सच्चाई यह है कि मानसून की पहली फुहारें पड़ते ही भारत की प्राकृतिक वादियां और पहाड़ी इलाके हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं। धुंध से ढके पहाड़, कल-कल बहते झरने और चाय के बागान किसी परियों की दुनिया जैसे नजर आते हैं। लेकिन, यही सुहावना मौसम एडवेंचर और ट्रिप के शौकीनों के लिए एक बड़ा संकट भी खड़ा कर सकता है।पहाड़ी और अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में मानसून के दौरान मूसलाधार बारिश, भयंकर भूस्खलन (Landslide), अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods), सड़कें धंसने और बादलों के फटने से आपकी हसीन ट्रिप एक डरावने अनुभव में बदल सकती है। यदि आप भी इस सावन के मौसम में पहाड़ों पर घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इन 6 संवेदनशील जगहों और जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से जान लें।इन 6 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स पर जाने से पहले सौ बार सोचें1. चेरापूंजी और मौसिनराम (मेघालय)मेघालय के ये दोनों जुड़वां क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज करने के लिए विख्यात हैं। मानसून में यहाँ लगातार इतनी तेज बारिश होती है कि पहाड़ों की सड़कें बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं और विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य के बराबर पहुंच जाती है।मुख्य आकर्षण: डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज, नोहकलिकाई फॉल्स और मावसमाई गुफाएं।विशेष सावधानी: उफनती नदियों और तेज बहाव वाले झरनों के पास बिल्कुल न जाएं। रास्तों पर चलने के लिए मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज पहनें।2. दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल)चाय के बागानों और कंचनजंगा की पहाड़ियों के लिए मशहूर दार्जिलिंग मानसून में बेहद खूबसूरत तो लगता है, लेकिन यहाँ की मिट्टी बहुत जल्दी खिसकती है। भारी बारिश के समय पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण टॉय ट्रेन रूट और नेशनल हाईवे अक्सर बंद हो जाते हैं।मुख्य आकर्षण: टाइगर हिल, बतासिया लूप, हिमालयन रेलवे (टॉय ट्रेन) और पीस पगोडा (शांति स्तूप)।विशेष सावधानी: अपना ट्रैवल प्लान हमेशा फ्लेक्सिबल (लचीला) रखें ताकि रास्ते बंद होने पर होटल में ज्यादा दिन रुकना पड़े तो परेशानी न हो। रात के समय गाड़ी चलाने से पूरी तरह बचें।3. मुन्नार और पश्चिमी घाट (केरल)केरल के पश्चिमी घाट मानसून में हरी-भरी मखमली वादियों में तब्दील हो जाते हैं। लेकिन भारी बारिश के चलते यहाँ अचानक मौसम बदलता है, जिससे सड़कों पर पानी भरने और चाय के ढलानों पर लैंडस्लाइड का जोखिम काफी बढ़ जाता है।मुख्य आकर्षण: एराविकुलम नेशनल पार्क, मट्टुपेट्टी डैम, टॉप स्टेशन और अनामुडी चोटी।विशेष सावधानी: लगातार बारिश के दौरान घने जंगलों में ट्रेकिंग करने या अनजान रास्तों पर जाने का रिस्क बिल्कुल न लें।4. केदारनाथ धाम (उत्तराखंड)हिमालय की गोद में स्थित बाबा केदारनाथ का पावन धाम एक बेहद लोकप्रिय धार्मिक स्थल है, लेकिन मानसून में यहाँ का मौसम पल-पल बदलता है। पैदल मार्ग पर मलबे और पत्थरों के गिरने से यात्रा अक्सर रोकनी पड़ती है।मुख्य आकर्षण: केदारनाथ मंदिर, भैरवनाथ मंदिर और मंदाकिनी नदी का दिव्य नजारा।विशेष सावधानी: यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग (IMD) की लाइव वेदर रिपोर्ट जरूर चेक करें। यदि मौसम खराब हो, तो यात्रा को वहीं रोक देना सबसे सुरक्षित विकल्प है।5. चार धाम हाईवे (उत्तराखंड)यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने वाला यह ऑल-वेदर हाईवे बेहद ऊंचे और घुमावदार पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है। मानसून के दौरान पहाड़ों से भारी मलबा गिरने के कारण यहाँ मीलों लंबा ट्रैफिक जाम लगना बेहद आम बात है।विशेष सावधानी: रात के समय इन संकरे पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग करना जानलेवा हो सकता है। आपातकालीन स्थिति के लिए वाहन में अतिरिक्त राशन और जरूरी दवाएं हमेशा तैयार रखें।6. मनाली-लेह और श्रीनगर-लेह हाईवेलद्दाख की जादुई दुनिया को जोड़ने वाले ये दोनों मार्ग बाइकर्स और एडवेंचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं। लेकिन मानसून के दिनों में रोहतांग पास, जोजिला पास और कारगिल जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कें टूटने, बर्फीले तूफान आने और अचानक रास्तों के बंद होने की समस्या आम है।मुख्य आकर्षण: पैंगोंग झील, नुब्रा वैली, कारगिल वॉर मेमोरियल और रोहतांग दर्रा।विशेष सावधानी: ऊंचे अक्षांशों (High Altitude) पर ऑक्सीजन की कमी से बचने के लिए शरीर को मौसम के अनुकूल ढलने का समय दें (Acclimatization)। अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, स्नैक्स और पीने का पानी रखें।मानसून में सुरक्षित यात्रा के लिए 5 'गोल्डन रूल्स'सबसे जरूरी सलाह: पहाड़ों के स्थानीय लोगों और स्थानीय प्रशासन (Local Authorities) द्वारा दी जाने वाली चेतावनियों या लाउडस्पीकर एनाउंसमेंट को कभी भी हल्के में न लें। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने के बजाय उसकी सुरक्षा गाइडलाइंस का सम्मान करें ताकि आपका सफर सुरक्षित और आनंददायक बना रहे।
