5 सितंबर, शनिवार: मुजफ्फरपुर में बाबा गणिनाथ गोविंद जी महाराज के जन्मोत्सव पर ध्वजारोहण कर बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने पलवैया मेला का शुभारंभ किया। भव्य उद्घाटन हुआ, पूजा के लिए महिला श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी।
कोलकाता, 5 सितंबर . पश्चिम बंगाल में इस बार दूर्गा पूजा को भव्य रूप से सेलिब्रेट करने के लिए प्रदेश Government Monday को एक बड़ी बैठक करेगी. इस बैठक में इस साल दुर्गा पूजा के जश्न को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी. त्योहार के दौरान कोलकाता में बड़े पैमाने ... Read more
इंटरनेट डेस्क। आप भी काम कर कर के बोर हो चुके है और चाहते हैं की दोस्तों के साथ में इस बोरिंग वीकेंड को इंटरेस्टिंग बनाया जाए तो फिर आप त्रिशला फार्महाउस पर जा सकते है। यहां आपको कई तरह की सुविधाएं मिलेगी साथ ही आपके खाने पीने से लेकर रहने तक हर चीज का ख्याल रखा जाएगा। इसके साथ ही स्वीमिंग पूल का भी आनंद ले सकते है। जा सकते हैं आप बता दें की जयपुर के गोनेर रिंग रोड के पास खिजूरिया ब्राहम्णान में बना ये फार्महाउस ऐसे इवेंट के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। इसके साथ ही शहर की भीड़ से दूर है और यहां आपको एक बढ़िया सुविधा भी मिलती है। तो ऐसे में आप इस पार्टी के लिए त्रिशला फार्महाउस जा सकते है। कम बजट में मिल जाएगा आपको त्रिशला फार्महाउस कम ही बजट में उपलब्ध हो जाएगा। यहां आपको कई एक्टिविटीज भी करने का मौका मिलेगा। आप स्वीमिंग पूल का आनंद भी ले सकेंगे,स्पोटर्स का आनंद ले सकते है। ऐसे में आप टैरिफ से जुडी पूरी जानकारी के लिए व्हाट्सएप नंबर 9784461221 पर मैसेज कर के पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कैसे पहुंचे आप राजस्थान के बाहर किसी शहर से हैं और एयरपोर्ट से यहाँ आ रहे हैं तो जानकारी के लिए बता दें कि जयपुर एयरपोर्ट से त्रिशला फार्म हाउस 22 किलोमीटर है। आप टैक्सी से आसानी से यहाँ पहुंच सकते हैं। ट्रेन से जयपुर आ रहे हैं तो रेलवे स्टेशन से त्रिशला फार्म हाउस की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है। टेक्सी से आप यहां पहुंच सकते है और इसके साथ ही यह जगह अक्षयपात्र जगतपुरा से 15 किलोमीटर है।
चाहत खन्ना की मालदीव वेकेशन की तस्वीरें इंटरनेट पर छाईं
टीवी एक्ट्रेस चाहत खन्ना की मालदीव वेकेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उन्होंने बीच और पूल से अपनी छुट्टियों की कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह वेकेशन एन्जॉय करती नजर आईं।
विजयानंद ट्रैवल्स ने वोल्वो को दिया अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर, बेड़े में शामिल होंगी 150 नई बस
प्राइवेट बस सर्विस ऑपरेटर विजयानंद ट्रैवल्स ने शुक्रवार को बतया कि उसने वोल्वो बसेज इंडिया को 150 लग्ज़री स्लीपर कोच का ऑर्डर दिया है। कंपनी अपनी प्रीमियम बस सर्विस का पूरे भारत में विस्तार करना चाहती है। कंपनी ने यह भी बताया कि इस ऑर्डर में शामिल अधिकांश कोच (लगभग 70-80) में ऑनबोर्ड वॉशरूम लगाए जाएंगे,जिन्हें खास तौर पर लंबी दूरी के रूट के लिए बनाया गया है।कंपनी ने बताया कि वह अभी देश के दक्षिणी,पश्चिमी और मध्य इलाकों में काम कर रही है और प्रीमियम इंटरसिटी ट्रैवल सेगमेंट में अपनी पैठ बढ़ा रही है। कंपनी ने यह भी कहा कि यह बस ऑर्डर किसी प्राइवेट बस ऑपरेटर की ओर से वोल्वो बसेज को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर है।विजयानंद ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर शिवा संकेश्वर ने कहा कि 150 वोल्वो 9600 स्लीपर कोच के इस ऑर्डर के साथ (जो किसी प्राइवेट बस ऑपरेटर का अब तक का सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर है) कंपनी अपने बेड़े को और मजबूत कर रही हैं और नए राज्यों में अपना विस्तार कर रही है।बताते चलें के वोल्वो 9600 प्लेटफ़ॉर्म को एक अवॉर्ड-विनिंग यूरोपियन डिजाइन से तैयार किया गया है और यह देश भर के अहम रूटों पर सफलतापूर्वक चलाई जा रही है। कर्नाटक के होसकोटे में VECV की अत्याधुनिक इकाई में बनाई जाने वाली वोल्वो 9600,'मेक इन इंडिया' पहल के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का प्रमाण है।इस घोषणा पर खुशी जाहिर करते हुए,शिवा संकेश्वर ने कहा,वोल्वो के साथ हमारा जुड़ाव दशकों पुराना है और यह इस सिद्धांत पर टिका हुआ है कि हमारे ग्राहकों को सुरक्षा,भरोसे और आराम के सबसे हाई स्टैंडर्ड मिलने चाहिए। 150 वोल्वो बसों के इस ऑर्डर के साथ (जो किसी भी प्राइवेट बस ऑपरेटर द्वारा दिया गया अब तक का सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर है)हम अपने बेड़े को काफी मज़बूत कर रहे हैं,नए राज्यों में विस्तार कर रहे हैं और भारत के सबसे भरोसेमंद प्रीमियम इंटरसिटी ट्रैवल ब्रांड के तौर पर विजयानंद ट्रैवल्स की स्थिति को और मज़बूत कर रहे हैं। वोल्वो इस सफर में लंबे समय से हमारा पार्टनर रहा है और यह निवेश उनकी टेक्नोलॉजी,सेफ्टी इंजीनियरिंग और सर्विस इकोसिस्टम में हमारे लगातार बने भरोसे को दिखाता है।इस पार्टनरशिप पर बात करते हुए, VE कमर्शियल व्हीकल्स के MD और CEO, बी. श्रीनिवास ने कहा,विजयानंद ट्रैवल्स भारत में वोल्वो बसों के सबसे अहम और पुराने प्राइवेट ऑपरेटर पार्टनर में से एक है। यह बड़ा ऑर्डर दोनों के बीच कायम दशकों के भरोसे का एक मज़बूत सबूत है। हमें उन ऑपरेटर्स के लिए पसंदीदा प्लेटफॉर्म होने पर बहुत गर्व है जो यात्रियों की सुरक्षा, आराम और भरोसे के मामले में सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड तय करते हैं। वोल्वो 9600 इंटरसिटी लग्ज़री का सबसे बेहतरीन उदाहरण है और इसे विजयानंद ट्रैवल्स की पूरे भारत में तेज़ी से विस्तार करने की महत्वाकांक्षी कहानी का अहम हिस्सा बनते देखना बहुत खुशी की बात है।
Kangra News: दलाई लामा के लौटने से पर्यटन कारोबारियों के खिले चेहरे
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के धर्मशाला लौटने से स्थानीय पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं।
2017 के बाद धार्मिक पर्यटन में ऐतिहासिक उछाल, 6 करोड़ के पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या
उत्तराखंड में 2017 के बाद धार्मिक पर्यटन में ऐतिहासिक उछाल आया है, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या 6 करोड़ के पार पहुंच गई है। चारधाम यात्रा, मानसखंड मिशन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ने राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को नई ऊंचाइयां दी हैं।
September Travel Plan: राजस्थान की Shekhawati Haveli में देखें कला और रॉयल्टी का बेजोड़ संगम
सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से बेहद खास होता है क्योंकि इस महीने में न ज्यादा गर्मी होती है और न ज्यादा बारिश होती है। ऊपर से मौसम भी सुहावना होता है। इस दौरान लोग घूमने के लिए कहीं न कहीं जरुर जाते हैं। अगर आप भी घूमने का प्लान बना रही हैं और समझ नहीं आ रहा है, कहां जाएं, तो यह लेख आपके लिए है। इस बार सितंबर में इतिहास, कला और राजशाही ठाट-बाट से भरपूर इन हवेलियों का दीदार जरुर करें। शेखावाटी की प्रसिद्ध हवेलियां सितंबर के महीने में घूमने के लिए शेखावाटी की ये भव्य हवेलियां सबसे बेस्ट हैं। यहां पर आपको सैकड़ों साल पुराने राजसी दौर की झलक देखने को मिलेगी। आइए आपको बताते हैं शेखावाटी की इन चुनिंदा हवेलियों और अनोखी वास्तुकला के बारे में बताते हैं- मंडावा की कलात्मक हवेलियां शेखावाटी के मंडावा शहर की हर गली में आपको शानदार कलाकृति और अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं। यहां आप मंडावा किला, हवेली, मुरमुरिया हवेली और चौखानी हवेली जैसी कई शानदार हवेलियों को देख सकते हैं। इन हवेलियों की बाहरी दीवारों पर बनीं सुंदर पेंटिंग्स देखने लायक है। नवलगढ़ की ऐतिहासिक हवेलियां यदि आपको फोटग्राफी का सबसे ज्यादा क्रेज और शौक है, तो आप नवलगढ़ की पोद्दार हवेली और आनंदीलाल पोद्दार हवेली देखने जरुर जाएं। यहां पर आपको दीवारों पर बेहतरीन रंगों और सोने-चांदी की नक्काशी से बनी पेंटिंग फोटोग्राफी देखने को मिलेगी। वहीं, आपको यहां पर राजस्थानी की लोक संस्कृति और वास्तुकला की भी पूरी जानकारी मिलेगी। फतेहपुर शेखावाटी की नादिन ले प्रिंस हवेली अगर आप फ्रांसीसी कला का शानदार अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप फतेहपुर कीनादिन ले प्रिंस हवेली' जरुर विजिट करें, यहां पर आपको राजस्थानी रॉयल्टी देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, आप यहां द्वारकाधीश हवेली और सिंघानिया हवेली के दर्शन करने जरुर जा सकते हैं। शेखावाटी की हवेलियों तक कैसे पहुंचे? - यहां जाने के लिए आप सबसे नजदीकी एयरपोर्ट 'जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' जाएं। यहां से फिर मंडावा और नवलगढ़ से करीब 150 से 170 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से बाहर आते ही आपको कैब या टैक्सी मिल जाएगी, जो आपको इस लोकेशन पर पहुंचा देगी। - इसके अलावा, आप नवलगढ़, मुकुंदगढ़ या झुंझुनू रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं। ये तीनों रेलवे स्टेशन शेखावाटी के काफी नजदीक है। स्टेशन से बाहर आते ही आपको आसानी से लोकल बस या टैक्सी यहां पर जाने के लिए मिल जाएंगी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल पर्यटन का नया लोगो और ब्रांड पहचान जारी किया, जिससे राज्य के पर्यटन के खोए गौरव को लौटाने का संकल्प लिया गया है।
Fly High! अगर एडवेंचर के दीवाने हैं आप, तो भारत की इन पैराग्लाइडिंग लोकेशंस की तुरंत कर लें बुकिंग
Fly High! अगर एडवेंचर के दीवाने हैं आप, तो भारत की इन पैराग्लाइडिंग लोकेशंस की तुरंत कर लें बुकिंग
गर्ल्स बेफिक्र होकर करें सोलो ट्रिप, काम आएंगे ट्रैवल गुरु रिक स्टीव्स के ये यूनिक टिप्स!
