भाजपा जिलाध्यक्ष के प्रेस नोट में अछूते रहे लोढ़ा, इस बार राहुल गांधी निशाना
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा गुरवार को सीधे तौर पर भाजपा फिर हमलावर दिखे। उन्होंने भाजपा की जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी के गृह क्षेत्र शिवगंज में नगर पालिका में जाकर भाजपा के नेताओं के द्वारा जमीनो पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया। इसके बावजूद शाम को जो उनका प्रेस नोट आया उसमें वो […] The post भाजपा जिलाध्यक्ष के प्रेस नोट में अछूते रहे लोढ़ा, इस बार राहुल गांधी निशाना appeared first on Sabguru News .
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा भोजशाला विवाद, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और इसके लिए याचिका भी दाखिल भी की गई है। याचिका हस्तक्षेपकर्ता काजी मोइनुद्दीन की ओर से दायर की गई है। याचिका में 15 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी गई है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की तरफ लगी हुई हैं, जहां इस मामले में सुनवाई की संभावना है। ALSO READ: भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धार भोजशाला को माना मंदिर, हिंदुओं को मिला पूजा का अधिकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा 15 मई 2026 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष के हस्तक्षेपकर्ता काजी मोइनुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। ALSO READ: कौन है 'सीक्रेट किलर', जो भारत के दुश्मनों का बन रहा काल, 25 से ज्यादा आतंकियों को किया ढेर इंदौर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक दस्तावेजों को मुख्य आधार मानते हुए इस परिसर को वाग्देवी का मंदिर माना था। एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के स्तंभों पर हिन्दू प्रतीक और संस्कृत अभिलेख पाए गए थे। इसके बाद हाईकोर्ट ने परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। Edited by : Sudhir Sharma
दो करोड़ की लागत से फूलों की खेती का हब बनेगा अयोध्या का पिरखौली क्षेत्र
Ayodhya flower farming hub: रामनगरी अयोध्या में फूलों की खेती को नई ऊंचाई देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू करने जा रही है। पिरखौली क्षेत्र में तीन हेक्टेयर भूमि पर दो करोड़ रुपए की लागत से प्रदेश का पहला 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्लावर' (फूल उत्कृष्टता केंद्र) स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र न सिर्फ फूल उत्पादकों के लिए तकनीकी सहायता का हब बनेगा, बल्कि श्री राम मंदिर को भी गुणवत्तापूर्ण फूलों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। उप निदेशक उद्यान अनूप कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि यह केंद्र फूलों की आधुनिक खेती को बढ़ावा देने का प्रमुख माध्यम बनेगा। यहां किसानों को फूलों की उन्नत प्रजातियों की जानकारी, वैज्ञानिक तरीके से खेती, कीट प्रबंधन, सिंचाई प्रणाली और विपणन की पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी। केंद्र में फूलों की कई दुर्लभ और लोकप्रिय प्रजातियां लगाई जाएंगी, जिनमें डच रोज़ और गेंदे की उच्च गुणवत्ता वाली वैरायटी शामिल होंगी। योगी सरकार कृषि और उद्यान क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए यह पहला बड़ा कदम है। जल्द ही इस केंद्र का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसी तर्ज पर मथुरा और वाराणसी में भी ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे पूरे प्रदेश में फूल उत्पादन का नया नेटवर्क तैयार होगा। फूलों की खेती के प्रति बढ़ेगी जागरूकता इस परियोजना से स्थानीय किसानों में फूलों की खेती के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। वर्तमान में कई किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, लेकिन इस केंद्र के माध्यम से वे फूलों की खेती अपनाकर बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे। केंद्र न सिर्फ उत्पादन बढ़ाएगा बल्कि प्रसंस्करण, ड्राई फ्लावर और एक्सपोर्ट की संभावनाओं को भी खोलेगा। राम मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना के लिए बड़ी मात्रा में फूलों की आवश्यकता होती है। इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण फूल उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर केंद्र के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिलेगा। फूल कटाई, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। योगी सरकार के विजन के अनुरूप यह परियोजना आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगी। उद्यान विभाग इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र में आधुनिक ग्रीनहाउस, ड्रिप इरिगेशन, सोलर पावर और टिश्यू कल्चर लैब जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। किसान यहां आकर सीधे विशेषज्ञों से सलाह ले सकेंगे और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित होंगे। पिरखौली केन्द्र बनेगा जीवंत उदाहरण यह पहल न केवल अयोध्या बल्कि पूरे प्रदेश के कृषि परिदृश्य को बदलने वाली साबित होगी। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार कृषि विविधीकरण, किसान कल्याण और धार्मिक पर्यटन को जोड़कर समग्र विकास का मॉडल प्रस्तुत कर रही है। पिरखौली फूल केंद्र इसी मॉडल का जीवंत उदाहरण बनेगा। Edited by: Vrijendra Singh Jhala
योगी सरकार देगी आयुष छात्रों को स्मार्ट क्लास की सौगात, स्मार्ट होगी आयुर्वेद और होम्योपैथी की पढ़ाई
- सीएम योगी के निर्णय से प्रदेश के आयुष कॉलेजों में आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम से बढ़ेगी शिक्षण गुणवत्ता - आईएफपी, ऑडियो-वीडियो सिस्टम और डिजिटल टूल्स से छात्रों को मिलेगा इंटरएक्टिव लर्निंग का अनुभव - एलएमएस आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन लेक्चर और पठन सामग्री होगी उपलब्ध Uttar Pradesh News : योगी सरकार आयुष चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने आयुष कॉलेजों के विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लास की सौगात देने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश के 17 आयुर्वेद और होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में 51 स्मार्ट क्लास रूम विकसित किए जाएंगे। इन स्मार्ट क्लासों में अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) का उपयोग किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक और इंटरैक्टिव शिक्षा का अनुभव मिल सकेगा। स्मार्ट क्लास रूम में आईएफपी, ऑडियो-वीडियो सिस्टम और डिजिटल लर्निंग टूल्स का किया जाएगा यूज आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष चिकित्सा शिक्षा को समय की मांग के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि विद्यार्थी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल संसाधनों का भी लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए शिक्षा प्रणाली का आधुनिक होना बेहद जरूरी है। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप आयुष कॉलेज में स्मार्ट क्लास रूम संचालित की जाएंगी। ALSO READ: भीषण गर्मी पर CM योगी अलर्ट, अस्पताल, बिजली और राहत व्यवस्था पर सख्त निगरानी के निर्देश इनमें इंटरएक्टिव फ्लैट पैनल (आईएफपी), ऑडियो-वीडियो सिस्टम और डिजिटल लर्निंग टूल्स का उपयोग किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल सहयोग आधारित शिक्षा मिल सकेगी। साथ ही रियल टाइम इंटरएक्शन, मल्टीमीडिया कंटेंट और ऑनलाइन अध्ययन की सुविधा भी उपलब्ध होगी। 17 आयुष कॉलेजों में संचालित किये जाएंगे 51 स्मार्ट क्लासरूम आयुष महानिदेशक ने बताया कि स्मार्ट क्लास रूम को 17 आयुष कॉलेजों में स्थापित किया जाएगा। इनमें राज्य होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गाजीपुर, मुरादाबाद, आजमगढ़, गोरखपुर और अलीगढ़ शामिल हैं। इसके साथ ही आयुर्वेदिक संस्थानों में लखनऊ, पीलीभीत, बरेली, मुजफ्फरनगर, बांदा, झांसी, प्रयागराज और वाराणसी के कॉलेजों को स्मार्ट क्लास रूम स्थापित किये जाएंगे। ALSO READ: योगी सरकार का स्किल मिशन तेज, ITIOT लखनऊ में 10 नए ट्रेड शुरू, युवाओं को मिलेगी हाईटेक ट्रेनिंग इन सभी संस्थानों में कुल 51 स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए जाएंगे। इसके लिए कार्यदायी संस्था के रूप में यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन को नामित किया गया है। इन स्मार्ट क्लासों के माध्यम से आयुष छात्रों को 21वीं सदी की आवश्यक डिजिटल स्किल्स से लैस किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में नवाचार, शोध क्षमता और पेशेवर दक्षता का विकास होगा। स्मार्ट क्लासरूम केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यह आयुष शिक्षा को रिसर्च और इनोवेशन से जोड़ने का माध्यम भी बनेंगे। लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) की मदद से सभी आयुष संस्थानों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। एलएमएस के माध्यम से अध्ययन सामग्री, असाइनमेंट, ऑनलाइन लेक्चर और प्रगति रिपोर्ट एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा सकेगी। ALSO READ: योगी सरकार का बड़ा ऐलान, यूपी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अब ड्रेस कोड अनिवार्य, छात्रों के लिए नए नियम लागू इसके अलावा एलएमएस के जरिए डिजिटल कंटेंट रिपॉजिटरी भी तैयार की जाएगी, जिससे विद्यार्थी कहीं भी और कभी भी अध्ययन सामग्री तक पहुंच सकेंगे। इससे शिक्षण संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विभिन्न संस्थानों के बीच ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया भी मजबूत होगी। Edited By : Chetan Gour
BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। CJP ने अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए हैं। हर घंटे करीब 5 लाख फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म चीफ जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान के बाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। क्या है कॉकरोच जनता पार्टी, इसके पीछे किन लोगों का हाथ और क्या वाकई ये पार्टी कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकरोच जनता पार्टी है क्या?जवाबः ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन है… 21 मई की शाम तक यानी महज 5 दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टा फॉलोअर्स ने बीजेपी और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया है। CJP के इंस्टाग्राम पर गुरुवार शाम 5 बजे तक 1.49 करोड़ फॉलोअर्स हो गए। जबकि कांग्रेस के करीब 1.33 करोड़, बीजेपी के 88 लाख और AAP के 19 लाख फॉलोअर्स हैं। CJP औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। इसकी वेबसाइट पर व्यंग्य में लिखा गया है कि ये कॉकरोचिस्तान के नो इलेक्शन कमीशन पर कॉकरोच एक्ट के तहत एक नॉन-रजिस्टर्ड पार्टी है। 30 साल के अभिजीत दीपके ने खुद को इसका फाउंडर बताया है। सवाल-2: अभिजीत दीपके कौन हैं और क्या उनका कोई पॉलिटिकल कनेक्शन है?जवाबः 30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत AAP के IT सेल के चीफ अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर अभिजीत X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सवाल-3: आखिर इंटरनेट पर लोग कॉकरोच जनता पार्टी को पसंद क्यों कर रहे हैं?जवाबः 3 बड़ी वजहें हैं- 1. सोशल मीडिया पर यूथ से जुड़ी कंटेंट स्ट्रैटेजी 2. CJP के लॉन्च की परफेक्ट टाइमिंग 3. बेरोजगारी के चलते युवाओं में फ्रस्ट्रेशन अभिजीत कहते हैं, मैं ये नहीं कहूंगा कि ये सब मैंने हासिल किया है। यूथ के अंदर कई सालों से जो निराशा और गुस्सा पल रहा है, वही इतने बड़े रिएक्शन की वजह है। सरकार की नाकामियों की वजह से युवा बेरोजगार है। उन्हें एक मंच मिला, जहां पर वो अपनी निराशा और गुस्सा निकाल सकते हैं। सवाल-4: कॉकरोच जनता पार्टी का एजेंडा क्या है?जवाबः CJP का फिलहाल कोई सीरियस घोषित एजेंडा नहीं है। उसने अपने मैनिफेस्टो में 5 वादे किए हैं- सवाल-5: क्या इससे पहले भी ऑनलाइन कैंपेन से पार्टियां बनी हैं, उनका क्या हुआ?जवाबः भारत में अभी तक किसी ऑनलाइन कैंपेन या मूवमेंट से भारत में कोई राजनीतिक पार्टी उभर कर नहीं आई है। हालांकि दुनिया में इसके 3 बड़े उदाहरण हैं… 1. फाइव स्टार मूवमेंट, इटली 2. पोलिश बीयर लवर्स पार्टी, पोलैंड 3. बेस्ट पार्टी, आइसलैंड सवाल-6: क्या वाकई CJP असली पार्टी बनकर कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी?जवाबः CJP फिलहाल कोई ऑफिशियली रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी या ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। औपचारिक चुनावी राजनीति के लिए CJP को चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। अभिजीत के बयानों से ऐसा लगता है कि फिलहाल उनका इरादा औपचारिक राजनीतिक दल बनाने का नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों को लेकर सरकार के खिलाफ एक्टिविज्म जारी रखने का है। अभिजीत के ये बयान पढ़िए- इधर 21 मई की दोपहर करीब 12 बजे CJP के X अकाउंट पर रोक लगाई गई है। अभिजीत ने कहा है कि जैसी आशंका थी, वैसा ही हुआ। X स्थानीय कानून, कोर्ट के आदेश या कानूनी शिकायत के आधार पर Withhold करने यानी रोक लगाने की कार्रवाई करता है। **** रिसर्च सहयोग- उत्कर्ष राज **** ये खबर भी पढ़ें… CJI सूर्यकांत ने कॅाकरोच वाले बयान पर सफाई दी:कहा- इसे गलत तरीके से पेश किया गया, मैंने फर्जी डिग्रीधारियों की आलोचना की थी चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॅाकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया। पूरी खबर पढ़ें…
Maruti : महंगी होंगी मारुति की कारें, 30 हजार रुपए तक बढ़ सकती है कीमत, 1 जून से बढ़ेंगे दाम
अब कारों पर महंगाई का झटका लगने वाला है। मारुति अपनी कारों की कीमतों में इजाफा कर सकती है। खबरों के मुताबिक मारुति की कारों की कीमतें 30 हजार रुपए तक बढ़ सकती है। कंपनी जून से कारों की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India ने गुरुवार को घोषणा की कि जून 2026 से उसके सभी वाहन मॉडल महंगे हो जाएंगे। कंपनी ने कहा है कि बढ़ती इनपुट लागत और महंगाई के दबाव के चलते कारों की कीमतों में 30 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की जाएगी। कंपनी ने बताया कि पिछले कई महीनों से लागत कम करने और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ कम डालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कंपनी ने कहा, “पिछले कुछ महीनों से कंपनी लागत में वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार कॉस्ट कटिंग उपाय अपना रही थी। हालांकि, अब महंगाई का दबाव काफी बढ़ गया है और लागत का प्रतिकूल माहौल लगातार बना हुआ है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार पर डालना जरूरी हो गया है, जबकि ग्राहकों पर इसका असर न्यूनतम रखने की कोशिश जारी रहेगी।” साल 2026 में यह मारुति सुजुकी की कीमतों में की गई ताजा बढ़ोतरी है। इससे पहले फरवरी में कंपनी ने संकेत दिए थे कि कच्चे माल, कीमती धातुओं और अन्य कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण एक और प्राइस हाइक पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद कंपनी ने एंट्री-लेवल छोटी कारों की कीमतें घटाई थीं और प्रस्तावित कीमत बढ़ोतरी को 15-20 दिनों के लिए टाल दिया था। Edited by : Sudhir Sharma
Purushottam Maas: अधिकमास में ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, मिलेगा अक्षय पुण्य
पुरुषोत्तम मास चल रहा है जिसे अधिकमास भी कहते हैं। इस माह में श्रीहरि विष्णुजी के पुरुषोत्तम स्वरूप की पूजा विधिवत, खासकर षोडशोपचार पूजन करना बहुत ही पुण्यदायक माना जाता है। चलिए जानते हैं कि षोडशोपचार पूजा कैसे करते हैं और क्या है इस पूजा की सामग्री। ALSO READ: अधिकमास: पुरुषोत्तम मास की आरती 1.पूजा के मुख्यत: 5 प्रकार है- अभिगमन, उपादान, योग, स्वाध्याय और इज्या। इसमें उपादान पूजा के 3 प्रकार होते है। पंचोपचार, दशोपचार और सोलह उपचार। सलोहर उपचार को ही षोडशोपचार कहते हैं। 1. पांच उपचार : गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य। 2. दस उपचार : पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र निवेदन, गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य। 3. सोलह उपचार : पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार। पूजन के अंत में सांगता सिद्धि के लिए दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए। षोडशोपचार यानी विधिवत 16 क्रियाओं से पूजा संपन्न करना। ALSO READ: 3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा 2.षोडशोपचार पूजन क्या है: सोलह प्रकार की चीजों को मिलाकर तरीकों से पूजाकर करना षोडशोपचार पूजन है। इसमें- 1.ध्यान-प्रार्थना, 2.आसन, 3.पाद्य, 4.अर्ध्य, 5.आचमन, 6.स्नान, 7.वस्त्र, 8.यज्ञोपवीत, 9.गंधाक्षत, 10.पुष्प, 11.धूप, 12.दीप, 13.नैवेद्य, 14.ताम्बूल, दक्षिणा, जल आरती, 15.मंत्र पुष्पांजलि, 16.प्रदक्षिणा-नमस्कार एवं स्तुति। 3. विष्णु पूजा की मुख्य सामग्री: मुख्य देव और वेदी के लिए:- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर: (यदि मां लक्ष्मी के साथ संयुक्त तस्वीर हो तो अति उत्तम)। चौकी या पटरा: जिस पर भगवान को विराजमान किया जा सके। पीला कपड़ा: चौकी पर बिछाने के लिए (विष्णु जी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है)। अभिषेक और स्नान सामग्री:- तांबे या पीतल का पात्र: (मूर्ति स्नान के लिए)। गंगाजल और शुद्ध जल पंचामृत: (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण)। ALSO READ: अधिकमास 2026: इन 33 देवताओं की पूजा से मिलता है शुभ फल, पूरे साल बनी रहती है सुख-समृद्धि पूजन और श्रृंगार सामग्री:- पीला चंदन या गोपी चंदन अक्षत: (ध्यान रहे, विष्णु जी की पूजा में अक्षत यानी चावल साबुत होने चाहिए, टूटे हुए नहीं। कई लोग विष्णु पूजा में अक्षत की जगह तिल का प्रयोग करते हैं, जो ज्यादा शुभ माना जाता है)। रोली या कुमकुम हल्दी या अष्टगंध जनेऊ: (भगवान को अर्पित करने के लिए सूती सूत)। मौली (कलावा): रक्षासूत्र के रूप में। पीले फूल और माला: (गेंदे या पीले गुलाब के फूल)। धूप, दीप और सुगंध:- गाय का शुद्ध घी दीपक: (मिट्टी, पीतल या तांबे का)। रुई की बत्ती धूपबत्ती और अगरबत्ती कपूर: (आरती के लिए)। माचिस नैवेद्य (भोग) और प्रसाद:- तुलसी पत्र (तुलसी के पत्ते): (इसके बिना पूजा अधूरी है। ध्यान रखें, एकादशी, रविवार या सूर्यास्त के बाद तुलसी न तोड़ें, इसे पहले से तोड़कर रख लें)। पीली मिठाइयां: (बेसन के लड्डू, पेड़े, या केसरिया हलवा/खीर)। ऋतु फल: (विशेषकर केला, क्योंकि केले के वृक्ष में विष्णु जी का वास माना जाता है)। पंचमेवा: (काजू, बादाम, किशमिश, मखाना, छुआरा)। नारियल: (पानी वाला जटा युक्त नारियल)। पान के पत्ते और सुपारी लौंग और छोटी इलायची 4. षोडशोपचार पूजा संक्षिप्त विधि: ध्यान, आवाह्न, आचमन, पाद्य, नैवेद्य, पुष्पांजलि आदि सभी के मंत्र याद होना चाहिए या इसकी एक पुस्तक ले आएं फिर पूजा प्रारंभ करें। प्रात:काल स्नान-ध्यान से निवृत हो माता का स्मरण करते हुए व्रत एवं पूजा का संपल्प लें। घर पर पूजा कर रहे हैं तो एक पाट पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर घट एवं कलश की स्थापना करें। इसके बाद एक बड़ी सी थाली में शालिग्राम या विष्णुमूर्ति को स्थापित करके उस थाल को पाट पर स्थापित करें। अब धूप दीप को प्रज्वलित करें। इसके बाद कलश की पूजा करें। कलश पूजा के बाद शालिग्राम या विष्णुमूर्ति को जल से स्नान कराएं। फिर पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत के बाद पुन: जलाभिषेक करें। फिर शालिग्राम या विष्णुमूर्ति के मस्तक पर चंदन या हल्दी कंकू लगाएं और फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाकर माला पहनाएं। पूजन में अनामिका अंगुली (छोटी उंगली के पास वाली यानी रिंग फिंगर) से इत्र, गंध, चंदन आदि लगाना चाहिए। इसके बाद 16 प्रकार की संपूर्ण सामग्री एक एक करके अर्पित करें। सभी को अर्पित करते हुए मंत्र बोलते जाएं। पूजा करने के बाद प्रसाद या नैवेद्य (भोग) चढ़ाएं और प्रसाद अर्पित करें। ध्यान रखें कि नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है। नैवेद्य अर्पित करने के बाद अंत में शिवजी की आरती करें। आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें। 5.पूजा के नियम:- माता के पूजन में शुद्धता व सात्विकता का विशेष महत्व है। पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए। घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। पूजा का उचित मुहूर्त देखें या दोपहर 12 से शाम 4, रात्रि 12 से प्रात: 3 बजे के बीच का समय छोड़कर पूजा करें। पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। पूजा के समय सभी एकत्रित होकर पूजा करें। पूजा के दौरान किसी भी प्रकार शोर न करें। भगवान विष्णु की पूजा में कभी भी भैरव जी की पूजा की चीजें (जैसे राई या बहुत तीखी चीजें) और तुलसी की सूखी पत्तियां अर्पित न करें (केवल ताजी या सूखी पत्तियां जो पहले से चढ़ी न हों, साफ करके चढ़ाई जा सकती हैं)। इसके अलावा, विष्णु जी को कभी भी अगस्त्य के फूल नहीं चढ़ाए जाते।
इंदौर में सड़क के चौडीकरण के लिए बुल्डोजर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत 30 से ज्यादा मकानों को जमींदोंज किया गया है। बता दें कि इंदौर के जिंसी क्षेत्र में 60 फीट चौड़ी सड़क निर्माण के लिए नगर निगम ने कार्रवाई कर 30 से अधिक निर्माण हटाए हैं। हालांकि रहवासियों ने मुआवजा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। इंदौर के जिंसी क्षेत्र में 60 फीट चौड़ी सड़क निर्माण के लिए गुरुवार को नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 से अधिक निर्माण हटा दिए। वर्षों पुरानी बसाहट वाले इस इलाके में 100 साल से अधिक पुराने मकान भी मलबे में तब्दील हो गए। सुबह नगर निगम का अमला करीब 50 कर्मचारियों और बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंचा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। करीब दो घंटे में 30 से अधिक निर्माण हटाकर सड़क चौड़ीकरण के लिए रास्ता साफ किया गया। पिछले एक माह से कई रहवासी स्वेच्छा से सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले हिस्सों को खुद ही हटा रहे थे। निगम अधिकारियों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण में 170 से अधिक निर्माण बाधक हैं। जिन लोगों ने स्वयं निर्माण नहीं हटाए, उनके मकान गुरुवार को निगम ने तोड़ दिए। कार्रवाई से पहले पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी। बाधाएं हटने के बाद अब यहां जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। पहले नर्मदा और ड्रेनेज लाइन डाली जाएगी, उसके बाद सड़क का निर्माण होगा। मास्टर प्लान में इस सड़क की चौड़ाई 80 फीट प्रस्तावित है, लेकिन फिलहाल निगम इसे 60 फीट चौड़ा बना रहा है। Edited By: Naveen R Rangiyal
शाहरुख खान की 'किंग' के सेट पर भारी सुरक्षा, AI फैन एडिट के वायरल होने से मेकर्स की बढ़ी टेंशन
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की आगामी एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'किंग' इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों में भारी उत्साह है। हालांकि, हाल ही में फिल्म के सेट से कुछ ऐसी चीजें सामने आई हैं जिसने मेकर्स की रातों की नींद उड़ा दी है। इंटरनेट पर फिल्म के सेट से लगातार हो रही लीक्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एआई जनरेटेड फेक वीडियोज ने मेकर्स की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, कुछ दिनों पहले मुंबई और केप टाउन शेड्यूल से फिल्म के कुछ हिस्से इंटरनेट पर लीक हो गए थे। इसमें शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण का एक गाना और फिल्म के हाई-ओल्टेज क्लाइमेक्स से जुड़े कुछ स्टिल्स शामिल थे। ALSO READ: 'किंग' के सेट पर शाहरुख खान का बेटी सुहाना संग कैसा था बर्ताव, सौरभ शुक्ला ने किया खुलासा मामला तब और गंभीर हो गया जब सोशल मीडिया पर एक 15 मिनट का फैन-मेड वीडियो वायरल हो गया। यह कोई साधारण वीडियो नहीं था, बल्कि एआई की मदद से तैयार किया गया एक विस्तृत एडिट था। इस वीडियो में लीक हुई तस्वीरों, पपराजी क्लिप्स और पुरानी कड़ियों को जोड़कर फिल्म की पूरी कहानी को रीक्रिएट करने का दावा किया गया था। इसे फिल्म का एक 'मिनी वर्जन' कहा जा रहा था, जिसने मेकर्स को हैरान कर दिया। इसके बाद फिल्म के मेकर्स काफी सतर्क हो गए हैं। खबरों के अनुसार मेकर्स ने एक सख्त कदम उठाने का फैसला किया है, ताकि आगे किसी भी तरह की लीक को रोका जा सके। खबरों के अनुसार प्रोडक्शन से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि टीम केप टाउन और मुंबई के लीक से पहले ही परेशान थी, लेकिन एआई-जनरेटेड एडिट ने सारी सीमाएं पार कर दीं। सूत्र के मुताबिक, जब शाहरुख खान जैसे बड़े स्टार सार्वजनिक स्थानों पर शूटिंग करते हैं, तो लीक के सोर्स का पता लगाना नामुमकिन हो जाता है। लेकिन एआई वीडियो ने फिल्म के स्क्रीनप्ले और कहानी के ताने-बाने को चुराने की कोशिश की, जो कि एक गंभीर खतरा है। राहत की बात यह रही कि शाहरुख खान के वफादार फैंस और प्रोडक्शन टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए इस वीडियो को रिपोर्ट किया, जिसके बाद इसे ज्यादातर बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। वर्तमान में फिल्म की शूटिंग मुंबई के बाहरी इलाके घोड़बंदर रोड के पास चल रही है। चूंकि यह एक बेहद व्यस्त सार्वजनिक क्षेत्र है, इसलिए यहां सुरक्षा बनाए रखना टीम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। लीक को रोकने के लिए मेकर्स ने अब रणनीति बदल दी है। सार्वजनिक जगह होने के कारण क्रू और आम लोगों से फोन पूरी तरह छीनना संभव नहीं है, इसलिए अब एक्शन दृश्यों और महत्वपूर्ण ट्विस्ट वाले सीन्स के दौरान मूवमेंट को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। सेट के चारों ओर अतिरिक्त बाउंड्री और सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं ताकि कोई भी दूर से भी वीडियो न बना सके। pic.twitter.com/sTvx9IP4w3 — Siddharth Anand (@justSidAnand) May 1, 2026 निर्देशक सिद्धार्थ आनंद की फैंस से भावुक अपील मामले की गंभीरता को देखते हुए फिल्म के सिद्धार्थ आनंद ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर दर्शकों और प्रशंसकों से एक विशेष अपील की है। उन्होंने लिखा, कृपया 'किंग' के सेट से लीक हुआ कोई भी मल्टीमीडिया कंटेंट पोस्ट या सर्कुलेट न करें। हमारी पूरी टीम दिन-रात मेहनत कर रही है ताकि आपको सिनेमाघरों में एक बेहतरीन अनुभव मिल सके। कृपया बड़े पर्दे पर मिलने वाले सरप्राइज का इंतजार करें। फिल्म 'किंग' अपनी शूटिंग के आखिरी पड़ाव पर है। बताया जा रहा है कि फिल्म का लगभग दो महीने का काम अभी बाकी है, जिसमें कुछ पैचवर्क, एक्शन इन्सर्ट्स और एक छोटा शेड्यूल शामिल है। इसके साथ ही फिल्म का वीएफएक्स का काम भी बैकएंड पर तेजी से चल रहा है। मेकर्स का लक्ष्य इस साल जुलाई के अंत तक फिल्म की शूटिंग को पूरी तरह से रैप-अप करने का है। फिल्म 'किंग' में शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, सुहाना खान, रानी मुखर्जी, अरशद वारसी और अभय वर्मा जैसे कई सितारे शामिल हैं। फिल्म को रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट और जियो स्टूडियोज़ ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। इसे सुजॉय घोष, सागर पंड्या और सुरेश नायर ने मिलकर लिखा है और डायलॉग अब्बास टायरवाला ने लिखे हैं।
Eid ul Azha 2026: कब मनाई जाएगी ईद उल-अज़हा, जानें परंपरा और महत्व
Baqrid 2026 Celebration Tips: बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा या ईद-ए-कुर्बान भी कहा जाता है, इस्लाम के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। वर्ष 2026 में यह 27 मई 2026 बुधवार या गुरुवार, 28 मई 2026 को मनाए जाने की संभावना है। यह त्योहार मुख्य रूप से 'कुर्बानी' (बलिदान) की भावना को समर्पित है। आइए यहां जानते हैं इसकी महान परंपरा और महत्व 1. कुर्बानी की ऐतिहासिक परंपरा कुर्बानी की परंपरा का सीधा संबंध हजरत इब्राहिम (अ.स.) से है, जिन्हें यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों धर्मों में एक महान पैगंबर माना जाता है। ईश्वरीय परीक्षा : इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम साहब के लिए उनके इकलौते बेटे हजरत इस्माइल सबसे प्रिय थे। अटूट विश्वास: अल्लाह के प्रति अपनी वफादारी साबित करने के लिए वह अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए। जब उन्होंने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह ने उनके जज्बे को स्वीकार किया और वहां एक 'दुंबा' (भेड़) भेज दिया। बेटे की जगह उस जानवर की कुर्बानी हुई। सुन्नत-ए-इब्राहिम: इसी ऐतिहासिक घटना की याद में हर साल पूरी दुनिया के मुसलमान जानवर की कुर्बानी देते हैं, जिसे 'सुन्नत-ए-इब्राहिम' कहा जाता है। 2. कुर्बानी का वास्तविक महत्व कुर्बानी का अर्थ केवल जानवर को ज़ब़ह करना नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और नैतिक संदेश हैं: समर्पण: यह संदेश देता है कि इंसान को ईश्वर की मर्जी के आगे अपनी इच्छाओं और मोह का त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। अहंकार का त्याग: जानवर की कुर्बानी प्रतीकात्मक है। इसका असली उद्देश्य मनुष्य के भीतर छिपे 'पशुत्व' यानी क्रोध, लालच, घृणा और अहंकार की बलि देना है। सामाजिक समरसता: यह त्योहार समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने की सीख देता है। 3. गोश्त (मांस) के बंटवारे का नियम बकरीद की सबसे सुंदर बात इसका वितरण नियम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी भूखा न रहे। कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है: पहला हिस्सा (गरीब और जरूरतमंद): समाज के उन लोगों के लिए जिनके पास भोजन का अभाव है। दूसरा हिस्सा (रिश्तेदार और दोस्त): सामाजिक संबंधों और भाईचारे को मजबूत करने के लिए। तीसरा हिस्सा (स्वयं का परिवार): अपने परिवार की खुशियों के लिए। 4. हज और बकरीद का संबंध बकरीद का त्योहार 'जिलहिज्जा' के महीने में मनाया जाता है। इसी दौरान दुनिया भर के मुसलमान मक्का (सऊदी अरब) में हज के लिए एकत्रित होते हैं। हज की रस्मों का एक अनिवार्य हिस्सा कुर्बानी भी है, जो हज पूरा होने की खुशी में दी जाती है। 5. मुख्य नियम और शिष्टाचार नमाज: बकरीद के दिन सुबह ईदगाह या मस्जिद में विशेष नमाज (दो रकात) अदा की जाती है। पवित्रता: कुर्बानी के लिए वही जानवर चुना जाता है जो स्वस्थ हो और उसे कोई चोट न लगी हो। साफ-सफाई: वर्तमान समय में धर्मगुरुओं द्वारा यह विशेष सलाह दी जाती है कि कुर्बानी सार्वजनिक स्थलों पर न करें और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें ताकि पर्यावरण और अन्य लोगों को असुविधा न हो। सार: बकरीद हमें सिखाती है कि खुशियां वही हैं जो दूसरों के साथ बांटकर मनाई जाएं। यह त्योहार 'स्व' से ऊपर उठकर 'सर्व' के बारे में सोचने की प्रेरणा देता है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
फैक्ट चेक: हिंदू शादी में डीजे बंद करवाने के गलत सांप्रदायिक दावे से वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है. वीडियो में दिख रहे लोग हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम परिवार से डीजे को 'हराम' बताते हुए उसे बंद करने की अपील कर रहे थे.
