Amravati Hospital में आग की जांच के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बनी, 8 दिन में देगी रिपोर्ट
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबिटकर ने अमरावती शहर के एक सरकारी अस्पताल की नवजात देखभाल इकाई में तड़के लगी आग की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित करने की सोमवार शाम घोषणा की। इस घटना में तीन नवजातों की मौत हो गई थी। अबिटकर ने आग से प्रभावित जिला महिला अस्पताल में “गंभीर” अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि समिति आग लगने के कारणों का पता लगाएगी और आठ दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उन्होंने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पूर्वी महाराष्ट्र के इस शहर में आग से प्रभावित अस्पताल का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने वाले मंत्री ने कहा कि समिति की अध्यक्षता राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त करेंगे। उन्होंने बताया कि समिति में महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के अधिकारी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञ और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। अबिटकर ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने आज स्वास्थ्य विभाग के सचिव और कुछ स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ अस्पताल की स्थिति की समीक्षा की। यहां की स्थिति भयावह और दुर्भाग्यपूर्ण है। अस्पताल में जो भी अनियमितताएं थीं, वे गंभीर थीं।”उन्होंने कहा, “अस्पताल का निर्माण महज दो साल पहले हुआ था और उसके बाद आग लगने की ऐसी घटना हुई। यह बिल्कुल गलत है।”मंत्री ने कहा कि आग सुबह करीब साढ़े तीन बजे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में लगी और समिति इसके सही कारण का पता लगाने के साथ-साथ जिम्मेदारी भी तय करेगी। उन्होंने कहा, “समिति घटना की जांच करेगी और जिम्मेदारी तय करते हुए आठ दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट में जिन लोगों को इस हादसे के लिए दोषी या जिम्मेदार पाया जाएगा, उनके खिलाफ सिफारिश के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”अधिकारियों ने बताया कि समिति अस्पताल के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों समेत घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। अबिटकर ने कहा कि उनका विभाग मंगलवार को राज्य के चिकित्सा बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य व्यवस्था के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक करेगा। अमरावती शहर के जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू में सोमवार तड़के भीषण आग लगने से तीन नवजातों की मौत हो गई थी। आग एनआईसीयू के उस हिस्से में लगी थी, जहां समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज किया जा कहा था। धुएं से भरी इकाई से 36 अन्य नवजातों को बचा लिया गया था।
Amravati के अस्पताल के NICU में आग लगने से 3 नवजातों की मौत, 36 सुरक्षित बचाए गए
(फोटो के साथ)अमरावती (महाराष्ट्र), 24 अगस्त महाराष्ट्र के अमरावती में जिला महिला अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में सोमवार तड़के भीषण आग लगने से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। अधिकारियों ने बताया कि आग तड़के करीब 3:15 बजे एनआईसीयू में उस जगह लगी, जहां समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को रखा गया था। उन्होंने कहा कि धुएं से भरे इस हिस्से से 36 अन्य नवजात शिशुओं को बचा लिया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस ‘‘दिल दहला देने वाली’’ घटना पर गहरा दुख जताया और आग लगने के कारणों तथा प्रशासन की लापरवाही का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। फडणवीस ने एक बयान में कहा, ‘‘स्वास्थ्य प्रशासन को उच्चस्तरीय जांच करने का निर्देश दिया गया है।’’