कोरियन ड्रामा से भारतीय सीरियल तक : मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार
विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब सीरीज के माध्यम से पूरी दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है तो वह दक्षिण कोरिया है। कोरियन ड्रामा आज केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रभाव, सामाजिक शिक्षा, भावनात्मक परिपक्वता और जीवन मूल्यों के प्रस्तुतीकरण का सशक्त माध्यम बन ... Read more
शरीर के चक्रों और न्यूरॉन्स को एक्टिव करता है 'ओम', जानें इसके पीछे का विज्ञान
सनातन धर्म में ‘ओम’ का बेहद महत्व है। किसी भी मंत्र का जाप हो या ध्यान लगाना, इसका उच्चारण सिर्फ आध्यात्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है
ललित सुरजन की कलम से आरक्षण आयोग की आवश्यकता
'दरअसल विगत तीन-चार दशकों से जो आरक्षण नीति चली आ रही है, उसमेें समय की वास्तविकताओं के साथ जो संशोधन होने चाहिए थे, उन्हें लागू करने से हमारे सत्ताधीश कतराते रहे हैं। इसमें बहुत सारे मुद्दे हैं। सबसे पहले तो इस वास्तविकता का संज्ञान लेना आवश्यक है कि देश में विकास योजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर लगातार विस्थापन हो रहा है। एक समय था जब बड़े बांधों और कारखानों के लिए विस्थापन हुआ, जिससे प्रभावित होने वाली जनसंख्या मुख्यत: आदिवासियों की थी। चूंकि नेहरू युग में जनता के मन में एक विश्वास था इसलिए लोगों ने खुशी-खुशी अपनी जमीनें दे दीं, किंतु जिन नौकरशाहों पर मुआवजा और पुनर्वास की जिम्मेदारी थी, उसे उन्होंने ठीक से नहींनिभाया। आज भी ऐसे विस्थापित आदिवासी मिल जाएंगे जो 55-60 साल से खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि एक चतुर, संपन्न तबके ने इन विकास योजनाओं का लाभ अपने लिए लेने में कोई कसर बाकी नहींरखी। (देशबन्धु में 05 मई 2016 को प्रकाशित) https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/05/blog-post_6.html
भय से विश्वास तक : एक युगांतकारी परिवर्तन
बृजमोहन अग्रवाल जनजातीय समाज को यह समझाया गया कि नक्सल नेतृत्व में स्थानीय छत्तीसगढ़ी आदिवासियों की भागीदारी शून्य है। जल जंगल जमीन के नारों की आड़ में हमारे भोले-भाले आदिवासियों का उपयोग केवल एक साधन के रूप में किया जा रहा था। यह भी सामने आया कि नक्सलियों के द्वारा आदिवासी युवतियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था, उन्हें शोषण का शिकार बनाया जाता था। छह दशकों तक भारत की आंतरिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास यात्रा को चुनौती देता रहा नक्सलवाद आज अपने निर्णायक अवसान की अवस्था में पहुंच चुका है। यह केवल एक सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय संकल्प की विजय है, जिसमें स्पष्ट नीति, अटूट राजनीतिक इच्छाशक्तिऔर केंद्र-राज्य के अभूतपूर्व समन्वय ने मिलकर एक जटिल और दीर्घकालिक समस्या का समाधान किया है। नक्सलवाद का यह अवसान इस सत्य को पुन: स्थापित करता है कि भारत में बंदूक की शक्ति अंतत: लोकतंत्र की सामूहिक शक्ति के आगे टिक नहीं सकती। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया—इसके पीछे दशकों का संघर्ष, अनगिनत बलिदान और एक ऐसी रणनीतिक निरंतरता रही है, जिसने अंतत: इस चुनौती को निर्णायक रूप से परास्त किया। इस ऐतिहासिक क्षण पर मैं उन सभी वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं—केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, कोबरा कमांडो, छत्तीसगढ़ पुलिस और स्थानीय सुरक्षाबलों के उन रणबांकुरों को—जिन्होंने अपने सर्वोच्च बलिदान से इस संघर्ष को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया। यह विजय उनके अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की अमिट गाथा है। नक्सलबाड़ी से रेड कॉरिडोर तक : एक वैचारिक आंदोलन का हिंसक विस्तार भारत में नक्सलवाद का उदय वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुआ, जिसकी वैचारिक जड़ें तत्कालीन सोवियत संघ और चीन की उग्र वामपंथी विचारधारा में थीं। अपनी विकास विरोधी छवि के कारण जब बंगाल में इस विचारधारा के प्रति विरोध पनपने लगा तो अपने विस्तार के लिए नक्सलवाद ने 'सॉफ्ट टारगेट्स' की तलाश शुरू की—ऐसे क्षेत्र जहां शासन की पहुंच सीमित हो, सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां अधिक हों और जनजागरूकता कम हो। देश के वनांचल, आदिवासी और खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र इस दृष्टि से सबसे आसान लक्ष्य थे। नक्सलवाद विस्तार की इसी रणनीति के तहत तथाकथित 'रेड कॉरिडोर' विकसित हुआ, जो तिरुपति से पशुपति तक फैले विशाल भूभाग में फैल गया। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से घिरा छत्तीसगढ़, जिसका लगभग 42 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है, इस रेड कॉरिडोर का रणनीतिक केंद्र बन गया। पड़ोसी राज्यों से अपनी गतिविधियां सीमित रखने का अघोषित समझौता कर नक्सली अबूझमाड़ क्षेत्र में संगठित होते चले गए। अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण दशकों तक प्रशासनिक सर्वेक्षण से दूर रहा अबूझमाड़ नक्सलियों का सुरक्षित शेल्टर बन गया। विचारधारा से विचलन: माओवाद से मनीवाद तक समय के साथ नक्सलवाद ने अपनी मूल वैचारिक पहचान खो दी और एक हिंसक आर्थिक उगाही तंत्र में परिवर्तित हो गया। बस्तर और सरगुजा जैसे वनाच्छादित जनजातीय क्षेत्रों में नक्सलियों ने समानांतर सत्ता संरचना स्थापित कर दी, जहां तथाकथित 'जन अदालतों' के माध्यम से भय आधारित नियंत्रण कायम किया गया। छत्तीसगढ़ के खनिज सम्पन्न क्षेत्रों की खदानें, विद्युत परियोजनाएं, तेंदूपत्ता व्यापार—सभी उनके लिए उगाही के स्रोत बन गए। सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों, ठेकेदारों और यहां तक कि पुलिस बलों से भी जबरन वसूली की जाने लगी। यह उगाही धीरे-धीरे इतनी बढ़ी कि छत्तीसगढ़ में इसका वार्षिक आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचने की चर्चा होने लगी। सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस में यह विचारधारा समाप्त हो गई। चीन ने भी माओवाद की सशस्त्र संरचना को छोड़कर आर्थिक सुधारों पर आधारित पूंजीवादी कम्युनिज्म मॉडल को अपना लिया, लेकिन भारत में नक्सलवाद अपने मूल उद्देश्यों से भटककर लेवी वसूली और हिंसा फैलाने का टूल बन गया। नक्सलवाद के झंडाबरदारों ने विचारधारा को त्यागकर इसे अपने आर्थिक हितों की पूर्ति और आतंक फैलाने का साधन बना लिया। नक्सलवाद के वैचारिक समर्थन की राजनीतिक पृष्ठभूमि: दुर्भाग्य से, कांग्रेस-नीत सरकारों के लंबे शासनकाल में नक्सलवाद के प्रति स्पष्ट और कठोर नीति का अभाव रहा क्योंकि उस दौर में केंद्र और कई राज्यों में भी वामपंथी पार्टियां कांग्रेस के सहयोगी की भूमिका में थीं। सत्ता के लिए वामपंथ के साथ कांग्रेस की राजनीतिक निकटता का परिणाम यह हुआ कि नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार करने की बजाय इसे सामाजिक-आर्थिक संघर्ष के रूप में प्रस्तुत कर वैधता प्रदान करने की नीति हावी हो गई। उस दौर में प्रशासनिक तंत्र के भीतर भी यह वैचारिक भ्रम दिखाई देता था। नक्सलवाद को सामाजिक समता पाने का वर्ग संघर्ष ठहराने के