सोलो ट्रैवल नई जगह देखने के साथ खुद को नए एक्सपीरियंस देने का भी शानदार मौका बन गया है। वुमन और गर्ल्स के बीच अकेले ट्रैवल करने का ट्रेंड बढ़ रहा है, लेकिन एडवेंचर ट्रिप के लिए डेस्टिनेशन चुनते समय सेफ्टी, लोकल ट्रांसपोर्ट और जरूरी फैसिलिटी का ध्यान रखना जरूरी है। किसी के शेड्यूल का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती और रास्ते में आने वाली चुनौतियों को खुद संभालकर मंजिल तक पहुंचने का कॉन्फिडेंस और गर्व भी अलग होता है। यदि आप भी अपनी अगली सोलो एडवेंचर ट्रिप की प्लानिंग कर रही हैं, तो दुनिया की ये खूबसूरत और ट्रैवल-फ्रेंडली डेस्टिनेशन आपकी लिस्ट में शामिल हो सकती हैं। ऑस्ट्रिया (Austria)ऑस्ट्रिया अपनी खूबसूरत पहाड़ियों, हिस्टोरिक बिल्डिंग और शानदार शहरों के लिए जाना जाता है। यहां क्राइम रेट कम है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फैसिलिटी भी काफी अच्छी है। वियना जैसे शहरों में घूमने के लिए ट्रेन, बस और ट्राम आसानी से मिल जाती हैं, जिससे अकेले सफर करना आसान रहता है। शहरों की कई जगहों पर अच्छी रोशनी और साफ सड़कें भी देखने को मिलती हैं। सोलो ट्रैवल में सेल्फ-कॉन्फिडेंस दिखाना बहुत जरूरी है। आप किसी नई जगह पर रास्ता ढूंढ रहे हैं, तो घबराए हुए दिखने के बजाय कॉन्फिडेंस के साथ चलें। पहले से मैप, गाइडबुक या फोन में Google Maps जैसी चीजें तैयार रखें। अकेले यात्रा के दौरान जब आप खुद कई मुश्किल सिचुएशनसंभाल लेते हैं, तो आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है। पहली बार सोलो ट्रिप कर रहे हैं तो ऐसी जगह चुनें, जो आपको थोड़ा एक्सप्लोर करने का मौका दे, लेकिन बहुत ज्यादा मुश्किल न हो। कनाडा (Canada)कनाडा बड़े-बड़े जंगलों, झीलों, पहाड़ों और खूबसूरत नेशनल पार्कों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यहां के लोग मिलनसार और मददगार माने जाते हैं, जिससे पहली बार सोलो ट्रैवल करने वालों को काफी फैसिलिटी मिल सकती है। वैंकूवर और मॉन्ट्रियल जैसे शहरों में घूमने के लिए कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जगहें हैं। अगर आपको एडवेंचर पसंद है, तो हाइकिंग, नेचर वॉक और दूसरे आउटडोर एक्सपीरियंस भी लिए जा सकते हैं। अकेले घूमने का मतलब यह नहीं है कि आपको पूरी ट्रिप अकेले ही रहना पड़ेगा। हॉस्टल, गेस्टहाउस, B&B और होमस्टे जैसी जगहों पर दूसरे ट्रैवलर से आसानी से बातचीत हो सकती है। हॉस्टल की किचन, कॉमन एरिया या सुबह की कॉफी के दौरान बातचीत शुरू करना आसान होता है। डेनमार्क (Denmark)डेनमार्क साफ-सुथरे शहरों, अच्छी फैसिलिटी और सेफ माहौल के लिए जाना जाता है। राजधानी कोपेनहेगन में साइकिल से घूमना काफी पॉपुलर है और शहर में साइकिल ट्रैक की अच्छी सुविधा मिलती है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी ऑर्गनाइज है, जिससे एक जगह से दूसरी जगह जाना आसान रहता है। यहां कई लोग इंग्लिश समझ लेते हैं, इसलिए फॉरेन ट्रैवलर को बातचीत में ज्यादा परेशानी नहीं होती। दूसरे ट्रैवलर से जुड़ें सोलो ट्रिप में नए लोगों से मिलने के मौके हर जगह मिल सकते हैं। ट्रिप से पहले अपने दोस्तों और सोशल मीडिया नेटवर्क में पूछ सकते हैं कि जिस शहर में जा रहे हैं, वहां कोई जान-पहचान का व्यक्ति रहता है या नहीं। Meetup और Facebook के ट्रैवल ग्रुप्स के जरिए भी इवेंट्स और दूसरे यात्रियों से जुड़ा जा सकता है।आइसलैंड (Iceland)आपको प्रकृति और एडवेंचर पसंद है, तो आइसलैंड आपके लिए शानदार डेस्टिनेशन हो सकता है। यह देश अपने ग्लेशियर, झरने, ज्वालामुखी, पहाड़ और खूबसूरत समुद्री नजारों के लिए जाना जाता है। यहां की कम आबादी और अच्छी रोड कनेक्टिविटी के कारण कई ट्रैवलर रोड ट्रिप करना पसंद करते हैं। सोलो ट्रैवल करने वाली महिलाएं यहां प्राकृतिक जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं और अलग-अलग एडवेंचर एक्टिविटी का एक्सपीरियंस ले सकती हैं। स्थानीय लोगों से घुलें-मिलें किसी जगह को सिर्फ टूरिस्ट की नजर से देखने के बजाय वहां के लोगों से बात करने पर उस जगह को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। किसी लोकल कैफे या रेस्टोरेंट में बार-बार जाने से वहां के स्टाफ से पहचान हो सकती है। आपको आम टूरिस्ट स्पॉट के अलावा वहां की लोकल लाइफ और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिल सकता है।स्विट्जरलैंड (Switzerland)स्विट्जरलैंड की पहचान खूबसूरत पहाड़ों, शांत गांवों और शानदार ट्रेन रूट्स से होती है। यहां का ट्रेन नेटवर्क इतना अच्छा है कि कई जगहों पर बिना कार के भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। अकेले घूमने वाली महिलाएं पहाड़ी शहरों में घूमने, खूबसूरत ट्रेन ट्रिप करने और आसान हाइकिंग ट्रेल्स का आनंद ले सकती हैं। ज्यूरिख, इंटरलेकन, लूसर्न और आसपास के इलाकों में प्राकृतिक नजारों के साथ कई खूबसूरत जगहें देखने को मिलती हैं। खाने को भी ट्रैवल एक्सपीरियंस बनाएं अकेले ट्रैवल करते समय खाना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि नए लोगों से मिलने का एक अच्छा तरीका भी बन सकता है। फूड टूर, लोकल डिश ट्राय करना और अलग तरह के रेस्टोरेंट एक्सप्लोर करना ट्रिप को यादगार बना सकता है।न्यूजीलैंड (New Zealand)न्यूजीलैंड को आउटडोर और एडवेंचर एक्टिविटीज के लिए पसंद किया जाता है। यहां पहाड़, समुद्र, झीलें और हरे-भरे इलाके आपको एक अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस देते हैं। अकेले घूमने वाली महिलाएं यहां रोड ट्रिप, हाइकिंग, नेचर वॉक और दूसरी आउटडोर एक्टिविटीज का आनंद ले सकती हैं। देश में बैकपैकर्स और टूरिस्ट्स के लिए भी अच्छा नेटवर्क मौजूद है, जिससे नए ट्रैवलर को जानकारी और मदद मिल सकती है। शाम को शहर को एक्सप्लोर करें, लेकिन सुरक्षित रहें सोलो ट्रैवल में शाम के समय किसी शहर का अलग माहौल देखने का मौका मिलता है। रोशनी से सजी सड़कें, मार्केट और लोकल कैफे रात में बिल्कुल अलग नजर आ सकते हैं।जापान (Japan)जापान कम क्राइम रेट, साफ-सुथरे शहरों और बेहतरीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए जाना जाता है। टोक्यो, क्योटो और ओसाका जैसे शहरों में ट्रेन और मेट्रो की मदद से आसानी से घूम सकते हैं। यहां अकेले खाना खाना भी काफी सामान्य है, इसलिए सोलो ट्रैवलर्स को हर जगह साथी की जरूरत महसूस नहीं होती। महिलाएं मंदिरों, बाजारों, म्यूजियम और मॉडर्न सिटी को अपनी पसंद के हिसाब से एक्सप्लोर कर सकती हैं जिस जगह जा रहे हैं, उसकी किताब पढ़ें जिस देश या शहर की ट्रिप करने वाले हैं, वहां की कहानी या उस जगह पर बेस कोई नॉवेल पढ़ना भी ट्रिप को खास बना सकता है। किताब में पढ़ी गई गलियां, इमारतें और जगहें जब असल में सामने आती हैं, तो उन्हें देखने का अनुभव और दिलचस्प हो जाता है।सिंगापुर (Singapore)सिंगापुर छोटा लेकिन बेहद ऑर्गनाइज और मॉडर्न कंट्री है। यहां साफ-सुथरी सड़कें, अच्छी रोशनी और तेज पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फैसिलिटी मिलती है। मेट्रो और बस की मदद से शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाना काफी आसान है। सोलो ट्रैवलर वुमन मरीना बे, बॉटनिकल गार्डन, बाजारों और पॉपुलर टूरिस्ट स्पॉट्स को आसानी से देख सकती हैं।अपनी रफ्तार से घूमें और कम सामान रखें सोलो ट्रैवल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको किसी के हिसाब से चलने की जरूरत नहीं होती। मन करे तो किसी जगह पर ज्यादा समय बिताएं, अचानक प्लान बदलें या आराम करने के लिए रुक जाएं। साथ ही कोशिश करें कि बहुत ज्यादा सामान लेकर न चलें। कम सामान होने से ट्रेन, बस या फ्लाइट बदलते समय परेशानी कम होती है और बैग संभालना भी आसान रहता है।
वेडिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की समिट में उठी पर्यटन नीति में वैवाहिक पर्यटन को शामिल करने की मांग, डेस्टिनेशन वेडिंग से चमकेगा पर्यटन, आठ लाख करोड़ की इंडस्ट्रीज में बढ़ेगी पर्यटन नगरी की हिस्सेदारी।
सलामतपुर में एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज हुआ बंद, पर्यटन और कारोबार पर ब्रेक
भास्कर संवाददाता| सलामतपुर रायसेन जिले के ऐतिहासिक सलामतपुर रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव बंद होने से पर्यटन, स्थानीय कारोबार, दैनिक यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सतधारा और सुनारी के बौद्ध स्तूपों के साथ सांची बौद्ध यूनिवर्सिटी भी क्षेत्र की पहचान है। यूनिवर्सिटी का निर्माण पूरा हो चुका है। नियमित कक्षाएं शुरू हैं। प्रमुख ट्रेनों के स्टॉपेज की कमी से यहां पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को भोपाल या विदिशा उतरकर बस या निजी वाहन से सांची और सतधारा जाना पड़ता है। इससे समय ज्यादा व खर्च बढ़ता है। सलामतपुर से भोपाल-विदिशा जाने वाले 400 से अधिक अपडाउनर्स, कॉलेज छात्र, कर्मचारी, मजदूर भी प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रमुख ट्रेनों का ठहराव शुरू होने से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। छोटे-बड़े कारोबारियों को काम मिलेगा। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनेंगे। कोरोना काल में बंद हुआ विंध्याचल एक्सप्रेस का स्टॉपेज अब तक बहाल नहीं हुआ है। सांची में भी कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव बंद है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने डीआरएम भोपाल को कई बार ज्ञापन दिए लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। वरिष्ठ कांग्रेस नेता बब्लू पठान ने कहा कि पर्यटकों को भोपाल या विदिशा उतरकर बस से सांची या सतधारा जाना पड़ता है। स्टॉपेज शुरू होने से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। रातातलाई सलामतपुर के रहवासी कैलाश गोस्वामी ने कहा कि अपडाउनर्स और नागरिक कई बार डीआरएम को ज्ञापन दे चुके हैं। एक्सप्रेस ट्रेनों के रुकने से बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा। शासन-प्रशासन को तुरंत ध्यान देना चाहिए। तीन पैसेंजर ट्रेनों के भरोसे सलामतपुर : वर्तमान में सलामतपुर में बिलासपुर-भोपाल, जोधपुर-भोपाल पैसेंजर और भोपाल-बीना मेमू रुकती हैं। पूर्व में इटारसी-भोपाल विंध्याचल एक्सप्रेस का नियमित ठहराव था, जो कोरोना काल में बंद हुआ और फिर शुरू नहीं हुआ। इससे दैनिक यात्रियों को महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों ने जताई चिंता: रघुवीर सिंह मीणा, सरपंच, ग्राम पंचायत रातातलाई ने कहा कि लंबी दूरी की ट्रेनों का स्टॉपेज न होने से यात्री और पर्यटक परेशान हैं। कई बार रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव #mpnews,#madhyapradeshnews,#bhopalnews,#DrMohanYadav,#mohanyadav,#mpcm भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत को पुन: स्थापित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध उज्जैन में श्री महाकाल लोक निर्माण के बाद 20 गुना बढ़ गई श्रद्धालुओं की संख्या मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्री द्वारकाधीश के किए […]
Royal Enfield अपनी लोकप्रिय एडवेंचर बाइक लाइनअप को और मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी 4 सितंबर 2026 को नई Royal Enfield Himalayan 440 लॉन्च कर सकती है। यह ब्रांड के 440cc प्लेटफॉर्म पर आधारित दूसरी बाइक होगी। खास बात यह है कि Himalayan 440 कंपनी ...
Travel Tips: नहीं घूमा हैं अगर आपने भी अभी तक भारत का वेनिस तो फिर जरूर जाए एक बार
इंटरनेट डेस्क। आपको घूमने में मजा आता हैं और आपको घूमने गए हुए कॉफी समय हो गया है तो परिवार के साथ घूमने जाने की प्लानिंग कर ले। ऐसे में आप छुट्टियों में घूमने के लिए ऐसी जगह जा सकते है जहां जाकर आप खुश हो जाएंगे। तो आए जानते है उसके बारे में। एलेप्पी, केरल आप इस बार छुट्टियों में घूमने जाना चाहते है तो फिर आप भारत के वेनिस जा सकते है। यानी के इस जगह को भारत का वेनिस कहा जाता है और आपको बता दें ये जगह केरल का एलेप्पी है। यहा की खूबसूरती ही ऐसी है की इस जगह को इटली के वेनिस शहर के नाम से जाना जाता है। क्या है खास आप यहां घूमने आ रहे है तो आपको यहां की खूबसूरती पसंद आने वाली है। यह जगह आपके दिलों दिमाग में बस जाएगी। यहां आप हाउसबोट का आनंद ले सकते है। साथ ही आप इसमें रूकने का प्लान बना सकते है। pc- grehlakshmi.com
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर सबरीना का इंडिया से बनाया गया आखिरी वीडियो देखने के बाद लोग भड़क गए हैं और उन्हें पाकिस्तान ट्रैवल करने की सलाह दे रहे हैं.
