एक्टर विजय देवरकोंडा और एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना ने अपनी कथित शादी के वीडियो के ओटीटी स्ट्रीमिंग राइट्स के लिए 60 करोड़ रुपए का ऑफर ठुकरा दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, नेटफ्लिक्स ने कथित तौर पर शादी के एक्सक्लूसिव स्ट्रीमिंग राइट्स के लिए 60 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया था, जिसे दोनों ने अस्वीकार कर दिया। वहीं, टॉलीवुड न्यूज पोर्टल टुपाकी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विजय और रश्मिका जल्द शादी कर सकते हैं। इसी के चलते कई ओटीटी प्लेटफॉर्म उनके पास शादी का वीडियो खरीदने के लिए संपर्क कर रहे हैं। एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ने भी उन्हें मोटी रकम की पेशकश की है। लेकिन जानकारी के मुताबिक, विजय और रश्मिका किसी भी कीमत पर अपनी कथित शादी का वीडियो बेचना नहीं चाहते। संभावना है कि वे इसे सीधे यूट्यूब पर ही रिलीज करें। विजय और रश्मिका की शादी की चर्चा गौरतलब है कि विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की शादी को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया में कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि दोनों सितारों ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दरअसल, पिछले साल अक्टूबर महीने में एम9 न्यूज की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों ने परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में सगाई कर ली है। अब खबरें हैं कि दोनों 26 फरवरी 2026 को शादी कर सकते हैं। इससे पहले 2 फरवरी को भी शादी की अफवाहें उड़ी थीं। दावा किया जा रहा है कि शादी राजस्थान के उदयपुर के एक हेरिटेज पैलेस में निजी समारोह में होगी।
मुंबई पुलिस ने बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह और फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के मैनेजरों के बयान दर्ज किए हैं। वहीं, इसके अलावा अलग से क्राइम ब्रांच ने रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग से जुड़े घटनाक्रम को दोबारा रीक्रिएट किया है। इसमें पुणे से मुंबई एक स्कूटर लाना भी शामिल था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह रीक्रिएशन पुलिस हिरासत में मौजूद चार आरोपियों- स्वप्निल सकट, आदित्य गायकी, सिद्धार्थ येनपुरे और समर्थ पोमाजी के साथ किया गया। जांच टीम ने उनके बताए सफर के हर स्टेप को फिर से देखा, ताकि अहम जानकारियां और सबूत जुटाए जा सकें। क्राइम सीन रीक्रिएशनरीक्रिएशन के दौरान पुलिस अधिकारी आरोपियों के साथ पुणे में स्कूटर खरीदने की जगह से लेकर रास्ते के स्टॉप्स और मुंबई के विले पार्ले स्टेशन के बाहर तक गए। पूरे प्रोसेस की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। मामले में पैसों की जानकारीजांच में नए फाइनेंशियल डिटेल्स सामने आए। क्राइम ब्रांच के अनुसार, स्कूटर मुंबई पहुंचाने के बाद मुख्य आरोपी शुभम लोंकर ने आरोपियों को अतिरिक्त 11,000 रुपए दिए। पहले पुलिस ने 40,000 रुपए मिलने की बात कही थी। बाद की जांच में पता चला कि कुल 51,000 रुपए दिए गए। इनमें से 30,000 रुपए स्कूटर खरीदने में खर्च हुए, जबकि 21,000 रुपए आरोपियों ने खर्च किए। सूत्रों के मुताबिक, इस केस के छठे आरोपी प्रवीण लोंकर को अगले दो-तीन दिनों में जेल से हिरासत में लिया जा सकता है। घटना के दो हफ्ते बाद भी शूटर और उसका एक साथी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। बता दें कि 31 जनवरी देर रात रोहित शेट्टी की बिल्डिंग पर पांच राउंड फायरिंग की गई थी। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने मुंबई के जुहू इलाके में स्थित नौ मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर रात करीब 12:45 बजे फायरिंग की। उन्होंने बताया कि कम से कम पांच राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें से एक गोली इमारत में बने जिम के शीशे से टकराई। वहीं, रणवीर सिंह और फिल्ममेकर रोहित शेट्टी को शुक्रवार को एक ऑडियो क्लिप के जरिए धमकी मिली। पुलिस ने बताया कि भेजने वाले ने खुद को लॉरेंस गैंग का सदस्य “हैरी बॉक्सर” बताया। रणवीर सिंह को इस हफ्ते दूसरी बार धमकी मिली। बता दें कि धमकी वाली यह ऑडियो क्लिप कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गई, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने मामले में जांच शुरू की। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि शक है कि देशभर में कई और लोगों को भी ऐसी ही धमकियां दी गई हों। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्लिप में सुनी गई आवाज असली है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स से बनाई गई। क्लिप में बोलने वाले व्यक्ति ने खुद को “हैरी बॉक्सर” बताया और शुक्रवार को पुर्तगाल के “मरीना ग्रांडे” में एक दुकान पर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी भी अपने सहयोगी “सुनील मीणा” के साथ लेने का दावा किया। बता दें कि सबसे पहले रणवीर सिंह के मैनेजर को व्हाट्सऐप पर धमकी मिली थी। वहीं दूसरी धमकी में “हैरी बॉक्सर” ने कहा, “अब तुम्हें दिखाएंगे कि हमारी ताकत के आगे तुम्हारी सात पुश्तें भी कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी। तुम्हारे सभी मैनेजर कहां रहते हैं, कब आते-जाते हैं और परिवार कहां रहता है सब पता है। संभल जाओ, वरना एक-एक मैनेजर को निशाना बनाना शुरू करेंगे।” बता दें कि रणवीर सिंह को मंगलवार को जान से मारने की धमकी मिली थी। यह धमकी वॉट्सएप पर भेजे गए एक वॉइस नोट के जरिए दी गई थी, जिसमें आरोपी ने करोड़ों रुपए की फिरौती की मांग की।
फिल्म धुरंधर के डायलॉग को लेकर एक्टर सनी देओल ने रॉयल्टी मांगने से इनकार कर दिया है। दरअसल, धुरंधर में एक्टर रणवीर सिंह का एक डायलॉग- “घायल हूं, इसलिए घातक हूं”, सनी देओल की पुरानी फिल्मों ‘घायल’ और ‘घातक’ की ओर इशारा करता है। इसी संदर्भ में हाल ही में ANI को दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या इस डायलॉग के लिए वे रॉयल्टी मांगेंगे, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि ऐसा करने का उनका कोई इरादा नहीं है। सनी देओल ने कहा कि फिल्म के निर्देशक आदित्य धर उनके बड़े फैन हैं। उनके मुताबिक, सिर्फ सम्मान के लिए ही यह डायलॉग इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी कहा, “मतलब, उन्होंने टाइटल का इस्तेमाल किया, जो बहुत स्वीट है।” बता दें कि आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह स्पाई थ्रिलर फिल्म 5 दिसंबर 2025 में रिलीज हुई थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹1300 करोड़ से अधिक का ग्लोबल कलेक्शन किया है। वहीं, सनी देओल इन दिनों अपनी नई रिलीज ‘बॉर्डर 2’ की सफलता का जश्न मना रहे हैं। दुनिया भर में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹460 करोड़ के पार पहुंच चुका है। बता दें कि फिल्म बॉर्डर 2, 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म बॉर्डर का सीक्वल है। फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है। इस फिल्म को भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता ने प्रोड्यूस किया है।
साल था 1933 और तारीख थी 14 फरवरी। इसी सुबह दिल्ली की गलियों में एक बच्ची ने जन्म लिया। नाम था मुमताज जहां बेगम देहलवी, जो आगे चलकर भारतीय सिनेमा की सबसे सुंदर और सबसे यादगार एक्ट्रेस में से एक बनीं। हम बात कर रहे हैं एक्ट्रेस मधुबाला की, जिन्होंने मुगल-ए-आजम, हावड़ा ब्रिज, काला पानी, चलती का नाम गाड़ी और बरसात की रात जैसी फिल्मों में काम किया। फिल्म मुगल-ए-आजम में उनका अनारकली का किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे प्रसिद्ध किरदारों में से एक है। मधुबाला, अताउल्लाह खान और आयशा बेगम की 11 संतानों में पांचवीं संतान थीं। उनके चार भाई-बहन बचपन में ही चल बसे थे। उनके पिता अताउल्लाह खान पेशावर घाटी के स्वाबी जिले से थे और यूसुफुजई पश्तून कबीले से संबंध रखते थे। वे दिल्ली में इम्पीरियल टोबैको कंपनी में नौकरी करते थे। परिवार को यह पता नहीं था कि मधुबाला को जन्म से ही वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट नाम की दिल की बीमारी थी, जिसे आमतौर पर दिल में छेद भी कहा जाता है। बता दें कि उस समय इसका कोई इलाज नहीं था। मधुबाला के बचपन की बात करें तो घर में सख्त अनुशासन, परंपराओं का दबाव और पैसों की किल्लत ये सब उनकी दुनिया का हिस्सा थे। स्कूल की चौखट उन्होंने कभी नहीं देखी, लेकिन शब्दों और भावनाओं की भाषा उन्हें अपने पिता से मिली। उर्दू, हिंदी और पश्तो तीनों ज़ुबानों पर उनकी पकड़ थी। मधुबाला आईने के सामने फिल्मी सीन दोहराया करती थीं बचपन में छोटी-सी मधुबाला आईने के सामने खड़ी होकर फिल्मी सीन दोहराया करती थीं। वे नाचतीं और खुद का मनोरंजन करतीं। पारंपरिक माहौल में पली-बढ़ी होने के बावजूद, उनका सपना फिल्म एक्ट्रेस बनने का था, जिसे उनके पिता शुरू में पसंद नहीं करते थे। हालांकि, 1940 में एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण नौकरी से निकाले जाने के बाद पिता का फैसला बदल गया। वहीं, मधुबाला की मां को डर था कि अगर उन्होंने अपनी बेटी को फिल्म इंडस्ट्री में काम करने की अनुमति दी, तो उन्हें बहिष्कार का सामना करना पड़ेगा, लेकिन पिता अड़े रहे। इसके बाद जल्द ही मधुबाला को खुर्शीद अनवर की रचनाएं गाने के लिए ऑल इंडिया रेडियो स्टेशन में मौका मिला। सात साल की मधुबाला ने वहां कई महीनों तक काम किया और इसी दौरान उनकी बॉम्बे टॉकीज के मैनेजर राय बहादुर चुन्नीलाल से पहचान हुई। चुन्नीलाल तुरंत मधुबाला से इंप्रेस हो गए और उन्होंने उनके पिता को बेहतर अवसरों के लिए बॉम्बे जाने की सलाह दी। 1941 की तपती गर्मी थी। धूल से भरी पगडंडियों और उम्मीदों से भरे दिलों के साथ अताउल्लाह खान अपने परिवार और नन्ही-सी मधुबाला को लेकर बंबई पहुंचे। सपनों का शहर, मगर जेब में खनकते सिक्कों से ज्यादा खनकते अरमान थे। बंबई पहुंचे तो यहां मालाड के एक कोने में, एक साधारण-सी गौशाला में उनका बसेरा हुआ। फिर बॉम्बे टॉकीज के मैनेजर चुन्नीलाल ने मधुबाला को फिल्म बसंत में एक छोटे रोल के लिए साइन किया। इसके लिए उन्हें 150 रुपए का मेहनताना मिला। जुलाई 1942 में रिलीज हुई बसंत बड़ी हिट साबित हुई। लोगों ने मधुबाला के काम की तारीफ की, लेकिन स्टूडियो को उस समय चाइल्ड आर्टिस्ट की जरूरत नहीं थी, इसलिए उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया। निराश होकर खान परिवार को वापस दिल्ली लौटना पड़ा। पिता ने छोटी-मोटी नौकरियां कीं और पैसों की किल्लत बनी रहीं। 1944 में किस्मत ने फिर करवट ली। देविका रानी ने फिल्म ज्वार भाटा के लिए बुलावा भेजा। हालांकि मधुबाला को यह रोल नहीं मिला, लेकिन उनके पिता ने तय कर लिया कि अब वे हमेशा के लिए बंबई में ही बसेंगे। परिवार फिर मलाड में बसा। जिसके बाद पिता-बेटी उम्मीद का दामन थामे स्टूडियो के चक्कर लगाते थे। हालात इतने खराब थे थे कि मधुवाला और उनके पिता पैरों में चप्पल तक नहीं होती थी। दोनों स्टूडियो-स्टूडियो भटकते थे और कई बार बेंच पर बैठने तक से रोक दिया जाता था। कुछ दिन बाद मधुबाला को रंजीत मूवीटोन स्टूडियो में तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला, जिसमें उन्हें हर महीने 300 रुपए मिलते थे। इस दौरान उन्होंने कई फिल्मों में छोटे रोल किए, जिनमें मुमताज महल (1944), धन्ना भगत (1945), राजपूतानी (1946), फूलवारी (1946) और पुजारी (1946) शामिल थीं। इन फिल्मों में एक्ट्रेस के तौर पर उनका नाम बेबी मुमताज था। 1946 में मधुबाला ने चित्तौड़ विजय और मेरे भगवान जैसी फिल्मों में काम किया, जो उनके लीड रोल की ओर पहला कदम था। लीड रोल के तौर पर उनकी पहली फिल्म दौलत थी, लेकिन यह फिल्म रुक गई। इसके बाद किदार शर्मा की फिल्म नील कमल में उन्हें राज कपूर के साथ मुख्य भूमिका मिली। मार्च 1947 में रिलीज हुई फिल्म नील कमल ने मधुबाला को पहचान दिलाई। हालांकि, इसके बाद आई कुछ फिल्में सफल नहीं रहीं। इस दौर में मधुबाला ने ज्यादा काम पाने के लिए अपनी फीस भी कम रखी। परिवार के लालन-पोषण के लिए उन्होंने जल्दी ही 24 फिल्में साइन कर लीं। नील कमल में उनके काम से प्रभावित होकर देविका रानी ने उन्हें नया स्क्रीन नाम अपनाने की सलाह दी जिसके बाद वो मुमताज से मधुबाला बन गईं। स्टारडम की ओर कदम साल 1948 में आई फिल्म लाल दुपट्टा से मधुबाला को पहली बड़ी सफलता मिली। इसके बाद पराई आग, पारस और सिंगार जैसी फिल्मों में भी उनकी एक्टिंग की सराहना हुई। 1949 में आई फिल्म महल ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। फिल्म महल के बाद मधुबाला को बड़े सितारों के साथ कई फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। दुलारी (1949) की सफलता के बाद मधुबाला ने बेकसूर (1950) में काम किया, जो हिट रही। 1950 में ही हंसते आंसू रिलीज हुई जो की पहली भारतीय फिल्म थी जिसे “एडल्ट सर्टिफिकेट” मिला। 1951 में उन्होंने बादल और सैयां में काम किया। दोनों फिल्में सफल रहीं। इसके बाद तराना (1951) और संगदिल (1952) में दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी बहुत लोकप्रिय हुई। प्रोडक्शन हाउस और संघर्ष1953 में मधुबाला ने अपनी कंपनी “मधुबाला प्राइवेट लिमिटेड” शुरू की। 1954 में फिल्म बहुत दिन हुए की शूटिंग के दौरान उनकी सेहत बिगड़ गई। उन्हें आराम लेना पड़ा और कुछ फिल्मों से हटना पड़ा। उसी साल फिल्म अमर में उन्होंने दमदार एक्टिंग की। फिल्म भले हिट न रही, मगर उनके काम की खूब तारीफ हुई। 1955 में उनकी अपनी फिल्म नाता फ्लॉप रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। इसके बाद फिल्म मिस्टर एंड मिसेज 55 (1955) आई। गुरु दत्त की इस फिल्म ने मधुबाला को फिर से सफलता दिलाई। फिल्म हिट रही और उनकी कॉमिक टाइमिंग की खूब तारीफ हुई। फिल्म नया दौर की आउटडोर शूटिंग को लेकर बी. आर. चोपड़ा और मधुबाला के बीच विवाद हुआ। मधुबाला को फिल्म से हटाकर वैजयंतीमाला को लिया गया। मामला कोर्ट तक पहुंचा, जो कई महीनों तक चला। इस तनाव और सेहत की वजह से मधुबाला ने काम कम कर दिया। इसके बाद राज हाथ, शिरीन फरहाद, गेटवे ऑफ इंडिया और एक साल जैसी फिल्मों में उनकी एक्टिंग को सराहा गया। 1958 में काला पानी और हावड़ा ब्रिज हिट रहीं। चलती का नाम गाड़ी (1958) में किशोर कुमार के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही। 1960 में आई फिल्म मुगल-ए-आजम उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म। अनारकली के किरदार में मधुबाला ने इतिहास रच दिया। भारी जंजीरें, कठिन शूटिंग और बिगड़ती सेहत के बावजूद उनका समर्पण अद्भुत था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इसके बाद वे बरसात की रात (1960), झुमरू, बॉय फ्रेंड और हाफ टिकट जैसी फिल्मों में नजर आईं। हाफ टिकट (1962) उनकी अंतिम बड़ी हिट फिल्मों में से एक रही। इसके बाद, दो साल के ब्रेक के बाद, उन्होंने शराबी (1964) पूरी की यह उनके जीवनकाल की आखिरी रिलीज फिल्म बनी। वहीं, उनकी मृत्यु के बाद 1971 में फिल्म ज्वाला रिलीज हुई, जो उनका अंतिम स्क्रीन रोल था। धर्मेंद्र ने डायलॉग भूलने की बात कही थी मधुबाला की खूबसूरती ऐसी थी कि लोग ही नहीं, उनके साथ काम करने वाले कलाकार भी प्रभावित हो जाते थे। मधुबाला की बहन ने इंटरव्यू में बताया था कि धर्मेंद्र जी ने कहा, “मैं आपको देखता हूं तो डायलॉग भूल जाता हूं।” इस पर मधुबाला ने जवाब दिया था, “डरो नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। तुम बहुत खूबसूरत हो। तुम्हें पता है, तुम एक्टर जोसेफ कॉटन जैसे लगते हो। तुम बहुत बड़े एक्टर बनोगे।” शम्मी कपूर ने मधुबाला से कहा था, “मैम, आप इतनी खूबसूरत क्यों हैं? आपकी शक्ल ही याद रह जाती है, बाकी सब कुछ हम भूल जाते हैं।” दिलीप कुमार और मधुबाला की लव स्टोरी दिलीप कुमार और मधुबाला का रिश्ता हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में एक रहा है। दोनों की मोहब्बत फिल्म तराना (1951) के सेट पर परवान चढ़ी, जहां साथ काम करते-करते यह रिश्ता गहरा होता गया। शुरुआत में परिवार को इस रिश्ते से ऐतराज नहीं था, लेकिन समय के साथ हालात बदल गए। दरअसस, फिल्म नया दौर के दौरान डायरेक्टर बी. आर. चोपड़ा पूरी यूनिट के साथ आउटडोर शूट (ग्वालियर/भोपाल के पास) करना चाहते थे। मधुबाला के पिता अताउल्ला खान ने सुरक्षा कारणों और दिलीप कुमार के साथ बढ़ती नजदीकियों का हवाला देते हुए उन्हें शहर से बाहर भेजने से मना कर दिया। दिलीप कुमार ने अदालत में गवाही दी थी शूटिंग पर न जाने के कारण बी.आर. चोपड़ा ने कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन का मुकदमा दायर किया और एडवांस राशि वापस मांगी। इस मामले में अदालत में दिलीप कुमार ने बी.आर. चोपड़ा के पक्ष में गवाही दी। अदालत में उन्होंने खुलकर अपने प्रेम का इजहार करते हुए कहा कि वे मधुबाला से प्यार करते हैं और हमेशा करते रहेंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में पिता का रवैया सही नहीं था। हालांकि, बाद में निर्माताओं और पक्षों के बीच समझौता हो गया। इसके बाद मधुबाला के परिवार की ओर से अपेक्षा थी कि दिलीप कुमार उनके पिता से एक ‘सॉरी’ कह दें, ताकि कड़वाहट समाप्त हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिसके बाद पिता के कारण मधुबाला ने अपना नौ साल का रिश्ता खत्म कर दिया। लेकिन, विडंबना यह रही कि फिल्म मुगल-ए-आजम के लंबे निर्माण के दौरान दोनों को साथ काम करना पड़ा, जबकि निजी तौर पर वे दूर हो चुके थे। इस घटना के बाद वे आपस में बात नहीं करते थे। ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग के दौरान एक सीन में सलीम बने दिलीप कुमार को अनारकली बनी मधुबाला को थप्पड़ मारना था। जहां आमतौर पर ऐसे सीन नकली तरीके से फिल्माए जाते हैं, दिलीप कुमार ने असली थप्पड़ मार दिया। इस घटना का उल्लेख खतीजा अकबर की किताब आई वांट टू लिव: द स्टोरी ऑफ मधुबाला में है। एक्टर अजीत ने बताया था कि थप्पड़ के बाद सेट पर सन्नाटा छा गया। फिल्म के डायरेक्टर के. आसिफ ने इसे दिलीप के प्यार का प्रमाण बताया था। मधुबाला कुछ पल खामोश रहीं, लेकिन भीतर से आहत थीं कि कभी उनसे बेइंतहा मोहब्बत करने वाला व्यक्ति अब एक्टिंग के नाम पर उन्हें थप्पड़ मार रहा था। किशोर कुमार से की थी शादी बता दें कि मधुबाला ने साल 1960 में सिंगर किशोर कुमार से शादी की थी। दोनों फिल्म चलती का नाम गाड़ी के दौरान करीब आए थे। विवाह के समय मधुबाला गंभीर हृदय-रोग से जूझ रही थीं। लंदन में डॉक्टरों ने कहा था कि इस बीमारी का न ऑपरेशन संभव है, न पुख्ता इलाज, और एक्ट्रेस केवल दो साल ही जी पाएंगी। शादी के बाद परिस्थितियां जटिल रहीं। मधुबाला की सेहत लगातार नाजुक होती गई, जबकि किशोर कुमार अपने काम में व्यस्त रहते थे। उनकी बहन ने एक साक्षात्कार में बताया था कि आखिरी समय में मधुबाला की सबसे बड़ी इच्छा अपने पति के साथ समय बिताने की थी। अक्सर कई रिपोर्टों में यह दावा किया जाता है कि मधुबाला से शादी करने के लिए किशोर कुमार ने इस्लाम अपनाकर अपना नाम बदलकर ‘अब्दुल करीम’ रख लिया था। हालांकि, ई टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में मधुबाला की बहन मधुर भूषण (जाहिदा) दी ने इस दावे को गलत बताया था। करीब 1960 से मधुबाला ने अपनी जिंदगी के आखिरी नौ साल बिस्तर पर ही बिताए। बीमारी के दौरान उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी। दवाइयों के भारी असर से मधुबाला का वजन तेजी से घट गया था। वे बहुत दुबली और कमजोर हो गई थीं। कभी अपनी खूबसूरती के लिए पहचानी जाने वाली अदाकारा आईने में खुद को देखकर भावुक हो जाती थीं। जब वे बहुत बीमार थीं, तब भी उनमें जीने की प्रबल इच्छा थी। वे अक्सर कहती थीं, “मुझे मरना नहीं है, मैं ठीक हो जाऊंगी।” डॉक्टरों द्वारा सीमित जीवन-काल बताए जाने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिरी दिनों में उन्हें बार-बार थकान, सांस की तकलीफ और खून की उल्टियों जैसी गंभीर समस्याएं झेलनी पड़ीं। फिर भारतीय सिनेमा की 'वीनस' कही जाने वाली मधुबाला ने 23 फरवरी 1969 को अंतिम सांस ली थी। ..................................... बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... दिलीप कुमार की 103वीं बर्थ एनिवर्सरी:पोस्टर देखकर पिता को पता चला बेटा हीरो बना, आधी उम्र की लड़की से शादी की हुई थी भविष्यवाणी साल था 1922 का और जगह थी पेशावर। 11 दिसंबर की रात किस्सा ख्वानी बाजार की सोना बनाने वालों की गली में भयानक आग लगी थी। ठंडी, बर्फीली रात, तेज हवा और उससे भड़की आग, चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। पूरी खबर यहां पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संगीतकार ए. आर. रहमान और फिल्म पोन्नियिन सेलवन 2(PS-2) के निर्माताओं से कहा कि वे फिल्म के गीत ‘वीरा राजा वीरा’ में डागरवाणी परंपरा के योगदान का उचित उल्लेख करें। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ यह सुनवाई ध्रुपद गायक उस्ताद फैयाज वासिफुद्दीन डागर की याचिका पर कर रही थी। डागर ने सितंबर 2025 में आए दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि शिव स्तुति की रचना के लेखक जूनियर डागर ब्रदर्स थे, इसका प्रथम दृष्टया कोई प्रमाण नहीं है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “पहली प्रस्तुति का मतलब यह नहीं कि वही रचना के लेखक हैं। सवाल यह है कि क्या यह रचना आपकी मौलिक है या डागर परंपरा से ली गई है?” डागर की ओर से कहा गया कि वे राग की मौलिकता नहीं, बल्कि विशेष रचना (कंपोजिशन) पर अधिकार जता रहे हैं, जिसे उनके पिता और चाचा ने तैयार किया था। इस पर पीठ ने कहा कि डागरवाणी परंपरा का शास्त्रीय संगीत में बड़ा योगदान रहा है और उसका सम्मान होना चाहिए। कोर्ट ने रहमान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी से कहा, “यदि घरानों का योगदान न होता तो आधुनिक गायक कैसे आगे बढ़ते? कम से कम परंपरा का उल्लेख तो होना चाहिए।” सिंघवी ने जवाब में कहा कि पहले की प्रस्तुतियों पर कोई आपत्ति नहीं उठी थी, लेकिन इस बार आपत्ति की गई है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की है।
