दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर को-पायलट ने हमला कर दिया। फ्लाइट क्रैश होने की कंडीशन में थी, लेकिन अमित ने जख्मी हालत में भी सूझबूझ से सभी की जान बचाई। शुक्रवार को सलमान खान ने देर रात पायलट स्मित मच्छर की सराहना की है। सलमान खान ने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट से लिखा है, ‘कमाल कर दिया पायलट जी, हम सब आपको सैल्यूट करते हैं। आपके साथ उड़ान भरने में गर्व महसूस होगा। वेल डन ब्रो कैप्टन स्मित मच्छर।’ रणवीर सिंह ने भी सोशल मीडिया पर कैप्टन स्मित की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है- 'कैप्टन बहादुर।' अनिल कपूर ने लिखा- ये असाधारण है अनिल कपूर ने एक लंबी-चौड़ी पोस्ट शेयर कर घटना की जानकारी मिलने के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, जब यह घटना हुई, तब जलाल ने मुझे बताया कि वह स्मित को फ्लाइंग स्कूल के दिनों से जानते हैं। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से जानते थे कि किसी मुश्किल परिस्थिति में वे स्मित को अपने साथ रखना चाहेंगे। इस बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि स्मित में शुरू से ही कितना साहस रहा होगा, जिसे उनके आसपास के लोगों ने इतनी कम उम्र में ही पहचान लिया था। आगे अनिल ने लिखा- ‘उस मुश्किल घड़ी में स्मित ने जो किया, वह वाकई असाधारण था। जब इंसान खुद किसी बेहद डरावनी परिस्थिति का सामना कर रहा हो, तब भी मजबूत बने रहना और दूसरों को खुद से पहले रखना, इसके लिए असाधारण हिम्मत चाहिए। स्मित को मेरा दिल से सम्मान और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना।’ सनी देओल ने लिखा- बड़ा हादसा टालने में अहम भूमिका निभाई एक्टर सनी देओल ने कैप्टन स्मित की तारीफ में लिखा है, 'कैप्टन स्मित मच्छर ने उस वक्त असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। आपने एक बड़े हादसे को टालने और कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। आपके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। सलाम।' सुनील शेट्टी ने कैप्टन स्मित की तारीफ में लिखा, ‘बहादुरी अक्सर खामोश होती है, लेकिन उसे कभी भुलाया नहीं जाता। कैप्टन स्मित मच्छर और उस मुश्किल घड़ी में आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभालने वाले हर शख्स ने अद्भुत धैर्य, सूझबूझ और हौसले का परिचय दिया। दिल से सम्मान। यह सच्ची सलामी है।’ इन सेलेब्स ने भी की सराहना- जावेद अख्तर बोले- महावीर चक्र के हकदार हैं स्मित जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी अतुलनीय है। वे बिना किसी शक के महावीर चक्र जैसे बड़े सम्मान के हकदार हैं। जावेद अख्तर के अलावा शमिता शेट्टी और रिद्धिमा कपूर साहनी ने भी कैप्टन स्मित के जज्बे की सराहना की है। परेश रावल ने दिया 'क्रांतिवीर' फिल्म का रेफरेंस अभिनेता परेश रावल ने कैप्टन के सरनेम 'मच्छार' पर चुटकी लेते हुए 1994 में आई अपनी मशहूर फिल्म 'क्रांतिवीर' का जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें नाना पाटेकर का वह मशहूर डायलॉग याद आ रहा है- 'एक मच्छर आदमी को...!' वहीं, एक्ट्रेस रवीना टंडन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कई पोस्ट शेयर करके कैप्टन स्मित को असली हीरो बताया। रवि किशन, आर माधवन और विजय देवरकोंडा की प्रतिक्रिया अभिनेता और सांसद रवि किशन ने लिखा कि कैप्टन स्मित मच्छार कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस की मिसाल हैं। खुद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी दूसरों की रक्षा करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। साउथ स्टार विजय देवरकोंडा और बॉलीवुड एक्टर आर माधवन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को शेयर किया। माधवन ने लिखा कि वे देश के इस सच्चे हीरो के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। वहीं विजय देवरकोंडा ने लिखा कि कैप्टन ने जो किया वह अविश्वसनीय है। क्या हुआ था फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में फ्लाईदुबई का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान 174 यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव जा रहा था। जब प्लेन सऊदी अरब के ऊपर उड़ रहा था, तभी कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया। बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अंदर आकर हमलावर को दबोच लिया। इसके बाद प्लेन को तबूक में सेफ लैंड कराया गया। PM मोदी ने भी की वीडियो कॉल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की और हाल-चाल जाना। पीएम ने X पर लिखा कि कैप्टन स्मित एक हीरो हैं। गंभीर खतरे और चोट के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस दिखाया। उनकी बहादुरी से सैकड़ों जिंदगियां बचीं और एक बड़ा हादसा टल गया। पूरे भारत को कैप्टन स्मित पर गर्व है। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम किया। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कॉमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है। इजराइल और गुजरात सरकार सम्मानित करेगी कैप्टन स्मित मच्छर को इजराइल सम्मानित करेगा। भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजार ने इंडिया टुडे से बातचीत में यह जानकारी दी। वहीं, गुजरात सरकार ने भी कैप्टन स्मित को ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ से सम्मानित करने का ऐलान किया है। ट्रम्प और नेतन्याहू ने हीरो बताया था इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की तारीफ की और उन्हें सच्चा हीरो बताया। नेतन्याहू ने कहा कि मच्छर की बहादुरी से विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी कैप्टन मच्छर को हीरो बताया और उनकी बहादुरी की सराहना की।
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर को-पायलट ने हमला कर दिया। फ्लाइट क्रैश होने की कंडीशन में थी, लेकिन अमित ने जख्मी हालत में भी सूझबूझ से सभी की जान बचाई। शुक्रवार को सलमान खान ने देर रात पायलट स्मित मच्छर की सराहना की है। सलमान खान ने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट से लिखा है, ‘कमाल कर दिया पायलट जी, हम सब आपको सैल्यूट करते हैं। आपके साथ उड़ान भरने में गर्व महसूस होगा। वेल डन ब्रो कैप्टन स्मित मच्छर।’ इन सेलेब्स ने भी की सराहना- जावेद अख्तर बोले- महावीर चक्र के हकदार हैं स्मित जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी अतुलनीय है। वे बिना किसी शक के महावीर चक्र जैसे बड़े सम्मान के हकदार हैं। जावेद अख्तर के अलावा शमिता शेट्टी और रिद्धिमा कपूर साहनी ने भी कैप्टन स्मित के जज्बे की सराहना की है। परेश रावल ने दिया 'क्रांतिवीर' फिल्म का रेफरेंस अभिनेता परेश रावल ने कैप्टन के सरनेम 'मच्छार' पर चुटकी लेते हुए 1994 में आई अपनी मशहूर फिल्म 'क्रांतिवीर' का जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें नाना पाटेकर का वह मशहूर डायलॉग याद आ रहा है- 'एक मच्छर आदमी को...!' वहीं, एक्ट्रेस रवीना टंडन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कई पोस्ट शेयर करके कैप्टन स्मित को असली हीरो बताया। रवि किशन, आर माधवन और विजय देवरकोंडा की प्रतिक्रिया अभिनेता और सांसद रवि किशन ने लिखा कि कैप्टन स्मित मच्छार कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस की मिसाल हैं। खुद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी दूसरों की रक्षा करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। साउथ स्टार विजय देवरकोंडा और बॉलीवुड एक्टर आर माधवन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को शेयर किया। माधवन ने लिखा कि वे देश के इस सच्चे हीरो के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। वहीं विजय देवरकोंडा ने लिखा कि कैप्टन ने जो किया वह अविश्वसनीय है। क्या हुआ था फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में फ्लाईदुबई का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान 174 यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव जा रहा था। जब प्लेन सऊदी अरब के ऊपर उड़ रहा था, तभी कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया। बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अंदर आकर हमलावर को दबोच लिया। इसके बाद प्लेन को तबूक में सेफ लैंड कराया गया। PM मोदी ने भी की वीडियो कॉल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की और हाल-चाल जाना। पीएम ने X पर लिखा कि कैप्टन स्मित एक हीरो हैं। गंभीर खतरे और चोट के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस दिखाया। उनकी बहादुरी से सैकड़ों जिंदगियां बचीं और एक बड़ा हादसा टल गया। पूरे भारत को कैप्टन स्मित पर गर्व है। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम किया। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कॉमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है।
अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 66.75 करोड़ रुपए कमाए। यह अजय देवगन के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग है। अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी यह फिल्म शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म में अजय देवगन विजय सलगांवकर के रोल में लौटे हैं। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में 15,759 शोज से 66.75 करोड़ रुपए नेट कमाए। इसका ग्रॉस कलेक्शन 80.10 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। विदेशों में फिल्म ने 15 करोड़ रुपए कमाए। इससे इसकी कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई 95.10 करोड़ रुपए हो गई है। इन फिल्मों को पीछे छोड़ा ‘दृश्यम 3’ इस साल किसी हिंदी फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्म बन गई है। यह सिर्फ ‘धुरंधर द रिवेंज’ से पीछे है। यह बॉलीवुड इतिहास की तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म भी बन गई है। इससे आगे सिर्फ ‘धुरंधर 2’ और ‘जवान’ हैं। फिल्म ने रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ की 30 करोड़ रुपए की ओपनिंग को पीछे छोड़ा। इसने शाहरुख खान की ‘पठान’ की 57 करोड़ रुपए और रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ की 63 करोड़ रुपए की ओपनिंग भी पार कर ली। वर्ल्डवाइड कलेक्शन में फिल्म ने ‘कल्कि’ की 95 करोड़ रुपए और ‘सालार’ की 91 करोड़ रुपए की कमाई को पीछे छोड़ दिया है। फिल्म रिलीज से पहले ही एडवांस बुकिंग में जबरदस्त डिमांड देखी गई थी। बुकिंग शुरू होने के सात दिनों में फिल्म ने भारत में 60.17 करोड़ रुपए ग्रॉस कमाए। इसमें ब्लॉक की गई सीटों की कमाई भी शामिल है। ब्लॉक सीटों को हटाकर एडवांस ग्रॉस कलेक्शन 49.29 करोड़ रुपए रहा। फिल्म ने 51,570 शोज में करीब 18.02 लाख टिकट बेचे। अजय के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग अजय देवगन के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में दृश्यम 3: द कन्क्लूजन ने नया रिकॉर्ड बनाया है। फिल्म ने पहले दिन ₹66.75 करोड़ कमाई के साथ अजय देवगन की अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज की। इससे पहले यह रिकॉर्ड सिंघम अगेन के नाम था, जिसने पहले दिन ₹43.50 करोड़ कमाए थे। अजय देवगन की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन सकती है दृश्यम 3 शुक्रवार को ओपनिंग डे पर हुई कमाई के बाद वीकेंड में फिल्म की कमाई में उछाल आने के अनुमान हैं। ये फिल्म अजय देवगन की कई हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्मों का भी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। फिलहाल उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म तान्हाजीः द अनसंग वॉरियर है, जिने कुल 361 करोड़ कमाए थे। स्टार कास्ट और फिल्म का बैकग्राउंड फिल्म 'दृश्यम 3: द कंक्लुजन' में अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में उनके साथ तबु, श्रिया सरन, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव, रजत कपूर और प्रकाश राज अपनी पुरानी भूमिकाओं में लौट रहे हैं। इस पार्ट में जयदीप अहलावत की भी एंट्री हुई है। यह फ्रेंचाइजी अपनी सस्पेंस थ्रिलर कहानी के लिए जानी जाती है, जिसके पहले दोनों पार्ट बॉक्स ऑफिस पर सफल रहे थे। आखिर वक्त पर अक्षय खन्ना ने फिल्म छोड़ी इससे पहले एक्टर अक्षय खन्ना के आखिरी वक्त पर शूटिंग छोड़ने को लेकर यह फिल्म चर्चा में रही थी। 'दृश्यम 3' के लेखक और निर्देशक अभिषेक पाठक ने बताया था कि अजय देवगन के साथ अक्षय खन्ना के सीन शूट होने से हफ्ते भर पहले उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया था। इसके बावजूद मेकर्स ने शूटिंग टालने के बजाय तीन दिन के भीतर स्क्रिप्ट दोबारा लिखी। अक्षय खन्ना के रोल को नए कैरेक्टर में बदलकर जयदीप अहलावत को कास्ट किया गया। ………………………….. फिल्म दृश्यम 3 से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- मूवी रिव्यू-‘दृश्यम 3’:2 अक्टूबर का राज सब जानते हैं, असली खेल अब 23 जुलाई का, अजय देवगन की विजय वाली बाजी इस बार कितनी भारी पड़ी? 2 अक्टूबर का सच ‘दृश्यम’ के हर फैन को पता है। पाव भाजी, सत्संग, फिल्म और फिर विजय सलगांवकर का वो खेल, जिसने पुलिस को सालों तक उलझाए रखा, लेकिन इस बार कहानी सिर्फ 2 अक्टूबर पर नहीं रुकी है। अब एक और तारीख सामने है- 23 जुलाई। आखिर उस दिन विजय कहां था? क्या हुआ था? और क्या इस तारीख के जरिए पुलिस विजय की बनाई पूरी कहानी को पलट सकती है? यहीं से फिल्म अपना असली खेल शुरू करती है। सामने हैं पुलिस अधीक्षक राजवीर सिंह तोमर, जिनके पास सवाल भी हैं और विजय को घेरने का इरादा भी। दूसरी तरफ विजय है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत उसका दिमाग है। पूरा रिव्यू पढ़िए… …………………………….अजय देवगन की 'दृश्यम-3' की रिलीज पर रोक की मांग:कॉपीराइट विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट ने सुनवाई टाली; एडवांस में बिके 4.77 लाख टिकट अजय देवगन स्टारर फिल्म 'दृश्यम 3: द कंक्लुजन' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है। मद्रास हाईकोर्ट में मेसर्स राजकुमार थिएटर प्राइवेट लिमिटेड ने मेसर्स वाइड एंगल क्रिएशंस के खिलाफ याचिका दायर कर फिल्म की वर्ल्डवाइड रिलीज और डिस्ट्रीब्यूशन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। कंपनी का आरोप है कि उनकी मंजूरी के बिना फिल्म का हिंदी वर्जन बनाना कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन है। हालांकि मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई टाल दी है। पूरी खबर पढ़िए…
अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 66.75 करोड़ रुपए कमाए। यह अजय देवगन के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग है। अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी यह फिल्म शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म में अजय देवगन विजय सलगांवकर के रोल में लौटे हैं। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में 15,759 शोज से 66.75 करोड़ रुपए नेट कमाए। इसका ग्रॉस कलेक्शन 80.10 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। विदेशों में फिल्म ने 15 करोड़ रुपए कमाए। इससे इसकी कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई 95.10 करोड़ रुपए हो गई है। फिल्म रिलीज से पहले ही एडवांस बुकिंग में जबरदस्त डिमांड देखी गई थी। बुकिंग शुरू होने के सात दिनों में फिल्म ने भारत में 60.17 करोड़ रुपए ग्रॉस कमाए। इसमें ब्लॉक की गई सीटों की कमाई भी शामिल है। ब्लॉक सीटों को हटाकर एडवांस ग्रॉस कलेक्शन 49.29 करोड़ रुपए रहा। फिल्म ने 51,570 शोज में करीब 18.02 लाख टिकट बेचे। इन फिल्मों को पीछे छोड़ा ‘दृश्यम 3’ इस साल किसी हिंदी फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्म बन गई है। यह सिर्फ ‘धुरंधर द रिवेंज’ से पीछे है। यह बॉलीवुड इतिहास की तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म भी बन गई है। इससे आगे सिर्फ ‘धुरंधर 2’ और ‘जवान’ हैं। फिल्म ने रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ की 30 करोड़ रुपए की ओपनिंग को पीछे छोड़ा। इसने शाहरुख खान की ‘पठान’ की 57 करोड़ रुपए और रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ की 63 करोड़ रुपए की ओपनिंग भी पार कर ली। वर्ल्डवाइड कलेक्शन में फिल्म ने ‘कल्कि’ की 95 करोड़ रुपए और ‘सालार’ की 91 करोड़ रुपए की कमाई को पीछे छोड़ दिया है। स्टार कास्ट और फिल्म का बैकग्राउंड फिल्म 'दृश्यम 3: द कंक्लुजन' में अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में उनके साथ तबु, श्रिया सरन, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव, रजत कपूर और प्रकाश राज अपनी पुरानी भूमिकाओं में लौट रहे हैं। इस पार्ट में जयदीप अहलावत की भी एंट्री हुई है। यह फ्रेंचाइजी अपनी सस्पेंस थ्रिलर कहानी के लिए जानी जाती है, जिसके पहले दोनों पार्ट बॉक्स ऑफिस पर सफल रहे थे। आखिर वक्त पर अक्षय खन्ना ने फिल्म छोड़ी इससे पहले एक्टर अक्षय खन्ना के आखिरी वक्त पर शूटिंग छोड़ने को लेकर यह फिल्म चर्चा में रही थी। 'दृश्यम 3' के लेखक और निर्देशक अभिषेक पाठक ने बताया था कि अजय देवगन के साथ अक्षय खन्ना के सीन शूट होने से हफ्ते भर पहले उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया था। इसके बावजूद मेकर्स ने शूटिंग टालने के बजाय तीन दिन के भीतर स्क्रिप्ट दोबारा लिखी। अक्षय खन्ना के रोल को नए कैरेक्टर में बदलकर जयदीप अहलावत को कास्ट किया गया। ………………………….. फिल्म दृश्यम 3 से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- मूवी रिव्यू-‘दृश्यम 3’:2 अक्टूबर का राज सब जानते हैं, असली खेल अब 23 जुलाई का, अजय देवगन की विजय वाली बाजी इस बार कितनी भारी पड़ी? 2 अक्टूबर का सच ‘दृश्यम’ के हर फैन को पता है। पाव भाजी, सत्संग, फिल्म और फिर विजय सलगांवकर का वो खेल, जिसने पुलिस को सालों तक उलझाए रखा, लेकिन इस बार कहानी सिर्फ 2 अक्टूबर पर नहीं रुकी है। अब एक और तारीख सामने है- 23 जुलाई। आखिर उस दिन विजय कहां था? क्या हुआ था? और क्या इस तारीख के जरिए पुलिस विजय की बनाई पूरी कहानी को पलट सकती है? यहीं से फिल्म अपना असली खेल शुरू करती है। सामने हैं पुलिस अधीक्षक राजवीर सिंह तोमर, जिनके पास सवाल भी हैं और विजय को घेरने का इरादा भी। दूसरी तरफ विजय है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत उसका दिमाग है। पूरा रिव्यू पढ़िए… …………………………….अजय देवगन की 'दृश्यम-3' की रिलीज पर रोक की मांग:कॉपीराइट विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट ने सुनवाई टाली; एडवांस में बिके 4.77 लाख टिकट अजय देवगन स्टारर फिल्म 'दृश्यम 3: द कंक्लुजन' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है। मद्रास हाईकोर्ट में मेसर्स राजकुमार थिएटर प्राइवेट लिमिटेड ने मेसर्स वाइड एंगल क्रिएशंस के खिलाफ याचिका दायर कर फिल्म की वर्ल्डवाइड रिलीज और डिस्ट्रीब्यूशन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। कंपनी का आरोप है कि उनकी मंजूरी के बिना फिल्म का हिंदी वर्जन बनाना कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन है। हालांकि मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई टाल दी है। पूरी खबर पढ़िए…
दृश्यम 3 (Drishyam 3) के आने से ऐसा लगा था कि ये हनुमान अंश (Hanuman Ansh) की कमाई पर ब्रेक लगाएगी, लेकिन अजय देवगन की मूवी के सामने शुक्रवार को डिवोशनल ड्रामा मूवी ने खूब नोट छापे।
