प्रसिद्ध यूट्यूबर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने कथित 'वोट चोरी' और चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। राठी ने लंदन में मौजूद अपने समर्थकों और भारतीय प्रवासियों से शनिवार दोपहर को पार्लियामेंट स्क्वायर पर एकत्र होने की अपील की है। शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी देते हुए राठी ने बताया कि वे लंदन पहुंच चुके हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, अगर आप यहां हैं, तो कल (शनिवार) दोपहर 12 बजे पार्लियामेंट स्क्वायर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने का समय आ गया है। उन्होंने अपने संदेश का अंत जय हिंद के साथ किया। पिछले हफ्ते CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले राठी को हिरासत में लिया गया था PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले, दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम (हरियाणा) के सेक्टर 56 स्थित उनके आवास से ध्रुव राठी को हिरासत में ले लिया था। उन्हें शनिवार देर रात रिहा कर दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए एहतियाती कदमों के तहत पुलिस ने राठी को हिरासत में लिया था। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा चिंताओं और जरूरी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। साथ ही, प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए कई अहम जगहों पर पुलिस बल तैनात किया गया था। CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन बुलाया था। उनका आरोप था कि मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) में गड़बड़ियां की गई हैं और मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में बदलाव किए गए हैं। पार्टी ने 'X' पर एक पोस्ट के जरिए राठी की हिरासत की पुष्टि की और आरोप लगाया कि सरकार उन युवाओं से डरी हुई है जो चुप रहने से इनकार करते हैं। CJP के विरोध प्रदर्शन की योजना के कारण कनॉट प्लेस बाजार बंद करना पड़ा पिछले हफ्ते प्रस्तावित इस विरोध प्रदर्शन के चलते 'न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन' (NDTA) को शनिवार के दिन कनॉट प्लेस बाजार बंद रखने की घोषणा करनी पड़ी थी। NDTA के संयुक्त सचिव अमित गुप्ता ने कहा कि यह फैसला जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि सप्ताहांत (वीकेंड) के दौरान इस व्यावसायिक केंद्र में हजारों लोग आते हैं। राठी की ताजा घोषणा के अनुसार, अब यह प्रस्तावित प्रदर्शन लंदन में होगा, जहाँ उन्होंने अपने समर्थकों से शनिवार दोपहर को पार्लियामेंट स्क्वायर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास इकट्ठा होने को कहा है। उनकी पोस्ट में मांग की गई है कि मतदान में हुई कथित अनियमितताओं के मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाए। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi I’ve just reached London It’s time the world sees the reality of vote chor and murderer of democracy. International danka bajane ka time aa gaya hai Join the protest tomorrow in front of Mahatma Gandhi’s statue in parliament square at 12pm if you’re here Jai Hind — Dhruv Rathee (@dhruv_rathee) October 16, 2026
Sant Kabir Nagar News: गायत्री महायज्ञ के शुभारंभ पर भक्तिमय हुआ माहौल
The atmosphere became filled with devotion at the commencement of the Gayatri Mahayajna.
