बीजेपीमेंबड़ेबदलावकीउल्टीगिनतीशुरू, नईटीमऔरराज्यपालोंकीसूचीपरलगसकतीमुहर
नईदिल्ली. भारतीयजनतापार्टीमेंबड़ेसंगठनात्मकऔरराजनीतिकबदलावोंकीतैयारियांअंतिमचरणमेंपहुंचगईहैं. रक्षामंत्रीराजनाथसिंहकेआवासपरभाजपाऔरराष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघ (आरएसएस) केशीर्षनेताओंकीमैराथनबैठककेबादसंकेतमिलेहैंकिपार्टीअध्यक्षनितिननवीनकीनईकेंद्रीयटीमकाऐलानकभीभीकियाजासकताहै. सूत्रोंकेअनुसारप्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदीकेजी-7 शिखरसम्मेलनसेलौटनेकेबादइसप्रक्रियाकोअंतिमरूपदियाजासकताहै. इसकेसाथहीकेंद्रसरकारऔरराज्यपालोंकेस्तरपरभीमहत्वपूर्णफेरबदलकीसंभावनाजताईजारहीहै. भाजपासूत्रोंकेमुताबिकरक्षामंत्रीराजनाथसिंहकेसरकारीआवासपरहुईइसमहत्वपूर्णबैठकमेंकेंद्रीयगृहमंत्रीअमितशाह, भाजपाअध्यक्षनितिननवीन, आरएसएसकेवरिष्ठपदाधिकारीअरुणकुमारऔरशिवप्रकाशसहितकईशीर्षनेतामौजूदरहे. बैठककरीबचारघंटेतकचलीऔरआधीरातकेबादसमाप्तहुई. राजनीतिकगलियारोंमेंइसबैठककोभाजपाकेआगामीसंगठनात्मकपुनर्गठनऔरव्यापकराजनीतिकरणनीतिसेजोड़करदेखाजारहाहै. सूत्रोंकाकहनाहैकिबैठकमेंकेवलसंगठनात्मकबदलावोंपरहीचर्चानहींहुई, बल्किसरकारऔरसंवैधानिकपदोंसेजुड़ेसंभावितफेरबदलपरभीविस्तारसेविचार-विमर्शकियागया. भाजपानेतृत्वआनेवालेचुनावीवर्षोंकोध्यानमेंरखतेहुएसंगठनऔरसरकारदोनोंस्तरोंपरनईरणनीतितैयारकररहाहै. पार्टीकेएकवरिष्ठसूत्रनेबतायाकिअधिकमासकीअवधि 15 जूनकोसमाप्तहोचुकीहै. परंपरागतरूपसेभाजपाऔरउससेजुड़ेकईसंगठनइसअवधिमेंबड़ेराजनीतिकयासंगठनात्मकफैसलोंसेबचतेहैं. ऐसेमेंअबसंगठनात्मकबदलावोंकीघोषणाकेलिएरास्तासाफहोगयाहै. हालांकियहभीसंभवहैकिप्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदीके 19 जूनकोविदेशदौरेसेलौटनेकेबादहीअंतिमघोषणाएंकीजाएं. भाजपाअध्यक्षनितिननवीनकीनईटीमकोलेकरपार्टीकेभीतरलंबेसमयसेचर्चाचलरहीहै. मानाजारहाहैकिनईटीममें 11 राष्ट्रीयउपाध्यक्षऔरछहराष्ट्रीयमहासचिवोंकेपदोंपरमहत्वपूर्णबदलावदेखनेकोमिलसकतेहैं. पार्टीइसबारसंगठनमेंसामाजिकऔरक्षेत्रीयसंतुलनकोप्राथमिकतादेरहीहै. महिलाप्रतिनिधित्वबढ़ानेकेसाथ-साथविभिन्नजातीयसमूहोंकोभीपर्याप्तस्थानदिएजानेकीसंभावनाहै. सूत्रोंकेअनुसारभाजपानेतृत्वयुवाऔरअनुभवीनेताओंकेबीचसंतुलनबनानेकीरणनीतिपरकामकररहाहै. नईटीममेंऐसेनेताओंकोअवसरदियाजासकताहैजिन्होंनेसंगठनात्मकस्तरपरउल्लेखनीयकामकियाहै. साथहीकईवरिष्ठनेताओंकेअनुभवकाभीलाभउठानेकीयोजनाबनाईजारहीहै. आगामीविधानसभाचुनावोंकोदेखतेहुएभाजपाउनराज्योंकोभीविशेषमहत्वदेनेकीतैयारीमेंहैजहांअगलेवर्षचुनावहोनेहैं. गुजरात, उत्तरप्रदेशऔरउत्तराखंडजैसेराज्योंकेअलावाराजस्थान, मध्यप्रदेशऔरछत्तीसगढ़सेभीसंगठनमेंमहत्वपूर्णप्रतिनिधित्वदिएजानेकीसंभावनाजताईजारहीहै. पार्टीनेतृत्वचाहताहैकिचुनावीराज्योंकेप्रभावशालीनेताओंकोसंगठनमेंऐसीजिम्मेदारियांदीजाएंजोआगामीचुनावोंमेंलाभकारीसाबितहों. भाजपाकेकेंद्रीयसंगठनमेंपिछलेछहवर्षोंसेबड़ेबदलावनहींहुएहैं. जनवरी 2020 मेंजेपीनड्डाकेराष्ट्रीयअध्यक्षबननेकेबादगठितटीममेंअधिकांशपदाधिकारीअबतकअपनीजिम्मेदारियांनिभारहेहैं. ऐसेमेंनितिननवीनकेनेतृत्वमेंबननेवालीनईटीमकोभाजपासंगठनकेलिएएकनईशुरुआतकेरूपमेंदेखाजारहाहै. पार्टीनेहालकेदिनोंमेंकईनेताओंकीभूमिकाओंमेंबदलावकरसंकेतभीदिएहैंकिसंगठनात्मकपुनर्गठनकीप्रक्रियाशुरूहोचुकीहै. इसीमहीनेभाजपाकेराष्ट्रीयमहासचिवविनोदतावड़ेऔरतरुणचुघकोराज्यसभाभेजागयाहै. इनकेसाथराष्ट्रीयसचिवअलकागुर्जरऔरराजस्थानभाजपाकेपूर्वप्रदेशाध्यक्षसतीशपूनियाकोभीउच्चसदनमेंस्थानमिलाहै. दूसरीओरराष्ट्रीयमहासचिवडॉ. राधामोहनदासअग्रवालकोराज्यसभाकानयाकार्यकालनहींदियागयाहै. वहींकेंद्रीयराज्यमंत्रीरवनीतसिंहबिट्टूऔरजॉर्जकुरियनकाकार्यकाल 21 जूनकोसमाप्तहोनेजारहाहै. इसकेअलावाभाजपाकेवरिष्ठनेताऔरराष्ट्रीयमहासचिवअरुणसिंहभीनवंबरमेंराज्यसभासेसेवानिवृत्तहोनेवालेहैं. ऐसेमेंकईपदोंपरनएचेहरोंकेआनेकीसंभावनाबढ़गईहै. भाजपाकेभीतरयहभीचर्चाहैकिमौजूदाराष्ट्रीयमहासचिवोंमेंसेकुछनेताओंकोसरकारमेंजिम्मेदारीदीजासकतीहै. विनोदतावड़ेऔरतरुणचुघजैसेनेताओंकोसंगठनमेंउनकीप्रभावीभूमिकाऔरराजनीतिकप्रबंधनक्षमताकेलिएजानाजाताहै. ऐसेमेंयहदेखनादिलचस्पहोगाकिवेनईटीममेंबनेरहतेहैंयाफिरउन्हेंकेंद्रसरकारमेंमंत्रीपदजैसीनईजिम्मेदारीसौंपीजातीहै. सूत्रोंकायहभीकहनाहैकिपिछलेछहवर्षोंमेंसंगठनकेलिएकामकरनेवालेकईवरिष्ठनेताओंकोराज्यपालपदोंयाविभिन्नआयोगों, बोर्डोंऔरअर्ध-सरकारीसंस्थाओंमेंमहत्वपूर्णजिम्मेदारियांदेकरसम्मानितकियाजासकताहै. इसीकारणराज्यपालोंकेस्तरपरभीबड़ेफेरबदलकीचर्चाएंतेजहोगईहैं. भाजपानेतृत्वआगामीचुनावीचुनौतियोंकोध्यानमेंरखतेहुएसंगठनकोऔरअधिकचुस्त-दुरुस्तबनानाचाहताहै. पार्टीकाफोकसकेवलचुनावीसफलतातकसीमितनहींहै, बल्किदीर्घकालिकसंगठनात्मकविस्तारऔरनएनेतृत्वकोआगेलानेपरभीहै. यहीवजहहैकिनईटीममेंयुवाचेहरोंऔरअनुभवीनेताओंकामिश्रणदेखनेकोमिलसकताहै. सूत्रोंकेमुताबिकउत्तरप्रदेशसेराज्यसभाकीकरीबएकदर्जनसीटोंकाकार्यकालनवंबरमेंसमाप्तहोनेजारहाहै. ऐसेमेंजिनवरिष्ठनेताओंकोनईसंगठनात्मकटीममेंस्थाननहींमिलेगा, उन्हेंराज्यसभाकेमाध्यमसेसमायोजितकिएजानेकीसंभावनाभीजताईजारहीहै. इससेपार्टीनेतृत्वविभिन्नक्षेत्रोंऔरराज्योंकेनेताओंकोसंतुलिततरीकेसेअवसरदेनेकीरणनीतिपरकामकरसकेगा. राजनाथसिंहकेआवासपरहुईदेररातकीबैठककेबादभाजपाकेभीतरराजनीतिकहलचलतेजहोगईहै. पार्टीकार्यकर्ताओंऔरनेताओंकीनिगाहेंअबप्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदीकीवापसीऔरउसकेबादहोनेवालीसंभावितघोषणाओंपरटिकीहुईहैं. मानाजारहाहैकिआनेवालेकुछदिनोंमेंभाजपासंगठन, केंद्रसरकारऔरराज्यपालोंकेस्तरपरऐसेफैसलेसामनेआसकतेहैंजोआगामीवर्षोंकीराजनीतिकीदिशातयकरनेमेंमहत्वपूर्णभूमिकानिभाएंगे.
भाजपामेंबड़ेसंगठनात्मकबदलावकीआहट, राजनाथसिंहकेआवासपरशाह-नड्डासमेतशीर्षनेताओंकीमैराथनबैठक
नईदिल्ली. भारतीयजनतापार्टीकेकेंद्रीयसंगठनमेंबड़ेफेरबदलकीअटकलोंकेबीचसोमवारकोराष्ट्रीयराजधानीदिल्लीमेंपार्टीकेशीर्षनेतृत्वकीएकअहमबैठकहुई. रक्षामंत्रीराजनाथसिंहकेसरकारीआवासपरआयोजितइसबैठकमेंकेंद्रीयगृहमंत्रीअमितशाह, भाजपाअध्यक्षनितिननवीन, केंद्रीयमंत्रीजेपीनड्डा, राष्ट्रीयमहासचिव (संगठन) बीएलसंतोषऔरराष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघ (आरएसएस) केवरिष्ठपदाधिकारीशामिलहुए. करीबचारघंटेसेअधिकसमयतकचलीइसबैठककोभाजपाकेआगामीसंगठनात्मकपुनर्गठनऔरराजनीतिकरणनीतिसेजोड़करदेखाजारहाहै. सूत्रोंकेअनुसारबैठकमेंभाजपाऔरआरएसएसकेबीचसमन्वयकीमहत्वपूर्णजिम्मेदारीनिभानेवालेवरिष्ठपदाधिकारीअरुणकुमारभीमौजूदरहे. केंद्रीयशिक्षामंत्रीधर्मेंद्रप्रधाननेभीबैठकमेंभागलिया. हालांकिबैठककेएजेंडेकोलेकरभाजपाकीओरसेकोईआधिकारिकजानकारीसाझानहींकीगईहै, लेकिनराजनीतिकगलियारोंमेंइसेपार्टीकेकेंद्रीयसंगठनमेंसंभावितबदलावोंकीदिशामेंमहत्वपूर्णकदममानाजारहाहै. भाजपासूत्रोंकाकहनाहैकिबैठकमेंसंगठनात्मकढांचेकोमजबूतबनाने, केंद्रीयपदाधिकारियोंकीनईटीमकेगठन, आगामीचुनावीरणनीतिऔरराज्योंमेंसंगठनविस्तारजैसेविषयोंपरविस्तृतचर्चाहुई. मानाजारहाहैकिपार्टीनेतृत्वआगामीचुनावीचुनौतियोंकोध्यानमेंरखतेहुएसंगठनकोनईऊर्जाऔरदिशादेनेकीतैयारीकररहाहै. जानकारीकेअनुसारजनवरीमेंभाजपाअध्यक्षकादायित्वसंभालनेवालेनितिननवीनकेनेतृत्वमेंपार्टीकीनईकेंद्रीयटीमकागठनलगभगअंतिमचरणमेंपहुंचचुकाहै. ऐसेसंकेतमिलरहेहैंकिइसीमहीनेनईटीमकीघोषणाकीजासकतीहै. पार्टीनेतृत्वसंगठनमेंअनुभवऔरयुवानेतृत्वकेबीचबेहतरसंतुलनस्थापितकरनेपरविशेषध्यानदेरहाहै. सूत्रोंकेमुताबिकनईटीममेंकईनएचेहरोंकोअवसरमिलसकताहै. पार्टीसंगठनकोअधिकसक्रिय, प्रभावीऔरचुनावीदृष्टिसेमजबूतबनानेकेलिएविभिन्नराज्योंसेऐसेनेताओंकोजिम्मेदारीदेनेपरविचारकियाजारहाहै, जिन्होंनेसंगठनात्मकस्तरपरउल्लेखनीयकार्यकियाहै. इसकेसाथहीकुछऐसेनेताओंकोभीसंगठनमेंमहत्वपूर्णभूमिकासौंपीजासकतीहैजोवर्तमानमेंसरकारमेंविभिन्नजिम्मेदारियोंकानिर्वहनकररहेहैं. भाजपाकेभीतरलंबेसमयसेकेंद्रीयटीममेंबदलावकीचर्चाचलरहीहै. पार्टीनेतृत्वकामाननाहैकिलगातारबदलतेराजनीतिकपरिदृश्यऔरआगामीचुनावोंकोदेखतेहुएसंगठनात्मकढांचेकोसमय-समयपरनईदिशादेनाआवश्यकहै. इसीरणनीतिकेतहतसंगठनमेंनईजिम्मेदारियोंकाबंटवाराऔरकार्यशैलीमेंबदलावकिएजानेकीसंभावनाजताईजारहीहै. राजनीतिकविश्लेषकोंकामाननाहैकियहबैठककेवलपदाधिकारियोंकेचयनतकसीमितनहींथी, बल्किइसमेंआगामीवर्षोंकीराजनीतिकरणनीतिपरभीचर्चाहुईहोगी. भाजपाअगलेकुछवर्षोंमेंकईमहत्वपूर्णचुनावोंकासामनाकरनेजारहीहै. ऐसेमेंसंगठनकोमजबूतऔरचुस्त-दुरुस्तबनानापार्टीनेतृत्वकीप्राथमिकतामानाजारहाहै. बैठकमेंआरएसएसकेप्रतिनिधियोंकीमौजूदगीकोभीविशेषमहत्वदियाजारहाहै. भाजपाऔरसंघकेबीचसंगठनात्मकसमन्वयकोपार्टीकीताकतमानाजाताहै. ऐसेमेंकेंद्रीयसंगठनमेंहोनेवालेसंभावितबदलावोंकोलेकरसंघकीरायऔरसुझावभीमहत्वपूर्णमानेजारहेहैं. यहीकारणहैकिबैठकमेंभाजपाऔरआरएसएसदोनोंपक्षोंकेवरिष्ठपदाधिकारीमौजूदरहे. सूत्रोंकायहभीकहनाहैकिसंगठनात्मकफेरबदलकेसाथ-साथविभिन्नमोर्चों, प्रकोष्ठोंऔरविभागोंमेंभीबदलावकिएजासकतेहैं. पार्टीऐसेनेताओंकोजिम्मेदारीदेनाचाहतीहैजोजमीनीस्तरपरसंगठनकोमजबूतकरनेमेंसक्षमहोंऔरविभिन्नसामाजिकवर्गोंतकपार्टीकीपहुंचकोऔरव्यापकबनासकें. भाजपानेतृत्वकाफोकसकेवलचुनावीजीततकसीमितनहींहै, बल्किसंगठनकेदीर्घकालिकविस्तारपरभीहै. इसीवजहसेनईटीमकेगठनमेंक्षेत्रीयसंतुलन, सामाजिकप्रतिनिधित्वऔरराजनीतिकअनुभवजैसेकईपहलुओंकोध्यानमेंरखाजारहाहै. पार्टीचाहतीहैकिसंगठनमेंऐसेचेहरेसामनेआएंजोनएमतदाताओंऔरयुवाओंकेबीचप्रभावीसंवादस्थापितकरसकें. राजनीतिकहलकोंमेंयहचर्चाभीहैकिकुछवरिष्ठनेताओंकोसंगठनमेंबड़ीजिम्मेदारीदेकरउन्हेंचुनावीप्रबंधनऔररणनीतिककार्योंमेंलगायाजासकताहै. वहींकुछनएऔरयुवानेताओंकोराष्ट्रीयस्तरपरअवसरदेकरपार्टीभविष्यकेनेतृत्वकोभीतैयारकरनाचाहतीहै. हालांकिभाजपाकीओरसेअभीतककिसीभीसंभावितफेरबदलकीआधिकारिकपुष्टिनहींकीगईहै, लेकिनराजनाथसिंहकेआवासपरहुईइसलंबीऔरउच्चस्तरीयबैठकनेराजनीतिकचर्चाओंकोतेजकरदियाहै. पार्टीकार्यकर्ताओंऔरनेताओंकीनिगाहेंअबनईकेंद्रीयटीमकीघोषणापरटिकीहुईहैं. यदिआनेवालेदिनोंमेंभाजपाअपनीनईकेंद्रीयसंगठनात्मकटीमकीघोषणाकरतीहै, तोउसेआगामीचुनावीरणनीतिऔरसंगठनात्मकविस्तारकेदृष्टिकोणसेबेहदमहत्वपूर्णमानाजाएगा. फिलहालयहस्पष्टहैकिभाजपानेतृत्वसंगठनकोनएस्वरूपमेंढालनेऔरभविष्यकीराजनीतिकचुनौतियोंकेलिएतैयारकरनेकीदिशामेंसक्रियरूपसेकामकररहाहै.
जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका दिखा अलग थलग, दुनिया जता रही मोदी पर भरोसा
जी-7 शिखर सम्मेलन इस बार वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और व्यापार का मंच नहीं बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था का आईना प्रतीत हुआ। फ्रांस में आयोजित इस सम्मेलन में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहुंचे तो उनके सामने वह यूरोप खड़ा था जो अब आंख मूंदकर वॉशिंगटन के पीछे चलने को तैयार नहीं दिखता। लंबे समय तक टैरिफ की धमकियां, कूटनीतिक दबाव, सार्वजनिक अपमान और अचानक फैसलों का सामना करने के बाद अब यूरोपीय देशों ने यह मान लिया है कि ट्रंप बदलती अमेरिकी सोच का स्थायी चेहरा हैं। यही कारण है कि इस बार जी-7 सम्मेलन पर सबसे गहरी छाया अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ती दूरी की रही। देखा जाये तो ईरान युद्ध के बाद पैदा हुई वैश्विक बेचैनी ने इस सम्मेलन को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। युद्धविराम की घोषणा के बावजूद तेल बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है, महंगाई को लेकर चिंता गहरा रही है और दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर अनिश्चितता के मोड में पहुंचती दिखाई दे रही है। ट्रंप इस सम्मेलन में यह साबित करने पहुंचे कि उनकी आक्रामक और टकराव वाली विदेश नीति परिणाम दे रही है। वह चाहते हैं कि दुनिया अमेरिकी प्राथमिकताओं को स्वीकार करे, चाहे मामला व्यापार का हो, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का, सुरक्षा का या फिर चीन को घेरने की रणनीति का। लेकिन इस बार यूरोप का स्वर बदला हुआ है। वह अमेरिका के साथ तो रहना चाहता है, मगर उसकी हर बात पर सिर झुकाने को तैयार नहीं है। इसे भी पढ़ें: France पहुंचे PM Modi, G7 Summit में वैश्विक चुनौतियों पर दुनिया को दिखाएंगे रास्ता देखा जाये तो यूरोप के भीतर यह बदलाव अचानक नहीं आया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों वर्षों से यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता की वकालत करते रहे हैं। उनका तर्क साफ है कि यूरोप को अपनी सुरक्षा और अपने हितों की रक्षा के लिए हमेशा अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इस बार सम्मेलन की मेजबानी कर रहे मैक्रों ने साफ शब्दों में कह दिया है कि यह ऐसा समय है जब अमेरिकी, रूसी और चीनी नेतृत्व यूरोप के हितों के खिलाफ खड़ा दिखाई देता है। इसलिए यूरोप को अब जागना होगा और अपने हितों की रक्षा खुद करनी होगी। हालांकि मैक्रों की रणनीति केवल विरोध की नहीं है। उन्होंने ट्रंप के साथ निजी संबंध बनाए रखने की भी भरपूर कोशिश की है। कभी एफिल टावर पर भोज, कभी सैन्य परेड में विशेष सम्मान और कभी नोट्रे डेम कैथेड्रल के पुनरोद्धार समारोह में आमंत्रण देकर उन्होंने ट्रंप को साधने की कोशिश की है। लेकिन ईरान युद्ध और ग्रीनलैंड विवाद के बाद यूरोप में ट्रंप विरोध चरम पर पहुंच गया। एक समय तो हालात ऐसे बन गए थे कि यूरोपीय नेताओं को लगने लगा कि ट्रंप डेनमार्क के अधीन ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए अमेरिकी सेना भेज सकते हैं। यह केवल एक भू-राजनीतिक विवाद नहीं था, बल्कि उस भरोसे के टूटने का प्रतीक था जिस पर दशकों से अटलांटिक गठबंधन टिका हुआ था। दरअसल, ग्रीनलैंड प्रकरण ने यूरोप को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं नाटो की सबसे बड़ी सैन्य ताकत ही उसके लिए सबसे बड़ा खतरा न बन जाए। यही कारण है कि अब यूरोपीय देशों में यह बहस तेज हो गई है कि अगर अमेरिका हर वैश्विक संकट में नेतृत्व नहीं करता या करना नहीं चाहता, तो आगे की दुनिया कैसी होगी। इस चिंता ने नाटो और अटलांटिक गठबंधन की नींव तक को हिला दिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भी इस बार दबाव में दिखे। घरेलू राजनीति में चुनौती झेल रहे स्टारमर को ईरान पर अमेरिकी हमलों का समर्थन न करने के कारण ट्रंप की नाराजगी का सामना करना पड़ा। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ब्रिटेन का मजाक उड़ाया और उसे असहयोगी तक कह दिया। नतीजा यह हुआ कि ब्रेक्जिट के बाद अमेरिका के और करीब जाने की कोशिश कर रहा ब्रिटेन अब फिर यूरोप की ओर झुकता दिखाई दे रहा है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जिन्हें कभी ट्रंप का स्वाभाविक सहयोगी माना जाता था, वह भी अब दूरी बनाती नजर आ रही हैं। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची इस सम्मेलन में पहली बार शामिल हुईं और उन्होंने अमेरिका, यूरोप तथा पश्चिम एशिया के बीच संवाद की कड़ी बनने की कोशिश की। साफ है कि दुनिया अब केवल अमेरिकी नेतृत्व पर निर्भर रहने की बजाय बहुध्रुवीय संतुलन की तरफ बढ़ रही है। देखा जाये तो ट्रंप की सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि वह निजी कूटनीति को सार्वजनिक तमाशे में बदल देते हैं। पिछले वर्ष नाटो प्रमुख मार्क रुटे के निजी संदेश सार्वजनिक कर उन्होंने यह दिखा दिया था कि यूरोपीय नेता निजी तौर पर अमेरिका के दबाव को स्वीकार करते हैं, भले ही सार्वजनिक मंचों पर विरोध का अभिनय करें। इस कारण अब यूरोपीय नेताओं के लिए संतुलन साधना और मुश्किल हो गया है। उन्हें अपने मतदाताओं को भी संतुष्ट रखना है और अमेरिका से रिश्ते भी नहीं बिगाड़ने हैं। इसी उथल पुथल के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी इस सम्मेलन में विशेष महत्व रखती है। जब पश्चिमी दुनिया भीतर से विभाजित दिखाई दे रही है, तब भारत एक ऐसे संतुलित और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है जिस पर हर शक्ति केंद्र भरोसा करना चाहता है। मोदी ने रूस और अमेरिका दोनों से संबंध बनाए रखे, पश्चिम एशिया के संकटों में संतुलन साधा और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठाया। यही वजह है कि आज दुनिया भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि स्थिर नेतृत्व वाली निर्णायक शक्ति के रूप में देख रही है। देखा जाये तो मोदी की कूटनीति की सबसे बड़ी ताकत यही है कि उन्होंने भारत को किसी एक खेमे में सीमित नहीं होने दिया। अमेरिका से रणनीतिक साझेदारी भी कायम रखी और रूस के साथ पुराने रिश्ते भी नहीं टूटने दिए। पश्चिम एशिया में भारत की स्वीकार्यता बनी रही और यूरोप के साथ आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग भी लगातार बढ़ता गया। जी-7 जैसे मंचों पर मोदी की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत केंद्र में आ चुका है। जब दुनिया अविश्वास, टकराव और अनिश्चितता से जूझ रही है, तब भारत संवाद, संतुलन और स्थिरता का चेहरा बनकर उभरा है। यही प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। बहरहाल, जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि गहरे मतभेदों और पश्चिमी देशों के भीतर बढ़ती अविश्वास की राजनीति के बावजूद संवाद की प्रक्रिया टूटी नहीं। ईरान संकट के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में पैदा हुए तनाव, तेल आपूर्ति को लेकर आशंकाओं और यूक्रेन युद्ध की लंबी खिंचती स्थिति के बीच सदस्य देशों ने कम से कम इस बात पर सहमति दिखाई कि बहुपक्षीय सहयोग को जिंदा रखना जरूरी है। सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैश्विक आर्थिक असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा और विकासशील देशों के कर्ज संकट जैसे मुद्दों पर साझा चर्चा आगे बढ़ी। यूरोप ने अपनी सामरिक स्वायत्तता का स्वर बुलंद किया, जबकि अमेरिका ने भी यह संकेत दिया कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा जिम्मेदारियों में अधिक भागीदारी निभानी होगी। भारत, ब्राजील, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की भागीदारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ग्लोबल साउथ को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकासशील देशों की आकांक्षाओं को मजबूती से उठाकर भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत किया। हालांकि सम्मेलन कई अहम मुद्दों पर ठोस नतीजे देने में विफल भी रहा। यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई निर्णायक रोडमैप सामने नहीं आया, चीन को लेकर पश्चिमी देशों के भीतर मतभेद बने रहे और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषय को जानबूझकर पीछे कर दिया गया ताकि अमेरिका और यूरोप के बीच टकराव नहीं बढ़े। ईरान समझौते पर भी स्पष्टता का अभाव रहा और ट्रंप की आक्रामक शैली के कारण साझा घोषणापत्र को लेकर एकजुटता कमजोर दिखाई दी। कुल मिलाकर यह सम्मेलन उपलब्धियों से अधिक बदलती विश्व राजनीति के अंतर्विरोधों का प्रतीक बनकर सामने आया, जहां संवाद तो जारी रहा लेकिन भरोसे का संकट अब भी गहराता दिखाई दिया। -नीरज कुमार दुबे
सार्वजनिक जीवन में विश्वास की पूंजी
विश्वास और भरोसा ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। सार्वजनिक जीवन में जन विश्वास गंवाने वाला व्यक्ति किसी योग्य नहीं रह जाता। हाल ही में भारतीय राजनीति में जन विश्वास से जुड़ी दो अहम घटनाएं घटित हुई। पहली घटना में एक नेता ने जन विश्वास की पूंजी खो दिया। वहीं दूसरी घटना में नेता ने जन विश्वास की पूंजी को सहेजा ही नहीं, बल्कि हर बीतते दिन के साथ उसमें वृद्धि भी की। पहली घटना 4 मई की है। इस दिन जन विश्वास खो चुकी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। तृणमूल और ममता से नाराजगी का आलम यह था कि स्वयं ममता बनर्जी अपनी सीट हार गई। आज ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की जो दुर्दशा हो रही है, उसकी जिम्मेदार कोई दूसरा नहीं बल्कि वह स्वयं और उनके कर्म ही हैं। इसे भी पढ़ें: Bengal में LoP पद पर संग्राम, विधानसभा Speaker के खिलाफ High Court पहुंचीं ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसद अपना अलग गुट बना चुके हैं। स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण मिलना मुश्किल है, जब किसी राजनीतिक दल का इतनी तेजी से विघटन हुआ हो। या किसी नेता की तथाकथित साख चुनाव हारने के चंद दिनों में ही औंधे मुंह गिरी हो। सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी को मंदिर जाने की याद आई। कालीबाड़ी दर्शन करने पहुंची ममता बनर्जी को लोगों ने पूरी तरह अनदेखा किया। डेढ दशक तक सूबे का मुख्यमंत्री रहने वाले नेता की जनता इस हद तक उपेक्षा करे, तो यह सिर्फ चुनावी हार नहीं, जनविश्वास के टूटने का संकेत होता है। तृणमूल कांग्रेस के कुशासन से आजिज जनता आज उसके नेताओं का अंडे, टमाटर, जूते और मार कुटाई से सत्कार कर रही है। तृणमूल के नेताओं को देखकर चोर-चोर के नारे लगाए जा रहे हैं। ये वो लोग है जो पिछले 15 वर्षों से तृणमूल नेताओं की तानाशाही, गुण्डागर्दी और अत्याचार चुपचाप सह रहे थे। तृणमूल नेताओं के प्रति जनता का व्यवहार उनके स्वाभाविक क्रोध, कुंठा, निराशा और हताशा का परिणाम है। ममता सरकार के डेढ़ दशक के शासन के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं की हत्या व अपहरण, पोलिंग एजेंटों की पिटाई, बमबाजी, गोलीबारी, बूथों में तोड़फोड़, वोटों की लूट, प्रत्याशियों व उनके परिवार के सदस्यों को धमकियां, ये सब बंगाल में आम बातें हो चुकीं थीं। भाजपा के अपने अनुमानों के अनुसार, 2021 में विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हुई हिंसा में टीएमसी के गुंडों ने 300 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की थी। तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कानून व व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि, राज्य में लोकतंत्र सांस नहीं ले पा रहा है। मुख्यमंत्री और प्रशासन मूक दर्शक बने हुए हैं। दूसरी घटना 10 जून को घटित हुई। इस दिन नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे किए, जो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में पूरे किए गए 4,398 दिन के कार्यकाल से ज्यादा है। इस तरह जनविश्वास, सुशासन और राष्ट्रहित के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए। यह सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, 140 करोड़ भारतीयों के अटूट विश्वास की जीत है। 