लोकतंत्र में जनता की नाराजगी की अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण स्थल बन चुके जंतर-मंतर पर अब मोदी सरकार की वक्र दृष्टि पड़ चुकी है।
विचार: उग्र आंदोलनों के आगे असहाय जनता
'भारत बंद' की पुकार पर कई आंदोलन और विरोध प्रदर्शन देशव्यापी भी होते हैं, लेकिन अब ऐसा करते हुए ऐसे नारे भी लगने लगे हैं, 'बंद दुकानें तुम्हारी, खुली दुकानें हमारी।'
विचार: मनमानी सजा पर दुर्भाग्यपूर्ण मौन
सारी दुनिया के हिंदुओं के लिए सिवारसा को मृत्युदंड की घोषणा कोई अप्रासंगिक विदेशी घटना नहीं है। ठीक वैसी घटनाएं यहां भी होती रही हैं, जिन पर भारतीय राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग की चुनी हुई चुप्पियों और चुने हुए शोर-शराबों से एकतरफा विशेषाधिकार और एकतरफा जुल्म को शह मिलती है।
जागरण संपादकीय: विपक्ष का विचित्र रवैया
राहुल गांधी के यह कहने का क्या मतलब कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, क्योंकि वे तो उसके फैसले की प्रतीक्षा करने को तैयार ही नहीं। क्या वे यह चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट उनके हिसाब से निर्णय दे या फिर उनकी दिलचस्पी उन बिंदुओं पर उसकी राय जानने की है ही नहीं, जो उन्होंने अपनी याचिका में उठाए हैं?
सनातन ने शक्ति के साथ करुणा को जरूरी माना
भारतीय सनातन संस्कृति में नवरात्रि केवल देवी की उपासना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शक्ति के जागरण का महापर्व भी है। ये नौ रात्रियां मनुष्य को बाहरी आडंबरों से ऊपर उठकर अपने अंतर्मन में झांकने, विकारों पर विजय प्राप्त करने और जीवन को धर्ममय बनाने की प्रेरणा देती हैं…
रूस के आगे फिर नरम पड़ा अमेरिका
रूस से ‘डीजल समझौता’ करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साथ कई समस्याओं से पार पाने का प्रयास किया है। इस समझौते के तहत मॉस्को तुरंत तीन लाख टन डीजल वाशिंगटन को देगा और फिर नवंबर में पांच लाख टन। अगली आपूर्ति में यह आंकड़ा बढ़कर 10 लाख टन तक हो जाएगा…
दिल्ली की शूटर इशिका भारद्वाज ने स्वर्ण पदक पर साधा निशाना
तुगलकाबाद स्थित डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित इंडिया ओपन शॉटगन प्रतियोगिता में दिल्ली की इशिका भारद्वाज ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया…
बाज़ार से गोभी, गाजर और बैंगन आए। उन्हें बिना काटे नहाए फ्रिज में प्रवेश दिया गया ताकि पारिवारिक परम्परा का उचित सम्मान जारी रहे। इस प्रथा के अंतर्गत आधा दर्जन सब्जियां कई दिनों तक अडोस पड़ोस में रह सकती हैं लेकिन समझा नहीं जाता कि आज रात को कौन सी सब्जी खाएं । बनने, खाने और बचने के बाद सब्ज़ी फ्रिज में ठंडी रहती है और चर्चा गर्म कि दोपहर में क्या बनेगा। यह व्यव्हारिक समस्या राष्ट्रीय है। लाखों कुक खाना पकाते हुए रीलें पका रहे हैं, अखबार और पत्रिकाएं सिखा रही हैं लेकिन यह मसला फ्रिज का स्थाई वासी है। खैर, बात बैंगन की है जो बाज़ार से आकर, ठंड में इंतज़ार कर रहे हैं कि कब उनका भर्ता बनेगा। बैंगन उदास और उपेक्षित सही लेकिन चर्चा में रहते हैं। थाली के बैंगन हमेशा अपना रुतबा कायम रखते हैं और असामाजिक आलुओं को रिझाते रहते हैं। लीजिए, कई दिन बाद वह शुभ समय आया जब रात के खाने में बैंगन का भर्ता बनना सुनिश्चित हुआ। उस दिन कुछ साधारण खाना बनना था। भर्ता बनने की प्रक्रिया के दौरान जब हवा में भूने गए बैंगनों को आपस में मिलाने लगे तो उनके नाराज़ हिस्सों ने मिलने जुलने में हिचकिचाहट बरती। पत्नी ने घोषणा की, आज भर्ता ठीक से नहीं बन रहा है। बैंगन अच्छी तरह से फ्राय नहीं हुए, कहीं कहीं से कच्चे रह गए। मिक्स नहीं हो रहे। जब वह बैंगन के हिस्सों को आपस में मिला रही थी तब उसके चेहरे को भी अच्छा नहीं लग रहा था। सब्जी का रंग गहरा भूरा हो गया था। वह बोली, यह बैंगन तो अच्छे नहीं निकले। आज भर्ता अच्छा नहीं बनने वाला क्यूंकि इनमें बीज भी बहुत निकले, लगता है यह बैंगन पुराने होंगे। इसे भी पढ़ें: चुनाव उनके - व्यवस्था हमारी (व्यंग्य) पति ने कल्पना की कि पत्नी यह भी कह सकती है