फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर की बेटी और एक्टर अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर कल यानी 6 जुलाई को शादी कर रही हैं। वे अपने लॉन्ग टर्म बॉयफ्रेंड रोहन ठक्कर के साथ शादी करेंगी। शादी से पहले उनके घर पर प्री-वेडिंग रस्में शुरू हो गई हैं। माता की चौकी के बाद अंशुला की मेहंदी सेरेमनी रखी गई, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। अपनी मेहंदी के लिए अंशुला ने पारंपरिक पीले या हरे रंग के बजाय टिल ब्लू कलर का डिजाइनर लहंगा चुना। इस फंक्शन में पूरा कपूर परिवार शामिल हुआ। देखें मेहंदी रस्म की तस्वीरें.… फंक्शन में शामिल हुआ पूरा कपूर परिवारअंशुला कपूर और रोहन ठक्कर की मेहंदी सेरेमनी के दौरान पूरा कपूर परिवार एक साथ नजर आया। इस पारिवारिक मिलन में दूल्हा-दुल्हन के करीबी दोस्त और रिश्तेदार शामिल हुए। फंक्शन में अंशुला के पिता बोनी कपूर और भाई अर्जुन कपूर मेहमानों का स्वागत करते दिखे। उनके अलावा सोनम कपूर, खुशी कपूर, महीप कपूर और बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन भी इस जश्न का हिस्सा बने। कार्यक्रम में काफी संगीत और डांस भी हुआ। मेहंदी के लिए चुना खास गुजराती पटोला लहंगाअंशुला कपूर ने अपनी मेहंदी सेरेमनी के लिए फैशन डिजाइनर अर्पिता मेहता का डिजाइन किया हुआ टिल ब्लू कलर का कस्टमाइज्ड लहंगा पहना। इस लहंगे का डिजाइन गुजरात के पारंपरिक पटोला प्रिंट से प्रेरित है। स्कर्ट पर बारीक पटोला मोटिफ्स के साथ मिरर वर्क किया गया है। लहंगे के बॉर्डर पर एंटीक गोल्ड एम्ब्रॉयडरी है। इसके साथ उन्होंने मैचिंग दुपट्टा लिया, जिस पर ज्योमेट्रिक पैटर्न, मिरर वर्क और टैसल्स लगे हुए हैं। ब्लाउज पर व्हाइट पोल्का-डॉट डिटेलिंग और गले पर हैवी कढ़ाई की गई है। पारंपरिक पोल्की छोड़कर पहनी फिरोजी ज्वेलरीअपने ब्राइडल लुक को अलग बनाने के लिए अंशुला ने पारंपरिक पोल्की ज्वेलरी को छोड़कर 'आम्रपाली ज्वेल्स' की फिरोजी (टर्कोइज) ज्वेलरी चुनी। उन्होंने मोतियों वाले हैवी फिरोजी नेकलेस के साथ मैचिंग ड्रॉप ईयररिंग्स और अंगूठियां पहनीं। उनका मेकअप बिल्कुल नेचुरल और फ्रेश रखा गया था, जिसमें न्यूड पिंक लिपस्टिक शामिल थी। बालों को सॉफ्ट वेव्स लुक देकर आधा खुला छोड़ा गया था, जिसमें पीछे की तरफ गहरे गुलाबी रंग का फ्लोरल गजरा लगाया गया था। यह गजरा उनके नीले लहंगे के साथ अलग ही दिख रहा था। माता की चौकी से हुई थी फंक्शन की शुरुआतमेहंदी सेरेमनी से पहले अंशुला के घर पर पारंपरिक माता की चौकी का आयोजन किया गया था। इस फंक्शन में अंशुला ने पंजाबी कारीगरी को दिखाते हुए चमकीले फुल्कारी दुपट्टे के साथ बेज-गोल्ड कलर का हैवी लहंगा पहना था। इसके साथ उन्होंने क्लासिक कुंदन ज्वेलरी कैरी की थी, जिसमें गले का हार, झुमके और मांग टीका शामिल थे। माता की चौकी के लिए उन्होंने बालों का जूड़ा बनाया था और सैटिन फिनिश मेकअप चुना था।
नई बायोपिक:15 साल बाद बड़े परदे पर लौटेंगी सेलिना, निभाएंगी ‘सिस्टर निवेदिता’ का किरदार
सेलीना जेटली करीब 15 साल बाद बड़े परदे पर वापसी करने जा रही हैं। वह निर्देशक राम कमल मुखर्जी की अगली बायोपिक में सिस्टर निवेदिता (मार्गरेट नोबल) का किरदार निभाएंगी। अपने एक इंटरव्यू में सेलिना ने कहा कि यह फिल्म उनके करियर के सबसे खास अनुभवों में से एक है। उन्होंने बताया कि राम कमल मुखर्जी के साथ काम करना उनके लिए अलग अनुभव रहा और इस किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी जैसा है। सेलिना कहती है...‘सिस्टर निवेदिता मुझे सबसे ज्यादा इसलिए प्रभावित करती हैं, क्योंकि उनका जन्म भारत में नहीं हुआ था, फिर भी उन्होंने अपना जीवन भारत, इसकी संस्कृति, आध्यात्मिक विचारधारा और लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया।’ कौन हैं सिस्टर निवेदिता सिस्टर निवेदिता स्वामी विवेकानंद की आयरिश शिष्या थीं, जिन्होंने अपना जीवन भारत की शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्रजागरण को समर्पित कर दिया। महिला शिक्षा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को आज भी प्रेरणास्रोत माना जाता है।
भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत हमेशा यह रही है कि उसने सवाल पूछने से कभी डरना नहीं सीखा। उपनिषदों में शिष्य गुरु से बेझिझक प्रश्न करता है। बुद्ध सदियों से चली आ रही मान्यताओं को चुनौती देते हैं। चार्वाक ईश्वर और वेदों तक पर सवाल उठाते हैं। कबीर धर्म और समाज में फैले पाखंड पर खुलकर चोट करते हैं। भारतीय दर्शन की लगभग हर परंपरा का आधार संवाद, तर्क और वाद-विवाद की समृद्ध परंपरा रही है। इंसान की सबसे बड़ी कुव्वत उसका दिमाग है और दिमाग का सबसे असरदार औजार है- एक अच्छा सवाल। इंसान और बाकी तमाम जीव-जंतुओं के बीच सबसे बड़ा फर्क सिर्फ यह नहीं है कि इंसान दो पैरों पर चलता है, औजार बनाता है या आसमान छूती इमारतें खड़ी कर लेता है। असली फर्क यह है कि इंसान सवाल पूछता है। वह सिर्फ यह नहीं देखता कि सूरज हर सुबह निकलता है; वह जानना चाहता है कि सूरज उगता हुआ दिखाई क्यों देता है। वह किसी बात को महज इसलिए सच नहीं मान लेता कि सब उसे सच मानते हैं; वह पूछता है आखिर यह सच क्यों है, और यही जिज्ञासा, यही सवाल करने की बेचैनी इंसान को इंसान बनाती है। किसी छोटे बच्चे को देखिए। दुनिया में आने के कुछ ही सालों में वह सवालों की चलती-फिरती मशीन बन जाता है। यह क्या है? वह कौन है? ऐसा क्यों है? वैसा क्यों नहीं है? अगर हम गौर से देखें, तो समझ आएगा कि जिज्ञासा इंसान की सबसे स्वाभाविक फितरत है। इतिहास गवाह है कि जिस समाज ने सवालों को दबाया, वह ठहर गया; और जिसने सवालों का इस्तकबाल किया, वह आगे बढ़ता गया। जरा सोचिए, विज्ञान की पूरी इमारत किस बुनियाद पर खड़ी है? किसी दिन न्यूटन के दिमाग में यह सवाल कौंधा कि पेड़ से गिरता हुआ सेब हमेशा नीचे ही क्यों आता है, ऊपर क्यों नहीं चला जाता। अगर कुछ सवाल कभी न पूछे गए होते तो शायद हम आज भी अंधविश्वासों और गलत धारणाओं के जंगल में भटक रहे होते। विज्ञान जवाबों नहीं, सवालों से जन्म लेता है। सवाल सिर्फ विज्ञान के दायरे तक ही नहीं रहते हैं। अदब, फन और फलसफा भी सवालों की कोख से ही जन्म लेते हैं। एक शायर जब पूछता है कि इंसान दु:खी क्यों है, मोहब्बत क्या है, तन्हाई क्यों है, इंसाफ किसे कहते हैं, तब शायरी पैदा होती है। एक लेखक जब अपने समाज से सवाल करता है, एक फिल्मकार जब अपने दौर की उलझनों, नाइंसाफियों और विसंगतियों पर उंगली रखता है, तब मायने रखने वाला सिनेमा बनता है। कला का काम तैयार जवाब बांटना नहीं, ऐसे सवाल पैदा करना है जो हमें अपने बारे में कुछ नया सोचने पर मजबूर कर दें। मुझे तब फिक्र होती है, जब लोग किसी फिल्म, किताब या खयाल से असहमत होने के बजाय उसे चुप करा देना चाहते हैं। किसी सवाल को सिर्फ इसलिए दबा देना कि वह असुविधाजनक है, किसी आत्मविश्वास से भरे समाज की निशानी नहीं हो सकती। अगर कोई बच्चा पूछ ले कि यह नियम क्यों है, तो उसे चुप करा दिया जाता है। अगर कोई नौजवान जानना चाहे कि यह परंपरा किस बुनियाद पर बनी है, तो उससे कहा जाता है, बहुत सवाल मत करो। अगर कोई नागरिक सरकार से पूछ ले कि यह फैसला क्यों लिया गया, तो उसे विरोधी मान लिया जाता है। जबकि सच यह है कि सवाल पूछना विरोध नहीं, बल्कि समाज में अपनी हिस्सेदारी निभाने का तरीका है। जो शख्स सवाल पूछ रहा है, वह बता रहा है कि उसे समाज की फिक्र है। धर्म और आस्था के मामले में भी यही बात लागू होती है। आस्था का सम्मान करने का यह हरगिज मतलब नहीं कि इंसान अपनी सोचने-समझने की ताकत पर ताला लगा दे। पर सवाल पूछना और हर बात का विरोध करना एक ही चीज नहीं हैं। कुछ लोग समझते हैं हर बात में नुक्स निकालना ही अक्लमंदी की निशानी है। ऐसा नहीं है। सवाल पूछने का मकसद सच तक पहुंचना होना चाहिए। अगर आपका इरादा सामने वाले को नीचा दिखाना भर है, तो वह जिज्ञासा नहीं, अहंकार है, लेकिन अगर आपकी कोशिश समझने की है, सीखने की है, सच के थोड़ा और करीब जाने की है, तो आपका सवाल पूछना एक रचनात्मक सरोकार बन जाता है। बौद्धिक ईमानदारी की पहली शर्त यही है कि इंसान जो सवाल दूसरों से पूछता है, उसे अपने आप से भी पूछे। हम अक्सर दूसरों के खयालों को कसौटी पर कसते हैं, लेकिन अपने यकीनों की जांच नहीं करते। हमें खुद से भी यह पूछने का हौसला होना चाहिए कि मैं जो मानता हूं, उसे मानने की बुनियाद क्या है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने कोई राय सिर्फ इसलिए अपना ली क्योंकि मेरे आसपास के ज्यादातर लोग उसे सही मानते हैं? अपने ही विश्वासों से सवाल करना आसान नहीं होता, लेकिन यही मानसिक परिपक्वता की सबसे बड़ी निशानी है। आज के दौर में, जब जानकारी पहले से कहीं ज्यादा और कहीं तेजी से हमारे सामने आती है, तब सवाल पूछने की जरूरत और भी बढ़ जाती है। इंटरनेट पर हर रोज लाखों दावे किए जाते हैं। हर विचार के हक में भी दलीलें मिल जाती हैं और उसके खिलाफ भी। ऐसे में आंख मूंदकर किसी बात को सच मान लेना खतरनाक हो सकता है। हमें पूछना होगा- इसका स्रोत क्या है? इसका सबूत क्या है? इसकी दलील क्या है? यही आलोचनात्मक सोच हमें भ्रम, अफवाह और प्रचार के जाल से बचाती है।सवाल पूछना सिर्फ हमारा अधिकार नहीं, हमारी जिम्मेदारी भी है। जो समाज सवाल पूछना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे सोचने की अपनी ताकत खो देता है, और जो इंसान सवाल पूछना छोड़ देता है, वह सीखना भी छोड़ देता है। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)
बॉलीवुड एक्टर आमिर खान आज गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से शादी करने वाले हैं। मुंबई के पाली हिल (बांद्रा) स्थित आमिर खान के आवास पर यह प्राइवेट शादी होगी। भारी मानसूनी बारिश के बीच शादी में शामिल होने के लिए उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनका परिवार भी आमिर खान के घर पहुंचा। आज आमिर खान की तीसरी शादी होगी। इसमें सिर्फ दोनों परिवारों के लोग और कुछ करीबी दोस्त शामिल होंगे। शादी में शामिल होने पहुंचे सेलेब्स; देखें तस्वीरें बता दें कि आमिर ने पहली शादी साल 1986 में फिल्म प्रोड्यूसर रीना दत्ता से की थी। साल 2002 में रीना से अलग होने के बाद आमिर ने साल 2005 में डायरेक्टर किरण राव से दूसरी शादी की। साल 2021 में किरण और आमिर का तलाक हो गया। सैलून एंटरप्रेन्योर और फैशन प्रोफेशनल हैं गौरी स्प्रैट आमिर ने साल 2025 में अपने 60वें जन्मदिन पर गौरी के साथ अपने रिलेशनशिप को पब्लिक किया था। गौरी बेंगलुरु की रहने वाली एक सैलून एंटरप्रेन्योर और फैशन प्रोफेशनल हैं। उनके पिता तमिल-ब्रिटिश मूल के और मां पंजाबी-आयरिश मूल की हैं। गौरी 1920 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ब्रिटिश कम्युनिस्ट फिलिप स्प्रैट की पोती हैं। आमिर की तरह गौरी भी पहले शादीशुदा रही हैं और उनका एक 7 साल का बच्चा है। गौरी और उनका बच्चा पिछले दो साल से मुंबई में साथ रह रहे हैं। आमिर और गौरी एक-दूसरे को पिछले 25 सालों से जानते हैं। दोनों पहले काफी अच्छे दोस्त थे, जिसके बाद उन्होंने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया। जब से आमिर और गौरी ने अपने रिश्ते को ऑफिशियल किया है, तब से गौरी को अक्सर आमिर के साथ अलग-अलग इवेंट्स और मौकों पर साथ देखा जाता है। गौरी के आने से खुद को पूरा मानते हैं आमिरमई 2026 में NBT को दिए इंटरव्यू में आमिर ने गौरी के साथ अपने रिश्ते को लेकर कहा था, ‘मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे गौरी मिलीं और हमारा रिश्ता शुरू हुआ। वह बेहतरीन हैं और उनके साथ मुझे बहुत शांति मिलती है। हालांकि रीना दत्ता और किरण राव के साथ भी मेरा रिश्ता बहुत गहरा था, लेकिन चीजें आगे नहीं बढ़ पाईं। मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि गौरी मेरी जिंदगी में आईं। मुझे लगता है, अब जाकर मैं मुकम्मल हुआ हूं।’ 2002 में हुआ था पहला तलाक आमिर ने अपनी पहली शादी साल 1986 में रीना दत्ता से की थी। यह एक लव मैरिज थी जो करीब 16 सालों तक चली। दोनों के दो बच्चे, जुनैद खान और इरा खान हैं। साल 2002 में दोनों कानूनी तौर पर अलग हो गए। किरण राव से दूसरा रिश्ता फिर सहमति से अलग हुए रीना दत्ता से तलाक के बाद आमिर खान की जिंदगी में डायरेक्टर किरण राव आईं। साल 2005 में दोनों की शादी हुई। इस शादी से उनका एक बेटा आजाद है, जिसका जन्म IVF से हुआ। शादी के 15 साल बाद, जुलाई 2021 में आमिर और किरण ने तलाक की घोषणा की थी। अपने साझा बयान में उन्होंने इसे एक सोची-समझी प्लानिंग के तहत लिया गया फैसला बताया था। आमिर के मुताबिक, समय के साथ पति-पत्नी के रूप में उनके रिश्ते का तालमेल बदल गया था। हालांकि, तलाक के बाद भी दोनों के बीच सम्मान और दोस्ती बरकरार है। वे आज भी अपने बेटे की मिलकर परवरिश कर रहे हैं और पानी फाउंडेशन समेत कई फिल्मी प्रोजेक्ट्स पर साथ काम करते हैं। ------------------------------------- आमिर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें आमिर खान ने 20 की उम्र में घरवालों से छिपकर पड़ोसी से पहली कोर्ट मैरिज की, जानिए 3 अहम रिश्तों की कहानी मशहूर कहावत है कि ‘दूसरा मौका सिर्फ कहानियां देती हैं, जिंदगी नहीं’, लेकिन बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने ये कहावत गलत साबित कर दी। दो नाकाम शादियों के बाद आमिर ने जिंदगी को नया मौका दिया है और आज वो 61 की उम्र में गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से शादी कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें
एक्टर अली गोनी ने सोशल मीडिया पर उन लोगों को जवाब दिया है, जिन्होंने एल्विश यादव के घी ब्रांड का नाम न लेने पर उन्हें ट्रोल किया था। हाल ही में अली ने एक वीडियो में घी की तारीफ की थी, लेकिन ब्रांड का नाम नहीं लिया। इसके बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर सवाल उठाए और इसे धर्म से जोड़कर रिएक्शन दिया। अली गोनी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो शेयर कर इस मामले पर अपनी सफाई दी। वीडियो में उन्होंने एल्विश यादव के घी ब्रांड का नाम भी लिया और कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि ब्रांड का नाम न लेने को लेकर विवाद खड़ा हो जाएगा। अली ने कहा, नमो नारायण। नमो नारायण। आप लोगों को कुछ नया नहीं मिला बात बनाने का, तो आप लोगों ने ये बना दिया। मैं तो बस घी की तारीफ कर रहा था। मैंने तो इतना सोचा भी नहीं था कि आप लोग नाम को लेकर इतना बड़ा... दिस इज सो फनी। उन्होंने आगे कहा, मैं कभी इन चीजों पर इतना ध्यान नहीं देता, बट ये बहुत फनी था। मतलब इतनी घटिया बात आप लोग करेंगे, लेकिन नमो नारायण। और मुझे कोई भी नाम लेने से कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेरे लिए सब बराबर है। कुछ नया ढूंढो यार, कुछ नया ढूंढो भाई। अली गोनी पहले भी हुए थे ट्रोल गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब अली गोनी इस तरह के विवाद में आए हैं। इससे पहले वह मुंबई में गर्लफ्रेंड जैस्मिन भसीन के साथ गणपति पूजा में शामिल हुए थे। उस दौरान 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे को लेकर भी उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। बाद में फिल्मीझान को दिए एक पॉडकास्ट में अली ने कहा था कि वह पहली बार गणपति उत्सव में शामिल हुए थे। उन्हें कभी नहीं लगा था कि एक छोटी-सी बात इतना बड़ा विवाद बन जाएगी। उन्होंने कहा था, “मेरे धर्म में इसकी इजाजत नहीं है। हम पूजा नहीं करते हैं। हमारा एक ही बिलीवर है। हम नमाज पढ़ते हैं, हम प्रार्थना करते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि वो हर धर्म का सम्मान करते हैं। अली गोनी ने यह भी बताया था कि वायरल वीडियो में जैस्मिन भसीन उनके मुंह को इसलिए पकड़ रही थीं, क्योंकि पीछे लोग जयकारा लगा रहे थे और किसी ने कहा था, गणपति सबसे क्यूट हैं। इसके बाद जैस्मिन ने प्यार से अली की तरफ इशारा करते हुए कहा, ये भी क्यूट है। अली का कहना था कि इस वीडियो का गलत मतलब निकाला गया और ऐसा दिखाया गया, जैसे जैस्मिन उन्हें गणपति बप्पा मोरया बोलने के लिए कह रही थीं।
