...

महाराष्ट्र के मंत्री ने किलों और स्मारकों के संरक्षण की मुहिम को आगे बढ़ाया

Mumbai , 25 अगस्त . Maharashtra भर में किलों, प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण कार्यों में तेजी लाने के लिए, जिला वार्षिक योजना (सामान्य) के तहत मिलने वाली धनराशि का तीन प्रतिशत हिस्सा संरक्षण कार्यों में इस्तेमाल करने की सुविधा को 2026-27 तक बढ़ा दिया गया है. सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ... Read more

डेली किरण 25 Aug 2026 11:54 pm

महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रालय में अनौपचारिक नियुक्तियां रद्द कीं

Mumbai , 25 अगस्त . अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव के तहत, Maharashtra Government ने Tuesday को एक सख्त Governmentी आदेश जारी किया. इसमें राज्य सचिवालय (मंत्रालय) के विभागों और मंत्रियों के कार्यालयों में डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर की गई सभी अनौपचारिक, मौखिक और अनियमित पोस्टिंग को तुरंत रद्द ... Read more

डेली किरण 25 Aug 2026 10:53 pm

महाराष्ट्र: बंदरगाह और समुद्री विकास परियोजनाओं को जल्द मंजूरी दिलाने की मांग, केंद्रीय मंत्री से मिले नितेश राणे

New Delhi, 25 अगस्त . Maharashtra Government में मत्स्य पालन एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने Tuesday को New Delhi में केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाकात की. इस दौरान Maharashtra में समुद्री और बंदरगाह क्षेत्र से जुड़ी आधारभूत संरचना विकास परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. नितेश राणे ... Read more

डेली किरण 25 Aug 2026 10:03 pm

Pune Chhatro Ki Goonj के बाद Nagpur में RSS के गढ़ में हुंकार भरेंगे Rahul Gandhi! | Maharashtra

पुणे के बाद अब राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को नागपुर ले जाने की तैयारी है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने राहुल गांधी से नागपुर में छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की है। हालांकि, अभी तारीख तय नहीं हुई है। नागपुर RSS का मुख्यालय और बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है

लाइव हिन्दुस्तान 25 Aug 2026 7:57 pm

Maharashtra FDA ने कहा- खुले खाद्य तेल पर रोक नया फैसला नहीं, 2011 से है नियम

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (एफडीए) ने खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाने के अपने फैसले को लेकर व्यापारियों की चिंताओं के बीच मंगलवार को कहा कि यह कोई नया कदम नहीं है और मिलावट पर लगाम लगाने तथा लोगों की सेहत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में इस संबंध में कानूनी प्रावधान 2011 से ही लागू है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा था कि खाद्य तेल में मिलावट पर लगाम लगाने के लिए एफडीए से ऐसी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के लिए कहा जाएगा, जिससे पारंपरिक तेल कारोबारियों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। एफडीए ने एक बयान में कहा कि उसने मौजूदा नियमों को समान रूप से लागू करने के लिए पूरे राज्य में अनुपालन आदेश जारी किया था। उसने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार खाद्य तेल की बिक्री उपभोक्ताओं को निर्धारित गुणवत्ता वाले, सीलबंद, छेड़छाड़ से सुरक्षित और पूरी तरह लेबल लगे पैकेट में ही की जानी चाहिए। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि इस पाबंदी का मकसद पूरी आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही सुनिश्चित करना और ग्राहकों को तेल के स्रोत, बैच नंबर और उपभोक्ताओं को उसकी निर्माण अवधि के बारे में जानने में सक्षम बनाना था। विभाग ने कहा कि ड्रम, टैंक, कनस्तर या टैंकर से सीधे उपभोक्ताओं की ओर से लाए गए बर्तन में तेल बेचना या मूल सील खोलने के बाद छोटे कंटेनर में तेल बेचना, खुले में बिकने वाले या अनधिकृत रूप से दोबारा पैक किए गए तेल की श्रेणी में आता है। एफडीए ने खाद्य तेल के थोक परिवहन/आवागमन और उपभोक्ताओं को खुदरा बिक्री के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। विभाग ने कहा कि लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों की ओर से उत्पादन या परिवहन के लिए खाद्य तेल का थोक परिवहन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन अंतिम उपभोक्ता को बेचा जाने वाला तेल सीलबंद और लेबल लगे पैकेट में ही होना चाहिए। एफडीए ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने खुले खाद्य तेल की बिक्री के लिए अस्थायी और समय-सीमा वाली छूट दी थी। उसने बताया कि ऐसी आखिरी छूट 2020 तक ही सीमित थी और इसे स्थायी अनुमति नहीं माना जा सकता। एफडीए के मुताबिक, उसने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में खाद्य तेल के 1,247 नमूने इकट्ठा किए, जिनमें से 1,142 नमूने जांच में तय मानकों के अनुसार पाए गए, जबकि 77 खराब गु‍णवत्ता के, 13 असुरक्षित और 15 गलत लेबल वाले मिले। विभाग ने बताया कि उसने इस अवधि में लगभग 5.31 करोड़ रुपये मूल्य का 3,20,781 लीटर खाद्य तेल जब्त किया।

प्रभासाक्षी 25 Aug 2026 7:12 pm

Jan Gan Man: Nashik Kumbh पर Justice Prasanna Varale के बयान पर मचा बवाल, आखिर सिर्फ Hindu आयोजनों पर ही क्यों उठाये जाते हैं प्रश्न?

