विचार: रोजगारपरक शिक्षा का अभाव
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में रोजगारपरक शिक्षा की कमी है, जिससे 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में हैं और अधिकांश स्नातकों को योग्यतानुसार नौकरी नहीं मिल रही
राहुल गांधी ने संविधान और आरएसएस के बीच लड़ाई का आरोप लगाते हुए अनुसूचित जातियों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया।
एक दिन जंतर मंतर पर साहित्यिक गोष्ठी हुई, जिसका विषय था- ‘आज साहित्य खिड़की में ही क्यों रहता है, खिड़की साहित्य में क्यों नहीं रहती?’ यानी जब सबका साथ, सबका विकास हो चुका है और सबको आवास मिल चुका है…
तुम्हारे महल-चौबारे यहीं रह जाएंगे सारे
हवाओं में फैली खुशबू बताने लगी थी कि आजादी के फूल खिलने वाले हैं, पर अफसोस, उनकी डालियों में कांटे भी थे। उनकी चुभन ही थी, जो एक कवि की कविता में फूट रही थी- जलता है पंजाब हमारा प्यारा, भगत सिंह की आंखों का…
काश! हर महकमे को एक तुकाराम मिल जाएं
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के बारे में कहा जाता है कि हमने जो शासन-प्रणाली अपनाई है, उसमें असली ‘राजा’ वही हैं। यह जन-धारणा उन्हें संविधान से मिले निर्णायक अधिकारों के कारण बनी है…
जितनी तेजी से ‘गिग वर्कर्स’ की तादाद बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उनकी दिक्कतें भी पनप रही हैं। समय आ गया है कि सरकार यूरोपीय यूनियन की तरह यहां भी गिग वर्कर्स की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए कड़े नियम…
सोनिया गांधी की किताब: सत्ता, शब्द और ‘किताबी विद्रोह’ का इतिहास
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं।
देव की डायरी: आप भारतीय रेल के यात्री हैं, कृपया अपनी नाक सुरक्षित रखें!
हमारे यहां नाक सिर्फ चेहरे पर नहीं होती, इज्जत और व्यवस्था में भी होती है। इसलिए जब फर्स्ट एसी में चूहा 78 वर्षीय यात्री की नाक कुतर गया तो मामला केवल एक यात्री के घायल होने का नहीं रहा, रेलवे की नाक का भी हो गया।
कैदी जब आजादी का अर्थ लिखता है: रिहाई के बाद बंदियों का पुनर्वास समाज की जवाबदेही; अपराधमुक्त बन सकेगा समाज
पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दौरान इमरान खान के बेटों के स्काई स्पोर्ट्स इंटरव्यू को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
दूसरा पहलू: एआई का इस्तेमाल करें, लेकिन इन्सान बने रहें
दूसरा पहलू: एआई का इस्तेमाल करें, लेकिन इन्सान बने रहें
भाषा राजनीतिक हथियारों में से एक: राजनीति में कुछ भी यों ही नहीं कहा जाता, दिमागी नक्सली कहने का मतलब ‘गैर-भारतीय’ बौद्धिक वर्ग से
जीवन धारा: तकनीक के साथ नैतिक विवेक भी जरूरी है
जीवन धारा: तकनीक के साथ नैतिक विवेक भी जरूरी है
यूजीसी-नेट का रिजल्ट जारी: 4000 से अधिक उम्मीदवार JRF के लिए पात्र, 84 विषयों के परीक्षा परिणाम जारी
यूजीसी-नेट का रिजल्ट जारी: 4000 से अधिक उम्मीदवार JRF के लिए पात्र, 84 विषयों के परीक्षा परिणाम जारी
टोक्यो ने चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया को पीछे छोड़ते हुए भारत में भारी निवेश किया
जापानी निवेशक कम लागत वाले विनिर्माण और निर्यात के बजाय अपने निवेश के लिए घरेलू मांग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
बाढ़ को रोकने की अच्छी परंपराएं
हमारी बरसों पुरानी परंपराओं में ही आज की बाढ़ जैसी समस्या के समाधान के सूत्र छिपे हैं।
खेलों की उड़ान, विकसित भारत की पहचान
राष्ट्रीय खेल दिवस-29 अगस्त, 2026 पर राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक महान खिलाड़ी की स्मृति को नमन करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की खेल-चेतना को जगाने एवं खेल आयामों को नये शिखर देने का दिन है। 29 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिवस हॉकी के महानायक मेजर ध्यानचंद की जयंती से जुड़ा है। ... Read more
दिल्ली के 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को अब अपने आसपास ही मेलजोल, मनोरंजन और स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए बेहतर जगह मिल सकेगी। दिल्ली सरकार ‘वयो आनंद’ योजना शुरू करने जा रही है।
झारखंड: सीआईडी ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास करने वाले चार लोगों को पकड़ा; क्या है पूरा मामला?
