जगह-जगह कठघरे में खड़ी विविधता

अफगान सिखों का पहला जत्था काबुल से भारत पहुंच चुका है। मौका मिलते ही अफगानिस्तान में रह रहे बाकी सिख भी उस देश को हमेशा के लिए छोड़ देंगे, जिसे वे सदियों से अपना मानते रहे हैं। काबुल में इस समय लगभग...

लाइव हिन्दुस्तान 4 Jul 2022 12:47 am

विश्वास और विकास की निरंतरता के सौ दिन: जानें अपराध के लिए कुख्यात उत्तर प्रदेश कैसे 'सक्षम समर्थ प्रदेश' के रूप में स्थापित हुआ

कभी संगठित अपराध सत्तापोषित भ्रष्टाचार सांप्रदायिक दंगों और कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति के लिए कुख्यात रहा उत्तर प्रदेश आखिर कैसे सक्षम-समर्थ प्रदेश के रूप में स्थापित हो सका यह तमाम लोगों के लिए कौतूहल का विषय है किंतु बदलाव व विकास का उत्तर प्रदेश माडल देश के समक्ष है।

जागरण 3 Jul 2022 11:31 pm

पशु : मानव से अधिक मर्यादित

Gulab Kothari Article : अफ्रीका के सेरेनगेटी अभयारण्य में जाकर एक बार तो आप भूल जाते हो कि आप मानव बस्ती से हो। जैसे एलियंस का अपना विश्व है, पशु-पक्षी-जलचरों का भी स्वतंत्र विश्व है। कर्मयोगी मानव सिक्के का एक पहलू है, तो अन्य जीव सिक्के का दूसरा पहलू। है तो सिक्के का हिस्सा। इसके बिना ब्रह्माण्ड का स्वरूप अधूरा ही होगा। हमको इस सृष्टि को भी मानव का ही प्राकृत-व्याकृत स्वरूप मानकर समझना होगा। मनोरंजन का विषय तो हो ही नहीं सकता, जैसा कि आज जंगल सफारी में शेर को देखकर आनन्दित होते हैं। क्या शेर देखने के लिए जीवन का इतना बड़ा कालखण्ड और धन खर्च करना मनोरंजन के निमित्त माना जाएगा! अज्ञानता की श्रेणी में आएगा अथवा जीवन के दुरूपयोग की श्रेणी में होगा। मनोरंजन भी एक प्रकार का भोग मात्र ही है। जैसे बिना किसी थकान के विश्राम भी विषतुल्य कहा गया है, वैसे ही सफारी भी एक सरकारी व्यापार बन गया है। जीवन की वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। जंगल में सभी प्रकार के जानवर रहते हैं, किन्तु पर्यटकों को तो शेर देखना है। वाह! आज भी किसी शहर से राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री गुजरते हैं, तो जनता जिज्ञासा के साथ, आतुर होकर देखती है। कभी यही बात राजा की सवारी पर लागू होती थी। बाकी किसी की कोई पूछ नहीं। प्रश्न उठता है कि क्या कोई पुण्यवान राजा ही योगभ्रष्ट होकर शेर बनता है? क्या कोई पुण्यवान ब्राह्मण-साधक ही शरीर त्यागकर गाय बनता है? गाय को दिव्य पशु कहा जाता है, जिसके शरीर में सभी 33 देवताओं का निवास माना गया है? शेर निश्चित ही क्षत्रिय राजा है। प्रजा का रक्षक है। आज तो सरकारें भक्षक होती जा रही हैं। वे क्षत्रिय नहीं हैं। क्षत्रिय का धर्म प्रजा का कल्याणकारी होना, शत्रुओं से स्वधर्मानुकूल युद्ध करना, परिस्थितियों के अनुकूल। श्रेयान्स्वधर्मो विगुण: परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:।। (गीता 3.35) अच्छे आचरण में लाए हुए दूसरे के धर्म से अपना गुणरहित धर्म ही उत्तम है। अपने धर्म में मरना कल्याणकारी है। दूसरे के धर्म में मरना भयावह है। क्योंकि स्वभाव से नियत किए हुए स्वधर्म रूप कर्म को करता हुआ मनुष्य पाप का भागी नहीं बनता। 18/47 यह भी पढ़ें : शरीर ही ब्रह्माण्ड: मानव योनि में पशु भाव शेर को हमने राजा कहा, क्षत्रिय माना। वर्णों के बारे में गीता में विस्तार है। ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परन्तप। कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणै:।। (गीता 18.41) - सभी वर्णों के कर्म स्वभाव (प्रकृति) से उत्पन्न गुणों के द्वारा विभक्त किए गए हैं। सभी प्राणियों में अहंकृति-प्रकृति और आकृति समान होती है। तब क्या शेर अपनी प्रकृति को बदल सकता है अथवा आकृति को बदल सकता है? नहीं बदल सकता। ये सारा प्रकृति के नियंत्रण में होता है। हम भी नहीं बदल सकते अपनी अहंकृति और आकृति। क्षात्र धर्म क्या है- शेर भी जानता है, मानता है। शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्। दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्।। (गीता 18.43) अर्थात्-शूरवीरता, तेज, धैर्य, चातुर्य, युद्ध से न भागना, दान देना, स्वामीभाव- ये क्षत्रिय के स्वाभाविक लक्षण है। शेर प्रजा का पालक भी है। बिना भूख के किसी भी जीव को आहत नहीं करता। राजा रजोगुणी होता है। राज रूप रजोगुण कामना और आसक्ति से उत्पन्न होता है। वह जीवात्मा को कर्मों के और उनके फलों के सम्बन्ध से बांधता है। (गीता 14/7) यह भी पढ़ें : शरीर में भी अग्नि-वायु-आदित्य रजोगुण के बढऩे पर मृत्यु को प्राप्त होकर कर्मों की आसक्ति वाली योनियों में उत्पन्न होता है (गीता 14/15)। मनुष्य योनि भी इसी श्रेणी में है। क्योंकि राजस कर्मों का फल दु:ख ही होता है (गीता 14/16)। क्योंकि रजोगुण लोभ का भी कारक है। दूसरे राज्य को जीत लेने का लोभ। राजस जीव यक्ष/राक्षसों को पूजते हैं। (गीता 7/5) आहार भी अपनी इच्छा के अनुसार ही करते हैं। फलों को दृष्टि में रखकर ही कर्म करते हैं। अपने क्षेत्र के प्रति, मर्यादा के प्रति अति जागरूक होते हैं। सेरेनगेटी में इतना बड़ा पशु समुदाय है, लाखों-लाख पशु है। बड़ी संख्या वाले पशु-विल्ड बीस्ट, जेब्रा, कुछ हिरण जैसे पशु सम्वत्सर (ऋतु चक्र) के साथ पलायन करते रहते हैं। ये पर्यटकों का प्रधान आकर्षण है। वार्षिक चक्र है। इस पलायन में न शेर पलायन करते हैं, और न ही अन्य हिंसक पशु। आश्चर्य यह है कि इनके साथ ही इनका भोजन बनने वाले जानवर-हिरण इत्यादि भी पलायन नहीं करते। भोक्ता और भोग्य। हालांकि स्वयं शेर भी मनुष्य की तरह भोग योनि ही है। मनुष्य में कर्म की प्रधानता भी रहती है, जो शेर में नहीं रहती। यह भी पढ़ें : मानवविहीन पशु साम्राज्य : सेरेनगेटी पशु को गीता के ज्ञान से क्या? किन्तु सृष्टि में सबका अपना अपना महत्व है। कुछ भी अनावश्यक या व्यर्थ नहीं है। शेर तो वैसे भी दुर्गा का वाहन है (शेरावाली कहते हैं)। सिंहनाद और सिंहावलोकन दोनों ही इसकी पहचान हैं। मर्यादित-संयमी प्राणी है सिंह। गीता में कर्म सिद्धि के पांच हेतु कहे हैं-अधिष्ठान, कर्ता, करण, चेष्टाएं और देव (प्रकृति)। मूल में तो सिंह अधिष्ठान पर आधारित योनि ही है। शक्ति का वाहन है। यही इसकी पहचान है। असुरों से युद्ध में शक्ति का सहायक है। मनुष्य भी जब किसी अपराधी या समाज कंटक से संघर्ष करता है, शक्ति का आह्वान करता है, तो सिंह गर्जना के साथ ही लड़ता है। सूक्ष्म में तो शेर भी षोडशी रूप आत्मा ही है। हमारी तरह ही। व्यवहार में हमसे बहुत आगे है। पशु मूक होते हुए भी मर्यादा एवं गंभीरता से बाहर नहीं जाता। समय के साथ आक्रामकता बढ़ाने के बजाए स्वयं को, परिवार को नए रूप में सुरक्षित रखना सीख लिया। यह भी पढ़ें : शरीर ही ब्रह्माण्ड: मैं यज्ञ का परिणाम सेरेनगेटी में शेरों को पेड़ों पर विश्राम करते देखने का पहला अनुभव था। परिवार के साथ। अर्थात् कहीं तीन, कहीं पांच एक साथ, एक ही पेड़ पर। अनुशासन पूर्ण प्राकृतिक। निश्चय ही भोगकाल पूर्ण करके पुन: किसी कुलीन-समृद्ध परिवार में जन्म लेंगे। इसके ठीक विपरीत आज के अधिकांश सत्ताधारी भ्रष्ट, अमर्यादित, आक्रामक व मूल्यविहीन हैं। इनको सेरेनगेटी जैसे अभयारण्यों में उगना होगा। सेेरेनगेटी का कोई पशु-पक्षी प्रकृति के नियमों के बाहर नहीं जीता। निश्चित रूप से उच्च योनियों में जाने लायक हैं। यह भी पढ़ें : शरीर ही ब्रह्माण्ड: क्षीरसागर योषा-वृषा का आशय गरुड़ पुराण का एक अंश यहां उद्धृत करना उचित होगा। अध्याय 225 में वर्णन मिलता है- ''जीव नरक भोग करके पाप योनियों में जन्म लेता है। याचक कृमि योनि में, गुरु-सम्पत्ति की कामना करने वाला श्वान, मित्र का अपमान करने वाला गधे की योनि में। माता-पिता को कष्ट पहुंचाने वाला कछुए की योनि में, स्वामी से छल करने वाला वानर की योनि में जाता है। विश्वासघाती मत्स्य योनि में, अनाज की चोरी करने वाला चूहे की योनि में, परस्त्री का अपहरण करने वाला भेडिय़े की योनि में जाता है।' बहुत लम्बी सूची है। उतने ही भ्रष्ट, उतने ही वनक्षेत्र। कलियुग अलग है। मर्यादा में कारागार की सी अनुभूति होती है। तृष्णा और ईष्र्या चिन्तन पर हावी है। स्वर्ग की चाह नहीं है। आत्मा की चर्चा नहीं है। शरीर का भोग स्वर्ग का पर्याय है। एक तथ्य यह भी है कि एक जैसा कृत्य करने वाले अगले जन्म में सब एक ही योनि में साथ हो जाएं शायद! क्रमश: यह भी पढ़ें : शरीर ही ब्रह्माण्ड: पृथ्वी और सौर प्राणों का सम्मिलन मानव यह भी पढ़ें : शरीर ही ब्रह्माण्ड: मैं भी देवता यह भी पढ़ें : शरीर ही ब्रह्माण्ड: क्वाण्टम को भारत आना पड़ेगा यह भी पढ़ें : शरीर ही ब्रह्माण्ड: अर्द्धेंद्र की पूर्णता दाम्पत्य में

पत्रिका 3 Jul 2022 11:18 pm

कर्ज देते समय बैंकों को बरतनी होगी सतर्कता, एनपीए वसूली के लिए अधिक अधिकार देने की जरूरत

आरबीआइ के आंकड़ों से पता चलता है कि बैंकिग क्षेत्र में लगभग 35 प्रतिशत घोटाले अंदरूनी होते हैं जो केवल कनिष्ठ और मध्य स्तर के प्रबंधन की मिलीभगत का नतीजा हैं। स्पष्ट है कि कर्ज देते समय बैंकों को आवश्यक सतर्कता का परिचय देना चाहिए।

जागरण 3 Jul 2022 10:56 pm

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पीएम मोदी और अमित शाह का परिवारवादी दलों पर निशाना

हैदराबाद में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने परिवारवादी दलों पर जिस तरह निशाना साधा उससे यह नए सिरे से स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा ऐसे दलों के खिलाफ अपना अभियान और तेज करने वाली है।

जागरण 3 Jul 2022 10:16 pm

घर से आ रही थी बदबू : पड़ोसियों से मिली सूचना पर पहुंची पुलिस तो भीतर मरा पड़ा था युवक

संदिग्ध हालत में एक युवक की घर पर लाश मिली, यह हत्या है या आत्महत्या जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर...

हरि भूमि 3 Jul 2022 6:15 pm

महाराष्‍ट्र, एमपी, कर्नाटक... पेंच फंसने पर कहीं काम नहीं आया, क्‍या खत्‍म कर देना चाहिए दल-बदल कानून?

Anti-defection Law News: महाराष्‍ट्र का ताजा घटनाक्रम हो मध्‍य प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश के पुराने अनुभव... यही बताते हैं कि संकट के वक्‍त दल-बदल कानून काम नहीं आता।

नव भारत टाइम्स 3 Jul 2022 2:09 pm

चार्ज में मोबाइल लगाकर करते हैं बात तो पहले देख ले ये वीडियो, हुआ धमाकेदार ब्लास्ट

किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान को इस्तेमाल करते समय कभी उसे चार्जिंग पर नहीं लगाया जाना चाहिए। जी हाँ क्योंकि कई बार ऐसे चौकाने वाले मामला हो जाते हैं जो देखकर हमारे होश उड़ जाते हैं। कई बार लोग अपने फोन को चार्ज में लगाकर उसे घंटो इस्तेमाल करते हैं। जी हाँ और इसे लेकर चेतावनी भी दी जाती है, इसके बाद भी लोग ऐसा करते हैं। अब हाल ही में भी एक घटना सामने आई है। जी दरअसल अब एक वीडियो सोशल साइट्स पर वायरल हो रहा है और इस वीडियो को जो देख रहा है उसके होश उड़ रहे हैं। इस वीडियो में एक महिला मोबाइल चार्ज पर लगाकर किसी से बात कर रही होती है। इस दौरान जो हादसा होता है, उसे देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। चार्ज में मोबाइल लगा कर बात कर रही थी युवती, फिर जो हुआ देख के दंग रह जायेंगे आप #Mobile #Mobileblast #Udaipur pic.twitter.com/6AfwKdmt9u — News Track (@newstracklive) July 3, 2022 आप सभी को बता दें कि इस समय इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तहलका मचा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इस वीडियो को देखकर लोगों के रातों की नींद उड़ गई है। यह वीडियो इतना खौफनाक है कि लोग अपने फोन को इस्तेमाल करने से डर रहे हैं। आप देख सकते हैं इस वीडियो में महिला फोन पर बात करते समय यहां-वहां टहल रही है। जी हाँ और इस दौरान वह जिस फोन से बात कर रही होती है, उसे चार्ज पर लगाई होती है। वहीं महिला ने अपने बेड के नजदीक बने पॉइंट पर फोन को चार्जिंग पर लगाई हुई थी लेकिन तभी न जाने क्या होता है कि महिला को जोर का झटका लगता है। इस वीडियो में आप देख सकते है वह किसी से लगातार बातें भी कर रही थी, लेकिन अचानक ही उसे जोर का झटका लगता है और वह अपने हाथ से मोबाइल फेंक देती है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि चार्जिंग पॉइंट से चिंगारी सी निकलती है, हालांकि, गनीमत यह रही कि महिला को कोई भी गंभीर चोट नहीं आती। इस वीडियो को अब लोगों को समझाइश देने के लिए शेयर किया जा रहा है। बाप-बेटे ने बनाया महिला का गंदा वीडियो और फिर कर डाला ये काम बच्ची को देख राहुल गांधी ने किया ऐसा काम कि वीडियो हो गया वायरल ये है दुनिया का सबसे महंगा कंडोम

