पिता ने अपनी आंखों के सामने अपने बेटे युवराज को कार के साथ डूबते हुए देखा। राजकुमार कहते हैं कि मौके पर 80 कर्मचारी थे। कोई भी पानी में नहीं उतर। एसआईटी की टीम ने राजकुमार से उस रात का पूरा ब्यौरा लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हादसे पर नाराज हैं। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को हटा दिया है। हादसे के लिए जिम्मेदार हर चेहरे को सामने लाने की जिम्मेदारी एसआईटी को दी गई है। इन सवालों का जवाब ढूंढ रही SIT तीन राउंड में जांच होगी पूरी - एडीजी भानू भास्करपहले दिन दो राउंड पूरे, पांच घंटे मीटिंगमीटिंग के बाद उन्होंने कहा कि पांच दिन में हमे सभी पहलुओं पर जांच करके बताना है। किसकी गलती की वजह से या हम लोग क्या और कर सकते थे जिससे ये हादसा न होता। हादसे के साथ जितने भी लिंक है चाहे वो सिविक अथारिटी या पुलिस अथारिटी हो उनके रोल को एक्जामिन कर रहे है। इसके बाद हम अपनी रिपोर्ट शासन को सब्मिट करेंगे। अभी हमने फर्स्ट राउंड की मीटिंग की है। सेकेंड राउंड में हमने मौका मुआयना कर लिया है। सभी लोगों से बातचीत की जा रही है जो लोग वहां थे उनसे भी पूछताछ होगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। उनके साथ मंडलायुक्त मेरठ भानूचंद्र गोस्वामी,चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी भी मौजूद थे। दोपहर करीब सवा 12 बजे के आसपास एसआईटी की टीम नोएडा प्राधिकरण पहुंची। प्राधिकरण के बोर्ड रुम में करीब साढ़े 12 बजे मीटिंग शुरू की गई। मीटिंग में कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, प्राधिकरण एसीईओ कृष्णा करुणेश, डीएम मेधा रूपम से सवाल जवाब किए गए। जिसके बाद टीम सेक्टर-150 घटना स्थल पहुंची। इसके बाद शाम को पांच से साढ़े सात बजे तक बैठक चली।
लुधियाना में पड़ोसी की घिनौनी करतूत:दिनभर घर में बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार
पंजाब के लुधियाना में हैबोवाल इलाके के गोपाल नगर में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है।जहां बीते दिन एक युवक ने पड़ोस में रहने वाली नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने घर में बंधक बना लिया और दिनभर उसके साथ हैवानियत की। पुलिस ने पीड़िता को आरोपी के चंगुल से छुड़ाकर मेडिकल जांच के लिए भेज दिया है। सुबह किया अगवा,शाम तक बंद रहा दरवाजा जानकारी के अनुसार मंगलवार दोपहर जब नाबालिग घर के बाहर थी तभी आरोपी युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने घर के अंदर ले गया। इसके बाद आरोपी ने तुरंत घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर तक जब बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। शक होने पर जब पड़ोसी का दरवाजा खटखटाया गया तो उसने गेट नहीं खोला जिससे परिजनों का शक यकीन में बदल गया। मोहल्ले में भारी हंगामा,पुलिस ने मशक्कत के बाद गेट खुलवाया घटना की खबर फैलते ही गोपाल नगर में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई । मोहल्ले वालों ने दरवाजा खुलवाने की काफी कोशिश की और शोर मचाया लेकिन आरोपी टस से मस नहीं हुआ। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित किया गया। मौके पर पहुंची पीसीआर टीम ने कड़ी मशक्कत और सख्ती के बाद आरोपी के घर का दरवाजा खुलवाया और आदर देख की नाबालिग लड़की पूरी डरी हुई थी और ऐसा लगरहा था की उसके साथ कुछ गलत हुआ है और लड़की को वहां से बाहर निकाला।पुलिस ने रेस्क्यू के तुरंत बाद पीड़िता को सिविल अस्पताल भेजा। जहां उसका मेडिकल कराया गया है पुलिस ने आरोपी युवक को मौके से ही हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। हैबोवाल पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस ने कहा इस मामले में थाना हैबोवाल के जाँच अधिकारी ने कहा हमें सूचना मिलते ही टीम मौके पर भेज दी गई थी। बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। परिजनों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज की किया नहीं जाएगा!
लखनऊ टुडे, 21 जनवरी- आपके काम की खबर:5 लाख की आबादी झेलेगी जल संकट, कुड़िया घाट पर रहेगा डायवर्जन
नमस्कार लखनऊ, मुस्कुराइए, आज 21 जनवरी, दिन बुधवार है... हम आपके लिए आज के इवेंट और आपसे जुड़ी काम की बातों को लेकर आए हैं। इसमें बता रहे हैं कि शहर में कहां और क्या-क्या हो रहा है। बिजली किन इलाकों में कटेगी, पानी किन इलाकों में नहीं आएगा। संगीत-संस्कृति, आर्ट, ड्रामा के इवेंट्स कहां हो रहे हैं। शहर का मौसम, सिटी का ट्रैफिक, सिनेमा, स्कूल-कॉलेज से जुड़ी जानकारियां भी हैं। पढ़िए क्या कुछ हैं, आपके काम की बातें... शहर में आपसे जुड़ी सुविधाएं और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर- दैनिक भास्कर लखनऊ रिपोर्टिंग टीम से संपर्क करें-
'मैं रचिता को बेटी की तरह मानती थी। कुछ भी खाना बनाती थी तो रचिता को जरूर बुलाती थी। होली के समय मैंने उसे अपने घर में 4 दिन रखा था। मुझे क्या पता था कि जिसे मैं खाना बना-बनाकर खिला रही हूं, वही रचिता एक दिन मेरे बेटे को मार डालेगी। उसके टुकड़े-टुकड़े कर देगी। मेरा बेटा उसे गुरु मानता था। उसने जरा भी मेरे बेटे के बारे में नहीं सोचा। उसने टीचर के रिश्ते को कलंकित किया। मुझे डर लगता था कि कहीं ये लोग मेरे अन्य दोनों बच्चों को न मार दें। इसलिए मैंने कानपुर छोड़ दिया। मैं सूरत चली गई। मैं अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए 1196 किलोमीटर दूर से कानपुर छोटी बेटी को साथ आती थी।' ये कहना है कुशाग्र की मां मां सोनिया कनोडिया का। बताया कि मेरा बेटा मुझे बहुत याद आता है। मैं जब तक जिंदा हूं। तब तक उसे नहीं भूला सकती। मुझे रचिता से नफरत हो गई है। उसे और उसके साथियों को फांसी होनी चाहिए। 30 अक्टूबर 2023 को हाईस्कूल के छात्र कुशाग्र कनोडिया की कोचिंग जाते समय अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और सहयोगी शिवा गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अपर जिला जज 11 सुभाष सिंह की अदालत ने तय किया कि ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके दोस्त आर्यन ने मिलकर कुशाग्र की हत्या की थी। पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाह पेश किए गए । 13 जनवरी को आखिरी सुनवाई हुई थी। अब 22 जनवरी को कोर्ट फैसला सुनाएगी। मां बोली- हत्यारों को जब फांसी होगी, तभी आत्मा को शांति मिलेगी कुशाग्र के हत्यारों को दोषी करार देने के बाद कुशाग्र की मां ने दैनिक भास्कर ऐप की टीम से बात की। उन्होंने कहा- हत्यारों को फांसी हो, तभी बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। उस दिन (30 अक्टूबर 2023) मेरा बेटा ट्यूशन पढ़ने गया था। रास्ते से प्रभात ने उसे किडनैप कर लिया। वो ट्यूशन टीचर रचिता वत्स का बॉयफ्रेंड था, इसलिए मेरा बच्चा उसे भी अपना गुरु मानता था। इसलिए मेरा बेटा प्रभात के साथ चला गया। वहां मेरे बच्चे को मार डाला। रचिता भी वहीं मौजूद थी। मेरा बेटा साढ़े सात से 8 बजे तक घर आ जाता था। मगर उस दिन नहीं आया। मैंने उसको कॉल किया, तो उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा था। मैंने दो से तीन बार कॉल की। मगर उसका फोन बंद ही आया। मैं घबरा गई। तब मेरे छोटे बेटे ने मुझे समझाया कि मम्मा हो सकता है, कि भइया ने मोबाइल बंद कर दिया हो। थोड़ी देर रुक जाओ। मगर मेरा मन नहीं माना, मैंने तुरंत कोचिंग में फोन किया। पता चला कि मेरा बेटा कोचिंग पहुंचा ही नहीं था। कुछ देर बाद मेरे घर फिरौती का लेटर आया। गार्ड ने बताया कि रचिता की स्कूटी से कोई लेटर फेंक कर गया है। रचिता हर 10 मिनट में फोन कर कुशाग्र के बारे में पूछ रही थी इसके बाद मैंने रचिता को फोन किया। उससे पूछा कि तुम्हारी स्कूटी कहां है? वह बोली- क्या हुआ भाभी? मेरी स्कूटी तो मेरे पास है। मैंने उसे बताया कि कुशाग्र घर नहीं आया। इसके बाद रचिता हर 10 मिनट में मुझे फोन कर पूछ रही थी। क्या हुआ भाभी? कुशाग्र का कुछ पता चला क्या? फिर मैं रचिता के घर पहुंची। मैंने उससे कहा कि स्कूटी कहां है तुम्हारी तो वह बोली कि भाभी उसे तो प्रभात लेकर गया है। उसे समय वह घबराई हुई थी। वहां से हम प्रभात के घर गए। वहां मुझे स्कूटी मिली। मैंने प्रभात से पूछा तो उसने कुछ भी जानकारी होने से इनकार कर दिया। मगर मुझे उस पर शक हो गया। हम लोगों ने पुलिस को जानकारी देकर सब बता दिया। पुलिस ने पूछताछ की तो प्रभात और रचिता ने सच कबूल दिया। रात करीब 2:30 बजे मुझे पुलिस ने बताया कि रचिता ने अपने बॉयफ्रेंड और एक लड़के के साथ मिलकर मेरे बेटे को मार डाला है। मेरे बेटे के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले थे सोनिया ने बताया कि जब हम लोग प्रभात के घर पहुंचे थे वह मेरे बेटे के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने वाले थे। अगर हम लोग सही समय पर नहीं पहुंचते तो मेरे बच्चे की लाश तक नहीं मिलती। सोनिया ने बताया कि प्रभात ने पुलिस को बताया था कि घटना वाले दिन प्रभात मेरे बेटे को अपने घर के पास ले गया। उसने मेरे बेटे से कहा कि हम लोग तो गरीब आदमी हैं, तुम तो मेरे घर का पानी भी नहीं पियोगे? जिस पर मेरे बेटे ने कहा कि ऐसी बात नहीं है अंकल। लाइए मैं पानी पी लूंगा। फिर प्रभात मेरे बेटे कुशाग्र को अंदर ले गया। उसे पानी दिया। मेरा बेटा जब पानी पीकर बाहर निकलने लगा तो हत्यारों ने गला दबाकर मेरे बेटे को मार डाला। कुशाग्र के मर्डर की योजना पहले ही बना ली थी। 29 अक्टूबर को ही उसने फिरौती का लेटर लिख लिया था। प्रभात ने अपने बयान में बताया था कि फिरौती लेने के बाद वह मेरे बच्चे को काट कर गंगा में फेंकने वाले थे। 600 पेज की चार्जशीट, 240 पेज की हुई जिरह मंगलवार को कुशाग्र हत्याकांड के आरोपी ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके साथी आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा को एडीजे-11 सुभाष सिंह की कोर्ट ने दोषी ठहराया। एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि पुलिस की ओर से मामले में 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। अभियोजन की ओर से 14 गवाह कोर्ट में पेश किए गए थे। ट्रायल के दौरान 240 पेज की जिरह हुई, कोर्ट में 42 कागजात साबित कराए गए थे। साथ ही घटना से जुड़ी हुई 112 वस्तुएं पुलिस ने बरामद कराई थी। सीसीटीवी कोर्ट में दिखाए गए, जिसमें प्रभात और कुशाग्र कमरे में जाते दिखे थे। 30 लाख फिरौती का पत्र डालते हुए प्रभात और शिवा कैद हुए थे, जबकि घटना के समय प्रभात के घर के बाहर शिवा टहलते हुए दिखा था। 313 के बयान में रचिता ने प्रभात को और प्रभात ने भी रचिता को अपना प्रेमी बताया था। कोर्ट ने अपहरण और हत्या में तीन आरोपियों को और कुशाग्र को अपहरण व हत्या में दोषी ठहराया गया। इस्कॉन से पहुंचे पुजारी, कहा- सजा दिलाने के लिए की प्रार्थना कुशाग्र की हत्या का फैसला आने के जानकारी पर बिठूर स्थित इस्कॉन मंदिर से पुजारी चंदन कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बताया कि कुशाग्र बहुत ही अच्छा बच्चा था, वह त्योहार में मंदिर आता था। बहुत दिल से सेवाएं करता था। बहुत ही प्रेम से जुड़ा हुआ था, उसके साथ ऐसा हुआ तो हम लोगों को बहुत ही कष्ट हुआ। हम लोग शुरुआत से ही इस केस से जुड़े हुए थे, उसके आरोपियों को सजा दिलाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते थे। अब सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम पढ़िए- कुशाग्र की गला घोंटकर हत्या की गई थीकानपुर शहर में आचार्य नगर निवासी मनीष कनोडिया कपड़ा कारोबारी हैं। उनका बेटा कुशाग्र जयपुरिया स्कूल में 10वीं का छात्र था। 30 अक्टूबर की शाम 4 बजे कुशाग्र स्कूटी से कोचिंग के लिए निकला। रास्ते में उसे ट्यूशन टीचर रचिता वत्स का प्रेमी प्रभात मिल गया। वह उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद दोनों ओमनगर में इंद्र कुटी हाता स्थित प्रभात के घर पहुंचे। प्रभात आगे-आगे चल रहा था, उसके पीछे-पीछे हेलमेट पहने कुशाग्र जा रहा था। इसी के बगल वाले कमरे में रचिता रुकी थी, जब कुशाग्र प्रभात के घर पहुंचा, तो रचिता भी वहां आ गई। फिर प्रभात शुक्ला कुशाग्र को एक स्टोरनुमा कमरे में बहाने से लेकर गए और प्रभात की गला घोंटकर हत्या कर दी। मामले को डायवर्ट करने के लिए लेटर में लिखा- 'अल्लाह हू अकबर'हत्या के दौरान प्रभात का दोस्त आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा कमरे के बाहर खड़ा था। कुशाग्र की हत्या के बाद प्रभात और शिवा रचिता की स्कूटी लेकर कुशाग्र के घर पहुंचे। कुशाग्र के किडनैप होने और 30 लाख की फिरौती का लेटर लिखा। साथ ही मामले को डायवर्ट करने के लिए 'अल्लाह हू अकबर' भी लिख दिया। इसके बाद वह लेटर कुशाग्र के घर में फेंक आया था। लेटर फेंकने के दौरान फ्लैट के गार्ड राजेंद्र को स्कूटी पहचानी हुई लगी, उसने पास जाकर देखा तो स्कूटी के नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई थी। नंबर प्लेट में काले टेप से F को E बनाया गया था। स्कूटी रचिता की थी, घर पहुंचे कुशाग्र के परिजनगार्ड राजेंद्र ने कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया को बताया कि स्कूटी रचिता की थी, जिस पर परिजन रचिता के घर पहुंचे, जहां वो घबराई हुई बाहर आई। बोली कि मैंने कुछ नहीं किया भाभी… इस पर परिजनों ने स्कूटी के बारे में पूछा। रचिता ने कहा- मेरी स्कूटी प्रभात लेकर गया था। परिजन पुलिस के साथ इंद्रकुटी हाता पहुंचे, तलाशी ली गई, जहां प्रभात के घर के बाहर बने कमरे से कुशाग्र की डेड बॉडी बरामद की गई थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को लेकर सख्ती से पूछताछ की। रचिता ने बताया कि उसे प्रभात से शादी करनी थी। पैसों की जरूरत थी, जिस कारण उसने कुशाग्र के अपहरण की योजना बनाई थी। अपहरण की फिरौती से अमीर बनना था। पुलिस ने प्रभात को बनाया था गैंग का लीडरहत्याकांड को अंजाम देने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने प्रभात की निशानदेही पर कुशाग्र का शव प्रभात शुक्ला के घर के बाहर बने कमरे से बरामद किया था। 31 मार्च 2024 को तीनों आरोपियों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की थी। पुलिस ने गैंग का लीडर प्रभात शुक्ला को बनाया था। मुकदमा एडीजे-11 सुभाष सिंह की कोर्ट में ट्रायल पर था। ADGC भास्कर मिश्रा ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पूरी घटना को कोर्ट में साबित किया। मामले में 14 गवाह पेश किए गए थे। इसके साथ ही CCTV, सबूत, कुशाग्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा और अन्य दस्तावेजों के बारे में बताया। ADGC ने बताया कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसले की तारीख 20 जनवरी तय की है। अब हूबहू पढ़िए फिरौती के लेटर में क्या लिखा था? पहला पेजः अल्लाह पर भरोसा रखो...मैं नहीं चाहता कि आपका त्योहार बर्बाद हो, आप मेरे हाथ में पैसे रखो और लड़का 1 घंटे बाद आपके पास होगा। अल्लाह हू अकबर... इस लड़के की गाड़ी और मोबाइल दोनों आपके घर के पास होटल सिटी क्लब के सामने खड़ी है। मैं आपका नुकसान नहीं चाहता। आपसे बार-बार बोल रहा हूं कि घबराओ नहीं अल्लाह पर भरोसा रखो। दूसरा पेजः पैसे का इंतजाम होते ही घर पर पूजन वाले झंडे लगा देनाआपसे निवेदन है कि आप ये बात पुलिस, न ही अपनी लखनऊ वाली फैमिली, न ही अपने अगल-बगल किसी को न बताएं कि हमने कुशाग्र को किडनैप कर लिया है। आपके पास दो या तीन दिन का समय है। आप जल्दी से 30 लाख रुपए का इंतजाम कर लो। अगर ये बात कहीं फैली तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। जल्दी से 30 लाख रुपए का इंतजाम करो और अपना बच्चा 1 घंटे बाद घर में देखो, और पैसे लेकर रात में 2 बजे कोकाकोला चौराहे पर मिलो। मैं पैसे लेने आऊंगा, जैसे ही पैसे मेरे पास आएंगे उसके ठीक 1 घंटे बाद लड़का आपके पास होगा। और पैसे का इंतजाम हो जाए तो घर पर चारो तरफ पूजन वाले झंडे लगा देना। मैं देख लूंगा इसके बाद आपको फोन करूंगा और कोई भी होशियारी हुई तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। मेरी नजर आपके घर पर ही होगी, कोई भी बात बाहर पता चली तो आप ध्यान रखना, और आप बिल्कुल भी घबराओ नहीं, आपका लड़का बिल्कुल सही सलामत घर पहुंच जाएगा। उसकी जिम्मेदारी आपके ऊपर है। कुशाग्र के बर्थडे से शुरू हुई अपहरण-हत्याकांड की प्लानिंगकुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया ने अपने बयान में बताया था- 13 अक्टूबर 2021 को मेरे बेटे कुशाग्र का जन्मदिन था। उसमें रचिता अपने प्रेमी प्रभात शुक्ला को लेकर मेरे घर आई थी। प्रभात उस दिन पहली बार मेरे घर आया था। रचिता ने प्रभात को अपना ब्वॉयफ्रेंड बताकर हमसे मिलवाया था। इस दौरान प्रभात ने कुशाग्र से कोचिंग जाने का समय, किस रास्ते से स्कूल और कोचिंग जाता है और कब आता है यह सारी जानकारियां ले ली थी। उसी दिन चकाचौंध देख प्रभात और रचिता ने अपहरण करने का प्लान तैयार कर लिया था। फिरौती वसूलने के बाद प्रभात और रचिता हिमाचल प्रदेश में बसने वाले थे। अपहरण से पहले कराई थी नई कार की बुकिंगरचिता और प्रभात से पूछताछ मं यह भी सामने आया था कि दोनों ने प्लानिंग इस कदर तक कर ली थी, कि जरीब चौकी स्थित कार के शोरूम में दोनों कार पसंद करने गए थे, एक कार को फाइनल भी कर दिया था। बस फिरौती की रकम मिलते ही उसका एडवांस पेमेंट करके कार उठानी थी। इसके लिए सभी दस्तावेज शोरूम में जमा करा दिए थे। एक घंटे में 8 बार रचिता ने प्रभात को की थी कॉलADGC ने बताया कि हत्या के बाद प्रभात शुक्ला मृतक कुशाग्र का मोबाइल लेकर जरीब चौकी गया था, जिसे पुलिस ने तेजाब मिल कैंपस से बरामद किया। हत्याकांड के बाद जब शिवा, कुशाग्र के घर फिरौती का लेटर डालने गया था, तब रचिता ने एक घंटे के भीतर प्रभात को 7 से 8 बार कॉल किया था। घटना में तीनों आरोपियों की मिलीभगत साबित करते हुए अभियोजन ने कोर्ट को बताया था कि घटना के 15 दिन पहले प्रभात और रचिता कुशाग्र के घर गए, जहां उसकी कोचिंग के बारे में जानकारी ली। इसके बाद 14, 15 और 15 अक्टूबर को प्रभात और शिवा करीब 6 से 7 बार लंबी बातचीत हुई थी।
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज परिसर में तैयार 520 बेड का हॉस्पिटल 6 माह बाद मरीजों के लिए खुलेगा। अब जिला मुख्यालय पर मरीजों के लिए हजार से अधिक बेड की सुविधा होगी। पहले से जिला अस्पताल में संचालित 627 बेड तथा कॉलेज के नए हॉस्पिटल में 520 बेड की सुविधा होगी। नए बने हॉस्पिटल व जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए जरूरी उपकरणों की व्यवस्थाओं का आकलन करने जोधपुर मेडिकल कॉलेज की 5 सदस्यीय टीम मंगलवार को पहुंची। टीम के डॉ. विजय वर्मा, डॉ. सावित्री शर्मा, डॉ. अमित सागर, डॉ. विहान चौधरी, डॉ. किशोर खत्री की ओर से कॉलेज के नए हॉस्पिटल में कैथ लैब, एमआरआई, सीटी स्कैन, सेंट्रल लैब, वार्डों में इक्विपमेंट, मरीजों के बैठने की व्यवस्था सहित बिंदुओं पर गहन जांच कर रिपोर्ट बनाई गई है, जो जोधपुर मेडिकल कॉलेज के मार्फत सरकार को भेजी जाएगी। प्राचार्य अनूपसिंह गुर्जर की ओर से उपकरणों सहित जरूरी सामान व व्यवस्था को देखते हुए राजमेस को 90 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा गया था। राजमेस व एनएमसी की ओर से जोधपुर मेडिकल कॉलेज की टीम को नए हॉस्पिटल व अस्पताल में पुराने व नए उपकरणों के गैप एनालिसिस के लिए भेजा गया था। टीम ने सुबह 11 से दोपहर 2:30 बजे तक कॉलेज के नए हॉस्पिटल व जिला अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की है। ऐसे में अब नए हॉस्पिटल के लिए जल्द उपकरणों व जरूरी सामान की खरीद होगी। कॉलेज परिसर में 520 बेड के नए हॉस्पिटल का सिविल वर्क करीब पूरा हो गया है। अब फिनिशिंग सहित कुछ छोटे-मोटे काम शेष हैं। अब बारीकी के काम शुरू किए जा रहे हैं। उपकरणों व फर्नीचर की व्यवस्था भी साथ-साथ जारी है। आने वाले 6 महीने में हॉस्पिटल शुरू हो जाएगा। विभागाध्यक्षों से यूनिट में जरूरी उपकरणों व वार्डों की व्यवस्था को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। 6 माह बाद गायनिक व पीडिया विभाग को छोड़कर सभी नए हॉस्पिटल में शिफ्ट होंगे नए हॉस्पिटल के खुलने के साथ जिला अस्पताल में गायनिक व पीडिया विभाग को छोड़कर सभी विभागों को शिफ्ट किया जाएगा। एमसीएच विंग में पीडिया विभाग तथा न्यू टीचिंग बिल्डिंग व पुरानी बिल्डिंग में गायनिक विभाग संचालित होंगे। अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के साथ मेडिसिन ओपीडी की व्यवस्था होगी। आईसीयू में गायनिक व पीडिया के मरीजों के साथ अन्य गंभीर मरीजों की भी व्यवस्था होगी। सेटेलाइट अस्पताल की भांति यहां गायनिक व पीडिया के साथ इमरजेंसी चलेगी। टोकन सिस्टम से मरीज देखने की प्रक्रिया होगी ^मिशन स्माइल ऑन चेयर व क्यू मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सरकार की योजनाएं नए हॉस्पिटल में प्रारंभ की जाएंगी। प्रत्येक मरीज व उसके रिश्तेदार को बैठने की व्यवस्था होगी। टोकन सिस्टम से मरीज को देखने की प्रक्रिया लागू की जाएगी। कैफेटेरिया की सुविधा मिलेगी। जोधपुर मेडिकल कॉलेज की 5 सदस्यीय टीम की ओर से कॉलेज के नए हॉस्पिटल व जिला अस्पताल में गैप का एनालिसिस किया गया है। रिपोर्ट जोधपुर कॉलेज के जरिए सरकार को भेजी जाएगी। — डॉ. अनूपसिंह गुर्जर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज बाड़मेर
कानपुर का मौसम पिछले दो दिन में बदला है। सुबह के समय मौसम साफ रहने के साथ-साथ गलन में कमी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को न्यूनतम तापमान 8.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो कि सामान्य से 1.2 डिग्री ज्यादा है। वहीं प्रदूषण की वजह से एक्यूआई 230 के पार रहा। मौसम में हल्की धुंध सी नजर आई। अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से 3.8 डिग्री ज्यादा है। मौसम विभाग के अनुसार 23 व 24 जनवरी को बारिश के आसार हैं। शहर के अलावा अन्य जिलों में पड़ रहे कोहरे के कारण मंगलवार 15 ट्र्रेनें देरी से कानपुर सेंट्रल पहुंची। आनंद विहार से चलकर दरभंगा जाने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस (15558) 09.56 घंटे व भागलपुर से आनंद विहार जाने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस (22405) 02.13 घंटे लेट रही। दिन में निकलेगी धूप, दो दिन बाद बारिशसीएसए के कृषि तकनीकी मौसम अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दो दिनों में आसमान साफ रहेगा। इसके बाद 23 व 24 जनवरी को मध्य तेज हवाओं, गरज चमक के साथ स्थानीय स्तर पर हल्की वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा सुबह व रात के समय हल्के कोहरा दिखाई देने की संभावना है। दिन में धूप निकलने से ठंड से राहत मिलेगी। 1260 ओपीडी में आए, 70 किए गए भर्ती ठंड से राहत भले ही मिल रही हो लेकिन दिल के मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को कार्डियोलाजी में 1260 मरीज ओपीडी में अपना इलाज कराने पहुंचे। इसके अलावा पांच मरीजों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई थी। गंभीर रूप से बीमार 70 मरीजों को भर्ती किया गया है। 181 मरीज इमरजेंसी में आए। डॉक्टरों का कहना है कि दिल के मरीजों को सुबह व रात के समय एहतियात बरतना है।
उत्तर प्रदेश दिवस 24 जनवरी को लखनऊ में भव्य तरीके से मनाया जाएगा। इस दिन लखनऊ में काशी की कचौड़ी-जलेबी, बनारसी पान और ठंडाई के स्टॉल लगेंगे। बता दें की काशी के पारंपरिक खान-पान की अपनी पहचान है। ऐसे में काशी के इन पारंपरिक खान-पान को ODOC (वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजिन) के तहत ब्रांड के रूप में विकसित करने की तैयारी है। लखनऊ में यूपी दिवस पर पूरे प्रदेश से खान-पान की वस्तुओं का स्टॉल लगेगा। काशी के खानपान को मिलेगी नई उड़ान जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के सहायक आयुक्त विनोद कुमार वर्मा ने बताया - लखनऊ में आयोजित यूपी दिवस के कार्यक्रम में वाराणसी का स्टॉल भी लगेगा। जिसपर ODOC के तहत वाराणसी की जीआई टैग प्राप्त तिरंगा बर्फी, बनारसी-पान, ठंडाई, कचौड़ी-जलेबी, लौंगलता और प्रसिद्ध हींग की कचौड़ी बनाई जाएगी। इसी जगह वन डिस्ट्रिक वन कुजिन का चयन भी होना है। इससे काशी के पारंपरिक खान-पान को नई उड़ान मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेगी काशी की पाककला विनोद कुमार वर्मा ने बताया - सरकार का उद्देश्य काशी की पाक कला को उसके ऑरिजनल स्वाद और उसकी खास पहचान के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच और पहुंचाना है। ODOC के तहत व्यंजनों की ब्रांडिंग होगी और उन्हें पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए सरकार प्रोत्साहित करेगी। इस योजना के तहत गुणवत्ता और स्वच्छता के साथ ही साथ खाद्य सुरक्षा का भी ख्याल रखा जाएगा। इन्हे प्राथमिकता दी जाएगी। जीआई टैगिंग को मिलेगा बढ़ावा जीआई मैन के नाम से प्रसिद्ध वाराणसी के पद्मश्री डॉ रजनीकांत ने बताया - ODOC के आने से सभी उत्पादों को काशी में खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया जा सकेगा। काशी के स्वाद को एक अनूठी पहचान मिलेगी। साथ ही सरकार की इस योजना के अंतर्गत उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ेगी जिसके बाद उसकी जीआई टैगिंग का रास्ता साफ़ हो जाएगा। इससे स्थानीय व्यंजनों के मालिकों की पहचान सुरक्षित हो जाएगी। कारीगरों को मिलेगी नई उड़ान पद्मश्री डॉ रजनीकांत ने कहा - ODOC से काशी का व्यंजन सुरक्षित होगा। साथ ही उसे बनाने वाले पारंपरिक कारीगर और दुकानदार भी संरक्षित होंगे। क्योंकि उन्हें जीआई टैगिंग का रास्ता साफ़ हो जाएगा और काशी के लाल पेड़ा, तिरंगा बर्फी की तरह उन्हें भी विश्व पटल पर अलग पहचान मिलेगी।
राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन के तहत अब गांव की बौद्धिक संपदा, कला साहित्य, मंदिर, मेले, उत्पाद और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण करना आसान होगा। इसके लिए आने वाले समय में पेटेंट और जीआई-टैग दिलाने जैसी कवायद की जाएगी। हाल ही में संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी किए गए मेरा गांव-मेरी धरोहर' के नए दिशा निर्दशों में बताया गया है कि देश के 6.5 लाख गांवों का केवल प्रशासनिक डेटा ही नहीं, बल्कि उनका सांस्कृतिक डीएनए' भी डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। वे 24 जनवरी तक गांव–गांव जाकर उन अनकही कहानियों, प्राचीन मंदिरों, भूली-बिसरी लोक कथाओं और विलक्षण हस्तशिल्प को खोज निकालेंगे, जो अब तक सरकारी रिकॉर्ड में नहीं थे। फिर 26 जनवरी को पूरे प्रदेश में ग्राम सभाओं में यह रिकॉर्ड रखा जाएगा। सर्वेक्षक केवल डेटा एंट्री नहीं करेंगे, बल्कि बुजुर्गों और स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत कर गांव के प्राचीन नाम' और उनके पीछे छिपे इतिहास' को भी दर्ज करेंगे। इसमें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थल या कला का विवरण देते समय इंटरनेट से डाउनलोड की गई फोटो मान्य नहीं होगी। सर्वेक्षकों को मौके पर जाकर मूल फोटो और वीडियो अपलोड करने होंगे। इसमें गांव की भौगोलिक स्थिति से लेकर वहां के प्रसिद्ध व्यक्तित्व जैसे स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, ऐतिहासिक स्मारकों, उपासना स्थलों, नदियों का भी विवरण लिया जाएगा। एक बार एकत्रित किए गए रिकॉर्ड का फिर सत्यापन भी कराया जाएगा। इसमें गुमनाम कलाकारों की खोज, बुनकर, कुम्हार, गायक या लोक नर्तक जिन्हें कोई नहीं जानता, अब पोर्टल के माध्यम से वैश्विक पहचान पाएंगे। पारंपरिक कौशल' और अमूर्त विरासत' के अंतर्गत लोक संगीत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और स्थानीय व्यंजनों को शामिल किया जाएगा। ऐसे कलाकारों का डेटाबेस बनने से उन्हें सीधे सरकारी योजनाओं, पेंशन और ऋण सुविधाओं से जोड़ा जा सकेगा। साथ ही गांवों में पर्यटन बढ़ सकेगा। आजीविका में सुधार संभव होगा। 3 फरवरी को तैयार होगा फाइनल ड्राफ्ट गांवों में 24 जनवरी तक प्री-सर्वे के बाद 26 जनवरी को ग्राम सभाओं में रिकॉर्ड का अनुमोदन होगा। 3 फरवरी को फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। सरकार ने एक विस्तृत सांस्कृतिक सर्वेक्षण फार्म जारी किया है। 24 जनवरी तक अधिकारियों द्वारा फील्ड सर्वे के माध्यम से यह फॉर्म भरा जाएगा। सर्वे को ग्राम सभा से अनुमति मिलने के बाद अंतिम माना जाएगा। इसके पश्चात, ब्लॉक स्तर पर गठित एक विशेष समिति दोबारा सत्यापन करेगी। फिर MGMD पोर्टल पर देख सकेंगे।
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक आज मेरठ पहुंचेंगे। वह पहले बागपत और फिर हापुड़ के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। हापुड़ से लौटते वक्त वह शाम को धीरखेड़ा स्थित गौ-आश्रय स्थल का निरीक्षण करेंगे और उसके बाद सर्किट हाउस में उनका रात्रि विश्राम रहेगा। अब एक नजर उनके कार्यक्रम पर उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार- डिप्टी सीएम बृजेश पाठक बुधवार सुबह अपने दौरे की शुरुआत जनपद बागपत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण से करेंगे। इसके बाद वह यहां कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। यहां के बाद वह सीधे हापुड़ पहुंचकर पुलिस लाइन, नए जिला कारागार के निर्माण कार्यों का निरीक्षण करेंगे। बागपत व हापुड़, दोनों ही जगह वह पार्टी कार्यालय पहुंचकर वहां जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे। कलेक्ट्रेट में जनकल्याणकारी योजनाओं व विकास कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। मेरठ सर्किट हाउस में करेंगे रात्रि विश्राम डिप्टी सीएम हापुड़ जनपद के भ्रमण के बाद बुधवार शाम को ही मेरठ प्रस्थान करेंगे। यहां खरखौदा के धीरखेड़ा स्थित गौ आश्रय स्थल का वह निरीक्षण करेंगे और उसके बाद सीधे मेरठ सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम के लिए रुकेंगे। गुरुवार सुबह 8 बजे उनका मेरठ दौरा शुरू होगा। सबसे पहले वह लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करेंगे। यही उन्हें 100 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक एवं लेक्चर थिएटर भवन के निर्माण कार्य का निरीक्षण भी करना है। लगभग 20 घंटे ठहरेंगे मेरठ में गुरुवार सुबह 2 घंटे के लिए डिप्टी सीएम सहारनपुर के देवबंद स्थित ग्राम जड़ौदा जट जाएंगे। यहां वह लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री कुंवर बृजेश सिंह के पिता डॉ राजकुमार रावत को श्रद्धांजलि देंगे। देवबंद से लौटते समय वह मेरठ के सरधना स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय दादरी का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वह सरस्वती लोग स्थित जागेश्वर धाम मंदिर में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। लगभग 20 घंटे वह मेरठ में रहेंगे। सूरजकुंड कैंप कार्यालय पर करेंगे बैठकमेरठ भ्रमण के दौरान गुरुवार दोपहर में डिप्टी सीएम सूरजकुंड स्थित महापौर कैंप कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारी गण और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। यहां से उन्हें सी ब्लॉक शास्त्री नगर में अजय गुप्ता के यहां जाना है। दोपहर में वह कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर विभिन्न सरकारी योजनाओं की समीक्षा करेंगे। लगभग 4 बजे बच्चा पार्क स्थित पीएल शर्मा स्मारक में आयोजित कवि सम्मेलन में शामिल होंगे। करीब एक घंटा ठहरने के बाद वह हिंडन एयरपोर्ट गाजियाबाद के लिए रवाना हो जाएंगे।
कस्बे के रेफरल अस्पताल में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। बिजली का करंट लगने से झुलसे पांच वर्षीय बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां आधा घंटे तक कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। इलाज के अभाव में बच्चे की हालत और बिगड़ती चली गई। बाद में आनन-फानन में अलवर रैफर किया गया, जहां ले जाते समय रास्ते में बच्चे की मौत हो गई। कस्बा निवासी पवन प्रजापति का पांच वर्षीय पुत्र सुमित घर पर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक खुले बिजली के तार की चपेट में आने से उसे तेज करंट लग गया। परिजन तुरंत उसे गंभीर हालत में पहाड़ी के सरकारी रेफरल अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद करीब आधा घंटे तक बच्चा गंभीर अवस्था में इलाज के बिना अस्पताल की टेबल पर पड़ा रहा। परिजन खुद उसके शरीर की मालिश करते रहे, लेकिन मौके पर कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। हंगामे की सूचना मिलने पर ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी मंसूर अली ने सोमका अस्पताल से चिकित्सक इरफान को बुलाकर रेफरल अस्पताल में बैठाया। बताया गया कि चिकित्सक करीब एक बजे अस्पताल पहुंचे। ट्रेनिंग और मीटिंग में डॉक्टर, अस्पताल भगवान भरोसे पहाड़ी रेफरल हॉस्पिटल में कुल 22 स्टाफ कर्मी पदस्थ हैं, जिनमें तीन चिकित्सक शामिल हैं। मंगलवार को ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंसूर अली द्वारा अंधवाड़ी चिकित्सा प्रभारी देवेंद्र पालीवाल और रॉफ चिकित्सा प्रभारी भुवनेश जोशी की ड्यूटी पहाड़ी रेफरल हॉस्पिटल में लगाई गई थी। हालांकि, ड्यूटी के बावजूद दोनों चिकित्सक अस्पताल नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार, डॉ. भुवनेश जोशी चिकित्सा विभाग की तीन दिवसीय मेंटल ट्रेनिंग में भाग लेने के लिए जयपुर गए हुए थे। वहीं डॉ. देवेंद्र पालीवाल को जिला हेल्थ सोसायटी की बैठक में बुला लिया गया था। सुबह ही इन दोनों चिकित्सकों की अनुपस्थिति की जानकारी मिलने के बावजूद अस्पताल में वैकल्पिक चिकित्सक की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में रेफरल हॉस्पिटल पर केवल डेंटल चिकित्सक डॉ. आरती धाकड़ और नर्सिंग स्टाफ में करतार सिंह, सुरेन्द्र सिंह व गिरिजा वर्मा ही मौजूद थे। परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में हंगामा चिकित्सक नहीं मिलने से गुस्साए परिजनों और कस्बे के लोगों ने चिकित्सक कार्यालय में तोड़फोड़ कर हंगामा किया। सूचना पर अस्पताल कर्मचारियों ने पुलिस को बुलाया। थाना प्रभारी योगेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे और भीड़ को शांत कराया। हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन ने बच्चे को गंभीर अवस्था में अलवर रैफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। उपखंड अधिकारी को दी शिकायत मृतक बच्चे के ताऊ अशोक कुमार ने उपखंड अधिकारी को शिकायत देकर बताया कि पहाड़ी उपखंड स्तर का अस्पताल होने के बावजूद वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। आधा घंटे तक इलाज नहीं मिलने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ी। उन्होंने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। करंट लगने से पीड़ित पक्ष जिस बच्चे को अस्पताल लेकर आया था, वह मृत अवस्था में था। इसके बावजूद मौके पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ द्वारा ट्रीटमेंट दिया गया। मामले को लेकर विभागीय स्तर पर तथ्यों की जांच की जा रही है। -विजय बंसल, सीएमएचओ, डीग
जोधपुर रेल मंडल ने बनाड़ रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं में विस्तार करते हुए एक अहम फैसला लिया है। अब यहां यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। रेलवे ने बनाड़ स्टेशन पर नए फुट ओवर ब्रिज के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट पर रेलवे 3.30 करोड़ रुपये खर्च करेगा। टेंडर प्रक्रिया जारी, एक साल में पूरा होगा काम जोधपुर डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग और सुविधाओं को अपग्रेड करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही टेंडर फाइनल होगा, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य है कि काम शुरू होने के एक साल के भीतर पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाए। 29 मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा होगा पुल डीआरएम त्रिपाठी ने तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि बनाड़ स्टेशन पर बनने वाला यह एफओबी करीब 29 मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा होगा। वर्तमान में स्टेशन पर दो प्लेटफॉर्म हैं। अब तक यात्रियों को पटरी पार करने या लंबी दूरी तय करने की मज़बूरी रहती थी, लेकिन इस पुल के बनने से वे सुरक्षित और सुगम तरीके से एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक आ-जा सकेंगे। बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों को मिलेगी बड़ी राहत डीआरएम के अनुसार, यह एफओबी विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और अन्य यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा। इससे न केवल दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी, बल्कि यात्रियों को एक सुरक्षित यात्रा का माहौल भी मिलेगा।
गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र के सिंघड़िया मॉडल शॉप के पास मंगलवार की देर शाम हुई फायरिंग में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के समय गोली सीधे युवक के पेट में लगी। घायल को तुरंत पास के नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर उसे शहर के एक निजी अस्पताल इसके बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि एक युवती का बर्थडे मनाने की तैयारी चल रही थी। इस दौरान कहासुनी के बाद मारपीट होने लगी। आरोप है कि तभी नाराज युवती ने पिस्टल से गोली चलाई, जो युवक के पेट में लगी। घटना के बाद युवती अपने साथियों के साथ भागने का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय लोगों ने घेर कर रोक लिया और पुलिस को सूचना दी। कैंट पुलिस ने इस मामले में एक युवती सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया है। जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। घटना के दौरान काफी भीड़ जुट गई थी। लोग अपने मोबाइल से मारपीट का वीडियो भी बनाए हैं। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। देखें 2 तस्वीरें- अब विस्तार से जानें पूरा मामला पुलिस के अनुसार हरपुरबुदहट थाना क्षेत्र की रहने वाली अंशिका कैंट इलाके के सिंघड़िया में किराये के कमरे में रहती है। मंगलवार को उसका जन्मदिन था। वह अपने जन्मदिन पर मित्रों के साथ कार से मॉडल शॉप के पास आई थी। अंशिका का कहना है कि वह जन्मदिन पार्टी मना रही थी, जबकि वहां से गुजर रहे विशाल मिश्रा, जंगल सिकरी निवासी अमिताभ निषाद, उसका भाई शैलेश और दाेस्त संदीप उसे देखकर रुके। जहां अंशिका और विशाल के बीच किसी व्यक्तिगत कारण से विवाद शुरू हो गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, विशाल को संदेह था कि अंशिका उसकी पत्नी को अपने साथ घुमा रही है, यही बात विवाद का कारण बनी। कहासुनी के दौरान अंशिका ने अपने पास रखी पिस्टल निकाल ली। विवाद के बीच छीना-झपटी के दौरान गोली चल गई, जो विशाल के चालक अमिताभ निषाद के पेट में लगी। अमिताभ खोराबार थाना क्षेत्र के जंगल सिकरी बाईपास के निवासी हैं। वह एक नर्सिंगहोम के मैनेजर के चालक के रूप में काम करते हैं। गोली लगते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान अंशिका और उसके कुछ साथी भागने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन आसपास के लोगों ने उन्हें घेर लिया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर अंशिका, विशाल और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया। साथ ही पिस्टल को जब्त किया गया। अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। सड़क पर बवाल के बाद चली गोलीसड़क पर बवाल के बाद दिन दहाड़े गोली चलने की वारदात के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। घटना स्थल पर उपस्थित लोगों ने बताया कि गोली चलने से इलाके में भारी डर का माहौल बन गया था। घायल अमिताभ को नजदीकी नर्सिंगहोम में ले जाया गया। जहां गंभीर हालत के कारण शहर के मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया है। जहां डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी कब्जे में ले लिया है, जिससे पूरे घटनाक्रम की पुष्टि होगी। वहीं, स्थानीय लोग भी पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी में मदद कर रहे हैं। इस संबंध में कैंट सीओ योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि अंशिका पर पहले भी एक चोरी का मामला खोराबार थाने में दर्ज है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और इस बात का पता लगाया जा रहा है कि घटना किन परिस्थितियों में और क्यों हुई। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
