एशियाई खेलों की शुरुआत होने में अब ज्यादा समय शेष नहीं रह गया है। बीसीसीआई क्रिकेटरों के लिए ठहराए जाने वाली व्यस्था से खुश नहीं है। बताया जा रहा है कि बोर्ड ने होटल के एक कमरे में दो क्रिकेटरों को ठहराए जाने पर आपत्ति जताई है।
छोटे कारोबारियों की बड़ी चिंताएं: अगले आर्थिक सुधारों का लक्ष्य हो छोटे कारोबार, करोड़ों को देते हैं आजीविका small-businesses-should-be-next-focus-of-economic-reforms-in-india
क्या नेपाल त्रासदी को रोका जा सकता था?: तबाही में छिपा जलवायु संकट का संदेश, तीन देशों के सहयोग की जरूरत nepal-tibet-flood-may-averted-glacier-melt-climate-change-himalayan-disaster
जीवन धारा: क्रोध की आग हमें ही जलाती है
जीवन धारा: क्रोध की आग हमें ही जलाती है
दूसरा पहलू: ब्रह्मांड के 'लिटिल रेड डॉट्स' का रहस्य
दूसरा पहलू: ब्रह्मांड के 'लिटिल रेड डॉट्स' का रहस्य
जीत का अर्थ: स्पर्धा में जीतना साहस की मिसाल, लेकिन एक मां को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी?
जीत का अर्थ: स्पर्धा में जीतना साहस की मिसाल, लेकिन एक मां को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी? ramabai-ranveer-runs-and-won-marathon-for-daughters-education-Ambajogai-Maharashtra
जटिल जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही 15 वर्षीय तन्वी की मौत ने देश के बड़े सरकारी अस्पतालों में सर्जरी के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ललित सुरजन की कलम से देशबन्धु : चौथा खंभा बनने से इंकार- 8
'छत्तीसगढ़ में शुक्ल बंधुओं के वर्चस्व के कारण अनेक कांग्रेसजन घुटन महसूस करते थे,
How safe is the digital world for children?
भारत में बच्चों की दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है।
छवियों में कैद मोदी विदेश नीति
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बनाई विदेश नीति में कैमरे में कैद छवियों को अहम बना दिया है।
विचार: अंधविरोध का वैचारिक गठबंधन
न्यूयार्क की स्थानीय राजनीति, एक्टिविस्ट संगठनों, भारत विरोधी अभियानों और धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर सक्रिय संस्थाओं के बीच एक ऐसा वैचारिक इकोसिस्टम दिखाई देता है, जिसमें एक मंच का आरोप दूसरे मंच का प्रमाण बन जाता है।
कमलापति त्रिपाठी में संचित रही काशी की संस्कृति
काशी अपने कुछ व्यक्तित्वों को कभी नहीं भूल सकती। पंडित कमलापति त्रिपाठी तो उसकी संस्कृति के सच्चे प्रतिनिधि थे। 3 सितंबर, 1905 को यहां की समृद्ध पांडित्य परंपरा वाले परिवार में जन्मे कमलापति त्रिपाठी को सात दशकों का…
मतदाताओं के छूटने से मकसद बेमानी
मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद थमता नहीं दिख रहा। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के जिस तरह के आरोप सर्वप्रथम बिहार में लगे थे, वे एसआईआर के तीसरे चरण में भी दूर नहीं किए जा सके…
राजधानी में लड़कियां आज भी असुरक्षित
राजधानी दिल्ली में 16 वर्षीया छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप की कथित घटना बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। सवाल सिर्फ अपराध का नहीं, उस मानसिकता का भी है, जो किसी मासूम की इंसानियत और सम्मान को कुचलने की हिम्मत…
ऐसे में अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि निजी निवेश और नई नौकरियां विकास के इंजन बनें। भारत ने साबित किया कि वह वैश्विक संकट के बीच भी अपनी विकास दर को तेज बनाए रख सकता है, लेकिन असली कसौटी इस संकट के छंटने के बाद भी इस रफ्तार को बरकरार रखने की है।
जागरण संपादकीय: राम मंदिर का संचालन
राम मंदिर उन आदर्शों का प्रकाशपुंज बनना चाहिए, जिनके लिए श्रीराम जाने और पूजे जाते हैं। वैसे तो संत समाज की यह मांग रही है कि राम मंदिर का संचालन उनके द्वारा ही हो, लेकिन एक तो इस पर आम सहमति नहीं और दूसरे, इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने और चढ़ावे के लेखा-जोखा के कारण प्रशासनिक मामलों में दक्ष लोगों की भी आवश्यकता है।
फैक्ट चेक: भारत के पुराने और असंबंधित वीडियो नेपाल बाढ़ से जोड़कर वायरल
बूम ने पाया कि पहला वीडियो महाराष्ट्र के एक बांध का है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के वृंदावन का है.
शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है यह आसन
नई दिल्ली, योग हमारी प्राचीन परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो न सिर्फ शरीर को बल्कि स्वस्थ रखने के साथ मन को भी शांत रखने में कारगर होता है।
नेपाल बाढ़ में तेज बहाव के कारण पुल टूटने के दावे से वायरल वीडियो फेक है
बूम की जांच में NVIDIA और Hive Moderation जैसे AI डिटेक्शन टूल्स ने वीडियो के AI जनरेटेड होने की संभावना जताई.
एससीओ समिट: मियां शहबाज शरीफ, तस्वीर काटने से हकीकत नहीं बदलती
अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी की मौजूदगी को मिटाने का सबसे आसान तरीका फोटो एडिट करना हो सकता है, लेकिन उसकी राजनीतिक मौजूदगी को मिटाना संभव नहीं है।
सिर्फ आक्रोश से रास्ता नहीं बनता: ‘जेन जी’ के सामने असली चुनौती अंतर्विरोध मुक्त वास्तविक नैतिक बल सिद्ध करना
आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी
साझा हिमालय के लिए अंतर्राष्ट्रीय नीति और तंत्र जरुरी
हाल ही में नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने इस प्राकृतिक और वैज्ञानिक वास्तविकता को एक बार फिर पूरे दक्षिण एशिया के सामने उजागर कर दिया है।
ललित सुरजन की कलम से आत्मकथा लिखना आसान नहीं
'एक आत्मकथा में समृद्ध अनुभव, सघन विचार और समर्थ अभिव्यक्ति से मिलकर वह आकर्षण होना चाहिए जो दूर-दूर तक प्रभावित कर सके।
हाथ में 50 पैसे का सिक्का और मन में गायिका बनने का सपना।
पूर्वोत्तर भारत के ईसाई संगठनों ने कहा एफसीआरए में प्रस्तावित बदलाव दमनकारी
इस बातचीत की प्रक्रिया में पूर्वोत्तर के कई चर्च काउंसिल और उनके मुख्य संगठन शामिल हैं।
दुुनिया जब बुरे दौर में है तब भारत के आर्थिक उजाले
दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, वह आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से असाधारण चुनौतियों का दौर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ... Read more
कौशल मिलेगा, रोजगार कहां मिलेगा?
विकसित भारत ञ्च2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए नीति आयोग ने कौशल विकास को पुर्नव्यवस्थित करने की पहल की है।
विचार: अति की हदों को पार करती असहमति
यह एक तथ्य है कि जनभागीदारी वाले कई सामाजिक अभियान महज मोदी सरकार के अभियान बनकर रह गए हैं। यह स्थिति तब है, जब देश में कई समस्याएं ऐसी हैं, जिनका समाधान जनता की सामूहिक भागीदारी से ही किया जा सकता है।
विचार: समझी जाएं जेन-जी की आकांक्षाएं
भारत में जेन-जी की आकांक्षाएं किसी एक चुनाव या एक अभियान की बात नहीं हैं। यह भारत के लोकतंत्र के आने वाले कल की दिशा तय करने वाला सवाल है। जो भी नेतृत्व राजर्षि की संकल्पना को आत्मसात कर उसके अनुरूप आचरण करेगा, वही इस पीढ़ी का भरोसा जीत पाएगा।
चौतरफा चुनौतियों के बावजूद बढ़ी भारत की विकास दर
अप्रैल से जून 2026 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की गई। यह उस विकास यात्रा की अगली कड़ी है, जिसमें वास्तविक जीडीपी 2023-24 में 7.2, 2024-25 में…
वैश्विक झंझावात में भी मजबूत भारत
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.8 प्रतिशत रहना सुखद आश्चर्य है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि अप्रैल से जून की इस अवधि में दुनिया की अर्थव्यवस्था…
किर्गिस्तान में कूटनीतिक कामयाबी
