शाजापुर के सरदार वल्लभभाई पटेल सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत निजी सुरक्षा ट्रेड के छात्रों के लिए एक अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम शुक्रवार दोपहर 3 बजे हुआ। कोतवाली थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर अंकित मुकाती ने अतिथि व्याख्याता के रूप में छात्रों को साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में ऑनलाइन ठगी, फिशिंग कॉल, फर्जी लिंक,सोशल मीडिया हैकिंग,ओटीपी धोखाधड़ी और डिजिटल भुगतान से जुड़े अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इनसे बचने के लिए मुकाती ने छात्रों को अनजान कॉल या संदेशों पर भरोसा न करने, किसी के साथ ओटीपी, पासवर्ड, बैंक या यूपीआई से जुड़ी जानकारी साझा न करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट में मजबूत पासवर्ड और टू-स्टेप वेरिफिकेशन का उपयोग करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षित वेबसाइटों का उपयोग करने, सार्वजनिक वाई-फाई पर संवेदनशील जानकारी साझा न करने और किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी। सब इंस्पेक्टर मुकाती ने छात्रों को सीसीटीवी कैमरों और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणालियों की उपयोगिता के बारे में भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, कॉलोनियों और घरों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे अपराधियों पर नजर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कैमरों से प्राप्त फुटेज न केवल अपराध का सबूत होता है, बल्कि कई मामलों में अपराध होने से पहले ही अपराधियों को रोकने का काम करता है। उन्होंने अलार्म सिस्टम,मोशन सेंसर,डिजिटल लॉक और एक्सेस कंट्रोल सिस्टम जैसी इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणालियों की जानकारी देते हुए बताया कि इनके माध्यम से किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत अलर्ट मिल जाता है,जिससे समय रहते सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। अंत में,उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे तकनीक का सही और सुरक्षित उपयोग करें,स्वयं सतर्क रहें और दूसरों को भी साइबर अपराध व सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करें। इस अवसर पर प्राचार्य सविता सोनी, निजी सुरक्षा ट्रेड के वोकेशनल ट्रेनर राम गोपाल देवतवाल और वोकेशनल ट्रेड नोडल शिक्षक आलोक भावसार भी उपस्थित रहे।
जयपुर में राजस्थान पुलिस और गुजरात के राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के बीच सोमवार को एक अहम एमओयू साइन किया गया। इस समझौते के बाद दोनों संस्थान मिलकर पुलिसिंग से जुड़ी ट्रेनिंग, रिसर्च और नए इनोवेशन पर काम करेंगे। पुलिस हेडक्वार्टर में हुए इस कार्यक्रम को स्मार्ट पुलिसिंग को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। एमओयू का फोकस पुलिस की फील्ड कैपेसिटी बढ़ाने, साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे नए क्षेत्रों में ट्रेनिंग पर रहेगा। समझौते के बाद राजस्थान पुलिस को RRU की टेक्निकल नॉलेज और एक्सपर्ट्स का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे राज्य की आंतरिक और पब्लिक सिक्योरिटी सिस्टम और बेहतर हो सकेगी। स्मार्ट पुलिसिंग और ट्रेनिंग होगी मजबूत डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि पुलिसिंग में लगातार बेहतर प्रैक्टिस अपनाई जा रही हैं और RRU की एक्सपर्टीज पूरे देश में काम आ रही है। एमओयू के बाद राजस्थान पुलिस साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक, स्मार्ट पुलिसिंग और बड़े मामलों में टेक्निकल सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में और प्रभावी तरीके से काम कर सकेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस ट्रेनिंग को राष्ट्रीय और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप अपग्रेड करने में यह साझेदारी खास भूमिका निभाएगी। RRU की एक्सपर्टीज से मिलेगा फायदा RRU के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. बिमल एन. पटेल ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अब तक 82 देशों के प्रतिनिधियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि एमओयू के बाद राजस्थान पुलिस विभिन्न कोर्स, ट्रेनिंग और रिसर्च प्रोग्राम का आसानी से फायदा ले सकेगी। पुलिस टीम को हाई-क्वालिटी ट्रेनिंग का मौका कार्यक्रम में PTC Traffic के डीजीपी अनिल पालीवाल ने बताया कि समझौते से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को हाई-क्वालिटी ट्रेनिंग और नए कोर्सों का एक्सेस मिलेगा। वहीं एमओयू पर राजस्थान पुलिस की ओर से DIG ट्रेनिंग शरद चौधरी और RRU की ओर से डीन अविनाश खारेल ने दस्तखत किए। फैकल्टी और अधिकारियों के बीच एक्सचेंज प्रोग्राम एमओयू के तहत पुलिस अधिकारियों, फैकल्टी मेंबर्स और रिसर्चर्स के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जाएंगे। इसमें साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक, टेररिज्म स्टडी और इंटेलिजेंस मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में बेस्ट प्रैक्टिस और टेक्नोलॉजी शेयर की जाएगी। संयुक्त रिसर्च से पुलिसिंग और मजबूत दोनों संस्थान मिलकर संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू करेंगे, जिनसे डेटा-आधारित पुलिसिंग, पॉलिसी मेकिंग और फील्ड स्ट्रेटेजी में सुधार होगा। इससे इन्वेस्टिगेशन और सिक्योरिटी मैनेजमेंट और प्रभावी हो सकेगा। अधिकारियों को हाई एजुकेशन का मौका एमओयू के बाद राजस्थान पुलिस के अधिकारी RRU के अकादमिक प्रोग्राम्स के जरिए उच्च शिक्षा हासिल कर सकेंगे। इससे उनके स्किल्स बढ़ेंगे और करियर ग्रोथ के नए अवसर मिलेंगे।
डिजिटल गार्ड हो गये फेल, साइबर सुरक्षा की कमजोरी हुई उजागर
साइबर-सिक्योरिटी फर्म और वेब-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता कंपनी द्वारा की गई रुकावट एक गंभीर याद दिलाती है कि किस प्रकार रक्षक भी कमजोर हैं

