ग्वालियर में वृद्ध रिश्तेदार ने किया 12 वर्षीय बालिका का कथित यौन उत्पीड़न
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर के जनकगंज थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बालिका के साथ कथित यौन उत्पीड़न और अश्लील हरकतों का मामला सामने आया है। पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार बालिका हाल के महीनों में ग्वालियर में परिजनों के […] The post ग्वालियर में वृद्ध रिश्तेदार ने किया 12 वर्षीय बालिका का कथित यौन उत्पीड़न appeared first on Sabguru News .
कर्नाटक में पोंजी घोटाले में 40,000 से ज़्यादा निवेशकों को चपत लगी
बेंगलूरु। कर्नाटक में पोंज़ी स्कीम के तौर पर चल रहे एक बड़े वित्तीय घोटाले में 40,000 से ज़्यादा निवेशकों को चपत लगी है। अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है। आरोप है कि इसे शिवानंद नीलन्नवर ने चलाया था। इस गिरोह ने लोगों से ज़्यादा रिटर्न का वादा करके और […] The post कर्नाटक में पोंजी घोटाले में 40,000 से ज़्यादा निवेशकों को चपत लगी appeared first on Sabguru News .
बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चलाई साइकिल
बीकानेर। विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर रविवार को राजस्थान में बीकानेर में जिला मुख्यालय पर आयोजित विशाल साइकिल रैली में केंद्रीय विधि एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल साइकिल चलाकर भागीदारी की। मेघवाल ने मेरी साइकिल-मेरा हेलमेट अभियान के तहत आयोजित विशेष कार्यक्रम में खुद साइकिल चलाकर चुस्ती […] The post बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चलाई साइकिल appeared first on Sabguru News .
हावड़ा में तृणमूल नेता संन्यासी मन्ना से मारपीट, सिर मूंडकर और जूते की माला पहनाकर पूरा गांव घुमाया
कोलकाता। हावड़ा के श्यामपुर में रविवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के फंड में हेराफेरी के आरोपों को लेकर गुस्साये ग्रामीणों ने एक तृणमूल कांग्रेस नेता की जमकर पिटाई कर दी। इस घटना में उसका आधा सिर मूंड दिया और जूतों की माला पहनाकर पूरे गांव में घुमाया। यह घटना […] The post हावड़ा में तृणमूल नेता संन्यासी मन्ना से मारपीट, सिर मूंडकर और जूते की माला पहनाकर पूरा गांव घुमाया appeared first on Sabguru News .
ईरान वार्ता में गतिरोध के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा, अमरीका ने दो और ईरानी ड्रोन मार गिराए
तेहरान/वाशिंगटन। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की ईरान यात्रा और नये कूटनीतिक प्रयासों के बीच फारस की खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को दो और ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया, जिन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बताया […] The post ईरान वार्ता में गतिरोध के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा, अमरीका ने दो और ईरानी ड्रोन मार गिराए appeared first on Sabguru News .
हरदोई में ऑनर किलिंग : 19 वर्षीय युवती की हत्या के मामले में पिता-चाचा और चाची समेत 4 अरेस्ट
हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के संडीला थाना क्षेत्र में इज्जत के नाम पर 19 वर्षीय युवती की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। समदखेड़ा गांव निवासी शुभी की मौत के मामले में उसकी मां मिथलेशा की तहरीर पर पुलिस ने हत्या और साक्ष्य नष्ट करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया […] The post हरदोई में ऑनर किलिंग : 19 वर्षीय युवती की हत्या के मामले में पिता-चाचा और चाची समेत 4 अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
2 जून को तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दिया। 3 दिन मान-मनौव्वल के बाद जब इस्तीफा मंजूर हुआ, तो अन्नामलाई ने अपने नए ‘पॉलिटिकल मूवमेंट’ का ऐलान कर दिया। ये पार्टी 2031 में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। कहा जा रहा है कि अन्नामलाई बीजेपी में रहते वो हासिल कर सकते थे, जो सीएम विजय थलापति ने किया। जबकि कांग्रेस का कहना है कि अन्नामलाई बीजेपी की ही B टीम बना रहे हैं। आखिर अन्नामलाई के बीजेपी से किनारा करने की इनसाइड स्टोरी क्या है, क्या अन्नामलाई विजय थालापति की तरह बीजेपी को बड़ी जीत दिला सकते थे, आगे के प्लान की क्या सच्चाई, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अन्नामलाई के बीजेपी से इस्तीफा देने की इनसाइड स्टोरी क्या है? जवाब: अन्नामलाई ने अगस्त 2020 को BJP जॉइन की औरे 11 महीने बाद 16 जुलाई 2021 को उन्हें BJP प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। दरअसल, तमिलनाडु में पिछले 60 सालों से एक अलग तरह की राजनीति होती आई है, जिसे ‘द्रविड़ पॉलिटिक्स’ कहते हैं। इसी द्रविड़ पॉलिटिक्स के सहारे पार्टियां DMK और AIADMK 60 सालों तक लगातार सत्ता में रहीं। अन्नामलाई ने बीजेपी में रहते द्रविड़ पॉलिटिक्स का काट निकालने की कोशिश की, लेकिन उनका ये मिशन सफल नहीं हो पाया। सवाल-2: आखिर तमिलनाडु की द्रविड़ पॉलिटिक्स है क्या? जवाब: इसकी शुरुआत होती है- आर्य बनाम द्रविड़ की बहस से। जर्मन भाषाविद मैक्स मूलर जैसे कई विद्वानों ने दावा किया कि 1500 ईसापूर्व आर्य नाम की एक जाति ने भारतीय उपमहाद्वीप पर हमला किया। इनकी भाषा संस्कृत थी। वहीं दक्षिण भारत में बोली जाने वाली भाषाओं- तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम को द्रविड़ भाषा कहा गया। ब्रिटिश शासन के दौरान ये सोच बनी कि द्रविड़ भाषाएं आर्यों की भाषा से कमतर हैं। इसी भाषाई आधार पर देश के लोगों में एक बंटवारा हुआ- आर्य बनाम द्रविड़। फिर 20वीं सदी की शुरुआत में मद्रास में द्रविड़ सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन खड़ा हुआ। शुरुआती द्रविड़ नेता ब्राह्मणों के भी विरोधी थे। उसकी वजह थी कि मद्रास प्रेसिडेंसी में सिर्फ 3% ब्राह्मण सरकारी विभागों में करीब 70% प्रमुख पदों पर काबिज थे। गैर-ब्राह्मण नेताओं का मानना था कि ब्राह्मण दक्षिण के मूल निवासी नहीं हैं, बल्कि आर्य हैं और बाहरी हैं। द्रविड़ आंदोलन मूलतः 3 बातों पर टिका था- इन्हीं तीन बातों पर दो बड़ी द्रविड़ राजनीतिक पार्टियां बनीं… 1. DMK: अन्नादुरई पहले गैर कांग्रेसी CM बने 2. AIADMK, एक्टर MG रामचंद्रन सीएम बने 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद से AIADMK कमजोर पड़ती गई। EPS अभी इसके नेता हैं। इधर DMK की कमान एम.के. स्टालिन के हाथों में है। 2021 से 2026 तक उनकी सरकार रही। DMK और AIADMK आज भी द्रविड़ पॉलिटिक्स को सबसे ऊपर रखती हैं। तमिल प्राइड, सेकुलरिज्म और एंटी-हिंदी कल्चर के अपने स्टैंड के लिए जानी जाती हैं। हालांकि दोनों में मूल अंतर ये है कि DMK पेरियार की सोच, एंटी-ब्राह्मण रेशनलिज्म जैसे मुद्दों पर ज्यादा सख्त है। जबकि AIADMK उतना कट्टर नहीं है। इसीलिए AIADMK और BJP का गठबंधन भी हुआ। हालांकि अन्नामलाई द्रविड़ पॉलिटिक्स के बजाय नए तरीके से बीजेपी को सत्ता में लाना चाहते थे। अन्ना से विवाद के चलते बीजेपी इसमें सफल नहीं हुई, लेकिन सिर्फ 2 साल पहले TVK को लॉन्च करने वाले विजय थलापति इसमें सफल हो गए। सवाल-3: तमिलनाडु में ऐसा क्या करना चाहते थे अन्नामलाई, जिस पर बीजेपी से विवाद हुआ? जवाब: तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद अन्नामलाई ने बीजेपी की पॉलिटिक्स और द्रविड़ पॉलिटिक्स के अलावा एक तीसरी तरह की पॉलिटिक्स की… इस्तीफे के बाद अन्ना का तमिलनाडु में तीसरे तरह की पॉलिटिक्स का एक्सपेरिमेंट रुक गया। हालांकि अन्ना की पॉलिटिकल वैक्यूम वाली बात सही साबित हुई। उन्होंने द्रविड़ राजनीति को जितना कमजोर किया, उसका फायदा विजय को हुआ। अन्ना द्रविड़ राजनीति को राष्ट्रवाद से हराना चाहते थे, वहीं विजय ने यही काम अपने ‘नए द्रविड़वाद’ से किया। विजय ने 2 फरवरी 2024 को जब तमिलगा वेत्री कझगम, TVK बनाई तब कहा था, ‘हम द्रविड़ राष्ट्रवाद को तमिल राष्ट्रवाद से अलग नहीं करेंगे। ये दोनों इस धरती की दो आंखें हैं।’ यानी विजय ने भी द्रविड़ राजनीति को ऊपर रखा, लेकिन थोड़ा अलग तरह से। पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं कि ये विजय की नई द्रविड़ विचारधारा है। DMK के आइकॉन पेरियार और करुणानिधि हैं और AIADMK के आइकॉन MGR और जयललिता। जबकि विजय ने 5 बड़ी शख्सियत- कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज, पेरियार, महिला स्वतंत्रता सेनानी वेलु नाच्चियार और अंजलाई अम्माल और भीमराव आंबेडकर को अपना आदर्श बताया। TVK का आधिकारिक नारा है, 'पिरप्पोक्कुम एल्ला उयिर्क्कुम' यानी 'जन्म से सभी जीव समान हैं।' ये DMK और AIADMK की आर्यन बनाम द्रविड़ पॉलिटिक्स की लाइन से अलग है। TVK के नाम में द्रविड़ शब्द तक नहीं है। विजय ने चुनाव में ज्यादा कट्टर द्रविड़वादी मानी जाने वाली DMK का पुरजोर विरोध किया। जबकि AIADMK और उसके नेता EPS को लेकर अपना रुख रखा। सवाल-4: अन्नामलाई का आगे का प्लान क्या, क्या इसमें सफल होंगे? जवाब: अन्नामलाई ने कहा, 'पहले मैं लोगों को आंदोलन से जोडूंगा, फिर उन्हें ट्रेनिंग देकर इसे पॉलिटिकल पार्टी बनाऊंगा।' अन्नामलाई ने WetheLeaders.org नाम का एक पोर्टल बनाया है। 5 जून को पोर्टल शुरू होने के सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख लोगों ने इस पर रजिस्ट्रेशन करा लिया। अन्नामलाई ने कोयंबटूर में ‘एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स’ बनाकर युवाओं को राजनीति की ट्रेनिंग देने का ऐलान भी किया है। उन्होंने कहा, ‘इस सेंटर में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उन लोगों को ट्रेन किया जाएगा, जो राजनीति में आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता। मैं कुछ सबसे प्रतिभाशाली लोगों को राजनीति में लाकर प्रदेश की राजनीतिक भाषा बदलना चाहता हूं।’ अन्नामलाई का कहना है कि 2031 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय निकाय चुनावों में भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे। पार्टी BJP को भी उसी नजरिए से देखेगी जैसे DMK, AIADMK या दूसरी पार्टियों को।’ तमिलनाडु BJP प्रदेश उपाध्यक्ष करु नागराजन सहित कई बीजेपी नेता भी इस्तीफा देकर अन्नामलाई से जुड़ गए हैं। नागराजन ने कहा है, ‘मेरे साथ कई और BJP नेता भी हैं, जिन्होंने अन्नामलाई के प्रति समर्थन जताया है।' पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं, ‘10-15 सालों तक तमिलनाडु में TVK की प्रासंगिकता बनी रह सकती है। लेकिन अगर अन्नामलाई अलग पार्टी बनाते हैं, तो DMK नेता उदयनिधि के अलावा यह TVK के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर सकती है।’ हालांकि तमिलनाडु के सीनियर जर्नलिस्ट आर. रंगराज कहते हैं कि अन्नामलाई के आंदोलन का असर सीमित ही रहेगा, क्योंकि TVK पहले ही युवाओं को अपने साथ जोड़ चुकी है। अभी हम ये भी नहीं जानते कि ये पार्टी पूरी तरह से अन्नामलाई की है या इसमें BJP का समर्थन भी है।' तमिलनाडु के कांग्रेस नेता और सांसद मणिकम टैगोर ने भी X पर लिखा, 'तमिलनाडु के लिए प्लान-बी तैयार है और इसके पीछे RSS का भी हाथ है।' सवाल-5: तो क्या अन्नामलाई के इस प्लान के पीछे बीजेपी है? जवाब: पॉलिटिकल एनालिस्ट निहार नलिनी सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई BJP से इस्तीफा देते हैं, फिर गृहमंत्री के घर पर उनसे मिलते हैं और उसी दिन नई पार्टी का ऐलान कर देते हैं। वो भी उस राज्य में जहां BJP अभी-अभी बुरी तरह हारी है। अन्नमलाई की ये विदाई बड़ी कंट्रोल्ड दिखती है।’ सारंगी के मुताबिक, ‘कोई आदमी गृहमंत्री से पार्टी छोड़ने के बाद नहीं मिलता, बल्कि तब मिलता है, जब उसे नई चाबियां सौंपी जाती हैं। इसका संकेत ये है कि अन्नामलाई ने इस्तीफे में BJP के लिए कोई कड़वी बात नहीं लिखी। PM मोदी की तारीफ की और पार्टी को धन्यवाद भी दिया।’ सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई की नई पार्टी BJP के लिए कोई चैलेंज नहीं, बल्कि TVK की प्रतिद्वंद्वी है। इसका टारगेट TVK की तरह OBC समुदाय, शहरी मिडिल क्लास और उन युवा वोटर्स को जोड़ना होगा, जो द्रविड़ियन राजनीति से थक चुके हैं। इसी वोटबैंक ने TVK को 108 सीटें दिलाईं और BJP इस ट्रेंड से अनजान नहीं है।’ आर. रंगराज भी कहते हैं, ‘तमिलनाडु में BJP ने ही अन्नामलाई को नई पार्टी बनाने के लिए बढ़ावा दिया है, क्योंकि अभी बीजेपी AIADMK के साथ मिलकर जैसी राजनीति कर रही है, उसमें अन्नामलाई के लिए कोई स्पेस नहीं बचता।' आर. राजगोपालन के मुताबिक, 'अन्नामलाई उन युवा वोटर्स को खींच सकते हैं, जिन तक BJP अपनी मौजूदा पहचान के साथ नहीं पहुंच सकती। उन्हें RSS का साइलेंट सपोर्ट भी मिल सकता है। ऐसे में बीजेपी, AIADMK गठबंधन में रह सकते हैं, जबकि अन्नामलाई अपने पुराने रवैये से DMK और AIADMK दोनों के वोट काट सकते हैं।' हालांकि, तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा है कि बीजेपी नेतृत्व ने अन्नामलाई के आंदोलन को कोई समर्थन नहीं दिया है। BJP नेताओं से अपील है कि वे किसी भी बहकावे में आकर इस मूवमेंट में शामिल न हों।’ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------तमिलनाडु से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… शराब दुकानें बंद, 200 यूनिट बिजली फ्री, गोल्ड चेन भी देंगे; फिल्मी हीरो जैसे फैसले ले रहे CM विजय, कितना महंगा पड़ेगा CM बनते ही थलापति विजय किसी फिल्मी नायक की तरह फैसले ले रहे हैं। 48 घंटे में ही 700 से ज्यादा शराब की दुकानें बंद कराने का आदेश दिया। शपथ के मंच से ही 200 यूनिट फ्री बिजली का ऐलान कर दिया था। सोने की चेन, अंगूठी और कैश देने का भी वादा किया है। पढ़ें पूरी खबर…
जयपुर : वंशिका प्रकरण में निष्पक्ष जांच एवं दोषियों की गिरफ्तारी की मांग
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रताप नगर थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय वंशिका गर्ग का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के बाद रविवार को आरयूएचएस अस्पताल के बाहर परिजनों, समाजजनों एवं संयुक्त अभिभावक संघ के पदाधिकारियों ने एकत्रित होकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। मृतक छात्रा की […] The post जयपुर : वंशिका प्रकरण में निष्पक्ष जांच एवं दोषियों की गिरफ्तारी की मांग appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा में हत्या के आरोपी दम्पती अरेस्ट
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के बागोर थाना क्षेत्र में बेटी की शादी से ठीक पहले उसके पिता की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या करने के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी और उसकी पत्नी को गिरफ्तार करके एक नाबालिग को निरुद्ध किया है। थाना प्रभारी भंवरलाल ने रविवार को बताया कि पुलिस ने दबिश देकर […] The post भीलवाड़ा में हत्या के आरोपी दम्पती अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
विक्रम भट्ट ने खोले राज: कंगाली में जीते थे, फिर भी कर रहे थे सुष्मिता सेन को डेट
photo credit : Social Media बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से कभी-कभी उतनी ही बेरहम और उलझी हुई होती है। मशहूर फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर विक्रम भट्ट की जिंदगी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दीं, लेकिन उनकी निजी जिंदगी हमेशा विवादों और उथल-पुथल से घिरी रही। हाल ही में सिद्धार्थ कनन को दिए इंटरव्यू में विक्रम भट्ट ने अपनी कंगाली, एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स और हाल ही में जेल में बिताए अपने 70 दिनों के सबसे काले दौर पर खुलकर बात की है। विक्रम भट्ट ने साल 1996 में आई फिल्म 'दस्तक' के सेट पर पूर्व मिस यूनिवर्स और एक्ट्रेस सुष्मिता सेन को डेट करना शुरू किया था। उस वक्त वह अपनी पहली पत्नी अदिति से अलग हो चुके थे। इस रिश्ते को याद करते हुए विक्रम ने एक हैरान कर देने वाला विरोधाभास साझा किया। ALSO READ: जब रात 2 बजे कॉलेज से हो गया था इम्तियाज अली का अपरहण, निर्देशक ने बताया किस्सा विक्रम भट्ट ने कहा, मैं एक स्ट्रगलिंग डायरेक्टर था। मेरे पास जहर खाने तक के पैसे नहीं थे। मैं एक तरफ आमिर खान (फिल्म 'गुलाम') को डायरेक्ट कर रहा था और दूसरी तरफ मिस यूनिवर्स को डेट कर रहा था, लेकिन अंदरूनी तौर पर मैं पूरी तरह कंगाल था। मुझे याद है कि मेरे पास एक म्यूजिक सीडी खरीदने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे। मैंने बिल्कुल एक फकीर की तरह जिंदगी जी है। हालांकि, सुष्मिता सेन से उनका यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और जल्द ही दोनों का ब्रेकअप हो गया। इसके बाद साल 2002 से 2007 तक उनका नाम एक्ट्रेस अमीषा पटेल के साथ भी जुड़ा, जिन्हें उन्होंने फिल्म 'आप मुझे अच्छे लगने लगे' में डायरेक्ट किया था। अपनी जिंदगी में आईं महिलाओं के बारे में बात करते हुए विक्रम कहते हैं कि उनके मन में किसी के लिए कोई कड़वाहट नहीं है। हर किसी ने उन्हें प्यार, समय या जिंदगी का कोई न कोई अहम सबक जरूर दिया है। विक्रम भट्ट की जिंदगी में एक नया और गंभीर मोड़ तब आया जब साल 2020 में उन्होंने श्वेतांबरी सोनी से शादी की। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें लेकिन खुशियों के इस दौर के बीच पिछले साल एक बड़ा कानूनी संकट खड़ा हो गया। उदयपुर के 'इंद्रा ग्रुप ऑफ कंपनीज' के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया की शिकायत पर राजस्थान पुलिस ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज किया। दिसंबर 2025 में राजस्थान पुलिस ने दोनों को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें राजस्थान की जेल में न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा। जनवरी 2026 में हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद आखिरकार फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली। इंटरव्यू के दौरान विक्रम भट्ट उस वक्त बेहद भावुक हो गए जब उन्होंने जेल में बिताए अपने 70 दिनों के दर्दनाक अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि सलाखों के पीछे की जिंदगी ने उन्हें हकीकत का वो आईना दिखाया जिसे वह कभी नहीं भूल सकते। विक्रम भट्ट ने भावुक होकर कहा, जेल के उस बैरक में किसी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि आप बाहर कौन हैं या आपने अतीत में क्या काम किया है। वहां बंद आधे लोगों का तो तब जन्म भी नहीं हुआ था जब मेरी फिल्में आ रही थीं। लेकिन एक बात साफ थी, वहां भले ही रिश्ते काम नहीं आए, लेकिन मेरी फिल्मों की पहचान वहां भी जिंदा थी। लोग मेरी फिल्मों को याद करते थे। इस खौफनाक दौर ने मुझे सिखाया कि आपकी मेहनत ही अंत में जीतती है।
जब रात 2 बजे कॉलेज से हो गया था इम्तियाज अली का अपरहण, निर्देशक ने बताया किस्सा
बॉलीवुड फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। इसी बीच उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों का एक ऐसा खौफनाक और फिल्मी किस्सा साझा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर हर किसी को हैरान कर दिया है। इम्तियाज अली ने बताया कि कैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान एक मामूली से पोस्टर विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि आधी रात को एक स्थानीय गैंग ने उनका अपहरण कर लिया था। इम्तियाज अली ने साल 1993 में दिल्ली के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की थी। ALSO READ: डीप नेक ब्लाउज और फ्लोरल साड़ी में कंगना रनौट का हॉट अवतार, तस्वीरें वायरल अनफिल्टर्ड विद समदिश को दिए एक इंटरव्यू में इम्तियाज ने उस दौर की यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि उस समय यूनिवर्सिटी कैंपसों में छात्र संगठनों के बीच काफी तीखी प्रतिद्वंद्विता हुआ करती थी। इसी राजनीतिक माहौल के बीच एक रात कुछ ऐसा हुआ जिसने इम्तियाज को सीधे खतरे में डाल दिया। इम्तियाज ने बताया कि उनके हॉस्टल की मुख्य दीवार पर किसी ने एक राजनीतिक पोस्टर चिपका दिया था। इम्तियाज ने उन लड़कों से कहा कि वे पोस्टर को सामने की मुख्य दीवार पर लगाने के बजाय बगल की साइड वॉल पर लगाएं। हालांकि, उन लड़कों ने जानबूझकर उसे सामने ही रहने दिया। इसके बाद इम्तियाज ने उनके सामने ही पोस्टर को वहां से हटाकर साइड की दीवार पर लगा दिया। उस वक्त तो वे लड़के चले गए, लेकिन कहानी में ट्विस्ट कुछ दिनों बाद आया। इम्तियाज ने बताया, कुछ दिनों बाद रात के करीब 2 बजे मेरे एक हॉस्टल के साथी ने आकर मुझसे कहा कि भाग जाओ, क्योंकि कुछ लोग तुम्हें ढूंढते हुए आ रहे हैं। वे लोग वहां पहुंचे और मुझसे बोले, 'हमारे साथ चलो।' जब मैंने पूछा कि कहां, तो मैंने देखा कि वे मुझे ले जाने के लिए बकायदा एक साइकिल रिक्शा लेकर आए थे। गैंग के लोग इम्तियाज को जबरन उस साइकिल रिक्शा में बिठाकर यूनिवर्सिटी इलाके में ही स्थित एक सरकारी क्वार्टर जैसी जगह पर ले गए। उस गुप्त ठिकाने पर एक स्थानीय गैंग लीडर मौजूद था, जिसका संबंध एक राजनीतिक संगठन से था। उसने इम्तियाज से पोस्टर हटाने को लेकर पूछताछ शुरू की। इम्तियाज ने बेहद शांति से अपनी स्थिति स्पष्ट की और बताया कि उन्होंने पोस्टर को फाड़ा नहीं था, बल्कि सिर्फ हॉस्टल की इमारत की खूबसूरती बनाए रखने के लिए उसे सामने से हटाकर किनारे की दीवार पर शिफ्ट किया था। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें तभी वहां एक अप्रत्याशित मोड़ आया, जिसने इम्तियाज अली की जान बचाई। इम्तियाज ने आगे बताया, गैंग लीडर ने अपने एक आदमी से पूछा कि क्या इसने सच में पोस्टर फाड़ा था? उस आदमी ने घबराकर कहा, 'बात तो एक ही है ना भाई, चाहे हटाया या फाड़ा।' यह सुनते ही गैंग लीडर बुरी तरह भड़क गया। उसने अपने ही आदमी से कहा, 'तुमने मुझसे कहा था कि उसने पोस्टर फाड़ा है और अब कह रहे हो सिर्फ हटाया है?' दोनों के बीच बहस बढ़ गई और गैंग लीडर ने झूठ बोलने के जुर्म में अपने ही आदमी को सटासट दो थप्पड़ जड़ दिए। बस उसी हंगामे के बीच मैं वहां से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा। कॉलेज के दिनों का यह डरावना अनुभव किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा ही लगता है। फिलहाल, इम्तियाज अली अपनी नई पीरियड रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की रिलीज की तैयारियों में व्यस्त हैं, जो 12 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवारी वाघ और नसीरुद्दीन शाह मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे।
कोलकाता नगर निगम का पार्षद मोहम्मद जसिमुद्दीन पॉक्सो के तहत अरेस्ट
कोलकाता। कोलकाता नगर निगम के जोड़ासांको के वार्ड नंबर 39 से पार्षद मोहम्मद जसिमुद्दीन को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। तृणमूल नेता पर हुई इस ताजा कार्रवाई के बाद पिछले 24 घंटों में गिरफ्तार होने वाले पार्षदों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। […] The post कोलकाता नगर निगम का पार्षद मोहम्मद जसिमुद्दीन पॉक्सो के तहत अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
AI Toys का बढ़ता चलन, 3 साल के बच्चों के लिए Chatbot टेडी बियर कितने सैफ
आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से बच्चों के खिलौनों की दुनिया में भी प्रवेश कर रहा है। AI टॉयज को लेकर दुनियाभर में बहस तेज हो गई है। ChattyBear नाम का एक मुलायम भूरे रंग का टेडी बियर सुर्खियों में है, जो हर बातचीत की शुरुआत Hello, my buddy! कहकर करता है। ALSO READ: LPG : पड़ोसी देशों से सस्ता है एलपीजी, दाम बढ़ाने पर सरकार ने क्या कहा अब यह सिर्फ कल्पना की बात नहीं रह गई है। ChattyBear नई पीढ़ी के AI आधारित खिलौनों का हिस्सा है, जो बच्चों को कहानियां सुना सकता है, उनकी रुचियों पर बातचीत कर सकता है, खेल खेल सकता है और यहां तक कि दुनिया में चल रही घटनाओं पर भी चर्चा कर सकता है। ALSO READ: वैश्विक संकट के बीच PM मोदी की बड़ी बैठक, आर्थिक रफ्तार बढ़ाने और Ease of Living पर हुआ मंथन ये हाई-टेक खिलौने ChatGPT जैसे जनरेटिव AI इंजन से संचालित होते हैं और अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। कंपनियां इन्हें तीन साल तक के छोटे बच्चों के लिए शैक्षणिक विकास और नए तरह के मनोरंजन का माध्यम बताकर प्रचारित कर रही हैं। ALSO READ: वैश्विक संकट के बीच PM मोदी की बड़ी बैठक, आर्थिक रफ्तार बढ़ाने और Ease of Living पर हुआ मंथन इन AI खिलौनों को स्क्रीन टाइम के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसे चैटबॉट आधारित खिलौनों के इस्तेमाल से गोपनीयता, भावनात्मक जुड़ाव और गलत जानकारी जैसे कई जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। Edited by : Sudhir Sharma
कोटपूतली बहरोड़ में ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाइक सवार दो युवकों की मौत
अलवर। राजस्थान में कोटपूतली बहरोड़ जिले के बानसूर थाना क्षेत्र में कोटपूतली मार्ग पर शनिवार को ट्रैक्टर की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौत हाे गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रामपुर गांव के दीपक मेघवाल और सबलपुरा गांव के नवदीप यादव मोटर साइकिल से कोटपूतली से अपने घर लौट रहे थे। […] The post कोटपूतली बहरोड़ में ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाइक सवार दो युवकों की मौत appeared first on Sabguru News .
एक माह की बच्ची को दादा की गोद से छीनकर जमीन पर पटका, आरोपी बोला- बलि देना था मुझे
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में एक माह की मासूम बच्ची का बलि देने जैसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है। सारनाथ थाना क्षेत्र के अकथा गांव की वनवासी बस्ती में शनिवार रात एक माह की बच्ची को उसके दादा की गोद से छीनकर पड़ोसी विकास यादव ने दो बार जमीन पर पटक दिया। गंभीर […] The post एक माह की बच्ची को दादा की गोद से छीनकर जमीन पर पटका, आरोपी बोला- बलि देना था मुझे appeared first on Sabguru News .