दृष्टिकोण से प्रशिक्षित किए गए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की नीतियां भी नक्सलवाद के विरुद्ध कठोर होने के बजाय सहानुभूतिपूर्ण हो गई थीं। इस ढुलमुल नीति का परिणाम यह हुआ कि नक्सलवाद देश के 12 राज्यों के लगभग 180 जिलों में फैल गया और छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से ही प्रदेश के समग्र विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन गया। राष्ट्रीय चेतना का उदय: मेरे प्रारंभिक अनुभव: छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहते हुए मुझे बस्तर क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला जहां नक्सलवाद रूपी दैत्य से मेरा प्रथम साक्षात्कार हुआ और यह आभास भी हुआ कि दंडकारण्य में इस दैत्य का दमन केवल हथियारों से नहीं किया जा सकता। नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष की भूमि तैयार करने के लिए इस क्षेत्र में वैचारिक जनजागरण की नितांत आवश्यकता थी और इसलिए जनजातीय समाज के बीच राष्ट्रीयता का अलख जगाने के प्रकल्प में मैंने भी अपनी भागीदारी निभाई। 1990 के दशक में स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा जी के नेतृत्व में रायपुर के पुराने कमिश्नर कार्यालय के बीटीआई कम्युनिटी परिसर में आयोजित बैठक में पहली बार यह निर्णय लिया गया कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष को राष्ट्रीयता के व्यापक संदर्भ में लड़ा जाएगा। यही वह निर्णायक मोड़ था जब नक्सलवाद की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के परिप्रेक्ष्य में देखा गया। जब हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा की गोपनीय बैठक: वर्ष 2003 से 2006 के बीच, जब मुझे मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह जी की सरकार में छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री के रूप में कार्य करने का उत्तरदायित्व मिला, तब प्रदेश में पहली बार नक्सलवाद के विरुद्ध एक ठोस, नीतिगत और समन्वित अभियान प्रारंभ किया गया। 'ज्वाइंट एफर्ट, ज्वाइंट कमांड और ज्वाइंट पॉलिसीÓ के सिद्धांत पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय स्थापित करने के प्रयास किए गए। तात्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल जी के साथ इस विषय पर मेरी कई गंभीर और विस्तृत मंत्रणाएं हुई थीं। उस दौर में इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए देश के इतिहास में पहली बार विधानसभा में गोपनीय बैठकों का आयोजन किया गया, ताकि लोग बिना किसी भय के खुलकर अपनी बात रख सकें। तात्कालीन स्पीकर प्रेम प्रकाश पांडेय जी की अध्यक्षता में आयोजित की जाने वाली इन बैठकों से अधिकारियों और पत्रकार साथियों को भी दूर रखना जरूरी हो गया था। इन मंत्रणाओं के परिणामस्वरूप बनी रणनीति के तहत तात्कालीन डीजीपी ओपी राठौड़ के नेतृत्व में कई अभियान चलाए गए और इसी क्रम में सलवा जुडूम जैसे जनअभियान की शुरुआत हुई। सलवा जुडूम: जनभागीदारी का ऐतिहासिक अध्याय हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अशिक्षा, अज्ञानता और दुष्प्रचार के कारण स्थानीय समाज का एक बड़ा हिस्सा नक्सलवाद के प्रति सहानुभूति रखता था। इस स्थिति को बदलने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया। स्कूलों, महाविद्यालयों और छात्रावासों में पर्चे और साहित्य वितरित किए गए। घर-घर जाकर नक्सलवाद की वास्तविकता को उजागर किया गया। इस अभियान में दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू जैसे संस्थानों से जुड़े राष्ट्रवादी विचारकों और छात्रों का भी सहयोग लिया गया। जनजातीय समाज को यह समझाया गया कि नक्सल नेतृत्व में स्थानीय छत्तीसगढ़ी आदिवासियों की भागीदारी शून्य है। जल जंगल जमीन के नारों की आड़ में हमारे भोले-भाले आदिवासियों का उपयोग केवल एक साधन के रूप में किया जा रहा था। यह भी सामने आया कि नक्सलियों के द्वारा आदिवासी युवतियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था, उन्हें शोषण का शिकार बनाया जाता था, उन्हें विवाह तक नहीं करने दिया जाता और सामान्य सामाजिक जीवन जीने तक से वंचित रखा जाता था। इन सभी कड़वी सच्चाइयों के उजागर होने से आई जनजागृति का परिणाम यह हुआ कि नक्सलवाद को मिलने वाला सामाजिक समर्थन कमजोर पड़ने लगा। जब नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा बने सलवा जुडूम के अगुआ 'सलवा जुडूमÓ केवल एक सरकारी पहल नहीं थी, बल्कि आदिवासी समाज के भीतर से उठा एक स्वाभाविक जनआंदोलन था, जिसने पहली बार सही मायने में नक्सलवाद को चुनौती दी। तात्कालीन नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा जी ने न केवल इस अभियान को पुरजोर समर्थन दिया बल्कि इसे जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई। इस संघर्ष से जुड़े रहने के कारण अंतत: उन्हें अपने प्राणों की आहुति तक देनी पड़ी—जो इस आंदोलन की गंभीरता और बलिदान की पराकाष्ठा का साक्षात प्रमाण है। नक्सलवाद ने हमें झीरम जैसे दंश दिए जिसमें प्रदेश के अग्रणी नेता काल-कलवित हो गए। सलवा जुडूम जनआंदोलन को अगर व्यापक संस्थागत समर्थन मिला होता, तो निश्चित ही नक्सलवाद का उन्मूलन उसी दौर में हो जाता, पर वैधानिक संस्थानों में काम करने वाले कई लोगों की सलवा जुडूम के खिलाफ लामबंदी, अर्बन नक्सली बुद्धिजीवियों के वैचारिक विरोध और केंद्र सरकार के नीतिगत असमंजस के कारण यह अवसर पूर्णरूप से साकार नहीं हो सका। समन्वित नेतृत्व से निर्णायक परिवर्तन:वास्तविक परिवर्तन तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध स्पष्ट, कठोर और समन्वित नीति अपनाई गई। नक्सलवाद को महज कानून-व्यवस्था की समस्या न मानकर, राष्ट्र की एकता, विकास और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर चुनौती मानते हुए नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए समयबद्ध रणनीति तैयार की गई। केंद्र और राज्य सरकारों के सशक्त समन्वय के परिणामस्वरूप दिसंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच सुरक्षा बलों ने लगातार सटीक और प्रभावी कार्रवाई करते हुए सैकड़ों कुख्यात नक्सलियों को निष्क्रिय किया, हजारों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां सुनिश्चित कीं। लैंड माइंस का व्यापक निष्क्रियकरण हुआ और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए। केंद्र और राज्य के समन्वित दृष्टिकोण और साझे प्रयासों से छह दशक पुराने नक्सलवाद के नासूर को जड़ से समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की बुनियाद पर विकसित छत्तीसगढ़ गढ़ने का संकल्प: वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए अब हमें नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ में गड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित होना पड़ेगा। जिस प्रकार आर्टिकल 370 के उन्मूलन से जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति और राष्ट्रीय एकीकरण का आधार बना, उसी प्रकार नक्सलवाद का समापन छत्तीसगढ़ के लिए एक नए युग का द्वार खोल रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी शासन की पहुंच सीमित थी, वहां अब सड़कों का जाल बिछ रहा है, मोबाइल नेटवर्क स्थापित हो रहे हैं, बैंकिंग सेवाएं सुलभ हो रही हैं और शिक्षा-स्वास्थ्य की सुविधाएं तेजी से विस्तार पा रही हैं। बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह केवल भौतिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक भी है। जहां कभी गनतंत्र का साया था, वहां आज जनतंत्र विश्वास और विकास के साथ स्थापित हो रहा है। अब चुनौती इस सफलता को स्थायी बनाने की है—ऐसी सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक संरचना खड़ी करने की, जहां किसी भी प्रकार की हिंसक विचारधारा को पनपने का अवसर ही न मिले। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि वे पुन: हिंसा के रास्ते पर न लौटें। बुलेट पर बैलेट की निर्णायक विजय: नक्सलवाद पर यह विजय केवल एक आंतरिक सुरक्षा अभियान की सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक आत्मविश्वास की पुनसर््थापना का प्रतीक है। यह उस निर्णायक परिवर्तन का संकेत है, जहां भय की राजनीति को विश्वास की शक्ति ने प्रतिस्थापित किया है और जहां बंदूक के साये में जी रहे समाज ने विकास और सहभागिता के मार्ग को अपनाया है। जो लोग बंदूक और गोलियों के दम पर भय के माध्यम से छत्तीसगढ़ में छद्म राज्य की कल्पना करते थे उनका अंत हुआ और लोकतंत्र की विजय हुई। बुलेट पर बैलेट की जीत हुई। देश की जनता, छत्तीसगढ़ की जनता और विशेषकर बस्तर की जनता को इस ऐतिहासिक विजय की हृदय से शुभकामनाएं। (लेखक छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री एवं वर्तमान में रायपुर लोकसभा से सांसद हैं)
कमजोर मोदी को सहारा देते कांग्रेस के नेता
कांग्रेस अपने ऐसे विश्वासघातियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेती है। केवल कहती रहती है। इससे इस तरह के लोगों के हौसले बढ़ते रहते हैं।
केंद्र सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है।
किचन से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक कचकच करती दुनिया में 'चुप कबीरा बोल मत' ही शांति का अंतिम हथियार हो सकता है
चेन की आँखें अपने आप खुल गई थीं, मानो उनके अंदर कोई अलार्म बज रहा हो
दंड से सुधार की ओर विश्वास आधारित न्यायिक यात्रा
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवस्था, अनुशासन, सुधार और विश्वास का वातावरण बनाना भी होता है। इसी दृष्टि से भारत सरकार द्वारा लाया गया जन विश्वास विधेयक 2026 पहले लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी पारित होने से इसके कानून के रूप में अमल का रास्ता ... Read more
क्या हम असभ्य और क्रूर होते जा रहे हैं!
जब कोई घटना दो अलग-अलग संप्रदाय या जाति के लोगों के बीच होती है। सवाल ये भी है बल्कि असल सवाल यही है कि हम इतने संकीर्ण, असंवेदनशील और आक्रामक क्यों हो गये हैं।
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम: सुरक्षा बनाम स्वतंत्रता
यह विधेयक सकारात्मक कदम है जो किसी भी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं है और केवल गैर-कार्यशील संस्थाओं की परिसंपत्तियों के प्रबंधन पर लागू होगा।
एआई 171 विमान दुर्घटना : सच के साथ न हो समझौता
एस रघोत्तम बोइंग के कई व्हिसलब्लोअर्स ने कांग्रेस की गवाही और कोर्ट में दायर दस्तावेजों में बोइंग 787 विमानों में कई मैन्युफैक्चरिंग खामियों का खुलासा किया है। ये खामियां खास तौर पर शुरुआती बैचों में थीं, जिनमें से एक विमान वीटी-एएनबी (विमान एआई171) एयर इंडिया को मिला था। इन खामियों में स्ट्रक्चरल गैप, ज़बरदस्ती फिट करने वाली असेंबली के तरीके और टॉयलेट से रिसकर इलेक्ट्रिकल बे में जाने वाला पानी शामिल है। जून 2025 में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया 171(एआई 171) विमान हादसे की स्वतंत्र, कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट में अटकी हुई है क्योंकि भारत के सॉलिसिटर जनरल, तुषार मेहता के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (एएआईबी) की जांच पर एक प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने का कोर्ट इंतज़ार कर रहा है। 11 फरवरी को मेहता ने अगली सुनवाई में रिपोर्ट जमा करने का वादा किया था, जिसके बाद कोर्ट ने 24 मार्च की तारीख दी थी। कोर्ट और देश अभी भी इसका इंतज़ार कर रहे हैं। क्या सरकार जान-बूझकर देरी कर रही है, जब तक कि वह एएआईबी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक न कर दे और इस तरह ऐसी स्थिति न बना दे कि स्वतंत्र जांच की मांग बेमानी हो जाए? दिलचस्प यह है कि सॉलिसिटर जनरल के आश्वासन से एक दिन पहले एविएशन में विशेषज्ञता रखने वाले पत्रकार लियोनार्ड बर्बेरी की एक दिलचस्प रिपोर्ट इटली के अखबार 'कोरिएरे डेला सेरा' में छपी थी। क्रैश के बाद से बर्बेरी ने 'अनाम पश्चिमी सूत्रों' का हवाला देते हुए लगातार कई खबरें चलाई हैं जिनमें एक ही बात पर ज़ोर दिया गया है- यह क्रैश पायलट की जान-बूझकर की गई कार्रवाई का नतीजा था। बर्बेरी की 10 फरवरी की रिपोर्ट का दावा था कि एएआईबी को दबाव और भारत की एयरलाइंस की सुरक्षा के स्तर के फिर से मूल्यांकन की 'पश्चिमी' धमकियों के चलते उसी राय पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा था जिसे उनके सूत्रों के अनुसार 'वांछित मोड़' कहा गया था। बर्बेरी के सूत्रों ने उन्हें बताया कि यह निष्कर्ष भारत में उच्चतम स्तर पर 'राजनीतिक मूल्यांकन' के अधीन होगा। खबरों के मुताबिक एएआईबी अधिकारियों ने अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ इस बात पर भी चर्चा की थी कि अंतिम रिपोर्ट को इस तरह कैसे लिखा जाए कि उससे 'राष्ट्रीय विवाद' न खड़े हों। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' में पहले लीक हुई खबरों के साथ मिलाकर देखें तो साफ़ है कि यह जांच कभी भी सिर्फ यह पता लगाने के बारे में नहीं थी कि एआई 171 के साथ क्या हुआ था। यह अब भारत और अमेरिका के बीच भू-राजनीतिक सत्ता संघर्ष का एक हिस्सा बन गई है। एएआईबी की जुलाई 2025 की शुरुआती रिपोर्ट में इस तनाव की झलक साफ़ दिख रही थी। इसमें एआई 171 क्रैश की पूरी घटना का क्रम बताया गया था- टेक-ऑफ के तीन सेकंड बाद दोनों फ्यूल स्विच एक-दूसरे के एक सेकंड के अंदर ही 'रन' से 'कट-ऑफ़' मोड में चले गए जिससे इंजनों को फ्यूल मिलना बंद हो गया और विमान क्रैश हो गया। इसके बाद रिपोर्ट में बातचीत का एक दिलचस्प हिस्सा भी शामिल किया गया जिसमें एक पायलट दूसरे से पूछता है- 'तुमने फ्यूल क्यों काटा?' और दूसरा जवाब देता है- 'मैंने ऐसा नहीं किया।' रिपोर्ट में फ़्यूल स्विच के बारे में 2018 की अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन एडवाइज़री का भी ज़िक्र किया गया था जिससे संकेत मिलता था कि इन स्विच में पहले से ही एक जानी-पहचानी, अनसुलझी समस्या मौजूद थी। यह जान-बूझकर किया गया हो या नहीं, पर नतीजा यह हुआ कि सबका ध्यान फ्यूल स्विच और पायलटों के कामों पर चला गया। साथ ही इतना शक भी पैदा कर दिया गया कि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना मुमकिन न हो सके। बोइंग के कई व्हिसलब्लोअर्स ने कांग्रेस की गवाही और कोर्ट में दायर दस्तावेजों में बोइंग 787 विमानों में कई मैन्युफैक्चरिंग खामियों का खुलासा किया है। ये खामियां खास तौर पर शुरुआती बैचों में थीं, जिनमें से एक विमान वीटी-एएनबी (विमान एआई171) एयर इंडिया को मिला था। इन खामियों में स्ट्रक्चरल गैप, ज़बरदस्ती फिट करने वाली असेंबली के तरीके और टॉयलेट से रिसकर इलेक्ट्रिकल बे में जाने वाला पानी शामिल है। इसके अलावा बोइंग 787 से जुड़ी घटनाओं का भी एक इतिहास रहा है : बैटरी में आग लगना, कंट्रोल फेल होना, बिजली की खराबी, ईंधन का रिसाव, बिना किसी निर्देश के आरएटी (रैम एयर टर्बाईन) का खुल जाना, सिस्टम का अपने आप एक्टिवेट हो जाना (जिसमें टीसीएमए भी शामिल है) और यहां तक कि ईंधन स्विच से जुड़ी समस्याएं भी। जनवरी में बोइंग के पूर्व मैनेजर और फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी के संस्थापक एड पियर्सन ने यूएस सीनेट कमेटी को वीटी-एएनबी के फॉल्ट लॉग और मेंटेनेंस हिस्ट्री पर एक स्टडी सौंपी। इससे पता चला कि विमान में पहले दिन से ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर में खराबी, सर्किट ब्रेकर ट्रिप, वायरिंग में नुकसान, शॉर्ट सर्किट, पावर में उतार-चढ़ाव और ओवरहीटिंग जैसी दिक्कतें थीं। 