पुणे में शिवाजी की प्रतिमा पर चप्पल फेंकने का वीडियो झूठे सांप्रदायिक दावे से वायरल
बूम ने पाया कि वायरल सांप्रदायिक दावा गलत है. वीडियो में दिख रही महिला का नाम अश्विनी दगड़े है और वह मुस्लिम नहीं है.
CJP प्रोटेस्ट में पीएम मोदी को अपशब्द कहने वाली किशोरी का AI वीडियो भ्रामक दावे से वायरल
बूम ने पाया कि 15 वर्षीय किशोरी के मूल वीडियो में AI की मदद से छेड़छाड़ की गई है. कई AI डिटेक्शन टूल भी वीडियो के एआई जनरेटेड होने पुष्टि करते हैं.
नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच डार्विन में खेले जा रहे पहले टेस्ट के दूसरे दिन बांग्लादेश ने अपनी पहली पारी में 210 रन बना लिए हैं और ऑस्ट्रेलिया पर 12 रन की बढ़त हासिल कर ली है।
इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ आज यानी 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। लेकिन फिल्म ने रिलीज से पहले ही कुछ रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।
रंग लाई मुहिम: अंधियारी रातों में फिर जगमगाने लगे जुगनू, क्या इंडोनेशिया बचा पाएगा यह नाजुक प्रजाति?
रंग लाई मुहिम: अंधियारी रातों में फिर जगमगाने लगे जुगनू, क्या इंडोनेशिया बचा पाएगा यह नाजुक प्रजाति?
Youth: क्या हम भविष्य का नेतृत्व करने के लिए तैयार? टॉपर से आगे बढ़कर देश को चाहिए समस्या सुलझाने वाले युवा
ललित सुरजन की कलम से स्वाधीनता और जनतंत्र का रिश्ता
'एक साजिश के तहत देश का नया इतिहास लिखने का काम चल रहा है।
युवाओं के लिए अच्छे काम का रास्ता मुश्किल
युवाओं में बेरोज़गारी और नीट(जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी कर रहे हैं और न ही ट्रेनिंग ले रहे हैं) की दरें बढ़ रही हैं।
आंदोलनों की शक्ति : स्वतंत्रता संग्राम से जेन जी तक
अरुण कुमार डनायक पूर्ववर्ती आंदोलनों की तरह यह छात्र आंदोलन भी कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण और गांधीवादी सत्याग्रह की तरह अहिंसक रहा तथा व्यवस्था की कमियों को सुधारने के लिए आगे आया। वर्तमान निराशाजनक राजनीतिक माहौल में जेन जी के इन निडर युवाओं ने बदलाव की उम्मीद जगाई है। भारत का स्वतंत्रता दिवस अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक और अहिंसक संघर्ष की निरंतर जिम्मेदारी का प्रतीक है। भारत की स्वतंत्रता में अनेक धाराओं का योगदान रहा, पर गांधी के अहिंसक आंदोलनों ने जनसामान्य की ललक को व्यापक जनआंदोलन में बदल दिया। गांधी के नेतृत्व में असहयोग, दांडी मार्च, सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जनसहयोग से सफल रहे। भारत छोड़ो आंदोलन ने शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद स्वतंत्रता की निर्णायक चेतना जगाई और ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। भारत में सामाजिक सुधार आंदोलनों की जड़ें भक्ति आंदोलन में हैं, जब कबीर, नानक और रैदास ने सामाजिक रूढ़ियों व भेदभाव के विरुद्ध जनचेतना जगाई। किन्तु आज़ादी के पहले हुए आंदोलनों ने भी जातीय भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष को दिशा दी। 1927 के महाड सत्याग्रह में डॉ. आंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने चवदार तालाब से पानी पीकर सार्वजनिक जलस्रोतों पर अधिकार जताया। महात्मा गांधी की हरिजन यात्रा ने अस्पृश्यता के विरुद्ध जनमत और मंदिर प्रवेश व शिक्षा के अधिकारों के प्रति चेतना जगाई। आजादी के बाद गांधी चाहते थे कि शासन समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज सुने और रचनात्मक कार्यक्रम को प्राथमिकता दे। संविधान ने नागरिकों को न्यायिक उपचार के साथ शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति का अधिकार भी दिया। लेकिन व्यवस्था की सीमाओं से आकांक्षाएं पूरी न होने पर लोगों ने आंदोलनों का रुख किया। डॉ. राम मनोहर लोहिया के 'कांग्रेस हटाओ, देश बचाओ' और 'अंग्रेजी हटाओ' जैसे आंदोलनों ने आजाद भारत में राजनीतिक आंदोलनों को नई धार दी। राजनीतिक आंदोलनों को पहली बड़ी सफलता छात्रों की भागीदारी से मिली। 1973-74 के गुजरात नव-निर्माण आंदोलन ने भ्रष्टाचार और महंगाई के विरोध में चिमनभाई पटेल सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर किया। इससे उत्साहित बिहार के छात्रों ने 1974 में जयप्रकाश नारायण से राज्य के कुशासन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व करने का आग्रह किया। बाद में यही आंदोलन इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन में बदल गया। जेपी ने पटना के गांधी मैदान से 'संपूर्ण क्रांतिÓ का आह्वान किया। आंदोलन के दबाव में आपातकाल लगा, विपक्षी नेता जेल गए और प्रेस पर पाबंदियां लगीं—यह भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय माना गया। 