जमुई यौन उत्पीड़न: अखिलेश यादव के साथ आरोपी नंदन यादव की तस्वीर AI जनरेटेड है
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर फेक है. कई AI डिटेक्शन टूल्स की मदद से परीक्षण करने पर पता चला कि इसे OpenAI के AI टूल की मदद से बनाया गया है.
जमुई छात्रा यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी के दावे से AI जनरेटेड तस्वीर वायरल
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर OpenAI के AI टूल की मदद से बनाई गई है. पुलिस ने मुख्य आरोपी नंदन यादव को मंगलवार को अरेस्ट किया है.
कभी घर-घर पहुंचाता था पिज्जा, आज 3 रेस्टोरेंट का मालिक; मेहनत से बदली इस भारतीय की जिंदगी
कहते हैं कि अगर इंसान में मेहनत करने और आगे बढ़ने का जुनून हो, तो मुश्किल हालात भी उसके रास्ते को ज्यादा लंबे समय तक नहीं रोक सकते।
गिरती जा रही है जन्मदर, फिर भी क्यों कई महिलाएं मां नहीं बनना चाहतीं?
महिलाएं अब समझ रही हैं कि मां बनना जिंदगी का कोई तय पड़ाव नहीं है. वे अपनी शिक्षा व करियर को ज्यादा समय देना चाहती हैं.
बहुमुखी प्रतिभा के धनी 'मुरारीलाल माहेश्वरी'
बहुमुखी प्रतिभा के धनी 'मुरारीलाल माहेश्वरी'amar ujala founder murari lal maheshwari 100th birth anniversary
आयुर्वेद दिवस पर रेखा गुप्ता से लेकर केशव प्रसाद मौर्य तक ने दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली, 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर देशभर के नेताओं ने आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा को नमन करते हुए सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
उम्मीदों के शहर: दुनिया के तेजी से उभर रहे भारतीय शहर, प्रगति अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं
उम्मीदों के शहर: दुनिया के तेजी से उभर रहे भारतीय शहर, प्रगति अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं
जीवन धारा: लंबी दूरी भी छोटे-छोटे कदमों से पूरी होती है, असफलता से न डरने का सूत्र अहम
जीवन धारा: लंबी दूरी भी छोटे-छोटे कदमों से पूरी होती है, असफलता से न डरने का सूत्र अहम
बॉलीवुड में ऐसी कई अभिनेत्रियां हैं, जिन्हें आए दिन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। फैसला कपल मिलकर लेते हैं, लेकिन ट्रोल सिर्फ एक्ट्रेस को किया जाता है।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ अपनी रिलीज के कई दिनों बाद भी बॉक्स ऑफिस में नंबर वन है। वहीं ‘मिर्जापुर द मूवी’ दूसरे नंबर की गद्दी पर बैठी है। मगर कुणाल की फिल्म ‘वाइब’ और करीना कपूर की फिल्म ‘दायरा’ को सिनेमाघरों में दर्शक नहीं मिल रहे।
शांति के लिए भी एक मंत्रालय हो: सुरक्षा केवल मिसाइलों व टैंकों से नहीं, क्या अब साहस दिखाने का समय नहीं?
ललित सुरजन की कलम से कावेरी, कोडग़ू, कॉफी, कोको
'भारत की प्रमुख नदियों में से एक कावेरी नदी का उद्गम मड़िकेरी से लगभग पैंतालीस किलोमीटर दूर तालकावेरी नामक स्थान पर है।
विद्यार्थियों की संख्या सवा तीन करोड़ घटी
सरकारी स्कूलों में भी अध्यापकों की भर्ती में काफी ढील वाला माहौल है और 33 फीसदी कमी की रिपोर्ट इसमें है। मजेदार सूचना यह है कि इस मामले में निजी स्कूलों का रिकार्ड सरकार से बेहतर है। इसके साथ ही यह भी हुआ है कि शहरी प्राइवेट स्कूलों में अध्यापकों को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के मुकाबले बेहतर वेतन मिलता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में शिक्षकों को वेतन कम मिलता है। ह हैरान करने वाली बात है कि देश में शिक्षा की स्थिति को लेकर एक नामी और विश्वसनीय संस्था के सर्वेक्षण से निकले निष्कर्षों पर कोई चर्चा ही नहीं हुई है। खबर के रूप में कहीं-कहीं यह बात आई कि टाटा इंस्टिट्यूट आफ सोशल साइंस की रिपोर्ट 'स्टेट आफ टीचर्स, टीचिंग एंड टीचर एजुकेशन इन इंडिया' नामक रिपोर्ट बताती है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद से बच्चों की संख्या में तीन साल में ही सवा तीन करोड़ की कमी आ गई है। 2021-22 में यह संख्या 26.5 करोड़ थी जो 2024-25 में घटकर 23.2 करोड़ रह गई है। शिक्षा अधिकार कानून और विकलांग लोगों के अधिकार कानून को लागू करने के बाद विद्यार्थियों की संख्या में बहुत तेज वृद्धि हुई थी और इन कानूनों के विरोधी कहते थे कि यह भीड़ सिर्फ खिचड़ी खाने वाले बच्चों की है, पढ़ने वालों की नहीं। 