IIT दिल्ली का नया AI कोर्स: साइबर सुरक्षा में सर्टिफिकेट प्रोग्राम
IIT दिल्ली ने साइबर सुरक्षा और AI में एक नया सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू किया है, जो तकनीकी करियर में रुचि रखने वालों के लिए एक बेहतरीन अवसर है। इस कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 नवंबर 2026 तक खुली है, और कक्षाएं 14 नवंबर 2026 से शुरू होंगी। जानें इस कोर्स की फीस, सीटों की संख्या और आवेदन कैसे करें।
Udham Singh Nagar News: विद्यार्थियों ने रैली निकालकर दिया साइबर सुरक्षा का संदेश
विद्यार्थियों ने रैली निकालकर दिया साइबर सुरक्षा का संदेश
लखनऊ के हाइजिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में मंगलवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा, रैगिंग रोकथाम, महिला सुरक्षा और नशे से बचाव को लेकर जागरूकता पर चर्चा हुईं। इसमें करीब 170 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मकसद युवाओं को वास्तविक जिंदगी के साथ डिजिटल दुनिया में भी सतर्क रहने के लिए जागरूक करना था। अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने छात्रों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि किसी भी असहज या संदिग्ध स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते अभिभावक, शिक्षक या पुलिस की मदद लेना जरूरी है। रैगिंग को मजाक न समझें छात्रों को बताया गया कि रैगिंग के नाम पर जूनियर को डराना, धमकाना, अपमानित करना या मानसिक-शारीरिक रूप से परेशान करना स्वीकार्य नहीं है। देर रात बुलाने या किसी गलत गतिविधि के लिए दबाव बनाने पर तुरंत शिकायत करने की सलाह दी गई। महिला सुरक्षा को लेकर पिंक बूथ, महिला सहायता डेस्क और महिला सुरक्षा केंद्र जैसी सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। अपरिचित लोगों पर भरोसा न करने और निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की अपील की गई। फर्जी लिंक और कॉल से रहें सावधान साइबर फ्रॉड से बचने के लिए छात्रों को OTP, पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल और निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करने को कहा गया। फर्जी लिंक, संदिग्ध कॉल, SMS और मैसेज से सावधान रहने की सलाह दी गई। साइबर अपराध होने पर तुरंत शिकायत करने के लिए प्रेरित किया गया। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी न डालें छात्रों से सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग का इस्तेमाल करने को कहा गया। मोबाइल नंबर, लोकेशन, कॉलेज और घर से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की सलाह दी गई। अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट और संदिग्ध प्रोफाइल से दूरी बनाए रखने को कहा गया। नशे को ना कहने का संदेश कार्यक्रम में युवाओं को नशीले पदार्थों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान बताए गए। गलत संगति और जिज्ञासा को नशे की शुरुआत का कारण बताते हुए इससे दूर रहने की अपील की गई। किसी भी दबाव या प्रलोभन पर साफ तौर पर ‘ना’ कहने और साथियों को भी जागरूक करने का संदेश दिया गया। छात्रों ने पूछे सवाल संवादात्मक सत्र में छात्रों ने रैगिंग, साइबर फ्रॉड, सोशल मीडिया और आपात स्थिति से जुड़े सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने व्यवहारिक उदाहरणों के जरिए उनके सवालों का समाधान किया। हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी छात्रों को साइबर अपराध और ऑनलाइन फ्रॉड के लिए 1930, मादक पदार्थों से जुड़ी सूचना के लिए MANAS 1933 तथा ड्रग्स और मानव तस्करी संबंधी सूचना के लिए 7839861034 पर जानकारी देने के बारे में बताया गया।
