मणिपुर की पहाड़ियों में जारी हिंसा अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर देश की सीमा सुरक्षा और संप्रभुता तक पहुंचता दिख रहा है। हम आपको बता दें कि तंगखुल अजे कतमनाओ लॉन्ग यानी सदर्न तंगखुल स्टूडेंट्स यूनियन ने केंद्र और मणिपुर सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर भारत-म्यांमार सीमा से सटे नागा इलाकों के लोगों को सुरक्षा नहीं मिली, तो वे मजबूरी में पड़ोसी देशों से, यहां तक कि चीन से भी मदद मांगने पर विचार कर सकते हैं। संगठन के अध्यक्ष यारचूइसो काशुंग का कहना है कि लगातार हिंसा और असुरक्षा से लोग अब बुरी तरह थक चुके हैं। बताया जा रहा है कि यह महज राजनीतिक नाराजगी वाला बयान नहीं है। इसके पीछे हाल में हुई कई हत्याओं और हमलों का संदर्भ है। काशुंग ने तामेंगलोंग में 17 वर्षीय लियांगमेई नागा युवक, सेनापति में तीन माओ नागा नागरिकों और कामजोंग के पिलोंग में चार तंगखुल नागा नागरिकों की हत्या का हवाला देते हुए जवाबदेही की मांग की है। उनका आरोप है कि सीमावर्ती गांव लगातार असुरक्षित हैं और सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। काशुंग ने यह भी कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्य और उसके लोगों की रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए। इससे साफ है कि असंतोष अब केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की राजनीतिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे भी पढ़ें: मणिपुर हिंसा में किसी बड़े नेटवर्क की साजिश की हो जांच: N Biren Singh मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह इलाका भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। मई में भी कामजोंग के नामली, वांगली और चोरो जैसे तंगखुल गांवों पर सीमापार से हमलों के आरोप लगे थे। उस दौरान घरों में आग लगने और ग्रामीणों के जंगलों की ओर भागने की खबरें सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में म्यांमार स्थित सशस्त्र कुकी गुटों पर आरोप लगाए गए, हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मणिपुर में नागा-कुकी-जो तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार मई 2023 से शुरू हुई व्यापक जातीय हिंसा में अब तक 306 लोगों की मौत हुई है और 28 हजार से अधिक लोग अभी भी विस्थापित हैं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र ने मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को भी एक अक्टूबर से अगले छह महीने के लिए बढ़ाया है। यानी एक तरफ सुरक्षा कानून का विस्तार हो रहा है, दूसरी तरफ सीमा पर रहने वाला एक नागा संगठन यह कह रहा है कि उसे सुरक्षा का भरोसा ही नहीं मिल रहा। यही विरोधाभास इस पूरे संकट को और गंभीर बनाता है। यहां सवाल यह भी उठता है कि जब सीमा पर रहने वाला कोई समुदाय यह कहने लगे कि उसे अपने ही देश में सुरक्षा नहीं मिल रही और वह चीन जैसे पड़ोसी से मदद लेने की बात कर रहा है, तो इसे केवल एक बयान मानकर खारिज करना जोखिम भरा हो सकता है। चीन का नाम इस पूरे मामले को स्थानीय जातीय संघर्ष से उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति के सवाल तक पहुंचा देता है। अब गेंद केंद्र और मणिपुर सरकार के पाले में है। अब सिर्फ शांति की अपील से काम नहीं चलेगा, बल्कि सीमावर्ती नागरिकों की सुरक्षा, जवाबदेही और भरोसा बहाल करने की ठोस कार्रवाई ही इस असंतोष को रोक सकती है। इसके अलावा, मणिपुर जैसे संवेदनशील और लंबे समय से हिंसा झेल रहे क्षेत्र में ऐसे बयानों को केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया मानकर छोड़ देना भी ठीक नहीं होगा। सरकार और आम लोगों को यह भी देखना होगा कि कहीं तनाव, असुरक्षा और कथित असंतोष का इस्तेमाल बाहरी प्रभाव बढ़ाने के लिए तो नहीं किया जा रहा। हम आपको बता दें कि इस प्रकार के आरोप लगते रहे हैं कि विदेशी चंदे से संचालित होने वाले संगठन भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे रहते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 से 2023 के बीच मणिपुर की 43 संस्थाओं के विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम के पंजीकरण रद्द किए गए थे। इसीलिए चीन से मदद लेने की चेतावनी जैसे बयान के मामले में जांच जरूरी है। यह देखा जाना चाहिए कि क्या यह केवल स्थानीय समुदाय की वास्तविक सुरक्षा चिंता और सरकार पर दबाव बनाने का तरीका है? या फिर क्या कोई बाहरी संगठन, वित्तीय नेटवर्क या प्रतिबंधित उग्रवादी ढांचा इस असंतोष को अपने रणनीतिक हित के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है? मणिपुर में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के खिलाफ जांच एजेंसियां पहले से ही अलगाववादी गतिविधियों, अवैध धन जुटाने और भारत की संप्रभुता के खिलाफ हिंसक अभियान जैसे आरोपों की जांच करती रही हैं। बहरहाल, मणिपुर में चीन का नाम लेकर दिया गया ताजा बयान सरकार के लिए सतर्क रहने का संकेत भी माना जाना चाहिए। -नीरज कुमार दुबे