जैस्मीन सैंडलस के देहरादून कॉन्सर्ट में हुआ हादसा, बैरिकेडिंग टूटने से मची अफरा-तफरी
'धुरंधर' मूवी सिंगर जैस्मीन सैंडलस इन दिनों अपने गानों और लाइव परफॉर्मेंस को लेकर छाई हुई हैं। जैस्मीन एक के बाद एक कई कॉन्सर्ट कर रही हैं। हाल ही में जैस्मीन सैंडलस उत्तराखंड के देहरादून में एक लाइव शो के लिए पहुंचीं, जहां उन्हें देखने और सुनने के लिए हजारों फैंस की भीड़ उमड़ पड़ी। लेकिन जैस्मीन सैंडलस के इस कॉन्सर्ट में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक दर्शकों के सामने लगी बैरिकेडिंग टूट गई। इस वजह से कई फैंस भी गिर गए। यह घटना उस वक्त हुई जब सिंगर मंच पर परफॉर्म कर रही थीं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं फ्रंट रो में मौजूद थे। A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के मुताबिक, जैसे ही बैरिकेड का एक हिस्सा गिरा, सामने खड़े कई दर्शकों का संतुलन बिगड़ गया और वे गिर पड़े। कुछ सेकंड के भीतर ही माहौल में हड़कंप मच गया। भीड़ के दबाव और अचानक हुए इस हादसे ने मौके पर मौजूद लोगों को घबरा दिया। ALSO READ: द इंडिया स्टोरी: खेती के ज़हर पर बनी फिल्म, काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े पहली बार दिखेंगे साथ स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जैस्मिन सैंडलस ने तुरंत अपनी परफॉर्मेंस रोक दी। उन्होंने स्टेज से ही स्थिति पर नजर रखते हुए अपनी टीम को हस्तक्षेप करने के लिए कहा। वायरल वीडियो में वह बार-बार अपनी इंटरनल टीम को बुलाते हुए नजर आ रही हैं। इतना ही नहीं जैस्मीन सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार पर सवाल उठाती हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति को शांत तरीके से संभाला जा सकता है और जरूरत से ज्यादा आक्रामकता से बचना चाहिए। उनकी इस प्रतिक्रिया ने न केवल हालात को काबू में लाने में मदद की, बल्कि दर्शकों के बीच भी भरोसा कायम किया। कुछ ही मिनटों में आयोजन टीम और जैस्मीन की टीम ने मिलकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया। हालात सामान्य होने के बाद जैस्मीन ने दोबारा अपना परफॉर्मेंस शुरू किया। उन्होंने माहौल को हल्का करने के लिए दर्शकों से मजाकिया अंदाज में बात की और कहा कि देहरादून में उनका यह पहला दौरा है और लोगों का उत्साह देखकर वह खुश हैं, लेकिन ऐसे आयोजनों में मजबूत बैरिकेडिंग बेहद जरूरी है। कॉन्सर्ट के दौरान उन्होंने अपने कई लोकप्रिय गाने पेश किए। इसके अलावा उन्होंने कुछ भावुक गाने भी गाए, जिनसे दर्शकों के साथ उनका कनेक्शन और मजबूत हुआ। कार्यक्रम के अंत तक माहौल फिर से सामान्य और उत्साहपूर्ण हो गया। पंजाबी और बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी अलग आवाज और बेबाक अंदाज़ के लिए पहचानी जाने वाली जैस्मीन सैंडलस आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। जैस्मीन सैंडलास का जन्म पंजाब के जालंधर में हुआ था। बचपन में ही उनका परिवार अमेरिका के कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गया। जैस्मीन का पहला गाना Muskan था, जिसने उन्हें शुरुआती पहचान दिलाई।
द इंडिया स्टोरी: खेती के ज़हर पर बनी फिल्म, काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े पहली बार दिखेंगे साथ
गंभीर मुद्दों पर फिल्में कम बनती हैं, लेकिन जब बनती हैं तो चर्चा दूर तक जाती है। अब ऐसी ही एक फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी’ रिलीज़ से पहले सुर्खियों में आ गई है। Kajal Aggarwal और Shreyas Talpade स्टारर यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक ऐसे खामोश खतरे को सामने लाने की कोशिश कर रही है जो लाखों लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। खेती में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायनों पर आधारित है कहानी The India Story का सबटाइटल ‘स्लो पॉइज़न इन प्रोग्रेस’ है, जो इसके विषय की गंभीरता को साफ दिखाता है। फिल्म खेती में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक रसायनों और उनके लोगों की सेहत पर पड़ने वाले खतरनाक असर को केंद्र में रखती है। कहानी यह दिखाने की कोशिश करती है कि कैसे औद्योगिक लापरवाही और जागरूकता की कमी धीरे-धीरे समाज को नुकसान पहुंचा रही है। पहली बार साथ दिखेंगे काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि पहली बार Kajal Aggarwal और Shreyas Talpade एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। दोनों कलाकारों से दमदार और भावनात्मक अभिनय की उम्मीद की जा रही है। फिल्म का टोन गंभीर है, इसलिए दर्शकों को इसमें इमोशन और सामाजिक संदेश का मजबूत मिश्रण देखने को मिल सकता है। 24 जुलाई को सिनेमाघरों में होगी रिलीज़ फिल्म का निर्देशन Chetan DK ने किया है, जबकि कहानी, लेखन और निर्माण की जिम्मेदारी Sagar B Shinde ने संभाली है। यह फिल्म Zee Studios और MIG Production and Studios के सहयोग से बनाई गई है। ‘द इंडिया स्टोरी’ 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में दर्शकों के सामने आएगी। मेकर्स को उम्मीद है कि यह फिल्म सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक चर्चा में भी अपनी खास जगह बनाएगी।
नार्वे में पत्रकारिता या पब्लिसिटी स्टंट?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान ओस्लो में जो कुछ भी हुआ, वह इसी छटपटाहट और एजेंडा-आधारित पत्रकारिता का एक ज्वलंत उदाहरण है। दुःख की बात यह है कि विदेशी जमीन पर रची गई एक पब्लिसिटी स्टंट की स्क्रिप्ट पर भारत का मुख्य ...
Vastu Tips: घर से वास्तु दोष मिटाने के 3 आसान उपाय, सुख-समृद्धि से भर जाएगा जीवन
घर में वास्तु दोष होने पर मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह जैसी परेशानियां खड़ी होने लगती हैं। कई बार लोग सोचते हैं कि वास्तु दोष ठीक करने के लिए घर में तोड़-फोड़ करनी पड़ेगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वास्तु शास्त्र में कुछ बेहद सरल और छोटे उपायों के बारे में बताया गया है, जिन्हें आजमाने से बिना किसी तोड़-फोड़ के घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। आइए जानते हैं ऐसे ही 3 अचूक और छोटे वास्तु उपाय। ALSO READ: वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips 1. मुख्य द्वार पर सेंधा नमक और पानी का पोंछा (Salt Water Mopping) घर का मुख्य द्वार (Main Gate) ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाएं घर में आती हैं। क्या करें: रोजाना या सप्ताह में कम से कम दो बार (विशेषकर गुरुवार और शनिवार को छोड़कर) पोंछे के पानी में एक मुट्ठी सेंधा नमक (Rock Salt) मिला लें। इस पानी से पूरे घर और मुख्य द्वार के आसपास पोंछा लगाएं। फायदा: नमक में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। इससे घर के कोने-कोने में छिपी डिप्रेशन या तनाव की ऊर्जा खत्म होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। 2. ईशान कोण (North-East) को रखें खाली और शुद्ध घर की उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है, जिसे देवताओं (विशेषकर भगवान शिव और कुबेर जी) का स्थान माना गया है। इस दिशा में दोष होने पर तरक्की रुक जाती है। क्या करें: ईशान कोण को हमेशा पूरी तरह साफ, खुला और हल्का रखें। यहाँ कभी भी भारी सामान, कबाड़, झाड़ू या डस्टबिन न रखें। विशेष उपाय: इस कोने में एक कांच के बर्तन में साफ पानी भरकर रखें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिला दें। इस पानी को रोजाना बदलते रहें। यदि संभव हो, तो यहाँ एक छोटा सा तुलसी का पौधा या जलता हुआ दीया रखें। फायदा: इससे घर में धन का प्रवाह (Cash Flow) बढ़ता है और परिवार के सदस्यों की बुद्धि सही दिशा में काम करती है। ALSO READ: Vastu tips: किराए के घर में रह रहे हैं? तो जान लें ये 8 वास्तु टिप्स, जो बदल देंगे आपकी किस्मत 3. कपूर और फिटकरी का जादुई उपाय (Camphor & Alum) अगर घर के किसी विशेष कमरे या कोने में आपको भारीपन महसूस होता है, या वहां जाते ही मूड खराब हो जाता है, तो यह उपाय रामबाण है। क्या करें: घर के बाथरूम और कमरों के गुप्त कोनों में एक छोटी सी कांच की कटोरी में फिटकरी (Alum) के कुछ टुकड़े या कपूर (Camphor) की टिकिया रख दें। जब यह कपूर हवा में उड़ जाए या फिटकरी का रंग बदलने लगे, तो इसे बदल दें। इसके अलावा, शाम के समय पूरे घर में कपूर और लौंग जलाकर उसका धुआं दिखाएं। फायदा: यह उपाय घर के सूक्ष्म वास्तु दोषों को खींच लेता है, हवा को शुद्ध करता है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम को बढ़ाता है। ALSO READ: Vastu Tips for Home: कैसे पता करें कि घर में वास्तु दोष है? जानें 13 काम की बातें झटपट टिप: याद रखें, वास्तु का सबसे पहला नियम है 'स्वच्छता'। घर में जो भी चीजें टूटी-फूटी हैं (जैसे बंद घड़ियां, चटके हुए कांच के बर्तन या खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान), उन्हें तुरंत घर से बाहर निकालें, क्योंकि ये राहू और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।
The Silent Megaphone: India’s Sovereign Bypassing of the Fourth Estate
In the cavernous press rooms of Western capitals, the script of modern statesmanship follows a predictable, almost liturgical rhythm. A leader speaks, the podium is cleared, and the floor is surrendered to the messy, adversarial friction of the press conference. It is a theater of accountability that global leaders, however reluctantly, accept as the cost […]
भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक 'ड्रैगन' अपनी बड़ी घोषणा के साथ हर तरफ छा गई है। यह फिल्म 'मैन ऑफ द मासेस' जूनियर एनटीआर (NTR) और देश के सबसे बड़े डायरेक्टर प्रशांत नील को एक साथ लेकर आ रही है, जो दर्शकों को सिनेमा का एक बेहद असाधारण अनुभव देने वाली है। एक बहुत बड़े स्केल पर बनाई जा रही यह फिल्म अपनी कमाल की कहानी और धमाकेदार एक्शन के साथ सिनेमाई अनुभव को एक बिल्कुल अलग लेवल पर ले जाने का वादा करती है। इस फिल्म की पहली झलक अब सामने आ चुकी है, जिसके हर एक शॉट में एक विशाल और बेहद आकर्षक दुनिया की झलक देखने को मिल रही है। ALSO READ: 'ऑफ कैंपस' में दिखीं महिमा चौधरी की बेटी? हॉलीवुड एक्ट्रेस को शो में देख कन्फ्यूज हुए फैंस, जानिए कौन हैं मीका अब्दुल्ला जिसने भी इस पहली झलक को देखा है, उसके होश उड़ गए हैं और अब हर कोई अपनी सांसें थामकर यह जानने का इंतजार कर रहा है कि यह फिल्म उनके लिए और क्या सरप्राइज लेकर आने वाली है। फिल्म की पहली झलक के बारे में बात करते हुए, 'ड्रैगन' के डायरेक्टर प्रशांत नील ने फैंस के बीच मचे इस जबरदस्त उत्साह पर अपनी प्रतिक्रिया दी। A post shared by Mythri Movie Makers (@mythriofficial) उन्होंने कहा, हमने इस झलक में जो कुछ भी दिखाया है, वह सिर्फ एक सेटिंग (माहौल) है। हमने टीज़र के जरिए जो बात पहुंचाई है, फिल्म उससे बिल्कुल उलट है। जैसा कि मैंने आपसे कहा, यह सिर्फ एक बैकग्राउंड तैयार करना है; आसान शब्दों में कहें तो यह सिर्फ खेलने का मैदान तैयार करने जैसा है। लेकिन इस फिल्म का असली ड्रामा यह है कि हम एक ऐसी कोशिश कर रहे हैं जो शायद अब तक की सबसे बेहतरीन देशभक्ति फिल्मों में से एक बनकर सामने आएगी। घोषणा के बाद से ही इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त बज बना हुआ है, और फैंस इसके हर एक अपडेट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब सिनेमा जगत के दो इतने बड़े और दमदार नाम एक साथ आ रहे हों, तो 'ड्रैगन' का सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक होना लाज़मी है। दर्शक बड़े पर्दे पर इस मेगा कोलाबोरेशन का जादू देखने के लिए बेहद एक्साइटेड हैं। प्रशांत नील के डायरेक्शन में बन रही फिल्म 'ड्रैगन' में जूनियर एनटीआर लीड रोल में नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्माण 'माइथ्री मूवी मेकर्स' और 'एनटीआर आर्ट्स' के बैनर तले किया जा रहा है। यह फिल्म कुल 5 भाषाओं में रिलीज होगी, और इसे 11 जून 2027 को एक भव्य स्तर पर सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी है।
अपने धमाकेदार टीज़र से पूरे देश में हलचल मचाने के बाद, 'बंदर' के मेकर्स ने आखिरकार इसका ट्रेलर भी रिलीज कर दिया है। यह ट्रेलर आपको एक ऐसी दुनिया में और गहराई से ले जाता है जो ट्विस्ट्स, बोल्ड डायलॉग्स, कमाल की परफॉर्मेंस और हल्के-फुल्के ह्यूमर से भरी हुई है। मनोरंजन के मामले में यह फिल्म अपने अनूठे और हटके अंदाज की वजह से बेहद दिलचस्प लग रही है। बॉबी देओल पहली बार डायरेक्टर अनुराग कश्यप के साथ काम कर रहे हैं, और उन्होंने एक अनुराग कश्यप फिल्म की अनूठी दुनिया में कदम रखते हुए बिल्कुल अलग और अनोखा रोल निभाया है, ठीक वैसा ही बेमिसाल एंटरटेनमेंट जिसका सब लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। 'बंदर' के ट्रेलर ने सिर्फ ढाई मिनट के अंदर ही वो कर दिखाया है जिसे करने में ज़्यादातर हिंदी फिल्में पूरा फर्स्ट हाफ ले लेती हैं। यानी आपको कहानी में पूरी तरह खींचना, हैरान कर देना और यह सोचने पर मजबूर कर देना कि आखिर आप किसका साथ दें। 'एनिमल' और 'द बैं***ड्स ऑफ बॉलीवुड' जैसी अपनी सुपरहिट फिल्मों की कतार के बाद बॉबी देओल यहां एक बिल्कुल अलग रोल में हाथ आज़माते दिख रहे हैं, और वो इसमें पूरी तरह छा गए हैं। ALSO READ: 'जोर से बोलो, आवाज नहीं आ रही', पैपराजी ने मांगी सलमान खान से माफी, विवाद का हैप्पी एंड बॉबी देओल स्क्रीन पर काफी स्मार्ट, चार्मिंग और अपने किरदार के आस-पास की पूरी दीवानगी के साथ बिल्कुल फिट बैठते नज़र आ रहे हैं। उन्हें अनुराग कश्यप की इस कमाल की कहानी कहने की दुनिया में कदम रखते हुए देखना वाकई एक बेहद शानदार अनुभव है। इसके अलावा, 'बंदर' का ट्रेलर आपको शुरू से लेकर आखिर तक पूरी तरह बांधे रखता है। अनुराग कश्यप, जो पहली बार बॉबी देओल के साथ काम कर रहे हैं, उन्होंने बॉबी को वो खुला स्पेस दिया है जो ज़्यादातर डायरेक्टर्स कभी नहीं दे पाते। बॉबी ने भी इसके हर एक हिस्से का पूरा इस्तेमाल किया है। वो फिल्म में एक ऐसे कभी मशहूर रहे स्टार का रोल प्ले कर रहे हैं जो अब बस नाम की शोहरत के सहारे जी रहा है। स्टेज पर घमंडी और अकड़ू, लेकिन ऑफ-स्टेज बिल्कुल अकेला। ऐसी औरतों को राइट-स्वाइप करने वाला जिनके नाम तक उसे याद नहीं रहेंगे। लेकिन तभी एक नाम वापस लौटता है, और उसके साथ ही शुरू होता है एक केस। ट्रेलर के कुछ ही मिनटों के भीतर, वो आदमी जिस पर हम हंस रहे होते हैं, अचानक सलाखों के पीछे पहुंच जाता है। उसकी मुस्कान गायब हो जाती है, तालियां रुक जाती हैं और पिंजरा बंद हो जाता है। सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी, सपना पब्बी, सबा आज़ाद, ऋद्धि सेन, जितेंद्र जोशी, इंद्रजीत और नागेश भोंसले जैसे टैलेंटेड एक्टर्स की दमदार मौजूदगी इसमें एक अलग ही चार्म जोड़ती है। यह फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और एक ऐसे सिस्टम के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो हमेशा सब कुछ सही नहीं करता। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें अनुराग कश्यप के डायरेक्शन में बनी और सुदीप शर्मा व अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखी गई फिल्म 'बंदर' ठीक उसी तरह की सिनेमा है जिसे बनाकर अनुराग कश्यप ने अपना इतना बड़ा नाम कमाया है। यह फिल्म डार्क है, बिना किसी हिचकिचाहट के सच दिखाने वाली है और सही-गलत के बीच के फर्क को धुंधला करने वाली है। 'बंदर' को 'पाताल लोक', 'कोहरा' और 'उड़ता पंजाब' जैसी सराही गई कहानियों के पीछे रहने वाली शानदार जोड़ी सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने लिखा है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन में बनी, निखिल द्विवेदी की 'सैफरन मैजिकवर्क्स' द्वारा प्रोड्यूस और 'ज़ी स्टूडियोज़' के सपोर्ट से तैयार यह फिल्म 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है।
अन्ना आंदोलन से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ तक : भारतीय लोकतंत्र में बदलाव की छटपटाहट
भा रत का लोकतंत्र केवल चुनावों की मशीन नहीं है, बल्कि यह समय-समय पर समाज की बेचैनी, उम्मीद और असंतोष का दर्पण भी रहा है। 1950 के दशक के नेहरूवादी आदर्शवाद से लेकर 2026 के मीम-प्रधान, सोशल मीडिया संचालित राजनीतिक विमर्श तक भारतीय राजनीति लगातार एक ऐसे समाज की कहानी कहती है जो हर पीढ़ी में “ बदलाव” चाहता है, लेकिन हर बार उस बदलाव की परिभाषा बदल जाती है। आज सोशल मीडिया पर उभरी तथाकथित “कॉकरोच जनता पार्टी” जैसी व्यंग्यात्मक डिजिटल राजनीति हो, या 2011 का अन्ना आंदोलन—दोनों के केंद्र में एक समान भावना दिखाई देती है: व्यवस्था से गहरा मोहभंग और एक वैकल्पिक राजनीतिक नैरेटिव की तलाश। फर्क सिर्फ इतना है कि अन्ना का आंदोलन सड़कों पर था, जबकि जेन-जी की राजनीति इंस्टाग्राम रील, यूट्यूब शॉर्ट्स और मीम संस्कृति के जरिए आकार ले रही है। 1956 से 1977: आदर्शवाद से असंतोष तक स्वतंत्रता के बाद भारत में लंबे समय तक जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस का प्रभुत्व रहा। यह वह दौर था जब राजनीति विकास, समाजवाद और राष्ट्र-निर्माण की भाषा बोलती थी। लेकिन 1962 के चीन युद्ध, 1965 और 1971 के युद्ध, खाद्यान्न संकट और बेरोजगारी ने जनता के भीतर यह प्रश्न पैदा किया कि क्या सत्ता का केंद्रीकरण लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। 1967 के चुनावों में पहली बार कांग्रेस की पकड़ कई राज्यों में कमजोर हुई। यही वह समय था जब भारतीय राजनीति में “विकल्प” शब्द जन्म लेने लगा। फिर आया 1975 का आपातकाल। इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का निर्णायक मोड़ बना। प्रेस पर नियंत्रण, विपक्ष की गिरफ्तारी और नागरिक स्वतंत्रताओं के हनन ने जनता के भीतर सत्ता-विरोधी ऊर्जा पैदा की। 1977 में जनता पार्टी का उभार इसी बेचैनी का परिणाम था।भारतीय लोकतंत्र ने पहली बार यह साबित किया कि जनता सत्ता बदल सकती है। 1980 से 1990 : जाति, धर्म और पहचान की राजनीति 1980 के दशक में भारतीय राजनीति का चरित्र बदलने लगा। अब विमर्श “गरीबी हटाओ” से आगे बढ़कर पहचान-आधारित राजनीति में प्रवेश कर चुका था। मंडल कमीशन की सिफारिशों ने सामाजिक न्याय की राजनीति को जन्म दिया, जबकि राम मंदिर आंदोलन ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को नई ऊर्जा दी। इसी दौर में भारतीय जनता पार्टी का उभार शुरू हुआ। “ यह वह समय था जब भारत में राजनीति केवल विचारधारा नहीं रही, बल्कि सामाजिक समूहों की आकांक्षाओं का युद्धक्षेत्र बन गई। “ दूसरी ओर, भ्रष्टाचार के मुद्दे—विशेषकर बोफोर्स—ने जनता में यह धारणा मजबूत की कि सत्ता चाहे किसी की भी हो, व्यवस्था अंततः भ्रष्ट हो जाती है। यही भावना आगे चलकर अन्ना आंदोलन की जमीन बनी। 1991 से 2010 : उदारीकरण और नए भारत की राजनीति 1991 के आर्थिक उदारीकरण ने भारतीय लोकतंत्र को आर्थिक रूप से बदल दिया। एक नया मध्यम वर्ग पैदा हुआ, निजी मीडिया का विस्तार हुआ और राजनीति में “विकास” एक नए नारे के रूप में सामने आया। अटल बिहारी बाजपेई ने गठबंधन राजनीति को स्थिरता दी, जबकि डॉ. मनमोहन सिंह के दौर में अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी। लेकिन इसी समय भ्रष्टाचार के बड़े आरोप—2G, कोयला आवंटन, कॉमनवेल्थ—जनता के भीतर यह भावना पैदा कर रहे थे कि लोकतंत्र चुनाव तो करा रहा है, लेकिन जवाबदेही नहीं दे पा रहा। 2011 : अन्ना आंदोलन और व्यवस्था-विरोध की राजनीति 2011 में अन्ना हजारे का आंदोलन भारतीय राजनीति में एक मनोवैज्ञानिक विस्फोट था। दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन केवल लोकपाल की मांग नहीं था। वह उस मध्यम वर्ग की राजनीतिक एंट्री थी जो लंबे समय तक “ राजनीति गंदी है” कहकर दूरी बनाए हुए था। यह आंदोलन सत्ता-विरोधी ऊर्जा का राष्ट्रीय विस्फोट था। लोगों को लगा कि शायद राजनीति को “ईमानदार” बनाया जा सकता है। इसी आंदोलन से आम आदमी पार्टी (AAP) का जन्म हुआ। हालांकि समय के साथ यह भी पारंपरिक राजनीतिक दलों जैसी आलोचनाओं के घेरे में आ गई। लेकिन अन्ना आंदोलन ने एक स्थायी बदलाव किया—उसने नागरिकों को यह एहसास कराया कि राजनीति केवल नेताओं की चीज नहीं , बल्कि जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी का क्षेत्र भी हो सकती है। 2014 के बाद: व्यक्तित्व-प्रधान राजनीति और डिजिटल राष्ट्रवाद 2014 के बाद भारतीय राजनीति में एक नया चरण शुरू हुआ जिसमें नेतृत्व, नैरेटिव और डिजिटल संचार सबसे बड़ी ताकत बन गए। नरेंद्र मोदी ने चुनावी राजनीति को अभूतपूर्व तरीके से केंद्रीकृत और ब्रांड-आधारित बनाया। राष्ट्रवाद, मजबूत नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाएं और सोशल मीडिया—इन सबका मिश्रण भारतीय राजनीति का नया मॉडल बना। विपक्ष लगातार यह प्रश्न उठाता रहा कि क्या संस्थाएं कमजोर हो रही हैं, क्या लोकतंत्र अत्यधिक व्यक्ति-केंद्रित हो गया है, और क्या असहमति के लिए पर्याप्त जगह बची है? दूसरी ओर समर्थकों का तर्क था कि दशकों की नीतिगत सुस्ती के बाद भारत को निर्णायक नेतृत्व मिला है। यानी भारतीय लोकतंत्र का विमर्श अब “वाम बनाम दक्षिण” से आगे बढ़कर “स्थिरता बनाम असहमति”, “राष्ट्रवाद बनाम उदारवाद” और “केंद्रीकरण बनाम संस्थागत संतुलन” के बीच घूमने लगा। जेन-जी और ‘ कॉकरोच राजनीति’: मीम, व्यंग्य और विद्रोह 2020 के दशक में राजनीति का नया चेहरा जेन-जी (Gen-Z) है—वह पीढ़ी जो टीवी डिबेट नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम क्लिप और यूट्यूब एल्गोरिद्म से राजनीतिक राय बनाती है।यह पीढ़ी वैचारिक रूप से स्थायी नहीं है। वह तेजी से प्रभावित होती है, तेजी से निराश होती है और तेजी से ट्रोल भी करती है। इसी वातावरण में “कॉकरोच जनता पार्टी” जैसे व्यंग्यात्मक डिजिटल प्रयोग लोकप्रिय होते हैं। यह वास्तविक राजनीतिक दल से अधिक एक सांस्कृतिक संकेत है—एक ऐसी पीढ़ी का संकेत जिसे लगता है कि पारंपरिक राजनीतिक दल उसकी भाषा नहीं समझते। कॉकरोच का प्रतीक यहां महत्वपूर्ण है। वह व्यवस्था की हर दरार में जीवित रहने वाली सत्ता-संरचनाओं का प्रतीक भी हो सकता है, और उस आम नागरिक का भी जो तमाम राजनीतिक विफलताओं के बावजूद जीवित है। “ जेन-जी राजनीति को गंभीर वैचारिक युद्ध की तरह नहीं, बल्कि “ सिस्टम हैक” की तरह देखती है। उसके लिए मीम भी राजनीतिक हथियार है। “ क्या भारत बदलाव चाहता है या सिर्फ नया चेहरा? भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि जनता हर दशक में बदलाव चाहती है, लेकिन अक्सर बदलाव का अर्थ केवल “नई सत्ता” रह जाता है। 1977 में कांग्रेस के खिलाफ लहर थी। 1989 में भ्रष्टाचार के खिलाफ। 2011 में व्यवस्था के खिलाफ। 2014 में निर्णायक नेतृत्व के पक्ष में। और 2026 तक आते-आते यह असंतोष डिजिटल व्यंग्य और एंटी-एस्टैब्लिशमेंट इंटरनेट संस्कृति में बदल रहा है। लेकिन, हर बार जनता की मूल मांग लगभग समान रही— अधिक जवाबदेही, कम भ्रष्टाचार, बेहतर अवसर, और ऐसी राजनीति जो नागरिक को केवल वोटर नहीं बल्कि सहभागी माने। भारतीय लोकतंत्र की अगली परीक्षा भारत का लोकतंत्र अभी भी जीवंत है क्योंकि यहां असंतोष दबता नहीं, नए रूप में लौटता है। कभी जेपी आंदोलन बनकर, कभी अन्ना आंदोलन बनकर और कभी “कॉकरोच जनता पार्टी” जैसे इंटरनेट-व्यंग्य के रूप में। यह बदलाव की बेचैनी लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी जीवन्तता का प्रमाण है। असल प्रश्न यह नहीं कि अगली सत्ता किसके पास होगी। असल प्रश्न यह है कि क्या भारतीय राजनीति 21वीं सदी के उस नागरिक को समझ पाएगी जो जाति और धर्म से आगे रोजगार, अवसर, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और डिजिटल भागीदारी की राजनीति चाहता है। यदि पारंपरिक दल इस बदलाव को नहीं समझेंगे, तो आने वाले वर्षों में भारत की राजनीति और अधिक अस्थिर, अधिक डिजिटल और अधिक अप्रत्याशित होती जाएगी। यहां — Martin Luther King Jr. की यह पंक्ति सटीक बैठती है कि “ राजनीति में सबसे बड़ा खतरा बुरे लोगों का नहीं, अच्छे लोगों की चुप्पी का होता है।” भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां जनता अभी भी बोलती है, सवाल पूछती है, नाराज़ भी होती है और हर पीढ़ी में बदलाव का नया सपना गढ़ती है।
पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?
साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है) का बेहद शुभ योग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब एक ही चंद्र मास दो बार आता है, तो पहले वाले को 'अधिकमास' और दूसरे को 'शुद्ध' या 'निज' मास कहा जाता है। यह महीना भौतिक सुखों के विस्तार के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति और ईश्वर की भक्ति के लिए समर्पित है। आइए जानते हैं इसकी तिथियां और जरूरी नियम। ALSO READ: 3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा ज्येष्ठ अधिकमास 17 मई 2026 (रविवार) से प्रारंभ। 15 जून 2026 (सोमवार) को समाप्त। निज ज्येष्ठ मास (शुद्ध) 16 जून 2026 (मंगलवार) से प्रारंभ। 13 जुलाई 2026 (सोमवार) को समाप्त। ALSO READ: पुरुषोत्तम मास 2026: इन खास तिथियों पर रखें व्रत, करें इन देवी-देवताओं की पूजा; मिलेगा अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि इस माह में क्या करें? (Dos) चूंकि यह महीना भगवान विष्णु (श्री पुरुषोत्तम) को समर्पित है, इसलिए इस दौरान किए गए आध्यात्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है: भगवान विष्णु की उपासना: नियमित रूप से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या पुरुष सूक्त का पाठ करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। महादान का महत्व: इस महीने में अनाज, जल, वस्त्र और दीपदान का विशेष महत्व है। प्राचीन परंपरा: इस माह में कांसे के पात्र (बर्तन) में मालपुए रखकर दान करने की विशेष परंपरा है। धार्मिक ग्रंथों का श्रवण: श्रीमद्भागवत कथा या भगवद्गीता का पाठ करें अथवा इसे सुनें। पवित्र स्नान: संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। व्रत और साधना: आत्मिक शुद्धि के लिए इस दौरान मौन व्रत रखने या पूरी तरह सात्विक जीवन जीने का संकल्प लें। ALSO READ: अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें क्या न करें? (Don'ts) अधिकमास को 'मलमास' भी कहा जाता है, इसलिए इस काल में सांसारिक मांगलिक (शुभ) कार्य पूरी तरह वर्जित माने गए हैं: मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई (तय करना), मुंडन, जनेऊ संस्कार और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य भूलकर भी न करें। नया बिजनेस या करियर: नया व्यापार शुरू करना या नई नौकरी ज्वाइन करने जैसे कदम इस समय टाल देने चाहिए। बड़ी खरीदारी: नया घर बनाना शुरू करना, या नया प्लॉट/गाड़ी खरीदने से बचना चाहिए। तामसिक भोजन का त्याग: भोजन में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा (शराब) का सेवन पूरी तरह वर्जित है। आचरण पर नियंत्रण: किसी का अपमान न करें, झूठ न बोलें और वाद-विवाद से बचें; क्योंकि इस दौरान किए गए बुरे कर्मों का नकारात्मक फल भी गहरा होता है। विशेष : यदि आप मीन राशि या उन 3 राशियों में से हैं जिन्हें ज्योतिषविदों द्वारा इस वर्ष सावधान रहने की सलाह दी गई है, तो यह महीना आपके लिए अपनी मानसिक ऊर्जा को शांत करने और उसे सकारात्मक दिशा में मोड़ने का सबसे बेहतरीन अवसर है।
POGO लेकर आया नया 3D एनिमेटेड शो 'सम्पत चम्पत', 40 साल पुराने कॉमिक कैरेक्टर्स की वापसी
बच्चों के मनोरंजन की दुनिया में अब एक नया और मजेदार शो आ गया है। पोगो ने अपने नए 3D एनिमेटेड शो 'सम्पत चम्पत' का 18 मई को प्रीमियर किया है। यह शो बच्चों की मशहूर कॉमिक पत्रिका ‘लोटपोट’ के लोकप्रिय किरदारों पर आधारित है। इसके साथ ही भारत की पसंदीदा कॉमिक कहानियों को एक नए अंदाज़ में दर्शकों के सामने पेश किया गया है। सम्पत चम्पत अपनी मजेदार हरकतों और कॉमेडी के लिए पिछले 40 सालों से लोगों का मनोरंजन करते आ रहे हैं। अब पहली बार ये दोनों किरदार कॉमिक्स से निकलकर टीवी स्क्रीन पर 3D एनिमेशन में दिखाई दे रहे हैं। यह शो बच्चों के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए हंसी, रोमांच और पुरानी यादों से भरा मनोरंजन लेकर आया है। A post shared by Pogo TV (@pogotvin) इस पर बात करते हुए लोटपोट कॉमिक्स के प्रकाशक और शो के निर्माता अमन बजाज ने कहा, मैं इस शो को लेकर बहुत उत्साहित हूं। सम्पत चम्पत पिछले 40 सालों से हमारी कॉमिक्स का हिस्सा रहे हैं, और अब उन्हें टीवी पर एनिमेशन के रूप में देखना मेरे लिए बेहद ख़ुशी की बात है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें उन्होंने कहा, सम्पत चम्पत लोटपोट की दुनिया से आते हैं, जिसने ‘मोटू पतलू’, ‘शेखचिल्ली एंड फ्रेंड्स’ जैसे कई सुपरहिट आईपी दिए हैं। मुझे विश्वास है कि अब ब्रॉडकास्टर्स भारतीय घरेलू आईपी को और भी ज्यादा अपनाएंगे। उम्मीद है कि दर्शक भी सम्पत चम्पत को उतना ही प्यार देंगे। लोटपोट कॉमिक्स के सीएमओ और शो के निर्माता शिवांक अरोड़ा ने कहा, यह बच्चों के टीवी शो के निर्माता के रूप में मेरा पहला प्रोजेक्ट है और मैं इसके लिए बहुत खुश और उत्साहित हूं। पिछले कुछ सालों से हम इस सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। मैं उम्मीद करता हूं कि यह शो सभी रिकॉर्ड तोड़े और दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए। कॉमिक लेखक और चित्रकार डॉ. हरविंदर मंकर ने कहा, मैंने सम्पत चम्पत को 40 साल पहले लोटपोट कॉमिक्स के लिए बनाया था और यह मेरे और इससे जुड़े सभी लोगों के लिए गर्व का पल है कि यह अब एक प्रसिद्ध चैनल पोगो पर एनिमेशन के रूप में प्रसारित हो रहा है। मैं कह सकता हूं कि यह हमारी उम्मीद से कई बेहतर है। आशा है कि यह दर्शकों को भी पसंद आएगा। ‘पोगो’ हमेशा बच्चों के लिए मजेदार और भारतीय कहानियों वाले अच्छे शो लाने की कोशिश करता है। ‘सम्पत चम्पत’ इसी कड़ी का एक उदाहरण है। यह लोटपोट कॉमिक्स के लिए भी बहुत खुशी और गर्व की बात है, क्योंकि उनके पुराने और पसंदीदा किरदार अब एनिमेशन के जरिए टीवी पर दिखाए जा रहे हैं।
बंगाल में राजनीतिक हिंसा रोकना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी चुनौती
चुनाव परिणाम के बाद बंगाल में जगह-जगह कुछ हिंसा तो तृणमूल नेताओं द्वारा मकानों, जमीनों, कार्यालयों पर कब्जे के संदर्भ में हुई जब लोग स्वयं निकलकर इसे मुक्त कराने लगे। इसी तरह हिंदुओं के कई धर्मस्थलों या धर्म स्थानों की मुक्ति के दृश्य भी सामने आए।
'जोर से बोलो, आवाज नहीं आ रही', पैपराजी ने मांगी सलमान खान से माफी, विवाद का हैप्पी एंड
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान अपनी दरियादिली के साथ-साथ अपने कड़क मिजाज के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में मुंबई के हिंदुजा अस्पताल के बाहर एक ऐसी घटना घटी, जिसने सेलिब्रिटी प्राइवेसी और पैपराजी के काम करने के तौर-तरीकों पर एक नई बहस छेड़ दी। दरअसल, सलमान खान अपने किसी करीबी से मिलने हिंदुजा अस्पताल पहुंचे थे, इस दौरान पैपराजी ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद सलमान पैपराजी पर बुरी तरह भड़क उठे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके भी पैपराजी को फटकार लगाई थी। LATEST: Cute Banter Between Salman Khan and Media People! Media - Aaj koi chilana mat re, Love u bhai. Salman - Ha yeh jagah sahi hai. Media - Kal ke liye sorry bhai Salman - Jor se bolo awaz Nahi aa rahi tum sabki #SalmanKhan pic.twitter.com/vhwiFz8K00 — Being ADARSH (@IBeingAdarsh_) May 20, 2026 हालांकि अब इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे का अंत बेहद सकारात्मक रहा, जहां गलती का एहसास होने पर मीडियाकर्मियों ने माफी मांगी और सलमान ने भी मुस्कुराकर उन्हें माफ कर दिया। इस विवाद के ठीक अगले दिन यानी बुधवार को सलमान खान मुंबई में रितेश देशमुख की मराठी फिल्म 'राजा शिवाजी' के सक्सेस बैश में शामिल होने पहुंचे, जहां उन्होंने एक कैमियो रोल किया है। ALSO READ: '60 साल का हो गया हूं, लड़ना नहीं भूला', पैपराजी पर भड़के सलमान खान, आधी रात को दी चेतावनी जैसे ही सलमान अपनी सुरक्षा टीम के साथ रितेश देशमुख के बगल में पोज देने के लिए आगे बढ़े, वहां मौजूद सभी फोटोग्राफर्स ने एक सुर में चिल्लाकर कहा— सॉरी भाईजान, सॉरी! शुरुआत में हलचल देखकर सलमान थोड़े ठिठके, लेकिन जब उन्हें समझ आया कि पैपराजी अपनी पिछली रात की गलती के लिए माफी मांग रहे हैं, तो उनका दिल पिघल गया। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटने का इशारा किया और पैपराजी की माफी स्वीकार कर ली। LATEST: Megastar #SalmanKhan with Riteish Deshmukh together & look at the paps... literally apologising & saying sorry. They know they crossed the line yesterday. It's never a bad idea to apologise to India's biggest megastar… & Bhai, being the man with the biggest heart,… pic.twitter.com/jdbRE9OOm3 — BeingXSohail (@BeingSohail__) May 20, 2026 मजाकिया अंदाज में खत्म हुआ तनाव माहौल को हल्का करते हुए सलमान खान ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में कहा, ज़ोर से बोलो, आवाज़ नहीं आ रही तुम सबकी! सलमान की यह बात सुनते ही वहां मौजूद रितेश देशमुख और सभी फोटोग्राफर्स हंस पड़े। सलमान ने उनसे यह भी पूछा कि उन्होंने वह वीडियो क्यों नहीं शेयर किया जिसमें वे कल रात चप्पलें हाथ में लेकर भाग रहे थे? इसके बाद पैपराजी ने फिर से अपनी गलती मानी और कहा, आज कोई नहीं चिल्लाएगा भाई, लव यू भाई। जवाब में सलमान ने मुस्कुराते हुए कहा, हां, यह जगह चिल्लाने के लिए सही है, अस्पताल नहीं। सलमान खान ने वहां मौजूद लोगों को यह भी बताया कि वह कल रात काफी भावुक थे क्योंकि उनके किसी करीबी की पत्नी बहुत बीमार थीं। इस तरह, महज 24 घंटे के भीतर सलमान खान और पैपराजी के बीच का यह बड़ा विवाद सुलझ गया। सलमान के इस कदम की सोशल मीडिया पर फैंस जमकर तारीफ कर रहे हैं।
'मिर्जापुर: द मूवी' रचेगी इतिहास, दिव्येंदु ने फिल्म को लेकर किया बड़ा खुलासा
भारत की सबसे प्रतिष्ठित ओटीटी फ्रैंचाइज़ी में से एक, 'मिर्जापुर: द मूवी' के साथ बड़े पर्दे पर अपनी बहुप्रतीक्षित छलांग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो इसके बेबाक और फैंस के पसंदीदा यूनिवर्स को सिनेमाघरों में कहीं बड़े पैमाने पर लेकर आ रही है। यह फिल्म अभी से साल 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित रिलीज में से एक बनकर उभरी है। दर्शकों को इसके धमाकेदार और विस्फोटक दुनिया में वापस ले जाने का वादा करते हुए, 'मिर्जापुर: द मूवी' से यह उम्मीद की जा रही है कि यह बड़े एक्शन सीन्स, नए ट्विस्ट, तीखे टकरावों और एक बड़े सिनेमाई अनुभव के साथ रोमांच को और बढ़ा देगी। फिल्म की रिलीज से पहले, दिव्येंदु ने अपने पसंदीदा किरदार 'मुन्ना भैया' के रूप में वापसी को लेकर अपनी उत्सुकता जाहिर की। ALSO READ: वाणी कपूर ने की 'सपने वर्सेस एवरीवन 2' की तारीफ, बोलीं- ऐसी कहानियां दिल को छू जाती है इसे 'विंटेज' (क्लासिक) मिर्जापुर बताते हुए और यह फिल्म बड़े पर्दे पर कितनी भव्य होने वाली है, इस पर दिव्येंदु ने साझा किया, यह पूरी तरह से 'विंटेज' मिर्जापुर होने वाला है। हम पूरी ताकत के साथ धमाकेदार वापसी कर रहे हैं। आप उन्हीं किरदारों को देखेंगे जो पहले सीज़न में थे, वे जैसे थे वैसे ही नज़र आएंगे। बैकड्रॉप बिल्कुल वैसा ही है लेकिन परिस्थितियां अलग हैं। चूंकि यह एक फिल्म है, इसलिए यह बहुत बड़े और सिनेमाई कैनवास पर बनी है, और यह वाकई में सिर्फ और सिर्फ फैंस के लिए है। 'मुन्ना भैया' के लिए मिले इस अगाध प्यार और एक बार फिर इस आइकॉनिक किरदार में कदम रखने के बारे में बात करते हुए दिव्येंदु ने कहा, मुन्ना के लिए लोगों के दिल में जो प्यार है, उसे मैं आज भी पूरी तरह समझ नहीं पाता हूं। कभी-कभी तो हैरानी होती है कि क्या ऐसा कोई किरदार सचमुच किसी समानांतर दुनिया में जी रहा है। चूंकि तीसरे सीज़न में मेरा किरदार मर गया था, इसलिए लोग पुराने हिंदी गानों के साथ इमोशनल रील्स बना रहे थे और उससे वापस आने की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने आगे कहा, मैं सचमुच यही उम्मीद करता हूं कि मैं एक बार फिर इस किरदार के साथ पूरा न्याय कर सकूँ। मेरे दिमाग में थोड़ा सा द्वंद्व (dichotomy) था कि क्या मुझे इसे बिल्कुल नए सिरे से निभाना चाहिए या फिर पहले सीज़न में जो मैंने किया था, उसी की नकल करनी चाहिए, इसलिए शुरुआत में मैं थोड़ा असमंजस में था। 'मिर्जापुर: द मूवी' को लेकर चारों तरफ मचे जबरदस्त बवाल और इसके इतिहास रचने की बात पर विचार करते हुए दिव्येंदु ने कहा: हां, कमाई और रेवेन्यू स्ट्रीमिंग के मामले में यह एक बहुत बड़ी क्रांति साबित होने वाली है; मुझे लगता है कि बहुत से लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह फॉर्मूला काम करता है, ताकि वे भी ऐसा ही कर सकें (यानी किसी वेब सीरीज़ को फिल्म में बदल सकें)। ठीक वैसे ही, जैसे जब पहली बार 'मिर्जापुर' आई थी और किसी ने उससे इतनी उम्मीदें नहीं लगाई थीं, मुझे लगता है कि यह फिल्म भी कुछ ऐसा ही ऐतिहासिक करने की राह पर है। 'मिर्जापुर: द मूवी' अमेज़न MGM स्टूडियोज और एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत की जा रही है। गुरमीत सिंह द्वारा निर्देशित और पुनीत कृष्णा द्वारा लिखित इस फिल्म को एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 4 सितंबर, 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में एक भव्य रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है।
भाजपा के संगठनात्मक एवं मीडिया प्रशिक्षण की सांगठनिक चर्चा
सिरोही। भारतीय जनता पार्टी जिला सिरोही की संगठनात्मक व मीडिया प्रशिक्षण बैठक बालाजी भवन सरूपगंज में भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ रक्षा भंड़ारी व प्रदेश प्रवक्ता व मीडिया पेनलिस्ट ललित लकवाल के आतिथ्य में सम्पन्न हुई। जिला संगठनात्मक बैठक में जिलाध्यक्ष डॉ रक्षा भंड़ारी ने कहा कि जिला, मंडल व बूथ तक की योजना बना कर महीने […] The post भाजपा के संगठनात्मक एवं मीडिया प्रशिक्षण की सांगठनिक चर्चा appeared first on Sabguru News .
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (21 मई, 2026)
1. मेष (Aries) Today 21 May horoscope in Hindi 2026 : करियर: नए प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलेगी। टीम के साथ सहयोग बढ़ेगा। लव: प्रेमी साथी के साथ समझ बढ़ेगी। धन: खर्च पर नियंत्रण जरूरी है। स्वास्थ्य: हल्की थकान महसूस हो सकती है, ध्यान रखें। उपाय: मंगलवार को हनुमान जी का मंत्र पढ़ें। ALSO READ: अधिकमास में 3 साल बाद बन रहे 2 प्रदोष व्रत, चंद्र और शनिदोष से मुक्ति पाने का दुर्लभ मौका 2. वृषभ (Taurus) करियर: नौकरी में प्रमोशन या सराहना मिल सकती है। लव: परिवार और प्रेम जीवन में सामंजस्य बना रहेगा। धन: लंबी अवधि के निवेश लाभकारी होंगे। स्वास्थ्य: पेट और पाचन से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। उपाय: गाय को हरा चारा दें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: व्यवसाय में नए अवसर मिलेंगे। लव: रिश्तों में संवाद से दूरी कम होगी। धन: अचानक धन लाभ संभव है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव बढ़ सकता है, ध्यान रखें। उपाय: बुध ग्रह के लिए हरा कपड़ा दान करें। 4. कर्क (Cancer) करियर: कार्यस्थल पर कठिन कार्यों में सफलता मिलेगी। लव: प्यार में मधुरता बढ़ेगी। रोमांटिक आउटिंग करें। धन: पैसों की स्थिति संतोषजनक रहेगी। स्वास्थ्य: एलर्जी और सर्दी-जुकाम से सतर्क रहें। उपाय: चांदी के बर्तन में जल दान करें। 5. सिंह (Leo) करियर: नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी। प्रमोशन या सराहना मिलने की संभावना। लव: साथी के साथ समय बिताएं, संबंध मजबूत होंगे। धन: निवेश के लिए अच्छा दिन है। स्वास्थ्य: ऊर्जा स्तर अच्छा रहेगा। उपाय: रविवार को सूरज को जल अर्पित करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: ऑफिस में चुनौतियां आएंगी लेकिन समाधान संभव है। लव: प्यार में नई शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। धन: खर्च नियंत्रण में रखें। स्वास्थ्य: थकान और नींद की समस्या हो सकती है। उपाय: बुधवार को हरे रंग की चीजें दान करें। ALSO READ: अधिकमास में 3 साल बाद बन रहे 2 प्रदोष व्रत, चंद्र और शनिदोष से मुक्ति पाने का दुर्लभ मौका 7. तुला (Libra) करियर: सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। आपकी परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी। लव: साथी से सुलह और समझ बनी रहेगी। धन: पैसों की स्थिति संतोषजनक रहेगी। स्वास्थ्य: स्वास्थ्य ठीक रहेगा। उपाय: तुला राशि वाले व्रत का पालन करें। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: नई जिम्मेदारियां मिलेंगी। मेहनत रंग लाएगी। लव: प्रेमीसंग रोमांस में नयापन आएगा। धन: धन लाभ के योग हैं। स्वास्थ्य: थोड़ी थकान हो सकती है। उपाय: मंगलवार को हनुमान चालीसा पढ़ें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: बिजनेस में लाभ और करियर में प्रगति। लव: रिश्तों में रोमांटिक समय मिलेगा। धन: खर्च संतुलित करें, निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य: फिटनेस बनाए रखें। उपाय: शुक्रवार को भगवान विष्णु को दूध चढ़ाएं। 10. मकर (Capricorn) करियर: ऑफिस में कठिन निर्णय लेने पड़ सकते हैं। लव: प्यार में स्थिरता बनी रहेगी। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य: सामान्य स्वास्थ्य, हल्की परेशानी हो सकती है। उपाय: गुरुवार को हल्दी दान करें। 11. कुम्भ (Aquarius) करियर: नए प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलेगी। टीम के साथ तालमेल बढ़ेगा। लव: साथी के साथ मधुरता बनी रहेगी। धन: पैसों का प्रबंधन ध्यान से करें। स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सामान्य, तनाव कम करें। उपाय: गुरुवार को पानी में फूल डालें और दान करें। 12. मीन (Pisces) करियर: बिजनेस और नौकरी दोनों में लाभ के योग। लव: प्रेम जीवन में संतुलन और खुशी रहेगी। धन: खर्च बढ़ सकता है, बजट पर ध्यान दें। स्वास्थ्य: हल्की थकान हो सकती है। उपाय: पीले वस्त्र पहनें और भोजन संबंधी वस्तुओं का दान करें। ALSO READ: 3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा
17 दिसंबर 2025। चारों तरफ जंगल और उसके बीच खाली खेत में 90 पंचायतों के लोग जुटे हैं। सभी के हाथ में लाठी-डंडे, कुदाल और फावड़े हैं। पंचायत में एक शख्स ने फरमान सुनाया कि उस कब्र को खोद डालो और लाश निकाल लो। इतना सुनते ही भीड़ कब्र की ओर चल पड़ी। एक खेत के किनारे ईंट-पत्थर से कब्र बनी है। भीड़ से कुछ लोग कुदाल-फावड़े से उसे तोड़ने लगते हैं। कुछ ही देर में कब्र टूट जाती है। दो लोग आगे आकर कब्र से एक लाश निकालते हैं। लाश सड़ चुकी है। कफन के चीथड़े बाहर बिखरे पड़े हैं। वे लाश को घसीटते हुए सड़क की तरफ चल पड़ते हैं। भीड़ लाश को कहां ले गई आज तक पता नहीं चला। लाश को गायब हुए 6 महीने हो चुके हैं। यह लाश चमरा राम सलाम की थी। इस भीड़ को चमरा राम सलाम का ईसाई धर्म को मानना मंजूर नहीं था। इस बार ब्लैकबोर्ड सीरीज में इस घटना का स्याह पहलू जानने के लिए मैं नीरज झा छत्तीसगढ़ के कांकेर पहुंचा हूं। कांकेर से 50 किलोमीटर दूर बड़े तेवड़ा गांव। यहां एक घर के बाहर आम के पेड़ के नीचे मेरी मुलाकात एक लड़की से होती है। यह 14 साल की लड़की चमरा राम सलाम की पोती है। नाम है ज्योति। वह कच्चे आम छील रही है। ज्योति बताती है, ‘उस दिन 90 गांव की भीड़ के साथ पुलिस भी थी। हम डरकर घर के एक कमरे में दुबक गए। चाची ने फौरन भीतर से कुंडी लगा लिया। मैं घर के एक झरोखे से क्रब तोड़ने का सारा मंजर देख रही थी। आज भी जब खेत की तरफ देखती हूं या दो से ज्यादा लोगों को उधर जाते हुए देखती हूं, तो डर लगता है। वही नजारा आंखों के सामने आ जाता है।’ ये बातें सुनते हुए पास में बैठीं ज्योति की मां ललिता रोने लगती हैं। घटना के बाद उनके पति सरपंच राजमन सलाम इतने डर गए कि पिछले 6 महीने से गांव से फरार हैं। ललिता टूटी-फूटी हिंदी में डर-डरकर बताती हैं- ‘पति से बात किए 6 महीने हो चुके हैं। पता नहीं कहां हैं। चारों बच्चे अपने पापा को याद कर के रोते हैं। कहते हैं कि दादा की तो लाश भी नहीं बची, पापा भी घर छोड़कर चले गए।’ ललिता आंसू पोंछते हुए कहती हैं- अब बच्चों को ये कैसे बताऊं कि धर्म बदलने के कारण गांव वालों ने हमारा ऐसा हाल कर दिया है। हमारा राशन-पानी, सड़क पर चलना-फिरना सब बंद कर दिया है। ‘गांव वालों की चोरी से राशन खरीदने जाती हूं’ पानी भी दूसरे गांव के बोरवेल से लाना पड़ता है, वो भी रात में ताकि कोई पहचान न सके। राशन भी रात में चुपके से लाती हूं, तब घर का चूल्हा जलता है। ऊपर से मुकदमा भी हमारे ही खिलाफ लिखा है। हर 15 दिन में हमारे परिवार को थाने बुलाया जाता है। पुलिस भी पैसे लेती है और तभी घर आने देती है। जबकि मुकदमा तो हमें करना चाहिए था। ललिता अपने बाल खींचकर कहती हैं- ‘देखिए, अभी भी मेरे बाल कटे हुए हैं। पिछले साल 15 दिसंबर की बात है। मेरे ससुर चमरा राम कई दिनों से बीमार थे। तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो हम उन्हें शहर लेकर भागे। शाम होते-होते अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई। पति ने गांव वालों को फोन करके खबर दी कि- पिताजी की मौत हो गई है। कल आप लोग मिट्टी देने आ जाइएगा। तब तक तो अंदाजा ही नहीं था कि लोग हमारे ईसाई धर्म अपना लेने से नाराज हैं। ससुर ने मरने से पहले ही कह दिया था मेरा अंतिम संस्कार ईसाई धर्म के अनुसार करना। जब मेरे पति ससुर का शव लेकर घर पहुंचे तो छोटे देवर राम सिंह ने कहा- भइया, पिताजी का अंतिम संस्कार आदिवासी हिंदू रीति-रिवाज से ही होना चाहिए, ईसाई धर्म के मुताबिक नहीं। देवर राम सिंह ने धर्म नहीं बदला है, वे आज भी आदिवासी हिंदू हैं। उनकी बात पर मेरे पति नाराज हो गए और सख्ते लहजे में कहा- मैं घर का बड़ा बेटा हूं, जिस धर्म को मानता हूं, उसी के मुताबिक पिताजी का अंतिम संस्कार करूंगा। ‘पति ने मिन्नतें की तब जाकर अंतिम संस्कार हुआ’ ये सुनते ही देवर राम सिंह ने गुस्से में गांव वालों को जुटा लिया और झगड़ा करने लगे। कहने लगे कि पिताजी तो हिंदू थे। फिर उन्हें ईसाई धर्म के मुताबिक कैसे दफना सकते हो? हम ऐसा नहीं होने देंगे। ये सब होते-होते शाम होने लगी। लाश दरवाजे पर रखी थी। मेरे पति मिन्नतें करने लगे कि पिताजी की यही इच्छा थी, देर मत करो। अंतिम संस्कार हो जाने दो। आखिरकार सबने हामी भर दी। मेरे पति ने अपने तीनों भाइयों के साथ मिलकर ससुर का शव घर के पास वाले खेत में दफना दिया। सभी ने ईसाई धर्म के मुताबिक प्रार्थना की। फिर ईंट और सीमेंट से पक्की कब्र बनवाई। अगले दिन 17 दिसंबर को मैं और मेरे पति कुछ रिश्तेदारों के साथ इसी आम के पेड़ के नीचे बैठे थे। अचानक 90 गांव के लोग पंचायत करके मेरे घर आ धमके। उनके हाथ में लाठी-डंडे थे। वे हमें पीटने लगे। मेरे सिर पर किसी ने डंडा मारा और मैं बेहोश हो गई। वे घर में घुसकर तोड़-फोड़ करने लगे। घर के बगल में बना हमारा चर्च भी तोड़ दिया। मुझे होश आया तो सिर से खून बह रहा था। पति भी बुरी तरह घायल थे। फौरन हमें हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर ने दो दिन भर्ती रखा। जब वापस घर लौटे, तो सब कुछ उजड़ चुका था। गांव वाले ससुर की लाश को कब्र से खोदकर निकाल ले गए थे। कहां ले गए, आज तक नहीं पता चला। पुलिस भी कुछ बताती नहीं। ललिता बात करते-करते मुझे, अपने खेत की ओर ले गईं। वहां एक आम के पेड़ के नीचे कब्र खुदी हुई है। क्रब के पास ही मिट्टी का ढेर लगा है। सामने एक टूटी हुई खाट पड़ी है। जिस पर उनके ससुर की लाश लाई गई थी। ललिता कहती हैं, ‘अब तो हम यहां आते ही नहीं। ससुर की लाश ही नहीं है, कैसे आंसू बहाएं?’ टूटी कब्र दिखाकर ललिता वापस लौट आती हैं। सामने अपनी देवरानी की घर की ओर इशारा करते हुए कहती हैं- मेरी सास अब उसी के घर रहती हैं।’ अब ललिता के देवरानी के घर पहुंचता हूं। आंगन में 65 साल की वैशाखी बाई बैठी हैं। नीचे चटाई पर बैठते हुए डबडबाई आंखों के साथ गोंडी भाषा में कहती हैं- मेरे सामने की बात है। गांव वाले पति की लाश कब्र से खोदकर कुत्ते की तरह घसीटते हुए ले गए। अब मैं कब्र पर नहीं जाती। जाती हूं तो कई दिन तक पति को याद करके रोती हूं। हाथ में पति की धुंधली सी पासपोर्ट साइज फोटो लिए वैशाखी बाई बताती हैं कि आज भी खेत में उनके कफन के फटे हुए टुकड़े पड़े हैं। अब तो केवल अपने बच्चों का सहारा है। मेरे पति को तो कब्र तक नसीब न हुई। लाश भी खोदकर ले गए। पास ही बैठी वैशाखी बाई की छोटी बहू ऊषा बीच में ही बोल पड़ीं, ‘10 साल पहले मेरी जेठानी ललिता ने ईसाई धर्म अपनाया था। मुझे बच्चे नहीं हो रहे थे, तो मुझे भी अपने साथ चर्च ले जाने लगीं। उसी साल मुझे बच्चा हुआ। तब से मैं भी ईसाई धर्म मानने लगी। मेरे गांव के लोगों को ईसाई धर्म से दिक्कत है।’ ऊषा की बात खत्म होते ही अब मैं अपने साथी को लेकर गांव की तरफ निकल पड़ता हूं। रास्ते में एक घर और उसके बरामदे पर बैठे कुछ लोग दिखाई पड़ते हैं। मैं रुककर इन लोगों से बात करने लगता हूं। ये सभी ‘ग्राम पटेल’ नाम के समूह के सदस्य हैं। यहां ग्राम पटेल कई पंचों का एक समूह को कहते हैं। इन्हीं में से एक हिरऊ राम सलाम छत्तीसगढ़ी जुबान में चमरा राम सलाम के बेटे सरपंच राजमन को गाली देते हुए कहते हैं- ‘हां, वह हमारा पट्टीदार है। सर, हम तो आदिवासी हिंदू हैं। शीतला माता की पूजा करते हैं, लेकिन उसका परिवार गलत रास्ते पर चल दिया। अपने देवी-देवता को छोड़कर ईसा-मसीह को मानने लगा। सिर्फ राजमन का भाई राम सिंह आदिवासी हिंदू धर्म मानता है। वह पिता का अंतिम संस्कार उसी के मुताबिक करना चाहता था, लेकिन नहीं करने दिया। उस परिवार के साथ जो हुआ, ठीक ही हुआ है। लेकिन आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं? आपका कोई एजेंडा तो नही? आप भी ईसाई तो नहीं हैं?’ यह कहते हुए लोगों के बीच बैठे हिरऊ राम सलाम भड़क गए। बातचीत के लिए लगाया माइक निकालकर फेंकने लगे। गुस्से में उनकी आंखें लाल हो गईं। शायद शराब भी पी रखी है। बोले- अब आपसे बात नहीं करना चाहता। उनका गुस्सा शांत करने के लिए मैंने अपने हाथ में बंधा रक्षा-सूत्र कई बार दिखाया। मेरे साथ मौजूद लोकल ड्राइवर युवराज के माथे पर लगे चंदन को दिखाते हुए समझाया कि हम हिंदू हैं। तब जाकर वह फिर से बात करने के लिए तैयार हुए। वह कहते हैं- ‘देखिए सर, सरपंच राजमन के पिता चमरा राम सलाम तो मेरे चाचा थे। जब उनकी मौत हुई, तो हम लोगों ने कहा कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू आदिवासी रीति-रिवाज से होना चाहिए। राम सिंह हिंदू धर्म मानता है। वही चाचा का अंतिम संस्कार करेगा, लेकिन वह नहीं माने। दरअसल, हमारे आदिवासी समाज में अंतिम संस्कार का एक रीति-रिवाज है। हम भी शव को दफनाते हैं, लेकिन कब्र खोदने से पहले जमीन पर दारू गिराते हैं। फिर तीन बार जमीन पर कुदाल मारी जाती है। उसके बाद कोई भी कब्र खोद सकता है। उसके बाद शव को शराब पिलाते हैं। आखिरी तौर पर दफनाने का काम मरे हुए आदमी की समधन करती है। लेकिन राजमन और उसका परिवार इस रिवाज के खिलाफ गया। हमें बिना बताए कब्र खोदी और चाचा का अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाज के मुताबिक किया। हम चाचा को इस तरह कभी भी अपने गांव में दफनाने नहीं देंगे।’ यह बातचीत चल ही रही थी कि हिरऊ राम सलाम मेरी गाड़ी में बैठे दो लड़कों देखकर फिर से भड़क जाते हैं। वे उन लड़को को पहचानते हैं। कुछ ही साल पहले ही दोनों लड़कों ने ईसाई धर्म अपनाया है। ये लड़के मुझे सरपंच राजमन सलाम के घर और अब हिरऊ राम सलाम तक लेकर पहुंचे हैं। हिरऊ राम सलाम और उनके साथ बैठे बाकी लोग दोनों लड़कों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ‘आप इन लोगों को अपने साथ लेकर क्यों घूम रहे हो? आप झूठ बोल रहे हैं कि आप ईसाई नहीं हैं। दरअसल, आप लोग हमारे गांव में ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं। जल्दी से अपना मोबाइल निकालो। गांव में जिन भी परिवारों का वीडियो बनाया है, सारे डिलीट कर दो। नहीं तो वापस नहीं जा पाओगे’ इस हल्ला-गुल्ला के बीच अचानक दर्जनभर के करीब और लोग जमा हो जाते हैं। इस बीच हिरऊ राम सलाम की मोबाइल पर एक के बाद एक कॉल आने लगती हैं। वह अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर देते हैं। कॉल पर एक आदमी बात करते हुए खुद को सरपंच बता रहा है। उसे सरपंच राजमन सलाम के फरार होने के बाद गांव वालों ने अस्थायी सरपंच चुना है। नाम है- श्याम सिंह सरफे। श्याम सिंह सरफे स्पीकर पर मुझसे कहते हैं, ‘थाने की परमिशन के बिना आपकी गांव में घुसने की हिम्मत कैसे हुई? आप ईसाई धर्म मानने वाले लोगों को लेकर गाड़ी में घूम रहे हैं? हम भी आ रहे हैं। जब तक हम पहुंचते नहीं। आप कहीं नहीं जाएंगे।’ उसके बाद वहां खड़े बाकी लोग मेरी गाड़ी को घेर लेते हैं। माहौल खराब होता देख मैं फौरन अपने मोबाइल, माइक समेटता हूं और अपनी गाड़ी में बैठ जाता हूं। गाड़ी का शीशा चढ़ाता हूं और अपने ड्राइवर युवराज साहू को इशार करके गाड़ी भगाने को कहता हूं। रास्ते में युवराज बताने लगते हैं, ‘सर, ये लोग जंगल से पता नहीं किस-किस तरह के जानवर मारकर खाते हैं। अगर कब्र में दफनाया गया शव निकाल सकते हैं, तो पता नहीं और क्या-क्या कर सकते हैं। यहां से जितना जल्दी हो निकल चलना बेहतर होगा। लोकल थाना भी इनसे मिला हुआ है।’ ड्राइवर की यह बात सुनते ही मेरा ध्यान अचानक आमाबेड़ा थाने के उस गेट की तरफ चला गया, जहां कुछ देर पहले वीडियो शूट करते वक्त तैनात सिपाही ने मुझसे मेरा धर्म पूछा था। मैंने उसे हिंदू होने की बात बताई थी। आगे पूछा था कि- ‘आप किस गांव में जा रहे हैं? हमें तो सरकार ने यहां मरने के लिए छोड़ दिया है।’ लेकिन मैं उसे बताए बगैर बड़े तेवड़ा गांव पहुंच गया था। ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-'तुम ईसाई बन गए, बाप की लाश नाले में बहाओ':22 दिन तक सड़ती रही लाश, सरपंच बोला- अंतिम संस्कार किया तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना कुछ देर तक शव देखते खड़े रहे, फिर कड़क आवाज में बोले- ‘देखो, तुम अपने बाप की लाश गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकते। वहां केवल दलित हिंदू ही शव दफना सकते हैं। तुम लोगों ने धर्म बदला है। इसलिए गांव के बाहर लाश दफनाओ'। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-सुहागरात पर ड्रग्स लेने गया, रातभर नहीं लौटा:हर हफ्ते लड़कियां बदलता, सड़क पर अंडरवियर में मिला; नशे के लिए 25 लाख की नौकरी छोड़ी जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
तारीख- 28 अप्रैल 2026, जगह- दिल्ली के कमला नगर का आर्य समाज मंदिर। मंदिर के कुंड से धुआं उठ रहा था। हवन की सौंधी खुशबू थी। हमने वही खड़े मंदिर के सेवादार से पूछा कि अभी हवन हुआ है क्या। उन्होंने जवाब दिया- हां, अभी-अभी शुद्धि हुई है। एक मुस्लिम लड़की ने हिंदू धर्म स्वीकार किया है। आर्य समाज में बताए तरीकों से उसकी वैदिक धर्म में वापसी कराई गई है। मंदिर से 50 मीटर दूर एक टूटा-फूटा कमरा है। बाहर सफेद रंग की नेम प्लेट लगी है, जिस पर लिखा है- शुद्धि सभा। कमरे के अंदर कुछ रैक हैं, जिनमें डॉक्यूमेंट्स का ढेर लगा है। इसमें शुद्धि यानी वैदिक धर्म में वापसी करने वालों का हिसाब-किताब है। पूजा-हवन के बाद पंडितजी बोले- अब लड़की हिंदू हुई शुद्धि कैसे होती है? इसके जवाब में मंदिर के सेवादार कहते हैं, ‘आप 15 मिनट पहले आतीं, तो शुद्धिकरण होते देख लेतीं।' उन्होंने हमें 18-20 मिनट की एक रिकॉर्डिंग दिखाई। इसमें एक लड़की दो महिलाओं के साथ थी। वैदिक मंत्रों के साथ हवनकुंड में आहुतियां देने के बाद पंडित जी ने लड़की के माथे पर रोली से तिलक लगाया। हाथ में कलावा बांधा। पूजा के बाद बोले- अब लड़की हिंदू हुई।‘ लड़की का नाम रीता (बदला हुआ नाम) रखा गया। उसने पंडित जी, सास और ननद के पैर छुए। एक सेवादार ने पीछे से कहा- ‘घर वापसी की बधाई।’ लड़की शांत थी, चेहर पर कृतज्ञता थी या दुविधा, ये नहीं पता, लेकिन हल्की सी मुस्कान जरूर थी। आर्य समाज मंदिर के बगल में शुद्धि सभा, हर हफ्ते करीब 400 शुद्धिकरणकमला नगर में कभी बिरला मिल चलती थी। अब बंद है। इसके नाम पर गली का नाम बिरला लेन हो गया। भीड़भाड़ वाला इलाका है, लेकिन शुद्धि सभा के बारे में पूछने पर लोग बगले झांकने लगते हैं। आर्यसमाज मंदिर के बारे में पूछेंगे, तो तुरंत बता देंगे। भारतीय हिंदू शुद्धि सभा भवन का 10 बाई 10 का ऑफिस है। अंदर एक टेबल, दो कुर्सियां और एक रैक रखी है। यही हमारी मुलाकात केयरटेकर से हुई, जो अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। वे बताते हैं, 'जिस दफ्तर से इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है, उसका पता किसी को क्यों बताएं। हमेशा हमले का खतरा बना रहता है। हम प्रचार कम, काम ज्यादा पर भरोसा करते हैं।' वे ऑफिस की रैक में रखी एक फाइल निकालकर कुछ लिखने लगे। हमने पूछा कि ये रजिस्टर किसलिए है, इसमें क्या लिखा? जवाब मिला, ‘आज जो शुद्धिकरण कराया गया, उसकी एंट्री की है। लड़की मुस्लिम से हिंदू बनी है। उसकी होने वाली सास और ननद लेकर आए थे। वो हिंदू लड़के से शादी करना चाहती है, इसलिए मर्जी से हिंदू बनना स्वीकार किया।' उसके परिवार वाले नहीं आए? इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं। मां राजी थी, लेकिन डर की वजह से साथ नहीं आई। घर वालों को पता चल जाएगा तो लड़की, लड़के और उनके परिवार को जान का खतरा हो जाएगा।’ क्या हर शुद्धिकरण की एंट्री होती है? जवाब मिला- ‘हां, डेटा तो रखना पड़ता है।‘ हफ्ते भर में कितने लोगों का शुद्धिकरण करवाते हैं? वे कहते हैं, ‘डेटा नहीं बता सकते, कॉन्फिडेंशियल है।‘ फिर बोले, ‘यही कोई 400 से 500 लोगों का शुद्धिकरण करते हैं । रोज कोई न कोई आता ही है। कोई अकेले आता है, कोई परिवार के साथ, कई परिवार एक साथ भी आ जाते हैं।‘ वे रजिस्टर दिखाने को तैयार हो गए, लेकिन फोटो या वीडियो लेने से मना कर दिया। रैक पर रखे रजिस्टरों में पिछले एक साल का रिकॉर्ड है। 1923 से शुरू हुई शुद्धि सभा, 30 हजार राजपूतों की घर वापसी इसके बाद हम भारतीय हिंदू शुद्धि सभा (BHSS) के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ से मिले। घर वापसी के इतिहास पर वे कहते हैं, ’देहरादून के रहने वाले मोहम्मद उमर, आर्यसमाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती के संपर्क में आए। उन्होंने वैदिक धर्म में वापसी की इच्छा जताई। दयानंद जी ने उनका शुद्धिकरण किया और अलखधारी नाम दिया।’ ’अलखधारी बाद में सनातन के प्रचारक बने। तब शुद्धि आंदोलन की नींव रखी जा रही थी। दयानंद सरस्वती ने ऐसे बहुत से लोगों का शुद्धिकरण किया। वे 1875 से ये काम कर रहे थे।’ '25 फरवरी को स्वामी श्रद्धानंद जी ने आगरा के रायभा गांव में सबसे पहले शुद्धि की। एक साथ करीब 5 हजार लोगों ने सनातन में वापसी की। 1923 के आखिर तक ये आंकड़ा 30 हजार के पार हो गया। इसमें मलकाना राजपूतों ने बड़े स्तर पर घर वापसी की।' घर वापसी करने वालों की संख्या पूछने पर सुभाष कहते हैं कि हम सटीक आंकड़ा तो नहीं बता सकते। हमारे पास सब डाक्यूमेंटेड है। मोटे तौर पर हर साल करीब 2.5 लाख लोग घर वापसी करते हैं। इसमें मुस्लिम और ईसाई दोनों हैं। मुसलमान ज्यादा हैं। मलकाना राजपूतों के गांव में आज भी है शुद्धि मोहल्ला सुभाष की बातों की पुष्टि के लिए हम आगरा के रायभा गांव पहुंचे। यहां की बड़ी आबादी मलकाना राजपूत है। गांववाले कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं हुए। कुछ लोगों ने बताया, ‘हम तो उस वक्त नहीं थे। पूर्वजों ने जरूर बताया था कि मुगलों के आक्रमण के वक्त जान बचाने के लिए हम हिंदू से मुसलमान बने, लेकिन बाद में शुद्धिकरण कर हिंदू बन गए।’ वे कहते हैं, ‘बेटे-बेटियों, नाती-पोतों की शादियां अब हिंदुओं में होती हैं। रिश्तेदार ये सब नहीं जानते। इतनी पुरानी बात बताने का मतलब भी नहीं। अगर ये खबर फैली, तो लोग हमारे हिंदू होने पर शक करेंगे। अगर सबूत चाहिए, तो यहां आज भी एक मोहल्ले का नाम शुद्धि है, जहां वैदिक रीति-रिवाज से हमारे पूर्वज हिंदू बने थे।‘ अमेरिका में बसे राजघराने के वंशजों की घर वापसी कराई भारतीय शुद्धि सभा के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ आगे बताते हैं, ‘जयपुर के महाराज मानसिंह का जिक्र आपने सुना होगा। वे मुगल सेना के साथ महाराणा प्रताप के खिलाफ लड़े थे। मुगलों ने उन्हें रियासत दी और वे मुसलमान बन गए। इनके वंशज अभी अमेरिका में रहते हैं। अनवर रजा और पत्नी जारा खान। दोनों 4 साल पहले वैदिक परंपरा में लौटे हैं।’ क्या आपने उनका शुद्धिकरण करवाया? सुभाष कहते हैं, ‘हां, अमेरिका में ही। शुद्धिकरण के बाद अनवर रजा नरेश सिंह राजपूत और पत्नी जारा खान अब जारा सिंह हो गई हैं। भारत ही नहीं विदेशों में भी हमारा बड़ा नेटवर्क है, खासकर दक्षिण अफ्रीका में।' नमाज छोड़ी, ध्यान सीखा, 4 साल पहले टेक्सास में हुई शुद्धि अनवर रजा से हिंदू बने नरेश सिंह राजपूत से हमने बात की। वे 1980 से अमेरिका में रह रहे हैं। नरेश बताते हैं, ‘मेरी पैदाइश पाकिस्तान के लाहौर की है। पिता कट्टर मुस्लिम थे। मुझे भी जमात-ए-इस्लामी पार्टी के मुखिया मौलाना मौदूदी के पास इस्लामी विचारधारा सीखने भेजते थे।‘ मेरे दादा खुद को पक्का मुसलमान नहीं मानते थे। मुझ पर उनका बहुत असर था। उन्होंने ही मुझे रामचंद्र और रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बताया। उन साहित्यों के बारे में जाना, जो हिंदू संस्कृति का हिस्सा है। क्या दादा से आपको परिवार के इतिहास के बारे में पता चला। इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं, सीधा तो नहीं। उन्होंने पापा को जो फैमिली ट्री दिया था, उसे उर्दू से अंग्रेजी में अनुवाद किया, तब मिर्जा राजा मानसिंह के बारे में पता चला। ये राजस्थान के आमेर के 29वें कछवाहा राजा थे और मुगल शासक अकबर के खास थे। हमारे पूर्वज उनकी सेना में थे।‘ ‘उन्हें और हमारे परिवार को मुस्लिम बनने पर किस चीज ने मजबूर किया होगा, इसका जवाब तो नहीं मिलेगा। हालांकि, यहीं से मुझे अपनी जड़ों की ओर लौटने का पहला इशारा मिला। मैंने नॉनवेज खाना छोड़ दिया। नमाज बंद कर दी। मन की शांति के लिए विपश्यना की और ध्यान करना सीखा।‘ ‘मैं मन ही मन सनातन में वापसी तो चाहता था, लेकिन रास्ता समझ नहीं आ रहा था। इसी दौरान मेरी सोशल मीडिया पोस्ट पढ़कर भारतीय हिंदू शुद्धि सभा के एक कार्यकर्ता ने मुझसे संपर्क किया। मैंने अपने बारे में सब बताया और पूछा कि क्या मैं दोबारा हिंदू बन सकता हूं। इसके बाद आर्यसमाज के एक कार्यकर्ता ने यहीं टेक्सास में ही वैदिक रीति रिवाज से मेरी शुद्धि करवाई।‘ आपकी पत्नी ने भी स्वीकार किया? जवाब मिला- ‘हां, हमने एक साथ ही घर वापसी की। वो अभी ब्रह्मकुमारी संस्था की कार्यकर्ता हैं। शादी के वक्त मैं मुस्लिम था, तो मुस्लिम से ही शादी की थी, लेकिन पत्नी ने मुझे ध्यान, विपश्यना करते देख ये सब करने की इच्छा जताई।‘ परिवार ने विरोध नहीं किया? नरेश कहते हैं, ‘ये सब अचानक नहीं किया। मैं धीरे-धीरे इस्लाम छोड़ ही रहा था। मेरा खान-पान, पूजा-पद्धति सब पहले ही बदल चुका था। बस नाम बदलना बाकी था। करीब 4 साल पहले शुद्धिकरण के जरिए ये भी हो गया।‘ बच्चे कौन सा धर्म मानते हैं? वे कहते हैं, ‘जारा और मेरे बच्चे नहीं हैं। मेरी पत्नी की पहली शादी से तीन बच्चे हैं। इनमें से दो इस्लाम मानते हैं और एक नास्तिक है।‘ कानूनी तरीके से होता है धर्म परिवर्तन शुद्धि सभा के केयरटेकर के मुताबिक, आर्य समाज रजिस्टर्ड गैर सरकारी संगठन है। घर वापसी के इच्छुक या उनके संबंधी आवेदन करते हैं। आवेदन करने वाले बालिग हैं या नहीं, इसके लिए मैट्रिक सर्टिफिकेट या एफिडेविट लगता है। उसे नया नाम देकर साइन या अंगूठा लगवाया जाता है। ये पूरी कानूनी प्रक्रिया है, इसमें डर और दबाव नहीं है। केयरटेकर बताते हैं, ‘हम व्यक्ति की प्राइवेसी और सुरक्षा को देखते हुए, धर्म बदलने वाले के डाक्यूमेंट किसी से शेयर नहीं करते। दो साल पहले एक लड़की ने यहां धर्म बदला था। न जाने कैसे उसके घरवालों को पता चला और लड़की की हत्या कर दी गई, इसलिए हम सबकुछ कॉन्फिडेंशियल रखते हैं।‘ ………………..ये खबर भी पढ़ें… TCS केस- हिंदुओं को नमाज पढ़ाने वाला तौसीफ मास्टरमाइंड 26 मार्च से 3 अप्रैल 2026 के बीच नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की 9 महिला कर्मचारियों ने FIR दर्ज कराई। 9 में से 6 FIR में TCS नासिक के टीम लीडर तौसीफ अत्तार का नाम है। तौसीफ पर सेक्शुअल हैरेसमेंट, जबरन धर्म परिवर्तन और वर्कप्लेस पर डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
कोलकाता के सामने फ्लॉप हुई मुंबई की बल्लेबाजी, बन पाए 148 रन
KKRvsMI ईडन गार्डन्स में कोलकाता नाईट राइडर्स के सामने मुंबई इंडियन्स की बल्लेबाजी फ्लॉप हो गई और वर्षा बाधित मैच में टीम 8 विकेट खोकर सिर्फ 148 रन ही बना सकी। टीम के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज कॉर्बिन बॉश रहे जिन्होंने नाबाद 18 रन बनाए। कोलकाता की ओर से कार्तिक त्यागी, सौरभ दुबे और कैमरन ग्रीन ने 2-2 विकेट लिए। इससे पहले कोलकाता नाइट राइडर्स ने बुधवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के 65वें मुकाबले में टॉस जीत कर मुम्बई इंडियंस के खिलाफ पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। Innings Break! A fantastic bowling performance from #KKR , but #MI fought back to put up /8 Who ends the night with points? Scorecard https://t.co/Aw11jLoww5 #TATAIPL | #KhelBindaas | #KKRvMI pic.twitter.com/7zQZfpfraf — IndianPremierLeague (@IPL) May 20, 2026 दोनों टीमें इस प्रकार है:- कोलकाता नाइट राइडर्स (एकादश): अजिंक्य रहाणे (कप्तान), अंगकृष रघुवंशी, कैमरन ग्रीन, रोवमेन पॉवेल, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नारायण, अनुकूल रॉय, कार्तिक त्यागी, वरुण चक्रवर्ती और सौरभ दुबे। मुम्बई इंडियंस (एकादश): रोहित शर्मा, रायन रिकल्टन, नमन धीर, सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या (कप्तान), विल जैक्स, कॉर्बिन बॉश, दीपक चाहर, जसप्रीत बुमराह, और रघु शर्मा।
वैभव सूर्यवंशी अब तोड़ेंगें यूनिवर्स बॉस क्रिस गेल के छक्कों का रिकॉर्ड
युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में अब तक 53 छक्के लगाए हैं, जो किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा किसी भी टी 20 टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज़्यादा हैं। सबसे ज़्यादा 59 छक्के क्रिस गेल ने आईपीएल 2012 में लगाए थे। सूर्यवंशी की नज़रें अब गेल के रिकॉर्ड पर होंगी। सूर्यवंशी ने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मंगलवार को 10 छक्कों की मदद से 93 रन बनाये। सूर्यवंशी ने तीन बार आईपीएल की एक पारी में 10 या उससे ज़्यादा छक्के लगाए हैं। वह अब सिर्फ़ गेल से पीछे हैं, जिन्होंने ऐसा चार बार किया था। सूर्यवंशी ने 2026 में दो बार एक पारी में 10 या उससे ज़्यादा छक्के लगाए हैं। आईपीएल के एक सीज़न में एक से अधिक बार ऐसा करने वाले एकमात्र दूसरे बल्लेबाज़ फ़िन ऐलन हैं, जिन्होंने 2026 में ही ऐसा किया है। राजस्थान रॉयल्स ने इस आईपीएल में पहले छह ओवरों में 60 छक्के लगाए हैं, जो किसी भी टीम द्वारा इस चरण में आईपीएल के एक सीज़न में सबसे ज़्यादा लगाए गए छक्के हैं। उन्होंने 2024 में सनराइज़र्स हैदराबाद के 59 छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ा। इनमें से अकेले सूर्यवंशी ने 37 छक्के लगाए हैं। किसी और बल्लेबाज़ ने किसी एक सीज़न के पहले छह ओवरों में 30 छक्के भी नहीं लगाए हैं। nराजस्थान रॉयल्स लखनऊ सुपर जायंट्स के ख़िलाफ़ 221 रनों का लक्ष्य हासिल किया। आईपीएल में राजस्थान द्वारा 220 से ज़्यादा का लक्ष्य सफलतापूर्वक चेज़ करने का यह चौथा मौका था, जो किसी भी टीम द्वारा सबसे ज़्यादा है। इससे पहले पंजाब किंग्स और एसआरएच ने तीन-तीन बार ऐसा किया था।
जयदीप अहलावत बने दोस्ती की मिसाल, दोस्त की फिल्म ‘Momacu’ के ट्रेलर लॉन्च में बने चीफ गेस्ट
कहते हैं कि जब सारे रिश्ते अपना हक मांगने की होड़ में लग जाते हैं तब दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता होता हैं जो बिना किसी शर्त के बस निःश्वार्थ भाव से हमेशा अपने गले लगाता हैं। एक्टर जयदीप अहलावत भी एक ऐसे दोस्त हैं जो अपने यारो के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। अब देखिए आज के समय जहा जयदीप के पास एक बाद एक फिल्में हैं वही दोस्त एक्टर जतिन सारन की आगामी फ़िल्म 'Momacu – Motor Machis Aur Cutte'r के ट्रेलर लॉन्च पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। केबल वन और सागा स्टूडियो द्वारा प्रस्तुत तथा हैरी भाटी फिल्म्स के सहयोग से आर्ट बीट हाउस एवं आर्ट Art Worshipers Productions द्वारा निर्मित इस फिल्म को कुलदीप कुनाल ने लिखा और निर्देशित किया है। Momacu – Motor Machis Aur Cutter एक दमदार, रहस्यमयी और डार्क लेयर्ड सिनेमाई अनुभव देने का वादा करती है, जिसमें सस्पेंस, ड्रामा और इंटेंस परफॉर्मेंस का जबरदस्त मिश्रण देखने मिलेगा। फिल्म यथार्थ, भावनाओं और सिचुएशनल डार्क कॉमेडी को एक तेज़ रफ्तार कहानी में प्रस्तुत करती है, जो एक ही रात के घटनाक्रम पर आधारित है। ALSO READ: '60 साल का हो गया हूं, लड़ना नहीं भूला', पैपराजी पर भड़के सलमान खान, आधी रात को दी चेतावनी फिल्म के बारे में बात करते हुए जयदीप अहलावत ने कहा, मुझे Momacu की सबसे खास बात इसकी रूटेड स्टोरीटेलिंग और इसकी दुनिया का पागलपन लगा। ऐसी फिल्में दर्शकों को अंत तक बांधे रखती हैं। ट्रेलर उस रॉ एनर्जी को बेहद खूबसूरती से सामने लाता है और मुझे बेहद खुशी है कि इस तरह की ईमानदार और निडर कहानी दर्शकों के सामने आ रही है। निर्माता सुमित सिंह ने कहा, Momacu – Motor Machis Aur Cutter ऐसी फिल्म है जो पारंपरिक कहानी कहने के तरीके से अलग हटकर सोचती है। शुरू से ही हमें इसकी कहानी की गहराई, पागलपन और भावनात्मक पक्ष पर भरोसा था। पूरी टीम ने जुनून के साथ काम किया है और अब हम दर्शकों को यह अनोखी दुनिया दिखाने के लिए उत्साहित हैं। वरिष्ठ अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा, फिल्म का ट्रीटमेंट बेहद अलग है। यह डार्क है, लेयर्ड है और साथ ही कई ऐसे पल भी हैं जो आपको अचानक हंसा देते हैं। हर किरदार की अपनी गहराई है और कहानी अंत तक बांधे रखती है। अभिनेता जतिन सरना ने कहा, Momacu में पागलपन, थ्रिल, ह्यूमर और इमोशन सब कुछ है। यह उन स्क्रिप्ट्स में से है जहां हर सीन आपको चौंकाता है और एक अभिनेता के तौर पर यही सबसे रोमांचक होता है। अभिनेत्री अपूर्वा अरोरा ने कहा, Momacu की दुनिया बेहद रॉ और अनप्रिडिक्टेबल है। मुझे सबसे ज्यादा इसकी ईमानदारी और किरदारों की सच्चाई ने प्रभावित किया। दर्शकों को इसमें कुछ बिल्कुल अलग देखने मिलेगा। ALSO READ: वाणी कपूर ने की 'सपने वर्सेस एवरीवन 2' की तारीफ, बोलीं- ऐसी कहानियां दिल को छू जाती है निर्देशक कुलदीप कुनाल ने कहा, Momacu – Motor Machis Aur Cutter एक ऐसी कहानी है जो अराजकता, संघर्ष और इंसानी भावनाओं से जन्मी है। हम चाहते थे कि फिल्म एक साथ असहज, मजेदार, वास्तविक और थ्रिलिंग लगे। फिल्म का हर किरदार अपने भीतर कोई रहस्य, डर और संघर्ष लेकर चलता है। निर्माता हैरी भट्टी ने कहा, हमें शुरुआत से ही इस स्क्रिप्ट की अलग पहचान पर भरोसा था। Momacu कोई पारंपरिक फिल्म नहीं है। इसकी अपनी भाषा, अपनी रफ्तार और अपनी धड़कन है और हम इसे दर्शकों तक पहुंचाने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। ट्रेलर लॉन्च के दौरान फिल्म की स्टारकास्ट, क्रू, निर्माता और मीडिया के सदस्य मौजूद रहे, जहां फिल्म की दुनिया की एक खास झलक देखने मिली। फिल्म के निर्माता सुमीत सिंह, हैरी भट्टी और सतेंदर सत्य सेहरावत हैं, जबकि अरमान सिद्धू और रूबी रोमाना़ सह-निर्माता हैं। हरमन धनोआ फिल्म के क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं। Momacu – Motor Machis Aur Cutter 4 जून 2026 को विशेष रूप से KableOne पर स्ट्रीम होगी।
फिल साल्ट के आने से प्लेऑफ में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलूरू होगी और मजबूत
चोट के इलाज के सिलसिले में इंग्लैंड गए फिल साल्ट के रॉयल चैलेंजर्स बैंगलूरू के साथ जुड़ने की संभावना है। गौरतलब है कि उनकी अनुपस्थिति में जैकब बैथल ने यह काम संभाला था। फिल साल्ट पिछले महीने उंगली में लगी चोट का स्कैन कराने के लिए इंग्लैंड लौट गए हैं।इस चोट के कारण साल्ट आरसीबी के पिछले तीन मैचों में नहीं खेल पाए थे। उनकी जगह उनके हमवतन जैकब बेथेल ने विराट कोहली के साथ पारी का आगाज किया। यह 29 वर्षीय खिलाड़ी 18 अप्रैल को एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मैच के दौरान डीप बैकवर्ड स्क्वायर लेग पर बाउंड्री बचाने के लिए डाइव लगाते समय चोटिल हो गया था। उनकी बाएं हाथ की उंगली में चोट लग गई थी। साल्ट ने मौजूदा आईपीएल में छह पारियों में 168.33 के स्ट्राइक रेट से 202 रन बनाए थे।फिल साल्ट की मौजूदगी में विराट कोहली के साथ बल्लेबाजी करने आए जैकब बैथल का बल्ला भी खास नहीं चला है। 6 मैचों में वह 14 की औसत और 121 की स्ट्राइक रेट के साथ सिर्फ 85 रन ही बना पाए है। उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी 27 रनों की रही है।
'60 साल का हो गया हूं, लड़ना नहीं भूला', पैपराजी पर भड़के सलमान खान, आधी रात को दी चेतावनी
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान अपने कूल अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जब बात प्राइवेसी और परिवार की संवेदनशीलता पर आती है, तो वह सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटते। मंगलवार रात मुंबई के हिंदुजा अस्पताल के बाहर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां पैपराजी की एक हरकत पर सलमान खान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद खुद सलमान ने आधी रात को सोशल मीडिया पर आकर पैपराजी और मीडिया को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। दरअसल, मंगलवार, 19 मई की रात सलमान खान मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में किसी करीबी से मिलने पहुंचे थे। ALSO READ: Jr NTR की नई फिल्म का नाम होगा 'ड्रैगन', टीजर में दिखी खून-खराबे से भरपूर कहानी इस दौरान पैपराजी ने सलमान का पीछा ट्रैफिक सिग्नल से ही शुरू कर दिया था और वे अस्पताल परिसर तक पहुंच गए। सलमान जब अस्पताल से बाहर निकल रहे थे, तब कुछ फोटोग्राफर्स ने उनका ध्यान खींचने के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया— भाई, भाई, मातृभूमि! अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर फिल्म का नाम लेकर चिलाना और कैमरे फ्लैश करना सलमान को बिल्कुल रास नहीं आया। वे तुरंत फोटोग्राफर्स की तरफ बढ़े और गुस्से में अपने माथे पर इशारा करते हुए कहा, 'पागल हो गए हो क्या?' उन्होंने पैपराजी से सवाल किया कि अगर उनके परिवार का कोई सदस्य अस्पताल के अंदर भर्ती हो, तो क्या वे ऐसा ही व्यवहार करेंगे? सलमान का यह कड़ा रूप देखकर मौके पर मौजूद फोटोग्राफर्स ने तुरंत अपनी गलती मानी और उनसे माफी मांगी। A post shared by Salman Khan (@beingsalmankhan) इंस्टाग्राम पर फूटा 'भाईजान' का गुस्सा अस्पताल के बाहर मामला भले ही शांत हो गया था, लेकिन सलमान खान का गुस्सा कम नहीं हुआ था। बुधवार तड़के करीब 2 बजे उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक के बाद एक चार सेल्फी पोस्ट कीं, जिनके कैप्शन में उन्होंने मीडिया की असंवेदनशीलता पर तीखे सवाल उठाए। A post shared by Salman Khan (@beingsalmankhan) पहली पोस्ट में सलमान ने लिखा, 'अगर मैं किसी प्रेस वाले को अस्पताल में मेरे दर्द का आनंद लेते हुए देखूं... वो प्रेस जिसके लिए मैं हमेशा खड़ा रहा, बातचीत की, ध्यान रखा और यह सुनिश्चित किया कि वे भी अपनी रोजी-रोटी कमा सकें...' A post shared by Salman Khan (@beingsalmankhan) दूसरी पोस्ट में उन्होंने फिल्म का नाम घसीटे जाने पर नाराजगी जताते हुए लिखा, लेकिन अगर वे मेरे नुकसान से पैसे कमाना चाहते हैं... तो चुप रहें, एन्जॉय न करें। भाई भाई भाई मातृभूमि पिक्चर की मां की आंख, पिक्चर जरूरी है या जिंदगी? A post shared by Salman Khan (@beingsalmankhan) तीसरी और चौथी पोस्ट में चेतावनी का लहजा और कड़ा हो गया। उन्होंने लिखा, ऐसे मैं सौ जला दूंगा। भाई के एक भाई के दुख पर अगली बार मेरे साथ ट्राई कर लेना। बस ट्राई कर लेना... जब भी तुम्हारा कोई अस्पताल में होगा, तो क्या मैं ऐसा रिएक्ट करूंगा? साठ साल का हो गया हूं लेकिन लड़ना नहीं भूला, ये याद रख लेना। जेल में डालोगे? हा हा हा। सलमान खान के इन पोस्ट्स ने उनके फैंस को हैरान और चिंतित कर दिया है। कमेंट सेक्शन में फैंस लगातार उनका समर्थन कर रहे हैं। यूजर्स का मानना है कि सेलिब्रिटीज की भी अपनी पर्सनल लाइफ होती है और विशेषकर अस्पताल जैसी जगहों पर पैपराजी को अपनी सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए।