पंजाबी एक्टर व कॉमेडियन बीनू ढिल्लों ने एअर इंडिया की फ्लाइट के साथ अपना ताजा एक्सपीरिएंस शेयर किया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर लाइव आकर अपने फैंस से कहा है कि एअर इंडिया की फ्लाइट में कभी सफर मत करना, चाहे पैदल ही कनाडा जाने पड़े। फ्लाइट में चढ़े बीनू ढिल्लों ने कहा- बिजनेस क्लास की सभी सीटें बेकार पड़ी हैं। इनमें कई सीटों की सुविधाएं चल ही नहीं रहीं। जब कंप्लेन की गई तो स्टाफ का कहना है कि आपको 35% रिफंड मिल जाएगा। यात्रा नहीं करनी है तो फ्लाइट से उतर भी सकते हैं। बीनू ढिल्लों के साथ मौजूद अन्य पैसेंजर्स ने भी इसे अपना सबसे खराब अनुभव बताया। हालांकि, इस मामले में अभी एअर इंडिया एयरलाइंस की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। जानिए, वीडियो में क्या-क्या बोले बीनू ढिल्लों कैरी ऑन जट्टा 4 के प्रमोशन को जा रहे थे आखिर में ढिल्लों कहते हैं कि बाबा सब पर मेहर करें। कैरी ऑन जट्टा किसने देख ली? चलो मिलते हैं। बताया जा रहा है कि बीनू ढिल्लों ने यह वीडियो कैरी ऑन जट्टा-4 फिल्म के प्रमोशन के लिए कनाडा जाते वक्त बनाई है। हालांकि, अभी तक एअर इंडिया की ओर से इस पर कोई सफाई नहीं दी गई। किष्टू के बोलीं- सही कहा आपने बीनू ढिल्लों की ओर से एअर इंडिया की वजह से हुई परेशानी के खिलाफ उठाई गई आवाज का सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर किष्टू के (कनिष्ठा कौशिक) ने समर्थन किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, बिल्कुल सही कहा जी। किष्टू के पंजाबी बोलियों के चलते कोरोना काल में फेमस हुई थीं। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… ट्रोलिंग पर पंजाबी एक्टर गुरप्रीत घुग्गी ने तोड़ी चुप्पी, कहा- बड़ी कंपनी छवि खराब करवा रही, एक्ट्रेस को प्रेग्नेंट कर ₹5 करोड़ देने का दावा पंजाबी एक्टर गुरप्रीत घुग्गी ने सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग को लेकर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि उनके साथ 30-35 वर्षों से काम करने वाले कई कलाकार अब रंजिश निकाल रहे हैं। एक बड़ी कंपनी पैसे देकर सोशल मीडिया पर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रचार करवा रही है। पढ़ें पूरी खबर…
वेब सीरीज 'राख' में रज्जो के किरदार से चर्चा बटोर रहे अभिनेता रमनदीप यादव का यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। कभी उनका सपना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना था, लेकिन किस्मत उन्हें थिएटर और फिर एक्टिंग में ले आई। उन्होंने मुंबई में चार साल तक ऑडिशन दिए, आर्थिक तंगी झेली और कई बार शहर छोड़ने का मन भी बनाया, लेकिन हार नहीं मानी। आखिरकार 'राख' ने उन्हें वह पहचान दिलाई, जिसका वह लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने संघर्ष, रिजेक्शन, थिएटर, 'राख' और रज्जो की तैयारी पर बात करते हुए बताया कि कई लोग कहते हैं कि अगर हमारे आस पास होते तो पक्का मार देते। सवाल: आपने क्रिकेट भी खेला है। फिर अचानक एक्टिंग की तरफ कैसे रुख हुआ? जवाब: सच कहूं तो आज भी मैं पूरी तरह नहीं समझ पाया कि ऐसा क्यों हुआ। मेरा सपना भारत के लिए क्रिकेट खेलना था। कभी नहीं सोचा था कि मैं एक्टिंग करूंगा। ऐसा कोई एक दिन या घटना नहीं हुई, जिसके बाद मैंने क्रिकेट छोड़ने का फैसला लिया हो। धीरे-धीरे लगा कि चीजें वैसी नहीं हो रही थीं जैसी मैं चाहता था। मेहनत के बावजूद मन नहीं लग रहा था। शायद भगवान ने मेरे लिए कुछ और सोच रखा था। कॉलेज के आखिरी साल में एक दोस्त ने कहा कि यूथ फेस्टिवल के लिए ऑडिशन हो रहे हैं, चलो ट्राई करते हैं। मैंने बिना ज्यादा सोचे ऑडिशन दिया और पहली बार में ही चयन हो गया। पहली बार स्टेज पर परफॉर्म किया और वहीं एहसास हुआ कि मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा है। उस अनुभव ने मेरी जिंदगी की दिशा बदल दी। सवाल: थिएटर तक पहुंचने का सफर कैसे शुरू हुआ? जवाब: यूथ फेस्टिवल में मेरी परफॉर्मेंस देखकर थिएटर टीचर ने कहा कि मुझे उनके थिएटर ग्रुप से जुड़ जाना चाहिए। मैंने कहा कि फीस देने की मेरी हैसियत नहीं है। उस समय 1500-2000 रुपए फीस थी और मैं घरवालों से थिएटर सीखने के लिए पैसे नहीं मांग सकता था। उन्होंने कहा कि तुम आ जाओ, फीस की चिंता मत करो। शुरुआत में मैंने नुक्कड़ नाटक किए। जागरूकता अभियान के तहत कई स्ट्रीट प्ले किए। मुझे पता नहीं था कि इसके पैसे मिलेंगे। पहला चेक 2500 रुपए का मिला। उसी पैसे से थिएटर की फीस भरी और 500 रुपए बच गए। तब लगा कि एक्टिंग से कमाई भी हो सकती है। सवाल: क्या उस समय तय कर लिया था कि अब एक्टिंग ही करनी है? जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। उस समय मैं सुबह क्रिकेट की प्रैक्टिस करता था और शाम को थिएटर करता था। दोनों साथ लेकर चलना चाहता था, लेकिन धीरे-धीरे समझ आया कि थिएटर भी उतनी ही मेहनत और समर्पण मांगता है जितना क्रिकेट। क्रिकेट में अनुशासन तय होता है, लेकिन एक्टिंग में खुद अपना अनुशासन बनाना पड़ता है। किताबें पढ़नी होती हैं, लोगों को ऑब्जर्व करना होता है, कविताएं पढ़नी होती हैं, संगीत सुनना होता है, पेंटिंग देखनी होती है और इंसानी व्यवहार को समझना पड़ता है। करीब डेढ़-दो साल बाद मुझे यकीन हुआ कि अब एक्टिंग में ही आगे बढ़ना है। सवाल: क्या आपने किसी एक्टिंग स्कूल में जाने की भी कोशिश की? जवाब: हां। मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का ऑडिशन दिया, लेकिन चयन नहीं हुआ। इसके बाद दूसरे ड्रामा स्कूलों में भी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। हालांकि मैंने हार नहीं मानी। थिएटर करता रहा और साथ-साथ ऑडिशन भी देता रहा। सवाल: पहला ब्रेक कैसे मिला? जवाब: मेरा पहला प्रोजेक्ट अनुराग कश्यप सर की फिल्म ‘मनमर्जियां’ थी। इसके बाद एमएक्स प्लेयर की सीरीज 'कैंपस डायरीज' मिली, जिसमें मैंने पृथ्वीराज का किरदार निभाया। इस सीरीज के बाद इंडस्ट्री में लोग मुझे पहचानने लगे और ऑडिशन मिलने शुरू हो गए। सवाल: नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘कैट’आपको कैसे मिली? जवाब: उस समय मैं 'कैंपस डायरीज' की शूटिंग कर रहा था। तभी मुझे 'कैट' का ऑडिशन मिला। इसमें मुझे सरदार का किरदार निभाना था, लेकिन पगड़ी बांधनी तक नहीं आती थी। मैं शूट खत्म करके सीधे दोस्त के घर गया। उसने रातभर मेरी मदद की, पगड़ी बांधी और हमने ऑडिशन रिकॉर्ड किया। बाद में मुझे डायरेक्टर से मिलने के लिए अमृतसर बुलाया गया। मैं पहली बार पगड़ी बांधकर ट्रेन से गया। पूरी यात्रा में गर्दन तक नहीं हिलाई, क्योंकि डर था कि पगड़ी खराब न हो जाए। आज सोचता हूं कि पगड़ी पहनकर जाना सही फैसला था। शायद उसी वजह से डायरेक्टर को मेरे लुक पर दोबारा सोचने की जरूरत नहीं पड़ी। सवाल: 'कैट' के बाद आपने चंडीगढ़ से मुंबई आने का फैसला कैसे लिया? जवाब: 'कैट' में काम करने के बाद मुझे थोड़ा आर्थिक सहारा मिला। तब लगा कि अब मुंबई जाकर किस्मत आजमानी चाहिए। मैं कास्टिंग डायरेक्टर्स से मिलकर उन्हें बताना चाहता था कि मैंने 'CAT' में काम किया है। मैं शो रिलीज होने से करीब तीन महीने पहले ही मुंबई आ गया था। 'कैट' रिलीज होने के बाद लोगों ने मेरा काम पसंद किया। जिन कास्टिंग डायरेक्टर्स से मैं पहले मिल चुका था, उन्हें मेरा चेहरा याद आ गया। इसके बाद ऑडिशन मिलने लगे। पहले मुझे खुद जाकर बताना पड़ता था कि मैं एक्टर हूं, लेकिन अब लोग मेरे काम से परिचित थे। हालांकि ऑडिशन मिल रहे थे, लेकिन कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिल रहा था। कई बार मैं आखिरी दौर तक पहुंचा, लेकिन रोल किसी और को मिल गया। देखते-देखते चार साल निकल गए। सवाल: इन चार सालों का संघर्ष कितना मुश्किल था? जवाब: बहुत मुश्किल था। जो पैसे लेकर मुंबई आया था, वे करीब छह महीने में खत्म हो गए। इसके बाद मैंने थिएटर किया, वर्कशॉप्स लीं और जितना काम मिला, करता रहा। कमाई नहीं होती थी, तो खर्च कम कर दिए। मैंने सादा जीवन जीना शुरू कर दिया। कोशिश यही थी कि किसी तरह मुंबई में टिके रहूं। मैं वर्सोवा में रहता था। कई बार लगा कि यह शहर छोड़ना पड़े। एक्टिंग छोड़ने का कभी मन नहीं हुआ, लेकिन लगा कि कुछ समय के लिए चंडीगढ़ जाकर पैसे जुटा लूं और फिर लौटूं। सवाल: फिर 'राख' कैसे मिली? जवाब: मैं कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ गया था। तभी 'राख' के ऑडिशन का कॉल आया। खास बात यह थी कि ऑडिशन उसी कास्टिंग टीम ने भेजा था, जिसने मुझे चार साल पहले 'CAT' के लिए चुना था। मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि इतने साल बाद भी उन्हें मैं याद था और उन्होंने लीड किरदार के लिए मेरा टेस्ट किया। उस वक्त लगा कि शायद भगवान मुझे एक और मौका दे रहे हैं। मैंने खुद से कहा कि अब बीच का रास्ता नहीं अपनाना है। इस मौके के लिए पूरी ताकत लगा दूंगा। पूरी ईमानदारी से तैयारी की और आखिरकार यह रोल मिल गया। सवाल: 'रज्जो' जैसा खतरनाक किरदार निभाने की तैयारी कैसे की? जवाब: जब मैंने पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मैं भावुक हो गया। कहानी इतनी गहरी और क्रूर थी कि पढ़ते-पढ़ते ही उसका असर महसूस होने लगा। इसके बाद मैंने रमनदीप को अलग रख दिया और सिर्फ रज्जो के बारे में सोचना शुरू किया। मैं चाहता था कि रज्जो की चाल, आवाज, सोच, आदतें और व्यवहार अलग हो। थिएटर की वजह से मुझे किरदार तैयार करने की आदत है। मैं सिर्फ डायलॉग याद नहीं करता, बल्कि यह भी सोचता हूं कि वह क्या खाता होगा, कैसे चलता होगा, किस तरह बात करता होगा और दुनिया को किस नजर से देखता होगा। खुशकिस्मती से इस शो के लिए 12 दिन की एक्टिंग वर्कशॉप मिली। उससे किरदार को समझने में काफी मदद मिली। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था? जवाब: दो सीन मेरे लिए सबसे मुश्किल थे। पहला वह, जिसमें रज्जो साहिल को पहली बार मारता है। उस दिन मैं पूरी तरह किरदार में डूब चुका था। कई टेक देने के बाद सच में ऐसा लग रहा था जैसे मैंने किसी को मार दिया हो। आधे दिन तक सेट पर होकर भी खुद में नहीं था। दूसरा सीन वह था, जब रज्जो साहिल की बॉडी ठिकाने लगाने जाता है। वहां भी मैं पूरी तरह किरदार की मानसिक स्थिति में था। मेरी कोशिश थी कि रज्जो सिर्फ खलनायक न लगे। मैं चाहता था कि दर्शक उसके अंदर का इंसान भी देखें। वह गलत इंसान है, लेकिन उसके फैसलों के पीछे भी एक मानसिकता है। मैंने उसी सोच के साथ यह किरदार निभाया। सवाल: 'राख' रिलीज होने के बाद दर्शकों से किस तरह का रिस्पॉन्स मिल रहा है? जवाब: दर्शकों का रिस्पॉन्स उम्मीद से बेहतर मिला है। लोग कहते हैं कि मैंने किरदार बहुत अच्छी तरह निभाया है। कई लोग यह भी कहते हैं कि अगर हमारे आस पास होते तो पक्का मार देते। मेरे लिए यह सबसे बड़ा कॉम्प्लीमेंट है, क्योंकि इसका मतलब है कि लोग मेरे किरदार से नफरत कर रहे हैं। यानी मैंने अपना काम ईमानदारी से किया है।
मशहूर कहावत है कि ‘दूसरा मौका सिर्फ कहानियां देती हैं, जिंदगी नहीं’, लेकिन बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने ये कहावत गलत साबित कर दी। दो नाकाम शादियों के बाद आमिर ने जिंदगी को नया मौका दिया है और आज वो 61 की उम्र में गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से शादी कर रहे हैं। दोनों आमिर के घर में रजिस्टर्ड मैरिज करेंगे, जिसमें परिवार के लोगों के अलावा चुनिंदा करीबी दोस्त शामिल होंगे। आमिर की पूर्व पत्नियां रीना दत्ता और किरण भी इस शादी में पहुंच सकती हैं। आमिर की पिछली दो शादियां भले ही नाकाम रहीं, लेकिन वो आज भी दोनों को जिंदगी के अहम किरदार मानते हैं। आमिर महज 20 साल के थे, जब उन्हें पड़ोस में रहने वालीं रीना से प्यार हो गया। तब वो फिल्मों में नहीं आए थे। घरवालों से चोरी-छिपे मुलाकात होना और घरवालों का गुस्सा, आमिर के खाते में आया। उन्होंने हार नहीं मानी और फिल्मी हीरो की तरह दुनिया की नजरों से छिपकर कोर्ट में शादी कर ली, जिसमें 10 रुपए खर्चा आया। दोनों कानूनी तौर पर पति-पत्नी बने, लेकिन दुनिया की नजरों में अपनी-अपनी जिंदगी जीते थे। संघर्ष लंबा रहा, लेकिन फिर दुनिया उनके प्यार के आगे झुकी और उनके रिश्ते को स्वीकार कर लिया। दोनों के 2 बच्चे आयरा और जुनैद हुए। शादी के 15 साल बाद ये रिश्ता टूट गया। आमिर के लिए ये असहनीय था। उन्होंने शराब का सहारा लिया और खुद को दुनिया से छिपा लिया, लेकिन कभी पहली पत्नी रीना और परिवार पर आंच नहीं आने दी। कुछ समय बाद आमिर की जिंदगी में एक रोज किरण राव की एंट्री हुई, जो उन्हीं की फिल्म की असिस्टेंट डायरेक्टर थीं। न कोई प्यार-मोहब्बत की बातें हुईं, न इजहार, न फैंसी डेट और न कोई प्लानिंग। कहानी महज एक आधे घंटे के कॉल से शुरू हुई। और फिर क्या था चट मंगनी और पट ब्याह। इस शादी से एक बेटा आजाद हुआ, लेकिन 2021 में दोनों ने अपनी-अपनी जिंदगियों को अहमियत देते हुए शादी तोड़ दी। लेकिन दोस्ती और एहसास बरकरार रहा। अब आमिर 61 की उम्र में गौरी स्प्रैट से शादी कर रहे हैं। गौरी तलाकशुदा हैं, जिनकी पिछली शादी से एक बेटा है। आज आमिर की तीसरी शादी के खास मौके पर, जानिए उनकी जिंदगी के इन 3 सबसे अहम चैप्टर्स की कहानी- आमिर महज 20 साल के थे। वो बॉम्बे की जिस बिल्डिंग के चौथे माले पर रहते थे, उसके ठीक सामने एयर इंडिया की बिल्डिंग थी। दोनों का फासला महज 100 मीटर था। एक दिन खिड़की पर खड़े आमिर की नजर सामने की बिल्डिंग की खिड़की पर पड़ी। सामने उन्हें गोरी-खूबसूरत लड़की दिखी। पहली नजर में ही आमिर को वो लड़की इस कदर पसंद आई कि उनका ज्यादातर समय खिड़की पर ही कटने लगा। कुछ दिनों बाद आमिर ने गौर किया कि वो लड़की भी देर तक खिड़की पर ही दिखती है, कहीं उसे भी वो पसंद तो नहीं करती। आमिर की शिल्पा नाम की दोस्त भी उसी बिल्डिंग में रहती थी। आमिर ने नाम पता किया, जो था रीना दत्ता। आमिर ने एक दिन शिल्पा से कहा- मुझे वो लड़की बहुत पसंद है, लेकिन वो हमेशा भीड़ में रहती है। वो तुम्हारी दोस्त है, उसे दुकान से सामान लेने के बहाने साथ लेकर निकलो और बुक्स लेने के बहाने मेरे घर ले आना। ठीक ऐसा ही हुआ, शिल्पा, रीना को आमिर के घर ले आईं। तीनों बेडरूम में बैठे और फिर शिल्पा, विक्की नाम के दोस्त से अर्जेंट काम के बहाने 2 मिनट का समय मांगकर वहां से निकल गईं। आमिर ने रीना को सच बता दिया कि इस कमरे में होना कोई संयोग नहीं बल्कि प्लान है। जवाब मिला- मैं समझ गई थी। आमिर ने झट से कहा- रीना, मैं आपको बहुत पसंद करता हूं। जवाब मिला- मुझे कोई इंट्रेस्ट नहीं। आमिर ने दबाव देकर पूछा, तब भी रीना ने यही कहा- मुझे दोस्ती नहीं करनी, कभी आगे फैसला बदला तो जरूर बताऊंगी। आमिर उदास हो गए और बस इतना ही कहा- चलो अब हम भी विक्की के घर ही चलते हैं। कुछ दिन बाद आमिर ने दोस्त के जरिए फिर रीना को मैसेज भेजा कि वो उनसे बस एक बार मिलना चाहते हैं। बात बन गई। आमिर ने रीना को कॉलेज से पिक किया और कैफे ले गए। आमिर ने सीधे पूछा- मुझे यकीन नहीं होता कि आप मुझे पसंद नहीं करतीं। अगर ऐसा है, तो आप घंटों मुझे देखते हुए खिड़की पर क्यों खड़ी रहती थीं। रीना का जवाब शॉकिंग था, उन्होंने कहा- बस ऐसे ही फन के लिए। आमिर का दिल टूट गया, उन्हों खिड़की पर जाना ही बंद कर दिया। एक महीने बाद बस स्टॉप के पास उनका रीना से सामना हुआ। आमिर हाय-हैलो कर आगे बढ़ गए कि पीछे से आवाज आई- आमिर। वो पलटे तो रीना घबराई हुई पास आईं और कहा- मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है। उन्होंने कहा- बताओ। रीना ने कहा- यहां नहीं, कल घर आऊंगी। 7 सितंबर 1985 को घर आते ही रीना ने कहा- मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं। मैं उस दिन डर गई थी। पेरेंट्स स्ट्रिक्ट हैं, इसलिए न कहा था। रिश्ता शुरू हुआ। दोनों खिड़कियों से इशारों में बात करते और मौका पाते ही टेलीफोन पर बातें करते। 1986 की 1 जनवरी को रीना और आमिर ने आधे घंटे कॉल पर बात की और रीना की मम्मी ने एक्सेंटशन फोन से पूरी बात सुन ली। आमिर को घर बुलाया गया। रीना की मां ने आमिर को डांटकर भगा दिया और कहा कि 2 दिन बाद रीना के पिता बात करेंगे। जब तक आमिर घर पहुंचे, सारी खिड़कियां बंद कर दी गईं। रीना को घर में बंद कर दिया गया। 4-5 दिन बाद एक रोज आमिर ने एक आधी खुली खिड़की से रीना को रोते देखा और आग बबूला हो गए। उन्होंने कॉल कर रीना की मां से मिन्नतें कीं, लेकिन बात नहीं बनी। कुछ दिन बाद रीना के छोटे भाई-बहन आमिर को समझाने पहुंचे कि रीना से दूर रहो। उल्टा गुस्से में आमिर रीना के घर पहुंच गए। रीना के मां-बाप ने धमकी दी कि मेरी बेटी से दूर रहो वर्ना टांगे तुड़वा दी जाएंगी। आमिर घर लौटे। कुछ दिनों बाद रीना को कॉलेज जाने की परमिशन मिली। खबर मिलते ही आमिर कॉलेज पहुंचे और रीना से पूछा कि क्या वो साथ रहना चाहती हैं। रीना की हामी मिलते ही आमिर को तसल्ली हुई। घरवालों से छिपकर बात करने के लिए दोनों सड़क पर रोज एक सीक्रेट स्पॉट पर लेटर छोड़ने लगे। कुछ दिनों आमिर ने खत में घरवालों से छिपकर शादी करने का प्रस्ताव दिया। शादी सिर्फ इसलिए, जिससे रीना के घरवाले उनकी कहीं और शादी न करवा सकें। रीना ने एक दिन का समय मांगा और हां कर दिया। आमिर ने दोस्त सत्या के घर जाकर स्पेशल मैरिज एक्ट पढ़ा। अब दिक्कत ये थी कि फरवरी 1986 में आमिर महज 20 के थे, जबकि शादी की लीगल उम्र 21 साल थी। 14 मार्च 1986 को आमिर 21 के हुए और अगले दिन जाकर उन्होंने शादी के लिए एप्लीकेशन दे दी। एक महीने बाद 15 अप्रैल को एप्लीकेशन वैलिड हुई, लेकिन 16-17 को वीकेंड होने की वजह से 18 अप्रैल को दोनों चोरी-छिपे मैरिज रजिस्टार के दफ्तर पहुंचे और शादी की। आमिर का भाई फैसल, दोस्त विक्की, सत्या और स्वाति गवाह बने। शादी के बाद दोनों अपने-अपने घर चले गए। 