राजस्थान विधानसभा में सर्वदलीय बैठक – 18 अगस्त को होगी अहम चर्चा
राजस्थान की सोलहवीं विधानसभा के षष्ठम सत्र से पहले 18 अगस्त को सर्वदलीय बैठक आयोजित की जायेगी
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान – किसान की आवाज दबाई जा रही
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आज किसान और मजदूर सबसे अधिक परेशान हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाया जा रहा है
मोहन भगवत मुंबई में जेन जी और जेन अल्फा से करेंगे बातचीत, विश्व को एकजुट करने में भारत की भूमिका पर होगी चर्चा
राहुल गांधी मानहानि केस – हाईकोर्ट जाने के लिए वादी को मिला समय
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर स्थित एमपी/एमएलए कोर्ट में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई बुधवार को हुई
जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा मिले : कांग्रेस
कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य के दर्जे को तत्काल बहाल करने की मांग करते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 370 हटाए जाने और तत्कालीन राज्य के पुनर्गठन के सात वर्ष बाद भी केंद्र सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेटफ्लिक्स के सह-सीईओ टेड सारंडोस से मुलाकात के बाद कहा कि भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा है। उन्होंने कहा कि देश की समृद्ध कहानी कहने की परंपरा और रचनात्मक प्रतिभा भारत को वैश्विक कंटेंट निर्माण का प्रमुख केंद्र बना सकती है।
मुंबई: आदित्य ठाकरे ने सीएम फडणवीस को लिखा पत्र, सार्वजनिक जमीन संस्था को आवंटित करने का किया विरोध
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। इस पत्र में आदित्य ठाकरे ने मुंबई की लगभग 16 एकड़ सार्वजनिक खुली जमीन एक संस्था को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है।
नई दिल्ली में 7-8 अगस्त को दो दिवसीय निवेश अभियान का नेतृत्व करेंगे ओडिशा सीएम मोहन चरण माझी
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी 7-8 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रम (इन्वेस्टमेंट आउटरीच प्रोग्राम) का नेतृत्व करेंगे। इस पहल का उद्देश्य राज्य में बड़े निवेश आकर्षित करना और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना है
ये लोग बदले की भावना से कर रहे काम: जयराम ठाकुर
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भाजपा नेताओं के खिलाफ मामलों को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।
भागवत का 'जेनजी संवाद' देश को सही दिशा देगा, नशा, कट्टरता और प्रदूषण की चुनौती : इंद्रेश कुमार
भागवत का 'जेनजी संवाद' देश को सही दिशा देगा, नशा, कट्टरता और प्रदूषण की चुनौती : इंद्रेश कुमार
हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों के वेतन में वृद्धि
हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों के वेतन में वृद्धि
बिहार विधान परिषद के लिए मनोनीत होने पर दीपक प्रकाश बोले- जिम्मेदारी को प्रतिबद्धता के साथ निभाऊंगा
बिहार विधान परिषद के लिए मनोनीत होने पर दीपक प्रकाश बोले- जिम्मेदारी को प्रतिबद्धता के साथ निभाऊंगा
त्रिपुरा में नशे और अपराध पर जीरो टॉलरेंस, सीएम माणिक साहा ने दिए कड़े निर्देश
त्रिपुरा में नशे और अपराध पर जीरो टॉलरेंस, सीएम माणिक साहा ने दिए कड़े निर्देश
नितिन गडकरी के ई20 डीपफेक वीडियो मामला: मुंबई कोर्ट ने 'मेटा' और 'एक्स' से मांगी अपलोडर्स की जानकारी
नितिन गडकरी के ई20 डीपफेक वीडियो मामला: मुंबई कोर्ट ने 'मेटा' और 'एक्स' से मांगी अपलोडर्स की जानकारी
बंगाल: 'बांग्लार बारी परियोजना' का नाम बदलकर 'पश्चिम बंगाल आवास' रखा जाएगा
बंगाल: 'बांग्लार बारी परियोजना' का नाम बदलकर 'पश्चिम बंगाल आवास' रखा जाएगा
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर बैठक, संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास पर जोर
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर बैठक, संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास पर जोर
जीआईडीसी जमीन घोटाला: शक्ति सिंह गोहिल का आरोप, ताक पर रखे गए नियम
जीआईडीसी जमीन घोटाला: शक्ति सिंह गोहिल का आरोप, ताक पर रखे गए नियम
छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले 66 माओवादियों को 6.60 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी
छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले 66 माओवादियों को 6.60 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी
जम्मू-कश्मीर को उसका हक मिले, सदन चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की ज्यादा : सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी
असम में बाढ़ पीड़ित छात्रों को राहत, मुफ्त किताबों के लिए सरकार देगी पैसे: सीएम सरमा
असम में बाढ़ पीड़ित छात्रों को राहत, मुफ्त किताबों के लिए सरकार देगी पैसे: सीएम सरमा
मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) के तहत वर्ष 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
जेनजी से संवाद जरूरी, कृषि में रोजगार और बिजनेस के लिए युवाओं को मिले सही दिशा : बीएयू के वाइस-चांसलर
अरुणाचल प्रदेश ने विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है: राज्यपाल परनाइक
अरुणाचल प्रदेश ने विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है: राज्यपाल परनाइक
‘कांग्रेस एकजुट’: मुलाकात के बाद शिवकुमार ने असहमति की आशंका को खारिज किया
‘कांग्रेस एकजुट’: मुलाकात के बाद शिवकुमार ने असहमति की आशंका को खारिज किया
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का सर्वांगीण विकास हुआ: नरेश बंसल
