Manipur में उग्रवादियों की गोलीबारी में 2 की मौत, CM आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन
मणिपुर में जंगल से जलावन की लकड़ियां इकट्ठा कर रहे दो लोगों की संदिग्ध उग्रवादियों ने सोमवार को कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शवों को यहां मुख्यमंत्री आवास के बाहर रखकर प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने बताया कि इंफाल पूर्वी और कांगपोकपी जिलों की सीमा पर जलावन की लकड़ियां इकट्ठा करने वालों के एक समूह पर उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर गोलीबारी किए जाने से चार अन्य लोग भी घायल हो गए। उन्होंने बताया कि कांगपोकपी के खोंगबल सुनुरोक उयोक में हुई इस घटना के बाद तीन लोग अब भी लापता हैं। यह स्थान इंफाल पूर्वी जिले के नोंगशुम गांव से कुछ मीटर की दूरी पर है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान अरुबाम रोनिल (35) और लैरेनलकपम इनाओबी (51) के रूप में हुई है। वे उन 16 लोगों में शामिल थे, जो सुबह करीब सात बजे जलावन की लकड़ियां इकट्ठा करने के लिए अपने गांव के पास की पहाड़ियों में गए थे। इसी दौरान घात लगाकर उनपर हमला किया गया। राज्य में मई 2023 से जारी हिंसा के विरोध में आक्रोशित स्थानीय लोग शवों के साथ राज्य की राजधानी पहुंचे। उन्होंने बाबूपारा स्थित मुख्यमंत्री आवास के मुख्य द्वार के बाहर शवों को रख दिया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह आवास पर मौजूद थे या नहीं, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले दागे, जिसके बाद शवों को जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि घायलों में शामिल के. देवन की हालत गंभीर बताई गई है।
इंफाल/नई दिल्ली/गुवाहाटी (नेशनल डेस्क): पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील राज्य मणिपुर (Manipur) में शांति लौटने की उम्मीदों को एक बार फिर से गहरा झटका लगा है। पिछले लंबे समय से जातीय संघर्ष की आग में झुलस रहे मणिपुर में कुछ दिनों की खामोशी के बाद अचानक फिर से तनाव (Manipur Tension) चरम पर पहुंच गया है। राज्य के सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों, विशेषकर जिरीबाम (Jiribam), कांगपोकपी, बिष्णुपुर और इंफाल घाटी से सटे जिलों में एक बार फिर से हिंसा और आगजनी का तांडव देखने को मिला है। जमीनी स्तर से आ रही ताजा और डराने वाली खबरों के मुताबिक, हथियारबंद बदमाशों और उपद्रवियों ने पिछले मात्र 36 घंटों के भीतर अलग-अलग इलाकों में करीब 28 घरों को पेट्रोल और ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग के हवाले कर दिया है। आसमान में उठते काले धुएं के गुबार और गोलियों की तड़तड़ाहट से एक बार फिर स्थानीय ग्रामीणों में दहशत फैल गई है और लोग अपनी जान बचाकर राहत शिविरों (Relief Camps) की तरफ भागने को मजबूर हैं। इस बीच मणिपुर पुलिस ने बयान जारी कर कहा है कि स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं और अतिरिक्त बलों की तैनाती कर दी गई है।36 घंटे में 28 आशियाने जलकर खाक, रात के अंधेरे में उपद्रवियों का तांडवमणिपुर से मिल रही ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा की यह ताजा लहर तब शुरू हुई जब कुछ अज्ञात हथियारबंद उग्रवादियों ने देर रात और तड़के सुबह संवेदनशील बफर जोन (Buffer Zone) के पास स्थित गांवों को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पिछले 36 घंटों के अंतराल में उपद्रवियों ने एक के बाद एक हमले करते हुए कुल 28 मकानों और कुछ दुकानों को फूंक दिया। इनमें से कई घर ऐसे थे जिन्हें पहले हुई हिंसा के बाद ग्रामीणों ने खाली कर दिया था, जबकि कुछ घरों में लोग रह रहे थे, जिन्होंने समय रहते जंगलों और सुरक्षा कैंपों में भागकर अपनी जान बचाई। आगजनी के साथ-साथ दोनों पक्षों के हथियारबंद समूहों के बीच कई राउंड की भारी गोलीबारी (Heavy Firing) भी हुई है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी घटनास्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा क्योंकि उपद्रवियों ने सड़कों पर अवरोध खड़े कर दिए थे। देखते ही देखते 28 परिवारों की जीवन भर की कमाई और उनके आशियाने राख के ढेर में तब्दील हो गए।