डिजिटल समाचार स्रोत

...

14 अगस्त को इस्तीफा देंगे कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी, कांग्रेस के फैसले पर जताई नाराजगी

14 अगस्त को इस्तीफा देंगे कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी, कांग्रेस के फैसले पर जताई नाराजगी

समाचार नामा 6 Aug 2026 8:23 pm

कॉकरोच जनता पार्टी ने 'क्या बोलती जनता?' राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की

कॉकरोच जनता पार्टी ने 'क्या बोलती जनता?' राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की

समाचार नामा 6 Aug 2026 8:10 pm

भारत-चीन सीमा की अपुष्ट तस्वीरें वायरल, आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील

भारत-चीन सीमा की अपुष्ट तस्वीरें वायरल, आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:59 pm

गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह की 'सत्यमेव जयते रैली', बोले- साजिश के तहत बदनाम किया गया

गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह की 'सत्यमेव जयते रैली', बोले- साजिश के तहत बदनाम किया गया

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:59 pm

विपक्ष की मकर द्वार राजनीति से संसद बाधित, चर्चा के बजाय बाहर प्रदर्शन कर रहे : आरएलडी सांसद चंदन चौहान

विपक्ष की मकर द्वार राजनीति से संसद बाधित, चर्चा के बजाय बाहर प्रदर्शन कर रहे : आरएलडी सांसद चंदन चौहान

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:54 pm

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई को आरजी कर केस में नई जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई को आरजी कर केस में नई जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:51 pm

नाराज कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष होरट्टी 14 अगस्त को पद से इस्तीफा देंगे

नाराज कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष होरट्टी 14 अगस्त को पद से इस्तीफा देंगे

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:40 pm

भाजपा ने संसद में व्यवधान उत्पन्न करने के लिए खड़गे और राहुल गांधी की आलोचना की

भाजपा ने संसद में व्यवधान उत्पन्न करने के लिए खड़गे और राहुल गांधी की आलोचना की

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:32 pm

मौलाना साजिद रशीदी का आदर्श ओसामा बिन लादेन रहा होगा: मिथिलेश तिवारी

मौलाना साजिद रशीदी का आदर्श ओसामा बिन लादेन रहा होगा: मिथिलेश तिवारी

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:30 pm

मजहब के नाम पर दरार डालने वाले मुसलमान नहीं, आत्मघाती आतंकवादी हैं : माधवी लता

मजहब के नाम पर दरार डालने वाले मुसलमान नहीं, आत्मघाती आतंकवादी हैं : माधवी लता

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:23 pm

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने 500 करोड़ रुपए के धान की हेराफेरी की जांच की मांग की

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने 500 करोड़ रुपए के धान की हेराफेरी की जांच की मांग की

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:19 pm

Cockroach Janata Party का बड़ा ऐलान! 11 सदस्यीय नेशनल वर्किंग कमिटी का गठन, जिम्मेदारियों का हुआ बंटवारा

Cockroach Janata Party का बड़ा ऐलान! 11 सदस्यीय नेशनल वर्किंग कमिटी का गठन, जिम्मेदारियों का हुआ बंटवारा

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:15 pm

'एनसीपीआई में सभी एकजुट, देशहित में करेंगे काम', एनडीए की बैठक पर बोले यूसुफ पठान

'एनसीपीआई में सभी एकजुट, देशहित में करेंगे काम', एनडीए की बैठक पर बोले यूसुफ पठान

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:12 pm

महाराष्ट्र: मनोज जरांगे ने कुनबी प्रमाणपत्र रद्द करने को लेकर राज्य सरकार पर साजिश का आरोप लगाया

महाराष्ट्र: मनोज जरांगे ने कुनबी प्रमाणपत्र रद्द करने को लेकर राज्य सरकार पर साजिश का आरोप लगाया

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:10 pm

जनसेना सांसद ने आंध्र प्रदेश के लिए दो नए एम्स की मांग उठाई, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा को लिखा पत्र

अमरावती, 6 अगस्त (आईएएनएस)। जनसेना के राज्यसभा सांसद लिंगमनेनी रमेश ने आंध्र प्रदेश में दो नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्तर के संस्थानों की स्थापना की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को मजबूत करने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

समाचार नामा 6 Aug 2026 7:02 pm

उज्ज्वल है भारत का खेल भविष्य

इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल में भारत का प्रदर्शन उम्मीद से कहीं बेहतर रहा। भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीते। वह पदक तालिका में चौथे नंबर पर रहा। पहली नजर में यह प्रदर्शन बर्मिंघम 2022 के 61 पदक से कमजोर दिख सकता है, लेकिन आंकड़े अलग कहानी बताते हैं। इस बार ग्लासगो में सिर्फ 10 खेल शामिल थे, जबकि बर्मिंघम में 19 खेल खेले गए थे। बैडमिंटन, कुश्ती, शूटिंग, हॉकी, टेबल टेनिस और क्रिकेट जैसे खेल ग्लासगो गेम्स का हिस्सा नहीं थे, जिनसे 2022 में भारत को 30 पदक मिले थे। इसके अलावा भारत ने 210 खिलाड़ियों की जगह सिर्फ 123 खिलाड़ियों का दल भेजा। इनमें से 38 खिलाड़ी पदक जीतकर लौटे, यानी सफलता की दर 31 प्रतिशत रही। बर्मिंघम में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत था। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने से पहले भारतीय ओलंपिक संघ और विभिन्न खेल महासंघों की आंतरिक रिपोर्ट में भारत को 6 स्वर्ण समेत 31 पदक मिलने का अनुमान लगाया गया था। भारतीय खिलाड़ियों ने अनुमान से दोगुना से भी ज्यादा स्वर्ण जीते। कुल पदक में भी आगे निकल गए। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल में भारत का सबसे सफल खेल बॉक्सिंग रहा। 14 मुक्केबाजों के दल में से 10 खिलाड़ी पदक जीतकर लौटे। इसमें 7 स्वर्ण और 3 रजत शामिल रहे। यानी 71 प्रतिशत मेडल कन्वर्जन रेट। बर्मिंघम 2022 में यह आंकड़ा 58 प्रतिशत था। पदक वितरण समारोह के दौरान सात बार भारत का राष्ट्रगान बजना न सिर्फ ग्लासगो में मौजूद भारतीय दर्शकों के लिए गर्व का पल था, बल्कि इस बात का सबूत भी था कि इस गैर-पारंपरिक खेल को गांवों और छोटे कस्बों तक ले जाने की पहल काफी हद तक सफल रही है। भारतीय बॉक्सरों के प्रदर्शन की जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है। इसे भी पढ़ें: राष्ट्रमंडल खेल 2026: चुनौतियों के बीच चमका भारत जूडो में भारत ने पहली बार राष्ट्रमंडल खेल इतिहास में स्वर्ण जीता। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने स्वर्ण जीता। यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य जीतकर कुल चार पदक भारत की झोली में डाले। हालांकि 14 सदस्यीय भारतीय टीम के दो खिलाड़ी अरुण कुमार और तुलिका मान डोपिंग के कारण बाहर हो गए। इसी तरह, एथलीटों और पैरा-एथलीटों ने 16 पदक जीते। इनमें से कुछ ने तो नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाए। वेटलिफ्टर्स ने आठ और पदक जीते। इन पदकों में ओलंपियन मीराबाई चानू का जीता हुआ एक स्वर्ण पदक भी शामिल था, जिससे उन्होंने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की; मणिपुर की इस एथलीट ने इससे पहले 2018 गोल्ड कोस्ट और 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल में भी स्वर्ण पदक जीता था। असल में, मीराबाई चानू की शानदार कामयाबी के बावजूद, भारतीय वेटलिफ्टरों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इस निराशा की एक वजह यह है कि डोपिंग के आरोपों के कारण कम से कम दो भारतीय वेटलिफ्टरों की एंट्री वापस लेनी पड़ी। छह अन्य खिलाड़ी—कड़ी टक्कर न होने के बावजूद—लड़ने के जज़्बे की कमी या तकनीकी गलतियों की वजह से स्वर्ण पदक जीतने का मौका चूक गए। एथलेटिक्स ने भारत को 10 पदक दिलाए, लेकिन एक भी स्वर्ण नहीं आया। नीरज चोपड़ा रजत जीत सके। उनके साथ डेब्यू कर रहे यशवीर सिंह ने कांस्य जीता। गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर में सिल्वर और 5 हजार मीटर रेस में कांस्य जीतकर इतिहास रचा। गुलवीर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स में दो पदक जीतने वाले वह भारत के पहले खिलाड़ी भी बनें। तेजस्विन शंकर ने डेकाथलन में भारत का पहला राष्ट्रमंडल पदक दिलाया। सरवेश कुशारे, श्रीशंकर, प्रवीण चित्रावेल और सीमा कालीरामना भी पदक जीतने में सफल रहे। हालांकि स्प्रिंट और रिले टीम से बड़ी उम्मीदें थीं, वह खाली हाथ रही। इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के शासन में देश में खेलों का संस्थागत विकास तेजी से हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार यह दोहराया है कि खेल देश में एकता बढ़ाने, युवाओं को प्रेरित करने और भारत को एक आत्मविश्वासी और उभरती हुई वैश्विक ताकत के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी यह सोच कार्यों में भी दिखाई देती है, जैसे कि ‘खेलो इंडिया’और ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी टॉप्स’ जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से। इन पहलों ने देश में खेलों की पूरी व्यवस्था को नया रूप दिया है और भारत को खेलकूद के प्रति समर्पित एक राष्ट्र बना दिया है। इन योजनाओं के कारण भारतीय खिलाड़ियों को बेहतर वित्तीय सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक्सपोजर मिला है, जिसके परिणामस्वरूप ओलंपिक, पैरालंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में भारत का प्रदर्शन लगातार सुधरा है। नई प्रतिभाओं को पदक जीतने वाले खिलाड़ी में बदलने में 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम की अहम भूमिका रही है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक 2781 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, चिकित्सा देखभाल और वित्तीय सहायता दी गई है। सरकार ने खेलो इंडिया योजना पर 36,441 करोड़ रुपये का भारी निवेश मंजूर किया है। वर्ष 2026-31 के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना को मंजूरी दी है। राष्ट्रीय खेल महासंघों को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता दी जा रही है। देश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से भी उभरती प्रतिभाओं को खोजा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की सुविधाएं देने के लिए देशभर में 1041 खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, 32 खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 301 खेल अकादमियों को मान्यता दी गई है, जिससे खेलों का पूरा इकोसिस्टम और मजबूत हुआ है। खेलो इंडिया सीओई में खिलाड़ियों को विशेषज्ञ कोचिंग, पोषण और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण की सुविधा दी जा रही है। मोदी सरकार की इन पहलों का जमीन पर जबरदस्त असर भी दिख रहा है। 2022 एशियाई खेलों में भारत के 42 पदकों में से 124 पदक विजेता 'खेलो इंडिया' से प्रशिक्षित खिलाड़ी थे। वहीं पेरिस 2024 ओलंपिक में खेलो इंडिया के 28 खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया था। 'खेलो इंडिया' के खिलाड़ियों ने अब तक करीब 6000 राष्ट्रीय रिकॉर्ड और 1400 अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं, जो भारत के जमीनी स्तर के खेलकूद के कार्यक्रमों की प्रगति को दर्शाता है। कोच और खेल विशेषज्ञ मानते हैं कि कॉन्टिनेंटल या ग्लोबल इवेंट्स में प्रतियोगिता का स्तर कहीं ज्यादा होता है। ऐसे में किसी एथलीट या खिलाड़ी की काबिलियत और कड़ी मेहनत की असली परीक्षा एशियन गेम्स या ओलंपिक्स में होती है। हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते गए मेडल का महत्व कम नहीं आंका जाना चाहिए। इस बार युवा खिलाड़ियों ने दिखाया है कि भारत का खेल भविष्य पहले से कहीं ज्यादा उज्ज्वल दिख रहा है, कई खेलों में नई पीढ़ी के टैलेंटेड एथलीट सुर्खियां बटोर रहे हैं। राष्ट्रमंडल खेल जैसी प्रतियोगिता में किए गए प्रदर्शन को आम तौर पर भविष्य में सुधार के पैमाने और अपनी खूबियों व कमियों के आकलन के तौर पर देखा जाता है। राष्ट्रमंडल खेल के बाद अब भारतीय खिलाड़ियों की नजर एशियन गेम्स में दमदार प्रदर्शन करने पर है। 20 वें एशियाई खेल का आगाज 19 सितंबर से जापान के नागोया में होग। भारत इस बार हांग्जो 2022 के अपने ऐतिहासिक 107 पदकों के रिकॉर्ड को तोड़ने के इरादे से मैदान में उतरेगा। इसीलिए भारतीय खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेल में अपने प्रदर्शन पर गर्व करते हुए एशियन गेम्स में पेश आने वाली चुनौतियों के हिसाब से बिना एक भी पल गवाएं तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए। क्योंकि जब विदेशी धरती पर तिरंगा लहराता है और जन-गण-मन गूंजता है, तो वह पल केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव बन जाता है। - डॉ. आशीष वशिष्ठ (स्वतंत्र पत्रकार) लखनऊ, उत्तर प्रदेश (भारत)