2022 में उड़ान के दौरान आग लगने से इसका एक पावर डिस्ट्रीब्यूशन पैनल पूरी तरह जल गया था। पत्रकार रचेल चित्रा की खोजी रिपोर्टिंग से सामने आया कि क्रैश से 72 घंटे पहले विमान में अनेक तकनीकी खराबियों की शिकायतें मिली थीं। इनमें क्रैश वाले दिन अहमदाबाद में सेंसर में खराबी के कारण हुई 'हार्ड लैंडिंग' की घटना भी शामिल थी। एएआईबी की शुरुआती रिपोर्ट में ज़िक्र है कि विमान चार एक्टिव फॉल्ट के साथ उड़ान भर रहा था जिसमें 'कोर नेटवर्क डिग्रेडेशन' (मुख्य नेटवर्क में खराबी) भी शामिल था। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 'सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन' के कैप्टन अमित सिंह ने अपनी जनहित याचिका में खुलासा किया कि उड़ान भरने से ठीक 15 मिनट पहले विमान की दोनों 'बस पावर कंट्रोल यूनिट्स' में खराबी की शिकायत मिली थी। इसके बावजूद विमान को उड़ान की अनुमति दी गई। सभी पक्षों की ओर से बोइंग के लिए, जो अभी भी बोइंग 737 मैक्स संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है, किसी और 'प्रणालीगत विफलता' का पता चलना विनाशकारी हो सकता है। परिणाम जो हो, एयर इंडिया को नुकसान तो होगा ही- चाहे दुर्घटना प्रणालीगत और रखरखाव की कमियों के कारण हुई हो या पायलट की गलती से। भू-राजनीतिक दृष्टि से बोइंग के खिलाफ कोई भी निष्कर्ष भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है जो पहले से ही एक नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं। भारत को डोनाल्ड ट्रम्प से भी निपटना होगा जो खुद को बोइंग का 'सबसे अच्छा सेल्समैन' कहते हैं और जिन्होंने अपने व्यापार समझौतों की बातचीत का इस्तेमाल करके दूसरे देशों को बोइंग खरीदने के लिए मजबूर किया है। लोग खुद ही इस बात पर अपनी राय बनाएंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव का सामना किया या झुक गए। पूरी दुनिया देख रही है कि क्या भारत अपने हितों की रक्षा और अपने नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में सक्षम है? इसलिए एआई171 मामले में सच्चाई का सामने आना भारत के राष्ट्रीय हित में है। भारत का यह दायित्व उन 260 लोगों और उनके परिवारों के प्रति भी है जिनकी हादसे में मृत्यु हो गई। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। सिंडिकेट : द बिलियन प्रेस)
किशोरों को सच में बिगाड़ रहा है सोशल मीडिया, या हम ज्यादा डर रहे हैं
सोशल मीडिया को लेकर कड़े कानूनों के साथ ही जरूरी है कि बच्चों को इसका सुरक्षित इस्तेमाल सिखाया जाए. ऐसा हुआ तो सोशल मीडिया को बैन करने के बजाए, बच्चों के विकास में उसका सही उपयोग किया जा सकेगा
क्या एक दुर्लभ व्हेल प्रजाति को चुकानी होगी तेल-गैस की कीमत?
व्हेलों की एक दुर्लभ प्रजाति है, राइसेज व्हेल. इस संरक्षित प्रजाति के दुनिया में 100 जीव भी नहीं हैं. ये सभी अपने इकलौते घर मेक्सिको की खाड़ी में रहते हैं
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
ललित सुरजन की कलम से - आम चुनाव और एन.जी.ओ.
'सिविल सोसायटी के नाम से एक पांचवां स्तंभ खड़ा हो गया है। इस नए स्तंभ के निर्माण के पीछे दो मुख्य कारण दिखाई देते हैं
क्या पाषाण युग में रहने वाले लोग दूरी तक मार करने वाली मिसाइल, अत्याधुनिक संचार प्रणाली, चिकित्सा विज्ञान में आधुनिक आविष्कार कर सकते हैं या इन सबसे बढ़कर परमाणु हथियार बना सकते हैं
दिल्ली में वन्यजीव संरक्षण को मजबूती, 9 वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर होंगे तैनात
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने फॉरेस्ट्स एंट वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट में वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर (डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) के नौ पद सृजन को मंजूरी दी है। ये पद 7वें सेंट्रल पे कमीशन के तहत पे मैट्रिक्स के लेवल-6 (35,400–1,12,400 रुपए) में रखे गए हैं और इन्हें नोटिफाई कर दिया गया है
विवाह संस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच नई खाई
आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो वह विवाह और रिश्तों की पारंपरिक अवधारणा है। बदलती जीवनशैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीक, वैश्वीकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चेतना ने रिश्तों की परिभाषा, अपेक्षाएँ और संरचना-सब कुछ बदल दिया है। यही कारण है कि आज रिश्तों से जुड़े ... Read more
PM मोदी की रैली में गैस न मिलने की शिकायत के दावे से उनके हमशक्ल का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी नहीं बल्कि उनके हमशक्ल सदानंद नायक हैं.
अस्पताल में PM मोदी और सोनिया गांधी की मुलाकात की AI जनरेटेड तस्वीर वायरल
कई AI डिटेक्शन टूल्स ने संकेत दिया कि यह तस्वीर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाई गई है.
नया वित्तीय वर्ष शुरु होते ही देश में एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई है
ललित सुरजन की कलम से -स्वायत्तता और विकेंद्रीकरण
'भारत की जनतांत्रिक व्यवस्था व चुनाव प्रणाली में जो भी वास्तविक या काल्पनिक विसंगतियां हैं उन पर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं
ईरान जंग ने तोड़ा नाटो और अमेरिका का रिश्ता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह ईरान पर छिड़ी जंग को खत्म करने का ऐलान कर सकते हैं
बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिये एक सराहनीय पहल
भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है-“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” केवल शास्त्रों की पंक्ति नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक संरचना की आत्मा रही है। इसलिए यह किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है कि जन्म देने और पालन-पोषण करने वाले माता-पिता को जीवन की सांझ में उपेक्षा, अपमान और आर्थिक असुरक्षा ... Read more
BJP ने शिव मंदिर विध्वंस पर ममता बनर्जी के बयान की भ्रामक क्लिप शेयर की
बूम ने पाया कि पूरे वीडियो में ममता बनर्जी मंदिर विध्वंस पर भाजपा के दोहरे मापदंड को लेकर बोलती हुई दिखाई दे रही हैं.
