मणिपुर के सेनापति जिले में सोमवार को दो गुटों के बीच हुई गोलीबारी और आगजनी की घटनाओं के बाद तनाव बढ़ गया। गोलीबारी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक जवान घायल हो गया। इस दौरान कई घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया। घटना के विरोध में स्थानीय ...
दिल्ली में फिर प्रोटेस्ट करेंगे 'कॉकरोच', मणिपुर में हिंसा की आग; पढ़ें शाम की बड़ी खबरें
सीजेपी ने दिल्ली में इंडिया गेट से शांतिपूर्ण विरोध मार्च का ऐलान किया है, जबकि मणिपुर के सीमावर्ती इलाकों में कई घर फूंके गए और एक सीआरपीएफ जवान घायल हो गया। पढ़ें आज की बड़ी खबरें
बंबीहा गैंग पर Amit Shah का कड़ा प्रहार, Malaysia से डिपोर्ट किए गए 3 कुख्यात Gangsters
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (24 अगस्त) को बताया कि बंबिहा गैंग से जुड़े तीन भगोड़े गैंगस्टरों को मलेशिया से डिपोर्ट किया गया है। इन पर जबरन वसूली, सीमा पार हथियारों की तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी समेत कई अपराधों के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि इन भगोड़ों - जसप्रीत सिंह, अजय सिंह और पवनदीप सिंह - को पकड़कर भारत लाया गया है। एक्स पर एक पोस्ट में शाह के ऑफ़िस ने कहा कि भारतीय एजेंसियों ने मलेशिया में तीन फ़रार भारतीय गैंगस्टर्स को पकड़ा, उन्हें भारत डिपोर्ट किया और पुलिस कस्टडी में भेज दिया। ये फ़रार अपराधी - जसप्रीत सिंह, अजय सिंह और पवनदीप सिंह - बंबीहा गैंग से जुड़े हैं और उन पर कई अपराधों का आरोप है, जिनमें रंगदारी, सीमा पार हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, और लुधियाना में ग्रेनेड हमले की नाकाम कोशिश शामिल है। इसे भी पढ़ें: N Biren Singh पहुंचे Delhi, Manipur के मौजूदा हालात पर BJP केंद्रीय नेतृत्व से होगी चर्चा 2026 में 51 कुख्यात अपराधियों को डिपोर्ट किया गया गृह मंत्री ने आगे कहा कि भारतीय एजेंसियों ने अकेले 2026 में 51 कुख्यात अपराधियों को डिपोर्ट करने में मदद की है। पोस्ट में कहा गया मोदी जी के सुरक्षित भारत के विज़न के तहत, हमारी एजेंसियों ने अकेले 2026 में 51 कुख्यात अपराधियों को डिपोर्ट करने में मदद की है। मई में दो वॉन्टेड भगोड़ों को वापस लाया गया इससे पहले मई में, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर काम करते हुए, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से दो वॉन्टेड भगोड़ों को भारत वापस लाया। भारतीय और UAE अधिकारियों की मिली-जुली कोशिशों के बाद दोनों आरोपियों को 1 मई, 2026 को वापस लाया गया। कमलेश पारेख एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले में वॉन्टेड थे, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। जांचकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने कंपनी के अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर, कथित तौर पर विदेशी व्यवसायों के एक नेटवर्क के ज़रिए बैंक फंड का गलत इस्तेमाल किया; इस नेटवर्क में UAE में चल रहे कामकाज भी शामिल थे। इस मामले में वित्तीय लेन-देन में हेरफेर और बैंकिंग सिस्टम का गलत इस्तेमाल शामिल है। इंटरपोल रेड नोटिस के ज़रिए UAE में उनका पता लगाया गया और बाद में स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया और दिल्ली लाया गया, जहाँ उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने रविवार को कहा कि चामराजनगर ज़िले के हनूर रेंज में जंगल में आग लगने की घटना को लेकर दिन-ब-दिन कई संदेह पैदा हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मामले की सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है। विधान सौधा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि घटना की सच्चाई जानने के लिए बीजेपी ने पहले ही एक जांच समिति बनाई थी। एक विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा कि समिति द्वारा घटनास्थल का दौरा करने और जानकारी इकट्ठा करने के बाद, इस मामले को लेकर और भी गंभीर सवाल और संदेह पैदा हुए हैं। विजयेंद्र ने दावा किया कि हनूर मामले में शवों को जल्दबाजी में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था, लेकिन इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। विजयेंद्र ने कहा सरकार को यह बताना चाहिए कि रिपोर्ट क्यों जारी नहीं की जा रही है। इसे भी पढ़ें: N Biren Singh पहुंचे Delhi, Manipur के मौजूदा हालात पर BJP केंद्रीय नेतृत्व से होगी चर्चा उन्होंने सवाल किया पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट छिपाने की क्या ज़रूरत है? क्या लोगों को यह नहीं बताया जाना चाहिए कि रिपोर्ट में क्या है? रिपोर्ट जारी न करने से ही कई तरह के शक पैदा हो रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना की तस्वीरें दिखाते हुए विजयेन्द्र ने आरोप लगाया कि तस्वीरों में मृतक के कंधे पर बंदूक रखी हुई और बहुत करीब से गोली चलाई गई दिख रही है। इसी तरह, उन्होंने गर्दन के पिछले हिस्से पर बहुत करीब से गोली चलने के निशान के बारे में भी सवाल उठाया। इसे भी पढ़ें: P. Chidambaram का Rijiju पर पलटवार, पूछा- PM Modi ने विपक्ष को नहीं तो किसे कहा Dimagi Naxal? विजयेन्द्र ने सवाल किया, विशेषज्ञों की राय के अनुसार, यह दूर से यानी लंबी दूरी से गोली चलने का मामला नहीं लगता। करीब से गोली चलने की संभावना है। ऐसी जानकारी है कि पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने भी रिपोर्ट में इस पहलू का ज़िक्र किया है। तो फिर सरकार उस रिपोर्ट का खुलासा क्यों नहीं कर रही है? इसे भी पढ़ें: Karnataka: Dalit Funds Scam पर सियासी संग्राम तेज, BJP का Nagendra के इस्तीफे तक धरना उन्होंने कहा जब इन सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जाती है, तो शक पैदा होता है कि क्या यह सामान्य एनकाउंटर का मामला है या इसके पीछे कोई और वजह है। विजयेन्द्र ने कहा कि एनकाउंटर में मारे गए लोग आदतन अपराधी या लगातार अपराधों में शामिल रहने वाले लोग नहीं थे। उन्होंने मांग की कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि महिमादास कहाँ है, जो जंगल गया था।
Karnataka: Dalit Funds Scam पर सियासी संग्राम तेज, BJP का Nagendra के इस्तीफे तक धरना
कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कई दिनों से चल रहे राजनीतिक तनाव के बाद, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार को विधानसभा के अंदर अनिश्चितकालीन दिन-रात के धरने (विरोध-प्रदर्शन) की घोषणा की। पत्रकारों से बात करते हुए, अशोक ने कांग्रेस सरकार पर नागेंद्र को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नागेंद्र ने कर्नाटक दलित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन के करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में दलितों के 180 करोड़ रुपये लूटे हैं। इसे भी पढ़ें: N Biren Singh पहुंचे Delhi, Manipur के मौजूदा हालात पर BJP केंद्रीय नेतृत्व से होगी चर्चा अशोक ने कहा कि हम पिछले हफ़्ते से धरने पर हैं। हम विधानसभा में विरोध कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आ रहा है। वे नागेंद्र को बचा रहे हैं, जिसने दलितों के 180 करोड़ रुपये लूटे। इसलिए हमारी मांग है कि वह पैसा दलितों को मिले। यही हमारी मांग है। इसीलिए आज मैंने फ़ैसला किया... हमने दिन-रात धरना देने का फ़ैसला किया। अब से, इसी पल से, हम विधानसभा में दिन-रात का धरना शुरू कर रहे हैं, और यह तब तक चलेगा जब तक नागेंद्र इस्तीफ़ा नहीं दे देते। यह घटनाक्रम तब हुआ जब बीजेपी नेता नागेंद्र के इस्तीफ़े की मांग को लेकर राज्य विधानसभा में घुसने की कोशिश कर रहे थे। भारी पुलिस बल ने उनका रास्ता रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। इस गतिरोध के दौरान, कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए पुलिस बल का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि सत्ताधारी सरकार के पापों का घड़ा भर चुका है। इसे भी पढ़ें: अब तक Jammu में Party Meetings करती रही BJP ने पहली बार Muslim बहुल Kashmir में बैठक कर दिये बड़े सियासी संकेत इसी बीच, कर्नाटक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी जवाबी विरोध-प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में बीजेपी शामिल थी, न कि राज्य सरकार। विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के प्रमुख BJP और JD(S) नेताओं के चेहरे वाले मास्क पहने थे। कांग्रेस के ज़िला (बेंगलुरु वेस्ट) उपाध्यक्ष कुशल अभय गौड़ा ने ANI को बताया कि BJP भ्रष्टाचार और भ्रष्ट नेताओं से भरी हुई है। देखिए, कश्मीर से कन्याकुमारी तक, ऐसे चार मुख्यमंत्री हैं जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। फिर भी, उन्हें पद दिए जाते हैं; वे राज्यों में शासन कर रहे हैं। इसलिए उन लोगों से सवाल करने के बजाय, कर्नाटक में BJP के विधायक हमारी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। नागेंद्र ने पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया था। अब उन्हें फिर से प्रमोट किया गया है, यह जानने के बाद कि आरोप सच नहीं हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