टीवी जगत से जुड़ी एक दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध टीवी निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के पुत्र आनंद सागर का निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस हिंदू श्मशान भूमि में किया गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही मनोरंजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार, करीबी रिश्तेदारों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने गहरा दुख जताया है। मिली जानकारी के अनुसार, आनंद सागर चोपड़ा लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। हालांकि परिवार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अंतिम सांस अपने निवास स्थान पर ली। उनके निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया है। आनंद सागर चोपड़ा ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रामानंद सागर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक और पौराणिक धारावाहिकों की परंपरा को उन्होंने नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया। प्रोडक्शन और क्रिएटिव क्षेत्र में उनकी गहरी समझ के कारण वे इंडस्ट्री में एक सम्मानित नाम थे। रामानंद सागर ने ‘रामायण’ जैसे कालजयी धारावाहिक से भारतीय टेलीविजन इतिहास में अमिट छाप छोड़ी थी। उसी विरासत को संभालते हुए आनंद सागर चोपड़ा ने भी कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया और पारिवारिक बैनर की पहचान को बनाए रखा। वे पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते थे, लेकिन इंडस्ट्री में उनका योगदान अहम माना जाता है।
एल्विश यादव और जिया शंकर अपने नए शो ‘एंगेज्ड: रोका या धोखा’ के साथ दर्शकों के सामने लौट रहे हैं। यह शो प्यार को दूसरा मौका देने की थीम पर आधारित है, जहां रिश्तों की परख सिर्फ आकर्षण से नहीं, बल्कि समझ, भरोसे और प्रतिबद्धता से होगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दोनों कलाकारों ने प्यार की अपनी-अपनी परिभाषा साझा की और बताया कि आज के दौर में रिश्तों की चुनौतियां कैसे बदल गई हैं। शो में ड्रामा, भावनाएं, पारिवारिक सहभागिता और रोका जैसी रस्में भी देखने को मिलेंगी, जो इसे आम डेटिंग रियलिटी शो से अलग बनाती हैं। सवाल: आप दोनों के लिए प्यार क्या है? जवाब/एल्विश यादव: मैं वह घिसा-पिटा जवाब नहीं दूंगा कि प्यार सिर्फ दोस्ती है। प्यार दोस्ती तो है ही, लेकिन उससे कहीं ज्यादा है। यह कई भावनाओं का मिश्रण है। जब आप सामने वाले की जरूरतों को अपनी जरूरतों से ऊपर रखने लगते हैं और यह सोचने लगते हैं कि उसे कैसा लगेगा, वही प्यार है। जिया शंकर: मेरे लिए प्यार की एक ही परिभाषा नहीं है। प्यार किसी इंसान से हो सकता है, अपने काम से हो सकता है, चीज़ों से या जानवरों से भी हो सकता है। हमने अपने शो से भी बहुत प्यार किया है। हर व्यक्ति के लिए प्यार की परिभाषा अलग होती है, और यह उतना ही गहरा होता है जितना आप उसे महसूस करते हैं। सवाल: आपका शो वेलेंटाइन डे पर आ रहा है। यह किस तरह का प्यार है? जवाब/जिया शंकर: यह प्यार को दूसरा मौका देने वाला प्यार है। यही हमने इस सीजन में दिखाया है। एल्विश यादव: इसमें प्यार के साथ-साथ रिश्तों में होने वाली परेशानियां, झगड़े और उन्हें कैसे सुलझाया जाए, यह सब दिखाया गया है। बहुत भावनाएं हैं, बहुत मस्ती है। मेरे लिए प्यार वही है जब आप सामने वाले की खुशी और जरूरतों को अपने से ऊपर रखते हैं। सवाल: क्या इस बार ड्रामा नहीं होगा? जवाब/एल्विश यादव: ड्रामा क्यों नहीं होगा? ड्रामा तो जरूर है। जिया शंकर: हर घर में झगड़े और मनमुटाव होते हैं। हम उसे ड्रामा कह देते हैं, लेकिन वह भी रिश्तों का हिस्सा है। इस शो में भावनाएं और ड्रामा दोनों भरपूर हैं। सवाल: शो के तीन चरणों के बारे में बताइए? जवाब/एल्विश यादव: शुरुआत में हमारे प्रेम-खोजी प्रतिभागी आते हैं। वे एक-दूसरे को समझते हैं और अपनी अनुकूलता की परीक्षा देते हैं। उनके बीच एक प्रेम-परीक्षण होता है, जिससे पता चलता है कि वे साथ चल सकते हैं या नहीं। दूसरे चरण में उन्हें गंभीर होना पड़ता है। अब वे एक व्यक्ति के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लेते हैं। इधर-उधर तलाश का दौर खत्म हो जाता है। जिया शंकर: तीसरे चरण में रात्रि-भोज के समय उनसे पूछा जाता है कि क्या वे इस रिश्ते को सगाई (रोका) तक ले जाना चाहते हैं या नहीं। अंत में परिवार भी शामिल होते हैं और सगाई की प्रक्रिया दिखाई जाती है। यहां कोई विजेता नहीं होता,सच्चा प्यार ही जीतता है। सवाल: वायरल हुई अंगूठी वाली तस्वीर का किसका विचार था? जवाब/जिया शंकर:यह शो के प्रचार का हिस्सा था। शो का नाम ही ‘एंगेज्ड’ है, इसलिए यह योजना सफल रही और लोगों के बीच चर्चा बनी। एल्विश यादव: इसकी बहुत चर्चा हुई। लोगों ने अपने-अपने अंदाजे लगाए। सवाल: क्या आपने वास्तविक जीवन में प्यार को दूसरा मौका दिया है? जवाब/एल्विश यादव: हां, बिल्कुल दिया है। मेरा मानना है कि प्यार पर कभी भरोसा नहीं छोड़ना चाहिए। अगर एक रिश्ता टूट भी जाए, तो जीवन दोबारा खिल सकता है। प्यार ही दुनिया को चलाता है। जिया शंकर: (मजाक में) इन्होंने तो कई मौके दिए हैं। सवाल: होस्ट के रूप में आप क्या अलग दिखाएंगे? जवाब/एल्विश यादव: लोगों ने मेरा मजाकिया और रोस्ट वाला रूप देखा है, लेकिन इस शो में मेरा गंभीर और सकारात्मक रूप भी दिखेगा। हम दोनों प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हैं। जिया शंकर: हमने प्रतिभागियों को गंभीरता से सलाह दी है। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सच्चे रिश्तों की परीक्षा है। सवाल: आदर्श साथी में क्या गुण होने चाहिए? जवाब/जिया शंकर: कोई तय सूची नहीं होती। समझदारी, भरोसा और आपसी तालमेल सबसे जरूरी है। प्यार किसी से भी हो सकता है। एल्विश यादव: लोग अक्सर सोचते हैं कि साथी कैसा दिखना चाहिए, लेकिन जब सच्चा प्यार होता है, तो ये शर्तें मायने नहीं रखतीं। जो आपको मिल जाता है, वही आपका टाइप बन जाता है। सवाल: 90 के दशक और आज के प्यार में क्या अंतर है? जवाब/एल्विश यादव: आजकल सिचुएशनशिप, घोस्टिंग जैसी नई चीजें आ गई हैं। पहले के समय में मासूमियत और संकोच अधिक था। आज लोग अधिक खुलकर अपनी बात कहते हैं। समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है। सवाल: बिग बॉस के बाद आपकी बॉन्डिंग में क्या बदलाव आया? जवाब/जिया शंकर: हम दोनों की अपनी-अपनी यात्रा रही है। एल्विश की प्रगति लोगों ने साफ देखी है। एल्विश यादव: मुझे खुशी हुई कि हम दोनों इस शो को साथ में होस्ट कर रहे हैं। 14 फरवरी यानी कि कल से इसके एपिसोड दर्शकों को देखने को मिलेंगे।
बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती 24 घंटे वह काफी शांत रहे, लेकिन अब जेल में साथी कैदियों के साथ घुलमिल गए हैं और उन्हें हंसी-ठहाकों से गुदगुदा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कैदियों की मांग पर वह अपनी फिल्मों के कॉमेडी डायलॉग भी सुनाते हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव जेल नंबर-2 में हैं। उनका रूटीन अन्य कैदियों की तरह ही है। सुबह बैरक से बाहर निकलना, फ्रेश होने के बाद नाश्ता करना और शाम 7 बजे डिनर। वह रात करीब 10 बजे सो जाते हैं और सुबह 5-6 बजे उठते हैं। उन्हें किसी प्रकार की वीआईपी सुविधा नहीं दी जा रही है। जेल नियमों के अनुसार, जो मेन्यू सभी कैदियों के लिए तय होता है, वही उन्हें भी मिलता है, जिसमें दाल, सब्जी, रोटी और चावल शामिल हैं। बताया जाता है कि जब कोई कैदी उनसे जेल आने का कारण पूछता है, तो वह खुलकर जवाब देते हैं। उन्होंने अपनी बैरक के कैदियों से यह भी कहा कि अच्छे समय में सब साथ होते हैं, लेकिन बुरा वक्त आने पर बहुत कम लोग साथ देते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कोई बेईमानी नहीं की, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें यहां आना पड़ा। राजपाल यादव की जमानत याचिका खारिज राजपाल यादव ने चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद जेल में सरेंडर किया था। गुरुवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से मना कर दिया और कहा, आप जेल इसलिए गए क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर बनी फिल्मों की कमी नहीं है, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो शोर नहीं मचाती, बल्कि धीरे धीरे अपनी पकड़ बनाती हैं। ओ रोमियो भी वैसी ही फिल्म है। यह एक ऐसी कहानी है जो पहले आपको किरदारों के करीब लाती है और फिर दूसरे हिस्से में उनके बीच छिपे राज खोलती है। विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को एक गंभीर, भावनात्मक और रहस्यमय सफर पर ले जाती है। आज ‘ओ रोमियो’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 59 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की कहानी 1995 के मुंबई में सेट है, जहां अपराध और सत्ता का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। शाहिद कपूर उस्तरा नाम के एक खतरनाक सुपारी किलर बने हैं, जो समुद्र किनारे एक पुराने जहाज में रहता है। वह अपराधियों को मारता है, लेकिन उसके अपने नियम हैं। इंस्पेक्टर खान (नाना पाटेकर) के साथ उसका रिश्ता भी सीधा नहीं है, बल्कि जरूरत और मजबूरी से जुड़ा हुआ है। उस्तरा की दुनिया में अफशां (तृप्ति डिमरी) की एंट्री होती है। अफशां सुपारी देने आई है, लेकिन उसकी असली वजह फिल्म के पहले हिस्से में पूरी तरह सामने नहीं आती। यहीं से कहानी में सस्पेंस पैदा होता है। उस्तरा और अफशां के बीच एक अजीब सा रिश्ता बनता है, जिसमें भरोसा भी है और शक भी। फिल्म का दूसरा हिस्सा इसी रिश्ते के असली मायने खोलता है। अफशां का मकसद, उस्तरा की कमजोरी और दोनों का अतीत जब सामने आता है, तब कहानी पूरी तरह रंग पकड़ती है। यही सस्पेंस फिल्म को साधारण गैंगस्टर कहानी बनने से रोकता है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? शाहिद कपूर ने उस्तरा के किरदार को बेहद असरदार तरीके से निभाया है। उनके चेहरे की खामोशी, आंखों का गुस्सा और एक्शन सीन में उनकी आक्रामकता किरदार को मजबूत बनाती है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां शाहिद बिना बोले ही भावनाएं जाहिर कर देते हैं। यह उनके करियर के बेहतरीन अभिनय में से एक माना जा सकता है। तृप्ति डिमरी अफशां के किरदार में चौंकाती हैं। पहले हिस्से में वह शांत और संयमित नजर आती हैं, लेकिन दूसरे हिस्से में जब उनके किरदार की परतें खुलती हैं, तब उनका आत्मविश्वास और आक्रोश साफ दिखाई देता है। शाहिद और तृप्ति के बीच की केमिस्ट्री बनावटी नहीं लगती और कहानी को आगे बढ़ाती है। अविनाश तिवारी जलाल के रूप में खतरनाक प्रभाव छोड़ते हैं। नाना पाटेकर अपने सख्त संवाद और दमदार मौजूदगी से हर दृश्य में जान डाल देते हैं। फरीदा जलाल, तमन्ना भाटिया, विक्रांत मैसी और दिशा पाटनी अपनी सीमित भूमिकाओं में भी असर छोड़ते हैं। फिल्म का निर्देशन और तकनीकी पक्ष कैसा है? विशाल भारद्वाज कहानी को जल्दबाजी में नहीं दौड़ाते। पहला हिस्सा जानबूझकर धीमा रखा गया है ताकि किरदारों की परतें तैयार हो सकें। यही तैयारी दूसरे हिस्से में काम आती है। जब कहानी अपने मोड़ लेती है, तब दर्शक भावनात्मक रूप से पहले से जुड़ा होता है। छायांकन मुंबई के उस दौर को जीवंत करता है। अंधेरे रंग, समुद्र का किनारा और तंग गलियां कहानी के मूड को मजबूत करती हैं। संपादन संतुलित है और पटकथा में भावनाओं, सस्पेंस और हिंसा के बीच तालमेल बना रहता है। संवाद कम हैं, लेकिन असरदार हैं। शाहिद कपूर का सधा हुआ और दमदार अभिनय दिखा है। शाहिद और तृप्ति के किरदारों के बीच छुपा सस्पेंस दूसरे हिस्से की कहानी में खुलता है। संगीत और संवादों के बीच का संतुलन अच्छा है। फिल्म का पहला हिस्सा कुछ दर्शकों को धीमा लग सकता है, कुछ गैंगस्टर किरदार ज्यादा विस्तार मांगते हैं। फिल्म का संगीत कैसा है? फिल्म का संगीत कहानी के साथ बहता है। विशाल भारद्वाज का संगीत और गुलजार के बोल गानों को फिल्म का हिस्सा बनाते हैं, न कि अलग से जोड़ा गया तत्व। रोमांटिक गीतों में सादगी है और नृत्य गीतों में ऊर्जा। पृष्ठभूमि संगीत कई अहम दृश्यों में तनाव और भावनाओं को गहराता है। फाइनल वर्डिक्ट, देखे या नहीं? ओ रोमियो ऐसी फिल्म है जो धैर्य मांगती है और उसका इनाम भी देती है। अगर आप केवल तेज रफ्तार की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो पहला हिस्सा भारी लग सकता है। लेकिन अगर कहानी और किरदारों में रुचि रखते हैं, तो दूसरा हिस्सा आपको बांध लेगा। शाहिद कपूर फिल्म को मजबूती से संभालते हैं और तृप्ति डिमरी उनके साथ बराबरी का असर छोड़ती हैं। विशाल भारद्वाज की कहानी कहने की शैली इस फिल्म को खास बनाती है।
बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह और फिल्ममेकर रोहित शेट्टी को एक बार फिर धमकी मिली है। लॉरेंस गैंग से जुड़े गैंगस्टर हैरी बॉक्सर के नाम से यह धमकी दी गई है। इससे पहले रोहित शेट्टी के घर पर हुई पांच राउंड फायरिंग की घटना के बाद 10 फरवरी को रणवीर सिंह को पहली धमकी मिली थी। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने को लेकर दोनों को दोबारा धमकाया गया है। कथित धमकी संदेश में रणवीर सिंह का नाम लेते हुए कहा गया कि उन्होंने ही रोहित शेट्टी को शिकायत करने की सलाह दी थी। संदेश में उनके मैनेजरों और परिवार की गतिविधियों की जानकारी होने का दावा करते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है, जिसमें कहा गया है कि अब हम तुम्हें दिखाएंगे कि हमारी ताकत के आगे तुम्हारी सात पुश्तें भी कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी। तुम्हारे सभी मैनेजर कहां रहते हैं, कब आते-जाते हैं और परिवार कहां रहता है सब पता है। एक-एक मैनेजर को निशाना बनाना शुरू करेंगे, वरना संभल जाओ। इसके साथ ही पुर्तगाल में भारतीय लोगों के पासपोर्ट जब्त करने के मामले में हुई फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का भी दावा किया गया है। हालांकि, लॉरेंस बिश्नोई गैंग और हैरी बॉक्सर की ओर से कथित तौर पर जारी इस ऑडियो मैसेज को लेकर मुंबई पुलिस सतर्क रुख अपनाए हुए है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह ऑडियो मैसेज सबसे पहले मीडिया के माध्यम से सामने आया है और पुलिस तक भी इसी जरिए पहुंचा। यह ऑडियो वास्तव में किसी गैंग से जुड़े व्यक्ति का है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकेगी। देर रात हुई थी रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंगमुंबई में 31 जनवरी की देर रात फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर पांच राउंड की फायरिंग हुई थी। मामले में पुणे पुलिस ने रविवार को चार लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने मुंबई के जुहू इलाके में स्थित नौ मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर रात करीब 12:45 बजे फायरिंग की। उन्होंने बताया था कि कम से कम पांच राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें से एक गोली इमारत में बने जिम के शीशे से टकराई। वहीं, इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में एक स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया था कि लॉरेंस गैंग ने हमले की जिम्मेदारी ली है। यह स्क्रीनशॉट शुभम लोंकर आरजू बिश्नोई नाम के अकाउंट की फेसबुक पोस्ट का है। इस पोस्ट में लिखा गया है, सभी भाइयों को आज जो ये मुंबई में (शेट्टी टावर) फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग हुई है, उसकी जिम्मेदारी शुभम लोनकर, आरजू बिश्नोई, हरि बॉक्सर, हरमन संधू हम लेते हैं। हमने इसको बहुत बार मैसेज लगाया कि हमारे काम में दखल ना दे, लेकिन इसको समझ में नहीं आया। इसको ये छोटा सा ट्रेलर दिया है। अगर इसने आगे फिर हमारी बात नहीं समझी और हमारी बात नहीं मानी, तो अब घर के बाहर नहीं, अंदर इसके बेडरूम में गोली चलेगी, इसकी छाती पर। इसी पोस्ट में आगे लिखा था, और आगे बॉलीवुड को चेतावनी है कि टाइम रहते सुधर जाओ, नहीं तो बहुत बुरा हाल होगा। तुम्हारा बाबा सिद्दीकी से भी बुरा हाल करेंगे। हमने जिन-जिन लोगों को फोन कर रखा है, या तो टाइम रहते लाइन पर आ जाओ, वरना छिपने के लिए जगह कम पड़ जाएगी। और जितने भी हमारे दुश्मन हैं, तैयार रहो, जल्दी ही मुलाकात होगी तुमसे। नोट- एक ही था, एक ही है और एक ही रहेगा लॉरेंस बिश्नोई गैंग। 10 फरवरी को मिली थी रणवीर सिंह को धमकी रणवीर सिंह को मंगलवार, 10 फरवरी को जान से मारने की धमकी मिली थी। यह धमकी वॉट्सएप पर भेजे गए एक वॉइस नोट के जरिए दी गई थी, इसमें आरोपी ने करोड़ों रुपए की फिरौती की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक, धमकी मिलने के तुरंत बाद मुंबई पुलिस ने रणवीर सिंह के बांद्रा स्थित आवास के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी थी। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखी गई। पूरी खबर पढ़ें..
फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांभरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी। वे आज जेल से बाहर आ सकती हैं। वहीं विक्रम भट्ट को राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट में विक्रम भट्ट की ओर से एडवोकेट मुकुल रोहतगी और परिवादी डॉ. अजय मुर्डिया की ओर से एडवोकेट हर्ष सुराना ने पैरवी की। अब दोनों की नियमित जमानत पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी अर्जी परिवादी डॉ. अजय मुर्डिया के वकील मंजूर हुसैन ने बताया- 31 जनवरी 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने भट्ट दंपती की जमानत याचिका खारिज की थी। इसके बाद दंपती ने सुप्रीम कोर्ट जाकर नियमित जमानत के लिए स्पेशल लीव पिटिशन दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए आज सुनवाई की। इसमें श्वेतांभरी भट्ट को अंतरिम जमानत दी गई है, लेकिन विक्रम भट्ट को राहत नहीं मिली। आज जेल से छूट सकती हैं श्वेतांभरी विक्रम भट्ट के केस जुड़े उदयपुर के वकील कमलेश दवे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से आदेश की कॉपी आने के बाद संबंधित कोर्ट एसीजेएम-4 उदयपुर में जमानत मुचलकों के लिए प्रार्थना-पत्र पेश किया जाएगा। जिसके बाद श्वेतांभरी के देर शाम तक जेल से छूटने की संभावना है। उदयपुर पुलिस मुंबई से पकड़कर लेकर आई थी 7 दिसंबर को उदयपुर डीएसपी छगन राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने मुंबई पहुंचकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को उनके जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से गिरफ्तार किया था। यहां भट्ट के सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को रोका भी था। सुरक्षा गार्डों ने पुलिस से कहा था कि साहब व उनकी पत्नी घर पर नहीं हैं। हालांकि पुलिस को हकीकत पता थी और दोनों गिरफ्तार कर लिए गए थे। व्यापारी की पत्नी की बायोपिक बनाने के नाम पर रुपए लिए राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप है कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था। …ये खबर भी पढ़िए-फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी की जमानत खारिज:हाईकोर्ट ने माना- इस स्तर पर बेल देना उचित नहीं; डॉक्टर से की करोड़ों की धोखाधड़ी करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी सहित 3 लोगों की जमानत याचिका राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने खारिज कर दी है। (पढ़िए पूरी खबर)
राजपाल यादव इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनकी जमानत याचिका कोर्ट से खारिज हो गई। दूसरी ओर वह आर्थिक तंगी का भी सामना कर रहे हैं। बॉलीवुड स्टार्स लगातार उनकी मदद कर रहे हैं। इसी बीच अब संभल से चर्चा में आए ASP अनुज चौधरी ने एक्टर की मदद की, जिसके बाद उनकी सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है। फिरोजाबाद में तैनात ASP अनुज चौधरी ने राजपाल ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह कहते हैं, मैं राजपाल यादव जी की कॉमेडी से व्यक्तिगत प्रभावित हूं। मैंने उनकी कई फिल्में देखी हैं। जिसमें मुझे उनसे अच्छा कलाकार कोई नहीं लगा। इस कठिन समय में मैं अपनी तरफ से उनको सहयोग के रूप में 51,000 रुपए अपनी सैलरी अकाउंट से देना चाहता हूं। राशि तो दोस्तों इतनी बड़ी नहीं है पर मैं अपने अनुसार, जो मुझे लगता है कि मैं दे सकता हूं वो मैं देना चाहता हूं क्योंकि वो भी इंसान हैं। उनका एक जो सेंटेंस है, जिसने मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित किया, उसमें उन्होंने कहा था कि यदि आपके जीवन का 1 भी सेकंड आप वापस ला सकते हो तो वो लाकर दिखाओ। जीवन का एक भी सेकंड अगर आप व्यर्थ करते हो, उसे व्यर्थ मत गंवाओ नहीं तो वो समय वापस नहीं आएगा। तो वो चीज राजपाल यादव जी की मुझे बहुत प्रभावित करती है और उस बारे में मैं बहुत सोचता हूं। क्योंकि वो व्यक्ति आध्यात्मिक हैं। ठीक है, समय बुरा आ सकता है किसी का भी, लेकिन मुझे लगता है कि वो आदमी धार्मिक है और अच्छे हैं, संस्कार अच्छे हैं और कलाकार भी बहुत अच्छे हैं।' एएसपी अनुज चौधरी के इस कदम के बाद हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। सबसे पहले सोनू सूद ने की मदद सोनू सूद ने X और इंस्टाग्राम स्टोरीज पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, राजपाल यादव एक बहुत ही प्रतिभाशाली अभिनेता हैं जिन्होंने हमारी फिल्म इंडस्ट्री को कई यादगार और अविस्मरणीय काम दिए हैं। कभी-कभी जिंदगी अन्यायपूर्ण हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी में टैलेंट की कमी है, बल्कि समय कभी-कभी बहुत कठोर हो सकता है। वह मेरी फिल्म का हिस्सा होंगे और मेरा मानना है कि यह वह समय है जब हम सभी प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और सहयोगी एक साथ खड़े हों। जो छोटा सा साइनिंग अमाउंट दिया जाएगा, जिसे भविष्य के काम के हिसाब से समायोजित किया जा सकता है, वह कोई दान नहीं है, बल्कि यह उनका सम्मान और गरिमा है। सलमान, अजय और मीका सिंह ने भी की मदद द स्क्रीन से बातचीत में राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने कहा था, बुधवार को सलमान खान, अजय देवगन, वरुण धवन और डेविड धवन जैसे कई सेलेब्स ने उनसे संपर्क कर आर्थिक सहायता दी। रतन नैन, वरुण धवन समेत इस बार बहुत लोग आगे आए हैं। राजपाल ने इसके लिए आभार जताया है। जब गोल्डी से पूछा गया कि क्या राजपाल ने तिहाड़ में सरेंडर से पहले मदद मांगी थी, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा। हालांकि, उन्होंने कहा, अच्छी बात यह है कि स्थिति बिगड़ने के बाद इंडस्ट्री मजबूती से उनके साथ खड़ी है। सबने कमिटमेंट किए हैं, लेकिन ऐसे लेन-देन तुरंत नहीं होते। सिंगर मीका सिंह ने भी राजपाल यादव को 11 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, सिर्फ पोस्ट डालने से कुछ नहीं होगा बल्कि आगे आकर एक्टर की मदद करो।
राजपाल यादव इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनकी जमानत याचिका कोर्ट से खारिज हो गई। दूसरी ओर वह आर्थिक तंगी का भी सामना कर रहे हैं। बॉलीवुड स्टार्स लगातार उनकी मदद कर रहे हैं। इसी बीच अब संभल से चर्चा में आए ASP अनुज चौधरी ने एक्टर की मदद की, जिसके बाद उनकी सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है। फिरोजाबाद में तैनात ASP अनुज चौधरी ने राजपाल ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह कहते हैं, मैं राजपाल यादव जी की कॉमेडी से व्यक्तिगत प्रभावित हूं। मैंने उनकी कई फिल्में देखी हैं। जिसमें मुझे उनसे अच्छा कलाकार कोई नहीं लगा। इस कठिन समय में मैं अपनी तरफ से उनको सहयोग के रूप में 51,000 रुपए अपनी सैलरी अकाउंट से देना चाहता हूं। राशि तो दोस्तों इतनी बड़ी नहीं है पर मैं अपने अनुसार, जो मुझे लगता है कि मैं दे सकता हूं वो मैं देना चाहता हूं क्योंकि वो भी इंसान हैं। उनका एक जो सेंटेंस है, जिसने मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित किया, उसमें उन्होंने कहा था कि यदि आपके जीवन का 1 भी सेकंड आप वापस ला सकते हो तो वो लाकर दिखाओ। जीवन का एक भी सेकंड अगर आप व्यर्थ करते हो, उसे व्यर्थ मत गंवाओ नहीं तो वो समय वापस नहीं आएगा। तो वो चीज राजपाल यादव जी की मुझे बहुत प्रभावित करती है और उस बारे में मैं बहुत सोचता हूं। क्योंकि वो व्यक्ति आध्यात्मिक हैं। ठीक है, समय बुरा आ सकता है किसी का भी, लेकिन मुझे लगता है कि वो आदमी धार्मिक है और अच्छे हैं, संस्कार अच्छे हैं और कलाकार भी बहुत अच्छे हैं।' एएसपी अनुज चौधरी के इस कदम के बाद हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। सबसे पहले सोनू सूद ने की मदद सोनू सूद ने X और इंस्टाग्राम स्टोरीज पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, राजपाल यादव एक बहुत ही प्रतिभाशाली अभिनेता हैं जिन्होंने हमारी फिल्म इंडस्ट्री को कई यादगार और अविस्मरणीय काम दिए हैं। कभी-कभी जिंदगी अन्यायपूर्ण हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी में टैलेंट की कमी है, बल्कि समय कभी-कभी बहुत कठोर हो सकता है। वह मेरी फिल्म का हिस्सा होंगे और मेरा मानना है कि यह वह समय है जब हम सभी प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और सहयोगी एक साथ खड़े हों। जो छोटा सा साइनिंग अमाउंट दिया जाएगा, जिसे भविष्य के काम के हिसाब से समायोजित किया जा सकता है, वह कोई दान नहीं है, बल्कि यह उनका सम्मान और गरिमा है। सलमान, अजय और मीका सिंह ने भी की मदद द स्क्रीन से बातचीत में राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने कहा था, बुधवार को सलमान खान, अजय देवगन, वरुण धवन और डेविड धवन जैसे कई सेलेब्स ने उनसे संपर्क कर आर्थिक सहायता दी। रतन नैन, वरुण धवन समेत इस बार बहुत लोग आगे आए हैं। राजपाल ने इसके लिए आभार जताया है। जब गोल्डी से पूछा गया कि क्या राजपाल ने तिहाड़ में सरेंडर से पहले मदद मांगी थी, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा। हालांकि, उन्होंने कहा, अच्छी बात यह है कि स्थिति बिगड़ने के बाद इंडस्ट्री मजबूती से उनके साथ खड़ी है। सबने कमिटमेंट किए हैं, लेकिन ऐसे लेन-देन तुरंत नहीं होते। सिंगर मीका सिंह ने भी राजपाल यादव को 11 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, सिर्फ पोस्ट डालने से कुछ नहीं होगा बल्कि आगे आकर एक्टर की मदद करो।
हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनोट गुरुवार को संसद भवन में कुल्लू घाटी की महिला कारीगरों द्वारा तैयार किया गया ‘हिमाचली समकालीन कोट’ पहनकर पहुंचीं। यह परिधान पारंपरिक हस्तकला और आधुनिक डिजाइन का सशक्त संगम है, जिसने राष्ट्रीय मंच पर हिमाचल की समृद्ध वस्त्र परंपरा को नई पहचान दी। कंगना द्वारा संसद जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इस कोट को पहनना केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि स्थानीय शिल्प कला और महिला कारीगरों के कौशल को सम्मान देने का संदेश भी है। इससे कुल्लू की महिला बुनकर (कारीगर) उत्साहित है और इसे गर्व का क्षण बता रही हैं। इसे कुल्लू की पुष्पा ठाकुर, इंद्रा देवी, मनीषा ठाकुर, वंदना, पूनम सूद और मीना सूद ने लगभग 2 महीने में तैयार किया है। हाथ से तैयार इस कोट की कीमत 45 हजार रुपए बताई जा रही है। देसी गद्दी ऊन से तैयार विशेष परिधान यह कोट स्थानीय देसी गद्दी ऊन से तैयार किया गया है। कुल्लू की महिला बुनकरों ने पारंपरिक तकनीक से ऊन को कातकर और हाथों से बुनकर इसे आकार दिया। परिधान पूरी तरह प्राकृतिक रंगों और हस्तनिर्मित प्रक्रियाओं से बना है, जो इसे पर्यावरण-अनुकूल फैशन का उत्कृष्ट उदाहरण बनाता है। हिमालयी रंगों की झलक कोट में प्रयुक्त रंग हिमालयी परिदृश्य से प्रेरित हैं। नीला रंग पर्वतों पर फैले निर्मल आकाश और अल्पाइन झीलों की शांति का प्रतीक है। हरा रंग चरागाहों और प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाता है, जबकि अखरोट रंग बर्फीली चोटियों और पहाड़ी भू-दृश्य की गरिमा को अभिव्यक्त करता है। इस दृष्टि से यह परिधान केवल वस्त्र नहीं, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनकर उभरता है। दो महीने की मेहनत, राष्ट्रीय मंच पर सम्मान ‘कुल्वी व्हिम्स’ संस्था के संस्थापक नग्गर निवासी भृगु राज आचार्य और निशा सुब्रमण्यम ने बताया कि इस कोट को तैयार करने में लगभग दो महीने का समय लगा। उनके अनुसार संसद में इस परिधान का प्रदर्शन महिला कारीगरों के लिए गर्व और सम्मान का क्षण है। संस्था गद्दी ऊन की पारंपरिक विरासत को पुनर्जीवित करने, स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार सृजित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उद्देश्य पारंपरिक बुनाई कला को आधुनिक बाजार से जोड़कर हिमाचली हस्तशिल्प को व्यापक पहचान दिलाना है। ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूती भृगु राज आचार्य का कहना है कि सांसद कंगना रनोट द्वारा स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पाद को सार्वजनिक मंच पर प्रोत्साहन देने से हिमाचल के कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को भी सशक्त करती है।
पंजाबी सिंगर जी खान अपने लाइव शो में अक्सर बॉलीवुड व पॉलीवुड अभिनेत्री सोमन बाजवा को लेकर टिप्पणियां करते रहते हैं। वो मंच से कई बार सोनम बाजवा के लिए गीत भी का चुके हैं। ऐसे में जब वो मंच पर आते हैं तो उनके फैंस सोनम-सोनम के नारे लगाना शुरू कर देते हैं। हाल ही में CT यूनिवर्सिटी में हुए एक स्टेज शो के दौरान पंजाबी सिंगर जी खान जब स्टेज पर आए तो फिर से फेंस ने सोनम बाजवा का नाम लेकर चिल्लाना शुरू कर दिया। इस बार जी खान ने सोनम बाजवा की तारीफ नहीं की बल्कि कह दिया कि वो टाइम बीत गया। सिंगर की इस बात से उनके फैंस एक बार तो साइलेंट हो गए लेकिन जब उसने कहा कि अब नई अपेडट दूंगा तो फैंस ने फिर से हूटिंग करनी शुरू कर दी। सिंगर ने आगे कहा कि इस बार तुमको जो नई अपडेट दूंगा वो पक्की मोहर लगाकर दूंगा। नहीं तो नहीं दूंगा। देखते रहो, आप लोग खुश हो जाओगे। आप कहोगे के क्या काला सा बड़ी सुंदर पटा गया। फैंस ने उनसे फिर सोनम बाजवा के लिए गाना गाने की फरमाइश की तो जी खान ने कह दिया कि चलो सोनम बाजवा के लिए गाना गा लेते हैं। उसके बाद जी खान ने सोमन बाजवा के लिए दो गल्लां करिये गीत की ये लाइनें गाई। जी खान के रवैये से फैंस कन्फ्यूजजी खान जिस तरह से सोनम बाजवा के बारे में मंचों से टिप्पणी करते हैं उससे उनके फैंस को लगता है कि उनकी सोनम बाजवा से काफी नजदीकियां हैं। लेकिन जब सीटी यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में सोनम बाजवा को लेकर कहा कि वो टाइम बीत गया। जिससे उनके फेंस कन्फ्यूज हो गए। इससे पहले सिंगर ने एक साल पहले अपने स्टेज शो के दौरान कहा था कि सोनम तो सोनम है। सोनम की तरह कौन हो सकता है। उसके जैसी मेरी एक्स भी नहीं थी। पंजाबी में कहते हैं कि मुझे अच्छी लगती है और जब मैंने कहा तो टिच्चरें करते हो। फैंस ने दी सोनम बाजवा के साथ पेंटिंगकरीब 7 महीने पहले एक स्टेज शो के दौरान एक फैन ने जी खान को उनकी और सोनम बाजवा की पेंटिंग दी। पेंटिंग देकर जी खान खुश हो गए और उन्होंने कहा कि बडी सुंदर फोटो लेकर आया है। फोटो देखने के बाद खुश होकर जी खान ने कहा कि एक गाना सोनम बाजवा के लिए गाऊंगा। उन्होंने मैं किन्ना तैनू करदा हां, प्यार जदों दसांगा, इक्क पासे दिल इक्क पासे जान रखांगा, मैं किन्ना तैनू करदा हां, गीत गाया। एक स्टेज शो के दौरान जी खान ने कहा था कि मैं तो सुनने वाली चीज हूं। देखने वाली चीज तो सोनम बाजवा है। मेरी बात सुनो दस रुपए सोनम बाजवा के नाम पर। *********************ये खबर भी पढ़ें… एक्ट्रेस सोनम बाजवा परफॉर्मेंस से विवादों में फंसी:शॉर्ट कॉस्टयूम और डांस मूव्स पर पंजाबियों को एतराज एक्ट्रेस सोनम बाजवा का गोवा में डांस देखकर पंजाबी भड़क गए हैं। परफॉर्मेंस के दौरान सोनम के शॉर्ट कॉस्ट्यूम पहनने पर सोशल मीडिया पर पंजाबियों ने एतराज जताया है। सोनम का वीडियो सामने आने पर यूजर ने लिखा की छोटे कपड़े पहनकर सोनम पंजाब का जुलूस निकलवा रही है। यह पंजाब का सभ्याचार नहीं है। गुस्साए यूजर ने सोनम को फेल हीरोइन तक कह दिया (पढ़ें पूरी खबर)
दिल्ली के वसंत विहार की एयर इंडिया कॉलोनी में पली-बढ़ीं तृप्ति डिमरी के सपनों की उड़ान घर के सांस्कृतिक माहौल से शुरू हुई। पिता दिनेश डिमरी रामलीला मंच के सक्रिय कलाकार रहे, लेकिन हालातों ने उनके अभिनय के सपने को पेशे में बदलने नहीं दिया। शायद वही अधूरा सपना तृप्ति की आंखों में आकार लेने लगा। दिल्ली पब्लिक स्कूल से पढ़ाई और श्री अरबिंदो कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री के दौरान मॉडलिंग का एक छोटा-सा मौका मिला, जिसने उन्हें मुंबई तक पहुंचा दिया। संतूर के विज्ञापन से शुरुआत हुई, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं था। रिश्तेदारों ने ताना मारा कि एक्ट्रेस बनने के बाद कोई शादी नहीं करेगा। इंडस्ट्री में उनके लुक और अपीयरेंस को लेकर जज किया गया। ऑडिशन में रिजेक्शन झेले, टिपिकल हीरोइन न दिखने की टिप्पणी की गई। कई बार आत्मविश्वास टूटा, मगर माता-पिता का साथ उनकी ताकत बना रहा। ‘पोस्टर बॉयज’ से डेब्यू के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ। ‘लैला मजनू’ जैसी संवेदनशील फिल्म ने अभिनय की पहचान दी, पर व्यावसायिक असफलता ने फिर शून्य पर ला खड़ा किया। ‘बुलबुल’ और ‘कला’ में कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की मजबूत अभिनेत्री के रूप में सराहना मिली, लेकिन व्यापक लोकप्रियता दूर थी। 2023 में ‘एनिमल’ ने तस्वीर बदल दी। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद उनका किरदार चर्चा का केंद्र बना और वे रातोंरात ‘नेशनल क्रश’ कहलाने लगीं। आज बड़े बैनर और बड़े सितारों के साथ काम कर रहीं हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं तृप्ति डिमरी की लाइफ और करियर से जुड़ी कुछ ऐसी ही कुछ और खास बातें.. रामलीला से मिला अभिनय का संस्कार तृप्ति डिमरी का जन्म 23 फरवरी 1994 को दिल्ली में हुआ। उनका परिवार मूल रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल से है, लेकिन पिता दिनेश डिमरी की एयर इंडिया में नौकरी के कारण परिवार दिल्ली में बस गया। वे वसंत विहार स्थित एयर इंडिया कॉलोनी में रहते हैं। तृप्ति के पिता को अभिनय और मंच से खास लगाव था। वे हर साल 10 दिनों तक रामलीला और दशहरा समारोह आयोजित करते थे और करीब 30 साल तक रामलीला कमिटी के सदस्य रहे। बचपन में उन्होंने राम और रावण जैसे किरदार भी निभाए। फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में तृप्ति ने बताया था कि घर में कला और संस्कृति का माहौल था, जिसने उनके अंदर अभिनय के प्रति झुकाव पैदा किया। पढ़ाई और मॉडलिंग की शुरुआत तृप्ति डिमरी ने 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के श्री अरबिंदो कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। कॉलेज के दौरान उनके भाई के एक दोस्त ने पार्क में उनका फोटोशूट किया और तस्वीरें एक मॉडलिंग एजेंसी को भेज दीं। एजेंसी ने उन्हें ऑडिशन के लिए बुलाया और वे सिलेक्ट हो गईं। मुंबई का सफर और फिल्मों में एंट्री तृप्ति को पहला मौका संतूर साबुन के विज्ञापन में मिला, जिसकी शूटिंग मुंबई में हुई। इस प्रोजेक्ट के बाद उन्होंने मुंबई में ही रुकने का फैसला किया और फिल्मों के लिए ऑडिशन देने लगीं। इसी दौरान उन्हें श्रीदेवी स्टारर फिल्म ‘मॉम’ में एक छोटा सा किरदार निभाने का अवसर मिला। यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। रिश्तेदारों ने कहा कि शादी नहीं होगी इस दौरान तृप्ति के रिश्तेदारों को पता चल गया कि वो एक्टिंग के लिए कोशिश कर रही हैं। रिश्तेदारों ने तृप्ति के पेरेंटस को ताना मरने लगे। तृप्ति कहती हैं- ‘कुछ रिश्तेदारों ने मेरे पेरेंट्स से कहा था कि अगर आपकी बेटी फिल्मों में जाएगी, तो उसकी शादी नहीं हो पाएगी। ऐसे कमेंट्स मेरे पेरेंट्स के लिए आसान नहीं थे, लेकिन फिर भी उन्होंने मेरा साथ दिया। 