एक्ट्रेस मौनी रॉय ने हाल ही में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी सोशल मीडिया चर्चाओं और अफवाहों पर खुलकर बात की। मोनिका शर्मा के डिजिटल टॉक शो में उनसे पूछा गया कि बॉलीवुड में आने के बाद उन्होंने अपने बारे में सबसे अजीब अफवाह कौन-सी सुनी। इस पर मौनी ने जवाब दिया, “यह कि मैं गे हूं।” मौनी ने इस सवाल का जवाब हल्के अंदाज में दिया और साफ किया कि वह ऐसी अटकलों को गंभीरता से नहीं लेतीं। पिछले कुछ समय से उनकी निजी जिंदगी चर्चा में रही है और सोशल मीडिया पर उनके रिश्तों व दोस्ती को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जाते रहे हैं। मौनी ने कहा कि उनके अच्छे-बुरे और मुश्किल दौर में करीबी महिला दोस्तों ने हमेशा साथ दिया। उनके मुताबिक मजबूत दोस्ती और सपोर्ट सिस्टम किसी भी इंसान को मुश्किल समय से बाहर आने में मदद करता है। एक्ट्रेस ने युवा महिलाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और भावनात्मक रूप से मजबूत बनना चाहिए। उनके मुताबिक आत्मनिर्भरता सिर्फ करियर नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक मजबूती से भी जुड़ी होती है। मौनी ने कहा कि लोगों की राय और सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं आती-जाती रहती हैं, लेकिन सबसे जरूरी खुद को समझना और अपने फैसलों पर भरोसा रखना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मजबूत सपोर्ट सिस्टम बनाना चाहिए और अपनी पहचान किसी बाहरी धारणा से तय नहीं होने देनी चाहिए। मौनी का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है और लोग उनकी बेबाकी व आत्मनिर्भरता के संदेश पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। __________________________________________________ यह खबर भी पढ़ें.. मौनी रॉय-सूरज ने फिर किया एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर फॉलो:गुरुवार को अलग होने की घोषणा की थी, दोस्ती बनाए रखने की कही थी बात एक्ट्रेस मौनी रॉय और बिजनेसमैन सूरज नांबियार ने शनिवार को इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फिर से फॉलो करना शुरू कर दिया। हाल ही में दोनों के अलग होने की खबरों के बीच दोनों ने एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया था।पूरी खबर पढ़ें..
IMAX फिल्मों का साल:6 महीने में आएंगी 10 बड़ी फिल्में, बजट 16 हजार करोड़ से भी अधिक
क्रिस्टोफर नोलन की आगामी फिल्म ‘द ऑडेसी’ 17 जुलाई को रिलीज होनी है, लेकिन भारत में फिल्म की आईमैक्स टिकटों की एडवांस बुकिंग खुलते ही दर्शकों ने रिकॉर्ड स्तर पर सीटें बुक कर ली हैं। रिलीज से करीब 1 महीने पहले ही भारत में इस फिल्म के 1.5 लाख टिकट बिक चुके हैं। नोलन की पिछली ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘ओपनहाइमर’ ने 2023 में बुकिंग शुरू होने के इसी चरण में 65 हजार टिकट बेचे थे। ‘द ऑडेसी’ इतिहास की पहली ऐसी फिल्म भी है जो पूरी तरह से आईमैक्स कैमरा पर शूट हुई है। यह यूनानी कवि होमर की प्रसिद्ध महाकाव्य रचना पर आधारित है। कहानी ट्रॉय युद्ध के बाद इथाका के राजा की यात्रा दिखाती है। IMAX फिल्मों के बारे में जानिए - IMAX यानी Image Maximum - स्क्रीन सामान्य थिएटर से कहीं बड़ी होती है। - स्क्रीन में बेहतर रिजॉल्यूशन मिलता है। - विशेष IMAX कैमरों से शूट दृश्य अधिक प्रभावशाली दिखते हैं। साउंड सिस्टम से फिल्म के भीतर होने का एहसास मिलता है। - एक्शन, साइंस-फिक्शन और फैंटेसी फिल्मों के लिए सबसे पसंदीदा फॉर्मेट माना जाता है। एवेंजर्स-ड्यून के नए पार्ट... नोलन ला रहे अपनी सबसे महंगी फिल्म हॉलीवुड अब प्रीमियम स्क्रीन एक्सपीरियंस पर दांव लगा रहा है। द ऑडेसी, एवेंजर्स, ड्यून, सुपरगर्ल और टॉय स्टोरी-5 जैसी फिल्मों समेत सिर्फ 10 बड़ी रिलीज का संयुक्त बजट ₹16 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा आंका जा रहा है। सबसे महंगी फिल्मों में एवेंजर्स और द ऑडेसी शामिल हैं, जिनका बजट क्रमशः ₹3,400 करोड़ रु. और ₹2,100 करोड़ रु. के आसपास है। 2026 की सबसे चर्चित फिल्में अगले 6 महीनों में करीब 13 ऐसी फिल्में आने वाली हैं जो आईमैक्स एक्सपीरियंस देंगी। उनमें से कुछ प्रसिद्ध फिल्में ये हैं। Dune : Part Three- रिलीज: 18 दिसंबर, डेनिस की साइंस-फिक्शन का तीसरा पार्ट Toy Story 5- रिलीज: 19 जून, पिक्सर की सबसे लोकप्रिय एनीमेशन फ्रेंचाइजी है। Supergirl- रिलीज: 26 जून, डीसी यूनिवर्स की नई सुपरहीरो फिल्म है। The Odyssey- रिलीज: 17 जुलाई, नोलन की फिल्म, आईमैक्स पर शूट की गई है। Resident Evil- रिलीज: 18 सितंबर, मशहूर हॉरर फ्रेंचाइजी का नया पार्ट आ रहा है। Godzilla Minus Zero- रिलीज: 6 नवंबर, बड़े मॉन्स्टर यूनिवर्स की अगली पेशकश। Avengers: Doomsday- रिलीज: 18 दिसंबर, मार्वल की मेगा इवेंट फिल्म होगी।
कलर्स के नए शो ‘बरेली के बच्चन’ में रिश्तों, सपनों और रोजमर्रा की उलझनों से जुड़े एक परिवार की कहानी दिखाई जा रही है। शो के मुख्य कलाकार प्रविष्ट मिश्रा और रमणीक कटारिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने किरदारों की तैयारी, शो की खासियत, शूटिंग के मजेदार किस्सों और फैमिली ड्रामा के बदलते ट्रेंड पर बात की। उन्होंने कहा कि यह शो दर्शकों को किसी आम परिवार की कहानी जैसा महसूस होगा। सवाल: कृष्ण और रियल लाइफ के प्रविष्ट में सबसे बड़ी समानता क्या है? जवाब/प्रविष्ट: कृष्ण और मेरे बीच सबसे बड़ी समानता यह है कि हम दोनों को ऊपरवाले पर अटूट विश्वास है। सवाल: रमणीक, संगम को एक लाइन में कैसे डिस्क्राइब करेंगी? जवाब/रमणीक: महत्वाकांक्षी, स्वतंत्र और बिल्कुल रियल। सवाल: प्रविष्ट, ‘बरेली के बच्चन’ में ऐसा क्या था जिसने आपको तुरंत हां कहने पर मजबूर किया? जवाब/प्रविष्ट: कृष्ण का किरदार और यूपी के लड़के का कैरेक्टर निभाने का मौका। सवाल: रमणीक, संगम किरदार के लिए आपने कोई खास तैयारी की थी? जवाब/रमणीक: हां। मैं दिल्ली से हूं और हमारे घर में कई सालों से काम करने वाली दीदी का परिवार ‘बरेली के बच्चन’ के घर जैसा ही है। मैंने उनके परिवार की कहानियां सुनीं, घर का माहौल समझा और उन्हीं अनुभवों से संगम का किरदार बनाया। सवाल: आजकल फैमिली ड्रामा कम देखने को मिलते हैं। आपको क्या लगता है, यह शो दर्शकों से कैसे जुड़ पाएगा? जवाब/प्रविष्ट: मुझे लगता है कि इस शो की सबसे बड़ी ताकत इसकी रियलनेस है। हर किसी को दूसरे घर की कहानी जानने में दिलचस्पी होती है और यह शो वैसा ही महसूस होगा। इसमें दिखावे वाला ड्रामा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की वही बातें और समस्याएं हैं जो असली घरों में होती हैं। दर्शकों को लगेगा जैसे किसी पड़ोसी के घर में कैमरा लगा हो। सवाल: रमणीक, आपके हिसाब से परिवार में प्यार ज्यादा जरूरी है या जुगाड़? जवाब/रमणीक: प्यार। हालांकि संगम की फैमिली में इज्जत और बाकी चीजों को भी अहमियत दी जाती है। सवाल: सेट पर सबसे ज्यादा मस्ती और प्रैंक कौन करता है? जवाब/प्रविष्ट: मैं तो नहीं करता। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे मजेदार घटना कौन-सी थी? जवाब/रमणीक: बरेली में शूटिंग के दौरान बहुत सारे फैंस आ गए थे। कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि उनके हाथ और छाती पर ऑटोग्राफ कर दूं। वह काफी फनी मोमेंट था। सवाल: अगर कृष्ण को एक दिन के लिए बच्चन परिवार से छुट्टी मिल जाए, तो वह सबसे पहले क्या करेगा? जवाब/प्रविष्ट: वह सबसे पहले संगम के पीछे जाएगा। सवाल: दर्शक संगम से क्या सीख सकते हैं? जवाब/रमणीक: अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं का पीछा करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। रास्ते में कितनी भी मुश्किलें आएं या कोई रोके, हार नहीं माननी चाहिए। ________________________________ ‘बरेली के बच्चन’ के स्टारकास्ट का यह इंटरव्यू भी पढ़ें 12 साल बाद टीवी पर लौटे यशपाल:बोले- ‘बरेली के बच्चन’ के लिए फिल्में-ओटीटी छोड़ी, अंश ने कहा- यंग ऑडियंस फिर टीवी से जुड़ेगी लंबे समय बाद टीवी पर वापसी कर रहे अभिनेता यशपाल शर्मा अपने नए शो ‘बरेली के बच्चन’ को लेकर उत्साहित हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस शो के लिए उन्होंने अपनी फिल्में और ओटीटी प्रोजेक्ट्स फिलहाल अलग रख दिए हैं।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ के 20वें सीजन के लिए सलमान खान होस्ट के रूप में वापसी करेंगे। वैरायटी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वह 21 सितंबर से नए सीजन की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इससे पहले सलमान खान डायरेक्टर वामसी पेडिपल्ली की आगामी एक्शन थ्रिलर फिल्म की शूटिंग का बड़ा हिस्सा पूरा करने की तैयारी में हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी। सूत्र के मुताबिक, एक्टर की टीम उनकी शूटिंग और शो के शेड्यूल को कोऑर्डिनेट करने में बिजी है। ‘बिग बॉस 20’ के लिए शॉर्टलिस्टिंग और ऑडिशन जल्द शुरू होने की उम्मीद है। सूत्र का कहना है कि शो के मेकर्स ने कई जाने-माने टीवी पर्सनैलिटीज से संपर्क किया है और शुरुआती बातचीत चल रही है। रियलिटी शो के कुछ कंटेस्टेंट्स को नए सीजन के लिए भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। यह पहल OTT दर्शकों के एंगेजमेंट को देखते हुए की जा रही है। इसके अलावा, शो के कुछ पुराने कंटेस्टेंट्स भी वापस आ सकते हैं। शो के फॉर्मेट और कंटेस्टेंट लिस्ट के बारे में और जानकारी आने वाले हफ्तों में सामने आ सकती है। बता दें कि ‘बिग बॉस 19’ में गौरव खन्ना, फरहाना भट्ट, अमाल मलिक, तान्या मित्तल और बसीर अली जैसे कंटेस्टेंट शामिल थे। वहीं, सलमान खान डायरेक्टर अपूर्व लाखिया की फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ में नजर आएंगे। इस फिल्म में चित्रांगदा सिंह भी हैं। सलमान फिल्म में कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की रिलीज डेट अभी तय नहीं हुई है। बिग बॉस का इतिहास बिग बॉस का आइडिया 1997 में नीदरलैंड में शुरू हुए शो बिग ब्रदर से लिया गया था। भारत में यह शो 2006 में आया। शुरुआत में इसे ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन समय के साथ यह सबसे चर्चित रियलिटी शो में से एक बन गया। पहले सीजन में राहुल रॉय और कैरोल ग्रेसियस जैसे नाम थे। शो के पहले होस्ट अरशद वारसी थे, फिर शिल्पा शेट्टी और अमिताभ बच्चन जैसे सितारों ने शो को होस्ट किया। 2010 से सलमान इस शो को होस्ट कर रहे हैं।
कॉमेडियन प्रणित मोरे ने अपने शो के 370 की बिरयानी वाली वीडियो को लेकर माफी मांगी है। उन्होंने शनिवार को वीडियो जारी कर कहा कि वह लंबे समय से इस मुद्दे पर बात करना चाहते थे, लेकिन उनका इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड हो गया था। प्रणित ने कहा कि वीडियो के बाद उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है और वह मानते हैं कि इस आलोचना के हकदार हैं। उनके मुताबिक, शो के दौरान एक व्यक्ति (हिमांशु जांगड़ा) ने कई आपत्तिजनक बातें कही थीं। उस समय लोग हंस रहे थे, जिससे वह भी माहौल में बह गए और सही फैसला नहीं ले पाए। उन्होंने माना कि अगर चाहते तो उसी वक्त उस व्यक्ति को रोक सकते थे या उसका विरोध कर सकते थे। लेकिन ऐसा न करके उन्होंने उसे एक मंच दिया, जिससे मामला और बढ़ गया। प्रणित ने कहा कि इस वजह से जिन लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, उनसे वह माफी मांगते हैं। प्रणित ने यह भी कहा कि वह मामले में चल रही लीगल प्रोसीडिंग में अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से उन्हें एक और मौका देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्हें सीख मिली है और वह खुद पर काम कर रहे हैं। भविष्य में उनके कंटेंट और काम में भी यह बदलाव देखने को मिलेगा। बता दें कि प्रणित मोरे के शो में दर्शक हिमांशु जांगड़ा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिमांशु और प्रणित की आलोचना हुई। हिमांशु गुरुग्राम की जिस डिजाइन और मार्केटिंग एजेंसी में काम करते थे, उसने इस विवाद के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया। पूरी खबर यहां पढ़ें.. बता दें कि ‘370 रुपए की बिरयानी’ वाले वीडियो के बाद प्रणित मोरे के शो का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस पुराने वीडियो में सेजल पवार नाम की एक MBBS स्टूडेंट ने कहा था कि वे और उनके साथी मेडिकल स्टूडेंट कॉलेज (KEM हॉस्पिटल, मुंबई) में मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते और उनका मजाक उड़ाते थे। विवाद बढ़ने के साथ सेजल ने माफी मांगते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। पूरी खबर यहां पढ़ें.. साइबर पुलिस ने FIR दर्ज की महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत दर्ज की गई है। वहीं, शो के वीडियो के लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि देश का संविधान सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा को लांघना सही नहीं है। पूरी खबर यहां पढ़ें..
