डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा बेहद जरूरी
भास्कर न्यूज | लुधियाना गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के छात्र कल्याण निदेशालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा एक्ट ह्यूमन सोसायटी के सहयोग से साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों के संबंध में अध्यापकों और विद्यार्थियों को जागरूक करने हेतु एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, उप-कुलपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षित लोग भी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। डॉ. राबिंदर सिंह औलख, निदेशक छात्र कल्याण ने एक्ट ह्यूमन सोसायटी द्वारा शारीरिक समस्याओं, पर्यावरण सुरक्षा, व्यावसायिक ज्ञान, चिकित्सकीय सहायता तथा कैंसर जैसी बीमारी की चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे सराहनीय प्रयासों पर प्रकाश डाला।तरुण मल्होत्रा, मुख्य वक्ता तथा साइबर स्प्लंक और साइबर अकेडमी के संस्थापक ने साइबर जागरूकता और डिजिटल विश्वास को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रोचक एवं ज्ञानवर्धक संबोधन दिया। उन्होंने साइबर धोखाधड़ी से बढ़ते खतरों के बारे में जानकारी दी तथा डाटा सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचाव संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने सुरक्षित पासवर्ड बनाने तथा ठगी के प्रयासों की पहचान करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी साझा की। हरलीन कौर, संस्थापक, एक्ट ह्यूमन सोसायटी ने संस्था द्वारा सामाजिक कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और कहा कि उनका उद्देश्य संवेदनशील तथा जिम्मेदार सामाजिक वातावरण का निर्माण करना है। डॉ. निधि शर्मा ने बताया कि इस चर्चा से राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवी विद्यार्थियों को अत्यधिक लाभ मिलेगा। डॉ. वरिंदर उप्पल, निदेशक, मानव संसाधन प्रबंधन केंद्र ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। डॉ. राम सरन सेठी, डीन, कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी ने इस सत्र को ज्ञानवर्धक, उपयोगी तथा समय की आवश्यकता के अनुरूप बताया। इस अवसर पर विभिन्न कॉलेजों के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजेश कसरीजा, डॉ. चंद्र शेखर मुखोपाध्याय, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. विशाल शर्मा तथा डॉ. सैयद हसन भी उपस्थित थे।
दमोह पुलिस ने फरियादियों की समस्याओं के समाधान और पुलिसकर्मियों के व्यवहार की निगरानी के लिए ऑनलाइन फीडबैक प्रणाली शुरू की है। एसपी आनंद कलादगी ने मंगलवार को कार्यालय में इस क्यूआर कोड आधारित गूगल फॉर्म का शुभारंभ किया। यह व्यवस्था इंदौर पुलिस की तर्ज पर दमोह के प्रमुख थानों और चौकियों में लागू की गई है। पांच केंद्रों पर लगाए फीडबैक स्कैनर शुरुआती चरण में यह सुविधा दमोह कोतवाली, देहात थाना, एसपी ऑफिस, जबलपुर नाका और सागर नाका चौकी में उपलब्ध कराई गई है। इन स्थानों पर क्यूआर कोड स्कैनर लगाए गए हैं, जिन्हें स्मार्टफोन से स्कैन कर कोई भी फरियादी अपना अनुभव शेयर कर सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य जनता की सीधी राय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना है। गूगल फॉर्म में आठ पॉइंट पर देंगे जानकारी इस ऑनलाइन फीडबैक फॉर्म में लगभग आठ कॉलम निर्धारित किए गए हैं, जिसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में भरा जा सकता है। आवेदक को अपना नाम, थाना आने का कारण, संबंधित अधिकारी का नाम और उनके बर्ताव की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही फरियादी स्टार रेटिंग के माध्यम से पुलिस की कार्यप्रणाली पर अपनी संतुष्टि दर्ज करा सकेंगे। असंतोषजनक फीडबैक पर सीधे संपर्क करेगी पुलिस एसपी आनंद कलादगी और साइबर सेल की टीम इन आवेदनों की नियमित मॉनिटरिंग करेगी। एसपी ने बताया कि यदि कोई फरियादी पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट पाया जाता है, तो उससे सीधे संपर्क कर समस्या पूछी जाएगी। किसी विशेष थाने से बार-बार नकारात्मक फीडबैक मिलने पर संबंधित थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

