'बिग बॉस 20' शुरू होने वाला है और शो के शुरू होने से पहले बीते दिनों घर के अंदर की झलक सामने आ गई है। वहीं, अब सलमान खान का लुक भी सामने आ चुका है।
मोहनलाल स्टारर L367 को लेकर बढ़ा सस्पेंस, कल सुबह 11:11 बजे डायरेक्टर विष्णु मोहन करेंगे बड़ी घोषणा
मोहनलाल की आगामी फिल्म 'L367' को लेकर दर्शकों में उत्साह है, जिसके निर्देशक विष्णु मोहन कल सुबह 11:11 बजे एक बड़ी घोषणा करेंगे।
मिर्जापुर: द मूवी ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन शानदार कलेक्शन किया। कालीन भैया और मुन्ना भैया का खास भौकाल थिएटर में भी देखने को मिला।
दो दशक पहले उदित नारायण (Udit Narayan) नेनिरहुआ (Nirahua) कोएक कल्ट भोजपुरी गीत दिया था जो अमर हो गया।
'कैमरा के सामने आने की जरूरत नहीं', किसपर गुस्सा हुए सलमान? Video
सलमान खान का बिग बॉस 20 के सेट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो अचानक किसी पर गुस्सा होते नजर आए. कुछ देर के लिए उनका पारा हाई दिखा, लेकिन जल्द ही वो नॉर्मल भी हो गए.
'जो चरित्रवान नहीं...', स्वरा का जौहर पर कमेंट सुन बौखलाए अनिरुद्धाचार्य
स्वरा भास्कर ने पद्मावत फिल्म के जौहर सीन की आलोचना कर विवाद खड़ा कर दिया है. इस पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने स्वरा को कड़ी प्रतिक्रिया दी है और जौहर को पवित्र चरित्र की रक्षा के रूप में बताया है.
'मिर्जापुर: द मूवी' आज यानी 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस मूवी को क्रिटिक्स और दर्शकों के शानदार रिव्यू मिल रहे हैं।
Hanuman Ansh Box Office Collection: नीम करोली बाबा पर बेस्ड फिल्म हनुमान अंश ने 29वें दिन फिर बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की है।
रिव्यू मिर्जापुर: द मूवी: रवि किशन और रसिका दुग्गल ने संभाली फिल्म, दोहराव और लंबाई बनी कमजोरी
‘मिर्जापुर: द मूवी’ अपने परिचित माहौल के साथ दर्शकों के सामने आती है—बंदूकें हैं, गालियां हैं, बदले की आग है और मिर्जापुर की गद्दी के लिए खूनी संघर्ष भी, सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि इस बार कहानी दर्शकों के लिए नया क्या लेकर आई है?.....
पवन सिंह को भोजपुरी इंडस्ट्री का पॉवर स्टार कहा जाता है। उनका यह वायरल गाना आज भी शादियों और पार्टियों में खूब बजता है।
अक्षय कुमार ने केबीसी शो पर सैफ अली खान और करीना कपूर की रिलेशनशिप के दिनों का एक मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि उन्होंने सैफ को सुबह 4-4:30 बजे करीना कपूर के कमरे से निकलते देखा था।
'बहुत तकलीफ होती थी...', बेवजह फिल्मों से निकाले जाने पर Tara Sutaria का छलका दर्द
टॉक्सिक एक्ट्रेस तारा सुतारिया (Tara Sutaria) ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में फिल्मों से बिना बताए हटाए जाने के दर्द को साझा किया।
हिंदी सिनेमा को वो अभिनेता जो एक डायलॉग के चलते इतने मशहूर हो गए कि आज भी लोग उन्हें 'कपटी लाला' के नाम से जानते हैं। जानिए उनके बारे में...
फिल्म 'दिल चाहता है' के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित पॉडकास्ट में आमिर खान, फरहान अख्तर और सैफ अली खान ने फिल्म से जुड़े कई दिलचस्प किस्से शेयर किए। सभी ने बताया की एक सीन के दौरान आमिर को 17 बार थप्पड़ खाना पड़ा था।
सत्यजीत और राज कपूर को कहा ना... अमिताभ के दौर में भी छाया ‘महानायक’
1950 के दशक में उत्तम कुमार ने खुद को बांग्ला सिनेमा के सबसे प्रमुख युवा अभिनेताओं में स्थापित कर लिया.इस दौरान उन्होंने कई बार लगातार हिट फिल्में दींलेकिन 1960 वह साल था, जब उन्हें ‘महानायक’ कहे जाने की शुरुआत हुई.उस साल वह नौ फिल्मों में नजर आए और बॉक्स ऑफिस पर सभी नौ फिल्में सफल रहीं.
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ईमानदारी के कायल हुए मनोज बाजपेयी, बोले- 'असली हीरो तो ऐसे बनते हैं'
बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी भी तुकाराम मुंडे के काम की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए।
मिर्जापुर द मूवी से पहले जरूरी है सीरीज देखना? यहां पढ़ें जवाब
Mirzapur The Movie: अली फजल और पंकज त्रिपाठी की फिल्म मिर्जापुर द मूवी सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। टिकट बुक करने से पहले जान लें कि फिल्म देखने के लिए सीरीज देखना जरूरी है या नहीं?
हैवान में असरानी का आखिरी शॉट देख भावुक हुए अक्षय, बोले- याद आएगी
बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार असरानी एक आखिरी बार अक्षय कुमार और सैफ अली खान की फिल्म हैवान में नजर आने वाले हैं. उन्हें ट्रिब्यूट देने के लिए अक्षय ने फिल्म से उनका आखिरी शॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया है.
100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट
मुंबई में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट किसी सामान्य क्विज शो के सेट जैसा नहीं है। यहां न दर्शकों के लिए अलग सीटिंग है और न ही एक कंटेस्टेंट हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देता है। इसके बजाय पूरे एरिना में देशभर से आए 100 प्रतिभागी एक साथ खेलते हैं। सेट के बीचों-बीच अनिल कपूर के लिए कोई पारंपरिक हॉट सीट भी नहीं है। वे इन 100 कंटेस्टेंट्स के बीच घूमते हुए सवाल पूछेंगे। करीब एक महीने में तैयार किए गए इस विशाल सेट पर 100 से ज्यादा लोगों ने काम किया। सेट डिजाइनर वर्षा जैन के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी चुनौती एक साथ 100 प्रतिभागियों के लिए तकनीकी व्यवस्था तैयार करना था। आंखों देखा हाल: 100 लोगों के लिए तैयार किया गया विशाल एरिना सेट में कदम रखते ही सबसे पहले इसका विशाल आकार ध्यान खींचता है। पूरा एरिना इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक साथ 100 प्रतिभागी बैठकर गेम खेल सकें। यहां पारंपरिक क्विज शो की तरह दर्शकों की भीड़ नहीं है। जो लोग दिखाई देंगे, वे सभी खेल का हिस्सा होंगे। सेट का पूरा डिजाइन प्रतिभागियों और होस्ट अनिल कपूर के बीच सीधा कनेक्शन बनाने के हिसाब से तैयार किया गया है। अनिल कपूर किसी एक कंटेस्टेंट के सामने बैठकर सवाल नहीं पूछेंगे, बल्कि 100 लोगों के बीच मौजूद रहकर उनसे सवाल करेंगे। अनिल कपूर के लिए नहीं है पारंपरिक ‘हॉट सीट’ सेट के बीच में एक खास सीट नजर आती है, जिसे देखकर पहली नजर में इसे हॉट सीट समझा जा सकता है। हालांकि, यह पारंपरिक हॉट सीट नहीं है। अनिल कपूर इस सीट पर बैठकर गेम होस्ट नहीं करेंगे। वे इसके आसपास घूमते हुए पूरे एरिना में मौजूद 100 प्रतिभागियों से सवाल करेंगे। यानी होस्ट और कंटेस्टेंट के बीच की दूरी को सेट डिजाइन के स्तर पर ही कम रखा गया है। छत पर लगी हैं 100 खास लाइट्स इस सेट की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक इसकी लाइटिंग है। वर्षा जैन के मुताबिक सेट की छत पर 100 लाइट पॉइंट लगाए गए हैं। हर लाइट एक प्रतिभागी के लिए है। गेम के दौरान किसी सवाल के जवाब के हिसाब से इन लाइट्स को प्रोग्राम किया जाएगा। सही और गलत जवाब के साथ लाइटिंग में बदलाव होगा, जिससे पूरे एरिना में गेम का असर दिखाई देगा। वर्षा जैन ने बताया कि 100 लोगों के लिए एक साथ कैमरा और लाइटिंग को प्रोग्राम करना तकनीकी तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण था। यही वजह है कि सेट तैयार होने के बाद भी करीब 10 दिन तक तकनीकी जांच और रिहर्सल चलती रही। एक महीने में तैयार हुआ सेट इस विशाल सेट को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। हालांकि, इसकी प्लानिंग इससे पहले ही शुरू हो गई थी और डिजाइन तैयार करने में करीब दो महीने लगे। वर्षा जैन के मुताबिक सेट पर काम करने के दौरान रोजाना 100 से ज्यादा लोग जुटे रहे। सेट तैयार होने के बाद कैमरों, लाइट्स और तकनीकी सिस्टम की लगातार जांच की गई, ताकि शूटिंग के दौरान 100 प्रतिभागियों के साथ गेम को आसानी से संचालित किया जा सके। वर्षा जैन ने बताया कि इंटरनेशनल फॉर्मेट होने के कारण सेट डिजाइन में तय गाइडलाइन का भी पालन करना था। इसके साथ भारतीय दर्शकों और शो की जरूरत के मुताबिक अपनी क्रिएटिव व्याख्या भी जोड़ी गई। ‘केबीसी’ जैसा दिखता है, लेकिन गेम बिल्कुल अलग पहली नजर में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट देखने पर इसे अमिताभ बच्चन के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ से जोड़ा जा सकता है, लेकिन दोनों के फॉर्मेट में बड़ा अंतर है। वर्षा जैन के मुताबिक ‘केबीसी’ में होस्ट एक समय में एक कंटेस्टेंट के साथ खेलते हैं और आसपास दर्शक मौजूद रहते हैं। ‘इंडिया के टॉप 1%’ में ऐसा नहीं है। यहां अनिल कपूर एक साथ पूरे 100 प्रतिभागियों के साथ खेलते हैं और सेट पर अलग से दर्शकों की मौजूदगी नहीं है। उनके मुताबिक शो की वाइब, होस्ट की एनर्जी, सवालों का अंदाज और सेट का लुक- सब कुछ ‘केबीसी’ से अलग रखा गया है। क्या है ‘इंडिया के टॉप 1%’ का कॉन्सेप्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ लोकप्रिय ब्रिटिश गेम शो ‘द 1% क्लब’ का भारतीय संस्करण है। शो में देशभर से अलग-अलग पेशों और बैकग्राउंड के 100 लोग एक साथ गेम खेलते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें इतिहास, भूगोल या किताबों से जुड़े सामान्य ज्ञान के सवालों पर ज्यादा जोर नहीं है। यहां कंटेस्टेंट की रीजनिंग, लॉजिक, ऑब्जर्वेशन, पैटर्न पहचानने की क्षमता, कॉमन सेंस और प्रेजेंस ऑफ माइंड को परखा जाता है। शो के कंसल्टेंट सिद्धार्थ बसु के मुताबिक इसका मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कितना किताबी ज्ञान हासिल किया है, बल्कि यह देखना है कि वह अपने सामने मौजूद चीजों को किस तरह समझता और उसका लॉजिक पकड़ता है। 90% से शुरू होकर 1% तक पहुंचता है खेल इस गेम का तरीका भी दूसरे क्विज शो से अलग है। शुरुआत में सवाल ऐसा होता है, जिसका जवाब देश के करीब 90% लोग दे सकते हैं। इसके बाद सवालों का स्तर धीरे-धीरे कठिन होता जाता है। इसके बाद 80%, 70%, 60% और आगे बढ़ते हुए सवालों का स्तर उस मुकाम तक पहुंचता है, जहां सिर्फ 1% लोग ही उसका सही जवाब दे पाते हैं। यही इस शो का मूल कॉन्सेप्ट है- देखना कि कौन-सा प्रतिभागी अपनी सोच और समझ के दम पर भारत के उस 1% लोगों में शामिल हो सकता है, जो सबसे मुश्किल सवाल का जवाब दे पाए। हर एपिसोड में 100 नए खिलाड़ी शो में हर एपिसोड 100 लोग गेम खेलते हैं। खास बात यह है कि इसमें प्राइज मनी का सफर भी इसी गेम के साथ आगे बढ़ता है। शो में प्रतिभागियों को पहले से एक लाख रुपए की राशि दी जाती है और गेम के दौरान वे आगे बढ़ते हुए बड़ी रकम जीत सकते हैं। शो में अधिकतम प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए तक है। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक हर एपिसोड में यह देखा जाएगा कि 100 में से कौन प्रतिभागी गेम में सबसे आगे तक पहुंच पाता है। इसमें किसी एक एपिसोड की रकम को अगले एपिसोड में ले जाने वाला रोलओवर सिस्टम नहीं है। ‘1%’ तक पहुंचने के लिए नहीं चाहिए बड़ी डिग्री इस गेम की एक खास बात यह भी है कि इसमें किसी खास शैक्षणिक डिग्री या प्रोफेशनल बैकग्राउंड की जरूरत नहीं है। सिद्धार्थ बसु ने अनिल कपूर को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को सफल होने के लिए जरूरी नहीं कि उसने इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की हो या यूपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी की हो। उनके मुताबिक शो इस बात पर केंद्रित है कि किसी व्यक्ति के भीतर मौजूद समझ, तर्क और सोचने की क्षमता उसे कितना आगे ले जा सकती है। अनिल कपूर को क्यों चुना गया होस्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ को अनिल कपूर होस्ट कर रहे हैं। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक जब उन्हें बताया गया कि अनिल कपूर जैसे अभिनेता और परफॉर्मर को शो से जोड़ा जा रहा है, तो उन्हें लगा कि वे इस कॉन्सेप्ट के लिए बिल्कुल सही उदाहरण हैं। उनका कहना है कि अनिल कपूर ने अपने करियर में लंबे समय तक मेहनत, लगन और अपने काम के प्रति समर्पण के दम पर अपनी पहचान बनाई है। इसलिए वे शो के उस विचार से भी मेल खाते हैं कि किसी व्यक्ति की सफलता सिर्फ उसकी डिग्री या किताबी ज्ञान से तय नहीं होती। सिद्धार्थ बसु ने यह भी बताया कि वे इस शो के निर्माता या निर्देशक नहीं हैं, बल्कि कंसल्टेंट के तौर पर इससे जुड़े हैं। अनिल कपूर के साथ पहले भी काम कर चुके हैं सिद्धार्थ बसु सिद्धार्थ बसु और अनिल कपूर का इससे पहले भी काम का अनुभव रहा है। उन्होंने बताया कि ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के दौरान भी अनिल कपूर से जुड़े ट्रेनिंग और शूटिंग के हिस्से में उनकी कंपनी और उन्होंने काम किया था। इसी अनुभव के कारण वे अनिल कपूर की तैयारी और काम के प्रति लगन से परिचित हैं। उनके मुताबिक अनिल कपूर जिस मेहनत और समर्पण के साथ किसी प्रोजेक्ट के लिए तैयारी करते हैं, वही इस शो के लिए भी दिखाई दे रहा है। शो में कैसे ले सकते हैं हिस्सा? ‘इंडिया के टॉप 1%’ में हिस्सा लेने के लिए शो की ओर से ओपन कॉल फॉर एंट्री का प्रोसेस रखा गया है। इच्छुक प्रतिभागी बताए गए माध्यम से रजिस्टर कर सकते हैं। इसके बाद उनसे कुछ सवाल पूछे जाते हैं। सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को अगले चरण के लिए चुना जाता है। इसके बाद स्टेज-बाय-स्टेज सिलेक्शन प्रोसेस के जरिए प्रतिभागी शो तक पहुंचते हैं। शो से जुड़े नियम और सिलेक्शन की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती है। 19 सितंबर से शुरू होगा शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ का प्रीमियर 19 सितंबर 2026 से रात 8 बजे स्टार प्लस पर होगा। शो को जियोहॉटस्टार पर भी देखा जा सकेगा। कुल मिलाकर यह शो सामान्य क्विज शो से अलग इस सवाल पर केंद्रित है कि 100 लोगों में से कौन अपनी सोच, लॉजिक और ऑब्जर्वेशन के दम पर उस 1% तक पहुंच सकता है। वहीं इसका विशाल एरिना, 100 प्रतिभागियों के लिए तैयार की गई लाइटिंग और उनके बीच घूमते हुए गेम होस्ट करने वाले अनिल कपूर इसे टीवी के दूसरे क्विज शो से अलग लुक देते हैं।
सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे 'द टक शॉप एट सेवियोज' का वीडियो शुक्रवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है। सलमान ने अपने मशहूर “इट्स डन, ब्रो” कैचफ्रेज को भी अलग अंदाज में इस्तेमाल किया। उन्होंने मैसेज के आखिर में “इट्स डन, सिस” लिखा। सलमान की चेतावनी महाराष्ट्र में खाने-पीने की जगहों पर बढ़ी निगरानी के बीच आई। पिछले कुछ महीनों में FDA ने फूड सेफ्टी, हाइजीन और लाइसेंस से जुड़े उल्लंघनों को लेकर रेस्टोरेंट्स और दूसरे संस्थानों पर जांच और कार्रवाई तेज की है। तुकाराम मुंढे ने 26 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA कमिश्नर का पद संभाला था। उनके पद संभालने के बाद विभाग ने रेस्टोरेंट्स, होटल्स, क्लब्स, फास्ट-फूड आउटलेट्स और संस्थागत किचन में जांच बढ़ाई है। मुंढे के कमिश्नर बनने के शुरुआती दो महीनों में FDA ने 3,000 से ज्यादा जांच कीं। करीब 165 फूड संस्थानों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। इस कार्रवाई में खराब हाइजीन, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और जरूरी लाइसेंस के बिना कारोबार करने जैसी शिकायतों पर ध्यान दिया गया। मुंढे के सख्त रवैये के चलते सोशल मीडिया पर उन्हें रियल-लाइफ सिंघम का नाम भी मिला है। स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों को संबोधित करते हुए मुंढे ने फूड सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ की जरूरत पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “मेरा मानना है कि स्वस्थ देश के लिए स्वस्थ लोगों का होना जरूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए अच्छा खाना और दवाइयां जरूरी हैं। इसके लिए रेगुलेटर्स को इस लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए।” FDA ने शाहरुख, अजय और टाइगर को नोटिस भेजा गौरतलब है कि महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इन तीनों अभिनेताओं ने 'विमल इलायची' का विज्ञापन किया था। इस मामले में अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को अपना जवाब भेज दिया। वहीं, शाहरुख खान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। तीनों एक्टर्स को नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया था। 'सीएनएन-न्यूज18' की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटर को अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के जवाब मिल गए हैं। शाहरुख खान का जवाब अभी तक नहीं मिला है और FDA उनके रिप्लाई का इंतजार कर रहा है। रेगुलेटर ने सवाल उठाया है कि क्या यह विज्ञापन विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के बराबर हो सकता है। FDA का कहना है कि भले ही विज्ञापन इलायची प्रोडक्ट के लिए है, लेकिन इसकी ब्रांडिंग पान मसाला ब्रांड से अप्रत्यक्ष कनेक्शन बना सकती है। तीनों एक्टर्स से मांगे गए थे सबूत FDA ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ से इस बात के सबूत मांगे थे कि उन्होंने विमल इलायची का जो विज्ञापन किया है, वह पूरी तरह अलग प्रोडक्ट है। इसके साथ ही उनसे यह भी साबित करने को कहा गया था कि यह विज्ञापन बैन किए गए विमल पान मसाला और तंबाकू के दूसरे प्रोडक्ट्स के प्रमोशन के लिए बनाया गया सरोगेट विज्ञापन नहीं है। FDA ने उनसे विज्ञापन से जुड़े एग्रीमेंट, कैंपेन ब्रीफ और अन्य दस्तावेज भी मांगे थे। शाहरुख ने जवाब नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ का जवाब मिलने के बाद अब FDA शाहरुख खान के जवाब का इंतजार कर रहा है। शाहरुख की तरफ से जवाब नहीं मिलने पर FDA क्या कार्रवाई करेगा, यह अभी साफ नहीं है। जानकारी के मुताबिक, समय सीमा तक जवाब न देने या जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भ्रामक खाद्य विज्ञापन के मामले में FSS एक्ट की धारा 53 के तहत 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने दिवंगत अभिनेता असरानी की याद में एक वीडियो शेयर किया है जो उनकी फिल्म हैवान का है।
आज के समय में नेपोटिज्म बॉलीवुड में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, लेकिन हाल ही में जीनत अमान ने बताया कि ये उस दौर में भी था, जब वह इंडस्ट्री में आईं थीं।
भारतीय संगीत जगत और बॉलीवुड के सुनहरे इतिहास में कुछ ऐसे नायाब गीत दर्ज हैं, जिनकी चमक और जिनकी मिठास समय के गुजरने के साथ-साथ और अधिक गहरी होती जाती है। हिंदी सिनेमा के फलक पर जब भी सबसे बेहतरीन, सुरीले और सदाबहार रोमांटिक गानों की बात होती है, तो दर्शकों और श्रोताओं के जहन में कुछ चुनिंदा नाम ही आते हैं। भारतीय संगीत के आकाश में एक ऐसे ही कालजयी और अमर गीत की चर्चा आज भी हर संगीत प्रेमी की जुबान पर होती है, जिसे संगीत की दुनिया के महान और बहुमुखी प्रतिभा के धनी गायक किशोर कुमार (Kishore Kumar) के सुयोग्य पुत्र अमित कुमार (Amit Kumar) ने अपनी जादुई आवाज से सजाया था। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए जब अमित कुमार ने पार्श्व गायन की दुनिया में कदम रखा, तो उनके पहले ही प्रयास ने एक ऐसा इतिहास रच दिया जिसकी गूंज आज पूरे पचास साल बाद भी उतनी ही शिद्दत के साथ सुनाई देती है। यह गाना सिर्फ एक धुन या कंपोजिशन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संगीत प्रेमियों के लिए एक ऐसा जज्बात बन चुका है, जो हर दौर के प्रेमियों के दिलों पर राज करता आ रहा है। सत्तर के दशक के उस सुहाने दौर में जब दिग्गज गायकों का एकछत्र साम्राज्य हुआ करता था, तब एक युवा गायक द्वारा गाया गया यह पहला ही गाना रातोंरात देश भर के रेडियो स्टेशनों की सबसे बड़ी शान बन गया और इसने लोकप्रियता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे।सत्तर के दशक के स्वर्णकाल में जब मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के बीच चमकी अमित कुमार की किस्मतबात अगर सत्तर के दशक की करें, तो वह भारतीय सिनेमा और संगीत का स्वर्णकाल माना जाता है, जब चारों तरफ मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मन्ना डे और मुकेश जैसे पाबंदियों और स्थापित दिग्गजों की भारी-भरकम आवाजें गूंजती थीं। उस दौर में किसी नए गायक के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाना और संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बनाना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं था। ऐसे कड़े और प्रतिस्पर्धी माहौल के बीच जब अमित कुमार ने अपनी सुरीली पारी की शुरुआत की, तो उन्होंने संगीत प्रेमियों को एक ऐसा तोहफा दिया जिसने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार गायक की श्रेणी में ला खड़ा किया। उनका वह पहला गाना इतना ज्यादा लोकप्रिय हुआ कि देखते ही देखते वह उस दौर के सबसे चर्चित और रोमांटिक गानों की सूची में सबसे ऊपर शुमार हो गया। रेडियो पर इस गाने की फरमाइशों का तांता लग गया था और हर आयु वर्ग के लोग इस धुन के दीवाने हो गए थे। अमित कुमार की उस अनूठी गायकी और उनके द्वारा बिखेरे गए जादू ने यह साबित कर दिया था कि वे न सिर्फ एक महान पिता की संतान हैं, बल्कि उनमें खुद की एक असाधारण और मौलिक संगीत प्रतिभा कूट-कूट कर भरी हुई है, जिसने आगे चलकर भारतीय फिल्म संगीत को कई और अनमोल रत्न दिए।'बड़े अच्छे लगते हैं' गाने का कल्ट स्टेटस: रेडियो की शान से लेकर छोटे परदे के सुपरहिट धारावाहिक तक का सफरफिल्मी पर्दे पर फिल्माया गया वह जादुई और सदाबहार गीत और कोई नहीं बल्कि भारतीय संगीत इतिहास का सबसे पसंदीदा और सुकून देने वाला गाना 'बड़े अच्छे लगते हैं' (Bade Achhe Lagte Hain) है। साल 1976 में रिलीज हुई प्रतिष्ठित और कलात्मक फिल्म 'बालिका वधू' का यह गाना सिनेमाई इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गया है। इस गीत के मुखड़े 'बड़े अच्छे लगते हैं बड़े अच्छे लगते हैं... क्या, ये धरती ये नदिया ये रैना और तुम' ने जो लोकप्रियता उस समय हासिल की थी, उसका दायरा समय के साथ और अधिक विस्तृत होता चला गया। इस गाने के कल्ट स्टेटस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज के दशकों बाद साल 2011 में जब इसी नाम से एक बड़ा और बेहद लोकप्रिय टीवी सीरियल 'बड़े अच्छे लगते हैं' बनाया गया, तो उसके टाइटल ट्रैक के रूप में भी इसी ओरिजिनल गीत और इसकी धुन का इस्तेमाल किया गया। हैरानी की बात यह रही कि चाहे वह सत्तर का दशक हो, नब्बे का दौर हो या फिर आधुनिक इक्कीसवीं सदी का टेलीविजन युग हो, हर नए वर्जन और हर रूप में यह गाना सुपरहिट साबित हुआ। श्रोताओं की दीवानगी का आलम यह था कि उस दौर के सबसे मशहूर रेडियो शो 'बिनाका गीतमाला' ने भी इस खूबसूरत गीत को वर्ष 1977 का 26वां सबसे अधिक लोकप्रिय और डिमांडेड फिल्मी गाना घोषित किया था, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर था।आरडी बर्मन की जादुई धुन, आनंद बक्शी के अमर बोल और सचिन-रजनी की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने बनाया इतिहासकिसी भी गाने को कल्ट और सदाबहार बनाने के पीछे एक पूरी टीम की अद्भुत रचनात्मकता और मेहनत छिपी होती है, और इस मास्टरपीस के साथ भी कुछ ऐसा ही जुड़ा हुआ है। इस गीत की रूह को छू लेने वाली और कानों में रस घोलने वाली जादुई धुन भारतीय संगीत जगत के महान संगीतकार राहुल देव बर्मन यानी आरडी बर्मन (RD Burman), जिन्हें प्यार से 'पंचम दा' कहा जाता है, ने तैयार की थी। पंचम दा के संगीत निर्देशन ने इस गाने को एक ऐसा शाश्वत ठहराव और मेलोडी दी जो सुनने वाले के दिल की गहराइयों में उतर जाती है। इसके साथ ही, हिंदी सिनेमा के दिग्गज और बेजोड़ गीतकार आनंद बक्शी ने इस गीत के ऐसे अमर बोल लिखे, जिन्होंने प्रकृति के सौंदर्य और इंसानी प्रेम के बीच के बेहद पवित्र और खूबसूरत रिश्ते को शब्दों की अद्भुत माला में पिरो दिया। परदे पर इस गीत को अभिनेता सचिन पिलगांवकर और अभिनेत्री रजनी शर्मा पर फिल्माया गया था, जिनकी मासूम और सधी हुई अदाकारी ने इस गाने की भावनाओं को चार चांद लगा दिए थे। अमित कुमार की स्थिर, भावुक और सुरीली आवाज ने आनंद बक्शी के शब्दों और पंचम दा की धुनों को ऐसा प्राण दिया कि आज पचास साल बीत जाने के बाद भी यह गाना उतना ही ताजा, जीवंत और प्रासंगिक लगता है जितना यह अपने रिलीज के दिन था। यह गीत इस बात का जीता-जागता सबूत है कि सच्ची कला कभी पुरानी नहीं होती, और आने वाली कई पीढ़ियां भी इस धुन पर झूमती और प्यार के अहसास में खोती रहेंगी।