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रसन्न वराले के एक बयान के बाद देश में एक नई बहस शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में मराठी माध्यम के स्कूलों की खराब होती स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने नासिक कुंभ मेले के लिए प्रस्तावित बजट के एक छोटे से हिस्से का उदाहरण दिया, जिसके बाद इस मुद्दे पर अलग-अलग तर्क सामने आने लगे। उनके बयान के समर्थक इसे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा पर उठाया गया जरूरी सवाल बता रहे हैं, जबकि विरोधियों का तर्क है कि स्कूलों और कुंभ जैसे विशाल आयोजन को एक-दूसरे के मुकाबले खड़ा करना ही गलत है, क्योंकि सरकार की जिम्मेदारी दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करना है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है, जिसने सिर्फ कुंभ और स्कूलों के खर्च का सवाल ही नहीं उठाया, बल्कि यह बड़ा प्रश्न भी खड़ा कर दिया है कि क्या विकास, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सदियों पुरानी सांस्कृतिक-धार्मिक परंपराओं को वास्तव में एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी मानना चाहिए, या फिर भारत जैसे देश को विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर चलने की नीति अपनानी चाहिए। वैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रसन्न वराले द्वारा महाराष्ट्र में मराठी माध्यम के स्कूलों की बदहाल स्थिति पर जताई गई चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि महज लगभग 32 करोड़ रुपये की कमी के कारण 100 से 150 स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से राज्य सरकार की शिक्षा नीति और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल है। लेकिन इस चिंता के साथ नासिक कुंभ मेले के विशाल बजट की तुलना कर यह कहना कि उसके मात्र 0.1 प्रतिशत खर्च से स्कूलों को बचाया जा सकता था, बहस को एक ऐसे द्वंद्व में बदल देता है, जहां सवाल राज्य सरकार की विफलता से हटकर स्कूल बनाम कुंभ बन जाता है। इसे भी पढ़ें: Maharashtra Govt का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: irregular Deputation नियुक्तियां रद्द, 10 सितंबर तक वापसी का Order जबकि असल सवाल यह है कि आखिर महाराष्ट्र सरकार को स्कूलों और कुंभ में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर क्यों माना जाए? सवाल यह भी उठता है कि क्या लाखों करोड़ रुपये के बजट वाला राज्य इतनी क्षमता नहीं रखता कि वह एक ओर मराठी माध्यम के स्कूलों को बचाए और दूसरी ओर करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ वाले विशाल आयोजन के लिए सड़क, पानी, स्वच्छता, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं भी करे? समस्या कुंभ पर खर्च नहीं है; समस्या यह है कि यदि 32 करोड़ रुपये के अभाव में स्कूल बंद हो रहे हैं, तो राज्य सरकार से पूछा जाना चाहिए कि उसने शिक्षा व्यवस्था को उस स्थिति तक पहुंचने ही क्यों दिया। यहां सवाल यह भी उठता है कि महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए सामान्य मराठी ज्ञान अनिवार्य करने पर तुली महाराष्ट्र सरकार को क्या राज्य में मराठी स्कूलों की बदहाल स्थिति नजर नहीं आ रही? देखा जाये तो नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ के लिए प्रस्तावित हजारों करोड़ रुपये की योजना को केवल “धार्मिक खर्च” कह देना पूरी तस्वीर को नजरअंदाज करना है। कुंभ जैसे विशाल आयोजन के लिए सड़कें, परिवहन, पेयजल, शौचालय, अस्पताल, आपातकालीन सेवाएं, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास करना पड़ता है। इनमें से कई सुविधाएं केवल आयोजन के दिनों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि बाद में भी उस क्षेत्र और वहां रहने वाले स्थानीय लोगों के काम आती हैं। बेहतर सड़कें, परिवहन व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाएं क्षेत्र के समग्र विकास को गति देती हैं और स्थानीय व्यापार व रोजगार को भी लाभ पहुंचाती हैं। इसलिए ऐसे खर्च को केवल धार्मिक आयोजन पर खर्च किया गया पैसा मानना सही नहीं होगा; यह बड़े जनसमूह की व्यवस्था के साथ-साथ उस पूरे क्षेत्र के बुनियादी विकास में निवेश भी है। देखा जाये तो कुंभ जैसे आयोजन को केवल एक धार्मिक मेले के रूप में देखना भारत की उस जीवंत सांस्कृतिक परंपरा को बहुत सीमित कर देना होगा, जो सदियों से आस्था, ज्ञान, सामाजिक मेल-मिलाप और सामूहिक स्मृति को एक साथ जोड़ती आई है। यूनेस्को ने भी 2017 में कुंभ मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल करते हुए इसे आध्यात्मिकता, खगोलीय परंपराओं, अनुष्ठानों, सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों और गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ी अत्यंत समृद्ध विरासत माना है। नासिक-त्र्यंबकेश्वर का सिंहस्थ कुंभ इस परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यह पवित्र गोदावरी के तट पर आयोजित होता है। साथ ही त्र्यंबकेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और गोदावरी नदी के उद्गम क्षेत्र के रूप में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां कुंभ की अपनी विशिष्ट परंपरा भी है, जिसमें वैष्णव अखाड़े नासिक में और शैव-संन्यासी तथा उदासीन अखाड़े त्र्यंबकेश्वर में स्नान करते हैं। विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहे भारत के लिए ऐसी सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखना केवल आस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक स्मृति को सुरक्षित रखने का दायित्व भी है। आधुनिक सड़कें, अस्पताल, स्कूल और तकनीक जितने जरूरी हैं, उतना ही जरूरी यह भी है कि विकास की दौड़ में समाज अपनी उन परंपराओं से कट न जाए जिन्होंने पीढ़ियों को जोड़े रखा है। आखिर एक आत्मविश्वासी और विकसित राष्ट्र वह नहीं होता जो आधुनिकता के नाम पर अपनी विरासत को बोझ समझने लगे, बल्कि वह होता है जो विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की क्षमता रखता हो। हालांकि यह बात भी सही है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में खर्च की समीक्षा आवश्यक है। कुंभ के नाम पर यदि कोई परियोजना अनावश्यक रूप से महंगी बनाई जा रही है, भ्रष्टाचार हो रहा है, काम में देरी है या जनता के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, तो उस पर कठोर सवाल उठने चाहिए। लेकिन यदि स्कूलों को उपेक्षित किया जाता है, तो इसका समाधान कुंभ को खलनायक बनाना नहीं हो सकता। वैसे विडंबना यह भी है कि ऐसी बहसों में अक्सर हिंदू धार्मिक आयोजनों को ही अस्पताल, स्कूल और कल्याणकारी योजनाओं के सामने खड़ा कर दिया जाता है। इसलिए सवाल यह भी उठता है कि क्या इसी तरह की तीखी तुलना किसी दूसरे धर्म के आयोजन या उससे जुड़े बड़े सार्वजनिक खर्च के समय भी की जाती है? यदि सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाना है, तो उसका पैमाना सभी पर समान होना चाहिए। किसी एक परंपरा को लगातार “अनुत्पादक खर्च” और बाकी को स्वतः सामाजिक रूप से स्वीकार्य मान लेना संतुलित सार्वजनिक नीति नहीं, बल्कि चयनात्मक दृष्टिकोण है। साथ ही कुंभ को केवल धार्मिक चश्मे से देखना भी अधूरा दृष्टिकोण है। यह विशाल सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनता है। इसका प्रभाव केवल घाटों और पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहता। होटल, परिवहन, छोटे दुकानदार, खाद्य विक्रेता, हस्तशिल्प, अस्थायी रोजगार और स्थानीय व्यापार, सभी इससे प्रभावित होते हैं। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 को ही उदाहरण स्वरूप लें तो इससे उत्तर प्रदेश को लाखों करोड़ रुपए का लाभ हुआ। इसलिए बहस को “कुंभ पर खर्च क्यों” तक सीमित करने की बजाय एक अधिक रचनात्मक प्रश्न पूछा जा सकता है कि कुंभ और ऐसे विशाल आयोजनों से उत्पन्न आर्थिक गतिविधि और सरकारी आय का एक निश्चित हिस्सा शिक्षा, स्कूलों के आधुनिकीकरण या किसी विशेष सामाजिक क्षेत्र में क्यों न लगाया जाए? यदि किसी आयोजन से पर्यटन, व्यापार, कर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है, तो उसकी आय का सुनियोजित उपयोग शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए किया जा सकता है। यह “कुंभ हटाओ, स्कूल बचाओ” जैसी नकारात्मक राजनीति से कहीं अधिक व्यावहारिक और दूरदर्शी सोच होगी। बहरहाल, वास्तव में भारत को मंदिर भी चाहिए, अस्पताल भी; कुंभ की परंपरा भी चाहिए और आधुनिक स्कूल भी। किसी समाज को अपनी सभ्यता और अपनी सार्वजनिक संस्थाओं में से एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह तर्क कि हर धार्मिक आयोजन के सामने एक अस्पताल या स्कूल खड़ा कर दिया जाए, अपने आप में गलत द्वंद्व पैदा करता है। इसलिए बहस का निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है कि शिक्षा पर खर्च बढ़ना चाहिए, स्कूल बचने चाहिए, अनावश्यक खर्च पर लगाम लगनी चाहिए और कुंभ जैसे विशाल आयोजनों में पारदर्शिता तथा दक्षता सुनिश्चित होनी चाहिए। लेकिन हिंदू आस्था, परंपरा और सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों को हर बार विकास के विरोधी खेमे में खड़ा कर देना न तो निष्पक्ष सार्वजनिक विमर्श है और न ही समाधान। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 25 Aug 2026 3:52 pm

पुणे के स्कूल छात्र और शिक्षक मंत्री दादा भुसे के घर पहुंचे, शिक्षिका बोलीं-हमारी बात सुनी गई

पुणे, 25 अगस्त . Maharashtra पुणे जिले के महात्मा गांधी स्कूल के छात्र और शिक्षक, स्कूल की जमीन से जुड़े मामले को लेकर Tuesday को मंत्री दादा भुसे के घर पहुंच गए. शिक्षकों का कहना है कि इस मामले पर मंत्री की ओर से ठीक से कार्रवाई नहीं की जा रही है. यह स्कूल अनाथ ... Read more

डेली किरण 25 Aug 2026 2:38 pm

Maharashtra: पालघर आवासीय विद्यालय के सात साल के छात्र की बुखार के बाद मौत; 26 बच्चे अस्पताल में भर्ती

Maharashtra: पालघर आवासीय विद्यालय के सात साल के छात्र की बुखार के बाद मौत; 26 बच्चे अस्पताल में भर्ती

अमर उजाला 25 Aug 2026 12:11 pm

महाराष्ट्र में महायुति का बड़ा फैसला: भाजपा-शिवसेना-एनसीपी साथ लड़ेंगे चुनाव, सहयोगियों पर बयानबाजी से भी परहेज

महाराष्ट्र में महायुति का बड़ा फैसला: भाजपा-शिवसेना-एनसीपी साथ लड़ेंगे चुनाव, सहयोगियों पर बयानबाजी से भी परहेज---Maharashtra Mahayuti to Contest Elections Together, Leaders Asked to Avoid Public Criticism

अमर उजाला 25 Aug 2026 10:15 am

Maharashtra: संजय राउत बोले- बाइक टैक्सी से राज्य के ऑटो चालक परेशान; BMC ने प्रभादेवी में अवैध कब्जे हटाए

Maharashtra: संजय राउत बोले- बाइक टैक्सी से राज्य के ऑटो चालक परेशान; BMC ने प्रभादेवी में अवैध कब्जे हटाए

अमर उजाला 25 Aug 2026 3:19 am

हिंदुओं की आस्था पर हमला करना फैशन बन गया, धार्मिक स्थलों पर मांसाहार प्रतिबंधित हो: आचार्य प्रमोद कृष्णम

हरिद्वार, 24 अगस्त . Maharashtra में गणेशजी की प्रतिमा ले जाने के दौरान अंडे फेंके जाने की घटना के बाद कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने हिंदू आस्था पर हो रहे हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हिंदुओं को गाली देना और उनकी आस्था को खंडित करना आज फैशन सा बन ... Read more

डेली किरण 24 Aug 2026 11:58 pm

मराठी भाषा अनिवार्यता के विरोध में कांदिवली में रिक्शा चालकों की हड़ताल, मारपीट में 4 गिरफ्तार

Mumbai , 24 अगस्त . Maharashtra में टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है. Mumbai के कांदिवली पश्चिम इलाके में इस फैसले के विरोध में रिक्शा चालकों ने हड़ताल की, जिसके बाद मारपीट की घटना सामने आई. Police ने इस मामले में ... Read more

डेली किरण 24 Aug 2026 10:03 pm

गणेश की प्रतिमा के स्वागत जुलूस पर अंडे फेंकने को लेकर अयोध्या के संतों में रोष, सख्त कार्रवाई की मांग की

अयोध्या, 24 अगस्त . Maharashtra में गणेश की प्रतिमा के स्वागत के दौरान एक जुलूस पर कथित तौर पर अंडे फेंके जाने की घटना को लेकर अयोध्या के संतों ने नाराजगी जताई. संतों ने घटना की निंदा करते हुए Maharashtra Government से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और शांति व्यवस्था ... Read more