प्रभासाक्षी 6 Aug 2026 6:50 pm

अमित शाह से मिले TMC के बागी मुस्लिम सांसद, मस्जिद में अजान को लेकर उठाया बड़ा मुद्दा, जाने क्या है पूरा मामला

अमित शाह से मिले TMC के बागी मुस्लिम सांसद, मस्जिद में अजान को लेकर उठाया बड़ा मुद्दा, जाने क्या है पूरा मामला

समाचार नामा 6 Aug 2026 6:40 pm

भारत को क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का ग्लोबल प्रोड्यूसर बनना चाहिए: एचडी कुमारस्वामी

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार को कहा कि भारत को क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का ग्लोबल प्रोड्यूसर बनना चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि तेजी से बदलती दुनिया में किसी देश की ताकत सिर्फ एनर्जी रिसोर्स तक पहुंच से तय नहीं होती, बल्कि भविष्य को चलाने वाली टेक्नोलॉजी के लिए मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और मजबूत सप्लाई चेन बनाने की उसकी क्षमता से तय होती है।

समाचार नामा 6 Aug 2026 6:39 pm

संसद में जारी गतिरोध के लिए सरकार जिम्मेदार, भाजपा घबराई हुई है: रमाशंकर राजभर

संसद में जारी गतिरोध के लिए सरकार जिम्मेदार, भाजपा घबराई हुई है: रमाशंकर राजभर

समाचार नामा 6 Aug 2026 6:37 pm

कैबिनेट ने एनएच-15 के गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को मंजूरी दी: प्रधानमंत्री मोदी

कैबिनेट ने एनएच-15 के गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को मंजूरी दी: प्रधानमंत्री मोदी

समाचार नामा 6 Aug 2026 6:34 pm

'चुनाव आयोग ने शक्तियों का उल्लंघन कर फैसला दिया', सुप्रीम कोर्ट में 'शिवसेना विवाद' पर सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दलील

'चुनाव आयोग ने शक्तियों का उल्लंघन कर फैसला दिया', सुप्रीम कोर्ट में 'शिवसेना विवाद' पर सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दलील

समाचार नामा 6 Aug 2026 6:17 pm

जेनजी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का संवाद स्वागतयोग्य: संजय निरुपम

जेनजी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का संवाद स्वागतयोग्य: संजय निरुपम

समाचार नामा 6 Aug 2026 6:00 pm

सीबीआई ने गुवाहाटी से आरोपी अरूप दास को किया गिरफ्तार, अभिजीत सरकार हत्याकांड में था फरार

सीबीआई ने गुवाहाटी से आरोपी अरूप दास को किया गिरफ्तार, अभिजीत सरकार हत्याकांड में था फरार

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:46 pm

एआईएसए प्रमुख नेहा 7 अगस्त से शुरू होने वाले 'जेनजी राइजिंग' अभियान का नेतृत्व करेंगी

एआईएसए प्रमुख नेहा 7 अगस्त से शुरू होने वाले 'जेनजी राइजिंग' अभियान का नेतृत्व करेंगी

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:46 pm

पंजाब: विधानसभा में अवैध खनन के मुद्दे पर हंगामा, हाउस कमेटी बनाने की मांग

पंजाब: विधानसभा में अवैध खनन के मुद्दे पर हंगामा, हाउस कमेटी बनाने की मांग

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:37 pm

बीटीसी प्रमुख मोहिलारी ने बाढ़ प्रभावित शिवसागर में राहत अभियान का नेतृत्व किया, सहायता सामग्री भी बांटी

बीटीसी प्रमुख मोहिलारी ने बाढ़ प्रभावित शिवसागर में राहत अभियान का नेतृत्व किया, सहायता सामग्री भी बांटी

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:35 pm

दतिया में जीत का पुरस्कार नायक को, देर से जारी हुआ नियुक्ति पत्र

दतिया में जीत का पुरस्कार नायक को, देर से जारी हुआ नियुक्ति पत्र

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:27 pm

कैबिनेट ने असम में 8,970 करोड़ रुपए की गुवाहाटी-तेजपुर 4-लेन हाईवे परियोजना को दी मंजूरी

कैबिनेट ने असम में 8,970 करोड़ रुपए की गुवाहाटी-तेजपुर 4-लेन हाईवे परियोजना को दी मंजूरी

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:22 pm

राज्यसभा में राघव चड्ढा ने उठाया डॉक्टरों-डायग्नोस्टिक सेंटरों के 'कट मनी' का मुद्दा, कहा- मरीजों पर पड़ता है बोझ

राज्यसभा में राघव चड्ढा ने उठाया डॉक्टरों-डायग्नोस्टिक सेंटरों के 'कट मनी' का मुद्दा, कहा- मरीजों पर पड़ता है बोझ

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:11 pm

महिलाओं का सम्मान हमारे संस्कार, शब्द से ठेस पहुंची तो खेद है: अश्वनी शर्मा

महिलाओं का सम्मान हमारे संस्कार, शब्द से ठेस पहुंची तो खेद है: अश्वनी शर्मा

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:11 pm

अरुणाचल प्रदेश: जेपी नड्डा ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया दौरा, समीक्षा बैठक की

अरुणाचल प्रदेश: जेपी नड्डा ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया दौरा, समीक्षा बैठक की

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:02 pm

अपहरण मामले में आंध्र प्रदेश की अदालत ने वाईएसआरसीपी नेता मुस्तफा को न्यायिक हिरासत में भेजा

अपहरण मामले में आंध्र प्रदेश की अदालत ने वाईएसआरसीपी नेता मुस्तफा को न्यायिक हिरासत में भेजा

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:54 pm

पंजाब सरकार की खुली पोल, किचलू नगर में पांच दिन में दो बार धंसी सड़कः रवनीत सिंह

पंजाब सरकार की खुली पोल, किचलू नगर में पांच दिन में दो बार धंसी सड़कः रवनीत सिंह

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:53 pm

'वेट्री वानमगल' योजना: तमिलनाडु सरकार महिला किसानों को देगी ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण

'वेट्री वानमगल' योजना: तमिलनाडु सरकार महिला किसानों को देगी ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:52 pm

कर्नाटक : कैबिनेट विस्तार को लेकर मंत्री यतींद्र ने अपने पिता सिद्धारमैया का किया बचाव

कर्नाटक : कैबिनेट विस्तार को लेकर मंत्री यतींद्र ने अपने पिता सिद्धारमैया का किया बचाव

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:40 pm

कोलकाता : इलियट पार्क से हटाए गए 'व्यू-ब्लॉकर', सीएम अधिकारी ने पूर्व सरकार पर कसा तंज

कोलकाता : इलियट पार्क से हटाए गए 'व्यू-ब्लॉकर', सीएम अधिकारी ने पूर्व सरकार पर कसा तंज

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:38 pm

कोर कमेटी को लेकर सीजेपी में बवाल, अभिजीत दिपके के घर के बाहर दो युवाओं ने दिया धरना

कोर कमेटी को लेकर सीजेपी में बवाल, अभिजीत दिपके के घर के बाहर दो युवाओं ने दिया धरना

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:25 pm

सीएम विजय ने टीवीके सरकार के पहले बजटों को बताया समावेशी विकास का रोडमैप

सीएम विजय ने टीवीके सरकार के पहले बजटों को बताया समावेशी विकास का रोडमैप

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:22 pm

राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने पर विपक्षी सांसदों ने सरकार पर लगाया आरोप

राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने पर विपक्षी सांसदों ने सरकार पर लगाया आरोप

समाचार नामा 6 Aug 2026 4:00 pm

'ये मेरा अधिकार है....' संसद में फिर बढ़ा सियासी पारा, जानिए किस बात पर भिड़े रिजिजू और मल्लिकार्जुन खरगे

'ये मेरा अधिकार है....'संसद में फिर बढ़ा सियासी पारा, जानिए किस बात पर भिड़ेरिजिजू और मल्लिकार्जुन खरगे

