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नवरात्र पर साइबर सुरक्षा के नौ मंत्र

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ उत्तराखंड एसटीएफ लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के नौ मंत्र भी सिखा रही है।

अमर उजाला 13 Oct 2026 7:20 am

हापुड़: कस्तला कासमाबाद में मिशन शक्ति 6.0 के तहत महिलाओं को साइबर सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की जानकारी

महिलाओं को सरकारी योजनाओं, कानूनी अधिकारों और साइबर हेल्पलाइन 1930 की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनाने की पहल की गई।

प्रातःकाल 12 Oct 2026 5:25 pm

कानून तोड़ने वाले बच्चों के नाम Internet पर सार्वजनिक न हों: प्रधान न्यायाधीश

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि ‘कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों’ के नाम समाचारों एवं इंटरनेट पर सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि यह वाक्यांश उसकी परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को। प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय की किशोर न्याय समिति द्वारा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सहयोग से आयोजित ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के 10 वर्ष: प्रगति, चुनौतियां और अगले दशक की प्राथमिकताएं’ विषय पर राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कहा कि किसी कानून के लिए 10 वर्ष का समय कम होता है लेकिन यह किसी बच्चे के बचपन के आधे से भी अधिक समय के बराबर है। उन्होंने कहा कि 2015 का यह अधिनियम इस सोच पर आधारित है कि किसी बच्चे पर अपराधी का ठप्पा लगाने के बजाय उसे दूसरा मौका दिया जाए तो उसके समाज का एक उपयोगी सदस्य बनने की संभावना कहीं अधिक होती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह यात्रा वास्तव में तभी पूरी होती है, जब अतीत की छाया भविष्य पर पड़नी बंद हो जाए। इसके लिए हमें पुराने रिकॉर्ड समय पर नष्ट करने होंगे और कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों के नाम समाचारों और इंटरनेट पर सार्वजनिक होने से रोकने होंगे, क्योंकि एक बार इंटरनेट पर आने के बाद ये नाम वर्षों तक वहां बने रह सकते हैं।’’प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जनवरी 2016 में जब यह अधिनियम लागू हुआ था, तब किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किए गए 15 वर्षीय बच्चे की उम्र आज लगभग 25 वर्ष होगी और इस अधिनियम ने उस बच्चे से जो पहला वादा किया था, वह इसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों में ही निहित है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चा’ वाक्यांश उस बच्चे की परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को।’’प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे बच्चों की परिस्थितियां आमतौर पर कठिन होती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कहानियों में अक्सर पढ़ाई बीच में छूटने, परिवारों के मुश्किल हालात से गुजरने और गरीबी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी बच्चे से बातचीत करने और उसकी ओर से बोलने वाला कोई नहीं है, तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार देने का कोई विशेष मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि इसी कारण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की 2024 की बाल-अनुकूल विधिक सेवा योजना में पुलिस थानों में बच्चों के लिए वकील और प्रत्येक किशोर न्याय बोर्ड में विधिक सेवा क्लिनिक की व्यवस्था की गई है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इसके बावजूद कई बोर्ड में अब भी ऐसे क्लिनिक नहीं हैं। इनके अभाव में बच्चे की देखभाल और कल्याण से जुड़े शुरुआती फैसले उचित कानूनी प्रतिनिधित्व के बिना लिए जाने की संभावना है।’’उन्होंने विधिक सेवा संस्थानों से बच्चों के लिए प्रशिक्षित बचाव पक्ष के वकीलों का एक अलग प्रकोष्ठ बनाने पर भी विचार करने का आग्रह किया, ताकि प्रत्येक बच्चे को शुरुआत से ही एक समर्पित वकील मिल सके। प्रधान न्यायाधीश ने नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि निजता का उचित ध्यान रखते हुए यह पता लगाया जा सके कि कितने बच्चे दोबारा विद्यालय गए, कितनों को रोजगार मिला और कितनों को फिर कभी किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश नहीं होना पड़ा। उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह परामर्श कार्यक्रम इस महत्वपूर्ण कानून की समीक्षा करने और यह समझने का अवसर है कि पिछले 10 वर्ष में इस कानून का उन बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है, जिनके लिए इसे बनाया गया था। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड का उद्देश्य किसी ‘‘छोटी आपराधिक अदालत’’ की तरह काम करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी भूमिका एक अलग सोच पर आधारित है, जो यह स्वीकार करती है कि बच्चों में विकास करने और बदलने की क्षमता होती है तथा न्याय व्यवस्था को उनके विकास से जुड़ी इस वास्तविकता को गंभीरता से लेना चाहिए। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यह अधिनियम अंततः भविष्य से जुड़ा कानून है। उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई बच्चा कानून तोड़ता है, तो कानून को उस बच्चे को नहीं तोड़ना चाहिए।

प्रभासाक्षी 10 Oct 2026 6:33 pm

यूपी-112 परिसर में 450 विद्यार्थियों को मिले साइबर सुरक्षा के टिप्स, ऑनलाइन ठगी और सुरक्षित इंटरनेट के प्रति किया गया जागरूक

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के तहत लखनऊ के यूपी-112 परिसर में 450 छात्रों और शिक्षकों के लिए साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें प्रतिभागियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और साइबर अपराधों की पहचान के बारे में जानकारी दी गई।

