देवास पुलिस ने ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए एक नया साइबर जागरूकता अभियान सेफ क्लिक-2.0 शुरू किया है। यह अभियान अगले 14 दिनों तक पूरे जिले में चलाया जाएगा। मध्यप्रदेश पुलिस के इस प्रदेशव्यापी अभियान का शुभारंभ देवास स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हुआ। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोत और सीएसपी सुमीत अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह पहल साइबर अपराधियों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के पिछले सफल अभियान के बाद की गई है। पिछले अभियान में मिली बड़ी सफलता पुलिस ने बताया कि पिछले सेफ क्लिक अभियान के दौरान जिले में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी। शिकायतों की मासिक संख्या 54 से बढ़कर 150 से 200 तक पहुंच गई थी। समय पर मिली शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लगभग 710 नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी में गंवाई गई 3.60 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलाने में मदद की। इसके अतिरिक्त, पिछले अभियान में 230 लोगों को डिजिटल अरेस्ट और अन्य प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होने से बचाया गया था। यह सफलता नए अभियान के लिए प्रेरणा बनी है। स्कूल, कॉलेज और बाजारों में होंगे कार्यक्रम सेफ क्लिक-2.0 के तहत स्कूलों, कॉलेजों, बैंकों, पंचायतों, अस्पतालों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें साइबर जागरूकता कार्यशालाएं, सेमिनार, साइबर चौपाल, नुक्कड़ नाटक, रैलियां, मैराथन और साइबर मेले शामिल होंगे। 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत की अपील अभियान के दौरान आमजन को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की जानकारी भी दी जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, एपीके फाइल या ऑनलाइन लेन-देन संबंधी संदेश पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में नागरिकों को तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। एसपी पुनीत गहलोत ने इस अभियान की शुरुआत की पुष्टि करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य साइबर अपराधों से समाज को सुरक्षित रखना है।
मुरैना जिले में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में ‘सेफ क्लिक 2.0’ साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के शुभारंभ अवसर पर पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र पाल सिंह, रक्षित निरीक्षक रविकांत शुक्ला और साइबर टीम के सदस्य मौजूद रहे। 15 दिन तक चलेगा जागरूकता अभियानपुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा की मौजूदगी में बुधवार को मध्यप्रदेश सरकार के ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान का शुभारंभ किया गया। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक 15 दिनों तक चलेगा। इस दौरान जिले के विभिन्न शासकीय संस्थानों, स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड और प्रमुख चौराहों पर लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। इन साइबर अपराधों से सतर्क रहने की अपील अभियान के तहत ओटीपी फ्रॉड, एक्सटॉर्शन, जॉब और लोन फ्रॉड, म्यूल अकाउंट, पहचान की चोरी, मैलवेयर और रैनसमवेयर अटैक, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, साइबर आतंकवाद, हैकिंग, अश्लील सामग्री का प्रसार, गोपनीयता का उल्लंघन, डिजिटल अरेस्ट, साइबर स्टॉकिंग, डेटा चोरी, फिशिंग और भेष बदलकर ठगी जैसे अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। हेल्पलाइन और पोर्टल पर कर सकेंगे शिकायत एसपी धर्मराज मीणा ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में साइबर अपराधों के ग्राफ को कम करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा माध्यम है और पुलिस लगातार लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
साइबर सुरक्षा पर जागरूकता सत्र, ऑनलाइन ठगी से बचने के गुर सिखाए
भास्कर न्यूज | लुधियाना पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज की सोसाइटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ एकेडमिक्स, स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एक्टिविटीज ने अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र विभाग के कमेटी रूम में साइबर सुरक्षा को लेकर एक जागरुकता सत्र का आयोजन किया। सत्र का संचालन बैंक ऑफ बड़ौदा लुधियाना के चीफ मैनेजर और लर्निंग हेड अजितेश कुमार ने किया। उन्होंने साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों और रोजमर्रा की जिंदगी में सुरक्षित डिजिटल तौर-तरीके अपनाने के महत्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने डिजिटल टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में तेजी से हो रही बढ़ोतरी पर बात की। उन्होंने जोर दिया कि जहां डिजिटलाइजेशन से बहुत सुविधाएं मिली हैं, वहीं इससे साइबर खतरों का जोखिम भी बढ़ा है। उन्होंने साइबर अपराध के विभिन्न रूपों जैसे फिशिंग हमले, पहचान की चोरी, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल इंजीनियरिंग स्कैम, मैलवेयर हमले और डेटा की चोरी पर चर्चा की। व्यावहारिक उदाहरणों और असल जिंदगी के केस स्टडीज़ के जरिए उन्होंने समझाया कि कैसे साइबर अपराधी इंसानी गलतियों और जानकारी की कमी का फायदा उठाकर संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच हासिल कर लेते हैं। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. किरण बैंस ने की। इसमें कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज के फैकल्टी सदस्यों, स्टाफ और छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सवाल-जवाब सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने वक्ता के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की और ऑनलाइन सुरक्षा, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया सुरक्षा और उभरते साइबर खतरों से जुड़े मुद्दों पर जानकारी मांगी। ऑनलाइन निजी जानकारी साझा करते समय सावधानियां बरतने की अपील विशेषज्ञ ने प्रतिभागियों को सलाह दी कि वह ऑनलाइन निजी जानकारी साझा करते समय, पासवर्ड बनाते समय, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करते समय और बिना मांगे आए मैसेज या कॉल का जवाब देते समय सावधानी बरतें। उन्होंने मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करने, सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करने और ऑनलाइन ट्रांजक्शन करने से पहले वेबसाइट की प्रमाणिकता की जांच करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लोगों को साइबर अपराध की रिपोर्ट करने और ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में मदद पाने के उपलब्ध तरीकों के बारे में भी जानकारी दी। यह कार्यक्रम एसएएएससीए के तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जो छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के सर्वांगीण विकास के लिए नियमित रूप से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है। सेक्रेटरी डॉ. शालिनी शर्मा ने अजितेश कुमार का आभार व्यक्त किया। सेशन का समापन बायोकेमिस्ट्री विभाग की बायोकेमिस्ट डॉ. शिल्पा की तरफ से धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने रिसोर्स पर्सन के योगदान और दर्शकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। इस सेशन का संचालन अंग्रेज़ी की प्रोफेसर डॉ. सुमेधा भंडारी ने बहुत अच्छे ढंग से किया।

