बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में आ गए हैं। लंदन में आर्यन को एक मिस्ट्री गर्ल के साथ देखा गया, जिनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। यूजर्स ने इस मिस्ट्री गर्ल की पहचान आर्टिस्ट विनी तकायर के रूप में की है। दोनों को लंदन के एक कसीनो से बाहर निकलते हुए देखा गया, जिसके बाद से दोनों के डेटिंग की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस पर दोनों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लंदन कसीनो के बाहर साथ दिखे आर्यन और विनीतस्वीरों में आर्यन खान कैजुअल लुक में नजर आ रहे हैं। वे लंदन के एक कसीनो से बाहर निकलते दिख रहे हैं। उनके ठीक पास में विनी तकायर खड़ी हैं, जिन्होंने ऑल-ब्लैक आउटफिट पहना हुआ है। दोनों के एक साथ कसीनो से बाहर निकलने के बाद ही फैंस के बीच उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। विनी ने शेयर की तस्वीरें, लिखा- 'लंदन, आई एल वाई'तस्वीरें वायरल होने के तुरंत बाद विनी तकायर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लंदन ट्रिप की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। उन्होंने इन तस्वीरों के साथ कैप्शन लिखा, लंदन, आई एल वाई (London, ily)। विनी के इस पोस्ट के बाद दोनों के अफेयर की चर्चा और तेज हो गई। आर्यन और विनी इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो भी करते हैं। फिलहाल दोनों में से किसी ने भी इन खबरों पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है। पहले मॉडल लरिसा बोनेसी के साथ जुड़ा था नामयह पहली बार नहीं है जब आर्यन खान अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। इससे पहले उनका नाम ब्राजीलियन मॉडल और एक्ट्रेस लरिसा बोनेसी के साथ जोड़ा जा चुका है। लरिसा, आर्यन के लक्जरी कपड़ों के ब्रांड 'डी'यावोल एक्स' (D'YAVOL X) के कई विज्ञापनों में नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा वे आर्यन की बतौर डायरेक्टर पहली सीरीज 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' के प्रीमियर पर भी दिखाई दी थीं। डायरेक्शन और बिजनेस में करियर बना रहे हैं आर्यनशाहरुख खान के बड़े बेटे आर्यन खान एक्टिंग की जगह डायरेक्शन और बिजनेस में अपना करियर बना रहे हैं। उन्होंने अपने लक्जरी स्ट्रीटवियर ब्रांड के साथ बिजनेस की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने वेब सीरीज 'द बास्टर्ड्स ऑफ बॉलीवुड' से बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया है। आर्यन मीडिया और लाइमलाइट से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं, लेकिन उनके सोशल मीडिया आउटिंग्स अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं।
अभिनेता सोनू सूद ने देश छात्र प्रदर्शनों में शामिल युवाओं पर कंगना रनोट की टिप्पणी की आलोचना की है। हाल ही में कंगना ने प्रदर्शनकारी जेन-जी (Gen-Z) छात्रों को 'जनरेशन गटर' कहा था। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनू सूद ने कहा कि अगर कंगना ने ऐसा कहा है तो यह बहुत शर्मनाक है। सोनू ने कहा कि यही युवा कलाकारों को स्टार बनाते हैं और ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। उन्होंने मशहूर हस्तियों को सोच-समझकर बोलने की सलाह दी और जनता को भगवान का रूप बताया। कहा- सोच समझकर कर बोलना चाहिएमीडिया से बातचीत के दौरान सोनू सूद ने कहा कि उन्होंने कंगना का पूरा बयान नहीं सुना है, लेकिन इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। सोनू ने कहा, ये युवा ही हैं जो कलाकारों को बनाते हैं और आपको इस मुकाम तक पहुंचने में मदद करते हैं। जब तक वे आपके साथ खड़े हैं, आप आगे बढ़ते रहेंगे। अगर वे साथ नहीं हैं तो काम मुश्किल हो जाता है। इसलिए हर किसी को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कहावत है 'तोल-मोल के बोल', यानी बोलने से पहले अच्छे से सोच लेना चाहिए क्योंकि जनता भगवान का दूसरा रूप होती है। कंगना ने युवाओं को बताया था 'जनरेशन गटर'यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कई पोस्ट शेयर किए। इनमें उन्होंने सीजेपी (CJP) विरोध प्रदर्शनों में शामिल युवाओं पर निशाना साधा था। कंगना ने प्रदर्शनकारी युवाओं को 'जनरेशन गटर' कहते हुए आरोप लगाया था कि ये लोग शराब और नशे का महिमामंडन करते हैं और पैसों के लिए अपने माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। कंगना ने कहा था कि असली आजादी मेहनत से मिलती है, बिना कुछ कमाए आजादी की मांग करना गलत है। कंगना ने मीडिया पर लिखा था, सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है। वे स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी को कमाना नहीं चाहतीं। जो महिलाएं वास्तव में स्वतंत्र होती हैं, वे विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की जिम्मेदारी भी खुद उठाती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर जीवन जीती हैं। वे यह सब अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं। यह तथाकथित पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं की नई पीढ़ी है, जिन्हें मैं 'जनरेशन गटर' कहती हूं। उन्होंने आगे लिखा था, इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं और उनकी सोच इतनी बदसूरत तथा मानसिकता इतनी भ्रष्ट है कि वे अच्छी गृहिणी भी नहीं बन सकतीं। फिर भी वे नशा करने, शराब पीने या कई लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाने की अपनी तथाकथित आजादी का खुलेआम प्रदर्शन करती हैं। वे बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर निर्भर रहती हैं और वास्तव में आत्मनिर्भर हुए बिना स्वतंत्र जीवन जीने की मांग करती रहती हैं। एक विनम्र याद दिलाना: स्वतंत्र जीवन कमाना पड़ता है। अगर आप जिम्मेदारी उठाए बिना स्वतंत्र जीवन जीने की कोशिश करते हैं, तो आप सिर्फ एक विकृत व्यक्तित्व हैं - 'गटर छाप'। इसके अलावा कंगना ने एक और इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था, प्रदर्शनकारियों को आम लोग उनकी गंदी और अपमानजनक रीलों की वजह से सड़कों पर पीट रहे हैं और गालियां दे रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि जब बोलते हो तो सुनना भी पड़ेगा। अगर तुम सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हो, तो वही जनता भी तुम्हें नुकसान पहुंचाएगी। अगर तुम्हें देश और नेतृत्व से समस्या है और तुमने सार्वजनिक रूप से खूब गंदी-गंदी गालियां दी हैं, तो अब उनकी भी सुनो जो इस देश से प्यार करते हैं और इस सरकार को वोट की ताकत से लेकर आए हैं। क्योंकि बोलने का हक उन्हें भी है। अब रोने वाली कोई बात नहीं है।
एक्टर सुदेश बेरी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने उन्हें भगवान विष्णु का अवतार बताया और कहा कि अगर मौका मिला, तो वह उनके पैर धोकर उनका पानी पीना चाहेंगे। वहीं, उन्होंने CJP पार्टी पर भी निशाना साधा। सुदेश बेरी ने कहा कि जंतर-मंतर पर बैठी CJP देश को आगे नहीं, बल्कि पीछे खींच रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पार्टी का नाम तक ठीक से नहीं पता। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता एजीपी, सीजीपी... मैं तो इन लोगों को पहचानता भी नहीं हूं। मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि ये देश को पीछे खींच रहे हैं।' CJP पर निशाना साधते हुए सुदेश बेरी ने कहा, 'ये सब बेकार लोग हैं। इनके पास देश के लिए कोई काम नहीं है। अगर सच में समाज की सेवा करनी है, तो बच्चों के लिए गार्डन बनाएं, बुजुर्गों के लिए ओल्ड एज होम बनाएं और लोगों का इलाज कराएं। सिर्फ जंतर-मंतर पर बैठकर विरोध करने से कुछ नहीं होगा।' उन्होंने पार्टी के नाम पर भी तंज कसा। सुदेश बेरी ने कहा, 'कुछ अजीब से जानवर का नाम लेकर पार्टी बना दी। लकड़बग्घा पार्टी क्यों नहीं बनाते?' सुदेश बेरी ने मोदी की जमकर तारीफ की इंटरव्यू में सुदेश बेरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'नरेन्द्र मोदी ने बेचारे ने क्या बिगाड़ा है? उनको चाय बेचने दो। वो पूरी दुनिया में चाय बेचकर आए हैं।' बातचीत के दौरान इंटरव्यूअर ने सुदेश बेरी को याद दिलाया कि उन्होंने पहले अपनी मां के चरण धोकर उनका जल पिया था। इस पर उन्होंने कहा, 'अब मुझे मोदी जी के पैर धोकर पीना है। अगर आप मुझे मोदी जी से मिला दें। मैं तो उनसे मिला नहीं, मैं उनको जानता नहीं हूं। जैसे हमने ईश्वर को देखा नहीं है, फिर भी उनकी पूजा करते हैं, तो मैं भी उतनी ही इज्जत मोदी जी की करता हूं। तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है। कोई बुरी बात तो नहीं है? करता हूं तो करता हूं। पार्टियों से परे, राजनीति से परे, एक इंसान के तौर पर।' रामराज्य आने का भी दावा किया सुदेश बेरी ने यह भी कहा कि उनके मुताबिक देश में 'रामराज्य आ चुका है।' जब उनसे पूछा गया कि ऐसा कैसे, तो उन्होंने जवाब दिया, 'रामराज्य आ चुका है। जो मैं देख सकता हूं, वो आप नहीं देख पा रहे हैं। शब्दों में नहीं बता सकते, ये महसूस करने वाली बात है।' इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये लोग देश के लिए काम कर रहे हैं और इनके खिलाफ बिना वजह बोलना ठीक नहीं है।
कॉमेडी फिल्म की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है दर्शकों को हंसाना। फिल्म 'भाई तेरा स्टार है' इसी सबसे जरूरी काम में बुरी तरह नाकाम रहती है। फिल्म शुरुआत से आखिर तक यह भरोसा दिलाती रहती है कि अब कुछ मजेदार होने वाला है, लेकिन हर अगले सीन के साथ निराशा ही हाथ लगती है। शोर है, भागदौड़ है, गलतफहमियां हैं, लेकिन हंसी कहीं दिखाई नहीं देती। राघव जुयाल की पहली सोलो लीड फिल्म से जिस धमाके की उम्मीद थी, वह शुरुआत में ही हवा हो जाती है। फिल्म की कहानीकहानी लंदन में रहने वाले स्ट्रगलिंग एक्टर अजय सिंह (राघव जुयाल) की है। क्रिकेट की एक शर्त हारने के बाद उस पर क्लब मालिक फैटी (संजय कपूर) का दस हजार पाउंड का कर्ज चढ़ जाता है। पैसे लौटाने के लिए उसके पास सिर्फ एक रात है, लेकिन सच बोलने की बजाय अजय एक के बाद एक झूठ बोलता चला जाता है। उसकी गर्लफ्रेंड रोशनी (निहारिका एन एम), बहन नताशा (पार्वती ओमनाकुट्टन) और रोशनी का भाई सिड (विवान भटेना) भी इस झूठ के जाल में फंसते चले जाते हैं। कहानी का आइडिया सुनने में दिलचस्प लगता है। एक रात, ढेर सारी गलतफहमियां और भागदौड़ वाली कॉमेडी, लेकिन स्क्रीन पर सब कुछ इतना बिखरा हुआ है कि कुछ देर बाद यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कहानी आखिर जाना कहां चाहती है। कई सीन सिर्फ समय भरने के लिए जोड़े गए लगते हैं और क्लाइमैक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म पूरी तरह थका देती है। फिल्म में एक्टिंगराघव जुयाल ने किल जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से प्रभावित किया था, लेकिन यहां वह पूरी तरह लड़खड़ा जाते हैं। यह उनकी पहली सोलो लीड फिल्म है, लेकिन पूरी फिल्म में वह लीड हीरो से ज्यादा किसी साइड किरदार जैसे महसूस होते हैं। उनके चेहरे के हावभाव जरूरत से ज्यादा बनावटी लगते हैं और कई जगह ओवरएक्टिंग कॉमेडी को पूरी तरह खत्म कर देती है। कॉमिक टाइमिंग भी बार बार चूकती है, जिससे उनका किरदार दर्शकों से जुड़ ही नहीं पाता। संजय कपूर अपने अनुभव से कुछ दृश्यों को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उनके हाथ भी बांध देती है। विवान भटेना अपने सीमित स्क्रीन टाइम में असर छोड़ते हैं और कई जगह राघव से ज्यादा सहज नजर आते हैं। पार्वती ओमनाकुट्टन ने फिल्म में सबसे बैलेंस्ड परफॉर्मेंस दी है। निहारिका एन एम ईमानदार कोशिश करती हैं, लेकिन कमजोर राइटिंग उन्हें भी ज्यादा मौका नहीं देता। चन्दन रॉय सान्याल और निकी वालिया जैसे शानदार एक्टर्स के टैलेंट का फिल्म में बहुत कम इस्तेमाल हुआ है। फिल्म में डायरेक्शननिर्देशक विवेक बी अग्रवाल की सबसे बड़ी गलती यह है कि उन्होंने शोर को कॉमेडी समझ लिया। पूरी फिल्म में किरदार लगातार भागते हैं, चिल्लाते हैं और एक दूसरे के पीछे दौड़ते रहते हैं, लेकिन कोई भी सिचुएशन ऐसी नहीं बनती जिस पर खुलकर हंसी आए। स्क्रीनप्ले जरूरत से ज्यादा उलझा हुआ है। नए किरदार आते रहते हैं, लेकिन कहानी को मजबूत करने के बजाय उसे और बिखेर देते हैं। कई पंचलाइन बिना असर छोड़े निकल जाती हैं। गलतफहमियों पर टिकी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसकी राइटिंग होती है, लेकिन यहां वही सबसे कमजोर कड़ी साबित होती है। क्लाइमैक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म पूरी तरह अपनी पकड़ खो देती है। फिल्म का तकनीकी पहलूलंदन की लोकेशन अच्छी लगती है और सिनेमैटोग्राफी भी ठीक ठाक है। एडिटिंग अगर थोड़ी और कसी हुई होती तो फिल्म का असर कुछ बेहतर हो सकता था, लेकिन कमजोर कहानी और ढीले स्क्रीनप्ले के सामने तकनीकी पक्ष भी बेबस नजर आता है। फिल्म में म्यूजिकअमित त्रिवेदी का म्यूजिक फिल्म की कुछ गिनी चुनी अच्छी बातों में शामिल है। हालांकि गाने कहानी की रफ्तार को रोकते हैं। सबसे अजीब फैसला आखिर में लगातार गाने रखने का है, जिससे फिल्म खत्म होने के बाद भी खत्म होती हुई महसूस नहीं होती। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट'भाई तेरा स्टार है' एक ऐसी कॉमेडी फिल्म है, जिसमें सबसे ज्यादा कमी हंसी की है। कमजोर कहानी, बिखरा हुआ स्क्रीनप्ले, फीका निर्देशन और राघव जुयाल की निराशाजनक लीड परफॉर्मेंस मिलकर इस फिल्म को बेहद थका देने वाला अनुभव बना देते हैं। जिस फिल्म से राघव को बतौर सोलो हीरो नई पहचान मिलनी थी, वही फिल्म उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। अगर अच्छी कॉमेडी देखने की उम्मीद लेकर थिएटर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीद और आपका धैर्य दोनों तोड़ देगी।
भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट के साथ चल रही बयानबाजी के बीच सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उनके एक दोस्त ने उनसे कहा कि वह यंग ऋतिक रोशन जैसे दिखते हैं। दरअसल, 'द मोजो स्टोरी' पर पत्रकार बरखा दत्त से बातचीत में सौरव ने कहा कि उनके मन में कंगना के प्रति कोई निजी दुश्मनी नहीं है। सौरव ने कहा कि उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए भी कंगना से शांत रहने और बैठकर बातचीत करने की अपील की थी। उनके मुताबिक, मतभेदों का समाधान संवाद से होना चाहिए क्योंकि देश में चर्चा और बहस की संस्कृति लगातार कमजोर होती जा रही है। सौरव ने कहा कि उनके दोस्तों ने भी इस पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया, ‘मेरे दोस्त भी मुझे मैसेज कर रहे थे कि अब वो तुम्हारे पीछे क्यों पड़ी है? उनमें से एक ने कहा कि मैं थोड़ा-बहुत यंग ऋतिक रोशन जैसा दिखता हूं।’ हालांकि, इस पर सौरव ने हैरानी जताई। जब सौरव से पूछा गया कि क्या वह कंगना के साथ कॉफी पर मिलना चाहेंगे, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। उनके मुताबिक, उनके मन में किसी के लिए, यहां तक कि भाजपा सांसदों के प्रति भी, कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। सौरव दास के बयान पर कंगना भड़क गईं बता दें कि इससे पहले लगातार स्टूडेंट प्रोटेस्ट की आलोचना कर रहीं एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनोट कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास के बयान पर भड़क गईं। दरअसल, कंगना के प्रोटेस्ट विरोधी बयानों पर सौरव ने कहा कि उन्हें उनकी पार्टी तक सीरियसली नहीं लेती, तो बाकी लोगों को भी नहीं लेना चाहिए। सौरव के बयान पर कंगना भड़क गईं और जवाब में उन्हें बेरोजगार और बेकार कहा था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दरअसल, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद से ही कंगना रनोट लगातार सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी और स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ बयान दे रही हैं। मंगलवार को कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा था, प्रदर्शनकारियों को आम लोग उनकी गंदी और अपमानजनक रीलों की वजह से सड़कों पर पीट रहे हैं और गालियां दे रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि जब बोलते हो तो सुनना भी पड़ेगा। अगर तुम सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हो, तो वही जनता भी तुम्हें नुकसान पहुंचाएगी। अगर तुम्हें देश और नेतृत्व से समस्या है और तुमने सार्वजनिक रूप से खूब गंदी-गंदी गालियां दी हैं, तो अब उनकी भी सुनो जो इस देश से प्यार करते हैं और इस सरकार को वोट की ताकत से लेकर आए हैं। क्योंकि बोलने का हक उन्हें भी है। अब रोने वाली कोई बात नहीं है। इसके अलावा कंगना ने एक और इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था, सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है। वे स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी को कमाना नहीं चाहतीं। जो महिलाएं वास्तव में स्वतंत्र होती हैं, वे विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की जिम्मेदारी भी खुद उठाती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर जीवन जीती हैं। वे यह सब अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं। यह तथाकथित पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं की नई पीढ़ी है, जिन्हें मैं 'जनरेशन गटर' कहती हूं। उन्होंने आगे लिखा था, इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं और उनकी सोच इतनी बदसूरत तथा मानसिकता इतनी भ्रष्ट है कि वे अच्छी गृहिणी भी नहीं बन सकतीं। फिर भी वे नशा करने, शराब पीने या कई लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाने की अपनी तथाकथित आजादी का खुलेआम प्रदर्शन करती हैं। वे बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर निर्भर रहती हैं और वास्तव में आत्मनिर्भर हुए बिना स्वतंत्र जीवन जीने की मांग करती रहती हैं। एक विनम्र याद दिलाना: स्वतंत्र जीवन कमाना पड़ता है। अगर आप जिम्मेदारी उठाए बिना स्वतंत्र जीवन जीने की कोशिश करते हैं, तो आप सिर्फ एक विकृत व्यक्तित्व हैं - 'गटर छाप'।
90 के दशक में टीवी शो 'सुरभि' ने रेणुका शहाणे को घर-घर तक पहुंचा दिया था। उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था, लेकिन लाखों चिट्ठियां कलाकारों तक पहुंचती थीं। दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणुका शहाणे ने 'सुरभि' के दिनों की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि फैंस के खत उनके लिए खास होते थे। एक दिन उन्हें खून से लिखा पत्र मिला, जिसने उन्हें बुरी तरह डरा दिया था। उन्होंने 'हम आपके हैं कौन' के बाद फिल्मों के बजाय टीवी चुनने की वजह भी बताई। सवाल: आप करीब 10 साल तक 'सुरभि' जैसे ऐतिहासिक शो का हिस्सा रहीं। आज जब हर चीज सोशल मीडिया पर आ गई है, तो क्या आपको चिट्ठियों वाला दौर याद आता है? जवाब: बहुत याद आता है। वह बेहद खूबसूरत एहसास था, जिसे आज हम मिस करते हैं। उस समय फैंस लंबे खत लिखा करते थे। उन चिट्ठियों में सिर्फ हमारे लिए प्यार नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की बातें भी होती थीं। ऐसा लगता था कि हमारा उनसे व्यक्तिगत रिश्ता बन गया है। आज लोगों से संपर्क करना आसान हो गया है, लेकिन उस इंतजार की मिठास खो गई है। किसी जवाब का इंतजार करना भी अपने आप में खुशी होती थी। पुराने पोस्ट ऑफिस बॉक्स देखती हूं तो लगता है कि एक पूरा दौर वहीं छूट गया। सवाल: उस दौर में फैंस के खतों से जुड़ा कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद हो? जवाब: बहुत सारे हैं। सबसे ज्यादा मुझे स्कूल के बच्चों की चिट्ठियां याद आती हैं। 'सुरभि' उस समय बच्चों का भी पसंदीदा कार्यक्रम था। कई बच्चे नौवीं-दसवीं से मुझे खत लिखना शुरू करते थे और कॉलेज तक लिखते रहे। उनकी पढ़ाई, दोस्त और सपने, सब उन चिट्ठियों में होते थे। ऐसा रिश्ता आज शायद सोशल मीडिया पर बन पाना मुश्किल है। एक घटना मैं कभी नहीं भूल सकती। बचपन में सुनते थे कि राजेश खन्ना जी को खून से लिखे खत आते थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ भी ऐसा होगा। एक दिन मेरे घर पर खून से लिखा खत आया। उसे देखकर मैं सचमुच डर गई थी। मुझे लगा कि अगर कोई इंसान इस हद तक जा सकता है, तो ये प्यार नहीं बल्कि डराने वाली दीवानगी है। उस खत ने मुझे बहुत असहज कर दिया था। सवाल: इतना प्यार, इतनी लोकप्रियता, फिर भी क्या कभी लगा कि अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है? जवाब: नहीं। सच कहूं तो मुझे जितना मिला, उसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी। मैंने कभी आईने के सामने खड़े होकर अवॉर्ड लेने की स्पीच की प्रैक्टिस नहीं की। मैं इस क्षेत्र में इसलिए आई थी क्योंकि मुझे थिएटर से प्यार था। कब थिएटर मेरा पेशा बन गया और कब मुझे ऐसे मौके मिले जिन्होंने इतिहास रच दिया, यह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। इसलिए मुझे कभी नहीं लगा कि कुछ छूट गया। सवाल: 'हम आपके हैं कौन' के बाद भी आपने कई फिल्में ठुकरा दीं। ऐसा फैसला लेना आसान नहीं रहा होगा? जवाब: उस समय फिल्मों में लगभग एक जैसे किरदार मिल रहे थे। एक भूमिका पसंद आने के बाद उसी तरह के रोल बार-बार मिलने लगते थे। मुझे लगा कि टेलीविजन पर महिलाओं के लिए ज्यादा मजबूत और अर्थपूर्ण किरदार लिखे जा रहे हैं। वहां हर बार कुछ नया करने का मौका मिलता था। इसलिए मैंने फिल्मों की बजाय टीवी को प्राथमिकता दी। सवाल: लेकिन उस दौर में फिल्मों को मना करना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी? जवाब: शायद इसलिए कि मेरी महत्वाकांक्षा अलग थी। मेरा लक्ष्य सिर्फ लोकप्रिय होना नहीं था। मैं अच्छा काम करना चाहती थी। थिएटर ने मुझे सिखाया कि दर्शक पांच हों या पांच हजार, काम पूरी ईमानदारी से करना है। सफलता का मतलब सिर्फ स्टार बनना नहीं, बल्कि हर काम से कुछ नया सीखना भी है। मैंने हमेशा उसी सोच के साथ काम किया। सवाल: यानी आपके लिए लोकप्रियता से ज्यादा काम की गुणवत्ता मायने रखती थी? जवाब: बिल्कुल। मैं प्रशिक्षित अभिनेत्री नहीं थी। मैंने हर काम करते हुए सीखा। हर नए प्रोजेक्ट ने मुझे कुछ नया सिखाया। लोकप्रियता अपने आप मिलती चली गई। इसलिए मैंने कभी नहीं सोचा कि मुझे क्या हासिल करना है। मेरे लिए अच्छा काम करना ही सबसे बड़ी उपलब्धि रही। __________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. शाहरुख फिल्मों के बारे में नहीं सोचते थे:रेणुका शहाणे बोलीं- टीवी के बड़े स्टार थे, उन्हें देखने हजारों की भीड़ जुटती थी थिएटर से अभिनय की शुरुआत, पीएचडी छोड़कर एक्टिंग को करियर बनाना, शाहरुख खान के साथ 'सर्कस' में काम करने का अनुभव, निर्देशन की नई पारी और सोशल मीडिया पर बेबाक राय। दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणुका शहाणे ने करियर के कई किस्से साझा किए, जिनसे पता चलता है कि उन्होंने लोकप्रियता से ज्यादा अच्छे काम को महत्व दिया।पूरा इंटरव्यू पढ़ें.. सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे मराठी वेब सीरीज 'अगं आई अहो आई' में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि 'अगं आई' और 'अहो आई' का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है।पूरा इंटरव्यू पढ़ें...