रिलेटेबल चेहरा, दमदार अदाकारी और लगातार मेहनत के दम पर हरलीन सेठी ने अपने हर किरदार से अलग पहचान बनाई है। ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’, ‘कोहरा’, ‘बैड कॉप’ और ‘डॉक्टर्स’ जैसे प्रोजेक्ट्स के बाद अब वह ‘शक’ में नजर आ रही हैं। अपने किरदारों से हरलीन ने साबित किया है कि वह खुद को सिर्फ नायिका की पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं रखना चाहतीं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में हरलीन ने अपने बचपन, अभिनय की शुरुआत, ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ की सफलता और रिजेक्शन के अनुभवों पर बात की। उन्होंने सह-कलाकारों और ‘शक’ में श्रेया के किरदार की तैयारी से जुड़े अनुभव भी साझा किए। सवाल: बचपन में कैसी थीं? अभिनय का ख्याल कब आया? जवाब: मैं बचपन से ही बहुत मस्तमौला थी। खेल-कूद और दूसरी गतिविधियों में काफी रुचि थी। हालांकि, अभिनय करने का कोई प्लान नहीं था। मुझे सिर्फ इतना पता था कि परफॉर्मिंग आर्ट्स में कुछ करना है। मुझे संगीत में भी बहुत रुचि थी। याद है, बचपन में ‘कल हो न हो’ की कैसेट आई थी। मैंने उसे पूरे दिन बजाया था। मेरे दादा ने मजाक में कहा था कि जब तक सारे गाने याद नहीं हो जाएंगे, तब तक हमें यही सुनाती रहोगी। फिर संगीत से डांस और डांस से धीरे-धीरे अभिनय की तरफ आ गई। सवाल: क्या आप पढ़ाई में भी आप काफी अच्छी थीं? जवाब: हां। मैंने विज्ञापन में पढ़ाई की और पूरे मुंबई में टॉप-5 में थी। उस समय टीचर और आसपास के लोग चाहते थे कि मैं पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ूं। लेकिन मेरा मन वहां पूरी तरह नहीं था। मैंने विज्ञापन एजेंसी में काम करने के बारे में सोचा। विज्ञापनों में असिस्टेंट डायरेक्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर भी काम किया। दरअसल, मैं लगातार तलाश रही थी कि परफॉर्मिंग आर्ट्स में आखिर मुझे करना क्या है। सवाल: वह कौन सा पल था, जब लगा कि अभिनय ही करना है? जवाब: कोई एक पल तो याद नहीं, लेकिन जब मैंने अपना पहला विज्ञापन किया, तब आधे दिन के काम के लिए मुझे 17 हजार रुपए मिले थे। मैंने सोचा कि मैंने ऐसा क्या काम किया? बस मुस्कुराई और विज्ञापन किया। उस समय मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी। उसके बाद धीरे-धीरे विश्वास बढ़ता गया। मैंने कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन किए। लेकिन असली आत्मविश्वास वेब सीरीज ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ से आया। सवाल: ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ आपके लिए कितना बड़ा मोड़ था? जवाब: यह मेरे लिए बहुत बड़ा मोड़ था। लोगों ने समीरा के किरदार से बहुत जुड़ाव महसूस किया। पहली बार मैंने लोगों को अपनी खूबसूरती और आवाज की तारीफ करते सुना। मैंने कभी खुद को उस नजर से नहीं देखा था। मुझे लगता था कि मैं खूबसूरत नहीं हूं, क्योंकि मेरी मां बहुत खूबसूरत हैं और मेरा भाई भी उन पर गया है। ‘ब्रोकन’ के बाद पहली बार मुझे लगा कि शायद मैं भी खूबसूरत हूं। यह मेरे लिए सिर्फ अभिनय की सफलता नहीं थी, बल्कि खुद को स्वीकार करने की यात्रा भी थी। सवाल: क्या आपको लगा था कि ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ इतना बड़ा बनेगा? जवाब: बिल्कुल नहीं। हमने बहुत सच्चाई और प्यार से इसे बनाया था, लेकिन यह कल्ट बन जाएगा, इसकी कल्पना नहीं की थी। आज भी रोमांटिक सीरीज की बात होती है तो ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ का जिक्र होता है। शो दोबारा ट्रेंड हुआ, लोगों ने इसके किरदारों और संगीत को फिर से पसंद किया। मुझे उन लड़कियों की तस्वीरें मिलीं, जिन्होंने समीरा वाला टैटू तक बनवाया था। कई लोगों ने लिखा कि समीरा के किरदार ने उन्हें खुद से प्यार करना सिखाया। यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। सवाल: ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ में विक्रांत मैसी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत अच्छा। जब आप करियर की शुरुआत कर रहे होते हैं, तब सामने वाला आपको छोटा महसूस न कराए, यह बहुत जरूरी होता है। विक्रांत ने कभी मुझे ऐसा महसूस नहीं कराया कि वह मुझसे ज्यादा अनुभवी हैं। उन्होंने मेरी काफी मदद की और एक बार मेरी परफॉर्मेंस देखकर कहा था कि मैं उन्हें एक अनुभवी कलाकार जैसी लगी। मेरे लिए यह बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट था। सवाल: ‘ब्रोकन’ के बाद आपने ‘कोहरा’ में मुख्य भूमिका के बजाय महत्वपूर्ण किरदार क्यों चुना? जवाब: मेरे लिए अच्छी कहानी और अच्छे फिल्ममेकर्स के साथ काम करना ज्यादा जरूरी था। ‘कोहरा’ के ऑडिशन के लिए जो सीन मुझे मिले, उन्हें पढ़कर ही लगा कि यह बहुत अच्छा प्रोजेक्ट है। सुदीप शर्मा सर के साथ काम करने का मौका भी मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने मुझसे कहा था, ‘हरलीन, बस मुझ पर भरोसा रखो और इसे करो।’ मैंने उन पर भरोसा किया और ‘कोहरा’ मेरे लिए एक बड़ा मोड़ बन गया। सवाल: ‘कोहरा’ और ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ की सफलता में क्या अंतर महसूस हुआ? जवाब: ‘ब्रोकन’ को दर्शकों से बहुत प्यार मिला। ‘कोहरा’ को इंडस्ट्री के लोगों से भी बहुत सराहना मिली और दर्शकों ने भी इसे पसंद किया। इन दोनों तरह की स्वीकृति का मिलना बहुत खास होता है। बहुत कम प्रोजेक्ट्स ऐसे होते हैं जिन्हें दर्शक भी पसंद करें और इंडस्ट्री के लोग भी उतनी ही गंभीरता से लें। सवाल: ‘बैड कॉप’ में अनुराग कश्यप और गुलशन देवैया जैसे कलाकारों के साथ काम करना कैसा रहा? जवाब: बहुत मजेदार अनुभव था। गुलशन बहुत मजेदार और अलग तरह के इंसान हैं। उन्हें देखकर ही आपको मनोरंजन मिलता रहता है। अनुराग कश्यप हमेशा से मेरे पसंदीदा निर्देशकों में रहे हैं। उनके साथ एक ही प्रोजेक्ट में काम करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। सौरभ सचदेवा, गुलशन, विक्रांत, शरद केलकर जैसे कलाकारों के बीच मैं अनुभव के मामले में सबसे जूनियर थी। इसलिए मेरी कोशिश रहती थी कि मैं मेहनत करके जाऊं और उनके सामने कम न लगूं। सवाल: अनुराग कश्यप के निर्देशन में काम करने की इच्छा भी है? जवाब: बिल्कुल। मैंने उनकी एक फिल्म के लिए ऑडिशन भी दिया था। बाद में किरदार बदल गया और उसमें एक अलग तरह के उच्चारण की जरूरत थी, इसलिए बात आगे नहीं बढ़ी। लेकिन उन्होंने मेरा ऑडिशन देखा था और खुद फोन करके मेरी तारीफ की थी। उम्मीद है, आगे उनके निर्देशन में काम करने का मौका मिले। सवाल: ‘शक’ के लिए हां कहने की सबसे बड़ी वजह क्या थी? जवाब: रेंसिल डिसिल्वा सर का फोन आया था। उन्होंने श्रेया के किरदार के बारे में बताया। मैं उस समय जुहू सर्कल के सिग्नल पर कार में थी। जैसे ही उन्होंने किरदार के बारे में बताया, मुझे लगा कि इसमें बहुत सारी परतें हैं। वह बचपन से नायिका की सबसे अच्छी दोस्त है, उसका नायिका के पति से रिश्ता है, बच्ची के गायब होने में भी उसका हाथ है और वह अपने पति से भी सच छिपा रही है। इतना जटिल किरदार सुनते ही मैंने कहा- सर, मैं यह करना चाहती हूं। सवाल: श्रेया जैसे किरदार में उतरने के लिए आपने क्या तैयारी की? जवाब: सबसे पहले मुझे अपने अंदर से उसके प्रति जजमेंट हटाना था। स्क्रिप्ट पढ़ते ही आप उसके कई फैसलों को गलत मान सकते हैं। लेकिन कलाकार के तौर पर आपको उस किरदार को समझना होता है। मैंने उसके बचपन से लेकर वर्तमान तक की पूरी जिंदगी के बारे में सोचा। अगर वह और उसकी दोस्त बचपन से साथ थीं, तो उनके रिश्ते में ऐसा क्या हुआ कि वह अपनी दोस्त के साथ ऐसा कर सकी? उसके मन में क्या था? पति के साथ उसका रिश्ता कैसे बना? इन सभी सवालों के जवाब मैंने अपनी नोटबुक में लिखे। मेरे लिए किरदार की तैयारी सिर्फ स्क्रिप्ट तक सीमित नहीं होती। मैं यह भी सोचती हूं कि कैमरे पर दिखाए जा रहे दृश्य से ठीक पहले किरदार की जिंदगी में क्या हुआ होगा। इससे किरदार को भीतर से समझने में मदद मिलती है। सवाल: इतने गंभीर किरदार के बाद क्या सेट का माहौल भी गंभीर रहता था? जवाब: नहीं। कैमरा शुरू होते ही हम किरदार बन जाते थे, लेकिन उससे पहले खूब मस्ती होती थी। 'शक’ की शूटिंग पहाड़ों में हुई। एक दिन पूरी कास्ट ने साथ में पार्टी की। खुले आसमान के नीचे संगीत था और सभी कलाकार साथ बैठे थे। शूटिंग के दौरान हम खाली समय में ट्रैकिंग और साइकिलिंग के लिए भी जाते थे। यही चीजें कलाकारों को एक-दूसरे के करीब लाती हैं और काम के दौरान केमिस्ट्री भी बेहतर होती है। सवाल: ‘शक’ के लिए मिला सबसे अच्छा कॉम्प्लिमेंट क्या रहा? जवाब: लोगों ने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ तो की ही, लेकिन मेरे लिए यह भी खास था कि लोगों ने कहा कि मैं स्क्रीन पर बहुत खूबसूरत लग रही हूं। मैंने आपको बताया कि मैंने कभी खुद को उस तरह नहीं देखा था, इसलिए यह बात मेरे लिए मायने रखती है। इसके अलावा मेरा और सुमित व्यास का जेल वाला एक सीन है, जिसे बहुत प्यार मिल रहा है। मेरे डीएम उस सीन की तारीफ से भरे हुए हैं। सवाल: आप किस तरह के किरदार करना चाहती हैं? जवाब: मेरी कोशिश रहती है कि ऐसे किरदार करूं, जिन्हें लोग अक्सर समझ नहीं पाते। मैं उन्हें सहानुभूति के साथ निभाना चाहती हूं। चाहे समीरा हो, ‘कोहरा’ की निमरत हो या ‘शक’ की श्रेया- इन सभी किरदारों में एक बारीक रेखा है। मुझे ऐसे किरदारों को समझना और निभाना पसंद है। सवाल: आगे क्या करने वाली हैं? जवाब: मैंने एक बहुत अच्छी सीरीज साइन की है। उसकी शूटिंग अक्टूबर-नवंबर में होगी। किरदार भी बहुत अच्छा है और कलाकार भी शानदार हैं। अभी मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकती। इसके अलावा एक थिएट्रिकल प्रोजेक्ट पर भी बातचीत चल रही है। अगर सब कुछ तय हो गया तो जनवरी में उसकी शूटिंग शुरू हो सकती है।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट के हमले के बाद भी 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर कई बॉलीवुड सेलेब्स ने रिएक्शन दिया है। लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने मांग की है कि कैप्टन स्मित को देश का दूसरा सर्वोच्च सैन्य सम्मान 'महावीर चक्र' दिया जाना चाहिए। वहीं, परेश रावल, रवीना टंडन, रवि किशन, विजय देवरकोंडा और आर माधवन समेत कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर कैप्टन की हिम्मत और सूझबूझ की तारीफ की है। जावेद अख्तर बोले- महावीर चक्र के हकदार हैं स्मित जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी अतुलनीय है। वे बिना किसी शक के महावीर चक्र जैसे बड़े सम्मान के हकदार हैं। जावेद अख्तर के अलावा शमिता शेट्टी और रिद्धिमा कपूर साहनी ने भी कैप्टन स्मित के जज्बे की सराहना की है। परेश रावल ने दिया 'क्रांतिवीर' फिल्म का रेफरेंस अभिनेता परेश रावल ने कैप्टन के सरनेम 'मच्छार' पर चुटकी लेते हुए 1994 में आई अपनी मशहूर फिल्म 'क्रांतिवीर' का जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें नाना पाटेकर का वह मशहूर डायलॉग याद आ रहा है- 'एक मच्छर आदमी को...!' वहीं, एक्ट्रेस रवीना टंडन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कई पोस्ट शेयर करके कैप्टन स्मित को असली हीरो बताया। रवि किशन, आर माधवन और विजय देवरकोंडा की प्रतिक्रिया अभिनेता और सांसद रवि किशन ने लिखा कि कैप्टन स्मित मच्छार कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस की मिसाल हैं। खुद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी दूसरों की रक्षा करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। साउथ स्टार विजय देवरकोंडा और बॉलीवुड एक्टर आर माधवन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को शेयर किया। माधवन ने लिखा कि वे देश के इस सच्चे हीरो के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। वहीं विजय देवरकोंडा ने लिखा कि कैप्टन ने जो किया वह अविश्वसनीय है। क्या हुआ था फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में फ्लाईदुबई का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान 174 यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव जा रहा था। जब प्लेन सऊदी अरब के ऊपर उड़ रहा था, तभी कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया। बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अंदर आकर हमलावर को दबोच लिया। इसके बाद प्लेन को तबूक में सेफ लैंड कराया गया। PM मोदी ने भी की वीडियो कॉल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की और हाल-चाल जाना। पीएम ने X पर लिखा कि कैप्टन स्मित एक हीरो हैं। गंभीर खतरे और चोट के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस दिखाया। उनकी बहादुरी से सैकड़ों जिंदगियां बचीं और एक बड़ा हादसा टल गया। पूरे भारत को कैप्टन स्मित पर गर्व है। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम किया। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कॉमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है।
एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया ने हनुमान अंश और सनातन संस्कृति पर बन रही फिल्मों की सफलता पर अपनी राय रखी है। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति जितनी स्पिरिचुअल है, उतनी ही साइंटिफिक भी है। आज दर्शक अपनी संस्कृति के बारे में और ज्यादा जानना चाहते हैं। डिमांड के कारण ऐसी कहानियां बनाई जा रही हैं और लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। इस बीच सनातन थीम पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' ने 56 दिनों में दुनियाभर में 414.06 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया है। साइंस और स्पिरिचुअलिटी एक ही सिक्के के दो पहलू तमन्ना भाटिया ने कहा कि अर्बन इंडिया के लिए अपनी जड़ों और कल्चर को समझना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग हर बात का पहले सबूत मांगते हैं और फिर विश्वास करते हैं, जबकि अध्यात्म का नियम है कि आप विश्वास करें तो अनुभव खुद मिल जाएगा। अपनी फिल्म 'वन' में निभाए किरदार का हवाला देते हुए तमन्ना ने बताया कि साइंस और स्पिरिचुअलिटी अलग नहीं हैं, दोनों एक ही बात को कहने के दो अलग तरीके हैं। 'हनुमान अंश' की प्रोड्यूसर से हुई थी मुलाकात तमन्ना ने बताया कि कुछ समय पहले एक पब्लिक वॉशरूम में उनकी मुलाकात 'हनुमान अंश' की महिला प्रोड्यूसर से हुई थी। वहां बातचीत के दौरान तमन्ना ने उन्हें फिल्म की सफलता पर बधाई दी। तमन्ना ने कहा कि मेकर्स ने बहुत कठिनाइयों के साथ यह फिल्म बनाई है और आज इसे जो रिस्पॉन्स मिल रहा है, उससे वे काफी खुश हैं। जब कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़े आंकड़े लेकर आती है, तो उसकी सफलता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। 'सनातन फिल्मों का हिस्सा बनने में दिक्कत नहीं' आगे भी धार्मिक या पौराणिक विषयों पर काम करने के सवाल पर तमन्ना ने कहा कि अगर किसी कहानी का लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है तो वे ऐसी फिल्मों का हिस्सा जरूर बनना चाहेंगी। भारतीय पौराणिक कथाओं में कई ऐसे किरदार हैं जिन्हें पर्दे पर उतारा जा सकता है। अपने एक पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने छठी मैया का गाना किया था, तब पटना के एक कॉलेज में किसी ने उनसे कहा था कि ऊपर वाले ने इस काम के लिए खुद आपको चुना है। 'हनुमान अंश' ने 56 दिनों में कमाए 414.06 करोड़ रुपए सनातन और पौराणिक बैकग्राउंड पर बनी फिल्मों की सफलता का बड़ा उदाहरण 'हनुमान अंश' का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन है। फिल्म ने अपनी रिलीज के 56वें दिन 4,345 शो के जरिए 2.90 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई 317.38 करोड़ रुपए और कुल ग्रॉस कलेक्शन 374.86 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ओवरसीज मार्केट में फिल्म ने 56वें दिन 0.10 करोड़ रुपए जोड़कर कुल 39.20 करोड़ रुपए की कमाई की है। इन आंकड़ों को मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 414.06 करोड़ रुपए हो गया है।
एक्टर डीनो मोरिया के शुक्रवार को गिरफ्तार होने की खबर सामने आई है। सुबह वे कमिश्नर ऑफिस पहुंचे, जहां मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के सामने उनकी पेशी हुई। उनसे पूछताछ की जा रही है। मामला मीठी नदी डीसिल्टिंग (गाद निकालना) घोटाले का है। दावा है कि राज्य में नदियों की सफाई के नाम पर हुए 65 करोड़ रुपए का गबन हुआ। इस जांच में मोरिया का नाम इसलिए आया क्योंकि उन पर उन कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े होने का आरोप है, जिन लोगों ने मुंबई में बाढ़ से बचाव और ड्रेनेज सिस्टम के रखरखाव के लिए दिए गए सरकारी फंड में हेराफेरी की थी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब डीनो, दिशा सालियन की मौत के मामले में भी जांच का सामना कर रहे हैं। पिछले साल ED ने डीनो के घर छापा मारा था 2025 में भी ED ने मुंबई और कोच्चि में 15 जगहों पर छापेमारी की, जिसमें मोरिया का घर भी शामिल था। इन छापों में उन लोगों और संगठनों को निशाना बनाया गया जो जांच के दायरे में आए कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े थे। जांच में सामने आया कि आरोपी केतन कदम और जय जोशी ने मैटप्रॉप कंपनी के अधिकारियों और बीएमसी के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके घोटाला किया। जब घोटाले के मुख्य आरोपी केतन कदम के कॉल रिकॉर्ड्स की जांच हुई तो इसमें एक्टर डिनो मोरिया और उनके भाई का नाम सामने आया। दोनों ने कई मौकों पर केतन कदम से बात की थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि डीनो मोरिया और केतन महज दोस्त नहीं हैं, बल्कि उनके बीच पैसों का लेन-देन भी हो सकता है। यही वजह है कि डिनो को जांच के दायरे में लेकर पूछताछ की जा रही है। क्या था मीठी नदी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट मीठी नदी से गाद निकालने यानी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत 2005 में मुंबई में आई बाढ़ के बाद बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) और दूसरी सिविक एजेंसियों ने की थी। इस प्रोजेक्ट का मकसद मलबे को हटाकर और नदी के तल का रखरखाव करके बाढ़ मैनेजमेंट को बेहतर बनाना था। बाद की जांच में डीसिल्टिंग के बताए गए काम और असल में किए गए काम के बीच अंतर मिला, जिससे प्रोजेक्ट के फंड के इस्तेमाल पर शक पैदा हुआ। मई 2025 की पहली FIR में 13 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें 3 BMC अधिकारी, ठेकेदार, बिचौलिए और निजी कंपनी के अधिकारी शामिल हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें... एक्ट्रेस नुसरत भरूचा को रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर:इंडोनेशिया के बाली में एक्सीडेंट, एयर एंबुलेंस से मुंबई लाया जा रहा, सर्जरी होगी एक्ट्रेस नुसरत भरूचा के बाली में हुए हादसे के बाद रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, नुसरत फिलहाल बाली के अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। शुक्रवार को नुसरत की टीम की पब्लिसिस्ट संचिता त्रिवेदी ने बताया कि डॉक्टर आगे की जांच के बाद उनकी रीढ़ की सर्जरी करेंगे। उन्हें इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से बाली से मुंबई लाने की तैयारी की जा रही है। मुंबई पहुंचने के बाद उनकी सर्जरी होगी। पूरी खबर यहां पढ़ें...
एक्टर डीनो मोरिया के गिरफ्तार होने की खबर:मीठी नदी डीसिल्टिंग घोटाले से जुड़ा है मामला
एक्टर डीनो मोरिया शुक्रवार को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार होने की खबर सामने आई है। शुक्रवार सुबह वे कमिश्नर ऑफिस पहुंचे, जहां मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के सामने उनकी पेशी हुई। मामला मीठी नदी डीसिल्टिंग स्कैम का है। दावा है कि राज्य में नदियों की सफाई के नाम पर हुए 65 करोड़ रुपए का गबन हुआ। इस जांच में मोरिया का नाम इसलिए आया क्योंकि उन पर उन कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े होने का आरोप है। इन लोगों पर मुंबई में बाढ़ से बचाव और ड्रेनेज सिस्टम के रखरखाव के लिए दिए गए सरकारी फंड में हेराफेरी करने का शक है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब डीनो, दिशा सालियन की मौत के मामले में भी जांच का सामना कर रहे हैं। पिछले साल ED ने डीनो के घर छापा मारा था 2025 में भी ED ने मुंबई और कोच्चि में 15 जगहों पर छापेमारी की, जिसमें मोरिया का घर भी शामिल था। इन छापों में उन लोगों और संगठनों को निशाना बनाया गया जो जांच के दायरे में आए कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े थे। जांच में सामने आया कि आरोपी केतन कदम और जय जोशी ने मैटप्रॉप कंपनी के अधिकारियों और बीएमसी के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके घोटाला किया। जब घोटाले के मुख्य आरोपी केतन कदम के कॉल रिकॉर्ड्स की जांच हुई तो इसमें एक्टर डिनो मोरिया और उनके भाई का नाम सामने आया। दोनों ने कई मौकों पर केतन कदम से बात की थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि डीनो मोरिया और केतन महज दोस्त नहीं हैं, बल्कि उनके बीच पैसों का लेन-देन भी हो सकता है। यही वजह है कि डिनो को जांच के दायरे में लेकर पूछताछ की जा रही है। क्या था मीठी नदी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट मीठी नदी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत 2005 में मुंबई में आई बाढ़ के बाद बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) और अन्य सिविक एजेंसियों ने की थी। इस प्रोजेक्ट का मकसद मलबे को हटाकर और नदी के तल का रखरखाव करके बाढ़ मैनेजमेंट को बेहतर बनाना था। बाद की जांच में डीसिल्टिंग के बताए गए काम और असल में किए गए काम के बीच अंतर मिला, जिससे प्रोजेक्ट के फंड के इस्तेमाल पर शक पैदा हुआ। खबर अपडेट की जा रही है…. ………… यह खबर भी पढ़ें... एक्ट्रेस नुसरत भरूचा को रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर:इंडोनेशिया के बाली में एक्सीडेंट, एयर एंबुलेंस से मुंबई लाया जा रहा, सर्जरी होगी एक्ट्रेस नुसरत भरूचा के बाली में हुए हादसे के बाद रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, नुसरत फिलहाल बाली के अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। शुक्रवार को नुसरत की टीम की पब्लिसिस्ट संचिता त्रिवेदी ने बताया कि डॉक्टर आगे की जांच के बाद उनकी रीढ़ की सर्जरी करेंगे। उन्हें इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से बाली से मुंबई लाने की तैयारी की जा रही है। मुंबई पहुंचने के बाद उनकी सर्जरी होगी। पूरी खबर यहां पढ़ें...