उन्होंने आश्वासन दिया कि जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव अबितकर और स्वास्थ्य सचिव को स्थिति की समीक्षा के लिए तुरंत पूर्वी महाराष्ट्र के अमरावती जाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि घायल बच्चों का इलाज सरकारी खर्च पर किया जाए। उन्होंने प्रत्येक मृत नवजात के परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, एनआईसीयू में एक वेंटिलेटर में विस्फोट होने के कारण आग लगी। घटना के समय घटनास्थल पर कुल 39 बच्चे भर्ती थे। कर्मचारियों और बचावकर्मियों ने प्रभावित हिस्से से छह बच्चों को बाहर निकाल लिया, लेकिन तीन नवजात शिशुओं की आग में झुलसने से मौत हो गई। अमरावती के पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने बताया कि बचाए गए छह नवजात शिशुओं को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया, जबकि चार अन्य बच्चों को संभागीय रेफरल सेवा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक बच्चे की हालत गंभीर है। उन्होंने बताया कि जान गंवाने वाले तीन नवजात शिशुओं के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इस घटना से अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहे माता-पिता और रिश्तेदारों में भारी गुस्सा फैल गया। उन्होंने गंभीर लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि वार्ड में आग लगने पर अलार्म नहीं बजा और धुआं तेजी से भरने के बावजूद अपने आप पानी छिड़कने वाली व्यवस्था भी शुरू नहीं हुई। माता-पिता ने बताया कि वहां अफरा-तफरी और डर का माहौल था। दमकल की गाड़ियां पहुंचने से पहले सुरक्षाकर्मियों और ड्यूटी पर मौजूद नर्सों ने घने धुएं और तेज गर्मी के बीच बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश की। अचलपुर के निवासी योगेश सावरकर ने बताया कि उनके आठ दिन के बच्चे को पहली मंजिल पर भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि वह रात में अस्पताल के बाहर सो रहे थे, तभी अफरा-तफरी मच गई। सावरकर ने कहा, ‘‘मेरा बच्चा पहली मंजिल पर था और मैं खुद जाकर उसे नीचे लेकर आया।”उन्होंने बताया कि धुएं से भरे वार्ड में सबसे पहले सुरक्षाकर्मी और एक नर्स पहुंचे थे। ड्यूटी पर मौजूद नर्सों ने बताया कि कम दिखाई देने के बावजूद उन्होंने बच्चों को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वहां स्थिति भयावह थी। ड्यूटी पर मौजूद दो नर्सों ने पत्रकारों से कहा, ‘‘जब वेंटिलेटर जल रहा था, तब हमने बच्चों को बाहर निकाला। मैं इसे शब्दों में नहीं बता सकती, यह बहुत भयानक था। उसके पास ही बच्चे जल रहे थे। हमने उन्हें बचाया, इन्क्यूबेटर बाहर निकाला और बच्चों को दूसरी जगह ले गए।’’उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद सभी नौ बच्चों को बाहर निकालने तक वे लगातार कोशिश करती रहीं। कई परिवारों के लिए बच्चे के जन्म की खुशी अचानक गहरे दुख में बदल गई। पुलगांव गांव के निवासी स्वप्निल बरगे ने बताया कि उन्होंने कुछ घंटे पहले ही अपने परिवार को फोन करके बेटे के जन्म की खुशखबरी दी थी। उनके बेटे का जन्म रविवार को हुआ था। बरगे ने कहा, ‘‘करीब 3:30 बजे मैं एक दोस्त के साथ अस्पताल के गेट पर खड़ा था, तभी मैंने एक महिला के चिल्लाने की आवाज सुनी... फिर अफरा-तफरी मच गई और दमकल की गाड़ी आ गई। मैं अपने बच्चे और पत्नी को ढूंढता रहा, बहुत तलाश किया, लेकिन उसे नहीं ढूंढ सका।’’उन्होंने बताया कि सुबह 7:30 बजे उन्हें यह दुखद खबर मिली कि आग में उनके नवजात शिशु की मौत हो गई। एक अन्य व्यक्ति प्रफुल्ल चोपड़े के पांच दिन के बेटे की भी आग में मौत हो गई। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। चोपड़े ने कहा कि उनकी पत्नी ने पिछले पांच दिन में अपने बच्चे को देखा तक नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि आग लगने पर अलार्म क्यों नहीं बजा और अधिकारियों ने तुरंत काम करने वाली सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल करने के बजाय दमकल की गाड़ियों का इंतजार क्यों किया। इस घटना को लेकर महाराष्ट्र में जल्द ही बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने प्रशासन की कथित लापरवाही और अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने आरोप लगाया कि 2021 में भंडारा अस्पताल में लगी आग के बाद एक समिति ने जो सिफारिशें की थीं, उन्हें लागू नहीं किया गया। भंडारा अस्पताल में आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की मौत हुई थी। देशमुख ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में तुरंत अग्निशमन और बिजली व्यवस्था की जांच कराने की मांग की। कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने घटना के बाद अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने वेंटिलेटर में विस्फोट होने के आधिकारिक दावे पर सवाल उठाया और कहा कि अस्पताल में पहले भी इसी तरह की आग लग चुकी है। उन्होंने बिजली के कनेक्शनों की सुरक्षा की जांच और उपकरणों की आपूर्ति करने वालों की जवाबदेही तय करने की मांग की। स्वास्थ्य मंत्री अबितकर ने चिकित्सा कर्मचारियों का बचाव करते हुए घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्चों को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और हर संभव प्रयास किया। राज्य के राजस्व मंत्री और अमरावती के प्रभारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भरोसा दिलाया कि दमकल कर्मचारियों और लोक निर्माण विभाग के बिजली विभाग की मदद से व्यापक जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे आग लगने के सही कारण का पता चलेगा और जिम्मेदारी तय करके कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Amravati Hospital Fire: एनआईसीयू में आग से 3 नवजातों की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
महाराष्ट्र के अमरावती में एक सरकारी अस्पताल में भर्ती अपने बच्चों के स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे माता-पिता एवं अन्य परिजन सोमवार तड़के अस्पताल के बाहर गहरी नींद में थे और उन्हें तनिक भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लग जाएगी और वहां भर्ती शिशुओं की जान खतरे में पड़ जाएगी। महाराष्ट्र के अमरावती शहर में सोमवार तड़के एक सरकारी अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में आग लगने से तीन शिशुओं की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि जिला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में भीषण आग लग गई, इससे वार्डों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ नवजात बच्चे गहरे काले धुएं से ढक गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाहर सो रहे अभिभावक और सुरक्षा गार्ड अंधेरे में धुएं से भरे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में पहुंचे और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की। अस्पताल के कर्मचारियों ने 36 नवजातों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि इस घटना में तीन नवजातों की मौत हो गई। आग में अपने पांच दिन के बेटे को खोने वाले प्रफुल्ल चोपड़े समेत शोकाकुल अभिभावकों और परिजनों ने आरोप लगाया कि आग लगने के समय ‘फायर अलार्म’ नहीं बजा और पानी छिड़काव (स्प्रिंकल) प्रणाली ने भी काम नहीं किया। चोपड़े ने मी़डिया के समक्ष