झांसी के समथर थाना क्षेत्र में पांचवीं कक्षा के एक छात्र के साथ मोहल्ले के ही तीन किशोरों द्वारा कुकर्म किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित बच्चे ने जब इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसके गुप्तांग से खून निकल आया। आरोपियों ने बच्चे को जान से मारने की धमकी देते हुए उसे अपने पैर छूने पर मजबूर किया और कहा कि अगर किसी को बताया तो हत्या कर शव के टुकड़े नहर में फेंक देंगे। खेलते समय सूने घर में ले गए आरोपी पीड़ित छात्र की मां ने बताया कि वह मूल रूप से जालौन जिले के नदी गांव की रहने वाली हैं और इन दिनों अपने मायके समथर में बच्चों के साथ रह रही थीं। 18 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे उनका 11 वर्षीय बेटा घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान मोहल्ले के तीन किशोर उसे बहला-फुसलाकर पास के एक सूने घर में ले गए, जहां उसके साथ अश्लील हरकतें की गईं। आधे घंटे तक बच्चे से की जबरदस्ती मां का आरोप है कि आरोपियों ने बच्चे के साथ जबरन अश्लील कृत्य किए। जब छात्र ने इसका विरोध किया और कपड़े उतारने से इनकार किया तो उसे थप्पड़ों और लात-घूंसों से पीटा गया। बच्चे की छाती पर लात मारी गई और वह लगातार रोता रहा। करीब 30 मिनट तक बच्चे को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। आरोपी बोले, 'रेप से बचना है तो पैर छू’ पीड़ित की मां ने बताया कि आरोपियों ने बच्चे को न्यूड करने की कोशिश की, फिर रेप करने की बात कही। उन्होंने बच्चे को छोड़ने से पहले शर्त रखी कि वह तीनों के पैर छूकर यह कसम भी खाए कि घटना की जानकारी किसी को नहीं देगा। डर के मारे बच्चे ने ऐसा ही किया, जिसके बाद आरोपियों ने उसे लात मारकर वहां से भगा दिया। बदहवास हालत में घर पहुंचा बच्चा घटना के बाद बच्चा बदहवास हालत में घर पहुंचा। उसका चेहरा लाल पड़ गया था और वह उल्टियां कर रहा था। पूछने पर उसने पूरी आपबीती अपनी मां को बताई। मां का कहना है कि मारपीट और कुकर्म के कारण बच्चा न तो ठीक से पानी पी पा रहा था और न ही चल पा रहा था। उसके गुप्तांग से खून भी निकल रहा था। थाने में मेडिकल की जगह कराया गया राजीनामा पीड़ित की मां ने आरोप लगाया कि जब वह बेटे को लेकर समथर थाने पहुंचीं तो पुलिस ने तत्काल मेडिकल कराने की बजाय उन्हें सुलह करने की नसीहत दे डाली। आरोप है कि थाने में मौजूद एक सफाईकर्मी ने बताया कि अधिकारियों से बात हो चुकी है और आरोपियों के परिजन इलाज कराने का भरोसा दे रहे हैं। इसी बहाने उनसे कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। राजीनामे में कुकर्म का जिक्र नहीं घर पहुंचने पर जब पीड़ित की मां के पिता ने सुलहनामे को पढ़ा तो उसमें कुकर्म की घटना का कोई जिक्र नहीं था। केवल बच्चों के बीच मारपीट की बात लिखी गई थी। मां का कहना है कि सुलह के बाद न तो आरोपियों ने इलाज कराया और न ही हालचाल लेने आए। अब सीओ के पास पहुंची पीड़ित की मां न्याय न मिलने पर पीड़ित बच्चे की मां मंगलवार को सीओ मोठ के पास पहुंचीं और पूरे मामले की शिकायत की। सीओ ने मामले की जांच कर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस पूरे मामले में समथर थाना प्रभारी निरीक्षक अतुल कुमार का कहना है कि यह मामला बच्चों के आपसी विवाद से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि पीड़ित बच्चा पहले से बीमार रहता है, जिसका इलाज विपक्षी पक्ष द्वारा कराए जाने की शर्त पर बच्चे की मां ने थाने में राजीनामा किया था। थाना प्रभारी के मुताबिक यह मामला कुकर्म का नहीं है और न ही पुलिस द्वारा किसी तरह का जबरन राजीनामा कराया गया है।
फतेहाबाद में वकीलों का वर्क सस्पेंड आज तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहेगा। डीएसपी के रीडर का सिक्योरिटी गार्ड व वकील के साथ हुए विवाद का दो दिन बाद भी निपटारा नहीं हो सका। अब पुलिस से बढ़ी नाराजगी के बाद फतेहाबाद बार एसोसिएशन ने हरियाणा व पंजाब के सभी जिलों की बार एसोसिएशनों से समर्थन मांगा है। बता दें कि, फतेहाबाद शहर स्थित कोर्ट परिसर की पार्किंग में कार खड़ी करने को लेकर सोमवार को डीएसपी (ट्रैफिक) जगदीश काजला के रीडर मुकेश कुमार का सिक्योरिटी गार्ड व एक वकील के साथ विवाद हो गया था। इसके बाद वकीलों ने वर्क सस्पेंड कर दिया। डीएसपी के रीडर पर कार्रवाई की मांग की जा रही है। जानिए... इस मामले में कब क्या हुआ पुलिस ने दी यह सफाई.... इस संबंध में एसपी सिद्धांत जैन के हवाले से फतेहाबाद पुलिस ने मीडिया को पांच प्वाइंट की प्रेस रिलीज भेजी। जिसमें कहा गया कि कभी भी किसी भी अधिवक्ता के साथ किसी प्रकार का न तो कोई दुर्व्यवहार किया गया है और न ही भविष्य में किया जाएगा। इस समस्या के समाधान के लिए न सिर्फ थाना एवं चौकी प्रबंधकों, डीएसपी बल्कि स्वयं एसपी द्वारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बार एसोसिएशन के प्रधान एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बातचीत की गई है। बार एसोसिएशन प्रधान द्वारा मीटिंग में सहमति भी जताई गई थी। डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी इन्क्वायरी प्रेस रिलीज में कहा गया कि संबंधित कर्मचारी के कृत्य की जांच के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारी को इन्क्वायरी सौंपी जा चुकी है, जिसकी रिपोर्ट अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसी भी व्यक्ति चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या नहीं, सबको अपना पक्ष रखने का अधिकार है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल है। बिना जांच के किसी व्यक्ति को दोषी करार देना अनुचित ही नहीं अवैध भी है। सभी अधिवक्ताओं एवं अन्य सभी पक्षों के साथ सम्मान के साथ कार्य करने के लिए फतेहाबाद पुलिस कटिबद्ध है। फिर भी यदि किसी की कभी भी भावना आहत हुई है तो इसके लिए क्षमा। यह बोले बार एसोसिएशन के प्रधान फतेहाबाद बार एसोसिएशन के प्रधान दिनेश गैरा ने बताया कि सेशन जज के ऑफिस में एसपी सिद्धांत जैन से बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि डीएसपी या एसएचओ को वकीलों के बीच भेजेंगे ताकि मामला का निपटारा किया जा सके। मगर न डीएसपी आया न एसएचओ। पुलिस जान-बूझकर मामले को लंबा खींच रही है। जब तक वकीलों के बीच आकर कोई पुख्ता आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक हमारा धरना खत्म नहीं होगा। हमने पंजाब-हरियाणा के बार एसोसिएशनों से समर्थन मांगा है। वकीलों के सम्मान के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
इटावा के मकसूदपुरा मोहल्ले में रुपये के लेनदेन से जुड़े विवाद ने एक महिला की जान ले ली। रिश्तेदार को उधार दिए गए 20 हजार रुपये वापस मांगने पर तानों और अपमान से आहत होकर दो बच्चों की मां ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका के पति ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि घटना से कुछ घंटे पहले कोतवाली में शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। महिला की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मृतका की पहचान मकसूदपुरा निवासी 30 वर्षीय विमला देवी पत्नी सुनील कुमार के रूप में हुई है। पति सुनील कुमार ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले उनकी पत्नी ने अपने भाई उमेश के साले विपिन निवासी कुदरकोट औरैया को उसकी शादी के लिए 20 हजार रुपये उधार दिए थे। तब से विपिन रुपये लौटाने में टालमटोल करता रहा और बार बार आज कल कहकर बात टाल देता था। सुनील के अनुसार सोमवार सुबह विमला ने विपिन को फोन कर रुपये वापस मांगे थे। आरोप है कि रुपये देने के बजाय विपिन और उसकी पत्नी ने विमला से अभद्रता की और उसके चरित्र पर सवाल उठाए। इस बातचीत से विमला बेहद आहत हो गई। दोपहर में जब सुनील घर पहुंचे तो विमला रोते हुए मिली और उसने पूरी घटना बताकर दोनों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पति पत्नी कोतवाली पहुंचे और विपिन व उसकी पत्नी के खिलाफ लिखित तहरीर दी। सुनील का आरोप है कि पुलिस ने उनकी तहरीर को नजरअंदाज कर दिया और बिना किसी कार्रवाई के उन्हें थाने से लौटा दिया।पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। अगर पुलिस समय से कार्रवाई कर देती तो शायद पत्नी आत्महत्या नहीं करती। शाम करीब छह बजे बड़े बेटे रुद्र ने फोन कर सूचना दी कि मां फंदे से लटकी हुई है। सुनील जब घर पहुंचे तो पड़ोस के लोग विमला को फंदे से उतारकर अस्पताल ले जा चुके थे। वहां डॉक्टरों ने विमला को मृत घोषित कर दिया। सीओ सिटी अभय नारायण राय ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला रुपये के लेनदेन से जुड़ा हुआ है। कोतवाली में शिकायत दिए जाने की बात भी सामने आई है। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बरेली के आंवला की अनिरुद्धपुर गौशाला में पिछले सप्ताह मकर संक्रांति के दिन हुए शर्मनाक घटनाक्रम के बाद अब प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में है। भूख और बदहाली के कारण पांच गायों की मौत के मामले में डीएम अविनाश सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर शिकंजा कस दिया है। एक सप्ताह पहले जब गौशाला में लाशों के ढेर और तड़पती गायों की तस्वीरें वायरल हुई थीं, तब बरेली से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। अब इस मामले में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद ग्राम प्रधान से लेकर सचिव तक पर गाज गिरी है। ADM की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, प्रधान और सचिव ने बरती गंभीर लापरवाहीघटना के तुरंत बाद एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह और एसडीएम विदुषी सिंह ने मौके का मुआयना किया था। गहन जांच और साक्ष्यों के संकलन के बाद यह साफ हो गया कि गौशाला की हालत बद से बदतर होने के पीछे सीधे तौर पर स्थानीय प्रबंधन जिम्मेदार था। डीएम ने बताया कि प्रधान और सचिव को संयुक्त रूप से देखभाल की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन दोनों ने ही इसमें घोर उदासीनता बरती। अधिकारियों ने माना कि अगर समय रहते चारा और इलाज मिलता, तो बेजुबानों की जान बचाई जा सकती थी। सचिव शिप्रा सिंह निलंबित, CVO और वेटनरी ऑफिसर पर भी गिरेगी गाजइस मामले में ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) शिप्रा सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कानूनी शिकंजा कसा गया है। कार्रवाई यहीं नहीं रुकी, प्रशासनिक हंटर अब विभाग के बड़े अफसरों की ओर मुड़ गया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. मनमोहन पांडेय के तबादले और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय वर्मा के निलंबन के लिए शासन को सिफारिश भेजी गई है। डीएम ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पशुधन मंत्री के क्षेत्र में बदहाली, विपक्ष ने अब भी बना रखा है दबावचूँकि यह मामला सीधे तौर पर पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. केबी त्रिपाठी ने इस कार्रवाई को केवल 'लीपापोती' करार देते हुए कहा कि सरकार केवल वोट के लिए गाय का नाम लेती है। विपक्ष का आरोप है कि मकर संक्रांति जैसे पावन दिन पर हुई इस 'गौ-हत्या' के लिए केवल छोटे कर्मचारी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था जिम्मेदार है। DM का पक्ष: ‘लापरवाही नाकाबिले बर्दाश्त, प्रधान-सचिव पर तय की गई जिम्मेदारी’जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आंवला तहसील के अनिरुद्धपुर गौशाला में लापरवाही की जो रिपोर्ट प्राप्त हुई है, वह बेहद गंभीर है। डीएम के मुताबिक, प्रथम दृष्टया जांच और फोटोग्राफ्स से यह स्पष्ट हुआ है कि ग्राम प्रधान और सचिव ने अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह उदासीनता बरती। गौवंश की देखभाल करना इनकी संयुक्त जिम्मेदारी थी, जिसमें ये विफल रहे। यह पूरी तरह नाकाबिले बर्दाश्त है।उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि दैनिक भास्कर और अन्य माध्यमों से जानकारी मिलते ही एडीएम प्रशासन और एसडीएम आंवला को मौके पर भेजा गया था। डीएम ने कहा, हमने प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और सचिव को निलंबित कर दिया है। साथ ही, दोषी पशु चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। हमारा मकसद साफ है- सरकारी योजनाओं में लापरवाही करने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी, जो भविष्य के लिए नजीर बनेगी। खबर के मुख्य अंश: एक नज़र में
नमस्कार, कानपुर में कल (मंगलवार) की बड़ी खबरें… 16 साल के कुशाग्र कनोडिया की किडनैपिंग और हत्या के मामले में कोर्ट ने 3 आरोपियों को दोषी करार दिया। अपर जिला जज-11 सुभाष सिंह की अदालत ने तय किया कि ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके दोस्त आर्यन ने मिलकर कुशाग्र की हत्या की थी। दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। सर्वर फॉल्ट के चलते सुबह पहली शिफ्ट की परीक्षा रद्द कर दी गई। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ कर दी। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के बंद पड़े डिग्री कॉलेज में 9 साल की बच्ची की लाश मिली है। बच्ची क्लासरूम में दुपट्टे के फंदे से लटकी हुई थी। कानपुर की ऐसी ही 10 बड़ी खबरों से गुजरने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें…। अब सिलसिलेवार 10 खबरें पढ़िए- 1. कुशाग्र हत्याकांड- ट्यूशन टीचर-प्रेमी और दोस्त दोषी करार:मां रोने लगी, बोली- फांसी हो; 26 महीने पहले बर्थडे पर रची मर्डर की कहानी कानपुर में 16 साल के कुशाग्र कनोडिया की किडनैपिंग और हत्या के मामले में मंगलवार को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अपर जिला जज 11 सुभाष सिंह की अदालत ने तय किया कि ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके दोस्त आर्यन ने मिलकर कुशाग्र की हत्या की थी। अदालत में जज की इन बातों को सुनकर कुशाग्र की मां बेटे को याद कर रोने लगीं। बोलीं- बेटे के हत्यारों को फांसी हो। पढ़ें पूरी खबर 2. कानपुर में दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा में हंगामा:नाराज छात्रों ने कंप्यूटर-दरवाजे तोड़े, कहा- सर्वर फाल्ट नहीं, कोई धांधली हुई कानपुर में मंगलवार को दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। सर्वर फॉल्ट के चलते सुबह पहली शिफ्ट की परीक्षा रद्द कर दी गई। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ कर दी। सर्वर रूम में घुसकर छात्रों ने कंप्यूटर, कांच, दरवाजे, कुर्सियां, वायर तोड़ दिए। नाराज छात्रों ने बताया- पहली शिफ्ट की परीक्षा सुबह 9 बजे से थी, जबकि एंट्री सुबह 8.45 बजे से होनी थी। पढ़ें पूरी खबर 3. मंत्री सचान के बंद कॉलेज में बच्ची की लाश मिली:कानपुर में दुपट्टे से लटकी थी, कमरे में टीवी चल रही थी कानपुर में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के बंद पड़े डिग्री कॉलेज में 9 साल की बच्ची की लाश मिली है। बच्ची क्लासरूम में दुपट्टे के फंदे से लटकी हुई थी। कमरे में टीवी चल रही थी। चौकीदार ने शव देखकर पुलिस को सूचना दी। फोरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए। बाबा बैजनाथ डिग्री कॉलेज 2016 से बंद है। बच्ची नानी के साथ इसी कॉलेज में रहती थी। घटना के बाद से नानी फरार है। वैष्णवी उर्फ रानी प्राइमरी स्कूल में क्लास-2 में पढ़ती थी। पुलिस आईडी कार्ड देखकर हैरान रह गई। इसमें पिता की जगह नाना और मां की जगह नानी का नाम लिखा है। फिलहाल, पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों एंगल से जांच कर रही है। पढ़ें पूरी खबर 4. सपा MLA नसीम बोलीं- मंदिरों का विकास कराएंगे:कहा- सतीश महाना मेरे संरक्षक हैं, 2027 में हम दोनों चुनाव लड़ेंगे कानपुर की सीसामऊ सीट से सपा विधायक नसीम सोलंकी की जीत का एक साल पूरा हो गया। सदन में उन्हें 2 बार बोलने का मौका मिला। पहली बार वह लगभग 7 मिनट तक बोलीं। दूसरी बार जब मौका मिला तो बायकॉट के कारण अपनी बात नहीं रख पाईं। सदन में नसीम ने सीसामऊ विधानसभा में मलिन बस्तियों की बात रखी। लाल इमली और वहां के कर्मचारियों को वेतन के मुद्दे पर भी बात रखी। वह कहती हैं कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना मेरे संरक्षक हैं। पढ़ें पूरी खबर 5. कानपुर में किशोरी का अपहरण कर गैंगरेप:पड़ोसी चचेरे 2 भाइयों ने दरिंदगी की, मुंह में कपड़ा ठूंसकर उठाया कानपुर में बिल्हौर थाना क्षेत्र के एक गांव में सोमवार देर किशोरी से गैंगरेप हुआ। रात में शौच के लिए घर के बाहर निकली किशोरी को पड़ोस में रहने वाले चचेरे भाइयों ने अगवा कर किया। अपने घर ले जाकर सभी ने रेप किया। तड़के किसी तरह छूट कर किशोरी घर पहुंची। उसने परिजनों को जानकारी दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की। एक गांव निवासी महिला ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि सोमवार रात 13 वर्षीय बेटी शौच के लिए घर के बाहर गई थी। देर तक वापस न आने पर उन्होंने घर वालों ने ढूंढना शुरू किया। लेकिन, उसका कहीं पता नहीं चल सका। सुबह बदहवास हालत में घर पहुंची बेटी ने आपबीती सुनाई। पढ़ें पूरी खबर 6. कानपुर में सीवर चोक, गलियों में फैला गंदा पानी:लोगों ने कमीशनखोरी और तेल चोरी का पोस्टर लगाया, बोले- बच्चे बीमार पड़ रहे कानपुर में चकेरी के कृष्णा नगर वार्ड 24 स्थित मोहल्ला साहदुल्लापुर में चोक पड़ी सीवर लाइनों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद सफाई न होने से अब प्रभावित परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई घरों के सामने मेनहोल ओवरफ्लो हो रहे हैं और सीवरेज सड़कों पर फैलने लगा है। सीवर का गंदा पानी सड़कों और गलियों में बहने से पूरे इलाके में बदबू फैल गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गंध के कारण घरों में रहना दूभर हो गया है। मच्छरों और गंदगी से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। पढ़ें पूरी खबर 7. ऑटो में दबंगों ने आग लगाई, CCTV सामने आया:11 दिन बाद भी नहीं दर्ज हुआ मुकदमा, पुलिस बोलीं- जल्द आरोपी गिरफ्तार होगा कानपुर में अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। ताजा मामला रावतपुर थाना क्षेत्र का है, जहां आवास विकास-1 केशवपुरम इलाके में घर के बाहर खड़ी एक ई-ऑटो को बेखौफ बदमाशों ने आग के हवाले कर दिया। 8 जनवरी की देर रात करीब तीन बजे बाइक से आए दो युवकों ने वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए। घटना का सीसीटीवी फुटेज अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों आरोपी साफ दिखाई दे रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर 8. 24 घंटे में तापमान तीन डिग्री बढ़ा, पारा 8 डिग्री:दिन में निकली धूप पारा पहुंचा 26 डिग्री, सात की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत कानपुर शहर में ठंड से लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर रखा है। शाम से लेकर सुबह तक चलने वाली सर्द हवाएं आमजन को गलन का एहसास करा रही हैं। हालांकि सुबह के समय कोहरा न रहने से मौसम साफ रहा। सर्द हवाओं ने भी बीते दिनों की अपेक्षा राहत देने का काम किया है। हवाओं की गति कम होने से आमजन को थोड़ी राहत मिली है। दो दिन पहले हवा की अधिकतम स्पीड 4.1 किमी थी। जो कि घटकर 2 किमी प्रतिघंटा रह गई। आसमान में बादल छाए रहने से तापमान भी बढ़ा है। सुबह और शाम के तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। पढ़ें पूरी खबर 9. ट्रांसपोर्टर की मौत की जांच 3 थानों में उलझी:महिला मित्र के घर बर्थडे पार्टी में गया था, महिला का मोबाइल बंद कानपुर के सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी हॉस्पिटल में एक ट्रांसपोर्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। जांच तीन थाना क्षेत्रों—काकादेव, कल्याणपुर और पनकी—की सीमा में उलझकर रह गई है, जिससे परिजन न्याय की आस में भटक रहे हैं। काकादेव पुलिस का कहना है कि ट्रांसपोर्टर को केवल रीजेंसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और मामला उनके क्षेत्र का नहीं है। वहीं कल्याणपुर पुलिस का दावा है कि तबीयत पनकी क्षेत्र में बिगड़ी थी, इसलिए जांच पनकी थाना करेगा। पढ़ें पूरी खबर 10. कानपुर में वांटेड BJP नेता को पुलिस ने दी सुरक्षा:पुलिस ने घर से उठाया फिर छोड़ा, CCTV वायरल हुआ तो भेजा जेल कानपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है कि पुलिस ने वांटेड अपराधी को सुरक्षा दे रखी थी। इतना ही नहीं थाने से लेकर पुलिस अफसरों के साथ उठता-बैठता था। मामले का खुलासा होने के बाद स्वरूप नगर पुलिस ने उसे दबोचा और फिर छोड़ दिया। पुलिस के उसे हिरासत में लेने और फिर छोड़ने का सीसीटीवी वायरल होने के बाद उसे दोबारा हिरासत में लिया है। अब उसे जेल भेजने की बात अफसरों ने कही है, लेकिन पूरे मामले को लेकर अब तक अफसर कुछ भी स्पष्ट रूप से कहने से बच रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर
रेवाड़ी जिले के बहाला निवासी व्यापारी मोहन हत्याकांड की गुत्थी अब धीरे धीरे खुलने लगी हैं। मोहन हिसार की एग्रो कंपनी का बड़ा डिस्ट्रीब्यूटर था। हिसार की कंपनी से अलग होकर मोहन दूसरी कंपनी से जुड़ा तो दक्षिणी हरियाणा में कंपनी का काम चौपट हो गया। कंपनी के निवेशकों ने जब एमडी से पहले की तरह प्रॉफिट मांगा तो मोहन के जाने का हवाला देकर उसने हाथ खड़े कर दिए। रिश्तेदारों का बिजनेस चौपट होता देख सोनू ने मोहन को निपटाने की ठानी। पुलिस ने इस मामले में जयभगवान उर्फ सोनू के साथ मोहन को गोली मारने के आरोपी सोनीपत जिले के गांव नसीरपुर निवासी अंकुश को गिरफ्तार कर लिया है। जिसे अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है। इस मामले में अभी भी पुलिस को चौथे आरोपी की तलाश कर रही है। सोनू के रिश्तेदारों की लगी थी पूंजीहिसार की जिस एग्रो कंपनी का मोहन दक्षिणी हरियाणा का डिस्ट्रीब्यूटर था, वह कंपनी सोनू के रिश्तेदारों की पूंजी से चलती थी। कंपनी के एमडी जयवीर का कंपनी में नाममात्र का ही निवेश था। मोहन की डिस्ट्रीब्यूटरशिप में दक्षिणी हरियाणा में खासा कारोबार करती थी। जिससे निवेशकों को मोटा प्रॉफिट मिलता था। जब से मोहन ने डिस्ट्रीब्यूटरशिप छोड़ी थी, तब से कंपनी का कारोबार सिमट रहा था। निवेशक जयवीर से पहले की तरह प्रॉफिट मांग रहे थे। जयवीर ने निवेशकों को स्पष्ट किया कि जब से मोहन ने कंपनी का साथ छोड़ा है, तब से दक्षिणी हरियाणा में कारोबार चौपट हो गया है। मोहन कंपनी की शर्तों पर फिर से जुड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में अब प्रोफिट देना उसके बस में नहीं है। सोनू और अंकुश ने किया था मर्डर व्यापारी मोहन का मर्डर सोनू महाल और अंकुश ने किया था। मोहन को गोली मारने के बाद सीसीटीवी में सोनू के साथ कार की तरफ भागने वाला अंकुश ही था। पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद घायल हुए सोनू का पुलिस बुधवार को कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट मांग सकती है। जिससे व्यापारी मोहन हत्या की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके। इस मामले में पुलिस अंकुश से पहले कंपनी के एमडी जयबीर और सोनीपत के पिनाना निवासी इनामी बदमाश जयभगवान उर्फ सोनू महाल को गिरफ्तार कर चुकी है। सोनू महाल हत्या, हत्या प्रयास, लूट और रंगदारी व फिरौती जैसे 42 मामलों में नामजद है। 12 जनवरी की रात हुआ था एनकाउंटर सोनू का धारूहेड़ा सीआईए और गुरुग्राम एटीएस ने खरखड़ा- भटसाना रोड पर 12 जनवरी की रात एनकाउंटर किया था। एनकाउंटर के दौरान दोनों पैरों में पुलिस की गोली लगने से इनामी बदमाश जयभगवान उर्फ सोनू घायल हो गया था। जिसे घायल अवस्था में पुलिस ने ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया था। 23 दिसंबर की शाम हुई थी हत्या गांव बहाला निवासी व्यापारी मोहन की 23 दिसंबर को दुकान में गोलियां मारकर हत्या कर दी। आरोपी हत्या के बाद कार में सवार होकर फरार हो गए थे। जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई थी। व्यापारी के परिजनों ने हिसार की एग्रो कंपनी के एमडी पर पैसों के लेनदेन में हत्या की आशंका जताई थी। हत्याकांड का तीसरा आरोपी गिरफ्तार डीएसपी सुरेंद्र श्योराण ने बताया कि धारूहेड़ा सीआईए ने बहाला निवासी व्यापारी मोहन की हत्या के तीसरे आरोपी अंकुश को गिरफ्तार किया है। सोनू के साथ हत्या के समय नसीरपुर का अंकुश ही था। चौथे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।
फतेहाबाद के गांव पीलीमंदोरी में प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित जसराज जयंती समारोह, सूचना लोक संपर्क एवं भाषा विभाग की ओर से मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए डीसी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। यही कमेटी समारोह स्थल से लेकर टेंट व अन्य व्यवस्थाओं का प्रबंधन करेगी। बता दें कि, 2 फरवरी को यह जयंती समारोह मनाया जाएगा। इस समारोह में सीएम नायब सैनी चीफ गेस्ट होंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से मिरासी समाज के लोगों को भी आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। ये होंगे कमेटी के सदस्य.... सूचना, लोक संपर्क एवं भाषा विभाग के सचिव की ओर से बनाई गई कमेटी में डीसी चेयरमैन होंगे। उनके साथ एडीसी, डीएमसी, एसडीएम सदस्य होंगे। वहीं, सीटीएम गौरव गुप्ता सदस्य सचिव होंगे। हालांकि, डीसी डॉ.विवेक भारती छुट्टी पर हैं। ऐसे में एडीसी अनुराग ढालिया ही कार्यवाहक डीसी हैं। डीएमसी का चार्ज भी उनके पास ही है। इनके अतिरिक्त पीडब्ल्यूडी बीएंडआर के एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के एक्सईएन, डीआईपीआरओ और डीसी की इच्छा के अनुसार किसी अन्य अफसर को भी शामिल किया जा सकेगा। आज बुलाई गई है मीटिंग इस समारोह की तैयारियों को लेकर एडीसी अनुराग ढालिया की अध्यक्षता में आज बुधवार को मीटिंग बुलाई गई है। इस मीटिंग में तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। मीटिंग में इस कमेटी के सदस्यों बुलाया गया है। जानिए... कौन थे पंडित जसराज
रोहतक के सांपला क्षेत्र में सांपला-बेरी रोड पर पुलिस व बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई, जिसमें दोनों तरफ से फायरिंग की गई। फायरिंग के दौरान बदमाश को गोली लगी, जिसके कारण वह घायल होकर गिर गया। पुलिस ने घायल बदमाश को मौके पर काबू किया और इलाज के लिए पीजीआई के ट्रोमा सेंटर में भर्ती करवाया। घायल बदमाश की पहचान हिमांशु भाऊ गैंग के शूटर अमन उर्फ काकू के रूप में हुई। अमन ने हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में कांग्रेस के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर पर जानलेवा हमला किया था। इस मामले में अमन के ऊपर हिमाचल प्रदेश में केस दर्ज है। इसके बाद से अमन लगातार हिमांशु भाऊ के संपर्क में रहा है। पुलिस व बदमाश के बीच हुए 5 राउंड फायरिंग पुलिस व बदमाश के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से फायर किए गए। दोनों तरफ से कुल 5 राउंड फायरिंग की गई, जिसमें अमन के पैर में गोली लगी। पुलिस ने शूटर अमन के पास से एक अवैध देसी पिस्तौल भी बरामद किया। साथ ही मौके से गोलियों के खोल बरामद किए गए। 14 मार्च 2025 को बंबर ठाकुर पर किया हमलाशूटर अमन उर्फ काकू ने अपने साथियों के साथ मिलकर 14 मार्च 2025 को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में कांग्रेस के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर पर हिमांशु भाऊ के कहने पर हमला किया था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ 26 मई 2025 को रोहतक के सदर थाने में केस दर्ज किया गया। इससे पहले 17 जुलाई 2022 को एक मामला शिवाजी कॉलोनी थाने में दर्ज किया था। 20 हजार का इनाम था घोषित शूटर अमन उर्फ काबू पर पुलिस की तरफ से 20 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। हिमाचल प्रदेश में वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अमन पिछले 10 महीने से गिरफ्तारी से बचने के लिए छुपता फिर रहा था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी को मुठभेड़ के बाद सांपला से बेरी राड़ आउटर बाइपास पुल के पास से काबू किया। बदमाश पर इन धाराओं में केस दर्ज पुलिस मुठभेड़ के बाद पकड़े गए आरोपी अमन उर्फ काबू पर 17 जुलाई 2022 में शिवाजी कॉलोनी थाने में धारा 148,149, 307,324,506 के तहत केस दर्ज किया गया। वहीं, 14 मार्च 2025 को सदर थाना बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में धारा 109(1),3(5) BNS 25 Arms Act के तहत केस दर्ज किया। 26 मई 2025 में रोहतक के सदर थाने में धारा 111(3),111(4),238B,3(5) BNS 25(6) Arms Act में केस दर्ज किया।
जोधपुर की एनडीपीएस कोर्ट ने 13 साल पुराने मादक पदार्थ तस्करी के मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। विशिष्ट न्यायाधीश (एनडीपीएस केसेज) संख्या-1, जोधपुर महानगर मधुसूदन मिश्रा की कोर्ट ने आरोपी राजेश जोशी को 2 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों के अपराधों में अनुचित सहानुभूति समाज के लिए घातक है। हालांकि, सबूतों के अभाव में सह-आरोपी सुनील उर्फ विक्रम सिंह को बरी कर दिया गया। पुलिस को देखकर भागा था तस्कर मामला 30 अक्टूबर 2013 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस स्टेशन नागौरी गेट के तत्कालीन एसएचओ नितिन दवे अपनी टीम के साथ शंभू भवन के पास नाकाबंदी कर रहे थे। शाम करीब 6:25 बजे पुलिस को देखकर राजेश जोशी ने भागने की कोशिश की। संदेह होने पर पुलिस ने उसे रोका और तलाशी ली। तलाशी के दौरान आरोपी की जीन्स की बाईं जेब से एक पारदर्शी थैली में 17.2 ग्राम स्मैक बरामद हुई। दूसरी जेब से एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा भी मिला। इस पर पुलिस ने आरोपी जालोरियों का बास मेहताजी का नोहरा निवासी राजेश जोशी पुत्र थानमल को गिरफ्तार कर लिया। बचाव पक्ष: स्वतंत्र गवाह नहीं, पुलिस ने फंसाया आरोपी राजेश के वकील ने तर्क दिया कि बरामदगी के समय पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया। वकील ने दलील दी कि एनडीपीएस एक्ट में तलाशी के नियम और धारा 42 का पालन नहीं किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि बरामदगी के बाद नमूने को 72 घंटे के भीतर एफएसएल नहीं भेजा गया, जिससे जांच प्रक्रिया संदिग्ध है। कोर्ट का विश्लेषण: 'चांस रिकवरी' में नियम अलग कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कानूनी स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह मामला 'चांस रिकवरी' का है, क्योंकि पुलिस के पास पहले से सूचना नहीं थी। आरोपी नाकाबंदी देखकर भागा था और सामान्य तलाशी में ड्रग्स मिले। कोर्ट ने 'सुनील कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश' और अन्य सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में एक्ट की धारा 42 और 50 की सख्त पालना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि केवल पुलिस गवाह होने से ही साक्ष्य को झूठा नहीं माना जा सकता। दया याचिका पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी दोषसिद्ध होने के बाद आरोपी के वकील ने पहली बार अपराध होने और परिवार की जिम्मेदारी का हवाला देकर कम सजा की मांग की। इसके विपरीत, विशिष्ट लोक अभियोजक गोविन्दलाल जोशी ने तर्क दिया कि नशा समाज को खोखला कर रहा है, इसलिए कठोर सजा दी जाए। इस पर कोर्ट ने फैसले में लिखा- आरोपी के प्रति नरमी का रुख अपनाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। अनुचित सहानुभूति न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है और जनता का कानून पर से विश्वास कम करती है। सप्लाई करने वाला बरी पुलिस ने इस मामले में मूलतया पीपाड़ सिटी के रामड़ावास हाल महामंदिर तिलग नगर द्वितीय निवासी सुनील उर्फ विक्रमसिंह पुत्र बाबूलाल को भी आरोपी बनाया था। उस पर राजेश जोशी को स्मैक सप्लाई करने का आरोप था। लेकिन कोर्ट ने पाया कि पुलिस यह साबित करने के लिए कोई कॉल डिटेल या ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी कि सुनील ने ही ड्रग्स बेचे थे। इस आधार पर कोर्ट ने सुनील को दोषमुक्त कर दिया।
मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। फोटो में पीछे खड़े दिखे सिंधिया, कांग्रेस ने किया तंजकरीब महीनेभर पहले ग्वालियर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मंच से 'राजा साहब' कहकर संबोधित किया था। अब वही ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा नेताओं के फोटो सेशन में पीछे खड़े नजर आए तो कांग्रेस ने तंज किया है। दरअसल, भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया के तहत मध्य प्रदेश के 20 नेता प्रस्तावक की भूमिका में दिल्ली पहुंचे थे। इस मौके पर सभी नेताओं का एक साथ फोटो सेशन भी हुआ। जब ये तस्वीरें सामने आईं, तो उनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया बाकी नेताओं की तुलना में कुछ पीछे खड़े नजर आए। कांग्रेस ने ये फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया और लिखा- नजर आना जरूरी है। जरा ढूंढिए, इस तस्वीर में महाराज भी हैं क्या? अब यह महज एक फोटो का एंगल है या इसके पीछे कोई सियासी संदेश, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कांग्रेस का प्रदर्शन, मंत्री शाह की सांकेतिक गिरफ्तारी कांग्रेस ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने विजय शाह का मुखौटा लगाए एक कार्यकर्ता को हथकड़ी लगाई और उसे सांकेतिक रूप से जेल पहुंचाया। हालांकि, यह पूरा मामला सांकेतिक प्रदर्शन था, लेकिन इसकी प्रस्तुति ने सबका ध्यान खींच लिया। इसी दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि कोर्ट ने साफ कहा है कि इन पर मुकदमा चलाया जाए, इसके बावजूद भाजपा के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अब मंत्री विजय शाह का इस्तीफा कब होगा या उनकी गिरफ्तारी कब होगी और ऐसा होगा भी या नहीं, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि इस अनोखे प्रदर्शन ने सुर्खियां जरूर बटोर ली है। शराब की अवैध बिक्री पर कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शनदेवास में उस वक्त लोग हैरान रह गए, जब एक ठेले पर खुलेआम शराब की बोतलें सजी नजर आईं। ठेले पर एक बैनर टंगा था। जिस पर लिखा- शराब की होम डिलीवरी चालू है। सौजन्य से - आबकारी विभाग देवास। दरअसल, देवास में शराब की अवैध बिक्री के खिलाफ कांग्रेस ने अनोखा और सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शासन-प्रशासन पर तंज किया और लोगों को इस बारे में बताया। राह चलते लोग रुक-रुककर इस प्रदर्शन को देखते रहे और चर्चा करने लगे। ठेले, बोतलों और बैनर के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि शहर में अवैध शराब की बिक्री किस कदर खुलेआम चल रही है। भाजपा विधायक ने कांग्रेस विधायक को कहा टकला शिवपुरी के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया और पूर्व विधायक केपी सिंह कक्का का नाम लिए बिना उन्हें ‘टकला’ कहा है। प्रीतम लोधी ने आरोप लगाया कि दोनों नेता ‘लाड़ली बहनों’ के लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘लाड़ली बहनों’ पर की जा रही छींटाकशी बंद होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे ‘लाड़ली बहनों’ को सशक्त करेंगे, ताकि वे अच्छे जूते-चप्पल खरीदकर ऐसे लोगों का ‘स्वागत’ कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि अगर इन नेताओं ने ‘लाड़ली बहनों’ पर टिप्पणी करना जारी रखा और किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए, तो उनके कार्यकर्ता जूते-चप्पल और अंडों से उनका ‘स्वागत’ करेंगे। इनपुट सहयोग - विजय सिंह बघेल (भोपाल), अशोक पटेल (देवास), कपिल मिश्रा (शिवपुरी) ये भी पढ़ें - धीरेंद्र शास्त्री से अर्जी- हनुमान जी को बुलाओ, मिलना है: ये मुख्यमंत्री बनेगा.. ऐसा सुनकर शरमाए जीतू पटवारी पंडित धीरेंद्र शास्त्री के मंच पर एक बच्चे ने उनसे पूछ लिया कि आपके पास हनुमान जी रहते हैं? तो पंडित शास्त्री ने मुस्कुराते हुए कहा- हां। इस पर बच्चे ने तुरंत कहा- तो उन्हें बुलाकर लाइए, मुझे उनसे मिलना है। बच्चे की इस मासूम और बेबाक बात पर पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। पूरी खबर पढ़ें
राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट 1 में आपने पढ़ा कि 29 अगस्त 2020 को बांसवाड़ा के खमेरा थाना इलाके में गेमन पुल के पास शव मिला था। माही नदी के बैक वाटर में महिला का शव तैर रहा था। उसके (महिला) गले पर गहरे निशान थे। जिस तरह से शव को पानी में ठिकाने लगाया गया था, उसने साफ संकेत मिल रहा था कि यह हादसा या खुदकुशी नहीं, बल्कि हत्या है। पुलिस ने शव की शिनाख्त के लिए महिला की फोटो सर्कुलेट कराए। एक शख्स ने शव की पहचान की। वो शख्स और कोई नहीं महिला (मृतक) के पिता थे। मरने वाली महिला का नाम सोना था। पिता ने अपने दामाद और दूसरी बेटी पर हत्या का आरोप लगाया। आरोप हैरान करने वाला था। पुलिस इस हत्या की असल वजह जानना चाहती थी। महिला के पति शंकर और उसकी (मृतक) सगी बहन केसर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। अब पढ़िए आगे की कहानी… उस दिन दोपहर तक घर नहीं लौटी महिलामहिला के 14 साल के बेटे अभिषेक ने बताया कि उसकी मां (सोना) आंगनबाड़ी में काम करती थी। पिता शंकर किराने की दुकान चलाते हैं। मां हर रोज सुबह 10 बजे काम पर जाती और दोपहर तीन बजे के आसपास वापस घर लौट आती थी। 28 अगस्त की सुबह सात बजे पिता शंकरलाल किराने की दुकान जाने के लिए तैयार हुए। मां सोना को भी उसी वक्त साथ लेकर गए थे। इसी दिन सुबह 10 बजे पिता वापस घर लौटे और मौसी केसर को भी साथ लेकर चले गए। रात को करीब 9 बजे पिता और मौसी ही घर लौटे। अभिषेक ने मां के बारे में पिता से पूछा तो उन्होंने बताया कि वो नाना के घर गई है। रात को ही नाना को मां के आने के बारे में पूछा तो उन्होंने इनकार कर दिया। महिला के पिता ने बताया कि बड़ी बेटी सोना की शादी 15 साल पहले शंकरलाल से कराई थी। उन दोनों का 14 साल का बेटा अभिषेक है। इस घटना के 4 महीने पहले उनकी दूसरी बेटी केसर को सोना का पति शंकर नाते लेकर चला गया था। बहन से झगड़े होने शुरू हुएइसके बाद शंकर, सोना और केसर साथ में ही रह रहे थे। पति शंकर और उसकी बहन केसर से सोना के झगडे़ होने शुरू हो गए। सोना चाहती थी कि उसका पति शंकर और उसकी छोटी बहन केसर कोई संतान पैदा नहीं करेंगे। केसर उनके बेटे अभिषेक को ही अपना बेटा मानेगी। इसके बावजूद केसर गर्भवती हो गई। इसी कारण से दामाद शंकर और छोटी बेटी केसर ने सोना की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को पानी में फेंक दिया। इस मामले में सोना (मृतक) के बेटे और उसके मां-बाप के बयान और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने शंकर और केसर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। महिला की हत्या कर शव नदी में फेंका:गले पर गहरे निशान थे, पिता के बयान से हैरान रह गई पुलिस, पार्ट-1
पिछले एक साल में निवेशकों को चौंकाने वाला रिटर्न देने वाली चांदी ने मंगलवार को अपने अब तक के उच्चतम स्तर को छू लिया। एक जनवरी 2025 को 90,500 रुपए प्रति किलो बिकने वाली चांदी अब बढ़कर 3.24 लाख रुपए तक पहुंच गई है। यानी महज एक साल में चांदी की कीमतों में करीब 250 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मंगलवार को बाजार खुलते ही आरटीजीएस में चांदी ने 3,24,999 रुपए का स्तर छूकर नया रिकॉर्ड बनाया, जिससे सर्राफा बाजार में खलबली मच गई। मंगलवार सुबह चांदी आरटीजीएस में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कुछ ही घंटों में मुनाफावसूली का दबाव झेलने लगी। शाम होते-होते भाव फिसलकर 3,21,575 रुपए के आसपास आ गए और रात आठ बजे तक इसी दायरे में घूमते रहे। हाजिर बाजार में भी यही रुख देखने को मिला। चांदी ने यहां 3,19,499 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ, लेकिन बाद में गिरकर 3,16,476 रुपए प्रति किलो पर टिक गई। लगातार हो रही इस उठा-पटक ने कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को सतर्क कर दिया है। चांदी की महंगाई का सबसे बड़ा असर शादी-विवाह वाले घरों पर पड़ा है। मध्यम वर्गीय परिवारों को या तो खरीद घटानी पड़ रही है या शादी का कुल बजट बढ़ाना पड़ रहा है। एक साल में 250% से ज्यादा की छलांग लगाने वाली चांदी ने बाजार को रोमांचित भी किया है और डरा भी दिया है। आने वाले दिनों में इसकी चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों और घरेलू सट्टेबाजी पर निर्भर करेगी। पिछले एक साल के आंकड़े क्या कहते हैं अगर पीछे मुड़कर देखें तो चांदी की तेजी असाधारण रही है। 1 जनवरी 2025 को 90,500 प्रति किलो के भाव थे। इसी प्रकार जुलाई 2025 में 1.55 लाख के आसपास भाव रहे। इसके बाद दिसंबर 2025 में चांदी के भाव करीब 2.40 लाख के आसपास थे। इसके बाद 20 जनवरी 2026 को 3.24 लाख (रिकॉर्ड) स्तर पर चांदी के भाव पहुंच गए। इन आंकड़ों से साफ है कि चांदी ने न सिर्फ निवेशकों को आकर्षित किया, बल्कि बाजार के पारंपरिक ट्रेंड को भी पीछे छोड़ दिया। भास्कर एक्सपर्ट--श्रीनारायण सोनी, वरिष्ठ सर्राफा विशेषज्ञ चांदी की कीमतों में मौजूदा उछाल का बड़ा कारण सट्टेबाजी है। यह तेजी स्थायी भी हो सकती है और अस्थायी भी। निवेशकों को चाहिए कि एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचें और चरणबद्ध निवेश करें। जिन ग्राहकों को तुरंत जरूरत नहीं है, वे भाव स्थिर होने का इंतजार करें। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान का कारण बन सकता है। हमने चांदी के जो गहने तय किए थे, अब उनका वजन कम करना पड़ रहा है। भाव इतने बढ़ गए हैं कि पूरा बजट बिगड़ गया। मजबूरी में परंपरा निभाने के तरीके बदलने पड़ रहे हैं। -शचि शर्मा, पारीक चौक, निवासी सट्टेबाज, वैश्विक संकेत और औद्योगिक मांग का तिहरा असरसर्राफा बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार, चांदी की मौजूदा अस्थिरता के पीछे कई वजहें हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ा है। वहीं सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही घरेलू बाजार में सटोरियों की सक्रियता ने कीमतों को जरूरत से ज्यादा ऊपर धकेल दिया है। अचानक खरीद-बिक्री के कारण रोजाना हजारों रुपए का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार सहमा हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो मौजूदा माहौल में जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती है। गहनों के खरीदारों को कुछ समय इंतजार करना चाहिए, जबकि निवेशकों के लिए चरणबद्ध निवेश ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। अचानक तेजी के पीछे भागने के बजाय दीर्घकालीन नजरिया अपनाने की सलाह दी जा रही है।
कैथल में गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस द्वारा चीका के बीडीपीओ कार्यालय में एसडीएम को झुनझुना देने का प्रयास करने के मामले में अब एसडीएम ने कड़ा रुख अपनाया है। एक ओर जहां इस संबंध में एसडीएम कैप्टन परमेश सिंह ने कैथल एसपी को शिकायत दी है। शिकायत में उन्हाेंने विधायक पर सरकार ड्यूटी में बाधा उत्पन्न करने और गलत व्यवहार करने संबंधित आरोप लगाए हैं। वहीं पंचायत समिति चेयरपर्सन ने भी अब एसडीएम का समर्थन किया है। दूसरी ओर विधायक ने इस मामले में टिप्पणी की है। विधायक ने वीडियो पर टिप्पणी की विधायक देवेंद्र हंस ने झुनझुना देने के मामले में फिर से टिप्पणी की है। विधायक ने कहा कि उन्होंने एसडीएम को वही सम्मान दिया है, जिसके वे हकदार हैं। विधायक ने कहा कि उनके कार्य को देखते हुए उनको झुनझुना दिया गया कि आप ये बजाते रहो। जो काम करना है, वो हम कर लेंगे। आपका काम है पैसे कमाना, गुहला की जनता को लूटना और झुनझुना बजाना। मामले को निंदनीय हरकत बताया इस मामले में चीका पंचायत समिति की चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर और उनके प्रतिनिधि जगतार माजरी, पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसिएशन एसडीएम के समर्थन में आए हैं। एक ओर जहां पंचायत समिति की चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर और उनके प्रतिनिधि जगतार माजरी ने कहा कि विधायक ने झुनझुने वाले मामले में निंदनीय हरकत की है। ये हरकत विधायक की मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वे अफसोस करते हैं कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति का साथ दिया, जो पंचायत मेंबर बनने के लायक भी नहीं है। इसके अलावा कैथल की पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन ने भी विधायक की निंदा की है। एसोसिएशन के प्रधान जगजीत सिंह और संरक्षक कैप्टन बलजीत मोर ने कहा कि विधायक को अपने इस व्यवहार के लिए तुरंत एसडीएम से माफी मांगनी चाहिए। इस संबंध में एसपी उपासना ने कहा कि मामले को लेकर पुलिस के पास शिकायत आई है। पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। जानिए पूरा मामला- बता दें कि चीका के बीडीपीओ कार्यालय में दुकानों की लंबाई 12 से बढ़ाकर 25 फीट तक कर दी गई। इस संबंध में क्षेत्र के कुछ लोगों ने प्रशासन को शिकायत दी और विधायक के संज्ञान में भी मामला लाया गया। विधायक ने अधिकारियों को जांच के आदेश दिए। अधिकारियों द्वारा जांच के बाद विधायक को सूचना दी गई। इसके बाद विधायक सोमवार को बीडीपीओ कार्यालय में पहुंचे और एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विधायक को झुनझुना देने का प्रयास किया गया। अब इस मामले में एसडीएम द्वारा विधायक के खिलाफ शिकायत दी गई है।
महापड़ाव की तैयारी:शपथ पत्र उल्लंघन; सोलर कंपनियो को पहली बार अवमानना के नोटिस जारी करने की तैयारी
खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत दो फरवरी को प्रस्तावित महापड़ाव को देखते हुए जिला प्रशासन भी बचाव की कार्रवाई में जुट गया है। शपथ पत्र का उल्लंघन करने पर सोलर कंपनियों को अवमानना के नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। ये नोटिस तहसील स्तर पर जारी किए जाएंगे। जिले में सोलर प्लांट लगाने की आड़ में पिछले एक साल में खेजड़ी के सात हजार से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत दो फरवरी को कलेक्ट्रेट पर प्रस्तावित महापड़ाव में बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी जुटेंगे। पर्यावरण संयुक्त संघर्ष समिति ने खेजड़ी के मुद्दे पर सरकार और प्रशासन को घेरने की रणनीति बनाई है। इसे देखते हुए प्रशासन के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। खेजड़ी को लेकर सुलग रही चिंगारी पर पानी डालने की भरसक कोशिशें की जा रही हैं। इस बीच मंगलवार को पूगल तहसील में सभी हल्का पटवारियों की बैठक हुई। सोलर प्रोजेक्ट पर चर्चा करते हुए बड़ी पांच-छह कंपनियों को शपथ पत्र का उल्लंघन करने पर अवमानना के नोटिस जारी करने का फैसला किया गया है। इसके लिए तहसीलदार अशोक पारिक ने सभी पटवारियों से सोलर कंपनियों की सूची मांगी है। बता दें, पूगल तहसील में सरकार का सोलर पार्क बन रहा है। इसके अलावा बड़ी सोलर कंपनियां वहां प्लांट लगा रही हैं। भास्कर इनसाइटवन्य जीव शिकार का मुद्दा भी उठेगा, एसीएफ ने मांगी रिपोर्ट दो फरवरी को महापड़ाव में खेजड़ी के साथ वन्य जीवों के शिकार और उनकी हत्या का मुद्दा भी उठेगा। लूणकरणसर में सोलर प्लांट की चारदीवारी में 2021 में चिंकारा हिरणों के शिकार का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है। जीव रक्षा संस्था के अध्यक्ष मोखराम बिश्नोई की शिकायत पर एसीएफ ने रेंजर से फैक्चुअल रिपोर्ट मांगी है। इन गांवों में काटे सबसे ज्यादा खेजड़ी के पेड़ पिछले छह-सात महीने में पूगल तहसील के करणीसर भाटियान में 1212, भानीपुरा में 1116, कालासर में 759, लाखूसर में 831 पेड़ काटे जा चुके हैं। इसके अलावा नाथों की ढाणी, छत्तरगढ़ में 34, बीकानेर तहसील के रामसर में 166 तथा पांचू स्थित धरनोक की रोही में 20 पेड़ों को जड़ों में यूरिया और तेजाब डालकर जला डाला गया। धरनोक की रोही में अंजना सन पावर के निदेशक के खिलाफ भू-अभिलेख निरीक्षक ने 17 पेड़ नष्ट करने का परिवाद पिछले पांचू थाने में दिया था, जिस पर अब तक केस दर्ज नहीं हो पाया है। पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर खानापूर्ति कर दी। इसी प्रकार भानीपुरा में भी खेजड़ी का कटान रोकने पर ग्रामीणों पर फायरिंग हो चुकी है। इस प्रकरण में भी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। महापड़ाव को लेकर पश्चिमी राजस्थान से बड़ी संख्या में 36 कौम के लोग जुटेंगे। खेजड़ी के साथ वन्य जीवों की हत्या का मामला भी उठेगा। -मोखराम बिश्नोई, अध्यक्ष, जीव रक्षा संस्था लूणकरणसर में हिरणों के शिकार का मामला पुराना है। इसकी फैक्चुअल रिपोर्ट मांगी गई है। — पूजा पंचारिया, एसीएफ, वन विभाग
ये संभाग मुख्यालय है। ऐसा मुख्यालय जहां केन्द्र में कानून मंत्री है। इसी जिले से प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। पांच से छह आईएएस अफ्सर हैं। सत्ता के 6 विधायक हैं। फिर भी ये शहर अनाथ सा महसूस कर रहा है। सिस्टम मानो शहर में है ही नहीं। जनता की समस्या को कोई सुनने या देखने वाला नहीं है। अगर आप पुलिस लाइन से आ रहे हैं और जूनागढ़ जाना है तो भुट्टों के चौराहे से आप राइट टर्न नहीं ले सकते। क्योंकि पुलिस ने अपनी मनमर्जी से बैरीकेड लगा दिया। इसके आगे श्रीगंगानगर चौराहे से आप टर्न लेना चाहो तो भी पुलिस ने यहां कीर्ति स्तंभ चौराहे की तरफ बेरीकेटिंग लगा दिए। अब दीनदयाल सर्किल से अगर कीर्ति स्तंभ चौराहे की ओर आना चाहो तो दो महीने से नगर निगम ने इस सड़क बंद कर रखा है। यानी आपको तीन से चार किलोमीटर का चक्कर लगाकर दुर्गादास सर्किल या म्यूजियम सर्किल से ही घूमकर आना होगा। सवाल ये कि जनता की ये परेशानी क्या पुलिस अधीक्षक को नहीं दिखती कि उनकी ट्रेफिक पुलिस कैसे अपनी मनमानी कर रही या कलेक्टर को नहीं दिखता कि एक सड़क दो महीने से बंद है और वहां सीवरेज का काम नहीं हो पाया। यही हालात जूनागढ़ में तीन फाटकों के पास है। यहां भी पब्लिक पार्क से आने वाले व्यक्ति को शार्दूल सिंह सर्किल से घूमकर आना पड़ता है और वहां जिस जगह से लोग टर्न लेते हैं वहां ठेले और टैक्सी वाले खड़े रहते हैं जिसके कारण वहां जगह नहीं बचती। भुट्टो का चौराहा यहां से कीर्ति स्तंभ चौराहे के लिए रोड़ निकलती है। पहले रोड़ टूटी थी। अब सीसी बन गई। रोड बनते ही पुलिस ने यहां बेरीकेटिंग लगा दी। तर्क दिया कि यहां मुड़ने से जाम लगता है मगर इसी चौराहे पर ट्रेफिक पुलिस के सिपाही रहते हैं। मगर उनका फोकस चालान पर होता है ट्रेफिक संभालने पर नहीं। इस कारण पुलिस को मेहनत ना करनी पड़ी इसलिए यहां बेरीकेटिंग लगा दिए और खुद चालान बनाने में व्यस्त हो गई। श्रीगंगानगर चौराहा चौराहे का मतलब ही होता है जहां चार रास्ते हों। श्रीगंगानगर चौराहे पर पुलिस का म्यूजियम सर्किल के बाद सबसे ज्यादा जमावड़ा रहता है मगर यहां भी पुलिस ने बेरीकेटिंग लगाकर कीिर्त स्तंभ जाने का रास्ता बंद कर दिया। अब पुलिस लाइन चौराहे से आने वाला व्यक्ति श्रीगंगानगर चौराहे तक आ गया मगर उसे मुड़ने के लिए जगह नहीं मिली। इस चौराहे पर तीन तरफ तो वाहनों की इतनी लम्बी कतारें होती है कि निकलना मुश्किल हो जाता है। दीनदयाल सर्किल इस चौराहे पर दो महीने पर सीवरेज फर्म ने गड्ढा खोदा। निगम के अधीक्षण अभियंता ने सवाल उठाया तो उन्हें 10 दिन में काम करने का भरोसा दिया। 20 दिन बीतने पर फिर सवाल उठा तो दो दिन में काम खत्म करने को कहा। उस बात को भी किए हुए 20 दिन बीत गए। निगम आयुक्त को पता है। कलेक्टर को पता है। भाजपा विधायक भी दो दिन पहले प्रेस कांफ्रेंस में गए तो घूमकर आए और प्रेस कांफ्रेंस में वे विकास की बातें कर रहे थे मगर किसी विधायक ने सवाल नहीं उठाया। 3 दिन तो वेटेरनरी चौराहा भी बंद रहा तीन दिन तक करणीसिंह स्टेडियम में कार्यक्रम होने से वेटेरनरी यूनिवर्सिटी और लालगढ़ होटल जाने वाले चौराहे पर भी करणीसिंह स्टेडियम की ओर आने वाले रास्ते को बंद कर दिया था। दीनदयाल सर्किल पर कुछ काम में तकनीकी दिक्कत हो रही है। श्रीगंगानगर चौराहा, भुट्टों के चौराहों पर बेरीकेटिंग किसकी परमिशन से और क्यों लगाए इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है पर मैं जरूर कलेक्टर के समक्ष ये विषय रखूंगा। -मयंक मनीष, कमिश्नर, निगम आयुक्त पब्लिक पार्क तीन गेट पब्लिक पार्क की ओर से अगर किसी को जूनागढ़ जाना है तो तीन गेट से निकलते ही लोग जूनागढ़ की ओर नहीं मुड़ सकते। क्योंकि तीन गेट के पास खड़ी पुलिस की जीप में बैठे ट्रेफिक पुलिस कर्मियों को ट्रेफिक कंट्रोल करना पड़ेगा और वो कौन करे। इसलिए बेरीकेटिंग लगा दी। लोग शार्दूल सिंह सर्किल की ओर से मुड़कर आते हैं। उस सर्किल पर टेक्सी और ठेले इतनी तादाद में हैं वाहन मुड़ने में दिक्कत होती है।
राजस्थान में आज से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस (WD) के सक्रिय होने से 22 जनवरी को 6 और 23 जनवरी को 10 जिलों में आंधी-बारिश हो सकती है। कुछ जगहों पर ओले भी गिर सकते हैं। इस सिस्टम का असर खत्म होने के बाद एक बार फिर राजस्थान में तेज सर्दी के साथ घना कोहरा देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर ने बीकानेर, जयपुर, भरतपुर संभाग के जिलों में इस सिस्टम का सबसे ज्यादा असर होने की संभावना जताई है, जबकि पहले दिन जोधपुर संभाग के कुछ जिलों में भी सिस्टम का असर देखने को मिल सकता है। कोहरे से गिरा पारा, सर्दी बढ़ी पिछले 24 घंटे में उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी जिलों में घना कोहरा रहा। इस कारण मंगलवार को जयपुर, चूरू, पिलानी, सीकर, फतेहपुर, करौली, दौसा, अलवर में तापमान गिरा। जयपुर को छोड़कर इन शहरों में तापमान सिंगल डिजिट में दर्ज हुआ। कल सबसे ज्यादा ठंडा इलाका पाली का एरिया रहा, जहां का न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दिन में भी सर्दी का असर, पारा 29 डिग्री से नीचे कोहरे के कारण सभी शहरों में मंगलवार दिन का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ। सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान बाड़मेर में 28.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था।
तीर्थदर्शन : तीर्थ यात्रियों का लॉटरी से चयन आज
सागर| मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में 31 जनवरी को कामाख्या धाम तीर्थयात्रियों को यात्रा के लिए जाना है। 279 यात्रियों का कोटा निर्धारित है। निर्धारित कोटे से अधिक संख्या में आवेदन होने से तीर्थयात्रियों का चयन लाटरी से 21 जनवरी को दोपहर 1 बजे राष्ट्रीय विज्ञान सूचना केन्द्र सागर में किया जाएगा। लॉटरी प्रक्रिया के दौरान जिले के सांसद एवं विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। स्नातकोत्तर में प्रवेश के लिए सीयूईटी अनिवार्य सागर| शैक्षणिक सत्र 2026-27 में स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही स्नातकोत्तर में प्रवेश मिलेगा।
युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा संयुक्त रूप से युवा संगम कार्यक्रम किया जा रहा है। यह 29 जनवरी को सुबह 11 बजे से शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) सागर के परिसर में किया जाएगा। आयोजित युवा संगम कार्यक्रम में रोजगार मेला तथा अप्रेंटिसशिप मेला के माध्यम से निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा उपस्थित आवेदकों का साक्षात्कार लेकर चयन किया जाएगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी तथा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। युवा साक्षात्कार के लिए रोजगार कार्यालय का पंजीयन, समग्र आईडी, दो पासपोर्ट साइज के फोटो, शैक्षणिक योग्यता संबंधी (अंकसूची) प्रमाण पत्र अपने साथ ले जाकर शामिल हो सकते हैं। कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा साक्षात्कार लेकर आवश्यकतानुसार अलग-अलग पदों के लिए चयन किया जाएगा।
हरिफाटक ब्रिज की फोरलेन भुजा के लिए भूमि पूजन 25 को
हरिफाटक ब्रिज की नई फोरलेन भुजा के लिए 25 जनवरी को भूमि पूजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भूमि पूजन करेंगे। नई फोरलेन भुजा का निर्माण एमपीआरडीसी करवाएगी। इसके संभागीय प्रबंधक विजय सिंह ने बताया कि नई फोरलेन भुजा का निर्माण पुलिस चौकी से इंटरप्रिटिशन सेंटर तक के टू-लेन ब्रिज के पेरेलल होगा। इसकी लंबाई करीब 980 मीटर रहेगी। प्रोजेक्ट की कुल लागत 371 करोड़ रुपए है। इसमें से प्रोजेक्ट की मुख्य कास्ट 150 करोड़ है बाकी की राशि भूमि अधिग्रहण में खर्च होना है। श्री महाकाल महालोक के शुरू होने के बाद से लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए इस ब्रिज का विस्तार जरूरी माना जा रहा था। सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं की इस संख्या में और भी इजाफा होगा। ऐसे में इसे फोरलेन बनाने का निर्णय लिया गया। निर्माण के दौरान जरूरी श्रद्धालुओं को थोड़ी बहुत परेशानी झेलना पड़ सकती है। इसे लेकर भी अधिकारियों का तर्क है कि वर्तमान वाला टू लेन ब्रिज उपयोग होता रहेगा।
यूपी में 24 घंटे के भीतर 2 परिवार खत्म हो गए। एटा में दवा कारोबारी ने अपने बूढ़े मां-बाप, पत्नी और बेटी का सिर ईंट से कूच दिया। फिर वारदात से अनजान होने का नाटक करता रहा। आखिरकार वह बेनकाब हुआ और जुर्म कबूल किए। एटा से 362 किमी दूर सहारनपुर में सरकारी अमीन ने पत्नी, दो बेटों और मां की गोली मारकर हत्या कर दी। चारों को उसने माथे पर गोली मारी थी। फिर खुद के सीने और माथे पर गोली मारकर सुसाइड कर लिया। एक VIDEO में देखिए दोनों मर्डर स्टोरी...
जिला अस्पताल की लिफ्टों को जल्द चालू करवाया जाए- सीएमएचओ
उज्जैन | जिला अस्पताल चरक भवन की सीवरेज लाइन को दुरुस्त करवाने एवं लिफ्ट के संचालन के लिए सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल द्वारा मंगलवार को चरक भवन का निरीक्षण किया। उन्होंने सीवरेज लाइन को सुधारने के लिए संबंधित विभाग से समन्वय कर जल्द दुरुस्त करवाने के निर्देश दिए। सीएमएचओ ने इस दौरान लिफ्टों का अवलोकन किया और जो लिफ्ट बंद थी। उन्हें मरम्मत कर शीघ्र चालू करवाने के निर्देश दिए। सीएमएचओ ने अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं एवं आवश्यक दवाइयां वितरित करने की निर्देश दिए।
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एसआईआर: 48142 में से 40450 को नोटिस जारी, 14064 की सुनवाई हुई
एसआईआर में मैपिंग नहीं करवा पाए 48142 मतदाताओं में से 40450 को सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर इनमें से 14064 की सुनवाई भी पूरी कर ली है। इस बीच मैपिंग वाले 2.53 लाख से अधिक ऐसे मतदाता भी सामने आए हैं, जिनके नाम-उम्र व जेंडर में गलतियां है। या फिर एक ही परिवार में 6 से अधिक सदस्य दर्ज है। इन्हें सूचना पत्र जारी कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करवाते हुए हाथोहाथ ऑनलाइन डाटा में सुधार किया जा रहा है। 21 फरवरी को फाइनल सूची का प्रकाशन होगा। जिले में 15 लाख 96 हजार 103 मतदाताओं की मैपिंग का लक्ष्य था। इनमें से 48 हजार 142 मतदाताओं की किन्हीं कारणों के चलते मैपिंग नहीं हो पाई हैं। लिहाजा इन्हें निर्वाचन कार्यालय की तरफ से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप सिंह ने बताया कि जिलेभर में सुनवाई का ये दौर 14 फरवरी तक चलेगा। 17 हजार से अधिक नए मतदाताओं के आवेदन { मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अब तक फार्म नंबर 6 के कुल 17080 आवेदन आए है। { मतदाता सूची से नाम कटवाने के फार्म नंबर 7 के अब तक 1005 आवेदन आए हैं। { इनके अलावा नाम-पते में संशोधन के लिए फार्म नंबर 8 के आवेदन अब तक 9366 आए हैं। { इस प्रक्रिया में 22 जनवरी तक दावे-आपत्ति लिए जाएंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद राहुल गांधी का पहला बड़ा कार्यक्रम रायबरेली में हुआ। यहां उन्होंने न सिर्फ कार्यकर्ताओं से बात की, बल्कि क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन किया। नगर पालिका अध्यक्ष के घर पहुंचे और उमरन गांव में 'मनरेगा बचाओ चौपाल' में गांववालों से रूबरू हुए। लेकिन, इस बार राहुल का अंदाज बदला-बदला सा था। न कोई आक्रामक तेवर, न ही कोई 'हटके' स्टंट। संयमित भाषा, सधे शब्द और ग्रामीणों से सरल संवाद- यह राहुल का नया 'मैच्योर' चेहरा था। राजनीतिक जानकार इसकी दो वजह बताते हैं। पहला- बिहार चुनाव ने आक्रामकता को स्वीकार नहीं किया। वहां, कांग्रेस महज 19 सीटों पर सिमट गई। दूसरा- राहुल अब अपनी बहन प्रियंका गांधी की तरह 'सधे अंदाज' वाले नेता की छवि गढ़ रहे हैं, जो सदन में भी प्रभावी साबित हो। लेकिन, सवाल यह है कि क्या राहुल का यह नया स्टाइल कांग्रेस को बढ़ा पाएगी? या मोदी सरकार के मनरेगा 'चेंजेस' पर यह सिर्फ एक चुनावी नारा साबित होगा? पढ़िए भास्कर एनालिसिस… राहुल ने 'ग्राउंड कनेक्ट' पर अधिक जोर दियाराहुल गांधी का रायबरेली दौरा सुबह कार्यकर्ताओं से संवाद के साथ शुरू हुआ। इस दौरान उनसे सपा के स्थानीय नेता भी मिले। शहर में कई जगह लगे होर्डिंग ने भी लोगों का ध्यान खींचा, जिनमें राहुल-अखिलेश को 2027 और 2029 लोकसभा चुनाव का कैप्टन दिखाया गया था। राहुल ने रायबरेली स्थित सांसद निवास में कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता से मुलाकात की। इस दौरान जो लोग जिले की अलग-अलग समस्याओं को लेकर पहुंचे थे, उनसे भी बात की। राहुल गांधी फतेहपुर के राहुल वाल्मीकि मामले की भी जानकारी लेना नहीं भूले। जिला कांग्रेस अधिवक्ता कमेटी के अमरेश बाजपेई ने बताया- ड्रोन चोर समझकर बीते दिनों ऊंचाहार में लोगों ने राहुल वाल्मीकि की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इस मामले में राहुल गांधी खुद पीड़ित परिवार से मिलने फतेहपुर गए थे। अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे तो इस केस का अपडेट लेना नहीं भूले। यह बताता है कि वह एक आम व्यक्ति की पीड़ा को कितना महत्व देते हैं। अमरेश बाजपेई के मुताबिक, इस केस में 19 गिरफ्तारियां हुई हैं। 15 की जमानत खारिज हो चुकी है। 6 की जमानत अर्जी हाईकोर्ट में लंबित है। भारतीय किसान यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल भी राहुल से मिलने पहुंचा था। इसमें शामिल अनिल वर्मा ने बताते हैं- क्षेत्र में नहरों से सिंचाई होती है, लेकिन सफाई न होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा। व,हीं किसानों को खाद नहीं मिल पा रही। खाद की लाइन लगाने में भी 100-100 रुपए की रिश्वत ली जा रही। जिले में जितनी भी सीएचसी हैं, वहां न तो प्रॉपर तरीके से डॉक्टर बैठ रहे और न ही लोगों को इलाज मिल पा रहा। इसी तरह ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के लोगों ने शहर में नए ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना की मांग की। राहुल से मिलने पहुंची दिव्यांशी ने बताया कि हमने उन्हें नकल के चलते निरस्त होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की समस्या के बारे में बताया। जिसे उन्होंने बहुत ध्यान से सुना और आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी से जो भी बन पड़ेगा, करेगी। दोपहर में सांसद आवास से निकल कर राहुल क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ करने पहुंचे। फिर नगर पालिका अध्यक्ष शत्रोहन सोनकर के घर पहुंचे। 8 दिन पहले उनकी बेटी की शादी थी, जिसमें राहुल नहीं आ पाए थे। राहुल ने पूरे परिवार से मुलाकात की। घर के सबसे छोटे सदस्य से एक दोस्त की तरह उसकी रुचि वाले क्रिकेट पर बातें कीं। यह दिखाता है कि राहुल हर उम्र के लोगों से आसानी से घुल मिल सकते हैं। मनरेगा बचाओ संग्राम में राहुल की टोन बेहद संयत रहीरायबरेली से 50 किमी दूर ऊंचाहार के उमरन कस्बे में राहुल 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत लगाई गई चौपाल में पहुंचे। यहां करीब 1000 महिलाएं और पुरुष जुटे। राहुल ने यहां मोदी सरकार पर मनरेगा में बदलावों को लेकर हमला बोला, लेकिन टोन बेहद संयत थी। राहुल के पहुंचने से पहले ग्रामीणों को एक ब्रोशर (विवरणिका) भी बांटा गया था। इसमें पुराने और नए कानून के अंतर को सरल भाषा में समझाया गया था। साथ ही मिस्ड कॉल और QR कोड स्कैन के जरिए 'मनरेगा बचाओ आंदोलन' से जुड़ने की अपील की गई। राहुल के साथ अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा भी चौपाल पहुंचे थे। उन्होंने कहा- जब राज्य सरकारें 10% राशि नहीं दे पा रहीं, तो 40% कैसे देंगी? यह मनरेगा को खत्म करने की साजिश है। राहुल ने चौपाल में अभिवादन से शुरुआत कीचौपाल में राहुल ने पूछा- आप लोग कैसे हैं? फिर मनरेगा को लेकर बात की। उन्होंने कहा- कांग्रेस की मनमोहन सरकार मनरेगा लाई थी, ताकि योजना पंचायत से चले, न कि केंद्र या राज्य से। इससे लाखों गरीबों को रोजगार मिला, गांवों में सड़कें, पुल, तालाब बने। लेकिन, मोदी जी ने लोकसभा में इसका मजाक उड़ाया और अब धीरे-धीरे इसका गला घोंट रहे हैं। राहुल ने कोविड काल का जिक्र किया, जब मनरेगा ने मजदूरों की रक्षा की। लेकिन, अब सरकार इसे खत्म कर अडाणी-अंबानी जैसे उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। राहुल की तरकश से मोदी सरकार पर चले 'तीन तीर'राहुल ने मनरेगा में बदलावों को 3 बिंदुओं में तोड़कर समझाया। पहला- काम की गारंटी छीनी जा रही है। पुराने कानून में हर परिवार को 100 दिनों की कानूनी गारंटी थी, हर गांव में काम मिलता था। अब सिर्फ मोदी सरकार के चुने गांवों में काम, कोई गारंटी नहीं। दूसरा- न्यूनतम मजदूरी का अधिकार खत्म। पहले पूरे साल काम मांग सकते थे, कानूनी मजदूरी मिलती थी। अब फसल कटाई के मौसम में काम नहीं, मजदूरी सरकार की मर्जी से। तीसरा- ग्राम पंचायत को साइडलाइन किया गया। पहले पंचायत से विकास कार्य होते थे। मेट और रोजगार सहायकों का सहयोग मिलता था। अब ठेकेदारों के जरिए मनमानी, कोई सहयोग नहीं। साथ ही, राज्यों पर 40% वित्तीय बोझ, जो खर्च बचाने के लिए काम ही बंद करा सकता है। क्या बिहार की हार से 'संयम मोड' में राहुल? राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ मनरेगा पर नहीं, कांग्रेस की ग्रामीण राजनीति को धार देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा। बिहार चुनाव में NDA की जीत ने राहुल को आक्रामकता का खतरा समझा दिया है। वहां तेजस्वी यादव के साथ गठबंधन फेल हुआ। कांग्रेस की 'एंग्री यंग मैन' इमेज वोटर्स से नहीं जुड़ी। अब राहुल 'प्रियंका मॉडल' की राजनीति पर चलते हुए दिखना चाहते हैं। बेहद सधे हमले, ग्रामीण कनेक्ट और संविधान की बात। उन्होंने कहा- BJP संविधान खत्म करना चाहती है। पंचायतों को कमजोर कर लोकतंत्र की तीसरी कड़ी तोड़ना चाहती है। यह RSS की सोच है। वह गांधी, अंबेडकर को मिटाना चाहती है। गरीबों से हक छीन अडाणी-अंबानी को देना चाहती है। वरिष्ठ पत्रकार विजय प्रताप सिंह कहते हैं- बिहार में एसआईआर का मुद्दा था। तब विषय ऐसा था कि राहुल को अक्रामकता दिखानी पड़ी थी। लेकिन, यहां मामला मनरेगा जैसे विषय से जुड़ा है। कांग्रेस के सामने संकट ये है कि उसके पास ग्रास रूट कार्यकर्ता नहीं हैं। ऐसे में ये भूमिका भी राहुल को निभानी पड़ रही है। अगर संगठन मजबूत होता तो ये काम वो करता और राहुल गांधी इसे जन आंदोलन बनाने की कोशिश करते। लेकिन, यहां संगठन न होने का नुकसान है। कांग्रेस के एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष को वाराणसी में पुलिस पीट देती है। लेकिन, यूपी कांग्रेस इसे मुद्दा तक नहीं बना पाती। यही कांग्रेस की असल कमजोरी है। राहुल की बात का ग्रामीणों पर असर दिखाराहुल की बातों का ग्रामीणों पर भी असर दिखा। चौपाल में पहुंची मिथिलेश कहती हैं- पुराना कानून ही लागू हो। नए वाले कानून से हमारा अधिकार छीनने की कोशिश होगी। पुराना कानून ही सबसे अच्छा है। रोहनिया के दातादीन बोले कि ओ जउन कहिन सब ठीके कहिन। हमका 5 रुपए का पान खवावा है और तीन बीघा जमीन दिन्हीं है। गौसपुर की फूलमती बोलीं कि हम गरीब लोग मजदूरी करके चार पैसा पा रहे थे। अब नया कानून बनाकर हमारी मजदूरी छीनी जा रही। कुल मिलाकर राहुल अपने भाषण के जरिए गांववालों को ये समझाने में सफल दिखे कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मनरेगा की भूमिका अहम है। खासकर महंगाई और बेरोजगारी के दौर में। मोदी सरकार भले ही दावा करती रहे कि बदलाव 'कुशलता' बढ़ाने के लिए किया गया है। लेकिन, राहुल ने इसे 'प्राइवेटाइजेशन' का रास्ता बता ग्रामीणों को समझा दिया कि पुराना मनरेगा कानून ही उनके लिए हितकर था। अब भाजपा को इसकी काट खोजनी होगी। नहीं तो कांग्रेस यूपी में भाजपा के खिलाफ 2024 जैसा नया नरेटिव गढ़ने में सफल हो जाएगी। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें... राहुल बोले-मोदी गरीबों को भूखा मारना चाहते, देश का धन अंबानी-अडाणी को देना चाह रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने रायबरेली दौरे पर हैं। उन्होंने कहा- नरेंद्र मोदी सारा पावर अपने हाथों में लेकर गरीबों को भूखा मारना चाहते हैं। मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाकर उनका अपमान किया है। मगर मुख्य बात नाम बदलने की नहीं है। हमारी गरीब जनता को जो सुरक्षा दी गई थी, उसे मोदी सरकार ने खत्म कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर
‘मैंने शादी के बाद पति और सास को बता दिया था कि मैं अपनी शर्तों पर ही ससुराल में रहूंगी। मुझसे झगड़ा मोल मत लेना, अगर किसी ने मुझे ‘तू’ भी कहा, तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगी।’ ये कहना है गाजियाबाद की ईशा का, जिस पर पति विपिन की जीभ काटने का आरोप है। पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया है। ईशा की सास गीता ने थाने में बहू की खौफनाक स्टोरी सुनाई। कहा- शादी के बाद मेरा बेटा (विपिन) बहू के मंसूबे समझ ही नहीं पाया था। शादी के 1 महीने बाद ही हमें पता चला कि वो छिपकर शराब और सिगरेट पीती थी। अपनी रील्स बनाकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती रहती थी। जब विपिन ने उसके पास सिगरेट देख ली, तो वो बेडरूम में उसके सामने ही पीने लगी। विपिन ने कहा- तुम प्रेग्नेंट होगी, तो बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा, मगर वो नहीं मानती थी। अब तो उसने मेरे बेटे की जीभ ही काट दी। थाने में भी ईशा पुलिस वालों से भिड़ गई। वह कहने लगी- पति कहता था कि अंडा करी नहीं खाऊंगा, तो मैंने सब्जी फेंक दी। फिर वो डांटता रहा, गुस्से में मैंने जीभ ही काट दी। पूरी कहानी पढ़िए… जून में शादी, 1 महीने बाद सिगरेट, शराब पीने का पता चला ये कहानी गाजियाबाद के संजयपुरी गली नंबर बेगमाबाद में जून, 2025 से शुरू होती है। जब राम अवतार और गीता ने अपने इकलौते बेटे विपिन की शादी ईशा से की। घर बहुत छोटा था, इसलिए ऊपर की मंजिल पर कमरा बनवाकर विपिन पत्नी के साथ वहीं पर रहने लगा। ईशा मेरठ के मलियाना इलाके की रहने वाली है। विपिन मोदीनगर में एक फैक्ट्री में प्राइवेट नौकरी करता है। सोमवार रात को ईशा ने अपने और पत्नी के लिए अंडा करी बनाई थी। 8 बजे जब विपिन घर वापस लौटा, तो पत्नी से कहा- मैं रोज-रोज अंडे नहीं खा सकता हूं। ईशा ने कहा- फिर अपने और मेरे लिए चिकन ऑर्डर कर दो। ये कहते हुए उसने पलंग के नीचे से शराब की बोतल निकाल ली। विपिन इस बात को लेकर गुस्सा हो गया। रात 11 बजे दोनों के बीच झगड़ा शुरू हुआ, जो हाथापाई तक पहुंच गया। 2 घंटे चले इस झगड़े में ईशा ने रात 1 बजे विपिन को कई थप्पड़ मारे। पति ने बचाव किया, तो प्यार करने के बहाने ईशा ने विपिन की जीभ अपने दांतों के बीच पकड़ ली और तेजी से काट दी। विपिन का मुंह खून से भर गया। दर्द से बिल-बिलाते हुए, वो उसी हालत में सीढ़ियों से नीचे उतर आया। जीभ का टुकड़ा, वो हाथ में पकड़े हुए था, उसने मां को दिखाते हुए इशारा किया कि कट गई है। मां को यही लगा कि उसकी पत्नी ईशा ने चाकू से जीभ काटी है। जब मोहल्ले की और महिलाएं इकट्ठा हो गईं और उन्होंने ईशा की पिटाई कर दी, तब उसने बताया कि चाकू नहीं मैंने अपने दांतों से ये जीभ काट दी है। अब FIR पढ़िए... मेरी बहू का कैरेक्टर ठीक नहीं… विपिन की मां गीता ने बहू ईशा पर केस दर्ज कराया है। उन्होंने शिकायत में लिखा- मेरे बेटे विपिन की शादी 7 महीने पहले मेरठ की ईशा के साथ हुई थी। ईशा का चरित्र ठीक नहीं है, वह बीड़ी और सिगरेट पीती है। कई बार पति से शराब मंगाकर पीती थी। विपिन मना करता ताे उसे छोड़कर जाने की धमकी देती थी। मेरे बेटे के साथ मारपीट व गाली गलौज करती है। सोमवार की रात दांतों से मेरे बेटे की जीभ काट दी, जो मेरठ के अस्पताल में भर्ती है। ईशा थाने में महिला पुलिसकर्मियों से भिड़ी मोदीनगर पुलिस जब आरोपी ईशा को पकड़कर थाने लाई तो वह महिला पुलिसकर्मियों से भिड़ गई। जिसके बाद महिला पुलिस को भी लगा कि यह बदतमीज महिला है, कुछ भी कर सकती है। ईशा ने पुलिस से कहा कि मैं नशे में नहीं हूं, मुझे मेरी सास ने महिलाओं से पिटवाया है। मुझे बहुत मारा पीटा, मुझे बचाया नहीं गया। ईशा ने आगे कहा- रात में मेरा पति से झगड़ा हुआ था। मैंने चोरी से शराब पी रखी थी, वो अंडा करी नहीं खाना चाहता था, इसलिए मैंने सब्जी उठाकर फेंक दी। विपिन ने मुझे मनाया, उसके बाद मेरी पति से मारपीट हो गई। पति मुझे बंद कमरे में डांटता रहा तो मैंने गुस्से में आकर उसकी जीभ काट दी। ईशा ने कहा कि विपिन मुझे शराब पीने और इंस्टाग्राम पर रील बनाने से रोकता था। उसने पुलिस को ये भी बताया कि मैं पिछले 6 महीने में शादी के बाद पति को 8-10 बार पीट चुकी हूं। सर्जरी के बाद भी नहीं जुड़ सकती जीभ मां गीता ने कहा- मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर का कहना है कि विपिन की जीभ कटकर अलग हो चुकी है। अब सर्जरी के बाद भी जीभ को जोड़ा नहीं जा सकता। जीभ करीब 2.5 सेमी कट चुकी है। डॉक्टर ने परिवार वालों को बताया कि प्लास्टिक की जीभ जोड़ी जा सकती है। हालांकि वह पहले की तरह अब साफ बोल नहीं सकेगा। परिवार ने कहा कि किसी भी तरह विपिन बच जाए और वह टूटी-फूटी भाषा में ही बोलना शुरू कर दे। एडवोकेट बोले- ऐसे मामले में 15 साल की सजा गाजियाबाद के सीनियर एडवोकेट सौरभ डागर कहते हैं- पुलिस ने जीभ कटने के मामले में BNS की धारा 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 352 (जानबूझकर अपमानित करना), 351(3) (जान से मारने की धमकी देना) और 118(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना) में केस दर्ज किया है। एफआईआर में दर्ज है कि जीभ कटकर अलग हो चुकी है, जिसके बाद महिला को अरेस्ट किया गया। गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें शरीर का एक अंग कटकर अलग हुआ। इस तरह के मामले में 15 साल तक की सजा है। एडिशनल कमिश्रर बोले- सब्जी बनाने पर झगड़े के बाद ये हुआ एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी ने बताया- पत्नी द्वारा पति की जीभ काटने की घटना में पुलिस ने तत्काल केस दर्ज कर अरेस्ट किया। आरोपी महिला के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। पूछताछ में पता चला कि सब्जी बनाने पर दोनों में विवाद हुआ। ................. ये रोचक खबर भी पढ़िए:- राहुल गांधी को दादा फिरोज का खोया ड्राइविंग लाइसेंस मिला, मां-बहन को तुरंत वॉट्सऐप किया, रायबरेली में एक परिवार ने सहेजकर रखा था कांग्रेस नेता राहुल गांधी रायबरेली दौरे पर थे। राहुल को उनके दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी का दशकों पहले खोया हुआ ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा गया। जिसे देखकर राहुल भावुक हो उठे। राहुल ने लाइसेंस को बड़े गौर से देखा और तुरंत उसकी तस्वीर अपने मोबाइल से अपनी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी को वॉट्सऐप के जरिए भेजी। पढ़िए पूरी खबर...
