बांका जिले के अमरपुर प्रखंड में स्थित प्राचीन बाबा ज्यैष्ठगोरनाथ महादेव मंदिर के कायाकल्प की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हाल ही में पर्यटन विभाग की एक टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया, जिससे क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई संभावनाएं दिखी हैं। निरीक्षण के दौरान पर्यटन विभाग के आर्किटेक्ट माधव भारद्वाज, कला संस्कृति पदाधिकारी शंभू पटेल और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। उनके साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रतिक राज भी उपस्थित थे। टीम ने मंदिर की संरचना, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी जुटाई। अधिकारियों ने यह भी आकलन किया कि वर्ष भर में कितने श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। पर्यटन विभाग की पहल से क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगी यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है, लेकिन इसे अब तक वह पहचान नहीं मिल पाई है जिसका यह हकदार है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकारी उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण धरोहर लंबे समय से उपेक्षित रही है। हालांकि, पर्यटन विभाग की इस पहल से क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगी है। निरीक्षण के दौरान मंदिर के समग्र विकास के लिए विभिन्न संभावित योजनाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने परिसर का बारीकी से मुआयना करते हुए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी विचार-विमर्श किया। प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा इस निरीक्षण के बाद क्षेत्रवासियों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि ज्यैष्ठगोरनाथ महादेव मंदिर को जल्द ही एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
झालावाड़ के कोटा रोड पर स्थित किशन सागर तालाब और रैन बसेरा उद्यान का जीर्णोद्धार किया जाएगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को मौके पर पहुंचकर तालाब का निरीक्षण किया। इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। जल संसाधन विभाग, झालावाड़ के अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.एन. शर्मा ने दोपहर बाद किशन सागर तालाब का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। शर्मा ने बताया कि किशन सागर तालाब पर स्थित रैन बसेरा का निर्माण मूल रूप से देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा लकड़ी से किया गया था। इसे वर्ष 1937 में महाराज राजेंद्र सिंह लखनऊ की एक प्रदर्शनी से झालावाड़ लाए थे। वर्ष 2012 में अज्ञात कारणों से आग लगने के कारण यह नष्ट हो गया था। अब पर्यटन विभाग द्वारा पीडब्ल्यूडी के माध्यम से इसका पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को देखते हुए पंचायती राज से तालाब को जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित किया गया है। विभाग ने बजट घोषणा वर्ष 2026-27 के तहत किशन सागर तालाब की मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य करने की योजना बनाई है। यह कार्य शीघ्र ही शुरू किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान शर्मा ने अधिकारियों को किशन सागर तालाब के आसपास सफाई कराने, एक उद्यान विकसित करने, चारदीवारी बनाने और नहरों की मरम्मत करने के निर्देश दिए। उन्होंने रैन बसेरा को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया, ताकि यह झालावाड़ जिले की पहचान बन सके और पर्यटन क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर सके। निरीक्षण के समय एसई महेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) जीतराम मीणा और अन्य विभागीय अभियंता भी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अप्रैल महीने में ही भीषण गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। यहां का तापमान करीब 36 से 40 डिग्री के आसपास पहुंचने से इंद्रावती नदी समेत कई नदी-नालों का जलस्तर घट गया है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात में भी पानी की एक-दो धार बह रही है। इसका असर न केवल पर्यटन पर दिख रहा है, बल्कि पर्यावरण और जनजीवन पर भी पड़ने लगा है। जहां आम दिनों में पर्यटकों की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। पर्यटकों में निराशा राजस्थान से पहुंचे पर्यटक शिवम शर्मा ने बताया कि, वे चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात की खूबसूरती देखने आए थे, लेकिन इस समय पतली धार ही नजर आ रही है। अगली बार मानसून के बाद आना बेहतर रहेगा। वहीं बलौदाबाजार, बेमेतरा और गरियाबंद से आए पर्यटकों ने भी पानी कम होने की बात कही, हालांकि उन्होंने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की। गर्मी का असर केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव जल, जंगल और जीव-जंतुओं पर भी पड़ रहा है। नदी-नाले सूखने से पेड़-पौधों और वन्य जीवों के सामने जल संकट खड़ा हो रहा है। इंद्रावती नदी का जलस्त्रोत हुआ कम बस्तर की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी का भी जलस्त्रोत कम हो रहा है। इसी नदी पर चित्रकोट वाटरफॉल बना है। अभी अप्रैल का महीना भी खत्म नहीं हुआ और पारा चढ़ने लगा है। भीषण गर्मी की वजह से इंद्रावती नदी सूख रही है, जिससे एशिया का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट वाटरफॉल में भी एक पतली धार में पानी नीचे गिर रहा है। कैसे बचाएं नदी-नाले और पर्यावरण गर्मी में खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
