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इति श्री रिसर्चाय

बाबू गोपालचंद्र बड़े नेता थे, क्योंकि उन्होंने लोगों को समझाया था और लोग समझ भी गए थे कि अगर वे स्वतंत्रता-संग्राम में दो बार जेल - 'ए क्लास' में - न जाते, तो भारत आजाद होता ही नहीं।

देशबन्धु 19 Apr 2026 3:10 am

अक्षय तृतीया पर्व है लोक से लोकोत्तर की दिव्य यात्रा

अक्षय तृतीया- 19 अप्रैल, 2026 अक्षय तृतीया महापर्व का न केवल सनातन परम्परा में बल्कि जैन परम्परा में विशेष महत्व है। इसका लौकिक और लोकोत्तर-दोनों ही दृष्टियों में महत्व है। अक्षय शब्द का अर्थ है कभी न खत्म होने वाला। संस्कृत में, अक्षय शब्द का अर्थ है ‘समृद्धि, आशा, खुशी, सफलता’, जबकि तृतीया का अर्थ ... Read more

अजमेरनामा 18 Apr 2026 3:58 pm

मांगलिक कार्यो को आरंभ करने का अबूझ मुहूर्त है -अक्षय तृतीया

परशुराम जयन्ती भी मनायी जाती है धूमधाम से ऐसा दिन जिसका सभी बेसर्बी से इंतजार करते है वह है – अक्षय तृतीया का दिन। यही ऐसा अबूझ मुहूर्त है जिसमें हर सामान्य नागरिक अपने शुभ कार्य निपटाना चाहता है। इस दिन से ब्याह-परिणय करने का आरम्भ हो जाता है। बड़े-वृद्ध अपने पुत्र-पुत्रियों के लगन का ... Read more

अजमेरनामा 18 Apr 2026 3:34 pm

दोहरा तेल संकट और कमजोर भारतीय रुपया

भरतीय रिज़र्व बैंक के मार्च 2026 के द्विमासिक पारिवारिक मुद्रास्फीति अनुमान सर्वेक्षण के अनुसार अनुमानित मुद्रास्फीति 7.2 प्रतिशत है।

देशबन्धु 18 Apr 2026 3:20 am

'भूदान दिवस' आज-भूदान आंदोलन के 75 वर्ष : भूमि, न्याय और नैतिकता की पुकार

कुमार सिद्धार्थ भूदान आंदोलन हमें सामुदायिक भावना और साझेदारी की संस्कृति को पुनर्जीवित करने की प्रेरणा भी देता है। आज जब समाज तेजी से व्यक्तिवादी होता जा रहा है, तब 'साझा संसाधन' और 'साझी जिम्मेदारी' की अवधारणा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्राम स्तर पर सामूहिक निर्णय, संसाधनों का साझा उपयोग और स्थानीय स्वशासन की मजबूत व्यवस्था आदि सभी पहलू भूदान के मूल विचार से जुड़े हुए हैं। देश के सामाजिक और नैतिक इतिहास में ऐसे कुछ आंदोलन हुए हैं, जिन्होंने बिना हिंसा, बिना सत्ता और बिना संसाधनों के भी समाज की आत्मा को झकझोर दिया है। आचार्य विनोबा भावे का भूदान आंदोलन ऐसा ही एक अद्वितीय प्रयोग था, जिसने न केवल भूमि के पुनर्वितरण का प्रश्न उठाया, बल्कि समाज के नैतिक पुनर्निर्माण की दिशा भी दिखाई। 18 अप्रैल को मनाया जाने वाला 'भूदान दिवस' उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है, जब 1951 में तेलंगाना के पोचमपल्ली गांव से इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी। अब, जब इस आंदोलन के लगभग 75 वर्ष पूर्ण होने को हैं, इसके महत्व और वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर पुनर्विचार आवश्यक हो जाता है। भूदान आंदोलन की शुरुआत एक साधारण, लेकिन गहरे सामाजिक प्रश्न से हुई थी-क्या समाज अपने ही भूमिहीन लोगों के लिए स्वेच्छा से संसाधन साझा कर सकता है? पोचमपल्ली में जब भूमिहीन परिवारों ने विनोबा भावे से भूमि की मांग की, तब एक जमींदार द्वारा स्वेच्छा से भूमि-दान की घोषणा ने इस आंदोलन को जन्म दिया। विनोबा भावे ने इसे केवल भूमि-दान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे 'सर्वोदय' याने सभी के उत्थान के व्यापक दर्शन से जोड़ा। भूदान आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विनोबा भावे ने व्यापक पदयात्राएं कीं, जो इस आंदोलन की आत्मा बन गईं। उन्होंने लगभग 13 वर्षों (1951 से 1964 के बीच) लगातार देशभर में पदयात्रा की और करीब 58,000 से अधिक किलोमीटर पैदल चलकर देश के लगभग 16 से अधिक राज्यों का भ्रमण किया और हजारों गांवों में पहुंचकर सीधे लोगों से संवाद किया। इन पदयात्राओं के माध्यम से उन्होंने न केवल भूमि-दान का आह्वान किया, बल्कि समाज में समानता, सहयोग और अहिंसक परिवर्तन की भावना को भी गहराई से स्थापित किया। आगे चलकर यह आंदोलन 'ग्रामदान' की अवधारणा तक विस्तारित हुआ, जिसमें पूरे गांव की भूमि को सामूहिक स्वामित्व और उपयोग के लिए समर्पित करने का विचार सामने आया। विनोबा मानते थे कि भूमि प्रकृति की देन है और उस पर किसी एक व्यक्ति का पूर्ण स्वामित्व नैतिक रूप से उचित नहीं हो सकता। इसी कारण उन्होंने समाज के संपन्न वर्ग से अपील की कि वे अपनी भूमि का एक हिस्सा भूमिहीनों को दें, ताकि समाज में संतुलन और समानता स्थापित हो सके। विनोबा के विचार में यह केवल आर्थिक सुधार का उपाय नहीं, बल्कि 'हृदय परिवर्तन' की प्रक्रिया थी, जिसमें दान देने वाला और प्राप्त करने वाला, दोनों एक नए सामाजिक संबंध में जुड़ते हैं। उनका यह भी विश्वास था कि यदि परिवर्तन स्वेच्छा और अहिंसा के आधार पर होगा, तो वह अधिक स्थायी और मानवीय होगा। भूदान आंदोलन के दौरान प्राप्त जमीनों के वितरण के लिए विभिन्न राज्यों में 'भूदान-यज्ञ बोर्डों' की स्थापना की गई जो दान में प्राप्त भूमि का अभिलेखीकरण, सत्यापन और वितरण सुनिश्चित करते थे। बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उड़ीसा जैसे राज्यों में लंबे समय तक 'भूदान-यज्ञ बोर्ड' सक्रिय रहे। इनकी जिम्मेदारी थी कि वे दान की गई भूमि का कानूनी हस्तांतरण कर उसे भूमिहीन परिवारों तक पहुंचाएं। कुछ राज्यों में इन 'बोर्डों' ने उल्लेखनीय कार्य किए, जहां हजारों परिवारों को भूमि का स्वामित्व मिला। हालांकि, कई स्थानों पर इन 'बोर्डों' को प्रशासनिक जटिलताओं, सीमित संसाधनों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई राज्यों में 'भूदान बोर्डों' के पास भूमि का रिकॉर्ड तो था, लेकिन उसका वास्तविक वितरण नहीं हो सका। कुछ स्थानों पर तो भूमि पर कब्जा दिलाने में भी कठिनाइयां आईं। इसके बावजूद, यह संस्थागत प्रयास इस बात का प्रमाण है कि भूदान आंदोलन केवल नैतिक अपील तक सीमित नहीं था, बल्कि उसे प्रशासनिक ढांचे में ढालने की भी कोशिश की गई। वर्तमान समय में भूमि असमानता का प्रश्न नए रूप में सामने आ रहा है। एक ओर बड़े कॉरपोरेट और उद्योग समूह विशाल भूमि पर अधिकार रखते हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों किसान और आदिवासी समुदाय भूमि से वंचित या विस्थापन के खतरे में हैं। शहरीकरण और औद्योगीकरण के बढ़ते दबाव ने भूमि को केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि एक 'वस्तु' में बदल दिया है, जिसका मूल्य बाजार तय करता है, जिससे सामाजिक असमानता और गहरी होती जा रही है। ऐसे में भूदान आंदोलन याद दिलाता है कि भूमि केवल आर्थिक संपत्ति नहीं है, बल्कि यह जीवन, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। विनोबा भावे का दृष्टिकोण सिखाता है कि विकास का मॉडल केवल आर्थिक लाभ पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें सामाजिक न्याय और नैतिकता का भी समावेश होना चाहिए। आज जरूरत इस बात की है कि भूदान की भावना को समकालीन संदर्भ में पुनर्परिभाषित किया जाए। यह जरूरी नहीं कि लोग अपनी भूमि दान करें, लेकिन यह आवश्यक है कि समाज और सरकार मिलकर ऐसी नीतियां बनाएं, जो भूमि के न्यायपूर्ण वितरण को सुनिश्चित करें। भूमि सुधार, वन अधिकार कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन और विस्थापित समुदायों के पुनर्वास जैसे मुद्दे इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। इसके अलावा, भूदान आंदोलन हमें सामुदायिक भावना और साझेदारी की संस्कृति को पुनर्जीवित करने की प्रेरणा भी देता है। आज जब समाज तेजी से व्यक्तिवादी होता जा रहा है, तब 'साझा संसाधन' और 'साझी जिम्मेदारी' की अवधारणा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्राम स्तर पर सामूहिक निर्णय, संसाधनों का साझा उपयोग और स्थानीय स्वशासन की मजबूत व्यवस्था आदि सभी पहलू भूदान के मूल विचार से जुड़े हुए हैं। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से भी भूदान की भावना को आगे बढ़ाया जा सकता है। नई पीढ़ी को यह समझाना जरूरी है कि सामाजिक परिवर्तन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हरेक नागरिक की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। यदि समाज के सक्षम वर्ग स्वेच्छा से कमजोर वर्गों के लिए आगे आएं, तो असमानता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 'भूदान आंदोलन' के 75 वर्षों की यात्रा केवल अतीत को स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी समय है। यदि हम विनोबा भावे के विचारों को आज के संदर्भ में समझकर उन्हें व्यवहार में लाने का प्रयास करें, तो यह आंदोलन एक बार फिर समाज में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान कर सकता है। 'भूदान दिवस' पर यह संकल्प लेना सार्थक होगा कि हम अपने-अपने स्तर पर समानता, न्याय और साझेदारी की भावना को मजबूत करें। यही इस ऐतिहासिक आंदोलन और उसके प्रणेता विनोबा भावे के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यों से संबद्ध हैं।)

