राय और ब्लॉग्स / जागरण
अमेरिका की ओर से भारत के लिए बढ़ती आर्थिक और व्यापारिक चुनौतियों के बीच भारत को अमेरिका के साथ आगे बढ़ रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत अप
हर समृद्ध देश को एक अच्छी शांति व्यवस्था की नींव चाहिए और यह केवल एक अच्छी पुलिस दे सकती है।
सरकार को इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बाद भी लोग उसके प्रति जागरूक क्यों नहीं हो पा रहे हैं?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में एबीवीपी की ऐतिहासिक जीत ने यह सिद्ध किया है कि भारत का युवा आज केंद्र की भाजपा सरकार, राष्ट्रवादी विचा
एआई कंपनियों के प्रमुख एआई के खतरों को लेकर नियामक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जबकि वे स्वयं इसके विकास में सबसे आगे हैं।
इंदौर में राहुल गांधी द्वारा एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का उपहास उड़ाने के लिए कॉमेडियन का सहारा लेने को 'फूहड़ राजनीति' बताया गया है।
देश की अदालतों में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्यायिक शिथिलता सामाजिक कुंठा और आर्थिक प्रगति में बाधा बन रही है
मोदी सरकार ने 2022 में पहले रोजगार मेले की शुरुआत करते हुए 2023 के अंत तक दस लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य तय किया था और अभी तक 12.75 लाख युवाओं
हमें यह समझना होगा कि हर सामाजिक समस्या का समाधान कानून के माध्यम से तलाशना उचित नहीं है
अरब देशों की इस्लामी एकता और अंतरराष्ट्रीय दबदबे की पिछली राजनीति नष्टप्राय हो चुकी है।
भले ही ममता बनर्जी अपनी पार्टी की दुर्गति के लिए भाजपा और चुनाव आयोग को दोष दें, लेकिन अपनी स्थिति के लिए वही जिम्मेदार हैं।
भविष्य निधि वह भरोसा है कि वर्षों के परिश्रम की पूंजी जरूरत पड़ने पर कामगार और परिवार के साथ खड़ी होगी।
यह सुनिश्चित करना होगा कि यूपीआई के जरिये नागरिकों को मुफ्त भुगतान, छोटे दुकानदारों को संरक्षण और समूचे तंत्र को सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन मिलते
जब भारत विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, तब महत्वाकांक्षा केवल बड़ी अर्थव्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे के नेटवर्क या अधिक सक्षम शासन-व्यवस्था के निर्माण
पीसा रिपोर्ट के रुझानों से भारत भी अछूता नहीं है। इसलिए हमारे नीति-नियंताओं को भी इस पर विचार करना चाहिए।
ध्यान रहे कि आनलाइन भुगतान की भारतीय प्रणाली की सराहना दुनिया भर में होती है। इस प्रणाली का और अधिक विस्तार हो, इसके लिए हरसंभव उपाय किए जाने चाहिए।
वह इकोसिस्टम हावी है, जो किसी मुद्दे को तूल देकर या उसकी अनदेखी कर लोगों के सोचने के तरीके को प्रभावित करता है
धार्मिक उत्सवों-आयोजनों में सुधार की जिम्मेदारी सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती और न ही यह आशा की जा सकती है कि अपने आप कोई नई संस्कृति जन्म लेगी
केंद्र सरकार की पहल पर छह राज्यों - उत्तराखंड, हिमाचल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा - ने महत्वाकांक्षी किशाऊ बांध परियोजना पर सहमति जताई
पंजाब आतंकवाद की अंधेरी सुरंग से तो निकल आया है, लेकिन अभी भी अनेक विघ्नसंतोषी तत्व फिर माहौल बिगाड़ने के खतरनाक मंसूबे पाले हुए हैं, जिन्हें नाकाम कर
इस क्रम में सात वर्ष बाद शी चिनफिंग की भारत यात्रा, मोदी से बातचीत, सीमा पर चीनी सैन्य तैनाती में कमी और विभिन्न संवाद तंत्रों की सक्रियता इसके संकेत
पाकिस्तान में पनप रहा आतंकवाद वैश्विक जिहाद को खाद-पानी दे रहा है और यह जिहाद अमेरिका के लिए भी खतरा बन सकता है।
भारत में युवाओं में कौशल की कमी उन्हें बेरोजगार और कम वेतन वाली नौकरियों में फंसा रही है, जिससे उत्पादकता और आर्थिक विकास बाधित हो रहा है।
डिग्री दुनिया को यह बताती है कि आपने क्या पढ़ा है, जबकि हुनर यह दिखाता है कि आप उस पढ़ाई से क्या कर सकते हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सहयोग की भावना के साथ संपन्न हुआ, जिसमें भारत ने सदस्य देशों के बीच संतुलन साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
लगभग 77 वर्ष बाद यह चेतावनी एक नए सवाल के साथ हमारे सामने है