फिल्म रामायण का ट्रेलर रिलीज:ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:15 बजे दुनिया भर में लॉन्च
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही बहुचर्चित फिल्म 'रामायण' का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर आज रिलीज हो गया है। मेकर्स ने इसे भारतीय समयानुसार 30 जुलाई सुबह 4:15 बजे, ब्रह्म मुहूर्त के शुभ अवसर पर दुनिया भर में लॉन्च किया। 'रामायण' के ट्रेलर को हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में एक साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज किया गया है। देखें ट्रेलर की झलक- रामायण के ट्रेलर ने जीता दर्शकों का दिल'रामायण' का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया। भव्य दृश्य, भगवान राम के किरदार और रावण बने यश के दमदार अंदाज की जमकर तारीफ हो रही है। एक यूजर ने लिखा, यह सिर्फ ट्रेलर नहीं, पीढ़ियों से जुड़ी एक भावना है। वहीं दूसरे ने कहा, कुछ फिल्में देखी जाती हैं, रामायण महसूस की जाती है। एक यूजर ने लिखा, रावण के किरदार में यश की कास्टिंग बेहतरीन है। जबकि साई पल्लवी के सीता रूप को देखकर लोगों ने कहा, मां सीता के रूप में साई पल्लवी दिव्य लग रही हैं। कई दर्शकों ने यह भी लिखा कि ट्रेलर देखने के उत्साह में वे पूरी रात सो नहीं पाए। इससे पहले फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा ने सोशल मीडिया पर ट्रेलर रिलीज की जानकारी दी थी कि हिंदू परंपरा में सुबह 4 से 5 बजे के बीच का समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है, जिसे किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए मेकर्स ने ट्रेलर रिलीज का समय चुना। रणबीर कपूर बने हैं भगवान राम, यश निभा रहे रावण का रोलफिल्म 'रामायण' में बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बड़े कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। रणबीर कपूर फिल्म में भगवान राम की भूमिका में हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। साउथ सुपरस्टार यश इस फिल्म में रावण के रोल में दिखेंगे। इसके अलावा सनी देओल हनुमान की भूमिका में हैं, जबकि रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय और कुणाल कपूर भी अहम भूमिकाओं में शामिल हैं। ऑस्कर विनर्स एआर रहमान और हैंस जिमर दे रहे म्यूजिकफिल्म के संगीत को लेकर भी काफी समय से चर्चा बनी हुई है। इस फिल्म में दो दिग्गज म्यूजिशियन एआर रहमान और ऑस्कर विजेता हैंस जिमर पहली बार एक साथ मिलकर बैकग्राउंड स्कोर और संगीत तैयार कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और एक्टर यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के तहत किया जा रहा है। इस ग्रैंड प्रोजेक्ट को दो भागों में बनाया जा रहा है, जिसका पहला पार्ट नवंबर 2026 में दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा। 4000 करोड़ के बजट में बन रही देश की सबसे महंगी फिल्म'दंगल' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म बना चुके डायरेक्टर नितेश तिवारी पिछले कई सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो भागों में बनने वाली इस फिल्म का कुल बजट 4000 करोड़ रुपए के करीब है, जो इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महंगी फिल्म बनाता है। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की जिम्मेदारी ऑस्कर विनिंग कंपनी DNEG संभाल रही है। फिल्म के पहले पार्ट की शूटिंग पूरी हो चुकी है और इस समय इसके पोस्ट-प्रोडक्शन का काम तेजी से चल रहा है। फिल्म 'रामायण' से जुड़ी अहम बातें-
हरियाणवी सॉन्ग बैरण से बिलबोर्ड तक पहुंच बनाने वाले सुमित-अनुज का नया सॉन्ग 'बरसात' अब हॉलीवुड तक पहुंच गया है। रिलीज होने के 20 दिनों के भीतर ही इसे हॉलीवुड फ्रेंचाइजी स्पाइडर मैन के लिए सिलेक्ट कर लिया गया। इस सीरिज की नई फिल्म 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' के लिए बरसात को इंडिया कैंपेन के लिए चुना गया है। 28 जुलाई को इस सॉन्ग की प्रमोशनल वीडियो भी रिलीज की गई। सॉन्ग में अभिनेता पीटर पार्कर की इमोशनल लव स्टोरी भी दिखाई गई। सिंगर्स का दावा है कि किसी हॉलीवुड स्टूडियो की फिल्म में चुने जाने वाला ये पहला हरियाणवी सॉन्ग है। दो दिन पहले रिलीज हुए इस सॉन्ग को 35 लाख से भी अधिक बार देखा जा चुका है। फिल्म में कैसे चुना गया ‘बरसात’ सॉन्ग फिल्म से कैसे जुड़ा सॉन्ग 'बरसात' 9 जुलाई को सोनी म्यूजिक इंडिया के साथ रिलीज हुआ था। रिलीज के साथ ही सॉन्ग तेजी से लोकप्रिय हुआ। इसके इमोशनल लिरिक्स और म्यूजिक को दर्शकों ने खूब पसंद किया। बाद में इसी सॉन्ग का स्पेशल मेल प्रमोशनल वर्जन तैयार किया गया, जिसे स्पाइडर-मैन के इंडियन प्रमोशन कैंपेन के लिए चुना गया। इसके बाद फिल्म के प्रमोशन के लिए बरसात का वीडियो 28 जुलाई को रिलीज किया गया। इसमें पीटर पार्कर और एमजे के रिश्ते की इमोशनल स्टोरी दिखाई गई है। इस प्रमोशनल सॉन्ग को बंजारे ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी शेयर किया। हॉलीवुड फिल्म में पहला हरियाणवी सॉन्ग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बरसात को पहला हरियाणवी सॉन्ग माना जा रहा है, जो हॉलीवुड स्टूडियो की फिल्म के इंडियन प्रमोशन कैंपेन में शामिल किया गया है। इसे सिर्फ बंजारे की सफलता नहीं, बल्कि हरियाणवी म्यूजिक और लैंग्वेज की ग्लोबल पहचान के रूप में भी देखा जा रहा है। रीजनल आर्टिस्ट्स के लिए खुलेगा नया रास्ता सिंगर सुमित और अजय ने दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए बताया कि ये सॉन्ग सिर्फ एक लव एंगल नहीं है। जब इसे फिल्म के प्रमोशन के रूप में चुना गया तो सबसे पहले अपने गांव, परिवार और हरियाणा की याद आई। उन्होंने कहा- एक ऐसा म्यूजिक बनाना है, जो लोगों के दिलों तक पहुंचे। हमारा सॉन्ग हरियाणवी लैंग्वेज को दुनिया के सबसे बड़े फिल्म प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने का जरिया बना है तो इससे बड़ी उपलब्धि कोई नहीं। सुमित और अनुज के बारे में जानिए…. सुमित के पिता PTI, भाई असिस्टेंट प्रोफेसर सुमित का जन्म 20 अप्रैल 1998 में हुआ। उनके पिता सत्यवान PTI टीचर हैं। उन्होंने अंबाला पॉलिटेक्निक से मैकेनिकल ट्रेड में कोर्स किया। उसके बाद हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीटेक की। सुमित भी गाने के साथ म्यूजिक कंपोज करते हैं। उनका छोटा भाई असिस्टेंट प्रोफसर है। अनुज के पिता JBT टीचर अनुज का जन्म 30 अगस्त 2002 को हुआ। इनके पिता राजेंद्र सिंह JBT टीचर हैं। अनुज की एक बड़ी बहन भी है। उन्होंने JRF क्वालीफाई किया हुआ है। अनुज जब तीसरी क्लास में थे तो उन्होंने स्टेज पर ‘यशोमती मैया से बोले नंदलाला’ भजन गया था। इसके बाद स्कूल टाइम में वह अलग-अलग प्रोग्रामों में हिस्सा लेने लगे। अनुज ने आठवीं क्लास में म्यूजिक में करियर बनाने की ठान ली। सरकारी नौकरी की कोशिश की अनुज बताते हैं कि उन्हें सिंगर बनना था। तब परिवार ने कहा कि पढ़ाई बेहद जरूरी है। इसलिए वे उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में MA की। इसके बाद नेट का एग्जाम भी क्रैक किया। सरकारी नौकरी की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद म्यूजिक में ही अपना करियर बनाने की ठान ली। पहले गाने के 40 हजार दिए, पसंद नहीं आया सुमित ने बताया कि उन्होंने 2019 में एक गाना लिखा था। वे अपने पहले गाने को कंपोज कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने परिवार से 40 हजार रुपए मांगे। उन्होंने हिसार में एक म्यूजिक प्रोड्यूसर से गाना तैयार करवाया, लेकिन उन्हें म्यूजिक पसंद नहीं आया। वे चाहते थे कि उनके लिरिक्स हर दिल तक पहुंचें। वे अपनी भावना को म्यूजिक प्रोड्यूसर तक ठीक से नहीं पहुंचा पाए, जिसकी वजह से मिस कम्युनिकेशन हुआ और गाना बेहतरीन नहीं बन पाया। इसके बाद 5 और गाने रिलीज किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। 28 नवंबर 2024 को पहला गाना रिलीज किया सुमित ने बताया कि 2024 में उन्होंने यूट्यूब पर बंजारा के नाम से चैनल बनाया। इसी ऑफिशल चैनल से अपने गाने रिलीज करने शुरू कर दिए। 28 नवंबर 2024 में 'सूट्स विद मी' पहला गाना रिलीज किया। उसके बाद उन्होंने दूसरा गाना 'डिफरेंट टॉक', आशिक आवारा, मौज, हाय रै और छठा गाना बैरण रिलीज किया। बैरण गाना लिखने से लेकर एनिमेटेड वीडियो रिलीज करने में डेढ़ साल का समय लगा। उन्होंने बार-बार इसके लिरिक्स बदले। --------------- यह खबर भी पढ़ें… बिलबोर्ड पर छाए हरियाणवी सिंगर भाइयों की कहानी:बैरण सॉन्ग में एनिमेटेड लव स्टोरी दिखाई; कोरोना में गाना शुरू किया, अब मुंबई से ऑफर हरियाणा में भिवानी जिले का गांव संडवा। इस गांव के रहने वाले दो चचेरे भाई सुमित और अनुज पूरे भारत में छाए हुए हैं। वजह- इनका नया हरियाणवी गाना बैरण। इस गाने में अनुज ने अपनी आवाज दी है, जबकि सुमित ने म्यूजिक कंपोज किया। (पूरी खबर पढ़ें)
भोपाल से मुंबई तक अन्नू कपूर का सफर संघर्षों से भरा रहा। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। परिवार चलाने के लिए उन्होंने चाय बेची, चाट का ठेला लगाया, लॉटरी टिकट बेचे और ऑटो रिक्शा चलाया। गरीबी ने उनका आईएएस बनने का सपना छीन लिया, लेकिन अभिनय ने नई पहचान दिलाई। जेब में सिर्फ 419 रुपए 25 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे अन्नू कपूर को चेहरे की वजह से रिजेक्ट किया गया, लेकिन अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर साबित किया कि असली हीरो चेहरा नहीं, हुनर होता है। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं अन्नू कपूर के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें… गरीबी ने छीन लिया आईएएस बनने का सपना 20 फरवरी 1956 को भोपाल के एक साधारण परिवार में जन्मे अन्नू कपूर का बचपन आर्थिक परेशानियों में बीता। उनके पिता मदनलाल कपूर पारसी थिएटर चलाते थे, जबकि मां कमल शबनम क्लासिकल गायिका और शिक्षिका थीं। घर में कला का माहौल था, लेकिन आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। अन्नू कपूर पढ़ाई में अच्छे थे और उनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था, लेकिन परिवार की हालत ने उन्हें यह सपना छोड़ने पर मजबूर कर दिया। परिवार चलाने के लिए किया हर छोटा-बड़ा काम जब घर की जिम्मेदारी आई तो उन्होंने कोई काम छोटा नहीं समझा। एक इंटरव्यू में अन्नू कपूर ने कहा था, मैंने अपनी जिंदगी चलाने के लिए चाय बेची, फ्राइड फूड का स्टॉल लगाया। कठिनाइयां मेरे जीवन में नई नहीं थीं। समस्याओं को तो मैंने बचपन से जिया है। चाय बेचने के अलावा उन्होंने चाट का ठेला लगाया, लॉटरी टिकट बेचे और ऑटो रिक्शा चलाया। उस समय उनके लिए सबसे जरूरी था कि किसी तरह परिवार का खर्च चलता रहे। लेकिन मुश्किलों के बीच अभिनय का सपना कभी खत्म नहीं हुआ। थिएटर बना जिंदगी बदलने का रास्ता बचपन से घर में थिएटर का माहौल था। पिता मंच पर अभिनय करते थे, इसलिए अन्नू कपूर का झुकाव रंगमंच की ओर बढ़ा। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) में दाखिला लिया। यहीं से उनकी अभिनय यात्रा को दिशा मिली। हालांकि यहां भी उन्हें संघर्ष करना पड़ा। एक बार मशहूर थिएटर निर्देशक बैरी जॉन एक नाटक के लिए कलाकार चुन रहे थे। ऑडिशन में अन्नू कपूर सबसे ज्यादा अंक लेकर पहले स्थान पर रहे, लेकिन चेहरे को किरदार के लिए उपयुक्त नहीं मानने के कारण उन्हें रोल नहीं मिला। इस घटना ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया। बाद में अन्नू कपूर ने इस घटना को याद करते हुए कहा था, मैं सबसे ज्यादा अंक लेकर आया था, लेकिन मुझे कहा गया कि तुम्हारे पास उस किरदार वाला चेहरा नहीं है। उस दिन मैं मानसिक रूप से बहुत परेशान हुआ था।'' यही वह पल था, जब उन्होंने तय किया कि अब उन्हें चेहरे से नहीं, अभिनय से पहचान बनानी है। 70 साल के बूढ़े का किरदार बना टर्निंग पॉइंट एनएसडी के दिनों में अन्नू कपूर ने नाटक 'एक रुका हुआ फैसला' में 70 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाया। तब उनकी उम्र करीब 25 साल थी, लेकिन अभिनय इतना प्रभावशाली था कि दर्शक उनकी असली उम्र का अंदाजा नहीं लगा पाए। संयोग से नाटक देखने निर्देशक श्याम बेनेगल भी पहुंचे थे। श्याम बेनेगल अन्नू कपूर की अदाकारी से प्रभावित हुए और उन्होंने उन्हें फिल्म 'मंडी' (1983) के लिए चुन लिया। यहीं से संघर्षरत थिएटर कलाकार के फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। एनएसडी में अभिनय की बारीकियां सीखने के बाद अन्नू कपूर के सामने सवाल था- अब आगे क्या? थिएटर पहचान दे रहा था, लेकिन रोजी-रोटी नहीं। ऐसे में उन्होंने मुंबई का रुख किया, जहां लाखों लोग सपनों के साथ आते हैं और हजारों सपने टूट जाते हैं। जेब में सिर्फ 419 रुपए 25 पैसे लेकर पहुंचे मुंबई मुंबई आने का फैसला आसान नहीं था। जेब में महज 419 रुपए 25 पैसे थे। रहने का ठिकाना पक्का नहीं था और फिल्मों में काम मिलने की गारंटी भी नहीं थी। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में अन्नू कपूर ने बताया था कि मुंबई आने के समय उनके पास सिर्फ 419.25 रुपए थे। उन्हें भरोसा था कि ईमानदारी से अभिनय करेंगे तो एक दिन पहचान जरूर मिलेगी। चेहरे की वजह से बार-बार हुए रिजेक्ट मुंबई पहुंचते ही उन्हें एहसास हुआ कि यहां सिर्फ अभिनय नहीं, चेहरा भी मायने रखता है। उस दौर में हिंदी फिल्मों में लंबे, गोरे और पारंपरिक हीरो जैसे दिखने वाले कलाकारों को प्राथमिकता मिलती थी। अन्नू कपूर इन मानकों पर फिट नहीं बैठते थे। रिजेक्शन लगातार मिल रहे थे, लेकिन उन्होंने तय कर लिया था कि अगर हीरो नहीं बन सकते, तो ऐसा अभिनेता बनेंगे जिसे लोग कभी भूल न सकें। श्याम बेनेगल ने बदली किस्मत एनएसडी के दौरान नाटक में उनका अभिनय देखकर निर्देशक श्याम बेनेगल पहले ही प्रभावित हो चुके थे। उन्होंने अन्नू कपूर को 1983 में फिल्म 'मंडी' में मौका दिया। रोल छोटा था, लेकिन इंडस्ट्री के बड़े निर्देशकों की नजर उन पर पड़ गई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। धीरे-धीरे उन्होंने 'उत्सव', 'चमेली की शादी', 'मिस्टर इंडिया', 'तेजाब', 'राम लखन' जैसी फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाए। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी भले कुछ मिनटों की होती, लेकिन दर्शक उन्हें नजरअंदाज नहीं कर पाते थे। हर किरदार में अलग पहचान बनाई अन्नू कपूर ने खुद को किसी एक तरह के रोल तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कॉमिक, गंभीर, खलनायक और भावनात्मक सभी तरह के किरदार निभाए। उनकी खासियत रही कि वह अपने किरदार को अभिनय नहीं, जीते थे। फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर कहा जाता है कि कोई रोल छोटा नहीं होता। अन्नू कपूर ने इसे अपने करियर से सच साबित किया। टीवी ने बना दिया घर-घर का चेहरा फिल्मों में काम मिल रहा था, लेकिन असली लोकप्रियता टीवी से मिली। 1993 में उन्होंने संगीत आधारित शो 'अंताक्षरी' होस्ट करना शुरू किया। उनका अंदाज अलग था। बेहतरीन हिंदी-उर्दू, हाजिरजवाबी, कविता, शायरी और संगीत ज्ञान ने उन्हें बाकी एंकरों से अलग बना दिया। धीरे-धीरे लोग शो से ज्यादा अन्नू कपूर को देखने लगे। रविवार की शाम 'अंताक्षरी' के समय परिवार टीवी के सामने बैठ जाता था। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक उनकी एंकरिंग के प्रशंसक बन गए। आज भी भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय होस्ट्स में अन्नू कपूर का नाम लिया जाता है। लेकिन इस शो से पहले साढ़े चार महीने तक अन्नू कपूर बेरोजगार रहे। जेब खाली थी और एक वक्त का खाना बचाने के लिए देर तक सोते थे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने उस दौर का जिक्र किया। साढ़े चार महीने ऐसा वक्त देखा, जब जेब में एक रुपया नहीं था अन्नू कपूर कहते हैं- मेरी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन 4 मई 1992 से शुरू हुआ साढ़े चार महीने का दौर मैं कभी नहीं भूल सकता। वो मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल समय था। मैं एक छोटे कमरे में रहता था, जिसका किराया सिर्फ एक हजार रुपए था। हालत ऐसी थी कि जेब में एक रुपए भी नहीं था। न कोई चेक था, न शूटिंग और न ही काम। पूरा दिन खाली गुजरता था। रात को दोस्तों के घर जाकर ताश खेलता था ताकि मन हल्का हो जाए। सुबह जानबूझकर देर से उठता था, क्योंकि देर से उठने पर सीधे लंच कर लेता था और एक वक्त का खाना बच जाता था। उस दौर ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। ड्राइवर ने कहा- बुरे वक्त में छोड़कर गया तो पाप लगेगा उसी मुश्किल दौर में मेरे ड्राइवर केशव दत्त ने जो साथ दिया, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मैंने उससे कहा था कि तू कहीं और नौकरी कर ले। मैं तुझे एचएलएल में एक बड़े अफसर के यहां लगवा देता हूं। वहां तुझे 750 रुपए की जगह 2000 रुपए तनख्वाह मिलेगी। उसने मेरी बात सुनकर कहा, सर, मैं ब्राह्मण हूं। अच्छे वक्त में आपको छोड़ दूं तो कोई बात नहीं, लेकिन बुरे वक्त में छोड़कर गया तो मुझे पाप लगेगा। अगर अभी आप तनख्वाह नहीं दे पा रहे हैं, तो भी मैं आपके साथ हूं। ऐसे वफादार लोग किस्मत वालों को ही मिलते हैं। 'अंताक्षरी' का पहला एपिसोड देखा और जिंदगी बदल गई करीब साढ़े चार महीने बाद दिल्ली में बनने वाली एक वीडियो फिल्म के लिए एक शख्स मुझे 5000 रुपए एडवांस देकर गया। इससे थोड़ी राहत मिली। लेकिन असली टर्निंग पॉइंट 3 सितंबर 1993 को आया। उस दिन मैं हमेशा की तरह दोस्त के घर ताश खेल रहा था। रात करीब आठ बजे दोस्त की पत्नी ने कहा, अरे अन्नू जी, आप टीवी पर दिख रहे हो। मैंने पलटकर देखा तो जी टीवी पर 'अंताक्षरी' का पहला एपिसोड चल रहा था, जिसे मैंने करीब डेढ़ महीने पहले शूट किया था। मैंने ताश के पत्ते नीचे रख दिए और पूरा शो देखा। शो खत्म होने के बाद दोस्त ने मुझसे कहा, पंडित की जुबान है, आज के बाद तुझे जिंदगी में कभी पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनकी बात सच साबित हुई। 'अंताक्षरी' ने मेरी जिंदगी बदल दी और उसके बाद मुझे फिर कभी वैसा संघर्ष नहीं करना पड़ा। स्टार नहीं, एक्टर कहलाना पसंद था जब कई कलाकार हीरो बनने की दौड़ में थे, तब अन्नू कपूर का नजरिया अलग था। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, मैं स्टार बनने नहीं आया था, मैं अभिनेता बनना चाहता था। स्टारडम कुछ समय का होता है, अभिनय हमेशा रहता है। यही सोच उनके पूरे करियर में दिखाई दी। उन्होंने कभी बड़े बैनर या बड़े रोल का इंतजार नहीं किया। जो किरदार मिला, उसे पूरी ईमानदारी से निभाया। 'विक्की डोनर' ने बदल दी करियर की तस्वीर करीब तीन दशक तक फिल्मों और टेलीविजन में काम करने के बाद 2012 में अन्नू कपूर के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट आया। निर्देशक शुजीत सरकार की फिल्म 'विक्की डोनर' में उन्होंने डॉ. बलदेव चड्ढा का किरदार निभाया। फिल्म का विषय अलग था और अन्नू कपूर का अभिनय इसकी बड़ी ताकतों में से एक माना गया। उनकी कॉमिक टाइमिंग, पंजाबी लहजा और किरदार की ऊर्जा ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीत लिया। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यह सम्मान उनके करीब तीन दशक के संघर्ष और मेहनत की पहचान बन गया। हर दौर में खुद को बदलते रहे अन्नू कपूर ने खुद को दोहराने के बजाय नए किरदार चुने। '7 खून माफ', 'ऐतराज', 'जॉली एलएलबी 2', 'ड्रीम गर्ल' जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि उम्र बढ़ने के साथ उनका अभिनय और परिपक्व हुआ है। उन्होंने वेब प्लेटफॉर्म, रेडियो और टेलीविजन पर भी काम किया। रेडियो शो 'सुहाना सफर विद अन्नू कपूर' में हिंदी सिनेमा और संगीत की जानकारी ने श्रोताओं को प्रभावित किया। अभिनय के साथ उनकी भाषा, साहित्य और संगीत की समझ भी उनकी अलग पहचान बनी। एक किस्सा जिसने उनकी सोच बदल दी अन्नू कपूर अक्सर कहते हैं कि संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है। उन्होंने बताया कि गरीबी ने उन्हें सिखाया कि किसी भी काम को छोटा नहीं समझना चाहिए। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था,मैंने जिंदगी में कोई काम छोटा नहीं माना। जो काम ईमानदारी से किया जाए, वही इंसान को आगे ले जाता है। शोहरत मिली, लेकिन जमीन से जुड़े रहे सफलता मिलने के बाद भी अन्नू कपूर ने अपने संघर्ष के दिनों को नहीं भुलाया। वह बताते हैं कि एक समय घर चलाना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया। उनका मानना है कि कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका हुनर होता है, न कि चेहरा या स्टारडम। रिजेक्शन को बनाया ताकत अन्नू कपूर की कहानी उन लोगों के लिए सीख है जो एक-दो असफलताओं के बाद हार मान लेते हैं। उन्हें कई बार सिर्फ इसलिए काम नहीं मिला क्योंकि वे पारंपरिक फिल्मी हीरो जैसे नहीं दिखते थे। लेकिन उन्होंने अपनी कमी को ताकत बना लिया। आज बॉलीवुड में उनका नाम उन कलाकारों में लिया जाता है जो किसी भी किरदार को यादगार बना सकते हैं। ____________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... हिट फिल्म के बाद भी 15 महीने बेरोजगार रहीं कृति:स्टारकिड्स ने छीने बड़े रोल, जिस किरदार पर सवाल उठे, उसी ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड आज कृति सेनन बॉलीवुड की सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उनके नाम नेशनल अवॉर्ड, कई सुपरहिट फिल्में और अपना प्रोडक्शन हाउस है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता रिजेक्शन, अकेलेपन, तानों और आत्मविश्वास की लड़ाई से होकर गुजरा है।पूरी खबर पढ़ें..
अभिनेत्री करिश्मा तन्ना और उनके पति वरुण बंगेरा माता-पिता बन गए हैं। 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन करिश्मा ने बेटे को जन्म दिया है। एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर अपने नवजात शिशु के पैर की मोनोक्रोम फोटो शेयर करके यह जानकारी दी। करिश्मा और वरुण ने अपने संयुक्त बयान में इस बच्चे को जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद बताया है। इस जानकारी के सामने आने के बाद फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के सितारों के साथ फैंस भी इस कपल को शुभकामनाएं दे रहे हैं। इंस्टाग्राम पर शेयर की बेटे के पैर की फोटोकरिश्मा और वरुण ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक संयुक्त पोस्ट में बच्चे के आगमन का ऐलान किया। शेयर की गई फोटो में बच्चे के पैर में एक टैग लगा नजर आ रहा है, जिस पर लिखा है 'ही इज हियर' (वह आ गया है)। फोटो के साथ पोस्ट में लिखा था, यह एक लड़का है! करिश्मा और वरुण। हमारा सबसे बड़ा आशीर्वाद, 29 जुलाई 2026। इसके साथ ही कैप्शन में करिश्मा ने लिखा, गुरु पूर्णिमा के पवित्र दिन जन्म हुआ... हमारा सबसे बड़ा आशीर्वाद यहां है। हमारी दुनिया में स्वागत है छोटे बच्चे। स्मृति ईरानी और सोनू सूद समेत कई सितारों ने दी बधाईसोशल मीडिया पर करिश्मा और वरुण की इस पोस्ट के बाद बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने कमेंट में लिखा, हार्दिक बधाई, भगवान भला करे। वहीं एक्टर सोनू सूद, खुशी कपूर, वामिका गब्बी, नेहा धूपिया, सोनल चौहान और कॉमेडियन कीकू शारदा ने भी कपल को कमेंट करके शुभकामनाएं दीं। फैंस भी लगातार इस पोस्ट पर रिएक्ट कर रहे हैं। देखें करिश्मा की प्रेग्नेंसी की तस्वीरें अप्रैल में दी थी प्रेग्नेंसी की जानकारीकरिश्मा तन्ना ने इसी साल अप्रैल के महीने में अपनी प्रेग्नेंसी की खबर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास फोटो के साथ लिखा था कि अगस्त में उनके घर छोटा मेहमान आने वाला है। इसके बाद मई में करिश्मा की तुलू रीति-रिवाज से गोद भराई (बेबी शावर) की रस्म हुई थी। इस पारंपरिक कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो भी करिश्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे। 2022 में बिजनेसमैन वरुण बंगेरा से की थी शादीकरिश्मा तन्ना और वरुण बंगेरा की पहली मुलाकात साल 2021 में एक कॉमन फ्रेंड की पार्टी में हुई थी। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया। कुछ महीनों की डेटिंग के बाद दोनों ने सगाई कर ली और 5 फरवरी 2022 को मुंबई में शादी के बंधन में बंध गए। करिश्मा की शादी में हल्दी, मेहंदी और संगीत समेत तमाम रस्में पारंपरिक तरीके से हुई थीं, जिसमें टीवी और बॉलीवुड के कई कलाकार शामिल हुए थे। 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से करियर की शुरुआतकरिश्मा तन्ना टीवी और ओटीटी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने साल 2001 में मशहूर टीवी शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे 'नागिन 3', 'अदालत' और 'बालवीर' जैसे कई धारावाहिकों में नजर आईं। उन्होंने रियलिटी शो 'बिग बॉस 8' में हिस्सा लिया था और 'खतरों के खिलाड़ी 10' की विनर भी रहीं। फिल्म 'संजू' (2018) के अलावा उन्होंने 2023 में हंसल मेहता की नेटफ्लिक्स सीरीज 'स्कूप' में पत्रकार जागृति पाठक का मुख्य किरदार निभाया था, जिसके लिए उन्हें काफी सराहना मिली थी।
असम में जारी भीषण बाढ़ के बीच बॉलीवुड अभिनेताओं ने मदद के हाथ बढ़ाए हैं। अभिनेता सलमान खान और अभिनेत्री आलिया भट्ट पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आए हैं। सलमान खान ने अपनी चैरिटेबल संस्था 'बीइंग ह्यूमन' के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में बहु-स्तरीय राहत अभियान शुरू किया है। वहीं, आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया पर अपील जारी कर देशवासियों से असम के बाढ़ पीड़ितों की मदद करने का अनुरोध किया है। असम में मानसून की भारी बारिश के चलते लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। सलमान ने फैन क्लब के साथ मिलकर शुरू किया राहत कार्य मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक सलमान खान की संस्था 'बीइंग ह्यूमन' ने असम में जमीनी स्तर पर काम करने के लिए अपने स्थानीय फैन क्लब के साथ हाथ मिलाया है। अभियान के पहले चरण में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैयार भोजन के पैकेट और अन्य जरूरी सामान बांटे जा रहे हैं। राहत सामग्री में पीने का पानी, दवाइयां, सेनेटरी पैड्स और मच्छर भगाने वाली रिपेलेंट क्रीम शामिल हैं। आने वाले हफ्तों में इस अभियान के तहत सूखा राशन, अस्थायी आश्रय सामग्री और बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए स्कूलों व अस्पतालों के पुनर्निर्माण में मदद की जाएगी। 'हर साल आती है यह त्रासदी': आलिया भट्ट ने जताया दुखअभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर असम के हालात पर चिंता जताई। आलिया ने लिखा, इस समय देश के कई हिस्से बाढ़ से प्रभावित हैं, जिसमें असम सबसे ज्यादा मुश्किल दौर से गुजर रहा है। 60 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। परिवारों ने अपने घर, जमीन, मवेशी और अपनों को खो दिया है। उन्होंने आगे लिखा कि यह आपदा हर साल आती है, फिर भी लोग इसके लिए तैयार नहीं हो पाते। आलिया ने वादा किया कि वे जल्द ही मदद के लिए जमीनी संगठनों की जानकारी साझा करेंगी। आयुष्मान खुराना-ताहिरा कश्यप ने भी की मदद वहीं अभिनेता आयुष्मान खुराना और उनकी पत्नी ताहिरा कश्यप ने असम में जारी भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इस दंपति ने असम मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक योगदान दिया है, जिसका उपयोग बाढ़ पीड़ित परिवारों के राहत और पुनर्वास कार्यों में किया जाएगा। सामाजिक कार्यों में लगातार सक्रिय रहने वाले आयुष्मान और ताहिरा इससे पहले भी संकट के समय मदद के लिए आगे आते रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया था, साथ ही कचरा बीनने वाली महिलाओं को सशक्त बनाने वाली दिल्ली की संस्था 'गुलमेहर' का भी समर्थन किया था। इसके अलावा, आयुष्मान यूनिसेफ (UNICEF) इंडिया के राष्ट्रीय एंबेसडर भी हैं और बच्चों के अधिकारों, शिक्षा व उनके कल्याण के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं। असम में बिगड़े हालात, 75 से ज्यादा लोगों की मौतअसम में जुलाई के मध्य से मूसलाधार बारिश और ऊपरी इलाकों में जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ के चलते अब तक 75 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। राज्य के शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट, गोलाघाट और नौगांव समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ से 3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न हो चुकी है। ये खबर भी पढ़ें स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी के ऑफिस पहुंचे सलमान खान:बुजुर्गों को चाबियां दीं, हाथ मिलाया, फिल्म मातृभूमि से जुड़ा सवाल करने से इनकार बॉलीवुड एक्टर सलमान खान शुक्रवार को SRA (स्लब रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी) के दफ्तर पहुंचे, जहां उन्होंने कई बुजुर्गों को उनके सपनों के घर की चाबियां सौंपीं। एक्टर टाइट सिक्योरिटी के साथ पहुंचे थे, इसके बावजूद भीड़ ने उन्हें घेर लिया। सलमान खान के पर्सनल सिक्योरिटी हैड शेरा भी उनके साथ मौजूद रहे। सलमान ने वहां मौजूद बुजुर्ग महिलाओं को उनके घरों की चाबियां दीं और मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया। पूरी खबर पढ़ें