डेली किरण 24 Aug 2026 7:24 pm

Maharashtra Marathi Controversy: ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के साथ नहीं होगा अन्याय, CM Fadnavis ने दिया बड़ा भरोसा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठी सीखने की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद पर कहा है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार भाषा की वजह से किसी की भी आजीविका पर असर नहीं पड़ने देगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में काम करने वाले उत्तर भारतीय ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि अगर ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए और समय चाहिए, तो सरकार समय-सीमा बढ़ाने को तैयार है। फडणवीस ने कहा कि सरकार की बस यही उम्मीद है कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर बातचीत के लिए ज़रूरी मराठी भाषा सीखें। इसे भी पढ़ें: Maharashtra में Auto Rickshaw, Taxi Drivers के लिए Marathi Mandatory क्यों की गयी? मराठी सीखने के लिए दबाव क्यों डालना? फडणवीस ने कहा, अगर ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए और समय चाहिए, तो सरकार समय-सीमा बढ़ाने के लिए भी तैयार है। हमारी बस यही उम्मीद है कि वे बातचीत के लिए मराठी सीखें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भाषा की वजह से किसी के साथ भी अन्याय नहीं होगा और सरकार यह पक्का करेगी कि लोगों की रोज़ी-रोटी पर कोई असर न पड़े। मुख्यमंत्री का यह बयान गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के बढ़ते विरोध के बीच आया है, जो रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) की कार्रवाई के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। महाराष्ट्र में गैर-मराठी ड्राइवरों ने RTO की कार्रवाई का विरोध किया गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों का आरोप है कि मराठी भाषा की शर्त को लेकर सरकार की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक कारण हैं। कुर्ला में हालात खास तौर पर तनावपूर्ण हो गए, जहां ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने काम बंद करके विरोध प्रदर्शन किया। ड्राइवर मराठी भाषा की शर्त को पूरा करने के दबाव का विरोध कर रहे हैं और उन्हें चिंता है कि सरकार की इस कार्रवाई का उनकी आजीविका पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि, फडणवीस ने प्रभावित ड्राइवरों को भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय हो।

प्रभासाक्षी 24 Aug 2026 6:39 pm

अखिलेश पर महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने साधा निशाना, कहा-मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए

Mumbai , 24 अगस्त . Maharashtra के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने Samajwadi Party के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव यूपी के सीएम रहे हैं और अगर उन्होंने अपने कार्यकाल में लोगों के रोजगार के बारे में सोचा होता तो लोगों ... Read more

डेली किरण 24 Aug 2026 4:48 pm

पूर्व आप विधायक नरेश बालियान की जमानत याचिका पर Supreme Court ने दिल्ली पुलिस को जारी किया नोटिस

New Delhi, 24 अगस्त . Supreme Court ने Monday को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और पूर्व विधायक नरेश बालियान की जमानत याचिका पर दिल्ली Government को नोटिस जारी किया. यह मामला Maharashtra कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत दर्ज किया गया था. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ... Read more

डेली किरण 24 Aug 2026 3:03 pm

Maharashtra के Amravati अस्पताल की NICU में आग लगने से 3 शिशुओं की मौत

महाराष्ट्र के अमरावती में एक सरकारी अस्पताल में भर्ती अपने बच्चों के स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे माता-पिता एवं अन्य परिजन सोमवार तड़के अस्पताल के बाहर गहरी नींद में थे और उन्हें तनिक भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में एनआईसीयू में आग लग जाएगी और वहां भर्ती शिशुओं की जान खतरे में पड़ जाएगी। महाराष्ट्र के अमरावती शहर में सोमवार तड़के एक सरकारी अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने से तीन शिशुओं की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि जिला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भीषण आग लग गई, जिससे कुछ नवजात शिशु काली राख से ढक गए और वार्डों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ माता-पिता ने बताया कि सुरक्षाकर्मी और नर्सें बच्चों को बचाने के लिए धुएं से भरी देखभाल इकाइयों में तुरंत भागे। उन्होंने इस घटना के लिए अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। अस्पताल में भर्ती कुछ बच्चों के परिजनों ने यह भी दावा किया कि वार्ड में पानी के छिड़काव की प्रणाली काम नहीं कर रही थी और आग लगते ही इसे तुरंत सक्रिय किया जाना चाहिए था। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के करीब सवा तीन बजे अस्पताल की एनआईसीयू में आग लगी। इस इकाई में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जा रहा था। अमरावती के अचलपुर निवासी योगेश सावरकर ने बताया कि उनकी पत्नी और आठ दिन का बच्चा अस्पताल में भर्ती थे तथा जब आग लगी, उस समय वह अस्पताल की इमारत के बाहर सो रहे थे। सावरकर ने बताया कि उनका बच्चा अस्पताल की पहली मंजिल पर था। एक वार्ड में आग की लपटें फैलने पर वह ऊपर पहुंचे, अपने बच्चे को बचाया और उसे सुरक्षित नीचे ले आए। सावरकर और कुछ अन्य बच्चों के परिजनों ने बताया कि स्थिति बेहद गंभीर थी और वार्ड में भर्ती बच्चों के ऊपर तक आग फैल रही थी। सावरकर ने कहा, “मेरा बच्चा पहली मंजिल पर था और मैं खुद जाकर उसे नीचे लेकर आया। हालांकि, मैंने अस्पताल में अन्य बच्चों को काली राख से ढका देखा।”उन्होंने कहा कि सुरक्षा गार्ड सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और बच्चों को बचाना शुरू किया। उन्होंने एक नर्स को भी बच्चों की जान बचाने में मदद करते देखा। बच्चों के परिजनों ने इस त्रासदी के लिए अस्पताल प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। परिजनों ने कहा कि उन्हें आग लगने की सही वजह का पता नहीं है, लेकिन उन्होंने वार्ड में भीषण आग लगी देखी, जिसके बाद बच्चों के माता-पिता और अस्पताल के कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।

प्रभासाक्षी 24 Aug 2026 1:52 pm

Maharashtra: नागपुर के वॉटर प्यूरीफिकेशन प्लांट में क्लोरीन गैस लीक से हड़कंप, करीब 40 लोग अस्पताल में भर्ती

महाराष्ट्र के नागपुर शहर से सटे गोधिनी इलाके में स्थित एक वॉटर प्यूरीफिकेशन प्लांट (जल शुद्धिकरण संयंत्र) में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात जहरीली क्लोरीन गैस (Chlorine Gas) का रिसाव होने से भीषण हड़कंप मच गया। गैस के रिसाव के कारण आसपास की घनी आबादी वाले क्षेत्र में करीब 40 लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। यह संयंत्र महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) का है और गोंडी नगर पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता है। गैस लीक की खबर शहर के गोधिनी इलाके में स्थित एक वॉटर प्यूरीफिकेशन प्लांट से मिली। यह प्लांट महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण का है और गोंडी नगर पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसे भी पढ़ें: Singheshwar Temple Stampede | सावन के अंतिम सोमवार पर मधेपुरा के सिंगेश्वर मंदिर में मची भगदड़! बैरिकेड टूटने से आधा दर्जन लोग घायल अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें रात करीब 12.45 बजे लीक के बारे में कॉल मिली, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर, सांस लेने में तकलीफ की शिकायत करने वाले 35 से 40 लोगों को अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर चार या पांच लोगों को इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भी भर्ती कराया गया। बाद में, अधिकारियों ने पुलिस, नागपुर नगर निगम (NMC), स्वास्थ्य विभाग और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के साथ मिलकर बचाव अभियान शुरू किया। 200 मीटर के दायरे को 'नो-मैन्स-लैंड' घोषित कर दिया गया और वहां मौजूद लोगों को इलाका छोड़ने की सलाह दी गई। इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor एक बार फिर हुआ कामयाब, सरहद बंद हुई तो पाकिस्तानी दुल्हनों ने आसमान के रास्ते भारत आकर शादी रचाई इंस्पेक्टर हरेश कलशेकर ने समाचार एजेंसी ANI को बताया, अभी 90 प्रतिशत लीक को रोक दिया गया है और 40 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इसके अलावा, 12 लोगों को छुट्टी भी दे दी गई है। स्थिति अब काफी हद तक नियंत्रण में है; घबराने की कोई जरूरत नहीं है और पुलिस जनता से अपील करती है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें। इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor एक बार फिर हुआ कामयाब, सरहद बंद हुई तो पाकिस्तानी दुल्हनों ने आसमान के रास्ते भारत आकर शादी रचाई हालांकि स्थिति नियंत्रण में है, फिर भी प्रशासन ने लोगों को सभी जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। NDRF के जवान विजय ने बताया कि लोगों की आवाजाही पर अभी भी रोक है और प्रभावित इलाके को दो से तीन दिनों के लिए सील किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Singheshwar Temple Stampede | सावन के अंतिम सोमवार पर मधेपुरा के सिंगेश्वर मंदिर में मची भगदड़! बैरिकेड टूटने से आधा दर्जन लोग घायल इस बीच, इस घटना से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। उन्होंने बताया कि गैस लीक की खबर के बाद इलाके में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। हालांकि, उन्होंने पुलिस और प्रशासन का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने सभी को सुरक्षित निकाला और प्रभावित लोगों को सही इलाज मुहैया कराया। स्थानीय निवासी नीरज पांडे ने पूरी घटना को याद करते हुए ANI को बताया, पुलिस इंस्पेक्टर (PI) अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे; गैस लीक होने से तेज़ बदबू आ रही थी और लोगों को साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी। PI ने घर-घर जाकर लोगों को बचाया और उन्हें खुद पुलिस वैन में एम्बुलेंस तक पहुँचाया। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi

प्रभासाक्षी 24 Aug 2026 11:43 am

अमरावती अस्पताल आग: विपक्ष ने राज्य सरकार पर लगाए आरोप, सुप्रिया सुले बोलीं- ‘यह व्यवस्था में लापरवाही का नमूना’

Mumbai , 24 अगस्त . Maharashtra के अमरावती जिला महिला अस्पताल में एनआईसीयू विभाग में आग लगने से तीन बच्चों की मौत होने पर विपक्ष ने राज्य Government को घेरा है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था में लापरवाही का नमूना है. एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले ने social media प्लेटफॉर्म ... Read more

डेली किरण 24 Aug 2026 11:28 am

अमरावती अग्निकांड: सीएम फडणवीस ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश, पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा

Mumbai , 24 अगस्त . Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने अमरावती के जिला महिला अस्पताल में आग लगने से तीन नवजातों की मौत पर दुख जताया है. उन्होंने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही, सीएम फडणवीस ने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की. Chief Minister ... Read more

डेली किरण 24 Aug 2026 11:23 am

महाराष्ट्र में लापरवाही का कहर! अमरावती NICU में लगी भयानक आग! हादसे में 3 नवजातों की दर्दनाक मौत

महाराष्ट्र के अमरावती शहर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। सोमवार तड़के ज़िला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में आग लगने से 3 नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल कर्मियों और राहत दल की सतर्कता से 36 अन्य नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचा लिया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के एनआईसीयू में एक वेंटिलेटर में तड़के करीब सवा तीन बजे आग लग गई। इकाई के इस हिस्से में समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को देखरेख के लिए रखा जाता है। अमरावती के पुलिस आयुक्त राकेश ओला के अनुसार, यह हादसा तड़के करीब 3:15 से 4:00 बजे के बीच अस्पताल की नई इमारत में स्थित NICU वार्ड में हुआ। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एवं अमरावती के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उन्होंने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घायलों को सभी आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन भी दिया। ओला ने बताया कि एनआईसीयू के तीन हिस्से हैं। इनमें एक अस्पताल में जन्मे शिशुओं, दूसरा बाहर से आए शिशुओं और तीसरा अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के लिए तैयार बच्चों की देखभाल के लिए है। इन तीनों हिस्सों में कुल 39 शिशु भर्ती थे। उन्होंने बताया कि बाहर से लाए गए शिशुओं वाले हिस्से में रखे एक वेंटिलेटर में आग लग गई। इसे भी पढ़ें: Pakistan Terrorist Attack | खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षाकर्मियों की जांच चौकी पर बड़ा आतंकी हमला, दो जवानों की मौत ओला ने बताया कि वहां मौजूद तीन शिशुओं की आग लगने के कारण मौत हो गई, जबकि छह अन्य को बचा लिया गया। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि छह शिशुओं को एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बावनकुले ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल के कर्मचारी आग लगते ही मौके पर पहुंचे और उन्होंने अन्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल की नयी इमारत में स्थित विशेष नवजात देखभाल इकाई में तड़के करीब चार बजे आग लगी। उन्होंने बताया कि इस इकाई में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जा रहा था।बावनकुले ने बताया कि कुछ शिशुओं को आगे के इलाज के लिए ‘डिवीजनल रेफरल सर्विसेज’ अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि वहां चार बच्चों का इलाज किया जा रहा है और इनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई है। इसे भी पढ़ें: Punjab Governor Gulab Chand Kataria ने Fazilka बॉर्डर पर BSF पोस्ट का दौरा किया ओला ने बताया कि अग्निशमन विभाग के कर्मियों और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की विद्युत शाखा को इस घटना के बारे में सूचना दे दी गई है और वे आग लगने के कारणों का पता लगाएंगे। बावनकुले ने शिशुओं की मौत पर गहरा दुख जताते हुए उनके परिजनों को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, ‘‘अमरावती में आज हुई घटना से मैं बेहद दुखी हूं। मेरा मन बहुत व्यथित है।’’ मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार मृत बच्चों के परिजनों के साथ खड़ी है और सरकार एवं प्रशासन हरसंभव मदद मुहैया करा रहे हैं।’’ बावनकुले ने कहा कि उन्होंने घटना के बारे में संबंधित अधिकारियों से बातचीत की है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi #WATCH | Amravati, Maharashtra: Three newborn babies lost their lives after a fire broke out in the Neonatal Intensive Care Unit (NICU) of the District Women’s Hospital. According to preliminary information, the fire erupted at around 3.30 am on the third floor of the hospital,… pic.twitter.com/fhSQvykujw — ANI (@ANI) August 24, 2026

प्रभासाक्षी 24 Aug 2026 10:01 am

150 फीट गहरी खाई में लटकी बस, मौत को छूकर वापस आए 49 यात्री, खिड़कियों से कूदकर बचाई जान

Maharashtra Govt Bus: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सूरत जा रही एक बस दुर्घटना का शिकार होने से बच गई. बस अचानक से खाई के मुहाने पर लटक गई, जिससे 49 यात्रियों की जान मुश्किल में फंस गई थी.

NDTV इंडिया 24 Aug 2026 9:41 am

महाराष्ट्र: अमरावती महिला अस्पताल के NICU में लगी आग, 39 नवजात में से तीन मासूमों की मौत; छह को किया गया शिफ्ट

महाराष्ट्र: अमरावती महिला अस्पताल के NICU में लगी आग, 39 नवजात में से तीन मासूमों की मौत; छह को किया गया शिफ्ट--Maharashtra Amravati Hospital Fire: Several Newborns Die in NICU Blaze, Many Shifted Updates Hindi

अमर उजाला 24 Aug 2026 7:49 am

Maharashtra: अठावले बोले- आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों पर राजद्रोह का मामला दर्ज हो

Maharashtra: अठावले बोले- आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों पर राजद्रोह का मामला दर्ज हो

अमर उजाला 24 Aug 2026 6:51 am

नागपुर: ‘मंथन फॉर युवा अभियान’ को लेकर उत्‍साहित दिखे छात्र, कार्यक्रम को युवा पीढ़ी के लिए बताया फायदेमंद

नागपुर, 23 अगस्‍त . Maharashtra के सीएम देवेंद्र फडणवीस Sunday को नागपुर के रेशिम बाग ग्राउंड में जेनजी के सदस्यों से बातचीत करेंगे, जहां 4,000 ढोल-ताशा वादक अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे. इस दौरान कार्यक्रम में शामिल छात्रों में काफी उत्‍साह देखने को मिल रहा है. छात्रों ने युवा कार्यक्रम की तारीफ की, कहा कि ... Read more

डेली किरण 23 Aug 2026 4:08 pm

राहुल गांधी और उनका पूरा ‘सनातन-विरोधी गैंग’ जिहादी तुष्टीकरण की नीति पर चल रहे : विनोद बंसल

नई दिल्‍ली, 23 अगस्‍त . विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी की आलोचना की और कहा कि India की महिलाओं के सम्मान को Political बहस का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए. दरअसल, Maharashtra के पुणे में कांग्रेस सांसद और Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल ... Read more

डेली किरण 23 Aug 2026 3:58 pm

राहुल गांधी खाने और दिखाने के दांत अलग रखते हैं : सीएम फडणवीस

नागपुर, 23 अगस्त . Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने Saturday को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में जेन-जी और Maharashtra के युवाओं की भारी भागीदारी रही. सीएम फडणवीस ने कहा, “सबसे पहले आप सबने आज देखा होगा कि जेन-जी और Maharashtra के युवा ... Read more

डेली किरण 23 Aug 2026 2:43 pm

Ajit Doval China Visit: ब्रिक्स समिट से पहले डोभाल का चीन दौरा, वांग यी के साथ सीमा विवाद पर होगी वार्ता

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग जाएंगे। वह अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर 'विशेष प्रतिनिधियों' की वार्ता में हिस्सा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग यी के बीच मंगलवार को 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता आयोजित की जाएगी। बता दें, 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के विवाद का हल निकालने के लिए वर्ष 2003 में विशेष प्रतिनिधि वार्ता तंत्र का गठन किया गया था। हालांकि यह तंत्र सीमा विवाद का अंतिम समाधान निकालने में अब तक पूरी तरह सफल नहीं हुआ है, लेकिन दोनों देश इसे सीमा पर तनाव दूर करने और शांति बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया मानते हैं। शीर्ष बैठक के मायने क्या? यह वार्ता नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को आयोजित होने जा रहे 'ब्रिक्स शिखर सम्मेलन' में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। दोनों पक्षों के अधिकारी चीनी राष्ट्रपति की भागीदारी को लेकर आशावादी हैं। इस दौरान ब्रिक्स से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अलग से बैठक होने का अवसर मिल सकता है। दोनों शीर्ष नेताओं की आखिरी मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में 'शंघाई सहयोग संगठन' शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसे भी पढ़ें: National Space Day: पीएम मोदी ने स्पेस स्टार्टअप्स के फाउंडर्स से की मुलाकात, बोले- दुनिया का टैलेंट भारत लाना है विदेश मंत्री जयशंकर का कड़ा संदेश डोभाल-वांग वार्ता से ठीक पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता ही चीन के साथ अच्छे द्विपक्षीय संबंधों की पहली शर्त है। जयशंकर ने कहा कि 2020 से 2024 के बीच दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब दौर से गुजरे, जो मुख्य रूप से सीमा पर पैदा हुई स्थितियों का परिणाम था। उन्होंने दोहराया कि सीमा की स्थिति ही काफी हद तक दोनों देशों के समग्र संबंधों का भविष्य तय करेगी। अरुणाचल प्रदेश पर गतिरोध हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों की गतिविधियों की खबरें सामने आई थीं। इन रिपोर्टों के बीच 12 अगस्त को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने दावा किया था कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल सामान्य और स्थिर है। गुओ ने बताया कि दोनों देशों ने परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र की 36वीं बैठक की है, जिसमें संवाद बनाए रखने पर सहमति बनी। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था कि भारत सीमाई मुद्दों को अत्यंत गंभीर मानता है और एलएसी पर शांति बनाए रखना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: Maharashtra Hill Horror: खाई में गिरने से एक दिन पहले मां ने शेयर किया था वीडियो, रिश्तों पर की थी बात भौगोलिक नामों पर विवाद भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक स्थलों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। नई दिल्ली ने साफ किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अखंड और अभिन्न हिस्सा है और इस सच्चाई को बदला नहीं जा सकता। चीन, जो अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है, 2017 से इन क्षेत्रों के अपने नाम जारी करता रहा है। भारत ने चीन के इस कदम को पूरी तरह से व्यर्थ बताया है।