'टीस' के इस सर्वेक्षण में इस तरह की मान्यता से शुरुआत नहीं हुई है लेकिन कुछ आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि पढ़ाई का स्तर गिरा है और बच्चों के सीखने के बुनियादी स्तर में गिरावट आई है। शिक्षा के स्थिति संबंधी दो एनी सर्वेक्षणों से यह नतीजा आया है कि बच्चों के ज्ञान के स्तर के साथ सीखने के क्षमता में भी कमी आई है। इस रिपोर्ट की खूबी यह है कि इसने इस गिरावट को गरीब और फटेहाल बच्चों के स्कूल पहुंचने की परिघटना के रूप में न बताकर शिक्षकों की कमी और उनके भी ज्ञान में कमी से भी जोड़ा है। यह सर्वेक्षण महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, पंजाब, ओडिशा और मिजोरम में किया गया और यह नतीजा निकाला कि स्कूलों में गणित और विज्ञान के अध्यापकों की भारी कमी है। जो लोग गणित पढ़ा भी रहे हैं उनमें से पचास फीसदी ने ही हाई स्कूल में भी गणित की पढ़ाई की थी। अंग्रेजी और भाषा पढ़ाने वालों का हाल इससे बेहतर है लेकिन वह भी 30 फीसदी की कमी वाला इलाका हैं। सरकारी स्कूलों में भी अध्यापकों की भर्ती में काफी ढील वाला माहौल है और 33 फीसदी कमी की रिपोर्ट इसमें है। मजेदार सूचना यह है कि इस मामले में निजी स्कूलों का रिकार्ड सरकार से बेहतर है। इसके साथ ही यह भी हुआ है कि शहरी प्राइवेट स्कूलों में अध्यापकों को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के मुकाबले बेहतर वेतन मिलता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में शिक्षकों को वेतन कम मिलता है । एक अन्य रिपोर्ट भी इसी प्रवृत्ति को बताती है जो पंजाब के स्कूलों को लेकर किया गया था। वहां की मुख्य शिकायत तो यही रही कि सरकारी स्कूल दलित स्कूल में बदल गए हैं क्योंकि बाकी लोग अपने बच्चों को निजी और अंग्रेजी मीडियम स्कूल में भेजते हैं। ऐसे स्कूल अब गांव-गांव में खुल गए हैं। यह बदलाव दिल्ली से लेकर बिहार तक में देखा जा सकता है। पंजाब के सरकारी स्कूलों में अच्छे भवन हैं, शिक्षक हैं, पढ़ने के बाकी साधन हैं लेकिन समाज के ऊंचे तबके के बच्चे नदारद हैं। बिहार के देहात तक में पहुंचे प्राइवेट स्कूल, जो असल में बेरोजगार और पढ़े-लिखे लड़के-लड़कियों के बल पर ही चलते हैं। अब हास्टल और ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कराके दूर-दूर से बच्चे जुटाने लगे हैं। 'टीस' वाली रिपोर्ट में छात्रों की संख्या की गिरावट को रेखांकित करने के साथ यह भी बताया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 लागू होने के बाद से शिक्षकों की संख्या में छह लाख की बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में छात्रों की संख्या गिरना ज्यादा चिंता की बात है। रिपोर्ट में एक दूसरी धनात्मक प्रवृत्ति को भी रेखांकित किया गया है कि अध्यापकों में महिला शिक्षिकाओं का हिस्सा तेजी से बढ़ा है। अब यह 54 फीसदी तक पहुंच गया है जो भारत के लिए गर्व की बात होनी चाहिए पर इसमें एक कमी है। यह वृद्धि शहरी ज्यादा है ग्रामीण कम। शहरी शिक्षकों में महिलाओं का हिस्सा जहां 67 फीसदी है वहीं ग्रामीण इलाकों में उनका अनुपात 47 फीसदी है। यह चिंता की खास बात नहीं है लेकिन रिपोर्ट में एक कक्षा में कई-कई वर्ग के विद्यार्थियों को साथ पढ़ाने का मर्ज बढ़ता गया है। पहले वाले सर्वेक्षण में ऐसा 39 फीसदी कक्षाओं के साथ था तो अब यह बढ़कर लगभग आधा हो गया है। यह अनुपात सरकारी स्कूलों का है। बल्कि कई स्कूल तो अकेले मास्टर के बल पर चल रहे हैं। संसाधनों के प्रबंधन और विद्यार्थियों की कमी के नाम पर उनको बंद करने की परिघटना अलग चिंता का विषय है। बंद होने वाले स्कूलों के मामले में उत्तर प्रदेश चैंपियन है। ऐसा दिल्ली में भी हुआ है जहां लंबे समय तक शासन करने वाले आप के लोग सरकारी स्कूलों पर ज़्यादा ध्यान देने का दावा करते रहे हैं। निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए अनहोम ने जरूर काफ़ी प्रयास किया लेकिन उनके शासन में भी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटी। शिक्षा के अंदर के बदलावों के साथ यह भी अच्छा हुआ है कि शिक्षा का मामला चुनावी मुद्दा बन रहा है। इस बार उत्तर प्रदेश में भी स्कूलों का बड़े पैमाने पर बंद होना मुद्दा बन गया है। दिल्ली में यह लगातार एक मुद्दा रहा है। ऐसे में इस रिपोर्ट के नतीजों पर चर्चा न होना हैरान करता है।
तेल, संप्रभुता, दबाव और भारत: ट्रम्प के रूस पर प्रतिबंध
शिंगटन के रूस-प्रतिबंध कानून पर भारत की चेतावनी महज़ टैरिफ विवाद नहीं है।
नेताओं की नीलामी और लोकतंत्र की मौत
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट कहती है कि लोकतंत्र की मौत अचानक नहीं हुई , उसे धीरे-धीरे मारा गया , पहले उसके वोट खरीदे गए, फिर उसके प्रतिनिधि, पहले उसके सवाल मारे गए, फिर उसकी आवाज . लेकिन उसकी सांस तब भी चल रही थी जब वोट पैसों से मिल रहे थे , उसकी नब्ज तब भी ... Read more
लुटियंस दिल्ली में कचरा प्रबंधन अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कचरा पैदा करने वालों की जेब पर भी सीधा असर पड़ेगा।
विचार: फूहड़ और विषाक्त होती राजनीति
भारतीय राजनीति हर दिन स्तरहीन होती जा रही है और भाषा की मर्यादा की कोई परवाह नहीं कर रहा है।
विचार: संघ की प्राथमिकता में समरसता
संघ प्रमुख का विदेश दौरा भारत की घरेलू राजनीति के लिए भी अहम रहा, क्योंकि उन्होंने धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध एक लक्ष्मण रेखा खींची
विचार: मजबूत होता भारत का सुरक्षा कवच
भारतीय जनसंघ ने अपने 1964 के पटना अधिवेशन में प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की थी कि भारत को परमाणु बम बनाने के सभी प्रयत्न करने चाहिए। “सिद्धांत एवं नीतियां” नामक दस्तावेज में भी परमाणु अस्त्रों का निर्माण करने की बात की थी।
जागरण संपादकीय: सवालों में आईआईटी बॉम्बे