1977 में पहली बार कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हुई और लोकतंत्र की पुनसर््थापना व लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन हेतु इस आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व रहा। चंडी प्रसाद भट्ट, सुंदरलाल बहुगुणा आदि के नेतृत्व में उत्तराखंड का 'चिपको आंदोलनÓ (1973) जंगलों व पर्यावरण संरक्षण की व्यापक जनचेतना का माध्यम बना। नर्मदा बचाओ आंदोलन (1985) मेधा पाटकर के नेतृत्व में सरदार सरोवर बांध से प्रभावित किसानों, आदिवासियों और विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू हुआ। आंदोलन ने बड़े बांधों के सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभावों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ी। बांध निर्माण रोकने में असफल रहने पर भी आंदोलन ने सरकारों को विस्थापितों के मुआवजे व पुनर्वास के लिए दबाव में लाया और यह सवाल उठाया कि विकास की कीमत कौन चुकाए तथा प्रभावितों के अधिकार कैसे सुरक्षित हों? वीपी सिंह सरकार द्वारा मंडल आयोग (1990) लागू करने के विरोध में छात्रों का व्यापक आंदोलन हुआ, जिसमें राजीव गोस्वामी सहित कुछ युवाओं ने आत्मदाह का प्रयास किया। मंडल के साथ उभरी 'कमंडलÓ की राजनीति ने भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक धु्रवीकरण को भी गहरा किया। महिला आंदोलनों ने दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठाने के साथ समान अधिकारों की मांग की। मुस्लिम महिलाओं के आंदोलनों ने गुज़ारा भत्ता, तीन तलाक और नागरिकता संशोधन कानून जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में प्रमुखता दी। श्रमिक आंदोलनों ने न्यायपूर्ण वेतन व श्रमिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक के शुरुआती वर्षों में हुए निर्भया आंदोलन ने सरकार को यौन अपराधों के विरुद्ध कड़े कानून बनाने के लिए विवश किया तो अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन ने भ्रष्टाचार और लोकपाल के मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया। इसके बाद दिल्ली में आम आदमी पार्टी के उभार से लेकर केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार को मिली राजनीतिक चुनौती तक, भारतीय राजनीति में आंदोलनों के प्रभाव का एक नया दौर दिखाई दिया। आज देश में फिर आंदोलन का माहौल बन रहा है। 2020-21 में तीन कृषि कानूनों के विरुद्ध चला लंबा किसान आंदोलन सरकार को कानून वापस लेने पर विवश कर गया और आंदोलनों की प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण बना। इसके बाद 'काकरोच जनता पार्टीÓ के बैनर तले नई पीढ़ी परीक्षा व्यवस्था की अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर एकत्रित हुई। गांधीवादी सोनम वांगचुक ने आंदोलन के समर्थन में 26 दिन की भूख हड़ताल की। अंतत: 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने आंदोलनकारियों की अन्य मांगें भी स्वीकार कर लीं। जेन •ाी के आंदोलनों की विशेषता सोशल मीडिया, डिजिटल नेटवर्क और त्वरित जनसंचार का प्रभावी इस्तेमाल है। विकेंद्रीकृत नेतृत्व ने युवाओं को तेजी से जोड़ा, जो पारंपरिक दलों की केंद्रीकृत राजनीति से भिन्न है, और भविष्य में दलों की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीतियों व सामाजिक-आर्थिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है। जेन •ाी का प्रभाव केवल युवाओं तक सीमित नहीं दिखता; प्रौढ़ मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं को प्रभावित करने की उसकी क्षमता सत्तारूढ़ दलों के लिए भविष्य की बड़ी राजनीतिक चिंता बन सकती है। पूर्ववर्ती आंदोलनों की तरह यह छात्र आंदोलन भी कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण और गांधीवादी सत्याग्रह की तरह अहिंसक रहा तथा व्यवस्था की कमियों को सुधारने के लिए आगे आया। वर्तमान निराशाजनक राजनीतिक माहौल में जेन •ाी के इन निडर युवाओं ने बदलाव की उम्मीद जगाई है। इस आंदोलन ने आलोचकों और प्रदर्शनकारियों को 'भारत-विरोधी ताकतों से पोषितÓ बताने वाली सत्ता पक्ष की पुरानी बयानबाजी की धार भी कुछ कुंद की है। इस आंदोलन को लेकर कुछ सवाल और आशंकाएं भी हैं—क्या लड़कियों के लिए भी अभद्र भाषा उतनी ही स्वीकार्य हो सकती है जितनी लड़कों के लिए? क्या सरकार को छात्रों से पहले संवाद नहीं करना चाहिए था? और सबसे बड़ा सवाल—क्या जेन •ाी स्थापित राजनीतिक दलों को पीछे धकेलकर सत्ता तक पहुंच पाएगी? वर्तमान के घाघ राजनीतिज्ञ सोशल मीडिया पर उससे मुकाबला कैसे करेंगे और उसकी अनुभवहीनता भविष्य में शासन के लिए चुनौती बनेगी? भारत की स्वतंत्रता का अहिंसक संघर्ष अनेक देशों के लिए उपनिवेशवाद से मुक्ति का उदाहरण बना, और गांधी की अहिंसा व सत्याग्रह आज भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा है। लोकतंत्र में आंदोलनों का होना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि नागरिक चेतना और शासन को जवाबदेह बनाए रखने की जीवंत शक्ति है। आंदोलनों की परंपरा बताती है कि स्वराज और लोकतंत्र चुनावों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सतत भागीदारी और प्रतिरोध से जीवित रहते हैं। (लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता )
सीट का समीकरण: तीन चुनाव, पुरकाजी ने तीन अलग चेहरों को चुना, जानें किस दल का रहा यहां दबदबा
up election 2027 Muzaffarnagar Purqazi assembly seat history bjp sp bsp congress political equation- सीट का समीकरण: तीन चुनाव, तीन अलग विधायक, पुरकाजी विधानसभा सीट पर किसका रहा दबदबा? समझें पूरा सियासी गणित
विचार: आसान नहीं शेख हसीना की वतन वापसी
पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में जो खटास आई है, उसकी शुरुआत ढाका से हुई। भारत ने बातचीत और कूटनीति को बराबर महत्व दिया और मित्रता का हाथ बढ़ाया।
विचार: संसद के सामने नई चुनौती
यह डर विपक्ष को फिर से मानसून सत्र की तरह ही व्यवहार करने को मजबूर कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह लोकतंत्र की असफलता होगी।
