रांची। सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने झारखंड की धरती को 'शिव की धरा' बताया। कथा के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि झारखंड का कण-कण शिवमय है। यहां के आदिवासी और वनवासी भाई-बहन सदियों से 'बूढ़ा देव' और 'पहाड़ी बाबा' के रूप में महादेव की आराधना करते आ रहे हैं। इसी क्रम में उनसे हुई बातचीत का खास अंश प्रस्तुत है... सवाल : आपकी कथा में इतनी भारी भीड़ (5-6 लाख लोग) बिना किसी बुलावे के कैसे खिंची चली आती है? ऐसी भीड़ तो किसी राजनीतिक सभा में देखी जाती है? जवाब : यह मेरा जादू नहीं, बल्कि महादेव के प्रति भक्तों का अटूट प्रेम है। कोरोना काल के दौरान लोगों ने देखा कि घर में धन तो था, पर आयु नहीं थी। उस कठिन समय ने लोगों के मन में भगवान शिव के प्रति एक विशेष भाव जागृत किया। आज शिवालयों में जो भीड़ है, वह उसी जागृत भक्ति का परिणाम है। इन्हें कभी बुलाना नहीं पड़ता है। हमारी व्यासपीठ कभी नहीं कहती कि आइए, वह कहती है कि मंदिर जाइए और एक लोटा जल चढ़ाइए। वह जल चढ़ाइए, जिससे आपके जीवन में खुशिया आएं। सवाल : एक लोटा जल, सभी समस्याओं का हल' - क्या वाकई इससे गंभीर बीमारियां ठीक होती हैं? इसमें क्या रहस्य है? जवाब : कोई जादू नहीं है, यह सिर्फ विश्वास है। हम व्यासपीठ से हमेशा कहते हैं कि डॉक्टर भी शिव का ही एक रूप हैं। बीमार हैं तो पहले अस्पताल जाइए, चेकअप कराइए और दवा लीजिए। लेकिन साथ ही महादेव पर जल चढ़ाकर उसका आचमन (कुंदकेश्वर महादेव का नाम लेकर) करें, तो दवा का फल अधिक प्राप्त होता है और व्यक्ति जल्दी स्वस्थ होता है। सवाल: आपको झारखंड की धरती और यहां के लोग कैसे लगे? जवाब : झारखंड की धरती अत्यंत पवित्र है, यह साक्षात शिव की धरा है। यहां के लोग बेहद सहज और सरल स्वभाव के हैं। चाहे आदिवासी हों या वनवासी, सभी महादेव की श्रद्धा और भक्ति से जुड़े हुए हैं। प्रदेश में हर ओर भगवान शिव के प्रति आस्था का भाव दिखाई देता है। यहां का प्राकृतिक वातावरण और भक्ति का माहौल लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।
श्री बालाजी धाम' बुझा रही प्यास, एक आसरा' बनी बेजुबानों का सहारा
पंजाब में आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ते तापमान के बीच जालंधर की सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं सेवा भाव के साथ सड़कों पर उतर आई हैं। जहां एक ओर राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए ठंडे-मीठे जल की छबीलें लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बेजुबान पक्षियों और जानवरों के लिए ‘एक आसरा' टीम ने व्यापक स्तर पर जल-पात्र (सकोरे) बांटने का अभियान छेड़ा है। इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल प्यास बुझाना है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और करुणा का संचार करना भी है। बाला जी धाम संस्था के सदस्यों का कहना है कि हमारा प्रयास है कि गर्मी में सभी राहत महसूस करें। वहीं, एक आसरा संस्था के सदस्यों का कहना है कि लोगों में बेजुबानों के प्रति प्रेम की भावना जागृत करने का प्रयास कर रहे हैं। इंसानों के साथ-साथ तपती गर्मी की मार झेल रहे मूक प्राणियों के लिए ‘एक आसरा' टीम ने मोर्चा संभाला है। संस्था द्वारा बेजुबानों