चूंकि आत्महत्या करने वाले छात्र सभी वर्गों के रहे हैं, इसलिए इस नतीजे पर पहुंचना सही नहीं कि इन संस्थानों में वर्ग विशेष के छात्रों के प्रति भेदभाव होता है, लेकिन इतना तो है ही कि छात्रों को तनावमुक्त वातावरण प्रदान करने की आवश्यकता है।
लहलहाते खेतों से ही दूर होगी पर्वतीय गांवों की वीरानगी
पहाड़ में सिमटती खेती और पलायन की दर अब स्थानीय पारिस्थितिकी व सामाजिक जीवन-तंत्र को प्रभावित करने लगी हैं। चिंताजनक है कि पहाड़ में खेती का परंपरागत तंत्र, जिसने सदियों तक हिमालयी गांवों को जीवंत बनाए रखा…
छात्र खुदकुशी पर हो गंभीर संवाद
आईआईटी, मुंबई के बीटेक, द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वोकाडे की आत्महत्या ने एक बार फिर देश के उच्च शिक्षा जगत में गंभीर बहस छेड़ दी है। इससे पहले आईआईटी, दिल्ली और कानपुर में भी दो छात्रों ने खुदकुशी कर ली थी, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं…
आईआईटी बॉम्बे के छात्र आत्महत्या से जुड़े सवाल
आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को हुई मृत्यु ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, परीक्षा में बढ़ती अनैतिकता, शिक्षकों की जवाबदेही, मानसिक स्वास्थ्य और परिसरों में राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे अनेक गंभीर प्रश्न एक साथ खड़े कर दिए हैं। इस ... Read more
ध्यान के लिए सबसे उत्तम है पद्मासन, फायदे और करने का सही तरीका
नई दिल्ली, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और मानसिक अशांति आम समस्या बन गई है। ऐसे में योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को शांत करने में भी मदद करता है। पद्मासन योग का एक प्रमुख आसन माना जाता है, जिसे ध्यान और मानसिक एकाग्रता के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।
डेंगू और सांस की बीमारियों की वजह से अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ : चेन्नई
चेन्नई, चेन्नई के प्राइवेट अस्पतालों में फ्लू, सांस से जुड़े संक्रमण और डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके कारण ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं, वार्ड भरे हुए हैं और भर्ती के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
मेरी पहली यात्रा: अनुभव के अंतर्जगत् में स्वप्न और संसार के पथिक का रोजनामचा
जब मैं अपनी जन्मभूमि से विदा लेकर निकला, तब रास्ते में मुझे मेरे विद्यालय के अध्यापक दिखाई पड़े। उनसे सीधे बातचीत तो नहीं हुई, परंतु मेरे अंदर का शिष्य-भाव जाग उठा और मैंने मन ही मन उन सभी को प्रणाम किया और आगे बढ़ता रहा।
ललित सुरजन की कलम से सुई की नोंक, हल की मूठ
'वर्धा में सबसे अच्छी बात यह हुई कि दो दिवसीय कार्यक्रम का आरंभ नृतत्वशास्त्री प्रोफेसर नदीम हसनैन के बीज वक्तव्य के साथ हुआ।
भाजपा की दुविधा यह है कि वह भारतीयों की प्रचलित खानपान की आदतों और अपने शाकाहार लादने के एजेंडे के बीच संतुलन कैसे कायम करे।
गौरतलब है कि रीइमेजिनिंग स्किलिंग फार विकसित भारत एट 2047 की उक्त रिपोर्ट, राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 78वें चक्र के यानी 2021 के आंकड़ों पर आधारित है।
आज का राशिफल 22 सितंबर: मकर और कुंभ राशि वालों को मिलेगा किस्मत का साथ, आर्थिक स्थिति होगी मजबूत
22 सितंबर 2026 का आज का राशिफल जानिए। आज ग्रहों की स्थिति आपके करियर, धन, प्रेम, परिवार और सेहत से जुड़े मामलों पर क्या असर डाल सकती है? पढ़ें आज का राशिफल और जानें अपने दिन की खास भविष्यवाणी।
आत्महत्या और सवाल: 22 वर्षीय बीटेक के छात्र की खबर क्षुब्ध करने वाली, जांच के नतीजों का इंतजार भी अहम
जीवन धारा: जीवन खुद को समझने की यात्रा भी है, अपनी कमियों को पहचानना ही सार्थक सूत्र
जीवन धारा: जीवन खुद को समझने की यात्रा भी है,अपनी कमियों को पहचानना ही सार्थक सूत्र
पिघलते ग्लेशियर और खोखले होते पहाड़ः चेतावनी सुने
हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत-शृंखला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, जल, कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण का आधार है। लेकिन जलवायु परिवर्तन और पहाड़ों की वहन-क्षमता की अनदेखी करते हुए हो रहे निर्माण ने हिमालयी क्षेत्र को एक ऐसे संकटभरे दौर में पहुंचा दिया है, जहां प्राकृतिक आपदाएं अब केवल अचानक आने वाली घटनाएं ... Read more
मुद्दा: साक्षरता बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी, सिर्फ सरकार के भरोसे बैठना सही नहीं होगा
मुद्दा: साक्षरता बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी, सिर्फ सरकार के भरोसे बैठना सही नहीं होगा
मोदी जी का पूंजीवाद का विश्लेषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली आर्थिक नीतियों को अक्सर ‘मोदीनॉमिक्स’ (Modinomics) या एक विशेष प्रकार के ‘राज्य-निर्देशित पूंजीवाद’ (State-Driven Capitalism) के रूप में देखा जाता है। मोदी जी का पूंजीवाद के आर्थिक मॉडल का उद्देश्य बाजार सुधारों, निजी निवेश और मजबूत सरकारी नियंत्रण के समन्वय से आर्थिक विकास को गति देना है।अर्थशास्त्रियों और आलोचकों ... Read more
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को याद करना जरूरी