जागरण संपादकीय: लोकतंत्र की त्रासदी
संसद लोकतंत्र का एक अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण मंच है। इस मंच का निरतंर क्षरण लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
बच्चे की डाइट में छह महीने के बाद शामिल करें ये तीन चीजें
नई दिल्ली, बच्चे की सेहत और विकास को लेकर हर माता-पिता काफी चिंता में रहते हैं।
यूपी से बिहार तक बरसेंगे बादल, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें मौसम का हाल
मौसम विभाग ने 13 से 19 अगस्त तक यूपी, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। जानें किस राज्य में कब होगी भारी बारिश।
वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि: ऑस्ट्रेलिया
मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। टीम ने स्टेम सेल से इंसानी हृदय के वाल्व जैसा ऊतक (टिशू) तैयार किया है।
Human Trafficking In India: मानव ट्रैफिकिंग का चेहरा बदला, चरित्र नहीं
ट्रैफिकिंग गिरोह आमतौर पर उन परिवारों को निशाना बनाते हैं जो आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से कमजोर होते हैं।
तिरंगे की कहानी: एक झंडा, जिसने भारत की पहचान बदल दी
7 अगस्त 1906 की पहली दस्तक से 15 अगस्त 1947 की आजादी तक—राष्ट्रीय ध्वज ने भी तय किया लंबा सफर।
नासा और इसरो:द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में हुई अहम पहल,भारत के स्पेस विजन-2047 को मिलेगी गति
ललित सुरजन की कलम से स्नोडन : अपराधी नहीं, विश्व नागरिक
'यह सबको पता है कि पिछले पच्चीस साल से भारत लगातार अमेरिकापरस्ती कर रहा है
मक्का समझौता : बदलता शक्ति-संतुलन और भारत की चुनौती
नई परिस्थितियों में भारत को यही बढ़त बनाए रखनी होगी—शोर से नहीं, शक्ति और रणनीति से।
मंगल मिलन में तिरंगा और भागवत कथा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद को राजनैतिक प्रहसन के मंच में तब्दील करने में लगातार लगे हुए हैं।
विचार: विदेशी पूंजी आकर्षित करने की चुनौती
निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा राजकोषीय घाटे का नियंत्रण और मुद्रास्फीति को संतुलित सीमा में रखना जरूरी है।
विचार: नए रूप में सामने आता गांधीवाद
नई पीढ़ी के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है। यदि नई पीढ़ी स्वयं लोकतांत्रिक मूल्यों का उदाहरण बनेगी तो बदलाव भी आएगा और लोकतंत्र भी मजबूत होगा और शायद यही 21वीं सदी का सबसे सच्चा गांधीवाद है।
जागरण संपादकीय: जेपीसी में एफसीआरए
इसे देखते हुए एफसीआरए में उपयुक्त संशोधन किए ही जाने चाहिए। इसलिए और भी, क्योंकि संप्रभु देश को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि विदेशी धन का दुरुपयोग न होने पाए।
ग्वालियर में मोबाइल चोर को पकड़ती बहनों का वीडियो झूठे सांप्रदायिक दावे से वायरल
बूम से बातचीत में ग्वालियर पुलिस ने पुष्टि की कि वीडियो में दिख रहा आरोपी मुस्लिम नहीं है और उसकी पहचान मनप्रीत सिंह के रूप में की गई है.
BJP ने झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज का बताकर शेयर किया पटना का वीडियो
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो 22 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज का है, जिसे बीजेपी ने गलत तरीके से झारखंड का बताकर शेयर किया है.
नदी में मगरमच्छ के सामने बच्चे का बेखौफ अंदाज, वीडियो ने मचाई सनसनी
नदी के पानी में मगरमच्छ को देखकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक बच्चे का बिल्कुल अलग ही अंदाज देखने को मिला। वीडियो में बच्चा नदी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम से नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है।
कपालभाति निकालता है शरीर के टॉक्सिन बाहर
नई दिल्ली, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा, कब्ज, साइनस, अस्थमा और तनाव आम हो गया है।
Independence Day 2026: आजाद भारत की युवा पीढ़ियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान
युवा लोकतंत्र को मजबूती देने में, युवा मतदान के प्रतिशत में वृद्धि करके देश हित में कार्य करने वाले योग्य व्यक्ति को संसद में पहुंचा सकते हैं ताकि युवाओं के आम जनमानस से जुड़े सवालों पर बहस हो और समाधान संभव हो।
जीवन धारा: जीवन को समझने का अर्थ है उसके साथ संवाद
जीवन धारा: जीवन को समझने का अर्थ है उसके साथ संवाद logic-and-life-beyond-reason-experience-emotion-and-wonder
नागरिक को टावर पर चढ़ना ही क्यों पड़े?: जमीन से नहीं पहुंचती फरियाद, न्याय के लिए ऊंचाई को सहारा बना रहे लोग uttar-pradesh-tank-tower-protest-public-grievances-administration
तस्वीर का दूसरा पहलू: युवाओं की बेरोजगारी घटी, लेकिन ग्रेजुएट नौकरी के लिए अब भी परेशान; क्या है बड़ी चुनौती? india-graduate-unemployment-youth-jobs-higher-education-state-of-working-india-2026
जलवायु के मौन संकेत: गर्म होते महासागर और ताकतवर अल-नीनो का खतरा
जलवायु के मौन संकेत: गर्म होते महासागर और ताकतवर अल-नीनो का खतरा global-ocean-temperature-july-record-el-nino-climate-change-india-impact
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
म्यूचुअल फंड में बदला निवेशकों का रुख: 30 महीने बाद लार्जकैप से निकाला पैसा; अब स्मॉलकैप में कितना निवेश बढ़ा?
