पंचकूला जिले में पिंजौर के सूरजपुर बाइपास पर वीरवार सुबह करीब 5 बजे एक सड़क हादसे में तीन यात्री घायल हो गए। हिमाचल प्रदेश से जयपुर जा रहा एक टेंपो ट्रैवलर आगे चल रहे ट्रक से टकरा गया। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। यह हादसा सूरजपुर-सुखोमाजरी बाइपास के पास हुआ। टेंपो ट्रैवलर नारकंडा, हिमाचल प्रदेश से जयपुर जा रहा था। वाहन में लगभग 8 से 10 यात्री सवार थे, जिन्हें चंडीगढ़ से हवाई जहाज द्वारा जयपुर जाना था। पुलिस ने घायलों को पहुंचाया अस्पताल हादसे की सूचना मिलते ही एनएचआई की एंबुलेंस, 112 पुलिस ईआरवी और 112 एंबुलेंस तुरंत मौके पर पहुंचीं। राहत एवं बचाव दल ने घायलों को वाहन से बाहर निकाला और उपचार के लिए सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने बताया कि हादसे में घायल हुए सभी यात्री खतरे से बाहर हैं और किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है। घटना के बाद कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ था, जिसे पुलिस ने जल्द ही सामान्य कर दिया। पुलिस फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है।
हरियाणा के अंबाला शहर में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कश्मीर घूमने जा रहे एक ही परिवार के लिए बुधवार की सुबह काल बनकर आई। अंबाला-जगाधरी हाईवे पर कैंट रामपुर मोड़ के पास तड़के करीब 4 बजे यात्रियों से भरी एक टेम्पो ट्रैवलर हाईवे पर मुड़ रही हाइड्रा से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि टेम्पो ट्रैवलर के परखच्चे उड़ गए और वाहन में सवार महिलाओं व बच्चों समेत एक ही परिवार के 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई। गर्मियों की छुट्टियां बिताने जा रहे थे मिली जानकारी के अनुसार, सभी घायल सहारनपुर की पीर वाली गली के रहने वाले हैं। पूरा परिवार गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए टेम्पो ट्रैवलर किराए पर लेकर कश्मीर के लिए रवाना हुआ था। जैसे ही उनकी गाड़ी सुबह तड़के अंबाला-जगाधरी हाईवे पर रामपुर मोड़ के पास पहुंची, तभी आगे एक हाइड्रा वाहन से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। राहगीरों ने घायलों को बाहर निकाला राहगीरों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को गाड़ी से बाहर निकाला और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हादसे में गंभीर रूप से घायलों में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल है। घायलों में अब्दुल वाहिद, जहांगीर आलम, गुलफाम, सलमान, अवदोत, सामत व मिस्बा, गुलअफशां और उजमा सहित 10 साल की बच्ची महिमा शामिल है। बच्ची सहित 3 को रेफर कर दिया गया है।
बैतूल जिले के सतपुड़ा अंचल में बसे हिल स्टेशन कुकरु को प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 और 28 जून को दो दिवसीय प्रवास पर कुकरु पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल प्रशासनिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे क्षेत्र के विकास और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री यहां रात्रि चौपाल लगाएंगे, किसी ग्रामीण परिवार के घर भोजन करेंगे और दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का श्रवण ग्रामीणों एवं कार्यकर्ताओं के साथ करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान कुकरु को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की जा सकती हैं। पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान की तैयारी कुकरु लंबे समय से अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ठंडे मौसम और हरियाली के कारण लोगों को आकर्षित करता रहा है। अब सरकार इसे व्यवस्थित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को इसी अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। समुद्र तल से 1137 मीटर की ऊंचाई पर बसा है कुकरु सतपुड़ा की वादियों में स्थित कुकरु समुद्र तल से लगभग 1137 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। घने जंगल, मनमोहक प्राकृतिक दृश्य, सुहावना मौसम और कॉफी बागान इसे मध्यप्रदेश के सबसे संभावनाशील पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। वर्षों से यहां पर्यटन विकास की संभावनाओं पर चर्चा होती रही है, लेकिन अब इसे धरातल पर उतारने की तैयारी दिखाई दे रही है। पर्यटन विकास की विस्तृत योजना तैयार कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के अनुसार कुकरु को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान इन योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा सकता है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड यहां होम स्टे, ग्रामीण पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। वहीं इको टूरिज्म कॉर्पोरेशन भी क्षेत्र के विकास के लिए अपनी अलग कार्ययोजना तैयार कर रहा है। रोजगार आधारित पर्यटन मॉडल पर रहेगा फोकस प्रशासन की कोशिश केवल पर्यटन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। योजना यह है कि पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ा जाए। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को होम स्टे से जोड़ा जाएगा, स्थानीय युवाओं को पर्यटन गतिविधियों में रोजगार के अवसर दिए जाएंगे और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एडवेंचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं कुकरु पहले से ही एडवेंचर गतिविधियों के लिए पहचान बना चुका है। यहां पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग, वैली क्रॉसिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, बोटिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। पर्यटन विभाग इन गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। यदि योजनाएं सफल रहीं तो कुकरु आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश का प्रमुख एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन बन सकता है। कॉफी बागान बन सकते हैं नई पहचान कुकरु की सबसे खास पहचान यहां के कॉफी बागान हैं। मध्य भारत के चुनिंदा कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में शामिल इस क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 44 हेक्टेयर में कॉफी की खेती की जा रही है। प्रशासन ने कॉफी बोर्ड से भी संपर्क किया है ताकि अधिक किसानों को कॉफी उत्पादन से जोड़ा जा सके। साथ ही कॉफी आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है, जिससे क्षेत्र को नई पहचान मिल सके। रात्रि चौपाल में सुनेंगे ग्रामीणों की समस्याएं सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री अपने प्रवास के दौरान ग्रामीणों के बीच रात्रि चौपाल लगाएंगे। इस दौरान वे स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनेंगे और विकास से जुड़े सुझाव भी प्राप्त करेंगे। दूसरे दिन जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से भी लोगों से सीधा संवाद करने की संभावना है। ग्रामीण परिवार के घर करेंगे भोजन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में किसी ग्रामीण परिवार के घर भोजन करने की भी चर्चा है। इससे ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद और सामाजिक सहभागिता का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। मन की बात कार्यक्रम का होगा सामूहिक श्रवण प्रवास के दूसरे दिन मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ का श्रवण ग्रामीणों, कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। राजनीतिक और विकासात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण दौरा राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल लंबे समय से कुकरु को प्रदेश और देश के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयासों में जुटे हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का यह प्रवास कुकरु के लिए उसी तरह का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, जैसा हनुवंतिया क्षेत्र के जल पर्यटन विकास के दौरान देखने को मिला था। कुकरु को मिल सकती है नई उड़ान मुख्यमंत्री के दौरे से क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि कुकरु को पर्यटन, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में नई सौगातें मिलेंगी। यदि प्रस्तावित योजनाएं अमल में आती हैं तो कुकरु आने वाले समय में मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना-2026' के तहत जिले के बुजुर्गों को तीर्थयात्रा पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग की अध्यक्षता में जिले के पात्र आवेदकों के चयन के लिए पारदर्शी तरीके से लॉटरी निकाली गई। 