रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर ‘रामायण’ के प्रचार को लेकर शनिवार को मुंबई के फिल्म सिटी स्थित प्राइम फोकस स्टूडियो में खास कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम का पहला समय दोपहर 12 बजे बताया गया था, जिसे बाद में दोपहर 1 बजे कर दिया गया। तय समय के अनुसार मीडिया कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया, लेकिन बातचीत शुरू होने में करीब साढ़े चार घंटे की देरी हुई। इस दौरान रणबीर कपूर, साई पल्लवी, निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी समेत फिल्म की टीम मौजूद थी। देरी की वजह मिस्टर बीस्ट के कार्यक्रम में देर से पहुंचने को बताया गया। पहले 12 बजे था कार्यक्रम का समय मीडिया को भेजे गए निमंत्रण में शुरुआत में कार्यक्रम का समय दोपहर 12 बजे बताया गया था। बाद में समय बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया गया। साथ ही जानकारी दी गई थी कि बातचीत दोपहर 1:30 बजे से शुरू होगी। पत्रकार और मीडिया प्रतिनिधि बदले हुए समय के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए थे। हालांकि, बातचीत तय समय पर शुरू नहीं हो सकी। करीब साढ़े चार घंटे करना पड़ा इंतजार कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मीडिया को बातचीत शुरू होने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान फिल्म की मुख्य टीम के कई सदस्य पहले से ही वहां मौजूद थे। रणबीर कपूर, साई पल्लवी, निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी के कार्यक्रम स्थल पर समय से पहुंचने की जानकारी थी। इसके बावजूद मीडिया से बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। मिस्टर बीस्ट की वजह से हुई देरी कार्यक्रम में मिस्टर बीस्ट की मौजूदगी को लेकर पहले से काफी उत्सुकता थी। उन्हें ‘रामायण’ की टीम के साथ विशेष बातचीत में शामिल होना था। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मीडिया को बताया गया कि मिस्टर बीस्ट इससे पहले दो उड़ानें मिस कर चुके थे और उनके देर से पहुंचने के कारण कार्यक्रम में देरी हुई। उनके पहुंचने के बाद ही फिल्म की टीम के साथ तय बातचीत आगे बढ़ी। मीडिया के समय को लेकर उठे सवाल करीब साढ़े चार घंटे के इंतजार के बाद मीडिया के बीच कार्यक्रम के प्रबंधन को लेकर नाराजगी देखने को मिली। सवाल यह भी उठा कि जब रणबीर कपूर, साई पल्लवी, नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी पहले से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे, तो उनके साथ बातचीत तय समय पर शुरू क्यों नहीं की गई। मीडिया के लिए आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों ने अपना समय निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रखा था। ऐसे में लंबे इंतजार को लेकर कई मीडिया प्रतिनिधियों में असंतोष देखने को मिला। मिस्टर बीस्ट के साथ रणबीर की बातचीत मिस्टर बीस्ट के पहुंचने के बाद ‘रामायण’ की टीम के साथ उनकी विशेष बातचीत हुई। रणबीर कपूर के साथ मिस्टर बीस्ट की बातचीत के वीडियो भी सामने आए हैं। मिस्टर बीस्ट को रणबीर ने बताया राम का परिचय इवेंट के दौरान एक पैपराजी ने मिस्टर बीस्ट से ‘जय श्री राम’ कहा। मिस्टर बीस्ट जवाब देने को लेकर असमंजस में दिखे, जिसके बाद रणबीर कपूर ने उन्हें ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए कहा। मिस्टर बीस्ट ने भी रणबीर की बात दोहराई। इसके बाद रणबीर ने मिस्टर बीस्ट को भगवान राम के बारे में बताते हुए कहा कि वे राजकुमार थे और उनके पास सब कुछ था, लेकिन पिता के वचन और अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए उन्होंने सब त्याग दिया। रणबीर ने कहा कि भगवान राम को एक आदर्श पुरुष के रूप में जाना जाता है और उम्मीद है कि फिल्म के जरिए मिस्टर बीस्ट को भारतीय संस्कृति और इतिहास की झलक मिलेगी। इवेंट में रणबीर ने उठाया शिव धनुष कार्यक्रम में रणबीर कपूर शिव धनुष उठाते हुए भी नजर आए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया। इवेंट में रणबीर के साथ साई पल्लवी, रवि दुबे, नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा भी मौजूद रहे। मिस्टर बीस्ट की मौजूदगी को फिल्म के अंतरराष्ट्रीय प्रचार अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी वैश्विक लोकप्रियता को देखते हुए निर्माताओं की कोशिश ‘रामायण’ को भारतीय दर्शकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की है। ‘रामायण’ में राम बने हैं रणबीर कपूर नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। साई पल्लवी माता सीता और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म में यश रावण और सनी देओल हनुमान की भूमिका में हैं। फिल्म को दो हिस्सों में रिलीज किया जाएगा। वैश्विक प्रचार पर निर्माताओं का जोर निर्माता नमित मल्होत्रा की फिल्म ‘रामायण’ को बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने की तैयारी है। मिस्टर बीस्ट के साथ यह विशेष कार्यक्रम भी इसी वैश्विक प्रचार अभियान का हिस्सा है।
‘बिग बॉस 20’ में रीति तिवारी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। ‘वीकेंड का वार’ में सलमान खान ने कहा कि बिग बॉस में आने से पहले उन्हें कोई नहीं जानता था। सलमान ने उन्हें मनोज तिवारी की बेटी बताते हुए ‘भाई-भतीजावाद’ का जिक्र किया। इसी बीच पंजाबी गायक एकम बावा ने दावा किया है कि उन्होंने रीति की मां रानी तिवारी से शादी की थी और वह रीति के सौतेले पिता हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सलमान ने रीति से कहा- आपको कोई नहीं जानता था बिग बॉस 20’ में रीति तिवारी लगातार चर्चा में हैं। घर में साथी प्रतियोगियों के साथ बहस और कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा है। इसी बीच ‘वीकेंड का वार’ में सलमान खान ने रीति को उनके व्यवहार और पहचान को लेकर फटकार लगाई। सलमान ने कहा कि बिग बॉस में आने से पहले रीति को कोई नहीं जानता था। उन्होंने कहा कि रीति शो में इसलिए आईं क्योंकि वह मनोज तिवारी की बेटी हैं। इस दौरान सलमान ने ‘भाई-भतीजावाद’ शब्द का इस्तेमाल किया। सलमान बोले- मनोज तिवारी की बेटी होने की वजह से आईं शो के प्रचार वीडियो में सलमान खान रीति से कहते नजर आ रहे हैं कि बिग बॉस में आने से पहले उन्हें कोई नहीं जानता था। इसके बाद वह कहते हैं कि रीति मनोज तिवारी की बेटी होने की वजह से शो में आई हैं और इसे ‘भाई-भतीजावाद’ बताते हैं। सलमान की यह टिप्पणी रीति के घर में हुए हालिया विवादों के बीच सामने आई है। इससे पहले उदिति सिंह और काजी तौकीर के साथ रीति की बहस भी चर्चा में रही थी। एकम बावा ने किया बड़ा दावा रीति तिवारी को लेकर अब एक और विवाद सामने आया है। पंजाबी गायक एकम बावा ने सोशल मीडिया पर रीति और उनकी मां रानी तिवारी को लेकर कई दावे किए हैं। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, एकम बावा ने दावा किया है कि वह रानी तिवारी के साथ रिश्ते में थे और बाद में दोनों ने शादी की। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह रीति के ‘कानूनी तौर पर पिता’ हैं। उन्होंने रीति और रानी के साथ अपनी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 2020 से 2025 तक साथ रहने का दावा एकम बावा के मुताबिक, वह 2020 से 2025 के बीच रानी तिवारी और रीति के साथ एक ही घर में रहे थे। उन्होंने दावा किया कि शादी से पहले वह और रानी 2020 से 2022 तक साथ रह रहे थे। बावा ने यह भी कहा कि रीति अपनी मां और उनके रिश्ते के बारे में जानती थीं। हालांकि, ये सभी बातें एकम बावा के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रीति के 25 हजार रुपए वाले दावे पर भी सवाल रीति तिवारी ने बिग बॉस के घर में अपने पिता मनोज तिवारी से मिलने वाली आर्थिक मदद के बारे में बात की थी। उन्होंने कथित तौर पर बताया था कि उन्हें हर महीने खर्च के लिए 25 हजार रुपए मिलते हैं। एकम बावा ने रीति के इस दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने रीति के महंगे हैंडबैग और गाड़ियों का जिक्र कर उनके आर्थिक संघर्ष के दावे को चुनौती दी। हालांकि, बावा के इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रानी तिवारी ने शादी की पुष्टि नहीं की आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, रानी तिवारी ने एकम बावा के साथ शादी की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने बावा के दावों पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी नहीं दी है। ऐसे में एकम बावा के रिश्ते और शादी से जुड़े दावों को फिलहाल उनके दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है। बिग बॉस में रीति के व्यवहार को लेकर पहले से विवाद बिग बॉस में आने के बाद रीति तिवारी अपने व्यवहार को लेकर भी चर्चा में रही हैं। दूसरे प्रतियोगियों के साथ हुई उनकी बहस के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अब ‘वीकेंड का वार’ में सलमान खान की टिप्पणी और बाहर एकम बावा के दावों के बाद रीति तिवारी से जुड़ा विवाद और बढ़ गया है। इस मामले में रीति तिवारी और रानी तिवारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
शुक्रवार को रिलीज हुई सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘द वन’ ने पहले दिन भारत में 8 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक, 6,746 शोज में रिलीज हुई फिल्म की ऑक्यूपेंसी 26% रही। फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन 9.6 करोड़ रुपए हो गया। वहीं अपने रिलीज के 50वें दिन भी ‘हनुमान अंश’ ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’, ‘वाइब’ जैसी कई फिल्मों से ज्यादा कमाई की। ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का निर्देशन ‘पंचायत’ फेम दीपक कुमार मिश्रा ने किया है। यह उनका फीचर फिल्म डायरेक्शन डेब्यू है। फिल्म भारतीय लोककथाओं पर आधारित है और इसमें सुपरनैचुरल फैंटेसी, पौराणिक कथाओं, एक्शन और थ्रिलर के एलिमेंट्स हैं। इस महीने रिलीज हुई करीना कपूर की ‘दायरा’ और कुणाल खेमू की ‘वाइब’ की तुलना में ‘द वन’ की शुरुआत बेहतर रही। दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ₹8 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ यह फिल्म एक्टर की पिछली 10 थिएट्रिकल रिलीज में दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म बन गई है। इस लिस्ट में ‘थैंक गॉड’ ₹8.10 करोड़ के साथ पहले स्थान पर है। ‘परम सुंदरी’ ने ₹7.25 करोड़, ‘मरजावां’ ने ₹7 करोड़ और ‘बार बार देखो’ ने ₹6.80 करोड़ की ओपनिंग की थी। फिल्म में तमन्ना भाटिया भी लीड रोल में हैं। यह सात साल बाद उनकी पहली हिंदी थिएट्रिकल फिल्म है, जिसमें वह लीड रोल में हैं। उनकी पिछली हिंदी फीचर फिल्म ‘खामोशी’ थी, जिसमें प्रभु देवा भी थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली थी। ‘खामोशी’ के बाद तमन्ना हिंदी फिल्मों में ज्यादातर स्पेशल सॉन्ग सीक्वेंस में नजर आईं। इनमें ‘स्त्री’ और ‘रेड 2’ शामिल हैं। ‘अवेंजर्स: एंडगेम’ से हुआ सामना ‘द वन’ को हिंदी बॉक्स ऑफिस पर सोलो रिलीज मिली। इसके साथ रिलीज हुई एकमात्र बड़ी फिल्म ‘अवेंजर्स: एंडगेम-एन्कोर’ थी। इसने भारत में सभी भाषाओं में 8.68 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिसमें इंग्लिश वर्जन की हिस्सेदारी 5.25 करोड़ रुपए रही। फिल्म को 3,635 शोज में दिखाया गया। ‘अवेंजर्स: एंडगेम - एन्कोर’ 2019 की मार्वल स्टूडियोज की फिल्म ‘अवेंजर्स: एंडगेम’ की थिएट्रिकल री-रिलीज थी। इसमें कुछ अतिरिक्त फुटेज जोड़ा गया था, जो कहानी को ‘अवेंजर्स: डूम्सडे’ से जोड़ता है। ‘डूम्सडे’ दिसंबर में रिलीज होने वाली है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का कलेक्शन ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 23वें दिन 503 शोज में चल रही है। फिल्म ने आज लाइव कलेक्शन के तौर पर 0.28 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। इसके साथ फिल्म का भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 266.70 करोड़ रुपए और कुल नेट कलेक्शन 224.08 करोड़ रुपए हो गया है। इससे पहले 25 सितंबर, 4वें शुक्रवार यानी 22वें दिन फिल्म ने 1.00 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया था। ‘हनुमान अंश’ ने 50वें दिन भी दिखाया दम भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शुक्रवार को कई फिल्मों के बीच ‘हनुमान अंश’ की कमाई चर्चा में रही। फिल्म ने रिलीज के 50वें दिन भी 3.35 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। वहीं, ‘वाइब’ ने शुक्रवार को ₹85 लाख, ‘दायरा’ ने ₹13 लाख और ‘लव लॉटरी’ ने करीब ₹9 लाख का नेट कलेक्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक, भारत में ‘हनुमान अंश’ का कुल नेट कलेक्शन 291.53 करोड़ रुपए हो गया है। भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 344.35 करोड़ रुपए पहुंच गया है। वहीं, ओवरसीज में 50वें दिन फिल्म ने 50 लाख रुपए कमाए। इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 37 करोड़ रुपए हो गया है। फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 381.35 करोड़ रुपए हो चुका है। नानी की फिल्म ‘द पैराडाइज’ ने दूसरे दिन भारत में 14.90 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। फिल्म को दूसरे दिन 7,049 शोज मिले। इसके साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 61.15 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन 72.50 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने 3 करोड़ रुपए कमाए। इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 25 करोड़ रुपए हो गया है। फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 97.50 करोड़ रुपए हो चुका है। वहीं, दूसरे दिन फिल्म के हिंदी वर्जन ने 1.50 करोड़ रुपए कमाए।
रक्षाबंधन से जुड़े एड में पहनावे के चलते विवादों में रहीं कृति सेनन ने अब देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे छेड़छाड़, रेप और शोषण के मामलों में पितृसत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये लड़ाई आदमियों और औरतों के बीच नहीं बल्कि उन औरतों के साथ भी है, जो पितृसत्ता को ही संस्कार मानती हैं। कृति सेनन ने बिना किसी घटना का जिक्र किए आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, यह लड़ाई पुरुषों और महिलाओं के बीच नहीं है। यह महिलाओं और पितृसत्तात्मक सोच के बीच की लड़ाई है। उन पुरुषों के खिलाफ, जो महिलाओं को कमतर समझते हैं और उन महिलाओं के खिलाफ भी, जो पितृसत्ता को ही संस्कार मान बैठी हैं। आगे कृति ने लिखा, ‘आखिर कब तक महिलाओं को ही यह सिखाया जाता रहेगा कि वे खुद को यौन हिंसा से कैसे बचाएं? पुरुषों को यह क्यों नहीं सिखाया जाता कि वे महिलाओं के साथ छेड़छाड़, यौन शोषण और जबरदस्ती न करें?’ ‘जब किसी नाबालिग के साथ बलात्कार होता है, तो सवाल यह क्यों नहीं पूछा जाता कि ऐसा करने वाला इंसान किस तरह की सोच रखता है? इसके बजाय आज भी लोग यही पूछते हैं कि लड़की ने क्या पहना था, वह कहां थी, किसके साथ थी, बाहर क्यों गई थी और उसके परिवार ने उसे ऐसा करने की इजाजत क्यों दी?’ इसके अलावा कृति ने लिखा, ‘महिलाओं को हर बार यह समझाना बंद कीजिए कि वे खुद को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा सावधान रहें। जरूरत पुरुषों को यह सिखाने की है कि वे महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आएं और अपनी मर्यादा में रहें। लड़कों को सहमति और सम्मान का मतलब सिखाइए। उन्हें अपने व्यवहार की जिम्मेदारी लेना सिखाइए। जो पुरुष गलत व्यवहार करते हैं, उनकी गलती का बोझ महिलाओं पर डालना बंद कीजिए।’ आएशा खान बोलीं- ये देखकर घिन आती है धुरंधर के गाने शरारत में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस ने भी कुछ समय पहले जमुई में लड़की के साथ हुई बर्बरता पर लिखा था, बिहार में जो हुआ, उसे देखकर मुझे सच में घिन आती है। सोचिए, जब लोग आपको घेरकर खड़े हों, आप डरे हुए हों, अपमानित महसूस कर रहे हों और लोग आपकी मदद करने के बजाय खड़े होकर आपका वीडियो बना रहे हों। इसे नैतिकता का नाम देना बंद कीजिए। उत्पीड़न को संस्कृति की आड़ में छिपाना बंद कीजिए। यह बेहद शर्मनाक और घिनौना है। दिशा पाटनी की बहन खुशबू बोलीं- कोई साथ घूमे तो आपत्ति क्यों खुशबू पाटनी ने 22 सितंबर को एक वीडियो शेयर कर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। खुशबू ने सवाल उठाया कि अगर कोई लड़का और लड़की अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं, साथ घूमना चाहते हैं या दोस्त बनना चाहते हैं, तो लोगों को इससे आपत्ति क्यों होनी चाहिए? जमुई केस के बारे में पढ़िए- 19 सितंबर को जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में 14 साल की छात्रा के साथ सड़क पर छेड़खानी और अभद्र व्यवहार किया गया था। इसका वीडियो 21 सितंबर को सामने आया। पुलिस के अनुसार, वीडियो की जानकारी 21 सितंबर को मिली, जिसके बाद पीड़िता की पहचान कर केस दर्ज किया गया। इसके लिए SIT बनाई गई। वीडियो में दिख रहे तीन नाबालिगों को पकड़ा गया, जबकि मुख्य आरोपियों के रूप में बताए जा रहे हरेराम यादव और नंदन यादव का 22 सितंबर को एनकाउंटर किया गया। एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने बताया कि छेड़खानी मामले में तीन नाबालिगों को पकड़ा गया है जबकि वीडियो वायरल करने के आरोप में रामाशीष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। पटना के मुख्य आरोपी नंदन यादव (लाल गमछा) और हरे राम यादव अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चल रहे वीडियो को टेकडाउन कराया गया है। आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने को लेकर दो दर्जन से अधिक लोगों, ट्विटर हैंडलर, फेसबुक और इंस्टाग्राम को चिन्हित किया गया है। वीडियो प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ भी POSCO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