दावा किया कि घटना के समय ‘फायर अलार्म’ नहीं बजा और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उन्होंने अपने बच्चे को खो दिया। व्यथित पिता ने कहा कि पांच दिन पहले उन्हें पुत्र-प्राप्ति का सुख मिला था और उन्होंने 19 अगस्त को नवजात बच्चे तथा उसकी मां को अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों ने कहा कि चोपड़े की पत्नी ने पिछले पांच दिनों से नवजात को नहीं देखा था। उन्होंने सवाल उठाया कि इस घटना में केवल नवजात ही क्यों प्रभावित हुए और अस्पताल का कोई कर्मचारी क्यों नहीं घायल हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की और आग बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियों के पहुंचने का इंतजार किया। पुलगांव निवासी स्वप्निल बारगे ने बताया कि तड़के करीब 3.30 बजे तक सरकारी महिला अस्पताल की एनआईसीयू में धुआं और अफरा-तफरी फैल गई और खुशी चंद पलों में मातम में बदल गई। उन्होंने रोते हुए कहा, “मैं अपने बच्चे और पत्नी को तलाशता रहा। मैंने बहुत खोजा लेकिन आग लगने के बाद अपने बेटे को नहीं ढूंढ सका। सुबह पता चला कि उसकी मौत हो गई है।”बारगे ने बताया कि उनकी पत्नी ने रविवार को एक अन्य अस्पताल में समय से पहले और कम वजन वाले बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती करने की जरूरत होने के कारण मां और नवजात दोनों को जिला महिला अस्पताल भेजा गया था। उन्होंने कहा, “बेटे के जन्म के बाद मैं बहुत खुश था। मैंने परिवार को फोन करके यह खुशखबरी दी थी। मैं सो नहीं सका और सुबह तीन बजे तक जागता रहा।”कुछ ही घंटों में उनकी खुशी मातम में बदल गई। उन्होंने कहा, “करीब 3.30 बजे मैं एक दोस्त के साथ अस्पताल के गेट पर खड़ा था, तभी एक महिला के चिल्लाने की आवाज सुनी, लेकिन हमें कुछ नहीं बताया गया। फिर अफरा-तफरी मच गई और दमकल की गाड़ियां पहुंचीं। मैं अपने बच्चे और पत्नी को तलाशता रहा, लेकिन उन्हें नहीं ढूंढ सका।”बारगे को सुबह करीब साढ़े सात बजे अपने नवजात बेटे की मौत की जानकारी मिली। वह रोते हुए कहे जा रहे थे कि अब वह अपने बेटे को कभी गोद में नहीं ले पाएंगे, उसके साथ खेल नहीं पाएंगे और उसे बड़ा होते नहीं देख पाएंगे। अमरावती के अचलपुर निवासी योगेश सावरकर ने बताया कि उनकी पत्नी और आठ दिन का बच्चा अस्पताल में भर्ती थे तथा जब आग लगी, उस समय वह अस्पताल की इमारत के बाहर सो रहे थे। सावरकर ने बताया कि उनका बच्चा अस्पताल की पहली मंजिल पर था। एक वार्ड में आग की लपटें फैलने पर वह ऊपर पहुंचे, अपने बच्चे को बचाया और उसे सुरक्षित नीचे ले आए। सावरकर और कुछ अन्य बच्चों के परिजनों ने बताया कि स्थिति बेहद गंभीर थी और वार्ड में भर्ती बच्चों के ऊपर तक आग फैल रही थी। सावरकर ने कहा, “मेरा बच्चा पहली मंजिल पर था और मैं खुद जाकर उसे नीचे लेकर आया। हालांकि, मैंने अस्पताल में अन्य बच्चों को काली राख से ढका देखा।”उन्होंने कहा कि सुरक्षा गार्ड सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने बच्चों को बचाना शुरू किया। उन्होंने एक नर्स को भी बच्चों की जान बचाने में मदद करते देखा। बच्चों के परिजनों ने इस त्रासदी के लिए अस्पताल प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। परिजनों ने कहा कि उन्हें आग लगने की सही वजह का पता नहीं है, लेकिन उन्होंने वार्ड में भीषण आग लगी देखी, जिसके बाद बच्चों के माता-पिता और अस्पताल के कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
Amravati NICU Fire: नर्सों ने बचाई 36 नवजातों की जान, हादसे में 3 की मौत