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:50 pm

संसद में सरकारी कंपनियों की परफॉर्मेंस पर संसदीय समिति की छह रिपोर्टें पेश

संसद में सरकारी कंपनियों की परफॉर्मेंस पर संसदीय समिति की छह रिपोर्टें पेश

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:47 pm

जनप्रतिनिधि एआई का अधिक उपयोग करें, योजनाओं की निगरानी होगी बेहतर: सम्राट चौधरी

जनप्रतिनिधि एआई का अधिक उपयोग करें, योजनाओं की निगरानी होगी बेहतर: सम्राट चौधरी

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:31 pm

गृह मंत्री सदन में आएं, छात्रों पर कार्रवाई का दें जवाब, प्रधानमंत्री मांगें माफी : मल्लिकार्जुन खड़गे

गृह मंत्री सदन में आएं, छात्रों पर कार्रवाई का दें जवाब, प्रधानमंत्री मांगें माफी : मल्लिकार्जुन खड़गे

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:23 pm

MP में कुशवाहा वोट बैंक की ताकत के आगे झुकी BJP, 'गुलाटी' बयान के लिए तोमर को मांगनी पड़ी माफी

मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे ने भारतीय जनता पार्टी को ऐसा राजनीतिक संदेश दिया है, जिसकी गूंज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर के एक विवादित बयान से शुरू हुआ विवाद आखिरकार सार्वजनिक माफी तक पहुंच गया। भाजपा की आंतरिक समीक्षा में यह संकेत मिलने के बाद कि कुशवाहा समाज की नाराजगी पार्टी की हार का बड़ा कारण बनी, तोमर ने स्वयं आगे आकर अपने शब्द वापस लिए और कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी इस समाज का अपमान करने की नहीं सोचा। पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब 31 जुलाई को मुरैना में भाजपा के जिला अध्यक्ष कमलेश कुशवाहा के निवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह तोमर ने कुशवाहा समाज को संबोधित करते हुए कहा कि यह समाज बीच-बीच में गुलाटी खाता रहा और इसी कारण उसने अपनी विश्वसनीयता को खंडित किया। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय ऐसा था जब कुशवाहा समाज भाजपा का मजबूत समर्थक माना जाता था और भाजपा ने उस दौर में भी समाज को सम्मान दिया, जब अन्य राजनीतिक दल उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की स्थिति में नहीं थे। उन्होंने पूर्व नेता कालीचरण कुशवाहा को टिकट दिए जाने का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। इसे भी पढ़ें: Article 370 पर बदजुबानी कर रहे थे जरदारी और शहबाज शरीफ, मोदी ने खुद आगे आकर दिया करारा जवाब हालांकि, कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक भूचाल आ गया। कुशवाहा समाज के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों ने इस टिप्पणी को पूरे समाज की राजनीतिक निष्ठा पर सवाल बताकर तीखी आपत्ति जताई। कांग्रेस ने भी इसे तुरंत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अपमान बताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती और उन्होंने नरेंद्र सिंह तोमर से सार्वजनिक माफी की मांग की। इस बीच, दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने भाजपा की मुश्किलें और बढ़ा दीं। कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशीष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से पराजित कर दिया। भाजपा की आंतरिक समीक्षा में यह बात सामने आई कि दतिया के लगभग 12 प्रतिशत मतदाता रहे कुशवाहा समाज का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस की ओर खिसक गया, जिसने चुनावी परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इसके बाद भाजपा संगठन ने हार की व्यापक समीक्षा शुरू की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेताओं और चुनाव प्रभारियों के साथ बैठक की, दतिया जिला इकाई को भंग किया गया, समीक्षा समितियां गठित की गईं और संगठनात्मक कमजोरियों के साथ-साथ संभावित अंदरूनी असंतोष की भी जांच शुरू हुई। इसी राजनीतिक आत्ममंथन के बीच नरेंद्र सिंह तोमर ने कुशवाहा समाज के नाम हस्ताक्षरित पत्र जारी कर अपने बयान पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि कमलेश कुशवाहा के घर आयोजित कार्यक्रम पारिवारिक वातावरण में था और उसी संदर्भ में बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा कि उनका और कुशवाहा समाज का रिश्ता परस्पर पूरक है तथा उन्होंने जीवनभर इस समाज का सम्मान किया है और आगे भी करते रहेंगे। यदि उनके शब्दों से किसी की भावना आहत हुई है तो वह अपने शब्द वापस लेते हैं और इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। उनका यह बयान भाजपा के भीतर बढ़ी राजनीतिक बेचैनी और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम केवल एक बयान और माफी तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश की बदलती सामाजिक-राजनीतिक राजनीति का संकेत भी देता है। राज्य की कुल आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग लगभग आधी हिस्सेदारी रखता है और कुशवाहा समाज इस वर्ग का एक प्रभावशाली हिस्सा माना जाता है। ग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना, दतिया, भिंड और ग्वालियर जैसे जिलों से लेकर बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र तक इस समाज की उल्लेखनीय उपस्थिति है। कई विधानसभा सीटों पर यह समाज जीत-हार तय करने की क्षमता रखता है। विशेष रूप से दतिया जैसी सीट पर, जहां कुशवाहा मतदाता लगभग 12 प्रतिशत हैं, किसी भी दल के लिए इस समाज की अनदेखी राजनीतिक जोखिम बन सकती है। यही कारण है कि भाजपा ने पिछले दो दशकों में ओबीसी सामाजिक समीकरणों के केंद्र में कुशवाहा समाज को महत्वपूर्ण स्थान दिया। दूसरी ओर कांग्रेस भी अब इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। पार्टी ने सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा के नेतृत्व में बूथ स्तर तक व्यापक अभियान चलाया, जिसका असर दतिया उपचुनाव में दिखाई दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुशवाहा समाज मध्य प्रदेश में केवल एक बड़ा वोट बैंक नहीं, बल्कि एक प्रभावी स्विंग फैक्टर भी है। यदि समाज को सम्मान, पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी का संदेश मिलता है तो वह किसी भी दल के साथ मजबूती से खड़ा हो सकता है। लेकिन उपेक्षा या अपमान की भावना पैदा होने पर उसका रुख तेजी से बदलने की क्षमता भी रखता है। यही वजह है कि नरेंद्र सिंह तोमर के गुलाटी वाले बयान के बाद भाजपा को सार्वजनिक रूप से डैमेज कंट्रोल करना पड़ा। बहरहाल, दतिया उपचुनाव ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि मध्य प्रदेश की आगामी राजनीतिक लड़ाई केवल नेताओं के भाषणों या चुनावी नारों से नहीं जीती जाएगी। सामाजिक सम्मान, प्रतिनिधित्व और ओबीसी वर्गों के साथ मजबूत संवाद आने वाले चुनावों की दिशा तय करेगा। नरेंद्र सिंह तोमर की सार्वजनिक माफी इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में कुशवाहा समाज अब केवल एक वोट बैंक नहीं, बल्कि सत्ता का समीकरण बदलने वाली निर्णायक राजनीतिक ताकत बन चुका है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 6 Aug 2026 3:21 pm

राहुल गांधी के द्वारा छात्रों की आवाज के नाम पर छात्र-प्रपंच का खेल खेला जा रहा है: मुख्तार अब्बास नकवी

राहुल गांधी के द्वारा छात्रों की आवाज के नाम पर छात्र-प्रपंच का खेल खेला जा रहा है: मुख्तार अब्बास नकवी

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:21 pm

अब शिवाजी, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह जैसे लोग क्यों नहीं मिलते?