सलमान खान ने रीति तिवारी को उदिति सिंह और काजी तौकीर के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर फटकार लगाई। बिग बॉस 20 के इस हफ्ते के वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान ने रीति से पूछा कि वह अपनी बातों पर गर्व क्यों कर रही हैं और कहा कि किसी का अपमान करने की भी एक लिमिट होनी चाहिए। दरअसल, हाल ही में एक डिस बैटल के दौरान रीति तिवारी ने उदिति सिंह और काजी तौकीर को लेकर टिप्पणी की थी। टास्क खत्म होने के बाद भी रीति अपने बयान पर कायम रहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने किए पर गर्व है और उन्हें भरोसा है कि उनके पिता भी उन पर गर्व करेंगे। सलमान ने पूछा- इस पर गर्व क्यों कर रही हैं? आने वाले वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान खान रीति के व्यवहार पर सवाल करते नजर आएंगे। सलमान ने कहा कि रीति काजी से जलती हैं और असुरक्षित महसूस करती हैं। इस पर रीति ने कहा कि वह काजी से नहीं जलतीं, बल्कि उन्हें एक व्यक्ति के तौर पर पसंद नहीं करतीं। इसके बाद सलमान ने टास्क के दौरान उदिति और काजी के खिलाफ की गई रीति की टिप्पणियों पर बात की। उन्होंने कहा, “डिस को भूल जाइए, मुझे समझ नहीं आता कि आपको इस पर गर्व क्यों है, लेकिन मुझे लगता है कि यह अब तक का सबसे खराब डिस था। किसी का अपमान करने की भी एक सीमा होनी चाहिए।” रीति ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा वह कहने का नहीं था, जो उन्होंने डिस के दौरान कहा। इस पर सलमान ने सवाल किया कि अगर उन्हें अपनी बात का मतलब ही नहीं पता था, तो उन्होंने ऐसी टिप्पणी क्यों की। सलमान ने बाकी घरवालों से भी सवाल किया सलमान ने घर के दूसरे सदस्यों से भी पूछा कि जब रीति लगातार ऐसी बातें कर रही थीं, तब किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। उन्होंने कहा, “क्या आपको नहीं लगा कि अपनी बातों से वह डिसरिस्पेक्ट की सीमा पार कर रही थीं? ये आपको चढ़ा रहे थे और ये चढ़ रही थीं।” सलमान ने आसिफ से भी इस मामले में सवाल किया। आसिफ ने रीति का समर्थन किया था, जब वह उदिति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर रही थीं। सलमान ने पूछा कि उन्होंने रीति को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। उन्होंने आसिफ से यह भी सवाल किया कि अगर यही डिस उनकी बहन को लेकर किया गया होता, तो क्या वह ऐसे शब्दों को बर्दाश्त करते। आखिर क्या था मामला? मामला बिग बॉस 20 के एक टास्क से शुरू हुआ। घर में दो टीमों के बीच एक-दूसरे को ‘डिस’ करने का टास्क रखा गया था। पहले रीति का मुकाबला उदिति सिंह से होना था। उदिति के इनकार के बाद काजी तौकीर सामने आए। टास्क के दौरान रीति ने उदिति और काजी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उनकी कुछ बातें शो के एडिट में म्यूट करनी पड़ीं। इसको लेकर घर में बहस भी हुई। रीति ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने ये शब्द सिर्फ राइमिंग के लिए इस्तेमाल किए थे। उन्होंने इन्हें स्लैंग बताया। मामला यहीं नहीं रुका। एक दूसरे टास्क के दौरान रीति ने काजी को धमकी भी दी। उन्होंने कहा, “अगर मेरे बाप आपको यह सब करते हुए देख लेते, तो आपको पता नहीं है आपका क्या हाल होता।” रीति ने काजी से यह भी कहा, तेरा म्यूट बटन दबा दूंगी मैं। कौन है तू, तू किससे बात कर रहा है? तेरे बाप की नौकर हूं? कौन हूं मैं, तू कौन है? मुझसे बात मत करना और मेरी तरफ देखना भी मत। शो में शामिल हो सकते हैं मनोज तिवारी इस बीच रीति के पिता और अभिनेता-राजनेता मनोज तिवारी के भी बिग बॉस 20 के वीकेंड का वार में पहुंचने की खबर है। इंडिया फोरम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मनोज तिवारी शो में अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर उनसे बात कर सकते हैं। इससे पहले पैपराजी से बातचीत में मनोज तिवारी से पूछा गया था कि क्या वह बिग बॉस 20 में अपनी बेटी का सफर देख रहे हैं। उन्होंने रीति के गेम को लेकर कहा था, “डर-डर के देखता हूं।” इससे पहले ‘बिग बॉस 20’ के प्रीमियर के एपिसोड में मनोज तिवारी नजर आए थे। वह रीति तिवारी को शो में छोड़ने पहुंचे थे। मनोज तिवारी गाना गाते हुए स्टेज पर पहुंचे थे। सलमान खान ने उन्हें दोबारा शो में आने को लेकर मजाक किया था। इस पर मनोज ने बताया था कि वह खुद कंटेस्टेंट बनने नहीं, बल्कि बेटी को शो में छोड़ने आए हैं। प्रीमियर के दौरान रीति को सलमान ने घर के अंदर होने वाले झगड़ों को लेकर सलाह दी थी। उन्होंने मजाक में कहा था कि अंडों को लेकर लड़ाई मत करना। इसके बाद सलमान ने कहा था, “ऐ बाप पे मत जाना।”
राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित हुईं ममता कुलकर्णी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने फिल्मी करियर, ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग और इंडस्ट्री से दूरी बनाने के फैसले पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अलवर में ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान, सलमान खान और पूरी टीम के साथ करीब एक महीने बिताया था। ममता ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ना उनके लिए मोहभंग नहीं, बल्कि भीतर से आई आध्यात्मिक जीवन की पुकार थी। ममता कुलकर्णी ने करीब 15 साल के फिल्मी करियर में 48 फिल्मों में काम किया। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाली ममता ने करियर के उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली थीं। राजस्थान लौटने पर उन्होंने अचानक इंडस्ट्री छोड़ने के फैसले और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़ाव पर खुलकर बातचीत की। सवाल: राजस्थान की धरती पर आपको लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जा रहा है। आप इस सम्मान को किस तरह देखती हैं? ममता कुलकर्णी: देखिए, मेरी 48 फिल्में रिलीज हुई हैं और मेरा करीब 15 साल का फिल्मी करियर रहा है। जिंदगी में भाग्य भी बहुत मायने रखता है। भगवान की कृपा और गुरु का आशीर्वाद रहा कि मेरे करियर में ज्यादातर फिल्में हिट या सुपरहिट रहीं। इसलिए जब इतने वर्षों बाद आपको कोई लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान देता है तो वह आपके पूरे सफर को याद करने जैसा होता है। मेरा फिल्मी सफर तमिलनाडु से शुरू हुआ था। मेरी पहली फिल्म एस. चंद्रशेखर की ‘ननबर्गल’ थी। इसके बाद मेरी दूसरी फिल्म ‘प्रेम शिकरम’ थी, जिसने काफी लोकप्रियता दिलाई। उन्होंने कहा कि नेल्लोर में लोगों ने मेरे नाम का मंदिर तक बना दिया था और इसकी खबर टाइम्स मैगजीन में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद मैं बॉलीवुड में आई। मेरी पहली हिंदी फिल्म ‘तिरंगा’ थी। फिर ‘आशिक आवारा’ ‘क्रांतिवीर’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘आंदोलन’, ‘करण अर्जुन’, ‘घातक’ और ‘नसीब’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। तो जब आज इतने वर्षों के बाद मुझे लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान मिल रहा है तो मेरे लिए यह बहुत भावुक पल है। सवाल: राजस्थान से आपका गहरा जुड़ाव रहा है। आपकी कई फिल्मों की शूटिंग यहां हुई और आपकी एक बेहद लोकप्रिय फिल्म का गाना भी राजस्थान में शूट हुआ। इस जुड़ाव को आप किस तरह देखती हैं? ममता कुलकर्णी: मुझे राजस्थान का खाना बहुत पसंद है। मुझे गट्टे की कढ़ी-चावल और बाजरे की रोटी मेरे पसंदीदा हैं। मेरी कई फिल्मों की शूटिंग राजस्थान में हुई। खास तौर पर ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग अलवर में हुई थी, जहां सलमान खान, शाहरुख खान और फिल्म के दूसरे कलाकारों के साथ वह करीब एक महीने तक रहीं। इसके बाद ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ का ‘भोली भाली लड़की’ वाला हिस्सा जयपुर में शूट हुआ था। ‘नसीब’ की शूटिंग उम्मेद भवन पैलेस में हुई। इसलिए राजस्थान मेरे लिए सिर्फ एक जगह नहीं है, बल्कि मेरे करियर की कई यादों से जुड़ा हुआ है। इतने साल बाद जब मैं राजस्थान वापस आई हूं तो अंदर से बहुत अच्छी और भावुक अनुभूति हो रही है। ऐसा लग रहा है जैसे अपने पुराने सफर के किसी हिस्से में वापस आ गई हूं। सवाल: ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग की कोई खास याद, खासकर शाहरुख खान या सलमान खान के साथ, जिसे आप दर्शकों के साथ साझा करना चाहेंगी? ममता कुलकर्णी: देखिए, उस समय हम सब नए थे। हम सभी अपने-अपने करियर में आगे बढ़ रहे थे और हमारे अंदर बहुत ज्यादा उत्साह और मेहनत करने की भूख थी। जब कोई कलाकार नया होता है तो उसके अंदर खुद को साबित करने की एक अलग ऊर्जा होती है। 1995 मेरे करियर के लिए भी बहुत खास साल रहा। उस साल मेरी करीब 11 फिल्में रिलीज हुई थीं। ‘आंदोलन’ आई, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ आई, आमिर खान के साथ ‘बाजी’ आई, ‘बेकाबू’ आई, ‘करण अर्जुन’ आई और उसके बाद ‘घातक’ जैसी फिल्में भी आईं। ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग के दौरान हम सभी ने जी-जान लगा दी थी। हम नए कलाकार थे और हमारे अंदर बहुत ज्यादा भूख थी कि कुछ अच्छा करना है, अपनी पहचान बनानी है। सुबह से लेकर शाम तक हम लोग बहुत मेहनत करते थे। इसलिए उस फिल्म की शूटिंग की बहुत सारी यादें आज भी मेरे साथ हैं। सवाल: करियर के चरम पर आपने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली। ऐसा क्या हुआ था? ममता कुलकर्णी: जिंदगी में एक समय आता है जब आपको लगता है कि अब कुछ और तलाशना है। मेरे जीवन में भी ऐसा ही समय आया। मेरे अंदर आध्यात्मिक जीवन को लेकर एक आवाज आई। मेरे गुरु मेरे जीवन में आए और उसके बाद मेरा रुझान अध्यात्म की तरफ बढ़ता चला गया। उस समय दुनिया के सबसे अमीर लोगों में ब्रुनेई के सुल्तान ने अपनी बेटी प्रिंसेस हमीदा के जन्मदिन पर मेरे लिए प्राइवेट जेट भेजा था। प्रिसेस मेरी प्रशंसक थीं। एक बार ब्रुनेई में प्रिंसेस हमीदा के जन्मदिन पर मैं गई थी। मैंने उनसे कहा था कि अक्टूबर में मैं शाहरुख के साथ एक शो के लिए आ रही हूं, तुम भी आना। इसके बाद जब हम अक्टूबर में वेम्बली स्टेडियम में शो करने पहुंचे तो मैं बैकस्टेज थी। तभी अली मोरानी दौड़ते हुए मेरे पास आए और बोले- ममता, ममता...। आपने जिस प्रिंसेस हमीदा को बुलाया था, वह अपनी मां और पूरी सिक्योरिटी के साथ आ गई हैं। उन्होंने स्टेडियम का एक पूरा हिस्सा सुरक्षा के लिए खाली करवा दिया था। वह अनुभव मेरे लिए बहुत अलग था। मैंने दुनिया का ग्लैमर, शोहरत और भौतिक जीवन बहुत करीब से देखा। शायद उसी के बाद मेरे भीतर अध्यात्म की तलाश और गहरी होती चली गई। सवाल: राजस्थान फिल्म फेस्टिवल क्षेत्रीय सिनेमा को एक बड़ा मंच देता है। आपको क्या लगता है कि क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करने की कितनी जरूरत है? ममता कुलकर्णी: बिल्कुल जरूरत है। फिल्म तो फिल्म होती है, चाहे वह किसी भी भाषा में बनाई गई हो। मैंने खुद कई भाषाओं में काम किया है। मेरी तीसरी फिल्म ‘शेष भोंक सो दो’ बंगाली भाषा की थी। उस समय मैं बहुत व्यस्त थी, लेकिन मुझे राष्ट्रपति की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार से जुड़ा पत्र भी मिला था कि आप आइए, हम आपको सम्मान देना चाहते हैं। मैं खुद एक बहुभाषी अभिनेत्री रही हूं। मेरी मातृभाषा मराठी है, लेकिन मैंने अभी तक मराठी में कोई फिल्म नहीं की। मैंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली सहित कई भाषाओं में काम किया है। भारत की खूबसूरती ही यही है कि यहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और कहानियां हैं। क्षेत्रीय सिनेमा इन्हीं कहानियों को सामने लाता है। इसलिए क्षेत्रीय फिल्मों और कलाकारों को मंच मिलना बहुत जरूरी है।
नई दिल्ली में शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर आयोजित भजन क्लबिंग कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। कार्यक्रम में फिल्म ‘हनुमान अंश’ के सिंगर साधु तिवारी ने ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ भजन पेश किया। इस दौरान मोदी खंजरी बजाते नजर आए। कार्यक्रम दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित किया गया था। सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पीएम मोदी भजन सुनते और खंजरी बजाकर ताल देते दिखाई दिए। इसके बाद फिल्म ‘हनुमान अंश’ के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने भी प्रस्तुति दी और हनुमान चालीसा का पाठ किया। ‘पार्वती’ गाने वाले साधु तिवारी कौन हैं? ‘हनुमान अंश’ के ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ भजन को साधु एस. तिवारी ने आवाज देने के साथ इसके बोल और संगीत भी तैयार किए हैं। गाने में भगवान शिव और माता पार्वती की कथा को आसान शब्दों और देसी अंदाज में पेश किया गया है। साधु तिवारी ग्वालियर के पास करहिया गांव के रहने वाले हैं। शुरुआती पढ़ाई गांव में करने के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए ग्वालियर आए। उन्होंने ग्वालियर के साइंस कॉलेज और कैंसर हॉस्पिटल से पढ़ाई की। संगीत की शिक्षा उन्होंने अपने गुरु संजय देवले से ली। साधु ने न्यूज नेशन को दिए इंटरव्यू में बताया कि वह पिछले करीब 15-17 साल से संगीत के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। हालांकि, उनका सफर सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने एक प्राइवेट कॉलेज में बायोकैमिस्ट्री के लेक्चरर के तौर पर भी काम किया। करीब चार साल तक उन्होंने छात्रों को पढ़ाया। इसके अलावा उन्होंने अलग-अलग जगहों पर प्राइवेट नौकरियां भी कीं। इसके बाद 2010 में साधु मुंबई पहुंचे। यहां उनकी मुलाकात म्यूजिक डायरेक्टर संदेश शांडिल्य से हुई। साधु ने कुछ समय तक उनके साथ असिस्टेंट के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्हें फिल्मों में काम करने के मौके मिलने लगे। साधु ने कई फिल्मों के लिए काम किया। इनमें माधुरी दीक्षित की ‘गुलाब गैंग’ भी शामिल है। उन्होंने फिल्म के लिए ‘मौज की मलारे’ गाना गाया। वह इसके वीडियो में भी नजर आए थे। इसके अलावा उन्होंने ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के लिए भी काम किया। साधु के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी उनके पुराने दोस्त हैं। विशाल ने उन्हें गाने की सिचुएशन बताई थी। इसके बाद साधु ने उसी हिसाब से गाना तैयार किया। साधु ने बताया कि वह इससे पहले भी कई फिल्मों के लिए गाने बना चुके हैं। फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी पिछले करीब 7-8 साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। वह एक ऑनलाइन यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं। उनके क्लब में करीब 10 हजार लोग रोज हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। साधु के मुताबिक, विशाल का हनुमान चालीसा से लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है। कौन हैं विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। ये उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2012 की वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। वह टीवी सीरीज और फिल्मों के डायलॉग राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कमाई सैकनिल्क के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने रिलीज के 50वें दिन भारत में 3.35 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। इस दिन फिल्म के 3,767 शोज हुए। इसके साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 291.53 करोड़ रुपए हो गया है। भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 344.35 करोड़ रुपए पहुंच गया है। वहीं, ओवरसीज में 50वें दिन फिल्म ने 50 लाख रुपए कमाए। इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 37 करोड़ रुपए हो गया है। सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 381.35 करोड़ रुपए हो चुका है। ‘हनुमान अंश’ दो राज्यों में टैक्स फ्री, अमित शाह से मिली थी फिल्म की टीम फिल्म ‘हनुमान अंश’ को उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री किया गया है। फिल्म बाबा नीम करोली के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म देखने के बाद इसे राज्य में टैक्स फ्री करने का ऐलान किया था। फिल्म की सफलता के बीच 21 सितंबर को निर्देशक विशाल चतुर्वेदी, लीड एक्टर शोभिनव सतैया और टीम के दूसरे सदस्य दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे।
गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा ने कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में अपने निजी जीवन की परेशानियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में भी कुछ राक्षस हैं और मां काली से उनसे मुक्ति की प्रार्थना की। दरअसल, दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सुनीता आहूजा ने कहा कि मैं आज दक्षिणेश्वर काली माता रानी का दर्शन करने आई हूं। आप सब जानते हैं कि महाकाली राक्षसों का नाश करती हैं। मेरे भी जीवन में कुछ राक्षस हैं, माता द्वारा बोलने आई हूं कि उनका भी नाश करें। सुनीता ने कथित तौर पर मीडिया में चल रही चर्चाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, मीडिया में आने के चक्कर में वो पब्लिसिटी कर रहे हैं और मैं चाहती हूं, हाथ जोड़ के मैं विनती करती हूं मीडिया से भी कि आप लोग इन सबको सपोर्ट न करें। अगर आपके घर की बेटी हो या आपकी बहू हो, ये सब दिन देखना होता तो आप लोग क्या करते? उन्होंने आगे कहा कि जो मेरे साथ हो रहा है वो अच्छा नहीं हो रहा है, ये घर मेरा टूट रहा है बिना किसी मतलब और मैं चाहती हूं आप सब औरतें मेरे लिए स्टैंड लें, सारे जेन-जी बच्चे मेरे लिए स्टैंड लें और मीडिया से दरख्वास्त करती हूं कि प्लीज ये चीज को आप आगे न बढ़ाएं। आप लोग को भी कायदे से मुझे सपोर्ट करना चाहिए। मैं माता से यही मांगने आई हूं कि जो मेरा घर बर्बाद कर रही है, माता उसे देखें। वो राक्षसों का नाश करने वाली माता रानी हैं, और मैं चाहती हूं मेरे जीवन से ये संकट हट जाए। जय मां काली, जय मां काली। गोविंदा सात साल बाद कमबैक कर रहे हैं गौरतलब है कि गोविंदा लगभग 7 साल बाद फिल्म 'रूपा' से बॉलीवुड में कमबैक कर रहे हैं। इस फिल्म में उनकी सह-कलाकार कोमल रानी स्वर्णकार हैं। पिछले कुछ समय से गोविंदा का नाम कोमल रानी के साथ जोड़ा जा रहा है और दोनों को कई मौकों (जैसे एयरपोर्ट और मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन) पर एक साथ देखा गया है, जिससे उनके अफेयर की चर्चाओं को हवा मिली। वहीं इन अफवाहों पर रिएक्शन देते हुए गुरुवार को गोविंदा ने कहा कि उनकी निजी जिंदगी किसी और के लिए चिंता या चर्चा का विषय नहीं होनी चाहिए। ANI को दिए इंटरव्यू में गोविंदा ने कहा कि यह किसी और के लिए चर्चा का विषय नहीं है, भले ही कोई अफेयर हो। मैं सिर्फ काम कर रहा हूं और एक पेशेवर रिश्ता बनाए हुए हूं। गोविंदा के मुताबिक, लोग बिना वजह उनकी निजी जिंदगी को निशाना बना रहे हैं, जबकि उन्हें सिर्फ अपने काम से मतलब रखना चाहिए। फिल्म 'रूपा' के लिए प्रार्थना करने पहुंचे थे कोमल रानी स्वर्णकार के साथ गणपति पंडाल में दिखने पर सफाई देते हुए गोविंदा ने बताया कि वे अपनी आने वाली फिल्म रूपा के लिए लालबागचा राजा के दरबार पहुंचे थे। इस फिल्म में गोविंदा के साथ कोमल रानी मुख्य भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा, इससे पहले भी मैं करिश्मा कपूर और रवीना टंडन के साथ मंदिरों में गया था और वे फिल्में बहुत बड़ी हिट साबित हुई थीं। मैं लंबे समय बाद नया काम शुरू कर रहा हूं, इसलिए प्रार्थना करने गया था। परिवार से दूर करने और इमेज खराब करने की साजिश इंटरव्यू में गोविंदा ने अपने खिलाफ चल रही बातों को एक सोची-समझी चाल करार दिया। उन्होंने कहा, यह किसी एक इंसान की गलती नहीं है, बल्कि बहुत सोच-समझकर बनाई गई योजना है। ऐसी चीजें आगे भी हो सकती हैं। यह मुझे मेरे परिवार से अलग करने और समाज में मेरी छवि खराब करने का प्लान है। गोविंदा ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और आगे भी काम करते रहेंगे। सुनीता आहूजा बोलीं- इंसान धोखा ही देते हैं गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा को अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार के साथ दिखने के बाद सुनीता आहूजा का एक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने इंसानों को धोखेबाज बताते हुए जानवरों से प्यार को बेहतर बताया। हालांकि, सुनीता ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया था। दरअसल, मुंबई एयरपोर्ट पर पैपराजी से बातचीत के दौरान सुनीता अपने पालतू कुत्ते विंटर के साथ थीं। पैपराजी से बात करते हुए सुनीता ने कहा कि इंसानों को जितना भी प्यार करो, कोई फायदा नहीं है। धोखा ही देते हैं। इनको प्यार करो, देखो, हमेशा चिपके रहते हैं। जानवरों से प्यार करो, इंसानों से नहीं। धोखेबाज होते हैं इंसान।
साल 1943 की बात है। एक युवा लड़का अपने सपनों को पूरा करने के लिए लाहौर से मुंबई पहुंचा। जेब में सिर्फ 30 रुपए थे और रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था। फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने का सपना था, लेकिन सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि मुंबई जैसे शहर में गुजारा कैसे हो। शुरुआत में उसे चॉल में रहना पड़ा। कुछ दिन बीते तो पैसे खत्म होने लगे। फिल्मों में काम मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। आखिरकार पेट पालने के लिए उसे नौकरी करनी पड़ी। मिलिट्री सेंसर ऑफिस में क्लर्क की नौकरी मिली, जहां वह ब्रिटिश सरकार के लिए मिलिट्री सेंसर का काम करते थे। उसे महीने की 65 रुपए तनख्वाह मिलती थी। लेकिन जिस लड़के के पास मुंबई पहुंचने के लिए सिर्फ 30 रुपए थे, उसने हार नहीं मानी। कुछ साल बाद वही शख्स हिंदी सिनेमा का ऐसा सितारा बना, जिसे लोग ‘एवरग्रीन स्टार’ कहने लगे। हम बात कर रहे हैं देव आनंद की और उनकी 103वीं बर्थ एनिवर्सरी पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें… पिता स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए थे देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को ब्रिटिश भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले में धर्मदेव पिशोरीमल आनंद के रूप में हुआ था। उनके पिता पिशोरी लाल आनंद गुरदासपुर में वकील थे और स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े थे। देव आनंद चार भाइयों में तीसरे थे। उनके भाई चेतन आनंद और विजय आनंद भी फिल्म जगत से जुड़े रहे, जबकि उनकी बहन शील कांता कपूर फिल्म निर्देशक शेखर कपूर की मां थीं। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई डलहौजी के सेक्रेड हार्ट स्कूल से की और बाद में लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में बीए किया। पिता ने पढ़ाई के लिए पैसे देने से मना कर दिया था देव आनंद आगे पढ़ना चाहते थे और उच्च शिक्षा के लिए लंदन जाने का सपना देखते थे, जबकि उनके पिता चाहते थे कि वह किसी बैंक में नौकरी कर लें, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनकी आगे की पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके। पिता ने साफ कह दिया कि अब उनकी पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं। इसके बाद देव आनंद ने तय किया कि अगर जिंदगी में संघर्ष करना ही है, तो क्यों न अपने बचपन के सपने एक्टिंग के लिए संघर्ष किया जाए। इसी सपने को पूरा करने के लिए जून 1943 में वह लाहौर से ट्रेन पकड़कर मुंबई के लिए निकल पड़े। शुरुआत में काम नहीं मिला और पैसे खत्म हो गए तो उन्होंने चर्चगेट स्थित मिलिट्री सेंसर ऑफिस में 65 रुपए मासिक वेतन पर नौकरी की। बाद में एक अकाउंटिंग फर्म में 85 रुपए की तनख्वाह पर क्लर्क का काम भी किया। अभिनेता बनने की इच्छा उन्हें अशोक कुमार की फिल्मों से मिली। मिलिट्री सेंसर ऑफिस में करीब एक साल तक नौकरी करने के बाद देव आनंद अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास चले गए। चेतन उस समय भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा से जुड़े थे। उन्होंने छोटे भाई को भी अपने साथ जोड़ लिया। यहां से देव आनंद को थिएटर में काम करने और अभिनय सीखने का मौका मिला। फिर किस्मत ने साथ दिया। साल 1946 में उन्हें प्रभात टॉकीज की फिल्म ‘हम एक हैं’ में काम करने का मौका मिला। शर्ट की अदला-बदली, शुरू हुई देव आनंद और गुरु दत्त की दोस्ती फिल्म ‘हम एक हैं’ में देव आनंद बतौर हीरो काम कर रहे थे, जबकि गुरु दत्त वहां असिस्टेंट डायरेक्टर और कोरियोग्राफर के तौर पर काम कर रहे थे। स्टूडियो के सभी लोगों के कपड़े एक ही धोबी के पास जाते थे। एक दिन धोबी से ऐसी गलती हुई कि देव आनंद की सफेद शर्ट गुरु दत्त के कपड़ों के साथ चली गई। गुरु दत्त ने वह शर्ट पहन ली और स्टूडियो पहुंच गए। जब देव आनंद ने अपनी शर्ट गुरु दत्त के शरीर पर देखी, तो दोनों का आमना-सामना हुआ। लेकिन शर्ट को लेकर कोई नाराजगी नहीं हुई। दोनों इस अजीब संयोग पर खूब हंसे। यही छोटी-सी घटना आगे चलकर उनकी गहरी दोस्ती की शुरुआत बन गई। दोनों ने बाद में साथ काम भी किया। देव आनंद ने गुरु दत्त को फिल्म ‘बाजी’ के निर्देशन का मौका दिया। 1951 में रिलीज हुई यह फिल्म गुरु दत्त के निर्देशन करियर की महत्वपूर्ण शुरुआत बनी और देव आनंद के साथ उनकी दोस्ती भी सिनेमा के पर्दे पर नजर आई। फिल्म ‘जिद्दी’ ने देव आनंद के करियर की दिशा बदल दी। अशोक कुमार ने उन्हें इस फिल्म में काम करने का मौका दिया। फिल्म सफल रही और देव आनंद को पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने सिर्फ अभिनेता बनकर रुकने के बजाय खुद फिल्में बनाने का फैसला किया। 1949 में बड़े भाई चेतन आनंद के साथ नवकेतन फिल्म्स की शुरुआत की। इसी बैनर के तहत बनी ‘बाजी’ 1951 में रिलीज हुई। यह फिल्म सफल रही और देव आनंद की स्टार इमेज और मजबूत हो गई। 1950 के दशक में देव आनंद की कई फिल्में सफल रहीं। ‘जाल’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘सीआईडी’, ‘पेइंग गेस्ट’ और ‘काला पानी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़े सितारों की कतार में खड़ा कर दिया। उनका बोलने का तेज अंदाज, संवाद अदायगी और कैमरे के सामने खास स्टाइल दर्शकों को पसंद आया। वह जिस तरह बात करते समय सिर हिलाते थे, वह भी उनकी पहचान बन गया। ‘गाइड’ ने करियर को दी नई पहचान 1960 का दशक देव आनंद के रोमांटिक हीरो वाले दौर के लिए खास रहा। ‘हम दोनों’, ‘तेरे घर के सामने’, ‘ज्वेल थीफ’ और ‘गाइड’ जैसी फिल्मों ने उनके स्टारडम को और मजबूत किया। 1965 में रिलीज हुई ‘गाइड’ उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हुई। फिल्म में उनके साथ वहीदा रहमान थीं। यह फिल्म आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी और इसके फिल्म रूपांतरण में देव आनंद की महत्वपूर्ण भूमिका थी। फिल्म में उन्होंने एक ऐसे किरदार को निभाया, जो साधारण रोमांटिक हीरो की उनकी छवि से काफी अलग था। ‘गाइड’ ने उन्हें एक गंभीर अभिनेता के तौर पर भी स्थापित किया। हालांकि, डीडी नेशनल को दिए एक इंटरव्यू में देव आनंद ने फिल्म ‘गाइड’ को लेकर बताया था कि जब उन्होंने इस फिल्म की योजना बनाई थी, तब कई लोगों ने उन्हें पागल तक कहा था। देव आनंद के मुताबिक, लोगों को लगता था कि फिल्म सेंसर बोर्ड से पास नहीं होगी, क्योंकि इसकी कहानी में एडल्टरी यानी विवाहेतर संबंध का एंगल था। इसके अलावा उनकी रोमांटिक हीरो की इमेज को देखते हुए लोगों को यह भी डर था कि दर्शक उन्हें एक साधु के किरदार में स्वीकार नहीं करेंगे। देव आनंद ने बताया था कि फिल्म को लेकर शुरुआत में काफी आशंकाएं थीं। रिलीज के समय फिल्म को वैसी सफलता नहीं मिली और इसे बेचना भी मुश्किल हो रहा था। हालांकि, समय के साथ ‘गाइड’ को दर्शकों और आलोचकों के बीच अलग पहचान मिली और बाद में यह कल्ट फिल्म बन गई। नाव पलटी और शुरू हुई सुरैया से प्रेम कहानी देव आनंद और सुरैया की प्रेम कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित और अधूरी प्रेम कहानियों में से एक है। देव आनंद और सुरैया की प्रेम कहानी की शुरुआत फिल्म ‘विद्या’ की शूटिंग के दौरान हुई। एक गाने की शूटिंग के दौरान नाव पलट गई और सुरैया पानी में गिर गईं। देव आनंद ने उन्हें बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी। इस घटना के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। देव आनंद ने बाद में एक इंटरव्यू में सुरैया को अपनी जिंदगी का पहला सच्चा प्यार बताया था। फिल्म ‘जीत’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया। देव आनंद के मुताबिक, सुरैया ने उनका प्रस्ताव स्वीकार भी कर लिया था। देव आनंद ने सुरैया को 3,000 रुपए की हीरे की अंगूठी भेजी थी। इस अंगूठी को लेकर बाद में कई किस्से सामने आए। कहा गया कि सुरैया ने इसे समुद्र में फेंक दिया था। हालांकि, देव आनंद ने खुद कहा था कि उन्हें नहीं पता कि अंगूठी के साथ वास्तव में क्या हुआ था। परिवार को मंजूर नहीं था रिश्ता दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन सुरैया का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। देव आनंद ने सिमी गरेवाल के शो में बताया था कि उन्हें लगता था कि परिवार नहीं चाहता था कि सुरैया एक हिंदू युवक से शादी करें। देव आनंद के मुताबिक, सुरैया अपनी नानी और परिवार के काफी करीब थीं। उनकी नानी भी सुरैया के साथ शूटिंग पर मौजूद रहती थीं। एक फिल्म के सीन में देव आनंद को सुरैया की आंखों पर किस करना था। उस समय ऐसे सीन को लेकर सेंसर की आपत्तियां होती थीं। सुरैया की नानी सेट पर मौजूद थीं और वहां से हट नहीं रही थीं। देव आनंद ने बताया था कि शूटिंग टीम ने किसी तरह उन्हें कुछ देर के लिए सुरैया को बाहर ले जाकर बातचीत करने के लिए राजी किया। उनके जाते ही देव आनंद और सुरैया ने वह सीन जल्दी से शूट कर लिया। ‘मैं रोया और फिर खुद को मजबूत किया’ सिमी गरेवाल ने जब देव आनंद से पूछा कि क्या सुरैया ने कभी उन्हें बताया था कि परिवार शादी के खिलाफ है, तो उन्होंने कहा कि सुरैया ने उनसे कभी सीधे तौर पर ऐसा नहीं कहा। हालांकि, बाद में उन्हें महसूस हुआ कि वह परिवार के दबाव में थीं। एक समय ऐसा भी आया जब देव आनंद सुरैया से सीधे मुलाकात नहीं कर पा रहे थे। उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति के जरिए सुरैया को चिट्ठियां भेजनी पड़ती थीं। इस स्थिति से वह बेहद निराश हुए। उन्होंने बताया था कि वह रोए, लेकिन इसके बाद खुद को संभाला और जिंदगी में आगे बढ़ गए। उनके रिश्ते को लेकर उस समय अखबारों में भी काफी चर्चा हुई थी। देव आनंद ने बताया था कि उन्होंने लोगों ने कहा था कि सुरैया को शादी न करने के लिए कुरान की कसम भी दिलाई गई थी। हालांकि, उन्होंने कभी सुरैया से इसकी पुष्टि नहीं की थी। सुरैया के निधन पर भी नहीं गए अस्पताल देव आनंद ने बताया था कि सुरैया से रिश्ता खत्म होने के बाद उनकी मुलाकात उनसे केवल एक-दो बार हुई। इसके बाद दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए। जब सुरैया के निधन की खबर देव आनंद को मिली, तो वह काफी दुखी हुए। उन्होंने बताया था कि सुरैया अस्पताल में थीं, लेकिन वह उनसे मिलने नहीं गए। उनका कहना था कि वह अपने निजी दुख को दुनिया के सामने नहीं लाना चाहते थे। उन्हें डर था कि मीडिया उनके आसपास जमा हो जाएगा और उनसे लगातार सवाल पूछेगा। सुरैया से अलग होने के बाद कल्पना कार्तिक से शादी समय आगे बढ़ा और देव आनंद की जिंदगी में अभिनेत्री मोना सिंह आईं, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कल्पना कार्तिक के नाम से जाना जाता था। फिल्म 'टैक्सी ड्राइवर' (1954) की शूटिंग के दौरान दोनों को एक-दूसरे से प्यार हुआ। दोनों ने शूटिंग के लंच ब्रेक के दौरान सेट पर ही बेहद सादगी से गुपचुप तरीके से शादी कर ली और ब्रेक खत्म होने के बाद वापस कैमरे के सामने आकर शॉट देने लगे। देव आनंद का काला कोट उनके स्टाइल की पहचान बना था देव आनंद का काला कोट उनके स्टाइल की पहचान बन गया था। 1958 में आई फिल्म काला पानी में सफेद शर्ट और काले कोट में उनका लुक काफी पसंद किया गया। इसके बाद एक किस्सा खूब चर्चित हुआ। कहा गया कि लड़कियां देव आनंद की एक झलक पाने के लिए बेकाबू हो जाती थीं। यहां तक कि कुछ लड़कियों के छत से कूदने की बातें भी सामने आईं। इसी वजह से दावा किया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने देव आनंद के सार्वजनिक जगहों पर काला कोट पहनने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, इस दावे का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिलता। देव आनंद ने अपनी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ में इस कहानी को बेवकूफी भरा मिथक बताया था। अभिनय के बाद निर्देशन की ओर बढ़े 70 के दशक में देव आनंद ने निर्देशन की ओर भी कदम बढ़ाया। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ थी। फिल्म को शुरुआत में बॉक्स ऑफिस पर खास सफलता नहीं मिली, लेकिन समय के साथ इसे अलग पहचान मिली। इसके बाद 1971 में आई ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ ने उन्हें निर्देशक के तौर पर बड़ी सफलता दी। फिल्म में जीनत अमान भी थीं। इस फिल्म के बाद जीनत अमान रातोंरात चर्चित हो गईं। देव आनंद ने आगे भी अभिनय के साथ निर्देशन और निर्माण का सिलसिला जारी रखा। देव आनंद उन कलाकारों में थे जिन्होंने उम्र बढ़ने के बावजूद फिल्मों में बतौर हीरो काम करना जारी रखा। ‘अमीर गरीब’, ‘वारंट’, ‘हीरा पन्ना’, ‘डार्लिंग डार्लिंग’ और ‘देस परदेस’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया। 1978 में आई ‘देस परदेस’ की सफलता के बाद उनके लिए ‘एवरग्रीन स्टार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल होने लगा। 80 के दशक में भी उन्होंने ‘मन पसंद’, ‘लूटमार’, ‘स्वामी दादा’, ‘हम नौजवान’ और ‘लश्कर’ जैसी फिल्मों में काम किया। वह नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ भी लगातार काम करते रहे और अपनी फिल्म निर्माण कंपनी के जरिए नए लोगों को मौके देते रहे। नवकेतन के जरिए नई प्रतिभाओं को मौका देव आनंद के लिए नवकेतन सिर्फ एक प्रोडक्शन हाउस नहीं था। यह उनके लिए नए विचारों और नई प्रतिभाओं को मौका देने का जरिया भी था। उन्होंने अपने करियर में अभिनय के साथ फिल्म निर्माण और लेखन पर भी काम किया। उन्होंने करीब 35 फिल्मों का निर्माण किया और 13 फिल्मों की कहानियां भी लिखीं। 2011 में आई ‘चार्जशीट’ उनकी आखिरी फिल्म थी, जिसे उन्होंने निर्देशित और प्रोड्यूस किया था। 3 दिसंबर 2011 को 88 साल की उम्र में लंदन में उनका निधन हो गया। उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2002 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ………………… यह खबर भी पढ़ें… अमजद खान की पुण्यतिथि:डिलीवरी के बाद बीवी को घर लाने के पैसे नहीं थे; ₹1.27 करोड़ की फीस अटकी, परिवार ने अंडरवर्ल्ड की मदद ठुकराई ‘मैं वो आदमी था, जो रोज 4–5 घंटे कसरत करता था। बैडमिंटन खेलता था, फ्री-हैंड एक्सरसाइज करता था, वेट उठाता था... लेकिन फिर एक एक्सीडेंट हुआ और मैं तीन महीने तक बिस्तर पर पड़ा रहा।’ एक पुराने इंटरव्यू में दिवंगत एक्टर अमजद खान ने अपनी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दौर याद करते हुए यह बात कही थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने फिल्म इंडस्ट्री के अपने कड़वे अनुभवों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। नयनदीप रक्षित को दिए इंटरव्यू में तापसी ने बताया कि उन्हें एक बार फिल्म की शूटिंग की तारीखें पक्की होने के बाद भी सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि फिल्म के हीरो की पत्नी उन्हें पसंद नहीं करती थीं। तापसी के मुताबिक, जब उन्होंने फिल्म से बाहर किए जाने की वजह पूछी तो मेकर्स ने उन्हें यही कारण बताया। उन्होंने किसी एक्टर या फिल्म का नाम लिए बिना कहा कि करियर की शुरुआत में उन्हें बिना वजह रिप्लेस करने का सामना करना पड़ा था। 'हीरो की पत्नी को मैं पसंद नहीं थी' बातचीत में तापसी ने फिल्म से निकाले जाने का वाकया शेयर किया। तापसी ने कहा, मुझसे कहा गया कि फिल्म के हीरो ने मुझे रिप्लेस कर दिया है। भगवान ही वजह जानता है। मैं वजहों का अंदाजा लगाती रहती हूं। शायद उसमें असुरक्षा की भावना थी या वह किसी ऐसे इंसान को फिल्म में चाहता था जो उसके ज्यादा करीब हो। मुझे कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। जब मैं बार-बार बाहर किए जाने का कारण पूछती रही, तो मुझे सिर्फ इतना कहा गया कि हीरो मुझे फिल्म में नहीं चाहता। तापसी ने आगे बताया, मुझे रिप्लेस करने की सबसे घटिया वजह यह दी गई कि 'हीरो की पत्नी तुम्हें पसंद नहीं करती।' मुझे आज तक नहीं पता कि वह मुझे पसंद क्यों नहीं करती थी। सीन्स को हाइपर-सेक्सुअलाइज किया जाता था तापसी ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में सीन्स के शूटिंग पर भी बात की। उन्होंने कहा, जब आप नए होते हैं, तो आपको नहीं पता होता कि पर्दे पर किसी सीन को हाइपर-सेक्सुअलाइज किया जा रहा है। शूटिंग के वक्त यह समझ नहीं आता कि सीन किस तरफ जा रहा है। मुझे लगता था कि यह सीन बहुत एस्थेटिक होगा, लेकिन जब स्क्रीन पर देखा तो लगा कि इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि आसपास के लोग कहते थे कि यह नॉर्मल है और सब ऐसा कर रहे हैं, इसलिए उन्हें लगा कि यह काम का हिस्सा है। बाद में समझ आया कि ग्लैमरस दिखे बिना भी काम किया जा सकता है और ग्लैमर के लिए हाइपर-सेक्सुअलाइजेशन जरूरी नहीं है। 'बचने के लिए फिल्मों को खुद रिजेक्ट कर रही हूं' इससे पहले न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में तापसी ने फिल्मों के चयन और एक ही तरह के रोल्स मिलने पर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में ग्लैमरस और गंभीर मुद्दों वाली फिल्मों के लिए अलग-अलग 5-5 एक्ट्रेसेस का सेट तय कर दिया गया है। तापसी ने कहा, मैंने इसी वजह से फिल्में रिजेक्ट करना शुरू कर दिया है। मैं मेकर्स से साफ कह देती हूं कि दर्शक फिल्म का अंत आसानी से भांप लेंगे, इसलिए मुझे इस फिल्म में कास्ट न करें। मैं खुद मेकर्स को मना कर देती हूं ताकि एक ही तरह के रोल में न बंध जाऊं। 'गांधारी' फिल्म में नजर आईं एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने बॉलीवुड में 'पिंक', 'थप्पड़', 'हसीन दिलरुबा', 'शाबाश मिठू' और 'डंकी' जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल ही में वे फिल्म 'गांधारी' में नजर आई हैं। ये खबर भी पढ़ें नेटफ्लिक्स पर कहानी चोरी का आरोप:राइटर बोले- चोरी कर बनाई गई तापसी पन्नू की फिल्म 'गांधारी'; कंपनी को भेजा लीगल नोटिस तापसी पन्नू स्टारर अपकमिंग फिल्म 'गांधारी' के 3 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्क्रीनराइटर कल्याण बंदी ने नेटफ्लिक्स इंडिया और उसकी कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल पर कहानी चोरी का आरोप लगाया है। पूरी खबर पढ़ें
एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी जयपुर में अपने फेमस गाने पर डांस करती दिखीं। खास बात यह रही कि ममता ने सिर्फ मंच पर प्रस्तुति नहीं दी, बल्कि स्टूडेंंट्स के बीच जाकर उनके साथ भी कदम मिलाए। महारानी कॉलेज की छात्राओं के साथ उन्होंने अपने लोकप्रिय गानों पर डांस किया और कुछ गीत गाकर भी सुनाए। ममता कुलकर्णी राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के तहत शुक्रवार को मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में आयोजित आरएफएफ सोशल स्पॉटलाइट 2026 और इंटर स्कूल-कॉलेज डांस कॉम्पिटिशन के फिनाले में पहुंची थीं। इस दौरान ममता कुलकर्णी ने फिल्म करण अर्जुन के गाने भंगडा पाले, ‘घातक’ के ‘कोई जाए तो ले आए’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ के ‘एक मुंडा मेरी उम्र का’ और ‘लंबा-लंबा घूंघट काहे को डाला’ जैसे गीतों पर डांस किया। इस दौरान स्टूडेंट्स भी उनके साथ शामिल हो गए। ममता ने अपने पुराने फिल्मी अंदाज की झलक दिखाते हुए गीतों की धुन पर डांस किया तो ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। यहां देखिए इवेंट के फोटोज… स्टूडेंट्स से बोलीं- डांस और एक्टिंग को साधना की तरह करें ममता कुलकर्णी ने स्टूडेंट्स से बातचीत करते हुए कहा कि डांस हो या एक्टिंग, इसे केवल मनोरंजन नहीं बल्कि साधना की तरह करना चाहिए। जब तक किसी कला में परफेक्शन नहीं आता, तब तक उसे स्टेज पर पेश करने से बचना चाहिए। उन्होंने स्टूडेंट्स को जिंदगी को लेकर भी एक दिलचस्प सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो करना है, उसे आज की सोच के साथ करें। ममता ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई नए कपड़े लेकर आया है और सोच रहा है कि उन्हें किसी खास दिन पहनेगा तो उस दिन का इंतजार करने के बजाय कपड़े उसी दिन पहन लेने चाहिए, जिस दिन वे खरीदे हैं। सोशल मीडिया क्रिएटर्स को मिला सम्मान कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाने वाले क्रिएटर्स को आरएफएफ सोशल स्पॉटलाइट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। आरएफएफ की फाउंडर डायरेक्टर संजना शर्मा ने बताया- नेहा एंड अंशु को बेस्ट फूड इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर, सोमी शर्मा को इमर्जिंग डांस स्टार ऑफ द ईयर, निधि नरवाल को पोएट्री आइकन ऑफ द ईयर और विजय को फादर-डॉटर डिजिटल डुओ ऑफ द ईयर का सम्मान दिया गया। इसी क्रम में ब्यूटीफुल गुलाबी नगरी की अनिशा जैन को सिटी इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर, प्रवीण प्रजापत को यूथ आइकन इन राजस्थानी फोक आर्ट्स, एडवोकेट अमृता वर्मा को लीगल अवेयरनेस क्रिएटर ऑफ द ईयर, द वाइज स्टोरीज की युवरागी राठौड़ को रीजनल स्टोरीटेलर ऑफ द ईयर और चारू असोपा को व्लॉगर ऑफ द ईयर की कैटेगरी में सम्मानित किया गया। प्रोग्रामिंग हेड अनिल जैन ने बताया कि सोशल मीडिया क्रिएटर्स की कैटेगरी उनके कंटेंट और डिजिटल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए तय की गई थीं। कार्यक्रम में खान-पान, कविता, डांस, राजस्थानी लोक कला, कानूनी जागरूकता और क्षेत्रीय कहानियों जैसे अलग-अलग विषयों पर काम करने वाले क्रिएटर्स को मंच मिला। 14 प्रस्तुतियों में दिखी विद्यार्थियों की क्रिएटिविटी इंटर स्कूल-कॉलेज कॉम्पीटिशन के फिनाले में जयपुर के तीन कॉलेज और 11 स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के तहत जयपुर के स्कूल-कॉलेजों में अब तक करीब 100 गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं। फिनाले के लिए चयनित विद्यार्थियों ने सामाजिक सरोकार, संस्कृति, कला और रचनात्मकता से जुड़ी अलग-अलग थीम पर कुल 14 प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को रचनात्मक अंदाज में मंच पर पेश किया। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के साथ विद्यार्थियों की ऊर्जा और उत्साह भी देखने को मिला। प्रतियोगिता में महारानी कॉलेज की टीम विजेता रही। विजेता टीम को 25 हजार रुपए और ट्रॉफी प्रदान की गई। वहीं कनोडिया कॉलेज की टीम दूसरे स्थान पर रही, जिसे 5 हजार रुपए और ट्रॉफी दी गई। विजेताओं को ममता कुलकर्णी और अतिथियों ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में आरएफएफ की फाउंडर डायरेक्टर संजना शर्मा और राजस्व, उपनिवेशन एवं सैनिक कल्याण विभाग के राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी सहित आयोजन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।
बॉलीवुड एक्टर गोविंदा ने अपनी पर्सनल लाइफ और अफेयर के आरोपों को लेकर चल रही चर्चाओं पर तीखा ऐतराज जताया है। ANI को दिए इंटरव्यू में गोविंदा ने कहा कि उनकी निजी जिंदगी किसी और के लिए चिंता या चर्चा का विषय नहीं होनी चाहिए, भले ही कोई अफेयर ही क्यों न हो। हाल ही में अपनी अपकमिंग फिल्म 'रूपा' की एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने के बाद से उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। उन्होंने इन खबरों को अपनी इमेज खराब करने और परिवार से दूर करने की सोची-समझी साजिश बताया है। 'भले ही अफेयर हो, किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं' अपनी पर्सनल लाइफ पर हो रही बयानबाजी का जवाब देते हुए गोविंदा ने कहा, यह किसी और के लिए चर्चा का विषय नहीं है, भले ही कोई अफेयर हो। मैं सिर्फ काम कर रहा हूं और एक पेशेवर रिश्ता बनाए हुए हूं। गोविंदा के मुताबिक, लोग बिना वजह उनकी निजी जिंदगी को निशाना बना रहे हैं, जबकि उन्हें सिर्फ अपने काम से मतलब रखना चाहिए। फिल्म 'रूपा' के लिए प्रार्थना करने पहुंचे थे कोमल रानी स्वर्णकार के साथ गणपति पंडाल में दिखने पर सफाई देते हुए गोविंदा ने बताया कि वे अपनी आने वाली फिल्म 'रूपा' के लिए लालबागचा राजा के दरबार पहुंचे थे। इस फिल्म में कोमल रानी मुख्य भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा, इससे पहले भी मैं करिश्मा कपूर और रवीना टंडन के साथ मंदिरों में गया था और वे फिल्में बहुत बड़ी हिट साबित हुई थीं। मैं लंबे समय बाद नया काम शुरू कर रहा हूं, इसलिए प्रार्थना करने गया था। परिवार से दूर करने और इमेज खराब करने की साजिश इंटरव्यू में गोविंदा ने अपने खिलाफ चल रही बातों को एक सोची-समझी चाल करार दिया। उन्होंने कहा, यह किसी एक इंसान की गलती नहीं है, बल्कि बहुत सोच-समझकर बनाई गई योजना है। ऐसी चीजें आगे भी हो सकती हैं। यह मुझे मेरे परिवार से अलग करने और समाज में मेरी छवि खराब करने का प्लान है। गोविंदा ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और आगे भी काम करते रहेंगे। कोमल संग दिखे गोविंदा, अकेली पहुंची थीं पत्नी सुनीता गोविंदा की पर्सनल लाइफ पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में है। हाल ही में गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल में गोविंदा अपनी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ गणपति के दर्शन करने पहुंचे थे। वहीं, उसी दिन उनसे पहले उनकी पत्नी सुनीता आहूजा अकेले ही दर्शन के लिए पहुंची थीं। दोनों के अलग-अलग पहुंचने और कोमल के साथ दिखने के बाद से उनके रिश्ते और कथित अफेयर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुनीता आहूजा बोलीं- इंसान धोखा ही देते हैं गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा को अभिनेत्री और रूमर्ड गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार के साथ दिखने के बाद सुनीता आहूजा का एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इंसानों को धोखेबाज बताते हुए जानवरों से प्यार को बेहतर बताया। हालांकि, सुनीता ने अपने बयान में गोविंदा का नाम नहीं लिया। दरअसल, मुंबई एयरपोर्ट पर पैपराजी से बातचीत के दौरान सुनीता अपने पालतू कुत्ते विंटर के साथ थीं। पैपराजी से बात करते हुए सुनीता ने कहा कि इंसानों को जितना भी प्यार करो, कोई फायदा नहीं है। धोखा ही देते हैं। इनको प्यार करो, देखो, हमेशा चिपके रहते हैं। जानवरों से प्यार करो, इंसानों से नहीं। धोखेबाज होते हैं इंसान। आसपास के माहौल से परेशान हैं गोविंदा: अनुपम खेर वहीं अनुपम खेर ने कहा कि गोविंदा को अपनी आदतों या निजी परेशानियों को अपनी पूरी जिंदगी और काम पर हावी होने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। अनुपम ने बताया कि वे गोविंदा पर कोई फैसला या टिप्पणी करने वाले व्यक्ति नहीं हैं और गोविंदा अपनी जिंदगी को बेहतर समझते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने गोविंदा को फोन किया था, लेकिन उन्होंने वापस कॉल करने की बात कही। अनुपम उन्हें सिर्फ यह कहना चाहते थे कि यह मुश्किल दौर भी बीत जाएगा। अनुपम के मुताबिक, हर किसी की जिंदगी में परेशानियां आती हैं। गोविंदा अपने आसपास के माहौल और परिस्थितियों से थोड़े परेशान जरूर हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है और वापसी की पूरी उम्मीद है। 'गोविंदा की एक्टिंग और डांस में कोई मुकाबला नहीं' अनुपम खेर ने गोविंदा के काम की तारीफ करते हुए कहा कि वे उन सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं, जिनके साथ उन्होंने काम किया है। दोनों ने साथ में 10 से 12 फिल्मों में काम किया है। अनुपम के मुताबिक, इम्प्रोवाइजेशन, एक्टिंग और डांस के मामले में गोविंदा का मुकाबला कोई नहीं कर सकता।
संजय लीला भंसाली की फिल्म 'लव एंड वॉर' से आलिया भट्ट का पहला लुक सामने आ गया है। इस फिल्म में आलिया ग्लैमरस रेट्रो और विंटेज अवतार में नजर आ रही हैं। संजय लीला भंसाली ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'X' (ट्विटर) पर आलिया के इस लुक की पहली तस्वीर शेयर की है। ओल्ड-स्कूल फैशन, स्पार्कलिंग डिटेल्स और क्लासिक स्टाइलिंग के साथ आलिया का यह लुक काफी चर्चा में है। इस बड़े बजट की फिल्म में आलिया के साथ रणबीर कपूर और विक्की कौशल भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। सामने आई पहली तस्वीर में आलिया भट्ट 60 और 70 के दशक के रेट्रो फैशन में नजर आ रही हैं। उनके आउटफिट में ब्लिंग और विंटेज स्टाइलिंग का खास ध्यान रखा गया है। रणबीर कपूर का रौबदार अंदाज दिखा फिल्म ‘लव एंड वॉर’ से रणबीर कपूर का पहला लुक बुधवार को सामने आया। पोस्टर में रणबीर का इंटेंस और रॉ अंदाज नजर आ रहा है। रणबीर मोटी मूंछों, खून के दाग वाली शर्ट और गॉगल्स में दिखाई दे रहे हैं। उनका लुक किरदार के रफ और मजबूत अंदाज की झलक देता है। शर्ट पर खून के दाग फिल्म की डार्क और एक्शन से भरपूर कहानी की ओर इशारा करते हैं। वहीं, गॉगल्स उनके किरदार को स्टाइलिश लुक दे रहे हैं। ‘लव एंड वॉर’ दुनियाभर में 21 जनवरी 2027 को रिलीज होगी। यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषा में रिलीज की जाएगी। इसका निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया है। ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट कई बार बदली संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट अब तक कई बार बदली जा चुकी है। सबसे पहले इसकी रिलीज की घोषणा जनवरी 2024 में हुई थी। उस समय फिल्म को क्रिसमस 2025 पर रिलीज करने की योजना थी। बड़े स्तर पर हो रही शूटिंग और प्रोडक्शन में ज्यादा समय लगने के कारण रिलीज को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद मार्च 2026 में फिल्म रिलीज होने की बात सामने आई। इस बीच 14 अगस्त 2026 की रिलीज डेट की भी चर्चा हुई थी। हालांकि, फिल्म का काम तय समय में पूरा नहीं हो सका। खास तौर पर बड़े वीएफएक्स और हवाई एक्शन सीन्स के कारण समय बढ़ा। इसके बाद मेकर्स ने फिल्म की नई रिलीज डेट तय की। 21 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज तय की गई है। भंसाली के साथ विक्की की पहली फिल्म संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल पहली बार एक साथ नजर आएंगे। हालांकि, रणबीर और आलिया इससे पहले भी भंसाली के साथ काम कर चुके हैं। रणबीर कपूर ने भंसाली के निर्देशन में ‘सांवरिया’ (2007) से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। फिल्म में उनके साथ सोनम कपूर भी मुख्य भूमिका में थीं। आलिया भट्ट ने भंसाली के साथ पहली बार ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ (2022) में काम किया। फिल्म में उन्होंने गंगूबाई का किरदार निभाया था। इस भूमिका के लिए आलिया को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला था। वहीं, विक्की कौशल ने ‘लव एंड वॉर’ से पहले भंसाली के निर्देशन में कोई फिल्म नहीं की है। ऐसे में यह उनके लिए भंसाली के साथ पहली फिल्म है। सेट से लीक हुए थे स्टारकास्ट के लुक, देखिए तस्वीरें- ‘लव एंड वॉर’ के सेट पर जून में हादसा हुआ फिल्म ‘लव एंड वॉर’ जून 2026 में सेट पर हुए एक हादसे के बाद चर्चा में आ गई थी। 17 जून को मुंबई के फिल्मसिटी के पास रॉयल पंप स्टूडियो में 42 वर्षीय कारपेंटर चंद्रधारी सिंह यादव की करंट लगने से मौत हो गई थी। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ था। हादसे के बाद भंसाली प्रोडक्शंस ने मृतक के परिवार को 40 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज यानी FWICE ने मुआवजा बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने की मांग की थी। संगठन ने परिवार के बच्चों की पढ़ाई और मृतक की पत्नी को रोजगार देने की भी अपील की थी। इसके बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन यानी AICWA ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा। संगठन ने हादसे की जांच और संजय लीला भंसाली के खिलाफ FIR की मांग की। AICWA ने मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग भी रखी। संगठन ने सेट पर सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए। AICWA ने यह भी कहा था कि घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही फिल्म सेट की सुरक्षा जांच कराने की मांग की गई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें...
