थानी फिल्मों में गाने गाए है। जब भी किसी ने गाने के लिए कहा, किसी को उन्होंने कभी मना नहीं किया। हमारी मैग्जीन स्वर सरिता लगातार पढ़ती थीं, उसी आधार पर मेरी मुलाकात हुई थी। ये भी पढ़ें… दोस्तों ने रुपए दिए, घर से भागकर मुंबई गए असरानी:जयपुर में काम किया, अजमेर में कहा था- सिंधी ने कभी भी भीख नहीं मांगी बॉलीवुड के हास्य अभिनेता असरानी का मुंबई में निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति गहरी लगन की मिसाल रहा है। उनका असली नाम गोवर्धन असरानी था। वे एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार से थे। उनके पिता भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से जयपुर आ बसे और यहां कालीन की दुकान खोली। (पूरी खबर पढ़ें)
भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपनी आवाज से सात दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। लेकिन9 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद अपना करियर शुरू करने वाली आशा ताई को शुरुआती दौर में भारी संघर्ष करना पड़ा। 1947 में एक रिकॉर्डिस्ट ने उन्हें 'खराब गला' कहकर रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने 20 भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए और अपना नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज कराया। आशा जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की 'आदर्श' छवि के बीच खुद को साबित करना था। उन्होंने चतुराई से अपनी आवाज में वेस्टर्न टच और मॉड्यूलेशन को पिरोया, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। जब लोगों को लगा कि वे सिर्फ कैबरे गा सकती हैं, तब उन्होंने 'उमराव जान' की गजलें गाकर अपनी गायिकी को साबित किया। आशा भोसले ने शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप और गजल तक हर शैली में अपनी महारत साबित की। महाराष्ट्र के सांगली में जन्म, पिता शास्त्रीय गायक रहे आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और थिएटर कलाकार पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। घर में संगीत का माहौल शुरू से ही था। उनके भाई-बहन लता मंगेशकर, मीना खडीकर, उषा मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीत की दुनिया से ही जुड़े रहे। जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब 1942 में उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा ने बहुत कम उम्र में गाना और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया था। मराठी फिल्म से बॉलीवुड तक का सफर आशा भोसले ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में एक मराठी फिल्म 'माझा बाळ' के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। हिंदी सिनेमा में उन्हें पहला मौका 1948 में फिल्म 'चुनरिया' के गाने 'सावन आया' से मिला। शुरुआती दौर में आशा को वे गाने मिलते थे जिन्हें प्रमुख गायिकाएं जैसे लता मंगेशकर, शमशाद बेगम या गीता दत्त छोड़ देती थीं। उस समय उन्हें अक्सर फिल्मों में विलेन, डांसर या साइड किरदारों के लिए गाने के लिए बुलाया जाता था। आवाज को खराब बताया, स्टूडियो से रिजेक्शन मिला आज जो आवाज दुनिया भर में पहचानी जाती है, एक समय उसे भी नकारा गया था। 1947 में, जब आशा अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, तब फिल्म ‘जान पहचान' (संगीतकार: खेमचंद प्रकाश) के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए वे किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियो गई थीं। वहां के रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने उनकी आवाज सुनने के बाद कहा था, यह आवाज नहीं चलेगी, इनका गला खराब है, किसी और को बुलाओ। उस समय आशा को यह कहकर स्टूडियो से बाहर कर दिया गया था कि उनकी आवाज अच्छी नहीं है। इस घटना से किशोर कुमार काफी दुखी हुए थे। रात के 2 बज चुके थे और दोनों महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन पर उदास बैठे थे। तब आशा ने ही किशोर दा को ढांढस बंधाते हुए कहा था कि उनकी आवाज को कोई नहीं रोक सकता। इस रिजेक्शन ने आशा को तोड़ा नहीं, बल्कि और बेहतर बनने की प्रेरणा दी। आरडी बर्मन रहे करियर के बड़े टर्निंग पॉइंट्स 50 और 60 के दशक में बॉलीवुड में लता मंगेशकर, शमशाद बेगम और गीता दत्त का दबदबा था। शमशाद बेगम अपनी खनकदार आवाज और गीता दत्त अपने दर्द भरे और वेस्टर्न अंदाज वाले गानों के लिए मशहूर थीं। जब गीता दत्त अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों के चलते रिकॉर्डिंग से दूर होने लगीं, तब ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने आशा भोसले की तरफ रुख किया। 1950 के दशक में नैयर ने आशा की आवाज की खनक को पहचाना। 1954 में फिल्म 'मंगू' से शुरू हुआ उनका साथ 'सीआईडी' (1956) और 'नया दौर' (1957) तक आते-आते ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। नया दौर का गाना 'मांग के साथ तुम्हारा' और 'उड़े जब जब जुल्फें तुम्हारी' ने उन्हें मुख्यधारा की टॉप सिंगर्स में शामिल कर दिया। इसके बाद 1960 और 70 के दशक में संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत की परिभाषा बदल दी। पंचम दा ने आशा से 'दम मारो दम' (हरे रामा हरे कृष्णा) और 'पिया तू अब तो आजा' (कारवां) जैसे वेस्टर्न और जैज स्टाइल के गाने गवाए, जिन्होंने आशा को 'क्वीन ऑफ इंडिपॉप' बना दिया। जब लता के साये से बाहर आईं आशा आशा भोसले के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही बहन लता मंगेशकर के साथ कॉम्पिटिशन करना था। उस दौर में लता जी की आवाज को 'आदर्श' माना जाता था। आशा ने चतुराई से अपनी आवाज के साथ प्रयोग किए। उन्होंने महसूस किया कि अगर वह लता जैसी ही शैली अपनाएंगी, तो वह कभी अपनी पहचान नहीं बना पाएंगी। उन्होंने वेस्टर्न टच, मॉड्यूलेशन को अपनी आवाज में पिरोया, जो उस समय किसी अन्य सिंगर के पास नहीं था। उन्होंने गीता दत्त और शमशाद बेगम जैसे सिंगर्स को उनके ही दौर में कड़ी टक्कर दी और बाद में अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति और सुनिधि चौहान जैसी पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनीं। जब लोगों को लगा कि वे सिर्फ कैबरे गा सकती हैं, तब 1981 में फिल्म 'उमराव जान' आई। संगीतकार खय्याम के निर्देशन में आशा ने 'दिल चीज क्या है' और 'इन आंखों की मस्ती के' जैसी बेहतरीन गजलें गाकर क्लासिकल गायिकी में भी लता मंगेशकर के बराबर अपनी जगह पक्की कर ली। आशा भोसले का पहला बड़ा सम्मान और वर्ल्ड रिकॉर्ड आशा भोसले के करियर के सबसे हिट गाने सिंगिंग के अलावा कुकिंग और सफल रेस्तरां बिजनेस आशा भोसले केवल एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक शानदार कुक भी थीं। वह अक्सर कहती थीं कि अगर वह सिंगर न होतीं, तो एक रसोइया होतीं। उनके हाथ के बने 'कढ़ाई गोश्त' और 'बिरयानी' के मुरीद राज कपूर से लेकर ऋषि कपूर तक रहे। अपने इसी शौक को उन्होंने बिजनेस में बदला। उन्होंने 'Asha's' नाम से रेस्तरां की एक ग्लोबल चैन शुरू की। उनका पहला रेस्तरां दुबई में खुला, जिसके बाद कुवैत, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और अबू धाबी जैसे शहरों में भी इसे विस्तार मिला। वह अपने रेस्तरां के शेफ्स को खुद ट्रेनिंग देती थीं। ब्रिटिश बैंड के साथ गाया आखिरी गाना आशा भोसले की आवाज सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं थी, बल्कि इंटरनेशनल म्यूजिक वर्ल्ड में भी उनका उतना ही सम्मान था। मार्च 2026 में रिलीज हुई मशहूर ब्रिटिश वर्चुअल बैंड ‘गोरिल्लाज’ की नौवीं एल्बम ‘द माउंटेन’ (पर्वत) में उनका गाना शामिल है। द शैडोई लाइट नाम के इस ट्रैक को अब उनके शानदार करियर के आखिरी अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इसमें उन्होंने ब्रिटिश आर्टिस्ट ग्रफ राइस और सरोद उस्ताद अमान-अयान अली बंगश के साथ काम किया था। गोरिल्लाज बैंड बनाने वाले डेमन अलबर्न असल में 70 के दशक के बॉलीवुड संगीत और आरडी बर्मन के बहुत बड़े फैन हैं। उन्होंने कई इंटरव्यू में आशा भोसले की आवाज को 'साइकडेलिक' और 'एक्सपेरिमेंटल' बताया था। यही वजह थी कि उन्होंने अपनी इस नई एल्बम को भारत में रिकॉर्ड किया। इस एल्बम में आशा ताई के अलावा अनुष्का शंकर ने भी साथ काम किया है। वहीं आशा अपने अंतिम वर्षों में म्यूजिक रियलिटी शोज में जज के रूप में और लाइव कॉन्सर्ट्स में सक्रिय रहीं। 