आज के एक-दूसरे पर निर्भर समाज में युवाओं, खासकर जेनरेशन जेड (जेन ज़ी) का व्यवहार समाज के लिए बहुत चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्हें अक्सर बेसब्री, बिना सोचे-समझे सोचने की आदत और कुछ मामलों में, बुरे बर्ताव वाला माना जाता है। यह सोच, हालांकि आम हो सकती है, और हर व्यक्ति में अलग-अलग भी हो सकती है। लेकिन यह इसके अंदरूनी कारणों और समाज की संभावित प्रतिक्रियाओं की एक ज़रूरी जांच को बढ़ावा देती है। इन उभरते हुए पैटर्न को समझने के लिए एक बहुआयामी नज़रिए की ज़रूरत है, जिसमें टेक्नोलॉजी में तरक्की, पढ़ाई के बदलते तरीकों, पेरेंटिंग स्टाइल में बदलाव और बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल के गहरे असर को माना जाए। यह आवश्यक है कि जेन ज़ी में इन आदतों के पीछे के संभावित कारणों पर गहराई से चर्चा हो, जिसमें डिजिटल इमर्शन, तुरंत मिलने वाले फ़ायदे का असर, जानकारी लेने का बदलता तरीका और उनके विकास को आकार देने वाले बदलते सामाजिक ढाँचों पर विचार किया जाए। तदनुसार, समाज ऐसे सुधार करें जिनसे इस पीढ़ी में ज़्यादा सब्र रखने, ज़्यादा तार्किक सोच विकसित करने और सम्मानजनक बातचीत को बढ़ावा मिलें। डिजिटल बाढ़ और बेसब्री की खेती जेन ज़ी को बनाने वाले सबसे बड़े और असरदार कारणों में से एक है, हाइपर-कनेक्टेड डिजिटल दुनिया में उनकी परवरिश। कम उम्र से ही, यह पीढ़ी ऐसे माहौल में रही है जहाँ जानकारी, मनोरंजन और बातचीत उनकी उंगलियों पर आसानी से मिल जाती है। स्मार्टफ़ोन, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और हाई-स्पीड इंटरनेट ने तुरंत मिलने वाले फ़ायदे का एक इकोसिस्टम बनाया है। अपडेट के साथ नोटिफ़िकेशन आते हैं, न्यूज़ साइकिल मिनटों में रिफ़्रेश हो जाती हैं, और मनोरंजन ऑन डिमांड उपलब्ध होता है। तुरंत फ़ीडबैक और आसानी से मिलने वाले कंटेंट की यह लगातार स्ट्रीम अनजाने में ही डेवलप हो रहे दिमाग को जल्दी नतीजे और तुरंत इनाम की उम्मीद करने के लिए ट्रेन कर सकती है। इसलिए, जिन हालात में सब्र की ज़रूरत होती है, जैसे जवाब का इंतज़ार करना, कोई लंबा काम पूरा करना, या धीरे-धीरे, सोच-समझकर सीखना, वे फ्रस्ट्रेटिंग और अनचाही लग सकती हैं। ऑनलाइन बातचीत का तेज़ नेचर, जहाँ छोटे मैसेज और थोड़ी देर का कंटेंट ज़्यादा होता है, लगातार ध्यान और गहरी बातचीत के लिए कम टॉलरेंस में भी योगदान दे सकता है, जिससे बेसब्री का कल्चर बढ़ता है। उदाहरण के लिए, मैसेजिंग ऐप पर तुरंत जवाब की उम्मीद या सोशल मीडिया फ़ीड पर तेज़ी से स्क्रॉल करने से लोग तुरंत संतुष्टि की उम्मीद करने लगते हैं, जिससे असल दुनिया की बातचीत की धीमी रफ़्तार मुश्किल लगने लगती है। नई चीज़ों और तेज़ी से जानकारी के इस लगातार संपर्क से बोरियत की क्षमता भी कम हो सकती है, एक ऐसी स्थिति जो अक्सर सोचने और क्रिएटिव प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स के विकास को बढ़ावा देती है। जब डिजिटल ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से बोरियत तुरंत दूर हो जाती है, तो सब्र और सेल्फ-रेगुलेशन विकसित करने के मौके कम हो जाते हैं। इसे भी पढ़ें: Jharkhand JPSC Protest: सरकार से बातचीत को तैयार छात्र, Video Recording की रखी शर्त इन्फॉर्मेशन ओवरलोड और लॉजिकल रीजनिंग का खत्म होना डिजिटल युग ने जानकारी को डेमोक्रेटाइज़ कर दिया है, जिससे यह पहले से कहीं ज़्यादा आसानी से मिलने वाली हो गई है। लेकिन, इस एक्सेसिबिलिटी के साथ एक बड़ी चुनौती आती है: उपलब्ध जानकारी की बहुत ज़्यादा मात्रा और अक्सर अनवेरिफाइड नेचर। जेन ज़ी, जो इस बहुतायत के साथ बड़ा हुआ है, अक्सर शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट, सोशल मीडिया फीड्स और वायरल ट्रेंड्स के ज़रिए जानकारी लेता है। इस्तेमाल का यह तरीका क्रिटिकल इवैल्यूएशन और लॉजिकल एनालिसिस के बजाय इमोशनल रेजोनेंस और तुरंत एंगेजमेंट को प्रायोरिटी दे सकता है। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म को कंट्रोल करने वाले एल्गोरिदम यूज़र्स को एंगेज रखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, अक्सर ऐसा कंटेंट दिखाकर जो उनके मौजूदा बायस से मेल खाता है या मज़बूत इमोशनल रिस्पॉन्स को उकसाता है। इससे इको चैंबर बन सकते हैं, जहाँ लोग मुख्य रूप से उन नज़रियों के संपर्क में आते हैं जो उनके अपने नज़रियों को कन्फर्म करती हैं, जिससे अलग-अलग नज़रियों से जुड़ने और बारीक समझ डेवलप करने की उनकी क्षमता में रुकावट आती है। नतीजतन, भरोसेमंद सोर्स और गलत जानकारी के बीच अंतर करना एक मुश्किल काम बन जाता है। फेक न्यूज़ और सेंसेशनलाइज़्ड कंटेंट के फैलने से युवाओं के लिए मज़बूत क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स डेवलप करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, कम जानकारी के आधार पर जल्दी से राय बनाने का दबाव, जो अक्सर ऑनलाइन बहस और तेज़ी से की जाने वाली कमेंट्री से और बढ़ जाता है, बेतुके तर्कों को अपनाने या बिना सबूत वाले दावों को मानने की ओर ले जा सकता है। उदाहरण के लिए, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉन्सपिरेसी थ्योरी की लोकप्रियता, जिनमें अक्सर अनुभव के सबूत नहीं होते लेकिन वे भावनात्मक रूप से मज़बूत होती हैं, यह दिखाती है कि बिना वेरिफ़ाई की गई जानकारी कैसे लोगों का ध्यान खींच सकती है और तर्क पर असर डाल सकती है। उन्हें कैसे जांचा जाए, इस बारे में पूरी गाइडेंस के बिना विभिन्न नज़रिया के लगातार संपर्क में रहने से कन्फ्यूजन हो सकता है और सिस्टमैटिक, लॉजिकल तरीकों के बजाय ह्यूरिस्टिक्स या भावनात्मक अपील पर भरोसा हो सकता है। बदलते सोशल नॉर्म्स और बुरे मैनर्स की सोच मैनर्स की परिभाषा खुद एक जैसी नहीं है; यह सोशल नॉर्म्स और टेक्नोलॉजी में बदलाव के साथ बदलती रहती है। जेन ज़ी की बातचीत काफी हद तक डिजिटल कम्युनिकेशन पर निर्भर करती है। टेक्स्टिंग, डायरेक्ट मैसेजिंग और ऑनलाइन कमेंट्स में अक्सर बिना बोले इशारे, आवाज़ का टोन और सोशल कॉन्टेक्स्ट की कमी होती है जो आमने-सामने की बातचीत के लिए ज़रूरी हैं। उदाहरण के लिए, एक साफ-साफ टेक्स्ट मैसेज भेजने वाले के लिए एक अच्छी बातचीत हो सकती है, लेकिन पाने वाला इसे खारिज करने वाला या बदतमीज़ी समझ सकता है, खासकर अगर उसमें ग्रीटिंग या आखिर में बात करने जैसी आम तमीज़ न हो। इसके अलावा, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिलने वाली गुमनामी या दूरी से हिचकिचाहट कम हो सकती है, जिससे ज़्यादा गुस्सैल या बेपरवाह व्यवहार हो सकता है जो शायद सीधे, आमने-सामने की मुलाकातों में न हो। इसके अलावा, पेरेंटिंग स्टाइल में बदलाव, कुछ स्टडीज़ में ज़्यादा छूट देने वाली पेरेंटिंग का ट्रेंड बताया गया है, अनजाने में बच्चों के लिए ज़रूरी सोशल दक्षता, जैसे हमदर्दी, झगड़े सुलझाना, और अथॉरिटी वाले लोगों या अलग राय का सम्मान करने के मौके कम कर सकता है। जब बच्चों को नतीजों से बचाया जाता है या सही सोशल बिहेवियर के लिए लगातार गाइड नहीं किया जाता है, तो उन्हें तमीज़ से बातचीत के लिए ज़रूरी सेल्फ-डिसिप्लिन और दूसरों के लिए सोच-विचार डेवलप करने में मुश्किल हो सकती है। समाज के लिए सुधार के कदम आज शिवाजी, चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह जैसे लोग क्यों नहीं मिलते? क्योंकि जीजाबाई (शिवाजी की माँ) जैसी माँ नहीं हैं। एक बच्चे की अच्छी परवरिश उसे देशभक्त और भविष्य का नागरिक बनाने के लिए बहुत ज़रूरी है। जेन ज़ी में कही जा रही अनुशासनहीनता को ठीक करने के लिए पूरे समाज को एक साथ और कई तरह के तरीके अपनाने की ज़रूरत है। सिर्फ़ बुराई करने से आगे बढ़कर ऐसे रचनात्मक दखल पर ध्यान देना ज़रूरी है जो सकारात्मक विकास को बढ़ावा दें। डिजिटल लिटरेसी और क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा देना इन चुनौतियों से निपटने का एक तरीका डिजिटल साक्षरता और क्रिटिकल सोचने-समझने के कौशल को बढ़ाना है। एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स को स्टूडेंट्स को डिजिटल दुनिया में ज़िम्मेदारी से संचालन करना सिखाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसमें गलत जानकारी की पहचान करने, एल्गोरिदमिक बायस को समझने और ऑनलाइन सोर्स की क्रेडिबिलिटी को एवैल्यूएट करने के बारे में साफ इंस्ट्रक्शन शामिल हैं। क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स को डेवलप करना सिर्फ़ एक एकेडमिक कोशिश नहीं है; इसके लिए अलग-अलग कॉन्टेक्स्ट में लगातार प्रैक्टिस की ज़रूरत होती है। डिबेट्स, रिसर्च प्रोजेक्ट्स जिनमें कई सोर्स से जानकारी को सिंथेसाइज़ करने की ज़रूरत होती है, और ऐसी डिस्कशन्स जिनमें कॉम्प्लेक्स एथिकल डिलेमाज़ को एक्सप्लोर किया जाता है, ये सभी ज़्यादा लॉजिकल रीज़निंग डेवलप करने में मदद कर सकते हैं। माता-पिता और शिक्षक खुलकर इस पर चर्चा करके क्रिटिकल थिंकिंग का मॉडल बना सकते हैं कि वे जानकारी को कैसे एवैल्यूएट करते हैं और राय कैसे बनाते हैं। पेशेंस और डिलेड ग्रैटिफिकेशन को कल्टिवेट करना पेशेंस को बढ़ावा देने के लिए ऐसा एनवायरनमेंट बनाने के लिए सोच-समझकर कोशिश करने की ज़रूरत होती है जो इसे बढ़ावा दे। यह घर और स्कूल दोनों जगह से शुरू हो सकता है। स्क्रीन टाइम कम करना और ऐसी एक्टिविटीज़ को बढ़ावा देना जिनमें लगातार फोकस की ज़रूरत होती है, जैसे किताबें पढ़ना, हॉबीज़ में शामिल होना, बोर्ड गेम खेलना, या स्ट्रक्चर्ड स्पोर्ट्स में हिस्सा लेना, देर से मिलने वाली खुशी को सहने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। स्कूल ऐसे असाइनमेंट डिज़ाइन कर सकते हैं जिनमें लंबे समय तक कमिटमेंट और लगन की ज़रूरत हो, जिससे स्टूडेंट्स को मेहनत की कीमत और लगातार काम करके लक्ष्य हासिल करने की संतुष्टि सिखाई जा सके। सिर्फ़ नतीजों को ही नहीं, बल्कि कोशिश और प्रोसेस को भी सेलिब्रेट करने से फोकस तुरंत नतीजों से हटकर सीखने और डेवलपमेंट की यात्रा पर जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी मुश्किल काम के लिए स्टूडेंट्स के डेडिकेशन को पहचानना और इनाम देना, चाहे तुरंत सफलता मिले या न मिले, लगन की अहमियत को और मज़बूत कर सकता है। एम्पैथी और सोशल-इमोशनल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना मैनर्स और आपसी व्यवहार को बेहतर बनाने के लिए सोशल-इमोशनल लर्निंग पर फोकस करना ज़रूरी है। स्कूलों और परिवारों को एक्टिवली एम्पैथी, सम्मान और असरदार कम्युनिकेशन सिखाना और उसका उदाहरण देना चाहिए। सोशल-इमोशनल लर्निंग प्रोग्राम को एजुकेशनल फ्रेमवर्क में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे स्टूडेंट्स को अपनी भावनाओं को समझने और मैनेज करने, अच्छे रिश्ते बनाने और ज़िम्मेदार फ़ैसले लेने के लिए टूल्स मिलें। कम्युनिटी सर्विस या वॉलंटियर एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने के लिए बढ़ावा देने से युवाओं को अलग-अलग तरह के अनुभव मिल सकते हैं और उनमें ज़्यादा समझदारी बढ़ सकती है। सहानुभूति और सामाजिक ज़िम्मेदारी की भावना रोल-प्लेइंग (भूमिका निभाने वाले) सीन और ग्रुप डिस्कशन, जो सामाजिक स्थितियों और उनके नतीजों को समझते हैं, सही व्यवहार सिखाने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में बहुत असरदार हो सकते हैं। माता-पिता अपने बच्चों और दूसरों के साथ बातचीत में सम्मानजनक व्यवहार का उदाहरण पेश करके अहम भूमिका निभा सकते हैं। अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सिर्फ़ सज़ा देने के बजाय, यह समझाना कि वह व्यवहार क्यों गलत है और उसे सुधारना, लंबे समय में व्यवहार बदलने में ज़्यादा असरदार हो सकता है। संतुलित डिजिटल जुड़ाव को बढ़ावा देना इसका मकसद टेक्नोलॉजी को बुरा बताना नहीं है, बल्कि इसके इस्तेमाल के लिए एक संतुलित और सोच-समझकर अपनाया जाने वाला नज़रिया विकसित करना है। इसमें स्क्रीन टाइम के लिए सही सीमाएँ तय करना, डिजिटल डिटॉक्स (कुछ समय के लिए डिजिटल डिवाइस से दूर रहना) को बढ़ावा देना और इस बात के प्रति जागरूकता पैदा करना शामिल है कि टेक्नोलॉजी किसी व्यक्ति की सोच और भावनाओं पर कैसे असर डालती है। माता-पिता अपने बच्चों के साथ मिलकर स्क्रीन टाइम की उचित सीमाएँ तय कर सकते हैं और घर में टेक्नोलॉजी-फ़्री ज़ोन या समय बना सकते हैं। ऑनलाइन अनुभवों के बारे में खुलकर बातचीत को बढ़ावा देना - जिसमें सोशल मीडिया से जुड़े दबाव और चुनौतियाँ भी शामिल हैं - युवाओं को अपनी डिजिटल ज़िंदगी के साथ ज़्यादा समझदारी भरा और जागरूक रिश्ता बनाने में मदद कर सकता है। निष्कर्ष जेन जी में देखी जाने वाली बेसब्री, तर्कहीन सोच और कभी-कभी अनुशासनहीनता भरा व्यवहार जटिल घटनाएँ हैं, जिनकी जड़ें डिजिटल युग के गहरे सामाजिक और तकनीकी बदलावों में हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यकता है -सही और लक्षित उपाय करके, समाज जेन जी को धैर्य रखने, तार्किक सोच को बेहतर बनाने और सम्मानजनक व सहानुभूति पूर्ण बातचीत को बढ़ावा देने में असरदार ढंग से मदद कर सकता है। शिक्षकों, माता-पिता, समुदायों और खुद युवाओं के सामूहिक प्रयासों से इन चुनौतियों का सामना करना और एक ऐसी पीढ़ी को तैयार करना संभव है जो न केवल टेक्नोलॉजी में माहिर हो, बल्कि उसमें सोच-समझकर काम करने, धैर्य रखने और दूसरों का ख्याल रखने जैसे ज़रूरी गुण भी हों, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें। - प्रोफ़ेसर (डॉ.) डी.के. पांडे विज़िटिंग सीनियर फ़ेलो, सेंटर फ़ॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़, एडजंक्ट प्रोफ़ेसर, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, सलाहकार, एकेडमिक काउंसिल, फ़ॉरेन पॉलिसी स्कूल और GNOIT, पूर्व एसोसिएट डीन, SoB, गलगोटिया विश्वविद्यालय।