सोमवार को यह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) नहीं, दिल्ली सहयोग संगठन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कुशल कूटनीति और शांति-प्रयासों के जरिये माहौल को भारत के पक्ष में बना दिया…
ऐसी खबर का जलवा कई दिन तक बरकरार रहता है जिसमें सामाजिक स्तर पर प्रसिद्ध, बहुत ज्यादा पहुंच वाला, खूब प्रभाव पैदा कर सकने वाला व्यक्ति किसी भी मुश्किल सवाल का जवाब संयम और मुस्कुराते हुए देता रहे। इससे देश के काफी बड़े हिस्से की तबीयत ठीक रहती है। वैसी खबर का जलवा एक दम बिखरा सा रहता है जब उसी तरह का व्यक्ति एक ही साक्षात्कार में कई सवालों के जवाब न दे पाए। ऐसा होना स्वाभाविक है जब परीक्षा से पहले सम्बंधित विषय की भरपूर तैयारी न की जाए। अपने गुरुओं और वरिष्ठ जनों की बातों को ठीक से सुना और समझा न हो। कक्षा या ज़िंदगी की कक्षा में बैठे हों लेकिन ध्यान कहीं और हो और नोट्स न लिए हों। अभ्यास करने के दौरान संजीदगी न बनाए रखो तो उचित समय पर सवालों के जवाब भूल ही जाते हैं, जिसे जवाब देते नहीं बना भी कहते हैं। इसे भी पढ़ें: पानी की कमियां और गुस्ताखियां (व्यंग्य) इम्तिहान से पहले व्यक्ति सोचता है कि मुझे सब कुछ पता है, सब याद है, मुझसे ज्यादा चतुर कोई नहीं। कोई कैसा, ऐसा या वैसा सवाल आएगा तो हल कर लूंगा। कई बार ऐसा हो जाता है कि परीक्षा की घड़ी बिना बताए मुख्य दरवाज़े पर आन खड़ी होती है। सुना है, तब याद किया सब कुछ भूल जाता है। कई सवाल सामने बैठ जाते हैं, एक दो सवाल को तो खड़े रहना पड़ता है इसलिए वे नाराज़ भी हो जाते हैं। जब जवाब सूझता नहीं तो बंदा सोचता है कि मुझे जवाब देने की तैयारी निरंतर रखनी चाहिए थी। अभ्यास करते रहना चाहिए था। दूसरे अनुभवी लोगों से पूछ लेना चाहिए था। परीक्षा में तो कुछ भी प्रत्याशित या अप्रत्याशित पूछा जा सकता है इसलिए यह पता होना चाहिए कि अगर सवाल का रंग लाल या नीला हो तो जवाब कौन से रंग का देना है। कई सवाल ऐसे होते हैं कि पोल खोल दें जिससे तबीयत अविलंब खराब हो जाती है। अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है। सवाल घबराहट का माहौल बन देते हैं। इस दौरान यह कह देना ज़रूरी होता है कि जिस सम्बन्ध में सवाल पूछे जा रहे हैं उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। साथ साथ यह भी कह देना चाहिए कि जो लोग गलत करते हैं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उनसे ऐसा करने की उम्मीद नहीं थी। अच्छी राजनीतिक जलवायु हो तो यह एक उम्दा जवाब माना जाता है और समाज में प्रसिद्ध भी है। यह हमारे सामाजिक जीवन का आधार कार्ड भी है। असल में सवाल तो वही असली सवाल माने जाते हैं जिनका जवाब न दिया जा सके। बड़ों बड़ों की बोलती बंद कर दें। सवाल ऐसे होते हैं तो जवाब भी ऐसे होते हैं या हो सकते हैं जो बड़ी से बड़ी बोलती बंद कर दें। सवालों ने अपने बीच से हमेशा कई ऐसे सवाल खड़े किए जिन्हें कोई जवाब बिठा न सका। कितने सवाल अपने जवाब ढूंढते रहे अभी भी ढूंढ रहे होंगे। पुलिस की मदद ली, सुप्रसिद्ध समझदारों, सिद्धहस्त महात्माओं और जाने माने ज्योतिशिओं की सलाह ली लेकिन न असली जवाब मिले न नकली। आखिर में यही मानना पडेगा कि जवाब जिनका नहीं, वो सवाल होते हैं असली सवाल। - संतोष उत्सुक
फैक्ट चेक: नेपाल में आई बाढ़ के CCTV फुटेज के दावे से AI जनित क्लिप वायरल
बूम ने जांच में पाया कि इनमें से ज्यादातर क्लिप नेपाल बाढ़ के वास्तविक दृश्य को नहीं दिखाते. इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से क्रिएट किया गया है.