Pauri Garhwal के Dhari Devi Temple में दिन में तीन बार स्वरूप बदलती है मां काली की प्रतिमा
देवभूमि उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर है, जहां पर एक ऐसा मंदिर है, जो बेहद प्रसिद्ध है। धारी देवी मंदिर, मुख्य रूप से मां काली को समर्पित है। यह मंदिर क्षेत्र में पूजनीय होने के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी काफी प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है। धारी देवी मंदिर को चार धाम का रक्षक भी कहा जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। कहां स्थित है मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के किनारे धारी देवी मंदिर के पास है। यह प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर है। वहीं धारी माता को देवी कालीसौर के रूप में भी जाना जाता है। इनका आशीर्वाद पाने के लिए भक्त दूर-दूर से इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। वहीं मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है। इसे भी पढ़ें: Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता दिन में तीन बार रूप बदलती है मूर्ति स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में स्थित धारी देवी की प्रतिमा दिन में 3 बार अपना रूप बदलती है। सुबह के समय छोटी बालिका, दिन में महिला और शाम को उनका स्वरूप बूढ़ी महिला के रूप में दिखाई देता है। जानें क्यों प्रसिद्ध है मंदिर पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक बार भीषण बाढ़ की वजह से मंदिर बह गया था और धारी देवी की मूर्ती धारो नामक गांव के पास एक चट्टान के पास रुक गई थी। वहीं गांव वालों को मूर्ति से विलाप की आवाज सुनाई दी और इस आवाज ने उनको मूर्ति को स्थापित किए जाने के निर्देश दिए। तब गांव वालों ने मिलकर फिर उसी स्थान पर धारी माता की मूर्ति को स्थापित किया। वहीं अन्य मान्यता के अनुसार, साल 2013 में केदारनाथ बाढ़ से ठीक पहले किसी काम के कारण धारी देवी मंदिर को स्थानांतरित किया गया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि धारी देवी के प्रकोप की वजह से ही बाढ़ आई थी। फिर बाद में उसी जगह पर मंदिर का निर्माण कर देवी की मूर्ति को स्थापित किया। इसलिए धारी देवी मंदिर की इतनी अधिक मान्यता है। मंदिर की खासियत धारी देवी मंदिर में देवी को 'उत्तराखंड की रक्षक देवी' और चारों धाम की संरक्षक के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर को 108 शक्ति स्थलों में से एक माना जाता है। धारी देवी की मूर्ति का सिर्फ ऊपरी आधा भाग पूजनीय है। वहीं रुद्रप्रयाग के कालीमठ में मूर्ति का निचला हिस्सा पूजा जाता है। धारी देवी के दर्शन किए बगैर चार धाम यात्रा अधूरी मानी जाती है। हर साल नवरात्रि के मौके पर देवी कालीसौर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
October Long Weekend: Dussehra पर Kolkata और Ayodhya जाएं या Tiger Reserve में करें Jungle Safari
अक्तूबर का महीना आते ही मौसम करवट बदलने लगता है। बारिश का दौर काफी हद तक थम चुका है और आसमान साफ नजर आने लगता है। कई शहरों में घूमने के लिए भी मौसम सुहाना होने लगता है। वहीं इस महीने में कई बड़े त्योहार और राष्ट्रीय पर्व आते हैं और इस दौरान छुट्टियां भी मिलती हैं। यही वजह है कि अक्तूबर को देश में ट्रैवल सीजन की शुरूआत के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में अगर आप भी इस साल ऑफिस की छुट्टियों में एक छोटी सी ट्रिप प्लान करना चाहते हैं, तो अक्तूबर 2026 में आपको कई लॉन्ग वीकेंड मिल सकती हैं। ऐसे में आप इन वीकेंड पर अपना ट्रिप प्लान कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि अक्तूबर महीने में कौन-कौन से लॉन्ग वीकेंड हैं और इन छुट्टियों में आप कहां-कहां जा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Pitru Paksha पर Gaya में Pind Daan का महत्व, Patna से यात्रा रूट और पूजा के नियम अक्टूबर में लॉन्ग वीकेंड अक्तूबर 2026 में सबसे अच्छा लॉन्ग वीकेंड 2 से 4 अक्तूबर का है, जबकि