बांग्लादेश की पाकिस्तान पर सीरीज जीत के कारण हुआ भारतीय टेस्ट टीम को नुकसान
बांग्लादेश का पाकिस्तान के खिलाफ अपनी घरेलू धरती पर खेली गई टेस्ट श्रृंखला में 2-0 से क्लीन स्वीप करने के कारण भारतीय क्रिकेट टीम को नुकसान हुआ है और वह नवीनतम विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (WT) रैंकिंग में छठे स्थान पर खिसक गई है।बांग्लादेश ने पाकिस्तान को दूसरे टेस्ट मैच में 78 रन से हराया। इससे पहले उसने मीरपुर में पहला टेस्ट मैच 104 रन के बड़े अंतर से जीता था। इससे उसकी टीम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के डब्ल्यूटीसी तालिका में नवीनतम अपडेट में भारत से आगे निकल गई है। बांग्लादेश के अब चार टेस्ट मैचों में दो जीत, एक हार और एक ड्रॉ के साथ 58.33 प्रतिशत अंक हैं, जबकि भारत के नौ टेस्ट मैचों में चार जीत, उतनी ही हार और एक ड्रॉ के साथ 48.15 अंक हैं। पहले दो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम अब एशियाई देशों की रैंकिंग में पाकिस्तान से ऊपर है। शुभमन गिल की अगुवाई वाली इस टीम ने इस साल अभी तक कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है।भारतीय टीम को इस साल के आखिर में श्रीलंका और न्यूजीलैंड का दौरा करना है, जहां वह दो-दो टेस्ट मैच खेलेगी। उसे फिर 2027 में अपने घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया का सामना करना है। BANGLADESH MOVES TO NUMBER 5 IN WTC POINTS TABLE pic.twitter.com/R5C4sZafFz — Johns. (@CricCrazyJohns) May 20, 2026 भारत को घरेलू टेस्ट श्रृंखला में दक्षिण अफ्रीका से 0-2 से हार का सामना करना पड़ा था, जबकि उसने इंग्लैंड में भी दो मैच गंवाए थे। गिल की अगुवाई वाली टीम ने इंग्लैंड में पांच मैचों की श्रृंखला 2-2 से ड्रॉ की थी।टीम रैंकिंग अंकों से नहीं बल्कि डब्ल्यूटीसी अंक तालिका में प्रतिशत अंकों के आधार पर तय की जाती है। 2025-2027 चक्र में बांग्लादेश के 28 अंक हैं जबकि भारत के 52 अंक हैं। पाकिस्तान की टीम दूसरे टेस्ट मैच में 437 रन की लक्ष्य का पीछा करते हुए 358 रन पर आउट हो गई। पाकिस्तान मौजूदा डब्ल्यूटीसी चक्र में एक जीत और तीन हार के साथ आठवें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया ने मौजूदा चक्र में अब तक आठ टेस्ट मैचों में सात जीत और एक हार दर्ज की है। वह 87.50 प्रतिशत अंकों के साथ डब्ल्यूटीसी अंक तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है। न्यूजीलैंड दूसरे स्थान पर है, जिसने तीन टेस्ट मैचों में दो जीत और एक ड्रॉ के बाद 77.78 अंक प्राप्त किए हैं।दक्षिण अफ्रीका तीसरे और श्रीलंका चौथे स्थान पर है।
हर नए घर के साथ बढ़ रहा कार्बन संकट: विकास की रफ्तार और जलवायु का टकराव
संयुक्त राष्ट्र की नई Global Status Report for Buildings and Construction 2025-2026 के अनुसार दुनिया की इमारतें अब भी 37 प्रतिशत वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। तेजी से बढ़ते निर्माण, ऊर्जा संकट और जलवायु असुरक्षा के बीच भारत सहित दुनिया के सामने कम-कार्बन और ऊर्जा-कुशल घर बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी है।
प्लेऑफ का एक स्थान और 4 दावेदार, कौन अंतिम मौके पर छीनेगा चौथी जगह
Indian Premiere League (IPL 2026) के लीग चरण में अब केवल 6 मैच शेष होने के बावजूद प्लेऑफ के लिए 4 टीमें अब भी रेस में बनी हुई हैं। पंजाब को हराकर सिर्फ बैंगलोर ने प्लेऑफ में जगह सुनिश्चित की है।सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर प्लेऑफ में जगह पक्की की और इस ही दिन गुजरात टाइटंस का भी प्लेऑफ पक्का हो गया लेकिन अभी भी 1 स्थान के लिए लड़ाई है। चेन्नई सुपर किंग्स- लखनऊ सुपर जायंट्स और सनराइजर्स हैदराबाद से मिली हार ने चेन्नई सुपर किंग्स की उम्मीदों को झटका दिया है, लेकिन टीम अब भी अपने आखिरी मैच जीतकर 14 अंक तक पहुंच सकती है।14 अंक पर भी क्वालिफाई करने की संभावना बनी हुई है। अगर पंजाब किंग्स अपने शेष सभी मैच हार जाएं और दिल्ली कैपिटल्स कोलकाता नाइट राइडर्स से हार जाए तो ऐसा हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही राजस्थान की ना केवल हार बल्कि मुंबई के खिलाफ बड़ी हार ही चेन्नई को प्लेऑफ में पहुंचा सकती है। पंजाब किंग्स:- लगातार 6 हार के बाद पंजाब किंग्स 13 अंक पर अटकी हुई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि टीम अब भी 13 अंक के साथ चौथी क्वालिफाई करने वाली टीम बन सकती है।केकेआर को डीसी को हराकर मुंबई इंडियंस से हारना होगा। ऐसे में आरसीबी, जीटी, एसआरएच और पंजाब किंग्स प्लेऑफ में पहुंच जाएंगी और नेट रन रेट की जरूरत नहीं पड़ेगी। पंजाब किंग्स के लिए आसान रास्ता यह है कि अपना अंतिम मैच जीतकर 15 अंक तक पहुंच जाएं और दूसरे नतीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा। खासकर राजस्थान की मुंबई के खिलाफ हार ही टीम को प्लेऑफ में पहुंचा सकती है। राजस्थान रॉयल्स- पिछले 9 मैचों में 6 हार ने RR की स्थिति मुश्किल कर दी थी।लेकिन कल लखनऊ के खिलाफ मिली जीत से राजस्थान ने राहत ली है। अब राजस्थान को सिर्फ मुंबई पर जीत दर्ज करनी है। अगर ऐसा नहीं होता है तो उसको कामना करनी होगी कि लखनऊ पंजाब को हरा दे और कोलकाता बचे दो मैच ना जीते। कोलकाता नाईट राइडर्स: लगातार चार जीत के बाद केकेआर ने वापसी की थी, लेकिन आरसीबी से हार के बाद टीम अधिकतम 15 अंक तक ही पहुंच सकती है। इसका मतलब अब उन्हें दूसरे नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा।केकेआर के बाक़ी 2 मैच घरेलू मैदान ईडन गार्डन्स में हैं, लेकिन इस सीजन टीम ने वहां चार मैचों में सिर्फ़ एक जीत हासिल की है।टीम को फिलहाल पंजाब और राजस्थान दोनों के हार की कामना करनी होगी।
3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम दिन माना गया है। लेकिन जब यह व्रत अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में आता है और उस दिन गुरुवार होता है, तो इसका महत्व कई हजार गुना बढ़ जाता है। अधिकमास के गुरु प्रदोष व्रत के महात्म्य को हम कुछ मुख्य बिंदुओं के जरिए आसानी से समझ सकते हैं। ALSO READ: 3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा 1. 'हरि-हर' की दोहरी कृपा सामान्य प्रदोष: केवल भगवान शिव (हर) को समर्पित होता है। अधिकमास का गुरु प्रदोष: अधिकमास के स्वामी भगवान विष्णु (हरि) हैं, गुरुवार के कारक देवगुरु बृहस्पति हैं, और प्रदोष तिथि के देवता भगवान शिव हैं। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से महादेव, श्रीहरि विष्णु और गुरु बृहस्पति तीनों का आशीर्वाद एक साथ मिलता है। 2. कुंडली में 'बृहस्पति दोष' से मुक्ति ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह (बृहस्पति) कमजोर स्थिति में है, विवाह में अड़चनें आ रही हैं या शिक्षा में रुकावट है, उनके लिए यह दिन वरदान जैसा है। इस दिन शिवलिंग पर केसर मिश्रित दूध चढ़ाने और चने की दाल का दान करने से गुरु दोष शांत होता है और भाग्य का साथ मिलने लगता है। ALSO READ: अधिकमास में 3 साल बाद बन रहे 2 प्रदोष व्रत, चंद्र और शनिदोष से मुक्ति पाने का दुर्लभ मौका 3. शत्रुओं और विरोधियों पर विजय पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवराज इंद्र ने वृत्तासुर राक्षस पर विजय प्राप्त करने के लिए गुरुदेव बृहस्पति के कहने पर ही 'गुरु प्रदोष व्रत' किया था। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने या शाम के समय शिव चालीसा का पाठ करने से शत्रुओं और गुप्त विरोधियों का नाश होता है। 4. दाम्पत्य जीवन और संतान सुख गुरु प्रदोष का व्रत वैवाहिक जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए अचूक माना गया है। यदि पति-पत्नी के बीच अनबन चल रही हो, तो इस दिन शाम को (प्रदोष काल में) शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से रिश्ते मधुर होते हैं। साथ ही, योग्य संतान की प्राप्ति और संतान की उन्नति के लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी है। 5. अनंत गुना फल (अधिकमास का प्रभाव) शास्त्रों में कहा गया है कि अधिकमास (मलमास) में किया गया कोई भी जप, तप, दान या व्रत सामान्य दिनों की तुलना में करोड़ों गुना अधिक फल प्रदान करता है। इसलिए इस दिन किया गया लोटा भर जल का अर्पण भी अक्षय पुण्य लेकर आता है। गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व शुभ फल: हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, गुरु प्रदोष का व्रत रखने से जातक को दोहरे शुभ फल प्राप्त होते हैं। शत्रु विजय: यह व्रत शत्रुओं के विनाश और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए जाना जाता है। सौभाग्य और समृद्धि: भगवान शिव की कृपा से आर्थिक तंगी दूर होती है और बृहस्पति देव की कृपा से यश, कीर्ति और उच्च पद की प्राप्ति होती है। पूर्वजों का आशीर्वाद: इस दिन व्रत करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। पुण्य फल: ऐसी मान्यता है कि एक प्रदोष व्रत रखने का पुण्य दो गायों के दान के बराबर होता है। इस दिन क्या विशेष करें? प्रदोष काल में पूजा: सूर्यास्त के समय (शाम के वक्त) भगवान शिव का रुद्राभिषेक या जलाभिषेक जरूर करें, क्योंकि मान्यता है कि इस समय महादेव कैलाश पर अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं। दीपदान: शाम को घर के मंदिर, मुख्य द्वार या तुलसी/बेलपत्र के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। अधिकमास में दीपदान का विशेष महत्व है। क्या आप इस व्रत की विशेष पूजा-विधि या इस दिन किए जाने वाले किसी खास उपाय के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं? गुरु प्रदोष व्रत की कथा: गुरु प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक बार इंद्र और वृत्तासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्तासुर अत्यंत क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे। बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हें वृत्तासुर का वास्तविक परिचय दे दूं। वृत्तासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है। उसने गंधमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया। पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था। एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया। वहां शिवजी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहासपूर्वक बोला- 'हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं किंतु देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे।' चित्ररथ के यह वचन सुन सर्वव्यापी शिवशंकर हंसकर बोले- 'हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है। मैंने मृत्युदाता-कालकूट महाविष का पान किया है, फिर भी तुम साधारणजन की भांति मेरा उपहास उड़ाते हो!' माता पार्वती क्रोधित हो चित्ररथ से संबोधित हुईं- 'अरे दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्वर के साथ ही मेरा भी उपहास उड़ाया है अतएव मैं तुझे वह शिक्षा दूंगी कि फिर तू ऐसे संतों के उपहास का दुस्साहस नहीं करेगा- अब तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर, मैं तुझे शाप देती हूं।' जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हुआ और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्तासुर बना। गुरुदेव बृहस्पति आगे बोले- 'वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिवभक्त रहा है अत हे इंद्र! तुम बृहस्पति प्रदोष व्रत कर शंकर भगवान को प्रसन्न करो।' देवराज ने गुरुदेव की आज्ञा का पालन कर बृहस्पति प्रदोष व्रत किया। गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से इंद्र ने शीघ्र ही वृत्तासुर पर विजय प्राप्त कर ली और देवलोक में शांति छा गई। अत: प्रदोष व्रत हर शिव भक्त को अवश्य करना चाहिए।
Guru Pushya Yoga: वैदिक ज्योतिष में 'गुरु पुष्य योग' या गुरु पुष्य नक्षत्र को अत्यंत दुर्लभ, शक्तिशाली और स्थायी समृद्धि देने वाला शुभ संयोग माना जाता है। ज्योतिषीय प्रभाव में यह योग तब बनता है जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग का निर्माण होता है। मान्यतानुसार इस अत्यंत शुभ मुहूर्त में नवीन संपत्ति की खरीदना, निवेश करना तथा नया व्यापार शुरू करना बहुत फलदायी माना जाता है। इस अवसर पर आध्यात्मिक कार्य करना भी शुभ फल प्रदान करता है। ALSO READ: Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें? हिंदू धर्म में पुष्य नक्षत्र को 'नक्षत्रों का राजा' माना जाता है, और जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'गुरु-पुष्य योग' कहते हैं। इस बार 21 मई 2026, गुरुवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग वाला होने जा रहा है, क्योंकि इस दिन 'गुरु-पुष्य योग' का महासंयोग बन रहा है। आइए यहां जानते हैं इस दिन के बारे में खास जानकारी... 1. गुरु-पुष्य योग: 21 मई 2026 के विशेष संयोग गुरु पुष्य नक्षत्र का प्रारंभ- 21 मई 2026 को 04:12 ए एम से पुष्य नक्षत्र का अंत: 22 मई 2026 को 02:49 ए एम पर। तिथि: हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है। विशेषता: इस दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में होंगे, जो पुष्य नक्षत्र के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। अमृत सिद्धि योग: कई बार इस दिन गुरु-पुष्य के साथ अमृत सिद्धि योग भी बनता है, जो इसे किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए 'अबूझ मुहूर्त' अर्थात् बिना पंचांग देखे किया जाने वाला कार्य बना देता है। 2. क्यों है प्रभावशाली गुरु-पुष्य योग? शास्त्रों के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता बृहस्पति (गुरु) हैं और इसके स्वामी शनि देव हैं। चूंकि पुष्य नक्षत्र खुद में शुभ है और गुरुवार भी भगवान विष्णु व गुरु बृहस्पति का दिन है, इसलिए इन दोनों का मिलन एक 'अक्षय' फल देने वाला योग बनाता है। यदि आप कोई बड़ी खरीदारी टाल रहे थे या घर-गाड़ी लेने का मन बना रहे थे, तो 21 मई 2026 का दिन कैलेंडर में मार्क कर लें। यह दिन आपकी आर्थिक उन्नति के द्वार खोल सकता है। ALSO READ: गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय 3. इस दिन क्या करें? धर्म कार्य: इस दिन गुरु मंत्र का जाप, दीक्षा लेना या तीर्थ यात्रा पर जाना आत्मिक शांति प्रदान करता है। नई दुकान की शुरुआत: व्यापारी वर्ग इस दिन नए बही खाते या नई दुकान की शुरुआत करना पसंद करते हैं। सोने की खरीदारी: गुरु-पुष्य योग में सोना खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना पीढ़ी दर पीढ़ी बना रहता है और समृद्धि लाता है। निवेश: प्रॉपर्टी, शेयर बाजार या नए व्यापार में निवेश के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है। 4. गुरु-पुष्य योग में क्या न करें? माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र को ब्रह्मा जी का श्राप मिला था, इसलिए इस अत्यंत शुभ योग में भी 'विवाह' यानी मैरेज की रस्में नहीं की जाती हैं। खरीदारी और निवेश के लिए यह उत्तम योग है, लेकिन विवाह संस्कार के लिए अन्य मुहूर्तों को प्राथमिकता दी जाती है। 5. लाभ: उत्तर-पूर्व दिशा: उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में इस दिन शाम को घी का दीपक जलाना सौभाग्य वर्धक माना जाता है। श्रीयंत्र स्थापना: अपने घर या ऑफिस में 'श्री यंत्र' स्थापित करने के लिए यह सबसे सिद्ध मुहूर्त है। पीली चीजों का दान: चने की दाल, गुड़, पीले वस्त्र या हल्दी का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है। विष्णु-लक्ष्मी पूजन: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से दरिद्रता दूर होती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: 3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा
इन दिनों इंडस्ट्री में रणवीर सिंह का जबरदस्त प्रभाव देखने को मिल रहा है। धुरंधर फ्रेंचाइज़ी की ऐतिहासिक सफलता के बाद अभिनेता को दर्शकों, समीक्षकों और फिल्म जगत से भरपूर प्यार और सराहना मिल रही है। इसी बीच रकुल प्रीत सिंह ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में रणवीर सिंह से अपनी पहली मुलाकात को याद किया और बताया कि उन्हें पहली बार देखकर वह पूरी तरह स्टार-प्रभावित हो गई थीं। रकुल प्रीत सिंह इन दिनों अपनी हालिया रिलीज पति पत्नी और वो दो में नीलोफर के किरदार के लिए खूब तारीफें बटोर रही हैं। इस घटना के बारे में बात करते हुए रकुल ने बताया कि बैंड बाजा बारात देखने के बाद से ही वह रणवीर सिंह की प्रशंसक बन गई थीं और अपने फिल्मी पदार्पण से पहले ही एक अवॉर्ड समारोह में उनसे मिलने का मन बना चुकी थीं। रकुल ने कहा, मैं रणवीर सिंह की बहुत बड़ी प्रशंसक हूं। मैंने बैंड बाजा बारात देखी थी, जो यारियां से कुछ समय पहले आई थी। हम लोग एक पुरस्कार समारोह में थे और पूरी टीम प्रस्तुति देने वाली थी। मंच के पीछे रणवीर मौजूद थे और मैं उनसे पहले कभी नहीं मिली थी। ALSO READ: कार्तिक आर्यन का शानदार सफर: प्यार का पंचनामा के द मोनोलॉग गाइ से लेकर बैंकेबल स्टार बनने तक उन्होंने कहा, उस समय तक मेरी पहली फिल्म रिलीज नहीं हुई थी, इसलिए मैं बहुत उत्साहित थी। मुझे पता चला कि रणवीर वहां मौजूद हैं और वही कार्यक्रम का संचालन भी कर रहे हैं। सबको पता था कि वह मेरे पसंदीदा अभिनेता हैं। मैंने सबको कहा था कि आज मुझे रणवीर से मिलना ही है और उनके साथ तस्वीर भी लेनी है। रकुल ने आगे कहा, हम लोग मंच के पीछे खड़े थे तभी अचानक पीछे से एक हाथ आया और आवाज आई — ‘रकुल?’ मैं एकदम घबरा गई और बस ‘हां, हां’ कह पाई। उसके बाद मैं अपनी वैनिटी वैन में गई और खुशी से उछलने लगी। मैं सोच रही थी — ‘हे भगवान, मैं रणवीर से मिल ली।’ बाद में मैंने उन्हें यह किस्सा बताया भी और हम इस पर खूब हंसे। लेकिन वही मेरा पहला और शायद आखिरी स्टार-प्रभावित पल था। रकुल का यह खुलासा एक बार फिर दिखाता है कि रणवीर सिंह को इंडस्ट्री में कितना सम्मान और प्यार मिलता है। बीते वर्षों में कई अभिनेता और फिल्मकार उनकी ऊर्जा, करिश्मा और लोगों पर गहरी छाप छोड़ने की क्षमता की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। अब धुरंधर फ्रेंचाइज़ी की बड़ी सफलता के बाद रणवीर सिंह का यह प्रभाव और भी बढ़ गया है। दर्शक उनके अभिनय का जश्न मना रहे हैं, समीक्षक उनकी बहुमुखी प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं और फिल्म जगत खुलकर उनके स्टारडम को स्वीकार कर रहा है। इसी शानदार दौर के बीच रणवीर सिंह ने एक और बड़ा मुकाम हासिल किया है। वह हिंदी सिनेमा में एक हजार करोड़ रुपये के शुद्ध कारोबार वाले क्लब की शुरुआत करने वाले अभिनेता बन गए हैं, जिससे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में उनकी जगह और मजबूत हो गई है।
कार्तिक आर्यन का शानदार सफर: प्यार का पंचनामा के द मोनोलॉग गाइ से लेकर बैंकेबल स्टार बनने तक
बॉक्स ऑफिस सफलता और मेनस्ट्रीम पहचान हासिल करने से पहले, कार्तिक आर्यन ग्वालियर (मध्य प्रदेश) के एक छोटे शहर के लड़के थे, जिनका फिल्मी बैकग्राउंड या इंडस्ट्री में कोई कनेक्शन नहीं था, लेकिन बॉलीवुड में बड़ा नाम बनाने का सपना जरूर था। जब साल 2011 में 'प्यार का पंचनामा' रिलीज हुई, तब इस फिल्म ने एक ऐसे मासूम लड़के को दर्शकों से मिलवाया, जिसकी रिलेटेबल स्क्रीन प्रेजेंस और रॉ एनर्जी ने खासकर युवाओं के साथ गहरा जुड़ाव बना लिया। मज़ेदार बात यह है कि लव रंजन के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने न सिर्फ कार्तिक को ‘द मोनोलॉग गाइ’ का टैग दिलाया, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई भी की। हालांकि कार्तिक के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2018 में 'सोनू के टीटू की स्वीटी' से आया, जहां उन्होंने एक लीडिंग मैन के तौर पर अपनी पहली बड़ी सफलता हासिल की। यह फिल्म न सिर्फ कमर्शियल हिट साबित हुई, बल्कि कार्तिक की पहली 100 करोड़ रुपए क्लब में शामिल होने वाली फिल्म भी बनी, जिसने उन्हें मजबूत ऑडियंस कनेक्ट वाले बैंकेबल यंग स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। ALSO READ: अमिताभ बच्चन के अस्पताल में भर्ती होने की खबरों का सच आया सामने, बिग बी बोले- चील जब होवे शांत तो... उसके बाद साल 2019 में कार्तिक ने लक्ष्मण उतेकर की फिल्म 'लुका छुपी' के जरिए कमर्शियल स्पेस में अपनी पकड़ और मजबूत की, जहां उनके किरदार गुड्डू शुक्ला ने फैमिली ऑडियंस और मास मार्केट के साथ गहरा जुड़ाव बनाया। इसी साल भूषण कुमार की 'पति पत्नी और वो' में उन्होंने अपने कॉमिक टाइमिंग और मेनस्ट्रीम अपील का एक और उदाहरण पेश किया, जहां ‘चिंटू त्यागी’ के रूप में उनकी परफॉर्मेंस को खूब पसंद किया गया। इसके बाद साल 2020 में 'लव आज कल' में उन्होंने इमोशनल और रोमांटिक स्पेस को एक्सप्लोर किया, जहां उन्होंने ड्यूल टाइमलाइन और भावनात्मक कहानी को संतुलित तरीके से निभाया। पोस्ट-पैंडेमिक दौर में, जब एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री मुश्किल समय से गुजर रही थी, कार्तिक आर्यन के करियर का एक निर्णायक फेज शुरू हुआ। साल 2021 में राम माधवानी की 'धमाका' ने उन्हें एक ज्यादा गंभीर और इंटेंस अवतार में पेश किया। इसके बाद साल 2022 में 'भूल भुलैया 2' आई, जहां उनका किरदार ‘रूह बाबा’ दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। ऐसे समय में जब थिएटर्स अभी भी कोविड के बाद रिकवरी कर रहे थे, यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी बॉक्स ऑफिस सफलताओं में से एक बनकर उभरी और लंबे सूखे दौर के बाद दर्शकों को दोबारा सिनेमाघरों तक लाने में सफल रही। उसी साल, शशांक घोष की 'फ्रेडी' ने कार्तिक का एक अलग और ज्यादा इंटेंस पक्ष दर्शाया। साइकोलॉजिकल थ्रिलर स्पेस में कदम रखते हुए उन्होंने फ्रेडी दारूवाला के किरदार को शांत लेकिन लेयर्ड अंदाज में निभाया, जिससे यह साबित हुआ कि वह सिर्फ मेनस्ट्रीम एंटरटेनर्स तक सीमित रहने वाले अभिनेता नहीं, बल्कि उससे ज़्यादा हैं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें साल 2023 में, समीर विद्वन्स की 'सत्यप्रेम की कथा' में कार्तिक ने ‘सत्तू’ का किरदार निभाया, जहां कियारा आडवाणी के साथ उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया। इस फिल्म में उन्होंने इमोशनल रोमांटिक ड्रामा स्पेस में वापसी करते हुए कमर्शियल अपील और संवेदनशील अभिनय के बीच संतुलन बनाया। फिर इसके बाद साल 2024 में आई 'चंदू चैंपियन', जिसने कार्तिक के करियर में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई। इस परफॉर्मेंस-ड्रिवन फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, जिसने उनके करियर ग्राफ में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ी। इसी दौरान 'भूल भुलैया 3' ने भी फ्रेंचाइज़ स्पेस में उनकी सफलता को आगे बढ़ाते हुए दुनियाभर में 423.85 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दर्ज किया। आज यह फ्रेंचाइज़ भारतीय सिनेमा की सबसे सफल और पसंदीदा हॉरर-कॉमेडी फ्रेंचाइज़ में टॉप तीन में गिनी जाती है। फिल्मों के अलावा, कार्तिक आर्यन ने अपनी मजबूत ब्रांड वैल्यू भी बनाई है। इंस्टाग्राम पर 50.6 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ वह प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले भारतीय मेल एक्टर्स में टॉप तीन में शामिल हैं और देशभर के युवाओं के बीच उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। आज कई बड़े ब्रांड्स उनकी लोकप्रियता, रिलेटेबिलिटी और मार्केट में बढ़ती पकड़ के कारण उनसे जुड़े हुए हैं। दो दर्जन से ज्यादा ब्रांड एंडोर्समेंट्स के साथ कार्तिक अपनी पीढ़ी के सबसे ज्यादा डिमांड वाले और कमर्शियली वैल्यूएबल सितारों में शामिल हो चुके हैं। फिलहाल आने वाले समय में कार्तिक आर्यन की अपकमिंग फिल्मों में 'नागज़िला' और 'कैप्टन इंडिया' के साथ अनुराग बासु की अनटाइटल्ड म्यूजिकल लव स्टोरी और कबीर खान की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्मों में नज़र आनेवाले हैं। माना जा रहा है कि यह फ़िल्में कार्तिक की फिल्मोग्राफी के साथ उनकी स्क्रीन इमेज को और भी बढ़ाएगी।
अमिताभ बच्चन के अस्पताल में भर्ती होने की खबरों का सच आया सामने, बिग बी बोले- चील जब होवे शांत तो...