जागरण 10 Oct 2026 3:48 pm

Shashi Tharoor ने Delhi में Internet और Metro बंदी पर केंद्र को घेरा, CJP सदस्यों की मांगी रिहाई

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) विवाद को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में लागू किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों और पाबंदियों पर केंद्र सरकार से सवाल किया। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने राजधानी में 22,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को युद्ध जैसी तैनाती करार दिया। उन्होंने 250 ट्रेनों के रद्द होने और मेट्रो सेवाओं के बंद किए जाने पर भी चिंता जताई। कांग्रेस नेता ने लिखा कि मैं रात 2 बजे के बाद राजधानी लौटा और मैंने शायद ही कभी ऐसा कुछ देखा हो जैसा दिल्ली में अभी हो रहा है—हर कुछ सौ मीटर पर चेकपॉइंट, सड़कों पर कंक्रीट बैरियर और स्पाइक स्ट्रिप्स, शहर भर में 22,000 पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों की युद्ध जैसी तैनाती, 250 ट्रेनें रद्द और 45 मेट्रो स्टेशन बंद, और दिल्ली व उसके आस-पास के इलाकों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरें—और यह सब इसलिए ताकि नागरिक हमारे चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण ढंग से सवाल न उठा सकें। इसे भी पढ़ें: EC के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन बेअसर साबित होगा, Himanta Biswa Sarma ने साधा निशाना शशि थरूर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोगों की आवाजाही पर रोक लगी हुई है और जंतर-मंतर जाने वाली सड़कें बंद हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा दमनकारी (और लोगों की आवाज़ दबाने वाला) कदम राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच इंटरनेट बंद करना है। लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जंतर-मंतर को खास तौर पर इसलिए तय किया गया था ताकि नागरिक दिल्ली के बीचों-बीच अपनी असहमति ज़ाहिर कर सकें, और आज वहाँ जाने वाली सड़कों को भी बंद कर दिया गया है। इसे भी पढ़ें: युवाओं को रोकना सरकार की बड़ी भूल साबित होगी, Delhi में सुरक्षा पर Akhilesh Yadav की BJP को चेतावनी CJP सदस्यों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाते हुए थरूर ने आगे कहा कि यह पूछना जायज़ है कि जब हमारी राजधानी में महिलाओं को सुरक्षा की ज़रूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और तत्परता कहाँ गायब हो जाती है? हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करना होगा। और अगर प्रदर्शनकारी सोमवार को फिर से लौटते हैं, तो क्या अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में फिर से लॉकडाउन लगा देंगे? हमारी GenZ (नई पीढ़ी) 'अघोषित इमरजेंसी' से बेहतर की हकदार है।

प्रभासाक्षी 10 Oct 2026 2:53 pm

साइबर जागरूकता अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा मैसेज:सीएम साय बोले-साइबर सुरक्षा के लिए जनभागीदारी जरूरी, ट्रैफिक सुधारने सुझावों पर भी होगा काम

साइबर अपराधों से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ में जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में साइबर जागृति अभियान और ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह में कहा कि साइबर सुरक्षा केवल सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। 7 सप्ताह का अभियान खत्म होना समापन नहीं, बल्कि शुरुआत है। साइबर जागरूकता को जनआंदोलन बनाना होगा। छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चले अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए और करीब 1.70 करोड़ लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया। सोशल मीडिया पर 3,100 से अधिक पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले। स्कूल-कॉलेज, ग्राम पंचायतों और हाट-बाजारों में लोगों को ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और यूपीआई से जुड़े अपराधों के प्रति जागरूक किया गया। ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पुलिस साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है। ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इन प्रयासों से साइबर अपराधों से जुड़ी एफआईआर में कमी आई है और ठगी की रकम वापस मिलने की दर बढ़ी है। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। अनजान लिंक खोलने, ओटीपी-पासवर्ड साझा करने और ऑनलाइन निवेश के नाम पर आने वाले संदिग्ध प्रस्तावों से बचें। ट्रैफिक सुधारने युवाओं ने दिए सुझाव ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 में युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने रायपुर के टाटीबंध चौक, तेलीबांधा, आमापारा और शंकर नगर जैसे व्यस्त इलाकों की यातायात समस्याओं के समाधान सुझाए। इनमें पार्किंग व्यवस्था सुधारने, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते बनाने, लेन मार्किंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ट्रैफिक प्रबंधन जैसे सुझाव शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपयोगी और व्यावहारिक सुझावों पर विचार कर उन्हें लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। कार्यक्रम में साइबर जागरूकता के लिए बेहतर पहल करने वाले जिलों और ट्रैफिक हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया गया। समारोह में विधायक राजेश मूणत, महापौर मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और विद्यार्थी मौद थे। मुख्यमंत्री ने युवाओं से साइबर सुरक्षा के प्रति खुद जागरूक रहने और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की।

दैनिक भास्कर 10 Oct 2026 7:25 am

Maharajganj News: साइबर सुरक्षा की क्लास, विशेषज्ञ बोले- क्लिक करने से पहले सोचो

सोशल मीडिया पर मिले संदिग्ध मैसेज से सतर्क रहने का भी सुझाव दिया गया।

अमर उजाला 9 Oct 2026 2:56 am

भारत में डेटा सेंटर्स का तेजी से विस्तार बढ़ा रहा बिजली, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े जोखिम - रिपोर्ट

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है।

खास खबर 6 Oct 2026 5:02 pm