दिल्ली में जारी एसआईआर में खामियां और चुनाव आयोग की नाकामियां खुलकर सामने आ ही रही हैं।
विचार: भारत के लिए मुसीबत बनते ट्रंप
अमेरिका की ओर से भारत के लिए बढ़ती आर्थिक और व्यापारिक चुनौतियों के बीच भारत को अमेरिका के साथ आगे बढ़ रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति अत्यंत सतर्क रहना होगा।
विचार: पुलिस सुधारों का अंतहीन इंतजार
हर समृद्ध देश को एक अच्छी शांति व्यवस्था की नींव चाहिए और यह केवल एक अच्छी पुलिस दे सकती है।
बढ़ती बेरोजगारी से बढ़ रही चिंता
मीडिया खबरों के मुताबिक, भारत में रोजगार की स्थिति बहुत अच्छी नहीं दिख रही। केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय के आवधिक श्रम-बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के हवाले से छपी खबर में बताया गया है कि बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल…
सत्याग्रह को कितना समझ रहे हमारे आंदोलनकारी
हरेक प्रतिकार जरूरी नहीं कि सत्याग्रह हो। प्रतिकार, शांतिपूर्ण प्रतिकार और अहिंसक प्रतिकार के बीच भेद है। हाल में हुए युवा आंदोलन को सत्याग्रह में खपाने की न तो जरूरत है और न ही इसका औचित्य है…
कोई नहीं चाहता पुलिस का चरित्र बदले
फिर बैतलवा डाल पर। बैताल कथा की यह तान हर बार पुलिस सुधारों पर ही टूटती है। हाल के दिनों में सत्ता द्वारा पुलिस के दुरुपयोग के खिलाफ काफी कुछ लिखा-कहा गया और कहीं-न-कहीं यह धारणा मजबूत होने लगी थी…
बिहार सरकार ने बेटियों और महिलाओं की उच्च शिक्षा, स्वरोजगार और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अगस्त 2026 में बेटियों और बहनों के लिए शिक्षा, उद्यमिता और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की। इनमें PhD करने वाली छात्राओं को हर महीने 10,000 रुपये की सहायता और स्टार्टअप शुरू करने के लिए 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद शामिल है। इन पहलों में मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप, बिहार की बेटी स्टार्टअप योजना और पुलिस दीदी अभया ब्रिगेड शामिल हैं। साथ में, वे उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना, महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना और शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास सुरक्षा में सुधार करना चाहते हैं। आईये इन योजनाओं के बारे में जानते हैं: इसे भी पढ़ें: क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना? जानिए आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और दस्तावेज से जुड़ी जरूरी बातें 1. मुख्यमंत्री बालिका PhD फेलोशिप उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री बालिका PhD फेलोशिप शुरू की है। योजना की मुख्य बातें: - लगभग 1,000 योग्य छात्राओं को योजना का लाभ देने का प्रावधान। - चयनित छात्राओं को 10,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता। - यह सहायता चार साल तक दिए जाने का प्रावधान है। - योजना का उद्देश्य छात्राओं को PhD और शोध कार्य के दौरान आर्थिक मदद देना है। सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता मिलने से अधिक छात्राएं उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगी। 2. बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना जो बेटियां अपना कारोबार या स्टार्टअप शुरू करना चाहती हैं, उनके लिए सरकार ने बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना शुरू की है। इस योजना के तहत: - महिला उद्यमियों को अपने स्टार्टअप और नवाचार के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। - 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद का प्रावधान है। - सहायता का उद्देश्य नए उद्यम और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। - बेटियों को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने पर जोर दिया गया है। हालांकि, योजना के तहत आवेदन, चयन और अन्य विस्तृत पात्रता शर्तों की जानकारी संबंधित विभाग के आधिकारिक पोर्टल से जांचना जरूरी है। 3. बेटियों की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी सरकार ने छात्राओं की सुरक्षा के लिए भी नई पहल की है। इसके तहत पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) के लिए 4,700 स्कूटर और मोटरसाइकिलों का लोकार्पण और फ्लैग-ऑफ किया गया। इस पहल का उद्देश्य: - स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को सुरक्षित माहौल देना। - महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को मजबूत करना। - जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता को अधिक प्रभावी बनाना। बेटियों को कैसे मिलेगा इन योजनाओं का लाभ? इन नई योजनाओं में लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा तय पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। आवेदन से पहले इन बातों की जांच करें: - योजना की आधिकारिक अधिसूचना। - उम्र और शैक्षणिक योग्यता। - बिहार का निवास संबंधी नियम। - जरूरी दस्तावेज। - आवेदन की प्रक्रिया और अंतिम तिथि। - चयन की