जीवन धारा:कृष्ण जीवन की सभी कलाओं में माहिर हैं,साथ जाने का रास्ता चुनने पर शुरुआत में ही अहंकार छोड़ना होगा
मुद्दा:लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है,छुआछूत-भेदभाव जैसी अस्पृश्यता अब भी कायम; स्वतंत्रतामूलक सुधार अपरिहार्य
भ्रष्टाचार की तस्वीर: शिकायत पर कार्रवाई नहीं, संभावना पहचानने की व्यवस्था हो, डिजिटल प्रक्रिया की अहम भूमिका
इंसाफ कैसे: कॉलेजियम प्रणाली पर देशव्यापी चिंता, राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग 'असांविधानिक', रास्ता क्या?
जीडीपी आंकड़ों का भ्रम: दो अलग सीरीज की तुलना क्यों, 2.6% के दावे पर उठे सवाल कितने सही?
जीडीपी आंकड़ों का भ्रम: दो अलग सीरीज की तुलना क्यों, 2.6% के दावे पर उठे सवाल कितने सही?
Janmashtami 2026: इस साल 04 सितंबर को जन्माष्टमी का पावन उत्सव मनाया जा रहा है। विदेशों तक भगवान कृष्ण के प्रति आस्था और दीवानगी देखी जाती है। कई हॉलीवुड सेलेब्स भी उन्हें बहुत मानते हैं।
राशिफल 04 सितंबर: तुला और धनु राशि वालों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, मिल सकता है लाभ
4 सितंबर 2026 का आज का राशिफल आपके लिए कैसा रहेगा? जानें मेष, कर्क, सिंह, कन्या, कुंभ और मकर राशि वालों के करियर, धन, प्रेम और सेहत से जुड़े आज के राशिफल की खास भविष्यवाणी।
वंधामा में रास्ता आज भी उन्हीं घरों के बीच से गुजरता है, लेकिन घरों के भीतर जिंदगी नहीं है।
ललित सुरजन की कलम से पंचायती राज में बाधक अभिजात सोच
अनिवार्य शिक्षा कानून लागू हो जाने के बाद भी उसका उल्लंघन कदम-कदम पर हो रहा है।
सोशल मीडिया को बरतने के तौर-तरीके
कोई सोशल मीडिया पर है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसके साथ चाहे जैसा व्यवहार करें।
किताबों और फिल्मों पर रोक से विचार नहीं रुकते
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का कहना था कि कोई भी संगठन कानून से परे नहीं है।
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर चल रहे अपग्रेडेशन कार्यों के कारण 10 सितंबर से 15 अक्तूबर तक 36 दिनों का पावर और ट्रैफिक ब्लॉक लागू किया जाएगा।
शिक्षा कोरी नियुक्ति ही नहीं, मुक्ति का माध्यम बने
शिक्षक दिवस- 5 सितम्बर, 2026 शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा-दृष्टि, शिक्षक की भूमिका और भावी पीढ़ी के निर्माण पर गंभीर आत्ममंथन का दिन है। किसी राष्ट्र का भविष्य केवल उसके विद्यालयों की संख्या, भवनों की भव्यता, पुस्तकों की उपलब्धता या परीक्षाओं के परिणामों से निर्धारित नहीं होता, ... Read more
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की मधुर छवियां हमारे मन में जाग उठती हैं- माखन चुराते कन्हैया, बांसुरी बजाते श्याम, ग्वाल-बालों के साथ खेलते नंदलाल और यशोदा मैया को मोहित करते बाल गोपाल…
विचार: तकनीक की लत के शिकार होते बच्चे
एक तरफ चैरिटी की बातें की जाती हैं और यह कहा जाता है कि हम सब बराबर हैं, मगर अफसोस है कि मुनाफे के लिए हर तरह की तरकीबें अपनाई जा रही हैं और लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण जितना लौकिक कोई नहीं
हम श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाते हैं, जन्मदिन नहीं, क्योंकि श्रीकृष्ण के प्रादुर्भाव का अनुभव करना चाहते हैं। श्रीकृष्ण के जीवन चरित का स्मरण नहीं करते। जो हमारे जीवन में रचा-बसा हो, उसे स्मरण करने की क्या आवश्यकता है…
विचार: भारत की विधि संहिता नहीं है मनुस्मृति
