टीवी एक्टर विशाल आदित्य सिंह एक बार फिर रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी 15 में नजर आने वाले हैं। इससे पहले भी विशाल इस शो का हिस्सा रह चुके हैं और फाइनल तक पहुंचे थे। अब ‘डर का नया दौर’ थीम वाले इस सीजन में वह एक बार फिर शो में लौट रहे हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में विशाल ने अपने डर, संघर्ष, दिल टूटने के दर्द और जिंदगी के उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात की। सवाल: दूसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ में वापसी कर रहे हैं। इस बार कितना एक्साइटमेंट है?जवाब: यह शो ऐसा है जो आपके साथ रह जाता है। हमें थ्रिल और एक्शन बहुत पसंद है। जैसे स्पोर्ट्स में कोई मैच जीतने का एहसास आपके साथ रहता है, वैसे ही यह शो भी मेरे लिए वैसा ही है। सांप, बिच्छू, ऊंचाई... बचपन से मैंने बहुत चीजें फेस की हैं। शायद इसलिए मुझे यह शो और ज्यादा पसंद है। लोग कहते हैं कि डर का सामना करने से डर खत्म हो जाता है। यह सिर्फ किताबों में अच्छा लगता है। असल में जब आप दोबारा डर का सामना करते हो, तो डर और ज्यादा बढ़ जाता है। सवाल: क्या पहली बार अधूरा रह गया सफर इस बार आपको और मोटिवेट कर रहा है?जवाब: बिल्कुल। स्पोर्ट्समैन के लिए जीत-हार बहुत मायने रखती है। अगर कुछ अधूरा रह जाए, तो वो अंदर कहीं रह जाता है। मेरे लिए भी यह सफर थोड़ा अधूरा रह गया था। शायद इसलिए मैं दोबारा लौट रहा हूं। सवाल: छोटे शहर से मुंबई आने तक का सफर कैसा रहा?जवाब: मैं बिहार से हूं। जब मुंबई आया, तब मेरे अंदर बहुत सारी कमियां थीं और सपने बहुत बड़े थे। यहां आकर समझ आया कि सिर्फ सपने काफी नहीं होते। खुद को बदलना पड़ता है। मैंने खुद को A से लेकर Z तक बदल दिया और आज जो हूं, वो सब उसी सफर का हिस्सा है। महेंद्र सिंह धोनी की एक बात ने बहुत मदद की। उन्होंने कहा था- ‘अपने साथ ईमानदार रहो।’ ईमानदार रहने का मतलब सिर्फ सच बोलना नहीं है, बल्कि खुद को समझना है कि आपकी ताकत क्या है, आपकी कमी क्या है और आप किस रेस के लिए बने हो। जब मैंने खुद को समझना शुरू किया, तब जिंदगी आसान लगने लगी। सवाल: क्या आज भी किसी चीज का डर लगता है?जवाब: पहले मुझे लगता था कि कहीं मेरा कॉन्फिडेंस खत्म न हो जाए, लेकिन अब समझ आया कि कॉन्फिडेंस कोई बाहर की चीज नहीं है, वो आपके अंदर होता है। अब मुझे डर कम लगता है। सवाल: क्या रियलिटी शो में आपका अनफिल्टर्ड और सीधा स्वभाव कभी नुकसान पहुंचाता है?जवाब: परिपक्व होना बहुत जरूरी है। पहले मैं बहुत भोला था। छोटे शहर से आया था, दुनिया उतनी नहीं देखी थी। लेकिन जब आप बड़े लेवल पर कॉम्पिटिशन देखते हो, तब समझ आता है कि सिर्फ अच्छा इंसान होना काफी नहीं है। बहुत कुछ सीखना पड़ता है। सवाल: हार्टब्रेक ने आपको कितना बदला?जवाब: बहुत ज्यादा। हार्टब्रेक बहुत जरूरी होता है। लोग पूछते हैं कि क्या मैं उससे बाहर आ गया हूं? सच कहूं तो नहीं। मैं आज भी उससे रिकवर कर रहा हूं, लेकिन ऐसा नहीं है कि मुझे प्यार से शिकायत है। प्यार जिंदगी का बहुत खूबसूरत हिस्सा है। सवाल: इस बार शो में आपकी रणनीति क्या होगी?जवाब: जब पहली बार गया था, तब मैं सिर्फ ‘विशाल आदित्य सिंह’ था। इस बार मैं ‘बिहार के आरा जिला वाला विशाल’ बनकर जा रहा हूं। इस बार पूरी देसी एनर्जी के साथ जाऊंगा। सवाल: बाकी कंटेस्टेंट्स के साथ कैसी बॉन्डिंग रहने वाली है?जवाब: मैं कैमरे के लिए अलग बनने की कोशिश नहीं करता। मैं जैसा हूं, वैसा ही रहता हूं। जो मुझे प्यार देगा, मैं उसे और ज्यादा प्यार दूंगा। जो नफरत देगा, उसे वही वापस मिलेगा, लेकिन आखिर में हर कोई यहां कॉम्पिटिटर है। पुराने खिलाड़ी हों या नए, सबको भय के देवता यानी रोहित शेट्टी से बचके रहना है। सवाल: पहली बार जब शो किया था, तब लोगों का कैसा रिएक्शन था?जवाब: लोगों ने बहुत प्यार दिया। सबने कहा कि चाहे मैं टास्क के दौरान जीतूं या हारूं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। वही बात मुझे इस बार भी मोटिवेट करती है।
70 के दशक की बात है। रोमांस का दौर था और हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार थे दिलीप कुमार। धर्मेंद्र उस दौर में ‘मेरा गांव मेरा देश’(1971), ‘सीता और गीता’(1972) जैसी बेहतरीन फिल्मों से खुद को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर चुके थे। समय के साथ वो फिल्में बनाने में दिलचस्पी लेने लगे। कोई भी स्क्रिप्ट अच्छी लगती थी, तो झट से खरीद लेते। सीता और गीता में काम करते हुए धर्मेंद्र ने उस फिल्म की राइटर जोड़ी सलीम-जावेद की एक कहानी सुनी। नाम था ‘जंजीर’। सलीम-जावेद तब ‘अंदाज’ (1971) और ‘हाथी मेरे साथी’ (1971) जैसी फिल्में लिख चुके थे। कहानी पसंद आने पर धर्मेंद्र ने जंजीर की स्क्रिप्ट झट से खरीद ली। समय के साथ वो दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए। एक रोज उनकी मुलाकात हसीना मान जाएगी, आन बान जैसी जुबली हिट डायरेक्ट करने वाले प्रकाश मेहरा से हुई। वो प्रोडक्शन में कदम रखने वाले थे। उन्होंने धर्मेंद्र से कहा कि वो फिल्म ‘समाधि’ बना रहे हैं, हीरो का डबल रोल होगा। धर्मेंद्र ने दिलचस्पी दिखाई और कहानी सुनी। उन्हें वो स्क्रिप्ट इतनी पसंद आई कि वो झट से इसे करने के लिए मान गए, लेकिन फिर एक डील हुई। धर्मेंद्र ने प्रकाश मेहरा से ‘समाधि’ की स्क्रिप्ट खरीद ली और बदले में 3500 रुपए लेकर जंजीर की स्क्रिप्ट थमा दी, जो सलीम-जावेद ने उन्हें दी थी। और इस तरह जंजीर की स्क्रिप्ट पहुंचीं प्रकाश मेहरा के पास। वो जंजीर, जिसने प्रकाश मेहरा को सबसे बड़ा डायरेक्टर, फ्लॉप-मनहूस एक्टर अमिताभ बच्चन को स्टार और सलीम-जावेद को इतिहास रचने वाली राइटर जोड़ी का दर्जा दिलाया। पत्नी के गहने बेचकर इस फिल्म को रूप देने वाले प्रकाश मेहरा को गुजरे आज 17 साल हो गए। डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए कैसे एक फिल्म और कई संयोंग ने उन्हें बनाया हिंदी सिनेमा का आला फिल्मकार- प्रकाश मेहरा ने धर्मेंद्र और मुमताज के साथ फिल्म जंजीर अनाउंस की। इसी समय प्रकाश मेहरा ने राइटर के.नारायण से ‘कहानी किस्मत की’ फिल्म की स्क्रिप्ट खरीदी। धर्मेंद्र को ये कहानी भी पसंद आई। उन्होंने प्रकाश मेहरा से कहा, ‘अगर आप कहानी किस्मत की फिल्म की स्क्रिप्ट डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी (धर्मेंद्र को पहली फिल्म देने वाले) को दे देंगे, तो वो आपकी जंजीर बनाने में काफी मदद कर सकते हैं।’ प्रकाश मेहरा को ये ऑफर पसंद नहीं आया। वो पहले ही ‘समाधि’ की कहानी धर्मेंद्र को दे चुके थे, अब एक और फिल्म किसी और को देना उन्हें मुनासिब नहीं लगा। उन्होंने साफ इनकार कर दिया। धर्मेंद्र को ये बात थोड़ी खटकी। कुछ दिन बीते ही थे कि धर्मेंद्र ने अपने भाई की फिल्म शुरू कर दी। जंजीर के लिए डेट्स मांगी गई तो धर्मेंद्र ने साफ कहा- ‘पहले मैं अपने भाई की फिल्म का आधा शेड्यूल करूंगा और फिर जंजीर की शूटिंग शुरू करूंगा।’ प्रकाश मेहरा इतना लंबा इंतजार नहीं करना चाहते थे। धर्मेंद्र ने इस बारे में सोचने का समय लिया, लेकिन फिर फिल्म छोड़ दी। धर्मेंद्र के इनकार के बाद प्रकाश मेहरा देव आनंद के पास गए। उन्हें लगा कि फिल्म में एक्शन-ही-एक्शन है और गाने कम। उन्होंने प्रकाश मेहरा को सुझाव दिया- ‘क्यों न तुम फिल्म में कुछ और गाने डालो’। बातचीत के बीच देव आनंद ने कहा- ‘अगर मैं अपने होम प्रोडक्शन नव निकेतन के बैनर तले ये फिल्म बनाऊं तो तुम कितने पैसे लोगे?’ प्रकाश मेहरा ये स्क्रिप्ट छोड़ना नहीं चाहते थे। उन्होंने देव आनंद का ऑफर झट से ठुकरा दिया। हीरो की तलाश जारी रही। अब प्रकाश मेहरा, राजकुमार के पास गए। वो तब मद्रास में एक फिल्म शूट कर रहे थे। उन्हें ‘जंजीर’ इतनी पसंद आई कि उन्होंने कहा कि वो कल से ही फिल्म की शूटिंग करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते शूटिंग मद्रास में ही हो, जिससे वो दूसरी फिल्म भी शूट कर सकें। ये मुमकिन नहीं था, क्योंकि कहानी बॉम्बे की थी। बात इस बार भी नहीं बनी। राजेश खन्ना, दिलीप कुमार ने भी एक्शन फिल्म करने से इनकार कर दिया। प्रकाश मेहरा बार-बार मिल रहे रिजेक्शन से परेशान हो गए। जावेद अख्तर ने दैनिक भास्कर को दिए पुराने इंटरव्यू में कहा था- फिल्म इंडस्ट्री में अगर एक -दो बड़े स्टार्स ने फिल्म की स्क्रिप्ट को ना कह दिया तो प्रोड्यूसर्स को लगता है कि स्क्रिप्ट खराब है और वो उसे छोड़ देते थे, लेकिन इस इंसान की न जाने क्या धारणा थी जो इन्होंने फिल्म नहीं छोड़ी। वो भी तब जब बड़े स्टार्स ने इसे करने से इनकार कर दिया था। एक दिन प्राण, प्रकाश मेहरा से मिलने पहुंचे और परेशान देख कहा- ‘तुम अमिताभ को ट्राय क्यों नहीं करते? बॉम्बे टू गोवा में देखने के बाद मुझे लगता है कि वो भविष्य में स्टार बनेगा। आपको भी वो फिल्म जरूर देखनी चाहिए।’ प्रकाश मेहरा ने ये बात अनसुनी कर दी। उस समय अमिताभ बच्चन एक फ्लॉप हीरो थे। अमिताभ 30 साल के थे और तब उनकी एक-एक कर 12 फिल्में फ्लॉप हो गईं। हर कोई उन्हें फिल्मों में लेने से कतराने लगा था। कुछ दिन बीते तो सलीम-जावेद भी उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने भी प्रकाश मेहरा के सामने अमिताभ का नाम सुझाया और कहा- ‘इस लड़के में वो बात है, जो जंजीर में विजय खन्ना बनने के लिए परफेक्ट हैं।' सलीम-जावेद ने भी प्रकाश मेहरा के सामने फिल्म बॉम्बे टू गोवा के उस फाइट सीन का जिक्र किया, जिसमें अमिताभ बच्चन च्विंगम खाते हुए गुंडों की पिटाई कर रहे थे। सबके सुझाव पर प्रकाश मेहरा ने फिल्म बॉम्बे टू गोवा देखी। एक सीन में अमिताभ बच्चन को देखते ही प्रकाश मेहरा जोर से चिल्लाए- ‘जंजीर का हीरो मिल गया।’ प्रकाश मेहरा ने अमिताभ को फिल्म ऑफर की, तो वो माने, जरूर लेकिन ये भी कहा कि अगर जंजीर नहीं चली तो मैं फिल्म इंडस्ट्री और बॉम्बे छोड़कर इलाहाबाद चला जाऊंगा। प्रकाश मेहरा को सलीम-जावेद की इस कहानी पर काफी भरोसा था। उन्होंने आश्वासन दिया कि ये फ्लॉप नहीं होगी। हीरो की कास्टिंग के बाद अब बारी थी हीरोइन की। फिल्म मुमताज के साथ अनाउंस हुई थी, लेकिन उन्होंने शादी के लिए फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी। बाद में कुछ और हीरोइनों ने ये कहकर फिल्म ठुकरा दी कि वो अमिताभ जैसे फ्लॉप एक्टर के साथ काम नहीं करेंगी। एक दिन अमिताभ ने जया भादुड़ी से कहा कि कोई भी हीरोइन उनके साथ काम करने के लिए राजी नहीं है। उस समय दोनों रिलेशनशिप में थे। अमिताभ बच्चन की निराशा देख जया ने कहा- ‘अगर प्रकाश मेहरा कहें, तो मैं फिल्म करने के लिए तैयार हूं।’ अमिताभ ये बात लेकर प्रकाश मेहरा के पास पहुंचे और बात बन गई। 1973 में ये फिल्म बनकर तैयार हो गई, लेकिन जब प्रकाश मेहरा ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को फिल्म दिखाई, तो उन्होंने अमिताभ बच्चन को देख मजाक उड़ाते हुए कहा- ‘ये लंबा बेवकूफ हीरो कौन है।’ अमिताभ बच्चन को ये बात काफी बुरी लगी। बिग बी तब प्रकाश मेहरा को लल्ला कहते थे, जो इलाहाबाद में भाई को कहा जाता ता। एक दिन उन्होंने कहा, ‘लल्ला मैं नहीं जानता कि इस फिल्म के बाद मेरा भविष्य क्या होगा?’ जवाब मिला, ‘स्वार्थी मत बनो, मेरे बारे में सोचो। अगर कुछ भी गड़बड़ हुई तो मैं सब कुछ गंवा दूंगा।’ वाकई प्रकाश मेहरा ने इस फिल्म में अपना सब कुछ लगा दिया। हर एक जमापूंजी। यहां तक कि उन्होंने पत्नी के सारे जेवर भी गिरवी रख दिए थे। लंबे स्ट्रगल के बाद जंजीर को डिस्ट्रीब्यूटर्स मिले, लेकिन रिलीज होने से पहले ही डायरेक्टर प्रकाश मेहरा और राइटर जोड़ी सलीम-जावेद के बीच क्रेडिट की मजेदार जंग शुरू हो गई। दरअसल, सलीम जावेद को अपनी लिखी कहानी पर पूरा भरोसा था। उनका मानना था कि अगर फिल्म की कहानी अच्छी हो, तो उसे हिट होने से कोई रोक नहीं सकता, लेकिन अगर कोई फिल्म हिट होती है, तो उसका क्रेडिट राइटर्स को भी जरूर मिलना चाहिए। एक दिन राइटर सलीम खान, प्रकाश मेहरा के पास पहुंचे और कहा- ‘हमारे नाम भी जंजीर के पोस्टर में होने चाहिए।’ प्रकाश मेहरा ने हैरानी जताते हुए कहा- ‘राइटर्स के नाम? ऐसा कभी होता है क्या?’ वाकई हिंदी सिनेमा के इतिहास में किसी भी फिल्म के पोस्टर में उस समय तक कभी किसी राइटर का नाम नहीं लिखा गया था, लेकिन सलीम-जावेद ये रीत बदलने पर अड़े थे। देखते-ही-देखते फिल्म रिलीज की तारीख पास आ गई और बॉम्बे में पोस्टर लगा दिए गए। एक दिन सलीम खान ने काफी शराब पी और जे.पी.सिप्पी के प्रोडक्शन हाउस में काम करने वाले लड़के को कॉल कर जीप और पेंटिंग के सामान का इंतजाम करने को कहा। वो लड़का जैसे ही पहुंचा, सलीम खान ने उससे कहा- ‘जाओ, शहर में जंजीर के जितने भी पोस्टर लिखे हैं, उनके ऊपर जाकर लिख दो, रिटन बाय सलीम-जावेद।’ उस लड़के ने ठीक वैसा ही किया। अगली सुबह जुहू से ओपेरा हाउस तक के हर पोस्टर में जया और प्राण नाथ के माथे पर अलग से पोते गए सलीम-जावेद के नाम थे। फिल्म इंडस्ट्री में इसकी जमकर चर्चा हुई, लेकिन फिर प्रकाश मेहरा ने उनकी जिद के आगे घुटने टेक दिए। उन्होंने जंजीर के नए पोस्टर बनवाए, जिसमें हिंदी सिनेमा के इतिहास में पहली बार राइटर के नाम शामिल किए गए। फिल्म के कोलकाता प्रीमियर कोलकाता में कई बड़ी हस्तियां पहुंचीं। प्रीमियर खत्म होते ही वहां मौजूद हर कोई प्राण के पास जाकर उनके अभिनय की तारीफ करने लगा और अमिताभ नजरअंदाज हो गए। ये देख अमिताभ बच्चन की आंखों में आंसू आ गए। प्रकाश मेहरा ने ये देखा, तो पास आकर कहा- ‘तुम चिंता मत करो, एक बार फिल्म रिलीज होने दो, फिर देखना, जो लोग आज प्राण-प्राण कर रहे हैं, वो कैसे अमिताभ-अमिताभ करेंगे।’ 11 मई 1973 फ्लॉप हीरो अमिताभ बच्चन और जया बच्चन स्टारर, प्रकाश मेहरा द्वारा डायरेक्ट और प्रोड्यूस की हुई फिल्म जंजीर रिलीज हुई। कोलकाता में फिल्म ने ठीक-ठाक कमाई की, लेकिन बॉम्बे में थिएटर खाली-खाली रहे। अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद लौटने की तैयारी कर ली। निराशा इतनी हुई कि उन्हें तेज बुखार हो गया। फिल्म रिलीज हुए 4 दिन बीत गए और प्रकाश मेहरा ने रोज-रोज फिल्म की खबर लेना भी बंद कर दिया। एक दिन मुंबई के गेएटी गैलेक्सी सिनेमा हॉल के बाहर से गुजरते हुए उन्होंने देखा कि टिकट विंडो के बाहर काफी भीड़ लगी है। आज से पहले तक वहां कभी इतनी भीड़ नहीं लगी थी। वो पास गए, तो वहां जंजीर लगी थी। फिल्म देखने वालों की भीड़ इतनी थी कि उन्हें टिकट भी नहीं मिल रही थी। तब भी लोग 5 रुपए की टिकट 100-100 रुपए में खरीदने के लिए झगड़ रहे थे। फिल्म जंजीर चल निकली थी। फिल्म के गाने ‘यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी…’ और ‘दीवाने हैं, दीवानों को न घर चाहिए…’ काफी हिट रहे। हर जगह बस फिल्म की ही चर्चा थी। प्रकाश मेहरा ने तुरंत अमिताभ को कॉल कर ये खबर दी, उन्हें लगा ये सुनकर उनकी तबीयत ठीक हो जाएगी, लेकिन हुआ इसका उल्टा। अमिताभ बच्चन को ये सुनते ही 104 डिग्री बुखार हो गया। एक हफ्ते में अमिताभ बच्चन स्टार बन चुके थे। उनके हुए डायलॉग- ‘जब तक बैठने को न कहा जाए, शराफत से खड़े रहो, ये पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं….’, हर किसी की जुबान पर था और अमिताभ बच्चन फ्लॉप एक्टर से बन गए एंग्री यंग मैन। प्रकाश मेहरा, अमिताभ बच्चन, सलीम-जावेद, चारों को फिल्म का फायदा मिला। प्रकाश मेहरा को अमिताभ का काम ऐसा पसंद आया कि आगे उन्होंने ‘हेरा फेरी’, ‘खून पसीना’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’, ‘नमक हलाल’ और ‘शराबी’ जैसी 6 फिल्में अमिताभ बच्चन के साथ बनाईं। तब कहा जाता था कि जिस फिल्म में प्रकाश मेहरा अमिताभ बच्चन को लें, उसका हिट होना तय है, लेकिन ये भ्रम फिल्म ‘जादूगर’ (1989) से टूट गया, जो प्रकाश मेहरा ने तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी के कहने पर बनाई थी। दरअसल, 5 हिट फिल्मों के बाद प्रकाश मेहरा अमिताभ के साथ फिल्म जादूगर बनाना चाहते थे, लेकिन बैक-टु-बैक फिल्में कर रहे अमिताभ के पास समय नहीं था। इसी बीच अमिताभ ने प्रकाश मेहरा के सबसे बड़े कॉम्पिटिटर मनमोहन देसाई के साथ कुछ फिल्में कीं। मर्द, अमर अकबर एंथोनी, नसीब और कूली बनाने वाले मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा का झगड़ा जगजाहिर था। दोनों इंटरव्यूज में एक दूसरे को फिल्मों के नाम से ताने देते थे। मनमोहन देसाई ने एक इंटरव्यू में कहा- ‘एक शराबी ही शराबी जैसी फिल्म बना सकता है, और मर्द ही मर्द जैसी फिल्में बनाते हैं।’ प्रकाश मेहरा ने जवाब दिया- ‘एक कुली ही इतने नीचे गिरकर ऐसी बात कर सकता है।’ इस कॉम्पिटिशन का असर बिग बी पर भी पड़ा, क्योंकि वो दोनों की फिल्में कर रहे थे। लेकिन एक गलतफहमी से प्रकाश मेहरा के जहन में बिग बी के लिए शक पैदा हो गया। उन्हें लगा कि स्टार बनने के बाद वो उन्हें समय नहीं दे रहे। 1987 में प्रकाश मेहरा एक पार्टी में पहुंचे। उन्होंने जमकर शराब पी। नशा होते ही वो अमिताभ बच्चन के पास पहुंचे और चिल्लाकर कहा- 'मैंने तुम्हें स्टार बनाया और अब तुम्हारे पास मेरे लिए ही टाइम नहीं। तुम मुझे भूल जाओ, मेरी फिल्म भूल जाओ, लेकिन ये मत भूलना कि जब तुम्हें कोई पूछता नहीं था, तब मैंन तुम्हें जंजीर से उठाया। एंग्री यंग मैन बनाया।' अमिताभ खामोश खड़े सुनते रहे। बात वहीं खत्म हो गई। अगले दिन अमिताभ ने प्रकाश मेहरा को कॉल कर कहा, ‘आपको ऐसा क्यों लगा कि मैं आपकी फिल्म नहीं करना चाहता। इस बार प्रकाश मेहरा खामोश रहे। आगे अमिताभ ने कहा- आप अपनी फिल्म के लिए डेट्स ले लीजिए।’ अनबन वहीं खत्म हो गई, लेकिन फिर प्रकाश मेहरा ने जादूगर बनाने का आइडिया ड्रॉप कर दिया। वाइल्ड फिल्म्स इंडिया को दिए इंटरव्यू में प्रकाश मेहरा ने स्वीकार किया था कि अमिताभ बच्चन से उनकी अनबन थी। उन्होंने ये भी कहा कि फिल्म जादूगर को चुनना उनकी बदकिस्मती थी। एक दिन यशवंतराव चौहान हॉल में इंदिरा गांधी एक प्रोग्राम में आई थीं,अमिताभ बच्चन के गांधी परिवार से करीब के रिश्ते थे, तो वो भी पहुंचे और प्रकाश मेहरा भी आए। वहां इंदिरा गांधी ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री को जिम्मेदारी लेकर अंधविश्वास कम करने के लिए फिल्में बनानी चाहिए। इंदिरा गांधी की बात सुनकर अमिताभ बच्चन ने प्रकाश मेहरा ने कहा, ‘देखो अपने बीच जो भी बात हुई उसे भूल जाओ।’ फिल्म बननी शुरू हुई, जो एक फर्जी बाबा को एक्सपोज करने की कहानी थी। शूटिंग चल ही रही थी कि एक दिन एक आदमी ने प्रकाश मेहरा की कार की डिग्गी में 50 लाख रुपए से भरी पेटी रख दी। कुछ देर बाद एक बाबा उनके पास आए और कहा ये 50 लाख रख लो, लेकिन ये फिल्म मत बनाओ। प्रकाश मेहरा ने इनकार कर दिया। फिल्म 1989 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। प्रकाश मेहरा क्रिएटिव, मस्ती-मजाक करने वाले शख्स थे, लेकिन सेट पर बेहद सख्त मिजाज थे। यही वजह रही कि वो फिल्म ‘लावारिस’ से राखी को निकालने वाले थे। इस फिल्म में परवीन बाबी को अमिताभ के साथ कास्ट किया गया था। परवीन बाबी की मानसिक हालत से सेट का माहौल बिगड़ने लगा, तो उन्हें हटाकर जीनत अमान की कास्टिंग की गई। राखी ने फिल्म में अमिताभ बच्चन की मां का रोल निभाया। एक दिन सेट पर अमजद खान तैयार बैठे, लेकिन राखी नहीं पहुंचीं। कई घंटे बीते, कई कॉल भी किए गए, लेकिन जवाब नहीं मिला। प्रकाश मेहरा शूटिंग रुकने से भड़क गए। उन्होंने टीम से कहा, ‘आखिरी बार कॉल करो, उठे तो ठीक वरना आज पैकअप कर, कल नई हीरोइन के साथ शूट करेंगे।’ खुशकिस्मती से राखी ने कॉल उठाकर कहा कि उनकी बेटी बीमार है। ये सुनकर प्रकाश मेहरा का गुस्सा शांत हो गया। एक नजर प्रकाश मेहरा के करियर पर- 13 जुलाई 1939 को प्रकाश मेहरा का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ। जन्म के ठीक बाद मां का निधन हो गया। पिता ने भी संन्यास ले लिया और नवजात प्रकाश को उनके नाना-नानी के पास छोड़ गए। रेडियो सुनते हुए उन्हें म्यूजिक कंपोजर बनने की ठानी और नाना से 13 रुपए चुराकर मुंबई आ गए। फिल्म इंडस्ट्री में काम नहीं मिला तो वो गुजारे के लिए सैलून में काम करने लगे। लंबी जद्दोजहद के बाद उन्हें 1962 की फिल्म प्रोफेसर में प्रोडक्शन कंट्रोलर का काम मिला। आगे उन्होंने 1965 की मीना कुमारी स्टारर फिल्म पूर्णिमा में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया। साथ ही फिल्म का एक गाना भी लिखा। दो सालों में ही हुनर परखने के बाद उन्होंने 1968 की हसीना मान जाएगी से बतौर डायरेक्टर फिल्म बनाई, जो जुबली हिट रही। आगे उन्होंने मेला, समाधि और आन-बान जैसी फिल्में भी बनाईं, जो सभी जुबली हिट रहीं। आगे उन्होंने जंजीर से बतौर प्रोड्यूसर करियर की दूसरी पारी शुरू की और शराबी, लावारिस, मुकद्दर का सिकंदर जैसी कई हिट फिल्में बनाईं। जादूगर फ्लॉप होने के बाद उनकी जिंदगी एक जुआं, दलाल और बाल ब्रह्मचारी जैसी फिल्में एवरेज रहीं। प्रकाश मेहरा ने फिल्मी करियर में कई गाने भी लिखे और साथ ही चमेली की शादी की स्क्रिप्ट में भी उनकी भागीदारी रही। उनके डायरेक्शन और प्रोडक्शन की आखिरी फिल्म मुझे मेरी बीवी से बचाओ (2001) रही। उन्हें प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की तरफ से दो बार लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। 17 मई 2009 में उनका 69 साल की उम्र में मल्टीपल ऑर्गन फैल्योर से निधन हो गया। ……………………………………………………………………………………. फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरीज भी पढ़ें- विजय का लेडी लक, जिसके बर्थडे पर चुनाव जीते: तमिलनाडु का रिजल्ट आते ही विजय के घर पहुंचीं तृषा, एक्टर का हो चुका तलाक तमिलनाडु चुनाव में थलापति विजय की पार्टी TVK की जीत में उनकी 'लेडी लक' तृषा कृष्णन को अहम माना जा रहा है। 4 मई को 'लेडी लक' एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का जन्मदिन था, जिनका नाम विजय से जुड़ता रहा है। तृषा तमिलनाडु चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं। 51 साल के विजय आज तमिल फिल्मों के सबसे बड़े स्टार हैं तो तृषा कृष्णन क्वीन ऑफ साउथ इंडिया कही जाती हैं। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं। पूरी खबर पढ़िए… पुण्यतिथि: ऋषि कपूर को सलमान के पिता ने धमकाया:राज कपूर ने सिगरेट पीने पर पीटा, दाऊद के साथ चाय पी, कभी अमिताभ का अवॉर्ड खरीदा 30 अप्रैल 2020, 6 साल पहले सुबह खबर आई कि ऋषि कपूर अब नहीं रहे। कुछ दिन पहले तक वो गंभीर हालत होने के बावजूद हॉस्पिटल स्टाफ को हंसाते तो कभी गाना सुना रहे थे। दैनिक भास्कर से बात करते हुए ऋषि कपूर की इकलौती बेटी रिद्धिमा कहती हैं, ‘सब अचानक हुआ, वो बहुत डरावना दिन था। अचानक एक खालीपन आ गया। एक सूनापन, उनकी जिंदगी उनकी मौजूदगी लार्जर देन लाइफ थी।’ पूरी स्टोरी पढ़ें…………………………………………………. विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। पूरी खबर पढ़ें…
अजय देवगन और अक्षय कुमार की दोस्ती फिर चर्चा में है। खबर है कि अजय ने ‘धमाल 4’ की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी है, ताकि ‘वेलकम टू द जंगल’ को बॉक्स ऑफिस पर क्लीन विंडो मिल सके। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले ‘धमाल 4’ 4 जुलाई 2026 को रिलीज होने वाली थी। अब फिल्म 17 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में आएगी। वहीं ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून 2026 को रिलीज होगी। दोनों बड़ी मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्में हैं। मेकर्स नहीं चाहते थे कि दोनों फिल्मों के बिजनेस पर असर पड़े। सूत्रों के अनुसार, अजय देवगन और अक्षय कुमार ने बातचीत के बाद यह फैसला लिया। दोनों लंबे समय से दोस्त हैं और बॉक्स ऑफिस क्लैश का असर समझते हैं। इंडस्ट्री में इस फैसले को पॉजिटिव कदम माना जा रहा है। ‘धमाल 4’ की रिलीज डेट इससे पहले भी कई बार बदली जा चुकी है। शुरुआत में फिल्म को ईद 2026 वीकेंड पर रिलीज करने की तैयारी थी। उस समय इसकी टक्कर यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर 2’ से होने की चर्चा थी। क्लैश से बचने के लिए मेकर्स ने फिल्म को ईद स्लॉट से हटाकर 12 जून 2026 कर दिया था। इसके बाद ट्रेड रिपोर्ट्स में सामने आया कि मेकर्स जून स्लॉट से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। बड़ी फिल्मों की भीड़ और बॉक्स ऑफिस विंडो को देखते हुए फिल्म की रिलीज 12 जून से बढ़ाकर 4 जुलाई 2026 कर दी गई थी। अब तीसरी बार फिल्म की रिलीज डेट बदली गई है। इस बार वजह ‘वेलकम टू द जंगल’ बनी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार दो बड़ी कॉमेडी फिल्मों की रिलीज से दोनों के कलेक्शन पर असर पड़ सकता था। इसी वजह से ‘धमाल 4’ को 17 जुलाई 2026 तक आगे बढ़ाया गया। वहीं, यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज डेट भी आगे बढ़ाई गई है। पहले यह फिल्म ईद 2026 के आसपास रिलीज होने वाली थी। बाद में इसकी नई रिलीज डेट 4 जून 2026 तय की गई। इससे कई बड़ी फिल्मों का संभावित क्लैश टल गया। अजय देवगन और अक्षय कुमार जल्द ही ‘गोलमाल 5’ में साथ नजर आएंगे। दोनों स्टार्स की बॉन्डिंग इंडस्ट्री में चर्चा में है। इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी ‘धमाल 4’ में अजय देवगन के अलावा रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और संजय मिश्रा नजर आएंगे। वहीं ‘वेलकम टू द जंगल’ में अक्षय कुमार के साथ बड़ी स्टारकास्ट दिखाई देगी।
फिल्ममेकर शेखर कपूर ने जेम्स बॉन्ड फ्रेंचाइजी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर डेनियल क्रेग के बाद कोई भारतीय अभिनेता 007 बन सकता है, तो वह जॉन अब्राहम हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। Amazon MGM Studios ने हाल ही में पुष्टि की है कि नए जेम्स बॉन्ड की तलाश शुरू हो चुकी है। इसी बीच शेखर कपूर ने अपने एक्स अकाउंट पर जॉन अब्राहम का नाम सुझाया। उन्होंने लिखा, “डेनियल क्रेग के बाद अगला जेम्स बॉन्ड जॉन अब्राहम होना चाहिए। उनके पास ‘शेकन नॉट स्टर्ड’ वाली पर्सनैलिटी और बॉन्ड वाला चार्म है।” शेखर कपूर ने अपनी पोस्ट में याद दिलाया कि डेनियल क्रेग को बॉन्ड के रोल के लिए उनकी फिल्म ‘एलिजाबेथ’ देखने के बाद चुना गया था। ऐसे में उनका यह बयान और चर्चा में आ गया। शेखर कपूर की तारीफ पर जॉन अब्राहम ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “सर, आपके शब्दों से मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। आपने दुनिया से पहले डेनियल क्रेग की क्षमता पहचानी थी। ऐसे में आपका यह कहना मेरे लिए बहुत मायने रखता है।” जॉन ने मजाकिया अंदाज में आगे लिखा, “अब मैं अपनी मार्टिनी ऑर्डर करने की प्रैक्टिस शुरू कर देता हूं… शेकन, नॉट स्टर्ड।” ‘No Time to Die’ के बाद डेनियल क्रेग ने जेम्स बॉन्ड फ्रेंचाइजी से विदाई ले ली थी। इसके बाद नए 007 को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग जॉन अब्राहम को इस किरदार के लिए फिट बता रहे हैं। शेखर कपूर भारतीय सिनेमा के चर्चित निर्देशकों में गिने जाते हैं। उन्होंने ‘मिस्टर इंडिया’, ‘बैंडिट क्वीन’, ‘एलिजाबेथ’ और ‘द फोर फेदर्स’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। उनकी फिल्मों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। वर्कफ्रंट की बात करें तो जॉन अब्राहम रोहित शेट्टी के निर्देशन में बन रही फिल्म में नजर आएंगे। यह पुलिस अधिकारी राकेश मारिया की बायोपिक है, जिसमें जॉन पुलिस ऑफिसर के किरदार में दिखेंगे। इसके अलावा वह ‘फोर्स 3’ की शूटिंग भी कर रहे हैं। इसमें उनके साथ हर्षवर्धन राणे प्रमुख भूमिका में दिखाई देंगे।
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने हाल ही में बताया कि उन्होंने आज तक कभी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी। वैरायटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में सलमान ने कहा, 'मैंने अपनी जिंदगी में कभी स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी। मैंने स्क्रिप्ट लिखी हैं, लेकिन पढ़ी नहीं हैं।' इंटरव्यू में सलमान ने अपनी लग्जरी घड़ियों को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, 'आप मुझे महंगी घड़ियां पहने देखते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि वो मेरी हैं।' उन्होंने मजाक में कहा कि कई घड़ियां उनके दोस्तों की होती हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान जल्द ही अपनी वॉर फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ में नजर आएंगे। इस फिल्म में चित्रांगदा सिंह भी होंगी। पहले इस फिल्म का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ था। फिल्म की रिलीज डेट पहले 17 अप्रैल थी, जो टाल दी गई है और नई तारीख का अभी ऐलान नहीं हुआ है। सलमान ने नई फिल्म की शूटिंग शुरू की वहीं, सलमान ने एक्ट्रेस नयनतारा के साथ अपनी दूसरी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है, जिसका अस्थायी नाम SVC63 है। इसके अलावा, वैरायटी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सलमान डायरेक्टर जोड़ी राज निदिमोरू और कृष्णा डी.के. के साथ एक सुपरहीरो एक्शन फिल्म में भी काम कर सकते हैं। ऐसी भी चर्चा है कि इस प्रोजेक्ट में वह करीना कपूर खान के साथ काम कर सकते हैं। 'बीबी हो तो ऐसी' से हुई थी सलमान के करियर की शुरुआत सलमान ने 1988 में आई फिल्म बीवी हो तो ऐसी से बॉलीवुड डेब्यू किया था। हालांकि, इस फिल्म में उन्होंने सपोर्टिंग रोल निभाया था। बतौर लीड सलमान पहली बार 1989 में सूरज बड़जात्या की फिल्म 'मैंने प्यार किया' में नजर आए थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। इसके बाद वो 'साजन', 'हम आपके हैं कौन..!' और 'करण अर्जुन' जैसी क्लासिक फिल्मों में नजर आए। हालांकि, एक समय ऐसा आया, जब उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लगातार बुरी तरह फ्लॉप हो रही थीं। लेकिन, एक्टर ने हर बार जोरदार वापसी की। सलमान ने वॉन्टेड, सुल्तान और दबंग जैसी सुपरहिट फिल्में दी 2009 से लेकर 2016 तक एक्टर की ज्यादातर फिल्मों ने अच्छा कलेक्शन भी किया। चाहे वो दबंग और दबंग 2 रही हों या फिर वॉन्टेड, रेडी और सुल्तान। एक्टर की कई फिल्में हिट रहीं। 2015 में आई फिल्म 'बजरंगी भाईजान' उनके करियर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई, जिसने पूरी दुनिया में 900 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की। 2017 में सलमान की फिल्म ट्यूबलाइट आई, जो कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। हालांकि, इसके बाद एक्टर टाइगर जिंदा है में नजर आए, जिसने बॉक्स ऑफिस पर 190 करोड़ रुपए की कमाई की थी। वहीं, फिल्म 'टाइगर 3' ने दुनिया भर में कुल 464-466.63 करोड़ रुपए का लाइफटाइम वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन किया। हालांकि, उनकी आखिरी फिल्म सिकंदर उम्मीदों के हिसाब से प्रदर्शन नहीं कर पाई। 200 करोड़ रुपए के बजट वाली इस फिल्म ने 184.89 करोड़ रुपए कमाए।
बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी शनिवार को जयपुर पहुंचे। एक्टर अपनी आगामी फिल्म ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में शामिल होंगे। जयपुर एयरपोर्ट पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी को देखते ही फैंस की भीड़ उमड़ पड़ी। एयरपोर्ट से बाहर आते वक्त नवाज ब्लैक मास्क में थे, लेकिन फैंस की रिक्वेस्ट पर उन्होंने मास्क हटाया और फोटो भी क्लिक करवाई। नवाजुद्दीन ने कहा- मैं जयपुर आकर बहुत खुश हूं। मैं अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए उत्साहित हूं। उम्मीद करता हूं कि दर्शकों को यह पसंद आएगी। वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड की मशहूर सिंगर मोनाली ठाकुर भी शनिवार को जयपुर एयरपोर्ट पर स्पॉट हुईं। मोनाली एक विशेष इवेंट में लाइव परफॉर्मेंस देने के लिए जयपुर पहुंची हैं। एयरपोर्ट पर उनके पहुंचते ही फैंस ने उनका स्वागत किया। मोनाली ठाकुर अपनी मधुर आवाज और सुपरहिट गीतों के लिए जानी जाती हैं। 'मोह मोह के धागे', 'सवार लूं', 'जरा-जरा टच मी' और 'लव मी थोड़ा और' जैसे कई लोकप्रिय गीतों से उन्होंने संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई है। मोनाली ने कहा- मैं जयपुर में प्रदर्शन करने के लिए बहुत उत्साहित हूं। मैं अपने प्रशंसकों के लिए कुछ खास गाने गाने वाली हूं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी दमदार अभिनय शैली और अलग तरह के किरदारों के लिए जाने जाते हैं। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', 'मंटो', 'सीरियस मैन', 'रात अकेली है' और 'बजरंगी भाईजान' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से वे दर्शकों के बीच खास पहचान बना चुके हैं। अब उनकी नई फिल्म ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ को लेकर भी दर्शकों में उत्साह नजर आ रहा है। फिल्म ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो अभिनय और वास्तविक जिंदगी के बीच संघर्ष करता है। यह फिल्म इंसानी भावनाओं, संघर्ष और पहचान के मुद्दों को संवेदनशील तरीके से दिखाती है। नवाजुद्दीन इस फिल्म में एक अलग और गंभीर किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म की कहानी आम जिंदगी और सिनेमा की दुनिया के बीच के अंतर को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करती है। जयपुर में आयोजित होने वाली इसकी स्पेशल स्क्रीनिंग में फिल्म से जुड़े कलाकारों और मेहमानों के शामिल होने की संभावना है।
