वेज या नॉनवेज : भोजन की थाली पर सियासत क्यों?
भोजन को लेकर विवाद इसलिए जल्दी बढ़ जाते हैं, क्योंकि यह विषय लोगों की आस्था, परिवार और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। जब हर घटना को विचारधारा की लड़ाई बना दिया जाता है तो मूल सवाल पीछे छूट जाता है।
तमिलनाडु : भारी बारिश के कारण आज स्कूल बंद
चेन्नई, उत्तर-पूर्वी मानसून के मजबूत होने के कारण हो रही भारी बारिश को देखते हुए तमिलनाडु के कई हिस्सों में सोमवार को स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई। वहीं, चेंगलपट्टू जिले में शिक्षण संस्थान सामान्य रूप से काम करेंगे।
द बोनस मार्केट अपडेट: सेंसेक्स 500 अंक से अधिक गिरा, निफ्टी 22450 के नीचे; जानिए बाजार का हाल
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 500 अंक से अधिक लुढ़का, जबकि निफ्टी 22,450 के नीचे बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का इंतजार निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।
गन्ना किसानों के हितों का सवाल: एक लाख करोड़ की पैदावार पर भी संकट से जूझ रहे अन्नदाता, सवाल उठना लाजिमी है
एक भारतीय राजनयिक की पहल बनी वैश्विक पहचान, अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस के 10 साल पूरे
भारतीय राजनयिक अभय के. की पहल से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दिवस अब दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुका है24 अक्तूबर 2026 को इस पहल के 10 साल पूरे हुए, जिसका उद्देश्य राजनयिकों और उनके परिवारों के योगदान को पहचान दिलाना है।
OTT Release This Week: देखने ही देखते अक्तूबर का महीना विदा ले रहा है। इस महीने सिनेमाघरों से ओटीटी तक खूब रौनक रही है। सस्पेंस से लेकर कॉमेडी और एक्शन तक, कई दिलचस्प फिल्मों और वेब सीरीज की आमद रही।
प्रक्रिया ही नहीं, सोच भी बदली: गति शक्ति और प्रगति से कैसे बदल रहा देश में बुनियादी ढांचे के विकास का तरीका?-PM Gati Shakti and PRAGATI: How India Is Changing Infrastructure Planning and Execution
गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में सांसद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले में 13 अक्तूबर को एमपी-एमएलए कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस की कार्यवाही पूरी हो चुकी है।
वैचारिक संकेत: यूरोप में हिंसा से जामिया के आंदोलन तक... बयानों के संदर्भ बेशक अलग, संकेतों को समझना जरूरी
जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने तीन सांसदों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
यूपी के बागपत का 23 वर्ष का विक्रांत तोमर उर्फ विक्की तोमर अब तक दिल्ली, यूपी व हरियाणा में 50 से ज्यादा महिला सिपाहियों को ठग चुका है।
ललित सुरजन की कलम से संसाधनों का राष्ट्रीयकरण!
'नेहरू सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी कि प्राथमिक क्षेत्र या कि बुनियादी उद्योग कैसे स्थापित किए जाएं।
जम्मू: रेलवे स्टेशन के सामने शिव मार्केट में लगी भीषण आग, कई दुकानें चपेट में; बुझाने के प्रयास जारी
जम्मू रेलवे स्टेशन के सामने स्थित शिव मार्केट में भीषण आग लग गई है।
विश्व सम्मेलन में प्रधानमंत्री द्वारा विपक्ष के नेता का उपहास करना हास्यास्पद
राहुल गांधी, मोदी के शासन, सत्ता के केंद्रीकरण, आर्थिक असमानता और भाजपा के राजनीतिक दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हैं।
विचार: सत्ता से अधिक व्यवस्था परिवर्तन जरूरी
जनतांत्रिक अभियानों से बदलाव के बारे में नानाजी देशमुख की सफलता से सभी राजनीतिक दलों के नेता प्रेरणा लें।
विचार: लाइलाज हुई दलबदल की बीमारी
भारतीय राजनीति में दलबदल एक गंभीर समस्या बन गया है, जहां 2022 से अब तक 111 सांसद-विधायक पार्टियां बदल चुके हैं, जो लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।
जागरण संपादकीय: कांग्रेस की बिगड़ी भाषा
