निर्वाचन आयोग ने अगले साल होने वाले मणिपुर विधानसभा चुनाव के सुचारू संचालन के लिए 11 नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) की ओर से मंगलवार शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी कामेई अंगम रोमानुस को कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी योजना का प्रभारी नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हुंग्यो वोरशांग आबकारी विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे। अधिसूचना के अनुसार, कोंसाम बिंकू चुनावी खर्च की निगरानी का काम देखेंगे, जबकि खुमान्थेम डायना परिवहन प्रबंधन की नोडल अधिकारी होंगी। कंप्यूटर से संबंधित काम, साइबर सुरक्षा, संचार योजना और अन्य श्रेणियों के लिए भी नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। मणिपुर में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होने की संभावना है। निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य के सभी 16 जिलों में चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए पिछले सप्ताह इंफाल का दौरा किया था।
Manipur में Kuki-Naga समुदायों में बढ़ी दूरी, पड़ोसी गांवों में बंद हुआ संवाद
(सौरव रॉय बर्मन)सेनापति/कांगपोकपी (मणिपुर), 27 अक्टूबर मणिपुर में तीन साल से अधिक समय से जारी कुकी-मेइती जातीय संघर्ष का प्रभाव अन्य समुदायों पर भी पड़ रहा है और कभी साथ रहे पड़ोसी अब एक दूसरे से बात करने में भी कतरा रहे हैं। ताफू कुकी गांव के मुखिया लेंखोमांग चोंगलोई पडो़सियों के बीच टकराव का वर्णन करते हुए कहते हैं, ‘‘यह कारगिल जैसा है, भारत और पाकिस्तान जैसा।’’ताफू कुकी से थोड़ी दूरी पर ताफू लियांगमाई गांव है, जहां लियांगमाई नगा जनजाति के लोग रहते हैं। इन गांवों के नाम ही अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान बताते हैं। चोंगलोई के घर से कुछ दूरी पर आपी पमई रहते हैं। चोंगलोई का बेटा पमई का सहपाठी था और वह अक्सर उनके घर आया-जाया करते थे। पमई (35) कहते हैं, ‘‘हम साथ बड़े हुए। उस तरफ मेरे कई दोस्त हैं। मई से हमारी बातचीत बंद है। हम उनके व्हाट्सऐप स्टेटस देखते हैं, लेकिन जवाब नहीं देते। हालात बदल गए हैं।’’राजधानी इंफाल से लगभग 65 किलोमीटर दूर इन दोनों बस्तियों के बीच अब सुरक्षा अवरोधक लगा दिए गए हैं। इनके आगे हरे-भरे पहाड़ों और घाटियों में घर, खेत व ढलान एक-दूसरे के काफी करीब हैं। किसी बाहरी व्यक्ति के लिए यह पहचानना मुश्किल है कि एक गांव कहां खत्म होता है और दूसरा कहां शुरू होता है। यहां की शांत तस्वीर भ्रामक है। कांगपोकपी और सेनापति जिलों की सीमा पर स्थित इस इलाके में मई और जून में लोगों को बंधक बनाए जाने की घटना ने कुकी-नगा टकराव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया। इससे मणिपुर के जातीय संघर्ष में हिंसा का एक और मोर्चा खुल गया। सेनापति जिले में मुख्य रूप से नगा समुदाय के लोग रहते हैं, जबकि कांगपोकपी में कुकी-जो समुदाय की आबादी अधिक है। हालांकि, यहां नगा समुदाय के कई गांव भी हैं। मई 2023 से जारी हिंसा में 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, इस साल 31 अगस्त तक हिंसा में मारे गए लोगों की संख्या 306 थी। इसके बाद भी लोगों की हत्या की घटनाएं हुई हैं। इस साल 13 मई को कांगपोकपी जिले में घात लगाकर किए गए हमले में कुकी-जो समुदाय के चर्च के तीन नेताओं की हत्या कर दी गई। इसके बाद कांगपोकपी और पड़ोसी सेनापति जिले में नगा और कुकी ग्रामीणों का अपहरण किया गया। नगा प्रतिनिधियों ने कुकी ग्रामीणों को अगवा किए जाने को जवाबी कार्रवाई बताया। हालांकि, कई बंधकों को दो दिन बाद रिहा कर दिया गया, लेकिन छह नगा पुरुष लापता रहे। इस बीच, नगा संगठनों ने 14 कुकी पुरुषों को अपने कब्जे में रखा और लापता लोगों की रिहाई की मांग की। कुकी संगठनों ने इन लोगों को बंधक बनाए रखने से इनकार किया। नौ जून को करीब एक महीने तक बंधक रहने के बाद 14 कुकी पुरुषों को रिहा कर दिया गया। अगले दिन छह लापता नगा पुरुषों के शव बरामद हुए। लियांगमाई नगा परिषद के महासचिव बेनवांग बो कहते हैं, ‘‘उन्होंने हमारे लोगों का अपहरण किया था, इसलिए हमने सेनापति से उनके लोगों को अगवा किया।