भीलवाड़ा में सुरक्षा इंतजाम ठीक नहीं मिलने पर गुरुवार रात एक ट्रैवल्स बस को सीज कर दिया गया। बस में सवार यात्रियों को नीचे उतरवाकर दूसरी बस से से भेजा गया। कार्रवाई जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य की अगुवाई में परिवहन विभाग की टीम ने होटल लैंडमार्क के पास चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान की। जांच में बस सुरक्षा और अन्य तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरी, जिसके बाद जिला परिवहन अधिकारी रामकृष्ण चौधरी के जरिए उसे मौके पर ही सीज कर दिया गया। अधिकारियों ने किया संयुक्त निरीक्षणजिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य ने परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बसों की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की। निरीक्षण के दौरान एक बस निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरी। इसके बाद जिला परिवहन अधिकारी रामकृष्ण चौधरी के माध्यम से उसे तत्काल सीज करने की कार्रवाई की गई। यात्रियों को दूसरी बस से भेजा गयाबस सील होने के बाद यात्रियों को असुविधा न हो, इसके लिए बस संचालक को उन्हें दूसरी बस से रवाना करने के निर्देश दिए गए। अभियान के दौरान होटल लैंडमार्क क्षेत्र में सामान्य से कम बसें दिखाई दीं। कार्रवाई से बचने के लिए कुछ चालक वैकल्पिक मार्गों से बसें ले जाते भी नजर आए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विभाग कभी भी जांच कर सकता है और सभी निजी बस संचालकों को सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। जांच से जुड़ी तस्वीरें …
आजाद टूर एंड ट्रैवलर्स वेलफेयर एसो. ने लगाया चावल का भंडारा
बरनाला| आजाद टूर एंड ट्रैवलर्स वेलफेयर एसोसिएशन, 22 एकड़, बरनाला की ओर से एक विशेष चावल का भंडारा आयोजित किया गया, जिसमें एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया। एसोसिएशन के प्रधान मक्खन सिंह जलूर ने जानकारी दी। इस परोपकारी सेवा कार्य के दौरान एसोसिएशन के मीत प्रधान शेर सिंह फौजी, राज शर्मा, जसविंदर सिंह, राजिंदर कुमार, अश्वनी कुमार, हरदीप सिंह, बारू सिंह, जमील मोहम्मद, अर्जन देव, सतिंदर सिंह, बलकार सिंह, पाल, बहादुर सिंह फौजी, नैब सिंह चीमा, गुरदीप सिंह चीमा, हरजीत सिंह और सतपाल पाली सहित एसोसिएशन के अन्य सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कन्नौज में मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के तहत ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मेंहदीघाट का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इसके लिए 8 करोड़ 48 लाख की परियोजना का गुरुवार देर शाम 7 बजे भूमि पूजन किया गया। जिसमें जिले के दोनों मंत्री मौजूद रहे। भूमि पूजन कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष वीरसिंह भदौरिया, डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, एसपी विनोद कुमार मौजूद रहे। मंत्रियों और अधिकारियों ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर भूमि पूजन एवं आरती की। अतिथियों ने गंगा तट पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ फावड़ा चलाकर निर्माण कार्य का शुभारम्भ किया। मंत्री असीम अरुण ने बताया कि मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के अंतर्गत घाट के जीर्णोद्धार, कल्चरल स्टेज, पर्यटक सुविधाओं एवं अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए लगभग 8.48 करोड़ की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यहां कपूर एंड टीम द्वारा भजन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। शाम के वक्त महादेवी घाट दीपों की रोशनी से आलोकित हो उठा, जिससे सम्पूर्ण घाट का वातावरण आध्यात्मिक बन गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला पर्यटन विभाग के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि इस घाट का महत्व प्राचीन काल से रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र सुरक्षित एवं ऊंचा तटीय क्षेत्र होने के कारण मानव बसावट का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि सम्राट हर्षवर्धन भी इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। भविष्य में यहां वार्षिक साहित्य महोत्सव, भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पठन-पाठन एवं अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन की संभावनाओं पर भी गंभीरता से कार्य किया जाएगा, जिससे यह स्थल धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन सके। इससे पहले वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया। जिसमें राज्य मंत्री असीम अरुण ने पीपल, राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने आम, जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने पाकड़, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने सहजन और जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया ने आंवला का पौधा रोपित किया।
बिहार के कैमूर जिले में मुंडेश्वरी पर्वत पर प्रस्तावित रोपवे परियोजना का अनुबंध रद्द कर दिया गया है। 735 लाख रुपये की यह पर्यटन योजना अब अनिश्चितता में है। इस महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना को वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। नियमानुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को वर्ष 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका। परियोजना में देरी का मुख्य कारण तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, वन्यप्राणी क्लीयरेंस और स्टेज-1 की आवश्यक सरकारी स्वीकृति मिलने के बावजूद संबंधित एजेंसी ने सुपरस्ट्रक्चर का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। लगातार हो रही देरी और लापरवाही के मद्देनजर विभाग ने अंततः इस रोपवे परियोजना का अनुबंध रद्द करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से करोड़ों रुपये की यह योजना अब पूरी तरह रुक गई है।