क्यों एकता कपूर का नाम है सफलता की गारंटी? जानिए उनके करियर के 5 सबसे मजबूत स्तंभ
एक ऐसी इंडस्ट्री में जहां ट्रेंड रातों-रात बदल जाते हैं और ऑडियंस की लॉयल्टी लगातार बदलती रहती है, बहुत कम नाम ऐसे हैं जिन्हें एकता कपूर जैसा भरोसा और पहचान मिलती है। उनके बर्थडे पर, यहां पांच कारण बताए गए हैं कि क्यों वह इंडिया की सबसे मज़बूत प्रोड्यूसर ब्रांड और बिना किसी शक के कंटेंट क्वीन बनी हुई हैं। 1. वह सभी फ़ॉर्मेट में सफलता दिलाती रहती हैं इंडस्ट्री में दशकों बाद भी, कपूर ऐसे प्रोजेक्ट्स के साथ अपनी अहमियत साबित करती रहती हैं जो ऑडियंस और क्रिटिक्स दोनों को पसंद आते हैं। इस साल भूत बांग्ला की सफलता और ऑडियंस के ज़बरदस्त रिस्पॉन्स ने उनके कमर्शियल अंदाज़ को और मज़बूत किया, जबकि कथल जैसी फ़िल्मों को नेशनल अवॉर्ड मिलना, मतलब वाली और असरदार कहानी कहने के उनके कमिटमेंट को दिखाता है। क्रिटिक्स की तारीफ़ और मेनस्ट्रीम सफलता का यह अनोखा बैलेंस उन्हें इंडस्ट्री के ज़्यादातर प्रोड्यूसर्स से अलग करता है। ALSO READ: 51 की उम्र में भी सिंगल हैं 'टीवी क्वीन' एकता कपूर, पिता की इस एक शर्त ने बदल दी पूरी जिंदगी! 2. उन्होंने शुरू से एक कंटेंट एम्पायर बनाया बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड और बालाजी मोशन पिक्चर्स के ज़रिए, कपूर ने देश के सबसे असरदार कंटेंट पावरहाउस में से एक बनाकर इंडियन एंटरटेनमेंट को बदल दिया। टेलीविज़न पर छाए रहने से लेकर फ़िल्मों और स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म तक, उन्होंने एक ऐसा ब्रांड बनाया जिसने दर्शकों की हर पीढ़ी के लिए लगातार कहानियाँ दी हैं। 3. वह इंडस्ट्री की सबसे बड़ी स्टार-मेकर्स में से एक हैं सफल कंटेंट बनाने के अलावा, कपूर ने टैलेंट को खोजने और उसे आगे बढ़ाने के लिए भी नाम कमाया है। इन सालों में, उन्होंने अनगिनत एक्टर्स, राइटर्स, डायरेक्टर्स और क्रिएटर्स को इंट्रोड्यूस किया, सपोर्ट किया और आगे बढ़ाया, जो आगे चलकर इंडस्ट्री में बड़े नाम बने। नई आवाज़ों और नए टैलेंट की उनकी लगातार खोज उनके इस विश्वास को दिखाती है कि अच्छी कहानी कहने की शुरुआत अगली पीढ़ी को मौके देने से होती है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें 4. वह खुद को नए सिरे से बनाती रहती हैं कपूर की लंबी उम्र उनकी इवॉल्व होने की काबिलियत से आती है। 2000 के दशक में टेलीविज़न कल्चर को बनाने से लेकर डिजिटल स्टोरीटेलिंग को अपनाने और आजकल के प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने तक, उन्होंने अपनी कमर्शियल समझ को खोए बिना बार-बार बदलते ऑडियंस के टेस्ट के हिसाब से खुद को ढाला है। 5. वह एंटरटेनमेंट से आगे बढ़कर नए ज़माने की सोच को अपनाती हैं बालाजी एस्ट्रो गाइड के साथ कपूर का जुड़ाव स्पिरिचुअलिटी, खुद को खोजने और मॉडर्न कंज्यूमर ट्रेंड्स को एक्सप्लोर करने के उनके खुलेपन को दिखाता है, जो पॉपुलर कल्चर पर तेज़ी से असर डाल रहे हैं। बदलती बातचीत में शामिल होने की इस इच्छा ने उन्हें आजकल के ऑडियंस से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई है। जैसे एकता कपूर एक और जन्मदिन मना रही हैं, उनकी विरासत सफल प्रोजेक्ट्स से कहीं आगे तक फैली हुई है। उन्होंने इंस्टीट्यूशन्स बनाए हैं, देखने की आदतों को बदला है, करियर शुरू किया है और कंटेंट क्रिएशन को नए सिरे से डिफाइन किया है, यह एक ऐसी अचीवमेंट है जिसे इंडियन एंटरटेनमेंट में बहुत कम लोग हासिल कर सकते हैं।
मलयालम सिनेमा के एक सुनहरे युग का अंत, नेशनल अवॉर्ड विनर सलीम कुमार का निधन
साउथ फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, स्क्रीनप्ले राइटर, निर्देशक और मशहूर मिमिक्री कलाकार सलीम कुमार का निधन हो गया है। उन्होंने 56 वर्ष की उम्र में कोच्चि के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। अस्पताल द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सलीम कुमार को तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था, जहां शनिवार रात 10:43 बजे कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका निधन हो गया। सलीम कुमार पिछले काफी समय से मल्टीपल ऑर्गन कॉम्प्लिकेशंस से जूझ रहे थे। वे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), क्रॉनिक किडनी डिजीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित थे। कुछ साल पहले उनका लिवर ट्रांसप्लांट भी हुआ था। ALSO READ: 'दोस्ताना 2' फिर मुश्किल में फंसी, निर्देशक अद्वैत चंदन ने छोड़ी फिल्म! शनिवार तड़के सलीम कुमार को तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर मिलते ही उनके गृह नगर नॉर्थ परवूर और पूरे केरल में शोक की लहर दौड़ गई। सलीम कुमार के आकस्मिक निधन पर साउथ सिनेमा के सुपरस्टार ममूटी ने बेहद भावुक पोस्ट लिखा। ममूटी ने कहा़, सलीम, जो खुद हंसा और दूसरों को हंसाया, जिसने सोचा और दूसरों को सोचने पर मजबूर किया, जो कभी खुद रोया और दूसरों को रुलाया... आज वह सिर्फ हमें रुला कर चला गया। भाई, तुम्हारा जाना एक कभी न खत्म होने वाला दुख है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें मिमिक्री स्टेज से नेशनल अवार्ड तक का सफर 10 अक्टूबर 1969 को जन्मे सलीम कुमार का फिल्मी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कोचीन कलाभवन से एक मिमिक्री कलाकार के रूप में की थी। साल 1997 में फिल्म 'इष्टमानु नूरु वट्टम' से सिनेमा की दुनिया में कदम रखने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग और अनोखे चेहरे के भावों के दम पर वे देखते ही देखते मलयालम सिनेमा के सबसे पसंदीदा कॉमेडियन बन गए। 'कल्याणरामन', 'सीआईडी मूसा', 'मीसा माधवन' और 'मायावी' जैसी फिल्मों में निभाए गए सलीम कुमार के किरदारों को आज भी केरल के घर-घर में याद किया जाता है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर बनने वाले मलयालम मीम्स का वे आज भी सबसे बड़ा चेहरा हैं। सलीम कुमार ने केवल दर्शकों को हंसाया ही नहीं, बल्कि अपनी गंभीर अदाकारी से सबकी आंखें नम भी कीं। साल 2010 में आई फिल्म 'अदामिन्ते माकन अबू' में एक बूढ़े इत्र विक्रेता की भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसके अलावा उन्होंने चार बार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार भी अपने नाम किया। सलीम कुमार न सिर्फ एक महान कलाकार थे, बल्कि एक बेहद संवेदनशील इंसान भी थे। साल 2018 में जब केरल में भीषण बाढ़ आई थी, तब उन्होंने अपने घर 'लाफिंग विला' के दरवाजे दर्जनों बेघर हुए लोगों के लिए खोल दिए थे। उन्होंने लगभग 45 लोगों को अपने घर में पनाह दी। इसके अलावा उन्हें खेती-किसानी से बेहद लगाव था।
राहुल गांधी पहले संस्कृति का ‘स’सीखें : गजेंद्र सिंह शेखावत
जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अंडमान निकोबार दौरे और पर्यावरण को लेकर दिए उनके बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि उन्हें पहले संस्कृति का ‘स’ सीखना चाहिए और उसके बाद ही ऐसी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक चीजों पर कोई टिप्पणी करनी चाहिए। शेखावत […] The post राहुल गांधी पहले संस्कृति का ‘स’ सीखें : गजेंद्र सिंह शेखावत appeared first on Sabguru News .
भ्रष्टाचार के आरोप में ओडिशा का इंजीनियर अरेस्ट, करोड़ों की संपत्ति का पता चला
भुवनेश्वर। ओडिशा सतर्कता विभाग ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (आईटीडीए) के एक इंजीनियर को रविवार को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से 2.04 करोड़ रुपये नकद सहित अकूत संपत्ति का पता चला है।कंधमाल जिले के […] The post भ्रष्टाचार के आरोप में ओडिशा का इंजीनियर अरेस्ट, करोड़ों की संपत्ति का पता चला appeared first on Sabguru News .
हैप्पी बर्थडे : 51 वर्ष की हुई फिल्म निर्माता एकता कपूर
मुंबई। भारतीय टेलीविजन और फिल्म जगत की चर्चित निर्माता एकता कपूर आज 51 वर्ष की हो गईं। एकता कपूर का जन्म 7 जून 1975 को मुंबई में हुआ था। वह हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जीतेन्द्र और निर्माता शोभा कपूर की पुत्री हैं। फिल्मी परिवार से संबंध होने के बावजूद उन्होंने अभिनय के बजाय निर्माण […] The post हैप्पी बर्थडे : 51 वर्ष की हुई फिल्म निर्माता एकता कपूर appeared first on Sabguru News .
घरेलू एलपीजी सिलेंडर 29 रुपए महंगा, हमलावर हुई कांग्रेस
नई दिल्ली। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर रविवार से 29 रुपए महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज से 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपए का हो गया है। हालांकि वाणिज्यिक इस्तेमाल वाले 19 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम […] The post घरेलू एलपीजी सिलेंडर 29 रुपए महंगा, हमलावर हुई कांग्रेस appeared first on Sabguru News .
आलिया-रणबीर की तारीफ में बोले इम्तियाज अली, टैलेंट के आगे फीका पड़ता है नेपोटिज्म
बॉलीवुड गलियारों में नेपोटिज्म एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर बहस की चिंगारी कभी शांत नहीं होती। स्टार किड्स को मिलने वाले विशेषाधिकार और आउटसाइडर्स का संघर्ष अक्सर सोशल मीडिया पर आमने-सामने आ जाते हैं। इस बीच, अपनी संजीदा और कल्ट फिल्मों के लिए मशहूर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने इस विषय पर एक ऐसा अनूठा दृष्टिकोण रखा है, जिसने इंडस्ट्री और सोशल मीडिया दोनों जगह एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में इम्तियाज अली ने कहा कि फिल्मी परिवारों में पैदा होने वाले कलाकारों की स्थिति उतनी सरल और मखमली नहीं होती, जितनी वह बाहर से दिखाई देती है। उनके अनुसार, स्टार किड्स पर अपनी पहचान बनाने और खुद को साबित करने का एक अलग और गहरा मानसिक दबाव होता है। ALSO READ: 'दोस्ताना 2' फिर मुश्किल में फंसी, निर्देशक अद्वैत चंदन ने छोड़ी फिल्म! पारिवारिक विरासत का भारी दबाव इम्तियाज अली ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए बॉलीवुड के दो सबसे बड़े और सफल नाम—रणबीर कपूर और आलिया भट्ट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि आलिया, रणबीर और फिल्म इंडस्ट्री के कई दूसरे अभिनेता जो इसी माहौल में पैदा हुए हैं, उन्हें कहीं ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उनके आस-पास ही सफलता के इतने बड़े प्रतिमान मौजूद हैं कि उन्हें अपने मन में खुद को सफल कहने के लिए अपने ही पिता, चाचा और मां की विरासत से मुकाबला करना पड़ता है। इम्तियाज ने आगे खुद को एक आउटसाइडर बताते हुए कहा कि बाहर से आने वाले लोगों के लिए राह मानसिक रूप से थोड़ी आसान होती है, क्योंकि उनके ऊपर किसी खानदान या नामचीन सरनेम की उम्मीदों का कोई बोझ नहीं होता। नेपोटिज्म के टैग को लेकर हो रही आलोचनाओं पर विराम लगाते हुए इम्तियाज अली ने रणबीर और आलिया के अभिनय कौशल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन दोनों कलाकारों ने अपनी काबिलियत के दम पर हर संदेह को दूर कर दिया है। रणबीर कपूर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे आज फिल्म इंडस्ट्री के एक बेहद शानदार और स्थापित अभिनेता हैं, इसमें कोई शक नहीं है। भले ही लोग उन्हें 'नेपो चाइल्ड' कहें, लेकिन उनके बेहतरीन काम ने सारे सवालों के जवाब दे दिए हैं। वहीं आलिया भट्ट के बारे में उन्होंने कहा, आलिया इतनी असाधारण कलाकार हैं कि किसी को इस बात का बुरा नहीं लगेगा कि उन्हें कोई रोल क्यों मिला। बल्कि दर्शक चाहेंगे कि उन्हें और भी काम मिले। फिल्म इंडस्ट्री में पैदा होने वालों को अपनी जगह बनाने के लिए और भी ज़्यादा कमाना पड़ता है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें बता दें कि इम्तियाज अली का इन दोनों ही कलाकारों के साथ एक बेहद गहरा और रचनात्मक रिश्ता रहा है। उन्होंने आलिया भट्ट के साथ फिल्म 'हाइवे' बनाई थी, जिसे आलिया के करियर का माइलस्टोन माना जाता है। वहीं रणबीर कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने 'रॉकस्टार' और 'तमाशा' जैसी कालजयी फिल्में दीं, जो आज कल्ट स्टेटस का लुत्फ उठा रही हैं। नेपोटिज्म की इस चर्चा के बीच इम्तियाज अली इन दिनों अपनी अगली निर्देशित फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' को लेकर भी सुर्खियों में छाए हुए हैं, जो जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' की शानदार सफलता के बाद दर्शकों को उनकी इस अगली प्रेम कहानी का बेसब्री से इंतजार है।
वैश्विक संकट के बीच PM मोदी की बड़ी बैठक, आर्थिक रफ्तार बढ़ाने और Ease of Living पर हुआ मंथन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ‘प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद’ (ईएसी-पीएम) के सदस्यों के साथ बैठक कर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि को और तेज करने के उपायों पर चर्चा की। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में ‘जीवन की सुगमता’ और ‘कारोबारी सुगमता’ को और बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न सुधारों पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री और उनकी सलाहकार परिषद के सदस्यों ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच आर्थिक वृद्धि को मजबूत करने के लिए कई विचारों एवं नीतिगत उपायों पर चर्चा की। सूत्रों ने बताया कि बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावों का भी आकलन किया गया। ईएसी-पीएम के सदस्यों ने इस दौरान मौजूदा आर्थिक स्थिति और भविष्य की चुनौतियों को लेकर अपना विश्लेषण भी प्रस्तुत किया। Edited by : Sudhir Sharma
51 की उम्र में भी सिंगल हैं 'टीवी क्वीन' एकता कपूर, पिता की इस एक शर्त ने बदल दी पूरी जिंदगी!
भारतीय टेलीविजन जगत का चेहरा बदलने वाली और 'कंटेंट क्वीन' के नाम से मशहूर प्रोड्यूसर एकता कपूर 7 जून को अपना 51वां जन्मदिन मना रही हैं। सुपरस्टार जितेंद्र और शोभा कपूर के घर जन्मीं एकता कपूर ने मनोरंजन की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया है, वहां तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं। 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से लेकर 'नागिन' और 'बड़े अच्छे लगते हैं' जैसे सुपरहिट शोज और 'द डर्टी पिक्चर' जैसी कल्ट फिल्में देने वाली एकता कपूर आज करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। लेकिन इतनी कामयाबी के बावजूद, फैंस के मन में हमेशा एक सवाल खटकता है— एकता कपूर ने आखिर 51 साल की उम्र में भी शादी क्यों नहीं की? ALSO READ: महेश भट्ट, प्रकाश झा और सद्गुरु बयां करेंगे अपने संघर्ष की कहानी, संग्राम सिंह लेकर आ रहे नया टॉक शो 'खुद से संग्राम' इसका जवाब किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दरअसल, एकता कपूर के सिंगल रहने के पीछे उनके पिता और गुजरे जमाने के दिग्गज अभिनेता जितेंद्र की एक ऐसी शर्त थी, जिसने एकता की पूरी जिंदगी का रुख ही बदल दिया। एकता कपूर ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने शादी न करने का फैसला क्यों लिया। एकता ने बताया था कि जब वह करीब 17-18 साल की थीं, तब वह दोस्तों के साथ घूमने और पार्टियां करने में व्यस्त रहती थीं। तब उनके पिता जितेंद्र ने उन्हें गंभीरता से समझाने के लिए एक बड़ी शर्त सामने रख दी। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें जितेंद्र ने एकता से कहा था— या तो तुम्हें शादी करनी होगी या फिर अभी से काम पर ध्यान देना होगा। तुम्हें इन दोनों में से किसी एक को ही चुनना होगा। पिता की यह बात एकता के दिल में घर कर गई। उस उम्र में एकता शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहती थीं। उन्होंने पिता की शर्त को एक चुनौती की तरह लिया और शादी के बजाय 'काम' को प्राथमिकता दी। पिता का यही डर उनके लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और उन्होंने महज 19 साल की उम्र में बालाजी टेलीफिल्म्स की शुरुआत कर दी। दोस्तों के तलाक देखकर शादी पर बदला नजरिया समय के साथ एकता कपूर अपने काम में इतनी व्यस्त हो गईं कि शादी का विचार कहीं पीछे छूट गया। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी शादी न करने का मलाल होता है? तो एकता ने बेहद व्यावहारिक जवाब दिया था। एकता ने कहा था, मैंने पिछले कुछ सालों में अपने कई करीबियों और दोस्तों के तलाक देखे हैं। मेरे वो दोस्त जिनकी शादी हो गई थी, आज उनमें से कई सिंगल हैं। मुझे लगता है कि शादी को लेकर मुझमें बहुत सब्र है और मैं सही समय का इंतजार कर सकती हूं, न कि सिर्फ समाज के दबाव में आकर शादी कर लूं। भले ही एकता कपूर ने शादी नहीं की, लेकिन उन्होंने मां बनने के सुख को कभी खुद से दूर नहीं होने दिया। साल 2019 में एकता कपूर ने सरोगेसी के जरिए अपने बेटे रवि कपूर का इस दुनिया में स्वागत किया। दिलचस्प बात यह है कि एकता की तरह ही उनके भाई तुषार कपूर भी सिंगल फादर हैं।
प्रोफेशनल रेसलिंग की दुनिया को जीतने और भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव दिलाने के बाद, कॉमनवेल्थ हैवीवेट गोल्ड मेडलिस्ट और एमएमए चैंपियन संग्राम सिंह अब एक नई चुनौती से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। यह मशहूर एथलीट जल्द ही एक दिल को छू लेने वाला डिजिटल टॉक शो शुरू करने जा रहा है, जो ग्लैमर की दुनिया से हटकर मानवीय संघर्ष की अडिग भावना पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह संग्राम सिंह की एक बेहद प्रेरणादायक पहल है। खेल के मैदान (रिंग) से निकलकर जिंदगी के मैदान में कदम रखना और मानवीय संघर्ष को सामने लाना, वाकई एक दमदार कदम है। A post shared by Sangram U Singh (@sangramsingh_wrestler) खुद से संग्राम बचपन में अर्थराइटिस और पैरालिसिस जैसी बीमारियों को हराकर एक वर्ल्ड-क्लास एथलीट और एमएमए चैंपियन बनने वाले संग्राम सिंह खुद संग्राम (संघर्ष) के मायने बहुत अच्छी तरह जानते हैं। उनका यह नया शो—जिसका नाम फिलहाल खुद से संग्राम—जीत के पीछे छिपे आंसुओं को दिखाने की इच्छा से पैदा हुआ है। दुनिया सिर्फ ताज, मेडल और चमक-दमक देखती है, लेकिन वे अक्सर उन घावों और कुर्बानियों को भूल जाते हैं जिनसे सफलता का रास्ता बनता है। ALSO READ: 'कॉकटेल 2' को हां बोलने से डर रही थीं रश्मिका मंदाना, फिल्म में दिखेगा अब तक का सबसे मॉडर्न और बोल्ड किरदार यह शो इसी दूरी को पाटने का काम करेगा, और उन दिग्गजों के जीवन के गहरे अनुभवों और असली जिंदगी के दर्द को सामने लाएगा, जिन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सफलता के शिखर को छुआ है। यह शो प्रेरणा की एक बेहतरीन पाठशाला होने का वादा करता है, जिसमें आध्यात्मिकता, खेल और शासन (governance) की दुनिया से जुड़ी हस्तियां शामिल होंगी। ये वो लोग हैं जिन्हें दुनिया आज उनकी ताकत और बुद्धिमत्ता के लिए जानती है, महेश भट्ट से लेकर, प्रकाश झा, सद्गुरु से लेकर पंडित श्री श्री रवि शंकर और राजनीति और खेल से ऐसे तमाम असल हिरे निकलेंगे जिनकी चमक आज दुनिया तो देख रही हैं पर उन अंधेरो के बारें में लोग नही जानते जो उनके जीवन का एक अहम हिस्सा रह चुका हैं। जी हां बहुत कम लोग उस आत्मा के अंधेरे दौर (कठिन समय) के बारे में जानते हैं जिससे वे गुजरे हैं। चकाचौंध से परे इस प्रोजेक्ट के पीछे के अपने दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए संग्राम सिंह ने कहा, हर सफलता की कहानी में संघर्ष का एक छिपा हुआ अध्याय होता है। लोग रोशनी तो देखते हैं, लेकिन उस आग को नहीं देखते जो उसे बनाने के लिए जली थी। यह शो दिल से रूह तक का एक सफर है। मैं उन लोगों की कहानियां सामने लाना चाहता हूँ जिन्होंने आज इस मुकाम तक पहुँचने के लिए अपने आंतरिक और बाहरी 'संग्राम' लड़े हैं। अब समय आ गया है कि हम सफलता के साथ-साथ संघर्ष का भी जश्न मनाएं। दिल को छू लेने वाला शो पारंपरिक इंटरव्यू के उलट, इस शो को एक बेहद निजी और आत्मीय बातचीत के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य 'रील लाइफ' के पीछे छिपी 'रियल लाइफ' को दिखाकर इंसानी दिल की गहराइयों को छूना है। कठिनाइयों की इन कहानियों को साझा करके, संग्राम सिंह उन लाखों दर्शकों के लिए उम्मीद की एक नई राह दिखाना चाहते हैं जो वर्तमान में अपनी जिंदगी की लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं। यह शो बहुत जल्द डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने की उम्मीद है।
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (07 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today 07 June horoscope in Hindi 2026 : करियर: आज आपको काम से थोड़ा ब्रेक लेने की जरूरत है। लव: पार्टनर के साथ किसी पारिवारिक मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। धन: पैतृक संपत्ति से लाभ होने के संकेत हैं। स्वास्थ्य: शाम को थकान महसूस हो सकती है। उपाय: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। ALSO READ: वर्ष 2026 में कब निकलेगी जगन्नाथ यात्रा, क्या रहेगा इस बार खास? 2. वृषभ (Taurus) करियर: यदि आप घर से काम कर रहे हैं, तो आज का दिन उत्पादक रहेगा। लव: प्रेम संबंधों में रोमांस बढ़ेगा। धन: आज खरीदारी पर खर्च आपके बजट के अंदर ही रहेगा। स्वास्थ्य: आंखों में जलन या भारीपन महसूस हो सकता है। उपाय: मंदिर में लाल चंदन का दान करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: नेटवर्किंग क्षेत्र के लिए अच्छा दिन है। लव: किसी पुराने मित्र के प्रति आकर्षण महसूस हो। धन: किसी को उधार दिया हुआ पैसा वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक शांति के लिए योग और प्राणायाम करें। उपाय: गाय को गुड़ और रोटी खिलाएं। 4. कर्क (Cancer) करियर: करियर को लेकर मन में कुछ दुविधा रह सकती है। लव: पार्टनर की भावनाओं को समझने की कोशिश करें। धन: अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य: पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। उपाय: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। 5. सिंह (Leo) करियर: कार्यस्थल पर नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। लव: लव लाइफ शानदार रहेगी। धन: आज धन आगमन के नए स्रोत खुलेंगे। स्वास्थ्य: आउटडोर एक्टिविटीज में हिस्सा लेंगे। उपाय: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: अधूरा काम पूरा करने के लिए आज का दिन सही है। लव: जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बना रहेगा। धन: बाहर के क्षेत्र में आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरतें। स्वास्थ्य: पैरों में दर्द में मालिश से लाभ होगा। उपाय: किसी गरीब को लाल फल दान करें। ALSO READ: गुरु का कर्क राशि में महागोचर, 2 राशियों के लिए अशुभ, 3 पर मिलाजुला प्रभाव, करें 5 उपाय 7. तुला (Libra) करियर: नौकरीपेशा लोगों को कल की तैयारी आज ही कर लेनी चाहिए। लव: अविवाहितों के लिए विवाह के नए रिश्ते आ सकते हैं। धन: शेयर बाजार में निवेश करने वाले जातकों को आज लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: अधूरी नींद स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। उपाय: तांबे का एक टुकड़ा बहते जल में प्रवाहित करें। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: कार्यक्षेत्र में चुनौतियां आ सकती हैं। लव: पार्टनर के साथ विश्वास में कमी आ सकती है। धन: आज धन संचय करने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है। स्वास्थ्य: माइग्रेन या सिरदर्द परेशान कर सकता है। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: करियर के क्षेत्र से आज कोई शुभ समाचार मिल सकता है। लव: प्रेम संबंधों में गहराई आएगी। धन: अचानक आय के नए रास्ते खुलेंगे। स्वास्थ्य: आज ताजे फलों का रस पिएं। उपाय: मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं। 10. मकर (Capricorn) करियर: व्यापार में कुछ नए बदलाव करने का विचार करेंगे। लव: परिवार के साथ डिनर का प्रोग्राम बन सकता है। धन: आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। स्वास्थ्य: घुटनों के दर्द में राहत मिलेगी। उपाय: शिव मंदिर में घी का दीपक जलाएं। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: नई स्किल्स सीखने का मन बनेगा। लव: लव लाइफ में कुछ नया और रोमांचक होगा। धन: भविष्य हेतु अपनी बचत को सुरक्षित रखें। स्वास्थ्य: मानसिक रूप से थोड़ा तनाव महसूस कर सकते हैं। उपाय: चंदन का तिलक लगाएं। 12. मीन (Pisces) करियर: करियर बनाने के इच्छुक लोगों को नये अवसर मिल सकते हैं। लव: लव पार्टनर आपकी हर बात को प्राथमिकता देगा। धन: किसी से रुका हुआ पैसा मिल सकता है। स्वास्थ्य: माइग्रेन की समस्या हो सकती है। उपाय: हल्दी की गांठ को पीले कपड़े में बांधकर अपने पास रखें। ALSO READ: 12 साल बाद बना हंस महापुरुष राजयोग, अगले कुछ महीने इन 5 राशियों पर होगी पैसों की बारिश
कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर 7.30 बजे आ गए थे, लेकिन बाहर आने में डेढ़ घंटे से ज्यादा वक्त लगा। सुबह 9 बजे के बाद बाहर निकले। सीधे गाड़ी में बैठे और जंतर-मंतर पहुंच गए। यहां पार्टी का पहला प्रोटेस्ट होना था। 5 अप्रैल, 2011 इसी जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने आमरण अनशन से करप्शन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। तब नारे लगे थे- मैं भी अन्ना। इस बार आंदोलन का मकसद एजुकेशन सिस्टम में बदलाव है। नारा है- मैं हूं कॉकरोच। पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.2 करोड़ फॉलोअर हैं। जंतर-मंतर पर उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं आई, लेकिन पहली बार पार्टी जमीन पर दिखाई दी। सवाल है कि पार्टी को प्रोटेस्ट से क्या हासिल हुआ… 1. मीम पार्टी का टैग हटा, पेपर लीक का मुद्दा दोबारा ट्रेंड में लाए 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं।’ इसी से कॉकरोच जनता पार्टी ऑनलाइन मूवमेंट के तौर पर शुरू हुई। हर दिन लाखों लोग जुड़ने लगे। कहा गया कि पार्टी सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित है। 6 जून के प्रोटेस्ट से पार्टी ये साबित कर गई कि वो जमीन पर भी मौजूद है। इस प्रोटेस्ट में हर उम्र के लोग शामिल हुए। देश के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग आए। पार्टी जमीन पर भले बहुत भीड़ नहीं जुटा पाई, लेकिन सोशल मीडिया पर NEET और पेपर लीक के मुद्दे को फिर से ट्रेंड करा दिया। 2. अभिजीत ही पार्टी का चेहरा, सबसे ज्यादा एक्टिव रहे स्टेज पर सबसे ज्यादा अभिजीत दीपके ही एक्टिव दिखे। हालांकि चीफ स्पोक्सपर्सन सौरव दास और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी कुछ देर स्पीच दी। अभिजीत के टारगेट पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान रहे। उन्होंने मंच से शिक्षा मंत्री को रिजाइन करने का अल्टीमेटम दिया। ऐसा नहीं होने पर अगले शनिवार को दोबारा प्रोटेस्ट की बात कही। 3. अन्ना आंदोलन जैसी कोशिश, लेकिन उतने असरदार नहीं सीनियर रिपोर्टर निखिल वाथ कहते हैं कि लोग इस प्रदर्शन में अन्ना आंदोलन की झलक ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि हालात में कुछ समानताएं हैं। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, NEET और CBSE एग्जाम में गड़बड़ी जैसे आरोप लग रहे हैं। अगले चुनाव में 3 साल बचे हैं। अन्ना आंदोलन के वक्त भी चुनाव में तीन साल बाकी थे। लोगों में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा था। फिर भी ये प्रोटेस्ट अन्ना आंदोलन जितना असरदार नहीं है। आगे क्या होगा…निखिल कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुई। कुछ लोग प्रोटेस्ट का विरोध करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया ताकि टकराव न हो। प्रोटेस्ट में किसी भी तरह का ड्रामा नहीं हुआ, जिससे लोगों के बीच इसकी रिकॉल वैल्यू कम हो सकती है। अगर शनिवार को दोबारा प्रदर्शन होता है, तो और भीड़ जुटानी होगी, नहीं तो आंदोलन लोगों के जेहन से जल्दी ही उतर सकता है।’ पार्टी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां 1. फॉलोअर्स को वोटर्स में बदलना जंतर-मंतर की कम भीड़ ने साबित किया कि पार्टी को अभी सोशल मीडिया से निकलकर जमीनी स्तर पर ब्लॉक और जिला कमेटियां बनानी होंगी। पार्टी के पास पॉलिटिक्स का बिल्कुल अनुभव नहीं है। सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की ताकत तो है, लेकिन सवाल है कि अगर वे चुनाव में उतरते हैं तो क्या इसे वोट बैंक में बदल पाएंगे। 2. अन्ना आंदोलन जैसा मददगार कैडर नहीं 2011 के अन्ना आंदोलन की कामयाबी के पीछे अलग-अलग संगठनों का समर्थन था। कॉकरोच जनता पार्टी के पास कैडर नहीं है। उसका पूरा आधार क्लिक एक्टिविज्म पर टिका है। इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स होना डिजिटल उपलब्धि तो है, लेकिन इस वर्चुअल कैडर के पास न लीडर हैं और न ही बूथ मैनेजमेंट की कोई समझ। 3. सिंगल पॉइंट एजेंडा नहीं कामयाब राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन की पहली शर्त सिंगल पॉइंट एजेंडा है। अन्ना आंदोलन का एक साफ मकसद था- लोकपाल बिल। इससे लोग जुड़ गए। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में आए लोगों में कोई मणिपुर की बात कर रहा था, कोई टैक्स और पानी के संकट की, तो कोई करप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर की। पार्टी को स्पष्ट राष्ट्रीय नीति और एजेंडा सामने रखना होगा। प्रोटेस्ट में पहुंचे लोगों की बातहमने प्रोटेस्ट में आए लोगों से समझने की कोशिश की कि उन्हें इससे क्या उम्मीदें हैं। चेहरे पर कॉकरोच का मास्क लगाकर आए गोल्डी 30 साल के हैं। दिल्ली के राजौरी गार्डन में रहते हैं। आंदोलन में आने की वजह बताते हैं, ‘22 लाख बच्चे नीट का एग्जाम दे रहे थे, पेपर लीक हो गया, SSC में 50 लाख बच्चे एग्जाम दे रहे थे, CBSE की साइट कोलेप्स हो गई। सरकार कर क्या रही है।’ ‘अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए’ दिल्ली के तीमारपुर से आए 68 साल के बुजुर्ग बोले, ‘हमारे बच्चों के साथ बार-बार खिलवाड़ हो रहा है। इसका हमें भी दर्द होता है। आप उन्हें कीड़े-मकोड़े बोल रहे हो। ये बोलने का अधिकार किसने दिया। इसलिए जरूरी है कि हम जवाब दें। मैं अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं कि बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए।’ असम से आईं जून अभी दिल्ली में रहती हैं। वे कहती हैं, ‘नॉर्थ ईस्ट में मणिपुर जल रहा है। सरकार कुछ नहीं कर रही है। वहां के युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है। यहां भी भविष्य दांव पर है। कॉकरोच जनता पार्टी का अभी जमीन पर तो असर नहीं दिख रहा है, लेकिन जिस तरह ये सोशल मीडिया पर हैं, उससे लग रहा है कि बदलाव होगा।’ …………………………. प्रोटेस्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा, अगले शनिवार फिर जंतर-मंतर पर जुटने का ऐलान NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा था कि मंत्री आज शाम 5 बजे तक इस्तीफा दें, नहीं तो पूरे देश में प्रदर्शन किया जाएगा। अगले शनिवार, यानी 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
FIFA World Cup में भारत का कौन सा राज्य कर रहा है किस देश का समर्थन
भारत भले ही फीफा विश्व कप में नहीं खेल रहा हो लेकिन देश में फुटबॉल के प्रति जुनूनी इलाकों ने इस खूबसूरत खेल से लंबी दूरी का रिश्ता कायम रखते हुए खुद को उत्तरी अमेरिका 2026 के रंग में रंग लिया है। लंबी दूरी का रिश्ता इसलिए, क्योंकि भारत इस समय विश्व कप के करीब कहीं भी नहीं है, लेकिन फुटबॉलप्रेमियों की उत्सुकता में यह बाधा नहीं बनने वाला। क्रिकेट के दीवाने देश में फुटबॉलप्रेमियों के ये छोटे इलाके अपनी पसंदीदा टीमों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल टीम को गोवा का एकजुट समर्थन है लेकिन नेमार की ब्राजील और लियोनेल मैसी की अर्जेंटीना के लिए पूर्व और दक्षिण में प्रशंसक बंटे हुए हैं। पुर्तगालियों की पूर्व कॉलोनी गोवा में ब्राजील को लेकर भी काफी उत्साह है। प्रशंसकों ने ग्रामीण स्तर के खेल क्लबों में बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगा दी हैं, जो रूस में होने वाले मुकाबलों को देखने के लिए अपनी रातें यहां बिताएंगे। गोवा फुटबॉल संघ के अध्यक्षकैटिनो फर्नाडिसने कहा कि तटीय राज्य में विश्व कप फुटबॉल मैच देखने के लिए बड़ी स्क्रीन लगाई गई है। 1 महीने के लिए फुटबॉल का बुखार काफी तेज रहेगा।इस तटीय क्षेत्र में जहां पुर्तगाल के झंडे लहराना आम दृश्य होगा, तो वहीं गोम्स की पसंदीदा टीम नाइजीरिया है, जो अर्जेंटीना, क्रोएशिया और आइसलैंड के साथ है। उन्होंने कहा कि मैं छुपी रुस्तमदक्षिण अफ्रीकाका समर्थन कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि विश्व कप एक बार के लिए अफ्रीका आना चाहिए। पूर्व भारतीय कप्तान ब्रुनो कौतिन्हो ने कहा कि गोवा में माहौल विश्व कप फुटबॉल के लिए काफी गर्म है। हर प्रशंसक अपने पसंदीदा स्थल पर मैच देख रहा होगा। क्लब हाउस ने बारिश के कारण इंडोर स्क्रीन लगाई है, वे इसे खुली जगह पर नहीं लगा सकते थे। केरल के प्रशंसकों ने उत्तरी क्षेत्र में मलाबार में फुटबॉल प्रेम को अपने पसंदीदा खिलाड़ी के कटआउट सड़कों पर लगाकर दिखा रहे हैं। मैसी सभी प्रशंसकों के पसंदीदा हैं और उनके कटआउट मल्लपुरम, कोझीकोड और कासारागोड में देखे जा सकते हैं।
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न
नई दिल्ली। पर्यावरण एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग तो बस शुरुआत है और असली मकसद शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है। नीट, सीयूईटी, सीबीएसई और एसएससी जीडी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को […] The post जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न appeared first on Sabguru News .