जयपुर और आसपास के इलाकों में इन दिनों प्रकाश झा के निर्देशन में बन रही चर्चित वेबसीरीज ‘आश्रम 4’ की शूटिंग जारी है। सीरीज के लिए शहर की अलग-अलग लोकेशन को कहानी के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। अब आमेर स्थित सागर लेक के आसपास के क्षेत्र में सीरीज के लिए एक नया सेट तैयार किया गया है, जहां बाबा निराला के किरदार में नजर आ रहे बॉबी देओल पर महत्वपूर्ण सीन फिल्माए गए। सागर लेक के पास शूटिंग के लिए कथा का माहौल तैयार किया गया। यहां बाबा निराला के रूप में बॉबी देओल लोगों के बीच कथा सुनाते हुए नजर आए। शूटिंग के दौरान बड़ी संख्या में कलाकार और जूनियर आर्टिस्ट भी मौजूद रहे। पूरे सेट को इस तरह तैयार किया गया कि यह बाबा निराला के आश्रम और उसके धार्मिक आयोजनों से जुड़े माहौल का हिस्सा नजर आए। यहां देखिए शूटिंग से जुड़े फोटोज… बाबा निराला ने सुनाई कथा, भक्तों की भीड़ के बीच फिल्माए गए सीन सागर लेक के पास बनाए गए सेट पर बाबा निराला के कथा सुनाने वाले दृश्यों को फिल्माया गया। बॉबी देओल ने बाबा निराला के गेटअप में शूटिंग की। कथा सुनाते बाबा निराला के आसपास बड़ी संख्या में लोग और उनके अनुयायियों के रूप में कलाकार मौजूद रहे। सीरीज की कहानी में बाबा निराला के प्रभाव और उसके इर्द-गिर्द बने धार्मिक माहौल को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ऐसे में आमेर की लोकेशन पर फिल्माए जा रहे ये दृश्य कहानी के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। शूटिंग के दौरान सीरीज के प्रमुख कलाकारों में शामिल चंदन रॉय सान्याल भी नजर आए। वे सीरीज में भोपा स्वामी का किरदार निभा रहे हैं। बॉबी देओल और चंदन रॉय सान्याल से जुड़े दृश्यों की शूटिंग के लिए सागर लेक के आसपास विशेष तैयारियां की गईं। त्रिधा चौधरी पर भी फिल्माए गए अहम सीन शूटिंग के दौरान अभिनेत्री त्रिधा चौधरी भी नजर आईं। सीरीज में उनके किरदार से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों को भी आमेर की इस लोकेशन पर फिल्माया गया। शूटिंग के लिए कलाकारों के कॉस्ट्यूम और मेकअप को कहानी के अनुरूप रखा गया। आमेर की ऐतिहासिक और प्राकृतिक लोकेशन को देखते हुए इसे सीरीज के कुछ दृश्यों के लिए उपयुक्त माना गया है। सागर लेक के आसपास का क्षेत्र शूटिंग के दौरान एक अलग ही दृश्यात्मक पृष्ठभूमि तैयार करता नजर आया। बॉबी देओल के बॉडी डबल का भी इस्तेमाल शूटिंग में बॉबी देओल के बॉडी डबल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे दृश्यों में, जहां कैमरा एंगल या शॉट की जरूरत के मुताबिक अभिनेता का पूरा चेहरा दिखाना आवश्यक नहीं होता, बॉडी डबल के जरिए शूटिंग पूरी की जाती है। इससे शूटिंग के दौरान समय बचाने के साथ अलग-अलग शॉट्स को तेजी से पूरा करने में मदद मिलती है। ‘आश्रम 4’ की शूटिंग में बॉबी देओल के साथ अन्य प्रमुख कलाकारों के सीन भी अलग-अलग हिस्सों में फिल्माए जा रहे हैं। जयपुर की कई लोकेशन पर चल रहा शूट ‘आश्रम 4’ की शूटिंग पिछले कई दिनों से जयपुर की अलग-अलग लोकेशन पर चल रही है। इससे पहले भी जयपुर और आसपास के क्षेत्रों को सीरीज के अलग-अलग दृश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया है। शहर की ऐतिहासिक इमारतों, ग्रामीण इलाकों और प्राकृतिक लोकेशन को कहानी के मुताबिक सेट में बदला जा रहा है। शूटिंग के लिए प्रोडक्शन टीम की ओर से कलाकारों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। सेट पर आठ से दस वैनिटी वैन की व्यवस्था की गई है, जिनका इस्तेमाल कलाकारों के मेकअप, कॉस्ट्यूम और आराम के लिए किया जा रहा है। बड़े स्तर पर चल रही शूटिंग के कारण सेट पर तकनीकी टीम, कलाकारों, जूनियर आर्टिस्ट और प्रोडक्शन स्टाफ की मौजूदगी बनी हुई है।
एक्ट्रेस नुसरत भरूचा के बाली में हुए हादसे के बाद रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, नुसरत फिलहाल बाली के अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। शुक्रवार को नुसरत की टीम की पब्लिसिस्ट संचिता त्रिवेदी ने बताया कि डॉक्टर आगे की जांच के बाद उनकी रीढ़ की सर्जरी करेंगे। उन्हें इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से बाली से मुंबई लाने की तैयारी की जा रही है। मुंबई पहुंचने के बाद उनकी सर्जरी होगी। टीम के मुताबिक, चोट और सर्जरी की वजह से नुसरत को आराम करने और ठीक होने में समय लगेगा। इसका असर आने वाले हफ्तों में उनकी काम से जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी पड़ सकता है। टीम ने सभी से उनकी निजता का सम्मान करने और उन्हें इलाज पर ध्यान देने देने की अपील की है। बता दें कि हादसे से करीब एक हफ्ते पहले नुसरत ने सोशल मीडिया पर छुट्टियों की कुछ तस्वीरें शेयर की थीं। टाइगर श्रॉफ की फिल्म में एंट्री नुसरत के टाइगर श्रॉफ की अगली फिल्म की कास्ट में शामिल होने की भी खबर है। यह टाइगर और नुसरत की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी होगी। एक सूत्र ने पिंकविला को बताया, “टीम को ऐसी एक्ट्रेस चाहिए थी, जो कहानी में मजबूती और भावनात्मक गहराई ला सके। नुसरत हमेशा सबसे मजबूत विकल्पों में थीं।” फिल्म में पश्मीना रोशन, अभिषेक बनर्जी और एल्विश यादव भी अहम भूमिकाओं में हैं। शूटिंग के दौरान घायल हुई थीं नुसरत साल 2023 में नुसरत भरूचा के शूटिंग के दौरान घायल होने की दो घटनाएं सामने आई थीं। अप्रैल 2023 में फिल्म ‘अकेली’ की शूटिंग के दौरान भी नुसरत हादसे का शिकार हुई थीं। एक सीन में उन्हें भागते हुए दिखाया जाना था। इसी दौरान वह संगमरमर के फर्श पर सिर के बल गिर गई थीं। हादसे के बाद वह करीब आधे घंटे तक दर्द से रोती रहीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें कुछ दिन आराम करने की सलाह दी थी। वहीं, जनवरी 2023 में फिल्म ‘छोरी 2’ की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन करते समय उनके चेहरे पर चोट लग गई थी। चोट इतनी थी कि उन्हें चेहरे और भौंह के पास टांके लगवाने पड़े थे। इसके बाद उनका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह टांके लगवाती नजर आई थीं। अगस्त 2021 में शूटिंग के दौरान तबीयत बिगड़ी थी इससे पहले अगस्त 2021 में नुसरत की शूटिंग के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। वह लव रंजन की फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। करीब 23-24 दिनों से लगातार काम करने के कारण वह काफी थक गई थीं। घटना वाले दिन उन्हें तेज चक्कर आए और वह ठीक से खड़ी या बात नहीं कर पा रही थीं। इसके बाद उन्हें मुंबई के हिंदुजा अस्पताल ले जाया गया। वहां उनका ब्लड प्रेशर 65/55 तक गिर गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद इसे गंभीर वर्टिगो अटैक बताया था। इसकी वजह ज्यादा तनाव और थकान बताई गई थी। इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। डॉक्टरों ने 15 दिन आराम की सलाह दी थी। उनकी वजह से फिल्म की शूटिंग भी रोक दी गई थी। मौलाना रजवी ने मंदिर जाने पर आपत्ति जताई थी नुसरत भरूचा पिछले साल उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुंची थीं। उन्होंने महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भी शामिल हुईं। नुसरत ने मंदिर से अपनी तस्वीर भी शेयर की थी और लिखा था, ‘जय श्री महाकाल।’ इसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके मंदिर जाने और हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे शरिया कानून के खिलाफ बताते हुए ‘गुनाह-ए-अजीम’ (बड़ा पाप) कहा था और नुसरत को तौबा (माफी) करने व कलमा पढ़ने की सलाह दी थी। नुसरत मुस्लिम बोहरा परिवार से ताल्लुक रखती हैं। हालांकि, उन्होंने बताया था कि उनका परिवार बचपन से ही सभी धर्मों का सम्मान करता रहा है। नुसरत के मुताबिक, वह मंदिरों के अलावा गुरुद्वारे और चर्च भी जाती रही हैं। उन्होंने वैष्णो देवी और केदारनाथ के दर्शन भी किए हैं। साथ ही वह नमाज भी पढ़ती हैं। …………… नुसरत भरूचा से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें... नुसरत भरूचा ने बताया-शादी की बात पर माता-पिता को दिया था 'धोखा', बोलीं-वे चाहते थे अरेंज मैरिज के लिए लड़कों से मीटिंग करूं बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी एक्टिंग करियर की शुरुआत के तुरंत बाद उनकी फैमिली चाहती थी कि उनकी शादी हो जाए। साथ ही उन्होंने कहा था कि मैंने अपने पेरेंट्स को सालों से धोखा दिया है। नुसरत ने बताया था कि वो कुछ लड़कों से भी मिली थीं, इसलिए उनकी फैमिली ने उनके सिंगल होने की शिकायत नहीं की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें...
कॉलेज में किसी पर दिल आ जाए तो लगता है कहानी बस इतनी सी है, लेकिन कभी प्यार पूरा होने से पहले ही कोई नया मोड़ आ जाता है और फिर वही कहानी चार साल बाद एक बिल्कुल अलग दुनिया में लौटती है। फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ इसी प्यार, दोस्ती और जिंदगी के बदलते रंगों को हल्के फुल्के अंदाज में लेकर चलती है। फिल्म हंसाती है, रिलेट करती है और बीच बीच में जिंदगी की थोड़ी सी कड़वी सच्चाई भी दिखा देती है। फिल्म की कहानी कैसी है कहानी बनारस के इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरू होती है। एडमिशन के दौरान विशाल ठाकुर (वीर पहाड़िया) और सुहानी (आफिया सैयद) पहली बार आमने सामने आते हैं। पहली मुलाकात नोकझोंक में बदलती है और दोनों एक दूसरे को श्राप दे बैठते हैं कि चार साल तक विशाल की कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनेगी और सुहानी का कोई बॉयफ्रेंड नहीं होगा। इसके बाद दोनों अलग अलग कॉलेज चले जाते हैं। चार साल की कॉलेज लाइफ में विशाल की जिंदगी में प्यार की दस्तक तो होती है, लेकिन बात मुकम्मल नहीं हो पाती। उधर सुहानी अपनी पढ़ाई और फिर करियर की तरफ बढ़ती है। चार साल बाद दोनों की जिंदगी कॉलेज से निकलकर नौकरी की दुनिया में पहुंच चुकी है। सुहानी को अच्छी नौकरी मिलती है, जबकि विशाल को करियर और जिंदगी की अपनी जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है। फिर दोनों की मुलाकात होती है और यहीं से पुरानी कहानी नए हालात में दोबारा खुलती है। फिल्म सिर्फ यह नहीं पूछती कि दोनों प्यार में पड़ेंगे या नहीं, बल्कि यह भी देखती है कि वक्त के साथ बदले दो लोग एक दूसरे की जिंदगी में फिर जगह बना पाएंगे या नहीं। इसी के साथ दोस्ती, परिवार और जिम्मेदारियां कहानी को थोड़ा और बड़ा बनाती हैं। फिल्म में एक्टिंग कैसी है वीर पहाड़िया विशाल के किरदार में सहज हैं। कॉलेज के मस्तमौला लड़के से लेकर जिंदगी की परेशानियों से जूझते युवा तक वह किरदार के बदलाव को स्वाभाविक रखते हैं। आफिया सैयद की यह पहली फिल्म है और वह सुहानी के किरदार में फ्रेश लगती हैं। वीर के साथ उनकी नोकझोंक और केमिस्ट्री फिल्म के रोमांटिक हिस्सों में अच्छी लगती है। निखिल विजय फिल्म की जान हैं। मगन अरोड़ा बनकर उनकी कॉमिक टाइमिंग, पंच और वीर के साथ झगड़बंदी कई जगह जबरदस्त मजा देती है। कहानी जहां थोड़ी धीमी पड़ती है, निखिल वहां माहौल फिर से गर्म कर देते हैं। अपारशक्ति खुराना ने अपने किरदार को पूरे अंदाज में निभाया है और उसे इंटरेस्टिंग रखा है। हां, किरदार की लिखावट थोड़ी और मजबूत होती तो उनकी परफॉर्मेंस का असर और बढ़ सकता था। फिल्म का डायरेक्शन कैसा है? अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म को हल्का और यूथफुल रखा है। कॉलेज की मस्ती से लेकर नौकरी और जिम्मेदारियों वाली जिंदगी तक टोन बदलता है, लेकिन फिल्म जरूरत से ज्यादा भारी नहीं होती। राइटर दीपक किंगरानी, जिन्हें सिर्फ एक बंदा काफी है के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिल चुका है, ने रिश्तों, दोस्ती और कॉमेडी को सहज अंदाज में पिरोया है। स्क्रीनप्ले की अच्छी बात यह है कि कहानी सिर्फ रोमांस पर नहीं टिकी। परिवार और दोस्ती को भी जगह मिलती है। हां, बीच में रफ्तार थोड़ी ढीली पड़ती है और कुछ मोड़ पहले से भांपे जा सकते हैं। इमोशनल हिस्सों में थोड़ा और ठहराव होता तो कहानी का असर और बढ़ता। तकनीकी तौर पर फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट रंगीन और यूथफुल है। कॉलेज और बनारस का माहौल कहानी को अपनी अलग फील देता है। फिल्म का म्यूजिक कैसा है ‘कहो तो’, ‘तू मेरा रइयो’ और ‘इश्क का गुलाम’ फिल्म के रोमांटिक और यूथफुल मूड को अच्छे से सपोर्ट करते हैं। गाने कहानी से अलग नहीं लगते और फिल्म की फील को बनाए रखते हैं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट प्यार की मस्ती, दोस्ती की शरारत और जिंदगी की थोड़ी सी कड़वी मिठास, ‘प्रेम कीटाणु’ इन तीनों का अच्छा कॉम्बिनेशन है। निखिल विजय खूब हंसाते हैं, वीर और आफिया की जोड़ी जमती है। थोड़ी कसावट की कमी जरूर है, लेकिन ये फिल्म मुस्कुराने और पुराने कॉलेज वाले दिनों को याद करने का अच्छा बहाना है।
2 अक्टूबर का सच ‘दृश्यम’ के हर फैन को पता है। पाव भाजी, सत्संग, फिल्म और फिर विजय सलगांवकर का वो खेल, जिसने पुलिस को सालों तक उलझाए रखा, लेकिन इस बार कहानी सिर्फ 2 अक्टूबर पर नहीं रुकी है। अब एक और तारीख सामने है- 23 जुलाई। आखिर उस दिन विजय कहां था? क्या हुआ था? और क्या इस तारीख के जरिए पुलिस विजय की बनाई पूरी कहानी को पलट सकती है? यहीं से फिल्म अपना असली खेल शुरू करती है। सामने हैं पुलिस अधीक्षक राजवीर सिंह तोमर, जिनके पास सवाल भी हैं और विजय को घेरने का इरादा भी। दूसरी तरफ विजय है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत उसका दिमाग है। फिल्म कई बार आपको यकीन दिलाती है कि इस बार विजय फंस गया। फिर विजय चुप हो जाता है। आप सोचने लगते हैं कि उसके दिमाग में आखिर क्या चल रहा है? यही फिल्म का मजा है। हालांकि हर चाल उतनी दमदार नहीं है और कुछ जगह कहानी थोड़ी आसान लगती है। फिल्म की कहानी कैसी है सलगांवकर परिवार अपनी पुरानी जिंदगी में लौटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सैम देशमुख की मौत का दर्द मीरा देशमुख के अंदर अब भी जिंदा है। मीरा और महेश देशमुख के लिए मामला खत्म नहीं हुआ। केस दोबारा खुलता है और पुलिस अधीक्षक राजवीर सिंह तोमर की एंट्री होती है। राजवीर पुराने सबूतों को नए नजरिए से देखता है। विजय सलगांवकर फिर पुलिस की नजर में आ जाता है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि विजय ने 2 अक्टूबर को क्या किया था। सवाल यह भी है कि 23 जुलाई को विजय कहां था और इस तारीख का पुराने केस से क्या संबंध है? वकील इंद्रजीत शेट्टी भी इस खेल में उतरते हैं। इंस्पेक्टर गायतोंडे अपने पुराने अंदाज में केस को थोड़ा हल्का रखते हैं। इसके बाद शुरू होती है विजय और राजवीर की दिमागी टक्कर। एक तरफ कानून है। दूसरी तरफ विजय है, जो कानून की किताबें नहीं पढ़ता, लेकिन कानून को अपने हिसाब से घुमाना जानता है। फिल्म में एक्टिंग कैसी है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत अजय देवगन और जयदीप अहलावत की टक्कर है। अजय देवगन का विजय अब सिर्फ एक किरदार नहीं रहा। चेहरे पर ज्यादा हलचल नहीं है। आवाज में भी ज्यादा बदलाव नहीं है, लेकिन उनकी आंखें बहुत कुछ कहती हैं। आप विजय को देखते हैं और सोचते हैं कि आखिर वह इतना शांत क्यों है? यही शांति कहानी का रोमांच बढ़ाती है। दूसरी तरफ जयदीप अहलावत हैं। राजवीर के रूप में उनका अंदाज शांत है। वह धीरे-धीरे विजय के करीब आते हैं। यही उनका सबसे बड़ा हथियार है। शुरुआत में दोनों की टक्कर फिल्म को बांधे रखती है। कुछ जगह फिल्म धीमी पड़ती है, लेकिन अजय और जयदीप के आमने-सामने आते ही रोमांच फिर बढ़ जाता है। प्रकाश राज भी अपने किरदार में शानदार हैं। उनके डायलॉग्स और अंदाज कोर्ट के सीन को मजबूत बनाते हैं। श्रेया सरन को इस बार पहले दोनों हिस्सों के मुकाबले कम जगह मिली है। हालांकि, उनके इमोशनल सीन असर छोड़ते हैं। तब्बू और रजत कपूर अपने बेटे को खोने का दर्द लेकर लौटे हैं। दोनों के किरदारों में बेचैनी साफ नजर आती है। फिर आते हैं गायतोंडे। सीरियस कहानी के बीच यह किरदार हंसी का मौका देता है। 2 अक्टूबर के मीम्स, पाव भाजी और अपनी पुलिसिया परेशानियों के साथ गायतोंडे फिल्म का तनाव हल्का करते हैं। फिल्म का डायरेक्शन कैसा है? अभिषेक पाठक की अच्छी बात यह है कि उन्होंने तीसरे हिस्से को पहले दो हिस्सों की नकल नहीं बनाया। कहानी में नए सवाल जोड़े गए हैं। इनमें 23 जुलाई वाली कड़ी सबसे दिलचस्प है। फिल्म जल्दी कहानी में उतर जाती है। ज्यादा समय यह बताने में नहीं लगाया गया कि कौन कौन है। दर्शक पहले से विजय की दुनिया जानता है। इसलिए फिल्म सीधे खेल शुरू करती है। लेकिन यही इसकी कमजोरी भी है। विजय और उसके परिवार के बीच का इमोशनल रिश्ता पहले दो हिस्सों में ज्यादा मजबूत था। इस बार कहानी ज्यादा इस बात पर टिकी है कि विजय अगली चाल क्या चलेगा। रोमांच बढ़ा है। परिवार वाला भाव थोड़ा कम हुआ है। फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले कैसा है स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी ताकत यह है कि फिल्म जवाब देने के बजाय लगातार नए सवाल खड़े करती है। 23 जुलाई क्या है? राजवीर के पास ऐसा क्या है, जिससे विजय परेशान है? विजय इतना शांत क्यों है? और सबसे बड़ा सवाल- क्या इस बार उसकी कोई चाल काम नहीं करेगी? यही सवाल आपको आगे ले जाते हैं। इंटरवल के आसपास फिल्म अच्छी पकड़ बनाती है। दूसरे हिस्से में विजय की योजना सामने आने लगती है। लेकिन कुछ मोड़ ऐसे हैं, जहां आपको लगेगा- यह इतनी आसानी से कैसे हो गया? पहले दो हिस्सों में विजय की योजनाएं बहुत मजबूत लगती थीं। इस बार कुछ जगह कहानी को आगे बढ़ाने के लिए आसान रास्ता लिया गया है। फिल्म का तकनीकी पक्ष कैसा है गोवा इस बार भी कहानी का हिस्सा लगता है। यह सिर्फ खूबसूरत जगह दिखाने के लिए नहीं है। कैमरे का काम रोमांच वाला माहौल बनाए रखता है। फिल्म की कटिंग भी ज्यादातर जगह तेज है। ढाई घंटे की फिल्म होने के बावजूद यह बेवजह लंबी नहीं लगती। हालांकि बीच के कुछ सीन और छोटे किए जा सकते थे। फिल्म का म्यूजिक कैसा है फिल्म में गानों की जरूरत कम है। अच्छी बात है कि कहानी पर गानों का बोझ नहीं डाला गया। अमर मोहिले का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म की बड़ी ताकत है। जैसे-जैसे विजय की योजनाएं सामने आती हैं, संगीत रोमांच बढ़ाता है। कई सीन में आपको पता होता है कि कुछ होने वाला है। फिर भी संगीत बेचैनी बढ़ा देता है। ‘मुस्कुरा दो’ भावनात्मक हिस्सों को सहारा देता है। लेकिन फिल्म की असली ताकत बैकग्राउंड म्यूजिक ही है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘दृश्यम द कॉन्क्लूजन’ में कई शानदार रोमांचक पल हैं। हालांकि हर जगह पहले दोनों हिस्सों जैसा असर नहीं बन पाता। अजय देवगन और जयदीप अहलावत की टक्कर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। गायतोंडे तनाव के बीच हंसी देते हैं। अमर मोहिले का पार्श्व संगीत माहौल बनाए रखता है। बीच में रफ्तार थोड़ी गिरती है। कुछ योजनाएं जरूरत से ज्यादा आसान लगती हैं, लेकिन 23 जुलाई का सवाल और विजय के दिमाग में चल रहा खेल इतना मजबूत है कि आखिरी मिनट तक नजर स्क्रीन से हटती नहीं।
एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया इन दिनों अपनी नई फिल्म 'द वन' को लेकर काफी सुर्खियों में हैं। फिल्म में उनका किरदार और खासतौर पर 'छठी मैया' गाना चर्चा में है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में तमन्ना ने छठ महापर्व से अपने भावनात्मक जुड़ाव, स्पिरिचुअलिटी और सनातन पर खुलकर बात की। तमन्ना ने बताया कि सिनेमाघरों में दर्शक इस फिल्म को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि एक पर्व की तरह देख रहे हैं; लोग थिएटर में पॉपकॉर्न छोड़कर ठेकुआ बांट रहे हैं और जूते-चप्पल बाहर उतारकर हॉल में जा रहे हैं। सवाल: 'द वन' की स्क्रिप्ट जब पहली बार आपके पास आई, तो आपने इसमें काम करने के लिए 'हां' क्यों कहा?जवाब: मुझे लगा कि यह बहुत ही दिलचस्प कॉन्सेप्ट है, जो लोककथा, फैंटेसी और आस्था को एक साथ लेकर आता है। हमारे देश में ऐसी कई कथाएं हैं जो अब तक आम लोगों तक नहीं पहुंची हैं। छठ महापर्व को करीब 30 से 40 करोड़ लोग मनाते हैं। हमने होली-दिवाली तो फिल्मों में बहुत देखी है, लेकिन छठ जैसे महापर्व को पहली बार इतने बड़े पैमाने पर बड़े पर्दे पर दिखाया गया है। साथ ही, इस एक्शन फिल्म के केंद्र में एक गहरा इमोशन है। मुझे बचपन से ही 'द ममी' जैसी फिल्में पसंद रही हैं, जिनमें मैजिक और फोकलोर होता है। इसलिए मुझे लगा कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे पूरी फैमिली साथ बैठकर देख सकती है। सवाल: फिल्म में 'छठी मैया' का गाना करते समय आप इमोशनल हो गईं थी। आपके अंदर क्या भावनात्मक और आध्यात्मिक बदलाव आए?जवाब: जब मैंने पहली बार विशाल मिश्रा की आवाज में यह गाना सुना, तो लगा कि यह हर भक्त की अंदरूनी भावना है। शूटिंग के दौरान जब मैं सूर्य देव को अर्घ्य देने का रिचुअल कर रही थी, तब मुझे एक बहुत बड़ी बात समझ में आई, जिस चीज का अस्त होता है, उसका उदय भी निश्चित है। हम जिंदगी में कई बार उतार-चढ़ाव देखकर निराश हो जाते हैं, लेकिन छठ महापर्व हमें सिखाता है कि डूबते सूरज के बाद उगता सूरज जरूर आता है। इस गाने ने मुझे ग्रेटिट्यूड का गहरा भाव महसूस कराया। सवाल: थिएटर से दर्शकों का किस तरह का रिएक्शन मिल रहा है, क्या आपने इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद की थी?जवाब: सच कहूं तो हमने फिल्म बनाते समय ऐसा बिल्कुल नहीं सोचा था। लेकिन अब जब मैं रील्स और वीडियो देख रही हूं, तो लोग सिनेमाघर के बाहर अपने जूते-चप्पल उतारकर अंदर जा रहे हैं। लोग हॉल में पॉपकॉर्न छोड़ ठेकुआ बांट रहे हैं। बिहार, पटना और झारखंड से जिस तरह का प्यार मिल रहा है, वैसा मैंने लंबे समय से किसी फिल्म के लिए नहीं देखा। कई लोग थिएटर में भावुक होकर रो रहे हैं, क्योंकि यह उनकी आस्था से जुड़ा है। यह देखना मेरे लिए बहुत मैजिकल है। सवाल: आप खुद शिव भक्त हैं और स्पिरिचुअल हैं। क्या इस जुड़ाव ने आपको इस रोल को निभाने में मदद की?जवाब: बिल्कुल। करीब चार साल पहले जब मैं अपने गुरु से मिली, तब मेरी असल स्पिरिचुअल जर्नी शुरू हुई। मुझे लगता है कि अगर यह फिल्म मुझे 4 साल पहले ऑफर होती, तो शायद मैं इसे उस तरह नहीं कर पाती। क्योंकि भक्ति एक ऐसा भाव है जिसमें आप कोई मिलावट या झूठी एक्टिंग नहीं कर सकते। अगर आपके अंदर वह भाव सच्चा नहीं है, तो दर्शक तुरंत पकड़ लेते हैं। पटना में एक स्टूडेंट ने मुझसे कहा था कि आप यह गाना इसलिए कर पाईं क्योंकि ऊपर वाले ने आपको इसके लिए चुना है। सवाल: आजकल सनातन और भारतीय संस्कृति पर आधारित फिल्मों को दर्शकों का काफी प्यार मिल रहा है। इस दौर को आप कैसे देखती हैं?जवाब: यह बहुत जरूरी दौर है, खासकर अर्बन इंडिया के लिए। हम हर चीज को लॉजिक और सबूत से तौलने की कोशिश करते हैं। सनातन संस्कृति में जो बातें कही गई हैं, वे जितनी स्पिरिचुअल हैं, उतनी ही साइंटिफिक भी हैं। स्पिरिचुअलिटी कहती है कि आप पहले विश्वास कीजिए, अनुभव अपने आप मिल जाएगा। आज लोग अपनी संस्कृति के बारे में और जानना चाहते हैं, इसलिए जब उन्हें ऐसी सच्ची कहानियां मिलती हैं, तो फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। सवाल: फिल्मों में सिनेमैटिक लिबर्टी और कल्चरल ऑथेंटिसिटी के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल होता है?जवाब: आपका इरादा सही होना चाहिए। जब हमने छठ का पूरा सीक्वेंस शूट किया, तो सभी नियमों और प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा। हमारे डायरेक्टर दीपक यूपी-बिहार बेल्ट से हैं, इसलिए वे बहुत पर्टिकुलर थे। हम कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं बना रहे थे, बल्कि एक कहानी के जरिए छठ की आस्था और इमोशन को लोगों तक पहुंचा रहे थे। उस इमोशन को फील कराने के लिए थोड़ी सिनेमैटिक लिबर्टी लेनी पड़ती है, ताकि दर्शक उस श्रद्धा को गहराई से महसूस कर सकें। 'वन - फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन फिल्म 'वन - फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' ने अपनी रिलीज के छठे दिन 7,070 शो के जरिए ₹4.25 करोड़ का नेट कलेक्शन दर्ज किया है। इस कमाई के साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹49.10 करोड़ और कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹58.42 करोड़ तक पहुंच गया है। ओवरसीज मार्केट की बात करें तो फिल्म ने छठे दिन ₹0.50 करोड़ की कमाई की, जिससे इसका कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹5.00 करोड़ हो गया है। इन आंकड़ों को मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब ₹63.42 करोड़ हो चुका है। फिल्म 25 सितंबर को रिलीज हुई थी।
आयुष्मान खुराना आज बॉलीवुड के उन एक्टर्स में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी अलग तरह की फिल्मों से इंडस्ट्री में पहचान बनाई। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। चंडीगढ़ से निकले आयुष्मान ने थिएटर किया, रेडियो जॉकी बने, एमटीवी पर वीजे रहे और कई ऑडिशन दिए। उन्हें इंडियन आइडल-2 में भी रिजेक्शन मिला। 2012 में ‘विक्की डोनर’ से फिल्मी करियर शुरू हुआ। पहली फिल्म हिट हुई, लेकिन इसके बाद लगातार तीन फिल्में नहीं चलीं। फिर ‘दम लगा के हईशा’ से करियर ने दोबारा रफ्तार पकड़ी। इसके बाद ‘बरेली की बर्फी’, ‘शुभ मंगल सावधान’, ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’, ‘आर्टिकल 15’, ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘बाला’ जैसी फिल्मों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। आज की सक्सेस स्टोरी में आयुष्मान खुराना के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें... चंडीगढ़ में हुआ जन्म, पिता ज्योतिषी आयुष्मान खुराना का जन्म 14 सितंबर 1984 को चंडीगढ़ में हुआ। उनकी शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ के सेंट जॉन्स हाई स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की और पंजाब यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन स्टडीज से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। उनके पिता पी. खुराना जाने-माने ज्योतिषी थे, जबकि मां पूनम खुराना ने हिंदी में एमए किया था। परिवार का माहौल पढ़ाई, साहित्य और कला से जुड़ा रहा। आयुष्मान ने कॉलेज के दिनों में थिएटर किया और दो थिएटर ग्रुप भी बनाए। डॉक्टर बनने का सपना था, डेंटिस्ट की सीट भी मिली थी एक्टिंग की दुनिया में आने से पहले आयुष्मान ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उन्होंने 11वीं में साइंस ली थी और कर्नाटक के एक डेंटल कॉलेज में उन्हें सीट भी मिल गई थी। लेकिन तभी उनका रुझान थिएटर की तरफ बढ़ा। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर आर्ट्स और थिएटर चुना। डीएवी कॉलेज में उन्होंने थिएटर ग्रुप बनाए और स्ट्रीट प्ले किए। थिएटर में काम करते हुए आयुष्मान ने सामाजिक मुद्दों को समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी फिल्मों के विषयों में भी दिखाई दिया। रोडीज जीते, लेकिन तुरंत मुंबई नहीं आए 2004 में आयुष्मान ने एमटीवी रोडीज सीजन-2 जीता। इसके बाद उन्हें पहचान मिलने लगी, लेकिन उन्होंने तुरंत मुंबई जाकर फिल्मों में किस्मत नहीं आजमाई। पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने रेडियो में काम शुरू किया। बाद में वे एमटीवी के वीजे बने और कई शो होस्ट किए। फिल्मों में आने से पहले आयुष्मान ने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे सितारों का इंटरव्यू भी लिया था। फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि इन सितारों से बातचीत ने उन्हें समझने में मदद की कि स्टार भी आम इंसानों की तरह होते हैं। पिता ने कहा- अभी मुंबई जाओ, वरना दो साल नौकरी नहीं मिलेगी आयुष्मान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दो महीने का ब्रेक लेकर एक्टिंग की तैयारी करना चाहते थे। लेकिन उनके पिता ने उन्हें तुरंत मुंबई जाने के लिए कहा। आयुष्मान के मुताबिक, उनके पिता ने कहा था कि अगर अभी नहीं गए तो दो साल तक नौकरी नहीं मिलेगी। इसके बाद वह मुंबई आ गए। शुरुआती दिनों में उनके पास रहने की जगह भी नहीं थी। वह अपने डॉक्टर दोस्त के साथ केईएम हॉस्पिटल के हॉस्टल में रहे और ऑडिशन देते रहे। ट्रेन में गाने से कमाए पैसे फिल्म स्टार बनने से बहुत पहले आयुष्मान और उनके दोस्त ट्रेनों में परफॉर्म करते थे। उन्होंने बताया था कि कॉलेज के दौरान वे पश्चिम एक्सप्रेस में दोस्तों के साथ चढ़ते और अलग-अलग कोच में गाना-परफॉर्म करना शुरू कर देते थे। यात्रियों से मिलने वाले पैसे इकट्ठा किए जाते थे और आयुष्मान के मुताबिक, इतनी कमाई हो जाती थी कि दोस्तों ने उससे गोवा ट्रिप तक स्पॉन्सर की थी। इंडियन आइडल से भी हुए रिजेक्ट आयुष्मान का स्ट्रगल सिर्फ एक्टिंग ऑडिशन तक सीमित नहीं था। उन्होंने इंडियन आइडल-2 में भी हिस्सा लिया था, लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह मुंबई राउंड तक पहुंचे थे और वहां उन्हें रिजेक्शन मिला। उनके मुताबिक, मुंबई आने से पहले भी उन्हें कई रिजेक्शन मिल चुके थे। 2012 में ‘विक्की डोनर’ पहली ही फिल्म ने बदल दी जिंदगी 2012 में आयुष्मान ने शूजित सरकार की ‘विक्की डोनर' से बॉलीवुड डेब्यू किया। फिल्म का विषय उस दौर के लिए काफी असामान्य था और आयुष्मान ने स्पर्म डोनर का किरदार निभाया। फिल्म सफल रही और आयुष्मान को रातोंरात पहचान मिली। उन्हें फिल्म के लिए बेस्ट मेल डेब्यू के साथ प्लेबैक सिंगिंग के लिए भी अवॉर्ड मिला। लेकिन पहली फिल्म की सफलता के बाद उनका सफर उतना आसान नहीं रहा, जितना बाहर से दिखाई देता था। पहली फिल्म के बाद लगातार तीन फ्लॉप, करियर पर लगा ब्रेक ‘विक्की डोनर’ के बाद आयुष्मान की ‘नौटंकी साला!’, ‘बेवकूफियां’ और ‘हवाईजादा’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। खुद आयुष्मान ने माना कि ‘विक्की डोनर' के बाद वह काफी कन्फ्यूज थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किस तरह की फिल्में करनी चाहिए। उन्होंने बाद में बताया कि तीन लगातार फिल्मों के अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के बाद उनका नजरिया बदला। ‘दम लगा के हईशा’ ने फिर बदली कहानी 2015 में आई ‘दम लगा के हईशा’ आयुष्मान के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी। फिल्म में उन्होंने ऐसे लड़के का किरदार निभाया जो पढ़ाई में कमजोर है और जिसकी शादी उससे ज्यादा पढ़ी-लिखी और वजनदार लड़की से हो जाती है। फिल्म की कहानी आम बॉलीवुड रोमांस से अलग थी और आयुष्मान की परफॉर्मेंस को खूब सराहा गया। आयुष्मान बताते हैं कि ‘दम लगा के हईशा’ के आने के बाद उनके करियर की दिशा बदल गई। फिर शुरू हुआ अलग कहानियों का दौर इसके बाद आयुष्मान ने एक के बाद एक ऐसे विषय चुने, जिनसे मुख्यधारा के कई अभिनेता दूरी बनाते रहे। ‘बरेली की बर्फी’ में छोटे शहर की कहानी, ‘शुभ मंगल सावधान’ में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसा संवेदनशील विषय, 'अंधाधुन’ में ब्लाइंड पियानो प्लेयर, ‘बधाई हो’ में उम्रदराज माता-पिता की प्रेग्नेंसी, ‘आर्टिकल 15’ में जातिगत भेदभाव, ‘ड्रीम गर्ल’ में फोन पर लड़की की आवाज निकालने वाला युवक और 'बाला’ में समय से पहले बाल झड़ने की समस्या जैसे विषय सामने आए। यहीं से आयुष्मान की एक अलग तरह की फिल्मी पहचान बनने लगी। आयुष्मान कहते हैं कि उनका पूरा करियर रिस्क से बना है और वह सामान्य कमर्शियल फिल्म में खुद को आसानी से नहीं देख पाते। ‘अंधाधुन’ और ‘बधाई हो’ ने स्टारडम मजबूत किया 2018 आयुष्मान के करियर के सबसे महत्वपूर्ण सालों में रहा। ‘अंधाधुन’ ने उन्हें अभिनेता के तौर पर नई ऊंचाई दी, जबकि ‘बधाई हो’ ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। ‘अंधाधुन’ ने भारत के अलावा चीन में भी जबरदस्त कारोबार किया। वहीं ‘बधाई हो’ ने भारत में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन किया। इसी दौर में आयुष्मान ने साबित किया कि कम बजट और असामान्य विषय वाली फिल्में भी दर्शकों तक पहुंच सकती हैं। पत्नी ताहिरा ने स्क्रिप्ट चुनने में निभाई अहम भूमिका आयुष्मान और ताहिरा कश्यप की मुलाकात किशोरावस्था में हुई थी और दोनों ने 2008 में शादी की। ताहिरा लेखक, निर्देशक और क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं। आयुष्मान कई बार बता चुके हैं कि फिल्म साइन करने से पहले वह ताहिरा की राय लेते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद वह ताहिरा को भी देते हैं। दोनों स्क्रिप्ट पर विस्तार से चर्चा करते हैं और मतभेद होने पर उसके फायदे-नुकसान देखते हैं। आयुष्मान ने ताहिरा को अपना ‘लाइफ कोच’ भी बताया है। सफलता के बाद भी फ्लॉप का दौर आया आयुष्मान के करियर में सिर्फ सफलता नहीं रही। ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’, ‘अनेक’, ‘डॉक्टर जी’ और ‘एन एक्शन हीरो’ जैसी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी उनके सफल दौर में मिली थी। इससे साफ हुआ कि अलग विषय चुनने का मतलब हर बार बॉक्स ऑफिस सफलता की गारंटी नहीं है। लेकिन आयुष्मान ने अपने करियर की दिशा पूरी तरह नहीं बदली। उन्होंने अलग जॉनर और नए किरदार आजमाने जारी रखे। ‘हर फिल्म रिस्क थी, इसलिए अब डर नहीं सकता’ आयुष्मान के करियर की खास बात यही है कि उन्होंने शुरुआत ही एक रिस्की विषय से की थी। उनके शब्दों में- तक पहुंचा हूं, तो मैं डर नहीं सकता हूं। मेरी हर फिल्म रिस्क थी, शायद बाकी एक्टर्स के मुकाबले। मैं रिस्क लेकर यहां तक पहुंचा हूं, तो मैं डर नहीं सकता हूं।” यही सोच उनके करियर में बार-बार दिखाई देती है। कभी स्पर्म डोनर, कभी नपुंसकता से जूझता युवक, कभी अंधा पियानो प्लेयर, कभी जातिगत भेदभाव के खिलाफ खड़ा पुलिस अफसर और कभी माता-पिता की प्रेग्नेंसी से परेशान बेटा। 40 की उम्र के बाद भी प्रयोग जारी आयुष्मान ने उम्र बढ़ने के साथ अपने करियर का दायरा भी बढ़ाया है। ‘डॉक्टर जी’ और ‘एन एक्शन हीरो’ के बाद उन्होंने अलग जॉनर आजमाए। 2025 में वह ‘थामा' में नजर आए, जो मैडॉक फिल्म्स के हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा थी। फिल्म में उनके साथ रश्मिका मंदाना, परेश रावल और नवाजुद्दीन सिद्दीकी थे। 2026 में भी उनका प्रयोग जारी है। उनकी आने वाली फिल्मों में ‘ये प्रेम मोल लिया’ और ‘उड़ता तीर’ शामिल हैं। ‘उड़ता तीर’ 9 अक्टूबर को रिलीज होगी। वहीं राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले बनी ‘ये प्रेम मोल लिया’ में आयुष्मान शरवरी वाघ के साथ नजर आएंगे। यह फिल्म 27 नवंबर को रिलीज होगी। इसका निर्देशन सूरज बड़जात्या ने किया है। एक्टिंग के साथ सिंगिंग में भी बनाई पहचान आयुष्मान खुराना की पहचान सिर्फ एक्टर के तौर पर नहीं है। वह अच्छे सिंगर भी हैं और कॉलेज के दिनों से संगीत उनके करियर का हिस्सा रहा है। उन्होंने डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान अपने दोस्त रोचक कोहली के साथ मिलकर ‘पानी दा रंग’ गाना लिखा और कंपोज किया था। यह गाना उन्होंने 2003 में लिखा था, लेकिन इसे रिलीज होने का मौका करीब 9 साल बाद मिला। 2012 में फिल्म ‘विक्की डोनर’ से आयुष्मान ने बॉलीवुड डेब्यू किया और इसी फिल्म के गाने ‘पानी दा रंग’ को अपनी आवाज भी दी। उन्होंने गाना सिर्फ गाया नहीं, बल्कि रोचक कोहली के साथ इसे कंपोज भी किया था। गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि आयुष्मान को फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर मिला। इसके बाद आयुष्मान ने ‘नौटंकी साला’, ‘बेवकूफियां’ जैसी फिल्मों के लिए भी प्लेबैक सिंगिंग की। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह खुद को ‘एक्टर-सिंगर’ मानते हैं और म्यूजिक को अपने करियर का समानांतर हिस्सा समझते हैं। आयुष्मान की संगीत की ट्रेनिंग भी रही है। उन्होंने बताया था कि वह बचपन से गाते थे और उन्हें वोकल ट्रेनिंग मिली थी, हालांकि यह ट्रेनिंग औपचारिक तरीके से नहीं हुई थी। उनके पिता भी संगीत में रुचि रखते थे और बांसुरी बजाते थे। ____________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़ें.. पहली फिल्म बंद हुई, अंडे-शकरकंद खाकर गुजारा किया:सिद्धार्थ मल्होत्रा बोले- ढीठपन और अड़ियलपन ने बचाया, ‘शेरशाह’ ने दी नई पहचान दिल्ली के मिडिल क्लास, आर्मी-मर्चेंट नेवी बैकग्राउंड वाले परिवार से निकले सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कभी खुलकर नहीं कहा था कि उन्हें एक्टर बनना है। स्कूल-कॉलेज में एमबीए और कॉर्पोरेट नौकरी का प्लान था, लेकिन अंदर छिपा एक्टर मॉडलिंग के रास्ते सामने आया। 21 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे तो फिल्म साइन होने के बावजूद प्रोजेक्ट बंद हो गया।पूरी खबर पढ़ें..
