फैक्ट चेक: मोहन भागवत और गौरव भाटिया के नाम पर मनगढ़ंत बयान हो रहे वायरल
बूम ने पाया कि नवभारत टाइम्स के लोगो वाले ये पोस्टकार्ड फेक हैं. इनमें मोहन भागवत और गौरव भाटिया के हवाले से पीएम मोदी व स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर फर्जी बयान वायरल किए जा रहे हैं.
फैक्ट चेक: अविश्वसनीय तरीके से कैच लेती महिला क्रिकेटर का AI जनित वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो असली नहीं है. इसे एआई की मदद से बनाया गया है.
Haiwaan Movie Review: फिल्म 'हैवान' आज 11 सितंबर को थिएटर्स में सज चुकी है। सैफ अली खान और अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म कैसी है? यहां पढ़िए पूरा रिव्यू
Box Office Collection: फिल्म 'हनुमान अंश' और 'मिर्जापुर द मूवी' की बॉक्स ऑफिस धमक के बीच आज 'हैवान' रिलीज हो गई है। जानिए सिनेमाघरों में लगी फिल्मों का हाल कैसा है?
Web Series Chumbak Review: नीना गुप्ता, देवेन भोजानी, सुमित व्यास और अर्जुन बिजलानी जैसे बड़े कलाकारों से सजी वेब सीरीज चुंबक रिलीज हो चुकी है। जानिए कैसी है इसकी कहानी?
जीवन धारा: समस्या उम्र में नहीं, सोच में
जीवन धारा: समस्या उम्र में नहीं, सोच में
Guru Gochar 2026: अक्तूबर में गुरु सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। उनका यह गोचर करीब 12 साल के बाद होगा। ऐसे में कुछ राशि वालों का भाग्योदय होने के अलावा सफलता-सम्मान की प्राप्ति के भी योग हैं।
मशीनों की होड़ में मानवता: सीमाओं का सवाल खुद से पूछना होगा,सुनिश्चित करना होगा कि दुनिया भी सुरक्षित बनी रहे
ब्रिक्स टिका रहा, अब उसे नतीजे देने होंगे:विस्तार से अधिक प्रतिनिधित्व वाला मंच बना, क्यावास्तविक बदलाव आएगा?
दिल्ली की परीक्षा: ब्रिक्स टकराव के बजाय सहयोग का मंच बन सकता है, क्या भारत इसे रणनीतिक प्रभाव में बदल सकता है?
ललित सुरजन की कलम से शिक्षक राष्ट्रपति, शिक्षक प्रधानमंत्री
'प्रधानमंत्री ने अपने एकपक्षीय व्याख्यान में गुरु-शिष्य परंपरा का बखान किया।
विनोबा : अहिंसक क्रांति के अग्रदूत
आचार्य विनोबा भावे का जीवन सत्य, प्रेम एवं करुणा से सिंचित, पल्लवित एवं पुष्पित एक बेमिसाल नजीर था।
न्यायपालिका की भूमिका और अधिकारों की रक्षा के सवाल
सजीव और सजग लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका अहम रहती है।
ब्रिक्स शक्ति-संघर्ष का अखाड़ा नहीं, सहयोग का सेतु बने
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब विश्व व्यवस्था गहरे संक्रमण से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का तनाव, आतंकवाद, व्यापारिक टकराव, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा की चिंता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तेज होती चुनौती और वैश्विक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर उठते ... Read more
'बेचारा' कहने पर भड़के प्रशांत किशोर: सीएम सम्राट चौधरी को बताया 'अनपढ़ अपराधी'; बाढ़-शराबबंदी पर क्या बोले?
विचार: अब भी नासूर बना हुआ है आतंकवाद
आतंक के खिलाफ कोरी बातें ही उसे ताकत प्रदान कर रही हैं। आज सबसे आवश्यक यह है कि आतंकवाद को संयुक्त राष्ट्र की ओर से परिभाषित किया जाए और आतंक के पोषक देशों को दंडित किया जाए।
विचार: आसिम मुनीर के शिकंजे में पाकिस्तान
रंपरागत रूप से पाकिस्तान में सेनाध्यक्ष ही सत्ता के सबसे ताकतवर चेहरे रहे हैं, जिनका रसूख निर्वाचित सरकार और उसके मुखिया से कहीं अधिक होता है।
जागरण संपादकीय: कांग्रेस की संकीर्णता
ध्यान रहे इसके बावजूद मुस्लिम लीग अलगाववादी एजेंडे पर चलती रही और देश के विभाजन का कारण बनी। आखिर कांग्रेस आज भी मुस्लिम लीग की आपत्तियों को महत्व क्यों दे रही है?