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 3 Jul 2022 11:57 am

सहेजें शब्द ब्रह्म की संस्कृति कोई भी शब्द कठिन नहीं

राजेश कुमार व्यास कला समीक्षक शब्दों की संस्कृति के लिए यह संकट का दौर है। इस विकट समय में बाजार पोषित मूल्य कुछेक शब्दों में ही जीवन चलाने को प्रेरित कर रहे हंै। संकट हिन्दी शब्दों पर ही नहीं है। दूसरी भाषाओं के शब्दों को बचाने का भी समय है। इमोजी के दौर में शब्द हाशिए पर हैं। हमारी हर हरकत पर बाजार की नजर जो है। इंटरनेट से जुड़े किसी भी माध्यम पर आपने कुछ पसंद किया, अपने विचार रखे नहीं कि बाजार अनुभूति कराएगा कि आपके मन को हमने बांच लिया है। और फिर जो कुछ स्क्रीन पर दिखेगा, उस पर ही बटन दब जाएगा। फेसबुक को ही लें। पहले इमोजी तक ही विकल्प थे, पर अब तो पोस्ट के आधार पर हिन्दी और अंग्रेजी में पहले से गढ़े 'लाजवाब, 'बहुत सुंदर, 'बधाई', 'सुपर और भी बहुत सारे शब्द जैसे नूंत देते दिखने लगे हैं। पर सोचिए, इस शब्द एकरसता से कितना कुछ हमारा मन का छीना जा रहा है। शब्द प्रयोग में ही सदा बढ़त करते हैं। हिन्दी में अधिकतर शब्द संस्कृत से आए हैं। पर, लेखक बहुत से स्तरों पर स्वयं भी बहुतेरी बार नए—नए शब्दों से भाषा को समृद्ध और संपन्न करते रहे है। भाषा 'सिन्टेक्स से ही आगे बढ़ती है। हर शब्द को बरतने की अपनी परम्परा और संस्कार होते हैं। इसलिए शब्द को व्याकरण ही नहीं, ध्वनित अर्थ से भी देखा जाना चाहिए। विशेष शब्दचय, विशेष संदर्भों में अपनी निजता लिए भी होते हैं। मेरे कला लेखन में परम्परा के साथ अपनी मायड़ भाषा राजस्थानी की लय से प्रेरित बहुत से शब्द अनायास प्रयुक्त हुए हैं, कुछ नए बने भी हंै। गौर किया बहुत से स्तरों पर उनका चलन हो गया। ऐसा ही होता है। देशज शब्दों से, लेखक की अपनी रुचि से गढऩे और बरतने से ही शब्द संपदा बढ़ती है। यह समझने वाली बात है कि शब्द शव है, तब तक जब तक कि उनका प्रयोग नहीं हो। 'कादम्बिनी अब तो बंद हो चुकी है, परंतु जब यह पत्रिका प्रारम्भ हुई, तो इसका नामकरण महादेवी वर्मा ने किया था। बहुतों को पत्रिका शीर्षक बहुत क्लिष्ट लगा, पर बाद में बहुत कम समय में 'कादम्बिनी शब्द लोकप्रिय हो गया। सोचिए, क्लिष्ट मानकर यदि शब्दों का प्रयोग ही नहीं हो, तो बहुत सारे शब्द सदा के लिए क्या हमसे जुदा नहीं हो जाएंगे। असल में हम किसी शब्द का प्रयोग ही नहीं करेंगे, तो वह हमें क्लिष्ट ही लगेगा। बहरहाल, कुबेरनाथ राय के निबन्ध संग्रह हैं—'गन्धमादन, 'रस आखेटक, 'मराल, 'पर्णमुकुट, 'निषाद बांसुरी आदि। पढेंग़े तो शब्द-शब्द मन मथेगा। बकौल कुबेरनाथ राय, उनके निबंध वाक्यों के चन्दन—काष्ठ हैं, जिनसे भावों और विचारों की सुगन्ध प्राप्त करने के लिए पाठक को थोड़ा सा निर्मल—तरल मन देकर इन्हें मेहनत से घिसना पड़ेगा। यह सच है, चंदन को घिसेंगे तभी तो उससे सुगंध आएगी। हम कहते हैं, 'बम बम भोले! कहां से आए ये शब्द? महादेव की अष्टमूर्ति व्योम से। व्योम माने महादेव। वह जो निराकार, शून्य सत्ता का प्रतिनिधित्व करता है। पर व्योम—व्योम महादेव रुचता कहां है। शब्द उच्चारण और बरतने की यही हमारी सौंदर्य दृष्टि है। कला या साहित्य में सपाट कुछ भी रंजक नहीं होता। लिखे में शब्द अर्थगर्भित हों और कलाओं में अर्थ के आग्रह से मुक्त व्यंजना होगी, तभी अंतर्मन आलोकित होगा। शब्द की संस्कृति उसे बरतने, नए शब्द गढऩे में ही बढ़त करेगी। और हां, शब्द बचेंगे तभी हम, हमारा मूल बचा रहेगा। विचारें, आखिर ऐसे ही तो शब्द को ब्रह्म नहीं कहा गया है।

पत्रिका 3 Jul 2022 11:38 am

'टीवी नहीं तो बीवी नहीं', चौकाने वाला है ये मामला

पति-पत्नी के बीच झगड़े होना आज के समय में बहुत बड़ी बात नहीं है, हालाँकि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक अनोखा मामला सामने आया है। जी दरअसल यहां एक दंपति के बीच झगड़े का कारण डिश का रिचार्ज बना है। सुनकर आपको यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सच है। जी दरअसल, यहां रहने वाले एक दंपति के घर में डिश का रिचार्ज खत्म हो गया था जिसके कारण नाराज पत्नी पति से अनबन करके मायके चली गई। यह मामला अब बिलासपुर के महिला थाने में पहुंचा है। बताया जा रहा है थाने पहुंची महिला ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि उसे पति से तलाक चाहिए। इस मामले में पुलिस से मिली जानकारी को माने तो, डिश टीवी का रिचार्ज खत्म हो जाने की वजह से पत्नी ससुराल को छोड़कर अपने मायके चली गई। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में पति का कहना है कि उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उसकी जेब में उस समय रिचार्ज के पैसे नहीं थे। इस मामले में युवक ने कहा कि उसने अपनी पत्नी से कहा था कि वह शाम को काम से लौटकर डिश टीवी का रिचार्ज करवा देगा, लेकिन शाम को उसके बटुए में पैसे नहीं थे। जिसको लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया और इसके बाद नाराज होकर युवती अपने मायके चली गई थी। मिली जानकारी के मुताबिक, घर छोड़कर जाते समय नाराज पत्नी ने अपने पति से कहा कि अगर टीवी नहीं, तो बीवी भी नहीं। इस मामले में पत्नी की इस अनोखे कारण के कारण नाराजगी को लेकर पुलिस और काउंसलर दोनों हैरान थे। वहीं बिलासपुर के महिला थाना में काउंसिंग करने वाली नीता श्रीवास्तव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, 'ये स्थिति बेहद गंभीर है।' इसी के साथ उन्होंने कहा कि, 'इस समय युवा दंपति छोटी-छोटी बातों पर विवाद कर लेते हैं। जो धैर्य और समझदारी की कमी के चलते तलाक तक पहुंच जाता है।' वहीं इस मामले में भी मात्र ढाई सौ रुपए के टीवी रिचार्ज के कारण विवाद इतना बढ़ गया कि पत्नी तलाक की मांग करने लगी। इसी के साथ उन्होंने आगे कहा कि हालांकि दोनों को समझाने के बाद विवाद शांत हुआ है और पत्नी मायके से वापल लौट गई है। हिंदुस्तान उर्वरक में निकली नौकरियां, जल्द कर ले आवेदन 'कन्हैयालाल के बाद अब तेरी बारी...', इस मशहूर स्टार को मिली गला काटने की धमकी CM बनते ही एक्शन में दिखे एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र विधानसभा में सील हुआ शिवसेना का दफ्तर

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 3 Jul 2022 11:35 am

लोकतांत्रिक प्रणाली में सबके लिए अनुशासन जरूरी

लोकतांत्रिक प्रणाली में सबके लिए अनुशासन जरूरी एन.एम. सिंघवी प्रशासनिक सुधार मानव संसाधन विकास व जनशक्ति आयोजना समिति, राजस्थान के अध्यक्ष रहे हैं अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र के लिए अवधारणा दी थी कि जनता का राज, जनता के लिए, जनता द्वारा ही किया जाना चाहिए। इस अवधारणा में जो मान्यताएं मानी गई होंगी, वे जनता का शिक्षित होना, जनता की संकुचित मनोवृत्ति न होना, जनता का रूढि़वादी नहीं होना तथा अधिकारों से अधिक देश और समाज के लिए अपने कत्र्तव्य के प्रति जागरूक होना भी सोचकर कहा गया होगा। आज के परिदृश्य में हम सोचें तो क्या हम इन मान्यताओं पर खरे उतरते हैं? लोकतंत्र में हर घटना की प्रतिक्रिया संभव है, परंतु हमें याद रखना चाहिए कि हमारे देश में सत्य और अहिंसा की अवधारणा पर स्वतंत्रता प्राप्त कर लोकतंत्र की स्थापना की गई है। लोकतंत्र के बारे में और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमारी सोच बन गई है कि हम कुछ भी कर सकते हैं और कुछ भी बोल सकते हैं। हम हर बात के लिए सरकारों पर दोष मढ़ कर अपने कत्र्तव्य की इति श्री समझ लेते हैं। हमारी जनसंख्या के आकार को देखते हुए पुलिस बिना जन सहयोग के अकेले कुछ नहीं कर सकती। तोडफ़ोड़ पर उतारू हो जाना और मनचाही बयानबाजी कर देना लोकतंत्र के लिए दीमक की तरह है। लोकतंत्र को चलाने के लिए जनता में भी अनुशासन की आवश्यकता होती है। कार्ल माक्र्स ने पूंजीवाद और साम्यवाद के लिए लिखा है कि पूंजीवाद में साम्यवाद के बीज छिपे होते हैं और साम्यवाद में ही पूंजीवाद के बीज छिपे होते हैं। यदि अनुशासित रह कर किसी भी प्रणाली को नहीं अपनाया गया, तो उसके विरोधियों को अवश्य अवसर मिलता है। अब्राहम लिंकन यह कहना भूल गए कि लोकतंत्र में तानाशाही के बीज पलते हैं और तानाशाही में ही लोकतंत्र के बीज पलते हैं। हमें सावधान और अनुशासित रहकर लोकतंत्र को पोषित करना चाहिए।

पत्रिका 3 Jul 2022 11:28 am

Maharashtra Assembly Session Live: महाराष्ट्र विधानसभा में आज शिंदे सरकार की पहली परीक्षा, बीजेपी के राहुल नार्वेकर का मुकाबला शिवसेना के राजन साल्वी से होगा

मुख्यमंत्री शिंदे ने दावा किया है कि सरकार को विधानसभा में 170 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इसलिए राहुल नार्वेकर को चुने जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

हरि भूमि 3 Jul 2022 10:05 am

बारिश में इन जगहों पर जाने की ना करें गलती वरना खतरे में पड़ सकती है जान

जून और जुलाई ये दो महीने ऐसे होते हैं जब लोग अपने अपने काम से थोड़ा समय निकालकर घूमने का प्लान बनाते हैं।जी हाँ और लोग अक्सर ऐसी जगहों पर जाने का सोचते हैं जो नजदीक हो और जहां पर वह काफी एंजॉय कर सके। इस लिस्ट में दिल्ली और उसके आसपास के राज्यों में रहने वाले लोगों की पहली पसंद अक्सर पहाड़ ही होते हैं, हालाँकि यहाँ से हिल स्टेशन जाने में ज्यादा समय नहीं लगता है। लेकिन आपको बता दें कि जून और जुलाई के महीने में मॉनसून आ जाता है ऐसे में इन हिल स्टेशन्स पर जाना आपके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। आज हम आपको उन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ आपको इन दिनों में नहीं जाना चाहिए। कलिम्‍पोंग- कलिम्‍पोंग वेस्ट बंगाल में स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। जी हाँ और जुलाई के महीने में यहां काफी ज्यादा बारिश होती है। वैसे तो बारिश के मौसम में यह जगह काफी खूबसूरत नजर आती है लेकिन बागडोगरा से कलिम्‍पोंग जाते समय ऐसी कई जगहें पड़ती है जहां लैंडस्लाइड आने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। जी हाँ तो ऐसे में जुलाई में यहां जाना आपके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। असम- जुलाई के महीने में बारिश ज्यादा होने के कारण असम में हर साल बाढ़ आती है। यहाँ बारिश और बाढ़ की वजह से कई जगहों को टूरिस्ट्स के लिए बंद कर दिया जाता है। तो आप जुलाई के महीने में यहां घूमने का प्लान बिल्कुल भी ना बनाएं, जी दरअसल यहां घूमने का सबसे सही महीना अगस्त है, क्योंकि इस दौरान यहां बारिश रुक जाती है। इसी के साथ ही काजीरंगा नेशनल पार्क भी खुल जाता है। हिमाचल प्रदेश - पहाड़ों में मॉनसून के दौरान लैंडस्लाइड आना काफी आम होता है। हालाँकि इसके बावजूद भी लोग मॉनसून में पहाड़ों पर घूमने का प्लान बनाते हैं। ऐसे में पहाड़ों में लैंडस्टाइड के दौरान आपको बिना किसी मदद के कई घंटों तक जाम में फंसना पड़ सकता है। तो जुलाई में हिमाचल प्रदेश जाने से बचें। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क- यहां पर जुलाई से अगस्त के बीच काफी ज्यादा बारिश होती है जिस कारण आप सफारी और रिवर राफ्टिंग जैसी एक्टिविटीज को एंजॉय नहीं कर पाएंगे। वहीं अगर आप ये सब एक्टिविटीज नहीं करना चाहते और होटल के कमरे से बारिश के दौरान यहां की सुंदरता को निहारना चाहते हैं तो यहां जा सकते हैं। ऋषिकेश- दिल्ली और इसके आसपास के राज्यों में रहने वाले लोगों की पहली पसंद ऋषिकेश होती है क्योंकि ये जगह काफी पास है। हालाँकि मॉनसून के दौरान आपको यहां जाने की गलती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। जी दरअसल ऋषिकेश में अक्सर लोग वॉटर एक्टिविटीज करने के लिए जाते हैं लेकिन मॉनसून के दौरान यहां पर सभी वॉटर एक्टिविटीज को बंद कर दिया जाता है, क्योंकि बारिश की वजह से गंगा नदी में पानी का लेवल काफी ज्यादा बढ़ जाता है। रणथंबोर- जुलाई के महीने तक रणथंबोर में भी मॉनसून आ जाता है। जी हाँ और इसके चलते जुलाई में रणथंबोर नेशनल पार्क को बंद कर दिया जाता है और इस दौरान आपको यहां उमस की दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। रणथंबोर जाने का सबसे सही समय दिसंबर और जनवरी है। हनीमून को बनाना है सबसे रोमांटिक तो जाएं लक्षद्वीप के इन बेस्ट द्वीप पर घूमने जा रहे हैं श्रीलंका तो इन जगहों पर जरूर करे सैर मानसून में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत है पुणे और मुंबई के समीप के ये स्थान

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 3 Jul 2022 9:53 am

Aarey Car Shed Dispute: आठ साल से चल रहे विवाद में अब तक क्या हुआ? आरे कारशेड मामले में उद्धव-फडणवीस फिर आमने-सामने

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य शहरी विकास विभाग को इस बारे में निर्देश दिए। इस मामले में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पलटवार किया। उद्धव ने कहा कि फैसला पलटने से उन्हें बेहद दुख हुआ है।

अमर उजाला 3 Jul 2022 9:30 am

प्राकृतिक विकास : भविष्य की कोख में बंजरता के बीज, मानव जाति की हिरासत में 'अपराजेय' ब्रह्मांड

मानव सभ्यता ने प्राकृतिक विकास की एक ऐसी स्थिति प्राप्त कर ली है, जहां मानव प्रजाति का संपूर्ण जीवन और सारे जीवित ग्रह पर नियंत्रण है। संपूर्ण जैवमंडल, ग्रह, यहां तक कि 'अपराजेय' ब्रह्मांड भी अब मानव जाति की हिरासत में है।

अमर उजाला 3 Jul 2022 4:52 am

नफरत के बीज : हिंसा पर मनुष्य का दर्शक बन जाना, समाज के मनोविज्ञान में आ रहे बदलाव का नतीजा

उदयपुर की हृदय विदारक घटना, जिसमें दो सिरफिरे युवकों ने सरे बाजार एक दर्जी की दुकान में घुसकर उसकी नृशंस हत्या कर दी, ने एक बार पुनः ये साबित कर दिया है कि समाज में मनुष्य बहुत तेजी से दर्शक बनते जा रहे हैं।

अमर उजाला 3 Jul 2022 4:47 am

भीगे हुए मौसम का मजा

बरसात में खाने-पीने का मिजाज थोड़ा अलग हो जाता है। दरअसल, यह मौसम गर्मी और सर्दी की संधि का मौसम है, इसलिए जब बारिश हो रही हो तो गरम-गरम पकौड़े, कुछ कुरकुरी, सोंधी चीजें खाने का मन होता है, तो कभी हल्का-फुल्का, सुपाच्य। मगर इस मौसम में ज्यादा मसालेदार और तीखी चीजें खाने से परहेज ही बेहतर है। कुछ ऐसे ही व्यंजन।

जनसत्ता 3 Jul 2022 3:12 am

जान से खिलवाड़: मकान में चल रही थी अवैध शराब की फैक्टरी, 250 लीटर दारू व इससे बनाने की मशीनें बरामद

सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन यह हकीकत है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक मकान में हजारों लोगों की जान से खिलवाड़ करने के लिए कच्ची शराब तैयार की जा रही थी।

अमर उजाला 3 Jul 2022 1:54 am

वंशवादी दलों के लिए खतरे की घंटी: उद्धव ठाकरे का जो हश्र हुआ, उनसे राजनीतिक पार्टियां चेत जाएं तो बेहतर

भाजपा ने वंशवादी दलों के खिलाफ देश में अपनी मुहिम और तेज कर दी है। यह कोई छिपी बात नहीं कि समाजवादी पार्टी डीएमके टीडीपी राकांपा झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसे तमाम क्षेत्रीय दल परिवारवाद के पर्याय बन गए हैं।

जागरण 2 Jul 2022 10:45 pm

सनक से लैस जिहादी सोच वाले बेलगाम और बेखौफ: देश में बढ़ रहा है मजहबी उन्माद

जिहादी तत्व उन लोगों को उदयपुर के कन्हैयालाल तेली की तरह से हत्या करने की धमकियां दे रहे हैं जो भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा के पक्ष में कुछ कह-लिख रहे हैं। उदयपुर और अमरावती की आतंकित करने वाली घटनाओं के पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

जागरण 2 Jul 2022 9:16 pm

सुविधा से ज्यादा जरूरी है सुरक्षा की सड़कें

भारत का सड़क यातायात तमाम विकास की उपलब्धियों एवं प्रयत्नों के असुरक्षित एवं जानलेवा बना हुआ है, सुविधा की खूनी एवं हादसे की सड़कें नित-नयी त्रासदियों की गवाह बन रही है। दुनिया की जानी-मानी पत्रिका ‘द लांसेट’ में इस मसले पर केंद्रित एक अध्ययन में बताया गया है कि भारत में सड़क सुरक्षा के उपायों ... Read more

अजमेरनामा 2 Jul 2022 7:46 pm

जर्मनी और इटली से खाद्यान्न भंडारण व साइलाे की संबंधी जानकारी लेगा हरियाणा, सहकारिता मंत्री के साथ पहुंची टीम

हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ बनवारी लाल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इटली और जर्मनी के दौरे पर है। इस यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल खाद्यान्न की खरीद प्रणाली का अध्ययन करेगा

हरि भूमि 2 Jul 2022 5:52 pm

क्या परिवारवादी राजनीति हो रही खत्म ? देवेंद्र फडणवीस का त्याग क्या गुल खिलायेगा ?

