डिजिटल समाचार स्रोत

...

भारत में Satellite Internet पर Security संशय, Starlink और Jio को लाइसेंस के लिए करना होगा और लंबा इंतजार

सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर भारत में इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। देश में पहली बार इस सेवा के लिए लाइसेंस जारी होने के चार साल से ज्यादा समय बाद भी व्यावसायिक शुरुआत नहीं हो पाई है। सरकारी अधिकारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी उपग्रह कंपनियों के नेटवर्क को लेकर सुरक्षा और नियंत्रण से जुड़ी चिंताएं हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार को आशंका है कि विदेशी उपग्रह कंपनियां भारतीय प्रवेश केंद्रों को दरकिनार करके इंटरनेट यातायात को दूसरे देशों में मौजूद केंद्रों के जरिये भेज सकती हैं। हालांकि कंपनियों का कहना है कि उनके पास ऐसी तकनीक मौजूद है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि भारत के प्रवेश केंद्रों को दरकिनार न किया जाए। कंपनियों ने सुरक्षा से जुड़े परीक्षण भी पूरे किए हैं और भारतीय नियमों के मुताबिक अपनी व्यवस्था में बदलाव करने के साथ अनुपालन का भरोसा भी दिया है। इसके बावजूद पिछले कुछ महीनों से दूरसंचार विभाग की ओर से मंजूरी की स्थिति, अतिरिक्त जानकारी या स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इस कारण सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही कंपनियों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। बता दें कि एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो प्लेटफॉर्म्स की पूर्ण स्वामित्व वाली जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस इस क्षेत्र में प्रमुख कंपनियां हैं। जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन लियो भी भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस की दौड़ में है। यूटेलसैट वनवेब इंडिया को अप्रैल 2022 में वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत संचार उपग्रह लाइसेंस मिला था। इसके बाद अक्टूबर 2022 में जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और जून 2025 में स्टारलिंक को लाइसेंस मिला। यूटेलसैट और वनवेब का 2023 में विलय हो चुका है। इस संयुक्त कंपनी में भारती समूह के साथ फ्रांस और ब्रिटेन की सरकारों समेत कई अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी है। गौरतलब है कि सरकार की चिंता सिर्फ लाइसेंस देने तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में यह सवाल भी उठा है कि विदेशी कंपनियों के उपग्रह नेटवर्क पर भारत का कितना नियंत्रण रहेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने हुई एक प्रस्तुति के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने कथित तौर पर कहा कि जब तक भारत के पास इन प्रणालियों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो, तब तक मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। इस चिंता को स्टारलिंक के ईरान युद्ध के दौरान अनुभव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे हालात में किसी विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाले उपग्रह नेटवर्क को सीमित करना सरकारों के लिए कितना मुश्किल हो सकता है, इस पर दुनिया भर में चर्चा हुई है। दूसरी तरफ जियो भारत के लिए अपनी अलग निम्न कक्षा वाली उपग्रह प्रणाली तैयार कर रही है। कंपनी करीब 1,600 उपग्रहों का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है और इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष नियामक संस्था तथा दूरसंचार विभाग से मदद मांग रही है। जियो को अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ से आवृत्ति और कक्षा से जुड़े अधिकारों के समन्वय की भी जरूरत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस व्यवस्था को पूरी तरह तैयार होने में करीब तीन साल लग सकते हैं। सरकार विदेशी और भारतीय उपग्रह कंपनियों के बीच समान समन्वय अधिकार देने की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है, ताकि भारतीय कंपनियों पर पहले से दर्ज विदेशी उपग्रह प्रणालियों की हर स्थिति में सुरक्षा की कानूनी जिम्मेदारी न आ जाए। हालांकि इस देरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू होने से दूरदराज के इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाने के साथ उन सेवाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें मोबाइल फोन सीधे उपग्रह से जुड़ सकते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में ऐसी सेवाएं पहले से उपलब्ध हैं। ब्रिटेन के संचार नियामक कार्यालय के डेविड विल्स के मुताबिक भारत जैसे देशों को सुरक्षा और उपभोक्ता सुविधा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। ब्रिटेन में निम्न कक्षा वाले उपग्रहों के जरिये एक लाख से ज्यादा ब्रॉडबैंड कनेक्शन मौजूद हैं। हालांकि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम न लेने की है। ऐसे में स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो जैसी कंपनियों को भारत में सेवा शुरू करने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है और अंतिम फैसला सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की संतुष्टि के बाद ही होने की उम्मीद है।