झारखंड: सीआईडी ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास करने वाले चार लोगों को पकड़ा; क्या है पूरा मामला?
विचार: अपनी सुविधा से शब्दों के चयन की होड़
भारतीय परिप्रेक्ष्य में ‘माओवाद’ हिंसा का पर्याय है, पर ‘माओवाद’ को केवल हथियारों की भाषा में समझना उसके व्यापक स्वरूप को सीमित करता है
यदि 60 करोड़ लोग रोज एक घंटा भी दें तो हम हर दिन लगभग 68 हजार वर्षों के बराबर मानवीय-समय अंगूठे से स्क्राल करने में झोंक रहे हैं
संपादकीय: पारित हो परिसीमन बिल
मानसून सत्र के बाद, सरकार महिला आरक्षण के लिए परिसीमन विधेयक पारित करने हेतु विशेष सत्र बुला सकती है
ऑफिस में घंटों बैठने से हो जाता है कमर दर्द ? अर्धचक्रासन करे मिलेगा तुरंत आराम
नई दिल्ली, आजकल लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने, मोबाइल चलाने और शारीरिक गतिविधि कम होने की वजह से पीठ, गर्दन और कंधों में अकड़न आम हो गई है। ऐसे में योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना काफी मददगार हो सकता है। अर्धचक्रासन एक सरल योगासन है, जिसमें शरीर को पीछे की ओर मोड़ा जाता है।
बांग्लादेश में परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में नहीं है सांप्रदायिक एंगल
बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में मुग्धा दास और सिद्धार्थ दास नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है.
विपरीतकरणी मुद्रा : पाचन से लेकर मानसिक सतर्कता तक
नई दिल्ली, योग शरीर और मन को संतुलित करने की प्राचीन विद्मा है। रोजमर्रा की भागदौड़ से शारीरिक थकान, तनाव और पाचन संबंधित समस्या आम हैं। इन्हीं आसनों में विपरीतकरणी है, जो न सिर्फ शरीर को नई ऊर्जा देता है, बल्कि थके हुए मन को भी शांत करता है।
दांत दर्द और मुंह की बदबू से परेशान है? तो इस्तेमाल करे घर के किचन में रखी लौंग
नई दिल्ली, लौंग भारतीय किचन में इस्तेमाल होने वाला ऐसा मसाला है, जो भले ही साइज में छोटा दिखे, लेकिन इसमें कई तरह के प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं। चाय से लेकर सब्जी तक, लौंग का इस्तेमाल स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। सर्दी-जुकाम या दांत में दर्द होने पर भी लोग अक्सर लौंग का इस्तेमाल करते हैं।
रक्षाबंधन: रक्षाबंधन के लिए नहीं बना था ये गाना, बने थे दो वर्जन; आज भी सबकी जुबान पर रहता है ये गीत
Bollywood Song: भारत में कोई त्योहार हो लगभग सभी पर बॉलीवुड ने गाने बनाए हैं। रक्षाबंधन भी इससे अछूता नहीं है। भाई-बहन के इस त्योहार पर रक्षाबंधन पर खूब गाने बने हैं।
फ्रॉड अलर्ट: इस रक्षा बंधन जरा सी गलती और बैंक खाता हो सकता है खाली, जानें कैसे बचें
अगर आप भी अपनी बहन के लिए रक्षा बंधन का गिफ्ट ऑनलाइन खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाए। वरना आपके साथ ठगी हो सकती है।
रक्षाबंधन स्पेशल: अभी तक नहीं भेजी है राखी? इस तरह से मिनटों में भाई तक पहुंचेगा आपका प्यार
