बिना दूध के बनने वाले एनालॉग पनीर पर एमपी, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बाद उत्तर प्रदेश ने भी कार्रवाई का फैसला किया है। जानें असली, नकली और एनालॉग पनीर में अंतर और एफएसएसएआई के नियम।
विचार: जेन-जी के सपनों को मिले पंख
प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत के सपने के बावजूद, जेन-जी और जेन-अल्फा युवा बेरोजगारी, पेपर लीक और कोचिंग संस्कृति जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं
विकास और युवा:बस्तर में आजादी के बाद से पहली बार तिरंगा स्वागतयोग्य, अर्थपूर्ण तभी जब अंतिम व्यक्ति तक लाभ
मुद्दा: तकनीक का जिम्मेदार इस्तेमाल जरूरी, ताकि जनता का भरोसा कायम रहे; सोशल मीडिया के साथ चुनौती भी बढ़ी
MP: पिस्टल के साथ फोटो वायरल हुई तो घर पहुंची पुलिस, अलमारी खोली तो मिले तीन करोड़ रुपये; जांच शुरू
सागर के तिली तिगड्डा इलाके में सोशल मीडिया पर पिस्टल के साथ फोटो वायरल होने के बाद पुलिस ने दो भाइयों के घर दबिश दी। तलाशी के दौरान हथियार तो नहीं मिला, लेकिन अलमारी से नोटों के बंडल बरामद हुए हैं।
Nag Panchami 2026: शुभ संयोग में नाग पंचमी आज, इन संदेशों से दें सभी को शुभकामनाएं
Nag Panchami 2026: आज नाग पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर आप इन प्यार भरे संदेशों के जरिए अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और प्रियजनों को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं दे सकते हैं।
संगठित राजनीति से भी आगे बढ़ रही है जंतर मंतर प्रदर्शन की भावना
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में अचानक होने वाले छात्र आन्दोलन एक ऐसी कमज़ोरी को सामने ला रहे हैं जिसे पारंपरिक राजनीति पहचानने में धीमी रही है
Gen Z दिमागी नक्सल या देश का भविष्य?
दिमागी नक्सल एक ऐसा शब्द प्रधानमंत्री ने यूज कर दिया जो केवल उनके भक्तों, जिनके लिए अब राहुल ने अंध भक्तों का नाम दे दिया है और गोदी मीडिया के अलावा किसी के भी गले नहीं उतर रहा है
सावन के तीसरे सोमवार को लगता है आगरा का सुप्रसिद्ध कैलाश मेला (विशेष आलेख)
हमारेभारतदेशमेंएकसमृद्धआध्यात्मिकऔरधार्मिकविरासतकेसाथ,कईधर्मोंकापालनकियाजाताहै।नतीजतनधार्मिकत्योहारोंकीएकबड़ीसंख्याकोमनायाजाताहै।ऐसाहीएकत्योहारआगराकासुप्रसिद्धकैलाशमेलाहै।आगराकायहसुप्रसिद्धकैलाशमेलाहरवर्षसावनमहीनेकेतीसरेसोमवारकोलगताहै।कैलाशमेलाहरसालबड़ीधूमधामसेआगराकेसिकंदराक्षेत्रमेंयमुनाकेकिनारेस्थितकैलाशमंदिरपरलगताहै।कैलाशमेलासावनमहीनेमेंभगवानशिवकेसम्मानमेंमनायाजाताहै।वैसेतोसालकेहरसोमवारकोआगराकेकैलाशमंदिरपरभक्तोंकाजमावड़ालगताहै,लेकिनसावनमहीनेमेंकैलाशमंदिरकामनमोहकनजाराहोताहै।हरतरफभक्तिकीबयारबहीहोतीहैऔरभगवानशिवकेभक्तदूरदराजकेक्षेत्रोंसेदर्शनकरनेकेलिएआतेहैं।ऐसीमान्यताहैकिआगराकेकैलाशमंदिरपरमांगीगयीहरमनौतीभगवानशिवपूर्णकरतेहैं।कैलाशमेलेपरआगराकामाहौलबहुतहंसमुखहोताहै।आगराकेलोगकैलाशमेलेकोएकपर्वकीतरहमनातेहैं। कैलाशमेलेकेदिनआगराकेस्थानीयप्रशासनद्वारासार्वजनिकअवकाशघोषितकियाजाताहैऔरइसदिनआगराकेसभीस्कूल-कॉलेज,सरकारीऔरगैरसरकारीकार्यालयोंमेंछुट्टीहोतीहै।मेलेकेअवसरपरजोबड़ीभीड़इकट्ठाहोतीहै,उनकीभक्तिऔरखुशीदेखनेलायकहोतीहै।इसदिनकैलाशमंदिरकेकई-कईकिलोमीटरदूरतकखेल-खिलौनों,खाने-पीनेसहितअनेकोंदुकानोंकीस्थापनाकीजातीहै।इसदिनयमुनाकिनारेकैलाशमंदिरपरहजारोंकांवड़ियेदूर-दूरसेकांवड़लाकरभगवानशिवकीभक्तिसेओत-प्रोतहोकरबम-बमभोलेऔरहर-हरमहादेवकेजयकारेलगातेहुएकांवड़चढ़ातेहैं।वैसेतोसावनकेहरसोमवारकोआगराकेसभीसुप्रसिद्धशिवमंदिरोंमेंकांवड़चढ़ाईजातीहैंलेकिनसावनकेतीसरेसोमवारकोकैलाशमंदिरपरकांवड़चढानेकाअपनाअलगहीमहत्वहै।इसदिनकैलाशमंदिरकेकिनारेसेगुजरनेवालीयमुनामेंस्नानकरनाभीकाफीशुभमानाजाताहै,इसलिएभक्तमंदिरमेंशिवलिंगोंकेदर्शनकरनेसेपहलेयमुनामेंजरूरस्नानकरतेहैं। मानाजाताहैकिआगराकेकैलाशमहादेवकामंदिरपांचहजारवर्षसेभीअधिकपुरानाहै।मंदिरमेंस्थापितदोशिवलिंगमंदिरकीमहिमाकोऔरभीबढ़ादेतेहैं।