सोने-चांदी के जेवर चुराने वाले Bhavnagar के गिरोह का भंडाफोड़, Jhansi Railway Police ने दबोचा
गुजरात से उत्तर प्रदेश तक, सात रिश्तेदार एक परिवार की तरह साथ यात्रा करते थे ताकि किसी को शक न हो और वे ट्रेन यात्रियों से कैश, गहने और फ़ोन लूट सकें। झांसी रेलवे पुलिस ने मंगलवार को चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ़्तार किया और उनसे चोरी का सामान बरामद किया। ये सभी सात आरोपी रिश्तेदार हैं और गुजरात के भावनगर ज़िले के रहने वाले हैं। झांसी रेलवे पुलिस के अनुसार, आरोपी ट्रेनों में साथ यात्रा करते थे और ऐसे यात्रियों पर नज़र रखते थे जो सो गए हों या कहीं जाते समय अपने बैग बिना किसी की देखरेख के छोड़ गए हों। वे कैसे पकड़े गए? गैंग की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद, पुलिस की एक टीम ने झांसी रेलवे स्टेशन पर रेल की पटरियों के पास घेराबंदी की। इसे भी पढ़ें: UP पुलिस SI भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा चाबुक! नियुक्ति पत्र बांटने पर रोक, आंसर की के 'खेल' से फंसा 12 हजार युवाओं का भविष्य! मौके पर ही 7 आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। उनकी पहचान इस प्रकार है: अमर (45), मनोज (45), संगीता (42), ज्योति (42), दिलीप (34), उषा (32) और कृष्णा अमर (20)। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि वे झांसी से आगरा, मथुरा, हाथरस और बरेली जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाते थे, और कभी-कभी अयोध्या जाने वाली ट्रेनों को भी निशाना बनाते थे। आरोपियों के ख़िलाफ़ झांसी रेलवे पुलिस स्टेशन में चोरी के दो मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरे ज़िलों और राज्यों के रेलवे स्टेशनों पर उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। इसे भी पढ़ें: Manipur में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, PLA और PREPAK-Pro के चार उग्रवादी पकड़े गए महिलाओं के बैग मुख्य निशाने पर होते थे जांच में पाया गया कि आरोपी ट्रेन में यात्रा करते समय यात्रियों के बीच घुल-मिल जाते थे और महिलाओं के बैग और सामान पर खास नज़र रखते थे। पुलिस ने बताया कि जब कोई महिला यात्री सो जाती थी या उसका ध्यान कहीं और होता था, तो आरोपी इस मौके का फ़ायदा उठाकर उसका बैग खोलते थे और गहने व अन्य कीमती सामान चुरा लेते थे। पुलिस के अनुसार, चोरी किए गए गहनों को या तो बेच दिया जाता था या उनकी मंज़िल तक पहुँचा दिया जाता था। चोरी का सामान बरामद पुलिस ने आरोपियों से दो ब्रेसलेट, एक मंगलसूत्र, एक अंगूठी और लगभग 5,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस बरामद गहनों को पहले दर्ज चोरी के मामलों से जोड़ने और उन यात्रियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिनका यह सामान था। वे यह भी जाँच कर रहे हैं कि क्या आरोपी अन्य घटनाओं में भी शामिल हैं।
Manipur Violence: तीन समुदायों के बीच क्यों गहराया विवाद? जमीन और ST दर्जे से जुड़े मुद्दे समझिए
Manipur Violence: तीन समुदायों के बीच क्यों गहराया विवाद? जमीन और ST दर्जे से जुड़े मुद्दे समझिए
Manipur में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, PLA और PREPAK-Pro के चार उग्रवादी पकड़े गए
इंफाल, एक अक्टूबर मणिपुर में अलग-अलग संगठनों से जुड़े चार उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ (पीएलए) के दो सदस्यों को तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमा सीमा के पास शैबोल के निकट पकड़ा गया। उन्होंने कहा कि ये गिरफ्तारियां खुफिया जानकारी के आधार पर की गईं। ऐसी सूचना मिली थी कि पीएलए के दो सदस्य मिंथार कैंप से भाग गए हैं और उनके घुसपैठ करने की आशंका है। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सदस्यों की पहचान क्षेत्रिमायुम कृष्णा दास और खुनुमायुम संगर सिंह के तौर पर हुई है और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि बुधवार को इंफाल ईस्ट जिले के खुराई पुथिबा लीकाई से पीएलए के 46 वर्षीय सदस्य को गिरफ्तार किया गया। नेप्रम सिंहजीत सिंह कथित रूप से उग्रवादी संगठन में नए सदस्यों को भर्ती करने में शामिल था। पुलिस ने बताया कि जब वह नए भर्ती सदस्यों के उखरुल जाने के वास्ते बस टिकट का इंतजाम करने के लिए इलाके में आया था तभी उसे पकड़ लिया गया। उखरुल की सीमा म्यांमार से लगती है। एक अन्य अभियान में सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित संगठन ‘पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेइपक’ (प्रेपाक-प्रो) के स्वयंभू कैप्टन को गिरफ्तार किया। उस पर बिष्णुपुर जिले से चार किशोरों की भर्ती कर उन्हें म्यांमा भेजने में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने बताया कि संगठन के एक वरिष्ठ कैडर के म्यांमा से कामजोंग के रास्ते घुसपैठ करने की सूचना के आधार पर थौबल जिले के चंद्रखोंग में यह गिरफ्तारी की गई। उन्होंने बताया कि आरोपी की पहचान मोइरांगथेम बोबॉय सिंह के रूप में हुई है और उसे वाहनों की जांच के दौरान पकड़ा गया।
मणिपुर में तंगखुल नगा छात्रों और सिविल सोसाइटी ग्रुप ने चेतावनी दी है कि अगर भारत और राज्य सरकार नगा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती है, तो वे चीन से मदद मांगने पर मजबूर होंगे।
‘भारत से नहीं मिली सुरक्षा तो चीन से मांगेंगे मदद’, मणिपुर में नागा संगठन की खुली धमकी
मणिपुर में नागा नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी है। संगठन ने कहा कि अगर सरकार सुरक्षा देने में नाकाम रही तो चीन समेत पड़ोसी देशों से मदद लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में पहली बार हुए झरना सर्वेक्षण में 10 राज्यों के 14,468 जलस्रोतों की पहचान की गई है।
एनआईए की बड़ी कार्रवाई, मणिपुर आईईडी हमले में दूसरा आरोपी गिरफ्तार
New Delhi, 29 सितंबर . नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में 7 अप्रैल को एक घर पर हुए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमले के सिलसिले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है. इस हमले में दो नाबालिग बच्चों की मौत हो गई थी और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया ... Read more
Manipur के Loktak Lake पर बसा Floating Village Champu Khangpok पानी पर तैरता है
क्या आप कभी ऐसी जगह पर घूमने के लिए गए हैं, जहां पर कदम रखते ही जमीन डगमगाने लगे। आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप चल नहीं बल्कि तैर रहे हैं। ऐसा दृश्य सोचने पर एकदम सपने जैसा महसूस होता है। ऐसा ही कुछ मणिपुर का फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अनोखे और रोमांच से भरपूर जगह फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक के बारे में बताने जा रहे हैं। फ्लोटिंग विलेज है चंपू खंगपोक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में एक तैरता हुआ गांव है। जिसका नाम चंपू खंगपोक है। यह भारत की फेमस लोकटक झील पर बसा है, जोकि करीब 240 वर्ग किमी के आकार में फैली है। इस गांव के लोगों ने पानी के साथ जीना सीख लिया है, तभी तो आपको इस गांव में पानी पर चलते लोग, तैरते घर और द्वीप देखने को मिलेंगे। इसे भी पढ़ें: Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल जानें डगमगाती जमीन का रहस्य चंपू खंगपोक गांव के तैरने के पीछे कोई जादू नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे साइंस का कमाल है। इसके पीछे की वजह इस स्थान की प्रकृति और बायोमास का प्रोसेस है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव की जमीन किसी चट्टान या मिट्टी से नहीं बनी है, बल्कि यह फुम्डी नाम की प्राकृतिक जमीन है। फुम्डी जमीन जड़ों, सड़े-गले पौधों, मिट्टी और जैविक पदार्थों की परत से बनी होती है। वहीं साल-दर-साल जब इन सभी चीजों का जमावड़ा शुरू होकर एक जगह पर एकत्र होता है। तो इसकी परत से जमीन बन जाती है। यह जमीन इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि इन पर घरों तक का निर्माण किया जा सकता है। बदलती है घरों की लोकेशन यहां पर रहने वाले लोगों के घरों को फुमशंग कहा जाता है, जो अपनी लोकेशन को बदलते रहते हैं। क्योंकि यह घर जमीन पर नहीं बल्कि फुम्डी पर बने हैं, तो पानी के बहाव और हवा के दबाव की वजह से इनकी लोकेशन बदलती रहती है। यही कारण है कि चंपू खंगपोक दुनियाभर में अपनी इसी विशेषता की के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। देख सकेंगे तैरता हुआ नेशनल पार्क अनोखे गांव के अलावा आप लोकटक झील में तैरता हुआ कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क भी देख सकेंगे। यह पार्क विष्णुपुर जिले में हैं, जोकि लोकटक झील के दक्षिण पश्चिम में करीब 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र फैला है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर विलुप्त हो रहे संगाई हिरण रहते हैं, यह उनका अकेला आवास स्थल है।
