धौलपुर पुलिस जिले में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए ऑपरेशन गरिमा अभियान चला रही है। एसपी विकास सांगवान के निर्देशन और एएसपी वैभव शर्मा के सुपरविजन में यह अभियान पूरे जिले में सक्रिय रूप से चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को पुराना शहर टाउन चौकी इंचार्ज एएसआई लोकेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने निजी स्कूल की छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को नए कानूनों के प्रावधान, साइबर सुरक्षा, गुड टच-बैड टच, राजकॉप सिटीजन ऐप सहित महिला सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। स्कूल-कॉलेजों, हॉस्टलों, सार्वजनिक स्थानों पर विशेष निगरानीएसपी सांगवान ने बताया कि ऑपरेशन गरिमा का उद्देश्य आमजन, युवाओं, स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और उनी सजा के बारे में जागरूक करना है। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि या शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। अभियान के तहत जिलेभर के बालिका स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों, गर्ल्स हॉस्टलों, सार्वजनिक स्थानों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। रेलवे स्टेशन सहित ट्रेन, बस, जीप और ऑटो जैसे विभिन्न परिवहन साधनों पर भी पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है। पुलिस द्वारा महिला हेल्पलाइन 1090 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि छात्र-छात्राएं जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
राजनांदगांव पुलिस ने ‘मिशन साइबर सुरक्षा’ अभियान के तहत कार्रवाई की है। पुलिस ने संगठित साइबर ठगी करने वाले गिरोह पर कार्रवाई करते हुए ऐसे 14 लोगों को गिरफ्तार किया है जो ठगी की रकम को अपने बैंक खातों के जरिए आगे भेजते थे। ये सभी आरोपी म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी के पैसे को इधर-उधर करते थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर साइबर सेल और थाना कोतवाली की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। जांच के दौरान यह पाया गया कि पकड़े गए आरोपियों के 14 बैंक खातों के माध्यम से लगभग 50 लाख रुपए से अधिक का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। ये खाते भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के पोर्टल पर संदिग्ध पाए गए थे। ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए आरोपियों ने विभिन्न प्रतिष्ठित बैंकों का इस्तेमाल किया था, जिनमें SBI, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, PNB, इंडियन ओवरसीज बैंक, कैनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन बैंक शामिल हैं। मामूली लालच में बैंक खाते और एटीएम दिए पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने मामूली कमीशन या पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम और चेकबुक अज्ञात ठगों को उपलब्ध कराए थे। पुलिस ने इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) और 317(4) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने जिन 14 आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा है, उनमें मिहीर साहू, भरत वैष्णव, शेख फैजान (दुर्ग), कुणाल सिंह, कुमारू लाल (केसीजी), दुकालू राम साहू, मोनिका यादव, शेख सैफूद्दीन, संगीता साहू, केजा बाई यादव, राधिका यादव, मुकेश निर्मलकर, किरण रहकवार और शेखर पसिने (भिलाई) शामिल हैं। राजनांदगांव पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या चेकबुक किसी अनजान व्यक्ति को न दें। पुलिस ने कहा कि किसी के बहकावे में आकर अपने दस्तावेज साझा करना आपको जेल पहुंचा सकता है और म्यूल अकाउंट के रूप में अपना खाता किराए पर देना एक गंभीर अपराध है।