देश को इतिहासबोध, आत्मसमीक्षा और संविधान में अटूट निष्ठा की आवश्यकता है। सभ्यतागत आत्मविश्वास अतीत पर शर्मिंदा होने में नहीं, बल्कि उसे समझकर आगे बढ़ने में है।
महिला क्रिकेट में नए दौर का आगाज
भारत को पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी मिलना महज खेल-जगत की खबर नहीं, महिला क्रिकेट के बदलते दौर का संकेत है। दशकों तक पुरुष क्रिकेट की तेज धारा के किनारे बहने वाला महिला क्रिकेट अब अपनी राह बना रहा है…
भारत में धर्मस्थलों की चर्चा सदा प्रासंगिक बनी रहती है। जहां अयोध्या राम मंदिर के संचालन के लिए नई टीम गठित हो गई है, वहीं पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गणना सबका ध्यान खींच रही है। यह सुखद इसलिए है कि गणना 48 साल बाद हुई है।
जागरण संपादकीय: हिमालयी राज्यों की चुनौती
यह सही समय है कि उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को ध्यान में रखकर शुरू की गई ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड संबंधी परियोजना की समीक्षा की जाए।
शरीर में अकड़न से परेशान? डाइट में शामिल करें ये चीजें, मिलेगा बदलाव
नई दिल्ली, शरीर का लचीलापन सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितनी देर तक स्ट्रेचिंग करते हैं। आपके खाने का भी इसमें बड़ा योगदान हो सकता है। अगर शरीर को रोजाना सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और जरूरी तत्व नहीं मिल रहे हैं तो मांसपेशियों की ताकत और उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
India-Belgium Relations Prime Minister Bart De Wever meets PM Modi discussions issues, including trade defense
ऑस्ट्रेलिया में बना दुनिया का सबसे भारी गोल्ड बार, 521 किलो वजन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
सोने की छोटी-सी ईंट या गोल्ड बार तो आपने कई बार देखी होगी
एशियाई खेलों की शुरुआत होने में अब ज्यादा समय शेष नहीं रह गया है। बीसीसीआई क्रिकेटरों के लिए ठहराए जाने वाली व्यस्था से खुश नहीं है। बताया जा रहा है कि बोर्ड ने होटल के एक कमरे में दो क्रिकेटरों को ठहराए जाने पर आपत्ति जताई है।
छोटे कारोबारियों की बड़ी चिंताएं: अगले आर्थिक सुधारों का लक्ष्य हो छोटे कारोबार, करोड़ों को देते हैं आजीविका small-businesses-should-be-next-focus-of-economic-reforms-in-india
क्या नेपाल त्रासदी को रोका जा सकता था?: तबाही में छिपा जलवायु संकट का संदेश, तीन देशों के सहयोग की जरूरत nepal-tibet-flood-may-averted-glacier-melt-climate-change-himalayan-disaster
जीवन धारा: क्रोध की आग हमें ही जलाती है
जीवन धारा: क्रोध की आग हमें ही जलाती है
दूसरा पहलू: ब्रह्मांड के 'लिटिल रेड डॉट्स' का रहस्य
दूसरा पहलू: ब्रह्मांड के 'लिटिल रेड डॉट्स' का रहस्य
जीत का अर्थ: स्पर्धा में जीतना साहस की मिसाल, लेकिन एक मां को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी?
जीत का अर्थ: स्पर्धा में जीतना साहस की मिसाल, लेकिन एक मां को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी? ramabai-ranveer-runs-and-won-marathon-for-daughters-education-Ambajogai-Maharashtra
उत्तराखंड में हिमनद झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़े हैं।
ललित सुरजन की कलम से देशबन्धु : चौथा खंभा बनने से इंकार- 8
'छत्तीसगढ़ में शुक्ल बंधुओं के वर्चस्व के कारण अनेक कांग्रेसजन घुटन महसूस करते थे,
How safe is the digital world for children?