अनिल कपूर ने ‘बिग बॉस OTT 3’ होस्ट करने के बाद अब एक नए रियलिटी शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ का ऐलान किया है। मेकर्स ने हाल ही में इसका प्रोमो जारी किया है, जिसमें अनिल कपूर अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। प्रोमो में अनिल कपूर एक मीटिंग से बाहर निकलते हैं और टाई ढीली करते हुए कहते हैं, “किसी भी मीटिंग से निकलो तो दिमाग का शॉट हो जाता है। कोई हार्वर्ड से, कोई हावड़ा से है। इनकी डिग्री का क्या आचार डालूं? सिंपल सा सवाल पूछो तो रट्टू तोते की तरह किताब में घुस जाते हैं।” इसके बाद अनिल कपूर एक व्यक्ति को उनका वीडियो रिकॉर्ड करते हुए देखते हैं और उस पर नाराज होते हैं। फिर वह कहते हैं कि ऐसा शो बनाया जाएगा जहां सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि दिमाग चलेगा और कोई भी योग्य व्यक्ति भारत के टॉप 1% में शामिल हो सकता है। कहां देखा जा सकेगा शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ का प्रीमियर स्टार प्लस और जियो हॉटस्टार पर किया जाएगा। हालांकि, शो की रिलीज डेट का अभी ऐलान नहीं किया गया है। प्रोमो के लास्ट में अनिल कपूर अपने गाने ‘माई नेम इज लखन’ पर डांस करते नजर आते हैं। इस दौरान एक व्यक्ति उनसे कहता है, “सर, आधार कार्ड में तो अनिल कपूर नाम है।” इस पर अनिल कपूर जवाब देते हैं, “ज्यादा फ्री मत बन, कल मुझसे मिल।” अनिल कपूर फिल्म 'अल्फा' में नजर आएंगे वर्कफ्रंट की बात करें तो अनिल कपूर जल्द YRF स्पाई यूनिवर्स की सातवीं फिल्म 'अल्फा' में एक अहम भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे। यह फिल्म 3 जुलाई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। वहीं, एक्टर फिल्म शाहरुख खान की 'किंग' में भी दिखाई देंगे। वहीं, अनिल कपूर आखिरी बार फिल्म 'सूबेदार' में पूर्व सैनिक अर्जुन मौर्य के रोल में नजर आए थे। फिल्म 5 मार्च को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है। शाहरुख खान ने फिल्म ‘सूबेदार’ की तारीफ करते हुए उन्होंने अनिल कपूर के अभिनय को शानदार बताया था। एक्टर ने X पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था, “सूबेदार पूरी तरह से एंजॉय की। पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है कि वे हर रोल में अपना पूरा दम लगा देते हैं। उनका शांत लेकिन प्रभावी अभिनय प्रेरणादायक है और एक्शन भी बहुत शानदार है। आदित्य रावल, सौरभ शुक्ला, मोना सिंह, फैजल मलिक, राधिका मदान, हर किरदार को अलग-अलग स्टाइल में बनाया गया है और आप सभी ने शानदार काम किया है। सुरेश त्रिवेणी और पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारा प्यार।”
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार शाम अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट के साथ उनकी नई फिल्म भारत भाग्य विधाता (BBV) का विशेष प्रदर्शन देखेंगे। मुख्यमंत्री और कंगना चंडीगढ़ में आयोजित शाम के शो में एक साथ मौजूद रहेंगे। बता दें कि एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री सैनी और कंगना की दिल्ली में मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों के बीच फिल्म और विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के अनुसार, उसी मुलाकात के दौरान फिल्म के विशेष प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा हुई थी। फिल्म में कंगना का लीड रोल फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ में कंगना रनोट मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। फिल्म देशभक्ति, नेतृत्व और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर आधारित बताई जा रही है। रिलीज के बाद फिल्म को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा बनी हुई है। मुख्यमंत्री सैनी का यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के वर्षों में हरियाणा सरकार राज्य में फिल्म निर्माण और मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल कर चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री का किसी फिल्म के विशेष प्रदर्शन में शामिल होना सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के नजरिए से भी देखा जा रहा है। इसलिए हो रही चर्चा राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कंगना रनोट न केवल फिल्म जगत की चर्चित हस्ती हैं, बल्कि सांसद होने के कारण उनकी राजनीतिक पहचान भी मजबूत हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री और कंगना का एक साथ फिल्म देखना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी शुक्रवार को दिल्ली दौरे पर थे। इस दौरान उनकी कंगना रनोट से मुलाकात हुई। दोनों की तस्वीरें और मुलाकात की जानकारी सामने आने के बाद राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। अब अगले ही दिन चंडीगढ़ में फिल्म के विशेष शो में दोनों की मौजूदगी इस चर्चा को और बढ़ा रही है।
भारत में नेटफ्लिक्स के पास बड़े सितारे, बड़े बजट और वैश्विक पहचान है। फिर भी वह अमेजन प्राइम, जियोहॉटस्टार और दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसा सांस्कृतिक प्रभाव नहीं बना पाया। सवाल सिर्फ फ्लॉप शो का नहीं, दर्शकों से जुड़ाव का भी है। जहां दूसरे प्लेटफॉर्म ऐसे किरदार और कहानियां बनाने में सफल रहे जो लोगों की बातचीत का हिस्सा बन गए, वहीं नेटफ्लिक्स के कई चर्चित प्रोजेक्ट रिलीज के कुछ समय बाद भुला दिए गए। अब सवाल यह है कि भारतीय बाजार में नेटफ्लिक्स कहां चूक गया और 'लॉकअप' उसके लिए कितना बड़ा इम्तिहान साबित होगा। इसे समझने के लिए हमने डायरेक्टर विवेक शर्मा, लेखक धीरज मिश्रा और ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन से बातचीत की । नेटफ्लिक्स की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ फ्लॉप शो नहीं, भारतीय दर्शकों से दूरी भी है भारत में नेटफ्लिक्स की आलोचना अक्सर इस बात पर होती है कि उसके कई बड़े प्रोजेक्ट उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। लेकिन समस्या सिर्फ फ्लॉप शो या कमजोर व्यूअरशिप की नहीं है। सवाल यह है कि क्या नेटफ्लिक्स भारतीय दर्शकों के साथ वैसा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव बना पाया है, जैसा उसके प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म बना चुके हैं। आज भारतीय मनोरंजन बाजार में सफलता सिर्फ व्यूअरशिप से तय नहीं होती। सफलता तब मानी जाती है जब किरदार लोगों की बातचीत का हिस्सा बन जाएं, संवाद सोशल मीडिया से निकलकर आम बोलचाल तक पहुंच जाएं और दर्शक अगले सीजन का इंतजार करें। यहीं नेटफ्लिक्स संघर्ष करता दिखाई देता है। फिल्म निर्देशक विवेक शर्मा का कहना है कि शुरुआत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से उम्मीद थी कि वे नए फिल्ममेकरों, नई कहानियों और अलग कंटेंट के लिए मंच बनेंगे। लेकिन समय के साथ कई प्लेटफॉर्म उसी व्यवस्था का हिस्सा बन गए, जिससे बदलाव की उम्मीद थी। उनके मुताबिक नेटफ्लिक्स ने बड़े सितारों और बड़े बैनरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया, जबकि नए विचारों और प्रतिभाओं को अपेक्षित जगह नहीं मिली। अमेजन ने किरदार बनाए, नेटफ्लिक्स ने प्रोजेक्ट अगर भारतीय ओटीटी बाजार का सबसे बड़ा विजेता चुना जाए तो अमेजन प्राइम वीडियो आगे दिखाई देता है। वजह सिर्फ अच्छी सीरीज नहीं, बल्कि मजबूत फ्रेंचाइजी का निर्माण है। कालीन भैया, गुड्डू पंडित, श्रीकांत तिवारी, हाथीराम चौधरी और सचिव जी अब सिर्फ किरदार नहीं रहे, बल्कि भारतीय पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुके हैं। ऑरमैक्स मीडिया के अनुसार शाहिद कपूर और विजय सेतुपति की ‘फर्जी’ 3.71 करोड़ दर्शकों के साथ भारत की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली एसवीओडी सीरीज बनी थी। वहीं ‘मिर्जापुर’ और ‘पंचायत’ आज भी दर्शकों की बातचीत का हिस्सा हैं। ‘मिर्जापुर’ सिर्फ एक सीरीज नहीं है। उस पर फिल्म भी बन रही है। उसके किरदारों की अलग पहचान है और उसकी दुनिया दर्शकों के दिमाग में आज भी जीवित है। विवेक शर्मा कहते हैं कि बड़े कलाकार किसी भी प्रोजेक्ट को शुरुआती चर्चा दिला सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक वही कंटेंट टिकता है जिसमें नई सोच, मजबूत कहानी और याद रह जाने वाले किरदार हों। उनके मुताबिक दर्शक अब सिर्फ स्टार्स नहीं, बल्कि ऐसा कंटेंट चाहते हैं जो उन्हें नया अनुभव दे सके। यही वह क्षेत्र है जहां अमेजन प्राइम और दूसरे प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स से आगे दिखाई देते हैं। बड़े सितारों पर दांव, लेकिन याद क्या रह गया? नेटफ्लिक्स ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग हर बड़े कलाकार के साथ काम किया। सैफ अली खान, जयदीप अहलावत, माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी, करीना कपूर खान, राजकुमार राव, विजय वर्मा और बॉबी देओल जैसे नाम उसकी रणनीति का हिस्सा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन बड़े नामों के बावजूद कितने प्रोजेक्ट लंबे समय तक दर्शकों के बीच टिक पाए। सैफ अली खान के हालिया प्रोजेक्ट ‘कर्तव्य’ और ‘ज्वेल थीफ’ को रिलीज से पहले काफी चर्चा मिली। ट्रेलर लॉन्च हुए, इंटरव्यू हुए और सोशल मीडिया अभियान भी चले। लेकिन रिलीज के बाद वे वैसा सांस्कृतिक प्रभाव नहीं बना सके, जैसी उनके स्तर के प्रोजेक्ट से उम्मीद थी। इसी तरह माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की ‘मां-बहन’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हुई, लेकिन वह कुछ हफ्तों में ठंडी पड़ गई। विवेक शर्मा का कहना है कि समस्या कलाकारों में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो बार-बार सुरक्षित विकल्प चुनती है। उनके मुताबिक हाल के वर्षों में बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़े कलाकारों का इस्तेमाल हुआ, लेकिन उन्हें जिस तरह प्रस्तुत किया गया उसमें नवीनता और रचनात्मक गहराई की कमी दिखी। कंटेंट का संकट या विजन का संकट? नेटफ्लिक्स की चुनौतियों को सिर्फ कमजोर प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं देखा जा सकता। सवाल यह भी है कि क्या प्लेटफॉर्म के पास भारतीय बाजार के लिए स्पष्ट कंटेंट विजन है। विवेक शर्मा का मानना है कि सबसे बड़ी समस्या यही है। उनके मुताबिक कई बार फैसले रचनात्मकता के बजाय रिश्तों, लॉबी और स्थापित समूहों के प्रभाव में लिए जाते हैं। एक ही बैनर या प्रोडक्शन हाउस को बार-बार बड़े प्रोजेक्ट मिलते हैं, जबकि नए लोगों और नए विचारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। विवेक शर्मा कहते हैं कि कई ऐसे लोग कंटेंट से जुड़े फैसले ले रहे हैं जिन्होंने खुद रचनात्मक स्तर पर बड़ी सफलता हासिल नहीं की। ऐसे माहौल में नए विचारों और ताजा कंटेंट का आना मुश्किल हो जाता है। उनके मुताबिक नेटफ्लिक्स को गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है। उसे तय करना होगा कि वह सिर्फ बड़े नामों का प्लेटफॉर्म बनना चाहता है या नई प्रतिभाओं और नई कहानियों का मंच भी। भारत बदल गया, क्या नेटफ्लिक्स भी बदला? ऑरमैक्स की 2025 रिपोर्ट के अनुसार भारत में ओटीटी दर्शकों की संख्या 60 करोड़ से ज्यादा पहुंच चुकी है। अब यह बाजार सिर्फ महानगरों और अंग्रेजी भाषी दर्शकों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहर, कस्बे, परिवार और क्षेत्रीय दर्शक इसकी सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं। लेखक धीरज मिश्रा का मानना है कि नेटफ्लिक्स आम भारतीय दर्शकों की नब्ज पकड़ने में देर कर गया। उनके मुताबिक शुरुआती दौर में प्लेटफॉर्म के शो तकनीकी रूप से मजबूत थे और महानगरों के दर्शकों को पसंद आए, लेकिन बड़े दर्शक वर्ग से उनका जुड़ाव सीमित रहा। धीरज मिश्रा कहते हैं कि इसी दौरान दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म ऐसे शो और फिल्में लेकर आए जिनकी कहानियां और किरदार आम भारतीय दर्शकों के ज्यादा करीब थे। इसी वजह से उन्होंने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर ली। ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन मानते हैं कि नेटफ्लिक्स की शुरुआती पोजिशनिंग भी उसकी सीमाओं का कारण बनी। शुरुआत से उसने खुद को प्रीमियम प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया। उसकी कीमत दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से ज्यादा रही, जबकि भारत प्राइस-सेंसिटिव मार्केट है। अतुल मोहन के मुताबिक अमेजन प्राइम, जियोहॉटस्टार और दूसरे प्लेटफॉर्म कम कीमत में ज्यादा वैल्यू देने में सफल रहे। खासकर ‘पंचायत’ जैसे शो उन दर्शकों तक पहुंचे जिन्होंने खुद को उन कहानियों में देखा। लॉकअप नेटफ्लिक्स को बचाएगा या बेनकाब करेगा? ऐसे समय में नेटफ्लिक्स का ‘लॉकअप’ जैसे रियलिटी फॉर्मेट की ओर बढ़ना दिलचस्प माना जा रहा है। धीरज मिश्रा कहते हैं कि जब एकता कपूर का ‘लॉक अप’ एमएक्स प्लेयर पर आया था, तब उसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। इसकी बड़ी वजह यह थी कि एमएक्स प्लेयर को आम भारतीय दर्शकों का प्लेटफॉर्म माना जाता था। उनके मुताबिक अगर नेटफ्लिक्स अब इसी दिशा में बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वह भारतीय बाजार और बड़े दर्शक वर्ग को बेहतर समझने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उसे एकता कपूर जैसे निर्माता का साथ मिल रहा है, जिन्हें दर्शकों की पसंद और सफल कंटेंट की अच्छी समझ रखने वाला प्रोड्यूसर माना जाता है। अगर ‘लॉकअप’ सफल होता है तो यह साबित कर सकता है कि नेटफ्लिक्स अब व्यापक भारतीय दर्शक वर्ग की ओर बढ़ रहा है। लेकिन अगर यह प्रयोग भी उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं होता, तो सवाल और गंभीर हो जाएगा कि भारत में ऐसा कौन-सा फॉर्मेट है जिसमें नेटफ्लिक्स वास्तव में दर्शकों की नब्ज पकड़ सकता है। निष्कर्ष भारत में नेटफ्लिक्स की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ कंटेंट नहीं, कनेक्शन और कंटेंट विजन की भी है। विवेक शर्मा के मुताबिक प्लेटफॉर्म को नए फिल्ममेकरों, नई प्रतिभाओं और नए विचारों के लिए ज्यादा जगह बनानी होगी। धीरज मिश्रा मानते हैं कि उसे आम भारतीय दर्शकों की पसंद और भावनाओं को बेहतर समझना होगा। वहीं अतुल मोहन के अनुसार उसकी प्रीमियम पोजिशनिंग और महंगी सदस्यता भी उसकी पहुंच सीमित करती रही है। नेटफ्लिक्स के पास पैसा, तकनीक, वैश्विक पहचान और बड़े सितारे हैं। लेकिन भारतीय बाजार में सफलता सिर्फ बड़े नामों से नहीं मिलती। यहां दर्शक ऐसे किरदार और कहानियां चाहता है जिनसे वह जुड़ सके और जो उसकी अपनी दुनिया के करीब महसूस हों। शायद इसी वजह से नेटफ्लिक्स आज ऐसे मोड़ पर है जहां उसे सिर्फ नए शो नहीं, नए नजरिए की भी जरूरत है। सवाल यह नहीं कि नेटफ्लिक्स कंटेंट बना सकता है या नहीं। सवाल यह है कि क्या वह ऐसा कंटेंट बना सकता है जो भारतीय दर्शकों के दिल और यादों में जगह बना सके।