राहुल गांधी संवैधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी जमकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने में लगे हुए हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि कांग्रेस के छोटे-बड़े नेता, कार्यकर्ता और समर्थक भी प्रधानमंत्री के संदर्भ में बात करते हुए भाषा का कोई लिहाज नहीं रखते।
संगठन मजबूत, पर जनता से छीजता रिश्ता
साल 2014 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन राज्यों में भी अपना संगठन मजबूत किया, जहां पार्टी कमजोर थी। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की टीम बनाई गई और मुख्यमंत्रियों से लेकर गांव-मोहल्ले के कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाने का तंत्र खड़ा किया गया…
मध्यावधि चुनाव नतीजों से क्या ट्रंप की नीति बदलेगी
अमेरिका के लोग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के ठीक बीचोबीच अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन, यानी ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ की सभी 435 सीटों और 100 सदस्यों वाले उच्च सदन ‘सीनेट’ की लगभग एक तिहाई, यानी 35 सीटों…
वैश्विक मंदी की गहराती आशंकाएं
दुनिया की अर्थव्यवस्था इस वक्त एक अजीब दुविधा में फंसी हुई दिखती है। शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव है। ईरान, अमेरिका इजरायल युद्ध ने तेल और ऊर्जा की कीमतों पर अनिश्चितता बढ़ा दी है। दुनिया भर की सरकारें कर्ज के बोझ से दबी हैं और अमेरिका से लेकर…
भारतीय भौतिक विज्ञानी अशोक सेन को दिया गया वर्ष 2026 का ऑस्कर क्लेन पदक भारतीय विज्ञान के लिए ऐतिहासिक अवसर है। विज्ञान की दुनिया में इस सम्मान को नोबेल तुल्य माना जाता है। साल 1988 में इसकी शुरुआत प्रसिद्ध…
सर्दी : इन चीजों से सेहत का रखें खास ख्याल
नई दिल्ली, ठंड के दिनों में गर्मागर्म खाना, चाय और मौसमी चीजें खाने का अपना ही मजा है। हालांकि इस मौसम में सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। सही खानपान न केवल शरीर को पोषण देने में मदद करता है बल्कि ठंड के दिनों में आपको आरामदायक महसूस कराने में भी सहायक हो सकता है। ऐसे में ताजा बना गर्म खाना, स्थानीय अनाज और मौसमी फल-सब्जियों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना अच्छा विकल्प है।
करवा चौथ पर विवाहित स्त्रियां चंद्रमा की ही पूजा क्यों करती हैं?
नई दिल्ली, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर हर वर्ष करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं इस पर्व का बड़े उत्साह से इंतजार करती हैं। इस दिन चंद्रमा की विशेष पूजा की जाती है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की ही पूजा की जाती है, इसकी भी पौराणिक मान्यताएं हैं।
पंचांग : सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे तक अभिजीत मुहूर्त
नई दिल्ली, हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
बाबा महाकाल : भस्म आरती में बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु
उज्जैन, महाकाल की नगरी उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर रविवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
दलेर मेहंदी पिछले कुछ दिनों से चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, एक इवेंट में गायक और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए विवाद हो गया था।इस पर अब गायक के बेटे गुरदीप मेहंदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
रोम में आज भी खड़े हैं हजारों साल पुराने जल सेतु: पहाड़ों से शहर तक पहुंचाते थे पानी, जानें इनकी खासियत
छोटे-छोटे पलों में छिपा है असली सुकून: ठहरकर देखें कि क्या अच्छा हुआ, हम किसके चेहरे पर मुस्कान ला सके?
चुनाव के 75 साल और भरोसे का सवाल: अमृत वर्ष में प्रणाली पर सवाल दुर्भाग्यपूर्ण, सीईसी ज्ञानेश कुमार पर भी आरोप
जानना जरूरी है: पतिव्रता से पराजित हुए इंद्र और कामदेव, सुकला के अटूट सतीत्व की रक्षा कैसे हुई?
जानना जरूरी है: पतिव्रता से पराजित हुए इंद्र और कामदेव,सुकला के अटूट सतीत्व की रक्षा कैसे हुई?
