सलूंबर में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, महिलाओं और बालिकाओं को डिजिटल ठगी से बचाव की दी जानकारी
सलूंबर के सल्लाड़ा में महिलाओं और बालिकाओं को साइबर ठगी, फर्जी ऑफर और ‘डिजिटल अरेस्ट’ से बचाव के उपाय बताए गए।
New Delhi, 21 अगस्त . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सिंगापुर दौरे के दौरान वैश्विक साइबर सुरक्षा कंपनी चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नादव जफरीर से मुलाकात कर India में कंपनी की बढ़ती भागीदारी, साइबर सुरक्षा सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित सुरक्षा समाधानों पर चर्चा की. India में ... Read more
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सिंगापुर दौरे के दौरान वैश्विक साइबर सुरक्षा कंपनी चेक प्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नादव जफरीर से मुलाकात कर भारत में कंपनी की बढ़ती भागीदारी, साइबर सुरक्षा सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित सुरक्षा समाधानों पर चर्चा की।
सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर भारत में इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। देश में पहली बार इस सेवा के लिए लाइसेंस जारी होने के चार साल से ज्यादा समय बाद भी व्यावसायिक शुरुआत नहीं हो पाई है। सरकारी अधिकारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी उपग्रह कंपनियों के नेटवर्क को लेकर सुरक्षा और नियंत्रण से जुड़ी चिंताएं हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार को आशंका है कि विदेशी उपग्रह कंपनियां भारतीय प्रवेश केंद्रों को दरकिनार करके इंटरनेट यातायात को दूसरे देशों में मौजूद केंद्रों के जरिये भेज सकती हैं। हालांकि कंपनियों का कहना है कि उनके पास ऐसी तकनीक मौजूद है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि भारत के प्रवेश केंद्रों को दरकिनार न किया जाए। कंपनियों ने सुरक्षा से जुड़े परीक्षण भी पूरे किए हैं और भारतीय नियमों के मुताबिक अपनी व्यवस्था में बदलाव करने के साथ अनुपालन का भरोसा भी दिया है। इसके बावजूद पिछले कुछ महीनों से दूरसंचार विभाग की ओर से मंजूरी की स्थिति, अतिरिक्त जानकारी या स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इस कारण सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही कंपनियों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। बता दें कि एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो प्लेटफॉर्म्स की पूर्ण स्वामित्व वाली जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस इस क्षेत्र में प्रमुख कंपनियां हैं। जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन लियो भी भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस की दौड़ में है। यूटेलसैट वनवेब इंडिया को अप्रैल 2022 में वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत संचार उपग्रह लाइसेंस मिला था। इसके बाद अक्टूबर 2022 में जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और जून 2025 में स्टारलिंक को लाइसेंस मिला। यूटेलसैट और वनवेब का 2023 में विलय हो चुका है। इस संयुक्त कंपनी में भारती समूह के साथ फ्रांस और ब्रिटेन की सरकारों समेत कई अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी है। गौरतलब है कि सरकार की चिंता सिर्फ लाइसेंस देने तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में यह सवाल भी उठा है कि विदेशी कंपनियों के उपग्रह नेटवर्क पर भारत का कितना नियंत्रण रहेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने हुई एक प्रस्तुति के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने कथित तौर पर कहा कि जब तक भारत के पास इन प्रणालियों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो, तब तक मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। इस चिंता को स्टारलिंक के ईरान युद्ध के दौरान अनुभव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे हालात में किसी विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाले उपग्रह नेटवर्क को सीमित करना सरकारों के लिए कितना मुश्किल हो सकता है, इस पर दुनिया भर में चर्चा हुई है। दूसरी तरफ जियो भारत के लिए अपनी अलग निम्न कक्षा वाली उपग्रह प्रणाली तैयार कर रही है। कंपनी करीब 1,600 उपग्रहों का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है और इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष नियामक संस्था तथा दूरसंचार विभाग से मदद मांग रही है। जियो को अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ से आवृत्ति और कक्षा से जुड़े अधिकारों के समन्वय की भी जरूरत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस व्यवस्था को पूरी तरह तैयार होने में करीब तीन साल लग सकते हैं। सरकार विदेशी और भारतीय उपग्रह कंपनियों के बीच समान समन्वय अधिकार देने की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है, ताकि भारतीय कंपनियों पर पहले से दर्ज विदेशी उपग्रह प्रणालियों की हर स्थिति में सुरक्षा की कानूनी जिम्मेदारी न आ जाए। हालांकि इस देरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू होने से दूरदराज के इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाने के साथ उन सेवाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें मोबाइल फोन सीधे उपग्रह से जुड़ सकते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में ऐसी सेवाएं पहले से उपलब्ध हैं। ब्रिटेन के संचार नियामक कार्यालय के डेविड विल्स के मुताबिक भारत जैसे देशों को सुरक्षा और उपभोक्ता सुविधा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। ब्रिटेन में निम्न कक्षा वाले उपग्रहों के जरिये एक लाख से ज्यादा ब्रॉडबैंड कनेक्शन मौजूद