बॉलीवुड एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत शुक्रवार शाम जयपुर पहुंचीं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ अपनी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ की विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुईं। शहर के ईपी मिराज सिनेमाघर में आयोजित इस स्पेशल स्क्रीनिंग में राजस्थान सरकार के कई मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे। कंगना ने कहा- मेरी पूरी टीम के साथ यहां हूं। सीएम और उनकी टीम यहां आई है, नर्सिंग स्टूडेट्स आए हैं। यह मेरे लिए खास दिन है। मैं चाहती हूं कि आज मेरी फिल्म बोले। यह अनसंग हीरो की कहानी है, जो इस देश के असली हीरो हैं। मै आज यहां ऐसे ही अनसंग हीरोज को सम्मानित करेंगे। सीएम ने कहा- जो सब कुछ छोड़कर राष्ट्र को समर्पित है, उनकी कहानी लेकर कंगना जी आई हैं। कंगना जी ने राष्ट्र और समाज के प्रति काम करने वालों पर फिल्म बनाई है, उसके लिए इनका धन्यवाद देना चाहता हूं। हम सभी राष्ट्र प्रथम को मानने वाले लोग हैं। कई लोगों ने गुमनाम रहकर देश की सेवा की है। कोरोना के वक्त भी ऐसे ही गुमनाम लोगों ने देश की सेवा की है। यह फिल्म काफी कुछ सिखाने वाली साबित होगी। बता दें कि कंगना रनौत शुक्रवार सुबह जोधपुर से सड़क मार्ग के जरिए जयपुर पहुंचीं। यहां पहुंचने के बाद उन्होंने कुछ समय रामबाग पैलेस में आराम किया। शाम को वे सीधे ईपी मिराज सिनेमाघर पहुंचीं, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस मौके पर फिल्म को देखने के लिए जयपुर और आसपास के क्षेत्रों से 200 से अधिक नर्सों को आमंत्रित किया गया था। फिल्म में नर्सों के जीवन, उनके संघर्ष और समाज में उनकी भूमिका को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसलिए यह स्क्रीनिंग उनके लिए भी विशेष महत्व रखती थी। 26/11 हमले की अनकही कहानी को सामने लाती है फिल्म फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ साल 2008 में हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमलों पर आधारित है। यह फिल्म केवल आतंकी हमलों की कहानी नहीं कहती, बल्कि उन लोगों के जीवन को भी सामने लाती है, जो इस त्रासदी के दौरान और उसके बाद चुपचाप अपने कर्तव्यों को निभाते रहे। फिल्म का पहला हिस्सा नर्सों के जीवन और उनके संघर्षों पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली नर्सों को अक्सर वह सम्मान नहीं मिल पाता, जिसकी वे हकदार होती हैं। मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटी रहने वाली नर्सों का योगदान कई बार डॉक्टरों की चमक के पीछे दब जाता है, जबकि चिकित्सा व्यवस्था में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। समाज की अनदेखी सच्चाई को उजागर करती है फिल्म फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि नर्सिंग पेशे से जुड़ी महिलाओं को व्यक्तिगत जीवन में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। परिवार और समाज में सम्मान की कमी, कठिन कार्य परिस्थितियां और विवाह जैसे सामाजिक पहलुओं में आने वाली बाधाएं फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। निर्देशक मनोज तापड़िया ने बताया कि फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज के उन वर्गों की आवाज बनना है, जिनके संघर्ष अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनकी भूमिका को सम्मान मिलना चाहिए। कलाकारों ने निभाए प्रभावशाली किरदार फिल्म में कंगना रनौत के अलावा गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, आशा शेलार, प्रिया अर्जुन बेर्डे, जाहिद खान और सुहिता थट्टे ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को संवेदनशीलता और प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। स्क्रीनिंग के बाद उपस्थित दर्शकों और नर्सिंग समुदाय से जुड़े लोगों ने फिल्म की सराहना की। उनका कहना था कि यह फिल्म नर्सों के जीवन के उन पहलुओं को सामने लाती है, जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सों का योगदान अमूल्य है। ऐसी फिल्में समाज को उनके प्रति संवेदनशील बनाने का कार्य करती हैं। कंगना रनौत ने भी दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फिल्म उन अनसुने नायकों को समर्पित है, जो हर परिस्थिति में मानवता की सेवा में जुटे रहते हैं।
स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो में हुईं आपत्तिजनक बातों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान आया है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा को लांघना सही नहीं है। इससे पहले महाराष्ट्र सायबर पुलिस ने गुरुग्राम में हुए एक कॉमेडी शो के वीडियो को लेकर प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। इस शो में महिलाओं और मृतकों के शवों पर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं। संविधान आजादी देता है, लेकिन जिम्मेदारी जरूरी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि वे खुद स्टैंडअप कॉमेडी देखना पसंद करते हैं, लेकिन कॉमेडी करते समय शालीनता के न्यूनतम मानकों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, भारत का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी देता है। हालांकि, इसमें कुछ सुरक्षा उपाय भी तय किए गए हैं ताकि इस आजादी का गलत इस्तेमाल न हो। जब अभिव्यक्ति अनियंत्रित हो जाती है, तो यह समाज में सम्मान से जीने के लोगों के अधिकार को प्रभावित करती है। मनोरंजन के नाम पर मर्यादा न लांघें मुख्यमंत्री ने साफ किया कि कॉमेडी एक लोकप्रिय माध्यम है, लेकिन इसके जरिए सामाजिक सीमाओं को पार करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मनोरंजन के लिए मर्यादा की सीमाएं तोड़ना लोगों के साथ अन्याय करने जैसा है। इसलिए स्टैंडअप कॉमेडी करते समय कलाकारों को शालीनता के दायरे का पालन करना चाहिए। क्या है पूरा मामला दरअसल यह पूरा मामला गुरुग्राम में हुए उनके एक लाइव शो से जुड़ा है, जहां एक 22 साल के लड़के ने बातचीत के दौरान महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। शो में बातचीत के दौरान जांगड़ा ने एक डेटिंग अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक महिला पर करीब ₹360–₹370 की चिकन बिरयानी का खर्च किया था। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिला ने उन्हें घर छोड़ने के लिए कहा, तो उन्हें अपने खर्च की भरपाई के रूप में फिजिकल इंटिमेसी की उम्मीद थी। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रणित मोरे की काफी आलोचना हुई। विवाद बढ़ने पर कॉमेडियन को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी और उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया है। वहीं वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा को गुरुग्राम स्थित कंपनी स्टारविक डिजाइन से नौकरी से निकाल दिया गया। इसके अलावा एक और वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में सेजल पवार नाम की एक डॉक्टर और इन्फ्लुएंसर ने कहा था कि वे और उनके साथी मेडिकल स्टूडेंट कॉलेज (KEM हॉस्पिटल, मुंबई) में मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते और उनका मजाक उड़ाते थे। सोशल मीडिया पर विरोध के बाद प्रणित ने माफी मांगी इंस्टाग्राम और एक्स सहित कई प्लेटफॉर्म पर लोगों ने जांगड़ा के कमेंट की आलोचना की। विरोध बढ़ने के बाद प्रणित मोरे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इंस्टाग्राम स्टोरी में मोरे ने लिखा था कि हाल ही में वायरल हुई क्लिप को लेकर मिली आलोचनाओं को मैं स्वीकार करता हूं। दर्शक के कमेंट्स मेरे विचार नहीं हैं। मुझे उस समय बेहतर जवाब देना चाहिए था। हमने वीडियो हटा दिया है। मैं माफी मांगता हूं और भविष्य में ऐसे मामलों को अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ संभालूंगा। हिमांशु जांगड़ा को नौकरी से निकाला गया स्टारविक डिजाइन ने इस मामले में जांगड़ा पर एक्शन लेते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया। कंपनी के फाउंडर विवेक विश्वकर्मा ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा, “पिछले 24 घंटों में मुझे हमारे एक कर्मचारी हिमांशु जांगड़ा को लेकर सैकड़ों मैसेज, ईमेल और फोन कॉल आए हैं। आप सभी की तरह मैंने भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो क्लिप्स देखे हैं। मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि उन वीडियो में दिखाई गई बातें आपत्तिजनक हैं। मैं उन बातों से सहमत नहीं हूं। हमारी कंपनी भी ऐसे विचारों का समर्थन नहीं करती और न ही हम चाहते हैं कि ऐसी बातें युवाओं को प्रभावित करें।” -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें शवों के प्राइवेट पार्ट्स का उड़ता है मजाक':'370 की बिरयानी' विवाद के बीच प्रणित मोरे के शो का एक और वीडियो वायरल ‘370 रुपए की बिरयानी’ वाले वीडियो के बाद कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में सेजल पवार नाम की एक डॉक्टर और इन्फ्लुएंसर ने कहा था कि वे और उनके साथी मेडिकल स्टूडेंट कॉलेज (KEM हॉस्पिटल, मुंबई) में मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते और उनका मजाक उड़ाते थे। पूरी खबर पढ़ें
फिल्म 'डॉन 3' विवाद में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने हिंदी रश से कहा कि एक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग (नॉन-कोऑपरेशन) का निर्देश जारी करने से पहले उन्होंने रणवीर और डायरेक्टर फरहान अख्तर की प्राइवेट व्हाट्सएप चैट खुद पढ़ी थीं। हालांकि, रणवीर सिंह की तरफ से लीगल नोटिस मिलने के बाद फेडरेशन ने उनके खिलाफ जारी असहयोग का यह निर्देश अब वापस ले लिया था। प्राइवेट व्हाट्सएप चैट देखकर लिया था एक्शनअशोक पंडित ने बताया कि एक्टर के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था और गहराई से दस्तावेजों की जांच की गई थी। उन्होंने कहा, शिकायत मिलने के बाद हमने रणवीर सिंह, फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के बीच हुई व्हाट्सएप चैट देखी थीं। चैट से साफ था कि फिल्म के लिए स्टाइलिंग पूरी हो चुकी थी, कपड़े फाइनल थे, टिकट बुक हो चुके थे और होटलों का इंतजाम भी हो गया था। पूरी यूनिट तीन हफ्ते में शूटिंग के लिए रवाना होने वाली थी, लेकिन ऐन वक्त पर रणवीर पीछे हट गए। शूटिंग से तीन हफ्ते पहले फिल्म छोड़ने से नुकसानअशोक पंडित ने कहा कि फिल्म 'डॉन 3' के डायरेक्टर फरहान अख्तर और प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी ने करीब पांच महीने पहले फेडरेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। मेकर्स का कहना था कि वे फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर 45 करोड़ रुपए खर्च कर चुके थे। अशोक पंडित ने मेकर्स का बचाव करते हुए कहा कि 300 करोड़ रुपए के बजट वाली फिल्म में इस तरह के खर्च होना आम बात है। कोई भी प्रोड्यूसर एक्टर की पक्की सहमति के बिना इतने पैसे खर्च नहीं करता। मेकर्स इस 45 करोड़ रुपए के खर्च का पूरा ऑडिट पेपर दिखाने के लिए भी तैयार हैं। रणवीर के लीगल नोटिस के बाद हटाया निर्देशमई के महीने में फेडरेशन ने रणवीर सिंह के अचानक फिल्म छोड़ने पर उनके खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया था। इसके खिलाफ रणवीर सिंह ने अपनी लीगल टीम के जरिए फेडरेशन को एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें इस निर्देश को हटाने की मांग की गई थी। इसके ठीक एक दिन बाद फेडरेशन के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने सिनेमा जगत की अन्य संस्थाओं CINTAAऔर इम्पा IMPAA के अनुरोध पर इस निर्देश को वापस लेने का ऐलान कर दिया। हालांकि, फेडरेशन की लीगल टीम रणवीर के नोटिस का कानूनी जवाब जरूर देगी। बैन करने का अधिकार नहीं, बातचीत से हलअशोक पंडित ने यह भी साफ किया कि फेडरेशन का मकसद किसी के काम को रोकना नहीं है। उन्होंने कहा, हम रणवीर की स्टारडम का सम्मान करते हैं। हमारे पास किसी को बैन करने का कोई अधिकार नहीं है। हमने रणवीर से अपील की है कि वे आएं और हमारे साथ बैठकर इस मामले का कोई बीच का रास्ता निकालें। अब फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी और रणवीर सिंह आपस में बैठकर इस नुकसान की भरपाई और विवाद को सुलझाने के लिए तैयार हैं ताकि फिल्म का काम दोबारा शुरू हो सके। जानिए क्या है रणवीर और फरहान अख्तर का विवाद डॉन 3 की घोषणा करीब तीन साल पहले हुई थी, जिसे फरहान अख्तर डायरेक्ट करने वाले थे। विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने पिछले साल दिसंबर में 'धुरंधर' की सफलता के बाद स्क्रिप्ट में अंतर होने के कारण फिल्म छोड़ दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर के फिल्म छोड़कर जाने से पहले मेकर्स आउटडोर लोकेशन और प्रोडक्शन पर काफी खर्च कर चुके थे। रणवीर के हटने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रोड्यूसर्स ने उनसे 45 करोड़ रुपए की मांग की। रणवीर ने पहले पैसे देने से मना किया, लेकिन बाद में 10 करोड़ रुपए का ऑफर दिया, जिसे मेकर्स ने ठुकरा दिया।