कि पता नहीं बैंगन कितने पुराने पौधे में लटके होंगे । उस पौधे को लगाने वाला व्यक्ति कैसा होगा जिसकी वजह से बैंगनों का ऐसा भर्ता बना। लेकिन पत्नी ने ठोक बजाकर कहा, इन बैंगनों का रंग भी कुछ उड़ा उड़ा सा था। कई टेढ़ी मेढ़ी लकीरें भी इन पर थी। जब मैनें इन्हें दबाकर देखा ठीक से दब भी नहीं रहे थे। हालांकि इन्हें मैंने अपनी पसंद के चाकू से ही काटा लेकिन अन्दर से इनका टेक्सचर भी कुछ जांच नहीं रहा था। इनके तो बीज भी अजीब से लगे। मैंने आज तक बैंगन में ऐसे बीज नहीं देखे तभी शायद इनका भर्ता ठीक नहीं बना। अगर बैंगन के साथ एक दो पत्ते भी होते तो स्वाद कुछ और ही होता। यदि इनका रंग लाल होता तो भर्ता स्वादिष्ट बनता। पति ने कहा, आपने पिछली बार ऐसे ही बैंगनों से स्वादिष्ट भर्ता बनाया था। पत्नी बोली, वो बैंगन ऐसे नहीं थे। पहली बार लगा..... क्या ऐसे भी बैंगन होते हैं। ये बैंगन तो बेगुण ही थे। इन बैंगनों में कोई विटामिन भी नहीं होगा। इन बैंगनों की तो शक्ल ही अजीब थी जिससे लगता था कि यह वज़न भी नहीं घटा सकते। पाचन सुधार नहीं सकते, दिल की सेहत बना नहीं सकते तभी इनका भर्ता ठीक नहीं बना। इनसे अच्छा भर्ता तो आलुओं का बन जाता। पत्नी द्वारा, कई हज़ार लाइक्स वाली रील में बताए, सुगम तरीके से पकाए भर्ते की, पति ने परम्परा अनुसार तारीफ की। बैंगन का भेजा फ्राय करने के लिए नए उपकरण का उद्घाटन पत्नी द्वारा किया गया। इस दौरान पति को याद आया कि इन बैंगनों ने नौ दिन पहले फ्रिज में प्रवेश किया था लेकिन उन्हें भर्ता होने का अवसर नहीं मिल रहा था। वे फ्रिज में पसरे हुए परेशान हो चुके थे तभी उनका भर्ता वैसा नहीं बना, जैसा बन सकता था। एक वजह यह भी रही कि पत्नी को बैंगन ज्यादा पसंद नहीं। - संतोष उत्सुक
जंतर-मंतर 2.0: RSS-BJP समर्थकों को वर्दी देने के दावे से पश्चिम बंगाल का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो पश्चिम बंगाल का है और इसका हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है.
रामलीला मैदान: आंदोलन की गूंज और चुनाव में सत्ता की विदाई
दिल्ली का रामलीला मैदान केवल राजनीतिक रैलियों का स्थल नहीं रहा। यह उस जन-असंतोष का प्रतीक भी बना, जिसने सत्ता के सामने सवाल खड़े किए। यहां जुटी भीड़ ने कई बार देश का ध्यान उन मुद्दों की ओर खींचा, जिन्हें राजनीतिक व्यवस्था नजरअंदाज नहीं कर सकती थी।
विश्व साहित्य का आकाश: प्रसिद्धि के बावजूद आत्महत्या
कुछ लोग जिन्हें खूब प्रसिद्धि, सम्पत्ति, सम्मान मिला होता है ऐसे लोग भी आत्महत्या करते हैं। इसके उदाहरण हैं, कुछ नोबेल पुरस्कृत लेखक, जैसे हेमिंग्वे और कावाबाता यासूनारी।
सेतुबंधासन : दूर होगी कब्ज की समस्या और मजबूत होगी रीढ़ की हड्डी
नई दिल्ली, आजकल की व्यस्त दिनचर्या और दफ्तर में घंटों में बैठे रहने से कमर दर्द, तनाव और थकान होना आम समस्या बन गई है। ऐसे में सेतुबंधासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इसके नियमित अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी लचीली रहती है और शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।
जलवायु परिवर्तन से स्वास्थ्य का संकट भी, इंसानों की सेहत पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायु प्रदूषण से प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख असमय मौतें होती हैं। प्रदूषित हवा के सूक्ष्म कण हृदय रोग, पक्षाघात, श्वसन संबंधी बीमारियों और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
जीवन धारा: बाहर के शोर से ज्यादा भीतर की आवाज सुनें, खुद पर विश्वास रखना सार्थक सूत्र
जीवन धारा: बाहर के शोर से ज्यादा भीतर की आवाज सुनें,खुद पर विश्वास रखना सार्थक सूत्र
पर्यटन में चिकित्सा यात्रा का बढ़ता दायरा: भारत आर्थिक शक्ति बन सकता है, सामाजिक शक्ति की पहचान का रास्ता क्या?
तमिलनाडु की सियासत बदल रही है: सीएम विजय करिश्माई नेता जैसे, महत्वाकांक्षाओं के साथ वैचारिक ढांचे में भी बदलाव
पश्चिम एशिया तनाव: रियाद चिंतित, सऊदी का शाही परिवार बंकर में; भारत से अजीत डोभाल ने ईरान में किसे फोन किया?