2213 का कोटा, प्राप्त हुए 1976 आवेदन देवस्थान विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत झुंझुनूं जिले के लिए वर्ष 2026 में कुल 2213 यात्रियों का कोटा निर्धारित किया गया है। इस कोटे में रेल यात्री 1972 और हवाई यात्री 241 निर्धारित थे। योजना के प्रति जिले के बुजुर्गों में काफी उत्साह देखने को मिला। लॉटरी प्रक्रिया के लिए विभाग को कुल 1976 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन सभी आवेदनों की जांच के बाद पात्र पाए गए आवेदकों के चयन के लिए आज लॉटरी का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से चयनित यात्रियों की सूची तैयार की गई है। लॉटरी प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी रखा गया। इस दौरान जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे चयन प्रक्रिया से जुड़ी सभी औपचारिकताएं सरकारी नियमों के अनुसार समयबद्ध तरीके से पूरी करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस अनूठी योजना का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन के इस पड़ाव पर प्रमुख धार्मिक स्थलों की सहज और सुगम यात्रा का अवसर प्रदान करना है। लॉटरी प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक देवेंद्र चौधरी, आईटी विभाग की उपनिदेशक दीपा राणासरिया, देवस्थान विभाग की सहायक लेखाधिकारी सुनीला सैनी सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए 'वर्ल्ड रेनफॉरेस्ट डे' (विश्व वर्षावन दिवस) अपने भीतर के घुमक्कड़ को जगाने का एक बेहतरीन मौका है। भारत अपनी विविध भौगोलिक संरचनाओं के कारण कई ऐसे अद्भुत और घने वर्षावनों (Rainforests) का घर है, जिनकी हरियाली, वन्यजीव (Wildlife) और अनछुए रास्ते आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं।यदि आप भी कंक्रीट के जंगलों और शहरों की भागदौड़ से दूर असली प्रकृति, एडवेंचर और शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो भारत के ये 7 सबसे शानदार फॉरेस्ट गेटवे आपके लिए एक परफेक्ट वीकेंड या लॉन्ग ट्रिप का विकल्प बन सकते हैं। आइए जानते हैं इन जादुई जंगलों की खासियत, पहुँचने का तरीका और बजट।1. साइलेंट वैली नेशनल पार्क (Silent Valley National Park), केरलनीलगिरी की पहाड़ियों में स्थित साइलेंट वैली नेशनल पार्क को भारत के सबसे प्राचीन और अनछुए सदाबहार वनों (Evergreen Forests) में गिना जाता है।खासियत: जैसा कि नाम से ही साफ है, यह जंगल अपनी असीम शांति के लिए जाना जाता है। यहाँ पाए जाने वाले दुर्लभ 'लॉयन-टेल्ड मकाक' (शेर जैसी पूंछ वाले बंदर) को देखने दुनिया भर से लोग आते हैं।कैसे पहुँचें: आप कोयम्बटूर या पलक्कड़ से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं। यहाँ ट्रैकिंग का अनुभव बेहद जादुई होता है।2. पेरियार नेशनल पार्क (Periyar National Park), थेक्कडी, केरलयदि आप एक ऐसा जंगल टूर चाहते हैं जो पूरी तरह से टूरिस्ट-फ्रेंडली हो और जहाँ एडवेंचर के साथ-साथ आराम भी मिले, तो थेक्कडी स्थित पेरियार आपके लिए बेस्ट है।मुख्य आकर्षण: यहाँ की लेक बोट सफारी (Lake Boat Safari) सबसे बड़ा अट्रैक्शन है, जहाँ बोटिंग करते हुए हाथियों के झुंड, बायसन और अन्य जंगली जानवरों को पानी पीते हुए बेहद करीब से देखा जा सकता है।यात्रा और बजट: कोच्चि (Kochi) से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 4-5 घंटे का सफर तय करके आप यहाँ पहुँच सकते हैं। यहाँ बेहतरीन इको-रिसॉर्ट्स और होमस्टे उपलब्ध हैं। प्रतिदिन का खर्च लगभग ₹2,000 से ₹5,000 तक आता है।3. अगुम्बे (Agumbe), कर्नाटक: दक्षिण का चेरापूंजीपश्चिमी घाट की गोद में बसे अगुम्बे को भारत का चेरापूंजी ऑफ साउथ भी कहा जाता है। अत्यधिक बारिश के कारण यहाँ एक रहस्यमयी और घना क्लाउड फॉरेस्ट (Cloud Forest) विकसित हुआ है।रोमांच की वजह: यह जगह दुनिया भर में 'किंग कोबरा' रिसर्च सेंटर और घने जंगलों के बीच ट्रेकिंग के लिए मशहूर है। मानसून के समय यहाँ के झरने और धुंध से ढकी पहाड़ियाँ देखने लायक होती हैं।यात्रा और बजट: मैंगलोर या उडुपी से सड़क मार्ग द्वारा अगुम्बे आसानी से पहुँचा जा सकता है। छोटे और पारंपरिक होमस्टे के कारण यह ट्रिप काफी बजट-फ्रेंडली रहती है, जहाँ प्रतिदिन का खर्च मात्र ₹1,500 से ₹3,000 तक आता है।4. वायनाड (Wayanad), केरलवायनाड आराम और एडवेंचर का एक बेहतरीन संतुलन पेश करता है। यह इलाका अपने धुंध से ढके पहाड़ों, प्राचीन गुफाओं और मसालों के बागानों के लिए जाना जाता है।खासियत: यहाँ आप घने जंगलों के बीच स्थित झरनों (Waterfalls), एडक्कल गुफाओं (Edakkal Caves) को एक्सप्लोर कर सकते हैं और स्पाइस प्लांटेशन रिसॉर्ट्स में ठहरने का अनूठा आनंद ले सकते हैं।यात्रा और बजट: कोझिकोड (Kozhikode) से मात्र 3 घंटे का सफर तय करके आप वायनाड पहुँच सकते हैं। यहाँ ठहरने और घूमने का दैनिक खर्च ₹2,000 से ₹4,500 के बीच बैठता है।5. दिहिंग पटकाई नेशनल पार्क (Dehing Patkai), असम: पूर्व का अमेजनपूर्वोत्तर भारत के असम में स्थित दिहिंग पटकाई को पूर्व का अमेजन (Amazon of the East) कहा जाता है। यह भारत का एकमात्र ऐसा तराई क्षेत्र का वर्षावन है जो अविश्वसनीय बायोडायवर्सिटी से समृद्ध है।