देशबन्धु 18 Apr 2026 3:10 am

पौष्टिक अनाजों की प्रदर्शनी

मध्यप्रदेश में आदिवासियों के बीच पौष्टिक भोजन की वापसी की पहल की जा रही है। इस पहल से विशेष तौर पर महिलाओं और बच्चों को जोड़ा जा रहा है।

देशबन्धु 18 Apr 2026 3:00 am

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह की पहली बैठक, स्वस्थ जीवन शैली और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह (एचडब्ल्यूजी) की पहली बैठक 2026 की मेजबानी की।

देशबन्धु 17 Apr 2026 10:42 am

हाइड्रोथेरेपी: पानी से उपचार का बेहतरीन तरीका, माइग्रेन से जोड़ों के दर्द तक में कारगर

'जल ही जीवन है...' ये तो हम सब जानते हैं, लेकिन जल से कई शारीरिक व मानसिक रोगों का इलाज भी संभव है, क्या ये आप जानते हैं? पानी से उपचार का प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है हाइड्रोथेरेपी या जल चिकित्सा।

देशबन्धु 17 Apr 2026 10:30 am

पुराना तकिया बन सकता है गर्दन और सिर दर्द की बड़ी वजह, बढ़ा सकता है सांस की परेशानी

हम अक्सर अच्छी नींद के लिए बिस्तर, गद्दा, या कमरे के माहौल पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक जरूरी चीज को नजरअंदाज कर देते हैं

देशबन्धु 17 Apr 2026 10:20 am

50 वैज्ञानिकों ने ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस से लड़ने के पांच तरीके बताए

दुनियाभर में फंगल संक्रमणों का खतरा अब और गंभीर होता जा रहा है, क्योंकि कई प्रकार के फंगस दवाओं के प्रति तेजी से प्रतिरोधक (रेजिस्टेंट) बनते जा रहे हैं

देशबन्धु 17 Apr 2026 10:20 am

चेहरे के अनचाहे बालों से छुटकारा पाना आसान, इन घरेलू उपायों से पाएं साफ रंगत

खूबसूरत और साफ त्वचा पाने की चाह लगभग हर किसी की होती है, खासकर महिलाएं अपनी त्वचा को लेकर काफी सजग रहती हैं

देशबन्धु 17 Apr 2026 10:14 am

गेहूं की रोटी में मिलाएं ये चीजें, शरीर को मिलेगा भरपूर प्रोटीन

भारतीय रसोई में रोटी सिर्फ एक खाना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है, लेकिन सिर्फ गेहूं की रोटी शरीर की सभी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती, खासकर जब बात प्रोटीन की आती है तो गेहूं की रोटी इस जरूरत को पूरा करने में थोड़ी पीछे रह जाती है।

देशबन्धु 17 Apr 2026 10:09 am

कैंसर के शुरुआती रिस्क पैटर्न का पता लगाने में एआई सक्षम: अध्ययन में खुलासा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब त्वचा कैंसर के एक खतरनाक रूप मेलानोमा के शुरुआती जोखिम की पहचान करने में अहम भूमिका निभा सकता है

देशबन्धु 17 Apr 2026 10:03 am

18 अप्रैल का पंचांग : बैशाख शुक्ल की प्रतिपदा तिथि, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। दिन की शुरुआत से लेकर शुभ-अशुभ समय का निर्धारण भी इसके पांच अंगों (करण, योग, नक्षत्र, तिथि और वार) की आधार पर होता है

देशबन्धु 17 Apr 2026 9:23 am

बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं कीमतें और मुद्रास्फीति

भू-राजनीतिक तनाव और कमज़ोर भारतीय रुपये के कारण देश में सभी वस्तुओं और परिवहन की लागत में काफ़ी बढ़ोतरी देखी जा रही है। रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की खुदरा कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं।

देशबन्धु 17 Apr 2026 3:15 am

योगीजी, घर सुधारिए नक्सलवाद चला जाएगा

एक-दो जगह पुलिस से हिंसक झड़प भी हुई और सरकार ने तुरंत मजदूरों से बातचीत के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बना दी।

देशबन्धु 17 Apr 2026 3:10 am

वेदांता हादसा, वही पुराने सवाल

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुए बड़े हादसे ने बिहार से बंगाल तक कई परिवारों पर बड़ा दुख बरपाया है।

देशबन्धु 17 Apr 2026 3:05 am

यूपी में पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है

कुशीनगर पुलिस ने इस संबंध में बताया कि बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले वास्तविक आरोपी की गिरफ्तारी हो गई है, जिसका नाम सुरेंद्र सिंह है.

बूमलाइव 16 Apr 2026 4:15 pm

गर्मियों में खतरनाक डायबिटीज को लेकर लापरवाही, संतुलित आहार और सही कैलोरी काउंट से बनेगी बात

गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान के साथ-साथ डायबिटीज की समस्या भी बढ़ जाती है। देश में डायबिटीज के मरीज बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ऐसे में गर्मी में लापरवाही से यह और खतरनाक हो सकती है

देशबन्धु 16 Apr 2026 10:22 am

एलोवेरा-हल्दी: सस्ते और प्राकृतिक तरीके से पाएं चमकदार त्वचा, दाग-धब्बे होंगे दूर

गर्मियों में बढ़ते तापमान और प्रदूषण से चेहरे पर दाग-धब्बे, मुंहासे और फीकी त्वचा की समस्या आम हो गई है। महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और पार्लर ट्रीटमेंट पर हजारों रुपए खर्च करने के बावजूद स्थायी निखार नहीं मिल पाता

देशबन्धु 16 Apr 2026 10:16 am

नए ऐतिहासिक मोड़ पर न्यायपालिका

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बीच हुआ संवाद न्यायिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

देशबन्धु 16 Apr 2026 3:40 am

भारत में नोएडा से औद्योगिक अशांति, दिल्ली-एनसीआर के कई राज्यों में फैली

नोएडा के फेज़-2 में प्रदर्शन हिंसक हो गया, और एक पुलिस वैन और दूसरी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई,

देशबन्धु 16 Apr 2026 3:20 am

16 अप्रैल को मासिक शिवरात्रि, अभिजित के साथ विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

देवाधिदेव महादेव व माता पार्वती को समर्पित मासिक शिवरात्रि गुरुवार यानी 16 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को विशेष रूप से प्रिय माना जाता है

देशबन्धु 15 Apr 2026 11:28 pm

फरीदाबाद में रेप के बाद महिला को कार से फेंकने के दावे से ब्राजील का वीडियो वायरल

बूम ने पाया कि वायरल वीडियो ब्राजील के Macap का है. वीडियो में कैद यह घटना 28 मार्च 2026 की है, जहां एक महिला चलती गाड़ी से कूद गई थी.

