विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रविवार को दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में पर्यटकों को निशुल्क प्रवेश मिलेगा।
दुनिया बेहिसाब बड़ी है और बच्चों के लिए तो और भी अथाह रहस्यमय। फौज में रहे नाना जब अपने दुलारे नाती को दूर देश-प्रदेश के अनुभव सुनाते, तब नाती कान खड़े कर सुनता था। पूछता चला जाता कि वहां के लोग कैसे दिखते हैं…
तालिबान अब फरीबा से कैसे नफरत कर पाएगा
पड़ोस में एक मुल्क है, जो कभी हमारे पुरखों द्वारा शासित होता था। पुराण बांचने वाले बताते हैं कि गांधारी वहीं के एक रजवाड़े की बेटी थीं; इतिहास कहता है कि बामियान की बुद्ध प्रतिमाएं, पृथ्वीराज चौहान की समाधि इस बात की साक्षी…
विचार: चुनाव आयोग के विवाद पर विराम
किसी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान मतभेद होना स्वाभाविक हैं। इन्हें तूल देने का कोई औचित्य नहीं बनता, लेकिन ऐसा ही किया गया।
जागरण संपादकीय: संदेह का निराकरण
वैसे तो तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक और उसके बाद जारी बयान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छेड़े गए विपक्ष के अभियान की हवा निकाल दी है, लेकिन यह तय है कि वह चुप नहीं बैठने वाला।
इस दौर में निरंकुश सत्तानायकों को नियंत्रित करने के लिए न कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था बची है और न विचार। यह अकारण नहीं है कि जंगें भड़क रही हैं और समूची दुनिया की अर्थव्यवस्था सतहगामी है। ऐसा लगता है, मौजूदा दुनिया को कमजोर और निर्धन मुल्कों या इंसानों की जरूरत नहीं रह बची है…
सेहत के लिए वरदान है फाइबर, रोज कितना खाना चाहिए ? जाने सही मात्रा और फायदे
नई दिल्ली, सेहतमंद रहने के लिए सिर्फ भरपूर खाना जरूरी नहीं है, बल्कि संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना बेहद जरूरी है। हमारी रोज की डाइट में फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना हेल्दी ईटिंग प्लान का अहम हिस्सा है। फाइबर और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है।
शरीर संतुलन में चले तो करे अष्टावक्रासन
नई दिल्ली, योग केवल शरीर को लचीला बनाने की क्रिय नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा को संतुलित करने का एक प्राचीन मार्ग है। भारतीय योग परंपरा में अष्टावक्रासन एक ऐसा योगासन है, जो बाजुओं में मजबूती, पेट की मांसपेशियों में कसाव और मानसिक स्थिरता लाने के लिए जाना जाता है।
Rashifal 26 September 2026: आज का दिन कुछ राशियों के लिए करियर और आर्थिक मामलों में नए अवसर लेकर आ सकता है, तो कुछ लोगों को रिश्तों और फैसलों में सावधानी बरतनी होगी। जानें मेष, कर्क, सिंह, कन्या, कुंभ और मकर राशि वालों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।
26 सितंबर 2026 को शनिवार होने के साथ-साथ आज महीने का चौथा शनिवार है। इस वजह से आज देशभर में बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी, हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी।
विकास की दौड़ में हांफती नदियां:गंगा-यमुना को जीवित मानव का दर्जा! ऐसे कानूनी नवाचार कड़ाई से लागू करना जरूरी
फिर हादसा, फिर सवाल: कागजी नियमों से सुरक्षा नहीं,जमीनी स्तर पर सख्त और निरंतर औचक निरीक्षण सबसे जरूरी कदम
राजनीतिक दखलंदाजी से खराब होता टाटा गु्रप का नाम
टाटा गु्रप में हुए हाल के घटनाक्रम से कई लोगों को बेचैनी महसूस हो सकती है।
सितंबर के आखिरी हफ्ते में पहाड़ से लेकर मैदान तक भारी बारिश से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
पेड़ों के आसपास की मिट्टी में कई तरह के जंतु होते हैं। कीड़े-मकोड़ों का भी वास होता है।
जीवन के अन्तिम पड़ाव में- अपनों रिश्तो की अहमियत समझिये!