वाइल्डलाइफ: यहाँ हॉर्नबिल पक्षी, एशियाई हाथी, और कई दुर्लभ प्रजाति के जीव-जंतु पाए जाते हैं। स्थानीय असमिया होमस्टे और वहाँ का पारंपरिक भोजन इस यात्रा के अनुभव को और भी प्रामाणिक बना देता है।यात्रा और बजट: डिब्रूगढ़ (Dibrugarh) से आप आसानी से इस नेशनल पार्क तक पहुँच सकते हैं। यहाँ ट्राइबल कल्चर को करीब से देखने का मौका भी मिलता है। यहाँ का प्रतिदिन का औसत बजट ₹2,500 से ₹5,000 तक रहता है।6. नामदफा नेशनल पार्क (Namdapha), अरुणाचल प्रदेशयदि आप बेहद रिमोट, अनछुए और असली खतरनाक जंगल का अनुभव करना चाहते हैं, तो नामदफा से बेहतर कोई जगह नहीं है। यह भारत के सबसे बड़े और सबसे ऊँचे राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।रोमांच: यहाँ की घनी वनस्पतियों के बीच 'बिग कैट्स' (बाघ, तेंदुआ, क्लाउडेड लेपर्ड और स्नो लेपर्ड) का वास है। यहाँ के अनछुए ट्रेल्स और बेसिक कैंपिंग सुविधाएं आपको आदिम काल के जंगलों का अहसास कराती हैं।यात्रा और बजट: असम के तिनसुकिया या डिब्रूगढ़ से यहाँ के लिए यात्रा शुरू की जा सकती है। यहाँ पहुँचना और सफर थोड़ा कठिन है, लेकिन एडवेंचर लाजवाब है। यहाँ प्रतिदिन का खर्च ₹3,000 से ₹7,000 तक हो सकता है।7. ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व, अंडमान और निकोबारयह भारत का सबसे विशिष्ट और एक्सक्लूसिव रेनफॉरेस्ट डेस्टिनेशन है, जहाँ आपको घने उष्णकटिबंधीय वर्षावन (Tropical Rainforest) और विशाल नीले समुद्र का एक साथ अद्भुत कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है।खासियत: यह रिजर्व अपनी अनूठी द्वीप-पारिस्थितिकी (Island Ecosystem) और विशालकाय लेदरबैक कछुओं के लिए जाना जाता है।नियम और बजट: इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए यहाँ जाने के लिए सरकार से विशेष परमिट (Permit) लेना अनिवार्य होता है। यहाँ यात्रा और ठहरने का खर्च थोड़ा प्रीमियम श्रेणी में आता है, जो प्रतिदिन ₹5,000 से ₹12,000 तक जा सकता है।
वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना : अजमेर जिले के 1 हजार 688 वरिष्ठ नागरिक करेंगे तीर्थ यात्रा
केन्द्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने निकाली लॉटरी ट्रेन से 1504 और हवाईमार्ग से 184 करेंगे यात्रा अजमेर। देवस्थान विभाग की प्रमुख योजना वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2026 के तहत इस बार जिले के एक हजार 677 तीर्थयात्रियों को रेलमार्ग तथा 205 को हवाईमार्ग से विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा करवाई जाएगी। इसके लिए केन्द्रीय कृषि […] The post वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना : अजमेर जिले के 1 हजार 688 वरिष्ठ नागरिक करेंगे तीर्थ यात्रा appeared first on Sabguru News .
उज्जैन में विदेश यात्रा का सपना एक रिटायर्ड अधिकारी और उनके परिवार के लिए महंगा साबित हुआ। इंस्टाग्राम पर देखी गई एक ट्रैवल एजेंसी की रील के झांसे में आकर उन्होंने वियतनाम टूर पैकेज के नाम पर 3.50 लाख रुपए गंवा दिए। पुलिस जांच में एजेंसी फर्जी निकली है और आरोपी की तलाश की जा रही है। नीलगंगा थाना क्षेत्र के प्रकाश नगर निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी हरिप्रकाश वाडिया ने साइबर सेल और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन देखकर उन्होंने भोपाल स्थित ड्रीम डेस्टिनेशन ट्रैवल एजेंसी से संपर्क किया था। एजेंसी से जुड़े जुनैद नामक व्यक्ति ने परिवार के साथ वियतनाम यात्रा के लिए पैकेज ऑफर किया, जिसमें वीजा, हवाई टिकट, होटल और खाने-पीने सहित कुल खर्च 6 लाख 80 हजार रुपए बताया गया। प्रस्ताव पसंद आने पर हरिप्रकाश वाडिया ने 3 लाख 50 हजार रुपए तीन किस्तों में आरोपी के खाते में जमा करा दिए। शेष राशि वीजा और टिकट मिलने के बाद देने की बात तय हुई थी। आरोपी ने भरोसा दिलाया था कि वीजा दिल्ली एयरपोर्ट पर ही उपलब्ध करा दिया जाएगा। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर पता चला टूर रद्द निर्धारित तिथि पर परिवार दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा तो जुनैद ने फोन कर बताया कि उनकी पोती का वीजा तैयार नहीं हुआ है, इसलिए पूरा टूर रद्द किया जा रहा है। इसके बाद आरोपी कई दिनों तक परिवार को अलग-अलग बहाने बनाकर उलझाता रहा और बाद में उसका मोबाइल फोन बंद हो गया। साइबर सेल और पुलिस में की शिकायत ठगी का एहसास होने पर हरिप्रकाश वाडिया ने पहले साइबर सेल में शिकायत की और बाद में नीलगंगा थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस द्वारा एजेंसी का सत्यापन कराया गया तो वह फर्जी पाई गई। नीलगंगा थाना प्रभारी तरुण कुरील ने बताया कि आरोपी की तलाश की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक ऑफर्स के झांसे में न आएं। किसी भी ट्रैवल एजेंसी को भुगतान करने से पहले उसका पंजीकरण, कार्यालय, पुराने ग्राहकों की जानकारी और वीजा प्रक्रिया की प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें।