बॉलीवुड एक्टर सनी देओल ने कहा- फिल्म में मैं किसी धर्म का चेहरा नहीं, बल्कि इंसानियत का चेहरा दिखाना चाहते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि हालात इंसान को तोड़ देते हैं, लेकिन अंत में जीत हमेशा इंसानियत की ही होती है। अंत में न कोई धर्म बचता है, न कोई मजहब... सबसे बड़ी चीज इंसानियत है और उससे भी बड़ी हमारी मां होती है। आज समाज में जिस तरह हर बात को धर्म और राजनीति से जोड़कर देखा जाता है, वे खुद को इससे हमेशा दूर रखते आए हैं। सनी ने कहा- मैं कभी ऐसी फिल्में नहीं करता जो लोगों को बांटती हों। लोग कई बार फिल्मों को अलग नजरिए से देखने लगते हैं, जबकि उनका उद्देश्य बिल्कुल अलग होता है। 'गदर' भी मेरे लिए कभी हिंदू-मुस्लिम फिल्म नहीं थी, वह एक परिवार और एक प्रेम कहानी थी। दरअसल, बॉलीवुड एक्टर सनी देओल, अपने बेटे करण देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ बुधवार को अपनी आगामी फिल्म 'बंटवारा 1947' के प्रमोशन के लिए जयपुर पहुंचे। इस दौरान तीनों दैनिक भास्कर कार्यालय पहुंचे और फिल्म, अपने लंबे फिल्मी सफर, भारत-पाक विभाजन, इंसानियत, समाज और सिनेमा की जिम्मेदारी पर खुलकर बातचीत की। यह पार्टिशन फिल्म जरूर है, लेकिन फैसला नहीं सुनाती सनी देओल ने कहा- फिल्म भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी जरूर है, लेकिन यह तय नहीं करती कि कौन सही था और कौन गलत। यह कहानी रिश्तों के टूटने और फिर जुड़ने की है। भटका हुआ इंसान सही रास्ते पर लौटता है। युवा इस फिल्म को देखेंगे तो उन्हें जिंदगी की कई ऐसी बातें समझ आएंगी, जो शायद आज उन्हें दिखाई नहीं देतीं। सिनेमा समाज को दिशा देने का माध्यम भी है। हमने हमेशा कोशिश की है कि फिल्मों के जरिए समाज को कुछ लौटाया जाए। 'बंटवारा 1947' भी ऐसी ही फिल्म है। दर्शक जब थिएटर से बाहर निकलेंगे तो उनके दिल में सबसे पहले मां के लिए सम्मान और इंसानियत का भाव होगा। सनी देओल ने बताया- पंजाब के गांवों में बचपन बिताने के दौरान उन्होंने विभाजन की अनेक सच्ची कहानियां सुनीं। लोग मारने वालों की बातें करते हैं, लेकिन जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरे धर्म के लोगों को बचाया, उनकी कहानियां कम सुनाई जाती हैं। हमारी फिल्म उन्हीं इंसानों को सलाम करती है। मां की सेवा सबसे बड़ा कर्म है सनी देओल ने भावुक होते हुए कहा- फिल्म का सबसे बड़ा संदेश मां और मानवता है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह फिल्म किसी को निराश नहीं करेगी। इसमें मनोरंजन है, एक्शन है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा एक मजबूत संदेश है। मां की सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं। फिल्म का एक संवाद है, 'कोई मजहब बुरा नहीं होता, अच्छा-बुरा इंसान होता है।' यही इस फिल्म का सार है। राजस्थान से मेरा रिश्ता बहुत पुराना है राजस्थान से अपने लगाव का जिक्र करते हुए सनी देओल ने कहा- रिश्ता बचपन से इस प्रदेश से जुड़ा है। पापा (धर्मेंद्र) के साथ बचपन से यहां आता रहा हूं। यहां कई फिल्मों की शूटिंग की है। मौका मिलता है तो राजस्थान की सड़कों और गांवों में खुद गाड़ी चलाकर घूमने निकल जाता हूं। यहां एक अलग ही शांति और खुलापन महसूस होता है। राजस्थान मेरे सबसे पसंदीदा राज्यों में से एक है। 'सिकंदर मिर्जा मेरा सबसे ताकतवर किरदार है' निर्देशक राजकुमार संतोषी ने कहा- 'बंटवारा 1947' का नायक सिकंदर मिर्जा उनके अब तक लिखे गए सबसे सशक्त किरदारों में से एक है। सुपरमैन वह नहीं जो आसमान में उड़ता है। असली सुपरमैन वह है, जो नफरत और सांप्रदायिकता के सामने खड़ा होने की हिम्मत रखता है। सिकंदर मिर्जा ऐसा ही इंसान है। यह किरदार अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के अधिकार और सम्मान के लिए लड़ता है। दूसरे का दर्द महसूस करना ही असली इंसानियत है। सिकंदर मिर्जा वही करता है। वह नफरत के माहौल में भी अपने जमीर को मरने नहीं देता। 'दामिनी' के गुस्से से लेकर 'बंटवारा' की संवेदना तक संतोषी ने बताया- मेरी फिल्मों में समाज के प्रति गुस्सा हमेशा निजी अनुभवों से आया है। उन्होंने याद किया कि उनकी मां और दादी सालों तक अदालतों के चक्कर लगाती रहीं। वहीं से 'दामिनी' जैसी फिल्मों की संवेदनाएं पैदा हुईं। बंटवारा 1947 फिल्म में भी दर्द है, लेकिन यहां संघर्ष केवल बाहरी नहीं, भीतर का भी है। आदमी परिस्थितियों से भी लड़ता है और अपने जमीर को बचाने की लड़ाई भी लड़ता है। राजकुमार संतोषी ने सनी देओल की अभिनय शैली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सनी अभिनय नहीं करते, किरदार को जी लेते हैं। 'घातक', 'दामिनी', 'घायल' के संवाद आज भी इसलिए याद हैं क्योंकि उन्होंने उन्हें पूरी सच्चाई और विश्वास के साथ बोला। 'बंटवारा 1947' में भी सनी देओल ने सिकंदर मिर्जा के किरदार को पूरी ईमानदारी से जिया है। मैंने उन्हें कहा था कि यह आपकी सामान्य एक्शन फिल्म नहीं है। यह परिवार, मां-बेटे, पति-पत्नी और इंसानियत के रिश्तों की फिल्म है। उन्होंने बिना एक पल सोचे इसे स्वीकार कर लिया। पिता के सामने अभिनय नहीं, भावनाएं खुद निकल आईंफिल्म में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा रहे करण देओल ने कहा कि यह उनके लिए अभिनय से कहीं बढ़कर अनुभव था। स्क्रीन पर मेरे सामने मेरे असली पिता थे। भावनात्मक दृश्यों में अभिनय करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। कई सीन में हम दोनों सचमुच भावुक हो गए। राज सर और आमिर सर ने मुझ पर भरोसा किया, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।
विशाल ददलानी ने सोशल मीडिया पर जेन-जी प्रदर्शन का समर्थन किया है। हाल ही में भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनोट ने छात्रों की भाषा शैली और सोशल मीडिया रील को ‘उल्टी आने जैसा’ बताया था। इसके जवाब में विशाल ददलानी ने कहा कि छात्रों की भाषा पर सवाल उठाने से पहले यह देखना चाहिए कि उनके साथ सड़क पर कैसा बर्ताव किया गया। विशाल ने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं, आंसू गैस के गोले दागे गए और पत्थरबाजी की गई। 'आपने बच्चों को सड़क पर पीटा, तो गालियां ही मिलेंगी'विशाल ददलानी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक सख्त पोस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने लिखा, खराब भाषा!? आपने सड़क पर बच्चों को पीटा। उन पर पत्थर फेंके और आरोप भी उन्हीं पर लगा दिया। उन पर गोलियां चलाईं, आंसू गैस के गोले छोड़े और पेलेट गन का इस्तेमाल किया। आपके भाड़े के गुंडे अभी भी उन्हें डरा रहे हैं और पीट रहे हैं। आपने ये गालियां खुद कमाई हैं मेरे दोस्त। विशाल ने अपने पोस्ट में हंसने वाला इमोजी लगाकर तंज भी कसा। पेड कैंपेन और इन्फ्लुएंसर पर उठाए सवालविशाल ददलानी ने युवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे कैंपेन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए पेड स्टोरी और इन्फ्लुएंसर के जरिए कैंपेन चलाए जा रहे हैं। विशाल के मुताबिक, इस तरह की हरकतों से अपनी बात सही साबित करने की कोशिश करना और ज्यादा दयनीय लगता है। विशाल से पहले कई अन्य हस्तियों ने भी छात्रों के साथ हुए पुलिस बर्ताव पर सवाल उठाए थे। कंगना ने नई जनरेशन की महिलाओं को कहा- गटर छाप इससे पहले सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को गटर कहा। कंगना का कहना है कि ये महिलाएं स्वतंत्र महिलाओं की नकल उतारते हुए नशे करने, शराब पीने और अनगिनत आदमियों से यौन संबंध बनाने को स्वतंत्रता कहती हैं। कंगना ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन से लिखा है, 'सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। असल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।' आगे कंगना ने लिखा, 'आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें 'गटर जेनरेशन' कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।' 'इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं, नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं और लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, 'गटर छाप'।' स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कहा था- कैसी परवरिश हो रही है भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने सोमवार को स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर भी विवादित राय दी और नई जनरेशन की परवरिश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से लिखा, ‘अपनी पूरी जिंदगी में मैंने कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों की ये रीलें देखकर घिन आती है। इन लोगों के बोलने का तरीका और जिस भाषा का ये इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर फ्रेम इतना अजीब और परेशान करने वाला है कि देखकर घिन होती है। आखिर इन्हें जन्म कौन दे रहा है और इनकी परवरिश कौन कर रहा है?’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ भी दिए कई बयान कंगना रनोट ने सोशल मीडिया के जरिए स्टूडेंट प्रोटेस्ट का जमकर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि किसी को पद से हटाने या रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मुद्दों पर बहस के लिए संसद सही जगह है, न कि आंदोलन। कंगना ने कहा था की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। इसके बाद जब प्रोटेस्ट खत्म हुआ तो कंगना ने प्रदर्शनकारियों की भाषा की आलोचना की। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ विवादकॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। संसद की तरफ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस के बल प्रयोग के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए थे। कंगना ने इन वीडियो में इस्तेमाल भाषा पर निशाना साधा था, जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स और बॉलीवुड हस्तियों ने कंगना के बयान का विरोध किया और छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई।
पॉपुलर सिंगर और रैपर बादशाह की शादी में अनबन चल रही है। उनकी शादी 5 महीने पहले ही पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी से हुई थी। मंगलवार को ईशा ने एक पोस्ट शेयर कर तलाक का हिंट दिया और कहा कि वो अब तक बादशाह के पावर के डर से चुप थीं। इसी बीच अब ईशा की मां और बादशाह की सास ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अगर तुम किसी का जीना मुश्किल करोगे, तो भगवान तुम्हारा मरना मुश्किल कर देंगे। ईशा रिखी की मां ने सोशल मीडिया पर लिखा है, 'कर्म लौटकर आते हैं। तुम किसी का जीना मुश्किल करोगे, भगवान तुम्हारा मरना मुश्किल करेंगे।' अगली पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'कर्म कभी माफ नहीं करता। रुलाया है, तो रोना भी निश्चित है। कर्म से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं है। कर्म का लेखा कभी झूठा नहीं होता। कर्म समय आने पर न्याय जरूर करता है। बिना पक्षपात के ईश्वर तुम्हें शायद माफ भी कर दे, लेकिन तुम्हारे कर्म तुम्हें कभी माफ नहीं करेंगे।' बादशाह की पत्नी ईशा ने कहा- डर से चुप थी पूनम रिखी की ये पोस्ट तब सामने आई हैं, जब बादशाह की पत्नी ईशा ने मंगलवार को सोशल मीडिया से तलाक का हिंट देते हुए लिखा- कुछ लड़ाइयां ऐसी भी होती हैं, जिनके जख्म बाहर दिखाई नहीं देते। मैं बहुत लंबे समय तक चुप रही, क्योंकि मैं डरी हुई थी। मुझे लगता था कि मेरे पति के पास इतना इन्फ्लूएंस, पावर और रीसोर्स हैं कि उनके सामने मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी। मैंने खुद को यही समझा लिया था कि चुप रहना ही मेरे लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है। आगे ईशा ने लिखा है, ‘चुप्पी कभी स्वीकार नहीं की जाती, वह सिर्फ अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश थी। आज मैं डर नहीं, बल्कि हिम्मत को चुन रही हूं। शायद मैं अभी पूरी कहानी बताने के लिए तैयार नहीं हूं, लेकिन अब मैं यह दिखावा करना बंद करने के लिए तैयार हूं कि सब कुछ ठीक था।’ बादशाह के साथ शादी की तस्वीरें पोस्ट कीं, लिखा- तूफान एक सबक है इस क्रिप्टिक पोस्ट से कुछ दिन पहले ही ईशा ने बादशाह के साथ कुछ तस्वीरें और वीडियोज शेयर कर लिखा था, कुछ तूफान, सबक लेकर आता है और हर दुआ उम्मीद। ईशा की इस पोस्ट पर करीबी दोस्त जैस्मिन भसीन ने कमेंट कर उन्हें मजबूत बने रहने की सलाह दी थी। बता दें कि ईशा रिखी की पोस्ट सामने आने के बाद कई करीबी और दोस्त उनके समर्थन में पोस्ट शेयर कर रहे हैं। एक करीबी ने लिखा है, तुम जिस दौर से गुजर हो और अब भी गुजर रही हो, उसकी मैं गवाह हूं। मैं और तुम्हारे करीब रहने वाले बाकी लोग जानते हैं कि तुमने हर मुश्किल का सामना ईमानदारी, सच्चाई और पूरे आत्मसम्मान के साथ किया है। मजबूत बनी रहो, ईशा रिखी। हम तुम्हारे साथ हैं, और सच के साथ भी। वहीं एक ने लिखा, स्ट्रॉन्ग रहो, डर कर नहीं। एक करीबी ने लिखा, तुम बहुत स्ट्रॉन्ग और सुंदर हो। सोशल मीडिया के जरिए कन्फर्म की शादी सिंगर और रैपर बादशाह ने मार्च 2026 में ईशा से गुपचुप शादी की थी। इंटिमेट वेडिंग में कपल के करीबी ही शामिल हुए थे। बादशाह ने शादी को राज रखा, हालांकि ईशा रिखी ने सोशल मीडिया में रोमांटिक तस्वीर पोस्ट कर इस पर कन्फर्मेशन दी। वहीं ईशा ने एक फैन के सवाल का जवाब देते हुए बादशाह को पति देव कहा था। इससे पहले ईशा की मां ने उनकी और बादशाह की शादी की तस्वीरें पोस्ट कर दोनों को सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दी थीं। कौन हैं ईशा रिखी? तलाक के बाद बादशाह ने की ईशा से शादी बादशाह ने साल 2012 में जैस्मिन मसीह से शादी की थी। 2017 में बादशाह बेटी के पिता बने, लेकिन 3 साल बाद ही उनका तलाक हो गया। तलाक के 6 साल बाद बादशाह ने ईशा से दूसरी शादी की है। बादशाह ने फिलहाल कभी शादी पर बात नहीं की है।
टेलीविजन की पॉपुलर एक्ट्रेस श्वेता तिवारी के पूर्व पति राजा चौधरी ने उन पर कई अफेयर होने के संगीन आरोप लगाए हैं। राजा ने दावा किया है कि उनका कसौटी जिंदगी की एक्टर सेजान खान के साथ भी अफेयर था और एक्टर ने उनके सामने ये कबूल भी किया था। राजा चौधरी ने सिद्धार्थ कानन को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘सिर्फ सेजान खान ही नहीं श्वेता के कई और लोगों के साथ भी अफेयर थे। मुझे लगता है कि उसका हर एक इंसान के साथ ही अफेयर था।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जो मैंने उस समय देखा, उससे ये साबित भी हुआ। वो उसके (सेजान खान) के साथ काम कर रही थी, उसके घर में रह रही थी। हमारे एक कॉमन दोस्त के सामने उसने कन्फेस भी किया है कि वो उसके साथ यहां आती थी। यहां तक कि उसने (सेजान ने) मेरे सामने कबूल किया है कि हां हमारा अफेयर है, तेरे में हिम्मत है तो आ जा मेरे घर कोलीवाड़ा। मैंने उससे कहा कि क्या अब ये लड़ाई-झगड़े करने बैठूंगा तेरे साथ। अपना ही सिक्के में खोट है। लेकिन श्वेता ने कभी कबूल नहीं किया।’ बातचीत में राजा चौधरी ने ये भी दावा किया है कि कई बार वो श्वेता के टीवी शोज के सेट पर गए थे, तब वो सेट पर नहीं होती थीं और सेजान के साथ बाहर होती थीं। पूछने पर कहती थीं डबिंग है, लेकिन जब राजा ने डबिंग वालों से पूछा तो जवाब मिला कि कोई डबिंग नहीं चल रही। राजा ने ये भी दावा किया कि श्वेता लंबे समय तक रोड के किनारे सेजान के साथ कार में समय बिताती थीं। राजा चौधरी ने मारपीट के दावे को नकारा बातचीत में राजा चौधरी ने श्वेता तिवारी पर हाथ उठाने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि गुस्से में उन्होंने गालियां दी हैं, सामान तोड़ा है, लेकिन कभी एक्ट्रेस पर हाथ नहीं उठाया। 1998 में परिवार के खिलाफ जाकर श्वेता ने की थी शादी श्वेता तिवारी ने 1998 में परिवार के खिलाफ जाकर राजा चौधरी से शादी की थी। तब वह महज 18 साल की थीं। शादी के बाद श्वेता तिवारी ने 2000 में बेटी पलक को जन्म दिया। इसी समय उन्होंने टीवी शो आने वाला पल से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। उन्हें 2001 के शो कसौटी जिंदगी की से देशभर में पहचान मिली। श्वेता ने राजा के साथ रियलिटी शो नच बलिए में हिस्सा लिया था। कुछ समय बाद ही शादी के करीब 9 साल बाद, 2007 में श्वेता ने तलाक की अर्जी दी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राजा चौधरी शराब पीते थे और उनके साथ मारपीट करते थे। श्वेता के मुताबिक, राजा अक्सर उनके शूटिंग सेट पर भी पहुंच जाते थे और उनके साथ बदसलूकी करते थे। दोनों का तलाक 2012 में हुआ। इसके बाद श्वेता तिवारी ने अभिनेता अभिनव कोहली को करीब तीन साल तक डेट करने के बाद 13 जुलाई 2013 को शादी की। 27 नवंबर 2016 को उनके बेटे रेयांश कोहली का जन्म हुआ। हालांकि, 2017 से ही दोनों के रिश्ते में अनबन की खबरें आने लगी थीं। अगस्त 2019 में श्वेता ने अभिनव कोहली के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनव उन्हें और उनकी बेटी पलक को परेशान करते थे। शिकायत के बाद पुलिस ने अभिनव को हिरासत में लिया। इसके बाद 2019 में दोनों अलग हो गए। वहीं दूसरी तरफ राजा चौधरी ने 2015 में दिल्ली की कॉर्पोरेट प्रोफेशन श्वेता सूद से शादी की। शादी के 7 साल बाद उनका तलाक हो गया।