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनके लोगों का अच्छी तरह ख्याल रखा और आखिरकार उन्हें छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने हमारे छह लोगों की हत्या कर दी।’’मई 2023 के बाद करीब दो साल तक नगा समुदाय मुख्य रूप से मेइती-कुकी संघर्ष से दूर रहा। हालांकि, भूमि, बस्तियों और राजनीतिक आकांक्षाओं को लेकर कुकी और नगा समुदायों के बीच पुराने विवाद बने रहे। 1990 के दशक में इन विवादों ने हिंसक रूप ले लिया था। ताफू कुकी गांव में रहने वाले स्वयंसेवक मिनथांग को याद है कि नगा समुदाय के लोगों से उनकी दोस्ती थी। अब गांव के लोग अपनी बस्ती की रक्षा करने की बात करते हैं और स्वीकार करते हैं कि उनके पास स्वचालित हथियारों समेत बंदूकें हैं। उनका कहना है कि 1990 के दशक की हिंसा के दौरान कुकी समुदाय की पिछली पीढ़ी खुद को असहाय महसूस करती थी, लेकिन इस बार वे बेहतर तैयारी के साथ हैं। दूसरी ओर, अहजापौ एमके बताते हैं कि वह 27 अगस्त को कांगपोकपी जिले में इंफाल-तामेंगलॉन्ग रोड पर घात लगाकर किए गए हमले में बच गए थे। इस हमले में चार नगा पुरुष मारे गए थे। उनका कहना है कि वह जंगल में भाग गए और कई घंटे तक छिपे रहे। कुकी समुदाय के बारे में वह कहते हैं, ‘‘वे इस युद्ध को शुरू करने के लिए तैयार बैठे थे।’’दोनों पक्ष अपनी तैयारियों को सुरक्षा के लिए जरूरी बताते हैं और दूसरे पक्ष की तैयारियों को सुनियोजित आक्रामकता का सबूत मानते हैं। अहजापौ के लिए सवाल केवल अपने गांव की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। वह इस बात पर भी सवाल उठाते हैं कि कुकी समुदाय इस इलाके में अपना मूल निवास क्षेत्र होने का दावा कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘वे बाहरी लोग हैं। ताफू भी नगा नाम है, जिसमें उन्होंने कुकी जोड़ दिया है।’’
सुरक्षा बलों ने मणिपुर में कुकी उग्रवादी कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया, विदेश निर्मित हथियार भी जब्त
मणिपुर में सुरक्षा बलों ने चुराचांदपुर और इंफाल पूर्वी जिलों में अलग-अलग अभियानों के दौरान कुकी नेशनल फ्रंट (एमसी) के एक संदिग्ध कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया और विदेश में निर्मित हथियारों सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया।
Manipur के पूर्व इंफाल में CRPF और पुलिस का बड़ा एक्शन, 11 हथियार और हथगोले बरामद
मणिपुर के पूर्व इंफाल जिले में सुरक्षा बलों ने एक अभियान के दौरान 11 हथियार जब्त किए। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पुलिस के संयुक्त दल ने बोंगबल खोलेन पहाड़ी की तलहटी में अभियान चलाया और हथियार बरामद किए। पुलिस ने एक बयान में बताया कि जब्त हथियारों में एक ए1 राइफल, नौ एमएम की एक पिस्तौल, 12 बोर की दो दुनाली बंदूकें, 12 बोर की एक नाली वाली तीन बंदूकें और स्थानीय स्तर पर बनाई गई नौ एमएम की एक पिस्तौल शामिल हैं। अभियान के दौरान तीन हथगोले और गोला-बारूद भी जब्त किए गए। पुलिस ने बताया कि जब्त सामान थौबल डैम पुलिस थाने को सौंप दिया गया है। मणिपुर में तीन साल पहले जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से सुरक्षा बल तलाशी अभियान चला रहे हैं। घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष में कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। इस साल फरवरी से पहाड़ी जिलों में कुकी और नगा समुदायों के बीच झड़पों में कम से कम 50 लोगों की मौत हो चुकी है।
Nainital से Bhimtal तक, Lucknow के पास Summer Vacation के लिए बेहतरीन हैं ये 4 जगहें
उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों का शहर लखनऊ जितना अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है, उतना की अपनी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। ऐतिहासिक इमारतों से भरपूर लखनऊ शहर प्राचीन काल से ही तहजीब और अदब का नमूना पेश करता आया है। लखनऊ में आपको जितनी खूबसूरती इमारतें मिलेंगी, यहां की संस्कृति और खाना भी वैसा ही है। वैसे तो यह शहर अपने आप में बेहद खूबसूरत है, लेकिन गर्मियों में यह शहर काफी गर्म हो जाता है। ऐसे में अगर आप भी किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां पर सुकून के साथ-साथ छुट्टियों का भी पूरा मजा उठाया जा सके। तो हम आपको आज इस आर्टिकल के जरिए लखनऊ से करीब 400 किमी से कम दूरी पर स्थिति कुछ ऐसे हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि बेहद खूबसूरत हैं और आप यहां अपने परिवार के साथ जा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Manipur घूमने का प्लान है तो Imphal में Kangla Fort और Loktak Lake जरूर देखें नैनीताल लखनऊ से करीब 381 किमी दूर स्थित नैनीताल हिल स्टेशन बेहद खास और खूबसूरत है। यहां पर आप नैनी झील, नैना देवी मंदिर, टिफिन टॉप और स्नो व्यू पॉइंट जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। उत्तराखंड में कुमाऊं पहाड़ियों की तलहटी में बसा नैनीताल लखनऊ के पास सबसे ज़्यादा घूमे जाने वाले हिल स्टेशनों में से एक है। यहां पर पूरे साल मौसम सुहावना रहता है। वहीं यह जगह फैमिली ट्रिप के लिए बेस्ट है। भीमताल उत्तराखंड का भीमताल भी एक बेहद शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है। इस जगह की खासियत यहां का अनोखा और शांत माहौल है। यहां पर आप भीमताल झील, पैडल बोटिंग, बर्ड वाचिंग और प्रकृति के बीच सैर करने का मजा ले सकते हैं। लखनऊ से भीमताल की दूरी करीब 367 किमी है। यह जगह अपने आप में खूबसूरती को समेटे हुए है। भीमताल चीड़, ओक और झाड़ियों के घने जंगलों से घिरा है। इसके अलावा आप यहां पर कुछ फेमस मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं। चंपावत उत्तराखंड में बसा चंपावत सबसे कम आबादी वाले जिलों में शामिल है। यह उत्तराखंड राज्य के पूर्वी हिस्से है और बेहद खूबसूरत जिला है। यहां पर आपको प्रकृति, पौराणिक कथाएं, इतिहास और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है। कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय की शानदार पहाड़ियों से घिरे चंपावत के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आप भी अगर किसी नई जगह की तलाश में हैं, तो यह जगह आपके लिए है। लखनऊ से यह जगह करीब 367 किमी दूर है। नौकुचियाताल उत्तराखंड का नौकुचियाताल झील के किनारे बसा एक खूबसूरत और छोटा गांव है। यह जगह उन लोगों के लिए बेस्ट है, जोकि प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं और सुकून की तलाश में हैं। यह मुख्य रूप में यह जगह नौ कोनों वाली झील के लिए प्रसिद्ध है, जोकि करीब 1 किमी लंबी और 40 मीटर गहरी है। ऐसे में अगर आप लखनऊ में रहते हैं, तो इस बार की छुट्टियों में फैमिली के साथ यहां पर जा सकते हैं। लखनऊ से यहां की दूरी करीब 368 किमी है।
Travel Tips: Manipur घूमने का प्लान है तो Imphal में Kangla Fort और Loktak Lake जरूर देखें
इंफाल एयरपोर्ट बेहद खूबसूरत है। यहां की ताजी हवा और खुला आकाश आपका मन मोह लेगा। मणिपुरी शैली की हरी छतों वाला यह छोटा और बेहद खूबसूरत एयरपोर्ट इतना सहज है कि आप फ्लाइट से उतरकर पैदल ही भवन में जा सकते हैं। महानगरों की भागदौड़ से दूर इस शहर की अपनी खासियत है। ऐसे में अगर आप भी मणिपुर जाने का प्लान कर रही हैं। तो यह आर्टिकल आपके लिए है। क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप मणिपुर के इंफाल में कौन-कौन सी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इमा मार्केट शहर के बीचों-बीच इमा मार्केट है। यह महिलाओं यानी की माताओं द्वारा चलाया जाने वाला बाजार है। यह मार्केट सिर्फ महिलाओं द्वारा चलाई जाती है। आप यहां