डीग–गोवर्धन अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत बहज, जो ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का प्रमुख पड़ाव स्थल माना जाता है, इन दिनों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई को लेकर चर्चा में है। गांव का प्राचीन नाम ब्रजनाभ (भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र) के नाम पर ‘बज नगर’ बताया जाता है, जिसे करीब 4000 से 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता से जोड़ा जा रहा है। 10 जनवरी 2024 से शुरू हुई खुदाई में अब तक 3500 से 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता के कई महत्वपूर्ण अवशेष सामने आए हैं, जिससे क्षेत्र का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह स्थल ब्रज क्षेत्र में स्थित होने के साथ-साथ पौराणिक सरस्वती नदी के प्राचीन सूखे मार्ग से भी जुड़ा माना जा रहा है। लोक कलाकारों ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचानबहज गांव के लोक कलाकारों विजय कटीला, विष्णु शर्मा, बबलू ब्रजवासी और अशोक शर्मा ने ब्रज फोक गीत, फूलों की होली, चरकुला नृत्य, मयूर नृत्य और महारास जैसे कार्यक्रमों का देश-विदेश में प्रदर्शन किया है। इन कलाकारों ने म्यांमार और दक्षिण कोरिया सहित विभिन्न देशों में प्रस्तुतियां देकर गांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। बहज में मिली संरचनाएं विकसित सभ्यता के संकेत विशेषज्ञों के अनुसार बहज में मिली संरचनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि यहां एक सुव्यवस्थित और समृद्ध सभ्यता निवास करती थी। जल प्रबंधन, आवास निर्माण और धार्मिक परंपराओं के प्रमाण इस स्थल को एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं। साहित्यकार मुन्ना लाल ने कहा कि पुरातत्व विभाग की इस खोज के बाद बहज गांव में पर्यटन और शोध की अपार संभावनाएं बढ़ गई हैं। यदि इस स्थल का सही संरक्षण और विकास किया जाए तो यह प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। 800 से अधिक पुरावशेष, यज्ञकुंड और प्राचीन संरचनाएं मिलीं खुदाई के दौरान अब तक 800 से अधिक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं। इनमें मिट्टी के बर्तन, आभूषण, उपकरण, हड्डियों के औजार, ब्राह्मी लिपि की मोहरें, पंचमार्क सिक्के तथा धार्मिक गतिविधियों से जुड़े अवशेष शामिल हैं। इसके अलावा यज्ञकुंड, प्राचीन दीवारें और आवासीय संरचनाओं के प्रमाण भी मिले हैं, जो उस समय के विकसित सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की झलक देते हैं। पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या – लगभग 13,000 मुख्यालय से दूरी – 5 किमी साक्षरता – 90 प्रतिशत आजीविका – कृषि एवं पशुपालन आवागमन के साधन – रोडवेज बस, रेल एवं निजी वाहन
औरैया जनपद में पर्यटन विकास परियोजनाओं के लिए 278 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। राज्य सेक्टर के तहत पर्यटन विभाग ने कानपुर मंडल के औरैया जनपद की तीन विधानसभाओं के लिए कुल 370.53 लाख रुपये के सापेक्ष यह राशि जारी की है। इस धनराशि का उपयोग विभिन्न धार्मिक स्थलों के पर्यटन विकास में किया जाएगा। पर्यटन मंत्री ने बताया कि दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित हनुमान मंदिर सेहुद धाम के विकास के लिए 105 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इसी प्रकार, विधुना विधानसभा क्षेत्र के दुर्वासा आश्रम के पर्यटन विकास हेतु 1 करोड़ रुपये (100 लाख रुपये) और कुल देवता गंगा बाबा नवी मोहान, मधवापुर विकासखंड सहार के पर्यटन के लिए 73 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन सभी निर्माण कार्यों के लिए यूपीएसटीडीसी (उत्तर प्रदेश स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। पर्यटन मंत्री ने गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के लगभग सभी जनपदों के लिए पर्यटन विकास योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य प्राचीन धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है। पर्यटन मंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने में मदद मिलेगी।
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Astro-Tourism: 2026 में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते पर्यटन ट्रेंड्स में से एक है। वर्तमान दौर में एस्ट्रो-टूरिज्म का चलन हो चला है। अब केवल ग्रह नक्षत्र या सितारे देखने ही ज्योतिष सीमित नहीं रहा है; यह विज्ञान, आध्यात्मिकता और एडवेंचर का एक अनोखा ...