2023 में भी उन्होंने अपने 90वें जन्मदिन पर दुबई में परफॉर्म किया था। उनकी आवाज में जो ताजगी 1950 में थी, वही 92 साल की उम्र तक बरकरार रही।
सुरों की मल्लिका आशा भोसले का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। सिंगर को शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। आशा भोसले बीते 70 सालों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा थीं। उन्होंने कई भाषाओं में रिकॉर्ड 12 हजार गाने गाए। उनके बिना हिंदी सिनेमा की कल्पना करना भी मुश्किल है, हालांकि एक समय ऐसा था जब ये कहकर आशा भोसले को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया कि उनकी आवाज खराब है। आज दुनियाभर के कई होटलों की मालकिन आशा भोसले का बचपन गरीबी में बीता। तंगहाली का वो आलम था कि वो बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, जिससे पिता को फीस न देना पड़े। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्से- बहन के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं आशा भोसले 8 सितंबर 1933 में आशा भोसले का जन्म ब्रिटिश इंडिया के सांगली में हुआ। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर, रंगमंच कलाकार थे। घर में तंगहाली का वो आलम था कि बड़ी बहन लता मंगेशकर का जब स्कूल में दाखिला करवाया गया, तो वो आशा को चोरी-छिपे स्कूल ले जाने लगीं। मास्टर से छिपकर वो आशा को साथ बैठा लेती थीं। स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि एक रोज मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। अगले दिन लता ने फैसला किया कि वो छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने पिता से बात कर स्कूल से अपना नाम कटवा दिया और अपनी जगह बहन आशा का एडमिशन करवाया। आशा महज 9 साल की थीं, जब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। ऐसे में लता ने ही संघर्ष कर हिंदी सिनेमा में कदम रखा और बहन की परवरिश की। परिवार पहले पुणे और फिर मुंबई आकर बसा। यहां महज 10 साल की उम्र में आशा भोसले ने गाना शुरू कर दिया। उन्हें पहला ब्रेक मराठी फिल्म माझा बल (1943) के गाने चला चला नाव बला से मिला। आशा महज 15 साल की थीं, जब उन्हें हिंदी फिल्म चुनरिया का सावन आया गाने का मौका मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम जैसी सिंगर्स की इंडस्ट्री में पकड़ थी। लता मंगेशकर भी धीरे-धीरे पहचान बना रही थीं, लेकिन आशा इस लिस्ट में कहीं नहीं थीं। उन्हें सिर्फ तब ही मौके मिलते थे, जब फिल्ममेकर्स या तो बड़ी सिंगर्स की फीस चुका नहीं पाते थे या दूसरी सिंगर्स इनकार कर देती थीं। गाना रिकॉर्ड करने पहुंचीं, तो आवाज पर ताना देकर स्टूडियो से निकाला गया आशा भोसले को एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से बाहर निकाल दिया गया था। 1947 की बात है। आशा, किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म ‘जान पहचान' के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। तब स्टूडियो में कोई खास सुविधा नहीं होती थी, माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा और किशोर दा ने जैसे ही गाना शुरू किया, वहां रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने धीरे से म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद्र से बंगाली में कहा- इन दोनों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही, दूसरे सिंगर लाओ। पास खड़े किशोर दा ये बात समझ गए और उन्होंने आशा से कहा कि यहां कुछ गड़बड़ है। उनका गाना भी रोक दिया गया और थोड़ी देर में ही उन्हें वहां से निकल जाने को कहा गया। रात के 2 बज चुके थे। दोनों इस अपमान से टूट गए और वहां से निकलकर महालक्ष्मी स्टेशन के पास बैठे और ये चर्चा करने लगे कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। सालों बाद किशोर कुमार ने लिया था, अपने और आशा के अपमान का बदला 1957 तक आशा भोसले हिंदी सिनेमा में पहचान बना चुकी थीं। उनके गाने उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी काफी हिट रहा था। किशोर कुमार भी अपनी पहचान बना चुके थे। कामयाबी मिलने के बाद एक रोज उन्हें फिर उसी स्टूडियो में रिकॉर्ड करने का मौका मिला। वहां रॉबिन चटर्जी भी मौजूद थे, जिन्होंने सालों पहले उन्हें और आशा को स्टूडियो से निकलवाया था। आशा ताई तो झिझक में कुछ कह नहीं सकीं, लेकिन किशोर कुमार ने मौके का फायदा उठाया और रिकॉर्डिस्ट से कहा- क्यों, आपने तो कहा था कि हम गा नहीं सकते। आप देख लीजिए कि अब हम कहां हैं। 16 की उम्र में की भागकर शादी, बहन से बिगड़े रिश्ते 10 साल की उम्र में गाना शुरू करने वालीं आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में अपने सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। वो जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को कभी नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी की। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती ही रही। षादी से आशा को 3 बच्चे हुए। कुछ साल बाद, शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने आखिरकार दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए। बेटी ने गोली मारकर की आत्महत्या, बेटे की कैंसर से हुई मौत आशा भोसले और गणपत राव के तीन बच्चे थे। उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले ने शुरुआत में पायलट के तौर पर काम किया, लेकिन बाद में संगीत की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने कुछ यादगार गाने भी दिए, हालांकि उनका सिंगिंग करियर ज्यादा लंबा नहीं चला। 