भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत के बाद, कांग्रेस पार्टी और उसके नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए चुनावी धांधली के आरोपों की आलोचना की। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस उन चुनावों में भी जनता का समर्थन हासिल करने में विफल रही, जो मतपत्रों और मतपेटियों के जरिए कराए गए थे। उन्होंने MLC चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को शून्य बताया और वोट चोरी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये कांग्रेस के खराब चुनावी प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिशें हैं। इसे भी पढ़ें: युवाओं को Gen Z और Gen Alpha में बांटने की जरूरत नहीं, Panaji में बोले Nitin Nabin त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक झूठ को इतना बड़ा मुद्दा बना दिया, जबकि वे इसे नज़रअंदाज़ कर सकते थे। MLC चुनावों के नतीजों ने आज उनकी अराजकता फैलाने की इच्छा पर पानी फेर दिया है। भारत के कई राज्यों में हुई विधान परिषद (MLC) चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन शून्य रहा है। भले ही उन्हें यह अच्छा न लगे, लेकिन सच यही है कि वे शून्य पर हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन चुनावों में बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल होने से, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर कांग्रेस की शिकायतों का कोई आधार नहीं रह जाता। त्रिवेदी ने कहा कि ये चुनाव बैलेट बॉक्स और बैलेट पेपर के ज़रिए कराए गए थे। फिर भी, कांग्रेस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में नाकाम रही। कांग्रेस के लोगों को यह बात बेहतर ढंग से समझाने के लिए मैं कहूंगा कि वे अपना अस्तित्व साबित करने में भी विफल रहे हैं। इससे साफ होता है कि कांग्रेस में जनता या मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की क्षमता नहीं है—चाहे चुनाव EVM से हों या बैलेट पेपर से। त्रिवेदी ने राहुल गांधी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों की भी आलोचना की और सवाल उठाया कि क्या इनसे जनता का समर्थन मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी से कहना चाहता हूं कि अगर कोई व्यक्ति भ्रम में जी रहा है या अपना मानसिक संतुलन खो चुका है, तो आप चाहे बैलेट पेपर से चुनाव करवा लें, नतीजा फिर भी वही (शून्य) रहेगा। इसलिए, कांग्रेस को यह समझ लेना चाहिए कि राहुल गांधी—जो लगभग दो हफ्ते तक घूमने-फिरने के बाद अब भारत की अर्थव्यवस्था में मुश्किलें पैदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन की बात कर रहे हैं—उन्हें यह जान लेना चाहिए कि न तो जनता और न ही विधायक उनके साथ हैं। इसे भी पढ़ें: Make in India से बढ़ा उत्पादन, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Phone निर्माता बना भारत उन्होंने कांग्रेस की गतिविधियों की तुलना भाजपा नेताओं के कार्यों से की। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबिन के उत्तर प्रदेश दौरे और अमित शाह की पंजाब में मौजूदगी का जिक्र किया, जबकि राहुल गांधी पर वियतनाम में घूमने-फिरने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबिन जी उत्तर प्रदेश जा रहे हैं। अमित शाह जी पंजाब में हैं, और राहुल गांधी वियतनाम में घूम रहे हैं—फिर उन्हें लगता है कि उन्हें जनता का समर्थन मिल जाएगा। त्रिवेदी ने फिर दोहराया कि समस्या कांग्रेस पार्टी के साथ है, न कि मतदान प्रक्रिया के साथ।
BJP का बड़ा सियासी दांव: Hardeep Singh Puri होंगे Madhya Pradesh से राज्यसभा उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश में 2026 के राज्यसभा उपचुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। 28 अक्टूबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, BJP की केंद्रीय चुनाव समिति ने उपचुनाव के लिए पुरी की उम्मीदवारी को मंजूरी देने की घोषणा की। यह घोषणा नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से की गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट को भरने के लिए 12 नवंबर को उपचुनाव होना है। इसे भी पढ़ें: युवाओं को Gen Z और Gen Alpha में बांटने की जरूरत नहीं, Panaji में बोले Nitin Nabin उपचुनाव से पहले, मध्य प्रदेश बीजेपी जिन संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा कर रही थी, उनमें पुरी का नाम भी शामिल था। पार्टी की राज्य कोर कमिटी ने अंतिम फैसले के लिए केंद्रीय नेतृत्व को चार-पांच नामों का एक पैनल भेजने का निर्णय लिया था। उत्तर प्रदेश से पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों के लिए फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया था, जिससे उच्च सदन में उनके बने रहने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी। इस उपचुनाव से मध्य प्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों में से एक भरी जाएगी। बीजेपी के अंतिम नामांकन से यह तय होगा कि केंद्रीय मंत्री इस राज्य से संसद में वापस लौटेंगे या नहीं।