वन विभाग:पनिहार में सरसों के खेत में आठ घंटे तक चीता का डेरा, अब पहुंचा बरई के जंगल में
कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता (केएपी-1) को ग्वालियर का जंगल रास आ गया है। यहां मौजूद वाइल्ड लाइफ और गांवों में छोटे जानवरों का शिकार कर चीता दो महीने से बसा हुआ है। मंगलवार की सुबह नौ बजे चीता पहाड़ी के ऊपर से उतरकर नरेश पांडे के सरसों के खेत में पहुंच गया। यहां लोगों ने चीता देखा तो वे भयभीत हो गए। हालांकि उस पर वन विभाग की स्पेशल टीम नजर रखे हुए थी। चीता नरेश पांडे के सरसों के खेत में शाम को पांच बजे तक बैठा नजर आया। अब वह रेल पटरी को पार कर बरई के जंगल में जा पहुंचा है। सरसों के खेत में बैठे चीता से शुरू में तो लोग भयभीत रहे। लेकिन फिर पास के खेतों में पहुंचकर मटर की तुड़ाई करते नजर आए। गौरतलब है कि चीता ने शिवपुरी के जंगल से ग्वालियर वन मंडल में प्रवेश किया था। वह अभी तक हरसी, सियावली, आरोन, सिमरिया, पनिहार, लखनपुरा, चंदूपुरा से मुरैना के जंगल में पहुंचा। वहां से फिर लौट आया है। अब बसौटा, राय का आश्रम, पनिहार और बरई में मौजूद है। वह अधिकतर सोनचिड़िया के जंगलों में दस्तक दे रहा है। यहीं आस-पास के गांव में भी पहुंच जाता और छोटे जानवरों का शिकार कर रहा है। स्ट्रीट डॉग पर हमला, लेकिन डॉग बचापनिहार में रहने वाली बालकृष्ण दुबोलिया ने बताया कि सरसों के खेत से चीता शाम को पांच बजे निकला। उसने एक स्ट्रीट डॉग पर हमला किया। लेकिन स्ट्रीट डॉग चीता के चंगुल से निकल गया। चीता उसे छोड़कर फिर बरई की तरफ से निकल गया।
प्रयागराज में संगम में स्नान करके श्रद्धालु लौट रहे हैं। सामने 3 लोग चार्ट लेकर खड़े हैं। किसी में लिखा है- अपनी बेटी को लव जिहाद से बचाओ तो किसी में लिखा है कब तक हिंदू कटता रहेगा? ये बैनर लेकर खड़े लोग कहते हैं कि लोगों को हम लव जिहाद को लेकर जागरूक कर रहे। बात सिर्फ इतनी नहीं, पूरे मेले में लव जिहाद को लेकर चर्चा है। कहीं नागा साधु तो कहीं शंकराचार्य इस मामले में खुलकर बोल रहे। मेले में आईं हर्षा रिछारिया ने तो यह तक कह दिया कि अभी हिंदू अपनी लड़कियों को बातों से समझा रहे थे। अब अगर डंडे की जरूरत पड़े तो डंडे से समझाओ। आखिर क्यों वह किसी अब्दुल के चक्कर में पड़ें? दैनिक भास्कर ने लव जिहाद की बातों को लेकर माघ मेले में अलग-अलग लोगों से बात की। जो कुछ निकलकर आया है, वह कई मायनों में गंभीर सवाल खड़ा करता है। बैनर लेकर संगम पर खड़े, पुलिस हटा रहीप्रयागराज में 3 जनवरी से माघ मेला शुरू हुआ। हर दिन लाखों लोग संगम में स्नान कर रहे। यहां किसी भी चीज का प्रचार करने वाले यह मानते हैं कि ढंग से बात पहुंचाई जाए, तो करोड़ों लोगों तक आसानी से पहुंचाई जा सकती है। इसी सोच के साथ विपिन सिंह, शिवांगी और नवीन संगम में आ गए। ये लोग लव जिहाद को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे। पहले ये बैनर लेकर संगम घाट के पास खड़े थे। लेकिन, वहां से पुलिस ने इन्हें हटने को बोल दिया। इसके बाद ये लोग वापसी मार्ग पर आकर खड़े हो गए। विपिन से हमने पूछा, इन सबकी जरूरत क्यों? विपिन कहते हैं- देश में लव जिहाद की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। देश के हर कोने से हर दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रहीं। पैटर्न एक जैसा है। कहीं भी देखेंगे तो ऐसा ही नजारा दिख जाएगा। अगर आज हम सब नहीं बोले तो आगे बहुत नुकसान हो जाएगा। विपिन के हाथ में जो बैनर है, उस पर लिखा है- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। बेटी बचेगी, तभी तो पढ़ेगी। पहले अपनी बेटी को लव जिहाद से बचाओ। पहले मेल-जोल बढ़ाएगा, फिर बंदिशें लगाएगाप्रयागराज की शिवांगी शर्मा भी हाथ में बैनर लेकर खड़ी हैं। कहती हैं- हम दिल्ली में रहते हैं, पिछले एक महीने से प्रयागराज में हैं। लव जिहाद के मामले में सबसे बड़ी गलती तो हिंदू लड़की की ही होती है। उसे समझना होगा कि वह ऐसे लोगों से न मिले, न मेल-जोल रखे। पहले वह मीठी-मीठी बातें करेगा, लेकिन बाद में वह आपको फंसा लेगा। फिर कहेगा कि तुम ये नहीं कर सकती, तुम वो नहीं कर सकती। अगर तुमने इन चीजों को लेकर मना किया, फिर वह मार देगा। लड़कियों को इससे दूर रहना पड़ेगा। विपिन के तीसरे साथी नवीन सिंह ने जो बैनर पकड़ा है, वह बाकी दो से अलग है। उसमें लिखा है- हिंदू एक किन बातों में? कब तक हिंदू कटता रहेगा? कब तक कश्मीर में, आज कट रहा बंगाल में? अब आगे कहां कटेगा हिंदू? जय श्रीराम। नवीन कहते हैं- हम किसी पार्टी या फिर संगठन से नहीं जुड़े हैं। हमारा मकसद बस लोगों को जागरूक करने का है। आए दिन हिंदू मर रहा है। बांग्लादेश और पाकिस्तान का हाल आप खुद देख लीजिए। वहां हिंदू भगाओ-देश बचाओ जैसी मुहिम चल रही। दिल्ली में ब्लास्ट हो रहा। पहले कहते थे कि पढ़े-लिखे नहीं, जबकि अब तो बहुत ज्यादा पढ़े लिखे भी इस काम में शामिल हैं। शंकराचार्य बोले- लव जिहाद मतलब मानव तस्करीन सिर्फ पोस्टर-बैनर, बल्कि साधु-संतों और शंकराचार्य के बीच भी लव जिहाद बड़ा मुद्दा बना है। वाराणसी के सुमेर पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती कहते हैं- लव जिहाद एक तरह से मानव तस्करी का मामला है। 10-11 लाख हिंदू लड़कियों को किडनैप किया गया और फिर विदेश में बेच दिया गया। जो लोग ऐसा कर रहे, उनकी संपत्ति जब्त होनी चाहिए। आजीवन कारावास की सजा होना चाहिए। दुष्टों के साथ दुष्टता जरूरी है। अगर इनके साथ सख्ती से नहीं निपटा गया तो खतरनाक होगा। श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़ा के नागा साधु महंत चेतन गिरि भी मेले में आए हैं। लव जिहाद को लेकर वह कहते हैं- हमारी कन्याएं नाजुक हैं, कोई भी उन्हें बहला-फुसला सकता है। हिंदू भी गाय की तरह है, लेकिन जब बिगड़ता है तो वह शेर की तरह हो जाता है। दूसरे धर्म को लेकर बिगाड़ने की नौबत कर रहे हैं। ये हमें काफिर बोलते हैं। लेकिन समझ लें कि अगर हम काफिरताई पर आ गए तो ये बच नहीं पाएंगे। हर्षा बोलीं- लड़कियों को अब डंडे से सुधारने की जरूरतमहाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया भी इस वक्त मेले में हैं। लव जिहाद को लेकर वह मुखर हैं। कहती हैं- लव जिहाद के खिलाफ हमारी युवा पीढ़ी, खासकर लड़कियों को समझाने की जरूरत है। जागरूक करने की जरूरत है। मेरा अपना विचार है कि जब बच्चा कमाने लग जाए। नाम बनाना सीख जाए, सोशल मीडिया चलाना सीख जाए तो उसे इतना को ज्ञान हो जाता है कि क्या सही और क्या गलत है। लेकिन, इसके बावजूद किसी अब्दुल के चक्कर में पड़ते हो तो गलत आप हो। हर्षा आगे कहती हैं- इस वक्त जितने भी केस आ रहे, वह किसी से छुपे नहीं। कितनी ही बेटियों को टारगेट किया जा रहा, ये सबके सामने हैं। हर दिन ही कहीं न कहीं से केस सामने आ रहे। कुछ कमियां तो हमारी बेटियों में भी है। अब अगर वह इतना कुछ होने के बाद भी नहीं समझ रही हैं तो उन्हें डंडे से समझाने की जरूरत है। क्योंकि, मुंह से समझाना बहुत हो गया। सामने वाले को तो हम समझा ही रहे हैं, अब बेटियों को भी समझाने की जरूरत है। लव जिहाद के इस मामले पर हमारी बात तेज बहादुर सप्रू हॉस्पिटल के आई सर्जन केके मिश्रा से हुई। वह कहते हैं- लव जिहाद उन अर्थों में गलत है, जब प्रेम न करके धर्म विशेष पर ही नजर रखना हो और लड़कियां ग्रहण करना हो। अगर ऐसा है तो हम इसे लव जिहाद की श्रेणी में ले आएं। लेकिन अगर सचमुच कोई प्रेम कर रहा, प्रेम को ही सर्वोपरि मान रहा तो ऐसे प्रेम पर रोक नहीं लगाना चाहिए। लेकिन अगर मार दे रहे हैं, तो फिर प्रेम कैसा? ----------------------- ये खबर भी पढ़ें... अपर्णा का तलाक हुआ तो BJP कितना साथ देगी, मुलायम परिवार की बहू होना ही खासियत भाजपा नेता अपर्णा यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव के वैवाहिक जीवन में कटुता आ गई है। प्रतीक यादव ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर अपर्णा से तलाक लेने की बात कही। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कई सवाल घूमने लगे हैं। पढ़िए पूरी खबर
ग्वालियर–चंबल संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जेएएच समूह के न्यू जेएएच के सी ब्लॉक की सभी चारों लिफ्ट खराब हो गई है।इतना ही नहीं बी ब्लॉक की दो में से सिर्फ एक लिफ्ट ही चल रही है। बी ब्लॉक की जो एक लिफ्ट चल रही है उसका लाभ सी ब्लॉक में जाने वाले गंभीर मरीजों का सिर्फ इसलिए नहीं मिल पा रहा है। बी और सी–ब्लॉक को जोड़ने वाले रास्ते जो रैंप के पास से गुजरता है वहां हर मंजिल पर ताला लगा हुआ है। इसके चलते अगर बी–ब्लॉक से कोई मरीज सी–ब्लॉक आना चाहे तो वह नहीं जा सकता है। मंगलवार को न्यू जेएएच के सी ब्लॉक में बने आईसीयू या 4 या 5 वीं मंजिल पर गंभीर मरीज को ले जाने के लिए परिजन स्ट्रेचर लिए लिए घूमते रहे कि वह अपने मरीज को छह मंजिल पर कैसे ले जाएं? कुछ अटेंडेंट बी–ब्लॉक की लिफ्ट से छठवीं मंजिल पहुंच भी गए तो पता चला कि रास्ता बंद है। लिहाजा वे वापस लौटकर आए और रैंप से अपने मरीज को छह मंजिल तक स्ट्रेचर धकेलकर ले गए। जब वह स्ट्रेचर खींचते हुए थक जाते तो कुछ देर रुक लेते और फिर आगे बढ़ते। कई मरीज को परेशान होकर वापस ही चले गए। न्यू जेएच की 5 और 6वीं मंजिल तक सीढि़यों से अपने मरीजों को ले जा रहे परिजन ये हो सकती है व्यवस्था: बी और ए ब्लॉक को सी–ब्लॉक से जोड़ने वाले जिन मार्गों को बंद कर दिया गया है उन्हें खोल दिया जाए। स्ट्रेचर पर आने वाले गंभीर मरीज को यहां से लिफ्ट के माध्यम से ऊपर भेजा जाए। गंभीर मरीज को ही एक अटेंडेंट के साथ लिफ्ट से जाने दिया जाए। इससे मरीज परेशानी से बचेगा। लिफ्ट का टेंडर पीडब्ल्यूडी ने निकाला था लेकिन कोई आया नहींलिफ्ट का टेंडर पीडब्ल्यूडी द्वारा निकाला गया था लेकिन कोई आया नहीं। लिफ्ट में अधिक संख्या में मरीज रहते हैं। जिस कंपनी की लिफ्ट है उसे ही नियमानुसार ठेका दिया जाए। इसके लिए शासन को पत्र लिखकर इसकी अनुमति मांगी है। तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।-डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जेएएच
SIR पार्ट-2 की बढ़ेगी समयसीमा:ग्वालियर व गुना कलेक्टर ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को लिखा पत्र
एसआईआर पार्ट-2 के काम में 1935 बीएलओ सहित करीब 3000 अधिकारी-कर्मचारी लगे होने के बाद भी रफ्तार गाइडलाइन के मुताबिक नहीं है। यदि काम जल्दबाजी में किया तो वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण का मकसद पूरा नहीं होगा। इसी कारण ग्वालियर और गुना के कलेक्टर ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर समय बढ़ाने का आग्रह किया गया है। रिटायर संभागायुक्त बीएम शर्मा का कहना है बोर्ड परीक्षा के दिनों में शिक्षकों का एसआईआर या दूसरे काम में लगे रहने से पढ़ाई, रिजल्ट पर असर होना स्वाभाविक है। लॉजिकल एरर 3.21 लाख. कलेक्टरों ने लिखा- डेट बढ़ाएं 1. ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने पत्र में लिखा कि जिले में 3,21,777 लॉजिकल डिसक्रेपेंसी वाले वोटर हैं, जिनमें से 56,485 का सत्यापन हुआ पर नोटिस प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। 68,540 नो‑मैपिंग वोटरों में 13,644 की सुनवाई पूरी हुई। ईआरओ ने 14 फरवरी समय कम बताते हुए अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है। 2. गुना कलेक्टर किशोर कन्याल ने लिखा कि जिले की चार विधानसभा क्षेत्रों में 2,41,101 लॉजिकल डिसक्रेपेंसी वोटर हैं, जिनमें 69,903 का सत्यापन हुआ है। 11,279 नो‑मैपिंग वोटरों में से 3,035 की सुनवाई पूरी हुई। शेष प्रकरणों के मद्देनज़र ईआरओ ने समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है। नोट: जबलपुर में राजस्व अधिकारी, कलेक्टर को ज्ञापन दे चुके हैं कि अंचल के जिलों में पेंडेंसी को लेकर चिंता है। यहां भी कलेक्टर पत्र लिखने की तैयारी में हैं।
नगर निगम की फाइलों में फर्जीवाड़ा होना आम बात है, लेकिन अब यहां से राजस्व आय की फाइलें गायब होने के मामले ने सभी को चौंका दिया है। पिछले 4 माह में निगम की राजस्व शाखा से 5 फाइलें गायब हुईं। इसमें पासपोर्ट ऑफिस, सुखाड़िया रंगमंच, सरस बूथ, यात्री कर और दीपावली मेले के झूलों की लेखा-जोखों की फाइलें शामिल हैं। इनमें सालों के आय-व्यय, अनुबंध, टेंडर, गजट नोटिफिकेशन और पत्राचार के ब्योरे थे। इनमें से दो-तीन फाइलें वे भी शामिल हैं, जिनमें निगम आयुक्त ने लापरवाही के नोट लिखे थे। ऐसे में फाइलों के गायब होने के पीछे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि साजिश की आशंका दिखाई दे रही है। आयुक्त बोले- जिम्मेदार पर कार्रवाई करेंगेभास्कर ने जब इस मामले में आयुक्त अभिषेक खन्ना से बात की तो उन्होंने कहा कि फाइलें गायब होने की जानकारी नहीं है। सभी महत्वपूर्ण फाइलें हैं। अगर ऐसी गंभीर लापरवाही हुई है तो संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। किसी में जांच तो किसी का मामला हाईकोर्ट में पासपोर्ट ऑफिस : 86 लाख की वसूली बाकीनिगम ने साल 2015 में पासपोर्ट कार्यालय के लिए भवन किराए पर दिया था। इसका जुलाई 2022 से अब तक का 86 लाख रु. किराया बाकी है। फाइल में 11 साल के दस्तावेज हैं। इसमें विदेश मंत्रालय से हुई लीज डीड, किराये का ब्यौरा, पासपोर्ट ऑफिस को चलाने वाली टीसीएस से किए पत्राचार जैसे दस्तावेज है। राजस्व अधिकारी ने इस फाइल को 4 माह तक रोके रखा था। आयुक्त ने उन्हें लताड़ लगाते हुए फाइल पर लापरवाही के नोट भी लिखे थे। यात्री कर : मामला हाईकोर्ट में, पैरवी मुश्किलये फाइल 3 माह से लापता है। यात्री कर के लिए निगम ने हाल ही में उपविधि बनाकर गजट नोटिफिकेशन कराया था। इसमें होटलों से टैक्स वसूलना था। इसके खिलाफ होटल एसोसिएशन कोर्ट में गया, जहां से उन्हें स्टे भी मिल गया। फाइल में पत्राचार, आम सूचनाएं, आपत्ति आमंत्रण और इसके निस्तारण, डीएलबी से पत्राचार और हाईकोर्ट के केस संबंधी दस्तावेज हैं। सरस बूथ : 6 सालें के आवंटन रिकॉर्डये फाइल 4 माह से नदारद है। इनमें साल 2019 से अब तक आवंटित सरस बूथों का विवरण है। इसमें 6 सालों में आवेदकों से ली गई राशियां, इनके आवंटन में हुए कोर्ट केसों की डिटेल, विचाराधीन मामलों के दस्तावेज हैं। दीपावली मेला : टेंडर-राशि का ब्यौरा थादीपावली मेला खत्म होने के बाद से ही यह फाइल ओझल हो गई। हालांकि, टेंडर आवेदन तक का रिकॉर्ड निगम में ऑनलाइन है। इसके बाद की प्रक्रिया की रिपोर्ट, मूल पत्रावलियां, जमा राशियों और टेंडर पास-फेल का ब्यौरा अब निगम के पास नहीं है। सुखाड़िया रंगमंच : बुकिंग-किराया रिकाॅर्डये फाइल ढाई माह से अदृश्य है। इसमें रंगमंच के लिए की गई बुकिंग और किराया राशि के लेन-देन के रिकॉर्ड हैं। हैरानीजनक...राजस्व विभाग में ही चर्चा, निगम में किसी को पता ही नहीं? चौंकाने वाली बात यह है कि फाइलों के गायब होने की चर्चा राजस्व विभाग में ही चल रही है। लेकिन, इनके अलावा पूरे नगर निगम में किसी को इसकी भनक तक नहीं है। भास्कर ने पड़ताल की तो इन फाइलों के गायब होना सामने आया। विभाग के अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साधी हुई है। सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला तब खुला, जब एक फाइल की जरूरत पड़ी तो नहीं मिली। यह भी बताया जा रहा है कि फाइलें राजस्व अधिकारी के चैंबर से गायब हुई हैं। वे ऑफिस पहुंचे तो फाइलें नहीं मिली। अब देखने वाली बात यह रहेगी कि खुलासा होने के बाद महीनों से गायब फाइलें चमत्कारिक रूप से प्रकट हो जाती हैं या नहीं?
हाई कोर्ट की टिप्पणी:सरकार का काम हम कर रहे...
चंबल संभागायुक्त के खिलाफ हाई कोर्ट को गलत जानकारी देने के मामले में भिंड कलेक्टर केएल मीणा को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ अब अवमानना की कार्रवाई नहीं चलेगी। हालांकि, सरकारी जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने कहा- ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां सरकारी संपत्ति की सुरक्षा करना राज्य सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है, लेकिन केवल कोर्ट ही इसे गंभीरता से ले रहा है, अधिकारी नहीं। हाई कोर्ट ने कहा- सरकारी वकील शैलेंद्र सिंह कुशवाह के बार-बार अनुरोध को देखते हुए और कलेक्टर के कॅरियर को ध्यान में रखते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं की जा रही। लेकिन इस मामले में भिंड कलेक्टर लापरवाह रहे, उन्होंने राज्य संपत्ति के हित को नजरअंदाज कर कोर्ट के सामने असत्य वक्तव्य देने में भी संकोच नहीं किया। बता दें कि इस मामले में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भिंड कलेक्टर को प्रशासनिक चेतावनी दी है। मुख्य सचिव का आदेश कलेक्टर की सेवा पुस्तिका में रखा जाएगा। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता कुशवाह ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि कलेक्टर कोर्ट के आदेश को भविष्य में हल्के में नहीं लेंगे और अधिक सतर्क रहेंगे। मामला: दंदरौआ सरकार मंदिर ट्रस्ट को मिली 50 हे. भूमि कादरअसल, दंदरौआ सरकार मंदिर ट्रस्ट को 24 जुलाई 2007 को लगभग 50 हेक्टेयर जमीन पौधरोपण के लिए लीज पर दी गई। कलेक्टर भिंड ने 25 अप्रैल 2011 को यह आवंटन निरस्त किया, जिसे ट्रस्ट ने चुनौती दी और 15 जनवरी 2015 को राजस्व मंडल ने कलेक्टर का आदेश पलट दिया। मप्र शासन ने लगभग छह साल बाद 2021 में याचिका दायर की, जिसमें 13 फरवरी 2024 को नोटिस जारी हुए, पर 29 मई 2024 को प्रोसेस फीस न भरने पर याचिका खारिज हो गई। दोबारा सुनवाई की मांग पर कोर्ट ने देरी पर सवाल किए। भिंड कलेक्टर ने गलत जानकारी देने पर बाद में माफी मांगी।
वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन के मेंटेनेंस के लिए रेलवे महू में कवर्ड शेड बनाएगा। यहां दो नई पिटलाइन भी बनेगी। रेलवे के अनुसार इसका काम इसी साल शुरू किया जाएगा। जल्द से जल्द काम पूरा करने का टारगेट रहेगा। अब इंदौर से न सिर्फ अलग-अलग रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस स्लीपर ट्रेन चलाई जा सकेंगी, बल्कि इनका मेंटेनेंस भी यहीं होगा। सिंहस्थ को लेकर रेलवे का यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा, क्योंकि सिंहस्थ में रेलवे देशभर से 300 से ज्यादा ट्रेन उज्जैन, इंदौर, महू के लिए चलाएगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महू में वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन के लिए कवर्ड शेड और दो पिटलाइन को मंजूरी मिल गई है। महू में रेलवे के पास काफी जगह है, इसलिए इस जगह को फाइनल किया गया है। वंदे भारत के लिए सभी हाईटेक मशीनरी और सिस्टम यहां लगाया जाएगा। इसका फायदा आने वाले समय में न सिर्फ इंदौर, महू, उज्जैन, बल्कि रतलाम रेल मंडल को भी मिलेगा। इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस का मेंटेनेंस भी यहीं फिलहाल इंदौर से नागपुर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही है। इस ट्रेन में एसी चेयरकार और एग्जीक्यूटिव क्लास की सीटें हैं। इसका मेंटेनेंस भी रेलवे इंदौर में कर रहा है। आने वाले समय में इंदौर-महू दोनों जगहों पर मेंटेनेंस हो सकेगा। पुणे, दिल्ली, मुंबई और हावड़ा रूट के लिए लगातार मांग उठ रही इंदौर से पुणे, दिल्ली, मुंबई, हावड़ा के लिए लगातार स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की मांग की जा रही है। जब मेंटेनेंस के लिए कवर्ड शेड और पिटलाइन बन जाएगी तो ज्यादा से ज्यादा ट्रेनें इंदौर से चलाई जा सकेंगी। 2028 में सिंहस्थ भी है, ऐसे में नई ट्रेनों का संचालन का रास्ता भी साफ होगा। जिस भी शहर से ट्रेन चली है, अब मेंटेनेंस भी वहीं किया जाएगारेलवे महू में मेंटेनेंस के लिए कवर्ड शेड और पिटलाइन बना रहा है। अभी भी नई ट्रेन का संचालन संभव है। इंदौर में प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों का संचालन होगा, यानी ट्रेन इंदौर आकर वापस प्लेटफॉर्म से ही लौट जाएगी। जिस भी शहर से ट्रेन चली है, मेंटेनेंस भी वहीं होगा। -नागेश नामजोशी, रेलवे एक्सपर्ट
हमें उनकी निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा तो जानकारी नहीं है, क्योंकि वह अब बहुत बड़े परिवार और बड़े शहर का हिस्सा हैं। लेकिन एक भाई होने के नाते इतना जरूर कहूंगा कि बचपन से ही वह बहुत तेज-तर्रार रही हैं। अगर पारिवारिक जीवन में कुछ उथल-पुथल चल भी रही है, तो हमें उम्मीद है कि वह मजबूती से खड़ी रहेंगी। अपर्णा सिर्फ एक बहू नहीं, बल्कि इस गांव की बेटी हैं और भविष्य की एक बड़ी नेत्री हैं। यह कहना है उत्तरकाशी के गढ़बरसाली गांव के रहने वाले अनूप सिंह बिष्ट का, जो रिश्ते में अपर्णा यादव के बड़े भाई लगते हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे रसूखदार 'यादव परिवार' की छोटी बहू और भाजपा नेता अपर्णा यादव और उनके पति प्रतीक यादव के बीच तलाक की खबरें इन दिनों सियासी गलियारों में तैर रही हैं। लखनऊ से सैकड़ों किलोमीटर दूर, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के एक शांत से गांव 'गढ़बरसाली' (कुरा) में भी इन खबरों की आहट पहुंची है। यह अपर्णा यादव का पैतृक गांव है। वही गांव, जहां उनके पिता अरविंद सिंह बिष्ट का बचपन बीता और जहां की मिट्टी में अपर्णा का बचपन भी कभी खेला करता था। दैनिक भास्कर की टीम जब इस मुद्दे पर गांव वालों की नब्ज टटोलने पहुंची, तो वहां सन्नाटा भी था और दबी जुबान में चिंता भी। गांव के लोग अपनी 'बेटी' के निजी जीवन में चल रहे तूफ़ान से बहुत ज्यादा वाकिफ तो नहीं हैं, लेकिन एक कसक जरूर है कि जो रिश्ता मुलायम सिंह यादव जैसे बड़े नाम के साथ जुड़ा था, उसका इस तरह बिखरना दुखद है। अपर्णा की शादी पर गांव में मना था जश्न उत्तरकाशी मुख्यालय के नजदीक स्थित गढ़बरसाली गांव अपनी सादगी के लिए जाना जाता है। इसी गांव के एक पुराने, लेकिन रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह बिष्ट। उनकी बेटी अपर्णा बिष्ट (अब यादव) की शादी जब मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक से हुई थी, तो पूरे क्षेत्र में एक जश्न का माहौल था। लोगों को लगा था कि लखनऊ की सत्ता का सीधा कनेक्शन अब उनके गांव से जुड़ गया है। लेकिन आज, जब तलाक की खबरें आ रही हैं, तो गांव के लोग संशय में हैं। अपर्णा के चचेरे भाई और पेशे से एडवोकेट अनूप सिंह बिष्ट कहते हैं, देखिए, अपर्णा यादव का बचपन यहीं हमारे साथ बीता। वह छुट्टियों में अक्सर यहां आती थीं। हम साथ खेलते थे। वह शुरू से ही 'ऑलराउंडर' थीं। चाहे पढ़ाई हो, संगीत हो या ड्राइंग, हर चीज में वह अव्वल रहती थीं। राजनीति का शौक तो उन्हें बचपन से ही था। अनूप आगे कहते हैं, शादी के बाद वह अपने माता-पिता के साथ लखनऊ ही रहीं। उनके पिता अरविंद चाचा टाइम्स ऑफ इंडिया में बड़े पद पर रहे, इसलिए उनकी परवरिश वहीं के माहौल में हुई। 'बड़े लोग हैं, बड़ी बातें हैं...' गांव की एक छोटी सी दुकान चलाने वाले और रिश्ते में अपर्णा के भाई लगने वाले अनिल सिंह बिष्ट की प्रतिक्रिया में पहाड़ जैसा भोलापन और एक टीस दोनों झलकती है। वह कहते हैं, हमें तो अखबारों और टीवी से ही पता चलता है कि क्या हो रहा है। वह बीच में एक बार आई थीं, जब हम उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा हुआ करते थे। तब यहां उनके घर में पाठ-पूजा थी। वह हेलिकॉप्टर से आई थीं। हम सब उनसे मिले थे, उनका व्यवहार बहुत अच्छा था। उन्होंने गांव के लोगों से बड़े प्रेम से मुलाकात की थी। अनिल बिष्ट आगे कहते हैं, अब देखिए, अब उत्तराखंड अलग राज्य है और वह यूपी की राजनीति में हैं। अगर वह उत्तराखंड आती तो शायद यहां का कुछ भला होता। रही बात उनके तलाक की, तो यह सुनकर अच्छा तो नहीं लगता। हमारे परिवार की बेटी हैं। जो हो रहा है, अगर सच है, तो दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन हम यहां गांव में बैठकर लखनऊ के फैसलों पर क्या ही कह सकते हैं। वह घर, जो उनके आने की बाट जोहता है गांव में अरविंद सिंह बिष्ट का पैतृक मकान आज भी शान से खड़ा है, लेकिन उसमें सन्नाटा पसरा रहता है। इस घर की देखरेख के लिए एक केयरटेकर परिवार वहां रहता है। हरिद्वार के रहने वाले सोनू कश्यप और उनकी पत्नी पिछले एक साल से यहां चौकीदारी कर रहे हैं। सोनू कश्यप बताते हैं, साहब, हम तो गरीब आदमी हैं। हमारे लिए तो यही बहुत बड़ी बात है कि अरविंद साहब और अपर्णा मैडम की वजह से हमारे बच्चों को रोटी मिल रही है। वह (अपर्णा) पिछली बार आई थीं जब चिन्यालीसौड़ में कोई कार्यक्रम था। वह बहुत कम समय के लिए आती हैं। कभी घंटा भर रुकती हैं, तो कभी एक दिन। लेकिन जब भी मिलती हैं, बहुत अच्छे से बात करती हैं। हमें और क्या चाहिए? हमारे लिए तो उनका आना और हमें रोजगार देना ही सबसे बड़ी सौगात है। 'विकास की उम्मीद और यादों का पुल' गांव के बुजुर्ग और अपर्णा के चाचा धनबीर सिंह बिष्ट पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि कैसे अपर्णा के पिता ने गांव के लिए काम किया था। वह कहते हैं, आज जो आप कुरा की रोड देख रहे हैं, जो कचडू देवता मंदिर से ऊपर गांव तक चार किलोमीटर आती है, यह अरविंद सिंह बिष्ट की ही देन है। उस समय मुलायम सिंह यादव जी जीवित थे और उनकी सरकार थी। अरविंद जी ने अपने रसूख का इस्तेमाल करके यह रोड पास करवाई थी। धनबीर सिंह कहते हैं, अब जब वह (अपर्णा) इतने बड़े पद पर हैं, तो उम्मीदें तो होती ही हैं। लेकिन सच तो यह है कि वह अब लखनऊ की हो गई हैं। यहां उनका आना-जाना कम है। उनके पिता अपनी इष्ट देवी के पूजन के लिए हर साल आते हैं, लेकिन अपर्णा अपनी व्यस्तताओं के कारण कम ही आ पाती हैं। तलाक की खबरों पर हम क्या बोलें? बड़े शहरों की हवा अलग होती है। हमें बस इतना पता है कि वह हमारे गांव का नाम रोशन कर रही हैं। गांव की सड़क पर लगा वहीं, गांव के एक और बुजुर्ग और अधिवक्ता जगमोहन सिंह बिष्ट थोड़ा निराश भी नजर आते हैं। वह कहते हैं, दूर के ढोल सुहाने होते हैं। मैंने उन्हें बचपन से देखा है, उनके पिता के साथ मेरे अच्छे संबंध रहे। वह लखनऊ में रहती थीं। जब बंशीलाल जी पर्वतीय विकास मंत्री थे, तब हमारी मुलाकात चारबाग में हुई थी। हमें उम्मीद थी कि वह इस क्षेत्र के लिए कुछ बड़ा करेंगी, कोई प्रोजेक्ट लाएंगी। लेकिन अब हमें अपने प्रधान से ही मतलब रखना पड़ता है, लखनऊ तो बहुत दूर की बात हो गई। हालांकि, जगमोहन जी भी अंत में उम्मीद नहीं छोड़ते। वह कहते हैं, वह पावर में हैं, अच्छे लेवल पर हैं। आज नहीं तो कल, वह जरूर कुछ करेंगी। अपनी जड़ों को कोई पूरी तरह नहीं भूलता। दैनिक भास्कर की इस पड़ताल में एक बात जो सबसे प्रमुखता से उभरकर आई, वह यह है कि गढ़बरसाली गांव अपनी 'हाई-प्रोफाइल बेटी' के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा तो है, लेकिन एक व्यावहारिक दूरी भी बन चुकी है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें... टाइगर और सोनाक्षी की फैन हैं कुंभ की मोनालिसा:बोलीं- फिल्मों के लिए हिंदी पढ़ना-लिखना सीखा, मूवी हिट हुई तो बनवाऊंगी स्कूल प्रयागराज महाकुंभ 2025 में रुद्राक्ष की माला बेचकर सोशल मीडिया पर छा जाने वाली 'वायरल गर्ल' मोनालिसा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। कभी मेले में श्रद्धालुओं को माला बेचकर अपना जीवन यापन करने वाली मोनालिसा अब बॉलीवुड में कदम रख चुकी हैं। वह जल्द ही फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' में बतौर हीरोइन नजर आएंगी। (पढ़ें पूरी खबर)