2014 में देश ने उत्साह और अटूट विश्वास के साथ नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री चुना था, लेकिन उन्होंने स्वयं को हमेशा एक प्रधानसेवक माना। इसी रूप में वे अपना राष्ट्रधर्म निभाते हुए विकसित भारत के निर्माण में जुटे हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के संकल्प के साथ उन्होंने समाज के हर वर्ग का विश्वास जीता है। उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अधिकार, सम्मान और आत्मनिर्भरता का एहसास कराया है। विपक्ष के लगातार मिथ्या प्रचार, व्यक्तिगत हमलों, यहां तक की अपशब्द देने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी अहर्निशं जनसेवा में जुटे हैं। देश की जनता उन पर भरोसा करती है, जनता को विश्वास है मोदी के रहते उनका अहित नहीं होगा। इसलिए वो लगातार तीसरी बार उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी सहर्ष सौंपती है। जब विश्वास टूटता है तो बड़े से बड़े नेता और व्यक्ति अर्श से फर्श पर आ जाता है। भारतीय राजनीति में इंदिरा गांधी का बड़ा कद था। लेकिन अपनी सत्ता बचाने के लिए 1975 को इमरजेंसी लगाने के बाद जनता का विश्वास इंदिरा गांधी से टूट गया। 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस को ऐतिहासिक हार का मुंह देखना पड़ा। इंदिरा का घमंड चूर चूर हो गया, और देश में आजादी के बाद पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, उड़ीसा में बीजू जनता दल, दिल्ली में आम आदमी पार्टी तमाम ऐसे उदाहरण ऐसे हैं, जब जनता ने इन दलों पर विश्वास करके सत्ता के सिंहासन पर बैठाया। लेकिन जब ये नेता विश्वास और उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे तो, जनता ने इन्हें इनको आसमान से जमीन पर पटकने में देरी नहीं की। तमिलनाडु में विश्वास ही तो खत्म हुआ होगा, तभी तो वहां की जनता ने सत्तारूढ़ डीएमके को हटाकर अभिनेता चंद्रशेखरन जोसेफ विजय की नयी नवेली पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी टीवीके को सत्ता की कुंजी सौंप दी। वहीं कई ऐसे उदाहरण भी हैं, जहां विश्वास के चलते जनता ने बार बार जीत का आशीष दिया। गुजरात में बीते 31 और मध्य प्रदेश 21 साल से भाजपा की सरकार है। इतने लंबे समय तक विश्वास और सेवा किये बिना कोई नेता या दल सत्ता या लोगों के दिलों में नहीं रह सकता। किसी जमाने में हरियाणा में भाजपा कोई बड़ी शक्ति नहीं थी। बामुश्किल उसके दो या तीन विधायक ही जीतते थे। लेकिन विश्वास और जनसेवा की बदौलत ही पिछले 12 वर्षों से हरियाणा में भाजपा की सरकार सत्ता में है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मिथक था कि यहां कोई सरकार दोबारा रिपीट नहीं करती। 2017 में भाजपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कृतित्व एवं व्यक्तित्व से सरकार और शासन के प्रति जनता के विश्वास को लगातार बढ़ाने का काम किया। नतीजा उत्तर प्रदेश की राजनीति में 37 साल पुराना यह मिथक 2022 के विधानसभा चुनाव में टूट गया। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भाजपा सरकार पिछले नौ साल से लगातार जनसेवा में जुटी है। जीवन की सबसे बड़ी पूंजी पद नहीं, बल्कि विश्वास होता है। यह विश्वास किसी नेता, राजनीतिक दल या किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी है। यह विश्वास बना रहना ही चाहिए। और जिस दिन यह विश्वास टूटता है, उस दिन नतीजे वैसे ही होते हैं, जैसे 4 मई को पश्चिम बंगाल में ईवीएम से निकले। हारने वाला कुंठा, निराशा और हताशा में भले ही इसे वोट की लूट बताता रहे, लेकिन ये वोट की नहीं बल्कि दिल की लूट होती है। इसलिए व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में विश्वास बनाए रखें। - डॉ. आशीष वशिष्ठ (लेखक-पत्रकार)
फिरसियासीभूचालकीआहट, उद्धवठाकरेके 16 विधायकऔर 7 सांसदोंपरनजर, शिंदेगुटकेदावोंसेबढ़ीहलचल
मुंबई. महाराष्ट्रकीराजनीतिमेंएकबारफिरबड़ेराजनीतिकघटनाक्रमकीअटकलेंतेजहोगईहैं. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुखउद्धवठाकरेकेनेतृत्ववालीपार्टीमेंसंभावितटूटकोलेकरचर्चाओंकाबाजारगर्महै. दावाकियाजारहाहैकिउद्धवगुटकेकरीब 16 विधायकऔर 7 सांसदएकनाथशिंदेकेनेतृत्ववालीशिवसेनाकेसंपर्कमेंहैं. हालांकिइनदावोंकीअबतककोईआधिकारिकपुष्टिनहींहुईहै, लेकिनलगातारसामनेआरहेराजनीतिकसंकेतोंनेराज्यकीसियासतकोगरमादियाहै. रविवारकोमातोश्रीमेंउद्धवठाकरेद्वारालोकसभासांसदोंकीबुलाईगईबैठककेबादइनचर्चाओंनेऔरजोरपकड़लिया. राजनीतिकगलियारोंमेंयहसवालउठनेलगाकिक्यावास्तवमेंपार्टीकेसभीसांसदनेतृत्वकेसाथमजबूतीसेखड़ेहैंयाफिरअंदरहीअंदरअसंतोषबढ़रहाहै. बैठककेबादविभिन्नराजनीतिकहलकोंमेंइसबातकीचर्चाशुरूहोगईकिआनेवालेदिनोंमेंमहाराष्ट्रकीराजनीतिमेंबड़ाउलटफेरदेखनेकोमिलसकताहै. सूत्रोंकेमुताबिकशिवसेना (यूबीटी) केकुछसांसदऔरविधायकपार्टीकीवर्तमानकार्यशैलीऔरनेतृत्वसेअसंतुष्टबताएजारहेहैं. हालांकिइनमेंसेकिसीभीनेतानेसार्वजनिकरूपसेनाराजगीव्यक्तनहींकीहै, लेकिनराजनीतिकचर्चाओंमेंयहदावाकियाजारहाहैकिकईनेतावैकल्पिकराजनीतिकसंभावनाओंपरविचारकररहेहैं. उद्धवठाकरेनेसांसदोंकीबैठककेदौरानकथिततौरपरस्पष्टसंदेशदियाकियदिकिसीकोपार्टीछोड़करजानाहैतोवहजासकताहैऔरइससेसंगठनकमजोरनहींहोगा. सूत्रोंकेअनुसारउन्होंनेयहभीकहाकिसमयबदलनेपरपार्टीछोड़नेवालोंकाराजनीतिकहिसाबभीकियाजाएगा. राजनीतिकविश्लेषकोंकामाननाहैकियहबयानपार्टीकेभीतरचलरहीसंभावितअसंतोषकीचर्चाओंकेसंदर्भमेंकाफीमहत्वपूर्णमानाजारहाहै. उधरपिछलेकुछदिनोंसेमहाराष्ट्रकीराजनीतिमें‘ऑपरेशनटाइगर’ नामकराजनीतिकअभियानकीचर्चालगातारहोरहीहै. विपक्षीखेमेमेंयहचर्चाहैकिएकनाथशिंदेकेनेतृत्ववालीशिवसेनाउद्धवगुटकेनेताओंकोअपनेसाथलानेकेप्रयासमेंजुटीहुईहै. बतायाजारहाहैकिदोनोंपक्षोंकेनेताओंकेबीचदिल्लीऔरमुंबईमेंकईस्तरोंपरबातचीतभीहुईहै. हालांकिइनदावोंकोलेकरकोईआधिकारिकदस्तावेजयापुष्टिसामनेनहींआईहै. केंद्रीयमंत्रीऔरशिंदेगुटकेवरिष्ठनेताप्रतापरावजाधवनेभीइसबहसकोहवादेतेहुएकहाकिउद्धवगुटकेकईसांसदऔरविधायकपार्टीकेभीतरकीस्थितिसेसंतुष्टनहींहैं. उन्होंनेदावाकियाकिकईनेताओंकोलगताहैकिउनपरलगातारसंदेहकियाजाताहैऔरउन्हेंसंगठनमेंपहलेजैसीप्राथमिकतानहींमिलरहीहै. हालांकिउन्होंनेयहभीकहाकिसंपर्कमेंहोनेकाअर्थयहनहींहैकिकोईनेतातुरंतपार्टीबदलनेजारहाहै. राजनीतिकजानकारोंकामाननाहैकियदिशिंदेगुटवास्तवमेंबड़ीसंख्यामेंसांसदोंऔरविधायकोंकोअपनेसाथलानेमेंसफलहोताहैतोयह 2022 कीबगावतकेबादउद्धवठाकरेकेलिएदूसराबड़ाराजनीतिकझटकासाबितहोसकताहै. गौरतलबहैकि 2022 मेंएकनाथशिंदेकेनेतृत्वमेंहुएविद्रोहनेशिवसेनाकोदोहिस्सोंमेंबांटदियाथाऔरराज्यकीसत्ताकापूरासमीकरणबदलगयाथा. हालांकिउद्धवठाकरेगुटनेटूटकीसभीअटकलोंकोसिरेसेखारिजकरदियाहै. पार्टीकेवरिष्ठनेताऔरसांसदअरविंदसावंतनेकहाकिसभीसांसदपूरीतरहसेपार्टीनेतृत्वकेसाथहैंऔरटूटकीखबरेंकेवलराजनीतिकअफवाहेंहैं. उन्होंनेचुनौतीदेतेहुएकहाकियदिसातसांसदपार्टीछोड़नेवालेहैंतोउनकेनामसार्वजनिककिएजाएं. सावंतनेदावाकियाकिशिवसेना (यूबीटी) पूरीतरहएकजुटहैऔरपार्टीमेंकिसीप्रकारकासंकटनहींहै. दूसरीओरशिंदेगुटकीनेताशाइनाएनसीनेभी‘ऑपरेशनटाइगर’ कोलेकरचलरहीचर्चाओंकोखारिजकियाहै. उन्होंनेकहाकिउनकीपार्टीकिसीभीसंगठनकोतोड़नेकीराजनीतिमेंविश्वासनहींरखती. उनकेअनुसारमुख्यमंत्रीएकनाथशिंदेकीविकासआधारितराजनीतिऔरजनस्वीकृतिकेकारणविभिन्नदलोंकेनेतास्वेच्छासेउनकेसाथजुड़नाचाहतेहैं. उन्होंनेकहाकिमहाराष्ट्रमेंकिसीप्रकारका‘ऑपरेशनटाइगर’ नहींबल्किविकासऔरप्रगतिकाअभियानचलरहाहै. फिरभीराजनीतिकविश्लेषकोंकामाननाहैकिलगातारउठरहेसवालऔरनेताओंकेबयानोंसेयहस्पष्टहैकिमहाराष्ट्रकीराजनीतिमेंअंदरखानेकुछनकुछगतिविधियांजरूरचलरहीहैं. खासकरआगामीस्थानीयनिकायचुनावोंऔरभविष्यकीराजनीतिकरणनीतियोंकोदेखतेहुएविभिन्नदलअपनेसंगठनात्मकढांचेकोमजबूतकरनेमेंजुटेहुएहैं. फिलहालस्थितिपूरीतरहदावोंऔरप्रतिदावोंकेबीचबनीहुईहै. एकओरशिंदेगुटकेनेताओंकेबयानराजनीतिकहलचलकोबढ़ारहेहैंतोदूसरीओरउद्धवठाकरेकाखेमापार्टीकीएकजुटताकादावाकररहाहै. ऐसेमेंआनेवालेकुछदिनमहाराष्ट्रकीराजनीतिकेलिएबेहदमहत्वपूर्णमानेजारहेहैं. यदिचर्चाओंकेअनुरूपकोईबड़ाराजनीतिकघटनाक्रमसामनेआताहैतोराज्यकीराजनीतिमेंएकबारफिरबड़ाबदलावदेखनेकोमिलसकताहै. वहींयदिसभीविधायकऔरसांसदउद्धवठाकरेकेसाथबनेरहतेहैंतोयहउनकेनेतृत्वकेलिएबड़ीराहतहोगी. फिलहालमहाराष्ट्रकीराजनीतिमेंनिगाहेंअगलेकुछदिनोंपरटिकीहैं, जहांहरबयानऔरहरराजनीतिकगतिविधिकोबेहदध्यानसेदेखाजारहाहै.
2027 कीजंगसेपहलेमायावतीका OBC दांव, ‘आयरनलेडी’बनकर 2007 वालाकरिश्मादोहरानेकीतैयारी
लखनऊ. उत्तरप्रदेशविधानसभाचुनाव 2027 कीसियासीसरगर्मियांतेजहोनेलगीहैंऔरइसीबीचबहुजनसमाजपार्टीप्रमुखमायावतीनेऐसाराजनीतिकदांवचलाहै, जिसनेप्रदेशकीराजनीतिमेंनईहलचलपैदाकरदीहै. पार्टीकीअहमबैठककेबादजारीसंदेशमेंमायावतीनेखुदकोएकबारफिर‘आयरनलेडी’ केरूपमेंपेशकरतेहुएओबीसीसमाजकोसाधनेकीकोशिशकीहै. राजनीतिकविश्लेषकोंकामाननाहैकिबसपासुप्रीमोकायहकदमकेवलएकबयाननहीं, बल्कि 2007 मेंमिलीऐतिहासिकजीतकेफॉर्मूलेकोदोबाराजमीनपरउतारनेकीरणनीतिहै. मायावतीनेअपनेसंबोधनमेंकहाकिपिछड़ावर्ग, दलितऔरअन्यवंचितसमाजकावास्तविकहितबसपाशासनमेंहीसुरक्षितरहाहै. उन्होंनेदावाकियाकिउनकेमुख्यमंत्रीरहतेहुएओबीसीवर्गकोसम्मान, भागीदारीऔरअधिकारमिले, जबकिअन्यदलोंनेकेवलवोटबैंककीराजनीतिकी. इसीदौरानउन्होंनेस्वयंको‘आयरनलेडी’ बतातेहुएअपनेशासनकालकीसख्तप्रशासनिकछविकोभीसामनेरखा. राजनीतिकजानकारोंकेअनुसारमायावतीका‘आयरनलेडी’ वालासंदेशकेवलव्यक्तिगतछविनिर्माणतकसीमितनहींहै. इसकेजरिएवहप्रदेशकीजनताको 2007 से 2012 केउसकार्यकालकीयाददिलानाचाहतीहैं, जबकानून-व्यवस्थाऔरप्रशासनिकनियंत्रणकोलेकरउनकीसरकारकीअलगपहचानबनीथी. बसपासुप्रीमोयहसंदेशदेनाचाहतीहैंकिमजबूतनेतृत्वऔरकठोरप्रशासनदेनेकीक्षमताआजभीउनकेपासहै. अपनेभाषणमेंमायावतीनेवर्ष 2007 काविशेषउल्लेखकिया. उन्होंनेकहाकिउसीचुनावमेंओबीसीसमाजकेव्यापकसमर्थनसेबसपाकोपूर्णबहुमतमिलाथा. राजनीतिकदृष्टिसेयहबयानबेहदमहत्वपूर्णमानाजारहाहैक्योंकि 2007 काचुनावउत्तरप्रदेशकीराजनीतिमेंसामाजिकइंजीनियरिंगकासबसेसफलप्रयोगमानाजाताहै. उससमयदलित, पिछड़ाऔरसवर्णवर्गकेएकहिस्सेकेसमर्थननेबसपाकोअपनेदमपरसत्तातकपहुंचायाथा. पिछलेकुछचुनावोंमेंबसपाकाजनाधारकमजोरहुआहैऔरउसकापारंपरिकवोटबैंकभीकईहिस्सोंमेंबंटतादिखाईदियाहै. ऐसेमेंमायावतीएकबारफिरदलितऔरओबीसीगठजोड़कोमजबूतकरअपनेराजनीतिकआधारकोपुनर्जीवितकरनेकीकोशिशकररहीहैं. विशेषरूपसेगैर-यादवपिछड़ावर्गकोलेकरउनकीसक्रियताबढ़तीदिखाईदेरहीहै. मायावतीनेअपनेसंबोधनमेंआरक्षणकामुद्दाभीजोरदारतरीकेसेउठाया. उन्होंनेआरोपलगायाकिशिक्षाऔरसरकारीनौकरियोंमेंओबीसीवर्गकोमिलनेवाले 27 प्रतिशतआरक्षणकोधीरे-धीरेकमजोरकियाजारहाहै. उनकेइसबयानकोभाजपाऔरविपक्षीगठबंधनदोनोंपरएकसाथहमलामानाजारहाहै. बसपाप्रमुखकाप्रयासहैकिपिछड़ावर्गकेबीचयहसंदेशजाएकिउनकेअधिकारोंऔरहिस्सेदारीकीसबसेमुखरआवाजबसपाहीउठारहीहै. राजनीतिकविश्लेषकोंकामाननाहैकियहरणनीतिसीधेतौरपरभाजपाकेउसवोटबैंककोप्रभावितकरनेकीकोशिशहै, जिसमेंगैर-यादवओबीसीसमुदायकीबड़ीभूमिकारहीहै. मौर्य, कुर्मी, सैनी, शाक्य, लोधऔरअन्यपिछड़ीजातियांपिछलेकईचुनावोंमेंभाजपाकेसाथमजबूतीसेखड़ीरहीहैं. ऐसेमेंमायावतीकानयाअभियानभाजपाकेलिएचुनौतीबनसकताहै. दूसरीओर, समाजवादीपार्टीऔरकांग्रेसद्वाराआगेबढ़ाएजारहेपीडीएयानीपिछड़ा, दलितऔरअल्पसंख्यकसमीकरणकोभीबसपाकीनईरणनीतिसेझटकालगसकताहै. सपाप्रमुखअखिलेशयादवलगातारपीडीएकोचुनावीआधारबनानेकीकोशिशकररहेहैं. लेकिनयदिदलितऔरअति-पिछड़ावर्गकाएकहिस्साबसपाकीओरलौटताहैतोविपक्षीवोटोंकाबिखरावबढ़सकताहै. मायावतीनेअपनेकार्यकर्ताओंकोभीनयाराजनीतिकसंदेशदिया. उन्होंनेकहाकिकेवलदूसरीपार्टियोंकीआलोचनाकरनेसेकोईलाभनहींहोगा. कार्यकर्ताओंकोसमाजकेबीचजाकरयहसंदेशदेनाहोगाकिदलित, पिछड़ाऔरशोषितवर्गसत्ताकी‘मास्टरचाबी’ अपनेहाथमेंलेकरहीवास्तविकपरिवर्तनलासकताहै. उन्होंनेसमर्थकोंसे 2027 में‘शासकवर्ग’ बननेकालक्ष्यलेकरआगेबढ़नेकाआह्वानकिया. यहबयानबसपाकीपारंपरिकबहुजनराजनीतिकीयाददिलाताहै, जिसमेंसामाजिकरूपसेवंचितवर्गोंकोकेवलवोटरनहींबल्किसत्ताकेकेंद्रमेंपहुंचानेकीबातकहीजातीरहीहै. ‘शासकवर्ग’ कानाराउसीराजनीतिकसोचकाविस्तारमानाजारहाहै. राजनीतिकपर्यवेक्षकोंकेअनुसारमायावतीकायहपूराअभियानसंकेतदेताहैकिबसपा 2027 केचुनावकोत्रिकोणीयबनानेकीतैयारीमेंहै. पार्टीअबकेवलअपनेपारंपरिकवोटबैंकपरनिर्भररहनेकेबजायपिछड़ेवर्गोंमेंनईपैठबनानेकाप्रयासकररहीहै. यदिबसपादलितोंकेसाथओबीसीवर्गकेप्रभावीहिस्सेकोजोड़नेमेंसफलहोतीहैतोउत्तरप्रदेशकीराजनीतिमेंसमीकरणपूरीतरहबदलसकतेहैं. फिलहालमायावतीकेइसनएराजनीतिकअभियाननेभाजपा, समाजवादीपार्टीऔरकांग्रेसतीनोंकीरणनीतियोंपरअसरडालनाशुरूकरदियाहै. आनेवालेमहीनोंमेंयहस्पष्टहोगाकि‘आयरनलेडी’ कीछविऔर 2007 केसोशलइंजीनियरिंगमॉडलकायहनयासंस्करणबसपाकोकितनाराजनीतिकलाभदिलापाताहै. लेकिनइतनातयहैकिउत्तरप्रदेशकीचुनावीराजनीतिमेंमायावतीनेएकबारफिरखुदकोकेंद्रमेंलानेकीकोशिशतेजकरदीहैऔरउनकेइसदांवने 2027 कीसियासीलड़ाईकोऔरदिलचस्पबनादियाहै.