भारतीय सिनेमा और देश के पारंपरिक त्योहारों का रिश्ता हमेशा से बेहद गहरा और भावनात्मक रहा है। अगर हम बॉलीवुड के दशकों पुराने इतिहास पर नजर डालें, तो फिल्मों में होली की मस्ती, दिवाली की जगमगाहट, ईद की सेवइयां और लोहड़ी की रौनक को हमेशा से ही बहुत ही भव्य और विशाल पैमाने पर परदे पर उकेरा जाता रहा है। लेकिन इन सबके बावजूद, हिंदी फिल्म जगत के इतिहास में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था कि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के सबसे बड़े, पवित्र और लोकआस्था के महापर्व 'छठ पूजा' की अलौकिक भव्यता, उसकी कठिन मान्यताओं और पारंपरिक अनुष्ठानों को इतने बड़े स्तर पर बड़े पर्दे पर दिखाया गया हो। अब जाकर यह सूखा खत्म होने जा रहा है और सिनेमाप्रेमियों को एक बिलकुल नया और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध अनुभव मिलने वाला है। बहुप्रतीक्षित सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' के मेकर्स ने अपनी इस फिल्म में छठी मैया की पूजा-अर्चना और इसके सख्त नियमों को बेहद खूबसूरती के साथ फिल्माया है। फिल्म के टीजर और गानों में जब से छठ पूजा के दृश्यों की झलक सामने आई है, तब से न सिर्फ बिहार और पूर्वांचल के दर्शकों में, बल्कि पूरे देश के सिनेप्रेमियों में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह और उत्सुकता देखी जा रही है। यह पहली बार होगा जब वैश्विक मंच पर भारतीय लोक संस्कृति के इस सबसे पावन पर्व का ऐसा विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा।सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म 'द वन' और पटना के ऐतिहासिक 'वन देवी मंदिर' से क्या है गहरा कनेक्शनफिल्मों में किसी भी त्योहार या विशेष अनुष्ठान को यूँ ही नहीं जोड़ा जाता है, और यही बात सिद्धार्थ मल्होत्रा (Sidharth Malhotra) और ग्लैमरस अभिनेत्री तमन्ना भाटिया (Tamannaah Bhatia) की आगामी बहुचर्चित सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म 'द वन' पर भी पूरी तरह लागू होती है। इस फिल्म में छठ पूजा के दृश्यों को शामिल करने के पीछे कोई दिखावा नहीं, बल्कि फिल्म की पटकथा और उसकी मूल कहानी का एक बहुत ही गहरा और अटूट ताना-बाना जुड़ा हुआ है। आपको बता दें कि इस रोमांचक और रहस्य से भरी फिल्म की पूरी की पूरी कहानी बिहार की राजधानी पटना के पास स्थित एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक 'वन देवी मंदिर' तथा उसके आसपास के रहस्यमयी जंगलों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के निर्माताओं ने इसके टीजर में ही उन घने जंगलों के भीतर छिपे कई डरावने और अनसुलझे रहस्यों की एक छोटी सी रोमांचक झलक दुनिया के सामने पेश कर दी थी। यह पूरी मूवी बिहार की माटी से जुड़ी लोककथाओं, पीढ़ियों से चली आ रही पौराणिक मान्यताओं, और वहां की विशिष्ट संस्कृति में पूरी तरह से रची-बसी हुई है। यही एक मुख्य वजह है कि निर्देशक ने इस फिक्शनल थ्रिलर में भी बिहार की सांस्कृतिक पहचान और मान्यताओं को बहुत ही प्रामाणिक तरीके से पिरोया है, जिससे दर्शकों को हॉरर और थ्रिल के साथ-साथ अपनी संस्कृति से जुड़ाव का भी एक अनूठा अहसास हो सके।टीजर में तमन्ना भाटिया के लाल साड़ी और सिंदूर वाले लुक ने खींचा सबका ध्यान, नदी घाट पर दिखा छठी मैया का अद्भुत नजाराजब से फिल्म 'द वन' का टीजर रिलीज हुआ है, तब से सोशल मीडिया पर इसके कई सींस चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिनमें विशेष तौर पर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के लुक ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। टीजर के कुछ पलों में साउथ और बॉलीवुड की जानी-मानो अभिनेत्री तमन्ना भाटिया पारंपरिक लाल रंग की साड़ी पहने हुए, मांग में लंबा संतरी सिंदूर सजाए और हाथ में सूप लिए हुए एक नदी के पावन घाट पर खड़ी नजर आ रही हैं। वह पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ छठी मैया और भगवान सूर्य नारायण को अर्घ्य देती हुई दिखाई दे रही हैं, जो दृश्य वाकई में आंखों को शीतलता और मन को शांति देने वाला है। हालांकि, इस धार्मिक और शांतनुमा माहौल के तुरंत बाद टीजर में एक बेहद खौफनाक और रहस्यमयी घटना को भी अंजाम देते हुए दिखाया गया है, जो इस बात का संकेत देता है कि यह फिल्म सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई गहरा और खौफनाक सुपरनैचुरल रहस्य छिपा हुआ है। दर्शकों के लिए यह देखना बेहद दिलचस्प होने वाला है कि कैसे एक तरफ लोकआस्था और पवित्रता का महापर्व चल रहा है, और दूसरी तरफ फिल्म की कहानी में कोई अदृश्य शक्ति तांडव मचा रही है। तमन्ना भाटिया का यह देसी और पारंपरिक अंदाज उनके फैंस को बेहद पसंद आ रहा है और वे इस फिल्म के सिनेमाघरों में आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा और अरुणाभ कुमार की जोड़ी ने अपनी जड़ों को दिया सम्मान, 25 सितंबर को सिनेमाघरों में देगी दस्तकइस फिल्म में बिहार की लोककथाओं और छठ जैसे महान पर्व को इतने बड़े पैमाने पर दर्शाने के पीछे एक और बहुत बड़ा और व्यक्तिगत कारण भी जुड़ा हुआ है। इस बहुचर्चित फिल्म के निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा और अरुणाभ कुमार हैं, और ये दोनों ही अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं यानी मूल रूप से बिहार के ही रहने वाले हैं। ऐसे में वे अपनी माटी की खुशबू, वहां के रीति-रिवाजों और लोकसंस्कृति से भली-भांति परिचित हैं। वे चाहते थे कि जब दर्शक देश-विदेश के सिनेमाघरों में उनकी इस फिल्म को देखने के लिए आएं, तो उन्हें केवल एक डरावनी थ्रिलर कहानी ही न मिले, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और मिट्टी के सबसे खूबसूरत, पवित्र और जीवंत पलों का भी भरपूर आनंद उठाने का मौका मिले। अपनी कला के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को ग्लोबल मंच पर सम्मान देने का यह प्रयास वाकई सराहनीय है। आपको बता दें कि तमाम रोमांच, रहस्य और लोकआस्था के अनूठे संगम से सजी यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' इसी महीने की 25 तारीख यानी 25 सितंबर 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। अब यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि बड़े पर्दे पर यह सुपरनैचुरल और सांस्कृतिक प्रयोग दर्शकों की कसौटी पर कितना खरा उतरता है और बॉक्स ऑफिस पर कैसा कमाल दिखाता है।
Gandhari Review: न थ्रिल, न कहानी में दम! कैसी है नेटफ्लिक्स पर आई तापसी की गांधारी?
Netflix Film Review: नेटफ्लिक्स पर 3 सितंबर को गांधारी रिलीज हुई है। फिल्म में तापसी का एक्शन तो है, लेकिन फिल्म की कमजोर कहानी काफी निराश करती है। आइए जानते हैं इस फिल्म के बारे में।
टीवी दुनिया की जानी-मानी अदाकारा अमनदीप सिद्धू ने याद किए अपने संघर्ष के और स्कूल के पुराने दिन
मनोरंजन जगत और टेलीविजन की दुनिया में अपनी बेहतरीन अदायगी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली लोकप्रिय अभिनेत्री अमनदीप सिद्धू (Amandeep Sidhu) आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। छोटे पर्दे पर अपने शानदार अभिनय से अपनी एक खास पहचान बनाने वाली अमनदीप के लिए ग्लैमरस इंडस्ट्री का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान इस प्रतिभाशाली अभिनेत्री ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद किया और साथ ही अपने स्कूल के शुरुआती जीवन से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने किस्से साझा किए। अमनदीप ने बताया कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली लड़की ने हिंदी और अंग्रेजी की मुश्किलों को पार करते हुए अभिनय की दुनिया में अपना परचम लहराया। उनके बचपन के ये संस्मरण न केवल उनके स्वभाव की सादगी को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कड़े अनुशासन और मां के मार्गदर्शन ने उनके जीवन को किस तरह एक नई दिशा दी। आज टीवी के धारावाहिक 'गंगा माई की बेटियां' में अपनी अदायगी का जलवा बिखेरने वाली अमनदीप के स्कूल के दिनों की ये यादें उनके फैंस को भी काफी भावुक और प्रेरित कर रही हैं।बचपन में बहुत बातें करती थीं अमनदीप, दिल्ली आने पर भाषा और उच्चारण को लेकर हुई थीं बड़ी परेशानियांअपने स्कूल के शुरुआती दिनों के बारे में खुलकर बात करते हुए अमनदीप सिद्धू ने बताया कि वह बचपन में बेहद नटखट थीं और क्लास में बहुत ज्यादा बातें किया करती थीं। स्थिति यह थी कि स्कूल की प्रिंसिपल अक्सर उनकी मां से इस बात की शिकायत करने के लिए फोन किया करती थीं। अपने शुरुआती जीवन के सफर को याद करते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्होंने स्कूल जाना शुरू किया था, तब वह पंजाब में रहती थीं, लेकिन दूसरी कक्षा की पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद वह अपनी मां के साथ दिल्ली आ गईं। दिल्ली आने के बाद उनके सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई, क्योंकि उस समय उनकी हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाएं बहुत ज्यादा कमजोर थीं। उनकी बोलचाल और बातचीत करने के तरीके में पंजाबी भाषा और उसकी शैली का बहुत अधिक प्रभाव दिखाई देता था, जिसकी वजह से उन्हें कई बार कक्षाओं में अजीब स्थिति का सामना करना पड़ता था। दिल्ली जैसे महानगर के स्कूल में ढलना और वहां के छात्र-छात्राओं के बीच अपनी जगह बनाना एक छोटी बच्ची के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन उनकी मां के सहयोग और खुद की सीखने की ललक ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी।दिल्ली के स्कूल की सख्त 'डॉली मैम' और छड़ी से पिटाई का वो दौर, आज भी याद हैं वो कड़े अनुशासन के पलअमनदीप सिद्धू ने अपने स्कूल के दिनों के उस सबसे डरावने और दिलचस्प अनुभव को साझा किया, जब उन्हें अपनी एक टीचर से गहरी नफरत हुआ करती थी। उन्होंने बताया कि दिल्ली के जिस स्कूल में वह पढ़ती थीं, वहां डॉली नाम की एक अध्यापिका उन्हें अंग्रेजी पढ़ाया करती थीं, जो स्वभाव से बेहद सख्त और अनुशासनप्रिय थीं। वह क्लास में हमेशा इस बात पर जोर देती थीं कि सभी छात्र आपस में बातचीत करने के लिए केवल अंग्रेजी भाषा का ही इस्तेमाल करें। अमनदीप बताती हैं कि जब भी डॉली मैम की क्लास होती थी, उनके मन में एक अजीब सा डर बैठ जाता था और वह क्लास शुरू होने से पहले यही दुआ करती थीं कि किसी तरह मैम आज कक्षा में न आएं। उस कड़े अनुशासन का जिक्र करते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि मैम क्लास में एक-एक कर सभी बच्चों को अपनी बेंच पर खड़ा करवा देती थीं और किताब में से अंग्रेजी के पैराग्राफ जोर-जोर से बोलकर पढ़ने के लिए कहती थीं। यदि किसी बच्चे से उच्चारण में कोई गलती हो जाती थी, तो डॉली मैम छड़ी से उनकी पिटाई भी करती थीं। उस दौर में छड़ी के डर और सख्ती की वजह से अमनदीप को अपनी उस इंग्लिश टीचर से नफरत सी हो गई थी, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि अगर वो कड़े नियम और वो टीचर नहीं होतीं, तो आज उनके अंदर अंग्रेजी बोलने का वो आत्मविश्वास कभी पैदा नहीं हो पाता।मां की दूरदर्शिता और स्पेशल क्लासेज ने संवारी भाषा, अल्का अमीन बनीं इंडस्ट्री की पहली गुरु और प्रेरणासिर्फ अंग्रेजी ही नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा पंजाबी और हिंदी पर पकड़ मजबूत करने के पीछे अमनदीप ने अपनी मां के अमूल्य योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि जब वह सातवीं या आठवीं कक्षा में थीं, तब उनकी मां को ऐसा महसूस हुआ कि भले ही वह दिल्ली आ गई हैं, लेकिन उन्हें अपनी मूल भाषा पंजाबी नहीं भूलनी चाहिए। इसके लिए उनकी मां ने उन्हें विशेष तौर पर पंजाबी सीखने के लिए एक स्पेशल क्लास में दाखिल करवा दिया, जिससे वह अपनी मातृभाषा से जुड़ी रहीं और साथ ही उनकी हिंदी और अंग्रेजी के व्याकरण में भी काफी सुधार हुआ। अपने पहले टीवी धारावाहिक 'ये प्यार नहीं तो क्या है' के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि तब भी उनकी हिंदी में पंजाबी लहजे का प्रभाव झलकता था। ऐसे में सेट पर उनकी मां की भूमिका निभाने वाली वरिष्ठ और दिग्गज अभिनेत्री अल्का अमीन ने उन्हें अपनी बेटी की तरह बहुत डांटा और समझाया, जिससे उन्हें अपनी हिंदी को परिष्कृत करने की प्रेरणा मिली। अल्का मैम जब भी शूटिंग के सेट पर आती थीं, तो वह सबसे पहले कैमरे को श्रद्धा से माथा टेकती थीं, और यही संस्कार अमनदीप ने भी उनसे सीख लिया। आज भी अमनदीप सेट पर पहुंचते ही सबसे पहले कैमरे को माथा टेकती हैं और मन ही मन प्रार्थना करती हैं, और इसी वजह से वह अल्का अमीन को इंडस्ट्री में अपनी पहली और सच्ची गुरु मानती हैं।
पूरी हुई ‘लव एंड वॉर’ की शूटिंग, तय हुई रणबीर-आलिया-विक्की की फिल्म की रिलीज डेट
संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ की शूटिंग पूरी हो गई है। रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल स्टारर यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज की तैयारी कर रही है। मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया है।
‘मिर्जापुर द मूवी’ की कहानी गद्दी, सत्ता, बदला और रिश्तों के उलझे खेल पर आधारित है। पुराने किरदारों की वापसी और नए खिलाड़ियों की एंट्री फिल्म को रोमांचक बनाती है, लेकिन सबसे मजेदार ट्विस्ट कहानी खत्म होने के बाद आता है।
'मिर्जापुर: द मूवी' को दर्शकों के साथ क्रिटिक्स के भी शानदार रिव्यू मिल रहे हैं। फिल्म रिलीज के साथ ही अब हर किसी को इसके ओपनिंग डे कलेक्शन का बेसब्री से इंतजार है।
हिंदी सिनेमा में यह पहली बार होने जा रहा है, जब बिहार का महापर्व 'छठ पूजा' को परदे पर फैंस देखेंगे। क्या है छठ पूजा और द वन की कहानी के बीच कनेक्शन पढ़ें खबर।
कृति खरबंदा की रहस्यमयी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ ने बढ़ाई उत्सुकता, क्या होने वाला है कोई बड़ा ऐलान?