मणिपुर पुलिस का बयान: सुरक्षा के किए गए हैं पुख्ता उपाय, चल रहा सर्च ऑपरेशनलगातार हो रही आगजनी और हिंसा की घटनाओं के बाद मणिपुर पुलिस (Manipur Police) और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई हैं। मणिपुर पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए सुरक्षा के तमाम कड़े उपाय (Strict Security Measures) किए गए हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जिस इलाके में 28 घरों को जलाया गया है, वहां असम राइफल्स (Assam Rifles), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), बीएसएफ (BSF) और राज्य पुलिस के कमांडो की संयुक्त टीमों को तुरंत रवाना किया गया है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और पहाड़ियों व जंगलों में छिपे उग्रवादियों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर 'सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन' (Combing Operation) चलाया जा रहा है। इसके अलावा, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के जरिए भी संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही है ताकि उपद्रवियों की किसी भी हरकत को तुरंत नाकाम किया जा सके।क्यों बार-बार भड़क रही है मणिपुर में हिंसा? नहीं थम रहा संघर्ष का दौरगौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से ही मैतेई (Meitei) और कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदायों के बीच शुरू हुआ जातीय संघर्ष आज तक पूरी तरह शांत नहीं हो पाया है। इस लंबे संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और 50,000 से अधिक लोग अपने ही राज्य में बेघर होकर राहत शिविरों में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। हाल के महीनों में जिरीबाम (जो असम की सीमा से सटा हुआ जिला है) और अन्य सीमावर्ती इलाकों में हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही तरफ के कट्टरपंथी और हथियारबंद समूह (Armed Militants) शांति बहाल नहीं होने देना चाहते। पुलिस शस्त्रागारों से लूटे गए अत्याधुनिक हथियार और सीमा पार से हो रही घुसपैठ सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब भी केंद्र और राज्य की तरफ से शांति वार्ता या सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश होती है, उपद्रवी तत्व ऐसी आगजनी और हमलों को अंजाम देकर माहौल को फिर से भड़का देते हैं।प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू और हाई अलर्ट, अफवाहों पर ध्यान न देने की अपीलताजा हिंसा और 28 घरों के जलाए जाने के बाद एहतियात के तौर पर प्रशासन ने प्रभावित जिलों में फिर से कर्फ्यू (Curfew) की पाबंदियों को सख्त कर दिया है और संवेदनशील स्थानों पर एक साथ चार या अधिक लोगों के जमा होने पर रोक लगा दी गई है। सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ वीडियो और फर्जी खबरें (Fake News) फैलाकर माहौल बिगाड़ने की साजिशों को रोकने के लिए साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। मणिपुर पुलिस ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति या समूह कानून को अपने हाथ में लेने या आगजनी करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे इलाके में भारी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और चप्पे-चप्पे पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान मुस्तैद हैं।
मणिपुर को फिर हिंसा की आग में झोंकने की साजिश?: थौबल में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प, गोलीबारी में एक की मौत manipur thoubal clash dead curfew imposed khangabok violence fire houses vehicles
Manipur के Kamjong में संदिग्ध उग्रवादियों ने फूंके 28 घर, एक की मौत