ललित सुरजन की कलम से तपती धूप में सड़क का सफर
'हरदा जाते समय हमने सोचा कि फोरलेन छोड़कर बैतूल के पहले बैतूलबाजार में निर्मित बालाजीपुरम में रुककर चाय पी लेंगे।
प्रवासी शिविर जगती का माहौल मंगलवार को बदला-बदला नजर आया।
2027 की जनगणना संसदीय सीमाओं को फिर से बनाने में मदद करेगी
इसका असर सुरक्षित चुनाव क्षेत्रों पर पड़ेगा, जो उनकी नयी आबादी के आंकड़ों के आधार पर होगी जिससे अनुसूचित जाति और जनजाति सीटों की संख्या और भूगोल बदलेगा।
संसद में गतिरोध और सुविधा का लोकतंत्र
संसद के मानसून सत्र को खत्म होने में बस दो दिन बचे हैं। 13 अगस्त को सत्र खत्म हो जाएगा।
युवा शक्ति को मिले दिशा, सपनों को मिले उड़ान
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त 2026) पर विशेषः युवा केवल उम्र की एक अवस्था नहीं, बल्कि ऊर्जा, साहस, कल्पना, परिवर्तन और नवसृजन की चेतना का नाम है। जिस समाज की युवा शक्ति जाग्रत, संवेदनशील और रचनात्मक होती है, वह समाज परिवर्तन की नई इबारत लिखता है। इसके विपरीत जब युवा ऊर्जा दिशाहीन हो जाती है ... Read more
विचार: एक बड़ा उद्यम बना मिलावटखोरी
देश में ऐसे सरकारी विभागों की कमी नहीं, जो जिस काम के लिए बने हैं, वही कर पाने में बुरी तरह नाकाम हैं। परिणाम यह है कि गुणवत्ता के मानकों की हर कहीं अनदेखी हो रही है।
विचार: आसान नहीं साइबर अपराधों पर अंकुश
डाटा सिक्योरिटी काउंसिल आफ इंडिया यानी डीएससीआइ द्वारा समय-समय पर साइबर क्राइम की जांच-पड़ताल से संबंधित पुस्तक प्रकाशित की गई है, जो काफी उपयोगी है।
जागरण संपादकीय: संसद में सड़क की राजनीति
यह ठीक नहीं कि संसद में विधेयक बिना चर्चा के पारित हो जाए, लेकिन ऐसा हो रहा है। इसके लिए विपक्ष ही अधिक जिम्मेदार है।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के दावे से बांग्लादेश सीमा का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो चांपाईनवाबगंज के शिबगंज सीमा क्षेत्र पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच हुई कहासुनी का है.
Atal Pension Scheme: क्या आपको मिल सकती है 5000 रुपये की पेंशन?
भारत सरकार द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana - APY) देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और आम नागरिकों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजना है। इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की गारंटीड न्यूनतम मासिक पेंशन मिलती है। अटल पेंशन योजना (APY) 2026 क्या है? अटल पेंशन योजना 2026 एक सरकारी रिटायरमेंट स्कीम है, जिसे PFRDA रेगुलेट करता है। यह हर काम करने वाले भारतीय को सब्सक्राइबर के 60 साल का होने के बाद ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 की गारंटीड मंथली पेंशन देती है। यह अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर के लाखों लोगों के लिए बनाई गई है - दुकानदार, ड्राइवर, डिलीवरी वर्कर, घरेलू हेल्पर, किसान और सेल्फ-एम्प्लॉयड — जिनके पास EPF या फॉर्मल पेंशन नहीं है। जब आप जवान होते हैं तो आप हर महीने थोड़ी सी रकम देते हैं, यह आपके बैंक अकाउंट से ऑटो-डेबिट हो जाती है और 60 साल की उम्र से आपको ज़िंदगी भर एक फिक्स्ड पेंशन मिलती है। किसे और कैसे मिलेगी 5,000 रुपये मासिक पेंशन? अटल पेंशन योजना के तहत 5,000 रुपये की अधिकतम मासिक पेंशन प्राप्त करने की शर्तें और प्रक्रिया निम्नलिखित हैं: - पात्रता और आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष के बीच का कोई भी भारतीय नागरिक इस योजना से जुड़ सकता है। - 20 वर्षों का न्यूनतम योगदान: योजना के नियमानुसार, 60 वर्ष की आयु में पेंशन शुरू होने के लिए कम से कम 20 वर्षों तक नियमित योगदान करना अनिवार्य है। - योगदान की राशि उम्र पर आधारित: 5,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन पाने के लिए आपकी मासिक किस्त (Premium) इस बात पर निर्भर करती है कि आपने किस उम्र में अकाउंट खुलवाया है। - यदि आप 18 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो 5,000 रुपये की पेंशन के लिए आपको प्रति माह केवल 210 रुपये जमा करने होंगे। - यदि आप 30 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो आपको प्रति माह 577 रुपये जमा करने होंगे। - यदि आप अंतिम सीमा यानी 40 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो आपको प्रति माह 1,454 रुपये का योगदान देना होगा। अटल पेंशन योजना की मुख्य विशेषताएं और नियम - आयकर दाताओं पर प्रतिबंध: 1 अक्टूबर 2022 से लागू नए नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति इनकम टैक्स भरते हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं। - ऑटो-डेबिट सुविधा: बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते से आपकी तय किस्त (मासिक, तिमाही या छमाही) अपने आप कट जाती है। - पति/पत्नी को सुरक्षा: सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद समान पेंशन राशि (5,000 रुपये प्रतिमाह) उनके जीवनसाथी को मिलती है। - नॉमिनी को कॉरपस राशि: पति और पत्नी दोनों के निधन के बाद संचित पेंशन फंड (लगभग 8.5 लाख रुपये) नामांकित व्यक्ति (Nominee) को सौंप दिया जाता है। - टैक्स लाभ: इस योजना में जमा की गई राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1) और 80CCD (1B) के तहत कर छूट का लाभ भी मिलता है। कौन एलिजिबल है ? - कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 से 40 साल के बीच हो - सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट-ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए - अकाउंट से जुड़ा एक वैलिड आधार नंबर होना चाहिए - एक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (ट्रांज़ैक्शन और बैलेंस अलर्ट के लिए) होना चाहिए अटल पेंशन योजना के फायदे - एक आम फ़ायदा जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, वह यह है कि आपकी ज़िंदगी के बाद आपकी सेविंग्स का क्या होता है। जहाँ ज़्यादातर लोग पेंशन पेमेंट पर ध्यान देते हैं, वहीं अटल पेंशन योजना (APY) आपके परिवार