चेन्नई में शुक्रवार को थिएटर से बाहर निकलते समय एक फैन ने तृषा कृष्णन से विजय का जिक्र किया तो एक्ट्रेस ब्लश कर गईं। शुक्रवार को तृषा चेन्नई में अपनी नई रिलीज फिल्म ‘करुप्पु’ की स्क्रीनिंग में पहुंचीं। इस दौरान डायरेक्टर आरजे बालाजी और एक्टर कार्थी भी मौजूद थे। थिएटर से बाहर निकलते समय तृषा अपनी कार में बैठी थीं। उन्होंने ब्लैक टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी। इसी दौरान एक फैन ने कहा, 'थलापति से कहना कि मैंने उनका हालचाल पूछा है।' इस पर तृषा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘कंदीपा (जरूर)’। फिर उन्होंने सिर नीचे कर लिया। इसके बाद वह फोन चलाती नजर आती हैं। बाद में तृषा वहां मौजूद फैंस की तरफ हाथ हिलाकर उनका अभिवादन भी करती दिखीं। तृषा और विजय की डेटिंग चर्चा गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से तृषा को एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के साथ लिंक किया जा रहा है। हालांकि, विजय और तृषा ने अब तक अपने रिश्ते को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। हाल ही में सीएम विजय के एक फैसले की भी काफी चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने तृषा की फिल्म ‘करुप्पु’ के लिए सुबह 9 बजे के मॉर्निंग शो (स्पेशल स्क्रीनिंग) की विशेष अनुमति दी। बता दें कि मॉर्निंग शो पर राज्य में पिछले 3 सालों से प्रतिबंध लगा हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें… इससे पहले 10 मई को तृषा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुईं। वहीं, 4 मई को चुनाव परिणाम के दिन तृषा विजय के नीलांकरई स्थित घर भी पहुंची थीं। खास बात यह रही कि उसी दिन तृषा का 43वां जन्मदिन भी था। विजय पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप लगा पर्सनल लाइफ की बात करें तो तृषा की 2015 में बिजनेस मैन वरुण मनियन से सगाई हुई थी, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए थे। वहीं, विजय ने 1999 में संगीता सोरनालिंगम से शादी की थी। इस शादी से दोनों के दो बच्चे जेसन संजय और दिव्या साशा हुए। वहीं, विजय और संगीता के तलाक का मामला अदालत में चल रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, संगीता ने अपनी तलाक याचिका में पति विजय पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप लगाया था। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था।
रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 के पाकिस्तान में नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद प्लेटफॉर्म का सर्वर क्रैश हो गया और यह वहां नंबर-1 ट्रेंडिंग मूवी बन गई। ऐसा दावा पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर माविया उमर फारूकी ने किया। हालांकि, सर्वर क्रैश होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फारूकी ने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में लोग रात 12 बजे से फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे थे और रिलीज होते ही बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ फिल्म देखने की कोशिश की। वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म को लेकर प्रोपेगेंडा होने की आलोचना के बावजूद पाकिस्तान में लोग इसे देखने के लिए उत्सुक थे। उनके मुताबिक, दर्शक यह जानना चाहते थे कि फिल्म कैसे बनाई गई है, रणवीर सिंह ने रोल को कैसे निभाया है और फिल्म में दिखाए गए ल्यारी के घटनाक्रम कितने सही हैं। 24 घंटे में 20 करोड़ व्यू का दावा एक और वीडियो में फारूकी ने दावा किया कि धुरंधर 2 पाकिस्तान में नेटफ्लिक्स पर नंबर-1 पर ट्रेंड कर रही है। माविया के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान में करीब 20 करोड़ बार फिल्म देखी गई और यह देश की सबसे बड़ी ट्रेंडिंग फिल्म बन गई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इससे पहले किसी फिल्म ने रिलीज के सिर्फ 24 घंटे में नंबर-1 पोजिशन हासिल नहीं की। धुरंधर 2 पाकिस्तान में 15 मई को नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई। यह फिल्म इंटरनेशनल लेवल पर नेटफ्लिक्स पर धुरंधर: द रिवेंज (रॉ एंड अनदेखा) टाइटल से रिलीज हुई। फिल्म का 3 घंटे 52 मिनट का अनकट वर्जन नेटफ्लिक्स पाकिस्तान पर उपलब्ध है। इसमें लगभग 3 मिनट के नए एक्शन सीन और कुछ रॉ फुटेज हैं, जिन्हें भारतीय थिएटर वर्जन से हटा दिया गया था। पाकिस्तान और दूसरे देशों के दर्शक अभी यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं, लेकिन यह भारत में नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध नहीं है। भारत में धुरंधर 2 के डिजिटल राइट्स जियोहॉटस्टार के पास हैं, जहां यह 4 जून, 2026 को रिलीज होगी। फिल्म का डिजिटल प्रीमियर 4 जून को शाम 7 बजे रखा गया है। सोशल मीडिया पर हुई स्ट्रीमिंग की घोषणाफिल्म की ओटीटी रिलीज की जानकारी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर दी। पोस्ट में लिखा गया, ‘आंधी बनके जो आ रहा है उसे धुरंधर कहते हैं। देखिए धुरंधर: द रिवेंज, रॉ एंड अनदेखा। ग्रैंड डिजिटल प्रीमियर 4 जून शाम 7 बजे, स्ट्रीमिंग शुरू 5 जून से सिर्फ जियो-हॉटस्टार पर।’ भारत की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने अब तक भारत में करीब ₹1145 करोड़ नेट कलेक्शन और दुनियाभर में लगभग ₹1797 करोड़ ग्रॉस कमाई कर ली है। फिल्म में लंबी स्टारकास्ट धुरंधर 2 में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा फिल्म में संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी नजर आए। जबकि पहले पार्ट में अक्षय खन्ना ने भी अहम भूमिका निभाई थी। धुरंधर (2025) और धुरंधर 2 (2026) दोनों ही फिल्मों का निर्देशन आदित्य धर ने किया। फिल्म को ज्योति देशपांडे और आदित्य धर ने मिलकर जियो स्टूडियोज और B62 स्टूडियोज के बैनर तले प्रोड्यूस किया है।
कॉमेडी फिल्मों से पहचान बनाने वाले रितेश देशमुख आज ‘राजा शिवाजी’ में छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि एक दौर ऐसा भी था, जब लगातार फ्लॉप फिल्मों और ट्रोलिंग से परेशान होकर उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे होने की वजह से लोग उन्हें अक्सर एक्टर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री का बेटा कहते थे। डेब्यू फिल्म ‘तुझे मेरी कसम’ के बाद उनकी कई फिल्में नहीं चलीं और उन्होंने दोबारा आर्किटेक्ट की नौकरी करने का फैसला कर लिया था। बाद में ‘मस्ती’, ‘धमाल’, ‘हे बेबी’ और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री में बनाए रखा। फिर ‘एक विलेन’ में निगेटिव किरदार निभाकर उन्होंने अलग पहचान बनाई। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं रितेश देशमुख के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक, लेकिन राजनीति से दूरी रितेश देशमुख का जन्म 17 दिसंबर 1978 को लातूर, महाराष्ट्र में हुआ था। वह महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे हैं। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक होने की वजह से उनका बचपन राजनीति और सार्वजनिक जीवन के माहौल में बीता। हालांकि रितेश ने कभी राजनीति में आने की इच्छा जाहिर नहीं की। उनका झुकाव शुरुआत से ही क्रिएटिव फील्ड और डिजाइनिंग की तरफ था। आर्किटेक्चर की पढ़ाई, न्यूयॉर्क में नौकरी रितेश की शुरुआती पढ़ाई मुंबई के जी.डी. सोमानी मेमोरियल स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने कमला रहेजा कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर एंड एनवायरनमेंटल स्टडीज, मुंबई से आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय न्यूयॉर्क की एक आर्किटेक्चर फर्म में काम किया। उस दौर में उनका फोकस पूरी तरह आर्किटेक्चर करियर पर था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि फिल्मों में काम करेंगे। रितेश को कॉलेज के दिनों से ही स्टेज, एक्टिंग और एंटरटेनमेंट पसंद था। हालांकि वह काफी शर्मीले स्वभाव के थे। राजनीतिक परिवार से होने की वजह से वह सीमित दायरे में रहते थे और उन्हें लगता था कि संभलकर रहना चाहिए। ‘तुझे मेरी कसम’ से फिल्मों में एंट्री रितेश का फिल्मों में आने का विचार धीरे-धीरे बना। उस समय तेलुगु फिल्म ‘नुव्वे कवाली’ बड़ी हिट हुई थी और इसके हिंदी रीमेक की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान रितेश तक फिल्म की स्क्रिप्ट पहुंची। शुरुआत में उन्होंने ओरिजिनल फिल्म देखने की कोशिश की, लेकिन भाषा समझ नहीं आने की वजह से ज्यादा देर नहीं देख पाए। बाद में निर्देशक के. विजय भास्कर ने उन्हें हैदराबाद बुलाकर पूरी स्क्रिप्ट सुनाई। रितेश स्क्रिप्ट और किरदार की सादगी से प्रभावित हुए। उन्हें लगा कि यह किरदार उनकी कॉलेज लाइफ जैसा है। रितेश कहते हैं- ‘तुझे मेरी कसम’ के जरिए मुझे सब करने का मौका मिला, जो मैं कॉलेज के दिनों में कभी खुलकर नहीं कर पाया था। लोग एक्टर से ज्यादा सीएम का बेटा मानते थे उस समय इंडस्ट्री में चर्चा थी कि मुख्यमंत्री के बेटे होने की वजह से उन्हें आसानी से लॉन्च मिल गया। लेकिन रितेश मानते हैं कि इस बैकग्राउंड की वजह से उन पर दबाव भी बहुत ज्यादा था। लोग उन्हें एक्टर से ज्यादा सीएम का बेटा मानते थे। डेब्यू के बाद उनका करियर आसान नहीं रहा। उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप रहीं और इंडस्ट्री में धारणा बनने लगी कि वह ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएंगे। सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में रितेश ने बताया था कि जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, तब उन्हें भरोसा नहीं था कि वह इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिक पाएंगे। फिल्में फ्लॉप हुईं तो एक्टिंग छोड़ने का ख्याल आया रितेश ने बताया कि एक समय ऐसा आया जब उनकी लगातार पांच फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं। उस दौर में उन्हें लगने लगा था कि उनका करियर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा था- एक वक्त ऐसा आया जब मेरी लगातार पांच फिल्में फ्लॉप हुईं। तब मैंने सोचा- बस, अब पैकअप… मैं वापस आर्किटेक्चर में चला जाऊंगा। उस दौर में इंडस्ट्री में चर्चा शुरू हो गई थी कि रितेश शायद लंबे समय तक बॉलीवुड में टिक नहीं पाएंगे। लगातार असफल फिल्मों की वजह से उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित हुआ। कॉमेडी फिल्मों ने इंडस्ट्री में टिकने का मौका दिया लगातार असफलताओं के बाद रितेश के करियर ने नया मोड़ लिया। फ्लॉप फिल्मों के बाद जब उनकी फिल्में सफल होने लगीं, तो उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में उनकी नई जिंदगी शुरू हो गई है। कॉमेडी फिल्मों में रितेश देशमुख की टाइमिंग दर्शकों को पसंद आने लगी। ‘मस्ती’, ‘क्या कूल हैं हम’, ‘मालामाल वीकली’, ‘हे बेबी’, ‘धमाल’ और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड में पहचान दिलाई। दैनिक भास्कर से बातचीत में रितेश देशमुख कहते हैं- मैं लोगों का आभारी हूं। उस दौर में जब मैंने डेब्यू किया था, अगर किसी एक तरह की फिल्म हिट हो जाती थी तो उसी तरह के और काम मिलते थे। इसलिए मेरी एक कॉमेडी फिल्म चली, तो फिर मुझे दूसरी और तीसरी कॉमेडी फिल्म मिलीं। मैं खुशकिस्मत था कि कॉमेडी-जेनर ने मुझे लंबे समय तक इंडस्ट्री में बनाए रखा। रितेश के मुताबिक, राजनीतिक परिवार से आने की वजह से उन्होंने बचपन से हार और वापसी दोनों करीब से देखी हैं। यही वजह है कि वह असफलता से जल्दी टूटते नहीं हैं। कॉमेडी इमेज तोड़ने का फैसला किया रितेश देशमुख लंबे समय तक बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों के लिए पहचाने जाते रहे। लेकिन करियर के एक दौर में उन्होंने अपनी इमेज तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने ऐसे किरदार चुनने शुरू किए, जिनमें उनका डार्क और खतरनाक अंदाज दिखाई दे। दिलचस्प बात यह रही कि विलेन के रूप में भी उन्हें काफी सराहना मिली। ‘एक विलेन’ बना करियर का टर्निंग पॉइंट रितेश के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट ‘एक विलेन’ रही। साल 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने राकेश महाडकर नाम के सीरियल किलर का किरदार निभाया था। फिल्म में उनका किरदार एक आम आदमी का था, जो बाहर से शांत और साधारण नजर आता है, लेकिन अंदर से बेहद हिंसक और मानसिक रूप से परेशान होता है। राकेश अपनी पत्नी से लगातार अपमानित महसूस करता है और इसी कुंठा में महिलाओं की बेरहमी से हत्या करने लगता है। फिल्म में रितेश का शांत चेहरा और अचानक हिंसक हो जाना दर्शकों के लिए काफी शॉकिंग था। साबित किया कि सिर्फ कॉमेडी एक्टर नहीं हैं ‘एक विलेन’ के रोल के लिए रितेश की काफी तारीफ हुई। कई क्रिटिक्स ने लिखा कि रितेश ने पहली बार साबित किया कि वह सिर्फ कॉमेडी एक्टर नहीं हैं। साल 2019 में फिल्म ‘मरजावां’ में रितेश ने विष्णु शेट्टी नाम का निगेटिव किरदार निभाया। यह रोल अलग था, क्योंकि फिल्म में उनका किरदार बौने गैंगस्टर का था। विष्णु बेहद गुस्सैल, सनकी और पावर का भूखा इंसान होता है। फिल्म में वह सिद्धार्थ मल्होत्रा के किरदार से नफरत करता है और अपने वर्चस्व के लिए किसी भी हद तक चला जाता है। हालांकि फिल्म को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली, लेकिन रितेश के डायलॉग्स और स्क्रीन प्रेजेंस की काफी चर्चा हुई। खासकर उनका डायलॉग- “कमिनेपन की हाइट तीन फुट” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। रितेश कहा कि ‘एक विलेन’ उनके लिए बड़ा रिस्क थी, क्योंकि लोग उन्हें उस तरह के किरदार में देखने के आदी नहीं थे। लेकिन फिल्म की सफलता के बाद इंडस्ट्री का नजरिया बदल गया। इसके बाद उन्हें अलग तरह के रोल मिलने शुरू हुए। रितेश की सबसे बड़ी ताकत उनका सॉफ्ट फेस माना जाता है। स्क्रीन पर वह सामान्य और शांत इंसान जैसे दिखते हैं। यही वजह है कि जब वह अचानक हिंसक या खतरनाक किरदार निभाते हैं, तो उसका असर ज्यादा मजबूत दिखाई देता है। क्रिटिक्स का मानना है कि रितेश ने विलेन के किरदारों में ओवरएक्टिंग के बजाय शांत और दबे हुए गुस्से का इस्तेमाल किया, जिसने उनके रोल्स को ज्यादा डरावना बनाया। प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर नई पारी की शुरुआत अभिनेता होने के साथ-साथ रितेश देशमुख अब प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर भी मराठी इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन चुके हैं। रितेश और उनकी पत्नी जेनेलिया डिसूजा ने मिलकर ‘मुंबई फिल्म कंपनी’ नाम की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। राजनीतिक परिवार से आने वाले रितेश हमेशा से मराठी संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने मराठी फिल्मों को बड़े स्तर पर पेश करने की कोशिश की और ऐसी फिल्में बनाई, जिनका स्केल हिंदी फिल्मों जैसा दिखाई दे। ‘लय भारी’ ने मराठी सिनेमा की तस्वीर बदल दी साल 2014 में रिलीज हुई ‘लय भारी’ रितेश के मराठी करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म को जेनेलिया ने प्रोड्यूस किया था और डायरेक्टर निशिकांत कामत थे। फिल्म में रितेश ने दोहरे रोल निभाए थे। एक्शन, भावनाएं और जनप्रिय मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म ने मराठी बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई की थी। उस दौर में मराठी फिल्मों का बजट अपेक्षाकृत कम माना जाता था, लेकिन ‘लय भारी’ ने साबित किया कि मराठी सिनेमा भी बड़े पैमाने पर बनी फिल्मों को सफल बना सकता है। फिल्म में सलमान खान का छोटा-सा कैमियो भी चर्चा में रहा था। रितेश ने कई मराठी फिल्मों को प्रोड्यूस किया। उनका फोकस ऐसी कहानियों पर रहा, जो मराठी दर्शकों से जुड़ी हों, लेकिन प्रेजेंटेशन और स्केल में राष्ट्रीय स्तर की दिखें। मराठी फिल्म ‘वेद’ से डायरेक्टर बने साल 2022 में मराठी फिल्म ‘वेद’ के जरिए रितेश ने निर्देशन में कदम रखा। यह फिल्म तेलुगु फिल्म ‘मजिली’ की मराठी रीमेक थी। फिल्म में रितेश और जेनेलिया की जोड़ी नजर आई। ‘वेद’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई और मराठी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। डायरेक्टर के तौर पर भी रितेश की काफी तारीफ हुई। अब ‘राजा शिवाजी’ से चर्चा में इन दिनों रितेश अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म रिलीज हो चुकी है और बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। यह फिल्म ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ के जीवन, युद्ध कौशल और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना के संघर्ष पर आधारित है। फिल्म में रितेश ने खुद शिवाजी महाराज की भूमिका निभाई है और निर्देशन भी किया है। सलमान खान समेत कई बड़े स्टार्स की मौजूदगी फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका बड़ा स्टारकास्ट माना जा रहा है। सलमान खान फिल्म में खास कैमियो रोल में नजर आए हैं। उनके अलावा संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, फरदीन खान, विद्या बालन, जेनेलिया और कई मराठी कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दिए हैं। यह फिल्म मराठी और हिंदी में रिलीज हुई है। खुद को अपडेट रखना बहुत जरूरी है संघर्ष और चुनौतियों पर बात करते हुए रितेश देशमुख कहते हैं- चुनौती और संघर्ष यही है कि समय बदलता रहता है और सिनेमा के साथ दर्शकों की सोच भी बदल जाती है। हम अक्सर उसी पुराने ढंग की एक्टिंग में अटक जाते हैं, क्योंकि वह पहले चली थी। लेकिन समय बदलने पर अगर आप उसी तरह के रहो, तो आउट-डेट लगने लगते हैं। इसलिए अपने आप को समय के साथ अपडेट करना बहुत जरूरी है। _____________________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... पिता बस ड्राइवर थे, ₹300 लेकर एक्टर बनने निकले:थिएटर में ₹50 कमाए, टीवी से शुरुआत करने वाले यश को केजीएफ ने पैन-इंडिया स्टार बनाया यश आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनका सफर संघर्षों से भरा रहा। कर्नाटक के साधारण परिवार में जन्मे यश के पिता BMTC बस ड्राइवर थे, जबकि मां हाउसवाइफ थीं। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक्टर बनना है। घरवालों की चिंता और पैसों की तंगी के बावजूद वे महज ₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचे।पूरी खबर पढ़ें..