शर्तें। - पुरानी योजनाओं से भी मिल रहा फायदा बिहार में महिलाओं के लिए पहले से भी कई योजनाएं संचालित हैं, जिनका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और रोजगार को बढ़ावा देना है। नई PhD फेलोशिप और बेटी स्टार्टअप चैलेंज जैसी पहल से अब बेटियों को उच्च शिक्षा से लेकर अपना कारोबार शुरू करने तक अतिरिक्त मदद मिलने की उम्मीद है। बिहार सरकार की नई योजनाएं बेटियों को पढ़ाई और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। PhD करने वाली योग्य छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10,000 रुपये की सहायता दी जाएगी, जबकि बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना के तहत महिला उद्यमियों को 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। हालांकि, किसी भी योजना के लिए आवेदन करने से पहले उसकी विस्तृत पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी बिहार सरकार के संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से जरूर जांच लें। - जे. पी. शुक्ला
क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना? जानिए आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और दस्तावेज से जुड़ी जरूरी बातें
दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर महिलाओं के बीच लंबे समय से चर्चा थी। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार के ताजा ऐलान के अनुसार, योजना की पात्र लाभार्थियों को 1 सितंबर 2026 से 2,500 रुपये की मासिक सहायता राशि मिलना शुरू हो गई है। ताजा जानकारी के अनुसार: - पात्र महिलाओं को स्वीकृति पत्र अगस्त के अंतिम सप्ताह में दिए गए। - 1 सितंबर 2026 से पहली किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। - पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। - राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है। इसे भी पढ़ें: म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते समय 10 आम गलतियों को करने से बचें, तभी मुनाफा होगा क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना? दिल्ली लक्ष्मी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की पात्र महिलाओं को नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि इस योजना से महिलाओं को घरेलू खर्च और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। योजना के तहत: - पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता। - लाभार्थियों को स्वीकृति और सत्यापन प्रक्रिया के बाद योजना में शामिल किया जाता है। - सहायता राशि बैंक खाते के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। डिफ़ॉल्ट रूप से, ₹2,500 में से ₹1,500 बेनिफिशियरी महिला के रिकरिंग डिपॉजिट (RD) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अकाउंट में जमा किए जाएंगे। बाकी ₹1,000 बेनिफिशियरी के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) वॉलेट से जुड़े बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जाएंगे। RD या FD में जमा की गई रकम पर 31 जुलाई, 2029 तक लॉक-इन पीरियड लागू होगा। आवेदन और लाभार्थियों की स्थिति योजना शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसके लिए पंजीकरण कराया था। रिपोर्टों के अनुसार, लाखों महिलाओं ने योजना के लिए आवेदन किया और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद पात्र लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिए गए। खाते में पैसा नहीं आया तो क्या करें? यदि आप योजना की पात्र लाभार्थी हैं और आपके खाते में राशि नहीं आई है तो इन बातों की जांच करें: - आवेदन का स्टेटस जांचें। - बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं, इसकी पुष्टि करें। - आवेदन में दिए गए दस्तावेज पूरे और सही हैं या नहीं। - रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए SMS की जांच करें। - संबंधित विभाग या आधिकारिक हेल्पलाइन से संपर्क करें। रिपोर्टों के अनुसार, गलत या अधूरी जानकारी वाले आवेदनों में सुधार या सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है। क्या सभी महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ? नहीं। योजना का लाभ केवल उन महिलाओं को मिलेगा जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं और जिनका आवेदन सत्यापन के बाद मंजूर किया गया है। केवल आवेदन कर देना योजना का लाभ मिलने की गारंटी नहीं है। इन बातों का रखें ध्यान - केवल आधिकारिक पोर्टल पर ही आवेदन और स्टेटस जांचें। - किसी एजेंट को अनावश्यक पैसे न दें। - बैंक खाते और मोबाइल नंबर की जानकारी अपडेट रखें। - स्वीकृति पत्र मिलने के बाद भी बैंक खाते की स्थिति जांचते रहें। - योजना से जुड़ी नई जानकारी के लिए केवल दिल्ली सरकार के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें। दिल्ली लक्ष्मी योजना की पहली किस्त को लेकर अब इंतजार समाप्त हो चुका है। सरकार के बाद के ऐलान के अनुसार 1 सितंबर 2026 से पात्र महिलाओं को 2,500 रुपये की मासिक सहायता राशि मिलना शुरू हुई। हालांकि, प्रत्येक आवेदक को लाभ तभी मिलेगा जब उसका आवेदन और पात्रता सरकार द्वारा सत्यापित और स्वीकृत हो। इसलिए जिन महिलाओं ने आवेदन किया है, उन्हें अपना स्टेटस और बैंक विवरण जरूर जांचना चाहिए। - जे. पी. शुक्ला