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का सर्वांगीण विकास हुआ: नरेश बंसल
बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर
बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर
विधानसभा में संभल हिंसा आयोग की रिपोर्ट पेश, 24 नवंबर की घटना को बताया पूर्व नियोजित साजिश
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट बिना चर्चा के सदन के पटल पर रख दी गई
कावेरी जल विवाद पर डीएमके का आरोप, पी. विल्सन ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्नाटक नहीं छोड़ रहा पानी
फसल बीमा के दायरे में 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि के साथ राजस्थान देश में अग्रणी
फसल बीमा के दायरे में 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि के साथ राजस्थान देश में अग्रणी
मेघालय की प्रारूप मतदाता सूची में फिर महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक, सत्यापन के बाद 1.8 लाख से ज्यादा नाम हटे
यूपी बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, मायावती समेत कई नेताओं ने जताया दुख
यूपी बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, मायावती समेत कई नेताओं ने जताया दुख
तेजस्वी यादव अगर सीरियस होते तो बांकीपुर में 14,000 की जगह 74,000 वोट मिलते : साधु यादव
तेजस्वी यादव अगर सीरियस होते तो बांकीपुर में 14,000 की जगह 74,000 वोट मिलते : साधु यादव
कर्नाटक सरकार 34,000 ग्रामीण मंदिरों में पुजारियों की ट्रेनिंग में मदद करेगी: सीएम शिवकुमार
कर्नाटक सरकार 34,000 ग्रामीण मंदिरों में पुजारियों की ट्रेनिंग में मदद करेगी: सीएम शिवकुमार
छत्तीसगढ़ सीएम ने वन महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ, ‘पीपल सिटी’ विकसित करने की घोषणा
छत्तीसगढ़ सीएम ने वन महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ, ‘पीपल सिटी’ विकसित करने की घोषणा
'वे नेहरू और इंदिरा गांधी की पूजा करते हैं': भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला
'वे नेहरू और इंदिरा गांधी की पूजा करते हैं': भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला
सीएम फडणवीस को सिद्धि विनायक मंदिर प्रकरण पर एसआईटी से जांच करानी चाहिए: महेश तपासे
सीएम फडणवीस को सिद्धि विनायक मंदिर प्रकरण पर एसआईटी से जांच करानी चाहिए: महेश तपासे
दीपक प्रकाश का विधान परिषद मनोनीत होना पहले से तय था: उपेंद्र कुशवाहा
दीपक प्रकाश का विधान परिषद मनोनीत होना पहले से तय था: उपेंद्र कुशवाहा
पंजाब मंत्रिमंडल ने 'ग्रीन कवर' बनाए रखने के विधेयक को मंजूरी दी
पंजाब मंत्रिमंडल ने 'ग्रीन कवर' बनाए रखने के विधेयक को मंजूरी दी
सरकार सदन में देशहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय ध्यान भटका रही: सपा
सरकार सदन में देशहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय ध्यान भटका रही: सपा
मिजोरम और असम के बीच शांति और आपसी समझ को प्राथमिकता देना अनिवार्य: मुख्यमंत्री लालदुहोमा
मिजोरम और असम के बीच शांति और आपसी समझ को प्राथमिकता देना अनिवार्य: मुख्यमंत्री लालदुहोमा
यूपी की जनता अखिलेश यादव के कार्यकाल में माफिया राज को नहीं भूली है: रोहन गुप्ता
यूपी की जनता अखिलेश यादव के कार्यकाल में माफिया राज को नहीं भूली है: रोहन गुप्ता
सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहने पर एनसीपी उग्र, कांग्रेस के सामने रखी माफी की मांग
सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहने पर एनसीपी उग्र, कांग्रेस के सामने रखी माफी की मांग
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छात्रों को एआई का बुद्धिमानी से उपयोग करने की सलाह दी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छात्रों को एआई का बुद्धिमानी से उपयोग करने की सलाह दी
'परिसीमन पर विपक्ष का रुख साफ, सरकार फैला रही भ्रम', कांग्रेस का आरोप
'परिसीमन पर विपक्ष का रुख साफ, सरकार फैला रही भ्रम', कांग्रेस का आरोप
पंजाब के लोग आप सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस को विकल्प मानते हैं: भूपेश बघेल
पंजाब के लोग आप सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस को विकल्प मानते हैं: भूपेश बघेल
15 अगस्त तक केंद्र को सौंपेंगे मेकेदातु परियोजना की संशोधित डीपीआर, तमिलनाडु इसे नहीं रोक सकता: रामलिंगा रेड्डी
परिसीमन बिल पर कांग्रेस का रुख नहीं बदला, किरेन रिजिजू देश से माफी मांगें: केसी वेणुगोपाल
परिसीमन बिल पर कांग्रेस का रुख नहीं बदला, किरेन रिजिजू देश से माफी मांगें: केसी वेणुगोपाल
छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपए के एआई मिशन, बीईएमएल संयंत्र को मंजूरी दी
छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपए के एआई मिशन, बीईएमएल संयंत्र को मंजूरी दी
अखिलेश ने पीडीए को एक ऐसी पहेली में तब्दील कर दिया, जो गिरगिट की तरह रंग बदलती है: केशव प्रसाद मौर्य
अखिलेश ने पीडीए को एक ऐसी पहेली में तब्दील कर दिया, जो गिरगिट की तरह रंग बदलती है: केशव प्रसाद मौर्य
अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग
सिद्धिविनायक मंदिर चंदा विवाद पर शिवसेना नेता संजय निरुपम की मांग, 'दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए'
सिद्धिविनायक मंदिर चंदा विवाद पर शिवसेना नेता संजय निरुपम की मांग, 'दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए'
टीवीके सरकार का पहला बजट 'निराशाजनक', चुनावी वादों को किया नजरअंदाज: एमके स्टालिन
टीवीके सरकार का पहला बजट 'निराशाजनक', चुनावी वादों को किया नजरअंदाज: एमके स्टालिन
'यहां कोई जादू नहीं दिख रहा', जोधपुर दौरे पर पहुंचे गजेंद्र सिंह शेखावत का अशोक गहलोत पर तंज
'यहां कोई जादू नहीं दिख रहा', जोधपुर दौरे पर पहुंचे गजेंद्र सिंह शेखावत का अशोक गहलोत पर तंज