झारखंड के वन क्षेत्रों में मानसून के दौरान तीन महीने तक सन्नाटा पसरा रहेगा। वन एवं पर्यावरण विभाग ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नए लगाए जाने वाले पौधों को बेहतर वातावरण देना है। इस अवधि में पर्यटन, जंगल सफारी, सड़क निर्माण, बिजली टावर लगाने जैसे सभी कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे। पलामू टाइगर रिजर्व और दलमा समेत सभी प्रमुख वन क्षेत्रों में यह नियम सख्ती से लागू किया जाएगा। विभाग का मानना है कि बारिश के समय मानव गतिविधियों में कमी से वन्यजीवों को प्राकृतिक रूप से विचरण करने का अवसर मिलता है और नए पौधों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इको टूरिज्म से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखें…. 10 लाख पौधे लगाने का टारगेट, जल संचयन पर जोर मानसून के इन तीन महीनों में राज्य भर में दस लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है। विभाग ने इसके लिए विशेष रणनीति बनाई है। जिसमें कच्ची संरचनाओं के जरिए पानी का संचयन प्रमुख भूमिका निभाएगा। पलामू क्षेत्र में जून तक औसत से कम बारिश होने के कारण पौधों की सिंचाई एक चुनौती बन गई है। ऐसे में टैंकर और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। कृषि वानिकी विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई से सितंबर के बीच अधिक बारिश होती है। लेकिन जून में लगाए गए पौधों को बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास जरूरी हैं। यही कारण है कि इस बार पौधरोपण के साथ-साथ संरक्षण पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। मानसून के बाद इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा वन विभाग मानसून के बाद पर्यटन गतिविधियों को नए स्वरूप में शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इको टूरिज्म का दायरा बढ़ाने के साथ जंगल सफारी के लिए बैट्री चालित वाहनों की संख्या 25 तक करने की योजना है। इसके अलावा वन क्षेत्रों में स्थित आवासीय परिसरों में सोलर आधारित बिजली व्यवस्था लागू की जाएगी। पलामू टाइगर रिजर्व और लातेहार में प्रस्तावित सफारी परियोजनाओं को भी मानसून के बाद तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को संतुलित तरीके से विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिले और जंगल का प्राकृतिक संतुलन भी बना रहे।
नवादा-पावापुरी नई रेललाइन परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। रेलवे की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी किए जाने के बाद गिरियक अंचल के कई गांवों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आ गई है। इस परियोजना के तहत नवादा से पावापुरी रोड स्टेशन तक लगभग 25.10 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन का निर्माण किया जाएगा। रेलवे के सहायक अभियंता शशिकांत पांडेय ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद अब प्रभावित भूखंडों की विस्तृत सूची जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को भेजी जा रही है, जिसके बाद भूमि का मूल्यांकन कर मुआवजा निर्धारण एवं भुगतान की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी। इस परियोजना के लिए गिरियक अंचल के कुल नौ मौजों की भूमि को चिह्नित किया गया है, जिसके तहत सैकड़ों भूखंड प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, पुरी मौजा के सबसे अधिक 309 प्लॉट और सतौआ के 189 प्लॉट इस परियोजना की जद में आए हैं। इसके अलावा दशरथपुर के 141, मरकट्टा के 94, इसुआ के 82, प्यारेपुर के 47, जलालपुर के 28, नसीरपुर के 26 और पावा मौजा के 14 प्लॉटों का अधिग्रहण किया जाएगा। इस भूमि अधिग्रहण को लेकर यदि किसी भी भूमि से संबंधित हितबद्ध व्यक्ति को कोई आपत्ति है, तो वे राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां लिखित रूप में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, नालंदा के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रभावित व्यक्ति आपत्ति दर्ज करा सकते हैं आपत्ति दर्ज कराने वाले सभी भू-स्वामियों को सक्षम