प्रभासाक्षी 20 Aug 2026 9:21 pm

राजस्थान पुलिस की स्मार्ट पुलिसिंग को नई धार, AI और साइबर सुरक्षा का 75 पुलिसकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार आधुनिक डिजिटल युग में सामने आ रही साइबर चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने तथा राजस्थान पुलिस को तकनीकी रूप से और...

खास खबर 19 Aug 2026 8:57 pm

रायगढ़ में 1700 विद्यार्थियों ने लिया साइबर सुरक्षा का संकल्प:सोशल मीडिया और ऑनलाइन ठगी से बचने के बताए तरीके,OTP शेयर न करने की सलाह

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेशभर में यह अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान के तहत रायगढ़ में 1700 छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए गए। उन्हें ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां दी गईं। स्कूल-कॉलेजों में छात्रों को ठगी से बचने के बताए तरीके साइबर जागृति अभियान के तहत DSP उन्नति ठाकुर, सुशांतो बनर्जी और पूंजीपथरा थाना प्रभारी रामकिंकर यादव ने ओपी जिंदल स्कूल में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचने के उपाय बताए। कोतवाली पुलिस ने गर्ल्स कॉलेज, लॉ कॉलेज और शासकीय ग्रंथालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यहां लोगों को ऑनलाइन ठगी से सावधान रहने की जानकारी दी गई। खरसिया पुलिस ने आत्मानंद स्कूल में बच्चों को साइबर अपराध और उससे बचाव के तरीके बताए। वहीं भूपदेवपुर थाना प्रभारी रोशन कुमार कौशिक की टीम ने कोड़तराई और भूपदेवपुर के हायर सेकेंडरी स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम किया। साइबर थाना और चक्रधरनगर थाना की संयुक्त टीम ने बोइरदादर के सेंट टेरेसा और सेंट जेवियर इंग्लिश मीडियम स्कूल में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। इसी तरह घरघोड़ा पुलिस ने कन्या शाला में और महिला थाना पुलिस ने स्थानीय बच्चों के बीच साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस ने साइबर सुरक्षा के जरूरी तरीके बताए कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को बताया गया कि OTP, PIN, CVV और बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ शेयर न करें। अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल, लिंक, QR कोड और संदिग्ध मैसेज से सावधान रहें। बिना जांचे किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें। अपनी निजी फोटो और व्यक्तिगत जानकारी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें। तुरंत शिकायत करने की दी जानकारी पुलिस ने बताया कि ऑनलाइन ऑफर, नौकरी, इनाम, निवेश या लोन के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। डिजिटल गिरफ्तारी, KYC अपडेट, बिजली कनेक्शन कटने, बैंक खाता बंद होने या पुलिस अधिकारी बनकर डराने वाली कॉल भी साइबर ठगी हो सकती है। विद्यार्थियों को मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और प्राइवेसी सेटिंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करने की जानकारी भी दी गई।

दैनिक भास्कर 19 Aug 2026 7:44 pm

UP: अब हर छात्र को पढ़नी होगी साइबर सुरक्षा, IIT कानपुर देगा सर्टिफिकेट; 75 घंटे की ट्रेनिंग होगी अनिवार्य

आईआईटी कानपुर से मिलेगा प्रमाणपत्र, 75 घंटे के प्रशिक्षण में ऑनलाइन कक्षाओं के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी।

अमर उजाला 19 Aug 2026 11:44 am

PoJK में Internet Shutdown पर बरसी मानवाधिकार परिषद, कहा- अभिव्यक्ति की आजादी और Digital Access का हो रहा हनन