कहाजाताहैकिकैलाशमंदिरकेशिवलिंगभगवानपरशुरामऔरउनकेपिताजमदग्निकेद्वारास्थापितकिएगएथे।महर्षिपरशुरामकेपिताजमदग्निऋषिकाआश्रमरेणुकाधामभीयहांसेपांचसेछहकिलोमीटरकीदूरीपरस्थितहै।हिंदूपौराणिककथाओंकेअनुसारइसमंदिरकाअपनाअलगहीएकमहत्वहै।त्रेतायुगमेंभगवानविष्णुकेछठवेंअवतारभगवानपरशुरामऔरउनकेपिताऋषिजमदग्निकैलाशपर्वतपरभगवानशिवकीआराधनाकरनेगए।दोनोंपिता-पुत्रकीकड़ीतपस्यासेप्रसन्नहोकरभगवानशिवनेउन्हेंवरदानमांगनेकोकहा।इसपरभगवानपरशुरामऔरउनकेपिताऋषिजमदग्निनेउनसेअपनेसाथचलनेऔरहमेशासाथरहनेकाआशीर्वादमांगलिया। इसकेबादभगवानशिवनेदोनोंपिता-पुत्रकोएक-एकशिवलिंगभेंटस्वरूपदिया।जबदोनोंपिता-पुत्रयमुनाकिनारेअग्रवनमेंबनेअपनेआश्रमरेणुकाकेलिएचले(रेणुका धामकाअतीतश्रीमद्भागवतगीतामेंवर्णितहै)तोआश्रमसे6किलोमीटरपहलेहीरात्रिविश्रामकोरुके।फिरसुबहहोतेहीदोनोंपिता-पुत्रहररोजकीतरहनित्यकर्मकेलिएगए।इसकेबादज्योर्तिलिंगोंकीपूजाकरनेकेलिएपहुंचे,तोवहजुड़वाज्योर्तिलिंगवहींस्थापितहोगए।इनशिवलिंगोंकोमहर्षिपरशुरामऔरउनकेपिताऋषिजमदग्निनेकाफीउठानेकाप्रयासकिया,लेकिनउसजगहसेउठानहींपाए।हारकरदोनोंपिता-पुत्रनेउसीजगहपरदोनोंशिवलिंगोंकीपूजाअर्चनाकरपूरेविधि-विधानसेस्थापितकरदियाऔरतबसेइसधार्मिकस्थलकानामकैलाशपड़गया।यहमंदिरभगवानशिवऔरपवित्रयमुनानदीजोकिमंदिरकेकिनारेसेहोकरगुजरतीहैकेलिएप्रसिद्धहै।कभी-कभारजबयमुनाकाजल-स्तरबढ़ाहुआहोताहैऔरयमुनामेंबाढ़कीस्थितिहोतीहैतोयमुनाकापवित्रजलकैलाशमहादेवमंदिरकेशिवलिंगोंतककोछूजाताहै।यहअत्यंतमनमोहकदृश्यहोताहै।इसबारयहमेला17अगस्त2026कोलगायाजारहाहै।कैलाशमंदिरपरआनेवालाहरव्यक्तिइसखूबसूरतऐतिहासिकजगहकीसराहनाकरेवगैरहनहींरहताहै। लेखक –डॉ.ब्रह्मानंद राजपूत (Brahmanand Rajput) On twitter @33908rajput On facebook –facebook.com/rajputbrahmanand E-Mail –brhama_rajput@rediffmail.com Mob/WhatsApp- 08864840607
वैश्विक खेल स्पर्द्धाओं में खूब तिरंगा लहरा रहे हमारे एथलीट
भारतीय एथलीटों ने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में और फिर यूजीन अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करके जता दिया है कि अब हम भी विश्व स्तर पर धाक जमाने का माद्दा रखते हैं…
महिलाओं पर अपने ही करते बर्बरता
घर को मनुष्य के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि महिलाओं और बच्चों के लिए यही घर अब भय, अपमान और हिंसा का केंद्र बनने लगा है। घरेलू हिंसा का अर्थ केवल मारपीट नहीं है, मानसिक प्रताड़ना…
महंगाई की बढ़ती रफ्तार कैसे घटेगी
जिसका डर था, वही खतरा अब सामने आ खड़ा हुआ है। बरसों से काबू में चल रही महंगाई ने धीरे-धीरे ही सही, मगर सिर उठाना शुरू कर दिया है। खुदरा महंगाई जुलाई में 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले उन्नीस महीनों में सबसे ज्यादा…
संपादकीय: वंदे मातरम् पर विवाद
स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
विचार: भारत के लिए सतर्क रहने का समय
सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का समझौते से पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की स्थिति मजबूत हो सकती है, जिससे भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है
Pregnant Deepika Padukone Video: दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह जल्द अपने दूसरे बच्चे का स्वागत करने वाले हैं। इससे पहले कपल को हाल ही में एयरपोर्ट पर देखा गया। इस दौरान दीपिका कूल लुक में नजर आईं।
विचार: संसद ठप करने की राजनीति
संसद का मानसून सत्र नीट पेपर लीक और विपक्षी हंगामे के कारण बाधित रहा, जिससे जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से विकसित भारत के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और 'सप्तधारा' का खाका प्रस्तुत किया। इसमें एक करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण और छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग जैसी नई पहलें शामिल हैं, जिनके सफल क्रियान्वयन में केंद्र-राज्य सहयोग महत्वपूर्ण है।