ऋतिक रोशन अब सिर्फ बॉलीवुड स्टार नहीं, बल्कि इंटरनेशनल स्क्रीन प्रेजेंस की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी डील ग्लोबल मीडिया और टैलेंट कंपनी एनोनिमस कंटेंट के साथ हुई है। यह वही कंपनी है जो दुनिया भर में बड़े फिल्ममेकर, लेखक और कलाकारों के साथ काम करने और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स को आकार देने के लिए जानी जाती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी हॉलीवुड फिल्म की घोषणा नहीं हुई है लेकिन इंडस्ट्री में ऋतिक के इस कदम को करियर के अगले बड़े विस्तार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ऋतिक एक साथ एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिकाओं में बढ़ा रहे मौजूदगी इंडस्ट्री मान रही है कि यह सिर्फ विदेश में एजेंट बदलने जैसा कदम नहीं, बल्कि इंटरनेशनल को-प्रोडक्शन, ग्लोबल कंटेंट और क्रॉस-मार्केट मौजूदगी की रणनीति का हिस्सा भी है। पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ साझेदारी की है। इसी कड़ी ऋतिक का नया कदम थोड़ा अलग माना जा रहा है। वजह सिर्फ हॉलीवुड में संभावनाएं नहीं, बल्कि यह भी है कि यह फैसला ऐसे समय आया है जब ऋतिक एक साथ एक्टर, डायरेक्ट और प्रोड्यूसर तीनों भूमिकाओं में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। अभी कोई हॉलीवुड फिल्म या सीरीज अनाउंस नहीं हुई, ‘कृष 4’ की तैयारियों में जुटे हैं सुपरस्टार दिलचस्प यह है कि अभी तक किसी हॉलीवुड फिल्म या सीरीज की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। एक तरफ एक्टर के तौर पर ऋतिक अपनी सबसे बड़ी फ्रेंचाइज ‘कृष 4’ की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ निर्माता के रूप में अपने बैनर HRX Films का विस्तार हो रहा है। ऐसे में नई ग्लोबल डील ऋतिक के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स, को-प्रोडक्शन, ग्लोबल स्ट्रीमिंग कंटेंट और नए क्रिएटिव सहयोगों के रास्ते खोल सकती है। सुपरस्टार का अगला बड़ा दांव होम्बले फिल्म्स के साथ पैन-इंडिया प्रोजेक्ट है ऋतिक ने हाल में दक्षिण भारतीय प्रोडक्शन हाउस होम्बले फिल्म्स के साथ भी एक पैन-इंडिया फिल्म के लिए हाथ मिलाया है। करियर के लिए क्या संकेत मिल रहे हैं... इंटरनेशनल फिल्मों और सीरीज के लिए नए अवसरों की संभावना खुलेंगी। हॉलीवुड स्टूडियो और स्ट्रीमिंग मंचों तक सीधी पहुंच बनेगी। निर्माता के तौर पर भी ग्लोबल विस्तार की तैयारी है। अभी ऋ तिक की प्राथमिकताएं क्या हैं - ‘कृष 4’ में पहली बार निर्देशन की कमान भी संभाल रहे हैं। - HRX Films से प्रोडक्शन में सक्रिय विस्तार कर रहे हैं। - प्राइम वीडियो के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। - भारत में लीड हीरो की तरह सफर लगातार जारी रहेगा। बॉलीवुड से हॉलीवुड एजेंसियों की ओर बढ़ते अन्य बड़े भारतीय सितारे प्रियंका चोपड़ा - लंबे समय से अमेरिकी टैलेंट नेटवर्क के साथ जुड़ी हैं। हॉलीवुड में ‘क्वांटिको’, ‘बेवॉच’ और ‘हेड्स ऑफ स्टेट’ कर चुकी हैं। आलिया भट्ट - अंतरराष्ट्रीय एजेंसी WME (विलियम मॉरिस एंडेवर) से जुड़ीं और उसके बाद हॉलीवुड डेब्यू ‘हार्ट अॉफ स्टोन’ से किया। सोनम कपूर - ग्लोबल फैशन नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्क्रीन उपस्थिति के जरिए अलग ब्रांडिंग बनाई। ‘ब्लाइंड’ से पहले भी विदेशी मंचों पर आईं। राधिका आप्टे - एजेंसी मॉडल से आगे बढ़कर सीधे अंतरराष्ट्रीय कंटेंट स्पेस में गईं। ‘सिस्टर मिडनाइट’, ‘द वेडिंग गेस्ट’ और कई बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ीं। विद्युत जामवाल - हॉलीवुड के इंटरनेशनल एक्शन स्पेस में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस किया। ‘स्ट्रीट फाइटर’ से करेंगे डेब्यू।
टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी और उनके पति विवेक दहिया हाल ही में जुड़वां बेटों के माता-पिता बने हैं। मई महीने में बेटों के जन्म के बाद दिव्यांका ने आज सोशल मीडिया पर उनकी पहली झलक शेयर की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बच्चों की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मुझे चुनने के लिए शुक्रिया।' दिव्यांका और विवेक की शादी के 10 साल बाद उनके घर पहले बच्चों का जन्म हुआ है। हालांकि इन तस्वीरों में उन्होंने दोनों बेटों का चेहरा नहीं दिखाया है। भगवान से मांगी थी एक खुशी, मिली डबलदिव्यांका और विवेक ने इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट पोस्ट शेयर कर बेटों के आने की जानकारी दी थी। हमने भगवान से एक खुशी मांगी थी, लेकिन उन्होंने हमें डबल दे दी। हमारे घर जुड़वां बेटों का जन्म हुआ है। विवेक दहिया ने पोस्ट में लिखा कि उनका लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। लड़के आ चुके हैं और जिंदगी पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही है। उन्होंने आगे लिखा, 'मेरे करण अर्जुन आ गए।' कपल ने माता-पिता के इस नए सफर के लिए लोगों से आशीर्वाद मांगा है। आगे कपल ने लिखा है, ‘दिव्यांका और मुझे पेरेंटहुड के नए खूबसूरत सफर को शुरू करने के लिए आप सभी के प्यार और आशीर्वाद की जरुरत है।’ शेयर की तस्वीर में लिखा गया है, हमने भगवान से खुशियां मांगीं और भगवान ने कहा, डबल ले लो। हमें जुड़वा बच्चे हुए हैं। मार्च में की थी प्रेग्नेंसी अनाउंस दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक ने मार्च में फैंस को गुड न्यूज दी थी। एक्ट्रेस ने बेबी बंप की तस्वीरों के साथ लिखा था, ‘10 साल बाद कहानी में आया सबसे खूबसूरत ट्विस्ट। कुछ सफर जल्दी पूरे करने के लिए नहीं होते। वो साथ-साथ तैयार होने के लिए होते हैं। और जब आपको लगता है कि आपकी कहानी पूरी हो चुकी है। तभी जिंदगी उसमें सबसे खूबसूरत अध्याय जोड़ देती है। अब भी यकीन नहीं हो रहा। बिना वजह मुस्कुरा रहे हैं। दिल में सिर्फ शुक्र और खुशी है। हम माता-पिता बनने वाले हैं।’ देखिए दिव्यांका त्रिपाठी की प्रेग्नेंसी की चुनिंदा तस्वीरें- टीवी के शो के सेट में हुआ प्यार और कर ली शादी दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दाहिया की मुलाकात टीवी शो ये है मोहब्बतें के सेट पर हुई थी। दोनों शो के लीड एक्टर्स थे। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और फिर जनवरी 2016 में कपल ने सगाई की। सगाई के 5 महीने बाद जुलाई 2016 में दिव्यांका और विवेक की शादी भोपाल में हुई। दिव्यांका त्रिपाठी को टीवी शो बनूं मैं तेरी दुल्हन से देशभर में पहचान मिली थी। इसेक बाद वो ये हैं मोहब्बतें में दिखीं। टीवी शोज के अलावा दिव्यांका कई रियलिटी शो, कई वेब सीरीज और फिल्मों का भी हिस्सा रही हैं। 'सिनेस्टार्स की खोज' से शुरू किया था एक्टिंग करियरदिव्यांका त्रिपाठी टीवी इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2004 में रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार्स की खोज' से की थी। इसके बाद साल 2006 में आए सीरियल 'बनू मैं तेरी दुल्हन' में विद्या का लीड रोल निभाकर वे काफी पॉपुलर हुईं। दिव्यांका ने 'खाना खजाना', 'नचले वे विद सरोज खान', 'जोर का झटका', 'कॉमेडी सर्कस' और 'नच बलिए 8' जैसे कई शोज में काम किया है। वे 'खतरों के खिलाड़ी 11' की रनर-अप भी रही थीं। हाल ही में वे सोनी लिव की सीरीज 'अदृश्यम' में इंस्पेक्टर पार्वती सहगल के रोल में नजर आई थीं।
टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी और उनके पति विवेक दहिया हाल ही में जुड़वां बेटों के माता-पिता बने हैं। मई महीने में बेटों के जन्म के बाद दिव्यांका ने आज सोशल मीडिया पर उनकी पहली झलक शेयर की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बच्चों की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मुझे चुनने के लिए शुक्रिया।' दिव्यांका और विवेक की शादी के 10 साल बाद उनके घर पहले बच्चों का जन्म हुआ है। हालांकि इन तस्वीरों में उन्होंने दोनों बेटों का चेहरा नहीं दिखाया है। भगवान से मांगी थी एक खुशी, मिली डबलदिव्यांका और विवेक ने इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट पोस्ट शेयर कर बेटों के आने की जानकारी दी थी। हमने भगवान से एक खुशी मांगी थी, लेकिन उन्होंने हमें डबल दे दी। हमारे घर जुड़वां बेटों का जन्म हुआ है। विवेक दहिया ने पोस्ट में लिखा कि उनका लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। लड़के आ चुके हैं और जिंदगी पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही है। उन्होंने आगे लिखा, 'मेरे करण अर्जुन आ गए।' कपल ने माता-पिता के इस नए सफर के लिए लोगों से आशीर्वाद मांगा है। आगे कपल ने लिखा है, ‘दिव्यांका और मुझे पेरेंटहुड के नए खूबसूरत सफर को शुरू करने के लिए आप सभी के प्यार और आशीर्वाद की जरुरत है।’ शेयर की तस्वीर में लिखा गया है, हमने भगवान से खुशियां मांगीं और भगवान ने कहा, डबल ले लो। हमें जुड़वा बच्चे हुए हैं। मार्च में की थी प्रेग्नेंसी अनाउंस दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक ने मार्च में फैंस को गुड न्यूज दी थी। एक्ट्रेस ने बेबी बंप की तस्वीरों के साथ लिखा था, ‘10 साल बाद कहानी में आया सबसे खूबसूरत ट्विस्ट। कुछ सफर जल्दी पूरे करने के लिए नहीं होते। वो साथ-साथ तैयार होने के लिए होते हैं। और जब आपको लगता है कि आपकी कहानी पूरी हो चुकी है। तभी जिंदगी उसमें सबसे खूबसूरत अध्याय जोड़ देती है। अब भी यकीन नहीं हो रहा। बिना वजह मुस्कुरा रहे हैं। दिल में सिर्फ शुक्र और खुशी है। हम माता-पिता बनने वाले हैं।’ देखिए दिव्यांका त्रिपाठी की प्रेग्नेंसी की चुनिंदा तस्वीरें- टीवी के शो के सेट में हुआ प्यार और कर ली शादी दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दाहिया की मुलाकात टीवी शो ये है मोहब्बतें के सेट पर हुई थी। दोनों शो के लीड एक्टर्स थे। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और फिर जनवरी 2016 में कपल ने सगाई की। सगाई के 5 महीने बाद जुलाई 2016 में दिव्यांका और विवेक की शादी भोपाल में हुई। दिव्यांका त्रिपाठी को टीवी शो बनूं मैं तेरी दुल्हन से देशभर में पहचान मिली थी। इसेक बाद वो ये हैं मोहब्बतें में दिखीं। टीवी शोज के अलावा दिव्यांका कई रियलिटी शो, कई वेब सीरीज और फिल्मों का भी हिस्सा रही हैं। 'सिनेस्टार्स की खोज' से शुरू किया था एक्टिंग करियरदिव्यांका त्रिपाठी टीवी इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2004 में रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार्स की खोज' से की थी। इसके बाद साल 2006 में आए सीरियल 'बनू मैं तेरी दुल्हन' में विद्या का लीड रोल निभाकर वे काफी पॉपुलर हुईं। दिव्यांका ने 'खाना खजाना', 'नचले वे विद सरोज खान', 'जोर का झटका', 'कॉमेडी सर्कस' और 'नच बलिए 8' जैसे कई शोज में काम किया है। वे 'खतरों के खिलाड़ी 11' की रनर-अप भी रही थीं। हाल ही में वे सोनी लिव की सीरीज 'अदृश्यम' में इंस्पेक्टर पार्वती सहगल के रोल में नजर आई थीं।
आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। 'गवर्नर' उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? 'गवर्नर' उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।