मई में थोक महंगाई 9.68 प्रतिशत रही, सरकार ने 2022-23 आधार वर्ष के साथ नई डब्ल्यूपीआई सीरीज लॉन्च की
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को 2022-23 को नया आधार वर्ष मानते हुए संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) सीरीज लॉन्च की, साथ ही मंत्रालय ने बताया कि मई में थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई।
अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कंपनी के दो एयरपोर्ट्स को प्रतिष्ठित 'प्रिक्स वर्साय वर्ल्ड्स मोस्ट ब्यूटीफुल एयरपोर्ट्स लिस्ट 2026' में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंपनी विश्वस्तरीय विमानन अवसंरचना विकसित करने पर जोर दे रही है, जो आर्थिक विकास, पर्यटन और क्षेत्रीय प्रगति में योगदान दे रही है।
पीएम मोदी ने 'नया भारत निर्माण' के 12 साल पूरे होने पे दोहराया नयी पीढ़ी के इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन
नई दिल्ली, 'नया भारत निर्माण के 12 साल' पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पिछले दशक में देशभर में रिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हुआ है। साथ ही, उन्होंने 'विकसित भारत' के विजन को साकार करने के लिए अगली पीढ़ी का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
मुनाफा वसूली के बाद सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट
मुंबई, लगातार दो सत्रों की तेजी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार को गिरावट देखने को मिली।
भारत अब पेट्रोल और डीजल पर निर्भर अर्थव्यवस्था से निकलकर वैकल्पिक ईंधन की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E-100 ईंधन के मानकों को मंजूरी देकर देश की ऊर्जा नीति में एक नई बहस और नई उम्मीद दोनों को जन्म दिया है। इस फैसले के बाद इथेनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था को लेकर सरकार, वाहन कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में यही ईंधन भारत को कच्चे तेल के वैश्विक झटकों से बचाने का मजबूत आधार बन सकता है। पेट्रोल का खेल खत्म? सरकार लाई E-100 ईंधन का मास्टर प्लान हम आपको बता दें कि E-100 ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग सौ प्रतिशत इथेनॉल होता है और पारंपरिक पेट्रोल की मिलावट नहीं के बराबर रहती है। इथेनॉल गन्ना, मक्का, खराब अनाज और कृषि अपशिष्ट जैसे स्रोतों से तैयार किया जाता है। अभी देश में E-20 मिश्रण वाला पेट्रोल इस्तेमाल हो रहा है जिसमें बीस प्रतिशत इथेनॉल और अस्सी प्रतिशत पेट्रोल होता है। लेकिन E-100 पूरी तरह इथेनॉल आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ने का संकेत है। इसे भी पढ़ें: सही कहा था Modi ने... एक एक बूंद पानी के लिए तरस रहा Pakistan, नहरें सूखीं, खेत बंजर हो रहे, शहरों में भी जल संकट तेल संकट से बचने का भारत का नया हथियार! मोदी सरकार की नजर सिर्फ पर्यावरण पर नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था और रणनीतिक सुरक्षा पर भी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चे तेल के रूप में खरीदता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ते ही देश का आयात बिल और महंगाई दोनों बढ़ जाती हैं। ऐसे में सरकार इथेनॉल आधारित ईंधन को ऊर्जा आत्मनिर्भरता का रास्ता मान रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण अब तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कच्चे तेल आयात की बचत हुई है, जबकि किसानों को लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिली है। ऊर्जा विशेषज्ञ भी इसे भारत की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा मान रहे हैं। केपीएमजी की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इथेनॉल आधारित बदलाव भारत के परिवहन ऊर्जा ढांचे को मजबूत बना सकता है और वैश्विक तेल संकटों से देश को बचाने में मददगार साबित हो सकता है। देखा जाये तो E-100 ईंधन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इससे किसानों की भूमिका सीधे ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जुड़ जाएगी। गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ेगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया सहारा मिलेगा। लंबे समय से खेती में लागत और लाभ के संकट से जूझ रहे किसानों के लिए यह अतिरिक्त आय का नया रास्ता बन सकता है। सरकार इसी वजह से इसे कृषि और ऊर्जा दोनों क्षेत्रों के लिए दोहरा लाभ मान रही है। हालांकि सवाल यह भी है कि क्या E-100 पेट्रोल की पूरी तरह जगह ले सकता है। जवाब है, हां लेकिन तुरंत नहीं। देश की करोड़ों गाड़ियां अभी पारंपरिक पेट्रोल या E-20 ईंधन के हिसाब से बनी हैं। उन्हें सीधे E-100 पर चलाना संभव नहीं है। इथेनॉल का व्यवहार पेट्रोल से अलग होता है। इससे इंजन की संरचना, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और पाइप लाइन तक में बदलाव करना पड़ता है। यही वजह है कि अब वाहन कंपनियां विशेष फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाले वाहन विकसित कर रही हैं। मारुति सुजूकी ने वैगन आर का फ्लेक्स फ्यूल मॉडल पेश कर संकेत दे दिया है कि कम कीमत वाली जनसाधारण की गाड़ियां भी इथेनॉल आधारित तकनीक पर लाई जा सकती हैं। इसके अलावा टोयोटा, एमजी, हुंडई और सुजुकी भी ऐसे उत्पादों पर काम कर रही हैं। दोपहिया क्षेत्र में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर और एच एफ डीलक्स के फ्लेक्स फ्यूल संस्करण सामने रखे हैं। इससे साफ है कि उद्योग जगत अब इस बदलाव को गंभीरता से लेने लगा है। गन्ने से बनेगा गाड़ी का ईंधन! देखा जाये तो E-100 के कई फायदे हैं। सबसे पहला लाभ विदेशी तेल पर निर्भरता कम होना है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। दूसरा बड़ा लाभ पर्यावरण को होगा क्योंकि इथेनॉल पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ माना जाता है और इससे कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है। तीसरा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा जहां इथेनॉल उत्पादन से कृषि आधारित उद्योगों को नई गति मिल सकती है। क्यों डर रहे हैं लोग इथेनॉल वाले पेट्रोल से? वैसे इथेनॉल को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में अभी भी कई तरह की आशंकाएं हैं। सबसे बड़ी चिंता गाड़ी के इंजन और उसकी उम्र को लेकर है। बहुत से वाहन मालिक मानते हैं कि अधिक इथेनॉल मिश्रण से इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, माइलेज घट सकता है और लंबे समय में फ्यूल पाइप, रबर पार्ट्स तथा इंजेक्टर जैसे हिस्सों को नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने पेट्रोल वाहन पूरी तरह इथेनॉल आधारित ईंधन के लिए तैयार नहीं हैं, इसलिए उनमें दिक्कतें आ सकती हैं। यही वजह है कि लोग अपने मौजूदा वाहन में अधिक इथेनॉल वाला ईंधन डलवाने से हिचक रहे हैं। हालांकि नई फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियां विशेष रूप से इथेनाल के हिसाब से तैयार की जा रही हैं, इसलिए उनमें ऐसी आशंकाएं कम होंगी। सरकार और कंपनियां यह दावा कर रही हैं कि सही तकनीक वाले इंजनों में इथेनॉल से गाड़ी की आयु पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उपभोक्ताओं का भरोसा जीतना अभी बाकी है। कीमत को लेकर भी बहस तेज है। माना जा रहा है कि देश में बड़े पैमाने पर उत्पादन होने पर इथेनॉल आधारित ईंधन पेट्रोल की तुलना में सस्ता पड़ सकता है, क्योंकि इसका स्रोत घरेलू कृषि क्षेत्र है और इसमें आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम रहती है। फिर भी आम लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब मौजूदा E-20 ईंधन में बीस प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ है, तब उपभोक्ताओं से पूरी तरह पेट्रोल जैसी कीमत क्यों वसूली जा रही है। आलोचकों का तर्क है कि यदि पेट्रोल की मात्रा कम है तो कीमत में भी उसका असर दिखना चाहिए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ईंधन मूल्य निर्धारण केवल कच्चे तेल की मात्रा से तय नहीं होता, बल्कि उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन और कर व्यवस्था जैसे कई पहलू उसमें शामिल रहते हैं। साथ ही डीजल में इथेनॉल मिलाने को लेकर अभी व्यापक स्तर पर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है, क्योंकि डीजल इंजन की तकनीक पेट्रोल इंजनों से अलग होती है और उसमें इथेनॉल मिश्रण को लेकर ज्यादा तकनीकी चुनौतियां हैं। फिलहाल सरकार का मुख्य जोर पेट्रोल आधारित वाहनों और फ्लेक्स फ्यूल तकनीक को आगे बढ़ाने पर है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पक्ष भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है। यानी समान दूरी तय करने के लिए वाहन को ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा मौजूदा वाहनों को सीधे E-100 पर चलाना संभव नहीं है। उपभोक्ताओं को नए फ्लेक्स फ्यूल वाहन खरीदने होंगे, जो शुरुआती दौर में महंगे भी हो सकते हैं। सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी ढांचे की है। देशभर के पेट्रोल पंपों को E-100 के भंडारण और वितरण के लिए नई व्यवस्था विकसित करनी होगी। जब तक व्यापक स्तर पर ईंधन स्टेशन तैयार नहीं होंगे, तब तक उपभोक्ताओं का भरोसा भी नहीं बन पाएगा। दूसरी चुनौती इथेनॉल उत्पादन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यदि ईंधन उत्पादन के लिए अत्यधिक कृषि संसाधन लगाए गए तो खाद्य सुरक्षा और जल संकट जैसे सवाल भी उठ सकते हैं। बहरहाल, इसके बावजूद सरकार और उद्योग दोनों मानते हैं कि भारत अब ऊर्जा परिवर्तन के ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां वैकल्पिक ईंधन को टाला नहीं जा सकता। E-100 कोई रातोंरात होने वाली क्रांति नहीं है, बल्कि यह लंबी यात्रा की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में पेट्रोल और इथेनॉल दोनों साथ-साथ चलेंगे, लेकिन दिशा साफ दिखाई दे रही है। भारत अब तेल आयात पर टिके भविष्य से हटकर खेतों से निकलने वाली ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। -नीरज कुमार दुबे
मोदी कैबिनेट में विस्तार की अटकलें तेज, टीएमसी के बागियों को भी मिल सकती है जगह
मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों वाली एनसीपीआई को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
केंद्र ने डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया, पेट्रोल पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं
केंद्र सरकार ने मंगलवार से डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर विंडफॉल गेन टैक्स बढ़ा दिया है। हालांकि, पेट्रोल पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है।
'कॉकरोच जनता पार्टी': सोशल मीडिया पर धमाल के बाद जमीनी हकीकत क्या है?
सोशल मीडिया पर सनसनी के तौर पर उभरी सीजेपी एक महीने के भीतर ही देश में जगह जगह अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है. कई लोग इसमें युवाओं के नेतृत्व को लेकर उम्मीदें जता रहे हैं तो कइयों को इसके भविष्य को लेकर आशंकाएं भी हैं
रिकॉर्ड के मोर्चे पर कौन भारी, कौन कमजोर
इस बार 11 जून की तारीख भारतीय इतिहास के लिए विशेष बनकर आई। इसी दिन निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सबसे ज्यादा दिन शासन चलाने का रिकॉर्ड कायम कर दिया। इसके पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा 4398 दिन प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाम है। मौजूदा दौर विशेषकर विजुअल मीडिया के वर्चस्व का दौर है। विजुअल मीडिया की चूंकि उत्सवधर्मिता केंद्रित है, लिहाजा इस रिकॉर्ड को लेकर सत्ता पक्ष में उत्साह का माहौल होना ही था और ऐसा है भी। लेकिन इसे लेकर आलोचनाओं की बाढ़ भी आ गई है। विशेषकर प्रगतिशील खेमे से मोदी के इस रिकॉर्ड को लेकर तंज में आलोचनाएं की जा रही हैं। इन आलोचनाओं का भाव कुछ वैसे ही है, जैसे कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली। आलोचकों की नजर में कहावत के राजा भोज नेहरू हैं और गंगू मोदी। प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ अरसा पहले संसद को संबोधित करते हुए देश के विकास में अतीत के हर प्रधानमंत्री के योगदान को याद किया था। इतिहास क्रम में हर प्रधानमंत्री ने कुछ न कुछ योगदान दिया ही है। हर प्रधानमंत्री की युगीन आवश्यकताएं और परिस्थितियां अलग रही हैं। इसे भी पढ़ें: मोदी की फ्रांस, स्लोवाकिया यात्रा से बदले वैश्विक समीकरण, दुनिया को दिखा नए भारत का दम इसलिए अव्वल तो ऐसी तुलनाएं होनी ही नहीं चाहिए थी। क्योंकि नेहरू के युग में भारत की जो स्थिति थी, वह अब नहीं है। इतिहास का कोई खंड कठिन होता है तो कोई आसान। इसलिए इतिहास के काल खंड की बुनियाद पर उस दौर के शासक की परख होनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि भविष्य का शासक अपनी उपलब्धियों का जश्न नहीं मना सकता। प्रधानमंत्री मोदी को लेकर जिस तरह का राजनीतिक माहौल स्थापित हो चुका है, उसमे अगर प्रगतिशील खेमा और कांग्रेस की आलोचना के केंद्र में मोदी ना रहें तो ही हैरत होगी। प्रगतिशील खेमा मोदी को कमतर दिखाने की कोशिश में नेहरू को सबसे ज्यादा दिनों तक प्रधानमंत्री दिखाने की कोशिश कर रहा है। इस आलोक में इतिहास के तथ्यों को जांचना जरूरी है। इसमें दो राय नहीं कि जब 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली, तब पंडित जवाहर लाल नेहरू ने ही देश के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। लेकिन वह किसी एक दल विशेष यानी कांग्रेस की ही सरकार नहीं थी, बल्कि एक तरह से वह राष्ट्रीय सरकार थी, जिसमें अंबेडकर भी थे और श्यामाप्रसाद मुखर्जी भी। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ऐसा लगने लगा था कि भारत को आजादी मिल जाएगी। इस बीच ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी और लॉर्ड एटली प्रधानमंत्री बने। एटली ने चुनावी वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनी तो भारत को स्वाधीनता दी जाएगी। जब उन्होंने ब्रिटेन की कमान संभाल ली तो उन्होंने भारत को आजादी देने की प्रक्रिया तेज कर दी। इसी सिलसिले में 1946 में कैबिनेट मिशन भारत आया। मिशन के सामने सवाल यह था कि सत्ता का हस्तांतरण किसे किया जाएगा, क्योंकि उन दिनों भारत में दो बड़े और प्रमुख दल थे, कांग्रेस और मुस्लिम लीग। लेकिन सत्ता किसे सौंपी जाए, इस सवाल के साथ ही भारत की भावी सरकार और विधान को तैयार करने के लिए संविधान सभा का चुनाव 1946 में हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस को 208 और मुस्लिम लीग को 73 सीटें मिलीं। दूसरे दलों और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं थी। इसके पहले प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव हुए थे, जिसमें कांग्रेस को 923 और मुस्लिम लीग को 425 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को सामान्य सीटों के नब्बे प्रतिशत हिस्से पर जीत मिली, मुस्लिम बहुल 87 प्रतिशत सीटों पर मुस्लिम लीग को जीत मिली। इसके बाद सबसे बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस को ही सत्ता हस्तांतरण होना तय हुआ। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष का महत्व बढ़ गया। उन दिनों कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए अधिकांश प्रांतीय समितियों ने सरदार पटेल का नाम आगे किया था, जबकि कुछ ही प्रांतीय कांग्रेस समितियों ने जवाहर लाल नेहरू का नाम आगे किया। चूंकि गांधी जी पहले ही कह चुके थे कि उनके बाद जवाहर उनकी भाषा बोलेगा यानी सत्ता उन्हें मिलेगी, इसलिए वे ही अध्यक्ष बनाए गए। इसके बाद सत्ता हस्तांतरण प्रक्रिया के तहत 2 सितंबर 1946 को 'अंतरिम सरकार' का गठन हुआ, जिसमें नेहरू जी को 'वायसराय की कार्यकारी परिषद का उपाध्यक्ष' बनाया गया, उस पद का नाम प्रधानमंत्री नहीं था। इसे अंतरिम सरकार कहा गया। भले ही कुछ लोग सुविधा के लिए नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल को उसी दिन से मान लेते हैं। यहां याद करना जरूरी है कि वायसराय की कार्यकारी परिषद के पदेन अध्यक्ष खुद वायसराय लॉर्ड वेवेल थे। उनके बाद आए वायसराय माउंटबेटन इसके अध्यक्ष रहे। देश को स15 अगस्त 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के तहत देश को आजाद घोषित किया गया। इस कानून के मूल पाठ में कहीं भी प्राइम मिनिस्टर या प्रधानमंत्री शब्द नहीं लिखा हुआ है। हालांकि पंद्रह अगस्त 1947 की आधी रात को नेहरू ने स्वाधीन सरकार के मंत्री के रूप में शपथ ली, भले ही वे उसके मुखिया थे। नेहरू ने अंग्रेजी में शपथ लेते हुए ‘ऑफिस ऑफ मिनिस्टर’ यानी मंत्री पद की शपथ ली थी, प्रधानमंत्री पद की नहीं। इसके बाद ही उन्होंने ‘नियति से साक्षात्कार’ वाला प्रसिद्ध भाषण दिया था। यहां याद करना चाहिए कि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत तत्कालीन गवर्नर-जनरल को ब्रिटिश सम्राट के प्रतिनिधि के रूप में दोनों उपनिवेशों भारत और पाकिस्तान का संवैधानिक प्रमुख नियुक्त किया गया था। जिन्हें सलाह देने और शासन चलाने के लिए एक मंत्रि परिषद का प्रावधान था। इस प्रावधान में प्रधानमंत्री या प्रीमियर या प्राइम मिनिस्टर का कोई पद नहीं है। गवर्नर-जनरल को इसी मंत्रि परिषद की सलाह पर शासन चलाना था। मोदी को सबसे लंबे समय तक बतौर निर्वाचित प्रधानंत्री काम करने के रिकॉर्ड को गलत साबित करने वाला प्रगतिशील तबके का तर्क है कि 1946 के चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ा दल बन कर उभरी और उसके निर्वाचित नेता के तौर पर नेहरू ने सरकार चलाई। लेकिन हकीकत यह है कि 1946 का चुनाव वयस्क मतदान के अधिकार और एक व्यक्ति, एक वोट के सिद्धांत के तहत नहीं हुआ था। तब वोटर होने की शर्त संपत्ति, शिक्षा, कर भुगतान आदि था। मुसलमान सिर्फ मुस्लिम बहुल सीटों के ही मतदाता थे। एक तरह से यह सार्वभौम वयस्क मतदान के अधिकार से रहित चुनाव था। इसलिए सही मायने में 1946 का चुनाव ना तो समानता और वयस्क मतदान के अधिकार से लैस था, न ही पूरे देश के मतदाताओं का प्रतिबिंब था। एक तरह से कहें तो यह सिर्फ दस प्रतिशत लोगों के मतदान की बुनियाद पर हुआ चुनाव था। जिसमें हर वयस्क की भागीदारी नहीं थी। उन दिनों धार्मिक आधार पर अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र भी थे। इसलिए 1946 का चुनाव सही मायने में संतुलित मतदान नहीं था। स्वाधीन भारत में पहला आम चुनाव 1951 -52 के बीच हुआ। जिसमें कांग्रेस को 364 सीटें मिलीं। इसी नतीजे के आधार पर पंडित नेहरू ने 13 मई 1952 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और 27 मई 1964 को मृत्यु पर्यंत अपने पद पर रहे। इसी लिहाज से नेहरू का निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल 4398 दिन ही होता। आधुनिक सार्वभौम मतदान के अधिकार और सिद्धांत के लिहाज से देखें तो पंडित नेहरू का निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर असल कार्यकाल 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक का ही होता है। रही बात नेहरू और मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियों की, तो इसकी तुलना की जा सकती है। भारत की आजादी के वक्त देश में बीस विश्वविद्यालय थे, जिसे नेहरू ने अपने कार्यकाल में 64 तक पहुंचा दिया था। इस लिहाज से देखें तो मोदी के कार्यकाल में देश में साढ़े पांच सौ से ज्यादा विश्वविद्यालय हो चुके हैं। नेहरू समर्थक कह रहे हैं कि आजादी के वक्त देश में 15 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या बढ़ाकर नेहरू ने 81 कर दी थी। लेकिन जब मोदी ने कार्यकाल संभाला तो देश में 393 मेडिकल कॉलेज थे, जिसे उन्होंने 818 तक कर दिया है। 431 मेडिकल कॉलेज तो 2014 के बाद ही बने हैं। बेशक नेहरू अपनी विदेश नीति के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मोदी ने भारत के स्वत्व बोध को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब बढ़ाया है। - उमेश चतुर्वेदी लेखक राजनीतिक समीक्षक और वरिष्ठ पत्रकार हैं...