Imphal Trip: Kangla Fort से लेकर Ima Market तक, Imphal में देखने लायक हैं ये प्रमुख स्थल
इंफाल एयरपोर्ट को देखकर आपका दिल खुश हो जाएगा। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा और बेहद खूबसूरत एयरपोर्ट इतना सहज है कि विमान से उतरकर पैदल ही आप भवन में दाखिल हुआ जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर इस शहर की अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा है। यहां के युवा जहां आधुनिक लिबास में नजर आता है, तो वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे अपने पारंपरिक परिधानों में दिखते हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। इमा मार्केट समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक शहर के बीचों-बीच बनी इमा मार्केट है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला बाजार। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं। यहां पर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे- ब्लाउज, शॉल, चादर, दुपट्टे, गमछे और भी कई तरह की चीजें हैं। वहीं मार्केट के एक हिस्से में सिर्फ पूजा का सामान है। इसे भी पढ़ें: Imphal Airport से अगवा पश्चिम बंगाल का युवक Bishnupur से सुरक्षित बचाया गया एक्सप्लोर करें कांगला किला इंफाल में दो जगहें आपको जरूर देखनी चाहिए। जिसमें पहला कांगला किला है और दूसरा लोकताक लेक है। कांगला फोर्ट या किला शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे स्थित है। मणिपुरी भाषा की भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। वहीं आज भी मणिपुर के निवासियों के लिए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां बनी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। इसे भी पढ़ें: मणिपुर के Kangpokpi में 7 ग्रामीणों को हिरासत में लेने पर बवाल, रिहाई के बाद शांत हुआ प्रदर्शन सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर इसके साथ ही आप सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर देख सकते हैं। सानामाही मेतेई वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी है। इसको मेतेई लोग बेहद शुभ और पवित्र स्थल मानते हैं। यहां पर आपको कई और दर्शनीय स्थल भी देखने को मिल जाएंगे, जैसे महाराज नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति, राजा बोधचंद्र की समाधि आदि। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर बनवाया गया है, जोकि इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। लोकताक लेक अगले दिन आप लोकताक लेक जा सकते हैं। यह पूरे नॉर्थ ईस्ट की सबसे बड़ी फ्रेश वाटर लेक है और इसकी खासियत झील के ऊपर आपको तैरते भूखंड दिखेंगे, जिनको स्थानीय भाषा में 'फुम्डी' कहते है। लोकताक झील मोइरांग के पास स्थित है, जहां INA का एक संग्रहालय है। इसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना से संबंधित वस्तुएं दिखाई जाती हैं। यहां से लौटने के दौरान आप इंडियन पीस मेमोरियल देख सकते हैं। रेड हिल के पास स्थित यह स्मारक उन भारतीय शहीदों की याद में बनाया गया है। जोकि सेंकेंड वर्ल्ड वॉर में आजाद हिंद फौज के तहत जापानी सेना के साथ मिलकर लड़े थे। इसी रेड हिल के पास उन्होंने ब्रिटिश सेना को हराया था। इंफाल में कई मंदिर, संग्रहालय, पार्क, झीलें, चिड़ियाघर और दर्शनीय स्थल हैं। अगर समय रहे, तो आप इन सबको भी देख सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Manipur के Kangpokpi में 6 ग्रामीणों की हिरासत पर हिंसक विरोध, बाद में हुए रिहा कुछ जरूरी बातें ट्रेन से इंफाल जाने के लिए गुवाहाटी या दीमापुर जाना होगा। यहां पर इंफाल के लिए बस मिल जाएगी। वहीं भारत के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा सीधे पहुंच सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान मणिपुर में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइप परमिट लेना जरूरी है। यह सुविधा अब ऑनलाइन भी मौजूद है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मिल जाएगी। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की कॉपी की जरूरत है। इसका शुल्क 100 रुपए है और विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होगी।
