कड़कड़ाती सर्दी में बिकिनी पहन पूल में उतरीं रुबीना दिलैक, जापान वेकेशन की दिखाई झलक
टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
कार्तिक आर्यन हाल ही में अपनी गोवा वेकेशन की तस्वीरों से सुर्खियों में आ गए। मंगलवार को कार्तिक ने गोवा से एक तस्वीर शेयर की थी, जिसके ठीक बाद 18 साल की करीना कुबिलियूट की भी ठीक उसी लोकेशन से तस्वीर सामने आई, जहां कार्तिक मौजूद थे। इसके बाद से ही दोनों के डेटिंग की खबरें सुर्खियों में आ गईं। हालांकि चर्चा में आने के बाद करीना ने इस पर रिएक्शन दिया है। पहले कार्तिक आर्यन और करीना की वेकेशन की तस्वीरें देखिए- करीना ने कार्तिक आर्यन से नाम जुड़ने के बाद अपने इंस्टाग्राम के बायो में लिखा था, मैं कार्तिक को नहीं जानती, मैं उसकी गर्लफ्रेंड नहीं हूं, मैं परिवार के साथ वेकेशन पर हूं। कार्तिक से डेटिंग की खबरों के साथ ही करीना कुबिलियूट के इंस्टाग्राम के कमेंट सेक्शन में दोनों का नाम जोड़ते हुए कई कमेंट्स किए जाने लगे। ऐसे ही एक कमेंट के जवाब में करीना कुबिलियूट ने लिखा, मैं कार्तिक की गर्लफ्रेंड नहीं हूं। इसके कुछ देर बाद ही करीना कुबिलियूट ने अपना इंस्टाग्राम कमेंट सेक्शन बंद कर दिया है। कैसे शुरू हुईं डेटिंग की खबरें मंगलवार को कार्तिक आर्यन ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से गोवा वेकेशन की तस्वीर शेयर की। वो बीच पर लेटे नजर आए। कुछ देर बाद रेडिट में करीना कुबिलियूट की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वो ठीक उसी बीच पर, उसी लोकेशन पर थीं, जहां कार्तिक आर्यन थे। रेडिट पर करीना की इंस्टाग्राम प्रोफाइल का एक स्क्रीनशॉट वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कार्तिक करीना को इंस्टाग्राम पर फॉलो कर रहे हैं। हालांकि दैनिक भास्कर इसकी पुष्टि नहीं करता। कौन हैं करीना कुबिलियूट? करीना कुबिलियूट ग्रीस की रहनेवाली हैं, जिनकी उम्र महज 18 साल है। करीना ब्रिटेन में रहकर कार्लिसले कॉलेज से पढ़ाई कर रही हैं, इसके साथ ही वो एक चीयरलीडर भी हैं। शुरुआत में करीना के इंस्टाग्राम पर महज 300 से 400 फॉलोवर्स थे, लेकिन कार्तिक आर्यन से नाम जुड़ने के बाद अब उनके फॉलोवर्स की संख्या 14 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हो चुके हैं।
आंध्र प्रदेश में मालदीव की तर्ज पर ‘द्वीप पर्यटन’ विकसित करने का आह्वान
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मालदीव की तर्ज पर राज्य में द्वीप पर्यटन को विकसित करने का आह्वान किया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को आगे बढ़ाते हुए लखनऊ में पर्यटन को नई पहचान देने की एक महत्वपूर्ण शुरुआत हुई। ‘लखनऊ दर्शन’ के नाम से इस विशेष बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने महिला सशक्तिकरण के प्रतीक 1090 चौराहे से रवाना ...
कोटा: हाड़ौती ट्रैवल मार्ट से पर्यटन के स्वर्णिम युग का आगाज, वैश्विक पटल पर चमकेगी अंचल की विरासत
कोटा में आयोजित 'हाड़ौती ट्रैवल मार्ट' ने पर्यटन विकास के नए द्वार खोल दिए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हाड़ौती को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने का संकल्प लिया। देशभर के टूर ऑपरेटर्स यहां की विरासत देख अभिभूत हुए। जानिए कैसे यह आयोजन राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
भारत ने ईरान को लेकर जारी की ट्रैवल एडवाइजरी, गैर जरूरी यात्रा से बचने की अपील
ईरान में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों को अगली सूचना तक ईरान की गैर-ज़रूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है
कपूरथला में एक ट्रैवल एजेंट ने अपने ही साढू के साथ 47.65 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है। आरोपी ने पीड़ित को अमेरिका भेजने का झांसा देकर मेक्सिको भेज दिया, जहां उसे अमेरिकी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सात महीने जेल में रहने के बाद पीड़ित को भारत डिपोर्ट कर दिया गया। इस मामले में थाना सुल्तानपुर लोधी पुलिस ने दो ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अमेरिका भेजने के नाम पर ठगी एसएसपी कपूरथला गौरव तूरा को दी शिकायत में गांव जैनपुर के रहने वाले जगतार सिंह ने बताया कि उसका रिश्तेदार और साढू जोगा सिंह, जो गांव मसीतां गांव के रहने वाले है, विदेश भेजने का काम करता है। जोगा सिंह ने उसे सीधी फ्लाइट से अमेरिका भेजने का वादा किया था। 50 लाख रुपए में हुई बात जुलाई 2024 में दोनों के बीच 50 लाख रुपए में बात तय हुई, जिसमें वीजा लगने के बाद पैसे देने की शर्त रखी गई थी। जोगा सिंह ने जगतार सिंह का पासपोर्ट ले लिया।कुछ दिनों बाद जोगा सिंह ने जगतार सिंह को वीजा की कॉपी दिखाई। इसके बाद 5 सितंबर 2024 से अलग-अलग तारीखों में जगतार सिंह ने जोगा सिंह और जालंधर के रहने वाले जगजीत सिंह भुल्लर को कुल 47.65 लाख रुपए दिए। दिल्ली से फ्रांस के लिए करवा दी फ्लाइट रकम मिलने के बाद 12 सितंबर 2024 को जोगा सिंह ने जगतार सिंह की दिल्ली से फ्रांस के लिए फ्लाइट करवा दी।फ्रांस से जगतार सिंह को स्पेन और फिर स्पेन से अल सल्वाडोर भेजा गया। अल सल्वाडोर पहुंचने पर जोगा सिंह ने उससे 1000 डॉलर और लिए। इसके बाद उसे एक गाड़ी में बिठाकर ग्वाटेमाला शहर के बाहर छोड़ दिया गया। जंगल में भटकता रहा पीड़ित वहां पहले से मौजूद एक व्यक्ति ने उसे तीन घंटे पैदल चलवाया और फिर एक बड़ी गाड़ी में बैठाया, जिसमें पहले से 60-70 लोग मौजूद थे। गाड़ी ड्राइवर ने उन सभी को जंगल में छोड़ दिया, जहां जगतार सिंह करीब 15 दिन भटकता रहा। इस दौरान उसे एहसास हुआ कि उसका साढू जोगा सिंह उसे गलत तरीके से अमेरिका भेज रहा है। 7 महीने जेल में रहा जंगल में भटकने के बाद अमेरिकी पुलिस ने उसे पकड़ लिया और जेल में डाल दिया। सात महीने जेल में बिताने के बाद उसे भारत डिपोर्ट कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में जोगा सिंह और जगजीत सिंह भुल्लर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और आगे की जांच जारी है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा में आयोजित 'हाड़ौती ट्रैवल मार्ट' के समापन पर क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन हब बनाने का संकल्प लिया। चंबल सफारी और ऐतिहासिक विरासत के दम पर रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के सहयोग से हाड़ौती को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी, जिससे राजस्थान की संस्कृति को मिलेगी वैश्विक पहचान।