उदयपुर ने देश भर में एक बार फिर राजस्थान का मान बढ़ाया है। साल 2026 के मानसून सीजन में अकेले यात्रा करने वाली यानी सोलो वीमेन ट्रैवलर्स के लिए उदयपुर को देश के टॉप 5 सबसे सुरक्षित पर्यटन स्थलों में शामिल किया गया है। भारत के 15 सबसे सुरक्षित मानसून डेस्टिनेशन की इस राष्ट्रीय सूची में उदयपुर को पांचवा स्थान मिला है। सुरक्षित माहौल, मजबूत पर्यटन व्यवस्था और शानदार मेहमाननवाजी की वजह से उदयपुर आज महिला पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है। इस रैंकिंग के आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी मानसून सीजन में यहां आने वाली महिला पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस रैंकिंग सर्वे में महिला यात्रियों की सुरक्षा, सड़क संपर्क, पर्यटन सुविधाओं और स्थानीय लोगों के सहयोग को मुख्य आधार बनाया गया है। इसके अलावा कई मशहूर ट्रैवल वेबसाइट्स, गूगल रिव्यू और पहले यात्रा कर चुकीं महिला पर्यटकों के असली अनुभवों का गहराई से विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए मुख्य रूप से पांच मानकों को देखा गया, जिनमें पुलिस द्वारा सत्यापित पर्यटन क्षेत्र, हर मौसम में सुरक्षित सड़क संपर्क, होटल और होमस्टे की बेहतरीन क्वालिटी, यात्रियों की मदद के लिए एक्टिव लोकल नेटवर्क और साल 2022 से 2025 के बीच कम भूस्खलन जोखिम वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन सभी पैमानों पर उदयपुर बिल्कुल खरा उतरा। इस सूची में दक्षिण भारत के दो मशहूर हिल स्टेशन, कर्नाटक का कुर्ग पहले और केरल का मुन्नार दूसरे स्थान पर रहे हैं। दक्षिण के इन पहाड़ी और अच्छी बारिश वाले इलाकों के मुकाबले उदयपुर अपनी ऐतिहासिक झीलों, महलों और राजपूती मेहमाननवाजी के अनूठे संगम के कारण अलग पहचान रखता है। जहां साउथ के डेस्टिनेशंस में मानसून के दौरान तेज बारिश और घने जंगलों के बीच अकेले सफर करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, वहीं उदयपुर अपनी बेहतरीन कनेक्टिविटी, शहरी सुरक्षा और हर कदम पर मिलने वाली गाइडेंस के चलते सोलो फीमेल ट्रैवलर्स के लिए ज्यादा सुगम और सुरक्षित साबित होता है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल का कहना है कि यह उदयपुर के पर्यटन उद्योग के लिए एक गौरवशाली क्षण है। एसोसिएशन की ओर से लगातार पुलिस के साथ मिलकर होटल्स और होमस्टे में महिला पर्यटकों की सुरक्षा और उनकी सहूलियत पर पूरा फोकस रहता है। आने वाले दिनों में वीमेन-ओनली टूर पैकेजेस और महिला यात्रियों के लिए कस्टमाइज्ड सर्विसेज की डिमांड तेजी से बढ़ेगी, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है। उदयपुर को यह खास मुकाम मिलने के पीछे कई बड़ी वजहें हैं। यहां की नियमित पुलिस गश्त, स्पेशल पर्यटन पुलिस और हेल्प डेस्क महिलाओं को सुरक्षा का अहसास कराते हैं। शहर में सुरक्षित होटल, होमस्टे के साथ-साथ ऑनलाइन कैब और ऑटो की बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं। सबसे खास बात यह है कि उदयपुर के स्थानीय लोगों का व्यवहार बहुत ही सहयोगी और दोस्ताना है। यहां का शांत वातावरण, पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त रोशनी और हर भाषा समझने वाले गाइड महिला यात्रियों के भरोसे को और मजबूत करते हैं। पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना ने कहा कि मानसून के आते ही उदयपुर की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। इस मौसम में अरावली की पहाड़ियां बादलों से घिर जाती हैं और चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पिछोला, फतहसागर और उदयसागर झीलों का सौंदर्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। सज्जनगढ़ की वादियों का नजारा इस मौसम में देखते ही बनता है। एक खास बात यह भी है कि मानसून के दौरान यहां भीड़भाड़ थोड़ी कम रहती है और होटल व होमस्टे के किराए 30 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं। इससे अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए यह सफर बेहद आरामदायक, सुरक्षित और बजट के अनुकूल बन जाता है।
खगड़िया की कसरैया धार झील के ईको टूरिज्म विकास के लिए बिहार सरकार ने ₹29.20 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 में ईको पर्यटन एवं पार्क विकास योजना के तहत मानसी प्रखंड स्थित कसरैया धार के विकास पर खर्च की जाएगी। इस परियोजना से कसरैया धार को बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। बजट सत्र के दौरान उठाया प्रश्न खगड़िया सदर विधायक बबलू कुमार मंडल ने इस स्वीकृति को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कसरैया धार के विकास के लिए उन्होंने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान तारांकित प्रश्न उठाया और शून्यकाल में भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। विधायक के निरंतर प्रयासों के बाद वन एवं पर्यावरण विभाग ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। तत्कालीन जिलाधिकारी नवीन कुमार ने इस आधार पर विकास प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा था। विधायक मंडल ने बताया कि प्रस्ताव भेजने के बाद भी उन्होंने विभागीय अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा। उन्होंने वन विभाग की सर्वे