धरती पर कई ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिनकी क्षमताएं इंसानों को हैरान कर देती हैं।
किडनी को हेल्दी रखने के लिए करे योगासन
नई दिल्ली, किडनी (गुर्दा) हमारे शरीर के बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। ये खून को साफ करने, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने और पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किडनी की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली के साथ कुछ योगाभ्यास भी शरीर को सक्रिय और स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
गुर्दा सही से चले तो करे योगाभ्यास, जानें करने का सही तरीका
नई दिल्ली, स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं बल्कि शरीर को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना है। गुर्दे हमारे शरीर का प्राकृतिक फिल्टरिंग सिस्टम है, जो शरीर की सफाई में काम करता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि आंतरिक अंगों की मालिश और पुनर्प्राप्ति की एक सूक्ष्म तकनीक है।
भारत को खुद अपनी राह बनानी होगी: ग्लोबल फॉर्च्यून 500 में शामिल होना आसान नहीं, घरेलू क्षमता मजबूत करनी होगी
दूसरा पहलू: वह मंदिर, जहां सूर्य की पहली किरण करती है अभिषेक, उत्तराखंड में है ये विशिष्ट जगह
दूसरा पहलू:वह मंदिर, जहां सूर्य की पहली किरण करती है अभिषेक, उत्तराखंड में है ये विशिष्ट जगह
मजबूती के संकेत: निजी निवेश और निर्यात के जरिये रफ्तार बनाए रखनी होगी; ताकि विकास पर भारी न पड़े बाहरी दबाव
आज से सितंबर महीने की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे में आपके लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि इस महीने बैंक कब-कब और कहां-कहां कितने दिन बंद रहेंगे।
नए महीने की शुरुआत से यानी आज सितंबर महीने की शुरुआत से ही कई बदलाव होने जा रहे हैं। अब ये देखना होगा कि इनका आपकी जेब पर क्या असर पड़ता है। आप इन नए बदलावों के बारे में यहां जान सकते हैं।
सीमा विवाद की कठिन डगर: हालिया वार्ताएं संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत कर सकती हैं, भारत-चीन के बीच राह लंबी
चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों का आज से पक्का मोर्चा: जाम करेंगे रोड, ये हैं मुद्दे
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि चंडीगढ़ बॉर्डर पर एसकेएम का यह पहला बड़ा प्रदर्शन है। इस दिन-रात के मोर्चे के दौरान किसानों की मांगों पर प्रतिदिन चर्चा होगी।
ललित सुरजन की कलम से मानसरोवर यात्रा पर राहुल
'जब पंडित नेहरू नैनी जेल में कैद थे तब उन्होंने माघ स्नान के लिए जाते श्रद्धालुओं को लेकर गंगा के बारे में इंदिरा जी को एक रोचक पत्र लिखा था।'
अमेरिका में भागवत: विवेकानंद नंबर टू या पाखंडी नंबर वन!