परिवार का इस दुनिया मे कोई भी सानी नही है। मगर रिश्ता यहाँ का कोई भी हो बेमानी नही है। कुछ लोग कहते है कि सभी साथ छोड़ जाते है। जीवनभर साथ देती किसी की भी जवानी नही है। आप है इसलिए अच्छा लगता हैं कहने के लिए , लिखने के लिए यह बात अच्छी ... Read more
विचार: तकनीक के मोर्चे पर छाप छोड़ता भारत
भारत भविष्य की तकनीकों, जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग, फोटोनिक्स, आप्टोइलेक्ट्रानिक्स और एआइ के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए चिप्स के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को तत्पर है।
विचार: संवेदना के साथ न्याय भी सुनिश्चित हो
दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई हो और आरोप असत्य या दुर्भावनापूर्ण सिद्ध होने पर निर्दोष व्यक्ति का सम्मान लौटाया जाए।
जागरण संपादकीय: अनुत्तरित प्रश्न
चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा की रक्षा करना और उसे अपुष्ट-अनर्गल आरोपों से बचाना अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी नहीं। यह जिम्मेदारी दोनों चुनाव आयुक्तों की भी है।
भारत: स्कूलों के 50 मीटर दायरे से दूर होगा जंक फूड?
बच्चों में मोटापा रोकने के लिए भारत सरकार स्कूलों के आसपास हाई फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री सीमित करने पर विचार कर रही है
बेटियों को बुरी नजरों से कैसे बचाया जाए
यह खेद की बात है कि संस्कार के युग में व्यभिचार का दौर चल गया। खेद है कि समता पर आधारित हमारे भारत राष्ट्र में, असम्माननीय कर्म चलन-सा बनता जा रहा। खेद यह भी है कि जो बालिका साइकिल पर बैठ स्कूल चल पड़ी थी, उसी को दरिंदों ने समूह बनाकर अपना निशाना बनाया…
लड़कियों की असुरक्षा के लिए तंत्र जिम्मेदार
बिहार से लेकर राजधानी दिल्ली तक लड़कियों और महिलाओं से छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और बलात्कार की कई घटनाओं ने एक बार फिर पूरे देश में महिला सुरक्षा के विषय को सुर्खियों में ला दिया है। जाहिर है, इस पर समाज में रोष है और लोग (खासकर बच्चियां, महिलाएं) इस स्थिति से जल्द से जल्द निजात चाहते हैं…
बच्चों की आंखों में दिखे ये लक्षण तो हो जाएं सावधान
नई दिल्ली, बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता अक्सर छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान देते हैं, लेकिन आंखों से जुड़े कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
'सुप्त पादांगुष्ठासन' शरीर को बनाता है लचीला
नई दिल्ली, आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में घंटों बैठकर काम करने से शरीर में अकड़न, कमर दर्द और पैरों में खिंचाव आम समस्या बन गई है।
6 जिलों में तापमान 40 डिग्री के पार: राजस्थान
जयपुर, राजस्थान से भले ही मानसून विदा ले रहा हो, लेकिन गर्मी जोरदार वापसी कर रही है।
दिल्ली एनसीआर में मौसम ने ली करवट, 27 सितंबर को येलो अलर्ट जारी
नई दिल्ली, दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है।
चुनाव आयोग पर सवाल: 77 साल पहले डॉ. आंबेडकर ने किस खतरे से किया था आगाह?
16 जून 1949 को संविधान सभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर एक महत्वपूर्ण आशंका जताई थी।
विचार: असहमति लोकतंत्र की नियत और नियति
मुख्तार अब्बास नकवी का यह लेख भारतीय चुनाव प्रणाली के 1952 के पहले आम चुनाव से वर्तमान तक के सफर को दर्शाता है।
नई तकनीक सीखने की कोई उम्र नहीं होती: डर छोड़ें, छोटे कदमों से शुरुआत करें
मेरी उम्र 72 साल है और मुझे नई तकनीकें सीखने में डर लगता है कि कहीं कोई धोखा न हो जाए। यूपीआई, स्मार्टफोन चलाना व वीडियो कॉल करने की शुरुआत करना कैसे सीखूं?