प्रभासाक्षी 6 Aug 2026 3:15 pm

हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने राज्य के इतिहास में सबसे ज्यादा कर्ज लिया: भाजपा

हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने राज्य के इतिहास में सबसे ज्यादा कर्ज लिया: भाजपा

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:04 pm

'2029 में जनता सिखाएगी सबक', एनसीपीआई के अल्पसंख्यक सांसदों पर भड़के हुमायूं कबीर

'2029 में जनता सिखाएगी सबक', एनसीपीआई के अल्पसंख्यक सांसदों पर भड़के हुमायूं कबीर

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:02 pm

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद के बीच दो पूर्व मंत्रियों का असहमति वाला वीडियो आया सामने

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद के बीच दो पूर्व मंत्रियों का असहमति वाला वीडियो आया सामने

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:02 pm

झारखंड : भर्ती परीक्षा विवाद पर विधानसभा में भाजपा का प्रदर्शन, मरांडी ने दोहराई सीबीआई जांच की मांग

झारखंड : भर्ती परीक्षा विवाद पर विधानसभा में भाजपा का प्रदर्शन, मरांडी ने दोहराई सीबीआई जांच की मांग

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:00 pm

विभिन्न दलों के नेताओं ने तेलंगाना के विचारक जयशंकर को दी श्रद्धांजलि

विभिन्न दलों के नेताओं ने तेलंगाना के विचारक जयशंकर को दी श्रद्धांजलि

समाचार नामा 6 Aug 2026 3:00 pm

केरल ने 'माई पुलिस स्टेशन' पुलिसिंग सुधार की घोषणा की, एसएचओ की तैनाती होगी

केरल ने 'माई पुलिस स्टेशन' पुलिसिंग सुधार की घोषणा की, एसएचओ की तैनाती होगी

समाचार नामा 6 Aug 2026 2:51 pm

इंस्टाग्राम ब्लॉक होने पर भड़के अरविंद केजरीवाल! META से की मोदी सरकार के आगें ना झुकने की अपील, देख वीडियो

इंस्टाग्राम ब्लॉक होने पर भड़के अरविंद केजरीवाल! META से की मोदी सरकार के आगें ना झुकने की अपील, देख वीडियो

समाचार नामा 6 Aug 2026 2:35 pm

वास्तविक मुद्दों से युवाओं का ध्यान हटाना चाह रही केंद्र और यूपी सरकार: डिंपल यादव

वास्तविक मुद्दों से युवाओं का ध्यान हटाना चाह रही केंद्र और यूपी सरकार: डिंपल यादव

समाचार नामा 6 Aug 2026 2:30 pm

भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार दिन के उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ।

देशबन्धु 6 Aug 2026 2:22 pm

उद्योग जगत: आरबीआई की नीतिगत स्थिरता और बेहतर विकास

नई दिल्ली, उद्योग जगत के नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने और तटस्थ (न्यूट्रल) नीतिगत रुख बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया।

देशबन्धु 6 Aug 2026 2:19 pm

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, असम के बाढ़ प्रभावितों के लिए तीन करोड़ की मदद मंजूर

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, असम के बाढ़ प्रभावितों के लिए तीन करोड़ की मदद मंजूर

समाचार नामा 6 Aug 2026 2:10 pm

कोयला क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार उठा रही ठोस कदम: जी. किशन रेड्डी

कोयला क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार उठा रही ठोस कदम: जी. किशन रेड्डी

समाचार नामा 6 Aug 2026 2:07 pm

केरल : ईडी टीम पर हमला करने के मामले में पुलिस ने सीपीआईएम के कई नेताओं को भेजा नोटिस

केरल : ईडी टीम पर हमला करने के मामले में पुलिस ने सीपीआईएम के कई नेताओं को भेजा नोटिस

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:59 pm

24 घंटे ग्रीन एनर्जी देने को प्रतिबद्ध है मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव

24 घंटे ग्रीन एनर्जी देने को प्रतिबद्ध है मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:54 pm

राज्यसभा में गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग, सभापति ने रिजिजू से कहा-विपक्ष की भावना सरकार तक पहुंचाएं

राज्यसभा में गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग, सभापति ने रिजिजू से कहा-विपक्ष की भावना सरकार तक पहुंचाएं

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:53 pm

राजनीतिक फायदे के लिए मुसलमानों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है: अरशद मदनी

राजनीतिक फायदे के लिए मुसलमानों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है: अरशद मदनी

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:51 pm

'अगर ऐसा है तो मैं खुद को सांप्रदायिक कहने से नहीं हिचकूंगी', संसद में ऐसा कह कर सुषमाजी ने सबको हैरान कर दिया था