हिंदू की यह परिभाषा और पहचान, किसी और ने नहीं, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयार्क के अपने दौरे पर पेश की है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे कठुआ जिले के हीरानगर स्थित चन्न खत्रियां इलाके में एक कबूतर पकड़ा गया है।
शहरों को ठंडा रखने के लिए जरूरी हैं पेड़, पर अब इन्हें भी चाहिए मदद
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और सूखे की वजह से शहरों के पेड़ खतरे में पड़ गए हैं. पर्यावरण की इस बड़ी ताकत को कैसे सुरक्षित रखा जाए और कैसे ऐसे शहरी जंगल लगाए जाएं, जो भविष्य में मौसम से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर सकें
विचार: सप्तधारा बनाएगी विकसित भारत
हरित और नीली अर्थव्यवस्था: भारत आज जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। हमारी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 76.38 गीगावाट से बढ़कर 288.58 गीगावाट हो गई है।
विचार: भारत-चीन रिश्तों की नई दिशा
स्पष्ट है कि भारत कूटनीतिक उम्मीदों के फेर में पड़कर अपनी रणनीतिक चौकसी और तैयारियों में कोई ढिलाई नहीं बरतेगा।
जागरण संपादकीय: आर्थिकी के अच्छे दिन
7.8 प्रतिशत विकास दर के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर सबसे तेज बढ़ती आर्थिकी बनी, लेकिन भारत को इससे संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
विकसित राष्ट्रीय राजधानी बनाने का मास्टर प्लान
महान शहर केवल बड़ी-बड़ी इमारतों और आधुनिक सुविधाओं से नहीं बनते, उनकी असल पहचान इस बात से होती है कि वे अपनी प्रकृति, इतिहास और विरासत को कितना सहेजते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़कर…
इन दिनों एक बार फिर मुंबई में अन्य राज्यों से आए कामगारों, विशेष रूप से ऑटो-टैक्सी चालकों पर मराठी सीखने का काफी दबाव है। मौजूदा राज्य सरकार ने उन्हें 15 अगस्त तक मराठी सीखने का जो अल्टीमेटम दिया था, वह अवधि…
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित हो रहा शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन मौजूदा समय के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है। एससीओ की यह 25वीं वर्षगांठ और 26वां सम्मेलन पूरी दुनिया का ध्यान खींच…
रटने से रचने तक: आधुनिक भारतीय शिक्षा प्रणाली से मेरा एक सवाल
हाल ही में अजमेर में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सृजनात्मक प्रतियोगिता के समापन समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बैठने का अवसर मिला। वहां से लौटते हुए मन में एक सवाल बार-बार लौटता रहा, जो शायद हम सबको बार-बार पूछना चाहिए — क्या हम अपने विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में अच्छे अंक ... Read more
पुरानी कार या बाइक खरीदने के बाद RC (Registration Certificate) अपने नाम ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है। अब केंद्र सरकार ने वाहन के मालिकाना हक के ट्रांसफर और अधिकृत डीलरों के जरिए पुराने वाहनों की बिक्री को लेकर नए नियमों का मसौदा पेश किया है। इसमें छह महीने की समय सीमा का प्रावधान चर्चा में है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि छह महीने बाद मालिकाना हक बदलने का प्रस्ताव आम व्यक्ति द्वारा खरीदे गए वाहन पर सीधे लागू होने वाला नियम नहीं है। यह मुख्य रूप से उस वाहन के लिए प्रस्तावित है, जिसे पंजीकृत मालिक ने अधिकृत डीलर को सौंप दिया है और Form 29C के जरिए इसकी सूचना दी गई है। क्या है सरकार का नया प्रस्ताव? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य खासकर संगठित सेकंड-हैंड वाहन कारोबार में वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने और अंतिम खरीदार के नाम ट्रांसफर होने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना है। इसे भी पढ़ें: आयुष्मान कार्ड कौन बनवा सकता है? क्या Taxpayers, PF, ESIC वाले इसके पात्र होंगे? प्रस्ताव के मुताबिक : - अधिकृत डीलर को वाहन मिलने के बाद उसकी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। एक डीलर से दूसरे अधिकृत डीलर के पास वाहन जाने पर Form 29CA का इस्तेमाल प्रस्तावित है। - डीलर