करनाल-मेरठ रोड पर रेत से भरे ट्रकों को जबरन रोकने का मामला सामने आया है। ट्रक चालकों ने बिना नंबर प्लेट की बलेरो गाड़ी में सवार अज्ञात लोगों द्वारा ट्रकों को रोकने और धमकाने के वीडियो वायरल किए हैं। चालकों का आरोप है कि खनन विभाग का एक कर्मचारी कुछ प्राइवेट लोग के साथ उनके ट्रकों को रोकते हैं और उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है।चालकों ने रेत कारोबार से जुड़े कुछ लोगों पर हथियार दिखाकर डराने का भी आरोप लगाया है। वहीं जिस खनन ठेकेदार पर आरोप लगे उन्होंने तो अपने उपर लगे आरोपों को झूठा बताया दिया लेकिन माइनिंग अधिकारियों को वीडियो भेजी गई तो उनकी तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आया। रेत लेकर नरवाना जा रहे ट्रक को रोकामंगलवार को रेत भरकर नरवाना जा रहे ट्रक चालक नवीन ने बताया कि वह दिन के समय ट्रक लेकर सुबह यूपी मंगलौरा से निकाला था इसी दौरान मंजीत मंगलौरा नाम का ठेकेदार व उसके साथ एक खनन विभाग का कर्मचारी नवीन ने उसकी गाड़ी को रूकवा लिया और सेक्टर 4 चौंकी में लेकर आए। इस दौरान उन्होंने मुझे बहुत धमकाया और कहा कि यहां से रेत लेकर जाना बंद करदे। जब वह सेक्टर चौकी में पहुंचा तो कुछ ही देर में पुलिस कर्मचारी द्वारा मुझसे दस्तावेज मांगे। मनीष ने बताया कि मैंने अपने ट्रक के सभी कागजात और अंडरलोड की पर्ची पुलिस कर्मी को दिखाई। इसके बाद ट्रक रोकने वाले लोग वहां से चले गए।पहले भी रात को रोक चुके रास्ताट्रक चालक मनीष का आरोप है कि खनन ठेकेदार मंजीत अपने प्राइवेट आदमियों को भेजकर ट्रक चालकों को तंग कर रहा है। मनीष ने बताया कि इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। आरोपी ठेकेदार मंजीत व खनन कर्मचारी नवीन बिना नंबर प्लेट की बलेरो गाड़ी में आते है और उसे जबरन रोक कर उसे धमकी देते है। इसी वीडियो भी मैंने कई बार बनाई है और अपने मालिक को भेजी है। वहीं ट्रक मालिक पुनीत ने बताया कि सभी कागजात पूरे होने के बावजूद उन्हें बार-बार रोका जाता है, जिससे कामकाज में दिक्कत हो रही है और डर का माहौल बना हुआ है। मामले को लेकर ट्रक चालकों में रोष है और वे कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने ने मामले की शिकायत मंगलवार शाम को पुलिस को भी दी है। रेत कारोबारी ने आरोपों को बताया झूठावहीं रेत कारोबारी मंजीत ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंजीत ने कहा कि बिना नंबर प्लेट की बलेरो गाड़ी के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं। उन्होंने कहा कि उनका इस तरह की किसी भी गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। खनन अधिकारी की चुप्पीट्रक चालकों के साथ हो रही घटनाओं को लेकर खनन अधिकारी विनय शर्मा से जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उन्हें इन घटनाओं से जुड़े वीडियो भी भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद खनन अधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
भोपाल जिला पंचायत की साधारण सभा की मीटिंग बुधवार को होगी। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पीएचई, कृषि, पीडब्ल्यूडी, आदिम जाति, वन, महिला एवं बाल विकास विभागों की योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। इससे पहले सामान्य प्रशासन समिति की मीटिंग में भी होगी। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्यों के प्रतिनिधियों की एंट्री नहीं हो सकेगी। न ही साधारण सभा में वे शामिल हो सकेंगे। मीटिंग का एजेंडा भी जारी कर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पीएचई, उद्यानिकी, आरईएस, पीडब्ल्यूडी, आदिम जाति, वन, महिला एवं बाल विकास, मत्स्योद्योग, पशु चिकित्सा, बिजली कंपनी समेत अन्य विभागों के कामों की समीक्षा की जाएगी। बता दें, गांवों में स्कूल शिक्षा, जर्जर सड़कों को लेकर जनप्रतिनिधियों की नाराजगी पहले से देखने को मिल रही है। ऐसे में इस बैठक में भी हंगामा हो सकता है। अध्यक्ष रामकुंवर गुर्जर की अध्यक्षता में यह बैठक होगी। इसलिए जरूरी है मीटिंगजानकारी के अनुसार, मीटिंग ही एक ऐसा प्लेटफार्म होता है, जब सभी विभागों के अफसरों से जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य रूबरू होते हैं। पिछली बैठकों में तो उपाध्यक्ष और सदस्यों की अधिकारियों पर भड़ास भी निकली थी। इसके बाद कामों में थोड़ी तेजी आई। पहले सामान्य प्रशासन की बैठकबैठक बरखेड़ीकलां स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र में होगी। जिला पंचायत के मीटिंग हॉल का रिनोवेशन होने की वजह से बैठक यहां की जा रही है। दोपहर 1.30 बजे सामान्य प्रशासन समिति की बैठक होगी। इसके बाद साधारण सभा की मीटिंग आयोजित की जाएगी। दोनों में ही प्रतिनिधि मान्य नहीं होंगे। बैठक के एजेंडे में यह स्पष्ट लिखा है।
भोपाल में मेट्रो के कमर्शियन रन को 1 महीना पूरा हो गया है। 20 दिसंबर को CM डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने मेट्रो का उद्घाटन किया था। अगले दिन 21 दिसंबर से आम लोगों के लिए मेट्रो दौड़ने लगी थी, लेकिन जिस उत्साह से मेट्रो शुरू की गई, नतीजे वैसे नहीं रहे। पैसेंजर नहीं मिलने से 14 दिन में ही न सिर्फ टाइमिंग बदल दी गई, बल्कि ट्रिप भी घटाई। दूसरी ओर, इसकी रफ्तार को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, एक अच्छी बात फेयर कलेक्शन सिस्टम इंस्ट्रॉल करना है। सभी 8 स्टेशन पर सिस्टम लगने शुरू हो गए हैं। एक महीने के अंदर भोपाल मेट्रो ने कई उतार-चढ़ाव देखें। तमाम प्रयास के बावजूद मेट्रो को पैसेंजर नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि दिन में 13 ट्रिप लगाने के बावजूद 300 यात्री भी नहीं बैठ पा रहे। यानी, 3 कोच की एक मेट्रो में प्रति ट्रिप एवरेज 30 यात्री ही बैठ रहे हैं। इतनी कम संख्या का अनुमान मेट्रो कॉरपोरेशन के अफसरों को भी नहीं था। हालांकि, आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ने की उम्मीद भी है। अफसरों का कहना है कि भविष्य में पास सुविधा भी शुरू हो जाएगी। इसलिए डेली अप-डाउनर्स को फायदा मिलेगा। इसके अलावा, स्टूडेंट्स और बुजुर्गों के लिए भी टिकट में छूट दी जा सकती है। 14 दिन में ही घटाई ट्रिप, इसके बाद भी कम हो गई संख्याइंदौर में 31 मई 2025 को मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत की गई थी। यहां पहले ही दिन करीब 26 हजार पैसेंजर मेट्रो में सवार हुए थे। हालांकि, शुरुआती 7 दिन तक इंदौर में मेट्रो में सफर करना फ्री में था, लेकिन भोपाल में ऐसा नहीं किया गया। पहले दिन से ही लोगों को टिकट खरीदना पड़ी। बावजूद पहले दिन कुल 6568 पैसेंजर सवार हुए थे और मेट्रो को टिकट के बदले 2 लाख 5 हजार 350 रुपए मिले थे। इसके बाद पैसेंजर की संख्या घटती गई। 22, 23 ओर 28 दिसंबर को पैसेंजर 2 हजार से ज्यादा थी। वहीं, 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी होने से 4264 लोगों ने मेट्रो में सवार किया था। 30 दिसंबर को सबसे कम 967 पैसेंजर मेट्रो में बैठे थे। नए साल के पहले दिन 2023 और दूसरे दिन 1065 यात्रियों ने सफर किया। यात्रियों की कम संख्या की वजह से ही मेट्रो के समय और ट्रिप दोनों में बदलाव कर दिया गया। 3 जनवरी से नया शेड्यूल लागू हो गया। मेट्रो कॉरपोरेशन ने न सिर्फ टाइमिंग बदल दी, बल्कि ट्रिप भी घटा दी है। अब एम्स स्टेशन से सुबह 9 बजे की बजाय दोपहर 12 बजे मेट्रो शुरू हो रही है, जबकि यही से शाम 7.30 बजे आखिरी मेट्रो चल रही है। टाइमिंग-ट्रिप घटाने के बाद भी संख्या नहीं बढ़ीट्रेन की टाइमिंग और ट्रिप घटाने के बाद भी यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ी है। सिर्फ वीकेंड के दिनों में ही संख्या ज्यादा होती है। बाकी दिनों में यह 300 से 400 के बीच ही रहती है। पिछले 8 दिन (13 से 20 जनवरी तक) की संख्या पर नजर डाले तो करीब 3350 यात्रियों ने सफर किया। 13, 15 और 19 जनवरी को संख्या 300 से भी कम रही। 15 जनवरी को सिर्फ 275 यात्री ही सवार हुए थे। वहीं, 18 जनवरी को रविवार होने की वजह से यह संख्या 1 हजार के करीब पहुंच गई थी। खर्च निकलना भी मुश्किलमेट्रो चलाने में जितना खर्च हो रहा है, उतना किराया भी नहीं निकल रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन औसत 10 हजार रुपए किराए के रूप में मिल रहे हैं, जबकि रोज का खर्च करीब 1 लाख रुपए आ रहा है। हालांकि, मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में स्टेशन में एटीएम का संचालन, फूड जोन, किड्स जोन आदि बनाए जाएंगे। इससे मेट्रो कॉरपोरेशन को इनकम होगी। अभी इस टाइमिंग पर चल रही है मेट्रो... अब ये है टाइमिंग ये खबरें भी पढ़िए... साइकिल से हार गई मेट्रो…2 किमी में लगे 7 मिनट कहने को भोपाल देश का 26वां मेट्रो शहर है, लेकिन यहां की मेट्रो की रफ्तार ‘कछुआ चाल’ जैसी है। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाने में 4 से 5 मिनट लग रहे हैं, जबकि दूरी 1 किलोमीटर भी नहीं है। 7 किमी का सफर 25 मिनट का है, लेकिन स्टेशन पर इंटर से एग्जिट करने तक में 1 घंटा तक लग रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स भी बन रहे हैं। मेट्रो की स्पीड को लेकर उठ रहे इन्हीं सवालों को लेकर दैनिक भास्कर ने 2 तरह से रियलिटी चेक किया। भास्कर के 2 रिपोर्टर ने डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में बैठकर सफर किया, जबकि 2 अन्य रिपोर्टर ने साइकिल से मेट्रो से रेस लगाई। दोनों की रेस में साइकिल मेट्रो से आगे निकल गई। करीब दो किमी के सफर में मेट्रो को 7 मिनट लगे, लेकिन यही दूरी साइकिल से महज 3 मिनट में पूरी हो गई। भोपाल मेट्रो की फुल स्पीड 90Km प्रतिघंटा तक है। पढ़े पूरी खबर भोपाल मेट्रो में पहली बार बैठे यात्रियों ने किया डांस भोपाल में रविवार को मेट्रो के कमर्शियल रन का पहला दिन था। सुबह 9 बजे एम्स स्टेशन से मेट्रो का सफर शुरू हुआ। पूरे दिन कुल 17 ट्रिप हुई। इसमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 9 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल हैं। संडे के दिन मेट्रो में घूमने के लिए लोगों ने खूब दिलचस्पी दिखाई। शाम 5 बजे 5 हजार से ज्यादा लोग घूम चुके थे। वहीं, आखिरी ट्रिप तक यह आंकड़ा करीब 6 हजार यात्री पहुंच गया। पहले दिन बच्चों की टिकट को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी। पढ़े पूरी खबर
भागीरथपुरा आपदा:डायरिया के 3 नए केस; उधर, गुइलेन-बैरे सिंड्रोम पर अलर्ट, केंद्रीय टीम जांच पर आई
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में 122 मरीज पहुंचे, जिनमें डायरिया के 3 नए मरीज शामिल थे। अस्पतालों में अभी भी 7 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। उधर, गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के मामलों में बढ़ोतरी के बाद केंद्र और राज्य सरकार अलर्ट पर है। आईडीएसपी और डब्ल्यूएचओ से जुड़ी विशेषज्ञ टीम मंगलवार को इंदौर पहुंची। दिल्ली, कोलकाता और भोपाल से आए अधिकारियों ने सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति का जायजा लिया। टीम ने एमवाय अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल और बॉम्बे अस्पताल का दौरा किया। न्यूरो फिजिशियन डॉ. अर्चना वर्मा सहित अन्य डॉक्टरों से मरीजों की हालत, इलाज और लक्षणों के बारे में जानकारी ली गई। इलाज और सैंपल की जांच इंदौर में जीबीएस के 11 मरीज भर्ती हैं। इनमें 7 मरीज चाचा नेहरू अस्पताल में हैं। इनमें से 2 बच्चों को वेंटिलेटर पर रखा है। टीम ने एपिडेमियोलॉजिकल जांच के लिए सैंपल भी जुटाए हैं। इंदौर के अलावा मनासा, नीमच, बैतूल, खंडवा, धार और हातोद से भी जीबीएस के मरीज सामने आए हैं। टीम वहां भी जांच के लिए पहुंची है। शरीर का इम्यून सिस्टम नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है विशेषज्ञों के मुताबिक जीबीएस दुर्लभ गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम नसों पर हमला करने लगता है। बीमारी की शुरुआत आमतौर पर पैरों से होती है और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ती है। गंभीर स्थिति में जब असर सांस से जुड़ी मांसपेशियों तक पहुंचता है, तो मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है।
भागीरथपुरा में रहने वाले लोगों में घटना के इतने दिनों बाद भी पानी को लेकर डर का माहौल है। कई लोग आज भी इतने डरे हुए है कि वे आज भी पानी उबालकर और छानकर इस्तेमाल कर रहे हैं। डर का आलम यह है कि यहां जो मेहमान आ रहे हैं, वे भी यहां पानी नहीं पी रहे हैं। वहीं दूषित पानी के डर ने कई लोगों के घर का बजट तक बिगाड़ दिया है, क्योंकि उन्हें पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। वहीं पानी उबालने के कारण जो गैस की टंकी डेढ़ महीने चलती थी वह महीने भर में ही खत्म हो रही है। भागीरथपुरा में दूषित पानी ने 24 जिंदगियां छिन ली। सैकड़ों लोग अस्पताल तक पहुंच गए। अभी भी कई लोग अस्पताल में भर्ती है, जिनका इलाज चल रहा है। मगर दूषित पानी को लेकर लोगों के मन में जो डर बैठ गया है, उसे दूर होने में काफी समय लग सकता है। भागीरथपुरा की घटना को कुछ ही दिनों में महीनाभर हो जाएगा, लेकिन आज भी लोग यहां पानी का इस्तेमाल करने में घबरा रहे हैं। मेहमान आते हैं, लेकिन पानी नहीं पीते इलाके में रहने वाली अर्चना यादव बताती हैं कि भागीरथपुरा की घटना के बाद लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। उनके घर मेहमान आते हैं, लेकिन पानी नहीं पीते। उन्होंने कहा कि मेहमान को बोलते हैं कि उबला पानी है, हम भी पीते हैं आप भी पी सकते हैं, लेकिन उनके मन में इतना डर है कि वे हमारे यहां पानी नहीं पीते। एक बार चाय पी लेंगे, लेकिन पानी नहीं पीते। हमें बुरा नहीं लगता है, लेकिन हर व्यक्ति अपनी सुरक्षा चाहता है, तो हम भी फोर्स नहीं करते। कल को किसी को कुछ हो जाए तो यहीं कहेंगे कि भागीरथपुरा गए थे, पानी पिया तो ऐसा हो गया। खरीदना पड़ रहा पानी, बजट भी बिगड़ा यहां रहने वाली शोभा पाटिल ने बताया पानी के टैंकर आ रहे हैं। पानी को उबालकर-छानकर पीने के लिए अनाउंसमेंट भी कर रहे हैं, लेकिन हम आरओ का पानी खरीदकर पी रहे हैं। पानी को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। नर्मदा की सप्लाई की, लेकिन हमने नल ही नहीं खोला। पीने के पानी के लिए आरओ का पानी खरीदकर ला रहे हैं। एक दिन में 60 रुपए का पानी लग रहा है। तीन केन खरीदना पड़ती है रोज की। इसके कारण खर्चे में भी इजाफा हो गया है। पानी के लिए अलग से खर्चा करना पड़ रहा है। जिसका असर बजट पर हुआ है। पोता भी गिर गया है, उसकी भी दवा चल रही है। पानी भी उबालकर इस्तेमाल करने के कारण गैस की टंकी भी जल्दी खत्म हो रही है। सुबह-शाम पानी गर्म करना पड़ता है, जो गैस टंकी पहले डेढ़ महीने चलती थी वह एक महीने में ही खत्म हो रही है। वहीं सुमित्रा गुर्जर ने बताया कि पानी का डर मन में बैठ गया है। कब गंदा पानी आ जाए और कब क्या हो जाए। डर तो बना हुआ है। पानी पीने में भी डर है। कब पानी कैसा आ जाए कोई भरोसा नहीं है। क्योंकि दूषित पानी के कारण उन्हें भी उल्टी-दस्त की परेशानी हुई थी। गंदे पानी का डर तो हमेशा के लिए बन गया है। पानी का इस्तेमाल तो उबालकर ही कर रहे हैं। आरओ का पानी और टैंकर का पानी उबालकर ही पी रहे है। खाना बनाने में जो पानी इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे भी पहले उबालते हैं उसके बाद ही उस पानी को खाना बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। हमने भी पीकर देखा पानी, जल्द शुरू हो जाएगी सप्लाई क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने बताया कि दो साल पहले ही निगम में लिखित में सप्लाई लाइन खराब होने की जानकारी दी थी। लाइन में कई जगह जंग लग गया है, टूट गई है। उसको बदलने की आवश्यकता है। पिछले 22 दिन में यहां पर लाइन का काम चल रहा है। जो अब पूरा होने की कगार पर है। निश्चित रूप से बड़ी घटना हुई है यहां। सतर्कता की जरूरत है, धीरे-धीरे लोगों में आत्मविश्वास लौटेगा। वैसे तो जनजीवन सामान्य हो गया है, लेकिन पानी को लेकर जो समस्या है उसे भी ठीक कर लेंगे। 50 टैंकर इलाके में चल रहे हैं और पीने का पानी सप्लाई किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो तत्काल सैंपल की जो जानकारी आती है। क्लोरिन डालकर जो चेक करते है, उसमें पानी शत प्रतिशत पैरामीटर पर सफल है पानी पीने योग्य हैं। महापौर ने और मैंने बिना उबाले भी पानी पिया है। अभी भी चल रहा लाइन का काम, टैंकरों से जारी सप्लाई इलाके में अभी भी कई जगह नर्मदा और ड्रेनेज लाइन का काम चल रहा है। हालांकि ये काम अब अंतिम चरणों में है। जल्द ही यहां पर लाइन का काम पूरा हो जाएगा। नर्मदा और ड्रेनेज लाइन के कारण इलाके में रोड़ की हालत जरूर खराब हो गई है, लोगों को काम के कारण आवाजाही में दिक्कत भी हो रही है। नर्मदा की लाइन का काम जल्द पूरा हो जाएगा, जिसके बाद इलाके में इस्तेमाल के लिए पानी की सप्लाई इस लाइन से शुरू की जा सकती है। फिलहाल यहां पर 50 टैंकरों से घर-घर तक पानी पहुंचाया जा रहा है, ताकि लोग को पानी की दिक्कत का सामना ना करना पड़े। 3 मरीज डायरिया के पहुंचे, 7 आईसीयू में भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी में मंगलवार को 122 मरीज पहुंचे। इनमें से डायरिया के 3 मरीज थे। वहीं अस्पतालों में अब तक कुल 449 मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिसमें से 433 स्वस्थ होकर वापस घर भी लौट चुके हैं। जबकि 9 अभी भी वार्ड में भर्ती है और 7 मरीजों का आईसीयू में इलाज चल रहा है।
‘नितिन की जिम्मेदारी सिर्फ पार्टी नहीं, बल्कि NDA के सहयोगियों को भी साथ लेकर चलना है।’ बीजेपी हेडक्वार्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नबीन की ताजपोशी के दौरान ये बातें कहीं। बीजेपी के सबसे बड़े नेता नितिन नबीन के लिए ये केवल एक सलाह नहीं, सबसे बड़ी चुनौती भी है। पहली बार बिहार का कोई बेटा बीजेपी में इस पद तक पहुंचा है। 2005 से लगातार नीतीश कुमार के चेहरे पर बिहार में सरकार चला रही बीजेपी 2025 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसके पास अपना सीएम बनाने का मौका है। अब जब बांकीपुर के विधायक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं तो तात्कालिक तौर पर उनके सामने बंगाल चुनाव एक बड़ी चुनौती तो है ही, लेकिन बिहार की राह भी आसान नहीं है। ये 3 बड़ी चुनौती सीधे तौर पर दिखाई दे रही है... आइए अब विस्तार से इन पॉइंट्स को समझते हैं। 1- क्या नितिन बिहार में अपना सीएम बना पाएंगे? आधिकारिक तौर पर बीजेपी के सभी नेता इस बात पर कुछ भी बोलने से बचते रहे हैं। NDA के सभी घटक दल एकजुट होकर नीतीश कुमार को अपना नेता बता रहे हैं। हालांकि, नीतीश कुमार की बढ़ती उम्र और गिरती सेहत के कारण लगातार इस बात की चर्चा बनी हुई है कि बंगाल चुनाव के बाद बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा उलटफेर हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इसकी तैयारी केवल बीजेपी के तरफ से नहीं हो रही है। जदयू भी इसकी तैयारी में जुटी है। यही कारण है कि नीतीश के बेटे निशांत की पॉलिटिकल डेब्यू किस रूप में कराई जाए, इसकी प्लानिंग भीतरखाने तैयार हो रही है। ये तय है कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार ही लेंगे। सीएम पद पर दावा बरकरार रहे, इसके लिए छोटी पार्टियों को तोड़ने का विकल्प भी खुला है। इस पर सत्ता पक्ष की दोनों पार्टियों का ऑपरेशन जारी है। सीनियर जर्नलिस्ट अरुण कुमार पांडेय बताते हैं, ’बीजेपी मौजूदा समय में विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन अभी तक उनका अपना सीएम नहीं हुआ है। कभी अकेले बहुमत में पार्टी नहीं आई है। लालू के विरोध में नीतीश की अगुआई में बीजेपी उनके साथ आई और अभी तक उनके साथ ही है। देर-सबेर बीजेपी अपनी ताकत से सत्ता में आने की कोशिश करेगी।’ अगर आंकड़ों की बात करें तो भाजपा के भरोसेमंद सहयोगी चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) 19, जीतन राम मांझी की पार्टी HAM 5 और उपेंद्र कुशवाहा के RLM को 4 सीटों पर जीत मिली है। चारों पार्टियों (BJP, LJP R, HAM, RLM) के विधायकों को जोड़ दें तो (89+19+5+4) आंकड़ा 117 तक पहुंचता है। बहुमत के लिए जरूरी 122 से सिर्फ 5 कम। 2- धड़ों में बंटती बीजेपी को एकजुट कैसे करेंगे नितिन नबीन? बिहार बीजेपी बाहर से भले एकजुट दिखाई दे, लेकिन पार्टी भीतर से कई धड़ों में बंटी हुई है। इसकी बानगी कई बार खुलकर सामने आई है। नाराजगी का ही नतीजा है कि एक प्रदेश अध्यक्ष का जितना कार्यकाल होना चाहिए उतने समय में बिहार में बीजेपी तीन प्रदेश अध्यक्ष बदल चुकी है। पार्टी की तरफ से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल का कार्यकाल पूरा होने के बाद मार्च 2023 में सम्राट चौधरी को प्रदेश की कमान दी गई थी, लेकिन मात्र 15 महीने के भीतर ही इन्हें बदलना पड़ा गया। इसके बाद जुलाई 2024 में दिलीप जायसवाल को पार्टी की कमान दी गई। ये भी मात्र 17 महीने तक ही चले। अब इन्हें भी बदल दिया गया। पार्टी के प्रदेश स्तर के एक बड़े नेता ने भास्कर को बताया कि स्थिति यह है कि नेता एक-दूसरे से सार्वजनिक तौर पर मिलने से भी परहेज करते हैं ताकि उनपर किसी धड़े का ठप्पा न लग जाए। पार्टी के सीनियर लीडर अश्विनी चौबे ने तो खुलेआम ऐलान कर दिया था कि आयातित माल पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनेगा। डैमेज कंट्रोल के लिए दिलीप जायसवाल प्रदेश अध्यक्ष जरूर बने लेकिन संगठन में सम्राट चौधरी का दबदबा बरकरार रहा। दिलीप जायसवाल ने 35 लोगों की अपनी स्टेट लेवल की टीम बनाई थी। इसमें करीब 60 फीसदी यानी 20 लोग सम्राट चौधरी के रिपीट किए गए। मतलब जायसवाल सिर्फ 15 नए लोगों को कार्यसमिति में शामिल कर सके थे। इसके अलावा पार्टी में नित्यानंद राय की अपनी पकड़ बनी हुई है। कभी बीजेपी की तरफ से सीएम पद के दावेदार रहे नित्यानंद प्रदेश की सियासत में अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दे रहे हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट भोलानाथ बताते हैं, ’संगठन में बीजेपी का ये एक रिवाज सा रहा है कि मजबूत लोग अपने लोगों को विभिन्न पदों पर सेट करने में जुट जाते हैं। ऐसे में नितिन नबीन की ये कोशिश होगी कि वे प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ मिलकर बिहार में एक ऐसा संगठन खड़ा करें, जिसकी लोग मिसाल दें।’ वहीं, सीनियर जर्नलिस्ट अरुण कुमार पांडेय बताते हैं, ’पिछले 2 दशक से बीजेपी में बहुत गुटबाजी है। नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी हर नेता का अपना-अपना गुट बन गया है। इसे कम करना उनकी बड़ी चुनौती बन गई है।’ 3- क्या बिहार में पार्टी को गठबंधन से मुक्त करा पाएंगे नबीन? बिहार में 2005 से NDA की सरकार है। तब से लगातार नीतीश कुमार बिहार के सीएम हैं। 2005 के बाद से 2026 तक बीजेपी दो बार सबसे बड़ी पार्टी बनी। आलम ये रहा कि 2020 में संख्या के आधार पर जदयू बीजेपी के आधे नंबर पर थी, लेकिन इसके बाद भी सीएम नीतीश कुमार ही बने। इसके दो कारण हैं। सीनियर जर्नलिस्ट अरुण पांडेय ने कहा, ‘मौजूदा समय में बीजेपी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन अभी सेकंड सीट पर है। इसका कारण लालू के विरोध की राजनीति है। इसी के कारण नीतीश की अगुआई में बीजेपी उनके साथ आई और अभी तक उनके साथ ही है। अब इसका खामियाजा समझिए। 2025 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में 8 ऐसे जिले हैं, जहां बीजेपी के एक भी विधायक नहीं हैं। 8 ऐसे जिले हैं, जहां बीजेपी के मात्र 1 विधायक हैं। चुनाव से पहले सभी पार्टियों की कोशिश थी कि हर जिले में कम से कम उनके एक विधायक हों। पॉलिटिकल एक्सपर्ट की मानें तो गठबंधन की सियासत के कारण बीजेपी अभी तक पूरे बिहार की पार्टी नहीं बन पाई है। कई ऐसे जिले हैं, जहां बीजेपी संगठन के तौर पर बहुत मजबूत है, लेकिन सीटें गठबंधन के लिए छोड़नी पड़ जाती हैं, जबकि कई जिले ऐसे हैं जहां चुनाव नहीं लड़ने के कारण पार्टी संगठन नहीं खड़ा कर पा रही है। हालात ये हैं कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली बीजेपी राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर अपने दम पर कैंडिडेट उतारने की स्थिति में नहीं है। अब नितिन नबीन के सामने चुनौती ये होगी कि सभी जिलों में अपना संगठन इतना मजबूत करें कि अपने दम पर चुनाव लड़ सकें।
उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) 19 जनवरी को राजस्व ग्राम सरे में होटल, रिसॉर्ट और विला के खिलाफ की गई सीज कार्रवाई पर अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन यह कार्रवाई चुनिंदा ही रही। यूडीए ने केवल मालदीव्स विला (17 विला) और वेलेसा होटल पर कार्रवाई की, जबकि इसी क्षेत्र की एक किलोमीटर की परिधि में 25 से अधिक बड़े होटल, रिसॉर्ट, विला और अन्य भवनों को छुआ तक नहीं गया। कई भवन मालिकों को केवल नोटिस देकर खानापूर्ति कर दी गई। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि यूडीए की टीम सरे में नंदा हिल होटल एंड रिसॉर्ट्स के ठीक नीचे, महज 100 मीटर पहले सड़क तोड़कर लौट गई और उसी होटल तक जाने वाले मार्ग पर कोई कार्रवाई नहीं की। लाभगढ़ रिसॉर्ट्स के पीछे पहाड़ियों को काटकर कच्ची सड़क बनाने का काम जारी है और तलहटी में धड़ल्ले से निर्माण चल रहा है, जिसे अभी तक नहीं रोका गया है। बड़ा सवाल...यूडीए अधिकारियों को निर्माण दिखे ही नहीं या मिलीभगत सरे में पेट्रोल पंप के पास पहाड़ियों के ऊपर से भी सड़कें बना दी गई हैं। ये होटल-रिसॉर्ट और विला तक जाती हैं, जहां बड़े पैमाने पर पहाड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन यूडीए की टीम यहां नहीं पहुंची। कैलाशपुरी में मुख्य सड़क से लेकर एक किलोमीटर अंदर तक कई पहाड़ काटे जा चुके हैं और पांच सितारा होटलों का निर्माण खुले आम चल रहा है, फिर भी यहां सीज या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यूडीए की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 2 साल में पहाड़ काटकर 100 से अधिक बहुमंजिला निर्माण हुए पिछले साल 2025 में राजस्व ग्राम सरे, मोहनपुरा खुर्द, कैलाशपुरी सहित 70 गांवों को यूडीए में शामिल किया गया। इससे पहले ही होटल, रिसॉर्ट और विला निर्माण के लिए मालिकों ने ग्राम पंचायतों, तहसीलों और उपखंडों से स्वीकृतियां व अनापत्ति प्रमाण-पत्र ले लिए थे। इसके बाद पहाड़ काटकर सड़कें बनाई गईं और बहुमंजिला होटल, रिसॉर्ट, विला, भवन और मंदिर बनाए गए। उस समय पहाड़ों की ऊंचाई संपर्क सड़क से मापी जाती थी, न कि सैटेलाइट से। इसी खामी का फायदा उठाकर 2020 से 2025 के बीच सरे, मोहनपुरा खुर्द, कैलाशपुरी और चीरवा में 100 से अधिक बहुमंजिला निर्माणों के लिए पहाड़ काटे गए। अब नए नियमों के तहत 15 डिग्री से अधिक ढलान वाले पहाड़ नहीं काटे जा सकते और ऊंचाई की मैपिंग सैटेलाइट से होती है। ऐसे में सवाल है कि यूडीए पंचायत, तहसील और उपखंड स्तर पर दी गई पुरानी अनुमतियों को अदालत में कैसे चुनौती देगा?
रैलिंग तोड़ने को राजी नहीं ठेकेदार, जितनी बेच चुका, वह रकम निगम में जमा कराएगा
बीआरटीएस की रैलिंग हटाने का ठेका लेने वाले कॉन्ट्रेक्टर ने काम जारी रखने से साफ इनकार कर दिया है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने सोमवार देर रात ठेकेदार दिनेश यादव से चर्चा की। लेकिन यादव ने मजबूरी का हवाला देते हुए कहा कि वह बीआरटीएस कॉरिडोर नहीं तोड़ सकता। यादव ने कहा कि अब तक निकाली गई रैलिंग को बेचकर जो रकम मिली है, वह नगर निगम में जमा करवा देंगे। हाई कोर्ट ने रैलिंग नहीं तोड़ने पर ठेकेदार को फटकार लगाई थी। निगमायुक्त को निर्देश दिए थे कि वे सीधे ठेकेदार से बात करें। साथ ही मुख्य सचिव को लोक निर्माण और नगरीय विकास विभाग से चर्चा करने के लिए कहा था ताकि एलिवेटेड कॉरिडोर पर स्थिति स्पष्ट हो। फरवरी 2025 से बीआरटीएस हटाने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक सिर्फ एक तरफ की रैलिंग आंशिक रूप से हटाई जा सकी है। काम अब भी अधूरा है। मामले में अगली सुनवाई 28 जनवरी को है। निगम कोर्ट में अपना जवाब पेश करेगा। बताया जा रहा है कि यदि ठेकेदार काम नहीं करता है तो पांचवीं बार नया टेंड बुलवाने की अनुमति मांगी जा सकती है। काम नहीं करने के ये कारण बताए ठेकेदार ने
बात खरी है... इसमें आप देखेंगे बिहार के नेताओं और अफसरों के बीच अंदरखाने क्या चल रहा है, और दिनभर की ऐसी बड़ी हलचल जो आपको हंसाएगी भी और जिम्मेदारों को आइना भी दिखाएंगी। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें...