8 महीने तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन फिर एक दिन भावनाओं में बहकर रीना ने छोटी बहन अन्नू को शादी की बात बता दी। उस दिन रीना के पेरेंट्स चेन्नई गए हुए थे। छोटी बहन ने तुरंत कॉल कर उन्हें सारी बात बता दी। पेरेंट्स अगले दिन लौटने वाले थे। आमिर बहुत डर गए। वो रीना को घर ले आए और अपने घरवालों को इकट्ठा किया। सबको लगा कि आमिर अपनी गर्लफ्रेंड से मिलवाएंगे, लेकिन रोते-बिलखते आमिर ने कहा- मैंने शादी कर ली है। सन्नाटा पसर गया। औरतें रोने लगीं। आमिर भी खूब रो रहे थे। तभी पिता पास आए और गले लगाकर कहा- अब तो शादी हो गई, अब क्यों रो रहे हो। आमिर ने कहा- रीना के घरवाले आज बॉम्बे आ रहे हैं, उन्हें भी अभी पता चला है। उनका क्या करेंगे। पिता ने कहा, वो रीना के पेरेंट्स से बात करेंगे। रीना ने घर पर कॉल किया, तो जवाब मिला- घर आने और मिलने की जरुरत नहीं है। रीना फिर घर नहीं गईं। 4 महीने बाद रीना के पिता की तबीयत बिगड़ी तो रीना आमिर के साथ हॉस्पिटल पहुंचीं। पिता ने बात नहीं की, लेकिन आमिर ने पैर छुआ तो उन्होंने चेहरा हिलाकर आशीर्वाद दिया। कुछ दिनों बाद जब वो डिस्चार्ज हुए, तो आमिर घर जाने लगे। एक दिन खाना खाते हुए उन्होंने आमिर से कहा- मुझे पहले ही तुम से मिल लेना था। रीना के लिए तुमसे अच्छा लड़का मुझे कभी नहीं मिलता। शादी के कुछ समय बाद ही आमिर खान की फिल्म कयामत से कयामत तक रिलीज हुई, जिससे वो स्टार बन गए। आमिर ने स्टारडम पर असर न पड़े, इसलिए शुरुआती कुछ सालों तक उन्होंने शादी राज रखी। इस शादी से उन्हें दो बच्चे आयरा और जुनैद हुए। हालांकि, बढ़ते स्टारडम के साथ आमिर का परिवार को समय देना मुश्किल होता चला गया। यही वजह रही कि रीना ने 2001 में आमिर का घर छोड़कर चली गईं। इसी साल आमिर की लगान रिलीज हुई, जो ब्लॉकबस्टर रही। रीना इसकी को-प्रोड्यूसर थीं। आमिर ने अपना ड्राइवर और कुक रीना और बच्चों के साथ भेजा और अकेले रहने लगे। तलाक से आमिर इस कदर टूट गए कि कभी शराब को हाथ न लगाने वाले आमिर शराबी बन गए। करीब डेढ़ साल तक आमिर रोज इतनी शराब पीते थे, जिससे उन्हें नींद आ जाए। उन्होंने काम करना भी लगभग बंद कर दिया। जूही चावला, अनिल कपूर जैसे कई दोस्त उन्हें सहारा देने घर भी पहुंचते थे। एक साल अलग रहने के बाद 2002 में दोनों का आधिकारिक तौर पर तलाक हुआ और बच्चों की कस्टडी रीना को मिल, लेकिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को बच्चे 2 से 6 बजे तक आमिर से मिलने आते थे। सिर्फ यही वो समय था, जब आमिर शराब छूते तक नहीं थे। आमिर खान की किरण राव से पहली मुलाकात फिल्म लगान के सेट पर हुई। किरण राव मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती थीं, जो लगान के डायरेक्टर आशूतोष गोवारिकर की असिस्टेंट डायरेक्टर थीं। तब दोनों ने एक-दूसरे को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। कुछ समय बाद आमिर ने कोकाकोला एड में काम किया, जिसे आशूतोष ने डायरेक्टर और किरण ने असिस्टेंट डायरेक्ट किया था। 2003 में काम के सिलसिले में आमिर-किरण की बातचीत होने लगी। फिर आया साल 2004, आमिर खान महाराष्ट्र के मेनावली में केतन मेहता के निर्देशन की फिल्म मंगल पांडे की शूटिंग कर रहे थे, ठीक इसी जगह शाहरुख की फिल्म स्वदेश की भी शूटिंग चल रही थी, जिसे आशूतोष गोवारिकर बना रहे थे। मेनावली गांव में शूटिंग के दौरान अक्सर किरण और आमिर की बातें होने लगीं। वो कभी-कभी साथ ड्राइव पर जाते थे। एक रोज किरण ने आमिर को काम के सिलसिले में कॉल किया। आधे घंटे की बातचीत के बाद आमिर ने खुशी महसूस की और उन्होंने किरण के साथ रहने का फैसला कर लिया। जल्द ही दोनों रिलेशनशिप में आ गए और एक-दूसरे को समझने के लिए लिव-इन में रहने लगे। किरण राव के परिवार को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने इस रिश्ते का विरोध किया। आमिर, किरण से 8 साल बड़े थे, तलाकशुदा थे और दो बच्चों के पिता थे। किरण ने परिवार के खिलाफ जाकर 28 दिसंबर 2005 में आमिर से सिविल मैरिज की। मुंबई के पंचगनी में 2 दिनों का सेलिब्रेशन रखा गया और महेरबाई हाउस नाम के पारसी बंगले में उनका रिसेप्शन हुआ। किरण ने 2011 में फिल्म धोबी घाट से डायरेक्टोरियल डेब्यू किया, जिसमें आमिर खान लीड रोल में थे। इसी साल किरण सरोगेसी की मदद मां बनीं। उनके बेटे का नाम आजाद राव खान रखा गया। किरण, आमिर खान प्रोडक्शन से जुड़ी रहीं। साल 2021 में आमिर और किरण ने मिलकर खुशी-खुशी एक वीडियो के जरिए तलाक की अनाउंसमेंट की। दोनों ने कहा कि वो हमेशा दोस्त रहेंगे और मिलकर बेटे आजाद की परवरिश करेंगे। तलाक के बाद भी दोनों पूर्व पत्नियों को देते हैं अहमियत आमिर खान, तलाक के बाद भी रीना दत्ता और किरण राव को पूरा सम्मान देते हैं। 2024 में हुई बेटी आयरा की शादी में आमिर खान ने रीना के साथ मिलकर पूरी जिम्मेदारियां उठाईं और किरण राव भी बेटे आजाद के साथ हर फंक्शन में बराबर की भागीदार रहीं। देखिए, पूर्व पत्नियों के साथ आमिर की तस्वीरें- किरण राव से अलग होने के बाद आमिर खान ने थैरेपी लेनी शुरू की और फिल्म लाल सिंह चड्ढा से कमबैक किया। फिल्म खास नहीं चली और आमिर ने एक्टिंग से ब्रेक लेने की अनाउंसमेंट कर दी। 2025 में आमिर खान ने 60वें जन्मदिन के मौके पर मीडिया और पैपराजी को इनवाइट किया और बताया कि वो एक बड़ी अनाउंसमेंट करने वाले हैं। हर कोई इस उम्मीद में पहुंचा कि आमिर नई फिल्म पर बात करेंगे, लेकिन बात कुछ और ही थी। आमिर ने केक काटने के बाद सबसे गौरी स्प्रैट का परिचय करवाया, आमिर की गर्लफ्रेंड। शुरुआत में गौरी की तस्वीरें क्लिक करने से रोका गया, लेकिन जल्द ही दोनों पब्लिकली साथ स्पॉट होने लगे। आमिर खान ने बताया कि वो गौरी को पिछले 25 सालों से जानते थे, लेकिन 2024 में दोनों की कॉमन लोगों की मदद से फिर बातचीत शुरू हुई और फिर दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। गौरी स्प्रैट बैंग्लोर की रहने वालीं हैं, जिनका पिछली शादी से एक 8 साल का बेटा है। आमिर ने कहा- अब जाकर मुकम्मल हुआ आमिर खान ने गौरी से रिश्ते पर बात करते हुए कहा था, मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे गौरी मिलीं और हमारा रिश्ता शुरू हुआ। वह बेहतरीन हैं और उनके साथ मुझे बहुत शांति मिलती है। हालांकि रीना दत्ता और किरण राव के साथ भी मेरा रिश्ता बहुत गहरा था, लेकिन चीजें आगे नहीं बढ़ पाईं। मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि गौरी मेरी जिंदगी में आईं। मुझे लगता है, अब जाकर मैं मुकम्मल हुआ हूं।
एक लड़का, जो बचपन से ही फिल्मों का दीवाना था और जब उसने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, तो उसे शुरुआत में कई रिजेक्शन झेलने पड़े। कास्टिंग काउच जैसे कड़वे अनुभवों का भी सामना करना पड़ा। यहां तक कि एक दिन जब वह काम की तलाश में अपना पोर्टफोलियो लेकर एक प्रोड्यूसर के घर पहुंचा, तो प्रोड्यूसर ने उसके पीछे कुत्ता छोड़ दिया। वही लड़का आज बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक है। उसने अपने करियर में 'धुरंधर', 'धुरंधर 2', 'पद्मावत' और 'बाजीराव मस्तानी' जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं। जी हां, हम बात कर रहे हैं रणवीर सिंह की। उनके बर्थडे के खास मौके पर आइए, उनकी जिंदगी को करीब से जानते हैं किस्सा-1 क्रिकेटर बनना चाहते थे; अमरनाथ ने कर दिया था रिजेक्ट सातवीं क्लास में रणवीर ने एक स्कूल मैच में सिर्फ 46 गेंदों पर 71 रन बना दिए। इस शानदार पारी के बाद उन्होंने क्रिकेटर बनने का फैसला किया। अपने दोस्तों के साथ उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ की क्रिकेट अकादमी में ट्रायल देने का मन बनाया। रणवीर ने साल 2017 में फिल्म '83' के एक इवेंट में यह किस्सा सुनाया था। उन्होंने कहा, ‘मेरे दोस्त क्रिकेट को लेकर काफी सीरियस थे और समय पर पहुंच गए, लेकिन मैं देर से पहुंचा। अमरनाथ सर पिच के पास खड़े थे। उन्होंने मुझे देर से आने और मेरा खेल देखने के बाद रिजेक्ट कर दिया। उस दिन उन्होंने मुझे रिजेक्ट करके बिल्कुल सही फैसला किया, वरना आज मैं यहां एक एक्टर के रूप में नहीं बैठा होता।’ दादी ने एक्टर बनने का सपना दिखाया था रणवीर सिंह की दादी चांद बर्क 1950 और 1960 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस थीं। उन्होंने राज कपूर की फिल्म 'बूट पॉलिश' से हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई और नरगिस, राज कपूर समेत कई बड़े सितारों के साथ काम किया। इसके अलावा वह 'बसंत बहार', 'सोहनी महिवाल', 'लाजवंती', 'अदालत' और 'दुश्मन' जैसी फिल्मों में भी नजर आईं। सिमी ग्रेवाल को दिए एक इंटरव्यू में रणवीर सिंह ने बताया था कि सबसे पहले उनकी दादी ने ही उनके भीतर एक्टर बनने का सपना जगाया था। उन्होंने कहा था कि उनके अंदर एक्टर बनने का कीड़ा सबसे पहले उनकी दादी ने ही डाला था। शाहरुख की फिल्म के गाने की वजह से सस्पेंड हुए थे रणवीर साल 1998 में फिल्म 'दिल से' रिलीज हुई थी और उसका सुपरहिट गाना 'छैंया-छैंया' हर किसी की जुबान पर था। उस समय रणवीर सिंह करीब 13 साल के थे और स्कूल में पढ़ते थे। शाहरुख के जबरदस्त फैन रहे रणवीर पर इस गाने का ऐसा जादू चला कि वह खुद को इसे सुनने से रोक नहीं पाए। एक दिन रणवीर क्लासरूम में चुपके से वॉकमैन पर 'छैंया-छैंया' सुन रहे थे और पूरी तरह गाने में खोए हुए थे। लेकिन उनकी यह शरारत ज्यादा देर तक छिप नहीं सकी। तभी उनकी टीचर ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। क्लास में पढ़ाई के दौरान गाना सुनना स्कूल के नियमों के खिलाफ था। अनुशासन तोड़ने पर स्कूल प्रशासन ने सख्त कदम उठाया और रणवीर सिंह को कुछ दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। रणवीर सिंह और धर्मेंद्र की बेटी अहाना देओल एक समय रिलेशनशिप में थे। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे, जहां उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों करीब 4 से 5 साल तक रिश्ते में रहे। रणवीर ने 'कॉफी विद करण' में बिना नाम लिए खुलासा किया था कि उनकी कॉलेज गर्लफ्रेंड ने अभिनेता आदित्य रॉय कपूर के लिए उनसे ब्रेकअप कर लिया था। प्रोड्यूसर ने रणवीर का पालतू कुत्ता पीछे छोड़ दिया आज रणवीर सिंह सुपरस्टार हैं, लेकिन संघर्ष के दिनों में उन्हें कई कड़वे अनुभवों से भी गुजरना पड़ा। 19वें माराकेश फिल्म फेस्टिवल के 'इन कन्वर्सेशन विद…' सेशन में उन्होंने एक ऐसा किस्सा शेयर किया था। रणवीर ने बताया था कि एक बार वह काम की तलाश में अपना पोर्टफोलियो लेकर एक प्रोड्यूसर से मिलने उनके घर पहुंचे थे। वह बरामदे में बैठकर घंटों इस उम्मीद में इंतजार करते रहे कि शायद उनसे मिलने का मौका मिल जाए, लेकिन अंदर वह अपने दोस्तों के साथ बीयर पी रहे थे और मौज-मस्ती कर रहे थे। रणवीर के मुताबिक, उस व्यक्ति ने मजा करने के लिए अपने पालतू कुत्ते को उनके पीछे छोड़ दिया। अचानक बड़ा सा कुत्ता उनकी तरफ दौड़ पड़ा और वह डर के मारे पूरे बरामदे में भागने लगे। रणवीर ने कहा, मैं बुरी तरह डर गया था। सोचिए, एक संघर्ष कर रहे कलाकार के साथ ऐसा मजाक किया गया। हालांकि, उन्होंने उस प्रोड्यूसर का नाम नहीं बताया था। सगाई को तीन साल तक सीक्रेट रखा साल 2015 में रणवीर सिंह ने दीपिका पादुकोण को शादी के लिए प्रपोज किया था। उस वक्त दोनों ने अपनी सगाई की बात दुनिया से छिपाकर रखी और करीब तीन साल तक यह राज सिर्फ परिवार के कुछ लोगों तक ही सीमित रहा। करण जौहर के शो में रणवीर ने बताया था कि उस समय उन्होंने अपनी मां और बहन की मदद से एक खूबसूरत डायमंड रिंग खरीदी थी। वह रिंग उनकी हैसियत से कहीं ज्यादा महंगी थी, लेकिन उनके लिए दीपिका की खुशी सबसे बढ़कर थी। हॉलिडे के दौरान रणवीर ने तय किया कि प्रपोज करने का यही सही मौका होगा। मालदीव में समुद्र के बीचों-बीच एक छोटी-सी रेतीली जगह थी। चारों तरफ सिर्फ नीला पानी था और दूर-दूर तक कोई नहीं था। नाव उन्हें वहां छोड़कर चली गई। रणवीर को लगा कि इससे बेहतर पल शायद कभी नहीं मिलेगा। उन्होंने बाद में मजाक में यह भी स्वीकार किया था कि उन्होंने जानबूझकर इतना परफेक्ट माहौल चुना था, ताकि दीपिका के लिए उन्हें 'न' कहना लगभग नामुमकिन हो जाए। रणवीर घुटनों के बल बैठे, दीपिका को अंगूठी पहनाई और अपने दिल की बात कह दी। दीपिका इस सरप्राइज के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। उनकी आंखें नम हो गईं और उन्होंने मुस्कुराते हुए 'हां' कह दिया। उस एक जवाब ने रणवीर को ऐसा एहसास कराया, मानो उन्होंने पूरी दुनिया जीत ली हो। तीन साल बाद, नवंबर 2018 में इटली के लेक कोमो में दोनों ने शादी की। सितंबर 2024 में उनकी बेटी दुआ का जन्म हुआ। रणवीर सिंह साल 2014 में ड्यूरेक्स के ब्रांड एम्बेसडर बने थे। इस दौरान उन्होंने सेक्स एजुकेशन को लेकर भी खुलकर बात की थी। जीक्यू इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में रणवीर ने बताया था कि ड्यूरेक्स के विज्ञापन का कॉन्सेप्ट उन्होंने खुद तैयार किया था। रणवीर ने कहा था, “मैंने ड्यूरेक्स को खुद फोन किया और कहा कि मैं उनके साथ काम करना चाहता हूं। कोई बड़ा सेलिब्रिटी कंडोम ब्रांड का प्रचार नहीं करता, लेकिन मैंने सोचा, क्यों न मैं यह करूं?” इंटरव्यू के दौरान रणवीर ने यह भी कहा था कि वह 12 साल की उम्र से ही ड्यूरेक्स का इस्तेमाल कर रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि 12 साल की उम्र में ऐसा कौन करता है, तो रणवीर ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, 14 साल की लड़की! 'बेफिक्रे' में रणवीर ने वाणी को 23 बार किस किया था फिल्म 'बेफिक्रे' में रणवीर सिंह और वाणी कपूर के बीच कुल 23 किसिंग सीन फिल्माए गए थे। नवंबर 2016 में जब दोनों अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए 'द कपिल शर्मा शो' (एपिसोड 63) में पहुंचे, तब इन 23 किसिंग सीन्स को लेकर शो में खूब हंसी-मजाक हुआ। बातचीत के दौरान रणवीर ने शूटिंग का एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने कहा था, “शूटिंग के दौरान मैं तो थक गया था यार, वाणी को किस करते-करते।” रणवीर ने बताया कि लगातार इतने किसिंग सीन शूट करते-करते यह सब उनके लिए रोजमर्रा का हिस्सा बन गया था। कभी दाईं तरफ से शॉट देना होता, कभी बाईं तरफ से, फिर रीटेक... देखते-देखते पूरा प्रोसेस एक रूटीन जैसा हो गया था। वहीं, वाणी ने कहा था कि एक समय ऐसा आ गया था जब उन्हें इन सीन्स से कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। दोनों इतने सहज हो गए थे कि कई बार खाना खाने के तुरंत बाद भी बिना किसी खास तैयारी के शूटिंग शुरू कर देते थे। 'पद्मावत' के एक सीन के लिए रजा मुराद ने रणवीर को 24 थप्पड़ मारे थे फिल्म 'पद्मावत' की शूटिंग के दौरान एक सीन में रजा मुराद को रणवीर सिंह को थप्पड़ मारना था। आमतौर पर ऐसे सीन एक-दो टेक में पूरे हो जाते हैं, लेकिन निर्देशक संजय लीला भंसाली अपनी बारीकी और परफेक्शन के लिए जाने जाते हैं। इसलिए इस सीन को बेहतरीन ढंग से फिल्माने के लिए उन्होंने कई रीटेक करवाए। हर रीटेक में रजा मुराद को रणवीर को थप्पड़ मारना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि रणवीर ने इस एक सीन के लिए 24 थप्पड़ खाए। आखिरकार सीन तो ओके हो गया, लेकिन रणवीर के गालों की लाली लंबे समय तक नहीं गई। 'धुरंधर 2' में 48 डिग्री की गर्मी में लेदर जैकेट और विग पहन की थी शूटिंग रणवीर की ब्लॉकबस्टर फिल्में 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया। दोनों फिल्मों ने दुनिया भर में ₹3000 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर नया रिकॉर्ड बनाया। लेकिन पर्दे पर दिखने वाले इन दमदार दृश्यों के पीछे रणवीर की कड़ी मेहनत और समर्पण छिपा था। 'धुरंधर 2' के क्लाइमेक्स की शूटिंग किसी चुनौती से कम नहीं थी। 47–48 डिग्री की झुलसाती गर्मी, चारों ओर तपते मेटल कंटेनर, भारी पठानी सूट, लेदर जैकेट और सिर पर विग पहनकर रणवीर ने लगातार शूटिंग की। मेकअप और प्रोस्थेटिक आर्टिस्ट करनदीप सिंह ने बताया था कि सिर्फ इस क्लाइमेक्स सीन की तैयारी में, रिहर्सल समेत, 15 से 20 दिन लगे। लुधियाना के बाहरी इलाके में फिल्माए गए इस एक्शन सीक्वेंस में रणवीर को जलते कंटेनरों पर छलांग भी लगानी पड़ी। हालात इतने मुश्किल थे कि पूरी टीम के लिए खाना खाना तक आसान नहीं था। इसके बावजूद रणवीर ने बिना किसी शिकायत के हर सीन पूरे डेडिकेशन और भरपूर एनर्जी के साथ पूरा किया। ________________________ बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... धर्मेंद्र ने कॉलर पकड़ी तो राजकुमार ने छोड़ी फिल्म:बप्पी लाहिड़ी के गहने देखकर बोले- मंगलसूत्र भी पहन लो, अमिताभ के सूट को पर्दा कहा ये कौन हैं? सलमान खान का सवाल सुनते ही जवाब आया- जानी…, अपने अब्बा से जाकर पूछना, हम कौन हैं। यही थे राजकुमार। वो अभिनेता, जो फ्लॉप फिल्म के बाद भी अपनी फीस बढ़ा देते थे। कहते थे- ‘मेरी पिक्चर चले न चले, मैं फेल नहीं हुआ। कभी बप्पी लाहिड़ी के गहने पहनने का सरेआम मजाक बना देते थे, तो कभी गोविंदा जैसे कलाकारों की शर्ट काटकर रूमाल बना लेते थे। पूरी खबर पढ़ें....