(तस्वीरों के साथ)अमरावती (महाराष्ट्र), 24 अगस्त महाराष्ट्र के अमरावती शहर में सोमवार तड़के एक सरकारी अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने के बाद घने धुएं और इसकी वजह से हुए अंधेरे का सामना करते हुए नर्सों ने आनन-फानन में पालनों और ‘इनक्यूबेटर’ से नवजात शिशुओं को बाहर निकाला। नर्सों ने उस भयावह दृश्य को याद करते हुए बताया कि जब इकाई में वेंटिलेटर जल गया, तो वे पास ही मौजूद झुलसे हुए बच्चों को बचाने के लिए तेज़ी से दौड़ीं। घने धुएं और आग की लपटों के बावजूद, वे बच्चों को बचाने, ‘इनक्यूबेटर’ को बाहर निकालने और बच्चों को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुँचाने में सफल रहीं। अमरावती के ज़िला महिला अस्पताल में सोमवार तड़के आग लग गई। अस्पताल कर्मियों ने 36 नवजातों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि इस घटना में तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई। यह घटना एनआईसीयू के ‘आउटबाउंड वार्ड’ में हुई, जहाँ नौ नवजात शिशु रखे गए थे। वहाँ ड्यूटी पर मौजूद दो नर्सों ने पत्रकारों को बताया कि वेंटिलेटर में विस्फोट हो गया। उन्होंने याद किया कि कैसे वॉर्ड में आग फैलने पर वेंटिलेटर पूरी तरह जलकर राख हो गया। आग बहुत तेज़ थी, लेकिन उनका पूरा ध्यान बच्चों को बाहर निकालने और उनकी जान बचाने पर था। नर्सों ने कहा, ‘‘जब वेंटिलेटर जल रहा था, तब हमने बच्चों को बाहर निकाला। हम इसे बयां नहीं कर सकते; यह बहुत भयानक था। बच्चे उसके पास ही जल रहे थे; हमने उन्हें बचाया, इनक्यूबेटर को बाहर निकाला और उन्हें सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भेज दिया।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने सभी को बचाने की कोशिश की। हमने बच्चों को बाहर निकाला, वहाँ नौ शिशु थे।’’यह घटना तड़के तीन से साढ़े तीन बजे के बीच हुई। नर्सों ने कहा, ‘‘जैसे ही आग लगी, हम सभी-नर्स, चिकित्सकों और बाकी लोगों ने बच्चों को बाहर निकालने की पूरी कोशिश की। लेकिन बाद में, कुछ बच्चे दिखाई नहीं दे रहे थे; फिर भी हम अंदर गए और सभी को बाहर निकाला। हम पालनों को भी बाहर ले आए।
Amravati NICU Fire: सरकारी अस्पताल में आग से 3 नवजातों की मौत, पिता का रो-रोकर बुरा हाल
महाराष्ट्र के अमरावती के एक सरकारी अस्पताल में स्वप्निल बारगे ने अपने परिजनों को फोन कर बेटा होने की खुशखबरी सुनायी थी। लेकिन चंद घंटे बाद ही वह बदहवास हालत में अपनी पत्नी और एक दिन के बेटे की तलाश में अस्पताल के गलियारों में भटक रहे थे। बाद में उन्हें पता चला कि उनका नवजात बेटा उन तीन शिशुओं में शामिल था जिनकी नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने से मौत हो गई। सोमवार सुबह बारगे की तलाश तब खत्म हुई जब उन्हें खबर मिली कि समय से पहले जन्मा उनका बेटा आग की चपेट में आकर मारा गया। अस्पताल की एनआईसीयू में तड़के एक वेंटिलेटर में आग लगने के बाद तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई। पुलगांव निवासी बारगे ने बताया कि सुबह करीब 3.30 बजे तक सरकारी महिला अस्पताल की एनआईसीयू में धुआं और अफरा-तफरी फैल गई और खुशी चंद पलों में मातम में बदल गई। उन्होंने रोते हुए कहा, “मैं अपने बच्चे और पत्नी को तलाशता रहा। मैंने बहुत खोजा लेकिन आग लगने के बाद अपने बेटे को नहीं ढूंढ सका। सुबह पता चला कि उसकी मौत हो गई है।”बारगे ने बताया कि उनकी पत्नी ने रविवार को एक अन्य अस्पताल में समय से पहले और कम वजन वाले बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती करने की जरूरत होने के कारण मां और नवजात दोनों को जिला महिला अस्पताल भेजा गया था। उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश था क्योंकि मेरे बेटा हुआ था। मैंने परिवार को फोन करके यह खुशखबरी दी थी। मैं सो नहीं सका और सुबह तीन बजे तक जागता रहा।”कुछ ही घंटों में उनकी खुशी मातम में बदल गई। उन्होंने कहा, “करीब 3.30 बजे मैं एक दोस्त के साथ अस्पताल के गेट पर खड़ा था, तभी एक महिला के चिल्लाने की आवाज सुनी लेकिन हमें कुछ नहीं बताया गया। फिर अफरा-तफरी मच गई और दमकल की गाड़ियां पहुंचीं। मैं अपने बच्चे और पत्नी को तलाशता रहा लेकिन उन्हें नहीं ढूंढ सका।”बारगे को सुबह करीब साढ़े सात बजे अपने नवजात बेटे की मौत की जानकारी मिली। वह रोते हुए कहे जा रहे थे कि अब वह अपने बेटे को कभी गोद में नहीं ले पाएंगे, उसके साथ खेल नहीं पाएंगे और उसे बड़ा होते नहीं देख पाएंगे।
