...

ईशा रिखी ने बादशाह से तलाक पर चुप्पी तोड़ी:कहा- निजी जिंदगी का तमाशा नहीं बनाऊंगी, कहने को बहुत कुछ; 5 महीने में टूटी सीक्रेट शादी

पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने रैपर-सिंगर बादशाह से अलग होने की पहली बार पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों अलग हो चुके हैं, लेकिन वह अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक तमाशा नहीं बनाना चाहतीं। ईशा रिखी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “कहने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहती। यह सब अतीत में है और मैं अपनी जिंदगी के इस अध्याय को सम्मान के साथ खत्म करना चाहती हूं।” ईशा ने कहा, “मैं सार्वजनिक तौर पर अपनी निजी जिंदगी का तमाशा नहीं बनाना चाहती। मैं लोगों के सामने अपने निजी रिश्ते की गंदगी नहीं फैलाऊंगी, क्योंकि मैं ऐसी नहीं हूं।” जब उनसे बादशाह के साथ मौजूदा रिश्ते के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “यह बहुत जटिल है। मैं उस दिन का इंतजार कर रही हूं, जब मैं इस बारे में पूरी तरह बात कर सकूं। जब मुझमें सभी सवालों का सामना करने और उनके जवाब देने की ताकत होगी। लेकिन अभी मैं ऐसी लड़ाई लड़ रही हूं।” ईशा ने कहा, “मैं सिर्फ इसलिए कड़वी इंसान नहीं बनना चाहती, क्योंकि मेरे साथ कुछ खराब चीजें हुईं। लेकिन मुझे पता है कि मुझे ठीक होने में काफी समय लग सकता है।” सोशल मीडिया के जरिए की तलाक की घोषणा रैपर बादशाह और पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने सोशल मीडिया के जरिए सीक्रेट शादी के 5 महीने बाद ही एक-दूसरे से अलग होने का ऐलान कर दिया है। बादशाह ने लिखा, हमारा यह फैसला आपसी सहमति से लिया गया है। हम सभी से गुजारिश करते हैं कि इस समय हमारी प्राइवेसी का ध्यान रखें। इस मुद्दे पर हमारा यह पहला और आखिरी बयान है, इसलिए हमारी रिलेशनशिप को लेकर आगे कोई अंदाजा न लगाया जाए। ईशा रिखी ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर यही बयान शेयर किया है। जुलाई से सामने आ रही थीं अनबन की खबरेंबादशाह और ईशा रिखी के रिश्ते में तनाव की खबरें जुलाई के महीने में आनी शुरू हुई थीं। 26 जुलाई को ईशा ने बादशाह के साथ अपनी कई तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए एक पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने 'हर तूफान एक सीख है' लिखकर दिल टूटने वाला इमोजी लगाया था। इसके बाद ईशा ने एक नोट में लिखा था कि वे लंबे समय तक डर की वजह से चुप रहीं, लेकिन अब वे अपने आत्मसम्मान के लिए बोल रही हैं। इसी बीच ईशा की मां पूनम रिखी ने भी सोशल मीडिया पर कर्म से जुड़ी पोस्ट शेयर की थीं। जून में ही किया था शादी का खुलासाईशा रिखी ने इसी साल जून में इंस्टाग्राम पर 'आस्क मी एनीथिंग' सेशन के दौरान बादशाह के साथ अपनी शादी की पुष्टि की थी। हालांकि शादी के बाद भी दोनों सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के बारे में ज्यादा बात करने से बचते रहे। वहीं अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईशा रिखी जल्द ही सलमान खान के रियलिटी शो 'बिग बॉस 20' का हिस्सा बन सकती हैं। बादशाह का दूसरा तलाक, पहली पत्नी से है एक बेटीयह रैपर बादशाह का दूसरा तलाक है। इससे पहले उन्होंने 2012 में जैस्मिन मसीह से शादी की थी। साल 2017 में दोनों की एक बेटी हुई, जिसका नाम जेसेमी ग्रेस मसीह सिंह है। हालांकि मतभेदों के बाद बादशाह और जैस्मिन साल 2020 में एक-दूसरे से अलग हो गए थे। इसके बाद बादशाह की जिंदगी में ईशा रिखी की एंट्री हुई थी। तलाक के ऐलान के बीच बादशाह का नया गाना रिलीजबादशाह, जिनका असली नाम आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया है, ने अपने संगीत सफर की शुरुआत साल 2006 में 'माफिया मुंडीर' ग्रुप से की थी। साल 2013 में दिलजीत दोसांझ के साथ आए पंजाबी गाने 'प्रॉपर पटोला' और साल 2015 के 'डीजे वाले बाबू' से उन्हें देशभर में बड़ी पहचान मिली। इसके बाद साल 2014 में उन्होंने फिल्म 'हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया' के गाने 'सैटरडे सैटरडे' और 'खूबसूरत' के गाने 'अभी तो पार्टी शुरू हुई है' से बॉलीवुड में कदम रखा। पर्सनल लाइफ में चल रही हलचल के बीच बादशाह का नया मराठी हिप-हॉप गाना 'चिमना' 31 अगस्त को रिलीज हुआ है। इसमें उन्होंने दिव्या कुमार और मराठी लोक कलाकार नागेश मोरवेकर के साथ काम किया है। बादशाह के करियर से जुड़े विवाद ……………………………………. ये खबर भी पढ़ें हनी सिंह ने बादशाह को नालायक औलाद कहा:बादशाह बोले थे- मैंने अपना नाम खुद चुना; यो यो ने पुरानी क्लिप शेयर कर सच बताया रैपर बादशाह और यो यो हनी सिंह का पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। कॉमेडियन समय रैना के शो के दौरान समय ने बादशाह से उनके स्टेज नाम 'बादशाह' को लेकर सवाल किया। पूरी खबर पढ़ें

दैनिक भास्कर 5 Sep 2026 12:54 pm

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी पर रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण के मेकर्स ने जन्माष्ठमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर कर दिया, जिसके चलते उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ यूजर्स इस चूक से हैरान हैं, तो वहीं कुछ का मानना है कि चर्चा में आने के लिए मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलतियां करते हैं। सवाल ये है कि अगर मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलती करें, तो नेगेटिव पब्लिसिटी से उन्हें क्या फायदा मिलेगा। दरअसल, फिल्मों से जुड़ी ट्रोलिंग या विवाद अगर सिर्फ चर्चा पैदा करता है तो फिल्म को फायदा मिल सकता है, लेकिन अगर विवाद इतना बढ़ जाए कि दर्शकों की धारणा फिल्म के खिलाफ हो जाए, तो नुकसान भी हो सकता है। एक नजर जानिए, कैसे पड़ता है नेगेटिव पब्लिसिटी का फिल्म पर असर- रामायण मेकर्स ने पोस्ट किया रावण का पोस्टर ये पोस्टर फिल्म रामायण के पेज से शुक्रवार शाम को पोस्ट किया गया था। साथ लिखा गया था, देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक, तीनों लोकों में एख ही राज होगा, रावण राज। पोस्टर आते ही सोशल मीडिया पर मेकर्स की आलोचना शुरू होने लगी। लोगों ने इस पर कई सवाल खड़े किए। पोस्टर से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं पहला सवाल- क्या मेकर्स जानबूझकर, पब्लिसिटी बटोरने और चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं? दूसरा सवाल- क्या फिल्म से जुड़ी सोशल मीडिया टीम ने गलती से पोस्टर शेयर किया? क्या 4 हजार करोड़ के मेगा बजट की इस फिल्म की रिसर्च टीम इतनी कमजोर है, जिन्हें ये भी नहीं पता कि जन्माष्ठमी में क्या पोस्ट करना चाहिए? इन सवालों के जवाब जानिए- नेगेटिव पब्लिसिटी से फिल्मों को कैसे फायदा होता है? 1. फिल्म की फ्री पब्लिसिटी किसी फिल्म का ट्रेलर, गाना या स्टार उतनी चर्चा न पैदा करे, जितनी कोई विवाद पैदा कर देता है। तो मेकर्स को इसका फायदा मिलता है। मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया बहस फिल्म का नाम लगातार लोगों के सामने रखती है। 2. लोगों की उत्सुकता बढ़ती है अगर फिल्म लगातार विवादों में रहती है, तो दर्शक के मन में सवाल उठता है कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है कि इतना विवाद हो रहा है? यही उत्सुकता कई बार टिकट खरीदने की वजह बन जाती है। इसे इन फिल्मों के उदाहरण से समझिए- 'द कश्मीर फाइल्स' (2022):फिल्म की रिलीज से पहले और बाद में इसके कंटेंट और राजनीतिक इंटरप्रेटेशन को लेकर जबरदस्त बहस हुई। विवाद ने फिल्म को लगातार हैडलाइन में बनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि कम बजट की फिल्म को कई लोगों ने देखा, जिससे फिल्म हिट हुई। अगर फिल्म से जुड़ा कोई विवाद न होता, तो फिल्म चर्चा में न आती। 'पद्मावत' (2018): फिल्म को लेकर राजपूत संगठनों का विरोध, कर्णी सेना का आंदोलन, शूटिंग के दौरान तोड़फोड़ और रिलीज रोकने की मांग तक हुई। विवाद इतना बड़ा हुआ कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसका नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया। लगातार टलने वाली फिल्म जब रिलीज हुई, तो लोग विवाद समझने के लिए ही बढ़-चढ़कर फिल्म देखने गए, जिससे फिल्म के कलेक्शन में फायदा हुआ। 'द केरला स्टोरी' (2023): फिल्म के कथानक और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद हुआ। कुछ राज्यों में इसे लेकर विरोध और प्रतिबंध की खबरें आईं, जबकि दूसरी तरफ समर्थकों ने इसे देखने की अपील की। इससे फिल्म को जबरदस्त एक्सपोजर मिला और फिल्म हिट रही। नेगेटिव पब्लिसिटी हमेशा काम नहीं करती? कंट्रोवर्सी तभी फायदा देती है जब दर्शकों की उत्सुकता, फिल्म के खिलाफ बनी नेगेटिविटी से ज्यादा मजबूत हो। इसके उलट कुछ फिल्मों में विवाद ने दर्शकों को फिल्म से दूर भी किया। 'लक्ष्मी' (2020): फिल्म के टाइटल और कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। बॉयकॉट की मांग हुई और सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। फिल्म विवाद से चर्चा में रही, लेकिन विवाद इतना बड़ा नहीं था, जो उत्सुकता पैदा कर सके। 'आदिपुरुष' (2023): फिल्म के डायलॉग, VFX और रामायण के किरदारों को मॉडर्नाइजेशन कर दिखाने को लेकर रिलीज के बाद भारी आलोचना हुई। यहां नेगेटिव पब्लिसिटी, फिल्म के कॉन्सेप्ट से आगे निकल गई। दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा फिल्म की आलोचना करने लगा और वर्ड ऑफ माउथ खराब हुआ। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले 'ग्लैमरस लुक' पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म 'आदिपुरुष' का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी सेना का चित्रण मंगोल लुटेरों की तरह किया गया था। इस भारी विरोध के कारण करोड़ों के बजट में बनी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।

दैनिक भास्कर 5 Sep 2026 11:37 am

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण के मेकर्स ने जन्माष्ठमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर कर दिया, जिसके चलते उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ यूजर्स इस चूक से हैरान हैं, तो वहीं कुछ का मानना है कि चर्चा में आने के लिए मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलतियां करते हैं। सवाल ये है कि अगर मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलती करें, तो नेगेटिव पब्लिसिटी से उन्हें क्या फायदा मिलेगा। दरअसल, फिल्मों से जुड़ी ट्रोलिंग या विवाद अगर सिर्फ चर्चा पैदा करता है तो फिल्म को फायदा मिल सकता है, लेकिन अगर विवाद इतना बढ़ जाए कि दर्शकों की धारणा फिल्म के खिलाफ हो जाए, तो नुकसान भी हो सकता है। एक नजर जानिए, कैसे पड़ता है नेगेटिव पब्लिसिटी का फिल्म पर असर- रामायण मेकर्स ने पोस्ट किया रावण का पोस्टर ये पोस्टर फिल्म रामायण के पेज से शुक्रवार शाम को पोस्ट किया गया था। साथ लिखा गया था, देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक, तीनों लोकों में एख ही राज होगा, रावण राज। पोस्टर आते ही सोशल मीडिया पर मेकर्स की आलोचना शुरू होने लगी। लोगों ने इस पर कई सवाल खड़े किए। पोस्टर से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं पहला सवाल- क्या मेकर्स जानबूझकर, पब्लिसिटी बटोरने और चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं? दूसरा सवाल- क्या फिल्म से जुड़ी सोशल मीडिया टीम ने गलती से पोस्टर शेयर किया? क्या 4 हजार करोड़ के मेगा बजट की इस फिल्म की रिसर्च टीम इतनी कमजोर है, जिन्हें ये भी नहीं पता कि जन्माष्ठमी में क्या पोस्ट करना चाहिए? इन सवालों के जवाब जानिए- नेगेटिव पब्लिसिटी से फिल्मों को कैसे फायदा होता है? 1. फिल्म की फ्री पब्लिसिटी किसी फिल्म का ट्रेलर, गाना या स्टार उतनी चर्चा न पैदा करे, जितनी कोई विवाद पैदा कर देता है। तो मेकर्स को इसका फायदा मिलता है। मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया बहस फिल्म का नाम लगातार लोगों के सामने रखती है। 2. लोगों की उत्सुकता बढ़ती है अगर फिल्म लगातार विवादों में रहती है, तो दर्शक के मन में सवाल उठता है कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है कि इतना विवाद हो रहा है? यही उत्सुकता कई बार टिकट खरीदने की वजह बन जाती है। इसे इन फिल्मों के उदाहरण से समझिए- 'द कश्मीर फाइल्स' (2022):फिल्म की रिलीज से पहले और बाद में इसके कंटेंट और राजनीतिक इंटरप्रेटेशन को लेकर जबरदस्त बहस हुई। विवाद ने फिल्म को लगातार हैडलाइन में बनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि कम बजट की फिल्म को कई लोगों ने देखा, जिससे फिल्म हिट हुई। अगर फिल्म से जुड़ा कोई विवाद न होता, तो फिल्म चर्चा में न आती। 'पद्मावत' (2018): फिल्म को लेकर राजपूत संगठनों का विरोध, कर्णी सेना का आंदोलन, शूटिंग के दौरान तोड़फोड़ और रिलीज रोकने की मांग तक हुई। विवाद इतना बड़ा हुआ कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसका नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया। लगातार टलने वाली फिल्म जब रिलीज हुई, तो लोग विवाद समझने के लिए ही बढ़-चढ़कर फिल्म देखने गए, जिससे फिल्म के कलेक्शन में फायदा हुआ। 'द केरला स्टोरी' (2023): फिल्म के कथानक और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद हुआ। कुछ राज्यों में इसे लेकर विरोध और प्रतिबंध की खबरें आईं, जबकि दूसरी तरफ समर्थकों ने इसे देखने की अपील की। इससे फिल्म को जबरदस्त एक्सपोजर मिला और फिल्म हिट रही। नेगेटिव पब्लिसिटी हमेशा काम नहीं करती? कंट्रोवर्सी तभी फायदा देती है जब दर्शकों की उत्सुकता, फिल्म के खिलाफ बनी नेगेटिविटी से ज्यादा मजबूत हो। इसके उलट कुछ फिल्मों में विवाद ने दर्शकों को फिल्म से दूर भी किया। 'लक्ष्मी' (2020): फिल्म के टाइटल और कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। बॉयकॉट की मांग हुई और सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। फिल्म विवाद से चर्चा में रही, लेकिन विवाद इतना बड़ा नहीं था, जो उत्सुकता पैदा कर सके। 'आदिपुरुष' (2023): फिल्म के डायलॉग, VFX और रामायण के किरदारों को मॉडर्नाइजेशन कर दिखाने को लेकर रिलीज के बाद भारी आलोचना हुई। यहां नेगेटिव पब्लिसिटी, फिल्म के कॉन्सेप्ट से आगे निकल गई। दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा फिल्म की आलोचना करने लगा और वर्ड ऑफ माउथ खराब हुआ। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले 'ग्लैमरस लुक' पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म 'आदिपुरुष' का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी सेना का चित्रण मंगोल लुटेरों की तरह किया गया था। इस भारी विरोध के कारण करोड़ों के बजट में बनी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।

दैनिक भास्कर 5 Sep 2026 11:37 am

पैपराजी पर भड़के सलमान खान:पोज देने की डिमांड पर फटकारा, बिग बॉस 20 की शूटिंग शुरू की, पहले भी लगा चुके हैं ऐसे ही डांट

सलमान खान बिग बॉस 20 के सेट पर उन्हें कवर करने आए पैपराजी पर भड़क गए। सलमान ने सरेआम फोटोग्राफर्स को फटकारा, जिसका वीडियो अब सामने आया है। दरअसल, सलमान टी-शर्ट, जींस और काऊबॉय हेट पहने, बिग बॉस 20 के मंच पर शूटिंग के लिए पहुंचे थे। सलमान पोज दे रहे थे तभी एक फोटोग्राफर ने- बाबा.., बाबा…, चिल्लाते हुए उनसे पोज देने की डिमांड की। ये सुनते ही सलमान नाराज हो गए और गुस्से में कहा- बाबा? ये तेरा काम नहीं है। मुझे कैमरे के आगे आने की कोई जरुरत नहीं है। इस घटना के कुछ समय बाद फिर पैपराजी बार-बार फोटो लेने के लिए उतावले दिखे, जिससे सलमान के चेहरे पर गुस्सा आ गया। बिग बॉस 20 की शूटिंग शुरू टेलीविजन रियलिटी शो बिग बॉस 20, 6 सितंबर से शुरू हो रहा है। बिग बॉस हाउस का फर्स्ट लुक भी सामने आ चुका है। ये है इस तरह की चौथी घटना सलमान पिछले कुछ दिनों से लगातार पैपराजी पर नाराजगी जता रहे हैं। ये इस तरह की चौथी घटना है, जब सलमान ने पैपराजी को फटकारा है। अस्पताल के बाहर शोर मचाने पर डांटा कुछ महीनों पहले सलमान किसी करीबी से मिलने अस्पताल गए थे। वह जैसे ही बाहर आए, पैपराजी तस्वीर लेने के लिए आवाज लगाने लगे। शोर होता देख, सलमान भड़क गए और जमकर खरी-खोटी सुनाई। बाद में सलमान ने की अटपटी सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कीं। कुछ समय बाद जब सलमान रितेश देशमुख की फिल्म राजा शिवाजी की सक्सेस पार्टी में पहुंचे, तो पैपराजी ने सलमान को घेर कर माफी मांगी थी। पैपराजी के शोर से परेशान हुए सलमान रियलिटी शो बिग बॉस 19 की सक्सेस पार्टी में भी ऐसा ही हुआ। सलमान जैसे ही पोज देने पहुंचे, पैपराजी उनकी तस्वीर लेते हुए शोर करने लगे, इसके बाद सलमान ने इशारे में हल्ला न करने के लिए कहा था। भांजी डिस्टर्ब हुई तो नाराज हुए सलमान कुछ महीनों पहले सलमान खान वर्ल्ड पैडल लीग के एक इवेंट का हिस्सा बने, जिसमें उनकी भांजी आयत भी पहुंची थी। इवेंट के बाद सलमान भांजी को गोद में लिए निकल रहे थे, तभी फोटोग्राफर्स ने उन्हें घेर लिया। सलमान ने तब गुस्से में पैपराजी से दूर हटने को कहा था। मां की फोटो लेने से रोका कुछ साल पहले सलमान खान, मां के साथ भाई सोहेल की बर्थडे पार्टी में पहुंचे थे। जैसे ही उनकी मां कार से उतरने को हुईं, सलमान ने इशारा कर सभी पैपराजी को वहां से हटा दिया। इन सेलेब्स की भी पैपराजी से हुई बहस मलाइका अरोड़ाः कुछ दिनों पहले मलाइका का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो एक शख्स से बात करती नजर आईं। जैसे ही पैपराजी उनके करीब जाने लगे, तो मलाइका गुस्सा हो गईं। गोविंदाः गोविंदा के सिक्योरिटी गार्ड से हाल ही में पैपराजी की धक्का-मुक्की हो गई। गोविंदा पिछले एक इवेंट में पहुंचे थे। वहां से निकलते हुए उन्हें पैपराजी ने घेर लिया था। जब उनके गार्ड्स ने निकलने की जगह बनाने के लिए लोगों को पीछे किया, तो पैपराजी ने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया। विवाद बढ़ने पर गोविंदा को खुद बीच-बचाव करना पड़ा था। मौनी रॉयः हाल ही में मौनी रॉय को मुंबई में स्पॉट किया गया था। वो जैसे ही कार में बैठीं पैपराजी की फ्लैश लाइट उनके चेहर पर पड़ने लगी। इस पर एक्ट्रेस भड़क गईं और फटकार लगा दी। सरेआम कपड़े बदलने की मांग पर भड़की थीं जरीन खान एक ब्रांड इवेंट के दौरान जरीन ने पैपराजी को फटकार लगाते हुए कहा की मेरे साथ फालतूगिरी की बातें नहीं करना। दरअसल जरीन खान मुंबई में एक क्लोदिंग ब्रांड के प्रमोशन इवेंट में पहुंची थीं। इसी दौरान वहां मौजूद पैपराजी ने उनसे कहा की ड्रेस ट्राई करके दिखाओ। एक्ट्रेस को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। जरीन खान ने कहा, फालतूगिरी की बातें नहीं करना मेरे साथ, क्योंकि मैं ऐसी चीजें बर्दाश्त करने वालों में से नहीं हूं। अपनी हद में रहकर बात करना। यह बात कहते हुए जरीन के चेहरे पर साफ तौर पर गुस्सा देखा जा सकता है। नेहा धूपिया ने बैक शॉट पर जताई थी नाराजगी इससे पहले गोल्ड स्ट्रीमिंग अवॉर्ड सेरेमनी में नेहा धूपिया पैपराजी पर भड़क गई थीं। एक्ट्रेस ने बैक शॉट लेने और उन्हें पोस्ट करने पर नाराजगी जाहिर की और पैपराजी को कड़े शब्दों में वॉर्निंग भी दी। सेरेमनी से नेहा धूपिया अवॉर्ड लेकर निकल रही थीं। तभी पैपराजी ने उनके ग्रे हेयर पर कमेंट किया, जिसके जवाब में भड़कते हुए उन्होंने कहा है, ‘बोल लिया? कर लिया? ये बदतमीजी से बैक शॉट कौन लेता है तुम लोगों में से? कौन लेता है? छापता कौन है? मत करो। मेरा नहीं करना है, किसी का नहीं करना है। बोल-बोलकर थक गए हैं।’

दैनिक भास्कर 5 Sep 2026 9:20 am

अरबाज-मलाइका के बेटे के डेब्यू में सलमान का कैमियो:सोहेल-अरबाज के करियर का संवारा, कमबैक में मदद की; भांजी अलिजेह, जीजा आयुष को लॉन्च किया