कैमूर: प्रमुख पर्यटन स्थल करमचट डैम में दिखा मगरमच्छ, मोटरबोट की सुविधा वाले जलाशय में बढ़ा खतरा
3 सितंबर, गुरुवार: कैमूर के करमचट डैम में मगरमच्छ तैरता दिखाई दिया। डैम में मोटरबोट की सुविधा होने से पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
Relationship Tips: पार्टनर से लड़ाई से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके, वेकेशन ट्रिप बन जाएगी यादगार
Couple Vacation Tips: वेकेशन पर पार्टनर से छोटी बातों पर होने वाली लड़ाई ट्रिप का मजा बिगाड़ सकती है. खाना, फोटो, शॉपिंग और धैर्य का ध्यान रखकर कपल्स सफर को यादगार बना सकते हैं. वेकेशन पर पार्टनर से लड़ाई से बचने के लिए 5 सुपर तरीके अपनाएं.
प्रशांत किशोर को बिहार विधानसभा में मिली जिम्मेदारी, बनाए गए पर्यटन उद्योग समिति के सदस्य
जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर को बिहार विधानसभा की पर्यटन उद्योग समिति का सदस्य बनाया गया है। यह नियुक्ति चालू वित्तीय वर्ष की शेष सात माह की अवधि के लिए है, जिसकी अध्यक्षता जदयू विधायक मनोरंजन सिंह कर रहे हैं।
बिहार न्यूज: वेणुवन पार्क का बदलेगा अंदाज, 12 एडवेंचर एक्टिविटीज और नए आकर्षण खींचेंगे पर्यटकों को
विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक वेणुवन पार्क को पर्यटकों के लिए और आकर्षक बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है। आगामी 20 सितंबर से पार्क परिसर में 12 तरह की साहसिक गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
Firozabad News: पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह स्वाइन फ्लू से संक्रमित, लखनऊ आवास में हुए आइसोलेट
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह स्वाइन फ्लू से संक्रमित, लखनऊ आवास में हुए आइसोलेट
राजस्थान: पर्यटन स्थलों की सुरक्षा मजबूत होगी, 30 सितंबर तक ऑडिट के निर्देश
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने पुलिस और पर्यटन विभाग की बैठक में टीएएफ को मजबूत करने, सीसीटीवी और हेल्पडेस्क बढ़ाने के निर्देश दिए।
शादी के बाद न्यूली वेड का सबसे पहला ड्रीम यही होता है कि वह हनीमून पर जाएं। अगर आपकी भी जल्द शादी होने वाली है, तो एक बार सबसे बेहतरीन हनीमून डेस्टिनेशन को जरुर देख लें। इस लेख में हम आपको भारत के बाहर उन देशों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो हनीमून के लिए आजकल काफी ट्रेंड में जगहें है। कपल्स की पहली पसंद बन रही हैं, ये जगहें। तो चलिए आपको बताते हैं हनीमून के लिए दुनिया के सबसे बेस्ट देशों के बारे में, यहां धीरे-धीरे टूरिज्म भी बढ़ रहा है। ग्रीस दक्षिण यूरोप में बसा ग्रीस एक खूबसूरत देश है। यह अपने एतिहासिक मॉन्यूमेंट्स, खूबसूरत बीचेस, बेस्ट सनराइज और टेस्टी फूड के लिए जाना जाता है। वैसे हनीमून के लिए यह डेस्टिनेशन सबसे खूबसूरत है। यहां पर आप एथेंस का एक्रोपोलिस, अपोलो टेंपल, मेटियोरा और कार्फू का पुराना शहर जैसी जगहें काफी फेमस है। यहां की सबसे मस्त नाइटलाइफ है। आइसलैंड अगर आप हनीमून के लिए किसी जन्नत जैसी जगहों की तलाश में हैं, तो आप आइसलैंड जरुर जाएं। यहां की कैफे नाइटलाइफ और सुंदर बीच आपका मन मोह लेंगी। कपल्स के लिए यहां पर हेल्दी एनवायरमेंट हैं। यह जगह नॉर्दन लाइट देखने के लिए काफी फेमस है। इसे देखने के लिए हर एक टूरिस्ट बेचैन रहता है। इसको औरोरा बोरेलिस (Aurora Borealis) कहा जाता है, जो कि आमतौर पर एक प्राकृतिक घटना है। यहां पर आसमान का रंग हरे, गुलाबी और बैंगनी रंग में बदल जाता है। हवाई आइलैंड हनीमून को स्पेशल बनाने के लिए आप हवाई आईलैंड भी जा सकते हैं। यहां की सुंदरता, शांति और रोमांटिक वाइब कपल्स को काफी पसंद आएगी। जिन लोगों की नई-नई शादी हुई, वे लोग इस जगह पर जरुर जाएं। यहां आपको रोमांटिक बीचेस और सुंदर जंगलों के नजारे देखने को मिलेंगे, जो कि दुनियाभर में फेमस है। यहां पर आप एक्टिव ज्वालामुखी देख सकते हैं। बहामास अगर आपके पास हनीमून का मोटा बजट है, तो आप कैरेबियन देश बहामास हनीमून के लिए घूमने जा सकते हैं। यह डेस्टिनेशन अन्य देशों से थोड़ी महंगी है। लेकिन यहां आकर आप अपने हनीमून को खास बना सकते हैं। सनबाथ के लिए यहां की बीचेस काफी फेमस है। यहां पर आप अपने पार्टनर के साथ हार्बर आइलैंड, पिग बीच, और पैराडाइज आइलैंड घूम सकते हैं। हनीमून के लिए यह जगह बेहद ही शानदार है।
‘तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड्स’ की घोषणा, विजेताओं को मिलेगा 15 लाख रुपए का नकद इनाम
New Delhi, 2 सितंबर . India Government के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने साल 2024 के लिए तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड्स (टीएनएनएए) की घोषणा की है. इन पुरस्कारों में 4 श्रेणियां ‘लैंड एडवेंचर’, ‘वाटर एडवेंचर’, ‘एयर एडवेंचर’ और ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ शामिल हैं. इन पुरस्कारों का उद्देश्य एडवेंचर के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों को ... Read more
'तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड्स' की घोषणा, विजेताओं को मिलेगा 15 लाख रुपए का नकद इनाम
भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने साल 2024 के लिए तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड्स (टीएनएनएए) की घोषणा की है। इन पुरस्कारों में 4 श्रेणियां 'लैंड एडवेंचर', 'वाटर एडवेंचर', 'एयर एडवेंचर' और 'लाइफटाइम अचीवमेंट' शामिल हैं।
'तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड्स' की घोषणा, विजेताओं को मिलेगा 15 लाख रुपए का नकद इनाम
नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने साल 2024 के लिए तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड्स (टीएनएनएए) की घोषणा की है। इन पुरस्कारों में 4 श्रेणियां 'लैंड एडवेंचर', 'वाटर एडवेंचर', 'एयर एडवेंचर' और 'लाइफटाइम अचीवमेंट' शामिल हैं।
तृप्ति सिंह पर होटल लीज दिलाने के नाम पर 50 लाख रुपये की ठगी का आरोप है, उसका भाई सुधांशु और साथी प्रखर भी मामले में आरोपी है।
दिल थोड़ा डेयरिंग है? भारत में ये 5 एडवेंचर एक्टिविटी जरूर ट्राई करें
अगर आपको घूमने के साथ थोड़ा रोमांच भी पसंद है, तो भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां आप स्कीइंग से लेकर स्काइडाइविंग तक का मजा ले सकते हैं। ये 5 एडवेंचर जिंदगी में एक बार जरूर ट्राई करें।
Travel Tips: जन्माष्टमी पर द्वारकाधीश दर्शन के लिए जानें Train और Flight रूट
जन्माष्टमी के पर्व को लोग तरह-तरह की प्लानिंग करते हैं। कोई घरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकी को बनाता है, तो कुछ मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का पर्व मनाने के लिए जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के दर्शन के प्लान बना रही हैं, तो आप गुजरात से लेकर द्वारका तक भगवान श्रीकृष्ण के कुछ फेमस मंदिरों के दर्शन के साथ एक यादगार ट्रिप प्लान कर सकती हैं। द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है, यहां पर जन्माष्टमी के मौके पर खास रौनक देखने को मिलती है। द्वारका में कहां-कहां घूमें द्वारका सिर्फ मंदिर घूमने की जगह नहीं है, बल्कि यहां पुराने मंदिर, समुद्र, बीच और आसपास के कई धार्मिक स्थल हैं, जिनको आप एक्सप्लोर कर सकती हैं। अगर आप दिल्ली से सिर्फ 2 से 3 दिन के लिए ट्रिप प्लान करती हैं, तो दर्शन के साथ-साथ यहां घूमने-फिरने का भी मजा ले सकती हैं। यहां द्वारकाधीश मंदिर के अलावा नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका, रुक्मिणी देवी मंदिर और शिवराजपुर बीच फेमस है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस पूरे ट्रिप के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Janmashtami 2026 | इस बार बनाएं खास प्लान, भारत के इन 5 प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में लें दिव्य दर्शन का आनंद | Best Krishna Temples India द्वारकाधीश मंदिर में करें दर्शन जब आप द्वारका पहुंच जाएं, तो होटल में चेकइन करें। फिर फ्रेश होकर सबसे पहले द्वारकाधीश मंदिर जाएं। इसको जगत मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इसकी स्थापना भगवान श्रीकृ्ष्ण के पोते वज्रनाभ ने कराया था। यह मंदिर एक ऊंचाई पर बना है, यहां तक पहुंचने के लिए 50 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। मंदिर के दर्शन का समय सुबह 07 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम को 05:00 बजे से 09:00 बजे तक है। वहीं जन्माष्टमी के मौके पर आम दिनों से ज्यादा भीड़ होती है, इसलिए समय में बदलाव हो सकता है। मंदिर में क्या खास देखें मंदिर में दर्शन करने के अलावा बहुत कुछ देख सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश रूप के दर्शन करें। मंदिर की खूबसूरत नक्काशी और ऊंचा शिखर देख सकते हैं। मंदिर के आसपास बने छोटे मंदिर देख सकते हैं। अरब सागर के पास का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। गोमती क्रीक के पास सुदामा सेतु देख सकते हैं। दिल्ली से ऐसे पहुंचे द्वारका दिल्ली से द्वारका काफी दूर है। इसलिए आपको ट्रिप की सही प्लानिंग करनी होगी। आप ट्रेन से द्वारका पहुंचने के लिए दिल्ली से ट्रेन ले सकती हैं। यह बजट फ्रेंडली ऑप्शन है। दिल्ली से द्वारका की दूरी करीब 1325 से 1335 किमी है। ऐसे में आपको द्वारका पहुंचने के लिए 23 से 24 घंटे का समय लग सकता है। इसके अलावा आप फ्लाइट से भी द्वारका जा सकती हैं। द्वारका का सबसे नजदीकी एयर कनेक्शन जामनगर और पोरबंदर है। द्वारका से पोरबंदर एयरपोर्ट की दूरी करीब 136 किमी है। वहीं जामनगर एयरपोर्ट की दूरी 105 किमी है। यहां पहुंचकर आप बस या कैब से द्वारका जा सकती हैं। वहीं अगर आप फ्लाइट या ट्रेन से नहीं जाना चाहती हैं, तो रोड ट्रिप प्लान कर सकती हैं। हालांकि रोड ट्रिप थोड़ा थकान भरी रह सकती है। क्योंकि इसकी दूरी करीब 1450 से 1460 किमी है। इन जगहों को भी करें एक्स्प्लोर अब आप द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के बाद यहां और भी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। बेट द्वारका मंदिर में दर्शन करने के बाद आप बेट द्वारका भी जा सकती हैं। यह समुद्र के पास बसा एक आइलैंड है और यहां पर मंदिर भी है। माना जाता है कि यह श्रीकृष्ण का निवास स्थान है। यहां पर विष्णु, शिव, लक्ष्मी-नारायण और हनुमान आदि के मंदिर है। ध्यान रकें कि शाम के समय यहां घूमने के लिए न जाएं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका में आप भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी कर सकती हैं। मंदिर के पास गोपी तालाब तीर्थ भी है। यह जगह भगवान कृष्ण और गोपियों से जुड़ी है। अगर आप धार्मिक जगहों में दिलचस्पी रखती हैं, तो द्वारका ट्रिप में इसे जरूर शामिल करें। रुक्मिणी देवी मंदिर द्वारका जाने पर आप रुक्मिणी देवी मंदिर के दर्शन भी करें। मंदिर की बाहरी दीवारों पर आपके देवी-देवताओं और अलग-अलग आकृतियों की नक्काशी देखने को मिलेगी। माना जाता है कि यह मंदिर 12वीं सदी से है। शिवराजपुर बीच आप मंदिर और धार्मिक जगहों को एक्सप्लोर करने के बाद शिवराजपुर बीच भी जा सकती हैं। यह द्वारका से करीब 12 किमी की दूरी पर है। अगर आप भी एडवेंचर के शौकीन हैं, तो यहां पर स्नॉर्कलिंग, बनाना राइड, स्कूबा डाइविंग जैसी एक्टिविटी कर सकती हैं। यहां पर जाने का समय सुबह 8 बजे से शाम के 7 बजे तक हैं। वहीं एंट्री के लिए आपको 30 रुपए का टिकट लेना होगा। जानिए द्वारका में कहां रुकें द्वारका में रुकने के लिए आपको आप होटल और टूरिस्ट स्टे मिल जाएंगे। लेकिन जन्माष्टमी के मौके पर भीड़ अधिक रहती है। इसलिए होटल आदि पहले से बुक कर लें। ध्यान रहे कि होटल मंदिर से ज्यादा दूर न हो। ऐसी जगह पर स्टे लें, जहां से मंदिर और अन्य जगहों तक आसानी से पहुंच सकें। खाने में क्या ट्राई करना चाहिए द्वारका में आप गुजरात का लोकल खाने का स्वाद ले सकती हैं। गुजराती थाली, खमण, जलेबी-फाफड़ा और दूसरी गुजराती चीजों को ट्राई करें। इससे आपकी ट्रिप अधिक मजेदार हो जाएगी। वहीं अगर आप जन्माष्टमी के मौके पर व्रत रखती हैं, तो बता दें कि आपको होटल या आसपास के भोजनालय में फलाहार खाना भी मिल जाएगा। इन बातों का रखें ध्यान जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में अधिक भीड़ हो सकती है, इसलिए समय से पहुंचें। ट्रेन, होटल या फ्लाइट आदि की बुकिंग पहले से कर लें। बेट द्वारका जाने के दौरान वापसी की टैक्सी भी पहले बुक कर लें। समुद्र के किनारे जाने के दौरान नियमों का पालन करें। गर्मी और उसम को देखते हुए पानी भी अपने साथ रखें।