आतंकवाद को मानवता के खिलाफ अपराध मानने की मांग: यूएन में भारत ने उठाया मुद्दा, 2028 की संधि में क्या होगा?india United Nations terrorism crimes against humanity conventionR Mythili
आरजे मिट्टे: 'ब्रेकिंग बैड' फेम अभिनेता का 34 साल की उम्र में हुआ निधन, इस बीमारी से थे पीड़ित
34 साल के अभिनेता आरजे मिट्टे का निधन हो गया है। उनके प्रतिनिधि ने यह जानकारी दी। वह 'ब्रेकिंग बैड' में अपने किरदार के लिए मशहूर थे।
ललित सुरजन की कलम से - देहलीज पर चुनाव
'चुनावी माहौल में रायपुर के किसी अन्य अखबार में इसी सोमवार को यह खबर पढ़कर मुझे आश्चर्य हुआ कि सरकार का खजाना खाली हो चुका है और उसे बार-बार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से ओवर ड्रॉफ्ट लेना पड़ रहा है
चुनावी लोकतंत्र बहाल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को निर्णायक कदम उठाने होंगे
भारत का चुनावी लोकतंत्र एक ऐसे नाजुक मोड़ पर है जहां न्यायिक दखल सिर्फ प्रक्रिया की जांच और चिंता जताने तक सीमित नहीं रह सकता
जंतर मंतर खाली कराने के निहितार्थ
मोदी-शाह की जोड़ी चाहे तो इसके लिए अपने गाल बजा सकती है कि 10 अक्टूबर को और उसके बाद भी उसने जंतर-मंतर को प्रदर्शनकारियों से खाली रखा है
एक्सप्लेनर: समुद्री लुटेरों के झंडे से जोकर के मेकअप तक; विरोध में ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल क्यों करते जेन जी?
इंसानी दिमाग का अध्ययन:दुनिया में पहली बार 100+ दिमागों का 3डी एटलस बनाने की पहल, आईआईटी मद्रास का मकसद क्या?
पंचकूला में पुलिस और क्राइम ब्रांच-2 की संयुक्त टीम ने लॉरेंस बिश्नोई और अर्जू बिश्नोई गैंग के दो कुख्यात शूटरों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।
विचार: माता-पिता के रहते भी अनाथ होते बच्चे
इन दिनों पति और बच्चों के रहते कुछ महिलाओं का दूसरे पुरुष के साथ शादी करने के मामले बढ़ने लगे हैं।
विचार: भरोसे के संकट से जूझता विपक्ष
राजनीतिक दल यह समझें कि बगैर विश्वसनीयता के न तो आंदोलन लंबा खिंच सकता है और न ही राजनीति।
जागरण संपादकीय: एक जरूरी इनकार
वैसे तो राहुल गांधी एक लंबे अर्से से एसआईआर को वोट चोरी बताने में लगे हुए हैं, लेकिन जबसे यह समाचार आया कि एसआईआर के कुछ पहलुओं पर दोनों चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त से असहमत थे, तबसे राहुल गांधी नए सिरे से आक्रामक हो गए।
...और मैंने अमिताभ बच्चन को भेंट की अपनी पुस्तक
अमिताभ बच्चन। नाम एक, उपमाएं अनेक। वह आवाज दें तो पल में हजारों की भीड़ उमड़ पड़े। वह हंसें तो लाखों चेहरे खिलखिला उठें
ललित सुरजन की कलम से संसद की सर्वोच्चता कायम रखने की जरूरत
'अभी हाल में सर्वोच्च न्यायालय ने जनप्रतिनिधित्व कानून की जो व्याख्या दो अवसरों पर की है वह हमारे मन में चिंता उपजाती है
तमिलनाडु उप-चुनावों में मिली जीत विजय के लिए संदेश
तमिलनाडु में हाल ही में संपन्न हुए दोनों विधानसभा उप-चुनावों में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की टीवीके पार्टी को जीत तो मिल गई है, लेकिन इसके लिए पार्टी को जी-तोड़ मशक्कत करनी पड़ी। ये सीटें- पश्चिमी तमिलनाडु की धारापुरम और उत्तर…
रासायनिक प्रतिक्रिया को जिस तरह कोई ‘उत्प्रेरक’ गति दे देता है, ठीक वही काम मौजूदा राजनीति में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया है। उसने सियासत में एक नई ऊर्जा भर दी है, जिसका लाभ अब विपक्ष को मिल रहा है…
विश्व राजनय में विडंबना या विरोधाभास की पराकाष्ठा बेहद दुखद और शर्मनाक है। अमेरिका ने रूस के साथ डीजल आयात के लिए समझौता किया है। वह रूस से पहले ही यूरेनियम और उर्वरक आयात करता रहा है। स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने…
सुधारों को तेजी से लागू करके ही भारत बनेगा समृद्ध
भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, जिसमें बुनियादी ढांचे और डिजिटल भुगतान में प्रगति हुई है।
सबको बेहतर अवसर मुहैया कराना - आय बढ़ाना है चुनौती
विकसित भारत 2047 का संकल्प पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों से मजबूत हुआ है, जिसमें जन-कल्याण और डिजिटल सेवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कंधे-पीठ के दर्द चाहते है राहत तो रोज करें गोमुखासन
नई दिल्ली, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए योग करना एक अच्छा विकल्प है। योग के विभिन्न आसनों में गोमुखासन शरीर को लचीला और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