हनुमान अंश फिल्म ने दो महीने में बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनियाभर में कमाई के झंडे गाड़ दिए हैं। जानिए 56वें दिन का कलेक्शन।
अजय देवगन की अपकमिंग फिल्म दृश्यम 3 बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत करती हुई नजर आ सकती है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस पलक तिवारी और एक्टर इब्राहिम अली खान पटौदी गुरुवार को जयपुर एयरपोर्ट पर नजर आए। दोनों को एयरपोर्ट पर एक साथ देखा गया। यहां से वे सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर के लिए रवाना हुए। जानकारी के मुताबिक- दोनों रणथंभौर में टाइगर सफारी देखने पहुंचे हैं। दोनों का दो दिन यहां रुकने का कार्यक्रम है। जयपुर एयरपोर्ट पर इब्राहिम अपने खास मजाकिया अंदाज में भी नजर आए। उनके हाथ में कॉफी का गिलास था। एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों और पैपराजी से बातचीत के दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा- आज मेरी कॉफी नहीं गिरेगी। उनका यह कमेंट हाल ही वायरल हुए उस वीडियो से जुड़ा था, जिसमें इब्राहिम के हाथ से कॉफी गिर गई थी। इसी बीच जयपुर एयरपोर्ट पर अभिनेता, मॉडल और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन भी नजर आए। एयरपोर्ट पर एक फैन ने उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई तो मिलिंद ने मजाकिया अंदाज में कहा- फोटो से पहले 20 पुशअप लगाने पड़ेंगे। उनके इस अंदाज को देखकर वहां मौजूद लोग भी चौंक गए। सेल्फी लेते हुए गिर गई थी कॉफी दरअसल, 30 सितंबर को सामने आए एक वीडियो में इब्राहिम एक फैन के साथ सेल्फी लेते समय गलती से अपनी कॉफी कपड़ों पर गिरा बैठे थे। वीडियो में वे अचानक नीचे देखते हुए कॉफी के दाग को चेक करते नजर आए। उनके इस रिएक्शन पर लोगों ने कई तरह के कमेंट किए थे। रणथंभौर में टाइगर सफारी का प्लान पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान की रणथंभौर में यात्रा ऐसे समय हुई, जब मानसून के तीन महीने के बाद 1 अक्टूबर से नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए फिर खुला है। पहले दिन देशी-विदेशी पर्यटकों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया गया। पलक और इब्राहिम के एक साथ नजर आने की खबर भी उनके फैंस के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों इससे पहले भी कई मौकों पर साथ नजर आ चुके हैं। सैफ अली के बेटे इब्राहिम, टीवी एक्ट्रेस श्वेता की बेटी पलक इब्राहिम अली खान बॉलीवुड के चर्चित फिल्मी परिवार से आते हैं। वे अभिनेता सैफ अली खान और अभिनेत्री अमृता सिंह के बेटे हैं। उनकी बहन सारा अली खान भी बॉलीवुड अभिनेत्री हैं। वहीं दादी शर्मिला टैगोर हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्रियों में शामिल रही हैं। इब्राहिम ने बतौर अभिनेता 2025 में फिल्म ‘नादानियां’ से शुरुआत की। इसमें वे खुशी कपूर के साथ नजर आए थे। इसके बाद वे ‘सरजमीन’ में काजोल और पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ दिखाई दिए। वहीं पलक तिवारी भी टीवी और बॉलीवुड के चर्चित परिवार से आती हैं। वे अभिनेत्री श्वेता तिवारी और अभिनेता राजा चौधरी की बेटी हैं। श्वेता तिवारी ने पलक की परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पलक ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म ‘अंतिम: द फाइनल ट्रूथ’ से की थी। इसके बाद वे सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ में नजर आईं। इसके अलावा वे ‘द भूतनी’, ‘रोमियो एस3’ और ‘रोजी: द सैफ्रॉन चैप्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही हैं। इस साल वे सीरीज ‘लुक्खे’ में भी नजर आईं। मॉडलिंग, एक्टिंग और फिटनेस का कॉम्बो मिलिंद सोमन लंबे समय से मॉडलिंग, अभिनय और फिटनेस के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे राष्ट्रीय स्तर के तैराक रह चुके हैं। मॉडलिंग के बाद साल 1995 में अलीशा चिनॉय के लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो ‘मेड इन इंडिया’ से उन्हें देशभर में खास पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन पर ‘कैप्टन व्योम’ सहित कई प्रोजेक्ट्स किए और फिल्मों में भी काम किया। ‘16 दिसंबर’, ‘अग्निवर्षा’, ‘भेजा फ्राय’, ‘पैय्या’, ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘शेफ’ जैसी फिल्मों में उनके काम को देखा गया।
एक्ट्रेस नुसरत भरुचा का बाली में एक्सीडेंट हो गया। हादसे में उन्हें चोट लगी है। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, उनकी चोट कितनी गंभीर है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई। एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि नुसरत भरुचा बाली में एक काम के सिलसिले में गई थीं। इसी दौरान वह हादसे का शिकार हो गईं। सूत्रों के मुताबिक, इलाज के चलते नुसरत को बाली में अपना स्टे बढ़ाना पड़ा है। बता दें कि हादसे से करीब एक हफ्ते पहले नुसरत ने सोशल मीडिया पर छुट्टियों की कुछ तस्वीरें शेयर की थीं। टाइगर श्रॉफ की फिल्म में एंट्री नुसरत भरुचा के टाइगर श्रॉफ की अगली फिल्म की कास्ट में शामिल होने की भी खबर है। यह टाइगर और नुसरत की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी होगी। एक सूत्र ने पिंकविला को बताया, “टीम को ऐसी एक्ट्रेस चाहिए थी, जो कहानी में मजबूती और भावनात्मक गहराई ला सके। नुसरत हमेशा सबसे मजबूत विकल्पों में थीं।” फिल्म में पश्मीना रोशन, अभिषेक बनर्जी और एल्विश यादव भी अहम भूमिकाओं में हैं। शूटिंग के दौरान घायल हुई थीं नुसरत भरुचा साल 2023 में नुसरत भरुचा के शूटिंग के दौरान घायल होने की दो घटनाएं सामने आई थीं। अप्रैल 2023 में फिल्म ‘अकेली’ की शूटिंग के दौरान भी नुसरत हादसे का शिकार हुई थीं। एक सीन में उन्हें भागते हुए दिखाया जाना था। इसी दौरान वह संगमरमर के फर्श पर सिर के बल गिर गई थीं। हादसे के बाद वह करीब आधे घंटे तक दर्द से रोती रहीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें कुछ दिन आराम करने की सलाह दी थी। वहीं, जनवरी 2023 में फिल्म ‘छोरी 2’ की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन करते समय उनके चेहरे पर चोट लग गई थी। चोट इतनी थी कि उन्हें चेहरे और भौंह के पास टांके लगवाने पड़े थे। इसके बाद उनका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह टांके लगवाती नजर आई थीं। इससे पहले अगस्त 2021 में नुसरत भरुचा की शूटिंग के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। वह लव रंजन की फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। करीब 23-24 दिनों से लगातार काम करने के कारण वह काफी थक गई थीं। घटना वाले दिन उन्हें तेज चक्कर आए और वह ठीक से खड़ी या बात नहीं कर पा रही थीं। इसके बाद उन्हें मुंबई के हिंदुजा अस्पताल ले जाया गया। वहां उनका ब्लड प्रेशर 65/55 तक गिर गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद इसे गंभीर वर्टिगो अटैक बताया। इसकी वजह ज्यादा तनाव और थकान बताई गई थी। इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। डॉक्टरों ने 15 दिन आराम की सलाह दी थी। उनकी वजह से फिल्म की शूटिंग भी रोक दी गई थी। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मंदिर जाने पर आपत्ति जताई नुसरत भरुचा पिछले साल उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुंची थीं। उन्होंने महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भी शामिल हुईं। नुसरत ने मंदिर से अपनी तस्वीर भी शेयर की थी और लिखा था, ‘जय श्री महाकाल।’ इसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके मंदिर जाने और हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे शरिया कानून के खिलाफ बताते हुए ‘गुनाह-ए-अजीम’ (बड़ा पाप) कहा था और नुसरत को तौबा (माफी) करने व कलमा पढ़ने की सलाह दी थी। नुसरत मुस्लिम बोहरा परिवार से ताल्लुक रखती हैं। हालांकि, उन्होंने बताया था कि उनका परिवार बचपन से ही सभी धर्मों का सम्मान करता रहा है। नुसरत के मुताबिक, वह मंदिरों के अलावा गुरुद्वारे और चर्च भी जाती रही हैं। उन्होंने वैष्णो देवी और केदारनाथ के दर्शन भी किए हैं। साथ ही वह नमाज भी पढ़ती हैं।
मुकेश खन्ना ने रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम के चित्रण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फिल्म में ज्यादा VFX और एक्शन दिखाने पर आपत्ति जताई। मुकेश खन्ना ने कहा कि फिल्म में भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम की खूबियों के बजाय एक्शन हीरो जैसा दिखाया गया है। उन्होंने रणबीर कपूर के पेड़ पर चढ़कर तीर चलाने वाले सीन पर भी सवाल उठाया। बॉलीवुड नाउ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। मुस्कुराते थे। श्रीराम को सलमान खान, अमिताभ बच्चन बना दिया, रजनीकांत बना दिया।” भगवान राम के एक्शन सीन पर सवाल मुकेश खन्ना ने उस सीन पर खास तौर पर आपत्ति जताई, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में पेड़ पर चढ़कर तीर चलाते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामायण के जिन संस्करणों को उन्होंने पढ़ा या देखा है, उनमें भगवान राम को इस तरह नहीं दिखाया गया। उन्होंने कहा, “रामजी ऐसे फाइट नहीं करते थे।” मुकेश खन्ना ने आगे कहा कि किरदार को ‘मैन ऑफ एक्शन’ बना दिया गया है। उन्होंने भगवान राम की तुलना क्लिंट ईस्टवुड से भी की। VFX के इस्तेमाल पर भी आपत्ति मुकेश खन्ना ने ‘रामायण’ में किए गए बड़े पैमाने के विजुअल इफेक्ट्स यानी VFX पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दर्शक फिल्म को बड़े स्तर की फैंटेसी फिल्म के रूप में देख सकते हैं। वहीं, भारतीय दर्शक भगवान राम के चित्रण को धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से देखेंगे। उन्होंने कहा, “लेकिन भारत में अगर आप राम दिखा रहे हो, तो आस्था से दिखाओ।” रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता: शिव सागर इससे पहले फिल्ममेकर और 1987 की चर्चित टीवी सीरीज ‘रामायण’ बनाने वाले रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने रणबीर कपूर की कास्टिंग पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि ‘एनिमल’ में रणबीर का किरदार देखने के बाद उनके लिए उन्हें भगवान राम के रूप में स्वीकार करना मुश्किल है। शिव सागर के मुताबिक, भगवान राम जैसे किरदार के लिए किसी फ्रेश फेस को चुना जाना चाहिए था। उनका कहना है कि नए चेहरे के साथ दर्शकों की पहले से कोई इमेज नहीं जुड़ी होती। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें रणबीर कपूर की एक्टिंग से कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने रणबीर को अच्छा एक्टर बताया था। शिव सागर ने फिल्म की बाकी कास्टिंग, खासकर यश और साई पल्लवी की भी तारीफ की थी। पूरी खबर यहां पढे़ं… रणबीर ने दिया था जवाब जुलाई में फिल्म के सैन डिएगो कॉमिक-कॉन शोकेस के दौरान रणबीर कपूर ने भगवान राम के किरदार के लिए अपनी कास्टिंग पर हुई आलोचना का जवाब दिया था। रणबीर ने कहा था, “रामायण देखने वाले हर व्यक्ति की भगवान राम को लेकर अपनी एक अलग छवि और व्याख्या होती है। इसका कोई एक तय चेहरा नहीं है। बहुत से लोग सोच सकते हैं कि मैं गलत कास्टिंग हूं, तो कुछ को लगेगा कि मैं सही कास्टिंग हूं। लेकिन ईमानदारी से कहूं तो राम के किरदार के लिए सही कास्टिंग वही अभिनेता होगा, जिसके पास सही नीयत, विश्वास और इस यात्रा के प्रति आस्था हो।” ……………………… रामायण से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज: भगवान राम-सीता के विवाह की झलक दिखी; श्रेया घोषाल-अरिजीत सिंह ने आवाज दी फिल्म ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के अवसर पर रिलीज हुआ था। गाने को श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज दी है। इसके म्यूजिक को ए.आर. रहमान ने कंपोज, प्रोड्यूस और अरेंज किया है। गाने के लिरिक्स डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
मुंबई में बुधवार को एक्टर मुश्ताक खान की प्रेयर मीट हुई। उनका 24 सितंबर को कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया था। प्रेयर मीट में पूनम ढिल्लों, राजपाल यादव, राहुल रॉय, किरण कुमार, अनिल शर्मा समेत बॉलीवुड के कई कलाकार और उनके सहयोगी पहुंचे। वहीं, प्रेयर मीट के दौरान दिग्गज अभिनेता और ‘वागले की दुनिया’ फेम अंजन श्रीवास्तव मुश्ताक खान को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने मुश्ताक खान की तारीफ करते हुए उन्हें एक ‘सुपर डुपर हिट’ लीडर बताया। मुश्ताक खान ‘वेलकम’, ‘गदर’ जैसी कई फिल्मों में नजर आए थे। मुश्ताक खान की प्रेयर मीट से राजपाल यादव का वीडियो वायरल हुआ। जिसको लेकर कुछ पैपराजी पेजेस ने दावा किया कि राजपाल यादव को प्रेयर मीट से निकाल दिया गया। वीडियो में एक महिला कहती है कि लगता है कि आपको बाहर भेजना पड़ेगा। मैंने आपको समझाया, लेकिन आप समझ नहीं रहे। हद है, यह समय है सेल्फी लेने का। हालांकि, इस वीडियो की सच्चाई है कि राजपाल यादव को प्रेयर मीट से नहीं निकाला गया। दरअसल, जब वे प्रार्थना सभा खत्म होने के बाद बाहर निकल रहे थे, तब वहां मौजूद मीडिया (पैपराजी) और कुछ फैंस उनके साथ तस्वीरें और सेल्फी खिंचवाने लगे। शोक के उस माहौल में कुछ लोगों द्वारा सेल्फी लेने से वहां मौजूद मुश्ताक खान के परिवार को बिल्कुल पसंद नहीं आई। वीडियो में जो महिला बोल रही हैं, उनका गुस्सा राजपाल यादव पर नहीं, बल्कि वहां उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे फैंस और पैपराजी पर था। वहीं, बाहर फैंस द्वारा सेल्फी की वजह से हुए शोर-शराबे को देखकर राजपाल यादव ही वहां से अपनी कार की तरफ चले गए। 250 से ज्यादा फिल्मों में किया काम मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्बे में जन्मे मुश्ताक खान ने अभिनय की शुरुआत थिएटर से की थी। साल 1980 में फिल्म अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1990 के दशक में वे आशिकी, सड़क, साथी, हम हैं राही प्यार के, क्रांतिवीर, राजा, मेजर साब और मन जैसी फिल्मों में नजर आए। आशिकी में दर्जी रफू मास्टर और हम हैं राही प्यार के में भगवती प्रसाद मिश्रा का उनका किरदार काफी चर्चित हुआ। इसके बाद हेरा फेरी, मुझसे शादी करोगी, गदर: एक प्रेम कथा, जोड़ी नं. 1 और राउडी राठौर जैसी फिल्मों में उन्होंने कॉमिक और सपोर्टिंग रोल निभाए। 2007 की फिल्म वेलकम में मजनू भाई के साथी बल्लू के किरदार से उन्हें खास पहचान मिली। जिसमें उनका डायलॉग 'मेरी एक टांग नकली है, मैं हॉकी का बहुत बड़ा खिलाड़ी था। एक दिन उदय भाई...' काफी मशहूर हुआ। इसके बाद वेलकम बैक, स्त्री और स्त्री 2 जैसी फिल्मों में भी वे नजर आए। फिल्मों के साथ-साथ मुश्ताक खान ने टीवी पर भी काम किया। वे अदालत, चाचा चौधरी, टेढ़े-मेढ़े सपने और कुछ रंग प्यार के ऐसे भी जैसे शोज का हिस्सा रहे। हाल के वर्षों की बात करें तो साल 2025 में वे फिल्म जाट में इंस्पेक्टर मुश्ताक के किरदार में नजर आए। इसी साल उदयपुर फाइल्स में वीरेंद्र कुमार मीणा का रोल निभाया। इसके अलावा किस किसको प्यार करूं 2 में भी काम किया। साल 2026 में वे भाभीजी घर पर हैं! फन ऑन द रन, हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं और कोकिन में नजर आए। परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी मुश्ताक खान अपने पीछे पत्नी सलमा खान, दो बेटों और एक बेटी को छोड़ गए हैं। उनके बड़े बेटे का नाम मोहम्मद अरशद खान, छोटे बेटे का नाम मोहसिन खान और बेटी का नाम सबा शेख है। मुश्ताक खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पहले उन्हें किसी से प्यार हुआ था, लेकिन यह रिश्ता सफल नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने शादी से दूरी बनाने का फैसला किया था। बाद में माता-पिता की इच्छा पर उन्होंने सलमा खान से अरेंज मैरिज की। उनके बड़े बेटे मोहम्मद अरशद खान ने फिल्मी दुनिया से अलग अपना करियर बनाया है। वहीं, छोटे बेटे मोहसिन खान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं। हालांकि, वे एक्टिंग नहीं करते। मोहसिन डायरेक्टर और प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने मराठी कॉमेडी फिल्म ‘डिलीवरी बॉय’ का निर्देशन किया है। मुश्ताक खान का हुआ था अपहरण नवंबर 2024 में मुश्ताक खान को अवॉर्ड फंक्शन के बहाने बुलाकर किडनैप कर लिया गया था। उन्हें मेरठ में एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनाने की बात कही गई थी। भरोसा जीतने के लिए बदमाशों ने उन्हें 25 हजार रुपए एडवांस भेजे और मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट टिकट भी बुक कराई। 20 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद एक कैब उन्हें मेरठ लेकर निकली। रास्ते में उन्हें दूसरी गाड़ी में बैठाया गया। इसके बाद बंदूक दिखाकर उनका अपहरण कर लिया गया। उन्हें बिजनौर के एक घर में ले जाकर करीब 12 घंटे तक बंधक रखा गया। बदमाशों ने 1 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। अगली सुबह अपहरणकर्ता नशे में थे और कुछ सो रहे थे। इसी दौरान मुश्ताक खान वहां से भाग निकले। पास की मस्जिद पहुंचकर उन्होंने स्थानीय लोगों से मदद मांगी। लोगों ने उनके परिवार और पुलिस से संपर्क कराया। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने उनके बैंक खाते से करीब 2.2 लाख रुपए भी निकाल लिए थे। मामले में पुलिस ने गिरोह के कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने शक्ति कपूर और राजेश पुरी समेत दूसरे कलाकारों को भी इसी तरह फंसाने की कोशिश की थी। …………………. ये खबर भी पढ़ें… रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का निधन:बंगाली सिनेमा में प्लेबैक सिंगर थीं, शाहरुख खान अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का मंगलवार दोपहर 75 साल की उम्र में निधन हो गया। यशराज फिल्म्स (YRF) ने आधिकारिक बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी है। पूरी खबर पढ़ें
हनुमान अंश को बॉक्स ऑफिस पर रोकना अब नामुमकिन सा लग रहा है, क्योंकि घरेलू के साथ-साथ नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी फिल्म विदेशों में भी खूब पैसा कमा रही है। य