हिरासत में मौतें: बढ़ते आंकड़े, घटती जवाबदेही
महज 74 दिनों में 170 मौतें—यह आंकड़ा नहीं,बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत है। हिरासत,जहां कानून के संरक्षण की उम्मीद होती है,वहीं अगर मौतें होने लगें,तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा सवाल है।इतनी बड़ी संख्या का सामने आना इस बात का संकेत है कि समस्या केवल बनी हुई नहीं है,बल्कि ... Read more
अपने भीतर के हनुमान को जगाने का पर्व
हनुमान जयंती (2 अप्रैल 2026) विशेष हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन के चरित्र-निर्माण, आत्मबल, संयम, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देने वाला महान दिवस है। यह दिन हमें मंदिरों में दीप जलाने से अधिक अपने भीतर के अंधकार को दूर करने का संदेश देता है। हनुमान केवल शक्ति के प्रतीक ... Read more
कोशिकाओं का 'ब्लैक बॉक्स' बन गया! अब सेल अपनी पुरानी कहानी खुद बताएंगे
कोशिकाओं के 'ब्लैक बॉक्स' की जानकारी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च के बाद साझा की है। एक ऐसा डिब्बा जो सेल्स की हर गतिविधि पर पारखी नजर बनाए रखेगा। इसे गढ़ने के पीछे की कहानी बड़ी रोचक है
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
ललित सुरजन की कलम से - नक्सली तांडव : नई रणनीति की जरूरत
'छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा शुरु हिंसा का तांडव थमने के कोई आसार नजर नहीं आते
अमीर क़ज़लबाश के इस शेर का मतलब भाजपा के लोग ही अब बेहतर समझेंगे और समझाएंगे
आज 31 मार्च 2026 को भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव (महावीर जयंती) है इस अवसर पर- भगवान महावीर स्वामी का संदेश केवल जैन धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याणकारी है। उनके दर्शन का मूल आधार “आत्मवत् सर्वभूतेषु” (सभी जीवों को अपने समान समझना) है। उनके मुख्य संदेश इस प्रकार ... Read more
हवाई चप्पल वाले विमान में या हवाई सेवाएं जमीन पर!
हैरानी की बात नहीं है कि हमारे उद्घाटन-वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, पांच विधानसभाई चुनावों के लिए अपने प्रचार के औपचारिक चरण के लिए दिल्ली से रवाना होने से ठीक पहले, एक धमाकेदार उद्घाटन करना जरूरी समझा
'मथे ना माखन होय' की ओर बढ़ता देश
इस देश में अल्पसंख्यकों- ख़ास तौर पर मुसलमानों के प्रति घृणा का भाव दूर-दूर और बहुत गहराई तक फैल चुका है
ईरान पर इजरायल और अमेरिका को युद्ध छेड़े 31 दिन पूरे हो चुके हैं और इस एक महीने में ईरान समेत पूरी दुनिया को बड़ी तबाही की राह पर धकेला जा चुका है
माओवादी मुक्ति से शांति एवं संतुलन की नई संभावनाएं
भारत जैसे विशाल, विविधतापूर्ण और लोकतांत्रिक राष्ट्र के सामने आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां हमेशा से बहुआयामी रही हैं। इन चुनौतियों में नक्सलवाद या माओवादी हिंसा एक ऐसी समस्या रही, जिसने दशकों तक देश की आंतरिक शांति, विकास और सुशासन को गंभीर रूप से प्रभावित किया। विशेषकर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार और आंध्र प्रदेश के आदिवासी ... Read more
एकात्म मानववाद: पुनर्जागरण का भारतीय मंत्र
वैश्विक इतिहास में एक समय ऐसा आता है, जब प्रगति का शिखर भी शून्यता का अहसास कराने लगता है; जब उपलब्धियाँ भी असंतोष को जन्म देती हैं; और जब विकास का वैभव अन्दर की दरिद्रता को छिपा नहीं पाता। आज का वैश्विक परिदृश्य कुछ ऐसा ही है—बाह्य समृद्धि और आंतरिक विखंडन का एक बेमेल संगम। ... Read more
भाजपा द्वारा बंगाल भेजे गए चुनाव पर्यवेक्षक स्थानीय लोगों के निशाने पर
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, परन्तु भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई अभी भी अपनी स्थिति ठीक नहीं कर पाई है
पांच राज्य के चुनाव विपक्ष के लिए मौका : मोदी का सबसे कमजोर समय
ईरान युद्ध और उसके नतीजे में देश में गैस और पेट्रोल की किल्लत में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की खबर दब गई
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में जेन ज़ी (नयी पीढ़ी) आंदोलन से हुई बड़ी राजनैतिक उथल-पुथल के बाद सत्ता के नए युवा युग की शुरुआत हुई है
ललित सुरजन की कलम से - वे आपसे मिलना चाहते हैं
जनता आपको काम करने के लिए चुनती है। आपकी इज्जत भी करती है, लेकिन जब आप अहंकार में आ जाते हैं
तीन साल की हुई भारत में जन्मी पहली चीता 'मुखी', सीएम ने जताई खुशी
भारत की पहली चीता मुखी, जो महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत जंगल में जन्मी थी, वह रविवार को तीन साल की हो गई है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
'मटके' में छिपा सेहत का भी राज, गर्मियों में वरदान से कम नहीं मिट्टी के बर्तन
गर्मी, लू और उमस के इस मौसम में ठंडे पानी की तलब हर किसी को सताने लगी है
गर्मी में क्यों जरूरी है सौंफ का सेवन? जानिए इसके जबरदस्त फायदे
गर्मियों का मौसम शुरू होते ही पेट की गर्मी, गैस, सूजन और अपच की शिकायतें बढ़ जाती हैं
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
बीमा सुरक्षा का माध्यम बने, न कि मुनाफे का जाल
बीमा का मूल उद्देश्य जीवन की अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करना है। यह व्यवस्था व्यक्ति को बीमारी, दुर्घटना या अन्य संकटों के समय आर्थिक सहारा देती है। परंतु आज के दौर में यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य से भटकती हुई दिखाई दे रही है। विशेषकर स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में जो जटिलताएं, अपारदर्शिता और मनमानी ... Read more
अदाणी ग्रुप को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। इसे राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया क्लाइमेट वीक 2026' के दौरान 'इंडिया क्लाइमेट सम्मान' में 'नेट जीरो लीडरशिप' अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है
बड़े बैंक, नैतिकता और मूल्यों पर बड़े सवाल
एचडीएफसी बैंक कामहत्व उसकी उस यात्रा में निहित है जो यह दिखाती है कि अच्छी ग्रोथ और अच्छा गवर्नेंस कैसे साथ-साथ चल सकते हैं।
रणनीतिक स्वायत्तता या अनिश्चितता? भारतीय कूटनीति का बदलता स्वरूप
भारतीय विदेश नीति की विशिष्टता लंबे समय तक यह रही कि उसने राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, संप्रभुता, उपनिवेशवाद-विरोध और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को समान महत्व दिया
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में जन स्वास्थ्य के काम की देश-दुनिया में काफी चर्चा है। यह पहल बिलासपुर के पास गनियारी में चल रही है
गर्मी में अमृत से कम नहीं सत्तू, शरीर को ठंडक संग देता है भरपूर पोषण
भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाली कई देशी ड्रिंक्स लोकप्रिय हैं, लेकिन इनमें से एक सबसे फायदेमंद और पौष्टिक पेय है सत्तू का शरबत
ललित सुरजन की कलम से माओवाद बनाम कॉर्पोरेट पूंजी
'मेरा मानना है कि कारपोरेट पूंजी का एक गहरा षड़यंत्र बस्तर सहित देश के उन तमाम हिस्सों में चल रहा है
इसी 21 मार्च को जब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य का वार्षिक बजट पेश किया तो एक क्रांतिकारी काम किया। अफसोस यह है कि उसकी चर्चा उसे हिसाब से नहीं हुई।
भाजपा ने दिखाया आरक्षण विरोधी चेहरा
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उनके बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार अस्पताल में अपनी मां के साथ बने हुए हैं।
मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम
रामनवमी- 26 मार्च, 2026 रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य और पवित्र अवसर है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, आतंक, असहिष्णुता, पारिवारिक विघटन, राजनीतिक अविश्वास और नैतिक पतन जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है, तब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन-दर्शन केवल आस्था का विषय ... Read more
जलवायु परिवर्तनः भविष्य नहीं, वर्तमान का महाविनाशकारी संकट
आज मानव सभ्यता जिस सबसे बड़े संकट के सामने खड़ी है, वह युद्ध, महामारी या आर्थिक मंदी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन है। दुनिया आज जलवायु संकट के ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर नया आंकड़ा खतरे की घंटी बनकर सामने आ रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की ताजा रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि ... Read more
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच लॉकडाउन लगाने के दावे से पीएम मोदी का पुराना वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि पीएम मोदी और कपिल मिश्रा का पुराना वीडियो हालिया घटनाक्रम से जोड़कर वायरल है. लॉकडाउन की घोषणा करते पीएम मोदी का वीडियो कोरोना काल का है जबकि कपिल मिश्रा का वीडियो दिसंबर 2025 का है.