'पोस्टर बॉयज' ने मेरे पेरेंट्स को भरोसा दिलाया 2017 में 'पोस्टर बॉयज' से डेब्यू किया। उस समय मुंबई नई-नई आई थी, तब पता नहीं था कि क्या करना है। मुंबई शहर अजनबी लगता था। इस फिल्म के लिए पहली बार ऑडिशन में रिजेक्ट हो गई थी। फिर मुझे दोबारा ऑडिशन के लिए बुलाया गया और सेलेक्ट हो गई। पहली ही फिल्म में सनी देओल, बॉबी देओल और श्रेयस तलपड़े के साथ काम करने का मौका मिला। उस समय बहुत घबराहट थी, लेकिन उत्साह भी था। इंडस्ट्री में जगह बनाना मुश्किल था, फिर भी गर्व महसूस हुआ। इस फिल्म ने परिवार को भरोसा दिलाया। कैमरे के सामने खड़े होने का आत्मविश्वास मिला। पहले बहुत शर्मीली थी, लेकिन रोज सौ लोगों के सामने परफॉर्म करने से डर दूर हुआ। फैसला लिया कि कभी रुकूंगी नहीं। आउटसाइडर के लिए इंडस्ट्री में जगह बनाना मुश्किल लेकिन एक आउटसाइडर के रूप में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। ऑडिशन का सिलसिला करीब डेढ़ साल तक चला। कभी-कभी एक ही दिन में तीन-चार ऑडिशन देने पड़ते थे। ऑडिशन के बारे में बहुत कम जानकारी दी जाती थी, लेकिन उम्मीद होती थी कि आप किरदार को पूरी तरह जीवंत कर दें। इतने सारे लोगों के सामने सिर्फ एक या दो मौके मिलते थे। लुक और अपीयरेंस को लेकर ताने मिले शुरू में मेरे लुक और अपीयरेंस को लेकर जज किया गया। मुझसे कहा गया कि तुम बहुत सिंपल हो, तुम टिपिकल हीरोइन जैसी नहीं लगतीं, तुम ग्लैमरस नहीं हो। ऐसे कमेंट्स ने कई बार आत्मविश्वास तोड़ा। उस दौर ने मुझे बहुत कुछ सिखाया कि धैर्य, निरंतरता और खुद को हर बार नया बनाए रखने की जरूरत है। काम मिलने के बाद भी चुनौती खत्म नहीं होती। आपको हर बार कुछ नया लाना पड़ता है, ताकि न दर्शक ऊबें और न आप खुद। 'लैला मजनू' की शूटिंग के दौरान रो पड़ी 2018 में रिलीज फिल्म 'लैला मजनू' मेरे लिए बहुत खास थी। क्योंकि यह मेरी पहली लीड भूमिका वाली फिल्म थी। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक्टिंग की बारीकियां सीखने को मिली। उस फिल्म ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। हालांकि फिल्म की शूटिंग के दौरान कई चुनौतियां थीं क्योंकि हम कश्मीर की घाटियों में लगातार 20 या 24 घंटे तक शूटिंग करते थे। कई बार उस दौरान मैं रो पड़ी, यह सोचकर कि मैं क्या कर रही हूं, क्योंकि कुछ भी आसान नहीं था। हम स्थानीय लोगों के घरों में जाते और वहीं खाना खाते थे, और मुझे कश्मीर से गहरा लगाव हो गया। जब फिल्म अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई, तो मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि हम फिर से शून्य पर आ गए थे। और फिर हमने दोबारा ऑडिशन देना शुरू किया। ‘बुलबुल’ और ‘कला’ में काम करते वक्त डरी हुई थी 'बुलबुल' में काम करते वक्त मन में शंका थी कि पता नहीं लोगों को मेरा किरदार पसंद आएगा कि नहीं। लेकिन लोगों को फिल्म पसंद आई। फिर 'कला' का ऑफर आया। मुझे डर था कि किरदार एक जैसे न लगें, क्योंकि 'कला' की भी निर्देशक अनविता दत्त थीं। लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोनों अलग किरदार है। दोनों फिल्मों को दर्शकों का प्यार मिला। ‘एनिमल’ से बनी नेशनल क्रश तृप्ति की पॉपुलैरिटी साल 2023 में उस वक्त आसमान छूने लगी, जब वह रणबीर कपूर और रश्मिका मंदाना के साथ फिल्म 'एनिमल' में सपोर्टिंग रोल में नजर आईं। फिल्म में उनका किरदार भले ही स्क्रीन टाइम के लिहाज से सीमित था, लेकिन प्रभाव इतना गहरा था कि दर्शकों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया। उनकी सहज मुस्कान, आंखों की मासूमियत और किरदार की भावनात्मक परतों को उन्होंने जिस तरह निभाया, उसने उन्हें रातोंरात चर्चा के केंद्र में ला दिया। रिलीज के बाद उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में जबरदस्त उछाल आया और ब्रांड्स की कतार लग गई। इस फिल्म लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर नॉमिनेशन भी मिला। इस किरदार के बाद उन्हें उनके चाहने वालों ने 'भाभी 2' पुकारना शुरू कर दिया। तृप्ति को देश की नई 'नेशनल क्रश' भी बताया गया। ‘एनिमल’ से बदली किस्मत, बढ़ी मार्केट वैल्यू ‘एनिमल’ से पहले तृप्ति डिमरी को कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों की अभिनेत्री के रूप में देखा जाता था। वह आलोचकों की पसंद थीं, लेकिन बड़े पैमाने पर लोकप्रियता अभी दूर थी। इस फिल्म ने उन्हें कमर्शियल सिनेमा के दर्शकों तक पहुंचा दिया। यही वजह है कि अब उन्हें बड़े बैनर और स्टार-कास्ट वाली फिल्मों के ऑफर मिल रहे हैं। इंडस्ट्री में उनकी मार्केट वैल्यू और पहचान दोनों में बड़ा बदलाव आया है। बड़े बैनर, बड़े स्टार्स और लगातार नई फिल्में ‘एनिमल’ के बाद तृप्ति अनीज बजमी की ‘भूल भुलैया 3’, राजकुमार राव के साथ ‘विक्की विद्या का वो वाला वीडियो’, धर्मा प्रोडक्शन की ‘बैड न्यूज’ और ‘धड़क 2’ में नजर आईं। विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओ रोमियो’ में वह शाहिद कपूर के अपोजिट हैं। इसके अलावा वह संदीप रेड्डी वांगा की मच-अवेटेड फिल्म ‘स्पिरिट’ में प्रभास के साथ काम कर रही हैं। पॉपुलैरिटी के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी तृप्ति कहती हैं, “मैंने हमेशा अपने काम पर भरोसा रखा। ‘एनिमल’ के बाद जो प्यार मिला, वह मेरे लिए बेहद खास है। यह सिर्फ पॉपुलैरिटी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है कि मैं आगे भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरूं। मेरे लिए हर फिल्म एक नई शुरुआत होती है। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे मेरे किरदारों से याद रखें, न कि सिर्फ किसी एक टैग से।” उतार-चढ़ाव ही सिखाते हैं जिंदगी के असली सबक तृप्ति मानती हैं कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। वह कहती हैं, “सबसे जरूरी है यह समझना कि आप सही कर रहे हैं और खुद का ध्यान रख रहे हैं। अगर जिंदगी में सिर्फ चढ़ाव ही हों, तो सीखने का मौका नहीं मिलता। असली सबक तब मिलते हैं जब आप नीचे के दौर में होते हैं। तभी पता चलता है कि आपमें क्या कमी है। वरना हम खुद से सही सवाल ही नहीं पूछते। वह खामोशी बहुत जरूरी है, जो आपको खुद के करीब लाती है। आज भी मैं गलतियां कर रही हूं, जो कल सीख में बदलेंगी। यही तो जिंदगी है, बिना उतार-चढ़ाव के मजा ही क्या?” _________________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... शाहिद कपूर के पास कपड़े खरीदने के पैसे नहीं थे:बैकग्राउंड डांसर बने, लोगों ने कहा- हीरो मटेरियल नहीं, बॉलीवुड के सबसे सफल सितारों में शामिल बॉलीवुड में सफलता की चमक अक्सर संघर्ष की लंबी छाया को छुपा देती है, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो न सिर्फ प्रेरित करती हैं बल्कि यह भी सिखाती हैं कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल मिल ही जाती है। अभिनेता शाहिद कपूर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसा सफर जिसमें बचपन का अकेलापन, करियर की अनिश्चितता और लगातार रिजेक्शन मिले।पूरी खबर पढ़ें..
बॉलीवुड की दमदार परफॉर्मर नोरा फतेही ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा नाम लिखा है, जो अब तक किसी भारतीय कलाकार के हिस्से में नहीं आया। नोरा ने फीफा वर्ल्ड कप 2022 और आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 दोनों के समारोहों में शानदार परफॉर्मेंस दी, जिससे वे पहली बॉलीवुड कलाकार बन गई हैं जिन्होंने दोनों विश्व कप पैटर्न के मंचों पर अपनी कला का जादू दिखाया है। जहां फीफा वर्ल्ड कप 2022 कतर में आयोजित हुआ था, नोरा ने इसके समापन समारोह में ऑफिशियल एंथम ‘Light The Sky’ के हिस्से के रूप में परफॉर्म किया था। इस आयोजन का ग्लोबल प्रसारण हुआ और करोड़ों दर्शक इससे जुड़े थे। नोरा ने मंच पर न सिर्फ आकर्षक डांस किए, बल्कि हिंदी अंश भी पेश किए, जिसे आयोजकों ने बहुभाषी प्रस्तुति के रूप में शामिल किया था। यह भारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए एक बड़ा पल था क्योंकि किसी बॉलीवुड कलाकार को इतने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजन का हिस्सा बनने का मौका पहले नहीं मिला था। फिर, टी20 वर्ल्ड कप 2026 के उद्घाटन समारोह में भी नोरा ने धमाकेदार परफॉर्मेंस दी। यह समारोह खेल और एंटरटेनमेंट का एक शानदार मिश्रण था, जिसमें नोरा ने स्टेज को जीवंत कर दिया। उनके लाइव डांस मूव्स और ऊर्जा ने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के साथ ही टीवी और डिजिटल दर्शकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। इस तरह की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब खेल आयोजनों में सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है। वह अब एक ग्लोबल मनोरंजन का महाकुंभ बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, नोरा की भागीदारी स्पोर्ट्स-एंटरटेनमेंट इकोनॉमी के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज बड़े खेल आयोजनों में पॉप कल्चर और परफॉर्मिंग आर्ट्स को प्रमुख स्थान दिया जा रहा है, जो आयोजन की ग्लोबल अपील को और बढ़ाता है। नोरा फतेही की यह अनूठी उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय कलाकार अब वैश्विक स्तर पर कैसे पहचान बना रहे हैं।
हाल ही में रिलीज हुई ‘बॉर्डर-2’ फिल्म भले धमाल मचा रही हो, लेकिन 1997 में आई ‘बॉर्डर’ फिल्म का विवाद नहीं थम रहा है, जिसमें लोंगेवाला की लड़ाई को दिखाया गया है। इस युद्ध में शामिल रहे मोहाली के हवलदार मुख्तियार सिंह का दावा है कि मोर्चे पर 120 भारतीय जवानों ने हजारों पाकिस्तानी सैनिकों और टैंकों का डटकर मुकाबला किया और सिर्फ 3 जवान शहीद हुए थे, जबकि फिल्म में लगभग सभी को शहीद दिखा दिया गया। उनका कहना है कि वास्तविक इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिससे वे आहत हैं। वे इस मामले को लेकर 2 साल से राजस्थान के सीएम, रक्षा मंत्री और पीएम को पत्र लिख चुके हैं। उनका कहना है कि सनी देओल से वे यही चाहते हैं कि अगर कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम उस युद्ध में जिंदा रहे, सैनिकों से मिल लें। हम उस मोर्चे के असली हीरो हैं, लेकिन हमें तो कोई पूछता नहीं है। मैंने रेकी करते जहाज को देखकर दिया था अलर्ट चंडीगढ़ से 26 किलोमीटर दूर मोहाली के कुराली में रहने वाले हवलदार मुख्तियार सिंह इस समय 81 साल के हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत-पाकिस्तान की साल 1971 में लड़ाई हुई थी, उस समय मैं 26 साल का था। यह बात 4 और 5 दिसंबर 1971 की है। पाकिस्तान का रेकी वाला जहाज हमारे ऊपर से गया। उस समय कुलदीप सिंह चांदपुरी की अगुआई में अधिकारियों की मीटिंग चल रही थी। तो मैंने साहब को बताया कि यह पाकिस्तान का जहाज है। इस पर चांद-तारा बना हुआ है। इंटेलिजेंस की अपनी रिपोर्ट थी। हमारी आर्मी वाले ऊंटों पर पेट्रोलिंग करते थे। एक रात को नाइट पेट्रोलिंग पर गए। मैं पेशे से सेना में क्लर्क था, मैं भी साथ में गया। लेकिन हम गलती से उनकी पोस्टों के अंदर चले गए थे। हमारे साथ जो कुत्ते थे, वे भाग गए। फिर हम धीरे-धीरे पीछे हटे। चांदपुरी साहब ने सबको इकट्ठा किया था मुख्तियार सिंह ने कहा कि हम उस समय मोर्चे पर कुल 120 जवान थे। 24-25 लोग अधिकारी धर्मवीर के साथ पेट्रोलिंग पर गए हुए थे। जब वे पेट्रोलिंग कर रहे थे, तो उन्हें गड़गड़ाहट की आवाज आई। उन्होंने अच्छी तरह देखा तो चांदपुरी साहिब को मैसेज दिया कि पाकिस्तान साइड से आर्मी के टैंक आ गए हैं। फिर चांदपुरी साहब ने सबको इकट्ठा कर लिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन शुरू होने वाला है, आप लोग अलर्ट हो जाएं। उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। वे उस दिन कोलकाता गई हुई थीं। 3 तारीख को मेरे पास रेडियो था। अनाउंसमेंट हुआ कि इमरजेंसी लग गई है, आर्मी मोर्चे पर जाए। फिर सभी अलर्ट थे। पाकिस्तान के 45 टैंक क्रॉस कर आए थे। पाकिस्तान के टैंक अपनी आर्मी को कवरिंग फायर दे रहे थे। रात डेढ़ बजे आया था गोला उन्होंने कहा कि रात डेढ़ बजे उनका पहला गोला हमारी साइड गिरा था। चांदनी रात थी, सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। युद्ध में हमारी सिर्फ तीन कैजुअल्टी हुईं। सारे जवान ठीक थे। लेकिन फिल्म में सारे जवान शहीद दिखा दिए। हम चाहते हैं कि इतिहास को सही तरह से दिखाया जाए। पहले तो मैंने फिल्म की कहानी पर ध्यान नहीं दिया। फिर मीडिया वाले मेरे साथ जगदेव सिंह से फिरोजपुर में मिले। जगदेव ने उन्हें मेरा नंबर दिया। उसके बाद दो साल पहले मैंने सेना को इस बारे में पत्र लिखा। फिर हमें 31 मीडियम रेजिमेंट लोंगेवाला ने बुलाया। 2024 में हम वहां गए और जाकर सारी बात बताई। हम तो देश के सिपाही हैं, किसी पार्टी के नहीं मुख्तियार सिंह ने कहा कि इतने साल हो गए, सरकार ने हमें अभी तक पूछा नहीं है। अब तो लोग भी बहुत कम जिंदा बचे हैं। बड़ी मुश्किल से 10-20 लोग जिंदा होंगे। हम तो देश के सिपाही हैं, किसी पार्टी के नहीं हैं। हम देश के लिए हैं और देश के लिए ही जवान लड़ते हैं। सनी देओल को हमें क्या देना है? जब ‘बॉर्डर’ फिल्म रिलीज हुई, तो उससे पहले वे अलग-अलग यूनिट में गए थे। हम तो उस युद्ध में लड़कर आए हैं, उस युद्ध का के स्टार हैं। हालांकि सेना की तरफ से हमें महावीर चक्र, सेना मेडल या कोई अन्य मेडल नहीं दिया गया। यह तो सरकार ही जानती है। हमें तो कोई पूछता नहीं है। हमें कोई लालच नहीं है। सनी देओल हमारे नाम पर पैसे कमा रहे हैं। वे किसी टीवी या पेपर में यह जानकारी दें कि उस समय 23 पंजाब के जो लोग थे, हमारे जवान बहादुरी से लड़े थे।
बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली की ओर से 2019 में दर्ज रेप FIR को रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह FIR मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 376 सहित अन्य धाराओं में दर्ज की गई थी। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक आदित्य पंचोली की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत पाटिल ने कोर्ट में FIR को खारिज करने की मांग दोहराई। मामले में एक महिला बॉलीवुड अभिनेत्री ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें पंचोली को आरोपी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि पुलिस की ओर से 11 नोटिस भेजे जाने के बावजूद शिकायतकर्ता जांच में पेश नहीं हुईं। इसके बाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को शिकायतकर्ता को नया नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई यानी 24 फरवरी 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। 15 साल बाद दर्ज हुई शिकायत: पंचोली 27 जून 2019 को दर्ज इस FIR को लेकर विवाद बना हुआ है। पंचोली की ओर से दावा किया गया है कि कथित घटना के करीब 15 साल बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जो दुर्भावनापूर्ण है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के भजनलाल फैसले का हवाला देते हुए FIR रद्द करने की मांग की गई है। वकील प्रशांत पाटिल ने यह भी बताया कि कथित घटना से पहले एक व्यक्ति ने आदित्य पंचोली से मुलाकात की थी, जिसकी रिकॉर्डिंग उनके पास है। यह रिकॉर्डिंग कोर्ट में पेश की गई है, जिसमें शिकायत दर्ज कराने के पीछे गलत मंशा होने की बात कही गई है। इन धाराओं में दर्ज है केस 2019 में दर्ज FIR में आदित्य पंचोली पर IPC की धारा 376 (रेप), 328 (जहर देकर नुकसान पहुंचाना), 384 (जबरन वसूली), 341 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गैरकानूनी बंधक बनाना), 323 (मारपीट) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए गए थे। FIR दर्ज होने के बाद पंचोली ने खुद को झूठा फंसाया गया बताया था। फिलहाल मामला कोर्ट में लंबित है और अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
साउथ स्टार धनुष के साथ शादी की अफवाहों के बीच एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मृणाल ने साफ कहा कि सोशल मीडिया और खबरों में चल रही चर्चाओं से अब उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन पहले इन बातों का असर होता था। मृणाल ने कहा, “यह अंदर की दुनिया है और बाहर की दुनिया का अपना एक अलग परसेप्शन होता है। कभी मुझे पता चलता है कि मेरी शादी होने वाली है, कभी सुनने को मिलता है कि यह होने वाला है, वह होने वाला है। मैं खुद इन बातों से वाकिफ नहीं होती थी। पहले इन सबसे बहुत फर्क पड़ता था, लेकिन अब मैं इन पर हंसती हूं।” उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें अपनी निजी जिंदगी या किसी खास बात की जानकारी देनी होगी, तो वह खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा करेंगी। मृणाल ठाकुर ने कहा- “अफवाहें खबर नहीं होतीं। एक पत्रकार के रूप में यह जिम्मेदारी बनती है कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले मुझसे या मेरी टीम से पुष्टि की जाए।” मृणाल ने बताया कि पहले उनकी कोई पीआर टीम नहीं थी, लेकिन बार-बार फैल रही गलतफहमियों और अफवाहों के कारण उन्हें पीआर टीम रखनी पड़ी। फिल्मों को लेकर भी फैलती हैं अफवाहें एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि कई फिल्मों से उनका नाम जोड़ दिया जाता है, जबकि उन्हें उन प्रोजेक्ट्स के लिए संपर्क तक नहीं किया गया होता। बाद में खबरें आती हैं कि मैंने ज्यादा फीस मांग ली, इसलिए फिल्म नहीं की। मृणाल ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा- ‘’ये बातचीत कहां हो रही है? क्यों हो रही है? किसी कलाकार की छवि खराब क्यों की जा रही है? जब कोई तथाकथित प्रामाणिक अफवाह चल रही हो, तो क्या एक बार संबंधित कलाकार से पूछ लेना जरूरी नहीं समझा जाता?” ‘बेबी बंप’ को लेकर भी बनी खबरें मृणाल ने वायरल खबरों और भ्रामक शीर्षकों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर मैं किसी फिल्म में प्रेग्नेंट महिला का किरदार निभा रही हूं और बेबी बंप के साथ बाहर नजर आती हूं, तो क्या इसका मतलब यह है कि मैं सचमुच प्रेग्नेंट हूं? ऐसी खबरें बना दी जाती हैं।” उनका कहना है कि आजकल सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाएं भी खबरों की तरह प्रकाशित हो रही हैं, जो चिंता का विषय है। मुझे मेरे काम से जाना जाए मृणाल ने कहा, “मैं चाहती हूं कि ध्यान मेरे काम पर हो। मैं किसी और का नाम लेकर आगे बढ़ने में विश्वास नहीं करती। यह मैं नहीं हूं।” उन्होंने बातचीत के अंत में यह भी कहा कि फिल्म और किरदारों पर चर्चा होना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता। धनुष संग शादी की अफवाहों के बीच मृणाल का यह बयान साफ करता है कि वह अपनी निजी जिंदगी से ज्यादा अपने काम के जरिए पहचानी जाना चाहती हैं।
फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की शानदार सफलता के बाद आज इसकी ग्रैंड सक्सेस पार्टी आयोजित की गई, जहां पूरी स्टारकास्ट और मेकर्स ने फिल्म की कामयाबी का जश्न मनाया। पार्टी में फिल्म से जुड़े कलाकार, निर्देशक, निर्माता और इंडस्ट्री के कई बड़े नाम शामिल हुए। लीड एक्टर्स ने मीडिया से बातचीत में दर्शकों का आभार जताया और कहा कि यह सफलता देशभक्ति की भावना व दर्शकों के प्यार की जीत है। सनी देओल ने कहा, जनता आपकी फिल्म देखती है, बाकी लोग तो आपके बारे में बहुत कुछ बोलेंगे, क्योंकि उन्हें किसी के बारे में अच्छा बोलना अच्छा नहीं लगता। वहीं प्रोड्यूसर भूषण कुमार ने फिल्म को ऑर्गेनिक हिट बताया। सक्सेस पार्टी में फिल्म के यादगार डायलॉग्स और गानों पर जश्न का माहौल बना रहा। पूरी टीम ने केक काटकर सफलता का सेलिब्रेशन किया और एक-दूसरे को बधाई दी। गौरतलब है कि ‘बॉर्डर 2’ को देशभक्ति से जुड़ी दमदार कहानी और इमोशनल अपील के लिए दर्शकों से सराहना मिल रही है। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर फिल्ममेकर और नेटफ्लिक्स को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि समाज के किसी वर्ग को ऐसे नाम से बदनाम नहीं किया जा सकता। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ब्राह्मण समाज की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान बेंच ने कहा कि जब तक फिल्म का बदला हुआ नाम नहीं बताया जाएगा, तब तक इसे रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म निर्माता नीरज पांडेय को नोटिस जारी किया है। साथ ही नीरज पांडे से पूछा कि वे फिल्म का नाम बदलकर नया नाम क्या रखना चाहते हैं और अदालत को आज ही इसका जवाब दें। कोर्ट ने पांडे को यह भी आदेश दिया है कि वह हलफनामा दाखिल करें, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि फिल्म घूसखोर पंडत किसी भी समाजिक वर्ग का अपमान नहीं करती। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी। कब और कैसे शुरू हुआ विवाद? बता दें, 03 फरवरी 2026 को नेटफ्लिक्स ने मनोज बाजपेयी की 'घूसखोर पंडत' का एलान भी टीजर रिलीज करके किया गया था। लेकिन जैसे ही इसका टीजर जारी किया गया तो इसके टाइटल को लेकर विवाद शुरू हो गया है। लोग सड़कों पर उतर गए। इसके बाद यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया। टीजर में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिन्हें दिल्ली में ‘पंडित’ के नाम से जाना जाता है। फिल्म में उन्हें एक बदनाम पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है। टीजर के मुताबिक, दीक्षित 20 साल पहले एसआई के रूप में भर्ती हुए थे और अपने किए गए कारनामों की वजह से उन्हें बार-बार डिमोट किया गया। ब्राह्मण समाज ने फिल्म का विरोध किया अलग-अलगह जगहों पर ब्राह्मण समाज ने नेटफ्लिक्स की 'घूसखोर पंडत' के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा मुंबई के वकील आशुतोष दुबे का आरोप है कि ‘पंडत’ जैसे सम्मानजनक शब्द को भ्रष्टाचार के साथ जोड़ना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे पूरे समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचती है। नोटिस में कहा गया है कि यह फिल्म जानबूझकर एक समुदाय की छवि को खराब करने की कोशिश कर रही है। यह केवल क्रिएटिव फ्रीडम नहीं है बल्कि कला के नाम पर किसी समुदाय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। उनका कहना है कि फिल्म का नाम केवल सनसनी फैलाने के इरादे से रखा गया है, जिसमें सामाजिक संवेदनशीलता की अनदेखी की गई है। इसके साथ ही, वकील ने फिल्म का नाम बदलने की मांग भी की है। फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर हटाया गया फिल्म का टीजर और उससे जुड़ा सभी प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब से हटा दिया गया। फिल्म को लेकर नीरज पांडे ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए आम बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। इस कहानी का फोकस एक व्यक्ति के काम और उसके फैसलों पर है। इसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है और न ही यह किसी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने आगे लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर मैं अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता हूं और ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं जो सोच-समझकर और सम्मान के साथ बनाई जाएं। यह फिल्म भी मेरे पिछले कामों की तरह ईमानदार नीयत से और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के एक्स-हसबैंड और बिजनेसमैन संजय कपूर के निधन के बाद उनकी प्रॉपर्टी को लेकर विवाद जारी है। इसी बीच संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने अपनी सास रानी कपूर पर झूठी गवाही देने का आरोप लगाया है। प्रिया कपूर ने इस संबंध में एक याचिका भी दायर की है। इतना ही नहीं, उन्होंने आरके फैमिली ट्रस्ट के खिलाफ दायर दीवानी मुकदमे को पूरी तरह खारिज करने की मांग की है। याचिका में प्रिया ने कहा कि रानी कपूर ने झूठे बयान देकर और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर अदालत के साथ धोखाधड़ी की है। यह कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। जानिए क्या है पूरा मामला? दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिवंगत संजय कपूर की मां रानी कपूर से उनकी बहू प्रिया कपूर की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पारिवारिक ट्रस्ट के खिलाफ दायर उनकी सास का मुकदमा झूठे बयानों पर आधारित है। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने प्रिया कपूर की याचिका पर रानी कपूर को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत झूठी गवाही के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। अदालत ने रानी कपूर को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दायर आवेदन में आरोप लगाया गया है कि हलफनामों और तस्वीरों जैसे ‘पुख्ता सबूत’ मौजूद हैं, जो यह दर्शाते हैं कि रानी कपूर ने शपथपत्र में जानबूझकर झूठा बयान दिया। आवेदन में कहा गया है कि उन्होंने यह दावा किया था कि उन्होंने ‘आरके फैमिली ट्रस्ट डीड’ पर हस्ताक्षर नहीं किए थे या उसमें लिखी बातों को नहीं पढ़ा था। अपनी याचिका में रानी कपूर (80) ने कहा है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट के लिए जाली, धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने प्रतिवादियों अपनी बहू प्रिया कपूर और पोते-पोतियों समेत अन्य लोगों को किसी भी तरह से आरके फैमिली ट्रस्ट का इस्तेमाल करने या उसके सपोर्ट में कार्य करने से स्थायी रूप से रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है। रानी कपूर की याचिका में कहा गया है कि वह अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की संपूर्ण संपत्ति की एकमात्र लाभार्थी थीं और जब संपत्ति 'आरके फैमिली ट्रस्ट’ को हस्तांतरित की गई थी तब उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई थी। सुरिंदर कपूर ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ समेत विभिन्न व्यवसायों के ओरिजनेटर थे। याचिका में दावा किया गया है कि संजय ने अपनी मृत्यु तक रानी कपूर को कभी यह कन्फर्म नहीं की कि वास्तव में उन्हें उनके सभी अधिकारों, संपत्तियों और विरासत से वंचित कर दिया गया था और न ही उन्हें कथित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ की एक प्रति प्रदान की।
राजपाल यादव इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। 9 करोड़ रुपए के चेक बाउंस मामले में सरेंडर करने के बाद वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। इन दिनों वह आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और उनके पास इतनी बड़ी रकम लौटाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। ऐसे में कई बॉलीवुड सितारे उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। इस लिस्ट में अब मीका सिंह का नाम भी शामिल हो गया है। मीका सिंह ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा, इस वक्त सुपरस्टार राजपाल यादव बहुत ही कठिन समय से गुजर रहे हैं। हम सभी को उनके हालात पता हैं। इस वक्त उनको पैसों को बहुत जरूरत है। मैं रिक्वेस्ट करूंगा कि जिन-जिन एक्टर्स ने, प्रड्यूसर्स-डायरेक्टर्स ने, सुपरस्टार्स ने उनके साथ काम किया है, ये सही वक्त है कि वो उन्हें सपोर्ट करें। मैं नहीं कहता कि आपलोग 5 करोड़ दे दो। अगर हम 20 लोग भी 50-50 लाख अनाउंस करते हैं, 25 लाख अनाउंस करते हैं, 11 लाख अनाउंस करते हैं तो राजपाल यादव भाई की हेल्प हम कर सकते हैं। तो सिर्फ आप पोस्ट मत करो, दिखावा मत करो लेकिन मैं खुश हूं कि मेरे एक पोस्ट के बाद सभी ने शुरुआत कर दी है। लेकिन मैं वाकई में उनकी मदद करना चाहता हूं और आप सभी से हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि हमारी जो इंडस्ट्री है एक-दूसरे के लिए हमेशा बनी है, अफोर्ड करो।' सलमान, सोनू और अजय देवगन ने भी किया सपोर्ट बता दें, राजपाल यादव की मौजूदा स्थिति को देखकर उन्हें सोनू सूद, सलमान खान और अजय देवगन जैसे एक्टर्स ने सपोर्ट किया है। राजपाल यादव के मैनेजर गोल्डी ने SCREEN से हुई बातचीत में ने बताया कि कई बड़ी हस्तियां मदद के लिए आगे आई हैं। उन्होंने कहा, सोनू सूद, सलमान खान और अजय देवगन जैसे एक्टर्स ने अपना सपोर्ट दिया है। मेरी डेविड धवन से बात हुई तो उन्होंने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। रतन नैन, वरुण धवन के अलावा कई लोग इस बार उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, जिसकी राजपाल ने दिल से सराहना की है।
धुरंधर के पार्ट वन से अपनी अलग पहचान बनाने वाले एक्टर नवीन कौशिक अब फिल्म के दूसरे हिस्से को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में रिलीज हुए टीजर से लेकर अपने किरदार को मिले प्यार, इंडस्ट्री में सालों के संघर्ष, सेट पर बीते यादगार लम्हों और फिल्म को लेकर उठे विवादों तक नवीन ने हर मुद्दे पर खुलकर बात की। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि क्यों धुरंधर: द रिवेंज पहले से कहीं ज्यादा बड़ा, ज्यादा खतरनाक और ज्यादा इमोशनल होने वाला है, और कैसे यह फिल्म उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनकर सामने आई है। सबसे पहले धुरंधर: द रिवेंज के टीजर की बात करते हैं। आप धुरंधर के पार्ट वन का अहम हिस्सा रहे हैं, ऐसे में टीजर देखकर आपका रिव्यू क्या रहा? मैं बहुत एक्साइटेड हूं, क्योंकि पार्ट टू में जबरदस्त एक्शन आने वाला है। बहुत सारे नए कैरेक्टर्स भी जुड़ने वाले हैं। पार्ट वन में लोगों के मन में कई सवाल छोड़े गए थे हमजा कौन है, कहां से आया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि आर माधवन का किरदार कहता है कि हम ऐसे लोगों को चुनते हैं जिनकी जिंदगी में अब कुछ बचा नहीं है या तो जिन्हें उम्रकैद हो चुकी है या जो मरने के कगार पर हैं। ये सारे सवालों का जवाब पार्ट 2 में मिलेगा। मुझे बेहद दिलचस्पी है कि आगे क्या होने वाला है। टीजर में जो एक्शन सीक्वेंस दिखे हैं, वो पहले से कहीं ज्यादा बड़े, ज्यादा हिंसक और ज्यादा धमाकेदार लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ फैंस टीजर से निराश भी दिखे। उन्हें लगा कि कुछ नया नहीं दिखाया गया। आप इसे कैसे देखते हैं? मेरे हिसाब से इसके तीन बड़े कारण हैं। पहला कि टीजर में जो सीन दिखाया गया है, वो असल में पार्ट वन के एंड में, क्रेडिट्स से पहले आता है। बहुत सारे लोग फिल्म खत्म होते ही उठकर निकल गए थे, उन्होंने वो प्री-क्रेडिट सीन देखा ही नहीं। अब वही सीन उनके लिए नया है। दूसरा कि टीजर में जो गाना है, वो नया है। रिलीज से पहले लोग पूछ रहे थे कि ये कौन सा गाना है, क्योंकि ट्रेलर वाला गाना ये नहीं है। तीसरा कि कुछ समय पहले ये अफवाहें थीं कि 19 मार्च की रिलीज डेट शिफ्ट हो सकती है, क्योंकि उसी दिन टॉक्सिक रिलीज हो रही है। मुझे लगता है टीजर का एक मकसद ये भी था बताना कि फिल्म 19 मार्च को ही रिलीज होगी। पार्ट 2 का ट्रेलर जल्द आएगा और वही लोगों को असली तस्वीर दिखाएगा। क्या आपको इस बात का मलाल है कि आप पार्ट टू का हिस्सा नहीं हैं? थोड़ा-सा तो है। मुझे खुद अंदाजा नहीं था कि पार्ट वन इतनी बड़ी हिट होगी और मेरे किरदार को इतना प्यार मिलेगा। शूटिंग के दौरान मुझे पता था कि ये कैरेक्टर यहीं खत्म हो जाएगा। जब पार्ट वन के दो हिस्सों में बनने की घोषणा हुई, तो ट्रेलर लॉन्च के वक्त मैंने आदित्य सर से मजाक में कहा था ‘सर, जिंदा कर दो, वापस ला दो।’लेकिन सच्चाई ये है कि हर कहानी में हर किरदार की एक सीमा होती है। डोंगा का सफर पार्ट वन तक ही था। उसी एंडिंग की वजह से फिल्म ने लोगों पर गहरा असर छोड़ा। अच्छाई की जीत और बुराई का अंत हुआ। यही उम्मीद पार्ट टू के लिए जमीन तैयार करता है। फिर भी, थोड़ा-सा मलाल तो रहता ही है। धुरंधर से आप कैसे जुड़े? इस फिल्म के लिए आप किसे इसका सबसे बड़ा क्रेडिट देना चाहेंगे? इसका पूरा क्रेडिट मैं दिल से मुकेश छाबड़ा जी को देता हूं। वो मुझे दिल्ली थिएटर के दिनों से जानते हैं करीब 25 साल से। मुंबई में 16 सालों तक उन्होंने मेरे लिए कोई अच्छा रोल ढूंढने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन मुझे ज्यादातर वही बॉस वाले रोल मिलते रहे।मैं बहुत फ्रस्ट्रेट हो गया था न आर्टिस्टिक सैटिस्फैक्शन, न फेम, न फाइनेंशियल संतुष्टि मिल रही थी। मैंने एक्टिंग तक छोड़ने का फैसला कर लिया था। तभी मुकेश जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि एक फिल्म है और ये किरदार बिल्कुल अलग है।मैं तैयार नहीं था, लेकिन उन्होंने जोर देकर आदित्य धर सर से मिलने भेजा। आदित्य सर ने फिल्म और कैरेक्टर दोनों को इतनी डिटेल में समझाया कि मुझे लगा ये करना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर किरदार की अपनी कहानी और आर्क होगा और उन्होंने अपना वादा निभाया। फिल्म के सेट से कुछ ऐसे बीटीएस मोमेंट बताइए, जो दर्शक 70 एमएम के पर्दे पर नहीं देख पाए? जैसा कि आपने फिल्म देखी होगी, मेरा ज्यादातर काम रहमान डकैत की गैंग के साथ था। आमतौर पर फिल्में एक-दो महीने में खत्म हो जाती हैं, लेकिन धुरंधर का शूट करीब डेढ़ साल चला। दानिश, मैं, विक्रम सुनील और बाकी गैंग मेंबर्स लगातार मिलते रहे। शुरू में सेट पर एक औपचारिक डर रहता है कि ये हमारे सीनियर हैं, डायरेक्टर हैं, डीओपी हैं। लेकिन डेढ़ साल में वो सारी फॉर्मैलिटी टूट गई। फिर एक-दूसरे की लेग पुलिंग शुरू हो गई। विकास नोलखा (डीओपी) बार-बार आकर कहते थे ‘दाढ़ी की कंटिन्यूटी, दाढ़ी की कंटिन्यूटी।’ डेढ़ साल तक दाढ़ी मेंटेन करना आसान नहीं था। वो मुझे खूब छेड़ते थे वो कहते कि ‘बाल तो हैं नहीं, कम से कम दाढ़ी तो संभाल लो।’ रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना और संजय दत्त से सेट पर बातचीत का अनुभव कैसा रहा? रणवीर सिंह के साथ मेरे लगभग सारे सीन थे। अक्षय खन्ना के साथ भी कई सीन थे। शुरुआत में सब कुछ बहुत प्रोफेशनल रहता था। लेकिन डेढ़ साल तक साथ शूट करने के बाद वो बीच की दीवार गिर गई। अक्षय सर बहुत रिजर्व रहते हैं। उनका किरदार रहमान डकैत बहुत सीरियस है और उन्होंने उसे उसी लेवल की डिटेलिंग के साथ निभाया है। अगर आप उनसे बात करना चाहें, तो वो खुले दिल से बात करते हैं, लेकिन वो अटेंशन सीक नहीं करते। मैंने उनसे कहा था कि दिल चाहता है के समय मैं कॉलेज में था और थिएटर करता था। सब आमिर खान का किरदार बनना चाहते थे, लेकिन मुझे आपका कैरेक्टर सबसे ज्यादा रिलेटेबल लगा, क्योंकि वो एक आर्टिस्ट था। इसपर उन्होंने आगे कहा कि अक्सर लोग डायलॉग पर ही फोकस करते हैं, कैरेक्टर की बारीकियों पर नहीं। धुरंधर आपकी पहली एक्शन फिल्म थी। इतने बड़े एक्शन सीक्वेंस करते वक्त क्या डर या घबराहट महसूस हुई? बहुत लगा एक्सपीरियंस था। खासकर गाड़ी के अंदर फाइट सीन में। मेरे दिमाग में यही चलता रहता था कि गलती से रणवीर सिंह या अक्षय सर को लग गई तो? मैं अपने पंचेस होल्ड कर रहा था। लेकिन उन्होंने समझाया कि कैसे फुल फोर्स दिखाना है, बिना किसी को चोट पहुंचाए। आदित्य सर और पूरी टीम ने मुझे इस पूरे प्रोसेस में गाइड किया। इतने बड़े स्टार्स के साथ काम करते हुए नर्वसनेस रहती है? नर्वसनेस हमेशा रहती है और रहनी भी चाहिए। एक्टर के तौर पर डर रहता है कि कहीं डायलॉग फंबल न हो जाए।भले ही अब डिजिटल हो गया है, लेकिन फिल्म रोल वाली मेंटालिटी अभी भी दिमाग में रहती है कि गलती हुई तो टाइम और पैसा वेस्ट हो जाएगा। लेकिन रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल किसी ने भी मुझे कभी नर्वस महसूस नहीं होने दिया। सबका मकसद यही था कि हर किसी का काम अच्छे से निकले। रिलीज से पहले फिल्म को लेकर बॉयकॉट और प्रोपेगेंडा की बातें हुईं। आपने इसे कैसे लिया? मुझे सिर्फ ये डर था कि लोग फिल्म देखे बिना उसे खारिज न कर दें। अगर आप इंडिया-पाकिस्तान जैसे विषय पर फिल्म बनाएंगे, तो पॉलिटिकल अंडरटोन आएगा ही। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप किसी कम्युनिटी के खिलाफ हैं। फिल्म में कहीं नहीं कहा गया कि मुसलमान गलत हैं या पाकिस्तान के लोग बुरे हैं। हमने सिर्फ उस सिस्टम को दिखाया है जिसने आतंकवाद को बढ़ावा दिया। रिलीज के बाद जनता के प्यार ने सब साफ कर दिया। धुरंधर: द रिवेंज के पार्ट टू से आप किस तरह की उम्मीदें रखते हैं? अगर पार्ट वन ने लगभग 1300 करोड़ कमाए हैं, तो मैं चाहता हूं पार्ट टू 2000 करोड़ कमाए। जिन्हें पार्ट वन का एक्शन पसंद आया है, उन्हें पार्ट टू और भी ज्यादा पसंद आएगी। 19 मार्च को धुरंधर: द रिवेंज की रिलीज टॉक्सिक से क्लैश कर रही है। आप इस टकराव को किस तरह देखते हैं? ये इंडियन सिनेमा के लिए अच्छा है। दर्शकों के पास चॉइस है। मैं चाहता हूं दोनों फिल्में चलें। अगर ऐसी फिल्में हिट होंगी, तो ऐसी कहानियां और बनेंगी। आखिर में फायदे में ऑडियंस ही है।
जया बच्चन और राजेश खन्ना के बीच झगड़ा हुआ था:अमिताभ बच्चन को लेकर बहस हुई, फिल्म की शूटिंग रुक गई थी
फिल्म ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना और जया बच्चन के बीच अमिताभ बच्चन को लेकर झगड़ा हो गया था, जिसके चलते कुछ समय के लिए फिल्म की शूटिंग भी रुक गई थी। दरअसल, एक्टर राजू श्रेष्ठ, जिन्हें मास्टर राजू के नाम से जाना जाता है, ने हाल ही में फिल्म ‘बावर्ची’ से जुड़ा किस्सा शेयर किया। इस फिल्म में उन्होंने बाल कलाकार के रूप में काम किया था और उनके साथ राजेश खन्ना भी थे। सिद्धार्थ कन्नन से बातचीत में राजू ने कहा कि यह घटना बहुत पुरानी है, इसलिए उन्हें पूरी बात साफ-साफ याद नहीं, लेकिन इतना याद है कि बहस के कारण शूटिंग रोकनी पड़ी थी। उनके अनुसार, झगड़ा अमिताभ बच्चन को लेकर हुआ था। जया जी, अमिताभ जी की अच्छी दोस्त थीं और उस समय अमिताभ, ऋषिकेश मुखर्जी के भी करीब थे तथा उनके साथ फिल्म कर रहे थे। राजेश खन्ना को इस बात से परेशानी थी। राजू ने कहा कि राजेश खन्ना ने सेट पर जया जी से अमित जी के खिलाफ कुछ कहा था, जिसकी वजह से जया जी अपसेट हो गई थीं। उन्होंने कहा था, “तुम कहां इससे दोस्ती कर रही हो? इसका क्या होने वाला है? मैं राजेश खन्ना हूं।” कुछ तो हुआ, और कुछ समय के लिए शूटिंग रुक गई थी। कुछ बातचीत हुई, और जया जी मेकअप रूम में चली गई थीं। बता दें कि 1973 में अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘जंजीर’ रिलीज हुई। इसके बाद ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘नमक हराम’ जैसी फिल्मों ने अमिताभ को उस समय का सबसे बड़ा सुपरस्टार बना दिया और धीरे-धीरे स्टारडम का रुख राजेश खन्ना से अमिताभ बच्चन की ओर मुड़ गया। राजू ने यह भी बताया कि अक्षय कुमार एक बार राजेश खन्ना के घर पहुंचे थे। उस समय राजेश खन्ना घर में ऊपर अपने कमरे में मौजूद थे। राजू के अनुसार, जब किसी ने उन्हें बताया कि अक्षय कुमार उनसे मिलने आए हैं, तो राजेश खन्ना ने कथित तौर पर कहा, “मैं उसका ससुर हूं, वो मेरा ससुर नहीं है। वो मेरे पास आएगा। मैं क्यों जांऊ?”