'आप सदन चलने कहां दे रहे हैं, जो गृह मंत्री संसद आएं', राहुल गांधी को भाजपा का जवाब
'आप सदन चलने कहां दे रहे हैं, जो गृह मंत्री संसद आएं', राहुल गांधी को भाजपा का जवाब
राहुल गांधी को भाजपा का जवाब, मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर राजनीति न चमकाए कांग्रेस
राहुल गांधी को भाजपा का जवाब, मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर राजनीति न चमकाए कांग्रेस
पहली तिमाही में केंद्र सरकार की शुद्ध प्राप्तियां 10.49 लाख करोड़ रुपए रहीं, जो पूरे साल के लक्ष्य का 28.7 प्रतिशत है
मणिपुर: मुख्यमंत्री और आईटीबीपी आईजी ने आंतरिक सुरक्षा और नागरिक कार्रवाई पर चर्चा की
मणिपुर: मुख्यमंत्री और आईटीबीपी आईजी ने आंतरिक सुरक्षा और नागरिक कार्रवाई पर चर्चा की
तमिलनाडु ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के लिए दी जाने वाली राहत राशि बढ़ाकर 7000 रुपए की
तमिलनाडु ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के लिए दी जाने वाली राहत राशि बढ़ाकर 7000 रुपए की
अनुच्छेद-370 हटने के सात साल : जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, निवेश, पर्यटन के क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव
बेरोजगारी की वजह से मंदिरों में चोर चोरी करने पहुंचे, नौकरी मिलेगी तो अपराध कम होगा : किशोरी पेडनेकर
बेरोजगारी की वजह से मंदिरों में चोर चोरी करने पहुंचे, नौकरी मिलेगी तो अपराध कम होगा : किशोरी पेडनेकर
तमिलनाडु: एआईएडीएमके नेता पलानीस्वामी ने टीवीके के पहले बजट को 'शून्य' अंक दिए
तमिलनाडु: एआईएडीएमके नेता पलानीस्वामी ने टीवीके के पहले बजट को 'शून्य' अंक दिए
'मुझे उन युवाओं पर गर्व है', प्रदर्शनकारियों से मिलकर बोले राहुल गांधी
'मुझे उन युवाओं पर गर्व है', प्रदर्शनकारियों से मिलकर बोले राहुल गांधी
जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद शांति और विकास का नया दौर: हिमाचल के गवर्नर कविंदर गुप्ता
जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद शांति और विकास का नया दौर: हिमाचल के गवर्नर कविंदर गुप्ता
केंद्रीय गृह मंत्री पर राहुल गांधी के आरोप निराधार, प्रमाण है तो सामने लाएं: विक्रम सिंह
केंद्रीय गृह मंत्री पर राहुल गांधी के आरोप निराधार, प्रमाण है तो सामने लाएं: विक्रम सिंह
अभिषेक बनर्जी के आमतला पार्टी कार्यालय पर कार्रवाई को लेकर रोक 21 अगस्त तक बढ़ी, 18 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई
आखिर बांकीपुर उपचुनाव भाजपा क्यों, कैसे और किसके चलते हारी? पूछता है बिहार!
बांकीपुर उपचुनाव 2026 में भाजपा की हार अब हर किसी को नहीं पच रही है। इसलिए लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि भाजपा क्यों हारी? कैसे पराजित हुई? और किसके चलते यह राजनीतिक दुर्दिन देखना पड़ा? बिहार वासी जानना चाहते हैं! क्योंकि 9 माह पहले ही तो उन्होंने जदयू नीत एनडीए गठबंधन को अभूतपूर्व बहुमत दिया था! अटकलें हैं कि क्या जदयू नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हुई 'सियासी बदतमीजी' के बाद भाजपा अआखिर ब अकेले नहीं चल पाएगी, क्योंकि टीम नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के हवा-हवाई रणनीतिकारों को असली राजनीतिक जमीन पर तगड़ी पटकनी दिला डाली है! जानकारों की मानें तो चाहे चिराग पासवान हों, जीतनराम मांझी हों या उपेंद्र कुशवाहा हों, या मुंह फुलाए सवर्ण भाजपाई, सबकी खामोशी या राजनीतिक बकवास दोनों भाजपा पर भारी पड़ गई। वह हो गया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी! इसलिए ज्वलंत प्रश्न उठता है कि क्या भाजपा केवल अपने सहयोगियों और सहयोगी दलों दोनों के भितरघात की वजह से हारी है? क्योंकि ऐसे मतदान केंद्र जहां सहयोगी दल परंपरागत रूप से मजबूत रहे हैं, फिर भी वहां भाजपा को असामान्य रूप से कम वोट मिले हैं। खुद पार्टी और गठबंधन के नेताओं द्वारा दबी जुबान में ये बातें कहीं जा रही हैं, ताकि उनका महत्व बढ़े। इसे भी पढ़ें: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर की जीत के सियासी मायने चौंकाने वाले लिहाजा, सुलगते सवाल उठने लगे कि आखिर बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री (CM) बनने के बाद हुए पहले ही बांकीपुर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार को जिस प्रकार की तगड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा, वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंतरिक युगलबंदी के खिलाफ किसी अंदरूनी राजनीतिक साजिश का द्योतक तो नहीं है! चर्चा तो यहां तक हो रही है कि आनन-फानन में जिस तरह से पार्टी उम्मीदवार बदला गया, उस साजिश के पीछे केंद्रीय मंत्री अमित शाह की टीम में उपजे अंतर्विरोधों और आरएसएस से जुड़े दिग्गजों की परोक्ष भूमिका तो कहीं नहीं है, जो कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अव्यवहारिक पैराशूट नियुक्ति के बाद से ही अंदर ही अंदर खफा चल रहे थे और मौका मिलते ही उन्हें, उनकी ही जमीन पर असली जातीय और पार्टीगत दोनों राजनीतिक औकात दिखा दी! ऐसा इसलिए कि जो पार्टी दुर्लभ से दुर्लभतम चुनाव जीत जाती है, वह आखिर अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा छोड़ी हुई इकलौती सीट, जिस पर गत 30 वर्षों से 'पिता-पुत्र' का कब्जा रहा हो, वह अचानक हार जाए। खुद पटना के पीढ़ी दर पीढ़ी वाले भाजपा समर्थक संभ्रांत लोग भी अचंभित रह गए हैं कि ये क्या हो गया? क्या 'लालू की नीति' दबे पांव वेश बदलकर उनके पुत्र तेज प्रताप यादव के शह पर पटना में आ गई? क्या सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं को अपेक्षित स्तर पर सक्रिय नहीं किया गया? क्या स्थानीय स्तर पर असंतोष या गुटबाजी को शांत नहीं किया गया? क्या उम्मीदवार चयन को लेकर नाराज़गी नहीं भांपी जा सकी? क्या विपक्ष के प्रभावी ध्रुवीकरण का अंदाजा भाजपा रणनीतिकार नहीं लगा पाए? क्या स्थानीय मुद्दे और सत्ता-विरोधी भावना प्रबल रही और मतदान प्रबंधन यानी बूथ मैनेजमेंट में कमी बरती गई? उनका सीधा सवाल यह भी है कि आखिर पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद, जदयू सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ सी पी ठाकुर (सांसद विवेक ठाकुर के पिता), राज्य सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव और अशोक चौधरी के मोहल्लों से जुड़े मतदान केंद्रों पर भी भाजपा प्रत्याशी कैसे पिछड़े और प्रशांत किशोर वहां भी बढ़त बनाए रहे। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बूथ की भी यही स्थिति रही। आखिर यह सब सियासी प्रपंच कैसे और क्यों संभव हुआ? क्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बदलने के लिए इतना बड़ा आत्मघाती षड्यंत्र सवर्णों के नेताओं ने अपने ही खिलाफ रच दिया? क्या किसी ने इस हेतु नई दिल्ली और नागपुर से इशारा भी किया था? बात पचने वाली तो बिल्कुल भी नहीं है। सवाल है कि क्या आरएसएस और भाजपा के जमीनी तालमेल की कमी ही भाजपा के खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण है। क्या भाजपा और उसके वैचारिक-संगठनात्मक नेटवर्क के बीच स्थानीय स्तर पर समन्वय में कमी रही? क्या उम्मीदवार चयन या स्थानीय असंतोष का प्रभाव पड़ा? क्या विपक्ष ने नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनाए? क्या कम मतदान का असर भाजपा के पारंपरिक मतदाता आधार पर पड़ा? सवाल यह भी है कि क्या जदयू के पूर्वमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने द्वारा ही बनवाए हुए भाजपाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सियासी बदला ले लिया गया है? या फिर पूर्वमुख्यमंत्री व कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, और पूर्व कानून मंत्री व सांसद रविशंकर प्रसाद के अलावा ऋतुराज सिन्हा और संजय मयूख जैसे दिग्गज कायस्थ नेताओं ने निजी कारणों से भितरघात किया/कराया है? क्या लोजपा रामविलास के नेता व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का भी भाजपा को दिली सहयोग नहीं मिला? क्या उपेंद्र कुशवाहा की चुप्पी और जीतनराम मांझी और नागमणि जैसों के विषैले बोलों की कीमत भाजपा ने चुकाई है। वहीं, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यूजीसी बिल विवाद, ओबीसी/दलितों को ज्यादा कानूनी तरजीह दिए जाने, हिंदुत्व को गफलत में रखने और राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण के अलावा भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण आदि ने सवर्णों के बीच भाजपा की राजनीतिक साख को गहरी चोट पहुंचाई है। आलम यह बताया गया है कि ओबीसी/दलित वोट बैंक भाजपा के साथ पूरी तरह से नहीं जुटा पाया है,जबकि सवर्णों का सजग तबका अपने बच्चों के भविष्य के खातिर भाजपा से दूर चला जा रहा है, या विकल्प ढूंढ रहा है। क्या जन सुराज पार्टी में वह विकल्प दिखाई दे चुकी है? क्या सवर्णों ने बीजेपी को धोखा दिया या ओबीसी और दलितों ने या फिर तीनों वर्गों के समृद्ध तबके ने? देखा जाए तो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने शोषित, दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यक समाज की राजनीति को धार देने की कोशिश तो की थी, पर कामयाबी नहीं मिली। लिहाजा, इस चुनाव में उन्होंने न केवल मुद्दे बदलते, बल्कि मोदी-शाह-सम्राट पर सीधे निशाना साधकर ही सफलता के इस मुकाम तक पहुंचे हैं। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, बिहार में भाजपा के लिए जन सुराज पार्टी अब एक वास्तविक चुनावी चुनौती बन चुकी है, जिसको राष्ट्रीय विस्तार पाते देर नहीं लगेगी। क्योंकि राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थिति यही चुगली कर रही है। बांकीपुर उपचुनाव को प्रशांत किशोर ने व्यक्तिगत अभियान में बदल दिया था। उनकी पार्टी जन सुराज ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया और प्रशांत किशोर ने स्वयं मैदान में उतरकर इसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला बना दिया। इससे विपक्षी वोटों का ध्रुवीकरण हुआ और भाजपा विरोधी मत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राजद प्रत्याशी की ओर न जाकर अपेक्षाकृत अधिक एक दिशा में गए जिससे जनसुराज को विजयश्री मिली और भाजपा को नुकसान हुआ। जहां तक एंटी-इनकंबेंसी की बात है तो बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का गढ़ था, जहां लगातार एक ही दल के प्रतिनिधित्व से कुछ मतदाताओं में बदलाव की इच्छा पैदा हो गई प्रतीत होती है। इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे भी हावी रहे। विपक्ष ने पूर्व घोषित उम्मीदवार के अकस्मात बदलाव, बूथ प्रबंधन, स्थानीय संगठन और मतदान प्रतिशत जैसे कारक को भी उछाला, जो निर्णायक भूमिका निभाए। जबकि शहरी मतदाता का बदलता रुझान भाजपा पर भारी पड़ गया। शिक्षित और युवा मतदाताओं ने परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया, क्योंकि यूजीसी बिल का सर्वाधिक प्रभाव उन्हीं पर पड़ता। इसलिए इन बातों का प्रभाव परिणाम पर पड़ा है। पहले सीजेपी द्वारा केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे स्वीकार करवाना और अब जेएसपी के प्रशांत किशोर द्वारा भाजपा का मजबूत गढ़ तोड़ दिया जाना बहुत कुछ संकेत दे रहा है, जो यह साबित करता है कि उनकी पार्टी केवल वैचारिक मंच नहीं, बल्कि चुनाव जीतने की क्षमता भी रखती है। वहीं, अब बिहार और देश की राजनीति में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बढ़ चुकी है, क्योंकि जन सुराज पार्टी अब एक