रक्षाबंधन पर बहुत सी बहनें किन्हीं कारणों से अभी तक भाई को राखी नहीं भेज पाईं हैं। ऐसे में अगर आप तुरंत राखी भेजना चाहती हैं तो आपको ये लेख जरूर पढ़ना चाहिए।
रक्षाबंधन: रक्षा केवल कलाई पर बांधे गए धागे से नहीं, होती है प्रेम और भरोसे से
रक्षाबंधन को लेकर हमारे यहां कई कथाएं सुनाई जाती हैं। अलग-अलग जगहों पर इनके रूप भी अलग मिलते हैं, लेकिन इन सभी में एक बात समान है, रक्षा और अपनापन।
दूसरी क्रांति का वक्त: 20वीं सदी में भारत ने भुखमरी को हराया था, अब क्लीन रिवोल्यूशन का बिगुल फूंकने का समय
ताकि डिग्री काम तो आए: कितने युवाओं को सम्मानजनक आजीविका मिली, विकास की यही कसौटी होनी चाहिए
ताकि डिग्री काम तो आए: कितने युवाओं को सम्मानजनक आजीविका मिली, विकास की यही कसौटी होनी चाहिए
अब तो सुनें हिमालय की: छोटी-बड़ी ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं 'फ्लैश फ्लड' की वजह, ठोस प्रबंधन योजना तैयार करना जरूरी
ध्यान दें: आज रक्षा बंधन के दिन किन राज्यों में खुले हैं बैंक और कहां हैं बंद? यहां देखें लिस्ट
आज रक्षा बंधन के दिन क्या आपके शहर में बैंक खुले हैं या बंद हैं? आप यहां बैंकों की आज की छुट्टी के बारे में जान सकते हैं।
मैं स्वयं मुक्तिबोध जी को थोड़ा बहुत जानने का दावा रखता हूं तथा परसाई जी को एक लंबी अवधि तक निकट से जानने का सौभाग्य भी मुझे मिला है।
रणनीतिगत अंतरिक्ष क्षमता निजी क्षेत्र को सौंपना खतरनाक
निजी कंपनियां मुनाफ़ा कमाने के लिए ही होती हैं और भारत चाहता है कि वे सफल हों।
शिक्षा के लिए संघर्ष करता समाज
शिक्षक केवल पाठ पूरा न करे, यह देखे कि बच्चा समझ भी रहा है या नहीं।
नरेला सब सिटी में शुक्रवार से दिल्ली विकास प्राधिकरण लोगों को घर का तोहफा देने की तैयारी की है।
विचार: प्रकृति की अनदेखी के दुष्परिणाम
सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना और उन्हें पूर्व-चेतावनी नेटवर्क से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
विचार: नीतिगत निर्णयों में बढ़े युवाओं की भागीदारी
आज समय की मांग है कि वे गलतियां न दोहराई जाएं, जो 1947, 1977 या 2011-12 में हुईं। राजनीतिक दलों को गंभीर चिंतन करना होगा कि किस प्रकार राष्ट्र के प्रति समर्पित और विकसित भारत की संकल्पना से ओतप्रोत योग्य युवाओं को राजनीति की ओर आकृष्ट किया जाए।
जागरण संपादकीय: सबक सिखाने वाली आपदा
भारत को इस दिशा में सक्रिय होना चाहिए कि कैसे चीन, नेपाल, भूटान के सहयोग से एक ऐसे साझा तंत्र का निर्माण हो, जो हिमालय की चोटियों में होने वाले बदलाव की निगरानी में सहायक साबित हो सके।
भारत को 99 साल की लीज पर मिली आजादी? नहीं, वायरल लेटर AI जनरेटेड है
बूम ने पाया कि यह लेटर फर्जी है और इसे एआई की मदद से तैयार किया गया है. इसमें मौजूद गलतियां भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह कोई वास्तविक आधिकारिक ऐतिहासिक पत्र नहीं है.
दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना, जाने सेहत पर कैसे डालता है असर
नई दिल्ली, आज के समय में लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत बनती जा रही है।
नेपाल आपदा: हिमालय के संकटों के साझा संकेत है भोटेकोशी नेपाल की जलप्रलय
हिमालय में पैदा होने वाला यह जल-संकट किसी एक देश की प्रशासनिक या राजनीतिक सीमाओं को नहीं स्वीकारता। तिब्बत (चीन) के पठार से निकलने वाली नदियां नेपाल, भारत, भूटान, पाकिस्तान और बांग्लादेश तक के विशाल जनमानस को प्रभावित करती हैं।
भारत बनाम श्रीलंका Live Score: पांचवें दिन का खेल शुरू, नुवंथा और दिनुषा क्रीज पर मौजूद
Live Cricket Score Today IND vs SL 2nd Test Day 5: नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट मैच का आज पांचवां दिन है। भारत ने कोलंबो टेस्ट में शिकंजा कस लिया है। श्रीलंका ने मामूली बढ़त हासिल की है।
आज का राशिफल: कन्या सहित इन चार राशि वालों को मिलेगा बड़ा लाभ, भाग्य रहेगा मजबूत
Horoscope Prediction Today: 27 अगस्त 2026 का आज का राशिफल जानें और देखें मेष, कर्क, सिंह, कन्या, कुंभ और मकर राशि वालों के लिए करियर, धन, प्रेम और सेहत के लिहाज से दिन कैसा रहेगा।
जीवन धारा: विचारों की खूबसूरती हमें सुंदर बनाती है
जीवन धारा: विचारों की खूबसूरती हमें सुंदर बनाती है
बारिश में क्यों डूब रहे शहर? कचरा प्रबंधन की कमजोरी से बढ़ रहा जलभराव का संकट
बारिश में क्यों डूब रहे शहर? कचरा प्रबंधन की कमजोरी से बढ़ रहा जलभराव का संकट Why are cities drowning in the rain Poor waste management is exacerbating waterlogging crisis
इस्लामाबाद में पकती नई खिचड़ी: इमरान खान को राहत ने बढ़ाई हलचल, बदलते सियासी समीकरण की आहट
इस्लामाबाद में पकती नई खिचड़ी: इमरान खान को राहत ने बढ़ाई हलचल, बदलते सियासी समीकरण की आहट imran-khan-supreme-court-relief-pakistan-politics-army-us-role-political-deal
एक और चेतावनी: हिमालय में बढ़ते आपदा जोखिम का इशारा है नेपाल की बाढ़ त्रासदी
एक और चेतावनी: हिमालय में बढ़ते आपदा जोखिम का इशारा है नेपाल की बाढ़ त्रासदी nepal-rasuwa-flood-himalayan-disaster-risk-india-china-nepal-alert
Celebrate Raksha Bandhan as occasion of social reform
safety of women as well as care of old parents and depressed People The Festival of Raksha Bandhan can become a powerful day for social reform by pledging to protect women, care for aging parents, and support those facing depression and age relatedhealth and financialproblems . Meaning of the Pledge Traditional Tie:— The sacred thread ... Read more
ललित सुरजन की कलम से स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्गति-1
'केन्द्र सरकार को एक नीतिगत निर्णय लेकर शहरी क्षेत्र में निजी अस्पताल खोलने के लिए बैंक ऋण देने पर पाबंदी लगा देना चाहिए
जन-विरोधी है केंद्र की चीनी नीति, गरीबों के लिए इसे खरीदना मुश्किल
भारत की एथनॉल नीति ने असल में पेट्रोल और खाने-पीने की चीज़ों के इस्तेमाल के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है।
राहुल गांधी की एक महत्वपूर्ण पहल को केवल राजनैतिक खांचे में फिट करके उसे खराब करने की कोशिश भाजपा कर रही है।
विचार: आकाश छूने को तैयार नई पीढ़ी
हमारे अपने ही जिगर के टुकड़े, हमारे बच्चे हैं। स्वाभाविक है कि उनकी हर बात हमेशा सही नहीं होगी, ठीक वैसे ही जैसे हमारी भी हर बात अपने समय में सही नहीं हुआ करती थी। वे अपने जीवन में तमाम गलतियां करेंगे, बिल्कुल वैसे जैसे गलतियां हमने भी की थीं।
विचार: खतरनाक है वंदे मातरम् का विरोध
वैश्विक उदाहरणों को देखें तो 87 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान होने के बावजूद इंडोनेशिया ने अपने उन प्राचीन प्रतीकों को पूर्ण सम्मान दिया है, जो हिंदू धर्म से जुड़े हैं। इंडोनेशिया का राष्ट्रीय प्रतीक भगवान विष्णु का वाहन 'गरुड़' है, तो नोट पर गणेश भगवान का चित्र है।
विचार: तार-तार होती भाषा की मर्यादा
लोकतांत्रिक मर्यादा की रक्षा केवल नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। नागरिक किस प्रकार की राजनीतिक भाषा को महत्व देते हैं, इससे भी सार्वजनिक जीवन की दिशा तय होती है।
जागरण संपादकीय: अमेरिका की मनमानी
एक समय जो अमेरिका यह सुनिश्चित करता था कि विश्व भर से प्रतिभाएं उसके यहां आएं, वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से महान बनने के नाम पर अपना अहित करने के साथ मित्र एवं सहयोगी देशों को तंग करने वाले फैसले ले रहा है।
आयुष्मान कार्ड कौन बनवा सकता है? क्या Taxpayers, PF, ESIC वाले इसके पात्र होंगे?
