लखनऊ के चिनहट इलाके में कमता चौकी क्षेत्र में शनिवार शाम ट्रैवलर मालिक व सवारी में देर करने को लेकर विवाद हो गया। मालिक ने ड्राइवर व अन्य साथियों के साथ मिलकर गोरखपुर निवासी युवक और उसके साथियों पर लोहे की रॉड, सरिया और धारदार हथियार से हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने मौके पर फायरिंग भी की और फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। दुबौली रामनगर, कोडीराम गोरखपुर निवासी दिव्यांश राय (24) ने बताया वह शनिवार शाम करीब 5:30 बजे गोरखपुर जाने के लिए सफेद प्राइवेट ट्रैवलर (UP41 CT 7899) में बैठे थे। गाड़ी देर करने को लेकर उसकी चालक मोवीन और गाड़ी मालिक राहुल यादव से कहासुनी हो गई। आरोप है कि इस दौरान दोनों ने गाली-गलौज की और विरोध करने पर दिव्यांश व उसके मित्र शिवम सिंह के साथ मारपीट की।समझौता करने के लिए बुलाकर फिर हमला कियापीड़ित ने बताया कुछ देर बाद समझौते के लिए वह अपने वकील परम वर्मा और साथियों सूरज गुप्ता व दिलदार के साथ कमता चौकी पहुंचा। आरोप है कि पहले से घात लगाए बैठे राहुल यादव अपने 30-40 साथियों के साथ वहां आ गया और लोहे की रॉड, सरिया व धारदार हथियार से हमला कर दिया।आरोप है कि राहुल यादव ने उसके सिर पर रॉड से कई वार किए जबकि मोवीन ने वकील परम वर्मा पर पीछे से सरिया से हमला किया। वहीं, दयाशंकर पांडेय ने सूरज गुप्ता और दिलदार पर धारदार हथियार से वार किया। हमलावरों ने 3-4 राउंड फायरिंग भी की और जान से मारने की नीयत से मौके से फरार हो गए। पुलिस की मिलीभगत से भागे आरोपीघटना कमता चौकी के पास रोलेक्स अपार्टमेंट के सामने की बताई जा रही है। पीड़ित पक्ष ने चौकी इंचार्ज और पुलिसकर्मियों पर भी लापरवाही और आरोपियों से मिलीभगत का आरोप लगाया है। पुलिस के सामने आरोपी भाग गए लेकिन पकड़ा नहीं गया।
बांका जिले के अमरपुर प्रखंड में स्थित प्राचीन बाबा ज्यैष्ठगोरनाथ महादेव मंदिर के कायाकल्प की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हाल ही में पर्यटन विभाग की एक टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया, जिससे क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई संभावनाएं दिखी हैं। निरीक्षण के दौरान पर्यटन विभाग के आर्किटेक्ट माधव भारद्वाज, कला संस्कृति पदाधिकारी शंभू पटेल और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। उनके साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रतिक राज भी उपस्थित थे। टीम ने मंदिर की संरचना, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी जुटाई। अधिकारियों ने यह भी आकलन किया कि वर्ष भर में कितने श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। पर्यटन विभाग की पहल से क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगी यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है, लेकिन इसे अब तक वह पहचान नहीं मिल पाई है जिसका यह हकदार है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकारी उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण धरोहर लंबे समय से उपेक्षित रही है। हालांकि, पर्यटन विभाग की इस पहल से क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगी है। निरीक्षण के दौरान मंदिर के समग्र विकास के लिए विभिन्न संभावित योजनाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने परिसर का बारीकी से मुआयना करते हुए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी विचार-विमर्श किया। प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा इस निरीक्षण के बाद क्षेत्रवासियों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि ज्यैष्ठगोरनाथ महादेव मंदिर को जल्द ही एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