रणवीर सिंह स्टारर फिल्म 'धुरंधर 2' बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड ब्रेकिंग परफॉरमेंस के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए तैयार है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 5 जून से जियो-हॉटस्टार पर स्ट्रीम होगी। फिल्म का डिजिटल प्रीमियर 4 जून को शाम 7 बजे रखा गया है। वर्ल्डवाइड 3000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर यह फ्रेंचाइजी भारत की सबसे सफल फिल्म सीरीज बन चुकी है। सोशल मीडिया पर हुई स्ट्रीमिंग की घोषणाफिल्म की ओटीटी रिलीज की जानकारी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर दी है। पोस्ट में लिखा गया, आंधी बनके जो आ रहा है उसे धुरंधर कहते हैं। देखिए धुरंधर: द रिवेंज, रॉ और अनदेखा। ग्रैंड डिजिटल प्रीमियर 4 जून शाम 7 बजे, स्ट्रीमिंग शुरू 5 जून से सिर्फ जियो-हॉटस्टार पर। भारत की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म धुरंधर: द रिवेंज बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड बना रही है। फिल्म ने अब तक भारत में करीब ₹1144 करोड़ नेट कलेक्शन और दुनियाभर में लगभग ₹1795 करोड़ ग्रॉस कमाई कर ली है। फिल्म ने पेड प्रीव्यू से ₹75 करोड़ कमाकर नया रिकॉर्ड बनाया था और बाद में वर्ल्डवाइड कलेक्शन में बाहुबली 2: द कंक्लूजन को भी पीछे छोड़ दिया। यह भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है। धुरंधर और धुरंधर 2 ने मिलकर दुनियाभर में 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली। इसके बाद यह 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म फ्रेंचाइजी बन गई है। जब किसी एक फिल्म की सफलता के बाद उसके एक से ज्यादा पार्ट बनाए जाते हैं तो वह एक फ्रेंचाइजी का रूप ले लेती है। फिल्म में लंबी स्टारकास्ट इस सीक्वल में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं। उनके अलावा फिल्म में संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन, गौरव गेरा, राकेश बेदी और ब्रजेंद्र काला जैसे कलाकार नजर आएंगे। बता दें कि इस फ्रेंचाइजी के पहले हिस्से में अक्षय खन्ना ने भी अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म को ज्योति देशपांडे और आदित्य धर ने मिलकर जियो स्टूडियोज और B62 स्टूडियोज के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। अर्जुन बोले- ऐसी फिल्म से इतिहास बनता हैफिल्म में मेजर इकबाल का किरदार निभाने वाले एक्टर अर्जुन रामपाल ने इस सफलता पर खुशी जताई है। हाल ही में उन्होंने ANI से बातचीत में कहा, इतनी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनना हर किसी का सपना होता है। करियर में ऐसी फिल्म मिलना बहुत जरूरी है, क्योंकि आप एक तरह से इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। जब आप ऐसी फिल्म से जुड़ते हैं, तो इसका फायदा पूरी टीम को मिलता है। आदित्य धर ने अलग सोच के साथ किया कास्टमेजर इकबाल के रोल में अपनी कास्टिंग को याद करते हुए अर्जुन ने बताया कि उन्होंने डायरेक्टर आदित्य धर से पूछा था कि वे उन्हें इस रोल में कैसे देखते हैं। इस पर आदित्य ने कहा था, मैंने आपकी सभी फिल्में देखी हैं। मुझे पता है कि आप इस किरदार में जो भी नयापन लाएंगे, वो बिल्कुल अलग होगा। अर्जुन के मुताबिक, यहीं से उनका सफर शुरू हुआ और फिल्म ने कामयाबी की नई दास्तान लिख दी।
एक्ट्रेस आलिया भट्ट कांस फिल्म फेस्टिवल 2026 में अपने लुक्स को लेकर चर्चा में रहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा। कुछ वीडियो वायरल होने के बाद दावा किया गया कि इंटरनेशनल पैपराजी ने उन्हें इग्नोर किया। अब एक्टर सोनू सूद आलिया के समर्थन में उतरे हैं। सोनू ने लोगों से अपील की है कि वे इंटरनेशनल स्टेज पर भारतीय कलाकारों का हौसला बढ़ाएं, न कि उनकी कमियां ढूंढें। सोनू सूद बोले- कांस में खड़ा होना ही बड़ी उपलब्धिसोनू सूद ने सोशल मीडिया पर एक मैसेज शेयर किया है। हालांकि उन्होंने पोस्ट में सीधे तौर पर आलिया का नाम नहीं लिया, लेकिन फैंस इसे आलिया के सपोर्ट में देख रहे हैं। सोनू ने लिखा, जब हमारा कोई इंटरनेशनल स्टेज पर जाता है, तो यह गर्व का पल होना चाहिए, कमियां निकालने का नहीं। हर उपलब्धि को कैमरों, हेडलाइंस या अजनबियों की वाहवाही की जरूरत नहीं होती। वहां खड़े होकर ग्रेस के साथ अपने क्राफ्ट का प्रतिनिधित्व करना ही बड़ी उपलब्धि है। दूसरों को नीचे गिराने वालों के पास सपने नहीं होतेसोनू ने ट्रोलिंग कल्चर पर तंज कसते हुए आगे लिखा, आज की दुनिया को ट्रोल करने की लत लग गई है, लेकिन आप दूसरों का हौसला बढ़ाना चुनें। जो लोग अपने सपने पूरे करने में बिजी होते हैं, उनके पास दूसरों को नीचे गिराने का वक्त नहीं होता। चमकते रहो मेरे दोस्त, जिन्हें तुम्हारी रोशनी देखनी थी उन्होंने देख ली। आलिया ने भी ट्रोल को दिया मजेदार जवाबइससे पहले आलिया ने भी अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट पर एक ट्रोल को जवाब दिया था। एक यूजर ने आलिया की आइवरी साड़ी वाली फोटो पर कमेंट किया था- कितने दुख की बात है, वहां किसी ने आपको नोटिस ही नहीं किया। इस पर आलिया ने शांति और शालीनता से जवाब दिया, दुख कैसा प्यार? आपने तो मुझे नोटिस किया । अली गोनी और राहुल वैद्य ने भी उठाई आवाजआलिया के सपोर्ट में केवल सोनू सूद ही नहीं, बल्कि टीवी एक्टर अली गोनी और सिंगर राहुल वैद्य भी सामने आए। अली गोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि यह देखना दुखद है कि जब कोई भारत को ग्लोबल लेवल पर रिप्रजेंट कर रहा है, तो हमारे अपने ही लोग उसका मजाक उड़ा रहे हैं। राहुल वैद्य ने भी लोगों से भारतीय कलाकारों के प्रति दयालु रहने की अपील की। लगातार दूसरी बार कांस पहुंचीं आलियाआलिया भट्ट ने इस साल लगातार दूसरी बार कांस फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने 2025 में यहां अपना डेब्यू किया था। इस साल आलिया ने भारत पैवेलियन के लिए आइवरी सिल्क साड़ी-गाउन और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए सिंड्रेला स्टाइल का ब्लू गाउन चुना था।
एक्ट्रेस आलिया भट्ट कांस फिल्म फेस्टिवल 2026 में अपने लुक्स को लेकर चर्चा में रहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा। कुछ वीडियो वायरल होने के बाद दावा किया गया कि इंटरनेशनल पैपराजी ने उन्हें इग्नोर किया। अब एक्टर सोनू सूद आलिया के समर्थन में उतरे हैं। सोनू ने लोगों से अपील की है कि वे इंटरनेशनल स्टेज पर भारतीय कलाकारों का हौसला बढ़ाएं, न कि उनकी कमियां ढूंढें। सोनू सूद बोले- कांस में खड़ा होना ही बड़ी उपलब्धिसोनू सूद ने सोशल मीडिया पर एक मैसेज शेयर किया है। हालांकि उन्होंने पोस्ट में सीधे तौर पर आलिया का नाम नहीं लिया, लेकिन फैंस इसे आलिया के सपोर्ट में देख रहे हैं। सोनू ने लिखा, जब हमारा कोई इंटरनेशनल स्टेज पर जाता है, तो यह गर्व का पल होना चाहिए, कमियां निकालने का नहीं। हर उपलब्धि को कैमरों, हेडलाइंस या अजनबियों की वाहवाही की जरूरत नहीं होती। वहां खड़े होकर ग्रेस के साथ अपने क्राफ्ट का प्रतिनिधित्व करना ही बड़ी उपलब्धि है। दूसरों को नीचे गिराने वालों के पास सपने नहीं होतेसोनू ने ट्रोलिंग कल्चर पर तंज कसते हुए आगे लिखा, आज की दुनिया को ट्रोल करने की लत लग गई है, लेकिन आप दूसरों का हौसला बढ़ाना चुनें। जो लोग अपने सपने पूरे करने में बिजी होते हैं, उनके पास दूसरों को नीचे गिराने का वक्त नहीं होता। चमकते रहो मेरे दोस्त, जिन्हें तुम्हारी रोशनी देखनी थी उन्होंने देख ली। आलिया ने भी ट्रोल को दिया मजेदार जवाबइससे पहले आलिया ने भी अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट पर एक ट्रोल को जवाब दिया था। एक यूजर ने आलिया की आइवरी साड़ी वाली फोटो पर कमेंट किया था- कितने दुख की बात है, वहां किसी ने आपको नोटिस ही नहीं किया। इस पर आलिया ने शांति और शालीनता से जवाब दिया, दुख कैसा प्यार? आपने तो मुझे नोटिस किया । अली गोनी और राहुल वैद्य ने भी उठाई आवाजआलिया के सपोर्ट में केवल सोनू सूद ही नहीं, बल्कि टीवी एक्टर अली गोनी और सिंगर राहुल वैद्य भी सामने आए। अली गोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि यह देखना दुखद है कि जब कोई भारत को ग्लोबल लेवल पर रिप्रजेंट कर रहा है, तो हमारे अपने ही लोग उसका मजाक उड़ा रहे हैं। राहुल वैद्य ने भी लोगों से भारतीय कलाकारों के प्रति दयालु रहने की अपील की। लगातार दूसरी बार कांस पहुंचीं आलियाआलिया भट्ट ने इस साल लगातार दूसरी बार कांस फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने 2025 में यहां अपना डेब्यू किया था। इस साल आलिया ने भारत पैवेलियन के लिए आइवरी सिल्क साड़ी-गाउन और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए सिंड्रेला स्टाइल का ब्लू गाउन चुना था।
बॉलीवुड में स्पोर्ट्स ड्रामा की विश्वसनीयता हमेशा एक बड़ी कसौटी रही है और इसी कसौटी पर खरे उतरने के लिए पुलकित सम्राट ने अपनी अपकमिंग नेटफ्लिक्स सीरीज़ ‘ग्लोरी’ में खुद को पूरी तरह ढाल दिया है। हाल ही में रिलीज हुई इस सीरीज में वह एक प्रोफेशनल बॉक्सर के रोल में नजर आ रहे हैं। ट्रेलर लॉन्च के दौरान उन्होंने पेशेवर बॉक्सर नीरज गोयत के साथ लाइव रिंग में उतरकर सभी को चौंका दिया था। एक्टर से फाइटर जैसा बनने की जर्नी काफी चैलेंजिंग रही पुलकित के ट्रेनर ड्रयू नील के मुताबिक उनका मकसद केवल उन्हें बॉक्सिंग सिखाना नहीं था, बल्कि उन्हें एक असली बॉक्सर में बदलना था। ड्रयू ने इस प्रक्रिया को एक इंस्पायरिंग जर्नी बताया, जिसमें पुलकित को सिर्फ रिंग में सही दिखना ही नहीं, बल्कि एक फाइटर की तरह सोचना और महसूस करना भी सिखाया गया। ड्रयू के अनुसार उन्होंने शूटिंग से करीब 9 महीने पहले ट्रेनिंग शुरू की, जो बेहद कम समय माना जाता है। तैयारी में सिर्फ फिटनेस नहीं, फंक्शनल स्ट्रेंथ पर रहा फोकसबॉक्सर बनने की तैयारी में सबसे बड़ा बदलाव पुलकित की फिटनेस अप्रोच में आया। जहां आमतौर पर एक्टर्स स्क्रीन पर अच्छे दिखने के लिए मसल्स पर काम करते हैं, वहीं ड्रयू ने उनके शरीर को फंक्शनल बनाने पर जोर दिया। पुलकित पहले से ही फिट और रिप्ड थे, लेकिन उन्हें रिंग के हिसाब से मजबूत बनाने के लिए उनका वजन संतुलित किया गया ताकि वह मुकाबले के दौरान लंबे समय तक टिक सकें और प्रभावी प्रदर्शन कर सकें। हजारों रियल पंच मारे, पूरी ट्रेनिंग शरीर की असली परीक्षा भी हुई ट्रेनिंग का सबसे कठिन हिस्सा था स्टैमिना और रिपिटेशन। ड्रयू के मुताबिक पुलकित को रोजाना हजारों जैब्स और क्रॉसेस मारने पड़ते थे, जिससे उनके कंधों पर जबरदस्त दबाव पड़ा। यह उनके लिए नया अनुभव था, क्योंकि पहले उन्होंने इस तरह की लगातार पंचिंग ट्रेनिंग नहीं की थी। शरीर को लंबे समय तक लगातार एक्टिव रखने और उसी तीव्रता से प्रदर्शन करने के लिए उन्हें कड़े मैराथन सेशन्स से गुजरना पड़ा। पुलकित के इस सफर की गवाह उनकी पत्नी और कृति खरबंदा भी रहीं, जिन्होंने उनकी मेहनत की सराहना की और एक इमोशनल नोट भी शेयर किया।
फिल्ममेकर मीरा नायर ने हाल ही में मशहूर चित्रकार अमृता शेरगिल के जीवन से प्रेरित अपनी नई फिल्म ‘अमरी’ का ऐलान किया। इसके बाद से इंडस्ट्री में एक बार फिर अमृता प्रीतम की भी बायोपिक को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। खबरें सामने आते ही बॉलीवुड में उस दूसरी ‘अमृता’ यानि अमृता प्रीतम की अधूरी कहानी फिर याद की जाने लगी, जिस पर सालों से फिल्म बनाने की कोशिशें होती रही हैं। भंसाली का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर रह गई ‘गुस्ताखियां’ अमृता प्रीतम की जिंदगी को बड़े परदे पर उतारने की सबसे बड़ी कोशिश संजय लीला भंसाली ने की थी। ‘गुस्ताखियां’ नाम के प्रोजेक्ट पर वह लंबे समय तक काम करते रहे हैं। शाहरुख- प्रियंका के नाम ने भी बटोरी थीं सुर्खियां भंसाली की फिल्म के लिए पहले ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम सामने आया था। बाद में करीना कपूर खान भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ीं। हालांकि, मेल लीड और डेट्स की समस्याओं के चलते फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई। भंसाली के अलावा डायरेक्टर जसमीत के. रीन ने भी अमृता प्रीतम और साहिर की कहानी पर काम शुरू किया था। शाहरुख खान, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के जरिए इसे प्रोड्यूस कर करने वाले थे और संभवतः खुद साहिर का किरदार भी प्ले करते। वहीं, अमृता प्रीतम के रोल के लिए सबसे ज्यादा चर्चा प्रियंका चोपड़ा जोनास के नाम की थी। ‘अमरी’ का रिस्पॉन्स मेकर्स को देगा एक नई हिम्मत माना जा रहा है कि अगर ‘अमरी’ दर्शकों और क्रिटिक्स के बीच चर्चा का विषय बनती है, तो फिल्ममेकर्स फिर से अमृता प्रीतम की कहानी को बड़े परदे पर लाने का रिस्क ले सकते हैं। फिलहाल, हिंदी सिनेमा की यह सबसे चर्चित अधूरी बायोपिक्स में से एक बनी हुई है, जिसका इंतजार दर्शकों को सालों से है। जानकारों के मुताबिक, अमृता प्रीतम की कहानी में प्रेम, दर्द, विद्रोह और साहित्य का ऐसा मेल है, जो बड़े परदे के लिए परफेक्ट माना जाता है। साहिर लुधियानवी के लिए उनका प्रेम, उनकी कविताएं और बाद में इमरोज के साथ उनका रिश्ता हमेशा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यही वजह है कि हर दौर के बड़े फिल्ममेकर्स उनकी जिंदगी को बेहद सिनेमैटिक मानते रहे हैं।
वेटरन सिंगर ऊषा उत्थुप ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट पर रिएक्ट किया, जिसमें उनके एक गाने को ममता बनर्जी की हालिया चुनावी हार से जोड़ा गया। सिंगर ने इन दावों को गलत बताया। दरअसल, यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब X पर एक यूजर ने उत्थुप का बंगाली गाना 'दीदी' गाते हुए वीडियो शेयर किया। पोस्ट में दावा किया गया कि सिंगर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार का जश्न मना रही हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि TMC शासन के दौरान उनके कार्यक्रमों के लिए कट मनी मांगी जाती थी, जिसके कारण वह कोलकाता छोड़कर मुंबई चली गई थीं। यूजर ने लिखा कि अब वह वापस लौट आई हैं। सिंगर ने दावों को बताया गलत इन दावों पर रिएक्ट करते हुए ऊषा उत्थुप ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर मेरे बारे में एक पोस्ट वायरल हो रही है। मैं साफ करना चाहती हूं कि उस पोस्ट में कही गई कई बातें गलत और भ्रामक हैं। जिस गाने की बात हो रही है, वह एक बंगाली गाना है। इसे कई साल पहले बनाया गया था और यह एक अरबी धुन से प्रेरित है। मैं पिछले 20 सालों से इसे सिर्फ एक संगीत प्रस्तुति के तौर पर गाती आ रही हूं।’ सिंगर ने आगे लिखा, ‘मैं यह भी साफ करना चाहती हूं कि मैं 1976 से कोलकाता में रह रही हूं। मैंने कभी कोलकाता छोड़कर मुंबई शिफ्ट नहीं किया। कोलकाता हमेशा मेरा घर रहा है और मैं आज भी यहां के लोगों और इस शहर से बहुत प्यार करती हूं।’ पोस्ट के अंत में ऊषा उत्थुप ने लिखा, ‘उस पोस्ट में जो बातें, टिप्पणियां और कहानियां फैलाई जा रही हैं, उनका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। मैं उनसे खुद को नहीं जोड़ती और उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेती। कृपया मुझे बेवजह ऐसे विवादों में न घसीटें, जिनसे मेरा कोई संबंध नहीं है। ढेर सारा प्यार, दीदी (ऊषा उत्थुप)।’ बंगाल चुनाव में TMC की हार हुई गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की। पार्टी ने 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतीं, जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गई। पार्टी की सीटों की संख्या 215 से घटकर 80 हो गई और ममता बनर्जी भी अपनी भवानीपुर सीट हार गईं। बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को राज्य के पहले भाजपा (BJP) मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