2015 में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। आशा की बेटी वर्षा भोसले, एक जानी-मानी कॉलमनिस्ट थीं। उन्होंने पति से तलाक के बाद 55 साल की उम्र में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उनके सबसे छोटे बेटे आनंद भोसले ने बिजनेस और फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की और आज वे अपनी मां के करियर को संभालते थे। आरडी बर्मन की मां ने कहा था, आशा से शादी करनी है, तो लाश से होकर गुजरना होगा गणपत राव से तलाक लेने के बाद आशा भोसले की जिंदगी में आरडी बर्मन हमसफर बनकर आए। दोनों की मुलाकात 1966 में हुई, जब वो तीसरी मंजिल में साथ काम कर रहे थे। दोनों ने ओ हसीना जुल्फों वाली…, और ओ मेरे सोना रे सोना रे को आवाज दी। आरडी बर्मन, पिता एसडी बर्मन की लेगेसी से कुछ अलग करना चाहते थे। जैज, कैबरे का ट्रेंड लाते हुए उन्हें आशा भोसले की आवाज का सहारा मिला। दोनों ने पिया तू अब तो आजा…, दम मारो दम…. जैसे गानों बनाए, जिसे आशा भोसले को कैबरे क्वीन कहा जाने लगा। प्रोफेशनल रिश्ता जल्द ही नजदीकियां बढ़ने की वजह बना। पंचम दा, उम्र में आशा से 6 साल छोटे थे और 1971 में उनका पहली पत्नी रीटा से तलाक हो चुका था। उनकी शादी विवादों में थी। घरेलु झगड़े बढ़ने से वो घर छोड़कर होटल में रहने लगे थे। 9 साल बाद जब उन्होंने आशा से शादी करने का फैसला किया तो परिवार खिलाफ हो गया। मां ने साफ इनकार कर दिया। आरडी बर्मन की मां दोनों के रिश्ते से इतनी खफा दी कि उन्होंने साफ कह दिया कि जब तो वो जिंदा हैं, तब तक दोनों की शादी नहीं हो सकती और अगर वो ये शादी करना चाहते हैं तो आशा को अपनी मां की लाश के ऊपर से घर में लाना होगा। ये सुनकर आरडी बर्मन बिना कुछ कहे ही वहां से चले गए। दोनों शादी करना चाहते थे, हालांकि मां की नाराजगी के चलते ऐसा मुमकिन नहीं था। कुछ सालों के बाद आरडी बर्मन की मां बेहद बीमार रहने लगीं और उन्होंने किसी को भी पहचाना बंद कर दिया, जिसके बाद आरडी बर्मन और आशा ने 1980में शादी कर ली। शादी के महज 14 सालों बाद ही 1994 में आरडी बर्मन का निधन हो गया, और आशा फिर एक बार अकेली हो गईं। आरडी के निधन से पहले उनकी फाइनेंशिल कंडीशन ठीक नहीं थी जिसके चलते आशा और वो अलग रहा करते थे।
सनी की ‘बॉर्डर 3’ पर काम शुरू:जेपी फिल्म्स के बैनर तले अब फैंटेसी एडवेंचर वॉर फिल्म भी बनेगी
सनी देओल और वरुण धवन स्टारर ‘बॉर्डर 2’ की सफलता के बाद अब जेपी फिल्म्स ने आने वाले वर्षों के लिए बड़ा रोडमैप तैयार कर लिया है। 362 करोड़ के घरेलू कलेक्शन के साथ फिल्म ने यह साबित कर दिया कि देशभक्ति और रियल-लाइफ हीरोइज्म का क्रेज आज भी दर्शकों के बीच बरकरार है। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए निर्माता निधि दत्ता ने एक मेगा प्लान तैयार किया है, जिसके केंद्र में सनी को रखा गया है। ‘बॉर्डर 3’ पर काम शुरू हो चुका है। सनी ही मुख्य चेहरा बने रहेंगे। ‘बॉर्डर 3’ से सनी की देशभक्ति की इमेज फिर मजबूत होगी सनी की ‘बॉर्डर 3’ को 2027 का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह सनी की देशभक्ति वाली इमेज को एक बार फिर बड़े स्तर पर स्थापित करेगा। वहीं नितेश तिवारी की ‘रामायणम्’ में सनी का ‘हनुमान’ के रूप में नजर आना उनके करियर का एक नया और दिलचस्प अध्याय होगा। वह फिल्म के दोनों पार्ट्स में नजर आएंगे। वायुसेना पर एक नई फिल्म भी शुरू करेगा जेपी फिल्म्स जेपी फिल्म्स अब अपने पारंपरिक वॉर जोन से बाहर निकलते हुए एक बड़े बजट की फैंटेसी एडवेंचर फ्रेंचाइज पर भी काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट स्टूडियो के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसकी कहानी और राइटिंग प्रोसेस में खुद निधि शामिल हैं और यह देश की कई लोकेशंस में शूट होगी। चर्चा है कि इस प्रोजेक्ट में भी सनी का कैमियो हो सकता है। जेपी फिल्म्स भारतीय वायुसेना पर भी एक नई फिल्म भी शुरू करने जा रहा है। करियर को काफी रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं सनी ‘गदर 2’ की जबरदस्त सफलता के बाद सनी ने अपने करियर की दिशा को काफी रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ाया है। अब उनका फोकस ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर है, जो उन्हें सिर्फ स्टार ही नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस का मजबूत पिलर भी बनाए रखें। 2027 तक सनी के पास कई फिल्में हैं जो 1000 करोड़ क्लब तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। इस लाइनअप में ‘सफर’ नाम की एक इमोशनल ड्रामा है, जिसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है। निधि दत्ता पर भी है विरासत को आगे ले जाने की चुनौती निधि ने ‘पलटन' और ‘घुड़चढ़ी' जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बनाई है। अब उनके कंधों पर ‘बॉर्डर' जैसी विरासत को आगे ले जाने का मौका है। ‘बॉर्डर 2' ने यह साबित किया कि बड़े परदे पर सनी का गुस्सा आज भी दर्शक जुटा सकता है। बता दें कि एक तरफ सनी जहां ‘बॉर्डर 3' और एयर फोर्स ड्रामा में देशभक्ति का जज्बा जगाएंगे, वहीं ‘फैंटेसी एडवेंचर' के जरिए अलग अवतार में दिखेंगे। जेपी फिल्म्स की ओर से अगले कुछ महीनों में ‘बॉर्डर 3' की आधिकारिक कास्टिंग अनाउंस होगी।
IPL टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की फैन और दक्षिण कोरियाई कंटेंट क्रिएटर मिशेल का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है। हाल ही में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारत से आए एक पार्सल को अनबॉक्स करती नजर आईं। पार्सल में RCB की लाल जर्सी थी, जिस पर नंबर 18 और विराट कोहली लिखा हुआ था। जर्सी देखते ही मिशेल ने इसे गले से लगाया और पहनकर अपनी खुशी जाहिर की। मिशेल ने अपने वीडियो में कहा कि लोग कहते हैं RCB के पास ग्लोबल फैंस नहीं हैं, लेकिन वे कोरिया से टीम को पूरा सपोर्ट करती हैं। कंटेंट क्रिएटर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, 'मैं एक कोरियन RCB फैन हूं। मुझे जर्सी भले ही देर से मिली हो, लेकिन टीम के लिए मेरा प्यार कभी देर से नहीं आया।' वीडियो पर लोगों के जबरदस्त रिएक्शन सामने आए मिशेल के वीडियो पर कई लोगों ने रिएक्शन दिया। एक यूजर ने लिखा, “RCB का फैन होकर मैं बहुत खुश हूं।” वहीं, दूसरे ने कहा, “RCB सिर्फ एक फ्रेंचाइजी नहीं, हमारी भावनाएं हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “कोई इन्हें RCB मैच का टिकट दिला दो।” मिशेल RCB पर कई वीडियो बना चुकी हैं मिशेल इंस्टाग्राम पर @sausabe के नाम से जानी जाती हैं। उनके इंस्टाग्राम हैंडल पर करीब 32.6K फॉलोअर्स हैं। वो अपने इंस्टाग्राम पर मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, ट्रैवल से जुड़े वीडियो शेयर करती हैं। उन्होंने RCB, विराट कोहली और भारतीय क्रिकेट टीम से रिलेटेड कई कंटेंट भी पोस्ट किए हैं। वे अक्सर RCB की जर्सी पहनकर वीडियो बनाती हैं। मिशेल भारत की यात्रा कर चुकी हैं और उन्होंने यहां की कई ट्रैवल रील्स शेयर की हैं।
