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नौकरियों को एआई से गंभीर खतरा नहीं:एआई से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की मांग बढ़ी, यूएस में 76 करोड़ तक का पैकेज

गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स के ‎टेक्नोलॉजी पॉडकास्ट ‘हार्ड फोर्क’ के होस्ट्स के साथ बातचीत‎ की। इस दौरान गूगल सर्च के भविष्य, एआई एजेंट्स के‎ इस्तेमाल और कॉलेज ग्रेजुएट्स को लेकर चर्चाएं हुईं। पिचई ने‎ कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बेहद तेजी से‎ दुनिया को बदल रहा है। ऐसे में लोगों का चिंतित होना‎ स्वाभाविक है। दरअसल लोग इतने बड़े तकनीकी बदलाव को ‎समझने और उसके अनुरूप ढलने के लिए अभी तैयार नहीं‎ हैं। एक आंकड़ा सामने आया कि केवल 16% लोग ही एआई ‎को ज्यादातर अच्छा मानते हैं, जबकि 35% लोग इसे खराब ‎मानते हैं। इस पर पिचई ने कहा कि टेक कंपनियों की यह ‎जिम्मेदारी है कि वे एआई के फायदे लोगों तक पहुंचाएं और ‎दिखाएं कि यह तकनीक जीवन को कैसे बेहतर बना सकती है। ‎ एआई से नौकरियां खत्म होने और काम बदलने की‎ आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर‎ नहीं होगी, जितना अनुमान है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ‎हर पीढ़ी में भविष्य को लेकर चिंताएं होती हैं, लेकिन आखिरकार वही पीढ़ी बेहतर दुनिया बनाती है।‎ एंट्री लेवल के युवाओं की क्षमताएं बढ़ेंगी एंट्री-लेवल युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए पिचई ने कहा कि एआई लोगों की क्षमताओं को बढ़ाएगा। जैसे स्प्रेडशीट आने से काम करने का तरीका बदला था, वैसे ही एआई भी कई लोगों के लिए नई शुरुआत का रास्ता खोलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया में पहले से कहीं ज्यादा लोग कोडिंग कर पाएंगे। पिचई के मुताबिक एआई डॉक्टरी जैसे पेशों में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अभी डॉक्टरों का बहुत ज्यादा समय कागजी कार्रवाई और तकनीकी प्रक्रियाओं में चला जाता है,एआई से इस समय की बचत होगी, जिससे डॉक्टर बचे हुए समय को मरीजों के साथ बिता पाएंगे। एआई से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की मांग बढ़ी, यूएस में 76 करोड़ तक का पैकेज एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। जॉब सर्च प्लेटफॉर्म ग्लासडोर के मुताबिक इस साल की पहली तिमाही में साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी जॉब में 11% की बढ़ोतरी हुई है। बड़ी वजह एआई आधारित कोडिंग टूल्स का तेजी से इस्तेमाल माना जा रहा है, जिससे सिस्टम में बग्स व सुरक्षा खामियों का खतरा बढ़ रहा है।टेक कंपनियों के कर्मचारी अब बड़े पैमाने पर एआई से कोड जनरेट कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे काम की गति तो बढ़ती है, लेकिन कई बार सॉफ्टवेयर में कमजोरियां भी पैदा हो जाती हैं। प्रमुख एआई कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ जैसे मॉडल का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है। लिंक्डइन की चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी अफसर ली किसनर के मुताबिक सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। एआई का असर केवल साइबर सिक्योरिटी तक सीमित नहीं है। प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और एआई इंडस्ट्री में भी नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। नए कॉलेज ग्रेजुएट्स के लिए एआई इंजीनियर की मांग सबसे ज्यादा बताई जा रही है। गूगल के वाइस प्रेसिडेंट निक फॉक्स का कहना है कि पहले की तुलना में अब ज्यादा सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जरूरत है। हालांकि दूसरी तरफ टेक इंडस्ट्री में छंटनी भी हो रही है। मेटा ने पिछले सप्ताह करीब 8 हजार कर्मचारियों की छंटनी की। अमेजन हाल में 16 हजार नौकरियां खत्म कर चुकी है। स्ट्राइप, स्नैप और ब्लॉक जैसी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों को निकाला है। एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ और बाद में ओपनएआई के जीपीटी 5.4 साइबर मॉडल के आने के बाद साइबर सिक्योरिटी हायरिंग में और तेजी आई है। सिक्योरिटी एग्जीक्यूटिव्स का पैकेज 66से 76 करोड़ तक पहुंच गया है

दैनिक भास्कर 26 May 2026 4:20 pm

पामगढ़ पुलिस ने दर्री में चलाया जागरूकता अभियान:नशा मुक्ति, साइबर सुरक्षा पर जोर, महिलाओं को बताए गए सुरक्षा कानून और अधिकार

जांजगीर-चांपा पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप के मार्गदर्शन में थाना पामगढ़ पुलिस ने ग्राम पंचायत दर्री में एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। थाना प्रभारी सावन कुमार सारथी के नेतृत्व में 24 मई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को सुरक्षा, कानून तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना था। अभियान के दौरान एक महिला कमांडो टीम का गठन किया गया। टीम की सदस्यों को साइबर अपराधों से बचाव, ऑनलाइन ठगी की पहचान और सतर्कता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, उन्हें यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग, सड़क सुरक्षा और राहगीरों की सुरक्षा के लिए संचालित 'राहवीर योजना' के बारे में विस्तार से समझाया गया। युवाओं को नशे से दूर रहने की समझाइश कार्यक्रम में नशा मुक्ति अभियान पर विशेष जोर दिया गया। युवाओं और ग्रामीणों को शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की समझाइश दी गई। उपस्थित महिलाओं को महिला संबंधी अपराधों, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, बाल विवाह और महिला सुरक्षा कानूनों के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। उन्हें किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। महिला कमांडो टीम को सुरक्षा और जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए टोपी और सीटी वितरित की गईं। पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं को समाज में जागरूकता फैलाने, अपराधों की सूचना तत्काल पुलिस तक पहुंचाने और ग्राम स्तर पर सुरक्षा सहयोगी के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। थाना पामगढ़ पुलिस ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाना है। साथ ही, इसका लक्ष्य साइबर अपराधों और सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा महिला सुरक्षा एवं सामाजिक सहभागिता को मजबूत करना है।