एक दिन उसने धमकी दी, मैं तुम्हें ब्लॉक कर दूंगा। मैंने कहा, कर दो ब्लॉक, उससे क्या हो जाएगा? तुम हो कौन? अपने को क्या समझते हो? क्या तुम खुदा हो? बात तो तुमने ही शुरू की थी, तुमसे जवाब न बन पड़ा, तो खिसियाकर अपनी पर उतर…
वह एक ऐसा मध्यवर्गीय अमेरिकी परिवार था, जिसमें बच्चे बड़े शरारती थे। बच्चों को न पिता टोकते थे और न मां डांटती थीं। उसी परिवार में एक बच्ची थी, जिसके दो बड़े भाई थे और दो छोटे भाई-बहन। अक्सर ऐसा होता है, मां-बाप सीधे हों…
ऑफिस ब्वॉय से उद्यमी बनने की प्रेरक यात्रा
हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा- यह कोई नारा नहीं है, हालांकि इसे उपदेश देने या नारे के रूप में ही ज्यादा इस्तेमाल किया गया, जबकि यह तो विशुद्ध जीवन-दर्शन है। अध्यात्म में सूक्ष्म धरातल पर ही नहीं, एक सभ्य नागरिक, मनुष्य बनने की कसौटी…
हम अगले दशक में बुढ़ाने लगेंगे। क्या हम उस चुनौती के लिए तैयार हैं? इस मुद्दे पर अभी से सोचना होगा। क्यों न इस विचार यात्रा का आरंभ आज से ही किया जाए?हमें यह भी सोचना होगा कि जो पीछे छूट गया है,उसे कैसे संजोएं…
उत्तर प्रदेश में पनीर और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ योगी सरकार ने बड़ा अभियान चलाया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की 24 विशेष टीमों ने गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में 25 विनिर्माण इकाइयों पर कार्रवाई की। जांच के दौरान पनीर बनाने में औद्योगिक प्रयोग वाले रसायनों और पामोलिन ऑयल/रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल के साथ अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों के निर्माण के मामले सामने आए। अभियान में 72 नमूने लिए गए, 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई और गंभीर मामलों में छह एफआईआर दर्ज की गईं।
विचार: देश से जुड़ने की प्रवृत्ति है स्वतंत्रता
स्वतंत्रता सभ्य समाज का सर्वोत्तम आविष्कार है, जो देश से जुड़ने की प्रवृत्ति है न कि केवल व्यक्तिगत भोग। औपनिवेशिक सोच से मुक्ति और युवा पीढ़ी को सही शिक्षा व रोजगार देना आज के भारत की प्रमुख चुनौतियां हैं।
विचार: भाषा की मर्यादा का गिरता स्तर
जंतर-मंतर पर जेन-जी आंदोलन के दौरान भाषा के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है। लेख डिजिटल संस्कृति के प्रभाव और लोकतांत्रिक मर्यादा के क्षरण पर प्रकाश डालता है, संयम की अपील करता है।
आजादी अधिकार ही नहीं, कर्तव्य भी: प्रशासन में ईमानदारी, सेवा-भाव से ही भारत का लोकतंत्र अजेय रहेगा; सहमति अहम
संपादकीय: भावी भारत का निर्माण
स्वतंत्रता दिवस हमें आजादी के संघर्ष और विकसित भारत के लक्ष्य की याद दिलाता है। अनुशासन, एकजुटता और सकारात्मकता के साथ नागरिक कर्तव्य निभाना ही सशक्त भारत के निर्माण की कुंजी है।
79 साल की यात्रा: 15 अगस्त केवल राष्ट्रीय गौरव का नहीं, अधूरे संकल्प को फिर से याद करने का भी दिन
79 साल की यात्रा: 15 अगस्तकेवल राष्ट्रीय गौरव का नहीं, अधूरे संकल्प को फिर से याद करने का भी दिन
केवल झंडा फहराना ही काफी नहीं: एक बार मिली आजादी हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं हो जाती...उसे बचाकर रखना पड़ता है
अब यह देश प्रतीक्षा नहीं करता: भारत का जवाब अब सिर्फ शब्दों में नहीं, लोकतंत्र पर उपदेश पश्चिम की पुरानी आदत
‘अर्बन नक्सल’ के बाद ‘दिमागी नक्सली’: प्रधानमंत्री के लालकिले की प्राचीर से संबोधन के गहरे हैं मायने
वर्ष 2024 के लालकिले संबोधन में उन्होंने स्पष्ट रूप से ‘राष्ट्र प्रथम’ को सर्वोच्च संकल्प बताया और 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति से विकसित भारत बनाने का आह्वान किया। वर्ष 2025 के संबोधन में और व्यापक दिखाई दिया।