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी एक्ट्रेस इकरा अजीज के नाम से एक पोस्ट वायरल है। इसमें दावा किया जा रहा है कि उन्होंने आलिया भट्ट और शरवरी स्टारर फिल्म अल्फा देखने की अपील की और लिखा कि 'अल्फा, धुरंधर का पाकिस्तान की तरफ से जवाब है।' साथ ही YRF का शुक्रिया भी अदा किया। हालांकि, पड़ताल में यह दावा गलत निकला। क्या है वायरल दावा? सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर इकरा अजीज के नाम और तस्वीर के साथ पोस्ट शेयर किया जा रहा है। दावा है कि उन्होंने लिखा, Alpha जरूर देखिए। यह धुरंधर का पाकिस्तान की तरफ से जवाब है। शुक्रिया YRF। इसी पोस्ट के आधार पर कई यूजर्स इकरा अजीज को ट्रोल कर रहे हैं और इसे सच मानकर शेयर भी कर रहे हैं। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? दैनिक भास्कर की पड़ताल में इस दावे की पुष्टि नहीं हुई। इकरा अजीज के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अल्फा या YRF को लेकर ऐसा कोई पोस्ट नहीं मिला। YRF से जुड़े सूत्रों ने भी इस पोस्ट को फर्जी बताया। उनके मुताबिक, इसे ट्रोलिंग और गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसका YRF या फिल्म अल्फा के प्रमोशन से कोई संबंध नहीं है। एडिटेड स्क्रीनशॉट होने की आशंका वायरल तस्वीर का फॉर्मेट ऐसा है, जिसे आसानी से एडिट किया जा सकता है। फिलहाल ऐसा कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला कि यह पोस्ट इकरा अजीज के आधिकारिक अकाउंट से किया गया था। इसलिए इसे प्रमाणिक नहीं माना जा सकता। निष्कर्ष दावा: इकरा अजीज ने 'Alpha' देखने की अपील की और इसे 'धुरंधर का पाकिस्तान की तरफ से जवाब' बताते हुए YRF का धन्यवाद किया। सच्चाई: पड़ताल में दावा फर्जी निकला। इकरा अजीज के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ऐसा कोई पोस्ट नहीं मिला। YRF सूत्रों ने भी पोस्ट को फेक बताते हुए कहा कि इसे ट्रोलिंग और गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से वायरल किया जा रहा है। बता दें कि YRF की स्पाई थ्रिलर ‘अल्फा’ 3 जुलाई 2026 को रिलीज हुई। यह स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल-लीड फिल्म है, जिसमें दो महिला जासूस मुख्य भूमिका में हैं। YRF स्पाई यूनिवर्स में पहले एक था टाइगर, टाइगर जिंदा है, वॉर, पठान और टाइगर 3 जैसी फिल्में आ चुकी हैं। ‘अल्फा’ इस फ्रेंचाइजी की पहली फीमेल-लीड फिल्म है। ‘अल्फा’ एक स्पाई एक्शन थ्रिलर है, जिसमें एक लड़की बचपन से खतरनाक मिशनों के लिए तैयार की जाती है और आगे चलकर देश के जोखिम भरे ऑपरेशन्स का हिस्सा बनती है। फिल्म में आलिया भट्ट, शरवरी, बॉबी देओल, अनिल कपूर और आर. माधवन प्रमुख भूमिकाओं में हैं। कुछ सरप्राइज कैमियो भी शामिल हैं। फिल्म का निर्देशन शिव रवैल ने किया है, जबकि निर्माण आदित्य चोपड़ा और YRF ने किया है।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी एक्ट्रेस इकरा अजीज के नाम से एक पोस्ट वायरल है। इसमें दावा किया जा रहा है कि उन्होंने आलिया भट्ट और शरवरी स्टारर फिल्म अल्फा देखने की अपील की और लिखा कि 'अल्फा, धुरंधर का पाकिस्तान की तरफ से जवाब है।' साथ ही YRF का शुक्रिया भी अदा किया। हालांकि, पड़ताल में यह दावा गलत निकला। क्या है वायरल दावा? सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर इकरा अजीज के नाम और तस्वीर के साथ पोस्ट शेयर किया जा रहा है। दावा है कि उन्होंने लिखा, Alpha जरूर देखिए। यह धुरंधर का पाकिस्तान की तरफ से जवाब है। शुक्रिया YRF। इसी पोस्ट के आधार पर कई यूजर्स इकरा अजीज को ट्रोल कर रहे हैं और इसे सच मानकर शेयर भी कर रहे हैं। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? दैनिक भास्कर की पड़ताल में इस दावे की पुष्टि नहीं हुई। इकरा अजीज के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अल्फा या YRF को लेकर ऐसा कोई पोस्ट नहीं मिला। YRF से जुड़े सूत्रों ने भी इस पोस्ट को फर्जी बताया। उनके मुताबिक, इसे ट्रोलिंग और गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसका YRF या फिल्म अल्फा के प्रमोशन से कोई संबंध नहीं है। एडिटेड स्क्रीनशॉट होने की आशंका वायरल तस्वीर का फॉर्मेट ऐसा है, जिसे आसानी से एडिट किया जा सकता है। फिलहाल ऐसा कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला कि यह पोस्ट इकरा अजीज के आधिकारिक अकाउंट से किया गया था। इसलिए इसे प्रमाणिक नहीं माना जा सकता। निष्कर्ष दावा: इकरा अजीज ने 'Alpha' देखने की अपील की और इसे 'धुरंधर का पाकिस्तान की तरफ से जवाब' बताते हुए YRF का धन्यवाद किया। सच्चाई: पड़ताल में दावा फर्जी निकला। इकरा अजीज के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ऐसा कोई पोस्ट नहीं मिला। YRF सूत्रों ने भी पोस्ट को फेक बताते हुए कहा कि इसे ट्रोलिंग और गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से वायरल किया जा रहा है। बता दें कि YRF की स्पाई थ्रिलर ‘अल्फा’ 3 जुलाई 2026 को रिलीज हुई। यह स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल-लीड फिल्म है, जिसमें दो महिला जासूस मुख्य भूमिका में हैं। YRF स्पाई यूनिवर्स में पहले एक था टाइगर, टाइगर जिंदा है, वॉर, पठान और टाइगर 3 जैसी फिल्में आ चुकी हैं। ‘अल्फा’ इस फ्रेंचाइजी की पहली फीमेल-लीड फिल्म है। ‘अल्फा’ एक स्पाई एक्शन थ्रिलर है, जिसमें एक लड़की बचपन से खतरनाक मिशनों के लिए तैयार की जाती है और आगे चलकर देश के जोखिम भरे ऑपरेशन्स का हिस्सा बनती है। फिल्म में आलिया भट्ट, शरवरी, बॉबी देओल, अनिल कपूर और आर. माधवन प्रमुख भूमिकाओं में हैं। कुछ सरप्राइज कैमियो भी शामिल हैं। फिल्म का निर्देशन शिव रवैल ने किया है, जबकि निर्माण आदित्य चोपड़ा और YRF ने किया है।
‘हीरामंडी’ में उस्ताद जी और ‘द पिरामिड स्कीम’ में अभिनय से चर्चा में आए इंद्रेश मलिक ने दैनिक भास्कर से बातचीत में करियर, संघर्ष और निजी जिंदगी से जुड़े किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि करीब 20 साल पहले वह मल्टी लेवल मार्केटिंग फ्रॉड का शिकार हुए थे। उन्होंने संजय लीला भंसाली के साथ काम, थिएटर, इंडस्ट्री के अनुभव, ऑडिशन और परिवार से जुड़ी बातें साझा कीं। साथ ही आने वाले प्रोजेक्ट्स और लेखन के शौक पर भी बात की। सवाल: ‘द पिरामिड स्कीम’ में आपका किरदार प्रभावशाली है। क्या असल जिंदगी में भी ऐसी स्कीम या मल्टी-लेवल मार्केटिंग का सामना किया है? जवाब: बिल्कुल। ऑडिशन के बाद क्रिएटिव टीम और डायरेक्टर्स से मुलाकात में मैंने बताया था कि करीब 15-20 साल पहले मैं भी ऐसी स्कीम का शिकार हो चुका हूं। उस समय मल्टी-लेवल मार्केटिंग का कॉन्सेप्ट नया था और जागरूकता कम थी। आधी-अधूरी जानकारी देकर लोगों को जोड़ा जाता था। मैं भी इसका नुकसान झेल चुका हूं। सवाल: इस सीरीज का ऑफर मिलने पर पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: मैं अपने पिछले किरदारों की इमेज से बाहर निकलकर कुछ अलग करना चाहता था। यह किरदार मुझे दिलचस्प लगा। पूरी यूनिट शानदार थी और पहली बार Amazon Prime के साथ काम करने का मौका मिला। डायरेक्टर्स और क्रिएटिव टीम के साथ अच्छी ट्यूनिंग बनी। शूटिंग का माहौल सकारात्मक था। सवाल: क्या पिछली इमेज से आपका मतलब ‘हीरामंडी’ के उस्ताद जी के किरदार से है? जवाब: जी हां। ‘हीरामंडी’ में उस्ताद जी का किरदार निभाना शानदार अनुभव था। ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के बाद फिर से संजय लीला भंसाली के साथ काम करने का मौका मिला। सवाल: उस्ताद जी के किरदार से जुड़ाव कैसे बना था? जवाब: जब पहली बार इस किरदार के बारे में बताया गया, तभी लगा कि यह रोल मैं कर सकता हूं। मेरे परिवार की जड़ें विभाजन से पहले के पंजाब और आज के पाकिस्तान के शहरों से जुड़ी हैं। मैंने बुजुर्गों से उस दौर की भाषा, लहजा और संस्कृति सीखी थी। वही अनुभव किरदार में काम आया। सवाल: आपने बताया कि ‘हीरामंडी’ के लिए विभाजन से पहले के पंजाब की संस्कृति पर काम किया था। आपके परिवार का संबंध कहां से है? जवाब: मेरे ननिहाल का संबंध झंग से है। दादा-दादी का परिवार सरगोधा, रावलपिंडी और लाहौर क्षेत्र से था। विभाजन के बाद परिवार भारत आया और दिल्ली में बस गया। मेरी पैदाइश लुधियाना में हुई, क्योंकि उस समय पहला बच्चा ननिहाल में होने की परंपरा थी। इसके बाद मेरी पढ़ाई और परवरिश दिल्ली में हुई। सवाल: कहा जाता है कि ‘हीरामंडी’ की शूटिंग लंबी चली और कलाकार दूसरे प्रोजेक्ट नहीं कर पा रहे थे। क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ? जवाब: नहीं, मेरे साथ ऐसी बड़ी समस्या नहीं हुई। किसी भी पेशे में एक काम उम्मीद से ज्यादा लंबा चल सकता है। लेकिन जब अंतिम परिणाम खूबसूरत हो, तो बाकी परेशानियां छोटी लगती हैं। सवाल: संजय लीला भंसाली के साथ दोबारा काम करने का अनुभव कैसा था? जवाब: मैं उनका बड़ा प्रशंसक हूं। वह परफेक्शनिस्ट से भी आगे हैं। उनके साथ काम करना हमेशा सपना रहा है। सेट पर उनसे और टीम से प्यार और सम्मान मिला। सवाल: ‘हीरामंडी 2’ को लेकर कोई अपडेट है? जवाब: फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है। जब भी कुछ होगा, सबको पता चल जाएगा। सवाल: ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ से जुड़ी कोई खास याद? जवाब: उस समय कोविड का दौर था और ज्यादातर शूटिंग रात में फिल्म सिटी में होती थी। मेरा किरदार लंबा नहीं था, लेकिन छोटे रोल में भी लोगों ने मुझे नोटिस किया। यह शानदार अनुभव था। सवाल: आलिया भट्ट के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: आलिया विनम्र और जमीन से जुड़ी इंसान हैं। उनमें स्टार वाला अहंकार नहीं दिखा। वह सहयोगी हैं। मैंने उनके साथ कम समय काम किया, लेकिन अनुभव अच्छा रहा। उन्होंने ‘गंगूबाई’ के किरदार के लिए जबरदस्त मेहनत की थी और वह बेहतरीन अभिनेत्री हैं। सवाल: ‘फन्ने खां’ में आपका किरदार फिल्म में नजर क्यों नहीं आया? जवाब: मैंने फिल्म की शूटिंग की थी, लेकिन रिलीज के समय मेरा हिस्सा नहीं था। एडिटिंग के दौरान क्या फैसला लिया गया, मुझे नहीं पता। लेकिन इसका अफसोस नहीं है। फिल्म निर्माता का अपना विजन होता है। मेरा काम किरदार ईमानदारी से निभाना है। सवाल: आपको कब महसूस हुआ कि अभिनेता ही बनना है? जवाब: मुझे बचपन से अभिनेता बनना था। मैं प्रसिद्ध होना चाहता था और अभिनय मेरा जुनून था। मैं अपने शौक और पैशन के लिए पैदा हुआ हूं और उसी के लिए जीना चाहता हूं। सवाल: क्या आपके बच्चे भी इसी फील्ड में हैं? जवाब: मेरा बड़ा बेटा डायरेक्शन, कास्टिंग और एडिटिंग में काम कर रहा है। उसे इन क्षेत्रों की अच्छी समझ है। छोटा बेटा अभी तय कर रहा है कि उसे किस दिशा में जाना है। मुझे भरोसा है कि वह अपना रास्ता खुद बना लेगा। सवाल: आपके करियर का सबसे बड़ा संघर्ष क्या रहा? जवाब: इस इंडस्ट्री को समझना सबसे बड़ी चुनौती थी। कई बार लोगों की बातों पर भरोसा कर लेता था। वादे किए जाते थे, लेकिन पूरे नहीं होते थे। धीरे-धीरे समझ आया कि इस प्रोफेशन में समझदारी से काम करना और फैसले लेना जरूरी है। काम नहीं होता, तब मुश्किलें ज्यादा महसूस होती हैं। लेकिन जुनून हो तो हर परेशानी पार कर सकते हैं। सवाल: आपकी नजर में सबसे बड़ी सफलता क्या है? जवाब: लोगों का भरोसा और प्यार सबसे बड़ी सफलता है। अगर दर्शक पसंद करते हैं, तो काम भी मिलता है। किसी किरदार की तारीफ सबसे ज्यादा खुशी देती है। सवाल: सफलता मिलने के बाद आपके अंदर कितना बदलाव आया? जवाब: मेरे अंदर बिल्कुल बदलाव नहीं आया। मैं आज भी वही दिल्ली वाला लड़का हूं। पुराने दोस्त भी कहते हैं कि मैं नहीं बदला। यह सुनकर अच्छा लगता है। रिश्ते निभाना मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है। सवाल: एक्टिंग के अलावा खाली समय में क्या करना पसंद करते हैं? जवाब: मैं दूसरे बिजनेस भी देखता हूं। शेर-ओ-शायरी और छोटी कहानियां लिखता हूं, खाना बनाता हूं, कपड़े, बैग और जूते डिजाइन करता हूं। मुझे कुछ नया करना पसंद है। मन नहीं होता तो आराम कर लेता हूं। सवाल: खाना बनाने का भी शौक है? जवाब: जी, बहुत। मुझे नई रेसिपी पर प्रयोग करना अच्छा लगता है। दादी-नानी के समय की कई पारंपरिक रेसिपी धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। मैं उन्हें सीखने और संभालने की कोशिश करता हूं। मसाले अलग-अलग जगहों से लाकर खुद तैयार करता हूं। खाना बनाना मेरे लिए थेरेपी है। सवाल: कभी रेस्टोरेंट खोलने का विचार आया? जवाब: नहीं। मैं सिर्फ शौक के लिए खाना बनाता हूं। परिवार और खास दोस्तों के लिए बनाता हूं। फिलहाल इसे बिजनेस बनाने का इरादा नहीं है। सवाल: जो कहानियां और शायरी लिखते हैं, क्या उन्हें पर्दे पर लाने का इरादा है? जवाब: बिल्कुल। मैं लिखता हूं ताकि एक दिन उन्हें पर्दे पर ला सकूं। यह मेरी मंजिल है और भरोसा है कि सही समय पर ऐसा जरूर होगा। सवाल: किस तरह की शायरी लिखते हैं? जवाब: मुझे उर्दू और हिंदी के शब्दों से खेलना पसंद है। मैं शेर-ओ-शायरी लिखता हूं। कविता के नियमों का बड़ा जानकार नहीं हूं, लेकिन दिल से लिखता हूं। सवाल: हाल ही में रिलीज हुई ‘धुरंधर’ कैसी लगी? जवाब: मुझे पसंद आई। खासकर बेदी साहब का किरदार शानदार लगा। रणवीर सिंह सहित टीम ने बेहतरीन काम किया है। फिल्म का हर छोटा-बड़ा किरदार अच्छे से लिखा और निभाया गया है। सवाल: अगर ‘धुरंधर’ में काम करने का मौका मिलता, तो कौन-सा किरदार करना पसंद करते? जवाब: मैं किसी नए किरदार में खुद को देखना पसंद करता। निर्देशक जैसा कहते, उसी हिसाब से मेहनत करता। अगर दूसरा हिस्सा बनता है और मौका मिलता है, तो खुशी होगी। सवाल: आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से हैं? जवाब: अभी ज्यादा खुलकर नहीं बता सकता। दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करने की कोशिश कर रहा हूं। ऐसे किरदार तलाशता हूं, जिनमें कुछ नया करने का मौका मिले। सवाल: क्या आज भी ऑडिशन देते हैं? जवाब: बिल्कुल। ऑडिशन देने में कोई बुराई नहीं है। इससे किरदार समझने का मौका मिलता है। बस शिकायत है कि कई बार ऑडिशन लेने वाले खुद किरदार को ठीक से नहीं समझा पाते।
जोधपुर में प्रसिद्ध कवि और अभिनेता शैलेश लोढ़ा की बेटी स्वरा की शादी 6 जुलाई को होने जा रही है। 4 जुलाई (शनिवार) से 3 दिन शादी की रस्में और कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। शादी समारोह में शामिल होने के लिए मेहमानों का आगमन शुरू हो चुका है। शादी के कार्यक्रम जोधपुर के अलग-अलग आलीशान होटलों में आयोजित किए जाएंगे। 4 जुलाई की शाम को 'ताज हरि महल' में होने वाले 'संस्कृति स्वर' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी शामिल होंगे। शैलेश लोढ़ा की बेटी स्वरा की शादी शाश्वत से होने जा रही है। मेहमानों का आगमन शुक्रवार से ही शुरू हो गया था। सभी मेहमानों को 'उम्मेद भवन पैलेस' में ठहराया गया है, जहां उनका पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वरा और शाश्वत 6 जुलाई को उम्मेद भवन पैलेस में ही सात फेरे लेंगे। इससे पूर्व के कार्यक्रम शहर के ताज हरि महल, इंडाना पैलेस, उम्मेद भवन पैलेस और वेलकमहोटल आईटीसी में होंगे। क्या करती हैं स्वरा लोढ़ा शैलेश लोढ़ा की बेटी स्वरा लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं और अपनी निजी जिंदगी को काफी प्राइवेट रखती हैं। स्वरा अपनी मां की तरह ही एक लेखिका हैं। उन्होंने अपनी मां डॉ. स्वाति लोढ़ा के साथ मिलकर '54 Reasons Why Parents Suck!' नामक किताब लिखी है। शादी समारोह में शामिल होंगे कई वीआईपी गेस्ट समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव, अभिनेता राकेश बेदी, कृष्णा अभिषेक, सेलो कंपनी के प्रदीप राठौड़, केपीएमजी के चेयरमैन पंकज कर्णावट, वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी, ब्रजेश सिंह और प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा समेत कई बॉलीवुड हस्तियां, कवि और साहित्यकार हिस्सा लेंगे। अब जानिए उस होटल की खासियत, जहां होगी शादी
सलमान खान फिल्म्स ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को लेकर चल रही खबरों पर सफाई दी है। प्रोडक्शन हाउस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि फिल्म की सीबीएफसी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी होने की खबरें पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। बयान में कहा गया कि फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजा ही नहीं गया है। इसलिए इस तरह की रिपोर्ट्स पर भरोसा न करें। सलमान खान फिल्म्स ने मीडिया और लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि की जानकारी न फैलाएं। फिल्म से जुड़े सभी आधिकारिक अपडेट केवल उनके ऑफिशियल प्लेटफॉर्म पर ही शेयर किए जाएंगे। दरअसल, हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म 'मातृभूमि' को सर्टिफिकेट देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। फिल्म 'मातृभूमि' साल 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प पर आधारित है। पहले इस फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' रखा गया था। फिल्म को पहले 17 अप्रैल को ईद के मौके पर रिलीज किया जाना था, लेकिन बाद में इसकी रिलीज डेट टाल दी गई। इस फिल्म का प्रोडक्शन सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान ने किया है और इसके डायरेक्टर अपूर्व लाखिया हैं। फिल्म में सलमान खान के साथ एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का म्यूजिक हिमेश रेशमिया ने तैयार किया है। फिल्म 'मातृभूमि' का टीजर 27 दिसंबर 2025 को सलमान खान के 60वें जन्मदिन पर रिलीज किया गया था। इस फिल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। कर्नल संतोष बाबू ने ही गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प के दौरान भारतीय टुकड़ी का नेतृत्व किया था। इस झड़प में वे शहीद हो गए थे। वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान इन दिनों फिल्म 'SVC63' की शूटिंग कर रहे हैं। वामशी पेडिपल्ली के डायरेक्शन में बन रही इस एक्शन फिल्म को दिल राजू की श्री वेंकटेश्वर क्रिएशंस प्रोड्यूस कर रही है। फिल्म में नयनतारा पहली बार सलमान के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। फिल्म ईद 2027 पर रिलीज होगी और इसकी शूटिंग अगस्त या सितंबर 2026 तक पूरी हो सकती है।
एक्ट्रेस और बिग बॉस फेम ईशा मालवीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में वह एक पल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमशक्ल को पीएम मोदी समझ बैठीं। जिसके बाद वहां मौजूद पैपराजी और दूसरे लोग हंसने लगे। दरअसल, ईशा ब्राइट एंटरटेनमेंट अवॉर्ड्स 2026 के रेड कार्पेट पर पहुंची थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात पीएम मोदी के हमशक्ल से हुई। उन्हें देखते ही ईशा चौंक गईं और मुस्कुराते हुए कहा, ओह, मोदी जी! हालांकि, बाद में उन्हें रियलाइज हुआ कि वे पीएम मोदी के हमशक्ल हैं। इसके बाद उन्होंने हमशक्ल से हाथ मिलाया और कैमरे की ओर देखकर कहा, गाइज, हमारे साथ मोदी जी हैं। विकास महांते कौन हैं? ईशा ने पीएम मोदी के जिन हमशक्ल से मुलाकात की, वह विकास महांते हैं। विकास महांते मुंबई के जाने-माने बिजनेसमैन, एक्टर और समाजसेवी हैं। उनकी शक्ल, दाढ़ी और बोलने का अंदाज पीएम मोदी से काफी मिलता-जुलता है, जिसकी वजह से लोग उन्हें देखते ही भ्रमित हो जाते हैं। विकास कई चुनावों के दौरान बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के प्रचार कार्यक्रमों में भी नजर आ चुके हैं। उन्होंने महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब समेत कई राज्यों में चुनावी रैलियों में हिस्सा लिया है। एक्टिंग की दुनिया में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। वह फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' में कैमियो रोल कर चुके हैं। इसके अलावा 'मोदी काका का गांव', 'द साबरमती रिपोर्ट' और 'एक नया सवेरा' जैसी फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में भी काम कर चुके हैं। वहीं, ईशा मालवीय के वर्कफ्रंट की बात करें तो उन्होंने 13 साल की उम्र में मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। साल 2017 में वह मिस मध्य प्रदेश बनीं, जबकि 2019 में मिस टीन इंडिया वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता में सेकेंड रनर-अप रहीं। ईशा ने 2021 में टीवी शो 'उड़ारियां' से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इस शो में जैस्मिन कौर संधू का उनका किरदार काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद वह बिग बॉस 17 में नजर आईं, जहां उनकी लोकप्रियता पूरे देश में बढ़ी। ईशा कई हिंदी और पंजाबी म्यूजिक वीडियो में भी काम कर चुकी हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं और वह कई बड़े फैशन व ब्यूटी ब्रांड्स के साथ जुड़ी हुई हैं।