कृति खरबंदा ने अपनी हालिया इंस्टाग्राम स्टोरीज़ के जरिए फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। अभिनेत्री ने एक के बाद एक कुछ ऐसी तस्वीरें साझा की हैं, जिन्होंने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शायद वह जल्द ही किसी खास घोषणा की तैयारी में हैं।
Review: मिर्जापुर का फिर मचा भौकाल, भरपूर हैं सीटीमार मोमेंट्स
मिर्जापुर की दुनिया में से एक फिल्म का जन्म हुआ है, जो वही 8 साल पुराना भौकाल मचाने का वादा करता है. पुराने किरदारों के साथ-साथ कुछ नए किरदार भी इस गद्दी की लड़ाई में जुड़े. कैसी है ये मिर्जापुर द मूवी? पढ़िए हमारा रिव्यू...
39 साल पहले आई एक फिल्म का सीन महाभारत के द्रौपदी के चीरहरण से प्रेरित था। बोल्ड और इंटेंट सीन देने वाली एक्ट्रेस रातों-रात एक जाना पहचाना चेहरा बन गई थीं।
करिश्मा तन्ना ने गुरु पूर्णिमा पर दिया था बेटे को जन्म, जन्माष्टमी पर रखा खूबसूरत नाम, बताया मतलब
करिश्मा तन्ना और वरुण बंगेरा ने जन्माष्टमी पर अपने बेटे के नाम का खुलासा किया। उन्होंने बेटे के नाम के साथ उसका अर्थ भी साझा किया है। खास पोस्ट में उन्होंने ये जानकारी साझा की है।
50 सालों से कल्ट है Kishore Kumar के बेटे का पहला हिट गाना, Radio पर बन गया था नंबर-1 रोमांटिक सॉन्ग
किशोर कुमार (Kishore Kumar) के बेटे अमित कुमार का पहला गाना इतना पॉपुलर हुआ था कि 50 साल बाद भी लोग इसे सुनते हैं।
58 साल पुराना Janmastami का सबसे वायरल गाना, लता मंगेशकर की आवाज में आज भी हिट है सदाबहार गीत
कृष्ण जी के जन्मदिन के अवसर पर 58 साल पुराना गीत 'ओ कन्हैया' काफी ज्यादा वायरल हो रहा है। लता मंगेशकर ने इसे अपनी आवाज से सजाया है।
Mirzapur Movie: मिर्जापुर सीरीज में बोल्ड रोल निभाने वाली एक्ट्रेस को पहले सीजन के बाद काफी भद्दे और घटिया मैसेज आए थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि पहले सीजन के बाद वो काफी परेशान हो गई थीं।
समय रैना के 'नल्ला बेरोजगार' कमेंट पर आया अर्चना पूरन सिंह और फैमिली का रिएक्शन, कहा- अपमान करना...
समय रैना के इस कमेंट पर अर्चना पूरन सिंह और उनके परिवार का रिएक्शन सामने आया है।
सलमान खान के पॉपुलर रियलिटी शो 'बिग बॉस 20' का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। जहां अपने कंट्रोवर्शियल कंटेंट और पाकिस्तान में बैन को लेकर चर्चा में रहने वाले यूट्यूबर नीतीश राजपूत के शो में आने की खबरें हैं, वहीं मशहूर सितार वादक भागीरथ भट्ट ने शो का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया है।
सीनियर एक्टर मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी। उनकी यह टिप्पणी सीनियर एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के उस बयान के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् के पूरे गीत को गाने के बजाय केवल शुरुआती अंतरों को गाने की बात कही थी। ‘द फ्री प्रेस जर्नल’ से बातचीत के दौरान मुकेश खन्ना से शर्मिला टैगोर के कथित सुझाव को लेकर कहा, “वह अपनी समझ के हिसाब से बोल रही हैं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। शायद अपनी बात समझाते हुए उनके मुंह से यह निकल गया कि दूसरे धर्मों के लोग इसे समझ या स्वीकार नहीं कर पाएंगे।” मुकेश खन्ना ने कहा, “आप बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां काली पूजा इतने बड़े स्तर पर मनाई जाती है। आप बंगाली संस्कृति और बंगाली फिल्मों के बीच बड़ी हुई हैं। फिर आज आपको समझ में आ रहा है कि एक धर्म वाला इसको एक्सेप्ट नहीं करे। उस वक्त नहीं आया था। हम क्या शादी करने के बाद आपको मालूम पड़ा?” उन्होंने सवाल उठाया, जब आप नवाब की बेगम बन गईं। तब आपको मालूम पड़ा कि अरे मुस्लिम धर्म भी है। अरे ये लोग तो मानते नहीं हैं। अल्लाह को मानते हैं। ये लोग तो हमारे देवी को भी नहीं मानते। बोलेंगे हम लोग बहुत सारे भगवान में बिलीव नहीं करते। उन्होंने आगे कहा, शादी के लिए आयशा बेगम बन गईं, लेकिन आज आप बात कर रही हैं आयशा बेगम बनकर। आज आपको मुस्लिम धर्म समझ में आ रहा है। हिंदू धर्म क्या भूल गई आप? वंदे मातरम् पर पुराने विरोध का भी किया जिक्र मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को लेकर ऐतिहासिक तौर पर उठाई गई आपत्तियों पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों की आपत्ति केवल गीत के बाद के हिस्सों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों को लेकर नहीं थी। उन्होंने कहा कि एक आपत्ति यह भी थी कि मुस्लिम केवल खुदा के सामने झुकते हैं। मुकेश ने दावा किया, “इस पर आपत्ति आज से शुरू नहीं हुई है। तर्क यह दिया जाता रहा है कि वे केवल खुदा के सामने झुकते हैं और इसलिए किसी और के सामने नहीं झुकेंगे।” अभिनेता ने वंदे मातरम् के अलग-अलग गायन संस्करणों का भी जिक्र किया। उन्होंने लता मंगेशकर, हेमंत कुमार और एआर रहमान से जुड़े संस्करणों का उदाहरण दिया। एआर रहमान के ‘मां तुझे सलाम’ का दिया उदाहरण मुकेश खन्ना ने मातृभूमि के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति को समझाने के लिए एआर रहमान के गीत ‘मां तुझे सलाम’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “वह कहते हैं ‘मां तुझे सलाम’। वह उसे मां कह रहे हैं और उन्हें सलाम कर रहे हैं।” अभिनेता ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने का मतलब किसी को जबरन झुकने के लिए मजबूर करना नहीं होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने वंदे मातरम् गाने पर आपत्ति को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हम भारत माता के सामने झुकते हैं। अगर कोई झुकना नहीं चाहता तो ठीक है, हम उसे झुकने के लिए मजबूर नहीं कर रहे। लेकिन फिर यह कहना कि वंदे मातरम् ही नहीं गाया जाना चाहिए, यह बात मेरी समझ में नहीं आती।” शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था शर्मिला टैगोर ने न्यूज एजेंसी IANS के साथ बातचीत में कहा, 'बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र है। जो लोग एक धर्म, एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें तो वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।' हालांकि, शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना के कमेंट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनोट ने कहा था कि हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए। कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया था। उन्होंने लिखा, 'मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो। विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार तरीके से गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसे आप हमेशा मिलती हैं।' ………….. यह खबर भी पढ़ें… शर्मिला टैगोर ने शादी के बाद इस्लाम अपनाया था:बेटी सबा बोलीं- हमारे घर में मंदिर नहीं था; मां ने हमें इस्लाम के बारे में बताया एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की बेटी सबा अली पटौदी ने हाल ही में अपने माता-पिता की अंतरधार्मिक शादी और धार्मिक परवरिश पर बात की है। उन्होंने बताया कि शादी के बाद उनकी मां ने इस्लाम अपनाया था और बच्चों को भी इसके बारे में सिखाया। सबा ने यह बात यूट्यूब चैनल ‘बिग बॉलीवुड बफ्स’ से बातचीत में कही। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें, सैफ अली खान और सोहा अली खान को कोई धर्म मानने के लिए मजबूर नहीं किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने विमल पान मसाला FDA नोटिस का दिया जवाब, शाहरुख खान ने अभी तक नहीं दिया
यह विवाद विमल के एक ऐड से जुड़ा है जिसमें अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ हैं। यह ऐड ब्रांड के इलायची वेरिएंट को प्रमोट करता है, जबकि महाराष्ट्र FDA ने खबर दी है कि यह ऐड पान मसाला का इनडायरेक्ट प्रमोशन हो सकता है क्योंकि विमल ब्रांड का इस प्रोडक्ट से जुड़ाव है।
Ramayana 2026:मुकेश खन्ना ने क्यों नहीं देखा रामायण का ट्रेलर? बोले- '...तो आस्था को चोट पहुंचेगी'
Ranbir Kapoor as Ram: रामायण की जब कास्ट का ऐलान हुआ था तब रणबीर कपूर को भगवान राम का किरदार निभाने को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। रणबीर की आलोचना होने पर अब मुकेश खन्ना ने बात की है।
Review: 'मिर्जापुर द मूवी' का रिव्यू, 3 घंटे 15 मिनट का भौकाल या सिरदर्द? जानें देखें या छोड़ें
Mirzapur The Movie Review: मुन्ना भैया और गुड्डू पंडित की वापसी में कितना दम है ये जानने के लिए आपको रिव्यू पढ़ना होगा। बता दें, ये फिल्म 3 घंटे 15 मिनट की है।
'मिर्जापुर: द मूवी' में रवि किशन की एंट्री पर बोले फैंस- फुल पैसा वसूल!
फिल्म के फर्स्ट हाफ को लेकर भी ज्यादातर प्रतिक्रियाएं सकारात्मक हैं. एक दर्शक ने इसे 'कड़क' बताया. हालांकि, उसने माना कि फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी है, लेकिन आगे बढ़ने के साथ यह बेहतर होती जाती है.
आलिया भट्ट की अल्फा पिटने पर तापसी पन्नू को हुआ नुकसान, बोलीं- बड़े सुपरस्टार की फिल्म नहीं चली...
तापसी पन्नू इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म गांधारी का खूब जोर-शोर से प्रमोशन कर रही हैं। इसी दौरान तापसी ने बताया कि कैसे फीमेल लीड फिल्म के फ्लॉप होने पर बाकी सभी एक्ट्रेसेस को भी नुकसान होता है।
संजय लीला भंसाली की मच अवेटेड फिल्म 'लव एंड वॉर' की रिलीज डेट का एलान हो गया है।
आमिर खान ने हाल ही में 'दिल चाहता है' की शूटिंग का एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि अक्षय खन्ना ने उन्हें एक सीन के लिए 17 बार थप्पड़ मारे थे।
हनुमान अंश में नीम करोली बाबा के किरदार में दिखे शोभिनव सत्या ने बताया कि शूटिंग के दौरन उन्हें काफी दिक्कतें आ रही थी। हालांकि, हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए ऐसा चमत्कार हुआ कि सब हैरान रह गए।
Gandhari Review: अंधेरे में ममता का खौफनाक तांडव, तापसी पन्नू के कंधों पर टिकी डार्क थ्रिलर
तापसी पन्नू की दमदार एक्टिंग, कसा हुआ साउंड डिज़ाइन और 1 घंटे 55 मिनट का क्रिस्प टाइम इसे बोर नहीं होने देता। अगर आप वीकेंड पर एक बेहतरीन इमोशनल-रिवेंज थ्रिलर देखना चाहते हैं, तो यह नेटफ्लिक्स पर एक बार देखी जाने वाली बढ़िया फिल्म है।....