विकास और निवेश का नया केंद्र बना उत्तराखंड, MSME, स्टार्टअप और पर्यटन के लिए नई नीतियां लागू
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री धामी के प्रशासन में उत्तराखंड विकास और निवेश का नया केंद्र बन गया है। राज्य ने MSME, स्टार्टअप और पर्यटन क्षेत्रों के लिए नई नीतियां लागू की हैं, जिसमें वित्तीय प्रोत्साहन और संस्थागत सहयोग शामिल है।
Travel Tips: वृंदावन जाने का बना रहे हैं प्लॉन तो फिर इन बातों का रखें जरूर ख्याल
इंटरनेट डेस्क। आप भी जन्माष्टिमी के मौके पर पर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित वृंदावन जा रहे हैं तो फिर आपको कुछ बातों का तो विशेष ध्यान रखना ही होगा। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर जैसी जगहों की वजह से वृंदावन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। तो जानते हैं किन बातों का ध्यान रखना है। सही समय पर करें वृंदावन जाने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम ठंडा और सुहावना रहता है। इसके अलावा जन्माष्टमी और होली के त्योहार पर वृंदावन का माहौल बेहद खास होता है, लेकिन इस दौरान भारी भीड़ भी उमड़ती है। हल्का और जरूरी सामान ही रखें साथ यात्रा के दौरान ज्यादा सामान ले जाने से बचना चाहिए, पानी की बोतल, छोटा तौलिया, मोबाइल चार्जर, नकद पैसे और आईडी कार्ड जैसी जरूरी चीजें ही अपने बैग में रखें। मंदिरों के नियमों का रखें ध्यान वृंदावन एक आध्यात्मिक नगरी है, इसलिए वहां की परंपराओं और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है। कई मंदिरों में फोटो या वीडियो बनाने की अनुमति नहीं होती, वहीं कुछ मंदिरों में मोबाइल फोन और बैग ले जाना भी मना होता हैं। pc- inditales.com
SCO ने Lahore को 2026-27 के लिए पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी बनाया
सज्जाद हुसैनइस्लामाबाद, दो सितंबर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने पाकिस्तान के सांस्कृतिक केंद्र लाहौर को 2026-27 के लिए ‘पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी’ घोषित किया है। यह घोषणा किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एससीओ सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 26वीं बैठक में की गई जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल हुए थे। ‘डॉन’ अखबार की खबर के अनुसार 2022 से हर साल एससीओ के सदस्यों देशों के शहरों को बारी बारी से पर्यटन एवं सांस्कृतिक राजधानी का दर्जा दिया जाता है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह उस देश की सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर करता है जो संगठन का मौजूदा अध्यक्ष होता है। अध्यक्ष का पद भी बारी बारी से सदस्य देशों को मिलता है। पाकिस्तान ने इस साल एससीओ की अध्यक्षता संभाली है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसकी अध्यक्षता की थीम ‘दृष्टिकोण को कार्य में बदलना: संपर्क, नवाचार और साझा समृद्धि’ तय की है। इस साल अप्रैल में एससीओ सदस्य देशों के पर्यटन विभागों के प्रमुख की बिश्केक में मुलाकात के दौरान लाहौर को यह दर्जा देने का फैसला किया गया। जिन शहरों को पहले यह दर्जा मिल चुका है उनमें भारत का वाराणसी (2022-23), कजाकिस्तान का अल्माटी (2023-24), चीन का किंगदाओ (2024-25) और किर्गिस्तान का चोलपोन-अता (2025-26) शामिल हैं। वर्ष 2001 में गठित एससीओ इस साल अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है जिसका मुख्यालय चीन की राजधानी बीजिंग में है। इसमें भारत समेत 10 सदस्य देश शामिल हैं। यह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की अध्यक्षता में बिश्केक में आयोजित किया गया था।
यूपी में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को स्वाइन फ्लू, प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 700 के करीब पहुंची
उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू का मामला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अब पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह भी फ्लू की जकड़ में आ गए हैं। केजीएमयू में कराई गई जांच में पुष्टि के बाद खुद को कोरंटीन हो गए हैं।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ रहा है, फिरोजाबाद और बदायूं में दो लोगों की मौत हो गई है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह भी संक्रमित पाए गए हैं, जबकि उन्नाव और नोएडा में भी नए मामले सामने आए हैं।
परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चलती बस में 17 साल की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के बाद अधिकारी हरकत में आ गए हैं।
Amethi News: जायसी की जन्मस्थली बनेगी साहित्य व पर्यटन का केंद्र
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मुनि की रेती और तपोवन क्षेत्र में पर्यटन कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर करीब 1000 छोटे-बड़े होटल और होमस्टे संचालित होने का दावा है, जबकि पर्यटन विभाग के रिकॉर्ड में केवल 500 से 600 प्रतिष्ठान पंजीकृत बताए जा रहे हैं।
सीएम सम्राट चौधरी 55 योजनाओं का उदघाटन करेंगे। जिस पर 19610.14 लाख रुपये खर्च किये गये हैं। स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल 01 के तहत नौ योजनाओं का उदघाटन होगा।
मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत लखेवाली ढाब गांव से 2 बसें रवाना
भास्कर न्यूज | फाजिल्का पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत आज गांव लखेवाली ढाब से 2 बसों को तीर्थ स्थलों के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर खुशबू सावन सुखा सवना विशेष रूप से उपस्थित हुईं। उन्होंने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और बताया कि श्रद्धालु श्री दरबार साहिब अमृतसर, दुर्ग्याना मंदिर, जलियांवाला बाग, रामतीर्थ मंदिर सहित कई गुरुधामों के दर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों के दर्शन के अलावा श्रद्धालुओं के रहने, खाने-पीने और यात्रा का बेहतर एवं निशुल्क प्रबंध पंजाब सरकार की ओर से किया गया है। उन्होंने कहा कि यात्रियों के लिए परिवहन, रहने और भोजन की व्यवस्था पंजाब सरकार द्वारा बिल्कुल निशुल्क की गई है, ताकि किसी भी यात्री को कोई असुविधा न हो।
रामराजा लोक बनने से ओरछा में बढ़ेगा पर्यटन : मोहन
ओरछा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निवाड़ी जिले के प्रवास के दौरान सोमवार को ओरछा में भगवान श्री रामराजा सरकार के दर्शन किए।
Tripura Tourism Plan: जानिए क्यों खास हैं उनाकोटी की रहस्यमयी मूर्तियां और Ujjayanta Palace
भारत में विविधता का देश है और यहां पर घूमने के लिए कई सारी जगहें मौजूद है। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप त्रिपुरा जरुर जाएं। यहां पर आपकों संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के नजारे देखने को मिलेंगे। त्रिपुरा में एकदम शांत वातावरण देखने को मिलता है। हरी-भरी पहाड़ियों का एक अलग ही अनुभव देता है। आइए आपको त्रिपुरा के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं। त्रिपुरा की खूबसूरत जगहें त्रिपुरा के इतिहास और विरासत जानने के लिए आपको यहां उज्जयंत पैलेस देखने को मिलेगा। रुद्रसागर झील के बीचों-बीच स्थित नीरमहल एक बेहद सुंदर वॉटर पैलेस है और भारत का सबसे बड़ा जल महल है। उनाकोटी त्रिपुरा का प्राचीन रॉक-कट तीर्थ स्थल है। यहां भगवान शिव की विशाल मूर्तियां हैं, जो घने जंगलों के बीच पत्थरों पर उकेरी गई हैं। यह जगह बेहद ही खूबसूरत है। त्रिपुरा की कला और हस्तशिल्प त्रिपुरा की कला की बात करें, तो यहां मुख्य रुप से बांस और बेत के काम पर आधारित कला है। यहां के लोकल कारीगर बांस के फर्नीचर, बास्केट, डेकोरेशन पीस और बर्तन बनाते हैं, इसके अलावा, त्रिपुरा में रेशा नाम का एक पारंपरिक बुना हुआ कपड़ा काफी मशहूर है। इसको महिलाएं ऊपरी वस्त्र के तौर पर पहनती हैं। वहीं यहां का खान-पान काफी सदा होता है। त्रिपुरा की पारंपरिक डिश मुई बोरोक बेहद ही स्वादिष्ट होती है। इसे फर्मेंट की गई मछली के पेस्ट से बनाया जाता है। बांगुई राइस भी यहां के खान-पान का मुख्य हिस्सा है।
अगर आपकी सेक्स लाइफ थोड़ी बोरिंग या एक जैसी हो गई है, तो पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाना अच्छा आइडिया हो सकता है। रोज की भागदौड़ से दूर छुट्टियों का माहौल आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का मौका देता है। नए माहौल में रोमांस और नजदीकियां रिश्ते में एक नई ताजगी ला सकती हैं। लेकिन छुट्टियों में इंटीमेसी को बेहतर बनाने के लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसे ही 10 आसान टिप्स, जो आपके कपल टाइम को और खास बना सकते हैं। अपनी पसंद की चीजें साथ लेकर जाएं अगर आपके लिए कोई खास चीज रोमांटिक माहौल बनाने में मदद करती है, तो उसे ट्रिप पर साथ ले जा सकते हैं। यह आपकी पसंद की कोई रोमांटिक एक्सेसरी, परफ्यूम, आरामदायक नाइटवियर या दूसरी पसंदीदा चीज हो सकती है। ध्यान रखें कि जो भी चीज आप इस्तेमाल करें, उसमें दोनों पार्टनर की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। सिर्फ बेड तक सीमित न रहें होटल का कमरा सिर्फ सोने के लिए नहीं होता। छुट्टियों में आप कमरे के माहौल को थोड़ा अलग और रोमांटिक बना सकते हैं। कमरे की लाइटिंग, खुशबू और म्यूजिक जैसी छोटी चीजें भी मूड को बेहतर कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी तरह की एक्टिविटी में होटल की संपत्ति और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। इसे भी पढ़ें: Long Distance Relationship में बढ़ रही हैं दूरियां? नजदीकियां बढ़ाने में मदद कर सकता है Phone Sex दोपहर का समय भी आजमाएं रोजमर्रा की जिंदगी में कपल्स अक्सर अपनी व्यस्त दिनचर्या के हिसाब से ही इंटीमेट होते हैं। छुट्टियों में आपके पास समय की थोड़ी ज्यादा आजादी होती है। इसलिए अगर आमतौर पर आपके पास सिर्फ रात या सुबह का समय होता है, तो छुट्टी के दौरान दिन में भी एक-दूसरे के साथ रोमांटिक समय बिताया जा सकता है। जल्दबाजी न करें काम, घर और रोज की जिम्मेदारियों के बीच कपल्स के पास अक्सर एक-दूसरे के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। छुट्टियां इस रफ्तार को थोड़ा धीमा करने का अच्छा मौका देती हैं। एक-दूसरे के साथ आराम से समय बिताएं, बातचीत करें और बिना किसी जल्दबाजी के पल को एंजॉय करें। यहां मकसद किसी तरह का दबाव बनाना नहीं, बल्कि साथ में अच्छा समय बिताना है। छुट्टियों में काम को थोड़ा दूर रखें अगर आप छुट्टियों पर भी लगातार ईमेल, ऑफिस चैट या काम के मैसेज चेक करते रहेंगे, तो आपका दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाएगा। इसलिए जहां संभव हो, काम से ब्रेक लें। लैपटॉप और ऑफिस नोटिफिकेशन को कुछ समय के लिए दूर रखना आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे पर ध्यान देने में मदद कर सकता है। अपने शरीर और भावनाओं पर ध्यान दें छुट्टियां खुद को रिलैक्स करने और अपने पार्टनर के साथ जुड़ने का अच्छा समय होती हैं। अपने आसपास के माहौल को महसूस करें और पार्टनर के साथ बिताए जा रहे समय पर ध्यान दें। नए माहौल, नई जगह और पार्टनर की मौजूदगी को महसूस करने से रोमांटिक कनेक्शन और बेहतर हो सकता है। ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं इंटीमेसी के दौरान ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल आराम और सुविधा बढ़ाने में मदद कर सकता है। खासतौर पर अगर ड्रायनेस या असहजता महसूस हो रही हो, तो सही ल्यूब्रिकेंट उपयोगी हो सकता है। ट्रिप पर जाने से पहले इसे साथ रखना भी एक अच्छा विकल्प है। अगर किसी प्रोडक्ट से जलन या परेशानी हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें। खुद को पूरी तरह रिलैक्स रखें कई बार इंटीमेसी के दौरान लोग काम, तनाव या दूसरी बातों के बारे में सोचते रहते हैं। इससे वे उस पल को पूरी तरह एंजॉय नहीं कर पाते। छुट्टियों में खुद को थोड़ा रिलैक्स करने की कोशिश करें। किसी तरह की परफॉर्मेंस या उम्मीद का दबाव न बनाएं और अपने पार्टनर के साथ सहज तरीके से समय बिताएं। इसे भी पढ़ें: Couples Special: बोरिंग Sex Life को रोमांचक बनाने के लिए ट्राई करें ये 4 नई Sex Positions यह न गिनें कि कितनी बार इंटीमेट हुए छुट्टियों में ज्यादा रोमांस होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर दिन या बार-बार इंटीमेट होना ही चाहिए। हर कपल की पसंद और कम्फर्ट अलग होता है। इसलिए खुद पर या पार्टनर पर कोई दबाव न डालें। अगर छुट्टी के माहौल में ढलने में थोड़ा समय लग रहा है, तो यह बिल्कुल सामान्य है। कुछ नया आजमाने की कोशिश करें छुट्टियां रिश्ते में कुछ नया करने का अच्छा मौका हो सकती हैं। आप कोई नया रोमांटिक आइडिया, नई एक्टिविटी या ऐसी चीज आजमा सकते हैं जिसे दोनों पार्टनर पहले से करने की इच्छा रखते हों। लेकिन यहां भी दोनों की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। अगर किसी एक पार्टनर को कोई चीज पसंद नहीं है, तो उसे करने का दबाव नहीं होना चाहिए। छुट्टियों में रोमांस का असली मतलब वेकेशन सेक्स या छुट्टियों में इंटीमेसी का मतलब सिर्फ सेक्स नहीं है। असल में यह अपने पार्टनर के साथ बिना रोजमर्रा के तनाव के क्वालिटी टाइम बिताने और रिश्ते में नजदीकी बढ़ाने का मौका है। इसलिए छुट्टी के दौरान खुद पर किसी तरह का दबाव न डालें। साथ में घूमना, बातें करना, एक-दूसरे को समय देना और छोटे-छोटे रोमांटिक पल भी रिश्ते को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