एक्ट्रेस तृषा कृष्णन ने अपैरल ब्रांड ZARA की होम डिलीवरी सर्विस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर दावा किया कि लगातार तीसरी बार उन्हें ऐसे कपड़े मिले, जिनसे शरीर की बदबू आ रही थी। तृषा ने अपनी पोस्ट में लिखा, प्रिय @zara @zaracare, एक छोटी-सी रिक्वेस्ट है। अगली बार होम डिलीवरी भेजने से पहले कृपया यह सुनिश्चित करें कि कपड़ों से शरीर की बदबू न आ रही हो। लगातार तीसरी बार ऐसा हुआ है। यह बहुत बुरा एक्सपीरियंस है। पैक करने से पहले कम से कम कपड़ों को सूंघकर देख लें। तृषा 'करुप्पु' में नजर आई थीं वर्कफ्रंट की बात करें तो तृषा कृष्णन हाल ही में फिल्म 'करुप्पु' में नजर आईं, जिसमें उनके साथ सूर्या ने अभिनय किया है। फिल्म 'करुप्पु' बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। फिल्म ने दुनिया भर में करीब 309 करोड़ रुपए की कमाई की। फिल्म में आरजे बालाजी ने विलेन की भूमिका निभाई, जबकि इंद्रंस, अनाघा माया रवि, नैट्टी सुब्रमण्यम, शिवादा, स्वासिका और सुप्रीत रेड्डी भी अहम भूमिकाओं में नजर आए। वहीं, अफेयर की खबरों के बीच एक्ट्रेस तृषा ने मुख्यमंत्री विजय के 52वें जन्मदिन के एक दिन बाद सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने केक के साथ दोनों की तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा था, उस इंसान को जन्मदिन मुबारक, जो हर चीज को मायने देता है। बता दें कि पिछले साल भी तृषा ने विजय के साथ तस्वीर शेयर कर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं। गौरतलब है कि विजय के तलाक की खबर सामने आने के बाद एक्ट्रेस तृषा का नाम विजय के साथ जुड़ा। हालांकि, विजय और तृषा ने अब तक रिश्ते को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया। 10 मई को तृषा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुई थीं। वहीं, 4 मई को तमिलनाडु चुनाव रिजल्ट के दिन तृषा विजय के घर भी पहुंची थीं। विजय और तृषा ने 'गिल्ली', 'तिरुपाची', 'आथी' और 'कुरुवी' जैसी फिल्मों में साथ काम किया। ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री के कारण पहली बार उनके अफेयर की अफवाहें उड़ीं। हालांकि, 2008 में रिलीज हुई 'कुरुवी' के बाद दोनों 15 साल तक किसी फिल्म में साथ दिखाई नहीं दिए। 2023 में दोनों 15 साल बाद फिल्म 'लियो' में साथ नजर आए थे। ……………… ये खबर भी पढ़ें… विजय का नाम सुन शरमाईं तृषा कृष्णन:फैन ने कहा- थलापति से कहना कि मैंने उनका हालचाल पूछा है; एक्ट्रेस ने किया रिएक्ट चेन्नई में शुक्रवार को थिएटर से बाहर निकलते समय एक फैन ने तृषा कृष्णन से विजय का जिक्र किया तो एक्ट्रेस ब्लश कर गईं। शुक्रवार को तृषा चेन्नई में अपनी नई रिलीज फिल्म ‘करुप्पु’ की स्क्रीनिंग में पहुंचीं। इस दौरान डायरेक्टर आरजे बालाजी और एक्टर कार्थी भी मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें
मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच टीवी एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया के बेटे और एक्टर क्षितिज ढोलकिया हाल ही में एक हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। भारी बारिश के दौरान उनकी पार्किंग में खड़ी कार पर अचानक एक बड़ा पेड़ गिर पड़ा, जिससे कार को काफी नुकसान पहुंचा। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय क्षितिज कार के अंदर मौजूद नहीं थे और किसी को चोट नहीं आई। घटना के बाद क्षितिज ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो शेयर किए, जिनमें उनकी कार पेड़ के नीचे दबी हुई दिखाई दे रही है। वीडियो में फायर ब्रिगेड और अन्य अधिकारी पेड़ हटाने की कोशिश करते नजर आए। क्षितिज ने बताया कि उनकी कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने मुंबई पुलिस और फायर ब्रिगेड का आभार जताते हुए लिखा कि यह घटना याद दिलाती है कि जिंदगी कितनी अनप्रेडिक्टेबल हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं क्योंकि हादसे के समय वह कार में नहीं थे। वर्कफ्रंट की बात करें तो क्षितिज ढोलकिया ने एकता कपूर के शो 'नागिन 7' से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। एक्टिंग से पहले वह फिल्म इंडस्ट्री में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं और 'हमशकल्स' और 'ड्रीम गर्ल' जैसी फिल्मों की टीम का हिस्सा रह चुके हैं। वहीं, उर्वशी ढोलकिया की बात करें तो वह शो 'कसौटी जिंदगी की' में 'कोमोलिका' के किरदार के लिए पहचानी जाती हैं। इसके अलावा वह कलर्स टीवी के रियलिटी शो 'बिग बॉस 6' (2012) की विनर भी रह चुकी हैं। शहर के कई इलाकों में जलभराव पिछले कुछ दिनों से मुंबई में लगातार भारी बारिश हो रही है। तेज बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ है और इसका असर बॉलीवुड और टीवी सितारों पर भी दिखा। हाल ही में बिग बॉस 19 फेम अश्नूर कौर के लग्जरी घर में बारिश का पानी घुस गया, जिससे घर के सामान को काफी नुकसान हुआ। अश्नूर ने वीडियो शेयर कर हालात दिखाए। वहीं, ट्रैफिक से बचने के लिए एक्टर रणदीप हुड्डा ने आम लोगों की तरह मास्क लगाकर मेट्रो से सफर किया था। दूसरी ओर, तमन्ना भाटिया बारिश में भीगती नजर आईं और ठंड लगने की बात कही थी।
हिट फिल्म हो तो तालियां स्टार्स के हिस्से आती हैं, लेकिन फ्लॉप होते ही सबसे पहले कटघरे में डायरेक्टर खड़ा होता है। विक्रम भट्ट इसे फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा और सबसे पुराना सच मानते हैं। वह कहते हैं, हमें फ्लॉप फिल्मों की लाश उठाने के पैसे दिए जाते हैं। यह उनके चार दशक लंबे करियर का अनुभव है। हॉरर फिल्मों को हिंदी सिनेमा में नई पहचान दिलाने वाले विक्रम भट्ट ने सुपरहिट फिल्मों के साथ फ्लॉप दौर भी देखा। उन्होंने बड़े सितारों के साथ काम किया, नए कलाकारों को लॉन्च किया, निजी विवादों का सामना किया और जेल तक का सफर भी तय किया। इसके बावजूद उनका मानना है कि इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए सफलता नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों पर कायम रहना सबसे जरूरी है। यही वजह है कि उन्होंने स्टार सिस्टम, फिल्मों के क्रेडिट, आमिर खान के साथ दोबारा काम न करने की वजह, अपने संघर्ष और विवादों पर बेबाकी से बात की। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं विक्रम भट्ट के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। शुरुआती मौके से लेकर अलग पहचान बनाने तक विक्रम भट्ट फिल्मी माहौल में बड़े हुए और कम उम्र में ही फिल्म निर्माण से जुड़ गए। शुरुआती दौर में उन्होंने निर्देशन की बारीकियां सीखीं और अपनी फिल्मों के जरिए अलग पहचान बनाई। रोमांटिक और थ्रिलर फिल्मों के बाद उन्होंने हॉरर जॉनर में ऐसा प्रयोग किया, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में अलग मुकाम दिलाया। 'राज', '1920', 'शापित' और 'हॉन्टेड 3डी' जैसी फिल्मों ने उन्हें हॉरर फिल्मों का बड़ा चेहरा बना दिया। उनकी फिल्मों ने साबित किया कि दमदार कहानी और ट्रीटमेंट के दम पर हॉरर भी बॉक्स ऑफिस पर सफल हो सकता है। डायरेक्टर के तौर पर नए और बड़े स्टार्स के साथ काम करने का फर्क अपने लंबे करियर में विक्रम भट्ट ने अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, आमिर खान, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी जैसे बड़े सितारों के साथ-साथ नए कलाकारों के साथ भी काम किया है। उनके मुताबिक दोनों की अपनी-अपनी खूबियां होती हैं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर के तौर पर नए और बड़े स्टार्स के साथ काम करने में क्या फर्क होता है। विक्रम भट्ट कहते हैं कि नए कलाकार उतने ट्रेंड या मंझे हुए नहीं होते, जितने अनुभवी कलाकार होते हैं। लेकिन उनमें सीखने की इच्छा होती है, जो कई बार स्टार्स में नहीं होती। स्टार्स अपनी तय शैली में काम करना पसंद करते हैं, जबकि डायरेक्टर कई बार कुछ अलग करना चाहता है। इसलिए दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। स्टार्स के साथ काम करने पर फिल्म को अच्छी ओपनिंग और अनुभवी अभिनेता मिलता है। वहीं, नए कलाकारों के साथ एक उत्साही और कुछ कर दिखाने का जज्बा रखने वाला इंसान मिलता है। इसलिए दोनों के अपने-अपने एडवांटेज हैं। फिल्म की जिम्मेदारी हमेशा डायरेक्टर की होती है विक्रम भट्ट का मानना है कि स्टार हो या न हो, फिल्म की जिम्मेदारी आखिरकार डायरेक्टर की ही होती है। हालांकि बदकिस्मती यह है कि जब किसी स्टार की फिल्म हिट होती है, तो डायरेक्टर को उतना श्रेय नहीं मिलता। काम वह उतना ही करता है, लेकिन फिल्म स्टार की हिट कहलाती है। वह कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि फिल्म 'धुरंधर' के मामले में उसके डायरेक्टर आदित्य धर का भी नाम लिया जा रहा है। सिर्फ कलाकारों की ही नहीं, बल्कि डायरेक्टर की भी चर्चा हो रही है। वरना अक्सर लोग कहते हैं कि यह फलां स्टार की हिट फिल्म है। यही सबसे बड़ी दिक्कत है। उनके मुताबिक मेहनत सभी बराबर करते हैं। लेकिन जब स्टार की फिल्म नहीं चलती, तब सबसे पहले डायरेक्टर का नाम आता है कि इतने बड़े स्टार के साथ भी फ्लॉप फिल्म बना दी। इसलिए वह मजाक में कहते हैं कि डायरेक्टर को पैसे फ्लॉप फिल्म की लाश उठाने के लिए दिए जाते हैं। हिट सबकी होती है, लेकिन फ्लॉप सिर्फ डायरेक्टर की मानी जाती है। हिट का क्रेडिट स्टार को, फ्लॉप का ठीकरा डायरेक्टर पर विक्रम भट्ट कहते हैं कि यह कोई नई बात नहीं, बल्कि हमेशा से ऐसा ही होता आया है। स्टार एक साथ कई फिल्में करते हैं। अगर उनकी चार फिल्मों में से तीन हिट हो जाएं और आपकी फिल्म फ्लॉप हो जाए, तो लोग यही मानते हैं कि कमी डायरेक्टर में रही होगी। वह कहते हैं कि लोग यह नहीं समझते कि किसी फिल्म को सफल बनाने में सिर्फ स्टार नहीं होता। कोई राइटर कहानी लिखता है, कोई अच्छे डायलॉग देता है, कोई बेहतरीन सीन बनाता है, अच्छे गाने बनते हैं और सही पब्लिसिटी होती है। तब जाकर एक स्टार बनता है। लेकिन जब फिल्म हिट होती है, तो लोग मान लेते हैं कि सिर्फ स्टार ने ही सब कुछ किया है। उनके मुताबिक यह बरसों से चला आ रहा सच है और इसे बदला नहीं जा सकता। यही इंडस्ट्री की हकीकत है, इसलिए इससे लड़ने का कोई मतलब नहीं है। मुझे हमेशा मेरा क्रेडिट मिला विक्रम भट्ट कहते हैं कि खुशकिस्मती से उनके साथ कभी ऐसा नहीं हुआ कि उनका श्रेय किसी और को मिल गया हो। आमिर खान के साथ काम करने के दौरान भी लोग कहते थे कि हमेशा आमिर को ही क्रेडिट मिलता है, लेकिन 'गुलाम' ने उन्हें भी पूरा सम्मान दिया। वह बताते हैं कि किसी ने कभी यह नहीं कहा कि फिल्म आमिर खान ने डायरेक्ट की थी। उन्हें जितना क्रेडिट मिलना चाहिए था, उतना मिला। ' आवारा पागल दीवाना' के लिए भी उन्हें पूरा श्रेय मिला। इसलिए वह मानते हैं कि इस मामले में उनकी किस्मत अच्छी रही। आमिर खान के साथ दोबारा काम क्यों नहीं हुआ? विक्रम भट्ट बताते हैं कि 'गुलाम' के समय मुकेश भट्ट और आमिर खान के रिश्ते अच्छे नहीं थे। आमिर शायद उनके साथ आगे काम नहीं करना चाहते थे। यह कोई निजी दुश्मनी नहीं थी, बल्कि दोनों का स्वभाव मेल नहीं खा रहा था। वह कहते हैं कि वह मुकेश भट्ट के लिए काम करते थे और 'गुलाम' भी उन्हें मुकेश भट्ट ने ही दी थी। ऐसे में उन्हें लगा कि अगर वह मुकेश भट्ट को छोड़कर आमिर खान के साथ चले जाएं, तो यह बेवफाई होगी। बाद में फिर कभी ऐसा मौका ही नहीं आया। वह दूसरी दिशा में चले गए और आमिर खान दूसरी राह पर। भगवान पर भरोसा रखने वाला इंसान बेवफाई नहीं कर सकता हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा बहुत कम होता है। आमतौर पर लोग बड़े स्टार्स के साथ ही खड़े नजर आते हैं। लेकिन विक्रम भट्ट हमेशा मुकेश भट्ट के ही साथ खड़े रहे। विक्रम भट्ट से जब पूछा गया कि इसकी ताकत और हिम्मत कहां से आई कि किसी को धोखा नहीं देना है? विक्रम भट्ट कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि इसके लिए किसी खास हिम्मत या ताकत की जरूरत होती है। उनका मानना है कि जो इंसान सच में भगवान पर भरोसा रखता है, वह ऐसे काम नहीं कर सकता। वह बताते हैं कि उन्होंने 'गुलाम' मुकेश भट्ट के लिए बनाई थी, जिसमें आमिर खान थे। इससे पहले मुकेश भट्ट ने ही उन्हें 'जानम' जैसी पहली फिल्म और 'फरेब' जैसी पहली हिट फिल्म दी थी। ऐसे इंसान को सिर्फ इसलिए छोड़ देना कि कहीं और काम मिल रहा है, उन्हें सही नहीं लगा। उनका कहना है कि जो इंसान सिर्फ मौके देखकर रिश्ते बदलता है, वह बिन पेंदी का लोटा होता है और ऐसे लोग इस इंडस्ट्री में ज्यादा समय तक टिक नहीं पाते। अगर आपके अपने सिद्धांत नहीं हैं, तो आप बहुत आगे नहीं जा सकते। मेरे करियर में ऊंचाइयां भी आईं और बड़े उतार भी विक्रम भट्ट कहते हैं कि उनके करियर ने ऊंचाइयां भी देखी हैं और बड़े उतार भी। कभी लगातार छह-सात फिल्में हिट हुईं, तो कभी लगातार छह-सात फिल्में फ्लॉप भी रहीं। फिर दोबारा हिट फिल्मों का दौर आया और उसके बाद फिर फ्लॉप फिल्मों का दौर। वह अपने करियर की तुलना ऊंट की चाल से करते हैं, जो कभी ऊपर जाती है, कभी नीचे। उनका कहना है कि शायद अब फिर से ऊपर वाला दौर आया है। यह कितना लंबा चलेगा, यह ऊपरवाला ही जानता है। उनकी बस यही दुआ है कि जितना हो सके, यह दौर चलता रहे। अगर मेरी जिंदगी पर फिल्म बने तो उसका नाम 'संघर्ष' होगा विक्रम भट्ट कहते हैं कि अगर उनकी जिंदगी पर फिल्म बने, तो उसका नाम 'संघर्ष' होना चाहिए। उन्होंने हर चीज के लिए संघर्ष किया है- निजी जिंदगी, फिल्मी करियर और आध्यात्मिक यात्रा में भी। उनके मुताबिक संघर्ष उनकी सबसे बड़ी पहचान रहा है। मेरी फिल्में रिलीज के समय नहीं, समय बीतने के बाद पसंद की जाती हैं विक्रम भट्ट कहते हैं कि उनकी फिल्मों के साथ अजीब बात होती है। जब फिल्म रिलीज होती है, तब लोगों को पसंद नहीं आती, लेकिन कुछ साल बाद वही फिल्म कल्ट क्लासिक बन जाती है। वह उदाहरण देते हैं कि 'राज' को रिलीज के समय किसी ने जीरो स्टार दिए, किसी ने एक स्टार और किसी ने डेढ़ स्टार। लेकिन कुछ साल बाद वही फिल्म क्लासिक कहलाने लगी। इसी तरह 'हॉन्टेड' के रिलीज होने पर लोगों ने उसकी काफी आलोचना की थी, लेकिन आज वही लोग उसे क्लासिक कहते हैं। वह कहते हैं कि आज जो फिल्म क्लासिक है, रिलीज के समय वह क्लासिक नहीं थी। और जो आज नई फिल्म है, अगर चल गई तो चार साल बाद उसे भी क्लासिक कहा जाएगा। इसी बात को वह अंग्रेजी की एक लाइन से समझाते हैं- Durability is acceptability. यानी जो समय की कसौटी पर टिकता है, वही स्वीकार किया जाता है। जो टिक नहीं पाता, वह समय के साथ खत्म हो जाता है। धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिन विक्रम भट्ट के करियर में सिर्फ फिल्मी उतार-चढ़ाव ही नहीं आए। उनकी निजी जिंदगी भी कई बार विवादों में रही। सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई, जब उन्हें और उनकी पत्नी को एक कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को उदयपुर के 'इंदिरा आईवीएफ' ग्रुप के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया से जुड़े ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी और ठगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने मुर्डिया की दिवंगत पत्नी पर बायोपिक बनाने के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपए लिए और प्रोजेक्ट बीच में रोक दिया गया। इस गिरफ्तारी ने मीडिया का ध्यान खींचा। विक्रम भट्ट से जब पूछा गया कि क्या सेलिब्रिटी होने के कारण उन्हें टारगेट किया गया होगा, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब इस तरह दिया। सेलिब्रिटी होने की वजह से मामला बड़ा बन गया विक्रम भट्ट कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें सेलिब्रिटी होने की वजह से टारगेट किया गया या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि सेलिब्रिटी होने की वजह से हर बात ज्यादा चर्चा में आ जाती है। वह अखबारों की सुर्खियां बन जाती है और जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाता है। उनका कहना है कि अगर यही घटना किसी कम जाने-पहचाने व्यक्ति के साथ हुई होती, तो शायद इतना बड़ा रूप नहीं लेती। लेकिन अब वह अपनी पहचान या अपना ओहदा तो बदल नहीं सकते, इसलिए जो है, उसे स्वीकार करना ही पड़ता है। ___________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... ‘मॉम, क्या लगती हैं आप?’:14 साल के बेटे की बात सुनकर शिल्पा शेट्टी बोलीं- लगा, अब सच में जिंदगी में कुछ हासिल किया है हर सफलता की कहानी सिर्फ तालियों और शोहरत से नहीं बनती। इसके पीछे ऐसे दौर भी होते हैं जब मौके छूटते हैं, फैसले गलत साबित होते हैं और फिर खुद को साबित करना पड़ता है। शिल्पा शेट्टी की कहानी भी ऐसी ही रही।पूरी खबर पढ़ें..
सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने एक्टर सलमान खान की फिल्म 'मातृभूमि' का क्लियरेंस सर्टिफिकेट अगले आदेश तक रोक दिया है। यह फिल्म साल 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प पर आधारित है। पहले इस फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' रखा गया था। फिल्म को पहले 17 अप्रैल को ईद के मौके पर रिलीज किया जाना था, लेकिन बाद में इसकी रिलीज डेट बढ़ाकर अगस्त तय की गई थी। सेंसर बोर्ड के इस फैसले के बाद अब फिल्म की अगस्त रिलीज भी टलने की आशंका है। सेंसर बोर्ड ने अगले आदेश तक रोका सर्टिफिकेटएनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंसर बोर्ड ने फिल्म 'मातृभूमि' को सर्टिफिकेट देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। फिल्म के मेकर्स को उम्मीद थी कि इसे स्वतंत्रता दिवस के वीकेंड पर अगस्त में रिलीज कर दिया जाएगा, लेकिन नया सर्टिफिकेट न मिलने के कारण अब ऐसा होना मुश्किल लग रहा है। इस फिल्म का निर्माण सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान ने किया है और इसके डायरेक्टर अपूर्वा लाखिया हैं। फिल्म में सलमान खान के साथ एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का म्यूजिक हिमेश रेशमिया ने तैयार किया है। चीनी सोशल मीडिया पर विरोध के बाद बदला था नामइस फिल्म को लेकर रिलीज से पहले ही विवाद शुरू हो गया था। पिछले साल दिसंबर में जब फिल्म का टीजर सामने आया था, तब चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो (Weibo) पर इसे लेकर काफी विरोध देखा गया था। चीनी यूजर्स ने मेकर्स पर गलवान घाटी की घटना को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया था। इस विवाद के बाद मेकर्स ने फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' से बदलकर 'मातृभूमि' कर दिया था। नाम बदलने के साथ ही फिल्म की स्क्रिप्ट और दृश्यों में भी कुछ बदलाव किए गए थे। फिल्म पर विदेश मंत्रालय ने दी थी सफाईइसी साल जनवरी में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) से भी इस फिल्म को लेकर सवाल पूछा गया था। तब ऐसी खबरें आई थीं कि विदेश मंत्रालय ने भारत और चीन के सैनिकों के बीच छह साल पहले हुई झड़प पर बन रही इस फिल्म को लेकर आपत्ति जताई है। इस पर सफाई देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े मामलों को संबंधित अथॉरिटी ही देखती है। इस तरह के मामलों में विदेश मंत्रालय का कोई रोल नहीं होता है। उन्होंने साफ किया था कि मंत्रालय की तरफ से फिल्म पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। कर्नल संतोष बाबू के रोल में दिखेंगे सलमान खानफिल्म 'मातृभूमि' का टीजर 27 दिसंबर 2025 को सलमान खान के 60वें जन्मदिन पर रिलीज किया गया था। इस फिल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। कर्नल संतोष बाबू ने ही गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प के दौरान भारतीय टुकड़ी का नेतृत्व किया था। इस झड़प में वे शहीद हो गए थे।