आज जब पूरा देश पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, तब हर भारतीय के मन में उनकी मुस्कुराती छवि, ओजस्वी आवाज़ और मानवीय संवेदनाओं से भरा व्यक्तित्व एक बार फिर जीवंत हो उठता है। देखा जाये तो भारतीय राजनीति में ऐसे नेता विरले ही हुए हैं, जिनकी लोकप्रियता केवल अपनी पार्टी तक सीमित न रहकर राजनीतिक सीमाओं को भी पार कर गई हो। सुषमा स्वराज उन्हीं असाधारण नेताओं में थीं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, संसद हो या अंतरराष्ट्रीय मंच, उनके शब्दों में दृढ़ता थी, विचारों में स्पष्टता थी और व्यवहार में ऐसी आत्मीयता थी, जिसने उन्हें हर दल के नेताओं और करोड़ों भारतीयों का सम्मान दिलाया। छह अगस्त 2019 को 67 वर्ष की आयु में उनके निधन ने भारतीय राजनीति को एक ऐसी आवाज़ से वंचित कर दिया, जिसकी कमी आज भी महसूस की जाती है। सुषमा स्वराज का अंतिम सार्वजनिक संदेश भी उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी वैचारिक प्रतिबद्धताओं में से एक का प्रतीक बन गया। छह अगस्त 2019 की शाम 7:23 बजे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए ट्वीट लिखा था, धन्यवाद प्रधानमंत्री जी। मैं अपने जीवनकाल में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी। यह संदेश जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर उनकी प्रतिक्रिया थी। भारतीय जनता पार्टी वर्षों से जिस संकल्प को लेकर आगे बढ़ रही थी, उसे पूरा होते देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक इच्छाओं में शामिल था। विडंबना देखिए कि इस ऐतिहासिक क्षण पर खुशी व्यक्त करने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें हृदयाघात हुआ और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। यह संयोग उनके जीवन को एक भावनात्मक पूर्णविराम देता है। इसे भी पढ़ें: आखिर बांकीपुर उपचुनाव भाजपा क्यों, कैसे और किसके चलते हारी? पूछता है बिहार! हरियाणा के एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी सुषमा स्वराज ने ऐसे दौर में राजनीति में अपनी पहचान बनाई, जब यह क्षेत्र लगभग पूरी तरह पुरुषों के वर्चस्व वाला माना जाता था। हरियाणा में मात्र 25 वर्ष की आयु में वह भारत की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनीं और 27 वर्ष की उम्र में राज्य में जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभाला। बाद के वर्षों में वह लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं, लोकसभा में विपक्ष की दूसरी महिला नेता रहीं और भारत की पहली पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। उनका राजनीतिक सफर केवल पदों की सूची नहीं था, बल्कि उन तमाम सामाजिक और राजनीतिक बाधाओं को तोड़ने की कहानी था, जिन्हें लंबे समय तक महिलाओं के सामने अजेय माना जाता रहा। सुषमा स्वराज की सबसे बड़ी पहचान उनकी अद्भुत वक्तृत्व कला थी। संसद में उनके भाषण केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं होते थे, बल्कि उनमें इतिहास, संस्कृति, तर्क और संवेदना का अनूठा संगम दिखाई देता था। वर्ष 1996 में लोकसभा में दिया गया उनका धर्मनिरपेक्षता पर भाषण आज भी भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे चर्चित भाषणों में गिना जाता है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से कहा था कि यदि वंदे मातरम् का सम्मान करना, राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा की रक्षा करना, अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की मांग करना और समान नागरिक संहिता की वकालत करना सांप्रदायिकता है, तो वे स्वयं को सांप्रदायिक कहने से नहीं हिचकेंगी। लेकिन इसी भाषण में उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की अपनी परिभाषा भी दी कि एक अच्छा हिंदू, अच्छा मुसलमान, अच्छा सिख और अच्छा ईसाई वही है, जो अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरे धर्मों का भी समान सम्मान करे। उनके इस दृष्टिकोण ने वैचारिक बहस को नई दिशा दी और विरोधी दलों के कई नेताओं ने भी उनकी तार्किक क्षमता की सराहना की। भारतीय संस्कृति की उनकी व्याख्या भी उतनी ही प्रभावशाली थी। जब संसद में भारतीयता की अवधारणा पर प्रश्न उठे, तब उन्होंने भांगड़ा से भरतनाट्यम तक, राजमा-चावल से इडली-दोसा तक और अमरनाथ से रामेश्वरम तक की सांस्कृतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि विविधताओं के बीच यही एकता भारत की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि यही वह संस्कृति है, जिसमें कश्मीर का श्रद्धालु अमरनाथ का जल लेकर रामेश्वरम में भगवान शिव का अभिषेक करता है। उनके इन शब्दों ने भारतीय सांस्कृतिक एकता की ऐसी तस्वीर प्रस्तुत की, जिसे आज भी याद किया जाता है। हालांकि सुषमा स्वराज की सबसे अलग पहचान विदेश मंत्री के रूप में बनी। वर्ष 2014 में जब उन्होंने विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली, तब कई लोगों को लगा कि विदेश नीति का पूरा केंद्र प्रधानमंत्री कार्यालय ही रहेगा। लेकिन उन्होंने अपने काम और संवेदनशीलता से यह धारणा बदल दी। उन्होंने विदेश मंत्रालय को आम भारतीय के जीवन से जोड़ दिया। सोशल मीडिया मंच ट्विटर को उन्होंने केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संकट में फंसे भारतीयों के लिए जीवनरेखा बना दिया। दुनिया के किसी भी कोने में कोई भारतीय मुश्किल में होता, तो लोग सीधे उन्हें टैग करते और कुछ ही समय में उनकी ओर से प्रतिक्रिया आ जाती। चाहे जर्मनी के शरणार्थी शिविर में फंसी गुरप्रीत कौर हों, पाकिस्तान में जबरन विवाह का शिकार बनी उज्मा हों, मूक-बधिर गीता की स्वदेश वापसी हो या पाकिस्तान में फंसे हमीद अंसारी का मामला, हर जगह सुषमा स्वराज ने मानवीय संवेदनाओं के साथ हस्तक्षेप किया। उनकी कार्यशैली इतनी सक्रिय थी कि उन्होंने स्वयं कहा था, मैं न सोती हूँ और न ही भारतीय दूतावासों के अधिकारियों को सोने देती हूँ। उनके एक संदेश पर दुनिया के किसी भी देश में भारतीय दूतावास तत्काल सक्रिय हो जाता था। यही कारण था कि भारतीय राजनयिक अपने मोबाइल फोन हर समय चालू रखते थे। विदेश मंत्रालय को उन्होंने पहली बार ऐसा मानवीय चेहरा दिया, जहां फाइलों से पहले इंसान की पीड़ा को महत्व मिला। उनकी हाजिरजवाबी भी लोगों को बेहद पसंद थी। एक बार किसी व्यक्ति ने ट्विटर पर खराब रेफ्रिजरेटर की शिकायत कर दी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, भाई, मैं रेफ्रिजरेटर के मामले में आपकी मदद नहीं कर सकती। मैं इस समय संकट में फंसे इंसानों की मदद में बहुत व्यस्त हूँ। विदेश नीति के स्तर पर भी उनके कार्यकाल में भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत की कानूनी सफलता, डोकलाम विवाद के दौरान संतुलित कूटनीति, मालदीव संकट और नेपाल से जुड़े चुनौतीपूर्ण हालात का प्रबंधन, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व तथा पाकिस्तान के विरोध के बावजूद वहां भारत की प्रभावशाली उपस्थिति, ये सभी उपलब्धियां उनके नेतृत्व की गवाही देती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख विदेश यात्राओं की पृष्ठभूमि तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन से लेकर चीन और किर्गिस्तान तक, उन्होंने परदे के पीछे रहकर भारतीय कूटनीति को मजबूती प्रदान की। देखा जाये तो सुषमा स्वराज को केवल एक सफल राजनेता या कुशल प्रशासक के रूप में याद करना उनके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं होगा। वह ऐसी जननेता थीं, जिन्होंने राजनीति को मानवीय संवेदना से जोड़ा। उनकी वाणी में ओज था, विचारों में स्पष्टता थी, निर्णयों में राष्ट्रहित सर्वोपरि था और व्यवहार में ऐसी आत्मीयता थी कि राजनीतिक विरोधी भी उनका सम्मान करते थे। शायद यही कारण था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी उन्हें भारत की सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार किया। आज उनकी पुण्यतिथि पर देश उन्हें केवल एक पूर्व विदेश मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि उस जननेता के रूप में याद कर रहा है, जिसने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और करोड़ों भारतीयों के दिलों में हमेशा के लिए अपनी जगह बना ली। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 6 Aug 2026 1:43 pm

तमिलनाडु के कृषि बजट पेश करने के दौरान डीएमके विधायकों का काली शर्ट पहनकर विरोध प्रदर्शन

तमिलनाडु के कृषि बजट पेश करने के दौरान डीएमके विधायकों का काली शर्ट पहनकर विरोध प्रदर्शन

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:41 pm

ईओ विमल कुमार हत्याकांड में स्पीडी ट्रायल के बाद दोषियों को जल्द मिले सजा: राजद विधायक

ईओ विमल कुमार हत्याकांड में स्पीडी ट्रायल के बाद दोषियों को जल्द मिले सजा: राजद विधायक

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:41 pm

परमाणु हथियारों के प्रतिबंध की वकालत करती है हिरोशिमा त्रासदी

मानव इतिहास में ‘6 अगस्त 1945’ की मनहूस तारीख को शायद ही कोई भूल पाए। 'हिरोशिमा दिवस' के रूप में मनाई जाती है ये तारीख। इस तारीख में सिर्फ तबाही लिखी थी। तारीख में ऐसा मुकर्रर वक्त था जिसने मात्र 16 मिनट के भीतर 1,30,000 लोगों की सांसें एक साथ रोकी थी। हताहतों का आकंड़ा फिलहाल सरकारी है, पर वास्तिवक संख्या इससे कहीं अधिक बताई जाती है। हिरोशिमा पर किए परमाणु हमले में मरने वालों में बूढ़े, बच्चे, नौजवान, औरतें भी थीं। सुबह करीब 8ः15 बजे अमेरिका ने हिरोशिमा पर अपने ‘बी-29 ‘एनाला गे’ विमान द्वारा आसमान से परिमाणु बमों की बारिश करके पूरा शहर जिंदा जला दिया था। घटना के वक्त ज्यादातर लोग सोए हुए थे, परमाणु बम ने उन्हें सोता ही मार दिया। हिरोशिमा में जब परमाणु बम फोड़ा गया, तो जापानियों को लगा कि सूरज फटा है। जबकि, वह सूरज नहीं, बल्कि तथाकथित विकसित, सभ्य और मुट्ठी भर लोगों का निर्णय तथा एक महाशक्ति द्वारा निर्मित कृत्रिम सूरज था जिसकी आग में लाखों निर्दोष लोग भाप बनकर चंद मिनटों में उड़ गए। घटना का सामूहिक हत्यारा अमेरिका था। अगस्त माह की जब 6 तारीख आती है या फिर परमाणु हथियारों की बढ़ती तादात पर वैश्विक मंचों पर विमर्श होता है, तो जापान की दिल दहला देने वाली यह घटना आंखों के सामने अनायास उमड़ पड़ती हैं। घटना को श्रृधालजि के तौर पर ही सालाना 6 अगस्त को ‘हिरोशिमा दिवस’ के रूप में विश्व मनाता है। यह दिन उन मुल्कों को संकल्पित होने को आहवान भी करवाता है, जो परमाणु बम फोड़ने की अनाअवश्यक धमकी दिया करते हैं। साथ ही अहिंसा, त्रासदी, को छोड़कर भाईचारा अपनाने और शांति के पथ पर चलने को जागरूश्क भी करता है। 1945 में अमेरिका द्वारा जापान के दो शहरों पर गिराए गए अलग-अलग तारीखों पर परमाणु बम की यह कहानी काले अध्याय के रूप में तबतक दर्ज रहेगी, जबतक दुनिया इस धरती पर वास करेगी। 6 अगस्त को गिराए पहले बम का नाम ‘एनाला गे’ था। वहीं, 9 अगस्त वाले बम का नाम ‘लिटिल बॉय’ यानी यूरेनियम-आधारित परमाणु बम था। इसे भी पढ़ें: Hiroshima Day 2026: एक परमाणु बम ने ली लाखों जानें, US Attack की उस काली सुबह ने बदल दिया World History जापान का जब तक अस्तित्व रहेगा, उनके लोग अमेरिका को माफ नहीं करेंगे। जापान के अलावा पूरे विश्व में इस मानव त्रासदी की निंदा प्रत्येक 6 अगस्त को की जाती है। नागासाकी पर गिराए बम से भी लाखों की संख्या में बेकसूर नागरिक मरे थे। हिरोशिमा दिवस वैश्विक स्तरीय पर परमाणु हथियारों के विरुद्ध एकजुट होने एवं समूचे संसार में अमन-शांति की वकालत के लिए भी याद किया जाता है। साथ ही भविष्य में ऐसे विनाशकारी युद्धों को रोकने के लिए परमाणु हथियारों को नष्ट करने की पुरजोर अपील भी करता है। हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन ‘डेलानो रूजवेल्ट’ के सन्दर्भ में ‘लिटिल ब्वाय’ और नागासाकी के बम को विन्सटन चर्चिल के सन्दर्भ में ‘फैट मैन’ भी कहा जाता है। फ्रैंकलिन डेलानो रूजवेल्ट अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति हुआ करते थे। वह द्वितीय विश्वयुद्ध और वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान बीसवीं सदी के सबसे क्रूर व्यक्तियों में गिने जाते रहे। यह त्रासदी उनकी ही देन थी। पाकिस्तान, अमरिका जैसे मुल्क आज भी परमाणु बमों को फोड़ने की धमकी देते हैं। इसलिए हिरोशिमा दिवस उनके लिए चेतावनी के अलावा सीख जैसा भी है। हिरोशिमा की घटना को आज 81 वर्ष हो गए, लेकिन दुर्भाग्य संसार आज भी युद्ध-हिंसा में संलग्न है। यूं कहें कि परमाणु हथियारों के ढेर पर बैठा है। हाल में, अमेरिका द्वारा ईराक पर परमाणु हमले की धमकी देना, दुनिया भर में बढ़ती हिंसा की घटनाएं और हथियारों को इकट्ठा करने की होड़ के बीच हमारे सामने यह प्रश्न खड़ा होता है कि हम हिरोशिमा और नागासाकी की घटनाओं से क्या कुछ सबक सीख पाए या नहीं? 81 साल पहले 2,50,000 हजार लोगों को मारकर भी अमेरिका को शांति नहीं मिली? अमेरिका की दादागिरी को जवाब देने का वक्त आ चुका है इसके लिए वैश्विक स्तर पर सभी मुल्कों को एकजुट होना होगा। साथ ही परमाणु हथियारों के निर्माणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की दिशा में सभी देशों को सामूहिक पहल करने की जरूरत है। - डॉ. रमेश ठाकुर सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!

