UIDAI का बड़ा अपडेट: Aadhaar App के Offline Mode से बिना Internet होगा वेरिफिकेशन
आज के समय में आधार कार्ड देश के हर नागरिक की पहचान का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है। UIDAI यानी के भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा इस इस साल की शुरुआत में नया 'आधार एप' लॉन्च किया था। जब इस एप को लॉन्च किया गया है तो कुछ दिनों के बाद पुराने 'एमआधार' एप को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। अब इस नए आधार एप को ऑफलाइन मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके मदद से आप बिना किसी इंटरनेट के भी अपनी पहचान का पुख्ता वेरिफिकेशन आसानी से कर पाएंगे। आइए आपको इस लेख में बताते है यूआईडीएआई का नया ऑफलाइन फीचर कैसे यूज कर सकते हैं और जानें इसके फायदे। जानिए क्या नया है ऑफलाइन मोड और कैसे काम करता? - गौरतलब है कि आधार एप ऐसा बनाया गया है कि अब बिना किसी इंटरनेट के भी इसको इस्तेमाल किया जा सकता है। - बिना इंटरनेट के आप आधार एप ओपन करेंगे तो भी आपकी स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड नजर आएगा, जो ऑफलाइन मोड पर भी काम करता है। - बता दें कि, इस क्यूआर कोड में आपकी फोटो, नाम और जन्मतिथि जैसी जरूरी जानकारियां पहले से ही सुरक्षित रूप से लॉक रहती हैं। बिना नेटवर्क के कैसे होगा पहचान का पूरा सत्यापन - खासकर, जब आप किसी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या सरकारी ऑफिस जाएंगे, तो वहां स्थित अधिकारी अपने मोबाइल से आपके इस ऑफलाइन क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे। - कोड स्कैन करने पर अधिकृत QR स्कैनर या UIDAI के आधार एप के तहत आपकी पहचान ऑफलाइन सत्यापित कर पाएंगे। - इस पूरी प्रक्रिया के लिए आपके फोन में डेटा की जरूरत नहीं पड़ेगी। डेटा की प्राइवेसी और सुरक्षा का रखा गया है खास ध्यान - हर किसी के मन यह डर जरुर होता है कि इंटरनेट के बिना क्या यह सुरक्षित है? - UIDAI के अनुसार, यह ऑफलाइन क्यूआर कोड पूरी तरह सेफ है। - इस सुविधा में सिर्फ जरुरत की जानकारी ही शेयर की जाती है, ताकि आपकी निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहे और अनावश्यक डेटा शेयर होने का जोखिम कम हो। दूर-दराज के क्षेत्रों और आम नागरिकों को मिलने वाले बड़े लाभ - इस नए ऑफलाइन मोड का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों या गांव में रहते हैं। - ट्रेन टिकट चेकिंग के दौरान या आपातकालीन स्थिति में मोबाइल डेटा न होने पर भी आपका डिजिटल आधार पूरी तरह से मान्य होगा। - गौरतलब है कि कुछ जगहों पर नया Aadhaar App पहचान के लिए सुविधाजनक ऑप्शन बन सकता है। लेकिन, कुछ संस्थान पर अपने नियमों के अनुसार फिजिकल आधार या अन्य दस्तावेज भी मांगा जा सकता है।
कैंप लगा बेटियों को कानून व साइबर सुरक्षा की सीख दी
कोंडागांव | बदलते सामाजिक माहौल, बढ़ते साइबर अपराधों के बीच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बेटियों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने की पहल की। प्री-मेट्रिक कन्या छात्रावास में वृहद विधिक जागरूकता शिविर हुआ। छात्राओं को कानून, अधिकारों की जानकारी दी गई। शिविर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी के मार्गदर्शन में हुआ। सचिव गायत्री साय के नेतृत्व में आयोजन हुआ। उद्देश्य कानूनी जागरूकता बढ़ाना रहा। महिलाओं, बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े कानून समझाए गए। छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया। अधिकार मित्र धनबती कोर्राम ने पॉक्सो अधिनियम-2012, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, महिला संरक्षण कानून, शिक्षा का अधिकार, साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा की जानकारी दी। गुड टच-बैड टच समझाया। निशुल्क विधिक सहायता योजना नालसा, सालसा की जानकारी दी। बच्चों, महिलाओं के कानूनी अधिकार सरल भाषा में बताए गए। छात्राओं को बताया गया कि शारीरिक, मानसिक, यौन उत्पीड़न हो तो डरें नहीं। चुप न रहें। तुरंत माता-पिता को बताएं। छात्रावास अधीक्षिका को बताएं। शिक्षकों को बताएं। पुलिस को सूचना दें।
पूर्णिया में कसबा थाना पुलिस ने बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और वर्तमान समय की चुनौतियों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया। यह कार्यक्रम कसबा नगर परिषद क्षेत्र के मदरसा चौक स्थित मदरसा कलीमिया में हुआ। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) सदर-2, डॉ. गौरव कुमार ने इस अभियान का नेतृत्व किया। अभियान के दौरान बच्चों को पॉक्सो एक्ट, साइबर सुरक्षा और डायल 112 जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। सदर एसडीपीओ 2 डॉ गौरव कुमार ने बच्चों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। बच्चों को पॉक्सो (POCSO) एक्ट के प्रावधानों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, ताकि वे अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर सतर्क एवं जागरूक रह सकें। 'संदिग्ध-अज्ञात लिंक पर क्लिक करें'मानव तस्करी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस टीम ने बच्चों को सचेत किया। उन्होंने बच्चों को किसी भी दलाल या अनजान व्यक्ति के प्रलोभन या लालच में न आने की सलाह दी। किसी भी प्रकार के अनजाने लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई । सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से यातायात और सड़क सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की गई। हेल्पलाइन डायल 112 के कार्य की दी जानकारीकार्यक्रम में बच्चों को बिहार पुलिस की आपातकालीन सेवा डायल 112 के महत्व और इसके उपयोग के बारे में जानकारी दी गई, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति या संकट के समय वे तुरंत पुलिस की सहायता प्राप्त कर सकें। पूर्णिया सदर एसडीपीओ 2 डॉ. गौरव कुमार ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से पुलिस ने बच्चों में कानून के प्रति विश्वास जगाने और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