महाराष्ट्र सियासत का हालिया अध्याय भारत के लिए कुछ महासबक दे रहा है। सबसे पहला सबक तो यही है कि परिवारवाद की राजनीति पर जो पार्टी टिकी हुई है, वह खुद के लिए और भारतीय लोकतंत्र के लिए भी खतरा है। अब जो शिवसेना उद्धव ठाकरे के पास बची हुई है, वह कब तक बची रहेगी या बचेगी या नहीं बचेगी, कुछ पता नहीं। उसके दो टुकड़े पहले ही हो चुके थे जैसे लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह की पार्टियों के हुए हैं। दरअसल, परिवारवादी पार्टियां परिवार के अलग-अलग खंभों पर टिकी होती हैं। प्रभासाक्षी के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में महाराष्ट्र के घटनाक्रम और हैदराबाद में हो रही भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उठाए गए विषयों की समीक्षा की गई। इसे भी पढ़ें: क्या साहेब को सत्ता मोह ले डूबा ? उद्धव ठाकरे की किन गलतियों की सजा भुगत रही है शिवसेना महाराष्ट्र में नई सरकार लगातार फैसले ले रही है और पुरानी सरकार को झटका भी दे रही है। दरअसल, प्रदेश के नए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मेट्रो कार शेड को आरे कॉलोनी में ट्रांसफर करने के निर्देश दे दिए हैं। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने कानूनी टीम को न्यायालय को सूचित करने के लिए कहा है कि मेट्रो कार शेड को आरे कॉलोनी में ट्रांसफर किया जा रहा है। प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद एकनाथ शिंदे खेमे में अब सांसद भी शामिल होना चाहते हैं। भाजपा का दावा है कि शिवसेना के कम से कम 12 सांसद उनके संपर्क में हैं। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने बताया कि हमने 10 दिन तक सियासी घटनाक्रम को बारीकी से देखा और अब वहां पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार है। किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था, खुद एकनाथ शिंदे को भी कि वो मुख्यमंत्री बनेंगे। देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात से पहले तक एकनाथ शिंदे को यह बिल्कुल भी नहीं लगा था कि वो मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन तमाम बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि देवेंद्र फडणवीस की दिल्ली में हुई बैठकों के बाद एकनाथ शिंदे की ताजपोशी का फैसला हुआ। यह शिवसेना के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। इतना ही नहीं महाराष्ट्र की राजनीति के भीष्म कहे जाने वाले शरद पवार भी इस फैसले से अचंभित रह गए थे। उन्हें बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि एकनाथ शिंदे को सत्ता की कमान सौंपी जाएगी। हालांकि उन्होंने ट्वीट कर एकनाथ शिंदे को बधाई भी दी थी। आपको बता दें कि राज्यपाल से मुलाकात के बाद देवेंद्र फडणवीस ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया था कि एकनाथ शिंदे हमारे नेता होंगे और मैं मंत्रिमंडल से बाहर रहूंगा। उनके इस ऐलान ने सभी को अचंभित कर दिया था। हालांकि शीर्ष नेताओं के निर्देश के बाद देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल हुए और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। उनके इस त्याग को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने एक मराठी भाषा में एक खुला पत्र भी लिखा। जिसमें उनके फैसले की जमकर सराहना की। इसे भी पढ़ें: राजनीति चमकाने के लिए लिया जा रहा बवाल का सहारा! ऐसे कैसे सुधरेगा देश का हाल इसी बीच भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से जुड़े सवाल पर उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि भाजपा समय-समय पर वर्चुअल मोड पर भी बैठकें करती रहती है। इसके अलावा प्रदेश कार्यकारिणी की भी बैठकें हुई हैं तो पार्टी में लगातार काम चल रहा है और शीर्ष नेताओं के साथ पार्टी पदाधिकारियों की बैठकें भी हो रही हैं। इसी बीच दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विधानसभा चुनावों को लेकर तो मंथन होगा ही साथ-साथ उदयपुर, अमरावती जैसी घटनाओं को लेकर भी गहन चिंतन किया जाएगा और पार्टी की भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी। - अनुराग गुप्ता

प्रभासाक्षी 2 Jul 2022 3:55 pm

विनायक चतुर्थी पर बन रहे दो शुभ योग, जानिए पूजा का मुहूर्त और चमत्कारी उपाय

विनायक चतुर्थी पर बन रहे दो शुभ योग, जानिए पूजा का मुहूर्त और चमत्कारी उपाय

समाचार नामा 2 Jul 2022 3:45 pm

हनीमून को बनाना है सबसे रोमांटिक तो जाएं लक्षद्वीप के इन बेस्ट द्वीप पर

अगर आपकी नई-नई शादी हुई है और आप घूमने के बारे में सोच रहे हैं तो आज हम आपको उन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ जाकर आप आनंद ले सकते हैं और रोमांस कर सकते हैं। लक्षद्वीप- अगर आप अपने पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे है तो भारत में कई ऐसी जगह है जहां आप अपने हनीमून को एन्जॉय कर सकते है। अगर आप अपने पार्टनर के साथ प्राकृतिक दृश्यों का आनंद उठाना चाहते है या फिर आप भीड़-भाड़ भरी लाइफ से दूर जाना चाहते है तो लक्षद्वीप आपके लिए बेस्ट जगह है। जी दरअसल लक्षद्वीप घूमने के लिए बहुत ही सुन्दर जगह है साथ ही आपकी जेब के लिए भी किफायती है। इसी के साथ लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्रशासित प्रदेश है और अपनी सुंदरता और प्राकृतिक दृश्यों के कारण लक्षद्वीप भारत की बहुत ही शांत जगह है। इसके अलावा यहां पर शांत समुन्द्र तट होने के कारण यह बहुत ही खूबसूरत जगह है। अब हम आपको बताते हैं लक्षद्वीप के बेस्ट द्वीप के बारें में। कैसे पहुंचे लक्षद्वीप- आप लक्षद्वीप जाने के लिए हवाई या समुद्री मार्ग अपना सकते है। जी हाँ और अगर आप हवाई मार्ग से यात्रा करना चाहते है तो सबसे नजदीकी हवाई अड्डा अगति है, दूसरी तरफ कोच्चि से यहां के लिए सीढ़ी नियमित हवाई सेवा उपलब्ध है। आपको फ्लाइट से यहां पहुँचने में डेढ़ से दो घंटे लग सकते है। इसके अलावा शिप से यहां आने में आपको 14 से 20 घंटे का समय लग सकता है। इन महीनों में बनाए घूमने का प्लान- लक्षद्वीप का मौसम ज्यादातर सुहावना होता है। यहां पर तापमान 27 डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 32 डिग्री सेंटीग्रेड तक रहता है। वहीं लक्षद्वीप में अप्रैल और मई के महीने सबसे गर्म रहते है और अगर आप यहां पर घूमने का प्लान बना रहे है तो अक्टूबर से लेकर मार्च का महीना आपके लिए बेस्ट रहेगा। क्योंकि यहाँ मई से लेकर सितम्बर तक बारिश होती है जिसके कारण यहां बीच पर बोट की सुविधा बाधित हो जाती है। जी दरअसल यह लक्षद्वीप का एक मात्र द्वीप है जहां पर एयरपोर्ट की सुविधा है। इसके अलावा यह जगह अपने वाटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी के लिए भी फेमस है और अगत्ती द्वीप अपने समुद्र तट की खूबसूरती और जलीय जीवों के लिए भी जाना जाता है। मिनिकॉय द्वीप- मिनिकॉय द्वीप लक्षद्वीप का सबसे बड़ा और प्रमुख द्वीप है। आपको बता दें कि मिनिकॉय में एक बहुत बड़ा लाइटहाउस है जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुँचते है। जी हाँ और इस लाइटहाउस का निर्माण 1885 में कराया गया था। इसी के साथ पुराना लाइट हाउस होने के कारण यह स्थान काफी प्रसिद्ध है और आप यहां पर 300 फ़ीट ऊँचे लाइटहाउस से प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन कर सकते है। केवल यही नहीं बल्कि इसके अलावा आपको मिनिकॉय में आपको सुन्दर और मनभावक समुंद्रतट और सफ़ेद रेत और आकर्षक चट्टाने देखने को मिलेगी। इसके अलावा आप अपने पार्टनर के साथ आकर शांत समुद्र और घने नारियल पेड़ों के नीचे बैठकर देखने का आनंद उठा सकते है। बंगारम द्वीप- बंगारम द्वीप अपने नीले साफ़ पानी के समुंद्रतट और खूबसूरत मूंगे की चट्टानों के लिए जाने जाते है। ऐसे में अगर आप वाटर स्पोर्ट्स के दीवाने है तो ये जगह आपके लिए बेस्ट रहेगी। यहाँ ग्लास बोट की सवारी के साथ-साथ आप यहां स्कूबा डाइविंग, कायाकिंग और विंडसर्फिंग का मजा उठा सकते है। इसके अलावा आप यहां अपने पार्टनर के साथ साफ़ पानी में मछलियों को तैरते हुए देख सकते है और साथ ही अपने पार्टनर के हाथों में हाथ डाले यहां के सनराइज और सनसेट को निहार सकते है। घूमने जा रहे हैं श्रीलंका तो इन जगहों पर जरूर करे सैर मानसून में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत है पुणे और मुंबई के समीप के ये स्थान बरसात में इन 4 जगहों पर जाकर खो जाएंगे आप, डबल आएगा मजा

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 2 Jul 2022 1:28 pm

ये है दुनिया का सबसे महंगा कंडोम

आप शायद ही जानते होंगे कि निरोध आज की दुनिया का आविष्कार नहीं है, जी हाँ बल्कि हमारे पूर्वज भी इनका उपयोग करते थे। सुनकर आपको अचम्भा हो रहा होगा लेकिन यह सत्य है। जी दरअसल आज के समय में जहां कंडोम लेटेक्स के बनते हैं, उस समय इन्हें बनाने के लिए भेड़ की अंतड़ियों का उपयोग किया जाता था। जी हाँ और आज के समय में तो शारीरिक संबंध से जुडी एजुकेशन का महत्व काफी बढ़ गया है। हालाँकि आज हम आपको जिस कंडोम के बारे में बताने जा रहे हैं वह बहुत महंगा है। जी हाँ और यह 18-19वीं सदी का 200 साल पुराना कंडोम है जो काफ़ी यूनिक और महंगा है। आज हम आपको दुनिया के सबसे महंगे कंडोम की A-Z इतिहास (Condom History) के बारे में बताने जा रहे हैं। जी दरअसल बीते 2 वर्षों में कंडोम की बिक्री में काफ़ी इजाफ़ा हुआ है। एक तरफ जहां कंडोम की बिक्री थोड़ी कम होती थी, वहां कोविड-19 के दौरान कई देशों में कंडोम की जमकर बिक्री हुई थी। केवल यही नहीं बल्कि यहां तक की कई देशों में तो कंडोम की कमी के कारण उसे दुगने दाम पर बेचा जा रहा था। जी दरअसल ये उस काल का कंडोम है, जब इन्हें भेड़, सूअर, बछड़े और बकरियों की अंतड़ियों से बनाया जाता था। केवल यही नहीं बल्कि उस समय कंडोम का उपयोग सिर्फ़ अमीर लोग किया करते थे, क्योंकि वो काफ़ी महंगे बिकते थे। इसी के साथ ही उसे बनाने में बहुत समय और मेहनत लगती थी और उसके बाद जब 19वीं सदी में रबर के कंडोम बनने लग गए, तब इनका मूल्य कम हो गया। इसी के साथ ही हर बीतती सदी में कंडोम का विकास होता चला गया। हालाँकि आज कंडोम हर एक साइज़ और फ़्लेवर में उपलब्ध है। आपको बता दें कि 7 इंच का ये कंडोम स्पेन (Spain) के एक शहर में बंद बक्से में पाया गया था और इसे एम्स्टर्डम के एक व्यक्ति ने खरीदा था। यहाँ के मेयर ने मगरमच्छ को बनाया पत्नी, शादी में जुटे हजारों लोग एक घर में मिले मगरमच्छ के दर्जन भर अंडे, 5 से निकले बच्चे सोने की चेन उठा ले गईं चींटियां, वीडियो देखकर स्तब्ध रह गए लोग

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 2 Jul 2022 1:04 pm

हाथ में बने वलय देते हैं शुभ-अशुभ के संकेत

हस्तरेखा विज्ञान में हथेली की रेखाओं के अलावा हाथ में पाए जाने वाले प्रत्येक प्रकार के चिन्ह जैसे नक्षत्र, द्वीप, वर्ग, आयत, वृत्त, क्रॉस आदि का अध्ययन करके भविष्य कथन किया जाता है, लेकिन इनमें एक और महत्वपूर्ण चिन्ह है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। वह है वलय। वलय के अध्ययन के बिना फल ... Read more

अजमेरनामा 2 Jul 2022 11:16 am

उदयपुर हत्याकांड: NIA ने रियाज और गौस को हिरासत में लिया, 'कुछ बड़ा करने' को पाक आकाओं ने उकसाया था

शनिवार तड़के एनआईए (NIA) की टीम राजस्थान के अजमेर स्थित हाई सिक्योरिटी जेल पहुंची और दोनों आरोपियों को रिमांड पर लिया। उन्हें अब भारी सुरक्षा घेरे में जयपुर ले जाया जा रहा है।

हरि भूमि 2 Jul 2022 9:47 am

Rajpal Yadav: राजपाल यादव पर लगा धोखाधड़ी का आरोप, इंदौर पुलिस ने अभिनेता के खिलाफ जारी किया नोटिस

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों की लिस्ट में शुमार हैं। फिल्मों में हास्य भूमिका निभाकर उन्होंने लोगों के दिल में अपने लिए एक खास जगह बनाई है।

अमर उजाला 2 Jul 2022 9:12 am

यहाँ के मेयर ने मगरमच्छ को बनाया पत्नी, शादी में जुटे हजारों लोग

आजतक कई तरह के वीडियो सामने आए हैं जो चौकाने वाले हैं। अब जिस मामले के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं उसके बारे में जानने के बाद तो आपके होश ही उड़ जाएंगे। ये मामला मैक्सिको (Mexico) के सैन पेड्रो का है। यहाँ हुआमेलुला के मेयर क्‍टर ह्यूगो ने पूरे रीति-रिवाज के साथ एक मगरमच्‍छ को अपनी पत्‍नी के रूप में अपना लिया है। जी हाँ, सुनकर आपको यकीन तो नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सच है और इसी के चलते उनकी यह शादी अब सुर्खियां बटोर रही है। बताया जा रहा है मेयर की शादी में हजारों लोगों ने शिरकत की और सभी रस्‍में बखूबी निभाई गईं। जी दरअसल यह आयोजन पर्यावरण, इंसानों और जानवरों के बीच के रिश्‍ते को लेकर किया गया था। कहा जाता है ऐसा करना यहां आम बात है और लोगों को लगता है कि ऐसा करने से वे ईश्‍वर से अपनी मनचाही चीज पा सकेंगे। केवल यही नहीं बल्कि यहाँ के लोगों की आम इच्‍छा अच्‍छी बारिश, और मछुआरों के लिए भरपूर मछली पाना होती है और इसी को पूरी करने के लिए वह यह सब करते हैं। जी दरअसल मैक्सिको में मगरमच्‍छ से शादी करने की पुरानी परंपरा है और लोग बताते हैं कि ऐसा 1789 से हो रहा है। जी हाँ और इसके लिए कई रस्‍में की जाती हैं। इसमें सबसे पहले मगरमच्‍छ का नामकरण होता है और उसके बाद शादी की तारीख तय कर, उस दिन मेहमानों और अपने रिश्‍तेदारों को बुलाया जाता है। वहीं उसके बाद सबके सामने यह शादी पूरी होती है। जी दरअसल ऐसी मान्‍यता है कि ऐसा करने से लोगों का और इलाके का भला होता है। एक घर में मिले मगरमच्छ के दर्जन भर अंडे, 5 से निकले बच्चे सोने की चेन उठा ले गईं चींटियां, वीडियो देखकर स्तब्ध रह गए लोग गलती से कर्मचारी को कंपनी ने दे दी 300 महीने की सैलरी, फिर हुआ वो जो आप सोच भी नहीं सकते

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 2 Jul 2022 9:03 am

माहौल ना बिगड़े

राजनीतिक दलों में जिम्मेदार पदों पर बैठने वाले लोगों को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए, जिससे देश का माहौल बिगड़े। यह बात सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए है। दोनों को अमन-चैन बनाए रखने की कोशिश करनी होगी क्योंकि ऐसा ना होने पर देशविरोधी तत्व फायदा उठा सकते हैं।

नव भारत टाइम्स 2 Jul 2022 7:51 am

नरम हिंदुत्व हारा, गरम हिंदुत्व जीता : सियासी बिसात पर शिवसेना के सामने पहचान का संकट, भाजपा 

पता नहीं किसने कहा, लेकिन महाराष्ट्र की सत्ता-पलट को लेकर किसी ने यह अवश्य कहा कि यह सब बाबा ‘भोले की कृपा’ है कि चालीसा के दिनों में चालीस इधर आ गए! आप लाख कोसें कि महाविकास आघाड़ी सरकार को भाजपा ने साजिश रचकर गिराया।

अमर उजाला 2 Jul 2022 5:58 am

खेल : कमाल कर सकती है महिला हॉकी टीम, मिटाएगी टोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहकर पदक से वंचित होने का मलाल

भारतीय महिला हॉकी टीम का पुरुषों की तरह इतिहास चमकदार तो नहीं है। पिछले साल टोक्यो ओलंपिक में वह भले ही पोडियम पर चढ़ने में कामयाब नहीं हो सकी, पर उसने अपने जानदार प्रदर्शन से अपना नाम दुनिया की धाकड़ टीमों में शुमार जरूर करा लिया।

अमर उजाला 2 Jul 2022 5:25 am

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नुपुर शर्मा पर कठोर टिप्पणियां, खड़े हुए कुछ सवाल

आखिर सुप्रीम कोर्ट इसकी अनदेखी कैसे कर सकता है कि नुपुर शर्मा के माफी मांगने और उन्हें भाजपा से निलंबित किए जाने के बाद भी देश के कई शहरों में उनके खिलाफ किस तरह उग्र और हिंसक प्रदर्शन हुए?