मुंबई पुलिस ने फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कानून महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह फायरिंग जुहू में स्थित रोहित शेट्टी की बिल्डिंग पर हुई थी। समाचार एजेंसी PTI को एक अधिकारी ने बताया, “कुछ आरोपी पहले से ही गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। इसलिए इस केस में MCOCA की धाराएं लगाई गई हैं।” क्या है MCOCA?बता दें कि महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA), 1999 संगठित अपराध और अपराध सिंडिकेट पर कड़ी कार्रवाई के लिए बनाया गया कानून है। धारा 3 के तहत संगठित अपराध, साजिश, मदद या सिंडिकेट की सदस्यता पर सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें आजीवन कारावास तक शामिल हो सकता है। धारा 4 बेनामी या अपराध से अर्जित संपत्ति पर दंड और कुर्की की अनुमति देती है। धारा 9 विशेष अदालतों को सुनवाई का अधिकार देती है। धारा 18 पुलिस के सामने दिए बयान को सबूत मानती है। धारा 19 गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। धारा 23 में MCOCA लगाने से पहले वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी जरूरी है। जमानत कठिन और चार्जशीट के लिए 180 दिन तक समय मिल सकता है। रोहित शेट्टी की बिल्डिंग पर फायरिंग हुई थी बता दें कि 31 जनवरी की देर रात करीब 12:45 बजे जुहू इलाके में रोहित शेट्टी की नौ मंजिला बिल्डिंग की पहली मंजिल पर कम से कम पांच राउंड फायरिंग की गई थी। एक गोली बिल्डिंग के अंदर मौजूद जिम के कांच पर लगी। पुलिस ने अब तक मामले में आदित्य गायकी (19), सिद्धार्थ येनपुरे (20), समर्थ पोमाजी (18), स्वप्निल सकत (23) और असराम फसाले को गिरफ्तार किया है। इस मामले में लॉरेंस गैंग का सदस्य शुभम लोंकर वांटेड है। उसने कथित तौर पर फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी। कथित तौर पर शुभम लोंकर आरजू बिश्नोई नाम के अकाउंट की फेसबुक पोस्ट में लिखा गया था, सभी भाइयों को आज जो ये मुंबई में (शेट्टी टावर) फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग हुई है, उसकी जिम्मेदारी शुभम लोनकर, आरजू बिश्नोई, हरि बॉक्सर, हरमन संधू हम लेते हैं। हमने इसको बहुत बार मैसेज लगाया कि हमारे काम में दखल ना दे, लेकिन इसको समझ में नहीं आया। इसको ये छोटा सा ट्रेलर दिया है। अगर इसने आगे फिर हमारी बात नहीं समझी और हमारी बात नहीं मानी, तो अब घर के बाहर नहीं, अंदर इसके बेडरूम में गोली चलेगी, इसकी छाती पर। इसी पोस्ट में आगे लिखा था, और आगे बॉलीवुड को चेतावनी है कि टाइम रहते सुधर जाओ, नहीं तो बहुत बुरा हाल होगा। तुम्हारा बाबा सिद्दीकी से भी बुरा हाल करेंगे। हमने जिन-जिन लोगों को फोन कर रखा है, या तो टाइम रहते लाइन पर आ जाओ, वरना छिपने के लिए जगह कम पड़ जाएगी। और जितने भी हमारे दुश्मन हैं, तैयार रहो, जल्दी ही मुलाकात होगी तुमसे। नोट- एक ही था, एक ही है और एक ही रहेगा लॉरेंस बिश्नोई गैंग। कौन है शुभम लोंकर और आरजू बिश्नोई?शुभम लोंकर लॉरेंस गैंग का एक प्रमुख की ऑपरेटिव माना जाता है। शुभम एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या (अक्टूबर 2024) का मुख्य संदिग्ध और साजिशकर्ता है। उसने फेसबुक पर उस हत्या की जिम्मेदारी भी ली थी। वहीं, आरजू बिश्नोई को गैंग का एक सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है, जो सोशल मीडिया और धमकियों के जरिए गैंग की गतिविधियों को संचालित करने में मदद करता है।
मुंबई पुलिस ने फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग के मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कानून महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह फायरिंग जुहू में स्थित रोहित शेट्टी की बिल्डिंग पर हुई थी। एक अधिकारी ने बताया, “कुछ आरोपी पहले से ही गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। इसलिए इस केस में MCOCA की धाराएं लगाई गई हैं।” क्या है MCOCA?बता दें कि महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA), 1999 संगठित अपराध और अपराध सिंडिकेट पर कड़ी कार्रवाई के लिए बनाया गया कानून है। धारा 3 के तहत संगठित अपराध, साजिश, मदद या सिंडिकेट की सदस्यता पर सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें आजीवन कारावास तक शामिल हो सकता है। धारा 4 बेनामी या अपराध से अर्जित संपत्ति पर दंड और कुर्की की अनुमति देती है। धारा 9 विशेष अदालतों को सुनवाई का अधिकार देती है। धारा 18 पुलिस के सामने दिए बयान को सबूत मानती है। धारा 19 गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। धारा 23 में MCOCA लगाने से पहले वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी जरूरी है। जमानत कठिन और चार्जशीट के लिए 180 दिन तक समय मिल सकता है। रोहित शेट्टी की बिल्डिंग पर फायरिंग हुई थी बता दें कि 31 जनवरी की देर रात करीब 12:45 बजे जुहू इलाके में रोहित शेट्टी की नौ मंजिला बिल्डिंग की पहली मंजिल पर कम से कम पांच राउंड फायरिंग की गई थी। एक गोली बिल्डिंग के अंदर मौजूद जिम के कांच पर लगी। पुलिस ने अब तक मामले में आदित्य गायकी (19), सिद्धार्थ येनपुरे (20), समर्थ पोमाजी (18), स्वप्निल सकत (23) और असराम फसाले को गिरफ्तार किया है। इस मामले में लॉरेंस गैंग का सदस्य शुभम लोंकर वांटेड है। उसने कथित तौर पर फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी। कथित तौर पर शुभम लोंकर आरजू बिश्नोई नाम के अकाउंट की फेसबुक पोस्ट में लिखा गया था, सभी भाइयों को आज जो ये मुंबई में (शेट्टी टावर) फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग हुई है, उसकी जिम्मेदारी शुभम लोनकर, आरजू बिश्नोई, हरि बॉक्सर, हरमन संधू हम लेते हैं। हमने इसको बहुत बार मैसेज लगाया कि हमारे काम में दखल ना दे, लेकिन इसको समझ में नहीं आया। इसको ये छोटा सा ट्रेलर दिया है। अगर इसने आगे फिर हमारी बात नहीं समझी और हमारी बात नहीं मानी, तो अब घर के बाहर नहीं, अंदर इसके बेडरूम में गोली चलेगी, इसकी छाती पर। इसी पोस्ट में आगे लिखा था, और आगे बॉलीवुड को चेतावनी है कि टाइम रहते सुधर जाओ, नहीं तो बहुत बुरा हाल होगा। तुम्हारा बाबा सिद्दीकी से भी बुरा हाल करेंगे। हमने जिन-जिन लोगों को फोन कर रखा है, या तो टाइम रहते लाइन पर आ जाओ, वरना छिपने के लिए जगह कम पड़ जाएगी। और जितने भी हमारे दुश्मन हैं, तैयार रहो, जल्दी ही मुलाकात होगी तुमसे। नोट- एक ही था, एक ही है और एक ही रहेगा लॉरेंस बिश्नोई गैंग। कौन है शुभम लोंकर और आरजू बिश्नोई?शुभम लोंकर लॉरेंस गैंग का एक प्रमुख की ऑपरेटिव माना जाता है। शुभम एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या (अक्टूबर 2024) का मुख्य संदिग्ध और साजिशकर्ता है। उसने फेसबुक पर उस हत्या की जिम्मेदारी भी ली थी। वहीं, आरजू बिश्नोई को गैंग का एक सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है, जो सोशल मीडिया और धमकियों के जरिए गैंग की गतिविधियों को संचालित करने में मदद करता है।
फिल्म धुरंधर की सिंगर जैस्मिन सैंडलस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने कॉन्सर्ट के बीच में गाना रोक देती हैं, क्योंकि उन्हें दिखता है कि कुछ पुरुष महिलाओं के एक ग्रुप को परेशान कर रहे हैं। यह क्लिप 7 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए जैस्मिन सैंडलस के हालिया कॉन्सर्ट की है। वीडियो में जैस्मिन पहले गाना शुरू करती हैं, फिर अचानक कहती हैं, “सिक्योरिटी, प्लीज इन दो लड़कों को बाहर निकालिए। ये लड़कियां को परेशान कर रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने पंजाबी में भीड़ से कहा, “मैं तब तक परफॉर्म नहीं करूंगी, जब तक लड़कियां मेरे कॉन्सर्ट में सेफ महसूस नहीं करतीं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे ही स्टेज पर घूमती रहूंगी, जब तक समस्या हल नहीं हो जाती।” इस पर दर्शकों ने जोरदार तालियों और चीयर के साथ उनको सपोर्ट किया। वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने पर जैस्मिन की तारीफ की। इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने लिखा - “जबरदस्त… सच्ची शेरनी, महिला सशक्तिकरण।” दूसरे ने कहा - “आपके लिए बहुत इज्जत है।” एक अन्य यूजर ने लिखा - “जैस्मिन सैंडलस, बहुत सही।” वहीं, एक यूजर ने यह भी कहा - “भाई, वो सच में क्वीन है।” बता दें कि जैस्मिन ने हाल ही में आदित्य धर की फिल्म धुरंधर में दो गानों को अपनी आवाज दी है। जैस्मिन ने फिल्म धुरंधर में दो प्रमुख एक फिल्म का टाइटल ट्रैक (हनुमानकाइंड के साथ) और दूसरा ट्रैक 'शरारत' गाने गाए हैं। इस कॉन्सर्ट में आयशा खान भी उनके साथ थीं। आयशा खान ने स्टेज पर कहा, “स्टेज पर आकर मैं सारे स्टेप्स भूल गई, लेकिन यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। मैं हमेशा जैस्मिन से कहती हूं, वह भगवान की खास संतान हैं।”
फिल्म मर्दानी 3 ने बॉक्स ऑफिस पर दूसरे मंगलवार 1.60 करोड़ रुपए नेट कमाते हुए भारत में कुल 40 करोड़ रुपए नेट का आंकड़ा पार कर लिया है। यशराज फिल्म्स की इस फिल्म में रानी मुखर्जी मुख्य भूमिका में हैं। बता दें कि फिल्म ने रिलीज के दूसरे हफ्ते में भी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। दूसरे शुक्रवार को 2.15 करोड़, शनिवार को 3.85 करोड़ और रविवार को 4.55 करोड़ रुपए की कमाई की हुई है। दूसरे सोमवार को 1.30 करोड़ और मंगलवार को 1.60 करोड़ रुपए नेट कलेक्शन हुआ। पहले हफ्ते में फिल्म ने शुक्रवार 4.00 करोड़, शनिवार 6.00 करोड़ और रविवार 7.25 करोड़ की कमाई की थी। इसके बाद सोमवार 2.40 करोड़, मंगलवार 2.70 करोड़, बुधवार 2.20 करोड़ और गुरुवार 2 करोड़ रुपए का कलेक्शन रहा। कुल मिलाकर 12 दिनों में फिल्म 40 करोड़ रुपए नेट तक पहुंच गई। ओपनिंग डे पर फिल्म ने 4 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। यह मर्दानी फ्रेंचाइजी और रानी मुखर्जी की सोलो फिल्मों में सबसे बड़ी ओपनिंग मानी जा रही है। मर्दानी 3 की रिलीज के साथ रानी मुखर्जी ने हिंदी सिनेमा में अपने 30 साल भी पूरे किए हैं। मर्दानी का पहला पार्ट 2014 में रिलीज हुआ था फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है और निर्माण आदित्य चोपड़ा ने किया है। मर्दानी का पहला पार्ट 22 अगस्त 2014 को रिलीज हुआ था, जिसका निर्देशन प्रदीप सरकार ने किया था। फिल्म ने भारत में करीब 35 से 36 करोड़ रुपए की नेट कमाई की, जबकि वर्ल्डवाइड कलेक्शन लगभग 59.55 करोड़ रुपए रहा। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म हिट साबित हुई। इसके बाद मर्दानी 2, 13 दिसंबर 2019 को रिलीज हुई। इस फिल्म का निर्देशन गोपी पुथरन ने किया था। मर्दानी 2 ने भारत में लगभग 47.51 करोड़ रुपए की नेट कमाई की और दुनियाभर में करीब 67.12 करोड़ रुपए का कारोबार किया। यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर हिट रही।
मुंबई की एक अदालत ने करण जौहर की याचिका पर उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। पॉपुलर इन्फ्लूएंसर और यूट्यबर कैरी मिनाटी उर्फ अजय नागर ने कुछ समय पहले ही फिल्ममेकर करण जौहर को रोस्ट करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था, जिस पर फिल्ममेकर ने आपत्ति जताते हुए उसके खिलाफ याचिका दायर की थी। 9 फरवरी को हुई सुनवाई ने कोर्ट ने वो वीडियो डिलीट करने और साथ ही इस तरह की वीडियोज पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश दिया है। करण जौहर की याचिका पर 9 फरवरी को मुंबई की एक अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान जज पांडुरंगा भोसले ने करण जौहर पर बने रोस्ट वीडियो को मानहानिकारक माना और इसे हस्तक्षेप योग्य पाया। सुनवाई के दौरान जज ने कहा, “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अजेय नागर और दीपक चार (कैरी मिनाटी चैनल के मैनेजर) ने वादी (करण जौहर) के खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए हैं और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया है। इन वीडियो को तुरंत हटाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन्हें फैलाने या दोबारा साझा करने वालों के खिलाफ भी रोक लगनी चाहिए। क्या है पूरा मामला कैरी मिनाटी एक पॉपुलर यूट्यूबर हैं, जिनके यूट्यूबर चैनल में 45.3 मिलियन सब्सक्राइबर हैं। वो अपने चैनल पर सेलेब्स और पॉपुलर पर्सनालिटी का मजाक उड़ाते या उनके स्पूफ वीडियो पोस्ट करते हैं। हाल ही में उन्होंने करण जौहर को मॉक करते हुए उनके पॉपुलर चैट शो कॉफी विद करण का स्पूफ वीडियो बनाया, जिसका टाइटल था कॉफी विद जलन। करण जौहर की तरह तैयार हुए कैरी मिनाटी ने वीडियो में बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए आपत्तिजनक कमेंट्स किए। इसमें करण के अलावा रेसलर खली, रणवीर सिंह और सलमान खान की भी नकल कर आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल की गई। वीडियो जारी होने के बाद करण जौहर ने इस पर आपत्ति जताते हुए मुंबई की एक कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश के बाद कैरी मिनाटी ने तो अपने चैनल ने वो वीडियो डिलीट कर दिया है, हालांकि अन्य चैनल्स पर अब भी वो वीडियो मौजूद है। जबकि आदेश में साफ कहा गया है कि वीडियो सर्कुलेट करने पर भी कार्रवाई हो सकती है।
9 करोड़ रुपए के चेक बाउंस केस में सरेंडर के बाद से एक्टर राजपाल यादव तिहाड़ जेल में बंद हैं। एक्टर इन दिनों आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और उनके पास लौटाने के लिए इतनी बड़ी रकम नहीं है। खबर सामने आने के बाद एक्टर सोनू सूद ने राजपाल यादव को फिल्म में साइन कर एक बड़ा साइनिंग अमाउंट दिया और साथ दूसरे प्रोड्यूसर से मदद के लिए आगे आने की अपील की थी। इसके बाद से ही राजपाल यादव को देशभर से आर्थिक मदद मिल रही है। फिल्म फेडरेशन ने प्रोड्यूसर्स से की मदद की अपील बुधवार को FWICE (फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉय्ज) ने सभी प्रोड्यूसर से अपील की है कि वो जल्द से जल्द राजपाल यादव की मदद करें। फेडरेशन की ओर से जारी प्रेस रिलीज में लिखा गया है, राजपाल यादव सिर्फ ऐसे प्रसिद्ध अभिनेता ही नहीं हैं जिन्होंने अपनी अभिनय प्रतिभा से लाखों लोगों को खुशी और हंसी दी है, बल्कि वे इंडस्ट्री के एक समर्पित सदस्य भी हैं, जिन्होंने दशकों की मेहनत और यादगार भूमिकाओं के जरिए भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। श्री राजपाल यादव इस समय गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जिनमें बढ़ती देनदारियां और कारावास भी शामिल हैं। यह स्थिति उनके चरित्र या ईमानदारी को नहीं दर्शाती, बल्कि उन हालात का परिणाम है जो नियंत्रण से बाहर हो गए। आगे लिखा गया है, ‘इस निर्णायक घड़ी में FWICE का मानना है कि यह समय है जब फिल्म इंडस्ट्री अपने एक साथी के प्रति एकजुटता, करुणा और सामूहिक जिम्मेदारी का परिचय दे। आर्थिक संकट किसी को भी प्रभावित कर सकता है, चाहे उसका कद या सफलता कुछ भी हो। एक बिरादरी के रूप में हमारी पहचान इस बात से तय होती है कि हम जरूरत के समय अपने सहयोगियों के साथ कैसे खड़े होते हैं।’ गुरमीत चौधरी ने भी की अपील एक्टर गुरमीत चौधरी ने राजपाल यादव का समर्थन कर लिखा है, मुझे यह देखकर बहुत दुख होता है कि इतने सीनियर और बेहद प्रतिभाशाली कलाकार राजपाल यादव इस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने हमें अनगिनत मुस्कानें, हंसी और यादगार पल दिए हैं। आज उन्हें हमारी जरूरत है। आगे गुरमीत लिखते हैं, एक साथी कलाकार और इंसान होने के नाते, मैं अपनी तरफ से हर संभव मदद करने के लिए आगे आ रहा हूं। मैं सभी प्रोड्यूसरों, डायरेक्टर्स और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से विनम्र अपील करता हूं कि हम सब मिलकर, इंसानियत और करुणा के साथ, कोई रास्ता निकालें। हमारी इंडस्ट्री एक परिवार है, और परिवार अपने लोगों को अकेला नहीं छोड़ता। सबसे पहले सोनू सूद ने की मदद सोनू सूद ने X और इंस्टाग्राम स्टोरीज पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, राजपाल यादव एक बहुत ही प्रतिभाशाली अभिनेता हैं जिन्होंने हमारी फिल्म इंडस्ट्री को कई यादगार और अविस्मरणीय काम दिए हैं। कभी-कभी जिंदगी अन्यायपूर्ण हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी में टैलेंट की कमी है, बल्कि समय कभी-कभी बहुत कठोर हो सकता है। वह मेरी फिल्म का हिस्सा होंगे और मेरा मानना है कि यह वह समय है जब हम सभी प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और सहयोगी एक साथ खड़े हों। जो छोटा सा साइनिंग अमाउंट दिया जाएगा, जिसे भविष्य के काम के हिसाब से समायोजित किया जा सकता है, वह कोई दान नहीं है, बल्कि यह उनका सम्मान और गरिमा है। उन्होंने आगे कहा, ‘जब हमारे अपने में से कोई मुश्किल समय से गुजर रहा हो, तो इंडस्ट्री को उसे यह याद दिलाना चाहिए कि वह अकेला नहीं है। इसी तरह हम दिखा सकते हैं कि हम सिर्फ एक इंडस्ट्री नहीं, बल्कि एक परिवार हैं।’ तेज प्रताप यादव ने दी 11 लाख रुपए की मदद राजपाल यादव की मदद की घोषणा करते हुए राजनेता तेज प्रताप यादव ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, मुझे अभी मेरे बड़े भाई राव इंदरजीत यादव जी की पोस्ट के माध्यम से माननीय राजपाल यादव जी के परिवार की पीड़ा के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। इस अत्यंत कठिन समय में मैं और मेरा पूरा JJD (जन शक्ति जनता दल) परिवार, उनके शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदना और मजबूती से खड़ा है।मानवीय करुणा एवं सहयोग की भावना से, मैं JJD परिवार की ओर से ₹11,00,000 (ग्यारह लाख रुपए) की आर्थिक सहायता उनके परिवार को प्रदान कर रहा हूं। जेम्स टून म्यूजिक के ओनर राव इंद्रजीत सिंह यादव ने भी राजपाल यादव की मदद के लिए 1.11 करोड़ की आर्थिक सहायता दी है। उन्होंने न सिर्फ एक कलाकार, बल्कि एक इंसान के तौर पर राजपाल यादव का साथ दिया। साथ ही, उन्होंने देशवासियों से भी अपील की कि वे आगे आकर राजपाल यादव और उनके परिवार का सहयोग करें। सरेंडर से पहले राजपाल यादव ने कहा- मेरे पास पैसे नहीं चेक बाउंस केस में सरेंडर से पहले राजपाल यादव ने एक स्टेटमेंट में कहा था, क्या करूं? मेरे पास पैसे नहीं हैं। और कोई उपाय नजर नहीं आता। यहां हम सब अकेले हैं। कोई दोस्त नहीं है। मुझे इस संकट का सामना खुद ही करना होगा। क्यों जेल में बंद हैं राजपाल यादव? साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। ये फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। राजपाल यादव समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल यादव ने जो चेक कंपनी को दिए थे वो बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टी के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया। साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने उच्च अदालत में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था।