गुरुवार को मुंबई में आलिया भट्ट की प्रोड्यूस की हुई फिल्म ‘डोंट बी शाय’ की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई। इस मौके पर आलिया भट्ट अपने पति रणबीर कपूर के साथ पहुंचीं। रणबीर की मां नीतू कपूर भी नजर आईं। वहीं, आलिया के पिता महेश भट्ट, मां सोनी राजदान और बहन शाहीन भट्ट भी स्क्रीनिंग में शामिल हुईं। दोनों परिवारों ने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं। स्क्रीनिंग में करण जौहर, वरुण धवन, अयान मुखर्जी, शरवरी वाघ और समय रैना समेत कई सेलेब्स भी पहुंचे। ‘डोंट बी शाय’ को आलिया और शाहीन भट्ट ने अपने प्रोडक्शन हाउस एटरनल सनशाइन प्रोडक्शंस के तहत बनाया है। फिल्म 25 सितंबर को प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। अनीत पड्डा की वेब सीरीज ‘हुंकार’ की स्क्रीनिंग गुरुवार को वेब सीरीज ‘हुंकार: द रोअर’ की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई। स्क्रीनिंग में एक्ट्रेस अनीत पड्डा और फातिमा सना शेख पहुंचीं। इनके अलावा श्वेता त्रिपाठी और रणवीर सिंह भी नजर आए। अनीत पड्डा की यह सीरीज फिल्म ‘सयारा’ की सफलता के बाद चर्चा में है। कोर्टरूम ड्रामा पर आधारित ‘हुंकार: द रोअर’ 25 सितंबर 2026 को रिलीज हुई है। इसमें अनीत पड्डा के अलावा रघुबीर यादव और फातिमा सना शेख भी अहम भूमिकाओं में हैं।
प्यार हुआ, शादी हुई और फिर बीवी का कत्ल! मामला जब कोर्ट पहुंचता है तो पति खुद कटघरे में खड़ा है। अब वह कातिल है या कहानी का सबसे बड़ा शिकार? ‘लव लॉटरी’ इसी सवाल को लेकर अपना खेल शुरू करती है। फिल्म की कहानी कैसी है कार्तिक सक्सेना (अक्षय ओबेरॉय) की जिंदगी में भरनी वर्मा (हेली दारूवाला) आती है। मुलाकात प्यार में बदलती है और दोनों शादी कर लेते हैं। लेकिन शादी के बाद वही रिश्ता धीरे-धीरे उलझने लगता है। भरोसा कम होता है, तनाव बढ़ता है और दोनों के बीच दूरियां आ जाती हैं। फिर एक दिन भरनी की हत्या हो जाती है। पुलिस की नजर सीधे कार्तिक पर जाती है और इंस्पेक्टर विक्रम बिष्ट (कबीर दूहन सिंह) उसे गिरफ्तार कर लेते हैं। कार्तिक खुद को बेगुनाह बताता है, लेकिन उसके खिलाफ हालात कम नहीं होते। इसके बाद वह अपने वकील प्रशांत बत्रा (विक्रम शर्मा) के सामने अपनी शादी की पूरी कहानी बताता है। पहली मुलाकात से लेकर प्यार, शादी और रिश्ते में आई दरार तक। फिल्म की दिलचस्पी यहीं है जितना कार्तिक अपनी कहानी बताता है, उतना ही शक बढ़ता जाता है। फिल्म में एक्टिंग कैसी है अक्षय ओबेरॉय फिल्म की असली ताकत हैं। कार्तिक के किरदार में डर भी है, गुस्सा भी और खुद को बचाने की बेचैनी भी। अक्षय इन भावनाओं को बिना ज्यादा शोर किए निभाते हैं। कई सीन में वह इतने सामान्य दिखते हैं कि इसी वजह से उन पर शक और बढ़ जाता है। क्लाइमैक्स का उनका मोनोलॉग भी असर छोड़ता है। हेली दारूवाला भरनी के किरदार में जरूरी रहस्य बनाए रखती हैं। वह पूरी फिल्म में आसानी से पढ़ी नहीं जातीं, जो इस किरदार के लिए जरूरी है। कबीर दूहन सिंह पुलिस अधिकारी के रोल में फिट हैं। विजयंत कोहली कहानी में हल्कापन लाते हैं, हालांकि शादी और महिलाओं पर उनके किरदार की कुछ बातें जरूरत से ज्यादा सीधी लगती हैं। अग्नि अग्यारी और विक्रम शर्मा भी अपनी भूमिकाओं में असर छोड़ते हैं। फिल्म का निर्देशन कैसा है अरविंद पांडेय ने गंभीर मुद्दे को सीधे भाषण में बदलने के बजाय मर्डर मिस्ट्री और कोर्टरूम ड्रामा के रास्ते पेश किया है। फिल्म का पहला हाफ इसी वजह से ज्यादा मजेदार है। रिश्ता टूट रहा है और साथ ही हत्या की गुत्थी भी उलझ रही है। हर थोड़ी देर में कोई नई बात सामने आती है और शक की सुई घूमती रहती है। लेकिन दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी धीमी पड़ती है। कोर्टरूम वाले हिस्से में कुछ ट्विस्ट उतना असर नहीं छोड़ते और कुछ बातें किरदारों के अनुभव के बजाय सीधे संवादों से समझाई जाती हैं। यही जगह फिल्म को और बेहतर बनाया जा सकता था। फिल्म पुरुष के नजरिए से वैवाहिक विवाद और भावनात्मक दबाव की बात करती है। विषय नया नहीं है, लेकिन इसे मर्डर मिस्ट्री के साथ जोड़ना दिलचस्प है। दिक्कत यह है कि कुछ जगह बहस बारीक रहने के बजाय बहुत सीधी हो जाती है। नवीन वी. मिश्रा की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के गंभीर माहौल को सूट करती है। उत्तराखंड की लोकेशंस खूबसूरत हैं। प्रकाश झा की एडिटिंग पहले हाफ को रफ्तार देती है, लेकिन 2 घंटे 21 मिनट की फिल्म के दूसरे हिस्से में थोड़ी कैंची और चलती तो मजा बढ़ता। फिल्म के तकनीकी क्रेडिट्स में यही सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग दर्ज हैं। फिल्म का म्यूजिक कैसा है अरविंद पांडेय और वरुण मिश्रा का संगीत कहानी के इमोशनल हिस्से को सपोर्ट करता है। ‘नजर लग जाएगी’ और ‘बेवफा’ रिश्ते में आए प्यार और टूटन को आगे बढ़ाते हैं। गाने फिल्म पर भारी नहीं पड़ते, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि फिल्म खत्म होने के बाद सबसे पहले यही याद आएं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘लव लॉटरी’ का पहला हाफ बाजी मारता है। प्यार से शुरू हुई कहानी जब हत्या तक पहुंचती है तो फिल्म पकड़ बना लेती है। अक्षय ओबेरॉय इस पकड़ को अपने अभिनय से और मजबूत करते हैं। दूसरे हाफ में वही कसाव नहीं रह जाता। कोर्टरूम ड्रामा थोड़ा खिंचता है और जेंडर से जुड़ी बहस भी कुछ जगह ज्यादा सीधे तरीके से रखी गई है। फिर भी फिल्म में इतना सस्पेंस है कि आप अंत तक यह जानना चाहेंगे कि कातिल कौन है और कार्तिक की कहानी में कितना सच है। जैकपॉट नहीं, लेकिन ‘लव लॉटरी’ की टिकट पूरी तरह घाटे का सौदा भी नहीं है।
हमारे देश में कहानियों की कोई कमी नहीं है, कमी है उन्हें बड़े पर्दे पर नए अंदाज में सुनाने की। ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ बिहार की मिट्टी से निकली ऐसी ही एक लोककथा को लेकर आती है, जहां वन देवी, रहस्यमयी जंगल, छठी मइया की आस्था और इंसान की अपनी सोच आमने-सामने आती है। फिल्म की शुरुआत जितनी दिलचस्पी जगाती है, उतना ही सवाल भी छोड़ती है कि जंगल के अंदर आखिर है क्या? अच्छी बात यह है कि फिल्म काफी देर तक इस सवाल को जिंदा रखती है, बस बाद में जब जवाब मिलने शुरू होते हैं तो कुछ रहस्य उतने रहस्यमयी नहीं रह जाते। फिल्म की कहानी कैसी है कहानी ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा) की है, जो अपनी पत्नी ममता (तमन्ना भाटिया) के साथ बिहार के पुश्तैनी गांव आता है। शहर में पले ऋषि के लिए गांव और उसकी मान्यताएं पुरानी सोच का हिस्सा हैं। दोनों का अपना पारिवारिक दर्द भी है और छठ के लिए घर लौटने का रिश्ता भी। गांव के पास एक जंगल है, जिसके बीच वन देवी का मंदिर है। स्थानीय लोककथा के मुताबिक सूर्यास्त के बाद इस जंगल में जाना मना है। फिल्म की प्रेरणा बिहार के बिहटा स्थित वन देवी मंदिर से जुड़ी इसी लोककथा से ली गई है, जहां जंगल और देवी को लेकर पीढ़ियों से कई मान्यताएं चली आ रही हैं। ऋषि इन बातों को नहीं मानता। इसी बीच जंगल को लेकर विकास और प्रकृति के बीच खींचतान सामने आती है, लेकिन जब ऋषि जंगल में पहुंचता है और एक पुरानी मुहर टूटने के बाद अलौकिक ताकत जागती है, तब उसकी अपनी सोच भी सवालों के घेरे में आ जाती है। पहला हिस्सा यहीं सबसे ज्यादा पकड़ बनाता है। गांव का माहौल, रिश्ते, हल्का हास्य और जंगल का रहस्य साथ-साथ चलते हैं। लेकिन दूसरे हिस्से में कहानी प्रकृति और जमीन के सवाल से निकलकर सीधे अच्छाई बनाम बुराई की बड़ी लड़ाई की तरफ बढ़ जाती है। इससे शुरुआत में बना वह जमीन से जुड़ा संघर्ष थोड़ा पीछे छूटता है। कहानी में विचार कम नहीं हैं, बस कुछ विचारों को पूरी तरह खुलने का मौका नहीं मिलता। फिल्म में एक्टिंग कैसी है सिद्धार्थ मल्होत्रा ऋषि के किरदार में एक्शन के साथ भावनात्मक बदलाव भी संभालते हैं। उनका अविश्वास धीरे-धीरे विश्वास में बदलता है, हालांकि इस बदलाव को थोड़ा और समय मिलता तो किरदार और गहराता। तमन्ना भाटिया सहज लगती हैं और सिद्धार्थ के साथ उनकी पति-पत्नी वाली केमिस्ट्री फिल्म के फैंटेसी हिस्से को मानवीय आधार देती है। उनके किरदार में संभावनाएं हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले उन्हें पूरी तरह इस्तेमाल नहीं करता। सुनील ग्रोवर फिल्म का अच्छा सरप्राइज हैं। गंभीर किरदार में उनका अंदाज अलग लगता है और उनकी कहानी खुलने के साथ उत्सुकता बढ़ती है। मनीष पॉल पहले हिस्से में हंसी और हल्कापन लाते हैं। श्वेता तिवारी और अनूप सोनी भी अपने किरदारों में ठीक बैठते हैं। फिल्म का निर्देशन कैसा है निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि उन्होंने बिहार की एक कम सुनी गई लोककथा को सिर्फ डर की कहानी नहीं बनाया। इसमें परिवार है, प्रकृति है, आस्था है, विकास का सवाल है और फैंटेसी भी है। दिक्कत बस यही है कि इतनी सारी चीजों को साथ लेकर चलने की कोशिश में स्क्रीनप्ले कभी-कभी खुद अपनी रफ्तार से आगे निकल जाता है। शुरुआत में जो रहस्य धीरे-धीरे बनता है, बाद में उसके कई जवाब जल्दी मिल जाते हैं। कुछ चीजें अगर थोड़ी देर और छिपी रहतीं तो जंगल का रोमांच और टिक सकता था। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की बड़ी ताकत है। जंगल की हरियाली, धुंध, अंधेरा और रोशनी मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि कई बार जंगल खुद कहानी का किरदार लगता है। प्रोडक्शन डिजाइन में बिहार की मिट्टी और गांव की पहचान बनी रहती है। रहस्यमयी जीवों और पुराने घटनाक्रम को समझाने वाला एनीमेशन भी फिल्म का दिलचस्प प्रयोग है। वीएफएक्स में पैमाना बड़ा रखा गया है। कुछ दृश्य शानदार लगते हैं, जबकि कुछ जगह कंप्यूटर से बने हिस्से उतने सहज नहीं बैठते। बड़े पर्दे पर फिल्म का स्केल जरूर दिखाई देता है। फिल्म का म्यूजिक कैसा है ‘समझो ना’ कहानी के रोमांटिक हिस्से को जगह देता है, जबकि ‘ठुमक ठुमक’ माहौल में मस्ती भरता है। लेकिन सबसे ज्यादा फिल्म की जड़ों से जुड़ता है ‘छठी मइया’। छठ के घाट, अर्घ्य और भक्ति वाला माहौल फिल्म को बिहार की संस्कृति से जोड़ता है। हां, यहां सिनेमा ने अपनी थोड़ी आजादी भी ली है—कुछ दृश्य असली छठ की सादगी से ज्यादा फिल्मी और सजाए हुए लगते हैं। असल छठ चार दिन की साधना, व्रत, अनुशासन और डूबते-उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा पर टिका है; फिल्म उसका भाव पकड़ती है, हर बारीकी नहीं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘द वन’ एक देसी फैंटेसी एडवेंचर है, जो बिहार की लोककथा, छठी मइया की आस्था और रहस्यमयी जंगल को अपनी दुनिया का आधार बनाती है। फिल्म का माहौल, सिनेमैटोग्राफी और कलाकार इसे देखने लायक बनाते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी कुछ जानी-पहचानी राह पकड़ती है, लेकिन अपनी मिट्टी से जुड़ी दुनिया और बड़े पर्दे का स्केल इसका असर बनाए रखते हैं। रास्ता हर जगह बराबर मजबूत नहीं है, लेकिन ‘द वन’ की दुनिया में कदम रखना एक दिलचस्प सिनेमाई अनुभव जरूर है।
'वेलकम' और 'आशिकी' जैसी फिल्मों में काम करने वाले एक्टर मुश्ताक खान का 75 साल की उम्र में गुरूवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे थे। मुश्ताक खान के बेटे ने बताया कि शुक्रवार सुबह जुमे की नमाज से पहले मॉडल टाउन स्थित कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में उनके अंतिम दर्शन किए जा सकेंगे। सुबह 10 से 12 बजे तक लोग उन्हें अंतिम बार देख सकेंगे। इसके बाद जुमे की नमाज के बाद जनाजे की नमाज होगी। फिर यारी रोड कब्रिस्तान में उन्हें दफनाया जाएगा। मुश्ताक खान के निधन के बाद सनी देओल, अनुपम खेर समेत फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने दुख जताया। वहीं, राजपाल यादव ने कहा कि वे निधन से करीब 2 घंटे पहले ही उनसे मिलकर आए थे। मुश्ताक खान के बिजनेस पार्टनर शिवम ने बताया कि गुरुवार शाम करीब 7 बजे उनका निधन हुआ। मुश्ताक खान को करीब पांच साल पहले कैंसर का पता चला था और वे ठीक भी हो गए थे। हालांकि, आठ दिन पहले कैंसर फिर से लौट आया और उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह कैंसर का आखिरी स्टेज था। 250 से ज्यादा फिल्मों में किया काम मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्बे में जन्मे मुश्ताक खान ने अभिनय की शुरुआत थिएटर से की थी। साल 1980 में फिल्म अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1990 के दशक में वे आशिकी, सड़क, साथी, हम हैं राही प्यार के, क्रांतिवीर, राजा, मेजर साब और मन जैसी फिल्मों में नजर आए। आशिकी में दर्जी रफू मास्टर और हम हैं राही प्यार के में भगवती प्रसाद मिश्रा का उनका किरदार काफी चर्चित हुआ। इसके बाद हेरा फेरी, मुझसे शादी करोगी, गदर: एक प्रेम कथा, जोड़ी नं. 1 और राउडी राठौर जैसी फिल्मों में उन्होंने कॉमिक और सपोर्टिंग रोल निभाए। 2007 की फिल्म वेलकम में मजनू भाई के साथी बल्लू के किरदार से उन्हें खास पहचान मिली। इसके बाद वेलकम बैक, स्त्री और स्त्री 2 जैसी फिल्मों में भी वे नजर आए। फिल्मों के साथ-साथ मुश्ताक खान ने टीवी पर भी काम किया। वे अदालत, चाचा चौधरी, टेढ़े-मेढ़े सपने और कुछ रंग प्यार के ऐसे भी जैसे शोज का हिस्सा रहे। हाल के वर्षों की बात करें तो साल 2025 में वे फिल्म जाट में इंस्पेक्टर मुश्ताक के किरदार में नजर आए। इसी साल उदयपुर फाइल्स में वीरेंद्र कुमार मीणा का रोल निभाया। इसके अलावा किस किसको प्यार करूं 2 में भी काम किया। साल 2026 में वे भाभीजी घर पर हैं! फन ऑन द रन, हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं और कोकिन में नजर आए। परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी मुश्ताक खान अपने पीछे पत्नी सलमा खान, दो बेटों और एक बेटी को छोड़ गए हैं। उनके बड़े बेटे का नाम मोहम्मद अरशद खान, छोटे बेटे का नाम मोहसिन खान और बेटी का नाम सबा शेख है। मुश्ताक खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पहले उन्हें किसी से प्यार हुआ था, लेकिन यह रिश्ता सफल नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने शादी से दूरी बनाने का फैसला किया था। बाद में माता-पिता की इच्छा पर उन्होंने सलमा खान से अरेंज मैरिज की। उनके बड़े बेटे मोहम्मद अरशद खान ने फिल्मी दुनिया से अलग अपना करियर बनाया है। वहीं, छोटे बेटे मोहसिन खान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं। हालांकि, वे एक्टिंग नहीं करते। मोहसिन डायरेक्टर और प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने मराठी कॉमेडी फिल्म ‘डिलीवरी बॉय’ का निर्देशन किया है। मुश्ताक खान का हुआ था अपहरण नवंबर 2024 में मुश्ताक खान को अवॉर्ड फंक्शन के बहाने बुलाकर किडनैप कर लिया गया था। उन्हें मेरठ में एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनाने की बात कही गई थी। भरोसा जीतने के लिए बदमाशों ने उन्हें 25 हजार रुपए एडवांस भेजे और मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट टिकट भी बुक कराई। 20 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद एक कैब उन्हें मेरठ लेकर निकली। रास्ते में उन्हें दूसरी गाड़ी में बैठाया गया। इसके बाद बंदूक दिखाकर उनका अपहरण कर लिया गया। उन्हें बिजनौर के एक घर में ले जाकर करीब 12 घंटे तक बंधक रखा गया। बदमाशों ने 1 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। अगली सुबह अपहरणकर्ता नशे में थे और कुछ सो रहे थे। इसी दौरान मुश्ताक खान वहां से भाग निकले। पास की मस्जिद पहुंचकर उन्होंने स्थानीय लोगों से मदद मांगी। लोगों ने उनके परिवार और पुलिस से संपर्क कराया। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने उनके बैंक खाते से करीब 2.2 लाख रुपए भी निकाल लिए थे। मामले में पुलिस ने गिरोह के कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने शक्ति कपूर और राजेश पुरी समेत दूसरे कलाकारों को भी इसी तरह फंसाने की कोशिश की थी। अनुपम खेर ने कहा- उनके साथ बिताए दिन हमेशा याद रहेंगे अनुपम खेर ने वीडियो शेयर कर कहा कि मुश्ताक खान के निधन की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने बताया कि दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया था। अनुपम ने कहा कि मुश्ताक खान बहुत सहज थे और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर शानदार था। उन्होंने बताया कि पिछले चार-पांच साल से वे मुश्ताक खान के बेटे मोहसिन से लगातार बात करते थे। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले मुश्ताक खान से उनकी बात हुई थी। वे बड़ी बेबाकी से बात करते थे। अनुपम खेर ने उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त कीं। सनी देओल ने भी मुश्ताक खान के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि मुश्ताक खान एक अच्छे इंसान और बेहतरीन एक्टर थे। सनी ने उनके साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनकी कई अच्छी यादें उनसे जुड़ी हैं। राजपाल यादव बोले- 2 घंटे पहले ही उनसे मिला था राजपाल यादव ने X पर लिखा कि वे गुरुवार दोपहर मुश्ताक खान से मिलने गए थे। उन्होंने बताया कि मुश्ताक खान ने उन्हें देखा, हाथ मिलाया और उनकी सारी बातें सुनकर प्रतिक्रिया भी दी। राजपाल ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि जिस व्यक्ति से वे सिर्फ दो घंटे पहले मिले थे, वह अब उनके बीच नहीं रहे। उन्होंने मुश्ताक खान के निधन पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। संजय मिश्रा ने कहा- एक समय पर गार्जियन जैसे थे 'वेलकम' में मुश्ताक खान के साथ काम कर चुके संजय मिश्रा ने भी उनके निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि मुश्ताक खान सिर्फ अच्छे एक्टर ही नहीं थे, बल्कि एक समय पर उनके लिए गार्जियन जैसे बन गए थे। संजय मिश्रा ने कहा कि जब भी उन्हें जरूरत पड़ती थी, वे मुश्ताक खान से सलाह लेते थे। उन्होंने कहा कि मुश्ताक खान बहुत अच्छे कलाकार थे, लेकिन उन्हें उतना क्रेडिट नहीं मिला। संजय ने 'वेलकम' के दिनों को याद करते हुए कहा कि मुश्ताक खान बेहद अच्छे इंसान थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने उनके साथ 'वेलकम' में काम किया था और उन्हें पूरा दुबई घुमाया था। …………………. ये खबर भी पढ़ें… रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का निधन:बंगाली सिनेमा में प्लेबैक सिंगर थीं, शाहरुख खान अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का मंगलवार दोपहर 75 साल की उम्र में निधन हो गया। यशराज फिल्म्स (YRF) ने आधिकारिक बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी है। पूरी खबर पढ़ें
दिल्ली के मिडिल क्लास, आर्मी-मर्चेंट नेवी बैकग्राउंड वाले परिवार से निकले सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कभी खुलकर नहीं कहा था कि उन्हें एक्टर बनना है। स्कूल-कॉलेज में एमबीए और कॉर्पोरेट नौकरी का प्लान था, लेकिन अंदर छिपा एक्टर मॉडलिंग के रास्ते सामने आया। 21 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे तो फिल्म साइन होने के बावजूद प्रोजेक्ट बंद हो गया। घर ढूंढने, ऑडिशन देने और पैसों की तंगी जैसी कई मुश्किलें आईं। फिर मनीष मल्होत्रा के जरिए करण जौहर तक पहुंचे, ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर बने और ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से लॉन्च हुए। बाद में फ्लॉप फिल्मों के दौर से गुजरकर ‘शेरशाह’ ने करियर को नई पहचान दी। आज की सक्सेस स्टोरी में सिद्धार्थ मल्होत्रा के करियर और निजी जीवन से जुड़ी खास बातें दिल्ली में जन्मे, परिवार में था अनुशासन सिद्धार्थ मल्होत्रा का जन्म 16 जनवरी 1985 को दिल्ली में हुआ। उनके पिता सुनील मल्होत्रा मर्चेंट नेवी में रहे, जबकि मां रिम्मा मल्होत्रा गृहिणी हैं। बड़े भाई हर्षद बैंकिंग सेक्टर में काम करते हैं। सिद्धार्थ की परवरिश ऐसे परिवार में हुई, जहां अनुशासन और स्थिर करियर को महत्व दिया जाता था। सिद्धार्थ ने दिल्ली के डॉन बॉस्को स्कूल और नेवल पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के शहीद भगत सिंह कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। उनके मुताबिक कॉलेज के दिनों में उनका प्लान बिल्कुल अलग था। वे एमबीए करना चाहते थे और अच्छे नंबर लाकर किसी अच्छे एमबीए कॉलेज में दाखिला लेने की सोचते थे। फिल्मों में जाने का सपना तब इतना साफ नहीं था कि परिवार या दोस्तों से इसके बारे में बात कर सकें। सिद्धार्थ बताते हैं कि बचपन में वह शीशे के सामने एक्शन पोज किया करते थे और खेलते समय खुद को एक्शन सीन से लौटे किरदार की तरह कल्पना करते थे। यानी अभिनेता उनके अंदर था, लेकिन उसे करियर बनाने का फैसला काफी बाद में हुआ। कॉलेज के दौरान मिला मॉडलिंग का पहला ब्रेक कॉलेज के दौरान सिद्धार्थ ने मॉडलिंग शुरू की। शुरुआत में यह उनके लिए कमाई का जरिया था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका करियर बन गया। 18 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू करने के बाद उन्होंने कई बड़े ब्रांड्स और फैशन शोज में काम किया। वह इंटरनेशनल फैशन सर्किट में भी गए और रॉबर्टो कवाली जैसे डिजाइनर्स के लिए रैंप पर चले। कुछ साल मॉडलिंग करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें कैमरे के सामने एक्टिंग करनी है। सिद्धार्थ ने कहा कि मॉडलिंग और एक्टिंग दो अलग चीजें हैं और सिर्फ अच्छा मॉडल होना अच्छे एक्टर होने की गारंटी नहीं है। मॉडलिंग के दौरान उन्हें स्टिल कैमरे से मूविंग कैमरे तक जाने का मौका मिला। विज्ञापनों के बाद उन्होंने फिल्मों के ऑडिशन देना शुरू किया। पहला मौका मिला, लेकिन फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गई सिद्धार्थ ने पहली बार निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म के लिए ऑडिशन दिया। वह फिल्म उन्हें और दो अन्य कलाकारों को लॉन्च करने वाली थी। दिल्ली में ऑडिशन के बाद उन्हें दोबारा मुंबई बुलाया गया और ट्रेनिंग की तैयारी शुरू हो गई थी। लेकिन फिल्म आगे नहीं बढ़ सकी। बीबीसी को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने बताया था कि उस फिल्म के लिए कॉन्ट्रैक्ट और रहने की व्यवस्था तक हुई थी, लेकिन करीब छह महीने बाद प्रोजेक्ट बंद हो गया। उस समय अनुभव सिन्हा दूसरे प्रोजेक्ट ‘रा.वन’ की तरफ चले गए थे। सिद्धार्थ के लिए यह झटका इसलिए बड़ा था क्योंकि वह महीनों से खुद को फिल्म के लिए तैयार कर रहे थे। उनके मुताबिक जब किसी चीज के होने की उम्मीद बन जाए और फिर वह हाथ से निकल जाए तो उसका असर ज्यादा होता है। 21 साल की उम्र में मुंबई आए, घर मिलना भी आसान नहीं था करीब 21 साल की उम्र में सिद्धार्थ मुंबई पहुंचे। दिल्ली में उनका बड़ा परिवार था, लेकिन मुंबई में शुरुआती दिनों में करीबी परिवार का सहारा नहीं था। कुछ दिन दोस्तों और दूर के रिश्तेदारों के भरोसे रहे। मुंबई में उनके सामने सिर्फ काम पाने की चुनौती नहीं थी, बल्कि रहने की जगह ढूंढना भी बड़ा संघर्ष था। सिद्धार्थ ने बताया कि कभी नॉन-वेज खाने, कभी कम्युनिटी, कभी सिंगल होने और कभी अभिनेता बनने की वजह से उन्हें घर देने से मना किया गया। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए कहा कि मुंबई में उन्हें करियर के साथ-साथ शहर में रहने की भी लड़ाई लड़नी पड़ी। पैसों की स्थिति ऐसी नहीं थी कि घर से हर महीने तय रकम आती रहे। कई बार किराया और डिपॉजिट देने के लिए परिवार से पैसे उधार लेने पड़े। एक समय बैंक अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना भी चुनौती लगता था। उनका रोज का नाश्ता बजट के हिसाब से तय था- अंडा और स्वीट पोटैटो। किसी महीने मॉडलिंग का अच्छा पेमेंट मिल जाता तो दोस्तों के साथ उसी पैसे से खुलकर घूमने-फिरने का मौका भी मिलता। मनीष मल्होत्रा से मुलाकात ने बदली दिशा मॉडलिंग के दिनों में सिद्धार्थ की मुलाकात फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा से हुई थी। मनीष ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी पहली मुलाकात दिल्ली के एक फैशन शो में हुई थी। बाद में अभिनेता बनने मुंबई आए सिद्धार्थ ने निर्देशन सीखने की इच्छा जताई। मनीष ने उन्हें करण जौहर से मिलवाया। सिद्धार्थ और मनीष मल्होत्रा के रिश्ते को लेकर बाद में कई तरह की बातें हुईं, लेकिन सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि मनीष उनके रिश्तेदार नहीं हैं। मॉडलिंग के दौरान उनके फैशन इंडस्ट्री से संबंध थे और उसी कनेक्शन के जरिए वह धर्मा प्रोडक्शंस तक पहुंचे। करण जौहर के साथ ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर बने अनुभव सिन्हा की फिल्म बंद होने के बाद सिद्धार्थ ने फैसला किया कि सिर्फ ऑडिशन देने के बजाय फिल्ममेकिंग को करीब से समझना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी के लिए कोशिश शुरू की। मनीष मल्होत्रा के जरिए उनकी मुलाकात करण जौहर से हुई और वह ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर की टीम का हिस्सा बने। इस फिल्म में उनके साथ वरुण धवन भी असिस्टेंट डायरेक्टर थे। सिद्धार्थ ने इस अनुभव को एक्टिंग की सबसे बड़ी ट्रेनिंग में से एक बताया। उनके मुताबिक सेट पर बड़े कलाकारों और पूरी फिल्ममेकिंग प्रक्रिया को करीब से देखने का मौका मिला। वह शाहरुख खान और काजोल के कुछ सीन्स के लिए स्टैंड-इन भी करते थे। बाद में वरुण और सिद्धार्थ दोनों इसी अनुभव के बाद करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ में बतौर एक्टर लॉन्च हुए। ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से लॉन्च 2012 में करण जौहर की ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से सिद्धार्थ मल्होत्रा, वरुण धवन और आलिया भट्ट ने बॉलीवुड डेब्यू किया। फिल्म में सिद्धार्थ ने अभिमन्यु सिंह का किरदार निभाया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और उन्हें बेस्ट मेल डेब्यू के लिए फिल्मफेयर नॉमिनेशन भी मिला। सिद्धार्थ के लिए यह सिर्फ डेब्यू नहीं था, बल्कि उस सपने के सच होने का पल था जिसे उन्होंने बचपन में किसी के सामने खुलकर स्वीकार तक नहीं किया था। उनके शब्दों में, वह आज भी इस सफर को सपने जैसा ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी यह बात पूरी तरह हजम नहीं होती कि वह इस बिजनेस का हिस्सा हैं। ‘हंसी तो फंसी’ और ‘एक विलेन’ ने बढ़ाई पहचान ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के बाद सिद्धार्थ को 2014 में दो अलग तरह की फिल्मों में देखा गया। ‘हंसी तो फंसी’ में उन्होंने रोमांटिक-कॉमेडी और ‘एक विलेन’ में गंभीर और एक्शन-ड्रामा किरदार निभाया। ‘हंसी तो फंसी’ का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन औसत रहा, लेकिन ‘एक विलेन’ ने सिद्धार्थ को कमर्शियल सफलता दिलाई। उपलब्ध ट्रेड आंकड़ों के मुताबिक ‘एक विलेन’ को हिट/सुपरहिट श्रेणी में रखा गया है और यह उनके करियर की शुरुआती बड़ी सफल फिल्मों में शामिल रही। इसके बाद 2015 में ‘ब्रदर्स’ आई, जिसे बॉक्स ऑफिस इंडिया ने फ्लॉप श्रेणी में रखा। 2016 में ‘कपूर एंड संस’ ने फिर सफलता दिलाई, जबकि ‘बार बार देखो’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। एक के बाद एक फिल्मों ने बढ़ाया दबाव 2017 में ‘ए जेंटलमैन’ और ‘इत्तेफाक’ आईं। इसके बाद 2018 में ‘अय्यारी’ और 2019 में ‘जबरिया जोड़ी’ रिलीज हुईं। ट्रेड आंकड़ों के अनुसार इनमें कई फिल्मों को फ्लॉप या उससे नीचे की श्रेणी में रखा गया। ‘मरजावां’ का प्रदर्शन भी औसत से नीचे रहा। यही वह दौर था जिसे सिद्धार्थ अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण समय में गिनते हैं। उनकी फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा होती थी और मीडिया में उनके करियर पर सवाल उठने लगे थे। सिद्धार्थ ने इस दौर पर कहा कि जब आप फिल्म के मुख्य किरदार में होते हैं तो फिल्म की जिम्मेदारी आपके कंधों पर आती है। फिल्म नहीं चलती तो उसके साथ आपके करियर को लेकर भी बातें शुरू हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि एक आउटसाइडर के लिए यह दबाव ज्यादा महसूस होता है, क्योंकि उसके पास इंडस्ट्री में लौटने के लिए कोई तैयार बैकअप नहीं होता। फ्लॉप फिल्मों के दौर में भी हार नहीं मानी सिद्धार्थ के मुताबिक फिल्मों का असफल होना व्यक्तिगत तौर पर मानसिक और भावनात्मक दबाव पैदा करता है। लेकिन उन्होंने इसे अपने सफर का हिस्सा माना। उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री प्रदर्शन पर चलती है। अगर दर्शक आपका काम पसंद करते हैं तो आपको आगे काम मिलता है और अगर पसंद नहीं करते तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इसी दौर के बारे में सिद्धार्थ ने कहा, ‘जो कोई गिव अप न करे… जो कोशिश करना बंद नहीं करता, उसको हराना बहुत मुश्किल है। जब तक आप हार नहीं मानते, तब तक आप जिंदा हैं। यहां पर मुझे बहुत काम आया है वो ढीठपना, जो मेरे में है। मैं एक ढीठ किस्म की पर्सनैलिटी हूं। वो जो ढीठपन और अड़ियलपन है मेरे में, आई थिंक, उसने मुझे बचा के रखा।’ ‘शेरशाह’ ने करियर को दी नई पहचान कई फिल्मों के उतार-चढ़ाव के बाद 2021 में आई ‘शेरशाह’ ने सिद्धार्थ के करियर को नई पहचान दी। फिल्म में उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाया। फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई और सिद्धार्थ के अभिनय की खास तौर पर चर्चा हुई। इसके बाद उन्हें सिर्फ रोमांटिक या एक्शन हीरो के तौर पर नहीं, बल्कि गंभीर किरदार निभाने वाले अभिनेता के रूप में भी देखा जाने लगा। सिद्धार्थ बताते हैं कि आज जब वह किसी कॉलेज में जाते हैं और छात्र ‘शेरशाह’ पर उनसे बारीकी से सवाल करते हैं तो उन्हें भावुक महसूस होता है। उनके मुताबिक किसी अभिनेता के लिए इससे बड़ी बात क्या होगी कि लोग उसके काम को इतनी गंभीरता से देखें और उसके बारे में जानना चाहें। ‘शेरशाह’ के बाद भी सफर जारी ‘शेरशाह’ के बाद सिद्धार्थ ‘थैंक गॉड’, ‘मिशन मजनू’ और ‘योद्धा’ जैसी फिल्मों में नजर आए। इनका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अलग-अलग रहा। ट्रेड आंकड़ों के मुताबिक ‘थैंक गॉड’ और ‘योद्धा’ फ्लॉप रहे, जबकि ‘मिशन मजनू’ ओटीटी रिलीज थी। 2025 में उनकी ‘परम सुंदरी’ रिलीज हुई, जिसे बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन की श्रेणी में रखा गया। इस तरह सिद्धार्थ के करियर में सफलता और असफलता दोनों आती रहीं, लेकिन उनका सफर रुका नहीं। 50 साल तक काम करते रहने का सपना आज इंडस्ट्री में एक दशक से ज्यादा के सफर को सिद्धार्थ किसी उपलब्धि की तरह नहीं, बल्कि अभी भी चल रहे सपने की तरह देखते हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है यह सपना कभी न टूटे और वह अगले 10 नहीं, बल्कि 20 और 50 साल तक इसी तरह काम करते रहें और दर्शकों को एंटरटेन करते रहें। अब ‘द वन’ की बारी सिद्धार्थ मल्होत्रा अब अपनी अगली फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में नजर आए। फिल्म में उनके साथ तमन्ना भाटिया हैं और इसका निर्देशन दीपक मिश्रा ने किया है। फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। _________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़ें.. रिजेक्शन और रिप्लेसमेंट के बाद तारा सुतारिया ने बनाई पहचान:बोलीं- फिल्मों से निकाले जाने पर बहुत तकलीफ होती थी, खुद से सवाल करती थी बॉलीवुड में पहचान बनाने का सपना लेकर आने वाले हर कलाकार का सफर एक जैसा नहीं होता। कुछ को फिल्मी परिवार का सहारा मिलता है, तो कुछ हुनर और मेहनत के दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाने की कोशिश करते हैं। अभिनेत्री तारा सुतारिया का सफर भी ऐसा ही है। अभिनय के साथ संगीत और गायकी में रुचि रखने वाली तारा ने टेलीविजन से शुरुआत की और 2019 में करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा।पूरी खबर पढ़ें..