से फनेक, ब्लाउज, शॉल, दुपट्टे, चादर, गमछे और भी कई तरह की चीजें ले सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Bird Watching के शौकीनों के लिए बेस्ट हैं ये 5 जगहें, सर्दियों में दिखेंगे रंग-बिरंगे पक्षी कांगला किला की सैर आपको इंफाल में दो जगहें जरूर देखनी चाहिए। पहली कांगला किला और दूसरा लोकताल लेक। कांगला फोर्ट शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे स्थित है। मेतेई भाषा में इसका अर्थ है जमीन का मुख्य भाग। मणिपुरी भाषा भी भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं की लिस्ट में से एक है। यहां के राजवंश के शासकों की कांगला फोर्ट राजधानी हुआ करता था और आज भी मणिपुर के लोगों के लिए गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इस फोर्ट के मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां लगी हैं, जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। यहां पर घूमने के लिए गोल्फ कार्ट की सुविधा मौजूद है। मणिपुरी भाषा भी भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं की सूची में से एक है। कांगला फोर्ट राजधानी हुआ करता था और आज भी मणिपुर के निवासियों के लिए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके अलावा आप यहां पर कांगला संग्रहालय, बोट म्यूजियम और पुरातत्व संग्रहालय देख सकते हैं। सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर आप सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर को देख सकते हैं। सानामाही मेतेई वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी है, जिसको मेतेई लोग पवित्र और शुभ मानते हैं। यहां पर कई दर्शनीय स्थल है, जैसे राजा बोधचंद्र की समाधि और महाराजा नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति आदि। इसके अलावा यहां महाराजा नरसिंह द्वारा बनवाया गया श्री गोविंद जी मंदिर भी देख सकते हैं। लोकताक लेक आप इस दौरान लोकताल लेक भी जा सकते हैं। यह पूरे नॉर्थ ईस्ट की सबसे बड़ी और फ्रेश वाटर लेक है। इसकी खासियत है कि झील के ऊपर तैरते हुए भूखंड हैं, जिनको स्थानीय भाषा में 'फुम्डी' भी कहा जाता है। फुम्डी वनस्पति और अन्य जैविक तत्वों से बना एक बायोमास होता है, जो जमीन की शक्ल ले लेता है, लेकिन पानी के ऊपर तैरता रहता है। मोइरांग के पास लोकताक झील स्थित है, जहां आईएनए का संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना से संबंधित वस्तुएं देख सकते हैं। वहीं आप इंडियन पीस मेमोरियल देख सकते हैं। यह स्मारक उन भारतीय शहीदों की याद में बनाया गया है, जोकि सेकेंड वर्ल्ड वॉर में आजाद हिंद फौज के तहत जापानी सेना के साथ मिलकर लड़े थे। इस रेड हिल के पास उन्होंने ब्रिटिश सेना को हराया था। इन बातों का रखें खास ध्यान ट्रेन से इंफाल जाने के लिए आपको सबसे पहले दीमापुर या गुवाहाटी जाना होगा। यहां से इंफाल के लिए बस ले सकते हैं। इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा भी आप यहां पर जा सकते हैं। आप सितंबर से लेकर अप्रैल के लिए बीच का समय इंफाल जाने के लिए सबसे बेहतर होता है। क्योंकि इस दौरान यहां का मौसम सुहावना रहता है। मणिपुर राज्य में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से आपको इनर लाइन परमिट लेना जरूरी है। अब यह सुविधा ऑनलाइन मौजूद है। आप मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा आप इसको कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से भी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही आपको इंफाल एयरपोर्ट पर भी यह उपलब्ध है।
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आरोप है कि घर के बाहर शोर-शराबे को लेकर हुए विवाद के बाद उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के विरोध में मणिपुर के लोगों ने दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला…
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.