झालावाड़ के कोटा रोड पर स्थित किशन सागर तालाब और रैन बसेरा उद्यान का जीर्णोद्धार किया जाएगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को मौके पर पहुंचकर तालाब का निरीक्षण किया। इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। जल संसाधन विभाग, झालावाड़ के अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.एन. शर्मा ने दोपहर बाद किशन सागर तालाब का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। शर्मा ने बताया कि किशन सागर तालाब पर स्थित रैन बसेरा का निर्माण मूल रूप से देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा लकड़ी से किया गया था। इसे वर्ष 1937 में महाराज राजेंद्र सिंह लखनऊ की एक प्रदर्शनी से झालावाड़ लाए थे। वर्ष 2012 में अज्ञात कारणों से आग लगने के कारण यह नष्ट हो गया था। अब पर्यटन विभाग द्वारा पीडब्ल्यूडी के माध्यम से इसका पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को देखते हुए पंचायती राज से तालाब को जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित किया गया है। विभाग ने बजट घोषणा वर्ष 2026-27 के तहत किशन सागर तालाब की मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य करने की योजना बनाई है। यह कार्य शीघ्र ही शुरू किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान शर्मा ने अधिकारियों को किशन सागर तालाब के आसपास सफाई कराने, एक उद्यान विकसित करने, चारदीवारी बनाने और नहरों की मरम्मत करने के निर्देश दिए। उन्होंने रैन बसेरा को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया, ताकि यह झालावाड़ जिले की पहचान बन सके और पर्यटन क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर सके। निरीक्षण के समय एसई महेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) जीतराम मीणा और अन्य विभागीय अभियंता भी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अप्रैल महीने में ही भीषण गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। यहां का तापमान करीब 36 से 40 डिग्री के आसपास पहुंचने से इंद्रावती नदी समेत कई नदी-नालों का जलस्तर घट गया है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात में भी पानी की एक-दो धार बह रही है। इसका असर न केवल पर्यटन पर दिख रहा है, बल्कि पर्यावरण और जनजीवन पर भी पड़ने लगा है। जहां आम दिनों में पर्यटकों की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। पर्यटकों में निराशा राजस्थान से पहुंचे पर्यटक शिवम शर्मा ने बताया कि, वे चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात की खूबसूरती देखने आए थे, लेकिन इस समय पतली धार ही नजर आ रही है। अगली बार मानसून के बाद आना बेहतर रहेगा। वहीं बलौदाबाजार, बेमेतरा और गरियाबंद से आए पर्यटकों ने भी पानी कम होने की बात कही, हालांकि उन्होंने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की। गर्मी का असर केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव जल, जंगल और जीव-जंतुओं पर भी पड़ रहा है। नदी-नाले सूखने से पेड़-पौधों और वन्य जीवों के सामने जल संकट खड़ा हो रहा है। इंद्रावती नदी का जलस्त्रोत हुआ कम बस्तर की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी का भी जलस्त्रोत कम हो रहा है। इसी नदी पर चित्रकोट वाटरफॉल बना है। अभी अप्रैल का महीना भी खत्म नहीं हुआ और पारा चढ़ने लगा है। भीषण गर्मी की वजह से इंद्रावती नदी सूख रही है, जिससे एशिया का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट वाटरफॉल में भी एक पतली धार में पानी नीचे गिर रहा है। कैसे बचाएं नदी-नाले और पर्यावरण गर्मी में खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
डीग–गोवर्धन अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत बहज, जो ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का प्रमुख पड़ाव स्थल माना जाता है, इन दिनों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई को लेकर चर्चा में है। गांव का प्राचीन नाम ब्रजनाभ (भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र) के नाम पर ‘बज नगर’ बताया जाता है, जिसे करीब 4000 से 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता से जोड़ा जा रहा है। 10 जनवरी 2024 से शुरू हुई खुदाई में अब तक 3500 से 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता के कई महत्वपूर्ण अवशेष सामने आए हैं, जिससे क्षेत्र का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह स्थल ब्रज क्षेत्र में स्थित होने के साथ-साथ पौराणिक सरस्वती नदी के प्राचीन सूखे मार्ग से भी जुड़ा माना जा रहा है। लोक कलाकारों ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचानबहज गांव के लोक कलाकारों विजय कटीला, विष्णु शर्मा, बबलू ब्रजवासी और अशोक शर्मा ने ब्रज फोक गीत, फूलों की होली, चरकुला नृत्य, मयूर नृत्य और महारास जैसे कार्यक्रमों का