पटना। राजधानी पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में खान ग्लोबल स्टडीज के मुख्य द्वार के पास पिछले 2 जून को हुई कथित फायरिंग मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद संस्थान से जुड़े दो गार्डों को आज पटना की निचली अदालत ने जमानत देने से इंकार कर दिया वहीं कचहरी में पहुंचने की अफवाहों के […] The post अफवाहों के बीच कोर्ट में नहीं पहुंचे खान सर, अगली सुनवाई के दिन अग्रिम जमानत के लिए दाखिल करेंगे अर्जी appeared first on Sabguru News .
सीजेपी ने किशोरों को किया आकर्षित, जीवन के पहले प्रदर्शन में पहुंचे युवा
नई दिल्ली। सोशल मीडिया के जरिये सामने आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से नीट-पेपर लीक को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में सैकड़ों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए। हाथ में पोस्टर-पर्चे लिये कुछ लोगों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की, तो कुछ ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी […] The post सीजेपी ने किशोरों को किया आकर्षित, जीवन के पहले प्रदर्शन में पहुंचे युवा appeared first on Sabguru News .
बेटी से रेप वाले कलयुगी पिता को 20 वर्षों की कठोर कैद की सजा
पटना। बिहार की राजधानी पटना की एक विशेष अदालत ने नाबालिग पुत्री के साथ दुष्कर्म करने के जुर्म में शनिवार को उसके पिता को बीस वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ पचास हजार रूपए का जुर्माना भी किया। दुष्कर्म और बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के मामलों की त्वरित […] The post बेटी से रेप वाले कलयुगी पिता को 20 वर्षों की कठोर कैद की सजा appeared first on Sabguru News .
अन्नाद्रमुक के 4 पूर्व मंत्रियों और कई पूर्व विधायकों ने छोड़ी पार्टी, विजय की टीवीके में हुए शामिल
चेन्नई। तमिलनाडु में चुनावों में अपने इतिहास में पहली बार तीसरे स्थान पर खिसकने और लगातार चुनावी हार का सामना करने के बाद, तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक में टूट का सिलसिला जारी है। शनिवार को पार्टी के चार लोकप्रिय पूर्व मंत्रियों और कई पूर्व विधायकों ने अन्नाद्रमुक का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री विजय की […] The post अन्नाद्रमुक के 4 पूर्व मंत्रियों और कई पूर्व विधायकों ने छोड़ी पार्टी, विजय की टीवीके में हुए शामिल appeared first on Sabguru News .
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, अलवर के दो युवकों की मौत
अलवर। राजस्थान में दौसा जिले के बांदीकुई थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर शनिवार को एक वाहन और कार की टक्कर से दो युवकों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हादसा खटीक के तिबारे के पास एक्सप्रेस-वे के पिलर संख्या 155.8 के निकट हुआ। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे राजमार्ग गश्ती […] The post दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, अलवर के दो युवकों की मौत appeared first on Sabguru News .
कॉकरोच जनता पार्टी के पहले जमीनी प्रोटेस्ट की इकलौती मांग है- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो! NEET पेपर लीक को 5 हफ्ते और CBSE मार्किंग में गड़बड़ी को 3 हफ्ते हो गए। विपक्षी पार्टियां भी लगातार शिक्षामंत्री को हटाने की मांग कर रही हैं। लेकिन क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा? फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा। आज के एक्सप्लेनर में पैटर्न, संकेत और एक्सपर्ट्स के हवाले से पूरी कहानी… 4 संकेतों से समझिए… 1. बीजेपी सरकार में इस्तीफे नहीं होते 2. इस्तीफे का राजनीतिक मतलब निकलेगा कि सरकार से गलती हुई 3. धर्मेंद्र प्रधान की ‘डिलीवरी लीडर’ वाली छवि, PMO के करीबी 4. इस्तीफे की जगह सिस्टम सुधारने का नैरेटिव सरकार ये नैरेटिव बना रही है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जगह, सिस्टम को सुधार रहे हैं। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं… 7 जुलाई 2021 से धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री हैं। राहुल गांधी का कहना है कोई एग्जाम ईमानदारी से नहीं हुआ। 1 करोड़ बच्चों पर असर पड़ा है। पूरी शिक्षा व्यवस्था बर्बाद कर दी है। अभिजीत दीपके ने कहा- ‘शिक्षामंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, अब तक 5 स्टूडेंट सुसाइड कर चुके हैं।’ धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में 5 बड़े एग्जाम में गड़बड़ियों के आरोप लगते हैं… 1. NEET 2024 में गड़बड़ी, पेपर लीक 2. UGC NET 2024 में गड़बड़ी संसद की स्थायी समिति की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में NTA के जरिए हुए 14 एग्जाम में से कम से कम 5 में पेपर लीक, पेपर में गलतियां, रिजल्ट में देरी जैसी दिक्कतें हुईं। UGC-NET, CSIR-NET और NEET-PG के एग्जाम रोकने पड़े और CUET-UG और PG का रिजल्ट आने में देरी हुई। 3. NEET 2026 पेपर लीक 4. CBSE 12th बोर्ड मार्किंग में गड़बड़ी 5. CUET 2026 में गड़बड़ी चर्चा है कि 15 जून के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल और बीजेपी के संगठन में बदलाव होने वाला है। सरकार के सामने 2 विकल्प हैं… ऐसा पहले भी हो चुका है… नवंबर 2014 में सुरेश प्रभु को केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में कई रेल हादसे हुए, जिनको लेकर विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग की। अगस्त 2017 में प्रभु ने इस्तीफे पेशकश भी की। मोदी सरकार में ऐसा करने वाले प्रभु इकलौते मंत्री हैं। हालांकि सरकार ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया। एक महीने बाद उन्हें कॉमर्स मिनिस्ट्री में शिफ्ट कर दिया गया। वे 2 साल तक मंत्री रहे। 2019 के बाद वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाए। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी के पास थी। तब इस मंत्रालय का नाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय था। कुर्सी संभालते ही स्मृति सुर्खियों में आ गईं। वजह उनकी डिग्री और रोहित वेमुला सुसाइड मामला और JNU में 'भारत विरोधी नारे' जैसे मामलों में उनके बयान। विपक्षी दलों से लेकर सोशल मीडिया तक स्मृति का इस्तीफा मांगे जाने लगा। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। 2016 में कैबिनेट में बदलाव हुआ, तो स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया। बाद में उन्होंने महिला बाल विकास, सूचना एवं प्रसारण, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालाय मिले, लेकिन 2024 में वे मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाईं। मई 2014 से अब तक मोदी सरकार में 4 बार बड़े बदलाव हुए हैं, जिनमें मंत्रियों के इस्तीफे या विभाग बदले गए और नए चेहरे जोड़े गए। सबसे बड़ा बदलाव जुलाई 2021 में हुआ, जब 12 सीनियर कैबिनेट और राज्य मंत्रियों को हटाया गया था। इनमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जैसे बड़े नाम शामिल थे। इसी बदलाव में धर्मेंद्र प्रधान को प्रमोट कर शिक्षा मंत्री बनाया गया था। रशीद किदवई बताते हैं, ‘मोदी सरकार ऐसी कोई नजीर नहीं बनाना चाहती है कि दबाव में मंत्री का इस्तीफा हुआ। अगर धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, तो सरकार इसे रूटीन प्रोसेस की तरह पेश कर सकती है। कहा जा रहा है कि कैबिनेट रिशफल हो सकता है। कुछ लोग संगठन में जाएंगे, कुछ लोग सरकार में आएंगे।’ ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:क्या कॉकरोच पार्टी का राजनीति में उतरना तय, अभिजीत दीपके बोले- लड़ाई लंबी चलेगी; 9 सवालों के जवाब कॉकरोच जनता पार्टी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने X पर लिखा- हम कीड़े-मकोड़े, लेकिन लड़ने में सक्षम। फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी कहा कि ये लड़ाई लंबी चलेगी। 20 दिन पहले चीफ जस्टिस के बयान से पैदा हुए इस व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन ने कुछ घंटों में बीजेपी से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स जुटा लिए थे। अब ये इंटरनेट से निकलकर सड़क पर उतर गया है। पूरी खबर पढ़ें…
'गवर्नर' के जरिए युवाओं को संदेश: मनोज बाजपेयी बोले- सपने देखिए, नेतृत्व की जिम्मेदारी उठाइए
मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म 'गवर्नर' को लेकर दर्शकों के बीच एक्साइटमेंट लगातार बढ़ती जा रही है, क्योंकि यह फिल्म अब अपनी रिलीज के बेहद करीब है। भारत के आर्थिक इतिहास के एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय (1991 के वित्तीय संकट) पर आधारित इस फिल्म ने अपने दमदार ट्रेलर और दिलचस्प कहानी से पहले ही सोशल मीडिया पर काफी बज बना दिया है। इसी उत्सुकता को और बढ़ाते हुए, मेकर्स ने एक नया वीडियो जारी किया है। यह एक स्पेशल वीडियो सीरीज का हिस्सा है, जिसमें मनोज बाजपेयी 'गवर्नर' के अपने किरदार से जुड़े कुछ जरूरी सबक और विचार साझा करते नजर आ रहे हैं। A post shared by Sunshine Pictures (@sunshinepicturesofficial) वीडियो में, मनोज एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में भारत के सफर पर बात करते हैं और याद दिलाते हैं कि साल 1990 में देश की हकीकत आज से बिल्कुल अलग थी। फिल्म के मुख्य किरदार और आज के युवाओं के बीच एक समानता दिखाते हुए, वे स्टूडेंट्स से लगातार अलर्ट रहने, जिम्मेदार बनने और देश के भविष्य को संवारने के लिए हमेशा तैयार रहने की अपील करते हैं। ALSO READ: 'पेड्डी' बनी बॉक्स ऑफिस चैंपियन, 2 दिनों में किया इतने करोड़ का कलेक्शन अपने संदेश में उन्होंने कहा, मैं सभी फाइनेंस, इकोनॉमिक्स, मैनेजमेंट और UPSC के स्टूडेंट्स से यह आग्रह करता हूँ कि आप यह समझें कि आप ही इस देश का भविष्य हैं। आपको भी गवर्नर की तरह हमेशा अलर्ट और चौकन्ना रहना चाहिए। गवर्नर ने उस वक्त वो देख लिया था जो बाकी लोग नहीं देख पा रहे थे, और इसी वजह से भारत को 1991 में आर्थिक आजादी मिली। आप आने वाले कल के गवर्नर बनिए। भारत का भविष्य आपके हाथों में पूरी तरह सुरक्षित है। इस खास वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मेकर्स ने लिखा, मनोज बाजपेयी बता रहे हैं कि क्यों फिल्म 'गवर्नर' इतिहास के एक ऐसे चैप्टर को वापस लेकर आ रही है जिसे हर पीढ़ी को जानना चाहिए। अपॉइंटमेंट विद द गवर्नर, चैप्टर 1: माई डियर स्टूडेंट्स। 'गवर्नर' 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। सच्ची और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्म 'गवर्नर' भारत के इतिहास के उस निर्णायक अध्याय को पर्दे पर लाती है, जब देश को एक अभूतपूर्व वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा था। यह वो दौर था जिसने पूरे देश के सब्र और हौसले की परीक्षा ली थी। भारी अनिश्चितता और बेहद नाजुक फैसलों के उस दौर की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म, एक ऐसे दृढ़निश्चयी गवर्नर के सफर को दिखाती है, जिसे देश को इस मुश्किल वक्त से बाहर निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मनोज बाजपेयी का यह दमदार अभिनय उन फैसलों के पीछे छिपे भारी वजन, जिम्मेदारी और उनके पक्के इरादे को बखूबी बयां करता है, जिन्होंने आगे चलकर भारत के भविष्य को एक नई दिशा दी। दमदार और झकझोर देने वाले डायलॉग्स से सजी यह बेमिसाल कहानी 'सनशाइन पिक्चर्स' के बैनर तले आपके बीच आ रही है। इस फिल्म का निर्देशन चिन्मय मांडलेकर ने किया है। फिल्म 12 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
Weekly Horoscope June 2026: 08 से 14 जून तक कैसा रहेगा आपका सप्ताह? शॉर्ट में पढ़ें साप्ताहिक राशिफल
Horoscope June 08 to June 14 2026: 08 जून से 14 जून तक का मेष से लेकर मीन राशि तक का साप्ताहिक राशिफल। यह सप्ताह निवेश, व्यवसाय और करियर के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए समय निकालें। साप्ताहिक राशिफल के माध्यम से जानें आप घर, परिवार और कार्यक्षेत्र में किस तरह के बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
'पेड्डी' बनी बॉक्स ऑफिस चैंपियन, 2 दिनों में किया इतने करोड़ का कलेक्शन
महीनों तक सोशल मीडिया और फैंस के बीच भारी बज बनाए रखने के बाद, भारतीय सिनेमा की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक राम चरण स्टारर 'पेड्डी' ने दुनिया भर के सिनेमाघरों में एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। फिल्म को दर्शकों का इतना शानदार और जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है कि इसने इस साल की सबसे बड़ी ओपनिंग्स में से एक दर्ज करा ली है। अपनी इस धमाकेदार शुरुआत के साथ ही 'पेड्डी' इस साल की सबसे बड़ी बॉक्स ऑफिस कामयाबियों में से एक बनकर उभरी है। राम चरण, जाह्नवी कपूर और जगपति बाबू स्टारर भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, 'पेड्डी' ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर सुनामी ला दी है। महीनों के लंबे इंतजार, चार्टबस्टर गानों और दमदार ट्रेलर के बाद, इस फिल्म ने दुनिया भर के दर्शकों के दिलों को पूरी तरह से जीत लिया है। ALSO READ: 'पेड्डी' में जाह्नवी कपूर के किरदार को लेकर मचा बवाल, डायरेक्टर को मांगनी पड़ी माफी, फिल्म में होगा बदलाव रिलीज के महज दो दिनों के भीतर ही पेड्डी ने कमाई के नए मील के पत्थर स्थापित कर दिए हैं। फिल्म ने वर्ल्डवाइड 181.8 करोड़ रुपए का छप्परफाड़ ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है, जो इसे इस साल की सबसे बड़ी ओपनिंग्स में से एक बनाता है। खास बात यह है कि पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ की बदौलत फिल्म के हिंदी वर्जन की कमाई में दूसरे दिन शानदार उछाल देखने को मिला है और सभी शोज़ में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। अब जब वीकेंड शुरू हो चुका है और कई शहरों से शोज़ के हाउसफुल होने की खबरें आ रही हैं, तो माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह फिल्म और भी बड़े रिकॉर्ड बनाएगी। फिल्म में राम चरण के खतरनाक ट्रांसफॉर्मेशन और दमदार परफॉर्मेंस की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है। 'आरआरआर' के बाद 'पेड्डी' राम चरण के करियर की दूसरी 100 करोड़ रुपए की ओपनिंग वाली फिल्म बन गई है। इसी के साथ वे दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर एक से ज्यादा बार 100 करोड़ की ओपनिंग देने वाले भारत के केवल पांचवें एक्टर बन चुके हैं। A post shared by PEDDI (@peddimovie) इस ऐतिहासिक कामयाबी को सेलिब्रेट करते हुए मेकर्स ने सोशल मीडिया पर लिखा, #Peddi ने 2 दिनों में वर्ल्डवाइड 181.8 करोड़+ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। बॉक्स ऑफिस चैंपियन #PEDDI सिनेमाघरों पर राज कर रही है। अपनी टिकटें अभी बुक करें। बुची बाबू सना द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म 'पेड्डी' में राम चरण मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ फिल्म में शिवा राजकुमार, जाह्नवी कपूर, दिव्येंदु शर्मा और जगपति बाबू जैसे दमदार कलाकार अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं, जो इस फिल्म के स्केल और इसके इम्पैक्ट को एक अलग ही लेवल पर ले जाते हैं।
15 साल के वैभव सूर्यवंशी करेंगे भारतीय सीनियर टीम में अपना T-20I डेब्यू
15 साल के वैभव सूर्यवंशी को दो लगातार इंडियन प्रीमियर लीग संस्कण में धुआंधार बल्लेबाजी करने का इनाम मिला। अंडर 19 विश्वकप विजेता टीम के उपकप्तान वैभव को आयलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टी-20 अंतरराष्ट्रीय प्रारुप में भारतीय सीनियर टीम में मौका मिला। महज 15 वर्ष और 71 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बन गए हैं। उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का वर्षों पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।हालांकि सचिन तेंदलुकर के जमाने में टी-20 अंतरराष्ट्रीय प्रारुप नदारद था लेकिन अगर वैभव सूर्यवंशी का पदार्पण होता है तो वह निश्चित ही किसी भी प्रारुप में डेब्यू करने वाले सबसे युवा भारतीय क्रिकेटर बन जाएंगे। वैभव सूर्यवंशी का चयन लगभग तय माना जा रहा था। इस युवा बल्लेबाज ने 2026 आईपीएल सत्र में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम किया। इस दौरान उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक जड़े तथा 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी कर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा।इसके अलावा सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट (224) के कारण उन्हें सुपर स्ट्राइकर, टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के कारण उभरते हुए खिलाड़ी का अवार्ड भी दिया गया। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल सबसे कम गेंदों में 1000 रन पूरे किए। उन्होंने 440 गेंदें खेलीं, जो सबसे तेज हैं।आईपीएल 2026 में सूर्यवंशी ने कुल 135 बाउंड्री लगाईं, जिसमें रिकॉर्ड 72 छक्के शामिल हैं, जो किसी भी टी 20 टूर्नामेंट में किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा लगाए गए सबसे ज़्यादा छक्के हैं। भारतीय टीम 26 और 28 जून को आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलेगी। इसके बाद एक से 11 जुलाई तक इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला में हिस्सा लेगी। Presenting #TeamIndia 's T20I squads for the tours of England & Ireland 2026 #ENGvIND | #IREvIND pic.twitter.com/f84kSSAIDf — BCCI (@BCCI) June 6, 2026 आयरलैंड और इंग्लैंड टी20 श्रृंखला के लिए भारतीय टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उपकप्तान), नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव और वैभव सूर्यवंशी। एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम : श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उपकप्तान), नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और वैभव सूर्यवंशी।
राबड़ी देवी ने लौटाई अपनी सरकारी सुरक्षा, आवास पर लगा कार्यकर्ताओं का तांता
पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने शनिवार अपनी सरकारी सुरक्षा व्यवस्था वापस करने का निर्णय ले कर प्रदेश की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार के उस निर्णय का प्रतिरोध किया है, जिसके तहत लालू-राबड़ी परिवार के सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की गई थी। राबड़ी देवी ने यह प्रतिरोध बिहार सरकार के […] The post राबड़ी देवी ने लौटाई अपनी सरकारी सुरक्षा, आवास पर लगा कार्यकर्ताओं का तांता appeared first on Sabguru News .
श्रीगंगानगर में ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक युवक की मौत, एक घायल
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के राजियासर थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हाे गया। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि गुरुवार रात करीब 10 बजे राष्टीय राजमार्ग 62 पर एक फैक्ट्री के नजदीक एक ट्रैक्टर ट्रॉलर ने विपरीत दिशा से आ रही मोटरसाइकिल […] The post श्रीगंगानगर में ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक युवक की मौत, एक घायल appeared first on Sabguru News .
भारत को युवा बनाए रखने के लिए परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करना अनिवार्य : प्रांत प्रचारक बाबूलाल
जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने कहा कि भारत को युवा बनाए रखने के लिए परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करना अनिवार्य है। परिवार में कम से कम तीन संतानें होनी चाहिए और हमें संयुक्त परिवारों की अपनी पुरातन मर्यादाओं को पुनर्जीवित करना होगा ताकि हमारी संस्कृति सुरक्षित रहे। सामाजिक समरसता का आह्वान […] The post भारत को युवा बनाए रखने के लिए परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करना अनिवार्य : प्रांत प्रचारक बाबूलाल appeared first on Sabguru News .
कोटा में चंद्रसेल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या
कोटा। राजस्थान में कोटा शहर के बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में चंद्रेसल मठ में शुक्रवार देर रात अज्ञात लोगों ने मठ के महंत देवानंद महाराज की धारदार हथियारों से हत्या कर दी। पुलिस अधीक्षक (सिटी) तेजस्वी गौतम ने शनिवार को बताया कि हमले के बाद महंत लहुलुहान हाे गए। आसपास के ग्रामीणों ने उन्हें एमबीएस अस्पताल […] The post कोटा में चंद्रसेल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या appeared first on Sabguru News .
कॉकरोच जनता पार्टी इंटरनेट से सड़क पर उतर चुकी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों लोग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे। कॉकरोच पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अकाउंट ब्लॉक होने पर कहा भी था- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’ बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। बिना नर के भी बच्चा पैदा कर सकते हैं। भास्कर एक्सप्लेनर में इस वक्त के सबसे पॉपुलर प्राणी कॉकरोच की कहानी... **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा **** Reference: https://www.researchgate.net/publication/395390819_The_Cockroach_An_Analysis_of_Resilience_through_Biomathematical_Calculus https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9753028/ https://academic.oup.com/mbe/article/35/4/1035/4951729?login=false https://pursuit.unimelb.edu.au/articles/would-cockroaches-really-survive-a-nuclear-apocalypse Cockroach Fossil: https://www.digitalatlasofancientlife.org/ve/living-fossils/insects-and-arachnids/ Book:Cockroaches: Ecology, Behavior and Natural History by William J. Bell, Louis M. Roth and Christine A. Nalepa------ ये खबर भी पढ़िए... जमीन पर उतर रही कॉकरोच पार्टी; कौन-कौन साथ, आगे का रोडमैप, सरकार कैसे निपटेगी; 9 सवालों में पूरी कहानी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत पहुंचने के बाद करीब एक घंटे एयरपोर्ट केअंदर रहे। प्रोटेस्ट की परमिशन मिलने के बाद अभिजीत और CJP के समर्थक जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं। बड़ी संख्या में फोर्सेज भी तैनात हैं।
बाडमेर जिले में भू-अभिलेख निरीक्षक 18000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट
बाडमेर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बाड़मेर जिले में सेडवा तहसील में भू-अभिलेख निरीक्षक क्षेत्र सारला धनराज को 18 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि धनराज को शुक्रवार देर रात गिरफ्तार किया गया। गुप्ता ने बताया कि एसीबी की […] The post बाडमेर जिले में भू-अभिलेख निरीक्षक 18000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
अमेठी में कच्ची दीवार के मलबे में दब कर मां-बेटी की मौत
अमेठी। अमेठी में शनिवार की सुबह एक दिल को झकझोर देने वाला हादसा सामने आया है। जहां रात में सो रहे दलित परिवार पर कच्ची दीवार गिर गई और उसके मलबे में दब कर मां-बेटी की मौत हो गई। साथ में सो रहे एक अन्य मासूम बच्चे की स्थिति नाजुक बनी हुई है जिसका इलाज […] The post अमेठी में कच्ची दीवार के मलबे में दब कर मां-बेटी की मौत appeared first on Sabguru News .
पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक रवींद्रनाथ चटर्जी के कार्यालय पर आक्रोशित भीड़ ने हमला किया
दुर्गापुर। पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले में आक्रोशित भीड़ ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय पर हमला किया और पुलिस की मौजूदगी में भारी मात्रा में सरकारी राहत का सामान बरामद किया। बताया जाता है कि यह कार्यालय के पांडवेश्वर के पूर्व विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के नियंत्रण में है। भीड ने कटवा के पूर्व विधायक […] The post पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक रवींद्रनाथ चटर्जी के कार्यालय पर आक्रोशित भीड़ ने हमला किया appeared first on Sabguru News .
केप टाउन की कड़ाके की ठंड के बीच ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की शूटिंग, ओरी ने दिया मज़ेदार अपडेट
ओरी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर केप टाउन में चल रही 'खतरों के खिलाड़ी 15' की शूटिंग सेट से एक मज़ेदार झलक साझा की है। गौरतलब है कि सुबह करीब 6 बजे शूट किए गए इस वीडियो में ओरी ठंडे मौसम पर प्रतिक्रिया देते नज़र आ रहे हैं। सेट पर पॉप-टार्ट बनाते हुए ओरी ने कैमरे के सामने बार-बार सांस छोड़कर हवा में बन रहे धुएं को दिखाया, जो वहां की कड़ाके की ठंड का अंदाज़ा दे रहा था। वीडियो में ओरी कहते हैं, ओके गाइज, सुबह के 6 बजे हैं, मैं सेट पर पॉप-टार्ट बना रहा हूं, लेकिन ये देखो।' ये कहने के बाद वे हंसते हुए बार-बार अपनी सांस से बन रहे भाप को दिखाने लगे। हालांकि इस दौरान उन्होंने अपने साथी कंटेस्टेंट मुकुल को भी आवाज़ लगाकर उन्हें यह देखने के लिए बुला लिया। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें मज़ेदार बात यह भी है कि अपने मस्ती भरे अंदाज़ में ओरी ने अपनी स्टोरी पर “-100000C” लिखकर कैप्शन भी दिया, जो वहां की ठंड को मज़ाकिया तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहा है। फिलहाल इस हल्के-फुल्के वीडियो ने साफ कर दिया है कि 'खतरों के खिलाड़ी 15' के कंटेस्टेंट्स को शूटिंग के दौरान चुनौतीपूर्ण मौसम का भी सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि ओरी 'खतरों के खिलाड़ी 15' के दमदार कंटेस्टेंट्स में शामिल हैं, जिसकी शूटिंग फिलहाल केप टाउन में हो रही है। एडवेंचर आधारित यह रियलिटी शो हमेशा की तरह इस बार भी खतरनाक स्टंट्स, रोमांचक चुनौतियों और पर्दे के पीछे के दिलचस्प पलों से भरपूर होने वाला है। फिलहाल शूटिंग शुरू होते ही अपने खास सोशल मीडिया अंदाज़ से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे ओरी के इस मज़ाकिया अंदाज़ के साथ फैंस इस बात का भी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं कि ओरी इस एक्शन-पैक्ड शो में स्टंट्स का सामना कैसे करते हैं। वैसे ये देखना काफी दिलचस्प होगा।
विश्व विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव भारतीय T-20I टीम से बाहर
टी-20 अंतरराष्ट्रीय विश्वकप जिताने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव की आयरलैंड दौरे पर ना केवल कप्तानी छिनी है बल्कि उनको टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। उनकी जगह श्रेयस अय्यर को टीम की कप्तानी मिली है वही तिलक वर्मा उपकप्तान बनाए गए हैं। यह निर्णय लगभग तय माना जा रहा था क्योंकि सूर्या का बल्ला अंतरराष्ट्रीय और फ्रैंचाइजी स्तर पर शांत रहा था। सूर्या की कप्तानी शानदार, लेकिन बल्लेबाजी बनी चिंता सूर्यकुमार यादव ने जुलाई 2024 में भारत की टी20 कप्तानी संभाली थी। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने Asia Cup 2025 और T20 World Cup 2026 जैसे बड़े टूर्नामेंट अपने नाम किए। बतौर कप्तान उनका जीत प्रतिशत 76.92% (Win Percentage as Captain) रहा, जो किसी भी भारतीय टी20 कप्तान के लिए बेहद प्रभावशाली आंकड़ा माना जा रहा है।सूर्याकुमार यादव बतौर कप्तान एक भी सीरीज नहीं हारे। हालांकि, कप्तानी में सफलता के बावजूद उनकी बल्लेबाजी लगातार सवालों के घेरे में रही। कप्तान बनने के बाद से सूर्या ने 45 टी20 मुकाबलों में सिर्फ 932 रन बनाए हैं। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी उन्होंने 9 पारियों में 242 रन बनाए, लेकिन इनमें से 84 रन केवल अमेरिका के खिलाफ आए थे। बड़े मुकाबलों में उनका बल्ला दमदार असर नहीं छोड़ सका। आईपीएल 2026 में भी फीका रहा प्रदर्शन मुंबई इंडियंस के लिए खेल रहे सूर्यकुमार यादव का आईपीएल 2026 सीजन भी अब तक काफी निराशाजनक रहा है। सूर्यकुमार ने 12 पारियों में सिर्फ़ 18 की औसत से 2 अर्धशतक के साथ 270 रन बनाए हैं। टीम Points Table में नौवें स्थान पर रही । पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस का यह खराब प्रदर्शन भी कहीं न कहीं सूर्या पर दबाव बढ़ा गया। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि सूर्या लंबे समय से कलाई (Wrist Issue) की समस्या से जूझ रहे हैं। टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भी वह भारी टेपिंग के साथ बल्लेबाजी करते नजर आए थे। आईपीएल 2025 में भी उनकी कलाई पर मोटी स्ट्रैपिंग देखी गई थी। टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं, लेकिन यह चोट अब उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती दिख रही है।
ईरान ने कहा, ट्रंप के साथ किसी भी परमाणु समझौते पर भरोसा नहीं, अमरीका से रुक गई है बातचीत
तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सलाहकार एवं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के पूर्व कमांडर-इन-चीफ मोहसिन रेजाई ने वर्ष 2015 के जेसीपीओए समझौते से अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने का जिक्र करते हुए कहा कि अमरीका के साथ फिलहाल परमाणु पर कोई बातचीत नहीं होगी। रेजई ने यह भी […] The post ईरान ने कहा, ट्रंप के साथ किसी भी परमाणु समझौते पर भरोसा नहीं, अमरीका से रुक गई है बातचीत appeared first on Sabguru News .
मानसून की तीव्रता बढ़ी : केरल में भारी बारिश का अनुमान
तिरुवनंतपुरम। दक्षिण-पश्चिम मानसून के और जोर पकड़ने के कारण, केरल में अगले दो दिनों में मानसून की बारिश तेज होने के आसार हैं। मौसम बुलेटिन के अनुसार अगले सात दिनों के दौरान केरल में सात से 20 सेमी तक भारी से बहुत भारी बारिश होना का अनुमान है। राज्य में पहले ही कुछ स्थानों पर […] The post मानसून की तीव्रता बढ़ी : केरल में भारी बारिश का अनुमान appeared first on Sabguru News .