जीवन धारा: हर दिन यों जिएं, जैसे अंतिम हो; आज करें, अभी करें का सूत्र बेहद सार्थक
जीवन धारा: हर दिन यों जिएं, जैसे अंतिम हो; आज करें, अभी करें का सूत्र बेहद सार्थक
दोहरे तर्क: कटघरे में अमेरिकी नीतियों की विश्वसनीयता, खुद जरूरत पड़ी तो रूस से डीजल आयात करने को राजी हुए ट्रंप
साहस बिन करुणा के अधूरा है: कैप्टन स्मित, बिट्टू असाधारण मनुष्य बने, बच्चों को पढ़ाने के लिए मैराथन दौड़ीं मां
नरेंद्र मोदी सरकार के समक्ष वैधता और भरोसे का गंभीर संकट
भारत की भाजपा सरकार अपनी वैधता के संकट का सामना कर रही है।
हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति खत्म, जनता सड़कों पर
शकील अख्तर लोग टकराव की बात कर रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि आन्दोलनों के विभिन्न रूप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता अपने आप पहचान जाती है कि कौन उसके लिए ईमानदारी से लड़ रहा है और कौन बेवजह दूसरे पर सवाल उठा रहा है। राहुल किसी पर सवाल नहीं उठा रहे। उन पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे दिखने में चाहे मोदी के विरोध में दिखें मगर राहुल पर सवाल उठा कर वे अप्रत्यक्ष रूप मोदी की ही मदद कर रहे हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का आखिरी दांव है और असफल जा रहा है। पूरा देश उनके खिलाफ उठ कर खड़ा हो गया है। ऐसा मोदी ने कभी सोचा नहीं था। उन्हें अपने हिन्दू-मुस्लिम अजेंडे पर बहुत भरोसा था। मगर जन आन्दोलन ही एक ऐसी चीज होता है जो हर बैरिकेड्स को तोड़ देता है। आज राजनीतिक नेता, पत्रकार और दूसरे तमाम लोग यह कह रहे हैं कि ये हिन्दू लड़कियों के साथ क्या हो रहा है? नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तो बीजेपी आरएसएस के गुंडे शब्द का शाम को बाद में प्रयोग किया मगर बहुत सारे लोग दिन में ही यह कहने लगे थे। और ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से बहुत सारे लोग मोदी समर्थक थे। पिछले एक हफ्ते से चले घटनाक्रम ने उनकी कई धारणाओं को तोड़ा है। उनमें सबसे खास यह है कि मोदी केवल मुस्लिम को टाइट करेंगे उन लोगों के लिए हर तरह की छूट और सुरक्षा है। लेकिन शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर जो हुआ लड़कियों, छोटी-छोटी बच्चियों के कपड़े जिस तरह उतारने की कोशिश की गई, मार-पीट, गाली-गलौज उनकी कीमत लगाना इन सब के बाद वे लोग जो सोच रहे थे कि ये हिन्दुओं की रक्षा के लिए आए हैं उनका मोहभंग हो गया। क्योंकि जितनी लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार हुआ है उनमें से लगभग सभी हिन्दू ही थीं। इससे पहले भी जन्तर मन्तर वन और उसके बाद हुई सड़क की हर दुर्व्यवहार की घटना और पकड़ के ले जाने पर थाने में जो कुछ लड़कियों और लड़कों के साथ भी हुआ वे भी वही लोग थे जिनकी रक्षा के नाम पर मोदी हर चुनाव में वोट मांगते हैं। श्मशान कब्रिस्तान तक की बातें करते हैं। पुलिस अत्याचार का शिकार लड़के- लड़कियों ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में जो बताया उसको सुनना भी मुश्किल था। अभी शनिवार को तो दिल्ली की सड़कों पर लड़कियों के साथ पुलिस की मौजूदगी में गुंडों ने कपड़े उतारने की कोशिश से लेकर हर तरह की बदतमीजी की। मगर उससे पहले इन्होंने थानों के अंदर जाकर लड़के-लड़कियों के साथ वह वह हरकतें कीं कि बच्चे बता नहीं पा रहे थे। लड़कों के भी कपड़े उतारे गए। जो ज्यादा विरोध कर रहा था उसे कहा गया कि तू मुस्लिम है। लड़के ने अपना नाम बताया। कहा आधार देख लो नहीं माने। लड़कियों की दुर्दशा तो आप सुन ही नहीं सकते। इनमें वह लड़की भी शामिल थी जिस पर एक पुलिस अधिकारी असिस्टेंट कमिश्नर आफ पुलिस रैंक के विवेक भगत ने तीन अक्टूबर को सड़क पर यौन हमला किया था। और उसके बाद उसके प्रमोशन का आर्डर आया। मगर सोशल मीडिया और थोड़ी सी जिन्दा बची पत्रकारिता ने इस मुद्दे को इतना उठाया कि प्रमोशन का आर्डर पेन्डिंग रखना पड़ा। सीमित सही मगर साहसिक पत्रकारिता का यह असर रविवार को भी देखने को मिला जब शनिवार को पुलिस के साथ मिलकर खुली गुंडागर्दी कर रहे चार गुंड़ों को पुलिस को ही गिरफ्तार करना पड़ा। यह सब गुंडे और इनके संरक्षक पहले से हाथों में लाठियां लिए वीडियो बनाकर धमकियां दे रहे थे। और 12 साल से यही कर रहे हैं। लेकिन