उड़ान भरने का समय: उम्र नहीं, सीमित सोच संभावनाओं की राह रोकती है
उम्र कोई ऐसी ढलान नहीं है, जहां संभावनाओं के द्वार बंद होने लगें। यह तो अनुभवों की वह पराकाष्ठा है, जहां से नई उड़ान भरी जा सकती है।
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
टकराव से सबक: चीन-अमेरिका संवाद जरूरी, दोनों महाशक्तियों के लिए एक मौका
चुनाव आयोग के मतभेदों से उठे सवाल, विश्वसनीयता पर जवाब जरूरी
चुनाव आयोग के मतभेदों से उठे सवाल, विश्वसनीयता पर जवाब जरूरी
ललित सुरजन की कलम से यात्रा वृत्तांत: बूढ़ा पीपल और बूढ़ा पुल
'मैं एक लंबे अरसे बाद दिन के समय ट्रेन से कोलकाता की दिशा में जा रहा था।
सीईसी के 'बिना अधिकार' और 'गैर-कानूनी' कामों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ज़िम्मेदार
भारत के तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज की है
टाटा साम्राज्य में विद्रोह और विभाजन की दरार
1988-89 में भारत एक खोज सीरियल के साथ टाटा ग्रुप ने 'इस्पात भी हम बनाते हैं' के जरिये प्रेरक संदेश दिया था।
Will Rahul Gandhi be able to change the System by becoming Icon Of Youth, Women and depressed people? Whether Rahul Gandhi will be able to change the system by positioning himself as an icon for the youth, women, and marginalized groups is a subject of intense political debate in India. As the Leader of the ... Read more
अंत्योदय : विकसित भारत की मानवीय आधारशिला
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती (अंत्योदय दिवस), 25 सितंबर 2026 पर विशेषः भारत की विकास यात्रा आज ऐसे दौर में है, जब आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक प्रभाव के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है और ... Read more
विचार: सेवा और समर्पण के ढाई दशक
भारतीय परंपरा में इसका उत्तर केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म में निहित है। सेवा की शुरुआत किसी दूसरे के लिए कुछ करने से होती है, लेकिन उसका अंतिम उद्देश्य व्यक्ति, समाज और व्यापक सामूहिक कल्याण के बीच संबंध को अधिक मजबूत बनाना है।
विचार: घटता जा रहा है अमेरिका का कद
चिनफिंग और ट्रंप, दोनों ही इस समय द्विपक्षीय तनाव की तपिश घटाने तथा संबंधों में स्थायित्व लाने के पक्षधर प्रतीत होते हैं। आशा है कि यह स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसी तकनीक के संदर्भ में सीमित ही सही, किंतु किसी सार्थक प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
जागरण संपादकीय: फिर वही हंगामा
यह विचित्र है कि विपक्षी दल एक ओर मतदाता सूचियों में गलतियों की शिकायत करते हैं और दूसरी ओर उन्हें दुरुस्त करने वाली एसआईआर प्रक्रिया का विरोध भी करते हैं। क्या इसलिए कि एसआईआर प्रक्रिया घुसपैठियों को चिह्नित करने में भी सहायक बन रही है?