जागरण 2 Jul 2022 12:32 am

गलत मुद्दों में उलझे विपक्षी दल, जनता को भड़काकर अपने पक्ष में करना खतरनाक नैरेटिव

चुनाव लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा होते हैं। किसी भी सरकार या दल को अनियंत्रित ताकत न मिल जाए इसीलिए संविधान निर्माताओं ने हर पांच साल में इस अग्निपरीक्षा का प्रविधान किया। जो उम्मीदों पर खरा न उतरे उसे जनता बाहर करने में देर नहीं करती।

जागरण 2 Jul 2022 12:29 am

आर्थिक मोर्चे पर अनिश्चितता के आसार: वैश्विक घटनाक्रम भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने में अहम कारक

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत से पूंजी पलायन भी रुपये को गिराने में भूमिका निभा रहा है। ऐसे में कोई हैरानी नहीं कि रुपये में गिरावट का रुख कुछ समय के लिए जारी रहे। इस दौरान डालर के मुकाबले रुपया 80 के स्तर पर या उसके आसपास घूम सकता है।

जागरण 2 Jul 2022 12:27 am

केवल दो-तिहाई मत ही पर्याप्त नहीं होगा

दो-तिहाई मत से कमाल हो जाता है, महाराष्ट्र में भी हुआ, दल भी टूटा और सरकार भी बनी। संविधान सभा में शनिवार, 17 सितंबर, 1949 को गहरी बहस हुई थी। निचोड़ यह निकला कि बदलाव चाहे जो हो.....

लाइव हिन्दुस्तान 1 Jul 2022 11:16 pm

किसी बदलाव को इतना मुश्किल न बनाइए

हमने यह मान लिया है कि हम राष्ट्र के प्रतिनिधि हैं, हम सब परोक्ष निर्वाचन से यहां आए हैं, प्रांतों की उन विधानसभाओं द्वारा आए हैं, जो उस समय चुनी गई थीं, जब हम स्वतंत्र नहीं थे, जब अंग्रेज यहां थे....

लाइव हिन्दुस्तान 1 Jul 2022 11:12 pm

क्या उद्धव सरकार गिरने पर झूमकर नाचे अर्नब गोस्वामी? फ़ैक्ट चेक

बूम को टाइम्स नाउ के एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि यह वीडियो जुलाई 2005 में टाइम्स नाउ चैनल का ‘लोगो’ तय होने के समय का है.

बूमलाइव 1 Jul 2022 8:18 pm

डॉक्टर भगवान नहीं होते

रंजन दास गुप्ता वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार जब डॉ. बी.सी. रॉय ने 1958 में कोलकाता में गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक मरीज की जान बचाई, तो मरीज ने उनके पैर छुए और उन्हें धरती पर भगवान की संज्ञा दी। इस पर डॉ.रॉय ने कहा कि वे कोई ईश्वर या देवता नहीं हैं। उन्होंने सदा इस बात पर जोर दिया कि मरीजों को कभी यह नहीं मानना चाहिए कि डॉक्टर भगवान हैं। वे भी उन्हीं की तरह इंसान हैं। यह पूरी तरह वैज्ञानिक अवधारणा है। मुश्किल यह है कि डॉ. रॉय के निधन के छह दशक बीतने के बाद आज भी सफल चिकित्सकों को भगवान का दर्जा देना जारी है। दिवंगत डॉ. के.के अग्रवाल ने भी उन्हें भगवान बताने वाले लोगों को इस बात पर टोका था। भारतीय चिकित्सा संघ के कार्यकाल के दौरान उन्होंने डॉक्टर और मरीज के बीच स्वस्थ रिश्ते की ही वकालत की। वे हमेशा स्वीकार करते रहे कि डॉक्टर हर बार इलाज करने में सफल नहीं होते। कई बार गंभीर मरीज को ठीक करना डॉक्टर के वश में नहीं होता। कोरोना महामारी में कई चिकित्सकों की भी मौत हुई। इन दिनों कई घटनाएं सामने आर्इं, जब चिकित्सकों को मरीज के परिजनों द्वारा हिंसा का शिकार होना पड़ा। इलाज के दौरान किसी भी तरह की समस्या पैदा हो जाए, यह मान लिया जाता है कि डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ की गलती है। कभी-कभार डॉक्टर, नर्स और तकनीकी स्टाफ से गलती हो भी जाती है, जिससे मरीज की मृत्यु हो सकती है। लेकिन, आम तौर पर डॉक्टर मरीज की जान बचाने की हर संभव कोशिश करते हैं। पश्चिम बंगाल, दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ इलाकों में डॉक्टर मरीज के बीच संघर्ष बहुत ज्यादा देखे जाते हैं। दक्षिण में ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम देखे गए हैं। कारण बस इतना है कि दक्षिण भारत में चिकित्सक-मरीज संबंध उपमहाद्वीप के बाकी क्षेत्रों से बेहतर हैं। शायद ही किसी ने कभी सीएमसी वेल्लोर, अपोलो हॉस्पिटल या निमहान्स में मरीज पक्ष की ओर से हिंसा का कोई मामला सुना होगा। फिर भी डॉक्टर को पूजने का विचार न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि अजीब भी है। विज्ञान व धर्म दोनों अलग-अलग हैं। चिकित्सा जगत के विकास में धार्मिक हठधर्मिता और अंधविश्वास के लिए कोई जगह नहीं है। जितने अध्ययन, प्रयोग होंगे; यह उतना ही अधिक विकसित होगा। इसीलिए डॉक्टर निरंतर अनुसंधान पथ पर अग्रसर हैं। जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ डॉ.जी.चंद्रशेखर हों या श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ.रणवीर गुलेरिया इसके बेहतरीन उदाहरण हैं। श्रेष्ठ से श्रेष्ठ चिकित्सक भी सर्वशक्तिमान ईश्वर में आस्था रखते हैं। अध्यात्म में आस्था होना और डॉक्टर को भगवान मानना दोनों अलग-अलग सोच हैं। पहली सोच तर्कसंगत है, जबकि दूसरी तर्कविहीन। यहां तक कि बड़े से बड़े डॉक्टर स्वयं को भगवान या देवता नहीं मानते। वे भली-भांति जानते हैं कि वे भी विफलताओं से परे नहीं हैं। डॉक्टर को भगवान के समान समझ बैठना एक मानसिक रोग है, जिसे शुरुआती अवस्था में ही ठीक करना जरूरी है। अस्पताल प्रबंधन संभालने वाली महिला प्रबंधक व महिला चिकित्सक भी मरीजों के साथ मानवता पूर्ण व्यवहार करती हैं। डॉ. शैलजा सेन गुप्ता, डॉ.सागरिका मुखर्जी, प्रतीक्षा गांधी और डॉ.शांति बंसल ऐसे ही कुछ नाम हैं। 73 वर्ष के डॉ.बी. प्रताप रेड्डी स्वयं कैंसर पीडि़त हैं, लेकिन वे अपने मरीजों के प्रति अपनी ड्यूटी कभी नहीं भूलते और उन्हें सही परामर्श देते हैं। डॉ.जस्टिन जयलाल पूरी दक्षता के साथ सर्जरी की नियमित ड्यूटी निभाते हैं। दोनों ईश्वर में आस्था रखते हैं, लेकिन ऐसा नहीं मानते कि वे ईश्वर के समान हैं और चिकित्सा के वैज्ञानिक विकास पर ध्यान देते हैं। हालांकि आज कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो गरीब मरीज को इलाज उपलब्ध नहीं करवाते। ऐसे चलन पर रोक लगनी चाहिए। ऐसे डॉक्टरों को ब्लैकलिस्ट करने की जरूरत है। 1972 की एक इटैलियन फिल्म में सोफिया लॉरेन ने नर्स फ्लोरेंस नाइटिंगेल का किरदार निभाया है। वे स्वयं को मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मानती थीं और ऐसा ही जीवन उन्होंने जिया भी। डॉक्टर्स डे के इस अवसर पर हमें इस विचार को सजगता के साथ अपनाना होगा कि कोई डॉक्टर भगवान नहीं है। ये सब हमारे शुभचिंतक हैं और वे भी सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनका मरीज जल्दी ठीक हो कर घर जाए और दोबारा बीमार हो कर वापस न आए।

पत्रिका 1 Jul 2022 4:13 pm

CUET 2022: 15 जुलाई से शुरू होगा यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट, इन टिप्स की मदद से मिलेगी सफलता

Preparation Tips: किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए सबसे आवश्यक है सिलेबस को समझना।

नव भारत टाइम्स 1 Jul 2022 4:05 pm

कारगिल में 6 दशक से क्‍यों नहीं बन पाया बौद्ध मंदिर, क्‍या है गोंपा विवाद, देखें वीडियो

यह मामला सन् 1961 का है जब जम्मू कश्मीर सरकार ने कारगिल के मोंजा में बौद्धों को दो कनाल भूमि दी थी।

जागरण 1 Jul 2022 3:06 pm

जंगल में पेड़ से बंधी हुई मिलीं इस पोर्न स्टार की लाश, न्यूड बॉडी मिलने से फैली सनसनी

घटनाओं के एक चौंकाने वाले मोड़ में एक लापता महिला का शव जापान के एक सुदूर जंगल में एक पेड़ से निर्वस्‍त्र बंधा हुआ पाया गया। लापता महिला की पहचान 23 वर्षीय रीना अरानो ( Rina Arano) के रूप में की गई जो एक जापानी अदालत स्टार हैं। यह स्टार 8 जून से लापता थी वहीं लाश 14 जून को मिली।

हरि भूमि 1 Jul 2022 2:21 pm

घूमने जा रहे हैं श्रीलंका तो इन जगहों पर जरूर करे सैर

श्रीलंका घूमने जा रहे हैं तो हम आपको उन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ जाकर आपको आनंद आ सकता है। यहाँ खूबसूरत पहाड़ और अट्रैक्टिव बीच है और यहाँ जाकर आपको आनंद आ सकता है। जी दरअसल दक्षिण भारत से सटे हुए इस देश में आप ट्रिप के दौरान नेचुरल ब्यूटी को निहार सकते हैं। आइए बताते हैं आपको उन जगहों के बारे में जहाँ जाकर आप एन्जॉय कर सकते हैं। मिनटेल: ये श्रीलंका के सबसे पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में से एक है। यह एक तरह की पर्वत माला है, जिसके ऊपर जाकर खूबसूरती नजारे देखे जा सकते हैं। जी हाँ और बौद्ध समुदाय के लोगों के लिए ये धरती आध्यात्मिक महत्व रखती है। रावण वाटरफॉल: श्रीलंका में घूमने की बात हो और भला यहां के मोस्ट फेवरेट टूरिस्ट डेस्टिनेशन रावण फॉल को कैसे भूला जा सकता है। जी दरअसल यहां पर आकर आप अपने दोस्तों या परिवार के साथ खूबसूरत नजारों का मजा ले सकते हैं। यहाँ जाकर आपको आनंद ही आनंद आएगा। एडम पीक: श्रीलंका में यह भी एक जानी मानी टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। जी हाँ और यहाँ बौद्ध समुदाय के लोगों का मठ मौजूद है। इसके अलावा यहां एक पत्थर में पद्हचिन्ह बना हुआ है, जो अलग-अलग धर्मों के लिए खास महत्व रखता है। उनावातुना बीच: समुद्र के बीच बसे हुए श्रीलंका में वैसे तो कई बीच मौजूद है, हालाँकि इधर का उनावातुना बीच एक बड़ा टूरिस्ट स्पॉट माना जाता है। यहाँ के अट्रैक्टिव नजारे यहां टूरिस्ट को आने के लिए मजबूर कर देते हैं और यहाँ जाकर आप फोटोज खींचकर खुश हो सकते हैं। मानसून में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत है पुणे और मुंबई के समीप के ये स्थान बरसात में इन 4 जगहों पर जाकर खो जाएंगे आप, डबल आएगा मजा मानसून में करना है रोमांस तो इन जगहों पर लें हाउसबोट का मजा

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 1 Jul 2022 1:42 pm

मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कैमरा समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक ही चार्जर

यूरोपीय संघ के संसद में एक ऐसे प्रस्ताव को मंजूर किया गया है जिसके अंतर्गत अब एक ही चार्जर से कंप्यूटर, फोन, स्पीकर, टैब व अन्य डिवाइस वगैरह चार्ज हो सकेंगे। यानी अब अलग अलग डिवाइस के लिए कई चार्जर को अपने साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अमर उजाला 1 Jul 2022 12:52 pm

सोने की चेन उठा ले गईं चींटियां, वीडियो देखकर स्तब्ध रह गए लोग

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो आए दिन चर्चाओं का हिस्सा बने रहते हैं। जी हाँ और कई बार तो ऐसे वीडियो वायरल हो जाते हैं जिन्हें देखकर लगता है कि इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। अब हाल ही में ऐसा ही एक वीडियो सामने आया जो लोगों को हैरान कर रहा है। जी दरअसल इस वीडियो में चींटियों के एक छोटे से ग्रुप ने मिलकर बड़ी लंबी सोने की चेन खींच दी और इस वीडियो को लोग देखते ही रह गए। जी दरअसल, इस वीडियो को ट्विटर पर भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुशांत नंदा ने शेयर किया, जो आप यहाँ देख सकते हैं। Tiny gold smugglers The question is,under which section of IPC they can be booked? pic.twitter.com/IAtUYSnWpv — Susanta Nanda IFS (@susantananda3) June 28, 2022 जी दरअसल उन्होंने वीडियो को पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा कि ये चेन स्मगलर हैं, इन चोरों पर किस तरह का मुकदमा किया जाए। इस वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा है कि चींटियों की एक बस्ती दिखाई देती है जो सोने की जंजीरों को किसी चट्टानी इलाके में खींच रही हैं। इसके अलावा यह भी दिख रहा है कि सोने के इस चेन के दोनों तरफ काली चीटियां लगी हुई हैं और इसे एक तरफ खींचकर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वैसे इस वीडियो को देखकर ऐसा लग रहा है कि यह वीडियो किसी चट्टानी इलाके का है। हालांकि वीडियो के अंत में यह नहीं पता चल पाया कि चीटियों का झुंड उस चेन को कहां तक खींचकर ले गया। जैसे ही यह वीडियो पोस्ट किया गया यह देखते ही देखते वायरल हो गया। जी हाँ और कई यूजर्स ने इस पर चुटकी भी ली है। इस वीडियो को देख एक ने लिखा कि ऐसा लगता है ये चीटियां चोर हैं और बड़े ही शातिराना तरीके से अपना हाथ साफ करती नजर आ रही हैं। वहीं एक अन्य ने लिखा कि इन पर मामला दर्ज करने की आवश्यकता है। आप भी वीडियो देख बताए कैसा लगा? गलती से कर्मचारी को कंपनी ने दे दी 300 महीने की सैलरी, फिर हुआ वो जो आप सोच भी नहीं सकते Video: कोरोना से हुई पापा की मौत, शादी के मंडप में मोम से बने पिता को देख रोने लगी बेटी दिल तोड़ देने वाला Video! पैसे दने के बावजूद कपड़ों की वजह से बच्चों को रेस्टोरेंट से निकाला

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 1 Jul 2022 11:38 am

माही विज और जय भानुशाली को कुक ने दी जान से मारने की धमकी, कहा- '200 बिहारी लाकर'

टीवी की पॉपुलर एक्ट्रेस माही विज (Mahhi Vij) को लेकर एक चौंकाने वाली घटना सामने आ रही है। माही ने ट्विटर पर एक भयावह घटना शेयर की जिससे वह काफी डरी हुई हैं और अपनी फैमिली को लेकर चिंतित हैं। टेलीविजन होस्ट और एक्टर जय भानुशाली (Jai Bhanushali) की पत्नी माही ने ट्विटर पर कुछ पोस्ट कर इस घटना की जानकारी दी जिसे उन्होंने अब डिलीट कर दिया है।

हरि भूमि 1 Jul 2022 10:05 am

आजादी : लाहौर केस के सदाबहार क्रांतिकारी डॉक्टर गयाप्रसाद, संघर्ष की एक और अनकही दास्तां

कानपुर से जगदीशपुर गांव का वह सफर हमने बस और खड़खड़े पर बैठकर पूरा किया। शहीद भगत सिंह के साथी डॉ. गयाप्रसाद की इस बस्ती तक पहुंचने का मार्ग हमें हर पल रोमांच से भर देता रहा।

अमर उजाला 1 Jul 2022 2:55 am

अर्थव्यवस्था : आधारभूत संरचना के विकास पर जोर, सब सही रहने पर आएगा आमूलचूल बदलाव

भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था में गिनी जाती है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दिनों में 9.5 प्रतिशत विकास दर अनुमानित की गई थी।

अमर उजाला 1 Jul 2022 2:35 am

इस मिट्टी का ऋण हम सब पर

यह भारत की स्वतंत्रता का 75वां वर्ष तिरंगे का वर्ष है। जैसे ही हमारा झंडा फहराता है, हमारा दिमाग जाग उठता है; जैसे ही यह फड़फड़ाता है, हमारा दिल बैठ जाता है या धड़कने लगता है। ..और तब हमारी आंखों के...