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की मानवाधिकार परिषद ने इलाके में इंटरनेट सेवाओं को तुरंत बहाल करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि लंबे समय से इंटरनेट बंद रहने से लोगों के बुनियादी अधिकारों पर बुरा असर पड़ा है और छात्रों, फ्रीलांसरों, कारोबारियों और विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, PoJK की मानवाधिकार परिषद ने कहा कि इंटरनेट में लगातार रुकावट से अभिव्यक्ति की आज़ादी, जानकारी पाने और बातचीत करने की सुविधा पर बुरा असर पड़ा है। परिषद के अनुसार, भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने की वजह से छात्रों, फ्रीलांसरों और कारोबारियों को गंभीर मुश्किलों और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों को भी अपने परिवारों और समुदायों से संपर्क बनाए रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। परिषद ने ज़ोर देकर कहा कि डिजिटल एक्सेस को अब सिर्फ़ एक सुविधा नहीं माना जा सकता, क्योंकि इंटरनेट कनेक्टिविटी रोज़गार, शिक्षा, बातचीत और बुनियादी मानवाधिकारों के इस्तेमाल और उनकी सुरक्षा का एक ज़रूरी ज़रिया बन गई है। इसे भी पढ़ें: ये है अमेरिका का नया टेर्रेटिरी, ट्रूथ सोशल पर ट्रंप की नई पोस्ट ने मचाई हलचल इसलिए, परिषद ने मांग की है कि PoJK में इंटरनेट सेवाओं को बिना किसी और देरी के पूरी तरह बहाल किया जाए। एक अलग पोस्ट में ह्यूमन राइट्स काउंसिल PoJK ने अगस्त 2023 में मुज़फ़्फ़राबाद के बाहरी इलाके में एक प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में एक स्टूडेंट की कथित आत्महत्या के मामले को संभालने के तरीके पर भी चिंता जताई। काउंसिल के मुताबिक, उन्हें स्टूडेंट की मौत के बारे में एक शिकायत मिली थी, जिसके बाद एजुकेशन डिपार्टमेंट ने घटना से जुड़े हालात की जांच के लिए एक जांच कमिटी बनाई। हालांकि, काउंसिल का आरोप है कि एक साल से ज़्यादा समय बीतने के बाद भी कमिटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही ज़िम्मेदारी तय करने या एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में कोई साफ़ जानकारी दी गई है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने एजुकेशन डिपार्टमेंट से कहा कि वह जांच कमिटी की रिपोर्ट, मुख्य निष्कर्ष, ज़रूरी तथ्य और अब तक की गई कार्रवाई को सार्वजनिक करे, साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि मृतक स्टूडेंट और उनके परिवार की प्राइवेसी और गरिमा बनी रहे। इसे भी पढ़ें: CSAM पर सरकार सख्त: Meta को चेतावनी, नियमों के उल्लंघन पर छिनेगा Safe Harbor का दर्जा काउंसिल ने आगे कहा कि अगर जांच अधूरी रहती है, तो एजुकेशन डिपार्टमेंट को देरी की वजह बतानी चाहिए और रिपोर्ट जारी करने के लिए एक साफ़ समय-सीमा देनी चाहिए। काउंसिल के मुताबिक, किसी स्टूडेंट की मौत को सिर्फ़ एक प्रशासनिक मामला नहीं माना जा सकता, और उसने घटना से जुड़े हालात की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की। उसने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में जवाबदेही तय करना और सुरक्षित माहौल देना राज्य की ज़िम्मेदारी है।

प्रभासाक्षी 18 Aug 2026 6:18 pm

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा से स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगी नई धार, DGP ने किया प्रशिक्षण का शुभारंभ

कोटा में AI और साइबर सुरक्षा आधारित स्मार्ट पुलिसिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। DGP राजीव कुमार शर्मा ने शुभारंभ किया। 17 से 19 अगस्त तक चलने वाले प्रशिक्षण में 75 पुलिसकर्मी AI, OSINT और साइबर जांच सीखेंगे।

प्रातःकाल 18 Aug 2026 3:53 pm

नगरीय निकायों में नहीं चलेंगे अनट्रेंड कम्प्यूटर ऑपरेटर:CPCT और साइबर सुरक्षा कोर्स 30 दिनों में पास करना जरूरी