शनिवार की घटनाएं, जो कैमरों में कैद हो गईं, उनके विडियो वायरल हो गए, उस के बाद जब खुद मोदी के समर्थक रहे लोग यह कहने कि अब तो ये हिन्दू लड़कियों के साथ करने लगे तब सबको एक बड़ा झटका लगा। नफरत चीज ही ऐसी है कि वह किसी एक के खिलाफ केन्द्रित नहीं रहती है। मोदी ने मुसलमानों के खिलाफ इसे लाया था। शाहीन बाग़ के आन्दोलन के समय इसे चरम पर पहुंचा दिया गया था। दिल्ली में दंगे करवाए गए। जबकि दिल्ली में ऐसा कहीं माहौल ही नहीं था। इसी हिन्दू-मुसलमान के सहारे मोदी 12 साल से राज करने में सफल रहे। मगर अब जब लोगों ने खासतौर से हिन्दुओं ने देखा कि किस तरह उनकी बच्चियों के साथ अनपढ़ गुंडे बुलाकर उनके कपड़े उतारने की कोशिश की जा रही है उनकी तीन-तीन सौ रुपए कीमत लगाई जा रही है तो वे चौंक गए। इससे पहले शाहीन बाग़ की औरतों के लिए भी ऐसा ही कहा गया था कि पचास-पचास रुपए देकर धरने पर बिठाया जा रहा है। किसान आंदोलन की महिलाओं के लिए भी। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी कहा जिससे आक्रोशित होकर सुरक्षा बल की एक महिलाकर्मी ने जो किसान की बेटी थी कंगना रनौत को चांटा भी मारा था। लेकिन अब जब सड़क पर निकलने वाली हर लड़की बच्ची को पकड़-पकड़ कर उसका चीरहरण किया जाने लगा तो लोगों के मन में मोदी भक्ति के बदले मोदी के खिलाफ आक्रोश पैदा होने लगा। हिन्दुओं की सुरक्षा के नाम पर तो मोदी आए थे। नारा नारी की सुरक्षा का भी था। मगर नारी में सब धर्म जाति के आ जाते हैं तो उसे लोगों ने ज्यादा अपने हित वाले भाव से नहीं लिया। मगर हिन्दू खतरे में हैं और मैं उनकी रक्षा करूंगा यह बात मोदी लोगों के दिमाग में उतारने में सफल हो गए। इसलिए वे मंगल सूत्र जैसे प्रतीक बोलते हैं कि छीन कर ले जाएंगे। मगर छात्र और युवा पहले पेपर लीक पर और अब चुनाव चोरी पर जब आवाज उठाने लगे तो वही नफरत जो मुस्लिम के खिलाफ लाए थे इन बच्चों के खिलाफ भी सामने आ गई। खासतौर से लड़कियों के। और लड़कियां भी ज्यादातर उस मध्यम वर्ग की जिनके माता- पिता सबसे ज्यादा मोदी से प्रभावित हुए थे। नेहा वोरा के बारे में आप लोगों को मालूम होगा कि उसके माता-पिता दोनों मोदी समर्थकों में आते हैं। लेकिन अब जब उनकी लड़की के साथ और दूसरी लड़कियों के साथ एक से एक गलत व्यवहार होता है तो अभी तक मोदी का समर्थन कर रहे लोगों के दिमाग में भी सवाल आता है कि हमारे साथ भी वैसा ही व्यवहार। नेहा वोरा इस आन्दोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। निर्भय और प्रतिबद्ध। उसकी हिम्मत सबने देख ली। जब सीजेपी के सब बड़े नेता घोषणा करके दिल्ली आए और जाहिर है कि उसके बाद उन्हें पकड़ा ही जाना था, के बरअक्स नेहा शनिवार को अचानक सड़क पर आई और हिरासत में लिए जाने से पहले अपना प्रतिरोध दर्ज कराया। जब सरकार इतनी जालिम हो तब प्रतिरोध इसी तरह छापेमारी के अंदाज में किया जाता है। राहुल ने चार दिन लगातार दिल्ली में यही किया। और उससे पहले पेपर लीक के मुद्दे के समय भी। खैर हम फिलहाल सीजेपी ( काक्रोच जनता पार्टी) पर बात नहीं कर रहे हैं। लोग टकराव की बात कर रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि आन्दोलनों के विभिन्न रूप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता अपने आप पहचान जाती है कि कौन उसके लिए ईमानदारी से लड़ रहा है और कौन बेवजह दूसरे पर सवाल उठा रहा है। राहुल किसी पर सवाल नहीं उठा रहे। उन पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे दिखने में चाहे मोदी के विरोध में दिखें मगर राहुल पर सवाल उठा कर वे अप्रत्यक्ष रूप मोदी की ही मदद कर रहे हैं। अगर राहुल ही मैनेज हो जाएं तो फिर मोदी के लिए कोई समस्या बचती ही नहीं है। राहुल ही एकमात्र मोदी के लिए चैलेंज हैं। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)
विचार: आर्थिकी को नई धार देने की कोशिश
जीएसटी में हालिया सुधार से कारोबारियों में डर खत्म होगा और ईमानदारी से व्यापार करने वालों का भरोसा बढ़ेगा।
विचार: आंदोलन वही, जो भरोसा पैदा करे
केवल मुद्दा सही होना ही पर्याप्त नहीं है, उसके खिलाफ सही नेतृत्व, सही भाषा और सही पद्धति भी चाहिए।
जागरण संपादकीय: दोहरे रवैये पर प्रहार
ऐसा लगता है कि इस संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के कर्ताधर्ता ने यह देखने-समझने की भी जरूरत नहीं समझी कि भारत के जिस प्रकरण को लेकर उसने जो चिंता जताई, उसके मूल में क्या है।