प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रैप-1 लागू है, लेकिन सड़कों पर धूल, महीनों से पड़ा निर्माण मलबा और खुले में पड़ी निर्माण सामग्री बता रही है कि नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
कलाकार हैं स्वप्नद्रष्टा और शांतिपूर्ण भविष्य के शिल्पी
अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस (25 अक्टूबर) पर विशेष कला एवं कलाकार मानव सभ्यता की आत्मा है। यह वह अनंत भाषा है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने अंतरतम की संवेदनाओं, अनुभूतियों, विचारों और स्वप्नों को रूप, रंग, ध्वनि, शब्द, लय और भावों में अभिव्यक्त करता है। जब आदिम मानव-कलाकारों ने गुफाओं की दीवारों पर अपनी अनुभूतियों को ... Read more
आज महारास की रात है रात भर कौन जागेगा
आज शरद पूर्णिमा है। पूनो की चांदनी आज धरती पर यूं बरसेगी, मानो किसी की आंखों का नेह झर रहा हो- झिर...झिर...। दूब की नोक पर टंकी ओस की बूंद की तरह झलमल, पारदर्शी। शरद पूर्णिमा की रात कौन जाग रहा है? जो जागेगा, उसे ही ज्ञान हो पाएगा…
विचार: अमेरिका के समक्ष अडिग रहे भारत
यदि अमेरिका चाहता है कि भारत उसके ऊर्जा हितों की रक्षा में सहायक बने तो उसे भी भारतीय हितों की रक्षा के प्रति संवेदनशील होना होगा।
जागरण संपादकीय: बेलगाम फार्मा कंपनियां
ऐसे में जो समिति गठित होने जा रही है, उसकी सिफारिशों को वैधानिक रूप दिया जाए, ताकि फार्मा कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगे।
बहुत सी घटनाएं अथवा निर्णय देश, काल और परिस्थितियां पैदा करती हैं। यही वजह है कि हर समीक्षक इस उधेड़बुन में रहता है कि बरसों बाद उनकी समीक्षा कैसे की जाए? हम सब अपने-अपने चश्मे से उन फैसलों की रंग-ओ-बू आंकते हैं। इंदिरा गांधी को कोई कैसे भी परखे…
सैटिंग, बैटिंग और रेटिंग (व्यंग्य)
हज़ारों साल से पूरी दुनिया जानती है कि हम अपना सभी आकार और प्रकार का कामकाज अपनी पसंद की शैली में करते हैं। माहौल खुश रहे इसलिए हम अपनी सैटिंग, बैटिंग और रेटिंग भी खुद किया करते हैं। दूसरा रेटिंग करने वाला चाहे कितना शानदार, जानदार और ईनामदार हो हम रेटिंग स्वीकार नहीं करते। रेटिंग एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय हो, उसका नाम कितना भी आकर्षक हो। हम मानते हैं इन संस्थाओं द्वारा रेटिंग अपनी सुविधा के लिए की जाती है और हमारे लिए दुविधा खड़ी हो जाती है। हमें पता है खुद को यशस्वी, अनुभवी, तेज तर्रार मानने वालों से सही अनुमान नहीं लगता और हर दो तीन महीने में अनुमान बदलते रहते हैं। उसे घटाते ज्यादा हैं और बढाते कम हैं। अपना वक़्त बर्बाद करते रहते हैं हमारा मूड बिगाड़ते हैं। अंदाजा कुछ लगाते हैं परिणाम कुछ और निकालते हैं। विश्वगुरुओं यानि हमारी रेटिंग करने के सन्दर्भ में इस तरह से काम करना अच्छी बात नहीं है। उन्हें अभी तक समझ नहीं आया कि सैटिंग, बैटिंग और रेटिंग हमारी अपनी होती है। इसे भी पढ़ें: बैंगन का भर्ता (व्यंग्य) उनकी दी हुई रेटिंग भुलाकर हम यह ध्यान रखते हैं कि हमारी सारी वोटें सलामत रहें, जातीय समीकरण बिगड़ें नहीं। उदाहरणतया पारदर्शिता के अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने गुरुओं को ईमानदारी के पैमाने पर मनमाने अंक दिए हैं। हम क्यूं खाएं उनका बेस्वाद आकलन। उन्हें पता होना चाहिए कि हमें पसंद नहीं आएगा, स्वीकारेंगे नहीं तो ऐसा आकलन किया ही क्यूं। ज्ञानी हैं हम, इस बारे हम दो क्या तीन राय भी नहीं रखते। इस बारे दिलचस्प परिचर्चा हो सकती है कि नैतिक मूल्य सिखाए जा सकते हैं या नहीं। हमारे यहां नैतिकता एक पवित्र संस्था के रूप में स्थापित है इसलिए नैतिकता क्या किसी भी किस्म के मूल्य सिखाए जा सकते हैं। पेट से तो कोई भी सीख कर नहीं आता। हमारी सैटिंग, बैटिंग और रेटिंग इतनी अनुभवी होती है कि हमने कूड़ा कचरा प्रबंधन बेहतर तरीके से सीखने के लिए, दर्जनों लोगों की टीम को हज़ारों किलोमीटर दूर भेजा अब यह तो बदतमीज़ कूड़ा कचरा शातिर है कि काबू में नहीं आता। वर्तमान युग के परिवेश में भ्रष्टाचार, बेईमानी, दुष्टता व धूर्तता के कारण थोड़ी बहुत परेशानी तो है लेकिन हमारी सैटिंग कहीं कोई फर्क पड़ने नहीं देती, हम मानकर चलते हैं कि बैटिंग ठीक चल रही है इसलिए कोई दूसरा हमारे कामकाज की रेटिंग क्यूं करे। वैसे वास्तव में हम हमेशा चाहते हैं कि हमारी रेटिंग कोई ज़रूर करे लेकिन आंख मींच कर सौ में से दो सौ नंबर दे। यहां यह सवाल प्रवेश करता है क्या त्रेतायुग में रावण नहीं था। क्या वे अपने बारे में किसी भी तरह की रेटिंग की परवाह करते थे। हर युग का कठोर सत्य यही है इसलिए अपनी सैटिंग बैटिंग रेटिंग का प्रबंधन खुद करते रहना चाहिए करिए यही सुखी रहने का सूत्र है। - संतोष उत्सुक
यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा महिला उद्यमी क्रेडिट योजना की जो मौखिक घोषणा की गई, उससे राज्य की औरतों में आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा निर्णायक कदम साबित होगा। दरअसल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना केवल सामाजिक सशक्तिकरण का विषय नहीं, बल्कि परिवार की समृद्धि, रोजगार सृजन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रभावी माध्यम है। यदि उत्तर प्रदेश में एक करोड़ महिलाओं को महिला उद्यमी क्रेडिट योजना 2026 के तहत एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने की पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह प्रदेश में महिला उद्यमिता को नई गति देने वाला कदम साबित हो सकती है। इस तरह की योजना का सबसे बड़ा लाभ उन महिलाओं को मिल सकता है, जो सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प, छोटी दुकान, घरेलू उत्पाद निर्माण अथवा डिजिटल सेवाओं के माध्यम से अपना रोजगार शुरू करना चाहती हैं, लेकिन पूंजी की कमी के कारण अपने सपनों को साकार नहीं कर पातीं। इसे भी पढ़ें: यदि गलती से यूपीआई भुगतान किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी या बैंक खाते में हो गया तो ऐसे वापस पाएं अपने भुगतान हालांकि, उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमी क्रेडिट योजना 2026 की अभी कोई आधिकारिक लॉन्च तिथि घोषित नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारी चल रही है और इसकी पहली किस्त दिसंबर 2026 से जारी होने की योजना है। इस योजना से जुड़ीं कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:- पहला, बजट आवंटन: इस योजना को राज्य सरकार के बजट में ₹151.04 करोड़ के शुरुआती आवंटन के साथ घोषित किया गया था। दूसरा, लोन की राशि: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को ₹1 लाख तक का ब्याज-मुक्त ऋण देने का प्रस्ताव है। तीसरा, किस्त की जानकारी: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका पहला चरण (₹20,000 की पहली किस्त) दिसंबर 2026 में जारी होने की संभावना है। चौथा, आधिकारिक स्थिति: वर्तमान में यह प्रशासनिक स्तर पर लागू होने के चरण में है। सरकार की ओर से अभी विस्तृत दिशा-निर्देश, आवेदन प्रक्रिया और आधिकारिक वेबसाइट जारी नहीं की गई है। पांचवां, स्पष्टीकरण: यह एक ऋण (क्रेडिट) सुविधा है, खाते में मुफ्त पैसे नहीं डाले जाएंगे; इसे नियमों के अनुसार वापस चुकाना होगा। # ब्याज मुक्त ऋण से खुलेगा स्वरोजगार का रास्ता छोटा कारोबार शुरू करने में अक्सर सबसे बड़ी बाधा शुरुआती पूंजी होती है। इसके लिए बैंक से ऋण लेने पर ब्याज, दस्तावेजों और भुगतान की शर्तों का दबाव भी महसूस किया जाता है। ऐसे में ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा पात्र महिलाओं के लिए राहतकारी हो सकती है। यदि किसी महिला को एक लाख रुपये तक का ऋण मिलता है, तो वह अपनी जरूरत और स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार छोटा व्यवसाय शुरू कर सकती है। मसलन, कोई महिला सिलाई केंद्र खोल सकती है, कोई मसाले या अचार बनाकर बेच सकती है, तो कोई ऑनलाइन बिक्री, ब्यूटी सेवाओं अथवा अन्य घरेलू उद्योगों के माध्यम से आमदनी बढ़ा सकती है। हालांकि, ब्याज मुक्त ऋण का अर्थ यह नहीं है कि मूलधन भी माफ हो जाएगा। ऋण की वापसी, पात्रता, अवधि और अन्य शर्तें योजना के आधिकारिक नियमों के अनुसार ही लागू होंगी। # एक करोड़ महिलाओं तक लाभ पहुंचने का क्या होगा असर? यदि योजना के अंतर्गत एक करोड़ महिलाओं तक वास्तविक रूप से ऋण और आवश्यक सहायता पहुंचती है, तो इसका प्रभाव व्यक्तिगत आमदनी से आगे बढ़कर पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है:- पहला, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। महिलाओं की अपनी आमदनी बढ़ने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार की अन्य जरूरतों पर खर्च करने की क्षमता बेहतर हो सकती है। दूसरा, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। छोटे कारोबार सफल होने पर महिलाओं को अन्य लोगों को भी काम देने का अवसर मिल सकता है। इससे गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। तीसरा, महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा। अपनी कमाई और व्यवसाय से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालने वाली महिलाएं परिवार और समाज के आर्थिक निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। चौथा, स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा। स्वयं सहायता समूहों, महिला कारीगरों और घरेलू उद्योगों के उत्पादों को स्थानीय दुकानों, प्रदर्शनियों तथा ऑनलाइन मंचों से जोड़कर उनकी बिक्री बढ़ाई जा सकती है। पांचवां, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिल सकता है। छोटे उद्यमों से होने वाली आय का एक हिस्सा स्थानीय बाजार में खर्च होता है, जिससे दूसरे कारोबारियों को भी लाभ मिल सकता