26/11 मुंबई हमलों पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ज्यादातर कहानियां पुलिस, आतंकियों या सुरक्षा बलों के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं। लेकिन उस रात कामा अस्पताल के भीतर क्या चल रहा था, वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने किन हालात में मरीजों को बचाया, इस पर बहुत कम बात हुई। 'भारत भाग्य विधाता' उसी भूले हुए अध्याय को सामने लाती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो सुर्खियों में कभी नहीं आए, लेकिन जिनकी वजह से सैकड़ों लोग सुरक्षित घर लौट सके। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है जब मुंबई दहशत के साए में थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोलियां चल रही थीं और उसी दौरान कामा अस्पताल भी खतरे के दायरे में आ गया। अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सें, वार्ड स्टाफ और दूसरे कर्मचारी अचानक ऐसे हालात में फंस जाते हैं जिनके लिए कोई प्रशिक्षण काफी नहीं होता। कहानी का केंद्र एक नर्स और उसके साथ काम करने वाले लोग हैं, जो अपनी जान बचाने से पहले मरीजों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं। फिल्म का अच्छा पक्ष यह है कि यह किसी एक किरदार को सुपरहीरो नहीं बनाती। यहां बहादुरी सामूहिक है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ता है और यही बात कहानी को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि फिल्म की पटकथा शुरुआत में थोड़ा समय लेती है। पहले आधे घंटे में किरदारों और उनके रिश्तों को स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे गति कुछ धीमी महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे खतरा करीब आता है, फिल्म पकड़ बनाती चली जाती है। फिल्म में एक्टिंग कंगना रनोट इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां वह अपने स्टारडम पर नहीं, बल्कि किरदार पर भरोसा करती दिखाई देती हैं। लंबे समय बाद उन्हें ऐसे रोल में देखा गया है जहां ऊंची आवाज, लंबे भाषण या नाटकीयता नहीं है। उनका अभिनय संयमित है और यही बात असर छोड़ती है। कई दृश्यों में कंगना सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से डर, बेचैनी और जिम्मेदारी को व्यक्त कर देती हैं। यह उनके हालिया कामों से अलग प्रदर्शन है। गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं। फिल्म का एक बड़ा गुण यह है कि सहायक कलाकार सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बनते, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा लगते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि फिल्म किसी एक कलाकार की नहीं, पूरी टीम की है। फिल्म का डायरेक्शन निर्देशक मनोज तापड़िया ने विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए काम किया है। उन्होंने 26/11 को तमाशे की तरह पेश करने के बजाय इंसानी नजरिए से देखने की कोशिश की है। फिल्म आतंकियों से ज्यादा उन लोगों पर फोकस करती है जिन्होंने मुश्किल समय में अपना कर्तव्य निभाया। निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म लगातार सम्मानजनक बनी रहती है। कहीं भी अनावश्यक देशभक्ति या भावनाओं का दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई। कई दृश्य स्वाभाविक रूप से असर छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म और ज्यादा तीखी हो सकती थी। कुछ घटनाएं पर्दे पर जितना तनाव पैदा कर सकती थीं, उतना नहीं कर पातीं। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म की सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में सफल रहता है। अस्पताल के गलियारों, बंद कमरों और भय के माहौल को कैमरा प्रभावी ढंग से पकड़ता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां दर्शक जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है, फिर भी तनाव बना रहता है। फिल्म की एडिटिंग भी काफी टाइट है। फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती, हालांकि पहले हिस्से में थोड़ी काट-छांट की जा सकती थी। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम कहानी को असलियत के करीब लाते हैं। हॉस्पिटल का माहौल बनावटी नहीं लगता। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक याद रह जाने वाला नहीं है, लेकिन यह शिकायत भी नहीं बनता। पृष्ठभूमि संगीत कई महत्वपूर्ण दृश्यों में भावनात्मक असर बढ़ाता है। अच्छी बात यह है कि संगीत कहानी पर हावी नहीं होता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी शुरुआत है। कुछ दर्शकों को लग सकता है कि कहानी मुख्य संघर्ष तक पहुंचने में ज्यादा समय लेती है। इसके अलावा कुछ सहायक किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था। जो दर्शक पूरी तरह थ्रिलर देखने की उम्मीद से जाएंगे, उन्हें फिल्म कुछ जगहों पर अपेक्षा से ज्यादा भावनात्मक और कम रोमांचक लग सकती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट 'भारत भाग्य विधाता' उन लोगों को याद करने की कोशिश है जिनका नाम इतिहास के बड़े पन्नों में शायद नहीं लिखा गया, लेकिन जिन्होंने अपने हिस्से की बहादुरी पूरी ईमानदारी से निभाई। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आतंक की कहानी सुनाते-सुनाते इंसानियत की कहानी बन जाती है। कंगना रनोट का सधा हुआ अभिनय, मजबूत सहायक कलाकार और संवेदनशील निर्देशन इसे एक असरदार अनुभव बनाते हैं। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर है। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित और भावनात्मक मानवीय कहानियां पसंद करते हैं, तो 'भारत भाग्य विधाता' एक बार देखी जा सकती है।
फिल्म 'काला हिरण' का फर्स्ट लुक रिलीज:नाम बदलकर सलमान खान और लॉरेंस का जिक्र किया गया; देखें वीडियो
सलमान खान के चर्चित काला हिरण मामले से प्रेरित फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' का फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया है। फिल्म का पहला वीडियो शुक्रवार को रिलीज हुआ। जिसमें सलमान खान का जिक्र अयान खान और लॉरेंस का जिक्र लॉयन के नाम से किया गया है। वीडियो में काला हिरण शिकार केस और कानूनी लड़ाई से जुड़े मामले को दिखाया गया है। कई डायलॉग बिश्नोई समाज के त्याग और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन भारत एस. श्रीनाथे ने किया है। जबकि अमित जानी इसके लेखक और निर्माता हैं। फिल्म का ग्लोबल टीजर 20 जून को रिलीज किया जाएगा। 'काला हिरण' को लेकर सलमान ने लीगल नोटिस भेजा 'काला हिरण' को लेकर सलमान की ओर से लीगल नोटिस भेजा गया था। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि सलमान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में 'काला हिरण' नाम की प्रस्तावित फिल्म के प्रोडक्शन और प्रमोशन को तुरंत रोकने की मांग की गई। सलमान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ा फिल्म 'काला हिरण' को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ दिया। जानी ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए वीडियो में कहा, हर कोई मुझसे पूछ रहा है, मीडिया, दोस्त, कि सलमान खान के नोटिस पर आपको क्या कहना है? इस नोटिस पर मैं क्या कहूं? पिछले 36 घंटों से उनकी डोंगरी, धारावी, जोगेश्वरी के मुस्लिम लड़कों की फैन फॉलोइंग, उनके टूलकिट ने मुझे जान से मारने, मुंबई आने और सिर कलम करने के हजारों मैसेज भेजे हैं और उनके टूलकिट के जरिए एक मैसेज, चाहे वह असली हो या नकली, मुझे नहीं पता, डी-कंपनी के नाम से भेजा गया है। डी-कंपनी छोड़ेगी नहीं। जानी ने आगे कहा कि तो मैं किसका जवाब दूं? क्या मैं सलमान खान की टूलकिट द्वारा हजारों गालियां दिलवाई गईं और धमकियां दिलवाई गईं, उनका जवाब दूं? क्या मैं इस नोटिस का जवाब दूं? वहीं, इससे पहले ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट में पोस्ट किए वीडियो में अमित जानी ने कहा था कि हमारी पूरी फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। हमारी पूरी फिल्म सलमान खान के नजरिए से नहीं है। वहीं ABP न्यूज के साथ बातचीत में जानी ने कहा था कि 'काला हिरण' बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी विरासत और वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। सलमान खान फिल्म का सिर्फ एक पार्ट हैं। 1998 में काला हिरण शिकार मामला सामने आया सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार मामला साल 1998 में सामने आया था, जब वो जोधपुर में फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग कर रहे थे। सलमान के खिलाफ कुल चार केस दर्ज किए गए थे। इनमें दो चिंकारा शिकार मामले, एक कांकाणी काला हिरण शिकार मामला और एक आर्म्स एक्ट का मामला शामिल था। काला हिरण शिकार मामले में बिश्नोई समुदाय की शिकायत पर सलमान के साथ सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। अप्रैल 2006 में चिंकारा शिकार मामलों में सलमान को सजा सुनाई गई। जनवरी 2017 में उन्हें आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। वहीं, 5 अप्रैल 2018 को काला हिरण शिकार मामले में उन्हें 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। इसी मामले में बाकी कलाकारों को बरी कर दिया गया था। बाद में सलमान को जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 के लिए तय की है। सलमान खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
90 के दशक में अक्षय कुमार और रवीना टंडन की जोड़ी काफी फेमस रही थी। 22 साल बाद अब दोनों फिल्म वेलकम टू द जंगल में फिर से स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में अक्षय कुमार ने रवीना टंडन के साथ काम करने के अनुभव पर बात की। उन्होंने कहा कि रवीना हमेशा से बहुत प्रोफेशनल रही हैं। अक्षय ने एक पुराने शूटिंग अनुभव को याद करते हुए बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान सूरज डूबने से पहले सीन पूरा करना था। ग्रीन रूम दूर होने के बावजूद रवीना ने समय बचाने के लिए जनरेटर वैन में कपड़े बदले और तुरंत शूटिंग पर लौट आईं। अक्षय ने उन्हें बेहतरीन कलाकार बताया। रवीना के बारे में मजाकिया अंदाज में बोले अक्षय अक्षय कुमार ने कहा कि रवीना में समय के साथ कई बदलाव आए हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि पहले हीरोइन थी और अब हीरोइन की मां है। बता दें कि रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी भी फिल्मों में कदम रख चुकी हैं। उन्होंने फिल्म आजाद से डेब्यू किया है। 90 के दशक में अक्षय कुमार और रवीना टंडन की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे फेमस जोड़ियों में शुमार थी। साल 1994 में रिलीज हुई मोहरा उनकी सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक रही। इसी फिल्म का मशहूर गाना ‘टिप टिप बरसा पानी’ आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके बाद खिलाड़ियों का खिलाड़ी (1996) और दावा (1997) जैसी फिल्मों में भी दोनों की केमिस्ट्री को खूब सराहा गया। साल 2004 में रिलीज हुई आन: मेन एट वर्क में दोनों आखिरी बार बड़े पर्दे पर साथ नजर आए थे। सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि पर्सनल लाइफ में भी अक्षय और रवीना का रिश्ता चर्चा में रहा। बताया जाता है कि फिल्म मोहरा की शूटिंग के दौरान दोनों करीब आए और बाद में गुपचुप सगाई भी कर ली थी। हालांकि, साल 1998 में दोनों का रिश्ता टूट गया। इसके बाद अक्षय ने 2001 में ट्विंकल खन्ना से और रवीना ने 2004 में अनिल थडानी से शादी कर अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए।
मुंबई की चमक-दमक के पीछे ठगी, ताने और संघर्ष की लंबी कहानी भी छुपी है। नोरा फतेही की जिंदगी भी ऐसी ही रही, जहां काम दिलाने का वादा कर 20 लाख रुपए ठग लिए गए और कई बार उन्हें बिना फीस के गाने करने पड़े। “मेरा मजाक उड़ाया गया, दिलबर जैसे कई गाने फ्री में करने पड़े”- यह दौर उनकी पहचान बनने से पहले के संघर्ष को दिखाता है। कनाडा से मुंबई आई नोरा ने वेटर से लेकर ऑडिशन तक हर रास्ता अपनाया, लेकिन हार नहीं मानी। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी स्टारडम की सबसे बड़ी ताकत बना। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं नोरा फतेही के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। छिपकर डांस करती थीं नोरा, नहीं ली ट्रेनिंग; मां ने डांटा और पिटाई भी की नोरा का जन्म एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में हुआ। घर में डांस को लेकर कड़ा विरोध था, लेकिन उनके अंदर बचपन से ही डांस का जुनून था। उन्होंने कभी प्रोफेशनल डांस ट्रेनिंग नहीं ली। वे अलग-अलग डांस स्टाइल्स वीडियो देखकर और लगातार प्रैक्टिस से सीखती रहीं। नोरा बचपन में घर के अंदर बंद कमरे में छिपकर डांस करती थीं। उन्हें डर रहता था कि परिवार को पता चल गया तो डांट पड़ेगी। एक बार उनकी मां ने उन्हें डांस करते देख लिया, जिसके बाद उन्हें डांट और सख्त प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा। यहां तक की मां ने पिटाई भी की। विरोध के बावजूद नोरा ने डांस करना नहीं छोड़ा और अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत करती रहीं। परिवार के विरोध और मुश्किल माहौल के बीच उन्होंने पढ़ाई पूरी की और इसके बाद भारत आने का फैसला किया। उनका सपना एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में नाम बनाने और खुद को डांसर व परफॉर्मर के रूप में स्थापित करने का था। 