राजनाथ सिंह के आवास पर भाजपा की अहम बैठक, केंद्रीय टीम में बदलाव की चर्चाएं तेज
भाजपा की केंद्रीय टीम में संभावित फेरबदल को लेकर हलचल तेज हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद संगठन में बड़े बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी आज फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी7 समिट में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को दो दिन के दौरे पर फ्रांस के एवियन पहुंचेंगे। यह उनके दो देशों के दौरे का तीसरा और आखिरी पड़ाव होगा।
खान सर पर गंभीर आरोप लगने के बाद पटना कोचिंग संस्थान विवाद में नया मोड़
खान ग्लोबल स्टडीज से जुड़े विवाद में सोमवार को उस समय एक नया मोड़ आ गया, जब पटना की एक सिविल अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद बेउर जेल से रिहा हुए रोशन आनंद ने फैसल खान (खान सर) पर गंभीर आरोप लगाए।
कुणाल घोष पर फेंका गया अंडा, युवक का आरोप- 'उन्होंने हमारे साथ बहुत ज्यादतियां की हैं'
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक कुणाल घोष पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान अंडा फेंका गया
प्रिंस यादव मौत मामले की भारत, बिहार और नेपाल सरकार मिलकर संयुक्त जांच करे : तेजस्वी यादव
पटना में ज्ञान बिंदु कोचिंग से जुड़े रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है
तमिलनाडु में मुस्लिम आरक्षण बढ़ाने की मांग पर सियासत तेज, भाजपा ने जताया कड़ा विरोध
तमिलनाडु में मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की उस मांग का कड़ा विरोध किया है
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय अपने जन्मदिन पर राशन कार्ड वितरण की नई प्रणाली शुरू करेंगे
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय अपने जन्मदिन के अवसर पर 22 जून को राज्य भर में नए राशन कार्डों के वितरण की शुरुआत करने वाले हैं
मोदी की फ्रांस, स्लोवाकिया यात्रा से बदले वैश्विक समीकरण, दुनिया को दिखा नए भारत का दम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खासतौर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मोदी का स्वागत जिस धुरंधर स्टाइल में किया, उसने दुनिया को साफ संदेश दे दिया कि मोदी वैश्विक राजनीति के सबसे बड़े धुरंधरों में गिने जाते हैं। इस यात्रा के दौरान यूरोप की धरती पर भारत की बढ़ती ताकत और मोदी की वैश्विक लोकप्रियता हर तरफ दिखाई दी। फ्रांस से लेकर स्लोवाकिया तक भारतीय समुदाय ने अपने प्रधानमंत्री का जिस उत्साह, जोश और भारतीय अंदाज में स्वागत किया, उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। हाथों में तिरंगा, भारत माता के जयकारे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह दिखा दिया कि दुनिया भर में बसे भारतीय आज अपने देश की बढ़ती प्रतिष्ठा पर गर्व महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि मोदी की यह यात्रा केवल एक विदेशी दौरा नहीं रही, बल्कि दुनिया के सामने नए और शक्तिशाली भारत का दमदार प्रदर्शन बन गई। यूरोप में गूंजी भारत की ताकत देखा जाये तो यूरोप की धरती पर मोदी का स्वागत जिस गर्मजोशी, रणनीतिक सम्मान और राजनीतिक विश्वास के साथ हुआ, उसने दुनिया को यह संदेश दिया कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका निर्णायक होती जा रही है। विशेष रूप से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को जिस तरह भारतीय रंग दिया, वह भारत की बढ़ती सांस्कृतिक और रणनीतिक ताकत की स्वीकारोक्ति थी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो, मोदी और मैक्रों की आत्मीयता और नाइस में आयोजित भारत इनोवेट्स सम्मेलन ने यह साबित किया कि भारत और फ्रांस का रिश्ता अब केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तकनीक, नवाचार, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक नेतृत्व की साझेदारी में बदल चुका है। राफेल से बदल जाएगा दक्षिण एशिया का खेल मोदी और मैक्रों की बैठक में जो सबसे महत्वपूर्ण संदेश उभरा, वह था रक्षा सहयोग का नया प्रारूप। भारत ने साफ कर दिया कि अब वह केवल विदेशी हथियारों का खरीदार नहीं रहेगा। राफेल कार्यक्रम को लेकर भारत ने सह विकास, सह डिजाइन, सह उत्पादन और सह निर्माण की नीति अपनाकर अपनी रणनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री का बयान इस बात का संकेत है कि मोदी सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को निर्णायक रूप से आगे बढ़ा रही है। इसे भी पढ़ें: अब Europe में भी 'Make in India' की गूंज, Slovakia के साथ Joint Defence Production पर बनी सहमति। देखा जाये तो राफेल केवल एक युद्धक विमान नहीं है बल्कि यह भारत की सामरिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है। भारतीय वायुसेना के पास पहले से मौजूद 36 राफेल विमानों ने दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। अब भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल समुद्री विमानों का समझौता और भविष्य में बड़े राफेल कार्यक्रम की तैयारी यह दिखाती है कि भारत हिंद महासागर से लेकर हिमालय तक अपनी सैन्य क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। इन विमानों की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता, अत्याधुनिक सेंसर प्रणाली और बहु भूमिका युद्ध कौशल भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ निर्णायक बढ़त देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब राफेल का निर्माण और उसके पुर्जों का उत्पादन भारत में करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है। इसके जरिये भारत विश्व का प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र बन सकता है। इससे न केवल लाखों कुशल रोजगार पैदा होंगे बल्कि भारत का रक्षा औद्योगिक ढांचा भी मजबूत होगा। यह बदलाव दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति पर गहरा प्रभाव डालेगा। अब तक हथियार आयात पर निर्भर भारत धीरे धीरे रक्षा निर्यातक राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भारत के पक्ष में और अधिक झुकता दिखाई देगा। राफेल, एआई और रणनीति... मोदी ने यूरोप में रचा नया इतिहास साथ ही फ्रांस के साथ भारत की साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। भारत फ्रांस नवाचार रोडमैप 2030, कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्य समूह, आर्थिक सुरक्षा संवाद और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला पर सहयोग जैसे फैसले इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश आने वाले दशकों की वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को साथ मिलकर आकार देना चाहते हैं। नाइस में आयोजित भारत इनोवेट्स सम्मेलन इस यात्रा का सबसे प्रतीकात्मक क्षण साबित हुआ। एक सौ बीस से अधिक भारतीय डीप टेक स्टार्टअप, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों की भागीदारी और वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल बाजार नहीं, बल्कि नवाचार का वैश्विक केंद्र बन चुका है। मोदी ने सही कहा कि भारत और फ्रांस का रिश्ता केवल हितों का नहीं, बल्कि साझा दृष्टि का रिश्ता है। मैक्रों द्वारा भारत की चंद्रयान उपलब्धि और नवाचार क्षमता की खुली प्रशंसा इस बात का प्रमाण है कि विश्व अब भारत को तकनीकी महाशक्ति के रूप में देखने लगा है। फ्रांस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू था अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा सहयोग। छोटे और उन्नत परमाणु रिएक्टरों पर सहयोग तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में साझेदारी भारत को भविष्य की रणनीतिक तकनीकों में अग्रणी स्थान दिला सकती है। यही कारण है कि भारत फ्रांस संबंध अब पारंपरिक कूटनीति से निकलकर भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की धुरी बनते दिख रहे हैं। फ्रांस के साथ ही स्लोवाकिया में बजा मोदी का डंका फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा ने भारत की यूरोपीय रणनीति को और गहराई दी। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा थी और इसी तथ्य ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री राबर्ट फित्सो और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ हुई बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब यूरोप के छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ भी मजबूत संबंध बना रहा है। भारत और स्लोवाकिया के बीच संबंधों को व्यापक साझेदारी का दर्जा दिया जाना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है। यह मध्य यूरोप में भारत की बढ़ती उपस्थिति का संकेत है। वाहन निर्माण, रेलवे उत्पादन, निवेश, उभरती तकनीक और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग भारत को यूरोपीय संघ के भीतर नई आर्थिक और रणनीतिक पहुंच देगा। विशेष रूप से भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र लागू करने की दिशा में सक्रिय दिख रहा है, जिसका लाभ भारतीय उद्योग और निर्यात को मिलेगा। कूटनीति के मास्टर हैं मोदी देखा जाये तो मोदी की यह पूरी यूरोपीय यात्रा दरअसल भारत की बहुस्तरीय कूटनीति का उदाहरण है। एक ओर फ्रांस जैसे शक्तिशाली राष्ट्र के साथ रक्षा और तकनीकी गठजोड़ को नई ऊंचाई दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्लोवाकिया जैसे देशों के माध्यम से यूरोप में भारत का प्रभाव क्षेत्र विस्तारित किया जा रहा है। यह नीति भारत को ग्लोबल साउथ और पश्चिमी शक्तियों के बीच एक संतुलित, विश्वसनीय और प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज दुनिया के बदलते भू राजनीतिक माहौल में भारत जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी रणनीतिक दिशा तय कर रहा है, उसके केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय और दूरदर्शी कूटनीति है। चाहे रक्षा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हो, वैश्विक नवाचार में नेतृत्व की महत्वाकांक्षा हो या यूरोप के साथ बहुआयामी साझेदारी का विस्तार, मोदी सरकार ने हर मोर्चे पर भारत की स्थिति को मजबूत किया है। -नीरज कुमार दुबे
राज्यसभा में बदल रहा सियासी गणित, एनडीए दो-तिहाई बहुमत के करीब; टीएमसी में टूट का असर संसद तक
तृणमूल कांग्रेस में बगावत और हालिया राज्यसभा चुनावों के बाद संसद का सियासी गणित बदलता नजर आ रहा है। NDA राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकता है, जबकि लोकसभा में भी TMC के बागी सांसदों का असर देखने को मिल रहा है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 17 जून से कोटा से देशव्यापी छात्र संवाद अभियान की शुरुआत करेंगे। NEET पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर छात्रों से सीधे चर्चा की जाएगी।
उद्योगपति परिमल नतवानी को आगे कर झारखंड में तोड़फोड़ की कोशिश कर रही है भाजपा: दीपांकर भट्टाचार्य
झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीपीआई (एमएल) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है
टीएमसी के 20 बागी सांसदों का नया ठिकाना बनी NCPI, त्रिपुरा से शुरू हुआ सफर अब पहुंचा संसद तक
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया है। जानिए क्या है इस छोटी पार्टी का इतिहास, त्रिपुरा से उसका संबंध और इस विलय के राजनीतिक मायने।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते से कच्चा तेल 4% टूटा, पेट्रोल-डीजल के दाम घटने की बढ़ी उम्मीद
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 फीसदी से अधिक गिरावट आई है। जानिए इसका भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।
त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज में युवती की मौत पर सीपीआई (एम) ने एसआईटी जांच की मांग उठाई
त्रिपुरा के एक निजी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 24 वर्षीय युवती की रहस्यमय मौत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं
पंढरपुर दुर्घटना पर मुआवजा ठीक, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए सरकार: शायना एनसी
शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शायना एनसी ने पंढरपुर में हुई दुखद दुर्घटना पर दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि पैसा देकर किसी के परिवार को नहीं लाया जा सकता है
केंद्र की एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने रविवार को दुर्ग स्थित सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता की
ईमानदारी और विकास के दम पर 2027 में चुनाव जीतेगी आम आदमी पार्टी: अमन अरोड़ा
पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए पूरी तरह तैयार है और यदि कल भी चुनाव हो जाएं तो पार्टी उसका स्वागत करेगी।
जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू सरकार पर 'विपक्ष की आवाज दबाने' का आरोप लगाया
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने एन. चंद्रबाबू नायडू सरकार पर लोगों और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
अन्ना हजारे: 'मैं भी अन्ना हूं' से देशभर में जागी थी क्रांति, भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई बुलंद आवाज
15 जून 1937 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में जन्मे किसान बाबूराव हजारे को आज दुनिया अन्ना हजारे के नाम से जानती है। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने कई सामाजिक सुधारों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पांच साल के अंदर दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्च-स्तरीय सिस्टम बनाने पर सहमति जताई।
बदला हुआ गोरखपुर बनेगा देश के लिए विकास मॉडल: सीएम योगी
गोरखपुर को विकास का बेहतरीन मॉडल बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में शहर ने बीमारी, बदहाल बुनियादी ढांचे, जलभराव, अपराध और पहचान के संकट से निकलकर विकास, सुशासन और आधुनिक सुविधाओं के नए युग में प्रवेश किया है।
युवा, महिला और बुजुर्ग परेशान, ओडिशा सरकार जश्न में व्यस्त: ओपीसीसी अध्यक्ष
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने और केंद्रपाड़ा जिले में एक महिला सरपंच के कथित उत्पीड़न व गिरफ्तारी के मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है
यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में कदम उठाते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने रविवार को ईस्टर्न रेलवे (ईआर) के तारकेश्वर-सेओराफुली सेक्शन का बारीकी से निरीक्षण किया
काकोली घोष का दावा, 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी' में शामिल होंगे टीएमसी के बागी सांसद
तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ सांसदों ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और अलग बैठने की व्यवस्था तथा कथित राजनीतिक बदलाव को लेकर ज्ञापन सौंपा
एफएसएसएआई गुमराह करने वाले फूड लेबल्स के खिलाफ सख्त, कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने रविवार को कहा कि उसने कई खाद्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इन कंपनियों पर भ्रामक ब्रांडिंग और उत्पाद से जुड़े दावों के जरिए लेबलिंग नियमों का उल्लंघन का आरोप है।
नयी औद्योगिक क्रांति की और भारत, भव्य योजना से बदलेगी तस्वीर: उद्योग जगत
नई दिल्ली, भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) देश में नई पीढ़ी की औद्योगिक अवसंरचना (इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित करने की दिशा में एक साहसिक और दूरदर्शी कदम है। उद्योग जगत का मानना है कि यह योजना भारत के औद्योगिक विकास को नई गति देगी।
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे और मनोवैज्ञानिक डॉ. वैद्यनाथ घोष ने ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा सहित कई नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बंगाल में चार हजार ईवीएम जलने पर इमरान मसूद ने जताई चिंता, बोले- देश को अब जागने की जरूरत
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ईवीएम के कथित दुरुपयोग लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में हाल की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चिंता पैदा करती हैं
टीएमसी सांसदों की बगावत पर प्रेम कुमार बोले, ममता बनर्जी की कार्यशैली जिम्मेदार
बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कई अहम मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने और राजनीतिक निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
इंडिया गठबंधन पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगा और 2027 में जीत हासिल करेगा: अखिलेश प्रताप सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगा और 2027 में जीत हासिल करेगा।
'महिला कोई वस्तु नहीं', '370 रुपए की बिरयानी' टिप्पणी पर भड़कीं शाइना एनसी
कमीडियन प्रणित मोरे के एक शो के दौरान '370 रुपए की बिरयानी' वाली की गई विवादास्पद टिप्पणी को शिवसेना नेता शाइना एनसी ने बेहद निंदनीय बताया
बंगाल: काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ने ममता बनर्जी, तृणमूल सांसदों को भेजा कानूनी नोटिस
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बेटे बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तृणमूल सांसदों सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और पूर्व तृणमूल नेता सोनाली गुहा को उनके खिलाफ झूठे, मानहानिकारक और निराधार आरोप लगाने के लिए कानूनी नोटिस भेजा।
राज्य में 100 फीसदी लोगों का आधार कार्ड बन चुका है: सीएम हिमंता
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जोरहाट में तकनीकी खराबी के कारण एक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से जुड़ी घटना पर अपनी बात रखी।
भारत का यूपीआई सिस्टम दक्षिण अफ्रीका में कैशलेस युग की शुरुआत कर सकता है : रिपोर्ट
दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने भारत की रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को एक आदर्श मॉडल बताया है
जम्मू के डिविजनल कमिश्नर ने श्री शिव खोड़ी श्राइन बोर्ड बैठक की अध्यक्षता की
जम्मू के डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने रानसू में श्री शिव खोड़ी श्राइन बोर्ड बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में श्राइन बोर्ड के कामकाज की समीक्षा की गई और पवित्र तीर्थस्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सुविधाओं को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की गई।
सीएम मोहन यादव से मिले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा और नई शिक्षा नीति पर हुई चर्चा
मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भेंट की। मुख्यमंत्री यादव ने केंद्रीय मंत्री प्रधान का पुष्प गुच्छ और अंगवस्त्रम् से अभिवादन किया तथा उन्हें बाबा महाकाल की प्रतिकृति भेंट की।
मशहूर स्टैंडअप कमीडियन प्रणीत मोरे द्वारा एक कॉमेडी शो के दौरान की गई विवादित टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ '370 बिरयानी' विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने जम्मू-कश्मीर के कटरा में श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा, एक आस्था है, एक श्रद्धा है, एक विश्वास है। उसी विश्वास के आधार पर बार-बार मां के दरबार में आना होता है। मुझे लगता है कि आज तक जो मुझे मिला है, यहीं से मिला है।
मीनाक्षीनटराजननामांकनविवादमेंनयामोड़, अबहाईकोर्टकादरवाजाखटखटाएगीकांग्रेस
भोपाल. मध्यप्रदेशकेराज्यसभाचुनावमेंकांग्रेसप्रत्याशीमीनाक्षीनटराजनकानामांकननिरस्तकिएजानेकाविवादअबन्यायिकलड़ाईकेअगलेचरणमेंपहुंचगयाहै. सुप्रीमकोर्टऔरनिर्वाचनआयोगसेराहतनहींमिलनेकेबादकांग्रेसनेमध्यप्रदेशहाईकोर्टमेंचुनावयाचिकादायरकरनेकीतैयारीशुरूकरदीहै. पार्टीकाराष्ट्रीयनेतृत्वइसमामलेकोगंभीरतासेलेतेहुएवरिष्ठअधिवक्ताओंसेकानूनीसलाहलेरहाहै. मीनाक्षीनटराजनभीइनदिनोंदिल्लीमेंमौजूदहैंऔरपार्टीसूत्रोंकेअनुसारअगलेसप्ताहहाईकोर्टमेंयाचिकादायरकीजासकतीहै. कांग्रेसकीकोशिशहैकि 21 जूनसेपहलेकिसीप्रकारकीअंतरिमराहतप्राप्तहोजाए. इसकेपीछेसबसेबड़ाकारणयहहैकिराज्यसभाकेलिएनिर्विरोधनिर्वाचितघोषितकिएगएभाजपाउम्मीदवारतरुणचुग, रजनीशअग्रवालऔरमहेशकेवटइसीअवधिकेबादशपथग्रहणकरसकतेहैं. कांग्रेसकामाननाहैकियदिशपथसेपहलेन्यायालयसेकोईसकारात्मकआदेशप्राप्तहोजाताहैतोमामलेकीदिशाबदलसकतीहै. शुक्रवारकोइसविवादकोलेकरकांग्रेसकोबड़ाझटकातबलगाथाजबसुप्रीमकोर्टनेमीनाक्षीनटराजनकीयाचिकापरहस्तक्षेपकरनेसेइनकारकरदिया. इससेपहलेनिर्वाचनआयोगसेभीउन्हेंकोईराहतनहींमिलीथी. इसकेबादपार्टीनेचुनावयाचिकाकेरास्तेपरआगेबढ़नेकानिर्णयलियाहै. चुनावसंबंधीकानूनीप्रावधानोंकेअनुसारअधिसूचनाजारीहोनेके 45 दिनोंकेभीतरचुनावयाचिकादायरकीजासकतीहै. इसीसमयसीमाकोध्यानमेंरखतेहुएकांग्रेसकानूनीतैयारीकोअंतिमरूपदेरहीहै. प्रदेशकांग्रेसअध्यक्षजीतूपटवारीनेस्पष्टसंकेतदिएहैंकिपार्टीइसमामलेकोछोड़नेवालीनहींहै. उनकाकहनाहैकिनामांकननिरस्तकरनेकानिर्णयलोकतांत्रिकप्रक्रियापरप्रश्नचिह्नखड़ाकरताहैऔरबहुतजल्दहाईकोर्टमेंचुनावयाचिकाप्रस्तुतकीजाएगी. कांग्रेसकाआरोपहैकिनामांकननिरस्तकरनेकीकार्रवाईराजनीतिकपूर्वाग्रहसेप्रेरितथीऔरइससेविपक्षकीलोकतांत्रिकभागीदारीप्रभावितहुईहै. राजनीतिकस्तरपरभीकांग्रेसइसमुद्देकोव्यापकजनआंदोलनकारूपदेनेकीतैयारीकररहीहै. दिल्लीमेंविरोधदर्जकरानेगएअधिकांशविधायकभोपाललौटचुकेहैं, जबकिकुछनेतारविवारतकप्रदेशपहुंचेंगे. पार्टीने 15 से 17 जूनकेबीचप्रदेशभरकेजिलामुख्यालयोंपरविरोधप्रदर्शनकीघोषणाकीहै. 15 जूनकोयुवाकांग्रेस, 16 जूनकोएनएसयूआईऔर 17 जूनकोमहिलाकांग्रेसअलग-अलगस्तरपरप्रदर्शनकरइसमुद्देकोजनताकेबीचलेजाएंगी. कानूनीविशेषज्ञोंकामाननाहैकिअबचुनावयाचिकाहीइसमामलेकाएकमात्रप्रभावीरास्ताहै. हाईकोर्टजबलपुरकेवरिष्ठअधिवक्तासंजयकेअग्रवालकेअनुसार, चूंकितीनोंभाजपाउम्मीदवारनिर्विरोधनिर्वाचितहुएहैं, इसलिएचुनावयाचिकामेंसभीकोपक्षकारबनानाअनिवार्यहोगा. उनकाकहनाहैकियहकहनासंभवनहींहैकिमीनाक्षीनटराजनकीजगहकेवलकिसीएकउम्मीदवारकानिर्वाचनहुआहै. इसलिएतीनोंनिर्वाचितसदस्योंकोन्यायालयमेंअपनापक्षरखनेकाअवसरमिलेगा. कानूनीजानकारोंकेअनुसारइसमामलेकीजटिलताइसबातसेभीबढ़जातीहैकिमतदानकीप्रक्रियाहीनहींहुई. जबचुनावनिर्विरोधसंपन्नहुआहो, तबयहनिर्धारितकरनाकठिनहोजाताहैकियदिनामांकननिरस्तनहुआहोतातोप्रथमवरीयताकेमतकिसेप्राप्तहोते. यहीकारणहैकिइसप्रकरणमेंन्यायालयकोतथ्योंऔरकानूनीव्याख्याओंदोनोंपरविस्तारसेविचारकरनापड़सकताहै. विशेषज्ञबतातेहैंकिराज्यसभाचुनावसेजुड़ीयाचिकाएंसीधेहाईकोर्टमेंदायरकीजातीहैं. सामान्यतःऐसेमामलोंकानिपटाराछहमाहकेभीतरकरनेकाप्रयासकियाजाताहै, लेकिनअदालतोंमेंलंबितमामलोंऔरअन्यकारणोंसेइसमेंअधिकसमयभीलगसकताहै. हालांकिकानूनीदृष्टिसेयदिनिर्वाचितसदस्यशपथलेभीलेतेहैंऔरबादमेंउनकानिर्वाचननिरस्तकरदियाजाताहैतोउनकीसदस्यतास्वतःसमाप्तहोसकतीहै. कांग्रेसइसपूरेमामलेकोकेवलचुनावीविवादनहींबल्किलोकतांत्रिकअधिकारोंऔरसंवैधानिकमूल्योंसेजुड़ाविषयबतारहीहै. प्रदेशकांग्रेसकेमहासचिवरविजोशीकाकहनाहैकिमीनाक्षीनटराजनकानामांकननिरस्तकियाजानाकेवलएकउम्मीदवारकेसाथअन्यायनहींबल्किनिष्पक्षचुनावव्यवस्थापरगंभीरआघातहै. उन्होंनेकहाकिलोकतंत्रमेंचुनावीप्रक्रियाकानूनकेअनुसारसंचालितहोनीचाहिए, नकिकिसीराजनीतिकदबावयामनमानीव्याख्याकेआधारपर. जिलाकांग्रेसकमेटीभोपालग्रामीणकेप्रभारीमनोजराजानीनेभीइसमामलेमेंमहत्वपूर्णकानूनीपहलूउठायाहै. उनकाकहनाहैकिजिसनिजीपरिवादकाउल्लेखकरतेहुएनामांकननिरस्तकियागया, उसमेंमीनाक्षीनटराजनकोअभियुक्तनहींबल्किप्रतिवादीकेरूपमेंदर्शायागयाथा. दोनोंस्थितियोंमेंकानूनीरूपसेमहत्वपूर्णअंतरहोताहै. कांग्रेसकादावाहैकिइसअंतरकोनजरअंदाजकरजोनिर्णयलियागया, उसनेकईगंभीरकानूनीप्रश्नखड़ेकरदिएहैं. राजनीतिकऔरकानूनीदोनोंमोर्चोंपरतेजीसेआगेबढ़रहेइसविवादनेराज्यकीराजनीतिमेंनईहलचलपैदाकरदीहै. अबसभीकीनिगाहेंहाईकोर्टमेंदायरहोनेवालीसंभावितचुनावयाचिकाऔरउससेमिलनेवालेन्यायिकसंकेतोंपरटिकीहैं. आनेवालेदिनोंमेंयहमामलानकेवलराज्यसभाचुनावकीवैधताबल्किचुनावीप्रक्रियाकीपारदर्शिताऔरसंवैधानिकव्याख्याओंकेसंदर्भमेंभीमहत्वपूर्णमिसालबनसकताहै.