हाड़ौती ट्रैवल मार्ट के दौरान कोटा की प्रसिद्ध नमकीन ने देशभर से आए 26 राज्यों के अतिथियों का दिल जीत लिया। कोटा नमकीन व्यापार समिति द्वारा वितरित 9 हजार पैकेटों के माध्यम से स्थानीय स्वाद को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की यह अनूठी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। पर्यटन विशेषज्ञों और ब्लॉगर्स ने कोटा के कड़के और लौंग सेव की गुणवत्ता को जमकर सराहा।
कोटा में पर्यटन के नए युग का शंखनाद: भव्य समारोह के साथ हुआ ट्रैवल मार्ट का उद्घाटन
कोटा में आयोजित भव्य पर्यटन समारोह में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक संदीप शर्मा और कल्पना देवी सहित कई दिग्गजों ने शिरकत की। होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान और पर्यटन विभाग के इस संयुक्त प्रयास में प्रदेशभर के पदाधिकारियों ने राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन विकास पर मंथन किया। कोटा ट्रैवल मार्ट के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
रायबरेली में रेलवे तालाबों का होगा सौंदर्यकरण:जनवरी अंत तक बनेंगे पर्यटन स्थल, रोजगार के अवसर भी
रायबरेली जिले में रेलवे प्रशासन अपनी खाली पड़ी भूमि पर स्थित तालाबों का सौंदर्यकरण कर उन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगा। इन तालाबों को मत्स्य पालन के लिए भी लीज पर दिया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। श्रीराजनगर से रायबरेली, रायबरेली-रूपामऊ, रायबरेली से अरखा, दरियापुर से डलमऊ और ऊंचाहार से रघुराजसिंह स्टेशन के बीच रेलवे की भूमि पर कई तालाब उपेक्षित अवस्था में हैं। इन तालाबों की सफाई, गहरीकरण और सौंदर्यकरण किया जाएगा। इनके चारों ओर पाथवे, बैठने की व्यवस्था, लाइटिंग, हरियाली और सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि ये आकर्षक पर्यटन स्थल बन सकें। योजना के तहत जनवरी के अंतिम सप्ताह तक चयनित तालाबों को पर्यटन स्थल के रूप में तैयार करने का लक्ष्य है। इससे रेलवे की भूमि का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ जिले में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मत्स्य पालन के लिए तालाबों को लीज पर दिए जाने से स्थानीय मछुआरों और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक लाभ होगा, जिससे स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। तालाबों के विकास में पानी की गुणवत्ता और जैव विविधता के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सुरक्षा के लिए रेलिंग और चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएंगे। मंडल वाणिज्य प्रबंधक कुलदीप तिवारी ने बताया कि रेलवे की परिधि में आने वाले तालाबों को चिन्हित कर उनका सौंदर्यकरण किया जाएगा। इन्हें मत्स्य पालन हेतु लीज पर भी आवंटित किया जाएगा। इस संबंध में वाणिज्य निरीक्षक से तालाबों की सूची मांगी गई है।
राजगीर में पड़ रही कड़ाके की ठंड:शीतलहर और घने कुहासे से पर्यटन पर भी असर, पारा 14°C पर पहुंचा
राजगीर में रविवार को कड़ाके की ठंड, शीतलहर और घने कुहासे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सुबह से ही आसमान में धुंध की मोटी परत छाई रही, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। ठंड का असर इतना अधिक है कि तापमान सुबह के 9 बजे तक 14 डिग्री सेल्सियस रहा। टूरिज्म पर असर कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ राजगीर पहुंचे पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार की छुट्टी होने के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक अपने परिवार के साथ राजगीर भ्रमण के लिए पहुंचे थे, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण उनका भ्रमण प्रभावित हुआ है। टूरिस्टों ने क्या कहा? घने कुहासे और ठंड के चलते पर्यटक होटल और लॉज में ही रुके हुए हैं और मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। दिल्ली से आए पर्यटक केके श्रीवास्तव और आराधना सिन्हा ने बताया कि वे विश्व शांति स्तूप, रोपवे, वेणुवन, गर्म कुंड और अन्य दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करने आए थे। हालांकि, कुहासे के कारण न तो रास्ते स्पष्ट दिख रहे हैं और न ही ठंड में बाहर निकलना संभव हो पा रहा है। कई पर्यटकों ने बताया कि सुबह और शाम के समय ठंड का प्रकोप और बढ़ जाता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को विशेष परेशानी हो रही है। ठंड के कारण शहर के बाजारों में भी रौनक कम देखने को मिली। सुबह के समय सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम रही और लोग अलाव का सहारा लेते नजर आए।
धुर्वा डैम को पर्यटन स्थल बनाएं, इसकी कार्ययोजना बनाएं अधिकारी: सीएम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि धुर्वा डैम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करें। इसके लिए जल्दी ठोस कार्ययोजना तैयार करे। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही रांची शहर के पर्यटन नक्शे का यह प्रमुख आकर्षण होगा। नए साल पर धुर्वा डैम और अन्य पिकनिक स्पॉट का निरीक्षण करने गए मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिए। उन्होंने वहां की भौगोलिक स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटन विकास की संभावनाओं का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने चाय की चुस्की के साथ रांची की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लिया। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों एवं नागरिकों से उनकी समस्याएं सुनीं तथा सुझाव लिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार जनसहभागिता के माध्यम से क्षेत्र के समग्र विकास को प्राथमिकता देगी। मुख्यमंत्री ने कहा धुर्वा डैम न केवल रांची का महत्वपूर्ण जल स्रोत है, बल्कि यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं भी हैं। सरकार इन संभावनाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित करेगी। सोरेन ने धुर्वा स्थित ज्यूडिशियल अकादमी झारखंड का भी निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान की अधोसंरचना एवं प्रशिक्षण व्यवस्थाओं की प्रगति की समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश दिए।