अरबाज खान और मलाइका अरोड़ा के बेटे अरहान खान जल्द ही बतौर हीरो बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले हैं। सलमान खान अपने भतीजे की इस फिल्म में कैमियो करते नजर आएंगे। जाहिर है, फिल्म में सलमान की मौजूदगी से अरहान के डेब्यू को बड़ा सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब सलमान खान ने अपने परिवार के किसी सदस्य के करियर को सपोर्ट करने के लिए फिल्मों में काम किया हो। सोहेल खान की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म हो या उनका डायरेक्शन में कमबैक, सलमान ने दोनों मौकों पर भाई का साथ दिया और उनकी फिल्मों में लीड रोल कर कमान संभाली। वहीं, जब अरबाज खान की बतौर लीड एक्टर फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थीं, तब सलमान ने उन्हें अपनी फिल्मों में काम दिया और बाद में प्रोडक्शन और डायरेक्शन की दूसरी पारी में भी उनका साथ दिया। इतना ही नहीं, सलमान ने अपनी बहन अर्पिता खान शर्मा के पति आयुष शर्मा और बहन अलविरा अग्निहोत्री की बेटी अलिजेह अग्निहोत्री को भी अपने प्रोडक्शन हाउस के जरिए लॉन्च किया। अरहान खान के बॉलीवुड डेब्यू से पहले जानते हैं कि सलमान खान ने कब-कब अपने परिवार के सदस्यों के करियर को सपोर्ट किया- सोहेल खान के डायरेक्टोरियल डेब्यू का हिस्सा बने सलमान सोहेल खान ने साल 1997 में फिल्म ‘औजार’ से बतौर डायरेक्टर करियर की शुरुआत की थी। फिल्म में सलमान खान ने लीड रोल निभाया था। करीब 5 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 10 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी। इसके बाद सोहेल खान ने साल 1998 में ‘प्यार किया तो डरना क्या’ डायरेक्ट की। इस फिल्म में भी सलमान खान लीड रोल में नजर आए। सोहेल ने फिल्म की कहानी लिखने के साथ-साथ इसे प्रोड्यूस भी किया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही। सोहेल की अगली डायरेक्टोरियल फिल्म ‘हैलो ब्रदर’ में भी सलमान लीड रोल में थे। इस फिल्म में अरबाज खान भी अहम भूमिका में नजर आए। सोहेल के डायरेक्टोरियल कमबैक को भी किया सपोर्ट साल 2002 में रिलीज हुई सोहेल खान की फिल्म ‘मैंने दिल तुझको दिया’ में उन्होंने डायरेक्शन, प्रोडक्शन और एक्टिंग की जिम्मेदारी संभाली थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। इसके बाद सोहेल ने डायरेक्शन से दूरी बना ली। करीब 12 साल बाद सोहेल खान ने साल 2014 में फिल्म ‘जय हो’ से बतौर डायरेक्टर कमबैक किया। इस फिल्म में भी सलमान खान ने लीड रोल निभाकर अपने भाई के डायरेक्टोरियल कमबैक को सपोर्ट किया। सलमान की फिल्मों में सोहेल बने प्रोड्यूसर सोहेल खान ने डायरेक्शन से ब्रेक के दौरान बतौर प्रोड्यूसर भी काम किया। वह सलमान खान की कई फिल्मों से प्रोड्यूसर के तौर पर जुड़े रहे। इनमें ‘लकी: नो टाइम फॉर लव’, ‘मैंने प्यार क्यों किया?’, ‘पार्टनर’, ‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’, ‘मैं और मिसेज खन्ना’ और ‘रेडी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। इस तरह सलमान की फिल्मों के जरिए सोहेल का प्रोडक्शन करियर भी लगातार चलता रहा। रियलिटी शो में भी सोहेल को मिला सलमान का सपोर्ट सलमान खान लंबे समय से बानीजे प्रोडक्शन हाउस के पॉपुलर रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ से जुड़े हुए हैं। इसी प्रोडक्शन हाउस ने जब ओटीटी गेम रियलिटी शो ‘द अलायंस’ शुरू किया, तो सलमान की बदौलत, सोहेल शो से जुड़े। शो के दौरान सोहेल की जर्नी भले ही खास नहीं रही, लेकिन फैमिली वीक में सलमान खान उनके सपोर्ट में शो पर पहुंचे। सलमान ने आम कंटेस्टेंट की तरह सोहेल का हौसला बढ़ाया। उनकी मौजूदगी से सोहेल की जर्नी को भी चर्चा मिली और शो सुर्खियों में रहा। अरबाज खान के एक्टिंग करियर के बाद प्रोडक्शन और डायरेक्शन में भी साथ दिया अरबाज खान ने साल 1996 में फिल्म ‘दरार’ से एक्टिंग डेब्यू किया था। फिल्म सफल रही, लेकिन अरबाज को बतौर हीरो वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसकी उम्मीद थी। इसके बाद अरबाज ने सलमान खान की फिल्मों ‘प्यार किया तो डरना क्या’ और ‘हैलो ब्रदर’ में काम किया। दोनों ही फिल्में सलमान के करियर की चर्चित फिल्मों में शामिल रहीं। अरबाज ने सलमान की फिल्म ‘तुमको भुला न पाएंगे’ में भी कैमियो किया था। इसके अलावा वह ‘गर्व’ और ‘मैंने प्यार क्यों किया?’ जैसी सलमान की फिल्मों में भी नजर आए। जब अरबाज की बतौर लीड एक्टर फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं, तो उन्होंने एक्टिंग से आगे बढ़कर प्रोडक्शन में कदम रखा। साल 2010 में उन्होंने सलमान खान की फिल्म ‘दबंग’ से बतौर प्रोड्यूसर अपनी दूसरी पारी शुरू की और अरबाज खान प्रोडक्शंस की शुरुआत की। ‘दबंग’ में अरबाज ने मक्खी का किरदार भी निभाया। फिल्म ब्लॉकबस्टर रही। इसके बाद ‘दबंग 2’ में भी अरबाज ने एक्टिंग के साथ-साथ बतौर प्रोड्यूसर काम किया। ‘दबंग’ के डायरेक्टर की जगह अरबाज को मिला मौका ‘दबंग’ की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर अभिनव कश्यप के फिल्म से अलग होने के बाद अरबाज खान ने फिल्म की डायरेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने ‘दबंग 2’ डायरेक्ट की, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। इस तरह अरबाज ने सलमान के सपोर्ट से एक्टिंग के बाद प्रोडक्शन और डायरेक्शन में भी अपनी पहचान बनाई। सिर्फ अरबाज ही नहीं, बल्कि उनकी पूर्व पत्नी मलाइका अरोड़ा भी ‘दबंग’ और ‘दबंग 2’ के गानों के जरिए चर्चा में रहीं। ‘दबंग’ का ‘मुन्नी बदनाम हुई’ और ‘दबंग 2’ का ‘पांडे जी सीटी’ काफी लोकप्रिय हुआ। राखी बहन श्वेता रोहिरा के पति पुलकित सम्राट को भी किया सपोर्ट सलमान खान की राखी बहन श्वेता रोहिरा ने साल 2014 में अभिनेता पुलकित सम्राट से शादी की थी। पुलकित ने साल 2012 में फिल्म ‘बिट्टू बॉस’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। सलमान ने श्वेता के साथ अपने रिश्ते के चलते पुलकित के करियर को भी सपोर्ट किया। उन्होंने पुलकित की फिल्म बिट्टू बॉस के प्रमोशन में हिस्सा लिया। इसके अलावा साल 2014 में रिलीज हुई ‘जय हो’ में पुलकित को अहम भूमिका भी मिली। हालांकि, बाद में पुलकित और श्वेता का रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और 2015 में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद पुलकित का नाम यामी गौतम के साथ जुड़ा। बाद में उन्होंने एक्ट्रेस कृति खरबंदा से शादी की। भांजी अलिजेह अग्निहोत्री को लॉन्च किया, खुद फिल्म प्रोड्यूस की सलमान खान ने साल 2023 में रिलीज हुई फिल्म ‘फर्रे’ से अपनी भांजी अलिजेह अग्निहोत्री को बॉलीवुड में लॉन्च किया। अलिजेह, सलमान की बहन अलविरा अग्निहोत्री और फिल्ममेकर अतुल अग्निहोत्री की बेटी हैं। सलमान खान ने अपने प्रोडक्शन हाउस सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले फिल्म फर्रे को प्रोड्यूस किया। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर सकी। अलिजेह की मां अलविरा अग्निहोत्री भी प्रोडक्शन से जुड़ी रही हैं। वह सलमान की फिल्मों ‘बॉडीगार्ड’ और ‘भारत’ की प्रोड्यूसर रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘एक था टाइगर’ से बतौर कॉस्ट्यूम डिजाइनर भी काम शुरू किया था। वह ‘टाइगर जिंदा है’, ‘टाइगर’ और ‘सुल्तान’ जैसी फिल्मों में भी कॉस्ट्यूम डिजाइनर के तौर पर जुड़ी रहीं। बहन अर्पिता के पति आयुष शर्मा को किया बॉलीवुड में लॉन्च सलमान खान ने साल 2018 में अपनी बहन अर्पिता खान शर्मा के पति आयुष शर्मा को फिल्म ‘लवयात्री’ से बॉलीवुड में लॉन्च किया। फिल्म का निर्माण सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले हुआ था। फिल्म में अरबाज खान और सोहेल खान ने भी कैमियो किया था। इसके बाद आयुष शर्मा साल 2021 की फिल्म ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ में सलमान खान के साथ लीड रोल में नजर आए। हालांकि, ‘लवयात्री’ और ‘अंतिम’ दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। अब सलमान खान के भतीजे अरहान खान बॉलीवुड में बतौर हीरो डेब्यू करने जा रहे हैं। अगर फिल्म में सलमान का कैमियो होता है, तो यह एक बार फिर दिखाएगा कि खान परिवार के सदस्यों के करियर में सलमान किस तरह लगातार सपोर्ट सिस्टम की भूमिका निभाते रहे हैं।

दैनिक भास्कर 5 Sep 2026 4:30 am

कभी होटल में काम करते थे पंकज त्रिपाठी:मनोज बाजपेयी की चप्पल रख ली थी, प्रदर्शन के चलते 7 दिन जेल में भी बिताए थे

दिग्गज अभिनेता पंकज त्रिपाठी का आज 50वां जन्मदिन है। पंकज त्रिपाठी उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपनी अलग पहचान बनाई। बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव से निकलकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक पहुंचे पंकज ने फिल्मों में छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत की और वर्तमान समय के हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं। पंकज की जिंदगी से जुड़ा एक इमोशनल किस्सा अभिनेता मनोज बाजपेयी से भी जुड़ा है। जब पंकज ने मनोज की चप्पल अपने पास रख ली थी। दरअसल, फिल्मों में पहचान बनाने से पहले पंकज त्रिपाठी पटना के होटल मौर्य की किचन में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे। वह होटल में काम करने के साथ-साथ थिएटर भी किया करते थे। पंकज ने कपिल शर्मा के शो में बताया था कि वो मनोज बाजपेयी के बहुत बड़े फैन थे। उन्हें जब पता चला कि मनोज बाजपेयी होटल में रुके हुए हैं, तो उन्होंने होटल के स्टाफ से कहा था कि मनोज बाजपेयी के रूम से कोई भी ऑर्डर आए तो सीधे उनको बताना। जब मनोज के कमरे से ऑर्डर आया तब पंकज ने होटल में मौजूद ढेर सारे सेबों में से सबसे अच्छे सेब चुनवाए और उन्हें अच्छी तरह पैक करवाकर एक्टर के कमरे में भेजा था। इसके साथ ही उन्होंने वेटर से कह दिया था कि मनोज जी से कहना कि एक लड़का उनसे मिलना चाहता है और वह थिएटर करता है। इसके बाद पंकज खुद मनोज के कमरे में पहुंचे। उन्होंने मनोज को प्रणाम किया, पैर छुए और बताया कि वह भी थिएटर करते हैं। कुछ देर उनसे मिलने के बाद पंकज वहां से वापस आ गए। मनोज की चप्पल होटल में छूट गई थी पंकज ने बताया था कि अगले दिन सुबह मनोज बाजपेयी होटल से चेकआउट करके एयरपोर्ट के लिए निकल गए। हालांकि, मनोज की एक हवाई चप्पल होटल के कमरे में छूट गई। जिसके बाद हाउसकीपिंग के कर्मचारी ने पंकज से कहा, “तुम्हारे मनोज बाजपेयी चप्पल छोड़ गए हैं।” यह सुनते ही पंकज ने कहा कि चप्पल हाउसकीपिंग में जमा मत करो, उन्हें दे दो। इसके पीछे की वजह बताते हुए पंकज ने कहा था, “एकलव्य की तरह अगर मैं इनके खड़ाऊं में अपना पैर डाल लूंगा…” यह कहते-कहते पंकज शो में भावुक हो गए थे। उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे। पंकज की जिंदगी में एक नहीं, दो जन्मतिथियां पंकज त्रिपाठी की जन्मतिथि को लेकर भी एक दिलचस्प किस्सा है। दस्तावेजों और कई आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी जन्मतिथि 5 सितंबर 1976 दर्ज है। हालांकि, पंकज ने खुद बताया था कि उनका जन्म वास्तव में 28 सितंबर 1976 को हुआ था। उन्होंने बताया था कि बचपन में स्कूल में नामांकन के दौरान उनके भाई से जन्मतिथि पूछी गई थी। भाई को सही तारीख याद नहीं थी, इसलिए 5 सितंबर दर्ज हो गया। जिसके चलते यही तारीख उनकी जन्मतिथि बन गई। पंकज त्रिपाठी ने 7 दिन जेल में बिताए थे कॉलेज के दिनों में पंकज त्रिपाठी का सामना जेल से भी हुआ था। साल 1993 में वह छात्र राजनीति से जुड़े थे और एक आंदोलन के दौरान उन्हें पटना की बेऊर जेल में करीब सात दिन बिताने पड़े। दरअसल, मधुबनी में छात्रों पर हुई गोलीबारी के विरोध में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्रदर्शन किया था। जिसके चलते उन्हें राजनीतिक कैदी के रूप में जेल में रहना पड़ा था। जेल में बिताए इन सात दिनों ने पंकज की सोच पर गहरा असर डाला। इसी दौरान उन्हें किताबें पढ़ने का शौक लगा। जेल में बंद अलग-अलग लोगों और उनके स्वभाव को करीब से देखने का मौका मिला, जिसे बाद में उन्होंने अपने अभिनय और किरदारों को समझने में भी इस्तेमाल किया। एक नजर पंकज त्रिपाठी के करियर पर पंकज त्रिपाठी को फिल्मों में शुरुआती दौर में छोटे किरदार मिले। ‘रन’ और ‘ओमकारा’ जैसी कई फिल्मों में नजर आने के बाद उन्हें 2012 में आई अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से पहचान मिली। फिल्म में उनका सुल्तान कुरैशी का किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद पंकज ने फुकरे, मसान, निल बट्टे सन्नाटा, बरेली की बर्फी, न्यूटन और स्त्री जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। OTT पर सेक्रेड गेम्स, मिर्जापुर और क्रिमिनल जस्टिस जैसी सीरीज ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। मिमी में उनके अभिनय के लिए पंकज त्रिपाठी को 69वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार मिला था। यह खबर भी पढ़ें… शक्ति कपूर ने भागकर की थी शादी: लता मंगेशकर के परिवार से थीं पत्नी, शादी के बाद अखबार में छपा- 3 महीने में तलाक हो जाएगा तकरीबन 700 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके शक्ति कपूर का एक्टिंग करियर बेहद सफल रहा। उनकी पर्सनल लाइफ की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है। शक्ति ने शिवांगी कोल्हापुरे से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म ‘किस्मत’ के दौरान हुई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 5 Sep 2026 4:30 am

Mirzapur The Movie ने पहले दिन मचाया 'भौकाल', ओपनिंग डे पर ही मुन्ना भैया के सामने बिछ गया बॉक्स ऑफिस

मिर्जापुर: द मूवी ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन शानदार कलेक्शन किया। कालीन भैया और मुन्ना भैया का खास भौकाल थिएटर में भी देखने को मिला।

जागरण 4 Sep 2026 9:07 pm

29वें दिन Hanuman Ansh पर बरसी 'नीम करोली बाबा' की कृपा, 'मिर्जापुर द मूवी' भी नहीं रोक पाई कमाई की रफ्तार

Hanuman Ansh Box Office Collection: नीम करोली बाबा पर बेस्ड फिल्म हनुमान अंश ने 29वें दिन फिर बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की है।

जागरण 4 Sep 2026 8:19 pm

100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट

मुंबई में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट किसी सामान्य क्विज शो के सेट जैसा नहीं है। यहां न दर्शकों के लिए अलग सीटिंग है और न ही एक कंटेस्टेंट हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देता है। इसके बजाय पूरे एरिना में देशभर से आए 100 प्रतिभागी एक साथ खेलते हैं। सेट के बीचों-बीच अनिल कपूर के लिए कोई पारंपरिक हॉट सीट भी नहीं है। वे इन 100 कंटेस्टेंट्स के बीच घूमते हुए सवाल पूछेंगे। करीब एक महीने में तैयार किए गए इस विशाल सेट पर 100 से ज्यादा लोगों ने काम किया। सेट डिजाइनर वर्षा जैन के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी चुनौती एक साथ 100 प्रतिभागियों के लिए तकनीकी व्यवस्था तैयार करना था। आंखों देखा हाल: 100 लोगों के लिए तैयार किया गया विशाल एरिना सेट में कदम रखते ही सबसे पहले इसका विशाल आकार ध्यान खींचता है। पूरा एरिना इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक साथ 100 प्रतिभागी बैठकर गेम खेल सकें। यहां पारंपरिक क्विज शो की तरह दर्शकों की भीड़ नहीं है। जो लोग दिखाई देंगे, वे सभी खेल का हिस्सा होंगे। सेट का पूरा डिजाइन प्रतिभागियों और होस्ट अनिल कपूर के बीच सीधा कनेक्शन बनाने के हिसाब से तैयार किया गया है। अनिल कपूर किसी एक कंटेस्टेंट के सामने बैठकर सवाल नहीं पूछेंगे, बल्कि 100 लोगों के बीच मौजूद रहकर उनसे सवाल करेंगे। अनिल कपूर के लिए नहीं है पारंपरिक ‘हॉट सीट’ सेट के बीच में एक खास सीट नजर आती है, जिसे देखकर पहली नजर में इसे हॉट सीट समझा जा सकता है। हालांकि, यह पारंपरिक हॉट सीट नहीं है। अनिल कपूर इस सीट पर बैठकर गेम होस्ट नहीं करेंगे। वे इसके आसपास घूमते हुए पूरे एरिना में मौजूद 100 प्रतिभागियों से सवाल करेंगे। यानी होस्ट और कंटेस्टेंट के बीच की दूरी को सेट डिजाइन के स्तर पर ही कम रखा गया है। छत पर लगी हैं 100 खास लाइट्स इस सेट की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक इसकी लाइटिंग है। वर्षा जैन के मुताबिक सेट की छत पर 100 लाइट पॉइंट लगाए गए हैं। हर लाइट एक प्रतिभागी के लिए है। गेम के दौरान किसी सवाल के जवाब के हिसाब से इन लाइट्स को प्रोग्राम किया जाएगा। सही और गलत जवाब के साथ लाइटिंग में बदलाव होगा, जिससे पूरे एरिना में गेम का असर दिखाई देगा। वर्षा जैन ने बताया कि 100 लोगों के लिए एक साथ कैमरा और लाइटिंग को प्रोग्राम करना तकनीकी तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण था। यही वजह है कि सेट तैयार होने के बाद भी करीब 10 दिन तक तकनीकी जांच और रिहर्सल चलती रही। एक महीने में तैयार हुआ सेट इस विशाल सेट को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। हालांकि, इसकी प्लानिंग इससे पहले ही शुरू हो गई थी और डिजाइन तैयार करने में करीब दो महीने लगे। वर्षा जैन के मुताबिक सेट पर काम करने के दौरान रोजाना 100 से ज्यादा लोग जुटे रहे। सेट तैयार होने के बाद कैमरों, लाइट्स और तकनीकी सिस्टम की लगातार जांच की गई, ताकि शूटिंग के दौरान 100 प्रतिभागियों के साथ गेम को आसानी से संचालित किया जा सके। वर्षा जैन ने बताया कि इंटरनेशनल फॉर्मेट होने के कारण सेट डिजाइन में तय गाइडलाइन का भी पालन करना था। इसके साथ भारतीय दर्शकों और शो की जरूरत के मुताबिक अपनी क्रिएटिव व्याख्या भी जोड़ी गई। ‘केबीसी’ जैसा दिखता है, लेकिन गेम बिल्कुल अलग पहली नजर में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट देखने पर इसे अमिताभ बच्चन के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ से जोड़ा जा सकता है, लेकिन दोनों के फॉर्मेट में बड़ा अंतर है। वर्षा जैन के मुताबिक ‘केबीसी’ में होस्ट एक समय में एक कंटेस्टेंट के साथ खेलते हैं और आसपास दर्शक मौजूद रहते हैं। ‘इंडिया के टॉप 1%’ में ऐसा नहीं है। यहां अनिल कपूर एक साथ पूरे 100 प्रतिभागियों के साथ खेलते हैं और सेट पर अलग से दर्शकों की मौजूदगी नहीं है। उनके मुताबिक शो की वाइब, होस्ट की एनर्जी, सवालों का अंदाज और सेट का लुक- सब कुछ ‘केबीसी’ से अलग रखा गया है। क्या है ‘इंडिया के टॉप 1%’ का कॉन्सेप्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ लोकप्रिय ब्रिटिश गेम शो ‘द 1% क्लब’ का भारतीय संस्करण है। शो में देशभर से अलग-अलग पेशों और बैकग्राउंड के 100 लोग एक साथ गेम खेलते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें इतिहास, भूगोल या किताबों से जुड़े सामान्य ज्ञान के सवालों पर ज्यादा जोर नहीं है। यहां कंटेस्टेंट की रीजनिंग, लॉजिक, ऑब्जर्वेशन, पैटर्न पहचानने की क्षमता, कॉमन सेंस और प्रेजेंस ऑफ माइंड को परखा जाता है। शो के कंसल्टेंट सिद्धार्थ बसु के मुताबिक इसका मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कितना किताबी ज्ञान हासिल किया है, बल्कि यह देखना है कि वह अपने सामने मौजूद चीजों को किस तरह समझता और उसका लॉजिक पकड़ता है। 90% से शुरू होकर 1% तक पहुंचता है खेल इस गेम का तरीका भी दूसरे क्विज शो से अलग है। शुरुआत में सवाल ऐसा होता है, जिसका जवाब देश के करीब 90% लोग दे सकते हैं। इसके बाद सवालों का स्तर धीरे-धीरे कठिन होता जाता है। इसके बाद 80%, 70%, 60% और आगे बढ़ते हुए सवालों का स्तर उस मुकाम तक पहुंचता है, जहां सिर्फ 1% लोग ही उसका सही जवाब दे पाते हैं। यही इस शो का मूल कॉन्सेप्ट है- देखना कि कौन-सा प्रतिभागी अपनी सोच और समझ के दम पर भारत के उस 1% लोगों में शामिल हो सकता है, जो सबसे मुश्किल सवाल का जवाब दे पाए। हर एपिसोड में 100 नए खिलाड़ी शो में हर एपिसोड 100 लोग गेम खेलते हैं। खास बात यह है कि इसमें प्राइज मनी का सफर भी इसी गेम के साथ आगे बढ़ता है। शो में प्रतिभागियों को पहले से एक लाख रुपए की राशि दी जाती है और गेम के दौरान वे आगे बढ़ते हुए बड़ी रकम जीत सकते हैं। शो में अधिकतम प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए तक है। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक हर एपिसोड में यह देखा जाएगा कि 100 में से कौन प्रतिभागी गेम में सबसे आगे तक पहुंच पाता है। इसमें किसी एक एपिसोड की रकम को अगले एपिसोड में ले जाने वाला रोलओवर सिस्टम नहीं है। ‘1%’ तक पहुंचने के लिए नहीं चाहिए बड़ी डिग्री इस गेम की एक खास बात यह भी है कि इसमें किसी खास शैक्षणिक डिग्री या प्रोफेशनल बैकग्राउंड की जरूरत नहीं है। सिद्धार्थ बसु ने अनिल कपूर को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को सफल होने के लिए जरूरी नहीं कि उसने इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की हो या यूपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी की हो। उनके मुताबिक शो इस बात पर केंद्रित है कि किसी व्यक्ति के भीतर मौजूद समझ, तर्क और सोचने की क्षमता उसे कितना आगे ले जा सकती है। अनिल कपूर को क्यों चुना गया होस्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ को अनिल कपूर होस्ट कर रहे हैं। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक जब उन्हें बताया गया कि अनिल कपूर जैसे अभिनेता और परफॉर्मर को शो से जोड़ा जा रहा है, तो उन्हें लगा कि वे इस कॉन्सेप्ट के लिए बिल्कुल सही उदाहरण हैं। उनका कहना है कि अनिल कपूर ने अपने करियर में लंबे समय तक मेहनत, लगन और अपने काम के प्रति समर्पण के दम पर अपनी पहचान बनाई है। इसलिए वे शो के उस विचार से भी मेल खाते हैं कि किसी व्यक्ति की सफलता सिर्फ उसकी डिग्री या किताबी ज्ञान से तय नहीं होती। सिद्धार्थ बसु ने यह भी बताया कि वे इस शो के निर्माता या निर्देशक नहीं हैं, बल्कि कंसल्टेंट के तौर पर इससे जुड़े हैं। अनिल कपूर के साथ पहले भी काम कर चुके हैं सिद्धार्थ बसु सिद्धार्थ बसु और अनिल कपूर का इससे पहले भी काम का अनुभव रहा है। उन्होंने बताया कि ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के दौरान भी अनिल कपूर से जुड़े ट्रेनिंग और शूटिंग के हिस्से में उनकी कंपनी और उन्होंने काम किया था। इसी अनुभव के कारण वे अनिल कपूर की तैयारी और काम के प्रति लगन से परिचित हैं। उनके मुताबिक अनिल कपूर जिस मेहनत और समर्पण के साथ किसी प्रोजेक्ट के लिए तैयारी करते हैं, वही इस शो के लिए भी दिखाई दे रहा है। शो में कैसे ले सकते हैं हिस्सा? ‘इंडिया के टॉप 1%’ में हिस्सा लेने के लिए शो की ओर से ओपन कॉल फॉर एंट्री का प्रोसेस रखा गया है। इच्छुक प्रतिभागी बताए गए माध्यम से रजिस्टर कर सकते हैं। इसके बाद उनसे कुछ सवाल पूछे जाते हैं। सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को अगले चरण के लिए चुना जाता है। इसके बाद स्टेज-बाय-स्टेज सिलेक्शन प्रोसेस के जरिए प्रतिभागी शो तक पहुंचते हैं। शो से जुड़े नियम और सिलेक्शन की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती है। 19 सितंबर से शुरू होगा शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ का प्रीमियर 19 सितंबर 2026 से रात 8 बजे स्टार प्लस पर होगा। शो को जियोहॉटस्टार पर भी देखा जा सकेगा। कुल मिलाकर यह शो सामान्य क्विज शो से अलग इस सवाल पर केंद्रित है कि 100 लोगों में से कौन अपनी सोच, लॉजिक और ऑब्जर्वेशन के दम पर उस 1% तक पहुंच सकता है। वहीं इसका विशाल एरिना, 100 प्रतिभागियों के लिए तैयार की गई लाइटिंग और उनके बीच घूमते हुए गेम होस्ट करने वाले अनिल कपूर इसे टीवी के दूसरे क्विज शो से अलग लुक देते हैं।

