ईरानी मूल की अभिनेत्री एलनाज नोरौजी ने एक बार फिर अपने देश ईरान की मोरैलिटी पुलिस को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें भी मोरैलिटी पुलिस ने हिरासत में लिया था और उस दौरान उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे वे कोई अपराधी हों। द फ्री प्रेस जर्नल को दिए इंटरव्यू में एलनाज ने कहा कि जब उन्हें पुलिस ने पकड़ा तो उनकी प्रोफाइल के लिए अपराधियों की तरह तस्वीरें ली गईं। उन्होंने बताया कि पुलिस महिलाओं का पूरा रिकॉर्ड रखती है ताकि बाद में उन्हें ट्रैक किया जा सके कि कितनी बार उन्हें ड्रेस कोड के उल्लंघन में पकड़ा गया। एलनाज ने कहा कि उस वक्त वे मानसिक रूप से मजबूत थीं और उन्हें पता था कि उनके पास जर्मनी की नागरिकता है, इसलिए वे देश छोड़ सकती हैं। लेकिन उनका दिल उन लाखों महिलाओं के लिए दुखी हो गया जो ईरान में रहकर रोज ऐसे डर के माहौल में जिंदगी जीती हैं। एक्ट्रेस के मुताबिक ईरान में महिलाओं की स्थिति बेहद डरावनी है। उन्होंने कहा कि वहां एक महिला जब घर से बाहर निकलती है तो उसे यह तक नहीं पता होता कि वह सुरक्षित लौटेगी या नहीं। कई बार छोटी-सी बात, जैसे हिजाब सही तरीके से न पहनना, भी परेशानी की वजह बन जाती है। एलनाज ने 2022 में हुई महसा अमिनी की मौत का भी जिक्र किया। महसा को कथित तौर पर हिजाब नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मोरैलिटी पुलिस ने हिरासत में लिया था और बाद में उनकी मौत हो गई थी, जिसके बाद ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। एक्ट्रेस ने कहा कि वे इन मुद्दों पर बोलना जारी रखेंगी, भले ही उनके परिवार और दोस्त उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हों। उनका मानना है कि अगर उन्हें एक पब्लिक फिगर होने का मंच मिला है तो उन्हें उन लोगों की आवाज बनना चाहिए जो डर की वजह से खुलकर बोल नहीं पाते। एलनाज नोरौजी भारत में भी कई प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुकी हैं और वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ से उन्हें खास पहचान मिली थी। हाल के दिनों में ईरान की राजनीति और वहां महिलाओं की स्थिति पर उनके बयान लगातार चर्चा में बने हुए हैं।
फ्रेंचाइजी ‘ओह माय गॉड’ की तीसरी फिल्म ‘ओह माय गॉडेस’ में रानी मुखर्जी के शामिल होने की खबरों पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्हें इस फिल्म के लिए कभी साइन नहीं किया गया था। बातचीत शुरुआती स्तर पर ही रुक गई थी। वैरायटी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रानी मुखर्जी को फिल्म में लीड हीरोइन के तौर पर लेने को लेकर शुरुआती बातचीत हुई थी। फिल्म में अक्षय कुमार एक्सटेंडेड कैमियो रोल में नजर आने वाले बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, रानी को फिल्म की कहानी का छोटा सा आउटलाइन सुनाया गया था और उन्हें इसमें दिलचस्पी भी थी। हालांकि, बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। एक सोर्स के मुताबिक, अक्षय और रानी के बीच लंबे समय से अच्छा रिश्ता है, लेकिन चर्चा बहुत शुरुआती स्तर पर थी। ‘OMG’ फ्रेंचाइजी आस्था, विश्वास और धार्मिक संस्थाओं पर सटायर के लिए जानी जाती है। तीसरी फिल्म ‘ओह माय गॉडेस’ में डिवाइन फेमिनिन ट्विस्ट के साथ नई कहानी पेश करने की योजना है। इसमें फ्रेंचाइजी के ह्यूमर और सोशल कमेंट्री का मिश्रण बनाए रखने की बात कही जा रही है। फिल्म का निर्देशन अमित राय करेंगे, जिन्होंने ‘OMG 2’ भी डायरेक्ट की थी। फिल्म को विक्रम मल्होत्रा की अबुंदंतिया एंटरटेनमेंट और अक्षय कुमार के बैनर के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म की शूटिंग मई–जून 2026 के आसपास शुरू हो सकती है और मेकर्स दूसरी फीमेल लीड की तलाश में हैं। रानी मुखर्जी के वर्क फ्रंट की बात करें तो उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘मर्दानी 3’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही है। फिल्म ने भारत में करीब 50 करोड़ रुपए नेट और दुनिया भर में 74 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की है। रानी शाहरुख खान के साथ सिद्धार्थ आनंद की फिल्म ‘किंग’ में कैमियो रोल में नजर आएंगी, जो क्रिसमस 2026 पर रिलीज होने वाली है।
रणवीर सिंह की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' यानी 'धुरंधर 2' का ट्रेलर शनिवार को रिलीज हो गया है। ट्रेलर के साथ ही फिल्म की एडवांस बुकिंग भी ओपन कर दी गई है। बुकिंग शुरू होते ही महज एक घंटे के अंदर फिल्म के 5 हजार से ज्यादा टिकट बुक हो गए। फिल्म के लिए फैंस का क्रेज ऐसा है कि 2500 रुपए वाले महंगे टिकट के बावजूद कई थिएटर्स में शोज हाउसफुल होने की कगार पर हैं। एक घंटे में ही बुक हुए 5 हजार टिकट टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म बुक माय शो पर दोपहर 12:01 बजे का ट्रेंडिंग टिकर बता रहा था कि पिछले एक घंटे में फिल्म के 5 हजार टिकट बिक चुके हैं। यह डेटा केवल एक प्लेटफॉर्म का है। 18 मार्च को होने वाले पेड प्रीव्यू के लिए दर्शक सबसे ज्यादा उत्साह दिखा रहे हैं। खबर लिखे जाने तक बुकिंग की रफ्तार और तेज हो गई थी और टिकर पर यह आंकड़ा 7000 को पार कर गया था। ट्रेलर के साथ ही शुरू हुई एडवांस बुकिंग शनिवार सुबह 11:01 बजे 'धुरंधर 2' का ट्रेलर रिलीज किया गया। मेकर्स ने ट्रेलर के अंत में ही एडवांस बुकिंग शुरू होने का ऐलान किया। इसके साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि 19 मार्च को फिल्म की ग्रैंड रिलीज से पहले 18 मार्च को इसके पेड प्रीव्यू भी रखे जाएंगे। दिल्ली NCR में 2500 रुपए का एक टिकट महंगे टिकट के बावजूद फिल्म की बुकिंग में कोई कमी नहीं दिख रही है। दिल्ली एनसीआर के प्रीमियम थिएटर्स जैसे पीवीआर डायरेक्टर्स कट में एक टिकट की कीमत टैक्स मिलाकर करीब 2500 रुपए तक पहुंच गई है। इन प्रीमियम थिएटर्स में सीटें बहुत कम होती हैं, लेकिन ट्रेलर आने के दो घंटे के भीतर ही ये सीटें लगभग भर चुकी हैं। आम थिएटर्स में भी शोज तेजी से भरने लगे हैं। ------------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें फिल्म धुरंधर 2 का ट्रेलर रिलीज:डबल रोल में रणवीर सिंह का दमदार अंदाज, मूवी 19 मार्च को रिलीज होगी रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धुरंधर 2 का ट्रेलर शनिवार को रिलीज कर दिया गया है। फिल्म का ट्रेलर आज सुबह 11:01 बजे जारी किया गया। धुरंधर 2 में रणवीर सिंह के अलावा अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और आर. माधवन भी नजर आएंगे। पूरी खबर पढ़ें
एनिमेशन फिल्मों के लिए 2026 बेहद खास माना जा रहा है। इस साल कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं जिनमें जानवरों, खिलौनों और वीडियो गेम के किरदारों की कहानियां होंगी। इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि यह साल एनिमेशन के इतिहास का सबसे सफल साल साबित हो सकता है। इसकी शुरुआत 6 मार्च को आई एनिमेटेड फिल्म हॉपर्स ने कर दी है। कहानी अमेरिकी शहर बीवर्टन में रहने वाले बीवरों (ऊदबिलाव प्रजाति के जानवर) पर आधारित है। शहर का मेयर जंगल हटाकर फ्रीवे बनाना चाहता है। इससे नाराज किशोरी पर्यावरण कार्यकर्ता मेबल प्रयोग के जरिए अपनी चेतना को रोबोटिक बीवर में डाल देती है। वह बीवरों से दोस्ती कर उन्हें अपने जंगल को बचाने के लिए प्रेरित करती है। असल कहानी एनिमेशन फिल्मों के बूम की है। इस गर्मी में ‘डेस्पिकेबल मी’ और ‘पॉ पेट्रोल’ जैसी मशहूर फ्रेंचाइजी की नई फिल्में आ रही हैं। वहीं ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ और ‘टॉय स्टोरी 5’ अरबों डॉलर कमा सकती हैं। फरवरी में रिलीज हुई ‘गोट’ फिल्म, जिसमें खुर वाले जानवर खेलों में उतरते हैं, अब तक लगभग 1200 करोड़ कमा चुकी है। यह साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई वाली एनिमेशन फिल्म बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि एनिमेशन फिल्में अब सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि हर उम्र के दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। 1995 में अमेरिका और कनाडा के फिल्म बाजार में इनका हिस्सा केवल 2.8% था, जो 2024 तक 23.9% हो गया। उसी साल ‘इनसाइड आउट 2’ ने 15,616 करोड़ रुपए कमाकर रिकॉर्ड बनाया। पर 2025 की शुरुआत में चीनी फैंटेसी फिल्म ‘ने झा 2’ ने इसे पीछे छोड़ते हुए 18,372 करोड़ से ज्यादा कमा लिए। नवंबर में आई ‘जूटोपिया 2’ भी 17,450 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। जीवन के सामान्य अनुभव मन को स्पर्श कर जाते हैं: एक्सपर्ट मीडिया विश्लेषण कंपनी एम्पेयर की ओलिविया डीन कहती हैं, ‘कहानियों की सार्वभौमिकता एनिमेशन फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा कारण है। इनमें जीवन के सामान्य अनुभव दिखाया जाता है। यह भाषा व संस्कृति की सीमाओं से परे समझा जा सकता है। किरदारों के भाव व सरल कथानक दर्शकों को कहानी से जोड़ लेते हैं। इसके अलावा, बड़े स्टूडियो प्रमुख फिल्मों को छुट्टियों या त्योहारों पर लाते हैं। माता-पिता के लिए भी सिनेमा बच्चों को व्यस्त रखने का सबसे आसान तरीका है।’ भारत में भी बढ़ रही रुचि भारतीय एनिमेशन उद्योग सिर्फ आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मौलिक कहानियों का पावरहाउस बन चुका है। 2025 के अंत में रिलीज हुई फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ ने देश में ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच दिया। भगवान विष्णु के नरसिम्हा अवतार और भक्त प्रहलाद की यह कहानी दिखाती है कि पौराणिक कथाओं व आधुनिक 3 डी एनिमेशन का संगम दर्शकों को लुभा सकता है। इधर होम्बले फिल्म्स ने महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स के तहत छह और फिल्मों की घोषणा की है। छोटा भीम का बड़े पर्दे पर विस्तार व रामायण के नए एनिमेटेड रुपांतरण ने भी उत्साह पैदा कर दिया है।
तमिल एक्टर थलपति विजय इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। एक तरफ पत्नी संगीता सोरनलिंगम के साथ उनका तलाक हो रहा है, वहीं दूसरी ओर एक्ट्रेस तृषा कृष्णन के साथ उनके अफेयर के कयास लगाए जा रहे हैं। अफेयर की खबरें अब विजय के बॉडीगार्ड अरुण सुरेश के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद और चर्चा में आ गई हैं। फैंस इस पोस्ट को विजय और तृषा के रिश्ते से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, एक्टर की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बॉडीगार्ड ने लिखा- अफवाहों से ऊपर उठने का समय विजय के बॉडीगार्ड अरुण सुरेश ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, 'अब अफवाहों से ऊपर उठने का समय आ गया है।' उन्होंने साथ में फायर इमोजी भी बनाई। हालांकि, कुछ देर बाद उन्होंने यह स्टोरी डिलीट कर दी, लेकिन तब तक इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके तुरंत बाद अरुण ने एक और फोटो शेयर की जिसमें विजय 'हार्ट' का साइन बना रहे थे। फैंस इसे तृषा के साथ उनके रिश्ते पर मुहर के तौर पर देख रहे हैं। शादी में मैचिंग लुक के साथ पहुंचे विजय-तृषा यह पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब 5 मार्च को विजय और तृषा चेन्नई में एक शादी समारोह में साथ नजर आए। दोनों ने वेन्यू पर एक साथ एंट्री की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में विजय हाथ में गुलदस्ता लिए दिख रहे हैं और तृषा उनके पीछे-पीछे चलती नजर आ रही हैं। खास बात यह थी कि दोनों मैचिंग लुक में पहुंचे थे और शादी अटेंड करने के बाद वहां से साथ ही निकले। संगीता ने लगाए एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के आरोप थलपति विजय और संगीता की शादी के 27 साल बाद तलाक को ओर है। संगीता ने दिसंबर 2025 में चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी। उन्होंने याचिका में आरोप लगाया था कि विजय का किसी एक्ट्रेस के साथ अवैध संबंध है और उन्होंने संगीता को धोखा दिया है। हालांकि, इन आरोपों और तलाक की खबरों पर अभी तक विजय या संगीता की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। 1999 में हुई थी विजय की शादी विजय की पत्नी संगीता पहले उनकी बड़ी फैन थीं। साल 1996 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे प्यार हो गया। इसके बाद अगस्त 1999 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों ने उस दौर में हिंदू और ईसाई दोनों धर्मों से शादी की थी। 2000 में कपल ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया जिसका नाम जेसन संजय है, वहीं 2005 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ।
दिग्गज स्क्रीनराइटर और सलमान खान के पिता सलीम खान की सेहत में सुधार हो रहा है और अब वे कुर्सी पर बैठकर बातचीत करने लगे हैं। यह जानकारी लेखक जावेद अख्तर ने हाल ही में दिल्ली में एक बुक लॉन्च इवेंट के दौरान दी। सलीम खान 17 फरवरी से मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती हैं। सलीम खान के अस्पताल में भर्ती होने के बाद से शाहरुख खान, आमिर खान समेत कई सेलेब्स उनसे मिलने पहुंचे। जावेद अख्तर भी कई बार अस्पताल जाकर उनसे मुलाकात कर चुके हैं। वहीं, इससे पहले खान की सेहत को लेकर आमिर खान ने कहा था कि उनकी तबीयत में सुधार हो रहा है और वे जल्द घर लौट सकते हैं। मुंबई प्रेस क्लब के कार्यक्रम में शामिल हुए आमिर खान ने कहा था, “मैं सलीम साहब से मिलने गया था। हम सब दुआ कर रहे हैं कि वो जल्द से जल्द अच्छे हो जाएं। क्योंकि वो ICU में थे, मैं उनसे पर्सनली नहीं मिल पाया। मैं उनके परिवार के साथ बैठा था। मुझे अलवीरा जी हर रोज बता रही हैं कि उनकी हेल्थ इम्प्रूव हो रही है। हम सब प्रार्थना कर रहे हैं, दुआ कर रहे हैं कि वो एक बार फिर घर आ जाएं।” बता दें कि 18 फरवरी को लीलावती हॉस्पिटल के डॉक्टर ने सलीम खान की हेल्थ अपडेट दी थी। हालांकि, उसके बाद परिवार की ओर से मेडिकल अपडेट सार्वजनिक न करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद उनकी हेल्थ को लेकर कोई आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आई। सलीम खान लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती सलीम खान को 17 फरवरी को सुबह ब्रेन से जुड़ी दिक्कत के बाद लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उन्हें सुबह करीब 8:30 बजे इमरजेंसी में लाया गया। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम बनाई गई, जिसने उनकी स्थिति का आकलन किया। 18 फरवरी को लीलावती हॉस्पिटल के डॉक्टर जलील पारकर ने जानकारी दी थी कि सलीम खान की डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) की गई। डॉक्टरों के मुताबिक, यह ब्रेन सर्जरी नहीं है। DSA एक एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टेस्ट है, जिससे दिमाग की नसों की स्थिति और संभावित ब्लॉकेज को साफ तरीके से देखा जाता है। वहीं, 20 फरवरी को जानकारी सामने आई कि सलीम खान का परिवार चाहता है कि उनकी हेल्थ से जुड़ी जानकारी प्राइवेट रखी जाए। वैरायटी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को अस्पताल के सार्वजनिक बयान से सलमान खान और उनका परिवार नाराज था। परिवार के करीबी सूत्र ने कहा कि सेहत निजी मामला है और मीडिया से बात परिवार पर छोड़नी चाहिए। 1960 के दशक में करियर शुरू हुआ था सलीम खान 90 साल के हैं। उनका जन्म 24 नवंबर 1935 को हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटरों में शुमार हैं। सलीम खान ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की थी। 1960 के दशक में फिल्म बारात से करियर शुरू हुआ, लेकिन फिल्मों में उन्हें सीमित और छोटे किरदार ही मिले। लगभग दो दर्जन फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि एक्टिंग नहीं, बल्कि राइटिंग असली ताकत है। इसके बाद उन्होंने लेखन की ओर रुख किया और स्क्रिप्ट राइटर बन गए। ‘सलीम-जावेद’ की जोड़ी फेमस हुई सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी ‘सलीम–जावेद’ के नाम से मशहूर रही है। दोनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा को कई सुपरहिट और यादगार फिल्में दीं, जैसे जंजीर, दीवार, शोले, डॉन और सीता और गीता। इन फिल्मों की दमदार कहानियां और डायलॉग लोगों के दिलों में बस गए। उनकी लिखी स्क्रिप्ट ने फिल्मों का अंदाज बदल दिया। उन्होंने मजबूत किरदार, संवाद और सामाजिक मुद्दों को कहानी का हिस्सा बनाया। सलीम-जावेद की सफलता से फिल्म इंडस्ट्री में लेखकों को नई पहचान और सम्मान मिला और उन्हें भी स्टार्स की तरह महत्व मिलने लगा। सलीम-जावेद भारतीय सिनेमा के पहले लेखक माने जाते हैं, जिन्हें ‘स्टार स्टेटस’ मिला। उन्होंने अमिताभ बच्चन की ‘एंग्री यंग मैन’ इमेज को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। सलीम खान ने दो शादियां कीं पर्सनल लाइफ की बात करें तो सलीम खान ने दो शादियां कीं। उनकी पहली शादी 18 नवंबर 1964 को सलमा खान (पूर्व नाम सुशीला चरक) से हुई। इस शादी से उनके चार बच्चे सलमान खान, अरबाज खान, सोहेल खान और अलवीरा खान हुए। बाद में 1981 में सलीम खान ने एक्ट्रेस हेलन रिचर्डसन से शादी की। कुछ सालों बाद सलीम खान और हेलन ने अर्पिता को गोद लिया। उनके बड़े बेटे सलमान खान हिंदी सिनेमा के सबसे टॉप एक्टर्स में गिने जाते हैं, जबकि अरबाज और सोहेल भी फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। उनकी बेटी अलवीरा की शादी एक्टर-डायरेक्टर अतुल अग्निहोत्री से हुई, वहीं अर्पिता की शादी एक्टर आयुष शर्मा से हुई है। ………………………………………. सलीम खान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…. दोस्ताना में अमिताभ से ज्यादा फीस सलीम ने मांगी:सलमान से कहा था हैलो ब्रदर नहीं चलेगी, ऋषि कपूर को दी थी बर्बाद करने की धमकी सलीम खान को नई जनरेशन सुपरस्टार सलमान खान के पिता के रूप में जानती है, लेकिन 70–80 के दशक में उनका ऐसा रुतबा था कि हर फिल्ममेकर उनसे ही अपनी फिल्में लिखवाना चाहता था, चाहे फीस या शर्त कुछ भी हो। इंदौर शहर में रहते हुए दोस्तों के लव लेटर लिखने से शुरू हुआ राइटिंग का सिलसिला हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन स्क्रिप्ट राइटर बनने पर मुकम्मल हुआ। पूरी खबर यहां पढ़ें
‘बिग बॉस 19’ की पूर्व कंटेस्टेंट फरहाना भट्ट ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर दुख जताने के बाद हुई ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया दी है। फरहाना ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने देश के समर्थन में खड़े होकर काम किया है और देश के खिलाफ किसी भी नैरेटिव का विरोध किया है। इंस्टेंट बॉलीवुड से बातचीत में फरहाना भट्ट ने अपने बयान को लेकर कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और लोग अपने विचार अलग-अलग तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है और वह इसे स्वीकार करती हैं। उन्होंने कहा कि लोग उनकी बात को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने देश के लिए काम किया है और आगे भी करती रहेंगी। कश्मीर में शांति के लिए कई पहल कीं: फरहाना फरहाना ने कहा कि पहलगाम हमले, ईरान, फिलिस्तीन या इजरायल से जुड़े मुद्दों पर वह पहले भी अपनी राय रखती रही हैं। पुलवामा हमले और पहलगाम हमले जैसे मामलों में भी वह भारतीय सेना के साथ खड़ी रही हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि कश्मीर में शांति से जुड़े काम के दौरान उन्होंने भारतीय सेना के साथ मिलकर कई पहल की हैं। कश्मीर में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके काम की सराहना की है और उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया है। वहीं, होली को लेकर हुई ट्रोलिंग पर जवाब देते हुए फरहाना ने कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है। यहां हर व्यक्ति को अपने तरीके से त्योहार मनाने और अपनी बात रखने का अधिकार है, बशर्ते इससे देश की गरिमा को ठेस न पहुंचे। फरहाना ने खामेनेई के निधन पर क्या कहा था? खामेनेई के निधन को लेकर फरहाना भट्ट ने कहा था, बिल्कुल, वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें हम कभी नहीं भूल सकते। वे हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। इस घटना से सभी कश्मीरी गहरे सदमे में हैं। आप विश्वास नहीं करेंगे, सेहरी के बाद मैं बिल्कुल नहीं सो पाई। मैं बहुत दुखी थी। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था।