स्थायी ताकत बन चुकी है। भविष्य के चुनावों में मुकाबला केवल एनडीए बनाम महागठबंधन तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि तीसरा गुट भी बनेगा। यही नहीं, भाजपा को अब अपने पारंपरिक शहरी और सवर्ण वोट बैंक की समीक्षा भी करनी पड़ेगी, क्योंकि उसके शहरी गढ़ में ही सेंध लगी है। लिहाजा पार्टी यह जानने का प्रयास अवश्य करेगी कि क्या पराजय का कारण उम्मीदवार बदलने से उपजा अंदरूनी रोष, संगठन की अंदरूनी खींचातानी, स्थानीय मुद्दे या मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव तो नहीं था। क्या बिहार में संगठन बनाम चेहरे की बहस तेज होगी। यहां पर यह चर्चा भी होगी कि क्या मजबूत संगठन हमेशा निर्णायक है, या प्रभावशाली स्थानीय नेतृत्व और अभियान भी स्थापित दलों को चुनौती दे सकते हैं? क्या भाजपा 2030 के विधानसभा चुनाव की रणनीतियाँ बदल सकती है? क्या सभी प्रमुख दल उम्मीदवार चयन, सामाजिक समीकरण, शहरी मतदाताओं और युवा वोटरों को लेकर अपनी अपनी रणनीति की समीक्षा करेंगे? इसलिए, बांकीपुर का परिणाम केवल एक सीट का परिणाम नहीं माना जाएगा; बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में भी देखा जाएगा। भाजपा की हार के पीछे निम्नलिखित संभावित कारण हो सकते हैं, जैसे: एक, परंपरागत भाजपा मतदाताओं के एक हिस्से का जन सुराज की ओर जाना। दो, शहरी, युवा और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं का रुझान बदलना। तीन, कम मतदान प्रतिशत का भाजपा के संगठनात्मक लाभ को कम कर देना। और चार, उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और चुनावी रणनीति का प्रभाव। चूंकि एग्जिट पोल और कुछ चुनाव-पूर्व विश्लेषणों में यह दावा किया गया था कि सवर्ण मतों का एक हिस्सा प्रशांत किशोर की ओर जाने के संकेत हैं, वह बात अब सच प्रतीत होती है। बताया जाता है राष्ट्रीय अध्यक्ष की सोच व समझ पर भी इस चुनाव का असर पड़ेगा, क्योंकि बांकीपुर जैसी लंबे समय से भाजपा की सीट के उनके हाथ से निकलते ही संगठन की चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठ चुके हैं। लेकिन केवल एक उपचुनाव की हार से राष्ट्रीय अध्यक्ष की स्थिति पर बड़ा असर पड़ना तय नहीं माना जाता। पार्टी आमतौर पर कई चुनावों के समग्र प्रदर्शन के आधार पर ही संगठनात्मक निर्णय लेती है। जहाँ तक मुख्यमंत्री पर असर की बात है तो, चूँकि यह चुनाव राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ है, इसलिए विपक्ष इसे सरकार के कामकाज पर जनमत के रूप में पेश कर सकता है। चूंकि हार का अंतर बड़ा है और भाजपा के पारंपरिक क्षेत्रों में भी गिरावट दिखी है, इसलिए सरकार की रणनीति, संगठन और सामाजिक समीकरणों की समीक्षा हो सकती है। वहीं आगामी बिहार विधानसभा चुनाव पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि यह परिणाम व्यापक जनरुझान का संकेत प्रतीत होता है, जो भाजपा और एनडीए को उम्मीदवार चयन, सामाजिक गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और चुनावी संदेश में बदलाव करने की जरूरत की चुगली कर रहा हैं। वहीं, यदि इसे केवल स्थानीय परिस्थितियों वाला परिणाम माना जाता है, तो इसका प्रभाव सीमित भी रह सकता है। इसलिए बांकीपुर के परिणाम ने राजनीतिक संदेश अवश्य दिया है, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष या मुख्यमंत्री की स्थिति पर उसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी नेतृत्व इस हार के कारणों का क्या आकलन करता है और आने वाले चुनावों में उसका प्रदर्शन कैसा रहता है। इतना तय है कि भाजपा की चुनावी हार आमतौर पर कई सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक कारणों के संयुक्त प्रभाव के चलते हुई है। चूंकि भाजपा का पारंपरिक वोट अपेक्षा से कम निकला है, इसलिए संगठनात्मक समन्वय, बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर सवाल उठते हैं। भाजपा ने बूथ स्तर पर व्यापक संगठनात्मक तैयारी की थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को लगाया था। फिर भी इस चुनाव में कम मतदान, त्रिकोणीय मुकाबला, युवा मतदाताओं का रुझान, स्थानीय मुद्दे और विपक्ष की रणनीति जैसे कई अन्य कारकों के चलते उसे पराजय का सामना करना पड़ा। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई गुरुवार दोपहर दो बजे होगी, कपिल सिब्बल ने रखी दलीलें
शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई गुरुवार दोपहर दो बजे होगी, कपिल सिब्बल ने रखी दलीलें
असम में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दे रही भारतीय जनता पार्टी: बदरुद्दीन अजमल
असम में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दे रही भारतीय जनता पार्टी: बदरुद्दीन अजमल
पंजाब विधानसभा में विपक्ष से दुर्व्यवहार, दबाई जा रही है आवाज: प्रताप सिंह बाजवा
पंजाब विधानसभा में विपक्ष से दुर्व्यवहार, दबाई जा रही है आवाज: प्रताप सिंह बाजवा
राष्ट्रमंडल खेल 2026: चुनौतियों के बीच चमका भारत