लाइव हिन्दुस्तान 1 Jul 2022 12:15 am

देश में हिंसक होते युवा आंदोलन

( हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में भारी बेरोजगारी होने के साथ सरकारी नौकरियों की कमी की वजह से, युवाओं में ज्यादा हताशा और आक्रोश है। लेकिन यह स्थिति पूरे देश की भी है। ग्रुप-डी की नौकरी के लिए करोड़ों लोग अप्लाई कर रहें है। नौकरी के इच्छुक करीब 25 प्रतिशत युवाओं को कोई काम ... Read more

अजमेरनामा 30 Jun 2022 11:37 pm

राजनीति से रंगा इतिहास लेखन: शिक्षा संस्थानों के जरिये वामपंथियों का अपनी विचारधारा को आगे रखने का प्रयत्न

वास्तव में वामपंथियों ने शिक्षा संस्थानों के जरिये एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपनी विचारधारा को आगे रखने का प्रयत्न किया। उन्हें लगा कि यदि इतिहास और समाजशास्त्र को उनकी इच्छानुसार लिखा जाए तो भावी पीढ़ी माक्र्स-लेनिन-माओ को पूरी तरह स्वीकार कर लेगी।

जागरण 30 Jun 2022 10:52 pm

गोहाना सरकारी अस्पताल से बच्ची चोरी : नमकीन दिलाने के बहाने ले गई महिला, बाइक लेकर खड़े युवक के साथ फरार, CCTV फुटेज जारी

बच्ची के पिता की शिकायत पर पुलिस ने अपकरण का मामला दर्ज कर लिया। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपितों के सीसीटीवी फुटेज जारी कर दिए।

हरि भूमि 30 Jun 2022 10:20 pm

आस्था से जुड़े प्रश्नों पर आतंक का साया: कन्हैयालाल की बर्बर हत्या भारत की सांस्कृतिक चेतना और हिंदू जनमानस पर कभी न भरने वाला घाव

कन्हैयालाल की बर्बर हत्या भारत के सांस्कृतिक आत्मा और हिंदू जनमानस को ऐसा घाव दे गई है जो आसानी से नहीं भरेगा परंतु ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जब-जब हिंदू देवी-देवताओं को लेकर भद्दी टिप्पणियां कीं तो हिंसा और हत्याएं ही झेलनी पड़ीं।

जागरण 30 Jun 2022 9:59 pm

नफरत और हिंसा लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा

लेखक और शिक्षक उदयपुर की घटना ने हमें एक ओर भौगोलिक रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्यपूर्व के कट्टर और आंतरिक संघर्ष में उलझे देशों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है, तो दूसरी ओर समय के फलक पर मध्ययुग में धकेल दिया है। यह बर्बरता उस समय हुई है, जब हम अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और इसे अमृत काल घोषित कर रहे हैं। इस घटना ने न सिर्फ हमारे भीतर तक सिहरन पैदा कर दी है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि हमारे स्वाधीनता संग्राम से निकला भारत का विचार अपने समाज में या तो भीतर तक गया नहीं है या फिर वह अब बहुत विकृत हो चुका है। निश्चित तौर पर ऐसी घटना को अंजाम देने वालों को कानून के अनुसार कठोरतम सजा से दंडित किया जाना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से यही मांग भी उठ रही है, लेकिन क्या नए भारत का रास्ता महज दंड देने और भय पैदा करने से निकलेगा। अक्सर लोग हर दंगे के बाद, किसी की मॉब लिंचिंग के बाद या आतंकी घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराते हुए यह टिप्पणी करने लगते हैं कि अगर समय रहते कार्रवाई हुई होती, तो उसे रोका जा सकता था। समय रहते कार्रवाई तो होनी ही चाहिए, लेकिन घृणा और हिंसा का निवारण सिर्फ सुरक्षा बलों से नहीं हो सकता। यह कानून के उल्लंघन की प्रवृत्ति के साथ गंभीर सामाजिक बीमारी का द्योतक भी है। यह बीमारी कभी देश, राष्ट्र और धर्म की गलत समझ से पैदा होती है, तो कभी न्याय की अनुपस्थिति से। भारत इस समय एक अजीब तरह के कशमकश से गुजर रहा है। एक ओर उसके पास अपनी बहुलवाद की प्राचीन विरासत है, जो सद्भाव, प्रेम और अहिंसा सिखाती है, तो दूसरी ओर सभ्यताओं के संघर्ष की अंतरराष्ट्रीय स्थितियां और नवउदारवाद के साथ बढ़ी कट्टरता और उसे दबाने के लिए तेज होता राज्य का दमन इन भारतीय मूल्यों को मुंह चिढ़ा रहा है। सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मौजूदा विवाद की जड़ें एक ओर भारत के विभाजन जैसे रक्तरंजित इतिहास में है, तो दूसरी ओर पश्चिम की आधुनिकता और उससे बढ़े इस्लाम से टकराव में हैं। भारत अपने राज्य और समाज के चरित्र और संरचना के सहारे इससे निकलने की जितनी कोशिश कर रहा है, उतना ही उसमें फंसता जा रहा है, लेकिन इस ढलान पर गिरते रहना नासमझी तो होगी ही अपनी विरासत को नकारना भी होगा। हमें हर हाल में इससे बचना होगा। देश में गंगा-जमुनी तहजीब की विरासत रही है। मुस्लिम समुदाय में ऐसे शायर हुए हैं, जिन्होंने कृष्ण भक्ति के शेर कहे हैं, तो ऐसे हिंदू कवि हुए हैं, जिन्होंने मोहम्मद की शान में कसीदे पढ़े हैं। यह एक नई सभ्यता के विकास की प्रक्रिया थी, जिससे दुनिया देखकर ईष्र्या करती थी और हैरान रहती थी। इस मायने में हिंदुस्तान उन तमाम राजनीतिक विश्लेषकों को मुंह चिढ़ाता था, जो यूरोपीय बहुलवाद की तारीफ करते नहीं थकते थे। इसी दौरान महात्मा गांधी जैसे राजनेता हुए हैं, जिन्होंने धर्म के आधार पर पनप रही नफरत और हिंसा को इंसानियत का यथार्थ मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जिस तरह ब्रह्मांड के विभिन्न नक्षत्र गुरुत्वाकर्षण शक्ति के माध्यम से एक दूसरे से बंधे हुए हैं, ठीक उसी तरह से मानवता भी प्रेम की शक्तिमें बंधी हुई है, तभी वह लंबे समय से चली आ रही है। प्रेम की इसी शक्ति को समझना होगा। यहीं अभिव्यक्ति का सवाल भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। प्राचीन धर्म ग्रंथों से लेकर मध्ययुग और आधुनिक काल में यह बार-बार चेताया गया है कि हमारी अभिव्यक्ति किसी को आहत करने वाली नहीं होनी चाहिए। ऐसी बानी बोलिए... या सत्यम् ब्रूयात.. जैसे दोहे इसके उदाहरण हैं। दूसरी ओर समाज में ऐसा विवेक होना चाहिए कि वह बात को सही संदर्भ में ग्रहण करे। इस संदर्भ में मीडिया की भूमिका अहम हो जाती है। अगर कोई भी मीडिया या उसका प्रस्तोता समाज में सद्भाव और विवेक से संपन्न जनमत पैदा करने की बजाय द्वेष और नफरत के माध्यम से कटुता भरा जनमत पैदा करने की कोशिश कर रहा है, तो समाज को उसका बॉयकाट करना चाहिए और सरकार को उस पर लगाम लगानी चाहिए। भारत का अतीत एक महान देश का रहा है और औपनिवेशिक दासता और विभाजन को झटकर खड़ा हुआ यह देश आज भी वह अपनी उस महानता और समृद्धि को हासिल करने की राह पर है। लेकिन, नफरत और हिंसा की औपनिवेशिक साजिश इस लोकतांत्रिक स्वराज के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। इससे निपटने के लिए एक ओर समाज के विभिन्न तबकों के बीच मानवता के संयुक्त भविष्य की समझ बनानी होगी, तो दूसरी ओर राज्य नामक संस्था को पक्षपात छोडऩा होगा। एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के यही मायने हैं कि वह न हिंदू का पक्ष ले और न ही मुसलमान का। वह सत्य के साथ खड़ा रहे और कानून का राज कायम करने के लिए प्रतिबद्ध रहे।

पत्रिका 30 Jun 2022 7:20 pm

बिहार के सीएम नीतीश कुमार का बीजेपी पर निशाना साधते पुराना वीडियो वायरल

वायरल वीडियो में नीतीश कुमार 'बीजेपी' का मतलब बताते नज़र आ रहे हैं.

बूमलाइव 30 Jun 2022 6:13 pm

आखिर क्यों टमाटर को कहा जाता था पापी, सामने आई खास वजह

इंडिया में लगभग हर सब्जी में टमाटर का उपयोग किया जाता है। जिसके साथ ही टमाटर का सूप, जूस और सलाद को भी बड़े चाव से सेवन किया जाता है, लेकिन क्या आप जिसके इतिहास जानते हैं? आपके इस बारें में जानकर होश उड़ जाएंगे कि आज हर किसी की रसोई में अपनी खास जगह बना चुके टमाटर को तकरीबन 200 साल पहले 28 जून 1820 को यूरोप में बिना जहर वाली सब्जी का करार दिया गया था। कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि यूरोप और अमेरिका में लंबे समय तक टमाटर को जहरीला कहा जाता था। जिसमे अधिक मात्रा में लैड पाया जाता था, इसलिए इसे पॉइजन एपल निक नेम दिया गया था। 15वीं सदी से लेकर 18वीं सदी तक यानी तकरीबन तीन सदियों तक टमाटर से लोग नफरत करते थे, जिसके चलते पश्चिमी दुनिया में इसे ‘पापी’ फल का खिताब भी दिया गया था। कुछ वेबसाइट पर लिखे लेख के की माने तो टमाटर शब्द यूटो-एज़्टेकन नहुआट्ल शब्द ( Uto-Aztecan Nahuatl word), ‘टोमैटल‘ से लिया गया है, जिसका अर्थ है swelling fruit। लाल रंग के फल इंसानों के लिए सही नहीं: खबरों की माने तो अमेरिका के न्यू जर्सी के सेलम में जॉन गेराड नाम के एक सर्जन थे, जो फलों की खेती किया करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने जब पहली बार टमाटर की खेती की, तो उसमें टोमैटिन नाम का एक टॉक्सिन बहुत कम मात्रा में पाया गया है। दरअसल, टोमैटिन होने के कारण से ही टमाटर को लोग जहरीला मानते थे, लेकिन उससे किसी को हानि नहीं पहुँचता है। बताया जाता है कि टमाटर से नफरत करने का एक और वजह थी उसका लाल रंग। उन दिनों लाल रंग के फलों को इंसानों के लिए सही नहीं कहा जाता था। 28 जून 1820 को अदालत में बुलावा: इससे भी अधिक हैरानी वाली बात यह है कि टमाटर पर जहरीला होने का इल्जाम लगाकर उसके ऊपर केस तक किया गया था। वर्ष 1820 में न्यू जर्सी के सेलम के एक कोर्ट में टमाटर पर मुकदमा किया गया और उसे पेश होने के लिए बोला गया था। 28 जून, 1820 को अदालत में टमाटर को बुलाया गया है। उस बीच हर कोई टमाटर पर जहरीले होने का इल्जाम लगा रहा था और उससे जवाब माँग रहा था। वहीं, एक इंसान ऐसा भी था, जिसने टमाटर का पक्ष ले लिया है। उसका नाम कर्नल रॉबर्ट गिबन जॉनसन था। उन्होंने अदालत में टमाटर को बेकसूर साबित कर दिया है। टमाटर की पेशी वाले दिन खचाखच भरी अदालत में जॉनसन अपने हाथों में एक टमाटर से भरी हुई टोकरी लेकर गए हुए थे। हर कोई टकटकी लगाकर बस उन्हें ही देखे जा रहा था, क्योंकि सब तो टमाटर के पेश होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। बस फिर क्या था, जॉनसन ने ना आव देखा ना ताव वह अदालत में सबके सामने एक-एक करके टमाटर खाने लगे। इस बीच वहाँ मौजूद लोगों को लगा कि आज तो जॉनसन नहीं बचने वाला है. वह सुसाइड करने पर उतारू है। तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ़्तारी से क्यों बैचैन हुआ संयुक्त राष्ट्र ? भारत से की फ़ौरन रिहाई की मांग व्हाट्सऐप पर ब्लॉक किया तो बहन ने भाई से बात करने लिए अपनाया ऐसा तरीका कि बन गया 'वर्ल्ड रिकॉर्ड' OMG! आगरा में महिला ने एक साथ 4 बच्चों को दिया जन्म

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 30 Jun 2022 4:30 pm

OMG! पति को रेंट से देती है ये महिला

यदि आपसे मैं कहूंकि पैसों के लिए एक महिला ने अपने पति को ही किराए पर देना शुरू कर दिया है। ताकि बढ़ती महंगाई से वे लोग मुकाबला कर पाए। तो इस बात पर आप यकीन नहीं करेंगे। लेकिन ये बात सच है। इसके लिए महिला ने पहले तो एक वेबसाइट शुरू की फिर उसके प्रचार के लिए फेसबुक पर एक ऐड-कैंपेन भी चलाना शुरु कर दिया। उन्होंने इसका नाम ‘Hire my handy hubby’ सर्विस दिया है। ये केस ब्रिटेन का है। महिला का नाम है- लौरा। उन्हें यह आइडिया एक पॉडकास्ट सुनकर आया था। उस पॉडकास्ट में एक ऐसे शख्स के बारे में कहा जा रहा था कि लोगों के घरों में मामूली काम करके अपनी जीविका को चलाने में लगे हुए थे । लौरा ने सोचा कि 41 साल के अपने पति जेम्स को भी काम पर लगाया जा सकता है। लौरा का कहना है कि जेम्स बहुत टैलेंटेड हैं और वह कोई भी DIY प्रोजेक्ट को पूरा कर सकते हैं। लौरा ने इस बारें में बोला है कि जेम्स ने बकिंघमशायर में मौजूद उनके घर को ट्रांसफॉर्म किया था। उन्होंने कस्टम बेड्स बनाए थे, इनमें से एक 9 फीट चौड़ा एक फैमिली बेड भी था। जेम्स ने किचेन भी सेट किया था और रद्दी सामानों से एक डाइनिंग टेबल बनाया था। लौरा ने इस बारें में बोला है कि - वह घरेलू और गार्डन के कामों में माहिर हैं, इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना इन स्किल्स को यूज किया जाए और उन्हें किराए पर दिया जाए? लौरा ने इसके बाद ‘Rent My Handy Husband’ नाम से एक वेबसाइट को पेश कर दिया था। उन्होंने फेसबुक और एक पॉपुलर ऐप नेक्स्टडोर के जरिए इसका प्रचार भी करवाया। इस पर मिले रिस्पांस को देखकर वह चकित हो चुके है। लौरा ने कहा- लोग सच में इंटरेस्टेड थे। कुछ लोगों को लगा कि मैं जेम्स को किसी बिल्कुल ही अलग काम (सेक्शुअल सर्विस वगैरह) पर रखने के लिए बोल रही हूँ। इतनी महंगाई के बावजूद मैं ऐसा बिलकुल भी नहीं करने वाली हूँ । हालांकि, अधिकतर लोगों को यह पसंद आ रहा है। वे लोग कहते हैं कि कभी-कभी छोटे कामों के लिए बिल्डर को बुलाना कठिन होता है क्योंकि वह इसमें इंटरेस्टेड नहीं होते हैं। लौरा ने कहा- जेम्स कुछ चीजों में माहिर हैं, जैसे कि फ्लैट पैक्स को जोड़ना, ट्रैम्पोलाइंस को लगाना, शेल्व्स को बनाना और कई तरह के सामानों को इंस्टॉल करना। वह स्केच देखकर बच्चों के लिए बंक बेड्स से लेकर फैमिली के लिए बीस्पोक फर्नीचर बनाएंगे। जेम्स पहले एक वेयरहाउस में काम करते थे। उन्होंने 2 वर्ष पूर्व अपना जॉब छोड़ दिया था। क्योंकि उनके तीन बच्चों में से 2 ‘ऑटिस्टिक’ नाम के डिसऑर्डर से ग्रसित हैं और वे बच्चों की देखभाल में लौरा की सहयता करना चाह रहे है। लौरा ने कहा है कि जेम्स, मोटर मैकेनिक्स की पढ़ाई के लिए वापस कॉलेज जाने की प्लानिंग करने में लगे हुए है। वह पढ़ाई के दौरान भी काम करते रहेंगे ताकि फैमिली इनकम प्रभावित न हो जाए। लौरा ने बोला है कि- हमें एक घर से एवरेज 3400 रुपए मिल जाते हैं और कोई भी काम छोटा नहीं होता है। इनमें दीवार पर TV फिट करने से लेकर फेंस पेंट करने तक का काम भी होता है। हम लोग डिसेबल लोगों, देखभाल करने वालों, और 65 से ऊपर की उम्र के लोगों को डिस्काउंटभी प्रदान करते है। तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ़्तारी से क्यों बैचैन हुआ संयुक्त राष्ट्र ? भारत से की फ़ौरन रिहाई की मांग व्हाट्सऐप पर ब्लॉक किया तो बहन ने भाई से बात करने लिए अपनाया ऐसा तरीका कि बन गया 'वर्ल्ड रिकॉर्ड' OMG! आगरा में महिला ने एक साथ 4 बच्चों को दिया जन्म