मृत्यु की मुस्कान से मोक्ष की ओर — श्रीमती कान्तादेवी बोथरा की सागरी संथारा
जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा त्याग, तपस्या, संयम, आत्मजागरण और वैराग्य की ऐसी गौरवशाली परंपरा है, जिसमें जीवन की सार्थकता केवल जीने में नहीं, बल्कि जीवन के अंतिम क्षणों को भी सजगता, समता और आत्मशुद्धि से परिपूर्ण बनाने में निहित है। इस परंपरा में संथारा अथवा संलेखना एक ऐसी विशिष्ट आध्यात्मिक साधना है, जो मनुष्य ... Read more
भाजपा के राज में पूजा नए अंदाज में: ईडन गार्डन्स से पंडालों तक दिखेगा बदलाव?
क्या बंगाल की दुर्गा पूजा में इस बार राजनीतिक बदलाव की छाप अधिक गहरी होगी? हालांकि, पंडालों की पूरी तस्वीर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। लोकसंस्कृति, पर्यावरण, कला और बंगाल की अपनी परंपराएं भी इस उत्सव के केंद्र में बनी हुई हैं।
पंजाब में चुनाव के दौरान पारंपरिक सियासत और समीकरणों से ज्यादा राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी लहर और मतदाताओं का मूड असरदार रहता है।
Box Office Collection: 'दृश्यम 3' की कमाई ने सबको हैरान किया है। भारत के साथ दुनियाभर में यह फिल्म अच्छी कमाई कर रही है।
बेलोन में सर्व मंगला बेला भवानी मंदिर में दर्शनों के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर ट्राली की शनिवार की रात में डिबाई नरोरा मार्ग पर ट्रक से टक्कर हो गई। हादसे में ट्रैक्टर ट्राली में सवार 29 श्रद्धालु घायल हो गए।
भुस में लट्ठ मारते हम हिंदी वाले
एक संगोष्ठी में कई विद्वान मिलकर एक कवि के व्यक्तित्व और कृतित्व में मनुष्य खोज रहे थे और मैं उस कविता के कवि , उसकी पहचान को खोज रहा था। खोजते-खोजते पहले विद्वान ने…
वह कारों की दुनिया में किसी करिश्मे से कम नहीं थे। उनका एक ही मकसद था- बड़ी, शक्तिशाली और विश्वसनीय कार बनाना। बेहद साधारण परिवार से आए असाधारण मैकेनिकल इंजीनियर ने 30 की उम्र में एक कार कंपनी की नींव रखी…
सिर्फ सत्ता नहीं, व्यवस्था परिवर्तन के महानायक
पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान; लाहौर सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद 21 अप्रैल, 1946 को पहली बार जयप्रकाश नारायण का पटना आगमन; लाखों की भीड़ अपने नायक की एक झलक पाने को आतुर; जेपी के स्वागत में एक जनसभा का आयोजन…
(10th October 1933 – 18th December 2011) *स्वर्गीय श्री मिर्चूमल सोनी* का जन्म 10th October 1933 को मांझन्द, जिला दादू, सिंध प्रांत (ब्रिटिश भारत) में हुआ था। उन्होंने सिंधी फाइनल तक शिक्षा प्राप्त की तथा शास्त्रीय संगीत में विशारद की उपाधि हासिल की। पेशे से स्वर्णकार होने के साथ-साथ वे गीत-संगीत, नाटक, साहित्य एवं लेखन ... Read more
विचार: मिसाल कायम करने वाले मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे किए, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका प्रभावी नेतृत्व शामिल है
बदलती परिस्थितियों में कांग्रेस क्षत्रपों के साथ सम्मानजनक समझौते कर सकती है। राहुल गांधी की यह तमाम मशक्कत इसीलिए है। उनकी नजर साल 2029 के लोकसभा चुनावों पर है, लेकिन नरेंद्र मोदी जैसी लोकप्रिय शख्सियत से टकराने के…
समाजवाद के प्रणेता अहिंसावादी अग्रवंशी सम्राट महाराजा अग्रसेन
निर्विवाद रूप से किसी भी राष्ट्र या समाज एवं परिवार को उन्नत विकसित और कल्याणकारी बनाने के लिये उसके आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक स्तम्भों का मजबूत होना अति आवश्यक है | इन चारों स्तंभों को दृढ़ करके ही राष्ट्र को प्रगतिशील एवं विकसित देश बनाया जा सकता है |लगभग 5141वर्ष पूर्व महाराजा अग्रसेनजी इन्हीं ... Read more
जेपी की संपूर्ण क्रांतिः राजनीति को नई दिशा देने का मंत्र
जयप्रकाश नारायण जन्म जयन्ती-11 अक्टूबर, 2026 भारत के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने समय की सीमाओं को लांघकर आने वाली पीढ़ियों के लिए विचार, आदर्श और प्रेरणा के शाश्वत स्रोत बन जाते हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ऐसे ही महान जननायक थे, जिन्होंने सत्ता के शिखरों पर पहुंचने की अपेक्षा जनसेवा के ... Read more
शेखर सुमन: नाना पाटेकर की याद में अभिनेता ने लिया बड़ा फैसला, शो के आखिरी एपिसोड को लेकर कही ये बात
अभिनेता शेखर सुमन ने अपने शो 'शेखर टुनाइट' का आखिरी एपिसोड करने से मना कर दिया है और उन्होंने इसके पीछे की वजह का खुलासा भी किया है। आइए जानते हैं कि एक्टर ने क्या कहा।