एक लड़का, जिसने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय की तालीम हासिल की और बड़े ख्वाबों के साथ मुंबई पहुंचा। उसे एक फिल्म में शानदार किरदार मिला और उसने छह महीने तक पूरी लगन और मेहनत से उसकी तैयारी की। तभी अचानक खबर आई कि उसका रोल किसी और को दिया जा सकता है। मायूस होकर उसने मुंबई छोड़ने का फैसला कर लिया और आखिरी दफा फिल्म के डायरेक्टर महेश भट्ट से मिलने गया। गुस्से में उसने उन्हें खरी-खोटी भी सुना दी। मगर उसकी सच्चाई, हिम्मत और जुनून देखकर महेश भट्ट ने फैसला किया कि यह किरदार वही निभाएगा। इसके बाद 28 साल की उम्र में उसने बुजुर्ग का रोल इतने शानदार तरीके से अदा किया कि उसे बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। बस, इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के मशहूर एक्टर अनुपम खेर की। आज अनुपम खेर के बर्थडे के खास मौके पर आइए उनकी जिंदगी को करीब से छूते हैं- पिता थे वन विभाग में क्लर्क 7 मार्च 1955 को शिमला (हिमाचल प्रदेश) में एक कश्मीरी पंडित परिवार में पैदा हुए अनुपम खेर के पिता पुष्कर नाथ खेर वन विभाग में क्लर्क थे, जबकि उनकी माता दुलारी खेर गृहिणी थीं। उनकी स्कूल की पढ़ाई शिमला के डी. ए. वी. स्कूल से हुई थी। अनुपम खेर के एक छोटे भाई राजू खेर हैं। अनुपम खेर की पहली किस का किस्साअनुपम खेर ने शो आप की अदालत में बताया था कि ग्यारहवीं कक्षा में उन्हें अपने मोहल्ले में आई एक लड़की से प्यार हो गया था। वह लड़की अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ती थी और एक आर्मी ऑफिसर की बेटी थी। अनुपम खेर और उनके दोस्त विजय सहगल कई महीनों तक साइकिल से उसके पीछे-पीछे जाते रहे, लेकिन अनुपम मोहब्बत का इजहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। छोटे शहर का माहौल था, जहां जज्बात दिल में रहते थे और अल्फाज होंठों तक आते-आते रुक जाते थे। करीब दो महीने बाद दोस्त के कहने पर उन्होंने लड़की से “आई लव यू” कह दिया, जिस पर लड़की ने जवाब में “मी टू” कहा। अनुपम खेर को उस समय अंग्रेजी ज्यादा समझ नहीं आती थी और वह “मी टू” का मतलब भी फौरन नहीं समझ पाए। बाद में दोस्त ने समझाया कि इसका मतलब है कि वह भी उनसे मोहब्बत करती है। इसके बाद उनके दोस्त ने उन्हें लड़की से “आई वांट टू किस यू” कहने की सलाह दी। उस दौर में ऐसा कहना बहुत बड़ी बात होती थी। एक महीने बाद उन्होंने हिम्मत कर यह भी कह दिया, जिस पर लड़की ने जवाब में कहा कि स्कूल के एनुअल फंक्शन के दिन वह उन्हें किस करेगी। हालांकि बाद में अनुपम खेर को ध्यान आया कि एनुअल फंक्शन में अभी आठ महीने बाकी थे। इसी दौरान दोस्त ने मजाक में उन्हें किस की प्रैक्टिस करने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने शीशे के गिलास से अभ्यास करना शुरू कर दिया, जिससे उनके होंठ कट गए और सूज गए। परिवार में किसी ने सूट नहीं पहना था कहानी में नया मोड़ तब आया जब लड़की ने शर्त रखी कि वह एनुअल फंक्शन में साड़ी पहनकर आएगी और अनुपम खेर को सूट पहनकर आना होगा। खेर ने बताया था कि उनके परिवार में पहले किसी ने सूट नहीं पहना था। जब उन्होंने घर पर सूट की मांग की तो परिवार हैरान रह गया। किसी तरह उन्होंने पिता को स्कूल के कार्यक्रम का बहाना देकर राजी किया और सूट सिलवाया। तय दिन पर दोनों ने रेलवे ब्रिज के नीचे मिलने का फैसला किया। किस करने से पहले वह और उनके दोस्त ने वहां के बल्ब तक तोड़ दिए ताकि कोई देख न सके। रात करीब साढ़े आठ बजे लड़की साड़ी में पहुंची और वह खुद नीले सूट में पहुंचे। दोनों के बीच कुछ देर खामोशी रही। जैसे ही वह किस करने के लिए आगे बढ़े, उसी समय लड़की के घर की लाइट जल गई और उसके पिता दरवाजे पर दिखाई दिए। घबराहट में लड़की ने अपना चेहरा मोड़ लिया और अनुपम खेर का पहला किस उसके होंठों की बजाय उसके कान पर जा लगा। इंटरव्यू में खेर ने कहा कि उनका पहला किस डिजास्टर साबित हुआ था। NSD से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुपम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से संबद्ध गवर्नमेंट कॉलेज, संजौली में अर्थशास्त्र की पढ़ाई शुरू की। लेकिन बाद में भारतीय रंगमंच का अध्ययन करने के लिए उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में प्रवेश लिया और अपना पहले वाला कोर्स बीच में ही छोड़ दिया। बाद में उन्होंने 1978 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली से भी एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। 28 साल की उम्र में बुजुर्ग का किरदार निभाया लंबे संघर्ष के बाद उन्हें फिल्म सारांश (1984) में एक शानदार भूमिका निभाने का मौका मिला, लेकिन कुछ दिनों बाद उनका रोल बदलने की बात होने लगी। हालांकि उनका कॉन्फिडेंस और इरादा देखकर फिल्म के डायरेक्टर महेश भट्ट ने वही रोल दिया जो उनको ऑफर किया गया था। इसके बाद अनुपम को फिल्म से एक शानदार पहचान मिली। इस फिल्म में उन्होंने बुजुर्ग पिता का किरदार निभाया, जबकि उस वक्त उनकी उम्र करीब 28 साल थी। फिल्म व्यावसायिक तौर पर बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन फिल्म समीक्षकों ने उनकी अदाकारी की जमकर तारीफ की। उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला और यह फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने विलेन, कॉमेडी और करेक्टर रोल में खुद को साबित किया। कर्मा, तेजाब और चालबाज जैसी फिल्मों में उनके नेगेटिव रोल चर्चा में रहे। वहीं राम लखन और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में उनकी कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आई। 1990 और 2000 के दशक में वह लगातार सफल फिल्मों का हिस्सा रहे। हम आपके हैं कौन..!, कुछ कुछ होता है, ए वेडनसडे!, एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी और द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। उन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में काम किया है। एक्टिंग के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। अमिताभ से प्रोफेशनलिज्म का सबक मिला था साल 1986 था और फिल्म आखिरी रास्ता की शूटिंग चल रही थी। उस दौर में चेन्नई की भीषण गर्मी के बीच अनुपम खेर को अमिताभ बच्चन से प्रोफेशनलिज्म का एक सबक मिला था। दरअसल, उन दिनों अनुपम खेर फिल्म सारांश की कामयाबी के बाद खुद को बड़ा स्टार समझने लगे थे। शोहरत का असर था और थोड़ा सा गुरूर भी आ गया था। चेन्नई में 40-45 डिग्री तापमान था। उनके मेकअप रूम का AC खराब हो गया। इस बात पर उन्होंने प्रोडक्शन टीम पर काफी गुस्सा किया। जब वे सेट पर पहुंचे, तो मंजर कुछ और ही था। उन्होंने देखा कि अमिताभ बच्चन एक कोने में खामोशी से बैठे अपनी लाइनों की तैयारी कर रहे थे। हैरानी की बात यह थी कि इतनी सख्त गर्मी में भी उन्होंने भारी दाढ़ी, मूंछ, विग, जैकेट और यहां तक कि एक शॉल ओढ़ रखी थी। यह देख अनुपम से रहा नहीं गया और उन्होंने अमिताभ से तअज्जुब से पूछा, “सर, इतनी भीषण गर्मी में आपने यह सब पहन रखा है, क्या आपको गर्मी नहीं लग रही?” इस पर अमिताभ ने मुस्कुराते हुए बहुत ही गहरी बात कही, “अनुपम, गर्मी के बारे में सोचता हूं तो लगती है, नहीं सोचता तो नहीं लगती।” अमिताभ की इस एक लाइन ने अनुपम का नजरिया बदल दिया। उन्हें एहसास हुआ कि एक कलाकार को बाहरी सुख-सुविधाओं से ज्यादा अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उस दिन के बाद से उन्होंने कभी भी सेट पर AC या पंखे के लिए कोई हंगामा नहीं किया। बैंक खाते में महज 400 रुपए बचे थे अनुपम खेर साल 2004 के आसपास एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। उनके बैंक खाते में उस वक्त महज 400 रुपए बचे थे और वे दिवालिया होने के कगार पर थे।समदिश के पॉडकास्ट में खेर ने बताया था कि उस दौर में वे एक बड़ा टीवी प्रोडक्शन हाउस खड़ा करने का ख्वाब देख रहे थे और खुद को टीवी टायकून के तौर पर स्थापित करना चाहते थे। अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भारी कर्ज लिया, लेकिन बढ़ते ब्याज ने हालात को और ज्यादा संगीन बना दिया। हालात यहां तक पहुंच गए कि उन्हें अपना घर और दफ्तर तक गिरवी रखना पड़ा। दिलचस्प बात यह रही कि उसी दौरान वे बड़े बैनर की फिल्मों में काम कर रहे थे, इसलिए बाहरी दुनिया को उनके इस संघर्ष और परेशानी का अंदाजा नहीं था। हालांकि, इस मुश्किल दौर के बाद उन्होंने दोबारा हौसले के साथ शुरुआत की और फिर कई फिल्मों में काम कर इस संकट से बाहर निकले। चेहरे के लकवे के बावजूद की फिल्म की शूटिंगजब अनुपम खेर का करियर बुलंदी पर था और वे करीब 150 फिल्मों में काम कर चुके थे, उसी दौरान अचानक उन्हें फेशियल पैरालिसिस हो गया। टीवी शो आप की अदालत में अनुपम खेर ने बताया था कि एक दिन वे अनिल कपूर के घर खाना खा रहे थे। तभी अनिल की पत्नी सुनीता ने उनसे कहा कि वे एक आंख से पलक नहीं झपका रहे हैं। पहले उन्हें लगा कि शायद यह थकान की वजह से है, लेकिन अगले दिन जब वे ब्रश कर रहे थे तो पानी अपने आप मुंह से बाहर टपकने लगा। नहाते वक्त साबुन आंख में चला गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि मामला गंभीर है। वे फौरन फिल्ममेकर यश चोपड़ा के पास पहुंचे। यश चोपड़ा ने उन्हें डॉक्टर के पास भेजा। बॉम्बे हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन ने जांच के बाद बताया कि उन्हें फेशियल पैरालिसिस है और दो महीने तक पूरा आराम करने की सलाह दी। डॉक्टर ने दवाएं शुरू करने को कहा और काम से दूरी बनाने की हिदायत दी। इसी दिन फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के सेट पर उनका पहला दिन था, जहां अंताक्षरी वाला मशहूर सीन शूट होना था। खेर ने बताया था कि डॉक्टर की सलाह के बावजूद उन्होंने शूटिंग जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि अगर वे डरकर घर बैठ जाएंगे तो जिंदगी भर बीमारी से डरते रहेंगे। जब वे सेट पर पहुंचे तो पहले सलमान खान और माधुरी दीक्षित को लगा कि वे मजाकिया अंदाज में एक्टिंग कर रहे हैं। बाद में उन्होंने पूरी टीम को अपनी हालत बताई, लेकिन साफ कहा कि वे काम करने के लिए तैयार हैं। अनुपम खेर ने कहा था कि जिंदगी कभी-कभी ऐसे इम्तिहान लेती है, जो इंसान को अपनी असली हिम्मत का एहसास कराते हैं। 'बेस्ट कॉमेडियन' कैटेगरी में पांच फिल्मफेयर जीतेबॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर के नाम फिल्मफेयर अवॉर्ड में ‘बेस्ट कॉमेडियन’ कैटेगरी में सबसे ज्यादा पांच बार जीतने का रिकॉर्ड है। उन्हें यह सम्मान राम लखन (1989), लम्हे (1991), खेल (1992), डर (1993) और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) में शानदार एक्टिंग के लिए मिला था। खास बात यह थी कि उन्होंने 1992 से 1994 तक लगातार तीन साल यह अवॉर्ड जीतकर एक अलग मुकाम बनाया। इस कैटेगरी में उनके बाद एक्टर मेहमूद का नाम आता है, जिन्होंने चार बार यह पुरस्कार जीता। हालांकि, फिल्मफेयर ने 2007 के बाद ‘बेस्ट कॉमेडियन’ की अलग कैटेगरी खत्म कर दी थी। वेटर ने हॉलीवुड फिल्म का ऑडिशन रिकॉर्ड किया था अनुपम खेर को हॉलीवुड फिल्म सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक में काम करने का मौका मिला, जिसमें रॉबर्ट डी नीरो, ब्रैडली कूपर और जेनिफर लॉरेंस जैसे कलाकार थे और डायरेक्टर डेविड ओ. रसेल थे। फिल्म में एक हिंदुस्तानी किरदार की जरूरत थी, जिसके लिए अनुपम खेर को ऑडिशन देना था। दरअसल, उस वक्त अनुपम खेर राजस्थान के एक छोटे से गांव में शूटिंग कर रहे थे, इसलिए उनका स्काइप से ऑडिशन होना था। आज से करीब 15 साल पहले गांव में स्काइप की व्यवस्था अपने आप में एक चुनौती थी। किसी तरह कंप्यूटर लगाया गया, मगर ऑडिशन के वक्त आवाज काम नहीं कर रही थी। इसलिए उधर से मैसेज आया-“नेक्स्ट टाइम बी मोर प्रोफेशनल।” खेर को गुस्सा आया, जिस पर उन्होंने जवाब दिया, “गूगल सर्च मी।” इसके बाद तय हुआ कि टोरंटो में दोबारा ऑडिशन होगा। टोरंटो पहुंचकर अनुपम खेर पूरे एहतियात के साथ तैयार बैठे थे। दिल में ख्वाहिश थी कि रॉबर्ट डी नीरो के साथ काम करने का मौका मिलेगा। मगर किस्मत ने फिर इम्तिहान लिया। तकनीकी खराबी आ गई और उन्हें फोन पर कहा गया कि अगर सुबह तक लिंक नहीं मिला तो रोल हाथ से निकल जाएगा। तभी होटल के एक बांग्लादेशी वेटर अब्दुल को अनुपम खेर ने अपनी परेशानी बताई। उसने कहा कि उसके पास आईफोन 3 है, जिससे वह शूट करके लिंक भेज सकता है। इस तरह ऑडिशन रिकॉर्ड हुआ और उन्हें रोल मिल गया। रॉबर्ट डी नीरो ने अनुपम खेर से माफी मांगी थी इसके बाद शूटिंग के दौरान जब अनुपम खेर पहली बार रॉबर्ट डी नीरो से मिले तो उनके जज्बात काबू में नहीं रहे। उन्होंने उन्हें गणेश जी की खूबसूरत मूर्ति भेंट की, जिस पर रॉबर्ट डी नीरो की ओर से उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन फिल्म सेट पर रॉबर्ट डी नीरो पूरी तरह अपने किरदार में थे। एक सीन में उनका किरदार गुस्से में डॉक्टर बने अनुपम खेर को घर से बाहर निकाल देता है। रिहर्सल में उन्होंने सचमुच धक्का देकर बाहर कर दिया। इसके बाद सीन बदलने की बातें होने लगीं। तब खेर ने हिम्मत दिखाते हुए कहा, “आठ लोग सीन में हैं, आपने सिर्फ एक का नजरिया सुना है। मेरे किरदार की भी बात है।” माहौल में सन्नाटा छा गया। दोबारा रिहर्सल हुई और सीन संतुलन के साथ शूट हुआ। जिसके बाद रात ढाई बजे डी नीरो ने उन्हें वैन में बुलाकर कहा, “आई एम सॉरी, आई वॉज़ सेल्फिश।” अनुपम खेर और किरण खेर की लव स्टोरी अनुपम खेर और किरण खेर की लव स्टोरी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। यह कहानी दोस्ती से शुरू होकर गहरे प्यार तक पहुंची। अनुपम की पहली शादी एक्ट्रेस मधुमालती कपूर से हुई थी। दोनों की मुलाकात नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में पढ़ाई के दौरान हुई। 1979 में परिवार की रजामंदी से उन्होंने शादी की, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। जिसके बाद एक साल के भीतर ही दोनों अलग हो गए। इसके बाद अनुपम खेर की जिंदगी में फिर से किरण आईं। दरअसल, अनुपम और किरण की पहली मुलाकात चंडीगढ़ में थिएटर के दिनों में हुई थी। दोनों रंगमंच से जुड़े थे और धीरे-धीरे बहुत अच्छे दोस्त बन गए। करीब दस साल तक उनकी दोस्ती कायम रही। वे एक-दूसरे के राजदार थे। किरण जानती थीं कि अनुपम किस लड़की को पसंद करते हैं और अनुपम को भी किरण की हर बात मालूम होती थी। लेकिन तब तक उनके बीच सिर्फ दोस्ती थी, प्यार का एहसास नहीं। समय बदला। किरण की शादी बिजनेसमैन गौतम बेरी से हो चुकी थी, लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशहाल नहीं थी। उधर अनुपम भी अपनी पहली शादी से अलग हो चुके थे। इसी बीच किरण एक नाटक के सिलसिले में कोलकाता गई थी। उस समय अनुपम एक फिल्म के लिए सिर मुंडवाए हुए थे। एक शाम जब वे किरण के कमरे से निकल रहे थे, तो अचानक दोनों की नजरें मिलीं। थोड़ी देर बाद अनुपम ने दरवाजा खटखटाया और साफ शब्दों में कहा, “मुझे लगता है मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं।” उस पल सब कुछ बदल गया। दोस्ती की जगह प्यार ने ले ली। किरण ने भी अपने दिल की आवाज सुनी। उन्होंने अपनी पहली शादी खत्म की और 1985 में अनुपम खेर से शादी कर ली। आज उनकी शादी को चार दशक से ज्यादा हो चुके हैं। अनुपम ने किरण के बेटे सिकंदर खेर को अपने बेटे की तरह अपनाया। अनुपम खेर के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स अनुपम खेर ने अपने करियर की 550वीं फिल्म ‘खोसला का घोसला 2’ की शूटिंग जनवरी में शुरू कर दी है। यह फिल्म 2006 की चर्चित कल्ट क्लासिक ‘खोसला का घोसला’ का सीक्वल है। फिल्म का निर्देशन उमेश बिष्ट कर रहे हैं, जबकि इसमें बोमन ईरानी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। ________________________ बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... अभिषेक बच्चन@50; नकली अंगूठी से ऐश्वर्या को किया प्रपोज:पैसे नहीं थे तो अवॉर्ड शो में पहनी पुरानी शेरवानी, विल स्मिथ का तोड़ा रिकॉर्ड अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के घर जन्मे अभिषेक की पहचान सिर्फ एक सुपरस्टार के बेटे तक सीमित नहीं रही। उम्मीदों, असफलताओं, आलोचनाओं और फिर सफलता के चक्र से गुजरते हुए उन्होंने अपनी खुद की पहचान बनाई और युवा, धूम, गुरु, सरकार जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल जीता। पूरी खबर पढ़ें....
बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री जान्हवी कपूर का हर साल की तरह इस बार का जन्मदिन भी बेहद खास और आध्यात्मिक रहा। अपने जन्मदिन के मौके पर उन्होंने आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर में दर्शन किए। खास बात यह रही कि उन्होंने मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 3,550 सीढ़ियां नंगे पैर चढ़ीं। अभिनेत्री ने अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह कठिन यात्रा पैदल पूरी की। तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर के इस प्रसिद्ध मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु अक्सर पैदल मार्ग चुनते हैं, जिसमें हजारों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। जान्हवी कपूर ने भी इसी पारंपरिक रास्ते को चुना और पूरे रास्ते नंगे पैर चढ़कर अपनी भक्ति का परिचय दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जान्हवी कपूर ने यह यात्रा तड़के सुबह शुरू की थी। कई श्रद्धालुओं ने उन्हें रास्ते में देखा और उनकी सादगी की भी काफी तारीफ की। बिना किसी विशेष दिखावे के, साधारण कपड़ों में जन्हवी भगवान के दर्शन के लिए पहुंचीं। मंदिर पहुंचकर उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद लिया। जन्मदिन को इस तरह आध्यात्मिक अंदाज में मनाने की उनकी यह पहल सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है। फैंस उनकी इस भक्ति और सादगी की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि ग्लैमर की दुनिया में रहते हुए भी जन्हवी अपनी संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई हैं। जान्हवी कपूर अक्सर अपने परिवार की धार्मिक परंपराओं का पालन करती नजर आती हैं। खास मौकों पर मंदिरों में जाकर पूजा करना उनके लिए एक खास अनुभव होता है। इस बार भी उन्होंने अपने जन्मदिन को भगवान के दर्शन और आशीर्वाद के साथ मनाकर इसे और भी यादगार बना दिया। गौरतलब है कि जन्हवी कपूर दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी और फिल्म निर्माता बोनी कपूर की बेटी हैं। उनका जन्म 6 मार्च 1997 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है और आज वे इंडस्ट्री की चर्चित युवा अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने राम मंदिर की जन्मभूमि अयोध्या में एक और बड़ी प्रॉपर्टी खरीदी है। उन्होंने 'हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा' (HoABL) से 2.67 एकड़ जमीन खरीदी है। इस सौदे की कीमत 35 करोड़ रुपए है। कंपनी ने 6 मार्च को इस निवेश की आधिकारिक जानकारी दी है। अयोध्या में अमिताभ बच्चन का यह तीसरा बड़ा निवेश है। यह जमीन 75 एकड़ की 'द सरयू' परियोजना के पास स्थित है। अमिताभ की कंपनी 'AB Corp Ltd' के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश यादव ने इस पूरी डील को फाइनल किया है। अभिनंदन लोढ़ा ग्रुप के साथ अमिताभ बच्चन का यह कुल चौथा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट है। पिछले डेढ़ साल में खरीदे तीन प्लॉट अमिताभ बच्चन अयोध्या में लगातार निवेश कर रहे हैं। इससे पहले मई 2025 में उन्होंने 'द सरयू' के पास ही 40 करोड़ रुपए में 25,000 वर्ग फुट का एक प्लॉट खरीदा था। वहीं, साल 2024 में उन्होंने इसी प्रोजेक्ट में 14.5 करोड़ रुपए में 10,000 वर्ग फुट का प्लॉट लिया था। मंदिर नगर में अब तक वे जमीन पर करीब 90 करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं। विरासत के रूप में देख रहे हैं जमीन इस निवेश पर 'हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा' के चेयरमैन अभिनंदन लोढ़ा ने कहा, अमिताभ बच्चन का निवेश जमीन को एक ऐसी संपत्ति के रूप में देखने के हमारे भरोसे को दिखाता है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी वैल्यू बनाए रखती है। अयोध्या में आस्था और विरासत का मेल है। बुनियादी ढांचे के विकास के कारण यह शहर निवेश के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। अलीबाग में 10 करोड़ रुपए का निवेश कर चुके अयोध्या के अलावा बिग बी ने अलीबाग की 'सोल दे अलीबाग' परियोजना में भी 10 करोड़ रुपए निवेश किए हैं। वहां उन्होंने 10,000 वर्ग फुट की जमीन खरीदी है। अलीबाग के इसी प्रोजेक्ट में बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन और कार्तिक आर्यन ने भी अपने प्लॉट खरीदे हैं। 5 साल में 4.5 गुना बढ़ी कीमतें अयोध्या में जमीन की कीमतों में पिछले 5 साल में बड़ा उछाल आया है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और राम मंदिर निर्माण के बाद सरयू नदी के तट और राम मंदिर कॉरिडोर के आसपास जमीन के रेट साल 2020 से 2025 के बीच 4.5 गुना से ज्यादा बढ़ चुके हैं।