युवाओं को Gen Z और Gen Alpha में बांटने की जरूरत नहीं, Panaji में बोले Nitin Nabin
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केअध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को कहा कि युवाओं को ‘जेन जी’, ‘जेन अल्फा’ या अन्य पीढ़ियों के आधार पर बांटने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर बदलाव लाने की इच्छा रखता है, उसे युवा माना जाना चाहिए। नवीन ने पणजी में भाजपा की ओर से आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में युवाओं से बातचीत के दौरान कहा कि युवाओं की परिभाषा केवल उम्र के आधार पर तय नहीं की जानी चाहिए। जब तक किसी व्यक्ति में बदलाव लाने और जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा है, तब तक वह युवा है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश के कई हिस्सों में मुख्य रूप से ‘जेन जी’ के नेतृत्व में युवाओं के प्रदर्शन हुए हैं। विपक्षी दल कांग्रेस भी विभिन्न शहरों में युवाओं तक पहुंच बनाने के कार्यक्रम आयोजित कर रही है। ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ जैसे पीढ़ीगत वर्गीकरण का इस्तेमाल बढ़ने का जिक्र करते हुए नवीन ने कहा कि युवाओं को इस तरह के आधार पर बांटने या उनमें फर्क करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘आज के युवाओं को अलग-अलग श्रेणियों में नहीं बांटा जाना चाहिए। युवा वह है जो संघर्ष करना चाहता है, आगे बढ़ना चाहता है और मानता है कि कड़ी मेहनत तथा लगन से वह अपने जीवन, राज्य और देश में बदलाव ला सकता है।’’ नवीन ने कहा कि युवाओं की परिभाषा किसी खास आयु वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों में बदलाव लाने और जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा बनी रहती है, वे युवा हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक किसी व्यक्ति में बदलाव लाने, संघर्ष करने और आगे बढ़ने की चाहत है, तब तक वह युवा है, चाहे उसकी उम्र 15 साल हो या 40 या 45 साल।’’ जेन जी 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों की पीढ़ी को कहा जाता है। ‘‘जेन अल्फा’’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जिसका जन्म मुख्य रूप से 2010 से 2024 -2025 के बीच हुआ है। यह जेनरेशन जी के बाद और जेन बीटा से पहले की पीढ़ी है। नवीन ने बताया कि भाजपा अपनी युवा शाखा के जरिए युवाओं के साथ संवाद कर रही है और इस कार्यक्रम का मकसद उनके साथ सीधे बातचीत को बढ़ावा देना था। इस मौके पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और भाजपा की गोवा इकाई के अध्यक्ष दामोदर नाइक भी मौजूद थे।
हीरामंडी को लेकर संजय लीला भंसाली ने खोले ये राज़
संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित सीरीज़ हीरामंडी नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो गई है, जिसमें सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, और मनीषा कोईराला जैसे सितारों की कास्ट शामिल है। इस श्रृंखला ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि भंसाली ने खुलासा किया कि उनकी प्रारंभिक कास्टिंग विकल्प फाइनल कास्ट से अलग थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने मूल रूप से हीरामंडी को रेखा, करीना कपूर और रानी मुखर्जी के साथ एक फिल्म के रूप में देखा था। हालांकि, स्टोरी के बड़े होनेके कारण इसे फिल्म के बजाय एक सीरीज़ में बदल दिया गया। भंसाली ने बताया कि वह पिछले 18 वर्षों से हीरामंडी के कॉसेप्ट पर काम कर रहे थे। श्रृंखला स्वतंत्रता से पहले के लाहौर में स्थित हीरा मंडी जिले में दरबारऔर नवाबों पर है। शुरू में, कास्टिंग ने वर्षों में कई बदलावों का सामना किया, जिसमें माहिरा खान, इमरान अब्बास, और फवाद खान जैसे नाम विभिन्न समयों पर विचार किए गए। अंततः, प्रोडक्शन ने एक नई कास्ट पर फैसला किया । हीरामंडी एक पीरियड ड्रामा है जिसका निर्देशन संजय लीला भंसाली और मिताक्षरा कुमार ने किया है। कहानी लाहौर के हीरा मंडी जिले में तवायफों के जीवन पर है, फिल्म की कहानीब्रिटिशकाल के दौरान की कहानी है, जहां एक वैश्यालय की महिलाएं आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लड़ रही होती हैं।। प्रमुख अभिनेताओं के साथ, श्रृंखला में मनीषा कोईराला, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख, महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फरदीन खान, शेखर सुमन और अध्ययन सुमन भी नवाबों की भूमिका में हैं। जियो फाइबर को कड़ी टक्कर दे रहा है एयरटेल एक्सट्रीम फाइबर, जानिए सभी फ्री ओटीटी प्लान्स की लिस्ट ₹10,000 से कम में मिलेंगे ये 5 बेहतरीन स्मार्ट टीवी, पूरा दिन देखने का मन करेगा जियो सिनेमा के दो नए प्रीमियम प्लान लॉन्च, सिर्फ ₹29 में मिलेंगे इतने फायदे