5,000 रुपए लेकर मुंबई आई थीं नोरा फतेही 2014 में बॉलीवुड में करियर शुरू करने के लिए केवल ₹5,000 लेकर मुंबई पहुंची थीं। नोरा कहती हैं- मुझे यह भी नहीं पता था कि 1000 डॉलर क्या होते हैं। मैं एक अपार्टमेंट में नौ लड़कियों के साथ रहती थी। वहां अक्सर सोचती थी कि मैं किस मुसीबत में फंस गई हूं। हिंदी न आने पर उड़ाया जाता था मजाक नोरा ने बताया कि भारत आने के बाद सबसे बड़ी चुनौती भाषा थी। हिंदी न जानने की वजह से ऑडिशन में उन्हें बार-बार रिजेक्ट किया जाता था। कई बार लोग उनके उच्चारण और एक्सेंट का मजाक उड़ाते थे। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती रहीं। लगा था मुंबई पहुंचते ही स्टार बन जाएंगी नोरा कहती हैं- फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले मैंने कोई तैयारी नहीं की थी। मुझे लगा था कि मुंबई पहुंचते ही स्टार बन जाऊंगी। मैंने कपड़े पैक किए और मुंबई आ गई। यहां आने के बाद पता चला कि बहुत कुछ सीखना है। मुझे हिंदी नहीं आती थी। हिंदी मेरे लिए विदेशी भाषा थी। सबसे पहले हिंदी सीखी और खुद को परफॉर्मर के तौर पर तैयार किया। कैटरीना कैफ और जैकलीन फर्नांडिस से मिली प्रेरणा नोरा कहती हैं- मैंने बॉलीवुड में कभी काम करने के बारे में नहीं सोचा था। इंडस्ट्री में आने से पहले मैंने ‘देवदास’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी फिल्में देखी थीं। मुझे लगता था कि सिर्फ इंडियन लड़कियां ही बॉलीवुड में एक्ट्रेस बन सकती हैं। बॉलीवुड में काम करने की प्रेरणा मुझे कैटरीना कैफ और जैकलीन फर्नांडिस से मिली। फिर मैंने बहुत ऑडिशन देने शुरू किए। गुजारे के लिए किया वेटर का काम, बेचे लॉटरी टिकट स्ट्रगल के दिनों में आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें गुजारे के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़े। नोरा ने कॉफी शॉप में वेटर का काम किया और लॉटरी टिकट भी बेचे। मॉडलिंग और छोटे प्रोजेक्ट्स मिलने लगे थे, लेकिन कई बार काम के बाद भी भुगतान नहीं मिलता था। कई दिन सिर्फ ब्रेड और अंडे खाकर बिताए नोरा के लिए सबसे मुश्किल समय वह था जब पैसों की कमी के कारण उन्हें खाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि कई बार दिनभर सिर्फ ब्रेड और अंडे खाकर गुजारा करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने मुंबई छोड़ने का विचार नहीं किया और अपने सपनों के लिए डटी रहीं। हफ्ते के 3 हजार रुपए में चलाना पड़ता था खर्च अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए नोरा फतेही कहती हैं कि उस समय जिस एजेंसी के साथ काम कर रही थी, वह उन्हें हफ्ते के सिर्फ 3 हजार रुपए देती थी। इतने कम पैसों में रोज का खर्च चलाना बहुत मुश्किल होता था। काम दिलाने का वादा कर 20 लाख रुपए ठग लिए बॉलीवुड में पहचान बनाने से पहले मेरे साथ ठगी हुई। मैंने बताया था कि जब मैं कनाडा से भारत आई थी, तब मेरी पहली एजेंसी ने मुझे काम दिलाने का वादा किया। उनके कहने पर मैंने 20 लाख रुपए दे दिए। लेकिन बाद में उनका व्यवहार बदल गया। जब मैंने एजेंसी छोड़ने और पैसे वापस मांगने की बात की, तो उन्होंने साफ कह दिया कि पैसे नहीं मिलेंगे। उस समय मैंने 20 लाख रुपए गंवा दिए। ये वही पैसे थे, जो मैंने एक विज्ञापन में काम करके कमाए थे। 'बिग बॉस 9' से मिली पहचान साल 2015 में नोरा को टीवी के चर्चित रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ में हिस्सा लेने का मौका मिला। शो में उनका सफर लंबा नहीं रहा, लेकिन इससे उन्हें दर्शकों के बीच पहचान मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने कई डांस परफॉर्मेंस और फिल्मों में छोटे-बड़े मौके हासिल किए। नोरा फतेही ने 2014 में फिल्म ‘रोर: टाइगर्स ऑफ द सुंदरबन्स’ से बॉलीवुड डेब्यू किया। इसके बाद उन्हें साउथ इंडस्ट्री से भी कई फिल्मों के ऑफर मिले। नोरा 2015 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘बाहुबली’ के गाने ‘मनोहरी’ में नजर आई थीं। 'दिलबर' ने बदल दी जिंदगी नोरा के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2018 में आया, जब फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ का गाना ‘दिलबर’ रिलीज हुआ। यह गाना जबरदस्त हिट साबित हुआ और नोरा रातोंरात देशभर में चर्चा में आ गईं। उनके डांस स्टाइल, स्क्रीन प्रेजेंस और एक्सप्रेशंस ने दर्शकों का दिल जीत लिया। बिना पेमेंट के काम करने पड़े हालांकि, करियर की शुरुआत में उन्हें फिल्मों में पैसे नहीं मिलते थे। नोरा कहती हैं- ‘दिलबर’ के अलावा भी मैंने कई गाने फ्री में किए हैं। उस समय पैसे कमाना मेरा उद्देश्य नहीं था। मैं फिल्म इंडस्ट्री में खुद को प्रूव करना चाहती थी, इसलिए पैसे की डिमांड नहीं की। इंडस्ट्री में लोगों के पास बहुत ऑप्शन हैं। मैं नहीं तो कोई और करेगा। मेरे लिए सबसे बड़ी बात मौका मिलना था। एक के बाद एक दिए सुपरहिट डांस नंबर ‘दिलबर’ की सफलता के बाद नोरा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘कमरिया’, ‘ओ साकी साकी’ और ‘गर्मी’ जैसे कई सुपरहिट गानों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। देखते ही देखते वह बॉलीवुड की लोकप्रिय डांस परफॉर्मर्स में शामिल हो गईं। गाने पर हुआ विवाद, मांगनी पड़ी थी माफी नोरा फतेही हाल ही में फिल्म ‘केडीः द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवादों में घिर गई थीं। गाने के रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसके बोल और प्रस्तुति पर आपत्ति जताई गई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि गाने में महिलाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है। मामला बढ़ने के बाद यह राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया। विवाद के बाद आयोग ने नोरा समेत गाने से जुड़े अन्य लोगों को पेश होने के लिए कहा। सुनवाई के दौरान नोरा आयोग के सामने पहुंचीं और लिखित रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और एक कलाकार के तौर पर वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोरा ने आयोग को बताया कि उन्होंने गाने की शूटिंग एक अलग क्रिएटिव विजन के तहत की थी और रिलीज के समय हुए कुछ बदलावों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद के बाद उन्हें मामले की गंभीरता समझ आई। सुनवाई के दौरान उन्होंने सामाजिक पहल से जुड़ने की बात कही। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अनाथ लड़कियों की शिक्षा और सहयोग से जुड़े प्रयासों में योगदान देने की इच्छा जताई। छोटे-छोटे रोल्स करके यहां तक पहुंची हूं नोरा फतेही कहती हैं- छोटे-छोटे रोल्स करके यहां तक पहुंची हूं। मैं लोगों से कहती थी कि मेरे बारे में भी सोचें। यह कहने से पहले कई बार सोचती थी कि कैसे कहूं। ‘दिलबर’ के बाद लोगों को लगता था कि मैं सिर्फ गाने कर सकती हूं, लेकिन मुझे एक्टिंग करनी थी। मुझे लगने लगा था कि गानों में टाइपकास्ट हो रही हूं। मैंने ऑडिशन देने शुरू किए। कुणाल खेमू ने मुझे ‘मडगांव एक्सप्रेस’ में मौका दिया। ___________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... ब्रेकअप के बाद सुसाइड के ख्याल आए:प्रोड्यूसर ने पेमेंट रोककर 16 लाख का जुर्माना लगाया, रुबीना दिलैक बोलीं- मजबूरी में घर-गाड़ी बेची पहले शॉट में 17 रीटेक, डायरेक्टर की फटकार और शिमला लौट जाने के ताने से रुबीना दिलैक ने करियर की शुरुआत में अपमान और संघर्ष झेले। बाद में एक प्रोड्यूसर की कथित धोखाधड़ी से उन्हें लाखों का नुकसान हुआ और घर-कार बेचनी पड़ी।पूरी खबर पढ़ें..
'बिग बॉस 19' के पूर्व कंटेस्टेंट और स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। प्रणित के खिलाफ महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने यह एक्शन लिया है। दरअसल यह पूरा मामला गुरुग्राम में हुए उनके एक लाइव शो से जुड़ा है, जहां एक 22 साल के लड़के ने बातचीत के दौरान महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। पूरा विवाद प्रणित मोरे के गुरुग्राम में लाइव क्राउड-वर्क कॉमेडी शो के दौरान शुरू हुआ। शो में बातचीत के दौरान जांगड़ा ने एक डेटिंग अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक महिला पर करीब ₹360–₹370 की चिकन बिरयानी का खर्च किया था। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिला ने उन्हें घर छोड़ने के लिए कहा, तो उन्हें अपने खर्च की भरपाई के रूप में फिजिकल इंटिमेसी की उम्मीद थी। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रणित मोरे की काफी आलोचना हुई। विवाद बढ़ने पर कॉमेडियन को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी और उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया है। वहीं वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा को गुरुग्राम स्थित कंपनी स्टारविक डिजाइन से नौकरी से निकाल दिया गया। सोशल मीडिया पर विरोध के बाद प्रणित ने माफी मांगी इंस्टाग्राम और एक्स सहित कई प्लेटफॉर्म पर लोगों ने जांगड़ा के कमेंट की आलोचना की। विरोध बढ़ने के बाद प्रणित मोरे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इंस्टाग्राम स्टोरी में मोरे ने लिखा था कि हाल ही में वायरल हुई क्लिप को लेकर मिली आलोचनाओं को मैं स्वीकार करता हूं। दर्शक के कमेंट्स मेरे विचार नहीं हैं। मुझे उस समय बेहतर जवाब देना चाहिए था। हमने वीडियो हटा दिया है। मैं माफी मांगता हूं और भविष्य में ऐसे मामलों को अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ संभालूंगा। हिमांशु जांगड़ा को नौकरी से निकाला गया स्टारविक डिजाइन ने इस मामले में जांगड़ा पर एक्शन लेते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया। कंपनी के फाउंडर विवेक विश्वकर्मा ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा, पिछले 24 घंटों में मुझे हमारे एक कर्मचारी हिमांशु जांगड़ा को लेकर सैकड़ों मैसेज, ईमेल और फोन कॉल आए हैं। आप सभी की तरह मैंने भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो क्लिप्स देखे हैं। मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि उन वीडियो में दिखाई गई बातें आपत्तिजनक हैं। मैं उन बातों से सहमत नहीं हूं। हमारी कंपनी भी ऐसे विचारों का समर्थन नहीं करती और न ही हम चाहते हैं कि ऐसी बातें युवाओं को प्रभावित करें। ऑफिस में हिमांशु के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली विवेक विश्वकर्मा ने बताया, हमने अपनी टीम, खासकर महिला कर्मचारियों से भी बात की। ऑफिस में हिमांशु के व्यवहार का रिव्यू किया और कई जरूरी सवाल पूछे, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि हमें उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली। टीम के लोगों ने उसे प्रोफेशनल, सम्मानजनक, मेहनती और अच्छे व्यवहार वाला कर्मचारी बताया। उन्होंने आगे कहा, लेकिन वर्कप्लेस के बाहर हुई इस घटना का असर अब वर्कप्लेस पर भी पड़ रहा है। कंपनी, कर्मचारियों, ग्राहकों और यहां के माहौल के प्रति मेरी जिम्मेदारी है। इसलिए हमने हिमांशु से अलग होने का फैसला किया है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें शवों के प्राइवेट पार्ट्स का उड़ता है मजाक':'370 की बिरयानी' विवाद के बीच प्रणित मोरे के शो का एक और वीडियो वायरल ‘370 रुपए की बिरयानी’ वाले वीडियो के बाद कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में सेजल पवार नाम की एक डॉक्टर और इन्फ्लुएंसर ने कहा था कि वे और उनके साथी मेडिकल स्टूडेंट कॉलेज (KEM हॉस्पिटल, मुंबई) में मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते और उनका मजाक उड़ाते थे। पूरी खबर पढ़ें