डायरेक्टर होमी अदजानिया की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'कॉक्टेल 2' का ट्रेलर इंटरनेट पर छाया हुआ है। जहां एक तरफ शाहिद कपूर और कृति सेनन की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री फैंस को लुभा रही है, वहीं नेशनल क्रश रश्मिका मंदाना का बदला हुआ मॉडर्न और बोल्ड अवतार हर किसी को हैरान कर रहा है। 'पुष्पा' की 'श्रीवल्ली' और 'एनिमल' की 'गीतांजलि' के रूप में गंभीर भूमिकाएं निभाने वाली रश्मिका मंदाना इस बार एक बेहद लाइट-हार्टेड और अर्बन लड़की 'दिया' के किरदार में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में रश्मिका ने दिल खोलकर बात की। रश्मिका ने खुलासा किया कि शुरुआत में वह इस किरदार को स्वीकार करने में काफी झिझक रही थीं और उनके मन में एक अनजाना डर था। A post shared by Rashmika Mandanna (@rashmika_mandanna) गंभीर इमेज से बाहर निकलना था बड़ी चुनौती रश्मिका मंदाना ने कहा, मैं सच में बहुत डरी हुई थी, क्योंकि सिनेमा के पर्दे पर यह मेरा अब तक का सबसे अर्बन और ग्लैमरस लुक है। मेरी पिछली फिल्मों की वजह से मुझे ऐसा लगता है कि दर्शक मुझसे हमेशा एक गंभीर और भारी-भरकम ड्रामेटिक परफॉर्मेंस की उम्मीद करते हैं। लेकिन पहली बार, मैंने कुछ ऐसा किया है जो बहुत हल्का-फुल्का है, जिसमें दोस्ती, पागलपन और प्यार को दिखाया गया है। ALSO READ: 'पेड्डी' में जाह्नवी कपूर के किरदार को लेकर मचा बवाल, डायरेक्टर को मांगनी पड़ी माफी, फिल्म में होगा बदलाव रश्मिका ने आगे बताया कि शुरुआत में उनके दिमाग में यह सवाल लगातार घूम रहा था कि क्या यह उनके करियर के लिए सही कदम है? लेकिन उन्होंने खुद को चुनौती दी। उनका मानना है कि दर्शक भी हमेशा कुछ नया, कुछ सरप्राइजिंग और बिल्कुल अलग देखना चाहते हैं, और यही वजह रही कि उन्होंने 'कॉक्टेल 2' के लिए हां कहा। साल 2012 में आई सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और डायना पेंटी की सुपरहिट फिल्म 'कॉक्टेल' की तरह, यह फिल्म भी आधुनिक रिश्तों के ताने-बाने को छूती है। ट्रेलर में दिया (रश्मिका), एली (कृति सेनन) और कुणाल (शाहिद कपूर) के बीच प्यार और दोस्ती का एक खूबसूरत लेकिन उलझा हुआ सफर दिखाया गया है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें रश्मिका मंदाना का मौजूदा फिल्म लाइनअप यह साबित करता है कि वह खुद को किसी एक दायरे में बांधकर नहीं रखना चाहतीं। 'कॉक्टेल 2' के इस मॉडर्न अवतार के अलावा उनके पास दो और बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। पैन-इंडिया तेलुगु इमोशनल एक्शन-थ्रिलर मायसा में रश्मिका एक बेहद आक्रामक और शक्तिशाली 'गोंड महिला' का किरदार निभा रही हैं। पीरियड ड्रामा राणाबली में वह अपने पति विजय देवरकोंडा के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी। हाल ही में इवेंट में जब रश्मिका से उनके पहले प्यार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह विजय के साथ 'हैपिली मैरिड' हैं, जिसने फैंस का दिल जीत लिया।
इंदौर समेत देशभर में लगातार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन होटल, रेस्टोरेंट और बड़ी इमारतों के मालिक इनसे सबक लेने को तैयार नहीं हैं। इंदौर में हालात यह है कि 150 से ज्यादा होटलों और भवनों में अग्नि सुरक्षा उपकरण नहीं पाए गए हैं। बता दें कि हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर में आग लगने के बाद 21 लोगों की जलकर मौत हो गई। इसके पहले इंदौर में एक ही परिवार के 8 लोग आगजनी की घटना में जान गवां चुके हैं। ALSO READ: देश के 26 राज्यों में है फायर सेफ्टी एक्ट, क्यों मप्र में लागू नहीं हो रहा, 7 साल पहले बना ड्राफ्ट कहां अटका है? 157 भवनों में उपकरण बंद : प्रशासन की कार्रवाई में इस लापरवाही का खुलासा हुआ है। अब तक सभी जोन क्षेत्रों में 467 भवनों का सर्वे किया गया है। इनमें से 305 में अग्नि सुरक्षा उपकरण लगे पाए गए। जबकि 157 भवनों में उपकरण बंद पाए गए अथवा अग्नि सुरक्षा उपकरण नहीं लगे हैं। इन भवन स्वामियों/ संचालकों को नोटिस जारी किए गए है। बता दें कि नगर निगम की टीम ने हाल ही में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होटल और भवनों का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान अपर आयुक्त प्रखर सिंह, आशीष पाठक, सहायक यंत्री अंकेश बिरथरे और फायर आफिसर विनोद मिश्रा शामिल थे। इन उपकरणों की जांच : निरीक्षण के दौरान भवनों में स्थापित अग्नि सुरक्षा उपकरणों एवं व्यवस्थाओं की जांच की गई। फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म सिस्टम, हाइड्रेंट सिस्टम, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपायों का परीक्षण किया गया। ALSO READ: हादसों से भी नहीं जागा इंदौर प्रशासन, 10 हजार में से 452 इमारतों की फायर ऑडिट, बाकी 'राम भरोसे' कैसे बुझेगी आग? इन प्रतिष्ठानों पर मिली लापरवाही : निरीक्षण के दौरान श्री गुरुकृपा होटल सरवटे बस स्टैंड के सामने, होटल वैष्णव पैलेस, सरवटे बस स्टैंड होटल दी मीरा राजीव गांधी चौराहा के पास, होटल दी क्लीन इंदौर, होटल दिलीप नसिया रोड, होटल वैष्णव नसिया रोड सहित भवनों एवं होटलों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां पाई गईं। ALSO READ: 6 कमरों की अनुमति पर चल रहे थे 25 कमरे, बिना फायर NOC चिमनी बनी इमारत; दिल्ली में 21 मौतों का जिम्मेदार कौन? कुछ भवनों के बेसमेंट का उपयोग स्वीकृत अनुमति के अनुरूप नहीं पाया गया। इस पर संबंधित भवन संचालकों एवं स्वामियों को नियमानुसार नोटिस जारी कर तीन दिवस की समयावधि प्रदान की गई तथा निर्देशित किया गया कि निर्धारित अवधि में सभी कमियों को दूर कर अग्नि सुरक्षा उपकरणों को पूर्ण रूप से कार्यशील एवं उपयोग योग्य बनाया जाए। 101 मालिकों को नोटिस जारी : कार्रवाई के बाद अब तक 101 भवन स्वामियों और संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। 32 ऐसे भवन जिनमें अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नहीं है या सुरक्षा उपकरण बंद पाए गए पूरी तरह से सील कर दिया गया है। Edited By: Naveen R Rangiyal
फीफा विश्व कप : 39 दिन, 48 टीमें, कुल 104 मैच
नई दिल्ली। फुटबॉल का महाकुंभ ‘फीफा विश्व कप’ 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में आयोजित किया जाएगा जिसमें 39 दिनों में 48 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 104 मैच खेले जाएंगे। ज़ी 5 भारत में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए ऑफिशियल स्ट्रीमिंग डेस्टिनेशन होगा, और मैच नए लॉन्च हुए […] The post फीफा विश्व कप : 39 दिन, 48 टीमें, कुल 104 मैच appeared first on Sabguru News .
ब्राह्मणी नदी में नहाते समय एक व्यक्ति ने विशालकाय मगरमच्छ से दस मिनट तक संघर्ष कर बचाई जान
केंद्रपाड़ा। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में ब्राह्मणी नदी पर बने एक बाड़ वाले स्नान घाट में नहाते समय एक 40 वर्षीय व्यक्ति पर विशालकाय मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिसके बाद वह उसके साथ दस मिनट से अधिक समय तक संघर्ष करते हुए सकुशल बच गया। राजपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले बलिचंद्रपुर गांव के […] The post ब्राह्मणी नदी में नहाते समय एक व्यक्ति ने विशालकाय मगरमच्छ से दस मिनट तक संघर्ष कर बचाई जान appeared first on Sabguru News .
खान ग्लोबल स्टडीज के दो गार्डों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ सकती हैं खान सर की मुश्किलें
पटना। राजधानी पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में खान ग्लोबल स्टडीज के मुख्य द्वार के पास पिछले 2 जून को हुई कथित फायरिंग मामले में संस्थान से जुड़े दो गार्डों की गिरफ्तारी के बाद खान सर (फैसल खान) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस मामले में कदमकुआं थाने में कांड संख्या- 410/26 दर्ज कर जांच […] The post खान ग्लोबल स्टडीज के दो गार्डों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ सकती हैं खान सर की मुश्किलें appeared first on Sabguru News .
कर्नाटक के मंत्री रेड्डी ने शपथ लेने के दो दिन बाद अपमान का हवाला देकर दिया इस्तीफा
बेंगलूरु। कर्नाटक में नयी सरकार में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री आर रामलिंगा रेड्डी ने शपथ लेने के सिर्फ दो दिन बाद ही शुक्रवार को अपने अपमान का हवाला देकर कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। बेंगलूरु बीटीएम लेआउट से आठ बार विधायक रहे और बेंगलूरु में कांग्रेस पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक […] The post कर्नाटक के मंत्री रेड्डी ने शपथ लेने के दो दिन बाद अपमान का हवाला देकर दिया इस्तीफा appeared first on Sabguru News .
शुभेंदु अधिकारी का 'प्लान B', राहुल गांधी का दावा- एक साल में गिर सकती है मोदी सरकार
क्या TMC में 50 से अधिक विधायक बगावत करेंगे? शुभेंदु अधिकारी के कथित प्लान B, राहुल गांधी के मोदी सरकार पर बड़े दावे और संभावित राजनीतिक बदलाव का विश्लेषण
कभी 500 रुपए में जागरण में गाना गाती थीं नेहा कक्कड़, आज इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस
बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय और सोशल मीडिया पर राज करने वाली एक्ट्रेस नेहा कक्कड़ 6 जून को अपना 38वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी जादुई आवाज़ और चुलबुले अंदाज से करोड़ों दिलों को जीतने वाली नेहा आज जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचना किसी के लिए भी एक सपने जैसा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज करोड़ों की मालकिन और लग्जरी लाइफ जीने वाली नेहा का बचपन बेहद तंगहाली और संघर्षों में बीता था? आइए उनके इस खास दिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे अनसुने पन्ने, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं। जब मां उन्हें जन्म ही नहीं देना चाहती थीं नेहा कक्कड़ के जीवन का सबसे भावुक और चौंकाने वाला सच यह है कि एक समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनकी मां उन्हें इस दुनिया में लाना ही नहीं चाहती थीं। इस बात का खुलासा खुद नेहा और उनके भाई टोनी कक्कड़ ने एक इंटरव्यू के दौरान किया था। तंगी के कारण उनकी मां गर्भपात कराना चाहती थीं, लेकिन जब तक उन्होंने यह फैसला लिया, तब तक 8 हफ्ते बीत चुके थे और डॉक्टरों ने मना कर दिया। ALSO READ: साउथ स्टार यश बने शाहरुख-दीपिका के पड़ोसी, अलीबाग में खरीदी 24 करोड़ रुपए की सी-फेसिंग प्रॉपर्टी 500 रुपए के लिए माता के जगराते में गाना ऋषिकेश के एक बेहद साधारण परिवार में जन्मीं नेहा ने बहुत छोटी उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझ उठा लिया था। उनके पिता घर चलाने के लिए उस स्कूल के बाहर समोसे बेचा करते थे, जहां उनकी बड़ी बहन सोनू कक्कड़ पढ़ती थीं। परिवार की आर्थिक मदद के लिए नेहा ने महज 4 साल की उम्र से ही अपनी बहन सोनू और भाई टोनी कक्कड़ के साथ दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में माता के जगरातों और भजनों में गाना शुरू कर दिया था। उस दौर में उन्हें पूरी रात गाने के बदले सिर्फ 500 रुपए मिलते थे। नेहा बताती हैं कि उन्होंने सुबह के 4-5 बजे तक लगातार गाकर अपने गले को मांझा है, जिसने उनकी आवाज़ को एक अलग पहचान दी। 'इंडियन आइडल 2' से रिजेक्शन नेहा कक्कड़ की जिंदगी में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2006 में आया, जब वह सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियन आइडल सीजन 2' में बतौर कंटेस्टेंट शामिल हुईं। हालांकि, इस शो में वह टॉप-10 में जगह नहीं बना पाईं और बहुत जल्दी एलिमिनेट हो गईं। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें नेहा इस रिजेक्शन से टूटी नहीं, बल्कि उन्होंने इसे एक शुरुआत माना। साल 2008 में उन्होंने अपना एल्बम 'नेहा द रॉकस्टार' लॉन्च किया। इसके बाद साल 2012 में फिल्म 'कॉकटेल' के गाने 'सेकंड हैंड जवानी' ने उन्हें बॉलीवुड में वो बड़ा ब्रेक दिया, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। नेहा की सफलता का सबसे खूबसूरत पड़ाव तब आया, जब सालों बाद वो उसी 'इंडियन आइडल' के मंच पर बतौर मुख्य जज बनकर बैठीं, जहां से उन्हें कभी रिजेक्ट कर दिया गया था। यह उनके कड़े संघर्ष और अटूट विश्वास की सबसे बड़ी जीत थी। एक्टिंग में भी आजमाया हाथ बहुत कम लोग जानते हैं कि नेहा कक्कड़ एक बेहतरीन सिंगर होने के साथ-साथ एक्टिंग का शौक भी रखती हैं। साल 2010 में उन्होंने राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म 'इसी लाइफ में...!' से बड़े पर्दे पर एक्टिंग की दुनिया में भी कदम रखा था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिंगिंग पर ही केंद्रित किया। कभी एक छोटे से कमरे के मकान में रहने वाली नेहा कक्कड़ आज मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 38 करोड़ रुपए की नेटवर्थ की मालकिन हैं। वह प्रति गाना गाने के लिए 8 से 10 लाख रुपए चार्ज करती हैं और आज बॉलीवुड में सबसे महंगी गायिकाओं में से एक हैं। इसके अलावा ब्रांड एंडोर्समेंट, रियलिटी शोज़ और सोशल मीडिया से भी वह मोटी कमाई करती हैं।
उच्च के गुरु का 3 राशियों पर पड़ेगा मिलाजुला प्रभाव, 5 उपायों से 100 प्रतिशत मिलेगा लाभ
02 जून 2026 मंगलवार को बृहस्पति यानी गुरु ने कर्क में में गोचर किया है। इस गोचर के चलते मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन को लाभ होगा।। सिंह और धनु राशियों को सतर्क रहना होगा और वृषभ, तुला एवं कुंभ राशियों पर इसका मिलाजुला प्रभाव रहेगा। ऐसे में ये 3 राशियां यदि 5 उपाय करती है उन्हें इसका 100 प्रतिशत लाभ मिलेगा। चलिए जानते हैं राशियों पर प्रभाव और उपाय। ALSO READ: गुरु का कर्क राशि में गोचर: किन राशियों के लिए रहेगा शुभ और अशुभ 3 राशियों पर कर्क के बृहस्पति का मिलाजुला प्रभाव: 1. वृषभ राशि (Taurus) बृहस्पति देव आपकी राशि से तीसरे भाव में प्रवेश करेंगे, जिसे पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहन और संचार का भाव कहा जाता है। आपके लिए इसका मिलाजुला प्रभाव रहेगा। 2. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर उनके दसवें भाव में होगा, जिसे कर्म, करियर, व्यवसाय और पिता का स्थान कहा जाता है। आपके लिए यह गोचर मिलाजुला प्रभाव देगा। 3. कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का यह गोचर छठे भाव में होने जा रहा है, जिसे रोग, ऋण (कर्ज), और शत्रुओं (विरोधियों) का घर माना जाता है। आपके लिए यह गोचर मिलाजुला प्रभाव देगा। ALSO READ: शुक्र का कर्क राशि में गोचर 2026: जानिए आपकी राशि पर क्या होगा असर? गुरु का कर्क राशि में गोचर, 5 अचूक उपाय 1. भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें, सत्यनारायण भगवान की पूजा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 2. बृहस्पति के कर्क में रहने तक नियमित रूप से मस्तक पर केसर का तिलक 3. प्रत्येक गुरुवार को केले के पेड़ की विशेष पूजा और हल्दी का मंदिर में अर्पण करें। 4. गुरुवार के दिन गौ माता की सेवा करें उन्हें रोटी के साथ चना दाल और गुड़ खिलाएं। 5. रोज सुबह जब आप नहाने जाएं, तो अपने नहाने के पानी में मात्र एक चुटकी पिसी हुई हल्दी और केसर की एक-दो पत्तियां मिला लें। ALSO READ: 2 जून से कर्क राशि में गुरु का महागोचर, जानें 12 राशियों पर क्या पड़ेगा शुभ-अशुभ प्रभाव
Mulank Horoscope 2026: साप्ताहिक अंक राशिफल (8 से 14 जून 2026): जानें आपका मूलांक क्या कहता है?
june 2026 ka saptahik ank jyotish rashifal: अंक ज्योतिष की दुनिया में संख्याओं का खेल हमारे जीवन की दशा और दिशा दोनों तय करता है। जून 2026 का यह दूसरा सप्ताह ग्रहों और अंकों के एक बेहद दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग के साथ शुरू हो रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 8 जून से 14 जून 2026 की यह समय अवधि वैश्विक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर बड़े बदलावों का गवाह बनने जा रही है। इस सप्ताह अंक विज्ञान के कई महत्वपूर्ण समीकरण बदल रहे हैं, जिसका सीधा असर आपके करियर, प्रेम संबंध, संचित धन और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला है। आइए जानते हैं जून का यह दूसरा हफ्ता क्या लेकर आ रहा हैं... ALSO READ: Panchak Dates 2026: 06 जून से लगेगा मृत्यु पंचक, जानें क्यों हैं खास, क्या करें और क्या न करें? (साप्ताहिक अंक राशिफल: 8 से 14 जून 2026) मूलांक 1 (जन्मतिथि: 1, 10, 19, 28) इस सप्ताह आपकी नेतृत्व क्षमता चरम पर होगी, निर्णय लेने की क्षमता तेज रहेगी। नया काम शुरू करने का अवसर मिल सकता है। रुका हुआ धन प्राप्त होने की संभावना है। निवेश से लाभ हो सकता हैं। रक्तचाप को नियंत्रित रखे। रिश्तों में अहंकार कम करने से रिश्ते मजबूत होंगे। उपाय: रविवार को गुड़-गेहूं दान करें। मूलांक 2 (जन्मतिथि: 2, 11, 20, 29) आपके लिए यह सप्ताह नौकरी में स्थिरता प्रदान करने वाला रहेगा। व्यापारियों को व्यापार के नए अवसर प्राप्त हो सकते है। मां/माता तुल्य या घर की बड़ी महिला से मार्गदर्शन प्राप्त करें जो आपके लिए सहायक रहेगा। भावनात्मक संतुलन बनाए रखें। खर्च नियंत्रित रखें। चिंता और अनिद्रा से बचें। प्रेम संबंधों में सुधार आएगा। उपाय: सफेद या हल्के क्रीम रंग के वस्त्रों का उपयोग करें। मूलांक 3 (जन्मतिथि: 3, 12, 21, 30) यह सप्ताह आपके रचनात्मक कार्यों में सफलता लाने के साथ साथ आपके मान–सम्मान में वृद्धि करने वाला भी रहेगा, पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती है। गुरु की कृपा से बड़े अवसर प्राप्त होंगे। किसी वरिष्ठ का मार्गदर्शन लेकर कार्य करना आपके लिए ठीक रहेगा। आय के नए स्रोत बनेंगे, पाचन या पेट संबंधी समस्या हो सकती है। उपाय: जरूरतमंद छात्रों को स्टेशनरी या किताबें का दान करें। मूलांक 4 (जन्मतिथि: 4, 13, 22, 31) यह सप्ताह परिवर्तन का सप्ताह रहेगा, अचानक विपरीत परिस्थितियां बनेंगी, किन्तु अंत में वह आपके पक्ष में रहेंगी। किसी पुराने मित्र या परिचित के माध्यम से नया अवसर खुल सकता है, करियर में नई दिशा मिलने की संभावना है। वाहन सावधानी से चलाये। अनावश्यक खर्च से बचें एवं अनावश्यक चिंता और नकारात्मक विचारों से बचें। रिश्तों में चली आ रही गलतफहमी दूर होगी। उपाय: गरीबों को काली उड़द की दाल और तिल दान करें। मूलांक 5 (जन्मतिथि: 5, 14, 23) इस सप्ताह विश्लेषणात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। महत्वपूर्ण दस्तावेज अच्छे से जांचें बिना हस्ताक्षर नहीं करें एवं आलोचना से बचे। जोखिम भरे निवेश करने के पूर्व अच्छे से विचार करके ही निवेश करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। गलतफहमियों से बचें, स्पष्ट संवाद करें। उपाय: विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। मूलांक 6 (जन्मतिथि: 6, 15, 24) यह सप्ताह आपके लिए शुभ रहने वाला है। इस सप्ताह आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। कार्यस्थल पर सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। आय ठीक रहेगी, निवेश करने का उत्तम समय रहेगा। फिजूलखर्ची से बचें। प्रेम संबंधों में मधुरता रहेगी। परिवार में प्रसन्नता का माहौल रहेगा। ALSO READ: 8 जून से पलटेगी इन 4 राशियों की किस्मत, गुरु-शुक्र मिलकर बना रहे गजलक्ष्मी राजयोग उपाय: शुक्रवार को लक्ष्मी जी को सुगंधित वस्तु अर्पण करें। मूलांक 7 (जन्मतिथि: 7, 16, 25) यह सप्ताह आध्यात्मिक और बौद्धिक उन्नति का है। कार्यस्थल पर एकाकी प्रयास अधिक फलदायी रहेगा। गुप्त शत्रु से सावधान रहे। किसी निर्णय को लेकर मन अस्थिर रह सकता है, तनाव न लें। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। सावधानीपूर्वक निवेश करें। छोटी स्वास्थ्य की समस्या को नजरअंदाज न करें। रिश्तों में स्पष्टता रखें। उपाय: शिव जी को बिल्व पत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। मूलांक 8 (जन्मतिथि: 8, 17, 26) यह सप्ताह आपको आपकी मेहनत का फल देने वाला होगा, रुके हुए कार्य में तेजी आएगी। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नए काम की जिम्मेदारी प्राप्त हो सकती है, व्यवसाय, राजनीति या रियल एस्टेट से जुड़े लोगों के लिए यह समय उत्तम रहेगा किन्तु अहंकार से बचे। आय ठीक रहेगी, कानूनी या सरकारी मामलों में राहत मिल सकती है। रिश्तों में गंभीरता बढ़ेगी। उपाय: शनि मंदिर में शनि देव के सामने में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मूलांक 9 (जन्मतिथि: 9, 18, 27) यह सप्ताह आपके लिए नई ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा रहेगा, यह किसी लक्ष्य को हासिल करने का सही समय है अतः पूरी मेहनत से कार्य करें। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पुराने मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करें और विवादों से दूर रहे। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें। दाम्पत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। पेट और ब्लड प्रेशर सम्बंधित समस्या हो सकती है। उपाय: उपाय: हनुमान जी को सिंदूर अर्पण करें। अस्वीकरण (Disclaimer): अंक ज्योतिष द्वारा बताई गई भविष्यवाणियां केवल संभावित रुझानों का संकेत देती हैं। यह राशिफल मूलांक के आधार पर किया गया सामान्य पूर्वानुमान है, इसमें व्यक्तिगत तौर पर परिवर्तन संभव है अधिक जानकारी के किसी अनुभवी अंक ज्योतिषी से संपर्क करें। ALSO READ: 12 साल बाद बना हंस महापुरुष राजयोग, अगले कुछ महीने इन 5 राशियों पर होगी पैसों की बारिश Edited BY: Rajshri Kasliwal
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (06 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today Horoscope Rashifal 06 June 2026 : करियर: ऑफिस में काम की अधिकता रहेगी। लव: पार्टनर के साथ किसी बात पर वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। धन: निवेश के लिए दिन मध्यम है। स्वास्थ्य: बदन दर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: शनि चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: Parama Ekadashi 2026: 3 साल बाद आई परमा एकादशी, इस तरह करें पूजा और व्रत 2. वृषभ (Taurus) करियर: व्यापार में नए अनुबंध मिल सकते हैं। लव: प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। धन: आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। स्वास्थ्य: शारीरिक थकान हो तो आज आराम करें। उपाय: काली उड़द की दाल का दान करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं। लव: पार्टनर के साथ वाणी पर नियंत्रण रखें। धन: अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाएं। स्वास्थ्य: योग आपके लिए लाभकारी रहेगा। उपाय: पक्षियों को पानी पिलाएं। 4. कर्क (Cancer) करियर: नौकरी से जुड़े लोगों के लिए दिन महत्वपूर्ण है। लव: मांगलिक कार्य की योजना बन सकती है। धन: भूमि या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य: ठंडी चीजों के सेवन से बचें। उपाय: शिव चालीसा का पाठ करें। 5. सिंह (Leo) करियर: नई नौकरी के प्रस्ताव मिल सकते हैं। लव: प्रेमी के साथ रिश्तों में किसी बात को न छुपाएं। धन: आज धन निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य: दिन भर ताजगी महसूस करेंगे। उपाय: सूर्य देव को अर्घ्य दें। ALSO READ: Weekly Horoscope 1 to 7 June: साप्ताहिक राशिफल (1 से 7 जून 2026): अपने भाग्य को जानें और तैयार रहें 6. कन्या (Virgo) करियर: कार्यक्षेत्र में कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। लव: लव पार्टनर की बातों को नजरअंदाज न करें। धन: धन के लेन-देन में धोखाधड़ी की संभावना है। स्वास्थ्य: खान-पान में अनियमितता से बचें। उपाय: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं। 7. तुला (Libra) करियर: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन की संभावना है। लव: दांपत्य जीवन में मधुरता रहेगी। धन: सुख-सुविधाओं पर खर्च होगा। स्वास्थ्य: त्वचा संबंधी छोटी समस्या हो सकती है। उपाय: छोटी कन्याओं को फल दान करें। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: व्यापार में नुकसान हो तो संयम से काम लें। लव: पुरानी बातों को लेकर प्रेमीजन न उलझें। धन: रुका हुआ धन मिलने में देरी हो सकती है। स्वास्थ्य: आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। उपाय: शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 9. धनु (Sagittarius) करियर: कार्यस्थल पर आज भाग्य का साथ मिलेगा। लव: प्रेम जीवन में उत्साह बना रहेगा। धन: नया निवेश भविष्य में बड़ा लाभ दे सकता है। स्वास्थ्य: स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। उपाय: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 10. मकर (Capricorn) करियर: मेहनत से न घबराएं। लव: जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा। धन: इस समय बचत पर ध्यान देना जरूरी है। स्वास्थ्य: आज स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है। उपाय: पीपल के वृक्ष की सात परिक्रमा करें। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: आपकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा। लव: प्रेम रिश्तों में मजबूती आएगी। धन: फंसा हुआ पैसा वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य: आंखों में जलन या दर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: शाम के समय शनि चालीसा पढ़ें। 12. मीन (Pisces) करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी सलाह से दूसरों को लाभ होगा। लव: पार्टनर के साथ धार्मिक स्थल की यात्रा कर सकते हैं। धन: कारोबर के आय भी बनी रहेगी। स्वास्थ्य: अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। उपाय: किसी गरीब को काली वस्तु का दान करें। ALSO READ: गुरु का कर्क राशि में महागोचर, 2 राशियों के लिए अशुभ, 3 पर मिलाजुला प्रभाव, करें 5 उपाय
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके अमेरिका से उड़ान भर चुके हैं। उन्होंने X पर लिखा- भारत के लिए निकल गया हूं। मैं अपना भविष्य संविधान के हाथों में छोड़ता हूं। जय भीम। 20 दिन पहले चीफ जस्टिस के बयान से पैदा हुआ एक व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन, जिसने कुछ घंटों में बीजेपी से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स जुटा लिए। अब इंटरनेट से निकलकर सड़क पर उतरने जा रहा है। आगे क्या होगा, जमीन पर कुछ कर पाएंगे या सरकार कैम्पेन कुचल देगी; लोगों के मन में उठ रहे 9 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या वाकई इंटरनेट से निकल सड़क पर उतरने वाले हैं कॉकरोच? जवाबः हां। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 1 जून को एक वीडियो में बताया, '6 जून की सुबह मैं दिल्ली आ रहा हूं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने। आप सभी एयरपोर्ट आकर मुझसे मिलें। हम सब मिलकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे।' 3 जून को कॉकरोच पार्टी ने दिल्ली में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें खोजी पत्रकार सौरव दास, IIT कानपुर से पढ़े और मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म ‘मैकिन्से एंड कंपनी’ में काम कर चुके आशुतोष रांका, पॉलिटिकल रिसर्चर और फिल्ममेकर विजेता दहिया पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर शामिल हुए। 4 जून को अभिजीत ने X पर एक और वीडियो जारी करते हुए समर्थकों को एयरपोर्ट आने से मना किया। दीपके ने कहा, ‘मैं खुद पुलिस स्टेशन आऊंगा और फिर हम सब वहां से जंतर-मंतर के लिए बढ़ेंगे, क्योंकि इतने लोगों के एयरपोर्ट पर इकट्ठा होने से जनता और सुरक्षा बलों को असुविधा होगी।’ सवाल-2: ये लोग सड़क पर उतरकर चाहते क्या हैं? जवाबः कॉकरोच पार्टी की सबसे बड़ी मांग है केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दीपके ने X पर जारी वीडियो में कहा, 'NEET का एग्जाम रद्द होने से 5 स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया। CBSE, CUET और SSC जैसे एग्जाम में गड़बड़ी से लाखों बच्चे प्रभावित हुए। इसे लेकर देश के अलग-अलग शहरों में आंदोलन हुए, फिर भी प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया। इस देश में सरकार की जवाबदेही नहीं रह गई है। ऐसा कब तक चलेगा?’ CJP मुख्य प्रवक्ता सौरव दास का भी कहना है कि प्रधान के इस्तीफे के लिए वेबसाइट पर डाली गई पिटीशन का अब तक 8 लाख से ज्यादा लोग समर्थन कर चुके हैं, जो साबित करते हैं कि स्टूडेंट्स का गुस्सा अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है। सवाल-3: क्या दिल्ली में प्रोटेस्ट करने की अनुमति मिलेगी? जवाबः अनुमति मिलने की उम्मीद कम है। संविधान के आर्टिकल 19 के तहत, 'सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना किसी हथियार के इकट्ठा होने का अधिकार है।' दिल्ली का जंतर-मंतर प्रदर्शन की नियत जगह है। हालांकि कानूनी अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस से 7 दिन पहले लिखित परमिशन लेनी पड़ती है। दिल्ली पुलिस की गाइडलाइंस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच ही होना चाहिए। अस्थायी तंबू नहीं लगाए जा सकते। एक दिन में 1,000 से ज्यादा लोग हिस्सा नहीं ले सकते।' जबकि CJP की तरफ से अभिजीत 6 जून को प्रोटेस्ट के दिन ही पुलिस से इसकी अनुमति लेने जाएंगे। प्रोटेस्ट में काफी भीड़ होने का अनुमान है। प्रवक्ता विजेता दहिया ने परमिशन न लेने को पार्टी की स्ट्रैटेजी का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, ‘इस शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट के पीछे लोगों की भावनाएं हैं। लोग अभिजीत के साथ जुड़े हैं। इसीलिए हमने तय किया कि अभिजीत खुद पुलिस से मिलकर परमिशन मांगेंगे। हमें उम्मीद है कि प्रशासन हमें अनुमति देगा।’ अगर अभिजीत और उनके साथ जुटे लोग बिना परमिशन प्रोटेस्ट कोशिश करते हैं, तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। अगर प्रशासन को अव्यवस्था फैलने के संकेत मिलते हैं, तो वो प्रोटेस्ट वाली जगह पर BNSS की धारा 163 लागू कर सकता है। पुरानी CrPC में इसे धारा 144 कहते थे। इसके तहत पुलिस 5 या लोगों को इकठ्ठा होने पर रोक लगा सकती है। ये रोक 60 दिन तक लागू रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि बड़े विरोध प्रदर्शनों में खुफिया इनपुट्स के आधार पर भी इस तरह के आदेश दे सकती है और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है। सवाल-4: क्या राजनीतिक पार्टी बनाने का भी इरादा है, उसके लिए क्या-क्या करना होगा? जवाबः अभिजीत ने शुरुआत में कहा था कि उनका कोई राजनीतिक पार्टी बनाने का इरादा नहीं है। हालांकि अब जिस तरह जमीन पर प्रदर्शन की तैयारी है, प्रवक्ता नियुक्त किए गए, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही और जाने-माने लोग जुड़ रहे हैं, उससे राजनीतिक पार्टी के संकेत मिलते हैं। राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट, 1951 की धारा 29 (A) के तहत पार्टी बनाने के ऐलान से 30 दिनों के अंदर चुनाव आयोग में आवेदन देना होता है। पार्टी में कम से कम 100 भारतीय मेंबर होने चाहिए। पार्टी का संविधान, संगठन बनाने की प्रक्रिया, पद पाने वाले लोगों के कार्यकाल वगैरह के बारे में भी बताना होता है। एक पेच ये भी है कि हरियाणा में पानीपत के रहने वाले वकील सुधीर जाखर ने खुद को CJP का राष्ट्रीय संयोजक बताते हुए 25 मई को इसे पार्टी के तौर पर रजिस्टर करने के लिए चुनाव आयोग में अप्लाई किया था। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था, 'जब दीपके ने भारत आने से इनकार किया, तो हमें लगा कि कोई और इसका रजिस्ट्रेशन करवाकर दुरुपयोग करता है, इससे पूरा आंदोलन बेकार हो जाएगा। इसलिए हमने खुद इसका निर्णय लिया।' हालांकि इस पर अभिजीत का कोई बयान नहीं आया है। सवाल-5: राजनीतिक पार्टी बन गई, तो क्या चुनाव निशान ‘कॉकरोच’ मिलेगा? जवाबः फिलहाल कॉकरोच चुनाव निशान किसी को नहीं मिल सकता। दरअसल, चुनाव आयोग के इलेक्शन सिंबल रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट ऑर्डर, 1968 के तहत नई रजिस्टर्ड पार्टियों को ‘फ्री सिंबल लिस्ट’ से चुनाव निशान मिलता है। इसमें लैंडलाइन फोन, लैपटॉप, टीवी, ताला-चाबी, फूलगोभी, साबुनदानी और स्टेपलर जैसे 200 से ज्यादा सिंबल हैं। 1991 से चुनाव आयोग ने पक्षी या जानवरों से जुड़े सिंबल देने बंद कर दिए हैं। कॉकरोच को कीट की श्रेणी में रखा जाता है। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि इसे आधिकारिक तौर पर जानवरों में रखा जाएगा या नहीं। CJP ने अपने सिंबल में मोबाइल फोन की स्क्रीन के अंदर एक कोचरोच दिखाया था। अगर वे मोबाइल फोन का सिंबल मांगते हैं, तो भी मुश्किल है, क्योंकि मोबाइल फोन ‘फ्री सिंबल’ की लिस्ट में नहीं है। सवाल-6: क्या अभिजीत दीपके ही इसके प्रेसिडेंट बनेंगे, उनकी कहानी क्या है? जवाबः अभी तक CJP का चेहरा अभिजीत दीपके हैं। उनके भारत आने को लेकर हो रही तैयारियां और CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ये साफ है कि आगे भी अभिजीत ही मुख्य भूमिका में होंगे। 30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत AAP के IT सेल के चीफ अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर अभिजीत X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सवाल-7: जेन-जी के अलावा CJP से कौन-से बड़े चेहरे जुड़े, कहीं से फंडिंग भी मिल रही? जवाबः 6 जून को CJP के प्रोटेस्ट में कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी… सोनम वांगचुक, शिक्षाविद: वांगचुक ने 2 जून को X पर वीडियो जारी करके कहा, 'मैं CJP के आंदोलन से जुड़ने आ रहा हूं। CJP वाले देशप्रेमी लोग हैं, आप भी उनके साथ जुड़ना चाहिए।’ प्रकाश राज, फिल्म अभिनेता: अभिनेता प्रकाश राज ने X पर लिखा, ‘मैं शूटिंग के लिए फिलहाल दिल्ली से बहुत दूर हूं, लेकिन फिर भी मैं CJP के आंदोलन में पहुंचे की पूरी कोशिश करूंगा।’ अमित जोगी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ अध्यक्ष: छत्तीसगढ़ के पहले CM अजीत जोगी के बेटे और JCC अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा, 'छत्तीसगढ़ में कॉकरोच को झेंगुरा कहते हैं और जंतर-मंतर पर झेंगुरा पहुंच रहा है। हम CJP को समर्थन देने वालीं देश की पहली पार्टी बनेंगे।’ इसके अलावा एक्टर अतुल कुलकर्णी, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI की अध्यक्ष आइशे घोष भी प्रोटेस्ट में शामिल होंगी। अभी तक CJP की फंडिंग के कोई सोर्स का भी कोई पुख्ता सबूत नहीं है। 3 जून को प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, ‘हमें फंडिंग की जरूरत क्यों पड़ेगी? हमारे पीछे जो पार्टी का पोस्टर लगा है, वो 200 रुपए का है, लोग प्रोटेस्ट में अपने खर्चे पर आ सकते हैं। ये नैरेटिव आंदोलन को भटकाने के लिए खड़ा किया जा रहा है।’ CJP की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, ‘पार्टी पूरी तरह कम्युनिटी फंडिंग यानी आंदोलन से जुड़े लोगों से मिले पैसों पर काम करती है। किसी राजनीतिक संगठन या प्राइवेट कंपनी से डोनेशन नहीं लेगी।’ सवाल-8: कॉकरोच पार्टी को लेकर सरकार का रुख क्या है? जवाबः अभिजीत और उनकी CJP पर आरोप हैं कि उनके पीछे एंटी नेशनल ताकतें और विदेशी फंडिंग है। भारतीय खुफिया एजेंसी IB ने CJP के पहले X हैंडल को ब्लॉक करने का इनपुट दिया था। इसमें कहा गया, ‘हैंडल का भड़काऊ कॉन्टेंट देश के युवाओं के बीच फैल रहा था। इससे देश की नेशनल सिक्योरिटी को खतरा हो सकता था।’ इसके बाद सरकार ने X को भारत में CJP के हैंडल पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। 22 मई को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने X पर लिखा था, ‘अभिजीत को बोस्टन जाने के लिए किसने पैसा दिया? क्या सोरोस फाउंडेशन उनके रहने-खाने का खर्च उठा रहा है? क्या विपक्षी दल देश को तोड़ने के लिए विदेशी ताकतों से मदद ले रहे हैं?’ ऐसे में सरकार 6 जून के प्रोटेस्ट को नहीं होने देना चाहेगी। प्रशासन नियमों का हवाला दे सकता है। न मानने पर या हिंसा की स्थिति में अभिजीत और साथियों को हिरासत में भी लिया जा सकता है। हालांकि इससे कॉकरोच पार्टी के पक्ष में सहानुभूति की लहर उठने का खतरा है।एक विकल्प ये भी है कि सरकार प्रोटेस्ट होने दे और कॉकरोच पार्टी को एक सटायर मूवमेंट की तरह ही ट्रीट करे, जिससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होने वाला। सवाल-9: क्या ऐसी किसी पार्टी के लिए फिलहाल भारत की राजनीति में जगह है? जवाबः कॉकरोच पार्टी के उभार की टाइमिंग और मुद्दे इसे मौजूदा राजनीति में प्रासंगिक बनाते हैं। पॉलिटिक एनालिस्ट योगेंद्र यादव कहते हैं, 'देश के भीतर एक छटपटाहट है। जब सरकार संस्थाओं पर कब्जा कर लेती है और पूर्णसत्ता स्थापित करती है, तब विद्रोह अनपेक्षित जगहों से पैदा होता है। जैसे- 1971 में इंदिरा गांधी की भारी जीत के बाद 1974 में जयप्रकाश आंदोलन हुआ। 2009 में कांग्रेस की जीत के बाद 2011 में अन्ना आंदोलन और 2019 में पीएम मोदी के दूसरी बार सत्ता में आने के 2 साल बाद किसान आंदोलन हुआ।’ वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर कहते हैं, ‘युवा निराश है, इसीलिए इससे जुड़ रहा है। उम्मीद है कि इसके पीछे जो लोग हैं, वो इस एनर्जी को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में लाने का रास्ता निकाल लेंगे या फिर अपने वोट के जरिए बदलाव की आवाज बनेंगे।’ *****रिसर्च - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 दिन में बीजेपी-कांग्रेस को पछाड़ा, इंस्टा पर डेढ़ करोड़+ फॉलोअर्स; ये सिर्फ मजाक है या बदलाव की आहट BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी (जिसे सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है) भगवान सूर्य देव को समर्पित एक अत्यंत शुभ दिन है। जब भी शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे 'भानु सप्तमी' कहा जाता है। इस व्रत और दिन की महिमा से जुड़ी 3 पौराणिक कथाएं सबसे ज्यादा प्रचलित हैं। कथा 1: सूर्य देव के प्रकट होने की कथा (मुख्य कथा) सूर्यदेव: पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में भगवान सूर्य देव इसी दिन पहली बार अपने दिव्य रूप में प्रकट हुए थे। कथा का सार: महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी अदिति के पुत्र के रूप में सूर्य देव का जन्म हुआ था। शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्य देव ने पहली बार ब्रह्मांड को अपने प्रकाश से आलोकित किया था और उनका रथ सात घोड़ों पर सवार होकर आकाश में निकला था। चूंकि यह उनका 'जन्मदिन' माना जाता है, इसलिए इस दिन को 'भानु सप्तमी' (भानु यानी सूर्य) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को आरोग्य (अच्छी सेहत) और तेज की प्राप्ति होती है। ALSO READ: अधिकमास की भानु सप्तमी 2026 कब है? जानें तिथि, महत्व, शुभ मुहूर्त और सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय कथा 2: इंदुमती की कथा (व्रत का महत्व बताने वाली कथा) भविष्य पुराण में भानु सप्तमी के व्रत के महत्व को समझाने के लिए एक वेश्या की कथा आती है, जो इस प्रकार है: प्राचीन काल में इन्दुमती नाम की एक वेश्या थी। उसने अपने जीवन में कभी कोई पुण्य या धार्मिक कार्य नहीं किया था, लेकिन जैसे-जैसे उसका बुढ़ापा नजदीक आया, उसे परलोक सुधारने की चिंता सताने लगी। वह मुक्ति का मार्ग खोजने के लिए महर्षि वसिष्ठ के पास पहुंची। उसने मुनि से प्रार्थना की, हे ऋषिवर! मैंने जीवनभर कोई सत्कर्म नहीं किया। कृपा कर मुझे कोई ऐसा सरल उपाय या व्रत बताएं, जिससे मुझे मोक्ष मिल सके और मेरे सारे पाप धुल जाएं। महर्षि वसिष्ठ ने उपाय बताया: महर्षि वसिष्ठ ने कहा, हे इन्दुमती! महिलाओं के लिए मुक्ति और सौभाग्य देने वाला 'अचला सप्तमी' या 'भानु सप्तमी' का व्रत सबसे उत्तम है। शुक्ल पक्ष की जिस सप्तमी को रविवार हो, उस दिन पवित्र नदी में स्नान करके सूर्य देव को दीपदान करो और पूरे दिन निराहार रहकर उनकी पूजा करो। इन्दुमती ने महर्षि के कहे अनुसार पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भानु सप्तमी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से जब उसने अपना शरीर त्यागा, तो उसके सारे पाप नष्ट हो चुके थे। उसे स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई और वहां उसे अप्सराओं की प्रधान (नायिका) बनने का गौरव प्राप्त हुआ। कथा 3:श्री कृष्ण के पुत्रशाम्ब की कथा: जिसके अनुसार शाम्ब, जो कि भगवान श्री कृष्ण के पुत्र थे, उन्हें अपने शारीरिक बल और सुंदरता पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। अपने इसी अभिमान के चलते उन्होंने ऋषि दुर्वासा का अपमान कर दिया। और शाम्ब की यह धृष्ठता को देखकर मुनि दुर्वासा ने क्रोध में आकर शाम्ब को कुष्ठ रोग होने का श्राप दे दिया। तब भगवान श्री कृष्ण ने अपने पुत्र शाम्ब को भगवान सूर्य देव की उपासना करने के लिए कहा था और शाम्ब ने पिता की आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें कुष्ठ रोग मुक्ति मिली थी। भानु सप्तमी का धार्मिक संदेश यह कथा बताती है कि भानु सप्तमी के दिन जो भी व्यक्ति सूर्य देव की पूजा, व्रत और दान करता है, उसके कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। विशेषकर गंभीर बीमारियों से मुक्ति और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए इस कथा को सुनना और व्रत रखना बेहद फलदायी माना गया है। अत: इस व्रत का बहुत अधिक महत्व होने के कारण जो भी व्यक्ति भानु सप्तमी का व्रत रखकर विधिपूर्वक सूर्य देव का पूजन तथा अर्चना करते हैं उन्हें सेहत, संतान की प्राप्ति तथा सुख और धनदायक जीवन प्राप्त होता है। अत: हर व्यक्ति को भानु सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्यदेव को जल का अर्घ्य जरूर अर्पित करना चाहिए।
साउथ स्टार यश बने शाहरुख-दीपिका के पड़ोसी, अलीबाग में खरीदी 24 करोड़ रुपए की सी-फेसिंग प्रॉपर्टी
कन्नड़ सुपरस्टार और 'KGF' फ्रैंचाइज़ी से देश-दुनिया में अपनी धाक जमाने वाले यश इन दिनों अपनी आने वाली फिल्मों को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। लेकिन इस बार वह अपनी किसी फिल्म की वजह से नहीं, बल्कि रियल एस्टेट में किए गए एक बेहद आलीशान निवेश के कारण चर्चा में आ गए हैं। खबरों के मुताबिक, यश और उनकी पत्नी राधिका पंडित ने महाराष्ट्र के खूबसूरत तटीय शहर अलीबाग में करोड़ों रुपये की एक प्रीमियम प्रॉपर्टी अपने नाम की है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म 'लियासेस फोरस' द्वारा एक्सेस किए गए रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार, इस स्टार कपल ने अलीबाग के कामथ गांव में करीब 1.3 एकड़ की शानदार कृषि जमीन खरीदी है। ALSO READ: ट्रेडिशनल अवतार में छाईं तृप्ति डिमरी, बांधनी कुर्ता-शरारा में ढाया कहर इस पूरी डील की कीमत 24 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जिसका पंजीकरण 18 मई, 2026 को अलीबाग के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में पूरा किया गया। यह जमीन अलीबाग के सबसे पसंदीदा और पॉश इलाकों में से एक, किहिम बीच के बेहद करीब स्थित है। इस प्रॉपर्टी की सबसे बड़ी खासियत इसकी शानदार लोकेशन है। इसके एक तरफ गांव की खूबसूरत सड़क है, तो दूसरी तरफ सीधे अरब सागर का जादुई नजारा दिखाई देता है। इतना ही नहीं, इस जमीन से सीधे समुद्र तट पर जाने का एक निजी रास्ता भी जुड़ता है। इस जमीन पर पहले से ही एक छोटा सा रिहायशी मकान बना हुआ है। रिपोर्ट्स की मानें तो यश और राधिका इस जगह पर एक बेहद आलीशान 'अल्ट्रा-लग्जरी' हॉलिडे होम बनाने की योजना बना रहे हैं, जहां वे अपने बच्चों के साथ फुर्सत के पल बिता सकें। इस हाई-प्रोफाइल सरकारी सौदे को कानूनी रूप देने के लिए कपल ने 1.44 करोड़ रुपए की भारी-भरकम स्टांप ड्यूटी चुकाई है, साथ ही 60,000 रुपए की रजिस्ट्रेशन फीस और 5,200 रुपए का डॉक्यूमेंट हैंडलिंग चार्ज भी दिया है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें बॉलीवुड के दिग्गजों की लिस्ट में शामिल हुए यश अलीबाग पिछले कुछ सालों में भारत के सबसे बड़े सेलिब्रिटी हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है। मुंबई के करीब होने और रो-रो बोट सर्विस व वॉटर टैक्सी की बेहतरीन कनेक्टिविटी के कारण यह सितारों की पहली पसंद बन चुका है। अलीबाग में इस निवेश के साथ ही यश अब शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह, विराट कोहली-अनुष्का शर्मा और कृति सेनन जैसे उन दिग्गज सितारों की एलीट लिस्ट में शामिल हो गए हैं, जिनके पास पहले से ही अलीबाग में अपने आलीशान हॉलिडे होम्स मौजूद हैं। कन्नड़ सिनेमा के सबसे अमीर और पसंदीदा कपल्स में शुमार यश और राधिका का एसेट पोर्टफोलियो बेहद मजबूत है। उनके पास कई और बेशकीमती संपत्तियां है। बेंगलुरु के बेहद शानदार 'प्रेस्टीज गोल्फशायर' इलाके में उनका एक आलीशान ड्यूप्लेक्स अपार्टमेंट है, जिसकी कीमत 6 से 8 करोड़ रुपए के बीच है। कर्नाटक के हासन जिले में कपल का एक बड़ा और खूबसूरत फार्महाउस है, जहां वे अक्सर छुट्टियां मनाने जाते हैं।
E20 पेट्रोल से E85 सस्ता होगा, जानिए Flex Fuel Maruti Wagon R आपके लिए कितनी फायदेमंद, क्या है कीमत
4 जून को भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार Flex Fuel Maruti Wagon R को पेश किया गया। नई वैगन-आर पूरी तरह से E85 फ्यूल (85% तक एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलने में सक्षम है। इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन पेट्रोल और CNG वर्जन से अधिक हो सकती है। फ्लेक्स फ्यूल कारें धीरे-धीरे भारतीय बाजार में प्रवेश कर रही हैं और सरकार निर्माताओं को इन्हें बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि ईंधन पंपों की उपलब्धता अभी भी बढ़ रही है, लेकिन अगर आप लंबे समय में स्वच्छ और किफायती ड्राइविंग चाहते हैं तो फ्लेक्स फ्यूल एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कार को लॉन्च करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह भी भरोसा दिया कि E85 फ्यूल की कीमत मौजूदा E20 पेट्रोल के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी। ALSO READ: क्या है Google Search Profiles, क्रिएटर्स और पब्लिशर्स को Search और Discover में कैसे मिलेगा फायदा, किस तरह करेगा काम क्या होता है फ्लेक्स फ्यूल फ्लेक्स फ्यूल एक वैकल्पिक ईंधन है जिसे गैसोलीन को इथेनॉल या मेथनॉल के साथ मिलाकर बनाया जाता है। ये ईंधन केवल आंतरिक दहन इंजनों के अनुकूल होते हैं और विभिन्न प्रकार के ईंधनों पर काम कर सकते हैं। यह ईंधन 85% इथेनॉल और 15% गैसोलीन (E85) का मिश्रण हो सकता है, या इन दोनों ईंधनों का कोई भी संयोजन हो सकता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ईंधन के मिश्रण का पता लगाने और इंजन के प्रदर्शन को समायोजित करने के लिए उन्नत सेंसर और इंजन कंट्रोल मॉड्यूल (ECM) का उपयोग करते हैं। ALSO READ: भारत की पहली Flex Fuel कार लॉन्च! Maruti Suzuki WagonR अब चलेगी E85 इथेनॉल पर क्यों जरूरी है एथेनॉल एथेनॉल भारत की बड़ी आवश्कयता बनने वाला है। भारत क्रूड ऑइल का बड़ा आयातक है। एथेनॉल ब्लेंडिंग से विदेशी मुद्रा बचेगी। इथेनॉल गन्ना, मक्का आदि से बनता है। इससे किसानों को फायदा होगा। इससे कृषि आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी, क्योंकि एथेनॉल से टेलपाइप एमिशन 70-75% तक घट जाएगा। पेट्रोल की मात्रा कम होने से ईंधन सस्ता भी हो सकता है। कैसे है इसका इंजन Flex Fuel Maruti Wagon R में परफॉर्मेंस के लिए एक नया 1.2-लीटर फ्लेक्स-फ्यूल पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो कि E85 एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के साथ कंपेटिबल है। इस बदलाव के कारण स्पेसिफिकेशन्स में थोड़ा अंतर आया है, जो रेगुलर 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन थोड़ी ज्यादा पावर और टॉर्क देता है। फ्लेक्स फ्यूल कैसे काम करता है फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में ईंधन के मिश्रण का पता लगाने के लिए एक छोटा प्रोसेसर और सेंसर मौजूद होता है। ये मिश्रण का पता लगाने में मदद करते हैं और इंजन का कंप्यूटर इग्निशन टाइमिंग और हवा-ईंधन के मिश्रण को समायोजित करता है, जिससे इंजन का सर्वोत्तम प्रदर्शन सुनिश्चित होता है। बाई-फ्यूल इंजन में अलग-अलग ईंधनों के लिए दो अलग-अलग टैंक होते हैं, जबकि फ्लेक्स फ्यूल वाहन सभी प्रकार के मिश्रणों को एक ही टैंक में संग्रहित करता है। ALSO READ: HF Deluxe Flex Fuel Price : Hero ने लॉन्च कीं Flex Fuel Splendor और HF Deluxe, E85 इथेनॉल पर चलेंगी ये बाइक्स, जानें कीमत और फीचर्स, कबसे होगी बिक्री कितना लाभकारी, कितना नुकसानदायक फ्लेक्स फ्यूल ईंधन की खपत को कम कर सकता है क्योंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा उत्पन्न करता है। वाहन का उचित रखरखाव न होने पर इससे इंजन में अतिरिक्त टूट-फूट भी हो सकती है। लेकिन आधुनिक फ्लेक्स फ्यूल वाहन इन मिश्रणों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। फ्लेक्स फ्यूल में मौजूद इथेनॉल वाहनों के इंजनों पर अधिक घिसाव और दबाव डालता है। हालांकि इंजनों को फ्लेक्स फ्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधनों के मिश्रण के अनुसार समायोजित करने के लिए डिज़ाइन किया जा सकता है, फिर भी ऐसे इंजनों के रखरखाव में काफी खर्च आता है। इस तकनीक में सेंसर लगे होते हैं, इसलिए इसकी आयु बढ़ाना बहुत महंगा पड़ता है। Edited by : Sudhir Sharma
Panchak Dates 2026: 06 जून से लगेगा मृत्यु पंचक, जानें क्यों हैं खास, क्या करें और क्या न करें?
June Mrityu Panchak 2026: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में 'पंचक' को बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय माना गया है। इस बार जून के महीने में 06 जून से पंचक काल की शुरुआत होने जा रही है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करता है, तो उस पांच दिनों की अवधि को 'पंचक' कहा जाता है। ALSO READ: गुरु का कर्क राशि में महागोचर, 2 राशियों के लिए अशुभ, 3 पर मिलाजुला प्रभाव, करें 5 उपाय अक्सर लोग पंचक का नाम सुनते ही डर जाते हैं कि यह अशुभ समय है, लेकिन ऐसा नहीं है। 06 जून से शुरू होने वाला पंचक काल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह समय पूजा-पाठ, जप, ध्यान और दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। वहीं कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार निर्माण कार्य, लकड़ी संग्रह और कुछ अन्य कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। पंचक को भय का नहीं, बल्कि सावधानी और आध्यात्मिक साधना के अवसर के रूप में देखना चाहिए। आइए जानते हैं कि इस बार का पंचक क्यों खास है और इसमें किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। क्यों खास है इस बार का पंचक? (मृत्यु पंचक) ज्योतिष शास्त्र में पंचक जिस वार या दिन से शुरू होता है, उसके अनुसार उसका नाम और प्रभाव तय होता है। मृत्यु पंचक का योग: इस बार 06 जून को शनिवार का दिन है। शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को 'मृत्यु पंचक' कहा जाता है। प्रभाव: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह पंचक बेहद कष्टकारी और जोखिम भरा माना जाता है। इस अवधि में दुर्घटना, चोट लगने, बीमारी या किसी भी तरह के बड़े विवाद की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए इस पांच दिनों की अवधि में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। जून 2026 में कब पड़ेगा पंचक, जानें समय इस बार पंचक का आरम्भ 06 जून, 2026, शनिवार को 07:03 पी एम से हो रहा है। और पंचक का अंत 11 जून, 2026, बृहस्पतिवार को 08:16 ए एम पर होगा। पंचक में भूलकर भी न करें ये 5 काम/ वर्जित कार्य ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है, क्योंकि इस दौरान किए गए गलत काम का प्रभाव पांच गुना बढ़ सकता है। लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना: पंचक के दौरान घर की छत के लिए लकड़ी, घास या कोई भी ज्वलनशील सामग्री (जैसे कंडे, कोयला) इकट्ठा नहीं करना चाहिए। इससे अग्नि का भय रहता है। घर की छत डालना (लेंटर डालना): यदि आप घर बनवा रहे हैं, तो इन पांच दिनों में घर की छत या लेंटर डलवाने का काम रोक दें। ऐसा करना धन और सुख की हानि कराता है। चारपाई या बेड बुनना: पंचक काल में नई चारपाई बनाना, बेड खरीदना या गद्दे आदि तैयार करवाना अशुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना गया है। पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। शव दाह (अंतिम संस्कार) में नियम: यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो बिना पंचक शांति के शव का दाह संस्कार नहीं किया जाता। ऐसा न करने पर परिवार पर संकट आ सकता है। ALSO READ: 12 साल बाद बना हंस महापुरुष राजयोग, अगले कुछ महीने इन 5 राशियों पर होगी पैसों की बारिश पंचक काल में क्या करें? (क्या करने की है छूट) सभी पंचक बुरे नहीं होते और कुछ जरूरी काम इस दौरान किए जा सकते हैं: सरकारी और व्यावसायिक कार्य: यदि कोई जरूरी सरकारी काम या बिजनेस डील है, तो उसे किया जा सकता है। रक्षा और कानून से जुड़े काम: शनिवार से शुरू होने वाले मृत्यु पंचक में कानूनी विवादों को सुलझाने, कोर्ट-कचहरी के काम या सुरक्षा से जुड़े फैसले लेने में सफलता मिल सकती है। जरूरी काम के लिए उपाय: यदि कोई वर्जित काम करना बेहद जरूरी हो (जैसे दक्षिण दिशा की यात्रा या शवदाह), तो ज्योतिषीय उपाय या आटे के पांच पुतले बनाकर पंचक दोष का निवारण करने के बाद ही आगे बढ़ें। विशेष टिप: चूंकि यह 'मृत्यु पंचक' है, इसलिए वाहन चलाते समय गति पर नियंत्रण रखें और किसी भी तरह के वाद-विवाद से खुद को दूर रखें। इन पांच दिनों में भगवान शिव या हनुमान जी की आराधना करना संकटों से रक्षा करता है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: 8 जून से पलटेगी इन 4 राशियों की किस्मत, गुरु-शुक्र मिलकर बना रहे गजलक्ष्मी राजयोग
अब इंदौर में होगी पानी की हाईटेक टेस्टिंग, आखिर क्यों लिया निगम ने यह फैसला?
अब इंदौर में पानी की टेस्टिंग के लिए हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम प्रशासन अत्याधुनिक मशीन खरीदने की तैयारी कर रहा है, जिसकी कुल लागत 43 लाख रुपए बताई जा रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से शहरवासियों को मिलने वाले पानी की शुद्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। बता दें कि इस नई मशीन से हर महीने एफएसआई और यूएसईईए के मानकों के तहत 2000 पानी के नमूनों की तेज, सटीक और वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि शहर की पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित बनाया जा सके। 43 लाख की आधुनिक मशीन करेगी जांच : बता दें कि पिछले दिनों इंदौर में दूषित पानी से 36 लोगों की मौत हो गई थी। जिसके बाद से इंदौर के पानी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम अब एक नई और अत्याधुनिक मशीन खरीदने की तैयारी कर रहा है, जिसकी कुल लागत 43 लाख रुपए बताई जा रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से शहरवासियों को मिलने वाले पानी की शुद्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। पुरानी टेस्टिंग तकनीक में होगा बदलाव : अब तक शहर में पानी की शुद्धता जांचने के लिए पुरानी और पारंपरिक प्रणालियों का ही सहारा लिया जा रहा था। नर्मदा प्रोजेक्ट के अंतर्गत मूसाखेड़ी स्थित प्रयोगशाला में पानी के नमूनों का परीक्षण पुरानी पद्धति के आधार पर किया जाता रहा है, जिसमें समय अधिक लगता था। अब इस नई अत्याधुनिक मशीन के आ जाने से हर महीने पानी के लगभग दो हजार नमूनों की जांच की जा सकेगी। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से पानी की गुणवत्ता का परीक्षण न केवल तेज होगा, बल्कि बेहद सटीक और पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से संपन्न किया जाएगा। कांग्रेस ने लगाए थे पानी को लेकर आरोप : शहर की पानी की टंकियों से सप्लाई होने वाले पेयजल को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक सरगर्मियां तेज थीं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पानी के असुरक्षित सैंपलों का मामला प्रमुखता से उठाया था। Edited By: Naveen R Rangiyal
होशियारपुर में इंस्टाग्राम पर नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर किया रेप
होशियारपुर। पंजाब में होशियारपुर जिले के पुरहीरां में इंडस्ट्रियल एरिया फोकल पॉइंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक युवक ने 14 वर्षीय किशोरी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने की घटना सामने आई है। जांच अधिकारी निरीक्षक जसवीर कौर ने शुक्रवार को बताया कि नौवीं कक्षा की पीड़िता छात्रा की कुछ समय पहले एक सोशल […] The post होशियारपुर में इंस्टाग्राम पर नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर किया रेप appeared first on Sabguru News .
भिवाड़ी में दो फैक्ट्रियों में आग लगने से 5 लोग झुलसे
खैरथल तिजारा। राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में दो कंपनियों में आग लगने से पांच से अधिक लोग झुलस गए। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि गुरुवार को दोपहर करीब दो बजे रामको मेटल में ट्रांसफार्मर में विस्फोट हुआ। इससे प्रथम मंजिल पर रखे पांच हजार लीटर ऑयल से भरे […] The post भिवाड़ी में दो फैक्ट्रियों में आग लगने से 5 लोग झुलसे appeared first on Sabguru News .
चित्तौड़गढ़ में दुर्ग की तलहटी में महिला का शव मिलने से फैली सनसनी
चित्तौड़गढ़। राजस्थान में चित्तौड़गढ़ के कोतवाली थाना क्षेत्र में शुक्रवार काे दुर्ग की तलहटी में अज्ञात महिला का निर्वस्त्र शव मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस के अनुसार सुबह दुर्ग के प्रथम द्वार पाडनपोल स्थित झरने के मार्ग पर नहाने गये लोगों को तीव्र दुर्गंध आने पर पुलिस को सूचना दी गई, मौके पर कोतवाली […] The post चित्तौड़गढ़ में दुर्ग की तलहटी में महिला का शव मिलने से फैली सनसनी appeared first on Sabguru News .
12 साल बाद बना हंस महापुरुष राजयोग, अगले कुछ महीने इन 5 राशियों पर होगी पैसों की बारिश
ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो 12 साल बाद वर्ष 2026 का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण गोचर 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति (गुरु) का अपनी उच्च राशि कर्क में महापरिवर्तन हुआ है। इस परिवर्तन से पंचा महापुरुष योग में से एक योग हंस महापुरुष राजयोग का निर्माण हुआ है जो 31 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। तब तक मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक और मीन राशियों के लिए भाग्य के दरवाजे खुले रहेंगे। 1. मेष राशि (Aries) बृहस्पति आपके चौथे (सुख, माता, वाहन) भाव में गोचर करेंगे। चतुर्थ भाव में गुरु उच्च का फल देते हैं। प्रभाव: आपके पारिवारिक सुख में भारी वृद्धि होगी। नया घर या गाड़ी खरीदने के योग बनेंगे। माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। करियर में मान-सम्मान बढ़ेगा और मानसिक शांति मिलेगी। 2. कर्क राशि (Cancer) बृहस्पति आपकी ही राशि यानी आपके पहले (लग्न) भाव में आ रहे हैं। आपके लिए 'हंस पंचमहापुरुष राजयोग' का निर्माण होगा। प्रभाव: यह समय आपके स्वर्णिम काल की शुरुआत है। आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा, समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और वैवाहिक जीवन में खुशियां आएंगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा, पुरानी बीमारियां दूर होंगी और अटके हुए काम तेजी से पूरे होंगे। अविवाहितों के लिए विवाह के पक्के योग बनेंगे। 3. कन्या राशि (Virgo) बृहस्पति आपके ग्यारहवें (लाभ और आय) भाव में गोचर करेंगे। प्रभाव: आपकी आमदनी के नए स्रोत खुलेंगे और लंबे समय से रुकी हुई इच्छाएं पूरी होंगी। बड़े भाई-बहनों और मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा। निवेश से अच्छा मुनाफा होने के संकेत हैं। यदि आप बिजनेस करते हैं, तो कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों का प्रमोशन और सैलरी हाइक तय है। बड़े भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। 4. वृश्चिक राशि (Scorpio) बृहस्पति आपके नौवें (भाग्य और धर्म) भाव में गोचर करेंगे। प्रभाव: आपका सोया हुआ भाग्य जाग उठेगा। हर काम में किस्मत का पूरा साथ मिलेगा। उच्च शिक्षा के लिए प्रयासरत छात्रों को सफलता मिलेगी। लंबी दूरी की यात्राएं और तीर्थ यात्राएं होने के प्रबल योग हैं। अब तक जो काम भाग्य के भरोसे रुके थे, वे पूरे होंगे। लंबी दूरी की यात्राएं या विदेश यात्रा के योग बनेंगे। छात्रों को उच्च शिक्षा में बड़ी सफलता मिलेगी। 5. मीन राशि (Pisces) बृहस्पति आपके पांचवें (संतान, शिक्षा, प्रेम) भाव में गोचर करेंगे। प्रभाव: छात्रों के लिए यह समय बेहद शानदार रहेगा, पढ़ाई में मन लगेगा। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों को खुशखबरी मिल सकती है। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी और आपकी रचनात्मकता चरम पर होगी। यदि आप संतान प्राप्ति की कोशिश कर रहे थे, तो यह समय खुशखबरी ला सकता है। आकस्मिक धन लाभ (शेयर मार्केट, लॉटरी या पैतृक संपत्ति) के प्रबल योग हैं।
आखिर आत्महत्या क्यों कर रहे हैं भारत में विवाहित पुरुष
एनसीआरबी की ओर से जारी 'भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024 (एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया)' शीर्षक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 के दौरान देश में करीब 1.70 लाख लोगों ने आत्महत्या कर ली। वर्ष 2023 के आंकड़ों के मुकाबले यह 0.4 ...
