राय और ब्लॉग्स / बूमलाइव
बूम ने पाया कि वीडियो 19 अक्टूबर 2026 का है. कोल्हापुर में मिल्क यूनियन चुनाव में कांग्रेस समर्थित सदस्यों की जीत के बाद यह जश्न मनाया गया था.
Hive Moderation और Hiya जैसे एआई डिटेक्शन टूल्स भी NSA अजीत डोभाल के वायरल वीडियो की आवाज के AI जनरेटेड होने की पुष्टि करते हैं.
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर 2024 की है, जब इजिप्ट की इन्फ्लुएंसर गिहाद अलबाना (Gehad ElBanna) और उनके पति रमजी महमूद ने अपनी प्रेग्नेंसी अनाउंस करते ह
बूम ने जांच में पाया कि यह वीडियो बांग्लादेश का है. इसका दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है.
बूम ने पाया कि वीडियो पश्चिम बंगाल का है और इसका हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों से कोई संबंध नह
बूम ने स्थानीय लोगों और पुलिस से बात की, जिन्होंने पुष्टि की कि वायरल वीडियो महाराष्ट्र के विरार में एक विज्ञापन शूट का है.
बूम ने कार्यक्रम के अलग-अलग एंगल से रिकॉर्ड किए गए वीडियो की पड़ताल करने पर पाया कि वायरल क्लिप असली है. कई एआई डिटेक्शन टूल भी इसकी पुष्टि करते हैं.
वीडियो में एआई की मदद से छेड़छाड़ की गई है. मूल वीडियो में फगवाड़ा एसपी LPU मामले पर बात करते हुए अमित शाह के किसी संबंधी की संलिप्तता की बात नहीं कर
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर फेक है. कई AI डिटेक्शन टूल्स की मदद से परीक्षण करने पर पता चला कि इसे OpenAI के AI टूल की मदद से बनाया गया है.
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर OpenAI के AI टूल की मदद से बनाई गई है. पुलिस ने मुख्य आरोपी नंदन यादव को मंगलवार को अरेस्ट किया है.
बूम से बातचीत में एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि उज्जैन में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है. यह खबर पूरी तरह फर्जी है.
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर OpenAI के AI टूल्स की मदद से एडिट कर बनाई गई है. मलेशियाई प्रधानमंत्री से मुलाकात की मूल तस्वीर में मल्लिकार्जुन खरगे मौजू
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान जमीन पर गिरे पेपर को उठाने के लिए झुके थे, जिसे आचार्य लोकेश मुनि उन्हें दे रहे थे, आचार्य लोकेश मुनि ने बूम से इसकी पुष्
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो में एआई की मदद से छेड़छाड़ की गई है. मूल वीडियो सोनम यादव नाम की एक क्रिएटर का है, जिसमें वह सलवार-कमीज पहने नजर आ रही हैं
बूम ने पाया कि इन तस्वीरों को OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाया गया है.
बूम ने पाया कि नवभारत टाइम्स के लोगो वाले ये पोस्टकार्ड फेक हैं. इनमें मोहन भागवत और गौरव भाटिया के हवाले से पीएम मोदी व स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर फर्
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो असली नहीं है. इसे एआई की मदद से बनाया गया है.
बूम ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है. वीडियो दिल्ली पुलिस द्वारा महिला पत्रकारों के साथ मारपीट का नहीं बल्कि एक शूटिंग के बिहाइंड-द-सी
बूम ने पाया कि इनमें से दो वीडियो AI की मदद से बनाए गए हैं. वहीं एक वीडियो 2021 में बेंगलुरु में हुई घटना का है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद
बूम ने पाया कि पहला वीडियो महाराष्ट्र के एक बांध का है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के वृंदावन का है.
बूम की जांच में NVIDIA और Hive Moderation जैसे AI डिटेक्शन टूल्स ने वीडियो के AI जनरेटेड होने की संभावना जताई.
बूम ने जांच में पाया कि इनमें से ज्यादातर क्लिप नेपाल बाढ़ के वास्तविक दृश्य को नहीं दिखाते. इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से क्रिएट किया गया है
बूम ने जांच में पाया कि वायरल तस्वीर में AI की मदद से हेरफेर की गई है. मूल तस्वीर 1967 की है, जिसमें गो-गो डांसर्स परफॉर्म करती नजर आ रही हैं.
बूम ने पाया कि ये वीडियो 2026 की नेपाल बाढ़ से संबंधित नहीं हैं. वीडियो अलग-अलग घटनाओं के हैं, जिन्हें नेपाल में बाढ़ आने से पहले रिकॉर्ड किया गया था.
बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में मुग्धा दास और सिद्धार्थ दास नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है.
बूम ने पाया कि यह लेटर फर्जी है और इसे एआई की मदद से तैयार किया गया है. इसमें मौजूद गलतियां भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह कोई वास्तविक आधिकारिक ऐ
बूम ने पाया कि वीडियो पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का है. इस दौरान राहुल गांधी मोहन भागवत और मनोहर लाल खट्टर के बयानों का हवाला देते हु
बूम ने पाया कि बाबा रामदेव का वायरल वीडियो AI जनरेटेड है. इसके अलावा रामदेव ने पीएम मोदी को लेकर वायरल पोस्टकार्ड जैसा कोई बयान नहीं दिया है.
बूम ने फैक्ट चेक में पाया कि तस्वीर में राजीव और राहुल गांधी के साथ दिख रहे शख्स सिद्धार्थ रेड्डी हैं जो राजीव गांधी के करीबी दोस्तों में शामिल थे.
बूम ने पाया कि पंजाब बीजेपी द्वारा आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाते हुए शेयर किया गया वीडियो असल में 2018 का है. उस समय पंजाब में कांग्रेस की सरकार
बूम ने पाया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत सपा नेता मुलायम सिंह यादव की यह तस्वीर OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाई गई है.
बूम ने पाया कि वायरल हो रही नयनतारा की दोनों तस्वीरें गूगल AI का उपयोग करके बनाई गई हैं.
बूम ने पाया कि मूल वीडियो में पीछे राष्ट्रगान नहीं चल रहा है. 20 जून 2025 को बिहार के सीवान में आयोजित एक कार्यक्रम के वीडियो में राष्ट्रगान की धुन अल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.
बूम ने पाया कि वायरल सांप्रदायिक दावा गलत है. वीडियो में दिख रही महिला का नाम अश्विनी दगड़े है और वह मुस्लिम नहीं है.
बूम ने पाया कि 15 वर्षीय किशोरी के मूल वीडियो में AI की मदद से छेड़छाड़ की गई है. कई AI डिटेक्शन टूल भी वीडियो के एआई जनरेटेड होने पुष्टि करते हैं.
बूम ने पाया कि आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए हरभजन सिंह द्वारा शेयर किया गया वीडियो राजस्थान के श्रीगंगानगर का है. श्रीगंगानगर पुलिस ने इस मामले
बूम से बातचीत में ग्वालियर पुलिस ने पुष्टि की कि वीडियो में दिख रहा आरोपी मुस्लिम नहीं है और उसकी पहचान मनप्रीत सिंह के रूप में की गई है.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो 22 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज का है, जिसे बीजेपी ने गलत तरीके से झारखंड का ब
बूम ने पाया कि वीडियो चांपाईनवाबगंज के शिबगंज सीमा क्षेत्र पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच हुई कहासुनी का है.
मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर ठीक इससे उलट कहा कि आरक्षण सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का महत्वपूर्ण साधन है. इसपर राजनीति नहीं करना चाहिए.
बूम ने पाया कि राहुल गांधी और अभिजीत दीपके की वायरल तस्वीर वास्तविक नहीं है. इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया गया है.
बूम ने पाया कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के पुराने वीडियो को भ्रामक दावों के साथ शेयर किया जा रहा है.
बूम ने पाया कि एक पुराने वीडियो के साथ भ्रामक दावा किया जा रहा है. यह वीडियो जनवरी 2026 से इंटरनेट पर मौजूद है.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस नेता प्रणयिता दास के साथ हुई बदसलूकी का है.
किशनगंज पुलिस के अधिकारी ने बूम को बताया कि इस मामले में कोर्ट में करेक्शन लेटर सबमिट कर दिया गया है.
बूम ने पाया कि मूल वीडियो में पीएम मोदी परीक्षा पद्धति में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा कर रहे थे. कई AI डिटेक्शन टूल्स ने भी वायर
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो वाराणसी फैमिली कोर्ट का है, जहां न्यायालय परिसर के भीतर पति-पत्नी के बीच मारपीट का यह मामला सामने आया था.
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर फेक है. OpenAI के इमेज वेरिफिकेशन टूल ने संकेत दिया कि इसे OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाया गया है.
बूम ने पाया वायरल हो रहा एक वीडियो AI की मदद से क्रिएट किया गया है, वहीं दूसरा वीडियो Simran SK नाम की एक क्रिएटर द्वारा बनाया गया नाटकीय वीडियो है.

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