ब्रिक्स से हमारी विदेश नीति को और मिले विस्तार
भारत कल से दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब विश्व अर्थव्यवस्था और राजनीति, दोनों बड़े बदलावों से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में…
एक चौथाई खातों का निष्क्रिय होना ठीक नहीं
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 15,36,77,009 खाते निष्क्रिय पाए गए हैं, जो कुल खातों का करीब चौथाई हिस्सा (26 प्रतिशत) है। इसके अलावा, 5.72 करोड़ (5,72,35,490) खातों में शून्य (जीरो) बैलेंस है। आरटीआई के जरिये हुए…
उस दुर्दांत आतंकी हमले के आज पच्चीस साल हो रहे हैं, जिसने दुनिया की राजनीति, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दशा-दिशा बदल दी। 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका के ‘ट्विन टावर’ पर हुए आतंकी हमले को महज…
दुनिया के सबसे पुराने और विकसित लोकतांत्रिक देश अमेरिका में भी लोगों को सीधे नकदी या मुफ्त उपहार देने की राजनीति चल निकली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में उनकी…
आईफोन डुओ से लेकर एयरपॉड्स 5 तक: एपल के इवेंट में क्या-क्या हुआ लॉन्च? जानें पूरी डिटेल
आईफोन डुओ से लेकर एयरपॉड्स 5 तक: एपल के इवेंट में क्या-क्या हुआ लॉन्च? जानें सभी की पूरी डिटेल
काम से प्यार हो, तो मेहनत बोझ नहीं लगती: मैंने हार को भी अपने जीवन का शिक्षक माना
देश का सबसे ज्यादा सैनिकों वाला गांव: जहां हर घर से सरहद तक पहुंचता है एक जवानindia most soldiers village in gazipur asia largest also
फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ बॉक्स ऑफिस पर काफी मुनाफा कमा रही है। वहीं ‘हनुमान अंश’ की कमाई अपनी रिलीज से कई दिनों के बाद भी जारी है। जानें कितना है इन फिल्मों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त के तहत पात्र किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये की राशि भेजी जाएगी। जो किसान योजना के लिए पात्र होंगे, उन्हें ही ये आर्थिक मदद मिलेगी।
इमारतें नहीं, व्यवस्था गिर रही है: सत्य निकेतन के बाद सवाल- जिम्मेदार कौन?
इमारतें नहीं, व्यवस्था गिर रही है: सत्य निकेतन के बाद सवाल- जिम्मेदार कौन?
चीन 2.0 से एआई तक, बदलता शक्ति-संतुलन: दुनिया के मानक क्या चीन तय करेगा
चीन के विकास का बुलबुला फटने की भविष्यवाणियां कोई आज से नहीं हो रही हैं। पर, अब एआई में चीन जिस तरह से छलांग लगा रहा है, उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं, जब वह वैश्विक शक्ति-संतुलन को भी बदलने की कोशिश करेगा। असल समस्या की शुरुआत यहीं से होगी।
संप्रभुता की लकीरें: नक्शा सिर्फ भूगोल नहीं, राष्ट्रीय अस्मिता का आईना है
संप्रभुता की लकीरें: नक्शा सिर्फ भूगोल नहीं, राष्ट्रीय अस्मिता का आईना है
मूल लेखक: प्रोफ़ेसर अशरफ़ रहमान हिंदी अनुवाद-देवी नागरानी मूल लेखक: प्रोफ़ेसर अशरफ़ रहमान پروفیسر اشرف راہموں سَرحد کے اُس پار سَرحد کے اُس پار میرے بزرگ سَرحد کے اُس پار سے آئے تھے، وہ کیا چھوڑ کر آئے تھے ؛ تم کیا جانو؟ تمہیں اِس سے کوئ غرض نہیں ہو سکتی — تم نے اُن ... Read more
असलियत से ज़्यादा गणितीय हो सकती है भारत की तेज़ विकास दर
ऊर्जा की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, क्षेत्रीय आपूर्ति में रुकावट, कम निवेश और बढ़ते व्यापार प्रतिबंधों की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था धीमी हो रही है।