बलौदाबाजार के वन परिक्षेत्र बल्दाकछार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तुरतुरिया में अब इको-रिलीजियस टूरिज्म (पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक पर्यटन) की शुरुआत की गई है। इस पहल का संचालन स्थानीय पांच गांवों के सदस्यों से गठित तुरतुरिया संयुक्त वन प्रबंधन एवं पर्यटन समिति कर रही है, जिसमें महिला सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह समिति 23 दिसंबर 2025 से कार्यरत है। अपने पहले ही सप्ताह में समिति ने लगभग 70,000 रुपये की आय अर्जित की है। समिति के प्रमुख दायित्वों में वाहन पार्किंग, शौचालय प्रबंधन, साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना शामिल है। समिति ने ‘पॉलीथिन फ्री तुरतुरिया’ के लिए बांस के कूड़ेदान लगाए 'पॉलीथिन मुक्त तुरतुरिया' के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, समिति ने पूरे क्षेत्र में बांस के कूड़ेदान स्थापित किए हैं। इसके साथ ही, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को प्लास्टिक के उपयोग से बचने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। तुरतुरिया में बौद्धकालीन अवशेष और प्राचीन बुद्ध प्रतिमा तुरतुरिया का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी है। 19वीं सदी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जे.डी. बेगलर ने यहां बौद्धकालीन अवशेषों और भगवान बुद्ध की एक प्राचीन प्रतिमा का उल्लेख किया था। वन मंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने बताया कि भविष्य में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के साथ समन्वय स्थापित कर पुरातात्विक सर्वेक्षण और अन्य विकासात्मक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि इस इको-धार्मिक पर्यटन पहल से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। यह कदम पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्र में आजीविका संवर्धन को भी मजबूत कर रहा है।
वनस्पति-उपज-खेल-उत्पाद और पर्यटन के कामों में तेजी के निर्देश
पंच गौरव कार्यक्रम के तहत जिले में संचालित योजनाओं की समीक्षा बैठक शुक्रवार शाम कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में कलेक्टर नमित मेहता की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पंच गौरव के पांचों घटकों वनस्पति महुआ, उपज सीताफल, खेल तैराकी, उत्पाद मार्बल-ग्रेनाइट और पर्यटन स्थल फतहसागर व पिछोला के प्रचार-प्रसार और कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पंच गौरव से जुड़ी गतिविधियों को स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जाए। नोडल अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक सांख्यिकी पुनीत शर्मा ने बताया कि पंच गौरव के तहत 2610.44 लाख के कार्य स्वीकृत हैं। इनमें से 636.97 लाख के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। तरणताल बनेगा ऑल वेदर, ब्लॉक स्तर पर होगा टैलेंट सर्च खेलगांव के तरणताल को ऑल वेदर बनाने के लिए 650 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। टेंडर प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार से प्राप्त 102.50 लाख में से 50 लाख रुपए यूडीए को दिए गए हैं। कलेक्टर ने ब्लॉक स्तर पर तैराकी प्रतियोगिताओं के जरिए प्रतिभा खोज कार्यक्रम कराने के निर्देश भी दिए। वन विभाग ने बलीचा में 20 हेक्टेयर में पौधारोपण के लिए 40 लाख और प्रचार के लिए 45 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। जिले में सीताफल प्रोसेसिंग यूनिट और इससे जुड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। 15 फरवरी से पहले मार्बल-ग्रेनाइट फेयर : जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि ओडीओपी योजना के तहत मार्बल-ग्रेनाइट के लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। कलेक्टर ने स्थानीय एसोसिएशन के सहयोग से 15 फरवरी से पहले उदयपुर में बड़े स्तर पर मार्बल-ग्रेनाइट फेयर आयोजित करने और प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शनी लगाने के निर्देश दिए। फतहसागर पर फ्लोटिंग जेट फाउंटेन और डायनेमिक लाइटिंग का कार्य पूरा हो चुका है। दाईजी की पुलिया से चांदपोल तक जेट फाउंटेन का कार्य भी पूर्ण हो गया है। कलेक्टर ने फतहसागर पर फाउंटेन की संख्या बढ़ाने और मेवाड़ दीर्घा के सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए। विद्यालयों में पोस्टर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग और पंच गौरव विकास सुझाव प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। गणतंत्र दिवस पर पंच गौरव की झांकी भी सजाई जाएगी। बैठक में नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना, यूडीए सचिव हेमेंद्र नागर, उप निदेशक पर्यटन शिखा सक्सेना आदि उपस्थित रहे।