भारत में बच्चों की दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है।
छवियों में कैद मोदी विदेश नीति
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बनाई विदेश नीति में कैमरे में कैद छवियों को अहम बना दिया है।
विचार: अंधविरोध का वैचारिक गठबंधन
न्यूयार्क की स्थानीय राजनीति, एक्टिविस्ट संगठनों, भारत विरोधी अभियानों और धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर सक्रिय संस्थाओं के बीच एक ऐसा वैचारिक इकोसिस्टम दिखाई देता है, जिसमें एक मंच का आरोप दूसरे मंच का प्रमाण बन जाता है।
कमलापति त्रिपाठी में संचित रही काशी की संस्कृति
काशी अपने कुछ व्यक्तित्वों को कभी नहीं भूल सकती। पंडित कमलापति त्रिपाठी तो उसकी संस्कृति के सच्चे प्रतिनिधि थे। 3 सितंबर, 1905 को यहां की समृद्ध पांडित्य परंपरा वाले परिवार में जन्मे कमलापति त्रिपाठी को सात दशकों का…
मतदाताओं के छूटने से मकसद बेमानी
मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद थमता नहीं दिख रहा। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के जिस तरह के आरोप सर्वप्रथम बिहार में लगे थे, वे एसआईआर के तीसरे चरण में भी दूर नहीं किए जा सके…
राजधानी में लड़कियां आज भी असुरक्षित
राजधानी दिल्ली में 16 वर्षीया छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप की कथित घटना बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। सवाल सिर्फ अपराध का नहीं, उस मानसिकता का भी है, जो किसी मासूम की इंसानियत और सम्मान को कुचलने की हिम्मत…
जल प्रलय झेल रहे नेपाल ने क्षतिपूर्ति की जो मांग रखी है, वह पहली नजर में ही बहुत स्वाभाविक और विचारणीय लगती है। इस आपदा के चलते चीन या तिब्बत में कितना नुकसान हुआ, यह बहुत स्पष्ट नहीं है, लेकिन नेपाल में अब तक…
जागरण संपादकीय: राम मंदिर का संचालन
राम मंदिर उन आदर्शों का प्रकाशपुंज बनना चाहिए, जिनके लिए श्रीराम जाने और पूजे जाते हैं। वैसे तो संत समाज की यह मांग रही है कि राम मंदिर का संचालन उनके द्वारा ही हो, लेकिन एक तो इस पर आम सहमति नहीं और दूसरे, इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने और चढ़ावे के लेखा-जोखा के कारण प्रशासनिक मामलों में दक्ष लोगों की भी आवश्यकता है।
फैक्ट चेक: भारत के पुराने और असंबंधित वीडियो नेपाल बाढ़ से जोड़कर वायरल
बूम ने पाया कि पहला वीडियो महाराष्ट्र के एक बांध का है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के वृंदावन का है.
शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है यह आसन
नई दिल्ली, योग हमारी प्राचीन परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो न सिर्फ शरीर को बल्कि स्वस्थ रखने के साथ मन को भी शांत रखने में कारगर होता है।
नेपाल बाढ़ में तेज बहाव के कारण पुल टूटने के दावे से वायरल वीडियो फेक है
बूम की जांच में NVIDIA और Hive Moderation जैसे AI डिटेक्शन टूल्स ने वीडियो के AI जनरेटेड होने की संभावना जताई.