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 30 Jun 2022 4:22 pm

Exclusive: पायल रोहतगी बोलीं- ताजमहल नहीं, मंदिर की वजह से कर रही हूं आगरा में शादी

पायल रोहतगी संग्राम सिंह से आगरा में शादी करने जा रही हैं। उन्होंने बताया कि यह डेस्टिनेशन उन्होंने ताजमहल की वजह से आगरा को नहीं चुना है बल्कि वहां अच्छे मंदिर भी हैं जिस वजह से उन्होंने वहां शादी का फैसला लिया है।

नव भारत टाइम्स 30 Jun 2022 3:36 pm

सीएम बोले- महाराष्ट्र में भाजपा का असली चेहरा उजागर हुआ, उदयपुर कांड के दोषियों को मिले कड़ी सजा

उदयपुर में एक टेलर का सिर कलम करने की घटना पर सीएम ने कहा- इसकी जितनी भी निंदा की जाए उतनी कम है। इस प्रकार की घटना को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सीएम ने और क्या कहा... पढ़िए...

हरि भूमि 30 Jun 2022 2:20 pm

Watermelon Seeds: तरबूज के बीजों में छिपा है सेहत का खजाना, इसके फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

तरबूज पसंद करने वालों को इसके बीजों से चिढ़ जरूर होती है। मुंह में पहुंचकर ये तरबूज का सारा स्वाद जो खराब कर देते हैं। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो तरबूज के बीजों को सख्त नापसंद करते हैं तो यह जानकारी आपके विचार बदल सकती है।

हरि भूमि 30 Jun 2022 10:09 am

दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश से बदला मौसम, इन राज्यों में भी आंधी-तूफान का अलर्ट जारी

पिछले कुछ दिनों से देश में मौसम (Weather) का मिजाज गर्म बना हुआ था। वहीं राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के इलाकों के कई हिस्सों में गुरुवार सुबह बारिश हुई। सुबह हुई बारिश से तापमान में थोड़ी गिरावट आई, जिससे दिल्लीवासियों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

हरि भूमि 30 Jun 2022 10:05 am

Maharashtra Politics: 'औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर करने पर कई को पेटदर्द', शिवसेना ने सामने में कही यह बात

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने बुधवार को सत्ता छोड़ने से पहले अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के इरादे से बड़े व दूरगामी फैसले लिए। इसे लेकर शिवसेना ने अपने मुख पत्र में विस्तार से कई बातें लिखीं।

अमर उजाला 30 Jun 2022 8:58 am

भारत-विरोधी कुनबे का सच : परत-दर-परत बेनकाब होते झूठ के पुलिंदे, विकास की राह में डाले जा रहे रोड़े

गत 24 जून को सर्वोच्च न्यायालय का 2002 गुजरात दंगा मामले में निर्णय आया। इसके अगले ही दिन राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार के साथ 'सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस' नामक एनजीओ की सचिव तीस्ता सीतलवाड़ को गिरफ्तार कर लिया गया।

अमर उजाला 30 Jun 2022 2:24 am

पानी : वर्षा जल संचयन समय की मांग है, आज जल संकट समूचे विश्व की सबसे गंभीर समस्या

आज जल संकट समूचे विश्व की गंभीर समस्या है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया के 37 देश पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं।

अमर उजाला 30 Jun 2022 2:17 am

हिंसा कमजोरी के सिवा कुछ नहीं

ऐसे लोगों को पहचानना होगा, जो नहीं चाहते कि अमन-चैन हो, जो नहीं चाहते कि दुनिया में भारत तेजी से आगे बढ़े। देश के अंदर अगर उन्माद होगा, तो यह कैसे आगे बढ़ेगा?........................

लाइव हिन्दुस्तान 29 Jun 2022 10:52 pm

भारत में जिहादी सोच के खिलाफ खड़े होने का वक्त, फ्रांस जैसे देशों से लेनी होगी सीख

अशोक गहलोत सरकार अपने राज्य में बढ़ते मजहबी कट्टरवाद की कोई शिकायत सुनने को तैयार नहीं। कन्हैयालाल की हत्या के मामले में उन्होंने स्वयं को जवाबदेह मानने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से ही देश को हिंसा के विरुद्ध संबोधित करने की मांग कर दी।

जागरण 29 Jun 2022 10:38 pm

अग्निपथ का अंध विरोध: कुछ राजनीतिक दल और संगठन लांघ रहे हद

सेना में भर्ती की इस नई योजना के प्रति युवाओं के उत्साह से यदि कुछ सिद्ध होता है तो यही कि इस योजना का विरोध कर रहे राजनीतिक दल और कुछ अन्य संगठन दीवार पर लिखी इबारत पढऩे से जानबूझकर इन्कार कर रहे हैं।

जागरण 29 Jun 2022 10:33 pm

गुजरात दंगों पर दुष्प्रचार भरे अभियान का अंत: अग्निपरीक्षा से तपकर और निखर कर निकले पीएम मोदी

गुजरात दंगों की जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करने वाले बड़े एनजीओ और कथित मानवाधिकार संगठनों और मोदी विरोधी मीडिया का मुख्य उद्देश्य यही था कि किसी न किसी तरीके से मोदी को दोषी सिद्ध किया जाए।

जागरण 29 Jun 2022 10:16 pm

गर्भपात पर रोक से महिलाओं की जान को बढ़ता है खतरा

ऋतु सारस्वत समाजशास्त्री और स्तंभकार अमरीका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गर्भपात से जुड़े पचास साल पुराने फैसले को पलटने के बाद कट्टरपंथी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। गर्भपात की संवैधानिक वैधता धार्मिक समूहों के लिए एक बड़ा मुद्दा रही है, क्योंकि उनका मानना है कि भ्रूण हर स्थिति में जीवन जीने का अधिकारी है, चाहे वह किसी किशोर कन्या के साथ हुई दुष्कर्म की परिणति ही क्यों न हो। क्या यह धर्मावलंबियों का नैतिक दायित्व नहीं बनता कि जब कभी भी धार्मिक विचारों का विश्लेषण किया जाए, तो वह तर्क संबद्ध हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि वह मानवजाति के लिए न्याय संगत है या नहीं। गर्भपात का कानूनी अधिकार उस अजन्मे बच्चे के अधिकार से कहीं ज्यादा उस गर्भवती महिला के अधिकार के चिंतन का प्रतिफल है। इससे यह तथ्य स्थापित होता है कि जो सशरीर जीवित है, उसका जीवन कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है, बनिस्पत जिसने अभी जन्म नहीं लिया है। भावनाओं से परे यह चिंतन भी अपरिहार्य है कि क्यों अवांछित गर्भ महिलाओं के जीवन के लिए अहितकारी है। मई 2016 में प्रकाशित 'बॉर्न अनवांटेड, थर्टी फाइव इयर्स लेटर: द प्रैग स्टडी' उन बच्चों की आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्थितियों का गहन विश्लेषण है, जो कि अपनी मां के जीवन में अवांछित थे। 1960 के दशक में उन 220 बच्चों को अध्ययन का केंद्र बनाया गया, जिनकी माताएं उन्हें जन्म नहीं देना चाहती थीं। उनकी माताओं को किन्हीं कारणों के चलते गर्भपात के अधिकार से वंचित किया गया। इसलिए उन्होंने बच्चों को जन्म दिया। वहीं अध्ययन में अन्य वे 220 बच्चे भी सम्मिलित किए गए, जिनकी माताएं उन्हें जन्म देना चाहती थीं। निरंतर 35 वर्षों तक इन बच्चों को अध्ययनकर्ताओं ने अपने शोध का हिस्सा बनाए रखा और पाया कि अवांछित बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धि सामान्य से बहुत कम रही। यही नहीं उनके जीवन में वांछित बच्चों की अपेक्षाकृत संघर्ष अधिक था और वे 35 वर्ष की आयु तक अपने समान आयु वर्ग के लोगों की तुलना में मानसिक रोगी होने की संभावना अधिक रखते थे। नीति निर्माताओं को यह समझना होगा है गर्भपात का निर्णय माताएं उस अंतिम विकल्प के रूप में करती हैं, जब उनके समक्ष अन्य कोई विकल्प शेष नहीं रहता और जब वे पाती हैं कि वे अपने बच्चों को वह सुनहरा एवं सुरक्षित भविष्य नहीं दे पाएंगी, जिसके वे अधिकारी हैं। एम. बिग्स, एच. गाउल्ड तथा डी. जी. फॉस्टर का अध्ययन 'अंडरस्टैंडिंग वाई वीमेन सीक अबॉर्शन इन द यूएस' 2008 से 2010 के अंतराल में उन 954 महिलाओं से साक्षात्कार पर आधारित था, जिन्होंने गर्भपात करवाना चाहा था। अध्ययन में सर्वाधिक 40 प्रतिशत महिलाओं ने गर्भपात का कारण आर्थिक विवशताएं बताईं। एक महत्त्वपूर्ण विचारणीय तथ्य यह भी है कि किसी स्त्री को कैसे उसी के शरीर की स्वायत्तता से धर्म के आधार पर वंचित किया जा सकता है। 2021 में प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र के जनसंख्या कोष की रिपोर्ट 'माय बॉडी इज माय ओन' उल्लेखित करती है कि शारीरिक स्वायत्तता की कमी से महिलाओं की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ है और साथ ही आर्थिक उत्पादकता में भी कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप देश की स्वास्थ्य देखभाल और न्यायिक प्रणालियों के लिए अतिरिक्त लागत आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समस्या का मूल कारण लैंगिक भेदभाव है, जो पितृसत्तात्मक शक्ति प्रणाली को दर्शाता है और बनाए रखता है। साथ ही लैंगिक असमानता और अक्षमता को जन्म देता है। अमरीका में गर्भपात की संवैधानिक वैधता की समाप्ति महिलाओं के जीवन पर घातक हमला साबित होगी, क्योंकि विभिन्न अध्ययन बताते हैं कि गर्भपात तक पहुंच की कमी गर्भपात की संख्या को कम नहीं करती। वास्तव में असुरक्षित गर्भपात की दर सबसे अधिक वहीं होती है, जहां यह सबसे अधिक प्रतिबंधित है। दुनिया भर में कम से कम 8 प्रतिशत मातृ मृत्यु दर असुरक्षित गर्भपात से होती है। हाल ही में हुए एक अध्ययन का अनुमान है कि यूएस में गर्भपात पर प्रतिबंध लगाने से कुल मिलाकर गर्भावस्था से संबंधित मौतों की संख्या में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है और अश्वेत महिलाओं में 33 प्रतिशत की। इस खतरे की गंभीरता को समझना होगा।

पत्रिका 29 Jun 2022 8:15 pm

आपकी बात, क्या उपभोक्तावादी संस्कृति से पर्यावरण संकट बढ़ रहा है?

जीवनशैली में बदलाव जरूरी संकट इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि उपभोग तो हो रहा है परंतु उसकी भरपाई नहीं की जा रही। पर्यावरण की रक्षा के लिए जीवन शैली में बदलाव जरूरी है। -संजय माकोड़े बैतूल .................. प्राकृतिक संसाधनों पर अनावश्यक बोझ भारत जैसे देशों में उपभोक्तावाद व्यापक गरीबी के बीच लग्जरी वस्तुओं की होड़ को बढ़ाता है। चूंकि इन वस्तुओं का उपार्जन प्रतिष्ठा का आधार है, अत: इन्हें पाने की लालसा ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। -अशोक ,जोधपुर ................ दिखावा रोकें उपभोक्तावादी संस्कृति से हमारे दैनिक जीवन में सुख और शांति का लोप हो रहा है। तृष्णा बढ़ती ही जा रही हैै। दिखावे के लिए जरूरत से ज्यादा उन वस्तुओं का उपभोग कर रहे हैं, जो पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा हैं। पर्यावरण के असंतुलन से पृथ्वी का तारतम्य पूरी तरह से बिगड़ गया है। अब हमें सावधान हो जाना चाहिए। उपभोक्तावादी संस्कृति को त्याग कर पर्यावरण को सुरक्षित और संरक्षित कैसे रखा जाए, इस पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। -मनीष कुमार सिन्हा, रायपुर, छत्तीसगढ़ .................. पृथ्वी पर संकट उपभोक्तावादी संस्कृति ने आज पर्यावरण संतुलन बिगाड़ दिया है। इससे ओजोन परत का क्षरण हो रहा है, जिससे पृथ्वी का अस्तित्व ही संकट में आ गया है। -होमलाल साहू, खाती .................... पर्यावरण संकट सिंगल यूज प्लास्टिक से जहां जमीन और पानी प्रदूषित हो रहे हैं। डीजल-पेट्रोल के बेतहाशा उपभोग और एसी,फ्रिज से निकली सीएफसी से वायु प्रदूषण के कारण पर्यावरण प्रदूषण का संकट निरन्तर बढ़ रहा है। -महेंद्र किरार पटवारी, गुना, मप्र ................. उपभोगवाद ही कारण वर्तमान समय में व्यक्ति ज्यादा ही उपभोगवादी हो गया है। उसके उपभोगों का सीधा संबंध पर्यावरण से है। उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण हो रहे पर्यावरणीय विनाश का सामना करना पड़ रहा है। समय रहते लोगों को जागरूक करने और उपभोग के इस विनाशकारी प्रभाव को समझाने की जरूरत है। -उल्फत खान, अलवर ................. कट रहे हैं पेड़ उपभोक्तावाद और विकास के नाम पर पेड़ काटे जाते हैं। इंडस्ट्री खोली जाती हैं। विकास के साथ पर्यावरण को संरक्षित और संतुलित करना भी जरूरी है। -रजनी गंधा, रायपुर ............... पेड़ों को बचाएं बढ़ती उपभोक्तावादी प्रवृत्ति के चलते पेड़ काटे जा रहे हैं। इससे हमारे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंच रहा हैं। पेड़ों को बचाना जरूरी है। -प्रियव्रत चारण, जोधपुर

पत्रिका 29 Jun 2022 4:05 pm

मानसून में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत है हैं पुणे और मुंबई के समीप के ये स्थान

बारिश में घूमने के शौकीन है तो मानसून सीजन में पुणे और मुंबई के समीप कुछ ऐसे डेस्टिनेशन है, जहां के रास्तों पर चलने के दौरान आप बारिश का भी मजा ले सकते हैं। जी हाँ और आज हम आपको उन्ही के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ बारिश में जाकर आपको आनंद आ जाएगा। राजमाची ट्रेक- राजमाची ट्रेक, सहयाद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित बेहद शानदार ट्रेक्स में से एक है। जी हाँ और यह किला उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है जो गहरी घाटियों, कैंपिंग, पगडंडियों, झरनों और प्राकृतिक नजारों के दीवाने हैं। इसी के साथ मानसून के दिनों में यहां के झरने काफी आकर्षक दिखते हैं। देवकुंड वॉटरफॉल- देवकुंड वॉटरफॉल, मुंबई से करीब 140 किमी। की दूरी पर स्थित है, जो शहर के भीड़भाड़ से दूर एक शांत स्थान है। जी दरअसल मुंबई के नजदीक होने के कारण यहां पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जाती है और यह जगह परिवार या दोस्तों के साथ वीकेंड मनाने के लिए एक सर्वोत्तम स्थान है। विसापुर फोर्ट- विसापुर फोर्ट एक पहाड़ी किला है, जो महाराष्ट्र के पुणे जिले के अंतर्गत विसापुर नामक गांव में स्थित है। इसी के साथ यह एक प्राचीन किला है, जिसे 18वीं शताब्दी में बालाजी विश्वनाथ ने बनवाया था, जो मराठा साम्राज्य के सबसे पहले पेशवा थे। आप सभी को बता दें कि मराठा साम्राज्य से संबंध रखने के कारण इन्हें जुड़वा किला भी कहा जाता है। किले को लेकर कहा जाता है कि यह किला पांडवों द्वारा बनाया गया था। हालाँकि इसका कोई ठोस प्रमाण अभी तक नहीं मिला है। जी दरअसल यह किला महारा्ष्ट्र के सबसे ऊंचे किलों में शुमार है। जीवधान फोर्ट- जीवधान फोर्ट, नानेघाट पर्वत श्रृंखला में स्थित है, जो ट्रेकर्स के लिए सबसे कठिन किलों में से एक है। वहीं अनुभवी ट्रेकर्स के लिए सबसे लोकप्रिय किलों में से एक है। ट्रेक के कुछ हिस्सों में, आपको रस्सियों का उपयोग करने की भी आवश्यकता हो सकती है। इसी के साथ आपको बता दें कि इस किले के ट्रेकिंग वाले रास्ते बेहद खतरनाक है, काफी सावधानीपूर्वक यहां चढ़ाई करनी पड़ती है। आद्राई जंगल ट्रेक- आद्राई जंगल ट्रेक, सहयाद्रि पर्वत श्रृंखला के सबसे खूबसूरत और अछूते जंगलों में से एक है। वहीं मानसून के सीजन में इस जंगल की ट्रेकिंग करना बेहद ही शानदार अनुभव दिलाता है। इसी के साथ यहां आसपास का हरा-भरा माहौल, प्रकृति को छूती हुई हवाएं तन और मन दोनों को तृप्त कर देती है। आपको इस रास्ते में झरने, गुफाएं, घाटियां, चोटियां मिल सकती हैं। बरसात में इन 4 जगहों पर जाकर खो जाएंगे आप, डबल आएगा मजा मानसून में करना है रोमांस तो इन जगहों पर लें हाउसबोट का मजा जर्मनी रवाना हुए PM मोदी, जी7 शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 29 Jun 2022 3:17 pm

पहली बार कर रहे हैं सेक्स, तो कौन सा कंडोम खरीदें?