दैनिक भास्कर 24 May 2026 9:58 pm

बिहार AI समिट: साइबर सुरक्षा-स्मार्ट गवर्नेंस पर हुई चर्चा:विशेषज्ञों ने दिखाया विजन, विकास वैभव बोले- राज्य विकास की दौड़ में लंबी छलांग लगाने को तैयार

पटना में पहली बार आयोजित हो रहे 'बिहार एआई समिट 2026' के दूसरे और अंतिम दिन आज युवाओं, स्टार्टअप्स और तकनीकी विशेषज्ञों का उत्साह देखने को मिला। पहले दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा बिहार के लिए जल्द ही 'एआई पॉलिसी' लाने की घोषणा के बाद, आज दूसरे दिन का पूरा सत्र इसके क्रियान्वयन और भविष्य के रोडमैप पर केंद्रित रहा। आज 'लेट्स इंस्पायर बिहार' के संस्थापक विकास वैभव (IPS) ने गया जी से वर्चुअली जुड़कर समिट को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए 'बिहार @ 2047 विज़न डॉक्यूमेंट' में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक प्रमुख टूल माना गया है। इसके जरिए राज्य विकास की दौड़ में लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है। देखें तस्वीरें… आज के तकनीकी सत्रों में एआई के जन बिंदुओं पर हुई चर्चा साइबर सुरक्षा: बढ़ते डिजिटल फ्रॉड से निपटने और सुरक्षित डेटा प्रबंधन के लिए एआई टूल्स के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। स्मार्ट गवर्नेंस: सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के तरीकों पर विशेषज्ञों ने अपने फ्रेमवर्क साझा किए। हेल्थकेयर और शिक्षा: बिहार के ग्रामीण इलाकों तक एआई-संचालित स्वास्थ्य सेवाएं और छात्रों के लिए व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized Learning) मॉडल्स को जमीन पर उतारने का खाका तैयार हुआ। नितेश मिश्रा ने कार्यक्रम को किया संबोधित मंत्री नीतीश मिश्रा ने समिट के दौरान देश-विदेश में रह रहे बिहार मूल के प्रवासियों, उद्यमियों और प्रोफेशनल्स से अपनी मातृभूमि की ओर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार अब सिर्फ कार्यबल देने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजी लीडर बनकर उभरेगा। कार्यक्रम में शामिल हुए स्थानीय छात्रों और डेवलपर्स ने कहा कि इस समिट से उन्हें नई तकनीकों को करीब से जानने और समझने का एक शानदार एक्सपोज़र मिला है, जो उनके रोजगार और स्टार्टअप के सपनों को नई उड़ान देगा। साथ ही जो विभिन्न स्टार्टअप्स आई है, उनसे भी बात करके बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है।

दैनिक भास्कर 24 May 2026 5:03 pm

डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा बेहद जरूरी

भास्कर न्यूज | लुधियाना गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के छात्र कल्याण निदेशालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा एक्ट ह्यूमन सोसायटी के सहयोग से साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों के संबंध में अध्यापकों और विद्यार्थियों को जागरूक करने हेतु एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, उप-कुलपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षित लोग भी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। डॉ. राबिंदर सिंह औलख, निदेशक छात्र कल्याण ने एक्ट ह्यूमन सोसायटी द्वारा शारीरिक समस्याओं, पर्यावरण सुरक्षा, व्यावसायिक ज्ञान, चिकित्सकीय सहायता तथा कैंसर जैसी बीमारी की चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे सराहनीय प्रयासों पर प्रकाश डाला।तरुण मल्होत्रा, मुख्य वक्ता तथा साइबर स्प्लंक और साइबर अकेडमी के संस्थापक ने साइबर जागरूकता और डिजिटल विश्वास को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रोचक एवं ज्ञानवर्धक संबोधन दिया। उन्होंने साइबर धोखाधड़ी से बढ़ते खतरों के बारे में जानकारी दी तथा डाटा सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचाव संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने सुरक्षित पासवर्ड बनाने तथा ठगी के प्रयासों की पहचान करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी साझा की। हरलीन कौर, संस्थापक, एक्ट ह्यूमन सोसायटी ने संस्था द्वारा सामाजिक कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और कहा कि उनका उद्देश्य संवेदनशील तथा जिम्मेदार सामाजिक वातावरण का निर्माण करना है। डॉ. निधि शर्मा ने बताया कि इस चर्चा से राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवी विद्यार्थियों को अत्यधिक लाभ मिलेगा। डॉ. वरिंदर उप्पल, निदेशक, मानव संसाधन प्रबंधन केंद्र ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। डॉ. राम सरन सेठी, डीन, कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी ने इस सत्र को ज्ञानवर्धक, उपयोगी तथा समय की आवश्यकता के अनुरूप बताया। इस अवसर पर विभिन्न कॉलेजों के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजेश कसरीजा, डॉ. चंद्र शेखर मुखोपाध्याय, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. विशाल शर्मा तथा डॉ. सैयद हसन भी उपस्थित थे।

दैनिक भास्कर 22 May 2026 5:30 am