एससीओ समिट: मियां शहबाज शरीफ, तस्वीर काटने से हकीकत नहीं बदलती
अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी की मौजूदगी को मिटाने का सबसे आसान तरीका फोटो एडिट करना हो सकता है, लेकिन उसकी राजनीतिक मौजूदगी को मिटाना संभव नहीं है।
सिर्फ आक्रोश से रास्ता नहीं बनता: ‘जेन जी’ के सामने असली चुनौती अंतर्विरोध मुक्त वास्तविक नैतिक बल सिद्ध करना
आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी
आल्प्स, हिमालय के संकट अलग नहीं: जलवायु परिवर्तन के दो चरम विरोधाभासी परिदृश्य, लिख रहे भावी विभीषिका की कहानी
ललित सुरजन की कलम से आत्मकथा लिखना आसान नहीं
'एक आत्मकथा में समृद्ध अनुभव, सघन विचार और समर्थ अभिव्यक्ति से मिलकर वह आकर्षण होना चाहिए जो दूर-दूर तक प्रभावित कर सके।
हाथ में 50 पैसे का सिक्का और मन में गायिका बनने का सपना।
पूर्वोत्तर भारत के ईसाई संगठनों ने कहा एफसीआरए में प्रस्तावित बदलाव दमनकारी
इस बातचीत की प्रक्रिया में पूर्वोत्तर के कई चर्च काउंसिल और उनके मुख्य संगठन शामिल हैं।
दुुनिया जब बुरे दौर में है तब भारत के आर्थिक उजाले
दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, वह आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से असाधारण चुनौतियों का दौर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ... Read more
कौशल मिलेगा, रोजगार कहां मिलेगा?
विकसित भारत ञ्च2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए नीति आयोग ने कौशल विकास को पुर्नव्यवस्थित करने की पहल की है।
विचार: अति की हदों को पार करती असहमति
यह एक तथ्य है कि जनभागीदारी वाले कई सामाजिक अभियान महज मोदी सरकार के अभियान बनकर रह गए हैं। यह स्थिति तब है, जब देश में कई समस्याएं ऐसी हैं, जिनका समाधान जनता की सामूहिक भागीदारी से ही किया जा सकता है।
विचार: समझी जाएं जेन-जी की आकांक्षाएं
भारत में जेन-जी की आकांक्षाएं किसी एक चुनाव या एक अभियान की बात नहीं हैं। यह भारत के लोकतंत्र के आने वाले कल की दिशा तय करने वाला सवाल है। जो भी नेतृत्व राजर्षि की संकल्पना को आत्मसात कर उसके अनुरूप आचरण करेगा, वही इस पीढ़ी का भरोसा जीत पाएगा।
जागरण संपादकीय: स्वदेशी का मंत्र
आम तौर पर ऐसी सुविधाएं भारत में उपलब्ध नहीं होतीं और यदि होती भी हैं तो वे विदेश के मुकाबले महंगी पड़ती हैं। ऐसा क्यों है, इसके कारणों का निवारण करने की आवश्यकता है।
वैश्विक झंझावात में भी मजबूत भारत
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.8 प्रतिशत रहना सुखद आश्चर्य है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि अप्रैल से जून की इस अवधि में दुनिया की अर्थव्यवस्था…
किर्गिस्तान में कूटनीतिक कामयाबी
सोमवार को यह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) नहीं, दिल्ली सहयोग संगठन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कुशल कूटनीति और शांति-प्रयासों के जरिये माहौल को भारत के पक्ष में बना दिया…