दशहरा के आसपास 17 से 20 अक्तूबर का ब्रेक कुछ राज्यों और ऑफिस कैलेंडर के हिसाब से बना सकती हैं। वहीं कुछ राज्यों में 24-26 अक्तूबर में भी छुट्टी होगी। दशहरा और दुर्गा पूजा वाला वीकेंड 17 और 18 अक्तूबर 2026 को वीकेंड है और 19 अक्तूबर को कुछ राज्यों में महानवमी तो कुछ राज्यों में दुर्गा पूजा की छुट्टी है। फिर 20 अक्तूबर को दशहरा की छुट्टी होगी। ऐसे में 17 से 20 अक्तूबर तक चार दिनों के लिए ट्रिप प्लान कर सकते हैं। दशहरा के वीकेंड पर यहां घूमें आप दशहरा के लंबे वीकेंड पर कोलकाता शहर की दुर्गा पूजा देखने जा सकते हैं। यहां शहर के पंडाल, रोशनी और सांस्कृतिक माहौल को बेहद करीब से देखने का मौका मिलेगा। इसके अलावा आप वाराणसी जा सकती हैं। यहां पर दशहरा की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को देख पाएंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट और रामनगर की परंपराएं आपकी यात्रा को यादगार बना देंगी। आप इस वीकेंड अयोध्या घूमने के लिए जा सकती हैं। यहां पर राम मंदिर, सरयू घाट और अन्य जगहें देख सकती हैं। वहीं मैसूर में दशहरे का माहौल भी देखने लायक होचा है। यहां के महल और शहर की सजावट इस यात्रा को खास बना देगी। 24 से 26 अक्टूबर का वीकेंड 24 और 25 अक्तूबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी है। वहीं 26 अक्तूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती की छुट्टी होगी। हालांकि यह छुट्टी कुछ राज्यों में है। ऐसे में अगर आपके राज्य में भी यह अवकाश मिलता है, तो आप इस तीन दिन के ब्रेक में किसी छोटी ट्रिप के लिए जा सकते हैं। अक्तूबर का लास्ट वीकेंड अक्तूबर के लास्ट वीकेंड में पहाड़ों की छोटी छुट्टी पर जा सकते हैं। अगर आप शहर और पहाड़ दोनें को एक ट्रिप में जोड़ना चाहते हैं, तो चंडीगढ़ और कसौली एक अच्छा कॉम्बिनेशन हो सकता है। इसके अलावा भोपाल जाने का प्लान कर सकती हैं। यहां पर पुराने शहर, झीलें और आसपास की ऐतिहासिक स्थलों को देख सकती हैं। हम्पी का इतिहास और इसकी विरासत को बेहद करीब से जान सकती हैं। ऐसे में आप इस वीकेंड हम्पी जा सकती हैं। वाइल्ड लाइफ ट्रिप अक्तूबर में आप पहाड़ों या शहरों में घूमने की बजाय जंगल सफारी भी ट्राई कर सकती हैं। मानसून के बाद कई राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुलने लगते हैं। वहीं ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के कोर जोन के 01 अक्तूबर से खुलने की जानकारी सामने आई है। तो वहीं कार्बेट के कुछ जोन अक्तूबर महीने में दोबारा खुल सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान अपने ऑफिस कैलेंडर से छुट्टियां जरूर मिला लें, क्योंकि सरकारी और प्राइवेट कंपनियों की छुट्टियां अलग-अलग हो सकती हैं। पहले से ट्रेन और फ्लाइट आदि का टिकट बुक कर लें। क्योंकि त्योहारों या वीकेंड पर प्राइज बढ़ सकता है। पहले से होटल आदि की बुकिंग कर लें, क्योंकि वीकेंड पर होटल के किराएं में बदलाव हो सकता है। ट्रिप प्लान करने से पहले मौसम की जानकारी ले लें। वहीं इस महीने पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ जाती है। अगर आप त्योहार वाली ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो घूमने की जगह स्थानीय कार्यक्रमों और भीड़ के हिसाब से अपनी ट्रिप प्लान करें।
Pitru Paksha पर Gaya में Pind Daan का महत्व, Patna से यात्रा रूट और पूजा के नियम
इस बार 26 सितंबर 2026 से पितृपक्ष की शुरूआत हो रही है। आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस दौरान पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रतिपदा तिथि से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्धकर्म जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वज पृथ्वीलोक पर अपने वंशजों पर कृपा बरसाने हैं। इस दौरान विधि-विधान से किए गए श्राद्धकर्म से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर पितर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। इसलिए श्राद्धकर्म नियमों के साथ पूर्ण किए जाते हैं। अगर आप पहला