बूमलाइव 15 Apr 2026 6:30 pm

BJP पर टिप्पणी करते सम्राट चौधरी का 12 साल पुराना वीडियो भ्रामक दावे से वायरल

बूम ने पाया कि बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह वीडियो साल 2014 का है. उस समय उन्होंने राजद से अलग होकर जदयू को समर्थन देने की बात कही थी.

बूमलाइव 15 Apr 2026 2:19 pm

हमारी यह पेंशन

देकर अपनी जवानी के बहुमूल्य वो सारे पल खरीदीं है हमने थोड़ी सी सरकार की पेंशन, वृद्ध अवस्था में अपने चाहे साथ दे या ना दे हमें भूखें रखते नहीं कभी, हमारी यह पेंशन। दुनियां चाहे जो भी कहे पेंशन के बारे में पर पेंशन धारकों के लिए सर का ताज है पेंशन, औरों के ... Read more

अजमेरनामा 15 Apr 2026 11:16 am

सूंघने की क्षमता में गिरावट भी अल्जाइमर्स का शुरुआती संकेत

अल्जाइमर एक ऐसी अवस्था है जिसमें ढलती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होती चली जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अल्जाइमर डिमेंशिया (मस्तिष्क क्षीणता) का एक प्रकार है

देशबन्धु 15 Apr 2026 9:27 am

ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मददगार अर्जुन की छाल

आजकल बढ़ते हृदय रोग और सांस संबंधी समस्याओं के बीच आयुर्वेद में उपयोग होने वाला अर्जुन एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक औषधि माना जाता है

देशबन्धु 15 Apr 2026 6:20 am

ललित सुरजन की कलम से चुनावों में बदजुबानी

'चुनाव आयोग के सामने तकनीकी सीमाएं हैं। जब मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही हो, मतदान का प्रतिशत भी बढ़ रहा हो, चुनाव में घपलेबाजी रोकना हो, नयी तकनीकी का प्रयोग करना हो, मतदाताओं को निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के प्रति आश्वस्त करना हो तो इतनी व्यवस्थाएं करने में समय तो लगना ही है, किंतु अब चुनाव आयोग को विचार करना होगा कि कीचड़ उछालने के इस खेल को कैसे रोका जाए। कई-कई चरणों में मतदान होने से पार्टियों का अपने विरोधियों पर आक्रमण करने का एक नया अवसर हर दो दिन में मिल जा रहा है, इस पर विराम कैसे लगाया जाए।' 'आज एक नेता एक जगह भाषण देता है, अगले हफ्ते दूसरी जगह जाकर वह उसी बात को दोहरा देता है इस तरह से मर्यादाहीनता लगातार आगे बढ़ती जाती है। चुनाव आयोग ने शिकायत मिलने पर अपनी तरफ से कार्रवाईयां जरूर कीं, लेकिन वे पर्याप्त सिद्ध नहीं हुईं।' (देशबन्धु में 24 अप्रैल 2014 को प्रकाशित) https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/04/blog-post_23.html

देशबन्धु 15 Apr 2026 3:30 am

आंबेडकर के लिए राष्ट्र का भाग्य सर्वोपरि था

आंबेडकर को संविधान निर्माता के तौर पर पहचान मिली है, लेकिन वह प्लानर और अर्थशास्त्री भी थे।

देशबन्धु 15 Apr 2026 3:20 am

मजदूरों के गुस्से का पाकिस्तान और नक्सली लिंक

मई दिवस या अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस आने में अभी एक पखवाड़े का वक्त बचा है, लेकिन जिन वजहों से 140 साल पहले मजदूरों ने अपनी आवाज़ बुलंद की थी, वो वजहें अब कई गुना सघनता के साथ समाज में मौजूद हैं।

देशबन्धु 15 Apr 2026 2:50 am

जीना है तो गेंहू छोड़ दो

आज से ही सब छोड़ दो यह गेंहू की रोटिया खाना, नही तो यारो पहुंचा देगा यह सभी को सफाखाना। खा खाकर जिससे सब लोग आज बढ़ा रहे है तोंद, जीना है तो गेंहू छोड़ दो सब मानो हमारा कहना।। मोटापा-डायबिटीज बढ़ रहा है इससे हृदय के रोग, आज मिक्स अनाज खाकर रहो आप सब ... Read more

अजमेरनामा 14 Apr 2026 11:14 pm

मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू

मेरेलफ़्ज़ोंकीआख़िरीबाततू, मेरीख़ामोशीकाहरराज़तू, तुझसेहीचलतीहैयेधड़कन, मेरेहोनेकाएहसासतू तेरेबिनासबफीकासालगे, जैसेकोईसपनाअधूरालगे, तूजोमिलेतोरंगभरजाएँ, वरनाहरपलबसधुंधलालगे तूपासआएतोदिलयेकहे, अबऔरकुछभीज़रूरीनारहे मेरेलफ़्ज़ोंकीआख़िरीबाततू, मेरीख़ामोशीकाहरराज़तू, तुझसेहीजुड़ीमेरीहरकहानी, मेरेजीनेकीहरवजहतू तेरेख्यालोंमेंबहतारहूँ, तेरेसाथहीठहरतारहूँ, तूजोमिलेतोसबमिलजाए, तेरेबिनाक्योंजीतारहूँ जबतूसाथहैतोकमीक्याहै, तेरेबिनाहरखुशीअधूरीसीहै मेरेलफ़्ज़ोंकीआख़िरीबाततू, मेरीरूहकागहराराज़तू, तुझमेंहीसिमटामेराहरसफर, मेरीदुनिया,मेराआजतू “राहतटीकमगढ़”

अजमेरनामा 14 Apr 2026 11:08 pm

नोएडा: कर्मचारी प्रदर्शन से जोड़कर मध्यप्रदेश का वीडियो वायरल

बूम ने पाया कि पुलिसकर्मियों द्वारा युवक को लात मारने का यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले का है. इसका नोएडा प्रोटेस्ट से कोई संबंध नहीं है.

बूमलाइव 14 Apr 2026 6:15 pm

सतुआ संक्रांति: देवताओं को प्रिय तो दान से तृप्त होते हैं पूर्वज, जानें सत्तू व घड़े के दान का महत्व

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। आज देश भर में सतुआ संक्रांति या सतुआन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन घड़ा, पंखा, सत्तू और ठंडे फलों का दान करने का विधान है। मान्यता है कि ये दान करने से ढेरों पुण्य प्राप्त होते हैं।

देशबन्धु 14 Apr 2026 4:31 pm

हेल्थ टिप्स : गर्मियों में बढ़ जाता है 'फूड पॉइजनिंग' का मामला, ऐसे करें बचाव

गर्मी के मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले बढ़ते दिखते हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट लोगों को चेतावनी देने के साथ इससे बचाव के उपाय भी बताते हैं

देशबन्धु 14 Apr 2026 10:02 am

स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने लॉन्च किया 10,000 करोड़ रुपए का 'स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0'

स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 'स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0' (एफओएफ 2.0) लॉन्च किया

देशबन्धु 14 Apr 2026 9:43 am

ललित सुरजन की कलम से -सेंसरशिप: प्लेटो से अब तक

यह कहना एक स्थापित सत्य को दोहराना ही होगा कि जनतंत्र की पहिली शर्त अभिव्यक्ति की आजादी है।

देशबन्धु 14 Apr 2026 3:30 am

हिन्दू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अंगीकार कर मैं बहुत प्रसन्न हूं : डॉ अम्बेडकर

'ईसाई धर्म बुनियादी रूप से गरीबों का धर्म है। इसी तरह बौद्ध धर्म महारों का धर्म है। ब्राह्मण लोग गौतम बुद्ध को 'वो गौतम' कहकर पुकारते थे।

देशबन्धु 14 Apr 2026 3:00 am

अद्भूत जीवटता की मिसाल आशा भोंसले

फिल्म और संगीत जगत की महान गायिका आशा भोंसले ने 92 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

देशबन्धु 14 Apr 2026 2:50 am

सूरों की आशा बनकर गूंजती रहेगी आशा भोसले

भारतीय संगीत का आकाश आज कुछ अधिक मौन, कुछ अधिक रिक्त प्रतीत होता है। स्वर की वह चंचल चिड़िया, जन-जन को चमत्कृत करने वाली आवाज जिसने दशकों तक हर हृदय में मधुरता के बीज बोए, आज भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच न हो, पर उसकी गूंज अनंत में विलीन होकर भी अमर बनी ... Read more