ऐसी खबर का जलवा कई दिन तक बरकरार रहता है जिसमें सामाजिक स्तर पर प्रसिद्ध, बहुत ज्यादा पहुंच वाला, खूब प्रभाव पैदा कर सकने वाला व्यक्ति किसी भी मुश्किल सवाल का जवाब संयम और मुस्कुराते हुए देता रहे। इससे देश के काफी बड़े हिस्से की तबीयत ठीक रहती है। वैसी खबर का जलवा एक दम बिखरा सा रहता है जब उसी तरह का व्यक्ति एक ही साक्षात्कार में कई सवालों के जवाब न दे पाए। ऐसा होना स्वाभाविक है जब परीक्षा से पहले सम्बंधित विषय की भरपूर तैयारी न की जाए। अपने गुरुओं और वरिष्ठ जनों की बातों को ठीक से सुना और समझा न हो। कक्षा या ज़िंदगी की कक्षा में बैठे हों लेकिन ध्यान कहीं और हो और नोट्स न लिए हों। अभ्यास करने के दौरान संजीदगी न बनाए रखो तो उचित समय पर सवालों के जवाब भूल ही जाते हैं, जिसे जवाब देते नहीं बना भी कहते हैं। इसे भी पढ़ें: पानी की कमियां और गुस्ताखियां (व्यंग्य) इम्तिहान से पहले व्यक्ति सोचता है कि मुझे सब कुछ पता है, सब याद है, मुझसे ज्यादा चतुर कोई नहीं। कोई कैसा, ऐसा या वैसा सवाल आएगा तो हल कर लूंगा। कई बार ऐसा हो जाता है कि परीक्षा की घड़ी बिना बताए मुख्य दरवाज़े पर आन खड़ी होती है। सुना है, तब याद किया सब कुछ भूल जाता है। कई सवाल सामने बैठ जाते हैं, एक दो सवाल को तो खड़े रहना पड़ता है इसलिए वे नाराज़ भी हो जाते हैं। जब जवाब सूझता नहीं तो बंदा सोचता है कि मुझे जवाब देने की तैयारी निरंतर रखनी चाहिए थी। अभ्यास करते रहना चाहिए था। दूसरे अनुभवी लोगों से पूछ लेना चाहिए था। परीक्षा में तो कुछ भी प्रत्याशित या अप्रत्याशित पूछा जा सकता है इसलिए यह पता होना चाहिए कि अगर सवाल का रंग लाल या नीला हो तो जवाब कौन से रंग का देना है। कई सवाल ऐसे होते हैं कि पोल खोल दें जिससे तबीयत अविलंब खराब हो जाती है। अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है। सवाल घबराहट का माहौल बन देते हैं। इस दौरान यह कह देना ज़रूरी होता है कि जिस सम्बन्ध में सवाल पूछे जा रहे हैं उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। साथ साथ यह भी कह देना चाहिए कि जो लोग गलत करते हैं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उनसे ऐसा करने की उम्मीद नहीं थी। अच्छी राजनीतिक जलवायु हो तो यह एक उम्दा जवाब माना जाता है और समाज में प्रसिद्ध भी है। यह हमारे सामाजिक जीवन का आधार कार्ड भी है। असल में सवाल तो वही असली सवाल माने जाते हैं जिनका जवाब न दिया जा सके। बड़ों बड़ों की बोलती बंद कर दें। सवाल ऐसे होते हैं तो जवाब भी ऐसे होते हैं या हो सकते हैं जो बड़ी से बड़ी बोलती बंद कर दें। सवालों ने अपने बीच से हमेशा कई ऐसे सवाल खड़े किए जिन्हें कोई जवाब बिठा न सका। कितने सवाल अपने जवाब ढूंढते रहे अभी भी ढूंढ रहे होंगे। पुलिस की मदद ली, सुप्रसिद्ध समझदारों, सिद्धहस्त महात्माओं और जाने माने ज्योतिशिओं की सलाह ली लेकिन न असली जवाब मिले न नकली। आखिर में यही मानना पडेगा कि जवाब जिनका नहीं, वो सवाल होते हैं असली सवाल। - संतोष उत्सुक
फैक्ट चेक: नेपाल में आई बाढ़ के CCTV फुटेज के दावे से AI जनित क्लिप वायरल
बूम ने जांच में पाया कि इनमें से ज्यादातर क्लिप नेपाल बाढ़ के वास्तविक दृश्य को नहीं दिखाते. इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से क्रिएट किया गया है.