से डीलर वाहन ट्रांसफर की संख्या अधिकतम दो रखने का प्रस्ताव है। - Form 29C दाखिल होने के बाद वाहन छह महीने से ज्यादा समय तक डीलर के पास बिना Form 30 के नहीं रखा जा सकेगा। छह महीने बाद क्या होगा? प्रस्तावित नियम के अनुसार, यदि Form 29C दाखिल होने की तारीख से छह महीने के भीतर वाहन का मालिकाना हक Form 30 के जरिए किसी खरीदार को ट्रांसफर नहीं होता है तो वाहन का मालिकाना हक आखिरी अधिकृत डीलर के नाम अपने आप ट्रांसफर होने का प्रस्ताव है। यह बदलाव VAHAN सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी वाहन को मालिक ने डीलर A को सौंपा और बाद में वह डीलर B के पास चला गया, तो छह महीने की समयसीमा के भीतर अंतिम खरीदार के नाम Form 30 से ट्रांसफर होना जरूरी होगा। ऐसा नहीं होने पर प्रस्ताव के मुताबिक आखिरी डीलर के नाम मालिकाना हक दर्ज हो सकता है। क्या आम वाहन खरीदार को छह महीने में RC ट्रांसफर कराना होगा? यहां भ्रम दूर करना जरूरी है। मौजूदा सामान्य RC ट्रांसफर प्रक्रिया में खरीदार के लिए अलग समयसीमा लागू है। एक ही राज्य में वाहन की बिक्री होने पर सामान्यतः ट्रांसफर की सूचना और आवेदन निर्धारित समय में करना होता है। संबंधित परिवहन विभाग के अनुसार, सामान्य ट्रांसफर के लिए Form 29 और Form 30 का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए नए मसौदे की छह महीने वाली शर्त को सीधे यह कहना कि “हर खरीदार छह महीने में RC ट्रांसफर नहीं कराएगा तो गाड़ी का मालिकाना हक बदल जाएगा”, सही नहीं होगा। Form 29CA क्यों लाया जा रहा है? नए मसौदे में Form 29CA को अधिकृत डीलरों के बीच वाहन की आवाजाही दर्ज करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इससे क्या होगा : - किस डीलर के पास वाहन है, इसका रिकॉर्ड रहेगा। - वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने की जानकारी VAHAN पर दर्ज होगी। - वाहन के अंतिम खरीदार तक पहुंचने की प्रक्रिया ज्यादा ट्रैक योग्य होगी। - पुराने वाहनों की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ सकती है। - किन वाहनों के ट्रांसफर पर रोक लग सकती है? मसौदे में प्रस्ताव है कि कुछ परिस्थितियों में वाहन का डीलर को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। इनमें शामिल हैं: - RC वैध नहीं होना - इंश्योरेंस वैध नहीं होना - PUC प्रमाणपत्र वैध नहीं होना - पेंडिंग ट्रैफिक चालान - बकाया टैक्स या यूजर फीस - वाहन से जुड़ा कुछ कानूनी या आपराधिक मामला - वाहन पर हायर-पर्चेज, लीज या हाइपोथिकेशन जैसी देनदारी होना। अभी क्या है स्थिति? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अभी प्रस्तावित नियम हैं, अंतिम कानून नहीं। मंत्रालय ने मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से प्रावधान किस रूप में लागू होंगे। वाहन मालिक और खरीदार क्या करें? - वाहन खरीदने के बाद RC ट्रांसफर को टालें नहीं। - Form 29 और Form 30 की प्रक्रिया समय पर पूरी करें। - खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। - वाहन का इंश्योरेंस और PUC वैध रखें। - पेंडिंग चालान और टैक्स की स्थिति जांचें। - सेकंड-हैंड वाहन खरीदते समय VAHAN रिकॉर्ड की जांच करें। सरकार के नए मसौदे का मुख्य उद्देश्य पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री में मालिकाना हक और डीलर-से-डीलर वाहन की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करना है। छह महीने की प्रस्तावित सीमा खासतौर पर अधिकृत डीलर के पास रखे वाहन से जुड़ी है। इसे हर निजी खरीदार पर लागू होने वाला नया छह महीने का RC नियम समझना सही नहीं होगा। फिलहाल यह एक मसौदा है, इसलिए वाहन मालिकों और खरीदारों को अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए। हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत भी वाहन खरीदने के बाद RC अपने नाम कराने में देरी करना उचित नहीं है। - जे. पी. शुक्ला
ऑस्ट्रेलियाई डांसर्स की तस्वीर शेयर कर गलत तरीके से किया गया सोनिया गांधी की ओर इशारा
बूम ने जांच में पाया कि वायरल तस्वीर में AI की मदद से हेरफेर की गई है. मूल तस्वीर 1967 की है, जिसमें गो-गो डांसर्स परफॉर्म करती नजर आ रही हैं.