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की सेहत को लेकर हाल ही में खबर आई की वह मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि 83 वर्षीय अमिताभ को अस्पताल के वीआईपी विंग में पेट से जुड़ी समस्याओं के कारण भर्ती कराया गया है और उनके बेटे अभिषेक बच्चन भी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। इस खबर के फैलते ही दुनिया भर में मौजूद उनके करोड़ों प्रशंसकों की सांसें अटक गईं और लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआएं मांगने लगे। हालांकि अब इन खबरों का सच सामने आ गया है। अमिताभ की तबीयत बिल्कुल ठीक है। बिग बी अपने घर जलसा में हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं। ALSO READ: ‘मैं अकेला नहीं हूं...’ सलमान खान ने तोड़ी चुप्पी, ‘Lonely’ पोस्ट पर मचा बवाल तो मां सलमा खान ने पूछा- क्या हुआ बेटा? ईटाइम्स की रिपोटे के अनुसार, अमिताभ बच्चन शनिवार को नानावटी अस्पताल गए थे, लेकिन सिर्फ रूटीन चेकअप के लिए। वह चेक-अप के तुरंत बाद अपने घर 'जलसा' लौट आए थे। बिग बी पूरी तरह तंदुरुस्त हैं और उन्हें अस्पताल जाने के अगले ही दिन अपनी गाड़ी खुद चलाकर 'जलसा' से अपने दूसरे बंगले 'जनक' जाते हुए भी देखा गया था। ब्लॉग पर शेयर की अनोखी कविता अमिताभ बच्चन ने हमेशा की तरह मीडिया में चल रही अपनी सेहत की खबरों पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन अपने खास अंदाज में प्रशंसकों को आश्वस्त जरूर कर दिया। उन्होंने अपने आधिकारिक ब्लॉग पर एक देसी और मजाकिया लहजे वाली कविता साझा की। उन्होंने लिखा, चील जब होवे शांत तो भैया, तोते बोलन सुरु करें इर बीर फत्ते, कहान, चल हमऊ, पिलावे सुरु करें!!!! बाजरे दी रोटी खा दी, फु पड़ीयों दा, साग रे मुहं में डलन लगाई जैसे, बोलन लगे काग रे! इस कविता के माध्यम से बिग बी ने बिना कुछ कहे यह साबित कर दिया कि वे हमेशा की तरह ऊर्जा से भरपूर और पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने अपने इस पोस्ट के अंत में प्रशंसकों के लिए ढेर सारा प्यार और प्रार्थनाएं भी भेजीं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें क्यों उड़ी अस्वस्थ होने की अफवाह? हाल ही में पत्रकार विक्की लालवानी ने एक वीडियो पोस्ट कर दावा किया था कि अमिताभ बच्चन शनिवार से अस्पताल में भर्ती हैं। पिछले तीन दिनों से पेट से जुड़ी समस्याओं के कारण वे ए-विंग के वीआईपी एनक्लोजर में रह रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अभिषेक बच्चन भी अपने पिता को देखने मंगलवार की शाम अस्पताल पहुंचे थे। अपनी सेहत की अफवाहों को पीछे छोड़ते हुए महानायक इस उम्र में भी लगातार काम कर रहे हैं। वह जल्द ही साल 2024 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' के सीक्वल में नजर आने वाले हैं। निर्देशक इसके अलावा अमिताभ बच्चन के प्रशंसक उन्हें एक बार फिर इंटेंस कोर्टरूम ड्रामा फिल्म 'सेक्शन 84' में देखने के लिए उत्सुक हैं।
Varada Chaturthi 2026: अधिकमास की वरद गणेश चतुर्थी आज, जानें महत्व, पूजा विधि और विशेष मंत्र
Lord Ganesha Puja May 20, 2026: वरद विनायक चतुर्थी 20 मई 2026, बुधवार कोमनाई जा रही है। यह चतुर्थी विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रसिद्ध है और इसे अधिकमास चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता है। अधिकमास के कारण यह चतुर्थी साल में किसी अन्य सामान्य चतुर्थी की तुलना में और भी पवित्र मानी जाती है। ALSO READ: अधिकमास में 3 साल बाद बन रहे 2 प्रदोष व्रत, चंद्र और शनिदोष से मुक्ति पाने का दुर्लभ मौका वरद विनायक चतुर्थी पर भक्तगण भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन की पूजा में विशेष रूप से सिद्धि, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। अधिकमास चतुर्थी का महत्व धार्मिक ग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए कोई भी धार्मिक कार्य या व्रत दोगुना फल देते हैं। भक्तजन गणेश मंत्र, आरती और भजन के माध्यम से भगवान गणेश को याद करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस चतुर्थी के अवसर पर भारत के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं। लोग अपने घरों में गणेश प्रतिमा की स्थापना कर इसे विधिपूर्वक सजाते हैं और पूरे दिन ध्यान और भक्ति में लीन रहते हैं। यहां विनायक चतुर्थी से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं: वरदा चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त (मई 2026) ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 19 मई 2026, 02:18 पी एम से चतुर्थी तिथि समाप्त: 20 मई 2026, 11:06 ए एम पर। वरद चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त - 10:56 ए एम से 11:06 ए एम चतुर्थी: 00 घण्टे 10 मिनट्स बता दें कि विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय की जाती है। वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 08:43 ए एम से 11:08 पी एम अवधि - 14 घण्टे 25 मिनट्स विनायक चतुर्थी का महत्व जैसा कि नाम से स्पष्ट है, 'विनायक' का अर्थ है विशिष्ट नायक यानी विघ्नहर्ता और बाधाओं को हरने वाला। इस दिन व्रत रखने से जीवन की सभी अड़चनें दूर होती हैं। भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं। विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से पूजा करने से रुके हुए कार्य संपन्न होते हैं और घर में सुख-शांति आती है। यह व्रत बुद्धि और समृद्धि के साथ-साथ जीवन में सफलता का मार्ग भी दिखाता है। ALSO READ: गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय सरल पूजा विधि विनायक चतुर्थी पर दोपहर की पूजा का विधान है। आप इस विधि का पालन कर सकते हैं: स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें। स्थापना: पूजा स्थान पर गणेश जी की मूर्ति को गंगाजल से पवित्र करें। उन्हें लाल चंदन का तिलक लगाएं। अर्पण: भगवान गणेश को 21 दूर्वा घास की गांठें चढ़ाएं। उन्हें लाल फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें। भोग: गणेश जी के प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। कथा और आरती: विनायक चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में कपूर से आरती करें। विशेष मंत्र पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है: मुख्य मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः। कार्य सिद्धि के लिए: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ दूर्वा अर्पण मंत्र: 'इदं दूर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः' विशेष सावधानी: विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को देखने से कलंक या झूठे आरोप लगने का डर रहता है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय
ईरान युद्ध: कितनी असरदार है भारत की बहु-पक्षीय रणनीति?
भारत ने पश्चिम एशिया की परस्पर विरोधी ताकतों के बीच जिस सावधानी से संतुलन बनाए रखा है, वह उसकी बड़ी उपलब्धि रही है। हालांकि, मौजूदा संकट यह संकेत दे रहा है कि यह संतुलन बनाए रखना भारत के लिए कितना मुश्किल होता जा रहा है।
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (20 मई, 2026)
1. मेष (Aries) करियर: आज नए अवसर मिलेंगे, मेहनत का फल शीघ्र प्राप्त होगा। लव: प्रेमी साथी के साथ मधुरता और समझ बढ़ेगी। धन: आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य: हल्की थकान या सिरदर्द हो सकता है। उपाय: हनुमान जी को लाल फूल अर्पित करें। ALSO READ: पुरुषोत्तम मास 2026: इन खास तिथियों पर रखें व्रत, करें इन देवी-देवताओं की पूजा; मिलेगा अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि 2. वृषभ (Taurus) करियर: सहकर्मियों और अधिकारियों से सहयोग मिलेगा। लव: प्रेम जीवन में संतुलन और मधुरता बनी रहेगी। धन: खर्चों पर संयम रखें, निवेश लाभकारी रहेगा। स्वास्थ्य: पाचन या हल्की गैस की समस्या हो सकती है। उपाय: तुलसी के पौधे को जल दें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: नए प्रोजेक्ट और जिम्मेदारियां मिलने की संभावना। लव: साथी के साथ संवाद और तालमेल बढ़ेगा। धन: आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। स्वास्थ्य: मानसिक थकान से बचें। उपाय: गौमाता/ गाय को आहार दें, चारा खिलाएं। 4. कर्क (Cancer) करियर: पुराने प्रोजेक्ट सफल होंगे, अधिकारियों से सराहना मिल सकती है। लव: साथी के साथ तालमेल बेहतर रहेगा। धन: अचानक खर्च से बचें। स्वास्थ्य: हल्की सर्दी या एलर्जी हो सकती है। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। 5. सिंह (Leo) करियर: नौकरी में पदोन्नति और सम्मान मिलने की संभावना। लव: प्रेम जीवन में रोमांस और उत्साह बढ़ेगा। धन: आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य: ऊर्जा और उत्साह बनाए रखें। उपाय: पीले कपड़े पहनें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। 6. कन्या (Virgo) करियर: मेहनत का परिणाम मिलेगा, टीम वर्क अच्छा रहेगा। लव: प्रेम जीवन में मधुरता बनी रहेगी। धन: निवेश लाभकारी रहेगा। स्वास्थ्य: सिरदर्द या माइग्रेन की संभावना। उपाय: प्रतिदिन धार्मिक पाठ करें। ALSO READ: Weekly Horoscope May 2026: साप्ताहिक राशिफल (18 से 24 मई): जानें इस हफ्ते आपके सितारे क्या कहते हैं? 7. तुला (Libra) करियर: कामकाज में स्थिरता और संतुलन बना रहेगा। लव: संबंधों में समझ और मधुरता बढ़ेगी। धन: खर्चों पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य: जोड़ों और हड्डियों का ध्यान रखें। उपाय: सफेद फूलों का दान करें। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: कारोबार में जोखिम उठाने का समय अनुकूल है। लव: रोमांटिक जीवन में उत्साह बढ़ेगा। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य: खान-पान पर ध्यान दें। उपाय: हनुमान जी की पूजा करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: पेशेवर जीवन में उन्नति की संभावना। लव: संबंधों में समझ और मधुरता बढ़ेगी। धन: निवेश से लाभ होगा। स्वास्थ्य: मानसिक थकान से बचें। उपाय: सूर्य देव को अर्घ्य दें। 10. मकर (Capricorn) करियर: कार्यक्षेत्र में मेहनत का परिणाम मिलेगा, सम्मान बढ़ेगा। लव: सिंगल लोगों के लिए नए प्रेम संबंध बन सकते हैं। धन: कारोबारियों की वित्तीय स्थिति स्थिर रहेगी। स्वास्थ्य: सामान्य स्वास्थ्य, हल्का व्यायाम लाभकारी रहेगा। उपाय: काले तिल का दान करें। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: नौकरी में स्थिरता और संतुलन बना रहेगा। लव: प्रेमी साथी के साथ मधुरता बनी रहेगी। धन: कारोबारी खर्च नियंत्रित रखें। स्वास्थ्य: हल्की थकान महसूस हो सकती है। उपाय: आज गायत्री मंत्र जपें। 12. मीन (Pisces) करियर: कार्यस्थल की नई योजनाएं फायदेमंद होंगी। लव: सिंगल्स के लिए रोमांटिक मौका मिलेगा। धन: कारोबार से आर्थिक लाभ संभव है। स्वास्थ्य: मौसमी बीमारियों से सावधान रहें। उपाय: आज पीले वस्त्र पहनें। ALSO READ: Shani revati 2026: शनि का रेवती नक्षत्र में प्रवेश, 4 राशियों के लिए गोल्डन टाइम शुरू, 5 रहें बचकर
जावेद के ससुर की सर्जरी होनी थी। इसके लिए चंडीगढ़ जाना था। जावेद कश्मीर के पुलवामा में रहते हैं। कश्मीर से चंडीगढ़ तक पहुंचने के लिए जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) ही इकलौता रास्ता है। वो भी लैंडस्लाइड या बर्फबारी की वजह से अक्सर बंद हो जाता है। इसे ध्यान में रखकर जावेद सर्जरी से कुछ दिन पहले ही चंडीगढ़ के लिए निकल गए। 50 किमी दूर काजीगुंड पहुंचकर पता चला कि रामबन के पास रास्ता बंद है। दिक्कत तब बढ़ गई, जब सर्जरी की तारीख पास आने लगी और रास्ता नहीं खुला। अब फ्लाइट टिकट बुक कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। परिवार के चार-पांच लोगों के टिकट का खर्च लगभग सर्जरी के खर्च के बराबर हो गया। जावेद अहमद की ये कहानी 2023 है। 30 अप्रैल से पहले तक यही परेशानी कश्मीर में रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थी। अब जम्मू ट्रेन के जरिए सीधे कश्मीर घाटी से जुड़ गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। लोकल लोगों की बात…20 दिन में दो बार सफर किया, सिर्फ हजार रुपए खर्च हुए जम्मू-श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेशा बड़ी चुनौती रही है। अब जावेद कहते हैं, ‘अगर तीन साल पहले ट्रेन की सुविधा होती तो हम इतने बड़े खर्च और परेशानी से बच सकते थे। हम जैसे उन मिडिल क्लास परिवारों के लिए ये बड़ी राहत है, जो हवाई सफर या महंगी रोड ट्रिप पर खर्च नहीं कर सकते हैं।’ ट्रेन चलने के बाद दो बार सफर कर चुका हूं। महज हजार रुपए में सुबह घर से निकलकर शाम तक लौट आया। पैसा और समय दोनों बचा। जावेद बताते हैं कि सर्दियों में रामबन, बनिहाल और रामसू जैसे इलाकों में लैंडस्लाइड और बर्फबारी होने से सड़क कई दिनों या हफ्तों तक बंद रहती थी। इससे न सिर्फ काम रुकता था, बल्कि कश्मीर में जरूरी सामानों की भी कमी हो जाती थी। अब सड़कें जरूर पहले से बेहतर हुई हैं। हाईवे फोर-लेन और टनल से लैस हैं, लेकिन ट्रेन का सफर ज्यादा आसान, सस्ता और भरोसेमंद है। बाहर पढ़ रहे 70 हजार स्टूडेंट्स के लिए सफर आसान हुआ जम्मू-कश्मीर के करीब 70 हजार स्टूडेंट दिल्ली, चंडीगढ़ और देश के बाकी शहरों में रहकर पढ़ रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट श्रीगुफवारा के रहने वाले मोहम्मद आमिर कहते हैं, ‘पहले सर्दी या बारिश में जब NH-44 बंद हो जाता, तो मजबूरी में हवाई सफर करके घर जाना पड़ता था। अब घर आने-जाने से पहले सोचना नहीं पड़ेगा।‘ आमिर सरकार से अनंतनाग में ट्रेन के स्टॉपेज की मांग भी करते हैं। वे कहते हैं कि इससे साउथ कश्मीर में अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां जिलों के स्टूडेंट्स को सीधा फायदा मिलेगा। अमरनाथ यात्रियों के लिए अनंतनाग में स्टॉपेज की मांग साउथ कश्मीर के लोग भी अनंतनाग में वंदे भारत ट्रेन के स्टॉपेज की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे अनंतनाग धार्मिक पर्यटन का बड़ा ट्रांजिट हब बन सकता है। अमरनाथ यात्रियों और इलाके के टूरिज्म को भी फायदा होगा। अमरनाथ यात्रियों के लिए अनंतनाग पारंपरिक बेस कैंप का मुख्य प्रवेश द्वार है। यहां ट्रेन रुकने से यात्रियों के सफर का समय और खर्च दोनों कम होगा। यात्रियों की आवाजाही से होटल, रेस्त्रां, टैक्सी ऑपरेटर और छोटे व्यापारियों को भी फायदा मिलेगा। फल कारोबारियों की बात…अब सेब सड़ेंगे नहीं, ढुलाई भी सस्ती हुई एशिया की दूसरी सबसे बड़ी सोपोर फ्रूट मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद भट कहते हैं, ‘पहले सड़क के रास्ते दिल्ली तक एक सेब की पेटी 100–130 रुपए में भेजते थे। ट्रेन से ये लागत घटकर 30-45 रुपए रह गई है।‘ फैयाज के मुताबिक, ये सेक्टर हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए का कारोबार करता है। इससे लगभग 7 लाख परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है और करीब 35 लाख लोगों को रोजगार देता है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पिछले साल सेब के सीजन में NH-44 काफी दिनों तक बंद रहा और हमें 2 हजार करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। ये रास्ता लैंडस्लाइड के चलते 7 साल में 284 दिनों तक बंद रहा है। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई। जब ट्रक रास्ते में फंसते हैं, तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है और किसानों की कमाई घट जाती है।‘ ’रेल से फलों का ट्रांसपोर्ट किफायती है, लेकिन इसके लिए बेहतर इंतजाम जरूरी है। बुकिंग सीधे रेलवे से हो ताकि आम लोगों को फायदा मिले। एजेंट सक्रिय हुए तो ना ट्रांसपेरेंसी रहेगी, मोनोपोली अलग हो जाएगी। अभी फलों के लिए भी सीमेंट ढोने वाले वैगन इस्तेमाल हो रहे हैं, जो सही नहीं हैं।’ पर्यटकों की बात…कश्मीर में यूरोप सा नजारा, 10-12 घंटे का सफर 5 घंटे में पिछले 13 साल से परिवार के साथ कश्मीर घूमने आ रहे गणेश उंडाले कहते हैं, ‘रेलवे ने पूरा सफर ही बदल दिया। पहले मुंबई से जम्मू और फिर सड़क के रास्ते श्रीनगर पहुंचने में वक्त और पैसा दोनों लगता था। अब ट्रेन का किराया क्लास के हिसाब से 855 से 1600 रुपए तक है, जबकि टैक्सी का खर्च 7 से 8 हजार रुपए तक पहुंच जाता है।’ ’रोड के बजाय ट्रेन से सफर ज्यादा सेफ है। स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसा सिक्योरिटी चेक होता है। जम्मू से श्रीनगर का सफर सिर्फ 5 घंटे में तय हो जाता है। रोड ट्रिप की तुलना में 5-7 घंटे बचते हैं। फिर कश्मीर में ट्रेन जब पहाड़ों और खूबसूरत वादियों से गुजरती है, तो यूरोप की खूबसूरती को भी टक्कर देती है। चिनाब रेलवे ब्रिज से गुजरना एक्सपीरियंस को और खास बनाता है।’ ट्रेन की सुरक्षा के लिए CORAS कमांडो जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस देश के सबसे संवेदनशील इलाकों से गुजरती है। इस रेल रूट की कई जगहें आतंकियों के निशाने पर रही हैं। भारतीय रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां इसीलिए ट्रेन को हाई-सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तरह देख रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इंतजाम: ……………. ये खबर भी पढ़ें… कैसे बना चिनाब रेलवे ब्रिज, 10 पुलों के बराबर लगा लोहा जम्मू और पीर-पंजाल में पहाड़ियों पर बना है दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज। 16 साल में 1486 करोड़ रुपए की लागत से बना ये ब्रिज इंजीनियरिंग का शानदार नमूना तो है ही, भारतीय रेलवे के लिए भी अब तक का सबसे चैलेंजिंग प्रोजेक्ट रहा है। दैनिक भास्कर आपको बता रहा है इस ब्रिज की पूरी कहानी, वो भी ग्राउंड जीरो से। पढ़िए पूरी खबर…
सीएम योगी की सख्ती से टले 2 बाल विवाह, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से सुरक्षित हुआ बेटियों का भविष्य
उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती और प्रशासनिक सक्रियता का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। औरैया जिले में प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति की संयुक्त कार्रवाई से दो बहनों का बाल विवाह समय रहते रुकवाया गया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ दो बेटियों के जीवन और शिक्षा को सुरक्षित किया, बल्कि समाज में कानून के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी संदेश दिया। यह मामला औरैया जिले के थाना ऐरवाकटरा क्षेत्र के एक गांव का है। जहां संरक्षण अधिकारी रीना चौहान को 1098 हेल्पलाइन के जरिए सूचना मिली कि दो नाबालिगों का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच में सामने आई नाबालिगों की उम्र इस दौरान पता चला कि एक बहन की उम्र अभिलेखों में 18 वर्ष दर्ज है, लेकिन जिस लड़के से उसका विवाह तय था, उसकी उम्र मात्र 17 वर्ष 4 माह पाई गई। वहीं दूसरी की उम्र केवल 14 वर्ष 11 दिन निकली। इस प्रकार दोनों विवाह बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत अवैध पाए गए। रेस्क्यू टीम ने परिजनों को कानून की जानकारी देते हुए बताया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होना अनिवार्य है। शिक्षा और सुरक्षा योगी सरकार की प्राथमिकता योगी सरकार लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि बाल विवाह, महिला उत्पीड़न और बाल श्रम जैसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। इसी का परिणाम है कि प्रशासनिक टीमें संवेदनशील मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर रही हैं। बाल विवाह रोकने की ऐसी घटनाएं समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत हैं। इससे न केवल बेटियों को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और भविष्य को भी मजबूती मिलती है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में तत्काल की जा रही कार्रवाई: निदेशक सी. इंदुमती महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक सी. इंदुमती ने बताया कि बाल विवाह की सूचना मिलते ही औरैया जिला प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। जांच में उम्र वैधानिक विवाह आयु से कम पाई गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत निरंतर महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, इसके अलावा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ समय- समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। किसी भी सूचना पर प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयां तत्काल कार्रवाई कर रहीं हैं। हमारा उद्देश्य केवल बाल विवाह रोकना ही नहीं, बल्कि बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। Edited by : Sudhir Sharma
विपक्ष गैस और पेट्रोल को लेकर फैला रहा है अनावश्यक भ्रम : मदन राठौड़
जयपुर। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने राज्य में विपक्ष के नेताओं के आरोपों पर पलटवार करते हुए मंगलवार को कहा कि वह पेट्रोल-डीजल एवं गैस को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाकर केवल राजनीति करने की कोशिश कर रहा हैं। राठौड़ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधते हुए […] The post विपक्ष गैस और पेट्रोल को लेकर फैला रहा है अनावश्यक भ्रम : मदन राठौड़ appeared first on Sabguru News .
बीकानेर में डिग्गी में डूबने से महिला और बालक की मौत
बीकानेर। राजस्थान में बीकानेर जिले के पूगल थाना क्षेत्र में मंगलवार को पानी की डिग्गी में डूबने से एक महिला और उसके सात वर्ष के दोहिते की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि भानीपुरा गांव से कुछ दूरी पर छैलूसिंह राजपूत के खेत में डिग्गी बनी हुई है। मंगलवार सुबह उनका सात वर्षीय […] The post बीकानेर में डिग्गी में डूबने से महिला और बालक की मौत appeared first on Sabguru News .
डोटासरा ने भाजपा की राज्य सरकार पर आर्थिक संकट का लगाया आरोप
जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य और केन्द्र सरकार पर अनियंत्रित मंहगाई, नीट पेपर लीक घोटाला, राज्य की स्वास्थ्य एवं शिक्षा प्रणाली के पतन और आर्थिक संकट का आरोप लगाया है। डोटासरा ने मंगलवार को यहां मीडिया से बातचीत में ये आरोप लगाए। उन्होंने आसमान […] The post डोटासरा ने भाजपा की राज्य सरकार पर आर्थिक संकट का लगाया आरोप appeared first on Sabguru News .
राष्ट्र सेविका समिति का 15 दिवसीय प्रवेश शिक्षा वर्ग प्रारंभ
जयपुर। राष्ट्र सेविका समिति जयपुर प्रांत की ओर से 15 दिवसीय प्रवेश शिक्षा वर्ग का शुभारंभ 17 मई को शंकरलाल धानुका केशव विद्यापीठ, जामडोली में भारत माता पूजन के साथ हुआ। 1 जून तक चलने वाले इस आवासीय वर्ग में जयपुर प्रांत के 7 विभागों से कुल 92 शिक्षार्थी एवं प्रबंधिकाएं, शिक्षिकाएं एवं अधिकारी सहित […] The post राष्ट्र सेविका समिति का 15 दिवसीय प्रवेश शिक्षा वर्ग प्रारंभ appeared first on Sabguru News .
अजमेर, किशनगढ़ और पुष्कर में डाक विभाग की फ्रैंचाइजी आउटलेट खोलने के लिए आवेदन आमंत्रित
अजमेर। भारतीय डाक विभाग अजमेर मंडल द्वारा अजमेर शहर, किशनगढ़ और पुष्कर में नई फ्रैंचाइजी आउटलेट खोलने के लिए पात्र आवेदकों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन आउटलेट्स के माध्यम से स्पीड पोस्ट बुकिंग, स्पीड पोस्ट पार्सल और इंडिया पोस्ट पार्सल (रिटेल) डिलीवरी की सेवाएं प्रदान की जाएंगी। मण्डल के प्रवर अधीक्षक डाकघर […] The post अजमेर, किशनगढ़ और पुष्कर में डाक विभाग की फ्रैंचाइजी आउटलेट खोलने के लिए आवेदन आमंत्रित appeared first on Sabguru News .
जेएनयू के छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका नामंजूर
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में दायर की गई थी, जिसमें उन पर गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के […] The post जेएनयू के छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका नामंजूर appeared first on Sabguru News .
शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में चौथा आरोपी अरेस्ट
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले राजकुमार सिंह को राज्य के छपार से गिरफ्तार किया गया है। गत 12 मई को इस […] The post शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में चौथा आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
शर्तों पर फंसा अमरीका का पेंच, टस से मस न हुआ ईरान
वॉशिंगटन/तेहरान। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर रणनीति फिलहाल गतिरोध में फंसती दिखाई दे रही है क्योंकि कड़े बयानों, सैन्य धमकियों और प्रत्यक्ष कार्रवाई के बावजूद ईरान अपने पुराने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। अमरीका की ओर से लगातार बदलते संकेतों और लक्ष्यों के बीच ईरान संघर्ष में उसकी […] The post शर्तों पर फंसा अमरीका का पेंच, टस से मस न हुआ ईरान appeared first on Sabguru News .