मणिपुर के कामजोंग जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 28 घरों में आग लगा दी गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध उग्रवादियों ने नगा और कुकी दोनों समुदायों की बस्तियों को निशाना बनाया, जिसके चलते आम लोगों को अपने घर छोड़कर जंगलों और पास के एक सैन्य शिविर में शरण लेनी पड़ी। म्यांमा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पिलोंग और स्किप गांवों में रविवार को अज्ञात उपद्रवियों ने नगा समुदाय के लोगों के कम से कम 13 खाली घरों में आग लगा दी। पुलिस के एक बयान में कहा गया है, “इस घटना के संबंध में जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए हैं।”म्यांमा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पिलोंग सहित नगा गांवों पर हुए पिछले हमलों के बाद, इन घरों को खाली कर दिया गया था। रविवार सुबह एक अलग घटना में, उखरुल जिले के लिटन थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 202 पर ग्वालताबी और महादेवा के बीच जा रही एक कार पर अज्ञात हथियारबंद बदमाशों ने गोलीबारी कर दी, जिसमें दो लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात कामजोंग जिले के चासाद गांव में कुकी समुदाय के कम से कम 15 घरों में आग लगा दी गई जिसके कारण बड़ी संख्या में आम लोगों को जंगलों और पास के सैन्य शिविर में शरण लेनी पड़ी। अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध उग्रवादियों ने शनिवार देर रात गांव पर हमला किया और घरों में आग लगा दी। इससे पहले दिन में भी संदिग्ध उग्रवादियों ने गांव पर हमला किया था, जिसमें कुकी समुदाय के एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य लोग गोली लगने से घायल हो गए। पुलिस ने एक बयान में कहा कि स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रभावित इलाके में असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और कामजोंग पुलिस की संयुक्त टुकड़ी तैनात की गई है। उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने चासाद में हुई हिंसा की निंदा की। उन्होंने कुकी समुदाय के लोगों की मौत पर दुख जताया और घायल ग्रामीण नेताओं एवं विस्थापित परिवारों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मकानों में आग लगाए जाने को ऐसा अपराध बताया, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। किपगेन ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों को 24 घंटे सतर्क रहने, आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा करने और इस घटना के जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे में लाने का निर्देश दिया है। एक अन्य घटना में शनिवार रात कामजोंग जिला मुख्यालय में दूसरे समुदाय के प्रतिद्वंद्वी हथियारबंद समूहों ने एक गांव पर हमला किया, जिसमें तांगखुल नगा समुदाय के तीन लोग गोली लगने से घायल हो गए। फरवरी से तामेंगलोंग, कामजोंग, उखरुल, कांगपोकपी और नोनी जिलों में कुकी और नगा समुदायों के बीच हुई जातीय झड़पों में 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और दर्जनों घर जला दिए गए हैं।
Manipur के Kamjong में हमले के बाद SP Tholu Rocky का तबादला
मणिपुर सरकार ने शनिवार को संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में एक कुकी नागरिक की मौत हो जाने के एक दिन बाद रविवार को कामजोंग जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के एक बयान के अनुसार, मणिपुर पुलिस सेवा के अधिकारी थोलू रॉकी का अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है। वह कामजोंग के पुलिस अधीक्षक का कार्यभार संभाल रहे थे। उन्हें मणिपुर पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया गया है। बयान में कहा गया कि इंफाल पश्चिम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (कानून-व्यवस्था) के पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी जय बैरेज कामजोंग के प्रभारी पुलिस अधीक्षक का कार्यभार संभालेंगे। यह तबादला शनिवार को नगा बहुल जिले के चासाद गांव में हुए हमले के एक दिन बाद किया गया। इस गांव में कुकी समुदाय के लोग रहते हैं। हमले में 36 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य घायल हो गए थे। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात संदिग्ध उग्रवादियों ने पहाड़ी गांव में 15 घरों में भी आग लगा दी। इस बीच, रविवार शाम कामजोंग जिला मुख्यालय में कई नगा महिलाओं ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक कुकी विधायक ने मुख्यमंत्री और राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम से अनुरोध किया था, जिसके बाद यह तबादला किया गया।