प्रभासाक्षी 6 Aug 2026 1:39 pm

मिलावटखोरों के खिलाफ भी करना पड़ेगा देशव्यापी आंदोलन

संसद भवन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है और वहीं देश के तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों पर भी मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। लेकिन इस बीच कई ऐसी खबरें भी लगातार निकल कर सामने आ रही है, जिसपर बड़े पैमाने पर चर्चा, वाद-संवाद और कार्रवाई की जरूरत है। लेकिन इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि देश के सभी लोगों के जीवन से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मसले पर चर्चा करने का समय किसी के पास नहीं है। सत्ता में बैठने वाली किसी भी सरकार ( चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल की हो) के पास इसके समाधान का कोई स्थायी फॉर्मूला या विज़न नहीं है, विपक्ष के पास भी इस पर बात करने की फुर्सत नहीं है और सरकारी अधिकारी अपने में ही मस्त है। मिलावटखोरी की समस्या अब हमारे देश की सबसे बड़ी भयावह समस्या बनती जा रही है, जिस पर रोक लगाने के लिए अब बड़े स्तर पर कदम उठाए बिना कोई बात नहीं बनेगी। देश में कानून भी है, नियम भी है, निगरानी के लिए विभाग भी है और अधिकारी भी है लेकिन फिर भी ऐसा लगता है कि मिलावटखोरों को किसी भी बात का कोई डर ही नहीं है। इसे भी पढ़ें: उन्नत बचपन की पहली शर्त- स्वस्थ भोजन, स्वस्थ भविष्य हाल ही में देश के एक बड़े अखबार ने इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में जो दावा किया है, उसने सबकी नींदे उड़ा दी है। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश की कई आटा मिलों में गेंहू के आटे में सफेद पत्थर का चूरा यानी स्टोन पाउडर मिलाया जा रहा है। मुनाफाखोरी के लालच में ये मिलावटखोर हमें पत्थर वाले आटे से बनी रोटी खाने को मजबूर कर रहे हैं। जबकि ये भी जानते हैं कि इस मिलावटी आटे से बनी रोटी को खाने से लोगों के शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेंगे। आजकल लोगों के घरों से लेकर, फ़ास्ट फ़ूड, शादी-ब्याह और पार्टियों तक में सबसे ज्यादा पनीर का इस्तेमाल किया जाता है। कई एक्सपर्ट/ जिम ट्रेनर तो बॉडी को मजबूत बनाने के लिए भी पनीर खाने की सलाह देते हैं। लेकिन पनीर में मैदा या अरारोट मिलाना और स्किम्ड मिल्क पाउडर एवं वनस्पति तेल का इस्तेमाल कर सिंथेटिक या नकली पनीर बनाना तो आम बात हो गई है। बल्कि ऐसे गंभीर मामले भी कई बार सामने आए हैं, कि डिटर्जेंट या यूरिया से बने दूध का भी इस्तेमाल कर पनीर बनाया और बेचा जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही, राज्य में एनालॉग पनीर यानी नॉन डेयरी पनीर के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया कि असली पनीर बताकर इसे बेचना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है। महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अपने आदेश में सख्त शब्दों में कहा कि नियम तोड़ने वालों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने तक की जेल और एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार भी एनालॉग पनीर यानी नॉन डेयरी पनीर को लेकर ऐसा ही फैसला कर चुकी है। सबसे अधिक दुःखद और परेशानी में डालने वाला तथ्य तो यह है कि देश की नामी-गिरामी कंपनियां भी उपभोक्ताओं को धोखा देने का कोई मौका नहीं चूकती है। रोजमर्रा की जरूरत का कई सामान बेचने वाली एफएमसीजी कंपनी डाबर को लेकर भी चौंकाने वाली ख़बर सामने आई है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने डाबर द्वारा किए जा रहे ' 100% प्योर', '100% ऑर्गेनिक' और '100% नेचुरल' जैसे दावों को भ्रामक बताते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स की बिक्री को तुरंत रोकने का आदेश दे दिया है। इन प्रोडक्ट्स में शहद, गाय का देसी घी, तिल का तेल और नारियल पानी जैसी कई चीजें शामिल हैं। डाबर को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी जमा करने को कहा गया है। इससे पहले भी कई नामी-गिरामी और बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर गंभीर सवाल उठ चुके हैं। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यही कंपनियां जब विदेश खासकर अमेरिका या यूरोपीय देशों में कोई सामान बेचती है तो उसकी क्वालिटी का खास ध्यान रखती है लेकिन भारतीयों के लिए इनका एटीट्यूड 'सब चलता है टाइप' ही होता है। लोग पैसे खर्च करने को तैयार हैं ताकि उन्हें शुद्ध आटा, दाल, चावल, मसाले, चीनी, दूध, घी, खाद्य तेल, सब्जियां, पनीर, शहद, पानी और अन्य सामान मिल सके। लेकिन ज्यादा खर्च के बाद भी उनके साथ न केवल ठगी की जा रही है बल्कि लोग गंभीर बीमारियों के भी शिकार होकर मरते भी जा रहे हैं। लेकिन क्या सिर्फ कानून बना देने से इस भयावह समस्या का समाधान हो जाएगा, कतई नहीं। इसके लिए युद्धस्तर पर एक मिशन के तहत कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ेगा। नकली सामानों को बनने के स्तर पर ही रोकना होगा, इसके लिए उत्तरदायी विभाग में मैन पावर बढ़ाने के साथ ही उनकी जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। इससे जुड़े विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हर महीने अपनी संपत्ति का ब्यौरा भी ऑनलाइन भरना चाहिए। ऐसे मामलों को निपटाने के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर फैसले की समय सीमा भी तय करनी होगी। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर कई अन्य कदम भी उठाने होंगे। लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि क्या हमारी सरकार, अधिकारी, अदालत और नेता..ये सब इसके लिए तैयार हैं? - संतोष कुमार पाठक लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं

प्रभासाक्षी 6 Aug 2026 1:29 pm

कांग्रेस सांसदों ने संसद में निकाला मार्च, गृह मंत्री अमित शाह के सदन में न आने पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसदों ने संसद में निकाला मार्च, गृह मंत्री अमित शाह के सदन में न आने पर उठाए सवाल

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:20 pm

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र से पहले दिल्ली में अमित शाह से मिले सीएम भजनलाल

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र से पहले दिल्ली में अमित शाह से मिले सीएम भजनलाल

समाचार नामा 6 Aug 2026 1:18 pm

जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड डिजिटल करने से क्या बदलेगा

Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill 2026: मानसून सत्र में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पेश हुआ, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह बिल सदन में रखा। इस विधेयक का उद्देश्य देशभर में जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल करना और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना है। आइए समझते हैं कि ये बिल क्या है, इससे क्या क्या नियम बदलेंगे और आम लोगों के लिए क्या लाभ होंगे। इस कानून के तहत अब पूरे देश में भारत सरकार नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System) को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने के लिए नए संशोधन लागू कर रही है। विलंबित पंजीकरण के लिए सख्त प्रावधान नए प्रावधान के अनुसार, अगर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 2 साल से अधिक देर से कराया जाता है, तो अब DM या SDM इसकी मंजूरी नहीं दे सकेंगे. ऐसे मामलों में रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश के बाद ही हो सकेगा। इससे फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है। जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नए नियम 1. नाम दर्ज कराने और सुधार के नियम - 12 महीने की सीमा: यदि जन्म के समय बच्चे का नाम दर्ज नहीं कराया गया है, तो माता-पिता या अभिभावक को 12 महीने के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। - मानक प्रारूप (Standard Format): जन्म प्रमाण पत्र में नाम केवल फर्स्ट नेम, मिडिल नेम और लास्ट नेम के प्रारूप में ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी प्रकार का शॉर्ट फॉर्म मान्य नहीं होगा। - विलंब शुल्क (Late Fee): 1 वर्ष के बाद से लेकर 15 वर्ष की आयु तक नाम दर्ज कराने पर विलंब शुल्क देय होगा। - त्रुटि सुधार (Correction): स्पेलिंग या अन्य मामूली गलती होने पर जिला रजिस्ट्रार को आवेदन देकर सुधार करवाया जा सकता है। - आवश्यक दस्तावेज: इस पूरी प्रक्रिया के लिए माता-पिता के पहचान पत्र (स्व-प्रमाणित दस्तावेज) और पते का सही सत्यापन जमा करना अनिवार्य होगा। इसे भी पढ़ें: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर की जीत के सियासी मायने चौंकाने वाले 2. देरी से पंजीकरण के लिए प्रस्तावित नए नियम - वर्तमान व्यवस्था में 1 वर्ष से अधिक की देरी पर जिला मजिस्ट्रेट (DM), SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होती है। - नए विधेयक के तहत इस प्रक्रिया को दो श्रेणियों में बांटा गया है: - देरी की अवधि - स्वीकृत करने वाली अथॉरिटी प्रक्रिया व शर्तें - 1 से 2 वर्ष की देरी जिला मजिस्ट्रेट (DM), SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट, मौजूदा प्रक्रिया के तहत ही क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट से मंजूरी और निर्धारित शुल्क। - 2 वर्ष से अधिक की देरी प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट - कड़े नियम: मामला कार्यपालिका से न्यायपालिका के पास जाएगा। गहन जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी। | - ध्यान दें: अनुमति देने से पहले नामित अधिकारी के लिए जन्म या मृत्यु की सत्यता का सत्यापन (Verification) करना अनिवार्य होगा। 3. विधेयक लाने का उद्देश्य और जरूरत a. फर्जी रिकॉर्ड पर रोक: असत्यापित या फर्जी दावों के आधार पर बनने वाले जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्रों पर पूरी तरह से अंकुश लगाना। b. सटीक राष्ट्रीय डेटा: स्कूल दाखिले, मतदाता सूची, राशन कार्ड, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं के डेटाबेस को अधिक विश्वसनीय बनाना। c. समय पर सूचना को बढ़ावा: लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जन्म व मृत्यु की जानकारी दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करना। d. अस्पताल के बाहर हुई मृत्यु: इसके पंजीकरण के लिए मान्यता प्राप्त डॉक्टर का मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य करना। 4. पंजीकरण का कानूनी महत्व - जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। - जन्म प्रमाण पत्र की उपयोगिता: स्कूल/कॉलेज में प्रवेश, पासपोर्ट बनवाने, आधार नामांकन, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, सरकारी नौकरियों और विवाह पंजीकरण आदि के लिए प्राथमिक दस्तावेज। - मृत्यु प्रमाण पत्र की उपयोगिता: संपत्ति के हस्तांतरण, विरासत के दावों, बीमा क्लेम, पेंशन लाभ और बैंक खाते बंद कराने के लिए आवश्यक। 5. कानून के संभावित प्रभाव - पारदर्शिता और विश्वसनीयता: न्यायिक निगरानी (Judicial Oversight) लागू होने से प्रशासनिक दुरुपयोग और फर्जीवाड़ा रुकेगा। - सत्यनिष्ठ आवेदकों के लिए रास्ता खुला: जिनके पास पंजीकरण में देरी के वैध और ठोस कारण हैं, वे न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे। - संतुलन: यह संशोधन प्रत्येक नागरिक का रिकॉर्ड सुरक्षित करने और प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के बीच एक प्रभावी संतुलन स्थापित करता है। केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जुड़ेगा रिकॉर्ड इस कानून के तहत अब पूरे देश के जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इससे देश के किसी भी हिस्से में होने वाले जन्म या मृत्यु की जानकारी एक ही जगह ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इस डेटाबेस को मतदाता सूची, राशन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य राष्ट्रीय पहचान पत्रों से भी जोड़ा जाएगा। कोई नागरिक 18 वर्ष का होगा, उसका नाम स्वतः मतदाता सूची में जुड़ जाएगा। वहीं, किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर सरकारी रिकॉर्ड से उसका नाम आसानी से हटाया जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जी लाभ उठाने की घटनाओं पर रोक लगेगी। नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र सबसे मुख्य दस्तावेज बन जाएगा। अब तक स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस या सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन इस बिल के पास होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र ही उम्र और पहचान का एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज माना जाएगा। जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड डिजिटल कर देने से जो सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा वह देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले घुसपैठियों की पहचान करने हेतु एक व्यवस्थित एवं मजबूत सिस्टम डेवलप होगा। यह बात किसी से नहीं छुपी हुई है कि घुसपैठ करने वाले लगातार देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं उनके मंसूबों को काफी हद तक रोकने में यह कानून मददगार सिद्ध होगा। फ़र्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र तथा उसके द्वारा आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, बैंक अकाउंट और मतदाता सूची में जुड़ जाने तक का कार्य हो जाता है। यह न सिर्फ अनधिकृत रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बल्कि भारत देश में रहकर इसकी एकता और अखंडता को तोड़ने का काम करने वालों को रोकने के लिए एक ठोस और सशक्त उपाय सिद्ध होगा। - डॉ ऋतु दुबे तिवारी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ वर्तमान में गाजियाबाद में NISCORT कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत

प्रभासाक्षी 6 Aug 2026 1:16 pm

यूपी विधानसभा में हंगामे पर राजभर बोले- 'सपाइयों ने सदन की गरिमा से ऊपर उठकर किया काम, ये उनका पुराना कल्चर'

यूपी विधानसभा में हंगामे पर राजभर बोले- 'सपाइयों ने सदन की गरिमा से ऊपर उठकर किया काम, ये उनका पुराना कल्चर'

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:56 pm

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:51 pm

कंगना रनौत ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की धांधली पर कहा, हमारे 'जेन-जी' सच में हर तरह की तकलीफ झेल रहे हैं

कंगना रनौत ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की धांधली पर कहा, हमारे 'जेन-जी' सच में हर तरह की तकलीफ झेल रहे हैं

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:44 pm

राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर सपा सांसदों का संसद में प्रदर्शन, अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग

राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर सपा सांसदों का संसद में प्रदर्शन, अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:38 pm

कर्नाटक में पोर्टफोलियो बंटवारे में देरी को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर तंज, डीके शिवकुमार को बताया 'रबर स्टैम्प सीएम'

कर्नाटक में पोर्टफोलियो बंटवारे में देरी को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर तंज, डीके शिवकुमार को बताया 'रबर स्टैम्प सीएम'

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:33 pm

जेपीएससी विवाद पर एनडीए नेताओं ने पूछा, 'कहां है राहुल की नैतिकता, क्यों नहीं मांगा झारखंड सीएम का इस्तीफा'

जेपीएससी विवाद पर एनडीए नेताओं ने पूछा, 'कहां है राहुल की नैतिकता, क्यों नहीं मांगा झारखंड सीएम का इस्तीफा'

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:28 pm

अभिषेक बनर्जी के फरार सहयोगी ने अंतरिम सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

अभिषेक बनर्जी के फरार सहयोगी ने अंतरिम सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:28 pm

झारखंड : जेपीएससी को लेकर प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी, छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को बदतर बताया

झारखंड : जेपीएससी को लेकर प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी, छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को बदतर बताया

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:27 pm

नीति आयोग की रिपोर्ट ने युवा विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा व्यवस्था की हकीकतों को उजागर किया: शिवसेना (यूबीटी)

नीति आयोग की रिपोर्ट ने युवा विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा व्यवस्था की हकीकतों को उजागर किया: शिवसेना (यूबीटी)

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:25 pm

लोकसभा और राज्यसभा में फिर हंगामा, किरेन रिजिजू ने दिया नियमों का हवाला

लोकसभा और राज्यसभा में फिर हंगामा, किरेन रिजिजू ने दिया नियमों का हवाला

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:25 pm

टीवीके सरकार ने पेश किया पहला कृषि बजटः मिट्टी की सेहत, उत्पादकता बढ़ाने और एआई-आधारित सेवाओं को विस्तार करने की घोषणा

टीवीके सरकार ने पेश किया पहला कृषि बजटः मिट्टी की सेहत, उत्पादकता बढ़ाने और एआई-आधारित सेवाओं को विस्तार करने की घोषणा

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:19 pm

संसद में फिर हंगामा, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित; विपक्ष का सरकार पर हमला

संसद के मानसून सत्र के 14वें दिन भी हंगामा जारी रहा। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित हो गई। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सरकार को घेरा।

देशबन्धु 6 Aug 2026 12:18 pm

लोकसभा में गतिरोध जारी, विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

लोकसभा में गतिरोध जारी, विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:17 pm

अरविंद केजरीवाल ने मेटा पर लगाया अपने इंस्टाग्राम अकाउंट की पहुंच सीमित करने का आरोप

अरविंद केजरीवाल ने मेटा पर लगाया अपने इंस्टाग्राम अकाउंट की पहुंच सीमित करने का आरोप

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:11 pm

मोहन भागवत के 'जेन जी संवाद' कार्यक्रम पर बिहार भाजपा अध्यक्ष बोले- 'यह स्वागत योग्य कदम'

मोहन भागवत के 'जेन जी संवाद' कार्यक्रम पर बिहार भाजपा अध्यक्ष बोले- 'यह स्वागत योग्य कदम'

समाचार नामा 6 Aug 2026 11:57 am

नीट पेपर लीक केस : सुप्रीम कोर्ट में 19 अगस्त को अगली सुनवाई, केंद्र के हलफनामे पर मांगा जवाब

नीट पेपर लीक केस : सुप्रीम कोर्ट में 19 अगस्त को अगली सुनवाई, केंद्र के हलफनामे पर मांगा जवाब

समाचार नामा 6 Aug 2026 11:51 am

कांवड़ियों पर मौलाना रशीदी का विवादित बयान, आतंकवादियों से की शिवभक्तों की तुलना

कांवड़ियों पर मौलाना रशीदी का विवादित बयान, आतंकवादियों से की शिवभक्तों की तुलना

समाचार नामा 6 Aug 2026 11:41 am

सोने की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ उछाल: वायदा बाजार में नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंचे दाम; ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकला भाव

सोने में लगातार तेजी देखी जा रही है और गुरुवार को सत्र की शुरुआत के साथ ही वायदा बाजार में सोने का दाम 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया।

देशबन्धु 6 Aug 2026 11:37 am

प्रतापगढ़ में घर गिरने से छह लोगों की मौत पर सीएम योगी ने जताया दुख

प्रतापगढ़ में घर गिरने से छह लोगों की मौत पर सीएम योगी ने जताया दुख

समाचार नामा 6 Aug 2026 11:25 am

कैबिनेट बैठक में जनता के अनुरूप कई फैसले लेगी पश्चिम बंगाल सरकार: दिलीप घोष

कैबिनेट बैठक में जनता के अनुरूप कई फैसले लेगी पश्चिम बंगाल सरकार: दिलीप घोष

समाचार नामा 6 Aug 2026 11:22 am