हिंदी सिनेमा ने भाषा को अकादमिक बोझ से मुक्त कर जन-जन तक पहुंचाया, उसे बोलचाल और भावनाओं की भाषा बनाया
भारत ने ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र पर सदस्य देशों, विशेषकर ईरान, सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेदों के बावजूद सहमति बनाकर अपनी कूटनीतिक कुशलता का प्र
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने से छात्रों की मौत ने शहरी विकास की खामियों और अनियोजित निर्माण पर सवाल उठाए हैं
ब्रिक्स सम्मेलन का सबसे संवेदनशील पहलू भारत-चीन-रूस त्रिकोण होगा। भारत दोनों के साथ संबंध रखता है, लेकिन दोनों से अलग-अलग चुनौतियां भी हैं।
लोकतांत्रिक राज्य को असहमति सहनी चाहिए, लेकिन अराजकता के सामने आत्मसमर्पण नहीं। पुलिस संयमित हो, लेकिन पंगु नहीं, प्रशासन जवाबदेह हो, लेकिन असहाय नहीं
देखना यह है कि दिल्ली में आयोजित बिक्स सम्मेलन में सदस्य और सहयोगी देश अपने मतभेदों को भुलाकर आपसी व्यापार को कितना आगे ले जाने की कोई ठोस रूपरेखा बना
आतंक के खिलाफ कोरी बातें ही उसे ताकत प्रदान कर रही हैं। आज सबसे आवश्यक यह है कि आतंकवाद को संयुक्त राष्ट्र की ओर से परिभाषित किया जाए और आतंक के पोषक
रंपरागत रूप से पाकिस्तान में सेनाध्यक्ष ही सत्ता के सबसे ताकतवर चेहरे रहे हैं, जिनका रसूख निर्वाचित सरकार और उसके मुखिया से कहीं अधिक होता है।
ध्यान रहे इसके बावजूद मुस्लिम लीग अलगाववादी एजेंडे पर चलती रही और देश के विभाजन का कारण बनी। आखिर कांग्रेस आज भी मुस्लिम लीग की आपत्तियों को महत्व क्य
भारत की अध्यक्षता ब्रिक्स को संप्रभु राष्ट्रों के एक स्वतंत्र मंच के रूप में अक्षुण्ण रखते हुए व्यावहारिक सहयोग के एक अधिक प्रभावी माध्यम के तौर पर स्
शासन-प्रशासन में अनुभव, समझ और संयम का महत्व तो सदैव रहेगा, मगर भारत के भविष्य को गढ़ने में भावी पीढ़ी की भूमिका तय होनी ही चाहिए।
जापान, चीन और यूरोपीय देश न जाने कब से प्रमुख मार्गों पर बुलेट ट्रेन चला रहे हैं। इसी तरह एक सच्चाई यह भी है कि इन देशों में सामान्य ट्रेनों की औसत गत
अफसोस कि यह पहली बार नहीं, जब सरकार या फिर सुप्रीम कोर्ट या फिर दोनों, किसी समूह के अराजक व्यवहार के सामने घुटने टेकते दिखे हों। नागरिकता संशोधन कानून
हाइब्रिड आतंकवाद से निपटने में आम नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी सुरक्षा एजेंसियों की। अगर कोई डिजिटल मीडिया पर संदिग्ध किस्म का क
अच्छा हो कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर कोई ऐसा साझा तंत्र बनाए, जो राजमार्गों में आवागमन को सुरक्षित कर सके। राज्य सरकारों को
देशभर के लगभग 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्र 8.9 करोड़ से अधिक बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक पहुंच रहे हैं, और इन्हें चलाने वाली 25.2 लाख कार्यकर्ता एवं सह
शिक्षकों की कमी का पहला असर कक्षा पर पड़ता है। उपलब्ध शिक्षकों को अधिक कक्षाएं और अधिक प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं।
मुख्य न्यायाधीश बनने की वरिष्ठता-परंपरा में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का नाम है। उनके बाद बीवी नागरत्ना का नाम है।
यह ठीक नहीं कि आज जब देश को विकसित बनाने की बातें हो रही हैं, तब वैसी घटनाएं हो रही है, जैसी कई निर्धन देशों में भी नहीं होतीं।
भारत में उपभोक्ताओं की कमी नहीं है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि उनके द्वारा खर्च किए गए प्रत्येक रुपये से अधिक से अधिक आय का निर्माण हो
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8% आर्थिक वृद्धि दर एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह देश की पूरी आर्थिक स्थिति का एकमात्र पैमाना नहीं ह
दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर इमारत ढहने से व्यवस्था की पोल खुल गई, जो पुरानी इमारतों की निगरानी और अवैध निर्माण रोकने में विफल है
जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है
आजादी के पहले के तीन दशक तक किसी परीक्षार्थी का पेपर लीक या सॉल्वर जैसे शब्दों से कोई परिचय नहीं था, लेकिन आज पेपर लीक को झेलना युवाओं की नियति बन गया

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