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी PM-JAY सरकार का हेल्थकेयर प्रोग्राम है जो हर परिवार को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देता है, जो एम्पैनल्ड सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में होता है। आयुष्मान कार्ड क्या है? आयुष्मान कार्ड एक डिजिटल हेल्थ कार्ड है जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PMJAY) के तहत जारी किया जाता है। योग्य लाभार्थी आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल करके पूरे भारत में पैनल वाले अस्पतालों में हर परिवार को हर साल ₹5 लाख तक के कैशलेस इलाज का फ़ायदा उठा सकते हैं। यह कार्ड सभी योग्य लाभार्थियों के लिए सस्ती और आसानी से मिलने वाली हेल्थकेयर पक्का करता है और सेकेंडरी और टर्शियरी केयर हॉस्पिटलाइज़ेशन तक पहुँच देता है। इसे भी पढ़ें: Credit Card Closure: क्या आपने लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया? तो जानिए कैसे हो सकता है आपका नुकसान? आयुष्मान कार्ड की एलिजिबिलिटी PM-JAY के लिए एलिजिबल होने के लिए व्यक्ति को सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस (SECC) 2011 के डेटा के साथ-साथ राज्य-स्पेसिफिक बेनिफिशियरी डेटाबेस और तय ऑक्यूपेशनल कैटेगरी में आना चाहिए। एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के लिए अलग-अलग हैं। आयुष्मान कार्ड के लिए एलिजिबल शहरी और ग्रामीण परिवारों की लिस्ट ये है: I. शहरी परिवार - कचरा बीनने वाले - भिखारी - घरेलू कामगार - स्ट्रीट वेंडर, फेरीवाले, मोची या सड़कों पर काम करने वाले दूसरे सर्विस प्रोवाइडर - कंस्ट्रक्शन वर्कर, राजमिस्त्री, प्लंबर, लेबर, वेल्डर, पेंटर, कुली, सिक्योरिटी गार्ड और दूसरे सिर पर बोझा ढोने वाले वर्कर - सफाई कर्मचारी, सैनिटेशन वर्कर और माली - घर से काम करने वाले वर्कर, हैंडीक्राफ्ट वर्कर, कारीगर और दर्जी - ट्रांसपोर्ट वर्कर, कंडक्टर, ड्राइवर, गाड़ी खींचने वाले, ड्राइवर और कंडक्टर के हेल्पर और रिक्शा चलाने वाले - असिस्टेंट, दुकान में काम करने वाले, छोटी जगहों पर चपरासी, डिलीवरी असिस्टेंट, हेल्पर, वेटर और अटेंडेंट - इलेक्ट्रीशियन, असेंबलर, मैकेनिक और रिपेयर वर्कर - धोबी और चौकीदार II. ग्रामीण परिवार - एक कमरे वाले कच्चे घरों में रहने वाले परिवार - जिन परिवारों में 16-59 साल की उम्र का कोई एडल्ट सदस्य नहीं है - SC/ST परिवार - जिन परिवारों में एक विकलांग सदस्य है, लेकिन कोई गैर-विकलांग एडल्ट सदस्य नहीं है - जिन परिवारों में 16-59 साल की उम्र का कोई एडल्ट पुरुष सदस्य नहीं है - बिना ज़मीन वाले परिवार जो हाथ से काम करके रोज़ाना काम करते हैं III. सीनियर सिटिज़न - ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के 70 साल से ज़्यादा उम्र के सभी सीनियर सिटिज़न जो सीनियर सिटिज़न पहले से आयुष्मान भारत PMJAY (AB PMJAY) के तहत कवर हैं, वे हर साल ₹5 लाख तक का एक्स्ट्रा टॉप-अप कवर पाने के लिए एलिजिबल हैं - जो सीनियर सिटिज़न पहले से ही दूसरी पब्लिक हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, जैसे कि एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS), सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS), या आयुष्मान सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) का