एक शहर, दो घटनाएं… और वही सिस्टम की चुप्पी। एक तरफ NEET की तैयारी कर रही होनहार छात्रा सपनों के साथ घर से निकली और लौटी तो सिर्फ एक लाश। दूसरी तरफ शिल्पी-गौतम एक आम परिवार, रोजमर्रा की जिंदगी और अचानक मौत का साया। नाम अलग हैं, कहानियां अलग दिखती हैं, लेकिन दोनों हत्याकांडों की तह में उतरिए तो तस्वीर एक जैसी नजर आती है-दरिंदगी, लापरवाही और सिस्टम की नाकामी। मानों लड़कियों के लिए 27 सालों में कुछ बदला ही नहीं है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में पढ़िए, 1999 की शिल्पी-गौतम हत्याकांड और 2026 की NEET स्टूडेंट की हत्या में क्या समानता है। कैसे महिलाओं के लिए कुछ नहीं बदला है। कैसे आज भी बिहार की बेटियां बेबसी ओढ़े हुए हैं। 1. शुरुआती जांच में ही चूक NEET स्टूडेंट केस हो या शिल्पी-गौतम हत्याकांड, दोनों में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। सबूतों को समय पर सुरक्षित नहीं किया गया, घटनास्थल से अहम कड़ियां गायब रहीं और केस की दिशा तय करने में देर होती रही। शिल्पी-गौतम हत्याकांडः 3 जुलाई, 1999, नीले सूट में, कंधे पर बैग टांगे शिल्पी जैन रिक्शे पर बैठकर कोचिंग के लिए निकल रही थी। शिल्पी ‘मिस पटना’ रह चुकी थी। वह गौतम की दोस्त थी। रिक्शा अभी उसके घर के कनाल रोड के मोड़ पर पहुंचा ही था कि पीछे से एक सफेद कार धीरे-धीरे पास आई। अंदर से एक जानी-पहचानी आवाज आई- ‘अरे शिल्पी! रिक्शे में क्यों? मेरी गाड़ी में बैठो, छोड़ देता हूं।’ वो गौतम सिंह का दोस्त था। शिल्पी को गौतम पर भरोसा था और उसके दोस्तों पर भी। ‘अच्छा, बस पास तक छोड़ देना’, उसने मुस्कुराते हुए कहा और रिक्शा रुकवा दिया। वो कार में बैठ गई। शुरुआत में सब सामान्य था- कार उसी दिशा में बढ़ी, जहां शिल्पी की कोचिंग थी, लेकिन कुछ मिनट बाद, उसने देखा कि रास्ता बदल गया है। गाड़ी अब शहर से बाहर की तरफ मुड़ चुकी थी। ‘ये रास्ता तो नहीं है मेरे इंस्टीट्यूट का…?’, उसने हैरान होकर पूछा। बगल में बैठा गौतम का दोस्त मुस्कुराया, बोला- ‘अरे, घबराओ मत। वाल्मी गेस्ट हाउस चल रहे हैं। गौतम वहीं है, उसने बुलाया है। कुछ जरूरी बात करनी है।’ उधर, गौतम सिंह को किसी ने बताया- ‘शिल्पी को वाल्मी गेस्ट हाउस ले जाया गया है।’ वो सन्न रह गया। दौड़ा-भागा वहां पहुंचा। पहली मंजिल पर पहुंचा तो गौतम की सांस रुक गई। वो दरवाजे की ओर भागा। दरवाजा आधा खुला था। कमरे में शिल्पी थी- उसके कपड़े आधे फटे हुए, चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ। चारों तरफ कुछ लोग खड़े थे- वही चेहरे, जिन्हें गौतम अक्सर अपने साथ राजनीति के दांव-पेच में देखता था। वो लोग अब जानवर बन चुके थे। गौतम ने चिल्लाकर कहा, ‘रुको! छोड़ दो उसे!’ लेकिन उसकी आवाज उनकी गंदी हंसी में गुम हो गई। उसने झपटकर शिल्पी की ओर बढ़ने की कोशिश की, मगर पीछे से किसी ने उसे पकड़ लिया। और अगले ही पल, पहला मुक्का उसके चेहरे पर पड़ा। गौतम लड़ने की कोशिश करता रहा, पर हर तरफ से लातें और घूसे पड़ने लगे। वो बार-बार गिरता, उठता, फिर गिरता। सामने, वही लोग शिल्पी के साथ दरिंदगी करते रहे- और वो कुछ नहीं कर पाया। किसी ने पास रखे गिलास में कुछ मिलाया- कोई कड़वी-सी चीज, शायद जहर। थोड़ी देर बाद वही गिलास शिल्पी के होठों पर लगाया गया। वो बेहोश हो चुकी थी। कमरे में सन्नाटा छा गया। सिर्फ पंखे की आवाज रह गई। दो लोग फर्श पर पड़े थे। (...लोगों की चर्चाओं के आधार पर तब के अखबारों में ऐसा ही छपा था।) गैराज में मिली शिल्पी-गौतम की अर्ध नग्न लाश इधर, घर नहीं पहुंची शिल्पी तो घरवालों ने गांधी मैदान थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। थोड़ी ही देर में पुलिस साधु यादव के क्वार्टर के बाहर पहुंची। वहां पुलिस से पहले कुछ लोग जमा थे- कुछ चौकीदार, कुछ स्थानीय लोग। फुलवारी शरीफ के उस पुराने MLA क्वार्टर के पीछे एक गैराज था- आधा टूटा-फूटा, जिसमें अक्सर सफेद गाड़ियां पॉलिश होती थीं। इसके भीतर से पेट्रोल और धुएं की तेज गंध आ रही थी। थानेदार ने टॉर्च जलाया और धीरे से अंदर कदम रखा। पहली नजर में लगा, कोई हादसा हुआ है, लेकिन जैसे ही रोशनी वहां खड़ी कार के भीतर पड़ी- सबके होश उड़ गए। सामने सफेद कार खड़ी थी। अंदर दो शव पड़े थे- गौतम सिंह और शिल्पी जैन के। गौतम के शरीर पर सिर्फ पैंट थी। बगल में शिल्पी पड़ी थी- उसके ऊपरी हिस्से पर सिर्फ एक टी-शर्ट थी, जो साफ तौर पर गौतम की थी। बाकी कपड़े गायब थे। थानेदार कुछ पल के लिए चुप रहा, लेकिन इससे पहले कि पुलिस और जांच करती, एक जोरदार शोर उठा- गेट के बाहर कुछ गाड़ियों की हेडलाइटें चमक उठीं और भीड़ उमड़ आई। एक गाड़ी के बाहर से भारी आवाज सुनाई दी- ‘क्या हो रहा है यहां? वो साधु यादव थे। पुलिस वालों ने झटपट सलाम ठोका। थानेदार कुछ कहने ही वाला था कि साधु ने इशारे से बात रोक दी। ‘लाश मिली है?’ थानेदार ने सिर झुका लिया, ‘जी… कार में…’ साधु कुछ पल कार की ओर देखते रहे। ‘जांच करो… जो करना है, करो’, उन्होंने कहा, और पीछे हट गए। अब गैराज के भीतर सिर्फ पुलिस थी और दो बेजान जिस्म। एक पुलिस वाले ने धीरे से कहा, ‘गाड़ी को थाने ले चलते हैं।’ ‘लेकिन सर, फिंगर प्रिंट्स…’थानेदार ने डांट दिया, ‘ज्यादा दिमाग मत लगाओ।’ गाड़ी स्टार्ट की गई और थाने ले जाई गई- उसी वक्त दोनों के शरीर भी पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए। रात के साढ़े 9 बज चुके थे। एक रिपोर्टर ने अफसर से पूछा, ‘साहब, ये मर्डर है या एक्सीडेंट?’ अफसर ने कहा- ना, ना, आत्महत्या लग रही है।’ ‘लेकिन पोस्टमॉर्टम तो हुआ नहीं अभी?’ ‘हम इतने केस देख चुके हैं कि पहली नजर में समझ जाते हैं मौत कैसे हुई।’ अफसर ने जवाब दिया, और किसी को भी अंदर जाने से रोक दिया। रात गहराती गई। पोस्टमॉर्टम उसी रात किया गया, जल्दबाजी में, बिना परिजनों की मौजूदगी के। रात में ही गौतम का अंतिम संस्कार कर दिया गया। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के रेप-मौत मामले की सूचना मिलने के बाद भी 3 दिन तक थाना प्रभारी रोशनी कुमारी घटनास्थल पर पहुंचीं ही नहीं। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि लड़की से वारदात की जानकारी चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी को कदमकुआं थाने से मिली थी। उस वक्त वह गांधी मैदान में मीटिंग में थीं। सूचना मिलने के बाद वह अस्पताल तो पहुंचीं, लेकिन घटनास्थल यानी हॉस्टल कहां है, इसकी उन्हें जानकारी तक नहीं थी। परिजन बोले-कपड़े पर लगा था खून, डॉक्टर ने फेंक दिया परिजनों ने कहा- सबसे पहले उनकी बच्ची को हॉस्टल के पास सहज सर्जरी में भर्ती कराया गया। वहां से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां के एक जूनियर डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ ने हमें बताया कि पीड़िता के कपड़े पर खून लगा था। जब हमने बच्ची का कपड़ा मांगा तो डॉक्टर ने थानेदार और हॉस्टल संचालक की मौजूदगी में कहा-फेंक दिया हूं। डॉक्टर ने कहा-तुम्हें बच्ची को बचाना है या उसका कपड़ा रखना है? 2. पीड़ित वही, कहानी बदली गई दोनों मामलों में सबसे पहले पीड़ित के चरित्र और परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए। कहीं पढ़ाई और मूवमेंट को शक के दायरे में लाया गया, तो कहीं पारिवारिक विवाद की थ्योरी उछाली गई। असली सवाल—कातिल कौन है—हाशिए पर चला गया। शिल्पी-गौतम हत्याकांडः द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने शुरुआती जांच में बताया कि शिल्पी और गौतम की मौत सेक्स के दौरान हुई है। कार बंद थी। एसी ऑन था। संबंध बनाने के दौरान उन्हें घुटन होने लगी। कार में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस फैल गया। दम घुटने की वजह से दोनों की मौत हो गई। तीन साल बाद CBI ने पुलिस की जांच को सही बताया सितंबर 1999 से 2004 तक CBI की टीम ने पटना और फुलवारी शरीफ की गलियों में हर तरह की छानबीन की। तीन साल की लंबी जद्दोजहद के बाद CBI ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में दावा किया कि यह हत्या का मामला नहीं था, बल्कि शिल्पी और गौतम ने जहर खाकर अपनी जान दी। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः पुलिस जांच से पहले ही आत्महत्या करार दे चुकी है। हालांकि, लोगों का आक्रोश देखते हुए पुलिस अपने बयान से बैकफुट पर है। SIT मामले की जांच कर रही है, लेकिन उसकी जांच की दिशा अपने पहले के बयानों की तरफ मुड़ती दिख रही है। 3. सत्ता-सिस्टम की खामोशी NEET स्टूडेंट केस हो या शिल्पी–गौतम हत्याकांड-राजनीतिक बयान देर से आए, वो भी औपचारिक। न तत्काल जवाबदेही तय हुई, न अफसरों पर कार्रवाई। सिस्टम ने पहले खुद को बचाया, पीड़ितों को नहीं। शिल्पी गौतम हत्याकांडः दोनों कपल की बॉडी गराज में मिली थी। इस घटना की सूचना मिलते ही वहां पुलिस से पहले तत्कालीन RJD विधायक साधु यादव के समर्थक पहुंच गए और हंगामा करने लगे। नारेबाजी करने लगे। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः 6 जनवरी को NEET की तैयारी कर रही छात्रा शंभू हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली। हॉस्टल के कर्मचारी हॉस्पिटल ले गए। एक हॉस्पिटल, दो हॉस्पिटल और फिर तीसरे हॉस्पिटल में मौत। 6 जनवरी से 9 जनवरी तक चले इस घटनाक्रम में पुलिस सीन से गायब रही। 4. दबाव में पुलिस की जांच थोड़ी आगे बढ़ी दोनों ही मामलों में पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे। मीडिया, सोशल मीडिया और जनदबाव के बिना जांच आगे बढ़ती नहीं दिखी। सवाल यह है—क्या न्याय पाने के लिए हर परिवार को आंदोलन करना होगा? शिल्पी गौतम हत्याकांडः पुलिस के बिना जांच किए सुसाइड करार देने पर विपक्ष सड़क पर उतर गया। प्रदर्शन शुरू हो गए। पटना की गलियां नारों से गूंज उठीं- ‘साधु यादव को नहीं बख्शा जाएगा!’ NEET स्टूडेंट हत्याकांडः छात्रा की मौत के बाद पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा था, ‘नींद की गोली के ओवरडोज से छात्रा की मौत हुई है।’ हंगामा बढ़ा। लोगों ने प्रदर्शन किया तब पुलिस ने अपने बयान से यू-टर्न ले लिया। बवाल बढ़ता देख DGP विनय कुमार ने छात्रा की मौत के 6 दिन बाद 16 जनवरी को SIT बनाई। अब SIT मामले की जांच कर रही है। IG जितेंद्र राणा मामले की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस ने अब तक मामले का खुलासा नहीं किया है। सवाल आज भी वही… NEET स्टूडेंट रेप-हत्याकांड और शिल्पी–गौतम हत्याकांड सिर्फ 2 केस नहीं, बल्कि सिस्टम के चेहरे पर पड़े वही पुराने दाग हैं-जो हर बार नए नामों के साथ सामने आते हैं। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक अगली खबर बस नाम बदलेगी… कहानी वही रहेगी।
बिहार में उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं, जिससे लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिली है। दिन में तेज धूप निकलने से अधिकतम तापमान बढ़ा है। हालांकि सुबह-शाम कनकनी बरकरार है। मौसम विभाग ने आज अररिया, पूर्णिया सहित 5 जिलों में कोहरे का यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में सुबह और रात के समय लोगों को ठंड ज्यादा महसूस होगी। सुबह-देर रात धुंध भी दिखेगी। अगले 24 घंटों में बिहार में रात का न्यूनतम तापमान 8 से 14 डिग्री के बीच रहने की संभावना है, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 22 से 29 डिग्री के बीच रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दो दिनों में तापमान में 1 से 2 डिग्री की और गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे सुबह और रात के समय हल्की ठंड बढ़ेगी। पटना समेत कई जिलों में बादल छाए रह सकते हैं। बीते 24 घंटे में 12 जिलों का तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा है। कैमूर में 8.4 डिग्री, जमुई में 8.3 डिग्री, जहानाबाद में 8.2 डिग्री, अरवल में 9.1 डिग्री, जबकि लखीसराय में न्यूनतम तापमान 9.1 डिग्री दर्ज किया गया। 7 दिनों तक शुष्क रहेगा मौसम पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, अगले 7 दिनों तक राज्य का मौसम शुष्क रहेगा। बारिश की कोई संभावना नहीं है। आने वाले 2 दिनों तक सुबह में कोहरा छाए रहने की आशंका जताई गई है। खासकर उत्तर-पूर्वी और सीमावर्ती जिलों में असर रहेगा। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे दिन और रात के तापमान में इजाफा होगा। सर्दी का असर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगा। राजधानी में अगले कुछ दिनों तक हल्की ठंड रहेगी। सुबह में हल्का कोहरा और ठंडी हवा चल सकती है। जबकि दिन में धूप निकलने से मौसम नॉर्मल रहेगा। पटना में न्यूनतम तापमान 10 से 13 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। जनवरी लास्ट, फरवरी की शुरुआत में बढ़ेगी ठंड मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तो बिहार में एक बार फिर ठंड बढ़ सकती है। हालांकि फिलहाल तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। कुल मिलाकर, बिहार में अभी हल्की ठंड का दौर जारी है, लेकिन आने वाले दिनों में सर्दी का असर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। मौसम ऐसा क्यों बना हुआ है? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में फिलहाल कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव नहीं है। उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवाएं भी कमजोर पड़ी हैं। इसी कारण से तापमान में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। शुष्क मौसम और साफ आसमान की वजह से रात में तापमान गिर रहा है, जबकि दिन में धूप निकलने से तापमान बढ़ जा रहा है।
''हॉस्टल में रहने वाली बड़े घरों की लड़कियां मिल जाएंगी। जैसी आपकी डिमांड होगी वैसी लड़की मिलेगी। उम्र के हिसाब से रेट लगता है। 17 साल की लड़की का 25 हजार रुपए लगेगा। अगर 40 हजार दीजिएगा तो इससे भी कम उम्र की मिल जाएगी। आईडी फर्जी होगी और उस पर दर्ज उम्र भी फर्जी होगी। लड़की जाएगी तो आपको ओरिजिनल उम्र की आईडी दिखा देगी। बस दिन में ले जाइए और समय से वापस भेज दीजिए। वार्डन तो 1500 में सेट हो जाती है, लेकिन सेफ्टी के लिए लड़कियों को समय से हॉस्टल में वापस भेजना होता है। हमारी सर्विस कैश ऑन डिलिवरी वाली है, लड़की जाएगी तब पैसा दीजिएगा..।'' यह दावा बिहार के गर्ल्स हॉस्टल से लड़कियों की सप्लाई करने वाले एजेंट्स कर रहे हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन की टीम ने ऐसे एजेंट्स को बेनकाब किया है जो हॉस्टल के नाम पर सेक्स रैकेट चला रहे हैं। भास्कर के खुफिया कैमरे पर एजेंट्स, वार्डन और लड़कियों ने हॉस्टल के नाम पर चल रहे धंधे की बात कबूल की है। ऑपरेशन डर्टी हॉस्टल्स पार्ट-1 में पढ़िए और देखिए कैसे गर्ल्स हॉस्टल्स से हो रही लड़कियों की डील..। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से शुरू हुई भास्कर की इन्वेस्टिगेशन पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की स्टूडेंट के साथ हुई घटना ने पूरे बिहार में हॉस्टल्स में रह रही लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की थ्योरी तक सवालों में है। इस घटना के बाद के बाद बिहार के गर्ल्स हॉस्टल्स को लेकर चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को भी कई ऐसे इनपुट मिले हैं, जिसमें पता चला कि गर्ल्स हॉस्टल के नाम पर सेक्स रैकेट का बड़ा नेटवर्क का काम कर रहा है। ऐसे हॉस्टल्स में लड़कियां पढ़ाई और तैयारी के लिए नहीं बल्कि देह व्यापार के लिए रखी जाती हैं। ऐसे ही हॉस्टल्स में तैयारी करने वाली लड़की पहुंच गई तो उसे भी एजेंट्स धंधे में उतारने की कोशिश करते हैं। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी हॉस्टल्स से लड़की की सप्लाई का आरोप लगाया था जो हमारी इन्वेस्टिगेशन में सही पाया गया। पहले पप्पू यादव का आरोप बच्चियों को किसी कीमत पर हॉस्टल में मत डालिए। पटना के हॉस्टल्स में सेक्स रैकेट का धंधा चलता है। कई बार ऐसी चर्चा कर चुका हूं। पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, इसे दबा दिया गया है। हॉस्टल संचालक सेक्स रैकेट चलता है। जिस हॉस्टल्स में घटना हुई वहां संचालक पटना में लड़कियों की सप्लाई करता है। वह पहले से ही पटना में सेक्स रैकेट चलाता रहा है। कई रसूखदार नेता और पदाधिकारियों को लड़कियां सप्लाई करता था। शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड और पप्पू यादव के आरोपों के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी पड़ताल शुरू की। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटना इतनी हाई प्रोफाइल हो गई कि एजेंट्स अलर्ट हो गए हैं। वह अब लड़कियों की डील करने को तैयार ही नहीं। काफी पड़ताल के बाद पटना के कई लोकेशन पर लड़कियां सप्लाई करने वाले एजेंट रवि का नंबर मिला। रवि ने भास्कर रिपोर्टर से हॉस्टल्स की लड़कियों की पूरी डील की। रिपोर्टर - हॉस्टल्स की कुछ नई लड़कियां चाहिए थी? रवि - कितनी चाहिए? रिपोर्टर - 3 से 4 गेस्ट हैं तो 4 मिल जाएं। रवि - हो जाएगा, आपको फोटो भेज देता हूं सिलेक्ट कर लीजिए। रिपोर्टर - फोटो में पसंद नहीं आ रही, कुछ और भी हैं क्या? रवि - ठीक है, मेरे पास यूनिवर्सिटी और कॉलेज वाली भी हैं, होटल वाली भी दे दूंगा। रिपोर्टर - हॉस्टल वाली लड़कियां मिल जाएंगी ना? रवि - हां-हां, वही दूंगा, आपको जो चाहिए, वही मिलेगी। रिपोर्टर - मतलब हॉस्टल तो होटल? रवि - हां, हॉस्टल वाली ही मिलेंगी, मेरा नंबर पटना में नंबर-एक पर है। पटना के अलग-अलग हॉस्टल्स से रवि की सेटिंग डील के दौरान रवि ने खुलासा किया कि हर एरिया में उसकी सेटिंग है। किस एरिया में लड़की चाहिए वह वहां की हॉस्टल से सेटिंग कर लेगा। रवि ने तो यह भी दावा किया कि लड़कियां ऐसी मेंटेंन होकर जाएंगी किसी को पता भी नहीं चलेगा। रवि - आप बताइए पटना के किस एरिया में चाहिए, एक घंटे के अंदर मैं लड़की भेज दूंगा। रिपोर्टर - आप की तरह और एजेंट सभी ऐसे ही दावे करते हैं। रवि - कोई दूसरा देता है तो वह मेरी ही लड़की होगी, आप स्टांप पर लिखकर रख लो। रिपोर्टर - लड़की अच्छी होनी चाहिए। रवि - समझ गया, आपको अच्छी लड़की चाहिए, मिल जाएगी। रिपोर्टर - कौन लड़कियां होती हैं जो आप देते हो? रवि - अच्छे घर की लड़कियां होंगी, जो बाहर से पढ़ने आती हैं। रिपोर्टर - कितना लगेगा? रवि - कम उम्र की लड़की देंगे तो 25 हजार लगेगा, उससे भी कम उम्र की 40 हजार से ऊपर। रिपोर्टर - कितनी उम्र की लड़कियां होंगी? रवि - यहां बहुत कुछ रिकॉर्ड होता है, सब कुछ बताना ठीक नहीं होगा। रिपोर्टर - तब तो बहुत खतरा है आपसे बात करने में? रवि - अलर्ट रहना है, बस इतना जान लीजिए, 17 साल की लड़कियां मिल जाएंगी। लड़कियों को फर्जी आईडी पर भेजा जाता है हॉस्टल्स से लड़कियों की तस्करी करने वाले एजेंट रवि ने डील में खुलासा किया कि वह लड़कियों को फर्जी आईडी पर भेजता है। लड़कियां 18 साल से कम उम्र की होती हैं, इसलिए फर्जी आईडी बनाकर उन्हें 18 साल से ज्यादा उम्र का दिखाया जाता है। ऐसा इसलिए करता है कि कहीं कोई पुलिस केस नहीं हो। मामला फंसे भी तो लड़कियां आसानी से बाहर आ जाएं। रिपोर्टर - आईडी में तो लड़कियों की उम्र ओरिजिनल होगी ना? रवि - फर्जी आधार कार्ड होता है जिसमें लड़कियों की उम्र 18 से ऊपर होती है। रिपोर्टर - ऐसा क्यों करते हैं? रवि - कम उम्र की लड़कियों को होटल में ले जाने में परेशानी होती है। रिपोर्टर - अच्छा इसलिए? रवि - हां, इसीलिए फर्जी पहचान पत्र बनाना होता है, 18 साल से कम उम्र में होटल में अनुमति नहीं होती। रिपोर्टर - दिन या रात, कब दीजिएगा? रवि - जब बोलिए, दे दूंगा, दिन-रात दोनों में मौजूद हैं। रवि ने बताया हॉस्टल से निकालने का ट्रिक डील के दौरान रवि ने लड़कियों को हॉस्टल्स से निकालने का ट्रिक बताया। जब रिपोर्टर ने सवाल किया कि लड़कियां रात में हॉस्टल्स से कैसे निकलेंगी तो रवि ने दावे के साथ कहा कि भैया, रात में मैं निकाल लूंगा, वह सिस्टम मेरे ऊपर है। हॉस्टल के गार्ड और वार्डन सब मैनेज रहते हैं, उन्हें 15 सौ रुपए देना होता है। आप टेंशन मेरे ऊपर छोड़ दीजिए। कैसे लाएंगे, कैसे नहीं, यह मेरा टेंशन है। आपको लड़की चाहिए, मिल जाएगी। आपके सामने लाकर खड़ा कर दूंगा। रवि ने लड़कियों के लिए अलग-अलग लोकेशन शेयर की भास्कर रिपोर्टर की डील में रवि पूरी तरह से एक्टिव हो गया। डील पूरी तरह से फाइनल होते ही एजेंट रवि एक के बाद एक लोकेशन भेजने लगा। रवि ने आधा दर्जन से अधिक अलग अलग लोकेशन भेजी जहां हॉस्टल्स की लड़कियों को भेजने का दावा कर रहा था। एजेंट बोला- लड़कियां कैश ऑन डिलिवरी वाली हैं सिर्फ वॉट्सऐप मैसेज ही नहीं, बल्कि अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उसने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी भेजी। रवि ने एक वाइस मैसेज भी भेजा जिसमें बोल रहा था..आप मीठापुर बस स्टैंड के गेट नंबर-1 के पास आ जाइए। अगर वहां दिक्कत हो तो रेलवे जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-10, करबिगहिया रोड की तरफ स्थित हरे कृष्णा गेस्टहाउस में मिल सकते हैं। तीसरा ऑप्शन रामकृष्णा नगर, पिलर नंबर-78 के सामने मौजूद स्नो व्हाइट होटल है। जहां भी आओगे, कैश ऑन डिलीवरी में काम हो जाएगा। हॉस्टल्स की लड़कियों की डील करने वाले एजेंट रवि से बातचीत के दौरान ही राजू के बारे में पता चला। क्लू मिला कि राजू फुलवारी एरिया का रहने वाला है, लेकिन वह बड़ा गोपनीय तरीके से लड़कियों की सप्लाई करता है। उसकी कस्टमर और लड़कियां सब पहले से ही सेट हैं। इसलिए वह बाहरी लोगों से इस संबंध में कोई डील नहीं करता है। काफी पड़ताल के बाद राजू का मोबाइल नंबर मिला और उससे हॉस्टल्स की लड़कियों की पूरी डील की। रिपोर्टर - मैं पटना से हूं, आप कहां से? राजू - मैं भी पटना में ही हूं, क्या चाहिए बताएं? रिपोर्टर - कुछ सर्विस मिल जाए तो अच्छा रहता। राजू - ओह, कितने देर के लिए चाहिए? रिपोर्टर - आप कब दे सकते हो? राजू - फुल नाइट के लिए मिलेगा, आपको जब चाहिए मिल जाएगा। रिपोर्टर - किस एरिया में दोगे आप? राजू - आपको किस एरिया में चाहिए, कई एरिया में अपनी सेटिंग है। रिपोर्टर - कहां, कहां सेटिंग है? राजू - मीठापुर बस स्टैंड, गांधी मैदान, चिरैया टाड, बोरिंग रोड, राजा बाज़ार, कंकड़बाग, जंक्शन हर जगह। रिपोर्टर - और कहीं चाहिए हो तो क्या होगा? राजू - आप लोकेशन बताइएगा, हर जगह अवेलेबल होगा। कॉलेज और हॉस्टल वाली लड़कियों की ज्यादा डिमांड है बातचीत के दौरान एजेंट राजू ने बताया कि सबसे अधिक डिमांड कॉलेज और हॉस्टल्स वाली लड़कियों की होती है। वह सेफ होती हैं, बाजारु लड़कियों से तो बहुत रिस्क होता है। इसलिए वीआईपी लोग भी वही कॉलेज और हॉस्टल्स वाली लड़कियां ही चाहते हैं। राजू - मेरी सब लड़कियां हॉस्टल्स वाली ही होती हैं। रिपोर्टर - दिन या रात में कब मिल जाएगी, हम 4 दोस्त हैं। राजू - हो जाएगा, आप आइए, कुछ एडवांस दे दीजिए। रिपोर्टर - ऐसे कैसे होगा, पेमेंट उसी वक्त दे दूंगा। राजू - लड़की आपको पसंद आएंगी, अगर नहीं आईं तो पैसा वापस हो जाएगा। रिपोर्टर - लड़की ठीक होगी ना? राजू - हॉस्टल वाली मजबूरी में काम करती हैं, आई फोन से लेकर खर्चा पूरा करना होता है। रिपोर्टर - लड़कियों को आप सेट करके रखते हैं पहले से? राजू - जो कॉलेज की रहती हैं, वो लड़कियां कॉन्टैक्ट में हैं, वही आपको मिलेंगी। रिपोर्टर - मतलब मजबूरी वाली? राजू - हां, कॉलेज गर्ल और हॉस्टल वाली मिलेंगी। रिपोर्टर - अच्छा, ठीक है। राजू - एक बार काम कीजिए, काम पसंद आएगा तो आपके माध्यम से और ग्राहक मिल जाएंगे। रिपोर्टर - हॉस्टल वाली कैसे बाहर आएंगी? राजू - कैसे लाना है वह आप मुझ पर छोड़िए, कहां लाना है आप फाइनल कीजिए। गर्ल्स हॉस्टल्स से लड़कियों का पॉलिटिकल कनेक्शन भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पहले भी यह एक्सपोज हो चुका है कि गर्ल्स हॉस्टल्स की लड़कियों का सीधा कनेक्शन पॉलिटिकल है। हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम एजेंट और हॉस्टल की वार्डन से होकर नेता तक पहुंची थी जहां से लड़कियों की सप्लाई होती थी। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को राहुल का इनपुट मिला। राहुल पटना में लड़कियों की सप्लाई करता है। अधिकतर लड़कियां हॉस्टल्स की होती हैं जिन्हें वह नेता और वीआईपी लोगों के पास भेजता है। अब सैकड़ों लड़कियों की सप्लाई करने का दावा करते हुए राहुल ने हॉस्टल्स की लड़कियों का पॉलिटिकल कनेक्शन उजागर किया। रिपोर्टर - लड़कियां चाहिए? राहुल - कैसी लड़कियां चाहिए? रिपोर्टर - हाई प्रोफाइल लड़की चाहिए। राहुल - कुछ लड़कियां मेरे पास हैं, लेकिन बहुत हाई प्रोफाइल नहीं। रिपोर्टर - फिर कैसे होगा? राहुल - हाई प्रोफाइल लड़की देने वाली एक एजेंट से मिलवा दूंगा, मेरे लिए क्या कीजिएगा। रिपोर्टर - आपका जो कमीशन होगा दे दिया जाएगा। राहुल - हां, तब ठीक है, पूरी तरह से हाई प्रोफाइल लड़की मिलेगी। रिपोर्टर - वह लड़की कहां मिलेगी? राहुल - बोरिंग रोड के पास एक हॉस्टल की वार्डन है, मैं मीटिंग अरेंज करा दे रहा हूं। रिपोर्टर – ठीक है। लड़कियां सप्लाई करने वाले एजेंट राहुल ने भास्कर रिपोर्टर की मीटिंग मिस्टी से कराई। मिस्टी पटना के ही बोरिंग रोड स्थित एक गल्स हॉस्टल की वार्डन है। जहां मिस्टी वार्डन है, वहां लगभग 100 लड़कियां रहती हैं। राहुल से डील कराने के बाद मिस्टी खुलकर हॉस्टल की लड़कियों की डील को तैयार हो गई। रिपोर्टर - अकेले रहती हैं क्या? मिस्टी -- हां, हॉस्टल की वार्डन हूं। रिपोर्टर - लड़कियों का इंतजाम कैसे होगा? मिस्टी - बात करना पड़ेगा, एक एजेंट है, पूरे बिहार में काम करता है। रिपोर्टर - उसके पास मिल जाएगी लड़कियां? मिस्टी - बिहार में जितने अड्डे चलते हैं, उनमें से 99 प्रतिशत वही देता है। रिपोर्टर - कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगा ना? मिस्टी - नहीं नहीं कोई दिक्कत नहीं, हॉस्टल वाली ही होंगी। रिपोर्टर - आप धनबाद से यहां कैसे आ गईं? मिस्टी - मजबूरी है, वहां से आना पड़ा, जगह पसंद नहीं है। रिपोर्टर - अच्छा। मिस्टी - आपको कैसी चाहिए? फेयर और लंबी? रिपोर्टर - हां, ऐसी ही चाहिए। मिस्टी - ठीक है, इंतजाम हो जाएगा। रिपोर्टर - यहां हॉस्टल में कैसे…? मिस्टी - मेरी शादी नहीं हुई है, शादीशुदा की तरह रहना पड़ता है। रिपोर्टर - ऐसा क्यों? मिस्टी - वार्डन की नौकरी है, तो वैसे ही रहना पड़ता है। मिस्टी ने खोले हॉस्टल के कई राज डील के दौरान मिस्टी ने कई राज खोले। मिस्टी ने बताया कि हॉस्टल में कैसे धंधा चलता है। कैसे लड़कियों को फंसाने के लिए वार्डन को वेश बदलकर रहना पड़ता है। रिपोर्टर - आप लोगों का काम बहुत टफ है। मिस्टी - हां, भैया को पता है। रिपोर्टर - कौन से भैया? मिस्टी - जो हॉस्टल चला रहे हैं, वही। रिपोर्टर - शादीशुदा को ही क्यों रखते हैं? मिस्टी - उनकी शर्त ही थी कि शादीशुदा को ही रखना है। रिपोर्टर - अच्छा। मिस्टी - क्योंकि शादीशुदा महिलाओं पर जल्दी विश्वास हो जाता है। रिपोर्टर - हां, यह बात तो है, फिर वह झांसे में आ जाती होगी। मिस्टी - लड़कियां जल्दी घुल-मिल जाती हैं, बिहार है, बहुत कुछ देख-समझकर चलना होता है। हॉस्टल से स्पा सेंटर और फिर सेक्स रैकेट मिस्टी ने बातचीत में खुलासा किया कि वह हॉस्टल से पहले स्पा सेंटर में काम करती थी। वहां से हॉस्टल का संपर्क हुआ। मिस्टी की बातचीत से यह पता चल गया कि सेक्स रैकेट से पहले लड़कियों को स्पा सेंटर तक ले जाया जाता है। रिपोर्टर ने जब मिस्टी से सवाल किया कि वह हॉस्टल में कैसे पहुंची तो उसने चौंकाने वाला जवाब दिया। मिस्टी ने बताया मैं पटना में काम करने आई थी, स्पा सेंटर में भी काम किया। वहीं स्पा वाले भैया ने हॉस्टल वाले भइया से संपर्क करा दिया। इसके बाद मैं शादीशुदा महिला बनकर हॉस्टल में रहने लगी। अब इसके साथ-साथ कुछ एक्स्ट्रा काम भी कर लेती हूं, जिससे अच्छी आमदनी हो जाती है। मिस्टी ने ही खोल था हॉस्टल से नेताओं का कनेक्शन पटना के गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन मिस्टी ने ही नेताओं से लड़कियों के कनेक्शन का पूरा राज खोला था। मिस्टी पटना में बैठकर कैसे नेताओं के लिए लड़कियों की व्यवस्था करती है, इसका भी खुलासा किया। हॉस्टल की वार्डन मिस्टी ही भास्कर रिपोर्टर को लेकर झारखंड गई जहां कई नेताओं के पास लड़कियों की सप्लाई का खुलासा किया। झारखंड की महिला नेता से भी मिस्टी ने ही डील कराई थी। मिस्टी ने दावा किया था कि लड़कियों को हॉस्टल में रखती है और फिर उनकी सप्लाई नेताओं के पास होती है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को लड़कियों की सप्लाई करने वाले एजेंट्स से डील के दौरान ही पटना में कॉलेज और हॉस्टल की लड़कियों की सप्लाई करने वाले एजेंट विशाल का इनपुट मिला। विशाल पहले तो मिलने को तैयार नहीं था, काफी कोशिश के बाद वह मिला और लड़कियों की सप्लाई चेन का पूरा राज भी खोला। रिपोर्टर - लड़कियां चाहिए? विशाल - सब हो जाएगा, दिन में या रात में? रिपोर्टर - दिन और रात में क्या अंतर है? विशाल - दिन में मेरे पास एक से बढ़कर एक लड़कियां हैं। रिपोर्टर - कैसी लड़कियां हैं? विशाल - सब कम उम्र की पढ़ने वाली लड़कियां हैं। रिपोर्टर - पढ़ने वाली मतलब नहीं समझा? विशाल - हॉस्टल और महिला कॉलेज की लड़कियां मिल जाएंगी। रिपोर्टर - कई महिला कॉलेज की हाई-प्रोफाइल लड़कियां, समझ रहे हैं ना। रिपोर्टर - इन लड़कियों का चार्ज क्या रहेगा? विशाल - जैसी लड़की रहेगी, वैसा चार्ज रहेगा। हॉस्टल और कॉलेज की लड़कियों की डिमांड डील के दौरान एजेंट विशाल ने खुलासा किया कि कॉलेज और हॉस्टल्स की लड़कियों की सबसे अधिक डिमांड है। ऐसी लड़कियों के लिए लोग परेशान रहते हैं। इन लड़कियों की डिमांड काफी अधिक होती है। एक बार का कम से कम 10 हजार रुपए लेती हैं। विशाल - मेरे पास पटना की सबसे बेस्ट लड़कियां मिल जाएंगी। रिपोर्टर - रेट तो पसंद के बाद बताइएगा ना? विशाल - वॉट्सऐप पर फोटो भेज दूंगा, पसंद के बाद चार्ज बताएंगे। रिपोर्टर - लड़कियों का रेट कैसे तय होता है? विशाल - उम्र, फिगर यानी जैसी प्रोफाइल, वैसा चार्ज रहेगा। रिपोर्टर - अच्छा विशाल - जितनी सुंदर, उतना चार्ज, कम उम्र की बहुत डिमांड है। रिपोर्टर - लड़कियां तो फ्रेश मिलेंगी ना? विशाल - हां, मेरे पास फ्रेश मिलेंगी, पूरे पटना में ऐसी सप्लाई कोई नहीं कर पाएगा। रिपोर्टर - तब ठीक है, डन कीजिए। विशाल - मैं अपडेट देता रहूंगा, सबकी फोटो और चार्ज आपको भेज दिया जाएगा। कल ऑपरेशन डर्टी हॉस्टल पार्ट- 2 में जानिए गर्ल्स हॉस्टल में कैसे पहुंच रही ड्रग्स। लड़कियों को एडिक्ट बनाकर कैसे काम कर रहा ड्रग्स तस्करों का नेटवर्क।
भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर ठगी के मामलों के बीच जोधपुर कमिश्नरेट को बड़ी सफलता मिली है। कंबोडिया से ऑपरेट हो रहे इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग स्कैम के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इसमें राजस्थान समेत देश के 32 राज्यों से फर्जीवाड़े से 5378 सिम कंबोडिया गई। जहां से 1102 करोड़ रुपए की साइबर ठगी होना सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों हेमंत पंवार, रामावतार राठी, हरीश मालाकार, मोहम्मद शरीफ, संदीप भट्ट और प्रकाश भील को गिरफ्तार किया है। इनमें 2 आरोपी नागौर, 2 आरोपी जोधपुर, 1 आरोपी अजमेर और 1 आरोपी लुधियाना का रहने वाला है। जबकि मलेशिया के ली जीयेन हुई, लो डी खेन, चिन यू मिंग और लियोंग केन नेथ के खिलाफ एलओसी (लुक आउट नोटिस) जारी किया है। अब पुलिस 5 हजार सिम को बंद करवाएगी। उनके वॉट्स एप को भी ब्लॉक करवाया जाएगा। कमिश्नरेट स्तर पर एक एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया गया है। इस गिरोह में जोधपुर, नागौर, अजमेर, लुधियाना सहित कई राज्यों के सिम विक्रेता और एजेंट शामिल हैं। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच कर रही है। पुलिस आयुक्त ओमप्रकाश ने कहा कि यह कार्रवाई साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कामयाबी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।ऐसे चलता है सिम घोटाला: पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे। सिम विक्रेता ग्राहकों को यह कहकर गुमराह करते थे कि आपका फिंगरप्रिंट और फोटो सही से स्कैन नहीं हुआ, दोबारा करना पड़ेगा। इस बहाने एक सिम ग्राहक को दे दी जाती, जबकि दूसरी सिम गुपचुप तरीके से एक्टिव कर अपने पास रख ली जाती। बाद में ये फर्जी सिम आगे सप्लाई कर दी जाती थी। यूं हुआ खुलासा भगत की कोठी और देवनगर थानों में साइबर ठगी के मामलों की पुलिस ने जांच की थी। इसमें सामने आया कि पीड़ितों से संपर्क करने वाले वॉट्स एप नंबर कंबोडिया से ऑपरेट हो रहे थे। इसके बाद सिम गिरोह की रिवर्स चेन एनालिसिस शुरू की। पिछले साल सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के रिवर्स ट्रेल में 2.30 लाख मोबाइल सिम का डेटा सामने आया। इसे भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र (आई4सी) की डेटा एनालिटिक्स टीम की मदद से जांचा गया। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ एक्सपर्ट्स को करीब 36 हजार सिम कंबोडिया में रोमिंग पर सक्रिय मिली। इनमें से 5300 सिम से देशभर में 1102 करोड़ रुपए की ठगी हुई।
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शाह के खिलाफ अभियोजन पर स्वीकृति देने के लिए सरकार को दो हफ्ते का वक्त दिया है। कानूनी जानकारों की मानें तो विजय शाह के इस केस का ट्रायल इंदौर कोर्ट में शुरु किया जा सकता है। सीएम के दावोस से लौटने के बाद सरकार लेगी एक्शनसुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अभियोजन पर निर्णय लेने के लिए दो हफ्तों का वक्त दिया है। सीएम डॉ मोहन यादव 23 जनवरी तक स्विटजरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने के लिए गए हैं। ऐसे में सीएम के दावोस से लौटने के बाद विजय शाह के मामले में सरकार आगे निर्णय लेगी। सोमवार को हुई थी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में छह महीने बाद विजय शाह मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर सोमवार को कोर्ट ने कहा कि इसमें अब बहुत देर हो गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर 2 हफ्ते के भीतर फैसला लें। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर कई महीनों से कोई फैसला नहीं ले रही है। जबकि विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है। कोर्ट ने कहा अब सरकार को निर्णय लेना होगासुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश टिप्पणी करते हुए कहा- आप 19 अगस्त, 2025 से एसआईटी रिपोर्ट पर विचार कर रहे हैं। कानून आप पर दायित्व डालता है और आपको निर्णय लेना होगा। अब 19 जनवरी है। अदालत ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोली और पाया कि विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद, उसने उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी है। हमें सूचित किया गया है कि मामला यहां लंबित होने के कारण राज्य द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम मध्य प्रदेश राज्य को कानून के अनुसार मंजूरी हेतु उचित कदम उठाने का निर्देश देते हैं , न्यायालय ने आदेश दिया। कोर्ट ने माफी पर कहा अब बहुत देर हो चुकीइससे पहले मप्र सरकार की ओर से यह बताया गया था कि उसने एसआईटी के अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं की थी क्योंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित था। जब शाह का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले ही अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली थी, तो अदालत ने कहा, माफी कहां है? रिकॉर्ड में तो कुछ भी नहीं है। अब तो बहुत देर हो चुकी है। पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं विजय शाहमंत्री विजय शाह पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी को लेकर एक बयान के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। हाल ही में उन्होंने रतलाम जिले में लाड़ली बहनों को लेकर भी एक बयान दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेता उनका विरोध करते हुए पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। भोपाल में मंगलवार को कांग्रेस नेताओं ने विजय शाह को मंत्री पद से हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अमित शर्मा विजय शाह का मुखौटा पहनाकर एक कार्यकर्ता को हथकड़ी डाले हुए पुलिस चौकी लेकर पहुंचे। ये खबर भी पढ़ें… कर्नल सोफिया अपमान मामला-SC की MP के मंत्री को फटकार ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शाह की ऑनलाइन माफी पर सोमवार को कोर्ट ने कहा कि इसमें अब बहुत देर हो गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर 2 हफ्ते के भीतर फैसला लें।पूरी खबर पढ़ें
पति- जब मेरी पत्नी रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालती है तो दोस्त और परिवार के लोग मुझे चिढ़ाते हैं। मुझे अच्छा नहीं लगता है। पत्नी- मेरे पति मुझे पाउडर-लिपस्टिक भी लगाने नहीं देते हैं। लगाती हूं तो मेरे साथ मारपीट करते हैं। अपनी ये शिकायतें लेकर दानापुर के पति-पत्नी पटना में महिला आयोग के दफ्तर पहुंचे। पति की उम्र 28 साल है और पत्नी की 24। आगे डिटेल में जानिए पति और पत्नी ने महिला आयोग में क्या-क्या शिकायत की... 6 साल पहले हुई थी शादी महिला ने बताया कि, 30 नवंबर 2020 को मेरी शादी हुई थी। शादी के कुछ दिनों तक सब ठीक रहा। जैसे ही कुछ महीने बीते हमारे रिश्ते खराब होते चले गए। बिना बात बार-बार लड़ाई होने लगी। मैं भी अपना मूड ठीक करने के लिए मायके चली जाया करती थी। सोचती थी कि लौटूंगी तो ये ठीक हो जाएंगे। इनका दिमाग ठिकाने आ जाएगा, लेकिन मेरे लौटने के बाद भी ये वैसे ही झगड़ते थे। ये सिलसिला 5 साल तक चलता रहा। सास, ससुर, देवर और पति मिलकर मुझे मानसिक रूप से बहुत प्रताड़ित करते थे। छोटी-छोटी बातों पर मुझे गालियां देने लगते थे। शादी के 2 साल तक तो मुझे बच्चा नहीं होने पर ताने दिए जाते थे। 3 साल बाद मुझे एक बेटी हुई। मुझे रील का शौक है...बनाती हूं तो मारते हैं पति कोई नौकरी नहीं करते हैं। घर में कोई कमाई का साधन भी नहीं है। कभी कभार वो छोटी-मोदी मजदूरी कर लिया करते हैं। बेटी बड़ी हो रही है। स्कूल जाने लगेगी। मेरे भी खर्चे हैं, लेकिन फिर भी वो कोई काम नहीं करते हैं। मेरे ऊपर एक बेटी को पालने की जिम्मेदारी है। जब मैं अपने पति से कमाने की बात करती हूं, तो वो मुझसे झगड़ा करने लगते हैं। मुझे शादी के पहले से सोशल मीडिया का शौक था। कभी कभार जब मन इधर-उधर होता है तो एकाध वीडियो बनाकर इंस्टा, फेसबुक पर डाल देती हूं। लोगों के लाइक, कमेंट्स देखकर अच्छा फील करती हूं। रील बनाने के लिए मैं थोड़ा सज संवर लेती हूं तो मेरे पति को समस्या होती है। काजल, पाउडर, लिपस्टिक लगाने पर भी वो मुझे मारने लगते हैं। इन लोगों को मेरी चीजों से बहुत समस्या रहती है, लेकिन मुझे ये नॉर्मल चीजें भी नहीं दे पाते हैं। मेरे ससुराल में में शौचालय नहीं है। घर से 3 किलोमीटर दूर शौचालय के लिए जाना पड़ता है। मोबाइल की रोशनी में शौच करना पड़ता है। समस्या को लेकर प्रखंड स्तर, जिला स्तर के साथ मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी गुहार लगाई है। इसके बाद दानापुर के BDO ने जांच बैठाई। जांच पदाधिकारी ने सास-ससुर को अविलंब घर में शौचालय लगाने का निर्देश दिया, मगर अभी तक शौचालय नहीं बना है। पति बोला- मोबाइल छोड़ेगी तभी उसे साथ रखूंगा महिला के पति का कहना है कि, इसके बहुत शौक हैं। मेरा घर मिट्टी का है। ये वहां नहीं रहना चाहती है, इसलिए बार-बार भागकर मायके चली जाती है। मेरी बातों को भी नहीं मानती। अपनी मर्जी चलाती है। माता-पिता से भी कुछ भी बोल देती है। उनकी बातें नहीं सुनती। उनसे भी कुछ भी बोलने लगती है। वो दिनभर सोशल मीडिया में लगी रहती है। फोटो-वीडियो बनाकर इंस्टा-फेसबुक डालती है। ये रील और फोटो मेरे दोस्त भी देखते हैं। जब मैं बाहर जाता हूं तो वो मुझे ताने मारते हैं। मुझे अच्छा नहीं लगता है। दोस्त मुझे चिढ़ाते हैं। मैंने कई बार मना किया है, लेकिन वो नहीं मानती है। इसकी वजह से कई बार मेरा हाथ भी उसके ऊपर उठा है। कुछ दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया था। उंगली मुड़ गई। मेरी पत्नी मुझे लूला लंगड़ा कहने लगी। मैं उसे एक ही शर्त पर अपने पास रखूंगा जब वह मोबाइल नहीं रखेगी। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने कहा कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बात सुनी गई। लड़का का कहना है कि उसकी पत्नी छोटे-छोटे कपड़े पहनकर रील बनाती है तो परिजन और दोस्त उसे चिढ़ाते हैं। दोनों पति-पत्नी की ज्यादा उम्र नहीं है। अभी उन लोगों की सोच उतनी मैच्योर नहीं हुई है। हमने उन्हें परिवार हित में काम करने के लिए कहा है। दिखावटी दुनिया से दूर रहकर अपने परिवार और बच्चे को साथ लेकर चलने को कहा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। ------------------- ये खबर भी पढ़िए... 'मेरी पत्नी अपने खून से आशिक का नाम लिखती है':पति बोला-कहती है पूरा जिस्म काट लूंगी; बीवी ने कहा- मेरा हसबैंड मुझे खुश नहीं कर पाता 'मेरी पत्नी खून से अपने आशिक का नाम लिखती है। वो अपने प्रेमी से कहती है कि अगर वो उसे इग्नोर करेगा तो अपने जिस्म के अलग-अलग हिस्सों को चाकू से काट लेगी।' जबकि पत्नी का कहना है कि, 'मेरा पति मेरी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता। वो अक्सर बाहर रहता है, मुझे जो सुख चाहिए वो मेरे पति से नहीं मिल पाता।' अब पति और पत्नी महिला आयोग पहुंचे हैं। महिला आयोग इस मामले को सुलझाने में जुटा है। पति-पत्नी दोनों अरवल जिले के रहने वाले हैं। दोनों की शादी साल 2020 में सामाजिक रीति-रिवाजों से हुई थी। शुरुआती चार साल तक वैवाहिक जीवन सामान्य रहा। परिवार के लोगों के मुताबिक, शादी के बाद दोनों साथ रहते थे और कोई मन मुटाव भी नहीं था। पूरी खबर पढ़िए
सोलर नीति पर सरकार के ही नियम भारी पड़ रहे हैं। एक तरफ सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दे रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनी के फिक्स चार्ज उपभोक्ताओं को भारी पड़ रहे हैं। इंदौर शहर में कुल 22,500 सोलर प्लांट हैं। इनमें से 1500 उपभोक्ताओं के बिजली बिलों का विश्लेषण किया तो पता चला कि सालाना 7 से 9 हजार रु. फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है। इससे जिस सोलर प्लांट की लागत 5 साल में वसूल हो सकती थी, वह 8 साल तक पर पहुंच गई है। अगर सोलर प्लांट की लाइफ 20 साल मानें तो आधी सब्सिडी तो कंपनी फिक्स चार्ज में ही वसूल रही है। सोलर नीति के तहत दिन में उपभोक्ता अपने प्लांट से बनी बिजली कंपनी को एक्सपोर्ट करता है, जबकि रात में ग्रिड से इम्पोर्ट करता है। अगर नेट मीटरिंग में दिन और रात की यूनिट बराबर हैं, तो फिक्स चार्ज भी जीरो होना चाहिए। अगर इम्पोर्ट ज्यादा है तो नेट यूनिट पर ही फिक्स चार्ज लगना चाहिए। इधर, घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी 8 रुपए प्रति यूनिट दर से बिजली बेच रही है, वहीं कंपनी सोलर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त बिजली सिर्फ 2.16 रुपए प्रति यूनिट में खरीद रही है। 7-9 हजार फिक्स चार्ज- नतीजा प्लांट की लागत 8 साल में वसूल हो रही केस 1: 567 यूनिट कंपनी को दी फिर भी 840 रुपए फिक्स चार्जमैकेनिक नगर जोन के एक उपभोक्ता के यहां 567 यूनिट बिजली बनी और 445 यूनिट ही खपत की। फिक्स चार्ज 840 रुपए चुकाने पड़े। केस 2: 100 यूनिट ज्यादा बिजली बनाई, 784 रुपए फिर भी भरने पड़ेसत्य साई जोन के एक उपभोक्ता के बिल में 517 यूनिट बिजली एक्सपोर्ट की गई और 410 यूनिट इम्पोर्ट की गई। यानी 100 यूनिट ज्यादा बिजली बनाई। फिर भी 784 रुपए का बिल देना पड़ा। केस 3: 308 रुपए फिक्स चार्जसंगम नगर क्षेत्र के उपभोक्ता ने 225 यूनिट बनाई और खपत सिर्फ 153 यूनिट की रही। 308 रुपए फिक्स चार्ज अनिवार्य रूप से वसूला गया।
महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय की ओर से ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स गेम्स में खेलने गए 14 नेशनल लेवल एथलीटों के साथ बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यूनिवर्सिटी द्वारा नियुक्त एनआईएस कोच मोहम्मद तौफीक खिलाड़ियों से प्रति खिलाड़ी 7-7 हजार रुपए वसूलकर टीम रवाना होने से पहले ही गायब हो गया। इस लापरवाही और अव्यवस्था का खामियाजा खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में भुगतना पड़ा। कोच की गैरमौजूदगी के कारण पुरुष टीम 12 जनवरी को होने वाले मिक्स्ड रिले इवेंट में हिस्सा नहीं ले सकी, जिससे मेडल की मजबूत उम्मीद पर पानी फिर गया। दरअसल, कर्नाटक के मंगलोर स्थित राजीव गांधी यूनिवर्सिटी में 12 से 16 जनवरी तक ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स गेम्स का आयोजन किया गया। इसमें भाग लेने के लिए महाराजा सूरजमल बृज यूनिवर्सिटी की टीम का चयन 15 नवंबर को हुए इंटर कॉलेज टूर्नामेंट के प्रदर्शन के आधार पर किया गया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने खिलाड़ियों के साथ जाने के लिए एनआईएस कोच मोहम्मद तौफीक को नियुक्त किया। आरोप है कि कोच ने प्रतियोगिता में भाग लेने के नाम पर 10 खिलाड़ियों से 7-7 हजार रुपए वसूले, जिनमें से 2 हजार रुपए ट्रैक सूट के नाम पर लिए गए। वहीं इस मामले को लेकर कोच मोहम्मद तौफीक से संपर्क किया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। खिलाड़ियों के अनुसार, टीम के रवाना होने से दो दिन पहले कोच मोहम्मद तौफीक ने अचानक जाने से मना कर दिया और अपना मोबाइल बंद कर लिया। आनन-फानन में यूनिवर्सिटी ने महिला टीम के साथ कोच अंजली को तो भेज दिया, लेकिन पुरुष टीम के साथ कोई कोच नहीं गया। खिलाड़ियों की शिकायत के बाद 13 जनवरी की शाम को पुरुष टीम के लिए कोच भेजा गया, लेकिन तब तक 12 जनवरी का मिक्स्ड रिले इवेंट छूट चुका था। यूनिवर्सिटी ने खिलाड़ियों की ट्रेन रिजर्वेशन की जिम्मेदारी कोच को सौंप दी थी। आरोप है कि कोच ने 20 दिन पहले ही रिजर्वेशन कराया, जिससे सीटें कंफर्म नहीं हो पाईं। खिलाड़ियों को करीब 2000 किलोमीटर का सफर 40 घंटे तक जनरल डिब्बे में करना पड़ा।
एमपी में बुआई के हर मौसम में किसानों की खाद लेने के लिए लगी कतारें सरकार और पब्लिक दोनों को परेशान करती हैं। अब सरकार किसानों को खाद की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा देने जा रही है। यही नहीं खाद की होम डिलेवरी सेवा पर भी काम चल रहा है। मप्र के कृषि विभाग ने एग्रीस्टेक पोर्टल पर सवा करोड़ किसानों की पूरी डिटेल दर्ज कराई है। इसमें किसान की खेती की भूमि का रकबा और उसमें बोई जाने वाली फसलों के साथ ही लगने वाली खाद की भी अनुमानित खपत दी है। दैनिक भास्कर ने एमपी के कृषि विभाग द्वारा ऑनलाइन खाद की बुकिंग और होम डिलेवरी को लेकर एग्रीस्टेक पोर्टल तैयार करने वाले क्रिस्प के ई-विकास पोर्टल के प्रोजेक्ट मैनेजर कुलदीप सिंह से बातचीत की… सिलसिलेवार पढ़ें: किसान अब कैसे कर सकेंगे खाद की ऑनलाइन बुकिंग… भास्कर: किसान खाद की बुकिंग कैसे कर पाएंगे?कुलदीप सिंह: इसके लिए कृषि विभाग ने एक पोर्टल बनाया है। एग्रीस्टेक पोर्टल में आधार नंबर के जरिए किसान का रकबा मोबाइल पर आ जाएगा। उस रकबे के आधार पर फसल का चुनाव करने के बाद आईसीएआर की गाइडलाइन के तहत उस रकबे में किस रिकमंडेशन का डोज दिया है उसका किसान चुनाव कर सकते हैं। उसके बाद किसान को खाद किस रिटेलर के जरिए प्राप्त करना है। उसके लिए पोर्टल पर सरकारी खाद वितरण सोसाइटी और प्रायवेट रिटेलर दिखेंगे। किसान अपनी इच्छा के अनुसार सहकारी सोसाईटी या प्रायवेट रिटेलर का चयन करके वहां से खाद ले सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में किसानों को क्यूआर कोड की तरह ई-टोकन जनरेट होगा। उस ई-टोकन को लेकर किसान चयनित रिटेलर के पास जाएगा और वहां से ई-टोकन के जरिए खाद उठा सकते हैं। भास्कर: किसान क्या सिर्फ सरकारी दुकानों से खाद खरीदेंगे या प्रायवेट से भी?कुलदीप सिंह: हमने किसानों को दो ऑप्शन दिए हैं। अगर किसान सहकारी समितियों के सदस्य हैं तो अपनी समिति से खाद ले सकते हैं। अगर सदस्य नहीं हैं तो प्रायवेट रिटेलर का चुनाव करके वहां से खाद उठा सकते हैं। भास्कर: कितने किसानों की जानकारी इस पोर्टल पर दर्ज की है?कुलदीप सिंह: हमने तीन जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट लॉन्च किया था। इस पायलेट के तहत 4 लाख 12 हजार 572 किसानों ने इसका लाभ लिया है। इस पोर्टल के जरिए 1.52 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों ने लिया है। भास्कर: क्या इससे खाद की होम या खेत तक डिलेवरी भी कराई जाएगी?कुलदीप सिंह: हमने होम डिलेवरी का पायलेट प्रोजेक्ट विदिशा जिले में सफलता पूर्वक कर लिया है। कुछ वित्तीय नियमों के कारण रिटेलर्स के सीधे खातों में पैसा न जाए उस पर हम वर्कआउट कर रहे हैं। संभवत: अगले महीने से पूरे प्रदेश में होम डिलेवरी की सुविधा शुरु हो सकती है। भास्कर: किसान प्रायवेट दुकान से खाद लेने जा रहा है तो फर्टिलाइजर के रेट क्या एप बताएगा?कुलदीप सिंह: शासन ने हर फर्टिलाइजर का रेट निर्धारण किया है। तो पोर्टल और एप दोनों में तय रेट दिए गए हैं। नियमित रेट से ज्यादा रिटेलर पैसे नहीं ले सकता। भास्कर: पोर्टल बता रहा है कि किसान को यूरिया के चार बैग लगेंगे और किसान 6 बैग चाहता है? इसका क्या समाधान होगा? कुलदीप सिंह: अभी शासन ने इसकी पूर्ति के लिए जमीन के रकबा के हिसाब से 10 बोरियों का निर्धारण किया गया है। अगर पहले फेस के टोकन से किसान ने दस बोरियां ले लीं हैं। तो वह दूसरी बार में एक्सेस फर्टिलाइजर की डिमांड करके अतिरिक्त खाद ले सकता है। भास्कर: पूरे मध्य प्रदेश में कितने किसानों का डेटा इस पोर्टल से जोड़ा हैकुलदीप सिंह: हमने अभी एग्रीस्टेक के जरिए करीब सवा करोड़ किसानों को मैप किया है। ये सभी किसान इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। भास्कर: मप्र में फर्टिलाइजर की डिमांड कितनी रहती है?