धूप की तपिश में 'ठंडा और कूल' रखेगा छाछ, गर्मियों में अमृत से कम नहीं
गर्मियों का मौसम तपिश, लू और उमस के साथ आ चुका है। देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है
ललित सुरजन की कलम से कसाब को फांसी के बाद
एक ही परिवार की दो शाखाओं में खेती की जमीन पर मिल्कियत को लेकर झगड़ा होता है और बढ़ते-बढ़ते खून-खराबे तक पहुंच जाता है।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
ललित सुरजन की कलम से वैमनस्य की राजनीति
1977 में जब इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं तो यह प्रचारित किया गया कि राजीव गांधी अपनी ससुराल जाकर बस जाएंगे।
किसानों की टिकाऊ आजीविका की रक्षा को जलवायु बदलाव नियंत्रण से जोड़ रहा एक सार्थक प्रयास
इस तरह जो रचनात्मक उपलब्धियां बढ़ रही हैं, वे जलवायु बदलाव पर नियंत्रण के संदर्भ में भी सार्थक है।
अदूरदर्शी सरकार होने का खामियाजा
इरतिज़ा निशात का लिखा ये शेर आज भारत के हुक्मरानों को बतौर नसीहत सुनाया जा सकता है।
बदहाल मुल्क भी भारत से ज्यादा खुशहाल क्यों?
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनडीपी तमाम आंकड़ों के आधार पर पहले ही बता चुकी है कि भारत टिकाऊ विकास के मामले में दुनिया के 167 देशों की सूची में 99वें स्थान पर है।
श्रीराम और तीर्थंकर महावीर के बीच वंश परंपरा का मधुर संबंध
– श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र । चैत्र महीने का सीधा संबंध महापुरुषों के जन्मों के साथ जुड़ा हुआ है। चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मोत्सव आता है तो जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याणक (जन्म जयंती) भी चैत्र महीने में ही शुक्ल की त्रयोदशी को ... Read more
स्कैल्प की सफाई से मजबूती तक, गर्मियों में शैंपू-कंडीशनर नहीं, एलोवेरा से बनेगी बात
गर्मियों का मौसम अपने साथ कई समस्याएं लेकर आता है। तेज धूप, पसीना और धूल के कारण बाल कमजोर पड़ने लगते हैं, झड़ने की समस्या बढ़ जाती है
टीबी उन्मूलन की दिशा में भारत के सशक्त प्रयासों से बढ़ती उम्मीदें
(विश्वक्षयरोगदिवस, 24मार्चपरविशेषआलेख) हरसाल,हम24मार्चकोविश्वक्षयरोगदिवसमनातेहैं।यहकार्यक्रम24मार्च1882कीतारीखकोयादकरनेकादिनहैजबजर्मनफिजिशियनडॉ.रॉबर्टकोचनेमाइकोबैक्टीरियमट्यूबरकुलोसिसनामकजीवाणुकीखोजकीथी,यहजीवाणुतपेदिक/क्षयरोग(टीबी)काकारणबनताहै।माइकोबैक्टीरियमट्यूबरकुलोसिसकीखोजहोजानेसेटीबीकेनिदानऔरइलाजमेंबहुतआसानीहुई।जर्मनफिजिशियनरॉबर्टकोचकीइसखोजकेलिएउन्हें1905मेंनोबेलपुरस्कारदियागया।यहीकारणहैकिहरवर्षविश्वस्वास्थ्यसंगठनटीबीकेसामाजिक,आर्थिकऔरसेहतकेलिएहानिकारकनतीजोंपरदुनियामेंजन-जागरूकताफैलानेऔरदुनियासेटीबीकेखात्मेकीकोशिशोंमेंतेजीलानेकेलिएविश्वक्षयरोगदिवसमनाताआरहाहै।माइकोबैक्टीरियमट्यूबरकुलोसिसकीखोजकेसौसालबादविश्वस्वास्थ्यसंगठन(डब्ल्यूएचओ)नेपहलीबार24मार्च1982कोविश्वक्षयरोगदिवसशुरूमनानेकीशुरुआतकी,तभीसेहरसाल24मार्चकोविश्वक्षयरोगदिवसपूरेविश्वमेंमनायाजाताहै। टीबीजैसीगंभीरबीमारी21वींसदीमेंसबसेबड़ीचुनौतीबनीहुईहै।आजइसकेप्रभावीइलाजउपलब्धहोनेकेबावजूदलोगइसकेलक्षणों(दोसप्ताहसेअधिकखांसी,खांसीमेंखूनआना,लगातारबुखार,रातमेंपसीनाआना,तेजीसेवजनघटना,भूखकमलगना,सीनेमेंदर्दऔरसांसफूलनाइत्यादि)कोअक्सरनजरअंदाजकरदेतेहैंऔरअपनेदैनिककार्योंमेंलगेरहतेहैं।इसकेसाथही,आजभीसमाजमेंटीबीकोलेकरकलंकबनाहुआहै।कईलोगइसडरसेजांचकरानेसेबचतेहैंकिकहींउनकीबीमारीकापताचलनेपरसामाजिकबहिष्कारकासामनानकरनापड़े।यहीसामाजिकधारणाटीबीनियंत्रणऔरउन्मूलनकीराहमेंएकबड़ीबाधाहैऔरइसकेकारणभारतदेशमेंमामलोंकीसंख्याअधिकबनीरहतीहै।ऐसेमेंसबसेअधिकआवश्यकताहैव्यापकजन-जागरूकताकी,ताकिलोगोंकोयहसमझायाजासकेकिटीबीकोईलाइलाजबीमारीनहींहैऔरइसकापूराउपचारसंभवहै।भारतसरकारद्वारादेशभरमेंचलाएजारहेविभिन्नप्रभावीअभियानोंकेसकारात्मकपरिणामअबजमीनपरदिखनेलगेहैं,जोइसदिशामेंउम्मीदकीकिरणप्रस्तुतकरतेहैं। क्षयरोगउन्मूलनकीदिशामेंभारतकीटीबीमुक्तभारतकेनामसमर्पितयात्राकोवैश्विकस्तरपरमान्यतामिलीहै,विश्वस्वास्थ्यसंगठन(डब्ल्यूएचओ)कीवैश्विकटीबीरिपोर्ट2025केअनुसारभारतदेशने2015से2024तकक्षयरोग(टीबी)केमामलोंमेंउल्लेखनीय21प्रतिशतकीगिरावटदर्जकीहै,यहदरवैश्विकऔसतगिरावट12प्रतिशतकीलगभगदोगुनीहै।साल2015मेंप्रतिएकलाखकीजनसंख्यापर237लोगोंकोयेबीमारीथीजो2024में21प्रतिशतघटकरप्रतिएकलाखकीजनसंख्यापर187होगईहै।यहवैश्विकस्तरपरटीबीमामलोंमेंदर्जकीगईसबसेबड़ीगिरावटोंमेंसेएकहै,जोअन्यटीबीकेउच्च-भारवालेदेशोंमेंदेखीगईकमीसेभीअधिकप्रभावशालीहै।हालांकियेआंकड़ेअबभीदेशसेटीबीकेउन्मूलनकेलक्ष्यसेकाफीदूरहैं।टीबीसेहोनेवालीमौतोंमेंभीभारतदेशमेंलगभग25प्रतिशतकीकमीआईहै,जो2015मेंप्रतिलाखजनसंख्यापर28सेघटकर2024मेंप्रतिलाखजनसंख्यापर21होगईहै।यहटीबीसेहोनेवालीमौतोंकोकमकरनेमेंहुईउल्लेखनीयप्रगतिकोदर्शाताहै,जोसरकारकीमजबूतप्रतिबद्धताऔरप्रभावीनीतियोंकेपरिणामस्वरूपसंभवहोसकीहै।