धरती पर कई ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिनकी क्षमताएं इंसानों को हैरान कर देती हैं।
किडनी को हेल्दी रखने के लिए करे योगासन
नई दिल्ली, किडनी (गुर्दा) हमारे शरीर के बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। ये खून को साफ करने, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने और पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किडनी की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली के साथ कुछ योगाभ्यास भी शरीर को सक्रिय और स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
गुर्दा सही से चले तो करे योगाभ्यास, जानें करने का सही तरीका
नई दिल्ली, स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं बल्कि शरीर को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना है। गुर्दे हमारे शरीर का प्राकृतिक फिल्टरिंग सिस्टम है, जो शरीर की सफाई में काम करता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि आंतरिक अंगों की मालिश और पुनर्प्राप्ति की एक सूक्ष्म तकनीक है।
घर का खाना भी बढ़ा सकता है कोलेस्ट्रॉल, ये गलतियां न करे
नई दिल्ली, कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले बाहर का खाना, बर्गर, पिज्जा, समोसा और ज्यादा तेल वाली चीजें आती हैं। यही वजह है कि बहुत से लोग मानते हैं कि अगर वे घर का खाना खा रहे हैं तो उनका कोलेस्ट्रॉल कभी नहीं बढ़ सकता। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। घर का बना खाना सेहत के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन खाने के साथ-साथ हमारी रोज की आदतें भी शरीर पर असर डालती हैं। कई बार अच्छी डाइट लेने के बाद भी रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आ सकता है। इसकी वजह ज्यादा वजन, कम चलना-फिरना या खाने में कुछ चीजों की ज्यादा मात्रा हो सकती है।
दूसरा पहलू: वह मंदिर, जहां सूर्य की पहली किरण करती है अभिषेक, उत्तराखंड में है ये विशिष्ट जगह
दूसरा पहलू:वह मंदिर, जहां सूर्य की पहली किरण करती है अभिषेक, उत्तराखंड में है ये विशिष्ट जगह
मजबूती के संकेत: निजी निवेश और निर्यात के जरिये रफ्तार बनाए रखनी होगी; ताकि विकास पर भारी न पड़े बाहरी दबाव
आज से सितंबर महीने की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे में आपके लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि इस महीने बैंक कब-कब और कहां-कहां कितने दिन बंद रहेंगे।
नए महीने की शुरुआत से यानी आज सितंबर महीने की शुरुआत से ही कई बदलाव होने जा रहे हैं। अब ये देखना होगा कि इनका आपकी जेब पर क्या असर पड़ता है। आप इन नए बदलावों के बारे में यहां जान सकते हैं।
सीमा विवाद की कठिन डगर: हालिया वार्ताएं संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत कर सकती हैं, भारत-चीन के बीच राह लंबी
चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों का आज से पक्का मोर्चा: जाम करेंगे रोड, ये हैं मुद्दे
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि चंडीगढ़ बॉर्डर पर एसकेएम का यह पहला बड़ा प्रदर्शन है। इस दिन-रात के मोर्चे के दौरान किसानों की मांगों पर प्रतिदिन चर्चा होगी।
ललित सुरजन की कलम से मानसरोवर यात्रा पर राहुल
'जब पंडित नेहरू नैनी जेल में कैद थे तब उन्होंने माघ स्नान के लिए जाते श्रद्धालुओं को लेकर गंगा के बारे में इंदिरा जी को एक रोचक पत्र लिखा था।'
युवाओं के नेतृत्व में एक क्रांतिकारी बदलाव से गुज़र रहा है भारत
एक खास तौर पर सकारात्मक बात यह है कि युवा सांप्रदायिक राजनीति को नकार रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे कठुआ जिले के हीरानगर स्थित चन्न खत्रियां इलाके में एक कबूतर पकड़ा गया है।
शहरों को ठंडा रखने के लिए जरूरी हैं पेड़, पर अब इन्हें भी चाहिए मदद