भारतीय रेल समय-समय पर ट्रेन में यात्रा करने वालों को सजगता से जागरूक करते हुए अपील करता है कि सफल के दौरान ट्रेनों में बिना टिकट यात्रा करना कानूनी अपराध है। बावजूद इसके यात्री यह गलती कर रहे हैं, जिससे कि जुर्माने के रूप में उनकी जेब तो ढीली हो रही है। वहीं रेलवे का खजाना भी भरा रहा है। जुर्माने की राशि से भारतीय रेल मालामाल भी हो रही है। पश्चिम मध्य रेलवे ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सिर्फ यात्रियों से जुर्माने में वसूल की है। रेलवे ने पिछले 9 महीनों में बिना टिकिट सफर करने वाले यात्रियों से 101 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना वसूल किया है। पश्चिम मध्य रेलवे की जनरल मैनेजर के निर्देश और प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक के निर्देश पर जबलपुर, कोटा और भोपाल के तीनों मण्डलों में यात्री गाड़ियों एवं स्टेशनों पर समय-समय पर चलाए गए टिकट जांच अभियानों में चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल से दिसंबर 2025 तक कुल 14 लाख 65 हजार मामले पकड़े और अतिरिक्त किराया एवं जुर्माना सहित कुल 101 करोड़ 16 लाख रुपए का राजस्व अर्जित किया है। यह वसूली बीते साल की अपेक्षा वसूले गए जुर्माने (कुल 87 करोड़ 36 लाख रुपए) की तुलना में 15.80 प्रतिशत अधिक है। नौ माह में ऐसे हुई कार्रवाई बिना टिकट ट्रेन में यात्रा करना एक दंडनीय अपराध है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और टिकट निरीक्षकों (TTE) द्वारा चलाए जाने वाले विशेष अभियानों के दौरान ऐसे यात्रियों के खिलाफ इस तरह से कार्रवाई की जाती है। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव ने कहा कि- जब कभी भी ट्रेन में सफर करे तो टिकट जरूर लें। रेलवे हमेशा से अभियान चलाते आ रहा है, और यात्रियों को समझाइश भी दी जा रही थी। सीपीआरओ ने सभी यात्रियों से अपील की है कि टिकट लेकर ही ट्रेन में सफर करें।
पेयजल त्रासदी:हाई कोर्ट में निगम नहीं बता पाया भागीरथपुरा में मौतों की सही वजह
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। निगम की ओर से कहा गया कि वहां शौचालय की वजह से लाइन में दूषित पानी मिल रहा था। उसे ठीक कर दिया गया है। इस पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला, जस्टिस आलोक अवस्थी की डिविजन बेंच ने पूछा कि आप 100 फीसदी दावा कर रहे हैं क्या? इस पर निगम ने कहा कि केवल शौचालय ही नहीं, कुछ और भी वजहें हैं। वहां सकरी गलियां हैं, ड्रेनेज और पानी की लाइन भी साथ-साथ हैं। कोर्ट ने फिर सवाल किया कि क्या आप यह भी दावे के साथ कह रहे हैं कि ड्रेनेज का पानी मिलने से ही लोगों की मौत हुई है? इस पर निगम की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। पिछली सुनवाई पर अतिरिक्त महाधिवक्ता और मुख्य सचिव के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर असमंजस की स्थिति थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया, मनीष यादव, रितेश इनानी, अनिल ओझा पैरवी कर रहे हैं। कोर्ट ने सीएस से पूछा- आप यहां अपनी ही रिपोर्ट पढ़ रहे हैं, शिकायत की क्या व्यवस्था है बताएं? वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े मुख्य सचिव अनुराग जैन ने दोहराया कि हर सप्ताह जल सुनवाई की जा रही है। नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे हर दिन की रिपोर्ट ले रहे हैं। हाई कोर्ट ने सवाल किया कि यह तो आप अपनी रिपोर्ट पढ़ रहे हैं। हमारा सवाल यह है कि पूरे शहर में गंदे पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसी व्यक्ति को शिकायत करना है तो उसकी क्या व्यवस्था है। सीएस ने कहा कि सीएम हेल्प लाइन, जल सुनवाई, 311 एप है। इसके बाद भी कोर्ट चाहे तो हम अतिरिक्त कमेटी बना सकते हैं। अब जागे: फटकार के बाद बनाई कमेटी हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद राज्य शासन ने राज्य स्तरीय जांच कमेटी बनाई। इसमें अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, संजय कुमार शुक्ल अध्यक्ष होंगे। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पी. नरहरि, आयुक्त, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, संकेत भोंडवे को सदस्य बनाया गया है। आयुक्त, इंदौर संभाग, सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। समिति एक माह के भीतर राज्य शासन को जांच प्रतिवेदन देगी। पिछड़े: अपर कलेक्टर की रिपोर्ट नहीं आई मामले में की शुरुआत में ही एसीएस नीरज मंडलोई और संजय दुबे यहां पहुंचे थे। जिम्मेदारों से बात और भागीरथपुरा के दौरे के बाद ही निगमायुक्त को हटाया गया था। अपर आयुक्त और अधीक्षण यंत्री को सस्पेंड भी किया गया। कलेक्टर शिवम वर्मा ने अपर कलेक्टर पंवार नवजीवन विजय को जांच करने को कहा था लेकिन, अब तक वह रिपोर्ट नहीं आई है। आईसीएमआर की टीम अपनी रिपोर्ट पहले ही शासन स्तर पर दे चुकी है।
बिलासपुर सिटी के तत्कालीन ASP राजेंद्र जायसवाल और एक्वा स्पा सेंटर संचालक अमन सेन विवाद गहराता जा रहा है। वायरल वीडियो में डील और कमीशन के आरोपों के बीच बिलासपुर IG डॉ. संजीव शुक्ला ने SSP रजनेश सिंह को जांच के निर्देश दिए हैं। 7 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि स्पा सेंटर संचालक अमन सेन और 36 मॉल के मैनेजर आशीष सिंह चंदेल एडिशनल एसपी रहे राजेंद्र जायसवाल के दफ्तर में पहुंचते हैं। दफ्तर में पहुंचते ही एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल स्पा सेंटर संचालक से पूछते हैं कि तुम्हें काम नहीं करना है क्या? इसके बाद स्पा संचालक कहता है कि काम तो कर ही रहे हैं सर। एडिशनल एसपी कहते हैं कि जिसके माध्यम से तुम आए हो, इसलिए मैं कुछ नहीं कहता, लेकिन जो कमिटमेंट है, वह हो जानी चाहिए। नहीं तो टीम भेजूंगा, फिर रेड मारने। मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन तुम्हें बहुत फर्क पड़ जाएगा। वीडियो वायरल होने के बाद ASP राजेंद्र जायसवाल ने कहा कि छवि खराब करने के लिए ऐसी हरकत की जा रही है। वहीं स्पा सेंटर संचालक ने कहा कि ASP को 30 हजार कमीशन देता था। इन सभी आरोपों की जांच SSP रजनेश सिंह कर रहे हैं। फिलहाल, ASP जायसवाल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पोस्टेड हैं।पढ़िए इस रिपोर्ट में वीडियो में क्या है, क्यों विवाद बढ़ा, क्या है कमीशन और एक्शन की पूरी कहानी ? सबसे पहले जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, बिलासपुर सिटी ASP पंकज पटेल और सिविल CSP निमितेश सिंह की टीम ने 7 जनवरी 2026 को एक्वा स्पा सेंटर पर छापेमारी की। इस दौरान SPA सेंटर में कुछ संदिग्ध गतिविधियां और रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं मिले। स्पा सेंटर संचालक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। इसके बाद एक्वा स्पा सेंटर संचालक अमन सेन ने 9 जनवरी 2026 को आईजी से लिखित शिकायत की। स्पा सेंटर संचालक ने लिखा कि सिविल लाइन पुलिस हर महीने अवैध वसूली करती है। पैसे नहीं देने पर बिना कारण स्पा में चेकिंग के नाम पर बदनाम करने और बिजनेस खत्म कर देने की धमकी दी जाती है। सिविल लाइन थाने में 40 हजार रुपए देता था- स्पा सेंटर संचालक स्पा सेंटर संचालक ने लिखित शिकायत में बताया कि कुछ स्थानीय पुलिस कर्मचारी प्रति माह अवैध वसूली करते हैं। मांग पूरी नहीं करने पर बिना किसी ठोस वजह के बार-बार जांच के नाम से दबाव बनाया जाता है। पहले वह सिविल लाइन थाने में 40 हजार रुपए देता था। स्पा सेंटर संचालक ने आगे लिखा कि 40 हजार से घट कर वसूली 25 हजार हुई। इसके बाद अब कहा जा रहा है कि 30 हजार रुपए अलग से एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल को देना है। पैसे नहीं देने पर रेड मारने की धमकी दी जा रही है। इसके साथ ही, बिलासपुर के तत्कालीन ASP राजेंद्र जायसवाल के साथ बातचीत के दौरान चुपके से रिकॉर्ड किया। वीडियो बिलासपुर IG डॉ. संजीव शुक्ला को सबूत के तौर पर दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया । मीडियाकर्मियों को भी वीडियो दे दिया। अब जानिए वायरल वीडियो में क्या-क्या है ? वायरल में दिख रहा है कि स्पा सेंटर संचालक अमन सेन और 36 मॉल के मैनेजर आशीष सिंह चंदेल एडिशनल एसपी रहे राजेंद्र जायसवाल के दफ्तर में पहुंचते हैं। दफ्तर में पहुंचते ही ASP राजेंद्र जायसवाल स्पा सेंटर संचालक से पूछते हैं कि तुम्हें काम नहीं करना है क्या? इसके बाद स्पा संचालक कहता है कि काम तो कर ही रहे हैं सर। एडिशनल एसपी कहते हैं कि जिसके माध्यम से तुम आए हो, इसलिए मैं कुछ नहीं कहता, लेकिन जो कमिटमेंट है, वह हो जानी चाहिए। नहीं तो टीम भेजूंगा, फिर रेड मारने। मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन तुम्हें बहुत फर्क पड़ जाएगा। पुलिस को बदनाम करने जारी किया वीडियो वहीं वीडियो वायरल होने के बाद बिलासपुर सिटी के तत्कालीन ASP राजेंद्र जायसवाल ने बयान जारी किया। उनका कहना है कि वायरल वीडियो 13 दिसंबर 2025 का है। मैं बिलासपुर में एडिशनल एसपी सिटी के पद पर कार्यरत था। उस दौरान युवक मेरे चेंबर में आया था। किसी FIR के संबंध में बात कर रहा था। उन्होंने बताया कि इसके संबंध में मैने पहले ही बता दिया था कि अगर वह संबंधित दस्तावेज लेकर आएगा तो FIR दर्ज की जाएगी। फिर बताया गया कि सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज हो चुका है। इस दौरान युवक ने पुलिस के खिलाफ अभद्रतापूर्वक बात की गई।
28 जनवरी से विधानसभा का सत्र:अफसरों को देवनानी की चेतावनी का असर, 16 दिन में 1000 जवाब मिले
मुख्य सचिव की मौजूदगी में स्पीकर की नाराजगी एवं चेतवानी का असर यह हुआ कि पिछले 16 दिन में ही बकाया एक हजार से अधिक सवालों के जवाब विधानसभा एवं विधायकों को मिल गए हैं। दरअसल, विधानसभा का बजट सत्र आगामी 28 जनवरी से शुरू हो रहा है। ऐसे में सवालों के समय पर जवाब नहीं आने पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने पिछले दिनों कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अधिकारियों को विधानसभा को गंभीरता से लेना चाहिए। क्योंकि, वहां 200 विधायक बैठते हैं और सरकार भी यहां कार्यों को संपादित करती है। दसअसल, 16 वीं विधानसभा के चौथे सत्र तक करीब 22 हजार 735 सवाल विधानसभा को विभिन्न जनप्रतिनिधियों को मिले थे। इनमें से 21 हजार 684 सवालों के जवाब अब तक मिल चुके हैं। इनमें सदन के दौरान के तारांकित एवं अतारांकित सवाल भी शामिल हैं। वहीं, पांच हजार से ज्यादा वह सवाल भी शामिल हैं, जो इससे पहले के विधानसभा सत्र से संबंधित थे। बताया जा रहा है कि अब कुल मिलाकर एक हजार सवाल और बाकी हैं। जो कुल सवालों का करीब चार प्रतिशत ही है। सबसे ज्यादा सवाल चौथे सत्र से संबंधित विधानसभा सचिवालय के अनुसार चौथे सत्र तक करीब 5803 सवाल मिले थे। गत 3 जनवरी को विधानसभा में स्पीकर देवनानी ने सवालों को लेकर एक मीटिंग बुलाई। जिसमें मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास सहित अधिकांश विभागों के अधिकारियों की इसमें मौजूदगी रही। इसमें स्पष्ट तौर पर बताया गया कि 15 जनवरी तक सभी बकाया सवालों के जवाब मिल जाने चाहिए और ऐसे मीटिंग दुबारा बुलाने की जरूरत नहीं पड़े। उस दौरान 2031 सवालों के जवाब आना बाकी था। 19 जनवरी तक की स्थिति में सारे सवालों के जवाब तो नहीं आए। लेकिन अब बताया जा रहा है कि इन 16 दिनों में 1000 से ज्यादा सवालों के जवाब मिल चुके हैं। अब करीब 980 के जवाब आना शेष है। सत्र से पहले जवाब मिल जाएंगेविधानसभा स्पीकर वासुदेव देवानानी के अनुसार 16वीं विधानसभा से पहले भी करीब 5 हजार सवालों के जवाब बाकी थे। समीक्षा कर उन सभी के जवाब लिए गए। यहीं, नहीं मौजूदा विधानसभा में करीब चार प्रतिशत सवाल ही ऐसे हैं जिनका जवाब आना बाकी है। ऐसे में यह आंकड़ा अब बड़ा नहीं है। सत्र से पहले सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।
MP में 23-24 जनवरी को मावठा गिरेगा:ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश का अलर्ट; कोहरा भी छाएगा
मध्यप्रदेश में 23 और 24 जनवरी को मावठा गिरने यानी, बारिश का अलर्ट है। ऐसा स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से होगा। ग्वालियर-रीवा समेत 10 जिलों में असर रहेगा। इस दौरान कोहरा भी छाया रहेगा। बुधवार सुबह भी कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर देखा जा रहा है। आज ग्वालियर, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा रहा। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई शहरों में हल्के कोहरे का असर देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार, रात के तापमान स्थिर रहे। दिन में धूप खिली रहने से ठंड का असर नहीं रहेगा। न्यूनतम और अधिकतम दोनों ही तापमान में बढ़ोतरी होगी। जनवरी के आखिरी में तेज ठंड रहेगीमौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस गुजरने के बाद ठंड का एक और दौर आएगा। पारे में गिरावट हो सकती है। कोल्ड वेव यानी, शीतलहर चलने का अनुमान भी है। जनवरी के आखिरी दिनों में ऐसा होगा। इससे पहले दिन में गर्मी और रातें ठंडी रहेगी। कब-कहां बारिश होने का अनुमान23 जनवरी- ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड और दतिया।24 जनवरी- ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज। प्रदेश में सबसे ठंडा मंदसौर, इंदौर में भी पारे में गिरावटमौसम विभाग के अनुसार, सोमवार-मंगलवार रात प्रदेश का सबसे ठंडा शहर मंदसौर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। राजगढ़ में 6.6 डिग्री, शाजापुर में 7.1 डिग्री, दतिया में 8.6 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, मंडला-खजुराहो में 9.5 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 9.8 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री, ग्वालियर में 10 डिग्री, उज्जैन में 9.8 डिग्री और जबलपुर में पारा 14.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बाकी शहरों में भी न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी रही और यह 10 डिग्री से ऊपर ही रहे। अभी दो सिस्टम एक्टिवमौसम विभाग के अनुसार, अभी एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस पाकिस्तान के ऊपर है, जो 21 जनवरी की रात में उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके असर से ही 23 और 24 जनवरी को मध्यप्रदेश में बारिश होने के आसार है। इसके अलावा एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन की एक्टिविटी है। मंगलवार को नर्मदापुरम समेत कई जिलों में बादल रहे। उत्तर भारत के ऊपर 12.6 किमी की ऊंचाई पर करीब 241 किलोमीटर प्रतिघंटा के हिसाब से जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही है। इसका असर प्रदेश के कुछ शहरों में देखा जा रहा है। क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंसमौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाली हवा और बादलों का एक सिस्टम होता है। इसके एक्टिव होने से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, मैदानी क्षेत्रों में बारिश होगी। सिस्टम आगे गुजर जाने के बाद उत्तर से आने वाली हवा ठंडी रहती है। जिससे दिन-रात ठंड का असर रहता है। ठंड के लिए इसलिए खास है जनवरी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त अहम रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं, इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे। MP के 5 बड़े शहरों में जनवरी में ऐसा रहा सर्दी का ट्रेंड... भोपाल में 0.6 डिग्री पहुंच चुका टेम्परेचरभोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। वहीं, दिन में गर्मी का एहसास और बारिश का ट्रेंड भी है। 18 जनवरी 1935 को रात का टेम्परेचर रिकॉर्ड 0.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं, 26 जनवरी 2009 को दिन में तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 10 में से 7 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को हुई थी। वहीं, सर्वाधिक मासिक 3.8 इंच बारिश जनवरी 1948 में हुई थी। इंदौर में माइनस 1.1 डिग्री पहुंच चुका पाराइंदौर में जनवरी में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 में पारा माइनस 1.1 डिग्री दर्ज किया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 27 जनवरी 1990 को दिन का तापमान 33.9 डिग्री रहा था। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है। इस दिन 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, वर्ष 1920 में सर्वाधिक मासिक बारिश 4 इंच दर्ज की गई थी। जबलपुर में 1946 में रिकॉर्ड 1.1 डिग्री रहा था पाराजबलपुर में भी जनवरी में ठंड-बारिश का ट्रेंड है। इस महीने सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। 7 जनवरी 1946 को रात का पारा रिकॉर्ड 1.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। वहीं, दिन का उच्चतम तापमान 33.4 डिग्री 7 जनवरी 1973 को रहा था। इस महीने बारिश भी होती है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 24 जनवरी 1919 को 2.5 इंच हुई थी। इसी साल पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। उत्तरी हवा आने से ग्वालियर सबसे ठंडाउत्तरी हवाओं की वजह से प्रदेश का ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा रहता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो 2018 में तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया था। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री रहा था। ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी होती है। साल 2014 से 2024 के बीच 9 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 8 जनवरी 1926 को है। इस दिन 2.1 इंच पानी गिरा था। वहीं, 1948 को कुल मासिक बारिश 3.1 इंच हुई थी। उज्जैन में जीरो डिग्री रह चुका पाराउज्जैन में भी उत्तरी हवा का असर रहता है। इस वजह से यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को पारा 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में टेम्परेचर 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक रह चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है। इस दिन सवा इंच पानी गिरा था। वहीं, सर्वाधिक कुल मासिक 2.2 इंच 1994 को हुई थी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद आर्यन मान को लगातार बधाइयां मिल रही हैं। इसी क्रम में भोजपुरी कलाकार एवं उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी मंगलवार देर शाम आर्यन मान के बहादुरगढ़ स्थित आवास पर पहुंचे और उन्हें जीत की शुभकामनाएं दीं। मनोज तिवारी ने कहा कि आर्यन मान ने हम सभी को बहुत गौरवान्वित किया है। वे युवाओं में पहले से ही लोकप्रिय थे, लेकिन चुनाव तो चुनाव होता है, रिजल्ट को लेकर दिल धड़कता रहता है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए आर्यन मान को टिकट बहुत सोच-समझकर दिया गया था। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद मिली बड़ी जीत मनोज तिवारी ने कहा कि आर्यन मान की ख्याति जितनी बड़ी है, उतने ही उनके विरोधी भी थे। अध्यक्ष पद की दौड़ में अन्य राजनीतिक दलों और अलग-अलग संगठनों के कई प्रत्याशी मैदान में थे। बहुत से कैंडिडेट खड़े हुए, लेकिन आर्यन मान ने सबको पीछे छोड़ते हुए शानदार जीत हासिल की। सांसद ने कहा यह जीत कई मायनों में बड़ी है। सांसद मनोज तिवारी ने आर्यन मान की जीत को कई मायनों में ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि आर्यन ने न केवल खुद को जिताया, बल्कि एबीवीपी को भी जिताया है। एबीवीपी का सिद्धांत है देश पहले, दल बाद में। लोकसभा क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण जीत और भी खासमनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का क्षेत्र उनकी लोकसभा के अंतर्गत आता है, इसलिए यह जीत उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी खास है। उन्होंने बताया कि वे कई दिनों से आर्यन मान को बधाई देना चाहते थे और आज मौका मिलने पर स्वयं उनके घर पहुंचे। सांसद ने आर्यन मान की जीत पर बहादुरगढ़ वासियों और उनके परिवार को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। रिकॉर्ड वोटों जीते थे आर्यन मान आर्यन मान को पिछले साल के दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी की ओर से टिकट दिया गया। जिसमें आर्यन मान ने अपनी युवा टीम में लोकप्रियता के चलते रिकॉर्ड वोटों 16,196 से जीत दर्ज की। DUSU अध्यक्ष बनने के बाद से ही आर्यन मान लगातार चर्चा में रहे हैं। इससे पहले भी आर्यन मान ABVP से टिकट की मांग कर चुके थे। एक्टर संजय दत्त ने सपोर्ट किया आर्यन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से बॉलीवुड के मशहूर एक्टर संजय दत्त का एक वीडियो मैसेज शेयर किया था। जिसमें संजय दत्त ने आर्यन मान को अपना भतीजा कहा और DUSU इलेक्शन में आर्यन मान को वोट करने के लिए अपील की थी। इसमें वह आर्यन का बैलेट पेपर का नंबर और ABVP के पैनल का नंबर भी बताते थे। मासूम शर्मा ने किया था प्रचार आर्यन मान के लिए कई बड़े कलाकारों, एक्टर रणदीप हुडा, भोजपुरी स्टार और सांसद रवि किशन, बिंदू दारा सिंह, पूर्व क्रिकेटर और अंपायर अनिल चौधरी ने वीडियो जारी कर मान को वोट करने की अपील की थी। हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने तो आर्यन मान के लिए कैंपस में प्रचार शो भी किया था।
2022 में महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में सिंहस्थ 2028 के लिए मध्य प्रदेश सरकार, उज्जैन को एक नए धार्मिक पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित करने में जुट गई है। इसी क्रम में अब सरकार यहां 'शनि लोक' बनाने जा रही है। दैनिक भास्कर में पहली बार देखिए कि करीब 110 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला शनि लोक कैसा होगा और श्रद्धालुओं को यहां क्या सुविधाएं मिलेंगी? त्रिवेणी में शनि मंदिर पर बनेगा शनि लोकउज्जैन-इंदौर रोड पर त्रिवेणी क्षेत्र में शिप्रा नदी के तट पर बने शनि मंदिर को इस परियोजना का केंद्र बनाया जाएगा। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। यह देश का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां भगवान शनि, शिव स्वरूप में विराजमान हैं। हर शनिश्चरी अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान कर भगवान शनि के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। डीपीआर तैयार, महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगाउज्जैन में शनि लोक के रूप में दूसरा बड़ा धार्मिक कॉरिडोर कुंभ से पहले आकार ले लेगा। इसे महाकाल लोक की तर्ज पर ही विकसित किया जाएगा। इसकी घोषणा 8 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की थी। शनि लोक की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बन चुकी है। टेंडर होने के बाद जल्द ही काम शुरू होगा। सरकार की ओर से पूरी कोशिश है कि सिंहस्थ के पहले शनि लोक तैयार हो जाए। सभी नौ ग्रहों को समर्पित मंदिरउज्जैन में शिप्रा किनारे बना शनि मंदिर करीब 21 हजार 100 वर्गमीटर इलाके में फैला है। इसे नवग्रह मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह मंदिर सभी नौ ग्रहों- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु को समर्पित है। यहां साढ़े साती और ढैया से मुक्ति के लिए शिव रूपी शनि की विशेष पूजा कराई जाती है। शनि दोषों की शांति के लिए तेल, लोहा, तिल आदि चढ़ाए जाते हैं। भक्त शनिश्चरी अमावस्या पर पुराने कपड़े और जूते-चप्पल मंदिर के बाहर ही छोड़कर चले जाते हैं। ग्वालियर के ऐंती पर्वत पर भी बनेगा शनि लोक उज्जैन के साथ ही ग्वालियर में भी शनि लोक बनाया जाएगा। मुरैना की सीमा पर बन रहे शनि लोक में ऐंती पर्वत पर सप्त ऋषियों के अलावा भगवान श्रीराम की विशालकाय प्रतिमा के अलावा 18 मूर्तियां लगेंगी। फिलहाल यहां मूर्तियां बनाने का काम चल रहा है। हालांकि, ग्वालियर में शनि लोक को लेकर प्रदेश सरकार ने कोई घोषणा नहीं की है। ऐंती पर्वत पर शनि भगवान की प्रतिमा की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने ही कराई थी। यहीं हनुमान प्रतिमा भी स्थापित कराई गई थी। इस मंदिर का जीर्णोद्धार विक्रम संवत 1806 में तत्कालीन महाराज सिंधिया के मामा दौलत राव सिंधिया ने कराया था। ये मंदिर मध्य प्रदेश सरकार की संपत्ति होकर औकाफ के अधीन है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जिला कलेक्टर हैं। ये खबर भी पढ़ें... सिंहस्थ 2028 के लिए VR तकनीक का उपयोग देश में पहली बार पुलिस वर्चुअल रियलिटी (VR) का उपयोग करने जा रही है। यह सिंहस्थ 2028 में देखने को मिलेगा। उज्जैन पुलिस सिंहस्थ ड्यूटी के लिए आने वाले 54 हजार पुलिसकर्मियों के साथ इसकी शुरुआत करने जा रही है, जो अपने शहर में बैठकर उज्जैन की गलियों, चौराहों, एंट्री एग्जिट और श्रद्धालुओं को किसी मार्ग पर भेजने और रोकने की ट्रेनिंग भी VR के माध्यम से ही लेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
धूलिया के लडिंग गांव में सबसे ज्यादा भूमि अधिग्रहित
भास्कर संवाददाता | बड़वानी मनमाड़-इंदौर रेलवे परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण में सबसे अधिक प्रभावित लोगों की संख्या महाराष्ट्र के धूलिया जिले में सामने आई है। धूलिया तहसील के लडिंग गांव में कुल 1061 लोगों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। जो इस परियोजना में किसी एक गांव में अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण माना जा रहा है। यहां तक की ग्राम पंचायत भवन भी अधिग्रहण में आ गया है। इसी तरह जिले में भी रेलवे का काम तेजी से पूरा करने की मांग की गई है। मनमाड़-इंदौर रेलवे परियोजना को लेकर महाराष्ट्र में सबसे अधिक चर्चा धूलिया क्षेत्र की ही रही है। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि यहीं से रेल मार्ग के लिए सबसे पहले आंदोलन की शुरुआत हुई। बापू चौरे, मदन मिश्रा और साकला जैसे लोगों ने खंडेराव बाजार रेल समिति का गठन कर इस पुनीत काम की नींव रखी। इसके बाद धूलिया के पूर्व विधायक अनिल गोटे ने आंदोलन को और तेज कर इसे व्यापक स्तर पर चर्चा में ला दिया। इस आंदोलन का दूसरा प्रमुख केंद्र सेंधवा रहा। जहां खंडेराव बाजार समिति के साथ मिलकर रेलवे संघर्ष समिति बनाई गई। यहां से मनोज मराठे ने आंदोलन का नेतृत्व किया और इस परियोजना से जुड़े तथ्यों को जनहित याचिका के माध्यम से सरकार और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया यह परियोजना क्यों और कैसे जरूरी है। इसके चलते कई बार सर्वे किए गए। कई कमियां और परेशानियां सामने आईं। जिन्हें न्यायालय के निर्देशानुसार पूरा किया गया। रेलवे ने इस मार्ग को 8 प्रतिशत लाभकारी बताया जा रहा था। मराठे के प्रयासों से कोर्ट में इसे 18 से 20 प्रतिशत लाभकारी सिद्ध किया। इसके बाद परियोजना को मंजूरी मिली।
मैपिंग हटने के कारण नहीं हो रहा था लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ
बड़वानी | जनसुनवाई में कलेक्टर जयति सिंह ने जिलेभर से आए 63 आवेदकों की समस्या सुनकर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए। जनसुनवाई में गजुबाई पति किशोर ने राशि न मिलने की शिकायत की। जांच में स्पष्ट हुआ कि हितग्राही का आवेदन वैध है लेकिन एनपीसीआई से आधार मैपिंग हटने से भुगतान लंबित था। सुधार के बाद हितग्राही को जून 2023 से डीबीटी से पात्रतानुसार राशि प्रदान की है। संबल योजना में सहायता राशि न मिलने की शिकायत ग्राम ब्राह्मणगांव के बहादुर पंवार ने की। उन्होंने बताया माताजी अनिताबाई के निधन के बाद 5 जुलाई 2025 को आवेदन किया था लेकिन पंचायत से जवाब नहीं मिला। कलेक्टर ने प्रकरण को जिला श्रम अधिकारी को सौंपते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। अनुकंपा नियुक्ति के लिए सेंधवा निवासी सिद्धार्थ धामोने ने आवेदन दिया।
लक्ष्य स्पष्ट कर समाज को बदलने की क्षमता विकसित करें
भास्कर संवाददाता | बड़वानी ग्राम करी स्थित शासकीय आदर्श कॉलेज व शासकीय विधि कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रासेयो का सात दिनी शिविर मेरा युवा भारत व डिजिटल साक्षरता थीम पर शहीद भीमानायक प्रेरणा स्थल धाबाबावड़ी में आयोजित किया जा रहा है। शिविर का उद्देश्य युवाओं में सामाजिक जागरूकता, डिजिटल साक्षरता व राष्ट्र निर्माण की भावना को विकसित करना है। शिविर कर उद्घाटन मुख्य अतिथि समाजसेवी रविंद्र कुलकर्णी, विशेष अतिथि भूपेंद्र सिंह जाट व विशिष्ट अतिथि डॉ. आरएस मुजाल्दा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्जुन चौहान ने की। आदर्श कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित, शासकीय विधि कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. रविंद्र चौहान व डॉ. बीएस मुजाल्दा ने मार्गदर्शन दिया। जिला संगठनकर्ता डॉ. मुजाल्दा ने रासेयो उद्देश्य पर बोलते हुए कहा यह शिविर स्वयंसेवकों के सर्वांगीण विकास का माध्यम है, जिससे उनका शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास होगा। साथ ही ग्राम संपर्क के माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रामीण जीवन, समस्याओं एवं विशेषताओं को समझने का अवसर मिलेगा। मुख्य अतिथि कुलकर्णी ने विद्यार्थियों को ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने का आह्वान करते हुए कहा युवा अपने लक्ष्य स्पष्ट करें और अपने आसपास के समाज को बदलने की क्षमता विकसित करें। विशेष अतिथि जाट ने कहा युवाओं को संवाद के माध्यम से अपनी आवाज मजबूत करनी चाहिए व नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।
समाज सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में दे अहम योगदान
भास्कर संवाददाता | बड़वानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर समीपस्थ ग्राम बालकुआं में मंगलवार को मंडल का हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना और हिन्दू एकता का सशक्त संदेश दिया गया। बालकुआं मंडल अंतर्गत आने वाले 10 गांवों से 20 समाजों के हिन्दू समाजजन एक मंच पर एकत्रित हुए। इससे हिन्दू समाज एक पहचान, एक संकल्प की भावना सुदृढ़ हुई। सम्मेलन में संत राघवेंद्र महाराज ने हिन्दू समाज की उत्पत्ति व उसकी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं पर विचार रखने हुए कहा कि हिन्दू समाज विश्व की सबसे प्राचीन जीवन पद्धति है, जिसने सदैव मानवता, प्रकृति और समरसता के मूल्यों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने समाज से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। जया शर्मा ने पंच परिवर्तन विषय पर प्रभावी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा प्रत्येक परिवार को अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाते हुए अपने घर, मोहल्ले और गांव में अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए। उन्होंने स्वच्छता, स्वावलंबन और प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व बताया। मुख्य वक्ता महादेव यादव ने कहा हिन्दू सम्मेलन में हम सभी जाति-पाति के भेद से ऊपर उठकर एक मंच पर विराजित है। हम सब हिन्दू हैं, जाति-पाति को विदा करें। सम्मेलन में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। समिति संयोजक जगदीश मुकाती, सहसंयोजक दुदालाल चौहान, शांताबाई राठौर, राधेश्याम पाटीदार, सुरेश मुकाती, संतोष यादव, राजू राठौर, डॉ आशीष पाटीदार, देवेंद्र राठौर, जगदीश जमादारी, बद्री कोटवाल, महेश गेहलोत सहित समाजजन मौजूद थे। हिन्दू सम्मेलन के बाद सभी ने एक साथ बैठकर समरसता भोज किया।
औषधीय वाटिका विकसित करना सिखाया
बड़वानी | शहर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस एसबीएन शासकीय पीजी कॉलेज में वनस्पति विभाग व इको क्लब के माध्यम से कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें प्रथम वक्ता के रूप में डॉ. सपना गोयल ने औषधीय वाटिका के विकास विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा संसार में पाए जाने वाले प्रत्येक पौधे में कोई न कोई औषधीय गुण अवश्य होता है। उन्होंने अडूसा, सतावर, ब्राम्ही, लाजवंती, अश्वगंधा, देवकटासला, अपराजिता सहित अनेक औषधीय पौधों की जानकारी दी। साथ ही घरेलू उपचार के लिए घरों में छोटी औषधीय वाटिका विकसित करने का आह्वान किया। जिसमें अजवाइन, पुदीना, हल्दी, अदरक, एलोवेरा, निरगुंडी एवं पत्थरचट्टा जैसे पौधे शामिल हों। डॉ. पूजा पाचरेकर ने प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधनों की जानकारी दी। डॉ. संध्या परिहार ने हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस से हर्बेरियम निर्माण की विधि समझाई। कार्यशाला का संचालन पायल मकवाने ने किया। इस दौरान डॉ. डॉली परमार, डॉ. भूपेंद्र भार्गव, डॉ. राजमल राव, डॉ. सुखलाल मुवेल, डॉ. दीपक केवट, वीरचंद सागोरे, नीरज सेन व विद्यार्थी मौजूद थे।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) द्वारा हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) करवाई जानी है। जिसके लिए अभ्यार्थियों के आवेदन मांगे गए हैं। इस बार प्रदेशभर के 2 लाख 33 हजार से अधिक अभ्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। वहीं हरियाणा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि जल्द ही HTET परीक्षा आयोजित करवाई जाएगी। इसलिए अभ्यर्थी अपनी तैयारी रखें। सेंटर भी गृह जिले में बनाए जाएंगे। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से परीक्षा के दौरान थर्मल बायोमैट्रिक और एआई कैमरे का प्रयोग किया गया है। पिछले HTET से सबक लेकर इस बार पीएसयू से सेवाएं ली हैं। 2.33 लाख आवेदनहरियाणा में HTET के लिए कुल 2 लाख 33 हजार 251 अभ्यार्थियों ने आवेदन किया है। जिनमें से लेवल-1 (पीआरटी) के 41054, लेवल-2 (टीजीटी) के 119120 तथा लेवल-3 (पीजीटी) के 73077 अभ्यर्थी शामिल हैं। वहीं आवेदन करने वालों में हिसार जिले के अभ्यर्थी सबसे ज्यादा हैं। जबकि सबसे कम आवेदन नूंह जिले के अभ्यर्थियों ने किए हैं। बोर्ड चेयरमैन डॉ. पवन कुमार से बातचीतप्रश्न : HTET परीक्षा को लेकर बोर्ड द्वारा क्या तैयारी की गई है?डॉ. पवन कुमार : जैसा की हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की अपनी कार्यशैली रही है। परीक्षा को लेकर बड़ी गंभीरता से हर फैसला लिया गया है। पीएसयू (पब्लिक सेक्टर यूनिट) के द्वारा परीक्षा के सभी प्रकार के प्रबंध किए गए हैं।इसमें चाहे आवेदन फॉर्म लेना हो, सीसीटीवी कैमरा, बायोमैट्रिक्स, फ्रिस्किंग या फिर जैमर की बात हो, सभी सेवाएं पीएसयू द्वारा दी जाएगी। इसमें किसी प्रकार की गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। प्रश्न : पिछली बार की दिक्कतों के मद्देनजर अबकी बार क्या सुधार किए जाएंगे?डॉ. पवन कुमार : पहले सबसे बड़ी दिक्कत सर्विस देने वाली एजेंसी थी, जो टेंडर के जरिए इनसे सर्विस ली थी। चाहे सीसीटीवी कैमरा है, फ्रिस्किंग है, बायोमैट्रिक्स है या फिर जैमर सेवाएं, इनमें काफी अनियमितताएं देखने को मिली है।उन्होंने बताया कि एक सर्विस देने वाली एक एजेंसी का संदेश आया था कि पेमेंट किया जाए, अन्यथा आगे की कार्रवाई करेंगे। हम उस एजेंसी को ही ब्लैकलिस्ट करने जा रहे हैं। क्योंकि उसकी सर्विस बहुत खराब थी। यदि 70 प्रतिशत से ऊपर किसी की सर्विस खराब होती है तो उसे ब्लैक लिस्ट किया जाता है। उसकी पेमेंट के बारे में भी उसी अनुसार फैसला लिया जाता है। लेकिन इस बार HTET में कुछ ऐसा कंप्रोमाइज (समझौता) कहीं नहीं किया जाएगा। इसलिए पीएसयू को पूरा जिम्मा दिया गया है। कहीं भी ढील देखने को नहीं मिलेगी। प्रश्न : एआई या तकनीक का प्रयोग किया जाएगा?डॉ. पवन कुमार : एआई का प्रयोग किया जाएगा। जैसे बायोमैट्रिक में हम इंफ्ररेड अर्थात थर्मल बायोमैट्रिक का प्रयोग करेंगे। उसी प्रकार से कैमरा भी इंफ्रा रेड यानी एआई कैमरा उसमें प्रयोग किए जाएंगे। प्रश्न : कितने अभ्यार्थियों ने आवेदन किया है और परीक्षा कब होगी?डॉ. पवन कुमार : लगभग 2 लाख 33 हजार अभ्यार्थियों ने पंजीकरण किया है। परीक्षा तिथि का सवाल है तो जैसे ही निदेशालय से इसके बारे में सूचना मिलेगी, उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। संभावित तिथि 17-18 जनवरी थी। आगे की तिथि जल्दी घोषित हो जाएगी। प्रश्न : एग्जाम को लेकर परीक्षा केंद्रों को चिह्नित करने को लेकर बोर्ड द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?डॉ. पवन कुमार : परीक्षार्थियों की संख्या के अनुसार ही सेंटरों की संख्या निर्धारित होती है। गृह जिले में ही परीक्षा केंद्र होंगे। ताकि किसी भी परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र में जाने में या परीक्षा केंद्र को सर्च करने में किसी प्रकार की परेशानी ना हो। इसके साथ-साथ परीक्षा केंद्र सिलेक्ट कर लिए गए हैं।ऑब्जर्वर जहां लगाए जाएंगे, उनकी लिस्ट भी जिला प्रशासन से आ गई है। शिक्षा बोर्ड की तरफ से जो कर्मचारी और अधिकारी जहां-जहां ड्यूटी देंगे, वह भी फाइनल कर दिया गया है। प्रश्न : HTET के लिए आवेदन करने वाले अभ्यार्थियों को क्या कहेंगे?डॉ. पवन कुमार : हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड हर वर्ष जिस प्रकार से HTET की परीक्षा आयोजित कर रहा है। इसमें आप यदि पीछे की परीक्षा में किसी कारणवश असफल रहे हैं, तो आपको कोशिश करें कि आपकी कमियों को दूर करें। पूरे उत्साह के साथ परीक्षा में बैठें।आप पूरी तरह से सक्षम हैं, इसलिए परीक्षा में 60 प्रतिशत जो मार्क्स लेने होते हैं, वह आपके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं हैं। उत्साह और पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में बैठें।