सलमान खान की अपकमिंग फिल्म मातृभूमि को लेकर नई खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं ताकि भारत-चीन के बेहतर होते कूटनीतिक संबंधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। गौरतलब है कि फिल्म का नाम पहले बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, जिसे इस साल बदलकर मातृभूमि कर दिया गया। यह फिल्म 2020 में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष पर आधारित थी। हाल ही में दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हुए हैं, इसलिए रक्षा मंत्रालय को फिल्म के कंटेंट को लेकर कुछ आपत्ति थी। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंत्रालय के निर्देश के अनुसार फिल्म में चीन का नाम नहीं लिया जाएगा। करीब 40% फिल्म दोबारा शूट की गई रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “पहले यह फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय के कहने पर सलमान खान और डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने फिल्म को दोबारा शूट किया और कहानी में थोड़ा फिक्शन एंगल जोड़ दिया। लगभग 40% फिल्म दोबारा शूट की गई, जिसमें रोमांटिक सीन और बैकस्टोरी भी जोड़ी गई। मेकर्स ने नई फिल्म मंत्रालय को भेजी ताकि उन्हें NOC मिल सके, लेकिन मंत्रालय को अभी भी कुछ चिंताएं हैं।” सूत्र ने आगे बताया, “सलमान खान से यह भी कहा गया कि फिल्म में चीन का नाम बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह बात पहले ही मेकर्स को बता दी गई थी। इस महीने जो नया वर्जन जमा किया गया है, उसमें चीन का कहीं जिक्र नहीं है।” फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन शूटिंग और कंटेंट में बदलाव के कारण इसे टाल दिया गया। वहीं दूसरी तरफ, सलमान खान जल्द ही दिल राजू के साथ अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी और इसका डायरेक्शन वामशी पेडिपल्ली करेंगे।
बॉलीवुड की दिग्गज सिंगर आशा भोसले को शनिवार शाम मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें ज्यादा थकान और छाती में इन्फेक्शन की शिकायत है। पहले जानकारी आई थी कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। हालांकि, उनकी पोती जनाई भोसले ने इंस्टाग्राम पर बताया- मेरी दादी आशा भोसले, बहुत ज्यादा थकान और छाती के इन्फेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है और उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा। हम आपको जल्द ही अच्छी खबर देंगे। 12,000 से ज्यादा गाने गाए आशा भोसले ने अपने करियर में 12,000 से ज्यादा गाने गा चुकी हैं। उनके दम मारो दम, पिया तू अब तो आजा और चुरा लिया है तुमने जैसे गाने आज भी सदाबहार हैं। आशा भोसले के लिए संगीत का सफर इतना भी आसान नहीं था। आशा भोसले मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर परिवार को सपोर्ट करने के लिए सिंगिंग शुरू कर दी थी। 16 साल की उम्र में जब आशा भोसले ने भागकर परिवार वालों के खिलाफ बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से शादी की थी। लता जी और उनका परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था, जिसके कारण उन्होंने आशा से लंबे समय तक बातचीत बंद कर दी थी। शादी के बाद आशा भोसले को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और वह घरेलू हिंसा का शिकार भी हुईं। इतना ही नहीं, जिंदगी से इतना निराश हो गई थीं कि खुद को खत्म करना चाहती थीं। 1960 में वह पहले पति से अलग हो गईं और अपने तीन बच्चों (हेमंत, वर्षा और आनंद) की जिम्मेदारी अकेले ही उठाई। जब आशा भोसले की पहली शादी टूट गई और वह अपने तीन बच्चों के साथ वापस अपने परिवार के पास आईं, तब धीरे-धीरे दूरियां कम होनी शुरू हुईं। आर डी बर्मन की मां ने कहा था शादी मेरी लाश पर ही होगी आशा भोसले ने दूसरी शादी संगीतकार आर डी बर्मन से 1980 में की। दोनों की पहली मुलाकात 1966 में फिल्म तीसरी मंजिल के गाने के दौरान हुई थी। इसके बाद आशा भोसले ने आर.डी. बर्मन की कई फिल्मों में गीत गाए। लगातार काम करते हुए दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई और ये दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला। आर.डी. बर्मन ने एक दिन मौका पाते ही आशा के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। आशा ने इसके लिए तुरंत हां भी कर दिया था, लेकिन बर्मन की मां ने शादी से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने बर्मन से कहा कि अगर ये शादी होगी तो मेरी लाश पर ही होगी। बर्मन की मां शादी से इसलिए इनकार कर रही थीं, क्योंकि आशा बर्मन से 6 साल बड़ी थीं और वो 3 बच्चों की मां थीं। तब बर्मन ने चुपचाप मां की बात मान ली। हालांकि, जब बर्मन के पिता एस.डी. बर्मन का निधन हुआ, तो मां की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। ऐसे में मां की हालत में सुधार के लिए बर्मन ने आशा भोसले से 1980 में शादी कर ली थी। रिकॉर्डिंग स्टूडियो से बेकार आवाज कहकर निकाल दिया गया था आशा भोसले ने 50 से 90 के दशक के बीच ओपी नैयर, आरडी बर्मन, खय्याम और बप्पी लहरी जैसे कई संगीतकारों के साथ काम किया। कई सदाबहार गाने गाए। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब इसी आवाज को खराब बताकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो से वापस भेज दिया गया था। आरजे अनमोल के साथ बातचीत के दौरान आशा भोसले ने बताया था कि एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से निकाल दिया गया था। उन्होंने बताया था कि 1947 में किशोर कुमार के साथ वो फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म जान पहचान के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। आजकल स्टूडियो एयर-कंडीशन्ड होते हैं और उनमें ढेर सारी मशीनें होती हैं। उन दिनों दो ट्रैक वाली मशीनें हुआ करती थीं। एक ट्रैक संगीतकार और दूसरा ट्रैक गायक के लिए होता था। माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा भोसले और किशोर कुमार ने गाना शुरू किया। आशा भोसले ने बताया कि इसके बाद साउंड रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने बंगाली में कहा कि आप लोगों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही है। किशोर दा समझ गए क्योंकि वह बंगाली जानते थे। उन्होंने मुझसे कहा कि कुछ गड़बड़ है। मैं कुछ नहीं बोली। रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश से कहा कि आप दूसरे सिंगर लाओ। इनकी आवाज गाने के लायक ही नहीं है। आशा के बने कढ़ाई गोश्त और बिरयानी के मुरीद कई सेलेब्स आशा भोसले की आवाज जितनी मदहोश करने वाली है, उतना ही उनके हाथ का बना खाना है। आशा भोसले खाना पकाने की बहुत शौकीन हैं, उनके हाथों के बने कढ़ाई गोश्त और बिरयानी के मुरीद कई सेलेब्स हैं। दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर को आशा भोसले के हाथों का बना खाना बेहद पसंद था। एक इंटरव्यू के दौरान आशा भोसले ने कहा था कि ऋषि कपूर को उनके हाथ का शामी कबाब, कड़ाई गोश्त और काली दाल बहुत पसंद थी। इंटरव्यू के दौरान आशा भोसले ने यह भी बताया था कि अगर सिंगर नहीं होती तो पक्का कुक होतीं। गायिकी के साथ-साथ आशा भोसले ने अपने कुकिंग के शौक को भी जिंदा रखा। खाना पकाने के प्यार ने आशा भोसले को एक सफल रेस्तरां व्यवसायी के रूप में भी पहचान दिलाई है। सबसे पहले उन्होंने दुबई में आशाज नाम से रेस्टोरेंट खोला। इसे खुले दो दशक बीत चुके हैं। आशा भोसले के रेस्टोरेंट में उत्तर पश्चिमी भारतीय व्यंजन परोसा जाता है। आशा भोसले का रेस्टोरेंट दुबई के अलावा कुवैत, अबुधाबी, दोहा और बहरीन जैसे कई देशों में है। इन रेस्टोरेंट का संचालन वाफी ग्रुप द्वारा किया जाता है जिसमें आशा भोसले की 20 प्रतिशत भागीदारी है।
दिग्गज गायिका आशा भोसले को हार्ट अटैक:ब्रिच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया
बॉलीवुड की दिग्गज सिंगर आशा भोसले को शनिवार को हार्ट अटैक आया। उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के ICU में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है, लेकिन उनकी हालत को लेकर अस्पताल या परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह खबर अपडेट हो रही है..
हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर स्टेज पर गाली दी। शनिवार को वह उत्तराखंड के देहरादून में DAV कॉलेज में शो करने पहुंचे थे। इस दौरान, मासूम ने मंच से कहा कि कोई गुंडा मुझे मारने के लिए आया था। मैंने उसे कहा कि मैं देहरादून में प्रोग्राम कर रहा हूं, अगर तेरे में दम है तो यहां आ। हरियाणा छोड़कर यहां आ, टाइम रख ले। इस दौरान मासूम ने मंच से ही गालियां भी दीं। इस लाइव प्रोग्राम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद थे। उनके जाने के बाद मासूम शर्मा मंच पर भड़क गए, जिसका वीडियो भी सामने आया। विवाद के बाद मासूम ने वीडियो जारी कर घटना के बारे में बताया और माफी भी मांगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह बदमाश कौन है। जानिए वीडियो में मासूम ने क्या कहा… बदमाश चक्कर काट रहा था मासूम शर्मा ने वीडियो जारी कर कहा, “मैं शो करने के लिए देहरादून आया हुआ था और पिछली रात से यहीं एक होटल में रुका हुआ था। यहां एक बदमाश चक्कर काट रहा था। मेरी टीम ने भी मुझे इस बारे में बताया था, लेकिन पहले मुझे लगा कि वह यूं ही घूम रहा है।” चाचा के बेटे को फोन कर उल्टा बोला मासूम ने आगे कहा कि एक घंटे बाद, अमेरिका से मेरे चाचा के बेटे का फोन आया। उस बदमाश ने उसे फोन करके उल्टा-सीधा बोला। इसके बाद, मैं और मेरी टीम रात भर सो नहीं पाए। रात भर हमें इसी बात का स्ट्रेस रहा। फिर मैंने उसे फोन किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। वही गुस्सा मेरा स्टेज पर निकल गया। अगर किसी भी भाई या बहन को मेरे शब्दों से ठेस पहुंची हो, तो मैं माफी मांगता हूं। मासूम के भाई बोले- गैंगस्टर तंग कर रहा मासूम शर्मा के भाई विकास ब्राह्मणवास ने दैनिक भास्कर को बताया कि एक गैंगस्टर मासूम को तंग कर रहा है। वह कुछ बदमाशों के साथ हथियार लेकर देहरादून पहुंचा था। मासूम शर्मा एक फाइव स्टार होटल में रुके हुए थे। बदमाश उस होटल में जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें एंट्री नहीं मिली। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…
तमिल सुपरस्टार थलापति विजय की अपकमिंग फिल्म ‘जन नायकन’ ऑनलाइन लीक होने के बाद इंडस्ट्री में चिंता बढ़ी है। फिल्म की फीमेल लीड एक्ट्रेस पूजा हेगड़े ने इसे दुखद बताया और दर्शकों से इसे थिएटर में देखने की अपील की। पूजा हेगड़े ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि हजारों लोगों की मेहनत, क्रिएटिविटी और त्याग का नतीजा होती है। उन्होंने कहा कि लीक होना तकनीशियन और कलाकार के सम्मान को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने फैंस से अपील की कि वे पाइरेसी को बढ़ावा न दें और फिल्म को बड़े पर्दे पर एंजॉय करें। इससे पहले भी कई सेलेब्स, जिनमें रजनीकांत, चिरंजीवी, सूर्या और सिवकार्तिकेयन शामिल हैं, इस लीक पर नाराजगी जता चुके हैं। फिल्म के मेकर्स ने सख्त बयान जारी कर कहा कि यह गंभीर डिजिटल पाइरेसी का मामला है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। बढ़ते विवाद के बीच मेकर्स ने अभी तक आधिकारिक रिलीज डेट घोषित नहीं की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे बड़े पैमाने पर सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी है और इसे विजय की आखिरी फिल्म बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि फिल्म 22 जून 2026 को विजय के 52वें जन्मदिन पर रिलीज हो सकती है।
फिल्ममेकर राजीव राय ने ‘धुरंधर 2’ के मेकर्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी फिल्म ‘त्रिदेव’ के गाने ‘ओए ओए’ और ‘तिरछी टोपीवाले’ को बिना अनुमति रीक्रिएट कर फिल्म में इस्तेमाल किया गया है। DNA India को दिए इंटरव्यू में राजीव राय ने कहा कि उनकी फिल्म के गानों का इस्तेमाल बिना अनुमति किया गया और इसे क्रिएटिव चोरी माना जाना चाहिए। राजीव राय ने कहा कि उन्होंने ये गाने किसी दूसरी फिल्म में इस तरह इस्तेमाल के लिए नहीं बनाए थे। उनका आरोप है कि डायरेक्टर आदित्य धर और उनकी टीम ने बिना सही लाइसेंस और अधिकार के इन्हें रीमिक्स किया, जिससे मूल रचनाकारों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ। इस मामले में राजीव राय ने ‘धुरंधर 2’ और इसके प्रोडक्शन हाउस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में क्रिएटिव वर्क की चोरी बढ़ रही है और इसे रोकना जरूरी है। उनका कहना है कि रीमेक के नाम पर पुराने गानों की असल पहचान बदली जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, विवाद तब बढ़ा जब सामने आया कि ‘धुरंधर 2’ का गाना ‘रंग दे लाल’ त्रिदेव के ट्रैक ‘ओए ओए’ का रीक्रिएटेड वर्जन है। इस पर ट्रिमूर्ति फिल्म्स ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामला अदालत में पहुंच चुका है। राजीव राय ने कहा कि यह सिर्फ एक गाने का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी क्रिएटिव इंडस्ट्री के सम्मान का सवाल है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति पुराने गानों का इस्तेमाल जारी रहा, तो भविष्य में ओरिजिनल क्रिएटर्स का काम खत्म हो जाएगा। इस बीच, ‘धुरंधर 2’ की टीम की तरफ से अभी तक विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है, लेकिन विवाद से इसकी छवि पर असर पड़ने लगा है।