पर्यावरण आधारित पर्यटन और तीर्थाटन को मिले प्राथमिकता, विरासत बचाने की पैरवी
झील प्रेमियों ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया है कि उदयपुर में पारंपरिक पर्यटन के बजाय पर्यावरण आधारित पर्यटन और धार्मिक तीर्थाटन को प्राथमिकता दी जाए, ताकि शहर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सके। रविवार को आयोजित झील संवाद में झील संरक्षण समिति से जुड़े डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि उदयपुर की पहचान उसकी झीलों, तालाबों, पहाड़ियों, बावड़ियों, गोखड़ों तथा देवालयों से है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पर्यटन विस्तार के नाम पर इस नैसर्गिक विरासत को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में उदयपुर को पर्यावरण आधारित पर्यटन यानी पर्यटन और देवालय आधारित तीर्थाटन का प्रमुख केंद्र बनाया जाना चाहिए। झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि झीलों के किनारे स्थित घाट उदयपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर हैं, लेकिन उन पर लगातार अतिक्रमण और अवरोध बढ़ रहे हैं, जिन्हें तत्काल रोकने की आवश्यकता है। सामाजिक कार्यकर्ता नंद किशोर शर्मा ने कहा कि उदयपुर में बढ़ता हुआ पर्यटन शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे के विपरीत प्रभाव डाल रहा है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमावत ने सुझाव दिया कि पिछोला झील को धार्मिक पर्यटन सर्किट घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि इसके चारों ओर कई मंदिर और देवालय स्थित हैं, जो इसे आध्यात्मिक महत्व प्रदान करते हैं। शिक्षाविद कुशल रावल ने कहा कि पहाड़ियों और बावड़ियों का संरक्षण ही उदयपुर की पर्यावरणीय और जलीय विरासत को बचाने का एकमात्र मार्ग है।
उज्जैन, ओंकारेश्वर के बाद आगर-मालवा जिले का नलखेड़ा मप्र का नया धार्मिक पर्यटन क्षेत्र बनकर सामने आया है। इस साल हर 10 में से 6 से 7 बुकिंग में इस धाार्मिक क्षेत्र की भी बुकिंग हो रही है। यहां मां बाग्लामुखी का मंदिर है। ट्रैवल ऑपरेटरों का कहना है कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु उज्जैन ओंकारेश्वर के साथ नलखेड़ा की डिमांड कर रहे हैं। इधर, भोपाल से चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। ट्रेवल्स संचालकों के अनुसार, भोपाल से अब तक 300 से ज्यादा बुकिंग चारधाम यात्रा के लिए हो चुकी हैं। हबीबगंज क्षेत्र के ट्रेवल संचालक संदेश अग्रवाल ने बताया कि इस बार बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित यात्रा प्लान कर रहे हैं। ट्रैवल व्यवसायी गिरीश केसरवानी के मुताबिक, उनके यहां से भी करीब 15 बुकिंग चारधाम यात्रा के लिए कन्फर्म हो चुकी हैं। चारधाम यात्रा इस तरह करा रहे प्रमुख धार्मिक सर्किट में शामिल हो सकता है यह स्थल मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन में इन दिनों नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर और पचमढ़ी जैसे प्रमुख स्थलों के साथ अब श्रद्धालु नलखेड़ा को भी अपने टूर पैकेज में शामिल कर रहे हैं। टूर ऑपरेटरों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है। हबीबगंज के एक ट्रेवल संचालक ने बताया कि हाल ही में हुई 20 बुकिंग में से 14 यात्रियों ने नलखेड़ा को शामिल किया। अन्य व्यवसायियों के अनुसार, हर 10 में से 6-7 ग्राहक अब इस स्थल को यात्रा में जोड़ रहे हैं। खास बात यह है कि बेंगलुरु, हैदराबाद सहित दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सोशल मीडिया और प्रचार-प्रसार के कारण भी इस स्थल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इससे यह अब प्रमुख धार्मिक सर्किट का हिस्सा बनता जा रहा है। इस तरह, एक ओर चारधाम यात्रा को लेकर उत्साह चरम पर है। मध्यप्रदेश का धार्मिक पर्यटन भी लगातार बढ़ रहा है।