तिरंगा और दूध का कर्ज जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम करने वाली एक्ट्रेस वर्षा उसगांवकर लाखों की धोखाधड़ी का शिकार हो गई हैं। ऊषा के अलावा 4 अन्य एक्ट्रेसेस से भी धोखाधड़ी की गई है। जिसके बाद फिल्म निर्माता और बिल्डर अविनाश जाधव के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज की गई है। आरोप हैं कि अविनाश जाधव ने निवेश की आड़ में इन एक्ट्रेसेस से 47 लाख रुपए की ठगी की है। मराठी फिल्म और थिएटर एक्ट्रेस मृणालिनी सुभाष जांभले भी इन पीड़ितों में शामिल हैं। उन्होंने मुंबई के शिवाजी पार्क पुलिस में अविनाश जाधव के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। मुनाफे का लालच देकर ठगे पैसे शिकायत के अनुसार, आरोपी अविनाश जाधव लंबे समय से इन एक्ट्रेसेस को जानता था। जाधव ने खुद को एक बड़ा बिल्डर और फिल्म प्रोड्यूसर बताया था। उसने एक्ट्रेसेस को डोंबिवली स्थित एक कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में निवेश करने पर कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का लालच दिया। उसने वादा किया था कि एक साल के अंदर ही वह पूरी मूल राशि लौटा देगा। नवंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच एक्ट्रेसेस ने निवेश करना शुरू कर दिया। मृणालिनी जांभले, वर्षा उसगांवकर और तीन अन्य लोगों ने मिलकर चेक और ऑनलाइन पेमेंट से कुल 47 लाख रुपए जाधव को दिए थे। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए जाधव ने 4 लाख 52 हजार रुपए वापस भी किए, लेकिन इसके बाद उसने पैसे देना बंद कर दिया। जाधव ने नंबर बदला और धमकी दी पीड़ित एक्ट्रेसेस का आरोप है कि जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगने के लिए संपर्क किया, तो आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर और पता बदल लिया। काफी तलाश के बाद जब एक्ट्रेसेस डोंबिवली पहुंचीं और उससे अपना हक मांगा, तो जाधव ने उन्हें धमकी दी। उसने साफ कह दिया कि वह पैसे नहीं लौटाएगा, जिसे जो करना है कर ले। इसके बाद ठगी का एहसास होने पर एक्ट्रेसेस ने पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज कराई। आरोपी के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं में केस दर्ज शिवाजी पार्क पुलिस ने आरोपी अविनाश जाधव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने इसी तरह और कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया है। पुलिस जल्द ही आरोपी को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। फिल्मों में अभी भी एक्टिव हैं वर्षा उसगांवकर वर्षा उसगांवकर 90 के दशक की पॉपुलर एक्ट्रेस रही हैं। उन्होंने 'हनीमून', 'तिरंगा', 'सोने की जंजीर' और 'घर आया मेरा परदेसी' जैसी कई बड़ी हिंदी फिल्मों में काम किया है। हिंदी के साथ-साथ वह मराठी सिनेमा का भी जाना-माना नाम हैं और आज भी फिल्मों और सीरियल्स में काफी सक्रिय हैं।
बॉलीवुड सिंगर एवं रैपर बादशाह के आए नए गाने टटीरी को लेकर रोहतक में नवीन जयहिंद भड़क गए। उन्होंने कहा कि गाने में हरियाणा रोडवेज की बस का प्रयोग किया गया है। साथ ही लड़कियों से स्कूल ड्रेस में बस के ऊपर डांस करवाया गया है, जो गलत है। गाने में काफी अश्लीलता परोसी गई है, जिसको लेकर सभी लोगों को आवाज उठानी चाहिए। नवीन जयहिंद ने रैपर बादशाह को भांडशाह कहते हुए कहा कि हरियाणा रोडवेज की बस का प्रयोग एक गाने में रैपर बादशाह ने किया है, जिसके ऊपर लड़कियों को सरकारी स्कूल की ड्रेस में नचाया है। साथ ही गाने के बोल भी अश्लील है, जिसको लेकर तुरंत हरियाणा सरकार को हस्तक्षेप करते हुए बादशाह के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। विधानसभा में उठानी चाहिए आवाजनवीन जयहिंद ने कहा कि विधानसभा का सत्र चला हुआ है। ऐसे में विपक्ष के विधायकों को विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाना चाहिए। हरियाणा की बहन बेटियों के लिए एक व्यक्ति द्वारा अश्लील शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिसके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। लड़कियों के फोन आए, रोने लगी नवीन जयहिंद ने कहा कि 3-4 लड़कियों के फोन आए है, जो फोन पर रोने लगी। लड़कियों ने बताया कि रास्ते में कुछ युवक उन्हें गाना गाकर छेड़ रहे हैं। क्योंकि गाने में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। गाना बनाने वाले बेवकुफ नहीं है, जानबुझकर हरियाणा की लड़कियों को लेकर यह गाना बनाया गया है। परिवहन मंत्री को लेना चाहिए संज्ञान नवीन जयहिंद ने कहा कि हरियाणा रोडवेज की बस का प्रयोग गाने में किया गया, इस मामले में परिवहन मंत्री अनिल विज को संज्ञान लेना चाहिए। उनके विभाग की बस को कोई कैसे अश्लील गाने के लिए प्रयोग कर रहा है। कल को कोई अश्लील फिल्म बनाकर हरियाणा रोडवेज को बदनाम कर सकता है। शिक्षामंत्री करवाए मामले में जांचनवीन जयहिंद ने कहा कि इस मामले में शिक्षामंत्री को भी जांच करवानी चाहिए कि कौन से स्कूल की लड़कियों को स्कूल ड्रेस में बस के ऊपर नचाया गया है। यह गाने की वीडियो कहा शूट की गई है, इसको लेकर भी जांच होनी चाहिए। साथ ही सभी सरपंच, विधायक, नेता व मंत्रियों के साथ सामाजिक संगठनों को भी आवाज उठानी चाहिए।
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी मूल की अभिनेत्री मंदाना करीमी का बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। उन्होंने ईरान में हो रही घटनाओं और वहां के राजनीतिक हालात को लेकर अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद मंदाना के कुछ पोस्ट वायरल हुए, जिन पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। मिसाइल हमलों से कई शहरों में तबाही का माहौल है और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इन घटनाओं से दुखी होकर मंदाना करीमी ने सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट शेयर किए। एक वीडियो में वह रोती हुई भी नजर आईं और अपने देश के लोगों के लिए दुआ करती दिखीं। मंदाना का कहना है कि वह ईरान में पैदा हुई हैं और वहां की स्थिति से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि जब अपने देश में युद्ध और हिंसा होती है तो बाहर रह रहे लोगों के लिए भी यह बेहद दर्दनाक होता है। उन्होंने लोगों से ईरान के नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करने की अपील की। खामेनेई की मौत की खबर के बाद कुछ जगहों पर लोगों के जश्न मनाने की तस्वीरें भी सामने आईं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंदाना ने कहा कि कई बार लोग युद्ध की वजह से खुश नहीं होते, बल्कि लंबे समय से चली आ रही दमनकारी परिस्थितियों के खत्म होने की उम्मीद में प्रतिक्रिया देते हैं। उनका कहना था कि जब लोग सालों तक दबाव और डर में जीते हैं, तो उनके लिए बदलाव की उम्मीद ही सबसे बड़ी राहत बन जाती है। हालांकि, मंदाना के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। कुछ यूजर्स ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि कुछ ने उनकी आलोचना भी की। बावजूद इसके, मंदाना लगातार ईरान के लोगों की स्थिति और वहां के हालात को लेकर अपनी राय साझा कर रही हैं। मंदाना करीमी मूल रूप से तेहरान की रहने वाली हैं, लेकिन पिछले कई सालों से भारत में काम कर रही हैं। वह मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत कर चुकी हैं और हिंदी फिल्मों के अलावा रियलिटी शो में भी नजर आ चुकी हैं। Bigg Boss और Lock Upp जैसे शो से उन्हें भारत में काफी पहचान मिली।
कृति सेनन को क्रिटिसाइज करने वाली रील यामी ने की:आलोचना होने पर दी सफाई, कहा- गलती से लाइक हुई
बॉलीवुड एक्ट्रेस यामी गौतम और कृति सेनन के बीच विवाद चर्चा सोशल मीडिया पर में बना हुआ है। यह तब शुरू हुआ जब यामी ने इंस्टाग्राम पर एक ऐसी रील लाइक कर दी, जिसमें कृति सेनन को मिले बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर यामी गौतम का विरोध हो रहा था। अब एक्ट्रेस ने इस मामले पर सफाई दी है। यामी ने कहा कि मेरा इरादा किसी को नीचा दिखाना नहीं था। वह रील जानबूझकर लाइक नहीं की गई थी। यामी की सफाई, गलती से हुआ क्लिक विवाद बढ़ता देख यामी गौतम ने अपने X (ट्विटर) अकाउंट पर एक लंबा पोस्ट लिखकर सफाई दी। यामी ने लिखा, 'मुझे पता चला कि मैंने एक ऐसी रील को लाइक किया है जो दूसरे एक्टर के प्रति अपमानजनक है। हमें रोज कई चीजों में टैग किया जाता है, यह रील भी उसी तरह सामने आई थी। वह लाइक जानबूझकर नहीं किया गया था, शायद गलती से क्लिक हो गया होगा।' यामी बोलीं- मेरी कोई पीआर टीम नहीं यामी ने उन लोगों को भी जवाब दिया जो इसे पब्लिसिटी स्टंट बता रहे थे। उन्होंने लिखा, मैंने अपनी लाइफ में कभी भी घटिया पीआर के हथकंडे नहीं अपनाए हैं। मैंने हमेशा अपने काम पर फोकस किया है। आज की क्लिकबेट दुनिया में गॉसिप बनाना आसान है, लेकिन मेरी रेप्यूटेशन इससे कहीं बेहतर है। मेरी कोई पीआर टीम नहीं है। पोस्ट लाइक से शुरू हुआ विवादहाल ही में जी सिने अवॉर्ड्स में कृति सेनन को फिल्म 'तेरे इश्क में' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। वहीं, फिल्म 'हक' में शाजिया बानो के किरदार के बावजूद यामी गौतम को कोई अवॉर्ड नहीं मिला। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक रील वायरल हुई। इस रील में एक तरफ कृति अवॉर्ड का जश्न मना रही थीं और दूसरी तरफ यामी का एक पुराना इंटरव्यू चल रहा था। उस रील के जरिए कृति के अवॉर्ड पर सवाल उठाए गए थे, जिसे यामी ने लाइक कर दिया था। वीडियो में यामी बोलीं वैलिडेशन की तलाश छोड़ी रील में चल रहे इंटरव्यू के दौरान यामी ने अवॉर्ड्स को लेकर अपना नजरिया साफ किया था। उन्होंने कहा था, आप हर संभव कोशिश करते हैं, फिर भी बात नहीं बनती। इसलिए मैंने किसी भी तरह के वैलिडेशन की तलाश करना छोड़ दिया है। ऐसा नहीं है कि अवॉर्ड मिला तो ही मैं अच्छी एक्ट्रेस हूं। मैं बस अपने काम पर ध्यान दे रही हूं।
रोहतक जिले के महम में नेहरा खाप के सदस्यों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। खाप ने रैपर बादशाह और संबंधित स्कूल स्टाफ के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह मांग एक हालिया हरियाणवी गाने में स्कूल की लड़कियों को बस की छत पर स्कूल ड्रेस में नचाने और आपत्तिजनक बोल के विरोध में की गई है। नेहरा युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप नेहरा निंदाना ने बताया कि गाने में स्कूल की लड़कियों को हरियाणा रोडवेज की बस की छत पर नाचते हुए दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि गाने के बोल, जिसमें कलाकार खुद को बादशाह बताकर लड़कियों को 'घोड़ी बनाने' की बात कह रहा है, अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय हैं। खाप ने बादशाह पर कानूनी कार्रवाई कर उसे जेल भेजने की मांग की है। नेहरा बोले- ऐसे गाने संस्कृति को खराब कर रहे संदीप नेहरा ने कहा कि हरियाणा अपनी समृद्ध संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और नारी सम्मान की परंपरा के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गाने न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को गलत संदेश देकर सभ्यता और संस्कारों को भी नष्ट करते हैं। सरकार से तुरंत बैन करने की मांग नेहरा खाप ने इस विषय पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से गाने पर तुरंत बैन करने की मांग की है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से अपील की गई है कि जिस सरकारी स्कूल की लड़कियों को इस तरह के नृत्य के लिए इस्तेमाल किया गया, उस स्कूल के प्रिंसिपल और अध्यापकों पर कार्रवाई कर उन्हें बर्खास्त किया जाए।
बॉलीवुड एक्टर गोविंदा ने सलमान खान को लेकर एक बड़ा दावा किया है। गोविंदा ने कहा कि उन्होंने ही सलमान खान को अपना लुक और फिजिकल अपीयरेंस बदलने का सुझाव दिया था। गोविंदा ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में बताया कि पार्टनर फिल्म की शुरुआत से पहले उन्होंने सलमान को बॉडी और बालों पर काम करने की सलाह दी थी, जिसके बाद सलमान ने सर्जरी कराई और खुद को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म किया। गोविंदा बोले- थोड़ा चेहरा उतर गया है, बॉडी तैयार कर लीजिए इंटरव्यू में गोविंदा ने कहा, “मैंने सलमान से कहा था कि तुम्हें यह और यह करना है। थोड़ा सा चेहरा उतर गया है, थोड़ी बॉडी तैयार कर लीजिए। आपके बाल भी थोड़े कम लग रहे हैं, तो आपको कुछ करना चाहिए।” गोविंदा के मुताबिक, उन्होंने यह बात एक-दो ड्रिंक लेने के बाद कही थी। दावा- सलाह के बाद सलमान ने कराई थी सर्जरी गोविंदा ने दावा किया कि उनकी बात सुनने के बाद सलमान खान ने इसे गंभीरता से लिया। गोविंदा ने कहा, “सलमान गया और उसने सर्जरी कराई, फिर एक्सरसाइज शुरू की। पार्टनर के बाद आप सलमान को देखिए, वह पहले जैसा नहीं था। हमने कोशिश की थी कि उसकी पर्सनैलिटी को पूरी तरह बदल दें और हम इसमें कामयाब रहे।” सलमान बोले- गोविंदा के साथ काम करने से डर लगता था सलमान खान ने एक पुराने इंटरव्यू में गोविंदा के साथ काम करने के अनुभव पर बात की थी। सलमान ने बताया था कि उन्हें गोविंदा के साथ स्क्रीन शेयर करने में डर लगता था। सलमान ने कहा था, “एक फिल्म में कोई कितनी कॉमेडी कर सकता है? अपनी जिंदगी के शुरुआती 17 सालों में मुझे गोविंदा के साथ काम करने से डर लगता था कि कहीं वह अपनी कॉमेडी से मुझ पर भारी न पड़ जाएं।” राजनीति से लौटकर संघर्ष कर रहे थे गोविंदा 90 के दशक में गोविंदा बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार थे, लेकिन साल 2000 के आते-आते उनका स्टारडम कम होने लगा था। इस दौरान गोविंदा ने राजनीति में एंट्री की और करीब 3 साल तक फिल्मों से दूर रहे। जब उन्होंने वापसी की, तो इंडस्ट्री का मिजाज बदल चुका था। साल 2007 में आई डेविड धवन की फिल्म 'पार्टनर' ने गोविंदा को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।
एक्टर नागा चैतन्य अपनी अपकमिंग फिल्म ‘वृषकर्मा’ के प्रमोशनल इवेंट के दौरान एक दुर्घटना से बाल-बाल बच गए। नागा चैतन्य जब स्टेज पर रखी कुर्सी पर बैठने की कोशिश कर रहे थे, तभी कुर्सी का एक पैर अचानक झुक गया, जिससे वह असंतुलित होकर स्टेज से नीचे गिर गए। यह घटना प्रेस मीट शुरू होने से ठीक पहले हुई। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद लोग उनकी मदद के लिए आगे आए। हालांकि, नागा चैतन्य बिना किसी सहायता के तुरंत उठ खड़े हुए। उन्हें मुस्कुराते हुए इस घटना पर हंसते हुए भी देखा गया। आयोजकों के अनुसार, घटना में उन्हें कोई चोट नहीं आई और कुछ देर बाद कार्यक्रम दोबारा शुरू कर दिया गया। वृषकर्मा का टीजर रिलीज हुआ बता दें कि फिल्म वृषकर्मा का टीजर (जिसे मेकर्स ने 'फर्स्ट ग्लिम्स' कहा है) 5 मार्च को रिलीज किया गया है। यह एक माइथोलॉजिकल एडवेंचर थ्रिलर फिल्म है, जिसमें नागा चैतन्य मुख्य भूमिका में हैं। टीजर की शुरुआत एक ऐसे व्यक्ति से होती है, जिस पर किसी बुरी शक्ति का कब्जा दिखाया गया है। वह एक ऐसे व्यक्ति का चित्र बनाता है, जिसकी आंख निकली हुई है। चित्र पूरा होने के बाद उसके मुंह से चमगादड़ जैसा जीव निकलता है, जो आगे उसी तरह एक व्यक्ति की हत्या करता दिखाया गया है, जैसा चित्र में दर्शाया गया था। वीडियो में वॉयसओवर सुनाई देता है-“जब एक अनोखी शक्ति जागती है और दुनिया अपने मकसद से भटक जाती है, तो किस्मत अपना रास्ता खुद चुन लेती है।” इसमें जयराम, मीनाक्षी चौधरी और नागा चैतन्य के किरदारों की झलक भी दिखाई गई है। फिल्म में मीनाक्षी चौधरी और जयराम भी मेकर्स के अनुसार, मीनाक्षी चौधरी फिल्म में ‘दक्षा’ का किरदार निभा रही हैं, जबकि जयराम ‘प्रोफेसर रंगनाथ’ की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन कार्तिक दांडू कर रहे हैं। इसे BVSN प्रसाद और सुकुमार क्रमशः श्री वेंकटेश्वर सिने चित्रा और सुकुमार राइटिंग्स के बैनर तले प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म की कहानी सुकुमार ने लिखी है। सिनेमैटोग्राफी नील डी कुन्हा ने की है, संगीत अजनीश लोकनाथ ने दिया है। एडिटिंग नेशनल अवॉर्ड विनर एडिटर नवीन नूली कर रहे हैं, जबकि आर्ट डायरेक्शन श्री नागेंद्र तंगाला ने किया है।
तमिल एक्टर-पॉलिटिशियन थलापति विजय गुरुवार को चेन्नई में एक शादी के रिसेप्शन में एक्ट्रेस त्रिशा के साथ नजर आए। यह रिसेप्शन एंटरप्रेन्योर और फिल्म प्रोड्यूसर कल्पना एस सुरेश और मीनाक्षी सुरेश के बेटे की शादी का था। बता दें कि हाल ही में विजय की पत्नी संगीता ने तलाक की अर्जी दायर की है, जिसके बाद विजय और त्रिशा की यह पहली पब्लिक अपीयरेंस है। रिसेप्शन में विजय और त्रिशा को वेन्यू पर एक साथ आते हुए देखा गया। दोनों ने बाद में नए शादीशुदा जोड़े के साथ पोज भी दिए। सेरेमनी खत्म होने के बाद दोनों को एक साथ वेन्यू से निकलते हुए भी देखा गया। विजय ने गोल्ड कलर की सिल्क शर्ट के साथ ट्रेडिशनल वेष्टि पहनी थी। वहीं त्रिशा सफेद-गोल्ड रंग की प्योर सिल्क साड़ी में नजर आईं, जिसके बॉर्डर पर लाल रंग का काम था। उन्होंने साड़ी को स्लीवलेस रेड ब्लाउज के साथ पहना और ग्रीन एमरल्ड स्टेटमेंट नेकलेस से अपना लुक पूरा किया। विजय की पत्नी संगीता ने तलाक की अर्जी दी गौरतलब है कि यह अपीयरेंस ऐसे समय सामने आई है जब हाल ही में विजय की पत्नी संगीता ने तलाक की अर्जी दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विजय का एक दूसरी एक्ट्रेस के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशनशिप था, जिससे उन्हें गहरा इमोशनल दर्द और मानसिक तकलीफ हुई। याचिका के मुताबिक, विजय ने शुरू में उन्हें भरोसा दिलाया कि रिश्ता जल्द ही खत्म हो जाएगा, लेकिन आरोप है कि यह रिश्ता जारी रहा, जिससे उन्हें मेंटल हैरेसमेंट, सोशल मीडिया एक्टिविटीज के जरिए पब्लिक में शर्मिंदगी और इमोशनली नजरअंदाज किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि सितंबर 2021 से फरवरी 2022 और फिर अगस्त 2024 से फरवरी 2025 के बीच वकीलों और निजी बातचीत के जरिए मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। याचिका में यह दावा किया गया है कि शादी पूरी तरह टूट चुकी है और केवल कागजों पर रह गई है। इसके साथ ही उन्होंने विजय की इनकम के अनुसार परमानेंट एलिमनी और केस का फैसला होने तक नीलांकरई स्थित ससुराल में रहने का अधिकार या वैकल्पिक आवास की मांग की है। साथ ही कार्यवाही को बंद कमरे में करने की अपील भी की गई है।
पैसों के विवाद में जेल जाने के बाद अभिनेता राजपाल यादव पहली बार खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि 10-12 साल से चल रहे इस मामले में वह हमेशा कोर्ट की शरण में रहे हैं और सच्चाई जनता तक पहुंचना जरूरी है। राजपाल का कहना है कि सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी फैलने से भ्रम पैदा हुआ, इसलिए उन्होंने खुद सामने आकर सफाई देना जरूरी समझा। उन्होंने कहा कि अगर किसी का पैसा समय पर नहीं दे पाए तो उसकी नाराजगी स्वीकार है, लेकिन कभी किसी से छिपने या भागने की जरूरत महसूस नहीं हुई। अभिनेता ने इसे अपनी जिंदगी का सिर्फ एक ‘एपिसोड’ बताते हुए कहा कि आगे जो भी होगा, वह कोर्ट और सच्चाई के आधार पर तय होगा। दैनिक भास्कर से बातचीत में राजपाल यादव ने कहा कि सच छिपाने की बजाय उसे जनता के सामने रखना ही एक कलाकार की जिम्मेदारी है। पैसे के विवाद, जेल जाने और सोशल मीडिया पर फैली बातों के बीच आपने खुद सामने आकर सफाई देना जरूरी क्यों समझा? आप इस पूरे मामले को किस नजर से देखते हैं? हमारे देश की जनता बहुत ईमानदार और सच्ची है। आप क्रिकेटर हों या अभिनेता लोग आपको दिल से प्यार करते हैं। लेकिन अगर उनके पास कोई अधूरी जानकारी पहुंचती है, तो उसे साफ करना हमारा कर्तव्य है, क्योंकि हम पब्लिक के आदमी हैं। मुझे लगा कि सच्चाई जनता तक पहुंचनी चाहिए। 10-12 साल से जो मामला चल रहा है, उसमें मैं हमेशा माननीय कोर्ट की शरण में था, हूं और रहूंगा। एक अभिनेता का करियर होता है। फिल्म फाइनेंस 100 साल पुराना रिश्ता है। एक शुक्रवार 500 रुपए का नहीं रहता 500 करोड़ के दरवाजे खोल देता है। यही सिनेमा है, यही उसका रोमांच है। 1896 में हॉलीवुड शुरू हुआ, 1913 के आसपास भारतीय सिनेमा शुरू हुआ। 100 साल से इंडस्ट्री चल रही है। अगर सब बेईमान होते, तो क्या इतने साल टिक पाती इंडस्ट्री ? राजपाल यादव एक कॉमन मैन का प्रतिनिधि आदमी है। मैं कहीं “बिलॉन्ग” नहीं करता, मैं जीता हूं। 20 साल तक मुझे नहीं मालूम था कि मैं अभिनेता बनूंगा। लेकिन मुझे खेती करना आता था गेहूं कैसे बोया जाता है, पानी कैसे चलाया जाता है, मेड़ कैसे बांधी जाती है। अगर मैं अभिनेता हूं, तो मुझे स्टेज मैनेजमेंट समझना होगा। अगर फिल्म अभिनेता हूं, तो फिल्म का क्राफ्ट समझना होगा। क्राफ्ट से गुजरना पड़ेगा। मैं 11 साल सेल्फ-डिपेंड रहा हूं। मेरे पिताजी और परिवार गवाह हैं। हमने अपनी किताबें मेहनत से खरीदीं। थोड़ा पिताजी ने काम किया, थोड़ा भाई ने, थोड़ा मैंने। आज एशिया से लेकर सातों समंदर तक लोग पहचानते हैं। मैंने कभी रिसर्च नहीं की, लेकिन 500-600 लोग तो जहां जाता हूं पहचान लेते हैं। अगर ऐसे आदमी पर कोई उंगली उठती है, तो ऑडियंस को सच्चाई पता चलनी चाहिए। लोग कह रहे थे करियर खत्म हो जाएगा, इंडस्ट्री क्या कहेगी, दुनिया क्या कहेगी, सब चौपट हो जाएगा। मैं कहता हूं खड़ा हूं, चौपट हो जाए तो हो जाए। मजाक करता हूं, लेकिन अंदर की गंभीरता शरीर से 10 गुना ज्यादा है। मैं शाहजहांपुर से दाल-चावल-रोटी का इंतजाम करके मुंबई आया था। सिर्फ रोटी कमाने नहीं आया था। मैं अपनी भूख मिटाने आया था कला की भूख। एक डायलॉग बोलने में खुशी मिलती है। 50 बार रिहर्सल करने में खुशी मिलती है। दो लोगों का खर्च उठाने में खुशी मिलती है। यह मेरा पैशन है। यह जो विवाद आया है, यह मेरी जिंदगी का सिर्फ एक एपिसोड है। मैंने 50 लोगों से लेन-देन किया है। जिसका पैसा समय पर नहीं दे पाया, उसकी गाली खाने को तैयार हूं इस केस में गाली मिली भी। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी का पैसा ले लिया और उसका फोन न उठाया हो। मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई जरूरत है कि मैं किसी से छिपूं या भागूं। जिन दो लोगों पर आपके 30 साल के करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप है, क्या उनसे आउट ऑफ कोर्ट समझौते की कोई संभावना है? नहीं, अभी ऐसा कोई प्रश्न ही पैदा नहीं होता। जो भी होगा, माननीय कोर्ट के माध्यम से होगा। अगर उन्हें 5 करोड़ नहीं चाहिए थे, तो नाम तो हो गया ना उनका। तीन घंटे की चर्चा में उन्हें वही मिला जो चाहिए था पहचान। समझौता तब होता है जब दोनों तरफ से लड़ाई हो। यहां तो एक तरफ से पूरी तैयारी थी। स्टेडियम भी आपने बनाया, खिलाड़ी भी आपने खड़े किए, आउट भी आपने किया और पवेलियन भी आपने भेज दिया लेकिन अब मेरी बारी है। इन्होंने खुद सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर मुझे मेरी बारी दे दी। अब सच में मेरी बारी है। क्या आपको लगता है कि आपकी चुप्पी का फायदा उठाया गया? चुप्पी का फायदा उठाने की कोशिश हुई। लेकिन जिन्होंने इंटरव्यू दिए, उन्होंने खुद ही अपने शब्दों में कॉमा और विराम लगा दिए हैं। अब उनकी नियति और इरादा साफ हो चुका है पूर्ण विराम। मैं तो इसी की तलाश में था कि इनका इंटेंशन सामने आ जाए। इन्होंने कहा कि जिस दिन म्यूजिक रिलीज हुआ, अगले दिन फिल्म रुकवा दी। अरे, 20 करोड़ रुपये लगे हों और कोई फिल्म रुकवा दे? जबकि भुगतान फरवरी में होना था और बात सितंबर में की जा रही है। कभी-कभी यह सब पैसों से ज्यादा जलन और कुंठा का मामला भी हो जाता है। अगर उद्देश्य प्रसिद्धि पाना था, तो वह मिल गई। फेमस होना था हो गए। मैंने कुछ नया नहीं जोड़ा, बस वही कहा जो उनके अपने शब्दों और घटनाक्रम से साफ दिखाई देता है। आगे जो भी होगा, कानून और सच्चाई के आधार पर होगा। पैसे के विवाद में जेल जाने के बाद आपके जेल अनुभव को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें कही गईं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? जेल का अपना सिस्टम होता है, अपने नियम होते हैं। जेल देश की व्यवस्था का हिस्सा है। वहां के कानूनों का पालन करना धर्म है। बाहर जो लिखा जाता है, वह लोगों की कल्पना हो सकती है। कोई सोचता है काश ऐसा हो जाता, कोई कहता है काश वैसा हो जाता। वह उनका विषय है, मेरा नहीं। मैं जहां भी मिलूंगा, हंसते हुए मिलूंगा अपने आप से, समाज से, परिवार से। मुश्किल समय में आपके पिता ने कहा था कि अगर भैंसों से घिर जाओ तब भी शेर की तरह लड़ना। अगर आज वे होते, तो इस पूरे विवाद पर आपको क्या सलाह देते? वो यही कहते कि बेटा, अगर गलत हो तो तुरंत झुक जाओ। लेकिन अगर गलती नहीं है, तो दुनिया एक तरफ हो जाए, बिल्कुल मत झुकना। मुझे पता है यह दुनिया अपनी ही दुनिया है। आज अगर लोग आपको समझ रहे हैं या परख रहे हैं, तो कल आपके संस्कार ही आपकी परीक्षा लेंगे। अचानक कुछ भी नहीं होता। हर चीज के पीछे व्यवहार, आचरण और संस्कार होते हैं। मैं 30 साल पहले जैसा था, आज भी वैसा ही हूं। आगे भी कोशिश करूंगा कि और अच्छा काम करूं, ऐसे किरदार करूं जो मुझे खुद भी चौंका दें और देश-दुनिया में पहचान बनाएं।
बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह के हरियाणवी फोक सॉन्ग 'टटीरी' को लेकर विवाद हो गया है। गाने को लेकर 2 अलग-अलग शिकायतें दी गईं हैं। पहली शिकायत पानीपत की सविता आर्या ने हरियाणा महिला आयोग और दूसरी शिकायत रोहतक के एडवोकेट राजनारायण पंघाल ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजी है। शिकायत में बादशाह के रैप की लाइन ‘आया बादशाह डोली चढ़ाने, इन सबकी घोड़ी बनाने’ पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस गाने में गंदी शब्दावली का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही स्कूल ड्रेस में नाबालिग बच्चियों को स्कूल बैग फेंकते हुए दिखाया गया। यह सॉन्ग 1 मार्च को रिलीज हुआ था। इस गाने में कैथल की रहने वाली सिमरन जागलान की भी आवाज है। वह हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं। टटीरी गाने को अभी तक यूट्यूब पर 2 मिलियन से ज्यादा लोग सुन चुके हैं। अब जानिए गाने को लेकर क्या शिकायत हुई…. वकील ने दिया इन एक्ट का हवाला… अब जानिए कौन हैं बादशाह…. ------------------------ ये खबर भी पढ़ें :- बादशाह संग 'टटीरी' सॉन्ग गाने वाली सिमरन की कहानी:पिता हरियाणवी सॉन्ग 'पानी आली पानी प्यादे' गाकर फेमस हुए, बेटी बॉक्सिंग में स्टेट चैंपियन रही बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फोक सॉन्ग 'टटीरी' लॉन्च किया है। इस गाने में कैथल की रहने वाली सिमरन जागलान ने अपनी आवाज दी है। सिमरन, हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं, जिन्होंने फेमस हरियाणवी सॉन्ग 'पानी आली पानी प्यादे' गाया है। पढ़ें पूरी खबर…
हिंदी सिनेमा की दुनिया हर साल नए चेहरों से रोशन होती है, लेकिन चमकते सितारों की भीड़ में अपनी अलग पहचान बना पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इस चमक-दमक के पीछे अनगिनत संघर्ष, असफलताएं और आत्मविश्वास की लंबी परीक्षा छिपी होती है। ऐसे ही संघर्षों से निकलकर सामने आए नामों में सिद्धांत चतुर्वेदी का नाम खास तौर पर लिया जाता है। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड, बिना किसी बड़े गॉडफादर और बिना तैयार मंच के उन्होंने अपने दम पर वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना कई युवा कलाकार करते हैं। उनकी यात्रा आसान नहीं रही। ऑडिशन दर ऑडिशन रिजेक्शन झेलना, बार-बार यह सुनना कि वे हीरो जैसे नहीं दिखते और इंडस्ट्री में आउटसाइडर का टैग लग जाना, ये सब किसी भी नए कलाकार का आत्मविश्वास डिगा सकते थे। स्कूल के दिनों में उन्हें बुलिंग का सामना भी करना पड़ा, जिसने उनके व्यक्तित्व पर असर डाला, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। इसके बजाय, उन्होंने इन्हीं अनुभवों को अपनी ताकत में बदला। सिद्धांत की कहानी केवल एक अभिनेता के सफल होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे की कहानी है जो हर ठोकर के बाद इंसान को और मजबूत बनाता है। संघर्ष, धैर्य और खुद पर अटूट विश्वास के सहारे उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी आउटसाइडर अपनी जगह बना सकता है। आज की सक्सेस स्टोरी में आइए जानते हैं सिद्धांत चतुर्वेदी के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ और बातें.. साधारण घर में जन्म, बड़े सपने सिद्धांत चतुर्वेदी का जन्म 29 अप्रैल 1993 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ। बचपन में ही उनका परिवार मुंबई आ गया, जहां उनकी परवरिश हुई। उनके पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। घर में पढ़ाई-लिखाई को हमेशा प्राथमिकता दी जाती थी। अभिनय को करियर के रूप में चुनना परिवार के लिए शुरुआत में चौंकाने वाला था, लेकिन बेटे के जुनून को देखते हुए उन्होंने उनका साथ दिया। पढ़ाई और CA की तैयारी सिद्धांत ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई से पूरी की। कॉलेज में उन्होंने बीकॉम में दाखिला लिया। इसके बाद पिता के पेशे से प्रेरित होकर उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई शुरू की और इंटरमीडिएट स्तर तक पहुंचे। परिवार चाहता था कि वे एक सुरक्षित और स्थिर करियर चुनें। थिएटर और मंच से बढ़ता लगाव पढ़ाई के दौरान ही सिद्धांत का झुकाव थिएटर और मंच की ओर बढ़ने लगा। वे कॉलेज फेस्ट में परफॉर्म करते, स्टैंड-अप और स्पोकन वर्ड पोएट्री में हिस्सा लेते थे। मंच पर मिलने वाली सराहना ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और अभिनय के प्रति उनका जुनून मजबूत होता गया। ऑडिशन और शुरुआती संघर्ष मुंबई में ऑडिशन का दौर उनके लिए आसान नहीं था। कई बार उन्हें कहा गया कि वे टिपिकल बॉलीवुड हीरो जैसे नहीं दिखते। उनके घुंघराले बालों और हिंदी लहजे पर भी टिप्पणी की जाती थी। लेकिन इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अभिनय के सपने को आगे बढ़ाते रहे। स्कूल में भी उन्हें इसी वजह से चिढ़ाया गया था। लेकिन उन्होंने अपनी इसी पहचान को ताकत बना लिया। ब्रांड नहीं, काम से बनती है पहचान सिद्धांत चतुर्वेदी कहते हैं- जब मैंने अपना सफर शुरू किया था, तब बहुत कुछ समझ में नहीं आता था। क्या पहनना है, कहां जाना है, कौन-से ब्रांड के कपड़े या जूते पहनने से अच्छा माना जाएगा। मेरी पर्सनल स्टाइलिंग कभी भी ब्रांड-आधारित नहीं रही। स्कूल के दिनों में मुझे इस बात पर काफी चिढ़ाया गया कि मैं महंगी घड़ियां या जूते नहीं पहनता। लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत सही परवरिश दी। उन्होंने कहा, “इन चीजों से तुम्हारी पहचान नहीं बनेगी, तुम्हारा काम तुम्हारी पहचान बनेगा। जिस दिन तुम कुछ बन जाओगे, तुम खुद एक ब्रांड बन जाओगे।” वैलिडेशन की भीड़ में खुद को खोने का डर इंडस्ट्री में आने के बाद मैंने भी जैसा देश, वैसा भेष के चक्कर में बहुत कुछ आजमाया। लेकिन फिर महसूस हुआ कि मैं खुद को खो रहा हूं। बस भीड़ में घुलने की कोशिश कर रहा हूं, वैलिडेशन ढूंढ़ रहा हूं। पार्टियों में पहुंच तो गया, लेकिन सबसे बड़ा दुख यह था कि वहां टैलेंट की कदर नहीं होती। वहां अंक इस बात पर मिलते हैं कि आप क्या पहन रहे हैं, कहां से आए हैं और किस लहजे में बात कर रहे हैं। शुद्ध हिंदी बोलने पर लोग ऐसे देखते हैं, जैसे कुछ समझ ही नहीं पा रहे हों। स्टार फैक्टर से बड़ा है टैलेंट फिर मैंने खुद को वापस खींचा और कहा-मैं सिद्धांत चतुर्वेदी हूं, बलिया से हूं और वही रहूंगा। यह पूरी एक यात्रा रही है। एक बार एक बेहद प्रतिभाशाली युवा अभिनेता के बारे में चर्चा हो रही थी। एजेंसी ने कहा, “उसमें स्टार फैक्टर नहीं है।” जब पूछा गया क्यों, तो जवाब मिला, “अंग्रेजी और प्रेजेंटेशन की कमी है।” मैं सोच में पड़ गया-जिस देश की 60 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और जिनके हाथों पर हमारी अर्थव्यवस्था टिकी है, वहां आज भी हम वही सोच बेच रहे हैं, जिससे आजादी मिले दशकों हो चुके हैं? टैलेंट ही सबसे बड़ा फैक्टर होना चाहिए। और आज वही कलाकार शानदार काम कर रहा है। एड फिल्मों और छोटे प्रोजेक्ट्स से शुरुआत फिल्मों से पहले सिद्धांत ने कुछ विज्ञापन फिल्मों (एड फिल्म्स) में भी काम किया। यह उनके लिए कैमरे के सामने सहज होने की पहली सीढ़ी थी। उन्होंने कई छोटे ब्रांड्स और डिजिटल कैंपेन के लिए काम किया। इन अनुभवों ने उन्हें ऑडिशन की प्रक्रिया समझने और इंडस्ट्री के कामकाज से परिचित कराया। वेब सीरीज से पहला बड़ा मौका सिद्धांत को पहला बड़ा ब्रेक वेब सीरीज ‘इनसाइड एज’ से मिला। इस सीरीज में सिद्धांत चतुर्वेदी ने प्रशांत कनौजिया नामक एक नौसिखिया तेज गेंदबाज का रोल किया था। यह रोल छोटा, लेकिन लेकिन प्रभावशाली था। यहीं से इंडस्ट्री की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने खुद बताया था कि वे हर छोटे रोल को अपनी आखिरी उम्मीद की तरह निभाते थे। यह मंच उनके लिए अभिनय की प्रयोगशाला साबित हुआ। बॉलीवुड में पहला बड़ा ब्रेक, गली बॉय बनी टर्निंग पॉइंट सिद्धांत के करियर की टर्निंग पॉइंट बनी फिल्म ‘गली बॉय’। सिद्धांत इस फिल्म के लिए ऑडिशन देने पहुंचे थे और निर्देशक जोया अख्तर ने उनकी परफॉर्मेंस से प्रभावित होकर उन्हें एमसी शेर का रोल दिया। फिल्म में रणवीर सिंह और आलिया भट्ट मुख्य भूमिकाओं में थे,लेकिन सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद सिद्धांत ने गहरी छाप छोड़ी। उनका डायलॉग- “अपना टाइम आएगा नहीं, लाना पड़ता है।” युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इस किरदार की तैयारी के लिए सिद्धांत ने मुंबई के स्ट्रीट रैपर्स के साथ समय बिताया और रैप संस्कृति को करीब से समझा। ‘बंटी और बबली 2’ से मुख्यधारा में पहचान ‘गली बॉय’ की सफलता के बाद सिद्धांत को कई बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने लगे। उन्होंने ‘बंटी और बबली 2’ में सैफ अली खान और रानी मुखर्जी जैसे अनुभवी कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई, लेकिन सिद्धांत की मौजूदगी ने उन्हें मुख्यधारा के युवा स्टार के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। ‘गहराइयां’ में ग्रे शेड्स वाला किरदार फिल्म ‘गहराइयां’ में सिद्धांत ने दीपिका पादुकोण के साथ काम किया। रिलेशनशिप ड्रामा पर आधारित इस फिल्म में उनका किरदार ग्रे शेड्स लिए हुए था, जिसने उनके अभिनय के नए आयाम दर्शकों के सामने रखे। सिद्धांत का मानना है कि हर फिल्म के साथ खुद को तोड़कर फिर से गढ़ना ही एक अभिनेता की असली चुनौती और पहचान है। कॉमेडी से सोशल ड्रामा तक का सफर हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘फोन भूत’ में सिद्धांत ने कैटरीना कैफ के साथ काम किया और अपने कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद सिद्धांत का नाम धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म ‘धड़क 2’ से भी जुड़ा। यह फिल्म सामाजिक मुद्दों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। हाल ही में सिद्धांत की फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ भी रिलीज हुई है, जिससे उनके करियर में एक और नया अध्याय जुड़ गया। ‘वी शांताराम’ बायोपिक में दिखेंगे सिद्धांत चतुर्वेदी जल्द ही मशहूर फिल्मकार ‘वी शांताराम' की बायोपिक में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में सिद्धांत वी. शांताराम के जीवन और उनके सिनेमा में योगदान को पर्दे पर उतारेंगे। फिल्म का निर्देशन अभिजीत शिरीष देशपांडे कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में तमन्ना भाटिया भी अहम भूमिका में दिखाई देंगी। फिल्म का उद्देश्य भारतीय सिनेमा के एक महान फिल्मकार की यात्रा और उनके योगदान को दर्शकों तक पहुंचाना है। अभिषेक चौबे के साथ नए प्रोजेक्ट पर काम सिद्धांत निर्देशक अभिषेक चौबे की अगली फिल्म में भी नजर आएंगे। यह प्रोजेक्ट उनके होमटाउन बलिया की पृष्ठभूमि पर आधारित बताया जा रहा है। फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के छोटे शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक परतों को सामने लाएगी। फिलहाल इस फिल्म के टाइटल और बाकी कास्ट को लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि यह फिल्म सिद्धांत के करियर में एक अलग और दमदार किरदार लेकर आएगी। ______________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... स्ट्रगल, बॉडी शेमिंग-रिजेक्शन झेलकर बनीं स्टार:लोगों ने कहा- हीरोइन नहीं बन सकती, सुसाइड के ख्याल आए, मृणाल ठाकुर बोलीं, कमजोरियों को अपनी ताकत बनाया टीवी की दुनिया से बॉलीवुड तक अपनी दमदार एक्टिंग और काबिलियत के बल अपनी एक अलग पहचान बना चुकी एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर के लिए यह सफर आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें डिमोटिवेटिंग और नकारात्मक अनुभवों का सामना करना पड़ा था। पूरी खबर पढ़ें..
फिल्ममेकर राज शांडिल्य और बालाजी टेलीफिल्म्स के बीच इन दिनों कॉन्ट्रैक्ट को लेकर विवाद चर्चा में है। इस बीच राज शांडिल्या ने एक बयान जारी कर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि उनकी आने वाली फिल्म ‘भागम भाग 2’ तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है। राज शांडिल्य ने कहा कि उन्होंने अपने कॉन्ट्रैक्ट के तहत कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए बालाजी टेलीफिल्म्स के साथ अपनी व्यवस्था समाप्त करने का नोटिस जारी किया था। उनके मुताबिक इस नोटिस को जारी हुए दो हफ्ते से ज्यादा समय हो चुका है। अगर कंपनी को इस फैसले को चुनौती देने का कोई ठोस आधार लगती, तो वह सिविल कोर्ट का रुख कर सकती थी, लेकिन अब तक ऐसी कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। डायरेक्टर का कहना है कि अब उनके खिलाफ बढ़ा-चढ़ाकर और बेबुनियाद आपराधिक आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए कहा कि उन्हें अपनी कानूनी स्थिति पर पूरा भरोसा है और किसी भी आरोप का जवाब वे कानूनी प्रक्रिया के तहत देंगे। दरअसल, यह विवाद कथित तौर पर उस कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है जो राज शांडिल्या ने बालाजी टेलीफिल्म्स की प्रमुख एकता कपूर की कंपनी के साथ किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार इस डील के तहत उन्हें तीन फिल्मों का निर्देशन करना था। आरोप है कि तीसरी फिल्म पूरी किए बिना ही उन्होंने अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर दिया, जिसमें ‘भागम भाग' 2’ भी शामिल है। दूसरी ओर, राज शांडिल्य का कहना है कि उन्होंने नियमों के तहत ही यह समझौता समाप्त किया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि ‘भागम भाग' 2’ की योजना में कोई बदलाव नहीं हुआ है और फिल्म का काम तय शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ेगा। निर्देशक ने फिल्म और क्रिएटिव इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से भी अपील की कि वे इस मामले में अपनाए जा रहे दबाव के तरीकों पर ध्यान दें और भविष्य में पेशेवर साझेदारी तय करते समय अपनी राय खुद बनाएं। बता दें कि फिल्म भागम भाग' साल 2006 में रिलीज हुई एक कॉमेडी फिल्म थी। इसका निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर प्रियदर्शन ने किया था। फिल्म में अक्षय कुमार, गोविंदा और लारा दत्ता जैसे कलाकार नजर आए थे। यह फिल्म अपनी तेज-तर्रार कॉमेडी, गलतफहमियों और मजेदार भागदौड़ वाली कहानी के लिए काफी पसंद की गई थी। बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म सफल रही और बाद में इसे एक कल्ट कॉमेडी माना जाने लगा। अब इस फिल्म का सीक्वल भागम भाग' 2 बनाया जा रहा है। इस बार फिल्म का निर्देशन राज शांडिल्य कर रहे हैं। फिल्म में एक बार फिर अक्षय कुमार और परेश रावल जैसे कलाकारों के होने की चर्चा है। मेकर्स इस सीक्वल को पहले पार्ट की तरह फुल कॉमेडी और एंटरटेनमेंट से भरपूर बनाने की योजना बना रहे हैं।
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान जल्द ही एक अनोखे सुपरहीरो किरदार में नजर आ सकते हैं। खबर है कि फिल्ममेकर जोड़ी राज-डीके अपनी अगली फिल्म के लिए सलमान खान के साथ बातचीत कर रही है। यह फिल्म सुपरहीरो जॉनर पर आधारित होगी, लेकिन इसकी कहानी पारंपरिक सुपरहीरो फिल्मों से काफी अलग बताई जा रही है। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म की कहानी एक ऐसे सुपरहीरो के इर्द-गिर्द घूमती है जो दुनिया को बार-बार बचाते-बचाते थक चुका है और अब अपनी जिम्मेदारियों से रिटायर होना चाहता है। वह सामान्य जिंदगी जीना चाहता है और सुपरहीरो की पहचान से दूरी बनाना चाहता है। लेकिन परिस्थितियां उसे ऐसा करने नहीं देतीं और बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जो उसे फिर से एक्शन में लौटने पर मजबूर कर देती हैं। कहानी में एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता हुआ प्लॉट दिखाया जाएगा, जिसमें कॉमेडी और सुपरहीरो ड्रामा का मिश्रण होगा। सूत्रों के अनुसार, यह फिल्म हॉलीवुड फिल्म ‘हैंकॉक’ की तरह एक अनोखे और थोड़े अलग अंदाज की सुपरहीरो कहानी हो सकती है। इसमें एक थका-हारा लेकिन शक्तिशाली हीरो दिखाया जाएगा, जो जिम्मेदारियों से भागना चाहता है, लेकिन आखिरकार हालात उसे फिर से हीरो बनने पर मजबूर कर देते हैं। बताया जा रहा है कि सलमान खान को इस फिल्म का कॉन्सेप्ट पसंद आया है, लेकिन उन्होंने अभी अंतिम हां नहीं कही है। अभिनेता चाहते हैं कि पहले पूरी स्क्रिप्ट तैयार हो और फिल्म का बजट भी संतुलित रखा जाए। सलमान किसी बहुत महंगे सुपरहीरो प्रोजेक्ट में काम करने के मूड में नहीं हैं, इसलिए उन्होंने निर्माताओं से कहा है कि कहानी और बजट दोनों को सही तरह से विकसित किया जाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 में सलमान खान को फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट सुनाई जा सकती है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो फिल्म की शूटिंग नवंबर 2026 से शुरू होने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट को मिथ्री मूवी मेकर्स और रील लाइफ एंटरटेनमेंट मिलकर प्रोड्यूस कर सकते हैं।