80 वें स्वतन्त्रता दिवस के पावन अवसर पर नहीं चाहिए मुझे सम्मान-पत्र, न ही वीरता का कोई पदक। सरकार मेरे, मेरे माई-बाप, मेरे क्षेत्र के सांसद, विधायक और छुटभैये नेतागण, बस आप सबसे मेरी इतनी-सी विनती है। यदि सचमुच मेरे बलिदान से आपके हृदय को पीड़ा पहुँची है, और आप मेरे बलिदान का सम्मान करना ... Read more
Independence Day 2026: तिरंगे पर बनीं 24 तीलियों का क्या होता है अर्थ? जानिए यहां
अशोक चक्र पर बनी 24 तीलियों का क्या अर्थ होता है? आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं।
आजादी का संकल्प : भारत के लिए कुछ करें
– श्रमण डॉ पुष्पेंद्र स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह उस संकल्प को याद करने का दिन है, जिसके लिए असंख्य वीरों ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। आज जब हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, तो हमारे सामने यह प्रश्न भी होना चाहिए कि इस स्वतंत्रता को ... Read more
विभाजन की त्रासदी: इतिहास के कटघरे में नेहरू की भूमिका!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
15 अगस्त 1947: करोड़ों लोगों को नहीं मालूम था कि वे किस देश के नागरिक हैं
भारत-पाकिस्तान विभाजन की यह अमानवीय त्रासदी काफी हद तक औपनिवेशिक ब्रिटिश शासकों की आपराधिक जल्दबाजी और गैर-जिम्मेदारी का नतीजा थी।
15 August 2026 विशेष: स्वाधीनता आंदोलन की प्रमुख केन्द्र रही दून घाटी
इस देहरादून ने मुगलों, अफगानियों, सिखों, गुज्जरों और राजपूतों के हमले झेले तो गोरखों के हाथों सन् 1804 में गढ़वाल नरेश प्रद्युम्न शाह की शहादत और पराजय भी देखी और सन् 1914 में खलंगा के युद्ध में आतताई गोरखा शासन का अंत भी देखा।
आजाद देश में आजादी के अधूरे सवाल
–बाबूलाल नागा 15अगस्त हमारे लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं,बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है।1947में देश ने औपनिवेशिक शासन से मुक्ति पाई थी। आज हम स्वतंत्र भारत की80वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ की ओर बढ़ रहे हैं। इन वर्षों में देश ने विज्ञान,तकनीक,शिक्षा,कृषि,उद्योग,सड़क,संचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। दुनिया में भारत की ... Read more
चीन कई मोर्चों पर भारत के लिए मुश्किल खड़ी करता है
हाई टेक्नालॉजी जैसे क्षेत्रों को छोड़कर सामान्य चीजों पर कर की दरें बढ़ाने से भारत में इन्हें बनाने का प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है हरेली तिहार
खेती के साथ मिट्टी-पानी और पर्यावरण का संरक्षण करते हुए देश भर बिना रासायनिक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
आज भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्र का निर्माण भी होता है, जहां प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, सम्मान और न्याय प्राप्त हो…
इतिहास और भविष्य का संगम हमारा तिरंगा
जब मैं तिरंगे का मतलब खास कुछ नहीं समझता था, तब भी मुझे खुले आसमान में लहराता, हवा के साथ बल खाता तिरंगा बहुत आकर्षित करता था। सुंदर तो यह मुझे आज भी उतना ही लगता है, लेकिन अब ‘सबसे सुंदर’ जैसा भाव मन से…
नियति से अधूरी भेंट, पर सपना अभी जिंदा
बीसवीं सदी ने अपनी शुरुआत बारूद और बेड़ियों से की थी। उपनिवेशवाद अपने चरम पर था, दुनिया के तीन-चौथाई मनुष्य किसी दूसरे देश की ‘संपत्ति’ थे और फिर दो महायुद्धों ने वह कर दिखाया, जो पहले कभी संभव नहीं था…
पैंसठ साल पहले जो लाल किले पर देखा
अगस्त 15...स्वतंत्रता दिवस...तिरंगा...लाल किले के प्राचीर पर उसका फहराया जाना... साल 1960 या 1961... मैं पंद्रह-सोलह साल का हूं। मां से अनुमति लेकर विदेश से आए हुए अपने से कुछ बड़े एक युवक डेविड के साथ पहुंचता हूं लाल…
भारत की स्वतंत्रता आज पूरे विश्व के लिए प्रेरणा है। जब भारत की स्वतंत्रता की बात होती है, तब अनायास एक ब्रिटिश प्रधानमंत्री की नकारात्मक टिप्पणी की याद आती है। उस प्रधानमंत्री की भविष्यवाणी एक क्षणिक उद्गार भर साबित होकर …
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.