फिरोजाबाद में बाबा नीब करौरी महाराज की जन्मस्थली ग्राम पंचायत नागऊ के गांव अकबरपुर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। सोमवार को पर्यटन विभाग की टीम ने गांव में किसानों के साथ खुली बैठक कर प्रस्तावित परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण पर सहमति ली। बैठक में 20 से अधिक किसानों ने विकास कार्यों के लिए अपनी जमीन देने की लिखित सहमति दी। पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव की मौजूदगी में हुई बैठक में किसानों को प्रस्तावित परियोजना की जानकारी दी गई। पर्यटन विभाग की योजना के तहत अकबरपुर में बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़ी आस्था को केंद्र में रखते हुए पार्क, मंदिर, धर्मशाला और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े अन्य विकास कार्य कराए जाने प्रस्तावित हैं। परियोजना के लिए करीब 60 से 70 बीघा भूमि अधिग्रहित किए जाने की योजना है। इसमें बाबा नीब करौरी महाराज के स्वजनों की भूमि भी शामिल है। पर्यटन अधिकारी के अनुसार परियोजना के लिए कम से कम पांच हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि की आवश्यकता है। सर्किल रेट का चार गुना मिलेगा मुआवजा बैठक में किसानों को बताया गया कि अधिग्रहित भूमि के एवज में शासन की ओर से सर्किल रेट का करीब चार गुना मुआवजा दिए जाने का प्रस्ताव है। किसानों की सहमति की रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। शासन से स्वीकृति मिलने और नियमानुसार अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। खुली बैठक में बाबा नीब करौरी महाराज की छह पौत्रियां भी मौजूद रहीं। उन्होंने भी अपनी भूमि को प्रस्तावित विकास कार्यों में शामिल करने के संबंध में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, उनकी ओर से बाबा के पैतृक मकान को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में एक शिकायती पत्र भी दिया गया है। धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान परियोजना के पूरा होने के बाद अकबरपुर में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे बाबा नीब करौरी महाराज की जन्मस्थली को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है। फिलहाल पर्यटन विभाग की प्राथमिकता किसानों की सहमति जुटाकर रिपोर्ट शासन को भेजना है, ताकि स्वीकृति के बाद परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके।
कोच्चि वाटर मेट्रो के तकनीकी निदेशक ने झारखंड में जल पर्यटन और परिवहन के लिए वाटर मेट्रो की बड़ी संभावना बताई है। पतरातू, तिलैया और चांडिल जैसे बड़े बांधों पर यह परियोजना पर्यावरण-अनुकूल और किफायती तरीके से लागू हो सकती है।
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का आज दूसरा दिन है। इस बीच निवाड़ी के ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को रामराजा सरकार के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने रामराजा लोक में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान CM ने ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और प्राचीन निर्माण शैली को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने जहांगीर महल का नाम बदलकर ‘वीर सिंह महल’ करने के संकेत भी दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी शामिल थे। निर्माण कार्यों का जायजा लिया दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने रामराजा लोक में चल रहे विकास कार्यों का निरिक्षण किया। उन्होंने राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश को परियोजना और चल रहे कामों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरछा की पुरानी इमारतें बुंदेला राजाओं की समृद्ध विरासत हैं। इनका मूल स्वरूप बनाए रखने के लिए पुराने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री का ही उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए कुशल कारीगर काम कर रहे हैं। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने ओरछा में रामराजा लोक का निर्माण मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। उज्जैन के महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां विकास के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों का विकास किया जाएगा। ओरछा, चित्रकूट, पशुपतिनाथ और मंदसौर समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर भी विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। चूने से निर्माण पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने समय में बने भवनों की निर्माण शैली का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने सीमेंट के बजाय चूने से दीवारें बनाने पर जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पुराने भवन गर्मी में ठंडे और सर्दी में गर्म रहते हैं। इनमें उस समय की निर्माण तकनीक का इस्तेमाल हुआ था। सरकार इसी तकनीक को समझकर आगे काम करेगी। मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक जहांगीर महल का नाम बदलकर ‘वीर सिंह महल’ किए जाने की बात कही। राम से जुड़े स्थानों के विकास की बात मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के मध्यप्रदेश से जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में से 12 वर्ष मध्यप्रदेश में गुजारे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राम से जुड़े ऐसे सभी स्थानों को विकसित करने की दिशा में सरकार काम करेगी। ओरछा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी इसी दिशा में विकसित किया जा रहा है।
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हिमाचल प्रदेश का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले शिमला और मनाली का नाम आता है। इसके अलावा लोग और दूसरी जगहों के बारे में बहुत कम जानते हैं। ऐसे में अगर आप भी हिमाचल प्रदेश घूमने का मन बना रही हैं, तो आप हिमाचल की ऑफबीट लोकेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हिमाचल प्रदेश की छिपे खजाने जिभी के बारे में बताने जा रह हैं। ऑफबीट लोकेशन जिभी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बंजार घाटी स्थिति जिभी आपको सुकून का एहसास दिलाएगा। क्योंकि 5000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद यह जगह अन्य टूरिस्ट स्पॉट की तरह भीड़भाड़ वाली नहीं है। वहीं दूरी की बात की जाए, तो यह जगह मनाली से करीब 100 किमी दूर और मंदिर से करीब 50 किमी दूर है। इसे भी पढ़ें: Travel Plan Breakdown: दिल्ली से ₹5000 के बजट में घूमें ये 3 शहर, जानें ट्रांसपोर्ट और होटल का पूरा खर्च जिभी कैबाइन्स नामक ट्री हाउस, लकड़ी और घने देवदार के जंगलों के लिए जानी जाती है। आप आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते हैं, तो जिभी के सुंदर झरने और प्राकृतिक नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। जिभी में इन जगहों को करें एक्सप्लोर दुनिया की भीड़भाड़ से दूर हिमाचल प्रदेश की यह ऑफबीट लोकेशन कई मायनों में बेहद खास है। तो आइए जानते हैं कि आप जिभी में क्या-क्या एक्सप्लोर कर सकते हैं। रघुपुर किला रघुपुर किला वैसे तो अब खंडहरों में गिना जाता है। लेकिन 11,155 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस किले से कुल्लू और मंडी के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाया जा सकता है। जालोरी पास जिभी से करीब 12-14 किमी दूर और करीब 10 हजार फीट स्थित जालोरी पास एक माउंटेन है। यहां पर बर्फ से ढकी पहाड़ियां हसीन वादियों से कम नहीं लगती हैं। श्रृंग ऋषि मंदिर जिभी से थोड़ी ही दूर पर बग्गी गांव में स्थित श्रृंग ऋषि मंदिर है। जो यहां के स्थानीय देवता श्रृंग ऋषि को समर्पित है। श्रृंग ऋषि को कुल्लू के 18 देवताओं में से एक माना जाता है। जिनका संबंध रामायण काल से है। यही कारण है कि इस मंदिर में दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग भीड़ उमड़ती है। सेरोलसर झील जालोरी से करीब 5 किमी दूर सेरोलसर झील है। जिसके बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झील के पानी में औषधीय गुण हैं। झील के किनारे बैठकर बहुत सुकून मिलता है। ऐसे में प्रकृति प्रेमियों को यहां आकर निराशा नहीं होगी।
घुमक्कड़ लोग हमेशा घूमने के लिए तैयार रहते हैं। यह लोग हमेशा कही न कहीं का प्लान बनाते रहते हैं। सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से खास माना जाता है। इस दौरान कई जगहों पर बारिश होती है, इसलिए मौसम सुहाना होता है। बरसात के बाद से हर जगह खूबसूरती चरम पर पहुंच जाती है और आसपास का नजारा काफी फ्रेश नजर आता है। परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ कुछ दिनों की छुट्टी पर जाना अच्छा हो सकता है। आइए आपको बताते हैं करीब 5000 रुपये में बजट में आप कहां घूम सकते हैं। पुष्कर, राजस्थान यदि आप पहाड़ों की जगह पर किसी झील और मंदिर वाली जगहों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आप राजस्थान के पुष्कर जा सकते हैं। यहां की झीलें घूमना, ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करना और बाजारों में घूमना आपको मजेदार लगेगा। इस मौसम में यहां गर्मी कम होती है। - दिल्ली से दूरी-करीब 430 किमी है। - समय- लगभग 7-9 घंटे का समय लग जाता है। - घूमने के लिए पुष्कर झील, ब्रह्मा मंदिर, घाट और लोकल बाजार घूमने जा सकते हैं। बजट फ्रेंडली होटल लें, लोकल स्ट्रीट से खाना खाएं। होटल को बुकिंग ऑनलाइन ही करें। ऋषिकेश, उत्तराखंड योग नगरी ऋषिकेश धार्मिक दृष्टि से तो खास है, लेकिन यह जगह एडवेंचर के लिए भी काफी लोकप्रिय है। सुबह की आरती से लेकर मंदिरों के दर्शन तक, यहां पर आप सब कुछ देख सकते है। रिवर राफ्टिंग कर सकते हैं और भी कई एक्टिविटीज कर सकते हैं। - दिल्ली से दूरी करीब 240 किमी। - समय- लगभग 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है। - होटल के लिए कम से कम 1200 से 1500 रुपये में रुम मिल जाएगा। - 5000 हजार में ट्रिप को करने के लिए पैदल या शेयरिगं ऑटो से घूमें और महंगे कैफे से बचें। अमृतसर, पंजाब बजट फ्रेंडली ट्रिप के लिए आप पंजाब घूमने जा सकते हैं। अमृतसर में धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों तरह की जगहें देखने को मिल जाएगी। सबसे फेमस यहां पर स्वर्ण मंदिर है, जिसकी खूबसूरती काफी देखने के लायक है और माहौल भी शांत देखने को मिलेगा। वहीं, आप अटारी-वाघा बॉर्डर भी घूमने जा सकते हैं। -दिल्ली से दूरी- लगभग 450 किमी -समय- लगभग 7 से 8 घंटे लग सकते हैं। इस ट्रिप के दौरान आप खाने पर खर्च बचा सकते हैं, गुरुद्वारे में खाना खा सकते हैं। वहीं, आप लोकल स्ट्रीट पर फूड खा सकते हैं। महंगे होटल पर खाना खाने से बचें।