कार्तिक आर्यन से लेकर कृति सेनन तक कई फिल्मी सितारों को अक्सर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। इस ट्रोलिंग के पीछे करोड़ों का दांव खेला जा रहा है।
Tulip Singh Casting Couch:
Bigg Boss 20: पाकिस्तान में जिस यूट्यूबर पर लगा बैन, अब बिग बॉस में दिखेगा जलवा
नीतीश राजपूत एक लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर और यूट्यूबर हैं। उनके YouTube चैनल पर 8 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स बताए जाते हैं। वह अपने वीडियो में सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ शिक्षा, प्रशासन और समसामयिक मुद्दों को विस्तार से समझाते हैं।
31 गजलों, 9 ठुमरी और 15 गानों से सजी है बॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्म, 90 सालों से नहीं टूटा रिकॉर्ड
94 साल पहले आई इस हिस्टोरिकल फिल्म के नाम सबसे ज्यादा गाने होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। फिल्म में हर एक कैरेक्टर की एंट्री एक गाने के साथ होती है।
स्टारकास्ट- अली फजल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, रवि किशन, जीतेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, अभिषेक बनर्जी, श्रेया पिलगांवकर डायरेक्टर- गुरमीत सिंह ड्यूरेशन- 3 घंटे 17 मिनट रेटिंग- 3.5/ 5 मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। इसे सिनेमाई विस्तार दिया गया है। लेकिन 3 घंटे 17 मिनट की इस फिल्म में जहां कई सीक्वेंस बड़े पर्दे पर खूब असर करते हैं, वहीं कुछ जगह कहानी को अपनी मंजिल तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है। कैसी है फिल्म की कहानी? ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की कहानी फ्रेंचाइजी की उसी दुनिया में लौटती है, जहां सत्ता की कुर्सी खाली होते ही बंदूकें खुद अपनी भाषा बोलने लगती हैं। फिल्म दरअसल मिर्जापुर की कहानी में एक ऐसा अध्याय खोलती है, जो सीरीज की टाइमलाइन के बीच का हिस्सा है। यानी यह कहानी अचानक किसी दूसरी दुनिया में नहीं चली जाती, बल्कि पुराने किरदारों और उनके रिश्तों के बीच एक नया खेल जोड़ती है। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी के लिए सत्ता सिर्फ गद्दी नहीं, विरासत और दबदबे का सवाल है। दूसरी तरफ गुड्डू पंडित यानी अली फजल की दुनिया बदले और ताकत के इर्द-गिर्द घूमती है। और फिर मुन्ना त्रिपाठी यानी दिव्येंदु की मौजूदगी इस पूरे समीकरण को फिर से खतरनाक बना देती है। मुन्ना की वापसी फिल्म का सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता है, लेकिन कहानी सिर्फ पुराने चेहरों की वापसी पर निर्भर नहीं रहती। रवि किशन का बब्बुआ यादव इस सत्ता के खेल में नया रंग भरता है। उसके आते ही कहानी में एक अलग किस्म की आक्रामकता दिखाई देती है। बीना त्रिपाठी यानी रसिका दुग्गल भी अपनी चालें चलती हैं और यही मिर्जापुर की खासियत है। यहां कोई किरदार सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं होता, हर कोई किसी न किसी खेल का खिलाड़ी है। कहानी आगे बढ़ती है तो मिर्जापुर की गलियों से निकलकर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंचती है। बदला, सत्ता, धोखा और वर्चस्व की यह लड़ाई धीरे-धीरे ऐसे मुकाम पर जाती है, जहां पुरानी दुश्मनी और नए समीकरण आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। कैसी है कहानी और स्क्रीनप्ले में क्या खास है? पुनीत कृष्णा की लिखाई अब भी इस फ्रेंचाइजी की रीढ़ है। मिर्जापुर का संवाद सिर्फ संवाद नहीं होता, वह किरदार की पहचान बन जाता है। फिल्म में भी कई जगह बातचीत इतनी धारदार है कि गोली चलने से पहले ही सीन में तनाव पैदा हो जाता है। खास बात यह है कि यहां हास्य भी उसी अंधेरी दुनिया से निकलता है। हिंसा के बीच अचानक आने वाला देसी हास्य फिल्म को लगातार गंभीर बने रहने से बचाता है। लेकिन यहीं स्क्रीनप्ले थोड़ी परेशानी पैदा करता है। फिल्म के पास किरदार बहुत हैं, पुराने रिश्ते बहुत हैं और नए समीकरण भी बहुत हैं। इन्हें संभालने की कोशिश में दूसरे हिस्से में कहानी कई जगह आगे बढ़ने के बजाय अपने ही बनाए चक्कर में घूमती हुई लगती है। कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो फिल्म का असर और तेज हो सकता था। कैसी है स्टारकास्ट कि एक्टिंग? दिव्येंदु शर्मा- दिव्येंदु को मुन्ना के रूप में दोबारा देखना सिर्फ प्रशंसकों के लिए पुरानी याद नहीं है, अभिनय के स्तर पर भी यह फिल्म का बड़ा आकर्षण है। मुन्ना की बेपरवाही, सनक और खतरनाक मासूमियत का जो मिश्रण दिव्येंदु ने बनाया है, वह अब भी काम करता है। पंकज त्रिपाठी- कालीन भैया, दिव्येंदु के किरदार मुन्ना से ठीक उलट है। वह कम बोलते हैं और ज्यादा महसूस कराते हैं। उनका अभिनय शोर नहीं करता, लेकिन सीन पर कब्जा कर लेता है। अली फजल- अली का गुड्डू अब पहले से ज्यादा कठोर और सत्ता के खेल को समझने वाला किरदार है। उनके गुस्से में अब सिर्फ बदला नहीं, सत्ता की भूख भी दिखाई देती है। रवि किशन- इनकी एंट्री फिल्म को जरूरी ऊर्जा देती है। बब्बुआ यादव के किरदार में उनका देसी अंदाज और आक्रामकता मिर्जापुर की दुनिया में नया तड़का लगाती है। रसिका दुग्गल, जितेंद्र कुमार, अभिषेक बनर्जी, राजेश तैलंग और बाकी कलाकार भी अपने किरदारों को उसी दुनिया का हिस्सा बनाए रखते हैं। बड़े पर्दे पर मिर्जापुर का असली फायदा मिर्जापुर की बंदूकें ओटीटी पर भी चलती थीं, लेकिन सिनेमाघर में उनका असर अलग है। गोलियों की आवाज, हाथापाई, खून-खराबा और बड़े एक्शन सीक्वेंस फिल्म को थिएटर वाला स्केल देते हैं। खासकर राजस्थान के रेगिस्तान में फिल्म का प्री-क्लाइमैक्स और क्लाइमैक्स हिस्सा शानदार तरीके से फिल्माया गया है। यहां निर्देशक गुरमीत सिंह को अपनी सबसे ज्यादा आजादी मिलती है और कैमरा लोकेशन को सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं रहने देता, बल्कि उसे एक्शन का हिस्सा बना देता है। सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के स्केल को बढ़ाती है। 3 घंटे 17 मिनट भारी पड़ती हैफिल्म की सबसे बड़ी कमी उसकी लंबाई है। पहला हिस्सा कहानी, किरदार और टकराव को तेजी से स्थापित करता है। इंटरवल तक कई जगह फिल्म काफी मनोरंजक रहती है। लेकिन इंटरवल के बाद कुछ हिस्सों में स्क्रीनप्ले जरूरत से ज्यादा समझाता है और रफ्तार गिरती है। यह वही जगह है जहां फिल्म को थोड़ा कसने की जरूरत थी। ताजा प्रतिक्रियाओं में भी ओवर-एक्सप्लेनिंग और पेसिंग को लेकर यही बात सामने आई है। कुछ दृश्य ऐसे लगते हैं जिन्हें कहानी के लिए जरूरी समझा गया है, लेकिन वे फिल्म की गति को उतना आगे नहीं बढ़ाते। यही वजह है कि करीब 15-20 मिनट की कटौती फिल्म को और प्रभावी बना सकती थी। फिर आखिरी हिस्से में फिल्म दोबारा रफ्तार पकड़ती है और एक्शन के साथ कहानी अपना वजन वापस हासिल करती है। कैसा है डायरेक्शन, टेक्निकली कैसी बनी फिल्म? गुरमीत सिंह ने सबसे मुश्किल काम यह किया है कि मिर्जापुर की ओटीटी वाली पहचान को बड़े पर्दे की भाषा में बदला जाए। इस मामले में वह काफी हद तक सफल रहते हैं। फिल्म में मास एलिवेशन है, लेकिन वह पूरी तरह अपनी मूल दुनिया से बाहर नहीं जाती। बैकग्राउंड स्कोर कई एक्शन और एंट्री सीक्वेंस को जरूरी ताकत देता है। गाने फिल्म का प्रमुख आकर्षण नहीं हैं और उन्हें कहानी पर हावी भी नहीं होने दिया गया है। निर्माण कला और लोकेशन फिल्म की दुनिया को विश्वसनीय बनाए रखते हैं। कैमरा खास तौर पर एक्शन वाले हिस्सों में अच्छा काम करता है। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह अपने मूल भौकाल को बड़े पर्दे पर ले जाने में कामयाब रहती है। कालीन भैया का ठहराव, गुड्डू का गुस्सा, मुन्ना का पागलपन और बब्बुआ यादव की नई आक्रामकतास इन सबको मिलाकर फिल्म में कई ऐसे पल बनते हैं जो याद रह जाते हैं। लेकिन अच्छी फिल्म और बेहतरीन फिल्म के बीच का फर्क यहां स्क्रीनप्ले की कसावट पैदा करती है। कहानी में दम है, कलाकारों में दम है, संवादों में दम है और क्लाइमैक्स में भी दम है, मगर बीच का हिस्सा उतना धारदार नहीं रह पाता। कुल मिलाकर, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ भौकाल की वही पुरानी बोली बोलती है, बस इस बार आवाज बड़े पर्दे की है। फिल्म में बारूद खूब है, किरदार भी अपने रंग में हैं, लेकिन अगर कहानी की रफ्तार पर थोड़ी और कैंची चलती तो यह भौकाल और ज्यादा दमदार हो सकता था।
Bigg Boss 20: क्या सलमान खान के शो में आएंगे भागीरथ भट्ट? सितार वादक ने बता दिया सच
बिग बॉस 20 शुरू होने वाला है। ऐसे में कई संभावित नामों की चर्चा है जो इस साल घर में दिखाई पड़ सकते हैं। इन नामों में एक नाम 'सितार साधक' भागीरथ भट्ट का भी था। हालांकि, भागीरथ भट्ट ने साफ कर दिया है कि वो शो में नहीं जा रहे हैं।
कौन हैं Kanika Mann? गुड्डन से मिली पहचान, अब Bigg Boss 20 में आने की चर्चा
टीवी की दुनिया में अपनी एक्टिंग से खास पहचान बनाने वाली कनिका मान (Kanika Mann) आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। हरियाणा के पानीपत से आने वाली कनिका ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग और पंजाबी म्यूजिक वीडियोज से की थी। इसके बाद उन्होंने टीवी के साथ-साथ पंजाबी फिल्मों और ओटीटी में भी काम किया। कनिका मान को सबसे ज्यादा लोकप्रियता टीवी सीरियल 'गुड्डन तुमसे ना हो पाएगा' से मिली। इस शो में उन्होंने गुड्डन का किरदार निभाकर दर्शकों के दिल में अपनी जगह बना ली। अब खबरें हैं कि कनिका मान जल्द ही सलमान खान के चर्चित रियलिटी शो 'बिग बॉस 20' में नजर आ सकती हैं। कौन हैं कनिका मान? कनिका मान का जन्म 7 अक्टूबर 1993 को हरियाणा के पानीपत में हुआ था। उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही कनिका ने मॉडलिंग और एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में कनिका खुद भी एक्टिंग को लेकर बहुत कॉन्फिडेंट नहीं थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह पढ़ाई में काफी अच्छी थीं और एक्टिंग में करियर बनाना उनके लिए भी एक तरह का सरप्राइज था। इसे भी पढ़ें: Asim Riaz-Himannshi Khurrana के विवाद में Vishal Aditya Singh की एंट्री, 'बुआ जी' वाले कमेंट ने मचा दी हलचल पंजाबी म्यूजिक वीडियोज से शुरू हुआ करियर कनिका मान ने अपने करियर की शुरुआत पंजाबी म्यूजिक वीडियोज से की थी। कॉलेज के दिनों में ही उन्हें म्यूजिक वीडियोज के ऑफर मिलने लगे थे। साल 2015 में उनका पहला म्यूजिक वीडियो आया था। इसके बाद वह कई पंजाबी गानों में नजर आईं और धीरे-धीरे एक मॉडल के तौर पर उनकी पहचान बनने लगी। म्यूजिक वीडियोज के बाद कनिका ने पंजाबी फिल्मों में भी काम किया। साल 2017 में वह 'रॉकी मेंटल' फिल्म में नजर आई थीं। इसके बाद उन्होंने टीवी की दुनिया का रुख किया और सीरियल 'बढ़ो बहू' से छोटे पर्दे पर कदम रखा। इसे भी पढ़ें: Tejasswi Prakash को 'भाभी' कहने वाले Elvish Yadav अब क्यों हुए आगबबूला? वायरल वीडियो ने बढ़ाया बवाल 'गुड्डन तुमसे ना हो पाएगा' ने बदली किस्मत कनिका मान के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 'गुड्डन तुमसे ना हो पाएगा' रहा। इस सीरियल में उन्होंने गुड्डन का किरदार निभाया और अपनी एक्टिंग से दर्शकों के बीच खास पहचान बना ली। शो की सफलता के बाद कनिका घर-घर में पहचानी जाने लगीं। इसके बाद उन्होंने ओटीटी और रियलिटी शो में भी हाथ आजमाया। वह 'रूहानियत' में नजर आईं और इसके अलावा रोहित शेट्टी के रियलिटी शो 'खतरों के खिलाड़ी 12' का भी हिस्सा बनीं। क्या बिग बॉस 20 में नजर आएंगी कनिका मान? साल 2026 में 'बिग बॉस 20' को लेकर कई सेलिब्रिटीज के नाम चर्चा में हैं। इसी लिस्ट में अब कनिका मान का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि, अभी तक उनकी एंट्री को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में कनिका मान को बिग बॉस 20 की कन्फर्म कंटेस्टेंट कहना जल्दबाजी होगी। अगर वह सच में सलमान खान के शो का हिस्सा बनती हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि वह घर के माहौल में खुद को कैसे संभालती हैं और बाकी कंटेस्टेंट्स के साथ उनकी बॉन्डिंग कैसी रहती है।
प्रियंका चोपड़ा ने ग्लोरिया स्टीनम को दी श्रद्धांजलि
मुंबई, अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस ने फेमिनिस्ट आइकॉन और लीडर ग्लोरिया स्टीनम को श्रद्धांजलि दी।
मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने गुरुवार को एक्ट्रेस और फिल्ममेकर सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित या प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला उनकी शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ से जुड़ा है, जिस पर फिल्ममेकर विनीता नेगी ने चोरी के आरोप लगाए थे। लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल सेशंस जज शुद्धिकुमार मुरलीधरराव बुके ने सयानी गुप्ता की ओर से दायर अंतरिम राहत की अर्जी मंजूर की। सयानी गुप्ता ने फिल्ममेकर विनीता नेगी के खिलाफ 9 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। नेगी ने आरोप लगाया था कि सयानी गुप्ता की फिल्म में उनकी अधूरी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रभा’ के कुछ अहम हिस्सों की नकल की गई है। कोर्ट ने नेगी और अन्य प्रतिवादियों को सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित करने, प्रसारित करने या उसे आगे भी प्रकाशित करते रहने से रोक दिया है। इस अंतरिम राहत में मेटा, रेडिट और डेकन क्रॉनिकल जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश भी शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का मतलब सच्चे तथ्यों पर आधारित जानकारी के प्रकाशन पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला? सयानी गुप्ता की डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ को लेकर विनीता नेगी ने कहानी चोरी, कॉपीराइट और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। FTII की पूर्व छात्रा और फिल्ममेकर विनीता नेगी का दावा था कि वह डॉक्यूमेंट्री प्रभा बना रही हैं, लेकिन सयानी गुप्ता ने डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म आसमानी में उस डॉक्यूमेंट्री के सीन चोरी कर इस्तेमाल किए हैं। सयानी गुप्ता ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने आरोपों को झूठा, भ्रामक और बिना ठोस आधार वाला बताया। सयानी ने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में भी इसकी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई होने से पहले ही विनीता ने सोशल मीडिया पर चोरी के आरोप लगाते हुए सयानी के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। सयानी ने विनीता के खिलाफ 9 करोड़ की मानहानि की याचिका दायर की थी। सयानी ने गुप्ता के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया के जरिए विनीता ने इन आरोपों को और व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी पेशेवर छवि और काम को नुकसान पहुंचा। फिल्म फेस्टिवल को मेल भेजा, फिल्म को हुआ नुकसान सयानी ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी फिल्म ‘आसमानी’ को इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया था, लेकिन बाद में इसे फेस्टिवल से हटा लिया गया। गुप्ता ने कोर्ट से 9 करोड़ रुपये के हर्जाने, कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने और विनीता नेगी की ओर से सार्वजनिक तौर पर बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कथित मानहानिकारक सामग्री वाली प्रतियों या डिवाइस को अपने कब्जे में लेने के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने की मांग भी की थी। जल्द होगी केस की अगली सुनवाई सयानी को अंतरिम राहत देने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। सयानी गुप्ता की ओर से एडवोकेट मोनिल पंजाबी, एडवोकेट प्रियंका सिन्हा और एडवोकेट भाव्या शाह व मुजतबा अंबेकर पेश हुए। वहीं विनीता नेगी की ओर से एडवोकेट सायली शिंदे और लक्ष्मी जेनकिंस ने पैरवी की।
'मिर्जापुर द मूवी' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है और X पर शुरुआती रिव्यू भी आने शुरू हो गए हैं। फैंस ने फिल्म के एक्शन, डायलॉग्स और रवि किशन की एंट्री की तारीफ की। हालांकि, कुछ लोगों को फिल्म का कुछ हिस्सा थोड़ा खिंचा हुआ लगा।
फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच रही है। इस बीच फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बॉलीवुड को लेकर एक बड़ी बात कही है।
PAK में बैन यूट्यूबर की बिग बॉस में एंट्री! टेंपरेचर बढ़ने की गारंटी
सलमान खान के रियलिटी शो बिग बॉस 20 को लेकर फैन्स क्रेजी दिख रहे हैं. शो शुरू होने में मजह 2 दिन बचे हैं. कहा जा रहा है कि यूट्यूबर नीतीश राजपूत शो में हिस्सा लेने जा रहे हैं. शो शुरू हो उससे पहले यूट्यूबर को करीब से जानते हैं.
'जलेबी बाई' फेम सिंगर रितु पाठक: बर्थडे स्पेशल
मुंबई, एक छोटे से गांव के सामान्य परिवार से आकर बॉलीवुड में अपने गानों के जरिए जगह बनाना बिल्कुल भी आसान नहीं होता, लेकिन रितु पाठक उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं, जिन्होंने ऐसा करके दिखाया है।
फिल्म 'मिर्जापुर द मूवी' को लेकर पहले से दर्शकों के बीच बज बना था। अब जब यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, तो यूजर्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अनुपम कपाड़िया के तौर पर 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में वापसी करेंगे अमन वर्मा
अभिनेता अमन वर्मा इन दिनों 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में अनुपम कपाड़िया के किरदार में वापसी कर रहे हैं। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि शो की लोकप्रियता आज भी बरकरार है।
वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी है, जिनके बारे में कम चर्चा हुई। यह सीरीज संजीव सान्याल की किताब ‘रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने बताया कि ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के बाद उन्हें लगा कि ऐसी कहानियों में यूथ का नजरिया मिसिंग था। उन्होंने प्रतिभा रांटा की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह शो के लिए मना कर देतीं तो उनका दिल टूट जाता। निखिल ने मनोज बाजपेयी का किस्सा भी सुनाया, जिन्होंने 25 साल बाद साथ काम करने पर पूछा था- ‘अब आए हो?’ प्रतिभा ने किरदार की तैयारी और रोहित सराफ ने एक्शन को चुनौती बताया। सवाल: पहले भी आपने आजादी से जुड़ी कहानियां कही हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में ऐसा क्या था, जो आपको पहले की कहानियों में मिसिंग लगा? जवाब/निखिल आडवाणी: मुझे लगा कि यूथ मिसिंग था। हमने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, ऊधम सिंह और जलियांवाला बाग के बारे में बहुत पढ़ा है। लेकिन इनसे करीब 10 साल पहले भी एक समानांतर कहानी चल रही थी। रिसर्च करते हुए मुझे लगा कि इन युवाओं की कहानी भी बतानी चाहिए। उस समय के क्रांतिकारियों में एक अलग तरह का जुनून था। उन्होंने तय कर लिया था कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना है। कैसे करेंगे, यह बाद की बात थी। यही जुनून मुझे इस कहानी में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। सवाल: प्रतिभा रांटा में आपको वह प्रतिभा कब नजर आई, जो इस किरदार के लिए जरूरी थी? अगर वह शो करने से मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब/निखिल आडवाणी: मेरे लिए किसी एक्टर के पास जाना सिर्फ कास्टिंग नहीं है। मैं किसी कलाकार के पास तब तक नहीं जाना चाहता, जब तक मेरे पास उसके लिए ऐसा कुछ न हो, जिसमें वह पूरी तरह डूब सके। प्रतिभा के मामले में भी ऐसा ही था। मुझे पता था कि वह बहुत अच्छी एक्टर हैं, लेकिन यह समझना भी जरूरी था कि वह किरदार को किस तरह अपने अंदर उतारेंगी। हमने कई सीन्स पर महीनों चर्चा की। एक-एक लाइन पर बात की कि इसका मतलब क्या है और इसे किस तरह करना है। अगर प्रतिभा ने इस शो के लिए मना कर दिया होता, तो मैं सच में मेरा दिल टूट हो जाता। क्योंकि उन्होंने इस किरदार के लिए जो दिया है, वह बहुत खास है। मैं हमेशा मानता हूं कि एक एक्टर के अंदर यह चुनौती होनी चाहिए कि क्या मैं इस सीन को और बेहतर कर सकता हूं? क्या मैं इसे पेपर पर लिखे हुए सीन से आगे ले जा सकता हूं? अगर यह चुनौती नहीं है तो काम बोरिंग हो जाता है। सवाल: आपने कहा कि आप किसी कलाकार को सिर्फ इसलिए नहीं लेते कि वह बड़ा नाम है। मनोज बाजपेयी का 25 साल वाला किस्सा क्या है? जवाब/निखिल आडवाणी: मनोज बाजपेयी मुझसे करीब 25 साल से कहते रहे थे कि मेरे साथ काम करना है। जब मैं आखिरकार उनके पास ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गया तो उन्होंने मुझसे कहा- ‘अब आए हो?’ मैं किसी बिजी स्टार के पीछे भागने में विश्वास नहीं करता। मेरे लिए जरूरी है कि मेरे पास उस कलाकार के लिए सही किरदार हो। मैं किसी एक्टर के पास सिर्फ इसलिए नहीं जाता कि वह बड़ा नाम है। मुझे ऐसा किरदार लेकर जाना होता है, जिसमें वह अपने दांत गड़ा सके और पूरी तरह डूब सके। यही बात प्रतिभा के साथ भी थी। मुझे उनके लिए सही किरदार मिला और फिर हमने साथ में उसे खोजा। सवाल: प्रतिभा, निखिल सर ने आपको किरदार किस तरह समझाया? जवाब/प्रतिभा रांटा: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उसमें काफी कुछ पहले से मौजूद था, क्योंकि सर और उनकी टीम ने बहुत रिसर्च की थी। लेकिन प्रतिभा के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी क्रांतिकारी महिलाओं से भी प्रेरणा ली गई। मैंने भिकाजी कामा और बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के बारे में पढ़ा। मुझे फिल्म ‘लिटिल वुमन’ भी बहुत पसंद है और उससे भी मुझे प्रेरणा मिली। सर के साथ लगातार चर्चा होती थी कि प्रतिभा को किस तरह अप्रोच करना है। वह स्क्रीन पर सामान्य लड़की की तरह नहीं दिखती। उसमें आत्मविश्वास और आग है। वह बराबरी का हक मांगती है और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन सा सीन आपके लिए सबसे खास रहा? जवाब/प्रतिभा रांटा: बाघा जतिन और प्रतिभा के बीच का एक सीन मेरे लिए बहुत खास है। उसमें प्रतिभा उनसे कहती है कि आपको किसने हक दिया कि आप हमारे बारे में फैसला करें? अगर आप अपने लिए फैसले ले सकते हैं तो हम क्यों नहीं ले सकते? उस सीन में प्रतिभा का नजरिया साफ दिखाई देता है। वह महिलाओं को बराबरी से देखती है और अपने फैसले खुद लेना चाहती है। निखिल आडवाणी: यह सीन सुबह करीब 5 बजे शूट हुआ था। शूटिंग में देरी हो गई थी और वह लोकेशन का आखिरी दिन था, इसलिए हम वापस भी नहीं आ सकते थे। प्रतिभा और मैं उस सीन पर महीनों से बात कर रहे थे। वह उस वक्त काफी परेशान थी, लेकिन सुबह 5 बजे उसने जो परफॉर्म किया, वह शानदार था। यह उनके किरदार का बहुत महत्वपूर्ण सीन है और उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया। सवाल: रोहित, आपके लिए शो में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या रहा? जवाब/रोहित सराफ: मेरे लिए राजबिहारी बोस के साथ वाले सीन्स बहुत खास रहे। मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला, जिसे मैं बहुत मानता हूं। उनके साथ इंटरपर्सनल रिलेशनशिप वाले सीन्स करना मेरे लिए बहुत मजेदार था। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण एक्शन था। मैंने पहले इतना एक्शन नहीं किया था। इसकी तैयारी की और शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा। सवाल: अगर उस दौर का कोई क्रांतिकारी आज आपके सामने आ जाए तो क्या पूछेंगे? जवाब/रोहित सराफ: मैं उनसे पूछूंगा- ‘आप क्या खाकर पैदा हुए थे?’ सच में, क्योंकि उस दौर के लोगों में जिस तरह का जज्बा और जुनून था, उसी की वजह से आज हम यहां हैं। मैं जानना चाहूंगा कि उस तरह सपने देखना कैसा था? सवाल: प्रतिभा के किरदार से आज की लड़कियां क्या सीख सकती हैं? जवाब/प्रतिभा रांटा: सिर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी इस किरदार से बहुत कुछ सीख सकते हैं। प्रतिभा जिस तरह दुनिया को समझती है, लोगों को देखती है और बराबरी का हक मांगती है, वह महत्वपूर्ण है। उसके अंदर बराबरी की भावना है। वह मानती है कि अगर लड़के अपने फैसले खुद ले सकते हैं तो लड़कियों को भी अपने फैसले लेने का पूरा हक है। सवाल: क्या ‘द रिवोल्यूशनरीज’ जैसी कहानी पर फिल्म भी बनाई जा सकती है? जवाब/निखिल आडवाणी: बिल्कुल बनाई जा सकती है। लेकिन मुझे सीरीज का फॉर्मेट पसंद है, क्योंकि इसमें किरदारों को ज्यादा गहराई से एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है। इसमें रोमांस है, एक्शन है और कई किरदारों की अपनी अलग परतें हैं। अगर यह फिल्म होती तो भी मैं इन्हीं कलाकारों के साथ काम करता। मैंने रोहित, प्रतिभा और बाकी कलाकारों को इसलिए चुना क्योंकि वे मेरे दिमाग में मौजूद किरदारों के लिए बिल्कुल सही थे। मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि फॉर्मेट ओटीटी है या फिल्म। सही कलाकार और सही किरदार सबसे ज्यादा जरूरी हैं।
पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु की फिल्म मिर्जापुर द मूवी रिलीज हो गई है। फिल्म देखने का अगर आप प्लान बना रहे हैं तो पहले पढ़ें मूवी का फर्स्ट रिव्यू।
बेड पर मिली सड़ी-गली लाश, घर में खून के निशान, सिंगर की मौत से हड़कंप
पंजाबी सिंगर बलजीत सिंह का शव लुधियाना स्थित घर से बरामद हुआ. घर में खून के निशान मिले, लेकिन पोस्टमार्टम में हार्ट अटैक से मौत की बात सामने आई.