आजकल क्राइम थ्रिलर फिल्मों में गोलियां, गैंगस्टर और बदले की कहानियां नई बात नहीं रहीं। ऐसे में बेबी डू डाई डू अपने मुख्य किरदार की वजह से अलग नजर आती है। यहां एक ऐसी सुपारी किलर है, जो न बोल सकती है और न सुन सकती है, लेकिन हर मिशन को बिना शोर किए अंजाम देती है। निर्देशक नचिकेत सामंत ने इस कहानी को सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं बनाया, बल्कि मुंबई शहर की बदलती तस्वीर और उसके अंधेरे चेहरे को भी कहानी का हिस्सा बनाया है। फिल्म हर मोड़ पर चौंकाती नहीं, लेकिन अपने स्टाइल, माहौल और दमदार अभिनय के दम पर अंत तक दिलचस्प बनी रहती है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 5 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इसे 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? कहानी की शुरुआत दो जुड़वां बहनों से होती है, जो बचपन में एक बंद पड़े होटल में पहुंच जाती हैं। वहां वे एक हत्या की गवाह बन जाती हैं। इस घटना में एक बहन की मौत हो जाती है, जबकि दूसरी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है। सालों बाद वही लड़की बेबी करमरकर (हुमा कुरैशी) के नाम से मुंबई की सबसे खतरनाक कॉन्ट्रैक्ट किलर बन चुकी होती है। वह गूंगी और बहरी है, लेकिन अपने हर मिशन को बेहद सटीक तरीके से अंजाम देती है। उसकी पहचान उसकी खास छतरी है, जो जरूरत पड़ने पर जानलेवा हथियार बन जाती है। बेबी का पालन पोषण पापा (चंकी पांडे) ने किया है, जो उसे एक के बाद एक मिशन सौंपते रहते हैं। लेकिन हर सुपारी के पीछे बेबी की अपनी एक तलाश भी छिपी है। वह अपनी जुड़वां बहन के हत्यारे तक पहुंचना चाहती है। इसी बीच उसकी जिंदगी में सिद्धू (रचित सिंह) की एंट्री होती है और पहली बार उसे इस खून खराबे वाली दुनिया से बाहर निकलने की उम्मीद दिखाई देती है। क्या बेबी अपने अतीत से बाहर निकल पाएगी? क्या उसे अपनी बहन के हत्यारे तक पहुंचने का मौका मिलेगा? और क्या अपराध की दुनिया उसे इतनी आसानी से जाने देगी? इन्हीं सवालों के जवाब फिल्म धीरे धीरे देती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हुमा कुरैशी हैं। बिना लंबे संवाद बोले सिर्फ आंखों, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए उन्होंने बेबी के दर्द, गुस्से और अकेलेपन को बेहद असरदार तरीके से निभाया है। उनका शांत चेहरा और अचानक हिंसक हो जाने वाला अंदाज फिल्म को अलग पहचान देता है। रचित सिंह कहानी में भावनात्मक संतुलन लेकर आते हैं। उनका किरदार सादगी से लिखा गया है और दोनों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को राहत देती है। चंकी पांडे अपने अब तक के अलग किरदारों में नजर आते हैं। उनका शांत लेकिन रहस्यमय अंदाज प्रभावित करता है। सिकंदर खेर एक बार फिर ग्रे शेड वाले किरदार में जमे हैं और हर बार स्क्रीन पर आते ही तनाव बढ़ा देते हैं। सीमा पाहवा भी अपने सीमित स्क्रीन टाइम में प्रभाव छोड़ती हैं। फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है? निर्देशक नचिकेत सामंत ने इस फिल्म को पारंपरिक क्राइम थ्रिलर बनने से बचाने की कोशिश की है। उन्होंने स्टाइल और कहानी के बीच अच्छा संतुलन बनाने का प्रयास किया है। मुंबई यहां सिर्फ लोकेशन नहीं, बल्कि कहानी का एक अहम किरदार बनकर सामने आती है। बारिश में भीगी सड़कें, पुरानी चालें, अधूरी इमारतें और शहर का अंधेरा चेहरा फिल्म के माहौल को मजबूत बनाते हैं। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है। कई फ्रेम इंटरनेशनल नियो नॉयर फिल्मों की याद दिलाते हैं। ब्लैक एंड व्हाइट फ्लैशबैक, कम रोशनी वाले दृश्य और रंगों का इस्तेमाल कहानी को अलग पहचान देता है। हालांकि फिल्म पूरी तरह अपनी पकड़ बनाए नहीं रख पाती। पहले हिस्से में रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस होती है। दूसरे भाग में कहानी तेज होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा किरदार और कई समानांतर ट्रैक फिल्म को थोड़ा उलझा देते हैं। कुछ ट्विस्ट का अंदाजा पहले ही लग जाता है और कुछ घटनाएं जरूरत से ज्यादा सुविधाजनक लगती हैं। इसके बावजूद निर्देशक फिल्म का माहौल और सस्पेंस बनाए रखने में काफी हद तक सफल रहते हैं। फिल्म क म्यूजिक कैसा है? फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के साथ अच्छी तरह चलता है। कई जगह सन्नाटा भी कहानी का हिस्सा बन जाता है और तनाव बढ़ाता है। गाने कम हैं और कहानी में रुकावट नहीं बनते। हालांकि ऐसा कोई गीत नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? बेबी डू डाई डू उन फिल्मों में से है जो अपनी कहानी से ज्यादा अपने ट्रीटमेंट और माहौल के लिए याद रखी जाएगी। हुमा कुरैशी का दमदार अभिनय, स्टाइलिश प्रस्तुति और मुंबई को कहानी का अहम किरदार बनाने का तरीका फिल्म को अलग बनाता है। हालांकि धीमा पहला हिस्सा, कुछ अनुमानित मोड़ और जरूरत से ज्यादा किरदार इसकी रफ्तार को थोड़ा कमजोर करते हैं। अगर आपको अलग अंदाज की क्राइम थ्रिलर, मजबूत महिला प्रधान किरदार और स्टाइलिश फिल्में पसंद हैं, तो बेबी डू डाई डू एक बार जरूर देखी जा सकती है।
‘यारियां’, ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ समेत कई बड़ी फिल्मों में लीड रोल कर चुके हिमांश कोहली की नई फिल्म ‘आर्यभट्ट का जीरो’ है। इससे जुड़ने से लेकर मेकिंग आदि पर उनसे हुई खास बातचीत... हिमांश कहते हैं...‘आर्यभट्ट का जीरो’ देहरादून के एक मोहल्ले की कहानी है। इसमें मेरा किरदार ब्रह्मगुप्त श्रीवास्तव उर्फ बग्गू है, जिसे उसके पिता हमेशा ‘जीरो’ मानते हैं। पिता चाहते हैं कि बेटा उनके जीते-जी कुछ बन जाए, जबकि बग्गू अपने सपनों की दुनिया बसाना चाहता है। यह पिता-पुत्र के टकराव की कहानी के साथ हर उस युवा की कहानी भी है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करता है।’ फिल्म में मेरी जिंदगी की झलक भी है, तारीक मोहम्मद ने लिखी है कहानी हिमांश बताते हैं...‘मैं इस फिल्म से शुरुआत से जुड़ा रहा हूं। जब लेखक तारिक मोहम्मद कहानी लिख रहे थे, तब हम अपनी जिंदगी के अनुभव साझा कर रहे थे। मैं उन्हें बता रहा था कि कई बार अपने सपनों को लेकर सबसे पहले घरवालों को ही समझाना पड़ता है। मेरे जीवन में भी ऐसा दौर आया है। फिल्म के कई हिस्से, खासकर प्री-क्लाइमैक्स, मेरी निजी जिंदगी से मेल खाते हैं। सिर्फ मुझे ही नहीं, पूरी टीम को लगा कि कहानी में कहीं न कहीं उनकी भी जिंदगी दिखाई देती है।’ हर किरदार बग्गू की मंजिल तक उसे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है हिमांश कहते हैं, ‘यह सिर्फ एक लड़के की कहानी नहीं, पूरे मोहल्ले की कहानी है। फिल्म में सोनाली सहगल, रवि किशन, नीरज सूद, अल्का अमीन, राजेश शर्मा, दर्शना बानिक, गोपाल दत्त और शिल्पा शिंदे जैसे कलाकार हैं। हर किरदार बग्गू की जिंदगी में किसी न किसी मोड़ पर आता है और उसकी सोच या सफर को प्रभावित करता है।’ देहरादून सिर्फ लोकेशन नहीं, फिल्म का एक अहम किरदार भी है बकौल हिमांश...‘फिल्म की शूटिंग देहरादून, दिल्ली और मुंबई में हुई लेकिन सबसे ज्यादा समय देहरादून में बिताया। करीब 65 दिन वहां शूट किया। दिल्ली और मुंबई का इस्तेमाल कहानी की जरूरत के हिसाब से किया गया है। क्लाइमैक्स भी देहरादून में शूट हुआ।’ पहले नाम ‘बूंदी रायता’ था, फिर फिल्म बनने तक मिल गया मनचाहा टाइटल हिमांश के मुताबिक...‘शुरुआत में फिल्म का वर्किंग टाइटल ‘बूंदी रायता’ रखा गया था, क्योंकि ‘आर्यभट्ट का जीरो’ टाइटल उपलब्ध नहीं था। हमारी पहली पसंद हमेशा यही नाम था। यह किसी और के पास रजिस्टर्ड था, लेकिन बाद में रिन्यू नहीं हुआ और फिल्म पूरी होने तक हमें यह टाइटल मिल गया। मुझे लगता है कि कहानी के भाव और पिता-पुत्र के रिश्ते को यही नाम सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है।’ लीड रोल मिलना रणनीति नहीं, किस्मत का साथ होना है हिमांश का कहना है...‘यारियां’ में भी मैं पहले थर्ड लीड के लिए चुना गया था, लेकिन वर्कशॉप के दौरान मुख्य भूमिका तक पहुंच गया। उसी समय ‘हमसे है लाइफ’ में भी लीड कर रहा था। सही समय पर सही मौका मिलना जरूरी होता है, लेकिन तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। अभिनय के साथ-साथ अपने प्रोडक्शन हाउस के तहत भी फिल्में बना रहा हूं। ‘जूलिया एंड कालिया’ पूरी हो चुकी है। दूसरी फिल्म ‘क से कबूतर’ शिक्षा व्यवस्था पर आधारित है, जिसकी शूटिंग जारी है। इसका अगला शेड्यूल छत्तीसगढ़ में होगा।
कॉमेडियन सुनील पाल ने समय रैना के विवादित शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में शामिल होने को लेकर पहली बार प्रतिक्रिया दी। गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि समय रैना ने उन्हें शो में आने के लिए 25 लाख रुपए का ऑफर दिया था। गुरुवार को वह फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' देखने जा रहे थे। इस दौरान पैपराजी से बातचीत में सुनील ने कहा, समय रैना के लगभग 11 मिलियन फॉलोअर्स हैं और वह मुझे फॉलो करता है। इससे पता चलता है कि अब वह सही आदमी को फॉलो कर रहा है। वह सही मंजिल तक पहुंच जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि वह समय रैना के शो में कब नजर आएंगे, तो उन्होंने कहा, मैं उसके शो में क्यों जाऊंगा। वह मुझे फॉलो कर रहा है। वह मेरे पीछे आएगा। सुनील पाल ने आगे दावा किया कि समय ने उनसे शो में आने के लिए बातचीत की थी और 25 लाख रुपए देने की पेशकश भी की थी। उनके मुताबिक, उन्होंने कहा था कि वह गाली-गलौज नहीं करेंगे। इस पर समय ने कथित तौर पर जवाब दिया था, सर, गाली तो आप मत देना, लेकिन हम लोग सब देंगे। हालांकि, सुनील पाल ने यह कन्फर्म नहीं किया कि वह 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के दूसरे सीजन में शामिल होंगे या नहीं। आलिया भट्ट पर भी तंज कसा 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के दूसरे सीजन के पहले एपिसोड में आलिया भट्ट और शर्वरी वाघ गेस्ट के रूप में नजर आई थीं। इसको लेकर सुनील ने कहा, जहां-जहां है आलिया, वहां-वहां हैं गालियां, बजाओ तो तालियां, वरना सपने में आएगा विजय माल्या। गौरतलब है कि 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के पहले सीजन में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर सुनील पाल ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई थी। शो को लेकर उस समय विवाद भी हुआ था। वहीं 'इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन 2' को लेकर सुनील पाल ने यह भी कहा था, 'समय रैना के नए सीजन में दो लोगों को बैठाएं, अपनी माताजी और अपने पिताजी को बैठाएं। उनके सामने शो करके दिखाएं, तब मैं मानूंगा कि समय है और रैना है।' सुनील पाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कपिल शर्मा शो में सुनील पाल का आरोप:बोले- समय रैना के सामने मुझे अभिमन्यु की तरह घेरा गया, मेरे जोक्स काटे कॉमेडियन सुनील पाल ने द ग्रेट इंडियन कपिल शो में अपनी अपीयरेंस के बाद आरोप लगाया था कि शो के दौरान उन्हें 'टारगेट' किया गया और उनके कई अच्छे जोक्स को एडिट कर दिया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
यशराज स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म अल्फा बड़े स्केल, हाई ऑक्टेन एक्शन और एक नए कॉन्सेप्ट के साथ सिनेमाघरों में आई है। ट्रेलर से उम्मीद थी कि यह स्पाई यूनिवर्स को नया मुकाम देगी, लेकिन फिल्म उस उम्मीद पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। डायरेक्टर शिव रवैल ने इसे इंटरनेशनल स्पाई थ्रिलर का लुक देने में मेहनत की है। विजुअल्स, एक्शन और प्रोडक्शन वैल्यू प्रभावित करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और कम भावनात्मक जुड़ाव फिल्म को बार बार पीछे खींचते हैं। फिल्म की कहानीकरीब 140 मिनट लंबी फिल्म की शुरुआत 27 जुलाई 1999 से होती है। इंडियन आर्मी के विक्रांत कौल (अनिल कपूर) और फतेह सिंह लाखावत (बॉबी देओल) देश की सबसे खतरनाक सीक्रेट फोर्स बनाने का सपना देखते हैं। इसी सोच से टीम अल्फा की शुरुआत होती है, जिसके सैनिकों को अल्फा सीरम दिया जाता है। यह सीरम इंसान की ताकत, रिफ्लेक्स और रिकवरी को कई गुना बढ़ा देता है। इसी दौरान विक्रांत अपनी गर्भवती पत्नी जानकी (दिया मिर्जा) की जान बचाने के लिए उसे भी अल्फा सीरम दे देता है। यह फैसला उसकी पूरी जिंदगी बदल देता है। फतेह का मानना होता है कि इस सीरम पर सिर्फ सेना का हक था। वह विक्रांत की नवजात बेटी को उससे अलग कर देता है और उसे यकीन दिला देता है कि उसकी बेटी मर चुकी है। सालों बाद वही बेटी सीता (आलिया भट्ट) फतेह की निगरानी में एक खतरनाक हथियार बन चुकी होती है। बचपन से उसे मिशन दिए जाते हैं और वह देश के दुश्मनों को खत्म करती रहती है। लेकिन एक दिन उसे पता चलता है कि जिस इंसान को वह अपना गुरु मानती रही, वही सबसे बड़ा गुनहगार है। दूसरी तरफ स्पेन में पली विक्रांत की दूसरी बेटी दुर्गा (शरवरी) की एंट्री होती है। दोनों बहनों का आमना सामना होता है और कहानी ऑपरेशन ओडिसी के रहस्य तक पहुंचती है। आखिर फतेह का असली मिशन क्या है, ऑपरेशन ओडिसी के पीछे उसका मकसद क्या है और क्या सीता उसे रोक पाएगी, फिल्म का क्लाइमैक्स इन्हीं सवालों के जवाब देता है। फिल्म में एक्टिंगसीता के किरदार में आलिया भट्ट ने पूरी मेहनत की है। उन्होंने एक्शन सीक्वेंस में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और कई दृश्यों में प्रभाव भी छोड़ती हैं। हालांकि भावनात्मक दृश्यों में उनका किरदार दर्शकों से उतना जुड़ नहीं पाता, जितनी जरूरत थी।शरवरी को स्क्रीन स्पेस कम मिला है, लेकिन जितना मौका मिला उसमें उन्होंने अच्छा काम किया है और अपने किरदार के साथ न्याय किया है। फिल्म के सबसे बड़े सरप्राइज पैकेज हैं बॉबी देओल। फतेह सिंह लाखावत के रोल में उनका जुनून, खामोशी और खतरनाक स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। अनिल कपूर भी अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं। वहीं फिल्म के आखिर में ऋतिक रोशन का कैमियो स्पाई यूनिवर्स के फैंस के लिए एक अच्छा सरप्राइज बनकर आता है और आगे की फिल्मों के लिए उत्सुकता भी बढ़ा देता है। फिल्म में डायरेक्शन और टेक्निकल पक्षनिर्देशक शिव रवैल ने फिल्म को हॉलीवुड स्टाइल स्पाई थ्रिलर जैसा ट्रीटमेंट देने की कोशिश की है। सिनेमैटोग्राफी शानदार है। सेपिया टोन, बड़े सेट्स और खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को शानदार विजुअल अपील देते हैं। खासकर आलिया और शरवरी के बीच पहला फाइट सीक्वेंस फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है। हालांकि कहानी के स्तर पर फिल्म कई जगह कमजोर पड़ जाती है। स्क्रीनप्ले ढीला है और कई घटनाएं बिना ठोस आधार के आगे बढ़ती हैं। कुछ ट्विस्ट जरूर हैं, लेकिन उनमें वह रोमांच नहीं है जो दर्शकों को पूरी फिल्म बांधकर रख सके। भावनात्मक दृश्यों में भी फिल्म असर छोड़ने में नाकाम रहती है। कई जगह स्पाई एजेंट्स को इतना सुपरह्यूमन बना दिया गया है कि कहानी वास्तविकता से दूर जाती महसूस होती है। इतना अच्छा कॉन्सेप्ट होने के बावजूद लेखन उसे पूरी तरह भुना नहीं पाता। फिल्म का पहला हिस्सा औसत रफ्तार से आगे बढ़ता है। असली खेल इंटरवल के बाद शुरू होता है, जब बॉबी देओल के ग्रे शेड वाले किरदार का एक बड़ा सच सामने आता है। यही ट्विस्ट कहानी में नई जान डालता है और कुछ देर के लिए फिल्म धुरंधर जैसी स्पाई थ्रिलर वाली फील देने लगती है। हालांकि, इसके बाद भी कमजोर स्क्रीनप्ले फिल्म को पूरी तरह उड़ान नहीं भरने देता। इंटरवल के बाद आने वाले ट्विस्ट और बॉबी देओल के ग्रे शेड वाले किरदार की परतें फिल्म को बेहतर बनाती हैं, लेकिन कमजोर लेखन इसकी रफ्तार को आखिर तक बरकरार नहीं रख पाता। फिल्म में म्यूजिकफिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के टोन के मुताबिक ठीक बैठता है और एक्शन को सपोर्ट करता है। लेकिन गानों में ऐसा कोई ट्रैक नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रह जाए। फिल्म को फाइनल वर्डिक्ट अल्फा विजुअली शानदार है, एक्शन दमदार है और बॉबी देओल अपने किरदार से सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। आलिया भट्ट ने भी पूरी ईमानदारी से फिल्म को संभालने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, कम भावनात्मक जुड़ाव और औसत थ्रिल इसकी सबसे बड़ी कमजोरियां बन जाती हैं। फिल्म एक नए स्पाई चैप्टर की मजबूत शुरुआत बन सकती थी, लेकिन यह मौका पूरी तरह भुना नहीं जा सका। अगर आप बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन और यशराज स्पाई यूनिवर्स के फैन हैं तो फिल्म एक बार देख सकते हैं, लेकिन कहानी के स्तर पर यह आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।
जब किसी प्रोजेक्ट से राजकुमार हिरानी का नाम जुड़ता है तो उम्मीदें बढ़ना स्वाभाविक है। अरशद वारसी, विक्रांत मैसी, बोमन ईरानी और मोना सिंह जैसे कलाकार हों तो बेहतरीन क्राइम-कॉमेडी की आस और मजबूत हो जाती है। जियोहॉटस्टार पर रिलीज हुई 'प्रीतम एंड पेड्रो' साइबर क्राइम जैसे समकालीन विषय को कॉमेडी, थ्रिल और इमोशन के साथ पेश करने की कोशिश करती है। कॉन्सेप्ट दिलचस्प और स्टारकास्ट दमदार है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और धीमी रफ्तार के कारण सीरीज अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती। 6 एपिसोड की इस सीरीज को दैनिक भास्कर ने 5 में से 2.5 स्टार दिए हैं। सीरीज की कहानी कैसी है? 'प्रीतम एंड पेड्रो' की कहानी गोवा में सेट है। पेड्रो गोंसाल्वेस (अरशद वारसी) पुराने ख्यालों वाला अनुभवी पुलिस अफसर है, जो अपराधियों को पकड़ने में माहिर है, लेकिन तकनीक और साइबर दुनिया से उसकी ज्यादा दोस्ती नहीं है। एक घटना के बाद उसका तबादला साइबर सेल में होता है, जहां उसकी मुलाकात युवा और टेक-सेवी अधिकारी प्रीतम पार्कर (वीर हिरानी) से होती है। दोनों की कार्यशैली बिल्कुल अलग है। पेड्रो अनुभव और जमीनी जांच पर भरोसा करता है, जबकि प्रीतम डेटा, हैकिंग और डिजिटल तकनीक के जरिए अपराध सुलझाता है। इसी बीच उन्हें मंत्री के बेटे के अपहरण और एक हाई-प्रोफाइल साइबर क्राइम की गुत्थी सुलझाने की जिम्मेदारी मिलती है। जांच के साथ ऑनलाइन फ्रॉड, हैकिंग और डिजिटल स्कैम की परतें खुलती हैं, वहीं दोनों किरदारों की निजी जिंदगी और भावनात्मक संघर्ष को भी कहानी में जोड़ा गया है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? अरशद वारसी पूरी सीरीज की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका सहज अभिनय, शानदार कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस कई कमजोर दृश्यों को भी संभाल लेती है। राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी इस सीरीज से बतौर लीड एक्टर डेब्यू कर रहे हैं। उन्होंने ईमानदारी से किरदार निभाया है। कई दृश्यों में उनका आत्मविश्वास दिखता है, लेकिन भावनात्मक हिस्सों में अनुभव की कमी महसूस होती है। शुरुआत के लिहाज से उनका प्रदर्शन संतोषजनक है। विक्रांत मैसी सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ते हैं। मोना सिंह, बोमन ईरानी, सत्यदीप मिश्रा और श्रुति मराठे अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उन्हें ज्यादा अवसर नहीं देती। डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष कैसा है? निर्देशक अविनाश अरुण ने इससे पहले 'थ्री ऑफ अस' और 'पाताल लोक' जैसी बेहतरीन कृतियां दी हैं। ऐसे में उनसे उम्मीदें ज्यादा थीं, लेकिन इस बार वह कहानी की पकड़ बनाए रखने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। निर्देशन में राजकुमार हिरानी की फिल्मों वाला हल्का-फुल्का ह्यूमर और मानवीय स्पर्श जरूर नजर आता है। हालांकि सबसे बड़ी कमजोरी इसकी राइटिंग और स्क्रीनप्ले है। राजकुमार हिरानी, अभिजात जोशी, सुयश त्रिवेदी और अमित दुबे की लिखी कहानी का विषय प्रासंगिक है, लेकिन कई एपिसोड अनावश्यक रूप से लंबे लगते हैं। थ्रिल लगातार नहीं बनता और इमोशनल सीन भी अपेक्षित असर नहीं छोड़ते। अंत तक सीरीज मनोरंजक तो रहती है, लेकिन यादगार नहीं बनती। तकनीकी रूप से सीरीज मजबूत है। गोवा की लोकेशंस, सिनेमैटोग्राफी, कैमरा वर्क और प्रोडक्शन वैल्यू प्रभावित करते हैं। साइबर क्राइम से जुड़े विजुअल्स भी विश्वसनीय लगते हैं, लेकिन मजबूत तकनीकी पक्ष कमजोर लेखन की भरपाई नहीं कर पाता। म्यूजिक कैसा है? राजकुमार हिरानी के प्रोजेक्ट्स में संगीत हमेशा एक अहम भूमिका निभाता रहा है। 'प्रीतम एंड पेड्रो' में भी कुछ गाने शामिल किए गए हैं। शांतनु मोइत्रा का संगीत और स्वानंद किरकिरे के गीत कहानी के साथ मेल खाते हैं। श्रेया घोषाल की आवाज में रेट्रो अंदाज वाला गीत सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन कोई भी गाना लंबे समय तक याद नहीं रहता। बैकग्राउंड स्कोर कई जगह सस्पेंस पैदा करता है, लेकिन कहानी की धीमी रफ्तार और कमजोर थ्रिल के कारण उसका असर सीमित रह जाता है। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? अगर आप अरशद वारसी के फैन हैं या साइबर क्राइम पर हल्के-फुल्के अंदाज की सीरीज देखना चाहते हैं, तो 'प्रीतम एंड पेड्रो' एक बार देख सकते हैं। लेकिन अगर आप राजकुमार हिरानी के नाम से उनकी फिल्मों जैसा दमदार लेखन, गहरे इमोशन और यादगार मनोरंजन की उम्मीद करेंगे, तो यह सीरीज निराश कर सकती है।