जानिए पार्श्वकोणासन के फायदे और सावधानियां
नई दिल्ली, भारतीय योग परंपरा में शारीरिक लचीलापन, मानसिक एकाग्रता को एक साथ साधने वाले आसनों में 'परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन' का विशेष स्थान है।
बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: वर्ल्डवाइड 400 करोड़ पार हुई 'दृश्यम 3' की कमाई, 'हनुमान अंश' ने भी लगाई छलांग
'दृश्यम 3' बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर रही है। एक हफ्ते बाद भी यह फिल्म अच्छी कमाई कर रही है। आइए जानते हैं बाकी फिल्मों ने कितना कलेक्शन किया है?
जंतर-मंतर 2.0- सरकार के सामने सीजेपी की नई चुनौती
उभरते हुए लोकतंत्रों के लिए एक नए युग की शुरुआत करने वाला देश अब एक चक्र पूरा कर चुका है।
आज का राशिफल: मेष, मिथुन और कर्क राशि वालों का शानदार रहेगा दिन, नौकरी-व्यापार से होगा बड़ा लाभ
10 अक्तूबर 2026 का दिन कुछ राशियों के लिए नई उम्मीद और अवसर लेकर आ सकता है, तो कुछ को काम और रिश्तों में सावधानी बरतनी होगी। जानें मेष, कर्क, सिंह, कन्या, कुंभ और मकर राशि वालों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।
पड़ोसी पहले की नीति पर पुनर्विचार हो: भारत के स्वाभाविक क्षेत्रीय प्रभाव से निष्ठा सुनिश्चित नहीं, दिल्ली असहज
सत्ता बदलने से अधिक जरूरी है व्यवस्था का बदलना
इस आंदोलन में किसी मंत्री, अधिकारी या नियामक प्राधिकारी का इस्तीफा का केंद्र में होता है।
लद्दाख में हिम तेंदुआ बचाने की पहल
लद्दाख में हिम तेंदुआ को बचाने की शुरूआत दो दशक पहले हुई थी।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी निवास कार्यक्रम से बाहर करने और वीजा नियमों को सख्त करने को भारत विरोधी और अहंकारी बताया गया है
विचार: सेवा, संकल्प और समर्पण की यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की यात्रा, गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक, देश के विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर केंद्रित है
विचार: मस्क के दबाव में आने से बचे भारत
पांच साल पहले स्टारलिंक के तत्कालीन भारत प्रमुख ने एलान किया था कि 2022 के अंत तक देश में 2,00,000 टर्मिनल चालू कर दिए जाएंगे, जिनमें से ज़्यादातर गांवों में होंगे
शास्त्री भवन से पुस्तकालय हटाना अनुचित
दिल्ली के शास्त्री भवन से ‘केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय’ को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस पुस्तकालय की स्थापना सन् 1891 में कोलकाता में ‘इम्पीरियल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी’ के रूप में हुई थी और साल 1969 से यह…
अराजकता, भय और भ्रम फैलाना ठीक नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी एसआईआर को रद्द करने की मांग ने देश की चुनावी व्यवस्था को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है…
भारतीय मूल की अंतरराष्ट्रीय न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लै को शांति प्रयासों के लिए दिया जा रहा नोबेल तमाम भारतवंशियों के लिए खुशी और गौरव का क्षण है। न्यायविद नवी को बड़े-बड़े शांति व सेवा कार्यों को संपन्न करते देखा गया है…
गरबा और डांडिया रास की थापों बिना अधूरा लगता है नवरात्रा पर्व
समाज की संस्कृति का परिचायक नवरात्रा पर विशेष – हमारे देश में अनेक धर्म एवं सम्प्रदाय के लोग रहते है। जो समय समय पर अपनी संस्कृति के अनुसार धर्मो को मनाते है। इसीलिए हमारे देश के लिए अनेकता में एकता की बात कही जाती है। विभिन्न धर्मो एवं सम्प्रदाय के लोगों को एक सूत्र में ... Read more
‘भाइयों और बहनों’ से ‘ब्रो, वी नीड टू टॉक’ तक भारतीय राजनीति की बदलती भाषा और Gen-G का उभार
राजनीति हमेशा से केवल सत्ता प्राप्त करने की कला नहीं रही; वह समाज से संवाद करने की कला भी रही है। सत्ता के गलियारों से लेकर जनसभाओं तक, नेताओं की भाषा ने अपने समय की सामाजिक चेतना, राजनीतिक आकांक्षाओं और सांस्कृतिक मनोविज्ञान को प्रतिबिंबित किया है। एक समय था जब राजनीतिक संवाद की शुरुआत होती ... Read more
आईपीसीसी की जलवायु संबंधी रिपोर्टों पर तीन साल से जारी है वाद-विवाद
जलवायु परिवर्तन, अप्रत्याशित और गंभीर नतीजे दिखा रहा है. लेकिन नीति निर्माताओं के पास इससे जुड़ी बासी रिपोर्टें हैं.