श्राद्ध करने जा रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों को जान लेना चाहिए। गया में पिंडदान का महत्व सनातन परंपरा में गया को पितृकर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक माना गया है। यहां पर श्राद्ध और पिंडदान का संबंध पितरों के स्मरण, श्रद्धा और पितृ ऋण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गया में पितृकर्म करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह सिर्फ दोष दूर करने का उपाय नहीं बल्कि इसको पितरों के प्रति कर्तव्य के रूप में समझना चाहिए। ऐसे पहुंचे गया गया जाने के लिए सबसे पहले आपको राजधानी पटना तक रेल या हवाई यात्रा से जाना होगा। फिर पटना और उसके आसपास के शहरों से बड़ी आसानी से गया तक के ट्रेन मिल जाती है। अगर आप पटना से जा रही हैं, तो गया जाने में 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। फिर गया जंक्शन पर उतरकर टैक्सी या ऑटो की सहायता से पिंडदान स्थलों तक जाएं। पटना से सड़क के रास्ते गया तक जाने के लिए बस, टैक्सी या प्राइवेट कार कर सकते हैं। इसके बाद स्थानीय परिवहन की सहायता से पिंडदान स्थलों तक पहुंच सकते हैं। फ्लाइट से जाने वाले यात्रा भी पटना के बाद प्राइवेट टैक्सी से गया तक जा सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान पितृपक्ष में गया में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए होटल, ट्रेन और स्थानीय परिवहन की बुकिंग पहले करना उपयोगी साबित हो सकता है। पूजा-पिंडदान से जुड़ी दक्षिणा और सामग्री की कीमत पहले ही स्पष्ट करें। किसी भी पैकेज की बुकिंग करने से पहले इसमें शामिल सुविधाओं और ताजा मूल्यों की पुष्टि कर लें। पिंडदान की विधि और जरूरी सामग्री परिवार की परंपरा और संबंधित पुरोहित के मार्गदर्शन के हिसाब से अलग हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित/पुरोहित से पहले सही जानकारी ले लें।
गयाजी में अनोखी आस्था: जर्मनी, रूस और यूक्रेन की विदेशी महिलाओं ने फल्गु तट पर किया पिंडदान
भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक ऊर्जा और मोक्ष की पावन भूमि के रूप में विश्वविख्यात बिहार के गयाजी (Gaya Ji) से इस वक्त एक ऐसी अद्भुत, अलौकिक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पितृपक्ष के पवित्र अवसर पर इन दिनों गयाजी के फल्गु तट और विष्णुपाद मंदिर के प्रांगण में देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से विदेशी नागरिक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई हैं जर्मनी, रूस और यूक्रेन जैसे यूरोपीय देशों से आईं विदेशी महिलाएं, जिन्होंने सनातन परंपराओं में पूरी आस्था दिखाते हुए अपने पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए गयाजी की पवित्र वेदी पर विधिवत पिंडदान और तर्पण किया। युद्ध और संकट से घिरे देशों से आने वाली इन विदेशी महिलाओं के मन में भारतीय अध्यात्म और पूर्वजों के प्रति इस प्रकार का अगाध प्रेम देखकर वहां मौजूद स्थानीय तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और देश-विदेश से आए अन्य तीर्थयात्री भी पूरी तरह से दंग रह गए। आज के इस विस्तृत, ज्ञानवर्धक और विशेष आलेख में हम आपको गयाजी की इस अनूठी आस्था, विदेशी नागरिकों के बीच सनातन धर्म के बढ़ते प्रभाव और पिंडदान की इस प्राचीन परंपरा के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।पितृपक्ष के दौरान गयाजी की पावन भूमि पर उमड़ती है वैश्विक आस्था की भीड़हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में जब पितृपक्ष का अनुष्ठान शुरू होता है, तो बिहार की यह गयाजी नगरी पूरी दुनिया के नक्शे पर एक बड़े आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरकर सामने आती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के चरण चिह्नों से पवित्र हुई इस पावन धरती पर अपने पितरों का पिंडदान करने से उन्हें सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। यही वजह है कि केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी सैलानी और योग-वेदांत से जुड़े लोग भी इस अलौकिक शक्ति से खिंचे चले आते हैं। इस बार जर्मनी, रूस और यूक्रेन की जिन महिलाओं ने पिंडदान किया, वे पिछले कुछ समय से भारत में रहकर सनातन संस्कृति, योग और भारतीय दर्शन का अध्ययन कर रही थीं। जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए यह अनुष्ठान कितना महत्वपूर्ण है, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के पूरी श्रद्धा और भारतीय परिधान (साड़ी और कुर्ता) में सजकर गयाजी के फल्गु तट पर आकर इस पवित्र कर्मकांड में हिस्सा लिया।