अजमेरनामा 13 Apr 2026 10:05 pm

सुपारी: भारतीय संस्कृति की अमिट पहचान- ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश पांडे

भारत में जब भी त्योहारों और शादियों का मौसम आता है, तो पूरा देश रंगों, संगीत और परंपराओं से सराबोर हो जाता है। इन उल्लासपूर्ण आयोजनों के बीच एक छोटी-सी चीज़ अक्सर अनदेखी रह जाती है –सुपारी। यह साधारण-सा बीज वास्तव में भारतीय संस्कृति का एक गहरा प्रतीक है, जो सदियों से हमारे धार्मिक और ... Read more

अजमेरनामा 13 Apr 2026 9:54 pm

समानता और न्याय के अग्रदूत: डॉ. अंबेडकर की विचारधारा आज भी प्रासंगिक

14अप्रैल डॉ.भीमराव अंबेडकर जयंती विशेष लेख 14अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी दिनभीमराव अंबेडकरका जन्म हुआ था,जिन्हें पूरे देश में बाबा साहेब के नाम से जाना जाता है। वे भारतीय संविधान के निर्माता,महान समाज सुधारक,न्यायविद,अर्थशास्त्री और दूरदर्शी नेता थे। उनका जीवन संघर्ष,शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायक गाथा है। डॉ. अंबेडकर ... Read more

अजमेरनामा 13 Apr 2026 9:48 pm

प्रतिभा के पुंज —डॉ. भीमराव अंबेडकर

डॉ. अंबेडकर जयंती पर विशेष सन 1930 में लंदन में आयोजित गोलमेज कॉन्फ्रेंस में शेर की तरह दहाड़ते हुए एक युवक ने कहा ‘‘अंग्रेजों पहले तुम भारत छोड़ो‘‘। युवक के मन में देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाने एवं वहां रह रहे दलितों के जीवन स्तर को सुधार कर सभी लोगों को समान ... Read more

अजमेरनामा 13 Apr 2026 9:34 pm

बंगाल का आखिरी पड़ाव : मछली की कहानी, लापता वोटर और दो राष्ट्रीय नेता

बनर्जी, जो किसी और को अपनी बातों में मसाला लगाने का मौका देकर आज इस मुकाम तक नहीं पहुंची हैं, ने इस बात को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया।

देशबन्धु 13 Apr 2026 3:20 am

ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए

जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?

देशबन्धु 13 Apr 2026 3:20 am

इस्लामाबाद वार्ता से निकला संदेश

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई।

देशबन्धु 13 Apr 2026 2:50 am

स्मृति शेषः आशा जी की मधुर और सुरमयी आवाज सदा दिलों में अमर रहेगी

आशा भोंसले जी का नाम भारतीय संगीत इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपने करियर में आठ दशकों से भी अधिक समय तक संगीत जगत में अमूल्य योगदान दिया है और लगभग12हजार से अधिक गीतों को अपनी मधुर आवाज से सजाया है। आशा भोंसले जी,जो भारत की महानतम और दिग्गज गायिकाओं ... Read more

अजमेरनामा 12 Apr 2026 6:25 pm

कूनो नेशनल पार्क में खुशखबरी: भारतीय मूल की चीता ‘गामिनी’ ने 4 शावकों को दिया जन्म

मध्‍य प्रदेश में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां 25 माह की भारतीय मूल की चीता गामिनी ने चार शावकों को शनिवार को जन्म दिया है

देशबन्धु 12 Apr 2026 7:10 am

हाथों में कंपकंपी से मांसपेशियों में जकड़न तक, 'पार्किंसन' के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी

पार्किंसन एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर की गतिविधियों को प्रभावित करती है, और समय रहते लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है

देशबन्धु 12 Apr 2026 4:40 am

सुबह के नाश्ते में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? ऐसे करें बचाव

सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है। यह न सिर्फ शरीर को ऊर्जा देता है, बल्कि पूरे दिन के स्वास्थ्य और एक्टिविटी को भी प्रभावित करता है

देशबन्धु 12 Apr 2026 4:00 am

दिल्ली की 'जहरीली हवा' पर कांग्रेस नेता अजय माकन की चेतावनी

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के कोषाध्यक्ष और दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन ने राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए इसे “नीतिगत विफलता” करार दिया है

देशबन्धु 12 Apr 2026 3:30 am

युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत

यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।

देशबन्धु 11 Apr 2026 3:30 am

डिजिटल जनगणना 2027 : भारत की प्रशासनिक क्षमता का नया अध्याय

इस जनगणना के सामाजिक प्रभावों के साथ इसके राजनीतिक परिणाम भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इसके बाद परिसीमन के तहत जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं पुनर्निर्धारित होंगी,

देशबन्धु 11 Apr 2026 3:20 am

बंगाल को बचाने का विकल्प : वाम मोर्चे का घोषणा-पत्र 2026

*केवल वादों की सूची नहीं, बल्कि बंगाल के पुनर्निर्माण का व्यावहारिक खाका है।* – केशव कुमार भट्टड़ कोलकाता। पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वाम-लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष शक्तियों ने “बंगाल को बचाने के लिए” घोषणा-पत्र जारी किया है। यह दस्तावेज़ राज्य में व्याप्त अराजकता, लूट, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक विभाजन की राजनीति का स्पष्ट विकल्प ... Read more

अजमेरनामा 10 Apr 2026 10:21 pm

ज्योतिबा फुले जयंती: समानता की अधूरी लड़ाई और हमारी जिम्मेदारी

11 अप्रैल का दिन भारतीय समाज के लिए सिर्फ एक जयंती नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। यह दिन हमें ज्योतिराव गोविंदराव फुले के उस संघर्ष की याद दिलाता है, जिसने सदियों से जकड़े हुए समाज को सवालों के कटघरे में खड़ा किया। ज्योतिबा फुले ने केवल अन्याय का विरोध नहीं किया, बल्कि एक वैकल्पिक, ... Read more

अजमेरनामा 10 Apr 2026 9:41 pm

किशोर आक्रामकता एवं हिंसा पर अंकुश लगाने की पहल हो

भारतीय किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नये भारत एवं विकसित भारत के भाल पर यह बदनुमा दाग है। पिछले कुछ समय से किशोरों में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति निश्चित रूप से डरावनी, मर्मांतक एवं खौफनाक है। चिंता का बड़ा कारण इसलिए भी है क्योंकि जिस उम्र में किशोरों के ... Read more

अजमेरनामा 10 Apr 2026 9:39 pm

पाकिस्तान की प्रशंसा करते रवीश कुमार और शिव अरूर के वीडियो डीपफेक हैं

बूम ने पाया कि वीडियो को एआई-जनरेटेड वॉयसओवर का इस्तेमाल करके डिजिटल रूप से एडिट किया गया है.

बूमलाइव 10 Apr 2026 5:29 pm

समानता के संघर्ष का ऐतिहासिक प्रतीक: महाड़ सत्याग्रह

इतिहास में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जो अपने समय की सीमाओं को लाँघकर शाश्वत चेतना का रूप ले लेती हैं। महाड़ सत्याग्रह भी ऐसी ही एक घटना है, जिसने केवल एक स्थानीय समस्या का समाधान करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि भारतीय समाज की गहराइयों में जड़ जमा चुकी असमानताओं को चुनौती देने का ... Read more

अजमेरनामा 10 Apr 2026 12:53 pm

धुंधली नजर को न करें नजरअंदाज, खतरनाक हो सकते हैं ये लक्षण, ऐसे करें बचाव

अगर आपको या आपके घर के बुजुर्ग को धुंधला दिखाई देने लगा है या बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़ रहा है तो इसे कभी भी नजरअंदाज न करें

देशबन्धु 10 Apr 2026 10:13 am

ललित सुरजन की कलम से चलो, लंगर में चलते हैं

'बहुत बात होती है कि आजादी के पैंसठ साल बाद भी यह नहीं हो सका या वह नहीं हो सका।

देशबन्धु 10 Apr 2026 3:19 am

अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की मांग तेज

यह केवल विचारधारा की बात भी नहीं है। यह इस बारे में नहीं है कि कोई प्रशासन की व्यापक नीतियों का समर्थन करता है या विरोध।

देशबन्धु 10 Apr 2026 3:00 am

जनगणना में प्रवासी मजदूरों की गिनती जरूरी

सिर्फ प्रवासी बन जाने से वहां रहना, खाना, पहनना, ओढ़ना से लेकर पढ़ाई तक का काम कितना मुश्किल हो गया है इसकी कल्पना मुश्किल है।

देशबन्धु 10 Apr 2026 2:40 am

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत –महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले

ज्योतिबा फुले जयंती (11अप्रैल) पर विशेष आलेख भारत के सामाजिक इतिहास में अनेक महापुरूष हुए है जिन्होंने समाज में अज्ञानता,जातिवाद और असमानता के घने अंधेरे को चीरकर समानता और शिक्षा का प्रकाश फैलाया । ऐसे ही एक महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले (ज्योतिबा फुले) का नाम एक ऐसी मशाल की तरह सदैव याद किया जाता रहेगा। ... Read more

अजमेरनामा 9 Apr 2026 10:14 pm

सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका पर आपा खोते न्यूज एंकर का वीडियो AI जनरेटेड है

वीडियो में दिखाई देने वाली विसंगतियां साफ तौर पर संकेत देती हैं कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है.