अमिताभ बच्चन ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के सेट पर फिसल गए। इससे उनके बाएं घुटने में चोट आई है। हालिया एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने इस हादसे की जानकारी दी। अमिताभ आमतौर पर शो की शुरुआत विंग्स से दौड़कर आते हुए और स्टेज के सेंटर में खड़े होकर अपने मोनोलॉग से करते हैं। हालांकि, पैर में दर्द के कारण उन्होंने इस बार बैठकर एपिसोड की शुरुआत की। उन्होंने दर्शकों से कहा कि चोट गंभीर नहीं है और वे कंटेस्टेंट्स के साथ खड़े होकर ही गेम होस्ट करेंगे। शूटिंग के दौरान फिसल गया था पैर अमिताभ बच्चन ने शो की शुरुआत में ही अपने फैंस और दर्शकों को इस घटना के बारे में बताया। उन्होंने अपने बाएं घुटने की तरफ इशारा करते हुए कहा कि बीते दिन शूटिंग के समय उनका पैर फिसल गया था। उन्होंने कहा कि आम तौर पर वे सेंटर में खड़े होकर अपनी बात रखते हैं, लेकिन आज खड़े होने में थोड़ी तकलीफ हो रही है। अमिताभ साल 2000 से 'केबीसी' होस्ट कर रहे 'कौन बनेगा करोड़पति' का 18वां सीजन दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय है। अमिताभ बच्चन साल 2000 से इस क्विज शो को होस्ट करते आ रहे हैं। केवल तीसरे सीजन को छोड़कर, जिसे शाहरुख खान ने होस्ट किया था, बाकी सभी सीजन्स में अमिताभ ही शो का मुख्य चेहरा रहे हैं। 83 से अधिक उम्र में भी उनकी फिटनेस और काम के लिएसमर्पण की लोग तारीफ करते हैं। बिग बी का 75% लिवर है खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके हैं। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब एक्स-रे हुआ लेकिन अब भी सही कारण नहीं पता चल सका। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुई तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर इसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फंट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने माने सर्जन एच.एस.भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फंट चुकी हैं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वो 4 दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया। पहले ही अस्थमा, लिवर प्रॉब्लम और निमोनिया से जूझ रहे थे बिग बी हादसे से पहले ही अमिताभ बच्चन को लिवर की समस्या थी और साथ ही वो अस्थमैटिक भी थे। ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें निमोनिया हुआ जिससे हालत और बिगड़ गई। बैंगलोर में इलाज के बाद उन्हें एयरबस से मुंबई लाया गया था। क्रेन से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया था। 8 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के बाहर उनके चाहने वालों की चौबीसो घंटे भीड़ रहती थी। पूरे देश में कहीं पूजा करवाई जा रही थी तो कहीं यज्ञ। जया बच्चन खुद भी अमिताभ की सलामती के लिए सिद्धि विनायक गई थीं, लेकिन जब वो पहुंचीं तो देखा कि उनसे पहले ही कई लोग बिग बी के लिए वहां पूजा कर रहे थे। लोगों की दुआएं रंग लाईं। एक नजर अमिताभ बच्चन की जिंदगी पर-
प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘दुपहिया’ का दूसरा सीजन आज रिलीज हो चुका है। पहले सीजन में गांव की सादगी और दिलचस्प किरदारों से दर्शकों का मनोरंजन करने के बाद यह सीरीज नए ट्विस्ट और खुलासों के साथ लौट रही है। इस सीजन में अपराध, प्यार, जुगाड़, अंधविश्वास और पेपर लीक जैसे मुद्दे देखने को मिलेंगे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अभिनेता भुवन अरोड़ा, अभिनेत्री शिवानी रघुवंशी और निर्देशक सोनम नायर ने सीरीज के किरदारों, उनकी बारीकियों, शूटिंग के अनुभवों और असल जिंदगी से जुड़ी समानताओं पर बात की। उन्होंने सीरीज से जुड़े कई दिलचस्प किस्से भी साझा किए। सवाल: पहले सीजन में धड़कपुर काफी सीधा-सादा नजर आया था। इस बार यह ‘मिर्जापुर’ जैसा क्यों बनता दिख रहा है? जवाब/सोनम नायर: पिछले सीजन में हमने दिखाया था कि धड़कपुर में बिल्कुल भी अपराध नहीं होता। वहां के लोग बहुत भोले-भाले और सीधे-साधे हैं। लेकिन कहानी के अंत तक पता चलता है कि जो लोग खुद को जितना सीधा दिखा रहे थे, वे वास्तव में उतने सीधे नहीं हैं। अब सबका पर्दाफाश हो चुका है और उनकी असलियत सामने आ गई है। इस सीजन में इन किरदारों का असली रूप देखने को मिलेगा। सवाल: भुवन और शिवानी से पहली मुलाकात में आपका क्या इम्प्रेशन था? जवाब/सोनम नायर: जब मैं भुवन से अमावस के रोल के लिए मिली थी, तो शुरुआत में हमने रोल की बात ही नहीं की। करीब आधे-एक घंटे तक हम सिर्फ हंसते रहे। भुवन मुझे बिहार और अपने ससुराल की कहानियां सुना रहे थे। मुझे लगा कि इनके साथ सेट पर बहुत मजा आएगा। रोल तो ये अच्छे एक्टर हैं, कर ही लेंगे, लेकिन सेट पर भी मजा आना चाहिए। मेरा पहला इम्प्रेशन यही था कि अगर भुवन होंगे तो मैं एंजॉय करूंगी। शिवानी को मैंने पहली बार एक पार्टी में देखा था। वहां सभी लोग हंस-खुलकर मिल रहे थे, लेकिन शिवानी चुपचाप एक कोने में खड़ी थीं। वह किसी से ज्यादा बात नहीं कर रही थीं और हाथ में डाइट कोक था। मुझे लगा कि ग्लैमर वर्ल्ड में रहने के बावजूद उनमें अलग तरह की मासूमियत है। हमें जिस तरह की लड़की चाहिए, वो यही हैं। सवाल: भुवन, आप पढ़ाई के मामले में कैसे थे? दो महीने पहले से तैयारी करने वाले या परीक्षा से एक रात पहले पढ़ने वाले? जवाब/भुवन अरोड़ा: मैं तो रट्टा मारकर पास होता था। आज भी लंबे-लंबे डायलॉग याद करने में यह आदत मेरे बहुत काम आती है। लोग अक्सर पूछते हैं कि तुम्हें इतनी जल्दी डायलॉग कैसे याद हो जाते हैं। मैं कहता हूं कि मैंने स्कूल ही रट्टे मार-मारकर पास किया है। लास्ट मिनट तो छोड़िए, मैं आखिरी सेकंड तक पढ़ता रहता था। आप अक्सर देखेंगे कि डायलॉग याद करते वक्त मेरी आंखें ऊपर की तरफ रहती हैं, जैसे मेरे अंदर कोई आत्मा आ गई हो और मैं कुछ न कुछ रट रहा हूं। मैं इसी तरीके से पास हुआ हूं। सवाल: सोनम, दोनों में वन-टेक आर्टिस्ट कौन है और परफेक्शनिस्ट कौन है? जवाब/सोनम नायर: दोनों ही वन-टेक में अच्छा परफॉर्म करते हैं। शुरुआत से ही इनका परफॉर्मेंस अच्छा रहता है। कोई छोटा-मोटा बदलाव करना होता है तो मैं करवा लेती हूं। शिवानी शायद कभी-कभी कहती होंगी कि एक टेक और कर लेते हैं, लेकिन मैं हमेशा नहीं लेती। सवाल: अगर कोई कलाकार इतना अच्छा करने के बाद भी कहता है कि कुछ कमी रह गई है, एक टेक और देना चाहता तो आप क्या करती हैं? जवाब/सोनम नायर: मैं उसे कहती हूं कि आपने इतना अच्छा किया है, मैं बहुत खुश हूं। अपने ऊपर कॉन्फिडेंस रखिए और आगे बढ़िए। हां, अगर कोई बहुत महत्वपूर्ण सीन हो और उन्हें सच में लगे कि एक और टेक जरूरी है, तो मैं उन्हें करने देती हूं। कलाकारों के अंदर कई बार इनसिक्योरिटी होती है कि हम और अच्छा कर सकते हैं। लेकिन अगर मुझे लगता है कि टेक पर्याप्त अच्छा है, तो मैं प्यार से कह देती हूं कि नहीं, बहुत अच्छा है, अब आगे बढ़ते हैं। सवाल: ट्रेलर में शनिवार को लेकर एक डायलॉग है। क्या असल जिंदगी में भी कभी कोई टोटका आपके साथ हुआ है? जवाब/भुवन अरोड़ा: शनिवार वाली बिल्कुल ऐसी ही घटना मेरे साथ हुई है, लेकिन उसमें दुपहिया नहीं, वॉशिंग मशीन थी। दिल्ली में हमने एक वॉशिंग मशीन खरीदी थी और साफ कह दिया था कि शनिवार को हमारे यहां लोहे की चीज घर में नहीं आती। लेकिन शनिवार रात करीब 8-8:30 बजे उसकी डिलीवरी आ गई। डिलीवरी वाले ने मेरी मम्मी से कहा कि मैडम, अब इसे वापस कहां लेकर जाएंगे और दोबारा लेकर आएंगे, आप इसे रख लीजिए। मम्मी को लगा कि बच्चों को दोबारा परेशानी होगी, इसलिए उन्होंने रख लिया। उस वॉशिंग मशीन ने हमें बहुत परेशान किया। कभी चूहे उसके तार काट देते थे, तो कभी कोई और समस्या हो जाती थी। करीब साढ़े तीन महीने तक हम उस परेशानी से जूझते रहे। आखिरकार कंपनी ने मशीन रिप्लेस की। इसलिए हमारे घर में आज भी नियम है कि शनिवार को लोहे की चीज नहीं आती। सवाल: शिवानी, क्या आप भी इन अंधविश्वासों को मानती हैं? जवाब/शिवानी रघुवंशी: मैं इन सब चीजों को नहीं मानती। लेकिन हमारे घर में ऐसी बातें होती रहती हैं। कोई कहता है मंगलवार को यह नहीं करना चाहिए, कोई कहता है गुरुवार को ऐसा नहीं करना चाहिए। अभी मैं फ्लाइट बुक कर रही थी तो घर में कहा गया कि शुक्रवार को एक खास दिशा में नहीं जाना चाहिए। इसे दिशा शूल कहते हैं। मैं इन चीजों को नहीं मानती। मैं कहती हूं कि आज ही जाकर देखती हूं, कुछ होगा तो देखा जाएगा। आज तक मेरे साथ कुछ गलत नहीं हुआ। मेरा मानना है कि जो होगा, देखा जाएगा। रोशनी के नेचर में भी यही बात है। वह अंधविश्वास को चुनौती देती है और कहती है कि करके दिखाओ, मेरे साथ क्या होगा। सवाल: भुवन, अमावस और आपकी पर्सनैलिटी में क्या समानता है? भुवन अरोड़ा: अमावस और मेरे अंदर एक चीज बहुत कॉमन है। अगर मैं किसी से प्यार करता हूं तो उसके लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं। हां, एक चीज बिल्कुल कॉमन नहीं है। मैं क्लेप्टोमेनियाक नहीं हूं और किसी का सामान नहीं चुराता। शिवानी रघुवंशी: मेरे और रोशनी में कुछ भी कॉमन नहीं हैं और मैं वो चाहती भी नहीं हूं। सवाल: आपने प्यार के लिए असल जिंदगी में ऐसा क्या किया है, जिसे आप बड़ी कोशिश मानते हैं? जवाब/भुवन अरोड़ा: मुझे याद है, मेरी पत्नी को एक ज्वेलरी पसंद आई थी और वह पुणे में थी। हमारी एनिवर्सरी पर उन्हें वह ज्वेलरी देने के लिए मैं खास तौर पर पुणे गया। ज्वेलर को ऑर्डर दिया और फिर ज्वेलरी लेकर वापस आया। मैं मानता हूं कि पार्टनर के लिए हम छोटी-छोटी चीजें कर सकते हैं। ऐसी कोई नौबत नहीं आई कि जान पर बात आ जाए। टचवुड, ऐसी स्थिति आई ही नहीं। सवाल: सीरीज में अमावस दोस्त के लिए चीटिंग का जुगाड़ करता है। क्या असल जिंदगी में कभी नकल करनी पड़ी? शिवानी रघुवंशी: नहीं, बहुत ज्यादा नहीं। हालांकि मैं स्कूल में बहुत गंदी चीटिंग करती थी। मैं पूरा टर्न लेकर नकल करती थी। मेरे दोस्त कहते थे कि तू आगे रह, हम तेरे पीछे हैं। सवाल: सीरीज में पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया गया है। अगर अमावस को इस समस्या को अपने जुगाड़ से खत्म करना हो तो वह क्या करेगा? जवाब/भुवन अरोड़ा: सबसे पहले तो मैं रोशनी को समझाऊंगा कि इन बेकार के चैलेंज के चक्कर में मत पड़ो। सिर्फ कह दिया है तो जरूरी नहीं कि उसे करके दिखाना ही है। मैं तो खुश ही था कि अगर वह पास हो जाएगी तो शहर चली जाएगी और मुझसे दूर हो जाएगी। मैं कभी नहीं चाहूंगा कि वह मुझसे दूर जाए। लेकिन इश्क का मारा हूं, क्या करूं? जो कहती है, महबूबा के लिए करना पड़ता है। इसलिए जब तक साथ दे सकता हूं, कोशिश करूंगा। फिर चाहे वह दूर रहे या पास। सवाल: सोनम, आप इस मुद्दे पर कोई समाधान देना चाहेंगी? सोनम नायर: मैं कौन होती हूं समाधान बताने वाली? हमारे सिस्टम को हेड करने वाले बहुत सारे मुझसे ज्यादा पढ़े-लिखे और जिम्मेदार लोग हैं। हम अपनी तरफ से सिर्फ लोगों की कहानियां बता सकते हैं। लोगों को जो समस्याएं होती हैं, उसमें हम अपने स्तर पर क्या बदलाव ला सकते हैं, उस स्तर तक मैं कुछ कह सकती हूं। लेकिन इतनी बड़ी समस्या का समाधान, जब हम सब मिलकर भी नहीं कर पा रहे हैं, तो मैं इसका समाधान नहीं बता सकती। यह भी संयोग की बात है। जब हमने यह शो बनाया था, तब पेपर लीक का मुद्दा इतना सामने या प्रासंगिक नहीं था। मुझे लगता है कि जिस समय यह मुद्दा चर्चा में है, उसी समय हमारा शो भी आ रहा है। हमने इसे काफी पहले शूट किया था। इसलिए यह पूरी तरह संयोग है। सवाल: भुवन, हाल ही में हुए नेशनल अवॉर्ड्स में आपकी दो फिल्मों से जुड़े कलाकारों को सम्मान मिला। आप इसे कैसे देखते हैं? भुवन अरोड़ा: मैं खुद को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूं कि उन दोनों बेहतरीन फिल्मों का हिस्सा बनने का मौका मिला। अगर उनकी कहानी कहने में मैंने थोड़ा सा भी योगदान दिया है, जिसकी वजह से वे इस मुकाम तक पहुंचीं और नेशनल अवॉर्ड जीता, तो मैं बहुत खुश और आभारी हूं। दोनों फिल्में मेरे लिए बहुत खास हैं। दोनों ही वास्तविक जीवन पर आधारित कहानियां हैं। मुझे लगता है कि हमें ऐसी और फिल्में बनानी चाहिए। सवाल: ‘दुपहिया’ में पहली गाड़ी को लेकर भावनात्मक जुड़ाव दिखाया गया है। आपकी पहली बाइक या कार से जुड़ी क्या यादें हैं? भुवन अरोड़ा: जब मैं कॉलेज में पढ़ रहा था, तब मैंने अपनी पहली बाइक खरीदी थी, जो मेरे नाम पर थी। उससे पहले घरवालों ने जो बाइक खरीदकर दी थी, वह उनके नाम पर थी। लेकिन अपनी बुलेट मैंने खुद खरीदी थी। वह बुलेट आज भी मेरे पास है। काफी वक्त हो गया है, मैं उसे चला नहीं पाता और समय भी नहीं मिलता, लेकिन मैंने उसे संभालकर रखा है। वह मेरी पहली ऐसी गाड़ी थी, जो मेरे नाम पर थी। इसलिए वह मेरे लिए बहुत खास है। मुझे नहीं लगता कि मैं उसे कभी बेचूंगा। शिवानी रघुवंशी: जिस गाड़ी पर मैंने ड्राइविंग सीखी थी, वह सफेद रंग की फिएट 118 थी। वह हमारी फैमिली कार थी और मैंने उसी पर गाड़ी चलाना सीखा। मुझे याद है, एक दिन मैं अपनी फैमिली को ड्राइव करके लेकर गई थी। वे बहुत खुश और गर्व महसूस कर रहे थे कि उनकी बेटी गाड़ी चला रही है। इसलिए उस गाड़ी से मेरा खास जुड़ाव है।
‘मैं अकेले ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर,लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।’ इन पंक्तियों को सुनकर लगता है कि इन्हें लिखने वाला शख्स शायद जिंदगी की गहराइयों में डूबा कोई बेहद संजीदा और गंभीर शायर होगा। लेकिन यही मजरूह जब फिल्मों के लिए लिखने बैठे, तो उनकी कलम ने मोहब्बत के ऐसे रंग बिखेरे कि शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान के गाने सालों साल याद गिए गए। ‘पहला नशा… पहला खुमार…’,‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा…’,‘साथिया तूने क्या किया…’,और ‘ऐ काश कि हम होश में अब आने न पाएं…’ये सिर्फ गाने नहीं, बल्कि ऐसी धुनें हैं जिनके साथ कई पीढ़ियों की मोहब्बत, जवानी और यादें जुड़ी हुई हैं। उनके सदाबहार गीतों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि उसे गिनते-गिनते शाम हो जाए। ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ (तीसरी मंजिल, 1966) से लेकर ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ (यादों की बारात, 1973) तक, मजरूह की कलम ने हिंदी सिनेमा को दर्जनों ऐसे गीत दिए, जो वक्त बदलने के बावजूद पुराने नहीं पड़े। उनकी कलम में बगावत की स्याही भी थी। 1949 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को ‘हिटलर का चेला’ कहने पर जेल में डाला गया। विकल्प मिला- माफी मांगो या दो साल जेल में रहो। उन्होंने जेल चुनी। 1 अक्टूबर 1919 को जन्मे मजरूह सुल्तानपुरी की आज 107वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर जानिए कैसे एक शायर की कलम ने मोहब्बत के गीतों को ऐसे शब्द दिए, जिसे वक्त भी नहीं मिटा सका- 1 अक्टूबर 1919, मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म ब्रिटिश इंडिया के सुल्तानपुर में हुआ। असली नाम था सरारुल हसन खान, जो आगे जाकर सुल्तानपुर के नाम पर मजरूह सुल्तानपुरी नाम से जाने गए । पिता पुलिस में थे, जिन्होंने उनका दाखिला मदरसे में करवाया, वो अंग्रेजी पढ़ाई के खिलाफ थे। यहीं उन्होंने उर्दू, अरबी, फारसी सीखी। बढ़ती उम्र के साथ उनकी दिलचस्पी गानों में होने लगी। लेकिन पिता ने साफ कह दिया कि तुम्हें मेडिकल की पढ़ाई करनी होगी। पिता की सख्ती के आगे गायिकी का शौक फीका पड़ गया और उनका दाखिला करवाया गया लखनऊ के तामील-उल-तबी यूनानी मेडिसिन कॉलेज में। पढ़ाई पूरी कर वह हकीम बन गए, लेकिन जहन में गायिकी ही चलती थी। एक दिन तहसीलदार की बेटी की नब्ज देखते हुए, वो उसे दिल दे बैठे। दोनों में बातचीत भी शुरू हो गई, लेकिन जल्द ही लड़की के पिता ने दोनों के रास्ते अलग कर दिए। दिल टूटा, तो मजरूह सुल्तानपुरी ने कलम उठाई और दिल का दर्द कागजों में लिखने लगे। जल्द ही शब्द शायरी का रूप लेने लगे। दूसरे शायरों को देखते हुए उन्होंने अपना पेन नेम तखल्लुस रखा, जिसका मतलब था- नसीहत देने वाला। कुछ दिनों बाद दोस्त को बताया, तो उसने कहा- ‘नहीं ये नाम अच्छा नहीं, तुम नाम रखो मजरूह यानी घायल।’ ऐसे उनका नाम तखल्लुस मजरूह हुआ। हर शायरी के नीचे वह यही लिखने लगे। 1941 की बात है, एक रोज वह सुल्तानपुर में हो रहे मुशायरे में पहुंचे। हर कोई मंच पर अपनी-अपनी शायरी सुना रहा था, तो मजरूह सुल्तानपुरी भी अपनी डायरी लेकर पहुंच गए। दो लाइनें पढ़ीं, तो हर ओर से वाह- वाह…, की आवाज आने लगी। वाह-वाह करने वालों में उस दौर के मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी भी शामिल थे। वही मशहूर शायर जिनकी कलम से निकली थीं ये पंक्तियां- “ये इश्क नहीं आसां, इतना ही समझ लीजेइक आग का दरिया है और डूब के जाना है।” और “हम को मिटा सके ये जमाने में दम नहीं,हम से जमाना खुद है, जमाने से हम नहीं।” मजरूह सुल्तानपुरी की शायरी जिगर मुरादाबादी को इतनी पसंद आई कि उन्होंने शागिर्द से पूछा- ‘ये इतनी कम उम्र का बच्चा इतनी अच्छी शायरी कर रहा है। कौन है ये?’ जवाब मिला- ‘मजरूह है।’ जिगर मुरादाबादी ने उन्हें पास बुलाकर बात की और अपना शागिर्द बना लिया। मजरूह ने जिगर मुरादाबादी जैसा उस्ताद मिलने के बाद हकीमगिरी बंद कर दी और लिखने में तवज्जो देने लगें। कुछ समय बाद एक मुशायरे में जिगर साहब और मजरूह साहब दोनों थे। यहां फिल्म इंडस्ट्री की कई मशहूर हस्तियां भी थीं। तभी मशहूर प्रोड्यूसर कारदार साहब ने जिगर मुरादाबादी के पास आकर कहा- ‘मैं एक फिल्म बना रहा हूं शाहजहां, चाहता हूं कि आप उसमें गाने लिखें।’ जवाब मिला- ‘ये फिल्मी गाने लिखना मेरे बस की बात नहीं है। ये नौजवान शायर है मजरूह। इसको तुम मुशायरे में सुन चुके हो।’ इस पर जिगर साहब ने मजरूह साहब से कहा- ‘तुम कोशिश करो।’ मजरूह साहब बोले- ‘आप खुद तो मना कर रहे हैं और मुझे लिखने को बोल रहे हैं। मैं भी आपकी तरह साहित्य में, अदब में खुद को बड़ा शायर बनाना चाहता हूं, फिल्मी गीतकार नहीं।’ इस बार जिगर मुरादाबादी ने हल्की सी हंसी के साथ कहा- ‘देखो, तुम अभी जवान हो। 24-25 साल के हो। कल तुम्हारी शादी होगी, बीवी-बच्चे होंगे, जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। मैं अपने तजुर्बे से कह रहा हूं कि सिर्फ शायरी से घर नहीं चलेगा।’ मजरूह साहब, उस्ताद की बात से इनकार नहीं कर सके और ‘शाहजहां’ फिल्म के लिए दो गाने लिखे। पहला गाना था- ‘गम दिए मुस्तकिल, कितना नाजुक है दिल, ये न जाना, हाय हाय ये जालिम जमाना….’, और दूसरा लिखा- ‘जब दिल ही टूट गया, हम जी कर क्या करेंगे….,।’ मशहूर सिंगर के.एल. सहगल एक रोज फिल्मी गाने सुन रहे थे। तभी रेडियो पर गाना बजा- ‘जब दिल ही टूट गया, हम जी कर क्या करेंगे…’। गाना सुनते ही सहगल बोल पड़े- ‘जब मेरी मौत हो, तो मेरी अंतिम यात्रा में यही गाना बजना चाहिए।’ 