टेराकोटा शिल्प के लिए प्रसिद्ध जिले के भटहट क्षेत्र का गांव औरंगाबाद पर्यटन के नक्शे पर भी खूब चमकेगा। पर्यटन विभाग इसे स्पेशल टूरिस्ट विलेज (विशेष पर्यटन गांव) के रूप में विकसित कर रहा है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने टेराकोटा गांव औरंगाबाद के पर्यटन विकास के लिए एक करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई है। इस कार्ययोजना को पूर्ण करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था, सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को दी गई है। टेराकोटा गांव में ग्रामीण पर्यटन विकास के लिए स्वीकृत 96.29 लाख रुपये में से पहली किस्त के रूप में 67 लाख रुपये जारी भी कर दिए गए हैं। पर्यटन विकास की इस परियोजना में गेट कॉम्प्लेक्स, विद्युत कार्य और साइनेज के कार्य कराए जाएंगे। औरंगाबाद गांव के पर्यटन विकास से गोरखपुर के प्रसिद्ध टेराकोटा शिल्प की वैश्विक पटल पर ब्रांडिंग भी मजबूत होगी। गोरखपुर के टेराकोटा शिल्प से बने उत्पादों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल कर इसे नई पहचान दिलाई है। सरकार का प्रोत्साहन मिलने से टेराकोटा उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री खुद कई मंचों से इसकी ब्रांडिंग कर चुके हैं। अब सरकार ने टेराकोटा शिल्प को पर्यटन के साथ जोड़कर इसे नई ऊंचाई पर पहुंचाने की तैयारी की है। इसके दृष्टिगत टेराकोटा शिल्प का मूल माने जाने वाले औरंगाबाद गांव को टूरिस्ट विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार की मंशा औरंगाबाद गांव को इस तरह विकसित करने की है जिससे पर्यटक यहां आकर टेराकोटा उत्पादों को अपने सामने बनता देख सकें। कई पर्यटक ओरिजिनल टेराकोटा उत्पादों को खरीदने की चाह रखते हैं, उनकी यह ख्वाहिश भी यहां आकर पूरी होगी। पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि टेराकोटा गांव औरंगाबाद में पर्यटन विकास की परियोजना को शीघ्रता से पूर्ण कराया जाएगा। पर्यटन विकास होने से टेराकोटा गांव में होमस्टे और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित वन वाटिका में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने नौका विहार (बोटिंग) और चिल्ड्रन पार्क का शुभारंभ किया। यह पहल क्षेत्र को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर मंत्री नेताम ने कहा कि विकास केवल पुल-पुलिया और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की जरूरतों के अनुरूप सुविधाओं के विस्तार से जुड़ा है। उन्होंने दीर्घकालिक योजनाओं के महत्व पर जोर दिया और युवाओं की मांग पर वन वाटिका परिसर में ओपन जिम स्थापित करने का आश्वासन भी दिया। सुरक्षा के प्रति सावधानी बरतने की सलाह :मंत्री नेताम मंत्री ने नौका संचालन कर रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद किया और उन्हें सुरक्षा के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन, क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त रखने और स्थानीय महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही, आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न रोजगार गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात भी कही। 5 एकड़ में वन वाटिका विकसित की गई वनमंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने बताया कि वन वाटिका रामानुजगंज तेजी से एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस स्थान में 5 एकड़ में वन वाटिका विकसित की गई है। इसका संचालन वर्ष 2009 से वन प्रबंधन समूह द्वारा किया जा रहा है, और वर्तमान में ‘विश्वास महिला स्व-सहायता समूह’ इसकी जिम्मेदारी संभाल रहा है, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। वन वाटिका में बच्चों के लिए झूले और अन्य मनोरंजन सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनके भविष्य में और विस्तार की योजना है। मंत्री ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए समूह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया। यह पहल क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय आजीविका दोनों को गति प्रदान करेगी।