बूमलाइव 9 Apr 2026 6:31 pm

चित्रा त्रिपाठी के मेकअप पर पाकिस्तानी पैनलिस्ट के कमेंट का वीडियो एडिटेड है

बूम ने पाया कि वायरल वीडियो अत्ता मुहम्मद मरी नाम के पाकिस्तानी यूजर ने एडिट किया है.

बूमलाइव 9 Apr 2026 2:33 pm

ईरान का अद़्भुत जज्बा दुनिया के लिए मिसाल

टाइटैनिक फिल्म का एक अद्भुत दृश्य है, जब जहाज टुकड़े-टुकड़े होकर डूबता है, अमीरों में आपाधापी मची रहती है कि बचाने वाली नावों पर वे किसी भी तरह सवार हो जाएं

देशबन्धु 9 Apr 2026 7:55 am

न्यायपालिका में ए. आई. के उपयोग की संभावनाएं

भारत के संदर्भ में अभी कई चुनौतियां विद्यमान हैं, जिनमें न्यायिक प्रक्रियाओं में औपचारिक ढांचे का अभाव, अत्यधिक निर्भरता का जोखिम और ए.आई.के प्रशिक्षण की कमी प्रमुख हैं

देशबन्धु 9 Apr 2026 7:28 am

मोदी सरकार की विदेश नीति की बड़ी नाकामी

7 और 8 अप्रैल की आधी रात को जब भारत के लोग सो रहे थे, उस समय वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की एक बड़ी करवट ली जा चुकी थी

देशबन्धु 9 Apr 2026 7:20 am

बिना दवा के शरीर को रखना है निरोग, प्रकृति दिखाएगी स्वस्थ रखने का रास्ता

आज के समय में हर कोई निरोगी काया चाहता है, लेकिन सवाल है कि कैसे निरोगी काया को पाया जा सकता है

देशबन्धु 9 Apr 2026 3:20 am

सुबह के नाश्ते में क्यों जरूरी है प्रोटीन, जानें प्लेट में क्या करें शामिल?

सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण आहार माना जाता है। एक्सपर्ट के अनुसार, अगर नाश्ते में प्रोटीन शामिल किया जाए तो सेहत और ऊर्जा दोनों को बड़ा फायदा पहुंचता है

देशबन्धु 8 Apr 2026 7:30 am

कम कैलोरी से लेकर दिल और पाचन तक, जानिए कैसे शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है लौकी

भारतीय रसोई में कई ऐसी सब्जियां हैं, जिन्हें हम अक्सर साधारण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लौकी ऐसी ही एक सब्जी है

देशबन्धु 8 Apr 2026 4:50 am

ललित सुरजन की कलम से- यात्रा वृतांत : पूर्वोत्तर:कुछ और बातें

इस प्रदेश में अनेक जनजातियां निवास करती हैं, सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं, भाषा, भूषा, धार्मिक विश्वास, सामाजिक परंपराएं, हरेक दूसरे से बिल्कुल अलग।

देशबन्धु 8 Apr 2026 2:18 am

तनावपूर्ण चुनाव अभियान में पराजित होती दिख रही भाजपा

श्रृंखला - छात्रों के लिए साइकिल और छात्रवृत्ति, शिक्षा जारी रखने के लिए छात्राओं के लिए नकद हस्तांतरण और स्वास्थ्य बीमा- ने सुनिश्चित किया है कि बनर्जी की लोकलुभावन अपील बेदाग है।

देशबन्धु 8 Apr 2026 2:15 am

पांच राज्यों में चुनाव के नाम पर हो रहा डरावना नाटक

धार्मिक अथवा जातीय समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण देने या नारे लगाने का भी आचार संहिता निषेध करती है। इसके बावजूद भाजपा की ओर से धर्म के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं।

देशबन्धु 8 Apr 2026 2:02 am

असम चुनाव से पहले घमासान

गुरुवार 9 अप्रैल को राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है और उससे पहले मंगलवार को असम पुलिस दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर गिरफ्तारी के लिए पहुंच गई।

देशबन्धु 8 Apr 2026 1:57 am

युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस

विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more

अजमेरनामा 7 Apr 2026 9:50 pm

णमोकार महामंत्र: श्रद्धा, समता और आत्मशुद्धि का शाश्वत मंत्र

विश्व नवकार दिवस (9 अप्रैल 2026) आत्मशुद्धि का शाश्वत मंत्र जैन धर्म की आराधना परंपरा में णमोकार महामंत्र को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, समता और विनय का सार्वभौमिक संदेश है। इसकी महिमा का उल्लेख प्राचीन जैन आगम ग्रंथ भगवती सूत्र के प्रारम्भ में महामंगल वाक्य ... Read more

अजमेरनामा 7 Apr 2026 7:03 pm

दिल्ली-एनसीआर में बारिश से मौसम हुआ सुहाना, दो दिन होगी बरसात; IMD ने जारी किया यलो अलर्ट

दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार सुबह कई इलाकों में बारिश देखने को मिली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 7 और 8 अप्रैल के बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।

देशबन्धु 7 Apr 2026 11:16 am

ललित सुरजन की कलम से स्वाधीनता और जनतंत्र का रिश्ता

आज की दुनिया की यह भयावह सच्चाई है कि पूंजीवाद और साम्राज्यवाद नया बाना धारण करके जगह-जगह अपनी घुसपैठ कर चुके हैं।