एक्टर अक्षय कुमार ने अपनी आने वाली फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में रिटायरमेंट की खबरों को खारिज कर दिया है। मुंबई में गुरुवार को हुए इस इवेंट में अक्षय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे कभी रिटायर नहीं होना चाहते, क्योंकि घर बैठने पर उन्हें बिजली का काम या कुत्ता घुमाने जैसे घरेलू काम करने पड़ेंगे। उन्होंने सलाह दी कि इंसान को मरने से 5 मिनट पहले रिटायर होना चाहिए। वहीं ट्रेलर लॉन्च के दौरान एक पत्रकार ने फिल्म के उस सीन को लेकर सवाल पूछा जिसमें अक्षय कुमार को एक 'फ्लॉप एक्टर' के रूप में दिखाया गया है। इस सवाल के बाद इवेंट में कुछ देर के लिए असहज स्थिति बन गई थी, लेकिन अक्षय ने इसे बेहद शांति और मजाक के साथ संभाला। मजाकिया अंदाज में दिया जवाब अक्षय ने पत्रकार को जवाब देते हुए कहा, सर, बात यह है कि हम फिल्म में सिर्फ एक किरदार निभा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कोई हमें सजा दे रहा है। जब आप फिल्म देखेंगे, तो इसे सिर्फ एक कैरेक्टर के तौर पर ही देखेंगे क्योंकि आप एक समझदार व्यक्ति हैं। आपको इस बात का बुरा लगा, इसके लिए शुक्रिया, लेकिन इसे इतना गंभीरता से मत लीजिए। सुबह 4 बजे आता है रिटायरमेंट का विचारअक्षय कुमार ने कहा कि उनके मन में रिटायर होने का विचार कभी-कभी आता है, लेकिन वह सिर्फ पांच सेकंड के लिए होता है। उन्होंने बताया, रोज सुबह 4 बजे जब मेरी नींद खुलती है, तो पांच सेकंड के लिए लगता है कि अब रिटायर हो जाना चाहिए। लेकिन तुरंत याद आता है कि शूटिंग पर जाना है, जहां 300 लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद मैं अगले दिन रिटायर होने की सोचकर सेट पर चला जाता हूं। ऐसा करते हुए मुझे फिल्म इंडस्ट्री में 36 साल बीत चुके हैं। घर पर रहने से अच्छा है काम पर जाना अक्षय ने मजाक करते हुए कहा कि अगर वे रिटायर हो गए तो उन्हें घर के सारे काम करने पड़ेंगे। उन्होंने कहा, अगर मैं घर बैठा तो इलेक्ट्रिशियन का काम करूंगा, डॉग वॉकर बन जाऊंगा या गार्डनर बन जाऊंगा। मुझे घर के सारे काम थमा दिए जाएंगे। इससे अच्छा है कि मैं काम पर जाऊं और रिटायर न हूं। जब उनसे पूछा गया कि रिटायरमेंट से परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा, तो अक्षय ने हंसते हुए कहा, मैं एक दिन उनके साथ बैठता हूं, तो दूसरे दिन वे खुद ही बोल देते हैं कि आप काम पर जाओ। फीस को लेकर भी दी सफाई फिल्म में अक्षय कुमार की फीस को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें चल रही थीं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि उन्होंने इस फिल्म के लिए सिर्फ 1.7 करोड़ रुपए फीस ली है। ट्रेलर लॉन्च के दौरान अक्षय ने इन सभी दावों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि जिसने भी आपको यह बात बताई है वह सच नहीं है, क्योंकि मैंने इस फिल्म के लिए इतने पैसे (1.7 करोड़ रुपए) भी नहीं लिए हैं। अक्षय ने साफ किया कि उनके लिए यह फिल्म पैसों से ज्यादा इसलिए जरूरी है क्योंकि इसकी कहानी दिवंगत लेखक नीरज वोहरा ने लिखी है, जिनसे उन्होंने अभिनय और कॉमेडी के गुर सीखे थे। 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी फिल्म फिल्म का 4 मिनट से ज्यादा लंबा ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है। फिल्म की कहानी एक ऐसे एक्टर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो फ्लॉप फिल्मों के बाद वापसी की कोशिश में है। शूटिंग के दौरान फिल्म की क्रू एक बॉर्डर के पास के गांव में पहुंचती है, जहां गांव वाले उन्हें असली सैनिक समझ लेते हैं और जैकी श्रॉफ के गैंग से बचाने की उम्मीद करते हैं। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकलिन फर्नांडीज, दिशा पाटनी, अर्शद वारसी और रवीना टंडन समेत कई बड़े कलाकार हैं। यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के पनवेल फार्महाउस के पड़ोसी केतन कक्कड़ को सोशल मीडिया से एक्टर के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट और वीडियो हटाने को कहा है। जस्टिस शर्मिला देशमुख की बेंच ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सोशल मीडिया तक पहुंच होने का मतलब यह नहीं है कि कोई भी किसी आम नागरिक या सेलिब्रिटी को बदनाम करे। कोर्ट ने केतन कक्कड़ से इस सुझाव पर 6 जुलाई तक जवाब मांगा है। यह विवाद साल 2022 से कोर्ट में लंबित है। सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल सही नहींहाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि अगर किसी के पास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की सुविधा है, तो वह उसका इस्तेमाल दूसरों की छवि खराब करने के लिए नहीं कर सकता। जस्टिस देशमुख ने मौखिक रूप से कहा कि जमीन या प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए लोग सही कानूनी मंच पर जा सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो डालना सही नहीं है। कोर्ट ने उन वीडियो पर भी नाराजगी जताई जो केतन कक्कड़ के अलावा तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) की ओर से लगातार शेयर किए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इन्हें भी हटाने के कदम उठाए जा सकते हैं। क्या है पूरा विवाद और सलमान का आरोपयह विवाद सलमान खान के रायगढ़ जिले के पनवेल में स्थित फार्महाउस से जुड़ा है। केतन कक्कड़ का प्लॉट सलमान के फार्महाउस के पास ही है। सलमान खान ने साल 2022 में केतन कक्कड़ के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। सलमान का आरोप है कि केतन कक्कड़ ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, अपमानजनक और सांप्रदायिक रूप से भड़काने वाले वीडियो अपलोड किए थे। सलमान खान के मुताबिक, केतन कक्कड़ ने उनके फार्महाउस के पास एक जमीन का सौदा करने की कोशिश की थी, जिसे प्रशासन ने अवैध होने के कारण रद्द कर दिया था। इसके बाद से ही वे उनके खिलाफ वीडियो डाल रहे हैं। पड़ोसी केतन कक्कड़ की कोर्ट में दलीलदूसरी ओर, पड़ोसी केतन कक्कड़ ने कोर्ट में सलमान खान के आरोपों को गलत बताया है। केतन कक्कड़ का कहना है कि उन्होंने जो भी पोस्ट या वीडियो शेयर किए हैं, वे सलमान खान की प्रॉपर्टी से जुड़े सच पर आधारित हैं और इनसे कोई मानहानि नहीं होती है। केतन ने आरोप लगाया कि सलमान खान इस मानहानि के केस के जरिए उन पर दबाव बना रहे हैं ताकि वे पनवेल की जमीन के लिए अपनी लड़ाई छोड़ दें। केतन कक्कड़ ने हाईकोर्ट से सलमान खान की इस अपील को खारिज करने की मांग की है। चार साल से कोर्ट में चल रहा है मामलासलमान खान ने पहले एक निचली अदालत (सिविल कोर्ट) में केतन कक्कड़ के खिलाफ अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। सिविल कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद एक्टर ने 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। नवंबर 2022 में हाईकोर्ट के तत्कालीन जस्टिस सीवी भदांग ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी, लेकिन अपने रिटायरमेंट से एक दिन पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अंतिम फैसला तैयार नहीं कर पाए हैं। इसके बाद उन्होंने मामले को 'पार्ट-हर्ड' कैटेगरी में रखकर दूसरी बेंच के सामने भेजने का निर्देश दिया था, जिसके बाद अब नई बेंच इस पर सुनवाई कर रही है। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें दोस्त के अंतिम संस्कार में इमोशनल हुए सलमान खान:सहारा लेकर क्रिमेटोरियम से निकले, हेलन को संभालते दिखे सोहेल खान; पूरा परिवार पहुंचा एक्टर सलमान खान परिवार के साथ मंगलवार को अपनी फैमिली फ्रेंड कुमुद राणे के अंतिम संस्कार में पहुंचे। इस दौरान सलमान के भाई सोहेल, अरबाज और उनकी मां सलमा खान भी मौजूद थीं। अंतिम संस्कार के दौरान सलमान काफी इमोशनल नजर आए। पूरी खबर पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने के दिल्ली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने सुनवाई की शुरुआत में जैकलीन के वकील और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बताया कि मामला किसी अन्य बेंच के सामने लिस्ट किया जाएगा। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि एक संबंधित मामले में उनके बेटे सरकार की ओर से पेश हो चुके हैं। उन्होंने मामले को 25 जून को ऐसी बेंच के सामने लिस्ट करने का निर्देश दिया, जिसमें दोनों में से कोई एक सदस्य न हो। दिल्ली की एक अदालत ने 30 मई को जैकलीन फर्नांडिस, कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य लोगों के खिलाफ 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। जैकलीन 3 जून को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुई थीं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक्ट्रेस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया था। क्या है 200 करोड़ का यह मामलायह पूरा मामला हाई-प्रोफाइल ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। सुकेश पर आरोप है कि उसने दिल्ली की रोहिणी जेल के अंदर से ही फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की थी। जांच एजेंसी ED का दावा है कि सुकेश ने इसी वसूली की रकम का एक बड़ा हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया था। सुकेश ने जैकलीन को लुभाने के लिए करोड़ों रुपए के गिफ्ट दिए थे। ED की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी हैं जैकलीनप्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच के बाद दाखिल की गई अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जैकलीन फर्नांडिस को भी आरोपी बनाया था। ED का कहना है कि जैकलीन को सुकेश के आपराधिक बैकग्राउंड और जबरन वसूली के पैसों के बारे में पहले से जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने उससे महंगे तोहफे लेना जारी रखा। इन गिफ्ट्स में लग्जरी गाड़ियां, महंगे ब्रांडेड बैग, कपड़े, ज्वेलरी और कई कीमती पेट्स (पालतू जानवर) शामिल थे। लीगल टीम की दलील- जैकलीन खुद पीड़ित हैंदूसरी तरफ, जैकलीन फर्नांडिस की लीगल टीम लगातार कोर्ट में यह दलील दे रही है कि एक्ट्रेस इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं। उनके वकीलों का कहना है कि जैकलीन खुद सुकेश चंद्रशेखर की साजिश का शिकार हुई हैं और उन्होंने सुकेश को एक बिजनेसमैन समझकर उससे दोस्ती की थी। जांच के दौरान सुकेश और जैकलीन की कई निजी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। फिलहाल इस मामले में कोर्ट यह तय कर रहा है कि आरोपों के आधार पर केस को आगे कैसे बढ़ाया जाए।
इम्तियाज अली जब भी फिल्म बनाते हैं तो कहानी सिर्फ कहानी नहीं रहती, एक एहसास बन जाती है। 'मैं वापस आऊंगा' भी उसी तरह की फिल्म है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उनकी प्रेम कहानी किसी पहाड़, शहर या सफर के बीच नहीं, बल्कि भारत पाकिस्तान बंटवारे की त्रासदी के बीच जन्म लेती है। यह फिल्म प्रेम की बात करती है, लेकिन सिर्फ प्रेम की नहीं। यह उन यादों की भी बात करती है जो उम्र के आखिरी पड़ाव तक इंसान का पीछा नहीं छोड़तीं। यह उन लोगों की कहानी है जिन्होंने अपना घर खोया, अपना शहर खोया और कई मामलों में अपना प्यार भी खो दिया। फिल्म की कहानीफिल्म की शुरुआत 95 साल के ईशर सिंह ग्रेवाल (नसीरुद्दीन शाह) से होती है। उम्र और बीमारी ने उनके शरीर को कमजोर कर दिया है, लेकिन एक जिद अब भी बाकी है। वह पाकिस्तान के सरगोधा वापस जाना चाहते हैं। उनके पोते निर्वैर (दिलजीत दोसांझ) को समझ नहीं आता कि आखिर दादा बार बार उसी जगह लौटने की बात क्यों करते हैं। धीरे धीरे कहानी अतीत की तरफ जाती है और सामने आती है ईशर और जिया की प्रेम कहानी। युवा ईशर के किरदार में वेदांग रैना हैं और जिया के रोल में शरवरी। दोनों की दुनिया में प्रेम है, सपने हैं और साथ जीने की उम्मीद है। फिर बंटवारा होता है और सब कुछ बदल जाता है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बंटवारे को राजनीतिक घटना की तरह नहीं, बल्कि आम लोगों के दर्द की तरह दिखाती है। हालांकि पहला हिस्सा कहानी को स्थापित करने में थोड़ा ज्यादा समय लेता है। कई बार लगता है कि फिल्म अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए जरूरत से ज्यादा घूम रही है। लेकिन दूसरे हिस्से में कहानी भावनात्मक तौर पर मजबूत होती जाती है और अंत तक आते आते असर छोड़ती है। फिल्म में एक्टिंगअगर इस फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ चुनना हो तो वह नसीरुद्दीन शाह हैं। उन्होंने ईशर सिंह के किरदार को निभाया नहीं, जिया है। भूलती हुई यादें, अधूरी बातें, खोया हुआ प्यार और आखिरी बार अतीत को छू लेने की बेचैनी, सब कुछ उनके चेहरे पर दिखाई देता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां बिना संवाद बोले भी वह दर्शकों को भावुक कर देते हैं। वेदांग रैना ने भी शानदार काम किया है। उनके भीतर एक सच्चाई दिखाई देती है जो किरदार को विश्वसनीय बनाती है। यह उनके करियर की अब तक की सबसे मजबूत परफॉर्मेंस में गिनी जा सकती है।शरवरी स्क्रीन पर आते ही ध्यान खींचती हैं। उनके किरदार में मासूमियत भी है और भावनात्मक गहराई भी। इम्तियाज अली की फिल्मों की नायिकाओं में जो एक अलग तरह की गर्माहट होती है, वह जिया के किरदार में भी दिखाई देती है। दिलजीत दोसांझ अपने किरदार में सहज हैं, लेकिन सच यह है कि फिल्म का सबसे भावुक और प्रभावशाली हिस्सा नसीरुद्दीन शाह और वेदांग रैना के हिस्से में जाता है। दिलजीत की कहानी जरूरी है, मगर उतनी यादगार नहीं बन पाती।फिल्म में डायरेक्शनइम्तियाज अली की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से भावनाओं को पकड़ना रही है और यहां भी वही दिखाई देता है। वह बंटवारे को आंकड़ों या इतिहास की किताबों की तरह नहीं दिखाते। वह दिखाते हैं कि उस दौर में बिछड़ना कैसा लगता होगा। किसी अपने का अचानक छूट जाना कैसा लगता होगा। फिल्म का दूसरा हिस्सा इम्तियाज की पकड़ को साबित करता है। कई दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। खासकर वे सीन जहां प्रेम और बिछड़न एक साथ दिखाई देते हैं। हालांकि फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी भी यहीं है। लगभग तीन घंटे की अवधि हर दर्शक के लिए आसान नहीं होगी। पहले हिस्से में कई सीन ऐसे हैं जिन्हें छोटा किया जा सकता था। फिल्म कई बार जरूरत से ज्यादा ठहर जाती है। फिल्म का तकनीकी पहलूफिल्म देखने में बेहद खूबसूरत लगती है। सिनेमेटोग्राफी फिल्म का बड़ा प्लस पॉइंट है। सरगोधा की गलियां, पुराने घर, खेत और उस दौर का माहौल स्क्रीन पर बहुत प्रभावी तरीके से उभरकर आता है। प्रोडक्शन डिजाइन पर भी मेहनत दिखाई देती है। फिल्म अपने समय और माहौल को विश्वसनीय बनाने में सफल रहती है। एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई होती तो फिल्म का असर और ज्यादा बढ़ सकता था।फिल्म में म्जूजिकइम्तियाज अली और ए आर रहमान की जोड़ी से हमेशा उम्मीदें रहती हैं। इस फिल्म में भी संगीत कहानी का हिस्सा बनकर आता है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को भावनात्मक ऊंचाई देता है। कुछ गाने सुनने के बाद भी याद रहते हैं, लेकिन एल्बम उस लेवल तक नहीं पहुंचता जहां रहमान के पुराने और यादगार काम पहुंचते रहे हैं। फिर भी फिल्म के मूड के हिसाब से संगीत पूरी तरह फिट बैठता है। फिल्म में कमियांफिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी लंबाई है। करीब तीन घंटे की यह फिल्म कई जगह अपनी रफ्तार खो देती है। पहले हिस्से में धैर्य रखना पड़ता है। कुछ सब प्लॉट भी पूरी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पाते। कई दर्शकों को यह भी लग सकता है कि फिल्म अपने भावनात्मक असर तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा समय लेती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट'मैं वापस आऊंगा' कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो आपको सीट से बांधे रखे और हर दस मिनट में चौंकाए। यह धीरे धीरे खुलने वाली फिल्म है। इसके कुछ हिस्से बेहद खूबसूरत हैं, कुछ हिस्से थोड़े लंबे हैं, लेकिन जब फिल्म अपने भावनात्मक शिखर पर पहुंचती है तो असर छोड़ती है। नसीरुद्दीन शाह का शानदार अभिनय, वेदांग रैना और शरवरी की सादगी भरी केमिस्ट्री, इम्तियाज अली का संवेदनशील निर्देशन और ए आर रहमान का संगीत फिल्म को खास बनाते हैं। अगर आपको भावनात्मक कहानियां पसंद हैं और आप धीमी रफ्तार वाली फिल्मों से परहेज नहीं करते, तो 'मैं वापस आऊंगा' आपके लिए एक संतोषजनक सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है।