गणेशोत्सव के मौके पर मुंबई स्थित टी-सीरीज ऑफिस में आयोजित सत्यनारायण पूजन में बॉलीवुड की तमाम हस्तियों ने शिरकत की। हर साल की तरह इस बार भी संगीत कंपनी टी-सीरीज के कार्यालय में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। इस खास मौके पर वरुण धवन, कार्तिक आर्यन, टाइगर श्रॉफ, तृप्ति डिमरी और आयुष्मान खुराना समेत कई कलाकारों ने बप्पा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। सभी सितारे पारंपरिक भारतीय परिधानों में बप्पा के सामने माथा टेकते नजर आए। इस दौरान जैकी श्रॉफ वहां मौजूद फोटोग्राफर्स को प्रसाद बांटते नजर आए। देखें तस्वीरें पारंपरिक कपड़ों में पहुंचे वरुण, कार्तिक और टाइगर गणपति दर्शन के लिए टी-सीरीज दफ्तर पहुंचे कार्तिक आर्यन हल्के नीले रंग के कुर्ते में नजर आए, जबकि टाइगर श्रॉफ सफेद रंग के पारंपरिक कुर्ते-पायजामे में पहुंचे। वहीं वरुण धवन ने भी साधारण पारंपरिक आउटफिट में पहुंचकर बप्पा की पूजा-अर्चना की और वहां मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। पति डेनियल संग पहुंचीं सनी, तृप्ति डिमरी भी दिखीं अभिनेत्री सनी लियोनी अपने पति डेनियल वेबर के साथ टी-सीरीज के कार्यालय पहुंचीं। इस दौरान सनी पारंपरिक साड़ी में नजर आईं, वहीं डेनियल कुर्ता-पायजामा पहने दिखे। उनके अलावा एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी, नेहा शर्मा, रकुल प्रीत सिंह और पलक तिवारी भी सादगी भरे पारंपरिक कपड़ों में बप्पा का आशीर्वाद लेने पहुंचीं। 'हनुमान अंश' फेम शोभिनव भी दिखे अभिनेता आयुष्मान खुराना अपनी पत्नी ताहिरा कश्यप के साथ टी-सीरीज ऑफिस पहुंचे। दोनों ही एथनिक वियर में नजर आए। वहीं फिल्म 'हनुमान अंश' में नीम करोली बाबा की मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्य भी बेहद सादे अंदाज में दर्शन करने पहुंचे। वे एक साधारण कुर्ता पहने और कंधे पर बैग टांगे दिखे। उन्होंने हाथ जोड़कर वहां मौजूद लोगों का धन्यवाद किया। हर साल टी-सीरीज में आयोजित होती है पूजा टी-सीरीज के मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार हर साल गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर अपने मुंबई स्थित दफ्तर में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं। उत्सव के दौरान फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री से जुड़े निर्माता, निर्देशक, गायक और अभिनेता बप्पा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। ‘लव एंड वॉर’ का लुक रिलीज होने के बाद स्पॉट हुए रणबीर बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर फिल्म लव एंड वॉर’ में अपना लुक रिलीज होने के बाद स्पॉट हुए। वे मुंबई में अपने लाइफस्टाइल ब्रांड आर्क्स के नए स्टोर लॉन्च इवेंट के दौरान साधारण लुक में नजर आए। इस दौरान वे बिना आस्तीन वाली सफेद टी-शर्ट, ब्लैक जॉगर्स और काले सनग्लासेज पहने दिखे। इस दौरान वहां मौजूद पैपराजी ने उनसे सवाल किया की रणबीर आपको गोली कहां लगी। इसके जवाब में रणबीर अपना हाथ दिखाते नजर आए। दरअसल ‘लव एंड वॉर’ के उनके पहले लुक में उनकी शर्ट पर खून के दाग नजर आए थे। जिसके बाद पैपराजी ने उनसे यह सवाल किया।
वेलकम फिल्म एक्टर मुश्ताक खान का निधन:56 साल की उम्र में ली आखिरी सांस; 5 साल से कैंसर से पीड़ित थे
'वेलकम' और 'आशिकी' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से पहचान बनाने वाले चरित्र अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे पिछले करीब 15 दिनों से मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने आज 24 सितंबर को अंतिम सांस ली। मुश्ताक खान पिछले पांच सालों से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके बिजनेस पार्टनर शिवम ने आजतक से बातचीत में उनके निधन की पुष्टि की है। उन्हें 25 सितंबर को मुंबई में सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। 15 दिनों से नानावती अस्पताल में भर्ती थे मुश्ताक खान को करीब पांच साल पहले कैंसर का पता चला था। इलाज के बाद वे ठीक हो गए थे, लेकिन हाल ही में यह बीमारी दोबारा लौट आई थी। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी थी। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। मुश्ताक खान के बिजनेस पार्टनर शिवम ने जानकारी दी कि गुरुवार को अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके जाने से उनके परिवार और फिल्म जगत के साथियों में दुख का माहौल है। 250 से ज्यादा फिल्मों और कई टीवी शोज में किया काम मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्बे में जन्मे मुश्ताक खान ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी। साल 1980 में फिल्म 'थोड़ी सी बेवफाई' और 'अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। अपने चार दशक से अधिक लंबे अभिनय करियर में उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने छोटे पर्दे पर 'अदालत', 'चाचा चौधरी', 'टेढ़े-मेढ़े सपने' और 'कुछ रंग प्यार के ऐसे भी' जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में भी काम किया। कॉमिक और सपोर्टिंग रोल्स से मिली पहचान मुश्ताक खान ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, जिनसे उन्हें घर-घर में पहचान मिली। 2007 में आई फिल्म 'वेलकम' में मजनू भाई (अनिल कपूर) के साथी 'बल्लू' के रोल से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली। इससे पहले 1993 की फिल्म 'हम हैं राही प्यार के' में दक्षिण भारतीय लहजे वाले 'भगवती प्रसाद मिश्रा' और 1990 की ब्लॉकबस्टर 'आशिकी' में दर्जी 'रफू मास्टर' का उनका किरदार काफी चर्चित रहा। इसके अलावा फिल्म 'मुझसे शादी करोगी' में 'चुटकी बाबा', 'गदर: एक प्रेम कथा' में 'गुल खान' और 'दिल है कि मानता नहीं' में बस कंडक्टर के रोल में भी उनकी अदाकारी को बहुत सराहा गया। 90 के दशक से लेकर हालिया फिल्मों तक जारी रहा सफर 1990 के दशक में मुश्ताक खान ने 'सड़क', 'साथी', 'क्रांतिवीर', 'राजा', 'मेजर साब' और 'मन' जैसी कई बड़ी फिल्मों में अभिनय के जरिए अपनी खास जगह बनाई। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग के दम पर वे आगे चलकर 'हेरा फेरी', 'जोड़ी नं. 1', 'राउडी राठौर' और 'वेलकम बैक' जैसी कॉमेडी फिल्मों का अहम हिस्सा बने। हाल के वर्षों में भी वे फिल्म 'स्त्री' और 'स्त्री 2' जैसी सुपरहिट फिल्मों में नजर आए थे। ये खबर भी पढ़ें रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का निधन:बंगाली सिनेमा में प्लेबैक सिंगर थीं, शाहरुख खान अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का मंगलवार दोपहर 75 साल की उम्र में निधन हो गया। यशराज फिल्म्स (YRF) ने आधिकारिक बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी है। पूरी खबर पढ़ें
'वेलकम' और 'आशिकी' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से पहचान बनाने वाले चरित्र अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे पिछले करीब 15 दिनों से मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने आज 24 सितंबर को अंतिम सांस ली। मुश्ताक खान पिछले पांच सालों से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके बिजनेस पार्टनर शिवम ने आजतक से बातचीत में उनके निधन की पुष्टि की है। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार, 25 सितंबर को मुंबई में किया जाएगा। 15 दिनों से नानावती अस्पताल में भर्ती थे मुश्ताक खान को करीब पांच साल पहले कैंसर का पता चला था। इलाज के बाद वे ठीक हो गए थे, लेकिन हाल ही में यह बीमारी दोबारा लौट आई थी। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी थी। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। मुश्ताक खान के बिजनेस पार्टनर शिवम ने जानकारी दी कि गुरुवार को अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके जाने से उनके परिवार और फिल्म जगत के साथियों में दुख का माहौल है। सपोर्टिंग और कॉमेडी रोल से बनाई खास पहचान मुश्ताक खान ने अपने लंबे फिल्मी करियर में ज्यादातर सपोर्टिंग और कॉमिक किरदार निभाए। फिल्म 'वेलकम' में उनका काम काफी पसंद किया गया था। इसके अलावा उन्होंने 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं', 'मुझसे शादी करोगी' और 'हम हैं राही प्यार के' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी अदाकारी की छाप छोड़ी थी। थिएटर से शुरू हुआ था अभिनय का सफर मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले मुश्ताक खान ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी। 90 के दशक में बॉलीवुड में कदम रखने के बाद उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन शोज और नाटकों में भी काम किया। पर्दे पर उनकी सहज कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी को दर्शकों ने हमेशा सराहा।
बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा अपनी रूमर्ड गर्लफ्रेंड और पत्नी सुनीता आहूजा के साथ जारी अनबन की खबरों को लेकर चर्चा में हैं। अब अभिनेता अनुपम खेर ने गोविंदा की निजी जिंदगी पर प्रतिक्रिया दी है। फरीदून शहरयार को दिए इंटरव्यू में अनुपम खेर ने कहा कि गोविंदा बेहतरीन एक्टर हैं, लेकिन उन्हें अपनी निजी जिंदगी और आदतों को काम पर हावी नहीं होने देना चाहिए। दरअसल हाल ही में वे कोमल रानी स्वर्णकार के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे, जबकि उनकी पत्नी सुनीता उसी दिन अकेली पहुंची थीं। 'आसपास के माहौल से परेशान हैं गोविंदा' अनुपम ने कहा कि गोविंदा को अपनी आदतों या निजी परेशानियों को अपनी पूरी जिंदगी और काम पर हावी होने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। अनुपम ने बताया कि वे गोविंदा पर कोई फैसला या टिप्पणी करने वाले व्यक्ति नहीं हैं और गोविंदा अपनी जिंदगी को बेहतर समझते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने गोविंदा को फोन किया था, लेकिन उन्होंने वापस कॉल करने की बात कही। अनुपम उन्हें सिर्फ यह कहना चाहते थे कि यह मुश्किल दौर भी बीत जाएगा। अनुपम के मुताबिक, हर किसी की जिंदगी में परेशानियां आती हैं। गोविंदा अपने आसपास के माहौल और परिस्थितियों से थोड़े परेशान जरूर हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है और वापसी की पूरी उम्मीद है। 'गोविंदा की एक्टिंग और डांस में कोई मुकाबला नहीं' अनुपम खेर ने गोविंदा के काम की तारीफ करते हुए कहा कि वे उन सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं, जिनके साथ उन्होंने काम किया है। दोनों ने साथ में 10 से 12 फिल्मों में काम किया है। अनुपम के मुताबिक, इम्प्रोवाइजेशन, एक्टिंग और डांस के मामले में गोविंदा का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। कोमल संग दिखे गोविंदा, अकेली पहुंची थीं पत्नी सुनीता गोविंदा की पर्सनल लाइफ पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में है। हाल ही में गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल में गोविंदा अपनी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ गणपति के दर्शन करने पहुंचे थे। वहीं, उसी दिन उनसे पहले उनकी पत्नी सुनीता आहूजा अकेले ही दर्शन के लिए पहुंची थीं। दोनों के अलग-अलग पहुंचने और कोमल के साथ दिखने के बाद से उनके रिश्ते और कथित अफेयर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुनीता आहूजा बोलीं- इंसान धोखा ही देते हैं गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा को अभिनेत्री और रूमर्ड गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार के साथ दिखने के बाद सुनीता आहूजा का एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इंसानों को धोखेबाज बताते हुए जानवरों से प्यार को बेहतर बताया। हालांकि, सुनीता ने अपने बयान में गोविंदा का नाम नहीं लिया। दरअसल, मुंबई एयरपोर्ट पर पैपराजी से बातचीत के दौरान सुनीता अपने पालतू कुत्ते विंटर के साथ थीं। पैपराजी से बात करते हुए सुनीता ने कहा कि इंसानों को जितना भी प्यार करो, कोई फायदा नहीं है। धोखा ही देते हैं। इनको प्यार करो, देखो, हमेशा चिपके रहते हैं। जानवरों से प्यार करो, इंसानों से नहीं। धोखेबाज होते हैं इंसान। गणपति उत्सव में भी अलग नजर आया परिवारइस साल गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा और सुनीता साथ नजर नहीं आए। गणेश चतुर्थी के मौके पर सुनीता आहूजा के घर गणपति बप्पा का स्वागत किया गया। गणेशोत्सव के दौरान गोविंदा और सुनीता के बेटे यशवर्धन और बेटी टीना भी मौजूद थे। हालांकि, इस दौरान गोविंदा नजर नहीं आए। सुनीता का दावा- कोमल रानी से शादी करने वाले थे गोविंदा सुनीता आहूजा ने दिसंबर 2025 में गोविंदा से तलाक की अर्जी दाखिल की थी, हालांकि 19 अगस्त को उन्होंने अर्जी वापस ले ली है। इस दौरान राखी सावंत से कॉल पर बात करते हुए सुनीता ने दावा किया है कि तलाक के बाद गोविंदा कोमल से शादी करने वाले थे, यही वजह है कि उन्होंने तलाक का केस वापस ले लिया है।
गणेश उत्सव के दौरान मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल में लगातार बॉलीवुड और फिल्म जगत की हस्तियां पहुंच रही हैं। बुधवार को गोविंदा के बेटे यशवर्धन और बेटी टीना ने भी गणपति बप्पा के दर्शन किए। वहीं, मंगलवार को गोविंदा खुद अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार के साथ लालबागचा राजा पहुंचे थे। दोनों ने साथ में पूजा की और आरती में शामिल हुए। आज अनंत अंबानी ने भी लालबागचा राजा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। लालबागचा राजा के आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, 2026 में गणपति की स्थापना 14 सितंबर को हुई थी। 25 सितंबर को विसर्जन होगा। मंगलवार को एक्टर आयुष्मान खुराना भी लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे। उनके अलावा टीवी अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने भी पंडाल में बप्पा का आशीर्वाद लिया था। वहीं, अंकिता लोखंडे ने भी बप्पा का आशीर्वाद लिया। इससे पहले संजय दत्त पत्नी मान्यता दत्त के साथ लालबागचा राजा पहुंचे थे। दोनों ने साथ में पूजा की। इसी दौरान संजय दत्त की मुलाकात अभिनेता चंकी पांडे से भी हुई। चंकी अपनी बेटी अनन्या पांडे के साथ वहां पहुंचे थे। दोनों कलाकारों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और कुछ देर बातचीत भी की। इस दौरान संजय दत्त ऑरेंज कुर्ते में नजर आए, जबकि मान्यता ने पिंक सूट पहना था। दोनों ने साथ में गणपति की पूजा की। दर्शन के दौरान संजय ने बप्पा के सामने सिर झुकाया और माथे पर तिलक लगाया। इसी दौरान संजय दत्त का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। इसमें वह अपने माथे पर तिलक लगाने के बाद मान्यता के माथे पर भी तिलक लगाते नजर आए। दर्शन के दौरान संजय दत्त मान्यता का खास ख्याल रखते भी नजर आए। भारी भीड़ के बीच वह उन्हें अपने करीब रखते दिखे। पंडाल की तरफ जाते समय भी संजय लगातार उनके साथ चलते रहे।
फिल्म ‘लव एंड वॉर’ से रणबीर कपूर का पहला लुक बुधवार को सामने आया है। पोस्टर में रणबीर का इंटेंस और रॉ अंदाज नजर आ रहा है। रणबीर मोटी मूंछों, खून के दाग वाली शर्ट और गॉगल्स में दिखाई दे रहे हैं। उनका लुक किरदार के रफ और मजबूत अंदाज की झलक देता है। शर्ट पर खून के दाग फिल्म की डार्क और एक्शन से भरपूर कहानी की ओर इशारा करते हैं। वहीं, गॉगल्स उनके किरदार को स्टाइलिश लुक दे रहे हैं। मेकर्स ने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए लिखा, “वो रुतबा, वो रौब, वो जुनून! संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ 21 जनवरी 2027 को। फिल्मों में मिलते हैं!” पोस्टर में रणबीर का यह अवतार उनके अब तक के किरदारों से काफी अलग नजर आ रहा है। फिल्म में रणबीर के साथ आलिया भट्ट और विक्की कौशल भी नजर आएंगे। ‘लव एंड वॉर’ दुनियाभर में 21 जनवरी 2027 को रिलीज होगी। यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषा में रिलीज की जाएगी। इसका निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया है। ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट कई बार बदली संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट अब तक कई बार बदली जा चुकी है। सबसे पहले इसकी रिलीज की घोषणा जनवरी 2024 में हुई थी। उस समय फिल्म को क्रिसमस 2025 पर रिलीज करने की योजना थी। बड़े स्तर पर हो रही शूटिंग और प्रोडक्शन में ज्यादा समय लगने के कारण रिलीज को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद मार्च 2026 में फिल्म रिलीज होने की बात सामने आई। इस बीच 14 अगस्त 2026 की रिलीज डेट की भी चर्चा हुई थी। हालांकि, फिल्म का काम तय समय में पूरा नहीं हो सका। खास तौर पर बड़े वीएफएक्स और हवाई एक्शन सीन्स के कारण समय बढ़ा। इसके बाद मेकर्स ने फिल्म की नई रिलीज डेट तय की। 21 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज तय की गई है। भंसाली के साथ विक्की की पहली फिल्म संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल पहली बार एक साथ नजर आएंगे। हालांकि, रणबीर और आलिया इससे पहले भी भंसाली के साथ काम कर चुके हैं। रणबीर कपूर ने भंसाली के निर्देशन में ‘सांवरिया’ (2007) से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। फिल्म में उनके साथ सोनम कपूर भी मुख्य भूमिका में थीं। आलिया भट्ट ने भंसाली के साथ पहली बार ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ (2022) में काम किया। फिल्म में उन्होंने गंगूबाई का किरदार निभाया था। इस भूमिका के लिए आलिया को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला था। वहीं, विक्की कौशल ने ‘लव एंड वॉर’ से पहले भंसाली के निर्देशन में कोई फिल्म नहीं की है। ऐसे में यह उनके लिए भंसाली के साथ पहली फिल्म है। सेट से लीक हुए थे स्टारकास्ट के लुक, देखिए तस्वीरें- ‘लव एंड वॉर’ के सेट पर जून में हादसा हुआ फिल्म ‘लव एंड वॉर’ जून 2026 में सेट पर हुए एक हादसे के बाद चर्चा में आ गई थी। 17 जून को मुंबई के फिल्मसिटी के पास रॉयल पंप स्टूडियो में 42 वर्षीय कारपेंटर चंद्रधारी सिंह यादव की करंट लगने से मौत हो गई थी। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ था। हादसे के बाद भंसाली प्रोडक्शंस ने मृतक के परिवार को 40 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज यानी FWICE ने मुआवजा बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने की मांग की थी। संगठन ने परिवार के बच्चों की पढ़ाई और मृतक की पत्नी को रोजगार देने की भी अपील की थी। इसके बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन यानी AICWA ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा। संगठन ने हादसे की जांच और संजय लीला भंसाली के खिलाफ FIR की मांग की। AICWA ने मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग भी रखी। संगठन ने सेट पर सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए। AICWA ने यह भी कहा था कि घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही फिल्म सेट की सुरक्षा जांच कराने की मांग की गई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें...