पुराने संबंधों से नया समूह बनाता भारत
विदेश मंत्री एस जयशंकर का न्यूयॉर्क दौरा महज संयुक्त राष्ट्र की बैठक तक सीमित नहीं है। वह इसकी 81वीं आमसभा को कल, यानी 26 सितंबर को संबोधित करेंगे, लेकिन इससे पूर्व जिस तरह से वह अनेक देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें कर रहे हैं…
भारतीय चुनाव आयोग का एक बार फिर गंभीर विवादों में उलझना अफसोसजनक है। आयोग पर आलोचनाओं की बौछारें हो रही हैं। विपक्ष तरह-तरह के आरोपों के साथ जिस तरह से आक्रामक हुआ है, उसे समझना कठिन नहीं है। मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद की एक बड़ी वजह है…
बैंक ऑफ बड़ौदा ने लोकल बैंक ऑफिसर भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार पूरा शेड्यूल नीचे देख सकते हैं। बैंक पात्र उम्मीदवारों के लिए प्री-एग्जामिनेशन ट्रेनिंग भी आयोजित करेगा।
देश के परिवहन नेटवर्क में आ रहा बड़ा बदलाव
नई दिल्ली, भारत का परिवहन नेटवर्क तेजी से बदल रहा है और पुल एवं सुरंगें नए रास्ते खोल रही हैं।
जानें सेतुबंधासन करने का सही तरीका
नई दिल्ली, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता तनाव हमारे शरीर और मन दोनों पर बुरा असर डाल रहा है। ऐसे में शरीर को लचीला और मन को शांत रखने के लिए योग से बेहतर कुछ नहीं है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग की घटना ने खासतौर पर रात में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस शुक्रवार को ओटीटी पर अनीत पड्डा और फातिमा सना शेख की फिल्म रिलीज होने वाली है। वहीं वीरेंद्र सहवाग का शो भी स्ट्रीम होने वाला है।
24 सितंबर 2026 के आज के राशिफल में आपका हार्दिक स्वागत है! ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग प्रभाव लेकर आया है। आइए जानते हैं ग्रहों की चाल और आज के दिन का पूरा विश्लेषण, ताकि आप अपने दिन की सही योजना बना सकें।
सुख नहीं, जीवन का अर्थ खोजिए: क्या सच में खुश रहना ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है?
सुख नहीं, जीवन का अर्थ खोजिए: क्या सच में खुश रहना ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है?
दूसरा पहलू: मधुमक्खी का डंक और कैंसर का इलाज, एचआईवी से लड़ने सहित कई एंटी वायरल गुण भी
दूसरा पहलू: मधुमक्खी का डंक औरकैंसर का इलाज,एचआईवी से लड़ने सहित कई एंटी वायरल गुण भी
एक गंभीर चेतावनी:देश के करीब 40 फीसदी कोयला आधारित संयंत्रों में ईंधन का भंडार घटा,कई पहलुओं पर काम जरूरी
विज्ञान: देश के वैज्ञानिकों को सितारा बनाने की जरूरत, 2047 तक वैश्विक प्रयोगों की केंद्रीय शक्ति बनना चाहता है भारत
भारतीय कूटनीति का नया क्षितिज : ब्रिक्स सम्मेलन
आज का भारत वैश्विक कूटनीतिक धरातल पर अपनी समभाव की भावना को आगे बढ़ाने में सर्वोपरि रहा है।
जनता उठ कर खड़े हो, वर्ना लुटना तय है
सवाल केवल वोट चोरी का ही नहीं है। यह भारत के लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं पर मोदी सरकार के कब्जे का है।
कालकाजी मंदिर से सटे आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस जांच में नया खुलासा हुआ है।
हसनपुर कोतवाली क्षेत्र में झूलपुरी स्थित उत्तराखंड के विधायक उमेश शर्मा के फार्म हाउस पर हरियाणा की युवती से सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
विचार: यूपीआई तंत्र के हित में है एमडीआर
असली सवाल शुल्क की दर से ज्यादा उसकी वजह का है। यूपीआई पर हर साल करीब ₹20,000 करोड़ रुपये खर्च सिर्फ सर्वर, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे पर आता है।
विचार: अमेरिकी वर्चस्व थोपने वाला रवैया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप के संबोधन ने यही दर्शाया कि अमेरिका अपने मित्र राष्ट्रों एवं प्रतिद्वंद्वियों पर रणनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
जागरण संपादकीय: प्रधानमंत्री की चिंतन बैठक
शहरों की सूरत संवारने के साथ ही सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
दवाओं के बेहिसाब दाम पर लगाम लगाना जरूरी
दवाओं और मेडिकल उपकरणों की लागत और कीमत में भारी अंतर से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की है, उसके गहरे निहितार्थ हैं। कोर्ट ने कहा है कि 2,700 रुपये में खरीदी गई दवा को 27,000 रुपये में बेचने…
चुनाव आयोग के अंदर से जो खबर निकलकर सामने आई है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें कहा गया है कि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद चुनाव आयोग ने…
यह सुखद और स्वागतयोग्य है कि भारत दुनिया की महाशक्तियों से परे एक अलग मजबूत बहुदेशीय आवाज बनाने की कोशिश करता दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान ही भारत, लैटिन अमेरिकी…
जमुई छात्रा यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी के दावे से AI जनरेटेड तस्वीर वायरल
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर OpenAI के AI टूल की मदद से बनाई गई है. पुलिस ने मुख्य आरोपी नंदन यादव को मंगलवार को अरेस्ट किया है.