अपनी सहायता आप भली (बाल कहानी)
प्रतिभा गांव के सरकारी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती थी। पापा प्राइवेट नौकरी करते थे, उनकी आय ज़्यादा नहीं थी। वे कोशिश कर रहे थे कि उन्हें शहर में कहीं अच्छी नौकरी मिल जाए ताकि वे अपना परिवार भी वहीं रखें और प्रतिभा और उसके बड़े भाई आभास की पढ़ाई अच्छे स्कूल में हो सके। बेहतर नौकरी के लिए वे प्राइवेट स्तर पर उच्च शिक्षा भी ग्रहण कर रहे थे। गांव के स्कूल में पढ़ाई लिखाई के साथ, खेल कूद व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सामान्य स्तर के होते थे। प्रतिभा को बचपन से ही नृत्य का शौक था। उसके कानों में जब भी किसी नृत्य संगीत की आवाज़ पड़ती थी तो वह सर्दी के मौसम में भी रजाई से अपना नन्हा हाथ बाहर निकाल कर हिलाने लगती थी। बड़ी होते होते उसे डांस करना और अच्छा लगने लगा। स्कूल में अध्यापिकाएं सीडी लगाकर नृत्य करवाती थी जिनमें फिल्मी गानों पर ज़्यादा होते थे। प्रतिभा की मम्मी चाहती थी कि उनकी बेटी ऐसा डांस सीखे जो भारतीय संस्कृति आधारित हो ताकि उसे नृत्य का मूल आधार पता चले। इसे भी पढ़ें: कार्रवाई और कार्यवाही (व्यंग्य) उसकी मम्मी ने बताया था कि हमारे देश में कई तरह के नृत्य हैं। उसे लोक नृत्य भी भाता था लेकिन उनके संपर्क में कोई सिखाने वाला नहीं था। मम्मी ने उसे समझाया था कि जब भी कहीं कोई प्रस्तुति अच्छी मानी जाएगी वह फूहड़ फिल्मी नृत्य की न होकर भारतीय संस्कृति आधारित नृत्य की ही मानी जाएगी। फिल्मी गीतों पर की गई उछल कूद को नृत्य नहीं कहते। पुरानी फिल्मों के कुछ नृत्य गीत अवश्य बढ़िया हैं। उनसे भी हम सीख भी सकते हैं। प्रतिभा को लगने लगा था कि वह गाँव में रहते हुए कुछ अच्छा नहीं सीख सकती। उसके मामा की लड़की शहर में रहती थी जो उसे शहर के स्कूल में हो रहे कार्यक्रमों के बारे बताती रहती थी। एक शाम प्रतिभा ने टीवी पर अपनी उम्र की बच्ची को कथक करते देखा तो उसको बुरा लगा और रोना आ गया। वह खूब रोई और रोते रोते सो गई। उसे पता था कि उसके पापा डांस सिखाने उसे शहर नहीं भेज सकते। उसे एक सपना आया जिसमें उसने अपने अध्यापक से सुनी एकलव्य की कहानी को घटते देखा। वे गुरु की मूर्ति के सामने धनुर्विद्या सीख रहे हैं। अचानक उसकी आँख खुल गई, मुंह धोते धोते उसे लगा वह खुद भी तो प्रयास कर सकती है। उसने अपनी मम्मी को सपना सुनाया और पूछा, ‘क्या मैं खुद कथक डांस सीख सकती हूँ’। मम्मी ने कहा बिलकुल सीख सकती हो। इसके लिए मैं तुम्हें ऐसे वीडियोज़ दिखा सकती हूँ जिसमें भारतीय नृत्य शैलियों पर आधारित डांस हों, कथक भी हो। कभी कभी टीवी में भी ऐसे कार्यक्रम आते हैं। उन्हें देखकर तुम्हें अभ्यास करना चाहिए। प्रतिभा ने मम्मी की प्रेरणा से अपनी सहायता आप करनी शुरू कर दी। अभ्यास और लगन से उसने नृत्य की स्टेपिंग अच्छे से सीख ली। एक दिन आया पड़ोस के शहर में आयोजित अनेक स्कूलों की प्रतियोगिता में उनके स्कूल को भी बुलाया गया । स्कूल की तरफ से प्रतिभा को जाने का मौका मिला। उसने एक पुराने फिल्मी नृत्यगीत जोकि शास्त्रीय संगीत पर आधारित था, पर मम्मी के कहे अनुसार खूब अभ्यास किया । प्रतियोगिता में काफी विद्यार्थी आए हुए थे। अधिकारीगण व अध्यापक भी थे। खूब बड़ा पंडाल लगा हुआ था। प्रतिभा ने बेहद सधे हुए स्टेप्स के साथ नृत्य किया तो सब वाह वाह कर उठे। उसका नृत्यगीत का चुनाव सबसे अलग था। उसे अपने आयुवर्ग में प्रथम पुरस्कार मिला। बाद में चाय पीते हुए सभी ने उससे पूछा, गाँव में रहते हुए भी किससे सीखा इतना अच्छा डांस। प्रतिभा ने खुश होकर कहा, मम्मी ने कहा अपने आप सीखो, सो देख देखकर, मम्मी की मदद से सीख लिया। - संतोष उत्सुक
विचार: झूठे नैरेटिव की करारी हार
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में एबीवीपी की ऐतिहासिक जीत ने यह सिद्ध किया है कि भारत का युवा आज केंद्र की भाजपा सरकार, राष्ट्रवादी विचार और 'नेशन फर्स्ट' के संकल्प के साथ खड़ा है।
विचार: नियमन के दायरे में आए एआई
एआई कंपनियों के प्रमुख एआई के खतरों को लेकर नियामक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जबकि वे स्वयं इसके विकास में सबसे आगे हैं।
द बोनस मार्केट अपडेट: सेंसेक्स 400 अंक से अधिक उछला, निफ्टी 23,350 के पार पहुंचने में सफल
भारतीय शेयर बाजार में तेजी जारी है। सेंसेक्स 400 अंक से अधिक उछला और निफ्टी 23,350 के पार पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और सऊदी पाइपलाइन मरम्मत से बाजार को राहत मिली है।
दूसरा पहलू: दांतों के निशानों ने खोले प्राचीन मानव के राज, आधुनिक युग जैसे पहले भी थे मादक पदार्थों के दीवाने
जीवन धारा: अपना ही जीवन जिएं, भीड़ का नहीं; अपना रास्ता खुद बनाने का सूत्र सार्थक
जीवन धारा: अपना ही जीवन जिएं, भीड़ का नहीं;अपना रास्ता खुद बनाने का सूत्र सार्थक
चीन के बांध और तबाही की चिंताएं:जब हिमालयी आपदाएं ब्रह्मपुत्र नदी परपरियोजनाओं से टकराएंगी, तो क्या होगा?
