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Manipur CM Y Khemchand Singh बोले, बिना संवाद शांति और विकास संभव नहीं

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने शनिवार को कहा कि समुदायों के बीच संवाद के बिना राज्य में शांति नहीं हो सकती और इस बात पर जोर दिया कि शांति बहाल किए बिना विकास हासिल नहीं किया जा सकता। इंफाल में एक पार्किंग सुविधा के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘समुदायों के बीच संवाद के बिना शांति नहीं हो सकती।’’उन्होंने कहा कि विकास तभी संभव है, जब राज्य में शांति हो। खुमान लम्पक स्टेडियम में एक अन्य कार्यक्रम में, सिंह ने वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू और 2026 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल के अन्य पदक विजेताओं और प्रतिभागियों को राज्य और देश का नाम रोशन करने के लिए सम्मानित किया। उन्होंने 36वें और 37वें राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे। स्वर्ण पदक विजेताओं को 20-20 लाख रुपये, जबकि रजत पदक विजेताओं को 15-15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार और एक प्रमाण पत्र दिया गया।

प्रभासाक्षी 22 Aug 2026 9:02 pm

Manipur CM ने Japan जाने वाले 16 युवाओं से कहा: अपनी संस्कृति और पहचान कभी न भूलें

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने शुक्रवार को कौशल प्रशिक्षण लेने के लिए जापान जाने वाले राज्य के युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों (संस्कृति, परंपराओं और राज्य से जुड़ाव) को न भूलें। कुल 16 युवा ‘राज्य आजीविका सशक्तीकरण एवं उद्यमिता’ (लाइवलीहुड एम्पावरमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप) पहल के तहत जापान के विभिन्न हिस्सों में कौशल प्रशिक्षण लेंगे। बातचीत के दौरान, सिंह ने युवाओं को सलाह दी कि वे कभी भी अपनी जड़ों को न भूलें और उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा याद रखें कि वे मणिपुरी हैं, भले ही वे पूर्वी एशियाई देश में रह रहे हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा एक विदेशी सरजमीं, संस्कृति, परंपरा और विकास से रूबरू होंगे, लेकिन उन्हें अपनी पहचान से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले मणिपुर के लोग गर्व से खुद को मणिपुरी बताते थे, लेकिन अब कई लोग ऐसा करने में हिचकते हैं, पर इस सोच को बदलने की जरूरत है। अभ्यर्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और मणिपुर सरकार के उपक्रम एसएलईई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। इन अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) अंतरराष्ट्रीय अकादमी से जापानी का प्रशिक्षण पूरा किया है और उन्हें जापान के विभिन्न हिस्सों (जिनमें तोक्यो और ओकिनावा शामिल हैं) में स्वास्थ्य सेवा तथा आतिथ्य (मेहमाननवाजी) क्षेत्र में नौकरियां मिली हैं।

प्रभासाक्षी 21 Aug 2026 4:50 pm

Manipur में 'No NRC, No Census' आंदोलन क्यों पकड़ रहा रफ्तार? आखिर क्यों सड़कों पर उतर रही है जनता?

