शेखपुरा के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में AI वर्कशॉप:छात्रों को साइबर सुरक्षा के प्रति किया अवेयर
शेखपुरा के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में शुक्रवार को 'एआई इन साइबर सिक्योरिटी' विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इनक्यूबेशन हब ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा के आधुनिक उपयोगों के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना था। कार्यशाला में सी-डैक, पटना से साइंटिस्ट ‘बी’ शैलेन्द्र प्रताप सिंह और साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट प्रशांत श्रीवास्तव मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। जागरूक रहने की आवश्यकता पर जोर दिया शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि वर्तमान में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जो डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने में सहायक है। उन्होंने विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों और साइबर खतरों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रशांत श्रीवास्तव ने साइबर सुरक्षा के महत्व, इसके व्यावहारिक उपयोग और करियर अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहने के उपायों और साइबर जागरूकता के महत्व के बारे में जानकारी दी। आधुनिक कौशल विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप तिवारी, डीन एकेडमिक डॉ. जयशंकर प्रसाद केशरी और स्टार्टअप सेल के फैकल्टी इंचार्ज प्रो. संदीप कुमार भी मौजूद रहे। सभी ने विद्यार्थियों को तकनीकी नवाचार और आधुनिक कौशल विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का सफल आयोजन प्रो. संदीप कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। स्टार्टअप सेल के छात्र प्रतिनिधि आशीष कुमार और प्रियांशु भारद्वाज ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया और इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स के टेक्नोलॉजी पॉडकास्ट ‘हार्ड फोर्क’ के होस्ट्स के साथ बातचीत की। इस दौरान गूगल सर्च के भविष्य, एआई एजेंट्स के इस्तेमाल और कॉलेज ग्रेजुएट्स को लेकर चर्चाएं हुईं। पिचई ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बेहद तेजी से दुनिया को बदल रहा है। ऐसे में लोगों का चिंतित होना स्वाभाविक है। दरअसल लोग इतने बड़े तकनीकी बदलाव को समझने और उसके अनुरूप ढलने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। एक आंकड़ा सामने आया कि केवल 16% लोग ही एआई को ज्यादातर अच्छा मानते हैं, जबकि 35% लोग इसे खराब मानते हैं। इस पर पिचई ने कहा कि टेक कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे एआई के फायदे लोगों तक पहुंचाएं और दिखाएं कि यह तकनीक जीवन को कैसे बेहतर बना सकती है। एआई से नौकरियां खत्म होने और काम बदलने की आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर नहीं होगी, जितना अनुमान है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर पीढ़ी में भविष्य को लेकर चिंताएं होती हैं, लेकिन आखिरकार वही पीढ़ी बेहतर दुनिया बनाती है। एंट्री लेवल के युवाओं की क्षमताएं बढ़ेंगी एंट्री-लेवल युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए पिचई ने कहा कि एआई लोगों की क्षमताओं को बढ़ाएगा। जैसे स्प्रेडशीट आने से काम करने का तरीका बदला था, वैसे ही एआई भी कई लोगों के लिए नई शुरुआत का रास्ता खोलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया में पहले से कहीं ज्यादा लोग कोडिंग कर पाएंगे। पिचई के मुताबिक एआई डॉक्टरी जैसे पेशों में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अभी डॉक्टरों का बहुत ज्यादा समय कागजी कार्रवाई और तकनीकी प्रक्रियाओं में चला जाता है,एआई से इस समय की बचत होगी, जिससे डॉक्टर बचे हुए समय को मरीजों के साथ बिता पाएंगे। एआई से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की मांग बढ़ी, यूएस में 76 करोड़ तक का पैकेज एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। जॉब सर्च प्लेटफॉर्म ग्लासडोर के मुताबिक इस साल की पहली तिमाही में साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी जॉब में 11% की बढ़ोतरी हुई है। बड़ी वजह एआई आधारित कोडिंग टूल्स का तेजी से इस्तेमाल माना जा रहा है, जिससे सिस्टम में बग्स व सुरक्षा खामियों का खतरा बढ़ रहा है।टेक कंपनियों के कर्मचारी अब बड़े पैमाने पर एआई से कोड जनरेट कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे काम की गति तो बढ़ती है, लेकिन कई बार सॉफ्टवेयर में कमजोरियां भी पैदा हो जाती हैं। प्रमुख एआई कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ जैसे मॉडल का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है। लिंक्डइन की चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी अफसर ली किसनर के मुताबिक सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। एआई का असर केवल साइबर सिक्योरिटी तक सीमित नहीं है। प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और एआई इंडस्ट्री में भी नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। नए कॉलेज ग्रेजुएट्स के लिए एआई इंजीनियर की मांग सबसे ज्यादा बताई जा रही है। गूगल के वाइस प्रेसिडेंट निक फॉक्स का कहना है कि पहले की तुलना में अब ज्यादा सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जरूरत है। हालांकि दूसरी तरफ टेक इंडस्ट्री में छंटनी भी हो रही है। मेटा ने पिछले सप्ताह करीब 8 हजार कर्मचारियों की छंटनी की। अमेजन हाल में 16 हजार नौकरियां खत्म कर चुकी है। स्ट्राइप, स्नैप और ब्लॉक जैसी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों को निकाला है। एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ और बाद में ओपनएआई के जीपीटी 5.4 साइबर मॉडल के आने के बाद साइबर सिक्योरिटी हायरिंग में और तेजी आई है। सिक्योरिटी एग्जीक्यूटिव्स का पैकेज 66से 76 करोड़ तक पहुंच गया है