मनुस्मृति की आलोचना आज केवल राजनीति
हाल ही में पुणे के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बोलते हुए, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पितृसत्ता को बढ़ावा देने के लिए मनुस्मृति की आलोचना की और लोगों, खासकर महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लड़ने का आह्वान किया…
महिलाओं से हक छीनने वाले ग्रंथ का बचाव क्यों
बीते 22 अगस्त को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मंच से तीन शब्द कहे ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ यानी पितृसत्ता को खत्म करो। यह एक बेबाक बयान है, जो भारत के किसी भी राजनीतिक व्यक्ति ने किसी बड़े…
India Post GDS 2026: डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक के 23,757 पदों पर भर्ती के लिए आज से पंजीकरण शुरू हो रहा है। 10वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण 19 सितंबर तक और आवेदन व शुल्क जमा करने की प्रक्रिया 21 सितंबर तक चलेगी।
विचार: नेपाल की बाढ़ से लेनी होगी सीख
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) हिमालय की ग्लेशियर झीलों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लगा रहा है, लेकिन दुर्गम क्षेत्र और सटीकता एक चुनौती है
द बोनस मार्केट अपडेट: बाजार में गिरावट; सेंसेक्स 200 अंक से अधिक लुढ़का, निफ्टी भी कमजोर
31 अगस्त 2026 को सेंसेक्स प्री-ओपनिंग सत्र में 100 अंक से अधिक गिरा, निफ्टी 24,150 से नीचे। ब्रेंट कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और एशियाई बाजारों में गिरावट ने निवेशकों को सतर्क रखा।
जीवन धारा: सुख विलासिता में नहीं, अपने भीतर ही है; लालच से बचने का सूत्र कारगर
जीवन धारा:सुख विलासिता में नहीं, अपने भीतर ही है;लालच से बचने कासूत्र कारगर
दूसरा पहलू:उदमीराम की जांबाजी और अंग्रेजों का खूनी कोल्हू,1857 में दिल्ली में कत्लेआम से दहशतजदा थी हुकूमत
ताशकंद में मोदी: यात्रा का अपना व्यापक क्षेत्रीय महत्व, यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था पर सहमति अहम
मुद्दा:ज्वलंत सवालों पर लंबे समय तक खामोश रहना घातक, क्या यमुना अपनी प्राकृतिक क्षमता खो चुकी है
भावनाएं फॉरवर्ड नहीं होतीं: अब एक ही कमरे में है बाजार भी, घर भी! क्यों न कुछ कदम चलकर बातचीत कर ली जाए...
टॉक्सिक कलेक्शन: 200 करोड़ पार हुई 'टॉक्सिक' की कमाई, जानें 'इरुमुडी' और 'हनुमान अंश' का कलेक्शन
इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्में चल रही हैं। वीकएंड पर सभी फिल्मों के कलेक्शन में बढ़ोतरी हुई है।
Kajari Teej 2026: आज 31 अगस्त 2026 को कजरी तीज का पावन व्रत रखा जा रहा है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यहां जानें पूरी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, आरती, मंत्र और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें।
ललित सुरजन की कलम से क्या तिलिस्म टूट रहा है?
वह एक ऐसे अभेद्य किले के रूप में सामने था जिस पर कितने भी तीर बरसें, कितनी भी तोपें चलें, कोई असर होने वाला नहीं है।
अंतरिक्ष जैसे अहम सेक्टर में निजीकरण पर विवाद
निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए अक्सर अच्छे सरकारी संगठनों की नाकामियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।
देशभक्ति के बाद अब हिन्दू होने का भी सर्टिफिकेट !
राहुल ने देश की राजनीति से हिन्दू मुसलमान के सवाल को हटाकर शिक्षा, स्कूल, नौकरी, गरीबी, महंगाई जैसे असली सवालों को ला खड़ा किया है।
युवाचार्य महावीर कुमार : अध्यात्म-जगत में एक नवीन युग-संभावना का उद्घाटन
कुछ घटनाएं इतिहास में दर्ज होती हैं और कुछ घटनाएं इतिहास की दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं। तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमणजी द्वारा मुख्य मुनि महावीर कुमारजी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में युवाचार्य मनोनीत किया जाना ऐसी ही घटना है। 27 जुलाई 2026, आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी को लाडनूं स्थित जैन विश्व ... Read more
महिलाओं की मजबूती के खुले कई रास्ते
साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने कुछ धार्मिक रस्में निभाई थीं, जैसा कि कोई भी आस्थावान भारतीय करता है। उस समय पवित्र कलश को ले जाने के लिए किसी पुरोहित या महात्मा को चुनना सबसे…
यह सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग
भारतीय रेलवे को देश की आम जनता की जीवन-रेखा कहा जाता है। करोड़ों यात्री रोजाना ट्रेन से सफर करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें कन्फर्म टिकट, साफ-सुथरे शौचालय, समय पर ट्रेन और पर्याप्त सीट जैसी सुविधाओं…
मध्यवर्ग को फिर परेशान करने लगी महंगाई
सन् 1974 में आई सुपरहिट फिल्म रोटी कपड़ा और मकान का एक गाना-और बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई, शायद फिल्म से भी ज्यादा हिट हुआ। इसकी यह पंक्ति तब से आज तक किसी न किसी रूप में बार-बार सामने आती ही….