1987 में टीवी पर सुपरहिट 'रामायण' बनाने वाली सागर पिक्चर्स एंटरटेनमेंट अब बड़े पर्दे पर 'श्रीमद्भागवतम' लेकर आ रही है। स्टूडियो ने घोषणा की है कि यह 7 फिल्मों की एक बड़ी सिनेमाई सीरीज होगी। इसकी शुरुआत 'श्रीमद्भागवतम पार्ट-1' से होगी। इस सीरीज की परिकल्पना और निर्माण रामानंद सागर के पोते अमृत सागर चोपड़ा और आकाश सागर चोपड़ा ने किया है। दोनों इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं और अमृत सागर पहले पार्ट का निर्देशन भी कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्माण सागर पिक्चर्स ग्लोबल कर रहा है। वहीं, आध्यात्मिक गुरु और लेखक श्री एम इस प्रोजेक्ट के रिसर्च गाइड हैं, जबकि मोती सागर इसके मेंटर हैं। रामोजी फिल्म सिटी में शुरू हुई शूटिंग फिल्म की शूटिंग रामोजी फिल्म सिटी, हैदराबाद में शुरू हो चुकी है। इसका शुभारंभ तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने किया था। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी जोएल शेफर कर रहे हैं, जबकि ऑस्कर विजेता विजुअल इफेक्ट्स विशेषज्ञ क्लाइड एडवर्ड्स इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। सागर पिक्चर्स एंटरटेनमेंट ने बताया कि यह प्रोजेक्ट दिवंगत डॉ. रामानंद सागर और लीला सागर को समर्पित है। आने वाले महीनों में 'श्रीमद्भागवतम पार्ट-1' से जुड़ी अन्य अहम जानकारियां भी शेयर की जाएंगी। यह फिल्म महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित भागवत महापुराण पर आधारित होगी। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके उपदेशों और भगवान विष्णु के कई अवतारों की कहानियों को बड़े पैमाने पर दिखाया जाएगा। फिल्म का मकसद इन धार्मिक कथाओं को आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल्स के साथ दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाना है। सागर पिक्चर्स एंटरटेनमेंट के सीईओ आकाश सागर ने कहा कि 'श्रीमद्भागवतम' भारत की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और साहित्यिक कृतियों में से एक है। इसकी कहानियां बेहद विशाल और गहरी हैं। हमारी कोशिश है कि इन्हें पूरी प्रामाणिकता और भव्यता के साथ बड़े पर्दे पर पेश किया जाए। इस सीरीज में दर्शकों को श्रीकृष्ण का बाल और किशोर जीवन, रासलीला, गोपी गीत, समुद्र मंथन, मत्स्य, वराह और नरसिंह अवतार, ध्रुव, भरत, पृथु और कपिल जैसे कई प्रसिद्ध और कम चर्चित प्रसंग देखने को मिलेंगे। सागर पिक्चर्स एंटरटेनमेंट के बारे में
लगातार स्टूडेंट प्रोटेस्ट की आलोचना कर रहीं एक्ट्रेस और सासंद कंगना रनोट कॉकरोच जनता पार्टी के स्पोक्सपर्सन सौरव दास के बयान पर भड़क गईं। दरअसल, कंगना के प्रोटेस्ट विरोधी बयानों पर सौरव ने कहा कि उन्हें उनकी पार्टी तक सीरियसली नहीं लेती है, तो बाकी लोगों को भी नहीं लेना चाहिए। सौरव के बयान पर कंगना भड़क गईं और जवाब में उन्हें बेरोजगार और बेकार कहा। कंगना रनोट के विरोधी बयानों पर बात करते हुए सौरव ने एएनआई से कहा, ‘देखिए, कंगना रनोट जी को उनकी पार्टी वाले ही उन्हें नहीं पूछते, ज्यादा सीरियसली नहीं लेते, तो हम क्यों लें। मुझे नहीं लगता कि जेन जी में या जेन अल्फा में या कोई यंगर जनरेशन में उन्हें कोई सीरियसली नहीं लेता।’ आगे सौरव ने कहा, ‘वो पॉलिटिशियन हैं, नेता भी बन गई हैं। उनके तो कुछ वीडियो भी हैं, जब वो मंडी गई थीं। उन्होंने कहा था कि मैंने तो सोचा था कि थोड़ा बहुत काम करना पड़ेगा, यहां तो सांसद बनकर इतना काम करना पड़ता है। ये उनकी सीरियसनेस दिखाता है। वो हमें अनसीरियस बोल रही हैं, उन्होंने खुद को ही एक्सपोज कर दिया था। इस पर मैं ज्यादा कुछ बोलूंगा नहीं। शब्दावली सही नहीं है। शब्दावली संभाल लेना चाहिए नेताओं को। पद की गरिमा बनाकर रखना चाहिए। आपसे कहीं गुना ज्यादा जेन जी ने देश के लिए किया और कर रहे हैं। देश के लोकतंत्र पर भरोसा जगाने का काम जेन जी ने किया है, आपने नहीं।’ सौरव दास का बयान सामने आने पर कंगना रनोट भड़क गईं और सोशल मीडिया पर लिखा, मैंने गुगल किया है, ये लड़का 28 साल का है, ये खुद को स्टूडेंट कैसे बोल रहा है, समझ नहीं आता। हां मैं पिछले 2 साल से राजनीति में हूं, लेकिन पिछले 20 साल से पब्लिक लाइफ जी रही हूं। उसकी उम्र तक आते-आते मैं 2 नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी थी। हां, एक नई सांसद के तौर पर मैं काम के बोझ से अभिभूत हो गई थी, क्योंकि मैं एक फिल्ममेकर, परफॉर्मिंग आर्टिस्ट, प्रोड्यूसर, स्क्रीनराइटर, आंत्रप्रन्योर भी हूं। आगे कंगना ने लिखा, ‘जो व्यक्ति पूरी तरह बेकार और बेरोजगार हो, वह कभी नहीं समझ सकता कि किसी भी उम्र में हर समय इतनी ज्यादा डिमांड में रहने का क्या मतलब होता है। डियर सौरव दास, तुम्हारी प्रॉब्लम पर्सनल हैं। तुम स्टूडेंट नहीं हो, तुम सिर्फ बेकार हो। चलो स्किल्स सीखने से शुरू करते हैं, शुरुआत करने के लिए यह एक अच्छी जगह है।’ सौरव दास ने कंगना की पोस्ट पर दिया था रिएक्शन दरअसल, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद से ही कंगना रनोट लगातार सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी और स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ बयान दे रही हैं। मंगलवार को कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा था, 'प्रोटेस्टर्स जो सड़कों पर आम लोगों द्वारा पीटे जा रहे हैं और गाली खा रहे हैं, उनकी घटिया और अब्यूसिव रील की वजह से, उन्हें समझना चाहिए कि जब बोलते हो तो सुनना भी पड़ेगा, अगर तुमको देश और लीडरशिप से प्रॉब्लम है और तुमने पब्लिकली खूब गंदी गंदी गालियां दी तो अब उनकी सुनो जो देश से प्यार करते हैं और इस सरकार को वोट की पावर से लेकर आए हैं, क्योंकि बोलने का हक उनको भी है। अब रोने की कोई बात नहीं।' कौन हैं सौरव दास
हरियाणा के रहने वाले सिंगर रेशम सिंह अनमोल ने दावा किया है कि खराब पेट्रोल की वजह से डिफेंडर खराब होने संबंधी वीडियो वायरल होने के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो जारी कर सफाई दी है। रेशम ने कहा, मेरी गाड़ी सच में खराब हुई थी। मैंने कंपनी के सर्विस सेंटर में जाकर उसे ठीक कराया और मेरे पास उसका बिल भी है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं एजेंडा चला रहा हूं या पैसे लेकर एथेनॉल के खिलाफ वीडियो बना रहा हूं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। मुझे जब कहीं भी प्योर पेट्रोल नहीं मिला, तब परेशान होकर मैंने वह वीडियो बनाया था। दो पॉइंट में जानिए सिंगर ने क्या कहा… 'प्रोपेगेंडा फैलाने की बात कर रहे लोग' रेशम सिंह अनमोल ने कहा, “दो-तीन दिन पहले मैंने एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें बताया था कि खराब पेट्रोल की वजह से मेरी डिफेंडर में दिक्कत आ गई थी। इसके बाद से मुझे कई लोगों के फोन आ रहे हैं। कोई कह रहा है कि मैं प्रोपेगेंडा फैला रहा हूं, कोई इसे मेरा एजेंडा बता रहा है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि मैंने पैसे लेकर वीडियो बनाया है। वहीं, कुछ लोग मुझे धमकियां भी दे रहे हैं।” ‘27 मई को खराब हुई थी मेरी डिफेंडर’ रेशम ने आगे कहा, मैं यह साफ करना चाहता हूं कि यह दिक्कत अभी नहीं आई। मेरी डिफेंडर 27 मई को खराब हुई थी। यह उसका बिल भी है। कंपनी ने उसमें नया फ्यूल पंप लगाया था। वीडियो मैंने उस दिन बनाया, जब मुझे प्योर पेट्रोल नहीं मिला। मैं पांच-छह पेट्रोल पंपों पर गया, लेकिन कहीं भी XP100 या XP95 नहीं मिला। परेशान होकर मैंने वह वीडियो बनाया था। ‘पंपों पर एथेनॉल की जानकारी लिखी होनी चाहिए’ रेशम ने कहा, जब हम पेट्रोल पंप पर जाकर पूछते हैं कि XP95 में कितने प्रतिशत एथेनॉल है, तो हर जगह अलग-अलग जवाब मिलता है। कोई 8 प्रतिशत बताता है तो कोई 5 प्रतिशत। मैं सरकार से अपील करता हूं कि हर पेट्रोल पंप पर नोटिस लगाया जाए, ताकि लोगों को पता चल सके कि पेट्रोल में कितना एथेनॉल है। आम लोग इस वजह से काफी परेशान हैं। मेरे वीडियो के बाद भी बहुत से लोगों के मैसेज आए हैं। मैंने कोई प्रोपेगेंडा नहीं फैलाया है। हमारे लिए सभी राजनीतिक पार्टियां एक जैसी हैं। अब जानिए सिंगर के भाई ने दैनिक भास्कर को क्या बताया... बाढ़ में खराब हुई रेंज रोवर, फिर खरीदी डिफेंडर रेशम सिंह अनमोल के बड़े भाई और नंबरदार डॉ. निर्मल सिंह नकटपुर ने बताया कि पहले अनमोल के पास रेंज रोवर स्पोर्ट्स थी। 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान राहत कार्य करते समय गाड़ी पहले पेड़ की टहनी से क्षतिग्रस्त हुई, फिर बाढ़ के पानी में फिसल गई। इसके बाद 7 नवंबर 2025 को अनमोल ने करीब 1.55 करोड़ रुपए में सफेद रंग की डिफेंडर-110 खरीदी। अनमोल को ट्रैक्टर ज्यादा पसंद हैं, लेकिन यह गाड़ी उन्होंने शौक से खरीदी थी। शो जाते समय खराब हुई गाड़ी, फिर वायरल हुआ वीडियो नकटपुर ने बताया कि 27 मई 2026 को शो के लिए जाते समय रास्ते में डिफेंडर अचानक बंद हो गई। कंपनी की सलाह पर गाड़ी को दादा मोटर्स, चंडीगढ़ ले जाया गया, जहां जांच में फ्यूल पंप खराब मिला और उसे बदल दिया गया। चार दिन पहले जब अनमोल छात्रों के जंतर-मंतर धरने में समर्थन देने चंडीगढ़ से दिल्ली जा रहे थे, तब उन्हें पांच पेट्रोल पंपों पर भी XP100 हाई-स्पीड पेट्रोल नहीं मिला। इसी के बाद उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- हरियाणा के सिंगर बोले-E20 पेट्रोल से नई डिफेंडर खराब हुई:गाड़ी का फ्यूल पंप बदलवाना पड़ा; 8 महीने पहले ₹1.55 करोड़ में खरीदी देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज घटने, इंजन खराब होने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसे दावे किए जा रहे हैं। इसी बीच, हरियाणा के रहने वाले पंजाबी सिंगर रेशम सिंह अनमोल का एक वीडियो चर्चा में है। इसमें वह 8 महीने पहले खरीदी करीब 1.55 करोड़ रुपए की अपनी डिफेंडर-110 के रास्ते में अचानक बंद होने का किस्सा बता रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
थिएटर से अभिनय की शुरुआत, पीएचडी छोड़कर एक्टिंग को करियर बनाना, शाहरुख खान के साथ 'सर्कस' में काम करने का अनुभव, निर्देशन की नई पारी और सोशल मीडिया पर बेबाक राय। दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणुका शहाणे ने करियर के कई किस्से साझा किए, जिनसे पता चलता है कि उन्होंने लोकप्रियता से ज्यादा अच्छे काम को महत्व दिया। सवाल: आपकी अभिनय यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? क्या बचपन से ही अभिनेत्री बनने का सपना था? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैं मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही थी। कॉलेज में एक नाटक 'अंधेर नगरी' का मंचन होना था। मैं संगीत मंडल का हिस्सा थी, इसलिए बैकग्राउंड वोकल्स देने गई थी। वहीं पहली बार मैंने स्क्रिप्ट से स्टेज तक नाटक तैयार होते देखा। उस प्रक्रिया ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैंने तय कर लिया कि मुझे थिएटर का हिस्सा बनना है। उस समय अभिनेत्री बनने का सपना नहीं था, लेकिन थिएटर से प्यार हो गया था। सवाल: फिर थिएटर से जुड़ने का मौका कैसे मिला? जवाब: मेरी मां के मित्र पंडित सत्यदेव दुबे अक्सर हमारे घर आते थे। हर बार मुझसे पूछते थे, 'अभिनय करोगी?' और मैं मना कर देती थी। लेकिन कॉलेज के अनुभव के बाद जब वे दोबारा आए और उन्होंने वही सवाल पूछा, तो मैंने पहली बार कहा, 'हां, करूंगी।' इसके बाद उनके साथ वर्कशॉप की, एक्सपेरिमेंटल मराठी थिएटर किया और वहीं से सफर शुरू हो गया। सवाल: आपने तो क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमए भी किया था। फिर पीएचडी क्यों नहीं की? जवाब: मेरा इरादा पीएचडी करने का ही था। क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमए के बाद मैंने 'सर्कस' सीरियल किया। उसी दौरान निर्देशक अजीज मिर्जा ने मुझसे कहा, 'अब पीछे मत देखो, पीएचडी छोड़ दो। तुम्हें अभिनय में ही आगे बढ़ना चाहिए।' उनकी बात मान ली। उसके बाद मुझे 'सुरभि' का ऑफर मिला और जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। सवाल: 'सर्कस' के दौरान शाहरुख खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार। उस समय शाहरुख फिल्मों के बारे में नहीं सोच रहे थे। उन्हें टेलीविजन में काम करने में मजा आता था। लेकिन उनकी लोकप्रियता तब भी जबरदस्त थी। 'फौजी' आ चुका था और लोग उनके दीवाने थे। जहां हम शूटिंग करते थे, वहां उन्हें देखने के लिए 10-20 हजार लोगों की भीड़ जुट जाती थी। तभी समझ में आ गया था कि उनमें कुछ अलग बात है। सवाल: क्या तब लगा था कि वे इतने बड़े सुपरस्टार बनेंगे? जवाब: सुपरस्टार बनेंगे, ऐसा शायद किसी ने नहीं सोचा था। लेकिन इतना जरूर महसूस होता था कि उनका करिश्मा बाकी कलाकारों से अलग है। और सिर्फ करिश्मा ही नहीं, उनके काम करने का तरीका भी कमाल का है। आज भी उनकी ऊर्जा, अनुशासन और वर्क एथिक्स वैसे ही हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: आज टीवी पर पहले जैसी गहरी कहानियां क्यों नहीं बन रहीं? जवाब: पहले वीकली शोज होते थे, इसलिए कहानी पर बहुत मेहनत होती थी। आज डेली सोप्स का दौर है। हर महीने इतने सारे एपिसोड बनाने हों तो उसी स्तर की गहराई बनाए रखना आसान नहीं होता। फिर भी मैं लेखकों और पूरी टीम को श्रेय देती हूं कि वे लगातार लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। मुझे आज भी लगता है कि अच्छे वीकली शोज की वापसी होनी चाहिए। सवाल: अभिनय के बाद आपने निर्देशन की तरफ भी कदम बढ़ाया है, अभी डायरेक्शन में नया क्या कर रही हैं? जवाब: मैंने हाल ही में 'तर्पण' नाम की शॉर्ट फिल्म बनाई है, जिसमें पहली बार अपने पति आशुतोष राणा को डायरेक्ट किया। शुरुआत में हम दोनों थोड़ा घबराए हुए थे, लेकिन अनुभव शानदार रहा। आशुतोष इतने बेहतरीन अभिनेता हैं कि उन्हें निर्देशित करना मेरे लिए सीखने जैसा अनुभव था। सवाल: निर्देशन की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: मैंने डॉ. विजया मेहता को असिस्ट किया था। उनके साथ काम करते हुए निर्देशन की प्रक्रिया करीब से देखी। मुझे लगा कि मेरे पास फिल्म स्कूल की डिग्री नहीं है, लेकिन उनसे जो सीखा वही मेरी सबसे बड़ी शिक्षा है। तभी तय कर लिया था कि एक दिन अपनी कहानियां खुद लिखूंगी और निर्देशित भी करूंगी। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में महिला निर्देशकों की संख्या आज भी कम है। इसकी वजह क्या मानती हैं? जवाब: मुझे लगता है कि इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक भरोसा है। अगर किसी पुरुष निर्देशक ने कई फ्लॉप फिल्में भी दी हों, तब भी लोग उन पर पैसा लगाने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा भरोसा कम देखने को मिलता है। हालात बदल रहे हैं, लेकिन कैमरे के पीछे महिलाओं की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। सवाल: अगर आपकी बायोपिक बने तो उसमें आपकी जिंदगी का कौन-सा पक्ष सबसे ज्यादा दिखना चाहिए? जवाब: मुझे लगता है कि अच्छी मां और अच्छी नागरिक के रूप में मेरा जीवन ज्यादा महत्वपूर्ण है। लोग शायद इसे बहुत ग्लैमरस न मानें, लेकिन समाज के लिए यही सबसे जरूरी भूमिकाएं हैं। सवाल: आज सोशल मीडिया और लाइक्स का बहुत दबाव है। आप इसे कैसे देखती हैं? जवाब: मेरे लिए शायद इसलिए आसान है क्योंकि मुझे आज तक सोशल मीडिया की वजह से काम नहीं मिला। मुझे हमेशा काम की वजह से काम मिला है। दूसरी बात, मैं एक कैरेक्टर एक्टर हूं, इसलिए हर समय परफेक्ट दिखने का दबाव नहीं रहता। सोशल मीडिया अच्छा माध्यम है, लेकिन अगर हम अपनी खुशी और आत्मविश्वास को लाइक्स के भरोसे छोड़ देंगे, तो यह सही नहीं होगा। आखिरकार पहचान आपके काम से बनती है, न कि सिर्फ सोशल मीडिया से। _____________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे मराठी वेब सीरीज 'अगं आई अहो आई' में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि 'अगं आई' और 'अहो आई' का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है।पूरा इंटरव्यू पढ़ें...