टीम के साथ कसरैया धार का स्थलीय निरीक्षण भी किया था। इस दौरान पर्यटन की संभावनाओं, प्राकृतिक संरचना और स्थानीय आवश्यकताओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। सदर अस्पताल में जल निकासी व्यवस्था फरवरी में आयोजित बजट सत्र के दौरान विधायक बबलू कुमार मंडल ने खगड़िया के विकास से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी विधानसभा में उठाए थे। इनमें शहर के ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण, सदर अस्पताल में जल निकासी की व्यवस्था, डिग्री कॉलेज की स्थापना और राजेंद्र सरोवर का जीर्णोद्धार शामिल थे। विधायक बबलू कुमार मंडल ने कहा कि कसरैया धार केवल एक झील नहीं, बल्कि खगड़िया की प्राकृतिक पहचान है। इसके ईको टूरिज्म हब के रूप में विकसित होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आसपास के दर्जनों गांवों के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी होटल, रेस्टोरेंट, नौकायन, स्थानीय हस्तशिल्प, परिवहन, गाइड सेवा और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।उन्होंने कहा कि आगामी मानसून सत्र में भी वे खगड़िया में उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखेंगे, ताकि जिले के विकास को और गति मिल सके। इस अवसर पर विधायक ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की सकारात्मक सोच और सहयोग से खगड़िया को लगातार विकास की नई सौगातें मिल रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कसरैया धार परियोजना आने वाले समय में जिले के पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।
कई महत्वपूर्ण नीतियों के प्रारूप और पोर्टल्स की लॉन्चिंग व एमओयू होंगे झारखंड सरकार राज्य को निवेश, उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। दिल्ली के होटल ताज में बुधवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन में देश-विदेश के उद्योगपति, निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता एक मंच पर जुटेंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। वे दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस आयोजन में उद्योग जगत से मिले सुझावों के आधार पर नई औद्योगिक, आईटी, एआई और पर्यटन नीतियों को अंतिम रूप देने की दिशा तय होगी। कार्यक्रम के दौरान कई बड़े औद्योगिक घरानों के साथ एमओयू भी होने की संभावना है। सूचना प्रौद्योगिकी, उद्योग और पर्यटन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य राज्य की नई विकास नीतियों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। जिन नीतियों की अवधि समाप्त हो रही है, उन्हें नए सुझावों के आधार पर संशोधित किया जाएगा। जबकि नई नीतियों में भी उद्योग जगत की अनुशंसाओं को शामिल किया जाएगा। सरकार राज्य को औद्योगिक निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से अन्य राज्यों की तुलना में अधिक आकर्षक नीति तैयार करने पर काम कर रही है। साथ ही यूरोपीय कंपनियों के लिए उद्योग विभाग में विशेष कोषांग बनाने की प्रक्रिया भी जारी है। पहले दिन आईटी-एआई, दूसरे दिन निवेश व पर्यटन पर चर्चा, मुख्यमंत्री रखेंगे राज्य का डिजिटल रोडमैपबुधवार को पहले दिन डिजिटल गवर्नेंस, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी पार्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल निवेश पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा होगी। इसके बाद सरकार और आईटी कंपनियों के बीच बी-टू-जी संवाद आयोजित किया जाएगा। दिन का समापन ‘झारखंड में एआई का भविष्य’ विषय पर विशेष सत्र से होगा। वहीं, गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विशेष फीडबैक सत्र की अध्यक्षता करेंगे। दूसरे दिन निवेश, औद्योगिक विकास और पर्यटन पर विस्तृत चर्चा होगी। राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन क्षमता को निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसी दिन कई बड़े औद्योगिक घरानों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। कार्यक्रम का समापन झारखंड की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित प्रस्तुति से होगा। आईटी, एआई, पर्यटन और निवेश पर रहेगा विशेष फोकससम्मेलन में झारखंड एआई पॉलिसी, निवेश प्रोत्साहन नीति, पर्यटन नीति, टेक्सटाइल्स पॉलिसी, जियाडा रेगुलेशंस और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पॉलिसी के प्रारूप पर विस्तार से चर्चा होगी। खनन, आधारभूत संरचना, इस्पात, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी मंथन होगा। यह आयोजन राज्य के विजन-2050 को गति देने और पिछले वर्ष दावोस में हुए वैश्विक निवेश संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गूगल, एक्सेंचर, आईबीएम समेत प्रमुख कंपनियां होंगी शामिलजानकारी के मुताबिक, सरकार आईटी सेक्टर की कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, गूगल, अोरेकल, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो, एचसीएल, टेक महिंद्रा, एलटीआईमाइंडट्री, कॉग्निजेंट, एक्सेंचर, आईबीएम इंडिया, कैपजेमिनी इंडिया के साथ कई विषयों पर मंथन करेगी। इसके अलावा बड़ी औद्योगिक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, अदाणी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी, जेएसडब्ल्यू स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, मेक माई िट्रप, रेडिशन, इज माई ट्रिप के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल होंगे।