कभी घर-घर पहुंचाता था पिज्जा, आज 3 रेस्टोरेंट का मालिक; मेहनत से बदली इस भारतीय की जिंदगी
कहते हैं कि अगर इंसान में मेहनत करने और आगे बढ़ने का जुनून हो, तो मुश्किल हालात भी उसके रास्ते को ज्यादा लंबे समय तक नहीं रोक सकते।
गिरती जा रही है जन्मदर, फिर भी क्यों कई महिलाएं मां नहीं बनना चाहतीं?
महिलाएं अब समझ रही हैं कि मां बनना जिंदगी का कोई तय पड़ाव नहीं है. वे अपनी शिक्षा व करियर को ज्यादा समय देना चाहती हैं.
बहुमुखी प्रतिभा के धनी 'मुरारीलाल माहेश्वरी'
बहुमुखी प्रतिभा के धनी 'मुरारीलाल माहेश्वरी'amar ujala founder murari lal maheshwari 100th birth anniversary
आयुर्वेद दिवस पर रेखा गुप्ता से लेकर केशव प्रसाद मौर्य तक ने दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली, 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर देशभर के नेताओं ने आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा को नमन करते हुए सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
जानें महाभेद मुद्रा करने का सही तरीका
नई दिल्ली, योग शास्त्रों में शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह की मुद्राओं का अभ्यास करना बताया गया है।
उम्मीदों के शहर: दुनिया के तेजी से उभर रहे भारतीय शहर, प्रगति अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं
उम्मीदों के शहर: दुनिया के तेजी से उभर रहे भारतीय शहर, प्रगति अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं
जीवन धारा: लंबी दूरी भी छोटे-छोटे कदमों से पूरी होती है, असफलता से न डरने का सूत्र अहम
जीवन धारा: लंबी दूरी भी छोटे-छोटे कदमों से पूरी होती है, असफलता से न डरने का सूत्र अहम
फिल्म ‘हनुमान अंश’ अपनी रिलीज के कई दिनों बाद भी बॉक्स ऑफिस में नंबर वन है। वहीं ‘मिर्जापुर द मूवी’ दूसरे नंबर की गद्दी पर बैठी है। मगर कुणाल की फिल्म ‘वाइब’ और करीना कपूर की फिल्म ‘दायरा’ को सिनेमाघरों में दर्शक नहीं मिल रहे।
शांति के लिए भी एक मंत्रालय हो: सुरक्षा केवल मिसाइलों व टैंकों से नहीं, क्या अब साहस दिखाने का समय नहीं?