कबीरधाम जिले में पर्यटन विकास को नई गति देने के लिए स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपए की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन नववर्ष पर गुरुवार को किया गया। यह परियोजना जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना के भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, अरुण साव, सांसद संतोष पांडे शामिल हुए। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री शेखावत ने कहा कि आस्था स्थलों का समुचित विकास हो, दर्शन सुलभ हो और देशभर में सांस्कृतिक चेतना मजबूत हो, इसी संकल्प के साथ केन्द्र सरकार कार्य कर रही है। सीएम साय ने कहा कि भोरमदेव में पर्यटन और आस्था से जुड़े अनेक विकास कार्य किए जाएंगे। भोरमदेव एक पवित्र स्थल है, जहां अमरकंटक से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है, ऐसे आस्था केंद्रों का समुचित विकास सरकार की प्राथमिकता है। कहा कि मोदी की गारंटी का मतलब केवल घोषणा नहीं, बल्कि उसे पूरा करना है। बीते दो वर्षों में बड़ी संख्या में आवास पूरे किए गए हैं। महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना के तहत हर माह सहायता राशि दी जा रही है, वहीं रामलला दर्शन जैसी योजनाएं भी संचालित हैं। देश और प्रदेश के हर वर्ग के विकास के लिए योजनाएं लागू की जा रही हैं। आदिवासी क्षेत्रों में जनमन योजना के माध्यम से सड़क, पानी और बिजली पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने भोरमदेव-बोड़ला सड़क निर्माण की मांग पूरी करने की भी घोषणा की। 11वीं शताब्दी में कराया गया था मंदिर निर्माणभोरमदेव छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है, जिसे उसकी अद्वितीय पहचान के कारण छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। भोरमदेव मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में फणी नागवंशी राजा गोपालदेव के काल में हुआ माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और नागर शैली की उत्कृष्ट स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है। मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं, नृत्य मुद्राओं, पशु-पक्षियों और जनजीवन से जुड़ी बारीक नक्काशी तत्कालीन कला और समाज की झलक प्रस्तुत करती है। भोरमदेव की विशेषता केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। यह स्थल मैकल पर्वत शृंखला और घने वन क्षेत्र के बीच स्थित है। इस राशि से केवल मंदिर सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि भोरमदेव-रामचुआ-सरोदा बांध को जोड़ने वाला एक समग्र भोरमदेव कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत भोरमदेव के इतिहास और विरासत को सहेजने के लिए वीडियो डॉक्यूमेंट्री तैयार की जाएगी। लाइट और साउंड शो के माध्यम से मंदिर की कथा और उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग दर्शाए जाएंगे। जिला पुरातत्व समिति के अनुसार लिडार सर्वे कर मंदिर की थ्री-डी डिजाइन तैयार की जाएगी, जिसे इंटरनेट पर अपलोड किया जाएगा। गूगल पर भोरमदेव सर्च करने पर थ्री-डी विजुअल दिखाई देगी।
जमुई जिले के खैरा प्रखंड के गरही डेम और भगवान महावीर जन्मस्थल पर नववर्ष के अवसर पर भारी भीड़ उमड़ी। नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने परिवारों के साथ इन प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर पहुंचे। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह चरम पर था। गरही डेम की प्राकृतिक सुंदरता ने पर्यटकों को खूब आकर्षित किया। यहां पहुंचे लोगों ने नाव की सवारी का आनंद लिया और जलराशि के मनमोहक दृश्यों का अवलोकन किया। इसी तरह, भगवान महावीर जन्मस्थल पर भी श्रद्धालुओं और सैलानियों की भारी भीड़ रही। लोगों ने महावीर स्थल पर वनभोज किया और मंदिर परिसर में समय बिताया। भगवान महावीर मंदिर के निर्माण और इसके धार्मिक महत्व के प्रति लोगों में विशेष आस्था दिखाई दी। गरही डेम खैरा प्रखंड का एक महत्वपूर्ण जलस्रोत और पर्यटन स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। वहीं, खैरा क्षेत्र में स्थित भगवान महावीर जन्मस्थल जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर से जुड़ा एक पवित्र स्थल है, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
बालाघाट में नववर्ष का स्वागत बड़े ही धार्मिक उत्साह और उमंग के साथ किया गया। इस मौके पर शहर में पिछले 28 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार 1111 फीट लंबी चुनरी यात्रा निकाली गई, जो पूरे नगर में मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने कालीपाठ मंदिर, हनुमान मंदिर और शंकर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर नए साल में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। बब्बर सेना की देखरेख में निकाली गई चुनरी यात्रा दोपहर 1 बजे कोसमी स्थित मरकट बाबा अर्धनारीश्वर मंदिर से शुरू हुई। लगभग 5 किलोमीटर का सफर तय करते हुए यह यात्रा गोंदिया रोड, सरेखा, हनुमान चौक, सुभाष चौक और काली पुतली चौक जैसे प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा में शामिल बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी मां के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। माता रानी को चुनरी भेंट और भंडारे का आयोजन यात्रा का समापन कालीपाठ मंदिर में हुआ, जहां मातारानी को 1111 फीट लंबी चुनरी पूरी श्रद्धा के साथ भेंट की गई। इस अवसर पर बब्बर सेना प्रमुख हितेश माहुले और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि मुकेश माहुले सहित कई लोग मौजूद रहे। चुनरी भेंट करने के बाद मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। पर्यटन स्थलों पर भी दिखा जश्न का माहौल धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ जिले के पर्यटन स्थलों पर भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। वनस्पति उद्यान, वैनगंगा नदी घाट, गांगुलपारा और रमरमा जैसे पिकनिक स्पॉट्स पर लोगों ने परिवार के साथ वक्त बिताया। जिला पंचायत प्रतिनिधि मुकेश माहुले ने बताया कि हर साल नए साल के पहले दिन मां कालीपाठ को चुनरी भेंट करने की परंपरा है, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले की खुशहाली और शांति बनाए रखना है।