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 6:18 pm

सलमान खान ने कैफे को दी चेतावनी:बोले- हाइजीन मेंटेन रखना, वरना उनको भेज दूंगा; क्या तुकाराम मुंढे की ओर किया इशारा

सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे 'द टक शॉप एट सेवियोज' का वीडियो शुक्रवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है। सलमान ने अपने मशहूर “इट्स डन, ब्रो” कैचफ्रेज को भी अलग अंदाज में इस्तेमाल किया। उन्होंने मैसेज के आखिर में “इट्स डन, सिस” लिखा। सलमान की चेतावनी महाराष्ट्र में खाने-पीने की जगहों पर बढ़ी निगरानी के बीच आई। पिछले कुछ महीनों में FDA ने फूड सेफ्टी, हाइजीन और लाइसेंस से जुड़े उल्लंघनों को लेकर रेस्टोरेंट्स और दूसरे संस्थानों पर जांच और कार्रवाई तेज की है। तुकाराम मुंढे ने 26 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA कमिश्नर का पद संभाला था। उनके पद संभालने के बाद विभाग ने रेस्टोरेंट्स, होटल्स, क्लब्स, फास्ट-फूड आउटलेट्स और संस्थागत किचन में जांच बढ़ाई है। मुंढे के कमिश्नर बनने के शुरुआती दो महीनों में FDA ने 3,000 से ज्यादा जांच कीं। करीब 165 फूड संस्थानों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। इस कार्रवाई में खराब हाइजीन, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और जरूरी लाइसेंस के बिना कारोबार करने जैसी शिकायतों पर ध्यान दिया गया। मुंढे के सख्त रवैये के चलते सोशल मीडिया पर उन्हें रियल-लाइफ सिंघम का नाम भी मिला है। स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों को संबोधित करते हुए मुंढे ने फूड सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ की जरूरत पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “मेरा मानना है कि स्वस्थ देश के लिए स्वस्थ लोगों का होना जरूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए अच्छा खाना और दवाइयां जरूरी हैं। इसके लिए रेगुलेटर्स को इस लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए।” FDA ने शाहरुख, अजय और टाइगर को नोटिस भेजा गौरतलब है कि महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इन तीनों अभिनेताओं ने 'विमल इलायची' का विज्ञापन किया था। इस मामले में अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को अपना जवाब भेज दिया। वहीं, शाहरुख खान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। तीनों एक्टर्स को नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया था। 'सीएनएन-न्यूज18' की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटर को अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के जवाब मिल गए हैं। शाहरुख खान का जवाब अभी तक नहीं मिला है और FDA उनके रिप्लाई का इंतजार कर रहा है। रेगुलेटर ने सवाल उठाया है कि क्या यह विज्ञापन विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के बराबर हो सकता है। FDA का कहना है कि भले ही विज्ञापन इलायची प्रोडक्ट के लिए है, लेकिन इसकी ब्रांडिंग पान मसाला ब्रांड से अप्रत्यक्ष कनेक्शन बना सकती है। तीनों एक्टर्स से मांगे गए थे सबूत FDA ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ से इस बात के सबूत मांगे थे कि उन्होंने विमल इलायची का जो विज्ञापन किया है, वह पूरी तरह अलग प्रोडक्ट है। इसके साथ ही उनसे यह भी साबित करने को कहा गया था कि यह विज्ञापन बैन किए गए विमल पान मसाला और तंबाकू के दूसरे प्रोडक्ट्स के प्रमोशन के लिए बनाया गया सरोगेट विज्ञापन नहीं है। FDA ने उनसे विज्ञापन से जुड़े एग्रीमेंट, कैंपेन ब्रीफ और अन्य दस्तावेज भी मांगे थे। शाहरुख ने जवाब नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ का जवाब मिलने के बाद अब FDA शाहरुख खान के जवाब का इंतजार कर रहा है। शाहरुख की तरफ से जवाब नहीं मिलने पर FDA क्या कार्रवाई करेगा, यह अभी साफ नहीं है। जानकारी के मुताबिक, समय सीमा तक जवाब न देने या जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भ्रामक खाद्य विज्ञापन के मामले में FSS एक्ट की धारा 53 के तहत 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 6:16 pm

'आप आयशा बेगम बनकर बात कर रही हैं':मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को लेकर दिए शर्मिला टैगोर के बयान पर सवाल उठाए

सीनियर एक्टर मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी। उनकी यह टिप्पणी सीनियर एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के उस बयान के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् के पूरे गीत को गाने के बजाय केवल शुरुआती अंतरों को गाने की बात कही थी। ‘द फ्री प्रेस जर्नल’ से बातचीत के दौरान मुकेश खन्ना से शर्मिला टैगोर के कथित सुझाव को लेकर कहा, “वह अपनी समझ के हिसाब से बोल रही हैं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। शायद अपनी बात समझाते हुए उनके मुंह से यह निकल गया कि दूसरे धर्मों के लोग इसे समझ या स्वीकार नहीं कर पाएंगे।” मुकेश खन्ना ने कहा, “आप बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां काली पूजा इतने बड़े स्तर पर मनाई जाती है। आप बंगाली संस्कृति और बंगाली फिल्मों के बीच बड़ी हुई हैं। फिर आज आपको समझ में आ रहा है कि एक धर्म वाला इसको एक्सेप्ट नहीं करे। उस वक्त नहीं आया था। हम क्या शादी करने के बाद आपको मालूम पड़ा?” उन्होंने सवाल उठाया, जब आप नवाब की बेगम बन गईं। तब आपको मालूम पड़ा कि अरे मुस्लिम धर्म भी है। अरे ये लोग तो मानते नहीं हैं। अल्लाह को मानते हैं। ये लोग तो हमारे देवी को भी नहीं मानते। बोलेंगे हम लोग बहुत सारे भगवान में बिलीव नहीं करते। उन्होंने आगे कहा, शादी के लिए आयशा बेगम बन गईं, लेकिन आज आप बात कर रही हैं आयशा बेगम बनकर। आज आपको मुस्लिम धर्म समझ में आ रहा है। हिंदू धर्म क्या भूल गई आप? वंदे मातरम् पर पुराने विरोध का भी किया जिक्र मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को लेकर ऐतिहासिक तौर पर उठाई गई आपत्तियों पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों की आपत्ति केवल गीत के बाद के हिस्सों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों को लेकर नहीं थी। उन्होंने कहा कि एक आपत्ति यह भी थी कि मुस्लिम केवल खुदा के सामने झुकते हैं। मुकेश ने दावा किया, “इस पर आपत्ति आज से शुरू नहीं हुई है। तर्क यह दिया जाता रहा है कि वे केवल खुदा के सामने झुकते हैं और इसलिए किसी और के सामने नहीं झुकेंगे।” अभिनेता ने वंदे मातरम् के अलग-अलग गायन संस्करणों का भी जिक्र किया। उन्होंने लता मंगेशकर, हेमंत कुमार और एआर रहमान से जुड़े संस्करणों का उदाहरण दिया। एआर रहमान के ‘मां तुझे सलाम’ का दिया उदाहरण मुकेश खन्ना ने मातृभूमि के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति को समझाने के लिए एआर रहमान के गीत ‘मां तुझे सलाम’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “वह कहते हैं ‘मां तुझे सलाम’। वह उसे मां कह रहे हैं और उन्हें सलाम कर रहे हैं।” अभिनेता ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने का मतलब किसी को जबरन झुकने के लिए मजबूर करना नहीं होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने वंदे मातरम् गाने पर आपत्ति को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हम भारत माता के सामने झुकते हैं। अगर कोई झुकना नहीं चाहता तो ठीक है, हम उसे झुकने के लिए मजबूर नहीं कर रहे। लेकिन फिर यह कहना कि वंदे मातरम् ही नहीं गाया जाना चाहिए, यह बात मेरी समझ में नहीं आती।” शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था शर्मिला टैगोर ने न्यूज एजेंसी IANS के साथ बातचीत में कहा, 'बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र है। जो लोग एक धर्म, एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें तो वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।' हालांकि, शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना के कमेंट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनोट ने कहा था कि हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए। कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया था। उन्होंने लिखा, 'मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो। विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार तरीके से गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसे आप हमेशा मिलती हैं।' ………….. यह खबर भी पढ़ें… शर्मिला टैगोर ने शादी के बाद इस्लाम अपनाया था:बेटी सबा बोलीं- हमारे घर में मंदिर नहीं था; मां ने हमें इस्लाम के बारे में बताया एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की बेटी सबा अली पटौदी ने हाल ही में अपने माता-पिता की अंतरधार्मिक शादी और धार्मिक परवरिश पर बात की है। उन्होंने बताया कि शादी के बाद उनकी मां ने इस्लाम अपनाया था और बच्चों को भी इसके बारे में सिखाया। सबा ने यह बात यूट्यूब चैनल ‘बिग बॉलीवुड बफ्स’ से बातचीत में कही। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें, सैफ अली खान और सोहा अली खान को कोई धर्म मानने के लिए मजबूर नहीं किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 2:47 pm

मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी

स्टारकास्ट- अली फजल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, रवि किशन, जीतेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, अभिषेक बनर्जी, श्रेया पिलगांवकर डायरेक्टर- गुरमीत सिंह ड्यूरेशन- 3 घंटे 17 मिनट रेटिंग- 3.5/ 5 मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। इसे सिनेमाई विस्तार दिया गया है। लेकिन 3 घंटे 17 मिनट की इस फिल्म में जहां कई सीक्वेंस बड़े पर्दे पर खूब असर करते हैं, वहीं कुछ जगह कहानी को अपनी मंजिल तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है। कैसी है फिल्म की कहानी? ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की कहानी फ्रेंचाइजी की उसी दुनिया में लौटती है, जहां सत्ता की कुर्सी खाली होते ही बंदूकें खुद अपनी भाषा बोलने लगती हैं। फिल्म दरअसल मिर्जापुर की कहानी में एक ऐसा अध्याय खोलती है, जो सीरीज की टाइमलाइन के बीच का हिस्सा है। यानी यह कहानी अचानक किसी दूसरी दुनिया में नहीं चली जाती, बल्कि पुराने किरदारों और उनके रिश्तों के बीच एक नया खेल जोड़ती है। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी के लिए सत्ता सिर्फ गद्दी नहीं, विरासत और दबदबे का सवाल है। दूसरी तरफ गुड्डू पंडित यानी अली फजल की दुनिया बदले और ताकत के इर्द-गिर्द घूमती है। और फिर मुन्ना त्रिपाठी यानी दिव्येंदु की मौजूदगी इस पूरे समीकरण को फिर से खतरनाक बना देती है। मुन्ना की वापसी फिल्म का सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता है, लेकिन कहानी सिर्फ पुराने चेहरों की वापसी पर निर्भर नहीं रहती। रवि किशन का बब्बुआ यादव इस सत्ता के खेल में नया रंग भरता है। उसके आते ही कहानी में एक अलग किस्म की आक्रामकता दिखाई देती है। बीना त्रिपाठी यानी रसिका दुग्गल भी अपनी चालें चलती हैं और यही मिर्जापुर की खासियत है। यहां कोई किरदार सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं होता, हर कोई किसी न किसी खेल का खिलाड़ी है। कहानी आगे बढ़ती है तो मिर्जापुर की गलियों से निकलकर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंचती है। बदला, सत्ता, धोखा और वर्चस्व की यह लड़ाई धीरे-धीरे ऐसे मुकाम पर जाती है, जहां पुरानी दुश्मनी और नए समीकरण आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। कैसी है कहानी और स्क्रीनप्ले में क्या खास है? पुनीत कृष्णा की लिखाई अब भी इस फ्रेंचाइजी की रीढ़ है। मिर्जापुर का संवाद सिर्फ संवाद नहीं होता, वह किरदार की पहचान बन जाता है। फिल्म में भी कई जगह बातचीत इतनी धारदार है कि गोली चलने से पहले ही सीन में तनाव पैदा हो जाता है। खास बात यह है कि यहां हास्य भी उसी अंधेरी दुनिया से निकलता है। हिंसा के बीच अचानक आने वाला देसी हास्य फिल्म को लगातार गंभीर बने रहने से बचाता है। लेकिन यहीं स्क्रीनप्ले थोड़ी परेशानी पैदा करता है। फिल्म के पास किरदार बहुत हैं, पुराने रिश्ते बहुत हैं और नए समीकरण भी बहुत हैं। इन्हें संभालने की कोशिश में दूसरे हिस्से में कहानी कई जगह आगे बढ़ने के बजाय अपने ही बनाए चक्कर में घूमती हुई लगती है। कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो फिल्म का असर और तेज हो सकता था। कैसी है स्टारकास्ट कि एक्टिंग? दिव्येंदु शर्मा- दिव्येंदु को मुन्ना के रूप में दोबारा देखना सिर्फ प्रशंसकों के लिए पुरानी याद नहीं है, अभिनय के स्तर पर भी यह फिल्म का बड़ा आकर्षण है। मुन्ना की बेपरवाही, सनक और खतरनाक मासूमियत का जो मिश्रण दिव्येंदु ने बनाया है, वह अब भी काम करता है। पंकज त्रिपाठी- कालीन भैया, दिव्येंदु के किरदार मुन्ना से ठीक उलट है। वह कम बोलते हैं और ज्यादा महसूस कराते हैं। उनका अभिनय शोर नहीं करता, लेकिन सीन पर कब्जा कर लेता है। अली फजल- अली का गुड्डू अब पहले से ज्यादा कठोर और सत्ता के खेल को समझने वाला किरदार है। उनके गुस्से में अब सिर्फ बदला नहीं, सत्ता की भूख भी दिखाई देती है। रवि किशन- इनकी एंट्री फिल्म को जरूरी ऊर्जा देती है। बब्बुआ यादव के किरदार में उनका देसी अंदाज और आक्रामकता मिर्जापुर की दुनिया में नया तड़का लगाती है। रसिका दुग्गल, जितेंद्र कुमार, अभिषेक बनर्जी, राजेश तैलंग और बाकी कलाकार भी अपने किरदारों को उसी दुनिया का हिस्सा बनाए रखते हैं। बड़े पर्दे पर मिर्जापुर का असली फायदा मिर्जापुर की बंदूकें ओटीटी पर भी चलती थीं, लेकिन सिनेमाघर में उनका असर अलग है। गोलियों की आवाज, हाथापाई, खून-खराबा और बड़े एक्शन सीक्वेंस फिल्म को थिएटर वाला स्केल देते हैं। खासकर राजस्थान के रेगिस्तान में फिल्म का प्री-क्लाइमैक्स और क्लाइमैक्स हिस्सा शानदार तरीके से फिल्माया गया है। यहां निर्देशक गुरमीत सिंह को अपनी सबसे ज्यादा आजादी मिलती है और कैमरा लोकेशन को सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं रहने देता, बल्कि उसे एक्शन का हिस्सा बना देता है। सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के स्केल को बढ़ाती है। 3 घंटे 17 मिनट भारी पड़ती हैफिल्म की सबसे बड़ी कमी उसकी लंबाई है। पहला हिस्सा कहानी, किरदार और टकराव को तेजी से स्थापित करता है। इंटरवल तक कई जगह फिल्म काफी मनोरंजक रहती है। लेकिन इंटरवल के बाद कुछ हिस्सों में स्क्रीनप्ले जरूरत से ज्यादा समझाता है और रफ्तार गिरती है। यह वही जगह है जहां फिल्म को थोड़ा कसने की जरूरत थी। ताजा प्रतिक्रियाओं में भी ओवर-एक्सप्लेनिंग और पेसिंग को लेकर यही बात सामने आई है। कुछ दृश्य ऐसे लगते हैं जिन्हें कहानी के लिए जरूरी समझा गया है, लेकिन वे फिल्म की गति को उतना आगे नहीं बढ़ाते। यही वजह है कि करीब 15-20 मिनट की कटौती फिल्म को और प्रभावी बना सकती थी। फिर आखिरी हिस्से में फिल्म दोबारा रफ्तार पकड़ती है और एक्शन के साथ कहानी अपना वजन वापस हासिल करती है। कैसा है डायरेक्शन, टेक्निकली कैसी बनी फिल्म? गुरमीत सिंह ने सबसे मुश्किल काम यह किया है कि मिर्जापुर की ओटीटी वाली पहचान को बड़े पर्दे की भाषा में बदला जाए। इस मामले में वह काफी हद तक सफल रहते हैं। फिल्म में मास एलिवेशन है, लेकिन वह पूरी तरह अपनी मूल दुनिया से बाहर नहीं जाती। बैकग्राउंड स्कोर कई एक्शन और एंट्री सीक्वेंस को जरूरी ताकत देता है। गाने फिल्म का प्रमुख आकर्षण नहीं हैं और उन्हें कहानी पर हावी भी नहीं होने दिया गया है। निर्माण कला और लोकेशन फिल्म की दुनिया को विश्वसनीय बनाए रखते हैं। कैमरा खास तौर पर एक्शन वाले हिस्सों में अच्छा काम करता है। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह अपने मूल भौकाल को बड़े पर्दे पर ले जाने में कामयाब रहती है। कालीन भैया का ठहराव, गुड्डू का गुस्सा, मुन्ना का पागलपन और बब्बुआ यादव की नई आक्रामकतास इन सबको मिलाकर फिल्म में कई ऐसे पल बनते हैं जो याद रह जाते हैं। लेकिन अच्छी फिल्म और बेहतरीन फिल्म के बीच का फर्क यहां स्क्रीनप्ले की कसावट पैदा करती है। कहानी में दम है, कलाकारों में दम है, संवादों में दम है और क्लाइमैक्स में भी दम है, मगर बीच का हिस्सा उतना धारदार नहीं रह पाता। कुल मिलाकर, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ भौकाल की वही पुरानी बोली बोलती है, बस इस बार आवाज बड़े पर्दे की है। फिल्म में बारूद खूब है, किरदार भी अपने रंग में हैं, लेकिन अगर कहानी की रफ्तार पर थोड़ी और कैंची चलती तो यह भौकाल और ज्यादा दमदार हो सकता था।

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 1:41 pm

मानहानि केस में सयानी गुप्ता को अंतरिम राहत:सीन चोरी के आरोप लगाने वालीं फिल्ममेकर का मानहानिकारक कंटेंट हटाना होगा; मेटा-रेडिट भी नामजद, जानिए पूरा विवाद

मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने गुरुवार को एक्ट्रेस और फिल्ममेकर सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित या प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला उनकी शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ से जुड़ा है, जिस पर फिल्ममेकर विनीता नेगी ने चोरी के आरोप लगाए थे। लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल सेशंस जज शुद्धिकुमार मुरलीधरराव बुके ने सयानी गुप्ता की ओर से दायर अंतरिम राहत की अर्जी मंजूर की। सयानी गुप्ता ने फिल्ममेकर विनीता नेगी के खिलाफ 9 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। नेगी ने आरोप लगाया था कि सयानी गुप्ता की फिल्म में उनकी अधूरी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रभा’ के कुछ अहम हिस्सों की नकल की गई है। कोर्ट ने नेगी और अन्य प्रतिवादियों को सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित करने, प्रसारित करने या उसे आगे भी प्रकाशित करते रहने से रोक दिया है। इस अंतरिम राहत में मेटा, रेडिट और डेकन क्रॉनिकल जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश भी शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का मतलब सच्चे तथ्यों पर आधारित जानकारी के प्रकाशन पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला? सयानी गुप्ता की डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ को लेकर विनीता नेगी ने कहानी चोरी, कॉपीराइट और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। FTII की पूर्व छात्रा और फिल्ममेकर विनीता नेगी का दावा था कि वह डॉक्यूमेंट्री प्रभा बना रही हैं, लेकिन सयानी गुप्ता ने डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म आसमानी में उस डॉक्यूमेंट्री के सीन चोरी कर इस्तेमाल किए हैं। सयानी गुप्ता ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने आरोपों को झूठा, भ्रामक और बिना ठोस आधार वाला बताया। सयानी ने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में भी इसकी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई होने से पहले ही विनीता ने सोशल मीडिया पर चोरी के आरोप लगाते हुए सयानी के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। सयानी ने विनीता के खिलाफ 9 करोड़ की मानहानि की याचिका दायर की थी। सयानी ने गुप्ता के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया के जरिए विनीता ने इन आरोपों को और व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी पेशेवर छवि और काम को नुकसान पहुंचा। फिल्म फेस्टिवल को मेल भेजा, फिल्म को हुआ नुकसान सयानी ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी फिल्म ‘आसमानी’ को इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया था, लेकिन बाद में इसे फेस्टिवल से हटा लिया गया। गुप्ता ने कोर्ट से 9 करोड़ रुपये के हर्जाने, कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने और विनीता नेगी की ओर से सार्वजनिक तौर पर बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कथित मानहानिकारक सामग्री वाली प्रतियों या डिवाइस को अपने कब्जे में लेने के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने की मांग भी की थी। जल्द होगी केस की अगली सुनवाई सयानी को अंतरिम राहत देने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। सयानी गुप्ता की ओर से एडवोकेट मोनिल पंजाबी, एडवोकेट प्रियंका सिन्हा और एडवोकेट भाव्या शाह व मुजतबा अंबेकर पेश हुए। वहीं विनीता नेगी की ओर से एडवोकेट सायली शिंदे और लक्ष्मी जेनकिंस ने पैरवी की।

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 12:57 pm

मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता:निखिल आडवाणी बोले- 25 साल बाद मनोज बाजपेयी संग काम किया तो उन्होंने कहा- अब आए हो

वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी है, जिनके बारे में कम चर्चा हुई। यह सीरीज संजीव सान्याल की किताब ‘रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने बताया कि ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के बाद उन्हें लगा कि ऐसी कहानियों में यूथ का नजरिया मिसिंग था। उन्होंने प्रतिभा रांटा की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह शो के लिए मना कर देतीं तो उनका दिल टूट जाता। निखिल ने मनोज बाजपेयी का किस्सा भी सुनाया, जिन्होंने 25 साल बाद साथ काम करने पर पूछा था- ‘अब आए हो?’ प्रतिभा ने किरदार की तैयारी और रोहित सराफ ने एक्शन को चुनौती बताया। सवाल: पहले भी आपने आजादी से जुड़ी कहानियां कही हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में ऐसा क्या था, जो आपको पहले की कहानियों में मिसिंग लगा? जवाब/निखिल आडवाणी: मुझे लगा कि यूथ मिसिंग था। हमने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, ऊधम सिंह और जलियांवाला बाग के बारे में बहुत पढ़ा है। लेकिन इनसे करीब 10 साल पहले भी एक समानांतर कहानी चल रही थी। रिसर्च करते हुए मुझे लगा कि इन युवाओं की कहानी भी बतानी चाहिए। उस समय के क्रांतिकारियों में एक अलग तरह का जुनून था। उन्होंने तय कर लिया था कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना है। कैसे करेंगे, यह बाद की बात थी। यही जुनून मुझे इस कहानी में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। सवाल: प्रतिभा रांटा में आपको वह प्रतिभा कब नजर आई, जो इस किरदार के लिए जरूरी थी? अगर वह शो करने से मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब/निखिल आडवाणी: मेरे लिए किसी एक्टर के पास जाना सिर्फ कास्टिंग नहीं है। मैं किसी कलाकार के पास तब तक नहीं जाना चाहता, जब तक मेरे पास उसके लिए ऐसा कुछ न हो, जिसमें वह पूरी तरह डूब सके। प्रतिभा के मामले में भी ऐसा ही था। मुझे पता था कि वह बहुत अच्छी एक्टर हैं, लेकिन यह समझना भी जरूरी था कि वह किरदार को किस तरह अपने अंदर उतारेंगी। हमने कई सीन्स पर महीनों चर्चा की। एक-एक लाइन पर बात की कि इसका मतलब क्या है और इसे किस तरह करना है। अगर प्रतिभा ने इस शो के लिए मना कर दिया होता, तो मैं सच में मेरा दिल टूट हो जाता। क्योंकि उन्होंने इस किरदार के लिए जो दिया है, वह बहुत खास है। मैं हमेशा मानता हूं कि एक एक्टर के अंदर यह चुनौती होनी चाहिए कि क्या मैं इस सीन को और बेहतर कर सकता हूं? क्या मैं इसे पेपर पर लिखे हुए सीन से आगे ले जा सकता हूं? अगर यह चुनौती नहीं है तो काम बोरिंग हो जाता है। सवाल: आपने कहा कि आप किसी कलाकार को सिर्फ इसलिए नहीं लेते कि वह बड़ा नाम है। मनोज बाजपेयी का 25 साल वाला किस्सा क्या है? जवाब/निखिल आडवाणी: मनोज बाजपेयी मुझसे करीब 25 साल से कहते रहे थे कि मेरे साथ काम करना है। जब मैं आखिरकार उनके पास ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गया तो उन्होंने मुझसे कहा- ‘अब आए हो?’ मैं किसी बिजी स्टार के पीछे भागने में विश्वास नहीं करता। मेरे लिए जरूरी है कि मेरे पास उस कलाकार के लिए सही किरदार हो। मैं किसी एक्टर के पास सिर्फ इसलिए नहीं जाता कि वह बड़ा नाम है। मुझे ऐसा किरदार लेकर जाना होता है, जिसमें वह अपने दांत गड़ा सके और पूरी तरह डूब सके। यही बात प्रतिभा के साथ भी थी। मुझे उनके लिए सही किरदार मिला और फिर हमने साथ में उसे खोजा। सवाल: प्रतिभा, निखिल सर ने आपको किरदार किस तरह समझाया? जवाब/प्रतिभा रांटा: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उसमें काफी कुछ पहले से मौजूद था, क्योंकि सर और उनकी टीम ने बहुत रिसर्च की थी। लेकिन प्रतिभा के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी क्रांतिकारी महिलाओं से भी प्रेरणा ली गई। मैंने भिकाजी कामा और बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के बारे में पढ़ा। मुझे फिल्म ‘लिटिल वुमन’ भी बहुत पसंद है और उससे भी मुझे प्रेरणा मिली। सर के साथ लगातार चर्चा होती थी कि प्रतिभा को किस तरह अप्रोच करना है। वह स्क्रीन पर सामान्य लड़की की तरह नहीं दिखती। उसमें आत्मविश्वास और आग है। वह बराबरी का हक मांगती है और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन सा सीन आपके लिए सबसे खास रहा? जवाब/प्रतिभा रांटा: बाघा जतिन और प्रतिभा के बीच का एक सीन मेरे लिए बहुत खास है। उसमें प्रतिभा उनसे कहती है कि आपको किसने हक दिया कि आप हमारे बारे में फैसला करें? अगर आप अपने लिए फैसले ले सकते हैं तो हम क्यों नहीं ले सकते? उस सीन में प्रतिभा का नजरिया साफ दिखाई देता है। वह महिलाओं को बराबरी से देखती है और अपने फैसले खुद लेना चाहती है। निखिल आडवाणी: यह सीन सुबह करीब 5 बजे शूट हुआ था। शूटिंग में देरी हो गई थी और वह लोकेशन का आखिरी दिन था, इसलिए हम वापस भी नहीं आ सकते थे। प्रतिभा और मैं उस सीन पर महीनों से बात कर रहे थे। वह उस वक्त काफी परेशान थी, लेकिन सुबह 5 बजे उसने जो परफॉर्म किया, वह शानदार था। यह उनके किरदार का बहुत महत्वपूर्ण सीन है और उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया। सवाल: रोहित, आपके लिए शो में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या रहा? जवाब/रोहित सराफ: मेरे लिए राजबिहारी बोस के साथ वाले सीन्स बहुत खास रहे। मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला, जिसे मैं बहुत मानता हूं। उनके साथ इंटरपर्सनल रिलेशनशिप वाले सीन्स करना मेरे लिए बहुत मजेदार था। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण एक्शन था। मैंने पहले इतना एक्शन नहीं किया था। इसकी तैयारी की और शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा। सवाल: अगर उस दौर का कोई क्रांतिकारी आज आपके सामने आ जाए तो क्या पूछेंगे? जवाब/रोहित सराफ: मैं उनसे पूछूंगा- ‘आप क्या खाकर पैदा हुए थे?’ सच में, क्योंकि उस दौर के लोगों में जिस तरह का जज्बा और जुनून था, उसी की वजह से आज हम यहां हैं। मैं जानना चाहूंगा कि उस तरह सपने देखना कैसा था? सवाल: प्रतिभा के किरदार से आज की लड़कियां क्या सीख सकती हैं? जवाब/प्रतिभा रांटा: सिर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी इस किरदार से बहुत कुछ सीख सकते हैं। प्रतिभा जिस तरह दुनिया को समझती है, लोगों को देखती है और बराबरी का हक मांगती है, वह महत्वपूर्ण है। उसके अंदर बराबरी की भावना है। वह मानती है कि अगर लड़के अपने फैसले खुद ले सकते हैं तो लड़कियों को भी अपने फैसले लेने का पूरा हक है। सवाल: क्या ‘द रिवोल्यूशनरीज’ जैसी कहानी पर फिल्म भी बनाई जा सकती है? जवाब/निखिल आडवाणी: बिल्कुल बनाई जा सकती है। लेकिन मुझे सीरीज का फॉर्मेट पसंद है, क्योंकि इसमें किरदारों को ज्यादा गहराई से एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है। इसमें रोमांस है, एक्शन है और कई किरदारों की अपनी अलग परतें हैं। अगर यह फिल्म होती तो भी मैं इन्हीं कलाकारों के साथ काम करता। मैंने रोहित, प्रतिभा और बाकी कलाकारों को इसलिए चुना क्योंकि वे मेरे दिमाग में मौजूद किरदारों के लिए बिल्कुल सही थे। मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि फॉर्मेट ओटीटी है या फिल्म। सही कलाकार और सही किरदार सबसे ज्यादा जरूरी हैं।

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 12:02 pm

पान मसाला एड विवाद में शाहरुख की मुश्किल बढ़ेंगी!:FDA को नहीं भेजा जवाब, 15 दिन की समय सीमा खत्म, अजय देवगन-टाइगर श्रॉफ ने आदेश माना

पान मसाला एड मामले में अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को अपना जवाब भेज दिया है। वहीं, शाहरुख खान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। तीनों एक्टर्स को 14 अगस्त को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर जवाब देने का आदेश दिया गया था। महाराष्ट्र FDA ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को ‘च्युइंग इलायची’ ब्रांड का विज्ञापन करने के मामले में नोटिस भेजा था। नोटिस में 15 दिन के अंदर जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई थी। ‘सीएनएन-न्यूज18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटर को अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के जवाब मिल गए हैं। शाहरुख खान का जवाब अभी तक नहीं मिला है और FDA उनके रिप्लाई का इंतजार कर रहा है। रेगुलेटर ने सवाल उठाया है कि क्या यह विज्ञापन विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के बराबर हो सकता है। महाराष्ट्र में पान मसाला के प्रमोशन पर रोक है। FDA का कहना है कि भले ही विज्ञापन इलायची प्रोडक्ट के लिए है, लेकिन इसकी ब्रांडिंग पान मसाला ब्रांड से अप्रत्यक्ष कनेक्शन बना सकती है। तीनों एक्टर्स से मांगे गए थे सबूत FDA ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ से इस बात के सबूत मांगे थे कि उन्होंने विमल इलायची का जो विज्ञापन किया है, वह पूरी तरह अलग प्रोडक्ट है। इसके साथ ही उनसे यह भी साबित करने को कहा गया था कि यह विज्ञापन बैन किए गए विमल पान मसाला और तंबाकू के दूसरे प्रोडक्ट्स के प्रमोशन के लिए बनाया गया सरोगेट विज्ञापन नहीं है। शाहरुख के जवाब नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ का जवाब मिलने के बाद अब FDA शाहरुख खान के जवाब का इंतजार कर रहा है। शाहरुख की तरफ से जवाब नहीं मिलने पर FDA क्या कार्रवाई करेगा, यह अभी साफ नहीं है। जानकारी के मुताबिक, समय सीमा तक जवाब न देने की स्थिति में लाखों रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पान मसाला एड विवाद पर सेलेब्स के पुराने बयान पान मसाला एड पर लंबे समय से विवाद है। हालांकि एक्टर्स का कहना है कि एड नहीं बल्कि बिक्री पर रोक लगाना चाहिए। शाहरुख खान और अजय देवगन पहले भी कह चुके हैं कि अगर कोई प्रॉडक्ट सेहत के लिए नुकसानदेह है, तो सरकार को उसके निर्माण और बिक्री पर ही रोक लगा देनी चाहिए। CNN-IBN को दिए एक पुराने इंटरव्यू में शाहरुख खान से पूछा गया था कि स्वास्थ्य मंत्री ने सेलिब्रिटीज से सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे उत्पादों का विज्ञापन न करने की अपील की है, क्योंकि बच्चे उन्हें देखकर पीने लगते हैं। इस पर शाहरुख ने कहा था कि अगर सिगरेट या सॉफ्ट ड्रिंक्स खराब हैं, तो सरकार देश में उनकी बिक्री और उत्पादन ही रोक दे। सरकार को मिलता है रेवेन्यू, फिर मेरी कमाई क्यों रोकते हैं - शाहरुख शाहरुख खान ने अपने जवाब में तर्क दिया था कि सरकार ऐसे उत्पादों को इसलिए बंद नहीं करती क्योंकि वे सरकार के लिए राजस्व (रेवेन्यू) का जरिया हैं। शाहरुख ने कहा था कि जब सरकार अपने रेवेन्यू के लिए उत्पादन नहीं रोक रही है, तो उनकी कमाई को भी नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे एक एक्टर हैं और काम करके कमाना उनका पेशा है। अगर कोई चीज वाकई गलत है, तो उसका बनना ही बंद होना चाहिए। अजय देवगन बोले- मैं केवल इलायची का प्रचार करता हूं साल 2022 में भी जब इस तरह के विज्ञापन पर विवाद बढ़ा था, तब अभिनेता अजय देवगन ने अपना पक्ष रखा था। अजय ने कहा था कि वे केवल 'इलायची' का विज्ञापन करते हैं और सरोगेट एडवरटाइजिंग के आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि किसी उत्पाद को इस्तेमाल करना इंसान की व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। अजय ने भी शाहरुख खान की बात से सहमति जताते हुए कहा था कि अगर कोई उत्पाद हानिकारक है, तो सबसे पहले उसके निर्माण पर रोक लगानी चाहिए। सेलेब्स के इन एड पर भी हुआ विवाद- कृति सेनन रक्षाबंधन एड विवादः एक्ट्रेस कृति सेनन हाल ही में जूलरी ब्रांड जीवा के जूलरी ब्रांड में नजर आईं। एड में भाई और कुत्ते को राखी बांधती हुईं कृति ने रिवीलिंग कपड़े पहने, जिससे विवाद हो गया। आलोचना के बीच ब्रांड ने एड हटा दिया। आमिर खान गृहप्रवेश एड विवादः आमिर खान कुछ सालों पहले एक प्राइवेट बैंक के एड में कियारा आडवाणी संग नजर आए। इसमें आमिर शादी के बाद दुल्हन के गृह प्रवेश करने के उलट घर जमाई के रूप में ससुराल में गृह प्रवेश करते नजर आ रहे हैं। तनिष्क एड पर हिंदू-मुस्लिम विवादः टाटा ग्रुप के मशहूर ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क ने कुछ सालों पहले इंटर रिलीजन मैरिज पर आधारित एड जारी किया था। विज्ञापन में एक हिंदू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी दिखाई गई है। एड पर जमकर विवाद हुआ, जिसके बाद तनिष्क ने वीडियो को यूट्यूब चैनल से हटा दिया है।

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 9:52 am

मूवी रिव्यू- गांधारी:मां का गुस्सा भी नहीं बचा पाया ये ‘ट्विस्टों का तांडव’, तापसी लड़ती रहीं और कहानी दम तोड़ती रही

कास्ट- तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, मीता वशिष्ठ, छाया कदम, चंदन रॉय, प्रशांत नारायण डायरेक्टर- देवाशीष मखीजा ड्यूरेशन- 1 घंटा 56 मिनट रेटिंग- 1.5/5 एक मां की बेटी गायब हो जाए, तो उसका दर्द कितना बड़ा होगा, यह समझने के लिए किसी भारी-भरकम डायलॉग की जरूरत नहीं होती। बस उस मां का चेहरा काफी है। ‘गांधारी’ के पास यही सबसे मजबूत हथियार था, एक मां, उसकी खोई हुई बेटी और उसे वापस पाने के लिए किसी भी हद तक जाने का जुनून। लेकिन फिल्म ने इस सीधे और दमदार आइडिया को इतना घुमाया, इतना सजाया और इतने ट्विस्ट डाल दिए कि आखिर में मां की कहानी कम और स्क्रीनप्ले की कसरत ज्यादा नजर आने लगती है। तापसी पन्नू पूरी ताकत से बानी का किरदार निभाती हैं। वह दौड़ती हैं, लड़ती हैं, मार खाती हैं और फिर उठकर लड़ती हैं। फिल्म उनसे हर तरह का इमोशन निकलवाना चाहती है। दिक्कत सिर्फ इतनी है कि जिस कहानी के लिए वह इतना सब कर रही हैं, वही कहानी बार-बार उनके पैरों में आकर गिर जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? बानी (तापसी पन्नू) और गोकुल (इश्वाक सिंह) अपनी बेटी के साथ सफर पर हैं। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन अचानक बेटी गायब हो जाती है। इसके बाद शुरू होती है एक मां की तलाश। जॉयपुरा नाम के छोटे शहर में पहुंचने के बाद बानी को एहसास होता है कि मामला सिर्फ एक बच्ची के गायब होने का नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क है और शहर में कई चेहरे ऐसे हैं, जिन पर भरोसा करना मुश्किल है। बानी की आंखों की रोशनी भी चली जाती है। लेकिन यहीं से फिल्म का सबसे दिलचस्प आइडिया सामने आता है, वह अपनी हालत को छिपाकर खुद को अंधा दिखाने लगती है, ताकि उन लोगों तक पहुंच सके जो उसकी बेटी के गायब होने के पीछे हैं। कहानी में बाल तस्करी, पुलिस, स्थानीय लोगों की मिलीभगत, धार्मिक प्रतीक और कई रहस्यमय किरदार जुड़ते जाते हैं। मीता वशिष्ठ, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी, जतिन सरना, चंदन रॉय और प्रशांत नारायण जैसे कलाकार कहानी में मौजूद हैं, लेकिन इतने सारे किरदारों के बीच असली कहानी कई बार पीछे छूट जाती है। फिल्म लगातार आपको चौंकाने की कोशिश करती है। समस्या यह है कि कुछ देर बाद ट्विस्ट चौंकाने के बजाय थकाने लगते हैं। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? तापसी पन्नू ने बानी के किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। एक्शन सीक्वेंस में उनकी मेहनत साफ दिखाई देती है। वह किरदार की शारीरिक और भावनात्मक मुश्किलों से पूरी तरह गुजरती नजर आती हैं। लेकिन अभिनय तभी असर करता है, जब कहानी उसे सहारा दे। यहां कई जगह तापसी जितना ज्यादा भाव देने की कोशिश करती हैं, फिल्म उतनी ही बनावटी लगने लगती है। इश्वाक सिंह ठीक हैं, लेकिन उनके किरदार को ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिला। जतिन सरना, मीता वशिष्ठ, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी और चंदन रॉय जैसे अच्छे कलाकार भी स्क्रीनप्ले की कमजोरी के आगे ज्यादा असर नहीं छोड़ पाते। प्रशांत नारायण को स्क्रीन पर बहुत कम वक्त मिलता है, लेकिन उनकी मौजूदगी बाकी कलाकारों के मुकाबले ज्यादा प्रभावशाली लगती है। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले? देवाशीष मखीजा की ‘जोरम’ जैसी फिल्म देखने के बाद ‘गांधारी’ से उम्मीद काफी ज्यादा थी। लेकिन यहां निर्देशक अपनी ही कहानी को संभाल नहीं पाए। फिल्म की शुरुआत एक गंभीर क्राइम थ्रिलर की तरह होती है। फिर यह मां की तलाश बनती है, फिर बदले की कहानी और कुछ देर बाद एक्शन फिल्म। एक मां अपनी बेटी को बचाने के लिए लड़ रही है, इससे ज्यादा सीधी और इमोशनल कहानी क्या होगी? लेकिन फिल्म को शायद सरल रहना मंजूर नहीं था। स्क्रीनप्ले हर कुछ मिनट में नया मोड़ लाता है। कुछ ट्विस्ट काम करते हैं, लेकिन ज्यादातर सिर्फ कहानी को और उलझाते हैं। सबसे बड़ी परेशानी बानी का बदलाव है। शुरुआत में वह एक परेशान मां है, लेकिन बाद में फिल्म उसे लगभग सुपर-वुमन बना देती है। वह अकेले कई लोगों से भिड़ती है, मार खाती है और फिर उसी ताकत से वापस खड़ी हो जाती है। पर्दे पर यह देखने में जोश जरूर देता है, लेकिन कहानी के भीतर इसका सफर पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगता। फिल्म में कई प्रतीक और रूपक भी हैं। ‘गांधारी’ का नाम खुद महाभारत की उस महिला से जुड़ा है, जिसने अपने नेत्रहीन पति के साथ रहने के लिए अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। फिल्म इस संदर्भ को अपनी कहानी से जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन कई जगह यह जुड़ाव स्वाभाविक कम और जबरदस्ती का ज्यादा लगता है। एडिटिंग भी कहानी को बचाने के बजाय और परेशान करती है। समय में आगे-पीछे जाना, अचानक फ्लैशबैक और लगातार खुलते राज कहानी को तेज तो बनाते हैं, लेकिन इमोशन को सांस लेने की जगह नहीं देते। और फिर आते हैं एक्शन सीन। कुछ सीक्वेंस अच्छे हैं, लेकिन फिल्म कई जगह यथार्थ से इतनी दूर निकल जाती है कि दर्शक किरदार के दर्द से जुड़ने के बजाय अगला स्टंट देखने लगता है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के तनाव को बढ़ाने की कोशिश करते हैं। कुछ जगह माहौल बनता है, लेकिन कई बार संगीत खुद दृश्य से ज्यादा जोर से बोलने लगता है। ‘बिटिया’ जैसे भावनात्मक हिस्से कहानी के मूड के साथ चलते हैं, लेकिन संगीत फिल्म की सबसे बड़ी कमी को नहीं ढक पाता, कमजोर कहानी। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘गांधारी’ में आइडिया खराब नहीं है। बल्कि आइडिया काफी अच्छा है। एक मां अपनी बेटी को बचाने के लिए अपनी कमजोरी को हथियार बना ले, यह कहानी दर्शकों को बांध सकती थी। लेकिन फिल्म ने इस कहानी को इतना घुमा दिया कि भावनाएं रास्ते में कहीं छूट गईं। तापसी पन्नू ने मेहनत की, एक्शन किया और किरदार को पूरी ताकत दी। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, जरूरत से ज्यादा ट्विस्ट, असमान टोन और कई जगह बनावटी लगने वाला ड्रामा फिल्म को संभाल नहीं पाता। ‘गांधारी’ में मां का गुस्सा बहुत है, लेकिन कहानी में दम कम। तापसी लड़ती बहुत हैं, पर फिल्म खुद से ही हार जाती है। ……………………………………………… फिल्म गांधारी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए- नेटफ्लिक्स पर कहानी चोरी का आरोप:राइटर बोले- चोरी कर बनाई गई तापसी पन्नू की फिल्म 'गांधारी'; कंपनी को भेजा लीगल नोटिस तापसी पन्नू स्टारर फिल्म 'गांधारी' के 3 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्क्रीनराइटर कल्याण बंदी ने नेटफ्लिक्स इंडिया और उसकी कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल पर कहानी चोरी का आरोप लगाया है। कल्याण का दावा है कि उन्होंने साल 2019 में 'गांधारी' नाम की अपनी कहानी मोनिका शेरगिल को ईमेल की थी, जिसे तब रिजेक्ट कर दिया गया था। अब उसी टाइटल और कॉन्सेप्ट पर फिल्म बनाई जा रही है। कल्याण ने नेटफ्लिक्स को लीगल नोटिस भी भेजा है, लेकिन कंपनी ने 11 महीने से इसका कोई जवाब नहीं दिया है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 8:41 am

पैसे बचाने पैदल चलती थीं हुमा कुरैशी:चार लड़कियों संग पीजी में रहीं; पहली फिल्म के मिले 65 हजार, हिट के बाद भी करना पड़ा स्ट्रगल

