लखनऊ पुलिस की साइबर सेल और गैर-सरकारी संगठन 'प्रयास' ने संयुक्त रूप से स्कूली छात्रों को साइबर अपराध से बचाव की जानकारी दी। अभियान के तहत करीब 400 छात्रों को सोशल मीडिया सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग और मोबाइल हैकिंग जैसे विषयों पर जागरूक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के प्रति जागरूक करना था। कक्षा-12 की छात्रा अनुषांगी खेमका ने साइबर जागरूकता अभियान की पहल की है। लखनऊ पुलिस की साइबर सेल के सहयोग से वह स्कूलों में जाकर छात्रों को साइबर अपराध से बचाव और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक कर रही हैं। सेंट मेरी इंटर कॉलेज में हुआ कार्यक्रम आयोजित कार्यक्रम में सेंट मेरी इंटर कॉलेज के कक्षा 9 से 12 तक के करीब 400 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। लखनऊ पुलिस की साइबर सेल और NGO 'प्रयास' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साइबर अपराध के बदलते तरीकों और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई। मुख्य आरक्षी ने बताए साइबर सुरक्षा के अहम नियम साइबर सेल के मुख्य आरक्षी गौरव शुक्ला ने छात्रों को सोशल मीडिया पर निजी फोटो और व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने, प्रोफाइल को सुरक्षित रखने, अनजान लोगों द्वारा भेजे गए लिंक और APK फाइल डाउनलोड न करने की सलाह दी। उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग, मोबाइल हैकिंग और फिशिंग फ्रॉड से बचने के तरीके भी बताए। साथ ही साइबर हेल्पलाइन और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी। डिजिटल जागरूकता पर दिया जोर कोऑर्डिनेटर अनुगंगी खेमका ने कहा कि आज के समय में बच्चों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में सही जानकारी के अभाव में बच्चे आसानी से साइबर अपराधियों का शिकार बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि 'प्रयास' का उद्देश्य लखनऊ पुलिस के सहयोग से स्कूलों में लगातार ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना है, ताकि छात्र सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बन सकें। पोस्टर भी बांटे, स्कूल प्रबंधन ने की सराहना कार्यक्रम के दौरान छात्रों को साइबर सुरक्षा से जुड़े पोस्टर और जागरूकता सामग्री भी वितरित की गई। स्कूल के डायरेक्टर श्री गौरव, प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होने चाहिए, जिससे छात्र साइबर अपराध के प्रति सतर्क रह सकें और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपना सकें।
हिसार के उकलाना में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर ठगी के एक पीड़ित को उसकी 17 हजार रुपए की ठगी गई राशि वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़ित की मेहनत की कमाई सुरक्षित वापस उसके बैंक खाते में पहुंच गई। थाना प्रभारी उकलाना पीएसआई कुलदीप ने बताया कि शिकायत संख्या 31307260053688 के तहत पीड़ित ने ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलते ही साइबर हेल्प डेस्क उकलाना की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक एवं राष्ट्रीय साइबर पोर्टल के माध्यम से ठगी गई राशि को होल्ड करवाने की प्रक्रिया शुरू की। पीड़ित के बैंक खाते में वापस करवाई राशि लगातार प्रयासों के बाद 17 हजार रुपए की पूरी राशि सफलतापूर्वक पीड़ित के बैंक खाते में वापस करवा दी गई। राशि वापस मिलने पर पीड़ित ने हिसार पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क उकलाना का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण उसकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकी। ठगी के शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण एसपी सिद्धान्त जैन (आईपीएस) ने कहा कि साइबर ठगी होने के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित तत्काल शिकायत दर्ज कराता है तो ठगी गई राशि को होल्ड कर वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि हिसार पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ पूरी सख्ती से कार्रवाई कर रही है और पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। साइबर हेल्प डेस्क से तुरंत संपर्क करें एसपी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के साथ ऑनलाइन ठगी होती है, तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही निकटतम साइबर पुलिस थाना अथवा साइबर हेल्प डेस्क से तुरंत संपर्क करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें उन्होंने लोगों से साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक खाते की जानकारी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।
स्कूल में बच्चों को साइबर सुरक्षा के गुर सिखाए गए
सुकमा | जिले में बच्चों को डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए साइबर जागरूकता अभियान लगातार चल रहा है। इसी कड़ी में महिला एवं बाल विकास विभाग के मिशन शक्ति महिला सशक्तिकरण हब ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, कुम्हाररास में एक दिवसीय साइबर सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को इंटरनेट और सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग बताया गया। साइबर अपराधों की पहचान कराई गई। बचाव के व्यावहारिक उपाय समझाए गए। विशेषज्ञों ने ऑनलाइन सतर्कता अपनाने को कहा। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अभिभावकों या पुलिस को देने की बात कही। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता महिला थाना प्रभारी पदमा जगत रहीं। उन्होंने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप की जानकारी दी। बचाव के प्रभावी उपाय बताए। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का उपयोग सोच-समझकर करें। किसी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन संपर्क से बचें। निजी जानकारी साझा न करें। उन्होंने ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, फर्जी लिंक, साइबर ठगी, डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में घबराने के बजाय तुरंत माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस से संपर्क करने को कहा। कार्यक्रम में स्कूल की प्राचार्य ट्रिजा दास मौजूद रहीं। शिक्षक भी शामिल रहे।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने छात्रों को साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रखने के लिए गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय में साइबर जागरूकता, साइबर हाइजीन, क्षमता निर्माण, अनुसंधान, इंटर्नशिप और छात्र सहभागिता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एमओयू पर डीयू की ओर से कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता और आई4सी की ओर से निदेशक निशांत कुमार ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत छात्रों और शिक्षकों के लिए कार्यशालाएं, सेमिनार, हैकाथॉन, साइबर वालंटियर कार्यक्रम, छात्र प्रतियोगिताएं और अनुभवात्मक शिक्षण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा यूजीसी के साइबर सुरक्षा और साइबर जागरूकता पाठ्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के साथ संस्थागत सहयोग और नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा। डीयू के कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता ने कहा, दिल्ली विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है। कई मामलों में छात्र, विशेषकर छात्राएं, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो जाती हैं। इस समझौते का उद्देश्य छात्रों को जागरूक बनाना, उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए प्रशिक्षित करना और साइबर अपराधों की रोकथाम में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम में डीयू कंप्यूटर सेंटर के निदेशक प्रो संजीव सिंह, डीन अकादमिक प्रो के रत्नाबली सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