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और सूखे की वजह से शहरों के पेड़ खतरे में पड़ गए हैं. पर्यावरण की इस बड़ी ताकत को कैसे सुरक्षित रखा जाए और कैसे ऐसे शहरी जंगल लगाए जाएं, जो भविष्य में मौसम से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर सकें
विचार: सप्तधारा बनाएगी विकसित भारत
हरित और नीली अर्थव्यवस्था: भारत आज जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। हमारी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 76.38 गीगावाट से बढ़कर 288.58 गीगावाट हो गई है।
विचार: भारत-चीन रिश्तों की नई दिशा
स्पष्ट है कि भारत कूटनीतिक उम्मीदों के फेर में पड़कर अपनी रणनीतिक चौकसी और तैयारियों में कोई ढिलाई नहीं बरतेगा।
जागरण संपादकीय: आर्थिकी के अच्छे दिन
7.8 प्रतिशत विकास दर के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर सबसे तेज बढ़ती आर्थिकी बनी, लेकिन भारत को इससे संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
विकसित राष्ट्रीय राजधानी बनाने का मास्टर प्लान
महान शहर केवल बड़ी-बड़ी इमारतों और आधुनिक सुविधाओं से नहीं बनते, उनकी असल पहचान इस बात से होती है कि वे अपनी प्रकृति, इतिहास और विरासत को कितना सहेजते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़कर…
इन दिनों एक बार फिर मुंबई में अन्य राज्यों से आए कामगारों, विशेष रूप से ऑटो-टैक्सी चालकों पर मराठी सीखने का काफी दबाव है। मौजूदा राज्य सरकार ने उन्हें 15 अगस्त तक मराठी सीखने का जो अल्टीमेटम दिया था, वह अवधि…
मतदाता सूची से शिकायत और सियासत
दक्षिण के दो राज्यों- कर्नाटक और तेलंगाना में क्रमश: मई 2028 और मई 2029 में विधानसभा के चुनाव निर्धारित हैं और इन दोनों राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगभग 2.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से…
रटने से रचने तक: आधुनिक भारतीय शिक्षा प्रणाली से मेरा एक सवाल
हाल ही में अजमेर में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सृजनात्मक प्रतियोगिता के समापन समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बैठने का अवसर मिला। वहां से लौटते हुए मन में एक सवाल बार-बार लौटता रहा, जो शायद हम सबको बार-बार पूछना चाहिए — क्या हम अपने विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में अच्छे अंक ... Read more
पुरानी कार या बाइक खरीदने के बाद RC (Registration Certificate) अपने नाम ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है। अब केंद्र सरकार ने वाहन के मालिकाना हक के ट्रांसफर और अधिकृत डीलरों के जरिए पुराने वाहनों की बिक्री को लेकर नए नियमों का मसौदा पेश किया है। इसमें छह महीने की समय सीमा का प्रावधान चर्चा में है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि छह महीने बाद मालिकाना हक बदलने का प्रस्ताव आम व्यक्ति द्वारा खरीदे गए वाहन पर सीधे लागू होने वाला नियम नहीं है। यह मुख्य रूप से उस वाहन के लिए प्रस्तावित है, जिसे पंजीकृत मालिक ने अधिकृत डीलर को सौंप दिया है और Form 29C के जरिए इसकी सूचना दी गई है। क्या है सरकार का नया प्रस्ताव? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य खासकर संगठित सेकंड-हैंड वाहन कारोबार में वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने और अंतिम खरीदार के नाम ट्रांसफर होने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना है। इसे भी पढ़ें: आयुष्मान कार्ड कौन बनवा सकता है? क्या Taxpayers, PF, ESIC वाले इसके पात्र होंगे? प्रस्ताव के मुताबिक : - अधिकृत डीलर को वाहन मिलने के बाद उसकी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। एक डीलर से दूसरे अधिकृत डीलर के पास वाहन जाने पर Form 29CA का इस्तेमाल प्रस्तावित है। - डीलर से डीलर वाहन ट्रांसफर की संख्या अधिकतम दो रखने का प्रस्ताव है। - Form 29C दाखिल होने के बाद वाहन छह