साउथ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की रिलीज डेट बदलने से बॉलीवुड में नया बॉक्स ऑफिस क्लैश खड़ा हो गया है। पहले यह फिल्म मार्च में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी नई रिलीज डेट 4 जून 2026 तय की गई है। इस बदलाव के कारण अब फिल्म की टक्कर सीधे वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ से होने वाली है, जिससे इंडस्ट्री में हलचल मच गई है। दरअसल, पहले ‘टॉक्सिक’ की रिलीज 19 मार्च 2026 को तय थी और उसी दिन रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ भी रिलीज होने वाली थी। ट्रेड एक्सपर्ट्स मान रहे थे कि दो बड़ी फिल्मों का एक साथ आना बॉक्स ऑफिस पर नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसी वजह से टॉक्सिक के मेकर्स ने रिलीज डेट आगे बढ़ाने का फैसला लिया। बताया गया कि मिडिल ईस्ट में चल रही परिस्थितियों के कारण भी फिल्म की रिलीज टालने का निर्णय लिया गया। मेकर्स चाहते थे कि फिल्म को ग्लोबल मार्केट में बेहतर माहौल में रिलीज किया जाए। इसलिए मार्च की बजाय जून में नई रिलीज डेट तय की गई। हालांकि, इस फैसले से एक नया क्लैश पैदा हो गया। अब ‘टॉक्सिक’ 4 जून को रिलीज होगी, जबकि वरुण धवन की रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ भी इसी समय सिनेमाघरों में आने वाली है। यह फिल्म पहले से ही इस तारीख के आसपास रिलीज के लिए लॉक थी, इसलिए उसके मेकर्स इस अचानक बने क्लैश से खुश नहीं बताए जा रहे हैं। ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का निर्देशन डेविड धवन कर रहे हैं और इसमें वरुण धवन के साथ मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म एक हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी बताई जा रही है, जिसे फैमिली ऑडियंस को ध्यान में रखकर बनाया गया है। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वरुण धवन की फिल्म की टीम को इस क्लैश की जानकारी पहले नहीं थी। बताया गया कि उन्हें ‘टॉक्सिक’ की नई रिलीज डेट के बारे में तब पता चला जब यश ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की। यही वजह है कि फिल्म के निर्माता और निर्देशक इस स्थिति से नाराज बताए जा रहे हैं। वहीं ‘टॉक्सिक’ के मेकर्स का दावा है कि उन्होंने पहले ही दूसरी फिल्म की टीम को संभावित क्लैश के बारे में जानकारी दे दी थी और बातचीत भी की थी, ताकि किसी तरह का विवाद न हो। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई थी। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बॉक्स ऑफिस पर दिलचस्प मुकाबला हो सकता है। एक तरफ यश की बड़े बजट की एक्शन-ड्रामा फिल्म है, जिसकी पैन-इंडिया अपील है, वहीं दूसरी तरफ वरुण धवन की रोमांटिक कॉमेडी है, जो युवा और पारिवारिक दर्शकों को टारगेट करती है। ऐसे में दोनों फिल्मों का बिजनेस एक-दूसरे को प्रभावित कर सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या किसी फिल्म के मेकर्स रिलीज डेट में बदलाव करते हैं या फिर जून 2026 में दर्शकों को यश और वरुण धवन के बीच बड़ा बॉक्स ऑफिस मुकाबला देखने को मिलेगा।
ईरानी एक्ट्रेस मंदाना करीमी ने भारत छोड़ने का फैसला कर लिया है। 25 सालों से बॉलीवुड में काम कर रहीं मंदाना का कहना है कि भारत ने उन्हें धोखा दिया है और अब यहां उनकी कोई आवाज नहीं बची है। उन्होंने अपना सारा सामान पैक कर लिया है और जैसे ही ईरान में मौजूदा शासन खत्म होगा, वह वापस अपने देश लौट जाएंगी। दरअसल ईरान-इजराइल युद्ध में 28 फरवरी को हुए मिसाइल हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो गई थी। मंदाना ने सोशल मीडिया पर इस मौत पर खुशी जाहिर की थी और ईरानी शासन की कड़ी आलोचना की थी। इसी विरोध के बाद से मंदाना को भारत में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। एक्ट्रेस का दावा- काम मिलना बंद हुआ बॉलीवुड हंगामा को दिए इंटरव्यू में मंदाना ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, पिछले दो महीनों में मुझे मुंबई में बहुत अकेलापन महसूस हुआ। ईरान के हक में बोलने और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने की वजह से मैंने अपने कई पुराने दोस्त खो दिए। मुझे महसूस हो रहा है कि भारत ने एक तरह से मुझे धोखा दिया है। जनवरी 2026 से मुझे काम मिलना बंद हो गया है और मेरे पुराने कॉन्ट्रैक्ट भी कैंसिल कर दिए गए हैं। बैग पैक, सरकार गिरते ही ईरान लौटेंगी मंदाना का कहना है कि वह अब भारत से अपना नाता तोड़ रही हैं। उन्होंने कहा, जैसे ही ऐलान होगा कि ईरान की मौजूदा सरकार गिर गई है, मैं तुरंत चली जाऊंगी। मैंने अपना बैग पैक कर लिया है। मैं एक ऐसा ईरान देखना चाहती हूं जहां महिलाएं आजाद हों, अपनी मर्जी के कपड़े पहन सकें और किसी भी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकें। मॉडलिंग से शुरू हुआ था मंदाना का करियर मंदाना करीमी का जन्म तेहरान में हुआ था। वह 2010 में पहली बार मॉडलिंग के लिए भारत आई थीं और 2013 से मुंबई में ही बस गईं। उन्होंने 'क्या कूल हैं हम 3', 'मैं और चार्ल्स' और 'भाग जॉनी' जैसी फिल्मों में काम किया। इसके अलावा 'बिग बॉस' और 'लॉकअप' जैसे रियलिटी शोज से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद मंदाना ने साल 2017 में भारतीय बिजनेसमैन गौरव गुप्ता से शादी की, लेकिन यह रिश्ता लंबा नहीं चला। 2021 में उनका तलाक हो गया। मंदाना ने अपने पति और ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के चलते दुबई में फंसी बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनल चौहान और ईशा गुप्ता सुरक्षित भारत लौट आई हैं। सोनल ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वतन वापसी के लिए मदद मांगी थी। अब उन्होंने मुंबई पहुंचने की जानकारी देते हुए भारत सरकार और दुबई प्रशासन को शुक्रिया कहा। सोनल ने युद्ध पर बात करते हुए यह भी कहा कि युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होता। इससे पहले मंगलवार को UAE में फंसी ईशा गुप्ता ने भी भारत लौटकर भारत सरकार और यूएई प्रशासन का धन्यवाद किया था। वतन वापसी पर सोनल ने जाहिर की खुशी सोनल चौहान ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर अपनी वतन वापसी की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि भारत वापस आकर वह बहुत शुक्रगुजार महसूस कर रही हैं। एक्ट्रेस ने उन सभी फैंस और दोस्तों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने मुश्किल वक्त में उनके लिए मैसेज भेजे और दुआएं कीं। एक्ट्रेस ने कहा कि यह मुश्किल समय जल्द ही खत्म होगा और इलाके में शांति बहाल होगी। ईशा गुप्ता ने भी घर लौटने पर ईश्वर का आभार जताते हुए कहा था कि यह अनुभव हमें असली ताकत का एहसास कराता है। दुबई प्रशासन की तारीफ की, बोलीं- वहां के लोगों में हिम्मत दिखी सोनल ने अपनी पोस्ट में दुबई के लोगों और वहां की सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा, मैंने वहां के लोगों का जोश और अपनी सरकार पर अटूट भरोसा देखा। इस संकट के समय में दुबई प्रशासन ने सबको शांत और सुरक्षित रखा। हर चीज को बड़ी सावधानी और जिम्मेदारी के साथ हैंडल किया गया ताकि वहां मौजूद हर व्यक्ति खुद को सेफ महसूस करे। ईशा गुप्ता ने भारत लौटकर सुनाई आपबीती ईशा ने सोशल मीडिया पर बताया कि मिसाइल हमलों की खबरों के बाद UAE में डर और अफरा-तफरी का माहौल था। कुछ समय के लिए एयरपोर्ट बंद कर दिए गए थे, जिससे यात्री वहीं फंस गए थे। ईशा ने यूएई सरकार, एयरपोर्ट स्टाफ और होटल मैनेजमेंट की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारियों ने फंसे हुए यात्रियों को तुरंत होटलों में रुकवाया और खाने-पीने का इंतजाम किया। जंग के बाद दुबई और UAE में फंसी थीं एक्ट्रेसेस ईरान और इजराइल के युद्ध के बीच ईरान ने दुबई और UAE पर भी मिसाइलों से हमला किया। सुरक्षा कारणों से मिडिल ईस्ट के कई देशों ने अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) बंद कर दिया था। दुबई और UAE इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ और कई इंटरनेशनल फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं। इसी दौरान सोनल चौहान और ईशा गुप्ता वहां फ्लाइट्स रद्द होने के कारण फंस गईं।
एक्टर करणवीर बोहरा के पिता और फिल्म प्रोड्यूसर महेंद्र बोहरा का निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी बेटे करणवीर ने सोशल मीडिया के जरिए दी। महेंद्र बोहरा लंबे समय से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे। उन्होंने प्रोड्यूसर के तौर पर तेजा और प्यार का कर्ज जैसी फिल्मों में काम किया था। करणवीर ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर अपने पिता को याद किया। उन्होंने लिखा, “लव यू डैड। मैं आपको शब्दों से ज्यादा मिस करूंगा। जिसने भी अपने माता-पिता को खोया है, वह जानता है कि यह दर्द कैसा होता है। लेकिन इस दुख के बीच मुझे सुकून है कि आपने एक अच्छी और पूरी जिंदगी जी।” उन्होंने आगे लिखा, “आप हमेशा कहते थे कि आप इस दुनिया से शांति से जाना चाहते हैं और बिना किसी तकलीफ के। ऐसा ही हुआ। आप मजबूत थे और आपने हमेशा अपनी शर्तों पर जिंदगी जी।” एक्टर ने कहा- पिता ने उम्मीद रखना सिखाया एक्टर ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें जिंदगी की कई अहम बातें सिखाईं। उन्होंने कहा, “आपने मुझे और दीदी को सिखाया कि हालात कितने भी मुश्किल हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अगर गिरो तो दोबारा खड़े होना चाहिए। जिंदगी को जोश और पॉजिटिविटी के साथ जीना चाहिए।” करणवीर ने यह भी कहा कि उनके पिता ने उन्हें सपने देखना और मेहनत करना सिखाया। उन्होंने लिखा, “आपने मुझे सिखाया कि एक प्रोड्यूसर के एक्टर बनो और अपना शॉट पूरा किए बिना सेट मत छोड़ो। आपने मुझे क्रिएट करना सिखाया। आपने सिखाया कि लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।” एक्टर ने पोस्ट में लिखा कि जो भी उनके पिता के बारे में बात करता है, वही कहता है कि वह बहुत अच्छे इंसान थे। उन्होंने कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें ऐसा पिता मिला। कई दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव रहे महेंद्र बोहरा कई दशकों तक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव रहे। वह मशहूर फिल्म निर्माता रामकुमार बोहरा के बेटे थे। अपने करियर में उन्होंने कई हिंदी फिल्मों का निर्माण किया। इनमें तेजा, लश्कर, टक्कर, प्यार का कर्ज और हमें तुमसे प्यार कितना जैसी फिल्में शामिल हैं। लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रहे महेंद्र बोहरा ने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह, संजय दत्त, सुनील शेट्टी और सोनाली बेंद्रे जैसे सितारों के साथ फिल्में बनाई।
एक्ट्रेस आयशा खान ने हाल ही में पब्लिक लाइफ में महिलाओं को मिलने वाली ऑनलाइन ट्रोलिंग और धमकियों के बारे में खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर उन्हें रोज बॉडी को लेकर सेक्शुअल कमेंट्स मिलते हैं और कई बार रेप की धमकियां भी मिलती हैं। मोजो स्टोरी की समिट में आयशा ने कहा कि हाल ही में उन्होंने फिल्म धुरंधर के गाने शरारत की शूटिंग से जुड़ा एक अनुभव शेयर किया था। उन्होंने बताया था कि उस गाने की शूटिंग उन्होंने पीरियड्स के दौरान की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया। आयशा ने कहा कि मुझे लगा कि मेरे पीरियड्स पर होना अचानक एक नेशनल जोक बन गया है। एक्ट्रेस ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग उनके कपड़ों को लेकर भी कमेंट करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं इंस्टाग्राम पर लगभग हर दिन अपनी बॉडी को लेकर सेक्शुअल कमेंट्स का सामना करती हूं। अगर मैं नॉर्मल टॉप पहनती हूं तो लोगों को समस्या होती है। अगर मैं स्कर्ट पहनती हूं तो भी लोगों को दिक्कत होती है। मुझे कुछ पोस्ट करने से पहले भी सोचना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि कई बार इस तरह की बातें उन्हें इमोशनली परेशान करती हैं। उनके मुताबिक अगर किसी को कपड़े पहनने या फोटो पोस्ट करने से पहले सोचना पड़े, सिर्फ इसलिए कि लोग उसे सेक्शुअल तरीके से देखेंगे, तो यह एक दुखद स्थिति है। आयशा ने कहा कि कुछ दिनों में वह इन बातों को नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन कई बार ऐसे कमेंट्स ज्यादा परेशान करते हैं, खासकर जब लोग हिंसा की बात करते हैं। उन्होंने कहा, “जब लोग लिखते हैं कि अगर उनके पास ताकत होती तो वह कुछ भी कर सकते थे, तो यह डराने वाला होता है। क्योंकि यह असली लोग हैं जो हमारे आसपास ही रहते हैं।” लगभग हर दिन रेप की धमकियां भी मिलती हैं: आयशा समिट के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें ऑनलाइन रेप की धमकियां मिलती हैं। इस पर आयशा ने कहा, “हां, लगभग हर दिन। मैं अभी अपना फोन खोलकर दिखा सकती हूं। यह अब बहुत नॉर्मल हो गया है।” उन्होंने कहा कि इंटरव्यू और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के सवाल अक्सर उठते हैं, लेकिन इस पर ज्यादा कार्रवाई नहीं होती। उनके मुताबिक यह कोई नई समस्या नहीं है। यह काफी समय से चली आ रही है। आयशा ने यह भी कहा कि यह समस्या सिर्फ उनके साथ नहीं है। पब्लिक लाइफ में रहने वाली लगभग हर महिला को इस तरह की ट्रोलिंग और धमकियों का सामना करना पड़ता है। एक्ट्रेस ने बताया उनके साथ रेप की कोशिश हो चुकी आयशा ने अपने जीवन की एक निजी घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके साथ एक बार रेप की कोशिश भी हो चुकी है। उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी एक इंटरव्यू में इसके बारे में बात की है। मैं इस विषय पर ज्यादा नहीं जाना चाहती। कुछ दिन ऐसे होते हैं जब यह घटना फिर याद आ जाती है और मन को परेशान करती है।” आयशा ने कहा कि ऑनलाइन धमकियों के असल जिंदगी में सच हो जाने का डर भी उन्हें रहता है। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला सफर कर रही होती है या किसी फिल्म के सेट पर काम कर रही होती है, तब भी उसे याद रहता है कि ऐसे कमेंट करने वाले लोग असल में आसपास ही मौजूद हो सकते हैं। आयशा ने एक घटना का भी जिक्र किया जो शूटिंग के दौरान हुई थी। उन्होंने बताया कि वह एक फिल्म की शूटिंग कर रही थीं और उस दिन उनके पिता भी सेट पर मौजूद थे। उसी समय उन्होंने इंस्टाग्राम खोला। वहां एक ऐसा मैसेज दिखा जो उन्हें लंबे समय से मिल रहा था। उसमें वॉइस नोट भी थे। बाद में उन्हें पता चला कि वह मैसेज सेट पर काम करने वाले एक स्पॉट बॉय का था। उन्होंने तुरंत अपने पिता और प्रोडक्शन टीम को इसकी जानकारी दी। इसके बाद उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई। आयशा ने कहा कि इस घटना से उन्हें यह एहसास हुआ कि ऑनलाइन ट्रोलिंग और धमकियां कभी-कभी असल जिंदगी के बहुत करीब भी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पब्लिक लाइफ में है और सोशल मीडिया अकाउंट पब्लिक है, तो वह हमेशा लोगों की नजर में रहता है। ऐसे में ट्रोलिंग और गलत कमेंट्स का खतरा भी बढ़ जाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक्ट्रेस लारा दत्ता दुबई से अपना अनुभव शेयर करते हुए इमोशनल हो गईं। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में वहां का माहौल थोड़ा तनाव भरा रहा है। एक्ट्रेस इस समय अपनी बेटी सायरा के साथ दुबई में हैं। लारा ने कहा कि वह दुबई एक ब्रांड से जुड़े काम के लिए गई थीं। यह एक सामान्य वर्क ट्रिप थी, लेकिन हालात अचानक बदल गए। संघर्ष बढ़ने के बाद वहां का माहौल अलग हो गया। उन्होंने एक वीडियो में बताया कि वह 28 तारीख को दुबई के एक स्टूडियो में शूट कर रही थीं। उसी दौरान उन्हें ऊपर से तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी। लारा ने कहा, “हम इस इजराइल-ईरान युद्ध की शुरुआत से ही दुबई में हैं। यूएई का दुबई पिछले तीन साल से मेरा घर जैसा है। मैं यहां काफी समय बिताती हूं। 28 तारीख को मैं दुबई के एक स्टूडियो में शूट कर रही थी।” उन्होंने आगे बताया कि अचानक ऊपर से धमाकों की आवाज आने लगी। इसके बाद टीम के लोग स्टूडियो से बाहर निकल गए। लारा ने कई फाइटर जेट उड़ते देखे एक्ट्रेस ने कहा, “हमने ऊपर से धमाके सुने। हम स्टूडियो से बाहर भागे। वहां हमने देखा कि आसमान में मिसाइलों को बीच में ही रोका जा रहा था। पिछले कुछ दिन काफी तनाव वाले रहे हैं। मेरी बेटी मेरे साथ है। महेश काम के सिलसिले में बाहर थे, वह दुबई में नहीं थे।” लारा ने यह भी बताया कि उन्होंने आसमान में कई फाइटर जेट उड़ते हुए देखे। साथ ही तेज आवाज वाले धमाके भी सुनाई दिए। उन्होंने कहा, “हम थोड़ा नर्वस हैं और यह सब थोड़ा डराने वाला है। ऊपर कई फाइटर जेट उड़ते दिखे। कई तेज धमाकों की आवाज भी आई। हम एक सुरक्षित इलाके में विला में रहते हैं, लेकिन धमाकों के समय खिड़कियां हिलने लगती हैं और दरवाजे भी हिलते हैं। यह स्थिति परेशान करने वाली होती है। हालांकि मुझे एक बार भी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ।” यूएई सरकार सभी लोगों का ध्यान रख रही: लारा लारा ने यूएई सरकार की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि वहां की सरकार लोगों की सुरक्षा के लिए पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “यूएई सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। हर व्यक्ति को यहां सुरक्षित महसूस कराने की कोशिश की जा रही है। चाहे कोई भी किसी भी देश से हो, सभी का ध्यान रखा जा रहा है।” एक्ट्रेस ने आगे कहा कि वहां रहने वाले लोगों को महसूस कराया जाता है कि उनकी अहमियत है। उन्होंने कहा, “यहां रहने वाले लोगों को लगता है कि उनकी परवाह की जाती है। सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि सभी सुरक्षित रहें। मैं यह देखकर हैरान हूं कि यहां सामान्य लोग भी रोज अपना काम कर रहे हैं। मेरा माली भी रोज आकर लॉन की घास काटता है और पौधों को पानी देता है।” वीडियो के अंत में लारा इमोशनल हो गईं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही मुंबई लौटना चाहती हैं। उन्होंने बताया, “हम फ्लाइट देख रहे हैं। ज्यादा फ्लाइट नहीं हैं, लेकिन कुछ फ्लाइट मिल रही हैं। एतिहाद और एमिरेट्स की फ्लाइट्स देख रहे हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह मुंबई लौट जाएं। बच्चों को इन हालात से ज्यादा डर लग रहा है। बड़े लोग खुद को संभाल लेते हैं, लेकिन बच्चों को समझाना पड़ता है।” लारा ने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हुआ था, तब मैं भारत में थी। उस समय हमने देखा कि हमारे देश ने लोगों की सुरक्षा के लिए अच्छा काम किया था। यहां भी वैसा ही महसूस होता है।” अंत में उन्होंने कहा कि किसी भी आम नागरिक को डर के माहौल में नहीं जीना चाहिए। लारा ने कहा, “कोई भी आम इंसान डर में जीने का हकदार नहीं है। उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे और सही फैसले लिए जाएंगे।” बता दें कि दुबई में तनाव की वजह ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष है। ईरान ने दुबई और अबू धाबी के कुछ ठिकानों को निशाना बनाया। सुरक्षा कारणों से दुबई का हवाई क्षेत्र कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा, जिससे कई उड़ानें रद्द हुईं और हजारों यात्री फंस गए।
बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फोक सॉन्ग 'टटीरी' लॉन्च किया है। इस गाने में कैथल की रहने वाली सिमरन जागलान ने अपनी आवाज दी है। सिमरन, हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं, जिन्होंने फेमस हरियाणवी सॉन्ग 'पानी आली पानी प्यादे' गाया है। सिमरन एक बॉक्सर भी हैं और स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए वह सिंगिंग भी कर रही हैं। तीन साल पहले बनाए गए 'टटीरी' गाने पर बादशाह की नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने 1 मार्च को इसका रीमिक्स वर्जन रिलीज किया। इस गाने को अभी तक यूट्यूब पर 2 मिलियन से ज्यादा लोग सुन चुके हैं। गाने की शूटिंग जींद के सच्चा खेड़ा, नरवाना और दुबई में हुई है। 26 फरवरी को बादशाह इस गाने के प्रमोशन के लिए हरियाणा के कैथल और सोनीपत पहुंचे थे। अब 14 मार्च को सिमरन, बादशाह के साथ मुंबई में एक शो करेंगी। जानिए कौन हैं सिमरन जागलान जिन्होंने बादशाह संग गाना गाया… पिता भी हरियाणवी सिंगर 20 साल की सिमरन जागलान कैथल जिले के पट्टी अफगान गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्मबीर फौजी भी हरियाणवी सिंगर हैं। सिमरन चार बेटियों में तीसरे नंबर पर है। सिमरन कैथल के आरकेएसडी कॉलेज में बीए फाइनल ईयर की स्टूडेंट हैं। वह कैथल में ही गुरमीत कोच के पास बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करती हैं। वह स्टेट और नेशनल चैंपियन भी रह चुकी हैं। कॉल आई तो विश्वास नहीं हुआ सिमरन ने बताया कि जब मुझे बादशाह के साथ गाने का मौका मिला तो पहले मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। मुझे लगा कि शायद कोई प्रैंक कॉल या प्रमोशन कॉल है। बाद में जब पुष्टि हुई तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बादशाह को उनकी ट्रेडिशनल स्टाइल में गाई हुई आवाज पसंद आई। इसी वजह से मुझे ‘टटीरी’ में मौका मिला। 3 साल पहले बनाया था टटीरी गाना सिमरन ने बताया कि करीब तीन साल पहले मैंने अपने पिता की कंपनी में ही ‘टटीरी’ गाना गाया था। वही गाना बादशाह को पसंद आया और उन्होंने इसे रिमिक्स कर मॉडर्न ट्विस्ट दिया। अब 2026 में यह गाना नए रूप में रिलीज हुआ है। मैंने अभी तक करीब 300 फोक सॉन्ग गाए हैं। मैं फोक सॉन्ग और भजन गाती हूं। मैंने सिंगिंग लाइन की शुरुआत अपने पिता के साथ की। मेहनत का फल जरूर मिलता है सिमरन ने कहा कि मैं बॉक्सर हूं। सिंगिंग पिता की प्रेरणा से शुरू हुई। जब भी पिता कहते थे कि गाना गाना है, तो मैं मना नहीं करती थी। मैं कहती हूं कि अगर हम साफ-सुथरा गा रहे हैं और मेहनत कर रहे हैं तो उसका फल एक दिन जरूर मिलता है। मैं अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने पिता को देती हूं। अब जानिए कर्मबीर फौजी ने क्या कहा… सभी बच्चे बॉक्सिंग करते हैं सिमरन के पिता कर्मबीर फौजी ने बताया कि परिवार के बच्चे बॉक्सिंग खेलते हैं। सिमरन खेलो इंडिया में नेशनल खेल चुकी है। सबसे बड़ी बेटी शीतल भी ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी में मेडल हासिल किया है। शीतल से छोटी शिवानी जागलान ने नेशनल बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता है। बादशाह के मैनेजर का कॉल आया था कर्मबीर ने कहा कि हमारे पास बादशाह के मैनेजर का कॉल आया था। उन्होंने टटीरी सॉन्ग को लेकर बातचीत की थी। बाद में बादशाह से बात करवाई। जब बादशाह को यह पता चला कि सिमरन हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी है तो वे और भी ज्यादा खुश हुए। बेटी की आवाज आज बॉलीवुड में गूंज रही है। यह उसके लिए बहुत बड़ा ब्रेक है। फोक सॉन्ग संस्कृति की पहचान उन्होंने कहा कि बेटी सिमरन सिंगिंग और बॉक्सिंग दोनों में अच्छा कर रही है। अब यह बेटी पर ही डिपेंड करेगा कि वो अपना करियर किस तरफ लेकर जाती है। बेटी की बाजू में थोड़ी इंजरी भी है। बेटी से फोक सॉन्ग गवाने का उद्देश्य सिर्फ इतना था कि हमारे पुराने गीत जिंदा रहे, क्येंकि ये हमारी संस्कृति की पहचान हैं। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- हरियाणवी सॉन्ग 'टटीरी' का रैप वर्जन लाए सिंगर बादशाह:सोनीपत में सरपंचों के वेलकम पर बोले- मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फॉक सॉन्ग टटीरी का रैप वर्जन रिकॉर्ड किया है। इसी सिलसिले में सिंगर अपनी टीम के साथ सोनीपत के गांव असदनपुर-नांदनोर पहुंचे, यहां उन्हें बैल-बुग्गी पर बैठाकर गांव की गलियों में घुमाया गया। सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी खाना खाया। पढ़ें पूरी खबर…