पुणे में शिवाजी की प्रतिमा पर चप्पल फेंकने का वीडियो झूठे सांप्रदायिक दावे से वायरल
बूम ने पाया कि वायरल सांप्रदायिक दावा गलत है. वीडियो में दिख रही महिला का नाम अश्विनी दगड़े है और वह मुस्लिम नहीं है.
नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच डार्विन में खेले जा रहे पहले टेस्ट के दूसरे दिन बांग्लादेश ने अपनी पहली पारी में 210 रन बना लिए हैं और ऑस्ट्रेलिया पर 12 रन की बढ़त हासिल कर ली है।
इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ आज यानी 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। लेकिन फिल्म ने रिलीज से पहले ही कुछ रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।
रंग लाई मुहिम: अंधियारी रातों में फिर जगमगाने लगे जुगनू, क्या इंडोनेशिया बचा पाएगा यह नाजुक प्रजाति?
रंग लाई मुहिम: अंधियारी रातों में फिर जगमगाने लगे जुगनू, क्या इंडोनेशिया बचा पाएगा यह नाजुक प्रजाति?
Youth: क्या हम भविष्य का नेतृत्व करने के लिए तैयार? टॉपर से आगे बढ़कर देश को चाहिए समस्या सुलझाने वाले युवा
Radio History: तरंगों के जरिये आजादी की अलख, स्वतंत्रता की लड़ाई में कैसे रेडिययो ने अलग मोर्चा खोल दिया था?
ललित सुरजन की कलम से स्वाधीनता और जनतंत्र का रिश्ता
'एक साजिश के तहत देश का नया इतिहास लिखने का काम चल रहा है।
युवाओं के लिए अच्छे काम का रास्ता मुश्किल
युवाओं में बेरोज़गारी और नीट(जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी कर रहे हैं और न ही ट्रेनिंग ले रहे हैं) की दरें बढ़ रही हैं।
आंदोलनों की शक्ति : स्वतंत्रता संग्राम से जेन जी तक
अरुण कुमार डनायक पूर्ववर्ती आंदोलनों की तरह यह छात्र आंदोलन भी कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण और गांधीवादी सत्याग्रह की तरह अहिंसक रहा तथा व्यवस्था की कमियों को सुधारने के लिए आगे आया। वर्तमान निराशाजनक राजनीतिक माहौल में जेन जी के इन निडर युवाओं ने बदलाव की उम्मीद जगाई है। भारत का स्वतंत्रता दिवस अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक और अहिंसक संघर्ष की निरंतर जिम्मेदारी का प्रतीक है। भारत की स्वतंत्रता में अनेक धाराओं का योगदान रहा, पर गांधी के अहिंसक आंदोलनों ने जनसामान्य की ललक को व्यापक जनआंदोलन में बदल दिया। गांधी के नेतृत्व में असहयोग, दांडी मार्च, सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जनसहयोग से सफल रहे। भारत छोड़ो आंदोलन ने शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद स्वतंत्रता की निर्णायक चेतना जगाई और ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। भारत में सामाजिक सुधार आंदोलनों की जड़ें भक्ति आंदोलन में हैं, जब कबीर, नानक और रैदास ने सामाजिक रूढ़ियों व भेदभाव के विरुद्ध जनचेतना जगाई। किन्तु आज़ादी के पहले हुए आंदोलनों ने भी जातीय भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष को दिशा दी। 1927 के महाड सत्याग्रह में डॉ. आंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने चवदार तालाब से पानी पीकर सार्वजनिक जलस्रोतों पर अधिकार जताया। महात्मा गांधी की हरिजन यात्रा ने अस्पृश्यता के विरुद्ध जनमत और मंदिर प्रवेश व शिक्षा के अधिकारों के प्रति चेतना जगाई। आजादी के बाद गांधी चाहते थे कि शासन समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज सुने और रचनात्मक कार्यक्रम को प्राथमिकता दे। संविधान ने नागरिकों को न्यायिक उपचार के साथ शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति का अधिकार भी दिया। लेकिन व्यवस्था की सीमाओं से आकांक्षाएं पूरी न होने पर लोगों ने आंदोलनों का रुख किया। डॉ. राम मनोहर लोहिया के 'कांग्रेस हटाओ, देश बचाओ' और 'अंग्रेजी हटाओ' जैसे आंदोलनों ने आजाद भारत में राजनीतिक आंदोलनों को नई धार दी। राजनीतिक आंदोलनों को पहली बड़ी सफलता छात्रों की भागीदारी से मिली। 