कन्या महाविद्यालय में वंदे मातरम् का दिया प्रशिक्षण
बड़वानी | वंदे मातरम् गीत की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शासकीय कन्या महाविद्यालय में छात्राओं को राष्ट्रीय गीत गायन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रभारी प्राचार्य डॉ. एन.एल. गुप्ता ने वंदे मातरम् को राष्ट्र की आत्मा व स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक बताते हुए छात्राओं को शुद्ध उच्चारण व भावपूर्ण गायन के महत्व से अवगत कराया। पीएफबी प्रभारी डॉ. जगदीश मुझाल्दे ने कहा ऐसे कार्यक्रमों से छात्राओं में अनुशासन, आत्मविश्वास व राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित होती है। प्रो. दीपक सोलंकी ने प्रशिक्षण की जानकारी दी। संचालन प्रो. पवन कुमार सिंह व आभार प्रो. दीपाली निगम ने व्यक्त किया।
विद्यार्थियों को स्वदेशी अपनाने की शपथ दिलाई
बड़वानी | मप्र जन अभियान परिषद के तत्वावधान में ग्रामोदय से अभ्युदय मप्र अभियान के तहत पाटी के शासकीय कॉलेज में विकासखंड स्तरीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की उद्देश्यात्मक भूमिका विकासखंड समन्वयक कमल बामनिया ने प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनय गोरे ने किया। मुख्य अतिथि सेवा निवृत्त प्राचार्य धनालाल भावसार ने स्वामी विवेकानंदजी के जीवन परिचय व उनके विचारों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। जपं पाटी के सेवा निवृत्त कार्यक्रम अधिकारी धार्वे ने मप्र शासन की उपलब्धियों व जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। योजनाओं का लाभ लेकर जनसामान्य को अधिक से अधिक जागरूक करने पर बल दिया। सभी को स्वदेशी अपनाने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में बीएसडब्ल्यू व एमएसडब्ल्यू उत्तीर्ण छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। स्वदेशी सद्भावना बाइक रैली का आयोजन कर स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया। इस दौरान परामर्शदाता सुनील गुप्ता सहित नवांकुर व प्रस्फुटन समिति सदस्यों मेंटर्स पूर्णिमा जोशी व गौरव व्यास सहित अन्य मौजूद थे।
दशहरा मैदान पर 2 फरवरी तक चलेगा आनंद मेला
बड़वानी | शहर के दशहरा मैदान में शुरू हुआ आनंद मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले का संचालन अब 2 फरवरी तक किया जाएगा। मेले में रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे हैं। बच्चों, महिलाओं और युवाओं के लिए अलग-अलग झूले और मनोरंजन के साधन लगाए गए हैं। इस बार का मुख्य आकर्षण टॉवर झूला बना हुआ है, जिसमें लोग 50 फीट की ऊंचाई तक जाकर रोमांच का लुत्फ उठा रहे हैं। मेला संचालक पिंटू लश्करी और नरेश लश्करी ने बताया मेले में कुल 70 दुकानें और 14 खाद्य व्यंजन स्टॉल लगाए गए हैं। सभी आयु वर्ग के लिए मनोरंजन के लिए टॉवर झूला, टोरा-टोरा, ब्रेक डांस, नाव झूला, हवाई झूला, ड्रेगन ट्रेन, मिक्की माउस व वाटर बोर्ड, धूम चकरी, चांद-तारा झूला, दिलवाला झूला, भूत बंगला शामिल हैं। मेला शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक संचालित हो रहा है। मेला पहले 26 जनवरी तक चलने वाला था लेकिन लोगों की फरमाइश पर इसकी तिथि बढ़ाकर 2 फरवरी कर दी है।
नर्मदा जयंती पर होगा निर्झरणी महोत्सव
बड़वानी | नर्मदा जयंती पर 25 जनवरी को निर्झरणी महोत्सव का आयोजन होगा। आयोजन नवलपुरा स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर में होगा। संचालक संस्कृति एनपी नामदेव ने बताया नर्मदा केवल नदी नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति व आस्था की शाश्वत धरोहर है। कार्यक्रम 25 जनवरी को शाम 6 बजे से शुरू होगा। सबसे पहले बड़वानी के बालकृष्ण धनगर व साथी मालवी लोकगायन प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद इंदौर की मनाली मोहिते व साथी नर्मदा केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत करेंगे। अंतिम प्रस्तुति भोपाल के ध्वनि बैंड द्वारा भक्ति गायन की होगी। कार्यक्रम में प्रवेश निशुल्क रहेगा।
औद्योगिक नगरी पानीपत की खटीक बस्ती में एक साल के मासूम बच्चे के साथ दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। अपने पहले जन्मदिन के जश्न से महज दो घंटे पहले मासूम दिव्यांशु खौलती हुई चाय के पतीले पर गिर गया। इस हादसे में बच्चा बुरी तरह झुलस गया है, जिसका उपचार जारी है। पिता ने नम आंखों से बताया कि उन्होंने रात 12 बजे बेटे का पहला जन्मदिन मनाने के लिए केक मंगवाया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। झुलसे हुए बच्चे का इलाज अस्पताल में चल रहा है। यहां पढ़िए, पिता ने घटना के बारे में क्या-क्या बताया... 2 घंटे बाद कटना था पहला जन्मदिन का केकपिता अनिल ने भारी मन और नम आंखों से बताया कि 15 जनवरी 2025 को दिव्यांशु का जन्म हुआ था। 14 जनवरी की रात वह बहुत खुश थे क्योंकि उनका सबसे छोटा बेटा एक साल का होने वाला था। उन्होंने रात 12 बजे दिव्यांशु का पहला जन्मदिन मनाने के लिए केक मंगवाने और उसे काटने की पूरी तैयारी कर रखी थी। एक मजदूर पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार बेटे के लिए खुशियां बटोरी थीं। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। 15 जनवरी शुरू होने से ठीक 2 घंटे पहले यानी रात 10 बजे यह भयानक हादसा हो गया। जिस हाथ में केक होना चाहिए था, अब उन हाथों पर पट्टियां बंधी हैं।
हरियाणा के पंचकूला में नगर निगम की वार्डबंदी के खिलाफ कांग्रेस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिसमें म्यूनिसिपल एक्ट-1994 का हवाला देते हुए कहा गया है कि निगम एरिया में नया क्षेत्र जुड़ने या घटने के बाद ही वार्डबंदी में बदलाव किया जा सकता है। लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ। पंचकूला प्रदेश में पहला नगर निगम था, जिसने चुनाव प्रक्रिया में सबसे पहले वार्डबंदी का कार्य पूरा किया। जिस पर कांग्रेस पार्टी की ओर से आपत्तियां और सुझाव भी दर्ज करवाए गए थे। लेकिन एडहॉक कमेटी की ओर से सुझावों व आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया गया था। जिसके बाद से ही कांग्रेस हाईकोर्ट में जाने की तैयारी कर रही थी। म्यूनिसिपल एक्ट-1994 का हवाला..कांग्रेस ने अपनी याचिका में म्यूनिसिपल एक्ट-1994 का हवाला देते हएु कहा है कि वैधानिक प्रावधानों के अनुसार वार्ड, जहां तक संभव हो, भौगोलिक रूप से सघन, सटे हुए होने चाहिए और भौतिक विशेषताओं, मौजूदा प्रशासनिक सीमाओं, संचार की सुविधाओं, सार्वजनिक सुविधा और प्लस 10 प्रतिशत के अनुमेय परिवर्तन के साथ लगभग समान जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए सीमांकित किए जाने चाहिए। भौगोलिक सघनता, निरंतरता और प्रशासनिक इकाइयों की समरूपता के सिद्धांतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप तर्कहीन और खंडित वार्ड बने हैं। वार्ड आरक्षण का भी हो चुका ड्रा पचंकूला नगर निगम के वार्ड नंबर 16 को महिला अनुसूचित जाति आरक्षित घोषित किया गया। इसी प्रकार वार्ड नंबर 7 और वार्ड नंबर 17 को अनुसूचित जाति (SC) वार्ड, वार्ड नंबर 19 को बीसीए महिला आरक्षित वार्ड और वार्ड नंबर 18 को बीसी-बी महिला आरक्षित वार्ड घोषित किया गया। इसी प्रकार सामान्य (महिला) वर्ग के लिए 4 वार्ड आरक्षित घोषित किए गए, जिनमें वार्ड नंबर 1, वार्ड नंबर 2, वार्ड नंबर 11 और वार्ड नंबर 15 शामिल हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज (21 जनवरी) हरियाणा दौरे पर रहेंगे। वह सुबह 11 बजे कुरुक्षेत्र की पंजाबी धर्मशाला में चल रहे 'संगठन सृजन अभियान' के तहत ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लेंगे। यहां वह हरियाणा और उत्तराखंड के कांग्रेस जिला अध्यक्षों से बातचीत कर उनके परिवार से भी मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी के साथ हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा, राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत अन्य नेता भी मौजूद रहेंगे। ट्रेनिंग कैंप के बाद शाम को राहुल गांधी ब्रह्मसरोवर पर आरती में भी शामिल हो सकते हैं। इसके बाद वह दिल्ली रवाना होंगे। राव नरेंद्र सिंह बोले- संगठन को मजबूत करेंगेकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि हरियाणा और उत्तराखंड के जिला अध्यक्षों के लिए कुरुक्षेत्र एक केंद्रीय स्थान है, इसलिए हमने ट्रेनिंग के लिए इसे चुना। 13 जनवरी को शुरू हुआ यह कैंप 22 जनवरी तक चलेगा, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता नवनियुक्त जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और चुनाव लड़ने की राजनीति सिखाना है। इस शिविर में हरियाणा के 32 और उत्तराखंड के 27 कांग्रेस जिला अध्यक्ष, उनके साथ-साथ राज्यों के प्रभारी, सह प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक दल के नेता भी शामिल हो रहे हैं। पिछले साल 4 जून को आए थे राहुलराहुल गांधी ने पिछले साल 4 जून को चंडीगढ़ में पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में 'संगठन सृजन कार्यक्रम' के तहत राज्य के नेताओं और ऑब्जर्वरों की मीटिंग ली थी। उस समय तक हरियाणा में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हुई थी। राहुल गांधी ने मीटिंग में कहा था कि संगठन बनाते समय किसी नेता की सिफारिश नहीं चलेगी। राहुल गांधी के दौरे के बाद 12 अगस्त को कांग्रेस ने 32 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। इसके बाद, 29 सितंबर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया गया। उदयभान की जगह पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- राहुल के दौरे से पहले हरियाणा कांग्रेस का संगठनात्मक विस्तार:20 जिलों की कार्यकारिणी घोषित; कुरुक्षेत्र में जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग में आएंगे सांसद हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 20 जिलों की कार्यकारिणी का विस्तार किया है। इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक पत्र जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, तीन जिलों में कार्यकारिणी का विस्तार फिलहाल रोक दिया गया है, जिसे बाद में जारी किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...
हरियाणा BJP के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और हरियाणवी सिंगर रॉकी मित्तल को कसौली रेप केस में जिस दूसरी क्लोजर रिपोर्ट पर क्लीन चिट मिली, वह 13 दिन बाद सामने आई है। इस रिपोर्ट में पुलिस ने शिकायतकर्ता युवती के खिलाफ कई गंभीर खुलासे किए हैं। पुलिस ने रेप का केस करने वाली युवती पर मेडिकल नहीं कराने के अलावा मुकदमे में देरी, प्रत्यक्षदर्शी की गवाही समेत करीब 8 खुलासे किए हैं। पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट में हर खुलासे का कारण दाखिल किया है। बता दें कि इससे पहले भी कसौली कोर्ट में इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट पुलिस ने दाखिल की थी, जिसको कसौली कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद रेप पीड़िता ने इसे जिला कोर्ट सोलन में चुनौती दी थी। जिला कोर्ट ने ही कसौली कोर्ट को फिर से महिला का पक्ष सुनने के आदेश दिए थे। हालांकि पुलिस की दूसरी क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर सोलन कोर्ट ने सभी आरोपों को खारिज कर केस बंद कर दिया है। वो 8 अहम बिंदू जिनके आधार पर पुलिस ने क्लोजर रिपोर्टर बनाई... जानिए कोर्ट ने केस को बंद करने के फैसले में क्या कहा... अब सिलसिलेवार जानिए क्या था पूरा मामला... -------------------- यह खबर भी पढ़ें... हरियाणा BJP अध्यक्ष के खिलाफ गैंगरेप केस बंद:पुलिस सबूत नहीं जुटा पाई; युवती ने कहा था- बड़ौली-मित्तल ने शराब पिलाकर रेप किया हरियाणा BJP अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल को रेप केस में क्लीन चिट मिल गई है। कसौली कोर्ट ने गुरुवार (8 जनवरी) को दूसरी बार पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट (CR) को स्वीकार किया। इस केस में कसौली पुलिस को बड़ौली और रॉकी मित्तल के खिलाफ सबूत नहीं मिले थे। (पूरी खबर पढ़ें)
फरीदाबाद में तीन नाबालिग लड़कियों समेत 6 हत्याएं एक ही तरीके से की गई थीं। सभी को गला घोंटकर मौत के घाट उतारा। फिर लाश को बोरे में डालकर आगरा नहर में फेंक दिया गया। साइको किलर सिंह राज सभी लड़कियों के परिवार से पहले जान-पहचान बनाता था। फिर मौका मिलते ही छेड़खानी करता। वह छोटी बच्चियों को अपना निशाना बनाता था। मरने वाली सभी लड़कियां गरीब परिवार से संबंध रखती थीं। सिंह राज जसाना गांव का रहने वाला है। वह सेक्टर 16 स्थित एक निजी अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड था। गांव में उसके परिवार में कोई नहीं है। उसके कुनबे के लोग उससे कोई रिश्ता नहीं रखते। उसने पहली बार 1987 में अपने चाचा और चचेरे भाई की गला घोंटकर हत्या की थी। पुलिस ने इसको गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कोर्ट में सबूत के अभाव में उसको बरी कर दिया गया। युवती की हत्या केस में दोषी ठहराए गए सिंह राज को आज फरीदाबाद कोर्ट सजा सुनाएगी। साल 2022 में साइको होने के पता चलापुलिस के मुताबिक जब सिंह राज को भूपानी की रहने वाली लड़की की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया, तो उससे पूछताछ के दौरान पुराने मामलों की जानकारी मिली। पुलिस की पूछताछ में उसने तीन नाबालिग लड़की और चाचा व चचेरे भाई की हत्या की बात को कबूल लिया। पुलिस को जांच में ये भी पता चला कि सभी की हत्या एक ही तरीके से की गईं। जिससे पुलिस ने माना कि यह एक साइको किलर है। परिवार से बनाता था जान पहचानपुलिस के मुताबिक अप्रैल 2019 में सिंह राज ने एक 12 साल की लड़की को अपना शिकार बनाया। सेक्टर 17 के पास उसने रात के समय लड़की की गला घोंटकर हत्या कर दी। लड़की के परिवार से उसकी मुलाकात अस्पताल में हुई थी। लड़की का पिता दवाई लेने के लिए अस्पताल में आया था। जहां पर उसकी पहचान सिंह राज से हो गई। जिसके बाद सिंह राज ने उससे फोन नंबर ले लिया और उसके घर पर आना जाना शुरू कर दिया। अप्रैल महीने में उसने सेक्टर 17 में बाहर घूम रही लड़की के साथ छेड़छाड़ की। लड़की ने जब शोर मचाना चाहा तो गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। जिसके बाद उसकी लाश को बोरे में भरकर साइकिल पर रखकर आगरा नहर के पास झाड़ियों में फेंक दिया। अस्पताल के अंदर फीमेल सफाई कर्मचारी को माराजून 2021 में सिंह राज ने एक 16 साल की फीमेल सफाई कर्मचारी को अस्पताल के अंदर रात के समय गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया। अस्पताल में गार्ड की नौकरी करने के चलते उसकी महिला सफाई कर्मचारी से जान पहचान हो गई थी। जून महीने में उसने रात के समय कॉल करके सफाई कर्मचारी को बुलाया और उसके साथ छेड़खानी शुरू कर दी। जब महिला सफाई कर्मचारी ने विरोध किया तो उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। जिसके बाद उसके शव को बोरे में भरकर आगरा नहर की झाड़ियों में फेंक दिया। चाय की टपरी वाले की बेटी को माराअगस्त 2021 में सिंह राज ने अस्पताल के पास चाय की टपरी लगाने वाली की 12 साल बेटी को गला घोंट कर मार दिया। पहले उसने टपरी पर चाय पीनी शुरू की, जिससे उसकी पहचान टपरी लगाने वाले से हो गई। धीरे-धीरे उसकी लड़की भी उसके साथ घुल-मिल गई। अगस्त महीने में रात के समय लड़की चाय लेकर अस्पताल में अंदर गई थी, लेकिन बाहर आते समय सिंह राज ने उसको रोक लिया और उसके साथ छेड़खानी करने लगा। जब लड़की ने शोर मचाने की कोशिश की तो उसका भी गला घोंट दिया। हत्या के बाद रात के अंधेरे में उसके भी शव को आगरा नहर की झाड़ियों में फेंक दिया। बाजार से वापस आती लड़की को मारादो जनवरी 2022 को ओल्ड फरीदाबाद थाने में भूपानी की रहने वाली युवती की गुमशुदगी का मामला दर्ज हुआ था। एक परिजन ने बताया कि उनकी भांजी ओल्ड फरीदाबाद मार्केट गई थी, लेकिन घर नहीं लौटी। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की। पता चला कि युवती की कॉल हिस्ट्री में अंतिम कॉल सिंह राज के नाम की मिली। पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर जसाना के रहने वाले सिंह राज को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया तो उसने युवती की हत्या की बात कबूल की। पूछताछ में सिंह राज ने बताया था कि उसने युवती के साथ छेड़खानी की थी। पोल खुलने के डर से उसने 31 दिसंबर 2022 को युवती को फोन करके सेक्टर-17 के पास बुलाया और वहां पर गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को आगरा नहर की झाड़ियों में फेंक दिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर युवती का शव सेक्टर-17 में नहर के पास झाड़ियों से बरामद किया था। पुलिस की जांच में पता चला कि लड़की की इलाज के लिए अस्पताल गई थी जहां पर उसकी मुलाकात सिंह राज से हुई थी। सिंह राज ने इलाज के दौरान उसकी मदद की थी। सिंह राज उससे काफी समय से संपर्क में था। जब लड़की उसकी छेड़खानी की बात सभी को बताने के लिए बोलने लगी तो उसने उसकी हत्या की साजिश रची।
'मेरी बेटी के हत्यारे को ढूंढने की जगह पुलिस हमारे परिवार-वालों पर शक कर रही है। तीन बार SIT हमारे घर आ चुकी है। हर बार वही सवाल, वही शक। इससे हम सब मानसिक रूप से टूट चुके हैं। SIT के आरोप सरासर गलत हैं।' 'मेरे साले-भांजे का इस घटना से कोई मतलब नहीं है। घटना को घटे 9 दिन से ज्यादा हो गए हैं और पुलिस अभी तक मेरी बेटी के हत्यारों तक नहीं पहुंच पाई है। जब तक मेरी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक मैं संतुष्ट नहीं रहूंगा।' ये कहना है पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के पिता का, जिसकी बेटी की रेप के बाद अस्पताल में मौत हो गई। NEET छात्रा की मौत के बाद SIT की टीम जांच में जुटी है। टीम पटना से लेकर जहानाबाद तक हर पहलू की जांच कर रही है। SIT ने मृतक छात्रा के पिता और परिवार से किस तरह के सवाल कर रही है, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम गांव में पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पिता बोले- सिर्फ हत्या का नहीं, मामला पॉक्सो एक्ट का है पिता का कहना है कि यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं है बल्कि पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध का है। उन्होंने साफ मांग रखी है कि मामले की जांच पॉक्सो एक्ट के तहत हो और दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। परिवार का दावा है कि पुलिस की मौजूदा थ्योरी गलत दिशा में जा रही है, जिससे असली अपराधी अब तक बचे हुए हैं। SIT ने छात्रा के माता-पिता, मामा-ममेरे भाई से पूछताछ कर चुकी है। अब तक कितनी बार गांव पहुंची SIT नीट छात्रा की मौत के बाद गठित SIT अब तक तीन बार जहानाबाद में छात्रा के गांव पहुंच चुकी है। छात्रा के पिता का कहना है, 'हर बार टीम ने लगभग 12-12 घंटे तक गांव में डेरा डाले रखती है। मुझसे, लड़की के मामा और ममेरे भाई से लगभग एक ही तरह के सवाल कर रही है।' पीड़ित पिता ने बताया, 'SIT हमसे पूछ रही- आपकी बेटी के डेथ से पहले घर का माहौल कैसा था? बेटी पर पढ़ाई का दबाव तो नहीं था? हाल के दिनों में क्या छात्रा के व्यवहार में कोई बदलाव आए थे? परिवार के सदस्यों के साथ उसके संबंध कैसे थे? क्या कोई उसे परेशान कर रहा था? कितनी देर तक वो मोबाइल इस्तेमाल करती थी? क्या किसी से भी कॉल और चैट पर घंटों बात करती थी? उसके रूम से क्या कोई डायरी मिली है? पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले छात्रा ने घर में किसी से कोई खास बात तो साझा नहीं की थी। मामा, ममेरे भाई से 12 घंटे तक पूछताछ जांच के दौरान SIT की टीम ने छात्रा के मामा और उनके बेटे को लगभग 12 घंटे तक हिरासत में रखा था। पुलिस के मुताबिक, उनसे छात्रा से बातचीत, फोन कॉल, मैसेज और हालिया मुलाकातों को लेकर गहन पूछताछ की गई। हालांकि, सोमवार की देर रात दोनों को छोड़ दिया गया। SIT ने मामा और उसके बेटे से पूछा, आपकी छात्रा से आखिरी बार कब बात हुई थी? आखिरी बार बातचीत में क्या वो टेंशन में थी? छात्रा से किस बात पर आपलोगों की बातचीत हुई थी? क्या किसी तरह का पारिवारिक तनाव या विवाद था? क्या छात्रा ने किसी दबाव या डर का जिक्र किया था? हालांकि पूछताछ में कोई ठोस आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया है। परिजनों का कहना है कि, एक ही सवाल बार-बार पूछे जा रहे हैं। इससे लगता है कि पुलिस हमे ही शक के दायरे में रखी हो। भाई-बहन हैं, बात करने में क्या गलत?- पिता का गुस्सा पिता ने पुलिस की इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए कहा, मेरी बेटी और भांजे के बीच का रिश्ता भाई-बहन का रिश्ता कहलाता है। परिवार में रहते हैं, तो बात होती है। इसमें गलत क्या है? पुलिस बेवजह इस एंगल को तूल दे रही है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी बेटी का किसी भी तरह का गलत कनेक्शन नहीं था। पिता पुलिस की थ्योरी से संतुष्ट नहीं छात्रा के पिता पुलिस की मौजूदा जांच दिशा से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है, जांच निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ परिवार को ही कटघरे में खड़ा करना गलत है। मेरी बेटी की मौत से जुड़े कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। पिता मानते हैं कि पुलिस की यह थ्योरी जांच को गलत दिशा में ले जा सकती है। डायरी को लेकर उठते सवाल पुलिस सूत्रों में एक कथित डायरी का भी जिक्र हो रहा है, जिसमें छात्रा की मानसिक स्थिति या निजी बातों के संकेत होने की चर्चा है। हालांकि इस पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही इस मामले पर परिवार वालों ने कुछ कहा है। उनका सिर्फ इतना कहना है, इस डायरी के बारे में परिवार वालों को कुछ नहीं पता है। छात्रा के पिता ने कहा, मुझे ऐसी किसी डायरी की कोई जानकारी नहीं दी गई है। अगर कोई डायरी है भी, तो उसे सबूत के तौर पर सामने लाया जाए। अफवाहें फैलाने से सच्चाई सामने नहीं आएगी मां कुछ बोल नहीं रही बातचीत के दौरान हमने घर के अन्य लोगों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन अब सब बोलने से बच रहे हैं। यहां तक कि मां भी कोई जवाब नहीं देती हैं। वो बस बुदबुदाते हुए कहती हैं कि हमारी बेटी चली गई और सब लोग हमी से सवाल कर रहे हैं। ई कैसा जांच चल रहा है। पुलिस से पूछे गए वो 5 सवाल जिसके जवाब नहीं मिले 1- लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? 6 जनवरी से 9 जनवरी तक मामला पुलिस की जानकारी में रहा। फिर भी FIR, सीन प्रिजर्वेशन, CCTV जब्ती और संदिग्धों से पूछताछ में देरी क्यों हुई? 2- जिस अस्पताल ने रेप या गंभीर चोट का स्पष्ट जिक्र नहीं किया, उस पर एक्शन कब? जब बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान से मामला स्पष्ट हो गया, तो क्या अस्पताल पर एक्शन नहीं होना चाहिए? 3- हॉस्टल की संचालिका, उसके दोनों बेटे और केयर टेकर अब कहां हैं? घटना के इतने दिन बाद भी ये लोग पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं? किस आधार पर इन्हें थाने बुलाया गया था और किसके दबाव में छोड़ दिया गया? 4- मुख्य आरोपियों में अब तक किस-किस की गिरफ्तारी हुई? अगर यह मामला इतना संवेदनशील है, तो अब तक गिरफ्तारी शून्य क्यों है? कुछ संदिग्धों को उठाया गया है उनका खुलासा कब होगा। 5- परिजनों को डराने-धमकाने के आरोपों पर पुलिस क्या कार्रवाई करेगी? पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने में देरी और धमकी के आरोपों पर जवाब कौन देगा? अब उन आरोपियों के बारे में जानिए जिनकी अभी भी तलाश जारी है... आरोपी –1: हॉस्टल मालकिन नीलम अग्रवाल नीलम अग्रवाल शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका हैं। छात्रा इसी हॉस्टल में रहती थी। 9 जनवरी को नीलम अग्रवाल खुद अस्पताल पहुंचती हैं और परिजनों से कहती हैं कि “हॉस्टल का नाम बदनाम हो जाएगा, केस वापस ले लीजिए।” यह बयान अपने आप में गंभीर है। गर हॉस्टल में सब कुछ ठीक था, तो केस वापस लेने का लालच क्यों दिया गया? नीलम अग्रवाल को कुछ देर के लिए थाने ले जाया गया, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। सवाल है, किस आधार पर छोड़ा गया? हॉस्टल की CCTV फुटेज, रजिस्टर, एंट्री-एग्जिट लॉग, सबकी जिम्मेदारी हॉस्टल संचालक की होती है। लेकिन अब तक न तो CCTV सामने आया, न यह साफ है कि हॉस्टल की रात की गतिविधियों की जांच हुई या नहीं। आरोपी –2: केयर टेकर नीतू और चंचला केयर टेकर नीतू छात्रा को अस्पताल लेकर जाती है, लेकिन पहले सेंट्रल हॉस्पिटल न ले जाकर प्रभात मेमोरियल ले जाती है। यह फैसला किसके कहने पर हुआ, इसका जवाब आज तक नहीं मिला। 7 और 8 जनवरी को हॉस्टल में मौजूद दूसरी केयर टेकर चंचला की भूमिका भी संदिग्ध है। रिश्तेदारों का दावा है कि उस वक्त CCTV चेक किया जा रहा था। घटना के बाद दोनों केयर टेकर कहां चली गईं— यह पुलिस अब तक सार्वजनिक नहीं कर पाई है। आरोपी –3: मनीष रंजन जेल में, उसके गार्ड्स कहां हैं जिस इमारत में हॉस्टल चलता है, उसका मालिक मनीष रंजन है, जो उसी बिल्डिंग के ऊपरी फ्लोर पर रहता है। परिजनों का आरोप है कि 6 जनवरी से लेकर प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में आखिरी दिन तक मनीष रंजन का गार्ड परिजनों के पीछे-पीछे घूमता रहा। यह निगरानी क्यों हो रही थी? क्या किसी को डराने या कंट्रोल करने की कोशिश हो रही थी? अब मकान मालिक के गार्ड्स कहां हैं। इस पर अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पुलिस ने अब तक क्या क्या किया
CM नीतीश कुमार आज (21 जनवरी) 'समृद्धि यात्रा' के पांचवे दिन सारण पहुंचेंगे। यहां मुख्यमंत्री 86.50 करोड़ रुपए की योजनाओं का उद्घाटन और 450.30 करोड़ रुपए की योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। छपरा में सबसे पहले CM नीतीश जीविका दीदियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे सिलाई केंद्र का उद्घाटन करने के साथ साथ केंद्र का निरीक्षण भी करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री ITI बॉयज केंद्र का उद्घाटन करेंगे। सीएम नीतीश कुमार बिनतोलिया के पास निर्माणाधीन बस स्टैंड पहुंचेंगे। यहां एक जनसभा को संबोधित करेंगे। फिर जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान आम लोगों से सीधे संवाद करेंगे। जीविका दीदियों से CM करेंगे संवाद CM नीतीश सुबह 11 बजे छपरा पहुंचेंगे। इसके बाद सबसे पहले जीविका दीदियों से संवाद करेंगे। फिर सिलाई केंद्र का उद्घाटन करेंगे। यह सिलाई केंद्र जीविका दीदियों द्वारा संचालित किया जाएगा। इसको लेकर जीविका समूहों में काफी उत्साह है। इस केंद्र में तैयार किए गए कपड़े सारण के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजा जाएगा। जिला प्रशासन का कहना है कि यह पहल जीविका दीदियों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है। बॉयज ITI केंद्र का होगा उद्घाटन मुख्यमंत्री आईटीआई बॉयज केंद्र का भी उद्घाटन करेंगे। यह ITI केंद्र मॉडर्न सुविधाओं से लैस है। यहां इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल सहित कई ट्रेड से जुड़े मॉडर्न उपकरण लगाए गए हैं। इन डिवाइस के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईटीआई प्रशासन का कहना है कि इस केंद्र के शुरू होने से स्थानीय युवाओं को तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। ट्रेनिंग मिलने के बाद युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। CM नीतीश कुमार एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान लोगों से संवाद भी करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री जीविका दीदियों द्वारा संचालित योजनाओं के स्टॉल का निरीक्षण करेंगे।
सेक्टर रोड में अवाप्त होने वाली जमीन के बदले जमीन देने में अब मिलीभगत और मनमर्जी नहीं चलेगी। जेडीए अब सेक्टर रोड के लिए जमीन अवाप्त करने के बाद सभी प्रभावितों के लिए एक ही जगह मुआवजे में विकसित जमीन देगा। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान सेक्टर रोड के बदले मिलीभगत से बेशकीमती जमीनें मुआवजे में बांट दी गई थीं। इस पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी सवाल उठाए थे। जेडीए ने अब सेक्टर रोड से प्रभावित काश्तकारों को विकसित जमीन देने के लिए नई एसओपी तैयार की है। नई एसओपी के अनुसार ही जमीन अवाप्त कर प्रभावित जमीन के नजदीक ही सरकारी जमीन पर योजना विकसित कर मुआवजा दिया जाएगा। गौरतलब है कि शहर में मास्टर प्लान 2025 में प्रस्तावित सेक्टर सड़कों में से 50 फीसदी सड़कें भी नहीं बनी हैं। ऐसे में शहर की मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और ट्रैफिक जाम से शहर की सांसें फूल रही हैं। सेक्टर सड़क के लिए जमीन अवाप्ति को लेकर आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए जेडीसी सिद्धार्थ महाजन ने जोन, इंजीनियरिंग और प्लानिंग विंग को नई एसओपी लागू करने के निर्देश दिए हैं। जेडीए पुराने रीजन में मास्टर प्लान में प्रस्तावित करीब 300 प्रमुख सेक्टर सड़कें 15 साल में भी नहीं बना पाया है। नई SOP में ऐसे होगा काम 15 दिन में पीटी सर्वे करना होगा जेडीए की इन सेक्टर सड़कों को बनाने की प्लानिंग
त्रिवेणी पुलिया से गुर्जर की थड़ी तक बन रहे एलिवेटेड रोड से भविष्य में ट्रैफिक को राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल यह प्रोजेक्ट आमजन के लिए परेशानी का कारण बन गया है। कागजों में जहां सड़क की चौड़ाई 160 फीट है, वहीं मौके पर यह केवल 140 फीट ही रह गई है। एलिवेटेड रोड के लिए जेडीए ने करीब 2100 मीटर क्षेत्र में 40 से 50 फीट चौड़ा कॉरिडोर बैरिकेड्स लगाकर घेर लिया है, जिससे सड़क की दो लेन पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। ऊपर से सड़क के दोनों ओर व्यावसायिक गतिविधियां होने के कारण बेतरतीब पार्किंग और अस्थायी अतिक्रमण ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। गुर्जर की थड़ी, महेश नगर, रिद्धि-सिद्धि चौराहा और त्रिवेणी नगर से रोजाना करीब 1 से डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। निर्माण कार्य और अतिक्रमण के चलते ट्रैफिक के लिए केवल 2 से 3 लेन ही बची हैं। ऐसे में पीक ऑवर्स में हालात बेहद खराब हो जाते हैं। 5 मिनट का सफर तय करने में 20 मिनट तक लग रहे हैं। 2.1 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में चार ट्रैफिक सिग्नल हैं, जहां चौड़ाई कम होने से हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। सुबह करीब 3 घंटे और शाम को 4 घंटे तक वाहन चालकों को जाम में फंसना पड़ता है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, एंबुलेंस और जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे समझें परेशानी एलिवेटेड रोड का काम शुरू होते ही सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लिया गया। इसके साथ दुकानों के सामने वाहन खड़े होने लगे और कई जगह अस्थायी अतिक्रमण हो गया। इससे दोनों तरफ करीब 10-10 फीट की जगह और कम हो गई। नतीजा यह हुआ कि पूरा कॉरिडोर रोजाना ट्रैफिक जाम की चपेट में आ गया है। यह प्रोजेक्ट 30 महीने में पूरा होना है, लेकिन यदि ट्रैफिक प्रबंधन नहीं सुधरा तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। अस्थायी अतिक्रमण हटे तो मिल सकती है राहतइस समस्या का सबसे जल्द समाधान सड़क किनारे से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटाना है। यदि प्रशासन सख्ती करे तो मौजूदा चौड़ाई में भी यातायात काफी हद तक सुचारू हो सकता है। निर्माण कार्य के साथ ट्रैफिक प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है, ताकि विकास की कीमत जनता को जाम में खड़े होकर न चुकानी पड़े। अस्थायी अतिक्रमण हटे तो मिल सकती है राहतइस समस्या का सबसे जल्द समाधान सड़क किनारे से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटाना है। यदि प्रशासन सख्ती करे तो मौजूदा चौड़ाई में भी यातायात काफी हद तक सुचारू हो सकता है। निर्माण कार्य के साथ ट्रैफिक प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है, ताकि विकास की कीमत जनता को जाम में खड़े होकर न चुकानी पड़े।
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का पैतृक गांव से है गहरा जुड़ाव
भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पैतृक गांव नवादा के अमावां में खासा उत्साह दिख रहा है। काफी दिनों से नितिन नवीन का परिवार वहां नहीं रह रहा है। लेकिन नितिन नवीन गांव से जुड़े रहे हैं। न सिर्फ गांव के लोगों से सीधे संपर्क में रहे हैं बल्कि हाल में वे गांव भी आए थे। उनके गोतिया पप्पू सिन्हा बताते हैं कि यह पल गौरव का पल है। गांव को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। पूरा देश आज जान गया । नितिन नवीन के दादाजी दशकों पहले रजौली के अमावां से पटना जाकर बसे थे। उनके पिताजी नवीन किशोर सिन्हा का जन्म अमावा में ही हुआ था। वे गांव के संपर्क में थे। जो लोग पटना जाते थे उनसे हाल-चाल लेते थे। उनके बाद नितिन नवीन भी गांव के लोगों से जुड़े रहे। नितिन नवीन के चाचा और अमावां गांव निवासी रवि भूषण प्रसाद सिन्हा कहते हैं नितिन सच्चा हीरा था, जिसे असली हीरे ने पहचान दिया। सीरा-पीड़ा पूजकर गए थे नितिन नवीन, फल मिला: करीब 19 महीना पहले वे रजौली के अमावां स्थित अपने पैतृक गांव पहुंचे थे । वे अपने गांव की मिट्टी से इस कदर जुड़े हैं कि अपने पैतृक घर में सीरा- पीड़ा (कुल देवी - देवताओं) को नमन किया। इसका आशीर्वाद उन्हें मिल गया है। ग्रामीणों के अनुसार नितिन नवीन के पुरखों की कई पीढ़ी का जीवन अमावां गांव में ही बीता है। दो पीढ़ी पूर्व यानी नितिन नवीन के दादाजी स्व. कामेंद्र प्रसाद सिन्हा रोजगार के सिलसिले में पटना गए और वहीं बस गए। गांव में हर घर में जले नितिन के नाम से घी के दीये: नितिन नवीन के पैतृक गांव अमावां में इस अवसर पर भव्य जश्न मनाया गया। गांव की गलियों में ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी, पटाखे फोड़े गए व एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दी गईं। लोगों ने इसे न केवल अमावां बल्कि रजौली प्रखंड व नवादा के लिए गौरव का क्षण बताया। हर घर में नितिन नवीन के नाम से घी का दीपक जलाए गए। नवादा के अमावां गांव के लोगों में खासा उत्साह, हाल ही में पूजा करने गए थे