महीने से ज्यादा समय तक डीलर के पास बिना Form 30 के नहीं रखा जा सकेगा। छह महीने बाद क्या होगा? प्रस्तावित नियम के अनुसार, यदि Form 29C दाखिल होने की तारीख से छह महीने के भीतर वाहन का मालिकाना हक Form 30 के जरिए किसी खरीदार को ट्रांसफर नहीं होता है तो वाहन का मालिकाना हक आखिरी अधिकृत डीलर के नाम अपने आप ट्रांसफर होने का प्रस्ताव है। यह बदलाव VAHAN सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी वाहन को मालिक ने डीलर A को सौंपा और बाद में वह डीलर B के पास चला गया, तो छह महीने की समयसीमा के भीतर अंतिम खरीदार के नाम Form 30 से ट्रांसफर होना जरूरी होगा। ऐसा नहीं होने पर प्रस्ताव के मुताबिक आखिरी डीलर के नाम मालिकाना हक दर्ज हो सकता है। क्या आम वाहन खरीदार को छह महीने में RC ट्रांसफर कराना होगा? यहां भ्रम दूर करना जरूरी है। मौजूदा सामान्य RC ट्रांसफर प्रक्रिया में खरीदार के लिए अलग समयसीमा लागू है। एक ही राज्य में वाहन की बिक्री होने पर सामान्यतः ट्रांसफर की सूचना और आवेदन निर्धारित समय में करना होता है। संबंधित परिवहन विभाग के अनुसार, सामान्य ट्रांसफर के लिए Form 29 और Form 30 का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए नए मसौदे की छह महीने वाली शर्त को सीधे यह कहना कि “हर खरीदार छह महीने में RC ट्रांसफर नहीं कराएगा तो गाड़ी का मालिकाना हक बदल जाएगा”, सही नहीं होगा। Form 29CA क्यों लाया जा रहा है? नए मसौदे में Form 29CA को अधिकृत डीलरों के बीच वाहन की आवाजाही दर्ज करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इससे क्या होगा : - किस डीलर के पास वाहन है, इसका रिकॉर्ड रहेगा। - वाहन के एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने की जानकारी VAHAN पर दर्ज होगी। - वाहन के अंतिम खरीदार तक पहुंचने की प्रक्रिया ज्यादा ट्रैक योग्य होगी। - पुराने वाहनों की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ सकती है। - किन वाहनों के ट्रांसफर पर रोक लग सकती है? मसौदे में प्रस्ताव है कि कुछ परिस्थितियों में वाहन का डीलर को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। इनमें शामिल हैं: - RC वैध नहीं होना - इंश्योरेंस वैध नहीं होना - PUC प्रमाणपत्र वैध नहीं होना - पेंडिंग ट्रैफिक चालान - बकाया टैक्स या यूजर फीस - वाहन से जुड़ा कुछ कानूनी या आपराधिक मामला - वाहन पर हायर-पर्चेज, लीज या हाइपोथिकेशन जैसी देनदारी होना। अभी क्या है स्थिति? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अभी प्रस्तावित नियम हैं, अंतिम कानून नहीं। मंत्रालय ने मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से प्रावधान किस रूप में लागू होंगे। वाहन मालिक और खरीदार क्या करें? - वाहन खरीदने के बाद RC ट्रांसफर को टालें नहीं। - Form 29 और Form 30 की प्रक्रिया समय पर पूरी करें। - खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। - वाहन का इंश्योरेंस और PUC वैध रखें। - पेंडिंग चालान और टैक्स की स्थिति जांचें। - सेकंड-हैंड वाहन खरीदते समय VAHAN रिकॉर्ड की जांच करें। सरकार के नए मसौदे का मुख्य उद्देश्य पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री में मालिकाना हक और डीलर-से-डीलर वाहन की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत करना है। छह महीने की प्रस्तावित सीमा खासतौर पर अधिकृत डीलर के पास रखे वाहन से जुड़ी है। इसे हर निजी खरीदार पर लागू होने वाला नया छह महीने का RC नियम समझना सही नहीं होगा। फिलहाल यह एक मसौदा है, इसलिए वाहन मालिकों और खरीदारों को अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए। हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत भी वाहन खरीदने के बाद RC अपने नाम कराने में देरी करना उचित नहीं है। - जे. पी. शुक्ला
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