बूंदी में गुरुवार को 29 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि बूंदी को पर्यटन, कृषि और उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। उन्होंने जोर दिया कि नया वर्ष विकास के नए संकल्पों का वर्ष होगा और बूंदी विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनेगा। बिरला ने नगर परिषद द्वारा नवनिर्मित टाउन हॉल और विभिन्न सड़कों के विकास कार्यों के लोकार्पण समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के माध्यम से बूंदी को इको-टूरिज्म में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। उन्होंने इंटर-स्टेट एयर लिफ्ट के जरिए हेलिकॉप्टर से बाघिन लाने का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने बूंदी के सामर्थ्य का प्रतीक बताया। लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि कोटा-बूंदी के नाम से नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे 2027 में उड़ानें शुरू होंगी। उन्होंने कहा कि इस एयर कनेक्टिविटी का सर्वाधिक लाभ बूंदी के औद्योगिक विकास और पर्यटन को मिलेगा। बिरला ने एक्सप्रेस-वे के साथ ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी में भी अभूतपूर्व कार्य होने की बात कही। उन्होंने नमाना-सिलोर सड़क के लिए वन विभाग से सभी स्वीकृतियां मिलने और इसी माह निर्माण शुरू होने की जानकारी दी। पेयजल आपूर्ति के संबंध में बिरला ने कहा कि गरड़दा और नौनेरा परियोजनाओं के माध्यम से आगामी दो वर्षों में हर घर तक नल से जल पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि वर्षों से वन क्षेत्र की स्वीकृति के कारण अटकी गरड़दा नहर परियोजना को भी गति मिली है और शीघ्र ही नहरों का कार्य प्रारंभ होगा। इसके अतिरिक्त, अमृत 2.0 शहरी योजना से बूंदी की हर कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। एग्रो इंडस्ट्री का हब बनकर उभरा बूंदी बिरला ने कहा कि बूंदी को एग्रो हब बनाने के प्रयासों में बड़ी सफलता मिली है। मदर डेयरी का फूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित हो रहा है, अकेले तालेड़ा क्षेत्र में 19 एग्रो प्लांट लग चुके हैं, जिससे बूंदी एग्रो-इंडस्ट्री के रूप में उभर रहा है। किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एग्रो-टेक मेले का आयोजन किया जाएगा, जिससे उन्हें प्रशिक्षण और नई कृषि तकनीकों की जानकारी मिलेगी। सेंड स्टोन के प्रोत्साहन के लिए स्टोन पार्क का निर्माण भी शीघ्र होगा। तीमारदारों के लिए बनेगा रामाश्रय अस्पताल का कार्य भी प्रगतिरत है, एक वर्ष के भीतर बूंदी के अस्पताल में सभी प्रमुख बीमारियों का उपचार संभव होगा, जिससे कोटा और जयपुर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों के लिए ‘रामाश्रय’ का निर्माण होगा जहां ठहरने और निशुल्क भोजन की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही बड़े कस्बों के अस्पतालों का भी विकास किया जा रहा है। बूंदी खेल सुविधाओं के मामले में अग्रणी बन रहा है। 20 करोड़ से सुविधाओं का विस्तार होगा। मानधाता बालाजी के किए दर्शन स्पीकर बिरला ने कार्यक्रम से पूर्व मानधाता बालाजी मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि मानधाता बालाजी महाराज के आशीर्वाद से नए वर्ष की शुरुआत विकास और नए संकल्पों के साथ हुई है। मानधाता बालाजी मंदिर प्रांगण का विकास हुआ है, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। शीघ्र ही 46 लाख रुपए से यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विकास होगा। सर्व सुविधायुक्त ऑडिटोरियम की मिली सौगात कार्यक्रम के दौरान 29 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण हुआ। 20 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित टॉउन हॉल में 800 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है। इसके साथ ही 12 कमरे और 2 अतिरिक्त हॉल का भी निर्माण किया गया है। टाउन हॉल सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। साथ ही विभिन्न आयोजनों, सम्मेलनों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनसंवाद के लिए उपयोगी सिद्ध होंगा। इसके साथ ही लगभग 9 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सीसी सड़कों का लोकार्पण हुआ। बूंदी की बदल रही तस्वीर पूर्व विधायक अशोक डोगरा और चन्द्रकांता मेघवाल ने कहा कि स्पीकर बिरला के प्रयासों से बूंदी जिले में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे है। डबल इंजन की सरकार बूंदी के लोगों के सपनों को पूरा कर रही है। नगर परिषद चेयरमैन सरोज अग्रवाल ने कहा कि स्पीकर बिरला के विजन के अनुरूप पूरी टीम स्वस्छ, स्वच्छ और पर्यटन फ्रेंडली बूंदी बनाने के लिए प्रयासरत है। जिलाध्यक्ष रामेश्वर मीणा ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। कार्यक्रम में भाजपा नेता भरत शर्मा, राकेश बोयत आदि भी मौजूद रहे।
सहारनपुर स्थित सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी धाम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से चल रही विभिन्न परियोजनाओं का गुरुवार को डीएम मनीष बंसल ने निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्धता का गहनता से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों तथा कार्यदायी संस्था को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीएम ने शाकंभरी देवी शक्तिपीठ क्षेत्र में निर्माणाधीन टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी), पार्किंग, लैंडस्केपिंग, फुटपाथ, म्यूरल, स्कल्पचर्स, वाटर फाउंटेन, बाउंड्री वॉल, टॉयलेट ब्लॉक और सोवेनियर शॉप का निरीक्षण किया। उन्होंने पदयात्रा मार्ग के सुदृढ़ीकरण, पर्यटन सुविधाओं के विकास, साइनेज की स्थापना, प्रकाश व्यवस्था, प्रवेश द्वार कॉम्प्लेक्स और ओपन एयर थिएटर के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान, डीएम ने कार्यदायी संस्था यू.पी. सी एंड डी एस को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया जाए। उन्होंने सभी कार्यों को फिनिशिंग के साथ पूरा करने पर जोर दिया और कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। डीएम मनीष बंसल ने सोवेनियर शॉप के पास पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रवेश द्वार कॉम्प्लेक्स के समीप निर्माणाधीन टीएफसी, ओपन एयर थिएटर और बहुस्तरीय कार पार्किंग के कार्यों को मानकों के अनुरूप और निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर भी बल दिया। डीएम ने निर्माण स्थल पर कार्यदायी संस्था की अस्थायी प्रयोगशाला में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण भी करवाया। पदयात्रा मार्ग के संबंध में, उन्होंने जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने के विशेष निर्देश दिए, ताकि बरसात के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। डीएम ने सभी निर्माण कार्यों को फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवि शंकर सहित संबंधित अधिकारी और कार्यदायी संस्था के पदाधिकारी उपस्थित थे।