फायदा ले रहे हैं, वे अपनी मौजूदा स्कीम जारी रख सकते हैं या AB PMJAY में बदल सकते हैं - प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी या एम्प्लॉई स्टेट इंश्योरेंस (ESI) स्कीम के तहत कवर सीनियर सिटिज़न AB PMJAY के लिए एलिजिबल हैं आयुष्मान भारत योजना के तहत क्या कवर होता है? PMJAY लिस्टेड सेकेंडरी और टर्शियरी केयर कंडीशन के लिए परिवार के सभी सदस्यों को ₹5,00,000 तक का कैशलेस कवर देता है। आयुष्मान भारत योजना स्कीम इलाज के इन हिस्सों पर होने वाले खर्चों को कवर करती है: - मेडिकल जांच, इलाज और कंसल्टेशन - इंटेंसिव और नॉन-इंटेंसिव केयर सर्विस - दवा और मेडिकल कंज्यूमेबल्स - डायग्नोस्टिक और लैबोरेटरी जांच - इलाज के दौरान होने वाली दिक्कतें - रहने के फायदे - मेडिकल इम्प्लांटेशन सर्विस - मरीज़ को खाना - हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले का चार्ज 3 दिन तक - हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद 15 दिन तक फॉलो-अप केयर आयुष्मान कार्ड के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स आयुष्मान कार्ड रजिस्ट्रेशन, बेनिफिशियरी वेरिफिकेशन या e-KYC के दौरान इन डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत पड़ सकती है: - पहचान वेरिफिकेशन और आधार-बेस्ड ऑथेंटिकेशन के लिए आधार कार्ड - OTP वेरिफिकेशन के लिए आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर - एलिजिबल राज्यों में बेनिफिशियरी सर्च के लिए राशन कार्ड या फैमिली ID - एड्रेस प्रूफ - PAN कार्ड या दूसरा पहचान प्रूफ - इनकम सर्टिफिकेट, अगर लागू हो - जाति सर्टिफिकेट, जहाँ ज़रूरी हो - फैमिली-बेस्ड वेरिफिकेशन के लिए फैमिली रिलेशनशिप प्रूफ - पासपोर्ट-साइज़ फोटो क्या Taxpayer आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है? केवल आयकरदाता होने या न होने से पात्रता तय नहीं होती। सामान्य PM-JAY में निर्धारित लाभार्थी सूची और पात्रता शर्तें देखी जाती हैं। केंद्र सरकार ने आय की परवाह किए बिना सभी 70+ नागरिकों को AB PM-JAY के तहत स्वास्थ्य कवर देने का फैसला किया है। यानी इस आयु वर्ग के लिए आयकरदाता होना बाधा नहीं है। क्या PF कटने वाले कर्मचारी आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं? सिर्फ किसी कर्मचारी के वेतन से EPF/PF का पैसा कटना यह तय नहीं करता कि वह आयुष्मान योजना का पात्र है या नहीं। यानी PF खाता होना अपने आप में न पात्रता देता है और न ही अपात्र बनाता है। 70 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति की पात्रता योजना के निर्धारित रिकॉर्ड और राज्य के नियमों के आधार पर जांची जानी चाहिए। क्या ESIC वाले कर्मचारी पात्र हैं? ESIC (Employees' State Insurance Corporation) एक अलग सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था है। इसलिए केवल ESIC में पंजीकरण होने से किसी व्यक्ति को अपने आप AB PM-JAY का लाभार्थी नहीं माना जा सकता। - जे. पी. शुक्ला
फैक्ट चेक: महिलाओं पर विवादित बयान देते राहुल गांधी का यह वीडियो एडिटेड है
बूम ने पाया कि वीडियो पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का है. इस दौरान राहुल गांधी मोहन भागवत और मनोहर लाल खट्टर के बयानों का हवाला देते हुए यह बात कह रहे थे.