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और भूतपूर्व क्रिकेट कप्तान इमरान खान के साथ उनके मुल्क का निजाम वही सुलूक कर रहा है, जो वह अपने रहनुमाओं और अजीम हस्तियों के साथ हमेशा से करता आया है। हालांकि, इमरान के साथ…
विचार: एससीओ का तीसरा स्तंभ बने भारत
एससीओ में भारत के उत्थान से रूस आश्वस्त हो सकता है कि संगठन में आर्थिक मुद्दों को प्राथमिकता देने में कोई हर्ज नहीं है, क्योंकि भारत उनमें विविधीकरण ला सकता है। ऐसे में एससीओ के अंदर रूस-भारत तालमेल को नए अंदाज से आगे ले जाना अनिवार्य होगा।
जागरण संपादकीय: हिमालय की निगरानी
हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में हजारों ग्लेशियर और झीलें हैं। इन सभी की निगरानी की आवश्यकता कहीं अधिक बढ़ गई है। एक समय हिमालय की चोटियों पर होने वाले बदलाव की निगरानी करना कठिन था, लेकिन आज ऐसी तकनीक उपलब्ध है, जिससे यह काम कहीं अधिक आसानी से किया जा सकता है। अब इसे किया ही जाना चाहिए।
क्या आपकी कैल्शियम की पूर्ति पर्याप्त है? जानिए स्रोत, फायदे और रोजाना कितनी जरूरत
नई दिल्ली, हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है और कैल्शियम उनमें से एक बेहद जरूरी खनिज है। आमतौर पर कैल्शियम का नाम सुनते ही सबसे पहले हड्डियों और दांतों का ख्याल आता है, लेकिन इसकी भूमिका सिर्फ इतनी ही नहीं है। इसलिए रोज की डाइट में पर्याप्त कैल्शियम लेना जरूरी है।
NEET-PG परीक्षा के दौरान जयपुर के एक परीक्षा केंद्र पर बिजली की खराबी के कारण परीक्षा प्रभावित हुई। अब एनबीईएमएस ने इस मामले में जवाब देते हुए बताया है कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए परीक्षा दोबारा कब आयोजित की जाएगी।
किताबें तैयार हैं, कैमरा भी तैयार है: ओटीटी से बदल रहा परिदृश्य, हिंदी लेखकों और नई कहानियों के लिए शुभ संकेत
जानना जरूरी है: विष्णु ने कैसे किया कालनेमि का अंत, चक्र से क्यों काटने पड़े सौ भयंकर मस्तक?
जानना जरूरी है: विष्णु ने कैसे किया कालनेमि का अंत,चक्र से क्यों काटने पड़े सौ भयंकर मस्तक?
कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद मामले पर अब ज्वेलरी ब्रांड ने सफाई दी है। उन्होंने कृति सेनन का समर्थन करते हुए बताया है कि उन्होंने अपना विज्ञापन क्यों हटाया है।
Aaj Ka Rashifal 30 August 2026: ग्रह-नक्षत्रों की चाल आज सभी राशियों के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालेगी। कुछ राशियों को करियर और धन के मामले में लाभ मिल सकता है, तो वहीं कुछ लोगों को रिश्तों और खर्चों को लेकर सावधानी बरतनी होगी।
विचार: रोजगारपरक शिक्षा का अभाव
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में रोजगारपरक शिक्षा की कमी है, जिससे 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में हैं और अधिकांश स्नातकों को योग्यतानुसार नौकरी नहीं मिल रही
राहुल गांधी ने संविधान और आरएसएस के बीच लड़ाई का आरोप लगाते हुए अनुसूचित जातियों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया।
एक दिन जंतर मंतर पर साहित्यिक गोष्ठी हुई, जिसका विषय था- ‘आज साहित्य खिड़की में ही क्यों रहता है, खिड़की साहित्य में क्यों नहीं रहती?’ यानी जब सबका साथ, सबका विकास हो चुका है और सबको आवास मिल चुका है…
तुम्हारे महल-चौबारे यहीं रह जाएंगे सारे
हवाओं में फैली खुशबू बताने लगी थी कि आजादी के फूल खिलने वाले हैं, पर अफसोस, उनकी डालियों में कांटे भी थे। उनकी चुभन ही थी, जो एक कवि की कविता में फूट रही थी- जलता है पंजाब हमारा प्यारा, भगत सिंह की आंखों का…