स्वतंत्रता के साथ जवाबदेही भी हो: न्यायपालिका लोकतंत्र का प्रहरी, सर्वोच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी
आंकड़े बोलते हैं: पहली बार एनएसओ ने युवाओं की जिला स्तरीय तस्वीर दिखाई, ये जमीनी हकीकत को समझने का अवसर
हनीट्रैप में फंसकर सीमा पार संवेदनशील जानकारियां भेजने के आरोप में गिरफ्तार कठुआ के ट्रक चालक अमन कुमार से पूछताछ में बड़े खुलासे हुए हैं।
जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष की शुरुआत कश्मीर के आखिरी गांव खाजिमियार (बारामुला) से शुरू होगी।
दिल्ली के कंक्रीट के जंगल के बीच कुछ ऐसे प्राकृतिक ठिकाने भी हैं, जहां करीब तीन करोड़ साल पुरानी कीट प्रजातियों की दुनिया आज भी आबाद है।
डीटीसी बस चालकों की हड़ताल रविवार को छठे दिन भी जारी रही।
राहुल मेहनत कर रहे हैं और कांग्रेसी उस पर पानी फेर रहे
राहुल के छात्रों के गूंज कार्यक्रम की अब चौतरफा चर्चा है। छात्रों से कोई पंगा नहीं ले सकता।
युद्ध की राख से शांति का नया संसार कैसे बने?
अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस-21 सितम्बर, 2026 21 सितम्बर का अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस इस वर्ष ऐसे समय में आया है, जब दुनिया को शांति की सबसे अधिक जरूरत है। रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच चुका है, पश्चिम एशिया में इजराइल-गाजा संघर्ष की मानवीय त्रासदी समाप्त नहीं हुई है और 2026 में अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच भीषण सैन्य ... Read more
ललित सुरजन की कलम से संशयग्रस्त भारत और ओलंपिक
'क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें खिलाडिय़ों के साथ मैदान को भी विज्ञापनों से पाटा जा सकता है।
जन्मशताब्दी के अवसर पर युवाओं ने अखंड गायत्री साधना की
नई दिल्ली। मुखर्जी नगर स्थित युवा चेतना केंद्र में रविवार को गायत्री मंत्र की अखंड गूंज से साधनामय रहा…
दक्षिण कोरियाई सेना का दावा- 'उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी में दागा अज्ञात प्रोजेक्टाइल'
सोल, दक्षिण कोरिया की सेना ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी (जापान सागर) की ओर अज्ञात प्रोजेक्टाइल दागा है। ज्यादा दिन नहीं बीते जब प्योंगयांग ने वॉनसन इलाके से ईस्ट सी की तरफ कई मिसाइलें दागी थीं।
हाई ब्लड प्रेशर है तो करे आसान आदतों से कंट्रोल
नई दिल्ली, हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) ऐसी समस्या है, जो कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के लंबे समय तक शरीर में बनी रह सकती है। व्यक्ति रोजमर्रा का काम सामान्य तरीके से करता रहता है और उसे महसूस भी नहीं होता कि बढ़ा हुआ रक्तचाप धीरे-धीरे उसके दिल, रक्त वाहिकाओं और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
नंदीग्राम: जिसने ममता को पहचान दी, उसी ने आईना दिखाया
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की एक विधानसभा सीट नहीं, ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है। 2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और 2011 में वाम मोर्चे के 34 साल पुराने शासन के अंत की पृष्ठभूमि तैयार करने में भूमिका निभाई।
नागरिक स्वतंत्रता की जरूरत: लोकतंत्र में राज्य-सत्ता से सवाल पूछना अहम, सजग और स्वतंत्र आवाजों की जरूरत और बढ़ी
जानना जरूरी है:कैसे हुआ यमलार्जुन वृक्षों का उद्धार? नारद जी के शाप और श्रीकृष्ण की लीला से जुड़ी है पौराणिक कथा
हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां जेमिनी ने टेस्टिंग के दौरान तीन वास्तविक कंपनियों के सिस्टम में बिना अनुमति पहुंच बना ली। इस घटना ने एआई की सुरक्षा और उसकी बढ़ती स्वायत्तता को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
कुछ अलग: ज्वालामुखी के क्रेटर में बसी 170 लोगों की दुनिया, समुद्र के बीच जापान का आगाशिमा क्यों है इतना अनोखा?