दिल्ली की हुमा कुरैशी ने एक्टिंग को करियर बनाने के लिए परिवार को मनाने में महीनों लगाए। मुंबई पहुंचीं तो न गॉडफादर था, न फिल्मी लॉन्च। छोटे से पीजी में चार लड़कियों के साथ रहकर ऑडिशन देने वाली हुमा ने विज्ञापनों से शुरुआत की। शाहरुख खान और आमिर खान जैसे सितारों के साथ विज्ञापन किए। फिर एक मोबाइल ऐड के सेट पर हुई मुलाकात ने उनकी जिंदगी बदल दी। अनुराग कश्यप ने उन्हें गैंग्स ऑफ वासेपुर में मौका दिया। फिल्म हिट हुई, लेकिन हुमा का संघर्ष खत्म नहीं हुआ। बॉडी शेमिंग, रिजेक्शन, ट्रोलिंग और लिंकअप की अफवाहों के बीच उन्होंने अलग-अलग किरदारों से पहचान बनाई। आज की सक्सेस स्टोरी में हुमा कुरैशी के जीवन और करियर से जुड़ी खास बातें पढ़ाई में तेज थीं, एक्टिंग का शौक बाद में करियर बना हुमा कुरैशी का जन्म 28 जुलाई 1986 को दिल्ली में हुआ। उनके पिता सलीम कुरैशी रेस्टोरेंट बिजनेस से जुड़े हैं। हुमा ने दिल्ली के गार्गी कॉलेज से हिस्ट्री ऑनर्स किया। कॉलेज के दिनों में वह पढ़ाई के साथ ड्रामा, डिबेट और थिएटर में सक्रिय रहीं। वह ड्रामा सोसायटी की प्रेसिडेंट भी बनीं। थिएटर के दौरान एनके शर्मा उनके मेंटर बने। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में हुमा ने बताया था कि एनके शर्मा ने ही उनमें एक्टर बनने की क्षमता सबसे पहले पहचानी। उन्होंने ‘द अमेरिकन पायलट’ जैसे नाटकों में काम किया। हुमा के मुताबिक, एक्टिंग का असली जुनून उन्हें थिएटर के दौरान ही महसूस हुआ। डॉक्टर बनने की पढ़ाई से मुंबई तक का सफर हुमा के परिवार को लगता था कि वह पढ़ाई में अच्छी हैं और आगे अकादमिक करियर बनाएंगी। हुमा ने बताया था कि उनके पिता एक्टिंग के फैसले को लेकर शुरुआत में आश्वस्त नहीं थे। उन्हें अपने माता-पिता को मनाने में करीब छह से आठ महीने लगे। मुंबई आने से पहले उन्हें एक फिल्म का ऑडिशन मिला था। फिल्म में उनका चयन हुआ, लेकिन प्रोजेक्ट कभी बन नहीं सका। इस अनुभव से हुमा को समझ आया कि उन्हें फिल्मों में काम करना है। इसके बाद उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया। मुंबई में चार लड़कियों के साथ छोटे से पीजी में रहती थीं मुंबई पहुंचने के बाद हुमा ने कोई आलीशान जिंदगी नहीं जी। वह जुहू में चार दूसरी लड़कियों के साथ छोटे से पीजी में रहती थीं। हर लड़की के पास अपना बेड और एक कैबिनेट था। बाथरूम इस्तेमाल करने को लेकर भी रोजाना झगड़े होते थे। फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में हुमा ने बताया था कि ऑडिशन के लिए वह एक बैग लेकर निकलती थीं। उसमें एक सलवार-कमीज, सफेद शर्ट, काली ड्रेस और टिफिन रहता था। कई बार उन्हें बिना ठीक से बातचीत किए ही रिजेक्ट कर दिया जाता था। शुरुआती दौर में वह दादर-जुहू के बीच टैक्सी और ऑटो रिक्शे से सफर करती थीं। पैसे बचाने के लिए कई बार पैदल भी चलती थीं। पहला विज्ञापन मिला तो सिर्फ 5 हजार रुपए फिल्म का सपना पूरा होने में वक्त लग रहा था, इसलिए हुमा ने विज्ञापनों से शुरुआत की। उनका पहला विज्ञापन एक मोबाइल कंपनी के लिए था। इसमें वह अबिषेक बच्चन का इंटरव्यू करती पत्रकार बनी थीं। इसके लिए उन्हें सिर्फ 5 हजार रुपए मिले थे। इसके बाद हुमा ने आमिर खान, शाहरुख खान समेत कई बड़े सितारों के साथ विज्ञापन किए। यही विज्ञापन आगे उनके फिल्मी करियर का रास्ता खोलने वाला था। आमिर खान के ऐड में अनुराग कश्यप से मुलाकात हुमा ने एक मोबाइल विज्ञापन में आमिर खान के साथ काम किया था। इसकी शूटिंग पंचगनी में चार दिन चली। उस विज्ञापन के डायरेक्टर अनुराग कश्यप थे। हुमा ने इस मुलाकात का मजेदार किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया कि तब वह करीब दस विज्ञापन कर चुकी थीं और खुद को इस मामले में ‘वेटरन’ समझने लगी थीं। सेट पर उन्होंने काफी मेकअप किया हुआ था। अनुराग ने पूछा, ‘ये क्या है?’ तो हुमा ने बेझिझक कहा कि यह उनका पहला ऐड है, जबकि वह दस ऐड कर चुकी हैं। अगले ही दिन अनुराग ने उनसे कहा कि वह अपनी फिल्म में उन्हें कास्ट करेंगे। हुमा को भरोसा नहीं हुआ, लेकिन अनुराग ने अपना वादा निभाया। गैंग्स ऑफ वासेपुर मिली, लेकिन सिर्फ 65 हजार रुपए मिले थे 2012 में हुमा ने गैंग्स ऑफ वासेपुर से बॉलीवुड डेब्यू किया। फिल्म में उन्होंने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के किरदार की पत्नी मोहसिना का रोल निभाया। शूटिंग के वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनकी भूमिका इतनी अहम होने वाली है। एक इंटरव्यू में हुमा ने बताया था कि फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 65 हजार रुपए मिले थे। उन्होंने कहा कि शूटिंग किसी बड़े स्टार वाली फिल्म जैसी नहीं थी-न फाइव स्टार होटल, न वैनिटी वैन का तामझाम। टीम वाराणसी गई, महीनों शूटिंग की और वापस आ गई। फिल्म रिलीज हुई तो हुमा ने देखा कि उनका चेहरा होर्डिंग पर था। फिल्म हिट हुई, लेकिन इसके बाद आया असली स्ट्रगल गैंग्स ऑफ वासेपुर ने हुमा को पहचान दिला दी। लेकिन सफलता के बाद वह लगातार बड़े स्टार्स वाली फिल्मों की हीरोइन नहीं बन गईं। बर्खा दत्त के इंटरव्यू में हुमा ने कहा था कि पहली कुछ फिल्मों के बाद वह खुद को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगी थीं। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किस दिशा में आगे बढ़ना है। ‘बिल्ला 2’ पहले मिली थी, लेकिन फिल्मी सफर अटक गया गैंग्स ऑफ वासेपुर से पहले हुमा को तमिल फिल्म बिल्ला 2 में अजित कुमार के साथ काम करने का मौका मिला था। उन्होंने करीब 700 उम्मीदवारों के ऑडिशन के बाद यह रोल हासिल किया था। लेकिन फिल्म में देरी हुई और दूसरे कमिटमेंट्स की वजह से हुमा ने यह प्रोजेक्ट छोड़ दिया। ‘बॉडी शेमिंग’ ने आत्मविश्वास तक हिला दिया हुमा के करियर की सबसे मुश्किल लड़ाइयों में से एक वजन और लुक्स को लेकर होने वाली आलोचना रही। हुमा ने बताया कि एक रिव्यू में लिखा गया था कि वह अच्छी एक्ट्रेस हैं, लेकिन मेनस्ट्रीम एक्ट्रेस बनने के लिए पांच किलो ज्यादा वजन है। बाद में फिल्म ‘डबल एक्सएल’ के लिए उन्होंने करीब 20 किलो वजन बढ़ाया। हुमा ने कहा कि यह फिल्म उनके लिए थेरेपी जैसी थी। 2026 में डबल डेट शो पर भी उन्होंने शुरुआती करियर की ट्रोलिंग का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लगातार नेगेटिव कमेंट्स का उनके आत्मविश्वास पर असर पड़ा। वह कुछ समय के लिए काफी रिजर्व हो गई थीं। अनुराग कश्यप से लिंकअप की अफवाहें भी झेलनी पड़ीं गैंग्स ऑफ वासेपुर के बाद हुमा और अनुराग कश्यप की दोस्ती को लेकर अफवाहें शुरू हो गईं। दोनों के रिश्ते को लेकर मीडिया में लगातार खबरें आईं। हुमा ने 2013 में इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में इन खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि वह अफवाहों को अपने काम और उन लोगों के साथ रिश्तों पर असर नहीं डालने देंगी, जिन्होंने उन पर भरोसा किया। एक साल बाद अनुराग कश्यप ने भी कहा था कि इन अफवाहों में हुमा को निशाना बनाया जा रहा है और इसका असर उनकी इमेज पर पड़ रहा है। एक और अफवाह- ‘डेढ़ इश्किया’ के डायरेक्टर से सगाई 2014 में हुमा के बारे में सोशल मीडिया पर अफवाह चली कि उन्होंने ‘डेढ़ इश्किया’ के डायरेक्टर अभिषेक चौबे से सगाई कर ली है। हुमा ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि ऐसी अफवाहें एक आउटसाइडर की मेहनत को कमजोर करती हैं। डेढ़ इश्किया’ से ‘बदलापुर तक, अलग रोल्स चुनती गईं हुमा ने खुद को पारंपरिक ग्लैमरस हीरोइन की छवि तक सीमित नहीं रखा। डेढ़ इश्किया’ से ‘बदलापुर ,जॉली एलएलबी 2 और मोनिका, ओ माई डार्लिंग जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग किरदार निभाए। यही उनकी करियर रणनीति बनी-हर फिल्म में खुद को दोहराने के बजाय नया किरदार चुनना। हुम कहती हैं कि उनके लिए हर फिल्म दोबारा शुरुआत करने जैसी है। वह एक ही तरह के रोल दोहराना पसंद नहीं करतीं। ओटीटी ने दिया करियर को नया मोड़ फिल्मों के साथ हुमा ने ओटीटी का रुख किया। 2019 में वेब सीरीज लैला में उनका किरदार चर्चा में रहा, लेकिन 2021 की ‘महारानी’ ने उनके करियर को नया मोड़ दिया। रानी भारती का किरदार हुमा के अब तक के सबसे चर्चित किरदारों में शामिल हो गया। सत्ता की राजनीति में एक साधारण महिला का धीरे-धीरे मजबूत होना हुमा ने बेहद प्रभावी तरीके से निभाया। यही दौर था जब उन्हें सिर्फ फिल्मों की अभिनेत्री के बजाय ऐसी कलाकार के तौर पर देखा जाने लगा, जो अलग माध्यमों में भी मजबूत किरदार निभा सकती है। ‘महारानी’ की रानी भारती बनीं जिंदगी बदलने वाला किरदार हुमा ने रानी भारती को अपने करियर का वह रोल बताया जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। इस किरदार में उन्होंने ऐसी महिला को निभाया, जो राजनीति, सत्ता और निजी जिंदगी के संघर्षों के बीच धीरे-धीरे खुद को मजबूत करती है। इसके बाद ‘मिथ्या’ और ‘आर्मी ऑफ द डेड’ जैसे प्रोजेक्ट्स से उन्होंने ओटीटी और इंटरनेशनल स्क्रीन पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। ट्रोलिंग पर बोलीं- काम करते रहना जरूरी है हुमा ने हालिया इंटरव्यू में ट्रोलिंग को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अब वह सोशल मीडिया की नकारात्मकता को अपने ऊपर हावी नहीं होने देतीं। लखनऊ टाइम्स से बातचीत में उन्होंने अपने लुक्स और ट्रोलिंग पर अपने आत्मविश्वास को लेकर जवाब दिया। अब एक्टर के साथ प्रोड्यूसर भी हुमा अब सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं हैं। Baby Do Die Do में उन्होंने एक्टिंग के साथ प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संभाली। फिल्म 3 जुलाई 2026 को रिलीज हुई थी। जिस लड़की ने कभी एक फिल्म मिलने को ही सबसे बड़ी उपलब्धि माना था, वह अब अपनी पसंद की कहानियां बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा चुकी है। 'टॉक्सिक: में दिखा करियर का नया दौर हुमा की हालिया रिलीज फिल्मों में 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' भी शामिल है। यश स्टारर यह फिल्म 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इसमें यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी भी अहम भूमिकाओं में हैं। _____________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़ें.. दिशा पाटनी 500 रुपए लेकर मुंबई आई थीं:‘हीरोपंती’ के ऑडिशन में फेल हुईं; इंजीनियरिंग छोड़ी, फिर ‘एमएस धोनी’ से बनीं स्टार दिशा पाटनी की बॉलीवुड तक पहुंचने की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बरेली से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बीच मॉडलिंग शुरू करने वाली दिशा 500 रुपए लेकर मुंबई पहुंची थीं। यहां उन्हें लगातार ऑडिशन देने पड़े और ‘हीरोपंती’ का ऑडिशन फेल हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इंजीनियरिंग छोड़कर एक्टिंग को करियर बना लिया।पूरी खबर पढ़ें..

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 5:23 am

अमिताभ बच्चन ने परीक्षा में की थी चीटिंग:अक्षय कुमार के सवाल पर बोले- थोड़ी चीटिंग की थी, एक्टर ने जोड़ लिए हाथ

टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के अपकमिंग एपिसोड में अक्षय कुमार और सैफ अली खान हॉटसीट पर नजर आएंगे। एपिसोड में अक्षय ने होस्ट अमिताभ बच्चन से पूछा कि क्या उन्होंने कभी परीक्षा में चीटिंग की है। जिसके बाद अमिताभ ने जवाब दिया कि उन्होंने भी थोड़ी-बहुत चीटिंग की है। दरअसल, शो के सामने आए प्रोमो में अक्षय कुमार अमिताभ बच्चन से मजेदार सवाल करते दिखाई दे रहे हैं। बातचीत के दौरान परीक्षा में पास होने की बात छिड़ती है। अमिताभ ने अक्षय से पूछा कि इतनी बदमाशी करने के बावजूद वह इम्तिहान कैसे पास करते थे। इस पर अक्षय ने स्वीकार किया कि वह चीटिंग करके पास होते थे। इसके बाद अक्षय ने अमिताभ से भी पूछ लिया कि क्या उन्होंने कभी चीटिंग की है। अमिताभ ने जवाब दिया, “सच बात तो यह है कि मैंने भी थोड़ी-बहुत चीटिंग की है।” बिग बी का यह जवाब सुनकर अक्षय ने हाथ जोड़ लिए और दर्शकों से कहा कि यह गलत बात है, इसलिए ऐसे जवाब पर ताली न बजाएं। B.Sc के पेपर में अमिताभ बच्चन फेल हो गए थे इससे पहले साल 2023 में KBC पर ही अमिताभ बच्चन ने बताया था कि B.Sc के पेपर में वो फेल हो गए थे। बिग बी ने कहा था कि ग्रेजुएशन में उन्होंने गलत सब्जेक्ट का चुनाव कर लिया था, जिस कारण उन्हें ये दिक्कत हुई। अमिताभ बच्चन ने कहा था कि उन्होंने B.Sc में एडमिशन लिया था। बाद में ये सब्जेक्ट लेने पर उन्हें बहुत पछतावा हुआ। ये उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। 3 साल तक इस सब्जेक्ट को उन्होंने एक बोझ की तरह झेला। खासतौर पर फिजिक्स उन्हें बिल्कुल भी समझ नहीं आती थी। जिस कारण उनके मन में डर सा बैठ गया था। जब पेपर होने को 2 महीने बचे थे, तब उन्होंने किसी तरह सब कुछ बस रट लिया था। हालांकि, उनका ये रटा काम नहीं आया और फिजिक्स में फेल हो गए। इस कारण उन्हें दोबारा से एग्जाम देना पड़ा, पर इस बार वो सारे सब्जेक्ट में पास हो गए थे। अमिताभ ने पूछा, करीना उन्हें रिश्ते में क्या कहेंगी? इस एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने सैफ अली खान से उनके पारिवारिक रिश्ते को लेकर बात की। अमिताभ ने सैफ से कहा, “बहुत से लोगों को नहीं पता कि ये हमारे रिश्ते में हैं।” यह सुनकर सैफ हैरान हुए और उन्होंने पूछा, “मैं?” अमिताभ ने इसके बाद कपूर और नंदा परिवार के जरिए दोनों परिवारों के जुड़ाव की जानकारी दी। शो पर अमिताभ ने यह कनेक्शन समझाते हुए कहा, “राज कपूर की बेटी रितु का बेटा निखिल मेरी बेटी श्वेता से शादीशुदा है।” इसके बाद अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में सैफ से पूछा कि करीना उन्हें क्या कहेंगी? इस पर सैफ ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि यह सवाल शो में नहीं है। कपूर-नंदा परिवार से जुड़ा रिश्ता अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन की शादी निखिल नंदा से हुई है। निखिल की मां रितु नंदा, फिल्ममेकर राज कपूर की बेटी हैं। राज कपूर, करीना कपूर के दादा थे। करीना राज कपूर के बड़े बेटे रणधीर कपूर की बेटी हैं। इस वजह से निखिल नंदा और करीना कपूर कजिन हैं। सैफ अली खान की शादी करीना से हुई है, इसलिए बच्चन परिवार से उनका सीधा रिश्ता (जैसे चाचा-भतीजी, मामा-भांजी आदि) नहीं है, बल्कि शादी के जरिए जुड़ा है। सैफ अली खान और अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘हैवान’ की बात करें तो यह फिल्म प्रियदर्शन की 2016 में रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का रीमेक है, जिसमें मोहनलाल मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, राजपाल यादव, शारिब हाशमी, राजेश शर्मा और मनोज जोशी भी अहम भूमिकाओं में हैं। …………….. यह खबर भी पढ़ें… दाऊद इब्राहिम ने ऋषि कपूर को चाय पर बुलाया था: रोल्स रॉयस भेजी थी, फिल्म ‘तवायफ’ में दाऊद नाम रखने की भी तारीफ की थी दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर की आज 74वीं बर्थ एनिवर्सरी है। ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लम खुल्ला’ में जिंदगी से जुड़े कई किस्से साझा किए थे। किताब में उन्होंने दाऊद इब्राहिम से दुबई में 2 बार हुई मुलाकात का जिक्र भी किया था। इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में भी ऋषि कपूर ने दाऊद से हुई पहली मुलाकात को लेकर कई बातें शेयर की थीं। उन्होंने बताया था कि 1988 में वह आर.डी. बर्मन, आशा भोसले और बिट्टू आनंद के साथ शो के लिए दुबई पहुंचे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 5:00 am

दाऊद इब्राहिम ने ऋषि कपूर को चाय पर बुलाया था:रोल्स रॉयस भेजी थी, फिल्म ‘तवायफ’ में दाऊद नाम रखने की तारीफ भी की थी

दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर की आज 74वीं बर्थ एनिवर्सरी है। ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लम खुल्ला’ में जिंदगी से जुड़े कई किस्से साझा किए थे। किताब में उन्होंने दाऊद इब्राहिम से दुबई में हुई 2 बार मुलाकात का जिक्र भी किया था। इंडिया टीवी को दिए इंटरव्यू में भी ऋषि कपूर ने दाऊद से हुई पहली मुलाकात को लेकर कई बातें शेयर की थीं। उन्होंने बताया था कि 1988 में वह आर.डी. बर्मन, आशा भोसले और बिट्टू आनंद के साथ शो के लिए दुबई पहुंचे थे। ऋषि के मुताबिक, वहां एक व्यक्ति उनके पास फोन लेकर आया और कहा, “भाई बात करेंगे।” इसके बाद दाऊद ने उन्हें चाय पर घर बुलाया। ऋषि ने कहा था कि उन्हें लगा कि इसमें कुछ गलत नहीं है, क्योंकि उस समय दाऊद सिर्फ एक भगोड़ा था और उस समय उस पर बाद में होने वाले गंभीर अपराधों के आरोप नहीं थे। यह मुलाकात 1993 के मुंबई धमाकों से पहले हुई थी। ऋषि ने बताया था कि दाऊद के साथ उनकी करीब चार घंटे की मुलाकात हुई, जिसमें उन्होंने दो कप चाय पी। ऋषि के मुताबिक, दाऊद ने उन्हें अपने घर बुलाने के लिए रोल्स रॉयस गाड़ी भेजी थी। ‘तवायफ’ फिल्म में ऋषि का नाम था दाऊद ऋषि कपूर ने बताया था कि फिल्म ‘तवायफ’ में उनके किरदार का नाम दाऊद था। यह बात दाऊद इब्राहिम को काफी पसंद आई थी। ऋषि के मुताबिक, दाऊद ने कहा था कि उन्होंने उसका नाम अच्छे तरीके से दिखाया है। ऋषि ने यह भी कहा था कि दाऊद ने उनसे कभी कोई तोहफा नहीं लिया। हालांकि, उसने पूछा था, “क्या मैं आपको कुछ दिला सकता हूं?” इस पर ऋषि ने जवाब दिया था, “नहीं, आप मुझे कुछ क्यों दिलाएंगे? मैं अपनी जरूरत की चीजें खरीद सकता हूं।” राज कपूर के निधन के एक दिन बाद जून 1988 में दाऊद ने मुंबई स्थित ऋषि के घर पर शोक जताने के लिए अपना एक आदमी भी भेजा था। ऋषि के मुताबिक, दाऊद उनके पिता राज कपूर का बड़ा फैन था। दूसरी मुलाकात साल 1989 में हुई थी वहीं, ऋषि कपूर की दाऊद से दूसरी मुलाकात साल 1989 में हुई थी। यह एक अचानक हुई मुलाकात थी। ऋषि पत्नी नीतू के साथ दुबई के एक जूते के स्टोर में खरीदारी कर रहे थे, जहां दाऊद अपने कुछ बॉडीगार्ड्स के साथ आया और उसने ऋषि को पहचानकर उनसे बातचीत की। दाऊद ने कुछ खरीदकर देने का ऑफर दिया, लेकिन ऋषि ने मना कर दिया था। ऋषि ने कहा था कि उन्हें दाऊद से मिलने में बिल्कुल कुछ गलत नहीं लगा और कभी-कभी फिल्मों के लिए ऐसे लोगों से भी प्रेरणा ली जा सकती है। उन्होंने बताया था कि फिल्म ‘डी-डे’ में दाऊद से प्रेरित किरदार निभाने के लिए उन्होंने उससे जुड़ी चीजों को समझने की कोशिश की थी। एक नजर ऋषि कपूर के करियर पर ऋषि कपूर ने 1970 में फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट बॉलीवुड में कदम रखा था। इस फिल्म में उन्होंने अपने पिता राज कपूर के बचपन का किरदार निभाया था। 1973 में फिल्म ‘बॉबी’ से ऋषि कपूर ने बतौर लीड एक्टर डेब्यू किया। फिल्म में उनके साथ डिंपल कपाड़िया नजर आई थीं। यह फिल्म बड़ी हिट रही और ऋषि रातोंरात स्टार बन गए। ऋषि कपूर ने अपने करियर में कई रोमांटिक फिल्मों में काम किया। ‘कर्ज’, ‘चांदनी’, ‘नगीना’, ‘प्रेम रोग’ और ‘सागर’ उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं। उन्होंने सिर्फ हीरो ही नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के किरदार भी निभाए। ‘अग्निपथ’, ‘दो दूनी चार’, ‘मुल्क’ और ‘102 नॉट आउट’ में उनके अभिनय को खूब पसंद किया गया। उनकी आखिरी फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ थी। यह फिल्म उनके निधन के बाद 2022 में रिलीज हुई थी। ……………. यह खबर भी पढ़ें… शक्ति कपूर ने भागकर की थी शादी: लता मंगेशकर के परिवार से थीं पत्नी, शादी के बाद अखबार में छपा- 3 महीने में तलाक हो जाएगा तकरीबन 700 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके शक्ति कपूर का एक्टिंग करियर बेहद सफल रहा। उनकी पर्सनल लाइफ की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है। शक्ति ने शिवांगी कोल्हापुरे से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म ‘किस्मत’ के दौरान हुई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 4 Sep 2026 4:30 am

Hanuman Ansh पर हुई बजरंग बली की कृपा, मात्र 2 करोड़ की फिल्म ने हिला डाला बॉक्स ऑफिस; जमकर बरसे नोट

विशाल चतुर्वेदी की फिल्म हनुमान अंश ने 28 दिनों में बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित यह फिल्म अब विदेशों में भी रिलीज होने की तैयारी में है।

जागरण 3 Sep 2026 9:08 pm

बिग बॉस 20 का घर बना ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’:गार्डन में शार्क से लेकर बेडरूम में बिच्छू तक, हर कोना सुनाएगा नई कहानी

‘बिग बॉस 20’ का घर इस बार सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक अलग ही दुनिया नजर आ रहा है। शो की थीम ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ और ‘ड्युअलिटी’ को ध्यान में रखते हुए घर के हर हिस्से को अलग अंदाज में डिजाइन किया गया है। गार्डन में जानवरों और पक्षियों की आकृतियां, दीवारों पर कई आंखें, तालाब में शार्क, पेड़ पर सांप और एक अलग जिम एरिया नजर आता है। ड्राइंग रूम से लेकर किचन, डाइनिंग एरिया और बेडरूम तक हर जगह कोई न कोई कहानी छिपी है। इस बार घर को डिजाइन किया है वर्षा जैन ने। इसे तैयार करने में करीब डेढ़ महीने तक रोजाना 100 से ज्यादा लोग दिन-रात काम करते रहे। गार्डन में कदम रखते ही दिखेगा ‘अलग संसार’ बिग बॉस के घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले गार्डन एरिया नजर आता है। यहां दीवारों पर अलग-अलग जानवरों और पक्षियों की बड़ी-बड़ी आकृतियां बनाई गई हैं। एक तरफ गोरिल्ला नजर आता है तो दूसरी ओर ईगल की आकृति खास ध्यान खींचती है। बिग बॉस के हाथ पर बना ईगल भी इस डिजाइन का हिस्सा है। इसका शो की कहानी से क्या कनेक्शन है, यह आने वाले एपिसोड में सामने आएगा। गार्डन के एक हिस्से में पेड़ पर खतरनाक सांप की आकृति बनाई गई है। वहीं एक विचित्र प्राणी को कैंप लगाए हुए दिखाया गया है। यानी घर के बाहर का हिस्सा भी सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि शो की थीम का हिस्सा है। स्विमिंग पूल में इस बार दिखेगी शार्क गार्डन का स्विमिंग पूल भी इस बार पहले जैसा सामान्य नहीं है। पानी के बीच शार्क की आकृति इसे बिल्कुल अलग लुक देती है। साफ पानी के बीच नजर आती शार्क घर के ‘इल्यूजन’ वाले कॉन्सेप्ट को और मजबूत करती है। गार्डन में कंटेस्टेंट्स के लिए छोटा जिम गार्डन एरिया में ही कंटेस्टेंट्स के लिए जिम बनाया गया है। यहां वे एक्सरसाइज और फिटनेस पर ध्यान दे सकेंगे। यानी घर के अंदर होने वाले तनाव और गेम के बीच फिटनेस के लिए भी अलग जगह रखी गई है। ड्राइंग रूम में हर चीज बताएगी अपनी कहानी गार्डन से आगे बढ़ते ही घर का ड्राइंग और लिविंग एरिया आता है। घर का हर हिस्सा अलग नजर आता है, लेकिन सभी हिस्से एक ही थीम से जुड़े हुए हैं। बेडरूम, किचन, लिविंग एरिया और टेरेस के रंग और कॉन्सेप्ट अलग रखे गए हैं, लेकिन ओवरऑल थीम एक ही है। यही वजह है कि एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते ही दर्शकों को अलग दुनिया का एहसास होगा। दीवारों पर बनी आंखें देंगी ‘हर चीज देखे जाने’ का एहसास घर की कुछ दीवारों पर बड़ी संख्या में आंखों की आकृतियां बनाई गई हैं। इनका मतलब भी सीधा है- घर के अंदर कुछ भी छिपा नहीं है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। यह डिजाइन बिग बॉस के उस मूल कॉन्सेप्ट को भी दर्शाता है, जिसमें कंटेस्टेंट्स लगातार कैमरों की निगरानी में रहते हैं। किचन में खाना कम, गॉसिप और झगड़े ज्यादा! अब पहुंचते हैं बिग बॉस के सबसे चर्चित हिस्सों में से एक- किचन एरिया में। यहां खाना बनाने के साथ-साथ गॉसिप, बहस और लड़ाई-झगड़े भी खूब होते हैं। इस बार किचन का लुक भी थीम के मुताबिक रखा गया है। फिलहाल यहां नजर आने वाली कुछ चीजें असली नहीं, बल्कि सेट का हिस्सा हैं। किचन से आगे बढ़ते ही डाइनिंग एरिया आता है। डाइनिंग टेबल पर खाने से ज्यादा होंगी बातें बिग बॉस के घर की डाइनिंग टेबल सिर्फ खाना खाने की जगह नहीं होती। यहां कंटेस्टेंट्स बैठकर एक-दूसरे से बातें करते हैं, रणनीतियां बनाते हैं और कई बार छोटी-सी बात बड़े विवाद में बदल जाती है। यही वजह है कि इस घर में डाइनिंग एरिया भी कहानी का अहम हिस्सा नजर आता है। बेडरूम में मधुमक्खी, बिच्छू और रंग-बिरंगी तितलियां घर का बेडरूम इस बार सबसे ज्यादा रहस्यमयी हिस्सों में से एक है। यहां दीवारों और आसपास के डिजाइन में मधुमक्खी, बिच्छू, छिपकली और रंग-बिरंगी तितलियों की आकृतियां नजर आती हैं। डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि रात में सोने वाला कंटेस्टेंट भी इस अजीबोगरीब दुनिया के बीच खुद को महसूस करे। बिच्छू और सांप जैसी आकृतियां जहां खतरे का संकेत देती हैं, वहीं तितलियां सपनों और कल्पना की दुनिया का एहसास कराती हैं। समुद्र में डूबती कश्ती भी डिजाइन का हिस्सा बेडरूम के एक हिस्से में पेड़ के पीछे समुद्र और डूबती हुई कश्ती का दृश्य दिखाई देता है। ऐसा लगता है जैसे समुद्र में कोई नाव डूब रही हो और उसमें मौजूद लोग मुश्किल में हों। यह पूरा सेटअप ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ की थीम को आगे बढ़ाता है, जहां वास्तविक और काल्पनिक दुनिया के बीच की सीमा धुंधली नजर आती है। ऑक्टोपस चेस खेलेगा, जानवर भी देंगे संकेत घर में कई ऐसी चीजें रखी गई हैं, जो सामान्य दुनिया में संभव नहीं लगतीं। उदाहरण के तौर पर एक ऑक्टोपस को चेस खेलते हुए दिखाया गया है। इस तरह की ‘लार्जर दैन लाइफ’ आकृतियां दर्शकों को लगातार यह एहसास कराती हैं कि वे एक सामान्य घर नहीं, बल्कि एक काल्पनिक दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं। ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ और ‘ड्युअलिटी’ है पूरे डिजाइन की थीम इस बार पूरे घर का कॉन्सेप्ट ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ और ‘ड्युअलिटी’ पर आधारित है। गेम शो की थीम को ध्यान में रखते हुए घर के हर हिस्से को अलग बनाया गया है। यानी एक तरफ घर खूबसूरत और आकर्षक दिखाई देता है, तो दूसरी तरफ उसमें छिपे सांप, बिच्छू, आंखें और दूसरी आकृतियां एक रहस्यमयी और चुनौतीपूर्ण दुनिया का एहसास कराती हैं। डेढ़ महीने में तैयार हुआ इतना बड़ा सेट इतने बड़े सेट को तैयार करना आसान नहीं था। डिजाइनर वर्षा जैन को फिजिकल कंस्ट्रक्शन में करीब डेढ़ महीने का समय लगा। हालांकि, उससे पहले डिजाइन को अंतिम रूप देने में काफी समय लगा। बारिश के मौसम में भी करीब 100 से ज्यादा मजदूर रोजाना दिन-रात काम करते रहे, ताकि तय समय में इतना बड़ा सेट तैयार किया जा सके। इस बार घर सिर्फ घर नहीं, कहानी का हिस्सा है बिग बॉस 20 के घर को देखकर साफ नजर आता है कि इस बार डिजाइन को सिर्फ खूबसूरत बनाने पर ध्यान नहीं दिया गया है। हर कमरे, हर दीवार और हर आकृति को शो की थीम से जोड़ने की कोशिश की गई है। गार्डन में शार्क और सांप से लेकर दीवारों पर आंखें, ऑक्टोपस, जानवरों और पक्षियों की आकृतियां और बेडरूम में बिच्छू-तितलियां- ये सभी मिलकर घर को एक ऐसी दुनिया में बदल देते हैं, जहां हर कदम पर कुछ नया देखने को मिलता है। अब कंटेस्टेंट्स इस ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ में पहुंचेंगे और इन डिजाइन के पीछे छिपे संकेतों के बीच अपना गेम खेलेंगे। घर की दीवारें भले ही खामोश हों, लेकिन इस बार उनमें छिपी हर आकृति अपने आप में एक कहानी कहती नजर आएगी।