राष्ट्रमंडल खेल केवल पदकों की प्रतियोगिता नहीं बल्कि किसी देश की खेल संस्कृति, प्रतिभा विकास, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण व्यवस्था और दीर्घकालिक खेल नीति का दर्पण भी होते हैं। ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में 23 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों का समापन भारत के लिए अनेक उपलब्धियों, कुछ अधूरी अपेक्षाओं और भविष्य की नई संभावनाओं के साथ हुआ। भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार प्रतियोगिता के कार्यक्रम में निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी, टेबल टेनिस इत्यादि भारत के कई पारंपरिक मजबूत खेल शामिल ही नहीं थे। इन खेलों में भारत सामान्यतः बड़ी संख्या में पदक जीतता रहा है। ऐसे में सीमित अवसरों के बावजूद चौथा स्थान बनाए रखना भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता और जुझारूपन का प्रमाण है। पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने 70 स्वर्ण सहित कुल 171 पदक जीतकर एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा। इंग्लैंड 110 पदकों के साथ दूसरे तथा कनाडा 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। मेजबान स्कॉटलैंड भी 39 पदकों के साथ प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए पांचवें स्थान पर रहा। भारत और स्कॉटलैंड के कुल पदक समान रहे लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या के आधार पर भारत चौथे स्थान पर रहा। यदि पिछले राष्ट्रमंडल खेलों के प्रदर्शन की तुलना करें तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। वर्ष 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य सहित कुल 66 पदक जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया था। उस प्रतियोगिता में निशानेबाजी ने अकेले 16 पदक दिलाकर भारत की सफलता में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा मुक्केबाजी, भारोत्तोलन और कुश्ती में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था। 2022 में इंग्लैंड के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य सहित कुल 61 पदक जीतकर चौथा स्थान प्राप्त किया था। तब कुश्ती में भारत के सभी 12 पहलवानों ने पदक जीतकर इतिहास रचा था जबकि भारोत्तोलन और टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की थी। इन दोनों आयोजनों की तुलना में 2026 के ग्लासगो खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या घटकर 39 रह गई। पहली दृष्टि में यह गिरावट चिंताजनक लग सकती है किंतु यदि प्रतियोगिता के कार्यक्रम का विश्लेषण किया जाए तो स्पष्ट होता है कि भारत के अनेक पदक संभावित खेल इस बार आयोजित ही नहीं किए गए। इसलिए केवल पदकों की संख्या के आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। वास्तव में भारत ने उपलब्ध अवसरों का काफी प्रभावी उपयोग किया और जिन खेलों में उसने भाग लिया, उनमें उल्लेखनीय सफलता अर्जित की। इसे भी पढ़ें: Gujarat CM भूपेंद्र पटेल को सौंपा गया Commonwealth Games ध्वज, 2030 की तैयारियां शुरू इस बार भारतीय मुक्केबाजों ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ अभियान चलाया। भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल दस पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। महिला मुक्केबाजों ने विशेष रूप से प्रभावित किया। जैस्मीन लम्बोरिया, प्रिया घनघस, साक्षी चौधरी और प्रीति पवार जैसी युवा खिलाड़ियों ने यह संकेत दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाजी का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन स्वर्ण से भले चूक गई लेकिन उनका अनुभव और प्रदर्शन भारतीय मुक्केबाजी की मजबूती का प्रमाण बना रहा। पुरुष वर्ग में भी सचिन सिवाच और अंकुश सहित अन्य मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की पदक संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह सफलता दर्शाती है कि भारतीय मुक्केबाजी अब केवल कुछ खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रही बल्कि उसके पास प्रतिभाओं की व्यापक श्रृंखला तैयार हो चुकी है। भारोत्तोलन ने भी भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखी। पिछले एक दशक में इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने निरंतर प्रगति की है। ग्लासगो में भी उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि विश्व स्तर पर भारत अब एक मजबूत शक्ति बन चुका है। जूडो में भारतीय खिलाड़ियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण पदक जीतकर यह संदेश दिया कि यह खेल भी भारत में तेजी से विकसित हो रहा है। हालांकि जूडो खिलाड़ी तूलिका मान का डोपिंग रोधी नियमों के अंतर्गत तीन बार ‘वेयरअबाउट्स’ संबंधी जानकारी देने में विफल रहने के कारण अस्थायी निलंबन और प्रतियोगिता से बाहर होना भारतीय दल के लिए एक बड़ा झटका था। यह घटना बताती है कि विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा में केवल खेल कौशल ही नहीं, डोपिंग रोधी नियमों के प्रति पूर्ण जागरूकता और अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है। एथलेटिक्स में भारत का प्रदर्शन इस बार विशेष चर्चा का विषय रहा। गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे एक ही राष्ट्रमंडल खेल में ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाओं में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। इससे पहले भारत को इन लंबी दूरी की स्पर्धाओं में कभी पदक नहीं मिला था। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के बदलते स्वरूप और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रणाली की सफलता का संकेत देती है। पैरा खेलों में भी भारत ने 3 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य सहित कुल सात पदक जीतकर नया इतिहास बनाया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राष्ट्रमंडल खेलों के पैरा वर्ग में भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बराबर है। यदि भारतीय दल के प्रदर्शन का गहन विश्लेषण किया जाए तो स्पष्ट होता है कि इस बार महिलाओं ने शानदार योगदान दिया। महिला खिलाड़ियों ने 8 स्वर्ण सहित कुल 16 पदक जीतकर भारतीय खेलों में बढ़ती महिला भागीदारी और उत्कृष्टता का परिचय दिया। दूसरी ओर पुरुष खिलाड़ियों ने कुल 23 पदक जीतकर संतुलित प्रदर्शन किया। फिर भी यह स्वीकार करना होगा कि 2026 का प्रदर्शन भारत के लिए संतोषजनक अवश्य है लेकिन ऐतिहासिक नहीं। वर्ष 