जर्मनी, रूस और यूक्रेन की महिलाओं ने कैसे संपन्न कराया पूरा कर्मकांड?जब विदेशी महिलाएं गयाजी के तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में पिंडदान करने के लिए बैठीं, तो उनका समर्पण देखने लायक था। उन्होंने हाथों में कुश, अक्षत, काले तिल और फूल लेकर संस्कृत के उन मंत्रों को पूरी निष्ठा के साथ दोहराया जिनका उच्चारण पुरोहित करवा रहे थे। रूस और यूक्रेन से आईं महिलाओं ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया कि उनके देशों में अपने पूर्वजों को याद करने की अपनी परंपराएं हैं, लेकिन भारत की यह सनातन परंपरा विज्ञान और आत्मा के रहस्यों से जुड़ी एक ऐसी जीवंत व्यवस्था है जो इंसान को अंदर से शांति देती है। युद्ध की विभीषिका झेल रहे यूक्रेन और रूस की महिलाओं द्वारा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दुख, शांति और श्रद्धा की भाषा पूरी दुनिया में एक ही होती है। स्थानीय पंडा समाज ने इन विदेशी महिलाओं को बहुत ही सहजता और विस्तार से एक-एक अनुष्ठान की विधि समझाई, जिसे उन्होंने पूरी तन्मयता के साथ पूरा किया और अंत में फल्गु नदी में तर्पण कर अपने पितरों को नमन किया।सनातन संस्कृति का वैश्विक विस्तार और वसुधैव कुटुंबकम की सच्ची तस्वीरआज के इस आधुनिक और तकनीकी युग में जहां पूरी दुनिया भौतिकतावाद की दौड़ में भाग रही है, वहीं भारतीय संस्कृति और दर्शन के प्रति विदेशियों का यह बढ़ता आकर्षण इस बात का संकेत है कि मानवता को शांति का असली मार्ग केवल सनातन परंपराओं से ही मिल सकता है। गयाजी में हर साल आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जो यहां आकर न केवल पिंडदान जैसी प्राचीन परंपराओं को देखते हैं बल्कि खुद इसका हिस्सा भी बनते हैं। जर्मनी और यूरोपीय देशों से आए कई शोधार्थियों का यह मानना है कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पूर्वजों और ब्रह्मांड के बीच का जो संतुलन सिखाया गया है, वह दुनिया के किसी अन्य कोने में देखने को नहीं मिलता। गयाजी के इन आयोजनों ने एक बार फिर से 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरा विश्व एक परिवार है) के उस प्राचीन भारतीय सूत्र को चरितार्थ कर दिया है, जहां हर संस्कृति और देश के लोग आकर एक ही ईश्वर और अपनी जड़ों से जुड़ जाते हैं।स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों द्वारा की गई मेहमाननवाजियों की सराहनागयाजी पहुंचे इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा, सुविधा और उनके धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहित समाज ने विशेष इंतजाम किए थे। पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें लगातार इस बात का ध्यान रख रही थीं कि देश-विदेश से आने वाले किसी भी तीर्थयात्री को दर्शन या पिंडदान के दौरान कोई असुविधा न हो। विदेशी महिलाओं ने भी भारतीय आतिथ्य सत्कार और गया के लोगों के खुले दिल से स्वागत की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गयाजी की इस धरती पर आकर उन्हें जो मानसिक शांति और अपनेपन का अहसास हुआ है, उसे वे कभी नहीं भूल सकतीं। यह घटना न केवल गयाजी के इतिहास में दर्ज हो गई है, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दे गई है कि आस्था की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती और पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव हर इंसान के दिल में समान रूप से धड़कता है।
Manipur के Loktak Lake पर बसा Floating Village Champu Khangpok पानी पर तैरता है