दैनिक भास्कर 3 Sep 2026 7:15 pm

एडवांस बुकिंग में दिखा Mirzapur The Movie का भौकाल टाइट, डबल डिजिट में कलेक्शन करने के लिए तैयार फिल्म

मिर्जापुर: द मूवी की एडवांस बुकिंग में शानदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, फिल्म ने रिलीज से पहले ही शानदार कलेक्शन कर लिया है।

जागरण 3 Sep 2026 5:54 pm

'करीना मुझे क्या कहकर बुलाएंगी':सैफ से अमिताभ बच्चन बोले- ये हमारे रिश्ते में हैं, सुनकर एक्टर हैरान हो गए

बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में सैफ अली खान से अपने पारिवारिक रिश्ते को लेकर बात की। दरअसल, सैफ शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अपनी अपकमिंग फिल्म ‘हैवान’ के को-स्टार अक्षय कुमार के साथ पहुंचे थे। शो के प्रोमो में अमिताभ ने सैफ से कहा, “बहुत से लोगों को नहीं पता कि ये हमारे रिश्ते में हैं।” यह सुनकर सैफ हैरान हुए और उन्होंने पूछा, “मैं?” अमिताभ ने इसके बाद कपूर और नंदा परिवार के जरिए दोनों परिवारों के जुड़ाव की जानकारी दी। शो पर अमिताभ ने यह कनेक्शन समझाते हुए कहा, “राज कपूर की बेटी रितु का बेटा निखिल मेरी बेटी श्वेता से शादीशुदा है।” इसके बाद अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में सैफ से पूछा कि करीना उन्हें क्या कहेंगी? इस पर सैफ ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि यह सवाल शो में नहीं है। कपूर-नंदा परिवार से जुड़ा रिश्ता अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन की शादी निखिल नंदा से हुई है। निखिल की मां रितु नंदा, फिल्ममेकर राज कपूर की बेटी हैं। राज कपूर, करीना कपूर के दादा थे। करीना राज कपूर के बड़े बेटे रणधीर कपूर की बेटी हैं। इस वजह से निखिल नंदा और करीना कपूर कजिन हैं। सैफ अली खान की शादी करीना से हुई है, इसलिए बच्चन परिवार से उनका सीधा रिश्ता (जैसे चाचा-भतीजी, मामा-भांजी आदि) नहीं है, बल्कि शादी के जरिए जुड़ा है। अमिताभ बच्चन और करीना साथ कर चुके हैं काम अमिताभ बच्चन और करीना कपूर ने ‘कभी खुशी कभी गम’ (2001), ‘देव’ (2004) और ‘सत्याग्रह’ (2013) जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। वहीं, अमिताभ ने सैफ अली खान के साथ ‘एकलव्य: द रॉयल गार्ड’ (2007) और ‘आरक्षण’ (2011) में भी स्क्रीन शेयर की है। सैफ अली खान के वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी ‘हैवान’ में नजर आएंगे। जिसमें सैफ के अलावा अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, राजपाल यादव, शारिब हाशमी, राजेश शर्मा, और मनोज जोशी अहम भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म प्रियदर्शन की 2016 में रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का रीमेक है, जिसमें मोहनलाल मुख्य भूमिका में थे। करीना के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो आखिरी बार फिल्म सिंघम अगेन (2024) में नजर आई थीं। वहीं वो जल्द मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्म दायरा में दिखाई देंगी। दायरा में करीना एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आएंगी। दायरा 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। …………….. यह खबर भी पढ़ें… करीना कपूर ने 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी थी:बोलीं- शिक्षा पूरी न करने का आज भी अफसोस; जानिए कपूर फैमिली में कौन कितना पढ़ा-लिखा एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने हाल ही में बताया कि उन्होंने 11वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़कर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। हनुमान दास के यूट्यूब चैनल में बातचीत में करीना ने कहा कि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की, जिसका अफसोस उन्हें सफलता मिलने के बाद भी रहा। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और यह बात मेरे साथ बनी रही। मुझे मौका मिला था, लेकिन फिल्मों में आ गई और क्लास 11 के बाद आगे पढ़ाई नहीं की।” पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 3 Sep 2026 2:40 pm

प्रीति जिंटा बोलीं- मैंने रोज 18 घंटे काम किया:दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे शिफ्ट के लिए छोड़ी थी फिल्म; मेल एक्टर्स पर सवाल उठाया था

फिल्म इंडस्ट्री में काम के लंबे घंटों और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। लगभग एक दशक के अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है। मुंबई में अपनी आने वाली एक्शन-कॉमेडी फिल्म 'वाइब' के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में प्रीति जिंटा ने खुलासा किया कि उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान रोजाना 18 घंटे तक काम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर किसी की अपनी प्राथमिकताएं होती हैं और उन्होंने भारत में अपने कम समय के टूर और अमेरिका में बच्चों के पास जल्दी लौटने के लिए खुद यह लंबा शेड्यूल चुना था। ‘बच्चों के पास लौटने के लिए 18 घंटे काम किया’ ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब मीडिया ने प्रीति जिंटा से सेट पर लंबे वर्किंग आवर्स के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक शूटिंग करना मुश्किल जरूर था, लेकिन यह उनका अपना व्यक्तिगत फैसला था। 50 साल की प्रीति जिंटा ने कहा, सबकी अपनी पसंद और जरूरतें होती हैं। बेशक, मैंने 18 घंटे तक काम किया क्योंकि मैं अपना काम जितनी जल्दी हो सके खत्म करके अमेरिका वापस अपने बच्चों के पास जाना चाहती थी। मेरा फोकस सिर्फ यही था कि मैं भारत आऊंगी, अपना काम तेजी से पूरा करूंगी और तुरंत लौट जाऊंगी। मैं यहां 30 से 40 दिनों के समय के लिए आई थी। इसलिए मुझे इतनी लंबी शिफ्ट में काम करने में कोई आपत्ति नहीं थी। प्रीति ने यह भी बताया कि इस फिल्म में उन्होंने कई कठिन एक्शन सीन खुद किए हैं, जिसके लिए लगातार लंबे शोज और शारीरिक मेहनत की जरूरत थी। दीपिका पादुकोण की थी 8 घंटे की शिफ्ट की मांग फिल्म इंडस्ट्री में वर्किंग आवर्स का यह विवाद असल में तब शुरू हुआ था, जब एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'स्पिरिट' (प्रभास स्टारर) और 'कल्कि 2898 एडी' के सीक्वल से अलग होने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मां बनने के बाद दीपिका ने अपनी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखने के लिए रोजाना 8 घंटे की वर्क शिफ्ट की मांग रखी थी। मेकर्स के साथ काम के घंटों और फीस को लेकर सहमति न बन पाने के कारण दीपिका इन प्रोजेक्ट्स से हट गईं। इसके बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि क्या भारतीय सिनेमा में तय वर्किंग टाइम लागू होना चाहिए या नहीं। मेल सुपरस्टार्स् पर दीपिका का बयान जब दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की वर्किंग डिमांड पर विवाद बढ़ा, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दोहराव वाले रवैये पर खुलकर बात की। दीपिका ने CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कहा था, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कई मेल सुपरस्टार्स् सालों से सिर्फ 8 घंटे ही काम करते आ रहे हैं। वे सोमवार से शुक्रवार तक 8 घंटे काम करते हैं और वीकेंड्स पर काम नहीं करते। लेकिन जब कोई महिला अपने लिए 8 घंटे की शिफ्ट मांगती है, तो इसे हेडलाइन बना दिया जाता है। अक्षय कुमार करते हैं 8 घंटे काम इसी दौरान एक्टर अभिषेक बच्चन का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे 'द कपिल शर्मा शो' में अक्षय कुमार के वर्किंग स्टाइल के बारे में बता रहे थे। अभिषेक ने कहा था, पैकअप का ऐलान होते ही सबसे ज्यादा खुश अक्षय कुमार होते हैं। वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते। सुबह 7 बजे सेट पर आते हैं और तुरंत अपना काम शुरू कर देते हैं। सुनील शेट्टी ने कहा 18 घंटे काम प्रोडक्टिव नहीं वर्किंग आवर्स की इस बहस में एक्टर सुनील शेट्टी ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होने कहा कि सेट पर 12 से 18 घंटे तक काम करना न तो प्रैक्टिकल है और न ही इससे बेहतर आउटपुट मिलता है। सुनील शेट्टी ने कहा था कि किसी भी कलाकार या क्रू मेंबर के लिए 12 से 18 घंटे तक लगातार काम करना संभव नहीं है। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस, सही ब्रेक और प्रॉपर रेस्ट को काम की क्वालिटी के लिए जरूरी बताया था। सुनील शेट्टी के मुताबिक, थकान में काम करने से रचनात्मकता पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए सेट पर प्रोफेशनल और अनुशासित माहौल होना चाहिए। 70 घंटे के वर्क वीक की बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं यह बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। इंफोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति द्वारा देश के युवाओं को हफ्ते में 70 घंटे काम करने की सलाह देने के बाद से ही पूरे देश में ओवरवर्किंग और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। फिल्म निर्माता रोनी स्क्रूवाला ने नारायण मूर्ति के इस विचार का विरोध करते हुए कहा था कि केवल काम के घंटे बढ़ाने से उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) नहीं बढ़ती, बल्कि क्वालिटी वर्क, स्किल और बेहतर वर्क एनवायरनमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

दैनिक भास्कर 3 Sep 2026 12:35 pm

विवेक ओबेरॉय ने कभी रिहर्सल रूम साफ किया था:डांसर्स के लिए चाय भी लाते थे, 'कंपनी' से डेब्यू किया, अब ‘रामायण’ में नजर आएंगे

अपने करियर में हीरो से लेकर विलेन तक कई तरह के किरदार निभाने वाले एक्टर विवेक ओबेरॉय आज 50 साल के हो गए हैं। हालांकि, उनका फिल्मी सफर शुरुआत से आसान नहीं था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने संघर्ष किया था। यहां तक कि उन्होंने फिल्ममेकर फराह खान को असिस्ट भी किया। इस दौरान वह रिहर्सल रूम साफ करते थे और डांसर्स के लिए चाय भी लाते थे। मैशबल इंडिया से बातचीत में विवेक ने बताया था कि वह ट्रेनिंग के लिए लंबे समय तक फराह खान को असिस्ट करते रहे। उन्होंने कहा था, “मैंने रिहर्सल रूम साफ करने और सभी डांसर्स के लिए चाय लाने से शुरुआत की और फिर आगे बढ़ता गया।” विवेक ने यह भी बताया था कि उन्होंने कभी किसी को नहीं बताया कि उनके पिता कौन हैं। दरअसल, विवेक दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय के बेटे हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने पिता की पहचान का सहारा लेकर काम पाने की कोशिश नहीं की। 2002 में ‘कंपनी’ से मिला बड़ा ब्रेक विवेक ओबेरॉय को साल 2002 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘कंपनी’ से बॉलीवुड डेब्यू का मौका मिला था। फिल्म मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर आधारित थी। इसमें विवेक ने चंदू का किरदार निभाया था। ‘कंपनी’ में विवेक के अभिनय को काफी पसंद किया गया। फिल्म की सफलता के साथ ही वह इंडस्ट्री में तेजी से पहचाने जाने लगे। अपने डेब्यू के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड मिला था। इसके बाद साल 2002 में ही वह ‘रोड’ और ‘साथिया’ में नजर आए। खासतौर पर ‘साथिया’ में रानी मुखर्जी के साथ उनकी जोड़ी पसंद की गई। फिल्म सफल रही और विवेक को बेस्ट एक्टर के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला। विवेक ने अपने करियर में सिर्फ हीरो वाले रोल नहीं किए। उन्होंने नेगेटिव किरदारों में भी अपनी छाप छोड़ी। साल 2006 में विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओमकारा’ में उन्होंने केशु का रोल किया था। इसके बाद 2007 में आई ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ में उन्होंने गैंगस्टर माया डोलस का किरदार निभाया। इस रोल में विवेक के लुक और एक्टिंग की काफी चर्चा हुई। उन्हें इस किरदार के लिए फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन भी मिला। ‘रक्त चरित्र’ में निभाया दमदार रोल 2010 में विवेक ने राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘रक्त चरित्र’ में परिताला रवि का किरदार निभाया। यह एक गंभीर और चुनौतीपूर्ण रोल था। फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। इसके बाद 2013 में विवेक ‘कृष 3’ में नजर आए। उन्होंने फिल्म में सुपरविलेन काल का किरदार निभाया। ऋतिक रोशन और कंगना रनोट स्टारर इस फिल्म में विवेक की परफॉर्मेंस भी चर्चा में रही। उन्हें फिल्म के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला। साउथ की फिल्मों में भी बनाई पहचान विवेक ने हिंदी फिल्मों के अलावा साउथ की फिल्मों में भी काम किया। 2017 में उन्होंने तमिल फिल्म ‘विवेगम’ से डेब्यू किया। इसके बाद 2019 में वह मलयालम फिल्म ‘लूसिफर’ में नजर आए। इस फिल्म में उन्होंने विलेन बॉबी का रोल निभाया। मोहनलाल स्टारर फिल्म में उनके किरदार को दर्शकों ने पसंद किया। विवेक ने तेलुगु फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने ‘विनय विधेया रामा’ में अहम भूमिका निभाई। 2022 में वह मलयालम फिल्म ‘कडुवा’ में भी नजर आए। एक्टिंग के साथ प्रोडक्शन में भी कदम रखा विवेक ने एक्टिंग के अलावा फिल्म प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया। साल 2011 में उन्होंने फिल्म ‘देख इंडियन सर्कस’ प्रोड्यूस की। इस फिल्म को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी सराहना मिली। फिल्म ने 2011 में बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ऑडियंस चॉइस अवॉर्ड जीता था। विवेक ने टीवी पर भी काम किया। वह रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज’ में जज की भूमिका में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किरदार निभाया। अब विवेक ओबेरॉय जल्द नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ में नजर आएंगे। फिल्म भारत में 8 नवंबर 2026 (दिवाली) को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में वह रावण की बहन शूर्पणखा के पति विद्युत्जिह्व का किरदार निभा रहे हैं। शुरुआत में उनके विभीषण बनने की चर्चा थी। हालांकि, ट्रेलर के बाद उनका किरदार साफ हो गया। फिल्म में विवेक और रावण के बीच युद्ध का सीन भी देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि विवेक ने फिल्म से मिलने वाली अपनी पूरी फीस कैंसर से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए दान करने का फैसला किया है। ………….. यह खबर भी पढ़ें… शक्ति कपूर ने भागकर की थी शादी: लता मंगेशकर के परिवार से थीं पत्नी, शादी के बाद अखबार में छपा- 3 महीने में तलाक हो जाएगा कई सुपरहिट फिल्मों में विलेन और कॉमेडियन का रोल प्ले करने वाले शक्ति कपूर आज 74 साल के हो गए। तकरीबन 700 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके शक्ति का एक्टिंग करियर बेहद सफल रहा। उनकी पर्सनल लाइफ की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है। शक्ति ने शिवांगी कोल्हापुरे से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म ‘किस्मत’ के दौरान हुई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 3 Sep 2026 11:50 am

ऑस्ट्रेलिया में बना दुनिया का सबसे भारी गोल्ड बार, 521 किलो वजन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

सोने की छोटी-सी ईंट या गोल्ड बार तो आपने कई बार देखी होगी

खास खबर 3 Sep 2026 11:41 am

आतिफ असलम बोले- भारत से बेहतर है पाकिस्तान कोक स्टूडियो:पाकिस्तान के गानों में दिखता है जादू; भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन ज्यादा

पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम ने भारत और पाकिस्तान के लोकप्रिय संगीत प्लेटफॉर्म 'कोक स्टूडियो' के बीच तुलना करते हुए पाकिस्तान कोक स्टुडियो को बेहतर बताया है। एक इंटरव्यू में आतिफ ने कहा कि कोक स्टूडियो पाकिस्तान की सफलता के पीछे उसका 'रॉ और ओरिजनल' संगीत है, जबकि कोक स्टूडियो इंडिया में 'कमर्शियलाइजेशन' (व्यावसायीकरण) ज्यादा हावी दिखता है। ‘भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन हावी’दुबई के रेडियो स्टेशन मिर्ची यूएई को दिए इंटरव्यू में आतिफ असलम ने दोनों देशों के कोक स्टूडियो के काम करने के तरीके पर बात की। आतिफ ने कहा, दोनों ही तरफ संगीत की कंपोजिशन बेहतरीन बनाई जाती है, लेकिन भारतीय संगीत में वह रॉ-नेस गायब है जो हमारे गानों में होती है। इंडियन कोक स्टूडियो कमर्शियलाइजेशन पर बहुत ज्यादा भरोसा करता है और गानों को बाजार के हिसाब से ढालता है। इसके उलट, पाकिस्तानी कोक स्टूडियो पूरी तरह से ओरिजनल कंपोजिशन पर जोर देता है। वहां संगीतकारों के पास अपनी कला दिखाने की आजादी होती है और एक तरह से यह उनके लिए करो या मरो की स्थिति होती है, जहां वे अपनी अलग पहचान जोड़ सकते हैं। 2008 में शुरू हुआ कोक स्टूडियो पाकिस्तानकोक स्टूडियो पाकिस्तान की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसके फाउंडर और प्रोड्यूसर रोहेल हयात थे। इस शो ने पारंपरिक सूफी, कव्वाली, गजल और लोक संगीत को आधुनिक वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स के साथ मिलाकर फ्यूजन म्यूजिक को एक नया मुकाम दिया। कोक स्टूडियो भारत: 2011 में हुई थी शुरुआतभारत में कोक स्टूडियो की शुरुआत साल 2011 में 'एमटीवी कोक स्टूडियो इंडिया' के नाम से हुई थी। शुरुआती सीजन्स में ए.आर. रहमान, अमित त्रिवेदी और क्लिंटन सेरेजो जैसे संगीतकारों ने कई बेहतरीन ओरिजनल ट्रैक्स बनाए, लेकिन बाद के सालों में यह प्लेटफॉर्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड कंपोजर्स के प्रभाव में ज्यादा आ गया। भारत में बैन हुए, बोले- लोग VPN से गाने सुनते हैंइससे पहले आतिफ असलम ने भारत में लगे बैन पर बात करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और वो अपने फैंस को मिस करते हैं। यह बात उन्होंने रेडियो प्रेजेंटर क्रिस फेड के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में कही। बातचीत में आतिफ असलम ने कहा, “मुझे भारत में बैन हुए लगभग 10 साल हो गए हैं। यह भारतीय सरकार का फैसला था। उन्होंने पाकिस्तान के कलाकारों को बैन करने का फैसला किया। भारतीय कलाकार भी पाकिस्तान में बैन हैं। पिछले 10 साल से। मैंने वहां कोई गाना रिलीज नहीं किया है।” उन्होंने भारतीय फैंस के लगातार अपने संगीत को सुनने का जिक्र करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और सीडी बनाकर दूसरों को देते हैं। उन्होंने कहा कि वह पाइरेसी को बढ़ावा नहीं देते, लेकिन संगीत जहां पहुंचना होता है, वहां पहुंच जाता है। मेरे पहले सिंगल के साथ भी ऐसा ही हुआ था। आतिफ ने भारतीय फैंस को उदास नहीं होने कहा भारतीय फैंस के लिए आतिफ ने कहा, “हां, इसे लेकर बुरा मत महसूस करो। उदास मत हो। मैं हमेशा से आप लोगों से कहना चाहता था कि मुझे आप लोगों की याद आती है। मुझे वहां काम करने की याद नहीं आती, लेकिन आप लोगों की याद आती है।” आतिफ ने आगे कहा कि मैंने प्लेबैक सिंगिंग से बहुत कुछ सीखा है। अगर यह बैन नहीं हुआ होता, तो शायद मैं अपना खुद का म्यूजिक नहीं बना पाता। इसलिए इसके लिए भी मैं आप लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं। पाकिस्तानी कलाकारों पर क्यों लगा था बैन सितंबर 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने अपने निर्माता सदस्यों को भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य होने तक पाकिस्तानी कलाकारों और तकनीशियनों को काम न देने का निर्देश दिया था। हालांकि, 2016 के बाद भी कई बॉलीवुड फिल्मों में आतिफ असलम के गाने आए। 2017 में फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का ‘दिल दियां गल्लां’, ‘राब्ता’ का ‘दरअसल’, ‘ट्यूबलाइट’ का ‘मैं अगर’ और ‘करीब करीब सिंगल’ का ‘जाने दे’ रिलीज हुआ। वहीं, 2018 में ‘बागी 2’ का ‘ओ साथी’, ‘सत्यमेव जयते’ का ‘पानियों सा’, ‘लवयात्री’ का ‘तेरा हुआ’ और ‘जीनियस’ का ‘दिल मेरी ना सुने’ गाना रिलीज हुआ। वहीं, मार्च 2019 के बाद से उनका कोई गाना बॉलीवुड फिल्मों में रिलीज नहीं हुआ। गौरतलब है कि फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के कुछ दिनों बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने भी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पाकिस्तानी एक्टर्स और कलाकारों पर पूरी तरह बैन की घोषणा की थी। इस हमले में 40 CRPF जवानों की जान गई थी। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी फिल्मों, वेब सीरीज, गानों और पॉडकास्ट पर रोक लगा दी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने IT रूल्स 2021 के तहत OTT और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स से पाकिस्तानी कंटेंट हटाने का आदेश दिया। इसके अलावा कई पाकिस्तानी कलाकारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स भी भारत में अस्थायी रूप से ब्लॉक किए गए। इनमें माहिरा खान और हानिया आमिर जैसे कलाकार शामिल थे।

दैनिक भास्कर 3 Sep 2026 10:28 am

हर्षिता गौर का दिल टूटा, दो साल बाद संभलीं:बोलीं- उस रिश्ते ने खुद से प्यार करना सिखाया, पेरेंट्स अब शादी के लिए दबाव नहीं डालते