Maharashtra के Amravati अस्पताल की NICU में आग लगने से 3 शिशुओं की मौत
महाराष्ट्र के अमरावती में एक सरकारी अस्पताल में भर्ती अपने बच्चों के स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे माता-पिता एवं अन्य परिजन सोमवार तड़के अस्पताल के बाहर गहरी नींद में थे और उन्हें तनिक भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में एनआईसीयू में आग लग जाएगी और वहां भर्ती शिशुओं की जान खतरे में पड़ जाएगी। महाराष्ट्र के अमरावती शहर में सोमवार तड़के एक सरकारी अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने से तीन शिशुओं की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि जिला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भीषण आग लग गई, जिससे कुछ नवजात शिशु काली राख से ढक गए और वार्डों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ माता-पिता ने बताया कि सुरक्षाकर्मी और नर्सें बच्चों को बचाने के लिए धुएं से भरी देखभाल इकाइयों में तुरंत भागे। उन्होंने इस घटना के लिए अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। अस्पताल में भर्ती कुछ बच्चों के परिजनों ने यह भी दावा किया कि वार्ड में पानी के छिड़काव की प्रणाली काम नहीं कर रही थी और आग लगते ही इसे तुरंत सक्रिय किया जाना चाहिए था। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के करीब सवा तीन बजे अस्पताल की एनआईसीयू में आग लगी। इस इकाई में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जा रहा था। अमरावती के अचलपुर निवासी योगेश सावरकर ने बताया कि उनकी पत्नी और आठ दिन का बच्चा अस्पताल में भर्ती थे तथा जब आग लगी, उस समय वह अस्पताल की इमारत के बाहर सो रहे थे। सावरकर ने बताया कि उनका बच्चा अस्पताल की पहली मंजिल पर था। एक वार्ड में आग की लपटें फैलने पर वह ऊपर पहुंचे, अपने बच्चे को बचाया और उसे सुरक्षित नीचे ले आए। सावरकर और कुछ अन्य बच्चों के परिजनों ने बताया कि स्थिति बेहद गंभीर थी और वार्ड में भर्ती बच्चों के ऊपर तक आग फैल रही थी। सावरकर ने कहा, “मेरा बच्चा पहली मंजिल पर था और मैं खुद जाकर उसे नीचे लेकर आया। हालांकि, मैंने अस्पताल में अन्य बच्चों को काली राख से ढका देखा।”उन्होंने कहा कि सुरक्षा गार्ड सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और बच्चों को बचाना शुरू किया। उन्होंने एक नर्स को भी बच्चों की जान बचाने में मदद करते देखा। बच्चों के परिजनों ने इस त्रासदी के लिए अस्पताल प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। परिजनों ने कहा कि उन्हें आग लगने की सही वजह का पता नहीं है, लेकिन उन्होंने वार्ड में भीषण आग लगी देखी, जिसके बाद बच्चों के माता-पिता और अस्पताल के कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
महाराष्ट्र में लापरवाही का कहर! अमरावती NICU में लगी भयानक आग! हादसे में 3 नवजातों की दर्दनाक मौत