पंजाब: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 'आप' को 'लुटेरों का गिरोह' बताया
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार को लुटेरों का गिरोह कहा और दावा किया कि उसका कार्यकाल खत्म होने वाला है।
असममें 18 सालसेऊपरनएआधारकार्डपररोक, हिमंतासरकारकेफैसलेनेछेड़ीनईबहस
गुवाहाटी. असमसरकारनेआधारकार्डजारीकरनेकीप्रक्रियाकोलेकरएकबड़ाऔरचर्चितफैसलालियाहै. मुख्यमंत्रीहिमंताबिस्वासरमाकीअध्यक्षतामेंहुईराज्यमंत्रिमंडलकीबैठकमेंनिर्णयलियागयाकिअबराज्यमें 18 वर्षसेअधिकआयुकेनएआवेदकोंकोआधारकार्डजारीनहींकियाजाएगा. हालांकिअनुसूचितजाति (एससी), अनुसूचितजनजाति (एसटी) औरचायबागानसमुदायसेजुड़ेलोगोंकोइसनियमसेअस्थायीराहतदीगईहै. इनवर्गोंकेपात्रनागरिकोंकोमार्च 2027 तकआधारकार्डजारीकिएजातेरहेंगे. राज्यसरकारकेइसफैसलेनेप्रशासनिकऔरराजनीतिकदोनोंस्तरोंपरनईचर्चाकोजन्मदेदियाहै. शनिवारकोकैबिनेटबैठककेबादमीडियाकोसंबोधितकरतेहुएमुख्यमंत्रीहिमंताबिस्वासरमानेकहाकिराज्यसरकारनेआधारपंजीकरणव्यवस्थाकोअधिकप्रभावीऔरनियंत्रितबनानेकेउद्देश्यसेयहनिर्णयलियाहै. सरकारकामाननाहैकिआधारकार्डपहचानकामहत्वपूर्णदस्तावेजहैऔरइसकेनिर्गमनकीप्रक्रियामेंअतिरिक्तसतर्कताबरतनाआवश्यकहै. इसीकारण 18 वर्षसेअधिकआयुकेनएआवेदनोंपररोकलगानेकानिर्णयलियागयाहै. मुख्यमंत्रीनेस्पष्टकियाकियहप्रतिबंधसभीवर्गोंपरसमानरूपसेलागूनहींहोगा. एससी, एसटीऔरचायबागानसमुदायकेलोगोंकोविशेषछूटप्रदानकीगईहै. इनसमुदायोंकेऐसेलोगजिनकाअबतकआधारकार्डनहींबनाहै, वेमार्च 2027 तकआवेदनकरसकेंगेऔरउन्हेंआधारकार्डजारीकिएजातेरहेंगे. सरकारकातर्कहैकिइनसमुदायोंकेअनेकलोगदूरदराजकेक्षेत्रोंमेंरहतेहैंऔरकईकारणोंसेअबतकआधारपंजीकरणसेवंचितरहगएहैं. राज्यमंत्रिमंडलकीबैठकमेंकेवलआधारकार्डसेजुड़ाफैसलाहीनहींलियागया, बल्किशहरीविकासऔरक्षेत्रीयविस्तारसेसंबंधितकईमहत्वपूर्णप्रस्तावोंकोभीमंजूरीदीगई. मुख्यमंत्रीहिमंताबिस्वासरमानेबतायाकिगुवाहाटीमहानगरविकासप्राधिकरण (जीएमडीए) क्षेत्रमेंएकनएसैटेलाइटशहरकेनिर्माणकामार्गभीप्रशस्तकरदियागयाहै. सरकारकाउद्देश्यगुवाहाटीपरलगातारबढ़रहेजनसंख्याऔरयातायातकेदबावकोकमकरनाहै. इसकेसाथहीआसपासकेक्षेत्रोंमेंआधुनिकशहरीसुविधाओंकाविकासकरसंतुलितक्षेत्रीयविकाससुनिश्चितकरनाभीयोजनाकाहिस्साहै. मुख्यमंत्रीनेकहाकिनएसैटेलाइटशहरकेविकसितहोनेसेरोजगार, आवास, परिवहनऔरआधारभूतसंरचनाकेक्षेत्रमेंनएअवसरपैदाहोंगे. इससेगुवाहाटीमहानगरपरपड़नेवालादबावकमहोगाऔरराज्यकीशहरीविकासनीतिकोनईदिशामिलेगी. सरकारकामाननाहैकिभविष्यकीजरूरतोंकोध्यानमेंरखतेहुएयोजनाबद्धशहरीविस्तारआवश्यकहै. इसबीचमुख्यमंत्रीहिमंताबिस्वासरमानेहालहीमेंनईदिल्लीमेंआयोजितनीतिआयोगकीबैठकमेंभीपूर्वोत्तरभारतकेविकाससेजुड़ेमुद्दोंकोप्रमुखतासेउठाया. उन्होंनेपूर्वोत्तरराज्योंकेमुख्यमंत्रियोंऔरमुख्यसचिवोंकेसाथहुईबैठकमें‘भौगोलिकसमानता’ आधारितविकासमॉडलकीआवश्यकतापरजोरदिया. उनकेअनुसारविकसितभारत 2047 कालक्ष्यकेवलआर्थिकवृद्धिदरबढ़ानेसेहासिलनहींकियाजासकता, बल्कियहसुनिश्चितकरनाभीआवश्यकहैकिविकासकालाभदेशकेहरक्षेत्रऔरहरसमुदायतकपहुंचे. मुख्यमंत्रीनेकहाकिभारतकेविकासकापहलाचरणआर्थिकप्रगतिकोगतिदेनेपरकेंद्रितथा, लेकिनअबसमयआगयाहैकिविकासकेअवसरोंकासमानवितरणसुनिश्चितकियाजाए. उन्होंनेकहाकिपूर्वोत्तरभारतलंबेसमयतकराष्ट्रीयविमर्शकेकेंद्रसेदूररहा, लेकिनप्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदीकेनेतृत्वमेंस्थितिमेंउल्लेखनीयपरिवर्तनआयाहै. आजपूर्वोत्तरक्षेत्रराष्ट्रीयनीतियोंऔरविकासयोजनाओंकामहत्वपूर्णहिस्साबनचुकाहै. उन्होंनेबतायाकिपिछलेकुछवर्षोंमेंपूर्वोत्तरक्षेत्रमेंसड़क, रेलऔरहवाईसंपर्ककेक्षेत्रमेंव्यापकसुधारहुआहै. इसकेअलावाआधारभूतसंरचनाविकास, शांतिस्थापनाकेप्रयासोंऔर‘एक्टईस्टपॉलिसी’ केप्रभावीक्रियान्वयननेइसक्षेत्रकीरणनीतिकऔरआर्थिकमहत्ताकोबढ़ायाहै. मुख्यमंत्रीकेअनुसारइनपहलोंकेकारणपूर्वोत्तरभारतअबकेवलभौगोलिकदृष्टिसेहीनहीं, बल्किआर्थिकऔररणनीतिकरूपसेभीदेशकेलिएअत्यंतमहत्वपूर्णबनगयाहै. हिमंताबिस्वासरमानेयहभीकहाकिअसममेंनिवेशकोंकाविश्वासलगातारबढ़रहाहै. राज्यमेंमैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीयऊर्जाऔरतकनीकीक्षेत्रमेंबड़ेपैमानेपरनिवेशआरहाहै. इससेनकेवलराज्यकीअर्थव्यवस्थाकोमजबूतीमिलरहीहै, बल्किरोजगारकेनएअवसरभीसृजितहोरहेहैं. उन्होंनेविश्वासजतायाकिआनेवालेवर्षोंमेंअसमपूर्वोत्तरभारतकेआर्थिकविकासकाप्रमुखकेंद्रबनकरउभरेगा. हालांकिआधारकार्डसेजुड़ेफैसलेकोलेकरविभिन्नसामाजिकऔरराजनीतिकवर्गोंमेंबहसशुरूहोगईहै. समर्थकोंकामाननाहैकिइससेपहचानसंबंधीप्रक्रियाओंमेंअधिकपारदर्शिताआएगी, जबकिआलोचकोंकाकहनाहैकिइससेकईवास्तविकजरूरतमंदनागरिकप्रभावितहोसकतेहैं. फिलहालराज्यसरकारनेअपनेनिर्णयकोप्रशासनिकसुधारऔरबेहतरप्रबंधनकीदिशामेंउठायागयाकदमबतायाहै. आनेवालेदिनोंमेंइसफैसलेकेप्रभावऔरइसकेक्रियान्वयनकीप्रक्रियापरपूरेदेशकीनजरबनीरहेगी.
आरएसएससबसेबड़ालेकिनसबसेज्यादागलतसमझाजानेवालासंगठन, बोलेमोहनभागवत
नागपुर. राष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघ (आरएसएस) केसरसंघचालकमोहनभागवतनेशनिवारकोसंघकेशताब्दीवर्षसमारोहकेतहतआयोजितएककार्यक्रममेंसंगठनकोलेकरमहत्वपूर्णटिप्पणीकरतेहुएकहाकिआरएसएसदुनियाकासबसेबड़ास्वयंसेवीसंगठनहै, लेकिनसाथहीयहसबसेअधिकगलतसमझाजानेवालासंगठनभीहै. उन्होंनेकहाकिसंघकोबाहरसेदेखकरसमझनाआसाननहींहैऔरइसकेवास्तविकस्वरूपकोजाननेकेलिएउसकेकार्यऔरविचारोंकोभीतरसेअनुभवकरनाआवश्यकहै. संघकेशताब्दीवर्षकेअवसरपरआयोजितकार्यक्रममेंसंबोधितकरतेहुएमोहनभागवतनेकहाकिआमलोगोंकेबीचआरएसएसकोलेकरकईतरहकीधारणाएंऔरभ्रांतियांमौजूदहैं. कुछलोगस्वयंसेवकोंद्वारागणवेशमेंकिएजानेवालेपथसंचलनोंकोदेखकरइसेअर्धसैनिकसंगठनसमझलेतेहैं, जबकिकुछलोगभारतीयखेलोंऔरपारंपरिकव्यायामपद्धतियोंकेप्रचार-प्रसारकेकारणइसेकेवलएकविशालव्यायामशालाकेरूपमेंदेखतेहैं. उन्होंनेकहाकिसंघकीवास्तविकपहचानइससेकहींव्यापकऔरगहरीहै. भागवतनेकहाकिसंघकोकेवलबाहरीगतिविधियोंकेआधारपरपरिभाषितनहींकियाजासकता. उन्होंनेजोरदेकरकहाकिसंघकाउद्देश्यराष्ट्रनिर्माण, समाजसंगठनऔरराष्ट्रीयजीवनकेविभिन्नक्षेत्रोंमेंसकारात्मकपरिवर्तनलानाहै. उनकेअनुसारसंघकोसमझनेकासबसेअच्छातरीकाउसकेकार्यकर्ताओंकेबीचजाकरउसकेकार्योंकोदेखनाऔरअनुभवकरनाहै. उन्होंनेकहाकिकिसीभीसंगठनकेबारेमेंसहीधारणाबनानेकेलिएकेवलसुनी-सुनाईबातोंयापूर्वाग्रहोंपरनिर्भरनहींरहनाचाहिए. हालांकिउन्होंनेयहभीस्वीकारकियाकिकिसीव्यक्तिकोसंघकेबारेमेंजाननेऔरसमझनेकेलिएप्रारंभिकजानकारीकीआवश्यकताहोतीहै. उनकेअनुसारव्याख्यान, साहित्यऔरपुस्तकोंकेमाध्यमसेसंघकेविचारोंऔरकार्यप्रणालीकीएकआधारभूतसमझविकसितकीजासकतीहै, लेकिनवास्तविकअनुभवतभीप्राप्तहोताहैजबकोईव्यक्तिसंगठनकेकार्योंसेप्रत्यक्षरूपसेजुड़ताहै. मोहनभागवतनेस्पष्टकियाकिराष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघकिसीविशेषपरिस्थितिकीप्रतिक्रियाकेरूपमेंअस्तित्वमेंनहींआयाथा. उन्होंनेकहाकिसंघकीस्थापनाकिसीवर्ग, समुदाय, राजनीतिकदलयाविचारधाराकेविरोधकेलिएनहींकीगईथी. बल्किइसकामूलउद्देश्यराष्ट्रहितमेंसमाजकोसंगठितकरनाऔरराष्ट्रीयचेतनाकोमजबूतबनानाथा. उन्होंनेकहाकिसंघकिसीकेखिलाफनहीं, बल्किसमाजऔरराष्ट्रकेपक्षमेंकार्यकरनेवालासंगठनहै. संघप्रमुखनेकहाकिसमयकेसाथसंगठनकेबारेमेंअनेकप्रकारकीधारणाएंविकसितहुईं, जिनमेंसेकईवास्तविकतासेमेलनहींखातीं. यहीकारणहैकिसंघनेअपनेशताब्दीवर्षकेअवसरपरव्यापकजनसंपर्कअभियानचलानेऔरलोगोंतकअपनेविचारतथाकार्यपहुंचानेकानिर्णयलियाहै. उन्होंनेकहाकिइसविशेषअवसरपरसंघसमाजकेविभिन्नवर्गोंकेबीचजाकरअपनेउद्देश्यों, कार्यशैलीऔरयोगदानकेबारेमेंजानकारीसाझाकररहाहै, ताकिलोगोंकेमनमेंमौजूदभ्रमदूरहोसकें. भागवतनेकहाकिसंघकाउदयराष्ट्रकल्याणकेउद्देश्यसेहुआथाऔरपिछलेलगभगएकशताब्दीसेसंगठनउसीदिशामेंकार्यकररहाहै. उन्होंनेकहाकिस्वयंसेवकोंकालक्ष्यव्यक्तिगतलाभनहींबल्किसमाजऔरदेशकीसेवाहै. संघकामाननाहैकिसंगठितसमाजहीराष्ट्रकोमजबूतबनासकताहैऔरइसीविचारकोलेकरसंगठननिरंतरकार्यकरतारहाहै. उन्होंनेयहभीकहाकिदेशकेविकासऔरसामाजिकसमरसताकेलिएसभीवर्गोंकीभागीदारीआवश्यकहै. संघसमाजकेप्रत्येकव्यक्तितकपहुंचनेऔरउसेराष्ट्रनिर्माणकीप्रक्रियामेंसहभागीबनानेकाप्रयासकरताहै. उनकेअनुसारसंगठनकाकार्यकिसीराजनीतिकलाभयाचुनावीउद्देश्यसेप्रेरितनहींहै, बल्कियहदीर्घकालिकसामाजिकपरिवर्तनऔरराष्ट्रीयउत्थानकेलक्ष्यपरआधारितहै. आरएसएसकेशताब्दीवर्षकेदौरानदेशभरमेंविभिन्नकार्यक्रमों, संगोष्ठियों, संवादसत्रोंऔरजनसंपर्कअभियानोंकाआयोजनकियाजारहाहै. संघनेतृत्वकामाननाहैकिइनआयोजनोंकेमाध्यमसेसंगठनकेबारेमेंफैलीगलतफहमियोंकोदूरकरनेऔरसमाजकेविभिन्नवर्गोंकेसाथसंवादस्थापितकरनेकाअवसरमिलेगा. भागवतकेइसबयानकोऐसेसमयमेंमहत्वपूर्णमानाजारहाहैजबराष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघअपनेस्थापनाके 100 वर्षपूरेकरनेकीओरबढ़रहाहै. संघदेशकेसामाजिक, सांस्कृतिकऔरवैचारिकविमर्शमेंलंबेसमयसेप्रभावशालीभूमिकानिभातारहाहैऔरउसकेकार्योंतथाविचारोंकोलेकरसमर्थकोंऔरआलोचकोंकेबीचलगातारबहसहोतीरहीहै. अपनेसंबोधनकेअंतमेंमोहनभागवतनेकहाकिसंघकाउद्देश्यराष्ट्रसेवाकीउसपरंपराकोआगेबढ़ानाहै, जोसमाजकेसंगठन, चरित्रनिर्माणऔरराष्ट्रीयएकतापरआधारितहै. उन्होंनेविश्वासव्यक्तकियाकिसंवादऔरप्रत्यक्षअनुभवकेमाध्यमसेलोगसंघकोबेहतरढंगसेसमझसकेंगेऔरउसकेवास्तविकस्वरूपकोपहचानपाएंगे.