क्या आप कभी ऐसी जगह पर घूमने के लिए गए हैं, जहां पर कदम रखते ही जमीन डगमगाने लगे। आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप चल नहीं बल्कि तैर रहे हैं। ऐसा दृश्य सोचने पर एकदम सपने जैसा महसूस होता है। ऐसा ही कुछ मणिपुर का फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अनोखे और रोमांच से भरपूर जगह फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक के बारे में बताने जा रहे हैं। फ्लोटिंग विलेज है चंपू खंगपोक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में एक तैरता हुआ गांव है। जिसका नाम चंपू खंगपोक है। यह भारत की फेमस लोकटक झील पर बसा है, जोकि करीब 240 वर्ग किमी के आकार में फैली है। इस गांव के लोगों ने पानी के साथ जीना सीख लिया है, तभी तो आपको इस गांव में पानी पर चलते लोग, तैरते घर और द्वीप देखने को मिलेंगे। इसे भी पढ़ें: Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल जानें डगमगाती जमीन का रहस्य चंपू खंगपोक गांव के तैरने के पीछे कोई जादू नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे साइंस का कमाल है। इसके पीछे की वजह इस स्थान की प्रकृति और बायोमास का प्रोसेस है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव की जमीन किसी चट्टान या मिट्टी से नहीं बनी है, बल्कि यह फुम्डी नाम की प्राकृतिक जमीन है। फुम्डी जमीन जड़ों, सड़े-गले पौधों, मिट्टी और जैविक पदार्थों की परत से बनी होती है। वहीं साल-दर-साल जब इन सभी चीजों का जमावड़ा शुरू होकर एक जगह पर एकत्र होता है। तो इसकी परत से जमीन बन जाती है। यह जमीन इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि इन पर घरों तक का निर्माण किया जा सकता है। बदलती है घरों की लोकेशन यहां पर रहने वाले लोगों के घरों को फुमशंग कहा जाता है, जो अपनी लोकेशन को बदलते रहते हैं। क्योंकि यह घर जमीन पर नहीं बल्कि फुम्डी पर बने हैं, तो पानी के बहाव और हवा के दबाव की वजह से इनकी लोकेशन बदलती रहती है। यही कारण है कि चंपू खंगपोक दुनियाभर में अपनी इसी विशेषता की के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। देख सकेंगे तैरता हुआ नेशनल पार्क अनोखे गांव के अलावा आप लोकटक झील में तैरता हुआ कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क भी देख सकेंगे। यह पार्क विष्णुपुर जिले में हैं, जोकि लोकटक झील के दक्षिण पश्चिम में करीब 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र फैला है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर विलुप्त हो रहे संगाई हिरण रहते हैं, यह उनका अकेला आवास स्थल है।
Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल
पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है और यह 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं। वहीं, गया जी जाकर पिंडदान भी करते हैं। यदि आप भी गया जी जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस लेख में जान लें कि सफर शुरु करने से पहले रुट और खर्च का अंदाजा लग जाए। बिहार का गया पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने वाली खास जगहों में माना जाता है। इस समय गया में काफी संख्या में लोग जाते हैं। असल में गया में पिंजदान के लिए कई जगहें हैं और कुछ वेदियों को खास माना जाता है। ऐसे में आपके लिए पूरा गाइड लेकर आए हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं ट्रेन, फ्लाइट, रहने और पिंडदान से संबंधित खर्च की जानकारी आपको बताने जा रहे हैं। गया जी में पिंडदान के लिए हैं 48 प्रमुख वेदियां बिहार टूरिज्म के मुताबिक, गया में पिंडदान के लिए कुल 48 मुख्य वेदियां है। इसमें विष्णुपद मंदिर, गया शिरोमणि मंदिर, फल्गु नदी, पंचतीर्थ, अक्षय वट, प्रेतशिला, रामशिला और सीता कुंड सबसे खास माने जाते हैं। श्राद्ध के समय यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। दिल्ली से गया कैसे पहुंचें? यदि आप दिल्ली से गया जी जाना चाहते हैं, तो पहले पटना तक पहुंचना होगा। आप पटना ट्रेन या फ्लाइट