देश-विदेश में प्रदर्शन किया है। इन कलाकारों ने म्यांमार और दक्षिण कोरिया सहित विभिन्न देशों में प्रस्तुतियां देकर गांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। बहज में मिली संरचनाएं विकसित सभ्यता के संकेत विशेषज्ञों के अनुसार बहज में मिली संरचनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि यहां एक सुव्यवस्थित और समृद्ध सभ्यता निवास करती थी। जल प्रबंधन, आवास निर्माण और धार्मिक परंपराओं के प्रमाण इस स्थल को एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं। साहित्यकार मुन्ना लाल ने कहा कि पुरातत्व विभाग की इस खोज के बाद बहज गांव में पर्यटन और शोध की अपार संभावनाएं बढ़ गई हैं। यदि इस स्थल का सही संरक्षण और विकास किया जाए तो यह प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। 800 से अधिक पुरावशेष, यज्ञकुंड और प्राचीन संरचनाएं मिलीं खुदाई के दौरान अब तक 800 से अधिक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं। इनमें मिट्टी के बर्तन, आभूषण, उपकरण, हड्डियों के औजार, ब्राह्मी लिपि की मोहरें, पंचमार्क सिक्के तथा धार्मिक गतिविधियों से जुड़े अवशेष शामिल हैं। इसके अलावा यज्ञकुंड, प्राचीन दीवारें और आवासीय संरचनाओं के प्रमाण भी मिले हैं, जो उस समय के विकसित सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की झलक देते हैं। पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या – लगभग 13,000 मुख्यालय से दूरी – 5 किमी साक्षरता – 90 प्रतिशत आजीविका – कृषि एवं पशुपालन आवागमन के साधन – रोडवेज बस, रेल एवं निजी वाहन
औरैया जनपद में पर्यटन विकास परियोजनाओं के लिए 278 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। राज्य सेक्टर के तहत पर्यटन विभाग ने कानपुर मंडल के औरैया जनपद की तीन विधानसभाओं के लिए कुल 370.53 लाख रुपये के सापेक्ष यह राशि जारी की है। इस धनराशि का उपयोग विभिन्न धार्मिक स्थलों के पर्यटन विकास में किया जाएगा। पर्यटन मंत्री ने बताया कि दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित हनुमान मंदिर सेहुद धाम के विकास के लिए 105 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इसी प्रकार, विधुना विधानसभा क्षेत्र के दुर्वासा आश्रम के पर्यटन विकास हेतु 1 करोड़ रुपये (100 लाख रुपये) और कुल देवता गंगा बाबा नवी मोहान, मधवापुर विकासखंड सहार के पर्यटन के लिए 73 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन सभी निर्माण कार्यों के लिए यूपीएसटीडीसी (उत्तर प्रदेश स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। पर्यटन मंत्री ने गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के लगभग सभी जनपदों के लिए पर्यटन विकास योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य प्राचीन धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है। पर्यटन मंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने में मदद मिलेगी।
जालंधर के घनी आबादी वाले क्षेत्र मोहल्ला बाग बाहरियां में बुधवार देर शाम तीन लुटेरों ने एक ट्रैवल कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाया। लुटेरे करीब डेढ़ लाख रुपये (संभावित राशि अधिक) लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। घटना हरनामदास पुरा के पास स्थित मोहल्ला बाग बाहरियां की है, जहां लुटेरों ने सरेआम वारदात को अंजाम दिया। टूर एंड ट्रैवल कंपनी में काम करता है युवक जानकारी के अनुसार, लुटेरों ने राज टूर एंड ट्रैवल कंपनी के एक कर्मचारी को अपना शिकार बनाया। बताया जा रहा है कि कर्मचारी दफ्तर के काम से नकदी लेकर जा रहा था, तभी लुटेरों ने उसे घेर लिया और रुपयों से भरा बैग लेकर फरार हो गए। पीडि़त की अभी पहचान नहीं हो पाई है। ज्यादा हो सकती है लूट की राशिशुरुआती जांच में ट्रैवल कंपनी के संचालक उपेंद्र राजदान ने करीब 1.5 लाख रुपये की लूट होने की बात कही है। हालांकि, स्थानीय चर्चाओं के अनुसार लूट की गई राशि इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। पुलिस असली रकम का पता लगाने में जुटी है।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया की वारदात को अंजाम देने वाले लुटेरों की संख्या तीन थी। इनमें से दो लुटेरे पैदल आए थे, जबकि उनका तीसरा साथी एक्टिवा पर सवार था। वारदात के बाद तीनों तेजी से गलियों के रास्ते फरार हो गए। पुलिस ने CCTV कैमरों की फुटेज कब्जे में ली घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के रास्तों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज कब्जे में ले ली है। पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पर्यावरण आधारित पर्यटन और तीर्थाटन को मिले प्राथमिकता, विरासत बचाने की पैरवी