प्राधिकारी की ओर से व्यक्तिगत रूप से अथवा उनके विधि व्यवसायी के माध्यम से अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सभी आपत्तियों की गहन सुनवाई और आवश्यक जांच-पड़ताल के बाद सक्षम प्राधिकारी उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करने संबंधी अंतिम आदेश जारी करेंगे, जिसे अधिनियम की धारा 20 (घ) की उपधारा (2) के तहत अंतिम माना जाएगा। प्रभावित व्यक्ति भूमि के रेखांकन और अन्य संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण सक्षम प्राधिकारी के कार्यालय में जाकर कर सकते हैं। पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे इस नई रेललाइन के निर्माण से नवादा जिला सीधे पावापुरी रोड स्टेशन तथा राजगीर-बख्तियारपुर रेलखंड से जुड़ जाएगा। रेलवे की योजना के अनुसार इस नए मार्ग पर नवादा के बाद समाय, आदमपुर और पावापुरी नाम से तीन नए स्टेशन विकसित किए जाएंगे। स्थानीय लोगों में इस परियोजना को लेकर काफी उत्साह है और उनका मानना है कि रेल सेवा शुरू होने से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन, व्यापार, शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिससे नवादा और नालंदा क्षेत्र के बीच का आवागमन बेहद सुगम और तीव्र हो जाएगा।
हर चंदेरी साड़ी पर लगेगा जीआई टैग:कलेक्टर की बैठक में संरक्षण, विपणन और पर्यटन बढ़ाने पर अहम फैसले
अशोकनगर जिले के चंदेरी स्थित हैंडलूम पार्क में शुक्रवार को कलेक्टर की अध्यक्षता में एसपीवी और मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की संयुक्त बैठक हुई। इसमें चंदेरी साड़ियों के संरक्षण, विपणन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में नकली चंदेरी साड़ियों की बिक्री रोकने के लिए प्रत्येक साड़ी पर जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग लगाने का सुझाव दिया गया। नगर के मास्टर वीवर्स और बुनकरों ने यह प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित टैग में बुनकर का नाम, ताने-बाने का विवरण और साड़ी निर्माण में लगा समय अंकित होगा। कलेक्टर ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शीघ्र लागू करने पर जोर दिया, जिससे साड़ियों की मौलिकता सुरक्षित रहेगी और नकली उत्पादों पर नियंत्रण होगा। कलेक्टर ने हथकरघा विभाग को हैंडलूम पार्क के लिए एक समर्पित वेबसाइट बनाने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य देश-विदेश के ग्राहकों को सीधे उच्च गुणवत्ता वाली असली चंदेरी साड़ियां खरीदने की सुविधा प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो डिजाइनिंग, मार्केटिंग और उत्पादन में तकनीकी सहयोग देगी। बैठक के दौरान चंदेरी साड़ी संग्रहालय की स्थापना और हैंडलूम पार्क में दुकानों के आवंटन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के स्थानीय गाइडों को चंदेरी पर्यटन के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, और कलेक्टर ने नव प्रशिक्षित गाइडों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। इस अवसर पर एसडीएम मनीष धनगर सहित हथकरघा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य संबंधित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने जिले के उद्योग, पर्यटन, खेल और बुनियादी सुविधाओं के विकास का पूरा खाका बताया। खंडेलवाल ने कहा कि आने वाले समय में बैतूल को उद्योग, पर्यटन और खेल गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाने की योजना है। खंडेलवाल ने कहा कि पहले बैतूल में सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं की कमी के कारण उद्योग नहीं लग पाए थे। अब इन क्षेत्रों में सुधार हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती उद्योग लगाने के लिए जमीन की उपलब्धता है, क्योंकि जिले का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र में आता है और जमीन बदलने की प्रक्रिया जटिल है, फिर भी इस पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि चार से पांच बड़े उद्योग समूह बैतूल में निवेश करने के लिए तैयार हैं। शुगर फैक्ट्री सहित अन्य बड़े उद्योग लगाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे रोजगार बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। फॉरेस्ट कंजर्वेशन कॉरिडो बनेगा पर्यटन के विकास के लिए बैतूल-भोपाल मार्ग पर प्रदेश का पहला फॉरेस्ट कंजर्वेशन कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसके लिए बजट की तैयारी की जा रही है। जिले में बर्ड सेंचुरी और बटरफ्लाई सेंचुरी बनाने के साथ वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कुकरू को एडवेंचर टूरिज्म हब बनाने की योजना पर काम चल रहा है। वन विभाग के साथ प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अलावा मुक्तागिरी, चिखलधरा और मेलघाट को जोड़कर एक पर्यटन सर्किट बनाया जाएगा, जिसका केंद्र कुकरू होगा। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का सारणी में बनाएंगे प्रवेश द्वारखंडेलवाल ने बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का एक प्रवेश द्वार सारणी क्षेत्र से शुरू करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही एमपी टूरिज्म के होटल और अन्य सुविधाएं विकसित करने पर भी विचार चल रहा है। गढ़ा और बेला जैसे जलाशयों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए भी बैठकें की जा रही हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास करेंगे उन्होंने बताया कि खेड़ला किला, शाहपुर क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल और भैंसदेही के प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण और विकास की योजना बनाई जा रही है। जिले में एक बड़ा जनजातीय संग्रहालय (ट्राइबल म्यूजियम) बनाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। खेल और सुविधाओं का विकास युवाओं के लिए खेल गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल मैदान बनाने और फूड जोन जैसी सुविधाएं तैयार करने की योजना है। शहर के बाहर अंतरराज्यीय बस स्टैंड बनाने की योजना है। रेलवे में स्टॉपेज बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। मेरे साथ न फॉलो गार्ड है, न कोई सरकारी बंगला खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद भी उनके काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा, “मैं बैतूल के लिए आज भी वही हूं जो पहले था। मेरे साथ न फॉलो गार्ड है, न कोई सरकारी बंगला। मैं पहले की तरह जनता के बीच रहकर काम कर रहा हूं।”
खासतौर पर ऐसी कई सफर होते हैं जो किसी खास मौसम से जरुर जुड़े होते हैं। भारत में मॉनसून की रोड ट्रिप भी ऐसी ही एक यात्रा है। बारिश के दौरान रोड ट्रिप करने का अलग ही मजा होता है। बारिश से सड़कों से मिट्टी गायब हो जाती है, अचानक से कई जगहों पर झरने दिखाई देने लगते हैं। हाईवे पर अचानक से किसी फिल्म के सीन जैसे लगते हैं। मॉनसून के मौसम में ड्राइव का आनंद लेने का एक अलग ही मजा होता है। इस दौरान सफर करने से काफी सुकून मिलता है। मॉनसून के मौसम में चारों तरफ हरियाली, मनमोहक झरने और धुंध से ढके पहाड़ देखने को मिलते हैं। इस लेख में हम आपको भारत की सबसे खूबसूरत रोड ट्रिप्स के बारे में बताते हैं, जिनका सबसे ज्यादा मजा बरसात के मौसम में आता है। मुंबई से लोनावला बारिश के मौसम में मुंबई से लोनावला का रास्ता मॉनसून में गाड़ी चलाने के लिए सबसे बेहतरीन है। यहां बरसात में वेस्टर्न घाट हरे-भरे एकदम स्वर्ग जैसे नजर आने लगते हैं, यहां जगह-जगह पर झरने और तैरते हुए बादल दिखाई देते हैं। खंडला घाट के आस-पास का सफर और भी जादुई लगता है, जहां पहाड़ों पर धुंध छा जाती है और सड़के किनारे बेचने वाले गरमा-गरम भुट्टा और कटिंग चाय का आनंद आ जाता है। यह सफर खूबसूरती और ताजगी से भरा होता है। यह जगह भारत की पसंदीदा जगहों में से एक है। यहां पहुंचने के लिए करीब 1 घंटा 50 मिनट लगता है। बेंगलुरु से कूर्ग मॉनसून के मौसम में बेंगलुरु से कूर्ग का रास्ता बेहद खूबसूरत हो जाता है। हल्की बारिश में चमकने कॉफी के बागान चमकने लगते हैं, जंगल और भी घने हो जाते हैं और हवा मिट्टी का ताजी व भीनी-भीनी खुशबू घुल जाती है। मॉनसून के दौरान कूर्ग के झरने और भी खूबसूरत हो जाती हैं, जिससे रास्ते में रुकना बहुत सुखद अनुभव बन जाता है। यहां का ठंडा मौसम और घुमावदार सड़कें इसे आराम से घूमने-फिरने के लिए बेहतरीन जगह बनाते हैं। बेंगलुरु से कूर्ग जाने के लिए कम से कम 5 घंटे का समय लगता है। दिल्ली से लैंसडाउन यदि आप उत्तर भारत में रहते हैं और मॉनसून सीजन का आनंद लेना चाहते हैं, तो आप दिल्ली से लैंसडाउन तक की ड्राइव कर सकते हैं। भीड़-भाड़ वाले हिल स्टेशनों के मुकाबले मॉनसून में शांति से घूमने का एक अच्छा डेस्टिनेशन है। जैसे ही सड़के गढ़वाल की पहाड़ियों पर ऊपर की ओर जाती है, नजारा बहुत ही सुंदर दिखाई देता है। शहर की भागदौड़ शोर-शराबे की जगह धुंध में लिपटे चीड़ के जंगल बहुत ही खूबसूरत लगते हैं। बरसात के मौसम में यहां काफी शांति देखने को मिलती है। दिल्ली से लैंसडाउन पहुंचने के लिए लगभग 6 घंटे लगते हैं। ईस्ट कोस्ट रोड से चेन्नई से पुडुचेरी चेन्नई और पुडुचेरी को जोड़ने वाली ईस्ट कोस्ट रोड साल भर खूबसूरत रहती