कॉमेडियन समय रैना ने हाल ही में बताया कि उनके शो ‘स्टिल अलाइव’ में गालियां होने के कारण वह पिता को बुलाने में हिचकिचा रहे थे। गौरतलब है कि समय रैना इन दिनों अपने शो ‘स्टिल अलाइव’ स्पेशल को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनके मम्मी-पापा भी नजर आ रहे हैं। यह वीडियो शो की स्क्रीनिंग के दौरान का है, जहां वह दर्शकों के सामने पिता को भेजा गया मैसेज पढ़ते हैं। बता दें कि समय ने रात के लगभग 4 बजे अपने पिता को मैसेज कर पूछा, पापा, कल आओगे आप शो देखने? थोड़ी गालियां हैं उसमें, इसलिए पूछने में शर्म आ रही थी, पर ज्यादा नहीं हैं। इसके जवाब में उनके पिता ने बहुत ही कूल अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हमने 'धुरंधर', 'द फैमिली मैन' और 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' भी देखी है, इसलिए कोई दिक्कत नहीं है।” समय रैना के पिता का यह जवाब सुनकर दर्शक हंस पड़े। समय का शो पिता को काफी पसंद आया और उन्होंने बेटे पर गर्व जताया। बता दें कि इस शो में समय ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो से जुड़े विवाद, एफआईआर और अन्य घटनाओं पर भी चर्चा की। साल 2025 में शो में रणवीर अल्लाहबादिया के एक जोक के बाद शो विवादो में घिर गया था। विवाद के चलते शो के कई वीडियो हटाने पड़े और माफी भी मांगनी पड़ी थी। हालांकि, समय रैना ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह जल्द ही ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का नया सीजन लेकर आ सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अक्षय कुमार के इवेंट में फैंस की दीवानगी खतरनाक दिखी। शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के गौर सिटी मॉल में फिल्म ‘भूत बंगला’ के प्रमोशन के दौरान हुई घटनाओं ने फैंस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए। अक्षय कुमार अपने को-स्टार्स राजपाल यादव और वामिका गब्बी के साथ प्रमोशन के लिए मॉल पहुंचे थे। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। हालात बिगड़े और भगदड़ जैसी स्थिति बनी। लोग जान जोखिम में डालते नजर आए। वायरल वीडियो में दिखा कि कुछ फैंस बेहतर व्यू के लिए एस्केलेटर की रेलिंग पर चढ़ गए। ग्राउंड फ्लोर पर बैरिकेड्स टूटे और लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़े। यह स्थिति बड़े हादसे में बदल सकती थी। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या ऐसे पब्लिक इवेंट्स के लिए सही सुरक्षा इंतजाम थे? बंद जगह में हजारों की भीड़ जुटना और कंट्रोल का टूटना, मॉल मैनेजमेंट और इवेंट ऑर्गनाइजर्स की तैयारियों पर सवाल उठाता है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स नाराज दिखे। कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि स्टार्स और उनकी टीम को ऐसे इवेंट्स में फैंस की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, इस दौरान अक्षय कुमार स्टेज पर शांत नजर आए और फैंस से बातचीत करते रहे। लेकिन भीड़ का बेकाबू होना बड़ी चेतावनी है। फिल्म ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। लेकिन प्रमोशन के दौरान सामने आई तस्वीरें सवाल छोड़ती हैं कि क्या स्टारडम के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डालना सही है?
हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अदाकाराओं में गिनी जाने वाली मधुबाला की बायोपिक को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। फिल्म में उनकी भूमिका कौन निभाएगा, इसे लेकर नए नाम सामने आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीड रोल के लिए सारा अर्जुन का नाम सबसे आगे है। फिल्म को संजय लीला भंसाली प्रोड्यूस करेंगे, जबकि निर्देशन जसमीत के रीन करेंगी। सारा अर्जुन इन दिनों अपनी फिल्म धुरंधर को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है। इसी के बाद उनके करियर को नया मोड़ मिला और अब उन्हें मधुबाला जैसी आइकॉनिक शख्सियत का किरदार निभाने का मौका मिल सकता है। टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म फिलहाल प्री-प्रोडक्शन स्टेज में है। 2026 के आखिर तक इसकी शूटिंग शुरू हो सकती है। फिल्म 50-60 के दशक के गोल्डन एरा को बड़े स्तर पर दिखाएगी। इसमें मधुबाला की फिल्मों के साथ उनकी निजी जिंदगी, खासकर रिश्ते, संघर्ष और कम उम्र में हुई मौत को विस्तार से दिखाया जाएगा। इस किरदार के लिए सारा अर्जुन को खास तैयारी करनी होगी। वह लुक टेस्ट, डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज पर काम करेंगी, ताकि मधुबाला की ग्रेस और स्क्रीन प्रेजेंस को सही तरीके से पर्दे पर उतार सकें। मधुबाला की बायोपिक के लिए पिछले कुछ समय में कई बड़ी एक्ट्रेसेस के नाम सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कियारा आडवाणी का नाम जोड़ा गया था। हाल ही में अनीत पड्डा को लेकर भी खबरें आई थीं कि वह इस रोल के लिए चुनी जा सकती हैं। अब ताजा रिपोर्ट्स में सारा अर्जुन का नाम सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर सामने आया है। अगर कास्टिंग फाइनल होती है, तो यह उनके करियर का बड़ा ब्रेक साबित हो सकता है। दर्शकों को हिंदी सिनेमा के ग्लैमरस और रहस्यमयी दौर को करीब से देखने का मौका मिलेगा। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 ने शुक्रवार को दुनिया भर में ₹10.03 करोड़ की कमाई की। वहीं, अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर की फिल्म डकैत: एक प्रेम कथा ने शुक्रवार को यानी रिलीज के पहले दिन दुनिया भर में ₹15 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। जिसके बाद यह फिल्म हिंदी और तेलुगु मार्केट में अदिवि शेष की सबसे बड़ी ओपनिंग बन गई। फिल्म ने पहले दिन ₹15 करोड़+ का कलेक्शन करने के बाद डकैत: एक प्रेम कथा को बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत मिली है। बता दें कि फिल्म में अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर के अलावा अनुराग कश्यप, प्रकाश राज, अतुल कुलकर्णी और जैन मैरी खान सहित अन्य कलाकार भी हैं। फिल्म के म्यूजिक और वर्ड ऑफ माउथ को इसके शुरुआती कलेक्शन का अहम कारण माना जा रहा है। अब शनिवार और रविवार को वीकेंड में कलेक्शन और बढ़ सकता है। धुरंधर 2 का कुल कलेक्शन 1671 करोड़ पार दूसरी ओर, धुरंधर 2 ने रिलीज के 23वें दिन (चौथे शुक्रवार) ₹6.70 करोड़ का इंडिया नेट कलेक्शन किया। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म का कुल इंडिया ग्रॉस ₹1,263.26 करोड़ और नेट ₹1,055.12 करोड़ हो चुका है। ओवरसीज में 23वें दिन ₹2.00 करोड़ जोड़ते हुए कुल ₹408.00 करोड़ का कलेक्शन हुआ। इसके साथ फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस ₹1,671.26 करोड़ पहुंच गया है। भाषा के हिसाब से 23वें दिन हिंदी से ₹6.50 करोड़, तमिल ₹0.07 करोड़, तेलुगु ₹0.09 करोड़, कन्नड़ ₹0.03 करोड़ और मलयालम ₹0.01 करोड़ की कमाई हुई। बता दें कि धुरंधर 2 भारतीय सिनेमा के इतिहास में चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। अब यह केवल दंगल (2070 करोड़ रुपए), बाहुबली 2 (1788 करोड़ रुपए) और पुष्पा 2 (1742 करोड़ रुपए) से पीछे है।