खगड़िया के परबत्ता प्रखंड स्थित भरतखंड गांव में मुगलकालीन '52 कोठरी, 53 द्वार' महल का कला एवं संस्कृति विभाग की टीम ने निरीक्षण किया है। वर्षों से उपेक्षित इस ऐतिहासिक धरोहर को अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की उम्मीद जगी है। यह किला-नुमा महल वर्तमान में संरक्षण के अभाव में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में मध्य प्रदेश के सोलंकी वंश के राजा बैरम सिंह ने कराया था। 51 प्रकार की ईंटें भी इस्तेमाल की गई लगभग 5 बीघा, 5 कट्ठा, 5 धुर और 5 धुरकी क्षेत्र में फैले इस महल को मुगलकालीन कारीगर मोहम्मद बरकाती मियां के नेतृत्व में बनाया गया था, जिन्होंने मुंगेर किले के निर्माण में भी योगदान दिया था। महल की मुख्य विशेषता इसकी अनूठी वास्तुकला है, जिसमें 52 कोठरियां और 53 द्वार हैं, जो इसे एक भूलभुलैया जैसा स्वरूप देते हैं। इसके निर्माण में राख, चूना और सुरखी का उपयोग किया गया है, साथ ही एक से दो फीट आकार की 51 प्रकार की ईंटें भी इस्तेमाल की गई हैं। नक्काशी धरोहर की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाती परिसर में स्थित चमत्कारी मंडप आज भी आकर्षण का केंद्र है, जिसके खंभों पर हल्की चोट करने से विभिन्न मधुर ध्वनियां निकलती हैं। इसके अतिरिक्त, रानी स्नान तालाब, मंदिर तक जाने वाली गुप्त सुरंग, दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी और बारीक नक्काशी इस धरोहर की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाती हैं। कला एवं संस्कृति पदाधिकारी खगड़िया, घनश्याम कुमार ने पूर्व में इस महल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव विभाग को भेजा था। इसी क्रम में मंगलवार को सहायक अभियंता अरविंद कुमार तिवारी, वरीय तकनीकी सहायक डॉ. हर्षवर्धन कुमार और कनीय अभियंता सुरंजन कुमार सहित विभाग की टीम भरतखंड पहुंची। जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई अधिकारियों ने महल का विस्तृत निरीक्षण किया, नक्शा देखा और स्थानीय ग्रामीणों से इसके इतिहास व महत्व की जानकारी ली। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान जुटाई गई सभी जानकारियां विभाग को भेजी जाएंगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान मुखिया प्रतिनिधि उमेश कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से महल का शीघ्र संरक्षण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण किया जाए तो यह न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बनेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए रामपुर पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार दोपहर अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने पंजाबनगर शिव मंदिर पहुंचकर मंदिर परिसर, आसपास की सड़कों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने प्रवेश-निकास मार्ग, बैरिकेडिंग, पार्किंग, सीसीटीवी कैमरों, प्रकाश व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े इंतजामों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान एएसपी ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्कता के साथ ड्यूटी करने, लगातार भ्रमणशील रहने और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने देने के निर्देश दिए। वहीं, पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना ने उत्तराखंड सीमा से जुड़े कांवड़ मार्ग रुद्रविलास, काशीपुर क्षेत्र तथा बिलासपुर की ओर प्रस्तावित रूट डायवर्जन स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने कांवड़ यात्रियों की सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग, डायवर्जन व्यवस्था, पार्किंग स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की समीक्षा की। साथ ही सीसीटीवी निगरानी और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी परखी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह सुचारु रहे, श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल पूरी तरह तैयार रहे। संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी रखने, लगातार पेट्रोलिंग करने तथा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने के भी निर्देश दिए गए हैं। रामपुर पुलिस का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और पूरे रूट पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
थाईलैंड सरकार ने भारतीय पर्यटकों के लिए अपने यात्रा और वीजा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इन सख्त नियमों का उद्देश्य पर्यटन को रोकना नहीं, बल्कि फर्जी यात्रियों, तय समय से ज्यादा रुकने (ओवरस्टे) और नौकरी के नाम पर होने वाले ऑनलाइन घोटालों जैसी गंभीर समस्याओं पर लगाम लगाना है। इसके साथ ही इमिग्रेशन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए नई तकनीक को भी शामिल किया गया है। अगर आप भी आने वाले दिनों में थाईलैंड घूमने की योजना बना रहे हैं, तो इन नए नियमों को ध्यान से समझना बेहद जरूरी है।थाईलैंड सरकार को क्यों उठाने पड़े ये सख्त कदम?थाईलैंड दुनिया भर के पर्यटकों के साथ-साथ भारतीयों के लिए भी सबसे पसंदीदा हॉलिडे डेस्टिनेशन रहा है। हालांकि, पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई चुनौतियां आ रही थीं। कई लोग टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड जाकर अवैध रूप से काम करने लगे थे, तो कई यात्री वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वहाँ छिपकर रह रहे थे। फर्जी दस्तावेजों के सहारे यात्रा करने के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब सरकार ने पूरे सिस्टम को डिजिटल और फुलप्रूफ बनाने का फैसला लिया है, ताकि असली पर्यटकों को कोई परेशानी न हो।