हॉलीवुड फिल्ममेकर रहे हार्वी वीनस्टीन को न्यूयॉर्क में 15 साल जेल की सजा सुनाई गई है। उन्हें पूर्व ‘प्रोजेक्ट रनवे’ प्रोडक्शन असिस्टेंट मिरियम हेली से जुड़े यौन अपराध में दोषी ठहराया गया था। न्यूयॉर्क की अदालत ने 23 सितंबर को यह सजा सुनाई। यह सजा 2025 में हुए दोबारा ट्रायल में वीनस्टीन की दोषसिद्धि के बाद सुनाई गई है। अभियोजन पक्ष ने 20 साल की सजा और रिहाई के बाद 5 साल निगरानी की मांग की थी। बचाव पक्ष ने वीनस्टीन की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए 9 साल की सजा की मांग की थी। बता दें कि 2017 में हार्वी वीनस्टीन पर कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न और यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इन खुलासों के बाद #MeToo आंदोलन को दुनियाभर में बड़ी गति मिली। हालांकि, #MeToo की शुरुआत 2006 में एक्टिविस्ट तराना बर्क ने की थी। 2017 में अभिनेत्री एलिसा मिलानो की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह हैशटैग दुनियाभर में तेजी से वायरल हुआ। वीनस्टीन ने अदालत में कहा, “मैं एक परफेक्ट इंसान नहीं हूं। लेकिन मैं ऐसा इंसान हूं, जिसने गलतियां की हैं।” उन्होंने कहा कि 2017 के बाद हुई घटनाओं पर सोचने से उन्हें समझ आया कि उनके पुराने व्यवहार से दूसरों पर बुरा असर पड़ा। उन्होंने उन लोगों से माफी मांगी, जिन्हें उनके कामों से चोट पहुंची होगी। हालांकि, उन्होंने अपनी बेगुनाही दोहराई और कहा कि वह हिंसक व्यक्ति नहीं हैं। जज ने कहा- यौन शिकारी के रूप में याद किए जाएंगे जज कर्टिस फार्बर ने कहा कि वीनस्टीन की फिल्मों के लिए उन्हें याद किया जा सकता है, लेकिन उनकी पहचान उस काम के सामने छोटी पड़ जाती है, जो उन्होंने मिरियम हेली के साथ किया। जज ने कहा कि वीनस्टीन ने हेली के फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के सपने का फायदा उठाया। मिरियम हेली ने सुनाई आपबीती 2025 के दोबारा ट्रायल में मिरियम हेली ने गवाही दी थी। उन्होंने बताया कि 2006 में वीनस्टीन ने मैनहटन स्थित अपने अपार्टमेंट में उन्हें ओरल सेक्स के लिए मजबूर किया था। हेली के मुताबिक, उन्होंने इसका विरोध किया था। सजा सुनाए जाने से पहले हेली ने अदालत में पीड़ित प्रभाव बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोबारा गवाही देना उनके लिए बेहद मुश्किल था। 2020 में हार्वी वीनस्टीन को न्यूयॉर्क में यौन अपराध और जेसिका मान से रेप के मामले में दोषी ठहराया गया था। उन्हें 23 साल जेल की सजा मिली थी। हालांकि, 2024 में न्यूयॉर्क की सर्वोच्च अदालत ने उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और नए ट्रायल का आदेश दिया। कोर्ट ने माना था कि ट्रायल में ऐसे आरोपों से जुड़ी गवाही शामिल की गई थी, जो सीधे मामले से संबंधित नहीं थी। इसके बाद 2025 में दोबारा ट्रायल हुआ। इसमें वीनस्टीन को मिरियम हेली से जुड़े यौन अपराध में फिर दोषी ठहराया गया। वहीं, काजा सोकोला से जुड़े आरोप में वह बरी हो गए। जेसिका मान से जुड़े रेप के आरोप पर जूरी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। 2026 में जेसिका मान से जुड़े आरोप पर तीसरा ट्रायल हुआ, लेकिन जूरी फिर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने यह आरोप हटा दिया। वीनस्टीन को कैलिफोर्निया में भी 16 साल की सजा मिली है। वह 2013 में एक महिला के साथ रेप और यौन हमले के मामले में दोषी ठहराए गए थे। कैलिफोर्निया में उनकी सजा पर भी कानूनी प्रक्रिया जारी है। न्यूयॉर्क के जज ने कहा है कि न्यूयॉर्क की सजा कैलिफोर्निया की सजा के बाद लगातार चल सकती है, हालांकि कैलिफोर्निया में इसकी कानूनी स्थिति वहां की अदालत तय करेगी। वीनस्टीन 2020 से जेल में हैं और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं का भी जिक्र अदालत में हुआ है। बचाव पक्ष ने इन्हीं स्वास्थ्य कारणों के आधार पर कम सजा की मांग की थी। भारत में 2018 में #MeToo आंदोलन ने जोर पकड़ा साल 2018 में भारत में भी #MeToo आंदोलन के दौरान कई कलाकारों पर महिलाओं ने अलग-अलग तरह के आरोप लगाए। भारत में 2018 के #MeToo आंदोलन को अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के आरोपों के बाद बड़ी गति मिली। उन्होंने अभिनेता नाना पाटेकर पर 2008 में फिल्म हॉर्न ओके प्लीज़ की शूटिंग के दौरान गलत व्यवहार का आरोप लगाया था। नाना पाटेकर ने आरोपों से इनकार किया था। बाद में तनुश्री की शिकायत पर पुलिस केस भी दर्ज हुआ था। साजिद खान पर #MeToo आरोप लगे थे अक्टूबर 2018 में मॉडल और अभिनेत्री सलोनी चोपड़ा, पत्रकार करिश्मा उपाध्याय और अभिनेत्री रैचल व्हाइट ने साजिद खान पर यौन दुर्व्यवहार, अनुचित व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद सिमरन सूरी और अहाना कुमरा समेत कुछ अन्य महिलाओं ने भी साजिद के व्यवहार को लेकर अपनी बातें सार्वजनिक कीं। आरोप सामने आने के बाद साजिद खान ने फिल्म हाउसफुल 4 के निर्देशन से दूरी बना ली। उन्होंने कहा था कि जब तक वह इन आरोपों को गलत साबित नहीं कर देते, तब तक वह निर्देशन से दूर रहेंगे। इसके बाद निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने फरहाद सामजी को फिल्म का निर्देशक बनाया। फिल्म की बाकी शूटिंग और निर्देशन फरहाद सामजी ने पूरा किया। मामले में इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन यानी आईएफटीडीए ने भी कार्रवाई की। संगठन ने साजिद खान की सदस्यता एक साल के लिए निलंबित कर दी थी। अनु मलिक पर कई महिलाओं ने आरोप लगाए थे 2018 में संगीतकार अनु मलिक पर कई महिलाओं ने अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। गायिका सोना महापात्रा ने उन पर अनुचित और कथित तौर पर शिकारी जैसा व्यवहार करने के आरोप लगाए। इसके बाद गायिका श्वेता पंडित ने भी आरोप लगाया कि जब वह नाबालिग थीं, तब अनु मलिक ने उनके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया था। नेहा भसीन समेत कुछ अन्य महिलाओं ने भी उन पर आरोप लगाए। अनु मलिक और उनके वकीलों ने इन आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने आरोपों को चरित्र हनन बताया था। विवाद के बाद अनु मलिक को इंडियन आइडल 10 में जज की भूमिका से हटा दिया गया। हालांकि, 2019 में उन्हें शो के अगले सीजन में फिर जज बनाया गया। उनकी वापसी का सोना महापात्रा और नेहा भसीन समेत कई लोगों ने विरोध किया। इसके बाद अनु मलिक फिर शो से बाहर हो गए। विंता नंदा ने आलोक नाथ पर आरोप लगाए थे अक्टूबर 2018 में 90 के दशक के टीवी शो तारा की लेखिका और प्रोड्यूसर विंता नंदा ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए आलोक नाथ का नाम लिए बिना उन पर करीब 19 साल पहले नशीला पदार्थ पिलाकर रेप और यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगाए थे। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा आलोक नाथ की तरफ था। मामले के बाद CINTAA ने आलोक नाथ को शो-कॉज नोटिस जारी किया। वहीं, आलोक नाथ और उनकी पत्नी आशु नाथ ने विंता नंदा के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया। 17 अक्टूबर 2018 को विंता नंदा ने मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। नवंबर में CINTAA की बैठक में शामिल नहीं होने के बाद संगठन ने आलोक नाथ को एसोसिएशन से निष्कासित कर दिया। 21 नवंबर 2018 को मुंबई पुलिस ने विंता नंदा की शिकायत पर आईपीसी की धारा 376 के तहत रेप का केस दर्ज किया। जनवरी 2019 में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आलोक नाथ को 5 लाख रुपए के मुचलके पर अग्रिम जमानत दे दी। विकास बहल पर पूर्व महिला कर्मचारी ने आरोप लगाए थे फिल्ममेकर विकास बहल पर फैंटम फिल्म्स की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। यह मामला 2015 की घटना से जुड़ा था, लेकिन 2018 में #MeToo आंदोलन के दौरान दोबारा चर्चा में आया। महिला ने एक मीडिया इंटरव्यू में अपने अनुभव के बारे में विस्तार से बताया था। इसके बाद कंगना रनोट समेत कुछ अन्य लोगों ने भी बहल के व्यवहार पर सवाल उठाए। अक्टूबर 2018 में विवाद के बीच फैंटम फिल्म्स को बंद कर दिया गया। इसके बाद विकास बहल ने अपने पूर्व पार्टनर्स अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवाने के खिलाफ 10 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दायर किया। बाद में संबंधित महिला ने अदालत को बताया कि वह विकास बहल के खिलाफ पुलिस शिकायत या कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाना चाहती थीं। जून 2019 में रिलायंस एंटरटेनमेंट की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी ने विकास बहल को आरोपों से मुक्त कर दिया। इसके बाद फिल्म सुपर 30 में उनका निर्देशक के तौर पर क्रेडिट दोबारा जोड़ा गया। सुभाष घई पर भी आरोप लगा था अक्टूबर 2018 में #MeToo आंदोलन के दौरान फिल्ममेकर सुभाष घई पर यौन उत्पीड़न और रेप के आरोप लगाए गए थे। एक महिला ने लेखक महिमा कुकरेजा के जरिए शेयर किए गए एक अनाम अकाउंट में आरोप लगाया कि घई ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर रेप किया। घई ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था। उन्होंने इन्हें झूठा बताते हुए मानहानि का केस करने की चेतावनी भी दी थी। इसी दौरान मॉडल और टीवी अभिनेत्री केट शर्मा ने मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि घई ने उन्हें अपने घर बुलाया और जबरन चूमने की कोशिश की। घई ने इन आरोपों से भी इनकार किया। दिसंबर 2018 में मुंबई पुलिस ने केट शर्मा की शिकायत की जांच के बाद रिपोर्ट दाखिल की। पुलिस के मुताबिक, शिकायत में कोई ठोस सबूत या तथ्य नहीं मिला। आंदोलन के दौरान सोना महापात्रा और महिला पत्रकार नताशा हेमराजानी समेत कई महिलाओं ने कैलाश खेर पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। खेर ने एक आरोप पर कहा था कि उन्हें ऐसी घटना याद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी को उनके व्यवहार से असहज महसूस हुआ हो, तो वह माफी मांगते हैं। रजत कपूर ने सार्वजनिक माफी मांगी थी अक्टूबर 2018 में #MeToo आंदोलन के दौरान अभिनेता रजत कपूर पर दो महिलाओं ने अनुचित और गैर-पेशेवर व्यवहार के आरोप लगाए। इनमें एक महिला पत्रकार थीं, जिन्होंने 2007 के एक इंटरव्यू के दौरान रजत कपूर द्वारा पूछे गए आपत्तिजनक सवालों के स्क्रीनशॉट साझा किए थे। दूसरी महिला सहायक निर्देशक थीं, जिन्होंने उनके व्यवहार की शिकायत की थी। बाद में एक और गुमनाम महिला का आरोप भी सामने आया। आरोप सामने आने के बाद रजत कपूर ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा था कि अगर उनके शब्दों या व्यवहार से किसी को दुख, ठेस या मानसिक परेशानी हुई है, तो वह इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं।
कभी घर-घर पहुंचाता था पिज्जा, आज 3 रेस्टोरेंट का मालिक; मेहनत से बदली इस भारतीय की जिंदगी
कहते हैं कि अगर इंसान में मेहनत करने और आगे बढ़ने का जुनून हो, तो मुश्किल हालात भी उसके रास्ते को ज्यादा लंबे समय तक नहीं रोक सकते।
मराठी गाने पर रोबोट ‘माया’ का शानदार क्लासिकल डांस, वीडियो देख हैरान रह गए लोग
तकनीक के तेजी से बदलते दौर में अब रोबोट सिर्फ इंसानों की तरह चलने या काम करने तक सीमित नहीं रह गए हैं
सीने में तेज दर्द के बाद अस्पताल पहुंची महिला, सर्जरी में पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और मोमबत्ती
आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 33 वर्षीय महिला को सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को उसके पेट के अंदर कई असामान्य वस्तुएं मौजूद होने का पता चला। सर्जरी के दौरान महिला के पेट से 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती निकाली गई।
ऑस्ट्रेलिया में बना दुनिया का सबसे भारी गोल्ड बार, 521 किलो वजन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
सोने की छोटी-सी ईंट या गोल्ड बार तो आपने कई बार देखी होगी
धरती पर कई ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिनकी क्षमताएं इंसानों को हैरान कर देती हैं।
नदी में मगरमच्छ के सामने बच्चे का बेखौफ अंदाज, वीडियो ने मचाई सनसनी
नदी के पानी में मगरमच्छ को देखकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक बच्चे का बिल्कुल अलग ही अंदाज देखने को मिला। वीडियो में बच्चा नदी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम से नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है।
4,000 मीटर की ऊंचाई पर खिलता है 'हिमालयी हीरा', 7 से 15 साल में सिर्फ एक बार आता है फूल
प्रकृति अपने अनोखे और दुर्लभ चमत्कारों से समय-समय पर लोगों को हैरान करती रहती है।