सिमोन द बुवा के देश में नारी उत्पीड़न
नारी सशक्तीकरण पर उनके मौलिक और क्रांतिकारी विचारों पर दुनिया में आज भी मंथन होता है।
विचार: ब्रिक्स को नए आयाम देता भारत
भारत की अध्यक्षता ब्रिक्स को संप्रभु राष्ट्रों के एक स्वतंत्र मंच के रूप में अक्षुण्ण रखते हुए व्यावहारिक सहयोग के एक अधिक प्रभावी माध्यम के तौर पर स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
विचार: नई पीढ़ी को सक्षम बनाने की चुनौती
शासन-प्रशासन में अनुभव, समझ और संयम का महत्व तो सदैव रहेगा, मगर भारत के भविष्य को गढ़ने में भावी पीढ़ी की भूमिका तय होनी ही चाहिए।
पश्चिम से उत्तर भारत तक आसान हुई माल ढुलाई
दो दशक पुराना सपना पूरा हुआ है। 2,843 किलोमीटर लंबे समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) पर मालगाड़ियां अब दौड़ने लगी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वडोदरा दौरे में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर…
भारत ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसके अपने निहितार्थ हैं और संदेश भी, लेकिन उससे भी अधिक मायने हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के, जो ब्रिक्स की बैठक से एक दिन…
खुदकुशी की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक
हर वर्ष 10 सितंबर को ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ मनाया जाता है। हालांकि, सिर्फ एक दिन इसे मनाने से समाज में आत्महत्या नहीं रुक सकती। बड़े-बुजुर्ग ही नहीं, छात्र और युवा भी अपनी जान लेते रहे हैं…
जर्जर और अवैध भवनों को ध्वस्त करने की कोई भी कार्रवाई स्वागतयोग्य है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली नगर निगम को शहर के कई हिस्सों में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और इस दिशा में…
दिल्ली में महिला पत्रकारों के साथ हुई बदसलूकी से जोड़कर फिल्म शूटिंग का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है. वीडियो दिल्ली पुलिस द्वारा महिला पत्रकारों के साथ मारपीट का नहीं बल्कि एक शूटिंग के बिहाइंड-द-सीन का है.
सीने में तेज दर्द के बाद अस्पताल पहुंची महिला, सर्जरी में पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और मोमबत्ती
आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 33 वर्षीय महिला को सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को उसके पेट के अंदर कई असामान्य वस्तुएं मौजूद होने का पता चला। सर्जरी के दौरान महिला के पेट से 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती निकाली गई।
बेल का पेड़ है औषधीय गुणों से भरपूर
नई दिल्ली, भारत में पेड़-पौधों का महत्व सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि प्राचीन समय से ही कई पौधों का इस्तेमाल औषधीय जरूरतों के लिए भी किया जाता रहा है।
एक किताब : जहां सुर की उठान के एहसास से भरे अनछुए किस्से हैं
संगीत के सुरों के साथ तमाम शख्सियतों के ऐसे किस्से जो भाषा की रवानगी और संवेदनशीलता के एहसास से भरी है
इन दिनों सिनेमाघरों में फिल्म 'मिर्जापुर द मूवी' और 'हनुमान अंश' के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। वहीं जानिए 'टॉक्सिक' और 'इरुमुडी' ने मंगलवार को कितनी कमाई की है।
वीडियो गेम में चलते युद्ध का प्रवेश: मनोवैज्ञानिक युद्ध से कैसे बदल रहा राजनीतिक प्रचार?
वीडियो गेम में चलते युद्ध का प्रवेश: मनोवैज्ञानिक युद्ध से कैसे बदल रहा राजनीतिक प्रचार?