मणिपुर में जनगणना से पहले एनआरसी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है और राज्य सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। मणिपुर में बड़े प्रयासों के बाद शांति स्थापित हुई लेकिन नये आंदोलन के चलते प्रशासन के हाथ पांव फूल रहे हैं और जनगणना प्रशिक्षण का काम कुछ जिलों में रोकना पड़ गया है। देखा जाये तो मणिपुर में ‘नो एनआरसी, नो सेंसस’ का नारा अब केवल जनगणना रोकने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। इसके पीछे विस्थापन, जनसंख्या में बदलाव, भूमि अधिकार, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताएं हैं। तीन साल से अधिक समय से जातीय हिंसा की मार झेल रहे मणिपुर में जनगणना से पहले एनआरसी की मांग अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुकी है। बताया जा रहा है कि वर्तमान आंदोलन की सबसे बड़ी चिंता 40 हजार से अधिक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से जुड़ी है। चुराचांदपुर या मोरेह से विस्थापित कोई मैतेई परिवार आज इम्फाल के राहत शिविर में रह रहा है, तो जनगणना में उसकी वर्तमान स्थिति दर्ज हो सकती है। इसी तरह इम्फाल से विस्थापित कोई कुकी परिवार चुराचांदपुर में गिना जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जनगणना मणिपुर की वास्तविक जनसंख्या संरचना दर्ज करेगी या हिंसा और विस्थापन से अस्थायी रूप से बदले भूगोल को? यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनगणना के आंकड़े भविष्य में विकास योजनाओं, संसाधनों के आवंटन, परिसीमन, आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Manipur में 20 से 22 अगस्त तक बंद रहेंगे सभी स्कूल और कॉलेज, सरकार ने जारी किया आदेश इसी पृष्ठभूमि में कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन के नेतृत्व में आंदोलन तेज हुआ। 48 घंटे के बंद के दौरान कई घाटी जिलों में सड़कें जाम की गईं, प्रदर्शन हुए और मुख्यमंत्री व गृह मंत्री के पुतले जलाए गए। छात्रों और महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक जनरूप दिया। अब सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का भी ऐलान किया गया है, जबकि आवश्यक सेवाओं को इससे अलग रखा गया है। बढ़ते तनाव के बीच राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों को तीन दिन के लिए बंद करने का आदेश दिया है। बताया जा रहा है कि आंदोलन की मूल मांग है कि जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी एनआरसी को लागू या अपडेट किया जाए। देखा जाये तो यहां एनआरसी और जनगणना में अंतर समझना जरूरी है। जनगणना का उद्देश्य आबादी की गणना और उसकी सामाजिक-आर्थिक जानकारी जुटाना है, जबकि एनआरसी का संबंध भारतीय नागरिकों की पहचान से है। नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 14ए और 2003 के नियम इसके कानूनी ढांचे से जुड़े हैं। आंदोलन समर्थकों का तर्क है कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि राज्य की वैध जनसांख्यिकीय आबादी कौन है, उसके बाद ही नई जनगणना के आंकड़ों को भविष्य के प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों का आधार बनाया जाए। देखा जाये तो मणिपुर में यह मांग नई नहीं है। विधानसभा 2022 और फिर 2024 में एनआरसी लागू करने संबंधी प्रस्ताव पारित कर चुकी है। राज्य जनसंख्या आयोग का गठन भी इसी बहस की पृष्ठभूमि में हुआ। लेकिन सबसे विवादास्पद मुद्दा कट-ऑफ वर्ष का है। कई नागरिक संगठनों की मांग है कि 1951 को आधार बनाया जाए, जबकि राज्य मंत्रिमंडल ने इनर लाइन परमिट के संदर्भ में 1961 को ‘मूल निवासी’ निर्धारण का आधार स्वीकार किया था। यही अंतर अब आंदोलन की राजनीतिक धार को और तेज कर रहा है। जनसांख्यिकीय बदलाव की आशंका के पीछे पुराने आंकड़ों का भी हवाला दिया जा रहा है। हम आपको बता दें कि 1961 में मणिपुर की दशकीय जनसंख्या वृद्धि 35.04 प्रतिशत और 1971 में 37.52 प्रतिशत रही, जबकि 2011 में यह 24.50 प्रतिशत थी। समर्थकों का कहना है कि ऐसे बदलावों की गंभीर जांच होनी चाहिए। हालांकि यह भी उतना ही जरूरी है कि जनसंख्या वृद्धि को सीधे अवैध प्रवास का प्रमाण नहीं मान लिया जाए। हर दावा तथ्यों और प्रमाणों की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। यहीं यह बहस सबसे संवेदनशील हो जाती है। म्यांमार सीमा से लगे मणिपुर में अवैध प्रवास का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। लेकिन कुकी-जो समुदायों के म्यांमार के चिन समुदायों से जातीय संबंध भी हैं। इसलिए पूरे समुदाय को अवैध प्रवास की दृष्टि से देखना न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत हो सकता है, बल्कि पहले से विभाजित समाज में अविश्वास को और गहरा कर सकता है। एनआरसी पर बहस प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, किसी समुदाय के सामूहिक संदेहीकरण के आधार पर नहीं। उधर, अब 2027 की जनगणना इस विवाद का तात्कालिक केंद्र बन गई है। पहले चरण में सितंबर में हाउस लिस्टिंग प्रस्तावित है, जबकि फरवरी 2027 में जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक विवरण जुटाए जाने हैं। इसी बीच लिलोंग के एसडीओ द्वारा जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम रद्द किया जाना तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब ज्ञापन, प्रदर्शन और चेतावनियां पहले से मौजूद थीं, तब राजनीतिक संवाद पहले क्यों नहीं शुरू हुआ? इसी बीच विभिन्न समुदायों और संगठनों के नेताओं का एक 10 सदस्यीय दल दिल्ली रवाना हुआ है, ताकि केंद्र के समक्ष एनआरसी और जनगणना का मुद्दा उठाया जा सके। दिल्ली जाना जरूरी हो सकता है, क्योंकि एनआरसी और जनगणना जैसे फैसलों में केंद्र की भूमिका निर्णायक है। लेकिन हर बार स्थानीय संकट के बाद दिल्ली की ओर देखना राजनीतिक नेतृत्व की सीमाओं को भी उजागर करता है। देखा जाये तो जनगणना शासन, विकास और कल्याण के लिए अनिवार्य है। लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या लंबे विस्थापन, अधूरी पुनर्वास प्रक्रिया और गहरे जनसांख्यिकीय अविश्वास के बीच की गई जनगणना मणिपुर की सामान्य सामाजिक संरचना का वास्तविक चित्र पेश कर पाएगी? बहरहाल, सरकार को आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानने की बजाय उसके पीछे छिपे विश्वास के संकट को समझना होगा। एक प्रशिक्षण कार्यक्रम रद्द कर देना या दिल्ली में ज्ञापन सौंप देना पर्याप्त नहीं होगा। मणिपुर को तथ्य-आधारित एनआरसी बहस, विस्थापितों की सुरक्षित वापसी, जनगणना की विश्वसनीयता और सभी समुदायों की संवैधानिक सुरक्षा पर गंभीर राजनीतिक संवाद चाहिए। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 21 Aug 2026 1:39 pm