कटिहार के जिला पदाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने नए साल के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा के लिए मनिहारी प्रखंड का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने मनिहारी गंगा घाट पर नमामि गंगे योजना के तहत चल रहे रिवर फ्रंट निर्माण कार्य में देरी पर नाराजगी व्यक्त की। निरीक्षण के दौरान, डीएम ने रिवर फ्रंट निर्माण की धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने संबंधित कार्य एजेंसी को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। 'रिवर फ्रंट परियोजना मनिहारी की पहचान और पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण' जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि रिवर फ्रंट परियोजना मनिहारी की पहचान और पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों को नियमित निगरानी तथा देरी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया। ओवरलोडेड वाहनों और अवैध मिट्टी खनन के मामलों पर भी कड़ा रुख डीएम ने निरीक्षण के दौरान ओवरलोडेड वाहनों और अवैध मिट्टी खनन के मामलों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने परिवहन, खनन और पुलिस विभाग के अधिकारियों को ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। पुलिस अधीक्षक ने नए साल के मद्देनजर गंगा घाट और अन्य पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य आम लोगों को सुरक्षित और सुगम वातावरण प्रदान करना है।
नए साल के पहले दिन झारखंड पूरी तरह जश्नमय नजर आया। मंदिरों में आस्था की लंबी कतारें दिखीं तो पर्यटन स्थलों पर पिकनिक और सैर-सपाटे का उत्साह चरम पर दिख रहा है। कहीं जयकारों की गूंज सुनाई दी तो कहीं डीजे की धुन पर युवा झूमते नजर आए। रामगढ़, कोडरमा, गिरिडीह और देवघर जैसे प्रमुख जिलों में नववर्ष के स्वागत को लेकर सुबह से ही चहल-पहल रही। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं और सैलानियों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरा प्रदेश नए साल के रंग में रंगा दिखा। रजरप्पा में मां छिन्नमस्तिके के दरबार में उमड़ी भीड़ रामगढ़ जिले के प्रसिद्ध सिद्धपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर में नववर्ष के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। झारखंड और बिहार समेत अन्य राज्यों से हजारों भक्त मां का आशीर्वाद लेने पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में लंबी कतारें लगी रहीं। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भक्तों ने नए साल की शुरुआत की। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने दामोदर नदी के संगम स्थल और आसपास की प्राकृतिक वादियों में पिकनिक और नौका विहार का आनंद ले रहे हैं। भीड़ को देखते हुए पुलिस और मंदिर न्यास समिति की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। तिलैया डैम बना सैलानियों का हॉटस्पॉट कोडरमा जिले का ऐतिहासिक तिलैया डैम नववर्ष के मौके पर सैलानियों से गुलजार रहा है। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहां पहुंचे। प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों और डैम पर बने टापुओं ने सैलानियों को आकर्षित किया। इस वर्ष फ्लोटिंग बोट सेवा खास आकर्षण रही। जिसमें सवार होकर पर्यटकों ने हरियाली और सूर्योदय-सूर्यास्त के मनोरम दृश्य देख सकते हैं। पिकनिक, फोटोग्राफी और बोटिंग के साथ यहां उत्सव का माहौल बना रहा। सुरक्षा के लिए पुलिस बल, पार्किंग, ट्रैफिक कंट्रोल और चिकित्सा व्यवस्था की गई है। खंडोली में पर्यटन और कारोबार दोनों को मिला बढ़ावा गिरिडीह का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खंडोली भी नववर्ष पर पर्यटकों से खचाखच भरा रहा। धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, कोडरमा और देवघर समेत आसपास के जिलों से लोग यहां पहुंचे। बोटिंग, घुड़सवारी, बच्चों के पार्क और साइबेरियन पक्षियों ने सैलानियों को रोमांचित किया है। भारी भीड़ के कारण स्थानीय दुकानदारों और पर्यटन से जुड़े लोगों की अच्छी कमाई भी हुई। पुलिस-प्रशासन की सतर्कता से पर्यटकों ने खुद को सुरक्षित महसूस किया। देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन को उमड़ी आस्था नववर्ष की शुरुआत बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना के साथ करने के लिए देवघर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के मंदिर के पट खुलते ही 4 से 5 किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। हिमालयी फूलों से सजा बाबा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम, बैरिकेडिंग और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कुल मिलाकर नववर्ष के स्वागत में झारखंड के मंदिरों और पर्यटन स्थलों पर आस्था, आनंद और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।
बांका में गुरुवार की सुबह से ही नववर्ष 2026 की धूम देखने को मिल रही है। पहली जनवरी को जिले में उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल छाया हुआ है। बुधवार देर रात जैसे ही घड़ी की सुई 12 बजकर एक मिनट पर पहुंची, लोगों ने एक-दूसरे को नए साल की बधाइयां देना शुरू कर दिया। पटाखों की आवाज, मोबाइल पर शुभकामना संदेशों की बाढ़ और सोशल मीडिया पर रील्स व स्टेटस के जरिए लोगों ने नए साल का गर्मजोशी से स्वागत किया। पूजा-पाठ और आशीर्वाद के साथ हुई दिन की शुरुआत गुरुवार की सुबह लोगों ने पूजा-पाठ और बड़ों के आशीर्वाद के साथ नए साल की शुरुआत की। जिले के विभिन्न मंदिरों और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। सुबह से ही मंदिरों में घंटियों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए भगवान के दर्शन किए। पर्यटन स्थलों पर उमड़ा सैलानियों का सैलाब नववर्ष के पहले दिन बांका के लगभग सभी पर्यटन स्थल स्थानीय लोगों और बाहर से आए पर्यटकों से गुलजार नजर आए। विश्व प्रसिद्ध मंदार पर्वत के साथ-साथ ओढ़नी जलाशय पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। हजारों की संख्या में पहुंचे सैलानियों ने ओढ़नी जलाशय की प्राकृतिक सुंदरता का भरपूर आनंद लिया। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ियों के बीच सैर-सपाटा और खुले वातावरण ने पर्यटकों को खासा आकर्षित किया। कई लोग नौका विहार का भी लुत्फ उठाते नजर आए। झरना, कोझी समेत अन्य प्राकृतिक स्थल भी रहे गुलजार ओढ़नी जलाशय के अलावा झरना, कोझी समेत जिले के अन्य प्राकृतिक स्थलों पर भी लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखी गई। हर ओर लोग एक-दूसरे को “हैप्पी न्यू ईयर” कहते और तस्वीरें व वीडियो बनाते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में नए साल को लेकर खासा उत्साह दिखा। पिकनिक स्पॉट पर डीजे की धुन पर झूमे लोग हर साल की तरह इस वर्ष भी एक जनवरी को पिकनिक ने खास रंग जमाया। जिले के विभिन्न पिकनिक स्पॉट पर डीजे की धुन पर लोग झूमते-थिरकते दिखे। सुबह से ही युवाओं की टोलियां जंगल और पहाड़ों की ओर पिकनिक मनाने निकल पड़ीं। खास बात यह रही कि इस बार केवल युवा ही नहीं, बल्कि अधेड़ उम्र के लोग भी बड़ी संख्या में अपने दोस्तों और परिवार के साथ पिकनिक का आनंद लेते नजर आए। खानपान और मेलजोल के साथ मनाया गया नया साल ओढ़नी डैम, झरना और कोझी जैसे स्थलों पर लोगों ने तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन पकाए और मिल-बांटकर नए साल का जश्न मनाया। गीत-संगीत, हंसी-मजाक और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच लोगों ने पूरे दिन को यादगार बना लिया। हर्षोल्लास, आस्था और प्रकृति के बीच नववर्ष का स्वागत कुल मिलाकर बांका जिले में नववर्ष 2026 का स्वागत पूरे हर्षोल्लास, आस्था और प्रकृति के सान्निध्य में किया गया। हर चेहरे पर खुशी और हर माहौल में उत्सव की झलक साफ नजर आई।
नव वर्ष 2026 का जश्न मनाने के लिए अगर आप बिहार के सबसे हॉट टूरिस्ट डेस्टिनेशन राजगीर और नालंदा आने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। इतिहास, अध्यात्म और आधुनिक एडवेंचर का यह संगम स्थल पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। हालांकि, 1 जनवरी को भीड़ के कारण सफारी पार्क बंद रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों से अपनी यात्रा 31 दिसंबर या 2 जनवरी को प्लान करने की अपील की है। यहां हम आपको राजगीर और नालंदा के उन सभी प्रमुख स्थलों की जानकारी दे रहे हैं, जहां आपको जरूर जाना चाहिए, साथ ही यह भी कि वहां आसानी से कैसे पहुंचा जाए। 1. राजगीर: यहां प्रकृति और रोमांच का मिलन होता है। राजगीर अब सिर्फ धार्मिक नगरी नहीं रही, बल्कि यह एक मॉडर्न एडवेंचर हब बन चुका है। यहां घूमने के लिए एक दिन भी कम पड़ सकता है। नेचर सफारी और ग्लास ब्रिज: ये राजगीर का सबसे बड़ा आकर्षण है। पांच पहाड़ियों के बीच गहरी खाई पर बना ग्लास ब्रिज (कांच का पुल) पर्यटकों को रोमांचित करता है। इसके अलावा यहां सस्पेंशन ब्रिज, जिप लाइन (हवा में लटककर जाना), स्काई वॉक और तीरंदाजी का मजा लिया जा सकता है। (नोट: यह सोमवार को बंद रहता है और टिकट ऑनलाइन बुक करना अनिवार्य है, ऑफ लाइन टिकट की संख्या 300 के ही करीब होती है।) जू सफारी (Zoo Safari): यहां जानवर पिंजरे में नहीं, बल्कि खुले जंगल में रहते हैं और पर्यटक बंद बसों में बैठकर उन्हें देखते हैं। यहाँ बाघ (Tiger), शेर (Lion), तेंदुआ, भालू और हिरण को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिलता है। यह भी सोमवार को बंद रहता है। घोड़ा कटोरा झील: ये एक 'इको-टूरिज्म' स्पॉट है। यहाँ पेट्रोल-डीजल गाड़ियां प्रतिबंधित हैं। झील के बीच में भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा मन मोह लेती है। यहां बोटिंग (नौका विहार) की सुविधा है। यहां पहुंचने के लिए आपको मुख्य सड़क से टमटम (घोड़ा गाड़ी) या ई-रिक्शा लेना पड़ता है। विश्व शांति स्तूप और रोपवे (Ropeway): रत्नागिरी पर्वत पर स्थित यह सफेद संगमरमर का स्तूप शांति का प्रतीक है। यहां जाने के लिए रोपवे (रज्जू मार्ग) का इस्तेमाल होता है। अब यहां पुराने सिंगल चेयरलिफ्ट के साथ-साथ केबिन वाले नए रोपवे भी लग गए हैं, जो परिवार के साथ जाने के लिए सुरक्षित हैं। ऊपर से राजगीर की वादियों का नजारा अद्भुत दिखता है। गर्म जल कुंड (ब्रह्मकुंड): सर्दियों में यहाँ नहाने का अलग ही महत्व है। राजगीर में 22 कुंड हैं, लेकिन ब्रह्मकुंड का पानी सबसे गर्म (करीब 45 डिग्री) रहता है। मान्यता है कि इसमें गंधक होने के कारण चर्म रोग ठीक होते हैं। पांडु पोखर: बच्चों के साथ जा रहे हैं तो यह बेस्ट जगह है। यह एक मनोरंजन पार्क है जहां बोटिंग, भूल-भुलैया, और कई तरह के झूले और गेम जोन मौजूद हैं। सोन भंडार और जरासंध का अखाड़ा: इतिहास प्रेमियों के लिए सोन भंडार एक रहस्य है। कहा जाता है कि यहाँ मौर्य शासक बिंबिसार का खजाना छुपा है, जिसे आज तक कोई खोज नहीं पाया। पास ही जरासंध का अखाड़ा है, जहाँ महाभारत काल की यादें जुड़ी हैं। वेणु वन और जापानी मंदिर: वेणु वन वह जगह है जहां भगवान बुद्ध ने लंबा समय बिताया था। यह एक बेहद शांत पार्क है। इसके अलावा पास ही स्थित जापानी मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। 2. नालंदा: ज्ञान की प्राचीन धरोहर राजगीर से मात्र 12-15 किलोमीटर की दूरी पर नालंदा है, जो दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक का गवाह है। प्राचीन नालंदा महाविहार (खंडहर): यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल लाल ईंटों से बने ये खंडहर उस गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं जब यहां दुनिया भर से 10,000 छात्र पढ़ने आते थे। यहां का मुख्य स्तूप (सारिपुत्र स्तूप) और मठों की कतारें देखने लायक हैं। नालंदा पुरातत्व संग्रहालय (Museum): खंडहरों के ठीक सामने स्थित इस म्यूजियम में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियां, सिक्के और जले हुए चावल के दाने रखे हैं, जो उस समय के आक्रमण की गवाही देते हैं। ह्वेनसांग मेमोरियल: चीनी यात्री ह्वेनसांग की याद में बना यह हॉल इंडो-चाइनीज वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। यहां एक विशाल घंटा और ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत देखने को मिलते हैं। पावापुरी जल मंदिर (नजदीक ही स्थित): नालंदा से कुछ ही दूरी पर पावापुरी है, जो जैन धर्म का पवित्र तीर्थ है। यहाँ तालाब के बीचों-बीच संगमरमर का बना जल मंदिर है, जहाँ भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। 