पंजाबी एक्ट्रेस ने बादशाह को बताया पति देव:रैपर के साथ फोटो शेयर कर कहा- मेरी शादी हो चुकी है
पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने सोशल मीडिया पर रैपर और म्यूजिक प्रोड्यूसर बादशाह के साथ एक तस्वीर शेयर की है और बादशाह को पति देव बताया है। जिसके बाद उनकी शादी को लेकर चल रही चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं और इसे दोनों के रिश्ते की सार्वजनिक पुष्टि मान जा रहा है। दरअसल, इंस्टाग्राम पर एक आस्क मी एनीथिंग सेशन के दौरान एक यूजर ने ईशा से सवाल पूछा, मैम, आपकी और बादशाह भाई की शादी हो गई है, फिर आप दोनों एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर फॉलो क्यों नहीं करते? इस पर ईशा ने मजाकिया अंदाज में लिखा, मुझे लगता है कि अब इन सवालों की बाढ़ आ गई है। 'क्या आपकी शादी हो गई है?', 'क्या आपकी शादी बादशाह से हुई है?', 'आप दोनों एक-दूसरे को फॉलो क्यों नहीं करते?', 'आप साथ में तस्वीरें क्यों नहीं पोस्ट करते?' जैसे सवाल लगातार पूछे जा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने हंसने वाली इमोजी के साथ लिखा, हां, मेरी शादी हो चुकी है। अब सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल पर आते हैं- 'आप दोनों एक-दूसरे को फॉलो क्यों नहीं करते?' सच कहूं तो इसका जवाब मेरे पति को देना चाहिए। पति देव (बादशाह), जनता के मन में कई सवाल हैं। कृपया जल्द से जल्द उनका जवाब दें। बादशाह संग तस्वीर भी की शेयर फिर एक अन्य यूजर ने पूछा कि अगर वह बादशाह की पत्नी हैं, तो उन्होंने अब तक उनके साथ एक भी फोटो क्यों पोस्ट नहीं की। सबको हैरान करते हुए ईशा ने बादशाह के साथ अपनी एक तस्वीर शेयर की। तस्वीर में ईशा बादशाह की गोद में बैठी नजर आ रही हैं, जबकि बादशाह उन्हें गले लगाए हुए दिखाई दे रहे हैं। मार्च में दोनों की तस्वीरें वायरल हुई थीं 24 मार्च में दोनों की कथित शादी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। ये तस्वीरें ईशा की मां द्वारा शेयर की गई थीं, जिनमें दोनों पारंपरिक पंजाबी शादी की ड्रेस में नजर आए थे। जिसमें में परिवार के करीबी लोगों की मौजूदगी भी दिखाई दी थी। उस समय बादशाह और ईशा रिखी ने इन खबरों पर कोई पब्लिक रिएक्शन नहीं दिया थी। हालांकि, ईशा की मां ने तस्वीरों के साथ “गॉड ब्लेस यू” लिखकर बादशाह और ईशा को टैग किया था, जिसके बाद शादी की अटकलों तेज हो गई थी। बता दें कि ईशा रिखी पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री और मॉडल हैं। वह जट्ट बॉयज पुट जट्टान डे, हैप्पी गो लकी और अरदास जैसी कई पंजाबी फिल्मों में काम कर चुकी हैं और बॉलीवुड फिल्म नवाबजादे में भी नजर आ चुकी हैं। बादशाह की पहली शादी जैस्मिन मसीह से शादी हुई थी और दोनों की एक बेटी भी है। साल 2020 में दोनों अलग हो गए थे।
हरिद्वार में बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी की फिल्म की शूटिंग के दौरान बार एंड रेस्टोरेंट के सीन को लेकर विवाद हो गया। जैसे ही हरिद्वार में कुछ हिंदूवादी संगठनों और तीर्थ पुरोहितों को बार एंड रेस्टोरेंट के सेट के बारे में पता चला, तो वे मौके पर पहुंच गए। इसके बाद वहां जोरदार विरोध शुरू हो गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए फिल्म यूनिट और भवन संचालकों को बोर्ड से “बार” शब्द हटाना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हो सका। शूटिंग कर रहे लोगों की तरफ ये नहीं बताया गया कि किस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। मामले को लेकर भी एक्टर की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तस्वीरें देखिए- कैसे शुरू हुआ विवाद हरिद्वार के श्रवणनाथ नगर स्थित भटिया भवन का है, जहां पिछले कुछ दिनों से बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी की फिल्म की शूटिंग चल रही थी। बुधवार देर रात फिल्म के एक दृश्य की शूटिंग के लिए मकान के बाहर बार एंड रेस्टोरेंट का बोर्ड लगाया गया। इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि हरिद्वार विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी है, जहां करोड़ों श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर आते हैं। ऐसे में शहर के अंदर बार का बोर्ड लगाना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। लोगों ने आरोप लगाया कि फिल्मों की शूटिंग के नाम पर हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। देर रात तक चली बहस विरोध बढ़ने पर व्यापारियों, समाजसेवियों, भवन संचालकों और फिल्म यूनिट के सदस्यों के बीच देर रात तक बहस होती रही। लोगों ने स्पष्ट कहा कि धर्मनगरी की गरिमा और मर्यादा के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आखिरकार विरोध के दबाव में बोर्ड से बार शब्द हटा दिया गया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। मां गंगा व्यापार मंडल के अध्यक्ष कशिश भाटिया ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि भवन के बाहर बार एंड रेस्टोरेंट का बोर्ड लगाया गया है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार एक पवित्र तीर्थस्थल है, जहां मांस और मदिरा प्रतिबंधित हैं। ऐसे में शूटिंग के लिए भी इस तरह का बोर्ड लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए बोर्ड से बार शब्द हटा दिया गया। समाजसेवी करण पंडित ने कहा कि जिस स्थान पर बोर्ड लगाया गया था, वहां से कुछ ही दूरी पर मां गंगा का पावन तट स्थित है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की धार्मिक पहचान और आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे कोई फिल्म निर्माता हो या किसी बड़े उद्योग से जुड़ा व्यक्ति, धर्मनगरी की मर्यादा सर्वोपरि है। तीर्थ पुरोहितों ने भी उठाए सवाल तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने कहा कि हरिद्वार की पवित्रता बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों के विरोध के कारण ही बोर्ड हटाया गया और यह शहरवासियों की जागरूकता का परिणाम है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भी यदि कोई हरिद्वार की धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा तो उसका विरोध किया जाएगा। पूरे विवाद के दौरान यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। फिल्म यूनिट से जुड़े लोगों ने केवल इतना कहा कि उनके पास शूटिंग की अनुमति है, लेकिन फिल्म का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि शूटिंग के लिए मुंबई से कलाकार और तकनीकी टीम हरिद्वार पहुंची हुई है। इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में फिल्मांकन के दौरान स्थानीय परंपराओं, आस्थाओं और जनभावनाओं का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…
दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में गुरुवार तड़के एक जिम के बाहर मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह जिम दिल्ली में राजौरी गार्डन के रहने वाले 2 कारोबारियों का है। वहीं, इसके ब्रांड एंबेसडर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा हैं। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है, लेकिन वारदात के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर कुख्यात लॉरेंस गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जबरन वसूली, गैंगवार और आपसी रंजिश समेत सभी एंगल से जांच शुरू कर दी है। हमलावरों ने जिम पर कम से कम 7 राउंड गोलियां चलाईं और वारदात को अंजाम देकर बड़ी आसानी से मौके से फरार हो गए। गनीमत यह रही कि हमला तड़के हुआ था, जब जिम बंद था और वहां कोई मौजूद नहीं था। इस वजह से हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। केयरटेकर के पहुंचने पर हुआ खुलासा घटना का पता तब चला जब सुबह करीब सवा 5 बजे जिम के केयरटेकर वहां पहुंचे। जिम के शीशे टूटे देख और गोलियों के निशान पाकर उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। जांच के लिए तुरंत फोरेंसिक टीम (FSL) को भी मौके पर बुलाया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से खाली कारतूस और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस हमलावरों की पहचान करने के लिए जिम के आसपास और भागने वाले रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। जांच में सामने आया है कि जिस फिटनेस सेंटर पर हमला हुआ है, उसके मालिक राजौरी गार्डन के रहने वाले दो व्यवसायी हैं। वहीं, एक बेहद मशहूर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा इस जिम के ब्रांड एंबेसडर हैं। इसी वजह से इस हमले को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। वारदात के कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल होने लगा। इस पोस्ट में लॉरेंस गैंग से जुड़े अनिल पंडित ग्रुप ने कथित तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इस दावे के बाद से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…
‘370 रुपए की बिरयानी’ वाले वीडियो के बाद कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में डॉक्टर डॉ. सेजल पवार ने कहा कि वे और उनके साथी मेडिकल छात्र कॉलेज (KEM हॉस्पिटल, मुंबई) में मेडिकल रिसर्च और डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते हैं और उनका मजाक उड़ाते हैं। वीडियो में डॉ. सेजल पवार ने कहा, खोपड़ी काटी और फिर लास्ट में जो भी है, प्रजनन अंग... इस पर प्रणीत मोरे ने पूछा, तू डॉक्टर है या कसाई? और ऐसे जोक भी मारते हो या सीरियस रहते हो? सेजल ने जवाब दिया, मारते हैं। इसके बाद प्रणीत मोरे ने कहा, जोक भी मारते हैं कि इसके दिमाग में कुछ नहीं है। बातचीत के दौरान सेजल ने आगे कहा, जो भी हो... साइज वगैरह। यह सुनकर प्रणीत मोरे ने हैरानी जताते हुए पूछा, “क्या? आप लोग इन सब बातों पर भी चर्चा करते हैं?” सोशल मीडिया पर बयान को लेकर नाराजगी X पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि इस वीडियो पर रिएक्शन उतना ज्यादा क्यों नहीं दिख रहा, जितना हिमांशु जांगड़ा के बयान पर देखने को मिला था। एक यूजर ने लिखा कि यदि किसी पुरुष डॉक्टर ने मृत महिला के शरीर को लेकर ऐसा मजाक किया होता तो उसकी कड़ी आलोचना होती। कुछ लोगों ने मेडिकल एथिक्स और बॉडी डोनेशन को लेकर भी चिंता जताई। एक पोस्ट में कहा गया कि परिवार अपने प्रियजनों की बॉडी मेडिकल एजुकेशन के लिए दान करते हैं और ऐसे मामलों का मजाक उड़ाना उस भरोसे का अपमान है। सेजल का अकाउंट प्राइवेट हुआ विवाद बढ़ने के साथ सेजल पवार का इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट हो गया है। उनके 2 लाख 44 हजार फॉलोअर्स हैं। वहीं, प्रणीत मोरे पहले से ही बिरयानी विवाद को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर विरोध के बाद उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट या डीएक्टिवेट कर दिया है। वहीं, बिरयानी वाले कमेंट करने वाले हिमांशु जांगड़ा को नौकरी से निकाल दिया गया। यह खबर भी पढ़ें… 'बिरयानी के 370 वसूलूंगा' कहने वाले शख्स की नौकरी गई:कंपनी ने लिया एक्शन, विवाद के बीच प्रणित मोरे ने डिलीट किया इंस्टाग्राम अकाउंट 22 साल के वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा को गुरुग्राम स्थित कंपनी स्टारविक डिजाइन से नौकरी से निकाल दिया गया। यह कार्रवाई एक वायरल वीडियो में महिलाओं को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर हुए विरोध के बाद की गई। वहीं, विवाद के बीच प्रणित मोरे ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट या डीएक्टिवेट कर दिया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