बारिश और आंधी-तूफान के लिए येलो अलर्ट जारी: बिहार
पटना, बिहार में शुक्रवार को मौसम खराब रहने की संभावना है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
: नाना पाटेकर का कल रात उनके द्वारा इकट्ठा की गईं लकड़ियों से किया गया। इस मौके पर उनके बेटे ने बताया है कि उनका अंतिम संस्कार रात में क्यों किया गया है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो 9 अक्तूबर की तारीख न चूकें। एनसीआरटीसी, बीसीपीएल, मैत्रेयी कॉलेज, जेकेएसएसबी और एसएमपी कोलकाता में कई पदों पर भर्ती चल रही है। नीचे दी गई भर्तियों में से अपनी पसंद की नौकरी के लिए तुरंत आवेदन कर दें।
वोटर के अधिकार की रक्षा सबसे ज़्यादा ज़रूरी
भारत के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विवाद गहराता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हर किसी के निशाने पर हैं।
जीएसटी सुधार की ओर: टैक्स दरों में बदलाव के बजाय व्यापार आसान बनाने की दिशा में पहल,57वीं बैठक कई अहम फैसले
थोड़ा-सा रूमानी, थोड़ा-सा रूहानी:नाना पाटेकर एक खुदरंग अभिनेता के रूप में दर्ज रहेंगे, अपनी तरह के खालिस
ललित सुरजन की कलम से विकलांग चेतना का दौर
कुल मिलाकर मुझे लगता है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में सारा देश 'थियेटर ऑफ द एब्सर्ड' में तब्दील हो गया है।
आने वाले समय का संकेत: रेपो दर बढ़ने के पीछे अर्थव्यवस्था पर आरबीआई का भरोसा, क्या मुद्रास्फीति में कमी आएगी?
सामान्य वर्ग को न्यायोचित अधिकार मिलने चाहिए!
मनोहर चावला आज चारों तरफ़ आरक्षण ख़त्म करने के लिए सामान्य वर्ग सड़को पर है देश में जगह जगह आरक्षण ख़त्म करने के लिए जुलूस, हड़ताले और अनशन हो रहे है लेकिन सरकार के कानों जूँ तक नहीं रेंग रही है ।किसी भी दल ने आरक्षण के मुद्दे पर एक शब्द नहीं बोला न ही ... Read more
फोर्टिस शालीमार बाग ने उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण किया
नई दिल्ली। फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के डॉक्टरों ने उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण (हार्ट ट्रांसप्लांट) कर 47 वर्षीय मरीज चंचल यादव को नया जीवन दिया है…
विचार: संस्थाओं की साख पर निशाना
अगर संस्थाएं अपनी नैतिक आभा के साथ नहीं बची रहीं तो यह लोकतंत्र की सेहत के लिए शुभ नहीं होगा।
विचार: सेवा भाव ने बनाया मोदी को सफल नेता
एक राजनेता के रूप में मोदी इसलिए सफल हैं, क्योंकि सेवा उनका मूलमंत्र है और यही लोगों को उनसे जोड़ती है।
जागरण संपादकीय: जीएसटी परिषद के फैसले
ध्यान रहे कि देश के साथ विदेश के भी कारोबारी टैक्स संबंधी नियमों को सरल और सुगम बनाने की मांग करते ही रहते हैं। यह मांग पूरी होनी चाहिए, क्योंकि इससे कारोबार जगत में भरोसा बढ़ता है और इसके नतीजे में उसे गति मिलती है।
डाटा सेंटर बनाते समय पानी बिजली का भी ध्यान रखें
इस साल जुलाई में ठाणे (मुंबई) के सैकड़ों निवासियों ने बालकुम स्थित 53 एकड़ के उस भूखंड पर मानव शृंखला बनाई, जिसे ‘हाइपरस्केल डाटा सेंटर’ के लिए चयनित किया गया था। निवासी उस शोर और गर्मी के खिलाफ अपना विरोध…
चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा राजधानी दिल्ली में मार्च और धरना-प्रदर्शन ने एक बार फिर चुनाव आयोग की कार्य-प्रणाली, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को राष्ट्रीय बहस…
पाकिस्तान के गले पड़ा मक्का समझौता
सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों की एक शृंखला ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौता, यानी मक्का पैक्ट को सक्रिय कर दिया है। यह पश्चिम एशिया की सुरक्षा संरचना में एक अहम मोड़ है…