ओटीटी के दौर में ऐसी फिल्मों की कमी नहीं है जो समाज के कड़वे सच को सामने लाने का दावा करती हैं। कर्तव्य भी उसी रास्ते पर चलती नजर आती है। फिल्म जातिवाद, ऑनर किलिंग, पाखंडी बाबाओं का नेटवर्क, सिस्टम की सड़ांध और इंसानियत जैसे कई गंभीर मुद्दों को एक साथ छूने की कोशिश करती है। ऊपर से सैफ अली खान, रसिका दुग्गल और संजय मिश्रा जैसे मजबूत कलाकार भी हैं। सुनने में सब कुछ दमदार लगता है, लेकिन दिक्कत यह है कि फिल्म अपने इरादों जितनी मजबूत बन नहीं पाती। कहना बहुत कुछ चाहती है, मगर असर उतना नहीं छोड़ पाती। इस फिल्म की लेंथ एक घंटा 49 मिनट है। इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 5 में से 2 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी क्या है? कहानी हरियाणा के काल्पनिक कस्बे झामली में सेट है, जहां ईमानदार पुलिस अफसर पवन (सैफ अली खान) अपनी नौकरी को सिर्फ वर्दी नहीं, जिम्मेदारी मानता है। मामला तब उलझता है जब एक पत्रकार, जो इलाके के प्रभावशाली बाबा आनंद श्री के काले राज खोलने में जुटी होती है, झामली पहुंचती है। लेकिन सच सामने आने से पहले ही उसकी हत्या हो जाती है। यहीं से कहानी एक ऐसे जाल में उतरती है, जहां गायब हो रहे बच्चे, ऑनर किलिंग, जातिगत दबाव और सत्ता का डरावना खेल एक एक कर सामने आने लगता है। दूसरी तरफ पवन के घर में भी उथल पुथल मच जाती है, जब उसका छोटा भाई समाज की तय सीमाओं के खिलाफ जाकर दूसरी जाति में शादी कर लेता है। फिल्म कई जगह यह सवाल पूछती है कि इंसान का असली कर्तव्य क्या है। परिवार के प्रति जिम्मेदारी, नौकरी का फर्ज या सच के साथ खड़े रहने की हिम्मत? मुद्दे मजबूत हैं, लेकिन कहानी कई बार खुद अपनी धार खो देती है। जहां जोरदार टकराव चाहिए होता है, वहां फिल्म खुद को थोड़ा संभाल लेती है। कई ट्विस्ट पहले से समझ आने लगते हैं और थ्रिलर वाला रोमांच लगातार नहीं बन पाता। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? सैफ अली खान इस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। लंबे समय बाद पुलिस अफसर के किरदार में वह जमे हुए लगते हैं। उनके चेहरे पर जिम्मेदारी का बोझ, भीतर का गुस्सा और सिस्टम से लड़ने की बेचैनी साफ दिखती है। अच्छी बात यह है कि उनका किरदार सिर्फ एक ‘हीरो पुलिसवाला’ बनकर नहीं रह जाता, बल्कि इंसानी कमजोरी भी दिखाता है। संजय मिश्रा अपनी मौजूदगी महसूस कराते हैं, लेकिन उनका किरदार जितना असर छोड़ सकता था, उतना मौका उसे मिला नहीं। रसिका दुग्गल कम स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ती हैं, लेकिन उनके हिस्से में ज्यादा कुछ आता नहीं। फिल्म में सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं युधवीर अहलावत। दबाव, डर और मजबूरी के बीच पिसते एक लड़के के किरदार में वह कई जगह बेहद सच्चे लगते हैं और भावनात्मक असर छोड़ते हैं। हालांकि, फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा उसका विलेन साबित होता है। सौरभ द्विवेदी, बाबा आनंद श्री के रोल में, उतना डर या रहस्य पैदा नहीं कर पाते जिसकी कहानी को जरूरत थी। उनका किरदार कई जगह खतरनाक कम और सतही ज्यादा लगता है, जिससे फिल्म का बड़ा संघर्ष कमजोर पड़ जाता है। फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पहलू कैसा है? डायरेक्टर पुलकित की मंशा अच्छी नजर आती है। फिल्म अपनी गति बनाए रखती है और लगातार कुछ न कुछ होता रहता है, इसलिए बोरियत महसूस नहीं होती। लेकिन सिर्फ तेज रफ्तार से कहानी असरदार नहीं बनती, उसके लिए गहराई भी चाहिए और वही यहां थोड़ी कम महसूस होती है। सबसे ज्यादा खटकती है फिल्म की विजुअल ट्रीटमेंट। कहानी जिस कच्चे, धूल भरे और बेचैन माहौल की मांग करती है, स्क्रीन पर वह पूरी तरह नजर नहीं आता। हरियाणा की कठोर दुनिया जरूरत से ज्यादा साफ और चमकदार दिखती है। नतीजा यह होता है कि कहानी की गंदगी और डर दर्शक तक पूरी ताकत से पहुंच ही नहीं पाता। डायलॉग्स कुछ जगह अच्छे हैं और हरियाणवी टोन भी पकड़ते हैं। बैकग्राउंड स्कोर कहानी पर हावी नहीं होता, जो अच्छी बात है। लेकिन थ्रिलर वाला तनाव और सस्पेंस कई जगह फीका पड़ जाता है। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी राइटिंग है। कर्तव्य बहुत सारे मुद्दों को छूती जरूर है, लेकिन किसी एक पर पूरी ताकत से चोट नहीं कर पाती। ऑनर किलिंग का दर्द हो, जातिगत राजनीति का डर या सिस्टम की सड़ांध, सब कुछ थोड़ा थोड़ा दिखता है लेकिन पूरी गहराई से नहीं। कई किरदार आधे अधूरे लगते हैं और कहानी कई बार पहले से देखी हुई सी महसूस होती है। फिल्म हर मुश्किल मोड़ पर रिस्क लेने के बजाय सुरक्षित रास्ता चुनती दिखती है, और यही इसकी धार को कमजोर कर देता है। फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं? कर्तव्य बुरी फिल्म बिल्कुल नहीं है। इसके पास जरूरी मुद्दे हैं, अच्छे कलाकार हैं और कुछ असरदार पल भी हैं। लेकिन यह हर बार उस मुकाम पर पहुंचकर रुक जाती है, जहां इसे और ज्यादा तीखा, गुस्से वाला और बेखौफ होना चाहिए था। सैफ अली खान की ईमानदार परफॉर्मेंस फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन कमजोर लेखन और सुरक्षित कहानी इसे ऊपर उठने नहीं देती। यह फिल्म कई जरूरी सवाल उठाती है, लेकिन जवाब देने से पहले ही धीरे से पीछे हट जाती है।
सुपरस्टार रजनीकांत की आने वाली तमिल फिल्म 'जेलर 2' के सेट पर करंट लगने से एक कर्मचारी की मौत हो गई है। यह हादसा चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर पनैयूर स्थित आदित्यराम फिल्म सिटी के एक सेट पर हुआ। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक की पहचान 28 साल के कार्तिकेयन के तौर पर हुई है। यह हादसा पनैयूर में शूटिंग की जगह पर हुआ। मिली जानकारी के मुताबिक, कार्तिकेयन फिल्म की शूटिंग के लिए घर जैसा सेट तैयार करने का काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें जोरदार करंट लगा, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, कार्तिकेयन आर्ट डायरेक्शन से जुड़े काम में लगे हुए थे। कनाथुर पुलिस ने बताया कि मामले में अभी FIR दर्ज नहीं हुई है। पुलिस फिलहाल उस परिस्थिति की जांच कर रही है, जिसकी वजह से बिजली का लीकेज हुआ। जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी यह घटना उस घोषणा के कुछ दिनों बाद हुई है, जब फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी सन पिक्चर्स ने बताया था कि जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है। 21 अप्रैल को मेकर्स ने सोशल मीडिया पर रैप-अप पार्टी की तस्वीरें शेयर की थीं, जिनमें रजनीकांत और डायरेक्टर नेल्सन कलाकारों और क्रू के साथ केक काटते नजर आए थे। फिल्म की रिलीज डेट बदल सकती है रजनीकांत ने पहले मीडिया को बताया था कि फिल्म 12 जून को रिलीज हो सकती है। वहीं, हाल ही में पिंकविला की रिपोर्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि फिल्म की रिलीज डेट में बदलाव हो सकता है। अब फिल्म को 4 सितंबर 2026 को रिलीज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह तारीख कृष्ण जयंती के मौके पर पड़ रही है। फिल्म 2023 की ब्लॉकबस्टर जेलर का सीक्वल है। इसमें राम्या कृष्णन, योगी बाबू और मिर्ना अपने पुराने किरदारों में लौटेंगे। पहली फिल्म में मोहनलाल, शिवराजकुमार और जैकी श्रॉफ ने कैमियो किया था। विनायकन, वसंत रवि, तमन्ना भाटिया और सुनील भी अहम रोल में दिखे थे। सैकनिल्क के मुताबिक, लगभग ₹200 करोड़ के बजट में बनी जेलर ने दुनिया भर में ₹604.5 करोड़ की कमाई की थी। साउथ फिल्मों के सेट पर पहले भी हादसे हुए गौरतलब है कि इससे पहले भी साउथ फिल्मों के सेट पर हादसे हुए हैं। फिल्म ‘सरदार 2’ के सेट पर 54 वर्षीय स्टंटमैन एस. एलुमलाई की मौत स्टंट रिहर्सल के दौरान 20 फीट ऊंचाई से गिरने के कारण हुई थी। वहीं, कमल हासन की फिल्म ‘इंडियन 2’ के सेट पर 19 फरवरी 2020 को बड़ा हादसा हुआ था। यह हादसा चेन्नई के EVP फिल्म सिटी में रात के शूट के दौरान हुआ। शूटिंग के समय एक बड़ी क्रेन पर भारी लाइटिंग सेट लगाया गया था। अचानक क्रेन गिर गई और वहां मौजूद कई लोग उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में असिस्टेंट डायरेक्टर कृष्णा, आर्ट असिस्टेंट चंद्रन और प्रोडक्शन असिस्टेंट मधु शामिल थे। कई अन्य लोग घायल भी हुए थे। हादसे के बाद पुलिस ने लापरवाही का केस दर्ज किया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को त्रिमूर्ति फिल्म्स और फिल्म 'धुरंधर 2' के प्रोड्यूसर्स के बीच कॉपीराइट विवाद में त्रिमूर्ति फिल्म्स को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। मामला गाने ‘तिरछी टोपीवाले (ओए ओए)’ से जुड़ा है। त्रिमूर्ति फिल्म्स ने 'धुरंधर 2' की OTT रिलीज रोकने की मांग की थी। जिसको कोर्ट ने रोकने से इनकार कर दिया। हालांकि, जस्टिस तुषार राव गेडेला ने सुपर कैसेट्स को चार हफ्ते के अंदर कोर्ट में 50 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया। मामले में शिकायतकर्ता त्रिमूर्ति फिल्म्स (राजीव राय) हैं और प्रतिवादियों में सुपर कैसेट्स (टी-सीरीज) तथा B62 स्टूडियोज शामिल हैं। बता दें कि सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को दुनिया भर में टी-सीरीज के नाम से जाना जाता है। कोर्ट ने कहा कि इस समय वादी की मांग के अनुसार अंतरिम आदेश देना संभव नहीं है, लेकिन त्रिमूर्ति फिल्म्स के दावे को सुरक्षित करने के लिए जमा राशि की मांग करना सही होगा। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह रकम रजिस्ट्रार जनरल के नाम पर जमा की जाए और ऑटो-रिन्यूअल में रखी जाए। ट्रायल के अंत में सफल पक्ष को इसका लाभ मिलेगा। आदेश की विस्तृत कॉपी अभी जारी नहीं हुई है। क्या है पूरा मामला? प्रोडक्शन कंपनी त्रिमूर्ति फिल्म्स ने फिल्ममेकर आदित्य धर के प्रोडक्शन हाउस B62 स्टूडियोज के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का केस दायर किया था। कंपनी का आरोप था कि फिल्म 'धुरंधर 2' के गाने 'रंग दे लाल (ओए ओए)' में 1989 की फिल्म 'त्रिदेव' के फेमस गाने 'तिरछी टोपीवाले (ओए ओए)' और उससे मिलती-जुलती धुन का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। त्रिमूर्ति फिल्म्स का दावा था कि गाने के अधिकार उसके पास हैं और बिना लाइसेंस इसके इस्तेमाल से कॉपीराइट का उल्लंघन हुआ। कंपनी ने फिल्म की थिएटर रिलीज, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रमोशनल कंटेंट में गाने के व्यावसायिक उपयोग पर भी आपत्ति जताई। 'तिरछी टोपीवाले' मुख्य रूप से नसीरुद्दीन शाह और सोनम पर फिल्माया गया था। गाने का संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था। इसे अमित कुमार और सपना मुखर्जी ने गाया था और इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे। वहीं, नए वर्जन 'रंग दे लाल (ओए ओए)' को जैस्मिन सैंडलस, अफसाना खान, अमित कुमार और रेबल ने आवाज दी है। इसका संगीत शाश्वत सचदेव ने तैयार किया है और गाने में कल्याणजी-आनंदजी को भी क्रेडिट दिया गया है। गाने ‘तिरछी टोपीवाले’ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… धुरंधर 2 की OTT रिलीज मध्य मई तक नहीं होगी:गाने रंग दे लाल को लेकर कॉपीराइट केस में मेकर्स ने कोर्ट को दिया आश्वासन आदित्य धर के प्रोडक्शन हाउस B62 स्टूडियोज प्राइवेट लिमिटेड ने 9 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट को यह आश्वासन दिया था कि वह फिल्म धुरंधर: द रिवेंज को मई 2026 के मध्य तक किसी भी OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं करेगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
एक्टर रणबीर कपूर ने अयोध्या के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में जमीन खरीदी है। यह प्रोजेक्ट द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा (HoABL) का प्रीमियम प्लॉटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है। न्यूज एजेंसी ANI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कंपनी की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, यह डील 3.31 करोड़ रुपए में हुई है। खरीदी गई जमीन का कुल क्षेत्रफल 2,134 वर्ग फीट है। अमिताभ बच्चन के बाद 'द सरयू' में निवेश करने वाले रणबीर कपूर दूसरे बड़े एक्टर बने हैं। ‘द सरयू’ 75 एकड़ में फैला प्रोजेक्ट है, जो सरयू नदी के किनारे स्थित है। इस प्रोजेक्ट में ग्रैंड क्लब हाउस, 35 से ज्यादा लाइफस्टाइल सुविधाएं और द लीला होटल्स का पांच एकड़ में बनने वाला शुद्ध शाकाहारी लग्जरी होटल शामिल है। रणबीर बोले- अयोध्या ने मुझे चुना रणबीर ने बयान में कहा कि उन्हें लगता है कि अयोध्या ने उन्हें चुना है। उन्होंने कहा कि अयोध्या भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है और ‘द सरयू’ में यह जमीन उनके परिवार की विरासत का हिस्सा बनेगी। HoABL के चेयरमैन अभिनंदन लोढ़ा ने कहा कि अयोध्या सांस्कृतिक और आर्थिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म और दुनिया भर का ध्यान खींचने की वजह से शहर में लंबे समय तक विकास की संभावना है। उन्होंने कहा कि रणबीर कपूर का इन्वेस्टमेंट दिखाता है कि खरीदार अयोध्या को न केवल इमोशनली बल्कि भविष्य के नजरिए से भी एक महत्वपूर्ण इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में देख रहे हैं। ‘रामायण’ में भगवान राम बनेंगे रणबीर गौरतलब है कि यह इन्वेस्टमेंट ऐसे समय में सामने आया है, जब रणबीर डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' में भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं। हनुमान जयंती के मौके पर फिल्म से रणबीर का भगवान राम के रूप में लुक भी सामने आया था। देखें भगवान राम के लुक की झलक- फिल्म 'रामायण' से जुड़ी अहम बातें-
अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित और राजकुमार जैसे बड़े सितारों के साथ काम कर चुके दिग्गज फिल्ममेकर केसी बोकड़िया इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘तीसरी बेगम’ को लेकर चर्चा में हैं। लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बनी इस फिल्म को लेकर उन्होंने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की। बोकाड़िया ने बताया कि फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है और इसका मकसद किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर सवाल रखना है। उन्होंने सेंसर बोर्ड से विवाद, कोर्ट तक पहुंची लड़ाई और अपनी कन्विक्शन पर भी बेबाक राय रखी। सवाल: ‘तीसरी बेगम’ बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: एक असली घटना से। मैं एक परिचित के घर गया था, जहां उसने गर्व से बताया कि उसकी तीन पत्नियां हैं- मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण। वहीं से मेरे मन में सवाल आया कि अलग संस्कार और खान-पान वाली लड़कियां ऐसे माहौल में कैसे एडजस्ट करती होंगी। उसी सोच से फिल्म की कहानी बनी। सवाल: फिल्म में लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और हलाला जैसे मुद्दे दिख रहे हैं। इतने विवादित विषय पर फिल्म बनाने में डर नहीं लगा? जवाब: नहीं। मैंने जो देखा और महसूस किया, वही फिल्म में दिखाया। मेरा मकसद किसी धर्म को गलत बताना नहीं, बल्कि उन लड़कियों की मानसिक स्थिति दिखाना है जो अलग माहौल में जाकर संघर्ष करती हैं। मैंने इसे संतुलित तरीके से पेश किया है। सवाल: फिल्म में क्या दिखाया गया है? जवाब: फिल्म में एक ब्राह्मण लड़की शादी के बाद मुस्लिम परिवार में जाती है। वहां उसे नाम बदलने, तौर-तरीके अपनाने और नई जिंदगी में ढलने का दबाव झेलना पड़ता है। कहानी में उसकी परेशानी, संघर्ष और बाहर निकलने की कोशिश दिखाई गई है। सवाल: क्या फिल्म में धर्म परिवर्तन और जबरदस्ती जैसे मुद्दे भी हैं? जवाब: हमने दिखाया है कि कई बार लड़कियों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर शादी की जाती है। बाद में उन्हें सच्चाई पता चलती है। फिल्म सिर्फ समस्या नहीं दिखाती, यह भी बताती है कि फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। सवाल: क्या फिल्म में यह दिखाया गया है कि ऐसे मामलों के पीछे कोई नेटवर्क या पैसों का खेल होता है? जवाब: मैंने ऐसी बातें सुनी हैं, लेकिन फिल्म में उसे नहीं दिखाया। मैंने सिर्फ वही रखा जो कहानी और भावनाओं के हिसाब से जरूरी था। सवाल: सेंसर बोर्ड के साथ आपकी लंबी लड़ाई क्यों हुई? जवाब: सेंसर बोर्ड को कुछ डायलॉग्स और खासकर ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर आपत्ति थी। मैंने साफ कहा कि इसे हटाऊंगा नहीं। बाद में मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट ने फिल्म देखी और सिर्फ 24 सेकंड काटने के बाद रिलीज की अनुमति मिली। सवाल: क्या यह आपकी कन्विक्शन की जीत भी है? जवाब: बिल्कुल। अगर फिल्ममेकर को अपने विषय और कहानी पर भरोसा नहीं होगा तो वह फिल्म कैसे बनाएगा? मैंने वही दिखाया जो मुझे सही लगा। ‘जय सियाराम’ वाला सीन हटाने के लिए कहा गया, लेकिन मैं अपने स्टैंड पर कायम रहा। आखिरकार कोर्ट ने भी हमारी बात समझी। सवाल: ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर इतनी बहस क्यों हुई? जवाब: फिल्म में एक लड़की से पूछा जाता है कि उसका भगवान कौन है, तो वह ‘जय सियाराम’ बोलती है। सेंसर को इस पर आपत्ति थी, लेकिन मैंने कहा कि यह किरदार की सच्चाई है। बाद में कोर्ट ने ज्यादातर सीन रहने दिए। सवाल: आपने फिल्म को खुद रिलीज करने का फैसला क्यों लिया? जवाब: आज सिस्टम काफी बदल गया है। कई लोग पहले ओटीटी के बारे में सोचते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर कंटेंट अच्छा हो तो फिल्म थिएटर में जरूर चलती है। इसलिए मैंने खुद थिएटर मालिकों से बात की और अपनी तरह से फिल्म रिलीज करने का फैसला लिया। सवाल: क्या आज फिल्म रिलीज करना मुश्किल हो गया है? जवाब: बहुत मुश्किल है। टिकट, थिएटर और पूरा सिस्टम बदल गया है। अच्छे कंटेंट वाली फिल्मों को भी मौका कम मिलता है। लेकिन मुझे आज भी विश्वास है कि अच्छी फिल्म चलेगी। सवाल: इतने लंबे करियर और अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपको आज संघर्ष करना पड़ रहा है? जवाब: संघर्ष हर दौर में होता है। मैंने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है। उस दौर में रिश्तों और भरोसे पर काम होता था। आज सिस्टम बदल गया है, लेकिन मेरा काम करने का तरीका नहीं बदला। सवाल: क्या आज के स्टार्स और पुराने दौर के स्टार्स में फर्क महसूस होता है? जवाब: पहले कलाकारों में बहुत भरोसा था। अमिताभ बच्चन ने ‘आज का अर्जुन’ की कहानी तक नहीं सुनी थी। राजकुमार जैसे कलाकार फोन पर हां कह देते थे। आज चीजें ज्यादा कॉरपोरेट और सिस्टम बेस्ड हो गई हैं। सवाल: इतने बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपने ‘तीसरी बेगम’ में नए चेहरों को क्यों चुना? जवाब: इस कहानी में मासूमियत और वास्तविकता जरूरी थी। अगर बड़े स्टार्स होते तो दर्शकों का ध्यान किरदार से ज्यादा स्टार इमेज पर जाता। मुझे कहानी का असर ज्यादा जरूरी लगा। सवाल: क्या आपको लगता है कि फिल्म पर प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप लगेंगे? जवाब: हो सकता है, लेकिन मैं तैयार हूं। मेरा मकसद किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं है। मैंने हमेशा सामाजिक और पारिवारिक फिल्में बनाई हैं। यह भी उसी तरह की फिल्म है। सवाल: मुस्लिम समुदाय के लिए आपका क्या संदेश है? जवाब: हम सब एक हैं। अगर किसी समुदाय में गलत चीजें हो रही हैं, तो उन्हें रोकना चाहिए। किसी भी चीज को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। इंसानियत सबसे ऊपर है। सवाल: 78 साल की उम्र में भी इतनी ऊर्जा कहां से आती है? जवाब: भगवान की कृपा और लोगों का प्यार। मैंने हमेशा फिल्म इंडस्ट्री को पूजा की तरह माना है। अनुशासन में रहता हूं और काम को ईमानदारी से करता हूं। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री जैसी प्रतिस्पर्धी जगह में इतना सरल और ईमानदार रहना कितना मुश्किल है? जवाब: अगर इंसान साफ नीयत से काम करे तो मजा आता है। मैंने हमेशा रिश्तों और सम्मान को महत्व दिया है। यही वजह है कि इतने साल बाद भी लोग प्यार देते हैं। सवाल: दर्शकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब: ‘तीसरी बेगम’ परिवार के साथ देखने वाली फिल्म है। इसमें सिर्फ विवाद नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश और समाधान भी है। मैं चाहता हूं कि लोग इसे खुले मन से देखें।
टीवी एक्टर ऋत्विक धनजानी एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ में दिखाई देने वाले हैं। ऋत्विक इससे पहले भी इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा रह चुके हैं और तीसरी बार वो शो में दिखेंगे। ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की शूटिंग साउथ अफ्रीका के केपटाउन में होगी। शो में इस बार कई पुराने कंटेस्टेंट्स के साथ नए चेहरे भी नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में ऋत्विक ने अपने डर, ब्रेकअप, एंगर इश्यू, जिंदगी के संघर्ष और दोस्ती पर बात की। सवाल: तीसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ करने का फैसला कैसे लिया? डर नहीं लगा? जवाब: कोई गेम प्लान नहीं, कोई स्ट्रैटजी नहीं। बस कूद पड़ा। सच कहूं तो मुझे रिस्क लेने में मजा आता है। पहली बार जब मैंने ‘पेन इन स्पेन’ किया था, तब मैं बहुत डरा हुआ था, लेकिन जितना डर लगा, उतना ही मजा आया। जब वापस लौटा, तो दिल बहुत भरा हुआ था। ऐसा लगा कि इतने डर फेस करने के बाद अब समझ नहीं आ रहा कि आखिर डर किस चीज का था। सवाल: इस शो में ऐसा क्या खास है कि आप तीसरी बार लौट आए? जवाब: यह शो अपने आप में एक कार्निवल है। ‘कार्निवल ऑफ डेंजर्स’। मुझे ये सारी पागल चीजें करना बहुत पसंद है। हेलिकॉप्टर से कूदना, बाइक स्टंट करना, बड़े-बड़े स्टंट करना और ऊपर से उसके पैसे भी मिलना... इससे बड़ी ब्लेसिंग क्या होगी? इसलिए मुझे यह शो बहुत पसंद है। सवाल: लोग आपको हमेशा हंसते और पॉजिटिव देखते हैं, लेकिन अंदर का ऋत्विक कितना अलग है? जवाब: हर इंसान का एक वल्नरेबल साइड होता है। ऐसा नहीं है कि मैं हमेशा खुश रहता हूं। मेरी जिंदगी में भी बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं। पहले मैं बहुत पछताता था, भविष्य को लेकर बहुत सोचता था। मैं इस पल में बहुत कम जीता था, लेकिन अब मैंने यह समझ लिया है कि जिंदगी सिर्फ यही पल है। ना पास्ट बदल सकते हैं और ना फ्यूचर जानते हैं। इसलिए अब मैं हर पल को पूरी इंटेंसिटी के साथ जीता हूं। सवाल: क्या हार और संघर्ष इंसान को और मजबूत बनाते हैं? जवाब: बिल्कुल। जब जिंदगी में कुछ गलत होता है, तो लगता है कि हम पीछे रह गए हैं, लेकिन मैं हमेशा एक चीज सोचता हूं- रामजी का तीर आगे जाने से पहले तीन कदम पीछे जाता है। वही तीन कदम उसकी सबसे बड़ी ताकत बनते हैं। इसलिए अगर जिंदगी में कभी लगे कि पीछे रह गए हो, तो समझ लेना कि अब आगे बहुत दूर जाना है। सवाल: लोग हमेशा आपका स्माइलिंग फेस देखते हैं। क्या कभी लगा कि दुनिया को आपकी असली स्ट्रगल भी दिखनी चाहिए? जवाब: हां, क्योंकि मेरे साथ भी वही होता है जो हर इंसान के साथ होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि हमारी जिंदगी पब्लिक होती है। लोग जानते हैं कि हमारे जीवन में क्या चल रहा है, लेकिन मैं अपनी स्ट्रगल को ग्लोरिफाई नहीं करना चाहता। मैं बस यह दिखाना चाहता हूं कि चाहे जिंदगी में कितना भी बड़ा सेटबैक आए, आप उससे बाहर निकल सकते हो। सवाल: करण वाही के साथ आपकी दोस्ती काफी चर्चित है। इस बार भी दोनों साथ नजर आएंगे? जवाब: बिल्कुल। हमने इस शो को लेकर बहुत बातें कीं। हम एक-दूसरे से पूछ रहे थे कि करना चाहिए या नहीं, लेकिन आखिर में यही लगा कि यार, मजा आएगा। सच कहूं तो शायद अगर करण नहीं होता, तो मैं यह शो नहीं करता। जिंदगी में दोस्ती बहुत जरूरी होती है। अगर दोस्त साथ हो, तो फिर यह पूरा सफर एक वेकेशन जैसा लगता है। सवाल: इस बार भी किस चीज का सबसे ज्यादा डर है? जवाब: मुझे हमेशा से फ्री फॉल का बहुत डर रहा है। इसलिए मैंने आज तक स्काइडाइविंग नहीं की। अब मुझे ऐसा लगता है कि पहले दो सीजन्स के मुकाबले यह डर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन अभी भी ऐसा हो सकता है कि अगर मुझे किसी ऊंची चट्टान पर खड़ा कर दो, तो मैं ‘राम-राम-राम’ करता मिलूं, ऐसा भी हो सकता है। सवाल: असल जिंदगी में आपका सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: मुझे अपने गुस्से से बहुत डर लगता था। लोग यकीन नहीं करते, लेकिन मेरा गुस्सा बहुत खतरनाक था। कई सालों की मेहनत और जिंदगी में आए कुछ खूबसूरत लोगों की वजह से मैं खुद को बदल पाया। उन्होंने मुझे समझाया कि गुस्सा इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। मैं आज भी कोशिश करता हूं कि गुस्से से जितना दूर रह सकूं, रहूं क्योंकि गुस्सा सबसे बड़ा शैतान है। अगर इंसान अपने गुस्से और ईगो पर जीत हासिल कर ले, तो समझो उसने जिंदगी की आधी लड़ाई जीत ली।
59 साल की हो चुकीं माधुरी दीक्षित सिर्फ अपनी फिल्मों और डांस ही नहीं, बल्कि करियर से जुड़े दिलचस्प किस्सों की वजह से भी चर्चा में रही हैं। करियर के शुरुआती दौर में सुभाष घई ने उन्हें फिल्म कर्मा में छोटा रोल दिया था, लेकिन बाद में यह कहकर उनका सीन हटा दिया कि इतनी टैलेंटेड लड़की को छोटा रोल देना सही नहीं होगा। आगे चलकर उन्होंने माधुरी को अपनी फिल्मों में बड़े रोल दिए। फिल्म खलनायक के दौरान उनसे ‘नो प्रेग्नेंसी’ क्लॉज भी साइन करवाया गया था, ताकि शूटिंग प्रभावित न हो। वहीं, हम आपके हैं कौन..! के लिए माधुरी को सलमान खान से ज्यादा फीस मिली थी। आज माधुरी दीक्षित के जन्मदिन पर उनके करियर और निजी जीवन से जुड़े कुछ खास किस्से जानते हैं। माधुरी का नाम सुनते ही फिल्म के लिए हां कर दी थी सहिला चड्ढा के लिए माधुरी दीक्षित सिर्फ सुपरस्टार नहीं, बल्कि परिवार जैसी हैं। माधुरी के जन्मदिन पर दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने ‘हम आपके हैं कौन’ के सेट से लेकर बचपन तक की कई यादें साझा कीं। साहिला चड्डा कहती हैं- जब मुझे हम आपके हैं कौन..! ऑफर हुई थी, तब मैं सोलो हीरोइन वाली फिल्में कर रही थी। मैंने पहले फिल्म के लिए मना कर दिया था, क्योंकि मैं सेकंड रोल नहीं करना चाहती थी। लेकिन जब मुझे बताया गया कि माधुरी फिल्म में होंगी, तब मैंने तुरंत हां कर दी। माधुरी मेरे लिए कोई अजनबी स्टार नहीं थीं। मैं उन्हें बचपन से जानती हूं। उनकी चाची मेरी मासी हैं, इसलिए फैमिली फंक्शंस में मुलाकात होती रहती थी। उनके साथ हमेशा कम्फर्ट महसूस हुआ। बचपन से ही स्टार बनने का सपना देखती थीं माधुरी माधुरी बचपन से बहुत फोकस्ड थीं। उन्हें डांस का बहुत शौक था और वह छोटी उम्र से ट्रेनिंग ले रही थीं। अपने लुक्स, स्माइल, टीथ हर चीज का ध्यान रखती थीं। उन्हें शुरू से पता था कि उन्हें एक्ट्रेस बनना है। उनका पूरा फोकस अपने पैशन पर था। सेट पर कभी स्टार वाला एटीट्यूड नहीं दिखाया हम दोनों के बीच कभी इनसिक्योरिटी नहीं थी। न उन्हें मुझसे कोई असुरक्षा थी, न मुझे उनसे। हम सच में बहनों की तरह थे। माधुरी हर किसी से जल्दी घुलती-मिलती नहीं थीं, लेकिन जिनसे जुड़ती थीं, उनके साथ बहुत जेन्युइन रिश्ता बनाती थीं। घर से खाना आता था, तो मुझे जरूर बुलाती थीं अगर माधुरी के घर से कुछ अच्छा खाना आता था, तो वह मुझे जरूर बुलाती थीं। कई बार किसी को भेजकर बुलवाती थीं कि आओ, साथ में खाते हैं। उनके घर से अक्सर मच्छी आती थी, जबकि सलमान खान के घर से पूरी यूनिट के लिए बिरयानी आती थी। नॉन-वेज खाने के लिए हम लोग चुपचाप कमरे में चले जाते थे राजश्री प्रोडक्शंस के सेट पर बिना प्याज-लहसुन का खाना बनता था, लेकिन इतना स्वादिष्ट था कि आज तक उसका स्वाद याद है। मैं कुक से बार-बार पूछती थी कि पक्का इसमें प्याज-लहसुन नहीं डाला? उनका राजमा और बाकी सब्जियां कमाल की होती थीं। हालांकि नॉन-वेज खाने के लिए हम लोग चुपचाप कमरे में चले जाते थे। पिंपल होने पर माधुरी ने दिया अपना खास साबुन एक बार माधुरी के चेहरे पर पिंपल हो गया था। तब उन्होंने मुझे बताया कि वह कौन-सा साबुन इस्तेमाल करती हैं। बाद में जब मेरे चेहरे पर पिंपल आया, तो उन्होंने वही साबुन मुझे देते हुए कहा- ‘अब ये तुम्हारे काम आएगा।’ उस छोटी-सी बात में भी उनका अपनापन दिखता था। हर शॉट में चाहती थीं परफेक्शन माधुरी अपने काम को लेकर बहुत गंभीर रहती थीं। अगर उन्हें लगता था कि शॉट परफेक्ट नहीं हुआ है, तो वह रीटेक लेने से पीछे नहीं हटती थीं। उनके अंदर परफेक्शन को लेकर अलग पैशन था। कई बार मेरा शॉट एक टेक में ओके हो जाता था और माधुरी रीटेक करती थीं। तब मैं मजाक में कहती थी- ‘मेरे साथ सौतेला व्यवहार क्यों हो रहा है?’” मेकअप में घंटों लगाती थीं माधुरी अपने लुक और मेकअप को लेकर बहुत सजग रहती थीं। वह मेकअप में काफी समय लेती थीं। मैं आधे घंटे में तैयार होकर सेट पर पहुंच जाती थी, लेकिन वह हर चीज डिटेल में करती थीं। इस वजह से कैमरामैन को हमारी अलग-अलग लाइटिंग करनी पड़ती थी। वह ज्यादा मेकअप करती थीं और मैं बहुत कम। अच्छे आइडिया को कभी रिजेक्ट नहीं करती थीं फिल्म के कई मजेदार मोमेंट्स शूटिंग के दौरान वहीं इम्प्रोवाइज हुए थे। ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ में कद्दू वाला सीन मेरा आइडिया था। माधुरी की प्रेग्नेंसी वाले हिस्से में चाय का कप रखने वाला आइडिया भी हमने वहीं मिलकर किया था। माधुरी की सबसे अच्छी बात यह थी कि वह किसी अच्छे आइडिया को कभी रिजेक्ट नहीं करती थीं। शूटिंग के बाद भी परिवार जैसा माहौल रहता था शूटिंग खत्म होने के बाद भी पूरा यूनिट साथ वक्त बिताता था। कभी टीटी खेलते थे, कभी शॉपिंग पर चले जाते थे, तो कभी साथ में फिल्म देखने निकल जाते थे। ऊटी में हम सबने साथ बैठकर फिल्म ‘रोजा’ भी देखी थी। पूरा माहौल फैमिली पिकनिक जैसा लगता था। माधुरी की सबसे बड़ी ताकत उनका पैशन है डांस हो, रोमांटिक सीन हो या इमोशनल मोमेंट, माधुरी हर चीज में अपना सौ प्रतिशत देती थीं। सरोज खान ने उनके एक्सप्रेशंस और स्क्रीन प्रेजेंस को खूबसूरती से निखारा था। आज भी मिलते हैं, तो बहनों वाली फीलिंग आ जाती है। माधुरी को कभी एक्टिंग नहीं छोड़नी चाहिए मुझे लगता है कि माधुरी को कभी एक्टिंग नहीं छोड़नी चाहिए। जरूरी नहीं कि वह 16 साल की हीरोइन वाले रोल करें, लेकिन अपनी स्क्रीन एज के हिसाब से दमदार किरदार निभाते रहना चाहिए। अगर माधुरी एक्टिंग छोड़ देंगी, तो मुझे बहुत दुख होगा। दूरदर्शन के लिए किया पहला शो, लेकिन कभी टेलीकास्ट नहीं हुआ करियर के शुरुआती दिनों में माधुरी दीक्षित ने कई टीवी प्रोजेक्ट्स और पायलट एपिसोड्स में काम किया था, लेकिन उनमें से कुछ ऑन एयर नहीं हो पाए। उस समय वह इंडस्ट्री में नई थीं और लगातार ऑडिशन दे रही थीं। माधुरी ने दूरदर्शन के लिए ‘बॉम्बे मेरी है’ नाम के टीवी शो की शूटिंग भी की थी, लेकिन प्रभावशाली स्टारकास्ट नहीं होने की वजह से यह शो टेलीकास्ट नहीं हो सका। ‘पेइंग गेस्ट’ बना पहला टेलीकास्ट शो माधुरी दीक्षित ने राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘अबोध’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। वह राजश्री प्रोडक्शंस के टीवी शो ‘पेइंग गेस्ट’ में भी नजर आई थीं। यह शो 1985 में दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हुआ था। ‘पेइंग गेस्ट’ के पहले एपिसोड में माधुरी ने ‘नीना’ नाम की लड़की का किरदार निभाया था। पेइंग गेस्ट’ के सेट पर माधुरी को देखकर प्रभावित हुए थे रिक्कू राकेश नाथ माधुरी दीक्षित के लंबे समय तक मैनेजर रहे रिक्कू राकेश नाथ ने Rediff.com को दिए इंटरव्यू में उनसे जुड़ा दिलचस्प किस्सा शेयर किया था। रिक्कू ने बताया, “मैं चांदिवली स्टूडियो में टीवी सीरियल ‘पेइंग गेस्ट’ के सेट पर माधुरी से मिला था। मेरी मुलाकात उनकी हेयरड्रेसर खातून के जरिए हुई थी। खातून ने मुझसे कहा था कि माधुरी बहुत टैलेंटेड हैं और उनका चेहरा बेहद अच्छा है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं एक कोने में खड़ा होकर माधुरी की परफॉर्मेंस देखता रहा। उनमें गजब का कॉन्फिडेंस था और मैं प्रभावित हुआ।” सुभाष घई ने ‘कर्मा’ से हटाया रोल, फिर लीड हीरोइन बनाया रिक्कू राकेश नाथ के मुताबिक, खातून ने ही माधुरी की मुलाकात सुभाष घई से करवाई थी। माधुरी को फिल्म कर्मा में छोटे डांस सीक्वेंस के लिए लिया गया था, लेकिन बाद में वह हिस्सा फिल्म से हटा दिया गया। सुभाष घई माधुरी के टैलेंट से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें लगा कि इतना छोटा रोल उनकी क्षमता के साथ न्याय नहीं करेगा। इसी वजह से उन्होंने उनका कैमियो हटाने का फैसला किया, ताकि आगे चलकर उन्हें अपनी फिल्मों में लीड रोल दे सकें। बाद में सुभाष घई ने माधुरी को फिल्म ‘उत्तर दक्षिण’ में साइन किया। फिल्म को सुभाष घई ने प्रोड्यूस किया था और इसके डायरेक्टर प्रभात खन्ना थे। फिल्म में माधुरी को रजनीकांत और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने का मौका मिला। इसके बाद माधुरी ने सुभाष घई के साथ राम लखन और खलनायक जैसी फिल्मों में भी काम किया। ‘खलनायक’ के दौरान साइन करवाया गया था ‘नो प्रेग्नेंसी’ क्लॉज फिल्म ‘खलनायक’ की शूटिंग के दौरान माधुरी दीक्षित और संजय दत्त के अफेयर्स की खबरें सुर्खियों में थीं। इसी दौरान सुभाष घई को डर था कि अगर फिल्म की शूटिंग के बीच माधुरी ने शादी कर ली या वह प्रेग्नेंट हो गईं, तो फिल्म बीच में रुक सकती है। इसी वजह से सुभाष घई ने माधुरी से ‘नो प्रेग्नेंसी’ क्लॉज साइन करवाया था। इसके मुताबिक, शूटिंग के दौरान अगर माधुरी प्रेग्नेंट होतीं, तो उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ता। बताया जाता है कि किसी अभिनेत्री से ऐसा कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाने वाले सुभाष घई पहले डायरेक्टर थे। ‘साजन’ से शुरू हुई थीं संजय दत्त और माधुरी के अफेयर की चर्चाएं माधुरी दीक्षित और संजय दत्त के रिश्ते की चर्चाएं 1991 में आई फिल्म साजन के दौरान शुरू हुई थीं। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को पसंद आई थी और फिल्म मैगजीनों में उनके रिलेशनशिप की खबरें छपने लगी थीं। बाद में ‘खलनायक’ के दौरान भी ये अफवाहें तेज हो गईं। हालांकि दोनों ने कभी सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते को स्वीकार नहीं किया। 1993 में मुंबई ब्लास्ट केस में संजय दत्त की गिरफ्तारी के बाद खबरें आईं कि माधुरी ने उनसे दूरी बना ली थी। माधुरी दीक्षित को सलमान से ज्यादा फीस मिली थी तेजाब, दिल, बेटा और साजन जैसी कई सुपरहिट फिल्में दे चुकीं माधुरी दीक्षित उस समय इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस थीं। उनका स्टारडम इतना बड़ा था कि निर्माता-निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों की सबसे बड़ी यूएसपी मानते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘हम आपके हैं कौन’ के लिए माधुरी दीक्षित को करीब 2.7 करोड़ रुपए फीस दी गई थी, जबकि सलमान खान को लगभग 25 लाख रुपए मिले थे। उस समय किसी अभिनेत्री को इतनी बड़ी रकम मिलना बड़ी बात मानी जाती थी। कहा जाता है कि इस फिल्म के बाद माधुरी बॉलीवुड की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री बन गई थीं। सहिला चड्ढा ने भी फीस को लेकर कही यह बात साहिला चड्डा ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि सलमान और माधुरी ने फिल्म के लिए कितनी फीस ली थी, क्योंकि दोनों पहले से ही राजश्री प्रोडक्शंस से जुड़े हुए थे। माधुरी ने राजश्री की फिल्म से ही करियर की शुरुआत की थी। सलमान खान भले ही पहले ‘बीवी हो तो ऐसी’ में काम कर चुके थे, लेकिन स्टार राजश्री की फिल्म से ही बने। उन्हें नहीं लगता कि सलमान और माधुरी ने बहुत ज्यादा पैसे डिमांड किए थे, क्योंकि दोनों का करियर कहीं न कहीं राजश्री से जुड़ा था। ________________________________________________ फिल्मी सितारों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- विजय का लेडी लक, जिसके बर्थडे पर चुनाव जीते:तमिलनाडु का रिजल्ट आते ही विजय के घर पहुंचीं तृषा, एक्टर का हो चुका तलाक TVK की जीत में विजय के 'लेडी लक' को अहम माना जा रहा है। आज उसी 'लेडी लक' एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का जन्मदिन है, जिनका नाम विजय से जुड़ता रहा है। तृषा तमिलनाडु चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं।पूरी खबर पढ़ें..
एक्ट्रेस मौनी रॉय और बिजनेसमैन सूरज नांबियार ने अनबन की खबरों के बीच अब आधिकारिक तौर पर अपने तलाक की पुष्टि कर दी है। गुरुवार को मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट नोट जारी कर बताया कि वे अपनी शादी खत्म कर रहे हैं। दोनों ने इस मुश्किल समय में प्राइवेसी की मांग की है और मीडिया में चल रही खबरों पर नाराजगी भी जताई है। मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए कमेंट्स सेक्शन को बंद कर दिया है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, हम सभी से विनम्र निवेदन करते हैं कि हमें प्राइवेसी और गरिमा दें। मेरे या सूरज के बारे में कोई झूठी कहानियां न फैलाएं। उम्मीद है कि आप इस मुश्किल समय में हमें निजी समय देंगे। बोले- आपसी सहमति से फैसला लियाअपने नोट में कपल ने बताया कि उन्होंने आपसी समझ और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। उन्होंने लिखा, मीडिया के कुछ हिस्सों द्वारा हमारी पर्सनल लाइफ में अनावश्यक दखल दिया जा रहा है। हमने आपसी सहमति से अपने रास्ते अलग करने का फैसला किया है और हम निजी तौर पर इस मामले को सुलझाने के लिए समय ले रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे हकीकत से कोसों दूर हैं और वे भविष्य में भी अपनी दोस्ती को बनाए रखने की कोशिश करेंगे। अनफॉलो करने से शुरू हुईं अनबन की चर्चा तलाक की ये खबरें तब शुरू हुईं जब फैंस ने गौर किया कि मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया है। बात सिर्फ अनफॉलो करने तक ही सीमित नहीं रही, सूरज ने अपनी प्रोफाइल से शादी की कई पुरानी तस्वीरें भी डिलीट कर दी हैं। हालांकि, मौनी की प्रोफाइल पर अब भी कुछ तस्वीरें मौजूद हैं। 2018 में दुबई में हुई थी पहली मुलाकातमौनी रॉय और दुबई के बिजनेसमैन सूरज नांबियार के रिश्ते की शुरुआत 2018 में हुई थी। दोनों पहली बार दुबई में मिले थे और करीब चार साल तक एक-दूसरे को डेट किया। इसके बाद 27 जनवरी 2022 को उन्होंने गोवा में शादी की थी। उनकी शादी काफी चर्चा में रही थी क्योंकि उन्होंने मलियाली और बंगाली, दोनों रीति-रिवाजों से रस्में निभाई थीं।
तमिल एक्ट्रेस तृषा कृष्णन थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार चर्चा में हैं। पहले वे विजय के साथ अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में रहीं। वहीं अब एक मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विजय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उदयनिधि स्टालिन ने 12 करोड़ रुपए का ऑफर दिया है। एनडीटीवी के मुताबिक, डीएमके के प्रमुख नेता और एक्टर उदयनिधि स्टालिन ने अपनी अगली बड़ी फिल्म के लिए तृषा को अप्रोच किया है। इस फिल्म में उन्हें लीड रोल देने की तैयारी है। उदयनिधि और विजय की पार्टियों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में सीधा मुकाबला है। पोन्नियिन सेल्वन के बाद बढ़ी पावरतृषा कृष्णन साउथ सिनेमा की सबसे डिमांडिंग एक्ट्रेसेज में से एक हैं। 'पोन्नियिन सेल्वन', 'घिल्ली' और 'वरशम' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल के दिनों में उनकी पॉपुलैरिटी और फीस दोनों में बड़ा उछाल आया है। रिपोर्ट्स की मानें तो वे अब प्रति फिल्म 10 से 12 करोड़ रुपए चार्ज कर रही हैं। उदयनिधि के प्रोजेक्ट को उनकी इसी बढ़ती स्टार पावर से जोड़कर देखा जा रहा है। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में हुई थीं भावुककुछ समय पहले थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके शपथ ग्रहण समारोह में तृषा भी पहुंची थीं। वहां विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देख उनकी भावुक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे। पर्दे पर भी विजय और तृषा की जोड़ी हमेशा हिट रही है। विजय ने तृषा के लिए बदले नियमतमिलनाडू के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद थलापति विजय ने तृषा के लिए फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े नियम में बदलाव किया है। विजय ने तृषा कृष्णन की फिल्म करप्पू के लिए सुबह 9 बजे की स्क्रीनिंग रखने की स्पेशल परमिशन दी है, जबकि अब तक साउथ में इस पर प्रतिबंध था।
साथ निभाना साथिया' में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने नाइजीरिया में महिलाओं पर हुए आतंकी हमले पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इस घटना में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों के साथ काफी क्रूरता की, जिसे देखकर एक्ट्रेस ने इन हमलावरों को 'राक्षस' और 'शैतान' करार दिया है। देवोलीना ने कहा- नरक में मिलेगी खास जगहदेवोलीना ने इस बर्बर घटना पर नाराजगी जताते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ‘एकदम राक्षस और शैतान वाली प्रवृत्ति। इन राक्षसों के लिए नरक में खास जगह है, जिसे वे स्वर्ग समझते हैं।’ एक्ट्रेस उस वीडियो पर भड़क गईं जिसमें आतंकियों ने निर्दोष परिवारों और गर्भवती महिलाओं को अपना निशाना बनाया। प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ की गई क्रूरतामीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाइजीरिया के एक ईसाई गांव पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। जो परिवार वहां से भाग नहीं पाए, उन पर आतंकियों ने कुल्हाड़ियों से हमला किया। वीडियो में दावा किया गया है कि इन आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं को पकड़ लिया और उनके पेट पर वार किए। इतना ही नहीं, उन महिलाओं को अपने अजन्मे बच्चों को आंखों के सामने मरते हुए देखने के लिए मजबूर किया गया। 11 ईसाइयों की हत्यासीबीएन (CBN) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला 8 मई की रात को हुआ था। हथियारबंद फुलानी आतंकवादियों ने इस ईसाई समुदाय पर हमला किया, जिसमें बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं सहित कम से कम 11 लोगों की हत्या कर दी गई। हमले में बंदूकों और चाकुओं का इस्तेमाल हुआ था। बंगाल चुनाव में भी रही थीं चर्चा मेंदेवोलीना भट्टाचार्जी हाल ही में तब भी चर्चा में रही थीं, जब उन्होंने मई 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बीजेपी की जीत का समर्थन किया था और ममता बनर्जी को बंगाल के लिए 'बुरा सपना' बताया था।
भारतीय पंजाबी सिंगर तलविंदर हाल ही में टोरंटो में पाकिस्तानी सिंगर हसन रहीम के लाइव कॉन्सर्ट में शामिल हुए और उनके साथ मंच शेयर किया। दरअसल, मंगलवार को तलविंदर ने इंस्टाग्राम पर कॉन्सर्ट की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। उन्होंने पोस्ट पर कैप्शन लिखा, 'टोरंटो में हसन रहीम के साथ विशेज पूरी हुईं।' वीडियो में दोनों स्टेज पर एक साथ गाते, गले मिलते और डांस करते दिखे। हसन ने तलविंदर की इंस्टाग्राम पोस्ट पर 'भाई' लिखकर रिएक्ट किया। इस पोस्ट के बाद कुछ यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ ने लिखा कि हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच ऐसी मौजूदगी गलत थी। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, 'मैंने नहीं सोचा था भाई कि ये लोग हमारे देश की सेना का मजाक उड़ाने वालों के साथ स्टेज शो करेंगे।' गौरतलब है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। इसके बाद 'फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज' (FWICE) जैसे संगठन ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर पाकिस्तानी कलाकारों, गायकों और तकनीशियनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। तलविंदर को गाने ‘पल पल’ से मिली थी बड़ी पहचानतलविंदर का असली नाम तलविंदर सिंह सिद्धू है। उन्हें उनके गाने पल पल से पहचान मिली। कुछ महीने पहले उनका नाम एक्ट्रेस दिशा पाटनी से जुड़ा था। दोनों को कई मौकों पर एक साथ देखा गया था। वहीं, तलविंदर ने दिशा पाटनी के साथ कथित रिलेशनशिप को लेकर हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, हमारी मुलाकात शादी (नूपुर सेनन की शादी) से ठीक पहले हुई थी और अचानक मिली इतनी सारी चर्चा ने हमें हैरान कर दिया। हम न तो किसी दबाव में आना चाहते हैं और न ही अफवाहों पर ध्यान देना चाहते हैं। हम अभी खुद को समझने और एक-दूसरे को जानने की प्रोसेस में हैं। मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि अगर लोग अफवाहें फैलाने की कोशिश करेंगे तो मैं उन्हें अफवाह ही रहने दूंगा। जब तलविंदर से पूछा गया था कि क्या वह प्यार और रिश्तों के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, मैं हर दिन प्यार में पड़ जाता हूं। मैं अभी भी प्यार में पड़ रहा हूं।