अनमोल बिश्नोई ने 2024 के सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग मामले में मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने की अर्जी दाखिल की है। उसने कहा है कि वह निष्पक्ष ट्रायल और कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अपनी मर्जी से सरेंडर करना चाहता है। अनमोल, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई है। उसे पिछले साल नवंबर में अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था, जिसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे गिरफ्तार किया। फिलहाल वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। सलमान खान के बांद्रा स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग समेत कई मामलों में उसकी तलाश थी। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, स्पेशल MCOCA कोर्ट में दाखिल अर्जी में अनमोल ने कहा कि वह पहले से ही एक दूसरे केस में कानूनी कस्टडी में है। इसलिए अदालत के आदेश के बिना पेश नहीं हो सकता। उसने अदालत से तिहाड़ जेल के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करने की मांग की है, ताकि उसे कोर्ट में पेश किया जा सके और इस केस में रिमांड की प्रक्रिया पूरी की जा सके। अनमोल ने अपनी पिटीशन में कहा कि कोर्ट में उसके पेश होने से प्रॉसिक्यूशन को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे ट्रायल और लीगल प्रोसेस में तेजी आएगी और लीगल प्रोसेस का गलत इस्तेमाल रुकेगा। अर्जी में कहा गया है कि इस मामले में ट्रायल शुरू हो चुका है और उसकी अनुपस्थिति में तीन गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अनमोल सरेंडर क्यों करना चाहता है, जबकि पहले से जेल में है? अनमोल अभी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। वह NIA के एक अलग मामले में गिरफ्तार हुआ था। सलमान के घर के बाहर हुई फायरिंग का केस मुंबई पुलिस का एक अलग मामला है, जिसमें वह अब तक केवल वॉन्टेड है। जब तक कोई आरोपी किसी विशिष्ट केस में कोर्ट के सामने पेश नहीं होता, तब तक उस केस में उसकी औपचारिक गिरफ्तारी (Formal Arrest) दर्ज नहीं होती। प्रोडक्शन वारंट क्या है? चूंकि अनमोल तिहाड़ जेल में है, इसलिए वह खुद चलकर मुंबई कोर्ट नहीं जा सकता। इसके लिए कोर्ट प्रोडक्शन वारंट जारी करता है। यह एक जेल से दूसरी जेल या कोर्ट को भेजा जाने वाला आदेश होता है। इसका मतलब है, ‘इस कैदी को इस तारीख पर हमारे सामने पेश किया जाए।’ सलमान के घर के बाहर 2024 में हुई थी फायरिंग 14 अप्रैल 2024 की सुबह सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर बाइक सवार हमलावरों ने फायरिंग की थी। जांच के दौरान उनकी पहचान विक्की गुप्ता और सागर पाल के रूप में हुई। इस केस में विक्की गुप्ता, सागर पाल, सोनू कुमार बिश्नोई, मोहम्मद रफीक चौधरी और हरपाल सिंह ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। वहीं, एक अन्य आरोपी अनुजकुमार थापन ने पुलिस कस्टडी में सुसाइड कर लिया था। लॉरेंस बिश्नोई भी इस केस में वॉन्टेड है। सलमान को Y+ कैटेगरी की सुरक्षा, 24 घंटे 11 जवान साथ …………….. सलमान खान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सलमान के कंधे पर शख्स ने अचानक हाथ रख दिया:सिक्योरिटी हो गई अलर्ट, तुरंत हटाया; एक्टर ने शांत रहने का इशारा किया सलमान खान का जामनगर एयरपोर्ट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जैसे ही एक शख्स ने उनके कंधे पर हाथ रखने की कोशिश की, उनकी सिक्योरिटी टीम तुरंत अलर्ट हो गई। पूरी खबर यहां पढ़ें…
पिछले कुछ सालों में भारतीय पौराणिक कथाओं और सनातन पर आधारित फिल्मों को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म नागबंधम भी इसी कड़ी में एक ऐसा ट्रेजर हंट एडवेंचर है, जो सनातन की विरासत, इतिहास और इंसानी लालच को एक साथ जोड़ने की कोशिश करता है। फिल्म का विचार और विजुअल स्केल इम्प्रेस करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और ज्यादा लंबी अवधि इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाते हैं। फिल्म की कहानी कहानी साल 1962 में हिमालय से शुरू होती है, जहां आर्कियोलॉजिस्ट जुल्फिकार अली (ऋषभ साहनी) और टेस्ला (जेसन शाह) रहस्यमयी नागबंधम की तलाश में एक गुफा तक पहुंचते हैं। वहां पेड़ में कैद एक बैरागी जुल्फिकार को उसकी सबसे बड़ी सच्चाई बताता है कि वह अपने पिछले जन्म में अहमद शाह अब्दाली था। बैरागी उसे पुष्पकमल और नागबंधम हासिल कर पूरी दुनिया पर राज करने का लालच देता है। दूसरी तरफ जुल्फिकार, रुद्र (विराट कर्ण) और उसके परिवार पर हमला कर देता है, क्योंकि उसे विश्वास है कि पुष्पकमल का रहस्य उसी के पास है। इस हमले में रुद्र अपना पूरा परिवार खो देता है। वहीं पार्वती (नभा नटेश), जिस पर रुद्र सबसे ज्यादा भरोसा करता है, उससे जुड़ा एक बड़ा रहस्य कहानी को नया मोड़ देता है। रुद्र बदले और सच की तलाश में निकलता है। इसी दौरान कहानी 1756 में पहुंचती है, जहां दिखाया जाता है कि कैसे अहमद शाह अब्दाली ने हिंदू मंदिरों पर हमला कर दिव्य पुष्पकमल को हासिल करने की कोशिश की थी। अब क्या रुद्र नागबंधम और पुष्पकमल की रक्षा कर पाएगा और क्या वह जुल्फिकार से बदला ले सकेगा, इसी पर फिल्म का क्लाइमैक्स टिका है। फिल्म में एक्टिंग रुद्र के किरदार में विराट कर्ण ने पूरी मेहनत की है। एक्शन सीन्स में वह प्रभाव छोड़ते हैं, लेकिन इमोशनल और सीरियस सीन्स में कई जगह उनकी परफॉर्मेंस जरूरत से ज्यादा लाउड और ओवरड्रामेटिक महसूस होती है। बतौर लीड एक्टर उनमें संभावनाएं हैं, लेकिन अभी उन्हें एक्टिंग पर और काम करने की जरूरत है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत नभा नटेश हैं। डबल रोल में उन्होंने अच्छी एक्टिंग की है और उनका किरदार कहानी में सबसे बड़ा सरप्राइज लेकर आता है। जुल्फिकार और अहमद शाह अब्दाली के रोल में ऋषभ साहनी का लुक प्रभावशाली है और वह डर पैदा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई जगह उनकी परफॉर्मेंस भी जरूरत से ज्यादा लाउड नजर आती है। वहीं जगपति बाबू, मुरली शर्मा, महेश मांजरेकर और ऐश्वर्या मेनन अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं। फिल्म में डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष कहानी, स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन की जिम्मेदारी अभिषेक नामा ने संभाली है। फिल्म का बेस काफी मजबूत है। शुरुआत शानदार है और सेट डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी तथा वीएफएक्स बड़े पर्दे का एहसास कराते हैं। शुरुआती आधे घंटे तक फिल्म बांधे रखती है। लेकिन इसके बाद ढीले स्क्रीनप्ले की वजह से कहानी बार-बार भटकती है और गति खो देती है। इंटरवल पर एक बड़ा सरप्राइज आता है, जो बाहुबली और कांतारा जैसी फिल्मों की याद दिलाता है। इसके बाद कुछ समय तक फिल्म फिर से पटरी पर लौटती है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी एक बार फिर बिखर जाती है। फिल्म की जरूरत से ज्यादा लंबी अवधि, लगातार लाउड बैकग्राउंड म्यूजिक, कई जगह ओवर द टॉप एक्टिंग और कमजोर एडिटिंग दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेते हैं। अगर एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई होती और स्क्रीनप्ले पर ज्यादा काम किया जाता, तो यही कहानी कहीं ज्यादा असरदार बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर जरूरत से ज्यादा तेज महसूस होता है। कई सीन्स में यह भावनाओं को उभारने के बजाय उन पर हावी हो जाता है। गाने भी ऐसे नहीं हैं, जो फिल्म खत्म होने के बाद याद रह जाएं। फिल्म को फाइनल वर्डिक्ट नागबंधम का आइडिया नया नहीं है, लेकिन इसे भारतीय इतिहास, सनातन की विरासत और पौराणिक रहस्यों के साथ जोड़ने की कोशिश दिलचस्प है। शानदार विजुअल्स, भव्य सेट और कुछ अच्छे सरप्राइज इस फिल्म को देखने लायक बनाते हैं। हालांकि कमजोर स्क्रीनप्ले, लंबी अवधि और लाउड ट्रीटमेंट इसकी रफ्तार को बार-बार रोकते हैं। अगर आपको पौराणिक रहस्य, ट्रेजर हंट और बड़े विजुअल स्केल वाली फिल्में पसंद हैं, तो नागबंधम एक बार देखी जा सकती है।
बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने गुरुवार को पब्लिकली अपनी तीसरी शादी को कन्फर्म कर दिया है। आमिर 5 जुलाई को गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से शादी करेंगे। उन्होंने यह बात मुंबई के एक इवेंट के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान कही। आमिर ने बताया कि शादी बहुत ही प्राइवेट होगी। यह शादी उनके घर पर होगी। इसमें सिर्फ दोनों परिवारों के लोग और कुछ करीबी दोस्त शामिल होंगे। उन्होंने सभी से आशीर्वाद और शुभकामनाएं भी मांगीं। इस मौके पर उनके बेटे जुनैद खान भी साथ मौजूद थे। आमिर ने पहली शादी साल 1986 में फिल्म प्रोड्यूसर रीना दत्ता से की थी। साल 2002 में रीना से अलग होने के बाद आमिर ने साल 2005 में डायरेक्टर किरण राव से दूसरी शादी की थी। साल 2021 में किरण और आमिर का तलाक हो गया था। सैलून एंटरप्रेन्योर और फैशन प्रोफेशनल हैं गौरी स्प्रैट आमिर ने साल 2025 में अपने 60वें जन्मदिन पर गौरी के साथ अपने रिलेशनशिप को पब्लिक किया था। गौरी बेंगलुरु की रहने वाली एक सैलून एंटरप्रेन्योर और फैशन प्रोफेशनल हैं। उनके पिता तमिल-ब्रिटिश मूल के और मां पंजाबी-आयरिश मूल की हैं। गौरी 1920 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ब्रिटिश कम्युनिस्ट फिलिप स्प्रैट की पोती हैं। आमिर की तरह गौरी भी पहले शादीशुदा रही हैं और उनका एक 7 साल का बच्चा है। गौरी और उनका बच्चा पिछले दो साल से मुंबई में साथ रह रहे हैं। आमिर और गौरी एक-दूसरे को पिछले 25 सालों से जानते हैं। दोनों पहले काफी अच्छे दोस्त थे, जिसके बाद उन्होंने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया। जब से आमिर और गौरी ने अपने रिश्ते को ऑफिशियल किया है, तब से गौरी को अक्सर आमिर के साथ अलग-अलग इवेंट्स और मौकों पर साथ देखा जाता है। गौरी के आने से खुद को पूरा मानते हैं आमिरमई 2026 में NBT को दिए इंटरव्यू में आमिर ने गौरी के साथ अपने रिश्ते को लेकर कहा था, ‘मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे गौरी मिलीं और हमारा रिश्ता शुरू हुआ। वह बेहतरीन हैं और उनके साथ मुझे बहुत शांति मिलती है। हालांकि रीना दत्ता और किरण राव के साथ भी मेरा रिश्ता बहुत गहरा था, लेकिन चीजें आगे नहीं बढ़ पाईं। मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि गौरी मेरी जिंदगी में आईं। मुझे लगता है, अब जाकर मैं मुकम्मल हुआ हूं।’ 2002 में हुआ था पहला तलाक आमिर ने अपनी पहली शादी साल 1986 में रीना दत्ता से की थी। यह एक लव मैरिज थी जो करीब 16 सालों तक चली। दोनों के दो बच्चे, जुनैद खान और इरा खान हैं। साल 2002 में दोनों कानूनी तौर पर अलग हो गए। किरण राव से दूसरा रिश्ता फिर सहमति से अलग हुए रीना दत्ता से तलाक के बाद आमिर खान की जिंदगी में डायरेक्टर किरण राव आईं। साल 2005 में दोनों की शादी हुई। इस शादी से उनका एक बेटा आजाद है, जिसका जन्म IVF से हुआ। शादी के 15 साल बाद, जुलाई 2021 में आमिर और किरण ने तलाक की घोषणा की थी। अपने साझा बयान में उन्होंने इसे एक सोची-समझी प्लानिंग के तहत लिया गया फैसला बताया था। आमिर के मुताबिक, समय के साथ पति-पत्नी के रूप में उनके रिश्ते का तालमेल बदल गया था। हालांकि, तलाक के बाद भी दोनों के बीच सम्मान और दोस्ती बरकरार है। वे आज भी अपने बेटे की मिलकर परवरिश कर रहे हैं और पानी फाउंडेशन समेत कई फिल्मी प्रोजेक्ट्स पर साथ काम करते हैं। ------------------------------------- आमिर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें आमिर खान @61, शूटिंग के समय घड़ी नहीं देखते:मोबाइल के जमाने में लंबे समय तक पेजर यूज किया, तकनीक से ज्यादा काम पर फोकस बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान ने करीब चार दशक लंबे करियर में उन्होंने सिर्फ हिट फिल्में ही नहीं दीं, बल्कि अभिनय और कहानी कहने के तरीके को भी नई दिशा दी है। पूरी खबर पढ़ें
ये कौन हैं?सलमान खान का सवाल सुनते ही जवाब आया- जानी…, अपने अब्बा से जाकर पूछना, हम कौन हैं। यही थे राजकुमार। वो अभिनेता, जो फ्लॉप फिल्म के बाद भी अपनी फीस बढ़ा देते थे। कहते थे- ‘मेरी पिक्चर चले न चले, मैं फेल नहीं हुआ। कभी बप्पी लाहिड़ी के गहने पहनने का सरेआम मजाक बना देते थे, तो कभी गोविंदा जैसे कलाकारों की शर्ट काटकर रूमाल बना लेते थे। बेबाकी और हाजिर जवाबी ऐसी थी कि बड़े-बड़े कलाकार भी इनके सामने बोलने से कतराते थे। और हुनर और खौफ ऐसा कि रजनीकांत जैसे सुपरस्टार भी एक दौर में इनके साथ फिल्म करने से झिझकते थे। ‘हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे, लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा….’ (फिल्म-सौदागर, 1991) ‘हम तुम्हें वो मौत देंगे, जो न किसी कानून की किताब में लिखी होगी और न ही कभी किसी मुजरिम ने सोची होगी…’ (फिल्म- तिरंगा, 1992) राजकुमार के ये डायलॉग भी उनकी रौबदार पर्सनैलिटी और भारी आवाज को मद्देनजर रखते हुए ही लिखे गए थे। लेकिन अफसोस की जिस आवाज ने लाखों दिलों पर राज किया, वही आवाज आखिरी दिनों में नासूर बन गई। गले के कैंसर के चलते 1996 में उनका निधन हो गया। राजकुमार का मानना था कि मौत एक निजी मामला है, यही वजह है कि उन्होंने बीमारी और मौत राज रखने की आखिरी इच्छा जाहिर की। आज राजकुमार गुजरे 30 साल हो चुके हैं। उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर पढ़िए उनकी बेबाकी, रौबदार पर्सनैलिटी के वो किस्से जो उनके व्यक्तित्व को समझने में मदद करते हैं- किस्सा-1 पार्टी में अमिताभ बच्चन के सूट की कर दी पर्दे से तुलना 60 के दशक में राजकुमार करियर के शिखर पर थे। जितनी उनके अभिनय की तारीफ होती थी, उससे कहीं ज्यादा चर्चा उनके बड़बोलेपन की होती थी। हर कोई उनके सामने ज्यादा बाद करने से कतराते थे। एक समय ऐसा था, जब अमिताभ बच्चन फिल्मों में नए-नए आए थे। दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई। अमिताभ ने पार्टी में विदेशी थ्रीपीस सूट पहना था। राजकुमार पास आए और पूछा, सूट कहां से सिलवाया। अमिताभ को लगा वो तारीफ कर रहे हैं, तो उन्होंने झट से पता बताना चाहा, लेकिन आगे राजकुमार ने सूट को ऊपर से नीचे देखते हुए कहा- मुझे भी पर्दे सिलवाने हैं। अमिताभ बच्चन इस बेइज्जती पर कुछ कह नहीं सके और मुस्कुराकर वहां से निकल गए। किस्सा- 2 गोविंदा की तोहफे में दी हुई शर्ट काटकर बना लिया रूमाल गोविंदा ने करियर की शुरुआत में राजकुमार के साथ 1989 की फिल्म जंगबाज में काम किया था। एक दिन सेट पर राजकुमार ने गोविंदा को देखकर कहा- तुम्हारी शर्ट बहुत शानदार है। गोविंदा, राजकुमार जैसे बड़े स्टार से तारीफ मिलने से बेहद खुश हो गए। उन्होंने झट से कहा- सर, आपको ये शर्ट पसंद आ रही है, तो आप इसे रख लीजिए। गोविंदा ने तुरंत शर्ट उतारकर राजकुमार को दे दी। गोविंदा जैसे नए एक्टर के लिए ये बड़ी बात थी कि उन्होंने राजकुमार को तोहफे में शर्ट दी और राजकुमार उनकी दी हुई शर्ट कभी पहनेंगे। दो दिन बाद गोविंदा का दिल तब टूटा, जब राजकुमार ने उनकी दी हुई शर्ट काटकर रुमाल बना लिया था। ये किस्सा डायरेक्टर मेहुल कुमार ने एक इंटरव्यू में सुनाया। किस्सा- 3 मिथुन चक्रवर्ती को देखकर प्रोड्यूसर से कहा- किस स्ट्रगलिंग एक्टर को उठा लाए मिथुन चक्रवर्ती को 80 के दशक में उस दौर के स्टार राजकुमार के साथ फिल्म गोलियों के बादशाह में छोटा सा रोल मिला था। राजकुमार का रवैया नए एक्टर्स के साथ उस समय ठीक नहीं था। शूटिंग के पहले ही दिन जब मिथुन कॉस्ट्यूम पहनकर तैयार हुए, तो उन्हें देख राजकुमार ने डायरेक्टर से कहा- माना कि रोल छोटा है, लेकिन इसके लिए आप किसी स्ट्रगलिंग एक्टर को क्यों ले आए। किसी अच्छे एक्टर को लेना था, ये किसे उठा लाए। मिथुन को ये बात काफी बुरी लगी। वो सीधे राजकुमार के पास गए और कहा- जिस स्ट्रगलिंग एक्टर की आप बात कर रहे हैं, वो मैं ही हूं। मिथुन को देख राजकुमार हंस पड़े और कहा- तुम यहां कहां आ गए एक्टिंग करने। ये कोई बच्चों का खेल नहीं है। इस पर मिथुन ने कहा- जानता हूं कि ये बच्चों का खेल नहीं है। मैं 7 साल से एक्टिंग कर रहा हूं। एक दिन मैं भी बड़ा एक्टर बनूंगा। ये सुनकर राजकुमार फिर हंसे और कहा- कोई छोटा-मोटा रोल चाहिए हो तो बताना। किस्सा- 4 बप्पी लाहिड़ी के गहने देख कहा- मंगलसूत्र भी पहन लेते लीजेंड्री सिंगर बप्पी लाहिड़ी सोने के भारी गहने पहनने के लिए भी मशहूर थे। एक दिन एक पार्टी में राजकुमार की बप्पी दा पर नजर पड़ गई। जब बप्पी उनसे मिलने करीब गए, तो राजकुमार ने ऊपर से नीचे देखकर कहा- ''वाह, शानदार! एक से एक गहने पहने हो, सिर्फ मंगलसूत्र की कमी रह गई है, वो भी पहन लेते। किस्सा- 5 सलमान पहचान नहीं सके तो कहा- अपने अब्बा से पूछो हम कौन हैं 1989 में सलमान खान की फिल्म मैंने प्यार किया सुपरहिट रही। प्रोड्यूसर सूरज बड़जात्या ने एक पार्टी रखी, जिसमें राजकुमार भी पहुंचे। बड़जात्या के लिए ये फक्र की बात थी। वो तुरंत सलमान खान को राजकुमार से मिलवाने ले गए, लेकिन कामयाबी की खुशी में सलमान उन्हें पहचान नहीं सके। सलमान ने ठंडी प्रतिक्रिया दी और फिर दबे शब्दों में सूरज बड़जात्या से पूछा- ये कौन हैं। ये बात राजकुमार ने सुन ली और खुद जवाब देकर कहा- घर जाकर अपने अब्बा से जाकर पूछना, हम कौन हैं, फिर पता चलेगा। पास खड़े सूरज बड़जात्या ये सुनते ही सलमान को एक किनारे ले गए और राजकुमार के बारे में बताया। सलमान को तुरंत गलती का एहसास हुआ और उन्होंने दोबारा राजकुमार के पास आकर माफी मांगी। किस्सा- 6 कॉमेडियन को ज्यादा डायलॉग मिले तो भड़क गए राजकुमार, खुद बोल डाले सारे डायलॉग 1971 में रिलीज हुई फिल्म मर्यादा में राजकुमार को एक दयालु व्यक्ति की भूमिका मिली। फिल्म में दिखाया जाना था कि उन्होंने नौकर की मां के इलाज के लिए पैसे दिए और मां ठीक हो गईं। नौकर का किरदार कॉमेडियन मोहन चोटी को दिया गया था। सीन के मुताबिक मोहन चोटी को कहना था, मालिक आपने मुझे मां के इलाज के लिए पैसे दिए थे, मां बिल्कुल ठीक हो गई है। मैं आपका ये एहसान कैसे उतारूंगा। मालिक क्या मैं आपके नहाने के लिए पानी गर्म कर दूं। सेट पर रिहर्सल शुरू हुई। मोहन चोटी ने जैसे ही ये डायलॉग कहा, राजकुमार भड़क गए और कहा- अब हमारे ऐसे दिन आ गए कि ये मोहन चोटी बोलेगा और हम सुनेंगे। कुछ देर बाद जैसे ही एक्शन बोला गया, मोहन चोटी के डायलॉग बोलने से पहले ही राजकुमार ने खुद पूरे डायलॉग बदल दिए और कहा, मोहन इधर आओ, हमने तुम्हारी मां के इलाज के लिए रुपया दिया था, सुना है तुम्हारी मां बिल्कुल ठीक हो गई। अरे भाई, एहसान मानने की बात नहीं है, ये हमारा फर्ज था। अब खड़े-खड़े मुंह क्या देख रहे हो, जाओ मेरे नहाने के लिए पानी गर्म करो। किस्सा- 7 साधना के घर पर खाने से किया इनकार, कहा- खाना खाते हैं, लेकिन कुछ भी नहीं खा लेते राजकुमार ने 70 के दशक में फिल्म उल्फत में काम किया, जिसमें उनकी को-स्टार वहीदा रहमान और साधना थीं। एक दिन शूटिंग खत्म कर साधना ने राजकुमार और दूसरे एक्टर्स को डिनर पर इनवाइट किया। राजकुमार पहुंचे और खाना निकला। सभी खाना खा रहे थे, लेकिन राजकुमार खामोश बैठे थे। साधना ने उनसे कहा- राज साहब खाना खाइए। राजकुमार ने कहा- नहीं, आप खाइए। साधना ने फिर कहा- कुछ तो खाइए। थोड़ा सा ही खा लीजिए। राजकुमार ने फिर कहा- नहीं आप लोग ही खाइए। साधना ने झिझकते हुए कहा- आप खाना तो खाते ही होंगे। इस पर राजकुमार ने अपने स्टाइल में कहा- जानी…, खाना तो हम खाते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की कहीं भी कुछ भी खा लें। किस्सा- 8 लड़की को छेड़ने वाले शख्स की इतना पीटा, हो गई मौत 8 अक्टूबर 1926 को राजकुमार का जन्म ब्रिटिश इंडिया के बलूचिस्तान में हुआ। उनका असली नाम कुलभूषण पंडित था। 1940 में राजकुमार की बॉम्बे पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति हुई। कद-काठी और गौरी रंगत देख, दोस्त अक्सर उन्हें फिल्मों में जाने का सुझाव देते थे। इसी समय उन्हें राज कपूर ने फिल्म आवारा ऑफर की, जो राजकुमार ने ठुकरा दी। एक दिन छुट्टी होने पर राजकुमार एक दोस्त और उसकी गर्लफ्रेंड के साथ जुहू में सैर कर रहे थे। तभी कुछ आवारा लड़कों ने दोस्त की गर्लफ्रेंड को छेड़ दिया। इस बात से राजकुमार आगबबूला हो गए और एक लड़के की इस कदर पिटाई की कि उसकी वहीं मौत हो गई। राजकुमार पर हत्या के आरोप लगे। रजा मुराद के पिता राजकुमार के दोस्त थे, तो वो अक्सर हर सुनवाई में साथ जाते थे। लंबे समय बाद राजकुमार को केस से बरी कर दिया गया। कुछ समय बाद दोस्त की जिद पर राजकुमार ने एक फोटोशूट करवाया, जिसकी बदौलत उन्हें 1952 की फिल्म रंगीली मिल गई। ये फिल्म खास नहीं चली, लेकिन राजकुमार को लगातार फिल्में मिलने लगीं। 1957 की फिल्म मदर इंडिया से राजकुमार को पहचान मिली और आगे वक्त, ऊंचे लोग, हमराज, नील कमल हीर रांझा जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टार बना दिया। किस्सा-9 फिल्म ठुकराने पर राज कपूर ने सरेआम कहा-हत्यारा, जवाब से बंद की बोलती समय के साथ राज कुमार को बड़ी-बड़ी फिल्में मिलने लगीं, लेकिन सालों पहले आवारा ठुकराने पर राज कपूर को हमेशा वो खटकते रहे। एक ही इंडस्ट्री की दो अहम शख्सियत होने के बावजूद दोनों की कभी बात नहीं हुई। सालों बाद प्रेम चोपड़ा की शादी की पार्टी में दोनों आमना-सामना हुआ। राज कपूर को पुराने जख्म याद आ गए। पार्टी में राज कपूर ने खूब शराब पी और नशे में राजकुमार को खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दिया। बहस में बात इतनी बढ़ गई कि राज कपूर ने चिल्लाते हुए राज कुमार से कहा- तुम हत्यारे हो। राजकुमार ने जवाब में कहा- ‘बेशक मैं हत्यारा हूं, लेकिन मैं आपके पास काम मांगने नहीं आया था, बल्कि आप मेरे पास फिल्म का ऑफर लेकर आए थे।’ किस्सा- 10 दिलीप कुमार ने थप्पड़ मारा तो 33 साल नहीं की बात इस फिल्म के ठीक एक साल बाद उनकी फिल्म पैगाम रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने दिलीप कुमार के बड़े भाई का रोल किया। एक सीन के लिए दिलीप कुमार को उन्हें थप्पड़ मारना था। एक्शन सुनते ही, दिलीप कुमार ने पूरी ताकत से राजकुमार के गाल पर थप्पड़ मारा, जो उन्हें तेजी से लगा। राजकुमार, जिनके सामने लोग बोलने से भी कतराते थे, थप्पड़ पड़ते ही हिल गए। उन्होंने मान लिया कि दिलीप कुमार ने जानबूझकर ऐसा किया और दिलीप कुमार से दोस्ती खत्म कर दी। दोनों की 33 सालों तक बात बंद रही। दोनों ने इंडस्ट्री में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी। 