एक्ट्रेस डेलनाज ईरानी ने हाल ही में दिए इंटरव्यू में पूर्व पति राजीव पॉल से तलाक (2012) के बाद एलिमनी न लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि शादी 1998 में हुई थी, 2010 में सेपेरेशन हुआ और उन्होंने लीगल बैटल से ज्यादा मेंटल पीस को प्रायोरिटी दी। डेलनाज ईरानी ने हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनके लिए तलाक आसान फैसला नहीं था, क्योंकि वह एक पारसी मिडिल क्लास परिवार से आती हैं, जहां तलाक आम बात नहीं रही। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में लंबे समय तक रिश्ते निभाए गए हैं, इसलिए यह इमोशनली उनके लिए मुश्किल समय था। डेलनाज के अनुसार, मीडिया में 2010 में सेपेरेशन की खबर आई, लेकिन उनके रिश्ते में दरार काफी पहले आ चुकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता से शादी में चल रही समस्याओं को छुपाकर रखा था। उनके पिता को 2010 में हार्ट अटैक आया था और 2011 में उनका निधन हो गया। एलिमनी को लेकर डेलनाज ने कहा, “मुझे कुछ भी नहीं मिला। असल में, जो मेरा था, मैंने उसे जाने दिया। ऐसा नहीं है कि मैंने किसी चीज को अपने पास रखा हो,” एक्ट्रेस ने कहा कि तलाक काफी उलझा हुआ था क्योंकि एक पार्टनर तलाक चाहता था और दूसरा नहीं। उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मैंने इसे ऐसे ही छोड़ दिया। मैंने इसे जाने दिया क्योंकि मैंने हर चीज से ऊपर अपनी शांति को चुना।” बता दें कि डेलनाज और राजीव पॉल की मुलाकात 1993 में टीवी शो परिवर्तन के सेट पर हुई थी, जिसके बाद 1998 में शादी हुई। हालांकि, आपसी मतभेदों के चलते 14 साल बाद उनका रिश्ता खत्म हो गया। तलाक के बाद डेलनाज ईरानी लंबे समय से डीजे पर्सी करकरिया के साथ रिलेशनशिप में हैं। वहीं, राजीव पॉल फिलहाल सिंगल लाइफ जी रहे हैं।
बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह शुक्रवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के मेमोरियल पर गए। उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि दी और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से बातचीत की। पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि एक्टर ने संघ के दूसरे सरसंघचालक एम एस गोलवलकर के मेमोरियल पर नागपुर में उन्हें श्रद्धांजलि दी। रणवीर सिंह दोपहर करीब 4 बजे मुंबई से चार्टर्ड फ्लाइट से नागपुर पहुंचे। इसके बाद वे सीधे रेशिमबाग स्थित हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर गए, जो RSS से जुड़ा प्रमुख स्थान है। यहां उन्होंने कुछ समय बिताया और वरिष्ठ सदस्यों के साथ चर्चा की। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि दौरा छोटा लेकिन महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने RSS पदाधिकारियों के साथ कई विषयों पर बातचीत की, हालांकि इन चर्चाओं का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। अभिनेता की मौजूदगी के कारण इस दौरे पर खास ध्यान गया। एयरपोर्ट अधिकारियों ने भी उनके आगमन और प्रस्थान की पुष्टि की। रणवीर सिंह शाम करीब 8 बजे वापस मुंबई लौट गए। मोहन भागवत से मुलाकात की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रणवीर सिंह ने नागपुर में RSS प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। यह मुलाकात RSS हेडक्वार्टर में हुई, हालांकि संगठन ने कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है। RSS ने रेशिमबाग स्थित स्मृति भवन में उनके दौरे की पुष्टि की है। हालांकि, उनके इस दौरे का उद्देश्य साफ नहीं किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले रणवीर सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के 100 साल पूरे होने के अवसर पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी शुभकामनाएं दी थीं। बता दें कि रणवीर का यह दौरा ऐसे समय में सामने आया है जब उनकी फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है और इसने दुनिया भर में 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली है।
जामनगर में अनंत अंबानी के 31वें जन्मदिन समारोह में शामिल होने के बाद एक्टर सलमान खान ने इंटरनेशनल व्हीलचेयर क्रिकेटर भीमा खूंटी से मुलाकात की और उनकी टी-शर्ट पर ऑटोग्राफ दिया। बता दें कि भीमा खूंटी एक अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेटर हैं और गुजरात व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान हैं। वह पोरबंदर, गुजरात के रहने वाले हैं और एक मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी पहचान रखते हैं। भीमा खूंटी ने अपने इंस्टाग्राम पर जो वीडियो पोस्ट किया है, उसमें देखा जा सकता है कि सलमान जामनगर से निकलते समय कड़ी सुरक्षा के बीच भीमा खूंटी से मिलने के लिए रुके। उन्होंने भीमा खूंटी की टी-शर्ट पर ऑटोग्राफ दिया और कुछ समय बातचीत भी की। सलमान से मिलने के बाद भीमा ने लिखा कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, वे सिर्फ हिम्मत देखते हैं। क्रिकेट के मैदान से लेकर सलमान खान से मुलाकात तक का सफर उनके लिए गर्व का पल रहा। रणवीर सिंह ने भी मुलाकात की वहीं, रणवीर सिंह भी जामनगर एयरपोर्ट पर भीमा खूंटी से मिले। वीडियो में रणवीर उनके सामने घुटनों पर बैठकर बातचीत करते, ऑटोग्राफ देते और हाथ मिलाते नजर आए। रणवीर सिंह से मुलाकात को लेकर भीमा ने इमोशनल पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि जिंदगी में कुछ पल ऐसे होते हैं जो कभी नहीं भूलते और आज का दिन उन्हीं में से एक था। भीमा ने रणवीर सिंह की सादगी, विनम्रता और सम्मान की भावना की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सुपरस्टार होना अलग बात है, लेकिन एक अच्छा इंसान होना ही असली स्टार बनाता है। बता दें कि सलमान खान और रणवीर सिंह जामनगर में आयोजित अनंत अंबानी के जन्मदिन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