अगर आप अपने साथी के साथ बिना किसी टेंशन के फर्स्ट टाइम इंजॉय करना चाहते हैं, तो कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें। ये उन कई तरह की समस्याओं से बचाएगा, जो बाद में जी का जंजाल बन सकती हैं। अगर ये नहीं जानते कि कैसे और कौन सा कंडोम चुनना चाहिए, तो नीचे लिखीं कुछ टिप्स काम आ सकती हैं।

नव भारत टाइम्स 29 Jun 2022 2:35 pm

व्हाट्सऐप पर ब्लॉक किया तो बहन ने भाई से बात करने लिए अपनाया ऐसा तरीका कि बन गया 'वर्ल्ड रिकॉर्ड'

इद्दुकी: हाल ही में केरल (Kerala) के इद्दुकी से एक अजीबोगरीब घटना सामने आ रही है जिसमे इद्दुकी में रहने वाली एक कृष्णाप्रिया ने अपने 21 वर्षीय भाई कृष्णप्रसाद के लिए पत्र लिखा है। ये पत्र इतना लम्बा है कि वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Record) बन गया। ये पत्र कृष्णाप्रिया ने अपने भाई को तब लिखा था, जब वो उसे ब्रदर्स डे पर विश करना भूल गई। अपनी बात रखने के लिए बहन ने इतना लम्बा पत्र लिखा कि ये विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पेशे से इंजीनियर कृष्णाप्रिया (krishnapriya) ने अपने 21 वर्षीय भाई कृष्णप्रसाद के लिए पत्र लिखा। इस वर्ष विश्व भाई दिवस के अवसर पर कृष्णाप्रिया अपने भाई के साथ नहीं थीं तथा वे उन्हें बधाई देना भी भूल गईं। इसके बाद जब भाई ने उन्हें मैसेज किया तो घंटों तक वे मैसेज देख भी नहीं पाईं। ऐसे में भाई ने कृष्णा को याद दिलाने के लिए कुछ स्क्रीन शॉट्स भी भेजे। जब इस पर भी उनकी तरफ से कोई उत्तर नहीं आया तो उनके भाई ने उन्हें व्हाट्सऐप पर ब्लॉक कर दिया। जब भाई ने उनसे बात करनी बंद कर दी तो कृष्णा ने पत्र के माध्यम से अपना पक्ष रखा , जो वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया। पत्र को कृष्णाप्रिया ने 25 मई से लिखना आरम्भ कर दिया। उन्हें सामान्य पेपर पर लिखना आरम्भ किया था, मगर जब उनकी बातें समाप्त नहीं हो रही थीं, तो उन्होंने दुकान से 15 पेपर रोल खरीदे। प्रत्येक रोल को वे 12 घंटे में समाप्त कर रही थीं। आखिरकार ये पत्र आपस में जोड़ना मुश्किल काम था। किसी प्रकार जब वे इसे जोड़कर पोस्ट ऑफिस पहुंचीं तो इसका वजन 5।27 किलो तथा लंबाई 434 मीटर (लगभग आधा किलोमीटर) निकली। पार्सल में पत्र देखने के बाद भाई कृष्ण प्रसाद हैरान रह गया। उसने जब कोलकाता के यूनिवर्सल रिकॉर्ड फोरमको पत्र भेजा, तो इसके रिकॉर्ड बनने की पुष्टि हुई। OMG! आगरा में महिला ने एक साथ 4 बच्चों को दिया जन्म अजब-गजब! बेटे की मौत के बाद हॉस्पिटल आत्मा लेने पहुंचे परिजन 'ये पीड़ितों के दर्द का भाव लगाते हैं, ताकि रुपए कमाएं..' , तीस्ता सीतलवाड़ को लेकर कांग्रेस पर भाजपा का बड़ा हमला

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 29 Jun 2022 1:25 pm

खिलौनों की दुनिया के वो मिट्टी के घर याद आते हैं

सदियों से मिटटी के घर बनाने की जो परम्परा चली आ रही है; भारत में 118 मिलियन घरों में से 65 मिलियन मिट्टी के घर हैं? यह भी सच है कि कई लोग अपने द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभों के लिए मिट्टी के घरों को पसंद करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हम ... Read more

अजमेरनामा 29 Jun 2022 12:54 pm

'वन नेशन, वन डायलिसिस' कार्यक्रम क्या है? इसकी कितनी जरूरत है? यह कब से शुरू होगा?

बीते कई वर्षों में यह देखने में सामने आया है कि लोगों में तेजी से किडनी की बीमारी बढ़ रही है। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में लगभग 85 करोड़ लोगों को किडनी की कोई न कोई बीमारी है। अकेले भारत में लगभग 10 करोड़ लोगों को क्रोनिक किडनी रोग (अपरिवर्तनीय गुर्दे की विफलता) है। इनमें से भारत में हर साल लगभग तीन लाख मरीज किडनी की बीमारी के अंतिम चरण में पहुंच जाते हैं। इसका मतलब है कि इन किडनी के मरीजों को डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि गत दिनों तमिलनाडु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 'वन नेशन, वन डायलिसिस' कार्यक्रम शुरू करेगी। इस योजना के माध्यम से कोई भी मरीज देश में कहीं से भी डायलिसिस की सुविधा प्राप्त कर सकता है। क्योंकि डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की लागत समाज के अधिकांश वर्गों के लिए सस्ती नहीं है। इसे भी पढ़ें: दिल्ली में किडनी रैकेट का पर्दाफाश, डॉक्टर समेत 10 लोगों की हुई गिरफ्तारी, सोशल मीडिया के जरिए बनाते थे निशाना चिकित्सकों की राय है कि किडनी यानी गुर्दे की बेहतर देखभाल के लिए गुर्दे की बीमारी की रोकथाम, जल्दी पता लगाने और प्रगति को धीमा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। शायद इसी उद्देश्य से हर साल 10 मार्च को विश्व गुर्दा दिवस मनाया जाता है। इसके तहत हॉस्पिटल्स के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से गुर्दे की बीमारियों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस क्रोनिक किडनी रोग का प्रमुख कारण डॉक्टर बताते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस क्रोनिक किडनी डिजीज का प्रमुख कारण है। टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस के निदान के समय और टाइप वन डायबिटीज मेलिटस के निदान के पांच साल बाद गुर्दे की बीमारी के लिए एक परीक्षण करवाना महत्वपूर्ण है। इसके बाद किडनी की बीमारी का जल्द पता लगाने के लिए हर साल जांच जरूरी है। उनके मुताबिक, मधुमेह रोगियों में गुर्दे की बीमारी के मुख्य लक्षण उच्च रक्तचाप का विकास, पैरों/शरीर की सूजन का विकास, मूत्र उत्पादन में वृद्धि, विशेष रूप से रात में, दृश्य गड़बड़ी का विकास (मधुमेह रेटिनोपैथी) होना है। किडनी की बीमारी को लेकर जरूर कराना चाहिए टेस्ट चिकित्सा जगत के विशेषज्ञ बताते हैं कि हर वयस्क को किडनी की बीमारी की जांच कराने की जरूरत नहीं है। फिर भी कुछ उच्च-जोखिम वाले समूह हैं जिन्हें जोखिम का पता लगाने के लिए परीक्षण करवाना चाहिए। उनमें मधुमेह मेलिटस, उच्च रक्तचाप, गुर्दे की पथरी की बीमारी, मोटापा, मूत्र मार्ग में संक्रमण, हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी और मधुमेह के पारिवारिक इतिहास से पीड़ित लोगों को जरूर जांच कराना चाहिए। इन व्यक्तियों को किडनी रोग की जांच के लिए यूरिन टेस्ट और सीरम क्रिएटिनिन करवाना चाहिए। किडनी की बीमारी से बचने के लिए यह सावधानियां बरतें यदि किसी को गुर्दे की पथरी का निदान कराना है तो समय पर उपचार के लिए मूत्र रोग विशेषज्ञ और नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। रोजाना पर्याप्त पानी (एक से दो लीटर) नहीं पीना चाहिए, जब तक कि डाक्टरों द्वारा इससे बचने के लिए कहा न जाए। ये गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ा सकता है। हालांकि अतिरिक्त पानी (चार लीटर प्रति दिन से ज्यादा) पीना किडनी के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं है। उच्च नमक, उच्च चीनी और भारी रेड मीट के सेवन से किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है। मोटापा गुर्दे की पथरी बनने का एक और जोखिम कारक है। ये है प्रोस्टेट वृद्धि और गुर्दे की बीमारी के बीच संबंध प्रोस्टेट ग्रंथि को प्रभावित करने वाले रोग विशेष रूप से वृद्ध पुरुषों में गुर्दे की बीमारी का एक महत्वपूर्ण कारण है। प्रोस्टेट वृद्धि मूत्र पथ में रुकावट और गुर्दे की तीव्र चोट का कारण बन सकती है। प्रोस्टेट विशिष्ट एंटीजन (पीएसए) का उपयोग करके प्रोस्टेट कैंसर के लिए स्क्रीनिग 55 वर्ष की आयु से शुरू होनी चाहिए और हर दो साल में दोहराई जानी चाहिए। तेजी से बढ़ रहे मरीजों के लिए वरदान साबित होगा डायलिसिस कार्यक्रम आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल एंड-स्टेज रीनल डिजीज (ईएसआरडी) के लगभग 2.2 लाख नए मरीज जुड़ते हैं, जिसके परिणामस्वरुप हर साल 3.4 करोड़ डायलिसिस की अतिरिक्त मांग होती है। वहीं, लगभग 4,950 डायलिसिस केंद्रों के साथ, भारत में बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र में, मौजूदा बुनियादी ढांचे के साथ मांग आधे से भी कम है। इसे भी पढ़ें: तांबे के बर्तनों में रखा पानी क्या सच में शरीर के लिए फायदेमंद होता है? जानिए क्या कहती है स्टडीज चूंकि प्रत्येक डायलिसिस में लगभग ₹2000 का अतिरिक्त व्यय टैग होता है, इसके परिणामस्वरूप रोगियों के लिए सालाना 3-4 लाख रुपये का खर्च होता है। इसके अलावा, अधिकांश परिवारों को बार-बार यात्राएं करनी पड़ती हैं, और अक्सर डायलिसिस सेवाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे रोगी और रोगी के साथ आने वाले परिवार के सदस्यों को भारी यात्रा लागत और मजदूरी का नुकसान होता है। इसलिए, ऐसे रोगियों के साथ व्यवहारिक रूप से सभी परिवारों के लिए वित्तीय तबाही होती है। जीवन की गुणवत्ता में पर्याप्त लाभ और रोगियों के लिए प्रगति-मुक्त अस्तित्व के विस्तार के साथ, परिवार बड़े पैमाने पर जेब खर्च करने के लिए आर्थिक रूप से विस्तार करना जारी रखते हैं। यह महसूस किया गया है कि इस महत्वपूर्ण जीवन रक्षक प्रक्रिया के प्रावधान के संदर्भ में और रोगियों के लिए जेब से खर्च की जाने वाली दरिद्रता को कम करने के लिए, एक डायलिसिस कार्यक्रम की आवश्यकता है, जिसको पूरा करने के लिए सरकार ततपर है। गौरतलब है कि बजट भाषण 2016-17 में केंद्रीय वित्त मंत्री ने जिला अस्पतालों में सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत एक राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी, जिस पर अब तेजी से अमल किया जाने वाला है। इससे अभावग्रस्त लोगों को राहत मिलेगी। -कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

प्रभासाक्षी 29 Jun 2022 12:08 pm

महाराष्ट्र सियासत: पार्टी की आउटसोर्सिंग और शिवसेना का ‘होस्टाइल टेकओवर’?

शिवसेना को महज़ एक परिवार की पार्टी मान लेने वाले बड़ी भूल करते हैं। ज़मीन पर शिवसेना परिवार से ज़्यादा विचारधारा की पार्टी है।इसकी जड़े मुंबई की शिवसेना शाखाओं में है जिसे बाल ठाकरे ने अपने विचारों से बनाया।

अमर उजाला 29 Jun 2022 12:04 pm

गलती से कर्मचारी को कंपनी ने दे दी 300 महीने की सैलरी, फिर हुआ वो जो आप सोच भी नहीं सकते

हम सभी यह बात जानते हैं कि महीने भर काम करने के बाद कर्मचारियों को एक तारीख का बड़ा ही बेसब्री से इंतजार होता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन सैलरी आती है जिससे पूरे महीने का खर्चा चलता है। केवल यही नहीं बल्कि कई बार तो महीने के आखिरी दिनों में लोगों के पास पैसे खत्म हो जाते हैं तो थोड़े में गुजारा करते रहते हैं। आप सभी यह भी जानते होंगे कि प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले एम्प्लाई को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और उन्हें सैलरी की अहमियत बहुत अच्छे से मालूम होती है। यहाँ जैसे ही सैलरी बांटी जाती है वैसे ही एम्प्लाईज के चेहरे की मुस्कान बढ़ जाती है। हालांकि, एक अजीबोगरीब मामले में एक एम्प्लाई को उसके सोच से कहीं अधिक सैलरी मिल गई, जिसके बाद उसने रिजाइन दे दिया और गायब हो गया। सुनकर आप कहेंगे ये क्या हुआ? लेकिन यह सच है। जी दरअसल एक कर्मचारी को कंपनी ने गलती से हजारों-लाखों नहीं बल्कि एक करोड़ से ज्यादा सैलरी दे दी और कर्मचारी को गलती से उसके वेतन का 286 गुना भुगतान कर दिया गया था। वहीं इस घटना के बाद, कर्मचारी ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया और अपने कंपनी से वादा किया कि वह अधिक भुगतान की गई राशि को वापस कर देगा, गायब हो गया। आप सभी को बता दें कि यह चिली में cecinas (स्पेनिश मूल का एक प्रकार का निर्जलित मांस) की सबसे बड़ी कंपनी है। बताया जा रहा है जब कंपनी कर्मचारियों को वेतन ट्रांसफर कर रही थी, एक त्रुटि थी जिसके कारण इतनी बड़ी गलती हुई। वहीं स्थानीय मीडिया के अनुसार, कंपनी ने गलती से कर्मचारी को 500,000 पेसो (43,000 रुपये) के बजाय 165,398,851 चिली पेसो (1।42 करोड़ रुपये) का भुगतान किया। आप सभी को बता दें कि यह पूरा घटनाक्रम फूड इंडस्ट्रियल कंसोर्टियम (Cial) के मानव संसाधन क्षेत्र में हुआ। जी हाँ और यह एक ऐसी कंपनी है जिसके नियंत्रण में सैन जॉर्ज, ला प्रेफेरिडा और विंटर जैसे महत्वपूर्ण चिली ब्रांड हैं। Video: कोरोना से हुई पापा की मौत, शादी के मंडप में मोम से बने पिता को देख रोने लगी बेटी दिल तोड़ देने वाला Video! पैसे दने के बावजूद कपड़ों की वजह से बच्चों को रेस्टोरेंट से निकाला दुनिया के सबसे खतरनाक कुत्ते ने मासूम पर किया अटैक, लगे 200 टांके

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 29 Jun 2022 11:27 am

IPS आरबी श्रीकुमार ने जो नरेन्द्र मोदी के साथ किया, उससे बुरा ISRO के वैज्ञानिक नंबी नारायण संग किया

आरबी श्रीकुमार की गिरफ्तारी पर 79 साल के नंबी नारायण बेहद खुश हैं। दरअसल श्रीकुमार ने जो कुछ भी नरेन्द्र मोदी के साथ किया उससे कही ज्‍यादा बुरा ISRO के वैज्ञानिक नंबी नारायण संग किया था। आइए नंबी नारायण की व्यथा-कथा भी जानिए।