के लिए एक मज़बूत फ़ाइनेंशियल सेफ़्टी नेट भी देती है। - आपकी मौत होने पर आपके जीवनसाथी को बिना किसी रुकावट के वही पेंशन मिलती रहती है। आपके और आपके जीवनसाथी दोनों के गुज़र जाने के बाद पूरी जमा की गई रकमआपके नॉमिनी को ट्रांसफ़र कर दी जाती है। इससे यह पक्का होता है कि आपकी सेविंग्स आपके परिवार को फ़ायदा पहुँचाती रहे और डूबे नहीं। अप्लाई / एनरोल कैसे करें - स्टेप-बाय-स्टेप 2026 - पक्का करें कि आपका सेविंग्स अकाउंट है: आपके पास एक एक्टिव सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट-ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए जो आपके आधार से लिंक हो और एक चालू मोबाइल नंबर हो। - अपना पेंशन स्लैब चुनें: तय करें कि आपको 60 साल के बाद कितनी पेंशन चाहिए - ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 हर महीने। पेंशन जितनी ज़्यादा होगी, मंथली कंट्रीब्यूशन भी उतना ही ज़्यादा होगा। - अपना कंट्रीब्यूशन चेक करें: अपनी अभी की उम्र के हिसाब से अपनी सही मंथली रकम देखने के लिए ऑफिशियल APY कंट्रीब्यूशन चार्ट का इस्तेमाल करें। एक मोटे तौर पर, 18 साल की उम्र में ₹5,000 पेंशन के लिए जुड़ने पर लगभग ₹210/महीना खर्च आता है, जबकि 40 साल की उम्र में उतनी ही पेंशन के लिए जुड़ने पर लगभग ₹1,454/महीना खर्च आता है। - नेट बैंकिंग या ब्रांच से अप्लाई करें: अपने बैंक के नेट बैंकिंग में लॉग इन करें और अटल पेंशन योजना देखें, या अपने बैंक या पोस्ट-ऑफिस ब्रांच में जाकर APY रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म मांगें। आप enps.nsdl.com के ज़रिए भी एनरोल कर सकते हैं। - APY फ़ॉर्म भरें और आधार दें: अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर, नॉमिनी की जानकारी और चुनी हुई पेंशन रकम डालें। आपकी पहचान वेरिफ़ाई करने के लिए आधार-बेस्ड eKYC का इस्तेमाल किया जाता है। - ऑटो-डेबिट सेट अप करें: अपने सेविंग्स अकाउंट से अपने कंट्रीब्यूशन के ऑटो-डेबिट को ऑथराइज़ करें। आप मंथली, क्वार्टरली या हाफ-ईयरली डिडक्शन चुन सकते हैं। - काफ़ी बैलेंस रखें: ऑटो-डेबिट की तारीख पर काफ़ी बैलेंस रखें ताकि कंट्रीब्यूशन बिना किसी पेनल्टी के हो जाए। - अपना PRAN पाएं: एनरोल होने के बाद आपको एक PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) मिलेगा। आप इसका इस्तेमाल अपना APY स्टेटमेंट और पेंशन स्टेटस चेक करने के लिए करेंगे। - जे. पी. शुक्ला
वैश्विक स्तर पर व्हाट्सएप में आई दिक्कत
नई दिल्ली, मेटा के स्वामित्व वाले लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप के कई यूजर्स ने सोमवार को सेवा में बाधा (आउटेज) की शिकायत की।
भारत, चीन पर निर्भरता कम करने के लिए ला रहा पीएलआई स्कीम
नई दिल्ली, भारत पॉलीसिलिकॉन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) लाने की तैयार कर रहा है।
फैक्ट चेक: आरक्षण खत्म करने के दावे से मायावती का फर्जी बयान वायरल
मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर ठीक इससे उलट कहा कि आरक्षण सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का महत्वपूर्ण साधन है. इसपर राजनीति नहीं करना चाहिए.
नई स्टडी : बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने की असली वजह सामने आयी
नई दिल्ली, आज के समय में बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना माता-पिता के लिए आसान नहीं है। पढ़ाई, मनोरंजन से लेकर कभी-कभी बच्चे को शांत कराने तक, मोबाइल, टीवी या टैबलेट परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। इस बीच फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एफआईयू) की एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन : बैठकर काम करने वालो की समस्याओ के लिए रामबाण, जाने इसके हेल्थ बेनिफिट्स
नई दिल्ली, लंबे समय तक बैठे रहने, कंधा जकड़े रहने और पैरों में खिंचाव आम हो गया है। ऐसे में योग सिर्फ शरीर को मोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि खुद से जुड़ने का एक जरिया है। ऐसे ही योग पद्धति में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन सबसे शरीर की जकड़न खोलने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने समेत कई शारीरिक स्वास्थ संबंधित समस्याओं का समाधान है।
अंतरिक्ष विज्ञान कीनई पहेली: ग्रैवास्टार में ब्लैक होल की तरह सिंगुलैरिटी या इवेंट होराइजन नहीं, इसके भीतर डार्क एनर्जी
मुद्दा: मानसून का बदलना अब एक स्थायी संकट, जलवायु परिवर्तन की कहानी भी छिपी
मुद्दा:मानसून का बदलना अब एक स्थायी संकट,जलवायु परिवर्तन की कहानी भी छिपी
Mental Strength: दूसरों की नजरों से खुद को देखना छोड़िए, कमियों और खूबियों को स्वयं पहचानना क्यों जरूरी?
Parliament Monsoon Session: संसद चलती रहे, सवाल भी उठें और सरकार जवाब भी दे; आखिर लोकतंत्र में गतिरोध कब तक?
गीतों के राज कुमार गोपाल सिंह नेपाली के ११६वें जन्मदिन (११ अगस्त) पर विशेष
सुप्रसिद्ध कवि, लेखक और पत्रकार स्व. गोपाल सिंह नेपाली का आज जन्म दिन है। आज ११ अगस्त १९११ के दिन बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया में उनका जन्म हुआ था।चूंकि उनका जन्म जन्माष्टमी के दिन हुआ था इसलिए पिता रेल बहादुर ने इनका नाम गोपाल रखा, गोपाल बहादुर सिंह। बाद में इन्होंने अपना ... Read more
ललित सुरजन की कलम से देशबन्धु : चौथा खंभा बनने से इंकार- 24
'यह एक अटपटी सच्चाई है कि दिग्विजय सिंह एक ओर जहां नौकरशाहों के सहारे प्रदेश चला रहे थे;
सत्ता जो फ़ैसला लेने से बचती है
समुद्री 'साझेदारी सिद्धांत' संयुक्त वक्तव्यों में प्रभावशाली लगता है पर उसी समुद्र में चीन की बंदरगाह-निर्माण की तुलना में भारत धीमी गति से आगे बढ़ता है।
शाह से जवाबदेही की मांग की बाढ़ में बहा मानसून सत्र
हैरानी की बात नहीं है कि संसद के मानसून सत्र का तीसरा और आखिरी सप्ताह भी गतिरोध पर ही खत्म होने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।
जंतर मंतर के बाद रांची में लाठीचार्ज: झारखंड के छात्र आंदोलन पर पुलिस की सख्ती, CM हेमंत की अगली रणनीति क्या?
जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप
यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं
विचार: कब मिलेगी भाषाई पराधीनता से मुक्ति
किसी के उच्चारण का उपहास करना उपहास करने वाले व्यक्ति की मानसिक पराधीनता का सबसे बड़ा प्रमाण होता है और विश्व की किसी भी संस्कृति में मानसिक रूप से पराधीन व्यक्ति कभी भी सम्मान योग्य नहीं होता।
जागरण संपादकीय: छात्र हित की अनदेखी
यदि झारखंड सरकार छात्रों का भरोसा हासिल नहीं कर सकी तो इसके लिए वही जिम्मेदार है। वह इसके लिए भी जिम्मेदार है कि छात्रों के आंदोलन को लेकर दलगत राजनीति शुरू हो गई और पुलिस बल प्रयोग भी एक मुद्दा बन गया।
कुंभिनासी : लंका से मथुरा तक जाती एक विस्मृत पौराणिक गाथा
भारतकीपौराणिकस्मृतिमेंकुछकथाएँऐसीहैं,जोमुख्यआख्यानोंकेपीछेरहजातीहैं।रामायणकानामआतेहीहमारेसामनेराम,सीता,लक्ष्मण,भरत,हनुमानऔररावणकेविराटचरित्रउभरतेहैं।विभीषण,कुंभकर्णऔरशूर्पणखाभीहमारीसामूहिकस्मृतिकाहिस्साहैं।लेकिनउसीविशालकथा-परंपरामेंएकस्त्रीऐसीभीहै,जिसकीकहानीलंकाकेराजमहलसेआरंभहोकरयमुनाकेकिनारेबसेमधुवनतकपहुँचतीहैऔरअंततःमथुराकीप्राचीनस्मृतिसेजुड़जातीहै। उसकानामहै“कुंभिनासी”। कहींउन्हेंकुंभिनीकहागयाहै,कहींकुम्भीनसी।लोकप्रियकथाओंमेंउन्हेंरावणकीबहनकेरूपमेंयादकियाजाताहै।लेकिनजबरामायणकीअलग-अलगपरंपराओंऔरवंश-विवरणोंकोसाथरखकरदेखाजाताहै,तोउनकासंबंधकुछअधिकजटिलदिखाईदेताहै।यहीजटिलताइसकथाकोऔररोचकबनातीहै।कुंभिनासीकीकहानीकेवलएकराक्षसीस्त्रीकीकथानहींहै।यहपरिवार,सत्ता,प्रेम,प्रतिशोध,विवेकऔरनियतिकीऐसीकहानीहै,जिसकेएकछोरपरलंकाहैऔरदूसरेछोरपरमथुरा। औरइनदोनोंकेबीचखड़ीहै–एकस्त्री। लंकाकेराजवंशसेजुड़ीएकस्त्री रामायणकीवंश-परंपरामेंकुंभिनासीकासंबंधलंकाकेराक्षस-कुलसेअत्यंतनिकटबतायागयाहै।विभीषणजबरावणकोउनकेअपहरणकासमाचारदेतेहैं,तोउनकेसंबंधकोमातृकुलकेमाध्यमसेसमझातेहैं।वेउन्हेंभाइयोंकीबहनकेसमानबतातेहैं।इसीकारणबादकीलोकप्रियपरंपरामेंकुंभिनासीकोरावणकीबहनकेरूपमेंजानागया।लेकिनरामायणकीकथामेंएकदूसरावंश-विवरणभीमिलताहै,जिसमेंकुंभिनासीकोविश्वावसुऔरअनलाकीपुत्रीतथामधुकीपत्नीकहागयाहै।उन्हींसेलवणनामकपुत्रकाजन्मबतायागयाहै।इसलिएकुंभिनासीकोलेकरसबसेसावधानीपूर्णबातयहीहोगीकिउन्हेंरावणकेमातृकुलसेअत्यंतनिकटतारखनेवालीस्त्रीकहाजाए,जिसेकथामेंबहनकेसमानसंबोधितकियागयाहै। भारतीयप्राचीनआख्यानोंमेंरिश्तोंकीभाषाहमेशाआधुनिकजैविकसंबंधोंजैसीसीधीरेखामेंनहींचलती।मातृकुल,पितृकुलऔरकुल-संबंधोंकीअपनीसामाजिकसंरचनाथी।संभवतःइसीकारणकुंभिनासीकीपहचानअलग-अलगपाठ-परंपराओंमेंकुछभिन्नरूपोंमेंदिखाईदेतीहै। लेकिनउनकेजीवनकीअगलीघटनाबिल्कुलस्पष्टहै;औरयहींसेकहानीमेंएकनयामोड़आताहै। मधुकाआगमन उससमयलंकामेंशक्तिकाकेंद्ररावणथा।उसकीमहत्वाकांक्षासीमाओंसेपरेफैलचुकीथी।वहविजय-अभियानपरथाऔरउसकेपीछेलंकाकीसत्ता,सेनाऔरराजकीयप्रतिष्ठाकाभारथा। इसीसमयएकशक्तिशालीराक्षसलंकापहुँचा। उसकानामथा“मधु”। मधुकेवलबलवानहीनहींथा।रामायणकीपरंपरामेंउसकाचित्रणलवणासुरसेबिल्कुलअलगदिखाईदेताहै।वहब्राह्मणोंकासम्मानकरताथा,शरणागतकीरक्षाकरताथाऔरदेवताओंकेसाथभीमैत्रीपूर्णसंबंधरखनेवालाबतायागयाहै।उसकेव्यक्तित्वमेंशक्तिथी,लेकिनवहशक्तिअभीतकअनियंत्रितहिंसामेंनहींबदलीथी। लेकिनकुंभिनासीकोदेखकरमधुकामनबदलगया। उसनेकुंभिनासीकोबलपूर्वकअपनेसाथलेलिया। यहघटनाउससमयहुईजबलंकाकेराजपरिवारकेप्रमुखसदस्यअलग-अलगकार्योंमेंव्यस्तथे।रावणविजय-अभियानपरथा,विभीषणअपनेधार्मिककर्ममेंलगेथेऔरकुंभकर्णनिद्रामेंथा।मधुनेअवसरकालाभउठायाऔरकुंभिनासीकोअपनेसाथमधुपुरीलेगया।