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही बहुचर्चित फिल्म 'रामायण' के मेकर्स ने इसके ट्रेलर रिलीज के समय का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। फिल्म का ट्रेलर 30 जुलाई को भारतीय समयानुसार तड़के 4:15 बजे दुनिया भर में रिलीज किया जाएगा। मेकर्स ने इस खास समय को हिंदू परंपरा के अनुसार पवित्र माने जाने वाले ब्रह्म मुहूर्त के साथ जोड़कर चुना है। मेकर्स ने एक नया पोस्टर जारी करके लिखा कि हम शुभ ब्रह्म मुहूर्त में अपने ट्रेलर के साथ रामायण की नई भोर का स्वागत करते हैं। ब्रह्म मुहूर्त के खास समय पर होगा ग्लोबल रिलीजफिल्म के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर कर यह घोषणा की। हिंदू धर्म में सुबह के 4 से 5 बजे के बीच के समय को ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है, जिसे किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए बेहद शुभ कहा गया है। मेकर्स का मानना है कि भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े महाकाव्य पर आधारित इस फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था। फिल्म के इस ट्रेलर को एक साथ हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज किया जाएगा। रणबीर कपूर बने हैं भगवान राम, यश निभा रहे रावण का रोलफिल्म 'रामायण' में बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बड़े कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। रणबीर कपूर फिल्म में भगवान राम की भूमिका में हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। साउथ सुपरस्टार यश इस फिल्म में रावण के रोल में दिखेंगे। इसके अलावा सनी देओल हनुमान की भूमिका में हैं, जबकि रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय और कुणाल कपूर भी अहम भूमिकाओं में शामिल हैं। ऑस्कर विनर्स एआर रहमान और हैंस जिमर दे रहे म्यूजिकफिल्म के संगीत को लेकर भी काफी समय से चर्चा बनी हुई है। इस फिल्म में दो दिग्गज म्यूजिशियन एआर रहमान और ऑस्कर विजेता हैंस जिमर पहली बार एक साथ मिलकर बैकग्राउंड स्कोर और संगीत तैयार कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और एक्टर यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के तहत किया जा रहा है। इस ग्रैंड प्रोजेक्ट को दो भागों में बनाया जा रहा है, जिसका पहला पार्ट नवंबर 2026 में दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा। 4000 करोड़ के बजट में बन रही देश की सबसे महंगी फिल्म'दंगल' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म बना चुके डायरेक्टर नितेश तिवारी पिछले कई सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो भागों में बनने वाली इस फिल्म का कुल बजट 4000 करोड़ रुपए के करीब है, जो इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महंगी फिल्म बनाता है। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की जिम्मेदारी ऑस्कर विनिंग कंपनी DNEG संभाल रही है। फिल्म के पहले पार्ट की शूटिंग पूरी हो चुकी है और इस समय इसके पोस्ट-प्रोडक्शन का काम तेजी से चल रहा है। फिल्म 'रामायण' से जुड़ी अहम बातें-
साल था 1994। मुंबई की ठाणे सेंट्रल जेल की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली अंडा बैरक में बंद एक आरोपी रक्षाबंधन के दिन अपनी बहनों का इंतजार कर रहा था। लोहे की सलाखों के पीछे दोनों बहनों ने उसके हाथ पर राखी बांधी, लेकिन उस भाई की जेब पूरी तरह खाली थी। देने के लिए न कोई तोहफा था, न पैसे। कुछ पल तक वह चुप रहा। फिर जेल की कैंटीन से मिले दो-दो रुपए के चाय-नाश्ते के कूपन बहनों के हाथ में रख दिए और बोला, ‘मेरे पास फिलहाल यही है।’ यह वही शख्स था, जिसके नाम पर कभी सिनेमाघरों के बाहर भीड़ उमड़ती थी, जिसकी फिल्मों के पोस्टर शहरों में छाए रहते थे और जो करोड़ों लोगों का सुपरस्टार था, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट बदली कि वही एक्टर जेल की चारदीवारी के भीतर अपनी बहनों को सिर्फ दो रुपए के कूपन ही दे सका। जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के 'संजू बाबा' यानी संजय दत्त की। आज उनके 67वें जन्मदिन पर जानते हैं उनके कुछ अनसुने किस्से। इंदिरा गांधी की सलाह पर बोर्डिंग स्कूल भेजा गया संजय दत्त के जन्म के बाद सुनील दत्त और नरगिस ने अपने बेटे के नाम के लिए फिल्म पत्रिका 'शमा' के पाठकों से सुझाव मांगे थे। जिसके बाद देशभर से लगभग 15,000 से अधिक नाम आए थे। इसके बाद 'संजय' नाम आगरा की रहने वाली पुष्पा अग्रवाल ने सुझाया था। संजय बचपन से ही परिवार के सबसे लाड़ले थे। माता-पिता, नानी और रिश्तेदार उनकी हर इच्छा पूरी कर देते थे। इसी वजह से वे बेहद जिद्दी भी होते जा रहे थे। स्कूल हो या घर, हर जगह उन्हें विशेष तवज्जो मिलती थी। हालांकि, संजय सिर्फ जिद्दी नहीं थे, उनका दिल भी बहुत बड़ा था। एक बार दिल्ली में एक शादी के दौरान उन्होंने ठंड से कांप रहे एक गरीब बच्चे को अपना सूट उतारकर दे दिया था। लेकिन उनकी शरारतें परिवार की चिंता भी बढ़ा रही थीं। पत्रकार यासिर उस्मान द्वारा संजय दत्त पर लिखी गई किताब के मुताबिक छह साल की उम्र में उन्होंने पिता सुनील दत्त को सिगरेट पीते देखा और खुद भी सिगरेट पीने की जिद करने लगे। सुनील दत्त को लगा कि एक बार सिगरेट पीने के बाद बेटे का शौक खत्म हो जाएगा, लेकिन संजय ने पूरी सिगरेट पी ली। कुछ साल बाद वे घर आए मेहमानों की फेंकी हुई सिगरेट की बुझी हुई बटें बगीचे में छिपकर पीते हुए भी पकड़े गए। जिस पर पिता ने उनकी पिटाई की थी। ऐसे में सुनील दत्त को एहसास हुआ कि जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार और फिल्मी माहौल का संजय पर गलत असर पड़ रहा है। तभी यह फैसला किया गया कि संजय को किसी बोर्डिंग स्कूल भेज दिया जाए। इसके बाद परिवार की करीबी मित्र और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सलाह दी कि संजय को मिलिट्री डिसिप्लिन के लिए हिमाचल प्रदेश के सनावर स्थित लॉरेंस स्कूल भेजा जाए। संजय जूतों में हेरोइन छिपाकर न्यूयॉर्क गए थे 1980 में संजय दत्त अपनी पहली फिल्म 'रॉकी' की शूटिंग में बिजी थे। इसी दौरान उनकी मां नरगिस की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। नरगिस को पैंक्रियाटिक कैंसर था और उन्हें इलाज के लिए न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर ले जाना था। सुनील दत्त ने कांपती आवाज में अपने तीनों बच्चों संजय, नम्रता और प्रिया को बताया कि उनकी मां को कैंसर है। इसके बाद 'रॉकी' की शूटिंग रोक दी गई और 21 अगस्त 1980 को सुनील दत्त नरगिस को लेकर अमेरिका रवाना हो गए। न्यूयॉर्क में इलाज के दौरान नरगिस की कई सर्जरी हुईं, लेकिन ऑपरेशन के बाद लगातार खून बहने से वे कोमा में चली गईं। इसी दौरान संजय दत्त खुद भी नशे की लत से जूझ रहे थे। मां की गंभीर हालत के बावजूद वे ड्रग्स नहीं छोड़ पा रहे थे। यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, न्यूयॉर्क जाते समय वे अपने जूतों में करीब 30 ग्राम हेरोइन छिपाकर ले गए थे। बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि उस घटना को याद करके उन्हें शर्म आती है। यहां तक कि नशे की वजह से उन्हें अपनी मां के लिए खून दान करने की अनुमति भी नहीं मिली थी। 'रॉकी' के प्रीमियर में नरगिस की याद में कुर्सी खाली छोड़ी गई न्यूयॉर्क में करीब तीन महीने तक कोमा में रहने के बाद नरगिस को होश आया था। उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि वे जल्द भारत लौटें और अपने बेटे की पहली फिल्म 'रॉकी' देखें। 6 मार्च 1981 को भारत लौटने के बाद 9 मार्च 1981 को सुनील दत्त उन्हें फिल्म 'रॉकी' दिखाने घर के प्रीव्यू थिएटर तक ले गए। कमजोरी के कारण वे पूरी फिल्म नहीं देख सकीं और सिर्फ सात रील देखने के बाद उन्हें वापस कमरे में ले जाना पड़ा, लेकिन जितना देखा, उससे वे बेहद खुश थीं। उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा संजू बड़ा स्टार बनेगा। वहीं, संजय की डेब्यू फिल्म 'रॉकी' का प्रीमियर 7 मई 1981 को तय किया गया था। प्रीमियर से ठीक चार दिन पहले, 3 मई 1981 को नरगिस का निधन हो गया। इसके बाद फिल्म के प्रीमियर के दौरान सुनील दत्त ने थिएटर में संजय दत्त के बगल वाली कुर्सी नरगिस की याद में खाली रखी थी। ऋषि कपूर-राजेश खन्ना को पीटने पहुंच गए थे फिल्म 'रॉकी' की शूटिंग के दौरान संजय दत्त और एक्ट्रेस टीना मुनीम के बीच प्यार हुआ। इस रिश्ते में संजय बेहद पजेसिव बॉयफ्रेंड थे। दोनो का अफेयर लगभग 2 साल तक चला था। यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, फिल्म 'कर्ज' में टीना मुनीम ऋषि कपूर के साथ काम कर रही थीं। तब दोनों के बीच प्रेम संबंध होने की अफवाहें फैल गई थीं। इससे संजय इतने गुस्से में आ गए कि वे ऋषि कपूर की पिटाई करने के इरादे से उनके घर पहुंच गए थे। संजय ने एक्टर गुलशन ग्रोवर से भी अपने साथ चलने को कहा। गुलशन ने बाद में बताया था, संजय और मैं भाइयों जैसे थे। एक दिन उसने मुझसे कहा, 'चलो चिंटू (ऋषि कपूर) के घर चलते हैं, उसकी पिटाई करनी है।' हम वहां गए भी, लेकिन उनकी मंगेतर नीतूजी (नीतू सिंह) ने हमें समझाया कि चिंटू का कोई अफेयर नहीं है। इसके बाद हम वहां से लौट आए। बाद में फिल्म 'सौतन' की शूटिंग के बाद टीना मुनीम और राजेश खन्ना की नजदीकियों की खबरें फिल्म इंडस्ट्री में फैलने लगीं। बाद में संजय ने स्वीकार किया कि उन्हें यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि टीना उन्हें छोड़कर किसी और के करीब चली जाएं। इसके बाद गुस्से में वे सीधे मेहबूब स्टूडियो पहुंच गए, जहां राजेश खन्ना शूटिंग कर रहे थे। संजय ने राजेश खन्ना के ठीक सामने कुर्सी खींचकर लगा ली और उन्हें लगातार घूरते रहे। बाद में खुद संजय ने स्वीकार किया कि अगर उस दिन राजेश खन्ना ने कुछ भी कहा होता, तो वे उन पर हमला कर देते, लेकिन राजेश खन्ना शांत बैठे रहे और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। आखिरकार संजय वहां से लौट आए। संजय दत्त और रेखा की गुपचुप शादी की अफवाह उड़ी थी साल 1982 में अफवाह फैल गई कि संजय दत्त ने एक्ट्रेस रेखा से गुपचुप शादी कर ली। दरअसल, मशहूर फिल्म मैगजीन सिनेब्लिट्ज ने अपने कॉलम 'रिप ऑफ' में लिखा था, हमें अपने बेहद भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है, जो होटल सी रॉक के आसपास मौजूद थे, कि संजय और रेखा ने अपनी कथित शादी के शुरुआती कुछ दिन वहीं साथ बिताए। अगर आप सोच रहे हैं कि होटल में किसी ने उन्हें क्यों नहीं देखा, तो याद रखिए कि वहां 'रूम सर्विस' जैसी सुविधा भी होती है। मैगजीन ने आगे लिखा था, संजय दत्त इन दिनों खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। उनकी अपनी 'कवयित्री' रेखा उनके लिए छोटी-छोटी प्रेम कविताएं लिख रही हैं, ‘तुम मेरी ताकत हो, मेरा सहारा हो, मेरे प्यारे से फूल हो।’ यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, इन खबरों से फिल्म इंडस्ट्री में सनसनी फैल गई। हालांकि, संजय दत्त और रेखा दोनों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। एक इंटरव्यू में संजय ने साफ कहा था कि रेखा से मेरा कोई रिश्ता नहीं है। मेरी शादी की खबर पूरी तरह साजिश और झूठ है। यहां तक कि मेरी तथाकथित गुप्त शादी की कहानी भी गढ़ दी गई। संजय ने कहा था कि कुछ रिपोर्टों में तो यह तक लिखा गया कि शादी के 15 दिन बाद वे रेखा को अपने पिता सुनील दत्त से आशीर्वाद दिलाने ले गए, लेकिन सुनील दत्त ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। संजय ने इन सभी दावों को मनगढ़ंत बताते हुए कहा था कि उन्होंने कभी रेखा से शादी नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि उनका नाम रेखा के साथ क्यों जोड़ा जा रहा है, जबकि वे जानते हैं कि रेखा का रिश्ता फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े शख्स से है। संजय का मानना था कि यह अफवाह इसलिए भी फैली क्योंकि वे उस समय अस्पताल में भर्ती अमिताभ बच्चन से मिलने नहीं जा सके थे। जेल में बहनों को दो-दो रुपए के कूपन दिए थे साल था 1994 और महीना था जुलाई। अवैध रूप से हथियार रखने के मामले में संजय दत्त की अंतरिम जमानत अदालत ने रद्द कर दी और उन्हें ठाणे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। उन्हें जेल की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली अंडा बैरक में रखा गया। यह वही जगह थी, जहां खतरनाक अपराधियों और टाडा के आरोपियों को रखा जाता था। करीब 10x10 फीट की उस छोटी-सी कोठरी में न धूप आती थी और न ही बाहर की दुनिया दिखाई देती थी। एक छोटा-सा बल्ब, एक गद्दा और कोने में बिना फ्लश वाला शौचालय। संजय दत्त ने बाद में बताया था कि शुरुआती डेढ़ महीने तक उन्हें दूसरे कैदियों से मिलने तक की इजाजत नहीं थी। अकेलापन इतना बढ़ गया कि उन्होंने समय काटने के लिए चींटियों को घंटों चलते हुए देखना शुरू कर दिया था। बाहर पिता सुनील दत्त लगातार बेटे की जमानत के लिए नेताओं, वकीलों और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे। बहनें प्रिया और नम्रता भी नियमित रूप से जेल जाती थीं, लेकिन अक्सर सिर्फ दूर से ही संजय को देख पाती थीं। वहीं, रक्षाबंधन पर बहनों ने जेल में उन्हें राखी बांधी। उस समय संजय के पास देने के लिए कोई गिप्ट नहीं था। उन्होंने अपनी बहनों को सिर्फ जेल की कैंटीन के दो-दो रुपए वाले चाय-नाश्ते के कूपन दिए और कहा था, ‘मेरे पास फिलहाल यही है।’ बेटी के एक्टिंग करने पर बोले थे- टांगें तोड़ दूंगा संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशाला दत्त का जन्म 1988 में उनकी पहली पत्नी रिचा शर्मा से हुआ था। जब वह सिर्फ 8 साल की थीं, तब ब्रेन ट्यूमर के कारण उनकी मां का निधन हो गया। इसके बाद उनका पालन-पोषण न्यूयॉर्क में नाना-नानी ने किया। त्रिशाला कभी बॉलीवुड में अभिनेत्री बनना चाहती थीं, लेकिन संजय दत्त इसके सख्त खिलाफ थे। 2016 में फिल्म 'भूमि' के प्रमोशन के दौरान उन्होंने कहा था, ‘त्रिशाला एक्ट्रेस बनना चाहती थी और मैं उसकी टांगें तोड़ देना चाहता था।’ संजय दत्त ने यह भी कहा था, ‘मैंने उसे एक अच्छे कॉलेज में भेजने के लिए अपना बहुत समय और एनर्जी लगाई है। उसने फोरेंसिक साइंस में विशेषज्ञता हासिल की है और मुझे लगता है कि यह एक बेहतरीन करियर है।’ सलमान की BMW की चाबी समुद्र में फेंक दी थी संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड में मिसाल मानी जाती है। हालांकि, एक बार ऐसा भी हुआ था जब संजय दत्त, सलमान से नाराज हो गए थे। इस किस्से का खुलासा खुद सलमान ने रजत शर्मा के शो में किया था। सलमान ने बताया था कि सोहेल खान की फिल्म 'मैंने दिल तुझको दिया' में संजय दत्त ने दोस्ती की खातिर गेस्ट अपीयरेंस किया था। शूटिंग पूरी होने के बाद संजय दत्त सलमान के घर पहुंचे, जहां पार्टी चल रही थी। उसी दौरान सलमान के पास नई BMW M5 आई थी। वह संजय दत्त को बाहर ले गए और बोले, ‘बाबा, यह देश की पहली BMW M5 है और मैं चाहता हूं कि यह आपके पास हो।’ इतना सुनते ही संजय दत्त ने सलमान को धन्यवाद कहा, लेकिन अगले ही पल कार की चाबी उठाकर सीधे समुद्र में फेंक दी। चाबी समंदर में चली गई और क्योंकि कार की केवल एक ही चाबी थी, इसलिए वह कई दिनों तक घर के बाहर ही खड़ी रह गई। सलमान ने बताया था कि उस चाबी को ढूंढ़कर निकालने में पूरे चार दिन लगे थे। ………….. यह खबर भी पढ़ें… अमजद खान की पुण्यतिथि:डिलीवरी के बाद बीवी को घर लाने के पैसे नहीं थे; ₹1.27 करोड़ की फीस अटकी, परिवार ने अंडरवर्ल्ड की मदद ठुकराई ‘मैं वो आदमी था, जो रोज 4–5 घंटे कसरत करता था। बैडमिंटन खेलता था, फ्री-हैंड एक्सरसाइज करता था, वेट उठाता था... लेकिन फिर एक एक्सीडेंट हुआ और मैं तीन महीने तक बिस्तर पर पड़ा रहा।’ एक पुराने इंटरव्यू में दिवंगत एक्टर अमजद खान ने अपनी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दौर याद करते हुए यह बात कही थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बॉलीवुड के दिवंगत दिग्गज अभिनेता देव आनंद के बेटे और अभिनेता-निर्देशक सुनील आनंद का 26 जुलाई की सुबह लंदन में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्होंने उसी अस्पताल में आखिरी सांस ली, जहां साल 2011 में उनके पिता देव आनंद का निधन हुआ था। उनकी भतीजी जीना नारंग ने आधिकारिक बयान जारी कर इस खबर की पुष्टि की है। परिवार ने इस कठिन समय में लोगों से अपनी प्राइवेसी बनाए रखने की अपील की है। भतीजी जीना नारंग ने जारी किया आधिकारिक बयानसुनील आनंद के निधन की जानकारी उनकी भतीजी जीना नारंग ने परिवार की तरफ से दी। जारी किए गए नोट में लिखा गया, भारी मन से हमारा परिवार सुनील आनंद के निधन की जानकारी दे रहा है। इस कठिन समय में मिले प्यार, प्रार्थनाओं और समर्थन के लिए हम सभी के आभारी हैं। हम सभी से अनुरोध करते हैं कि हमारी निजता का सम्मान करें ताकि हम साथ मिलकर इस मुश्किल दौर से उबर सकें। हालांकि, परिवार ने अभी अंतिम संस्कार से जुड़ी जानकारी साझा नहीं की है। 1984 में फिल्म 'आनंद और आनंद' से किया था डेब्यूसुनील आनंद ने साल 1984 में अपने पिता देव आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म 'आनंद और आनंद' से एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 'कार थीफ' और 'मैं तेरे लिए' जैसी फिल्मों में भी काम किया। हालांकि, उन्हें बतौर एक्टर अपने पिता जैसी सफलता और पहचान नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने कैमरे के आगे काम करने के बजाय पर्दे के पीछे काम करने का फैसला लिया। नवकेतन फिल्म्स का संभाला कामकाजफिल्मों में एक्टिंग में मनमुताबिक सफलता न मिलने के बाद सुनील आनंद ने परिवार के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन बैनर 'नवकेतन फिल्म्स' की जिम्मेदारी संभाली। वे लंबे समय तक इस प्रोडक्शन हाउस से जुड़े रहे और इसके कामकाज को आगे बढ़ाते रहे। उन्होंने देव आनंद की सिनेमाई विरासत को जीवित रखने और उनके बनाए बैनर को संभालने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। परिवार में 94 वर्षीय मां कल्पना कार्तिक और बहन देविकासुनील आनंद अपने पीछे अपनी 94 वर्षीय मां और बीते दौर की मशहूर अभिनेत्री कल्पना कार्तिक और बहन देविका को छोड़ गए हैं। उनकी मां और बहन फिलहाल तमिलनाडु के ऊटी में रहती हैं। सुनील, देव आनंद और कल्पना कार्तिक के इकलौते बेटे थे।
एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के नाम से आरक्षण पर फर्जी पोस्ट वायरल हो गई। जानकारी मिलने पर एक्ट्रेस भड़क गईं और उन्होंने साफ किया कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है। शिल्पा शेट्टी ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, आरक्षण को लेकर मेरे नाम से जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। कुछ लोग जानबूझकर मेरे नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और फर्जी खबर फैला रहे हैं। ऐसी फर्जी न्यूज पर बिल्कुल भरोसा मत कीजिए। विजय वर्मा ने भी फर्जी पोस्ट वायरल होने पर दी सफाई हाल ही में एक्टर विजय वर्मा के नाम से भी रिजर्वेशन पर एक पोस्ट वायरल हो गई। पोस्ट में विजय के नाम से लिखा गया था, मेरे पिता ने मारुति 800 खरीदी थी, जब मैं पैदा हुआ था। जब मैं 12वीं कक्षा में पहुंचा, तब उन्होंने होंडा सिटी खरीदी। मैं उसी कार से कॉलेज जाता था, जबकि मेरा सबसे अच्छा दोस्त, जो एक मारवाड़ी परिवार से था, अब भी 12 साल पुरानी हीरो होंडा बाइक चलाता था। हमने एक सरकारी नौकरी की परीक्षा दी। उसने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन उसे सीट नहीं मिली। नतीजे वाले दिन वह रोते हुए घर लौटा, जबकि मैं मुस्कुराते हुए घर गया। मैं उस आरक्षण का हकदार नहीं था, लेकिन मुझे वह मिला। अगर मेरा नहीं, तो कम से कम उसके लिए तो निष्पक्ष मौका उसका अधिकार था। पोस्ट वायरल होने के बाद विजय ने सफाई देते हुए कहा, मैंने यह कभी पोस्ट नहीं किया। यह पूरी तरह झूठ है। रिजर्वेशन पर क्यों वायरल हो रही हैं सेलेब्स की पोस्ट नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया है। इस मुद्दे पर जीत के बाद कई लोग जनरल कैटेगरी के लोगों को सामान्य अधिकार न मिलने पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसके लिए भी विरोध करने की बात कही, जिसके बाद से ही रिजर्वेशन का मुद्दा गरम हो गया। इसी बीच सेलेब्स को इससे जोड़ा जा रहा है।
फिल्म 'बंटवारा 1947' का ट्रेलर लॉन्च इवेंट में सनी देओल रो पड़े। इवेंट के दौरान डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने दिवंगत अभिनेता धर्मेन्द्र पर बात की जिसे सुनकर सनी देओल की आंखों में आंसू आ गए। संतोषी ने कहा की धर्मेन्द्र जी ने आखिरी फिल्म भी बटवारा देखी थी। उन्होंने कहा था ये फिल्म हिट होगी। मुंबई में आयोजित हुए इस इवेंट में शबाना आजमी, सनी देओल, करण देओल और फिल्म की बाकी स्टारकास्ट एक साथ नजर आई। इवेंट के दौरान शबाना आजमी ने शूटिंग से जुड़ा एक बेहद भावुक वाकया शेयर किया। शबाना ने बताया कि एक मुश्किल सीन के दौरान सनी ने एक बेटे की तरह उनकी मदद की। वहीं सनी देओल ने कहा कि यह फिल्म दुनिया की हर मां को समर्पित है। 'अपमानित महसूस हुआ, सनी बेटे की तरह सामने आए'शबाना आजमी ने ट्रेलर लॉन्च पर फिल्म के एक मुश्किल सीन को याद किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में एक सीन है जहां विलेन उन्हें घसीटता है और उनका कुर्ता फाड़ देता है। शबाना ने कहा, एक इंसान के तौर पर मैंने जिंदगी में कभी इतना लाचार महसूस नहीं किया था। लेकिन जब सनी आए और उन्होंने मुझ पर दुपट्टा डाला, तो वे असल जिंदगी में मेरे बेटे और रक्षक बन गए। मैंने उन्हें कसकर गले लगाया। 50 साल के करियर में किसी को-एक्टर की वजह से ऐसा सच्चा इमोशन महसूस होना बड़ी बात है। धर्मेंद्र परिवार संग काम पर बोलीं- 'अब बॉबी भी तैयार हो जाएं'देओल परिवार के साथ काम करने के अनुभव पर शबाना आजमी ने हंसते हुए बात की। उन्होंने कहा, मेरी पिछली फिल्म धर्मेंद्र जी के साथ 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' थी। अब यह फिल्म उनके बेटे सनी और पोते करण के साथ आ रही है। मैं अभय के साथ भी एक फिल्म कर सकती हूं। अब आप लोग बॉबी से कहिए कि वे भी मेरे साथ काम करने के लिए तैयार हो जाएं। शबाना के इस बयान पर इवेंट में मौजूद सभी लोग हंस पड़े। मां-बेटे के रिश्ते और भावनाओं पर आधारित है कहानीइवेंट में बात करते हुए सनी देओल काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मां और बेटे के रिश्ते की खूबसूरती को दिखाती है। फिल्म देखने के बाद हर इंसान अपनी मां से और ज्यादा प्यार करने लगेगा। सनी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अपनी मां प्रकाश कौर के साथ एक फोटो शेयर कर यह फिल्म दुनिया की हर मां के त्याग को समर्पित की है। कल मां को याद कर इमोशनल हुए थे सनी देओल कल अपनी मां प्रकाश कौर को याद कर भावुक हो गए थे। उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म 'बंटवारा 1947' को अपनी मां के लिए समर्पित किया । सनी देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी की जोड़ी 30 साल बाद फिल्म 'बंटवारा 1947' के जरिए वापसी कर रही है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का ट्रेलर कल सामने आने वाला है। इससे पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म को बिना किसी कट के 'A' सर्टिफिकेट दे दिया है। मां को समर्पित की फिल्म, लिखा- 'मेरी मां ही मेरा रब हैं' ट्रेलर रिलीज से पहले सनी देओल ने अपनी मां प्रकाश कौर के साथ एक अनदेखी तस्वीर शेयर की। मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत और सहारा बताते हुए उन्होंने एक भावुक संदेश लिखा। सनी ने कहा, मेरी मां ही मेरा रब हैं। मेरा प्यार, मेरा हौसला, मेरी ताकत। 'बंटवारा 1947' मैं अपनी मां और दुनिया की हर मां को समर्पित करता हूं। बिना किसी कट के मिला सेंसर बोर्ड से 'A' सर्टिफिकेट फिल्म 'बंटवारा 1947' को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिल गई है। CBFC ने बिना कोई सीन या डायलॉग काटे फिल्म को 'A' सर्टिफिकेट दिया है। इस पर खुशी जाहिर करते हुए सनी देओल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सेंसर बोर्ड ने इंसानियत और प्यार की इस कहानी को बिना किसी कट के पास किया है। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि 14 अगस्त को पार्टिशन डे के मौके पर लोग इस फिल्म को सिनेमाघरों में जाकर जरूर देखें। 30 साल बाद साथ आई सनी और राजकुमार की जोड़ी 'घायल', 'दामिनी' और 'घातक' जैसी सुपरहिट फिल्में देने के बाद राजकुमार संतोषी और सनी देओल लगभग 30 साल बाद फिर से साथ काम कर रहे हैं। भारत के विभाजन के दौर पर आधारित यह फिल्म एक ऐतिहासिक ड्रामा है। फिल्म का निर्माण आमिर खान और अपरणा पुरोहित ने किया है। फिल्म का संगीत ऑस्कर विजेता ए. आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि इसके गाने जावेद अख्तर ने लिखे हैं। शबाना आजमी-प्रीति जिंटा समेत दिखेगी बड़ी स्टारकास्ट 'बंटवारा 1947' में विभाजन के दर्द और उससे जुड़े मानवीय संबंधों को करीब से दिखाया जाएगा। फिल्म में सनी देओल के साथ शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म के पोस्टर्स और पहले जारी किए गए दो टीजर में इस इमोशनल कहानी की झलक पहले ही दिखाई जा चुकी है।
फिल्म 'बंटवारा 1947' का ट्रेलर लॉन्च इवेंट सनी देओल रो पड़े। इवेंट के दौरान डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने दिवंगत अभिनेता धर्मेन्द्र पर बात की जिसे सुनकर सनी देओल की आंखों में आंसू आ गए।मुंबई में आयोजित हुए इस इवेंट में शबाना आजमी, सनी देओल, करण देओल और फिल्म की बाकी स्टारकास्ट एक साथ नजर आई। इवेंट के दौरान शबाना आजमी ने शूटिंग से जुड़ा एक बेहद भावुक वाकया शेयर किया, जिसे सुनकर सनी देओल की आंखों में आंसू आ गए। शबाना ने बताया कि एक मुश्किल सीन के दौरान सनी ने एक बेटे की तरह उनकी मदद की । वहीं सनी देओल ने कहा कि यह फिल्म दुनिया की हर मां को समर्पित है। 'अपमानित महसूस हुआ, सनी बेटे की तरह सामने आए'शबाना आजमी ने ट्रेलर लॉन्च पर फिल्म के एक मुश्किल सीन को याद किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में एक सीन है जहां विलेन उन्हें घसीटता है और उनका कुर्ता फाड़ देता है। शबाना ने कहा, एक इंसान के तौर पर मैंने जिंदगी में कभी इतना लाचार महसूस नहीं किया था। लेकिन जब सनी आए और उन्होंने मुझ पर दुपट्टा डाला, तो वे असल जिंदगी में मेरे बेटे और रक्षक बन गए। मैंने उन्हें कसकर गले लगाया। 50 साल के करियर में किसी को-एक्टर की वजह से ऐसा सच्चा इमोशन महसूस होना बड़ी बात है। धर्मेंद्र परिवार संग काम पर बोलीं- 'अब बॉबी भी तैयार हो जाएं'देओल परिवार के साथ काम करने के अनुभव पर शबाना आजमी ने हंसते हुए बात की। उन्होंने कहा, मेरी पिछली फिल्म धर्मेंद्र जी के साथ 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' थी। अब यह फिल्म उनके बेटे सनी और पोते करण के साथ आ रही है। मैं अभय के साथ भी एक फिल्म कर सकती हूं। अब आप लोग बॉबी से कहिए कि वे भी मेरे साथ काम करने के लिए तैयार हो जाएं। शबाना के इस बयान पर इवेंट में मौजूद सभी लोग हंस पड़े। मां-बेटे के रिश्ते और भावनाओं पर आधारित है कहानीइवेंट में बात करते हुए सनी देओल काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मां और बेटे के रिश्ते की खूबसूरती को दिखाती है। फिल्म देखने के बाद हर इंसान अपनी मां से और ज्यादा प्यार करने लगेगा। सनी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अपनी मां प्रकाश कौर के साथ एक फोटो शेयर कर यह फिल्म दुनिया की हर मां के त्याग को समर्पित की है।
अभिनेता रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण जल्द ही दूसरी बार माता-पिता बनने जा रहे हैं। सितंबर 2024 में बेटी दुआ के जन्म के बाद यह कपल अपने दूसरे बच्चे के स्वागत की तैयारी में है। इसी बीच रणवीर सिंह का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जो अप्रैल 2026 में हुए एक ब्रांड शूट के दौरान का है। सेट पर एक एक्ट्रेस के फ्लर्ट करने पर रणवीर सिंह ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। रणवीर ने हंसते हुए कहा कि कितना फ्लर्ट कर रही हो, मैं दो बच्चों का बाप बनने वाला हूं। '2 बच्चों का बाप बनने वाला हूं, कितना फ्लर्ट कर रही हो'एक्ट्रेस दीक्षा नारंग ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रणवीर सिंह का यह वीडियो शेयर किया है। दीक्षा ने बताया कि यह वीडियो अप्रैल 2026 में सुपरयू और स्टारबक्स के एक कैंपेन शूट का है। सेट पर कॉफी ब्लेंडर खराब होने की वजह से सन्नाटा छा गया था। माहौल को हल्का करने के लिए दीक्षा ने रणवीर से बात शुरू की और 'केमिस्ट्री फॉर कॉफी' कहा। रणवीर ने इसे मजाक में 'केमिस्ट्री ऑफ लव' समझ लिया और मुस्कुराते हुए बोले, कितना फ्लर्ट कर रही हो, मैं दो बच्चों का बाप बनने वाला हूं यार। दीक्षा नारंग ने पोस्ट में लिखा कि सेट पर रणवीर से बातचीत करना उनके लिए एक यादगार अनुभव था और उस दिन उन्हें रणवीर से चार बार बात करने का मौका मिला था। हाल ही में दीपिका के साथ डोसा खाने पहुंचे थे हाल ही में दीपिका और रणवीर मुंबई में लंच डेट के लिए पहुंचे थे। यह कपल भारी सुरक्षा के बीच मुंबई के एक मशहूर रेस्टोरेंट में बेने डोसा खाने पहुंचा। सोशल मीडिया पर इस आउटिंग के वीडियो सामने आए हैं, जिसमें दोनों रेस्टोरेंट से बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं। इंस्टाग्राम पर की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणारणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने कुछ समय पहले ही इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट पोस्ट शेयर कर दूसरी बार पेरेंट्स बनने की जानकारी दी थी। इस पोस्ट में उनकी बेटी दुआ पादुकोण सिंह एक प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पकड़े नजर आ रही थी, जिस पर दो पिंक लाइनें बनी थीं। दीपिका और रणवीर ने साल 2018 में इटली में शादी की थी। इसके बाद सितंबर 2024 में उन्होंने अपनी पहली बेटी दुआ का स्वागत किया था। 'धुरंधर' की सफलता के बाद 300 करोड़ की 'प्रलय' में दिखेंगेरणवीर सिंह के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनकी पिछली दोनों फिल्में 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल रही थीं। ये फिल्में उनके करियर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्में साबित हुई हैं। इन दो बड़ी हिट फिल्मों के बाद अब रणवीर सिंह अपनी अगली फिल्म 'प्रलय' की तैयारी में जुट गए हैं। जय मेहता के निर्देशन में बन रही है जॉम्बी थ्रिलर फिल्मफिल्म 'प्रलय' एक बड़े बजट की जॉम्बी थ्रिलर फिल्म है। करीब 300 करोड़ रुपए के बजट में बन रही इस फिल्म का निर्देशन जय मेहता कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण हंसल मेहता की 'ट्रू स्टोरी फिल्म्स' और रणवीर सिंह की 'मां कसम फिल्म्स' मिलकर कर रही हैं। इस फिल्म में साउथ एक्ट्रेस कल्याणी प्रियदर्शन, रणवीर सिंह के साथ मुख्य भूमिका में नजर आएंगी।
देहरादून के फेमस यूट्यूबर UK07 राइडर उर्फ अनुराग डोभाल और उनकी पत्नी रितिका चौहान के बीच चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। अनुराग डोभाल ने रितिका और अभिषेक पर गंभीर आरोप लगाने के एक दिन बाद फिर से एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में अनुराग डोभाल ने दावा किया कि अभिषेक और रितिका के बीच कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनसे विवाद खड़ा हो सकता है। इस वीडियो में अनुराग, अभिषेक के साथ दिखाई दे रहे हैं, जिसमें अभिषेक ने कई बड़े दावे किए हैं। अभिषेक ने दावा किया कि रितिका की मां ने उनसे एबॉर्शन कराने की बात कही थी और रितिका ने अनुराग के बारे में उनसे झूठ बोला था। वीडियो में अभिषेक ने यह भी दावा किया कि अनुराग ने अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ शादी की थी। इसी वजह से परिवार ने उनका सामान घर से बाहर फेंक दिया था। इसके अलावा, अभिषेक ने दावा किया कि अनुराग के भाई कलम (अतुल) भी अनुराग की बढ़ती लोकप्रियता से असहज हो गए थे और घर में वीडियो बनाने के खिलाफ थे। 6 पॉइंट में पूरी वीडियो में क्या… 1. अनुराग के परिवार से विवाद और गाड़ियों के दावे- अनुराग ने दावा किया कि वीडियो में अभिषेक यह बता रहा था कि रितिका से मर्जी के खिलाफ शादी करने पर परिवार ने अनुराग को घर से बेदखल कर दिया था। अनुराग के फेमस होने के बाद लोग उनके भाई (कलम) को भी अनुराग के नाम से पहचानने लगे थे। विवाद बढ़ने पर मां के कहने के बाद परिवार ने अनुराग का सामान घर से बाहर फेंक दिया था। अभिषेक के मुताबिक अनुराग के पास करोड़ों की गाड़ियां थीं, जिनमें से केवल एक लेम्बॉर्गिनी और बाइक बची है। थार बेच दी गई, फॉर्च्यूनर खराब हो गई और मां के नाम खरीदे प्लॉट को लेकर विवाद भी हुआ था। 2. रितिका के परिवार कराना चाहता था एबॉर्शन- रितिका के घरवालों (मां) ने सलाह दी थी कि जब तक रिश्ता ठीक नहीं होता, तब तक बच्चा न रखें, क्योंकि कम उम्र में बच्चा होने पर बाद में संभालना मुश्किल होगा। अभिषेक का दावा है कि रितिका की मां ने कहा था कि रिश्ता न चलने पर तलाक ले लो या दूसरी शादी कर लो; बच्चा होने पर कोई अपनाएगा नहीं। साथ ही भाई की शादी में भी दिक्कत आएगी। रितिका को अमृतसर माथा टेकने ले जाया गया था, जहां उसकी तबीयत बिगड़ने और चक्कर आने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 3. अभिषेक और रितिका की दोस्ती में आई गलतफहमियां- 2 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड किए वीडियो में अभिषेक ने स्वीकार किया कि रितिका की बातों में आकर उसने अनुराग को गलत समझा, क्योंकि उसने अनुराग से कभी सीधे बात नहीं की थी। रितिका ने कमरे में बंद होने का दावा कर अभिषेक से कैब मांगी थी। बाद में पता चला कि अनुराग उस समय मनाली में थे और उन्होंने ही रितिका की कैब कराई थी, लेकिन रितिका उसमें गई ही नहीं। रितिका का दावा था कि अनुराग उसे पैसे नहीं देते, जबकि बाद में सबूतों से साफ हुआ कि सारे पैसे अनुराग ही देते थे। 4. प्रेग्नेंट रितिका का अभिषेक के फ्लैट पर आना- अनुराग के पूछने पर अभिषेक ने बताया कि रितिका अपने भाई रोहित, एरिक और बाउंसर नीटू मोटला के साथ उसके फ्लैट पर आई थी। रितिका आईडी खुलवाने की जिद लेकर करीब डेढ़ हफ्ते तक अभिषेक के फ्लैट पर रुकी रही। अभिषेक को रितिका ने अनुराग के बजाय उनके मैनेजर का नंबर दिया था, जबकि अनुराग का नंबर ब्लॉक लिस्ट में था। 