हॉलीवुड अभिनेता जेम्स हैंडी की हत्या, गर्लफ्रेंड के बेटे पर लगा चाकू मारने का आरोप
हॉलीवुड इंडस्ट्री से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 'जुमांजी' और 'टॉप गन: मेवरिक' जैसी कल्ट फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाले दिग्गज अमेरिकी अभिनेता जेम्स हैंडी का निधन हो गया है। 81 वर्ष की उम्र में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई है। खबरों के अनुसार लॉस एंजिल्स के टारजाना इलाके में स्थित जेम्स हैंडी के घर के बाहर इस वारदात को अंजाम दिया गया। हत्या का आरोप उनकी ही गर्लफ्रेंड के बेटे पर लगा है, जिसने खुद फोन कर बेहद खौफनाक अंदाज में अपना गुनाह कबूला है। ALSO READ: राम चरण स्टारर 'पेड्डी' का बॉक्स ऑफिस पर दिखा तूफान, ओपनिंग डे पर ही पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट के अनुसार, यह घटना 3 जून की सुबह करीब 9:30 बजे की है। पुलिस को एक इमरजेंसी 911 कॉल मिली, जिसमें कॉलर ने कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। वैराइटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलर ने डिस्पैचर से कहा, 'मैं इंसान का बेटा हूं, मैंने अभी-अभी पाप के पुतले को मार डाला है।' इस अजीबोगरीब और डरावने फोन कॉल के तुरंत बाद वेस्ट वैली एरिया के पुलिस अधिकारी टारजाना के इरविन स्ट्रीट स्थित घटनास्थल पर पहुंचे। वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। जेम्स हैंडी अपने घर के लॉन में बेहोश पड़े थे और उनकी छाती पर चाकू के गहरे जख्म थे। उन्हें तुरंत लॉस एंजिल्स फायर डिपार्टमेंट के पैरामेडिक्स द्वारा नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें आरोपी ने खुद को पुलिस के हवाले किया पुलिस जब घटनास्थल पर जांच कर रही थी, तभी वहां मौजूद एक शख्स ने पुलिस टीम को इशारा कर रोका। वह कोई और नहीं बल्कि जेम्स हैंडी की गर्लफ्रेंड का 44 वर्षीय बेटा माइकल ग्लेडहिल था। ग्लेडहिल ने पुलिस को बताया कि वही वह व्यक्ति है जिसे वे ढूंढ रहे हैं। वह उसी घर में अपनी मां के साथ रहता था, जो लंबे समय से जेम्स हैंडी की पार्टनर थीं। पुलिस ने बिना देरी किए माइकल ग्लेडहिल को हिरासत में ले लिया। फिलहाल उसे जेल में रखा गया है और उस पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इस क्रूर हत्याकांड के पीछे का मुख्य मकसद क्या था, इसकी जांच पुलिस अभी कर रही है। ALSO READ: है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू: हंसी की तलाश में भटकती कॉमेडी न्यूयॉर्क में जन्मे जेम्स हैंडी हॉलीवुड के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे, जिनका नाम भले ही हर किसी की जुबान पर न हो, लेकिन उनका चेहरा देखते ही दर्शक उन्हें पहचान जाते थे। सिनेमा जगत में उनका करियर लगभग 50 साल लंबा रहा। उन्होंने साल 1977 में फिल्म 'टैप्स' से अपने स्क्रीन करियर की शुरुआत की थी। जेम्स हैंडी को उनकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाना जाता था। उन्होंने बड़े पर्दे पर कई यादगार भूमिकाएं निभाईं है। उन्होंने टॉप गन: मेवरिक में 'जिमी' नाम के एक बारटेंडर का किरदार निभाया था, जो दर्शकों को बेहद पसंद आया। फिल्म जुमांजी में उन्होंने एक पेस्ट कंट्रोलर की भूमिका निभाई थी।
ट्रंप ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी मेरे अच्छे दोस्त, भारत के साथ जल्द होगा व्यापार समझौता
वॉशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि भारत और अमरीका जल्द ही एक व्यापार समझौते पर पहुंच जाएंगे। ट्रंप ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों देश् ही एक व्यापार समझौते पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम एक समझौते तक जरूर पहुंचेंगे, क्योंकि मैं भारतीय प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूं। […] The post ट्रंप ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी मेरे अच्छे दोस्त, भारत के साथ जल्द होगा व्यापार समझौता appeared first on Sabguru News .
आरबीआई ने रेपो दर स्थिर रखी, जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाया
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शुक्रवार को रेपो रेट तथा अन्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की शुक्रवार को समाप्त तीन दिवसीय बैठक में पश्चिम एशिया संकट जारी रहने, मुद्रास्फीति में वृद्धि-विशेषकर ईंधन की कीमतों में, और कमजोर मानसून की भविष्यवाणी […] The post आरबीआई ने रेपो दर स्थिर रखी, जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाया appeared first on Sabguru News .
राम चरण स्टारर 'पेड्डी' का बॉक्स ऑफिस पर दिखा तूफान, ओपनिंग डे पर ही पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
'पेड्डी' इस साल की सबसे मच-अवेटेड पैन-इंडिया रिलीज में से एक थी, जिसमें राम चरण लीड रोल में हैं और जाह्नवी कपूर और जगपति बाबू ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। अपने सुपरहिट गानों, दमदार प्रमोशनल कंटेंट और इम्पैक्टफुल ट्रेलर के जरिए सोशल मीडिया पर भारी बज बनाने के बाद, यह फिल्म आखिरकार 4 जून को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। रिलीज होते ही 'पेड्डी' ने थिएटर्स में तूफान ला दिया है। हिम्मत, जज्बे और दिल छू लेने वाली कहानी को देखने के लिए थिएटर्स में भारी भीड़ उमड़ रही है, फैंस जश्न मना रहे हैं और जनता की तरफ से फिल्म को शानदार रिव्यूज मिल रहे हैं। दर्शकों के इस जबरदस्त रिस्पॉन्स का असर बॉक्स ऑफिस के कलेक्शन पर भी साफ देखने को मिल रहा है। ALSO READ: है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू: हंसी की तलाश में भटकती कॉमेडी फिल्म ने दुनिया भर में अपने पहले ही दिन 135.36 करोड़ रुपए से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन करके एक धमाकेदार शुरुआत की है, जिससे यह इस साल की सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्मों में से एक बन गई है। सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ और शोज़ में दर्शकों की लगातार बढ़ती भीड़ के दम पर 'पेड्डी' के हिंदी वर्जन ने भी पहले दिन जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है। फिल्म को मिल रही तारीफों और सामने आ रहे वीकेंड को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में यह कमाई के नए रिकॉर्ड बनाएगी। यह कामयाबी राम चरण के लिए बेहद खास है, क्योंकि 'RRR' के बाद यह उनकी दूसरी 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की ओपनिंग है। इसी के साथ वे एक से ज्यादा बार 100 करोड़ रुपए की ओपनिंग डे देने वाले दुनिया के सिर्फ पांचवें एक्टर बन गए हैं। A post shared by PEDDI (@peddimovie) इस बड़ी खुशखबरी को शेयर करते हुए मेकर्स ने लिखा, बॉक्स ऑफिस चैंपियन - #PEDDI सर पहले दिन दुनिया भर में 135.36 करोड़ से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन। मिलिए #PEDDI से अब अपने नजदीकी सिनेमाघरों में। अपनी टिकटें अभी बुक करें। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें 23 मई को भोपाल में हुआ 'पेड्डी' का ग्रैंड म्यूज़िकल लॉन्च इवेंट इस साल के सबसे बड़े और यादगार फिल्मी इवेंट्स में से एक बनकर उभरा है। इस शानदार शाम में फिल्म की पूरी स्टार कास्ट और क्रू एक साथ नजर आए, जिनमें राम चरण, जाह्नवी कपूर, रवि किशन, शिवा राजकुमार, दिव्येंदु शर्मा, जगपति बाबू, डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना और ऑस्कर विनर कंपोजर ए. आर. रहमान शामिल थे। इन सबने मिलकर फैंस के लिए इस शाम को कभी न भूलने वाला एक बेहतरीन अनुभव बना दिया। फिल्म में राम चरण ने एक 'क्रॉसओवर एथलीट' का किरदार निभाया है। यह कैरेक्टर उन महान खेल दिग्गजों के सफर से प्रेरित है, जिन्होंने अपनी असली मंजिल पाने से पहले अलग-अलग खेलों में अपना दमखम दिखाया था। ठीक वैसे ही जैसे एम एस धोनी क्रिकेट के आइकॉन बनने से पहले फुटबॉल खेला करते थे, और सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट का इतिहास रचने से पहले शुरुआत में टेनिस में हाथ आजमाया था। 'पेद्दि' भी इसी तरह हिम्मत, बदलाव और बड़े सपनों को सच करने के जज्बे का जश्न मनाती है। बुची बाबू सना द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में राम चरण मुख्य भूमिका में हैं, और उनके साथ शिवा राजकुमार, जाह्नवी कपूर, दिव्येंदु शर्मा और जगपति बाबू जैसे बेहतरीन कलाकारों की फौज है, जो फिल्म के स्केल और इसके इम्पैक्ट को और ज्यादा बढ़ा देती है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर इंदौर: एक अद्वितीय, कालजयी एवं वैश्विक प्रतिमान
वैश्विक पृष्ठभूमि- जलवायु क्रिया की वैश्विक पुकार विश्व पर्यावरण दिवस २०२६ जलवायु क्रिया (Climate Action) के केंद्रीय विषय के अंतर्गत मनाया जा रहा है, और इस वर्ष अज़रबैजान गणराज्य की राजधानी बाकू इसका वैश्विक आयोजन-स्थल है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का यह वैश्विक अभियान पृथ्वी द्वारा भेजे जा रहे आपातकालीन संकेतों पर केंद्रित है। प्रश्न अब यह नहीं कि परिवर्तन आएगा या नहीं, बल्कि यह है कि मानवता इस परिवर्तन को किस दिशा में और कितनी गति से मोड़ती है। इस वर्ष की थीम Inspired by Nature. For Climate. For Our Future प्रकृति को जलवायु-संकट के सबसे बड़े पीड़ित के साथ-साथ उसके सबसे शक्तिशाली समाधान के रूप में प्रस्तुत करती है। वर्ष २०१५ से २०२५ तक के ग्यारह वर्ष रिकॉर्ड पर सबसे गर्म रहे हैं। अनुमान है कि २०५० तक विश्व की तीन-चौथाई से अधिक जनसंख्या सूखे की चपेट में आ सकती है और वर्तमान हिमनद-स्थलों (Glaciers) का एक-तिहाई भाग सदा के लिए विलुप्त हो सकता है। ऐसी वैश्विक विभीषिका के महासंकट-काल में, जब समूची मानव-जाति आसन्न पर्यावरणीय प्रलय के भय से आतंकित है, भारत की मध्यभूमि में स्थित एक नगर इंदौर संपूर्ण विश्व के समक्ष आशा और संकल्प का एक अभूतपूर्व, दीप्तिमान एवं अनुकरणीय दृष्टान्त प्रस्तुत कर रहा है। नव-चेतना का संवाहक इंदौर इंदौर ने केवल स्वच्छता के धरातल पर ही कीर्तिमान स्थापित नहीं किए हैं, अपितु उसने आधुनिक युग की विकासवादी अंधी दौड़ के बीच प्रकृति के साथ तादात्म्य बिठाने की एक युगांतरकारी कला सीखी है। निरंतर राष्ट्रपटल पर शीर्ष स्थान अर्जित करने वाला यह महानगर अब विश्व पर्यावरण दिवस (५ जून) के पावन अवसर पर संपूर्ण वसुंधरा के समक्ष एक अग्रणी, जाज्वल्यमान एवं वैश्विक प्रतिमान (Global Role Model) बनकर उभरा है। जब वैश्विक समुदाय जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक असंतुलन के संकट से जूझ रहा है, तब इंदौर ने सिद्ध किया है कि विकास और पर्यावरण का सह-अस्तित्व न केवल संभव है, बल्कि अनिवार्य भी है। प्रकृति के तीन मूलभूत, अनादि और अनंत स्तंभों, मृदा (मिट्टी), जल और वन्य जीवन के संरक्षण, संवर्धन एवं संपूर्ण कायाकल्प में इंदौर का भगीरथ प्रयास अत्यंत विस्मयकारी, श्लाघनीय और संपूर्ण मानवता के लिए अनुकरणीय है। ये तीनों तत्व ही इस धरा पर हमारे अस्तित्व के वास्तविक 'प्राण-आधार' हैं। १. अक्षय मृदा संपदा एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन (Soil Health & Waste Management) भूमि केवल अन्न ही नहीं उपजाती, वह समस्त जीव-जगत को अपनी गोद में धारण करती है। इंदौर ने अपनी इस पावन धरा को प्रदूषण की विभीषिका और रसायनों के घातक प्रभावों से पूर्णतः मुक्त रखने के लिए एक अद्वितीय, त्रि-आयामी कचरा प्रबंधन तंत्र स्थापित किया है, जो आज संपूर्ण विश्व के शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का विषय है। शून्य अपशिष्ट भराव क्षेत्र (Zero Landfill City): इंदौर ने 'कचरा' शब्द की परिभाषा को ही बदल दिया है। यहाँ शत-प्रतिशत अपशिष्ट को उसके जनन-स्रोत (घरों और उद्योगों) पर ही छह अलग-अलग श्रेणियों में पृथक (Segregate) कर लिया जाता है। इसके फलस्वरूप प्लास्टिक, सीसा और अन्य घातक रसायनों के अंश हमारी जीवनदायिनी मिट्टी में मिलकर उसे बंजर नहीं बना पाते। एशिया का विशालतम बायो-सीएनजी संयंत्र (देवगुराड़ियन): देवगुराड़ियन का यह आधुनिक संयंत्र केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि पर्यावरण शुद्धि का आधुनिक यज्ञ है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों टन गीले कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण (Processing) से जहाँ एक ओर प्रचुर मात्रा में बायो-गैस का उत्पादन हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उच्चतम कोटि की जैविक खाद (Organic Compost) निर्मित की जा रही है। यह खाद मृदा की नैसर्गिक उर्वरा शक्ति को पुनर्जीवित करने के लिए कृषकों को अत्यंत सुलभ दरों पर प्रदान की जाती है, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता समाप्त हो रही है। मृदा स्वास्थ्य संवर्धन एवं शहरी कृषि: नगर के नागरिकों में मिट्टी के प्रति कृतज्ञता का भाव जगाने के लिए 'मृदा स्वास्थ्य संवर्धन' और 'गृह-वाटिका' (Kitchen Gardening) को एक जन-आंदोलन का रूप दिया गया है, ताकि शहरी क्षेत्रों की मिट्टी भी सजीव और समृद्ध बनी रहे। २. दिव्य जल संस्कृति: संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन अपो हि ष्ठा मयोभुवः अर्थात् जल ही साक्षात् आनंद और जीवन का स्रोत है। जल संकट से जूझती दुनिया को इंदौर ने जल संचय, जल शोधन और जल के विवेकपूर्ण उपयोग का एक ऐसा दर्शन दिया है जो विरला है। देश का प्रथम और एकमात्र 'वॉटर प्लस' नगर: इंदौर ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से यह सुनिश्चित किया है कि नगर के पारंपरिक नालों, जलस्रोतों और यहाँ की ऐतिहासिक नदियों कान्ह और सरस्वती में तनिक भी दूषित या अशोधित जल प्रवाहित न हो। सीवेज के दूषित जल को अत्याधुनिक संयंत्रों के माध्यम से शत-प्रतिशत उपचारित (Treat) किया जाता है। इस पुनर्चक्रित (Recycled) जल का उपयोग औद्योगिक निर्माण कार्यों, सड़कों की सफाई और उद्यानों को सींचने में किया जा रहा है, जिससे ताजे जल की भारी बचत हो रही है। भवन-छत वर्षाजल संचयन (Rooftop Rainwater Harvesting): इंदौर ने अपनी वास्तुकला को पर्यावरण से जोड़ा है। नगर के लाखों निजी आवासों, व्यावसायिक परिसरों और शासकीय भवनों में वर्षा की एक-एक बूंद को सहेजकर भूगर्भ में उतारने (Groundwater Recharge) की प्रणाली को वैधानिक रूप से अनिवार्य किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, विगत वर्षों में यहाँ के भूजल स्तर में एक चमत्कारी और तीव्र सुधार दर्ज किया गया है। अमृत सरोवरों का पुनरुद्धार: इंदौर और उसके ग्रामीण अंचलों में स्थित प्राचीन, ऐतिहासिक और पारंपरिक तालाबों की गाद निकालकर उनका जीर्णोद्धार किया गया है, जिससे न केवल जल संग्रहण क्षमता बढ़ी है, बल्कि आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) भी समृद्ध हुआ है। ३. वन्य जीवन एवं हरित आवरण: जैव-विविधता का महासंगम पर्यावरण का शाश्वत संतुलन तभी संभव है जब इस धरा पर मूक वन्य जीव, दुर्लभ पक्षी और वनस्पति संपदा पूर्णतः सुरक्षित, फलित और पुष्पित हों। इंदौर ने अपनी कंक्रीट की दीवारों के बीच प्रकृति को सांस लेने की जगह दी है। नगर वन (अहिल्या वन): मियावाकी पद्धति का अभूतपूर्व अवलंबन: कंक्रीट के जंगलों के बीच सांस लेती इस नगरी में जापानी वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित अद्भुत पद्धति का अवलंबन कर सघन लघु-वनों (City Forests) का अभूतपूर्व सृजन किया गया है। मियावाकी तकनीक एक ऐसी अनोखी पद्धति है जिसके माध्यम से प्राकृतिक वन-क्षेत्रों से बाहर भी दस गुना तेज गति से वृक्षों को विकसित किया जा सकता है। अहिल्या वन की यह पहल क्षरित एवं कूड़े से भरी भूमि को हरे-भरे तथा सघन हरित क्षेत्रों में रूपांतरित करने का एक संकल्पित अभियान है, जो कार्बन अवशोषण, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जैव-विविधता तीनों दिशाओं में एक साथ कार्य करता है। यहाँ मोरिंगा, अमरूद, नीम, महोगनी, पीपल, जामुन, कदम्ब, टेबुबिया, सिरस, कटहल, चम्पा और मोहनी जैसे देशज वृक्षों का रोपण कर इन्हें पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र में रूपांतरित किया जा रहा है। प्रत्येक अहिल्या वन के मध्य एक लघु सरोवर का भी निर्माण किया जाता है, जो जैव-विविधता के संवर्धन और पक्षियों के आकर्षण का केंद्र बनता है। 'भारत वन' की ऐतिहासिक घोषणा: वर्ष २०२५ में नगर महापौर ने नगर के मध्यभाग में ३६ एकड़ की खुली भूमि पर एक 'भारत वन' के निर्माण की ऐतिहासिक घोषणा की है। एक ऐसा क्षेत्र जो शत-प्रतिशत हरित होगा, जिसमें कमल-तालाब और मियावाकी वन की परिकल्पना साकार की जाएगी और जो इंदौर के 'फेफड़े' (Lungs of Indore) के रूप में कार्य करेगा। 'अहिल्या वन' जैसे ये सघन हरित क्षेत्र आज स्थानीय पक्षियों, तितलियों और लघु जीवों के लिए एक अभेद्य और सुरक्षित प्राकृतिक आश्रय-स्थली बन चुके हैं, जो नगर के वायुमंडल को निरंतर शुद्ध कर रहे हैं। कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (वैश्विक स्तर का जीवोद्धार केंद्र): कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (इंदौर जू) ५१ एकड़ में फैला एक सघन हरित वन्यजीव अभयारण्य है, जो नगर के हृदय में स्थित है। इसमें ५७ से अधिक प्रजातियों के लगभग ६२८ वन्यजीव, स्तनपायी, पक्षी और सरीसृप संरक्षित हैं। १९७४ में स्थापित और १९९९ में विस्तारित इस संग्रहालय में बाघ, सिंह, दरियाई घोड़ा, सर्प, मगरमच्छ और असंख्य दुर्लभ पक्षी प्रजातियाँ हैं। इंदौर का यह प्राणी उद्यान केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, अपितु यह वन्य जीवों के संरक्षण, बंदी-प्रजनन (Captive Breeding) और संकटग्रस्त मूक जीवों के चिकित्सा-सह-जीवोद्धार (Rescue) के क्षेत्र में संपूर्ण एशिया के सबसे सक्रिय, संवेदनशील और सफल केंद्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ४. इंदौर की जल-भूमि विरासत: रामसर स्थल एवं भारत की प्रथम 'वेटलैंड सिटी' यशवंत सागर मालवांचल का मुकुटमणि यशवंत सागर, गंभीर नदी पर निर्मित एक विशाल जलाशय है, जो इंदौर से लगभग २६ किलोमीटर पश्चिम में हातोद ग्राम के निकट स्थित है। इसका निर्माण सन् १९३९ में हुआ था और यह लगभग २,६५० हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है। इसे ७ जनवरी २०२२ को रामसर स्थल (Ramsar Site क्र. २४९५) के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई। यशवंत सागर मध्य भारत में संकटग्रस्त सारस क्रेन (Sarus Crane) का एक सुदृढ़ आवास-क्षेत्र माना जाता है। अपनी विशाल उथली नरकट-भूमि के कारण यह आर्द्रभूमि शीतकालीन प्रवासी पक्षियों की असंख्य प्रजातियों के लिए स्वर्ग के समान है। सुदूर साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाले हजारों दुर्लभ प्रवासी पक्षी प्रतिवर्ष इस विशाल आर्द्रभूमि को अपना शीतकालीन आश्रय बनाते हैं। सिरपुर आर्द्रभूमि- इंदौर का 'पक्षी विहार' सिरपुर झील इंदौर की पश्चिमी सीमा पर इंदौर-धार मार्ग पर स्थित एक ऐतिहासिक मानव-निर्मित सरोवर है, जिसका निर्माण होल्कर राजाओं ने नगर को जलापूर्ति के लिए करवाया था। आज यह ८०० एकड़ के क्षेत्र में फैली एक शहरी पक्षी-अभयारण्य बन चुकी है। अपने आकार की दृष्टि से लघु होने के बावजूद सिरपुर में नॉर्दर्न शॉवेलर, गैडवाल, कॉमन पोचार्ड, बार-हेडेड गूज और कॉम्ब डक जैसी १४० से अधिक पक्षी प्रजातियाँ नियमित रूप से अंकित की जाती हैं। सिरपुर झील में २०० से अधिक पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जिनमें विभिन्न प्रकार के प्रवासी पक्षी भी सम्मिलित हैं। आवास-पुनर्स्थापन, जल-गुणवत्ता सुधार और जैव-विविधता अनुश्रवण इन तीनों स्तरों पर यहाँ सतत कार्य जारी है। भारत की प्रथम 'रामसर वेटलैंड सिटी'- इंदौर का वैश्विक सम्मान जनवरी २०२५ में रामसर अभिसमय की ६४वीं स्थायी समिति की बैठक में विश्व के ३१ नव-मान्यता प्राप्त वेटलैंड नगरों की घोषणा की गई। इसमें इंदौर और उदयपुर को भारत के प्रथम दो रामसर वेटलैंड सिटी के रूप में वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई। इंदौर में सिरपुर झील (रामसर स्थल) को जलपक्षी-समागम की दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण मान्यता दी गई है और इसे एक पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह मान्यता रामसर अभिसमय के अंतर्गत प्रदान की गई है और यह ६ वर्षों के लिए वैध है। इसका उद्देश्य नगरीय आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं उनके विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करना है, ताकि स्थानीय जनसमुदाय को पारिस्थितिक एवं सामाजिक-आर्थिक लाभ सुनिश्चित हो सके। इसी क्रम में भारत अब एशिया का सबसे बड़ा रामसर नेटवर्क बन चुका है और वैश्विक स्तर पर रामसर स्थलों की संख्या में तीसरे स्थान पर विराजमान है। ५. भारत की वैश्विक वन्यजीव संरक्षण यात्रा- इंदौर का सन्दर्भ वर्ष २०२५ भारत की वन्यजीव संरक्षण यात्रा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में अंकित हुआ है। इस वर्ष हिम-तेंदुए की प्रथम जनसंख्या आकलन रिपोर्ट प्रकाशित हुई, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में नए बाघ आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए, गंगा नदी डॉल्फिन पर पहली बार रेडियो-टैगिंग की गई और नए रामसर स्थलों को मान्यता दी गई। विशेष रूप से, रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को मध्य प्रदेश का ८वां बाघ आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया। ८९० वर्ग किलोमीटर में विस्तृत यह अभयारण्य पन्ना और सतपुड़ा बाघ आरक्षित क्षेत्रों के बाघ-कुनबे को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रीय स्तर पर, वर्ष २०२५ में नगर वन योजना (Nagar Van Yojana) के अंतर्गत ७५ नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई और इंदौर के अहिल्या वन इसी महान राष्ट्रीय हरित संकल्प की एक अग्रणी अभिव्यक्ति हैं। भारत सरकार ने वित्त वर्ष २०२५-२६ में वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास हेतु ₹४५० करोड़ आवंटित किए हैं तथा प्रोजेक्ट टाइगर एवं प्रोजेक्ट एलीफेंट के लिए २९० करोड़ की विशेष व्यवस्था की गई है, जो विगत वर्ष की तुलना में १८% की वृद्धि दर्शाती है। ६. जन-भागीदारी: इंदौर की वास्तविक महाशक्ति और निष्कर्ष इंदौर की इस अप्रतिम और युगांतरकारी सफलता का सबसे बड़ा रहस्य किसी तकनीक में नहीं, बल्कि यहाँ के जन-मानस के चरित्र में है। इंदौर ने संपूर्ण मानवता के समक्ष यह अकाट्य सत्य सिद्ध कर दिया है कि जब 'जन-भागीदारी' (Public Participation) एक पवित्र संस्कार बन जाती है और उसे 'प्रशासनिक संकल्प' का त्रिवेणी संगम प्राप्त होता है, तो कोई भी भूभाग पृथ्वी का स्वर्ग बन सकता है। यहाँ का बच्चा-बच्चा पर्यावरण का सजग प्रहरी है। इंदौर और उदयपुर की यह उपलब्धि प्रमाणित करती है कि नगरीय विकास और आर्द्रभूमि संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। भारत के अन्य नगरों को भी इस उपलब्धि से प्रेरणा लेकर अपनी अमूल्य प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। ५ जून को विश्व पर्यावरण दिवस- Inspired by Nature. For Climate. For Our Future- के पावन अवसर पर इंदौर के इस यशस्वी, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक मॉडल पर वैश्विक पटल पर विमर्श करना, अपनी राह से भटक रही आधुनिक सभ्यता को एक नवीन, कल्याणकारी, संधारणीय (Sustainable) और सनातन मार्ग दिखाने के सदृश है। इंदौर की यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार एक नगर अपनी स्वच्छता-नीति, आर्द्रभूमि संरक्षण और हरित नगर-नियोजन को एकीकृत दृष्टि से आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण जागरूकता और सतत् पर्यटन का एक विश्वस्तरीय केंद्र बन सकता है। इंदौर केवल एक शहर नहीं, वह पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीवन, जल-संस्कृति और मृदा-स्वास्थ्य की एक वैश्विक प्रतिज्ञा है। वह एक जीती-जागती, श्वास लेती हुई प्रेरणा है, समूचे भारत के लिए, समूची मानवता के लिए। सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय। लेखक: डॉ. तेज प्रकाश पूर्णानन्द व्यास पीएच.डी., डी.लिट्. | proftpv49@gmail.com | +917987713115
7 टेस्ट मैचों बाद ही इस कीपर बल्लेबाज ने लिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास
भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज कोना श्रीकर भरत ने गुरूवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की।भरत ने 2023-2024 के बीच भारत के लिए सात टेस्ट मैच खेले, जिसमें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल 2023 भी शामिल है।बत्तीस साल के भरत ने फरवरी 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पदार्पण किया और इसके एक साल बाद उन्होंने विशाखापत्तनम में इंग्लैंड के खिलाफ देश के लिए अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला। उन्होंने कुल 221 रन बनाए जिसमें उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 44 रन रहा। भरत ने गुरूवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘गर्व और कृतज्ञता की भावना के साथ मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान करता हूं। अपने देश के लिए खेलना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरी इस यात्रा में बहुत अधिक सहनशक्ति और ताकत की जरूरत पड़ी लेकिन टेस्ट मैच में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान हर पल के लायक था। चार लोगों के हमारे परिवार में हम सभी ने दो दशक तक एक ही सपना जिया।’’ #TeamIndia wicket-keeper batter KS Bharat has announced his retirement from international cricket. Wishing him the very best for the road ahead and all his future endeavours @KonaBharat pic.twitter.com/hhuDTBr6rj — BCCI (@BCCI) June 5, 2026 भरत ने कहा, ‘‘मेरी बहन, मां और पिताजी को दिल से धन्यवाद जिन्होंने मेरे लिए ऐसा माहौल और समर्थन तैयार किया। मैं उनके प्यार, अनुशासन और कड़ी मेहनत का ही नतीजा हूं।’’ दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने घरेलू क्रिकेट में आंध्र का प्रतिनिधित्व किया। वह रणजी ट्रॉफी में तिहरा शतक लगाने वाले पहले विकेटकीपर बल्लेबाज हैं। उन्होंने 2014-2015 में गोवा के खिलाफ आंध्र के लिए 311 गेंद में 308 रन बनाए थे। यह आंध्र के किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया पहला तिहरा शतक था। भरत ने भारत के पूर्व कप्तानों विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी धन्यवाद दिया। इन्हीं दोनों कप्तानों की अगुवाई में उन्होंने आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। इसके अलावा उन्होंने भारत के पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ का भी आभार जताया। भरत ने लिखा, ‘‘आईपीएल पदार्पण के दौरान मेरे कप्तान विराट कोहली को बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने मुझे अपनी प्रतिभा दिखाने और पहचान बनाने का मौका दिया।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘मेरे भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को भी बहुत-बहुत धन्यवाद जिनके नेतृत्व में मैंने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। यह अनुभव मेरे लिए अनमोल है और इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।’’ भरत ने लिखा, ‘‘मेरे भारतीय कोच राहुल द्रविड़ सर को भी धन्यवाद। भारत ए टीम से लेकर भारतीय टीम तक उनका मार्गदर्शन मेरे लिए अविस्मरणीय रहा है। आपके सहयोग से ही मैं एक भारतीय टेस्ट क्रिकेटर बन पाया।’’ भरत ने आईपीएल 2021 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेला जबकि 2022 में उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स का प्रतिनिधित्व किया।
है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू: हंसी की तलाश में भटकती कॉमेडी
एक दौर था जब डेविड धवन का नाम सुनते ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। उनकी फिल्मों का मतलब होता था बिना ज्यादा दिमाग लगाए भरपूर मनोरंजन। लेकिन समय बदल गया है और कॉमेडी भी। आज के दौर में दर्शक सिर्फ शोर-शराबे, गलतफहमियों और भागदौड़ को कॉमेडी मानने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि हाल के वर्षों में आई कई तथाकथित कॉमेडी फिल्में हंसी से ज्यादा निराशा दे गईं। दुर्भाग्य से ‘है जवानी तो इश्क होना है’ भी उसी कतार में खड़ी नजर आती है। यह न केवल डेविड धवन की हालिया फिल्मों में बल्कि उनके पूरे करियर की सबसे कमजोर फिल्मों में गिनी जा सकती है। युनूस सेजवाल जैसे सफल लेखक और मसाला मनोरंजन के उस्ताद माने जाने वाले डेविड धवन का साथ सुनने में बेहद रोमांचक लगता है। उम्मीद थी कि यह जोड़ी बड़े पर्दे पर धमाका करेगी, लेकिन नतीजा इसके बिल्कुल उलट निकलता है। खूबसूरत विदेशी लोकेशन, रंगीन फ्रेम और सजे-धजे सितारों के बावजूद फिल्म में ऐसा बहुत कम है जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए। करीब सवा दो घंटे की यह फिल्म कई जगह इतनी लंबी और थकाऊ महसूस होती है कि समय रुकता हुआ प्रतीत होने लगता है। कहानी जस (वरुण धवन) और बानी (मृणाल ठाकुर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं और शादी के पांच साल पूरे कर चुके हैं। समस्या सिर्फ इतनी है कि जस पिता बनना चाहता है जबकि बानी अभी मां बनने के लिए तैयार नहीं है। यह मतभेद इतना बढ़ जाता है कि मामला अदालत तक पहुंच जाता है। जज दोनों को छह महीने का समय देता है और वे अलग रहने का फैसला कर लेते हैं। इसके बाद जस लंदन पहुंच जाता है, जहां उसकी मुलाकात प्रीत (पूजा हेगड़े) से होती है और दोनों के बीच प्रेम कहानी शुरू हो जाती है। स्थिति तब उलझती है जब प्रीत गर्भवती हो जाती है और उसी दौरान बानी भी लंदन पहुंचकर खुद के गर्भवती होने की खबर देती है। इसके बाद शुरू होता है झूठ, भ्रम और छिपाव का सिलसिला, जिसे फिल्म हास्य के रूप में पेश करना चाहती है। समस्या यहीं से शुरू होती है। फिल्म की पूरी बुनियाद ही बेहद कमजोर और अविश्वसनीय लगती है। जस और बानी के रिश्ते को जिस तरह गहरे प्रेम से भरा दिखाया गया है, उसके बाद उनका तलाक की कगार तक पहुंच जाना सहज नहीं लगता। उससे भी बड़ा सवाल यह है कि जस अचानक लंदन क्यों पहुंचता है? फिल्म इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं देती। शादीशुदा होने के बावजूद उसका प्रीत के साथ प्रेम संबंध बनाना भी चरित्र के अनुरूप नहीं लगता क्योंकि फिल्म लगातार उसे भोला, मासूम और नेकदिल साबित करने की कोशिश करती रहती है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जस अपने किसी भी फैसले या गलती को लेकर वास्तव में अपराधबोध महसूस करता दिखाई नहीं देता। उल्टा पटकथा इस तरह लिखी गई है कि दर्शक उसकी गलतियों पर सवाल उठाने के बजाय उस पर तरस खाने लगें कि बेचारा दो महिलाओं को खुश रखने के लिए कितनी मुश्किलें झेल रहा है। यह दृष्टिकोण न केवल सतही लगता है बल्कि पूरी कहानी को नैतिक और भावनात्मक स्तर पर खोखला भी बना देता है। फिल्म का क्लाइमैक्स इस कमजोरी को और उजागर करता है, जहां जस अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए लगभग सभी को गलत ठहरा देता है। स्क्रीनप्ले की दूसरी बड़ी समस्या यह है कि पूरी दुनिया में केवल जस ही बुद्धिमान दिखाई देता है। बानी, प्रीत, प्रीत का भाई और लगभग बाकी सभी किरदार इतने भोले या मूर्ख दिखाए गए हैं कि वे जस की किसी भी कहानी पर बिना सोचे-समझे विश्वास कर लेते हैं। कॉमेडी फिल्मों में अतिशयोक्ति स्वीकार की जा सकती है, लेकिन यहां यह अतिशयोक्ति हास्य नहीं बल्कि झुंझलाहट पैदा करती है। दर्शक हंसने के बजाय बार-बार सोचता है कि आखिर कोई पात्र इतना अविश्वसनीय व्यवहार कैसे कर सकता है। हास्य दृश्य भी फिल्म की सबसे बड़ी निराशाओं में शामिल हैं। अधिकांश कॉमिक सिचुएशन लंबी खिंचती हैं और उनमें हास्य का प्रभाव लगभग नदारद है। कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे वे सिर्फ समय भरने के लिए जोड़े गए हों। हंसी पैदा करने के लिए संवाद, परिस्थितियां और किरदारों की प्रतिक्रिया, तीनों का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन यहां तीनों स्तरों पर लेखन कमजोर पड़ जाता है। लेखक युनूस सेजवाल का काम स्तरहीन है। कॉमेडी के नाम पर कई जगह बेहद आसान और पुराने ढर्रे के चुटकुलों का सहारा लिया गया है। यहां तक कि मोटे लोगों का मजाक उड़ाने जैसी पुरानी और अप्रासंगिक शैली भी अपनाई गई है। फरहाद सामजी के संवाद भी याद रखने योग्य नहीं हैं। एक कॉमेडी फिल्म में संवाद ही सबसे बड़ा हथियार होते हैं, लेकिन यहां वे शायद ही कभी मुस्कान पैदा कर पाते हैं। निर्देशक के रूप में डेविड धवन भी पूरी तरह निराश करते हैं। ऐसा लगता है मानो वे अपने ही पुराने दौर को दोहराने की कोशिश कर रहे हों। पुराने गीतों का इस्तेमाल, पुरानी फिल्मों के संदर्भ और वही परिचित फार्मूला बार-बार नजर आता है, लेकिन उस जादू की पूरी तरह कमी है जिसने कभी उनकी फिल्मों को लोकप्रिय बनाया था। निर्देशन बेहद सतही और जल्दबाजी में किया गया प्रतीत होता है। फिल्म का एक दृश्य इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। पूजा हेगड़े का किरदार नदी में डूबता हुआ दिखाया जाता है, लेकिन दृश्य इतना बनावटी है कि उसमें किसी तरह का रोमांच या खतरा महसूस ही नहीं होता। वह नदी किनारे से कुछ मीटर दूर खड़ी होकर हाथ हिलाती रहती है और तुरंत वरुण धवन उसे बचा लेते हैं। सवाल उठता है कि ऐसे दृश्य को अंतिम रूप देने से पहले किसी ने इसकी विश्वसनीयता पर विचार क्यों नहीं किया? ऐसा लगता है कि फिल्म को यह भरोसा था कि तेज रफ्तार बैकग्राउंड म्यूजिक, लगातार भागदौड़ और अचानक आने वाले गाने उसकी कमियों को छिपा देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। अभिनय की बात करें तो वरुण धवन अपनी सहज कॉमिक टाइमिंग के दम पर कुछ दृश्यों को संभालने की कोशिश करते हैं। हालांकि कमजोर पटकथा उनके प्रदर्शन को भी सीमित कर देती है। पूजा हेगड़े को फिल्म में मुख्य रूप से ग्लैमरस उपस्थिति के लिए इस्तेमाल किया गया है और उन्होंने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। जो भी दृश्य उन्हें मिले, उनमें वे प्रभाव छोड़ती हैं और कई मौकों पर मृणाल ठाकुर से बेहतर नजर आती हैं। मृणाल का अभिनय कई जगह जरूरत से ज्यादा ऊंचे सुर में जाता है, जिससे उनका किरदार स्वाभाविक नहीं लग पाता। सहायक कलाकारों में चंकी पांडे लगातार झुंझलाहट पैदा करते हैं। जिमी शेरगिल को ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे वे प्रभाव छोड़ सकें। मनीष पाल का उपयोग बेहद सीमित और निराशाजनक है। मौनी रॉय का किरदार कहानी में लगभग हास्यास्पद स्तर तक अनावश्यक महसूस होता है। राजपाल यादव, जॉनी लीवर और राकेश बेदी जैसे अनुभवी कलाकार छोटे-छोटे रोल में नजर आते हैं, लेकिन पटकथा उन्हें चमकने का अवसर ही नहीं देती। संगीत भी फिल्म की मदद नहीं कर पाता। कई गीतकारों और संगीतकारों की मौजूदगी के बावजूद गानों का स्तर औसत है। ज्यादातर गाने कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय ब्रेक का काम करते हैं। फिल्म का एकमात्र लगातार सकारात्मक पक्ष अयानंका बोस की सिनेमाटोग्राफी है। उनकी कैमरा दृष्टि हर फ्रेम को आकर्षक बनाती है। विदेशी लोकेशन खूबसूरती से कैद की गई हैं और कई बार लगता है कि कैमरा कहानी से कहीं ज्यादा दिलचस्प काम कर रहा है। आखिरकार ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उस बुनियादी कसौटी पर ही असफल हो जाती है जिस पर किसी भी कॉमेडी फिल्म को परखा जाता है और वो है मनोरंजन। दर्शक टिकट खरीदकर हंसने, हल्का महसूस करने और अच्छा समय बिताने की उम्मीद से थिएटर पहुंचता है, लेकिन फिल्म उसे न हंसी दे पाती है, न भावनात्मक जुड़ाव और न ही कोई यादगार सिनेमाई अनुभव। खूबसूरत लोकेशन, स्टारकास्ट और रंगीन पैकेजिंग के बावजूद भीतर से यह फिल्म खाली महसूस होती है। डेविड धवन की फिल्म से जिस बेफिक्र मनोरंजन की उम्मीद की जाती है, वह यहां कहीं नजर नहीं आता। नतीजतन, ‘है जवानी तो इश्क होना है’ एक ऐसी कॉमेडी बनकर रह जाती है, जिसमें हंसी सबसे दुर्लभ चीज साबित होती है। HA JAWANI TOH ISHQ HONA HAI (2026) निर्देशक: डेविड धवन गीतकार: वायु, जयराज, मोहसिन शेख, रॉनी अंजली एंड गिल मैक्करी, आईपी सिंह संगीत: व्हाइट नॉइज़ कलेक्टिव्स, तनिष्क बागची, रॉनी अंजली, गिल मैक्करी, जावेद-मोहसिन, अक्षय एंड आईपी कलाकार: वरुण धवन, मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मनीष पाल, चंकी पांडे, जिम्मी शेरगिल, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजपाल यादव, जॉनी लीवर निर्माता: रमेश तौरानी सेंसर सर्टिफिकेट : यूए (16 वर्ष प्लस)* 2 घंटे 16 मिनट 40 सेकंड रेटिंग : 1/5
आज पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है और 'विश्व पर्यावरण दिवस' हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। ऐसे समय में जब स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, बॉलीवुड के कई सितारे भी पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाकर लोगों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि ये सितारे कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम उठा रहे हैं। आइए जानते हैं उन बॉलीवुड हस्तियों के बारे में, जिन्होंने हरित भविष्य की ओर अपना कदम बढ़ाया है। शाहरुख खान शाहरुख खान ने भारत मोबिलिटी एक्सपो 2023 में हुंडई आयोनिक 5 को पेश कर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दिया। उनका यह कदम स्वच्छ परिवहन और प्रदूषण कम करने के महत्व को रेखांकित करता है। ALSO READ: 'गुड बॉय' इमेज से बाहर निकलना चाहते हैं रितिक रोशन, सोशल मीडिया पर मांगा 'ग्रे शेड' रोल कुब्रा सैत कुब्रा सैत लंबे समय से पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल की समर्थक रही हैं। हाल ही में महिंद्रा XEV 9e इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाकर उन्होंने इको-फ्रेंडली लाइफस्टाइल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। रितेश देशमुख रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा ने साल 2022 में बीएमडब्ल्यू iX इलेक्ट्रिक एसयूवी को अपने कार कलेक्शन का हिस्सा बनाया। यह फैसला उनके पर्यावरण के प्रति जागरूक नजरिए और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल को अपनाने की सोच को दर्शाता है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें सुनील शेट्टी सुनील शेट्टी ने एमजी कॉमेट ईवी को अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार के रूप में अपनाकर यह संदेश दिया कि छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं। माधुरी दीक्षित माधुरी दीक्षित ने टाटा नेक्सन ईवी डार्क एडिशन को अपनाकर पर्यावरण-अनुकूल लाइफस्टाइल को बढ़ावा दिया। उनका यह कदम भारत के विकसित हो रहे ईवी इकोसिस्टम को समर्थन देने की दिशा में प्रेरणादायक माना जाता है। दीया मिर्जा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाने वाली दीया मिर्जा ने बीएमडब्ल्यू iX इलेक्ट्रिक एसयूवी को अपनाकर एक बार फिर ग्रीन लाइफस्टाइल के समर्थन का संदेश दिया। जैकलीन फर्नांडिस जैकलीन फर्नांडिस ने बीएमडब्ल्यू i7 के जरिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाया, जो आधुनिक तकनीक, लग्जरी और पर्यावरण-अनुकूल सोच का शानदार उदाहरण है। कुणाल खेमू कुणाल खेमू ने मर्सिडीज-बेंज जी-क्लास इलेक्ट्रिक को अपनाकर यह दिखाया कि आधुनिक प्रदर्शन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। इन बॉलीवुड सितारों द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना केवल एक व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि समाज को पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी है। यह साबित करता है कि सस्टेनेबिलिटी केवल एक चलन नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए एक आवश्यक जिम्मेदारी है।
इंसान के जीवन के लिए पांच तत्वों का होना जरूरी है, तभी वो सांस ले पाएगा। हमारे दर्शन में इन पांच तत्वों का जिक्र है और विज्ञान भी इस पांच तत्वों पर ही टिका है। ये पांच तत्व हैं वायू, जल, आकाश, पृथ्वी और आग। मनुष्य के जीवन का आधार यही पांच तत्व हैं। इनके बगैर न तो कोई इंसान जीवित रह सकता है और न ही कोई शहर। भले ही इंदौर सबसे स्वच्छ शहर है, लेकिन इंदौर के ये पांचों ही तत्व बिगड़ रहे हैं। यहां पानी दूषित है, हवा जहरीली होकर आकाश का रंग बदलती जा रही है, पृथ्वी में भूजल स्तर गिरता जा रहा है, जिससे हर साल भयंकर जल संकट आता जा रहा है। विकास के नाम पर लगातार पेड़ों की बलि एक अलग त्रासदी बनती जा रही है। जानते है 5 जनू को पर्यावरण दिवस के मौके पर कि किस तरह से से इंदौर के ये पंचमहाभूत बिगड़ते जा रहे हैं। पंचमहाभूत एक जगह एकत्र होकर सुना रहे हैं इंदौर की हवा खराब होने की कहानी। पांच तत्वों का विलाप और इंदौर की चेतावनी : इंदौर के राजवाड़ा के सामने देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा शांत खड़ी थी, लेकिन आज उनकी आंखों में एक गहरी चिंता थी। रात के सन्नाटे में, जब शहर की शोरगुल थमी, तो राजवाड़ा के प्रांगण में पांच अदृश्य शक्तियां इकट्ठा हुईं। ये थे ब्रह्मांड को रचने वाले पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। आज वे इंदौर की हालत पर चर्चा करने के लिए एकजुट हुए थे। 1. वायु (प्रदूषित हवा) सबसे पहले 'वायु' ने एक भारी सांस ली। उसकी आवाज़ में घुटन थी। उसने कहा, इंदौर ने स्वच्छता में छक्का लगाया, सड़कों को चमकाया, लेकिन मेरी तरफ किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। वाहनों का धुआं, लगातार बढते वाहन, धूल के कण और फैक्ट्रियों के धुएं से निकलते जहर ने मेरी शुद्धता को छीन लिया है। इंदौर के लोग अब खुलकर सांस भी नहीं ले पा रहे हैं। मेरा दम घुट रहा है। 2. जल (खराब और प्रदूषित पानी) तभी पास के सूखे और गंदे नाले से 'जल' की कराहने की आवाज़ आई। जल ने कहा, मेरा वजूद ही संकट में है। कभी खान और सरस्वती नदियां इंदौर की जीवनरेखा हुआ करती थीं, आज वे नाले में बदल चुकी हैं। भूजल का स्तर इतना गिर चुका है कि लोग पाताल तक खुदाई कर रहे हैं, फिर भी उन्हें जो मिल रहा है, वह प्रदूषित और रसायनों से भरा पानी है। इंदौर प्यासा भी है और बीमार भी। 3. पृथ्वी (खोखली जमीन और कटते पेड़) 'पृथ्वी' ने गहरे दर्द के साथ अपनी बात रखी। वह बुरी तरह कांप रही थी। मेट्रो, कंक्रीट के जंगलों और चौड़ी सड़कों के नाम पर मेरे सीने से हजारों हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। पेड़ मेरी जड़ें थे, जो मुझे थाम कर रखते थे। अब इंदौर की जमीन भीतर से खोखली हो चुकी है। न तो इसमें पानी सोखने की क्षमता बची है और न ही हरियाली को पालने की। 4. अग्नि (भीषण गर्मी और लगातार लगती आग) 'अग्निदेव' ने अपनी प्रचंडता दिखाते हुए कहा, जब पृथ्वी पर पेड़ नहीं बचे और कंक्रीट का जाल बिछ गया, तो मेरा तापमान बढ़ना ही था। इस बार इंदौर ने भीषण गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। कंक्रीट के ढांचे दिनभर मेरी गर्मी को सोखते हैं और रात को उसे उगलते हैं (अर्बन हीट आइलैंड)। यही कारण है कि शहर के तापमान में इतनी बढ़ोतरी हुई है। और तो और, इंसानी लापरवाही के कारण शहर के व्यावसायिक इलाकों और कबाड़खानों में लगातार लग रही आग मेरी इसी विकरालता का नतीजा है। 5. आकाश (धुंधला और तंग होता आसमान) अंत में 'आकाशतत्व' ने ऊपर से निहारते हुए कहा, ऊंची-ऊंची इमारतों और प्रदूषण के घने कोहरे ने मेरे फैलाव को समेट दिया है। इंदौर का आसमान अब नीला और साफ नहीं दिखता, बल्कि उस पर प्रदूषण की एक काली चादर हमेशा तनी रहती है। पांचों तत्वों ने एक साथ माता अहिल्या की प्रतिमा की ओर देखा। उनकी विलाप भरी बातें हवा में गूंज रही थीं—यदि इंदौर के नागरिकों ने पर्यावरण दिवस पर सिर्फ दिखावे के पौधे लगाने के बजाय सच में हमें नहीं बचाया, तो यह मिनी मुंबई जल्द ही एक निर्जन कंक्रीट का ढेर बन जाएगा। इंदौर के लिए कितनी खतरनाक है यह स्थिति ? पंचमहाभूतों का यह असंतुलन इंदौर के भविष्य के लिए एक बड़ी रेड अलार्म है। स्वास्थ्य का आपातकाल ( Health Emergency): वायु और जल प्रदूषण के कारण इंदौर में सांस की बीमारियां, फेफड़ों के रोग और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह शहर रहने लायक नहीं बचेगा। एलर्जी और दमे के मरीजों में इजाफा हुआ है सो अलग। जल संकट ( Water Crisis): जमीन खोखली होने और वाटर रिचार्ज न होने से आने वाले कुछ वर्षों में इंदौर को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसकी बानगी इसी साल देखने को मिली है। पिछले दो तीन साल से जल का संकट गहराता जा रहा है। टैंकर माफिया और पानी के लिए विवाद आम हो रहे हैं। इस साल भी लोग बूंद-बूंद को तरसे। सत्ता और विपक्ष पानी को लेकर आमने-सामने हैं। अर्बन हीट आइलैंड का खतरा: पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण इंदौर का तापमान मालवा की प्रसिद्ध शब-ए-मालवा (ठंडी रातों) को खत्म कर रहा है। रातें भी गर्म होने लगी हैं, जिससे बिजली की खपत बढ़ेगी और हीट स्ट्रोक से मौतें हो सकती हैं। कई पेड़ काट दिए गए हैं, रीगल पर स्थित रानी सराय के सैकड़ों पेड़ों को मेट्रो के लिए काटने की अनुमति दे दी है। इसके बाद इंदौर के कंक्रीट एरिया में और ज्यादा इजाफा हो जाएगा। आर्थिक नुकसान: इस बिगड़ते पांच तत्वों की वजह से लगातार शहर में आग और पर्यावरण असंतुलन के कारण निवेश प्रभावित हो सकता है। कोई भी बड़ी कंपनी या रहने वाले ऐसे शहर की ओर रुख नहीं करेंगे, जहां बुनियादी प्राकृतिक संसाधन (हवा-पानी) ही दूषित हों।
'गुड बॉय' इमेज से बाहर निकलना चाहते हैं रितिक रोशन, सोशल मीडिया पर मांगा 'ग्रे शेड' रोल
बॉलीवुड के 'ग्रीक गॉड' कहे जाने वाले रितिक रोशन की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग हैं। पिछले ढाई दशकों से हिंदी सिनेमा में एक आदर्श नायक, देशभक्त और सीधे-साधे 'गुड बॉय' की भूमिकाएं निभाने के बाद, अब रितिक रोशन कुछ डार्क और जटिल किरदारों की तलाश में है। रितिक ने खुद सोशल मीडिया पर खुलकर इस बात का इजहार किया है कि वे पारंपरिक हीरो के सांचे से बाहर निकलना चाहते हैं। हाल ही में रितिक रोशन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर पेरिस से अपनी एक बेहद खूबसूरत नाइट-सेल्फी साझा की। ALSO READ: पलक तिवारी ने फ्लोरल ड्रेस में दिखाया कातिलाना अंदाज, तस्वीरों से बढ़ाया इंटरनेट का पारा इस तस्वीर के बैकग्राउंड में रोशनी से नहाया हुआ एफिल टावर साफ नजर आ रहा है। ब्लैक कैप, डार्क जैकेट और मफलर पहने रितिक ने इस फोटो के साथ एक ऐसा कैप्शन लिखा जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान खींच लिया है। A post shared by Hrithik Roshan (@hrithikroshan) रितिक ने लिखा, मुझसे अभी पूछा गया कि मैं किस तरह का रोल करना चाहता हूं। जब इसका जवाब मेरे दिमाग में आया, तो मैं खुद भी हैरान रह गया। क्या आपको फिल्म 'लक बाय चांस' का जफ्फर याद है? मुझे वैसा ही रोल चाहिए। मैं इस तरह के किसी भी प्रोजेक्ट को तुरंत लपक लूंगा। लेकिन दुख की बात है कि डायरेक्टर्स मुझे सिर्फ 'अच्छे इंसान' के रोल में ही देखना चाहते हैं। सैड। क्या था 'जफ्फर' का वो यादगार किरदार? रितिक रोशन जिस 'जफ्फर' की बात कर रहे हैं, वह साल 2009 में आई जोया अख्तर की निर्देशित पहली फिल्म 'लक बाय चांस' का एक बेहद खास हिस्सा था। इस फिल्म में रितिक का सिर्फ एक एक्सटेंडेड कैमियो था। फिल्म में उन्होंने 'जफ्फर खान' नाम के एक ऐसे सुपरस्टार का रोल प्ले किया था जो ऊपर से बेहद आकर्षक और हंसमुख दिखता है, लेकिन असल जिंदगी में वह बेहद मतलबी, असुरक्षित और मौकापरस्त है। रितिक की इस पोस्ट पर बॉलीवुड गलियारे से तुरंत प्रतिक्रियाएं आने लगीं। निर्देशक जोया अख्तर ने कमेंट किया, 'चलो, कॉफी पर मिलते हैं।' जोया के इस कमेंट के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या दोनों जल्द ही किसी नए डार्क प्रोजेक्ट के लिए साथ आ सकते हैं। वहीं डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी लिखा, 'चलो फिर!' बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें पहले भी ग्रे शेड्स में कर चुके हैं कमाल ऐसा नहीं है कि रितिक ने कभी निगेटिव किरदार नहीं निभाए। जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया है। धूम 2 में रितिक ने एक ऐसा हाई-टेक चोर का किरदार निभाया जो बेहद शातिर, बेपरवाह और स्टाइलिश था। लोगों को पुलिस से ज्यादा इस चोर से प्यार हो गया था। अग्निपथ में रितिक ने एक प्रतिशोधी और क्रूर युवक का किरदार निभाया, जिसमें पारंपरिक हीरो वाली कोई मिठास नहीं थी। फिल्म विक्रम वेधा में एक सनकी, खूंखार लेकिन तेज दिमाग गैंगस्टर, जो पुलिस अधिकारी के साथ दिमागी खेल खेलता है।
RBI Monetary Policy: रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा। इस फैसले से अब लोन की EMI नहीं बढ़ेगी। यानी आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की मासिक किस्त में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने रियल GDP ग्रोथ का अनुमान अब 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। रेपो रेट को स्थिर रखकर आरबीआई ने एक ओर देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखा है। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर भी उसकी नजर है। रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई ने इसके साथ मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा। मौद्रिक नीति की 6 खास बातें नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत किया। पहले इसके 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था। 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था। RBI को अब अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी रहने की आशंका है। विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI पूरी तरह सतर्क। सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स खत्म कर दिया है। क्या बोले RBI गर्वनर संजय मल्होत्रा? गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी मजबूती के साथ प्रवेश किया है। हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, ग्लोबल अर्थव्यवस्था में काफ़ी अनिश्चितता रही है, अहम व्यापारिक रास्तों और सप्लाई चेन में रुकावटें आई हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और बिजनेस को लेकर सावधानी का माहौल रहा है। मैं सबसे पहले इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी मजबूती के साथ प्रवेश किया है। हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे। आरबीआई के इस फैसले से इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने का डर खत्म होने से बाजार में घरों और नई गाड़ियों की डिमांड बढ़ेगी। इससे प्रॉपर्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर को रफ्तार मिलेगी। edited by : Nrapendra Gupta
मोदी और कॅाकरोच का लक्ष्य है कांग्रेस का स्पेस खाओ
प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी भारतीय राजनीति, नरेंद्र मोदी सरकार, कांग्रेस, लोकतंत्र और विपक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हैं। पढ़िए और सुनिए उनका विस्तृत विश्लेषण...