है, लेकिन मॉनसून के दौरान यहां की समुद्री सुंदरता और भी खास हो जाती है। इस रोड ट्रिप पर एक तरफ बंगाल की खाड़ी और दूसरी तरफ बारिश से भीगी सड़कें, यहां गाड़ी चलाने का अनुभव सुकून देने वाला और किसी फिल्म के सीन जैसा लगता है। आसमान में छाए बादल, टकराती लहरें और समुद्र की हवा मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जैसा किसी और मौसम में मिलना मुश्किल है। यहां जाने के लिए लगभग 7.5 घंटे लगते हैं। शिलांग से चेरापूंजी शिलांग और चेरापूंजी के बीच का सफर शायद ही भारत की सबसे बेहतरीन मॉनसून रोड ट्रिप है। दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश मेघालय में होती है और मॉनसून के दौरान यह इलाका अविश्वसनीय रूप से हरा-भरा हो जाता है। सड़कों पर बादल तैरते हैं, झरने पूरे जोर-शोर से बहने लगते हैं और यहां की घाटियों धुंध में आप खो जाएंगे। हर मोड़ किसी पोस्टकार्ड जैसा सुंदर लगता है, जिससे नेचर लवर के लिए यह सफर यादगार बन जाएगा। शिलांग से चेरापूंजी पहुंचने में करीब 1 घंटा 40 मिनट लगते हैं। जयपुर से उदयपुर मानसून का नाम सुनते ही शायद राजस्थान का ख्याल सबसे पहले न आए, लेकिन जयपुर से उदयपुर तक की यात्रा इस रेगिस्तानी राज्य का एक अलग और सुकून भरा दर्शाती है। बरसात के दौरान अरावली की पहाड़ियां हरी-भरी हो जाती हैं, झीलें पानी से भर जाती हैं और मौसम ठंडा होने के कारण घूमना-फिरना बहुत सुखद हो जाता है। मानसून उदयपुर के महलों और झील के नजारों में एक रोमांटिक एहसास भी घोल देता है।
बरसात के मौसम में घूमने का एक अलग ही आनंद होता है। मॉनसून में चारों तरफ हरियाली, ठंडी हवाएं और पानी की हल्की बौछर मन को सुकून देती है। इस मौसम में कई लोग ट्रिप पर जरुर जाते हैं। हालांकि, मॉनसून में कई समस्याएं भी देखने को मिलती है। जब हम कहीं घूमने जाते हैं, तो काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है। अगर आप बारिश के समय ट्रैवलिंग करने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ चीजों को अपने पास जरुर रखें, ताकि आपको ट्रिप पर किसी भी प्रकार की समस्या न आए। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ट्रैवल बैग में कुछ जरुरी चीजों को शामिल करें, जिससे आपकी ट्रिप आसान और सुरक्षित बन जाए। रेनकोट मॉनसून ट्रैवलिंग में सबसे जरुरी है रेनकोट अपने बैग में रखना। अचानक होने वाली तेज बारिश से बचने के लिए रेनकोट बहुत जरुरी है। इसके अलावा, आप फोल्डेबल छाता रख सकते हैं, जो फैशन का ध्यान रखने के साथ-साथ आपको बारिश से भी बचाएगा। एक्सट्रा कपड़े यदि आप बारिश में भीग जाते हैं, तो लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए अपने बैग में डार्क कलर के ड्राई फिट या कॉटन के कपड़े पहन सकते हैं। जब आपके कपड़े भीग जाएं, तो इन्हें पहन सकते हैं। माइक्रोफाइबर तौलिया कपड़ो के साथ ही अपने बैग में माइक्रोफाइबर तौलिया जररु रखें जो बहुत ही हल्की होती है। इसके साथ ही यह बैग में कम जगह घेरती है और आसानी से रखी जा सकती है। अगर आपके साथ बच्चे ट्रैवल कर रहे है, तो भी आपके काफी काम आ सकती है। वॉटरप्रूफ बैग कवर कहीं आप ट्रिप पर जाएं, तो अपने साथ वॉटरप्रूफ बैग कवर जरुर साथ लें जाएं। ऐसा करने से आपका बैग भीगने से बच जाएगा और उसके अंदर का जरुरी सामान भी सुरक्षित रहेगा। जिससे आपका सामान सुरक्षित रहेगा और आप आराम से मौसम का आनंद ले सकेंगे। जिप लॉक बैग मॉनसून की ट्रिप पर जाने के लिए सबसे जरुरी है कि जिप लॉक बैग अपने पास रखें। मोबाइल फोन, वॉलेट, जरुरी कार्ड्स, रुपए और कीमती चीजों को आप जिप लॉक बैग में रख सकते हैं। इस बैग में आप किसी भी तरह का सामान रख सकते हैं जो पानी से खराब हो सकता है। फर्स्ट एड किट हमेशा अपनी ट्रिप को सुरक्षित और यादगार बनाने के लिए अपने पास फर्स्ट एड किट रख सकते हैं। किसी को भी कोई भी छोटी-मोटी हेल्थ प्रॉब्लम हो, तो उपचार कर सकते हैं। क्योंकि अक्सर ट्रैवलिंग के दौरान मेडिकल स्टोर आसानी से नहीं मिलती हैं पावर बैंक मॉनसून ट्रिप के लिए अपने साथ हमेशा पावर बैंक जरुर रखें। कई बार बारिश-तूफान के चलते काफी समस्या हो जाती है या फिर लाइट चली जाती है, तो ऐसे में ट्रैवल के दौरान पावर बैंक जरुर रखें, जिससे आप अपने फोन चार्ज कर सकते हैं। अगर आपके फोन की बैटरी लंबे समय तक नहीं चलती हैं, तो आप फोन चार्ज करने के लिए बैग में पावर बैंक जरुर रख सकते हैं।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
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सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
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