5. चैट, फोटो/वीडियो और निजी रिश्ते पर शक- अनुराग ने सवाल उठाया कि अभिषेक के फोन में ऐसी तस्वीरें और वॉट्सएप पर 'तू मेरी बंदी है' जैसे मैसेज थे, जो सही नहीं थे। अभिषेक ने कहा कि उसकी तरफ से कोई गलत नीयत नहीं थी; वे सिर्फ दोस्त थे। उसने माना कि रितिका ने सिर्फ अपना पक्ष बताया था और अब वह रितिका व उसके परिवार से कभी बात नहीं करेगा। अनुराग का कहना है कि उनके पास सुसाइड से पहले के सभी सबूत, रितिका के घर की कॉल रिकॉर्डिंग्स मौजूद हैं। वीडियो के लास्ट में अभिषेक ने कहा कि वह अब अनुराग और रितिका दोनों में से किसी से कोई संबंध नहीं रखेगा। अनुराग ने कहा कि अभिषेक को अपनी गलती की सजा भुगतनी होगी, जिस पर अभिषेक ने माना कि उससे गलती हुई है। दो दिन पहले क्या बोला था… अनुराग ने 26 जुलाई को यूट्यूब पर 5 मिनट का एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने रितिका पर धोखा देने का आरोप लगाया। अनुराग ने रितिका और उनकी मां पर बेटे अनुरित से नहीं मिलने देने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि रितिका के परिवार को उन्होंने अपने बेटे से मिलने के लिए 37 लाख रुपए दिए हैं और अब रितिका का परिवार भारी-भरकम गुजारा भत्ता मांग रहा है। अनुराग ने कहा, यह सब झेलना सबसे मुश्किल है, लेकिन अपने बेटे के लिए मैं यह भी करना चुनूंगा। अनुराग ने वीडियो में आगे लिखा, मैंने अपने बेटे अनुरित की खातिर सब कुछ छिपाने और सभी को माफ करने का फैसला किया था। भाई कलम को सब सच पता था, लेकिन उसने अपने अहम को संतुष्ट करने के लिए दुनिया के सामने मुझे गलत बना दिया। रितिका ने भी इस चीज का फायदा उठाया, क्योंकि मेरे पास मेरे मां-बाप नहीं थे, मेरी फैमिली नहीं थी। सब लोगों ने मिलकर मुझे बहुत परेशान किया और आज भी कर रहे हैं। आर्थिक रूप से, कानूनी रूप से और मानसिक रूप से। लेकिन अब और नहीं। मेरी गलती बस इतनी थी कि मैं इन सब लोगों से प्यार करता था और इनकी गलतियों को छिपाता रहा। लेकिन मुझे लगता है कि वे इस प्यार और वफादारी के हकदार नहीं हैं। अनुराग ने रितिका और उसके दोस्त का ऑडियो वारयल की अनुराग ने एक ऑडियो भी शेयर किया, जिसमें रितिका पर दोस्त अभिषेक के साथ मिलकर धोखा देने का आरोप लगाया है। इसमें उन्होंने दावा किया कि रितिका कह रही है, अनुराग मेरे लिए मर चुका है। मेरे पास इसका बच्चा है, यह मेरे लिए पाप है। इसके बाद अनुराग ने अभिषेक का एक ऑडियो बताकर भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अभिषेक कह रहा है, “रितिका ने मुझसे कहा था कि मैं बच्चे को मार दूंगी। वह एबॉर्शन कराने के लिए कह रही थी, लेकिन मैंने मना कर दिया था।” 4 महीने पहले बने थे पिता अनुराग डोभाल और उनकी पत्नी रितिका चौहान चार महीने पहले अपने पहले बच्चे के माता-पिता बने थे। रितिका ने 27 मार्च 2026 को राम नवमी के शुभ अवसर पर बेटे को जन्म दिया था। बेटे के जन्म पर अनुराग ने भावुक होते हुए कहा था कि अब मेरा दूसरा जन्म अपने बेटे के लिए है। रितिका ने बेटे के जन्म की जानकारी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए साझा की थी, जहां उन्होंने नवजात के नन्हे पैरों की तस्वीर पोस्ट की थी। 7 मार्च को की थी सुसाइड की कोशिश अनुराग डोभाल ने 7 मार्च को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर कार चलाते हुए इंस्टाग्राम लाइव किया था। लाइव में उन्होंने कहा था- मम्मी, अगले जन्म आऊं तो बस प्यार देना… चलो फाइनल ड्राइव पर चलते हैं। इसके बाद उन्होंने करीब 150-160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कार भगाई और कार डिवाइडर से टकरा गई। उस समय लगभग 80 हजार लोग लाइव देख रहे थे। हादसे के बाद उन्हें पहले मेरठ के शुभारती अस्पताल ले जाया गया और बाद में दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में भर्ती कराया गया था। इसके कुछ दिनों बाद अनुराग डोभाल को 14 मार्च 2026 को पहली बार अस्पताल से छुट्टी मिली थी। हालांकि, डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद उनकी स्थिति फिर से बिगड़ गई थी। 15 मार्च (रविवार) को जब उन्हें देहरादून ले जाया जा रहा था, तब उन्हें सांस लेने में गंभीर समस्या हुई, जिसके कारण उन्हें फिर से एक नीजी अस्पताल के ICU में भर्ती कराना पड़ा था। अनुराग ने लगाए थे परिवार पर गंभीर आरोप एक्सीडेंट से पहले अनुराग डोभाल ने कई वीडियो पोस्ट किए थे, जिनमें उन्होंने अपने माता-पिता और भाई पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि परिवार उनकी शादी तोड़ने की कोशिश कर रहा है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। इसी विवाद के बाद वह इंस्टाग्राम लाइव आए थे और उसी दौरान उनका एक्सीडेंट हो गया था। होली के दिन डाला वीडियो, फिर डिलीट किया अनुराग डोभाल ने होली की रात (4 मार्च) जारी करीब दो घंटे के वीडियो में अपनी निजी जिंदगी और परिवार के साथ चल रहे विवाद का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी रितिका चौहान पहले उनकी फैन थीं और इंस्टाग्राम पर मैसेज के जरिए दोनों की बातचीत शुरू हुई, जो बाद में रिश्ते में बदल गई। अनुराग के मुताबिक, उनकी इंटरकास्ट शादी (ब्राह्मण-राजपूत) को लेकर परिवार में विवाद हो गया। उनका आरोप है कि शादी के बाद उन्हें पत्नी के साथ घर में रहने नहीं दिया गया, जिसके बाद उन्हें अलग फ्लैट में रहना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में परिवार के साथ मामला पुलिस और कानूनी विवाद तक पहुंच गया। वीडियो में अनुराग ने बताया कि पत्नी के प्रेग्नेंट होने की खबर मिलने के बाद उन्हें लगा कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हालात और बिगड़ गए। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं के कारण वह लंबे समय से मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। इसके कुछ दिनों बाद अनुराग ने ये वीडियो डिलीट कर दिया था। भाई अतुल डोभाल उर्फ कलम इंक भी आए सामने इस पूरे विवाद के बीच अनुराग के भाई अतुल डोभाल उर्फ कलम इंक ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर उनके परिवार को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और वायरल ऑडियो क्लिप एडिटेड हैं। अतुल ने कहा कि अगर उन्होंने अपने भाई के साथ गलत किया है तो इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को इस विवाद के कारण सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। रितिका को किचन में जाने से रोकने पर सफाई अनुराग के भाई अतुल डोभाल उर्फ कलम इंक ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कहा था कि अनुराग की पत्नी रितिका को किचन में जाने से रोकने का मामला गलत तरीके से पेश किया गया। उनके अनुसार परिवार में किसी करीबी की मौत हो गई थी और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कुछ समय तक मिठाई और तला हुआ खाना नहीं बनाया जाता। इसी कारण उन्हें खाना बनाने से रोका गया था। प्रॉपर्टी विवाद के आरोपों से इनकार कलम इंक ने अपने ऊपर लगे प्रॉपर्टी कब्जाने और झूठे केस करने के आरोपों को भी खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि अगर उन्होंने अपने भाई की संपत्ति का एक छोटा सा हिस्सा भी लिया है तो इसकी जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर उन्हें सजा दी जाए। एक्सीडेंट के बाद परिवार को मिल रहीं धमकियां अतुल डोभाल ने कहा कि अनुराग के सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के बाद उनके परिवार को धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि अनुराग के करोड़ों फॉलोअर्स हैं और लाइव में परिवार को जिम्मेदार ठहराने के बाद लोग उनके घर के बाहर तक पहुंच गए और धमकियां देने लगे। ---------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… UK07 राइडर बोले-बेटे से मिलने के लिए दिए ₹37 लाख:रितिका अपने दोस्त के साथ मिलकर दे रही धोखा; 4 महीने पहले बने थे पिता देहरादून के फेमस यूट्यूबर UK 07 राइडर अनुराग डोभाल और उनकी पत्नी रितिका चौहान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अनुराग ने 26 जुलाई को यूट्यूब पर 5 मिनट का एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने रितिका पर धोखा देने का आरोप लगाया। (पढ़ें पूरी खबर)
टेलीविजन एक्टर राम कपूर ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने अपने पिता की मौत प्लान की थी। वहीं दूसरी तरफ एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने खुलासा किया है कि वो परिवार से रिश्ते तोड़ चुकी हैं। उनकी मां और भाई ने उन्हें घर से निकाल दिया था, जिसके बाद अब वो आश्रम में रहकर गुजारा करती हैं। रियलिटी शो लॉकअप में राम कपूर ने एक टास्क में अपना सीक्रेट रिवील करते हुए पिता की मौत प्लान करने का दावा किया और ये भी कहा कि इस बात से नाराज मां और बहन ने आज तक उनसे बात नहीं की। राम कपूर ने शो में कहा, ‘मैंने पिता की उनकी मौत प्लान करने में मदद की। 63 की उम्र में उन्हें कैंसर हुआ। ऑपरेशन पॉसिबल नहीं था। उन्होंने 18 कीमोथैरेपी लीं। इतना अच्छा किया कि वो 73 तक जिए। जब कैंसर वापस आया, तो डॉक्टर ने कहा कि ये बुरा है, हम सब दोबारा करेंगे।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘मेरे पिता रिच थे। मैंने उनकी कंपनी जॉइन करने के बजाए एक्टर बनने का फैसला लिया और अलग हो गया। मेरे और पिता के बीच 36 का आंकड़ा था। जब उनका कैंसर वापस आया, वो सिंगापुर में थे, कोविड टाइम था, लॉकडाउन था। उन्होंने गौतमी को कॉल कर बोला मुझे राम से बात करना है। उन्होंने डिसाइड कर लिया था कि उन्हें जीना नहीं है, वो मरना चाहते थे, लेकिन वो ये अकेले नहीं करना चाहते थे। उन्हें लगा उन्हें मेरी जरूरत है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुम मेरी मरने में मदद कर सकते हो।’ भावुक होकर राम कपूर ने आगे कहा, ‘उन्होंने मुझे मना लिया कि मैं मदद नहीं करूंगा तो वो अकेले मरेंगे। उन्होंने मुझसे डील की कि मैं किसी को न बताऊं। उन्होंने मुझसे कहा कि जब वो आईसीयू में हों, तो मैं साथ रहूं। मेरी मां और बहन को नहीं पता था। वो नहीं जानते थे कि उनका इलाज नहीं चल रहा है। मेरे पिता बस मेरा हाथ पकड़ना चाहते थे। वो अकेले रहने से डरे हुए थे। वो मरने से नहीं डर रहे थे, वो बस अकेले नहीं रहना चाहते थे। उन्हें लगता था कि किसी और को पता चला तो उन्हें मरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस दिन मरूं उसी दिन मुझे दफ्ना या जला देना। मैंने उनका हाथ पकड़ा और उनकी मरने में मदद की।ट 5 सालों से मां और बहन ने नहीं की बात- राम कपूर मेरी मां और बहन आज भी मुझसे बात नहीं करते, 5 साल हो चुके हैं। लेकिन मुझे लगता है कि एक बच्चा अपने पिता के लिए इससे ज्यादा अच्छा कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि हर कोई राजा की तरह जीता है, लेकिन वो राजा की तरह रहे। उनकी वजह से मैंने अपनी ताकत देखी और मौत को करीब से देखा। शिल्पा शिंदे बोलीं- मैं अनाथ, शेल्टर होम में रहती हूं शिल्पा शिंदे ने परिवार द्वारा ठुकराए जाने पर कहा, ‘लोग फैमिली-फैमिली बोलते हैं। लोगों के पास फैमिली नहीं होती। मेरे पास फैमिली होने के बाद भी मैं अनाथ हूं। मैं कोई दया नहीं चाहती। मैं पहले भी बोल चुकी हूं कि मैं शेल्टर हाउस में रहती हूं जब भी आती हूं (मुंबई)। करजत मैंने दूसरे घर की तरह लिया था, लेकिन अब वो मेरा फर्स्ट होम है, क्योंकि मैंने मुंबई छोड़ दिया।’ आगे शिल्पा ने बताया, ‘3 साल हो गए, जब मेरी शोल्डर की सर्जरी हुई। मेरे भाई वाइफ से इन्फ्लूएंस हुआ और मेरी मां भाई से इन्फ्लूएंस हुई और मुझे घर से निकाल दिया। आप सोचेंगे कि वह इतने बुरे हैं कि आपको निकाल दिया गया, लेकिन हालात ऐसे क्रिएट किए गए कि उन्हें पता है कि मैं सेल्फ रिस्पेक्ट वाली लड़की हूं। मैं रात 11 बजे घर छोड़कर चली गई, मेरी मां ने मुझे नहीं रोका, क्योंकि वो भाई के इन्फ्लूएंस में आ गई थीं।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जब आप लोगों के लिए एवेलेबल हो जाते हैं, तो लोग आपका फायदा उठाते हैं। आप डोरमेट बन जाते हैं, मैं मेरे घर की डोरमेट हूं। मैं बॉम्बे जाती हूं और होटल में रुकती हूं तो लोग कहते हैं आप तो यहीं रहते हो, मैं कहती हूं हां, मेरे घर में बहुत सारे मेहमान आए हैं, इसलिए प्राइवेसी के लिए यहां आती हूं। मैं कभी जिंदगी में बात नहीं करूंगी। मैं अपनी वसीयत में लिख चुकी हूं कि मेरा इन लोगों से कोई रिश्ता नहीं है।’' शिल्पा शिंदे ने भावुक होकर आगे कहा, ‘किसी ने मुझसे पूछा कि मैं ये शो क्यों कर रही हूं, तो मैं होम नहीं शेल्टर होम बनाना चाहती हूं, इसलिए ये कर रही हूं। मैं मां से मिलना चाहती हूं, वो पूछती हैं कि क्या घर आओगी, लेकिन मैं नहीं जाती। मैं रिश्तों के मामले में बहुत कठोर हूं। मैं इतनी खराब हूं कि मुझे अपने ही घर से बाहर निकाल दिया गया।’ बता दें कि शिल्पा शिंदे और राम कपूर इन दिनों नेटफ्लिक्स के रियलिटी शो लॉकअप 2 में हैं। शो के नियम के अनुसार, हर कंटेस्टेंट जिंदगी के 3 सीक्रेट शो में साथ ले जाता है, जिसे वो खुद को एलिमिनेशन से बचाने में इस्तेमाल करता है। इसी नियम के तहत एक टास्क में शिल्पा और राम को अपने सीक्रेट रिवील करने पड़े हैं। उनसे पहले आकांक्षा चमोला ने सीक्रेट रिवील कर बताया था कि वो बायसेक्शुअल हैं और एक्टर गौरव खन्ना से तलाक ले रही हैं। राम कपूर के पिता ने दी थी अमूल की पंचलाइन राम कपूर के पिता अनिल कपूर को बिली नाम से पहचाना जाता था। वो बड़े बिजनेसमैन थे। वे FCB उल्का में चेयरमैन थे। उन्हें कई यादगार विज्ञापनों के लिए जाना जाता है। लेकिन अमूल की द टेस्ट ऑफ इंडिया पंचलाइन अनिल कपूर ने ही दी थी। अनिल कपूर के सीईओ रहते ही अमूल FCB उल्का की क्लाइंट थी। उनका निधन 12 अप्रैल 2021 में हुआ था।
पॉपुलर सिगंर और रैपर बादशाह की दूसरी शादी में अनबन की खबरें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनकी पत्नी ईशा रिखी ने हाल ही में एक पोस्ट में लिखा है कि वो अब तक बादशाह के पावर के डर से चुप थीं, लेकिन वो अब और दिखावा नहीं कर सकतीं। ईशा ने पोस्ट में तलाक का हिंट भी दिया था। ईशा रिखी ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट शेयर कर लिखा है, ‘कुछ लड़ाइयां ऐसी भी होती हैं, जिनके जख्म बाहर दिखाई नहीं देते। मैं बहुत लंबे समय तक चुप रही, क्योंकि मैं डरी हुई थी। मुझे लगता था कि मेरे पति के पास इतना इन्फ्लूएंस, पावर और रीसोर्स हैं कि उनके सामने मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी। मैंने खुद को यही समझा लिया था कि चुप रहना ही मेरे लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है।’ आगे ईशा ने लिखा है, ‘चुप्पी कभी स्वीकार नहीं की जाती, वह सिर्फ अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश थी। आज मैं डर नहीं, बल्कि हिम्मत को चुन रही हूं। शायद मैं अभी पूरी कहानी बताने के लिए तैयार नहीं हूं, लेकिन अब मैं यह दिखावा करना बंद करने के लिए तैयार हूं कि सब कुछ ठीक था।’ बादशाह के साथ शादी की तस्वीरें पोस्ट कीं, लिखा- तूफान एक सबक है इस क्रिप्टिक पोस्ट से कुछ दिन पहले ही ईशा ने बादशाह के साथ कुछ तस्वीरें और वीडियोज शेयर कर लिखा था, कुछ तूफान, सबक लेकर आता है और हर दुआ उम्मीद। ईशा की इस पोस्ट पर करीबी दोस्त जैस्मिन भसीन ने कमेंट कर उन्हें मजबूत बने रहने की सलाह दी थी। बता दें कि ईशा रिखी की पोस्ट सामने आने के बाद कई करीबी और दोस्त उनके समर्थन में पोस्ट शेयर कर रहे हैं। एक करीबी ने लिखा है, तुम जिस दौर से गुजर हो और अब भी गुजर रही हो, उसकी मैं गवाह हूं। मैं और तुम्हारे करीब रहने वाले बाकी लोग जानते हैं कि तुमने हर मुश्किल का सामना ईमानदारी, सच्चाई और पूरे आत्मसम्मान के साथ किया है। मजबूत बनी रहो, ईशा रिखी। हम तुम्हारे साथ हैं, और सच के साथ भी। वहीं एक ने लिखा, स्ट्रॉन्ग रहो, डर कर नहीं। एक करीबी ने लिखा, तुम बहुत स्ट्रॉन्ग और सुंदर हो। सोशल मीडिया के जरिए कन्फर्म की शादी सिंगर और रैपर बादशाह ने मार्च 2026 में ईशा से गुपचुप शादी की थी। इंटिमेट वेडिंग में कपल के करीबी ही शामिल हुए थे। बादशाह ने शादी को राज रखा, हालांकि ईशा रिखी ने सोशल मीडिया में रोमांटिक तस्वीर पोस्ट कर इस पर कन्फर्मेशन दी। वहीं ईशा ने एक फैन के सवाल का जवाब देते हुए बादशाह को पति देव कहा था। इससे पहले ईशा की मां ने उनकी और बादशाह की शादी की तस्वीरें पोस्ट कर दोनों को सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दी थीं। कौन हैं ईशा रिखी? तलाक के बाद बादशाह ने की ईशा से शादी बादशाह ने साल 2012 में जैस्मिन मसीह से शादी की थी। 2017 में बादशाह बेटी के पिता बने, लेकिन 3 साल बाद ही उनका तलाक हो गया। तलाक के 6 साल बाद बादशाह ने ईशा से दूसरी शादी की है। बादशाह ने फिलहाल कभी शादी पर बात नहीं की है।
सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की भारतीय महिलाओं को गटर कहा है। कंगना का कहना है कि ये महिलाएं स्वतंत्र महिलाओं की नकल उतारते हुए नशे करने, शराब पीने और अनगिनत आदमियों से यौन संबंध बनाने को स्वतंत्रता कहती हैं। कंगना ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन से लिखा है, 'सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। असल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।' आगे कंगना ने लिखा, 'आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें 'गटर जेनरेशन' कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं।' 'इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं, नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं और लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, 'गटर छाप'।' स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कहा था- कैसी परवरिश हो रही है भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने सोमवार को स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर भी विवादित राय दी और नई जनरेशन की परवरिश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया से लिखा, ‘अपनी पूरी जिंदगी में मैंने कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। Gen Z के विरोध-प्रदर्शनों की ये रीलें देखकर घिन आती है। इन लोगों के बोलने का तरीका और जिस भाषा का ये इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर फ्रेम इतना अजीब और परेशान करने वाला है कि देखकर घिन होती है। आखिर इन्हें जन्म कौन दे रहा है और इनकी परवरिश कौन कर रहा है?’ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के खिलाफ भी दिए कई बयान कंगना रनोट ने सोशल मीडिया के जरिए स्टूडेंट प्रोटेस्ट का जमकर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि किसी को पद से हटाने या रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मुद्दों पर बहस के लिए संसद सही जगह है, न कि आंदोलन। कंगना ने कहा था की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। इसके बाद जब प्रोटेस्ट खत्म हुआ तो कंगना ने प्रदर्शनकारियों की भाषा की आलोचना की।