भारत में कई अद्भुत चमत्कार और रहस्यमय मंदिरों का खजाना है। यहां पर आपको कई प्राचीन मंदिर देखने को मिलेंगे। हर मंदिर की एक अलग विशेषता है। राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शता है। इस मंदिर का नाम है जीणा माता। यह मंदिर मां जीण भवानी को समर्पित है। रक्षाबंधन पर अपने भाई के साथ यहां दर्शन के लिए आप जरुर जा सकते हैं। यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां मां जीण माता के साथ उनके भाई हर्ष की भी पूजा की जाती है। आइए आपको इस मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बताते हैं। राजस्थान में कहां स्थित है भाई-बहन को समर्पित जीण माता का मंदिर? राजस्थान के सीकर जिले में जीणमाता गांव में यह मंदिर स्थित है। यहां पर मुख्य रुप से मां जीण की पूजा होती है। राखी के समय यहां लोग दर्शन के लिए जरुर जाते हैं। इस दौरान यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर खाटू श्याम से 25-30 किमी की दूरी पर स्थित है। कैसे पहुंचे? - अगर आप सीकर शहर से यहां जाएंगे, तो आपको 29 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। यदि आप जयपुर से जा रहे हैं, तो आपको 110 किमी का सफर तय करना होगा। जयपुर से पहुंचने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगेगा। - जो भाई-बहन दूसरे शहरों से आने का प्लान कर रहे हैं, वह ट्रेन से जा सकते हैं। इसके लिए आपको रींगस जंक्शन तक ट्रेन टिकट बुक करानी पड़ेगी। - सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट है, यहां से आप मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए बस की क्या सुविधा है? - राजस्थान से आपको सीकर जिले से मंदिर के लिए बस मिल जाएगी। आसपास के शहरों से भी सीकर जिले के लिए बस जाती है। - जयपुर से आप सीकर के लिए पहले बस लें। इसके बाद सीकर पहुंचकर जीण माता मंदिर के लिए शेयरिंग टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं। जीण माता मंदिर यह मंदिर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, इसलिए रक्षाबंधन के समय भीड़ थोड़ी देखने को मिल सकती है। किसी भी साधन से जा रहे हैं, तो समय का जरुर ध्यान रखें। जीण माता मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 200 से 300 मीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में करीब 200 सीढ़िया मिलेगी। इन्हें चढ़ने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। View this post on Instagram A post shared by Aryan Parashar (@aryanpujari_jeenmata)
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जन्माष्टमी के दिन द्वारकाधीश के दर्शन करने का प्लान कर रहे हैं, तो दिल्ली से द्वारका तक जाने का पूरा ट्रैवल प्लान जान लीजिए। हम आपको आने-जाने और ठहरने का खर्चा बताने जा रहे हैं।
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क्या आप कभी भारत के ऐसे इलाके में घूमने गए हैं, जहां की सड़कें एकदम जिगजैग हों। ऐसा सफर देखकर या सोचकर ही रोमांचक लगता है। कुछ ऐसा ही है सिक्किम का ऑफ बीट लोकेशन है। जिसका नाम जुलूक है। अगर आप भी हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड जाकर ऊब चुके हैं, तो इस बार आपको सिक्कम जाने का प्लान करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सिक्किम के छोटे से गांव जुलूक के बारे में बताने जा रहे हैं। सिक्किम का जन्नत भारत के सिक्किम राज्य के पूर्वी जिले में स्थित एक बेहद छोटा और खूबसूरत गांव जुलूक है। जुलूक आपको जन्नत की सैर इसी धरती पर करा सकता है। बादलों के ऊपर बसा यह गांव समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसको आप हनीमून डेस्टिनेशन या फैमिली ट्रिप बना सकती हैं। आपको यहां आकर निराशा नहीं होगी। इसे भी पढ़ें: IRCTC Northeast Package: अब किस्तों में चुकाएं पैसे, मुंबई से Gangtok-Darjeeling ट्रिप में Flight और Guide भी शामिल सिल्क रूट का हिस्सा शायद आपको पता न हो जुलूक कभी सिल्क रूट का हिस्सा था। इसके व्यापार मार्ग की बात करें, तो यह मार्ग जेलेपा मुख्य पहाड़ी दर्रे को तिब्बत के ल्हासा तक जोड़ता था। जुलूक में क्या करें एक्सप्लोर अगर आप भी जुलूक घूमने का मन बना रहे हैं, तो आपको इन खास जगहों को जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए। थंबी व्यू पॉइंट थंबी व्यू पॉइंट से आपको कंचनजंघा की चोटियां साफ देखने को मिल सकती हैं। क्योंकि थंबी व्यू पॉइंट से कंचनजंघा सिर्फ 10 से 12 किमी की दूरी पर है। नाथंग वैली नाथंग वैली पर जाकर आप एक गाना तो जरूर गुनगुनाएंगे, 'बादल पर पांव हैं', क्योंकि वाकई में आपके पैर बादलों के बीच होंगे। एलीफेंट लेक ओल्ड सिल्क रूट पर आपको सिर्फ बादल ही नहीं बल्कि एलिफेंट लेक भी देखने को मिलेगी। इसको कुपूप झील या बिटांग छो भी कहते हैं। इस झील का आकार कुछ-कुछ हाथी जैसा दिखता है। जिग-जैग रास्ते यहां जाकर अगर आप रोड ट्रिप पर नहीं गए हैं तो मतलब आपने जुलूक को सही से नहीं एक्सप्लोर किया। यहां के जिग-जैग मोड़ ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। जानें कब और कैसे जाएं यहां पर जाने के लिए मार्च से लेकर मई और सितंबर से नवंबर तक का समय बेस्ट है। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन और हवाई मार्ग के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद गंगटोक और रोंगली होते हुए सड़क यात्रा करनी होगी।
Travel Tips: तुर्कमेनिस्तान का वह नरक द्वार जहाँ 1971 से नहीं बुझी आग, जानिए Karakum Desert का सच
दुनिया में आपको कई ऐसी अनोखी जगहें मिलेंगी, जिनके बार में जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। ऐसी ही एक जगह मध्य एशियाई के देश तुर्कमेनिस्तान में है। यहां पर काराकुम रेगिस्तान को नरक का दरवाजा भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कोई पैर नहीं रख सकता है। काराकुम रेगिस्तान में डेवरेज गांव के पास में यह रेगिस्तान में है। जिसको 'शाइनिंग काराकुम' के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रेगिस्तान का एक हिस्सा हमेशा आग की तरह चमकता रहता है। ऐसे में अगर आप भी यह सोच रहे है कि इसको नरक का दरवाजा क्यों कहा जाता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको इस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2026: भारतीय रेलवे का बड़ा तोहफा, इन Routes पर चलेंगी Raksha Bandhan Special Trains क्यों कहते हैं नरक का दरवाजा साल 1971 में मध्य एशिया के काराकुम रेगिस्तान में एक ऐसी घटना हुई। जिस कारण रेगिस्तान में आग लगाना पड़ा। साल 1971 में तेल भंडार की खोज में सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक का एक ग्रुप काराकुम रेगिस्तान आया था। यहां पर उनको एक ऐसी जगह मिल भी गई। जहां पर वैज्ञानिकों को लगा कि तेल भंडार होगा। उन्होंने प्राकृतिक गैस के एक बड़े भंडार के ऊपर खुदाई करना शुरू किया। लेकिन उनको इसके नतीजे के बारे में नहीं पता था। जब खुदाई के लिए उन्होंने उस हिस्से पर भारी मशीनें लगाईं। तो जमीन मशीनों का जोर न सह पाए और जमीन अंदर की ओर धंसने लगी। जिस कारण कई जगहों पर गड्ढा बनता चला गया। एक गड्ढे से निकलने लगी गैस बता दें कि रेगिस्तान में जगह-जगह गड्ढे बन रहे थे। लेकिन एक गड्ढा सबसे बड़ा था। यह गड्ढा करीब 230 फीट चौड़ा और 65 फीट गहरा था। जिसके बाद वैज्ञानिकों को चिंता सताने लगी। क्योंकि इस गड्ढे से लगातार प्राकृतिक गैस बाहर निकल रही थी। हालांकि यह गैस जहरीली नहीं थी, लेकिन फिर भी यह ऑक्सीजन को बदल देती थी। जिस कारण सांस ले पाना मुश्किल हो जाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों को होती थी। क्योंकि गड्ढे में गिरने से जानवर की फौरन मौत हो जाती। ऐसे में वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर यहां ब्लास्ट करना हो तो सिर्फ 5% मीथेन की मात्रा काफी होगी। इसलिए उन्होंने सोचा कि इसमें आग लगा दी जाए। अभी तक जल रही आग आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आग अभी तक जल रही है। तुर्कमेनिस्तान के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब गड्ढे में मौजूद प्राकृतिक गैस खत्म हो जाएगी, तो यह आग अपने आप बुझ जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है और यह आग जल रही है। साल 2010 में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति कुरबानगुली बर्डीमुखामेदोव भी इस गड्ढे का दौरा करने के लिए यहां पहुंचे थे। रेगस्तान में भभकने वाली इस आग को देखकर उन्होंने भी चिंता जताई थी। इससे आसपास के गैस क्षेत्रों को भी खतरा हो सकता है।
Gaurav Khanna माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर निकले, बारिश में फंसे तो ऐसे किया एन्जॉय
एक्टर गौरव खन्ना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। एक्टर लगातार अपने फैंस के साथ अपनी जिंदगी से जुड़े अपडेट शेयर कर रहे हैं। हाल ही में गौरव ने एक नया वीडियो शेयर कर बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर गए हैं। गौरव ने वीडियो में उस कार की झलक भी दिखाई, जिसमें वह अपनी मां और पिता के साथ सफर कर रहे हैं। पहाड़ों की ओर जाते हुए गौरव काफी खुश नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा, बादलों के बीच में जाते हुए। इस वीडियो के साथ उन्होंने मसूरी का नाम भी लिखा। बारिश में फंसे गौरव खन्ना मसूरी पहुंचने के बाद गौरव ने एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बारिश का मजा लेते नजर आए। उन्होंने बताया कि वहां बारिश काफी तेज हो रही थी। गौरव ने कहा कि उन्होंने छतरी भी ली थी, लेकिन तेज बारिश की वजह से उनके हाल खराब हो गए। इसके बाद गौरव एक रेस्टोरेंट में चाय पीते नजर आए। उन्होंने कहा कि ट्रिप पर इतनी बारिश में आएंगे तो ऐसा होना ही है, लेकिन यही तो ट्रिप का मजा है। वीडियो के आखिर में गौरव ने मजाकिया अंदाज में कहा, मजा भी है। इसे भी पढ़ें: Tumbbad 2 की रेकी के दौरान हुआ बड़ा खुलासा: उसी खौफनाक हवेली में टीम को मिला 8 साल पुराना रहस्यमयी खजाना! फैंस ने गौरव के वेकेशन को बताया जरूरी गौरव खन्ना के ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फैंस को उनका अपने माता-पिता के साथ समय बिताना काफी पसंद आ रहा है। कई फैंस का मानना है कि गौरव को इस तरह के ब्रेक और वेकेशन की जरूरत थी। कुछ फैंस ने गौरव और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर भी कमेंट किए। फैंस का कहना है कि आकांक्षा से अलग रहने के बाद गौरव के लिए परिवार के साथ समय बिताना और घूमना अच्छा है। इसे भी पढ़ें: Pune में घर खरीदने के बाद अब शादी की जिम्मेदारियों पर क्या बोले Parth Samthaan गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का अभी तक नहीं हुआ तलाक गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी और तलाक को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। लॉकअप 2 में गौरव, आकांक्षा को सपोर्ट करने पहुंचे थे। उस दौरान एक्टर ने बताया था कि दोनों अभी भी कानूनी तौर पर शादीशुदा हैं और उनका तलाक नहीं हुआ है। वहीं, लॉकअप 2 के बाद आकांक्षा चमोला ने भी बताया था कि अभी तक तलाक के पेपर साइन नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। इस बीच गौरव अपने माता-पिता के साथ मसूरी ट्रिप का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