टीवी के वो सितारे जिन्हें कृष्ण बनते ही मिली ऐसी पहचान, लोग असली नाम भूलकर कहने लगे 'कान्हा'
टीवी ने भगवान कृष्ण की लीलाओं को करोड़ों घरों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। जब धार्मिक सीरियल घर-घर में देखे जाने लगे तो पर्दे पर कृष्ण का किरदार निभाने वाले कलाकार भी अचानक लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए।
समय रैना को सम्मानित करने पर भड़के गजेंद्र चौहान
मुंबई, 'महाभारत' में युधिष्ठिर का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान ने कमीडियन समय रैना को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी राय रखी है।
कास्ट- अरशद वारसी, विजय राज, संजीदा शेख डायरेक्टर- अभिषेक डोगरा ड्यूरेशन: 1 घंटा 55 मिनट रेटिंग- 3/ 5 एक आदमी अपनी मौत का झूठा नाटक रचता है, करोड़ों का इंश्योरेंस पाने का सपना देखता है और फिर उसकी जिंदगी में ऐसा बवाल शुरू होता है कि संभालना मुश्किल हो जाता है। ‘जीवन या भीमा कॉन?’ का आइडिया पहली नजर में काफी मजेदार लगता है और फिल्म की शुरुआत भी इसी वजह से उम्मीद जगाती है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कॉमेडी के साथ उलझन भी बढ़ती जाती है। कुछ सीन खूब हंसाते हैं, कलाकारों की टाइमिंग भी अच्छी है, लेकिन कहानी हर बार अपने ही सेटअप का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी है जीवन (अरशद वारसी) की, जो एक आम आदमी है और अपनी जमा-पूंजी एक रेस्टोरेंट खोलने में लगा देता है। हालात बिगड़ते हैं, कर्ज बढ़ता है और पैसे की जरूरत ऐसी आती है कि जीवन अपनी मौत का नाटक करने की खतरनाक योजना बना लेता है। किस्मत उसका साथ कुछ इस तरह देती है कि उसे अपने हमशक्ल भीमा (अरशद वारसी) के बारे में पता चलता है। भीमा एक डायमंड स्मगलर है, जिसका संबंध गैंगस्टर विनायक (विजय राज) से है। जीवन और उसकी पत्नी योजना (संजीदा शेख) मिलकर भीमा की पहचान का फायदा उठाकर दो करोड़ रुपए का इंश्योरेंस हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन प्लान यहां से बिगड़ना शुरू होता है। भीमा के पीछे पड़े विनायक और उसका साथी मनु (बृजेंद्र काला) उनके घर तक पहुंच जाते हैं। दूसरी तरफ इंश्योरेंस इंस्पेक्टर (अतुल परचुरे) भी क्लेम की जांच में लग जाता है। घर की मालकिन याशिका (पूजा चोपड़ा) की अपनी अलग दिलचस्पी है। इसके बाद हर किरदार दूसरे को शक की नजर से देखने लगता है और शुरू होती है गलत पहचान, झूठ और पैसों के पीछे भागने की कॉमेडी। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? अरशद वारसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। एक तरफ वह परेशान, कर्ज में डूबे जीवान बने हैं और दूसरी तरफ शराबी डायमंड स्मगलर भीमा। दोनों किरदारों के हाव-भाव, बोलने के तरीके और बॉडी लैंग्वेज में फर्क दिखाना आसान नहीं था, लेकिन अरशद इसे अच्छी तरह संभालते हैं। खासकर भीमा वाले हिस्सों में उनका कॉमिक टाइमिंग फिल्म को कई बार बचाता है। संजीदा शेख, योजना के किरदार में अच्छी लगती हैं और अरशद के साथ उनकी केमिस्ट्री भी सहज लगती है। विजय राज अपने अंदाज में फिल्म में क्राइम और कॉमेडी का अच्छा बैलेंस बनाते हैं। बृजेंद्र काला भी अपने किरदार में फिट बैठते हैं और कुछ सीन में अच्छी हंसी निकालते हैं। पूजा चोपड़ा को याशिका के रूप में कुछ मजेदार मौके मिलते हैं, हालांकि उनके किरदार को थोड़ा और इस्तेमाल किया जा सकता था। दिवंगत अतुल परचुरे इंश्योरेंस इंस्पेक्टर के छोटे लेकिन असरदार रोल में अपनी स्वाभाविक कॉमिक टाइमिंग दिखाते हैं। कैसा है डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और टेक्निकल एस्पेक्ट्स? डायरेक्टर अभिषेक डोगरा ने कहानी को ज्यादातर एक ही घर के अंदर रखा है। इससे फिल्म का सेटअप एक तरह की कमरे में बंद कॉमेडी जैसा बन जाता है, जहां कलाकारों और स्क्रीनप्ले पर पूरा दारोमदार रहता है। शुरुआत में यह तरीका काम करता है, लेकिन बाद में यही सीमित लोकेशन कहानी पर भारी पड़ने लगती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी समस्या यह है कि फिल्म के पास एक अच्छा आइडिया होने के बावजूद उसके साथ लगातार नए और मजेदार खेल नहीं किए जाते। कुछ स्थितियां बार-बार दोहराई जाती हैं। गलत पहचान से पैदा होने वाली कॉमेडी में काफी गुंजाइश थी, लेकिन कहानी उस संभावनाओं को पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती। फिल्म में कुछ वन-लाइनर्स हंसाते हैं, लेकिन कई जगह हास्य जरूरत से ज्यादा साधारण और जबरदस्ती का लगता है। खासकर फार्ट जोक्स और टॉयलेट ह्यूमर हर दर्शक को पसंद आए, यह जरूरी नहीं। फिल्म का दूसरा हिस्सा कुछ जगह खिंचता हुआ महसूस होता है और क्लाइमैक्स भी बहुत ज्यादा चौंकाता नहीं है। टेक्निकल तौर पर फिल्म ठीक-ठाक है। सिनेमैटोग्राफी कहानी के हिसाब से काम करती है और प्रोडक्शन डिजाइन फिल्म के मिडिल क्लास माहौल को सपोर्ट करता है। एडिटिंग पहले हिस्से में ठीक रहती है, लेकिन बाद के हिस्से में कुछ सीन और छोटे किए जा सकते थे। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का म्यूजिक कहानी पर हावी नहीं होता और ज्यादातर बैकग्राउंड तक ही सीमित रहता है। कोई ऐसा गाना नहीं है जो फिल्म देखने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर कॉमेडी और क्राइम वाले हिस्सों को सपोर्ट करता है और फिल्म के माहौल के हिसाब से ठीक बैठता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? ‘जीवन या भीमा कॉन?’ के पास एक ऐसा आइडिया है, जिससे एक शानदार कॉमेडी ऑफ एरर्स बनाई जा सकती थी। कलाकार भी अच्छे हैं और अरशद वारसी फिल्म को लगातार संभालते नजर आते हैं। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, दोहराए गए मजाक, कुछ जबरदस्ती के जोक्स और अनुमान लगाने लायक क्लाइमैक्स फिल्म को उस स्तर तक नहीं पहुंचने देते, जहां यह यादगार कॉमेडी बन सके। फिर भी अगर आप बिना ज्यादा उम्मीद के हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो फिल्म एक बार मनोरंजन कर सकती है। मसाला मौजूद है, कलाकार भी दमदार हैं, बस कहानी की आंच थोड़ी और तेज होती तो स्वाद काफी बेहतर होता।
Hanuman Ansh: तीन महिलाओं की वजह से हिट हुई हनुमान अंश, डायरेक्टर ने बताया सफलता का सीक्रेट
हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका किया है। फिल्म ने जिस तरह की सफलता पाई है, हर कोई उसके बारे में बात कर रहा है। अब फिल्म के डायरेक्टर ने फिल्म की सफलता का राज बताया है। उन्होंने तीन महिलाओं को फिल्म सफल होने का एक कारण बताया है।
हैरी पॉटर 2.0: नॉस्टैल्जिया से हटकर, किताब के करीब!
रीमेक के दौर में एक और रीमेक आया है. HBO अब हैरी पॉटर को वेब सीरीज़ के अंदाज़ में ला रहा है. मामला क्लियर है कि पहले जितनी किताबें थीं, उतनी फिल्में थीं. लेकिन अब उतनी वेब सीरीज़ आएंगी. ट्रेलर पर कई तरह के रिएक्शन हैं, लेकिन कमाल ये है कि ट्रेलर में विस्तार है और जिसे पीक डिटेलिंग कहते हैं इस बार वैसा ही मामला नज़र आ रहा है.
राखी सावंत ने कहा कि उन्हें स्क्रिप्ट में कोई दिलचस्पी नहीं थी, क्योंकि उन्हें सिर्फ घर खरीदने के लिए पैसे चाहिए थे। 'ड्रामा क्वीन' ने यह भी बताया कि उन्होंने उस वक्त 16 लड़कों को डेट किया था।
बिग बॉस 13: आसिम रियाज पर क्यों भड़के विशाल आदित्य सिंह? कहा- आर्ट जीरो और बकवास 100 प्रतिशत
आसिम रियाज और विशाल आदित्य के बीच जुबानी जंग जारी है। आसिम ने पहले विशाल आदित्य पर तंज किया। इसके बाद अभिनेता विशाल ने उन्हें सोशल मीडिया पर जवाब दिया है।
हनुमान अंश की सक्सेस के बीच डायरेक्टर ने निकाली बॉलीवुड पर भड़ास, बोले- यहां ऐसे लोग भरे हैं जो...
हनुमान अंश फिल्म को काफी पसंद किया जा रहा है और अब डायरेक्टर विशाल फिल्म को लेकर खूब बात कर रहे हैं। इस बीच उन्होंने इंडस्ट्री के लोगों पर नाराजगी भी जाहिर की है।
‘द ट्रेटर्स 2’ के फिनाले में शालिनी पासी अंतिम तीन तक पहुंचीं, लेकिन जीत से ठीक पहले उनका खेल खत्म हो गया।
पान मसाला एड मामले में अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को अपना जवाब भेज दिया है। वहीं, शाहरुख खान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। तीनों एक्टर्स को 14 अगस्त को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर जवाब देने का आदेश दिया गया था। महाराष्ट्र FDA ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को ‘च्युइंग इलायची’ ब्रांड का विज्ञापन करने के मामले में नोटिस भेजा था। नोटिस में 15 दिन के अंदर जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई थी। ‘सीएनएन-न्यूज18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटर को अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के जवाब मिल गए हैं। शाहरुख खान का जवाब अभी तक नहीं मिला है और FDA उनके रिप्लाई का इंतजार कर रहा है। रेगुलेटर ने सवाल उठाया है कि क्या यह विज्ञापन विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के बराबर हो सकता है। महाराष्ट्र में पान मसाला के प्रमोशन पर रोक है। FDA का कहना है कि भले ही विज्ञापन इलायची प्रोडक्ट के लिए है, लेकिन इसकी ब्रांडिंग पान मसाला ब्रांड से अप्रत्यक्ष कनेक्शन बना सकती है। तीनों एक्टर्स से मांगे गए थे सबूत FDA ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ से इस बात के सबूत मांगे थे कि उन्होंने विमल इलायची का जो विज्ञापन किया है, वह पूरी तरह अलग प्रोडक्ट है। इसके साथ ही उनसे यह भी साबित करने को कहा गया था कि यह विज्ञापन बैन किए गए विमल पान मसाला और तंबाकू के दूसरे प्रोडक्ट्स के प्रमोशन के लिए बनाया गया सरोगेट विज्ञापन नहीं है। शाहरुख के जवाब नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ का जवाब मिलने के बाद अब FDA शाहरुख खान के जवाब का इंतजार कर रहा है। शाहरुख की तरफ से जवाब नहीं मिलने पर FDA क्या कार्रवाई करेगा, यह अभी साफ नहीं है। जानकारी के मुताबिक, समय सीमा तक जवाब न देने की स्थिति में लाखों रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पान मसाला एड विवाद पर सेलेब्स के पुराने बयान पान मसाला एड पर लंबे समय से विवाद है। हालांकि एक्टर्स का कहना है कि एड नहीं बल्कि बिक्री पर रोक लगाना चाहिए। शाहरुख खान और अजय देवगन पहले भी कह चुके हैं कि अगर कोई प्रॉडक्ट सेहत के लिए नुकसानदेह है, तो सरकार को उसके निर्माण और बिक्री पर ही रोक लगा देनी चाहिए। CNN-IBN को दिए एक पुराने इंटरव्यू में शाहरुख खान से पूछा गया था कि स्वास्थ्य मंत्री ने सेलिब्रिटीज से सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे उत्पादों का विज्ञापन न करने की अपील की है, क्योंकि बच्चे उन्हें देखकर पीने लगते हैं। इस पर शाहरुख ने कहा था कि अगर सिगरेट या सॉफ्ट ड्रिंक्स खराब हैं, तो सरकार देश में उनकी बिक्री और उत्पादन ही रोक दे। सरकार को मिलता है रेवेन्यू, फिर मेरी कमाई क्यों रोकते हैं - शाहरुख शाहरुख खान ने अपने जवाब में तर्क दिया था कि सरकार ऐसे उत्पादों को इसलिए बंद नहीं करती क्योंकि वे सरकार के लिए राजस्व (रेवेन्यू) का जरिया हैं। शाहरुख ने कहा था कि जब सरकार अपने रेवेन्यू के लिए उत्पादन नहीं रोक रही है, तो उनकी कमाई को भी नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे एक एक्टर हैं और काम करके कमाना उनका पेशा है। अगर कोई चीज वाकई गलत है, तो उसका बनना ही बंद होना चाहिए। अजय देवगन बोले- मैं केवल इलायची का प्रचार करता हूं साल 2022 में भी जब इस तरह के विज्ञापन पर विवाद बढ़ा था, तब अभिनेता अजय देवगन ने अपना पक्ष रखा था। अजय ने कहा था कि वे केवल 'इलायची' का विज्ञापन करते हैं और सरोगेट एडवरटाइजिंग के आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि किसी उत्पाद को इस्तेमाल करना इंसान की व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। अजय ने भी शाहरुख खान की बात से सहमति जताते हुए कहा था कि अगर कोई उत्पाद हानिकारक है, तो सबसे पहले उसके निर्माण पर रोक लगानी चाहिए। सेलेब्स के इन एड पर भी हुआ विवाद- कृति सेनन रक्षाबंधन एड विवादः एक्ट्रेस कृति सेनन हाल ही में जूलरी ब्रांड जीवा के जूलरी ब्रांड में नजर आईं। एड में भाई और कुत्ते को राखी बांधती हुईं कृति ने रिवीलिंग कपड़े पहने, जिससे विवाद हो गया। आलोचना के बीच ब्रांड ने एड हटा दिया। आमिर खान गृहप्रवेश एड विवादः आमिर खान कुछ सालों पहले एक प्राइवेट बैंक के एड में कियारा आडवाणी संग नजर आए। इसमें आमिर शादी के बाद दुल्हन के गृह प्रवेश करने के उलट घर जमाई के रूप में ससुराल में गृह प्रवेश करते नजर आ रहे हैं। तनिष्क एड पर हिंदू-मुस्लिम विवादः टाटा ग्रुप के मशहूर ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क ने कुछ सालों पहले इंटर रिलीजन मैरिज पर आधारित एड जारी किया था। विज्ञापन में एक हिंदू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी दिखाई गई है। एड पर जमकर विवाद हुआ, जिसके बाद तनिष्क ने वीडियो को यूट्यूब चैनल से हटा दिया है।
करण जौहर का सबसे बड़ा दांव! राधा-कृष्ण की कहानी पर बनेगी मेगा फिल्म
Janmashtami 2026: करण जौहर अब राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी पर फिल्म बनाने की तैयारी में हैं. फिल्म में कृष्ण के जन्म से कंस वध तक का सफर दिखाया जाएगा.