18 जनवरी 1947 को जब के.एल. सहगल का निधन हुआ, तो उनकी आखिरी विदाई में यही गीत बजा। शाहजहां से बतौर लिरिसिस्ट करियर की शुरुआत करने वाले मजरूह सुल्तानपुरी ने आगे नाटक (1947), डोली (1947), अंजुमन (1948) जैसी कई फिल्मों के गाने लिखे। हालांकि उन्हें असल पहचान महबूब खान की फिल्म अंदाज (1949) से मिली। फिल्म में नरगिस, दिलीप कुमार और राज कपूर पर फिल्माए गए सभी गाने मजरूह सुल्तानपुरी ने ही लिखे। नेहरू जी के खिलाफ लिखने पर हुई जेल 1949 में मजरूह सुल्तानपुरी मजदूर आंदोलन में पहुंचे। मंच पर उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को ‘हिटलर का चेला’ कहते हुए एक कविता पढ़ी- मन में जहर डॉलर के बसा के, फिरती है भारत की अहिंसा। खादी की केंचुल को पहनकर, ये केंचुल लहराने न पाए। ये भी है हिटलर का चेला, मार लो साथी जाने न पाए। कॉमनवेल्थ का दास है नेहरू, मार लो साथी जाने न पाए। तत्कालीन गवर्नर मोरारजी देसाई के कहने पर आंदोलन में शामिल एक्टर बलराज साहनी और अन्य लोगों के साथ मजरूह सुल्तानपुरी को भी ऑर्थर रोड जेल में डाल दिया गया। जेल में मजरूह सुल्तानपुरी के सामने साफ विकल्प रखा गया- ‘माफी मांगो या दो साल जेल में रहो।’ मजरूह ने माफी मांगने के बजाय जेल जाना चुना। उनकी कलम सत्ता के सामने झुकने को तैयार नहीं थी। उन्होंने दो साल की सजा काटी। इतना ही नहीं, आगे भी ऐसे कई मौके आए, जब उनकी कविताओं और उनके विचारों की कीमत उन्हें जेल जाकर चुकानी पड़ी। जब मजरूह जेल में बंद थे तब उनकी पहली बेटी हुई। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इस दौरान मजरूह सुल्तानपुरी ने जेल में रहते हुए कुछ फिल्मों में गीत लिखने की हामी भरी और उनसे मिले पैसे परिवार को पंहुचा दिए। मजरूह 2 साल बाद 1951 के करीब जेल से बाहर आए। मजरूह ने लगभग 350 फिल्मों के लिए गाने लिखे हैं। उन्होंने आमिर खान स्टारर कयामत से कयामत तक, जो जीता वही सिकंदर, अकेले हम अकेले तुम से लेकर दिल आशना है, अंदाज अपना अपना, खामोशी, दरार, जानम समझा करो, क्या कहना और पुकार जैसी फिल्मों के गाने लिखे। उन्होंने आखिरी बार शाहरुख खान स्टारर फिल्म वन टू का फोर के लिए गाने लिखे, जो उनके निधन के बाद रिलीज हुआ। इस फिल्म का गाना ‘खामोशियां गुनगुनाने…,’ लगीं काफी हिट रहा था। मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने करियर में 8 हजार से ज्यादा गाने लिखे हैं। जिसमें से ज्यादातर गाने हिट रहे हैं। मजरूह पहले गीतकार हैं जिन्हें 1993 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया है। 24 मई 2000 को उनका लंग्स संबंधित दिक्कतों के चलते 80 साल की उम्र में निधन हो गया। मजरूह की याद में सुल्तानपुर में एक बगीचा बनाया गया जिसका नाम रखा गया मजरूह सुल्तानपुरी उद्यान। सुल्तानपुर में एंट्री के रास्ते में ही उनके नाम का गेट भी बनाया गया है।
हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर 55वें दिन कमाल कर दिया। 2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने साबित किया कि अच्छी कहानी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच सकती है।
एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी जयपुर में अपने डांस के कारण चर्चा में हैं। जयपुर में उनके डांस वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कुछ यूजर्स ने ट्रोल (मजाक उड़ाना) लिया था। इस पर ममता ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट कर कड़ा जवाब दिया है। ममता ने अपनी पोस्ट में लिखा- अच्छा है उस वक्त इंस्टाग्राम नहीं था, जब श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रास करते थे। ये उनको भी दिखाते और कहते कि ये कैसा भगवान जो नाचता है। उस रास में महादेव भी पहुंचे थे, दाढ़ी और मूंछो के साथ। यहां देखिए डांस से जुड़े फोटोज जयपुर में अपने ही हिट गानों पर थिरकी थीं ममता राजस्थान फिल्म फेस्टिवल का 14वां संस्करण 26 सितम्बर को जयपुर के दीप स्मृति ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ था। समारोह में ममता कुलकर्णी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसी दौरान जब उनकी फिल्मों के लोकप्रिय गाने बजाए गए तो ममता ने कुछ स्टेप पर डांस भी किया। वहीं एक दिन पहले भी उन्होंन इसी फेस्टिवल में स्टूडेंट्स के साथ डांस परफॉर्म किया था। उनकी प्रस्तुति में ‘घातक’ के ‘कोई जाए तो ले आए’, ‘करण अर्जुन’ के ‘एक मुंडा मेरी उम्र का’, ‘भंगड़ा पाले’, सबसे बड़ा खिलाड़ी फिल्म का ‘भोली भाली लड़की’ जैसे गीत शामिल रहे। ममता ने विद्यार्थियों के साथ इन गानों पर डांस किया। प्रस्तुति के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और इसके बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। डांस के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा ममता की इस प्रस्तुति की एक वजह यह भी रही कि पिछले कुछ समय से उनकी सार्वजनिक पहचान उनके फिल्मी दौर के बजाय आध्यात्मिक जीवन से जुड़ी रही हैं। ऐसे में जब वह अचानक अपने 90 के दशक के गानों पर उसी अंदाज में डांस करती नजर आईं तो सोशल मीडिया पर उनके पुराने फिल्मी अवतार की चर्चा शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनके डांस को उनके मौजूदा आध्यात्मिक जीवन से जोड़कर प्रतिक्रिया दी। इसी माहौल के बीच ममता की इंस्टाग्राम पोस्ट सामने आई। पोस्ट में उन्होंने सीधे किसी व्यक्ति या टिप्पणी का नाम नहीं लिया, बल्कि श्रीकृष्ण के गोपियों के साथ रास का उदाहरण देते हुए यह सवाल उठाया कि अगर उस समय सोशल मीडिया का दौर होता तो उस प्रसंग को भी लोग अपनी-अपनी नजर से देखते और सवाल उठाते। ये भी पढ़ें… जयपुर- फिल्म 'करण अर्जुन’ के गाने पर नाचीं ममता कुलकर्णी:कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ किया डांस, बोलीं- डांस और एक्टिंग मनोरंजन नहीं साधना है
सुपरस्टार रजनीकांत अपनी अपकमिंग फिल्म 'धर्मन' की शूटिंग के लिए मैसूर पहुंचे हैं। यहां शूटिंग सेट पर वह सादगी भरे अंदाज में ऑटो-रिक्शा में बैठकर पहुंचे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। ऑटो से उतरने के बाद रजनीकांत ने वहां मौजूद फैंस का अभिवादन किया। अश्वथ मारिमुथु के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को कमल हासन की कंपनी राज कमल फिल्म्स इंटरनेशनल और टरमरिक मीडिया के आर महेंद्रन मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। इस बीच रजनीकांत की एक और फिल्म 'जेलर 2' भी 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। जून में सामने आया था पहला लुक, डॉक्टर के रोल में दिखेंगे फिल्म 'धर्मन' में रजनीकांत के किरदार का पहला पोस्टर इसी साल जून में जारी किया गया था। पोस्टर में रजनीकांत अपने ट्रेडमार्क सनग्लासेस पहने और हाथ में खून से सना सर्जिकल चाकू (स्केल्पल) थामे नजर आए थे। इसके बैकग्राउंड में एक ऑपरेटिंग थिएटर दिखाया गया था। फिल्म में रजनीकांत एक डॉक्टर की भूमिका में हैं। उनके साथ सिमरन बग्गा, राशी खन्ना और योगी बाबू भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म से अलग हो चुके दो डायरेक्टर 'धर्मन' की शुरुआत से अब तक इसके डायरेक्शन डिपार्टमेंट में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। साल 2025 में जब इस प्रोजेक्ट का ऐलान हुआ था, तब सुंदर सी. को डायरेक्टर के तौर पर चुना गया था। हालांकि कुछ कारणों से उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया। इसके बाद 'डॉन' फेम डायरेक्टर सिबी चक्रवर्ती ने कमान संभाली और प्री-प्रोडक्शन का काम पूरा किया। बाद में वे भी बिना किसी स्पष्ट कारण के फिल्म से अलग हो गए। आखिरकार अश्वथ मारिमुथु को फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी गई। 15 अक्टूबर को रिलीज होगी 'जेलर 2' 'धर्मन' की शूटिंग के साथ ही रजनीकांत की फिल्म 'जेलर 2' भी रिलीज की तैयारी में है। यह फिल्म 15 अक्टूबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। साल 2023 की ब्लॉकबस्टर 'जेलर' के इस सीक्वल का निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार कर रहे हैं। फिल्म में रजनीकांत एक बार फिर रिटायर्ड जेलर टाइगर मुथुवेल पांडियन के किरदार में दिखाई देंगे। इस बार कहानी में वे बदला लेने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय क्राइम सिंडिकेट से टकराते नजर आएंगे। विद्या बालन समेत कई दिग्गज कलाकार शामिल 'जेलर 2' में पहली फिल्म के कलाकार राम्या कृष्णन और योगी बाबू अपनी भूमिकाएं दोहरा रहे हैं। वहीं इस सीक्वल में विद्या बालन, एस.जे. सूर्या, सूरज वेंजारामूडु, विजय सेतुपति और मिथुन चक्रवर्ती जैसे दिग्गज कलाकारों की नई एंट्री हुई है। इसके अलावा फिल्म में मोहनलाल, शिवा राजकुमार, जैकी श्रॉफ और ऋतिक रोशन के भी कैमियो रोल में नजर आने की खबर है। ये खबर भी पढ़ें सलमान ने पैपराजी से कर ली सुलह:कुछ घंटे पहले नजरअंदाज किया, फिर दिए पोज; ऐश्वर्या ने पैप्स के साथ तस्वीरें क्लिक करवाईं सलमान खान मंगलवार देर रात मुंबई के एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो के बाहर स्पॉट किए गए। टीवी शो बिग बॉस में पैपराजी की आलोचना के बाद उन्होंने पहली बार रुककर फोटोग्राफर्स को पोज दिए। पूरी खबर पढ़ें
झारखंडी वाद्य यंत्र मांदर को मिला जी आई टैग
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महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने विमल इलायची के विज्ञापन मामले में बॉलीवुड एक्टर्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के मुताबिक तीनों एक्टर्स ने नोटिस का जवाब दे दिया है और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और विज्ञापन करने वाले सभी सेलिब्रिटीज को भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि फूड सेफ्टी एक्ट के तहत भ्रामक या सरोगेट विज्ञापन करने पर सिर्फ कंपनी ही नहीं, बल्कि प्रचार करने वाले इन्फ्लुएंसर्स और एक्टर्स पर भी कार्रवाई होगी। 'ब्रांड प्रमोट करने वाले इन्फ्लुएंसर्स को भी पूरी जानकारी होना जरूरी' महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने मीडिया से बातचीत में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि कानून में इन्फ्लुएंसर्स और ब्रांड एंडोर्स करने वालों के लिए नियम पहले से तय हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSAI) का सेक्शन 24 साफ कहता है कि अगर आप किसी प्रोडक्ट का प्रमोशन या एंडोर्समेंट कर रहे हैं, तो आपको उस प्रोडक्ट की पूरी जानकारी होनी चाहिए। प्रचार करने वाले व्यक्ति और इन्फ्लुएंसर की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह प्रोडक्ट की प्रामाणिकता की जांच करे। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 'इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज कानून से ऊपर नहीं' कमिश्नर मुंढे ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि चाहे कोई बड़ा बॉलीवुड स्टार हो या फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, कानून की नजर में वे केवल विज्ञापनदाता (एडवरटाइजर) हैं। जो लोग यह तर्क देते हैं कि सारी जिम्मेदारी केवल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी की है, वे पूरी तरह गलत हैं। नैतिक और कानूनी दोनों तरह से विज्ञापन करने वाले पर जिम्मेदारी तय होती है। एफएसएसएआई के 2018 के एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स रेगुलेशन के तहत गलत दावा करने, भ्रामक जानकारी देने या सरोगेट ऐड बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। विमल इलायची के जरिए पान मसाला के सरोगेट ऐड का आरोप FDA ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस भेजा था। एजेंसी का आरोप है कि विमल इलायची का विज्ञापन असल में विमल पान मसाला का सरोगेट प्रमोशन (परोक्ष विज्ञापन) है। महाराष्ट्र में गुटखा और पान मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध है। एक्टर्स को जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया था। खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 53 के तहत भ्रामक विज्ञापन का हिस्सा बनने या उसे प्रकाशित करने पर 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। जवाब देने वाले एक्टर्स की होगी सुनवाई कमिश्नर ने बताया कि जिन एक्टर्स ने नोटिस का जवाब दिया है और सुनवाई की मांग की है, उनकी बात सुनी जा रही है। इससे पहले शुरुआत में एक एक्टर की तरफ से जवाब न मिलने पर एडजुडिकेशन और प्रॉसिक्यूशन की कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि अब तीनों अभिनेताओं के जवाब आ चुके हैं, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। ये खबर भी पढ़ें विमल इलायची विज्ञापन विवाद में घिरे शाहरुख-अजय:पुराने बयान चर्चा में; शाहरुख बोले थे- मेरी कमाई मत रोको, अजय ने कहा- बनाना बंद कर दो नोटिस मिलने के बाद कलाकारों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों के प्रमोशन को लेकर पुराने बयान फिर चर्चा में आ गए हैं। शाहरुख खान और अजय देवगन पहले भी कह चुके हैं कि अगर कोई प्रॉडक्ट सेहत के लिए नुकसानदेह है, तो सरकार को उसके निर्माण और बिक्री पर ही रोक लगा देनी चाहिए। पूरी खबर पढ़ें
महज डेढ़ करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने जिस तरह दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई, उसने फिल्म की अगली कड़ी की संभावनाओं को लेकर भी उत्सुकता बढ़ा दी है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने बताया कि इसे आगे ले जाने का विचार सफलता मिलने के बाद पैदा नहीं हुआ, बल्कि फिल्म शुरू करने से पहले ही इसे एक फ्रेंचाइजी के रूप में विकसित करने की योजना थी। यहां तक कि शुरुआती स्तर पर तीन फिल्मों के बारे में सोचा गया था। हालांकि, दूसरे पार्ट की स्क्रिप्टिंग अभी शुरू नहीं हुई है और निर्देशक के दूसरी फिल्म साइन करने के कारण इसमें कुछ समय लग सकता है। इसके बावजूद अनुप्रिया नागर का कहना है कि कहानी और महाराज जी के जीवन से जुड़ी इतनी सामग्री है कि एक फिल्म में सब कुछ समेटना संभव नहीं। सवाल: ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद इसे फ्रेंचाइजी के रूप में आगे ले जाने की तैयारी कितनी आगे बढ़ चुकी है? जवाब: इसका विचार सफलता के बाद नहीं आया है। फिल्म बनाने से पहले ही हमारे मन में इसे फ्रेंचाइजी के तौर पर विकसित करने की बात थी। महाराज जी की इतनी सारी कहानियां हैं, उनके जीवन से जुड़ी इतनी अद्भुत लीलाएं हैं कि एक फिल्म में सब कुछ बताना संभव नहीं है। इसलिए शुरुआत में ही हमने तीन फिल्मों के बारे में सोचा था। लेकिन अभी मैं यह नहीं कह सकती कि दूसरी फिल्म कब आएगी। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान पहली फिल्म को उसका पूरा न्याय देने पर है। हम अभी भी उसके साथ जुड़े काम कर रहे हैं। दूसरी फिल्म का विचार पूरी तरह मौजूद है, लेकिन उसकी राइटिंग अभी शुरू नहीं हुई है। सवाल: क्या दूसरे पार्ट के लिए कोई संभावित टाइमलाइन तय है? जवाब: अभी कोई निश्चित टाइमलाइन बताना जल्दबाजी होगी। हमारे डायरेक्टर ने एक दूसरी फिल्म साइन कर ली है, इसलिए स्वाभाविक तौर पर थोड़ा समय लगेगा। हमारी टीम ने अभी दूसरी फिल्म को लेकर पूरी तरह बैठकर चर्चा भी नहीं की है। जब तक वह बातचीत नहीं होती, तब तक तारीख बताना सही नहीं होगा। सच कहूं तो मैं भी इंतजार कर रही हूं कि कब महाराज जी बताएंगे कि यह फिल्म कब आएगी। सवाल: पहली फिल्म की सफलता के बाद क्या दूसरे पार्ट का बजट कई गुना बढ़ाने की योजना है? जवाब: मेरी सोच इस मामले में बहुत स्पष्ट है। मुझे लगता है कि पहली फिल्म जिस बजट में बनी, उसे उसी बजट में बनना चाहिए था। अगर हमने उसमें 10 या 20 करोड़ रुपये लगा दिए होते तो जरूरी नहीं कि फिल्म बेहतर बनती। उल्टा उसमें ऐसा VFX या AI आ सकता था जिसकी कहानी को जरूरत ही नहीं थी और उससे फिल्म की ऑथेंटिसिटी प्रभावित होती। हम जिस दौर की कहानी कह रहे हैं, उसमें सिर्फ किरदार ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। लैंडस्केप, विजुअल टेक्सचर, वातावरण और उस समय की दुनिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए हमारे लिए सबसे जरूरी चीज ऑथेंटिसिटी है। अगर समाज ने हमें इतना प्यार और सपोर्ट दिया है तो हम फिजूलखर्ची नहीं कर सकते। हां, अगर अगली कहानी की जरूरत बजट बढ़ाने की होगी तो हम जरूर बढ़ाएंगे। सवाल: यानी स्केल बढ़ सकता है, लेकिन सिर्फ कहानी की जरूरत के हिसाब से? जवाब: बिल्कुल। मान लीजिए कहानी में कोई बड़ा युद्ध दिखाना है या ब्रिटिश राज और कॉलोनाइजेशन का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे सीक्वेंस स्वाभाविक रूप से ज्यादा संसाधन मांगेंगे। वहां बजट बढ़ना जरूरी है। लेकिन सिर्फ इसलिए पैसा खर्च करना कि फिल्म ज्यादा ग्लॉसी दिखाई दे या बड़ी लगे, यह हमारी सोच नहीं है। हम कहानी को बड़ा बनाने के लिए खर्च करेंगे, फिल्म को सिर्फ महंगा दिखाने के लिए नहीं। सवाल: सफलता के बाद क्या किसी बड़े स्टूडियो के साथ साझेदारी की संभावना भी बनी है? जवाब: संभावनाएं हमेशा रहती हैं, लेकिन फैसला हमारा होगा। अभी हमारे साथ अलग-अलग स्तर पर पार्टनर्स जुड़े हुए हैं। सिनेपोलिस ने ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूशन किया है और हुमाले ने ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन संभाला है। लेकिन हमारा प्रोडक्शन हाउस हमारा ही है। अगर कोई स्टूडियो हमारे साथ आता है तो हम यह देखेंगे कि वह फिल्म के लिए सही है या नहीं। आखिरकार कितना बजट रखना है, कितना खर्च करना है और फिल्म को किस तरह आगे ले जाना है, इन चीजों पर हमारा नियंत्रण रहना जरूरी है। सवाल: अगर कोई बड़ा स्टूडियो जुड़ता है तो क्या फिल्म का स्केल भी अपने आप बड़ा हो जाएगा? जवाब: ऐसा जरूरी नहीं है। सिर्फ किसी बड़े स्टूडियो के जुड़ने से हमारा स्केल बदल जाए, यह हमारी सोच नहीं है। हमारा उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना या फिल्म को एक कमर्शियल और फाइनेंशियल प्रोजेक्ट की तरह देखना नहीं है। हमारे लिए पहली प्राथमिकता फिल्म की आत्मा और ऑथेंटिसिटी है। पहली फिल्म में आपको वह साफ दिखाई देती है। अगर कोई स्टूडियो हमारे साथ आकर उसी चीज को बनाए रखने में विश्वास करता है तो हम जरूर साथ काम करेंगे। लेकिन अगर उसके आने का मतलब फिल्म की मूल भावना से समझौता करना है तो हम अपने दम पर भी फिल्म बना सकते हैं। सवाल: फिल्म का वास्तविक बजट कितना था? अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। जवाब: फिल्म करीब डेढ़ करोड़ रुपये से थोड़ी ज्यादा में बनी है, लेकिन दो करोड़ रुपये में नहीं बनी। हमारा बजट दो करोड़ से कम ही रहा है। हम तीन प्रोड्यूसर्स हैं और हमने इसमें एक-तिहाई के हिसाब से योगदान दिया है। सवाल: निर्देशक ने पारंपरिक फीस लेने के बजाय प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल चुना। यह फैसला कैसे हुआ? जवाब: हमारे डायरेक्टर ने पारंपरिक तरीके से फीस लेने के बजाय प्रॉफिट शेयरिंग में हिस्सा लिया है। मुझे लगता है कि यह एक अलग और अच्छा मॉडल है। यह उनकी पहली फीचर फिल्म थी और उन्होंने बहुत अच्छी फिल्म बनाई। मेरी सोच यह है कि अगर फिल्म प्रॉफिट कमाती है तो उसमें निर्देशक की हिस्सेदारी होनी चाहिए। एक निर्माता के तौर पर हमें लगा कि यह उनके योगदान को सम्मान देने का सही तरीका है। सवाल: यानी शुरुआत से ही निर्देशक को सिर्फ फीस लेने वाले प्रोफेशनल के बजाय प्रोजेक्ट के पार्टनर की तरह देखा गया? जवाब: हां। अगर कोई व्यक्ति अपनी पहली फीचर फिल्म में इतना अच्छा काम कर रहा है और प्रोजेक्ट में उसका योगदान इतना महत्वपूर्ण है तो सफलता में उसका हिस्सा होना चाहिए। हमारे लिए यह उचित मॉडल था। सवाल: जब आपने ‘हनुमान अंश’ शुरू की थी, तब क्या आपने सोचा था कि यह इतना बड़ा कमर्शियल प्रोजेक्ट बन सकता है? जवाब: बिल्कुल नहीं। मेरे लिए यह कमर्शियल प्रोजेक्ट से ज्यादा एक इमोशनल प्रोजेक्ट था। मैं इसे फाइनेंशियल प्रोजेक्ट की तरह लेकर नहीं आई थी। मेरी ज्यूरिख में नौकरी लग गई थी और वहां मुझे सैलरी मिलने वाली थी। लेकिन मैंने वह रास्ता छोड़कर वापस आने और इस फिल्म के लिए काम करने का फैसला किया। अपनी सेविंग्स भी इसमें लगाईं। इसलिए शुरुआत में मेरा सवाल यह नहीं था कि फिल्म कितनी कमाई करेगी। मेरी सबसे बड़ी इच्छा थी कि लोग महाराज जी के बारे में जानें और खासकर बच्चे उनके बारे में जानें। सवाल: तो निवेश करते समय रिटर्न आपकी पहली प्राथमिकता नहीं था? जवाब: नहीं। जाहिर है, फिल्म महंगा माध्यम है और हर निर्माता चाहता है कि उसका निवेश वापस आए। लेकिन इस फिल्म के मामले में मेरी शुरुआती प्राथमिकता अलग थी। मैं चाहती थी कि यह कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। मुझे कोई ऐसी एक्सपेक्टेशन नहीं थी कि फिल्म इतनी बड़ी हिट होगी या इतने रिकॉर्ड बनाएगी। अगर आप शुरुआत में सिर्फ नंबर सोचकर फिल्म बनाते हैं तो शायद आपकी प्राथमिकताएं अलग हो जाती हैं। सवाल: अब जब फिल्म को दर्शकों का प्यार मिल चुका है, क्या अगले पार्ट में बड़े स्टार्स को लेने का दबाव महसूस होता है? जवाब: जरूरी नहीं। कोई सुपरस्टार अपने साथ अनुभव और क्राफ्ट जरूर लेकर आता है, लेकिन सिर्फ स्टार पावर से ‘हनुमान अंश’ नहीं चल सकती। इस फिल्म की खूबसूरती इसकी सादगी में है। हमारे कई कलाकार पहली बार फीचर फिल्म कर रहे थे। यहां तक कि हमारे कलाकारों में से एक असिस्टेंट डायरेक्टर भी हैं। इसलिए मैं उन सभी के काम और मेहनत की बहुत इज्जत करती हूं। मेरी इच्छा है कि इन कलाकारों को आगे भी काम मिले। उन्होंने अपनी क्षमता दिखाई है और उनके लिए भी यह फिल्म एक महत्वपूर्ण शुरुआत रही है। सवाल: क्या इसका मतलब है कि अगले पार्ट में मौजूदा कास्ट को बरकरार रखने की कोशिश होगी? जवाब: यह पूरी तरह कहानी पर निर्भर करेगा। कास्ट रिटेन होगी या बदलेगी, यह हमारे डायरेक्टर के विजन और कहानी की जरूरत तय करेगी। सिर्फ इसलिए किसी कलाकार को नहीं बदला जाएगा कि अब फिल्म सफल हो गई है और हमें बड़े नाम चाहिए। अगर किसी कहानी में किसी नए कलाकार की जरूरत होगी तो उसे लिया जाएगा और अगर मौजूदा कलाकार उस किरदार के लिए सही होंगे तो वे भी रहेंगे। हमारे लिए कास्टिंग का आधार कहानी है, स्टार पावर नहीं। सवाल: तीन फिल्मों की योजना के पीछे क्या सबसे बड़ा कारण यही है कि महाराज जी की कहानी का संसार बहुत विस्तृत है? जवाब: हां, यही सबसे बड़ी वजहों में से एक है। उनके जीवन और लीलाओं से जुड़ी सामग्री इतनी विस्तृत है कि उसे एक फिल्म में समेटना संभव नहीं है। इसलिए जब हमने शुरुआत की थी तभी यह महसूस हुआ था कि अगर इस कहानी को सही तरीके से कहना है तो इसे कई हिस्सों में आगे ले जाना होगा। लेकिन हर पार्ट सिर्फ पिछली फिल्म की सफलता का विस्तार नहीं होगा। कहानी की अपनी जरूरत होगी, उसका अपना संसार होगा और उसी के हिसाब से फिल्म का स्केल, बजट और कास्ट तय होगी। हमारी कोशिश यही रहेगी कि जैसे पहली फिल्म में हमने बिना फिजूलखर्ची के कहानी की आत्मा को बचाया, वैसे ही आगे भी बड़ा करने और बेहतर करने के बीच का फर्क समझते हुए काम करें।
प्रसाद समझकर 3 तोले की सोने की चेन निगल गया बैल, 15 दिन बाद सर्जरी से निकली
महाराष्ट्र के मालेगांव तालुका के वनपत गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
सलमान खान मंगलवार देर रात मुंबई के एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो के बाहर स्पॉट किए गए। टीवी शो बिग बॉस में पैपराजी की आलोचना के बाद उन्होंने पहली बार रुककर फोटोग्राफर्स को पोज दिए। सलमान काउबॉय लुक में नजर आए। उन्होंने जींस, ब्लैक शर्ट और सिर पर हैट पहनी थी। स्टूडियो पहुंचने पर उनके साथ सिक्योरिटी टीम भी थी। अंदर जाने से पहले सलमान रुके और पैपराजी को तस्वीरें लेने दीं। सलमान पैपराजी के पास आने का इंतजार करते दिखे। वहीं, सलमान को इससे पहले सोमवार को बांद्रा में स्पॉट किया गया था और वह बिना रुके सीधे कार में जाकर बैठ गए थे। सलमान ने एक नजर पैपराजी की ओर देखा और तुरंत नजरें फेरते हुए आगे बढ़ गए थे। सलमान ने पैपराजी के रवैये पर नाराजगी जताई थी ‘बिग बॉस 20’ में सलमान खान ने पैपराजी पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो गलत एंगल से लेने पर सवाल उठाए थे। सलमान ने कहा था कि कई बार कैमरे महिलाओं की टांगों और पीछे से तस्वीरें लेने पर फोकस करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला इससे असहज है, तो उसे इसका विरोध करना चाहिए। सलमान ने सई मांजरेकर और नेहा धूपिया का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नेहा भी ऐसे मामलों में पैपराजी पर नाराज हो चुकी हैं। सलमान ने सवाल किया कि महिलाओं की ऐसी तस्वीरों के साथ ‘पहचानो ये कौन है’ जैसे कैप्शन क्यों लगाए जाते हैं। उन्होंने महिलाओं से ऐसे मामलों में विरोध करने की अपील की। सलमान ने कहा कि बिग बॉस के घर में 108 कैमरे लगे हैं, लेकिन वहां महिलाओं को गलत एंगल से शूट नहीं किया जाता। पूरी खबर यहां पढें… ऐश्वर्या राय बच्चन पेरिस से भारत लौटीं ऐश्वर्या राय बच्चन मंगलवार रात पेरिस फैशन वीक से लौटकर भारत पहुंचीं। एयरपोर्ट पर उन्होंने इंतजार कर रहे पैपराजी से बात भी की। ऐश्वर्या ने पैपराजी को साथ में फोटो लेने के लिए बुलाया। उन्होंने एक फैन को ऑटोग्राफ भी दिया और फिर सभी के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई। ऐश्वर्या ने पैपराजी से कहा, आओ सभी लोग एक फोटो लेते हैं। चलिए, यह सब बंद करते हैं और ग्रुप में आइए। ट्रेंच कोट और ओवरफ्लेयर जींस में दिखीं भारत लौटते समय ऐश्वर्या ने सिंपल और बड़ा ट्रेंच कोट पहना था। इसके साथ उन्होंने ओवरफ्लेयर जींस और टॉप पहना। उन्होंने सिर पर सनग्लासेस लगाए थे। फैशन वीक में इन सितारों के साथ पहुंचीं ऐश्वर्या पेरिस फैशन वीक में इंडस्ट्री के कई बड़े नामों के साथ शामिल हुई थीं। इनमें उनकी करीबी दोस्त ईवा लॉन्गोरिया भी थीं। कार्यक्रम में केंडल जेनर, जेन फोंडा, सेलीन डियोन, हेइडी क्लम और वियोला डेविस भी शामिल हुईं। कारा डेलेविंग्ने, एंडी मैकडॉवेल, मीका अब्दाला और सिमोन एशली भी वहां मौजूद थीं। इनके अलावा कई अन्य सितारे भी फैशन वीक में पहुंचे। ब्लैक वेलवेट गाउन में रैंप वॉक किया फैशन इवेंट के लिए ऐश्वर्या ने 3D फ्रिंज एम्ब्रॉयडरी वाला ब्लैक वेलवेट गाउन पहना था। उन्होंने इसके साथ क्रिस्टल से सजा लंबा वेलवेट केप पहना। उन्होंने डायमंड टियारा और कई डायमंड रिंग्स से अपना लुक पूरा किया। रैंप वॉक के लिए उन्होंने पंप्स पहने थे। कार्यक्रम में ऐश्वर्या बाकी सितारों के साथ रैंप पर चलती दिखीं। एक वीडियो में वह केंडल जेनर का हाथ पकड़े नजर आईं। दूसरे वीडियो में वह ‘ब्रिजर्टन’ स्टार सिमोन एशली से उत्साह के साथ बात करती दिखीं। देखिए पेरिस फैशन वीक से ऐश्वर्या राय की वॉक और लुक- पेरिस फैशन वीक के बारे में- पेरिस फैशन वीक दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फैशन आयोजनों में से एक है। यहां दुनिया के बड़े फैशन ब्रांड अपने नए कलेक्शन पेश करते हैं। इसे फैशन इंडस्ट्री में नए ट्रेंड्स और डिजाइन की दिशा तय करने वाले आयोजनों में गिना जाता है। पेरिस फैशन वीक साल में चार बार आयोजित होता है। मौसम के मुताबिक कलेक्शन दिखाया जाता है।
ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर The Vvaan का हुआ कमबैक, छठी मैया की कृपा से मंगलवार को हुई धनवर्षा
अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की लेटेस्ट फिल्म द वन ने मंगलवार को शानदार कलेक्शन किया है।
मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने वीडियो जारी कर शंकराचार्य और संतों को तथाकथित संत, समाज का ठेकेदार और दोगला बताया। वीडियो में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, महाराज अलीनानंद, निरंजनी अखाड़ा पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप, महामंडलेश्वर मां योग योगेश्वरी और आचार्य तन्मय वेद के दातार की तस्वीरें भी लगाईं। हर्षा ने वीडियो जारी कर कहा- जिन संतों ने उनके हर कदम पर अपमान किया। मेरे मंच संचालन और एंकरिंग पर सवाल उठाए। उन्हें सनातन धर्म को बदनाम करने वाला बताया। मुझे 'नचनिया' और 'पाखंडी' तक कहा। वही संत अब अंजलि अरोड़ा के मां सीता की भूमिका निभाने पर चुप हैं। यह दोगलापन नहीं है तो क्या है, क्या संतों ने जमीर बेच दिया है? हर्षा बोलीं- मेरे लिए अलग कसौटी क्यों? हर्षा ने अंजलि अरोड़ा के पुराने डांस वीडियो और सार्वजनिक कार्यक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि संतों की आपत्ति उनके मंच संचालन को लेकर थी या किसी और वजह से। शायद कुछ संत खुद लाइमलाइट में रहना चाहते थे, इसलिए उन्हें मंच पर काम करने से आपत्ति थी। हर्षा ने कहा- जवाब मांगने की हकदार हूं वीडियो में हर्षा ने कहा- उन्होंने किसी के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई शुरू नहीं की है, लेकिन जिस तरह उन्हें लगातार निशाना बनाया गया। उसके बाद सवाल पूछना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा, क्या मैं जान सकती हूं कि यह दोगलापन उस लड़की के साथ ही क्यों, जिसका ऐसा कोई अतीत ही नहीं था? इसका जवाब कोई मांगे न मांगे, लेकिन मैं पूरी तरह मांगने की हकदार हूं। अंजलि आरोड़ा ने ट्रोलिंग पर क्या कहा था अंजलि अरोड़ा ने फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा-श्री राम की' में माता सीता की भूमिका निभाई है। फिल्म 25 सितंबर को रिलीज हुई। अंजलि अरोड़ा की सीता की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल उठे थे। ट्रेलर लॉन्च के दौरान अंजलि ने कहा था कि उन्हें ट्रोलिंग से दुख नहीं हुआ। लोगों को किसी कलाकार को पसंद या नापसंद करने का अधिकार है। दर्शकों को फिल्म देखते समय उनके निजी जीवन और पर्दे पर निभाए गए किरदार को अलग रखना चाहिए। अंजलि ने अपने पुराने डांस वीडियो को लेकर कहा था कि डांस करना कोई ऐसी बात नहीं है जिस पर उन्हें शर्म हो। उन्होंने कहा कि वह डांस को अपना शौक मानती हैं। हर कलाकार को अलग-अलग किरदार निभाने का मौका मिलता है। ………………………………… यह खबरें भी पढ़ें… 1. साध्वी हर्षानंद बोलीं- आश्रमों में मैनिक्योर-पेडिक्योर कराते हैं संत “जिन संतों को मैंने देखा है, वे पार्लर खुद आश्रम में बुला लेते हैं। मैनिक्योर-पेडिक्योर करा रहे हैं। मैं वो सब नहीं कराती हूं, लेकिन मुझे अच्छा लगता है कि हम जहां पर लक्ष्मी जी को पूजते हैं, कृष्ण जी को, नारायण को पूजते हैं, जो इतने सुंदर तरीके से रहते हैं तो उनकी पूजा करने वाला या उनको मानने वाला, वो क्यों नहीं सुंदर रहने का अधिकारी है?” पढ़ें पूरी खबर… 2. हर्षानंद गिरि बोलीं- मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया साध्वी हर्षानंद गिरि ने आश्रम में न रहने संबंधी बयान से यू-टर्न ले लिया है। अब उन्होंने कहा है- मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। मेरा उद्देश्य किसी आश्रम या संत समाज पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाना था। पढें पूरी खबर…
फिल्म निर्माता वाशु भगनानी लंदन के एक अस्पताल में भर्ती हैं। यह जानकारी न्यूज एजेंसी ANI ने मंगलवार को दी। वाशु ब्रिटेन में रहते हैं। उनकी तबीयत खराब होने की वजह अभी सामने नहीं आई है। ANI के मुताबिक, संपर्क करने पर उन्होंने अकेला छोड़ने को कहा। वाशु के अस्पताल में भर्ती होने की खबर आयकर विभाग की कथित तलाशी के कुछ दिन बाद आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभाग ने वाशु और उनकी बहू और एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह से जुड़े 12 ठिकानों पर तलाशी ली थी। 12 ठिकानों पर तलाशी की रिपोर्ट सोमवार को टीवी9 ने बताया था कि आयकर विभाग ने संदिग्ध फंड गड़बड़ी को लेकर 12 ठिकानों पर तलाशी शुरू की है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच इस बात की भी हो रही है कि फिल्म प्रोजेक्ट्स की फंडिंग के नाम पर कथित तौर पर पैसा विदेश भेजा गया या नहीं। कई टीमों के दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और कथित विदेशी लेन-देन की जांच करने की बात कही गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आयकर विभाग ने कुमार मंगत की अगुआई वाले पैनोरमा स्टूडियोज से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी ली। वहीं, वाशु और रकुल ने आयकर विभाग की तलाशी की खबरों पर अब तक कोई रिएक्शन नहीं दिया। वाशु भगनानी और पूजा एंटरटेनमेंट वाशु भगनानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने 1986 में पूजा एंटरटेनमेंट की शुरुआत की थी। वहीं, 1995 में गोविंदा की फिल्म ‘कुली नंबर 1’ से उन्होंने बतौर निर्माता करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने ‘हीरो नंबर 1’, ‘बीवी नंबर 1’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ और ‘रहना है तेरे दिल में’ जैसी कई फिल्में बनाईं। हाल के वर्षों में पूजा एंटरटेनमेंट की बॉक्स ऑफिस पर कमाई घटती गई। ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और ‘बेल बॉटम’ जैसी बड़े बजट की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। वाशु के बेटे जैकी भगनानी ने 2009 में फिल्म ‘कल किसने देखा’ से एक्टर के तौर पर करियर शुरू किया था। 2011 में उन्हें फिल्म 'फालतू' (F.A.L.T.U) से पहचान मिली। कई फिल्में सफल नहीं होने के बाद जैकी भी फिल्म निर्माण में आ गए। 2016 में उन्होंने पूजा एंटरटेनमेंट में अपने पिता वाशु के साथ काम शुरू किया। वाशु और रमेश तौरानी का विवाद सामने आया था इससे पहले मई महीने में वाशु भगनानी, रमेश तौरानी और निर्देशक डेविड धवन के बीच 1999 की फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के गानों को लेकर विवाद सामने आया था। वाशु भगनानी ने आरोप लगाया था कि फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ का इस्तेमाल बिना उनकी अनुमति किया गया। उन्होंने ₹400 करोड़ का मुकदमा दायर किया था। वाशु का दावा था कि गानों के ऑडियो राइट्स टिप्स के पास थे, लेकिन वीडियो और दूसरे अधिकार उनकी कंपनी के पास थे। उन्होंने यह भी कहा था कि ‘कुली नंबर 1’ से उन्हें ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ था। वाशु ने डेविड धवन पर ‘बीवी नंबर 1’ के सीक्वल का वादा पूरा नहीं करने का आरोप भी लगाया था। वहीं रमेश तौरानी ने पुराने मतभेद सुलझने की बात कही थी, जिसे वाशु ने खारिज किया था। 2025 में कर्मचारियों ने बकाया भुगतान का आरोप लगाया था वाशु की कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट 2025 में भी खबरों में रही थी। कई कर्मचारियों ने महीनों तक बकाया भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाया था। उस समय ऐसी रिपोर्ट्स भी आई थीं कि वाशु ने आर्थिक स्थिति संभालने के लिए ऑफिस की जगह बेच दी थी। हालांकि, बाद में वाशु ने इन दावों से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने बिल्डिंग को बेचा नहीं, बल्कि रीडेवलप किया था।
कभी घर-घर पहुंचाता था पिज्जा, आज 3 रेस्टोरेंट का मालिक; मेहनत से बदली इस भारतीय की जिंदगी
कहते हैं कि अगर इंसान में मेहनत करने और आगे बढ़ने का जुनून हो, तो मुश्किल हालात भी उसके रास्ते को ज्यादा लंबे समय तक नहीं रोक सकते।
सीने में तेज दर्द के बाद अस्पताल पहुंची महिला, सर्जरी में पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और मोमबत्ती
आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 33 वर्षीय महिला को सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को उसके पेट के अंदर कई असामान्य वस्तुएं मौजूद होने का पता चला। सर्जरी के दौरान महिला के पेट से 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती निकाली गई।
ऑस्ट्रेलिया में बना दुनिया का सबसे भारी गोल्ड बार, 521 किलो वजन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
सोने की छोटी-सी ईंट या गोल्ड बार तो आपने कई बार देखी होगी
धरती पर कई ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिनकी क्षमताएं इंसानों को हैरान कर देती हैं।
'मुझे चाइनीज मत बोलो, मैं इंडियन हूं...' मां ने बनाया था वीडियो, बेटी का जवाब सुनकर भावुक हुए लोग
अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर की छोटी-सी बच्ची करगा टिंकल गोंगो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। टिंकल ने एक वीडियो में लोगों से कहा कि उसे चाइनीज न कहा जाए। उसका यह मासूम और भावुक वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया।
नदी में मगरमच्छ के सामने बच्चे का बेखौफ अंदाज, वीडियो ने मचाई सनसनी
नदी के पानी में मगरमच्छ को देखकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक बच्चे का बिल्कुल अलग ही अंदाज देखने को मिला। वीडियो में बच्चा नदी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम से नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है।
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प्रकृति अपने अनोखे और दुर्लभ चमत्कारों से समय-समय पर लोगों को हैरान करती रहती है।