सबसे जरूरी तो हिमालय है: हिमालयी राज्यों के लिए विकास नहीं, अब पारिस्थितिकी भी प्राथमिकता होनी चाहिए
सबसे जरूरी तो हिमालय है: हिमालयी राज्यों के लिए विकास नहीं, अब पारिस्थितिकी भी प्राथमिकता होनी चाहिएnepal flood wake up call for himalayan states of india know how
चुनौतियां बाकी हैं: स्वच्छ हवा अब महज पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं
चुनौतियां बाकी हैं: स्वच्छ हवा अब महज पर्यावरण संरक्षण का विषय नहींOpinion on clean air survey 2026 indore lucknow and delhi situation
कॉकरोच से लगे झटके के बाद अपनी छवि सुधारने की तैयारी में मोदी
सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए बड़े प्रयास किए जा रहे हैं, जो भारत के बढ़ते प्रभाव और आर्थिक क्षमता को दिखाते हैं।
ललित सुरजन की कलम से वैज्ञानिक जिन्हें हम भूल न जाएं
'हमारी शासन व्यवस्था, समाज व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था- सब में ज्ञान, विवेक और तर्कबुद्धि, इन सबका मानो कोई स्थान नहीं रह गया है।
संयुक्त राष्ट्र की एक पहल के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से जम्मू-कश्मीर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
दिल्ली में एक मुठभेड़ के बाद हिमांशु भाऊ गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
नेपाली स्वर साम्राज्ञी : अरुणा लामा
9 सितंबर, नेपाली स्वर कोकिला अरुणा लामा के वीं 82वें जन्मदिन पर विशेष……. आज 9 सितंबर नेपाली स्वर कोकिला अरुणा लामा को स्मरण करने का दिन है….. आज से ठीक 82 वर्ष सन् 1945 को आज ही के दिन दार्जलिंग, घूम की सुरम्य वादियों में पिता सूर्य बहादुर लामा और माता सनमाया लामा के घर ... Read more
ई-बाजारः सुविधा से आगे टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नई चुनौती
भारत में खरीदारी की दुनिया जिस तेजी से बदल रही है, वह केवल बाजार की शैली में परिवर्तन नहीं है, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार, रोजगार, तकनीक, छोटे व्यापार और अर्थव्यवस्था की पूरी संरचना में हो रहे बदलाव का संकेत है। हाल में शोध परामर्श संस्था इन्फिसम की रिपोर्ट ने इस परिवर्तन को एक स्पष्ट आंकड़े में ... Read more
विचार: अराजकता करने वालों को विशेष छूट
अफसोस कि यह पहली बार नहीं, जब सरकार या फिर सुप्रीम कोर्ट या फिर दोनों, किसी समूह के अराजक व्यवहार के सामने घुटने टेकते दिखे हों। नागरिकता संशोधन कानून और तीन कृषि कानूनों के विरोध के समय भी यही हुआ था।
हाइब्रिड आतंकवाद से निपटने में आम नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी सुरक्षा एजेंसियों की। अगर कोई डिजिटल मीडिया पर संदिग्ध किस्म का कोई भी वार्तालाप या पोस्ट देखे तो उसे तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए।
हिमालय को बांटकर देखने की नीति बदलनी पड़ेगी
राजनीतिक नक्शे हिमालय को कई देशों में बांटते हैं, लेकिन प्रकृति इन सीमाओं को नहीं मानती। तिब्बत में पैदा हुआ जल-प्रवाह भारत, नेपाल या भूटान में संकट बन सकता है और ऊंचे हिमालय की किसी निर्जन घाटी में टूटी हिमनदीय…
सिर्फ मुफ्त रेवड़ियां काम न आएंगी
जंतर मंतर पर जेन-जी के आंदोलन ने न केवल तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया, बल्कि कई अन्य उपलब्धियां भी इसके नाम रहीं। पहली और सबसे दिलचस्प उपलब्धि तो यही रही कि इसने छात्रों की उस…
जहरीले नशे पर कठोर कार्रवाई जरूरी
नकली और जहरीली शराब से देश में समय-समय पर होने वाली मौतें केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और शासन की एक बड़ी कमजोरी है। हाल के वर्षों में बिहार, तमिलनाडु, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश…