है। # तीन चरणों में मिलेगा ऋण, समय पर भुगतान जरूरी योजना की रूपरेखा से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिलाओं को एक लाख रुपये का ऋण एक साथ देने के बजाय तीन चरणों में उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत पहला चरण में ₹20,000 का ऋण मिलेगा। दूसरा चरण: पहली राशि समय पर चुकाने पर ₹30,000 का अतिरिक्त ऋण मिलेगा। तीसरा चरण: दूसरी राशि का समय पर भुगतान करने पर ₹50,000 का अतिरिक्त ऋण भी मिलेगा। इस प्रकार पात्र महिला को तीनों चरणों में कुल एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण मिल सकता है। यह चरणबद्ध व्यवस्था महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। हालांकि, इन शर्तों की अंतिम पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देशों से करना आवश्यक है। # आखिर किन-किन महिलाओं को मिल सकता है यह लाभ? इस योजना का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को छोटे कारोबार की शुरुआत करने अथवा पहले से चल रहे कारोबार का विस्तार करने के लिए वित्तीय सहायता देना है। हालांकि, योजना की अंतिम पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, ऋण चुकाने की अवधि और आवेदन शुरू होने की तारीख की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना से ही होगी। # सरकार के सामने भी होंगी कुछ चुनौतियां योजना की सफलता केवल ऋण बांटने के आंकड़ों से नहीं मापी जानी चाहिए। असली सवाल यह होगा कि कितनी महिलाएं इस पूंजी से टिकाऊ व्यवसाय खड़ा कर पाती हैं और उनकी आय में कितना वास्तविक सुधार होता है। इसके लिए सरकार को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे: एक, आसान बैंकिंग व्यवस्था: पात्र महिलाओं को अनावश्यक बैंक चक्कर और कागजी औपचारिकताओं से राहत मिले। दो, व्यावसायिक प्रशिक्षण: ऋण लेने से पहले महिलाओं को लागत, मूल्य निर्धारण, बिक्री और लेखा-जोखा रखने का प्रशिक्षण दिया जाए। तीन, बाजार से जुड़ाव: महिला उद्यमियों के उत्पादों को सरकारी मेलों, स्थानीय बाजारों, ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान प्रणालियों से जोड़ा जाए। चार, नियमित मार्गदर्शन: कारोबार शुरू करने के बाद भी उन्हें विशेषज्ञों और बैंक प्रतिनिधियों से सलाह मिलती रहे। पांच, पारदर्शी निगरानी: लाभार्थियों का चयन निष्पक्ष हो और बिचौलियों, फर्जी आवेदन तथा धोखाधड़ी की गुंजाइश कम की जाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं को ऐसा व्यवसाय चुनने में मदद मिले, जिसकी स्थानीय बाजार में वास्तविक मांग हो। केवल ऋण उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं; व्यवसाय को सफल बनाने के लिए प्रशिक्षण, बाजार और निरंतर सहयोग भी जरूरी हैं। # चुनावी घोषणा से आगे, आर्थिक बदलाव की कसौटी महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में ऋण उपलब्ध कराने की योजना का राजनीतिक महत्व भी हो सकता है, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में। लेकिन इसका दीर्घकालीन मूल्यांकन राजनीतिक घोषणाओं के बजाय आर्थिक परिणामों से होना चाहिए। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह महिलाओं को केवल सरकारी सहायता प्राप्त करने वाली लाभार्थी के बजाय रोजगार सृजित करने वाली उद्यमी के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकती है। दूसरी ओर, यदि प्रशिक्षण, बाजार और ऋण भुगतान की व्यावहारिक कठिनाइयों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अपेक्षित लाभ सीमित रह सकता है। इसलिए सरकार को योजना की प्रगति के साथ-साथ यह भी बताना चाहिए कि कितने व्यवसाय शुरू हुए, कितने लंबे समय तक चलते रहे, महिलाओं की आय में कितना इजाफा हुआ और कितने उद्यमों ने अन्य लोगों को रोजगार दिया। वस्तुत: महिला सशक्तीकरण की असली पहचान आर्थिक स्वतंत्रता है। इसलिए उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन सकती है। एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण छोटे व्यवसायों के लिए शुरुआती पूंजी की समस्या कम करने में सहायक हो सकता है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब महिलाओं को ऋण के साथ प्रशिक्षण, बाजार, तकनीक और कारोबार चलाने के लिए जरूरी सहयोग भी मिले। महिला सशक्तीकरण का लक्ष्य केवल महिलाओं के हाथ में पूंजी पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें उस पूंजी से स्थायी आमदनी अर्जित करने में सक्षम बनाना है। यदि सरकार इस लक्ष्य को केंद्र में रखकर योजना लागू करती है, तो इसका लाभ महिलाओं, उनके परिवारों, स्थानीय बाजारों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार
आज का राशिफल 24 अक्तूबर: इन 4 राशि वालों को मिलेगी अच्छी खबर, नौकरी-बिजनेस में होगा बड़ा मुनाफा