क्या आप भी दिल्ली की भागदौड़ में परेशान हो गए हैं। बस आपको एक दिन ब्रेक लेना है, तो यह लेख आपके लिए है। वीकेंड पर घूमने के लिए आप दिल्ली से बेहद नजदीक इस जगह पर जरुर जा सकते हैं। यहां पर आपको इतिहास, खूबसूरती और अच्छा खाना तीनों एक साथ मिल जाएंगे। इस ट्रिप के लिए आपको ज्यादा दिन की छुट्टी लेनी की भी जरुरत नहीं है। आगरा में कई मशहूर जगहें जहां आप जरुर जाएं। मानसून के समय आगरा का मौसम बेहद प्यारा और खूबसूरत रहता है, तो चलिए बिना देर किए आपको बताते हैं एक दिन की छोटी ट्रिप के बारे में- आगरा में देखें ताजमहल आगरा जाएं और आप ताजमहल न देखें, ऐसा कुछ हो नहीं सकता। सफेद संगमरमर से बना हुआ यह मकबरा मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। आपको बताते चलें कि यह यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल है। मानसून के दौरान जब काले बादल छाए रहते हैं, तो ताजमहल का नजारा और भी खूबसूरत दिखता है। फोटो क्लिक करने के लिए शानदार व्यू बन जाता है। आगरा फोर्ट घूमें दिल्ली से आगरा की दूरी करीब 230 से 240 किलोमीटर है। ताजमहल घूमने के बाद आप आगरा फोर्ट देखने जरुर जाएं। लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ यह किला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल हैं। एक समय में यह मुगल बादशाहों के लिए सत्ता और रहने की जगह थी। वैसे यह ताजमहल से ज्यादा दूर नहीं है। किले के अंदर बड़े आंगन, महल और मुगर दौर की चीजें देखने को मिलती है। मेहताब बाग में मिलेगा ताज का अलग नजारा भीड़ से हटकर घूमना चाहती हैं, तो मेहताब बाग जा सकती हैं। यहां से दूर बैठकर ताजमहल के दीदर किए जा सकते हैं। खासतौर पर यह यमुना नदी के दूसरी तरफ बना मुगल गार्डन है और यहां से ताजमहल सबसे सुंदर नजर आता है। बेबी ताज भी देख सकती हैं आप यदि आप ट्रिप का समय का मैनेज कर लें, तो आप इत्माद-उद-दौला का मकबरा देखने भी जा सकते हैं। इसको बेबी ताज कहा जाता है। सफेद मार्बल, डिजाइन और काम इसको और भी सुंदर बना दिया है। जिन लोगों को भीड़ दूर रहना पसंद उनके लिए यह जगह बेहद खास है। मानसून में ट्रिप प्लान करते समय रखें ये बातें सबसे बढ़िया समय है मानसून के दौरान ट्रिप प्लान करने का। इस बात का ध्यान रखें कि पूरे दिन का शेड्यूल न रखें। आप भी एक दिन के लिए ऐसे ट्रिप का प्लान कर सकती हैं। - सुबह दिल्ली से आगरा के लिए निकलें। - सबसे पहले आप ताजमहल देखने जाएं। - दोपहर के समय खाना और थोड़ा आराम करें। - शाम के समय आप मेहताब बाग घूम सकते हैं। - अगर समय बचे तो बेबी ताज देख सकते हैं। - रात के समय दिल्ली के लिए वापस निकलें।
चंदेरी को भगवान श्रीकृष्ण की बुआ श्रुति के बेटे शिशुपाल की राजधानी माना जाता है। उस दौरान इसका उल्लेख चेदी राज्य के रूप में मिलता है। चंदेरी की रणनीतिक स्थिति में इसके समृद्धि की बड़ी वजह रही। कभी चंद्रगिरि कहा जाने वाला चंदेरी, बुंदेलखंड और मालवा की सीमा पर बसा है। जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। यहां पर मालवा के सुल्तानों और बुंदेल के राजपूतों द्वारा बनवाई गई तमाम इमारतें देखी जा सकती हैं। नदी किनारे गुफाओं में बने शैलचित्र सांस्कृतिक वैभव और कलात्मक सौंदर्य का परिचय देते हैं। यहां के शैलचित्रों को देखकर कहा जा सकता है कि चंदेरी प्रागैतिहासिक काल से एक जीवंत शहर है। चंदेरी साड़ियों से तो सभी वाकिफ हैं, चंदेरी साड़ियां अपने शिल्प और नफासत के लिए फेमस हैं। इसे भी पढ़ें: Monsoon Tourism 2026: भीड़भाड़ से दूर शांति देंगे ये 4 Budget Friendly Destinations, आज ही करें अपने ट्रिप का Plan जानें चंदेरी में कहां घूमें कोशक महल वहीं खिलजी वंश के शासनकाल में यह महल इस्लामी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चतुर्भुज आकार में निर्मित इस त्रि-स्तरीय महल के विशाल द्वार, झरोखे, खुले गलियारे इसकी स्थायपत्य कला को अनुपम बनाते हैं। इस महल के छत से दिखने वाले प्राकृतिक दृश्य इसकी शोभा को दोगुना कर देती है। कोशल इमारत के हर कक्ष के छत की डिजाइन बेहद अनोखा है। शुरूआत में 7 मंजिला इमारत के रूप में यह ढांचा सिर्फ 3 मंजिलों तक पूरा हो सका। चंदेरी किला चंदेरी किला शहर से 71 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला अभी भी शान से खड़ा है। यह किला कभी अभेद्य दुर्ग की तरह रहा होगा। यह किला 5 किमी लंबी दीवार से घिरा है। किले तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं: पहला पक्का रास्ता है, जिससे आप गाड़ी से किले तक जा सकते हैं। दूसरा रास्ता खूनी दरवाजा है, जहां से पैदल पहुंचा जा सकता है। खूनी दरवाजा लकड़ी का बड़ा द्वार है। इस पर मालवा के सुल्तान कैदियों के शवों को लटका देते थे। बताया जाता है कि जब बाबर ने किले की घेराबंदी की थी। तो यह सच में खून से नहा गया था। इसको आखिरी किला कहा जाता था, यानी जब शासक को पता होता था कि उसकी हार होना निश्चित है। वह यहीं से युद्ध करते थे, जिससे तहखाने से निकलकर सुरक्षित जा सकें। बत्तीसी बावड़ी चौकोर, गोल और समकोण बावड़ियों से भरा यह अफगान वास्तुकला की निशानी है। इसकी सुंदर सीढ़ियों के ऊपर बने बीच में स्वागत द्वारों ने इसको अधिक भव्य बनाया है। 60-60 फीट लंबी-चौड़ी बावड़ी आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां पर आपको एक फारसी में लिखा शिलालेख भी मिलेगा। जिसका अर्थ है, जो स्वर्ग की झलक देखना चाहता है, वह यहां पर थोड़ा विश्राम करें, क्योंकि स्वर्ग इसी की तरह है। कटी घाटी इसको विशाल चट्टान को तराश कर बनाया गया है। चंदेरी के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मार्ग बुंदेलखंड और मालवा के बीच एक कड़ी का काम करता था। मालवा के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी के स्वागत के लिए इसको रातों-रात बनाया गया था। लेकिन इस दरवाजे में कुंडे या टिकाव के लिए राजमिस्त्री ने जगह नहीं छोड़ी थी। इस कमी को देखते हुए जिमन खान ने मिस्त्री को मेहनताना देने से इंकार दिया। इससे दुखी होकर मिस्त्री ने आत्महत्या कर ली। तब से यह कटी घाटी गेट बिना दरवाजे के खड़ा है। शहजादी का रोजा चंदेरी के गवर्नर की बेटी मेहरुनिस्सा और एक सेनापति के अमर प्रेम का प्रतीक यह मकबरा है। इसको 15वीं शताब्दी में गवर्नर ने बनवाया था। गवर्नर ने दोनों को अलग करने के लिए सेनापति को युद्ध में भेजा और सैनिकों को निर्देश दिए कि वह जीवित वापस न आ पाए। यह जानकारी मिलने पर शहजादी ने रोजे रखे थे। घायल होने के बाद भी सेनापति बच गया और वापस चंदेरी आ गया। जब मेहरुन्निसा उससे मिली, तो वह सेनापति अंतिम सांसे ले रहा था। उसी दौरान शहजादी ने भी प्राण त्याग दिए। रोजा रखने के कारण इस मकबरे का नाम 'शहजादी का रोजा' पड़ा। बाद में दोनों प्रेमियों को गवर्नर ने इस मकबरे में साथ दफनाया। यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ललितुर है। वहीं भोपाल एयरपोर्ट से कैब लेकर भी यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। बुंदेली खानों का स्वाद लें, जैसे मक्के की रोटी, दाल बाफला, रसखीर और सूजी के लड्डू। चंदेरी घूमने का सबसे सही समय अक्तूबर से लेकर मार्च के बीच का है। दो लोगों के एक दिन रहने और खाने का अनुमानित खर्च 2.5 से 3 हजार रुपए तक है। यहां का मौसम अधिकतम 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का बना रहे हैं प्लान और आपका बजट भी लिमिटेड है, तो यह लेख आपके लिए है। वैसे इस महीने के घूमने का एक अलग ही अनुभव होता है, हर तरफ हरियाली और सुकून वाला मौसम होता है। इस बार आप कम बजट में भी कम भीड़ वाली जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि किसी शांत और खूबसूरत जगहों पर जाने का प्लान। अगस्त में घूमने के लिए 4 बजट-फ्रेंडली डेस्टिनेशंस वैसे तो भारत में घूमने के लिए कई छिपी हुई जगहें, जहां पर काफी शांति देखने को मिलती है। आइए आपको इन जगहों के बारे में बताते हैं- जंजैहली घाटी (हिमाचल प्रदेश) शिमला और मनाली के शोर-शराबे से दूर आप हिमाचल प्रदेश के की इस खूबसूरत जगह पर जा सकते हैं। मंडी जिले में स्थित जंजैहली घाटी, जहां मानसून के समय सेब के बागान और हरे-भरे मखमली मैदान देखने के लायक होते है। यह जगह ट्रेकिंग और नेचर वॉक के लिए शौकीनों के लिए बेस्ट है। कैसे पहुंचे? - दिल्ली से जंजैहली घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले ISBT कश्मीरी गेट से मंडी/ओट के लिए सीधी HRTC या प्राइवेट वोल्वो बस पकड़ लें। - मंडी से जंजैहली की दूरी करीब 85 किमी है, आपको यहां से स्थानीय बस या प्राइवेट टैक्सी मिल जाएगी। - आप चाहे, तो दिल्ली से चंडीगढ़ या ऊना हिमाचल तक ट्रेन लें। इसके बाद बस या टैक्सी से करीब 5-6 घंटे में यहां पहुंच जाए। ओरछा और गढ़कुंडार (मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश या आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, यहां पर जरुर जाएं। यहां आपको बेतवा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक कस्बा ओरछा और पास ही स्थित गढ़कुंडार का किला देखने का गजब का अनुभव प्राप्त होगा। मानसून के समय जंगलों के बीच बने प्राचीन महल, छतरियां और नदियां आपके ट्रिप को यादगार बना देगी। जिन लोगों को फोटोग्राफी और इतिहास जानने का शौक है, वो लोग इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। ऐसे पहुंचें - - ओरछा और गढ़कुंडार जाने के लिए आप झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई, झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा। - स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाएंगे। आप लोकल बस से भी यहां तक पहुंच सकते हैं। - यहां पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर है। वहीं, एयरपोर्ट से ओरछा की दूरी करीब 130 किमी है। भंडारदरा और घाटघर (महाराष्ट्र) यदि आपको झरने देखने का काफी शौक है, तो आप अगस्त के महीने में आप इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। मुंबई और पुणे के पास बसा भंडारदरा का घाटघर क्षेत्र घूमने के लिए सबसे बेस्ट है। मानसून के दौरान पूरी तरह धुंध और सैकड़ों मौसमी झरने देखने को मिलते हैं। यहां पर रंधा फॉल्स और आर्थर लेक अगस्त की बारिश में अपने पूरे शबाब पर होते हैं। कैसे पहुंचे? - इस जगह पर पहुंचने के लिए आपको नजदीकी बड़े शहर मुंबई, पुणे या नाशिक हैं। - आपको यहां आने के लिए मुंबई (BOM) पुणे (PNQ) या नाशिक (ISK) की डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं। - मुंबई से भंडारदरा करीब 165 किमी और नाशिक से लगभग 70 किमी दूर है। कसार देवी (उत्तराखंड) अगस्त के महीने में घूमने के लिए अल्मोड़ा के पास बसा कसार देवी भी एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यहां मानसून के समय बादल पहाड़ियों को छूकर गुजरते हैं, जिससे नजारा काफी अद्भुत लगता है। कसार देवी अपनी चुंबकीय ऊर्जा और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां पर आप दोस्तों और फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं। ऐसे पहुंचे - कसार देवी जाने के लिए आप काठगोदाम या हल्द्वानी स्टेशन तक जा सकते हैं। - स्टेशन पहुंचते ही आपको बहार अल्मोड़ा या कसार देवी के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें मिल जाएगी। - यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर (PGH) है, जो कि कसार देवी से करीब 125 किमी दूर है।
Travel Tips: बारिश के मौसम में जन्नत लगती हैं ये वादियां, Monsoon में एक्सप्लोर करें Hill Stations
बारिश के मौसम में घूमने का मजा ही अलग होता है। क्योंकि इस मौसम में चारों ओर हरियाली, बादलों से ढके पहाड़, ठंडी-ठंडी हवाएं और रिमझिम फुहारें लोगों को खूब भाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस मॉनसून कहीं घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आप साउथ इंडिया के कुछ फेमस हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। यहां बारिश में नेचर की खूबसूरती इस कदर बढ़ जाती है, जिसको देखकर लगता है मानो स्वर्ग में आ गए हों। साउथ इंडिया के हिल स्टेशन अपने चाय के बागानों, झरनों, हिल स्टेशनों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां की वादियां खूबसूरत और हरी-भरी हो जाती हैं। वहीं कई जगहों पर बादल इतने नीचे आ जाते हैं कि ऐसा लगता है कि हम बादलों के बीच खड़े हैं। तो आइए जानते हैं साउथ इंडिया की इन खूबसूरत जगहों के बारे में। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Switzerland on a Budget? ये 4 Indian Destinations देंगे आपको यूरोप जैसी हसीन वादियों का अनुभव मुन्नार मॉनसून में केरल के मुन्नार की खूबसूरती भी गई गुना बढ़ जाती है। यहां चाय के खूबसूरत बागान, ठंडी-ठंडी हवाएं और धुंध से ढके पहाड़ लोगों की ट्रिप को यादगार बना देते हैं। बारिश के बाद यहां की हरियाली निखर जाती है। ऐसे में अगर आप भी नेचर लवर हैं, या फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। कूर्ग कर्नाटक का कूर्ग भी मॉनसून में देखने लायक होता है। इसकी खूबसूरती के कारण कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मॉनसून में यहां पहाड़, कॉफी के बागानों और झरनों की खूबसूरती बढ़ जाती है। कूर्ग खूबसूरत होने के साथ शांत भी है। चिकमगलूर कर्नाटक का चिकमगलूर पिछले कुछ सालों से लोगों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। मॉनसून में यहां हरी-भरी घाटियां और बादलों से ढके पहाड़ देखने को मिलेंगे। यहां आप शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं। यह एक शानदार डेस्टिनेशन है। कोडाइकनाल तमिलनाडु का कोडाइकनाल हिल स्टेशन मानसून में बेहद खूबसूरत लगने लगता है। यहां की घाटियां, झीलें और व्यू पॉइंट बारिश के मौसम में बहुत ज्यादार सुंदर नजर आते हैं। अगर आपको भी प्रकृति से प्यार है और नेचर के बीच समय बिताना अच्छा लगता है, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। वायनाड केरल की खूबसूरती के बारे में तो आप सभी ने सुना होगा। इसको God's Own Country भी कहा जाता है। वहीं केरल का वायनाड भी मॉनसून में बेहद खूबसूरत लगता है। यहां लेक, गुफाएं, घने जंगल और कई बेहद शानदार झरने देखने लायक होते हैं। अगर आपको ट्रेकिंग और नेचर वॉक पसंद है, तो यह जगह आपके लिए बेस्ट है। ऊटी तमिलनाडु का ऊटी हिल स्टेशन भी बेहद खूबसूरत है। मॉनसून में यहां के चाय के बागान, पहाड़ और बगीचे खिल उठते हैं। अगर आप भी ऊटी आती हैं, तो पायकारा फॉल्स जाना न भूलें। इन बातों का ध्यान बारिश में मौसम की जानकारी लेने के बाद ही ट्रिप प्लान करें। छाता, रेनकोट और अच्छी ग्रिप वाले शूज साथ रखें। लोकल गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करें।