हर्षिता गौर ने एक्टिंग की शुरुआत टीवी से की और ‘मिर्जापुर’ से उन्हें अलग पहचान मिली। इंटरव्यू में उन्होंने पहली कमाई, माता-पिता के सपोर्ट और आने वाले प्रोजेक्ट्स समेत कई बातें साझा कीं। उनकी मां डॉक्टर होने के साथ 9 साल तक थिएटर भी कर चुकी हैं। बचपन में हर्षिता ने एक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन माता-पिता को उम्मीद थी कि यह सपना कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा। उन्होंने मुंबई में अपने 12 साल पुराने घर को खरीदने की कोशिश का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने सपनों के राजकुमार, दिल टूटने और खुद को प्यार करना सीखने पर भी बात की। बचपन में एक्टिंग करने का ख्याल कैसे आया? मैं करीब 7-8 साल की रही होंगी, जब मैंने मां से कहा था कि मुझे टीवी पर आना है। बचपन में ज्यादा फिल्में नहीं देखती थी, लेकिन 4 साल की उम्र से कथक सीख रही थी और स्टेज पर परफॉर्म करती थी। जब लोग मेरी तारीफ करते थे और मिलने आते थे, तो शायद वहीं से एक्टर बनने का ख्याल आया। आपकी मां भी थिएटर करती थीं? हां, मेरी मां डॉक्टर हैं, लेकिन उन्होंने पंजाब में करीब 9 साल तक थिएटर भी किया था। बचपन में मुझे पता नहीं था कि वह थिएटर एक्टर रही हैं। जब मैं थोड़ी बड़ी हुई, तब उन्होंने बताया। मुझे लगता है कि एक्टिंग का कीड़ा शायद उन्हीं से आया है। जब आपने माता-पिता को बताया कि एक्टर बनना है, तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? शुरुआत में उन्हें लगा कि मैं कुछ समय बाद भूल जाऊंगी। लेकिन यह सपना कभी खत्म नहीं हुआ। 10वीं के बाद मेडिकल या नॉन-मेडिकल चुनना था, तब मैंने पापा से कहा कि मुझसे डॉक्टर नहीं बना जाएगा, मुझे एक्टर बनना है। उन्होंने फिर भी कहा कि नॉन-मेडिकल या इंजीनियरिंग कर लो। फिर इंजीनियरिंग करने का फैसला कैसे हुआ? मुझे एक्टिंग ही करनी थी। उस समय NSD और FTII में ग्रेजुएशन के कोर्स नहीं थे, इसलिए ग्रेजुएशन करनी ही थी। मैंने सोचा कि जब करनी ही है तो कुछ भी कर लेते हैं, इसलिए इंजीनियरिंग कर ली। मैं मजाक में कहती हूं कि मैं इंजीनियरिंग से एक्टिंग में नहीं आई, बल्कि इंजीनियरिंग एक्टिंग के रास्ते में आई थी। आपके पापा ने एक्टिंग के लिए मुंबई आने से नहीं रोका? मेरे पापा ने कभी मुझे कोशिश करने से नहीं रोका। वह खुद गांव से आकर डॉक्टर बने थे, इसलिए शायद समझते थे कि अपने रास्ते पर कोशिश करना जरूरी है। कॉलेज के दौरान मैं दिल्ली में छोटे-मोटे शूट करती थी। एक बार सिर्फ ऑडिशन देने के लिए चार दिन की छुट्टी में मुंबई आई थी। पापा ने कहा था कि पहले जाकर खुद को टेस्ट करो, क्या पता वहां तुम्हें रिजेक्ट कर दें। आपकी पहली कमाई कितनी थी और उससे क्या किया था? मेरी पहली कमाई ₹1000 थी। एक ऐड के लिए करीब 12 घंटे शूट किया था और मुझे ₹1000 मिले थे। मुझे नहीं लगता कि मैंने उससे कुछ खास किया था। बस घर जाकर बताया था कि ये तो शुरुआत है। टीवी शो के बाद कमाई कितनी बढ़ी? शुरुआत में ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे, क्योंकि आप नए होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे शो चलता गया और हिट हुआ, कमाई धीरे-धीरे बढ़ती गई। मैंने तीन साल शो किया और बाद में मेरी फीस भी बढ़ी। हालांकि, टीवी में लोग जितना कमाते हैं, उसके मुकाबले मैंने बहुत ज्यादा नहीं कमाया। मुंबई आए आपको काफी साल हो गए, क्या आप अभी भी उसी घर में रहती हैं? हां, जब से मुंबई आई हूं, तब से इसी घर में रह रही हूं। करीब 12 साल हो गए हैं। लोगों को यह बड़ी बात लगती है कि मुंबई जैसे शहर में कोई इतने साल एक ही घर में रह रहा है। क्या कभी अपना घर खरीदने का सोचा? बिल्कुल सोचा है। मैंने इसी घर को खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन मेरे लैंडलॉर्ड अंकल-आंटी इसे बेचना नहीं चाहते थे। मुंबई में घर खरीदना आसान नहीं है। अगर आपके पास कम से कम 70-80 प्रतिशत डाउन पेमेंट नहीं है, तो लोन लेकर घर खरीदना महंगा पड़ सकता है। रेंट में कम से कम फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहती है। माता-पिता अब शादी को लेकर सवाल करते हैं? अब तो उन्होंने बोलना ही छोड़ दिया है। शुरुआत में उन्होंने काफी कोशिश की थी, क्योंकि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सेटल हो जाए। लेकिन अब उन्हें लगता है कि किसी को फोर्स करके शादी नहीं कराई जा सकती। इसलिए उनकी दुआएं और प्रार्थनाएं चलती रहती हैं कि मुझे अच्छा पार्टनर मिल जाए। आपके सपनों का राजकुमार कैसा होना चाहिए? मेरे लिए सबसे जरूरी है कि वह इमोशनली अवेयर हो। उसे अपने पैटर्न, गलतियां और स्ट्रेंथ समझ में आती हो। कम्युनिकेशन अच्छा होना चाहिए, ताकि वह अपनी फीलिंग्स खुलकर बता सके। उसके आसपास रहने वाला हर इंसान खुद को रिस्पेक्टेड महसूस करे, यह मेरे लिए बहुत जरूरी है। क्या आपको अब तक अपना सपनों का राजकुमार मिला? रिश्ते रहे हैं, लेकिन उस समय हम दोनों शायद साथ में सही नहीं थे। हर इंसान अपनी जर्नी पर होता है और उसी हिसाब से सीखता है। मेरे पुराने रिश्तों में रहे लोग व्यक्तिगत तौर पर बहुत अच्छे हैं और आज भी मेरे दोस्त हैं। कभी आपका दिल भी टूटा? हां, बिल्कुल। मैंने भी शायद किसी का दिल दुखाया है, लेकिन मेरा भी टूटा है। इससे बाहर आने में मुझे करीब डेढ़ से दो साल लग गए। जब मैं उससे बाहर निकली, तो लगा कि शायद वह रिश्ता मेरी जिंदगी में इसलिए आया था, ताकि मैं खुद से प्यार करना सीख सकूं। उस रिश्ते से सबसे बड़ी सीख क्या मिली? उस रिश्ते ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मेरी भी गलतियां रही होंगी और सामने वाले इंसान में कोई बुराई नहीं थी। लेकिन उस अनुभव के बाद मैं अलग इंसान बनी। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि अच्छा हुआ वह दौर मेरी जिंदगी में आया, क्योंकि उससे मैंने खुद को समझना और प्यार करना सीखा। अभी आपके कौन-कौन से प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं? मिर्जापुर’ फिल्म के अलावा दो और प्रोजेक्ट हैं। एक हॉरर प्रोजेक्ट है, जिसे निखिल आडवाणी की कंपनी ने बनाया है। इसमें परमब्रता चक्रवर्ती, गुलशन देवैया, प्रीति पानिग्राही और सुमेध जैसे कलाकार हैं। यह अमेजन के लिए है। इसके अलावा दिव्येंदु, भुवन अरोड़ा और विजय मौर्या के साथ एक शो किया है। सवाल: दूसरे शो के बारे में कुछ बताइए? इसे समीर विद्वांस ने डायरेक्ट किया है, जिन्होंने ‘सत्यप्रेम की कथा’ और ‘आनंदी गोपाल’ जैसी फिल्में बनाई हैं। वह नेशनल अवॉर्ड विनर हैं। यह शो भी अमेजन के लिए है। दोनों शो अनाउंस हो चुके हैं। रिलीज होने पर दर्शक देख पाएंगे।

दैनिक भास्कर 3 Sep 2026 5:30 am

शक्ति कपूर ने भागकर की थी शादी:लता मंगेशकर के परिवार से थीं पत्नी, शादी के बाद अखबार में छपा- 3 महीने में तलाक हो जाएगा

कई सुपरहिट फिल्मों में विलेन और कॉमेडियन का रोल प्ले करने वाले शक्ति कपूर आज 74 साल के हो गए। तकरीबन 700 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके शक्ति का एक्टिंग करियर बेहद सफल रहा। उनकी पर्सनल लाइफ की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है। शक्ति ने शिवांगी कोल्हापुरे से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म ‘किस्मत’ के दौरान हुई थी। कपिल शर्मा के शो में शक्ति कपूर ने बताया था कि शिवांगी को देखकर उन्हें वह पहली नजर में ही बेहद खूबसूरत लगी थीं। उन्होंने शिवांगी से हल्की-सी लाइन भी मारी और मन ही मन तय कर लिया था कि शादी करेंगे तो इसी मराठिन से करेंगे। फिर दोनों की मुलाकात के बाद दोनों में दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई। परिवार रिश्ते के खिलाफ था जब दोनों की मुलाकात हुई थी, तब शक्ति कपूर करीब 30 वर्ष के थे और शिवांगी महज 18 साल की थीं। इसके अलावा, शक्ति कपूर फिल्मों में अक्सर विलेन के रोल निभाते थे। इसी वजह से शिवांगी के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। जब दोनों ने शादी की बात की, तो शिवांगी के परिवार ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया था। परिवार को मनाने के सारे रास्ते बंद होने के बाद शिवांगी ने घर से भागकर शक्ति कपूर के साथ शादी करने का फैसला किया। 1982 में की कोर्ट मैरिज साल 1982 में दोनों ने भागकर कोर्ट मैरिज कर ली। शुरुआत में शक्ति कपूर का परिवार भी थोड़ा हिचकिचा रहा था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि शिवांगी मशहूर गायिका लता मंगेशकर के परिवार से ताल्लुक रखती हैं, तो वे मान गए। शादी के बाद शिवांगी के माता-पिता कई सालों तक उनसे नाराज रहे। हालांकि, बड़े बेटे सिद्धांत कपूर और बाद में बेटी श्रद्धा कपूर के जन्म के बाद दोनों परिवारों के बीच की कड़वाहट खत्म हो गई। शिवांगी के माता-पिता ने भी इस रिश्ते को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया। अखबार में लिखा गया- 3 महीने में तलाक हो जाएगा कपिल शर्मा के शो में शक्ति कपूर ने बताया था कि उनकी शादी के बाद अखबार में आया था कि 3 महीने में उनका तलाक हो जाएगा। हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ। वहीं, शक्ति के ससुर ने उनसे आकर बोला कि तुम्हारे जैसा जमाई मैंने कहीं नहीं देखा, मुझे तुम पर बहुत गर्व है। शक्ति कपूर की पत्नी शिवांगी कोल्हापुरे (अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे की बड़ी बहन) दिग्गज गायिका लता मंगेशकर की रिश्तेदार (भतीजी) हैं। बता दें कि शिवांगी कोल्हापुरे के पिता पंडित पंधारीनाथ कोल्हापुरे की मां, लता मंगेशकर के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर की सौतेली बहन थीं। इस नाते शिवांगी के पिता पंधारीनाथ जी, लता मंगेशकर और आशा भोसले के चचेरे भाई लगते थे। एक नजर शक्ति कपूर के करियर पर शक्ति कपूर ने 1977 में फिल्म ‘खेल खिलाड़ी का’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। शुरुआती दौर में उन्हें कई छोटी भूमिकाएं मिलीं, लेकिन ‘कुर्बानी’ और ‘रॉकी’ में विलेन के किरदारों ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद ‘हिम्मतवाला’ और ‘हीरो’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने नेगेटिव रोल निभाया। 1990 के दशक में शक्ति कपूर ने अपनी एक्टिंग का दायरा बढ़ाया और कॉमेडी में भी खास पहचान बनाई। ‘राजा बाबू’ में नंदू का किरदार उनके सबसे यादगार रोल्स में शामिल है। इस भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड मिला। ‘अंदाज अपना अपना’ में क्राइम मास्टर गोगो, ‘चालबाज’, ‘इंसाफ’, ‘बाप नंबरी बेटा दस नंबरी’ और ‘बोल राधा बोल’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार भी खूब चर्चित रहे। बाद में उन्होंने ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘चुप चुप के’ और ‘मालामाल वीकली’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। ………….. यह खबर भी पढ़ें…एक्ट्रेस साधना ने 1 रुपए से शुरू की थीं फिल्में:‘साधना कट’ से देशभर में छाईं, आखिरी दिनों में आर्थिक तंगी से जूझीं हिंदी सिनेमा के 60 और 70 के दशक में एक ऐसी अभिनेत्री आईं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। नाम था साधना शिवदासानी। कभी उनकी फिल्में हिट होती थीं और उनका हेयरस्टाइल पूरे देश में ट्रेंड करता था, लेकिन जिंदगी के आखिरी दौर में उन्हें बीमारी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 3 Sep 2026 4:30 am

‘विक्टिम कार्ड खेलना है तो वो इसके लिए स्वतंत्र हैं’:पत्नी अपरा मेहता को बदसूरत कहने के आरोप पर दर्शन जरीवाला ने दी सफाई

सीनियर एक्टर दर्शन जरीवाला ने अलग रह रहीं पत्नी और एक्ट्रेस अपरा मेहता के उन्हें बदसूरत कहने के आरोपों पर सफाई दी। दरअसल, कुछ समय पहले अपरा मेहता ने दर्शन जरीवाला से सेपरेशन पर बात की थी। हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि दर्शन घर छोड़कर चले गए थे और उन्हें अब तक की सबसे बदसूरत महिला कहा था। अपरा ने यह भी कहा था कि दर्शन ने उनसे कहा था कि उनका प्यार खत्म हो गया है। अब दर्शन ने अपनी अलग रह रहीं पत्नी के इन आरोपों पर जवाब दिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… सिद्धार्थ कनन से बातचीत में दर्शन ने अपरा की बताई घटनाओं को गलत बताया। दर्शन ने कहा, “एक न्यूरोलॉजिकल घटना होती है, जिसमें समय के साथ किसी घटना की याद बदलती रहती है। मैं बहुत उदारता से कह सकता हूं कि यह गलत याददाश्त का मामला है। जिस तरह से इसे बताया गया है, वैसा कुछ हुआ ही नहीं था।” दर्शन ने रूप-रंग पर टिप्पणी से इनकार किया अभिनेता ने इस बात से भी इनकार किया कि उन्होंने अपरा के रूप-रंग पर कोई टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें उनके स्वभाव से मेल नहीं खातीं। दर्शन ने कहा, “मैं ऐसा आदमी नहीं हूं, जो किसी साधारण दिखने वाली महिला से भी कहे कि वह बदसूरत है। ऐसा कहना बिल्कुल गैरजरूरी होता। अगर मैं खुद को अच्छी तरह जानता हूं, तो मैं व्यक्ति के अंदर की बात करता, उसके बाहरी रूप की नहीं।” दर्शन ने कहा कि अपरा विक्टिम कार्ड खेलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह अपने अतीत से आगे बढ़ चुके हैं और आज अपनी जिंदगी में बहुत खुश हैं। दर्शन बोले-इतने साल बाद अब ये बातें क्यों? दर्शन ने सवाल उठाया कि सेपरेशन के कई दशक बाद ये आरोप अब क्यों सामने आए। उन्होंने कहा, “मैं समझ ही नहीं सकता कि अलग होने के 23 साल बाद वह इन बातों पर क्यों बोलना चाहती हैं। इससे पहले कभी नहीं। अगर यही इतिहास है और उन्हें इसे मीडिया तक ले जाने का मौका मिला था, तो अब क्यों?” उन्होंने आगे कहा, “हम उनके दिमाग में बैठकर उनकी नीयत का फैसला नहीं कर सकते। मैं अपना सच जानता हूं। मेरा सच मेरा सच है। झूठ की कोई सीमा नहीं होती। मैं उनकी मंशा का अंदाजा भी नहीं लगा सकता।” दर्शन ने कहा, “जो लोग मुझे सच में जानते हैं, वे पूरी कहानी अच्छी तरह जानते हैं, क्योंकि मेरी बात कभी नहीं बदलती। सच के कई वर्जन नहीं होते।” दर्शन के मुताबिक, 1982 में शादी के बाद धीरे-धीरे दोनों की प्राथमिकताएं और सोच अलग होती गईं। उन्होंने कहा कि निजी हालात, करियर और आर्थिक स्थिति में बदलाव ने भी रिश्ते में दरार की वजह बनाई। एक्टर ने कहा, “दो लोग समय के साथ अलग तरह से बढ़ते हैं। अगर आप दो पौधे साथ लगाते हैं, तो वे अलग-अलग तरह से बढ़ेंगे। उनकी प्राथमिकताएं अलग थीं और मेरी अलग।” उन्होंने कहा, “मेरे हालात बदल गए थे, क्योंकि मैं एक फेल बिजनेस प्लान में शामिल था। हम अपने करियर को किस तरह आगे ले जाना चाहते थे, इस पर भी हमारी सोच अलग थी।” दर्शन ने कहा कि दोनों अपनी बेटी को अच्छा बचपन देने को लेकर साफ थे। उन्होंने कहा, “रिश्ता कभी-कभी बदलावों से गुजरता है।” तलाक के लिए कागज दिए, जज ने आवेदन खारिज किया दर्शन ने यह भी बताया कि उनकी शादी कानूनी रूप से खत्म क्यों नहीं हुई। उनके मुताबिक, उन्होंने तलाक की अर्जी दी थी, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा, “मैंने तलाक के कागज दिए थे, लेकिन जज ने आवेदन खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी सहमति नहीं दी।” दर्शन ने दावा किया, “वह तलाक के लिए राजी हो गई थीं, लेकिन जज के सामने आखिरी समय पर उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। शायद वह खुद को एक अच्छी और पीड़ित महिला के रूप में पेश कर रही हैं।” दर्शन ने सांताक्रूज वेस्ट स्थित घर छोड़ने की बात भी बताई। उन्होंने कहा कि वह घर से चले गए और अपरा व अपनी बेटी को वहीं रहने दिया। उन्होंने कहा, “मैं बस अपना घर छोड़कर चला गया था। मेरे पास उन्हें देने के लिए जितना था, मैंने दे दिया। अगर किसी को गुजारा भत्ता मांगना चाहिए था, तो वह मैं होता, क्योंकि उस समय मेरे हालात ऐसे थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।” दर्शन ने कहा कि उनके पास दूसरा घर नहीं था और घर छोड़ने के तुरंत बाद किराए का मकान लेने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। इसलिए वह कुछ समय तक दोस्तों के साथ रहे और बाद में एक छोटा-सा घर किराए पर ले सके। उन्होंने कहा, “हालात ऐसे थे कि मुझे यह सब दर्द झेलना पड़ा।” बेटी के साथ अपने रिश्ते को दर्शन ने करीबी बताया इंटरव्यू में दर्शन ने अपनी बेटी के साथ रिश्ते पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों लगातार संपर्क में रहते हैं और उनके बीच करीबी रिश्ता है। दर्शन ने कहा, “मैं एक अच्छा पिता हूं। मैं उसके संपर्क में रहता हूं। उसकी जिंदगी में होने वाली सभी बातों की मुझे अच्छी जानकारी रहती है। मेरे साथ उसका बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। उसके पास मेरा दिया हुआ डेबिट कार्ड भी है।” दर्शन ने अपरा के इस दावे को भी खारिज किया कि उन्होंने अपनी बेटी की परवरिश अकेले की। उन्होंने कहा कि लोग कई बार अपने भावनात्मक अनुभवों के आधार पर अतीत को अलग तरह से देखते हैं। उन्होंने कहा, “कभी-कभी हम अपनी जिंदगी के खालीपन को भरने की कोशिश करते हैं। जहां कुछ नहीं होता, वहां जानबूझकर या अनजाने में अजीब चीजें रख देते हैं।”

दैनिक भास्कर 2 Sep 2026 7:24 pm

'हनुमान अंश' ने 26वें दिन कमाए 8.50 करोड़:2 करोड़ में बनी फिल्म ने 500-1000 करोड़ की टॉक्सिक को किया पीछे; जानिए क्या है वजह

नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी छोटे बजट की फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच रही है। महज 2 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने यश की बहुचर्चित और 500 करोड़ के बजट की फिल्म ‘टॉक्सिक’ को 7वें दिन की कमाई में पछाड़ दिया। सैक्निल्क के आंकड़ों के मुताबिक भारत में रिलीज के 26वें दिन जहां 'हनुमान अंश' ने 8.50 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया, वहीं 'टॉक्सिक' अपने रिलीज के 7वें दिन केवल 7.85 करोड़ रुपए ही जुटा सकी। शुरुआती हफ्तों में धीमी शुरुआत करने वाली इस फिल्म ने वर्ड-ऑफ-माउथ और दर्शकों के पॉजिटिव रिस्पॉन्स के दम पर 26 दिनों में 54.13 करोड़ रुपए का भारत में नेट कलेक्शन कर लिया है। सिर्फ 10 लाख की ओपनिंग से 54 करोड़ तक का सफरविशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। रिलीज के पहले दिन फिल्म ने महज 10 लाख रुपए का कलेक्शन किया था और पहले दो हफ्तों में यह केवल 1.48 करोड़ रुपए ही कमा सकी थी। हालांकि, 17वें दिन फिल्म की किस्मत बदली और इसने एक ही दिन में 2.20 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। तीसरे हफ्ते से फिल्म की कमाई में ऐसा उछाल आया कि केवल तीसरे हफ्ते में ही इसने 10.40 करोड़ रुपए बटोर लिए। सैक्निल्क के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म का कुल भारत में ग्रॉस कलेक्शन 63.82 करोड़ रुपए हो चुका है। 6ठे दिन के हिन्दी कलेक्शन पर 'हनुमान अंश' का 25वां दिन भारीबॉक्स ऑफिस पर असली उलटफेर तब देखने को मिला जब रिलीज के 25वें दिन 'हनुमान अंश' ने हिन्दी बेल्ट में 5.50 करोड़ रुपए कमाए, जबकि उसी दिन यश स्टारर बड़े बजट की फिल्म 'टॉक्सिक' अपने रिलीज के छठे दिन (सोमवार) हिन्दी बेल्ट में सिर्फ 4.40 करोड़ रुपए ही जुटा सकी। गीथू मोहनदास के निर्देशन में बनी 'टॉक्सिक' ने भले ही पहले दिन दुनियाभर में 101.10 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड ओपनिंग की थी और शुरुआती वीकेंड में 214.10 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया था, लेकिन इसके बाद फिल्म के कलेक्शन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कम शोज के बावजूद बढ़ा 'हनुमान अंश' का ग्राफस्क्रीन काउंट के मामले में भी दोनों फिल्मों के बीच जमीन-आसमान का अंतर था। 'टॉक्सिक' भारत भर में 24,579 शोज के विशाल पैमाने पर रिलीज हुई थी, लेकिन कमजोर माउथ पब्लिसिटी के कारण छठे दिन तक इसके शोज घटकर 13,400 रह गए, यानी शोज में लगभग 45.4 फीसदी की कटौती हुई। इसके विपरीत 'हनुमान अंश' महज 300 शोज से शुरू हुई थी, लेकिन दर्शकों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके शोज लगातार बढ़ाए गए। 26वें दिन 'हनुमान अंश' देशभर में 7,008 शोज पर चल रही थी और 'टॉक्सिक' के मुकाबले आधे शोज होने के बाद भी इसने ज्यादा कमाई दर्ज की। अब समझिए कम बजट की इस फिल्म कैसे कमाए 50 करोड़ ट्रेड एक्सपर्ट तरण आदर्श ने फिल्म की कमाई पर कहा- ‘अगर आप कलेक्शन देखेंगे तो पहले दिन से लेकर अब तक, खासकर थर्ड वीक और चौथे वीकेंड में वो ऐतिहासिक है। ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।’ 'कंटेंट तो है ही, लेकिन 'वर्ड ऑफ माउथ' से फिल्म को फायदा मिला। अगर नेगेटिव पब्लिसिटी होती है, तो दूसरे-तीसरे दिन फिल्म पर असर दिखता है, लेकिन अगर रिव्यू पॉजिटिव हैं, तो फिल्म चल जाती है। यही हनुमान अंश के साथ हुआ। दूसरे वीक में ये फिल्म उतरने वाली थी। सिर्फ 40 लाख का कलेक्शन था। पहले हफ्ते भी कुछ खास कलेक्शन नहीं था।' बड़ी फिल्मों से क्लैश के बावजूद हनुमान अंश को स्क्रीन्स कैसे मिलीं? 7 अगस्त को जब फिल्म हनुमान अंश रिलीज हुई, तो इसे चुनिंदा स्क्रीन्स मिलीं। 14 अगस्त को आवारावन 2 और बंटवारा 1947 आने से फिल्म की स्क्रीन्स और कम हो गईं। फिल्म की कमाई भी खास नहीं हो रही थी, तो इसे सिनेमाघरों से हटाया जाने लगा। लेकिन फिल्म अब भी कई सिनेमाघरों में है। इसकी वजह क्या थी, सवाल पूछे जाने पर तरण आदर्श कहते हैं, ‘फिल्म के प्रोड्यूसर्स ने डिस्ट्रीब्यूटर्स से रिक्वेस्ट की कि कैसे भी हमारी फिल्म थर्ड वीक में चलाओ। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा कि टॉक्सिक आ रही है, फिल्म वैसे भी उतार दी जाएगी। लेकिन प्रोड्यूसर्स ने कहा- प्लीज इसे कैसे भी चलाइए।’ फिल्म के तीन बड़े चेहरों के बारे में- डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। ये उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2012 की वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। वह टीवी सीरीज और फिल्मों के डायलॉग राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में लीड रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शोज में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे दर्जनों शोज कर चुके हैं। ये खबर भी पढ़ें क्या नेगेटिव रेटिंग-रिव्यू से डरे टॉक्सिक मेकर्स:बुक माय शो से 5.5 रेटिंग गायब, जानिए क्यों अच्छी कमाई के बावजूद फिल्म पर है फ्लॉप का खतरा केजीएफ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक को लगातार दर्शकों के नेगेटिव रिव्यू मिल रहे हैं। सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइट्स में फिल्म को काफी निराशाजनक रेटिंग मिली है। इसी बीच अब फिल्म के मेकर्स पर बुक माय शो से फिल्म की रेटिंग हटवाने के आरोप लग रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें

दैनिक भास्कर 2 Sep 2026 4:20 pm

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखी जयपुर के चित्रकार की पेंटिंग:की-बोर्ड की कुंजियों से बनाई, तीन महीने में तैयार हुई नीम करोली बाबा की कलाकृति

जयपुर के कंटेम्परेरी कलाकार मुकेश शर्मा इन दिनों अपनी एक अनोखी कलाकृति को लेकर चर्चा में हैं। नीम करोली बाबा पर बनी उनकी यह पेंटिंग फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखाई गई है। खास बात यह है कि फिल्म में मुकेश शर्मा के काम और इस पेंटिंग के निर्माण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है और फिल्म के अंत में उन्हें विशेष क्रेडिट दिया गया है। खास बात यह है कि इस पेंटिंग का सफर किसी सामान्य फिल्मी असाइनमेंट की तरह शुरू नहीं हुआ, बल्कि तकनीक और आध्यात्मिकता के बीच संबंध तलाशते हुए फिल्म के निर्माताओं की नजर मुकेश शर्मा की कला पर पड़ी। जयपुर के रहने वाले मुकेश शर्मा इन दिनों दिल्ली में रहकर अपनी कला साधना कर रहे हैं। वेनिस में देखे काम से शुरू हुआ फिल्म से जुड़ाव मुकेश शर्मा ने बताया कि फिल्म के निर्माता तकनीक के साथ काम करने वाले ऐसे कलाकारों की तलाश कर रहे थे, जिनकी कला में टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, चेतना और समकालीन जीवन से जुड़े सवाल दिखाई देते हों। इसी शोध के दौरान उनकी नजर मेरे काम पर पड़ी। निर्माताओं ने उनका विशाल स्कल्प्चरल इंस्टॉलेशन ‘नागराज’ वेनिस, इटली में देखा था। यहां देखें पेंटिंग के फोटोज… कुछ समय बाद फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने उन से संपर्क किया। प्रोड्यूसर्स ने मुकेश शर्मा को बताया कि वह नीम करोली बाब पर फिल्म बना रहे हैं। और बाबा की आध्यात्मिक विचारधारा और तकनीक के बीच संबंध को भी फिल्म में तलाशना चाहते हैं। नीम करोली बाबा का प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया भर के कई लोगों पर रहा है। तकनीक और समकालीन संस्कृति से जुड़े चर्चित नामों में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग का उल्लेख भी अक्सर उनके संदर्भ में किया जाता है। निर्माताओं की दिलचस्पी इसी बिंदु में थी कि आध्यात्मिकता, तकनीक, ऊर्जा और मानवीय चेतना किस तरह एक-दूसरे से जोड़ती है। पोस्टर को अपनी कला भाषा में रीक्रिएट किया फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने मुकेश शर्मा के साथ बातचीत के दौरान फिल्म का आधिकारिक पोस्टर शेयर किया, जिसे डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने तैयार किया था। मुकेश शर्मा ने इसी पोस्टर की छवि को अपनी विशिष्ट कला-भाषा में देखने और रीक्रिएट करने का प्रयास किया। कलाकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए डिस्कार्डेड कंप्यूटर और लैपटॉप की कुंजियों का इस्तेमाल किया। इन कुंजियों को काटा, घिसा और फिर एक-एक टुकड़े को बेहद बारीकी से जोड़ते हुए महाराज जी के चेहरे, कंबल और पूरी आकृति को आकार दिया गया। छोटे-छोटे हिस्सों को इस तरह संयोजित किया गया कि दूर से देखने पर एक संपूर्ण आकृति उभरती है, जबकि करीब से देखने पर उसमें इस्तेमाल की गई हजारों तकनीकी कुंजियां दिखाई देती हैं। यह पेंटिंग लगभग तीन महीने में बनकर तैयार हुई। ई-वेस्ट को दिया आध्यात्मिक अर्थ मुकेश शर्मा के लिए यह पेंटिंग केवल नीम करोली बाबा की तस्वीर नहीं है। यह तकनीक और आध्यात्मिकता के बीच एक समकालीन संवाद है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और लैपटॉप की कुंजियां महज ई-कचरा नहीं हैं। वे हमारे समय, हमारी भाषा, हमारी स्मृतियों और तकनीकी जीवन के दस्तावेज भी हैं। जब इन्हीं अलग-अलग हिस्सों को एक साथ जोड़कर एक नई आकृति दी जाती है, तो डिस्कार्डेड तकनीक भी एक नई अर्थपूर्ण और आध्यात्मिक उपस्थिति हासिल कर लेती है। आश्रम की यात्रा ने बदला अनुभव इस कलाकृति के निर्माण के दौरान मुकेश शर्मा ने खुद नीम करोली बाबा के आश्रम की यात्रा भी की। इसी दौरान यह पूरा काम उनके लिए सिर्फ एक पेशेवर कमीशन नहीं रहा। मुकेश शर्मा कहते हैं कि उन्हें महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि किसी तरह का भीतर से आया एक आह्वान था। उन्हें लगा कि शायद यह आध्यात्मिक जुड़ाव सही समय पर उनके सामने आया है और इसी वजह से उन्होंने इस कमीशन को स्वीकार किया।

दैनिक भास्कर 2 Sep 2026 3:49 pm

Once More Movie Review | अर्जुन दास और अदिति शंकर की केमिस्ट्री एक उतार-चढ़ाव वाली रोमांटिक कहानी में जान डालती है

अगर आप किस्मत में यकीन रखते हैं, तो ज़िंदगी का सीधा सा मतलब है—'दूसरा मौका'। इसी सोच और उम्मीद पर टिकी है निर्देशक विग्नेश श्रीकांत की रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'वन्स मोर' (Once More)। यह कहानी एक ऐसे इंसान के इर्द-गिर्द घूमती है जो डिप्रेशन के अंधियारे में खुशियों का मतलब भूल चुका है। रघुवरन की बेरंग जिंदगी में जब खुशियों से लबरेज अंजलि की एंट्री होती है, तो कहानी एक नया मोड़ लेती है। क्या है फिल्म की कहानी? फिल्म का मुख्य किरदार रघुवरन (अर्जुन दास) पिछले आठ सालों से एक दुखद अतीत के साए में जी रहा है। एक पुरानी त्रासदी ने प्यार और जीवन के प्रति उसके नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है। वह खुद में सिमटा रहता है, तभी उसकी कॉलेज जूनियर अंजलि (अदिति शंकर) अचानक उसकी दुनिया में वापस आती है। अंजलि का उत्साही और चुलबुला स्वभाव रघुवरन के शांत और अकेले रहने की आदत के बिल्कुल उलट है। रघुवरन उसे खुद से दूर करने की हरसंभव कोशिश करता है, लेकिन अंजलि का निश्छल प्यार धीरे-धीरे उसकी खामोशी की दीवार को तोड़ने लगता है। क्या रघुवरन अपने अतीत को भुलाकर अंजलि के साथ जिंदगी को 'एक और मौका' दे पाएगा? फिल्म इन्हीं संवेदनशील सवालों के जवाब तलाशती है। संवेदनशील मुद्दों पर परिपक्व दृष्टिकोण 'वन्स मोर' की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह डिप्रेशन, आत्महत्या, सेम-सेक्स रिलेशनशिप (समलैंगिक संबंध) और इंटिमेसी जैसे संवेदनशील विषयों को बहुत ही सहजता और परिपक्वता से पर्दे पर उतारती है। बिना किसी जजमेंट के चित्रण: फिल्म इन गंभीर विषयों को सिर्फ ड्रामे या सनसनी के लिए इस्तेमाल नहीं करती, बल्कि ये किरदारों की जिंदगी का एक स्वाभाविक हिस्सा लगते हैं। नैतिक सीख से दूरी: कहानी किरदारों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने, गलतियां करने और मदद मांगने की पूरी आजादी देती है, बिना उन पर कोई मोरल पुलिसिंग थोपे। अभिनय और किरदारों की केमिस्ट्री अर्जुन दास और अदिति शंकर: अपनी गंभीर छवि के लिए जाने जाने वाले अर्जुन दास ने एक टूटे हुए इंसान से लेकर फिर से मुस्कुराना सीखने वाले प्रेमी के किरदार को बेहद शिद्दत से निभाया है। वहीं, अदिति शंकर अपनी ऊर्जावान और स्क्रीन प्रेजेंस से अंजलि के किरदार को जीवंत बना देती हैं। शुरुआत में उनका तरीका भले ही थोड़ा जोर-जबरदस्ती वाला लगे, लेकिन धीरे-धीरे दर्शक उनकी मासूमियत से जुड़ जाते हैं। इंद्रा और सहायक कलाकार: सोना ओलिकल (इंद्रा के रूप में) रोमांटिक और ड्रामेटिक दोनों दृश्यों में अपना प्रभाव छोड़ती हैं। हालांकि, रघुवरन और इंद्रा के रिश्ते के अचानक खत्म होने की वजह बहुत ठोस नहीं लगती, जो फिल्म को थोड़ा कमजोर बनाती है। देवदर्शिनी, द्रविड़ सेल्वम और अनुषा प्रभु जैसे सहायक कलाकारों ने कहानी को जरूरी हास्य और अपनापन दिया है। तकनीकी पक्ष: संगीत और सिनेमैटोग्राफी फिल्म को संभालने में इसके तकनीकी पहलुओं का बड़ा योगदान रहा है: हेशम अब्दुल वहाब का संगीत: फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और ट्रैक—खासकर 'वा कन्नाम्मा' और 'इधयम' बेहद कर्णप्रिय हैं, जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी आपके दिल में बसे रहते हैं। अरविंद विश्वनाथन की सिनेमैटोग्राफी: कैमरे का काम कहानी के मूड और इमोशंस को बहुत खूबसूरती से फ्रेम करता है। अंतिम फैसला 'वन्स मोर' निर्देशक विग्नेश श्रीकांत की एक अच्छी शुरुआत है। फिल्म में संवेदनशीलता, अपनापन और बेहतरीन परफॉर्मेंस का सुंदर मेल है। हालांकि, कहीं-कहीं फिल्म जानी-पहचानी और घिसी-पिटी रोमांटिक-ड्रामा की लीक पर चलने लगती है, जिससे यह पूरी तरह से अपनी क्षमता को नहीं छू पाती। इसके बावजूद, अर्जुन दास और अदिति शंकर की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री के लिए इसे एक बार जरूर देखा जा सकता है।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 3:48 pm

Hanuman Ansh के बाद एक और लो बजट फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर हुई फतेह, 2000 करोड़ की कमाई के साथ लहराया परचम

हनुमान अंश ही नहीं, बल्कि एक और फिल्म ने 2026 में बॉक्स ऑफिस पर बाजी मारी है। कौन सी है यह फिल्म जिसकी कहानी ने छुआ सबका दिल, नीचे पढ़ें कहानी।

जागरण 2 Sep 2026 12:55 pm

Spider-Man Brand New Day बनी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी फिल्म, ऐतिहासिक कमाई से टाइटैनिक-स्टार वार्स को छोड़ा पीछे

टॉम हॉलैंड स्टारर फिल्म स्पाइडर-मैन ब्रांड न्यू डे ने कमाई के मामले में सिनेमा जगत में इतिहास रच दिया है।

जागरण 2 Sep 2026 11:57 am

स्वरा भास्कर बोलीं- रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा:पद्मावत के जौहर सीन विवाद पर दी सफाई; सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से भी हुई बहस

एक्ट्रेस स्वरा भास्कर 2018 की फिल्म 'पद्मावत' के जौहर सीन पर दिए गए बयान के बाद विवादों में आ गई हैं। दिल्ली में एक इवेंट के दौरान उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म के जौहर सीन पर सवाल उठाए थे। बयान के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि स्वरा ने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा है। भारी ट्रोलिंग के बाद मंगलवार को स्वरा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर सफाई दी। स्वरा ने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा, बल्कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। दिल्ली के इवेंट में दिए बयान पर शुरू हुआ विवादयह पूरा विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम' टॉक के दौरान शुरू हुआ था। इवेंट में स्वरा ने फिल्म के जौहर सीन का जिक्र करते हुए कहा की इससे रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने आगे कहा 'क्या हम सर्वाइवर्स को यही बताना चाहते हैं कि वे जीने के लायक नहीं हैं, कि अगर आप सच में इज्जतदार और बहादुर महिला होतीं, तो आपने खुद को मार लिया होता? क्या हम यह कह रहे हैं कि रेप किसी महिला की जिंदगी का अंत है?' एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है। स्वरा ने कहा था, यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही 'छी' कह दिया था। 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। इंस्टाग्राम वीडियो शेयर कर दी सफाईमंगलवार को स्वरा भास्कर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा, सोशल मीडिया पर मेरा एक क्लिप वायरल हो रहा है। मुझसे पूछा गया था कि पद्मावत देखने के बाद मैंने ओपन लेटर क्यों लिखा था। मैं साफ करना चाहती हूं कि मैंने रानी पद्मावती या महल की बाकी महिलाओं को कायर नहीं कहा। अगर गाली देनी है तो सही बात पर दीजिए। मैंने कहा था कि अगर मैं रेप पीड़िता होती, तो क्लाइमेक्स देखकर मुझे लगता कि रेप के बाद जिंदा बचकर मैंने कायरता दिखाई है। 'क्या महिला की पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है?'स्वरा ने कहा कि देश में आज भी रेप एक महामारी जैसा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है? उन्होंने निर्भया केस का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी। किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम नहीं आंकना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई बहसस्वरा के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका ने लिखा कि जब चुनाव मौत और हराम में गुलाम बनने के बीच हो, तो महिलाओं ने मौत को चुना, जो उनका एक फैसला था। इस पर जवाब देते हुए स्वरा ने लिखा, प्रियंका जी, आप असल बात नहीं समझ रही हैं। बात जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं। क्या रेप के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का हक नहीं है? क्या है पद्मावत का जौहर सीन फिल्म में जौहर का सीन क्लाइमैक्स के पास आता है। अलाउद्दीन खिलजी की सेना राजपूतों को हरा देती है और चित्तौड़ के किले में घुस जाती है। दीपिका पादुकोण का किरदार 'रानी पद्मावती' किले की महिलाओं के साथ जौहर करती हैं। फिल्म में इसे पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को आग के हवाले करने की घटना के तौर पर दिखाया गया है।

दैनिक भास्कर 2 Sep 2026 11:52 am

सुशांत की मैनेजर दिशा सालियान मौत की जांच CBI करेगी:हाईकोर्ट का आदेश; 2020 में एक्टर की मौत से 6 दिन पहले 14वीं मंजिल से गिरी थीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने FIR दर्ज करने और जांच अपने हाथ में लेने का भी निर्देश दिया है। दिशा की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह 28 साल की थीं। दिशा की मौत के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। दिशा की मौत मामले की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आने के बाद 2023 में इसे दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। हालांकि, दिशा के पिता सतीश सालियान ने जांच में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए नए सिरे से जांच की मांग की थी। उनका आरोप है कि दिशा के साथ गैंगरेप और हत्या हुई और मामले को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR की मांग भी की थी। CBI को जांच सौंपेगा पुलिस रिकॉर्ड हाईकोर्ट ने CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी को मामले की जांच की जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सतीश सालियान का बयान दर्ज करने और उसके आधार पर FIR दर्ज करने को कहा है। मालवणी पुलिस को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI को सौंपने होंगे। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिर्फ FIR में नाम होने से कोई व्यक्ति आरोपी नहीं माना जाएगा। जब तक जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री या सबूत नहीं मिलते, तब तक उसे आरोपी नहीं बनाया जाएगा। अगर जांच में कुछ नहीं मिलता है तो CBI को सारांश रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। पिता बोले- 6 साल से इसका इंतजार था हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिशा के पिता सतीश सालियान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा- मैं 6 साल से इसका इंतजार कर रहा था। खुश होने की कोई वजह नहीं है, मैंने अपनी बेटी को खोया है। आज मुझे राहत महसूस हो रही है। मैंने हाथ जोड़कर जज के प्रति आभार जताया। वकील बोले- आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली समेत कई बड़े नाम FIR में होंगे सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी देते हुए कहा कि CBI पहले सतीश सालियान का बयान दर्ज करेगी और फिर FIR दर्ज कर जांच शुरू करेगी। ओझा ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ जांच में सबूत मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ सबूत नहीं मिलता है तो उसे आरोपी नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर CBI की रिपोर्ट नकारात्मक आती है, तो परिवार को उस पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा। ओझा के मुताबिक, FIR में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, परमबीर सिंह, उद्धव ठाकरे, सचिन वाजे और पिछली SIT के उन सदस्यों के नाम भी आरोपी के तौर पर दिए गए हैं, जिन पर मामले को दबाने का आरोप है। कोर्ट ने पुलिस की जांच पर उठाए सवाल दिशा की मौत की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, पंचनामा और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट समेत जांच के कई पहलुओं पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि परिवार के संदेह जताने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। पुलिस ने पहले ADR दर्ज की थी और बाद में मौत को आत्महत्या बताया। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि ADR की जांच इतनी लंबी क्यों चली। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर, हाथ और छाती पर चोटों का जिक्र था कोर्ट को बताया गया कि दिशा का पोस्टमॉर्टम एक डॉक्टर ने किया था, जबकि दिशा-निर्देशों के मुताबिक दो डॉक्टर होने चाहिए थे। रिपोर्ट में सिर, हाथ, पैर और छाती पर चोटों का जिक्र था। वहीं, पुलिस ने कहा कि रेप या यौन हमले के सबूत नहीं मिले और गवाहों व फॉरेंसिक जांच के आधार पर दिशा के खुद इमारत से छलांग लगाने की बात सामने आई थी। 2025 के हलफनामे में भी पुलिस ने इसे आत्महत्या बताते हुए साजिश से इनकार किया था। पुलिस का पुराना दावा- आत्महत्या हुई थी मुंबई पुलिस ने अक्टूबर 2020 में दिशा की मौत को आत्महत्या मानकर जांच बंद कर दी थी। बाद में 2025 में हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में भी पुलिस ने कहा कि जांच में किसी तरह की साजिश नहीं मिली। पुलिस के मुताबिक, दिशा तनाव में थीं, घटना से पहले शराब के नशे में थीं और उनके मंगेतर ने भी किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था। 2023 में बनाई गई SIT के निष्कर्ष भी शुरुआती जांच से मेल खाते बताए गए थे। भाजपा नेता नितेश राणे ने भी CBI जांच की मांग की थी दिशा सालियान केस में महायुति के नेता लगातार आदित्य ठाकरे पर सवाल उठाते रहे हैं। भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे ने दिशा के साथ गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाया था और मामले की CBI जांच की मांग भी की थी। वहीं, भाजपा सांसद नारायण राणे ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उनसे दिशा सालियान केस में उनके बेटे आदित्य ठाकरे का नाम नहीं लेने को कहा था। उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया था। दिशा की मौत के बाद अपने अपार्टमेंट में मृत मिले थे सुशांत दिशा सालियान की मौत के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। उस समय सुशांत की उम्र 34 साल थी। मुंबई पुलिस ने शुरुआती जांच में उनकी मौत को आत्महत्या बताया था। बाद में सुशांत की मौत की जांच CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) तक पहुंची। दिशा और सुशांत की मौत के बीच सिर्फ छह दिन का अंतर होने के कारण दोनों मामले चर्चा में जुड़े रहे। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई थी। ------------------------------ यह खबर भी पढ़ें… ममता बनर्जी की भतीजी फंदे से लटकी मिलीं:शिक्षक भर्ती घोटाले में चली गई थी नौकरी, 2 साल से डिप्रेशन में थीं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भतीजी ब्रिष्टी मुखर्जी मंगलवार को बीरभूम जिले के कुसुंबा गांव के घर में फंदे से लटकी मिलीं। ब्रिष्टि, ममता के चचेरे भाई और तृणमूल नेता निहार मुखर्जी की बेटी थीं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 2 Sep 2026 11:22 am

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नेपाल पहुंचे सोनू सूद:भारत से लाए कंबल और राशन; बोले- अगले कई महीनों तक मदद जारी रखेंगे

बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद नेपाल में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए काठमांडू पहुंचे हैं। उनकी संस्था 'सूद चैरिटी फाउंडेशन' की टीम भारत से कंबल, राशन और अन्य जरूरी सामान लेकर नेपाल पहुंची है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में सोनू सूद ने कहा कि उनकी टीम प्रभावित परिवारों को फिर से स्थापित करने के लिए आने वाले कई महीनों तक लगातार राहत सामग्री भेजती रहेगी। नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 900 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। भारत से भेजा राहत सामान सोनू सूद ने बताया कि उनकी टीम जमीनी स्तर पर बाढ़ पीड़ितों की जरूरतों का जायजा ले रही है। सोनू ने कहा, हम यहां बाढ़ पीड़ितों से मिलने आए हैं। भारत से बहुत सारा सामान, राशन और कंबल लाए हैं। संकट के इस दौर में जरूरतमंदों के साथ खड़े होना हम सभी का फर्ज है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत से नेपाल तक राहत सामग्री पहुंचाना थोड़ा मुश्किल काम है, लेकिन उनकी फाउंडेशन यह सुनिश्चित करेगी कि आने वाले महीनों में भी पीड़ितों तक मदद पहुंचती रहे। नेपाल में बाढ़ से 900 से ज्यादा लोगों की मौतनेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 939 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 3,925 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रसुवा और नुवाकोट समेत कई जिलों में सेना और स्थानीय प्रशासन का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। वहीं नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास ने बाढ़ में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के शवों की पहचान के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। कोविड लॉकडाउन में बने थे मजदूरों के मददगारसोनू सूद का आपदाओं और संकट में लोगों की मदद करने का सिलसिला साल 2020 में कोरोना महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के समय शुरू हुआ था। उस समय मुंबई में फंसे हजारों प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि) भेजने के लिए सोनू ने बसों, ट्रेनों और विशेष फ्लाइट्स का इंतजाम किया था। उन्होंने प्रवासियों के खाने-पीने से लेकर रास्ते के पूरे खर्च की जिम्मेदारी उठाई थी। इसके बाद से ही वे लगातार सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। यूक्रेन संकट तक पहुंचाई सहायताकोरोना की दूसरी लहर के दौरान सोनू सूद ने देशभर में ऑक्सीजन सिलेंडर, कंसंट्रेटर और अस्पताल में आईसीयू बेड्स उपलब्ध कराने के लिए दिन-रात काम किया था। इसके बाद साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय उन्होंने यूक्रेन में फंसे कई भारतीय छात्रों को रोमानिया और पोलैंड की सीमाओं के रास्ते सुरक्षित भारत लाने में मदद की थी। सोनू अपनी फाउंडेशन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई, मुफ्त मेडिकल सर्जरी और हादसों के शिकार लोगों की आर्थिक मदद लगातार करते आ रहे हैं। ये खबर भी पढ़ें नेपाल बाढ़ में फंसी एक्ट्रेस मानसी भारत लौटीं:एयरपोर्ट पर बेटी को गले लगाकर भावुक हुईं; लैंडस्लाइड के बाद पैदल बॉर्डर पार किया नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्ट्रेस मानसी पारेख कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बीच फंसने के बाद सुरक्षित मुंबई लौट आई हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर वे अपने पति और बेटी को गले लगाकर भावुक दिखाई दीं। पूरी खबर पढ़ें

दैनिक भास्कर 2 Sep 2026 9:27 am

'मुझे चाइनीज मत बोलो, मैं इंडियन हूं...' मां ने बनाया था वीडियो, बेटी का जवाब सुनकर भावुक हुए लोग

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर की छोटी-सी बच्ची करगा टिंकल गोंगो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। टिंकल ने एक वीडियो में लोगों से कहा कि उसे चाइनीज न कहा जाए। उसका यह मासूम और भावुक वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया।

खास खबर 22 Aug 2026 12:28 pm

नदी में मगरमच्छ के सामने बच्चे का बेखौफ अंदाज, वीडियो ने मचाई सनसनी

नदी के पानी में मगरमच्छ को देखकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक बच्चे का बिल्कुल अलग ही अंदाज देखने को मिला। वीडियो में बच्चा नदी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम से नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है।

खास खबर 12 Aug 2026 2:30 pm

4,000 मीटर की ऊंचाई पर खिलता है 'हिमालयी हीरा', 7 से 15 साल में सिर्फ एक बार आता है फूल

प्रकृति अपने अनोखे और दुर्लभ चमत्कारों से समय-समय पर लोगों को हैरान करती रहती है।

खास खबर 1 Aug 2026 12:53 pm