से भी पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना और आसपास के शहरों से गया जाने के लिए ट्रेन आसानी से मिल जाती है। पटना से गया पहुंचने के लिए आपको करीब 2 घंटे का समय लग सकता है। जब आप गया जी जंक्शन पहुंच जाएं तो पिंडदान वाली जगह तक जाने के लिए ऑटो या टैक्सी मिल जाएगी। फ्लाइट से जाने का क्या तरीका है? आपके पास समय की दिक्कत है, तो आप फ्लाइट के जरिए आप पटना पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना से गया जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी लेना होगा। लेकिन इससे आपका कुल खर्चा हो सकता है। फिर आप पटना से गया जा सकते हैं, इसके लिए आपको बस, टैक्सी या अपनी कार भी बुक कर सकते हैं। दिल्ली से ट्रेन का कितना खर्च आएगा? दिल्ली से ट्रेन गया जाती है और टिकट करीब 500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक हो सकता है। वैसे ट्रेन की टिकट क्लास के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। यदि आप फ्लाइट से जाना चाहती हैं, तो इसका खर्चा करीब 5000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का हो सकता है। गया में रुकने का किचना खर्चा आएगा? गया में रुकने के लिए अपने बजट के हिसाब से रह सकते हैं। आपकी पंसद और सुविधा के अनुसार से ठहरने का खर्च करीब 3000 से 5000 रुपये तक का हो सकता है। इतना ही नहीं, खाने-पीने पर करीब 2000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। पिंडदान और पंडा की फीस क्या है? वैसे पिंडदान के लिए यहां का खर्च सभी के लिए एक जैसा नहीं है। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि कितने लोग जा रहे हैं और किस तरह की पूजा कराई जाएगी। बताते चलें कि नॉर्मल पिंडदान और पूजा-पाठ कराने में आपको 5100 से करीब 11,000 रुपये देने होंगे। गया जी जाने से पहले बजट ऐसे समझें यदि आप गया जा रहे है, तो आपको मोटा-मोटी खर्चा इतना आ सकता है, बजट के कुछ पॉइंट्स को जरुर समझें। दिल्ली से ट्रेन: करीब 500 से 3,000 तक फ्लाइट से पटना: करीब 5,000 से 10,000 तक गया में स्टे करना: करीब 3,000 से 5,000 तक खान-पान: करीब 2000 तक पिंडदान और पूजा-पाठ: करीब 5100 से 11,000 तक पटना से गया: ट्रेन, बस, टैक्सी या प्राइवेट कार का ऑप्शन पितृपक्ष मेला 2026: 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक
हिंदू धर्म में देवी सरस्वती को कला और ज्ञान की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती को वेदों की माता भी कहा जाता है। देवी सरस्वती का स्वरूप निर्मल चांद की ओर जिनके मुख पर दिव्य चमक है। पीत और श्वेत रंग के वस्त्र पहने और उनको कमल के फूल पर विराजमान और हाथों में वीणा धारण किए दिखाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जो भी व्यक्ति नियमित रूप से मां के मंत्रों का जाप सच्चे मन से करता है, उसको मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देवी सरस्वती के कुछ खास मंत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका जप करने से आप स्वयं में बड़ा बदलाव महसूस कर सकेंगे। दर्शन, रहस्यवाद या उससे जुड़े विषय जो भी व्यक्ति रहस्यवाद, दर्शन या इससे जुड़े किसी भी तरह के विषयों का अध्ययन कर रहा होता है, उनके लिए यह मंत्र मस्तिष्क में महान विचारों को धारण करने और उन पर सोचने-समझने की क्षमता प्रदान करता है। इस मंत्र से व्यक्ति की मेधा और बुद्धि दोनों को जागृत करता है। इसे भी पढ़ें: Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता मंत्र- ऊं ब्रह्म ज्ञानायै नम: इस मंत्र का अर्थ है कि मैं ब्रह्मांड में मौजूद उस चेतन बुद्धि की शक्ति को नमन करते हैं। यह मंत्र देवी सरस्वती के उस शक्ति रूप को वर्णित करता है, जोकि खुद ब्रह्मांड की बुद्धि के पीछे मौजूद हैं। खगोल, भौतिकी, रसायन विज्ञान या संबंधित विषय जो भी व्यक्ति खगोल, भौतिकी या अलग-अलग तरह के रसायन विज्ञान और अन्य तरह के विषयों का अध्ययन करता है, उनको इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र - ऊं महा विद्यायै नम: इस मंत्र का अर्थ है कि