योग साधना : मन की शांति से एकाग्रता तक, जानें फायदे
नई दिल्ली, योग सिर्फ शरीर को लचीला बनाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, सांस और मन के बीच संतुलन बनाने का भी एक तरीका है। योग में कई ऐसी मुद्राएं और बंध बताए गए हैं, जिन्हें मन को स्थिर करने और एकाग्रता बढ़ना में मददगार माना जाता है।
ताड़ासन से स्पाइन में सारी परेशनी होगी दूर, पोस्चर सुधारने के साथ बढ़ता है आत्मविश्वास
नई दिल्ली, भारतीय योग संस्कृति में ताड़ासन को सभी आसनों का आधार माना जाता है। इस आसन में शरीर को ताड़ के वृक्ष की तरह सीधा और संतुलित रखा जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर में स्फूर्ति आती है और सही ढंग से खड़े होने की आदत विकसित होती है।
एमएसएमई के जरिए मजबूत हो रही स्वदेशी रक्षा की आपूर्ति : एसोचैम
नई दिल्ली, एसोचैम की राष्ट्रीय रक्षा और एयरोस्पेस परिषद (नेशनल काउंसिल ऑन डिफेंस एंड एयरोस्पेस) के चेयरमैन राजीव गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि देश उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए कितना दृढ़ संकल्प दिखाता है।
जीवन धारा: जिसे हम जानते नहीं उससे भय कैसा? डर का सामना करने का सूत्र अपनाना कारगर विकल्प
जीवन धारा:जिसे हम जानते नहीं उससे भय कैसा? डर का सामना करने का सूत्र अपनाना कारगर विकल्प
दूसरा पहलू: उषा मंदिर का बिगड़ता-बनता रूप और लोदी मीनार... बाणासुर की बेटी से जुड़ा है प्रसंग
दूसरा पहलू:उषा मंदिर का बिगड़ता-बनता रूप और लोदी मीनार...बाणासुर की बेटी से जुड़ा है प्रसंग
कल की बीमारी बदल रही आज का पता: गंभीर पारिस्थितिक बदलावों से खराब हो रही सेहत; स्वास्थ्य व्यवस्था को भी बदलना होगा रास्ता
साझा विरासत बनाम प्रतीकों की राजनीति: स्वतंत्रता आंदोलन के राष्ट्रीय प्रतीक क्यों पैदा हुए? आज याद करना जरूरी
आतंक के ठिकाने: पाकिस्तान को किसी भी नए प्रमाण की जरूरत नहीं, भारत के लिए भी संदेश स्पष्ट
आतंक के ठिकाने: पाकिस्तान को किसी भी नए प्रमाण की जरूरत नहीं, भारत के लिए भी संदेश स्पष्ट
आज का राशिफल: कुंभ और मकर राशि वालों की किस्मत देगी साथ, नौकरी-कारोबार में होंगे सकारात्मक बदलाव
26 अगस्त 2026 का आज का राशिफल जानें और देखें मेष, कर्क, सिंह, कन्या, कुंभ और मकर राशि वालों के लिए करियर, धन, प्रेम और सेहत के लिहाज से दिन कैसा रहेगा।
राजस्थान में बीजेपी के बजाय आपस में ही लड़ती कांग्रेस
राजस्थान कांग्रेस आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसकी सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं,बल्कि उसकी अपनी उलझती हुई आंतरिक राजनीति है। अशोक गहलोतऔरसचिन पायलट अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र रखते हैं,लेकिन इन दोनों बड़े नेताओं की शक्तियों के समन्वय में खालीपन देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने खुद को ताकतवर दिखाना करना शुरू ... Read more
ललित सुरजन की कलम से अटल: संघ के होकर संघ से दूर
हिन्दी क्षेत्र में दो ऐसे राजनेता हुए हैं जिनका लेखकों, पत्रकारों और अकादमिकों से जीवंत संवाद रहा है।
वंदे मातरम् : राष्ट्रगीत से विभाजन का हथियार
24 जुलाई को राज्यसभा में पेश किया गया और बिना किसी विस्तृत चर्चा का मौका दिए और विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद, 29 जुलाई को राज्य सभा से और 30 जुलाई को लोक सभा से इस पर मोहर लगवा ली गयी।
व्हीबी-जी राम-जी की पहली परीक्षा : रोजगार आधा क्यों हुआ?