थाईलैंड यात्रा के लिए अब ये 4 शर्तें होंगी अनिवार्य6 महीने की पासपोर्ट वैलिडिटी: अब थाईलैंड जाने वाले हर भारतीय यात्री का पासपोर्ट यात्रा की तारीख से कम से कम 6 महीने तक वैध (Valid) होना जरूरी है। अगर वैलिडिटी इससे कम पाई गई, तो एयरपोर्ट से ही वापस लौटाया जा सकता है।कन्फर्म रिटर्न टिकट और होटल बुकिंग: इमिग्रेशन काउंटर पर अब यात्रियों को अपनी वापसी का कन्फर्म हवाई टिकट और ठहरने के लिए होटल की पक्की बुकिंग दिखानी होगी। इससे आपका पूरा ट्रैवल प्लान स्पष्ट होना चाहिए।20,000 थाई बाहत (THB) का फाइनेंशियल प्रूफ: थाईलैंड में अपने खर्चों को संभालने के लिए यात्रियों को वित्तीय रूप से सक्षम होना साबित करना होगा। इसके तहत प्रति व्यक्ति लगभग 20,000 थाई बाहत (या इसके बराबर की विदेशी मुद्रा) कैश या बैंक बैलेंस के रूप में दिखाना पड़ सकता है।इंडिविजुअल ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स: अगर आप ग्रुप या परिवार के साथ भी यात्रा कर रहे हैं, तो भी हर सदस्य के पास पासपोर्ट, होटल बुकिंग और वीजा से जुड़े सभी दस्तावेज अलग-अलग और पूरी तरह तैयार होने चाहिए।क्या है नया TDAC (Thailand Digital Arrival Card) सिस्टम?थाईलैंड सरकार ने पुराने कागजी इमिग्रेशन फॉर्म को पूरी तरह बंद करके अब TDAC (थाईलैंड डिजिटल अराइवल कार्ड) नाम का एक नया ऑनलाइन सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। इसे इस बदलाव का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। हर यात्री को अपनी फ्लाइट से पहले इस आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर एक डिजिटल फॉर्म भरना होगा।इस डिजिटल फॉर्म में यात्रियों को अपने पासपोर्ट की जानकारी, फ्लाइट नंबर, थाईलैंड में रुकने का पूरा पता और यात्रा का मुख्य उद्देश्य जैसी बुनियादी जानकारियां दर्ज करनी होंगी। इस सिस्टम को लागू करने का मुख्य उद्देश्य एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन के दौरान लगने वाली लंबी लाइनों को खत्म करना और यात्रियों के डेटा को सुरक्षित तरीके से ट्रैक करना है।नियम न मानने या गलती करने पर क्या होगी कार्रवाई?यदि कोई यात्री उड़ान भरने से पहले अपना TDAC फॉर्म सही तरीके से नहीं भरता है या इमिग्रेशन काउंटर पर मांगे गए जरूरी दस्तावेज पेश करने में असमर्थ रहता है, तो उसे थाईलैंड एयरपोर्ट पर एंट्री देने से साफ इनकार किया जा सकता है। गंभीर मामलों में यात्री को डिपोर्ट (वापस देश भेजना) भी किया जा सकता है, जिससे भविष्य में थाईलैंड का वीजा मिलने में बड़ी दिक्कत आ सकती है। अगर आपके सभी दस्तावेज वैध हैं और आप केवल घूमने के इरादे से जा रहे हैं, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है—बस समय रहते अपनी डिजिटल तैयारी पूरी रखें।
जोधपुर में टेंपो ट्रैवलर और क्रेटा कार की आपस में टक्कर हो गई। हादसे में महाराष्ट्र के एक स्टूडेंट की मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों वाहनों को कब्जे में लिया। महाराष्ट्र से स्टूडेंट्स ट्रैवल कंपनी के जरिए जैसलमेर घूमने जा रहे थे। यह हादसा सोमवार सुबह 5:30 बजे केरू-जैसलमेर रोड पर हुआ। हादसे में गंभीर रूप से घायल स्टूडेंट को मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। राजीव गांधी नगर थाना अधिकारी रविंद्र पाल सिंह राजपुरोहित ने बताया- साहिल जाधव (20) पुत्र नंदकिशोर (निवासी पनवेल, जिला रायगढ़, महाराष्ट्र) की हादसे में मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। जोधपुर घूमने के बाद सभी स्टूडेंट्स जैसलमेर जा रहे थे। पुलिस हादसे की जांच कर रही है। सभी स्टूडेंट्स 19 से 25 साल के करीब के हैं। वे बांद्रा टर्मिनस से ट्रेन के जरिए आज सुबह 4:30 बजे के करीब जोधपुर पहुंचे थे। यहां से वे टूर एंड ट्रैवल्स कंपनी की गाड़ी लेकर रवाना हुए थे। गाड़ी में ड्राइवर समेत 13 लोग सवार थे, तभी जैसलमेर रोड पर हादसा हो गया। हादसे के बाद पुलिस ने घायल और मृतक के परिजनों को सूचना दे दी है। उनके आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, घटना के बाद मृतक के साथी भी काफी घबराए हुए हैं। इनमें से एक स्टूडेंट को गंभीर चोट लगी है, जबकि बाकी अन्य को मामूली चोटें आई हैं।
बिहार सरकार ने इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 50 से अधिक नए स्पॉट्स चिन्हित किए हैं। अगले पांच सालों में राज्य में इको-टूरिज्म स्थलों की संख्या बढ़कर 60-70 पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये राज्य का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। यह तराई के घने जंगलों, बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। नेपाल की सीमा से सटा होने के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। कैमूर बनेगा बिहार का दूसरा टाइगर रिजर्व इसके अलावा कैमूर को दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसे झरनों और ट्रैकिंग के लिए जाना जाता है। भीमबांध वन्यजीव सैंक्चुअरी, गौतम बुद्ध वन्यजीव सैंक्चुअरी, विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन सैंक्चुअरी, कांवर झील पक्षी सैंक्चुअरी, राजगीर का पहाड़ी क्षेत्र, ककोलत वॉटरफल, घोड़ा कटोरा, बराबर-गुरुपा पहाड़ियां और सूरजपुर वेटलैंड भी राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हैं। पर्यटन क्षेत्र से 20 