बॉलीवुड एक्टर श्रेयस तलपड़े और 12 अन्य सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में शिकायत दर्ज हुई है। आरोप हैं कि श्रेयस तलपड़े ने निवेश के नाम पर एक व्यक्ति से लाखों की ठगी की गई है। एएनाई की रिपोर्ट के अनुसार, 10 फरवरी को श्रेयस तलपड़े समेत अन्य के खिलाफ मैनपुरी के भोगांव थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है। भोगांव के रहने वाले शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक्टर और उनके साथियों ने निवेश का झासा देकर उनसे लाखों रुपए की ठगी की है। शिकायत के अनुसार, एक्टर ने भोगांव के मोहल्ला मिश्राना में मुंबई की एक बैंक ब्रांच खोलने और उसमें इन्वेस्ट करने के लिए कई गांव वालों से पैसे लिए, हालांकि बाद में सामने आया कि जिस बैंक का जिक्र किया गया था वो फर्जी है। शिकायत मिलने के बाद कोर्ट ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। शिकायत में श्रेयस तलपड़े के अलावा समीर अग्रवाल, सानिया अग्रवाल, आरके शेट्टी, संजय मुदगिल, शबाब हुसैन, नरेंद्र नेगी, पंकज अग्रवाल, सुप्रिया, अनुज जैन, अजय श्रीवास्तव और अरविंद त्रिपाठी के नाम भी शामिल हैं। शिकायत में श्रेयस तलपड़े को मार्केटिंग एडवाइज बताया गया है। श्रेयस तलपड़े के खिलाफ पहले भी हुईं धोखाधड़ी की शिकायत इस मामले से पहले साल 2025 में भी श्रेयस तलपड़े का नाम एक धोखाधड़ी मामले में सामने आ चुका है। बीते साल मितली गांव की बबली ने श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ समेत 22 लोगों के खिलाफ करोड़ों की धोखाधड़ी करने पर शिकायत दर्ज करवाई थी। आरोप थे कि एक ऐसी कंपनी के ब्रांड एंबेसेडर थे, जिसने पैसे दोगुने करने की लालच देकर 500 लोगों से धोखाधड़ी की है। 2025 में ही श्रेयस तलपड़े का नाम एक चिटफंड मामले में भी सामने आया था और उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में शिकायत दर्ज हुई थी।
मंगलवार को बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह को जान से मारने की धमकी दी गई थी, जिसके बाद अब सलमान खान के रिश्तेदार को करोड़ों रुपए न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई है। ये घटना मगंलवार की बताई जा रही है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, सलमान खान के करीबी रिश्तेदार को ईमेल के जरिए धमकी दी गई है। मेल में साफ लिखा है कि अगर करोड़ों रुपयों की मांग पूरी नहीं की जाती तो उन्हें जान का खतरा होगा। फिलहाल सलमान खान के किस रिश्तेदार को धमकी मिली है ये साफ नहीं है, हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका वो रिश्तेदार फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ है और एक एक्टर है। फिलहाल इस मामले में अब तक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की गई है। रणवीर सिंह को व्हॉट्सएप वॉइस नोट से मिली जरिए सलमान खान के रिश्तेदार से पहले मंगलवार को रणवीर सिंह को धमकी मिली है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रणवीर को ये धमकी व्हॉट्सएप में वॉइस नोट के जरिए भेजी गई है, जिसमें कहा गया है कि अगर करोड़ों रुपए नहीं दिए जाते तो एक्टर को जान का खतरा होगा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने रणवीर के बांद्रा स्थित घर की सिक्योरिटी बढ़ा दी है। इसके साथ ही मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने वॉइस नोट भेजने वाले शख्स की तलाश शुरू कर दी है। उस शख्स ने भी खुद को लॉरेंस गैंग का सदस्य बताया था। रोहित शेट्टी फायरिंग केस से कनेक्शन की जांच धमकियों के इन मामलों से ठीक पहले 31 जनवरी को डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर के बाहर 4 राउंड फायरिंग की गई थी। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रणवीर सिंह को मिली धमकी का कोई सीधा संबंध रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग की घटना से है या यह डर फैलाने की साजिश है। टारगेट में थे रोहित शेट्टी निर्देशक रोहित शेट्टी के मुंबई स्थित घर के बाहर 31 जनवरी को पांच राउंड फायरिंग की घटना सामने आई थी, जिसके बाद से मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि इस फायरिंग में रोहित शेट्टी ही हमलावरों का मुख्य टारगेट थे। इस मामले में पुलिस ने 5 फरवरी को आरोपी आसाराम फसाले को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच के मुताबिक, आसाराम फसाले पिछले चार वर्षों से गैरेज मैकेनिक के तौर पर काम कर रहा था और लॉरेंस गैंग से जुड़ा हुआ था। वह गैंग के मास्टरमाइंड शुभम लोंकर के निर्देश पर हथियारों की सप्लाई करता था। इस केस में पहले से गिरफ्तार चार आरोपियों में से आसाराम फसाले की सीधी पहचान स्वप्निल सकट से थी, जो शुभम लोंकर के जरिए कराई गई थी। बताया जा रहा है कि लोंकर के निर्देश पर फसाले ने ही सकट को हथियार मुहैया कराए थे, जिन्हें बाद में एक अज्ञात शूटर तक पहुंचाया गया। इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल फायरिंग की घटना में किया गया। क्राइम ब्रांच को यह भी जानकारी मिली है कि आसाराम के गैंग से जुड़े होने की भनक उसके कुछ करीबी लोगों को थी। हालांकि, वे लोग कौन हैं और क्या उनका भी लॉरेंस गैंग से कोई सीधा कनेक्शन है, इस एंगल से पुलिस अब जांच कर रही है।
पंजाब पुलिस ने ड्रग्स-गैंगस्टरों के खिलाफ शुरू किए ऑपरेशन प्रहार-2 में पंजाबी सिंगर परमजीत कौर पम्मी को भाई के साथ अरेस्ट कर लिया। उनसे 8 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। अब दोनों जेल भेज दिए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद सिंगर पम्मी सुर्खियों में आ गई। पम्मी पहले स्टेज शो करती थी। कुछ गाने भी रिलीज हुए। मगर, कोरोना काल में उसका सारा काम चौपट हो गया। इनकम बंद हुई तो वह अपनी मां-बहन के नशा तस्करी के धंधे में उतर गई। इसके बाद ड्रग ओवरडोज से युवक की मौत को लेकर गिरफ्तार हुई और जेल गई। जब वह बाहर निकली तो सुधरने के बजाय सिंगिंग छोड़ फिर से नशा तस्करी के धंधे में उतर आई। उसने अपने भाई को भी इसमें शामिल कर लिया। इस दौरान ब्रेकअप हुआ तो उसने शादी नहीं की। लुधियाना की रहने वाली परमजीत पम्मी सिंगर से तस्कर कैसे बनी, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पम्मी के सिंगर से तस्कर बनने की पूरी कहानी जानिए… पम्मी का परिवार करता रहा नशा तस्करीपरमजीत पम्मी लुधियाना के माछीवाड़ा साहिब स्थित रहीमाबाद खुर्द की रहने वाली है। पम्मी पंजाबी सिंगर के तौर पर अपना करियर डेवलप कर रही थी। वहीं दूसरी तरफ उसका परिवार नशा तस्करी के धंधे में शामिल हो गया। पम्मी की मां व बहन पर नशा तस्करी के तीन-तीन मामले दर्ज हैं। वहीं पम्मी की बहन बेअंत कौर पर तो हत्या का मामला भी दर्ज हो चुका है। पम्मी की बहन बेअंत कौर ने परिवार में सबसे पहले नशा तस्करी का काम शुरू किया। उस समय पम्मी पूरी तरह से सिंगिंग की दुनियां में व्यस्त थी। बेअंत कौर और उसकी मां पर 17 अगस्त 2018 में पहला पर्चा दर्ज हुआ। दूसर पर्चा 28 फरवरी 2020 में दर्ज हुआ। कोविड में स्टेज प्रोग्राम बंद हुए तो तस्करी में लगीपम्मी ने बताया कि कोविड के दौरान स्टेज शो व अखाड़े लगने बंद हो गए। जिससे उसकी आमदनी पूरी तरह से बंद हो गई। परिवार पर डिपेंड थी तो बहन ने उसे भी नशा तस्करी करने को कहा। कोविड के दौरान पम्मी की बहन के साथ उसकी मां ने भी नशा तस्करी करनी शुरू कर दी। इसी बीच आर्थिक संकट से गुजर रही पम्मी भी मां व बहन के साथ नशा तस्करी करने लगी। परमजीत कौर पम्मी की बहन बेअंत कौर ने कुछ समय पहले ही अपने घर में नशा देकर युवक को मौत के घाट उतार दिया था। बेअंत के घर जब टीका लगाने से युवक की मौत हुई थी तो शव घर के बाहर फेंक दिया था। पुलिस ने कत्ल केस में बेअंत कौर को गिरफ्तार किया था। बेअंत कौर के खिलाफ 19 जुलाई 2022 में हत्या का मामला दर्ज हुआ और वो गिरफ्तार हो गई। ओवरडोज से युवक की मौत हुई तो जेल जाना पड़ामाछीवाड़ा पुलिस का कहना है कि जब पम्मी की बहन जेल गए तो उसने नशा तस्करी के कारोबार को संभाला। मां के साथ मिलकर पम्मी नशा तस्करी करते रहे। माछीवाड़ा में 30 जुलाई 2023 को एक युवक की नशे की ओवरडोज के कारण मौत हो गई थी। पुलिस ने पहले अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच की तो कुलदीप नाम के युवक पर नशा देने के आरोप लगे। कुलदीप ने नशा पम्मी से लिया था। पुलिस ने तब पम्मी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया और पम्मी व कुलदीप को गिरफ्तार किया। जेल से छूटने के बाद फिर नशा बेचने लगीकुछ महीने जेल में रहने के बाद पम्मी जमानत पर बाहर आई और उसने फिर से नशा तस्करी का काम शुरू कर दिया। पम्मी चिट्टा लेकर युवकों को देती और वो आगे सप्लाई करते थे। पम्मी ने नशे के कारोबार को अब पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया था। इस काम में अब उसने अपने भाई को भी शमिल कर दिया। सोमवार को प्रहार-2 के दौरान पुलिस ने माछीवाड़ा साहिब में कोहाड़ा रोड स्थित अडियाना बस स्टैंड के पास पम्मी व उसके भाई सरवन को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया। पम्मी की पर्सनल लाइफ के बारे में जानिए… जालंधर दूरदर्शन पर पम्मी का गीत हुआ था प्रसिद्ध परमजीत पम्मी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उसका एक गाना ' कई दिन हो गए तैनू फोन मैं मिलौंदी ' जालंधर दूरदर्शन पर चलने के बाद वो काफी प्रसिद्ध हुआ था और उस के बाद एक गायक के साथ मिलकर उसने कई अखाड़े भी लगाए व उसी गायक के साथ एक धार्मिक एल्बम और कई पंजाबी गाने भी गाए। कोविड से पहले पम्मी ने एक धार्मिक एल्बम रिकार्ड की गई थी। एल्बम रिलीज होने से पहले कोविड शुरु हो गया और कंपनी ने वो एल्बम रिलीज नहीं की। जिसके कारण उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा। प्यार में भी धोखा मिला तो नहीं की शादीपम्मी ने बताया था कि गायकी दौरान उसका एक युवक के साथ अफेयर भी चला था और वो युवक एक अच्छा दोस्त भी बन गया था परन्तु यह दोस्ती अधिक समय तक ना चली और एक साल के बाद ही ब्रेकअप हो गया। माछीवाड़ा साहिब के थाना तक भी यह मामला पहुंच गया था और हमने आपसी सहमति से दूरियां बना ली थी। मैंने कभी विवाह भी नहीं किया। पम्मी और बेअंत कौर से भी इनकी एक छोटी बहन भी है, जो के घर में पीर बाबा की चौंकी लगाया करती थी। जिस कारण कई लोग उनके घर में माथा टेकने भी आते थे।
बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के अरुण टिक्कू मर्डर केस में अब तक आपने पढ़ा कि 7 अप्रैल 2012 को समर्थ आंगन बिल्डिंग से निकलते हुए एक शख्स अरुण टिक्कू की हत्या होते देखता है और पुलिस को इन्फॉर्म करता है। अरुण टिक्कू की हत्या के बाद उनका बेटा एक्टर अनुज टिक्कू लापता हो जाता है, जिससे पुलिस का उन पर शक बढ़ जाता है। जब अनुज की गिरफ्तारी होती है तो वो बताते हैं कि वो दोस्त करण सूद के साथ गोवा गए थे और उनके पिता रेंटल एग्रीमेंट देखने उसी दिन दिल्ली से मुंबई आए थे। घर में रेनोवेशन चल रहा था। 2 पुताई करने आए शख्स वहां मौजूद थे, जो उनके दोस्त करण सूद के नौकर थे। जांच में सामने आया कि जिस करण सूद को अनुज दोस्त कह रहे थे, वो असल में कुख्यात गैंगस्टर है, जिसे पहले डबल मर्डर के आरोप में उम्रकैद हुई थी। अनुज पुलिस को बताते हैं कि करण से उनकी मुलाकात एक्ट्रेस सिमरन सूद ने करवाई थी। सिमरन से उनसे कहा था कि करण बडे़ होटेलियर हैं और उनके भाई हैं। करण और सिमरन के कहने पर वो अपना फ्लैट एक जर्मन महिला को किराए पर दे रहे थे और पिता रेंट एग्रीमेंट देखने ही मुंबई आए थे। अरुण टिक्कू हत्याकांड के पार्ट-2 में जानिए आगे की कहानी- डबल मर्डर केस में विजय पालांडे को उम्रकैद की सजा हुई थी, जबकि सिमरन को तब छोड़ दिया गया था। करीब 2 साल तक जेल में रहने के बाद विजय पेरोल पर बाहर आए और भाग निकले। विजय पालांडे इस मामले में भी कस्टडी से भागने की नाकाम कोशिश कर चुके थे, जिससे पुलिस ने उन्हें कड़ी निगरानी में रखी और सख्ती से पूछताछ की। 12 अप्रैल को हुई पूछताछ में विजय पालांडे ने बेहद शॉकिंग खुलासे किए, जिससे न सिर्फ अरुण टिक्कू बल्कि एक प्रोड्यूसर की गुमशुदगी के तार भी जुड़े थे। विजय के इकबाल-ए-जुर्म के अनुसार, वो अनुज टिक्कू की प्रॉपर्टी हथियाने के बाद उनकी हत्या करना चाहता था। 2 साल पहले सिमरन ने अनुज से दोस्ती की और फिर विजय को करण सूद बताकर उससे मिलवाया। दोनों ने उन्हें अपनी रईसी की कहानियां सुनाईं और अनुज से गहरी दोस्ती कर ली। वो जिस विदेशी महिला को अनुज का फ्लैट किराए पर दिलवा रहे थे, वो विजय की ही पत्नी थी। प्लान के अनुसार, दोनों अनुज से प्रॉपर्टी के पेपर्स साइन करवाते और फिर उनकी गोवा ले जाकर हत्या करते। लेकिन इसी बीच उन्हें पता चला कि अनुज के पिता अरुण टिक्कू उनकी अचानक बढ़ती दोस्ती पर शक करने लगे थे और रेंटल एग्रीमेंट देखना चाहते थे। विजय ये भी जान चुका था कि अरुण टिक्कू डॉक्यूमेंटेशन के पक्के हैं और उनके रहते प्रॉपर्टी ट्रांसफर करना मुश्किल है। ऐसे में विजय ने अनुज के पिता अरुण को ये कहते हुए मुंबई बुलाया कि उनके बेटे ने बिना किराए के दो लोगों को फ्लैट में ठहराया हुआ है। विजय की बात सुनकर अरुण मुंबई आए थे। प्लान के तहते उसी रोज वो बेटे अनुज को अपने साथ गोवा ले गए और दूसरी तरफ फ्लैट में पिता की हत्या कर दी गई। अनुज टिक्कू पिता की हत्या के बाद उसी फ्लैट में रहे थे। तब तक क्राइम सीन को जस का तस ही रखा गया था। जब अनुज को पूछताछ के बाद छोड़ा गया तो वो उसी घर में रहे और उसी कमरे में सोए जहां पिता का कत्ल हुआ था। इस पर अनुज कहते हैं- घर में घुसते ही सब कुछ उलटा-पुलटा था। फ्रिज गिरा हुआ, मैट्रेस इधर-उधर, सोफे उलटे। बाथरूम में खून, टाइल्स टूटी हुई, दीवारों पर खून के छींटों के निशान। वो पूरा क्राइम सीन था। पुलिस ने जो लड़का मेरे साथ भेजा था, वो ये देखकर भाग गया। उसी क्राइम सीन में मैं रात को सोया। साल 2012 में उस समय के मशहूर क्राइम रिपोर्टर नीरज अग्रवाल केस को कवर कर रहे थे। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड के बाद अनुज की स्थिति ठीक नहीं थी। वो कहते हैं- ‘अनुज की हालत इतनी खराब थी कि वह पुलिस से भी ठीक से बात नहीं कर पा रहा था। अनुज एक बहुत ही सीधा‑सादा किस्म का लड़का था। उसकी दुनिया में दोस्त नहीं थे। वह उस तरह का इंसान नहीं था जो दो मिनट में किसी से दोस्ती कर ले। उसकी मानसिक स्थिति को आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता था। आप उसे स्ट्रीट‑स्मार्ट या बहुत दुनियादार भी नहीं कह सकते। यह बात उसके पिता मिस्टर टिक्कू जानते थे, हालांकि वह दिल्ली में रहते थे।’ आगे नीरज कहते हैं, ‘अनुज मुंबई एक्टिंग करने आया था, लेकिन इंडस्ट्री में उसकी नेटवर्किंग बहुत कमजोर थी। फिल्म इंडस्ट्री का उसूल है जितने ज्यादा लोग, उतनी ज्यादा संभावनाएं। यह कमी अनुज में थी, इसलिए उसे काम भी कम मिलता था।’ ‘उसके पास एक नीले रंग की मर्सिडीज कार भी थी, जिसे विजय पालांडे हथियाना चाहता था। उसे यह भी पता चला कि अनुज का अंधेरी में एक 2BHK फ्लैट है, जिसकी वैल्यू उस वक्त करीब ढाई‑तीन करोड़ या उससे ज्यादा थी। प्लान यह था कि फ्लैट किराए पर लेकर, कब्जा करके, फर्जी दस्तावेजों से उसे अपने या सिमरन के नाम ट्रांसफर कर दिया जाए और फिर बेचकर पैसा कमाया जाए।’अनुज टिक्कू की हत्या वाले दिन किया था एक प्रोड्यूसर का कत्ल अरुण टिक्कू हत्याकांड के कबूलनामे के बाद विजय ने पुलिस बयान में एक और हत्याकांड का भी खुलासा किया, जिसे उसने 7 अप्रैल को ही अंजाम दिया था। दरअसल, 5 अप्रैल को पुलिस को प्रोड्यूसर करण कक्कड़ के गुमशुदा होने की शिकायत मिली थी, जिनकी तलाश जारी थी। करण कक्कड़ एक अमीर बिजनेसमैन थे, जो फिल्मों में पैसे लगाना चाहते थे। इसकी खबर लगते ही सिमरन ने उन्हें टारगेट कर नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वो करण को बतौर प्रोड्यूसर एक फिल्म से जोड़ेंगी। 5 अप्रैल को मीटिंग का झांसा देकर सिमरन और विजय पालांडे उन्हें किराए के एक फ्लैट में ले गए और बंदी बना लिया। दोनों ने करण के अकाउंट से पैसे निकाले और क्रेडिट कार्ड से लाखों की शॉपिंग की। पूरे पैसे निकालने के बाद 7 अप्रैल को दोनों ने मिलकर करण कक्कड़ की गला काटकर हत्या कर दी। पुलिस बयान में विजय ने बताया कि हत्या से पहले उन्होंने करण कक्कड़ से पूछा कि उनका गला होश में काटा जाए या वो नींद की गोलियां खाना चाहेंगे। करण के कहने पर दोनों ने उन्हें 14 नींद की गोलियां खिलाईं और फिर बाथरूम में उनका गला काट दिया। दोनों ने लाश के टुकड़े किए और फिर उसे कुंभरली घाट में फेंक दिया। विजय की निशानदेही में पुलिस ने कुंभरली घाट से करण का कंकाल बरामद किया। विजय पालांडे के कबूलनामे के बाद सिमरन सूद को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया था। जब पुलिस ने सिमरन और विजय के जॉइंट बैंक लॉकर की जांच की तो उन्हें वहां अनुज टिक्कू का एक सुसाइड नोट भी मिला। नोट में अनुज की हैंडराइटिंग में उनके सिग्नेचर के साथ लिखा गया था- I, Anuj Tiku, am not happy with my life and I want to leave my body and go towards moksha. Nobody should be responsible for my death.”(“मैं अनुज टिक्कू अपने जीवन से निराश हूं और अपनी देह छोड़कर मोक्ष की ओर जाना चाहता हूं। मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं है।”) विजय ने बताया कि वो अनुज की हत्या के बाद ये सुसाइड नोट जारी करते, जिससे सबको लगता कि पिता की हत्या के बाद उन्होंने सुसाइड कर लिया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अनुज टिक्कू कहते हैं, ‘इनका प्लान था पहले मुझे मारना और फिर मेरे पिता को। लेकिन पापा के अचानक आ जाने से प्लान बदलना पड़ा। उस समय मेरी हालत ये थी कि मैं थोड़ा बहुत डोप लेता था। ये बात 6 तारीख की रात से कुछ दिन पहले की है। एक दिन उन्होंने मुझे बीयर पिलाई गई, जिसमें नशीली दवा मिलाई थी। मैं कभी बीयर पीकर उल्टी नहीं करता, लेकिन उस दिन मैंने उल्टी की, जबकि मैंने आधी बोतल से ज्यादा नहीं पी थी। वहीं उन्होंने नशे में मेरा हाथ पकड़कर वो लेटर लिखवाया। अगर कोई सच में डिप्रेस्ड होकर सुसाइड नोट लिखता, तो वो कमरे में कहीं पड़ा होता, बैंक लॉकर में क्यों मिलता?’ हीरोइन बनने के लिए मुंबई आईं थीं सिमरन फिर गैंगस्टर से बनी जोड़ी 1995 में सिमरन सूद एक डांस कॉम्पिटिशन के लिए मुंबई आई थीं। वो ये कॉम्पिटिशन तो नहीं जीतीं, लेकिन मॉडलिंग के प्रोजेक्ट्स मिलने के बाद वो मुंबई में ही रहने लगीं। एक पेज-3 पार्टी में सिमरन की मुलाकात विजय पालांडे से हुई और समय के साथ दोनों रिलेशनशिप में आ गए। विजय पालांडे से मुलाकात के बाद सिमरन की जिंदगी में लग्जरी की कोई कमी नहीं थी। वो अपनी ज्यादातर कमाई सिमरन पर खर्च करता था। उसकी कमाई का जरिया थी लूट और दो नंबर के काम। सिमरन ने उस समय कई प्लास्टिक सर्जरी करवाईं। साल 1997 में सिमरन ने बिजनेसमैन कहते हुए विजय की मुलाकात पेरेंट्स से करवाई और शादी की बात की। परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था, लेकिन इसके बावजूद दोनों ने 1997 में शादी कर ली। समय के साथ सिमरन भी विजय के प्लान्स में शामिल होने लगीं। डबल मर्डर केस में सिमरन बनीं भागीदार 1998 में विजय पालांडे मुंबई के कॉपर चिमनी रेस्टोरेंट में काम करता था। यहां उसने देखा कि अनूप दास अक्सर रेस्टोरेंट में आते हैं। अनूप एयर इंडिया के इंजीनियर थे, जिन्हें विजय ने टारगेट बनाया। प्लान के तहत विजय ने पहले खुद अनूप से दोस्ती की और फिर सिमरन को बहन बताते हुए उनसे मुलाकात करवाई। सिमरन ने उनसे जल्द ही नजदीकियां बढ़ा लीं, जिससे उनका घर आना-जाना भी बढ़ गया। अनूप के परिवार वाले भी सिमरन से परिचित थे। विजय जानता था कि अनूप की जुहू में प्रॉपर्टी है, जिसपर उनकी नजरें थीं। सिमरन ने एक रोज अनूप से कहा कि उनके पास मुंबई में रहने के लिए घर नहीं है, तो उसने अपना फ्लैट सिमरन को रहने दे दिया। सिमरन उस फ्लैट में विजय पालांडे के साथ रहने लगीं। फ्लैट मिलने के बाद सिमरन और विजय ने अनूप की हत्या की साजिश रची। 26 जनवरी 1998 को दोनों ने अनूप को एक बिजनेस मीटिंग के लिए महाबलेश्वर बुलाया था। अनूप बिना किसी को बताए महाबलेश्वर निकले, लेकिन इसके बाद से ही उनकी कोई खबर नहीं मिली। सिमरन और विजय ने उनका महाबलेश्वर के रास्ते में ही कत्ल कर उनकी लाश ठिकाने लगा थी। अनूप दास के पिता स्वराज रंजन ने बेटे के बारे में पता करने के लिए जब विजय पालांडे को कॉल किया तो जवाब मिला कि अनूप उनके साथ हैं, कुछ दिनों में लौट आएंगे। करीब एक हफ्ते बाद भी जब अनूप नहीं लौटे, तो स्वराज ने फिर विजय को कॉल किया। इस बार विजय ने कहा कि अनूप उनसे मिलना चाहते हैं और उन्हें महाबलेश्वर बुला रहे हैं। सिमरन और विजय का अनूप के घर में इस कदर आना-जाना था कि उनपर कभी किसी को शक नहीं हुआ। विजय से बात करने के तुरंत बाद ही स्वराज रंजन महाबलेश्वर पहुंचे। तब विजय और सिमरन ने बेटे से मिलने के बदले 7 लाख रुपए की डिमांड रख दी। स्वराज ने उन्हें 7 लाख ट्रांसफर भी किए, लेकिन दोनों ने इसके तुरंत बाद उनका भी कत्ल कर दिया। स्वराज रंजन की पत्नी ने उनकी और बेटे की मिसिंग कंप्लेंट दर्ज करवाई थी। जिसकी जांच में विजय पालांडे और सिमरन की गिरफ्तारी हुई। विजय पालांडे ने पुलिस कस्टडी में जुर्म कबूल कर लिया। उन्हें इस केस में उम्रकैद की सजा हुई, जबकि सिमरन को कुछ महीनों बाद ही छोड़ दिया गया था। विजय पालांडे 2 सालों तक जेल में रहा, लेकिन फिर पेरोल से भाग निकला। विजय से अलग होने के बाद सिमरन सूद फिर मॉडलिंग और एक्टिंग करियर में व्यस्त हो गईं। लेकिन 2005 में विजय ने फिर उनसे संपर्क किया। विजय पेरोल से भागने के बाद दुबई जाकर छिप गया। वहां उसने प्लास्टिक सर्जरी के जरिए हुलिया बदल लिया और फिर मुंबई आ गया। सिमरन स्ट्रगल करते हुए चंद रुपयों में गुजारा कर तंग आ चुकी थीं। ऐसे में विजय के लौटते ही उन्होंने फिर उसका साथ दिया। बिजनेसमैन गौतम वोरा की भी हत्या की रची साजिश विजय के मुंबई लौटते ही सिमरन ने 2005 में बिजनेसमैन गौतम वोरा को अपना अगला टारगेट बनाया। सिमरन ने गौतम को शादी के लिए राजी किया। प्लान था कि शादी के बाद सिमरन और विजय गौतम का कत्ल करेंगे, जिससे गौतम की सारी प्रॉपर्टी सिमरन को मिल जाती। हालांकि गौतम की मां इसके खिलाफ थीं, जिससे उनका प्लान टलता जा रहा था। विजय पालांडे ने कबूलनामे में बताया कि अनुज टिक्कू की हत्या के बाद वो गौतम का कत्ल करने वाले थे, लेकिन खुशकिस्मती से समय रहते उनके प्लान का पर्दाफाश हो गया। इस केस पर क्राइम जर्नलिस्ट नीरज अग्रवाल कहते हैं, सिमरन और विजय के बीच एक बहुत ही गजब और कमाल की केमिस्ट्री और हिस्ट्री थी। जब इन्हें घर किराए पर लेना होता था तो ये खुद को पति‑पत्नी बताते थे। और जब इन्हें खुद को मार्केट में प्लेस करना होता था, तो विजय पालांडे सिमरन को अलग‑अलग नामों से कभी सीमा, कभी किसी और नाम से अपनी बहन के रूप में इंट्रोड्यूस करता था। ये दोनों मिलकर बहुत सारे लोगों को ठग चुके थे और उनकी प्रॉपर्टीज हड़पने की योजनाएं बनाते थे। इसी सिलसिले में इनकी मुलाकात टिक्कू साहब के बेटे अनुज से हुई। इनके नेक्सस को कम से कम दस साल हो चुके थे। इनके टारगेट ज्यादातर फिल्म, एंटरटेनमेंट, मॉडलिंग और फैशन इंडस्ट्री से जुड़े लोग होते थे जो वल्नरेबल होते हैं और आसानी से भरोसा कर लेते हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक, अगर यह केस 2012 का है, तो इनका नेक्सस कम से कम दस साल या उससे भी ज्यादा पुराना था। ये लोग एक दशक से ज्यादा समय से इसी तरह की हरकतें कर रहे थे। इनका जो टार्गेटेड एरिया और टार्गेटेड पर्सन होते थे, वो ज्यादातर फिल्म इंडस्ट्री, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री, मॉडलिंग और फैशन से जुड़े लोग होते थे। अगर आपके सामने एक खूबसूरत लड़की बहन, पत्नी या प्रेमिका बनकर बैठी हो, तो कोई भी आसानी से भरोसा कर लेता है। इसी भरोसे का ये लोग फायदा उठाते थे। 14 सालों से जेल में है विजय पालांडे, सजा-ए-मौत की हुई मांग 1998 के डबल मर्डर, प्रोड्यसूर करण कक्कड़ और अरुण टिक्कू की मौत के आरोप में विजय पालांडे आज भी जेल में बंद है। उसके साथी धनंजय शिंदे और मनोज गजकोश भी जेल में हैं, हालांकि सिमरन को 3 साल की सजा के बाद छोड़ दिया गया है। अनुज कहते हैं, मुझे खुशी इस बात की है कि उज्जवल निगम 14 सालों से हमारा केस लड़ रहे हैं। वो डेथ पेनाल्टी की मांग कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि विजय पालांडे को डेथ पेनल्टी मिलेगी और तभी मुझे लगेगा कि मेरे पिता को इंसाफ मिला है। केस पर क्राइम जर्नलिस्ट नीरज अग्रवाल कहते हैं, यह पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश का उदाहरण है, जिसमें सिस्टम की कमजोरियां भी साफ नजर आती हैं। सबसे दुखद पहलू यही है कि इतने सबूत, गवाह और डॉक्यूमेंटेशन होने के बावजूद, सालों बाद भी मिस्टर टिक्कू और अनुज टिक्कू को पूरा न्याय नहीं मिल पाया। यह केस सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। (नोटः ये खबर एक्टर अनुज टिक्कू और मशहूर क्राइम जर्नलिस्ट नीरज अग्रवाल के इंटरव्यू और रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय …………………………………………………………….. पार्ट-1, एक्टर अनुज टिक्कू के घर में हुआ पिता का कत्ल:बाथरूम में खून से सनी लाश छोड़कर भागे कातिल, एक्ट्रेस-गैंगस्टर से जुड़े तार 7 अप्रैल 2012 की बात है … मुंबई के लोखंडवाला में एक हाईराइज अपार्टमेंट है, जिसका नाम समर्थ आंगन है। कई मंजिलों वाली इस इमारत में हजारों लोग रहते हैं। उस रात करीब 11 बजकर 30 मिनट पर हरंगद सिंह माइनी नाम के बिल्डिंग में रहने वाले शख्स अपने पिता के लिए दवाई लेने निकले थे। जैसे ही उन्होंने पार्किंग में खड़ी अपनी कार का दरवाजा खोला, तो उनकी नजर पहली मंजिल की खिड़की पर गई। एक हट्टा-कट्टा आदमी एक बुजुर्ग शख्स पर चाकू से हमला कर रहा था। बुजुर्ग खुद को बचाने की कोशिश में खिड़की से मदद मांग रहा था, तभी खिड़की के पर्दे की रॉड टूटकर गिरी। पूरी खबर पढ़िए… ……………………………………………………………….. पार्ट-1, फांसी के फंदे पर लटकी मिलीं तुनिषा शर्मा:एक्स बॉयफ्रेंड शीजान की हुई गिरफ्तारी, आरोप- इस्लाम कबूल करवाना चाहते थे 22 दिसंबर 2022 टीवी शो अलीबाबाःदास्तान ए काबुल चैप्टर-1 के सेट पर सभी शूटिंग शुरू करने की तैयारी कर रहे थे। शो की लीड एक्ट्रेस तुनीषा शर्मा भी तैयार थीं। कुछ देर बाद वो को-एक्टर और एक्स शीजान खान के मेकअप रूम में स्थित वॉशरूम गई। करीब 15 मिनट बीते, लेकिन तुनीषा बाहर नहीं आईं। शूटिंग में देर हो रही थी, तो सेट पर मौजूद लोगों ने मेकअप रूम में खटखटाना शुरू कर दिया। कोई जवाब नहीं मिल रहा था। जब दरवाजा तोड़ा गया तो तुनीषा की लाश फंदे पर लटकी मिली। एक्टर शीजान उन्हें गोद में उठाकर हॉस्पिटल पहुंचे, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। तुनीषा की मौत के बाद उनकी मां ने एक्टर शीजान पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। आरोप ये भी थे शीजान उन्हें जबरदस्ती इस्लाम कबूल करवाना चाहते थे। पूरी कहानी पढ़िए अगले मंगलवार-बुधवार, बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-5 तुनीषा शर्मा डेथ केस में। …………………………………………………………………….. भास्कर की नई सीरीज बॉलीवुड क्राइम फाइल्स की ये कहानियां भी पढ़िए- पार्ट-1, बालिका वधु एक्ट्रेस प्रत्युषा बोलीं- मैं बिकने नहीं आई:आखिरी कॉल में मां-बाप को गालियां दीं, फिर फंदे पर लटकी मिलीं 1 अप्रैल 2016, दोपहर करीब 12 बजे… प्रत्युषा बनर्जी, बॉयफ्रेंड एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज के साथ मुंबई के गोरेगांव की हार्मनी बिल्डिंग की सातवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 703 में रहती थीं। दोपहर में राहुल अपने काम से लोखंडवाला गए थे। कुछ देर बाद ही उन्होंने प्रत्युषा को कॉल किया तो वो जोर-जोर से रो रही थीं। थोड़ी कहासुनी होने के बाद प्रत्युषा ने कहा- वोह, राहुल राज, इगो अपने पास रखो, क्योंकि कुछ ही घंटों में, शायद मिनटों में, किसी को इगो दिखाने के लिए नहीं बचेगा। राहुल ने जवाब दिया- देखो, मैं तुमसे बस इतना बोल रहा हूं, खाली सुनो। प्रत्युषा ने बात काटते हुए कहा- मैं तुमसे इतना बोल रही हूं…. मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है। पूरी कहानी पढ़िए… पार्ट-2, मौत से पहले प्रत्युषा बनर्जी ने करवाया अबॉर्शन:बॉयफ्रेंड की एक्स ने की थी मारपीट, पोस्टमॉर्टम में शरीर में मिली 100ml शराब प्रत्युषा बनर्जी के दोस्तों ने जिस सलोनी शर्मा पर उनसे मारपीट के आरोप लगाए थे, उन्होंने पुलिस बयान में कबूला कि उन्होंने एक्ट्रेस को थप्पड़ मारा था, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वो और राहुल राज एक समय में रिलेशनशिप में थे, लेकिन प्रत्युषा की वजह से राहुल ने उन्हें छोड़ दिया। पूरी कहानी पढ़िए ………………………………………………………………………. पार्ट-1, एक्ट्रेस के घर से लापता हुए कास्टिंग डायरेक्टर नीरज ग्रोवर: एक कॉल से पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, कातिलों ने लाश के सामने बनाए शारीरिक संबंध मई 2008 की बात है उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी?’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस की रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया- ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ पूरी खबर पढ़िए… पार्ट-2, लाश के सामने एक्ट्रेस ने बनाए शारीरिक संबंध: मॉल से खरीदी चाकू, लाश के टुकड़े थैलियों में भरकर जंगल में जलाए, जानिए कैसे हुए हत्याकांड का खुलासा मारिया की बिल्डिंग के गार्ड ने पूछताछ में बताया कि मारिया 7 मई 2008 की शाम कुछ भारी बैग्स ले जाती दिखी थीं, उस समय उनके बॉयफ्रेंड जेरोम मैथ्यू भी साथ थे, जबकि पूछताछ में जेरोम ने कहा था कि वो मारिया की बिल्डिंग गए ही नहीं थे। नीरज की गुमशुदगी के करीब 2 हफ्ते बाद सख्ती करने पर मारिया ने कहा कि नीरज की हत्या हो चुकी है। जेरोम ने नीरज का कत्ल किया, फिर उन्होंने लाश के सामने एक्ट्रेस का रेप किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर लाश के टुकड़े किए और उन्हें ठिकाने लगाया। पूरी कहानी पढ़िए… ……………………………………………………………. पार्ट-1, फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए... पार्ट-2, जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं, उनके परिवार के 6 और लोग लापता हैं। एक साल तक लैला की कोई खबर नहीं मिली और फिर कश्मीर में एक बम ब्लास्ट हुआ, उस जगह के पास ही लैला की मां के नाम पर रजिस्टर्ड कार मिली। जांच में एक्ट्रेस लैला खान के सौतेले पिता परवेज टाक की गिरफ्तारी हुई। परवेज जांच टीम को फार्महाउस ले गया, जहां एक-एक कर 6 कंकाल बरामद किए गए। इनमें परिवार के पालतू कुत्ते का भी कंकाल था। 10 जुलाई 2012 को परवेज टाक को सदर्न मुंबई किला कोर्ट में पेश कर क्राइम ब्रांच ने कस्टडी ली। मामला गंभीर था, तो जांच टीम सख्ती करने से नहीं चूकी। हाथ-पैर बांधकर परवेज टाक को तबीयत से पीटा गया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर फार्महाउस से कंकाल निकाले गए। इससे पहले ही उसने फरवरी 2011 की रात की पूरी कहानी सुना दी थी। पूरी खबर पढ़िए...