Aaj Ka Rashifal 24 ctober 2026: आज का दिन मेष, कर्क, सिंह, कन्या और कुंभ समेत सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा? जानें करियर, कारोबार, धन, प्रेम और पारिवारिक जीवन के लिहाज से आज का दिन आपके लिए क्या संकेत दे रहा है।
फिर हवा खराब:दिल्ली के 42 निगरानी केंद्रों में से 32 परएक्यूआई 200 के पार, देश के 20 शहरों में समस्या गंभीर
जीवन धारा: मशीनें उड़ान का रास्ता तराश सकती हैं; सबको उड़ने का हक भी मिले, ये सिर्फ हमारे हाथों में
जीवन धारा:मशीनें उड़ान का रास्ता तराश सकती हैं; सबको उड़ने का हक भी मिले,ये सिर्फ हमारे हाथों में
डीआरडीओ (DRDE ग्वालियर) ने बायोलॉजिकल, केमिकल साइंसेज और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप निकाली है। बिना लिखित परीक्षा चयन होगा और ₹30,000 मिलेंगे। 28 वर्ष तक के छात्र 14 नवंबर 2026 तक ऑफलाइन/ईमेल से आवेदन कर सकते हैं।
मुद्दा:ताकि बनी रहे डिजिटल बढ़त, अर्थव्यवस्था में मौजूदा योगदान 12 से 13%, आगामी दशक में 20% होने का अनुमान
'जेन जी' विरोध को रचनात्मक आधार भी दें
दिल्ली की हालिया घटनाओं को सरकार और विपक्ष के बीच के तात्कालिक टकराव से कहीं आगे बढ़कर देखने की ज़रूरत है।
सरकारी स्कूलों में दाखिले के बाद की चुनौती?
पांच साल के बच्चे के हाथ में जब पहली किताब आती है, तो उसके साथ परिवार की उम्मीदें भी स्कूल पहुंचती हैं।
पानी की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
मैंने कुछ समय पहले राजस्थान के गांवों का दौरा किया था, इसका उद्देश्य वहां के तालाबों की परंपरा को देखने समझने का था।
विचार: डिजिटल बैंकिंग में भरोसे का संकट
भारतीय स्टेट बैंक के लगभग चार हजार ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर लीक होने से देश की डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था में भरोसे का संकट खड़ा हो गया है
विचार: अमेरिका में बढ़ता हिंदूफोबिया
अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई है
भाजपा ने विपक्षी दलों के 'वोट चोरी' के दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ा है, जिसमें चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप है
अधिकार देने से पहले सुरक्षा की सोचिए
सर्वोच्च न्यायालय के प्रति पूर्ण सम्मान रखते हुए भी, मीडिया रिपोर्टों में बताई गई इस टिप्पणी पर कि बच्चों पर इंटरनेट का पूर्ण प्रतिबंध अनुचित है, गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाता है। क्या अधिकार की चर्चा करते समय हम उस बच्चे की…
बच्चों को भी बराबरी से मिले इंटरनेट सुविधा
करीब 25 साल पहले की बात है। दिल्ली के कालकाजी इलाके में एक बस्ती के पास, एक दीवार पर इंटरनेट से कनेक्ट किया हुआ कंप्यूटर लगाया गया था। वहां न कोई शिक्षक था, न मदद या मार्गदर्शन करने वाला और न ही किसी तरह के…
शांति, सुरक्षा, समानता और सहयोग का मंच
द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका ने विश्व समुदाय को यह एहसास कराया कि दुनिया की रक्षा के लिए विश्व में एक प्रभावी, मजबूत एवं निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय संगठन का होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से 24 अक्तूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र की…
भारत-चीन सीमा पर लगातार तनाव चिंता की बात है। जहां, दोनों देशों के बीच व्यापार दिनोंदिन बढ़ रहा है, वहीं सरहद पर रहने वाले भारतीयों की चिंता भी बढ़ती लग रही है…
Diwali: From the Darkness of Ignorance to the Light of Self-Knowledge
India is a sacred land of festivals and celebrations. Every festival, celebrated here, introduces us to our rich culture, spiritual traditions, and values of life. Among all these festivals, Diwali holds special significance. Diwali is not merely a festival of lighting lamps, distributing sweets, and celebrating happiness, but a festival that inspires us to move ... Read more
एक्यूआई और प्रदूषण स्तर बिगड़ने पर कौन सा मास्क रखेगा सुरक्षित
नई दिल्ली, बदलते मौसम और बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच आजकल एक शब्द सबसे अधिक चर्चा में है, एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स)।
शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर क्यों रखा जाता है खुले आसमान के नीचे
नई दिल्ली, आश्विन महीने की पूर्णिमा तिथि को हर वर्ष शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है।
साइबर हमलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब बढ़ता ही जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, चीन से जुड़े एक हैकिंग ग्रुप ने एआई की मदद से सुरक्षा जांच के लिए बने टूल का इस्तेमाल कर आईटी सर्विस कंपनी कनेक्टवाइज (ConnectWise) को निशाना बनाया।