खोंगजारोन स्थित 5वीं बटालियन मणिपुर राइफल्स को 2026 के लिए ‘दूसरी सर्वश्रेष्ठ बटालियन’ चुना गया
इंफाल, 18 अक्टूबर . तामेंगलोंग के खोंगजारोन स्थित 5वीं बटालियन मणिपुर राइफल्स को मणिपुर Police विभाग की ओर से 2026 के लिए ‘दूसरी सर्वश्रेष्ठ बटालियन’ के पुरस्कार से…
दिल्ली में 6,000 जवान, मणिपुर में इतने क्यों नहीं? ममता-TMC का केंद्र से सवाल
दिल्ली में SIR विवाद और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का आह्वान किया था।
Manipur: में मेरा चाओरेल हौबा उत्सव हयिंग खोंगबल उपहोंग युमफाम में मनाया गया
11 अक्टूबर, रविवार: इम्फाल में हयिंग खोंगबल उपहोंग युमफाम में मेरा चाओरेल हौबा उत्सव मनाया गया, लाइनिंगथौ सनामही बोर्ड के सदस्य सचिव का बयान।
Manipur के Loktak Lake पर बसा Floating Village Champu Khangpok पानी पर तैरता है
क्या आप कभी ऐसी जगह पर घूमने के लिए गए हैं, जहां पर कदम रखते ही जमीन डगमगाने लगे। आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप चल नहीं बल्कि तैर रहे हैं। ऐसा दृश्य सोचने पर एकदम सपने जैसा महसूस होता है। ऐसा ही कुछ मणिपुर का फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अनोखे और रोमांच से भरपूर जगह फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक के बारे में बताने जा रहे हैं। फ्लोटिंग विलेज है चंपू खंगपोक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में एक तैरता हुआ गांव है। जिसका नाम चंपू खंगपोक है। यह भारत की फेमस लोकटक झील पर बसा है, जोकि करीब 240 वर्ग किमी के आकार में फैली है। इस गांव के लोगों ने पानी के साथ जीना सीख लिया है, तभी तो आपको इस गांव में पानी पर चलते लोग, तैरते घर और द्वीप देखने को मिलेंगे। इसे भी पढ़ें: Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल जानें डगमगाती जमीन का रहस्य चंपू खंगपोक गांव के तैरने के पीछे कोई जादू नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे साइंस का कमाल है। इसके पीछे की वजह इस स्थान की प्रकृति और बायोमास का प्रोसेस है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव की जमीन किसी चट्टान या मिट्टी से नहीं बनी है, बल्कि यह फुम्डी नाम की प्राकृतिक जमीन है। फुम्डी जमीन जड़ों, सड़े-गले पौधों, मिट्टी और जैविक पदार्थों की परत से बनी होती है। वहीं साल-दर-साल जब इन सभी चीजों का जमावड़ा शुरू होकर एक जगह पर एकत्र होता है। तो इसकी परत से जमीन बन जाती है। यह जमीन इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि इन पर घरों तक का निर्माण किया जा सकता है। बदलती है घरों की लोकेशन यहां पर रहने वाले लोगों के घरों को फुमशंग कहा जाता है, जो अपनी लोकेशन को बदलते रहते हैं। क्योंकि यह घर जमीन पर नहीं बल्कि फुम्डी पर बने हैं, तो पानी के बहाव और हवा के दबाव की वजह से इनकी लोकेशन बदलती रहती है। यही कारण है कि चंपू खंगपोक दुनियाभर में अपनी इसी विशेषता की के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। देख सकेंगे तैरता हुआ नेशनल पार्क अनोखे गांव के अलावा आप लोकटक झील में तैरता हुआ कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क भी देख सकेंगे। यह पार्क विष्णुपुर जिले में हैं, जोकि लोकटक झील के दक्षिण पश्चिम में करीब 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र फैला है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर विलुप्त हो रहे संगाई हिरण रहते हैं, यह उनका अकेला आवास स्थल है।
Imphal Trip: Kangla Fort से लेकर Ima Market तक, Imphal में देखने लायक हैं ये प्रमुख स्थल