मध्य प्रदेश के नगर पालिक निगम, नगरपालिका और नगर परिषद में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों को लेकर सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, म.प्र. द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब सभी कम्प्यूटर ऑपरेटरों के लिए तकनीकी दक्षता और साइबर सुरक्षा से जुड़ी कुछ अनिवार्य योग्यताएं तय कर दी गई हैं। इसके लिए उन्हें 30 दिनों की समय-सीमा दी गई है, ऐसा न करने पर उनके मानदेय या वेतन भुगतान पर रोक लग सकती है। यह आदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास की अपर आयुक्त मिशा सिंह ने किया है। आदेश की प्रति सभी नगर पालिक निगमों के आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को भेज दी गई है। क्यों लिया गया यह फैसला? विभाग का कहना है कि नगरीय निकायों की विभिन्न शाखाओं, योजनाओं और परियोजनाओं में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा कंप्यूटर संबंधी कार्यों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभागीय ऑनलाइन पोर्टल और आईटी (IT) आधारित प्रणालियों का संचालन किया जाता है। सरकारी डेटा को सुरक्षित रखने और ऑनलाइन कामकाज को सुचारू बनाने के लिए ऑपरेटरों की तकनीकी क्षमता और साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी को पुख्ता करना बेहद आवश्यक हो गया है। ये 3 शर्तें पूरी करना हुआ अनिवार्य CPCT परीक्षा पास होना जरूरी: सभी कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा अनिवार्य रूप से CPCT (Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा पास की गई हो। मिशन कर्मयोगी पोर्टल से सर्टिफिकेट कोर्स: ऑपरेटरों को भारत सरकार के 'मिशन कर्मयोगी' (iGOT Karmayogi) पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से संबंधित कम से कम 10 सर्टिफिकेट कोर्स पूरे करने होंगे। 50 क्रेडिट पॉइंट अर्जित करना जरूरी : इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों को पूरा करके कंप्यूटर ऑपरेटरों को कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने होंगे। तय किए गए मुख्य सर्टिफिकेट कोर्स आदेश के साथ एक सूची भी जारी की गई है जिसमें आवश्यक कोर्स और उनकी महत्ता बताई गई है, जैसे बेसिक कंप्यूटर कोर्स और माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल/वर्ड (डेटा एंट्री और रिकॉर्ड के लिए)। साइबर सिक्योरिटी बेसिक्स और डिजिटल सेफ्टी एसेंशियल्स (सरकारी कंप्यूटर और पासवर्ड सुरक्षित रखने के लिए)। आधुनिक तकनीकी और एआई की जानकारी के लिए ('AI Using Google Bard and ChatGPT for Beginners') जैसे कोर्स तय किए गए हैं। इसके साथ ही डेटा ड्रिवन डिसीजन मेकिंग और रिस्पॉन्सिबल डेटा मैनेजमेंट को भी सीखना होगा। वेतन और नौकरी पर आ सकता है संकट शासन ने निर्देश दिया है कि जो कंप्यूटर ऑपरेटर आगामी 30 दिनों के भीतर इन अनिवार्य योग्यताओं और प्रशिक्षण को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें आगे नियोजन में रखने या हटाने और उनके नियमानुसार मानदेय/वेतन भुगतान की कार्रवाई इसी आधार पर तय की जाएगी। यानी शर्तें पूरी न करने वालों की सैलरी अटक सकती है। औसतन किस निकाय में कितने ऑपरेटर होते हैं? निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या वहां की जनसंख्या, वॉर्डों की संख्या और विभागीय शाखाओं (जैसे- जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जलकर, संपत्ति कर, पीएम आवास योजना, राजस्व आदि) के आधार पर तय होती है। आधिकारिक रूप से स्वीकृत और आउटसोर्स पदों के आधार पर एक अनुमानित औसत इस प्रकार है: नगर निगम स्तर पर 60 से 150+ ऑपरेटर नगर निगम बड़े शहर होते हैं, जहां कई ज़ोनल ऑफिस और दर्जनों विभाग होते हैं। इंदौर और भोपाल जैसे 'A' श्रेणी के नगर निगमों में ऑपरेटरों की संख्या 150 से भी अधिक हो सकती है, जबकि छोटे नगर निगमों में यह संख्या 50-70 के आसपास होती है। नगर पालिका स्तर पर 15 से 30 ऑपरेटर ये मध्यम श्रेणी के शहर होते हैं। यहाँ मुख्य कार्यालय में ही लगभग सभी शाखाएं (राजस्व, सामान्य प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी आदि) संचालित होती हैं, जिसके कारण हर काउंटर और मुख्य शाखा पर ऑपरेटरों की जरूरत होती है। नगर परिषद स्तर पर 5 से 10 ऑपरेटर ये छोटे या ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे टाउन होते हैं। यहाँ सीमित संख्या में वॉर्ड और विभाग होते हैं, इसलिए मुख्य रूप से लेखा (Accounts), स्थापना, और नागरिक सेवाओं के काउंटरों को संभालने के लिए सीमित ऑपरेटर ही रखे जाते हैं।