कभी ट्रम्प ने बीच भाषण रोककर खूबसूरती की तारीफ की, कभी अल्बानिया के पीएम ने घुटने पर बैठकर स्वागत किया। मोदी के साथ सेल्फी ली तो #Melodi ट्रेंड हो गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी जब भी किसी विदेशी नेता से मिलती हैं, वो मुलाकात मोमेंट बन जाती है। आज पीएम मोदी फिर उनसे मिलने वाले हैं। मेलोनी की असली कहानी इन वायरल पलों से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। कैसे एक नाइट क्लब में बारटेंडर लड़की, इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… बचपनः मां एबॉर्शन करवाने वाली थीं, 1 साल की उम्र में पिता छोड़ गए इटली का सबसे मशहूर शहर है रोम। 15 जनवरी 1977 को यहीं जॉर्जिया मेलोनी पैदा हुईं। पिता फ्रांसेस्को टैक्स एडवाइजर थे और मां अन्ना नॉवेल राइटर। उनकी शादीशुदा जिंदगी में सब ठीक नहीं था। ऑटोबायोग्राफी 'इओ सोनो जॉर्जिया (मैं जॉर्जिया हूं)' में मेलोनी लिखती हैं- जब मैं गर्भ में थीं, तो मां ने इसे गिराने का सोचा। आखिरी वक्त पर क्लीनिक से लौट आईं। मैं अपनी मां और उनकी हिम्मत की कर्जदार हूं। उनके साहस और समझदारी के इस कदम के बिना मेरा जन्म ही नहीं होता।' अन्ना का पति से रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चला। 1978 में जब जॉर्जिया एक साल की हुईं, तो फ्रांसेस्को परिवार छोड़कर स्पेन के कैनरी द्वीप चले गए और दूसरी शादी कर ली। पिता जिस घर को छोड़कर गए थे, वो रोम के पॉश इलाके कैमिलुचिया में था। 1980 की बात है। 3 साल की मेलोनी बड़ी बहन एरियाना के साथ खेल रही थीं, तभी एक बड़ा हादसा हो गया। उस हादसे के बारे में एरियाना ने एक इंटरव्यू में बताया- हम लाइट नहीं जलाना चाहते थे, इसलिए मोमबत्तियां जला लीं। फिर हमने उन्हें रजाई और खिलौनों से ढक दिया और टीवी पर कार्टून देखने चले गए। कमरे में आग लग गई। जो कुछ बचा था, सब खत्म हो गया। जब तक नया घर नहीं मिला, मेलोनी नाना-नानी के गरबाटेला वाले घर में फर्श पर गद्दे बिछाकर सोती थीं। मां पास में ही अपनी एक दोस्त के यहां चली जाती थीं। नाइट क्लब में बारटेंडर, 15 साल में राजनीति शुरू की 1990 के आखिर में मां उपन्यास लिखकर कुछ पैसे कमाती थीं, लेकिन ये घर के खर्च के लिए काफी नहीं होते थे। बहन एरियाना कहती हैं, ‘जॉर्जिया गरीबी के चलते कॉलेज नहीं जा सकी। उसने सीडी बेचकर और बच्चों की देखभाल करके पैसे कमाए।' जॉर्जिया ने रोम के सबसे मशहूर नाइट क्लब 'पाइपर क्लब' में बारटेंडर का भी काम किया। 2013 में मेलोनी ने कहा था, ‘मैंने जिंदगी के बारे में संसद में काम करके नहीं, बार काउंटर के पीछे खड़े होकर सीखा है।’ 15 साल की उम्र में जॉर्जिया ने MSI नाम की पार्टी ज्वॉइन की। ये एक फासीवादी पार्टी थी, जिसे 1945 तक इटली के तानाशाह रहे मुसोलिनी की मौत के बाद उनके समर्थकों ने खड़ा किया था। 25 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री बनने के बाद संसद में अपने पहले भाषण में जॉर्जिया ने कहा, ‘मैंने 15 साल की उम्र में विया डी’एमेलियो नरसंहार के बाद राजनीति शुरू की, जिसमें माफिया ने जज पाओलो बोर्सेलिनो को मारा था। मुझे लगा कि अब चुपचाप बैठना मुमकिन नहीं।’ दरअसल, इटली के माफिया नेटवर्क के खिलाफ जांच कर रहे जज पाओलो बोर्सेलिनो की कार को बम से उड़ा दिया गया था। इसमें उनके अलावा 5 बॉडीगार्ड भी मारे गए थे। 1996 में मेलोनी ने फ्रेंच टीवी के साथ इंटरव्यू में कहा, ‘मुसोलिनी एक अच्छे नेता थे। पिछले 50 सालों के नेताओं के उलट उन्होंने जो कुछ भी किया, देश के लिए किया।' इसी वीडियो में मेलोनी की मां अन्ना भी दिखाई दे रही हैं। वो कहती हैं, ‘मैंने अपनी बेटी पर धुर दक्षिणपंथी विचार थोपने की कोशिश नहीं की है।’ 1995 में MSI के नेता जियानफ्रैंको फिनी ने पार्टी को फासीवाद से दूर करके एक नेशनल-कंजर्वेटिव पार्टी बनाने की पहल की। MSI की जगह नया नाम ‘नेशनल अलायंस’ रखा गया। 1997 में 20 साल की मेलोनी इसकी यूथ विंग के रोम सेक्शन की चीफ बनीं। सबसे कम उम्र की कैबिनेट मिनिस्टर 2004 में 27 साल की मेलोनी को पूरे इटली में नेशनल अलायंस की यूथ विंग का चीफ चुना गया। एक तरह से युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष। पहली बार किसी महिला को ये पद मिला था। 2006 में मेलोनी गरबाटेला से सांसद बनीं। फिर 2008 में उन्हें यूथ मिनिस्टर और इटली की संसद के निचले सदन यानी 'चैंबर ऑफ डेप्युटीज' का डिप्टी प्रेसिडेंट भी बनाया गया। इधर 2009 में नेशनल अलायंस के नेता फिनी ने इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के साथ मिलकर गठबंधन बनाया और इसे नाम दिया गया- 'द पीपुल ऑफ लिबर्टी।' ये एक तरह से दक्षिणपंथी नेताओं का जमावड़ा था। 2012 में बर्लुस्कोनी ने गठबंधन का नया नेता चुनने के लिए चुनाव से इनकार किया, तो मेलोनी और उनके साथियों ने ये गठबंधन छोड़ दिया और अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। अपनी पार्टी बनाई, इटली की पहली महिला पीएम बनीं मेलोनी अपनी पार्टी का नाम अंग्रेजी में 'We Italians' रखना चाहती थीं, लेकिन उनके साथी और पार्टी के फाउंडर मेंबर फैबियो रामपेली ने नाम सुझाया- फ्रेटेली डी'इटैलिया यानी 'ब्रदर्स ऑफ इटली'। ये इटली के राष्ट्रगान की पहली लाइन से लिया गया है। 'ब्रदर्स ऑफ इटली' के ज्यादातर नेता वही हैं, जो MSI में थे। पार्टी का हेडक्वार्टर और पार्टी का तीन रंगों वाला प्रतीक भी लगभग वही है। 2018 के इटली चुनाव में मेलोनी की पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' को 4.4% वोट मिले। 2022 के आम चुनाव में 26% वोट के साथ 'ब्रदर्स ऑफ इटली' देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इसने संसद के निचले सदन की 400 सीटों में से 119 सीटें जीतीं। बर्लुस्कोनी की पार्टी ‘फोर्जा इटालिया’ सहित कई अन्य दलों से गठबंधन किया और 22 अक्टूबर, 2022 को मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। परिवारः टीवी जर्नलिस्ट के साथ 8 साल रिश्ते में रहीं, 10 साल की बेटी 2014 में एक टीवी शो चल रहा था। ब्रेक के दौरान मेलोनी ने केला खाया और उसका छिलका पास खड़े एक शख्स को असिस्टेंट समझकर पकड़ा दिया। ये शख्स टीवी जर्नलिस्ट एंड्रिया जियाम्ब्रूनो थे। इस मुलाकात के बाद दोनों करीब आए।मेलोनी 2015 से 2023 तक एंड्रिया के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहीं। 2016 में मेलोनी को एक बेटी हुई जिसका नाम जिनेवरा है। 20 अक्टूबर 2023 को मेलोनी ने एंड्रिया के साथ अपने रिश्ते को खत्म करने का ऐलान करते हुए कहा- ‘करीब 10 साल चला हमारा रिश्ता अब खत्म होता है। शानदार समय साथ बिताने और मुझे मेरे जीवन की सबसे अहम चीज मेरी बेटी जिनेवरा देने के लिए मैं एंड्रिया की शुक्रगुजार हूं।’ वहीं जॉर्जिया की बहन एरियाना पार्टी की पॉलिटिकल सेक्रटेरियट की चीफ हैं। पार्टी के अहम फैसले एरियाना ही लेती हैं। उन्हें मेलोनी की करीबी सलाहकार माना जाता है। जॉर्जिया 12 साल की उम्र तक अपने पिता फ्रांसेस्को से मिलती रहीं, लेकिन उसके बाद संपर्क खत्म हो गया। 1995 में फ्रांसेस्को को स्पेन में ड्रग्स की तस्करी के आरोप में 9 साल की जेल हुई फिर 2012 में उनकी मौत हो गई थी। मेलोनी की कौन-सी बातें उन्हें अलग बनाती हैं? 2024 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर महिला बताया। 3 बातें उन्हें खास बनाती हैं- 1. इटली के 161 साल के चुनावी इतिहास में पहली महिला पीएम 3. 77 सालों में 68 सरकारें बदलीं, मेलोनी तीसरी लॉन्गेस्ट सर्विंग पीएम 3. चुलबुला अंदाज, आम इंसान वाली छवि इसके अलावा अंतराष्ट्रीय मंचों पर मेलोनी के कई नेताओं के साथ हंसी-मजाक के वीडियो भी वायरल होते हैं, जिससे वे चर्चाओं में बनी रहती हैं। मेलोनी की विदेशी नेताओं से मुलाकात कैसे मोमेंट बन जाती है? PM मोदी के साथ सेल्फी ली, #Melodi लिखकर पोस्ट की ट्रम्प ने बीच भाषण में मेलोनी को खूबसूरत कहा फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने किस किया, तो चौंक गई मेलोनी तुर्किए के राष्ट्रपति ने स्मोकिंग छोड़ने को कहा अल्बानिया के प्रधानमंत्री ने घुटनों पर बैठकर स्वागत किया 2023 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक कार्यक्रम में दिया गया उनका भाषण जमकर वायरल हुआ था। उन्होंने कहा था, 'दुनिया महिलाओं को ऊपर उठते नहीं देखना चाहती, लेकिन हम फिर भी आ जाते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता।’ ----------------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ:पापा के कहने पर 'किलर' बने, दोस्त को छत से फेंकने पर अड़े; ईरान को बास्टर्ड कहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 अप्रैल की शाम गालियों से भरा एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘मंगलवार को ईरान ऐसा नजारा देखेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा! ओ पागल, बास्टर्ड! होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना तुम नर्क के लिए तैयार रहो।’ पढ़ें पूरी खबर…
हनुमानगढ़ : घरेलू विवाद में पति ने पत्नी की पीठ में घोंपा चाकू
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के जंक्शन थाना क्षेत्र में मंगलवार को सुबह घरेलू विवाद के कारण पति ने पत्नी पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। चाकू पीठ के निचले हिस्से में इतनी गहराई तक धंस गया कि उसे निकालने के लिए बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में लंबी सर्जरी करनी पड़ी। घायल महिला परमजीतकौर […] The post हनुमानगढ़ : घरेलू विवाद में पति ने पत्नी की पीठ में घोंपा चाकू appeared first on Sabguru News .
फाल्टा से तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान पुनर्मतदान से पहले दौड़ से हटे, शुभेंदू सरकार की तारीफ की
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को फाल्टा विधानसभा पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले बड़ा झटका लगा जब पार्टी उम्मीदवार जहांगीर खान ने मंगलवार को चुनाव मैदान से हटने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने फैसले के पीछे क्षेत्र में शांति और विकास को कारण बताते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सार्वजनिक रूप […] The post फाल्टा से तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान पुनर्मतदान से पहले दौड़ से हटे, शुभेंदू सरकार की तारीफ की appeared first on Sabguru News .
पेट्रोल-डीजल बचा सको तो बचा लो!
संतोष खाचरियावास अजमेर। पीएम नरेंद्र मोदी का कोई भी शब्द बेमायना नहीं होता। उन्होंने कहा कि पेट्रोल डीजल का इस्तेमाल कम करें, हो सके तो सोना न खरीदें, विदेश यात्रा अवॉइड करें। बाकी दो सलाह पर तो सोशल मीडिया पर चुटकले और मिम्स बन गए लेकिन पहली सलाह को हल्के में लेना बहुत बड़ी मूर्खता […] The post पेट्रोल-डीजल बचा सको तो बचा लो! appeared first on Sabguru News .
ऋषभ पंत की टेस्ट उप कप्तानी छीन ली केएल राहुल ने, अफगानिस्तान के खिलाफ टीम की घोषणा
ऋषभ पंत को बीते कुछ समय से टेस्ट और आईपीएल में खराब प्रदर्शन का खामियाजा भुगतना पड़ा क्योंकि उनकी टेस्ट की उपकप्तानी अब लोकेश राहुल को मिल गई है।एकमात्र टेस्ट 6 जून को न्यू चंडीगढ़ में शुरू होगा। जबकि तीन वनडे 14, 17 और 20 जून को क्रमश: धर्मशाला, लखनऊ और चेन्नई में खेले जाएंगे। इससे पहले भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच अब तक एक ही टेस्ट नवंबर 2018 में बेंगलुरु खेला गया है, जिसमें भारत ने दो दिन के भीतर एक पारी और 262 रनों से जीत दर्ज की थी। पिछले साल नवंबर में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ मिली 2-0 की हार के बाद भारत पहली बार टेस्ट खेलेगा। जसप्रीत बुमराह को अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ घर पर एकमात्र टेस्ट और तीन वनडे मुक़ाबलों के लिए चयनित भारतीय दल से आराम दिया गया है।बुमराह के अलावा उस दल से नदारद रहने वाले खिलाड़ियों में बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर अक्षर पटेल और रवींद्र जाडेजा और तेज़ गेंदबाज़ आकाश दीप शामिल हैं। टेस्ट दल में बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर मानव सुथार और तेज़ गेंदबाज़ गुरनूर बराड़ को पहली बार बुलावा आया है जबकि बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे को भी जगह मिली है। IPL 2026 में अपनी तेज़ गेंदबाज़ी से प्रभावित करने वाले प्रिंस यादव को वनडे दल में जगह मिली है। News Presenting #TeamIndia 's squads for the @IDFCFIRSTBank Test match and the -match ODI series against Afghanistan in June #INDvAFG pic.twitter.com/hFiABALLld — BCCI (@BCCI) May 19, 2026 भारतीय टेस्ट दल : शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल (उपकप्तान), साई सुदर्शन, ऋषभ पंत, देवदत्त पड़िक्कल, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, मानव सुथार, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे, ध्रुव जुरेल
क्या एस जयशंकर ने माना ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को हुआ नुकसान? फैक्ट चेक
BOOM ने पाया कि वायरल वीडियो फेक है. इसमें AI जनरेटेड ऑडियो का इस्तेमाल कर विदेश मंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है.
घोड़ाडोंगरी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे से उठा धुआं, 19 मिनट बाद रवाना हुई गाड़ी
बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी रेलवे स्टेशन पर सिकंदराबाद-दानापुर एक्सप्रेस के एक स्लीपर कोच के पहियों से धुआं उठने के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ब्रेक बाइंडिंग के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई और तकनीकी जांच के बाद ट्रेन को 19 मिनट की […] The post घोड़ाडोंगरी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे से उठा धुआं, 19 मिनट बाद रवाना हुई गाड़ी appeared first on Sabguru News .
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द खंडूरी का निधन
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को निधन हो गया है। वे 90 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। उनकी पुत्री एवं राज्य विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण […] The post उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द खंडूरी का निधन appeared first on Sabguru News .
इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेट कप्तान माइक स्मिथ का 92 वर्ष की उम्र में निधन
लंदन। वारविकशायर और इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक स्मिथ, जिन्हें पूरे खेल में एमजेके के नाम से जाना जाता था, का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। दाएं हाथ के बैटर स्मिथ ने इंग्लैंड के लिए 50 टेस्ट खेले, जिनमें से ठीक आधे मैचों में उन्होंने टीम की कप्तानी की, और 1956 से […] The post इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेट कप्तान माइक स्मिथ का 92 वर्ष की उम्र में निधन appeared first on Sabguru News .
5 दिन में दूसरी बार बढे पेट्रोल-डीजल के दाम
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार से पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। तेल विपणन कंपनियों ने पांच दिन में दूसरी बार दोनों ईंधनों के दाम बढ़ाए हैं। इससे पहले, 15 मई को पेट्रोल-डीजल के मूल्य में तीन-तीन रुपये की वृद्धि की गई थी। देश की सबसे बड़ी […] The post 5 दिन में दूसरी बार बढे पेट्रोल-डीजल के दाम appeared first on Sabguru News .
हरदाेई में अश्लील वीडियो बेचने वाले गिरोह का सदस्य अरेस्ट
हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में साइबर पुलिस ने टेलीग्राम चैनलों के जरिए अश्लील वीडियो और फोटो बेचने वाले एक बड़े ऑनलाइन नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए प्रयागराज निवासी युवक को गिरफ्तार किया है जिस पर स्कूली बच्चों और नाबालिगों तक अश्लील सामग्री पहुंचाने तथा अपने चैनलों पर करीब आठ हजार अश्लील वीडियो अपलोड […] The post हरदाेई में अश्लील वीडियो बेचने वाले गिरोह का सदस्य अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
प्लेऑफ में जगह पक्की करने वाली तीसरी टीम बनी गुजरात टाइटंस
सोमवार को मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स बनाम सनराइजर्स हैदराबाद में था लेकिन मैच का नतीजा कुछ ऐसा आया कि गुजरात टाइटंस इंडियन प्रीमियर लीग के प्लेऑफ में शामिल होने वाली तीसरी टीम बन गई। गुजरात को हाल ही में कोलकाता से ईडन में 29 रनों की शर्मनाक हार मिली थी। लेकिन पिछली कुछ जीतें गुजरात के लिए काफी काम आई। Gold standard for consistency th playoff appearance in seasons for Gujarat Titans Will they lift their nd #TATAIPL title? #TATAIPL | #KhelBindaas pic.twitter.com/vZnLAxEl4I — IndianPremierLeague (@IPL) May 18, 2026 खासकर दिल्ली के खिलाफ मिली एक रन की जीत जिसने 2 महत्वपूर्ण अंक दिए। इस मैच में डेविड मिलर ने 2 गेंदों में 2 रन की दरकार पर कुलदीप को वापस भेज दिया था और अंतिम गेंद पर एक भी रन नहीं बना पाए थे। गुजरात टाइटंस ने कुल 13 मैच में 8 जीत और 5 हार के साथ 16 अंक प्राप्त किए हैं। वह अगर अगला मैच हार भी जाती है तो भी प्लेऑफ खेलेगी। इसका कारण यह है कि पंजाब, चेन्नई, राजस्थान या दिल्ली में से कोई भी 16 का अंक नहीं छू सकता। कल सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई को हराकर गुजरात की राह आसान कर दी। सनराइजर्स हैदराबाद के भी 16 अंक हो गए हैं। जीटी अभी भी 16 पॉइंट्स के साथ पॉइंट्स टेबल में दूसरे नंबर पर है और अगला मैच 21 मई को अपने घर पर चेन्नई सुपर किंग्स से खेलेगी। गुजरात टाइटंस के इस मुकाम पर होने का सबसे बड़ा कारण है संतुलन। सांई सुदर्शन और शुभमन गिल औरेंज कैप की दौड़ में पहले दो नंबर पर हैं और कगिसो रबाड़ा पर्पल कैप की दौड़ में तीसरे नंबर पर है। यही नहीं मोहम्मद सिराज और कगिसो रबाड़ा बिंदी गेंदें डालने में अव्वल है। दोनों ने अब तक 130 से ज्यादा बिंदी गेंदें डाली है। जिससे बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ा है।
इंदौर में गर्मी का तापमान बढ़कर 44.3 डिग्री सेल्सियस हो गया है। कई साल के बाद इंदौर में यह स्थिति बनी है। तपते सूरज से धरती आग का गोला बनती जा रही है। हालात यह है कि धूप में अंडे उबल रहे हैं और मैगी बन जा रही है। धूप में रखी गाडियां जल रही हैं। आग की घटनाएं बढ़ गई हैं। ऐसे में शहर में मरीजों की संख्या में भी जमकर इजाफा हुआ है। बुखार, उल्टी दस्त, लू और डिहाईड्रेशन के मरीजों की अस्पताल में भीड़ हो रही है। बता दें कि इंदौर में सोमवार को अधिकतम तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लू के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 40 हीट स्ट्रोक क्लिनिक बनाए हैं। डिहाइड्रेशन और बुखार के मरीजों बढ़े : तेज धूप और लू के कारण डिहाइड्रेशन और बुखार के मरीजों की संख्या में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि पिछले दिनों तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन हवा में उमस और वातावरण में तपिश लगातार बनी हुई थी। सोमवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक है। इससे पहले वर्ष 2024 में पारा 44 डिग्री तक पहुंचा था। वहीं रविवार रात का पारा भी 3 डिग्री उछला और 29 पर आ गया। यह सामान्य से 4 डिग्री अधिक है। बढ़ेगा गर्मी का प्रकोप : मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में सूर्य के तेवर और कड़े हो सकते हैं, जिससे गर्मी का प्रकोप और बढ़ेगा। सोमवार को सुबह से दिनभर चली गर्म हवाओं और लू के थपेड़ों ने नागरिकों को बेहाल कर दिया और लोग पसीने से तरबतर नजर आए। इससे पहले रविवार को अवकाश का दिन होने के बाद भी लोगों को घरों के भीतर राहत नहीं मिल सकी और स्थिति यह रही कि पंखे भी गर्म हवा फेंक रहे थे। अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या : तेज धूप और अत्यधिक गर्मी के कारण शहर में लू लगने और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है। शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया कि अस्पताल की बाह्य रोगी विभाग में डिहाइड्रेशन, बदन दर्द और तेज बुखार की शिकायतों के साथ आने वाले मरीजों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि बढ़ता तापमान लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है, जिसके कारण नागरिकों को अचानक चक्कर आना, उल्टी होना और गंभीर सिरदर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 40 हीट स्ट्रोक क्लिनिक बनाए: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने बताया कि डिहाइड्रेशन के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिले में 40 हीट स्ट्रोक क्लिनिक स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही जिला स्तर के सभी अस्पतालों में गर्मी से जनित आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए विशेष वार्ड संचालित करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता है। इसके अलावा अस्थमा, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से पहले से पीड़ित व्यक्तियों के लिए भी यह मौसम अधिक जोखिम भरा साबित हो रहा है। प्रशासन ने आम जनता को सलाह दी है कि वे दोपहर 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि अत्यधिक कमजोरी या मुंह सूखने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वास्थ्य विभाग ने जारी की गाइडलाइन : भीषण गर्मी से खुद को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। नागरिकों को प्रतिदिन कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीने और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बनाए रखने की सलाह दी गई है। इसके लिए नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ का सेवन बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। खान-पान में बदलाव करते हुए मौसमी फल, हरी सब्जियां, दाल और चावल जैसे सुपाच्य एवं हल्के भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस मौसम में तले-भुने, अधिक मसालेदार और जंक फूड के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय हमेशा ढीले, हल्के रंग के सूती कपड़ों का चयन करें और धूप से सुरक्षा के लिए टोपी, चश्मे या छाते का प्रयोग अवश्य करें। Edited By: Naveen R Rangiyal
भिवाड़ी में महिला ने मायके न भेजे जाने से रुष्ट होकर मासूम बालिका को पिलाया तेजाब
अलवर। राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी में मायके न भेजे जाने से क्रोधित होकर एक महिला के पुत्री को तेजाब पिलाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया, जबकि मासूम बालिका जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। महिला ने पहले तो इसे […] The post भिवाड़ी में महिला ने मायके न भेजे जाने से रुष्ट होकर मासूम बालिका को पिलाया तेजाब appeared first on Sabguru News .
यूडीएफ सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अव्यवस्था के चलते 30 लोग अस्पताल में भर्ती
तिरुवनंतपुरम। केरल में तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में सोमवार को आयोजित संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चो (यूडीएफ) सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अत्यधिक भीड़ एवं अव्यवस्था के कारण भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गयी एवं 30 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। रिपोर्टो के अनुसार उमस भरी गर्मी, धक्का-मुक्की और अव्यवस्था के चलते लगभग […] The post यूडीएफ सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अव्यवस्था के चलते 30 लोग अस्पताल में भर्ती appeared first on Sabguru News .
भोजशाला में उमड़ा हिंदू समाज, अखंड ज्योति मंदिर पर आतिशबाजी
धार। केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन धार स्थित भोजशाला में आयोजित महासत्याग्रह में आज बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल हुए। उच्च न्यायालय के निर्णय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की नई गाइडलाइन के बाद मंगलवार को पहली बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे। भोज उत्सव समिति द्वारा पूर्व में किए गए आह्वान […] The post भोजशाला में उमड़ा हिंदू समाज, अखंड ज्योति मंदिर पर आतिशबाजी appeared first on Sabguru News .
आपका शहर, आपका प्रशासन, आपकी पार्टी और आपके ही विधायक। इंदौर नगर निगम से लेकर प्रदेश और केंद्र तक में एकतरफा राजनीतिक पकड़ रखने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) इन दिनों शहर में एक अजीबोगरीब आंतरिक कलह से जूझ रही है। यह लड़ाई किसी विपक्षी दल से नहीं, बल्कि अपनों के बीच ही छिड़ी है। मुद्दा है—इंदौर की प्यास और उस पर होती पॉलिटिक्स। शहर में पानी की किल्लत को लेकर अब इंदौर के महापौर और पार्टी के ही स्थानीय विधायक महेंद्र हार्डिया खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। दूसरी तरफ शहर की जनता इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, वहीं सत्तापक्ष के ही दो जिम्मेदार स्तंभों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। महापौर का दावा: ' पानी पर्याप्त है ' : एक तरफ इंदौर के महापौर लगातार यह दावा कर रहे हैं कि शहर में पानी की कोई कमी नहीं है। नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि जल प्रदाय की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त है और शहरवासियों को पर्याप्त पानी दिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कुछ तकनीकी दिक्कतों या स्थानीय स्तर पर वितरण की गड़बड़ी को छोड़कर पानी की कोई बड़ी किल्लत नहीं है। अगर ऐसा है तो फिर जनता को पानी क्यों नहीं मिल रहा है। बता दें कि हाल ही में कई कॉलोनियों के नागरिकों ने पानी को लेकर प्रदर्शन किया था। विधायक की नाराजगी: ' जनता परेशान , जमीनी हकीकत कुछ और ' दूसरी तरफ, अपनी ही पार्टी के महापौर के इन दावों को हवा में उड़ाते हुए बीजेपी के स्थानीय विधायक महेंद्र हार्डिया मोर्चा खोले हुए हैं। उन्होंने कहा है कि जनता को पानी नहीं मिला तो वे रोज महापौर निवास के सामने जाकर बैठेंगे। विधायक का साफ कहना है कि जनता पानी के लिए परेशान है, टैंकरों के चक्कर लगा रही है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जब सत्ता भी अपनी है और प्रशासन भी अपना, तो फिर जनता को पानी देने में यह लाचारी क्यों? इंदौर की ये कैसी पॉलिटिक्स : बड़ा सवाल यह है कि जब 'सब अपना' तो फिर ऐसी लाचारी क्यों? इस पूरे घटनाक्रम ने शहर की राजनीति को गरमा दिया है। आम जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है। यह कैसी पॉलिटिक्स चल रही है। जब निगम में भी बीजेपी है, विधायक भी बीजेपी के हैं और प्रदेश में सरकार भी उन्हीं की है, तो फिर इस तरह से पानी पर आमने सामने क्यों आना पड रहा है। यह तालमेल की कमी क्यों है। क्या यह वाकई पानी का संकट है या फिर इसके पीछे अंदरूनी राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई (क्रेडिट वॉर) चल रही है? जनता के टैक्स के पैसों से चलने वाला प्रशासन जनप्रतिनिधियों के बीच के इस विवाद को सुलझाने में नाकाम क्यों साबित हो रहा है? जनता त्रस्त , सियासत मस्त : इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव प्राप्त है, लेकिन पानी जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर चल रही यह 'पॉलिटिक्स' शहर की छवि पर दाग लगा रही है। एक तरफ नेता बयानबाजी और दावों-प्रतिदावों में उलझे हैं, वहीं दूसरी तरफ इंदौर की जनता इस भीषण गर्मी में खाली बाल्टियां लेकर पानी के टैंकरों का इंतजार करने को मजबूर है। क्या कहा था विधायक ने : पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड-41 में जल संकट की परेशानी देखने पहुंचे विधायक महेंद्र हार्डिया भी जलसंकट को लेकर जमकर नाराज हुए थे। कार्यक्रम में महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी मौजूद थे, लेकिन हालात देखकर विधायक बीच कार्यक्रम से ही लौट गए। महेंद्र हार्डिया ने कहा कि पहले कभी शहर में जलसंकट के ऐसे हालात नहीं बने। टंकियां खाली रहती हैं और टैंकर भी समय पर नहीं पहुंचते। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे रोज महापौर निवास जाकर बैठेंगे। नहीं भर पा रही टंकियां : शहर की पानी की टंकियां पूरी क्षमता से नहीं भर पा रही हैं, जिसके कारण कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत हो गई है। स्थिति यह है कि पांच से छह मीटर क्षमता वाली टंकियां केवल दो से तीन मीटर तक ही भर रही हैं। इसका सीधा असर घरों तक पहुंचने वाले पानी पर पड़ रहा है और नलों में बेहद कम पानी आ रहा है। पानी की समस्या से परेशान होकर वीणा नगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों का गुस्सा सोमवार सुबह सड़कों पर फूट पड़ा था। मटके लेकर सड़कों पर उतरे थे लोग : पानी नहीं मिलने से नाराज बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय लोग खाली मटके और बर्तन लेकर सड़क पर उतर आए। लोगों ने पहले खाली मटके फोड़े और फिर सड़क पर बैठकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इलाके में न तो नियमित रूप से नलों में पानी आ रहा है और न ही टैंकरों के जरिए पर्याप्त जल वितरण किया जा रहा है। कांग्रेस नेता अमित पटेल और पार्षद राजू भदौरिया के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं बस्ती से निकलकर सड़क पर बैठ गईं और वाहनों को रोकना शुरू कर दिया था। टैंकर वाले कर रहे मनमानी : एक तरफ पानी की मार झेल रहे आम लोगों को टैंकर माफिया का भी शिकार होना पड रहा है। पहले से पानी के टैंकर मिल नहीं रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टैंकर वाले मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। छोटे टैंकर के 800 से ज्यादा वूसल किए जा रहे हैं। जबकि बडे टैंकर के बदले 1 हजार रुपए और 1200 की वसूली की जा रही है। रिपोर्ट : नवीन रांगियाल
पश्चिम एशिया संकट के बीच अमित शाह के नाम पर एक वक्त खाना छोड़ने की फर्जी अपील वायरल
पीआईबी ने वायरल दावे का खंडन करते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है.
ईयू में जेट फ्यूल की कमी का खतरा, उड़ानें हो सकती हैं रद्द
ईरान में अमेरिका और इजराइल का युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित पड़ा है। तनाव की वजह से यहां तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है। दुनियाभर में जेट ईंधन महंगा हो गया है। इसकी कीमतें दोगुने से ज्यादा बढ़ गई हैं। विमानन कंपनियों ने कटौती ...
आबूरोड में कांग्रेस ने जताया केंद्रीय शिक्षा मंत्री का विरोध, इस्तीफे की मांग
सबगुरु न्यूज- आबूरोड। नीट पेपर लीक के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला जलाकर प्रदर्शन कर इस्तीफे की मांग की। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देशानुसार NEET-2026 परीक्षा में हुए पेपर लीक एवं परीक्षा निरस्त होने के विरोध में जिला अध्यक्ष लीलाराम गरासिया […] The post आबूरोड में कांग्रेस ने जताया केंद्रीय शिक्षा मंत्री का विरोध, इस्तीफे की मांग appeared first on Sabguru News .