कोरबा में शनिवार देर रात एनएच 130 पर एक डीजल टैंकर और ट्रेलर की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों के अगले हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और एक चालक केबिन में फंस गया। इस घटना के कारण अंबिकापुर-कटघोरा मार्ग लगभग तीन घंटे तक बाधित रहा, जिसमें पर्यटन मंत्री का काफिला भी फंसा रहा। यह हादसा कटघोरा थाना क्षेत्र के बरपाली स्थित लालघाट के पास हुआ। जानकारी के अनुसार डीजल टैंकर अंबिकापुर की ओर से आ रहा था, जबकि ट्रेलर कटघोरा की दिशा में जा रहा था। लालघाट के पास दोनों वाहनों की आमने-सामने की टक्कर हो गई। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इस दुर्घटना में दोनों वाहनों के चालक घायल हो गए। टैंकर चालक केबिन में फंसा टैंकर चालक काफी देर तक अपने केबिन में फंसा रहा। कटघोरा थाना पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और फंसे हुए चालक को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हादसे के कारण एनएच 130 पर अंबिकापुर-कटघोरा मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया। गाड़ियों की लगी लंबी कतार सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों, चार पहिया वाहनों और अन्य गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे लगभग तीन घंटे तक यातायात ठप रहा। इसी जाम में पर्यटन मंत्री का काफिला भी फंसा रहा, जिसे बाद में पुलिस ने वैकल्पिक व्यवस्था कर निकाला। टैंकर और ट्रेलर को सड़क से हटाया गया यातायात बहाल करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी, खासकर टैंकर में डीजल भरा होने के कारण आग लगने का खतरा बना हुआ था। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को खाली कराया। काफी मशक्कत के बाद बड़ी क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त टैंकर और ट्रेलर को सड़क से हटाया गया। पुलिस ने दर्ज किया मामला इसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका। पुलिस ने घायल दोनों चालकों को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। कटघोरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों ने एनएच 130 के इस हिस्से में लगातार होने वाले हादसों पर चिंता व्यक्त की है, जिसका कारण रात में भारी वाहनों की तेज रफ्तार और सड़क पर रोशनी की कमी बताई जा रही है।
ओरछा में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की मैराथन बैठक में मंत्री राकेश सिंह ने कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों को पर्यटन और आध्यात्मिक स्थलों से जोड़कर विकसित किया जाएगा। इसकी शुरुआत बबीना-ओरछा मार्ग से होगी, जिसे श्रीराम के जीवन प्रसंगों पर आधारित थीम पर विकसित करेंगे। मंत्री ने कहा- सड़कों के लिए बिटुमिन केवल सरकारी रिफाइनरी से ही खरीदें। उन्होंने सड़कों की गुणवत्ता पर फोकस के निर्देश दिए।
कड़कड़ाती सर्दी में बिकिनी पहन पूल में उतरीं रुबीना दिलैक, जापान वेकेशन की दिखाई झलक
टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
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भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा हिंदी टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी मोनालिसा की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। वह अपनी ग्लैमरस तस्वीरों से तहलका मचाती रहती हैं। मोनालिसा इन दिनों थाइलैंड में वेकेशन एंजॉय कर रही ...
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टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
Tejasswi Praksh-Karan Kundrra नहीं हुए अलग,रोमांटिक वेकेशन एन्जॉय कर रहा है कपल करीबी दोस्त ने खोला राज
सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
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