देशबन्धु 7 Apr 2026 5:00 am

केरल- एलडीएफ और यूडीएफ के घोषणापत्र

— पी. श्रीकुमारन जहां एलडीएफ का घोषणापत्र अपने वादों को पूरा करने पर ज़ोर देता है, वहीं यूडीएफ का प्रयास वोट हासिल करने की एक छिपी हुई कोशिश लगती है। दूसरे शब्दों में कहें तो, एलडीएफ सिर्फ वही वादे करता है जिन्हें वह पूरा कर सकता है। पिनाराई-1 और पिनाराई-2, दोनों सरकारों का रिकॉर्ड इस बात को बिना किसी शक के साबित करता है। केरल के लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के घोषणापत्रों का अध्ययन करना काफ़ी दिलचस्प है। दोनों के बीच का अंतर इतना साफ़ है कि इसे नजऱअंदाज़ नहीं किया जा सकता। जहां एलडीएफ का घोषणापत्र अपने वादों को पूरा करने पर ज़ोर देता है, वहीं यूडीएफ का प्रयास वोट हासिल करने की एक छिपी हुई कोशिश लगती है। दूसरे शब्दों में कहें तो, एलडीएफ सिर्फ वही वादे करता है जिन्हें वह पूरा कर सकता है। पिनाराई-1 और पिनाराई-2, दोनों सरकारों का रिकॉर्ड इस बात को बिना किसी शक के साबित करता है। उदाहरण के लिए, पिनाराई-1 सरकार का रिकॉर्ड काफ़ी शानदार रहा है, जिसने अपने 98 प्रतिशत वादों को पूरा किया। पिनाराई-2 सरकार के घोषणापत्र को लागू करने का रिकॉर्ड भी उतना ही प्रभावशाली है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा जारी एलडीएफ के घोषणापत्र में एक 60-सूत्री कार्यक्रम की रूपरेखा दी गई है, जिसमें 'नवा केरल' बनाने के लिए 950 प्रस्ताव शामिल हैं। यह फ्रंट चल रहे विकास कार्यों को जारी रखने के लिए लोगों का जनादेश मांग रहा है। एलडीएफ घोषणापत्र की मुख्य बातें ये है: घोर गरीबी को खत्म करने का वादा, केरल को 'बेघर-मुक्त राज्य' बनाने के लिए 'लाइफ़ मिशन 2.0Ó की शुरुआत, कल्याणकारी पेंशन को 2000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करना, पांच सालों में राज्य को एक 'ज्ञान-आधारित समाज' में बदलना, कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए शिक्षित युवाओं के लिए पक्की नौकरी के अवसर, कौशल विकास के लिए 'बैक टू कैंपस' योजना, और उद्यमियों के लिए ब्याज़-मुक्त ऋण। लगभग पांच लाख अत्यंत गरीब परिवारों की पहचान की जाएगी और उन्हें गरीबी से बाहर निकाला जाएगा। महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत रोजग़ार का वादा और 20 लाख गृहिणियों के लिए नौकरी की गारंटी शामिल है। शिक्षा के क्षेत्र में, जिसने पिछले 10 सालों में ज़बरदस्त प्रगति की है, घोषणापत्र में उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने, सार्वजनिक शिक्षा में सीखने की कमियों को दूर करने और तकनीकी शिक्षा की पहलों का विस्तार करने का वादा किया गया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में, एक 'सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज योजना' लागू करने और इलाज के असीमित लाभ प्रदान करने का वादा किया गया है। अभी, 42 लाख लाभार्थियों को 'कारुण्य आरोग्य सुरक्षा पद्धति' के तहत 5 लाख रुपये तक का इलाज का लाभ मिल रहा है। बिस्तर पर पड़े सभी मरीज़ों को विशेष इलाज मिलेगा और सभी बुज़ुर्ग नागरिकों के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी। जहां तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की बात है, जिसे केंद्र सरकार ने देने से मना कर दिया है- जो केरल के साथ भेदभाव का एक उदाहरण है-एलडीएफ का वादा है कि अगर केंद्र सरकार अपना रुख नहीं बदलती है, तो वह लोगों की मदद से एक बेहतर मेडिकल-रिसर्च अस्पताल बनाएगी। एलडीएफ ने कहा कि वे केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम और कोझिकोड, दोनों जगहों पर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट शुरू होने वाले हैं; वहीं 'वॉटर मेट्रो' - जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारीफ़ मिली है - का विस्तार अलाप्पुझा, कोल्लम और कोडुंगल्लूर तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अल्पसंख्यकों ने जो चिंताएं ज़ाहिर की हैं, वे बिल्कुल सही हैं; क्योंकि ये संशोधन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ला रही है- जो 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' (आरएसएस) की राजनीतिक शाखा है। पीड़ितों का साथ देने के बजाय, संघ अपराधियों को बचा रहा है। विजयन ने ज़ोर देकर कहा कि यही सच्चाई है, इसलिए अल्पसंख्यकों का डर बेबुनियाद नहीं है। अपनी तरफ से, कांग्रेस के नेतृत्व वाला 'संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा' (यूडीएफ) पांच 'इंदिरा गारंटी' और पांच 'ड्रीम प्रोजेक्ट' का वादा कर रहा है; जिनका मुख्य ज़ोर समुद्री और विमानन क्षेत्रों पर, और वायनाड में एक 'आदिवासी विश्वविद्यालय' बनाने पर होगा। राहुल गांधी ने पहले जिन पांच गारंटियों की घोषणा की थी, वे इस प्रकार हैं: महिलाओं के लिए 'केरल राज्य सड़क परिवहन निगम' (केएसआरटीसी) की बसों में मुफ़्त यात्रा; कॉलेज जाने वाली छात्राओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक मदद; कल्याणकारी पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करना; पूर्व मुख्यमंत्री ओमनचांडी के नाम पर शुरू की गई एक योजना के तहत हर परिवार को 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर देना; और युवाओं को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज़-मुक्त कज़र् देना। विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने, जिन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को घोषणापत्र की एक प्रति सौंपी, कहा कि अगर यूडीएफ सत्ता में आती है, तो बुजुर्गों के सम्मान, देखभाल और उनके कल्याण पर विशेष ध्यान देने के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाएगा। घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल 'मिशन समुद्र' का उद्देश्य राज्य की 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 44 नदियों, 34 झीलों, चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और ऊंचे पहाड़ी इलाकों से मिलने वाले अवसरों को एकीकृत करना है, ताकि वैश्विक समुद्री क्षेत्र में केरल की स्थिति को और बेहतर बनाया जा सके। विमानन क्षेत्र में, घोषणापत्र में पायलट और विमानन कर्मचारियों के प्रशिक्षण की आधुनिक सुविधाओं, कोच्चि हवाई अड्डे पर रनवे निर्माण के दूसरे चरण और कन्नूर हवाई अड्डे के समग्र विकास का वादा किया गया है। अन्य प्रमुख आश्वासनों में एक कल्याण पेंशन आयोग की स्थापना, ज़रूरतमंदों के लिए 'आश्रय' परियोजना का दूसरा चरण और जनता को कम दरों पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए 'इंदिरा कैंटीन' की शुरुआत शामिल है। स्वास्थ्य क्षेत्र में, वादों में बजट में अधिक आवंटन और मरीजों की जेब से होने वाले खर्चों को कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदम शामिल हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए 'शी हॉस्पिटल्स', बुज़ुर्ग महिलाओं के लिए 'अम्मावाड़ी' प्रोजेक्ट और आदिवासी स्वास्थ्य क्लस्टर के वादे भी शामिल किये गये हैं। एक और वादा है रैगिंग को रोकने के लिए 'सिद्धार्थन एंटी-रैगिंग और छात्र कल्याण अधिनियम' को लागू करना। सतीसन ने लगभग 1,000 मध्यम, छोटे और सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का भी वादा किया है, जिनका कुल टर्न ओवर 100 करोड़ रुपये होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि योग्य स्कूलों को सहायता प्राप्त दर्जा दिया जाएगा। इसके अलावा, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) की न्यूनतम दैनिक मज़दूरी 700 रुपये तय की जाएगी। इस बीच, भाजपा के घोषणापत्र में एम्स की स्थापना और तिरुवनंतपुरम तथा कन्नूर को जोड़ने वाले एक हाई-स्पीड रेलवे नेटवर्क के विकास का वादा किया गया है। अन्य वादों में लगभग 10 लाख नौकरियों का सृजन, केरल को 'खाद्य अधिशेष राज्य' में बदलना, तथा कम आय वाले परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं। इनमें गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों की महिलाओं के लिए 'भक्ष्य आरोग्य सुरक्षा कार्ड' की शुरुआत भी शामिल है, जो किराने के सामान और दवाओं के लिए हर महीने 2,500 रुपये का रिचार्ज प्रदान करेगा। अन्य आश्वासनों में हर घर को हर महीने 20,000 लीटर मुफ्त पानी, ओणम और क्रिसमस के दौरान सालाना दो मुफ्त एलपीजी सिलिंडर, और 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों तथा विधवाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करना शामिल है।

देशबन्धु 7 Apr 2026 4:57 am

तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी

इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।

देशबन्धु 7 Apr 2026 4:54 am

अपशब्दों पर उतरे ट्रंप

हम नहीं जानते कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस विचार से कितना सहमत हैं। क्योंकि वे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों को अपना करीबी मित्र बताते हैं।

देशबन्धु 7 Apr 2026 4:51 am

तिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर: यहां एक दिन में 10 बार लगता है भोग, देर होने पर कमजोर हो जाती है 'रहस्यमयी प्रतिमा'

देशभर में कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां भगवान श्री कृष्ण अलग-अलग अवतारों में भक्तों के कष्टों को हरते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि केरल की धरती पर ऐसा मंदिर मौजूद है

देशबन्धु 6 Apr 2026 11:40 pm

सुबह उठते ही शरीर में रहती है जकड़न, आमवातारि वटी से मिलेगा आराम

आज के समय में कई घंटों तक कुर्सी पर बैठकर काम करना होता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने के साथ-साथ अकड़ने भी लगती है

देशबन्धु 6 Apr 2026 11:38 pm

कोरियन ड्रामा से भारतीय सीरियल तक : मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार

विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब सीरीज के माध्यम से पूरी दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है तो वह दक्षिण कोरिया है। कोरियन ड्रामा आज केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रभाव, सामाजिक शिक्षा, भावनात्मक परिपक्वता और जीवन मूल्यों के प्रस्तुतीकरण का सशक्त माध्यम बन ... Read more

अजमेरनामा 6 Apr 2026 6:34 pm

शरीर के चक्रों और न्यूरॉन्स को एक्टिव करता है 'ओम', जानें इसके पीछे का विज्ञान

सनातन धर्म में ‘ओम’ का बेहद महत्व है। किसी भी मंत्र का जाप हो या ध्यान लगाना, इसका उच्चारण सिर्फ आध्यात्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है