महाराष्ट्र के अमरावती शहर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। सोमवार तड़के ज़िला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में आग लगने से 3 नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल कर्मियों और राहत दल की सतर्कता से 36 अन्य नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचा लिया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के एनआईसीयू में एक वेंटिलेटर में तड़के करीब सवा तीन बजे आग लग गई। इकाई के इस हिस्से में समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को देखरेख के लिए रखा जाता है। अमरावती के पुलिस आयुक्त राकेश ओला के अनुसार, यह हादसा तड़के करीब 3:15 से 4:00 बजे के बीच अस्पताल की नई इमारत में स्थित NICU वार्ड में हुआ। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एवं अमरावती के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उन्होंने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घायलों को सभी आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन भी दिया। ओला ने बताया कि एनआईसीयू के तीन हिस्से हैं। इनमें एक अस्पताल में जन्मे शिशुओं, दूसरा बाहर से आए शिशुओं और तीसरा अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के लिए तैयार बच्चों की देखभाल के लिए है। इन तीनों हिस्सों में कुल 39 शिशु भर्ती थे। उन्होंने बताया कि बाहर से लाए गए शिशुओं वाले हिस्से में रखे एक वेंटिलेटर में आग लग गई। इसे भी पढ़ें: Pakistan Terrorist Attack | खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षाकर्मियों की जांच चौकी पर बड़ा आतंकी हमला, दो जवानों की मौत ओला ने बताया कि वहां मौजूद तीन शिशुओं की आग लगने के कारण मौत हो गई, जबकि छह अन्य को बचा लिया गया। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि छह शिशुओं को एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बावनकुले ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल के कर्मचारी आग लगते ही मौके पर पहुंचे और उन्होंने अन्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल की नयी इमारत में स्थित विशेष नवजात देखभाल इकाई में तड़के करीब चार बजे आग लगी। उन्होंने बताया कि इस इकाई में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जा रहा था।बावनकुले ने बताया कि कुछ शिशुओं को आगे के इलाज के लिए ‘डिवीजनल रेफरल सर्विसेज’ अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि वहां चार बच्चों का इलाज किया जा रहा है और इनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई है। इसे भी पढ़ें: Punjab Governor Gulab Chand Kataria ने Fazilka बॉर्डर पर BSF पोस्ट का दौरा किया ओला ने बताया कि अग्निशमन विभाग के कर्मियों और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की विद्युत शाखा को इस घटना के बारे में सूचना दे दी गई है और वे आग लगने के कारणों का पता लगाएंगे। बावनकुले ने शिशुओं की मौत पर गहरा दुख जताते हुए उनके परिजनों को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, ‘‘अमरावती में आज हुई घटना से मैं बेहद दुखी हूं। मेरा मन बहुत व्यथित है।’’ मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार मृत बच्चों के परिजनों के साथ खड़ी है और सरकार एवं प्रशासन हरसंभव मदद मुहैया करा रहे हैं।’’ बावनकुले ने कहा कि उन्होंने घटना के बारे में संबंधित अधिकारियों से बातचीत की है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi #WATCH | Amravati, Maharashtra: Three newborn babies lost their lives after a fire broke out in the Neonatal Intensive Care Unit (NICU) of the District Women’s Hospital. According to preliminary information, the fire erupted at around 3.30 am on the third floor of the hospital,… pic.twitter.com/fhSQvykujw — ANI (@ANI) August 24, 2026
महाराष्ट्र: अमरावती महिला अस्पताल के NICU में लगी आग, 39 नवजात में से तीन मासूमों की मौत; छह को किया गया शिफ्ट--Maharashtra Amravati Hospital Fire: Several Newborns Die in NICU Blaze, Many Shifted Updates Hindi