दैनिक भास्कर 16 Aug 2026 1:06 pm

UIDAI का बड़ा अपडेट: Aadhaar App के Offline Mode से बिना Internet होगा वेरिफिकेशन

आज के समय में आधार कार्ड देश के हर नागरिक की पहचान का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है। UIDAI यानी के भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा इस इस साल की शुरुआत में नया 'आधार एप' लॉन्च किया था। जब इस एप को लॉन्च किया गया है तो कुछ दिनों के बाद पुराने 'एमआधार' एप को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। अब इस नए आधार एप को ऑफलाइन मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके मदद से आप बिना किसी इंटरनेट के भी अपनी पहचान का पुख्ता वेरिफिकेशन आसानी से कर पाएंगे। आइए आपको इस लेख में बताते है यूआईडीएआई का नया ऑफलाइन फीचर कैसे यूज कर सकते हैं और जानें इसके फायदे। जानिए क्या नया है ऑफलाइन मोड और कैसे काम करता? - गौरतलब है कि आधार एप ऐसा बनाया गया है कि अब बिना किसी इंटरनेट के भी इसको इस्तेमाल किया जा सकता है। - बिना इंटरनेट के आप आधार एप ओपन करेंगे तो भी आपकी स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड नजर आएगा, जो ऑफलाइन मोड पर भी काम करता है। - बता दें कि, इस क्यूआर कोड में आपकी फोटो, नाम और जन्मतिथि जैसी जरूरी जानकारियां पहले से ही सुरक्षित रूप से लॉक रहती हैं। बिना नेटवर्क के कैसे होगा पहचान का पूरा सत्यापन - खासकर, जब आप किसी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या सरकारी ऑफिस जाएंगे, तो वहां स्थित अधिकारी अपने मोबाइल से आपके इस ऑफलाइन क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे। - कोड स्कैन करने पर अधिकृत QR स्कैनर या UIDAI के आधार एप के तहत आपकी पहचान ऑफलाइन सत्यापित कर पाएंगे। - इस पूरी प्रक्रिया के लिए आपके फोन में डेटा की जरूरत नहीं पड़ेगी। डेटा की प्राइवेसी और सुरक्षा का रखा गया है खास ध्यान - हर किसी के मन यह डर जरुर होता है कि इंटरनेट के बिना क्या यह सुरक्षित है? - UIDAI के अनुसार, यह ऑफलाइन क्यूआर कोड पूरी तरह सेफ है। - इस सुविधा में सिर्फ जरुरत की जानकारी ही शेयर की जाती है, ताकि आपकी निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहे और अनावश्यक डेटा शेयर होने का जोखिम कम हो। दूर-दराज के क्षेत्रों और आम नागरिकों को मिलने वाले बड़े लाभ - इस नए ऑफलाइन मोड का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों या गांव में रहते हैं। - ट्रेन टिकट चेकिंग के दौरान या आपातकालीन स्थिति में मोबाइल डेटा न होने पर भी आपका डिजिटल आधार पूरी तरह से मान्य होगा। - गौरतलब है कि कुछ जगहों पर नया Aadhaar App पहचान के लिए सुविधाजनक ऑप्शन बन सकता है। लेकिन, कुछ संस्थान पर अपने नियमों के अनुसार फिजिकल आधार या अन्य दस्तावेज भी मांगा जा सकता है।

प्रभासाक्षी 31 Jul 2026 4:11 pm