Travel Tips: मणिपुर की सांस्कृतिक सुंदरता का प्रतीक है Kangla Fort, जानें कैसे पहुंचे Imphal
इंफाल एयरपोर्ट पर उतरते ही खुला आसमान और हवा की ताजगी आपका मोह लेगी। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हवाई अड्डा इतना सहज है कि विमान से उतरने के बाद पैदल भवन में एंटर किया जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर बसा इंफाल शहर अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा के लिए जाना जाता है। जहां एक तरफ युवा आधुनिक लिबास में नजर आते हैं। वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे पारंपरिक आउटफिट में दिखाई देती हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उन महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। इमा मार्केट यह समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक है। शहर के बीचो-बीच इमा मार्केट स्थित है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला मार्केट। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं। इसे भी पढ़ें: IRCTC Kashi Tirtha Yatra Package: 17 हजार में वाराणसी और Ayodhya घूमने का बजट फ्रेंडली अवसर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे ब्लाउज, फनेक, दुपट्टे, शॉल, चादर, गमछे और अन्य कई तरह की चीजें शामिल हैं। वहीं एक हिस्से सिर्फ पूजा का सामान है। कांगला किला की सैर इसके अलावा इंफाल में आपको दो जगहें और देखनी चाहिए। जिनमें पहला कांगला किला और दूसरा लोकताल लेक है। कांगला फोर्ट शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे है। मेतेई भाषा में कांगला का अर्थ होता है जमीन का मुख्य भाग। मेतेई वर्तमान मणिपुर का मूल नाम है। मणिपुरी भाषा भी भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। आज भी मणिपुर के निवासियों के िए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां लगी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। यहां पर घूमने के लिए गोल्फ कार्ट की सुविधा मौजूद थी। लेकिन हमने पैदल घूमने का फैसला किया। इसके अंदर कई संग्रहालय हैं। कांगला संग्रहालय यहां प्राचीन शासकों से संबंधित वस्तुएं और इसका इतिहास देख सकते हैं। बोट म्यूजियम यहां पर प्राचीन शासकों की नावें और उनसे संबंधित जानकारी देखने को मिलेगी। पुरातत्व संग्रहालय पुरातत्व संग्रहालय को देखने से हमें मणिपुर के इतिहास के बारे में गहराई से जानकारी मिलती है। सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर सबसे सुंदर सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर लगे। सानामाही मेतेई वास्तुकला का उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी हुई है। जिसको मेतेई लोग शुभ और पवित्र मानते हैं। यहां पर कई और दर्शनीय स्थल है। जैसे - महाराजा नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति और राजा बोधचंद्र की समाधि है। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट में है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर का निर्माण कराया गया है। यह इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। जरूरी बातें ट्रेन से इंफाल पहुंचने के लिए आपको दीमापुर या गुवाहाटी जाना होगा। यहां से आप इंफाल के लिए बस ले सकते हैं। इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा भी यहां पर आप सीधे पहुंच सकते हैं। यहां पर जाने के लिए सिंतबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है। क्योंकि इस दौरान मौसम काफी सुहावना होता है। मणिपुर राज्य में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइन परमिट लेना जरूरी है। हालांकि यह सुविधा अब ऑनलाइन भी है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से भी इसको प्राप्त किया जा सकता है। यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मौजूद है। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की प्रति जरूरी है। इसका शुल्क 100 रुपए है। विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होती है।
Manipur Music Teacher Killed: Chongtham Vikram Singh को Delhi में पीट-पीटकर मारा, लोगों में गुस्सा!
आरोप है कि घर के बाहर शोर-शराबे को लेकर हुए विवाद के बाद उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के विरोध में मणिपुर के लोगों ने दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला…
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.