ललित सुरजन की कलम से कावेरी, कोडग़ू, कॉफी, कोको
'भारत की प्रमुख नदियों में से एक कावेरी नदी का उद्गम मड़िकेरी से लगभग पैंतालीस किलोमीटर दूर तालकावेरी नामक स्थान पर है।
विद्यार्थियों की संख्या सवा तीन करोड़ घटी
सरकारी स्कूलों में भी अध्यापकों की भर्ती में काफी ढील वाला माहौल है और 33 फीसदी कमी की रिपोर्ट इसमें है। मजेदार सूचना यह है कि इस मामले में निजी स्कूलों का रिकार्ड सरकार से बेहतर है। इसके साथ ही यह भी हुआ है कि शहरी प्राइवेट स्कूलों में अध्यापकों को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के मुकाबले बेहतर वेतन मिलता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में शिक्षकों को वेतन कम मिलता है। ह हैरान करने वाली बात है कि देश में शिक्षा की स्थिति को लेकर एक नामी और विश्वसनीय संस्था के सर्वेक्षण से निकले निष्कर्षों पर कोई चर्चा ही नहीं हुई है। खबर के रूप में कहीं-कहीं यह बात आई कि टाटा इंस्टिट्यूट आफ सोशल साइंस की रिपोर्ट 'स्टेट आफ टीचर्स, टीचिंग एंड टीचर एजुकेशन इन इंडिया' नामक रिपोर्ट बताती है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद से बच्चों की संख्या में तीन साल में ही सवा तीन करोड़ की कमी आ गई है। 2021-22 में यह संख्या 26.5 करोड़ थी जो 2024-25 में घटकर 23.2 करोड़ रह गई है। शिक्षा अधिकार कानून और विकलांग लोगों के अधिकार कानून को लागू करने के बाद विद्यार्थियों की संख्या में बहुत तेज वृद्धि हुई थी और इन कानूनों के विरोधी कहते थे कि यह भीड़ सिर्फ खिचड़ी खाने वाले बच्चों की है, पढ़ने वालों की नहीं। 'टीस' के इस सर्वेक्षण में इस तरह की मान्यता से शुरुआत नहीं हुई है लेकिन कुछ आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि पढ़ाई का स्तर गिरा है और बच्चों के सीखने के बुनियादी स्तर में गिरावट आई है। शिक्षा के स्थिति संबंधी दो एनी सर्वेक्षणों से यह नतीजा आया है कि बच्चों के ज्ञान के स्तर के साथ सीखने के क्षमता में भी कमी आई है। इस रिपोर्ट की खूबी यह है कि इसने इस गिरावट को गरीब और फटेहाल बच्चों के स्कूल पहुंचने की परिघटना के रूप में न बताकर शिक्षकों की कमी और उनके भी ज्ञान में कमी से भी जोड़ा है। यह सर्वेक्षण महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, पंजाब, ओडिशा और मिजोरम में किया गया और यह नतीजा निकाला कि स्कूलों में गणित और विज्ञान के अध्यापकों की भारी कमी है। जो लोग गणित पढ़ा भी रहे हैं उनमें से पचास फीसदी ने ही हाई स्कूल में भी गणित की पढ़ाई की थी। अंग्रेजी और भाषा पढ़ाने वालों का हाल इससे बेहतर है लेकिन वह भी 30 फीसदी की कमी वाला इलाका हैं। सरकारी स्कूलों में भी अध्यापकों की भर्ती में काफी ढील वाला माहौल है और 33 फीसदी कमी की रिपोर्ट इसमें है। मजेदार सूचना यह है कि इस मामले में निजी स्कूलों का रिकार्ड सरकार से बेहतर है। इसके साथ ही यह भी हुआ है कि शहरी प्राइवेट स्कूलों में अध्यापकों को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के मुकाबले बेहतर वेतन मिलता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में शिक्षकों को वेतन कम मिलता है । एक अन्य रिपोर्ट भी इसी प्रवृत्ति को बताती है जो पंजाब के स्कूलों को लेकर किया गया था। वहां की मुख्य शिकायत तो यही रही कि सरकारी स्कूल दलित स्कूल में बदल गए हैं क्योंकि बाकी लोग अपने बच्चों को निजी और अंग्रेजी मीडियम स्कूल में भेजते हैं। ऐसे स्कूल अब गांव-गांव में खुल गए हैं। यह बदलाव दिल्ली से लेकर बिहार तक में देखा जा सकता है। पंजाब के सरकारी स्कूलों में अच्छे भवन हैं, शिक्षक हैं, पढ़ने के बाकी साधन हैं लेकिन समाज के ऊंचे तबके के बच्चे नदारद हैं। बिहार के देहात तक में पहुंचे प्राइवेट स्कूल, जो असल में बेरोजगार और पढ़े-लिखे लड़के-लड़कियों के बल पर ही चलते हैं। अब हास्टल और ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कराके दूर-दूर से बच्चे जुटाने लगे हैं। 