हाल ही में रिलीज फिल्म धुरंधर की अभिनेत्री सारा अर्जुन शनिवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। उनके साथ पिता राज अर्जुन और मां सान्या भी मौजूद थीं। सारा ने नंदी हाल से भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। सारा अर्जुन पहली बार महाकाल मंदिर दर्शन के लिए पहुंचीं। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने भस्म आरती में हिस्सा लिया और करीब दो घंटे तक आरती में शामिल रहीं। इस दौरान उन्होंने “जय महाकाल” के जयकारे लगाए और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की। नंदी जी के कान में मांगी मुराद आरती के बाद सारा ने नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद गर्भगृह की देहरी से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उनका स्वागत और सत्कार भी किया गया। ‘यहां आकर बहुत अच्छा लगा’ दर्शन के बाद सारा ने कहा कि महाकाल के दर्शन कर उन्हें बेहद सुकून मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ खास नहीं मांगा, बस सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। साथ ही मंदिर की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। धुरंधर फिल्म से उन्हें खास पहचान मिली है। वे हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। सारा अर्जुन ने बहुत कम उम्र में विज्ञापनों और फिल्मों से करियर शुरू किया था।
फिल्म ‘एवरीबडी लव्स सोहराब हांडा’ पर रजत कपूर, विनय पाठक और रणवीर शौरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। रजत कपूर ने फिल्म में अभिनय के साथ इसे लिखा, डायरेक्ट किया और अपलॉज एंटरटेनमेंट के साथ प्रोड्यूस किया है। उन्होंने बताया कि सोहराब हांडा ऐसा किरदार है जो हर किसी का ध्यान खींचता है। रणवीर शौरी और विनय पाठक ने कहानी और किरदारों की गहराई पर बात की। यह मर्डर मिस्ट्री फिल्म 10 अप्रैल को ZEE5 पर स्ट्रीम हो चुकी है। सवाल: फिल्म का टाइटल ‘एवरीबडी लव्स सोहराब हांडा’ दिलचस्प है। सोहराब में ऐसा क्या है कि हर किरदार उससे जुड़ जाता है? जवाब / रजत कपूर: सोहराब हांडा एक खास इंसान है। कुछ लोग कमरे में आते ही माहौल अपने कब्जे में ले लेते हैं। सोहराब भी वैसा ही है। उसे हर किसी का ध्यान चाहिए और वह ऐसा करने का तरीका ढूंढ लेता है। उसकी पर्सनैलिटी मैग्नेटिक है। सवाल: रणवीर, आप सोहराब हांडा के बारे में क्या कहना चाहेंगे? जवाब / रणवीर शौरी: जैसा रजत सर ने कहा, वह हमेशा ध्यान चाहता है। इंडस्ट्री में ऐसे लोग हैं जिन्हें ज्यादा भाव चाहिए होता है। वह अलग-अलग लोगों से अलग तरीके से जुड़ता है, लेकिन एक बात कॉमन है- उसे अटेंशन चाहिए। सवाल: विनय जी, आप सोहराब हांडा का किरदार निभा रहे हैं। इसके लिए आपको क्या करना पड़ा? जवाब / विनय पाठक: मेरे लिए यह आसान था, क्योंकि स्क्रिप्ट अच्छी तरह लिखी गई थी। रजत बहुत रिसर्च करके लिखते हैं। हर किरदार असल जिंदगी से जुड़ा लगता है। इसलिए निभाना आसान हुआ। सभी किरदारों में गहराई और रोचकता है। सवाल: रजत जी, फिल्म के किरदार असल जिंदगी से प्रभावित हैं। क्या किसी खास व्यक्ति से प्रेरित होकर आपने कहानी लिखी? जवाब / रजत कपूर: किसी एक व्यक्ति को देखकर किरदार नहीं लिखा जाता। हम अनुभवों, दोस्तों और आसपास के लोगों से छोटी-छोटी बातें लेकर किरदार बनाते हैं। फिल्म में सभी किरदार खास हैं, ताकि रिश्ते अच्छे से दिखाए जा सकें। सवाल: क्या लिखते वक्त सारे किरदार आपके दिमाग में साफ होते हैं? जवाब / रजत कपूर: हां, एक आइडिया होता है कि कहानी किस दिशा में जाएगी। बाद में एक्टर्स किरदार को और निखार देते हैं। सवाल: रणवीर, जब आपने कहानी सुनी तो आपका पहला रिएक्शन क्या था? जवाब / रणवीर शौरी: रजत कुछ नया लिखते हैं तो उसे पढ़ने का उत्साह रहता है। उनके साथ काम करके मैंने बहुत कुछ सीखा है। फिल्म ऊपर से साधारण लग सकती है, लेकिन अंदर से अलग और खास है। रजत कपूर:: फिल्म में बेहतरीन कलाकार हैं- हर एक शानदार है। इतने अच्छे एक्टर्स का साथ काम करना खास अनुभव है। सवाल: विनय जी, फिल्म में जिस तरह से पिता-पुत्र का रिश्ता दिखाया गया है। इससे आप कितना जुड़ाव महसूस करते हैं? जवाब / विनय पाठक: किरदार भले काल्पनिक हो, लेकिन उसमें सच्चाई है। कई बार लगेगा कि ये हमारे आसपास के लोग हैं। यही अच्छे किरदार की पहचान है कि वह असली लगे। रजत कपूर: अगर दर्शकों को लगे कि वे इन किरदारों को जानते हैं, तो वही फिल्म की असली सफलता है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई भावनात्मक या मुश्किल पल आया? जवाब / रणवीर शौरी: कई सीन में 15 किरदार एक साथ थे। ऐसे सीन करना मुश्किल और रोमांचक था। रजत कपूर: इतने किरदारों को एक फ्रेम में सही तरीके से दिखाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन यही मजा था। शुरुआत में सब अराजक लगता था, फिर धीरे-धीरे सेट हो जाता था। सवाल: अप्लॉज एंटरटेनमेंट के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब / रजत कपूर: बहुत अच्छा। उन्होंने स्क्रिप्ट पढ़कर तुरंत हां कहा और पूरे समय सपोर्टिव रहे। उन्होंने काम में दखल नहीं दिया, जिससे काम आसान हो गया। सवाल: इस फिल्म को किस जॉनर में रखेंगे? जवाब / रजत कपूर: यह मर्डर मिस्ट्री है, लेकिन सिर्फ “किसने किया” नहीं, बल्कि “क्यों किया” पर ज्यादा फोकस है। सवाल: विनय जी, कंटेंट और दर्शकों की पसंद में आए बदलाव को कैसे देखते हैं? जवाब / विनय पाठक: यह बदलाव अच्छा है। अब कहानी आधारित फिल्में बन रही हैं। ओटीटी के आने से प्लेटफॉर्म बढ़े हैं, जिससे हर तरह की कहानियों को मौका मिल रहा है। सवाल: आज के कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा में इस फिल्म को कहां रखते हैं? जवाब / रजत कपूर: मुझे नहीं लगता कि पूरी तरह कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा चल रहा है। हमने एक फिल्म बनानी चाही और बना दी। आगे क्या होगा, यह समय बताएगा। रणवीर शौरी: ऐसी फिल्मों की एक खास ऑडियंस होती है। वह बड़ी नहीं होती, लेकिन मौजूद जरूर है। विनय पाठक: हम उम्मीद करते हैं कि ऐसी फिल्मों की ऑडियंस धीरे-धीरे बढ़े।