N Biren Singh पहुंचे Delhi, Manipur के मौजूदा हालात पर BJP केंद्रीय नेतृत्व से होगी चर्चा
(फाइल फोटो के साथ)इंफाल, 24 अगस्त मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह राज्य की मौजूदा स्थिति पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात और चर्चा करने के लिए सोमवार सुबह नयी दिल्ली रवाना हुए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब राज्य में जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) को अद्यतन करने की मांग तेज हो रही है। इस मांग को लेकर ‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (जेएफडी) की अगुवाई में प्रदर्शन हो रहे हैं। जेएफडी का कहना है कि 1951 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गयी सही एनआरसी राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान करने में मदद करेगी। सिंह ने हाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की थी तथा उन्हें जनगणना से पूर्व एनआरसी को अद्यतन किये जाने की मांग के बारे में बताया था। भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘‘राज्य की मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए सिंह को केंद्रीय नेताओं ने बुलाया है।
Manipur में Assam Rifles काफिले पर 2021 के हमले का मुख्य आरोपी PLA उग्रवादी गिरफ्तार
सुरक्षा बलों ने मणिपुर के थौबल जिले से एक प्रतिबंधित संगठन के उग्रवादी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि यह उग्रवादी वर्ष 2021 में असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर किए गए हमले में कथित तौर पर शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि 28 वर्षीय आरोपी प्रतिबंधित संगठन पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में स्वयंभू कैप्टन है। उन्होंने बताया कि यह गिरफ्तारी गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार को थौबल जिले के लिलोंग उशोईपोकपी से की गई है। पुलिस के एक बयान में कहा गया, “पूछताछ के दौरान यह पता चला कि वह उस टीम का हिस्सा था जिसने 13 नवंबर 2021 को चूराचांदपुर के बेहियांग में 46 असम राइफल्स (एआर) के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) और छह अन्य लोगों पर घात लगाकर हमला किया था।”सेना की पूर्वी कमान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “गिरफ्तार व्यक्ति 2021 में चूराचांदपुर में कर्नल विप्लव त्रिपाठी, उनके परिवार के सदस्यों और सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए गए हमले के मामले का मुख्य आरोपी है। यह सफल अभियान उग्रवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने और मणिपुर में शांति व स्थिरता की रक्षा करने के लिए सुरक्षा बलों के संकल्प को दोहराता है।”चूराचांदपुर जिले में सेहकेन गांव के पास 13 नवंबर 2021 को उग्रवादियों ने 46 असम राइफल्स के सीओ त्रिपाठी के सुरक्षा काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कर्नल त्रिपाठी, उनकी पत्नी, उनके मासूम बेटे और अर्धसैनिक बल के चार जवानों की मौत हो गई थी।
Manipur CM Y Khemchand Singh बोले, बिना संवाद शांति और विकास संभव नहीं
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने शनिवार को कहा कि समुदायों के बीच संवाद के बिना राज्य में शांति नहीं हो सकती और इस बात पर जोर दिया कि शांति बहाल किए बिना विकास हासिल नहीं किया जा सकता। इंफाल में एक पार्किंग सुविधा के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘समुदायों के बीच संवाद के बिना शांति नहीं हो सकती।’’उन्होंने कहा कि विकास तभी संभव है, जब राज्य में शांति हो। खुमान लम्पक स्टेडियम में एक अन्य कार्यक्रम में, सिंह ने वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू और 2026 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल के अन्य पदक विजेताओं और प्रतिभागियों को राज्य और देश का नाम रोशन करने के लिए सम्मानित किया। उन्होंने 36वें और 37वें राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे। स्वर्ण पदक विजेताओं को 20-20 लाख रुपये, जबकि रजत पदक विजेताओं को 15-15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार और एक प्रमाण पत्र दिया गया।
Manipur में 'No NRC, No Census' आंदोलन क्यों पकड़ रहा रफ्तार? आखिर क्यों सड़कों पर उतर रही है जनता?