'टीस' वाली रिपोर्ट में छात्रों की संख्या की गिरावट को रेखांकित करने के साथ यह भी बताया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 लागू होने के बाद से शिक्षकों की संख्या में छह लाख की बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में छात्रों की संख्या गिरना ज्यादा चिंता की बात है। रिपोर्ट में एक दूसरी धनात्मक प्रवृत्ति को भी रेखांकित किया गया है कि अध्यापकों में महिला शिक्षिकाओं का हिस्सा तेजी से बढ़ा है। अब यह 54 फीसदी तक पहुंच गया है जो भारत के लिए गर्व की बात होनी चाहिए पर इसमें एक कमी है। यह वृद्धि शहरी ज्यादा है ग्रामीण कम। शहरी शिक्षकों में महिलाओं का हिस्सा जहां 67 फीसदी है वहीं ग्रामीण इलाकों में उनका अनुपात 47 फीसदी है। यह चिंता की खास बात नहीं है लेकिन रिपोर्ट में एक कक्षा में कई-कई वर्ग के विद्यार्थियों को साथ पढ़ाने का मर्ज बढ़ता गया है। पहले वाले सर्वेक्षण में ऐसा 39 फीसदी कक्षाओं के साथ था तो अब यह बढ़कर लगभग आधा हो गया है। यह अनुपात सरकारी स्कूलों का है। बल्कि कई स्कूल तो अकेले मास्टर के बल पर चल रहे हैं। संसाधनों के प्रबंधन और विद्यार्थियों की कमी के नाम पर उनको बंद करने की परिघटना अलग चिंता का विषय है। बंद होने वाले स्कूलों के मामले में उत्तर प्रदेश चैंपियन है। ऐसा दिल्ली में भी हुआ है जहां लंबे समय तक शासन करने वाले आप के लोग सरकारी स्कूलों पर ज़्यादा ध्यान देने का दावा करते रहे हैं। निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए अनहोम ने जरूर काफ़ी प्रयास किया लेकिन उनके शासन में भी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटी। शिक्षा के अंदर के बदलावों के साथ यह भी अच्छा हुआ है कि शिक्षा का मामला चुनावी मुद्दा बन रहा है। इस बार उत्तर प्रदेश में भी स्कूलों का बड़े पैमाने पर बंद होना मुद्दा बन गया है। दिल्ली में यह लगातार एक मुद्दा रहा है। ऐसे में इस रिपोर्ट के नतीजों पर चर्चा न होना हैरान करता है।
तेल, संप्रभुता, दबाव और भारत: ट्रम्प के रूस पर प्रतिबंध
शिंगटन के रूस-प्रतिबंध कानून पर भारत की चेतावनी महज़ टैरिफ विवाद नहीं है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे के बीच, दोनों महाशक्तियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बादशाहत को लेकर होड़ मची है।
नेताओं की नीलामी और लोकतंत्र की मौत
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट कहती है कि लोकतंत्र की मौत अचानक नहीं हुई , उसे धीरे-धीरे मारा गया , पहले उसके वोट खरीदे गए, फिर उसके प्रतिनिधि, पहले उसके सवाल मारे गए, फिर उसकी आवाज . लेकिन उसकी सांस तब भी चल रही थी जब वोट पैसों से मिल रहे थे , उसकी नब्ज तब भी ... Read more
लुटियंस दिल्ली में कचरा प्रबंधन अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कचरा पैदा करने वालों की जेब पर भी सीधा असर पड़ेगा।
विचार: संघ की प्राथमिकता में समरसता
संघ प्रमुख का विदेश दौरा भारत की घरेलू राजनीति के लिए भी अहम रहा, क्योंकि उन्होंने धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध एक लक्ष्मण रेखा खींची
विचार: मजबूत होता भारत का सुरक्षा कवच