Aaj Ka Rashifal 23 October 2026: 23 अक्तूबर, शुक्रवार का दिन मेष, कर्क, सिंह, कन्या और कुंभ समेत सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा? जानें करियर, कारोबार, धन, प्रेम और पारिवारिक जीवन के लिहाज से आज का दिन आपके लिए क्या संकेत दे रहा है।
ललित सुरजन की कलम से - एक हाथ से ताली नहीं बजती
'हमें भारतीय जनता पार्टी का दु:ख समझ में आता है। जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी तब भाजपा को लगा कि उसने दिल्ली फतह कर ली है और उसे कोई चुनौती देने वाला नहीं है। दुर्भाग्य से 2004 में भाजपा का सपना टूट गया
भारतीय कंपनियों पर पाबंदी से अमेरिका को भी नुकसान
चुनाव नजदीक आते ही राजनेता लुभावनी घोषणाएं करते हैं। रियायतों का ढेर लगाते हैं। समर्थकों का भरोसा बनाए रखने के वास्ते उनकी पसंद के फैसले लेते हैं
खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से
दस अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी की रैली थी और केंद्र सरकार ने उसे रोकने के लिए उसके खिलाफ पचास हजार पुलिस तैनात करने, पचास से ज्यादा मेट्रो स्टेशन बंद करने, अनेक गाड़ियों को बंद करने और नेट पर भी सीमित रोक का प्रयास किया तो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी थी कि आप मक्खी मारने के लिए हथौड़ा चला रहे है
मुद्दा: दो फीसदी प्रतिभा का मायाजाल, वैज्ञानिकों की रैंकिंग पर सवाल; शोध की गुणवत्ता या सिर्फ साइटेशन का खेल?--Myth of the Top 2% Scientists List: Does Citation Count Define Scientific Excellence
फर्जी तस्वीरों के जरिये असली उत्पीड़न: महिलाओं को अपना सिर झुकाने की जरूरत नहीं, जवाबदेही तय हो
फर्जी तस्वीरों के जरिये असली उत्पीड़न: महिलाओं को अपना सिर झुकाने की जरूरत नहीं, जवाबदेही तय हो ai-deepfake-images-women-grok-xai-online-harassment-privacy-rights
क्या आकार ले रही है नई इस्लामी सामरिक धुरी?: समझौते के सहारे बदलते सामरिक समीकरण, भारत को रखनी होगी नजर pakistan-turkey-qatar-indonesia-badr-agreement-islamic-strategic-axis-india
दिल्ली में प्रदूषण से राहत की उम्मीद के बीच हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है।
जल संरक्षण और जल स्रोतों को फिर से जीवंत करने के लिए देशभर के 31 जल संरक्षकों को जल प्रहरी सम्मान-2026 से सम्मानित किया जाएगा।
विचार: बदल रही युवाओं के करियर की दिशा
पहले इंजीनियरिंग छात्रों की पहली पसंद कंप्यूटर साइंस थी, लेकिन अब बुनियादी ढांचे के विस्तार और सेमीकंडक्टर उद्योगों में निवेश के कारण पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखाओं में रुचि बढ़ रही है
विचार: क्यों लंबे खिंच रहे हैं युद्ध
एक अच्छा सैन्य प्रमुख वही है, जो युद्ध आरंभ होने से पहले ही उसकी समाप्ति की रूपरेखा भी तैयार कर ले। वर्ष 1971 में भारत का सफल सैन्य अभियान एक सुविचारित योजना और उसके सटीक रणनीतिक क्रियान्वयन की ही मिसाल था।
संपादकीय: संयुक्त राष्ट्र का रवैया
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में आतंकी सरगना दाऊद इब्राहिम के गिरोह को भारत आधारित बताए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है
यूपीआई के लिए कोई शुल्क चुकाने से परहेज क्यों
व्यापारियों को किए जाने वाले बड़े यूपीआई भुगतान (उन व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक का, जो यूपीआई के जरिये महीने में एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम प्राप्त करते हैं) पर हाल में घोषित ‘व्यापारी छूट दर (एमडीआर)’ को…
युद्ध से थक चुके देशों में शांति की पहल
युद्ध का अंत या तो जीत के साथ होता है या फिर लड़ते-लड़ते थक जाने पर। जीत की तुलना में थकान को समझना कहीं अधिक आसान होता है, क्योंकि इसमें संसाधनों को मापा जाता है; इच्छाशक्ति जैसे संसाधन की सीमा को भी…
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर दुनिया और भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। गुरुवार को भी भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का क्रम जारी रहा। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? ध्यान रहे, युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें…
जानलेवा होती हवा: सर्दियों से पहले ही प्रदूषण की चुनौती
सर्दियों ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है कि देश के अनेक शहरों की हवा में प्रदूषण का जहर घुलने लगा है। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का तेजी से बिगड़ना इस बात का संकेत है कि प्रदूषण का संकट अब केवल सर्दियों की मौसमी समस्या नहीं, बल्कि ... Read more
गुलशन इकेबाना का दुर्गा उत्सव सिंदूर खेला और विसर्जन के साथ समापन
नोएडा के सेक्टर-143 स्थित गुलशन इकेबाना में आयोजित दुर्गा उत्सव का समापन बुधवार को सिंदूर खेला और मां दुर्गा की भव्य विसर्जन यात्रा के साथ हुआ…
कोलकाता नगर निगम: ऐतिहासिक मेयर की कुर्सी पर अब भाजपा की नजर!