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे पहले खास होता है। इस दौरान शिवभक्तों की मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। अगर आप भी इस महीने कहीं घूमने के साथ-साथ भोलेनाथ के दर्शन करना चाहती हैं। तो हिमाचल प्रदेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो ऊंचाई पर बने हुए हैं। इस शिव मंदिरों तक पहुंचने का सफर उतना ही खूबसूरत होता है, जितने सुंदर यहां के नजारे होते हैं। बिजली महादेव मंदिर कुल्लू में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश का सबसे फेमस शिव मंदिर है। यह मंदिर करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से कुल्लू और पार्वती वैली का खूबसूरत नजारा बेहद साफ दिखता है। मंदिर की मान्यता है कि समय-समय पर शिवलिंग पर बिजली गिरती है। फिर पारंपरिक तरीके से पुजारी शिवलिंग को जोड़ते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम बिजली महादेव रखा गया है। इसे भी पढ़ें: Amarnath Yatra Rituals: कैसे करें बाबा बर्फानी की पूजा और क्या है प्रसाद वितरण का सही तरीका बैजनाथ शिव मंदिर हिमाचल के कांगड़ा जिले में बैजनाथ मंदिर भी है। जो भोलेनाथ को समर्पित है। यह धौलाधार पर्वत की तलहटी में बना हुआ है। भगवान शिव का यह मंदिर अपनी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी और अपने पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि रावण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहीं पर तपस्या की थी। सावन के महीने में यहां पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। मणिमहेश चंबा जिले में स्थित मणिमहेश भगवान भोलनाथ का सबसे पवित्र स्थल है। यहां मणिमहेश लेक और इसके पीछे दिखने वाली मणिमहेश पीक बेहद खूबसूरत लगती है। सावन और जन्माष्टमी के आसपास यहां पर मणिमहेश यात्रा भी निकलती है। समुद्र तल से मणिमहेश कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 5,653 मीटर बताई जाती है। अर्द्धनारीश्वर मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से एक अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। जोकि भगवान शिव और मां पार्वती की शक्ति का प्रतीक है। पहाड़ों के बीच बसे इस शहर का धार्मिक माहौल सावन के महीने में अधिक खास हो जाता है। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी सावन के महीने में हिमाचल के ऊंचाई वाले शिव मंदिरों में जाने का प्लान बना रहे हैं। तो मौसम की जानकारी पहले ले लें। क्योंकि बारिश की वजह से कई जगह सड़कें फिसलने वाली हो सकती है। इसलिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें। साथ में छाता या रेनकोट रख लें। ट्रैकिंग वाले मंदिरों में तब जाएं, जब आप फिजिकली फिट हों।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
दिल्ली से उज्जैन पहुंचने का सबसे सस्ता तरीका कौन सा? जानिए किराया और पूरा ट्रैवल प्लान
Ujjain Travel Plan: सावन के दिनों में महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन जाने का प्लान कर रहे हैं, तो हम आपको बताएंगे दिल्ली से जाने पर कितना खर्चा आएगा। चलिए आपको पूरा ट्रैवल प्लान समझाते हैं।
सावन का विशेष महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव के मंदिरों के दर्शन करने जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर उज्जैन के दर्शन के लिए मध्य प्रदेश जरुर आते हैं। दरअसल, उज्जैन की यात्रा न केवल महाकाल मंदिर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस शहर के कोने-कोने में अध्यात्म, पौराणिक कथाएं और अद्भुत वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। अगर आप भी उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो महाकाल दर्शन के अलावा बाद आप इन 5 प्रमुख स्थलों का भी भ्रमण करती है। महांकाल मंदिर के आसपास घूमने की 5 जगह मंगलनाथ मंदिर यदि आप उज्जैन महाकाल मंदिर जा रहे हैं, तो शिप्रा नदी के किनारे पहाड़ी पर स्थित मंगलनाथ मंदिर भी जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान को मंगल ग्रह (मंगल देव) का जन्मस्थान माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष या मांगलिक दोष होता है, वे यहां जरुर आएं और विशेष भात पूजा व शांति अनुष्ठान पूजा करवाएं। यदि आप महाकाल मंदिर से ऑटो या कैब बुक कर इस मंदिर तक जा सकते हैं। प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित चिंतामन गणेश मंदिर सबसे लोकप्रिय और प्राचीन है। माना जाता है कि यहां श्रद्धापूर्वक दर्शन करने से भक्तों की सभी चिंताएं दूर हो जाती है और मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। अगर आप नए काम की शुरुआत या गाड़ी खरीदने पर लोग सबसे पहले यहां आशीर्वाद लेने जरुर आएं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले महाकाल मंदिर से लोकल ई-रिक्शा मिल जाएगा। ऐतिहासिक गोमती कुंड अगर आप उज्जैन जा रहे हैं, तो महर्षि सांदीपनि आश्रम परिसर स्थित गोमती कुंड एक प्राचीन जलकुंड है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, अपने गुरु की सेवा और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने सभी पवित्र नदियों के जल को यहां एकत्रित किया था। वैसे आज भी इस कुंड का पानी पवित्र माना जाता है। यहां पर जाने के लिए आप रिक्शा लेकर जा सकते हैं। इस्कॉन मंदिर उज्जैन का इस्कॉन मंदिर घूमने के लिए एकदम परफेक्ट है। ऐसे में आप महाकाल दर्शन के बाद यहां जरुर जा सकती हैं। संगमरमर के पत्थरों से बने इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी विराजमान हैं। यहां का शांत वातावरण, हरी-भरी वाटिका और शाम की आरती में होने वाला कीर्तन भक्ति में डूबो देता है। आप महाकाल मंदिर से सीधा कैब करके यहां पहुंच सकते हैं। भव्य चार धाम मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर मार्ग के नजदीक स्थित चार धाम मंदिर एक अनोखा और सुंदर धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की स्थापना इसलिए की गई थी कि जो लोग देश के चार मुख्य धामों की यात्रा नहीं कर पाए, वे एक ही स्थान पर चारों धाम के दर्शन कर सकें। आपको इस मंदिर में बद्रीनाख, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। यहां पर वैष्णो देवी के जैसी गुफा भी स्थित है। कैसे पहुंचे उज्जैन? उज्जैन जाने के लिए आप किसी भी रेलवे स्टेशन से उज्जैन जंक्शन तक की टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा, आप हवाई जहाज से भी जा सकते हैं, तो उज्जैन के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतर्राष्टीय हवाई अड्डा है। जब आप इंदौर-उज्जैन पहुंच जाएंगे, तो वहां से बस या कैब को बुक कर सकते हैं।
Travel Tips: पहले ज्योतिर्लिंग की भव्यता का अनुभव, जानें Diu Airport और Veraval से पहुंचने का रास्ता
सावन में भगवान शिव के दर्शन के लिए इस बार अगर आप भी गुजरात के सोमनाथ मंदिर जाने का सोच रही हैं। तो आपको मंदिर से जुड़ी जानकारी पता होनी चाहिए। भगवान शिव को समर्पित सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर अपने शांत वातावरण, भव्य वास्तुकला और समुद्र किनारे स्थित होने की वजह से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सोमनाथ मंदिर में दर्शन से जुड़े नियमों के बारे में और यहां तक कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी देने जा रहे हैं। ऐसे जाएं गुजरात के सोमनाथ मंदिर सोमनाथ मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल या सोमनाथ है। इस दौरान आप दीव एयरपोर्ट से भी दर्शन के लिए आ सकती हैं। सोमनाथ मंदिर तक जाने के लिए भारत के करीब सभी बड़े शहरों से सीधी ट्रेन और फ्लाइट मिल जाती है। लेकिन अगर बजट में यहां आना चाहती हैं, तो ट्रेन से आना चाहिए। गुजरात राज्य के सोमनाथ जिले में वेरावल स्टेशन है। यहां से मंदिर की दूरी करीब 6 से 7 किमी है। दीव एयरपोर्ट से मंदिर की दूरी करीब 82 किमी है। यहां तक पहुंचने में आपको 1 घंटे का समय लग जाएगा। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost मंदिर के दर्शन से जुड़े जरूरी नियम सोमनाथ मंदिर में कैमरा, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर जाने की अनुमति नहीं है। एंट्री गेट के पास ही आपको क्लॉक रूम मिलेगा, यहां पर सामान जमा करवाना होगा। मंदिर में प्रवेश से पहले सिक्योरिटी जांच कराना जरूरी है। मंदिर दर्शन के लिए मर्यादित कपड़े पहनकर जाने पर ही एंट्री मिलेगी। दर्शन के लिए आपको लंबी लाइन में लगना पड़ सकता है। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की इजाजत नहीं है। वहीं नियम फॉलो न करने पर आप पर फाइन लग सकता है। आरती के दौरान भक्तों की संख्या ज्यादा होती है। इसलिए समय से पहले पहुंचें। सोमनाथ मंदिर में दर्शन का समय सोमनाथ मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट https://somnath.org/ के मुताबिक मंदिर रोजाना सुबह 06:00 बजे से लेकर रात को 10:00 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में रोजाना 3 बार आरती होती है। ऐसे में आप अपने हिसाब से दर्शन का समय प्लान कर सकती हैं। जिससे कि आपको आरती में शामिल होने का मौका मिल जाए। मंगला आरती का समय - सुबह 7:00 बजे राजभोग आरती का समय - दोपहर 12:00 बजे संध्या आरती का समय - शाम 7:00 बजे मंदिर में शाम को लाइट एंड शो भी होता है। रात को 08:00 बजे से 09:00 बजे तक इस शो का आयोजन होता है। हालांकि मौसम के हिसाब से इसका समय बदल सकता है। सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए गुजरात गए लोग अगले दिन भालका तीर्थ, गीता मंदिर, त्रिवेणी संगम, बाण स्तंभ और प्रभास पाटन संग्रहालय भी घूम सकते हैं।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
कड़कड़ाती सर्दी में बिकिनी पहन पूल में उतरीं रुबीना दिलैक, जापान वेकेशन की दिखाई झलक
टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
स्विमिंग पूल किनारे मोनालिसा का सिजलिंग अंदाज, वेकेशन से शेयर की बोल्ड तस्वीरें
भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा हिंदी टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी मोनालिसा की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। वह अपनी ग्लैमरस तस्वीरों से तहलका मचाती रहती हैं। मोनालिसा इन दिनों थाइलैंड में वेकेशन एंजॉय कर रही ...
गोवा में वेकेशन एंजॉय कर रहीं कृष्णा श्रॉफ, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
कृष्णा श्रॉफ निश्चित रूप से जानती हैं कि लोगों का ध्यान कैसे आकर्षित करना है- चाहे वह उनकी MMA चॉप्स हों या उनकी वेकेशन की तस्वीरें। कृष्णा इस दिनों गोवा की धूप और बीच पर छुट्टियां मना रही हैं। इसी बीच कृष्णा श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर अपनी ट्रॉपिकल ...
कैंसर के ट्रीटमेंट जंग के बीच वेकेशन मनाने मालदीव पहुंचीं हिना खान, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
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एक बार फिर सिनेमा घरो में दस्तक देने जा रही है क्रिस्टोफ़र नोलन की स्पेस एडवेंचर फिल्मInterstellar,10वीं सालगिरह पर होगी री-रिलीज़