महान ज्ञान के पीछे स्थित और इससे उत्पन्न करने वाली शक्ति को नमन करते हैं। मां सरस्वती को महान ज्ञान और उसकी अनुभूति के पीछे स्थित शक्ति के रूप में इस मंत्र को वर्णित किया जाता है। धार्मिक विषयों से जुड़े लोगों के लिए जो भी लोग धर्म के विचारों और ग्रंथों में गहराई से उतारने की कोशिश करते हैं। जिससे किसी भी धर्म या संस्कृति के शास्त्रों के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करते हैं। यह मंत्र धार्मिक विषयों से जुड़े लोगों की बौद्धिक क्षमताओं को भी अधिक तेज बनाने का काम करता है। मंत्र- वेदानां मातरं पश्य मत्सथां देवीं सरस्वती। इस मंत्र का अर्थ है कि देखो, वेदों की माता मां सरस्वती मुझमें निवास करती हैं। इन तीनों मंत्रों में मां सरस्वती को ब्रह्मांड में मौजूद बुद्धि, ज्ञान को उत्पन्न करने वाली शक्ति और अंदर निवास करने वाली वेदों की मां के रूप में पुकारा गया था।
Gaya Ji News: विजय कुमार सिन्हा बोले- कृषि की उन्नति के लिए सरकार सजग:
बिहार के कृषि मंत्री और गया जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गया सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई.कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने और किसानों की उन्नति के लिए सरकार पूरी तरह सजग और गंभीर है. प्रेस कॉन्फ्रेंस गयाजी सर्किट हाउस में आयोजित की गई
Gaya News: 4 मोबाइल के साथ धराए दो चोर
गया जंक्शन पर 'ऑपरेशन यात्री सुरक्षा' के तहत आरपीएफ और जीआरपी के संयुक्त अभियान में यात्रियों से चोरी किए गए चार मोबाइल फोन के साथ दो चोरों को गिरफ्तार किया गया है।
हीरामंडी को लेकर संजय लीला भंसाली ने खोले ये राज़
संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित सीरीज़ हीरामंडी नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो गई है, जिसमें सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, और मनीषा कोईराला जैसे सितारों की कास्ट शामिल है। इस श्रृंखला ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि भंसाली ने खुलासा किया कि उनकी प्रारंभिक कास्टिंग विकल्प फाइनल कास्ट से अलग थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने मूल रूप से हीरामंडी को रेखा, करीना कपूर और रानी मुखर्जी के साथ एक फिल्म के रूप में देखा था। हालांकि, स्टोरी के बड़े होनेके कारण इसे फिल्म के बजाय एक सीरीज़ में बदल दिया गया। भंसाली ने बताया कि वह पिछले 18 वर्षों से हीरामंडी के कॉसेप्ट पर काम कर रहे थे। श्रृंखला स्वतंत्रता से पहले के लाहौर में स्थित हीरा मंडी जिले में दरबारऔर नवाबों पर है। शुरू में, कास्टिंग ने वर्षों में कई बदलावों का सामना किया, जिसमें माहिरा खान, इमरान अब्बास, और फवाद खान जैसे नाम विभिन्न समयों पर विचार किए गए। अंततः, प्रोडक्शन ने एक नई कास्ट पर फैसला किया । हीरामंडी एक पीरियड ड्रामा है जिसका निर्देशन संजय लीला भंसाली और मिताक्षरा कुमार ने किया है। कहानी लाहौर के हीरा मंडी जिले में तवायफों के जीवन पर है, फिल्म की कहानीब्रिटिशकाल के दौरान की कहानी है, जहां एक वैश्यालय की महिलाएं आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लड़ रही होती हैं।। प्रमुख अभिनेताओं के साथ, श्रृंखला में मनीषा कोईराला, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख, महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फरदीन खान, शेखर सुमन और अध्ययन सुमन भी नवाबों की भूमिका में हैं। जियो फाइबर को कड़ी टक्कर दे रहा है एयरटेल एक्सट्रीम फाइबर, जानिए सभी फ्री ओटीटी प्लान्स की लिस्ट ₹10,000 से कम में मिलेंगे ये 5 बेहतरीन स्मार्ट टीवी, पूरा दिन देखने का मन करेगा जियो सिनेमा के दो नए प्रीमियम प्लान लॉन्च, सिर्फ ₹29 में मिलेंगे इतने फायदे
Gayatri Joshi Birthday Special : SRK संग सुपरहिट फिल्म देने के बाद भी इंडस्ट्री से क्यों गायब हो गई गायत्री,पहली फिल्मही बन गई आखिरी
Gayatri JoshiBirthday : 1 हिट फिल्म देकर हो गई इंडस्ट्री से गायब,65वें सबसे अमीर भारतीय से की शादी, Networth जानकर तोहो जांएगे बेहोश