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (19 मई, 2026)
1. मेष (Aries) Today Horoscope Rashifal 19 May 2026: करियर: नई परियोजनाओं को गति मिलेगी। लव: प्रेमीसंग रिश्तों में नयापन महसूस होगा। धन: साहस और पराक्रम से धन अर्जन करेंगे। स्वास्थ्य: कंधे में दर्द की शिकायत हो सकती है। उपाय: शिव चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: सूर्य का कृतिका नक्षत्र में महाप्रवेश: 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा शुभ फल 2. वृषभ (Taurus) करियर: वाणी के दम पर आप ऑफिस में अपनी धाक जमाएंगे। लव: परिवार के साथ मिलकर भविष्य की प्लानिंग करेंगे। धन: निवेश के लिए दिन बहुत शुभ है, विशेषकर गोल्ड में। स्वास्थ्य: दांत या मसूड़ों में समस्या हो सकती है। उपाय: महालक्ष्मी को गुलाबी फूल अर्पित करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: कार्यस्थल पर आपका व्यक्तित्व प्रभावशाली रहेगा। लव: आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य: मानसिक रूप से खुद को बहुत सक्रिय महसूस करेंगे। उपाय: पक्षियों को दाना डालें। 4. कर्क (Cancer) करियर: काम के सिलसिले में विदेश यात्रा की संभावना बन सकती है। लव: लव पार्टनर से दूरी का अनुभव हो सकता है। धन: खर्चों में बढ़ोतरी होगी, जिससे बजट थोड़ा बिगड़ सकता है। स्वास्थ्य: अनिद्रा की समस्या हो सकती है। उपाय: चंदन का तिलक लगाएं। 5. सिंह (Leo) करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी महत्वकांक्षाएं पूरी होंगी और अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। लव: प्रेम संबंधों में नया उत्साह और जोश देखने को मिलेगा। धन: अचानक धन लाभ का प्रबल योग है। स्वास्थ्य: पुरानी बीमारियों से काफी हद तक राहत मिलेगी। उपाय: सूर्य देव को जल में लाल चंदन मिलाकर अर्घ्य दें। 6. कन्या (Virgo) करियर: करियर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। लव: कार्यस्थल पर किसी के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है। धन: संपत्ति या वाहन की खरीद-फरोख्त से लाभ होगा। स्वास्थ्य: घुटनों में दर्द की शिकायत हो सकती है। उपाय: गणेश जी को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। 7. तुला (Libra) करियर: उच्च शिक्षा से जुड़े छात्रों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। लव: पार्टनर के साथ किसी स्थल की यात्रा कर सकते हैं। धन: भाग्य के सहारे कुछ ऐसे काम बनेंगे जिनकी उम्मीद छोड़ दी थी। स्वास्थ्य: मन अध्यात्म की ओर झुकेगा। उपाय: श्रीलक्ष्मी सूक्त का पाठ करें। ALSO READ: अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: आज गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। लव: लव लाइफ में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। धन: धन के लेन-देन में बहुत सतर्क रहें। स्वास्थ्य: वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। उपाय: मंदिर में पीले रंग की मिठाई का दान करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: साझेदारी के काम के लिए दिन उत्तम है। लव: दांपत्य जीवन में सुखद अनुभव होंगे। धन: व्यापारिक विस्तार में धन लगेगा। स्वास्थ्य: त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। उपाय: हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। 10. मकर (Capricorn) करियर: नौकरीपेशा लोगों को थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है। लव: लव पार्टनर का पूरा सपोर्ट मिलेगा। धन: पुराने कर्ज चुकाने के लिए धन का प्रबंधन हो जाएगा। स्वास्थ्य: गले में खराश या जुकाम हो सकता है। उपाय: शनिवार की संध्या शनि चालीसा का पाठ करें। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: नौकरी कर रहे लोगों को बड़े अवसर मिल सकते हैं। लव: लव पार्टनर के साथ किसी पार्टी में जा सकते हैं। धन: सट्टा बाजार से लाभ होने की संभावना है। स्वास्थ्य: आज स्वयं को स्फूर्तिवान महसूस करेंगे। उपाय: चींटियों को आटा डालें। 12. मीन (Pisces) करियर: घर से काम कर रहे लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी। लव: दांपत्य जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी। धन: सुख-सुविधा की वस्तुओं पर खर्च होगा। स्वास्थ्य: सीने में जकड़न महसूस हो सकती है। उपाय: आज केले के वृक्ष में जल दें। ALSO READ: वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips
चांद मेरा दिल: प्यार में पागलपन की सारी हदें पार, अनन्या और लक्ष्य का इंटेंस रोमांस
बदलते दौर के साथ बॉलीवुड में रोमांस की परिभाषा भी बदली है। जहाँ कभी 'कुछ कुछ होता है' का मासूम प्यार था, वहीं अब स्क्रीन पर 'इंटेंस और पैशनेट' लव स्टोरीज का दौर है। इसी कड़ी में, आगामी 22 मई को सिनेमाघरों में एक ऐसी ही दिल छू लेने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली प्रेम कहानी दस्तक देने जा रही है, जिसका नाम है 'चांद मेरा दिल'। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित यह फिल्म आज के दौर के प्यार, उसकी पेचीदगियों और जुनून को बड़े पर्दे पर पेश करने का वादा करती है। कैसी है फिल्म की कहानी? 'चांद मेरा दिल' कोई आम 'बॉय मीट्स गर्ल' वाली रोमांटिक-कॉमेडी नहीं है। यह एक गंभीर रोमैटिक-ड्रामा है। फिल्म की कहानी दो ऐसे किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक-दूसरे के प्यार में इस कदर गिरफ्तार हैं कि उनके लिए सही और गलत के बीच का फासला मिट जाता है। यह कहानी तड़प, जुदाई, और प्यार में जूनूनियत की उस हद को छूती है जहाँ आशिकी कभी-कभी दर्दनाक बन जाती है। फिल्म का मुख्य थीम है प्यार में पागलपन नहीं, तो वो प्यार कैसा? लक्ष्य और अनन्या की जोड़ी फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी फ्रेश और कल्ट स्टारकास्ट है: अनन्या पांडे: हाल के दिनों में अपनी गंभीर एक्टिंग से आलोचकों का दिल जीतने वाली अनन्या इस फिल्म में एक बेहद पेचीदा और इमोशनल किरदार निभा रही हैं। लक्ष्य लालवानी (Lakshya): फिल्म 'किल' (Kill) से अपनी दमदार एक्टिंग और एक्शन का लोहा मनवाने वाले लक्ष्य अब एक जुनूनी आशिक के रूप में नजर आएंगे। लक्ष्य और अनन्या की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) मानी जा रही है। निर्देशन की कमान: विवेक सोनी इस इंटेंस लव स्टोरी को डायरेक्ट किया है विवेक सोनी ने। विवेक इससे पहले नेटफ्लिक्स की फिल्म 'मीनाक्षी सुंदरेश्वर' जैसी खूबसूरत और सलीके से बुनी गई कहानी का निर्देशन कर चुके हैं। जहाँ 'मीनाक्षी सुंदरेश्वर' में उन्होंने सादगी दिखाई थी, वहीं 'चांद मेरा दिल' में वे मानवीय भावनाओं के डार्क और इंटेंस पहलू को टटोलते नजर आएंगे। फिल्म की शूटिंग और विजुअल्स फिल्म की खासियत इसका विजुअल ट्रीट भी है। जानकारी के अनुसार, फिल्म के बड़े हिस्से की शूटिंग उत्तर भारत के खूबसूरत और थोड़े अनछुए लोकेशंस (जैसे उत्तराखंड और हिमाचल के कुछ हिस्से) के साथ-साथ मुंबई की गलियों में की गई है। विवेक सोनी ने दृश्यों के जरिए किरदारों के अकेलेपन और उनके बीच के रोमांस को बखूबी कैमरे में कैद किया है। 'चांद मेरा दिल' से जुड़े कुछ रोचक तथ्य क्लासिक नाम, मॉडर्न ट्विस्ट: फिल्म का टाइटल 70 के दशक के मशहूर गाने चांद मेरा दिल, चांदनी हो तुम से प्रेरित लगता है, लेकिन फिल्म की वाइब पूरी तरह से मॉडर्न और यूथ-ओरिएंटेड है। लक्ष्य का नया अवतार: एक्शन फिल्म 'किल' में अपनी रफ-एंड-टफ इमेज बनाने के बाद, लक्ष्य इस फिल्म में पूरी तरह से एक चॉकलेटी लेकिन गंभीर लवर बॉय के रूप में मेकओवर कर चुके हैं। म्यूजिक एल्बम: धर्मा प्रोडक्शंस की फिल्मों का संगीत हमेशा चार्टबस्टर होता है। इस फिल्म में भी सूफी और रोमांटिक गानों का ऐसा मिक्स है जो रिलीज से पहले ही रील्स पर ट्रेंड करने के लिए तैयार है।
हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। जहां भारी-भरकम जैकेट में लिपटे हमारे शरीर ठिठुर रहे हैं, वहीं इन लोगों पर सर्द हवाओं का कोई असर नहीं दिख रहा। ये लोग असल में तपस्वी हैं, बौद्ध तपस्वी। इनका मकसद है बुद्ध को पाना या मोक्ष को पाना। बर्फीले तूफान आते हैं, शरीर को बर्फ की सफेद चादर से ढंक देते हैं। मौत का आभास भी होता है, लेकिन इनका तप जारी रहता है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं, लेह से 38 किलोमीटर दूर फ्यांग गांव के पास पर्वत पर तप कर रहे तपस्वियों की कहानी… चलिए चलते हैं, उसी पर्वत की चोटी पर जहां तपस्वी तप कर रहे हैं। मेरे साथ हैं सोनम वांगचुक। सोनम लेह में रहते हैं। बौद्ध धर्म और यहां के मठों के जानकार हैं। वे मुझे समझाते हैं कि यहां जो लोग नंगे बदन तपस्या कर रहे हैं, उनकी वीडियो या फोटो नहीं ले सकते। मैं सोनम से पूछती हूं- ये लोग कब से तप कर रहे हैं, और क्यों? सोनम बताते हैं- ‘तपस्या 3 साल, 3 महीने, 6 दिन में पूरी होती है। यह तप का आखिरी चरण है। इसमें एक साल तक नंगे बदन पर्वतों पर तपस्या करना जरूरी है, चाहे कितनी भी बर्फ-ठंड क्यों न हो।’ यदि कोई इतनी ठंड सहन न कर सके तो…? सोनम बताते हैं- ‘बौद्ध दर्शन में सांस के दो रूप माने जाते हैं। पहली- बाहरी सांस, जो हम नाक से लेते हैं। दूसरी- अंदरूनी, जो हमारी आत्मा या ऊर्जा का हिस्सा है।' ‘मौत के बाद बाहरी सांस तो थम जाती है, लेकिन अंदरूनी ऊर्जा को शरीर छोड़ने में वक्त लगता है। इसलिए, तपस्वी के शव को 15 दिनों तक अपनी जगह से नहीं हटाया जाता। कोशिश रहती है कि जिस 'ध्यान मुद्रा' में अंतिम सांस ली, उनका शरीर उसी अवस्था में बना रहे।’ फिर क्या करते हैं? वे बताते हैं- ‘15 दिन के बाद उनके शरीर को उसी 'ध्यान मुद्रा' में मंत्रोच्चार के साथ अग्नि के हवाले कर देते हैं।’ क्या यहां सभी की अंतिम विदाई ऐसे ही होती है? ‘नहीं, बौद्ध परंपरा में आध्यात्मिक स्तर का काफी ध्यान रखा जाता है। मौत के बाद एक तपस्वी के शव को 15 दिन, लामाओं के शव को 7 दिन और आम शिष्यों के शव को 4-5 दिन रखा जाता है। जहां तपस्वियों और लामाओं को उनकी साधना की स्थिति यानी 'बिठाकर' मुखाग्नि दी जाती है, वहीं आम शिष्यों को ‘लिटाकर’।’ जब अग्नि शांत होती है, तो उनकी अस्थियां समेट ली जाती हैं। इन्हीं अस्थियों को सहेजकर बनाया जाता है- स्तूप। इतना कहकर, वे मुझे चोटी से सड़क की तरफ देखने का इशारा करते हैं। वहां लकड़ी के कई ढांचे हैं, जिन पर सफेद और सुनहरा रंग है और उनकी छत नुकीली है। सोनम बताते हैं- ‘यह उन तपस्वियों और लामा के स्तूप हैं, जिन्होंने तप करते-करते जीवन को त्याग दिया।’ इतने में पर्वत के दूसरी ओर ढलान पर एक घर दिखाई देता है। सोनम बताते हैं- ‘वहां बौद्ध तपस्वी सेवंग गैलसन रहते हैं। उनकी उम्र सिर्फ 38 साल है। हमें उन्हीं से मिलना है। उन्होंने अभी कुछ दिन के लिए तपस्या रोकी है।’ मैंने पूछा- मतलब? वे बताते हैं- ‘बौद्ध धर्म में तपस्या आसान नहीं है। तपस्वी 3 महीने, 6 महीने, एक साल या फिर 3 साल 3 महीने 6 दिन के लिए पर्वत पर तप करते हैं।’ भिक्षु, लामा और तपस्वी में क्या अंतर है? सोनम बताते हैं- ’भिक्षु बुद्ध के नियमों और भिक्षा पर जीते हैं। लामा तिब्बती परंपरा के बहुत पढ़े-लिखे गुरू होते हैं। तपस्वी कठिन तप करते हैं।’ अब हम सेवंग के घर पहुंच चुके थे, दरवाजों पर कंबल और बोरियों से बने पर्दे लगे हैं। सोनम बताते हैं- ‘इससे ठंडी हवा घर में नहीं आती।’ घर में अंदर जाते ही, एक लड़का हमें कमरे में बैठाता है। कमरे में ही सामने चूल्हा जल रहा है। इसे यहां ‘चुछुंग’ कहते हैं। इससे कमरे में गर्माहट महसूस हो रही है। इसका धुआं एक पाइप के जरिए घर से बाहर निकल रहा है। तभी, मैरून रंग का चोगा पहने एक भिक्षु आते हैं। सोनम बताते हैं- ‘ये ही बौद्ध तपस्वी सेवंग गैलसन हैं। मैंने सेवंग को ‘जूले’ कहा। यहां नमस्ते, हेलो को जूले कहते हैं। उन्होंने हमें एक आसन पर बैठने के लिए कहा। आसन काफी गद्देदार था। इस पर याक की खाल से बना कंबल बिछा था, जिस पर बैठते ही शरीर को राहत मिली।’ सेवंग कुछ सोच रहे हैं और हमें बड़े गौर से देख रहे हैं। इतने में वो एक लड़के को आवाज देते हैं और लद्दाखी भाषा में चाय लाने के लिए कहते हैं। कुछ ही मिनटों में वो प्यालों में चाय और लद्दाखी ब्रेड देकर चला जाता है। इस बीच सेवंग चुप बैठे रहे। चाय की चुस्कियां लेते-लेते उन्होंने सेवंग गैलसन को बताया कि मैं कौन हूं और यहां क्यों आई हूं? इसके बाद, वे एक छोटे कमरे में चले जाते हैं। थोड़ी देर बाद, हमें उस कमरे में बुलाया जाता है। कमरे में सेवंग अपने आसन पर बैठे हैं। यह तपस्या का कमरा है। यहां सामने एक घंटी और पानी भरा प्याला है। पास ही एक चमकीला कपड़ा बिछा है, जिस पर एक बड़ा सफेद पत्थर रखा है। पत्थर पर कुछ शब्द उकेरे गए हैं। शायद कोई मंत्र। सेवंग बताते हैं- ‘जब मैं तपस्या करता हूं, तो घर के दरवाजे पर इस पत्थर को रख देता हूं, ताकि लोगों को पता रहे कि यहां तप चल रहा है। इस कमरे में एक खिड़की है, जहां लोग चुपचाप खाने-पीने का सामान रख जाते हैं।‘ मैं पूछती हूं- आप यहां कब से हैं? वे बताते हैं- ‘7 साल की उम्र में फ्यांग बौद्ध मठ आ गया था। यहीं 7वीं तक स्कूली शिक्षा और धार्मिक शिक्षा साथ-साथ ली।’ बौद्ध धर्म में धार्मिक शिक्षा को छुई कहते हैं। इसमें या तो आप बौद्ध दार्शनिक बनते हैं, मठ में काम करते हैं या फिर लामा, तपस्वी बनते हैं। कुछ परिवार अपने बच्चों को लामा बनाने के लिए मठ को दान दे देते हैं। पहले अगर किसी के तीन बेटे होते थे, तो मझले बेटे को लामा बनाने के लिए बौद्ध मठ को दे दिया जाता था। मैं बीच में ही पर्वतों पर तप कर रहे तपस्वियों का जिक्र करती हूं। वे कहते हैं- बौद्ध धर्म का एक ही मूल है- महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करना और मोक्ष प्राप्त करना। इसी बीच सेवंग के पास लामा निमाह आते हैं। निमाह हिंदी बोलना और लिखना जानते हैं। वज्रयान में तंत्र साधना की चर्चा दुनियाभर में लामा निमाह बताते हैं- 'यहां तीन बड़े संप्रदाय हैं- ’थेरवाद, महायान और वज्रयान।’ सबसे मुख्य है- ‘वज्रयान, इसमें तंत्र साधना होती है। इसके रहस्य की दुनियाभर में चर्चा होती है।’ सेवंग बताते हैं- ‘वज्रयान में किया जाने वाला तप सबसे कठिन है। इसमें 3 साल, 3 महीने, 6 दिन की तपस्या करनी होती है। हर साल के अलग नियम हैं।’ पहले साल में गुरू का ध्यान और दूसरे साल में एक लाख मंत्रोच्चार का जाप करते हैं। इस दौरान, खुद को मनुष्य नहीं, देवता का अंश मानते हैं। इतना कहने के बाद सेवंग हमें बाहर ले जाते हैं। वह बताते हैं- तीसरे साल का तप काफी कठिन है। पर्वतों पर बर्फ के बीच सांस रोककर तपस्या करनी होती है। इतना कठोर तप कैसे कर पाते हैं? सेवंग बताते हैं- ‘सांस को रोकने की क्षमता से यह मुमकिन है। इससे शरीर के अंदर ऊर्जा पैदा होती है और ऐसा महसूस होता है कि हमारी नाभि से निकली ऊर्जा पूरे शरीर को गर्म कर रही है। जब साधक इतना मजबूत हो जाता है, तो वह बर्फ में भी बिना कपड़ों के तप कर लेता है।’ तभी एक लड़का थर्मस में गुर-गुर चाय और कुछ प्याले लेकर आया। इसे ‘बटर टी’ भी कहते हैं। ठंड है, इसलिए जैसे ही एक प्याला खाली होता है, तो वह दूसरा भर देता। सेवंग उस चाय में सत्तू मिलाकर पी रहे हैं। वे बताते हैं- ‘तपस्या के दौरान हम गुर-गुर चाय या पानी में सिर्फ जौ का सत्तू मिलाकर पीते हैं।’ सेवंग बताते हैं- ’इन पर्वतों पर कई तपस्वी तप कर रहे हैं।’ शाम होने को थी, इसलिए हम सेवंग से विदा लेकर फ्यांग बौद्ध मठ की ओर जाते हैं। डरावने मुखौटे पहनकर भिक्षु करते हैं 'छम' नृत्य चटख रंगों से सजा फ्यांग बौद्ध मठ दूर से ऐसा दिख रहा है, जैसे पर्वतों के बीच कोई रंगों की दुनिया हो। मठ में चारों तरफ कपड़ों पर पेंटिंग बनी हुई थी। मठ के अंदर मंत्रोच्चार चल रहा है। अंदर कई बच्चे और बड़े मैरून रंग का चोगा पहने हुए हैं। इनमें से कुछ लामा हैं। जैसे ही फोटो के लिए कैमरा उठाया तो मुझे रोक दिया। कहा- यहां वीडियो, फोटो नहीं ले सकते। काफी मशक्कत के बाद एक साधक बातचीत के लिए राजी हुए। उन्होंने बताया- ‘इस मठ का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का वार्षिक उत्सव है। इसमें भिक्षु भारी और डरावने मुखौटे पहनकर 'छम’' नृत्य करते हैं। इसे देखने के लिए आसपास से भी लोग आते हैं।’ ऐसा क्यों करते हैं? वे बताते हैं- ‘यह नृत्य बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह हर साल जुलाई में होता है। रात गहरा रही थी, इसलिए हम वहां से लेह की ओर निकल पड़ते हैं।’ हेमिस मठ सबसे अमीर, यहां सोने से लिखे ग्रंथ हैं अगले दिन, सुबह 10 बजे हम लेह से हेमिस बौद्ध मठ निकल पड़ते हैं। रास्ते में सोनम बताते हैं- हेमिस, लद्दाख का सबसे अमीर बौद्ध मठ है। इसे जान-बूझकर संकरी घाटी में बनाया गया, ताकि हमलावरों की नजर इस पर न पड़े। थोड़ी देर में हम हेमिस बौद्ध मठ पहुंच जाते हैं। यहां लामा दोरजे हमारा इंतजार कर रहे थे, वे यहां प्रशासनिक व्यवस्था भी देखते हैं। वो हमें एक कमरे में ले गए। मैं कुछ पूछती, उससे पहले ही दोरजे बताते हैं- ’हमारे मठ में सभी सुबह 5 बजे उठ जाते हैं। ध्यान करते हैं। इसके बाद बच्चों को पढ़ाते हैं। सुबह 8 से 9 के बीच लामा गांवों में जाते हैं। अपनी तंत्र साधना से बताते हैं कि किस घर में क्या दिक्कत है, फिर उसके अनुसार पूजा करते हैं।’ मैंने उनसे भी पूछा- क्या यहां भी पर्वतों पर तप होता है? वे बताते हैं- ‘गोच्छंग और खसपंग जैसे दुर्लभ इलाकों में 108 गुफाएं हैं, जिनमें तपस्वी तप करते हैं। यह तंत्र साधना है, इसलिए इसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता।’ वे बताते हैं- ‘तपस्वी, आम लामा लोगों से अलग होते हैं। वे किसी दूसरे व्यक्ति से बात नहीं करते।’ उन्होंने दावा किया कि पुराने जमाने में तो तपस्वी अपने तप बल से उड़कर आया- जाया करते थे। मैं पूछती हूं- इसे सबसे अमीर मठ क्यों कहते हैं? दोरजे बताते हैं- यहां आज भी सोने-चांदी के तार से बनी थांका पेंटिंग हैं। सोने से लिखे बौद्ध ग्रंथ हैं। यहां से करीब 1000 मठ जुड़े हैं। इसलिए आर्थिक और आध्यात्मिक दोनों तरह से यह मठ अमीर है। क्या बौद्ध भिक्षु शादी करते हैं? वे कहते हैं- ‘नहीं, अगर कोई भिक्षु किसी महिला के साथ संबंधों में दोषी पाया जाता है, तो उसे मठ से निकाल दिया जाता है।’ यहां भिक्षु,लामा और बाकी सब मैरून रंग का चोला ही क्यों पहनते हैं? दोरजे बताते हैं- ’मैरून रंग सादगी और मोह-माया के त्याग का प्रतीक है। सभी का एक ही रंग के वस्त्र पहनना उनके बीच के अहंकार को मिटाकर उन्हें एक समान स्तर पर लाता है, इसलिए इसे पहनते हैं। मैं कुछ पूछती, उससे पहले ही दोरजे कहते हैं- साधना का वक्त हो गया है, मैं चलता हूं। इसके बाद, हम हेमिस मठ के म्यूजियम में जाते हैं। म्यूजियम में डिम लाइट के बीच कई पुरानी मूर्तियां रखी हैं। यहां देखरेख करने वाले एक लामा ने बताया कि इसका इतिहास 900 साल पुराना है। हेमिस अपने विशाल रेशमी थांका (बौद्ध पेंटिंग) के लिए प्रसिद्ध है। म्यूजियम में कई ऐसी थांका पेंटिंग है, जिनमें सोने और चांदी के धागों का काम किया गया है। इसके बाद हमें मठ में खाने के लिए कहा जाता है। खाने में यहां दाल-चावल, बैगन की सब्जी, रायता परोसा गया। म्यूजियम देखने के बाद हम लेह के लिए निकल पड़ते हैं। प्रकृति में संतुलन के लिए 5 रंग के कपड़ों की झंडियां मैं सोनम से पूछती हूं- यहां हर पहाड़ी पर नीले, सफेद, लाल, हरे और पीले कपड़ों की झंडियां लगी हैं, ये क्या हैं? सोनम बताते हैं- इसे ‘लुंग टा’ कहते हैं। ‘लुंग’ का मतलब- हवा और ‘टा’ का मतलब- घोड़ा। इसे यहां 'वायु अश्व' कहते हैं। ये पांच रंग प्रकृति के तत्वों के बीच संतुलन को बताते हैं। वो कैसे? वे बताते हैं- लुंग टा का एक निश्चित क्रम है। नीला- आसमान, सफेद- हवा/बादल, लाल- आग, हरा- पानी और पीला रंग- धरती के लिए है। माना जाता है कि इन 5 रंगों की झंडियां लगाने से हवा शुद्ध होती है। सुख-शांति रहती है। मैं पूछती हूं- क्या महिलाएं भी लामा बनती हैं। सोनम बताते हैं- हां, बौद्ध धर्म में 'लामा' एक पदवी है, जो आध्यात्मिक गुरू को दी जाती है। महिलाएं भी इस पद तक पहुंचती हैं। वे भी मैरून रंग का चोगा ही पहनती हैं। अचानक मेरी नजर एक ड्रम पर पड़ी, जिसे कुछ लोग घूमा रहे थे। मैंने पूछा- ये क्या है? सोनम बताते हैं- यह 'मानी' है, यह तांबे या लोहे से बना होता है। इसे घड़ी की सुई की दिशा में घुमाया जाता है। इनके भीतर कागज के लंबे रोल पर हजारों बार 'ॐ मणि पद्मे हुम' मंत्र लिखा होता है। यहां मान्यता है कि इस ड्रम को एक बार घुमाना, उसमें लिखे हजारों मंत्रों को एक साथ पढ़ने के बराबर है। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए अडिया जनजाति की कहानी…. ------------------------------- 1- नाचती लड़की का हाथ पकड़ा और भगा ले गया लड़का:मैतेई लोगों में शादी की अनोखी परंपरा, पैदा होते ही बच्चे को खिला देते हैं नमक शाम के 5 बजे हैं। एक सुनसान जगह पर कुछ लोग जमीन को चौकोर खोद रहे हैं। आसपास भीड़ है। आधे घंटे बाद खुदाई करने वालों को गड्ढे में कुछ नजर आया। कुछ पल बाद दो-तीन लोग उस गड्ढे में उतरे और एक लाश बाहर निकालकर रख दी। लाश के कई हिस्से कंकाल में तब्दील हो चुके हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
17 मई की शाम। थलाइवा रजनीकांत ने चेन्नई के पोएस गार्डेन स्थित अपने घर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सफाई देते हुए कहा- मैं विजय को तब से देख रहा हूं, जब वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी। आखिर रजनीकांत के विजय से जलन की बात क्यों उठी, क्या वो विजय को सीएम नहीं बनने देना चाहते थे; इससे जुड़ी पूरी कहानी जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: रजनीकांत और विजय के बीच क्या मसला है? जवाब: रजनीकांत ने 1975 में तमिल फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। फिल्म थी- के बालाचंदर की ‘अपूर्व रागंगल’। 1980 के दशक में ‘बिल्ला’, ‘थिल्लू-मुल्लू’ जैसी फिल्मों के बाद उन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिला, जो 5 दशकों से जारी है।इधर विजय ने भी 1966 में अपनी पहली बड़ी हिट फिल्म दी। लेकिन ‘थलापति’ और सुपरस्टार वाला दर्जा उन्हें 2007 में आई ‘पोक्किरी’ से मिला।‘सुपरस्टार’ के टैग पर विजय और रजनीकांत के फैंस अक्सर सोशल मीडिया पर भिड़ जाते हैं, लेकिन दोनों एक्टर्स के बीच सार्वजनिक रूप से कोई तनातनी नहीं दिखी हालांकि विजय के राजनीति में आते ही यह बदल गया- सवाल-2: रजनीकांत का राजनीति से क्या रिश्ता रहा है? जवाब: रजनीकांत के फिल्मों में आने के एक दशक बाद ही उनकी राजनीति में आने की चर्चा शुरू हो गई थी। वजह थी उनकी राजनीतिक बयानबाजियां, पार्टियों से नजदीकी और दमदार फैन बेस… 1996: जयललिता पर बयान, सरकार बदलने का क्रेडिट मिला 2002-2014: BJP को समर्थन, मोदी से मिले, कई बार चुनाव लड़ने के संकेत 2017-2021: पार्टी बनाने का ऐलान, लेकिन बिना चुनाव लड़े ही संन्यास सवाल-3: रजनीकांत राजनीति में विजय जैसा करिश्मा क्यों नहीं दिखा पाए? जवाब: 4 बड़े कारण हैं- 1. फैन बेस को कैडर में तब्दील नहीं कर पाए 2. द्रविड़ियन राजनीति में फिट नहीं बैठे थलाइवा 3. आधे-अधूरे मन से शुरुआत, कमिटमेंट पर संदेह 4. रजनीकांत ने एंट्री में देरी कर दी सवाल-4: क्या वाकई विजय की राजनीतिक सफलता से जलते हैं रजनीकांत? जवाब: रजनीकांत ने सीएम विजय से प्रतिस्पर्धा की बात से इनकार किया है। उन्होंने 17 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस चुनाव के बाद विजय और मेरे रिश्ते को लेकर कई बातें हो रही हैं। अगर मैं इनका खंडन न करूं, तो ये बातें सच मानी जाएंगी। विजय से जलन पर कहा- कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं विजय से जलता हूं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। वो मुझसे 25 साल जूनियर हैं। मैं राजनीति छोड़ चुका हूं, तो विजय से मुझे भला क्यों जलन होगी। अगर मैं विजय से तुलना करूं तो मेरे लिए ये ठीक नहीं है। अगर विजय मुझसे तुलना करें तो वो उनके लिए ठीक नहीं है। मैं उन्हें तब से देख रहा हूं जब से वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी?’ स्टालिन से मिलने पर कहा- ‘यह सही है कि मैं स्टालिन से मिला था, लेकिन मैं राजनीति के लिए किसी भी हद तक गिरने वाला व्यक्ति नहीं हूं। स्टालिन पिछले 30 साल से मेरे दोस्त हैं। हमारी दोस्ती राजनीति से परे है।’ विजय को CM बनने से रोकने पर कहा- ‘मैं स्टालिन से दोस्त के तौर पर मिला था। लेकिन खबरें आने लगीं कि दोनों पार्टियां (DMK-AIADMK) विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए बैठकें कर रही हैं और मैं उनमें शामिल रहा हूं। मैं आपको बता दूं कि रजनीकांत ऐसा शख्स नहीं है जो इतना नीचे गिर जाए।' विजय से तुलना पर कहा- ‘जब मैं राजनीति में हूं ही नहीं, तो उनसे मेरी तुलना करना गलत है। उनके और मेरे बीच एक जेनरेशन गैप है। अगर मैंने 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ा होता, तो मैं जरूर जीत जाता। मुझे उनकी जीत पर अचंभा हुआ। मैं उनकी जीत को लेकर खुश हुआ। लोगों को विजय से काफी उम्मीदें हैं और मुझे आशा है कि वो इन्हें पूरा करेंगे।’ ’ विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद रजनीकांत ने विजय को चुनाव जीतने की बधाई दी थी। फिलहाल वो राजनीति में नहीं है, इसलिए जलन वाली बात सही नहीं लगती। रजनीकांत ने मुस्कुराते हुए ये जरूर कहा- 'मैं राजनीति में हूं ही नहीं, तो विजय से जलूं क्यों? हां, अगर कमल हासन सीएम बनते तो जरूर जलता।' ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 4 बच्चे होने पर मिलेंगे 95 हजार, आंध्र प्रदेश CM ने क्यों कहा- बच्चे ही हमारी दौलत; इसका भारत पर क्या असर आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने 16 मई को कहा, 'राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपए और चौथे के जन्म पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे। एक समय मैंने जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए बहुत मेहनत की थी, लेकिन अब जन्म दर बढ़ाने की जरूरत है।' पढ़ें पूरी खबर…
2013 में बीजेपी की सरकार 7 राज्यों में थी, आज 22 राज्यों में है। उत्तर, पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर… एक-एक कर बीजेपी ने सब जीत लिए। अब बची है दक्षिण की दीवार। कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगले 2-3 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ये किला भी फतेह कर सकती है। लेकिन कैसे? क्या बाकी राज्यों वाला फॉर्मूला दक्षिण में भी काम करेगा? भास्कर एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… फैक्टर-1: जमीन पर RSS राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS और उससे जुड़े विद्यार्थी परिषद यानी ABVP, सेवा भारती, वनवासी कल्याण आश्रम वगैरह पहले से ही बीजेपी के लिए जमीन तैयार करते है। जैसे- फैक्टर-2: वोट शेयर की धीमी चढ़ाई बीजेपी सीधे सत्ता के बजाय, पहले विपक्ष या दूसरे नंबर की रणनीति पर चलती है और वोट शेयर बढ़ाती है… फैक्टर-3ः हिंदुत्व + लोकल जातीय समीकरण बीजेपी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के कॉमन एजेंडे के साथ लोकल जातियों और कल्चर के समीकरण को साधती है… फैक्टर-4ः विपक्ष के नाराज लोगों को अपनाना जिस नेता को कांग्रेस, बीजेडी, टीएमसी जैसे विपक्षी दलों ने दरकिनार किया, बीजेपी ने उसे अपने साथ लिया और वैक्यूम भरा… फैक्टर-5: हार से सीखना, रणनीति बदलना पिछले चुनावों की हार और रणनीतिक गलतियों से सबक लेकर बीजेपी अगले चुनाव में नई स्ट्रैटजी और नेताओं की फौज के साथ उतरती है… इन्हीं फैक्टर्स के आधार पर बीजेपी अब दक्षिण में अपना रोडमैप तैयार कर रही है। कर्नाटकः सबसे करीब, सबसे अहम आंध्र प्रदेश: सहयोगी के कंधे पर सवारी तेलंगाना: इंतजार और क्षेत्रीय गठजोड़ केरलम: धीमी लेकिन असली चढ़ाई तमिलनाडुः सबसे लंबा रास्ता 1. भाषाई-सांस्कृतिक पहचान 2. क्षेत्रीय पार्टियों की गहरी जड़ें 3. RSS का कमजोर जमीनी नेटवर्क --------- यह खबर भी पढ़िए… बीजेपी की बंगाल जीत में SIR का कितना रोल:केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस कैसे लौटी; नतीजों के पीछे 5 बड़े फैक्टर्स बंगाल में बीजेपी ने हिंदुत्व का वो रूप दिखाया जो उत्तर भारत से बिल्कुल अलग था- माछ भात खाते हुए, मां काली का नाम लेते हुए। असम में मुस्लिम वोट इस तरह बंटे कि विपक्ष का गणित ही बिगड़ गया। केरलम में राहुल गांधी ने भगवान अयप्पा के नाम पर वो नैरेटिव सेट किया, जिसे लेफ्ट काट नहीं पाया। पूरी खबर पढ़िए…

36 C