देशबंधु चित्तरंजन दास और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी ऐतिहासिक शख्सियतें जिस मेयर की कुर्सी पर बैठीं, उस पर इस बार कौन बैठेगा? कोलकाता नगर निगम का चुनाव अगले महीने होने की संभावना है।
बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों फिल्म 'जेलर 2' का जलवा है।इस फिल्म के अलावा 'रणबाली', 'प्रहार', 'नई नवेली' और 'दृश्यम 3' भी बॉक्स ऑफिस पर बनी हुई हैं।जानिए इन सभी फिल्मों ने बुधवार को बॉक्स ऑफिस पर कितना कलेक्शन किया है?
दूसरा पहलू: भोर में अनायास ही नहीं गाते हैं परिंदे, वैज्ञानिकों के शोध में क्या नई जानकारी मिली?
दूसरा पहलू:भोर में अनायास ही नहीं गाते हैं परिंदे,वैज्ञानिकों के शोध में क्या नई जानकारी मिली?
समझदारी से जीना भी एक कला है: खुद को समझें, असहमति के बावजूद दूसरों का सम्मान करें
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खरीदारी बदल रही है: भारतीय ऑनलाइन खुदरा बाजार 90 अरब डॉलर के पार! समग्र अर्थव्यवस्था के लिए कौन से सुखद संकेत?
PM Kisan 24th Installment: पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार योजना से जुड़े किसानों को हैअगर आपको योजना के तहत मिलने वाली किस्त का लाभ लेना है तो इसके लिए आपको कुछ काम करवाने जरूरी होते हैं
ललित सुरजन की कलम से - विश्व राजनीति के दो संकेत
'आज पश्चिम एशिया, उत्तर अफ्रीका याने अरब जगत और बहुत से अनेक देशों में जो राजनीतिक अस्थिरता व गृहयुद्ध की स्थितियां विद्यमान हैं उन्हें समझने के लिए इतिहास में जाना होगा। इनमें से अधिकतर देश उपनिवेशवाद का शिकार थे।
इतिहास की पाठ्यपुस्तकें : ज्ञान का विस्तार या वैचारिक संकुचन?
इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि वर्तमान को समझने और भविष्य के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टि विकसित करने का माध्यम भी है
वैश्विक राजनीति पर दबदबा उसी का होता है, जो अर्थव्यवस्था को अपनी मर्जी से नचाना जानता है
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब के युवाओं के साथ धोखा किया है और कांग्रेस देश के युवाओं को गुमराह कर रही है।
सिरसा जिले की 26 वर्षीय विवाहित महिला और 18 वर्षीय उसकी ननद ने परिवार से अलग होकर साथ रहने का फैसला किया है।
विचार: आर्थिक हितों पर चोट करते आंदोलन
देश में आए दिन होने वाले विरोध-प्रदर्शन आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार के लिए भी मुश्किलें पैदा करते हैं।
विचार: गंभीर संगठित अपराध बना मानव तस्करी
यौन शोषण पीड़ितों के मामले में पुलिस को संवेदनशलीन बनाने के साथ ही उनके लिए संरक्षण गृहों का परिवेश भी बेहतर बनाया जाए।
साफ हवा के लिए सख्ती का समय आया
हर साल अक्तूबर से फरवरी के बीच, उत्तर भारत की भौगोलिक परिस्थिति और मौसमी दशा वायु प्रदूषण को बदतर बना देती हैं। हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है…
जागरण संपादकीय: ट्रंप पर कितना भरोसा करें
अब जब अमेरिका को भारत का साथ लेना जरूरी जान पड़ रहा है, तब फिर उससे ऐसा समझौता होना चाहिए, जो भारतीय हितों के भी अनुकूल हो।
इन दिनों एक वीडियो बहुत चर्चा में है कि दलेर मेहंदी गाना नहीं गा पा रहे, क्योंकि वह नशे में धुत हैं और इसीलिए उत्तराखंड के एक मंत्री उन्हें डपट रहे हैं। कई लोग इस वीडियो को मजे-मजे से साझा कर रहे हैं, लेकिन इस भेड़चाल में…