33 साल बाद सुभाष घई ने दोनों की सुलह करवाई। दरअसल, फिल्म सौदागर की स्क्रिप्ट जब सुभाष घई ने दिलीप कुमार और राजकुमार के मुताबिक ही लिखी थी। जब दिलीप कुमार को फिल्म के लिए कॉल किया गया, तो उन्हें कहानी पसंद आई। लेकिन उन्होंने फिल्म करने की शर्त रखते हुए सुभाष घई से कहा था- शूटिंग के दौरान राजकुमार को संभालने की जिम्मेदारी आपको ही लेनी पड़ेगी। फिर जब सुभाष ने इसकी कहानी राजकुमार को सुनाई। जब ये बात उन्हें पता चली कि दिलीप कुमार इस फिल्म का हिस्सा हैं, तो वो बहुत खुश हुए। उन्होंने ये भी कहा- जानी, मैं इस इंडस्ट्री में अपने बाद किसी को बेहतर एक्टर मानता हूं, तो वो सिर्फ दिलीप कुमार ही हैं। किस्सा- 11 फिरोज खान ने कहा- आप मुझे मत सिखाइए, अगले दिन कहा- अकड़ बरकरार रखा 1965 की फिल्म ऊंचे लोग में राजकुमार के साथ फिरोज खान ने काम किया था। उस वक्त फिरोज इंडस्ट्री में नए आए थे। शूटिंग के पहले दिन राजकुमार उनके पास गए और कहा- देखो ये तुम्हारी पहली फिल्म है। फिल्म को बहुत परफेक्शन के साथ करना। हालांकि, मैं बीच-बीच में तुम्हें सिखाता रहूंगा। अभी उनकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि फिरोज खान बोल पड़े- आप मुझे मत सिखाइए। मैं अपना काम अच्छे से कर लूंगा। सेट पर मौजूद लोग ये देखकर डर गए कि कहीं राजकुमार फिल्म छोड़कर ना चले जाएं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। अगले दिन खुद राजकुमार फिरोज खान के पास गए और कहा- ये अकड़ तुम्हारी अच्छी है, इसे हमेशा बरकरार रखना। किस्सा- 12 रजनीकांत, नसीरुद्दीन शाह ने कर दिया साथ काम करने से इनकार राजकुमार की रौबदार पर्सनैलिटी के चलते कई बड़े-बड़े एक्टर उनके साथ काम करने से कतराते थे। यही वजह थी कि जब रजनीकांत को राजकुमार के साथ फिल्म तिरंगा मिली, तो उन्होंने डायरेक्टर मेहुल कुमार को कॉल कर रहा, मेहुल जी, मुझे एक ही प्रॉब्लम है- राज साहब के साथ कैसे काम कर पाऊंगा। कुछ सेट पर टेंशन हो गई, तब क्या करूंगा। मुझे माफ कर दो।' जब मेहुल कुमार ने नसीरुद्दीन शाह को फिल्म ऑफर की तो जवाब मिला- मेहुल भाई आपके साथ मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन राज साहब के साथ तो काम करने से रहा। आखिरकार ये फिल्म नाना पाटेकर को दी गई। नाना पाटेकर ने फिल्म करने की शर्त रखी- राज साहब सेट पर इंटरफेयर करेंगे, तब मैं सेट छोड़कर चला जाऊंगा। एक दिन राजकुमार ने मेहुल कुमार को कॉल कर पूछा- ये फिल्म कौन कर रहा है। जवाब मिला- नाना पाटेकर। इस पर राजकुमार ने कहा- 'अरे मेहुल! उसका दिमाग बहुत खराब रहता है,। सुना है कि वह सेट पर गाली-गलौज कर देता है।' इस कास्टिंग पर फिल्म इंडस्ट्री के हर शख्स ने कहा कि मेहुल कुमार कभी ये फिल्म पूरी नहीं कर सकेंगे, क्योंकि दोनों ही एक्टर गुस्से के तेज हैं। लेकिन सेट पर दोनों ने बेहतरीन ढंग से तालमेल मिलाया और फिल्म 6 महीने में बनकर तैयार हो गई। किस्सा- 13 स्टार बन चुकीं जीनत अमान से कहा- फिल्मों में काम क्यों नहीं करतीं राजकुमार, बेबाकी के अलावा अपने ह्यूमर के लिए भी मशहूर थे। 70 के दशक में हरे रामा हरे कृष्णा जैसी बेहतरीन फिल्में करते हुए जीनत अमान स्टार बन चुकी थीं। एक दिन उनकी मुलाकात राजकुमार से हुई। राजकुमार उनके पास पहुंचे और स्टाइल मारते हुए कहा, जीनत, तुम बहुत सुंदर हो। तुम फिल्मों में काम करने की कोशिश क्यों नहीं करतीं। ये सुनते ही वहां मौजूद लोग हंस पड़े। किस्सा- 14 धर्मेंद्र ने कॉलर पकड़ी, तो फिल्म अधूरी छोड़कर सेट से चले गए फिल्म काजल की शूटिंग के पहले दिन राजकुमार ने धर्मेंद्र को देखकर कहा- जानी, फिल्म की शूटिंग के लिए हीरो चाहिए था, कोई पहलवान नहीं। ये सुनकर धर्मेंद्र बहुत गुस्सा हुए, लेकिन उन्होंने बहुत अदब के साथ कहा कि वो उनका मजाक ना बनाएं। फिर भी राजकुमार नहीं माने तो धर्मेंद्र ने उनकी कॉलर पकड़ ली। ये देखकर सेट पर मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। बाद में ये फिल्म राजकुमार के बिना ही पूरी हुई। किस्सा- 15 पालतु कुत्ते ने जवाब नहीं दिया, तो रामानंद सागर से कहा- कुत्ता नहीं माना तो मैं रोल कैसे करूं 1968 में रामानंद सागर फिल्म आंखें बना रहे थे। वो स्क्रिप्ट लेकर राजकुमार के पास पहुंचे। राजकुमार का मूड उस दिन ठीक नहीं था। उन्होंने अपने पालतु कुत्ते को पास बुलाया और पूछा- क्या तुम इस फिल्म में काम करोगे। कुत्ता शांत खड़ा रहा। इस पर राजकुमार ने रामानंद सागर से कहा- जब मेरा कुत्ता भी इस रोल के लिए तैयार नहीं है, तो मैं भला इसे कैसे कर सकता हूं। रामानंद सागर नाराज होकर वहां से निकल गए और फिर धर्मेंद्र को कास्ट कर लिया।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्ट्रेस उर्फी जावेद हाल ही में असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर पहुंचीं। इस दौरान उर्फी अपने सामान्य वेस्टर्न पहनावे से अलग पूरी तरह से पारंपरिक लुक में नजर आईं। उन्होंने मंदिर में दर्शन की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की हैं। तस्वीरों में उर्फी पीले रंग का सूट-सलवार पहने और सिर पर दुपट्टा रखे हुए दिख रही हैं। उनके माथे पर मंदिर का सिंदूर और तिलक भी लगा हुआ है। कुछ समय पहले उनके धर्म परिवर्तन की अफवाह पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई थी। पारंपरिक कपड़ों में किए देवी के दर्शनउर्फी जावेद ने अपने कामाख्या देवी मंदिर दौरे की कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट की हैं। मंदिर परिसर में उर्फी ने सादगी से सिर को दुपट्टे से ढक रखा था। उन्होंने मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद माथे पर सिंदूर का तिलक भी लगाया। अपनी पोस्ट के कैप्शन में उर्फी ने लिखा, 'गुवाहाटी में कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए।' आमतौर पर अपने अलग-अलग आउटफिट्स के लिए चर्चा में रहने वाली उर्फी का यह शांत और धार्मिक रूप पहली बार सामने आया है। खुद को नास्तिक बता चुकीं उर्फी मंदिर के इस दौरे के बाद उर्फी के पुराने बयानों की चर्चा फिर शुरू हो गई है। उर्फी जावेद ने अपने शुरुआती इंटरव्यूज में कई बार कहा था कि वे किसी भी धर्म या रिलिजन में विश्वास नहीं रखती हैं। उन्होंने खुद को नास्तिक बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि वे एक मुस्लिम परिवार में पैदा जरूर हुई हैं, लेकिन वे इस्लाम को नहीं मानती हैं और न ही किसी अन्य धर्म का पालन करती हैं। ऐसे में उनके अचानक मंदिर जाकर पूजा करने पर उनके पुराने बयान चर्चा में आ गए हैं। धर्म परिवर्तन के दावों पर जताई थी नाराजगीहाल ही में उर्फी जावेद के धर्म बदलने को लेकर सोशल मीडिया पर एक विवाद खड़ा हुआ था। एक जर्नलिस्ट ने दावा किया था कि उर्फी ने अपना धर्म बदलकर हिंदू धर्म अपना लिया है और उन्होंने अपना नया नाम 'रीता भारद्वाज' रख लिया है। इस दावे पर उर्फी जावेद ने कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने उस जर्नलिस्ट को फटकार लगाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि इस तरह की झूठी और फेक न्यूज फैलाने वालों को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने साफ किया था कि उन्होंने कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया है। रियलिटी शोज और करियर का सफरउर्फी जावेद के करियर की बात करें तो वे हाल ही में रियलिटी शो 'लॉक अप सीजन 2' के एक एपिसोड में बतौर गेस्ट नजर आई थीं। इससे पहले वे मशहूर यूथ रियलिटी शो 'स्प्लिट्सविला' का भी हिस्सा रह चुकी हैं, जहां उन्होंने बतौर होस्ट काम किया था। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उनकी निजी जिंदगी और संघर्ष पर आधारित एक रियलिटी शो 'फॉलो कर लो यार' भी रिलीज हो चुका है। उर्फी टीवी सीरियल्स जैसे 'बड़े भैया की दुल्हनिया' और 'कसौटी जिंदगी की' में भी काम कर चुकी हैं।
पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल मर्डर केस में फिल्म डायरेक्टर संजय गुप्ता सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। संजय गुप्ता ने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर कर मुख्य आरोपी सिया गोयल का बचाव किया है। उन्होंने सिया गोयल के मामले की तुलना साल 2020 के रिया चक्रवर्ती मीडिया ट्रायल से की है। डायरेक्टर ने लिखा कि सबूत आने से पहले टीवी पर मुकदमा चलाना ठीक नहीं है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने संजय गुप्ता की कड़ी आलोचना की है और उनके इस बयान को बेहद बेतुका बताया है। संजय गुप्ता ने सोशल मीडिया पर क्या लिखाफिल्म डायरेक्टर संजय गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट लिखकर सिया गोयल का एक तरह से बचाव किया। उन्होंने लिखा, मैं किसी पर उंगली नहीं उठा रहा और न ही किसी की साइड ले रहा हूं। मैं बस इतना कह रहा हूं कि क्या हम सिया के साथ वो सब करना बंद कर सकते हैं जो हमने रिया चक्रवर्ती के साथ किया था? हम सबने वो तमाशा देखा था। टीवी पर ही मुकदमा चला दिया गया और सबूत आने से पहले ही फैसला सुना दिया गया। इसके बाद भी हम लोग कुछ नहीं सीखते हैं। लोगों ने डायरेक्टर को फटकार लगाईसंजय गुप्ता का यह बयान सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद नहीं आया। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, कभी-कभी आप बहस में सबसे बेतुका पक्ष चुन लेते हैं। इतनी कोशिश मत करिए सर, किसकी नजरों में ऊंचा बनना है? लोग सिया गोयल का बचाव करने पर डायरेक्टर से बेहद नाराज हुए। क्या था रिया चक्रवर्ती का पूरा विवादसाल 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उनकी मंगेतर और एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती विवादों में आई थीं। सुशांत केस की जांच के दौरान रिया और उनके भाई को नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय रिया चक्रवर्ती के खिलाफ सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर बड़ा मीडिया ट्रायल चला था। कोर्ट का फैसला आने से पहले ही लोगों ने उन्हें दोषी मान लिया था। लगभग 5 साल की कानूनी लड़ाई के बाद साल 2025 में कोर्ट से रिया को राहत मिली थी क्योंकि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिल सका था। मंगेतर ने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर की हत्या पुलिस जांच के मुताबिक, 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश उनकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर रची थी। केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी और दोनों इस साल नवंबर में शादी करने वाले थे। पुलिस ने सिया और चेतन दोनों को गिरफ्तार कर लिया है और फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। पहली कोशिश में झाड़ी पकड़कर बचे थे केतन पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने केतन को मारने की पहली कोशिश 14 जून को की थी। सिया उस दिन केतन को लोहागढ़ किले पर लेकर गई थी और वहां उसे घाटी में धक्का दे दिया था। हालांकि, केतन एक झाड़ी को पकड़कर लटक गए और उनकी जान बच गई। उस समय सिया ने बात को घुमाने के लिए सांप दिखने का नाटक किया और केतन का ध्यान भटका दिया। इसके बाद वह केतन को भरोसा दिलाकर वापस घर ले आई। दूसरी बार में किले से नीचे धकेलापहली कोशिश नाकाम होने के बाद सिया ने कुछ दिनों बाद दोबारा केतन को किले पर चलने के लिए राजी किया। इस बार वहां सिया का बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी भी पहले से मौजूद था। जब केतन वहां पहुंचे, तो सिया और चेतन ने पीछे से आकर उन्हें जोरदार धक्का दे दिया। गहरी घाटी में गिरने के कारण केतन अग्रवाल की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है। तीन सुराग; सिया का झूठ, CCTV फुटेज, 2004 बार कॉल पहला सुरागः सिया के हावभाव से केतन की बहन को शक हुआ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 जून को सिया केतन के घर पहुंची। केतन की बहन ने पूछा- केतन कैसे गिरा? इस सवाल पर सिया के हावभाव अचानक बदल गए। वो ठीक से जवाब नहीं दे पा रही थी। केतन की बहन को शक हुआ और उसने पिता विशाल अग्रवाल से कहा- भाई अच्छा ट्रैकर है, उसकी मौत एक्सीडेंट नहीं हो सकती। सिया ठीक से जवाब नहीं दे रही। विशाल को भी पहले से शक था कि कुछ तो ठीक नहीं है। इसके बाद विशाल दोबारा पुणे पुलिस से मिले और सिया पर शक जताया। उन्होंने ये भी कहा कि सिया किसी लड़के से बात करती है, उसकी भी जांच की जानी चाहिए। दूसरा सुरागः किले के CCTV फुटेज में गर्मी में हुडी पहने लड़का दिखा पुलिस ने लोहगढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज निकाले। इनमें 18 जून को एक शख्स वहां पहुंचे केतन और सिया के आसपास कई बार दिखा। गर्मी का मौसम, ऊपर से किले की चढ़ाई, उसके बावजूद किले की सीढ़ियों के फुटेज में दिखा कि वो हुडी पहने था। पुलिस के मुताबिक, लड़का अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहा था। तीसरा सुरागः सिया की एक नंबर पर 2000 से ज्यादा कॉल्स पुलिस ने सिया के कॉल-रिकॉर्ड खंगाले। इनमें एक मोबाइल नंबर पर जनवरी से केतन की हत्या वाले दिन सुबह 7 बजे तक सिया ने 2004 कॉल में करीब 338 घंटे की बातचीत की थी यानी दोनों रोज करीब 11 कॉल्स में 2 घंटे बात करते थे। ये नंबर पुणे के ही एक और व्यापारी परिवार के लड़के चेतन चौधरी का था। चेतन का घर पुणे के उसी इलाके में था, जहां सिया के पिता का ऑफिस है। मर्डर की 2 वजह; दावा- सिया शादी के लिए तैयार नहीं थी सिया शादी के लिए तैयार नहीं थी: पुलिस को शक है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी और परिवार के दबाव में केतन से शादी करने जा रही थी। इसी पहलू को पुलिस हत्या की संभावित वजहों में से एक मानकर जांच कर रही है। बदनामी के कारण प्रेमी के साथ भागी नहीं: प्रेमी चेतन ने बताया कि सिया सगाई तोड़कर भागने के पक्ष में नहीं थी। उसे लगता था कि इससे उसके परिवार की बदनामी होगी। पुणे के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 22 जून को सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। मर्डर से पहले सिया का मंगेतर के साथ डांस, रोमांस; 3 तस्वीरें केतन के मर्डर करने से पहले सिया ने सोशल मीडिया अकाउंट पर केतन अग्रवाल (26) के साथ कई रोमांटिक पोस्ट किए थे। कभी प्रपोजल की तस्वीरें, कभी फूल देकर प्यार जताने वाले पल, तो कभी डांस और गले मिलने के वीडियो। दोनों की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा थीं। इस साल फरवरी में सगाई के बाद सिया ने इंस्टाग्राम पर एक केक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- मेरे दिल को उसका घर मिले एक महीना पूरा हुआ। 19 मई को सिया ने अपने जन्मदिन के काउंटडाउन की स्टोरी पोस्ट की, जिसमें दोनों एक रोमांटिक गाने पर डांस करते नजर आ रहे थे। एक पोस्ट में दोनों कार के अंदर बैठकर गले लगते दिखे। केतन ने अपने कार के अंदर और बाहर फूलों की सजावट की थी।
टीवी सीरियल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में तारक मेहता का किरदार निभा चुके शैलेश लोढ़ा की बेटी स्वरा की शादी हो गई है। यह शादी मुंबई के बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में निजी तरीके से हुई। शादी के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद यह जानकारी मिली है। इन वीडियो में शैलेश लोढ़ा अपनी बेटी की शादी के फंक्शन में गाते और डांस करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स इन वीडियो को देखने के बाद शैलेश से जेठालाल के बारे में पूछ रहे हैं। बेटी की शादी में शैलेश लोढ़ा ने किया डांसस्वरा की शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें शैलेश लोढ़ा लाइव बैंड के साथ गाना गाते और मनोरंजन करते दिख रहे हैं। एक दूसरे वीडियो में वे परिवार के सदस्यों के साथ डांस करते नजर आए। शादी के इस फंक्शन में कव्वाली गायक कैफी और हमजा शबरी ने परफॉर्म किया था। उन्होंने ही सोशल मीडिया पर इस शादी के वीडियो शेयर किए हैं। शादी पूरी तरह से प्राइवेट रखी गई थी, जिसमें सिर्फ करीबी लोग शामिल हुए। पेशे से लेखिका हैं स्वरा लोढ़ाशैलेश लोढ़ा की बेटी स्वरा लाइमलाइट और एक्टिंग की दुनिया से दूर रहती हैं। वे पेशे से एक लेखिका हैं। स्वरा ने अपनी मां डॉ. स्वाति लोढ़ा के साथ मिलकर एक किताब भी लिखी है। शैलेश की पत्नी डॉ. स्वाति लोढ़ा भी मैनेजमेंट गुरु और लेखिका हैं। यूजर्स ने पूछा- जेठालाल शादी में नहीं आए क्यासोशल मीडिया पर शादी के वीडियो सामने आने के बाद फैंस शैलेश लोढ़ा की तारीफ कर रहे हैं। वहीं कई यूजर्स ने कमेंट बॉक्स में 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के मुख्य किरदार जेठालाल (दिलीप जोशी) के बारे में पूछना शुरू कर दिया। शो में जेठालाल और तारक मेहता की दोस्ती को काफी पसंद किया जाता था। इसलिए लोग कमेंट्स में पूछ रहे हैं कि क्या जेठालाल इस शादी में शामिल नहीं हुए। 14 साल बाद इस वजह से छोड़ा था शोशैलेश लोढ़ा ने साल 2022 में 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' शो छोड़ दिया था। वे 14 साल तक इस शो से जुड़े रहे। एक इंटरव्यू में शैलेश ने शो छोड़ने की वजह का खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि प्रोड्यूसर असित मोदी ने उनसे गलत तरीके से बात की थी। जब शैलेश सब टीवी के एक स्टैंड अप शो 'गुड नाइट इंडिया' का हिस्सा बने, तो असित मोदी ने उन्हें फोन किया और असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया। यह बात उनसे बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने शो छोड़ दिया। बाद में शो में उनकी जगह सचिन श्रॉफ को लिया गया।
एक्टर और आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण बुधवार को साउथ फिल्ममेकर मेहर रमेश की बेटी के रिसेप्शन में पहुंचे थे। पवन को देखते ही फैंस की भीड़ लग गई, जिस समय उनकी सिक्योरिटी टीम को भी एक्टर की सुरक्षा के लिए जद्दोजहद करते देखा गया। जैसे ही पवन मंच पर आए, भारी भीड़ जमा होने से रिसेप्शन में पहुंचे गेस्ट के साथ ही धक्का-मुक्की हो गई, जिससे कुछ मेहमान परेशान दिखे। पवन के अलावा साउथ इंडस्ट्री के कई और लोग भी इस शादी में पहुंचे हैं। पवन कल्याण पत्नी पूर्व रशियन मॉडल पत्नी अन्ना लेझनेवा के साथ रिसेप्शन में पहुंचे। उनकी एंट्री के साथ ही वहां मौजूद सभी कैमरामैन उनकी तस्वीरें क्लिक करने आगे बढ़े। इस दौरान पवन कल्याण ने इशारा करते हुए तस्वीरें न लेने के लिए टोका। इसके बाद वो मंच पर पहुंचे, जहां भारी भीड़ जमा हो गई। मंच पर पवन और उनकी पत्नी ने फिल्ममेकर की बेटी को तोहफे दिए। पवन कल्याण को मंच से उतरता देख कई लोग तस्वीर क्लिक करवाने और करने के लिए उतावले हो गए, जिस समय मंच पर मौजूद मेहमान ही धक्का-मुक्की का शिकार हो गए। ये सेलेब्स भी हुए रिसेप्शन में शामिल-
बिग बॉस 19 में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस अश्नूर कौर के लग्जरी घर में मुंबई की बारिश का बुरा असर पड़ा है। एक्ट्रेस ने हाल ही में वीडियो जारी कर बताया है कि उनके घर के सामान का काफी नुकसान हुआ है। मुंबई की बारिश का असर सेलेब्स पर भी पड़ रहा है। एक्टर रणदीप हुड्डा ने ट्रैफिक से बचने के लिए मुंह छिपाकर मेट्रो में ट्रेवल किया है। वहीं तमन्ना भाटिया बारिश के मजे उठाती दिखी हैं। अश्नूर कौर ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उनके परिवार के लगभग सभी सदस्य और हाउसहेल्प मिलकर घर से पानी निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं। इस वीडियो के साथ अश्नूर ने लिखा है, “मुझे एक इवेंट के लिए निकलना था, और तभी घर पर ये हो गया। मेरे ऊपर लगी हर नजर खुशियों, सफलता और तरक्की में बदल जाए।” एक्टर रणदीप हुड्डा ने मेट्रो में किया सफर मुंबई मेट्रो से रणदीप हुड्डा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो मास्क से चेहरा छिपाए हुए मेट्रो में सफर करते दिखे हैं। उनके साथ टीम के कुछ सदस्य भी शामिल थे। मास्क की वजह से एक्टर आम लोगों की तरह दिख रहे थे। आसपास के लोग भी उन्हें पहचान नहीं सके। तमन्ना भाटिया बारिश में कंपकंपाती दिखीं एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया ने हाल ही में ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो जारी किया है, जिसमें वो घर की बालकनी में बारिश में भीगती दिखीं। एक्ट्रेस थोड़ी देर में ही कंपकंपाने लगीं। वीडियो में एक्ट्रेस ने कहा- मुंबई में शिवरिंग सिर्फ ऐसे ही हो सकती है। वीडियो के साथ कैप्शन में तमन्ना लिखती हैं, मुझे अभी भी ठंड लग रही है। तमन्ना की पोस्ट पर रवीना टंडन की बेटी और उनकी करीबी दोस्त राशा ने लिखा है, तुमने ये मेरे बिना क्यों किया। सिंगर नेहा कक्कड़ को भी मुंबई की बारिश में लंच डेट पर पति रोहनप्रीत के साथ स्पॉट किया गया है। रोहनप्रीत नेहा के लिए छाता पकड़े दिखे हैं। बता दें कि हर साल की तरह इस साल भी मानसून की शुरुआत में ही मुंबई की कई सड़कों पर पानी भर चुका है। कई जगह ट्रैफिक व्यवस्ता पर असर पड़ा है। वहीं नवी मुंबई में सड़क में भरे पानी में करंट तक फैल गया है।