प्रभासाक्षी 23 Aug 2026 2:42 pm

Maharashtra Hill Horror: खाई में गिरने से एक दिन पहले मां ने शेयर किया था वीडियो, रिश्तों पर की थी बात

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। शुक्रवार को कोहड्या डोंगर की 250 फुट गहरी खाई में गिरने से संगीता चंदगुडे, उनके 48 साल के पति मुरलीधर चंदगुडे और 18 साल के बेटे कुणाल की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बेटे के नए आईफोन की EMI को लेकर हुए विवाद के बाद यह हादसा हुआ। इस दुखद घटना से ठीक एक दिन पहले संगीता ने अपने यूट्यूब चैनल पर रिश्तों की अहमियत को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया था। जो कद्र न करे, उसके लिए कुछ करने का मतलब नहीं गुरुवार को संगीता ने यूट्यूब पर 1 मिनट का एक व्लॉग शेयर किया था। इसमें उन्होंने कहा था, अपनी किस्मत या सब कुछ उसी इंसान को दें जो आपकी और आपके प्यार की कद्र करता हो। अगर कोई इंसान आपकी या आपके प्यार की कद्र नहीं करता, तो ऐसे इंसान के लिए कुछ भी करने का कोई मतलब नहीं है। संगीता अपने पति से अलग रह रही थीं। उन्होंने वीडियो में कहा था, चपाती तभी अच्छी लगती है जब वह दोनों तरफ से सिक जाए। रिश्तों के साथ भी ऐसा ही है। अगर रिश्ता दोनों तरफ से चल रहा है और दोनों एक-दूसरे की कद्र कर रहे हैं, तभी ऐसे रिश्ते में बने रहना चाहिए। इसे भी पढ़ें: iPhone की ज़िद में तबाही... नया फोन न मिलने पर 500 फीट ऊंची पहाड़ी से कूदा 19 साल का लड़का, पीछे से मां-बाप ने भी दी जान 29 हजार से ज्यादा थे फॉलोअर्स यूट्यूब पर संगीता के 29 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स थे। वे अपने चैनल पर अक्सर मोटिवेशनल वीडियो और छोटे व्लॉग पोस्ट करती थीं, जिनमें उनका बेटा भी नजर आता था। करीब छह साल पहले बीमारी के कारण उनके बड़े बेटे की मौत हो गई थी, जिसके बाद से वे पति से अलग रह रही थीं। इसे भी पढ़ें: BJP ने Rahul Gandhi के पुणे छात्र संवाद को हास्य कार्यक्रम करार दिया कैसे हुई यह दुखद घटना? कोहड्या डोंगर पर यह हादसा शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ। 18 साल का कुणाल नए आईफोन की EMI भरने के लिए पैसे मांग रहा था और इसी बात पर विवाद के बाद वह पहाड़ी पर चढ़ गया। बेटे की सुरक्षा से चिंतित पिता मुरलीधर और मां संगीता भी स्थानीय लोगों के साथ उसे समझाने के लिए पहाड़ी पर पहुंचे। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद जब मुरलीधर कुणाल को खींचकर वापस लाने की कोशिश कर रहे थे, तभी दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे 250 फीट गहरी खाई में गिर गए। पति और बेटे को गिरते देख सदमे में आई संगीता ने भी कुछ ही सेकंड बाद पहाड़ी से छलांग लगा दी। तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, कुणाल पिछले साल भी इसी जगह आया था, तब पुलिस ने उसे समझा-बुझाकर सुरक्षित बचा लिया था।

प्रभासाक्षी 23 Aug 2026 1:15 pm

महाराष्ट्र: बीड में आवारा कुत्तों ने 3 साल की मासूम पर किया हमला, चेहरे पर लगे 12 टांके

बीड, 23 अगस्त . Maharashtra के बीड शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में बीड के धांडे नगर इलाके के शिवतेज नगर में घर के सामने खेल रही महज 3 साल की मासूम बच्ची पर अचानक एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया. घायल बच्ची का नाम शिवांशी ... Read more

डेली किरण 23 Aug 2026 8:58 am

Mumbai Indians ने Zubin Bharucha को बनाया नया प्रदर्शन निदेशक, फ्रेंचाइजी ने की घोषणा

मुंबई इंडियंस ने शनिवार को जुबिन भरूचा को अपनी फ्रेंचाइजी का प्रदर्शन निदेशक नियुक्त किया जो फ्रेंचाइजी के पूरे तंत्र में नेतृत्व टीम के साथ मिलकर काम करेंगे। मुंबई और सरे के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल चुके भरूचा अब पांच बार की आईपीएल विजेता टीम मुंबई इंडियंस से जुड़ गए हैं। इसके साथ ही राजस्थान रॉयल्स के साथ उनका लंबा कार्यकाल समाप्त हो गया जिसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। मुंबई इंडियंस ने एक बयान में कहा, ‘‘जुबिन भरूचा प्रदर्शन निदेशक के तौर पर मुंबई इंडियंस से जुड़ रहे हैं और फ्रेंचाइजी के पूरे तंत्र में प्रदर्शन से जुड़े सभी क्षेत्र में नेतृत्व समूह के साथ मिलकर काम करेंगे। ’’ बयान में कहा गया, ‘‘जुबिन मुंबई इंडियंस के मौजूदा सहयोगी स्टाफ के साथ जुड़ेंगे और खिलाड़ी विकास में निरंतर उत्कृष्टता हासिल करने के मुंबई इंडियंस के स्थापित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएंगे। ’’ भरूचा ने राजस्थान रॉयल्स में टीम निदेशक, क्रिकेट प्रमुख और क्रिकेट संचालन एवं ‘हाई परफॉर्मेंस’ निदेशक सहित विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। इसे भी पढ़ें: Maharashtra में Auto Rickshaw, Taxi Drivers के लिए Marathi Mandatory क्यों की गयी? मराठी सीखने के लिए दबाव क्यों डालना? उन्होंने यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे भारतीय खिलाड़ियों के विकास में भी अहम भूमिका निभाई।

प्रभासाक्षी 22 Aug 2026 3:56 pm

Maharashtra में Auto Rickshaw, Taxi Drivers के लिए Marathi Mandatory क्यों की गयी? मराठी सीखने के लिए दबाव क्यों डालना?

महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने का फैसला अब केवल सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई का रूप ले चुका है। राज्यभर में शुरू हुई जांच के पहले ही दिन 1,268 व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों मुख्यतः ऑटो और टैक्सी चालकों, को मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने पर नोटिस जारी कर दिया गया। राज्य सरकार इसे यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और महाराष्ट्र की भाषा-संस्कृति से जोड़ रही है, लेकिन इस कार्रवाई ने रोज़गार, प्रवासी चालकों की आजीविका, नियमों की अस्पष्टता और कानूनी वैधता को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, राज्य में ऑटो और टैक्सी चलाने के लिए मराठी का ‘वर्किंग नॉलेज’ यानी व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य है। राज्य सरकार का तर्क है कि चालकों को रोजमर्रा के कामकाज में यात्रियों से संवाद करना पड़ता है और कई शिकायतें मिली हैं कि कुछ चालक मराठी में यात्रियों की बात, दिशा-निर्देश या सामान्य निर्देश तक नहीं समझ पाते। मंत्री का कहना है कि मराठी का व्यावहारिक ज्ञान केवल नियम पालन का मामला नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से भी जुड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या भाषा जानना सचमुच यात्री सुरक्षा का प्रश्न है, या फिर सुरक्षा के नाम पर एक ऐसी व्यवस्था लागू की जा रही है जिसकी कसौटियां अभी तक स्पष्ट नहीं हैं? हम आपको याद दिला दें कि राज्य सरकार ने मई में मराठी की बुनियादी जानकारी अनिवार्य करने की घोषणा की थी और गैर-मराठी चालकों के लिए मराठी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू कराया गया। 105 दिनों तक चले अभियान में लगभग 1.65 लाख चालकों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र जारी किए गए। मुंबई में पहले के अभियान में करीब 1.25 लाख चालकों ने भाग लिया था, जिनमें 7,750 चालक परीक्षा में असफल रहे, जबकि 14,000 से अधिक प्रशिक्षण पूरा नहीं कर सके। अब 15 अगस्त तक मराठी सीखने की समयसीमा समाप्त होने के बाद सरकार ने सीधे जांच और कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। इसे भी पढ़ें: Maharashtra RTO ने 1499 Auto Taxi चालकों को जारी किया नोटिस, मराठी न जानने पर कार्रवाई राज्यव्यापी जांच के पहले दिन शाम तक 8,217 चालकों का परीक्षण किया गया। इनमें मुंबई महानगर क्षेत्र में 3,995 चालक शामिल थे, जिनमें से 604 को मराठी का पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान नहीं होने पर नोटिस दिया गया। राज्य के बाकी हिस्सों में 4,222 चालकों की जांच हुई और 664 को नोटिस जारी किए गए। यह जांच अभियान 30 सितंबर तक जारी रहेगा। चालकों को एक महीने का समय दिया गया है। यदि वे इसके बाद भी मराठी में संतोषजनक ढंग से जवाब नहीं दे सके, तो उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद उन्हें फिर एक महीने का अवसर मिलेगा। लगातार उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई और कठोर हो सकती है। हम आपको बता दें कि जांच के दौरान चालकों को 16 सवालों के जरिए परखा जा रहा है। इनमें रोजमर्रा की बातचीत से जुड़े वाक्य शामिल हैं, जैसे— “मला CNG भरायचे आहे, थोडे थांबावे लागेल” अर्थात मुझे सीएनजी भरवानी है, थोड़ी देर रुकना होगा; “माझी रिक्षा/टॅक्सी शेअरिंगची आहे” यानी मेरी रिक्शा या टैक्सी शेयरिंग की है; और “मीटर चालू केले आहे” अर्थात मीटर चालू कर दिया है। प्रश्न यात्रियों से गंतव्य पूछने, रास्ता समझने, किराया, मीटर और स्टैंड से जुड़े संवाद पर आधारित हैं। परिवहन विभाग ने जांच की वीडियोग्राफी कराने के भी निर्देश दिए हैं। हम आपको बता दें कि यह प्रशिक्षण कोंकण साहित्य परिषद के माध्यम से कराया गया था और इसका समापन स्वतंत्रता दिवस पर हुआ। राज्य सरकार का दावा है कि उसका उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं, बल्कि मराठी भाषा और महाराष्ट्र की पहचान व संस्कृति को संरक्षित करना है। यहीं से विवाद का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पक्ष शुरू होता है यानि कानून। हम आपको याद दिला दें कि 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऑटो रिक्शा परमिट के लिए मराठी दक्षता की एक ऐसी ही शर्त को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि ऑटो रिक्शा ‘मोटर कैब’ की श्रेणी में आते हैं और महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स रूल्स के नियम 24 में भाषा संबंधी प्रावधान सार्वजनिक सेवा वाहन बैज के कुछ मामलों से जुड़ा है, लेकिन मोटर कैब को उसमें विशेष रूप से बाहर रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि नियम 24 के आधार पर ऑटो रिक्शा कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट के लिए मराठी दक्षता अनिवार्य नहीं बनाई जा सकती। अब राज्य सरकार का कहना है कि वर्तमान कार्रवाई मौजूदा नियमों के अनुपालन और संशोधित महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के तहत की जा रही है। अधिकारियों का तर्क है कि 2017 का फैसला परमिट से संबंधित था, जबकि मौजूदा व्यवस्था बैज, प्राधिकरण और उनके नवीनीकरण से जुड़ी है। सरकार यह भी कहती है कि व्यावहारिक मराठी ज्ञान की शर्त 1989 से ही नियमों में मौजूद थी, लेकिन उसका कड़ाई से पालन नहीं हुआ। फिर भी सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है, ‘वर्किंग नॉलेज ऑफ मराठी’ की स्पष्ट परिभाषा क्या है? टैक्सी यूनियनों ने आशंका जताई है कि नियमों में यह नहीं बताया गया कि व्यावहारिक ज्ञान का मानक क्या होगा। सेवा सारथी टैक्सी यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने चेतावनी दी है कि अस्पष्टता आरटीओ में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकती है। सेवानिवृत्त आरटीओ अधिकारियों का भी कहना है कि संशोधित नियमों में यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षा मौखिक होगी या लिखित, पास होने का मानक क्या होगा और सभी जगह एक जैसी जांच कैसे सुनिश्चित की जाएगी। राज्य सरकार के सामने इसलिए दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे राज्य की भाषा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करनी है, दूसरी ओर लाखों चालकों, जिनमें बड़ी संख्या प्रवासी और सीमित औपचारिक शिक्षा वाले श्रमिकों की है, उनकी आजीविका भी सुरक्षित रखनी है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई में ही 2.8 लाख से अधिक ऑटो रिक्शा और लगभग 20,000 टैक्सी परमिट हैं, जिनसे शिफ्टों में अनुमानित पांच लाख चालक जुड़े हैं। यहां सबसे तीखा सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार प्रशिक्षण और सहयोग की नीति को प्राथमिकता देगी या भाषा परीक्षा को लाइसेंस और बैज निलंबन का हथियार बनाएगी? क्या 16 सवालों की परीक्षा वास्तव में किसी चालक की संवाद क्षमता का निष्पक्ष पैमाना है? और सबसे अहम सवाल यह है कि क्या संशोधित नियम अदालत की कसौटी पर टिकेंगे? बहरहाल, मराठी सीखना और उसका सम्मान करना एक बात है, लेकिन किसी की आजीविका को भाषा की ऐसी परीक्षा से जोड़ना, जिसकी परिभाषा और मानक ही स्पष्ट न हों, प्रशासनिक मनमानी का रास्ता भी खोल सकता है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 22 Aug 2026 3:16 pm

धार्मिक आजादी के नाम पर महाराष्ट्र का कानून ही स्वतंत्रता का दुश्मन : मदनी

Maharashtra's law, enacted in the name of religious freedom, is itself an enemy of freedom: Madani.

अमर उजाला 22 Aug 2026 1:44 am

UP Politics के 'बाबूजी' और Good Governance के प्रतीक Kalyan Singh: जिनके सुशासन की आज भी दी जाती है मिसाल