जब बेहतर बनना ही बीमारी बन जाए: लुक्स से डाइट तक ‘मैक्सिंग’ बढ़ा रहा तनाव, खुद को रोकना भी जरूरी
जब बेहतर बनना ही बीमारी बन जाए: लुक्स से डाइट तक ‘मैक्सिंग’ बढ़ा रहा तनाव, खुद को रोकना भी जरूरी
हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को राज्य सरकार ने खत्म कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर 17 सितंबर को आईआईएम जम्मू में आयोजित दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम में अनुपस्थित छात्रों से जवाब तलब किया गया है।
विचार: राष्ट्र की राह रोकती न्यायिक शिथिलता
देश की अदालतों में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्यायिक शिथिलता सामाजिक कुंठा और आर्थिक प्रगति में बाधा बन रही है
मोदी सरकार ने 2022 में पहले रोजगार मेले की शुरुआत करते हुए 2023 के अंत तक दस लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य तय किया था और अभी तक 12.75 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।
बदलती और बदहाल होती विश्व-व्यवस्था ने बेजारी और क्षेत्रीय संघर्षों को विस्तार दे दिया है। इस समय दुनिया को पचास से अधिक सशस्त्र संघर्ष गरमा रहे हैं। इनमें से कई तो युद्ध की श्रेणी में आते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस से ऐन पहले दुखी मन से आपको प्लेटो का कथन याद दिलाना चाहता हूं…
सुरेंद्र कोली जेल से तो छूटा, अपने नाम से नहीं
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के मकान के पीछे नाले के पास मानव अवशेष मिलने से देश स्तब्ध रह गया।
आज का राशिफल: इन 3 राशि के लोगों का चमकेगा भाग्य, पूरे होंगे सभी अटके काम
19 सितंबर 2026 का आज का राशिफल:करियर, व्यापार, धन, प्रेम, परिवार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आज ग्रहों की स्थिति का क्या प्रभाव रहेगा? किस राशि को मिल सकता है कोई नया अवसर और किसे आज सावधानी बरतने की जरूरत है?
जीवन धारा: सोच ही विज्ञान की नींव है, शक्ति का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल बेहद खतरनाक
जीवन धारा: सोच ही विज्ञान की नींव है, शक्ति का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल बेहदखतरनाक
टैरिफ और हम: भारत बाहरी दबावों के आगे झुकने वाला नहीं, अब इसी स्वतंत्र निर्णय क्षमता की परीक्षा
टैरिफ और हम: भारतबाहरी दबावों के आगे झुकने वाला नहीं,अब इसीस्वतंत्र निर्णय क्षमता की परीक्षा
विमान में तकनीकी खराबी बड़ा मुद्दा: हवाई यात्रियों के भरोसे का सवाल,उड्डयन क्षेत्र में बड़े बदलाव जरूरी
एआई तेजी से भारत के आईटी सेक्टर के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को बदल रहा है। कम कर्मचारियों में ज्यादा काम की क्षमता ने नौकरियों, हायरिंग और आने वाले समय की आईटी इंडस्ट्री को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ब्रिक्स सम्मेलन : भारत-चीन रिश्तों की अब असली परीक्षा
चीन के साथ रिश्तों में नरमी आने से अमेरिका, यूरोप, जापान या क्वाड के साथ भारत के संबंधों पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
गांधी की नजर में अवैध है, यहूदियों का इजरायल
नाजी जर्मनी में यहूदियों के उत्पीड़न से दुखी होकर महात्मा गांधी ने उनके प्रति गहरी मानवीय सहानुभूति व्यक्त की थी।
यह खेती-बाड़ी और कृ षि परंपरा से जुड़ा है। विशेषकर, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में यह त्योहार उत्साह से मनाया जाता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव का करीब एक माह से चला आ रहा चुनावी संग्राम शुक्रवार को मतदान के साथ खत्म हो गया।
यूसीसी लागू करने का यह सही समय नहीं
यूसीसी पर बहस आज की नहीं है। आजादी के समय से ही इस पर चर्चा चल रही है। संविधान सभा में जब इस पर बहस हुई थी, तब मतभेद भी सामने आए थे। कुछ उलझनें और अस्पष्टता भी थीं। कुछ सदस्यों का मानना था…
समान नागरिक संहिता से सबको मिले न्याय
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-एनडीए शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की बात कही है। चूंकि उत्तराखंड में 27 जनवरी, 2025 को इसे लागू किया जा चुका…
खतरनाक होगा अंतरिक्ष में हथियार रखना
अमेरिका ने अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती शुरू कर दी है। अमेरिकी वायु सेना के सचिव ट्रॉय मींक ने यह खुलेआम स्वीकार किया है। उनकी इस स्वीकारोक्ति के बाद अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है। सच यही है कि…
देश की एक कद्दावर क्षत्रप ममता बनर्जी द्वारा गठित पार्टी तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान और भविष्य पर बड़े प्रश्नचिह्न लग गए हैं। तृणमूल कांग्रेस और उसके चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर एक तरह से रोक लग गई है…
आज के सफल कहे जाने वाले अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल
*जब बच्चों की जिंदगी में शनिवार-रविवार भी उसकी अपनी जिंदगी के लिए हों… तब बूढ़े माता-पिता अपने रविवार का क्या करें?* राज कुमार गुप्त कोलकाता। जब हमारे बच्चों की एडमिशन देश के 5 स्टार, टॉप टेन जैसे नामी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में हो जाती है तो उस समय हम बड़े उत्साह और गर्व से परिचितों ... Read more
अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं
विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ... Read more
विचार: फिर उठा वैवाहिक दुष्कर्म का प्रश्न
हमें यह समझना होगा कि हर सामाजिक समस्या का समाधान कानून के माध्यम से तलाशना उचित नहीं है