भारतीय जनसंघ ने अपने 1964 के पटना अधिवेशन में प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की थी कि भारत को परमाणु बम बनाने के सभी प्रयत्न करने चाहिए। “सिद्धांत एवं नीतियां” नामक दस्तावेज में भी परमाणु अस्त्रों का निर्माण करने की बात की थी।
जागरण संपादकीय: सवालों में आईआईटी बॉम्बे
चूंकि आत्महत्या करने वाले छात्र सभी वर्गों के रहे हैं, इसलिए इस नतीजे पर पहुंचना सही नहीं कि इन संस्थानों में वर्ग विशेष के छात्रों के प्रति भेदभाव होता है, लेकिन इतना तो है ही कि छात्रों को तनावमुक्त वातावरण प्रदान करने की आवश्यकता है।
लहलहाते खेतों से ही दूर होगी पर्वतीय गांवों की वीरानगी
पहाड़ में सिमटती खेती और पलायन की दर अब स्थानीय पारिस्थितिकी व सामाजिक जीवन-तंत्र को प्रभावित करने लगी हैं। चिंताजनक है कि पहाड़ में खेती का परंपरागत तंत्र, जिसने सदियों तक हिमालयी गांवों को जीवंत बनाए रखा…
छात्र खुदकुशी पर हो गंभीर संवाद
आईआईटी, मुंबई के बीटेक, द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वोकाडे की आत्महत्या ने एक बार फिर देश के उच्च शिक्षा जगत में गंभीर बहस छेड़ दी है। इससे पहले आईआईटी, दिल्ली और कानपुर में भी दो छात्रों ने खुदकुशी कर ली थी, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं…
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर बिहार के जमुई तक जब लड़कियों की आजादी को रौंदने वाली घटनाओं की मर्मांतक खबरें सिहरन पैदा कर रही थीं, ठीक उन्हीं पलों में जापान के कारोगी स्पोर्ट्स पार्क में भारतीय बेटियां हमें यह भरोसा सौंप रही थीं…
आईआईटी बॉम्बे के छात्र आत्महत्या से जुड़े सवाल
आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को हुई मृत्यु ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, परीक्षा में बढ़ती अनैतिकता, शिक्षकों की जवाबदेही, मानसिक स्वास्थ्य और परिसरों में राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे अनेक गंभीर प्रश्न एक साथ खड़े कर दिए हैं। इस ... Read more
ध्यान के लिए सबसे उत्तम है पद्मासन, फायदे और करने का सही तरीका
नई दिल्ली, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और मानसिक अशांति आम समस्या बन गई है। ऐसे में योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को शांत करने में भी मदद करता है। पद्मासन योग का एक प्रमुख आसन माना जाता है, जिसे ध्यान और मानसिक एकाग्रता के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।
डेंगू और सांस की बीमारियों की वजह से अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ : चेन्नई
चेन्नई, चेन्नई के प्राइवेट अस्पतालों में फ्लू, सांस से जुड़े संक्रमण और डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके कारण ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं, वार्ड भरे हुए हैं और भर्ती के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
मेरी पहली यात्रा: अनुभव के अंतर्जगत् में स्वप्न और संसार के पथिक का रोजनामचा
जब मैं अपनी जन्मभूमि से विदा लेकर निकला, तब रास्ते में मुझे मेरे विद्यालय के अध्यापक दिखाई पड़े। उनसे सीधे बातचीत तो नहीं हुई, परंतु मेरे अंदर का शिष्य-भाव जाग उठा और मैंने मन ही मन उन सभी को प्रणाम किया और आगे बढ़ता रहा।
ललित सुरजन की कलम से सुई की नोंक, हल की मूठ
'वर्धा में सबसे अच्छी बात यह हुई कि दो दिवसीय कार्यक्रम का आरंभ नृतत्वशास्त्री प्रोफेसर नदीम हसनैन के बीज वक्तव्य के साथ हुआ।
भाजपा की दुविधा यह है कि वह भारतीयों की प्रचलित खानपान की आदतों और अपने शाकाहार लादने के एजेंडे के बीच संतुलन कैसे कायम करे।