2010 के नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल आज भी भारत के स्वर्णिम अध्याय बने हुए हैं, जब भारत ने 38 स्वर्ण सहित कुल 101 पदक जीतकर ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा स्थान प्राप्त किया था। घरेलू मैदान का लाभ अपनी जगह है लेकिन वह प्रदर्शन यह भी दर्शाता है कि यदि मजबूत खेल अवसंरचना, व्यापक खिलाड़ी आधार और सुव्यवस्थित तैयारी हो तो भारत शीर्ष देशों को कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखता है। भारत की खेल यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष अब यह है कि देश अब कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं रह गया है। पहले भारत की अधिकांश सफलता निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और भारोत्तोलन तक सीमित रहती थी जबकि अब मुक्केबाजी, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा खेलों में भी लगातार नए खिलाड़ी उभर रहे हैं। यह परिवर्तन भारत की खेल नीति, खेलो इंडिया जैसी योजनाओं, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं, खेल विज्ञान, पोषण और खिलाड़ियों को मिलने वाले आर्थिक सहयोग का सकारात्मक परिणाम है। हालांकि अभी भी प्रतिभा पहचान, जमीनी स्तर पर कोचिंग, खेल चिकित्सा, मानसिक प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी अनुभव को और मजबूत करने की आवश्यकता बनी हुई है। अब भारतीय खेल जगत की निगाहें वर्ष 2030 पर टिक गई हैं, जब राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी अहमदाबाद करेगा। यह केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि भारत के लिए विश्व के सामने अपनी खेल क्षमता, आधुनिक अवसंरचना और संगठनात्मक दक्षता प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर होगा। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों ने भारत को यह विश्वास अवश्य दिलाया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, भारतीय खिलाड़ी हर मंच पर देश का गौरव बढ़ाने का सामर्थ्य रखते हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन उपलब्धियों को अंतिम लक्ष्य न मानकर उन्हें ओलंपिक और वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाए। जिन खेलों में भारत विश्वस्तरीय शक्ति बन चुका है, उन्हें और सशक्त किया जाए तथा एथलेटिक्स, तैराकी, जिम्नास्टिक और अन्य ओलंपिक खेलों में भी दीर्घकालिक निवेश बढ़ाया जाए। यदि भारत अपनी खेल नीतियों में निरंतरता बनाए रखता है, खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, विश्वस्तरीय सुविधाएं और दीर्घकालिक समर्थन उपलब्ध कराता है तो वह दिन दूर नहीं, जब राष्ट्रमंडल ही नहीं, ओलंपिक और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भी भारत पदक तालिका के शीर्ष देशों में नियमित रूप से दिखाई देगा। - योगेश कुमार गोयल (लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)
जगन ने आंध्र सरकार टीडीपी पर तंबाकू किसानों के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया
जगन ने आंध्र सरकार टीडीपी पर तंबाकू किसानों के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया
'महिला प्रदर्शनकारियों के घर भेजे गए गुंडे....' राहुल गांधी ने किया सनसनीखेज दावा, जानिए क्या है पूरा मामला
अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी बनाम अखिलेश की सियासत अब सीधे जातीय समीकरणों के अखाड़े में उतर चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां समाजवादी पार्टी के PDA की नई-नई राजनीतिक व्याख्याएं गढ़ते हुए कभी इसे परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी तो कभी प्रोडक्शन हाउस ऑफ दंगाई एंड अपराधी बताते हैं, वहीं अब अखिलेश यादव ने उसी PDA का नया अर्थ निकालकर भाजपा को उसी के अंदाज में जवाब दिया है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि PDA में PD का मतलब पंडित है। यानी जिस नारे को भाजपा लगातार निशाने पर ले रही थी, उसे सपा प्रमुख ने ब्राह्मण राजनीति के नए दरवाजे में बदलने की कोशिश कर दी। दरअसल, समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर लखनऊ में आयोजित प्रबुद्ध समाज सम्मेलन श्रद्धांजलि से ज्यादा राजनीतिक संदेश का मंच बन गया। अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र को समाजवादी आंदोलन का बड़ा चेहरा बताते हुए ब्राह्मण समाज को सम्मान देने का संदेश दिया और साफ संकेत दिया कि 2027 की लड़ाई में सपा सिर्फ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ब्राह्मण मतदाताओं को भी अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इसे भी पढ़ें: विधानसभा में बवाल पर भड़के योगी, बोले- सपा को संविधान पर भरोसा नहीं, राम मंदिर विवाद पर कही बड़ी बात अखिलेश ने योगी सरकार पर कई मोर्चों से हमला बोला। उन्होंने बिना नाम लिए विकास दुबे एनकाउंटर का जिक्र करते हुए कहा कि जिस दिन गाड़ी पलटी थी, उस दिन गाड़ी नहीं, सरकार पलटने से बच गई थी। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि समय आने पर सैटेलाइट इमेज सामने आएगी, जिससे पूरी कहानी साफ हो जाएगी। राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गड़बड़ी के मुद्दे को उठाते हुए भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि हिंदू धर्म में दान की रसीद नहीं मांगी जाती, लेकिन अब रसीदों की राजनीति हो रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को भी उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ हथियार बनाया। हम आपको बता दें कि ब्राह्मणों को लेकर अखिलेश का यह नया दांव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह वर्ग लंबे समय तक सत्ता की धुरी रहा है। आजादी के बाद शुरुआती दशकों में ब्राह्मण मतदाता मुख्य रूप से कांग्रेस के साथ रहे। मंडल-कमंडल की राजनीति के दौर में उनका बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर चला गया और राम मंदिर आंदोलन ने इस रिश्ते को और मजबूत किया। हालांकि 2007 में मायावती ने ब्राह्मण-दलित सोशल इंजीनियरिंग के सहारे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर यह साबित कर दिया था कि ब्राह्मण वोट पूरी तरह किसी एक दल की स्थायी जागीर नहीं हैं। लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में मोदी के उभार के बाद से ही यह वर्ग भाजपा के साथ रहा लेकिन तमाम कारणों के चलते ब्राह्मण भाजपा से नाराज बताये जा रहे हैं जिसके चलते अब एक बार फिर यही वर्ग सभी राजनीतिक दलों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यही वजह है कि बहुजन समाज पार्टी भी इस मुकाबले में पीछे नहीं है। मायावती पहले ही ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट देने और उन्हें सम्मानजनक भागीदारी देने की रणनीति का ऐलान कर चुकी हैं। उनका दावा है कि ब्राह्मणों सहित सवर्ण समाज के हित सबसे सुरक्षित बसपा में हैं और 2007 जैसा समीकरण दोबारा बन सकता है। ऐसे में साफ है कि 2027 के चुनाव में ब्राह्मण वोटों के लिए भाजपा, सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। उधर, उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र भी इसी राजनीतिक तल्खी की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर लोकतंत्र और विकास विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अनुपूरक बजट, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने जैसे जनहित के मुद्दों पर चर्चा तक नहीं होने दी। योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने के साथ पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई है, लेकिन विपक्ष का मकसद केवल व्यवधान पैदा करना था। बहरहाल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब नारे भी हथियार हैं और उनकी परिभाषाएं भी। योगी हर मौके पर PDA की नई व्याख्या गढ़कर सपा पर हमला बोल रहे हैं, तो अखिलेश उसी PDA में पंडित जोड़कर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। मायावती भी ब्राह्मण कार्ड खेल चुकी हैं। ऐसे में यह साफ है कि अगले साल का विधानसभा चुनाव सिर्फ विकास और कानून-व्यवस्था पर नहीं, बल्कि नारों, जातीय समीकरणों और राजनीतिक प्रतीकों की जंग पर भी लड़ा जाएगा। -नीरज कुमार दुबे
शशि थरूर ने एलजीबीटीक्यूएआईए-प्लस पैनल के काम में देरी पर सवाल उठाए
शशि थरूर ने एलजीबीटीक्यूएआईए-प्लस पैनल के काम में देरी पर सवाल उठाए
पाकिस्तान में गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान से सत्ता गठबंधन में हलचल, '70 साल पुरानी व्यवस्था विफल' बताने पर उठे सवाल
तिरंगा विवाद पर महबूबा के बचाव में उतरे उमर अब्दुल्ला, बोले- गलती से उल्टा पकड़ा होगा झंडा
तिरंगा विवाद पर महबूबा के बचाव में उतरे उमर अब्दुल्ला, बोले- गलती से उल्टा पकड़ा होगा झंडा
रेगिस्तान की इस आवाज ने दुनिया को बनाया अपना दीवाना, पढ़ें स्वरूप खान की सफलता की कहानी
रेगिस्तान की इस आवाज ने दुनिया को बनाया अपना दीवाना, पढ़ें स्वरूप खान की सफलता की कहानी
आतंकवाद पीड़ितों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरियां, न्याय और पुनर्वास की दिशा में एक नया अध्याय : एलजी सिन्हा
पॉलिटिकल पार्टी नहीं बल्कि प्रेशर ग्रुप होगी कॉकरोच जनता पार्टी, अभिजीत दीपके ने बताया अपना आगे का प्लान
कर्नाटक: मंत्री खंड्रे ने विकसित भारत-जी राम जी को लागू करने के दिशा-निर्देशों की समय सीमा तय की
कर्नाटक: मंत्री खंड्रे ने विकसित भारत-जी राम जी को लागू करने के दिशा-निर्देशों की समय सीमा तय की
'पप्पू यादव की मानसिकता पाकिस्तान जैसी, संसद की सदस्यता निलंबित होनी चाहिए', साधु-संतों की मांग
'पप्पू यादव की मानसिकता पाकिस्तान जैसी, संसद की सदस्यता निलंबित होनी चाहिए', साधु-संतों की मांग
अदालती कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा : सुप्रीम कोर्ट
अदालती कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा : सुप्रीम कोर्ट
अनुच्छेद 370 हटाते समय किया गया एक भी वादा पूरा नहीं हुआ : इमरान मसूद
अनुच्छेद 370 हटाते समय किया गया एक भी वादा पूरा नहीं हुआ : इमरान मसूद
प्रबुद्धजन सम्मेलन में अखिलेश बोले, भाजपा ने राम मंदिर से लेकर जनता के भरोसे तक को नुकसान पहुंचाया
प्रबुद्धजन सम्मेलन में अखिलेश बोले, भाजपा ने राम मंदिर से लेकर जनता के भरोसे तक को नुकसान पहुंचाया
ईडी ने चिट फंड घोटाले के मामले में वाईएसआर कांग्रेस के नेता से जुड़ी जगहों पर ली तलाशी
ईडी ने चिट फंड घोटाले के मामले में वाईएसआर कांग्रेस के नेता से जुड़ी जगहों पर ली तलाशी
भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर बिना वजह संसद की कार्यवाही बाधित करने और बहस से भागने का लगाया आरोप
भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर बिना वजह संसद की कार्यवाही बाधित करने और बहस से भागने का लगाया आरोप
कोलकाता में स्वतंत्रता दिवस की झांकियों में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को दिखाया जाएगा
असम बाढ़: जेपी नड्डा ने राहत शिविरों का किया दौरा, कहा- केंद्र से हर संभव मदद मिलेगी
असम बाढ़: जेपी नड्डा ने राहत शिविरों का किया दौरा, कहा- केंद्र से हर संभव मदद मिलेगी
गाड़ी का बीमा नहीं तो नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से करोड़ों वाहन मालिकों पर पड़ेगा असर, पढ़े पूरी खबर
मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई की जमानत की शर्तों में ढील दी
मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई की जमानत की शर्तों में ढील दी