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि बिहार इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य स्थाई पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। पर्यटन विभाग ने अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से 20 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन प्रयासों से न केवल देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि बिहार की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर की भी रक्षा होगी। वाल्मीकिनगर में बनेगा आइकॉनिक टूरिज्म पार्क सहरसा स्थित मत्स्यगंधा झील पर सॉवेनियर शॉप, सुपर ट्री, ग्लास ब्रिज और एक्सपीरियंस सेंटर समेत अन्य सुविधाएं वर्ष 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। पश्चिम चंपारण के लव कुश पार्क और वाल्मीकिनगर में आइकॉनिक टूरिज्म पार्क का व्यापक विकास कार्य 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा मां मुंडेश्वरी धाम में धर्मशाला का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जंगल सफारी और इको-टूरिज्म गतिविधियों को विशेष बढ़ावा दिया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे पर्यटन स्थल पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए विकसित किए जा रहे सभी इको-टूरिज्म स्थलों पर नेचर ट्रेल्स, वॉच टावर, इको-कॉटेज, होमस्टे, डिजिटल साइनेज और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएगी हैं। बिहार में वर्तमान में 10 से 15 सक्रिय इको-टूरिज्म स्थल हैं, जबकि 24 से अधिक प्रमुख स्थलों को विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, वॉटरफाॅल और पहाड़ियां शामिल हैं।
मनीष साहू जिला पर्यटन समिति के सदस्य बने
सुहेला | बलौदा बाजार विधायक और कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा ने आमाकोनी सरपंच मनीष साहू को जिला पर्यटन समिति का सदस्य मनोनीत किया है। उनकी इस नियुक्ति पर शिमला जनपद अध्यक्ष डॉ दौलतपाल, विधायक प्रतिनिधी करण वर्मा, सरपंच संघ अध्यक्ष दिनेश चवरे, भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमंत बघमार, जीवनदीप समिति के अध्यक्ष प्रतिनिधि युगल किशोर वर्मा, फरहदा सरपंच महिष जांगड़े सहित भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने कहा िक इस िनयुक्ति से पर्यटन को बढ़ावा देने के काम में मदद मिलेगी।
खासतौर पर ऐसी कई सफर होते हैं जो किसी खास मौसम से जरुर जुड़े होते हैं। भारत में मॉनसून की रोड ट्रिप भी ऐसी ही एक यात्रा है। बारिश के दौरान रोड ट्रिप करने का अलग ही मजा होता है। बारिश से सड़कों से मिट्टी गायब हो जाती है, अचानक से कई जगहों पर झरने दिखाई देने लगते हैं। हाईवे पर अचानक से किसी फिल्म के सीन जैसे लगते हैं। मॉनसून के मौसम में ड्राइव का आनंद लेने का एक अलग ही मजा होता है। इस दौरान सफर करने से काफी सुकून मिलता है। मॉनसून के मौसम में चारों तरफ हरियाली, मनमोहक झरने और धुंध से ढके पहाड़ देखने को मिलते हैं। इस लेख में हम आपको भारत की सबसे खूबसूरत रोड ट्रिप्स के बारे में बताते हैं, जिनका सबसे ज्यादा मजा बरसात के मौसम में आता है। मुंबई से लोनावला बारिश के मौसम में मुंबई से लोनावला का रास्ता मॉनसून में गाड़ी चलाने के लिए सबसे बेहतरीन है। यहां बरसात में वेस्टर्न घाट हरे-भरे एकदम स्वर्ग जैसे नजर आने लगते हैं, यहां जगह-जगह पर झरने और तैरते हुए बादल दिखाई देते हैं। खंडला घाट के आस-पास का सफर और भी जादुई लगता है, जहां पहाड़ों पर धुंध छा जाती है और सड़के किनारे बेचने वाले गरमा-गरम भुट्टा और कटिंग चाय का आनंद आ जाता है। यह सफर खूबसूरती और ताजगी से भरा होता है। यह जगह भारत की पसंदीदा जगहों में से एक है। यहां पहुंचने के लिए करीब 1 घंटा 50 मिनट लगता है। बेंगलुरु से कूर्ग मॉनसून के मौसम में बेंगलुरु से कूर्ग का रास्ता बेहद खूबसूरत हो जाता है। हल्की बारिश में चमकने कॉफी के बागान चमकने लगते हैं, जंगल और भी घने हो जाते हैं और हवा मिट्टी का ताजी व भीनी-भीनी खुशबू घुल जाती है। मॉनसून के दौरान कूर्ग के झरने और भी खूबसूरत हो जाती हैं, जिससे रास्ते में रुकना बहुत सुखद अनुभव बन जाता है। यहां का ठंडा मौसम और घुमावदार सड़कें इसे आराम से घूमने-फिरने के लिए बेहतरीन जगह बनाते हैं। बेंगलुरु से कूर्ग जाने के लिए कम से कम 5 घंटे का समय लगता है। दिल्ली से लैंसडाउन यदि आप उत्तर भारत में रहते हैं और मॉनसून सीजन का आनंद लेना चाहते हैं, तो आप दिल्ली से लैंसडाउन तक की ड्राइव कर सकते हैं। भीड़-भाड़ वाले हिल स्टेशनों के मुकाबले मॉनसून में शांति से घूमने का एक अच्छा डेस्टिनेशन है। जैसे ही सड़के गढ़वाल की पहाड़ियों पर ऊपर की ओर जाती है, नजारा बहुत ही सुंदर दिखाई देता है। शहर की भागदौड़ शोर-शराबे की जगह धुंध में लिपटे चीड़ के जंगल बहुत ही खूबसूरत लगते हैं। बरसात के मौसम में यहां काफी शांति देखने को मिलती है। दिल्ली से लैंसडाउन पहुंचने के लिए लगभग 6 घंटे लगते हैं। ईस्ट कोस्ट रोड से चेन्नई से पुडुचेरी चेन्नई और पुडुचेरी को जोड़ने वाली ईस्ट कोस्ट रोड साल भर खूबसूरत रहती है, लेकिन मॉनसून के दौरान यहां की समुद्री सुंदरता और भी खास हो जाती है। इस रोड ट्रिप पर एक तरफ बंगाल की खाड़ी और दूसरी तरफ बारिश से भीगी सड़कें, यहां गाड़ी चलाने का अनुभव सुकून देने वाला और किसी फिल्म के सीन जैसा लगता है। आसमान में छाए बादल, टकराती लहरें और समुद्र की हवा मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जैसा किसी और मौसम में मिलना मुश्किल है। यहां जाने के लिए लगभग 7.5 घंटे लगते हैं। शिलांग