झील प्रेमियों ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया है कि उदयपुर में पारंपरिक पर्यटन के बजाय पर्यावरण आधारित पर्यटन और धार्मिक तीर्थाटन को प्राथमिकता दी जाए, ताकि शहर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सके। रविवार को आयोजित झील संवाद में झील संरक्षण समिति से जुड़े डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि उदयपुर की पहचान उसकी झीलों, तालाबों, पहाड़ियों, बावड़ियों, गोखड़ों तथा देवालयों से है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पर्यटन विस्तार के नाम पर इस नैसर्गिक विरासत को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में उदयपुर को पर्यावरण आधारित पर्यटन यानी पर्यटन और देवालय आधारित तीर्थाटन का प्रमुख केंद्र बनाया जाना चाहिए। झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि झीलों के किनारे स्थित घाट उदयपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर हैं, लेकिन उन पर लगातार अतिक्रमण और अवरोध बढ़ रहे हैं, जिन्हें तत्काल रोकने की आवश्यकता है। सामाजिक कार्यकर्ता नंद किशोर शर्मा ने कहा कि उदयपुर में बढ़ता हुआ पर्यटन शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे के विपरीत प्रभाव डाल रहा है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमावत ने सुझाव दिया कि पिछोला झील को धार्मिक पर्यटन सर्किट घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि इसके चारों ओर कई मंदिर और देवालय स्थित हैं, जो इसे आध्यात्मिक महत्व प्रदान करते हैं। शिक्षाविद कुशल रावल ने कहा कि पहाड़ियों और बावड़ियों का संरक्षण ही उदयपुर की पर्यावरणीय और जलीय विरासत को बचाने का एकमात्र मार्ग है।
उज्जैन, ओंकारेश्वर के बाद आगर-मालवा जिले का नलखेड़ा मप्र का नया धार्मिक पर्यटन क्षेत्र बनकर सामने आया है। इस साल हर 10 में से 6 से 7 बुकिंग में इस धाार्मिक क्षेत्र की भी बुकिंग हो रही है। यहां मां बाग्लामुखी का मंदिर है। ट्रैवल ऑपरेटरों का कहना है कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु उज्जैन ओंकारेश्वर के साथ नलखेड़ा की डिमांड कर रहे हैं। इधर, भोपाल से चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। ट्रेवल्स संचालकों के अनुसार, भोपाल से अब तक 300 से ज्यादा बुकिंग चारधाम यात्रा के लिए हो चुकी हैं। हबीबगंज क्षेत्र के ट्रेवल संचालक संदेश अग्रवाल ने बताया कि इस बार बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित यात्रा प्लान कर रहे हैं। ट्रैवल व्यवसायी गिरीश केसरवानी के मुताबिक, उनके यहां से भी करीब 15 बुकिंग चारधाम यात्रा के लिए कन्फर्म हो चुकी हैं। चारधाम यात्रा इस तरह करा रहे प्रमुख धार्मिक सर्किट में शामिल हो सकता है यह स्थल मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन में इन दिनों नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर और पचमढ़ी जैसे प्रमुख स्थलों के साथ अब श्रद्धालु नलखेड़ा को भी अपने टूर पैकेज में शामिल कर रहे हैं। टूर ऑपरेटरों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है। हबीबगंज के एक ट्रेवल संचालक ने बताया कि हाल ही में हुई 20 बुकिंग में से 14 यात्रियों ने नलखेड़ा को शामिल किया। अन्य व्यवसायियों के अनुसार, हर 10 में से 6-7 ग्राहक अब इस स्थल को यात्रा में जोड़ रहे हैं। खास बात यह है कि बेंगलुरु, हैदराबाद सहित दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सोशल मीडिया और प्रचार-प्रसार के कारण भी इस स्थल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इससे यह अब प्रमुख धार्मिक सर्किट का हिस्सा बनता जा रहा है। इस तरह, एक ओर चारधाम यात्रा को लेकर उत्साह चरम पर है। मध्यप्रदेश का धार्मिक पर्यटन भी लगातार बढ़ रहा है।
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टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
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