कार्रवाई और कार्यवाही (व्यंग्य)
नकली बुद्धि पूरे विश्व में नैसर्गिक बुद्धि पर कब्ज़ा करती जा रही है। इधर दुनिया और समाज के समझदार, ख़ास लोग आम लोगों को चौकन्ना भी करते जा रहे हैं कि एआई यानी कृत्रिम बुद्धि पर ज्यादा विशवास न करें क्यूंकि यह भी गलती कर सकती है। लेकिन नकली बुद्धि ने यह बिलकुल सही बताया कि समाज या दफ्तर में अनुशासन बनाए रखने लिए नियमों के पालन के लिए, गलत काम करने वालों को सजा देकर अपराध रोकने के लिए और आम जनता की सुरक्षा और व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए कई किस्म की ज़रूरी कार्रवाई की जाती है। मजेदार यह है कि कितनी ही परिस्थितियों में कार्रवाई की जगह सिर्फ कार्यवाही ही की जाती है क्यूंकि कार्रवाई मुश्किल काम होता है और कार्यवाही आसान। हमारे यहां कार्यवाही यानी कामकाज और विचार विमर्श बहुत मेहनत, समयबद्ध तरीके से नियमानुसार और संवैधानिक आधार पर होता है जिसमें गलती की गुंजाईश काफी कम होती है। अगर गलती होती है तो प्राकृतिक कारणों से ही हुआ करती है, जैसे बरसात के मौसम में पानी का, बादलों की गलती से ज्यादा बरसना। कार्यवाही, बेचारी समझे जानी वाली कागजी चीज़ होती है, जिसके बारे ज्यादा बात क्या करनी। इसे भी पढ़ें: जवाब जिनका नहीं (व्यंग्य) कार्रवाई यानी किसी नियम, अनुशासन तोड़ने, गैर कानूनी काम करने वाले के खिलाफ सज़ा देने के लिए सख्त यानी कठोर प्रक्रिया अपनाना। जैसे पुलिस अपराधियों के खिलाफ हमेशा सख्त कदम उठाती है। वह बात अलग है कि कार्रवाई के दौरान जाति व्यवस्था, ऊंच नीच, शिक्षा अशिक्षा, अमीरी गरीबी, सामंती समाज को भी ससम्मान प्रवेश कराया जाता है। यह हमारे समाज के स्वादिष्ट मसाले हैं। पहले कार्रवाई हो चुकी हो या निपटाई जा चुकी हो तब भी दोबारा कार्रवाई की जा सकती है। पिछली कार्रवाई स्वत निरस्त हो जाती है। अगर कागज़ पर लिखे पत्र भेजे जाएं और महत्त्वपूर्ण शब्दों और लाइनों पर पीला, लाल या पसंद का रंग हाई लाइनर के रूप में प्रयोग किया जाए तो कई बातें रंग बदल लेती हैं। कार्रवाई पूरे इत्मीनान से होनी चाहिए नहीं तो पानी के बिना सिर्फ दूध की कॉफ़ी बन जाती है। कार्रवाई करना छोटा नहीं मोटा काम होता है। तस्सलीबख्स बाल काटने जैसा सतर्कता और ज़िम्मेदारी भरा काम होता है। कार्रवाई के दौरान जांच किए गए प्रमाण और कागजात बार बार कई कोनों से देखने परखने जांचने पड़ते हैं तभी तो बाद में पाया जाता है कि जिस गाडी को ट्रक के रूप जांच लिया गया वह वास्तव में टू व्ह्लिर्स या थ्री व्हीलर हो सकता है। कार्रवाई पूरी तरह से व्यवस्थित करनी पड़ती है ताकि कई नाक कटने से बच जाएं क्यूंकि नाक की मरम्मत पर अथाह खर्च होता है। हालांकि राजनीतिक परम्परा के अनुसार कार्रवाई के दौरान आपदा में अवसर भी खोजे जा सकते हैं फिर भी असली नैसर्गिक बुद्धिमत्ता इसी में है कि कार्रवाई को कार्यवाही न समझा जाए। - संतोष उत्सुक
म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते समय 10 आम गलतियों को करने से बचें, तभी मुनाफा होगा
आजकल म्यूचुअल फंड में निवेश करने का प्रचलन बढ़ा है, क्योंकि इसमें थोड़ी सी जोखिम उठाने और सही रणनीति अपनाने से बैंक ब्याज या एफडी से ज्यादा रिटर्न प्राप्त होता है। इसलिए वित्तीय सलाहकार बताते हैं कि म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सबसे बड़ी गलती रिटर्न के पीछे भागना और अपने लक्ष्य, जोखिम तथा समय-अवधि को नजरअंदाज करना है। देखा जाए तो म्यूचुअल फंड के निवेशक 10 आम गलतियाँ कर ही बैठते हैं। प्रायः हर किसी से यह हो जाती हैं। इसलिए इन गलतियों से बचें और एक बेहतर आर्थिक भविष्य प्राप्त करें। म्यूचुअल फंड निवेश की कुछ महत्वपूर्ण गलतियाँ निम्नलिखित हैं:- पहला, सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर फंड चुनना: पिछले 1–3 साल का शानदार प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है। इसलिए फंड की रणनीति, जोखिम और लंबी अवधि का प्रदर्शन भी देखें। अन्यथा भविष्य में आपको हानि उठानी पड़ सकती है। इसे भी पढ़ें: वाहन खरीदा, लेकिन छह महीने तक आरसी ट्रांसफर नहीं कराई तो बदल सकता है मालिकाना हक! सरकार लाई नया मसौदा नियम दूसरा, अपने लक्ष्य के बिना निवेश करना: बच्चों की शिक्षा, लड़की की शादी, घर, रिटायरमेंट या संपत्ति निर्माण—हर लक्ष्य के लिए निवेश की अवधि और फंड का चुनाव अलग हो सकता है। ऐसा करने में ही बुद्धिमानी होगी। इससे उपर्युक्त मौके पर आपके हाथ में सुनिश्चित धन रहेगा। तीसरा, जोखिम क्षमता से ज्यादा इक्विटी में जाना: इक्विटी फंड में बाजार गिरने पर बड़ी गिरावट संभव है। इसलिए जितनी गिरावट आप मानसिक और आर्थिक रूप से सह सकते हैं, उसी के अनुसार निवेश करें। यह बात हमेशा याद रखें कि म्यूचुअल फंड मार्केट में रिस्क तो उठाना ही पड़ता है, ज्यादा गेन प्राप्त करने के लिए। चौथा, बाजार गिरते ही SIP बंद कर देना: बाजार की गिरावट SIP निवेशक के लिए कम कीमत पर यूनिट खरीदने का अवसर भी हो सकती है। लेकिन केवल डर के कारण SIP रोकना लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है। चूंकि यह आपकी छोटी छोटी बचत को बड़ा बना देता है। इसलिए अपेक्षित सावधानी जरूरी है। पांचवां, बहुत सारे फंड खरीद लेना: कुछ निवेशक एक ही बार में बहुत सारे फंड खरीद लेते हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि 10–15 फंड रखने से जरूरी नहीं कि विविधीकरण (diversification) बेहतर हो जाए। कई फंड एक ही कंपनियों या क्षेत्रों में निवेश कर रहे हो सकते हैं। इसलिए इस दिशा में भी अपेक्षित सावधानी जरूरी है। छठा, NFO को सस्ता समझना: ₹10 की NAV वाला नया फंड जरूरी नहीं कि ₹100 NAV वाले पुराने फंड से सस्ता हो। चूंकि NAV अकेले फंड की गुणवत्ता नहीं बताती। इसलिए आंख मुदकर इन्हें खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। सातवां, Expense Ratio और Exit Load को नजरअंदाज करना: निवेश से पहले खर्च, exit load और अन्य लागू शुल्क समझना जरूरी है। तभी छोटी लागत का लंबी अवधि में बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। आठवां, बार-बार फंड बदलना: हर कुछ महीनों में प्रदर्शन देखकर फंड बदलना निवेश को अनुशासनहीन बना सकता है। ऐसे बदलाव का फैसला फंड की मूल रणनीति और आपके लक्ष्य के आधार पर करें। नौवां, कर (Tax) को नजरअंदाज करना: फंड बेचने पर लागू capital-gains tax और holding period को समझे बिना redemption का फैसला न करें। इसके लिए अनुभवी फंड मैनेजर की मदद लें। दस, बिना समझे किसी की सलाह पर निवेश करना: मित्र, रिश्तेदार, सोशल मीडिया या एजेंट की सलाह उपयोगी हो सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय लेने से पहले फंड के दस्तावेज, जोखिम और अपने वित्तीय लक्ष्य जरूर देखें। इससे आपको सटीक निर्णय लेने में मदद मिलेगी। सबसे जरूरी मंत्र: “सही फंड” से ज्यादा महत्वपूर्ण है— सही लक्ष्य, सही अवधि, सही जोखिम, नियमित निवेश और धैर्य। इसके अलावा, अपने निवेश से पहले यह भी तय करें कि आपको कितने समय बाद कितनी मोटी रकम चाहिए। उसी के आधार पर asset allocation और mutual-fund category चुनना अधिक तार्किक होता है। यही सही रणनीति होगी। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे से जोड़कर वायरल हुए AI जनित और असंबंधित वीडियो
बूम ने पाया कि इनमें से दो वीडियो AI की मदद से बनाए गए हैं. वहीं एक वीडियो 2021 में बेंगलुरु में हुई घटना का है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक इमारत गिरने की घटना से संबंधित है.