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (05 जून, 2026)
1. मेष (Aries) Today 05 June 2026 horoscope in Hindi: करियर: आज के दिन दफ्तर में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। लव: पार्टनर के साथ संबंधों में गहराई आएगी। धन: रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं। स्वास्थ्य: मानसिक रूप से शांति महसूस करेंगे। उपाय: लक्ष्मी जी को सफेद फूल अर्पित करें। ALSO READ: Weekly Horoscope 1 to 7 June: साप्ताहिक राशिफल (1 से 7 जून 2026): अपने भाग्य को जानें और तैयार रहें 2. वृषभ (Taurus) करियर: कला, फैशन या मीडिया से जुड़े लोगों के उन्नति के द्वार खुलेंगे। लव: वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहेगी। धन: कारोबार में आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य: बाहर के तले-भुने भोजन से बचें। उपाय: कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: नौकरीपेशा लोगों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। लव: बातचीत के माध्यम से पुराने विवाद सुलझ सकते हैं। धन: बजट से बाहर जाकर की गई खरीदारी भविष्य में परेशानी दे सकती है। स्वास्थ्य: सिरदर्द या अनिद्रा की समस्या हो सकती है। उपाय: गाय को ताजी रोटी और गुड़ खिलाएं। 4. कर्क (Cancer) करियर: करियर में स्थिरता आएगी। लव: परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। धन: अचल संपत्ति से लाभ होने की संभावना है। स्वास्थ्य: आज ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा। उपाय: सफेद चंदन का तिलक लगाएं। 5. सिंह (Leo) करियर: कार्यस्थल पर विरोधियों की चालें विफल होंगी। लव: अहंकार के कारण रिश्ते में तनाव आ सकता है। धन: फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है। स्वास्थ्य: मधुमेह रोगी को नियमित जांच करानी चाहिए। उपाय: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि के संकेत हैं। लव: लव लाइफ में आज कोई सुखद सरप्राइज मिल सकता है। धन: व्यापारिक यात्रा लाभदायक सिद्ध होगी। स्वास्थ्य: पेट संबंधी छोटी समस्या हो सकती है। उपाय: मां दुर्गा को मिश्री का भोग लगाएं। ALSO READ: Weekly Numerology Horoscope 1-7 June 2026: साप्ताहिक अंक राशिफल, जानें किस मूलांक की चमकेगी किस्मत? 7. तुला (Libra) करियर: नौकरी में बदलाव का मन बना रहे हैं तो आज का दिन शुभ है। लव: जीवनसाथी की सलाह को महत्व दें। धन: शेयर बाजार और कमोडिटी से जुड़े लोगों को लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचने के लिए योग का सहारा लें। उपाय: पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: टेक्निकल फील्ड वालों के लिए अच्छा दिन है। लव: पार्टनर के साथ किसी बात पर बहस हो सकती है। धन: पैतृक संपत्ति के विवाद सुलझ सकते हैं। स्वास्थ्य: एलर्जी या इंफेक्शन के प्रति सावधान रहें। उपाय: श्री सूक्त का पाठ लाभकारी रहेगा। 9. धनु (Sagittarius) करियर: धार्मिक या शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्रतिष्ठा मिलेगी। लव: प्रेमी के साथ रिश्तों में सुधार होगा। धन: भाग्य के सहयोग से आर्थिक लाभ होगा। स्वास्थ्य: आज आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे। उपाय: माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं। 10. मकर (Capricorn) करियर: सहकर्मियों के साथ अनबन हो सकती है। लव: जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता हो सकती है। धन: खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। स्वास्थ्य: जोड़ों के दर्द की समस्या परेशान कर सकती है। उपाय: किसी गरीब महिला को चावल या दूध का दान करें। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: दफ्तर में आपकी पूछ-परख बढ़ेगी। लव: पार्टनर के साथ अच्छा तालमेल रहेगा। धन: नया वाहन खरीदने का योग बन सकता है। स्वास्थ्य: आंखों में जलन या कमजोरी महसूस हो सकती है। उपाय: शनि देव के मंत्र 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप करें। 12. मीन (Pisces) करियर: कार्यस्थल पर आपकी क्रिएटिविटी की सराहना होगी। लव: वैवाहिक जीवन में प्रेम और उत्साह बना रहेगा। धन: आय के नए स्रोत विकसित होंगे। स्वास्थ्य: घर के किसी बुजुर्ग के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: पेड़-पौधों का ज्योतिष कनेक्शन: 100 यज्ञों के बराबर पुण्य देता है सिर्फ एक पौधा! जानें किस्मत चमकाने वाली 11 जादुई बातें
19 साल की राजकुमारी और 17 साल की रोशनी घर की चौखट पर बैठी हैं। यूं तो यह उम्र अपने लंबे बाल संवारने और चेहरा निखारने की है। दोस्तों के साथ खिलखिलाने और अपनी सतरंगी दुनिया बुनने की है, लेकिन ये दोनों बहनें 70 साल की किसी बूढ़ी जैसी हो चली हैं। दोनों के चेहरों की खाल गर्दन तक लटकी है। हाथ-पैर की खाल सिकुड़ चुकी है। सिर के बाल काफी हद तक झड़ चुके हैं। रह-रहकर तेज खांसी उठती है। कमजोरी इतनी कि चलना–फिरना मुश्किल है। चेहरा छोटा, नाक नुकीली और पूरा जिस्म वक्त से पहले ढल चुकी लाचार काया जैसा दिखता है। दरअसल, राजकुमारी और रोशनी, 80 लाख लोगों में से किसी एक को होने वाली जानलेवा जेनेटिक बीमारी से जूझ रहीं हैं। इन बहनों का एक छोटा भाई 7 साल की उम्र में ऐसे ही बूढ़ा होकर मर चुका है। भारत में इस तरह के अब तक सिर्फ 16 केस सामने आए हैं। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज- ऐ जिंदगी में मैं नीरज झा पहुंचा हूं मध्य प्रदेश में रायसेन जिले के गांव सालेर। आज कहानी, बचपन में बूढ़ा कर देने वाली ‘प्रोजेरिया’ नाम की बीमारी से जूझ रही दो बहनों की… सुबह के 10 बजे हैं। सालेर गांव के एक घर के बाहर गेहूं की बोरियां का ढेर लगा है। पास ही, एक बुजुर्ग बैठे हैं, जिन्होंने अपना नाम– रंजीत बैरागी बताया। उम्र 55 साल। ठीक सामने, उनकी पत्नी गणेशी बाई सूप से गेहूं फटककर भूसा और मिट्टी अलग कर रही हैं। राजकुमारी और रोशनी इन्हीं की बेटियां हैं। घर की दहलीज से किसी बुजुर्ग की तरह जोर-जोर से खांसने की आवाज आ रही है। तभी, गणेशी बाई मुंह में साड़ी का पल्लू दबाए बताती हैं– जो सामने बैठी है, वो मेरी बेटी रोशनी है। सिर्फ 17 साल की है। मैं 50 साल की हूं, लेकिन रोशनी मुझसे 20 साल बड़ी लगती है।’ तभी रोशनी की बहन राजकुमारी भी घर की दीवार के सहारे लंगड़ाते हुए बाहर आकर बैठ गई। गणेशी राजकुमारी की तरफ इशारा करते हुए कहती हैं– ‘ये रोशनी से दो साल बड़ी है। इसका भी यही हाल है। मेरी ये दोनों औलादें जिंदा होकर भी मरे के समान हैं। इनकी कौन सी सांस आखिरी होगी, इन्हें कब अस्पताल लेकर भागना पड़े, कोई नहीं जानता। इसी डर से पाई-पाई जोड़कर मोटरसाइकल खरीदी बात करते-करते गणेशी की आंखें भर आईं। वो खुद को संभालते हुए बोलीं– ‘ऐसा नहीं है कि मेरे सभी बच्चे ऐसे हैं। 5 बच्चे थे, जिसमें से एक को भगवान ने बुला लिया, अब 4 बचे हैं। तीन बेटी और एक बेटा है। बेटा और एक बेटी, एकदम ठीक हैं। रोशनी और राजकुमारी को देखती हूं, तो दुख होता है। पता नहीं, ऊपर वाले की क्या मर्जी थी। पैदा होते ही भगवान इन्हें अपने पास बुला लेता, तो अच्छा होता। मां-बाप जिस उम्र में बेटियों की शादी के सपने देखते हैं, उस उम्र में दोनों बूढ़ी दिखने लगीं। अब आगे क्या होगा। इनकी इस हालत की वजह से मेरे बेटे और दूसरी बेटी की शादी बड़ी मिन्नतों से हुई।' ‘दरअसल, जब बेटी प्रियंका के रिश्ते की बात चलती थी, तो रिश्तेदार मुंह मोड़ लेते थे। कहते थे–अरे! इसके घर में तो दो-दो बूढ़ी लड़कियां हैं, इनके यहां कौन शादी करेगा? कहीं हमारे घर भी ऐसे ही बच्चे पैदा हो गए तो!’ काफी मुश्किलों के बाद उसकी शादी हो पाई। बेटे को भी कोई अपनी बेटी देने को तैयार नहीं था। बहुत हाथ जोड़े, तब कहीं जाकर बेटे का ब्याह हुआ।’ इतने में एक बच्ची दौड़ते हुए आई। गणेशी बताती हैं– ‘ये प्रियंका की बेटी है, मेरी नातिन। देखिए, एकदम भली–चंगी है, इसे ऐसी कोई बीमारी नहीं है।’ खाट पर बैठी रोशनी और राजकुमारी, हमारी बातें सुन रही हैं। इस दौरान रोशनी बोल पड़ी– 'मैं 17 साल की हूं। बाकी बच्चों की तरह स्कूल जाना, गांव में घूमना, सजना–संवरना चाहती हूं। जैसी मेरी दीदी की शादी हुई, वैसी मेरी भी हो, लेकिन क्या करूं, बूढ़ी दिखती हूं। मैं तो कभी आईना भी नहीं देखती, गलती से देख लूं, तो डर जाती हूं। भगवान से हमेशा शिकायत करती हूं– कैसा चेहरा बना दिया? हालत ऐसी है कि ज्यादा बात करती हूं या 100-200 मीटर चलती हूं, तो सांस फूल जाती है। लगता है, प्राण निकल जाएंगे। चाहकर भी मां की मदद नहीं कर सकती। वह सारा काम अकेले करती हैं।’ अपनी बहन राजकुमारी की तरफ इशारा करते हुए रोशनी कहती हैं- दीदी भी विकलांग हैं। उन्होंने तो स्कूल का मुंह भी नहीं देखा। मैं 5वीं तक पढ़ी हूं। स्कूल जाती थी, तो सब बुढ़िया-बुढ़िया कहकर चिढ़ाते थे। एक दिन स्कूल में ही तबीयत बिगड़ गई तो फिर दोबारा नहीं गई। स्कूल से नाम कट गया।’ रोशनी की बहन राजकुमारी से कुछ पूछने की कोशिश की तो उसने सिर हिलाकर मना कर दिया। टोकते हुए, गणेशी बाई बोलीं- यह मंदबुद्धि है, ठीक से बोल नहीं पाती। ये दोनों जैसे ही दो–दो साल की हुई, तो गालों की चमड़ी लटकने लगी। जब ये घर से बाहर निकलतीं तो गांव के लोग इन्हें भूत कहकर चिढ़ाते। हमने इनका घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। कुछ लोगों ने कहा- शहर जाकर दिखाओ। पैसे जुटाकर इन्हें भोपाल के अस्पताल ले गई। वहां सब इन्हें देखते ही हंसने लगे। कहने लगे- ये कैसी बीमारी है। इतनी कम उम्र में बुढ़िया लग रहीं। डॉक्टर ने कहा- इनका कुछ नहीं होने वाला। जब तक जिंदा है, सेवा करो। धीरे-धीरे इनकी तबीयत खराब होने लगी। अभी भी खांसी का इलाज चल रहा है। सरकार पेंशन के नाम पर 600 रुपए महीना देती है, इससे ज्यादा की तो दवा आ जाती है। 'जब तक हम जिंदा हैं, सेवा करेंगे। हमारे मरने के बाद इनका क्या होगा, पता नहीं। भगवान से कहती हूं कि मेरे सामने ही इन दोनों को उठा लो।’, ये कहते ही गणेशी के आंसू बहने लगते हैं। कुछ देर बाद, गणेशी फिर बोलीं– ‘बेटियों का दर्द अपनी जगह है, लेकिन समाज हमें रोज मारता है। रिश्तेदार हों या आस-पड़ोस वाले, कोई हमारे यहां खाना तो दूर, पानी भी नहीं पीता। उन्हें लगता है कुछ खाया–पीया तो बीमारी लग जाएगी।' ‘जो बेटा इस दुनिया में नहीं रहा, उसे भी यही बीमारी थी?’ गणेशी कहती हैं– रोशनी के बाद, साल 2011 में एक बेटा हुआ। देखने में सुंदर था, इसलिए नाम राजकुमार रखा। सालभर भी नहीं हुआ था कि उसका सिर अजीब दिखने लगा। बाल झड़ने लगे। गाल और गर्दन की चमड़ी लटकने लगी। वह बूढ़ा दिखने लगा। घर वाले ताने देते, कहते– कैसा बेटा पैदा किया। यह तो बच्चे जैसा दिखता ही नहीं है। तब अस्पताल हमारे गांव से 70 किमी दूर था, इसलिए गांव के वैद्य को दिखाया। वैद्य बोला- बेटा बड़ा होगा, तो ठीक हो जाएगा, लेकिन 7 साल की उम्र में ही वो चल बसा। इतना कहकर गणेशी उठीं और भीतर से बेटे राजकुमार की फोटो और अस्पताल के कुछ कागज लेकर आईं और दिखाने लगीं। अस्पताल के कागजों में बीमारी का नाम लिखा है– प्रोजेरिया। फिर बताती हैं– जब राजकुमारी और रोशनी पैदा हुईं, तो एक साल बाद ही बूढ़ी नजर आने लगीं। पति और सास ने ताने कसे, गालियां दीं। सास कहती थीं- ‘कैसी बूढ़ी बेटियां पैदा की हो, किसी काम की नहीं हैं।’ पति भी रोज जलील करता– 'कैसी औरत से पाला पड़ा है, जो सिर्फ बूढ़ी औलादों को जन्म दे रही है।' लेकिन, अब कोई कुछ भी बोले फर्क नहीं पड़ता। बगल में रंजीत बैरागी चुपचाप बैठे हैं। गणेशी बोलती हैं– ‘ये ऊंचा सुनते हैं। बिजली गिरी थी न, तो इनका कान खराब हो गया।’ इतने में, घर के सामने बाइक रुकती है। गणेशी कहती है– ये मेरा बेटा लखन है। इसे ऐसी कोई बीमारी नहीं है। लखन बताता है- रोशनी और राजकुमारी दोनों को रायसेन और भोपाल के कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन डॉक्टरों ने मदद नहीं की। देखते ही बोल देते हैं- इनका कोई इलाज नहीं है। जब तक जिंदा है, खिलाओ-पिलाओ। लोग जब इन्हें देखकर हंसते हैं, तो मुझे शर्म आती है। दोनों बहनों की हालत देखने और परिवार का दर्द सुनने के बाद मैं दिल्ली चल पड़ा। वहां सर गंगाराम अस्पताल के जेनेटिक डिपार्टमेंट पहुंचा। यहां मेरी मुलाकात एचओडी डॉ. रतना दुआ पुरी से हुई। रोशनी और राजकुमारी की बीमारी का जिक्र किया, तो डॉ. रतना कहती हैं– ‘यह रेयर डिजीज है। इसका कोई इलाज नहीं है। भारत में बहुत ही कम केस हैं। माता-पिता से बच्चे के शरीर में करीब 20 हजार जीन्स आते हैं। गर्भधारण के दौरान बच्चे के जीन्स में अचानक आई एक मामूली सी जेनेटिक गड़बड़ी, इस लाइलाज बीमारी की वजह बनती है। इस बीमारी के साथ पैदा होने वाले बच्चों की चमड़ी शुरुआत से ही बहुत कमजोर होने लगती है। दरअसल, हमारी त्वचा की कोशिकाओं को आपस में बांधने वाला जो जोड़ या बॉन्ड होता है, वह ठीक से काम नहीं करता। नतीजा– त्वचा ढीली पड़ जाती है और झुर्रियां बचपन में ही दस्तक दे देती हैं। बच्चा पहला साल पूरा भी नहीं कर पाता कि वह धीरे-धीरे बूढ़ा दिखने लगता है। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो हमारी त्वचा को मजबूत रखने वाला प्रोटीन इस बीमारी के कारण दूषित होने लगता है, जिसे 'प्रोजेरिन' कहते हैं। यह दूषित प्रोटीन कोशिकाओं के ढांचे को पूरी तरह हिला देता है और बच्चे समय से पहले ही बूढ़े होने लगते हैं। इसके कारण अस्थमा और हार्ट की बीमारियां भी होने लगती हैं। प्रोजेरिया से जूझ रही ये दोनों बहनें कब तक जिंदा रह पाएंगी, कहना मुश्किल है। रोशनी और राजकुमारी की दुर्लभ बीमारी को समेटे मैं अगली कहानी के लिए हैदराबाद निकल पड़ता हूं। ------------------------------------- 1- 14 की उम्र में शरीर बना 'पेड़ की छाल’:उठो या बैठो फटने लगती है चमड़ी, मन करता है छीलकर फेंक दूं; देश का अकेला केस दोपहर के 1 बजे हैं। जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कार हिचकोले खा रही है। तेज गर्मी से गला लगातार सूख रहा है। करीब 2 घंटे बाद जंगलों में कुछ झोपड़ियां नजर आती हैं। इन्हीं झोपड़ियों में से एक के सामने हमारी कार रुकी। झोपड़ी के बाहर एक लड़की बेजान सी खड़ी नजर आई। उसकी मटमैली शर्ट और हाफ पैंट के बाहर जितना भी शरीर दिख रहा है, वह बेहद डरावना है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
तारीख- 2 जून 2026, जगह- महाराष्ट्र का समृद्धि एक्सप्रेस-वे। उद्धव ठाकरे खेमे के बड़े नेता अंबादास दानवे और एकनाथ शिंदे गुट के विधायक अब्दुल सत्तार का काफिला आमने-सामने आ गया। दोनों नेताओं ने गाड़ी से उतरकर एक-दूसरे को गले लगाया। इनकी मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद अंबादास दानवे ने मीडिया में कहा- वक्त आ गया है कि दोनों शिवसेना एक हो जाएं। ये मेरे अकेले के चाहने से नहीं होगा, दोनों तरफ से इच्छा होनी चाहिए। अब्दुल सत्तार ने जवाब में कहा- शिंदे साहब रजामंदी दें, तो दोनों पार्टियों को एक होने में जरा भी वक्त नहीं लगेगा। 18 जून को महाराष्ट्र की 16 सीटों पर MLC चुनाव होने हैं। इससे पहले शिवसेना के दोनों नेताओं का मिलना और गठबंधन की बात करना चर्चा में क्यों है, 2 पॉइंट्स में समझिए... 1. MLC चुनाव से बढ़ी खींचतान: BJP ने चुनाव में संभाजी नगर-जालना सीट से सुहास शिरसाट को उम्मीदवार बनाया है। शिंदे गुट ने भी इस सीट पर दावा किया था। ये शिवसेना का पारंपरिक गढ़ है, इसलिए दोनों के दावों से खींचतान बढ़ गई है। अविभाजित शिवसेना का गढ़ रही औरंगाबाद-जालना सीट पर भी BJP ने अपना उम्मीदवार उतारा है। इससे भी शिंदे गुट में नाराजगी दिखी। 2. BJP के बढ़ते प्रभाव की चिंता: उद्धव और शिंदे, दोनों खेमों के नेताओं का मानना है कि BJP धीरे-धीरे सहयोगी दलों की राजनीतिक जमीन पर कब्जा कर रही है। शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे और शिंदे गुट के नेता अब्दुल सत्तार ने खुलेआम BJP को चुनौती बताया। शिवसैनिक बोले- विचारधारा एक, सिर्फ हाईकमान के ऑर्डर का इंतजारक्या 4 साल पहले अलग हुई शिवसेना एक होने जा रही है? इस पर एकनाथ शिंदे के करीबी नासिक जिलाध्यक्ष अजय बोरास्ते कहते हैं, ‘महाराष्ट्र का हर शिवसैनिक चाहता है कि दोनों गुट एक हो जाएं, लेकिन हमारे लीडर्स (उद्धव और एकनाथ) के मन में क्या है, ये कोई नहीं जानता। दोनों तरफ बालासाहेब के आदर्शों को मानने वाले हैं, इसलिए कार्यकर्ता यही चाहते हैं कि दोनों पार्टियां फिर एक हो जाएं।' 'महाराष्ट्र में BJP जैसे काम कर रही है, उससे सहयोगी दलों के लिए हालात बहुत बदल गए हैं। NCP का हाल सब देख रहे हैं। लेकिन हमारे शिंदे साहब फाइटर हैं, इसलिए सब कंट्रोल में है।’ शिवसेना UBT उद्धव गुट के नेता प्रथमेश गीते भास्कर से कहते हैं, ‘महाराष्ट्र में शिवसेना एक नंबर की पार्टी रही है। ये अलग बात है कि राजनीतिक मतभेदों के कारण हम दो गुटों में बंट गए, लेकिन नाम अब भी एक ही है। सब साथ होंगे, तो अच्छा रहेगा।’ ’अभी MLC चुनावों के लिए नामांकन हुआ। सब देख रहे हैं कि BJP क्या कर रही है। कई पुराने उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिला। अगर दोनों शिवसेना साथ काम करें, तो मजबूती से चुनाव लड़ सकेंगे।’ शिवसैनिकों में बढ़ी छटपटाहट के पीछे वजह क्या है?महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की नामांकन प्रक्रिया के दौरान संभाजीनगर-जालना निर्वाचन क्षेत्र को लेकर BJP और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच मतभेद दिखा। दोनों पार्टियां यहां से अपना उम्मीदवार उतारना चाहती थीं। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ कार्यकर्ता नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, ‘कभी औरंगाबाद नगर निगम और जिला परिषद पर शिवसेना का एकछत्र राज था। 2022 में पार्टी टूट गई। आज इन दोनों प्रमुख निकायों पर BJP ने कब्जा जमा लिया है।’ संभाजीनगर-जालना सीट पर शिवसेना पिछले 20 साल से ज्यादा समय से चुनाव लड़ती आ रही थी। इस बार BJP ने यहां से सुहास शिरसाट को टिकट दे दिया। इससे शिंदे गुट नाराज है। ’शिंदे गुट यहां से सिल्लोड MLA अब्दुल सत्तार के बेटे समीर सत्तार को टिकट देना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विरोध में समीर ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। मामला बढ़ता देख CM देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को नामांकन वापस लेने के लिए फोन करना पड़ा। समीर सत्तार ने नाम वापस ले लिया, लेकिन इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में मैसेज गया है कि हम भले गठबंधन के साथी हैं, लेकिन BJP अपनी मर्जी से टिकट बांट रही है।’ महाराष्ट्र MLC चुनाव में 4 जून को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख के बाद कई विपक्षी उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिया। जिसके बाद महायुति ने 6 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली। लिहाजा, चुनावी मुकाबला अब घटकर 11 सीटों पर आ गया है। संजय राउत के बयान ने गठबंधन की अटकलों को हवा दीउद्धव गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत महायुति गठबंधन में बढ़ती बेचैनी का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने 2 जून को कहा कि 2022 में एकनाथ शिंदे का साथ देने वाले नेताओं को अगर फैसले पर पछतावा है, तो उन्हें उद्धव ठाकरे की पार्टी में लौट जाना चाहिए। उनका स्वागत है। संजय ने BJP पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘अगर शिंदे गुट के नेताओं को लगता है कि BJP शिवसेना को खत्म कर रही है, तो उन्हें अपने उन नेताओं से सवाल करना चाहिए, जो अब भी BJP के साथ चमचों की तरह काम कर रहे हैं।’ शिंदे बोले- हमारी शिवसेना को जनता ने चुनाडिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने गठबंधन की बात से न इनकार किया, न हामी भरी। वे महायुति कैंडिडेट रविंद्र फाटक के ठाणे-पालघर निकाय सीट पर नामांकन दाखिल करने के बाद बोल रहे थे। BJP बोली: झूठ फैलाया जा रहा, ध्यान मत दें विलय की अटकलों पर BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन प्रेम शुक्ला कहते हैं, ‘झूठ फैलाया जा रहा है। दूर-दूर तक ऐसी संभावना नहीं दिख रही है। पार्टी के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे भी साफ कर चुके हैं कि महायुति का हिस्सा बनकर महाराष्ट्र के लोगों की सेवा करते रहेंगे।’ रही बात MLC चुनावों में महायुति में टिकट बंटवारे को लेकर उठे मतभेद की, तो सारे विवाद सेटल हो चुके हैं। BJP, शिवसेना और NCP के कैंडिडेट्स चुनावों के लिए तैयार हैं। शिवसैनिक किसी भी गुट का हो, उसकी आखिरी उम्मीद 'मातोश्री'महाराष्ट्र में शिवसेना की गतिविधियों पर 20 साल से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट पांडुरंग म्हस्के कहते हैं, ‘शुरुआती दौर से जुड़े शिवसैनिक आज भी 'मातोश्री' (बांद्रा में ठाकरे परिवार का घर) के प्रति ही ईमानदार हैं। शिंदे के साथ यही दिक्कत रही कि वो कभी विश्वसनीय नेता नहीं बन सके।‘ शिवसेना टूटने पर ज्यादातर विधायक सिर्फ पैसे और पोजीशन के लिए शिंदे गुट में चले गए। उनका जुड़ाव आज भी 'मातोश्री' से ही है। इसलिए शिवसैनिक जब भी हताश होता है, उसे 'मातोश्री' ही आखिरी उम्मीद लगती है। ‘एकनाथ शिंदे फाइनेंशियल तौर पर मजबूत हैं। वो महायुति में रहते हुए BJP को इसलिए चैलेंज कर पा रहे हैं, क्योंकि उन पर दिल्ली का हाथ है। देवेंद्र फडणवीस भी ये अच्छे से जानते हैं। ये भी सुगबुगाहट है कि वो 'मातोश्री' के टच में हैं। संभव है कि BJP शिवसेना की पावर खत्म कर उसके एक-एक विधायक 'मातोश्री' को ट्रांसफर कर सकती है,जो शिंदे की पार्टी के प्रभाव पर असर डाल सकता है।’ ’उद्धव ठाकरे पार्टी से जुड़ी छोटी सी बात भी बेहद गंभीरता से लेते हैं। जितना मैं जानता हूं, 2022 में हुई बगावत के बाद वो कभी भी शिंद से गठबंधन नहीं करेंगे।’ सीनियर जर्नलिस्ट बोले- शिवसेना के गुटों का मिलना नामुमकिनमहाराष्ट्र के सीनियर जर्नलिस्ट सुधीर सूर्यवंशी कहते हैं, ’शिवसेना में दोनों गुट के नेता भले एक दूसरे के पक्ष में बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि विधानसभा चुनाव तक इनके बीच कोई अलायंस होगा। पहले भी शिंदे गुट में ऐसी टूट की बातें सामने आईं हैं, लेकिन शिंद ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया।’ ’महायुति में रहते हुए BJP जैसे शिवसेना को साइडलाइन कर रही है, उससे बौखलाकर शिंदे गुट के कुछ नेताओं ने निगेटिव स्टेटमेंट दिए। अभी के समीकरणों को देखते हुए पार्टी के पास BJP का साथ छोड़ने की कोई वजह नहीं है।’ …………….. ये खबर भी पढ़ें.. मंत्री के बेटे पर पॉक्सो, RSS-BJP में दरार 17 साल की लड़की और उसके दोस्तों ने मिलकर नए साल की पार्टी रखी। 31 दिसंबर 2025 की रात एक फॉर्मफाउस पर जश्न शुरू हुआ। नाबालिग के साथ एक लड़की और 5 लड़के थे। इनमें एक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार का 25 साल का बेटा साई भागीरथ भी था। पढ़िए पूरी खबर…
6 मई की शाम। बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने घर पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें अभिषेक बनर्जी की चुनावी भूमिका की तारीफ करते हुए खड़े होकर तालियां बजाने को कहा। कुछ विधायक खड़े हुए। कुछ चुपचाप बैठे रहे। बैठे रहने वालों में एक थे ऋतब्रत बनर्जी। ठीक 29 दिन बाद वही ऋतब्रत बंगाल विधानसभा के नेता विपक्ष बन चुके हैं। उन्होंने 58 बागी विधायकों को साथ लेकर असली TMC का दावा किया है। आखिर ये सब हुआ कैसे, कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी और क्या TMC को बीजेपी खत्म कर देगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: TMC में 58 बागी विधायकों का अलग धड़ा कैसे बन गया? जवाबः 4 मई को पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे आए। 41% वोट शेयर के बावजूद TMC सिर्फ 80 सीटें जीत पाई। बीजेपी को 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला। 6 मई की मीटिंग का किस्सा हमने ऊपर सुनाया। पश्चिम बंगाल की सीनियर पत्रकार शिखा मुखर्जी बताती हैं कि ममता उस बैठक में भतीजे अभिषेक की तारीफ कर रही थीं, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, संदीपन साहा और कुणाल घोष जैसे नेता अभिषेक बनर्जी और I-PAC को हार का जिम्मेदार ठहरा रहे थे। IPAC ने ही टीएमसी के चुनावी प्रचार का जिम्मा संभाला था। टीएमसी में बगावत का असली खेल शुरू हुआ 22 मई से। पश्चिम बंगाल के सीनियर पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं, ‘22 मई को ऋतब्रत राज्यसभा की कुछ औपचारिकताओं के सिलसिले में दिल्ली गए थे। इसी दिन CM शुभेंदु अधिकारी भी दिल्ली स्थित बंग भवन में मौजूद थे। लंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई।’ बंगाल लौटने के बाद ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी से असंतुष्ट नेताओं को एकजुट करना शुरू किया। ऋतब्रत की कोशिश तब सफल हुई, जब ममता की 31 मई की बैठक में 80 में से 20 विधायक ही पहुंचे। 1 जून की रात कोलकाता के एक हॉस्टल में ऋतब्रत की TMC विधायकों के साथ बैठक की खबरें सामने आईं, तो बगावत की अटकलों पर मुहर लग गई। 1 जून को ममता ने ऋतब्रत और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से TMC से बाहर कर दिया। 4 जून की सुबह ममता ने TMC का पूरा संगठन भंग करने का ऐलान किया। शाम तक खबर आ गई ऋतब्रत ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु को 58 बागी विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा है। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया और विधानसभा में विपक्ष के नेता के कमरे की चाबी ऋतब्रत को सौंप दी। शिखा मुखर्जी बताती हैं कि ऋतब्रत मुस्लिम विधायकों के समर्थन के बिना पार्टी नहीं तोड़ सकते थे, क्योंकि 80 में से 34 विधायक मुस्लिम थे। इसीलिए नेता विपक्ष बनने के बाद ऋतब्रत ने 4 डिप्टी लीडर चुने हैं, जिनमें से दो मुस्लिम हैं- सबीना यास्मीन और जावेद अहमद खान। वहीं अख्रुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है।’ ममता ने विधानसभा स्पीकर रथींद्र दास की भूमिका पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, 'जिस नेता को 2 दिन पहले पार्टी से निकाला गया, उसे स्पीकर विपक्ष का नेता कैसे चुन सकते हैं? ऋतब्रत के पास पार्टी का लेटरहेड भी नहीं था, उन्होंने कोरे कागज पर रिजॉल्यूशन लिखकर स्पीकर को भेजा, फिर भी स्पीकर ने उसे स्वीकार कैसे कर लिया?' सवाल-2: ममता की जमीन खिसकाने वाले ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं? जवाबः 47 साल के ऋतब्रत बनर्जी कोलकाता के रहने वाले हैं। 1990 के दशक में उन्होंने वामपंथी स्टूडेंट पॉलिटिक्स से शुरूआत की। वो CPI (M) की स्टूडेंट विंग स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI के जनरल सेक्रेटरी बने। ऋतब्रत करीब 8 साल तक SFI से जुड़े रहे। बेबाक भाषणों की बदौलत उनकी छवि युवा वामपंथी नेता के तौर पर मजबूत हुई। कहा जाता है कि वो CPI(M) के महासचिव रहे दिवंगत सीताराम येचुरी के भी करीबी थे। 2011 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए ममता बनर्जी ने कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट खाली कर दी। उपचुनाव में CPI (M) ने ऋतब्रत को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वो चुनाव हार गए। 2014 में CPI (M) ने सिर्फ 35 साल के ऋतब्रत को राज्यसभा सांसद बना दिया। उन्हें एपल की स्मार्टवॉच और मोंटब्लैंक पेन जैसी महंगी चीजों का इस्तेमाल करते देखा गया। कहा जाता है कि ‘लग्जरी लाइफस्टाइल’ के चलते CPI (M) के टॉप लीडर्स से उनके मतभेद हो गए थे। 2017 में एक इंटरव्यू में ऋतब्रत ने कहा कि उनकी लड़ाई प्रकाश करात, वृंदा करात जैसे लीडर्स से है। इस बयान के कुछ ही दिन बाद CPI(M) ने उन्हें पहले सस्पेंड किया और फिर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसी साल ऋतब्रत के साथ एक और विवाद हुआ। एक महिला ने उन पर शादी का झूठा वादा करके बलात्कार का आरोप लगाया। ऋतब्रत ने महिला पर उन्हें ब्लैकमेल करके पैसा उगाही की कोशिश करने का आरोप लगाया। 2018 में ऋतब्रत TMC में शामिल हो गए। उन्हें TMC की ‘ट्राइबल वेलफेयर कमेटी’ का संयोजक बनाया गया। जल्द ही वे TMC की मजदूर शाखा कही जाने वाली ‘इंडियन नेशनल तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ यानी INTTUC के स्टेट प्रेसिडेंट बन गए। 2024 में TMC से राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ममता सरकार का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद TMC ने ऋतब्रत को उनकी जगह राज्यसभा भेज दिया। तब अभिषेक बनर्जी ने तारीफ करते हुए कहा था, 'ऋतब्रत ने संगठन को मजबूत करने और पूरे राज्य में ट्रेड यूनियन वर्कर्स के हक के लिए काम किया है। भले थोड़ा समय मिले, लेकिन आखिर समर्पण और कड़ी मेहनत का फल जरूर मिलता है।’ 2 अप्रैल 2026 को ऋतब्रत का राज्यसभा क्रायकाल खत्म हुआ। इसके बाद TMC ने उन्हें उलुबेरिया पूर्व विधानसभा सीट से टिकट दिया। प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि ऋतब्रत में बड़े नेताओं के करीब बने रहने की खूबी है। वे CPI(M) की सरकार में पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्या के करीब रहे, जिसकी बदौलत उन्हें 2011 में विधानसभा का टिकट मिला और चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने 2014 में उन्हें राज्यसभा भेज दिया। इसके बाद TMC में रहते हुए वे शुभेंदु के करीब आए, जिसका फायदा उन्हें अब जाकर मिलता हुआ दिख रहा है। सवाल-3: क्या ऋतब्रत 60 विधायकों के साथ TMC हथिया लेंगे? जवाबः बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनने के बाद ऋतब्रत ने कहा, ‘हम विधानसभा में TMC का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। TMC की टिकट पर जीते 60 विधायक एकजुट हैं। 2 लोग फिलहाल राज्य से बाहर हैं। ममता बनर्जी से अनुरोध करते हैं कि वे हमारी सलाहकार बनें और हमारा मार्गदर्शन करें। हम एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। सदन में मजबूती से बीजेपी का सामना करेंगे।’ ऋतब्रत ने रथींद्र दास को बागी नेताओं की सहमति वाला जो पत्र भेजा, वो TMC के लेटरपैड के बजाय सफेद कागज पर लिखा गया था। इसमें ममता बनर्जी को ही TMC का नेता बताया गया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता। यानी ऋतब्रत खुले तौर पर दो संकेत दे रहे हैं। पहला- ममता बनर्जी कॉम्प्रोमाइज करके TMC की प्रतीकात्मक नेता बनी रह सकती हैं, दूसरा- वो बागी विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल नहीं होंगे। TMC के एक सीनियर सांसद ने दावा किया, 'जल्द ही TMC के सांसदों में भी फूट पड़ सकती है। यह TMC के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। एकनाथ शिंदे और अजीत पवार की तरह, बागी TMC सांसदों को भी चुनाव निशान और पार्टी के नाम का अधिकार मिल जाएगा।' दरअसल, अगर किसी पार्टी के कुल विधायकों में से दो-तिहाई या उससे ज्यादा विधायक अलग गुट बना लें और पार्टी के नेता के बजाय किसी और को लीडर मान लें, तो ऐसी स्थिति में दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उल्टा पार्टी के चुनाव निशान पर भी इसी गुट का दावा मजबूत माना जाता है। कई जानकारों का मानना है कि फिलहाल बीजेपी नहीं चाहती कि TMC पूरी तरह टूट जाए या उसके बागी धड़े का उनमें विलय हो जाए। सवाल-4: क्या वाकई बीजेपी नहीं चाहती बंगाल में TMC बिखर जाए? जवाबः भाजपा सांसद सौमित्र खान ने दावा किया था कि TMC के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद हमारे संपर्क में हैं। अगर आलाकमान चाहे, तो आज ही TMC का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बागी विधायकों ने बीजेपी से संपर्क भी किया था, लेकिन बीजेपी ने उनके लिए दरवाजा नहीं खोला, क्योंकि उसे सरकार बनाने के लिए संख्याबल की जरूरत नहीं है। पॉलिटिकल एनालिस्ट और पत्रकार सायंतन घोष X पर लिखते हैं… प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं, ‘ऋतब्रत के इस सकारात्मक विरोध वाले बयान और शुभेंदु से उनकी पुरानी नजदीकियों से राजनीतिक हलकों में यही चर्चा है कि ऋतब्रत का गुट BJP की बी-टीम बनकर रह जाएगा।’ पश्चिम बंगाल के सीनियर पत्रकार स्निग्धेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, '2024 में भाजपा ने ओडिशा में चुनाव जीतने के बावजूद विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल का अस्तित्व बनाए रखने में मदद की थी, ताकि राज्य में कांग्रेस फिर से एक्टिव न हो सके। पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है।' सवाल-5: क्या TMC के बिखरने से वाकई लेफ्ट-कांग्रेस का फायदा होगा? जवाबः 2026 के बंगाल चुनाव में कांगेस 2 और CPI(M) सिर्फ 1 सीट जीती है। हालांकि दोनों का वोट शेयर मिलाकर करीब 7.5% है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि TMC के कमजोर होने से बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट की भूमिका बढ़ सकती है… हालांकि प्रसून आचार्य जोर देते हैं कि ममता के लिए पार्टी की अंदरूनी कलह बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अचानक उनका प्रभाव खत्म हो जाएगा और वोटबैंक लेफ्ट या कांग्रेस में शिफ्ट हो जाएगा। *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- बंगाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… क्या TMC बिखरने वाली है, 4 संकेत; बंगाल में एकबार सत्ता जाने के बाद पार्टियां कभी वापसी क्यों नहीं कर पातीं बंगाल में आजादी के बाद से ही एक ट्रेंड है। जो पार्टी सत्ता से एकबार बेदखल हुई, वो कभी लौट नहीं सकी। सिर्फ कांग्रेस एक अपवाद है। 2026 का बंगाल चुनाव हारने के बाद TMC भी सबसे मुश्किल दौर में है। पढ़ें पूरी खबर…

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