जागरण 29 Jun 2022 9:54 am

Udaipur Murder Case: हैवानियत की हद, कन्हैया लाल की हत्या को आतंकी घटना के रूप में ही लिया जाना चाहिए

Udaipur Murder Case उदयपुर की घिनौनी घटना यही बता रही है कि सिर तन से जुदा महज एक नारा भर नहीं बल्कि कबीलाई युग वाली एक घृणित मानसिकता है। आज के युग में ऐसी बर्बर मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं हो सकती।

जागरण 29 Jun 2022 9:39 am

Share Market Opening: बाजार में गिरावट; सेंसेक्स 500 अंक लुढ़ककर 52623 और निफ्टी 15705 पर खुला

SGX Nifty में कमजोरी के बाद भारतीय बाजार बुधवार को लाल निशान में खुले हैं। सेंसेक्स 500 अंक लुढ़ककर 52623 और निफ्टी 15705 पर खुला है।

अमर उजाला 29 Jun 2022 9:29 am

Video: कोरोना से हुई पापा की मौत, शादी के मंडप में मोम से बने पिता को देख रोने लगी बेटी

दुनियाभर से कई चौकाने वाले मामले सामने आते रहते हैं। अब इस समय भी एक मामला सामने आया है जो सभी को हैरान कर रहा है। इस मामले में जो हुआ वह देखकर आपको ख़ुशी होगी। वैसे तो दुनिया में सब स्वार्थ पर टिका, बस बाप-बेटी का रिश्ता प्यार पर टिका। जी हाँ और इन्हीं शब्दों को बयां कर रहा एक इमोशनल वीडियो जो इस समय चर्चाओं में बना हुआ है। यह वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है। जी दरअसल यह वीडियो शादी का है, लेकिन इसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं। जी दरअसल, पिता को खोने के बाद जब बेटी की शादी हुई, तो उसके परिवार ने मंडप में पिता के मोम का पुतला रख दिया। वहीं इसको देख बेटी चौंक गई और पुतले से लिपट कर रोने लगी। View this post on Instagram A post shared by ???????????????????? | ???????????????? | ???????????????????????? (@naughtyworld_) आप देख सकते हैं इस वीडियो में पिता के पुतले को देख बेटी भावुक होकर उसे चूमने लगती है। वहीं इस दौरान सभी रिश्तेदारों की आंखें भी नम हो जाती हैं। इसी के साथ परिवार के सदस्य पुतले के साथ फैमिली फोटो भी क्लिक करवाते हुए नजर आते हैं। आप सभी को बता दें कि यह मामला तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले के थानाकानंदल गांव का है। जी दरअसल मार्च में 56 साल के सेल्वरेज की कोरोना से मौत हो गई थी और ल्वरेज जब जिंदा थे तो बेटी की शादी धूम-धाम से करना चाहते थे। वहीं अब जब इस साल जून में बेटी की शादी हुई, तब उसे पिता की कमी महसूस न हो इसलिए परिवार ने बेटी के लिए यह खूबसूरत गिफ्ट प्लान किया। यह गिफ्ट देख बेटी के आंसू नहीं रुके और वीडियो देख यूजर्स के आंसू नहीं रुक रहे हैं। दिल तोड़ देने वाला Video! पैसे दने के बावजूद कपड़ों की वजह से बच्चों को रेस्टोरेंट से निकाला दुनिया के सबसे खतरनाक कुत्ते ने मासूम पर किया अटैक, लगे 200 टांके क्या आसमान से आने वाली है Tsunami? तस्वीर हो रही वायरल

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 29 Jun 2022 9:21 am

मौसम की मार : बाढ़ से निपटने की रणनीति कैसी हो, यह तय करते समय जलवायु परिवर्तन का मुद्दा ध्यान रखना होगा

सही हो या गलत, कुछ आपदाओं पर दूसरों की तुलना में ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसकी कई वजहें हैं। आपदा के कवरेज का स्तर और तीव्रता वास्तविक पीड़ा के पैमाने के बजाय निकटता, लोगों की रुचि और इसमें शामिल आर्थिक दांव पर निर्भर करता है।

अमर उजाला 29 Jun 2022 2:58 am

Udaipur Murder Case: उदयपुर की घटना को लेकर यूपी में हाई अलर्ट, माहौल खराब किया तो खैर नहीं

दर्जी कन्हैयालाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की थी। इसमें उसने नुपुर शर्मा के विवादित बयान का समर्थन किया था। कन्हैयालाल की हत्या के बाद दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

अमर उजाला 29 Jun 2022 2:18 am

Bundelkhand Expressway: पीएम मोदी 13 जुलाई को करेंगे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण, यूपीडा ने शुरू कीं तैयारियां

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 296.07 किमी है। एक्सप्रेस-वे फोर लेन है, जिसे छह लेन तक विस्तार दिया जा सकता है। एक्सप्रेसवे पर 4 स्थानों पर फ्यूल पंप स्थापित करने की कार्यवाही प्रक्रिया में है।

अमर उजाला 29 Jun 2022 2:15 am

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की तैयारी

जब 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) की शुरुआत की गई थी, तब हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी, देश के सुदूर क्षेत्र में रहने वाली अंतिम महिला तक एलपीजी सिलेंडर.......

लाइव हिन्दुस्तान 28 Jun 2022 10:44 pm

मृत्यु के कितने प्रकार होते हैं, मृत्यु से पहले दिखते हैं कौन-कौन से लक्षण

जानिए परलोक और पुनर्जन्म के बारे में ======================== मृत्यु इस संसार का सबसे अटल सत्य है। इस सत्य से कोई भी इंकार नहीं कर सकता और ना ही कोई इसे टाल सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, जीवन के समान मृत्यु भी अटल सत्य है और मृत्यु के बाद फिर नया शरीर ... Read more

अजमेरनामा 28 Jun 2022 9:53 pm

मुर्मू के बहाने आदिवासी विकास का मर्म

आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए द्रौपदी मुर्मू को राजग का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाना एक सराहनीय एवं सूझबूझभरा कदम है। यह प्रशंसनीय एवं सुखद कदम इसलिये है कि आजादी के पचहत्तर वर्षांे के बाद देश के सर्वाेच्च ... Read more

अजमेरनामा 28 Jun 2022 9:48 pm

खूबसूरती में बेमिसाल तुरतुक गांव

तृप्ति पांडेय पर्यटन और संस्कृति विशेषज्ञ मैंने कभी इस गांव के बारे में न पढ़ा था और न ही सुना था। अपनी लद्दाख की दूसरी यात्रा के दौरान नूब्रा में पड़ाव के दौरान मैंने अपने गाइड से कहा कि कोई ऐसी जगह ले जाए, जो उन जगहों में शामिल न हो, जहां आमतौर पर पर्यटक जाते हैं। गाइड बोला कि वह मुझे एक ऐसे गांव ले जा सकता है, जिसकी सुंदरता स्विट्जरलैंड को भी टक्कर देती है और वहां बहुत कम ही लोग जाते है और विदेशियों को तो वहां जाने के लिए अनुमति लेनी होती है। खैर, गाइड साहब ने तो स्विट्जरलैंड नहीं देखा था, पर उनका विश्वास गजब का था। यह जानने के बाद भी कि यात्रा में आठ घंटे आने-जाने में लगेंगे, मेरा यायावर मन वहां जाने का निर्णय ले चुका था। हम बहुत सवेरे ही निकल पड़े। रास्ता ऊबड़-खाबड़ भी था, पर बेहद खूबसूरत। जब हरियाली, बड़े पेड़ और नीचे तैरते बादल दूर से अचानक नजर आते, तो गाइड चुप्पी तोड़ कर पूछता, क्यों मैडम, है ना हमारा तुरतुक स्विट्जरलैंड से ज्यादा खूबसूरत? अचानक हरियाली से घिरा वह गांव भी आ जाता है। इस छोटे से गांव का थोड़ा इधर, थोड़ा उधर होने का इतिहास हमें सन् उन्नीस सौ इकहत्तर के दिसम्बर महीने में ले जाता है, जब आठ से चौदह तारीख़ तक तुरतुक का वह युद्ध लड़ा गया था, जिसमें भारतीय सेना ने तुरतुक के इधर वाले हिस्से को अपने अधिकार में वापस ले लिया था, पर आधा हिस्सा अब भी पाक अधिकृत कश्मीर में है। तुरतुक बाल्टिस्तान क्षेत्र में है, जो कभी एक स्वतंत्र राज्य हुआ करता था। वहां अलग जनजातियों और वंशों ने राज किया, जिनमें से प्रमुख रहा यागबू जो मध्य एशिया से आया और लगभग एक हजार साल तक राज किया। गौरतलब है कि एक समय में ये पूरा इलाका सिल्क रूट का महत्त्वपूर्ण हिस्सा और बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। इस्लाम यहां ईरान के सूफी प्रचारक सैयद अली शाह हमदानी के साथ आया। आज भी यहां के कई लोग नूरबकशिया संप्रदाय से जुड़े हैं, जबकि शिया और सुन्नी विचारधारा के कारण परिवर्तन उन्नीसवीं सदी से हुआ। अठारह सौ चौंतीस मैं महाराजा गुलाब सिंह ने इसे अपने अधिकार में लिया। इतना सब इतिहास कुछ गाइड से तो तुरतुक के राजा याबगोमोहम्मद खान काचो से जाना। राजा तो कभी हुआ करते थे, पर अब वो उस पूर्व राज परिवार के वशंज हैं, जिसने कभी शान-शौकत से भरपूर समय देखा था। उनका निवास जो नाम भर के लिए राजमहल कहलाता है और वही हाल उनके संग्रहालय का है। हां, उस तीन सौ के करीब घर और चार हजार की आबादी वाले गांव में उनका घर ऊंचाई पर है, बस उतनी से शान जो दिखती है। बाकी उनकी बोली और आंखों से झलकती है, जो गुजरे जमाने की दास्तां सुना रही थीं। मैं वहां के छोटे बच्चों के गोरे चेहरे और उनकी भूरी आंखें अब भी नहीं भूल पाती। इन्हीं दिनों की बात थी, जब मैं वहां गई थी। चूंकि कुछ साल बीत गए और महामारी कोविड की मार भी रही, तो सोचा कि राजा जी के बारे में लिखने से पहले उनके हाल तो जान लूं। नेट पर बड़ी तलाश के बाद में जिसका नंबर हाथ में आया वह बोला कि 'मैडम राजा तो सोशल मीडिया ने बना रखा है, वैसे वे ठीक हैं। जिस आदमी से बात हुई, उसका जन्म भारत के तुरतुक गांव में उन्नीस सौ चौरासी में हुआ था। इसलिए उसे यह सब कहानी लगती होगी, पर भले ही मीडिया ने ही बनाया हो, वह राजा तो हैं ही। वाकई तुरतुक अपने आप में कुदरत की सौगात है, वहां उसकी अपनी रूह के लिए पहुंचना चाहिए, ना कि स्विट्जरलैंड याद करने के लिए।

पत्रिका 28 Jun 2022 7:56 pm

जलती धरती को बचाना सबकी जिम्मेदारी

रवि वेंकटेशन ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट के अध्यक्ष और 'व्हाट द हेक डू आई डू विद माई लाइफ?' के लेखक इस साल भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है। देश के कई हिस्सों में 122 साल का उच्चतम तापमान रेकॉर्ड किया गया। इस बीच असम और बांग्लादेश में आई बाढ़ ने लाखों लोगों को असहाय कर दिया या पलायन को मजबूर कर दिया। ये संयोगवश घटी घटनाएं नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आइपीसीसी) की नवीनतम रिपोर्ट भयावह तस्वीर पेश करती है। इसमें बताया गया है कि लू चलना, सूखा पडऩा या तूफान जैसी मौसम की चरम स्थितियां आम तौर पर देखने को मिलेंगी। सवाल यह है कि हम जलवायु परिवर्तन के संकट को क्यों अनदेखा कर रहे हैं? इसके कई कारण हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब भी काफी दूर हैं। हिमालय के ग्लेशियर पिघलना या असम की बाढ़ का असर हमारे सुकून भरे जीवन पर सीधा पड़ता दिखाई नहीं देता। और एक प्रमुख कारण है- 'ट्रेजेडी ऑफ कॉमन्स। यानी हम प्रत्येक सीमित संसाधन को लूटते हैं, क्योंकि यह 'मुफ्त है या इसकी लागत 7.5 अरब लोग में साझा की जाती है। कम से कम हम यह नहीं मानते कि हमारे व्यक्तिगत कार्य से कोई फर्क पड़ेगा। एक सवाल अपने आप से कीजिए कि पर्यावरण के लिए आपने अपने उपभोग और जीवनशैली में कितना परिवर्तन किया है? ईमानदारी से दिया जाए, तो इसका जवाब है-बहुत कम या न के बराबर। कम से कम तीन कारण ऐसे हैं, जिनके चलते बदलाव की शुरुआत हमसे ही होनी चाहिए। पहला, हमारे जैसे लोग ही जलवायु परिवर्तन में अत्यधिक योगदान दे रहे हैं। कार्बन उत्सर्जन का सीधा सम्बन्ध ऊर्जा और सामान के हमारे उपभोग से है। जितना सम्पन्न व्यक्ति होगा, उतना ही अधिक उपभोग व उत्सर्जन में योगदान होगा। विश्व स्तर पर सर्वाधिक सम्पन्न करीब 75 मिलियन लोग ऐसे हैं, जो निचले पायदान के 50 फीसदी लोगों के मुकाबले दोगुना उत्सर्जन का कारण हैं। भारत में भी यही हाल हैं। जापान स्थित संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार शीर्ष 20 प्रतिशत परिवार गरीबों के मुकाबले 7 फीसदी अधिक उत्सर्जन के वाहक बनते हैं। जब तक हम उपभोग नहीं घटाएंगे, सुधार नहीं आएगा। दूसरा, जब तक संस्थान, व्यवसाय व सरकार चलाने वाले हम जैसे लोग अपनी मानसिकता, जीवनशैली नहीं बदलेंगे, ये संस्थान भी नहीं बदलेंगे। ईएसजी,नेट जीरो और परिपत्र अर्थव्यवस्था की कितनी ही बातें कर ली जाएं, बदलाव एक बौद्धिक कवायद है। यह तभी आएगा, जब हम अपना व्यवहार बदलें। ऐसा होने पर संस्थानों का व्यवहार स्वत: बदल पाएगा। अखिरकार, हम अपने कार्यों से ही दूसरों को प्रेरित करते हैं और परिवर्तन वायरल होता चला जाता है। इसलिए इस धारणा के विपरीत कि मेरे प्रयास से वाकई में कोई फर्क नहीं पड़ता, को छोड़ कर हमें सोचना होगा कि यही एक चीज है, जो बदलाव ला सकती है। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि हमें वह परिवर्तन स्वयं में करना होगा, जिसकी अपेक्षा हम दुनिया से करते हैं। असल समस्या है अंधाधुध उपभोग। इसलिए शुरुआत यहीं से कीजिए कि अपने उपभोग के प्रति सचेत रहें। उपभोग करें, किसी भी वस्तु को व्यर्थ न करें और इस्तेमाल बुद्धिमत्ता के साथ करें। हमारे माता-पिता और दादा-दादी ऐसी ही सोच रखते थे। यह वह दौर था, जिसमें प्लास्टिक नहीं था, चीन का प्रभाव और ई कॉमर्स नहीं था, न ही बहुत सी सुलभ आय थी। तब हम काफी कम सामान खरीदते थे। अपनी उपकरण और कपड़े लम्बे समय तक इस्तेमाल करते थे। फाउंटेन पेन और कपड़े के थैले का इस्तेमाल करते थे। कागज की थैलियां और बोतलें रीसाइकल करते थे। मांसाहार कम करते थे। ताजा खाना, मौसमी फल व सब्जी खाते थे। एक दिन ऐसा होगा कि हम वस्तुओं की कीमतें पर्यावरण पर उनके प्रभाव के आधार पर तय करेंगे। इसलिए हम अपनी 'खरीदो, इस्तेमाल करो व फेंको जैसी आदतों के बारे में दो बार विचार करेंगे। एक दिन ऐसा होगा जब हमारे अत्यधिक आविष्कार हरित पैकेजिंग, हरित इस्पात व निर्माण सामग्री और नवीनीकरण योग्य ऊर्जा के रूप में सामने आएंगे। तब उपभोग का दुष्प्रभाव कम होगा। जिम्मेदारी हम सबकी है। क्या मैं हर माह का अपना बिजली का बिल कम कर सकता हूं? क्या अनावश्यक सामान खरीदना बंद कर सकता हूं? प्लास्टिक शून्यता के निकट पहुंच सकता हूं? बदलाव के लिए पर्यावरण के लिए चिंतित समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लेकर चलें। गीला-सूखा कचरा अलग रखना, खाद बनाना और रीसाइक्लिंग साफ-सफाई के लिए रसायन मुक्त विकल्प अपनाना इसी का नतीजा है। पड़ोसियों ने ही मुझे सोलर पैनल लगाने के लिए प्रेरित किया। स्थानीय सरकारों नागरिक संगठनों के साथ मिलकर काम करके अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार लाया जा सकता है। कार्बन ऑफसेट और हवाई यात्रा नई चुनौतियां हैं। पृथ्वी जल रही है, इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

पत्रिका 28 Jun 2022 7:46 pm