देशमेंइसरोगकीरोकथामकेलिएकिएगएप्रयासकेअच्छेपरिणामदेखनेकोमिलरहेहैं। नईतकनीककोतेजीसेअपनाने,सेवाओंकोलोगोंकेपासतकपहुँचाने(डीसेंट्रलाइजेशन)औरबड़ेस्तरपरजनभागीदारीकेकारणभारतमेंटीबीमरीजोंकीपहचानऔरइलाजमेंकाफीसुधारहुआहै।2015मेंजहाँकेवल53प्रतिशतमरीजइलाजतकपहुँचपातेथे,वहीं2024मेंयहबढ़कर92प्रतिशतसेज्यादाहोगयाहै।2024मेंकरीब26.18लाखमरीजोंकीपहचानहोनेकाअनुमानहै,जबकिकुलअनुमानितमामलेलगभग27लाखहैं।इसकामतलबहैकिपहलेजो“मिसिंगकेस”यानीऐसेमरीजजोटीबीसेग्रसितथेलेकिनसरकारीरिकॉर्डमेंनहींआतेथे,उनकीसंख्या2015मेंलगभग15लाखथी,जोअबघटकर2024मेंएकलाखसेभीकमरहगईहै।टीबीमुक्तभारतअभियानकेतहतइलाजकीसफलतादरबढ़करलगभग90प्रतिशतहोगईहै,जोदुनियाकेऔसत88प्रतिशतसेभीबेहतरहै।हमारेभारतदेशमेंपूरेविश्वकीतुलनामेंसबसेज्यादाटीबीमरीजोंकीसंख्याहै।भारतदेशकालगभग26प्रतिशतटीबीबीमारीकेमामलोंमेंपूरेविश्वमेंयोगदानहै।आजकेसमयपरदवा-प्रतिरोधीटीबीबड़ीचिंताकाविषयहै,जिसमेंवैश्विकमामलोंकालगभग32प्रतिशतहिस्साभारतसेआताहै।यहस्थितिदर्शातीहैकिभारतमेंदवा-प्रतिरोधीटीबीकीरोकथामऔरप्रभावीउपचारएकबड़ीसार्वजनिकस्वास्थ्यचुनौतीबनाहुआहै।हालांकिभारतदेशमेंड्रगरेजिस्टेंसटीबीकेमरीजोंकीउपचारसफलतादरजोसाल2020में68प्रतिशतथीवह2024में77प्रतिशतहोगईहैजोकिबहुतमहत्वपूर्णहै।अगरटीबीमरीजकोसहीसमयपरइलाजनहींमिलताहैतोएकसक्रियटीबीमरीजसालमेंकमसेकम10-15नएमरीजपैदाकरताहै।ड्रगरेजिस्टेंटटीबीमरीजसेहोनेवालासंक्रमणभीड्रगरेजिस्टेंटहीहोताहैजोकिएकचुनौतीपूर्णस्थितिहोतीहै।इसलिएजरूरीहैकिड्रगरेजिस्टेंटटीबीमरीजोंकीविशेषनिगरानीकीजानीचाहिएऔरउनकेसंपर्कमेंरहनेवालेलोगोंकीभीप्राथमिकताकेआधारपरजांचकरायीजानीचाहिए,जिससेकिड्रगरेजिस्टेंटटीबीमरीजदूसरेड्रगरेजिस्टेंटमरीजपैदानहींकरसकें। आजसरकारनिक्षयपोषणयोजनाकेजरिएटीबीकेमरीजोंकोहरमहीने1000रुपयेपोषणकेलिएदेरहीहै,इसकेसाथहीटीबीमरीजोंकोपहचानकरनेवालोंकोभीसरकारइनामराशिदेरहीहैयहभीसरकारकाटीबीमुक्तभारतकिदिशामेंएकबहुतबड़ाकदमहै।इसकेसाथहीसरकारनेप्राइवेटडॉक्टर्सऔरमेडिकलस्टोर्सकिलिएटीबीमरीजोंसेसम्बंधितजोदिशानिर्देशजारीकियेहैयेकदमभीराष्ट्रीयक्षयरोगउन्मूलनकार्यक्रमकोमजबूतीप्रदानकरतेहैं,इनदिशानिर्देशोंकेअंतर्गतहरप्राइवेटडॉक्टर्सकोटीबीकेमरीजोंकीजानकारीसरकारकोदेनीहोगी।साथहीसाथमेडिकलस्टोरवालोंकोटीबीमरीजोंकीदवाईसेसम्बंधितलेखा-जोखासरकारकोदेनाहोना।अगरइनदिशानिर्देशोंकाउल्लंघनहोताहैतोदोषियोंपरजुर्मानाऔरसजाकीकार्यवाहीहोसकतीहै।इसकेअलावाजरूरीहैकिसरकारकोटीबीमरीजोंकेइलाजसेसम्बन्धितदवाओंकेप्रयोगकेसम्बन्धमेंप्राइवेटडॉक्टरोंकेलियेदिशा-निर्देशजारीकरनेचाहिएजिससेकिड्रगरेजिस्टेंसकोरोकाजासके।इसकेअलावासरकारप्रधानमंत्रीटीबीमुक्तभारतअभियानकेतहतलोगोंऔरसामाजिकसंस्थाओंकोनिक्षयमित्रबनाकरटीबीमरीजोंकोगोदलेनेकेलिएप्रेरितकररहीहै,जिससेकिटीबीकेमरीजोंकोसहीसेपोषणऔरउनकेस्वास्थ्यमेंसुधारऔरउपचारकेबेहतरपरिणामसुनिश्चितहोसकें। सरकारनेटीबीकीत्वरितजांचकोऔरमजबूतबनानेकेलिएहुबेलओपनपीसीआरऔरपैथोडिटेक्टजैसीस्वदेशीतकनीकोंकोट्रायलकेरूपमेंशामिलकियाहै,जोमेकइनइंडियापहलकासशक्तउदाहरणहैं।इनआधुनिकतकनीकोंकेमाध्यमसेमरीजकेसैंपलमेंटीबीकेजीवाणुकीजल्दीऔरसटीकपहचानकीजासकतीहै,साथहीयहभीपतालगायाजासकताहैकिबीमारीदवा-प्रतिरोधीहैयानहीं,जिससेसमयपरसहीउपचारशुरूकरनासंभवहोपाताहै।सरकारटीबीउन्मूलनकेलिएकईनएऔरप्रभावीकदमउठारहीहै,जैसेटीबीमुक्तपंचायतअभियान,निक्षयपोषणयोजना,निक्षयमित्रपहल, 100-दिवसीयतीव्रटीबीउन्मूलनअभियान-जिसमेदेशकीकमजोरयाउच्चजोखिमवालेसमूहऔरअति-संवेदनशीलआबादीकीटीबीस्क्रीनिंगकरमरीजोंकोखोजाजारहाहै,नईअत्याधुनिकडायग्नोस्टिकतकनीकों(सीबीनाटऔरट्रूनाट)काविस्तार,डीआर-टीबीकेलिए6माहकीअवधिवालीबीपाल-एम(बीडाक्विलिन,प्रीटोमैनिड,लाइनजोलिडऔरमोक्सीफ्लोक्सासिन)शॉर्टरऔरओरलरेजीमेन,नयीइंटरमीडिएटरेफेरेंसलैबोरेट्रीजऔरटीबीकल्चरएंडडीएसटीलैब्सकाविस्तार,टीबीप्रिवेंटिवथेरेपी,डिफ्रेंटिएटेडटीबीकेयर,डेथऑडिटतथाटीबीकीअन्यमहत्वपूर्णसेवाओंकाविकेंद्रीकरण,जोआनेवालेसमयमेंटीबीमुक्तभारतकेलक्ष्यकोहासिलकरनेमेंमीलकापत्थरसाबितहोंगे। इनछोटे-छोटेलेकिनप्रभावीकदमोंकेमाध्यमसेदेशटीबीउन्मूलनकेलक्ष्यकीदिशामेंतेजीसेआगेबढ़सकताहै।निस्संदेह,टीबीभारतकेलिएयहएकबड़ीचुनौतीहैक्योंकिदेशमेंटीबीकाबोझसबसेअधिकहै,लेकिनसकारात्मकदृष्टिकोण,जनभागीदारी,मजबूतनीतियोंऔरनिरंतरप्रयासोंसेइसलक्ष्यकोहासिलकियाजासकताहै।इसकेसाथहीराष्ट्रीयक्षयरोगउन्मूलनकार्यक्रमकीसमय-समयपरनिष्पक्षसमीक्षा,मूल्यांकनऔरकमियोंकाविश्लेषणकियाजानाचाहिए,ताकिउन्हेंदूरकरकार्यक्रमकोऔरअधिकप्रभावीबनायाजासकेतथादेशकेअंतिमटीबीमरीजतकपहुंचसुनिश्चितकीजासके।यहमीलकापत्थरभारतकेराष्ट्रीयक्षयरोगउन्मूलनकार्यक्रम(एनटीईपी)कीप्रभावशीलताऔरकड़ीमेहनतकोदर्शाताहै।टीबीकोलेकरभारतसरकारएकव्यापकरणनीतिकेतहतकार्यकररहीहै,जिसमेंअत्याधुनिकनिदान,निवारकदेखभाल,रोगीसहायताऔरबहु-क्षेत्रीयसाझेदारीकेमाध्यमसेदेशमेंटीबीनियंत्रणऔरउन्मूलनकीदिशामेंनिरंतरप्रयासकिएजारहेहैं। लेखक –डॉ.ब्रह्मानंदराजपूत (Dr. Brahmanand Rajput) On twitter @33908rajput On facebook –facebook.com/rajputbrahmanand E-Mail –brhama_rajput@rediffmail.com