से चेरापूंजी शिलांग और चेरापूंजी के बीच का सफर शायद ही भारत की सबसे बेहतरीन मॉनसून रोड ट्रिप है। दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश मेघालय में होती है और मॉनसून के दौरान यह इलाका अविश्वसनीय रूप से हरा-भरा हो जाता है। सड़कों पर बादल तैरते हैं, झरने पूरे जोर-शोर से बहने लगते हैं और यहां की घाटियों धुंध में आप खो जाएंगे। हर मोड़ किसी पोस्टकार्ड जैसा सुंदर लगता है, जिससे नेचर लवर के लिए यह सफर यादगार बन जाएगा। शिलांग से चेरापूंजी पहुंचने में करीब 1 घंटा 40 मिनट लगते हैं। जयपुर से उदयपुर मानसून का नाम सुनते ही शायद राजस्थान का ख्याल सबसे पहले न आए, लेकिन जयपुर से उदयपुर तक की यात्रा इस रेगिस्तानी राज्य का एक अलग और सुकून भरा दर्शाती है। बरसात के दौरान अरावली की पहाड़ियां हरी-भरी हो जाती हैं, झीलें पानी से भर जाती हैं और मौसम ठंडा होने के कारण घूमना-फिरना बहुत सुखद हो जाता है। मानसून उदयपुर के महलों और झील के नजारों में एक रोमांटिक एहसास भी घोल देता है।
बरसात के मौसम में घूमने का एक अलग ही आनंद होता है। मॉनसून में चारों तरफ हरियाली, ठंडी हवाएं और पानी की हल्की बौछर मन को सुकून देती है। इस मौसम में कई लोग ट्रिप पर जरुर जाते हैं। हालांकि, मॉनसून में कई समस्याएं भी देखने को मिलती है। जब हम कहीं घूमने जाते हैं, तो काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है। अगर आप बारिश के समय ट्रैवलिंग करने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ चीजों को अपने पास जरुर रखें, ताकि आपको ट्रिप पर किसी भी प्रकार की समस्या न आए। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ट्रैवल बैग में कुछ जरुरी चीजों को शामिल करें, जिससे आपकी ट्रिप आसान और सुरक्षित बन जाए। रेनकोट मॉनसून ट्रैवलिंग में सबसे जरुरी है रेनकोट अपने बैग में रखना। अचानक होने वाली तेज बारिश से बचने के लिए रेनकोट बहुत जरुरी है। इसके अलावा, आप फोल्डेबल छाता रख सकते हैं, जो फैशन का ध्यान रखने के साथ-साथ आपको बारिश से भी बचाएगा। एक्सट्रा कपड़े यदि आप बारिश में भीग जाते हैं, तो लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए अपने बैग में डार्क कलर के ड्राई फिट या कॉटन के कपड़े पहन सकते हैं। जब आपके कपड़े भीग जाएं, तो इन्हें पहन सकते हैं। माइक्रोफाइबर तौलिया कपड़ो के साथ ही अपने बैग में माइक्रोफाइबर तौलिया जररु रखें जो बहुत ही हल्की होती है। इसके साथ ही यह बैग में कम जगह घेरती है और आसानी से रखी जा सकती है। अगर आपके साथ बच्चे ट्रैवल कर रहे है, तो भी आपके काफी काम आ सकती है। वॉटरप्रूफ बैग कवर कहीं आप ट्रिप पर जाएं, तो अपने साथ वॉटरप्रूफ बैग कवर जरुर साथ लें जाएं। ऐसा करने से आपका बैग भीगने से बच जाएगा और उसके अंदर का जरुरी सामान भी सुरक्षित रहेगा। जिससे आपका सामान सुरक्षित रहेगा और आप आराम से मौसम का आनंद ले सकेंगे। जिप लॉक बैग मॉनसून की ट्रिप पर जाने के लिए सबसे जरुरी है कि जिप लॉक बैग अपने पास रखें। मोबाइल फोन, वॉलेट, जरुरी कार्ड्स, रुपए और कीमती चीजों को आप जिप लॉक बैग में रख सकते हैं। इस बैग में आप किसी भी तरह का सामान रख सकते हैं जो पानी से खराब हो सकता है। फर्स्ट एड किट हमेशा अपनी ट्रिप को सुरक्षित और यादगार बनाने के लिए अपने पास फर्स्ट एड किट रख सकते हैं। किसी को भी कोई भी छोटी-मोटी हेल्थ प्रॉब्लम हो, तो उपचार कर सकते हैं। क्योंकि अक्सर ट्रैवलिंग के दौरान मेडिकल स्टोर आसानी से नहीं मिलती हैं पावर बैंक मॉनसून ट्रिप के लिए अपने साथ हमेशा पावर बैंक जरुर रखें। कई बार बारिश-तूफान के चलते काफी समस्या हो जाती है या फिर लाइट चली जाती है, तो ऐसे में ट्रैवल के दौरान पावर बैंक जरुर रखें, जिससे आप अपने फोन चार्ज कर सकते हैं। अगर आपके फोन की बैटरी लंबे समय तक नहीं चलती हैं, तो आप फोन चार्ज करने के लिए बैग में पावर बैंक जरुर रख सकते हैं।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
कड़कड़ाती सर्दी में बिकिनी पहन पूल में उतरीं रुबीना दिलैक, जापान वेकेशन की दिखाई झलक
टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
स्विमिंग पूल किनारे मोनालिसा का सिजलिंग अंदाज, वेकेशन से शेयर की बोल्ड तस्वीरें
भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा हिंदी टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी मोनालिसा की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। वह अपनी ग्लैमरस तस्वीरों से तहलका मचाती रहती हैं। मोनालिसा इन दिनों थाइलैंड में वेकेशन एंजॉय कर रही ...
गोवा में वेकेशन एंजॉय कर रहीं कृष्णा श्रॉफ, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
कृष्णा श्रॉफ निश्चित रूप से जानती हैं कि लोगों का ध्यान कैसे आकर्षित करना है- चाहे वह उनकी MMA चॉप्स हों या उनकी वेकेशन की तस्वीरें। कृष्णा इस दिनों गोवा की धूप और बीच पर छुट्टियां मना रही हैं। इसी बीच कृष्णा श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर अपनी ट्रॉपिकल ...
कैंसर के ट्रीटमेंट जंग के बीच वेकेशन मनाने मालदीव पहुंचीं हिना खान, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
Tejasswi Praksh-Karan Kundrra नहीं हुए अलग,रोमांटिक वेकेशन एन्जॉय कर रहा है कपल करीबी दोस्त ने खोला राज
शादी के तीन महीने बाद हनीमून पर निकलेRakul Preet Singh औरJackky Bhagnani, वेकेशन से वायरल हुई एक्ट्रेस की तस्वीरें
एक बार फिर सिनेमा घरो में दस्तक देने जा रही है क्रिस्टोफ़र नोलन की स्पेस एडवेंचर फिल्मInterstellar,10वीं सालगिरह पर होगी री-रिलीज़