भारतीय राजनीति के युगपुरुष, श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ, कोमल हृदय एवं संवेदनशील व्यक्तित्व, वज्रबाहु राष्ट्रप्रहरी, भारतमाता के सच्चे सपूत तथा भारतीय राजनीति में भगवान श्रीराम के हनुमान कहे जाने वाले हिंदू हृदय सम्राट कल्याण सिंह जी उन विरल नेताओं में थे, जिन्होंने भारतीय राजनीति में अनेक ऐतिहासिक मिसालें प्रस्तुत कीं। उनका राजनीतिक एवं व्यक्तिगत जीवन सदैव निष्कलंक, सिद्धांतनिष्ठ और प्रेरणास्पद रहा। कुशल प्रशासन, दृढ़ निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की मिसालें तब तक दी जाती रहेंगी, जब तक यह संसार रहेगा। कल्याण सिंह जी ने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना और जमीन से जुड़कर ‘जनता के नेता’ के रूप में जन-जन के हृदय में अपनी अमिट छवि स्थापित की। वे बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और सभी वर्गों में समान रूप से लोकप्रिय थे। देश का प्रत्येक हिंदू युवा और बालक उन्हें अपना आदर्श मानता था। उनका व्यक्तित्व हिमालय के समान विराट, अडिग और तेजस्वी था। भारतीय राजनीति में वे स्नेह और सम्मान के साथ ‘बाबूजी’ के नाम से विख्यात रहे। उनका संपूर्ण जीवन सादगी, राष्ट्रभक्ति और मूल्यों की राजनीति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। भारतीय राजनीति और समाज के लिए उनका योगदान युगों-युगों तक प्रेरणास्रोत बना रहेगा। हिंदू हृदय सम्राट कल्याण सिंह जी का नाम इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों पर सदैव अमर रहेगा। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी सन् 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ जनपद की अतरौली तहसील के मढ़ौली ग्राम के एक सामान्य किसान परिवार में हुआ। कल्याण सिंह के पिता का नाम तेजपाल सिंह लोधी और माता का नाम सीता देवी था। कल्याण सिंह में बचपन से ही नेतृत्व करने की क्षमता थी। कल्याण सिंह बचपन में ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ गए थे और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की शाखाओं में भाग लेने लगे थे। कल्याण सिंह ने विपरीत परिस्थितियों में कड़ी मेहनत कर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद कल्याण सिंह ने अध्यापक की नौकरी की। और साथ-साथ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ कर राजनीति के गुण भी सीखते रहे। कल्याण सिंह राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ में रहकर गांव-गांव जाकर लोगों में जागरुकता पैदा करते रहे। कल्याण सिंह का विवाह रामवती देवी से हुआ। कल्याण सिंह के दो संतान है। एक पुत्र और एक पुत्री, पुत्र का नाम राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया है और पुत्री का नाम प्रभा वर्मा है। कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया वर्तमान में उत्तर प्रदेश की एटा लोकसभा सीट से संसद सदस्य हैं। कल्याण सिंह ने अपना पहला विधानसभा चुनाव अतरौली से जीतकर 1967 में उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे। कल्याण सिंह 1967 से लगातार 1980 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इस बीच देश में आपातकाल के समय कल्याण सिंह 1975-76 में 21 महीने जेल में रहे। इस बीच कल्याण सिंह को अलीगढ़ और बनारस की जेलों में रखा गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद 1977 में रामनरेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। जिसमें कल्याण सिंह को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। सन् 1980 के उत्तर प्रदेश के चुनावों में कल्याण सिंह विधानसभा का चुनाव हार गये। भाजपा के गठन के बाद कल्याण सिंह को उत्तर प्रदेश का संगठन महामंत्री बनाया गया। इस बीच कल्याण सिंह ने गाँव-गाँव, घर-घर जाकर भाजपा को उत्तर प्रदेश में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसे भी पढ़ें: Vilasrao Deshmukh Death Anniversary: जमीनी राजनीति से Maharashtra CM की कुर्सी तक का अद्भुत Journey कल्याण सिंह 1985 से लेकर 2004 तक लगातार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इस बीच कल्याण सिंह दो बार भाजपा के उत्तर प्रदेश से प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में उत्तर प्रदेश में राम मंदिर आंदोलन चलाया गया। इस आंदोलन में कल्याण सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई। राम मंदिर आंदोलन की वजह से उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में भाजपा का उभार हुआ। और जून 1991 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से सरकार बनायी। जिसमे कल्याण सिंह की अहम भूमिका रही। और कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते कारसेवकों द्वारा अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद वहाँ श्री राम का एक अस्थायी मन्दिर निर्मित कर दिया गया। कल्याण सिंह ने बाबरी मस्जिद विध्वंस की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसम्बर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। यहीं से भाजपा को कल्याण सिंह के रूप में हिंदुत्ववादी चेहरा मिल गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा ने कल्याण सिंह के नेतृत्व में अनेक आयाम छुए। 1993 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में कल्याण सिंह अलीगढ के अतरौली और एटा के कासगंज से विधायक निर्वाचित हुये। इन चुनावों में भाजपा कल्याण सिंह के नेतृत्व में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। लेकिन सपा-बसपा ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में गठबन्धन सरकार बनायी। और उत्तर प्रदेश विधान सभा में कल्याण सिंह विपक्ष के नेता बने। इसके बाद कल्याण सिंह 1997 से 1999 तक पुनः दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल में कानून व्यवस्था एकदम मजबूत थी। इसलिए आज तक उत्तर प्रदेश में लोग कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल की मिसाल देते हैं। 1998 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व में 58 सीटें जीती। 1999 में भाजपा से मतभेद के कारण कल्याण सिंह ने भाजपा छोड़ दी। कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का गठन किया। 2002 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अपने दम पर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से लड़ा और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के चार विधायक चुने गए और कल्याण सिंह ने बड़े स्तर पर पूरे प्रदेश में भाजपा को नुकसान पहुँचाया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की जमीन पर भाजपा कई वर्षो तक कल्याण सिंह की उथल पुथल का और भाजपा के नकारा नेताओं की साजिश का शिकार बनी रही। लेकिन इसका फायदा न कल्याण सिंह को मिल पाया न भगवा पार्टी को। भाजपा और कल्याण सिंह दोनों उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाशिये पर चले गए। 2004 में कल्याण सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के आमंत्रण पर भाजपा में वापसी तो कर ली लेकिन, उनको वो पॉवर नहीं मिली जो मंदिर आन्दोलन के समय उनके पास थी। 2004 के आम चुनावों में उन्होंने बुलन्दशहर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा। और कल्याण सिंह पहली बार बुलंदशहर लोकसभा सीट से संसद पहुंचे। 2007 का उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव भाजपा ने कल्याण सिंह के नेतृत्व में लड़ा। कहने को भाजपा ने 2007 में कल्याण सिंह को भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तो बना दिया लेकिन नाम का, जिसके पास ना तो उम्मीदवार तय करने की पावर थी और ना ही उनके अंडर में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रबंधन था। इसलिए वो चुनाव में कुछ अच्छा नहीं कर सके। इसके बाद 2009 में पुनः अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मतभेदों के कारण भाजपा का दामन छोड़कर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से नजदीकियां बढ़ा लीं। 2009 के लोकसभा चुनावों में एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सांसद चुने गये। फिर 2009 लोकसभा चुनाव खत्म होते ही मुलायम ने कल्याण से नाता तोड़ लिया। क्योंकि कल्याण सिंह की बजह से मुस्लिम समुदाय के लोग उनसे नाता तोड़ चुके थे। इसके बाद कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय जनक्रान्ति पार्टी का गठन किया जो कि 2012 के विधानसभा चुनाव में कुछ विशेष नहीं कर सकी। लेकिन मुलायम के परम्परागत वोट उनके पास वापस आ गए। इसके बाद 2013 में कल्याण सिंह की भाजपा में पुनः वापसी हुई और कल्याण सिंह का परंपरागत लोधी-राजपूत वोट भी भाजपा से जुड़ गया। और 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के कहने पर कल्याण सिंह ने उत्तर प्रदेश में भाजपा का खूब प्रचार किया। भाजपा ने अकेले अपने दम पर 80 लोकसभा सीटों से 71 लोकसभा सीटें जीतीं। और नरेंद्र मोदी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री बनें। इसके बाद किसी समय देश के भावी प्रधानमंत्री कहे जाने वाले कल्याण सिंह को राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सिफारिश पर सितंबर 2014 में राजस्थान का राज्यपाल बनाया। इसके बाद कल्याण सिंह को जनवरी 2015 से अगस्त 2015 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। लेकिन राजस्थान का राज्यपाल रहते हुए भी कल्याण सिंह का दखल उत्तर प्रदेश की राजनीति में रहा। कल्याण सिंह ने राजस्थान के राज्यपाल के रूप में अपना 05 साल का कार्यकाल पूरा किया और 08 सितम्बर 2019 तक कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल रहे। इसके बाद कल्याण सिंह ने 09 सितम्बर 2019 को लखनऊ में भाजपा की पुनः सदस्यता ली और फिर से भाजपाई हो गए। उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनावों में भी कल्याण सिंह जी का अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावी दखल रहा। 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के अधिकांश प्रत्याशी कल्याण सिंह जी का आशीर्वाद लेने जयपुर राजभवन जाते रहे। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कल्याण सिंह जी जनमानस में कितने लोकप्रिय थे। आज भी लोग कल्याण सिंह सरकार के कार्यकाल की मिसाल देते हैं, क्योंकि जब कल्याण सिंह जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब प्रदेश में सुशासन, विकास और व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले थे। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता समाज के विभिन्न वर्गों में व्यापक रही। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने अनेक भाषणों में कल्याण सिंह सरकार के कुशल प्रशासन और सुशासन की मिसाल देते रहे हैं। कल्याण सिंह जी अपने समय में उत्तर प्रदेश के सर्वमान्य हिंदुत्ववादी नेताओं में गिने जाते थे। अपनी सशक्त राजनीतिक शैली, कुशल प्रशासन और हिंदुत्ववादी छवि के लिए प्रसिद्ध भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त कल्याण सिंह जी ने 21 अगस्त 2021 को 89 वर्ष की आयु में अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय राजनीति में एक युग का अवसान हुआ, लेकिन उनके विचार, आदर्श, सुशासन और राष्ट्रभक्ति की विरासत सदैव प्रेरणा देती रहेगी। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी योद्धा, धर्म और राष्ट्र के लिए सत्ता का त्याग करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, श्रद्धेय श्री कल्याण सिंह जी की आज 5वीं पुण्यतिथि है। उनका जीवन भारतीय राजनीति में त्याग, साहस और सिद्धांत निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। जब-जब धर्म, आस्था और कर्तव्य के लिए किए गए त्याग की चर्चा होगी, तब-तब श्री कल्याण सिंह जी का नाम विशेष सम्मान और गौरव के साथ स्मरण किया जाएगा। अयोध्या में आज भव्य और दिव्य रामलला के मंदिर की जो ऐतिहासिक परिकल्पना साकार हुई है, उसमें स्वर्गीय श्री कल्याण सिंह जी का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने पद, सत्ता और राजनीतिक भविष्य की परवाह किए बिना धर्म और जनभावनाओं की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका दृढ़ संकल्प, अडिग नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति निष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। श्रद्धेय बाबूजी का जीवन और कृतित्व भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अंकित रहेगा। - डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत

प्रभासाक्षी 21 Aug 2026 3:10 pm

Varanasi News: महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा के लोकनृत्य से सजी केंद्रीय विद्यालय की शाम

Kendriya Vidyalaya evening was decorated with folk dances from Maharashtra, Karnataka, Uttarakhand and Odisha.

अमर उजाला 21 Aug 2026 1:44 am

Rajiv Gandhi Birth Anniversary: आधुनिक भारत के निर्माता Rajiv Gandhi का वो विजन जिसने बदली देश की तकदीर

आज ही के दिन यानी की 20 अगस्त को देश के पूर्व पीएम रहे राजीव गांधी का जन्म हुआ था। वह भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। राजीव गांधी भारत को 21वीं सदी में ले जाने का सपना देखते थे। हालांकि उनको राजनीति में दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन जिस तेजी के साथ राजीव गांधी का राजनीतिक जीवन शुरू हुआ था, उतना ही दर्दनाक और भयावह स्थिति में उसका अंत भी हुआ। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर पूर्व पीएम राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... जन्म और परिवार मुंबई में 20 अगस्त 1944 को राजीव गांधी का जन्म हुआ था। वह एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े थे, जहां पर राजनीति और सत्ता देश के इतिहास का हिस्सा थी। उनकी मां देश की पहली महिला पीएम इंदिरा गांधी थीं। वहीं उनके पिता का नाम फिरोज गांधी थी। राजीव गांधी के नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। राजीव गांधी का बचपन दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन में बीता। इसे भी पढ़ें: Vilasrao Deshmukh Death Anniversary: जमीनी राजनीति से Maharashtra CM की कुर्सी तक का अद्भुत Journey पायलट बनना चाहते थे राजीव राजीव की शुरूआती जिंदगी राजनीति से अलग थी। उन्होंने देहरादूर के दून स्कूल से पढ़ाई की और फिर ब्रिटेन चले गए। वहां पर ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में पढ़ाई शुरू की। इसके बाद राजीव गांधी ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। राजीव की दिलचस्पी तकनीक और विज्ञान में थी। वह पायलट बनना चाहते थे। इसके लिए राजीव गांधी ने दिल्ली फ्लाइंग क्लब की परीक्षा पास की। उन्होंने कमर्शियल पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया। फिर वह इंडियन एयरलाइंस के पायलट बने। वह राजनीति से दूर अपना जीवन जी रहे थे। तभी साल 1980 के विमान दुर्घटना में राजीव के छोटे भाई संजय गांधी की मौत हो गई। ऐसे में राजीव को मजबूरन सियासत में आना पड़ा। राजनीति में एंट्री राजीव गांधी ने अमेठी से लोकसभा उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की। धीरे-धीरे राजीव कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय होत गए। वहीं 31 अक्तूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई और कांग्रेस नेतृत्व के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। जिसके बाद राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके बाद उन्होंने आम चुनाव का ऐलान कर दिया। इस चुनाव में कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत मिली और पार्टी ने 508 में से 401 लोकसभा सीटें प्राप्त कीं। आधुनिक भारत की नींव राजीव गांधी के सामने देश को संभालने की चुनौती थी, तो वह आधुनिक भारत की नींव मजबूत करने की महत्वाकांक्षी थे। वह तकनीक के क्षेत्र में भारत को आगे लेकर जाना चाहते थे। वह 21वीं सदी के भारत का सपना देखते थे। राजीव गांधी के कार्यकाल में भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के विस्तार की दिशा आगे बढ़ी। वही बाद के वर्षों में राजीव गांधी को कंप्यूटर और तकनीक क्रांति को बढ़ावा देने वाले नेता के रूप में जाना गया। आखिरी सफर जिस तरह से राजीव गांधी के जीवन के रूख अचानक से राजनीति की ओर मुड़ा था। उस तरह एक बेहद भयावह घटना ने उसको हमेशा के लिए रोक दिया। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदूर में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्याकर दी गई थी।