1973-74 के गुजरात नव-निर्माण आंदोलन ने भ्रष्टाचार और महंगाई के विरोध में चिमनभाई पटेल सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर किया। इससे उत्साहित बिहार के छात्रों ने 1974 में जयप्रकाश नारायण से राज्य के कुशासन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व करने का आग्रह किया। बाद में यही आंदोलन इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन में बदल गया। जेपी ने पटना के गांधी मैदान से 'संपूर्ण क्रांतिÓ का आह्वान किया। आंदोलन के दबाव में आपातकाल लगा, विपक्षी नेता जेल गए और प्रेस पर पाबंदियां लगीं—यह भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय माना गया। 1977 में पहली बार कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हुई और लोकतंत्र की पुनसर््थापना व लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन हेतु इस आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व रहा। चंडी प्रसाद भट्ट, सुंदरलाल बहुगुणा आदि के नेतृत्व में उत्तराखंड का 'चिपको आंदोलनÓ (1973) जंगलों व पर्यावरण संरक्षण की व्यापक जनचेतना का माध्यम बना। नर्मदा बचाओ आंदोलन (1985) मेधा पाटकर के नेतृत्व में सरदार सरोवर बांध से प्रभावित किसानों, आदिवासियों और विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू हुआ। आंदोलन ने बड़े बांधों के सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभावों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ी। बांध निर्माण रोकने में असफल रहने पर भी आंदोलन ने सरकारों को विस्थापितों के मुआवजे व पुनर्वास के लिए दबाव में लाया और यह सवाल उठाया कि विकास की कीमत कौन चुकाए तथा प्रभावितों के अधिकार कैसे सुरक्षित हों? वीपी सिंह सरकार द्वारा मंडल आयोग (1990) लागू करने के विरोध में छात्रों का व्यापक आंदोलन हुआ, जिसमें राजीव गोस्वामी सहित कुछ युवाओं ने आत्मदाह का प्रयास किया। मंडल के साथ उभरी 'कमंडलÓ की राजनीति ने भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक धु्रवीकरण को भी गहरा किया। महिला आंदोलनों ने दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठाने के साथ समान अधिकारों की मांग की। मुस्लिम महिलाओं के आंदोलनों ने गुज़ारा भत्ता, तीन तलाक और नागरिकता संशोधन कानून जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में प्रमुखता दी। श्रमिक आंदोलनों ने न्यायपूर्ण वेतन व श्रमिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक के शुरुआती वर्षों में हुए निर्भया आंदोलन ने सरकार को यौन अपराधों के विरुद्ध कड़े कानून बनाने के लिए विवश किया तो अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन ने भ्रष्टाचार और लोकपाल के मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया। इसके बाद दिल्ली में आम आदमी पार्टी के उभार से लेकर केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार को मिली राजनीतिक चुनौती तक, भारतीय राजनीति में आंदोलनों के प्रभाव का एक नया दौर दिखाई दिया। आज देश में फिर आंदोलन का माहौल बन रहा है। 2020-21 में तीन कृषि कानूनों के विरुद्ध चला लंबा किसान आंदोलन सरकार को कानून वापस लेने पर विवश कर गया और आंदोलनों की प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण बना। इसके बाद 'काकरोच जनता पार्टीÓ के बैनर तले नई पीढ़ी परीक्षा व्यवस्था की अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर एकत्रित हुई। गांधीवादी सोनम वांगचुक ने आंदोलन के समर्थन में 26 दिन की भूख हड़ताल की। अंतत: 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने आंदोलनकारियों की अन्य मांगें भी स्वीकार कर लीं। जेन •ाी के आंदोलनों की विशेषता सोशल मीडिया, डिजिटल नेटवर्क और त्वरित जनसंचार का प्रभावी इस्तेमाल है। विकेंद्रीकृत नेतृत्व ने युवाओं को तेजी से जोड़ा, जो पारंपरिक दलों की केंद्रीकृत राजनीति से भिन्न है, और भविष्य में दलों की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीतियों व सामाजिक-आर्थिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है। जेन •ाी का प्रभाव केवल युवाओं तक सीमित नहीं दिखता; प्रौढ़ मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं को प्रभावित करने की उसकी क्षमता सत्तारूढ़ दलों के लिए भविष्य की बड़ी राजनीतिक चिंता बन सकती है। पूर्ववर्ती आंदोलनों की तरह यह छात्र आंदोलन भी कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण और गांधीवादी सत्याग्रह की तरह अहिंसक रहा तथा व्यवस्था की कमियों को सुधारने के लिए आगे आया। वर्तमान निराशाजनक राजनीतिक माहौल में जेन •ाी के इन निडर युवाओं ने बदलाव की उम्मीद जगाई है। इस आंदोलन ने आलोचकों और प्रदर्शनकारियों को 'भारत-विरोधी ताकतों से पोषितÓ बताने वाली सत्ता पक्ष की पुरानी बयानबाजी की धार भी कुछ कुंद की है। इस आंदोलन को लेकर कुछ सवाल और आशंकाएं भी हैं—क्या लड़कियों के लिए भी अभद्र भाषा उतनी ही स्वीकार्य हो सकती है जितनी लड़कों के लिए? क्या सरकार को छात्रों से पहले संवाद नहीं करना चाहिए था? और सबसे बड़ा सवाल—क्या जेन •ाी स्थापित राजनीतिक दलों को पीछे धकेलकर सत्ता तक पहुंच पाएगी? वर्तमान के घाघ राजनीतिज्ञ सोशल मीडिया पर उससे मुकाबला कैसे करेंगे और उसकी अनुभवहीनता भविष्य में शासन के लिए चुनौती बनेगी? भारत की स्वतंत्रता का अहिंसक संघर्ष अनेक देशों के लिए उपनिवेशवाद से मुक्ति का उदाहरण बना, और गांधी की अहिंसा व सत्याग्रह आज भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा है। लोकतंत्र में आंदोलनों का होना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि नागरिक चेतना और शासन को जवाबदेह बनाए रखने की जीवंत शक्ति है। आंदोलनों की परंपरा बताती है कि स्वराज और लोकतंत्र चुनावों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सतत भागीदारी और प्रतिरोध से जीवित रहते हैं। (लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता )
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पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में जो खटास आई है, उसकी शुरुआत ढाका से हुई। भारत ने बातचीत और कूटनीति को बराबर महत्व दिया और मित्रता का हाथ बढ़ाया।
विचार: संसद के सामने नई चुनौती
यह डर विपक्ष को फिर से मानसून सत्र की तरह ही व्यवहार करने को मजबूर कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह लोकतंत्र की असफलता होगी।
जागरण संपादकीय: लोकतंत्र की त्रासदी
संसद लोकतंत्र का एक अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण मंच है। इस मंच का निरतंर क्षरण लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
बच्चे की डाइट में छह महीने के बाद शामिल करें ये तीन चीजें
नई दिल्ली, बच्चे की सेहत और विकास को लेकर हर माता-पिता काफी चिंता में रहते हैं।
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बूम ने पाया कि आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए हरभजन सिंह द्वारा शेयर किया गया वीडियो राजस्थान के श्रीगंगानगर का है. श्रीगंगानगर पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को पूछताछ के लिए डिटेन किया है.
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मौसम विभाग ने 13 से 19 अगस्त तक यूपी, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। जानें किस राज्य में कब होगी भारी बारिश।
वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि: ऑस्ट्रेलिया
मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। टीम ने स्टेम सेल से इंसानी हृदय के वाल्व जैसा ऊतक (टिशू) तैयार किया है।
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ट्रैफिकिंग गिरोह आमतौर पर उन परिवारों को निशाना बनाते हैं जो आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से कमजोर होते हैं।
नासा और इसरो:द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में हुई अहम पहल,भारत के स्पेस विजन-2047 को मिलेगी गति
ललित सुरजन की कलम से स्नोडन : अपराधी नहीं, विश्व नागरिक
'यह सबको पता है कि पिछले पच्चीस साल से भारत लगातार अमेरिकापरस्ती कर रहा है
मक्का समझौता : बदलता शक्ति-संतुलन और भारत की चुनौती
नई परिस्थितियों में भारत को यही बढ़त बनाए रखनी होगी—शोर से नहीं, शक्ति और रणनीति से।
मंगल मिलन में तिरंगा और भागवत कथा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद को राजनैतिक प्रहसन के मंच में तब्दील करने में लगातार लगे हुए हैं।
एफसीआरए और कुछ गंभीर सवाल: कानून सबसे ऊपर... क्या राष्ट्रीय हित की रक्षा, विदेशी असर पर अंकुश लगाना है लक्ष्य?