यश की फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन अप्स का ग्रैंड ट्रेलर लॉन्च इवेंट, जो पहले 8 मार्च को बेंगलुरु में होने वाला था, अब कैंसल कर दिया गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि फिल्म की रिलीज डेट 19 मार्च से बढ़ाकर 4 जून कर दी गई है। प्रोड्यूसर्स ने कहा कि मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में चल रहे टेंशन की वजह से सिनेमा के काम पर असर पड़ रहा है, जिसकी वजह से यह फैसला लिया गया। इस इवेंट के लिए पूरे भारत से मीडिया को बेंगलुरु बुलाने का प्लान था। यह इवेंट फिल्म के आखिरी प्रमोशनल कैंपेन की शुरुआत थी। फिल्म पहले 19 मार्च को रिलीज होने वाली थी, जो रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज से क्लैश कर रही थी। हालांकि, फिल्म के पोस्टपोन होने के कारण, आदित्य धर की फिल्म अब सोलो रिलीज होगी। फिल्म की टीम का कहना है कि विदेशों में, खासकर खाड़ी देशों में, बड़े मार्केट में हालात ठीक नहीं हैं। हाल ही में, US और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट में इजराइल और US के बेस पर मिसाइल हमले किए। यह टेंशन पिछले पांच दिनों से चल रहा है। इसलिए, दुनिया भर में बेहतर रिलीज के लिए फिल्म की रिलीज को टालने का फैसला किया गया। सिनेमा ऑपरेशन में आ रही मुश्किलों को देखते हुए, प्रोडक्शन हाउस ने अपना पूरा प्रमोशनल प्लान बदल दिया है। फिलहाल, ट्रेलर लॉन्च समेत सभी प्रमोशनल एक्टिविटीज को नई रिलीज डेट के करीब आने तक रोक दिया गया है। एक ऑफिशियल बयान में, KVN प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस ने कहा कि फिल्म को एक ग्लोबल सिनेमैटिक एक्सपीरियंस के तौर पर बनाया गया है। इसे कन्नड़ और इंग्लिश में एक साथ शूट किया गया है और इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु और मलयालम में डब करके रिलीज किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि रिलीज डेट को रीशेड्यूल करने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन यह दुनिया भर के दर्शकों और डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स के सबसे अच्छे फायदे में लिया गया फैसला था। फिल्म को गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है और यश ने को-राइट किया है। फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, रुक्मिणी वसंत और तारा सुतारिया भी अहम रोल में हैं। फिल्म का प्रमोशनल प्लान अब जून की नई रिलीज डेट के हिसाब से फिर से बनाया जाएगा ताकि भारत और विदेश में ज्यादा लोगों तक यह पहुंच सके। फिल्म का नया प्रमोशनल प्लान आने वाले हफ्तों में अनाउंस किया जाएगा। तब तक, फैंस को इस बहुत इंतजार वाली फिल्म की पहली झलक के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।
‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले सेन इस बार आस्था और अंधविश्वास के टकराव को बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं। ‘चरक’ केवल एक ऐतिहासिक उत्सव की कहानी नहीं है, बल्कि परंपरा, तर्क, समाज और अंधविश्वास के बीच के जटिल संबंधों को दिखाने की कोशिश है। फिल्म की रिसर्च प्रक्रिया, विवाद, सेंसर बोर्ड के मुद्दे, आलोचनाओं और उनके खिलाफ उठ रही आवाजों के बारे में सुदीप्तो ने खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुदीप्तो ने बताया कि उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से सवाल पूछने और जागरूकता फैलाने का एक जरिया है। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद आप फिर एक सामाजिक मुद्दे पर फिल्म लेकर आ रहे हैं। ‘चरक फेयर ऑफ फेथ’ के बारे में बताइए। कितनी रिसर्च की गई है? ‘चरक’ कोई नई परंपरा नहीं है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि यह उत्सव लगभग एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड साथ ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता रहा है। चैत्र महीने (करीब 15 मार्च से 15 मई) के बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होता है। पश्चिम बंगाल में जैसे दुर्गा पूजा की लोकप्रियता है, उसी तरह ‘चरक’ भी अत्यंत लोकप्रिय है। इसे मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। लोकविश्वास है कि इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों के बीच निवास करते हैं। बचपन में हम जेब खर्च बचाकर इस मेले का इंतजार करते थे। हजारों लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम इससे जुड़े हैं। लेकिन इस उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है तांत्रिक साधनाएं और अघोरी प्रथाएं। इतिहास में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथाएं रही हैं, जिन्हें अब कानूनन प्रतिबंधित किया जा चुका है। हमारी फिल्म इसी ‘फेथ’ यानी आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा को सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। आपकी फिल्में अक्सर विवादों में घिर जाती हैं। क्या आपको लगता है लोग सच से डरते हैं? हमारे समाज में विज्ञान, तर्क और शिक्षा को हम सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। जहां हमें फायदा दिखता है, वहां लॉजिक अपनाते हैं, और जहां परंपरा टकराती है, वहां चुप हो जाते हैं। मैं एक उदाहरण देता हूं। कई घरों में लड़कियों को रात में खुले बाल लेकर बाहर न जाने या कुछ विशेष रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है। इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन वे पीढ़ियों से चली आ रही हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब अंधविश्वास हिंसा में बदल जाता है। जैसे किसी दंपती को संतान न हो तो किसी मासूम की बलि देने की सोच, यह भयावह है। हाथरस की एक घटना ने मुझे झकझोर दिया, जहां कथित तौर पर स्कूल का रिजल्ट सुधारने के नाम पर एक बच्चे की बलि देने की बात सामने आई। जब तक समाज इन घटनाओं पर सवाल नहीं उठाएगा, तब तक बदलाव कैसे आएगा? ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज डेट टल गई है। आप इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं? लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है। आप किसी फिल्म से असहमत हो सकते हैं, आलोचना कर सकते हैं, बहस कर सकते हैं। लेकिन कला को रोक देना समाधान नहीं है। मेरे लिए आर्ट का काम है जो सच दबाया जा रहा है, उसे सामने लाना। सरकारें आएंगी-जाएंगी, राजनीतिक दल बदलेंगे, लेकिन समाज और आने वाली पीढ़ियां यहीं रहेंगी। इसलिए कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह ईमानदारी से अपनी बात कहे। ‘द केरल स्टोरी 2’ में आप निर्देशक के तौर पर नजर नहीं आएंगे। इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या प्रोडक्शन टीम के साथ किसी प्रकार का मतभेद हुआ था? ऐसी कोई अनबन नहीं है। शुरुआत में मुझे ही निर्देशन करना था, लेकिन कहानी का दायरा केरल से आगे बढ़ाया गया। मेरा रिसर्च मुख्यतः केरल पर आधारित था और मैंने उस पर लगभग दस साल काम किया। मैं अखबार की खबरों या सोशल मीडिया फॉरवर्ड के आधार पर फिल्म नहीं बना सकता। जिस विषय को छूता हूं, उस पर गहन अध्ययन करता हूं। इसलिए मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया। ‘द केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ के बाद आपको धमकियां भी मिलीं। क्या कभी डर लगा? सच कहूं तो हां, शुरुआत में डर लगा। ‘द केरला स्टोरी’ के बाद और खासकर ‘बस्तर’ के दौरान मेरे नाम पर बाकायदा “रेट कार्ड” चल रहा था किसी ने कहा आंख निकालने का इतना, हाथ काटने का इतना। ये सब सोशल मीडिया पर फैलाया गया। एक-दो दिन के लिए मन में डर आया, लेकिन फिर लगा कि अगर मैं डर गया तो फिल्म बनाना ही छोड़ दूं। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि कोई फिल्म सिर्फ प्रोपेगेंडा के दम पर इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। अगर दर्शक जुड़ते हैं तो उसकी वजह कहानी होती है, इरादा होता है। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के पार्ट 2 को लेकर कई फिल्मकारों ने भी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग कश्यप ने इसे ‘बकवास’ कहा, वहीं प्रकाश राज ने भी फिल्म को बेकार बताया। आप इन आलोचनाओं को कैसे देखते हैं? देखिए, लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। अगर अनुराग कश्यप या प्रकाश राज को मेरी फिल्म पसंद नहीं आई, तो उन्हें यह कहने की पूरी स्वतंत्रता है। मैं उनके अधिकार का सम्मान करता हूं। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी फिल्म को ट्रेलर या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। पूरी फिल्म देखने के बाद असहमति हो तो खुलकर आलोचना कीजिए, बहस कीजिए। हमारा संविधान हमें सवाल करने और तर्क करने का अधिकार देता है। आप सोशल मीडिया पर लिखिए, लेख लिखिए, चर्चा कीजिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी फिल्म को रुकवाने या बैन करने की मांग करना सही परंपरा नहीं है। अगर आपको फिल्म खराब लगती है तो दर्शकों से कहिए कि मत देखिए। लेकिन कला को रोकना समाधान नहीं है। कला नदी की तरह है उसे बांधा नहीं जा सकता। ‘चरक’ की रिसर्च के दौरान क्या कोई ऐसी घटना सामने आई जिसने आपको अंदर तक हिला दिया? कई दस्तावेज, एफआईआर और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पढ़े। कुछ वीडियो और तस्वीरें इतनी भयावह थीं कि उन्हें देखना भी मुश्किल था। तब एहसास हुआ कि यह सिर्फ इतिहास नहीं, आज भी समाज के कुछ हिस्सों में मौजूद सच्चाई है। एक तर्कसंगत नागरिक के रूप में हमें तय करना होगा कि हम किसके साथ खड़े हैं अंधविश्वास के साथ या विवेक के साथ। यह फिल्म दर्शकों से वही सवाल पूछती है। आपकी पिछली फिल्म 300 करोड़ से अधिक कमाई कर चुकी है। ‘चरक’ से क्या उम्मीदें हैं? मेरे लिए बॉक्स ऑफिस नंबर अंतिम लक्ष्य नहीं है। अगर 300 करोड़ का मतलब है कि ढाई-तीन करोड़ लोग थिएटर जाकर फिल्म देखते हैं, तो वही मेरी असली सफलता है। ‘चरक’ हर वर्ग के दर्शक से जुड़ी कहानी है चाहे वह मुंबई की शहरी लड़की हो या यूपी-बिहार के किसी गांव की। हमने इसे सरल सिनेमाई भाषा में बनाया है। इसमें संगीत, रंग, उत्सव का माहौल है, लेकिन साथ ही एक गहरा सवाल भी है। अगर दर्शक फिल्म देखकर अपने भीतर झांकें और सोचें तो वही मेरी जीत होगी।
सौरभ राज जैन और शीन सविता दास इन दिनों वेब सीरीज संमरमर को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दोनों कलाकारों ने अपने किरदारों अमृता और आदित्य के जरिए बदलते दौर के प्रेम, धैर्य और रिश्तों की गहराई पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि सच्चा प्यार केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि सम्मान, समझ और जिम्मेदारी निभाने का भी नाम है। आज के ‘रील संस्कृति’ और त्वरित फैसलों वाले समय में उनका मानना है कि रिश्तों की असली ताकत धैर्य और परस्पर सम्मान में छिपी है। दोनों ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए यह भी बताया कि टीवी से आगे बढ़ने के सफर में उन्हें किन धारणाओं का सामना करना पड़ा। साथ ही, सूरज बड़जात्या के साथ काम करने के अनुभव को उन्होंने परिवार जैसा बताया। पेश है कुछ खास अंश.. सवाल: शीन, आपका किरदार आपके असली जीवन से कितना मिलता-जुलता है? जवाब/शीन:मुझे लगता है कि भावनात्मक रूप से मैं और अमृता (मेरा किरदार) थोड़े संवेदनशील हैं। फर्क इतना है कि अमृता पहले बात को समझती है, उसे अपने भीतर समेटती है और फिर प्रतिक्रिया देती है। लेकिन मैं तुरंत प्रतिक्रिया दे देती हूं। मैं खुद भी यही सीखना चाहती हूं कि पहले बात को समझूं और फिर जवाब दूं। सवाल: सौरभ, आपका किरदार आदित्य आपसे कितना मिलता है? जवाब/सौरभ: आदित्य मुझे बहुत अपने जैसा लगता है। रिश्तों को समझना और उन्हें सम्मान देना मेरे लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। बचपन में हम सब थोड़े आवेग में फैसले लेते हैं और फिर उनसे सीखते हैं। आदित्य की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है। इसलिए यह किरदार मेरे लिए बहुत जुड़ा हुआ और अपना-सा है। सवाल: बदलते समय में प्यार के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? और यह कहानी कितनी प्रासंगिक है? जवाब/शीन: एक पुरानी कहावत है कि प्यार करना आसान है, लेकिन निभाना कठिन है। जो लोग निभा लेते हैं, वही सच्चे मायने में जीतते हैं। अमृता और आदित्य ने अपने प्यार को निभाया है। उन्हें समाज के लिए शादी की जरूरत नहीं थी, क्योंकि उनका रिश्ता गहरा और सच्चा था। हालांकि परिस्थितियों के कारण अमृता को अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए अलग रास्ता चुनना पड़ा। लेकिन आदित्य ने उसका साथ नहीं छोड़ा। उसने उसे आगे बढ़ने की आज़ादी दी। यह कहानी सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की है। जीवन हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता। प्यार और जिम्मेदारियां हमेशा एक साथ नहीं चलतीं। यही इस कहानी की खूबसूरती है। सवाल: आज के ‘तुरंत सब कुछ पाने’ वाले दौर में इंतजार और धैर्य कितना मायने रखता है? जवाब/सौरभ: मेरे विचार से किसी भी दौर का प्यार हो, उसका आधार एक ही है, सम्मान। जहां सम्मान है, वहां धैर्य भी है। बिना धैर्य के सम्मान नहीं हो सकता। जो इस बात को समझता है, वही सच्चा प्रेम करता है। जो सिर्फ समय बिताना चाहता है, उसके लिए प्रेम का कोई अर्थ नहीं है। सवाल: आजकल ‘अल्फा मेल’ की बातें होती हैं। ऐसे में आदित्य जैसा सरल और संवेदनशील लड़का कितना प्रासंगिक है? जवाब/सौरभ: मुझे लगता है कि दस आक्रामक लोगों के बीच एक शांत और संतुलित व्यक्ति काफी होता है। सच्चे प्रेम में हिंसा नहीं, बल्कि मूल्य और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होते हैं। सशक्त होना मतलब केवल अपने बारे में सोचना नहीं है। असली सशक्तिकरण तब है, जब आप अपने सपनों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझते हैं। आदित्य और अमृता की यात्रा यही सिखाती है। सवाल: टीवी से फिल्मों और अन्य मंचों पर आने वाले कलाकारों को ‘टीवी कलाकार’ का टैग झेलना पड़ता है। क्या आपके साथ ऐसा हुआ? जवाब/शीन: कभी-कभी लोग ऐसा कहते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि मैं जिस लगन से टीवी करती हूं, उसी लगन से फिल्म भी करूंगी। टीवी कलाकारों को अनुशासन, संवाद याद रखने और समय की कद्र करने की अच्छी आदत होती है। इसलिए यह अनुभव हमें और मजबूत बनाता है। लोगों की सोच अलग हो सकती है, लेकिन इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। सौरभ: हां, ऐसी धारणाएं होती हैं। लेकिन मेरा मानना है कि जब आपका समय आता है, तो सब ठीक हो जाता है। अगर समय नहीं आया, तो हम कई कारण गिना सकते हैं। पर सही समय पर सब अपने आप ठीक हो जाता है। सवाल: राजश्री परिवार के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? और सूरज जी से क्या सीख मिली? जवाब/शीन: जब मैंने उनके साथ पहला शो किया था, तो उन्होंने मुझसे कहा था कि टीआरपी की चिंता मत करो, बस प्रक्रिया का आनंद लो। यह सुनकर मैं हैरान रह गई थी। इतने बड़े निर्माता का ऐसा कहना बहुत प्रेरणादायक था। आज भी जब उनका फोन आता है, तो ऐसा लगता है जैसे घर से फोन आया हो। सौरभ: पहले मैंने ‘यहां में घर घर खेली’ में एक छोटे किरदार में काम किया था, और इस बार बड़ा अवसर मिला। जब मैं पहली बार उनसे मिला, तो सोचा था कोई असिस्टेंट आकर किरदार समझाएगा। लेकिन वे खुद मेरे मेकअप कक्ष में आए और किरदार के संदर्भ लेकर समझाया। उनका काम के प्रति जुनून और सभी को सम्मान देने का तरीका बहुत प्रेरणादायक है। आज के समय में जहां सम्मान को दिखावा समझ लिया जाता है, वहां उनके साथ रहकर महसूस होता है कि सच्चा सम्मान कैसा होता है।
होली का त्योहार बॉलीवुड फिल्मों के गानों के बिना अधूरा है, क्योंकि त्योहार का जश्न इन्हीं गानों पर झूमकर मनाया जाता है। हालांकि, ये गाने और फिल्में सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं रहे हैं। बॉलीवुड की कई फिल्मों में होली के मौके पर कहानी में मोड़ और ट्विस्ट सामने आया है। ‘सिलसिला’ में ‘रंग बरसे’ के दौरान रिश्तों का सच सामने आता है। ‘शोले’ में होली के जश्न के बाद तुरंत हमला होता है। चलिए, ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में जानते हैं... सिलसिलासाल 1981 में आई फिल्म सिलसिला का गाना रंग बरसे आज भी होली पर सबसे ज्यादा बजने वाले गानों में से एक है। वहीं, फिल्म में गाना रंग बरसे कहानी में बड़ा मोड़ लाता है। इस गाने में अमित, यानी अमिताभ बच्चन, और चांदनी, यानी रेखा, होली के जश्न में भांग के नशे में होते हैं। नशे में वे अपनी पुरानी यादों और दबे जज्बातों में खो जाते हैं। दोनों सबके सामने खुलकर गाते और नाचते हैं। उनके बीच की नजदीकी साफ दिखने लगती है। अमित की पत्नी शोभा (जया बच्चन) और चांदनी के पति डॉ. आनंद (संजीव कुमार) यह सब देख रहे होते हैं। उनके चेहरे पर असहजता साफ नजर आती है। उन्हें दोनों के पुराने रिश्ते का एहसास हो जाता है। शोले1975 की फिल्म शोले में होली का सीन कहानी में ट्विस्ट लाता है। गाने 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं' के बाद पूरा रामगढ़ जश्न मना रहा होता है। तभी गब्बर सिंह के डकैत अचानक गांव पर हमला कर देते हैं। जय और वीरू बहादुरी से डकैतों से लड़ते हैं। एक समय वे घिर जाते हैं और ठाकुर से बंदूक फेंकने को कहते हैं। ठाकुर के पास बंदूक होती है, फिर भी वह कुछ नहीं करता। डकैत वहां से भाग निकलते हैं। इस बात से नाराज होकर जय और वीरू गांव छोड़ने का फैसला करते हैं। तभी ठाकुर अपनी शॉल हटाकर दिखाता है कि उसके हाथ नहीं हैं। वह बताता है कि गब्बर ने उसका परिवार मार दिया और उसके हाथ काट दिए। यह सच सुनकर जय और वीरू बदला लेने का फैसला पक्का कर लेते हैं। दामिनीफिल्म ‘दामिनी’ (1993) में होली का सीन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ साबित होता है, जहां से फिल्म की कहानी एक पारिवारिक ड्रामे से बदलकर एक गंभीर लीगल थ्रिलर बन जाती है। होली के जश्न और गाने (‘गवाह है चाँद तारे’) के बीच दामिनी (मीनाक्षी शेषाद्री) अपने देवर राकेश और उसके दोस्तों को घर की नौकरानी उर्मी का बलात्कार करते हुए देख लेती है। दामिनी का पति शेखर (ऋषि कपूर) और उसके ससुराल वाले परिवार की ‘इज्जत’ बचाने के लिए उसे चुप रहने और पुलिस से झूठ बोलने के लिए मजबूर करते हैं। जब दामिनी सच बोलने का फैसला करती है, तो उसे मानसिक रूप से बीमार घोषित कर पागलखाने भेज दिया जाता है, ताकि उसकी गवाही को अमान्य किया जा सके। पागलखाने से भागने के बाद दामिनी की मुलाकात गोविंद (सनी देओल) से होती है, जो एक शराबी और असफल वकील है। यहीं से फिल्म का सबसे मशहूर हिस्सा शुरू होता है, जहाँ गोविंद दामिनी को इंसाफ दिलाने के लिए दिग्गज वकील इंद्रजीत चड्ढा (अमरीश पुरी) के खिलाफ कोर्ट में खड़ा होता है। जॉली एलएलबी 2फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में होली का सीन कहानी का अहम मोड़ बनता है। गाने ‘गो पागल’ के बाद हिना (सयानी गुप्ता) को पता चलता है कि जॉली (अक्षय कुमार) ने उसके पति के फर्जी एनकाउंटर केस में मदद का वादा किया था, लेकिन सच में उससे दो लाख रुपये लेकर अपना चैंबर खरीदने की योजना बनाई। इस धोखे का अहसास हिना को तोड़ देता है। जश्न और रंगों के माहौल के तुरंत बाद हिना का आत्महत्या वाला सीन फिल्म की दिशा बदल देता है। यही घटना जॉली के भीतर गहरा अपराध बोध पैदा करती है। वह अपने लालच और स्वार्थ को छोड़कर सच में केस लड़ने का फैसला करता है। इसके बाद कहानी एक गंभीर कोर्टरूम ड्रामा बन जाती है, जहां जॉली सिस्टम के खिलाफ खड़ा होकर न्याय के लिए लड़ता है। पद्मावतफिल्म ‘पद्मावत’ में होली का सीन सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि एक चाल है। अलाउद्दीन खिलजी छह महीने की घेराबंदी के बाद नई रणनीति बनाता है। वह सफेद झंडा भेजकर शांति का संदेश देता है। राजपूतों को लगता है कि अब सुलह होगी। किले के बाहर बैठा खिलजी अपने चेहरे पर केसरिया रंग लगाता है। राजपूतों के लिए यह वीरता का रंग है, लेकिन उसके लिए यह जुनून का प्रतीक है। होली के बहाने वह ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा का फायदा उठाकर किले में प्रवेश कर जाता है। वह भरोसा जीतता है ताकि रानी पद्मावती को देख सके। बाद में इसी शांति वार्ता के दौरान वह रतन सिंह को छल से बंदी बना लेता है। …………………………… होली से जुड़ी ये खबर पढ़ें… हरिवंशराय बच्चन ने होली का गाना ‘रंग बरसे’ लिखा था: अमिताभ बच्चन ने गाया था, फिल्म ‘सिलसिला’ में रेखा के साथ फिल्माया गया फिल्मों और होली का रिश्ता 94 सालों पुराना है। 