हैं। हालांकि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम न लेने की है। ऐसे में स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो जैसी कंपनियों को भारत में सेवा शुरू करने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है और अंतिम फैसला सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की संतुष्टि के बाद ही होने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेशभर में यह अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान के तहत रायगढ़ में 1700 छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए गए। उन्हें ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां दी गईं। स्कूल-कॉलेजों में छात्रों को ठगी से बचने के बताए तरीके साइबर जागृति अभियान के तहत DSP उन्नति ठाकुर, सुशांतो बनर्जी और पूंजीपथरा थाना प्रभारी रामकिंकर यादव ने ओपी जिंदल स्कूल में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचने के उपाय बताए। कोतवाली पुलिस ने गर्ल्स कॉलेज, लॉ कॉलेज और शासकीय ग्रंथालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यहां लोगों को ऑनलाइन ठगी से सावधान रहने की जानकारी दी गई। खरसिया पुलिस ने आत्मानंद स्कूल में बच्चों को साइबर अपराध और उससे बचाव के तरीके बताए। वहीं भूपदेवपुर थाना प्रभारी रोशन कुमार कौशिक की टीम ने कोड़तराई और भूपदेवपुर के हायर सेकेंडरी स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम किया। साइबर थाना और चक्रधरनगर थाना की संयुक्त टीम ने बोइरदादर के सेंट टेरेसा और सेंट जेवियर इंग्लिश मीडियम स्कूल में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। इसी तरह घरघोड़ा पुलिस ने कन्या शाला में और महिला थाना पुलिस ने स्थानीय बच्चों के बीच साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस ने साइबर सुरक्षा के जरूरी तरीके बताए कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को बताया गया कि OTP, PIN, CVV और बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ शेयर न करें। अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल, लिंक, QR कोड और संदिग्ध मैसेज से सावधान रहें। बिना जांचे किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें। अपनी निजी फोटो और व्यक्तिगत जानकारी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें। तुरंत शिकायत करने की दी जानकारी पुलिस ने बताया कि ऑनलाइन ऑफर, नौकरी, इनाम, निवेश या लोन के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। डिजिटल गिरफ्तारी, KYC अपडेट, बिजली कनेक्शन कटने, बैंक खाता बंद होने या पुलिस अधिकारी बनकर डराने वाली कॉल भी साइबर ठगी हो सकती है। विद्यार्थियों को मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और प्राइवेसी सेटिंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करने की जानकारी भी दी गई।
आईआईटी कानपुर से मिलेगा प्रमाणपत्र, 75 घंटे के प्रशिक्षण में ऑनलाइन कक्षाओं के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी।
UIDAI का बड़ा अपडेट: Aadhaar App के Offline Mode से बिना Internet होगा वेरिफिकेशन
आज के समय में आधार कार्ड देश के हर नागरिक की पहचान का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है। UIDAI यानी के भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा इस इस साल की शुरुआत में नया 'आधार एप' लॉन्च किया था। जब इस एप को लॉन्च किया गया है तो कुछ दिनों के बाद पुराने 'एमआधार' एप को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। अब इस नए आधार एप को ऑफलाइन मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके मदद से आप बिना किसी इंटरनेट के भी अपनी पहचान का पुख्ता वेरिफिकेशन आसानी से कर पाएंगे। आइए आपको इस लेख में बताते है यूआईडीएआई का नया ऑफलाइन फीचर कैसे यूज कर सकते हैं और जानें इसके फायदे। जानिए क्या नया है ऑफलाइन मोड और कैसे काम करता? - गौरतलब है कि आधार एप ऐसा बनाया गया है कि अब बिना किसी इंटरनेट के भी इसको इस्तेमाल किया जा सकता है। - बिना इंटरनेट के आप आधार एप ओपन करेंगे तो भी आपकी स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड नजर आएगा, जो ऑफलाइन मोड पर भी काम करता है। - बता दें कि, इस क्यूआर कोड में आपकी फोटो, नाम और जन्मतिथि जैसी जरूरी जानकारियां पहले से ही सुरक्षित रूप से लॉक रहती हैं। बिना नेटवर्क के कैसे होगा पहचान का पूरा सत्यापन - खासकर, जब आप किसी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या सरकारी ऑफिस जाएंगे, तो वहां स्थित अधिकारी अपने मोबाइल से आपके इस ऑफलाइन क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे। - कोड स्कैन करने पर अधिकृत QR स्कैनर या UIDAI के आधार एप के तहत आपकी पहचान ऑफलाइन सत्यापित कर पाएंगे। - इस पूरी प्रक्रिया के लिए आपके फोन में डेटा की जरूरत नहीं पड़ेगी। डेटा की प्राइवेसी और सुरक्षा का रखा गया है खास ध्यान - हर किसी के मन यह डर जरुर होता है कि इंटरनेट के बिना क्या यह सुरक्षित है? - UIDAI के अनुसार, यह ऑफलाइन क्यूआर कोड पूरी तरह सेफ है। - इस सुविधा में सिर्फ जरुरत की जानकारी ही शेयर की जाती है, ताकि आपकी निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहे और अनावश्यक डेटा शेयर होने का जोखिम कम हो। दूर-दराज के क्षेत्रों और आम नागरिकों को मिलने वाले बड़े लाभ - इस नए ऑफलाइन मोड का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों या गांव में रहते हैं। - ट्रेन टिकट चेकिंग के दौरान या आपातकालीन स्थिति में मोबाइल डेटा न होने पर भी आपका डिजिटल आधार पूरी तरह से मान्य होगा। - गौरतलब है कि कुछ जगहों पर नया Aadhaar App पहचान के लिए सुविधाजनक ऑप्शन बन सकता है। लेकिन, कुछ संस्थान पर अपने नियमों के अनुसार फिजिकल आधार या अन्य दस्तावेज भी मांगा जा सकता है।