विचार: विदेशी पूंजी आकर्षित करने की चुनौती
निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा राजकोषीय घाटे का नियंत्रण और मुद्रास्फीति को संतुलित सीमा में रखना जरूरी है।
विचार: नए रूप में सामने आता गांधीवाद
नई पीढ़ी के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है। यदि नई पीढ़ी स्वयं लोकतांत्रिक मूल्यों का उदाहरण बनेगी तो बदलाव भी आएगा और लोकतंत्र भी मजबूत होगा और शायद यही 21वीं सदी का सबसे सच्चा गांधीवाद है।
जागरण संपादकीय: जेपीसी में एफसीआरए
इसे देखते हुए एफसीआरए में उपयुक्त संशोधन किए ही जाने चाहिए। इसलिए और भी, क्योंकि संप्रभु देश को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि विदेशी धन का दुरुपयोग न होने पाए।
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बूम ने पाया कि वायरल वीडियो 22 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज का है, जिसे बीजेपी ने गलत तरीके से झारखंड का बताकर शेयर किया है.
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नदी के पानी में मगरमच्छ को देखकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक बच्चे का बिल्कुल अलग ही अंदाज देखने को मिला। वीडियो में बच्चा नदी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम से नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है।
कपालभाति निकालता है शरीर के टॉक्सिन बाहर
नई दिल्ली, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा, कब्ज, साइनस, अस्थमा और तनाव आम हो गया है।
Independence Day 2026: आजाद भारत की युवा पीढ़ियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान
युवा लोकतंत्र को मजबूती देने में, युवा मतदान के प्रतिशत में वृद्धि करके देश हित में कार्य करने वाले योग्य व्यक्ति को संसद में पहुंचा सकते हैं ताकि युवाओं के आम जनमानस से जुड़े सवालों पर बहस हो और समाधान संभव हो।
शुक्र कैसे बना सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह?: कभी था पानी और महासागर, सूरज के सबसे करीब नहीं फिर भी इतना तापमान
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राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
म्यूचुअल फंड में बदला निवेशकों का रुख: 30 महीने बाद लार्जकैप से निकाला पैसा; अब स्मॉलकैप में कितना निवेश बढ़ा?
ललित सुरजन की कलम से तपती धूप में सड़क का सफर
'हरदा जाते समय हमने सोचा कि फोरलेन छोड़कर बैतूल के पहले बैतूलबाजार में निर्मित बालाजीपुरम में रुककर चाय पी लेंगे।
प्रवासी शिविर जगती का माहौल मंगलवार को बदला-बदला नजर आया।
अभी आंदोलन से उभरी आग यह ठंडी पड़े उससे पहले रांची के बच्चों ने अपने प्रदेश की प्रतियोगिता परीक्षाओं की बदहाली के सवाल को उठाया।
2027 की जनगणना संसदीय सीमाओं को फिर से बनाने में मदद करेगी
इसका असर सुरक्षित चुनाव क्षेत्रों पर पड़ेगा, जो उनकी नयी आबादी के आंकड़ों के आधार पर होगी जिससे अनुसूचित जाति और जनजाति सीटों की संख्या और भूगोल बदलेगा।
संसद में गतिरोध और सुविधा का लोकतंत्र
संसद के मानसून सत्र को खत्म होने में बस दो दिन बचे हैं। 13 अगस्त को सत्र खत्म हो जाएगा।
युवा शक्ति को मिले दिशा, सपनों को मिले उड़ान
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त 2026) पर विशेषः युवा केवल उम्र की एक अवस्था नहीं, बल्कि ऊर्जा, साहस, कल्पना, परिवर्तन और नवसृजन की चेतना का नाम है। जिस समाज की युवा शक्ति जाग्रत, संवेदनशील और रचनात्मक होती है, वह समाज परिवर्तन की नई इबारत लिखता है। इसके विपरीत जब युवा ऊर्जा दिशाहीन हो जाती है ... Read more
विचार: एक बड़ा उद्यम बना मिलावटखोरी
देश में ऐसे सरकारी विभागों की कमी नहीं, जो जिस काम के लिए बने हैं, वही कर पाने में बुरी तरह नाकाम हैं। परिणाम यह है कि गुणवत्ता के मानकों की हर कहीं अनदेखी हो रही है।
विचार: आसान नहीं साइबर अपराधों पर अंकुश
डाटा सिक्योरिटी काउंसिल आफ इंडिया यानी डीएससीआइ द्वारा समय-समय पर साइबर क्राइम की जांच-पड़ताल से संबंधित पुस्तक प्रकाशित की गई है, जो काफी उपयोगी है।
जागरण संपादकीय: संसद में सड़क की राजनीति
यह ठीक नहीं कि संसद में विधेयक बिना चर्चा के पारित हो जाए, लेकिन ऐसा हो रहा है। इसके लिए विपक्ष ही अधिक जिम्मेदार है।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के दावे से बांग्लादेश सीमा का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो चांपाईनवाबगंज के शिबगंज सीमा क्षेत्र पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच हुई कहासुनी का है.