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
मोदी युग में भारत वाकई बदला मगर गया तो पीछे!
आखिरकार, प्रधानमंत्री मोदी ने एक नया रिकार्ड कायम कर लिया। मोदी के शीर्ष मंत्रिमंडलीय साथियों की प्रशस्तियों से पूरे देश को यह रिकार्ड बनने का पता चला
21 मार्च को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शाम साढ़े चार बजे के करीब सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी कि रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी - ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं
तेज होती हथियारों की होड़ और अस्थिर होती विश्व व्यवस्था
तेज होती हथियारों की होड़ और अस्थिर होती विश्व व्यवस्था आज मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर खड़ी है। दुनिया एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां युद्ध केवल सीमाओं पर लड़े जाने वाले संघर्ष नहीं रह गए हैं, बल्कि उनका प्रभाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा व्यवस्था, पर्यावरण, सृष्टि-संतुलन, ... Read more
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ललित सुरजन की कलम से चीन, ओबोर और भारत
'चीन ने भारत के जले पर नमक छिड़कने का काम बीजिंग शिखर सम्मेलन के अगले ही दिन किया।
इतिहास में कभी-कभी कुछ ऐसा घटता है कि दुनिया को कठपुतली बनाकर नचाने वालों का भांडा फूट जाता है।
कायर कौन हैं नाटो देश या खाड़ी देश?
हार्मुज स्ट्रेट पर हमला करके उसे और ज्यादा भड़काने से बचना चाहते हैं? या खाड़ी देश? जिन्होंने डर के मारे अपनी जमीन अमेरिका के सैन्य अड्डों के लिए दे रखी है।
दिल्ली के प्रदूषण में सिसकती ब्रज की जीवन रेखा यमुना (विश्व जल दिवस पर विशेष आलेख)
यमुना नदी यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है और गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना को गंगा के साथ रखा जाता है। आज यह नदी गंगा नदी से भी ज्यादा प्रदूषित है। जिस तरह गंगा नदी का सांस्कृतिक इतिहास है उसी प्रकार यमुना नदी का ... Read more
धर्मक्रांति का विलक्षण प्रयोग है योगक्षेम वर्ष
आज का युग विज्ञान, तकनीक और भौतिक प्रगति का युग माना जाता है, लेकिन इसी के साथ यह युग तनाव, असंतोष, हिंसा, युद्ध और मानसिक अशांति का भी युग बन गया है। मनुष्य ने बाहर की दुनिया को जीत लिया, लेकिन अपने भीतर की दुनिया को जीत नहीं पाया। उसने साधन बना लिये, लेकिन साधना ... Read more
सामाजिक जागरण की फ़िल्म : 'मार्चिंग इन द डार्क'
किंशुक सुरजन की पुरस्कृत डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म है, जो रायपुर शहर के श्याम टॉकीज में 14 तारीख की शाम दिखाई गई
नींद में ‘जेंडर गैप’! क्यों महिलाएं सोती हैं कम?
दुनियाभर में किए गए कई अध्ययनों से एक अहम और दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि महिलाओं और पुरुषों की नींद में स्पष्ट अंतर है, जिसे जेंडर स्लीप गैप कहा जा रहा है
बढ़ते सड़क हादसे, असुरक्षित सड़कें और अनसीखे सबक
भारत में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है जिसने पूरे देश में सड़क परिवहन के परिदृश्य को बदलकर रख दिया है
असम और पुडुचेरी में तेज़ी से बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण
भाजपा के लिए सबसे बड़ा फ़ायदा दूसरी राजनीतिक पार्टियों से नेताओं का पाला बदलना रहा है
आत्मनिर्भर बन रही हैं केरल की महिलाएं
कुछ समय पहले में केरल गया था, और वहां के एक महिला समूह की गतिविधियों के बारे में जानने का मौका मिला था
दिल्ली-एनसीआर में बरसात का दौर जारी, तापमान गिरा
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली एनसीआर में मौसम ने बीते दो दिनों की तरह आज भी अपना रुख बरकरार रखा है
हीटवेव से अपच तक को दूर करने में कारगर, गर्मी में सेहत के लिए वरदान से कम नहीं 'नीम का फूल'
गर्मी के मौसम ने दस्तक दे दी है। तपती धूप, लू और आसमान से बरसती आग, इन सबके बीच सेहतमंद बने रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता
अभी भी झोल है जीडीपी की गणना में
इसे मात्र संयोग मानना चाहिए कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की नई शृंखला जारी होते ही कीमतें बढ़ने का और सकल घरेलू उत्पादन-जीडीपी की गणना की नई शृंखला जारी होते ही वैश्विक स्तर पर काफी उथल-पुथल का दौर शुरू हो गया है
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ललित सुरजन की कलम से - देशबन्धु:चौथा खंभा बनने से इंकार- 20
1971 में संपन्न आम चुनाव में माधवराव सिंधिया भी जनसंघ टिकट पर जीत दर्ज कर राजनीति में आ गए