अभिषेकबनर्जीकेघरतड़केपुलिसकीदबिशसेबंगालकीसियासतगरमाई, सुमितरॉयकीतलाशमेंचलासर्चऑपरेशन
कोलकाता. पश्चिमबंगालकीराजनीतिमेंशनिवारकोउससमयबड़ाराजनीतिकऔरप्रशासनिकविवादखड़ाहोगयाजबतृणमूलकांग्रेसकेराष्ट्रीयमहासचिवअभिषेकबनर्जीकेकालीघाटस्थितआवासपरतड़केपुलिसनेतलाशीअभियानचलाया. पश्चिममेदिनीपुरजिलेकेसालबनीथानेकीपुलिसएकभूमिधोखाधड़ीमामलेमेंआरोपीबनाएगएअभिषेकबनर्जीकेनिजीसहायकसुमितरॉयकीतलाशमेंकोलकातापहुंचीथी. पुलिसकादावाहैकितकनीकीनिगरानीकेदौरानआरोपीकीमोबाइललोकेशनकालीघाटक्षेत्रमेंमिलनेकेबादयहकार्रवाईकीगई. हालांकितलाशीकेबावजूदआरोपीवहांनहींमिलाऔरपुलिसकोखालीहाथलौटनापड़ा. शनिवारशामतकयहमामलाराज्यकीराजनीतिकासबसेबड़ामुद्दाबनारहा, जिसपरतृणमूलकांग्रेसऔरभाजपाआमने-सामनेआगए. पुलिससूत्रोंकेअनुसारशुक्रवारदेररातपश्चिममेदिनीपुरपुलिसकीएकटीमकोसूचनामिलीथीकिभूमिधोखाधड़ीमामलेमेंवांछितसुमितरॉयकीमोबाइललोकेशनकोलकाताकेकालीघाटक्षेत्रमेंट्रेसहोरहीहै. इसकेबादसालबनीथानेकीटीमरातमेंहीकोलकातापहुंचीऔरस्थानीयकालीघाटथानेसेसंपर्ककरसंयुक्तकार्रवाईकीयोजनाबनाईगई. पुलिसअधिकारियोंकेमुताबिकलगभगदोबजेबड़ीसंख्यामेंपुलिसकर्मी, महिलापुलिसबलऔरकेंद्रीयअर्धसैनिकबलकेजवानअभिषेकबनर्जीके 121 कालीघाटरोडस्थितआवासपरपहुंचे. पुलिसकाकहनाहैकिप्रारंभिकस्तरपरघरकेभीतरमौजूदलोगोंसेदरवाजाखोलनेऔरजांचमेंसहयोगकरनेकाअनुरोधकियागया, लेकिनकाफीदेरतककोईप्रतिक्रियानहींमिली. इसकेबादस्थितिगतिरोधपूर्णहोगई. अधिकारियोंकेअनुसारलगभगचारघंटेतकइंतजारकरनेकेबादकोलकातापुलिसकीडिजास्टरमैनेजमेंटटीमकोबुलायागया, जिसनेतालेतोड़करप्रवेशकारास्ताबनाया. सुबहकरीबछहबजेपुलिसदलआवासपरिसरमेंदाखिलहुआऔरतलाशीअभियानशुरूकियागया. बतायागयाकितलाशीअभियानलगभगएकघंटेसेअधिकसमयतकचला. इसदौरानघरकेविभिन्नहिस्सोंकीजांचकीगई, लेकिनपुलिसकोनतोआरोपीसुमितरॉयमिलाऔरनहीकोईऐसीसामग्रीबरामदहुईजिसेजब्तकरनेकीआवश्यकताहो. पुलिसअधिकारियोंनेस्पष्टकियाकितलाशीपूरीतरहकानूनीप्रक्रियाकेतहतकीगईऔरकिसीप्रकारकीबरामदगीनहींहुई. कार्रवाईकीसूचनामिलतेहीपश्चिमबंगालकीमुख्यमंत्रीऔरतृणमूलकांग्रेसप्रमुखममताबनर्जीभीसुबहअभिषेकबनर्जीकेआवासपहुंचगईं. उनकेसाथपार्टीकेकुछवरिष्ठनेताऔरकानूनीसलाहकारभीमौजूदथे. सूत्रोंकेअनुसारममताबनर्जीनेपुलिसअधिकारियोंसेकार्रवाईकाआधारऔरजांचसेजुड़ीजानकारीली. उससमयअभिषेकबनर्जीभीअपनेआवासपरमौजूदथे. तलाशीअभियानसमाप्तहोनेकेबादअभिषेकबनर्जीनेमीडियासेसंक्षिप्तबातचीतमेंकहाकिपुलिसनेउनकेघरकीतलाशीलीहैऔरइससंबंधमेंसभीप्रश्नजांचएजेंसीसेपूछेजानेचाहिए. उन्होंनेकहाकिवहस्वयंजांचएजेंसीनहींहैंऔरपुलिसनेजोभीकार्रवाईकीहै, उसकेबारेमेंवहीबेहतरजानकारीदेसकतीहै. उन्होंनेयहभीकहाकिपुलिसनेघरमेंप्रवेशकरनेकेलिएतालेतोड़े. शनिवारशामतकइसकार्रवाईपरराजनीतिकप्रतिक्रियाओंकासिलसिलाजारीरहा. तृणमूलकांग्रेसनेइसेराजनीतिकप्रतिशोधकीकार्रवाईबतातेहुएकेंद्रसरकारऔरभाजपापरनिशानासाधा. पार्टीनेसोशलमीडियाप्लेटफॉर्मएक्सपरबयानजारीकरकहाकिराजनीतिकबदलेकीभावनाअबखतरनाकस्तरतकपहुंचचुकीहै. तृणमूलनेताओंकाआरोपहैकिविपक्षीनेताओंकोदबावमेंलानेऔरउन्हेंराजनीतिकरूपसेकमजोरकरनेकेलिएजांचएजेंसियोंकाइस्तेमालकियाजारहाहै. तृणमूलसांसदमहुआमोइत्रानेभीइसकार्रवाईपरतीखीप्रतिक्रियाव्यक्तकी. उन्होंनेकहाकिदेररातपुलिसकापहुंचना, तालेतोड़करघरमेंप्रवेशकरनाऔरफिरकुछभीबरामदनहोनायहदर्शाताहैकिपूरीकार्रवाईराजनीतिकउद्देश्यसेप्रेरितथी. उनकेअनुसारइसतरहकीकार्रवाईविपक्षीनेताओंकोडराने-धमकानेकाप्रयासहै. दूसरीओरभाजपानेताओंनेपुलिसकार्रवाईकाबचावकिया. भाजपाकीपूर्वसांसदलॉकेटचटर्जीनेकहाकियदिकिसीमामलेमेंजांचचलरहीहैतोकानूनअपनाकामकरेगाऔरकिसीभीव्यक्तिकोकानूनसेऊपरनहींमानाजासकता. उन्होंनेकहाकिजिनलोगोंनेसत्तामेंरहतेहुएगलतकार्यकिएहैं, उन्हेंअबसंवैधानिकऔरकानूनीप्रक्रियाओंकासामनाकरनापड़ेगा. यहघटनाक्रमऐसेसमयसामनेआयाहैजबअभिषेकबनर्जीपहलेसेहीकईजांचोंकासामनाकररहेहैं. हालकेदिनोंमेंप्रवर्तननिदेशालयऔरराज्यकीअपराधअन्वेषणविभागद्वाराउन्हेंविभिन्नमामलोंमेंपूछताछऔरसमनभेजेगएहैं. गुरुवारकोसीआईडीनेउनसेकथितहस्ताक्षरजालसाजीमामलेमेंलगभगछहघंटेतकपूछताछकीथी. शुक्रवारकोभीसीआईडीकीएकटीमउनकेआवासपरपहुंचकरचुनावपूर्वकथितभड़काऊभाषणोंसेजुड़ेमामलेमेंसमनसौंपकरगईथी. इसकेअलावात्रिपुराकीएकअदालतनेभीउन्हें 22 जूनकोपुलिसकेसमक्षउपस्थितहोनेकेनिर्देशदिएहैं. राजनीतिकविश्लेषकोंकामाननाहैकियहपूरामामलाऐसेसमयसामनेआयाहैजबतृणमूलकांग्रेसचुनावीझटकोंऔरआंतरिकअसंतोषकासामनाकररहीहै. पार्टीकेभीतरकईसांसदोंऔरविधायकोंकेरुखकोलेकरचर्चाएंजारीहैंऔरसंगठनात्मकस्तरपरभीचुनौतियांबनीहुईहैं. ऐसेमाहौलमेंअभिषेकबनर्जीकेआवासपरहुईपुलिसकार्रवाईनेराजनीतिकतापमानऔरबढ़ादियाहै. शनिवारशामतकपुलिसकीओरसेयहस्पष्टकरदियागयाकिआरोपीसुमितरॉयकीतलाशजारीहैऔरजांचप्रक्रियाआगेभीजारीरहेगी. वहींतृणमूलकांग्रेसइसमामलेकोराजनीतिकउत्पीड़नकाउदाहरणबताकरसरकारऔरजांचएजेंसियोंकेखिलाफआक्रामकरुखअपनाएहुएहै. अबसभीकीनजरइसबातपरटिकीहैकिआरोपीकीतलाशऔरचलरहीजांचोंसेजुड़ेमामलोंमेंआनेवालेदिनोंमेंक्यानएतथ्यसामनेआतेहैंऔरबंगालकीराजनीतिपरइनघटनाक्रमोंकाक्याप्रभावपड़ताहै.
पेपरलीकऔरबेरोजगारीकेखिलाफराहुलगांधीकादेशव्यापीअभियानशुरू
नईदिल्ली, 13 जून. देशमेंलगातारसामनेआरहेपेपरलीकमामलों, भर्तीपरीक्षाओंमेंअनियमितताओंऔरबढ़तीबेरोजगारीकोलेकरकांग्रेसनेकेंद्रसरकारकेखिलाफबड़ाराजनीतिकअभियानछेड़नेकाऐलानकियाहै. कांग्रेसकेवरिष्ठनेताराहुलगांधीकेनेतृत्वमेंशुरूहोनेजारहेइसराष्ट्रव्यापीअभियानकाउद्देश्ययुवाओंकीसमस्याओंकोराष्ट्रीयबहसकाविषयबनानाऔरसरकारकोजवाबदेहठहरानाबतायागयाहै. कांग्रेसनेआरोपलगायाहैकिकेंद्रकीनरेंद्रमोदीसरकारकीनीतियोंऔरप्रशासनिकविफलताओंकेकारणकरोड़ोंयुवाओंकाभविष्यसंकटमेंपड़गयाहै. कांग्रेसमहासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपालनेशनिवारकोइसअभियानकीघोषणाकरतेहुएकहाकिदेशकेयुवाओंकोबार-बारपेपरलीक, भर्तीपरीक्षाओंमेंगड़बड़ियों, बढ़तीपरीक्षाफीसऔररोजगारकेअवसरोंकीकमीजैसीसमस्याओंकासामनाकरनापड़रहाहै. उन्होंनेआरोपलगायाकियहकेवलप्रशासनिकलापरवाहीनहींबल्कियुवाओंकेसाथएकव्यवस्थितविश्वासघातहै. उन्होंनेकहाकिकांग्रेसइसमुद्देकोदेशव्यापीजनआंदोलनकारूपदेगीऔरयुवाओंकीआवाजकोमजबूतीसेउठाएगी. राहुलगांधीअगलेएकमहीनेकेदौरानदेशकेविभिन्नशहरोंमेंछात्रसम्मेलनोंकीश्रृंखलाकोसंबोधितकरेंगे. इसअभियानकीशुरुआत 17 जूनकोराजस्थानकेकोटासेहोगी, जिसेदेशकीसबसेबड़ीकोचिंगराजधानीमानाजाताहै. इसकेबाद 10 जुलाईकोप्रयागराजऔर 11 जुलाईकोपटनामेंछात्रसम्मेलनआयोजितकिएजाएंगे. अभियानकासमापन 14 जुलाईकोराष्ट्रीयराजधानीदिल्लीमेंएकबड़ेकार्यक्रमकेसाथकियाजाएगा. कांग्रेसकाकहनाहैकिइनसम्मेलनोंमेंछात्रों, प्रतियोगीपरीक्षाओंकीतैयारीकररहेअभ्यर्थियों, शिक्षकों, युवासंगठनोंतथापरीक्षाघोटालोंसेप्रभावितलोगोंकोएकमंचपरलायाजाएगा. कांग्रेसनेअपनेबयानमेंकहाकिराहुलगांधीलंबेसमयसेछात्रोंऔरयुवाओंसेजुड़ेमुद्दोंकोसंसदसेलेकरसड़कतकउठातेरहेहैं. पार्टीकादावाहैकिउन्होंनेलगातारपरीक्षाप्रणालीमेंपारदर्शिता, मेरिटकीरक्षाऔरयुवाओंकेलिएसमानअवसरसुनिश्चितकरनेकीमांगकीहै. इसीसोचकोआगेबढ़ातेहुएयहअभियानशुरूकियाजारहाहैताकिउनलाखोंयुवाओंकोआवाजमिलसकेजिनकाभविष्यबार-बारहोनेवालेपेपरलीकऔरपरीक्षाघोटालोंकेकारणप्रभावितहुआहै. पार्टीनेकहाकियहआंदोलनकिसीराजनीतिकसीमामेंबंधाहुआनहींहोगा, बल्किसभीवर्गोंकेछात्रोंऔरयुवाओंकोजोड़नेकाप्रयासकरेगा. कांग्रेसकादावाहैकिअभियानकेदौरानप्रभावितछात्रअपनेअनुभवसाझाकरेंगेऔरयहबतायाजाएगाकिकिसप्रकारबार-बारपरीक्षारद्दहोने, परिणामोंमेंदेरीऔरभर्तीप्रक्रियाओंमेंअनियमितताओंनेयुवाओंकेकरियरऔरमानसिकस्थितिपरगंभीरप्रभावडालाहै. इसअभियानकेमाध्यमसेकांग्रेसकईप्रमुखमांगेंभीउठाएगी. इनमेंराष्ट्रीयपात्रतासहप्रवेशपरीक्षा (नीट) केविकेंद्रीकरणकीमांगप्रमुखहै. पार्टीकामाननाहैकिपरीक्षाप्रणालीकोअधिकपारदर्शीऔरजवाबदेहबनानेकेलिएराज्योंकीभूमिकाबढ़ाईजानीचाहिए. इसकेअलावासभीप्रकारकीपरीक्षाफीससमाप्तकरनेकीमांगभीकीजाएगीताकिआर्थिकरूपसेकमजोरवर्गकेविद्यार्थियोंपरअतिरिक्तबोझनपड़े. कांग्रेसनेपेपरलीकमामलोंमेंशामिललोगोंकेखिलाफसख्तकानूनीकार्रवाईकीभीमांगकीहै. पार्टीकाकहनाहैकिदेशभरमेंबार-बारसामनेआरहेपेपरलीककेमामलोंनेशिक्षाऔरभर्तीव्यवस्थाकीविश्वसनीयताकोगंभीरनुकसानपहुंचायाहै. ऐसेमेंदोषियोंकोकठोरसजादेकरएकस्पष्टसंदेशदियाजानाचाहिएकियुवाओंकेभविष्यकेसाथखिलवाड़किसीभीकीमतपरस्वीकारनहींकियाजाएगा. अभियानकेदौरानकांग्रेसकेंद्रीयशिक्षामंत्रीधर्मेंद्रप्रधानकेइस्तीफेकीमांगकोभीप्रमुखतासेउठाएगी. पार्टीकाआरोपहैकिशिक्षामंत्रालयलगातारपरीक्षाप्रबंधनऔरभर्तीप्रक्रियाओंकोलेकरसवालोंकेघेरेमेंरहाहै, लेकिनइसकेबावजूदजिम्मेदारीतयनहींकीगई. कांग्रेसकाकहनाहैकिजवाबदेहीसुनिश्चितकरनेकेलिएशीर्षस्तरपरकार्रवाईआवश्यकहै. इसकेसाथहीपार्टीसंसदमेंयुवाओंकेसामनेखड़ेसंकटपरव्यापकचर्चाकरानेकीमांगभीकरेगी. कांग्रेसकाकहनाहैकिबेरोजगारी, भर्तीमेंदेरी, परीक्षाघोटालेऔरशिक्षाव्यवस्थाकीचुनौतियांकेवलप्रशासनिकमुद्देनहींहैं, बल्किदेशकेभविष्यसेजुड़ागंभीरराष्ट्रीयप्रश्नहैं. इसलिएसंसदमेंइसविषयपरविस्तृतबहसहोनीचाहिएऔरयुवाओंकेअधिकारों, हितोंतथाभविष्यकीसुरक्षाकेलिएआवश्यककानूनीकदमउठाएजानेचाहिए. कांग्रेसनेइसअभियानकोसफलबनानेकेलिएअपनेसभीसंगठनात्मकढांचेकोसक्रियकरनेकानिर्णयलियाहै. पार्टीकीछात्रइकाईनेशनलस्टूडेंट्सयूनियनऑफइंडिया (एनएसयूआई), युवाकांग्रेस, प्रदेशकांग्रेससमितियां, जिलाकांग्रेससमितियांऔरस्थानीयसंगठनअभियानमेंसक्रियभूमिकानिभाएंगे. युवाओंतकपहुंचबनानेकेलिएकॉलेजों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों, कोचिंगसंस्थानोंऔरविभिन्नयुवाकेंद्रोंपरसंपर्कअभियानचलायाजाएगा. इसकेअलावासोशलमीडियाप्लेटफॉर्म्सकेमाध्यमसेभीव्यापकजनसंपर्ककियाजाएगा. डिजिटलनिमंत्रण, लाइवकार्यक्रम, ऑनलाइनसंवादऔरसोशलमीडियाअभियानोंकेजरिएछात्रोंऔरयुवाओंकोजोड़नेकीरणनीतिबनाईगईहै. कांग्रेसकामाननाहैकिदेशभरमेंबड़ीसंख्यामेंऐसेयुवाहैंजोपरीक्षाघोटालोंऔररोजगारसंकटसेप्रभावितहुएहैंतथाउन्हेंअपनीबातरखनेकेलिएएकमजबूतमंचकीआवश्यकताहै. राजनीतिकविश्लेषकोंकामाननाहैकिआगामीचुनावीपरिदृश्यकोदेखतेहुएकांग्रेसयुवाओंकेमुद्दोंकोराष्ट्रीयराजनीतिकेकेंद्रमेंलानेकीकोशिशकररहीहै. बेरोजगारीऔरपरीक्षाअनियमितताओंकामुद्दापिछलेकुछवर्षोंमेंलगातारचर्चामेंरहाहैऔरविभिन्नराज्योंमेंइसेलेकरव्यापकविरोधप्रदर्शनभीहुएहैं. ऐसेमेंराहुलगांधीकेनेतृत्वमेंशुरूहोरहायहअभियानआनेवालेसमयमेंराष्ट्रीयराजनीतिकामहत्वपूर्णविषयबनसकताहै. कांग्रेसकाकहनाहैकियहकेवलराजनीतिककार्यक्रमनहींबल्किदेशकेयुवाओंकेअधिकारोंऔरभविष्यकीरक्षाकेलिएशुरूकियागयाजनआंदोलनहै. अबदेखनाहोगाकिराहुलगांधीकायहराष्ट्रव्यापीअभियानयुवाओंकेबीचकितनाप्रभावछोड़ताहैऔरकेंद्रसरकारइसपरक्याप्रतिक्रियादेतीहै.
ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार, कंपनी ने दी प्रतिक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रिलायंस अनिल अंबानी समूह (एडीएजी) के दो पूर्व अधिकारियों को मुंबई में गिरफ्तार किया है।
सोना एक हफ्ते में करीब 6,400 रुपये और चांदी 14,300 रुपये से अधिक सस्ती हुई
सोने और चांदी में इस हफ्ते गिरावट देखने को मिली, जिससे सोना और चांदी क्रमशः 6,400 रुपये और 14,300 हजार रुपये से अधिक सस्ते हो गए हैं।
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के शेयरों की धमाकेदार शुरुआत
नई दिल्ली, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) ने अमेरिकी शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की।
रेलवे ने फास्टर टेक्नोलॉजी ड्रिवन प्रक्रिया के तहत की उम्मीदवारों की भर्ती
नई दिल्ली, भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में छह प्रमुख श्रेणियों में 47,084 रिक्तियों को भरते हुए 43,781 उम्मीदवारों की भर्ती की है, जो भर्ती प्रक्रिया में जारी तेजी को दर्शाती है।
मदन मित्रा पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 7 ठिकानों पर छापेमारी
पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगर पालिका भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की
अभिषेक बनर्जी के घर तड़के पुलिस की एंट्री, ताला तोड़कर की तलाशी; सूचना मिलते ही पहुंचीं ममता बनर्जी
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर तड़के पुलिस पहुंची और कथित तौर पर ताला तोड़कर तलाशी अभियान चलाया। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंचीं।
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य पर एनडीए की नजर, टीएमसी के बाद शिवसेना UBT में बगावत की चर्चाएं
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिशों के बीच NDA की नजर विपक्षी दलों के सांसदों पर है। टीएमसी के बाद अब शिवसेना UBT में संभावित टूट की चर्चा तेज, छह सांसदों के पाला बदलने की अटकलें।
मोदी सरकार ने केरल के विकास को गति दी: राजीव चंद्रशेखर
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर केरल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य ने विकास में महत्वपूर्ण प्रगति देखी है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में 'विकसित भारत संकल्प सम्मेलन' का आयोजन किया
ममता बनर्जी खुद अभिषेक को बढ़ा रही हैं आगे, इसीलिए हो रहा है टीएमसी का ऐसा हाल: गौरव वल्लभ
भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी स्वयं अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाती है, जिसकी वजह से टीएमसी का हाल इस तरह हो रहा है।
तमिलनाडु: मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में पूजा-अर्चना की
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित प्रसिद्ध कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में देवी मूकाम्बिका की पूजा-अर्चना की।
'अगर मुस्लिम नाम होता तो मीडिया ट्रायल हो जाता', सेजल पवार विवाद पर बोले वारिस पठान
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो में सेजल पवार की विवादित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी।
कुमारस्वामी ने बिदादी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमला बोला
केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक जेडी(एस) अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए किसानों के कड़े विरोध के बावजूद भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी करने के लिए कांग्रेस सरकार की कड़ी निंदा की
ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाएं सौर ऊर्जा पर आधारित होंगी: सीएम देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि महाराष्ट्र की सभी ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को धीरे-धीरे सौर ऊर्जा पर स्थानांतरित किया जाए
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मीडिया और संचार से जुड़े अधिकारियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया
प्याज किसानों को बड़ी राहत, केंद्र ने बढ़ाई न्यूनतम सुनिश्चित खरीद कीमत
देश के प्याज किसानों को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जानकारी दी कि प्याज की खरीद को मजबूत बनाने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य (एमएपीपी) में संशोधन किया है।
'चंदा चोरी' राम मंदिर ट्रस्ट का अंदरूनी मामला, जांच चल रही है: मंत्री सूर्य प्रताप शाही
अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर हमलावर है। वहीं, इन आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार का सख्ती और स्पष्ट रुख सामने आया है
'कल्याण बनर्जी बचपन से मेरा मार्गदर्शन करते आए हैं', घमंडी होने के आरोप पर अभिषेक बनर्जी का बयान
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ चल रही जांच और पार्टी के भीतर उठ रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी
पीओके हिंसा के मुद्दे पर संजय निरुपम बोले, अब सख्त रुख अपनाने का समय
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पीओके में पाकिस्तानी सेना द्वारा फायरिंग और बमबारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिसमें लगभग 16 लोगों की मौत की सूचना है।
जिम भी स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए ट्रेनरों का सत्यापन जरूरी : मौलाना कासमी
उत्तर प्रदेश के शामली में हुई जिम जिहाद की घटना और धर्मांतरण का मामला सामने आने के बाद जिम ट्रेनरों और जिम संचालकों की पहचान तथा योग्यता की जांच को लेकर सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं
छत्तीसगढ़ को 9,580 करोड़ रुपए के नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए: विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट के अंतर्गत हैदराबाद में शुक्रवार को निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश का बढ़ता प्रवाह इस बात का संकेत है कि प्रदेश विकास की नई उड़ान भरने के लिए तैयार है।
स्पेसएक्स नैस्डैक पर धमाकेदार एंट्री: मस्क ट्रिलेनियर बनने के और करीब
एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स शुक्रवार को अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक पर आईपीओ के जरिए रिकॉर्ड 75 अरब डॉलर जुटाने के बाद लिस्ट हो गई है
तीन दिनों की गिरावट के बाद सोने और चांदी में लौटी तेजी; करीब 10 हजार रुपए तक बढ़े दाम
नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। तीन दिनों की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को फिर से तेजी देखने को मिली। इससे 24 कैरेट सोने का दाम 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.42 लाख रुपए प्रति किलो से अधिक हो गया है।
वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया ऐप फेसबुक, मैसेंजर और इंस्टाग्राम डाउन हो गए हैं। इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को लॉग-इन करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय शेयर बाजार करीब 2 प्रतिशत उछले; निवेशकों को 10 लाख करोड़ रुपए का फायदा
अमेरिका-ईरान के बीच के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में जोरदार तेजी देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,695.40 अंक या 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,527.95 और निफ्टी 461.30 अंक या 1.99 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,622.90 पर बंद हुआ।
मई में खुदरा महगाई दर, आलू, मटर और जीरे की कीमत हुई कम
नई दिल्ली, खुदरा महंगाई दर मई में सालाना आधार पर 3.93 प्रतिशत रही है। इस दौरान आलू, मटर, जीरे और गाड़ियों की कीमतों में कमी देखने को मिली है। यह अप्रैल 2026 में 3.48 प्रतिशत थी।
मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद ,सोना-चांदी हुआ महंगा
मुंबई, मध्य पूर्व में जारी युद्ध में शांति समझौते की उम्मीदों के बीच, हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमत में तेजी देखने को मिली।
बैंक ने बढ़ाई ब्याज दर, विदेशी मुद्रा जमाकर्ताओं को फयदा
मुंबई, शीर्ष भारतीय बैंकों ने विदेशी मुद्रा में जमा (फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट -एफसीएनआर (बी) डिपाजिट) विशेष रूप से अमेरिकी डॉलर जमा पर ब्याज दर को बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत तक कर दिया है।
सोना धड़ाम, चांदी भी 2.33 लाख के नीचे फिसली: सर्राफा बाजार में भारी गिरावट, जानें आज के ताजा भाव
सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को बिकवाली देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.33 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे फिसल गया है।
पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों से उपजे सकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी तेजी के साथ हरे निशान में खुला।
‘पुश‑इन’ के आरोपों पर भारत‑बांग्लादेश में बढ़ती कड़वाहट
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार के सत्ता संभालने के बाद अवैध रूप से यहां रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को 'पुश-इन' यानी जबरन सीमा पार खदेड़ने के मुद्दे पर बांग्लादेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में तनाव लगातार बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के बाद ही बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट ' का फार्मूला अपनाने की बात कही थी. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि सरकार केंद्र के एक पुराने कानून के सहारे ही घुसपैठियों को बीएसएफ के जरिए सीधे डिपोर्ट करने की कार्रवाई कर रही है. असम और पश्चिम बंगाल में सीमा पार से घुसपैठ दशकों पुरानी समस्या रही है और इस पर अक्सर विवाद होता रहा है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी कथित घुसपैठियों के पुश बैक के समर्थक रहे हैं. लेकिन इस दौरान कई भारतीयों को भी सीमा पार भेजने के कारण सरकार की किरकिरी हो चुकी है. अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद यहां भी वही कवायद दोहराई जा रही है. असम की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल में बनेगा 'होल्डिंग सेंटर' पश्चिम बंगाल की 2,216.7 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश के साथ लगी है. इसमें से 1,647.7 किलोमीटर के इलाके में कंटीले तारों की बाड़ लगा दी जा चुकी है. अब सत्ता में आने के बाद बीजपी ने बाकी इलाकों में बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने की कवायद शुरू कर दी है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर चिंता और आतंक बीजेपी सरकार के सत्ता संभालते ही जबरन पुशबैक के आतंक के कारण सैकड़ों की तादाद में लोग सीमावर्ती इलाकों में पहुंच रहे हैं. लेकिन बार्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) की ओर से सीमा पार करने की अनुमति नहीं मिलने के कारण सैकड़ों लोग कड़ी धूप और गर्मी में खुले आसमान के नीचे दिन गुजारने पर मजबूर हैं. इनमें बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं. मानवाधिकार संगठनों ने इस स्थिति पर भारी चिंता जताते हुए सरकार से जबरन सीमा पार धकेलने की कवायद पर अंकुश लगाने की मांग की है. राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद के दौरान लाखों लोगों के नाम सूची से कट गए थे. इस साल अप्रैल में हुए चुनाव में बीजेपी ने सत्ता में आने पर राज्य से घुसपैठियों को खदेड़ने का वादा किया था. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद अब तक 4,800 से ज्यादा लोगों को सीमा पार भेजा जा चुका है. लेकिन बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स ने इस दावे का खंडन किया है. शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के कुछ समय बाद ही अवैध तरीके से बंगाल पहुंचने वाले घुसपैठियों की शिनाख्त कर उनको जबरन सीमा पार भेजने से पहले रखने के लिए सीमावर्ती इलाकों में होल्डिंग सेंटर बनाने का निर्देश दिया था. फिलहाल उत्तर 24-परगना जिले की हकीमपुर के अलावा मालदा और मुर्शिदाबाद में बने ऐसे कुछ अस्थायी होल्डिंग सेंटर में 863 घुसपैठियों को रखा गया है. दोनों देशों के बीच संबंधों पर असर पुशबैक के मुद्दे का असर अब दोनों देशों के आपसी संबंधों पर भी नजर आने लगा है. बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर जाने के बाद दोनों देशों के आपसी संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. वहां तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी गठजोड़ की सरकार के सत्ता संभालने के बाद इन संबंधों में बेहतरी की उम्मीद जगी थी. लेकिन अब पुशबैक के मुद्दे से इसमें तनाव साफ दिख रहा है. नई दिल्ली में आठ से 11 जून के बीच बीजीबी और बीएसएफ के बीच महानिदेशक स्तर की सालाना बैठक में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी. भारत-बांग्लादेश सीमा पर हिंसक झड़पें तो अक्सर होती रही हैं. लेकिन बंगाल से इतनी बड़ी तादाद में लोगों को जबरन सीमा पार भेजने की घटनाएं पहले कभी नहीं हुई हैं. बीजेपी ममता बनर्जी सरकार पर घुसपैठियों को प्रश्रय देने के आरोप लगाती रही है. इसी वजह से सत्ता में आने के बाद अपने चुनावी वादे के मुताबिक वो कथित घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करती नजर आ रही है. सरकारी अधिकारियों को कहना है कि बीएसएफ की ओर से पुशबैक के प्रयासों का बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल बीजीबी लगातार कड़ा विरोध करता रहा है. इसी वजह से कुछ इलाकों में तनाव भी बढ़ा है. मानवाधिकार संगठनों को किस बात पर है गंभीर चिंता मानवाधिकार संगठनों ने सरकार की इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है. इन संगठनों और कार्यकर्ताओं ने पुशबैक की नीति को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए सरकार से इसे तुरंत खत्म करने की अपील की है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार की इस कवायद के कारण कई सीमावर्ती इलाकों में दर्जनों लोग 'नो मेंस लैंड' में दिन गुजारने पर मजबूर है. उनको न तो भारत में लौटने की अनुमति मिल रही है और न ही बांग्लादेश में प्रवेश की अनुमति मिल रही है. उधर, बांग्लादेश के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर कोई सचमुच बांग्लादेशी नागरिक है तो उसकी पहचान और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद उसे वापस ले लिया जाएगा लेकिन जबरन पुशबैक मंजूर नहीं है. मानवाधिकार संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन आफ डेमोक्रेटिक राइट्स (एपीडीआर) के उपाध्यक्ष रंजीत सुर डीडब्ल्यू से बातचीत में कहते हैं, जिन 4,800 लोगों को पुश बैक किया गया है या आठ सौ से ज्यादा जो लोग होल्डिंग सेंटरों में रह रहे हैं, सरकार को उनका परिचय स्पष्ट करना चाहिए. सरकार की यह कवायद लोगों को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. उसे इस मुद्दे पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए. महज संदेह के आधार पर किसी को विदेशी नागरिक घोषित नहीं किया जा सकता. साहा बताते हैं, एपीडीआर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से भी इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है. संगठन ने पुशबैक के विरोध में बृहस्पतिवार को मालदा में एक विरोध रैली का भी आयोजन किया. बंगाल के मानवाधिकार कार्यकर्ता लिटन दास डीडब्ल्यू से कहते हैं, हमने इससे पहले इस पैमाने पर पुशबैक की घटनाएं नहीं देखी हैं. यह कानूनी तौर पर सही हो सकता है लेकिन मानवीय आधार पर उचित नहीं है. बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. शायद बीजेपी अपने चुनावी वादे को पूरा करने के मकसद से ही इस राह पर चल रही है. उनका कहना था कि इसी वजह से बीजेपी सरकार ने सीमावर्ती इलाकों में होल्डिंग सेंटर बनाने के साथ ही सीमा के बाकी इलाकों में कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने का काम भी शुरू कर दिया है. दास कहते हैं, दोनों देशों के सुरक्षा बलों के इस रवैए के कारण बेकसूर लोगों को भारी मुसीबत उठानी पड़ रही है. फिलहाल उनके पास अपना कहने को कोई देश नहीं है. बीएसएफ को ऐसे लोगों को भारतीय सीमा में वापस बुला लेना चाहिए. बंगाल को घुसपैठिया-मुक्त बनाना था एक चुनावी वादा लेकिन लंबे अरसे बाद अब जब दोनों देशों के आपसी संबंधों में बेहतरी के आसार नजर आ रहे हैं, बंगाल की बीजेपी सरकार आक्रामक तरीके से यह कवायद क्यों कर रही है? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शायद बांग्लादेश पर दबाव पैदा करने के लिए केंद्र की शह पर बंगाल सरकार ने ऐसी कार्रवाई शुरू की है. कोलकाता में राजनीतिक विश्लेषक और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर विश्वनाथ चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहते हैं, घुसपैठ बीजेपी का बहुत पुराना मुद्दा रहा है. अब सत्ता में आने के बाद उसे कुछ न कुछ तो करना है. वह यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि पार्टी बंगाल को घुसपैठिया-मुक्त करने अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए कृतसंकल्प है. यह बांग्लादेश पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है. कोलकाता की एक महिला अधिकार कार्यकर्ता अपराजिता तालुकदार डीडब्ल्यू से कहती हैं, सरकार की ओर से जबरन सीमा पार भेजे जाने वालों में महिलाओं और बच्चों की भी बड़ी तादाद है. सरकार भले कानूनी तौर पर इसके सही होने का दावा करे, मानवता के लिहाज से यह गंभीर अपराध है. दर्जनों लोग खुले में दिन गुजारने पर मजबूर हैं. उनका कहना था कि अगर सरकार सचमुच घुसपैठियों को निकालने के प्रति गंभीर है तो उसे समुचित कानून प्रक्रिया अपनानी चाहिए. मौजूदा कार्रवाई तो पूरी तरह राजनीतिक है. बीजेपी बंगाल में घुसपैठ के अपने आरोपों को सही साबित करने के लिए ही हड़बड़ी में तमाम लोगों को बिना किसी जांच के सीमा पार खदेड़ने पर आमादा नजर आ रही है.