कुंभिनासीकायहहरणकेवलएकस्त्रीकेजीवनमेंआएसंकटकीघटनानहींथी।यहआनेवालेएकबड़ेसंघर्षकाबीजथा। क्योंकिकुंभिनासीजिसपरिवारसेआतीथीं,वहाँअपमानकाउत्तरप्रायःतलवारसेदियाजाताथा। औररावणकोजबयहसमाचारमिला,तोउसकाक्रोधस्वाभाविकहीथा। रावणकेलिएयहकेवलकिसीस्त्रीकाअपहरणनहींथा। यहउसकेकुलकोदीगईचुनौतीथी। उसनेअपनीसेनासंगठितकीऔरमधुकीनगरीकीओरबढ़चला। मधुपुरीपहुँचकररावणनेमधुकोखोजा,लेकिनवहवहाँउपस्थितनहींथा।वहाँउसेअपनीहीसंबंधिनीकुंभिनासीदिखाईदी। रावणकाक्रोधअभीशांतनहींहुआथा। लेकिनकुंभिनासीनेउसेदेखतेहीभयसेउसकेचरणपकड़लिए। उनकेसामनेदोपुरुषथे—एकउनकाभाईऔरदूसराउनकापति। औरदोनोंकेबीचशीघ्रहीरक्तपातहोनेवालाथा। कुंभिनासीनेरावणसेअपनेपतिकेप्राणोंकीरक्षाकीप्रार्थनाकी। उन्होंनेअपनेलिएकुछनहींमाँगा। उन्होंनेकेवलइतनाकहाकियदिमधुमारागयातोउनकाजीवनविधवाकेरूपमेंसमाप्तहोजाएगा।उन्होंनेअपनेपतिकेअपराधकेबावजूदउसकेप्राणोंकीयाचनाकी। रावणकाहृदयपिघलगया। उसनेअपनीसंबंधिनीकीप्रार्थनास्वीकारकरली। मधुकोक्षमाकरदियागया। लेकिनबातयहींसमाप्तनहींहुई। रावणनेमधुकोअपनाशत्रुबनानेकेबजायअपनासहयोगीबनालिया।वहचाहताथाकिमधुउसकेसाथदेवताओंकेविरुद्धहोनेवालेअभियानमेंसहयोगकरे। कुंभिनासीनेमधुकोजगायाऔरउसेरावणकेप्रस्तावसेअवगतकराया। मधुनेप्रस्तावस्वीकारकरलिया। इसप्रकारजिसघटनाकीशुरुआतअपहरणऔरप्रतिशोधसेहुईथी,उसकाअंतसंबंधऔरराजनीतिकमैत्रीमेंहुआ।यहकुंभिनासीकेचरित्रकासबसेमहत्वपूर्णक्षणथा। उन्होंनेयुद्धनहींलड़ा। उन्होंनेकोईअस्त्रनहींउठाया। लेकिनउन्होंनेदोशक्तिशालीपुरुषोंकेबीचहोनेवालायुद्धरोकदिया। उनकाहथियारथा–संबंधऔरसंवाद। शिवकावरदान मधुकीशक्तिकेवलउसकीसेनायाउसकेव्यक्तिगतपराक्रममेंनहींथी। उसकेपासभगवानशिवकादियाहुआएकअद्भुतअस्त्रभीथा। रामायणकीकथाकेअनुसारमधुनेघोरतपस्यासेरुद्रकोप्रसन्नकियाथा।उसकीतपस्यासेप्रसन्नहोकरशिवनेउसेएकदिव्यशूलप्रदानकिया। उसअस्त्रकीशक्तिअसाधारणथी। जबतकवहअस्त्रमधुकेहाथमेंरहता,उसेयुद्धमेंपराजितकरनाअत्यंतकठिनथा।वहउसव्यक्तिकाविनाशकरदेताजोमधुकोयुद्धकेलिएचुनौतीदेताऔरफिरवापसअपनेस्वामीकेपासलौटआता। मधुनेशिवसेप्रार्थनाकीकियहशक्तिउसकेवंशमेंबनीरहे। तबउसेबतायागयाकियहवरदानउसकेपुत्रतकपहुँचेगा। जबतकवहदिव्यशूलउसकेपुत्रकेहाथमेंरहेगा,वहसंसारकेप्राणियोंकेलिएलगभगअवध्यरहेगा।मधुनेउसवरदानकोस्वीकारकिया। लेकिनउसेशायदयहपतानहींथाकिभविष्यमेंयहीवरदानउसकेपुत्रकेलिएशक्तिसेअधिकअहंकारकाकारणबननेवालाहै। कुंभिनासीऔरलवणासुर मधुऔरकुंभिनासीकेघरएकपुत्रकाजन्महुआ। ... Read more
विदेशी फंडिंग के नियमन में एक अहम मोड़: प्रावधानों को लेकर जो थोड़े संदेह हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए
जेन-जी को जेन-जी ही रहने दें: देश का सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक ताना-बाना जटिलतम, युवा पीढ़ी के पास 'जादुई छड़ी’ नहीं...
मुस्लिम नाटो की राह: बदलती सामरिक तस्वीर में नए आयाम के संकेत से PAK उत्साहित, भारत को सतर्क रहने की जरूरत
प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 का अगस्त महीना एक अविस्मरणीय और अद्भुत अनुभव लेकर आ रहा है।
ललित सुरजन की कलम से परीक्षा की एक और घड़ी
'असम और पूर्वोत्तर प्रांतों की समस्या आज की नहीं है। वहां सिर्फ हिन्दू और मुसलमान का प्रश्न नहीं है, बात सिर्फ बंगलादेशियों के अवैध अप्रवासन की नहीं है।
असोहा/अचलगंज क्षेत्र में रविवार को हुई बारिश के चलते कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवेपर फिर दस जगहों पर सड़क धंस गई।
मोदी करते हैं बाबा बागेश्वर की बात, राहुल करते हैं छात्र-युवा की!