Manipur में Assam Rifles ने जब्त किए 27 करोड़ के मादक पदार्थ, 6 तस्कर गिरफ्तार

मणिपुर के जिरीबाम जिले में छह संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार कर उनके पास से 27 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। एक बयान में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई। बयान के मुताबिक, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस ने बृहस्पतिवार को तुपीधार इलाके में संयुक्त अभियान चलाया। इसमें कहा गया कि बराक नदी के रास्ते संदिग्ध तस्करों की आवाजाही की सूचना मिलने पर असम राइफल्स के जवानों ने एक नाव को रोका, जिसके बाद उसमें सवार लोगों ने कथित तौर पर भागने की कोशिश की। बयान के अनुसार, संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके पास से 27 करोड़ रुपये मूल्य की 90,000 याबा गोलियां और 28.80 लाख रुपये की 48 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। इसके मुताबिक, गिरफ्तार लोगों की पहचान एल्बेथेल लुंगताऊ, पाना हमार, डेन्थर हमार, लालतिउंग्लियन हमार, लाल रामथार हमार और थौना हमार के रूप में हुई है। बयान में बताया गया है कि आरोपियों और जब्त मादक पदार्थों को जांच के लिए बोरो बेकरा पुलिस को सौंप दिया गया है।

प्रभासाक्षी 21 Aug 2026 11:45 am

एनआरसी की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बीच मणिपुर के कई जिलों में जनगणना प्रशिक्षण स्थगित

इंफाल, 20 अगस्त . मणिपुर के इंफाल घाटी क्षेत्र के कई जिला प्रशासनों ने राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अपडेट की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के मद्देनजर जनगणना 2027 के तहत गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को या तो स्थगित कर दिया है या रद्द कर दिया है. मणिपुर गृह ... Read more

डेली किरण 20 Aug 2026 8:38 pm

NRC नहीं तो जनगणना नहीं! मणिपुर में भारी बवाल, प्रदर्शनकारियों ने फूंके सीएम और गृह मंत्री के पुतले

Manipur NRC Demand Protest: मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर बुलाया गया 48 घंटे का राज्यव्यापी बंद बुधवार को समाप्त हो गया। हालांकि, बंद खत्म होते ही घाटी वाले जिलों के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और ...

वेब दुनिया 20 Aug 2026 1:13 pm

NRC की मांग पर मणिपुर में बवाल: इंफाल वेस्ट में टली जनगणना की ट्रेनिंग; 23 अगस्त तक सभी शिक्षण संस्थान बंद

NRC की मांग पर मणिपुर में बवाल: इंफाल वेस्ट में टली जनगणना की ट्रेनिंग; 23 अगस्त तक सभी शिक्षण संस्थान बंद-Uproar in Manipur over NRC demand Census training postponed in Imphal West All educational institutions closed

अमर उजाला 20 Aug 2026 12:04 pm

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल

बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.

बूमलाइव 14 Aug 2026 6:24 pm