भ्रष्टाचार, फर्जी जॉब कार्ड, भुगतान में देरी और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता जैसे सवाल उस पर उठते रहे।
विचार: हटाने नहीं, सुधारने की आवश्यकता
किसी भी व्यवस्था की समीक्षा में कोई हर्ज नहीं, यदि उसका उद्देश्य उसे और प्रभावी-बेहतर बनाना हो। पता नहीं इससे क्यों बचा जा रहा है। जितना यह सच है कि असमानता दूर करने के लिए आरक्षण की जरूरत है, उतना ही यह भी कि वह सुधार की भी मांग कर रहा है।
विचार: सच से मुंह मोड़ते राहुल गांधी
भारत जैसे उदार देश में संविधान के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अभी तक समान नागरिक कानून नहीं बना, क्योंकि उलेमा विरोध करते हैं। समान कानून के लिए तसलीमा नसरीन बार-बार आग्रह करती रही हैं।
जागरण संपादकीय: कामचलाऊ कौशल विकास
इस अंतर को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के लिए नीति आयोग के इस सुझाव पर यथाशीघ्र अमल किया जाए कि स्कूल से लेकर कालेज स्तर तक रोजगार और उद्यमिता से जुड़े कौशल की सीख दी जाए।
पानी की कमियां और गुस्ताखियां (व्यंग्य)
कमियां तो सभी में होती हैं लेकिन कमियों के साथ गुस्ताखियां भी बढ़ती जाएं तो नाराज़गी जायज़ है। पानी अब ऐसा ही कर रहा है। गांव, गलियां और बाज़ारों में तो घुस ही जाता है इसने तो महासमझदारी से बनाए एक्सप्रेस वे नहीं छोड़े। बारिश का मौसम आया और जनाब सड़क पर आराम से तैरने लगते हैं। अब तो हद कर दी, उधर पहाड़ों में धुंध छाई हुई थी। पर्यटक दूर दूर से रोमांटिक मौसम का मज़ा लेने आए हुए थे। पिछले दिनों इस गुस्ताख़ ने ग्यारह हज़ार करोड़ रुपयों की भी परवाह नहीं और बिना किसी को सूचित किए प्रवेश कर गए सीना चौड़ा किए हुए। नियमानुसार कहीं भी खड़े गार्ड से अनुमति लेनी चाहिए थी। अगर वहां सुरक्षा कर्मी नहीं था तो सम्बंधित विभाग से अग्रिम स्वीकृति लिखित में लेनी चाहिए थी। कुछ लोग हर कहीं बिना पूछे घुस जाते हैं और चुपचाप उत्पात मचाने लगते हैं, अगर पूछो तो कुटिल मुस्कुराहट के साथ कहते हैं आपने हमें पहचाना नहीं। हमें कौन रोक सकता है या कह सकते हैं आज तक किसी ने हमें रोकने की कोशिश नहीं की जिसने की हमने उसे बख्शा नहीं। पानी ऐसा कर रहा है। छोटे मोटे शहर और गांवों में पानी ने पिछले कई दशकों से परेशान कर रखा है। दर्जनों सड़कें उखाड़ दी, लोहे के पाइप तोड़ दिए, बड़े बड़े पत्थर लुढका दिए, मिटटी के तोंदे सड़कों पर ला दिए। इतना भी क्या गुस्सा। इंसान ने जहां रोका इसने वहीँ पंगा लिया, वहीँ रास्ता बना लिया। किसी आभूषण जैसी लगने वाली खुबसूरत ईमारत का उदघाटन होना होता है, उसमें हज़ारों रूपए के नलके लाखों रूपए में लगाए जाते है। आम आदमी उन्हें खोलकर पानी को आने देना चाहता है लेकिन इतनी गुस्ताख़ी कि उदघाटन से पहले वहां तालाब बना दिया। इसे भी पढ़ें: डिमांड एंड सप्लाई (व्यंग्य) पानी ने यह भी नहीं सोचा कि यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर की जगह है। यहां की मिटटी ही कितनी महंगी है। करोड़ों रूपए की शानदार गाड़ियां आकर यहां पार्क होने वाली हैं। वह सीमेंट में भी प्रवेश कर गया। इंतजाम का मौका नहीं दिया और निर्माण की गुणवत्ता को सवालों की बारिश से पहले तैरा दिया। पानी तो सहयोगी माना जाता है इसलिए इंसान को बख्श देना चाहिए क्यूंकि अब वह नैसर्गिक बुद्धि से नहीं, नकली बुद्धि से काम चला रहा है । उसका प्रबंधन राजनीति की गिरफ्त में आ चुका है। समझदारी में भ्रष्टाचार का कीचड़ घुस गया है लेकिन पानी तो कुदरत का हिस्सा है फिर भी उसने करुणा, सदभावना, सहयोग सब बहा दिया और प्रकृति की अदभुत रचना इंसान को परेशान करता रहता है। पानी को वहां जाना चाहिए जहां घर घर में नलके लगे हैं और उसका इंतज़ार कर रहे हैं। वह अनधिकृत निर्माण गिराने में भी सहयोग कर सकता है वह बात दीगर है कि वहां प्रशासन के प्रबंधन का सीमेंट ज़रूर लगा है। पानी की विशेषताएं अब उसकी कमियां बन चुकी हैं। खाने पीने के जिस सामान में प्रवेश करता है अपने जैसा दूषित कर देता है। कहते हैं रंग, गंध और स्वाद हीन होता है लेकिन अब तो उसमें यह तीनों गुण हैं। पानी की कमियां और गुस्ताखियां बढ़ती जा रही हैं। - संतोष उत्सुक
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