देशबन्धु 6 Apr 2026 10:17 am

ललित सुरजन की कलम से आरक्षण आयोग की आवश्यकता

'दरअसल विगत तीन-चार दशकों से जो आरक्षण नीति चली आ रही है, उसमेें समय की वास्तविकताओं के साथ जो संशोधन होने चाहिए थे, उन्हें लागू करने से हमारे सत्ताधीश कतराते रहे हैं। इसमें बहुत सारे मुद्दे हैं। सबसे पहले तो इस वास्तविकता का संज्ञान लेना आवश्यक है कि देश में विकास योजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर लगातार विस्थापन हो रहा है। एक समय था जब बड़े बांधों और कारखानों के लिए विस्थापन हुआ, जिससे प्रभावित होने वाली जनसंख्या मुख्यत: आदिवासियों की थी। चूंकि नेहरू युग में जनता के मन में एक विश्वास था इसलिए लोगों ने खुशी-खुशी अपनी जमीनें दे दीं, किंतु जिन नौकरशाहों पर मुआवजा और पुनर्वास की जिम्मेदारी थी, उसे उन्होंने ठीक से नहींनिभाया। आज भी ऐसे विस्थापित आदिवासी मिल जाएंगे जो 55-60 साल से खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि एक चतुर, संपन्न तबके ने इन विकास योजनाओं का लाभ अपने लिए लेने में कोई कसर बाकी नहींरखी। (देशबन्धु में 05 मई 2016 को प्रकाशित) https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/05/blog-post_6.html