मणिपुर में जनगणना से पहले एनआरसी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है और राज्य सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। मणिपुर में बड़े प्रयासों के बाद शांति स्थापित हुई लेकिन नये आंदोलन के चलते प्रशासन के हाथ पांव फूल रहे हैं और जनगणना प्रशिक्षण का काम कुछ जिलों में रोकना पड़ गया है। देखा जाये तो मणिपुर में ‘नो एनआरसी, नो सेंसस’ का नारा अब केवल जनगणना रोकने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। इसके पीछे विस्थापन, जनसंख्या में बदलाव, भूमि अधिकार, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताएं हैं। तीन साल से अधिक समय से जातीय हिंसा की मार झेल रहे मणिपुर में जनगणना से पहले एनआरसी की मांग अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुकी है। बताया जा रहा है कि वर्तमान आंदोलन की सबसे बड़ी चिंता 40 हजार से अधिक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से जुड़ी है। चुराचांदपुर या मोरेह से विस्थापित कोई मैतेई परिवार आज इम्फाल के राहत शिविर में रह रहा है, तो जनगणना में उसकी वर्तमान स्थिति दर्ज हो सकती है। इसी तरह इम्फाल से विस्थापित कोई कुकी परिवार चुराचांदपुर में गिना जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जनगणना मणिपुर की वास्तविक जनसंख्या संरचना दर्ज करेगी या हिंसा और विस्थापन से अस्थायी रूप से बदले भूगोल को? यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनगणना के आंकड़े भविष्य में विकास योजनाओं, संसाधनों के आवंटन, परिसीमन, आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Manipur में 20 से 22 अगस्त तक बंद रहेंगे सभी स्कूल और कॉलेज, सरकार ने जारी किया आदेश इसी पृष्ठभूमि में कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन के नेतृत्व में आंदोलन तेज हुआ। 48 घंटे के बंद के दौरान कई घाटी जिलों में सड़कें जाम की गईं, प्रदर्शन हुए और मुख्यमंत्री व गृह मंत्री के पुतले जलाए गए। छात्रों और महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक जनरूप दिया। अब सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का भी ऐलान किया गया है, जबकि आवश्यक सेवाओं को इससे अलग रखा गया है। बढ़ते तनाव के बीच राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों को तीन दिन के लिए बंद करने का आदेश दिया है। बताया जा रहा है कि आंदोलन की मूल मांग है कि जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी एनआरसी को लागू या अपडेट किया जाए। देखा जाये तो यहां एनआरसी और जनगणना में अंतर समझना जरूरी है। जनगणना का उद्देश्य आबादी की गणना और उसकी सामाजिक-आर्थिक जानकारी जुटाना है, जबकि एनआरसी का संबंध भारतीय नागरिकों की पहचान से है। नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 14ए और 2003 के नियम इसके कानूनी ढांचे से जुड़े हैं। आंदोलन समर्थकों का तर्क है कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि राज्य की वैध जनसांख्यिकीय आबादी कौन है, उसके बाद ही नई जनगणना के आंकड़ों को भविष्य के प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों का आधार बनाया जाए। देखा जाये तो मणिपुर में यह मांग नई नहीं है। विधानसभा 2022 और फिर 2024 में एनआरसी लागू करने संबंधी प्रस्ताव पारित कर चुकी है। राज्य जनसंख्या आयोग का गठन भी इसी बहस की पृष्ठभूमि में हुआ। लेकिन सबसे विवादास्पद मुद्दा कट-ऑफ वर्ष का है। कई नागरिक संगठनों की मांग है कि 1951 को आधार बनाया जाए, जबकि