Bigg Boss 20 House: लग्ज़ूरियस इंटीरियर देख चौंक जाएंगे
Bigg Boss 20 के ग्रैंड प्रीमियर से पहले नए BB House की झलक सामने आई है. 100 से ज्यादा कैमरों वाले इस घर में जंगल थीम, शार्क स्टाइल पूल और मिस्ट्री रूम खास आकर्षण हैं. जानें नए घर की पूरी खासियत. एंट्री गेट पर बना विशाल ड्रामेटिक स्टैच्यू भी घर का खास आकर्षण है.
'क्या हम मुस्लिम हैं?' फरहान अख्तर के सवाल पर जावेद अख्तर का बेबाक जवाब वायरल
जावेद अख्तर हमेशा धर्म को लेकर खुलकर अपनी बात रखते हैं। जावेद का कहना है कि वह किसी धर्म को नहीं मानते हैं, लेकिन वह सबकी रिस्पेक्ट जरूर करते हैं।
कास्ट- तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, मीता वशिष्ठ, छाया कदम, चंदन रॉय, प्रशांत नारायण डायरेक्टर- देवाशीष मखीजा ड्यूरेशन- 1 घंटा 56 मिनट रेटिंग- 1.5/5 एक मां की बेटी गायब हो जाए, तो उसका दर्द कितना बड़ा होगा, यह समझने के लिए किसी भारी-भरकम डायलॉग की जरूरत नहीं होती। बस उस मां का चेहरा काफी है। ‘गांधारी’ के पास यही सबसे मजबूत हथियार था, एक मां, उसकी खोई हुई बेटी और उसे वापस पाने के लिए किसी भी हद तक जाने का जुनून। लेकिन फिल्म ने इस सीधे और दमदार आइडिया को इतना घुमाया, इतना सजाया और इतने ट्विस्ट डाल दिए कि आखिर में मां की कहानी कम और स्क्रीनप्ले की कसरत ज्यादा नजर आने लगती है। तापसी पन्नू पूरी ताकत से बानी का किरदार निभाती हैं। वह दौड़ती हैं, लड़ती हैं, मार खाती हैं और फिर उठकर लड़ती हैं। फिल्म उनसे हर तरह का इमोशन निकलवाना चाहती है। दिक्कत सिर्फ इतनी है कि जिस कहानी के लिए वह इतना सब कर रही हैं, वही कहानी बार-बार उनके पैरों में आकर गिर जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? बानी (तापसी पन्नू) और गोकुल (इश्वाक सिंह) अपनी बेटी के साथ सफर पर हैं। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन अचानक बेटी गायब हो जाती है। इसके बाद शुरू होती है एक मां की तलाश। जॉयपुरा नाम के छोटे शहर में पहुंचने के बाद बानी को एहसास होता है कि मामला सिर्फ एक बच्ची के गायब होने का नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क है और शहर में कई चेहरे ऐसे हैं, जिन पर भरोसा करना मुश्किल है। बानी की आंखों की रोशनी भी चली जाती है। लेकिन यहीं से फिल्म का सबसे दिलचस्प आइडिया सामने आता है, वह अपनी हालत को छिपाकर खुद को अंधा दिखाने लगती है, ताकि उन लोगों तक पहुंच सके जो उसकी बेटी के गायब होने के पीछे हैं। कहानी में बाल तस्करी, पुलिस, स्थानीय लोगों की मिलीभगत, धार्मिक प्रतीक और कई रहस्यमय किरदार जुड़ते जाते हैं। मीता वशिष्ठ, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी, जतिन सरना, चंदन रॉय और प्रशांत नारायण जैसे कलाकार कहानी में मौजूद हैं, लेकिन इतने सारे किरदारों के बीच असली कहानी कई बार पीछे छूट जाती है। फिल्म लगातार आपको चौंकाने की कोशिश करती है। समस्या यह है कि कुछ देर बाद ट्विस्ट चौंकाने के बजाय थकाने लगते हैं। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? तापसी पन्नू ने बानी के किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। एक्शन सीक्वेंस में उनकी मेहनत साफ दिखाई देती है। वह किरदार की शारीरिक और भावनात्मक मुश्किलों से पूरी तरह गुजरती नजर आती हैं। लेकिन अभिनय तभी असर करता है, जब कहानी उसे सहारा दे। यहां कई जगह तापसी जितना ज्यादा भाव देने की कोशिश करती हैं, फिल्म उतनी ही बनावटी लगने लगती है। इश्वाक सिंह ठीक हैं, लेकिन उनके किरदार को ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिला। जतिन सरना, मीता वशिष्ठ, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी और चंदन रॉय जैसे अच्छे कलाकार भी स्क्रीनप्ले की कमजोरी के आगे ज्यादा असर नहीं छोड़ पाते। प्रशांत नारायण को स्क्रीन पर बहुत कम वक्त मिलता है, लेकिन उनकी मौजूदगी बाकी कलाकारों के मुकाबले ज्यादा प्रभावशाली लगती है। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले? देवाशीष मखीजा की ‘जोरम’ जैसी फिल्म देखने के बाद ‘गांधारी’ से उम्मीद काफी ज्यादा थी। लेकिन यहां निर्देशक अपनी ही कहानी को संभाल नहीं पाए। फिल्म की शुरुआत एक गंभीर क्राइम थ्रिलर की तरह होती है। फिर यह मां की तलाश बनती है, फिर बदले की कहानी और कुछ देर बाद एक्शन फिल्म। एक मां अपनी बेटी को बचाने के लिए लड़ रही है, इससे ज्यादा सीधी और इमोशनल कहानी क्या होगी? लेकिन फिल्म को शायद सरल रहना मंजूर नहीं था। स्क्रीनप्ले हर कुछ मिनट में नया मोड़ लाता है। कुछ ट्विस्ट काम करते हैं, लेकिन ज्यादातर सिर्फ कहानी को और उलझाते हैं। सबसे बड़ी परेशानी बानी का बदलाव है। शुरुआत में वह एक परेशान मां है, लेकिन बाद में फिल्म उसे लगभग सुपर-वुमन बना देती है। वह अकेले कई लोगों से भिड़ती है, मार खाती है और फिर उसी ताकत से वापस खड़ी हो जाती है। पर्दे पर यह देखने में जोश जरूर देता है, लेकिन कहानी के भीतर इसका सफर पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगता। फिल्म में कई प्रतीक और रूपक भी हैं। ‘गांधारी’ का नाम खुद महाभारत की उस महिला से जुड़ा है, जिसने अपने नेत्रहीन पति के साथ रहने के लिए अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। फिल्म इस संदर्भ को अपनी कहानी से जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन कई जगह यह जुड़ाव स्वाभाविक कम और जबरदस्ती का ज्यादा लगता है। एडिटिंग भी कहानी को बचाने के बजाय और परेशान करती है। समय में आगे-पीछे जाना, अचानक फ्लैशबैक और लगातार खुलते राज कहानी को तेज तो बनाते हैं, लेकिन इमोशन को सांस लेने की जगह नहीं देते। और फिर आते हैं एक्शन सीन। कुछ सीक्वेंस अच्छे हैं, लेकिन फिल्म कई जगह यथार्थ से इतनी दूर निकल जाती है कि दर्शक किरदार के दर्द से जुड़ने के बजाय अगला स्टंट देखने लगता है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के तनाव को बढ़ाने की कोशिश करते हैं। कुछ जगह माहौल बनता है, लेकिन कई बार संगीत खुद दृश्य से ज्यादा जोर से बोलने लगता है। ‘बिटिया’ जैसे भावनात्मक हिस्से कहानी के मूड के साथ चलते हैं, लेकिन संगीत फिल्म की सबसे बड़ी कमी को नहीं ढक पाता, कमजोर कहानी। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘गांधारी’ में आइडिया खराब नहीं है। बल्कि आइडिया काफी अच्छा है। एक मां अपनी बेटी को बचाने के लिए अपनी कमजोरी को हथियार बना ले, यह कहानी दर्शकों को बांध सकती थी। लेकिन फिल्म ने इस कहानी को इतना घुमा दिया कि भावनाएं रास्ते में कहीं छूट गईं। तापसी पन्नू ने मेहनत की, एक्शन किया और किरदार को पूरी ताकत दी। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, जरूरत से ज्यादा ट्विस्ट, असमान टोन और कई जगह बनावटी लगने वाला ड्रामा फिल्म को संभाल नहीं पाता। ‘गांधारी’ में मां का गुस्सा बहुत है, लेकिन कहानी में दम कम। तापसी लड़ती बहुत हैं, पर फिल्म खुद से ही हार जाती है। ……………………………………………… फिल्म गांधारी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए- नेटफ्लिक्स पर कहानी चोरी का आरोप:राइटर बोले- चोरी कर बनाई गई तापसी पन्नू की फिल्म 'गांधारी'; कंपनी को भेजा लीगल नोटिस तापसी पन्नू स्टारर फिल्म 'गांधारी' के 3 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्क्रीनराइटर कल्याण बंदी ने नेटफ्लिक्स इंडिया और उसकी कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल पर कहानी चोरी का आरोप लगाया है। कल्याण का दावा है कि उन्होंने साल 2019 में 'गांधारी' नाम की अपनी कहानी मोनिका शेरगिल को ईमेल की थी, जिसे तब रिजेक्ट कर दिया गया था। अब उसी टाइटल और कॉन्सेप्ट पर फिल्म बनाई जा रही है। कल्याण ने नेटफ्लिक्स को लीगल नोटिस भी भेजा है, लेकिन कंपनी ने 11 महीने से इसका कोई जवाब नहीं दिया है। पूरी खबर पढ़िए…
विराट-अनुष्का देखें ‘हनुमान अंश’, बाबा के भक्तों से डायरेक्टर ने जताई ख्वाहिश
‘हनुमान अंश’ की सफलता के बीच डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी चाहते हैं कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा भी फिल्म देखें. सहवाग की तारीफ से वह बेहद खुश हुए.
सिर्फ दो करोड़ रुपये की लागत में बनी यह फिल्म 500 करोड़ रुपये की लागत में बनी फिल्म 'टॉक्सिक' की कमाई पर भारी पड़ रही है।
OTT: 7.9 रेटिंग वाली वो खौफनाक क्राइम थ्रिलर, जिसकी कहानी शुरू ही होती है 'कटे हाथों' से
OTT Recommendation: न सुपरकॉप, न धड़ाधड़ एक्शन... फिर भी ये क्राइम थ्रिलर आपके रोंगटे खड़े कर देगी। इसकी आईएमडीबी रेटिंग 7.9 है और लोग इसे एक-दूसरे को रिकमंड कर रहे हैं।
Ott Must Watch : 8.2 रेटिंग वाली ये साइको थ्रिलर फिल्म देखी? कूट-कूट कर भरा है सस्पेंस
आज हम आपको जी 5 की एक फिल्म के बारे में बताने वाले हैं जो साइको थ्रिलर है। ये फिल्म जी 5 की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली मूवी में से एक है।
भगवान श्री कृष्ण की भक्ति उनके जन्मोत्सव पर भक्तों के सर चढ़ कर बोल रही है। इसी भक्ति पर बनी कई फिल्में दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती है।
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कान्हा के रोल में छाए ये सितारे, रातोरात पाई शोहरत
बी.आर. चोपड़ा की मशहूर ‘महाभारत’ में नीतीश भारद्वाज ने भगवान कृष्ण का किरदार निभाया था. उनका अभिनय आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार पौराणिक किरदारों में गिना जाता है. जब उन्होंने यह भूमिका निभाई, तब वह सिर्फ 23 साल के थे. कृष्ण के किरदार ने उनके करियर को एक अलग पहचान दी.
छोटे पर्दे पर नीतीश भारद्वाज से लेकर कई कलाकारों ने श्रीकृष्ण का किरदार निभाया है।
हिंदू धर्म भूल गईं क्या?' वंदे मातरम विवाद पर मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर पर किया तीखा वार
वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर के बयान पर मुकेश खन्ना ने रिएक्ट किया है और उन्होंने एक्ट्रेस पर निशाना साधा है। इसके अलावा मुकेश ने शर्मिला पर कई सवाल भी उठाए हैं।