के लिए पानी के बर्तन (सकोरे) वितरित करने की सेवा जारी है। संस्था की मुख्य सदस्य जसप्रीत कौर ने बताया कि उनका लक्ष्य इस सीजन में 1000 से अधिक सकोरे बांटने का है। टीम ने राहगीरों और शहरवासियों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे अपने घरों और छतों पर ये बर्तन रखें और उनकी नियमित सफाई भी करें। उन्होंने कहा कि गौमाता, डॉग्स और पक्षियों की सेवा ही सच्ची मानवता है। माई हीरां गेट पर प्राचीन मंदिर बाबा यशरथ राय जी श्री बालाजी धाम (थापरां मोहल्ला) द्वारा एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। मंदिर प्रबंधन ने बढ़ती तपिश को देखते हुए मुख्य मार्ग पर राहगीरों के लिए मीठे और ठंडे जल की छबील लगाई है। मंदिर के मुख्य सेवादार गौरव थापर ने बताया कि 40 दिनों तक यह सेवा निरंतर जारी रहेगी। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे, जब गर्मी अपने चरम पर होती है, तब राहगीरों को जल पिलाया जाएगा। अभियान से रिक्शा चालकों और दिहाड़ीदारों को बड़ी राहत मिल रही है। मंदिर के सेवादारों का संकल्प है कि 40 दिन कोई प्यासा नहीं गुजरेगा।
हीरामंडी को लेकर संजय लीला भंसाली ने खोले ये राज़
संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित सीरीज़ हीरामंडी नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो गई है, जिसमें सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, और मनीषा कोईराला जैसे सितारों की कास्ट शामिल है। इस श्रृंखला ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि भंसाली ने खुलासा किया कि उनकी प्रारंभिक कास्टिंग विकल्प फाइनल कास्ट से अलग थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने मूल रूप से हीरामंडी को रेखा, करीना कपूर और रानी मुखर्जी के साथ एक फिल्म के रूप में देखा था। हालांकि, स्टोरी के बड़े होनेके कारण इसे फिल्म के बजाय एक सीरीज़ में बदल दिया गया। भंसाली ने बताया कि वह पिछले 18 वर्षों से हीरामंडी के कॉसेप्ट पर काम कर रहे थे। श्रृंखला स्वतंत्रता से पहले के लाहौर में स्थित हीरा मंडी जिले में दरबारऔर नवाबों पर है। शुरू में, कास्टिंग ने वर्षों में कई बदलावों का सामना किया, जिसमें माहिरा खान, इमरान अब्बास, और फवाद खान जैसे नाम विभिन्न समयों पर विचार किए गए। अंततः, प्रोडक्शन ने एक नई कास्ट पर फैसला किया । हीरामंडी एक पीरियड ड्रामा है जिसका निर्देशन संजय लीला भंसाली और मिताक्षरा कुमार ने किया है। कहानी लाहौर के हीरा मंडी जिले में तवायफों के जीवन पर है, फिल्म की कहानीब्रिटिशकाल के दौरान की कहानी है, जहां एक वैश्यालय की महिलाएं आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लड़ रही होती हैं।। प्रमुख अभिनेताओं के साथ, श्रृंखला में मनीषा कोईराला, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख, महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फरदीन खान, शेखर सुमन और अध्ययन सुमन भी नवाबों की भूमिका में हैं। जियो फाइबर को कड़ी टक्कर दे रहा है एयरटेल एक्सट्रीम फाइबर, जानिए सभी फ्री ओटीटी प्लान्स की लिस्ट ₹10,000 से कम में मिलेंगे ये 5 बेहतरीन स्मार्ट टीवी, पूरा दिन देखने का मन करेगा जियो सिनेमा के दो नए प्रीमियम प्लान लॉन्च, सिर्फ ₹29 में मिलेंगे इतने फायदे