1932 में पहली बार फिल्म गुलरू जरीना में होली थीम का ब्लैक एंड व्हाइट गाना ‘होरी मुझे खेलने को टेसू मंगा दे..’ दिखाया गया। हालांकि, इसे पॉपुलैरिटी नहीं मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बॉलीवुड और होली का बहुत पुराना रिश्ता है। पर्दे पर ही नहीं बल्कि रियल लाइफ में भी बॉलीवुड सेलेब्स होली मनाना खूब पसंद करते हैं। बच्चन, अख्तर और कपूर जैसे परिवारों की होली हमेशा से ही यादगार रही है। इन परिवारों ने होली के त्यौहार को एक नई परिभाषा दे दी और आज भी इनकी होली के चर्चे खूब होते हैं। रंगों के इस मौसम में जानते हैं इन सितारों की होली के मशहूर किस्से- शोमैन राज कपूर की होली बॉलीवुड की होली की बात हो तो राज कपूर का जिक्र जरूर होता है। राज कपूर की होली पार्टी हमेशा से खूब मशहूर थी। बड़े-बड़े स्टार्स पार्टी का हिस्सा बनना चाहते थे, न्यू कमर्स भी इस पार्टी में आने के लिए तरसा करते थे। बॉलीवुड में एक कहावत सबसे ज्यादा मशहूर है कि अगर आरके स्टूडियो में होली नहीं खेली तो क्या होली खेली? राज कपूर की होली को एक जमाने में 'भांग एंड फूड' फेस्टिवल भी कहा जाता था। इनकी पार्टी की एक खास बात यह भी थी कि यह एक पॉन्ड में ढेर सारा रंग मिलाकर अपने मेहमानों के लिए तैयार रखते थे। और जो भी इस पार्टी में आता था उसे उस पॉन्ड में डुबकी लगाकर ही एंट्री मिलती थी। हुड़दंग वाली होली की एक झलक, बजते बाजे और चेहरे पर लगे गुलाल इस होली के जश्न को दोगुना कर देते थे। आरके स्टूडियो की फेमस होली में नरगिस, वैजयंती माला, हेमा मालिनी, धर्मेद्र, मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, जितेंद्र, दारा सिंह, राकेश रोशन, मिथुन, राजेश खन्ना, अमिताभ, अनिल कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, राखी, रेखा, श्रीदेवी, जीनत अमान जैसे कलाकार होली का मजा उठा चुके हैं। हालांकि 1988 में राज कपूर के निधन के बाद आरके स्टूडियो की होली बंद हो गई। बच्चन परिवार की होली बॉलीवुड के महानायक अभिताभ बच्चन पर फिल्माया गाना रंग बरसे आज भी होली पार्टी की जान है। वहीं रियल लाइफ में भी बिग बी होली खेलने के शौकीन रहे है। बिग बी के बगले जलसा पर हर साल होली का जश्नन पूरे धूम-धाम के साथ मनाया जाता रहा है। साल 2004 में बिग बी की होली खूब चर्चे में थी क्योंकि इसी होली में शाहरुख खान और अमर सिंह ने अपने गिले शिकवे दूर किए थे। फिलहाल कुछ सालों से बच्चन परिवार होली पार्टी नहीं रख रहा है। जावेद अख्तर और शबाना की होली जावेद अख्तर उन सेलेब्स में से हैं जो आज भी होली पार्टी का उसी तरह आयोजन करते हैं जिस तरह सालों से करते आए हैं। जानकारी के मुताबिक, शबाना के पिता कैफी आजमी ने होली पार्टी का ट्रेडिशन शुरु किया था। जावेद अख्तर और शबाना होली को हमेशा से ही लैविश अंदाज में मनाते है। शाहरुख खान की होली शाहरुख खान के होली मनाने का अंदाज खूब निराला है। शाहरुख और गौरी की होली इसलिए फेमस होती है क्योंकि इनकी होली में हर्बल रंगों के कलर्स के साथ-साथ फूलों का भी इस्तेमाल होता है। शाहरुख खुलकर पत्नी गौरी खान होली का त्यौहार के साथ मनाते आए हैं। सुभाष घई की होली अपने मड आइलैंड वाले बंगले पर सुभाष घई लगभग हर बार ही होली पार्टी करते है। एक जमाना था जब सुभाष की होली के पार्टी की चर्चा कई महीनों तक होती थी।
फिल्मों और होली का रिश्ता 94 सालों पुराना है। 1932 में पहली बार फिल्म गुलरू जरीना में होली थीम का ब्लैक एंड व्हाइट गाना ‘होरी मुझे खेलने को टेसू मंगा दे..’ दिखाया गया। हालांकि, इसे पॉपुलैरिटी नहीं मिली। इसके बाद महबूब खान ने फिल्म औरत (1940) में होली की खूबसूरती दिखाते हुए दो गाने डाले। रंगों वाली होली दिखी तो जरूर लेकिन ब्लैक एंड व्हाइट एरा में रंग नहीं दिखे। पहली होली भले ही ब्लैक एंड व्हाइट थी, लेकिन जब रंगीन फिल्मों का दौर आया तब भी पर्दे पर रंगीन होली दिखाने का क्रेडिट भी महबूब खान की फिल्म आन (1952) को मिला। होली के गानों और सेलेब्स का होली मनाने का तरीका दोनों की कई कहानियां हैं। बॉलीवुड के शो-मैन कहे जाने वाले राज कपूर शानदार तरीके पैमाने पर होली मनाते थे। राज कपूर अपनी पार्टी में किन्नरों को बुलाते थे। उन्हें अपनी आने वाली फिल्म के गाने सुनाया करते थे। अगर किन्नरों को कोई गाना पसंद ना आए तो उसे फिल्म में नहीं रखते थे। अमिताभ बच्चन की होली पार्टी में मेहमानों के रंग से भरे पूल में फेंका जाता था। भांग पिलाई जाती थी और जमकर नाच-गाना होता था। एक समय जब अमिताभ का करियर कठिन दौर से गुजर रहा था तो एक होली गीत ने ही उन्हें फिल्म दिलाई थी। आज होली के खास मौके पर पढ़िए फिल्मों में दिखाई गई होली और स्टार्स के घर होली के जश्न से जुड़े कुछ खास किस्से- बड़े पर्दे की पहली होली तो दिखी, लेकिन रंग नहीं होली दिखाने वाली पहली फिल्म भले ही गुलरू जरीना है, लेकिन होली का ट्रेंड शुरू करने का क्रेडिट महबूब खान को दिया जाता है। डायरेक्टर महबूब खान ने 1940 की ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म औरत में होली के दो गाने थे। फिल्म में सुरेंद्र, सरदार अख्तर और याकूब अहम किरदारों में थे। पर्दे पर होली तो दिखाई गई, लेकिन ब्लैक एंड व्हाइट होने पर रंग नहीं दिखे। जब रंगीन फिल्मों का दौर आया तो महबूब खान ने इसी फिल्म को दोबारा मदर इंडिया टाइटल के साथ बनाया। ये फिल्म 1958 को रिलीज हुई थी। भारत की पहली फिल्म जिसे ऑस्कर नॉमिनेशन तक मिला। फिल्म में होली पर फिल्माया गया गाना “होली आई रे कन्हाई” जबरदस्त हिट हुआ, जिसे शमशाद बेगम ने आवाज दी थी। उस जमाने में मदर इंडिया हिंदी सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म थी जो करीब 60 लाख रुपए में बनी थी। जिसने सबसे ज्यादा 8 करोड़ रुपए की कमाई भी की। किन्नरों के साथ होली खेलते थे राज कपूर राज कपूर अपनी हर होली पार्टी में किन्नरों को बुलाकर उनके साथ होली का जश्न मनाते थे। राज किन्नरों पर इतना भरोसा करते थे कि रंग- गुलाल लगाने के बाद वो उन्हें अपनी अपकमिंग फिल्म के गाने बिना झिझक सुना देते थे। जब उनकी तरफ से हरी झंडी मिलती थी, तब ही फिल्म में वो गाना लिया जाता था। जब राज कपूर ने एक होली पार्टी में किन्नरों को अपनी अपकमिंग फिल्म राम तेरी गंगा मैली के गाने सुनाए तो एक गाना किन्नरों को पसंद नहीं आया। राज का उन पर ऐसा अटूट विश्वास था कि उन्होंने तुरंत कंपोजर रविंद्र जैन को बुलाकर इसे बदलने को कहा। इस गाने के रिप्लेसमेंट में ‘सुन साहिबा सुन’ गाना तैयार किया गया। जब फिर किन्नरों को ये गाना सुनाया गया तो जवाब मिला, ये गाना दशकों तक याद रखा जाएगा। हुआ भी ऐसा ही। सुन साहिबा सुन गाना चार्टबस्टर था, जो आज भी लोगों की जुबान पर है। कंपोजर रविंद्र जैन को इस फिल्म के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था। राज कपूर की पार्टी में होता था देखने लायक जश्न 60 के दशक में हिंदी सिनेमा में राज कपूर पहले ऐसे सेलिब्रिटी थे, जिन्होंने होली सेलिब्रेशन के लिए आरके स्टूडियो में पार्टी रखना शुरू किया। इनकी पार्टी में दो बड़े कंटेनर में पानी भरकर उनमें हर तरह के रंग मिलाए जाते थे। पार्टी में शामिल होने वाले गेस्ट को सबसे पहले इन कंटेनर में डाला जाता था और रंगने के बाद ही वो अंदर पार्टी में शामिल होते थे। इस पार्टी में उस दौर के हर छोटे-बड़े कलाकार को बुलाया जाता था। कई लोग तो इसे भांग एंड फूड फेस्टिवल तक कहते थे। अमिताभ पर ही फिल्माए गए पिता के लिखे हुए दो होली सॉन्ग अमिताभ बच्चन पर फिल्माए गए दो होली के सदाबहार गाने ‘रंग बरसे’ और ‘होरी खेलें’ उनके पिता कवि हरिवंशराय बच्चन ने लिखे थे। ये दोनों गाने फिल्माए जाने से काफी सालों पहले से ही अमिताभ अपने पिता से सुनते आए थे। 1981 की फिल्म सिलसिला में रंग बरसे गाना भी एक इत्तेफाक का नतीजा है। दरअसल, ये गाना मीरा पर बने एक भजन से प्रेरित है, जिसके लिरिक्स “रंग बरसे ओ मीरन, भवन में रंग बरसे” से प्रेरित हैं। पिता से बचपन से ये भजन सुनते आए अमिताभ खुद भी इस भजन को अक्सर गुनगुनाते रहते थे। राज कपूर की होली पार्टी में जब यश चोपड़ा ने इसे सुना तो उन्हें ये इतना पसंद आया कि इसे फिल्म में लेने का फैसला किया। ठीक ऐसा ही बागबान के गाने होरी खेले रघुबीरा के साथ हुआ। ये लोकगीत भी अक्सर हरिवंश राय बच्चन गुनगुनाते रहते थे, जो अमिताभ ने कई बार सुना था। जब बागबान फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर आदेश श्रीवास्तव ने अमिताभ से फिल्म के लिए एक होली के गाने का सुझाव मांगा तो उन्होंने यही गाना बताया। दोनों ने मिलकर इसे फाइनल किया और एक रात में इस गाने की रिकॉर्डिंग की। अमिताभ की होली पार्टी में मेहमानों को दी जाती थी भांग अमिताभ बच्चन भी अपने बंगले में होली की बड़ी पार्टी दिया करते थे। इनके बंगले में मेहमानों को भांग सर्व की जाती है। 2004 में बिग बी के बंगले जलसा में हुई पार्टी खूब सुर्खियों में रही थी, क्योंकि यहां शाहरुख खान और अमर सिंह के बीच की सालों से चली आ रही लड़ाई गले मिलकर खत्म हुई थी। किस्से अमिताभ बच्चन की होली पार्टी के- अमिताभ बच्चन की होली पार्टी ही वो वजह है जिसके डर से पॉपुलर फिल्ममेकर करण जौहर आज भी होली से घबराते हैं। दरअसल, 10 साल के करण जौहर अपने पिता हीरू जौहर के साथ बिग बी के घर होली पार्टी में गए थे। करण को बचपन से ही रंग लगवाने से नफरत थी। वो पार्टी में ये बात सबको बताने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही छोटे अभिषेक बच्चन ने दोस्तों के साथ शरारत करते हुए करण को रंग से भरे पूल में फेंक दिया। इससे करण इतने सहम गए कि उन्होंने जिंदगी में कभी होली नहीं खेली। बचपन में अर्जुन कपूर के साथ अभिषेक ने की थी मस्ती अर्जुन कपूर को हमेशा से ही रंग खेलने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। एक कारण ये भी है कि अर्जुन को रंगों से एलर्जी है। एक बार बचपन में अर्जुन अमिताभ बच्चन की होली पार्टी में पहुंचे थे। इस पार्टी में अभिषेक बच्चन और किरण खेर के बेटे सिकंदर खेर ने उन्हें रंगों से भरे पूल में धक्का दे दिया था। इसके बाद से ही उन्होंने कभी होली नहीं खेली। खुशनुमा माहौल दिखाने के लिए सेट पर होती थी असली पार्टी डर फिल्म का गाना अंग से अंग लगाना शूट करना भी यश चोपड़ा के लिए चैलेंजिंग था। शूटिंग लोनावला में हुई, जिसे साउथ के पॉपुलर कोरियोग्राफर तरुण कुमार ने कोरियोग्राफ किया था। जब यश चोपड़ा ने डांस रिहर्सल देखी तो उन्होंने कोरियोग्राफर से कहा कि स्टेप्स काफी सीरियस हैं। यश के कहने पर स्टेप्स बदल दिए गए। गाने की शूटिंग देखने के लिए हनी ईरानी, डिंपल कपाड़िया, यश चोपड़ा की पत्नी पामेला और जूही चावला के कुछ रिश्तेदार भी लोनावला पहुंच गए। सेट पर मस्ती भरा माहौल रखने के लिए सब वर्ड पजल खेलते थे और यश सभी लोगों के लिए मजेदार खाना बनवाते थे, जिससे असल में सेट पर पार्टी का माहौल दिखे। डू मी अ फेवर गाने की शूटिंग के दौरान लोगों ने देखा चमत्कार फिल्म वक्त का गाना डू मी अ फेवर अपनी तरह का एक शानदार गाना है। होली थीम पर बना ये गाना खूब बजाया गया और पसंद भी किया गया। इस गाने की शूटिंग के दौरान सेट पर मौजूद लोगों ने चमत्कार देखा। दरअसल विपुल शाह चाहते थे कि उन्हें रंग बरसे गाने की टक्कर का कोई गाना मिले। म्यूजिक डायरेक्टर अनु मलिक से चर्चा की तो 3 महीने में उन्होंने डू मी अ फेवर गाना तैयार कर विपुल को सुनाया। अनु ने इतने बेहतरीन ढंग से डू मी अ फेवर लेट्स प्ले होली कहा कि विपुल ने उन्हें ही गाने को आवाज देने के लिए इंसिस्ट किया। शूटिंग के दौरान विपुल शाह चाहते थे कि बदली में गाना फिल्माया जाय, लेकिन बारिश ना हो। गाने के लिए सेट तैयार करवाया गया था, जिसमें एक विशाल तालाब भी बनवाया गया था। गाने की शूटिंग शुरू हुई तो बदली छा गई और जब तक शूटिंग चलती रही बदली कायम रही, जो अमूमन होता नहीं है। जैसे ही गाने की शूटिंग पूरी हुई और डायरेक्टर ने पैक-अप कहा वैसे ही तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे पूरा सेट तबाह हो गया। बलम पिचकारी गाने की शूटिंग के समय हुआ दीपिका के साथ प्रैंक नए जमाने में बलम पिचकारी होली थीम का सबसे पसंदीदा गाना माना जाता है। इस गाने की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर अयान मुखर्जी और रणबीर कपूर ने दीपिका के साथ प्रैंक किया था। सेट पर एक रंग से भरा पूल तैयार किया गया था, जिसके बारे में सिर्फ अयान और रणबीर को ही पता था। जैसे ही दीपिका और कल्कि सेट पर तैयार होकर पहुंचे तो दोनों ने उन्हें उठाकर पूल में फेंक दिया। इस समय कैमरा रोलिंग में था। इस प्रैंक से आए रियल एक्सप्रेशन ही गाने में लिए गए थे। आखिर में होली सेलिब्रेशन की ये पुरानी तस्वीरें भी देखें-
बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के मोनिका बेदी केस के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि कैसे 2002 में 1993 सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी और अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को गिरफ्तार किया गया। जब पुलिस उनके घर पहुंची, तो वहां मोनिका बेदी की भी गिरफ्तारी हुई। मोनिका बेदी पुर्तगाल में सना मलिक नाम से रह रही थीं। इस पहचान के लिए उन्होंने नकली पासपोर्ट बनवाए थे। गिरफ्तारी के बाद अबू सलेम और मोनिका बेदी को पुर्तगाल की एक ही जेल में अलग-अलग सेल में रखा गया। दोनों के बीच अक्सर खतों के जरिए प्यार मोहब्बत की बातें होती थीं। दोनों जल्द ही जेल से निकलकर आम जिंदगी जीने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन फिर अचानक मोनिका बेदी ने उन्हें खत भेजना बंद कर दिया और उनसे रिश्ता खत्म कर लिया। जब दोनों को 1 साल बाद भारत डिपोर्ट किया गया तो चार्टर्ड प्लेन में मोनिका से नजरें तक नहीं मिलाईं। अब पार्ट-2 में जानिए कहानी आगे- 11 नवंबर 2005 को मोनिका बेदी और अबू सलेम को भारत लाया गया। मोनिका बेदी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 419 (छल से प्रतिरूपण) और 420 (धोखाधड़ी) और पासपोर्ट अधिनियम, 1967, सेक्शन 12 के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुर्तगाल में पहले ही सजा काट चुकीं मोनिका बेदी पर भारत में नया केस हुआ। 29 सितंबर 2006 में इंडियन कोर्ट पासपोर्ट एक्ट की धारा के अलावा अन्य धाराओं पर दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनाई। उन्हें हैदराबाद और भोपाल की जेल में रखा गया था। मोनिका बेदी ने कहा था, मुझे अबू सलेम से प्यार करने की कीमत चुकानी पड़ी फिल्मफेयर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में मोनिका बेदी ने कहा था, ‘पुर्तगाल की जेल में साफ कमरे और ठीक-ठाक बिस्तर थे, लेकिन यहां मुझे खुले टॉयलेट के सामने फर्श पर सोना पड़ा। मुझे जमानत नहीं मिली, जबकि हत्या के मामलों में आरोपी महिलाओं को मिल गई थी। मुझे अबू सलेम से प्यार करने की कीमत चुकानी पड़ी।' 'आखिरकार 2007 में मुझे जमानत मिल गई। 2010 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मेरी दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा को उतनी अवधि तक सीमित कर दिया, जितनी मैं पहले ही जेल में काट चुकी थी। लेकिन तब तक खुशी की अहमियत ही खत्म हो चुकी थी। सजा तो मैंने काट ही ली थी, क्या वे साल मुझे वापस मिल सकते हैं?’ अबू सलेम के दूसरे आरोपों में शामिल नहीं थीं मोनिका बेदी जांच एजेंसियों को शक था कि मोनिका बेदी अबू सलेम की अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में भी शामिल हो सकती हैं। क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल कहते हैं, ‘मेरे इन्फॉर्मर से मुझे ये जानकारी मिली कि जिस समय डायरेक्टर मुकेश दुग्गल की हत्या हुई, उस जगह मोनिका बेदी का मोबाइल फोन मिला था, जिसे हटवाने के लिए अबू सलेम ने 18 लाख रुपए की रिश्वत दी थी। लेकिन जांच में ये कन्फर्म नहीं हुआ।’ मोनिका के खिलाफ पुलिस को फर्जी पासपोर्ट केस के अलावा कोई सबूत नहीं मिले, जिसके चलते उन पर सिर्फ एक केस ही चला। वाकई में मोनिका जिस समय अबू सलेम के साथ भारत से भागीं, तब वो नहीं जानती थीं कि अबू सलेम पर कई हत्याओं और 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट के भी आरोप हैं। शुरुआती समय में वो ये तक नहीं जानती थीं कि जिस शख्स से उनकी बातचीत होती है, वो इवेंट ऑर्गेनाइजर नहीं बल्कि अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम है। चार्जशीट देखकर मोनिका बेदी ने किया रिश्ता खत्म करने का फैसला जिस समय मोनिका बेदी को पुर्तगाल जेल में रखा गया था, तब उन्हें अबू सलेम की चार्जशीट दिखाई गई। चार्जशीट देखने के बाद मोनिका बेदी को एहसास हुआ कि जिस शख्स को वो बड़ा बिजनेसमैन समझती थीं, वो असल में एक अंडरवर्ल्ड डॉन है। यही वजह रही कि उन्होंने रिश्ता अचानक खत्म कर लिया। मोनिका के दूर जाने से नाखुश था अबू सलेम, रिश्ता बनाए रखना चाहता था भारत लाए जाने के बाद मोनिका बेदी और अबू सलेम को अलग-अलग जेल में रखा गया। इस समय अबू सलेम, मोनिका बेदी के लिए अक्सर हैदराबाद जेल में फूल और महंगे तोहफे भिजवाता था। वो बार-बार उनसे संपर्क करने की कोशिश करता था, लेकिन मोनिका ने अपने रास्ते अलग कर लिए थे। अबू सलेम ने दावा किया था कि वो और मोनिका बेदी साल 2000 में लॉस एंजिलिस की एक मस्जिद में निकाह कर चुके हैं और मोनिका उनकी कानूनी तौर पर पत्नी हैं। हालांकि मोनिका इन सभी दावों को खारिज करती रहीं। इस समय अबू सलेम के वकील अरविंद शुक्ला ने दावा किया कि उनके पास मोनिका और अबू सलेम का निकाहनामा भी है। जानिए कैसे हुई डॉन से मोनिका बेदी की पहली मुलाकात 18 जनवरी 1975 पंजाब के होशियारपुर जिले के चाबेवल गांव में मोनिका बेदी का जन्म हुआ। वो महज 1 साल की थीं, जब उनका परिवार नॉर्वे शिफ्ट हो गया। वहां पिता ने कपड़ों का बिजनेस शुरू किया था। मोनिका विदेश में रहीं और पढ़ाई भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से की। देखने में बेहद खूबसूरत मोनिका के लुक्स की तुलना टीनएज में मशहूर एक्ट्रेस सायरा बानो से होती थी। डांस में रुचि थी तो वो भी घंटों कमरे बंद कर गाने सुनकर थिरका करती थीं। भाई उन्हें कमरा साफ करने के बदले श्रीदेवी के डांस के वीसीडी दिलवाया करता था। मोनिका सालाना भारत आया करती थीं। साल 1995 में जब वो भारत आईं तो उन्होंने यहीं रहकर गोपी कृष्ण डांस क्लासेस जॉइन कर कथक सीखने का फैसला किया। वहीं उनकी एक रोज मनोज कुमार से मुलाकात हुई, जिन्होंने उनकी खूबसूरती देखकर उन्हें अपने बेटे कुणाल के साथ लॉन्च करने का ऑफर दिया। मोनिका ने एक्टिंग क्लासेस भी शुरू कर दीं, लेकिन मनोज कुमार की वो फिल्म बनी ही नहीं। इसी बीच उन्हें दूसरी फिल्में मिलने लगीं। उनकी पहली फिल्म साउथ की ताजमहल रही। जिसके बाद उन्होंने सैफ अली खान के साथ सुरक्षा, सलमान खान के साथ जानम समझा करो और संजय दत्त के साथ जोड़ी नंबर वन जैसी कई फिल्में कीं। फिर आया साल 1998… करियर बुलंदियों पर था। कई डायरेक्टर प्रोड्यूसर उन्हें फिल्मों के ऑफर दे रहे थे। एक शाम उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले शख्स ने अपना नाम अर्सलान बताया था। उसने कहा कि वो दुबई का बड़ा बिजनेसमैन है। उनका दुबई में इवेंट है, जिसमें मोनिका को परफॉर्मेंस का ऑफर मिला। मोनिका दुबई गईं। उस शख्स से मिलीं और दोनों में अच्छी बातचीत हुई। जब वो भारत लौटीं, तब तक उनकी अर्सलान से दोस्ती गहरी हो चुकी थी। वो हर आधे घंटे में उन्हें कॉल करते और दोनों की लंबी-लंबी बातें होतीं। मोनिका भी उन्हें पसंद करने लगीं। अर्सलान से मिलने वो दो-तीन बार दुबई भी गई थीं। उन्होंने बताया कि उनके दुबई में कार के शोरूम हैं। वो उन्हें शोरूम दिखाने भी ले गए थे। ऐसी ही एक मुलाकात के दौरान अर्सलान ने मोनिका से कहा कि उनका असल नाम अर्सलान नहीं बल्कि अबू सलेम है। मोनिका को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा। अंडरवर्ल्ड कवर करने वाले सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल इस पर कहते हैं, ‘मोनिका के सामने एक ऐसी तस्वीर खींची गई कि अर्सलान बड़े-बड़े प्रोजेक्ट दिला सकता है। अबू सलेम ने मुकेश दुग्गल पर दबाव डालकर मोनिका को करीब आठ-नौ फिल्मों में काम तो दिलवाया, लेकिन टैलेंट की कमी और अंडरवर्ल्ड के दबाव के चलते इंडस्ट्री में डर फैलने लगा। धीरे-धीरे ये बात फैल गई कि मोनिका अंडरवर्ल्ड से जुड़ी हैं, और काम मिलना बंद हो गया।’ ‘जब मोनिका को पता चला कि दबाव डी-कंपनी से आ रहा है, तब तक मोनिका के लिए वापसी के सारे रास्ते बंद हो चुके थे। इस बीच दोनों की मुलाकातें विदेशों में होने लगीं और काफी समय तक उन्हें यह भी पता नहीं था कि अरसलान असल में अबू सलेम है।’ जब उनसे पूछा गया कि मोनिका को अबू सलेम की सच्चाई कब पता चली और उसके बाद क्या हुआ? तो जवाब में विवेक अग्रवाल ने कहा, ‘जब मोनिका को अबू सलेम की असल पहचान का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों के बीच रिश्ता इस हद तक पहुंच चुका था कि शादी की बातें होने लगी थीं और अबू सलेम ये दावा करने लगा था कि वो सब कुछ छोड़ देगा। लेकिन अंडरवर्ल्ड एक अंधेरी गली है एक बार अंदर गए तो वापसी नहीं होती।’ अबू सलेम ने छिपाई मोनिका से कई राजफिल्मफेयर को दिए गए एक पुराने इंटरव्यू में मोनिका बेदी ने कहा, ‘धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि वह कोई प्रभावशाली व्यक्ति है। उसके आसपास हमेशा गार्ड रहते थे। यह मुझे अजीब तो लगा, लेकिन उसने कभी अपनी निजी जिंदगी के बारे में खुलकर कुछ नहीं बताया। वह बहुत बंद स्वभाव का था। मुझे सिर्फ इतना पता था कि वह शादीशुदा है और तलाक की प्रोसेस चल रही है।’ ‘फिर किसी कारण से उसे अमेरिका जाना पड़ा। वह चाहता था कि मैं तुरंत उसके साथ अमेरिका आ जाऊं। वहां पहुंचकर मुझे एहसास हुआ कि अब मैं वापस नहीं जा सकती। पुलिस को पता था कि अबू सलेम एक एक्ट्रेस के साथ जुड़ा हुआ है और वे मेरी पहचान जानते थे। अबू सलेम को डर था कि मुझ पर दबाव डालकर वे उस तक पहुंच जाएंगे। इसलिए उसने मुझे लौटने नहीं दिया।’ वो चिड़चिड़ा और गुस्सल था- मोनिका बेदी आगे मोनिका ने कहा था, ‘मैं अमेरिका में उसके साथ एक साल से ज्यादा रही। बीच-बीच में वह दुबई जाता था और मैं अपने माता-पिता से मिलने नॉर्वे चली जाती थी। लेकिन हमारे बीच मतभेद बढ़ने लगे। वह बुरा इंसान नहीं था, पर उसकी सोच अलग थी। वह हावी रहने वाला स्वभाव का था। उसने ताकत और लोगों को कंट्रोल करने वाली जिंदगी जी थी, इसलिए वह हर चीज अपने तरीके से चाहता था। दबावों के कारण उसका स्वभाव चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो गया था। मुझे समझ में आ गया कि हम साथ रहने के लिए नहीं बने थे। मैं अपने पेशे में वापस लौटना चाहती थी, लेकिन उसने इजाजत नहीं दी। उसे डर था कि मेरे जरिए उसका ठिकाना पता चल जाएगा।’ मोनिका बेदी ने कई बार की भागने की कोशिश उसी इंटरव्यू में मोनिका ने कहा, ‘ऐसा नहीं था कि उसने मुझे बंदूक की नोक पर बंधक बना रखा था, वह तो फिल्मों जैसी कहानी होती। लेकिन कई बार मैं उससे दूर भागकर कुछ दिनों के लिए होटल में रही, फिर वह मुझे वापस ले आता। कभी-कभी मैं खुद भी लौट जाती, क्योंकि वह फोन पर रोता और कहता, “मैं तुमसे प्यार करता हू, ऐसा मत करो।” वह कहता कि वह सब कुछ छोड़कर आम जिंदगी जीना चाहता है। मुझे लगा कि कम से कम हालात संभलने तक मुझे उसके साथ रहना चाहिए।’ ‘आप कह सकते हैं कि यह मजबूरी, डर और प्यार, सबका मिला-जुला असर था, जिसकी वजह से मैं उसके साथ रही। मैं उससे प्यार भी करती थी। और मुझे समझ नहीं आता था कि जाऊं तो जाऊं कहां। पैसों, डॉक्यूमेंट्स और पासपोर्ट की जरूरत होती है।’ मैंने उसके लिए खाना बनाया, कपड़े धोए- मोनिका बेदी मोनिका ने इंटरव्यू में कहा था, ‘लोगों को लगता था कि उसके पास बहुत पैसा है, इसलिए मैं राजकुमारी जैसी जिंदगी जी रही हूं। लेकिन उसके साथ मैंने सिर्फ मुश्किलें और संघर्ष ही देखे। हम लगातार एक जगह से दूसरी जगह जाते रहे। मैं उसके लिए खाना बनाती, सफाई करती और कपड़े धोती थी। दरअसल, खाना बनाना भी मैंने उसी से सीखा।’ ‘अगर मैंने कभी अच्छी जिंदगी देखी, तो वह अपने माता-पिता के घर में या अपनी मेहनत की कमाई से ही देखी। लोग कहते थे, “वह उसके साथ पैसे के लिए है।” लेकिन पैसा कहां था? मुझे मुश्किलों से शिकायत नहीं थी, तकलीफ उसके एग्रेसिव और चिड़चिड़े बिहेवियर से थी। मैं अक्सर सोचती थी कि आखिर मैं इस सब में कैसे फंस गई।’ मोनिका बेदी ने ये भी कहा कि जब उनकी पुर्तगाल में गिरफ्तारी हुई, तो वो इससे बहुत खुश थीं, क्योंकि उन्हें आखिरकार भारत लौटने का एक रास्ता दिख रहा था। इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मैंने उसे चिट्ठियों के जरिए साफ कह दिया कि मैं अब यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ा सकती। लेकिन उसे भरोसा था कि वह मुझे मना लेगा। उसने लिखा, “तुम मुझे इस मोड़ पर छोड़ नहीं सकती।” मैं यह नहीं कहूंगी कि वह मुझसे प्यार नहीं करता था, उसका प्यार सच्चा था, उसमें कोई चालाकी नहीं थी। लेकिन मेरे अंदर एक मजबूत इच्छाशक्ति आ गई थी। मैं निडर हो गई थी।’ ‘जब मैंने अपने माता-पिता को नॉर्वे से पुर्तगाल सिर्फ मुझसे मिलने के लिए आते देखा, तो मुझे एहसास हुआ कि मैंने उनके साथ क्या किया?’ कई बार घर से भगाई गईं मोनिका बेदी, मुंबई में नहीं मिला ठिकाना साल 2007 में मोनिका बेदी को फर्जी पासपोर्ट केस में जमानत मिली। जमानत के समय शर्त रखी गई कि उन्हें अपने परिवार के साथ पंजाब में रहना होगा। लेकिन मोनिका को कुछ समय में एहसास हो गया कि वो परिवार के लिए बोझ बन गई हैं। उन्होंने मुंबई जाकर कोर्ट से अपील की कि उन्हें मुंबई में रहने की इजाजत मिले, जिससे वो कमाई कर सकें। उन्हें परमिशन मिल गई, लेकिन तब उनके सारे दोस्तों ने हाथ पीछे खींच लिए। उन्होंने मुंबई में किराए पर घर भी ढूंढने की कोशिश की, लेकिन हर किसी ने नाम सुनकर घर देने से इनकार दिया। लंबी जद्दोजहद के बाद उन्हें मुंबई में रहने के लिए एक किराए का घर मिला। उन्होंने गद्दा, कुछ बर्तन और घर का सामान खरीदा। उन्हें लगा कि अब शायद जिंदगी पटरी पर आए, लेकिन कुछ हफ्तों बाद ही मकानमालिक ने उन्हें घर खाली करने के लिए बोल दिया। ऐसा कई बार हुआ। बिग बॉस 2 में देखकर भड़का अंडरवर्ल्ड डॉन साल 2008 में मोनिका बेदी को रियलिटी शो बिग बॉस 2 का ऑफर मिला। विवादित जिंदगी के बावजूद मोनिका बेदी का शो में बिहेवियर काफी पसंद किया गया। इस दौरान उनकी को-कंटेस्टेंट राहुल महाजन से बढ़ती नजदीकियां काफी सुर्खियों में रहीं। ये खबर जेल में बंद अबू सलेम तक भी पहुंचीं। इस समय उसने पेशी से निकलते हुए कहा, मोनिका बेदी मेरी पत्नी है। अगर उसे नई जिंदगी शुरू करना है, तो पहले मुझे तलाक देना होगा। हालांकि मोनिका बार-बार शादी के दावे खारिज करती रहीं। मोनिका का बिग बॉस 2 में जाने से ठीक पहले इंटरव्यू कर चुकीं सीनियर रिपोर्टर जिग्ना वोरा कहती हैं, ‘मैंने चलती गाड़ी में बैठकर उनका इंटरव्यू किया था। जब मैंने उनसे और अबू सलेम के रिश्ते पर सवाल किया, तो वो इस बात से मुकर गईं। उन्होंने हर सवाल का जवाब ‘ना’ में दिया। वो डिनायल मोड में थीं अबू सलेम से अपने रिश्ते को लेकर। लेकिन आज भी कई ऐसे डॉक्युमेंट्स मौजूद हैं जो यह प्रूव करते हैं कि दोनों साथ थे और कैसे उन्होंने दुबई छोड़कर पुर्तगाल में साथ रहने का प्लान बनाया था।’ बिग बॉस 2 के बाद मोनिका बेदी झलक दिखला जा, राज पिछले जनम का, दिल जीतेंगी देसी गर्ल-1 जैसे कई रियलिटी शोज में नजर आईं। इसके बाद उन्हें संजयलीला भंसाली के प्रोडक्शन में बने टीवी शो सरस्वतीचंद में नेगेटिव रोल में कास्ट किया गया। वो टीवी शो बंधन में भी नजर आ चुकी हैं। टीवी शोज के अलावा वो कुछ पंजाबी, बंगाली और नेपाली फिल्मों का भी हिस्सा रहीं, लेकिन उन्हें अब तक कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं मिली।अबू सलेम ने ट्रेन में जाते हुए अनजान महिला से की शादी मोनिका बेदी के अलावा अबू सलेम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका है। साल 2014 में अबू सलेम को पासपोर्ट केस की सुनवाई के लिए ट्रेन से लखनऊ लाया गया था। इस दौरान पुलिस की मौजूदगी में ही उसने मुंब्रा की एक लड़की से ट्रेन में बातचीत की और कुछ घंटों की मुलाकात के बाद वहीं निकाह कर लिया। काजी ने फोन में ही निकाह पढ़वाया था। इसके बाद साल 2018 में अबू सलेम ने तीसरी शादी करने के लिए पेरोल की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। बता दें कि इससे पहले अबू सलेम ने 1991 में समायरा जुमानी से पहली शादी की थी। अबू सलेम फिलहाल नासिक की सेंट्रल जेल में है, उसे की हत्याओं के मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है। हालांकि उसे फांसी की सजा नहीं दी जा सकती। दरअसल, जिस समय उसे पुर्तगाल से भारत डिपोर्ट किया गया था, तब पुर्तगाल सरकार ने शर्त रखी थी कि पुर्तगाल के कानून के मद्देनजर उसे फांसी न दी जाए, क्योंकि उसे डिपोर्ट किया गया है। आखिर में क्राइम रिपोर्टर विवेक अग्रवाल कहते हैं, ‘मोनिका बेदी और अबू सलेम की मोहब्बत की दास्तान बड़ी बन गई। क्योंकि वो मोनिका बेदी थी और वो अबू सलेम था। हाजी मस्तान और सोना की कहानी आज भी क्यों कही जाती है? क्योंकि उसमें ग्लैमर जुड़ा हुआ है। दाऊद इब्राहिम की जिंदगी में महजबीन जैसी पत्नी होने के बावजूद उसकी मोहब्बत की कहानियां मंदाकिनी के साथ क्यों कही जाती हैं?’ ‘मंदाकिनी हजार बार इनकार कर चुकी हैं, लेकिन उनके इनकार से क्या फर्क पड़ता है? विक्की गोस्वामी और ममता कुलकर्णी की कहानी भी इसलिए बड़ी बनी, क्योंकि ममता एक सेलिब्रिटी थीं। एक तरफ अगर कोई सेलिब्रिटी हो, तो कहानी अपने आप सबकी निगाहों का मरकज बन जाती है। मोनिका और अबू सलेम के साथ भी यही हुआ।’ आज भी सिंगल है मोनिका बेदी हाल ही में सिद्धार्थ कानन को दिए इंटरव्यू में मोनिका बेदी ने कहा कि पिछले बुरे अनुभव के बाद से ही उन्हें रिश्ते और प्यार से डर लगने लगा है। यही वजह है कि वो आज भी सिंगल हैं। उन्होंने कहा कि वो हमेशा अकेली ही रहना चाहती हैं।…………………………………………… पार्ट-1, डिजाइनर कपड़ों में गिरफ्तार हुईं मोनिका बेदी:पुर्तगाल जेल में अबू सलेम को लिखे लव लेटर, चार्टर्ड प्लेन में नहीं मिलाई नजरें तारीख- 18 सितंबर 2002 जगह- लिस्बन पुर्तगाल भारत के समयानुसार करीब 8 बज रहे थे। लिस्बन की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक टेजो नदी का किनारा आमतौर पर सैलानियों से भरा होता था, नजारे किसी रोमांटिक फिल्म की तरह होते थे, लेकिन उस शाम ये नजारे थे एक क्राइम थ्रिलर फिल्म के। नदी किनारे एक लग्जरी एसयूवी कार सामान्य स्पीड में चल रही थी कि अचानक ही उस कार के पीछे पुर्तगाल पुलिस की गाड़ियों का काफिला चलने लगा। कार सवार शख्स को एहसास हुआ कि पुलिस उसका पीछा कर रही है, तभी उसने एक्सेलेटर पर पैर मारा और रफ्तार बढ़ा दी। पूरी कहानी पढ़िए… (नोट- ये खबर मोनिका बेदी का केस और अंडरवर्ल्ड की स्टोरी कवर करने वाले सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल और क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के इंटरव्यू और रिसर्च के आधार पर क्रिएटिव लिबर्टी के साथ लिखी गई है।)लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय ………………………. बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के मोनिका बेदी केस में इतना ही, अगले हफ्ते केस-8 में पढ़िए बॉलीवुड एक्टर कमल सदाना के फैमिली हत्याकांड की कहानी। जब उनके पिता ने उनके 20वें जन्मदिन के मौके पर पूरे परिवार की गोली मारकर हत्या कर दी। सिर्फ दैनिक भास्कर एप पर। एक्टर कमल सदाना के बर्थडे के दिन पिता ने किए नशे; कुछ देर में फर्श में खून से लथपथ मिलीं मां-बहन, फिर एक्टर पर भी चलाई गई गोली तारीख- 21 अक्टूबर 1990 जगह- 28th रोड, बांद्रा ईस्ट, मुंबई का बंगला शाम का वक्त था। ‘बेखुदी’ और ‘रंग’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में नजर आ चुके कमल सदाना का 20वां बर्थडे था। घर का माहौल खुशनुमा था, जो जल्द ही मातम और भयावह मंजर में तब्दील होने वाला था। कमल की मां ने उनके दोस्तों के लिए पार्टी रखी थी। पार्टी की तैयारियां जोरों पर थीं, बहन नम्रता भी हेडफोन लगाए एक कोना पकड़कर बैठी थी। दोस्त हरि पहले ही घर आ चुका था। दीवारें रंगीन गुब्बारे और रंग-बिरंगी लाइट्स से सजी हुई थीं। लिविंग रूम के सेंटर टेबल को कमल का पसंदीदा केक रखने के लिए खाली रखा गया था, जहां चंद घंटों में 3 लाशें बिछ गईं। पूरी कहानी पढ़िए अगले हफ्ते बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-8 में। ……………………………………… भास्कर की नई सीरीज बॉलीवुड क्राइम फाइल्स की ये कहानियां भी पढ़िए- पार्ट-1, शाइनी आहूजा रेप केस:मेड बोली- कमरे में बंद किया; सीमन सैंपल हुए मैच, एक्टर बोले- संबंध रजामंदी से बने 14 जून 2009 शाम का समय था। एक लड़की रोती-बिलखती हालत में ओशिवारा पुलिस स्टेशन में दाखिल हुई। उसके साथ कुछ और लोग भी थे। लड़की को पुलिस स्टेशन में बैठाया गया। साथ मौजूद लोगों ने जोर देकर बोला- इसका रेप हुआ है। लड़की लगातार रोए जा रही थी। पुलिस ने पूछा किसने किया, जवाब मिला- शाइनी आहूजा, बॉलीवुड एक्टर। वहां मौजूद हर शख्स हैरान था। मामला हाई प्रोफाइल था, तो पुलिस ने भी बिना देरी किए शिकायत लिखना शुरू किया। आसपास के लोगों ने लड़की का हौसला बढ़ाया और फिर उसने स्टेटमेंट देना शुरू किया, मेरा नाम माधुरी जोशी है, मैं 20 साल की हूं। शाइनी आहूजा के घर में मई से काम कर रही थी। मैं सुबह से शाम वहीं रहती थी। घर में दो मेड और थीं। उस दिन घर में कोई नहीं था। अचानक उन्होंने मुझे पकड़ लिया। मैंने बचने की कोशिश की तो मारा। पूरी कहानी पढ़िए……………………………. पार्ट-2, शाइनी आहूजा रेप केस:मेड ने बयान बदला, कहा- रेप नहीं हुआ, 7 साल की सजा हुई; ₹15 लाख की हुई मांग केस चर्चा में था तभी एक अखबार में दावा किया गया कि शाइनी के खिलाफ पुलिस को कई सबूत मिले हैं। दावा था कि शाइनी की पड़ोसी ने उस रोज मेड की चीखों की आवाजें सुनी थीं। इन दावों के बीच शाइनी आहूजा की पत्नी अनुपम आहूजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि उनके पति निर्दोष हैं, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। पूरी कहानी पढ़िए………………………………………. पार्ट-1, बालिका वधु एक्ट्रेस प्रत्युषा बोलीं- मैं बिकने नहीं आई:आखिरी कॉल में मां-बाप को गालियां दीं, फिर फंदे पर लटकी मिलीं 1 अप्रैल 2016, दोपहर करीब 12 बजे… प्रत्युषा बनर्जी, बॉयफ्रेंड एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज के साथ मुंबई के गोरेगांव की हार्मनी बिल्डिंग की सातवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 703 में रहती थीं। दोपहर में राहुल अपने काम से लोखंडवाला गए थे। कुछ देर बाद ही उन्होंने प्रत्युषा को कॉल किया तो वो जोर-जोर से रो रही थीं। थोड़ी कहासुनी होने के बाद प्रत्युषा ने कहा- वोह, राहुल राज, इगो अपने पास रखो, क्योंकि कुछ ही घंटों में, शायद मिनटों में, किसी को इगो दिखाने के लिए नहीं बचेगा। राहुल ने जवाब दिया- देखो, मैं तुमसे बस इतना बोल रहा हूं, खाली सुनो। प्रत्युषा ने बात काटते हुए कहा- मैं तुमसे इतना बोल रही हूं…. मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है। पूरी कहानी पढ़िए… पार्ट-2, मौत से पहले प्रत्युषा बनर्जी ने करवाया अबॉर्शन:बॉयफ्रेंड की एक्स ने की थी मारपीट, पोस्टमॉर्टम में शरीर में मिली 100ml शराब प्रत्युषा बनर्जी के दोस्तों ने जिस सलोनी शर्मा पर उनसे मारपीट के आरोप लगाए थे, उन्होंने पुलिस बयान में कबूला कि उन्होंने एक्ट्रेस को थप्पड़ मारा था, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वो और राहुल राज एक समय में रिलेशनशिप में थे, लेकिन प्रत्युषा की वजह से राहुल ने उन्हें छोड़ दिया। पूरी कहानी पढ़िए ………………………………………………………………………. पार्ट-1, एक्ट्रेस के घर से लापता हुए कास्टिंग डायरेक्टर नीरज ग्रोवर: एक कॉल से पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, कातिलों ने लाश के सामने बनाए शारीरिक संबंध मई 2008 की बात है उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी?’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस की रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया- ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ पूरी खबर पढ़िए… पार्ट-2, लाश के सामने एक्ट्रेस ने बनाए शारीरिक संबंध: मॉल से खरीदी चाकू, लाश के टुकड़े थैलियों में भरकर जंगल में जलाए, जानिए कैसे हुए हत्याकांड का खुलासा मारिया की बिल्डिंग के गार्ड ने पूछताछ में बताया कि मारिया 7 मई 2008 की शाम कुछ भारी बैग्स ले जाती दिखी थीं, उस समय उनके बॉयफ्रेंड जेरोम मैथ्यू भी साथ थे, जबकि पूछताछ में जेरोम ने कहा था कि वो मारिया की बिल्डिंग गए ही नहीं थे। विवेक की गुमशुदगी के करीब 2 हफ्ते बाद सख्ती करने पर मारिया ने कहा कि विवेक की हत्या हो चुकी है। जेरोम ने विवेक का कत्ल किया, फिर उन्होंने लाश के सामने एक्ट्रेस का रेप किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर लाश के टुकड़े किए और उन्हें ठिकाने लगाया। पूरी कहानी पढ़िए… ……………………………………………………………. पार्ट-1, फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए... पार्ट-2, जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं, उनके परिवार के 6 और लोग लापता हैं। एक साल तक लैला की कोई खबर नहीं मिली और फिर कश्मीर में एक बम ब्लास्ट हुआ, उस जगह के पास ही लैला की मां के नाम पर रजिस्टर्ड कार मिली। जांच में एक्ट्रेस लैला खान के सौतेले पिता परवेज टाक की गिरफ्तारी हुई। परवेज जांच टीम को फार्महाउस ले गया, जहां एक-एक कर 6 कंकाल बरामद किए गए। इनमें परिवार के पालतू कुत्ते का भी कंकाल था। 10 जुलाई 2012 को परवेज टाक को सदर्न मुंबई किला कोर्ट में पेश कर क्राइम ब्रांच ने कस्टडी ली। मामला गंभीर था, तो जांच टीम सख्ती करने से नहीं चूकी। हाथ-पैर बांधकर परवेज टाक को तबीयत से पीटा गया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर फार्महाउस से कंकाल निकाले गए। इससे पहले ही उसने फरवरी 2011 की रात की पूरी कहानी सुना दी थी। पूरी खबर पढ़िए…
विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना का रिसेप्शन आज हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में होने वाला है। कपल ने 26 फरवरी को उदयपुर में इंटिमेट वेडिंग की थी, जिसमें परिवार और करीबी लोग समेत महज 250 लोग ही मौजूद थे। अब कपल हैदराबाद में ग्रैंड रिसेप्शन दे रहा है, जिसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयाली और कन्नड़ इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियां शामिल होने वाली हैं। शादी में कई बड़े राजनेता भी शिरकत करेंगे। बिना वैलिड कार्ड के एंट्री पर रोक विजय-रश्मिका ने रविवार के आधिकारिक बयान करते हुए बताया है कि उनके रिसेप्शन में हाई-प्रोफाइल लोगों की मौजूदगी के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हैदराबाद के लोकल अधिकारियों से संपर्क कर अतिरिक्त सिक्योरिटी रखी गई है। गेस्ट लिस्ट को काफी लिमिटेड किया गया है। शादी में आने वाले सभी गेस्ट को ऑफिशियल वैलिड इनविटेशन कार्ड दिखाने के बाद ही एंट्री मिलेगी। अगर कार्ड नहीं हुआ तो एंट्री नहीं दी जाएगी। उदयपुर के आईटीसी ममेंटोस रिसोर्ट में हुई शादी विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना 26 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर में शादी के बंधन में बंध गए। दोनों की शादी एक प्राइवेट सेरेमनी में आईटीसी ममेंटोस रिसॉर्ट में हुई। शादी दो अलग परंपराओं से संपन्न हुई। सुबह तेलुगु रीति-रिवाजों से विवाह हुआ, जबकि शाम को रश्मिका की कोडवा परंपरा के अनुसार रस्में निभाई गईं। रश्मिका ने लाल साड़ी और सोने के आभूषण पहने, जबकि विजय ने आइवरी धोती और लाल अंगवस्त्रम धारण किया। देखिए विजय रश्मिका की शादी की तस्वीरें- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी शादी की शुभकामनाएं पीएम नरेंद्र मोदी ने रश्मिका और विजय को बधाई संदेश भेजा था। उन्होंने दोनों को आशीर्वाद दिया है। संदेश में ‘सखा सप्तपदी भव’ का जिक्र करते हुए कहा कि सात कदम साथ चलने के बाद दूल्हा-दुल्हन जीवन भर के साथी और सच्चे दोस्त बन जाते हैं। ये रिश्ता सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी होता है। उन्होंने इस बंधन को विश्वास और प्यार से भरी शुरुआत बताया। प्रधानमंत्री ने विजय और रश्मिका के फिल्मी सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा- विजय और रश्मिका दोनों ही अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट और कहानियों के लिए नए नहीं हैं, वह पर्दे पर जादू करना जानते हैं। लेकिन उनकी असल जिंदगी का यह नया अध्याय, जो प्यार और भरोसे से भरा है, निश्चित रूप से सिल्वर स्क्रीन पर उनके द्वारा बनाए गए जादू से भी कहीं ज्यादा चमकेगा। 24 फरवरी को हुई संगीत सेरेमनी विजय रश्मिका की संगीत सेरेमनी आईटीसी ममेंटोस रिसोर्ट में 24 फरवरी को हुई। इस दौरान विजय-रश्मिका ने कई डांस परफॉर्मेंस दी हैं। संगीत में रश्मिका मंदाना ने फाल्गुनी शेन का डिजाइनर लहंगा पहना था। देखिए संगीत सेरेमनी की तस्वीरें- प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन में कपल्स ने खेले गेम्स 26 फरवरी को हुई शादी से 2 दिन पहले 23 फरवरी को ही रश्मिका-विजय उदयपुर के ममेंटोज एकाय रिसोर्ट पहुंचे थे। यहां प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन हुआ। इस दौरान लड़के वालों और लड़की वालों के बीच गई गेम्स भी हुए। प्री-वेडिंग से लेकर हल्दी सेरेमनी तक की तस्वीरें भी उदयपुर से लगातार सामने आईं। देखिए प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन की तस्वीरें-