इस इलाहाबाद के खुद राहुल हैं। नेहरू थे। चन्द्रशेखर आजाद जिन्होंने कहा था- जीते जीते जी मुझे अंग्रेज नहीं पकड़ सकते।
विधानसभा घेराव से पहले रांची में पुलिस अलर्ट, छात्रों को रोकने के लिए कंटीले तारों की बैरिकेडिंग
जागरण संपादकीय: मेटा को चेतावनी
अभी हाल में मेटा ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो को हटाने को लेकर जो माफी मांगी, उसे खारिज कर सरकार ने उचित ही किया।
विचार: साधना, सेवा और समरसता की यात्रा
यात्रा पूर्ण होने पर मन में यह विचार बार-बार आया कि भारत को केवल पुस्तकों से नहीं समझा जा सकता। उसे समझना-जीना हो तो ऐसी आध्यात्मिक यात्रा पर चलना पड़ता है।
विचार: खाड़ी पर ऊर्जा निर्भरता के खतरे
असली और स्थायी समाधान ऊर्जा की आत्मनिर्भरता हासिल करने में है, जो स्वच्छ ऊर्जा से ही हासिल हो सकती है।
शिक्षा व्यवस्था अब सुधरेगी या नए संकट में डूब जाएगी
देश में परीक्षा-प्रणाली में सुधार की मांग व्यापक छात्र आंदोलन के बाद तेज हुई है। छात्र पेपर लीक से कहीं अधिक नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने से आक्रोशित थे। दरअसल, उपलब्ध तथ्यों और जांच के आधार पर सरकार और एनटीए ने स्वयं…
आभासी दुनिया में टूट रहे आधुनिक परिवार
सभ्यता को सबसे गहरा घाव किसी युद्ध, महामारी या आर्थिक संकट ने नहीं, उस चमकती स्क्रीन ने दिया है, जिसे हमने सुविधा समझकर जीवन का केंद्र बना लिया। इतिहास में पहली बार संवाद के साधन सबसे अधिक हैं, पर संवाद सबसे कम है…
साइबर अपराध रोकने की सर्वोच्च पहल
मुंबई में एक व्यक्ति ने आतंक-निरोधी एजेंसी का कथित अधिकारी बनकर एक रिटायर डॉक्टर को फोन किया और आतंकियों को धन देने का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। पीड़ित डॉक्टर ने डरकर उस ‘अधिकारी’ को…
सुबह खाली पेट एक्सरसाइज : वजन घटाने में मदद या नुकसान ? न करें ये गल
नई दिल्ली, आज के समय में वजन बढ़ना बहुत आम समस्या हो गई है। खराब खान-पान, घंटों बैठकर काम करना, कम चलना-फिरना और बिगड़ी हुई दिनचर्या की वजह से बड़ी संख्या में लोग अपने बढ़ते वजन को लेकर परेशान हैं। ऐसे में लोग वजन कम करने के लिए डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज का सहारा लेते हैं। खासकर सुबह के समय वर्कआउट करना काफी लोगों को पसंद होता है।
आपकी एक गलती ला सकती है डायरिया, जानिए बचाव का सही तरीका
नई दिल्ली, डायरिया यानी दस्त एक आम बीमारी लग सकती है, लेकिन अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो यह खासकर छोटे बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। हालांकि डायरिया से बचाव कोई मुश्किल काम नहीं है। हमारी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें बच्चों और पूरे परिवार को इस बीमारी से काफी हद तक सुरक्षित रख सकती हैं।
आयुर्वेद का राज : सुबह जल्दी उठकर ऐसे पाए हेल्दी और एनर्जेटिक दिन
नई दिल्ली, आजकल देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना आम बात हो गई है। लेकिन यही आदत आगे चलकर बीमारियों का कारण बन जाती है। आयुर्वेदिक परंपरा में ब्रह्ममुहूर्ते उत्तिष्ठेत् यानी ब्रह्ममुहूर्त में उठने की सलाह दी गई है। माना जाता है कि दिन की शुरुआत अगर सही तरीके से हो, तो उसका सकारात्मक असर शरीर और मन दोनों पर पड़ सकता है।
यूपी एनएचएम की सलाह- स्नैक में सेहत का रखें ध्यान, ऐसे करे सही चुनाव
नई दिल्ली, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर भूख लगने पर आसानी से मिल जाने वाली चीजें खा लेते हैं, जैसे चाय के साथ समोसा, कचौड़ी, चिप्स, नमकीन, मिठाई या पेस्ट्री। इन चीजों का स्वाद अच्छा होता है और थोड़ी देर के लिए पेट भी भर जाता है लेकिन अगर ऐसी चीजें रोज खाने की आदत बन जाए तो वजन बढ़ने और दूसरी स्वास्थ्य परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है।
नशे के खिलाफ लड़ाई को जनआंदोलन बनाएं:सरकार की कोशिश के साथ परिवार, स्कूल भी जुड़ें,संयुक्त प्रयास ही समाधान
'राष्ट्र विरोधी' अवधारणा की यात्रा: शब्दों या लेखन में असहमति से कमजोरी नहीं, अधिक न्यायपूर्ण, नैतिक बनेगा देश
नेपाल को दोबारा वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग तेज हो गई है।
मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में रविवार को हवन यज्ञ और शिला पूजन के साथ ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर कारसेवा का शंखनाद होगा। इसकी तैयारियां जोरों पर चल रहीं हैं और साधु-संत भी पहुंचना शुरू हो गए हैं।
09 August 2026 Rashifal: आज का दिन आपके लिए कैसा रहने वाला है, आइए इस राशिफल से जानते हैं।
क्या स्वस्थ रहने के लिए 8 घंटे सोना सच में जरूरी है?
अक्सर हम बड़े लोगों के बारे में सुनते हैं कि वे बहुत कम सोते हैं. कुछ तो रात में सिर्फ तीन घंटे की नींद ही लेते हैं. अगर वे स्वाभाविक रूप से कम नींद वालों में नहीं हैं, तो भविष्य में उन्हें दिक्कत हो सकती है
शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है, जो भाजपा के साथ उनके संबंधों में सुधार का संकेत है। यह कदम मोदी सरकार की विधेयक को शीघ्र पारित कराने की गंभीरता को दर्शाता है, जिससे महिला आरक्षण लागू होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
विचार: दोयम दर्जे के निर्माण का सिलसिला
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के तुरंत बाद धंसने से देश में बुनियादी ढांचे के निर्माण की खराब गुणवत्ता उजागर हुई है