3. स्थानीय जायका: सिलाव का खाजा यात्रा के दौरान नालंदा और राजगीर के बीच पड़ने वाले सिलाव कस्बे में रुकना न भूलें। यहाँ का 'खाजा' (52 परतों वाली मिठाई) विश्व प्रसिद्ध है और इसे GI टैग मिला हुआ है। यह इतना खस्ता होता है कि मुंह में रखते ही घुल जाता है। कैसे पहुंचें राजगीर और नालंदा? (How to Reach) नव वर्ष पर भीड़ को देखते हुए अपनी यात्रा की प्लानिंग पहले से कर लें। यहाँ पहुंचने के लिए यातायात के सभी साधन उपलब्ध हैं: ट्रेन से (By Train): राजगीर स्टेशन: राजगीर सीधे दिल्ली (श्रमजीवी एक्सप्रेस), वाराणसी (बुद्ध पूर्णिमा) और पटना से जुड़ा है। पटना से राजगीर के लिए कई इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेनें सुबह शाम चलती हैं। नालंदा स्टेशन: राजगीर जाने वाली ट्रेनें नालंदा स्टेशन पर भी रुकती हैं। बिहारशरीफ जंक्शन: यह बड़ा जंक्शन है, जहाँ कई लंबी दूरी की ट्रेनें रुकती हैं। यहाँ से राजगीर बस या ऑटो से 30-40 मिनट में पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग (By Road): बस सेवा: पटना के गांधी मैदान और मीठापुर बस स्टैंड से हर 15-20 मिनट पर राजगीर के लिए एसी और नॉन-एसी बसें मिलती हैं। किराया 100 से 200 रुपए के बीच है। निजी वाहन: पटना से बख्तियारपुर-बिहारशरीफ होते हुए राजगीर की सड़क (NH-20 और SH-71) चकाचक है। पटना से पहुंचने में मात्र 2.5 से 3 घंटे लगते हैं। हवाई मार्ग (By Air): सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गया (Gaya) है, जो करीब 70 किमी दूर है। पटना एयरपोर्ट (लगभग 100 किमी) देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। वहां से आप प्री-पेड टैक्सी या बस ले सकते हैं। लोकल ट्रांसपोर्ट (घूमने के लिए): राजगीर और नालंदा के अंदर घूमने के लिए ई-रिक्शा (टोटो) सबसे सुलभ साधन है। आप पूरे दिन के लिए टोटो रिजर्व भी कर सकते हैं (किराया 800-1200 रुपये के बीच) या शेयरिंग में भी जा सकते हैं। या आप घोड़ा गाड़ी टमटम का भी लुफ्त उठा सकते हैं। महत्वपूर्ण सलाह: सफारी की टिकटें केवल rajgirsafari.bihar.gov.in से बुक करें। दलालों के चक्कर में न पड़ें और अपनी आईडी प्रूफ साथ रखें।
पीएम मोदी कहते हैं, पहले भारत देखो, फिर दुनिया घूमों? अब तक क्या हुआ? विविधताओं भरे भारत को देखने के लिए एक जन्म पर्याप्त नहीं। रुचि के अनुरूप सब तरह के डेस्टिनेशन हैं। मोदीजी ने देखो अपना देश स्लोगन दिया। अर्थव्यवस्था का आगे बढ़ना, करोड़ों का गरीबी रेखा से बाहर आना, जेब में पैसा बचना। इनसे डोमेस्टिक ट्रेवल तेजी से बढ़ा है। घर से बाहर निकलने, ठहरने, घूमने आदि को ट्रेवल मानें तो यह कुल यात्राएं 294 करोड़ हैं। यह स्वाभाविक था, आपने क्या किया? मोदी जी के नेतृत्व में डेस्टिनेशन के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम किया। उदाहरण देखें तो महाकाल मंदिर में साल का फुट-फॉल करीब 35 लाख था। आज एक सप्ताह का 30 लाख है। हर डेस्टिनेशन में ऐसा हुआ है। भारतीयों में भारत के प्रति एक आस्था, विश्वास और सम्मान का भाव मोदी जी ने सृजित किया। हम सस्टेनेबल टूरिज्म का प्रयास कर रहे हैं। हमारी योजनाओं में राज्यों के प्रोजेक्ट को सलेक्ट करने में सस्टनेबिलिटी बड़ा क्राइटेरिया होता है। टूरिज्म पॉलिसी पर कितना काम हुआ ? टूरिस्ट का अनुभव बढ़े, इसे लेकर हमने होलिस्टिक प्रोग्राम बनाया है। किस तरह टूरिज्म बढ़े, हॉस्पिटेलिटी सैक्टर में इन्वेस्टमेंट किस तरह से आए। इसके लिए सरकार ने पॉलिसी रिफॉर्म की हैं। कई राज्यों की व इंटरनेशनल पॉलिसीज का अध्ययन कर ड्रॉफ्ट पॉलिसी बनाई। राज्यों को भेजा। 10 से अधिक राज्यों ने उसे हूबहू एडॉप्ट किया, आगे बढ़कर काम किया। राज्यों में टूरिज्म बेस्ड इकॉनॉमी पोटेंशियल के दोहन की प्रतियोगिता खड़ी हुई है। होटल निर्माण पर क्या पॉलिसी है? हमने प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री से आग्रह किया था कि हॉस्पिटेलिटी में इन्वेस्टमेंट को इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्टेटस मिले। मुझे खुशी है कि जो 50 ग्लोबल आइकोनिक टूरिस्ट प्लेस बनाने की कल्पना की है, उन जगह पर और होटल निर्माण वाले शहर 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए यह स्टेटस दे दिया गया है। सिंगापुर व हांगकांग जैसा टूरिज्म कब विकसित होगा? हम देखें की वहां डोमेस्टिक टूरिज्म नहीं के बराबर होता है। जबकि यहां यहां अकेले कई मंदिरों में उनके यहां से कई ज्यादा टूरिज्म होता है। केवल विदेशी सैलानियों की संख्या के आधार पर तुलना नहीं कर सकते। जबकि यह बढ़ा भी है और प्री-कोविड बैंचमार्क को हमने ही प्राप्त किया है। विकसित भारत का टूरिज्म कहां देखते हैं? इयर अराउंड टूरिज्म, सस्टेनेबल टूरिज्म और एक्सपीरियंस बेस्ड टूरिज्म का डेस्टिनेशन बने। लोग मॉन्युमेंट के बजाय अनुभव परक पर्यटन को पसंद करने लगे हैं। भारत की कल्चर, भोजन, नेचुरल डायवर्सिटीज, म्यूजिक, फेस्टिवल, कॉस्ट्यूम सबको अनुभव में बदलकर साल भर चलने वाले पर्यटन रूप में विकसित कर रहे हैं। विकसित भारत 2047 में साल का हर दिन टूरिज्म सीजन होगा। विकसित भारत का टूरिज्म कैसा होगा ? विकसित भारत 2047 कॉन्सेप्ट पर पर्यटन में कितना काम... देश के पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भास्कर की खास बातचीत पर्यटन में रोजगार सृजन में कितना पोटेंशियल दिखता है? फॉर्मल टूरिज्म का देश की जीडीपी में योगदान 5.6 प्रतिशत है। जबकि वैश्विक परिदृश्य में दुनिया का 10 प्रतिशत। हम 2047 तक इसे 10% ले जाएंगे। हमारा शॉर्ट टर्म गोल 2030 तक 7 प्रतिशत का है। जिस दिन 10% होगा। उस दिन टूरिज्म सैक्टर एग्रीकल्चर के बाद दूसरा जॉब उत्पन्न करने वाला सैक्टर बनेगा। इससे मल्टीसैक्टरल एंप्लॉयमेंट जनरेट होता है।
कॉरिडोर में कृष्ण: 'कुंज गलियों' का पर्यटन
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