देशबन्धु 6 Apr 2026 3:40 am

भय से विश्वास तक : एक युगांतकारी परिवर्तन

बृजमोहन अग्रवाल जनजातीय समाज को यह समझाया गया कि नक्सल नेतृत्व में स्थानीय छत्तीसगढ़ी आदिवासियों की भागीदारी शून्य है। जल जंगल जमीन के नारों की आड़ में हमारे भोले-भाले आदिवासियों का उपयोग केवल एक साधन के रूप में किया जा रहा था। यह भी सामने आया कि नक्सलियों के द्वारा आदिवासी युवतियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था, उन्हें शोषण का शिकार बनाया जाता था। छह दशकों तक भारत की आंतरिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास यात्रा को चुनौती देता रहा नक्सलवाद आज अपने निर्णायक अवसान की अवस्था में पहुंच चुका है। यह केवल एक सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय संकल्प की विजय है, जिसमें स्पष्ट नीति, अटूट राजनीतिक इच्छाशक्तिऔर केंद्र-राज्य के अभूतपूर्व समन्वय ने मिलकर एक जटिल और दीर्घकालिक समस्या का समाधान किया है। नक्सलवाद का यह अवसान इस सत्य को पुन: स्थापित करता है कि भारत में बंदूक की शक्ति अंतत: लोकतंत्र की सामूहिक शक्ति के आगे टिक नहीं सकती। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया—इसके पीछे दशकों का संघर्ष, अनगिनत बलिदान और एक ऐसी रणनीतिक निरंतरता रही है, जिसने अंतत: इस चुनौती को निर्णायक रूप से परास्त किया। इस ऐतिहासिक क्षण पर मैं उन सभी वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं—केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, कोबरा कमांडो, छत्तीसगढ़ पुलिस और स्थानीय सुरक्षाबलों के उन रणबांकुरों को—जिन्होंने अपने सर्वोच्च बलिदान से इस संघर्ष को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया। यह विजय उनके अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की अमिट गाथा है। नक्सलबाड़ी से रेड कॉरिडोर तक : एक वैचारिक आंदोलन का हिंसक विस्तार भारत में नक्सलवाद का उदय वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुआ, जिसकी वैचारिक जड़ें तत्कालीन सोवियत संघ और चीन की उग्र वामपंथी विचारधारा में थीं। अपनी विकास विरोधी छवि के कारण जब बंगाल में इस विचारधारा के प्रति विरोध पनपने लगा तो अपने विस्तार के लिए नक्सलवाद ने 'सॉफ्ट टारगेट्स' की तलाश शुरू की—ऐसे क्षेत्र जहां शासन की पहुंच सीमित हो, सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां अधिक हों और जनजागरूकता कम हो। देश के वनांचल, आदिवासी और खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र इस दृष्टि से सबसे आसान लक्ष्य थे। नक्सलवाद विस्तार की इसी रणनीति के तहत तथाकथित 'रेड कॉरिडोर' विकसित हुआ, जो तिरुपति से पशुपति तक फैले विशाल भूभाग में फैल गया। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से घिरा छत्तीसगढ़, जिसका लगभग 42 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है, इस रेड कॉरिडोर का रणनीतिक केंद्र बन गया। पड़ोसी राज्यों से अपनी गतिविधियां सीमित रखने का अघोषित समझौता कर नक्सली अबूझमाड़ क्षेत्र में संगठित होते चले गए। अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण दशकों तक प्रशासनिक सर्वेक्षण से दूर रहा अबूझमाड़ नक्सलियों का सुरक्षित शेल्टर बन गया। विचारधारा से विचलन: माओवाद से मनीवाद तक समय के साथ नक्सलवाद ने अपनी मूल वैचारिक पहचान खो दी और एक हिंसक आर्थिक उगाही तंत्र में परिवर्तित हो गया। बस्तर और सरगुजा जैसे वनाच्छादित जनजातीय क्षेत्रों में नक्सलियों ने समानांतर सत्ता संरचना स्थापित कर दी, जहां तथाकथित 'जन अदालतों' के माध्यम से भय आधारित नियंत्रण कायम किया गया। छत्तीसगढ़ के खनिज सम्पन्न क्षेत्रों की खदानें, विद्युत परियोजनाएं, तेंदूपत्ता व्यापार—सभी उनके लिए उगाही के स्रोत बन गए। सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों, ठेकेदारों और यहां तक कि पुलिस बलों से भी जबरन वसूली की जाने लगी। यह उगाही धीरे-धीरे इतनी बढ़ी कि छत्तीसगढ़ में इसका वार्षिक आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचने की चर्चा होने लगी। सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस में यह विचारधारा समाप्त हो गई। चीन ने भी माओवाद की सशस्त्र संरचना को छोड़कर आर्थिक सुधारों पर आधारित पूंजीवादी कम्युनिज्म मॉडल को अपना लिया, लेकिन भारत में नक्सलवाद अपने मूल उद्देश्यों से भटककर लेवी वसूली और हिंसा फैलाने का टूल बन गया। नक्सलवाद के झंडाबरदारों ने विचारधारा को त्यागकर इसे अपने आर्थिक हितों की पूर्ति और आतंक फैलाने का साधन बना लिया। नक्सलवाद के वैचारिक समर्थन की राजनीतिक पृष्ठभूमि: दुर्भाग्य से, कांग्रेस-नीत सरकारों के लंबे शासनकाल में नक्सलवाद के प्रति स्पष्ट और कठोर नीति का अभाव रहा क्योंकि उस दौर में केंद्र और कई राज्यों में भी वामपंथी पार्टियां कांग्रेस के सहयोगी की भूमिका में थीं। सत्ता के लिए वामपंथ के साथ कांग्रेस की राजनीतिक निकटता का परिणाम यह हुआ कि नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार करने की बजाय इसे सामाजिक-आर्थिक संघर्ष के रूप में प्रस्तुत कर वैधता प्रदान करने की नीति हावी हो गई। उस दौर में प्रशासनिक तंत्र के भीतर भी यह वैचारिक भ्रम दिखाई देता था। नक्सलवाद को सामाजिक समता पाने का वर्ग संघर्ष ठहराने के दृष्टिकोण से प्रशिक्षित किए गए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की नीतियां भी नक्सलवाद के विरुद्ध कठोर होने के बजाय सहानुभूतिपूर्ण हो गई थीं। इस ढुलमुल नीति का परिणाम यह हुआ कि नक्सलवाद देश के 12 राज्यों के लगभग 180 जिलों में फैल गया और छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से ही प्रदेश के समग्र विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन गया। राष्ट्रीय चेतना का उदय: मेरे प्रारंभिक अनुभव: छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहते हुए मुझे बस्तर क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला जहां नक्सलवाद रूपी दैत्य से मेरा प्रथम साक्षात्कार हुआ और यह आभास भी हुआ कि दंडकारण्य में इस दैत्य का दमन केवल हथियारों से नहीं किया जा सकता। नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष की भूमि तैयार करने के लिए इस क्षेत्र में वैचारिक जनजागरण की नितांत आवश्यकता थी और इसलिए जनजातीय समाज के बीच राष्ट्रीयता का अलख जगाने के प्रकल्प में मैंने भी अपनी भागीदारी निभाई। 1990 के दशक में स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा जी के नेतृत्व में रायपुर के पुराने कमिश्नर कार्यालय के बीटीआई कम्युनिटी परिसर में आयोजित बैठक में पहली बार यह निर्णय लिया गया कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष को राष्ट्रीयता के व्यापक संदर्भ में लड़ा जाएगा। यही वह निर्णायक मोड़ था जब नक्सलवाद की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के परिप्रेक्ष्य में देखा गया। जब हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा की गोपनीय बैठक: वर्ष 2003 से 2006 के बीच, जब मुझे मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह जी की सरकार में छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री के रूप में कार्य करने का उत्तरदायित्व मिला, तब प्रदेश में पहली बार नक्सलवाद के विरुद्ध एक ठोस, नीतिगत और समन्वित अभियान प्रारंभ किया गया। 'ज्वाइंट एफर्ट, ज्वाइंट कमांड और ज्वाइंट पॉलिसीÓ के सिद्धांत पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय स्थापित करने के प्रयास किए गए। तात्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल जी के साथ इस विषय पर मेरी कई गंभीर और विस्तृत मंत्रणाएं हुई थीं। उस दौर में इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए देश के इतिहास में पहली बार विधानसभा में गोपनीय बैठकों का आयोजन किया गया, ताकि लोग बिना किसी भय के खुलकर अपनी बात रख सकें। तात्कालीन स्पीकर प्रेम प्रकाश पांडेय जी की अध्यक्षता में आयोजित की जाने वाली इन बैठकों से अधिकारियों और पत्रकार साथियों को भी दूर रखना जरूरी हो गया था। इन मंत्रणाओं के परिणामस्वरूप बनी रणनीति के तहत तात्कालीन डीजीपी ओपी राठौड़ के नेतृत्व में कई अभियान चलाए गए और इसी क्रम में सलवा जुडूम जैसे जनअभियान की शुरुआत हुई। सलवा जुडूम: जनभागीदारी का ऐतिहासिक अध्याय हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अशिक्षा, अज्ञानता और दुष्प्रचार के कारण स्थानीय समाज का एक बड़ा हिस्सा नक्सलवाद के प्रति सहानुभूति रखता था। इस स्थिति को बदलने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया। स्कूलों, महाविद्यालयों और छात्रावासों में पर्चे और साहित्य वितरित किए गए। घर-घर जाकर नक्सलवाद की वास्तविकता को उजागर किया गया। इस अभियान में दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू जैसे संस्थानों से जुड़े राष्ट्रवादी विचारकों और छात्रों का भी सहयोग लिया गया। जनजातीय समाज को यह समझाया गया कि नक्सल नेतृत्व में स्थानीय छत्तीसगढ़ी आदिवासियों की भागीदारी शून्य है। जल जंगल जमीन के नारों की आड़ में हमारे भोले-भाले आदिवासियों का उपयोग केवल एक साधन के रूप में किया जा रहा था। यह भी सामने आया कि नक्सलियों के द्वारा आदिवासी युवतियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था, उन्हें शोषण का शिकार बनाया जाता था, उन्हें विवाह तक नहीं करने दिया जाता और सामान्य सामाजिक जीवन जीने तक से वंचित रखा जाता था। इन सभी कड़वी सच्चाइयों के उजागर होने से आई जनजागृति का परिणाम यह हुआ कि नक्सलवाद को मिलने वाला सामाजिक समर्थन कमजोर पड़ने लगा। जब नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा बने सलवा जुडूम के अगुआ 'सलवा जुडूमÓ केवल एक सरकारी पहल नहीं थी, बल्कि आदिवासी समाज के भीतर से उठा एक स्वाभाविक जनआंदोलन था, जिसने पहली बार सही मायने में नक्सलवाद को चुनौती दी। तात्कालीन नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा जी ने न केवल इस अभियान को पुरजोर समर्थन दिया बल्कि इसे जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई। इस संघर्ष से जुड़े रहने के कारण अंतत: उन्हें अपने प्राणों की आहुति तक देनी पड़ी—जो इस आंदोलन की गंभीरता और बलिदान की पराकाष्ठा का साक्षात प्रमाण है। नक्सलवाद ने हमें झीरम जैसे दंश दिए जिसमें प्रदेश के अग्रणी नेता काल-कलवित हो गए। सलवा जुडूम जनआंदोलन को अगर व्यापक संस्थागत समर्थन मिला होता, तो निश्चित ही नक्सलवाद का उन्मूलन उसी दौर में हो जाता, पर वैधानिक संस्थानों में काम करने वाले कई लोगों की सलवा जुडूम के खिलाफ लामबंदी, अर्बन नक्सली बुद्धिजीवियों के वैचारिक विरोध और केंद्र सरकार के नीतिगत असमंजस के कारण यह अवसर पूर्णरूप से साकार नहीं हो सका। समन्वित नेतृत्व से निर्णायक परिवर्तन:वास्तविक परिवर्तन तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध स्पष्ट, कठोर और समन्वित नीति अपनाई गई। नक्सलवाद को महज कानून-व्यवस्था की समस्या न मानकर, राष्ट्र की एकता, विकास और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर चुनौती मानते हुए नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए समयबद्ध रणनीति तैयार की गई। केंद्र और राज्य सरकारों के सशक्त समन्वय के परिणामस्वरूप दिसंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच सुरक्षा बलों ने लगातार सटीक और प्रभावी कार्रवाई करते हुए सैकड़ों कुख्यात नक्सलियों को निष्क्रिय किया, हजारों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां सुनिश्चित कीं। लैंड माइंस का व्यापक निष्क्रियकरण हुआ और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए। केंद्र और राज्य के समन्वित दृष्टिकोण और साझे प्रयासों से छह दशक पुराने नक्सलवाद के नासूर को जड़ से समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की बुनियाद पर विकसित छत्तीसगढ़ गढ़ने का संकल्प: वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए अब हमें नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ में गड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित होना पड़ेगा। जिस प्रकार आर्टिकल 370 के उन्मूलन से जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति और राष्ट्रीय एकीकरण का आधार बना, उसी प्रकार नक्सलवाद का समापन छत्तीसगढ़ के लिए एक नए युग का द्वार खोल रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी शासन की पहुंच सीमित थी, वहां अब सड़कों का जाल बिछ रहा है, मोबाइल नेटवर्क स्थापित हो रहे हैं, बैंकिंग सेवाएं सुलभ हो रही हैं और शिक्षा-स्वास्थ्य की सुविधाएं तेजी से विस्तार पा रही हैं। बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह केवल भौतिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक भी है। जहां कभी गनतंत्र का साया था, वहां आज जनतंत्र विश्वास और विकास के साथ स्थापित हो रहा है। अब चुनौती इस सफलता को स्थायी बनाने की है—ऐसी सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक संरचना खड़ी करने की, जहां किसी भी प्रकार की हिंसक विचारधारा को पनपने का अवसर ही न मिले। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि वे पुन: हिंसा के रास्ते पर न लौटें। बुलेट पर बैलेट की निर्णायक विजय: नक्सलवाद पर यह विजय केवल एक आंतरिक सुरक्षा अभियान की सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक आत्मविश्वास की पुनसर््थापना का प्रतीक है। यह उस निर्णायक परिवर्तन का संकेत है, जहां भय की राजनीति को विश्वास की शक्ति ने प्रतिस्थापित किया है और जहां बंदूक के साये में जी रहे समाज ने विकास और सहभागिता के मार्ग को अपनाया है। जो लोग बंदूक और गोलियों के दम पर भय के माध्यम से छत्तीसगढ़ में छद्म राज्य की कल्पना करते थे उनका अंत हुआ और लोकतंत्र की विजय हुई। बुलेट पर बैलेट की जीत हुई। देश की जनता, छत्तीसगढ़ की जनता और विशेषकर बस्तर की जनता को इस ऐतिहासिक विजय की हृदय से शुभकामनाएं। (लेखक छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री एवं वर्तमान में रायपुर लोकसभा से सांसद हैं)

देशबन्धु 6 Apr 2026 3:30 am

कमजोर मोदी को सहारा देते कांग्रेस के नेता

कांग्रेस अपने ऐसे विश्वासघातियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेती है। केवल कहती रहती है। इससे इस तरह के लोगों के हौसले बढ़ते रहते हैं।

देशबन्धु 6 Apr 2026 3:20 am