पीठ की अकड़न से है परेशान तो करे सुप्त मत्स्येंद्रासन
नई दिल्ली, दफ्तर में घंटों बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधि कम होने की वजह से कमर दर्द, कब्ज और पीठ में अकड़न की समस्या आम हो गई हैं। इन शारीरिक समस्याओं से निजात पाने के व्यक्ति योग का सहारा ले सकता है। सही खानपान और योग से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। योग के इन्हीं आसनों में 'सुप्त मत्स्येंद्रासन' बेहद लाभदायक है, जो न सिर्फ कमर दर्द और जकड़न दूर करता है बल्कि मन को शांति मिलती है।
एफिल टॉवर विवाद: बिना जांच बीएपीएस को कटघरे में रखना उचित नहीं
बीएपीएस से जुड़े करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे के दौरान आरोप लगा कि महिला कर्मचारियों को कुछ स्थानों से हटाया गया। उनके साथ प्रतिनिधिमंडल का संपर्क सीमित किया गया। इसके बाद एफिल टॉवर के कर्मचारियों में नाराजगी हुई, विरोध हुआ।
बच्चों के शुरुआती पहले 180 दिन रखे खास ख्याल, पूरे जीवन की नींव
नई दिल्ली, बच्चे के जीवन की शुरुआत जितनी नाजुक होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण भी। जन्म के बाद के शुरुआती दिन और खासकर पहले छह महीने बच्चे के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। यही वह समय होता है जब बच्चे को सही पोषण, प्यार और देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। बच्चे के जीवन के पहले 180 दिन, यानी पहले छह महीने, उसके पूरे जीवन पर गहरा असर डाल सकते हैं।
uttar pradesh election 2027 Mainpuri Kishni Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation- सीट का समीकरण: तीन दशक से ज्यादा समय से किशनी सीट पर सपा का कब्जा; अब तक नहीं जीत पाई BJP; ऐसा यहां का इतिहास
अदालती प्रक्रिया को भीड़ तंत्र से बचाएं: कानून का राज कमजोर हुआ तो न्याय पर टूटेगा भरोसा
अदालती प्रक्रिया को भीड़ तंत्र से बचाएं: कानून का राज कमजोर हुआ तो न्याय पर टूटेगा भरोसा
मुद्दा: हम भी हैं कथा कहने वाले, किस्सों में बसता है हमारा लोकजीवन
मुद्दा: हम भी हैं कथा कहने वाले, किस्सों में बसता है हमारा लोकजीवन
दूसरा पहलू: एच5एन1 से बचाव के लिए अनोखा अभियान
दूसरा पहलू: एच5एन1 से बचाव के लिए अनोखा अभियान
जीवन धारा: घृणा से मुक्ति ही सबसे बड़ी जीत, चोट का जवाब करुणा से देना सीखें
जीवन धारा: घृणा से मुक्ति ही सबसे बड़ी जीत, चोट का जवाब करुणा से देना सीखें
सत्य निकेतन हादसा और भाजपा की संवेदनहीनता
जिम्मेदारी के नाम पर कुछ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है, लेकिन असल दोषियों को बचा ही लिया जाता है। इस बार भी ऐसा ही होता हुआ दिख रहा है।
भागवत कथा: न विदेश ने सुनी न देश ने!