प्रभासाक्षी 20 Aug 2026 1:23 pm

Maharashtra: महाराष्ट्र में सर्पदंश अब अधिसूचित बीमारी, रिपोर्टिंग अनिवार्य; राहुल के पुणे दौरे की तैयारी तेज

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में सर्पदंश अब अधिसूचित बीमारी, रिपोर्टिंग अनिवार्य; राहुल के पुणे दौरे की तैयारी तेज

अमर उजाला 19 Aug 2026 8:46 am

Maharashtra HSC Exam 2027: महाराष्ट्र में 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण शुरू, इस तारीख तक भरना होगा फॉर्म

Maharashtra HSC 2027: महाराष्ट्र बोर्ड ने 12वीं की फरवरी-मार्च 2027 परीक्षा के लिए आवेदन शुरू कर दिए हैं। नियमित और अन्य पात्र छात्र 31 अक्तूबर तक SARAL पोर्टल से फॉर्म भर सकते हैं। इसके बाद लेट फीस के साथ दो मौके मिलेंगे।

अमर उजाला 17 Aug 2026 11:49 am

Maharastra State Film Awards : आशा पारेश को मिला राज कपूर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, देखिए पूरी लिस्ट

Maharashtra State Film Awards Winners List: महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार 21 अगस्त की शाम को वर्ली के डोम एसवीपी स्टेडियम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खड़गे, महाराष्ट्र फिल्म, थिएटर और ...

वेब दुनिया 22 Aug 2024 4:40 pm

Maharashtra SSC Result 2024: क्या 2 जून को जारी होंगे कक्षा 10वीं के नतीजे?

Maharashtra SSC Result 2024: महाराष्ट्र एसएससी कक्षा 10वीं के परीक्षा नतीजे अब किसी भी समय घोषित होने की उम्मीद है। MSBSHSE आधिकारिक नोटिस के माध्यम से एसएससी रिजल्ट की तारीख और समय की जानकारी शेयर कर

लाइव हिन्दुस्तान 24 May 2024 12:52 pm

शाहरुख खान ने गौरी और सुहाना के साथ डाला वोट, अबराम और आर्यन खान भी नजर आए.

लोकसभा चुनाव 2024 के पांचवें चरण में छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 49 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान जारी है। मुंबई में मतदान से पहले, कई बॉलीवुड हस्तियों ने मतदाताओं से बाहर आने और नागरिक के रूप में अपने कर्तव्य का पालन करने का आग्रह किया। बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान को उनके परिवार के साथ मुंबई के एक पोलिंग बूथ पर देखा गया। इसे भी पढ़ें: सफेद लिबास में लाल सिंदूर लगाकर वोट डालने निकली खूबसूरत एक्ट्रेस रेखा, माथे के सिंदूर ने खींचा ध्यान क्लिप में, शाहरुख खान ने काली टी-शर्ट और पैंट पहनी थी, उनकी बेटी सुहाना खान ने नीला सूट पहना था और उनकी पत्नी गौरी ने वाइफ टॉप और नीली जींस पहनी थी। अबराम और आर्यन खान भी नजर आए। उन्होंने रुककर मतदान केंद्र पर खड़े अधिकारियों को इस भीषण गर्मी में अपना कर्तव्य निभाने के लिए धन्यवाद दिया। इससे पहले, शाहरुख खान ने भारत के नेटिज़न्स से वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग करने का आग्रह किया था। उन्होंने एक्स (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर लिखा, जिम्मेदार भारतीय नागरिक के रूप में हमें इस सोमवार को महाराष्ट्र में मतदान करने के अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहिए। आइए भारतीय के रूप में अपना कर्तव्य निभाएं और अपने देश के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए मतदान करें। आगे बढ़ें, प्रचार करें, वोट देना हमारा अधिकार है। इसे भी पढ़ें: American Accent में इंटरव्यू में बोली Kiara Advani, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वी़डियो, लोगों ने उन्हें नकली Kim Kardashian कहा बता दें, पांचवें चरण में मुंबई की 6 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। सीटें हैं मुंबई उत्तर, मुंबई उत्तर पश्चिम, मुंबई उत्तर पूर्व, मुंबई उत्तर मध्य, मुंबई दक्षिण और मुंबई दक्षिण मध्य। महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटें हैं, जो उत्तर प्रदेश के बाद दूसरी सबसे बड़ी सीट है। पहले चार चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है और लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण का मतदान आज है। मतगणना और नतीजे 4 जून को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले दिन में अक्षय कुमार, देओल बंधु सनी और बॉबी, जान्हवी कपूर, रणबीर कपूर, फिल्म निर्माता सुभाष घई और उनकी पत्नी, कियारा आडवाणी, वरुण धवन और पिता डेविड धवन, दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और कई अन्य बॉलीवुड हस्तियों ने वोट डाले। As responsible Indian citizens we must exercise our right to vote this Monday in Maharashtra. Let’s carry out our duty as Indians and vote keeping our country’s best interests in mind. Go forth Promote, our right to Vote. — Shah Rukh Khan (@iamsrk) May 18, 2024 Shahrukh khan arrives at polling booth to vote for INDIA. pic.twitter.com/jPXWtEswo6 — Shantanu (@shaandelhite) May 20, 2024

प्रभासाक्षी 20 May 2024 6:05 pm

Shah Rukh Khan ने मतदाताओं से अपने मताधिकार का प्रयोग करने का आग्रह किया, कहा 'आइए भारतीय के रूप में अपना कर्तव्य निभाएं...'

मौजूदा लोकसभा चुनाव 2024 में पांचवें चरण के मतदान से पहले, शाहरुख खान मतदाताओं को लोकतंत्र के उत्सव में डूबने और अपनी उंगलियों पर स्याही लगवाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आगे आए हैं। जवान स्टार ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, ''जिम्मेदार भारतीय नागरिक के रूप में हमें इस सोमवार को महाराष्ट्र में वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहिए। आइए भारतीय के रूप में अपना कर्तव्य निभाएं और अपने देश के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए मतदान करें। आगे बढ़ें, वोट देने के हमारे अधिकार को बढ़ावा दें।'' इसे भी पढ़ें: Heeramandi | सोनाक्षी सिन्हा ने हीरामंडी देखने के बाद मनीष कोइराला से मांगी थी मांफी, अब बताया उसके पीछे का कारण वोटिंग के बारे में शाहरुख की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, उनके कई प्रशंसकों ने उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म जवान से उनका एकालाप साझा किया। फिल्म में, शाहरुख ने दो मिनट लंबा एक संवाद दिया, जहां उन्होंने मतदान के महत्व के बारे में बात की और बताया कि कैसे सही उम्मीदवार का चुनाव करना बहुत महत्वपूर्ण है, जो जाति, धर्म या नस्ल के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं रखता हो। भाषण देते हुए उन्होंने लोगों से राजनीतिक उम्मीदवारों से पूछने का आग्रह किया, अगले 5 वर्षों में वे आपके लिए क्या करेंगे। यदि परिवार में कोई बीमार पड़ जाता है, तो आप उनके इलाज के लिए क्या करेंगे? मुझे इलाज दिलाने के लिए आप क्या करेंगे? इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | अन्नू कपूर-स्टारर Hamare Baarah कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 में की जाएगी प्रदर्शित इससे पहले आज, सलमान खान ने भी मतदाताओं से बाहर आने और राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने लिखा, ''मैं साल में 365 दिन व्यायाम करता हूं, चाहे कुछ भी हो और अब मैं 20 मई को अपने वोट देने के अधिकार का प्रयोग करने जा रहा हूं, चाहे कुछ भी हो। तो जो करना है करो यार, लेकिन जाकर वोट करो और अपनी भारत माता को परेशान मत करो.. भारत माता की जय।'' बता दें, पांचवें चरण में मुंबई की 6 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। सीटें हैं मुंबई उत्तर, मुंबई उत्तर पश्चिम, मुंबई उत्तर पूर्व, मुंबई उत्तर मध्य, मुंबई दक्षिण और मुंबई दक्षिण मध्य। महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटें हैं, जो उत्तर प्रदेश के बाद दूसरी सबसे बड़ी सीट है। पहले चार चरणों के लिए मतदान संपन्न हो चुका है और लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए मतदान 20 मई को होगा। मतगणना और परिणाम 4 जून को घोषित किए जाएंगे। As responsible Indian citizens we must exercise our right to vote this Monday in Maharashtra. Let’s carry out our duty as Indians and vote keeping our country’s best interests in mind. Go forth Promote, our right to Vote. — Shah Rukh Khan (@iamsrk) May 18, 2024 I exercise 365 days a year no matter what and now I’m going to exercise my right to vote on the 20th of May no matter what. So do whatever you want to do man, but go and vote and don’t trouble your Bharat Mata .. Bharat Mata ki Jai — Salman Khan (@BeingSalmanKhan) May 17, 2024

प्रभासाक्षी 18 May 2024 4:46 pm