मेटा ने एआई की दुनिया में अपनी नई चाल से एक बार फिर बड़ी बहस को तेज कर दिया है। कंपनी ने ऐसा नया एआई मॉडल पेश किया है, जिसे लोग अपने निजी कंप्यूटर पर डाउनलोड करके चला और अपनी जरूरत के हिसाब से बदल सकेंगे। कंपनी के अनुसार, इस मॉडल को कम कंप्यूटिंग क्षमता में काम करने के लिए तैयार किया गया है, जिससे इसे चलाना पहले के बड़े मॉडलों के मुकाबले आसान होगा। मेटा के मुताबिक नए मॉडल का नाम म्यूज ग्लिमर है। यह कंपनी के म्यूज स्पार्क 1.2 मॉडल का छोटा और अधिक सक्षम रूप है। इसमें करीब 30 अरब मानक हैं और इसे चलाने के लिए एक ग्राफिक्स कार्ड ही पर्याप्त हो सकता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से ऐसे कामों में किया जा सकेगा, जिनमें एआई खुद कई चरणों में काम पूरा करती है। इनमें समय-सारणी बनाना, फाइलों को व्यवस्थित करना और रोजमर्रा के दूसरे डिजिटल काम शामिल हैं। गौरतलब है कि मेटा का यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका में एआई को सभी के लिए खुला रखने या उस पर कड़ा नियंत्रण लगाने को लेकर बहस तेज है। मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने इसी मुद्दे पर करीब 6,500 शब्दों का एक लेख भी लिखा है। उनका कहना है कि बेहद शक्तिशाली एआई को कुछ बड़ी कंपनियों या संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों तक पहुंचाना चाहिए। म्यूज ग्लिमर के मॉडल से जुड़े जरूरी आंकड़े हगिंग फेस मंच के जरिए उपलब्ध कराए जाएंगे। इसे डाउनलोड करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, हालांकि इसे अपने कंप्यूटर पर चलाने का खर्च उपयोगकर्ता को ही उठाना होगा। मेटा भविष्य में अपने ज्यादा शक्तिशाली म्यूज स्पार्क मॉडल का संस्करण भी इसी तरह उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। बता दें कि गूगल पहले से ही जेम्मा नाम के ऐसे एआई मॉडल उपलब्ध करा रहा है, जिन्हें स्थानीय उपकरणों पर चलाया जा सकता है। चीन की डीपसीक, मूनशॉट और अलीबाबा जैसी कंपनियों के कम लागत वाले खुले मॉडल ने भी अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है। मार्क जुकरबर्ग ने चीन के खुले मॉडलों पर सरकारी रोक लगाने के विचार का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि अमेरिका को विदेशी मॉडलों पर रोक लगाने के बजाय अपने खुले मॉडलों को दुनिया में सबसे बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई का विकास खुली तकनीक के जरिए भी सुरक्षित और मजबूत बनाया जा सकता है। वहीं, कुछ अमेरिकी कंपनियां खुले एआई मॉडल को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताती रही हैं। अमेरिकी सरकार ने फिलहाल ऐसे मॉडलों पर अनिवार्य सुरक्षा जांच लागू नहीं की है और कंपनियों को नए शक्तिशाली मॉडल जारी करने से पहले स्वैच्छिक सुरक्षा समीक्षा का विकल्प दिया गया है। मेटा के साथ अमेजन, गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां एआई के विकास में भारी निवेश कर रही हैं। इन कंपनियों का कुल निवेश दो हजार अरब डॉलर से ज्यादा बताया जा रहा है। इसी बीच मेटा ने अमेरिकी उन इलाकों में एक अरब डॉलर का कोष बनाने की घोषणा भी की है, जहां उसके आंकड़ा केंद्र मौजूद हैं। हालांकि, इन केंद्रों के लिए जमीन, बिजली और पानी की बढ़ती जरूरत को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी सामने आया है। इस तरह मेटा का नया मॉडल केवल तकनीकी उत्पाद नहीं, बल्कि एआई को आम लोगों तक पहुंचाने की उसकी बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ईरान को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति रजा आरिफ
नई दिल्ली, 11 अगस्त . ईरान के उपPresident मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि हमारे दुश्मन साजिशें रचेंगे और देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशते रहेंगे. इसलिए देश की साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि विरोधियों की साजिशों से निपटने के लिए ईरान को पूरी ... Read more
उत्तराखंड ने साइबर अपराध नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