राज्य मंत्रिमंडल ने इनर लाइन परमिट के संदर्भ में 1961 को ‘मूल निवासी’ निर्धारण का आधार स्वीकार किया था। यही अंतर अब आंदोलन की राजनीतिक धार को और तेज कर रहा है। जनसांख्यिकीय बदलाव की आशंका के पीछे पुराने आंकड़ों का भी हवाला दिया जा रहा है। हम आपको बता दें कि 1961 में मणिपुर की दशकीय जनसंख्या वृद्धि 35.04 प्रतिशत और 1971 में 37.52 प्रतिशत रही, जबकि 2011 में यह 24.50 प्रतिशत थी। समर्थकों का कहना है कि ऐसे बदलावों की गंभीर जांच होनी चाहिए। हालांकि यह भी उतना ही जरूरी है कि जनसंख्या वृद्धि को सीधे अवैध प्रवास का प्रमाण नहीं मान लिया जाए। हर दावा तथ्यों और प्रमाणों की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। यहीं यह बहस सबसे संवेदनशील हो जाती है। म्यांमार सीमा से लगे मणिपुर में अवैध प्रवास का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। लेकिन कुकी-जो समुदायों के म्यांमार के चिन समुदायों से जातीय संबंध भी हैं। इसलिए पूरे समुदाय को अवैध प्रवास की दृष्टि से देखना न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत हो सकता है, बल्कि पहले से विभाजित समाज में अविश्वास को और गहरा कर सकता है। एनआरसी पर बहस प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, किसी समुदाय के सामूहिक संदेहीकरण के आधार पर नहीं। उधर, अब 2027 की जनगणना इस विवाद का तात्कालिक केंद्र बन गई है। पहले चरण में सितंबर में हाउस लिस्टिंग प्रस्तावित है, जबकि फरवरी 2027 में जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक विवरण जुटाए जाने हैं। इसी बीच लिलोंग के एसडीओ द्वारा जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम रद्द किया जाना तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब ज्ञापन, प्रदर्शन और चेतावनियां पहले से मौजूद थीं, तब राजनीतिक संवाद पहले क्यों नहीं शुरू हुआ? इसी बीच विभिन्न समुदायों और संगठनों के नेताओं का एक 10 सदस्यीय दल दिल्ली रवाना हुआ है, ताकि केंद्र के समक्ष एनआरसी और जनगणना का मुद्दा उठाया जा सके। दिल्ली जाना जरूरी हो सकता है, क्योंकि एनआरसी और जनगणना जैसे फैसलों में केंद्र की भूमिका निर्णायक है। लेकिन हर बार स्थानीय संकट के बाद दिल्ली की ओर देखना राजनीतिक नेतृत्व की सीमाओं को भी उजागर करता है। देखा जाये तो जनगणना शासन, विकास और कल्याण के लिए अनिवार्य है। लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या लंबे विस्थापन, अधूरी पुनर्वास प्रक्रिया और गहरे जनसांख्यिकीय अविश्वास के बीच की गई जनगणना मणिपुर की सामान्य सामाजिक संरचना का वास्तविक चित्र पेश कर पाएगी? बहरहाल, सरकार को आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानने की बजाय उसके पीछे छिपे विश्वास के संकट को समझना होगा। एक प्रशिक्षण कार्यक्रम रद्द कर देना या दिल्ली में ज्ञापन सौंप देना पर्याप्त नहीं होगा। मणिपुर को तथ्य-आधारित एनआरसी बहस, विस्थापितों की सुरक्षित वापसी, जनगणना की विश्वसनीयता और सभी समुदायों की संवैधानिक सुरक्षा पर गंभीर राजनीतिक संवाद चाहिए। -नीरज कुमार दुबे
Manipur School Closed: एनआरसी विवाद के बीच मणिपुर में स्कूल-कॉलेज बंद, 22 अगस्त तक जारी रहेगा आदेश
School Closed: एनआरसी विवाद को लेकर बढ़ते तनाव के बीच मणिपुर सरकार ने स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का फैसला लिया है। राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान 22 अगस्त तक बंद रहेंगे।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.