इंफाल एयरपोर्ट को देखकर आपका दिल खुश हो जाएगा। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा और बेहद खूबसूरत एयरपोर्ट इतना सहज है कि विमान से उतरकर पैदल ही आप भवन में दाखिल हुआ जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर इस शहर की अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा है। यहां के युवा जहां आधुनिक लिबास में नजर आता है, तो वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे अपने पारंपरिक परिधानों में दिखते हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। इमा मार्केट समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक शहर के बीचों-बीच बनी इमा मार्केट है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला बाजार। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं। यहां पर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे- ब्लाउज, शॉल, चादर, दुपट्टे, गमछे और भी कई तरह की चीजें हैं। वहीं मार्केट के एक हिस्से में सिर्फ पूजा का सामान है। इसे भी पढ़ें: Imphal Airport से अगवा पश्चिम बंगाल का युवक Bishnupur से सुरक्षित बचाया गया एक्सप्लोर करें कांगला किला इंफाल में दो जगहें आपको जरूर देखनी चाहिए। जिसमें पहला कांगला किला है और दूसरा लोकताक लेक है। कांगला फोर्ट या किला शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे स्थित है। मणिपुरी भाषा की भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। वहीं आज भी मणिपुर के निवासियों के लिए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां बनी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। इसे भी पढ़ें: मणिपुर के Kangpokpi में 7 ग्रामीणों को हिरासत में लेने पर बवाल, रिहाई के बाद शांत हुआ प्रदर्शन सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर इसके साथ ही आप सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर देख सकते हैं। सानामाही मेतेई वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी है। इसको मेतेई लोग बेहद शुभ और पवित्र स्थल मानते हैं। यहां पर आपको कई और दर्शनीय स्थल भी देखने को मिल जाएंगे, जैसे महाराज नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति, राजा बोधचंद्र की समाधि आदि। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर बनवाया गया है, जोकि इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। लोकताक लेक अगले दिन आप लोकताक लेक जा सकते हैं। यह पूरे नॉर्थ ईस्ट की सबसे बड़ी फ्रेश वाटर लेक है और इसकी खासियत झील के ऊपर आपको तैरते भूखंड दिखेंगे, जिनको स्थानीय भाषा में 'फुम्डी' कहते है। लोकताक झील मोइरांग के पास स्थित है, जहां INA का एक संग्रहालय है। इसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना से संबंधित वस्तुएं दिखाई जाती हैं। यहां से लौटने के दौरान आप इंडियन पीस मेमोरियल देख सकते हैं। रेड हिल के पास स्थित यह स्मारक उन भारतीय शहीदों की याद में बनाया गया है। जोकि सेंकेंड वर्ल्ड वॉर में आजाद हिंद फौज के तहत जापानी सेना के साथ मिलकर लड़े थे। इसी रेड हिल के पास उन्होंने ब्रिटिश सेना को हराया था। इंफाल में कई मंदिर, संग्रहालय, पार्क, झीलें, चिड़ियाघर और दर्शनीय स्थल हैं। अगर समय रहे, तो आप इन सबको भी देख सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Manipur के Kangpokpi में 6 ग्रामीणों की हिरासत पर हिंसक विरोध, बाद में हुए रिहा कुछ जरूरी बातें ट्रेन से इंफाल जाने के लिए गुवाहाटी या दीमापुर जाना होगा। यहां पर इंफाल के लिए बस मिल जाएगी। वहीं भारत के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा सीधे पहुंच सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान मणिपुर में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइप परमिट लेना जरूरी है। यह सुविधा अब ऑनलाइन भी मौजूद है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मिल जाएगी। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की कॉपी की जरूरत है। इसका शुल्क 100 रुपए है और विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होगी।
Manipur Music Teacher Killed: Chongtham Vikram Singh को Delhi में पीट-पीटकर मारा, लोगों में गुस्सा!
आरोप है कि घर के बाहर शोर-शराबे को लेकर हुए विवाद के बाद उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के विरोध में मणिपुर के लोगों ने दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला…
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.