‘भक्षक’ के बाद निर्देशक पुलकित अब नेटफ्लिक्स फिल्म ‘कर्तव्य’ लेकर आ रहे हैं, जिसमें सैफ अली खान कॉप बने हैं। पुलकित ने फिल्म के बैकड्रॉप, सैफ की कास्टिंग आदि पर बातचीत की... पुलकित कहते हैं, ‘कर्तव्य’ किसी एक सच्ची घटना पर आधारित नहीं है। यह विचार मेरे दिमाग में बहुत सालों से चल रहा था। हम अक्सर अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों पर चर्चा कम ही होती है। बतौर इंसान हमारी क्या जिम्मेदारी है? एक पिता का काम सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं है, बल्कि उस बच्चे की जिंदगी में क्या सही है और क्या गलत, यह सिखाना भी उसकी ड्यूटी है। मैं कहानी के जरिए उसी कर्तव्य की परिभाषा को ढूंढ रहा था। मैं एक ऐसी दुनिया बुनना चाहता था जहां कर्तव्य और इंसानियत के बीच का संघर्ष दिखे। बहुत सालों तक यह विचार मेरे अंदर बंद था, जिसे अब मैंने इस फिल्म के रूप में बाहर निकाला है। फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं पुलकित बताते हैं, ‘भक्षक’ के बाद रेड चिलीज और नेटफ्लिक्स के साथ रिश्ता और मजबूत हुआ। जब ‘कर्तव्य’ लिखी तो सबसे पहले उन्हें सुनाई और वे तुरंत तैयार हो गए। सैफ ही मेरी पहली पसंद थे। मैं यह स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं।’ फिल्म के लिए ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है फिल्म की दुनिया पर पुलकित कहते हैं...‘हमने ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है, जिसकी टोन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा बॉर्डर जैसी रखी गई। ‘ओमकारा’ में सैफ का ‘लंगड़ा त्यागी’ वाला किरदार मेरे दिमाग में हमेशा रहा। मुझे मजा आता है जब आप बांद्रा में रहने वाले, इंग्लिश बोलने वाले एक्टर को छोटे शहर की धूल-मिट्टी में डाल देते हैं।’ ‘ओमकारा’ के बाद कम निर्देशकों ने सैफ के देसी और रॉ अंदाज में लिया पुलकित मानते हैं, ‘ओमकारा के बाद बहुत कम निर्देशकों ने सैफ के उस देसी और रॉ अंदाज को इस्तेमाल किया। ‘आरक्षण’ और ‘तांडव’ में कोशिश जरूर हुई, लेकिन मुझे वो वाला सैफ नहीं मिला जो ‘लंगड़ा त्यागी’ में दिखा था। मेरे जेहन में वही इमेज थी, इसलिए मैं उन्हें फिर से उसी दुनिया में वापस लेकर गया।’ ‘99% हिंदुस्तान छोटे शहरों में बसता है’ अपने सिनेमा की जड़ों पर बात करते हुए पुलकित कहते हैं, ‘मैं खुद छोटे शहर से आता हूं, इसलिए मुझे ऐसी कहानियों में मजा आता है। 99% हिंदुस्तान छोटे शहरों और कस्बों में बसता है। जब आप ग्रासरूट लेवल की कहानी लिखते हैं, तो एक्टर्स को भी उसमें कुछ नया नजर आता है। यही वजह है कि मैंने सैफ, रसिका दुग्गल, संजय मिश्रा और मनीष चौधरी जैसे दमदार एक्टर्स को चुना। हम स्टारडम नहीं, परफॉर्मेंस पर दांव लगा रहे हैं।’
आमिर खान के बेटे जुनैद खान ने बॉलीवुड में नेपोटिज्म और स्टार किड्स को मिलने वाले फायदों पर खुलकर बात की है। जुनैद की शुरुआती फिल्म 'एक दिन' बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाईं, लेकिन इसके बावजूद उनके पास काम की कमी नहीं है। जुनैद ने स्वीकार किया कि उन्हें आमिर खान का बेटा होने की वजह से इंडस्ट्री में आसानी से मौके मिल रहे हैं। 'नेपोटिज्म शब्द से मुझे चिढ़ नहीं होती'विक्की लालवानी को दिए एक इंटरव्यू में जुनैद ने अपनी प्रिविलेज को माना। उन्होंने कहा, नेपोटिज्म शब्द मुझे परेशान नहीं करता क्योंकि यह सच है। मुझे आमिर खान का बेटा होने की वजह से बहुत काम मिलता है। जुनैद का मानना है कि स्टार किड्स दर्शकों के लिए पहले से ही पहचाने हुए चेहरे होते हैं, जिससे प्रोड्यूसर्स के लिए फिल्म को मार्केट करना और बेचना आसान हो जाता है। प्रोड्यूसर्स को माल बेचना है, टैलेंट बाद में आता हैकास्टिंग के मुद्दे पर बात करते हुए जुनैद ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा मार्केटबिलिटी (बिकने की क्षमता) को अहमियत दी जाती है। उन्होंने बताया, प्रोड्यूसर्स को अपनी फिल्में बेचनी होती हैं, इसलिए वे ऐसे किसी व्यक्ति को काम पर रखेंगे जिसे वे आसानी से बेच सकें। उनके मुताबिक, कई बार मेकर्स यह नहीं देखते कि रोल के लिए बेस्ट एक्टर कौन है, बल्कि यह देखते हैं कि किसका चेहरा फिल्म को कमर्शियल फायदा पहुंचा सकता है। 2 फ्लॉप के बाद बोले- 'सर काम करने दीजिए'अपनी फिल्मों की असफलता पर जुनैद ने मजाकिया अंदाज में कहा, सर, अभी 2 फ्लॉप के बाद भी काम मिल रहा है, तो प्लीज मुझे काम करने दीजिए। फिल्म 'एक दिन' के प्रदर्शन पर बात करते हुए उन्होंने माना कि पूरी टीम को इस फिल्म से बेहतर उम्मीदें थीं। फिल्म में उनके साथ साई पल्लवी थीं और इसे आमिर खान के बैनर तले ही बनाया गया था। जुनैद ने कहा कि उन्हें पर्सनली फिल्म पसंद आई थी, लेकिन वह बड़े दर्शकों से नहीं जुड़ सकी। असफलता पर आमिर का रिएक्शनजुनैद ने यह भी बताया कि उनके पिता आमिर खान फिल्मों की असफलता को कैसे देखते हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में दशकों बिताने के बाद भी फ्लॉप फिल्में आमिर को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। हालांकि, आमिर खुद को काम में व्यस्त रखकर आगे बढ़ना पसंद करते हैं और नई ऊर्जा के साथ अगले प्रोजेक्ट पर ध्यान देते हैं। तमन्ना भाटिया के साथ आएंगे नजरजुनैद खान के भविष्य के प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वे जल्द ही 'रागिनी एमएमएस 3' में दिखाई देंगे। इस फिल्म में उनके साथ तमन्ना भाटिया लीड रोल में हैं। हालांकि फिल्म की कहानी और रिलीज डेट को लेकर अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।
पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ है, जो सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। फेसबुक पेज ऑल पाकिस्तान शोबिज स्टार्स ने दावा किया कि पाकिस्तान की फिल्म मेरा ल्यारी को खराब शुरुआत के बाद फैसलाबाद के ताज महल सिनेमा से हटा दिया गया है। फिल्म पहले दिन सिर्फ 22 टिकट ही बेच पाई। कम दर्शक आने की वजह से अगले शो भी रद्द कर दिए गए। बता दें कि यह फिल्म धुरंधर और दूसरी फिल्मों को जवाब देने के लिए बनाई गई। फिल्म को कराची के ल्यारी इलाके की कहानी के तौर पर प्रमोट किया गया था। जहां फिल्मों में अक्सर इस इलाके को अपराध और गैंग हिंसा से जोड़कर दिखाया जाता है, वहीं मेरा ल्यारी में समुदाय, खेल और युवाओं की जिंदगी पर फोकस किया गया। महिला फुटबॉल पर आधारित है फिल्म की कहानी यह फिल्म महिला फुटबॉल पर आधारित है। अबू अलीहा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आयशा उमर, दनानीर मोबीन, सामिया मुमताज और ट्रिनेट लुकास हैं। फिल्म की कहानी महिला फुटबॉल, कम्युनिटी की एकता और ल्यारी में युवा खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। मेकर्स ने फिल्म के जरिए इलाके की एक अच्छी इमेज दिखाने की कोशिश की है। डायरेक्टर अबू अलीहा ने पहले कहा था कि फिल्म की 80 प्रतिशत कास्ट लोकल है, जिसमें फुटबॉल टीमों के सदस्य भी शामिल हैं। फिल्म को सिंध के सूचना मंत्री शरजील इनाम मेमन का भी सपोर्ट मिला।
एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए इंजेक्शन संबंधी दावों पर उनके पति पराग त्यागी ने प्रतिक्रिया देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया और लोगों से गलत जानकारी फैलाना बंद करने की अपील की। ‘कांटा लगा गर्ल’ के नाम से मशहूर एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला का मुंबई में 27 जून 2025 को निधन हुआ था।उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर उनकी मौत को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे। इनमें कहा गया था कि किसी इंजेक्शन की वजह से उनकी मौत हुई। हम लोग बिल्कुल नॉर्मल खाना खाते थे: पराग फिल्मीज्ञान से बातचीत में पराग ने कहा, ‘हम लोग बिल्कुल नॉर्मल खाना खाते थे। नूडल्स से लेकर आइसक्रीम तक सब कुछ खाते थे। शेफाली भी हफ्ते में एक-दो बार आइसक्रीम खाती थीं। घर में दाल, सब्जी, रोटी और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें सब बनती थीं। बस प्रोटीन थोड़ा ज्यादा रहता था।’ पराग ने कहा, ‘वो अपनी पूरी लाइफ में इस पॉइंट पर सबसे ज्यादा फिट थीं।’ उन्होंने इंजेक्शन संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘मुझे नहीं पता कौन हमारे घर में आकर देख के गया है या किसने ये सब बता दिया।’ शेफाली नेचुरल ब्यूटी थीं: पराग त्यागी गोरा होने वाले इंजेक्शन की अफवाहों पर पराग ने कहा, ‘उनको ( शेफाली) और गोरे होने की क्या जरूरत थी? वो नेचुरल ब्यूटी थीं।’ वहीं, यंग दिखने वाले इंजेक्शन की बात पर उन्होंने कहा, ‘अगर यंग होने के इंजेक्शन आते हैं तो मुझे भी बता दो। आप भी ले लेना, अपने पैरेंट्स को भी लगवा देना।’ उन्होंने आगे कहा, 'अगर ऐसा कोई इंजेक्शन होता जो इंसान को हमेशा जवान रखता, तो शायद रतन टाटा जी आज जिंदा होते।' अफवाहों पर नाराजगी जताते हुए पराग ने कहा, 'दोस्तों प्लीज दिखावे पर मत जाओ, अपनी अकल लगाओ। आज व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और सोशल मीडिया पर लोग कुछ भी पढ़ लेते हैं, लेकिन उसके बारे में रिसर्च नहीं करते। नेगेटिव चीजें लोगों को बहुत जल्दी बिकती हैं।' उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, 'बस मैं सबसे रिक्वेस्ट करना चाहूंगा, ऐसा मत करो।'
टीवी एक्टर और होस्ट करण वाही एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आएंगे। करण इससे पहले सीजन 8 और ‘खतरों के खिलाड़ी: मेड इन इंडिया’ का हिस्सा रह चुके हैं। अब वह तीसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में दिखाई देंगे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में करण ने बताया कि यह शो सिर्फ एक रियलिटी शो नहीं, बल्कि जिंदगी बदल देने वाला एक्सपीरियंस है। सवाल: तीसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ में जा रहे हैं। शो को लेकर कितना एक्साइटमेंट है?जवाब: शो की बात करें तो पुराना शो भी बहुत डरावना था। अब नया शो कितना डरावना होगा, ये तो हमें भी नहीं पता क्योंकि उन्होंने ज्यादा बताया नहीं है, लेकिन मैं खुद को बहुत लकी मानता हूं कि मुझे तीसरी बार यह शो करने का मौका मिल रहा है। जितना ज्यादा डर लगेगा, उतना ज्यादा मजा आएगा। अब बस उस पल का इंतजार है जब हम केपटाउन जाएंगे और रोहित सर के साथ फिर वही सफर शुरू होगा। सवाल: जब तीसरी बार शो का ऑफर आया, तब पहला रिएक्शन क्या था?जवाब: मेरा पहला रिएक्शन सीधा ‘हां’ था क्योंकि यह शो सिर्फ शो नहीं है, एक एक्सपीरियंस है। यहां आपके कॉम्पिटिटर्स भी आपको चीयर करते हैं। अगर आप जीतते हैं तो सामने वाला हार जाएगा, लेकिन फिर भी वो आपके लिए उतना ही चीयर करेगा जितना खुद के लिए करते हैं। आज के समय में ऐसा शो दूसरा नहीं है। यहां आपको वो सब करने का मौका मिलता है, जो हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कभी नहीं करते। हम घर पर रह सकते हैं, फोन दूर रख सकते हैं, टीवी नहीं देख सकते, डांस या गाना गा सकते हैं, लेकिन असली जिंदगी में हम चूहों के बीच नहीं बैठते, 100 मंजिला इमारत से नहीं लटकते और ना ही ऐसी खतरनाक छलांग लगाते हैं। अगर आपको ये सब दोबारा करने का मौका मिले, तो डर जरूर लगता है। सवाल: पहली और दूसरी बार शो करने के दौरान सबसे बड़ा डर क्या था?जवाब: पहली बार तो मुझे कई चीजों से डर लगता था, लेकिन सबसे बड़ा फोबिया जानवरों का था, खासकर डॉग्स का। ‘खतरों के खिलाड़ी’ के बाद वो डर पूरी तरह खत्म हो गया और आज मेरे घर में खुद का डॉग है। दूसरी बार भी हाइट का डर था और सच कहूं तो वह आज भी है, लेकिन यह शो आपको सिखाता है कि ‘माइंड ओवर मैटर’ क्या होता है। सवाल: क्या डर कभी पूरी तरह खत्म हो जाता है?जवाब: नहीं। यह शो हमेशा आपके सामने एक नया डर ले आता है। अगर कुत्तों का डर खत्म हुआ, तो अब वो शेर या चीता ले आएंगे, लेकिन यही इस शो की खूबसूरती है कि आप खुद को हर बार नए तरीके से टेस्ट करते हैं। सवाल: असल जिंदगी में करियर की शुरुआत के दौरान सबसे बड़ा डर क्या था?जवाब: अगर डर को जनरल सेंस में देखें, तो डर आज भी है। छोटी-छोटी चीजों का डर रहता है। पहले मुझे अपने पैरेंट्स से डर लगता था, पढ़ाई से डर लगता था, लेकिन अगर काम की बात करूं, तो 20-22 साल पहले दुनिया भी बहुत अलग थी। उस वक्त इंसान बहुत फियरलेस होता है। आप दुनिया के बारे में ज्यादा नहीं सोचते। बस नाम कमाना होता है। लगता है कि सब कर लेंगे, कुछ भी कर लेंगे। उस समय शायद डर कम था, मैं थोड़ा ज्यादा फियरलेस था। अब मैं इसे डर नहीं कहूंगा, लेकिन अब चीजों के बारे में ज्यादा सोचता हूं। ये हर इंसान के साथ होता है। पहले बस यही सोच होती थी कि काम आ रहा है, कुछ भी करो लेकिन काम करो। अब बस यही उम्मीद रहती है कि इतने सालों से लोगों ने मुझे जो प्यार दिया है, वो आगे भी मिलता रहे। मैंने 20-22 साल काम किया है, तो अगर अगले 20-22 साल भी उसी दिल से काम कर पाऊं, वही प्यार और सम्मान मिलता रहे, तो उससे बड़ी बात कुछ नहीं होगी। सवाल: आप अपनी फिटनेस और लाइफस्टाइल को लेकर कितना डिसिप्लिन फॉलो करते हैं? आपका फिटनेस रूटीन कैसा है?जवाब: मुझे लगता है यह एक एम्बेडेड डिसिप्लिन है। फिटनेस सिर्फ एक्टर्स के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए जरूरी है। अच्छा खाना, वर्कआउट, साफ-सुथरी लाइफस्टाइल और शायद थोड़ी अच्छी जेनेटिक्स भी। यह सब पैरेंट्स की वजह से है। सवाल: मेंटल पीस और मेंटल फिटनेस कैसे बनाए रखते हैं?जवाब: पहले मैं बहुत एक्सटर्नल वैलिडेशन ढूंढता था। कौन क्या सोचता है, सोशल मीडिया पर किसने क्या लिखा। लेकिन अब मैंने यह सब छोड़ दिया है। अब मैं सिर्फ यह सोचता हूं कि मैं खुद अपने बारे में क्या सोचता हूं। मेरे एक्शन मेरे शब्दों से कितना मैच करते हैं। वही मुझे शांति देता है। सवाल: आपने स्पिरिचुअलिटी की तरफ भी काफी झुकाव दिखाया है?जवाब: स्पिरिचुअलिटी कोई बहुत बड़ी या अलग चीज नहीं है। मैं पहले भी स्पिरिचुअल था, बस अब खुद के साथ ज्यादा अलाइन्ड हूं। जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, आपकी चाहतें बदलती हैं और आप खुद को ज्यादा समझने लगते हैं। मेरे लिए स्पिरिचुअलिटी का मतलब बस खुद के साथ ईमानदार होना है। सवाल: इस बार के कंटेस्टेंट्स को कैसे देखते हैं?जवाब: मेरे लिए यह शो हमेशा एक बहुत बड़ा सपोर्ट सिस्टम रहा है। ऋत्विक धनजानी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं और उनकी एनर्जी ऐसी है कि आप उनके आसपास कभी उदास नहीं रह सकते। हम बहुत मस्ती करते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि इस बार भी हम फिनाले तक साथ पहुंचे और फिर वहीं मुकाबला हो। सवाल: जिंदगी का सबसे बड़ा रिस्क क्या लिया? जवाब: मुंबई आना। सवाल: सबसे खतरनाक अफवाह कौन सी लगी? जवाब: कि मैंने स्पिरिचुअल बनने के बाद काम छोड़ दिया है। सवाल: किसी कंटेस्टेंट के साथ बिना फोन के कहीं रुकना हो, तो कौन होगा? जवाब: ऋत्विक और वो किसी और को होने भी नहीं देगा। सवाल: आखिर में फैंस के लिए क्या कहना चाहेंगे?जवाब: मैं बस यही कहना चाहता हूं कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ जरूर देखिए। आपने इतने सालों से हमें बहुत प्यार दिया है, बस वही प्यार बनाए रखिए। और जो नई ऑडियंस है, जिन्होंने शायद हमारा काम नहीं देखा, उनसे कहना चाहूंगा कि शो देखिए, हमारे साथ हंसिए, हम पर भी हंसिए। रोहित सर हैं, वो हमेशा संभाल लेंगे। सच कहूं तो ‘खतरों के खिलाड़ी’ का नाम आते ही सबसे पहले रोहित शेट्टी का चेहरा याद आता है।