आरएसएस के साथ एक मंच पर आकर, उसकी गतिविधियों को जाने-अनजाने वैधता प्रदान करने को अपनी गलती मानकर, बाकायदा इस पर पछतावा जताया था।
इस सालतृतीया और चतुर्थी तिथि के एक ही तारीख पर पड़ने की वजह से यह विशेष संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं इस साल हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी और दोनों पर्वों की पूजा के लिए शुभ समय क्या रहेगा।
ललित सुरजन की कलम से देशबन्धु के साठ साल-12
'एक समय मैंने नोटिस किया कि पत्रकार गण किसी कार्यक्रम में गए तो उचित सत्कार न होने के कारण बहिष्कार करके लौट आए।
दिल्ली में एक भवन के ढहने से फिर खड़े हुए सवाल
राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना जितनी दुखद है, उतनी ही आंखें खोलने वाली भी। खबरों की मानें, तो यह इमारत 40-50 साल पुरानी थी और तीन मंजिल तक ही इसे बनाने की अनुमति मिली थी…
लापरवाही की भेंट चढ़ गई जिंदगी
दिल्ली में एक बार फिर प्रशासन और नौकरशाही की लापरवाही एक इमारत पर भारी पड़ी और वह ढह गई। सवाल अब ये पूछे जा रहे हैं कि क्या ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे? या, क्या इस हादसे के जिम्मेदार लोगों…
पुलिस को सबका विश्वास जीतना चाहिए
आज मुझे अपने एक वरिष्ठ सहकर्मी की बेतहाशा याद आ रही है, जिनके मुंह से एक वाक्य निहायत भोलेपन से निकल गया था। एक केंद्रीय पुलिस संगठन में प्रतिनियुक्ति पर आए हम कुछ अधिकारी गप्प लड़ा रहे थे कि वहां…
दिल्ली में एक भवन के ढहने से जो क्षति हुई है, उसकी भरपायी असंभव है। यह महज हादसा नहीं, जघन्य श्रेणी का अपराध है। यहां चंद गिरफ्तारियों और कार्रवाइयों से ही न्याय नहीं होगा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उचित ही दिल्ली...
विचार: हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी
देशभर के लगभग 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्र 8.9 करोड़ से अधिक बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक पहुंच रहे हैं, और इन्हें चलाने वाली 25.2 लाख कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं उसी समाज से आती हैं, जिसकी वे सेवा करती हैं।
विचार: फिर सवालों के घेरे में न्यायपालिका
मुख्य न्यायाधीश बनने की वरिष्ठता-परंपरा में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का नाम है। उनके बाद बीवी नागरत्ना का नाम है।
जागरण संपादकीय: जहरीली शराब का कहर
यह ठीक नहीं कि आज जब देश को विकसित बनाने की बातें हो रही हैं, तब वैसी घटनाएं हो रही है, जैसी कई निर्धन देशों में भी नहीं होतीं।
विचार: देश में खर्च किया गया हर रुपया बनता है आय
भारत में उपभोक्ताओं की कमी नहीं है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि उनके द्वारा खर्च किए गए प्रत्येक रुपये से अधिक से अधिक आय का निर्माण हो
विचार: जीवन में सकारात्मक बदलाव है देश की मंजिल
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8% आर्थिक वृद्धि दर एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह देश की पूरी आर्थिक स्थिति का एकमात्र पैमाना नहीं है
साफ शहर आदतों से बनेंगे: समाज केवल कानूनी बंदिशों से नहीं, परस्पर सम्मान की आदतों से सुसंस्कृत बनता है
बदलते मौसम की परीक्षा: क्या व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे सही, नुकसान को कम करने के लिए हम कितने तैयार हैं?
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर अब दुर्गापूजा तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
द बोनस मार्केट अपडेट: अमेरिकी-ईरान तनाव से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 188 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
7 सितंबर 2026 को अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 188 अंक और निफ्टी 63 अंक नीचे आया। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं।
ललित सुरजन की कलम से - हिमाचल प्रदेश- अंतिम: स्वर्ग से वापस धरती पर
'यूरोप के जैकोबियन शिल्प में निर्मित तिमंजिला भवन का एक हिस्सा ही आम जनता के लिए खुला है
प. बंगाल में भाजपा सरकार के शुरुआती सौ दिन में दिखा प्रतिशोध
प.बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के शुरुआती महीनों में दो तरह के नतीजे सामने आए हैं
शिक्षा संस्थान बौद्धिक संबोधनों की जगह : नाराज फूफा जैसे चुटकुलों की नहीं!
आदमी का स्वभाव है नीचे की तरफ आना। ऊपर उठाने में बहुत मेहनत करना पड़ती है
मिथक से मिथक की लड़ाई: ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर दो नजरिये- सत्ता की नजर में ‘गंभीर चुनौती’, विपक्ष के लिए ‘उपहास’ का ‘मुद्दा’

